Media24Media.com: आलेख : किसानों की खुशियों से छलका धान के कटोरे के प्रदेश का सुख

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आलेख : किसानों की खुशियों से छलका धान के कटोरे के प्रदेश का सुख

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक खुशहाली जिस बात पर सबसे ज्यादा निर्भर करती है वो हैं धान उत्पादक किसान। कुछ बरस पहले कमजोर समर्थन मूल्य, कर्ज की भारी मात्रा तथा प्रोत्साहन के अभाव के चलते किसान धान से हटने लगे थे। धान फसल से हटने का मतलब है खेती से ही पीछे हटना क्योंकि हमारे यहां यही परंपरागत फसल है। यही वजह है कि वर्ष 2018 में केवल 15 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचा था।

जिस तरह से किसानों को धान फसल से अरुचि हो रही थी और खेती किसानी घाटे का सौदा बनता जा रहा था। इस बात की आशंका बढ़ती जा रही थी कि ज्यादातर सीमांत किसान खेती किसानी छोड़ दें और शहरों में रोजगार के लिए पलायन कर दें। जिस प्रदेश की पहचान धान के कटोरे के नाम से है उस प्रदेश के किसान के हाथों में हँसिया न हो, यह कैसी विडंबना होती। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ लेते ही किसानों का मूड बदल दिया। उम्मीद नहीं थी कि एक दिन में ही कोई इतना बड़ा वायदा निभा देता है। करोड़ों रुपए की कर्जमाफी हुई। फिर राजीव गांधी न्याय योजना लाई गई, इससे 20 हजार करोड़ रुपए की इनपुट सब्सिडी किसानों तक पहुंची लेकिन किसानों के लिए मुख्यमंत्री के पिटारे से रह साल कुछ बेहतरीन चीज निकल ही जाती है। इस बार उन्होंने धान खरीदी की सीमा पंद्रह क्विंटल से बढ़ाकर 20 क्विंटल कर दी।

अब प्रदेश के किसानों से प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा से एक-एक दाना धान खरीदने का सपना साकार होगा। इन वर्षों में जहां खेती का रकबा बढ़ा है, वहीं कृषि उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है। चाहे बस्तर जिले का लोहण्डीगुड़ा इलाके में इस्पात संयंत्र के लिए पूर्व में 1700 से अधिक किसानों से अधिग्रहित लगभग 5 हजार एकड़ जमीन उन्हें फिर से सौंपकर उन्हें जमीन का मालिक बनाने की बात हो या फिर  3 फरवरी 2022 से राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाके जरिए 4 लाख 66 हजार ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को प्रति वर्ष 7 हजार रुपए की आर्थिक मदद हो, किसानों-कृषि मजदूरों सबका संबल मुख्यमंत्री ने बढ़ाया है। 

सरकार की प्रोत्साहक नीतियों से खेती का रकबा बढ़ रहा है। किसान खेती की ओर लौट रहे हैं। धान का उत्पादन बढ़ गया है। इसका परिणाम है कि वर्तमान में राज्य में लगभग 32 लाख से अधिक हेक्टेयर में खरीफ की फसल ली जा रही है। खरीफ में सर्वाधिक धान की फसल ली जाती है। धान की फसलों की व्यवस्थित खरीदी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इस वर्ष भी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी एक नवम्बर से प्रारंभ होगी। राज्य सरकार द्वारा लगभग 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है।

समर्थन मूल्य में धान खरीदी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने राज्य के किसानों का हौसला बढ़ाया। जो किसान खेती-किसानी छोड़ चुके थे, उन किसानों ने भी खेती-किसानी की ओर रूखकिया और कठिन चुनौतियों के बावजूद पिछले वर्ष लगभग 24 लाख किसानों से 107 लाख मीट्रिक टन से अधिक रिकार्ड धान खरीदी की गई। किसानों  का उत्साह और सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा एक नवम्बर से धान खरीदी के साथ ही किसानों से 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने के ऐलान से किसानों का उत्साह दुगुना कर दिया है।

राज्य में वर्ष 2018-19 में पंजीकृत धान का रकबा जो 25.60 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 32.19 लाख हेक्टेयर हो गया है। इन चार वर्षों में पंजीकृत किसानों की संख्या 16.92 लाख से बढ़कर 25.12 लाख के पार जा पहुंची है। खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में 80.30 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2019-20 में 83.94 लाख मीट्रिक टन, 2020-21 में 92.06 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2021-22 में 98 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2022-23 में रिकार्ड रिकार्ड 107.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इस वर्ष किसानों से 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का अनुमान से किसान उत्साहित है।

छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों की माली हालत सुधारने के लिए वर्ष 2018 में लगभग 18 लाख 82 हजार किसानों पर चढ़ा अल्पकालीन कृषि ऋण लगभग 10 हजार करोड़ रूपए माफ किया, वहीं 244.18 करोड़ रूपए के सिंचाई कर की माफी ने भी खेती-किसानी और किसानों के दिन बहुराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। पिछले चार सालों में विभिन्न माध्यमों से किसानों-मजदूरों और गरीबों की जेब में डेढ़ लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि डाली गई है। इसका परिणाम यह रहा कि कोरोना संकट काल में जहां देश में आर्थिक मंदी रही, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर खेती-किसानी के लिए सहकारी समिति से ऋण और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी देने का फैसला क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। इसके साथ ही कृषि पंपों के ऊर्जीकरण के लिए प्रति पम्प एक लाख की  दी जा रही अनुदान हो,  कृषकों को वित्तीय राहत प्रदाय किये जाने के उद्देश्य से कृषक जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत कृषकों को 3 एचपी तक कृषि पम्प के बिजली बिल में 6000 यूनिट प्रति वर्ष एवं 3 से 5 एचपी के कृषि पम्प के बिजली बिल में 7500 यूनिट प्रति वर्ष छूट तथा कृषकों को फ्लेट रेट दर पर बिजली और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को निःशुल्क विद्युत आपूर्ति से दोहरे उत्साह के साथ खेती-किसानी की जा है। इससे उत्पादन में वृद्धि के साथ ही आय में बढोत्तरी हुई है। 

किसानों को समर्थन मूल्य का उचित मूल्य दिलाने के साथ ही उन्हें इनपुट सब्सिडी के रूप में राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इस योजना के तहत धान की फसल लेने वाले किसानों को 9000 रूपए और धान के अलावा खरीफ की अन्य फसल लेने वाले किसानों को 10,000 रूपए की इनपुट सब्सिडी और ब्याज मुफ्त ऋण की व्यवस्था से खेती-किसानी को सबंल मिला और खेती-किसानी छोड़ चुके किसान भी खेती-किसानी की ओर लौटने लगे यह राज्य और किसान दोनों के लिए सुखद संदेश है।

छत्तीसगढ़ में समावेशी विकास को प्राथमिकता में रखकर विकास का नया मॉडल अपनाया गया। जहां सभी वर्गों के विकास के लिए न्याय योजनाओं की शुरूआत की गई है। यह किसान हित में सराहनीय कदम हैं। इस मॉडल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है। राज्य में लगभग 32 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए राज्य में ढाई हजार से भी अधिक धान खरीदी केन्द्र बनाये गये हैं। धान खरीदी की पूरी व्यवस्था कम्प्यूटरीकृत की गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों को धान खरीदी की राशि ऑनलाइन मिलती है। किसानों को धान बेचने में सुविधा के लिए एक मोबाईल एप टोकन तुंहर हाथभी अपनाया गया । इससे धान बेचने में किसानों को कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ा यह भी किसानों को खेती-किसानी की ओर आकर्षित होने का एक प्रमुख कारण हैं। 

छत्तीसगढ़ मॉडल से राज्य में कृषि एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में बदलते जा रहा है। इस मॉडल में किसानों को इनपुट सब्सिडी के साथ सस्ते दर पर विद्युत और शून्य प्रतिशत ब्याज पर खेती-किसानी के लिए ऋण की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा इस मॉडल में खेती के सहायक उद्योग-धंधे को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मछली पालन और लाख उत्पादन को खेती का दर्जा दिया गया है। मत्स्य पालन और लाख उत्पादन करने वाले किसानों को कृषि के समान ही दी जाने वाली सुविधाएं मिल रही हैं।

क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों पर सरकार की विशेष नजर है। किसानों की आय बढ़ाने की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को सोलर ड्यूल पंप और लघु-सीमांत किसानों को सामुदायिक सौर सिंचाई परियोजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। वनांचल में रहने वाले किसानों को भी सिंचाई सुविधा का लाभ मिल रहा है। सामान्य क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने के मद्देनजर सोलर ड्यूल पंप अनुदान पर दिये जा रहे हैं। गांवों में रोजगार के नये अवसर के लिए भी पहल की गई है। गौठानों में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) विकसित किए जा रहे है। राज्य में प्रथम चरण में लगभग 300 नये रीपा प्रारंभ किए गए हैं। इनमें से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नये-नये अवसर दिए जा रहे है। यहीं कारण है कि छत्तीसगढ़ में बेरोजगार देश में सबसे कम है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के मेहनतकश किसानों, मजदूरों और गरीबों का मर्म समझकर जनसरोकार से जुड़े अनेक फैसले लिए। छोटे-बड़े सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदने और राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। उन्होंने ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूरों के बारे में सोचा और राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना लाकर गरीबों-मजदूरों के जेब में पैसे डालने का काम किया। इन नीतियों का परिणाम है कि साल दर साल धान खरीदी का नया रिकार्ड बनता जा रहा है। यही नहीं साल दर साल पंजीकृत किसानों की संख्या और रकबे में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।

धान का कटोरा भरा है। छलक रहा है। इसके साथ ही छलक रही है लोगों की खुशी। एक मुखिया जब संवेदनशील होता है जमीन से जुड़ा होता है तो उसके सरोकार भी जमीनी होते हैं। छत्तीसगढ़ में जो खेती किसानी के विकास का माडल लाया गया है उसकी जड़ें बहुत गहरी हैं और इससे गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का सपना पूरा करने में मदद मिलेगी।

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