मध्यप्रदेश की राजनीति हमेशा से सुर्खियों में छाई रहती है, ताजा मामला पूर्व मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi News) से जुड़ा है , जिसकी वजह से MP की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। दरअसल पूर्व मंत्री इमरती देवी को पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर ने सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था, जिसके बाद नोटिस जारी करने वाले इंजीनियर का ट्रांसफर कर दिया गया है। इसे लेकर प्रदेश में विवाद गहरा गया है।
मध्यप्रदेश में हाल ही में हुए उपचुनाव में इमरती डबरा विधानसभा सीट से उम्मीवार के रूप में चुनाव में खड़ी हुई थी, लेकिन वे इस चुनाव में हार गईं। इसके बाद इमरती देवी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना इस्तीफा भेज दिया है, जो अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। इन्हीं सब के बीच पीडब्ल्यूडी ने इमरती देवी को ग्वालियर के झांसी रोड पर मिले सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस भेज दिया।
इंजीनियर ओमहरि शर्मा ने भेजा था इमरती देवी को नोटिस
इस नोटिस में लिखा था कि इमरती देवी (Imarti Devi News) के पास अब कोई पद नहीं है, जिसकी वजह से वे बंगले को खाली करके पीडब्ल्यूडी को सौंपा दें। बता दें कि पूर्व मंत्री इमरती देवी को इंजीनियर ओमहरि शर्मा ने नोटिस भेजा था।
एसडीएम किशोर कन्याल ने दी जानकारी
इस मामले पर एसडीएम किशोर कन्याल ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने वर्तमान मंत्री को आवास खाली करने का नोटिस भेजा है, जो की बिल्कुल गलत है। एसडीएम ने बताया कि नोटिस गलती से भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इमरती देवी अभी भी मंत्री हैं, जिसकी वजह से उन्हें ऐसा नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। इसके बाद शाम को खबर आई की पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शर्मा का ट्रांसफर ग्वालियर से भोपाल कर दिया गया है।
इमरती देवी ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थकों में से एक हैं, इमरती उन 22 विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने मार्च 2020 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। इस कारण कमलनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार गिर गई थी। इसके बाद राज्य में शिवराज की अगुवाई में बनी सरकार में उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया था, लेकिन हाल ही में हुए उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
उपचुनाव के दौरान भी सुर्खियों में आईं थी इमरती देवी
बता दें कि इमरती देवी का नाम सुर्खियों में तब भी आया था जब प्रचार के दौरान एक चुनावी सभा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal nath) ने उनको लेकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था. इसके बाद कमलनाथ की जमकर निंदा भी हुई थी.