Media24Media.com: प्रधानमंत्री स्मृतिचिन्ह ई-नीलामी 2025: 1,300 से अधिक उपहार होंगे ऑनलाइन नीलाम

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प्रधानमंत्री स्मृतिचिन्ह ई-नीलामी 2025: 1,300 से अधिक उपहार होंगे ऑनलाइन नीलाम

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भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने आज ‘प्रधानमंत्री स्मृतिचिन्ह ई-नीलामी’ के सातवें संस्करण की शुरुआत की घोषणा की, जिसे नई दिल्ली स्थित नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट (NGMA) द्वारा आयोजित किया जाएगा। यह घोषणा केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने NGMA में की।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि 17 सितंबर 2025 से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को प्राप्त 1,300 से अधिक उपहारों की ऑनलाइन नीलामी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नीलामी में चित्रकला, कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ, देव-देवियों की प्रतिमाएँ और कुछ खेल वस्तुएँ शामिल होंगी।

पहली नीलामी जनवरी 2019 में आयोजित की गई थी। तब से अब तक प्रधानमंत्री को प्राप्त हजारों अनूठे उपहार नीलाम किए जा चुके हैं, जिससे नमामि गंगे परियोजना के समर्थन में 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि जुटाई जा चुकी है। नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अपने द्वारा प्राप्त सभी स्मृतिचिन्हों को इस नेक काम के लिए समर्पित किया।

इस वर्ष के संस्करण में 1,300 से अधिक वस्तुएँ शामिल हैं, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक आधिकारिक पोर्टल www.pmmementos.gov.in पर बोली लगाने के लिए उपलब्ध होंगी।

इस संग्रह में भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतिबिंब दिखाई देता है, जिसमें पारंपरिक कला, चित्रकला, मूर्तियाँ, हस्तशिल्प, आदिवासी कलाकृतियाँ और सम्मान एवं आदर के अवसर पर प्राप्त उपहार शामिल हैं। कुछ मुख्य आकर्षण हैं:

  • जम्मू और कश्मीर से एक बारीक कशीदे वाला पश्मीना शॉल

  • राम दरबार का तंजोर चित्र

  • नटराज की धातु की मूर्ति

  • गुजरात की रोगन कला में जीवन वृक्ष का चित्रण

  • हाथ से बुना नागा शॉल

इस संस्करण की विशेष आकर्षण हैं पेरिस पैरालंपिक्स 2024 में भाग लेने वाले भारतीय पैराथलीटों द्वारा दिए गए खेल स्मृति चिन्ह, जो भारतीय खेल की दृढ़ता, उत्कृष्टता और अदम्य साहस को दर्शाते हैं।

वस्तुएँ वर्तमान में NGMA, नई दिल्ली में प्रदर्शित हैं, जहाँ आगंतुक इन्हें देख सकते हैं और ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं। पिछले वर्षों की तरह, इस ई-नीलामी से प्राप्त सभी धनराशि नमामि गंगे परियोजना को दी जाएगी, जो गंगा और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, पुनरुद्धार और सुरक्षा की भारत सरकार की प्रमुख पहल है। यह नीलामी न केवल नागरिकों को इतिहास का हिस्सा हासिल करने का अवसर देती है, बल्कि हमारे पवित्र नदी गंगा के संरक्षण में भागीदारी का भी एक माध्यम है।





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