Media24Media.com: जिला प्रशासन ने दूरस्थ वनांचल में रूकवाई नाबालिग भाई-बहन की शादी, लगातार लोगों को दे रहे समझाइश

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जिला प्रशासन ने दूरस्थ वनांचल में रूकवाई नाबालिग भाई-बहन की शादी, लगातार लोगों को दे रहे समझाइश

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कवर्धा कलेक्टर रमेश शर्मा के निर्देश पर बाल विवाह कुरीति को समाज से समूल खत्म करने प्रशासन की ओर से सतत निगरानी रखी जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग को जिला मुख्यालय से दूरस्थ वनांचल ग्राम मुड़वाही में नाबालिग भाई-बहन की शादी आयोजन किए जाने की सूचना मिली।





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सूचना प्राप्त होते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस विभाग, महिला सेल, ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष सदस्य सरपंच सचिव, पंच आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मितानीन और कोटवार की टीम के साथ संयुक्त रूप से नाबालिग के घर जाकर जानकारी लिया गया।





टीम ने प्रमाण पत्रों की जांच की





जानकारी के मुताबिक नाबालिग लड़के की शादी गांव की ही नाबालिग लड़की से और नाबालिग लड़की की शादी पास के गांव के लड़के से तय हुआ है, जिनकी शादी का आयोजन किया जा रहा है। टीम द्वारा नाबालिग लड़की और लड़के की शैक्षणिक अंकसूची और उम्र संबंधी प्रमाण पत्रों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया।





बाल विवाह के बारे में दी जानकारी





प्रमाण पत्र के अनुसार लड़की की आयु 17 साल और लड़के की उम्र 20 साल पाया गया, जो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह योग्य नहीं है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी संदीप पटेल ने मौके पर उपस्थित लोगों को बाल विवाह से होने वाले दुष्प्रभाव को विस्तृत में बताया कि बाल विवाह की वजह से लडकियां छोटी उम्र में ही गर्भवती हो जाती है, जो उनके लिए अच्छा नहीं है। इससे उनकों जान का खतरा हो सकता है।





बाल विवाह के दुष्परिणामों की दी जानकारी





बाल विवाह की वजह से लोगों को पढ़ने का मौका नहीं मिलता और वे गरीबी की चपेट में फंस जाते हैं। लोगों को कम समझ के कारण, शादी-शुदा जोड़ों के बीच संबंध कभी अच्छे नहीं हो पाते। बाल विवाह के बाद लड़कियों को अपना घर-परिवार छोड़कर दूसरे के घर में रहना पड़ता है। बचपन में उन्हें यह भूमिकाएं लेने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसको लेने के लिए वह मानसिक रूप से तैयार नहीं होती है।





बाल विवाह की कुरीति





छोटी उम्र में ही पारिवारिक दबाव झेलना पड़ता है जो उनको मानसिक रूप से दुर्बल बना देता है और उम्र से पहले शादी करने की वजह से वो शारीरिक रूप से भी दुर्बल रहता है, जो उन दोनों बच्चों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। इसलिए बाल विवाह नहीं करना चाहिए। साथ ही यह भी बताया कि समाज से बाल विवाह कुरीति को समूल खत्म करने जिला प्रशासन महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम दूरस्थ वनांचल में भी पैनी नजर रख सतत निगरानी कर रही है।





बाल विवाह संरक्षण की जानकारी





महिला सेल थाना प्रभारी रमा कोष्टी ने मौके पर उपस्थित लोगों को महिलाओं और बच्चों के अधिकार और संरक्षण बने कानूनों नियमों के साथ बाल विवाह से होने वाले शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की विस्तृत जानकारी देते हुए वर्तमान स्थिति कोविड 19 महामारी संक्रमण से बचाव के लिए सभी सुरक्षा उपायों मास्क, सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी का कड़ाई से पालन और बहुत जरूरी हो तभी घर से निकलने समझाइश दिए।





जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने दी जानकारी





महिला एवं बाल विकास विभाग से जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्यनारायण राठौर ने मौके पर उपस्थित लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 21 साल से कम उम्र के लड़के और 18 साल से कम उम्र की लड़की के विवाह को इस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया गया है।





बाल विवाह करने पर हो सकती है 2 साल की सजा





वहीं कोई व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, करता है या उसमें सहायता करता है, उसे 2 साल का कठोर कारावास और 1 लाख रूपये तक जुर्माना हो सकता है। या फिर दोनों से दण्डित किया जा सकता है, इसलिए इससे बचे।





दोनों पक्षों को दी गई समझाइश





दोनों पक्षों को काफी समझाइश देने के बाद नाबालिग लड़की-लड़का और परिवार जनों ने शादी रोकने सहमति दी, जिस पर बाल विवाह रोकथाम दल ने मौके पर ही दोनों पक्षों को शादी स्थगित करने और दोनों बच्चों का उम्र विवाह योग्य होने के बाद शादी करने उनके परिजन से घोषणा पत्र भरवाकर और पंचनामा तैयार कर बाल विवाह रूकवाया।





प्रशासन को लगातार मिल रही सफलता





बता दें कि जिला कलेक्टर और अध्यक्ष जिला बाल संरक्षण समिति के निर्देशानुसार जिले के सभी पंचायतों में बाल संरक्षण समिति गठित है। समिति में सरपंच-पंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, शिक्षक और गांव के गणमान्य नागरिक शामिल है, जिन्हें एकीकृत बाल संरक्षण कार्यक्रम अंतर्गत जागरूक किया गया है। समाज की जागरूकता और जनप्रतिनिधियों की सहयोग से ऐसे शादियां रोकने में प्रशासन को काफी सफलताएं मिलती जा रही है।


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