Media24Media.com: नवरात्रि 2025: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना, जानें पूजा विधि और आरती

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नवरात्रि 2025: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना, जानें पूजा विधि और आरती

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Navratri Third Day 2025 : शारदीय नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, जिसके कारण इन्हें यह नाम प्राप्त हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से साहस, शक्ति और शांति की प्राप्ति होती है।


तीसरे दिन का महत्व और रंग

मां चंद्रघंटा का प्रिय रंग लाल और पीला माना जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन भक्तों को लाल वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा के समय मां को लाल रंग के वस्त्र और पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है।

मां चंद्रघंटा का मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए यह मंत्र विशेष फलदायी माना जाता है–
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः”

मां चंद्रघंटा को प्रिय भोग और पुष्प

इस दिन मां को दूध से बनी मिठाई और खीर का भोग लगाया जाता है। खासतौर पर केसर की खीर मां को अति प्रिय है। साथ ही, लौंग, इलायची, पंचमेवा, पेड़े और मिसरी का भी भोग चढ़ाया जा सकता है। मां चंद्रघंटा को कमल का फूल चढ़ाना विशेष शुभ फलदायी माना गया है।

पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ लाल या पीले वस्त्र पहनें।

पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और मां की प्रतिमा स्थापित करें।

धूप-दीप जलाकर देवी का आवाहन करें।

गंगाजल से स्नान कराकर देवी को चंदन, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

दूध से बनी मिठाई या शहद का भोग लगाएं।

मंत्र “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” का जाप करें।

दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ कर मां की आरती करें।

अंत में प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥

मन की मालक मन भाती हो।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥

सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित तो विनय सुनाए॥

मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं॥

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगत दाता॥

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥

नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥

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