वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने और आर्थिक तंगी से बचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपने एक फाउंडेशन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति कर रहा है। जिसके तहत भारतीय मूल के हेल्थ एक्सपर्ट अनिल सोनी (Anil Soni ) विश्व स्वास्थ्य संगठन फाउंडेशन (World Health Organization Foundation) के CEO नियुक्त किए गए है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया में स्वास्थ्य के मोर्चे पर लड़ाई के लिए नया संगठन बनाया है, अनिल सोनी इसके पहले CEO बने हैं। बता दें कि अनिल सोनी 1 जनवरी से अपने काम को संभालेंगे।
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WHO की कोशिश CEO की नियुक्ति कर निजी फंड जुटाने का है, ताकि कोई देश अगर अपने देने वाले योगदान में कटौती करता है, तो उस समय WHO को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
बता दें कि अनिल सोनी इससे पहले क्लिंटन हेल्थ एक्सेस में भी काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने 2005 से 2010 तक अपनी सेवाएं दी। अनिल सोनी ने HIV के इलाज में भी अहम भूमिका निभाई है।
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कोरोना संकट काल में दुनिया के सामने काफी चुनौतियां आई इस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी आलोचना की गई. लेकिन अब नए संगठन और जोश के जरिए WHO फंड इकट्ठा करने में जुटा है.
कई देशों ने की फंड में कटौती
गौरतलब है कि हाल ही अमेरिका ने WHO को देने वाली राशि में कटौती कर दी थी। वहीं इस साल वैश्विक कोरोना महामारी और निकाय से अमेरिका के बाहर हो जाने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की आर्थिक स्थिति सबके सामने उजागर हो गई है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन बहुत हद तक सदस्य देशों के इच्छा अनुसार दिए जाने वाले फंड के साथ ही कुछ बड़े फाउंडेशनों पर निर्भर रहता है।
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इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जुझ रहा है, ऐसे में कई देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिए जाने वाले फंड में कटौती कर दी है। शायद यहीं कारण है कि निजी फंड जुटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को CEO की नियुक्ति करनी पड़ रही हैं।