Media24Media.com: डिजिटल इंडिया को नई दिशा देगा देहरादून का एआई सेंटर

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डिजिटल इंडिया को नई दिशा देगा देहरादून का एआई सेंटर

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देहरादून-केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ग्राफिक एरा (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल डेवलपमेंट और इनोवेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चमत्कार कर सकता है, लेकिन यदि इसका उपयोग ईमानदारी और नैतिकता के बिना किया गया तो यह खतरनाक भी साबित हो सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “एआई का कोई भी तकनीकी विकल्प ईमानदारी का स्थान नहीं ले सकता। डीपफेक्स और फेक न्यूज़ इसका उदाहरण हैं। इसलिए नई तकनीकों के इस्तेमाल में नैतिक निर्णय बेहद ज़रूरी हैं।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एआई को मानव बुद्धिमत्ता का पूरक समझा जाना चाहिए, न कि उसका विकल्प, और इसके लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाना होगा, जिसमें तकनीक और मानवीय निर्णय दोनों शामिल हों।

उत्तराखंड का पहला एआई सेंटर

1.5 लाख वर्ग फुट में फैला यह सेंटर उत्तराखंड में अपनी तरह का पहला है। इसमें:

  • एप्पल और इन्फोसिस के सहयोग से स्थापित Apple iOS Development Centre,

  • राज्य का पहला NVIDIA AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधा (NVIDIA DGX B200 सिस्टम के साथ, 8 GPU और 1.74 TB GPU मेमोरी क्षमता),
    शामिल हैं।

₹10 करोड़ से अधिक की लागत से बने इस सेंटर में स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, स्मार्ट सिटी और एडवांस्ड इंडस्ट्रीज़ से जुड़े अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।

ग्राफिक एरा की उपलब्धियाँ

ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, जो NIRF 2025 में 48वें स्थान पर है और NAAC से A+ ग्रेड मान्यता प्राप्त है, भारत का पहला Generative AI Ready Campus (AWS समर्थित) है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह सेंटर राष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और इनोवेशन का हब बनेगा, जो छात्रों को उभरती तकनीकों में करियर बनाने और स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा स्किल इंडिया मिशनों को मज़बूती देगा।

एआई और सुशासन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ग्रामीण भारत में एआई-आधारित टेलीमेडिसिन वैन चलाए जा रहे हैं, जिनसे उन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचीं जहाँ कभी डॉक्टर नहीं पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि एआई से शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रभावी हो सकती है, लेकिन यदि जवाबदेही न हो तो केवल तकनीक जनता की अपेक्षाएँ पूरी नहीं कर सकती।

भारत की डिजिटल छलांग

उन्होंने कहा कि भारत, जो कभी टीवी जैसी तकनीकों को देर से अपनाता था, आज अंतरिक्ष अन्वेषण और क्वांटम रिसर्च में अग्रणी है। इस प्रगति को बनाए रखने के लिए अकादमिक शोध, उद्योग और स्टार्टअप्स का तालमेल बेहद ज़रूरी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “हर उपकरण की एक सीमा है यदि ईमानदारी से समझौता किया जाए। नवाचार और ईमानदारी को मिलाकर ही हम भारत का डिजिटल भविष्य गढ़ सकते हैं।”


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