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कुबेरेश्वर धाम में भगदड़: दो महिलाओं की मौत, एक दर्जन से ज्यादा घायल, रुद्राक्ष वितरण के दौरान मचा हड़कंप

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 सीहोर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले स्थित कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को रुद्राक्ष वितरण के दौरान हुई भगदड़ में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुबेरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा की अगुवाई में हो रहे आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए थे। सावन माह के चलते मंदिर में भीड़ सामान्य से कई गुना अधिक थी। घटना के समय बड़ी संख्या में महिलाएं रुद्राक्ष लेने के लिए लाइन में खड़ी थीं। इसी दौरान पीछे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे कई महिलाएं गिर पड़ीं और भगदड़ मच गई।

पुलिस-प्रशासन मौके पर पहुंचा, हालात नियंत्रण में
एडिशनल एसपी सुनीता रावत ने बताया कि भगदड़ रुद्राक्ष वितरण के दौरान मची। “लाइन में लगी महिलाओं को अचानक पीछे से धक्का लगा, जिससे कुछ महिलाएं गिर गईं और दबने से दो की मौत हो गई। चार महिलाएं घायल हैं।”

घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस बल और प्रशासन मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रण में लिया। मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

सपा ने आयोजक प्रदीप मिश्रा पर कार्रवाई की मांग की
इस हादसे को लेकर समाजवादी पार्टी ने पंडित प्रदीप मिश्रा और आयोजन समिति पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, "किसी भी आयोजन में हादसा होने पर ज़िम्मेदारी आयोजकों की होती है। सरकार आयोजकों पर कार्रवाई करे, मृतकों के परिवारों को मुआवजा दे और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करे।"

सीएम शिवराज मोहन ने दिए राहत-बचाव के निर्देश
सीहोर विधायक सुदेश राय ने बताया कि मुख्यमंत्री को हादसे की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। विधायक ने कहा कि सीहोर में सावन के कारण और दूसरे राज्यों से आए कांवड़ यात्रियों की भारी भीड़ के कारण यह हादसा हुआ।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
गौरतलब है कि कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ का यह पहला मामला नहीं है। 16 फरवरी 2023 को भी रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें एक महिला की मौत और चार लोग लापता हो गए थे। बाद में एक तीन साल के बच्चे की भी मौत हुई थी। इसके बाद प्रशासन को आयोजन स्थगित करना पड़ा था। बावजूद इसके, इस बार फिर प्रबंधन की लापरवाही से दोबारा वैसी ही घटना दोहराई गई।

प्रशासन के लिए सबक या लापरवाही की पुनरावृत्ति?
लगातार दो वर्षों में ऐसे आयोजनों के दौरान भगदड़ की घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या प्रशासन और आयोजन समिति ने पिछले अनुभवों से कोई सबक नहीं लिया? या श्रद्धालुओं की भीड़ के प्रति संवेदनशीलता की कमी एक बार फिर भारी पड़ी?

इस हादसे ने फिर एक बार धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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