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भाजी से रेशा, रेशे से कपड़ा: किसान स्कूल के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन का कृषि मंत्री ने किया सम्मान

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 किसान स्कूल के रामाधार देवांगन का कृषि मंत्री ने किया सम्मान

अलसी और केला, भिंडी, अमारी के अलावा चेच के रेशे से बनाते हैं कपड़ा

प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भेंट कर चुके हैं प्राकृतिक रेशे से बनी जैकेट 

जांजगीर-चाम्पा- खेती को केवल अनाज और सब्जी उत्पादन तक सीमित न रखते हुए कृषि उपज और स्थानीय संसाधनों से नए उत्पाद तैयार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से जुड़े रामाधार देवांगन का छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम द्वारा सम्मान किया गया.

उल्लेखनीय है कि कृषि के क्षेत्र में किए गए उनके विभिन्न नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. 

रामाधार देवांगन ने कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़े संसाधनों में रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएं तलाशते हुए प्राकृतिक रेशों पर विशेष प्रयोग किया. उन्होंने अपनी टीम के साथ अलसी, केला, भिंडी, अमारी और चेच भाजी के रेशे निकालकर उनसे कपड़ा तैयार करने का नवाचार अपने सहयोगी टीम के साथ किया. इन रेशों से तैयार कपड़े से जैकेट सहित अन्य उपयोगी उत्पाद भी बनाए गए हैं. 

भाजी के रेशे से कपड़ा बनाने का अनूठा प्रयोग

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वनस्पतियों और स्थानीय फसलों को केवल भोजन तक सीमित न रखते हुए उनके दूसरे उपयोग तलाशने की दिशा में यह प्रयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अमारी और चेच जैसी स्थानीय भाजियों के तने से रेशा निकालकर उसे उपयोगी कपड़े में बदलने की प्रक्रिया में टीम ने लगातार प्रयोग और मेहनत की. इसी तरह केला, भिंडी और अलसी से भी रेशा प्राप्त कर कपड़ा बनाने का प्रयास किया गया.

बलौदा ब्लॉक के सिवनी गांव के प्रगतिशील व नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन का कहना है कि गांव में उपलब्ध फसलों और वनस्पतियों में केवल खाद्य उपयोग ही नहीं, बल्कि मूल्यवर्धन और रोजगार की भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. किसानों को इन संभावनाओं से जोड़कर खेती को उद्यमिता से जोड़ना उनके प्रयास का प्रमुख उद्देश्य है. 

प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंची जैकेट 

रामाधार देवांगन और किसान स्कूल की टीम द्वारा प्राकृतिक रेशों से तैयार की गई जैकेट देश के प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भेंट की जा चुकी है. स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयोग जब राष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट लोगों तक पहुंचा तो इससे किसान स्कूल के नवाचारों को भी व्यापक पहचान मिली। उनका यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि गांव में उपलब्ध संसाधनों और किसानों की मेहनत को तकनीक, कौशल एवं नवाचार से जोड़कर नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. 

राष्ट्रीय पुरस्कार से भी हो चुके हैं सम्मानित

कृषि क्षेत्र में विभिन्न नवाचारों के लिए रामाधार देवांगन को पूर्व में कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है. कृषि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय उत्पादों के मूल्यवर्धन और ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं विकसित करने की दिशा में वे लगातार प्रयोग करते रहे हैं.

किसान स्कूल बना नवाचार का केंद्र

बहेराडीह गांव में स्थित देश का पहला किसान स्कूल वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को खेती के कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं यहां पारंपरिक कृषि ज्ञान के साथ नए प्रयोगों और स्थानीय संसाधनों के मूल्यवर्धन को भी प्रोत्साहित किया जाता है.

रामाधार देवांगन के रेशे से कपड़ा बनाने के प्रयोग ने यह संदेश दिया है कि किसान की फसल खेत से बाजार तक पहुंचने के बीच कई नए रोजगार और व्यवसाय के अवसर पैदा कर सकती है. स्थानीय फसलों से रेशा, रेशे से कपड़ा और कपड़े से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्र में मूल्यवर्धन का उदाहरण बन रही है. 

कृषि मंत्री रामविचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ गिरीश चंदेल द्वारा रामाधार देवांगन का सम्मान किए जाने पर किसान स्कूल परिवार, किसानों, बिहान, ग्रामीण महिलाओं, आरसेटी, केवीके के अलावा जांजगीर-चाम्पा और सक्ती जिले के नवाचार से जुड़े लोगों ने हर्ष व्यक्त किया. किसान स्कूल परिवार का कहना है कि ऐसे नवाचार, ग्रामीण युवाओं और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नए कृषि उद्यम शुरू करने की प्रेरणा देते हैं.\

बरसात के बाद अब धरातल पर दिखेंगे सड़कों के काम, लोक निर्माण विभाग ने 6 कार्यों की निविदा को दी मंजूरी

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कुल 101.24 करोड़ की लागत से सड़कें होंगी चौड़ी और मजबूत, गौरव पथ निर्माण और सौंदर्यीकरण भी होगा

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यादेश जारी कर तत्काल काम शुरू कराने के दिए निर्देश 

रायपुर- राज्य शासन ने बरसात के बाद सड़कों के निर्माण में तेजी लाने की तैयारी पूरी कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने धमतरी जिले में 6 कार्यों के लिए कुल 101 करोड़ 23 लाख 55 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है। इनमें पांच सड़कों के मजबूतीकरण और चौड़ीकरण तथा आमदी नगर पंचायत में फोरलेन गौरव पथ एवं सौंदर्यीकरण का काम शामिल है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नए कार्यों की निविदा मंजूर करते हुए धमतरी संभाग के कार्यपालन अभियंता को चयनित ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को कार्यादेश जारी कर तत्काल कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं। 

कई महत्वपूर्ण मार्गों का होगा चौड़ीकरण और मजबूतीकरण

लोक निर्माण विभाग ने धमतरी जिले में मेघा रोड तिराहा-स्टेशन रोड-चरमुड़िया राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 3.75 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 45 लाख 12 हजार रुपए, पचपेड़ी-तर्रागोंदी-भेलवाकूदा-टिपानी-सेमरा (बी) मार्ग में पांच किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 13 करोड़ 32 लाख 82 हजार रुपए, नौ किलोमीटर छाती-गागरा-कंडेल-देवपुर मार्ग के लिए 23 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपए तथा 10 किलोमीटर अर्जुनी-भानपुरी-तरसींवा-कुर्रा-अमलीडीह-हसदा सड़क के लिए 19 करोड़ 42 लाख 22 हजार रुपए की निविदा मंजूर की है।

विभाग ने राजनांदगांव-गुंडरदेही-धमतरी-नगरी सिहावा-बोराई राज्य मार्ग में 23 किलोमीटर लंबाई के मजबूतीकरण एवं डामरीकरण के लिए 11 करोड़ 70 लाख 83 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है। लोक निर्माण विभाग द्वारा इसी मार्ग में पड़ने वाले आमदी नगर पंचायत में 3.50 किलोमीटर फोरलेन गौरव पथ के निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए भी 19 करोड़ 26 लाख 10 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की है। विभाग द्वारा इन निविदाओं का अनुमोदन अनुबंध के पूर्व ठेकेदारों से संपूर्ण कार्यावधि के लिए प्रभावशील एपीएस (Additional Performance Security) की राशि की बैंक गारंटी प्राप्त करने की शर्त पर की गई है।

मापदंडों के अनुसार कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें, गुणवत्ता व समय-सीमा पर दें विशेष ध्यान – अरुण साव

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने धमतरी संभाग के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करते हुए कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ये कार्य किसी अन्य को सबलेट नहीं करने तथा कार्य संपादन के लिए पॉवर-ऑफ-अटॉर्नी को मान्य नहीं करने भी कहा है। साव ने अनुबंधित समयावधि में कार्यों को पूर्ण करने, कार्यों का संपादन अनुबंधानुसार प्रशासकीय स्वीकृति एवं आबंटन की सीमा में करने के भी निर्देश दिए हैं।

सरगुजा में हाथी का हमला, 65 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल; पसली में फ्रैक्चर

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सरगुजा- छत्तीसगढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और घटना सामने आई है। उदयपुर वन परिक्षेत्र के महेशपुर इलाके में मंगलवार, 6 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे जंगली हाथियों के दल ने 65 वर्षीय ग्रामीण मोहन कुजूर पर हमला कर दिया। हादसे में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। 

मुंगरी तालाब के पास हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, मोहन कुजूर सुबह शौच के लिए घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान महेशपुर के मुंगरी तालाब के पास उनका सामना हाथियों के दल से हो गया। अचानक हुए हमले में वे संभल नहीं पाए और गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, उनकी पसली टूट गई है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। 

घायल हालत में खुद पहुंचे घर के पास

हमले के बाद घायल मोहन कुजूर किसी तरह खुद चलते-घिसटते हुए घर के नजदीक पहुंचे। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उन्हें अपने वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), उदयपुर ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। 

इलाके में करीब 26 हाथियों की मौजूदगी

घटना के बाद महेशपुर और आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 26 हाथियों का दल लगातार मौजूद है। हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रख रही है। 

पहले भी सामने आ चुकी हैं घटनाएं

उदयपुर क्षेत्र में पिछले दिनों भी हाथियों की मौजूदगी के कारण मानव और वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में इसी क्षेत्र में एक हाथी शावक की करंट की चपेट में आने से मौत के बाद हाथियों के दल की गतिविधियां बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। 

ग्रामीणों में दहशत, सतर्क रहने की अपील

लगातार हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे क्षेत्रों में लोगों को हाथियों के करीब जाने, अकेले जंगल या तालाब की ओर जाने और हाथियों का रास्ता रोकने से बचने की सलाह दी जा रही है।


बिलासपुर में शिक्षक निलंबित, नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का आरोप; वीडियो हुआ वायरल

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बिलासपुर- जिले के कोटा विकासखंड के बहेरामुड़ा स्थित अनुदान प्राप्त विद्यामंदिर प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ एक सहायक शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। शिक्षक पर स्कूल समय में कथित तौर पर नशे की हालत में पहुंचने और अनुशासनहीन एवं अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप है।


वायरल वीडियो से सामने आया मामला

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया। प्रारंभिक जांच में शिक्षक के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में पाए जाने और अनुचित व्यवहार की बात सामने आई।

DEO ने दिए तत्काल निलंबन के निर्देश

जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन समिति को संबंधित सहायक शिक्षक के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा

वायरल वीडियो में शिक्षक कथित तौर पर लंबे समय से वेतन नहीं मिलने की बात कहते हुए दिखाई देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 10 महीने से वेतन लंबित होने का दावा किया है। हालांकि, वेतन लंबित रहने के कारणों की अलग से पुष्टि/जांच की जानी बाकी है।

आगे विभागीय कार्रवाई संभव

शिक्षा विभाग ने फिलहाल प्रारंभिक जांच और उपलब्ध शिकायतों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।


छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, उत्कृष्ट योगदान पर मिलेगा एक लाख रुपये का सम्मान

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गांवों की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार और समृद्धि के नए द्वार-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

सतत ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को मिलेगा प्रोत्साहन

राज्योत्सव में होगा विजेता का सम्मान, उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी होगी जारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ के गांवों की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होंगे।

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाना भी है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण पर्यटन में यह क्षमता है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव करें। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकती है।

‘चेन्दरू’ नाम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंच

पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ छत्तीसगढ़ की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाता है, जिसने कभी बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब इसी नाम से स्थापित राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार छत्तीसगढ़ के गांवों में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी नायकों और संस्थाओं को सम्मान और पहचान प्रदान करेगा।

एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से होगा सम्मान

पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह सम्मान जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नवाचारी और प्रभावशाली प्रयासों को सामने लाकर राज्य में ग्रामीण पर्यटन की नई प्रेरक कहानियां तैयार करना है।

छह सदस्यीय जूरी करेगी उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन

पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन हेतु छह सदस्यीय निर्णायक मंडल का प्रावधान किया गया है। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। इसमें पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।

समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी प्रविष्टियां

‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

राज्योत्सव में मिलेगा सम्मान, देश के सामने आएंगी सफलता की कहानियां

चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को रेखांकित करती सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलेगी और अन्य गांवों तथा समुदायों को भी पर्यटन आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं राज्य की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी हुई हैं। बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में होमस्टे और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और इसका आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही पारंपरिक कला, शिल्प, खान-पान, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक-सामाजिक सशक्तता, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।

नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में PIL, अरपा समेत कई नदियों पर फोकस

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छत्तीसगढ़- प्रदेश की प्रमुख नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, उद्गम स्थलों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए मामला सामने आया है।

अरपा नदी समेत कई नदियां शामिल
मामले में अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांद, केलो, सोन और टिपान जैसी प्रमुख नदियों के उद्गम एवं संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। हाईकोर्ट की निगरानी के बाद राज्य सरकार ने नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान, मैपिंग और संरक्षण के लिए राज्य स्तरीय समिति भी गठित की है। 

प्राकृतिक प्रवाह बचाने पर जोर
नदियों के संरक्षण के तहत उद्गम स्थलों की सुरक्षा, अतिक्रमण की स्थिति की जांच, जल प्रवाह और जल गुणवत्ता की निगरानी, कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट तथा वैज्ञानिक तरीके से नदी पुनर्जीवन योजनाओं पर काम किया जा रहा है। 

विशेषज्ञों की भी होगी भूमिका
हाईकोर्ट ने नदी संरक्षण की निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए पर्यावरण, भू-विज्ञान, जल विज्ञान और भूजल जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को समिति में शामिल करने पर जोर दिया है।

अरपा नदी को लेकर भी विशेष निगरानी
अरपा नदी के उद्गम क्षेत्र के संरक्षण और नदी के आसपास अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर भी हाईकोर्ट के समक्ष कार्रवाई की स्थिति रखी गई है। जुलाई 2026 के आदेश में कोर्ट ने अरपा सहित प्रमुख नदियों के लिए तैयार की जा रही River Revival Plans और संरक्षण कार्यों की प्रगति पर भी ध्यान दिया। 

उद्देश्य: नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह को बनाए रखना, प्रदूषण एवं अतिक्रमण पर नियंत्रण करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जलस्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित करना।


छत्तीसगढ़ में 300 मछली पालकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण

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छत्तीसगढ़- प्रदेश में करीब 300 मछली पालकों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मछली उत्पादन बढ़ाने, तालाब प्रबंधन, बेहतर पोषण, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करने की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मछली पालकों की आय बढ़ाना और मत्स्य उत्पादन को अधिक प्रभावी एवं लाभदायक बनाना है। विशेषज्ञों ने कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग पर जोर दिया।

इस प्रशिक्षण से मछली पालकों को नई तकनीकों की जानकारी मिलने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिलने की उम्मीद है।


रायपुर में 7-8 अक्टूबर को बड़ा राज्य स्तरीय रोजगार मेला, हजारों युवाओं को नौकरी का मौका

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छत्तीसगढ़ के बेरोजगार और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। राजधानी रायपुर में 7 और 8 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगा। आयोजन कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा किया जा रहा है।

हजारों पदों पर नौकरी का अवसर

रोजगार मेले में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रिक्तियां उपलब्ध कराई गई हैं।

शुरुआती जानकारी में 8 हजार से अधिक पदों पर रोजगार के अवसर बताए गए थे। वहीं, बाद की रिपोर्टों के अनुसार अब तक 85 कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से 11,500 से अधिक रिक्त पदों की जानकारी विभाग को मिल चुकी है। अन्य कंपनियों से भी संपर्क जारी है, इसलिए उपलब्ध अवसरों की संख्या आगे और बढ़ सकती है। 

10वीं पास से MBA और इंजीनियरिंग तक मौका

इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें केवल उच्च शिक्षित युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं।

इनमें शामिल हैं—

🔹 10वीं पास
🔹 12वीं पास
🔹 ITI
🔹 डिप्लोमा
🔹 इंजीनियरिंग
🔹 सामान्य स्नातक
🔹 कृषि स्नातक
🔹 MBA
🔹 MCA
🔹 अन्य स्नातकोत्तर योग्यता वाले उम्मीदवार

अर्थात उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक योग्यता और कौशल के अनुसार अलग-अलग कंपनियों में उपलब्ध पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

किन पदों पर मिल सकती है नौकरी?

रोजगार मेले में तकनीकी क्षेत्र के साथ-साथ ऑफिस, बैंकिंग, सेल्स, स्वास्थ्य, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी अवसर उपलब्ध हैं।

तकनीकी पदों में—

➡️ मशीन ऑपरेटर
➡️ असेंबली ऑपरेटर
➡️ फिटर
➡️ वेल्डर
➡️ इलेक्ट्रिशियन
➡️ इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन
➡️ मेंटेनेंस इलेक्ट्रिशियन
➡️ मैकेनिकल इंजीनियर
➡️ क्वालिटी इंस्पेक्टर

ऑफिस एवं सर्विस सेक्टर में—

➡️ कंप्यूटर ऑपरेटर
➡️ कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव
➡️ टेलीकॉलर
➡️ रिलेशनशिप मैनेजर
➡️ सेल्स एग्जीक्यूटिव
➡️ सेल्स ऑफिसर

इसके अलावा बैंकिंग, फाइनेंस और HR से जुड़े पद भी उपलब्ध हैं।

स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी अवसर

स्वास्थ्य एवं देखभाल के क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ और केयरटेकर जैसे पदों की रिक्तियां हैं।

वहीं सुरक्षा क्षेत्र में—

➡️ सिक्योरिटी गार्ड
➡️ सिक्योरिटी सुपरवाइजर

और परिवहन/लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में—

➡️ ड्राइवर
➡️ डिलीवरी कर्मचारी
➡️ बाइक राइडर
➡️ पिकर-पैकर

जैसे पदों पर भी अवसर उपलब्ध हैं।

कौन-कौन सी कंपनियां शामिल होंगी?

रोजगार मेले में स्थानीय कंपनियों के साथ कई राष्ट्रीय स्तर की निजी कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों की भागीदारी बताई गई है।

रिपोर्टों में Quess Corp, Randstad India, Rajasthan Textile Mills–Sutlej Textiles, Vardhman Textiles, Genus Power Infrastructure और Airtel Payments Bank सहित कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं।

इसके अलावा Instacart, Spandana Sphoorty Financial, Svatantra Microfin, NIIT, AISECT, Shanta Techno, Rajat Equipments और First Fly Corporate जैसी संस्थाएं भी रिक्तियां उपलब्ध करा रही हैं। 

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवार छत्तीसगढ़ के ई-रोजगार पोर्टल पर जाकर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी देख सकते हैं और अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

आधिकारिक पोर्टल: erojgar.cg.gov.in

पोर्टल पर उम्मीदवार अलग-अलग कंपनियों की रिक्तियां देखकर यह भी तय कर सकते हैं कि उनकी योग्यता के अनुसार कौन-सा पद उपयुक्त है। रिपोर्ट के अनुसार 7 अक्टूबर तक पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। 

चयनित युवाओं को मिलेगा Offer Letter

इस रोजगार मेले की एक खास बात यह है कि चयनित उम्मीदवारों को कार्यक्रम के दौरान ऑफर लेटर देने की तैयारी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार 8 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब चयनित युवाओं को ऑफर लेटर वितरित करेंगे। 

रोजगार मेले का उद्देश्य

सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

इस आयोजन के माध्यम से युवाओं और कंपनियों को एक ही स्थान पर लाने की कोशिश की जा रही है, जिससे उम्मीदवार सीधे कंपनियों से बातचीत कर सकें और उपलब्ध नौकरियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

युवाओं के लिए जरूरी जानकारी

📅 तारीख: 7 और 8 अक्टूबर 2026
📍 स्थान: सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा, रायपुर
🏢 आयोजन: कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग
💼 अवसर: 8,000+ से लेकर नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 11,500+ रिक्तियां
🎓 योग्यता: 10वीं से लेकर ITI, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, इंजीनियरिंग, MBA/MCA और अन्य योग्यताएं
📝 पंजीयन: ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से
📄 चयन: कंपनियों द्वारा भर्ती/चयन प्रक्रिया
🎁 विशेष: चयनित उम्मीदवारों को ऑफर लेटर देने की तैयारी

 युवाओं के लिए जरूरी सलाह

मेले में जाने से पहले उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड/पहचान पत्र, रिज्यूमे (CV), पासपोर्ट साइज फोटो और अनुभव प्रमाण-पत्र, यदि लागू हो, साथ रखें। साथ ही ई-रोजगार पोर्टल पर अपनी योग्यता के अनुसार उपलब्ध रिक्तियों को पहले से देख लेना बेहतर रहेगा।

यह रोजगार मेला छत्तीसगढ़ के उन युवाओं के लिए खास अवसर है जो निजी क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

कनाडा के क्यूबेक में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: अलगाववादी Parti Québécois की जीत, लेकिन बहुमत से दूर

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कनाडा के क्यूबेक प्रांत में हुए विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। स्वतंत्रता समर्थक (separatist/sovereigntist) Parti Québécois (PQ) ने चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की है। हालांकि पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, इसलिए उसे अल्पमत सरकार के रूप में काम करना होगा।

PQ ने कितनी सीटें जीतीं?

क्यूबेक की 127 सदस्यीय National Assembly में सरकार बनाने के लिए कम से कम 64 सीटों की जरूरत होती है।

Parti Québécois ने करीब 59 सीटें जीतीं—यानी बहुमत के आंकड़े से लगभग 5 सीट कम। इसलिए पार्टी सरकार तो बनाएगी, लेकिन उसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों और विश्वास मतों पर विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है।

कौन होंगे क्यूबेक के नए Premier?

PQ के नेता Paul St-Pierre Plamondon क्यूबेक के अगले Premier बनने जा रहे हैं।

यह Parti Québécois के लिए लंबे समय बाद बड़ी वापसी है। पार्टी पिछले एक दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर थी और 2022 के चुनाव में उसे केवल कुछ ही सीटें मिली थीं। 2026 में पार्टी ने जोरदार वापसी करते हुए सबसे अधिक सीटें हासिल कीं।

क्यूबेक को कनाडा से अलग करने का मुद्दा फिर चर्चा में

इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्यूबेक की स्वतंत्रता का मुद्दा है।

Parti Québécois लंबे समय से क्यूबेक को कनाडा से अलग एक स्वतंत्र देश बनाने की समर्थक पार्टी रही है। पार्टी नेता Paul St-Pierre Plamondon ने भविष्य में क्यूबेक की स्वतंत्रता पर एक और जनमत-संग्रह (referendum) कराने का वादा किया है।

हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि इस जनमत-संग्रह को तुरंत नहीं कराया जाएगा और इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाद कराने की योजना है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि क्यूबेक तुरंत कनाडा से अलग हो जाएगा

यह बात समझना बहुत जरूरी है।

PQ की चुनावी जीत = क्यूबेक का कनाडा से अलग होना नहीं है।

पहले पार्टी को सरकार चलानी होगी। उसके बाद यदि स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो उसके लिए अलग राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया होगी।

क्यूबेक में इससे पहले 1980 और 1995 में स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह हो चुके हैं और दोनों में अलगाव के पक्ष को बहुमत नहीं मिला था। मौजूदा समय में भी क्यूबेक की स्वतंत्रता के समर्थन का स्तर लगभग 30% के आसपास बताया गया है।

सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर: CAQ को भारी नुकसान

इस चुनाव में मौजूदा Coalition Avenir Québec (CAQ) को बड़ा झटका लगा है।

CAQ पिछले करीब 8 वर्षों से क्यूबेक की सत्ता में थी, लेकिन इस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। रिपोर्टों के अनुसार CAQ अपनी पिछली मजबूत स्थिति से लगभग पूरी तरह बाहर हो गई और उसके नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा।

यह परिणाम क्यूबेक की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

विपक्ष की भूमिका अब बेहद महत्वपूर्ण

क्योंकि PQ के पास 64 सीटों का बहुमत नहीं है, इसलिए उसकी सरकार को कई मामलों में विपक्षी दलों का सहयोग लेना पड़ेगा।

इसका मतलब है कि:

  • PQ हर कानून को अकेले पास नहीं करा पाएगी।

  • महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए विपक्षी सांसदों का समर्थन जरूरी हो सकता है।

  • सरकार के अस्तित्व से जुड़े confidence votes में भी विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

  • स्वतंत्रता के मुद्दे पर PQ को राजनीतिक समर्थन जुटाने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

यानी PQ चुनाव जीत गई है, लेकिन बहुमत के बिना सरकार चलाना उसके लिए एक अलग राजनीतिक चुनौती होगी।

कनाडा की संघीय सरकार की प्रतिक्रिया

कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने PQ की जीत के बाद Paul St-Pierre Plamondon के साथ काम करने की इच्छा जताई है।

केंद्र सरकार के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि क्यूबेक कनाडा का एक महत्वपूर्ण प्रांत है और वहां स्वतंत्रता का मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

Carney सरकार ने क्यूबेक के साथ आर्थिक मुद्दों, रोजगार, आवास और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियों पर सहयोग करने पर जोर दिया है।

चुनाव का बड़ा संदेश क्या है?

क्यूबेक के चुनाव परिणाम से फिलहाल तीन बड़ी बातें सामने आती हैं:

1️⃣ Parti Québécois की जोरदार राजनीतिक वापसी
लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के बाद PQ फिर सरकार बनाने जा रही है।

2️⃣ स्वतंत्रता का मुद्दा फिर चर्चा में
PQ के सत्ता में आने से क्यूबेक की स्वतंत्रता पर संभावित तीसरे referendum की चर्चा तेज हो गई है।

3️⃣ लेकिन जनता ने PQ को पूर्ण बहुमत नहीं दिया
127 सीटों वाली विधानसभा में 64 सीटों के लिए जरूरी बहुमत हासिल नहीं हुआ। इसलिए PQ को विपक्षी दलों के साथ काम करना पड़ेगा।

 सबसे जरूरी बात

क्यूबेक अभी कनाडा से अलग नहीं हुआ है। चुनाव में अलगाववादी पार्टी की जीत हुई है, लेकिन स्वतंत्रता के लिए कोई तत्काल अलगाव नहीं हुआ है। भविष्य में referendum कराया भी जाता है तो वह एक अलग राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया होगी।

सुकमा से बड़ी खबर: ईसाई समुदाय के लिए दफन भूमि पर ग्राम सभा के फैसले से विवाद

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा के एक फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहां विशेष ग्राम सभा में ईसाई समुदाय और धर्मांतरित लोगों के शव दफनाने, चर्च निर्माण तथा प्रार्थना एवं धार्मिक सभाओं के लिए ग्राम सभा की सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया है। यह फैसला अब धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी परंपराओं और ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर बहस का विषय बन गया है। 

2 अक्टूबर को हुई विशेष ग्राम सभा

रिपोर्टों के अनुसार, कोंटा जनपद पंचायत के अंतर्गत पुनपल्ली ग्राम पंचायत में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हित और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें से एक प्रस्ताव में ईसाई और धर्मांतरित लोगों के लिए ग्राम सभा की जमीन पर शव दफनाने, चर्च बनाने, प्रार्थना सभा तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई है।

पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर भी रोक

ग्राम पंचायत की ओर से लगाए गए सूचना-पट्ट में यह भी कहा गया है कि पादरी और ईसाई धर्म प्रचारक धर्मांतरण, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों की रक्षा करना है। 

फैसले के लिए PESA कानून का हवाला

ग्राम सभा ने अपने निर्णय के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA Act, 1996 और छत्तीसगढ़ के PESA कानून में किए गए संशोधनों का हवाला दिया है।

पुनपल्ली अनुसूचित क्षेत्र में आता है। PESA के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्थानीय परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और पारंपरिक व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। 

हालांकि, PESA के तहत ग्राम सभा के अधिकारों की सीमा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं।

 ईसाई समुदाय के सामने क्या समस्या?

इस फैसले को लेकर चिंता इसलिए भी जताई जा रही है क्योंकि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है।

कुछ रिपोर्टों में स्थानीय ईसाई परिवारों की चिंता का उल्लेख किया गया है कि यदि ग्राम सभा की जमीन पर दफनाने की अनुमति नहीं होगी, तो उन्हें अंतिम संस्कार के लिए दूसरे गांव या दूर के स्थानों पर जाना पड़ सकता है।

यही वजह है कि मामला अब केवल जमीन आवंटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, अंतिम संस्कार के अधिकार और स्थानीय समुदाय के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

ग्राम सभा का पक्ष क्या है?

ग्राम सभा से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्णय किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि गांव की पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

जनपद पंचायत सदस्य मड़कम भीमा के अनुसार, ग्राम सभा ने स्थानीय परंपरा, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पारित किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद की स्थिति में कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। 

 दूसरी ओर उठ रहे संवैधानिक सवाल

इस फैसले को लेकर अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या ग्राम सभा के स्थानीय अधिकार किसी नागरिक के धार्मिक अधिकारों को इस तरह सीमित कर सकते हैं?

भारत का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसलिए इस मामले में एक तरफ आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा के विशेष अधिकार और पारंपरिक व्यवस्था, जबकि दूसरी तरफ नागरिकों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकार हैं।

इन दोनों के बीच कानूनी सीमा और इस प्रस्ताव की वैधता पर आगे बहस और प्रशासनिक/न्यायिक जांच की संभावना बनी हुई है। 

प्रशासन की भूमिका पर नजर

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ग्राम सभा के प्रस्ताव को प्रशासन किस रूप में देखता है और क्या आगे कोई प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

पुनपल्ली का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक साथ कई संवेदनशील मुद्दों को सामने लाता है—

🔹 आदिवासी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान
🔹 ग्राम सभा के अधिकार और PESA कानून
🔹 धार्मिक स्वतंत्रता
🔹 अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार
🔹 सामुदायिक जमीन का उपयोग
🔹 धर्मांतरण को लेकर स्थानीय विवाद
🔹 कानून और संविधान के बीच अधिकारों का संतुलन

फिलहाल स्थिति

पुनपल्ली ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन इस प्रस्ताव की कानूनी स्थिति और इसे लागू करने की सीमा को लेकर सवाल बने हुए हैं। मामले में प्रशासन की आगे की भूमिका और यदि मामला न्यायिक स्तर तक जाता है तो अदालत की व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए फिलहाल इसे “ग्राम सभा का प्रस्ताव” कहना अधिक सटीक है, न कि पूरे सुकमा जिले में लागू सरकारी आदेश।


दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन

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नई दिल्ली- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरा विवाद SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़ा है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की दोबारा गहन जांच करता है।

इस प्रक्रिया में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि—

  • मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं।

  • किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह तो नहीं है।

  • मृत लोगों के नाम अभी भी सूची में तो नहीं हैं।

  • ऐसे लोगों के नाम तो नहीं हैं जो उस क्षेत्र में रहने के पात्र नहीं हैं।

  • योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल है या नहीं।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और सही रखना जरूरी है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सकें।

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा है, खासकर गरीब, मजदूर, प्रवासी और ऐसे लोगों के नाम जिनके पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

 Form 6 को लेकर विवाद क्या है?

इस पूरे मामले में Form 6 भी महत्वपूर्ण है।

Form 6 का इस्तेमाल कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करता है।

विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान Form 6 से जुड़ी प्रक्रिया में अतिरिक्त घोषणा/जानकारी की व्यवस्था की गई, जिससे नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया कठिन हो सकती है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने ऐसा कदम उठाया जो मतदाता बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन चुनाव आयोग की सफाई क्या है?

चुनाव आयोग का कहना है कि मूल Form 6 को बदला नहीं गया है, बल्कि उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था की गई है।

यानी यहां दोनों पक्षों के दावे अलग हैं—

विपक्ष: Form 6 में बदलाव से मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।

ECI: Form 6 में मूल बदलाव नहीं किया गया, केवल अतिरिक्त declaration जोड़ा गया है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या है?

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट में Form 6 और SIR से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने इस प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड और बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं।

अदालत की चिंता यह है कि Form 6 में बदलाव आखिर किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है:

सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि चुनाव आयोग दोषी है।

अदालत की ओर से रिकॉर्ड की जांच और मामले की न्यायिक समीक्षा की जा रही है।

इसलिए विपक्ष के राजनीतिक आरोपों और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आज विपक्ष ने मार्च क्यों निकाला?

INDIA गठबंधन के सांसदों का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए।

विपक्ष की प्रमुख मांगें हैं:

1. CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

विपक्ष चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

2. SIR की प्रक्रिया पर रोक

विपक्ष चाहता है कि SIR की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जब तक पूरी पारदर्शिता न हो, इसे आगे न बढ़ाया जाए।

3. मतदाता सूची में पारदर्शिता

विपक्ष चाहता है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी जानकारी और प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो।

4. योग्य मतदाताओं का नाम न हटे

विपक्ष का सबसे बड़ा दावा है कि किसी भी वास्तविक और योग्य नागरिक का नाम सिर्फ दस्तावेजों की कमी या प्रक्रिया संबंधी कारणों से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।

मार्च में कौन-कौन शामिल है?

INDIA गठबंधन के कई विपक्षी दलों के सांसद इस मार्च में शामिल हुए हैं।

मार्च की शुरुआत संसद के मकर द्वार से हुई और सांसद निर्वाचन सदन, यानी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े।

हालांकि गठबंधन के सभी दल इस प्रदर्शन में एक साथ नहीं हैं। कुछ दलों ने मार्च में शामिल होने से दूरी बनाई है।

दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?

विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है।

मार्च के रास्ते में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।

प्रशासन की चिंता यह है कि बड़ी संख्या में सांसदों और समर्थकों के एक साथ आने से यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यह विवाद केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव नहीं है।

इसका सीधा संबंध मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से है।

अगर किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह चुनाव में मतदान नहीं कर सकता।

इसीलिए विपक्ष इसे लोकतंत्र और "वोट के अधिकार" का मुद्दा बता रहा है।

दूसरी ओर चुनाव आयोग का तर्क है कि अगर मतदाता सूची में गलत, डुप्लीकेट या अयोग्य नाम मौजूद रहेंगे तो चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। इसलिए मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

अभी यह कहना गलत होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दोषी ठहरा दिया है। अदालत मामले की जांच/सुनवाई कर रही है। वहीं चुनाव आयोग अपने फैसले और प्रक्रिया को उचित बता रहा है।

इस समय पूरा मामला तीन स्तरों पर चल रहा है—

राजनीतिक विरोध + चुनाव आयोग की सफाई + सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा।


असली ‘सेवा-संकल्प’ बच्चों को पढ़ाना और समझदार बनाना है : गेंदलाल कोकडिया

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सरकारी कार्यक्रम में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति पर उठे सवाल, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की चिंता

महासमुंद- ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत सलिहाभांठा में आयोजित समस्या-समाधान शिविर में महासमुंद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्र के सभी प्राचार्यों एवं प्रधानपाठकों की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आदेश के चलते क्षेत्र के कई स्कूलों के प्राचार्य और प्रधानपाठक शिविर में उपस्थित रहे, जिससे स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

शिक्षा के मानवीयकरण एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी, महासमुंद के प्रधान अध्यापक गेंदलाल कोकडिया ने इस व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों और प्रधानपाठकों का प्राथमिक दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना, उन्हें समझदार और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

कोकडिया का कहना है कि समस्या-समाधान शिविर में केवल उन्हीं स्कूलों के प्रधानपाठक और प्राचार्य उपस्थित हों, जिनके विद्यालय से संबंधित कोई समस्या है। सभी स्कूलों के प्रधानपाठकों एवं प्राचार्यों को एक साथ बुलाना आवश्यक नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, जिसके कारण वे स्वयं शिविर में उपस्थित नहीं हुए। हालांकि, उनके संकुल प्राचार्य द्वारा सभी प्रधानपाठकों को शिविर में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

‘स्कूल छोड़कर सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थिति क्यों?’

कोकडिया के अनुसार, यदि सरकारी कार्यक्रमों में सभी प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति कराई जाती है, तो इसका सीधा असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ता है। स्कूलों के जिम्मेदार अधिकारी एवं शिक्षक यदि विद्यालय के बजाय अन्य कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय में ऐसी व्यवस्था से जनमानस में सरकारी स्कूलों की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के बजाय शिक्षक और प्रधानपाठक विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं।

‘आदेश जारी करने से पहले होना चाहिए चिंतन’

कोकडिया ने कहा कि किसी भी आदेश को जारी करने से पहले उसके शैक्षणिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि किसी कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, तो उसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रमों में संकुल समन्वयकों एवं संकुल प्राचार्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है। स्कूलों से संबंधित समस्याओं को वे संबंधित विद्यालयों से जानकारी लेकर शिविर में प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे एक ओर लोगों की समस्याओं का समाधान होगा और दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

‘भीड़ जुटाना नहीं, शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी’

गेंदलाल कोकडिया ने स्कूल शिक्षा विभाग महासमुंद, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर महासमुंद एवं मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों को केवल भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से अनिवार्य रूप से नहीं बुलाया जाए। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसे कार्यक्रमों में केवल आवश्यक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, तो सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था बेहतर होगी और आम जनता के बीच सरकारी स्कूलों की छवि भी मजबूत होगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि शिक्षकों के मूल दायित्व को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश सभी राज्यों में लागू किए जाएं।

कोकडिया ने कहा कि शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण काम बच्चों को पढ़ाना, उन्हें समझदार बनाना और बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना है। यही असली ‘सेवा-संकल्प’ है—सरकारी कार्यक्रमों में अनावश्यक रूप से भीड़ बढ़ाना नहीं।

दिल्ली अब दूर नहीं: सरगुजा को मिली बड़ी रेल सौगात, अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के लिए अब सप्ताह में दो दिन ट्रेन

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सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर द्वितीय साप्ताहिक ट्रेन को किया रवाना

मंगलवार और गुरुवार को अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए मिलेगी सीधी रेल सुविधा

रेलवे स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म, लाइनों का विस्तार और बड़े एफओबी सहित यात्री सुविधाओं के विस्तार पर चल रहा कार्य

अम्बिकापुर- सरगुजा संभाग के रेल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिली है। अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित एक्सप्रेस ट्रेन की सेवा अब सप्ताह में एक दिन के स्थान पर दो दिन उपलब्ध होगी। मंगलवार को अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से द्वितीय साप्ताहिक ट्रेन को सांसद चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर निर्धारित समय 7.30 पर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों से मुलाकात कर उन्हें पुष्प भेंट किए और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल द्वारा गाड़ी संख्या 22407 अम्बिकापुर–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस का संचालन अब प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को किया जाएगा। ट्रेन अम्बिकापुर से प्रातः 7:30 बजे रवाना होगी। वहीं गाड़ी संख्या 22408 हजरत निजामुद्दीन–अम्बिकापुर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को रात्रि 11 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना होगी। सेवा आवृत्ति बढ़ाए जाने से सरगुजा संभाग के यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सप्ताह में एक अतिरिक्त सीधी रेल सेवा उपलब्ध हो गई है।

सरगुजा संभाग के यात्रियों की लंबे समय से थी मांग—सांसद श्री चिंतामणि महाराज

सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन ट्रेन संचालन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल सेवा की आवृत्ति बढ़ने से पूरे सरगुजा संभाग के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पहले सप्ताह में एक दिन ट्रेन चलने के कारण सभी यात्रियों को यात्रा का अवसर नहीं मिल पाता था। अब अतिरिक्त फेरा शुरू होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रथम दिन भी यात्रियों में नई सेवा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।  रायगढ़,जशपुर क्षेत्र सहित अन्य स्थानों से भी यात्री इस ट्रेन से यात्रा करने पहुंचे। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति सरगुजा संभाग की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

यात्रियों की मांग पर बढ़ाई गई ट्रेन की आवृत्ति—डीआरएम राकेश रंजन

डीआरएम राकेश रंजन ने बताया कि क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से दिल्ली के लिए संचालित रेल सेवा को सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर दो दिन करने की मांग की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन की गई है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल अम्बिकापुर बल्कि ट्रेन के मार्ग में आने वाले विभिन्न स्टेशनों के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के लोग इस अतिरिक्त रेल सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे।

अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में बढ़ेंगी सुविधाएं

डीआरएम रंजन ने अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। रेलवे लाइनों का विस्तार करने के साथ ही बड़े फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोचिंग सुविधाओं में सुधार का कार्य किया जा रहा है। भविष्य में अम्बिकापुर से और ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जरूरी अधोसंरचना और सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए आवागमन होगा आसान—महापौर

नगर निगम महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन सीधी ट्रेन की सुविधा मिलना नगरवासियों और पूरे क्षेत्र के यात्रियों के लिए उपयोगी है। इससे दिल्ली आने-जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों सहित अन्य यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने इस रेल सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति नगरवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डीसीएम एस. भारतीयन, एसआर डीआरएम अहूजा, पार्षद आलोक दुबे, पार्षद  रविकांत उरांव, भारत सिंह सिसोदिया, अरुणा सिंह, विनोद हर्ष सहित जनप्रतिनिधि, रेलवे के अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक गण उपस्थित रहे।


सुबह की बड़ी खबरें | आज का न्यूज़ बुलेटिन

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नमस्कार! आइए जानते हैं आज सुबह की सबसे महत्वपूर्ण खबरें

छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें

1. छत्तीसगढ़ को ₹43,250 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी आर्थिक खबर है। सिंगापुर के SING Forum 2026 में राज्य को करीब ₹43,250 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें लगभग ₹41,750 करोड़ का AI-Ready Data Centre Campus भी शामिल है। इससे राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

2. महासमुंद में तेंदुए का आतंक

महासमुंद जिले में एक तेंदुआ घर में घुस गया और परिवार के 6 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इनमें 3 लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। यह इलाके में दो दिनों के भीतर तेंदुए के हमले की दूसरी घटना बताई गई है। 

3. महासमुंद में हीरों की खबर चर्चा में

महासमुंद जिले में हीरे मिलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इलाके में मिले पत्थरों से बड़े हीरा भंडार की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है। मामले में आगे की जांच और पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। 

4. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की पिछली अवधि से लागू होने वाली 3 साल की स्टडी लीव की मांग को खारिज किया है। अदालत ने कहा कि किसी खास तारीख पर जारी कानूनी प्रावधान या छूट को सामान्यतः पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। 

देश की बड़ी खबरें

5. भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिलहाल एक तरह के गतिरोध/ठहराव पर पहुंच गई है। टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे बातचीत में अहम बने हुए हैं। 

6. चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद

मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच विवाद जारी है। हाल में दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव को सही ठहराया है।

7. IndiGo ने बढ़ाया ईंधन शुल्क

बढ़ती एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कीमतों के कारण IndiGo ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 6 अक्टूबर से ईंधन शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है। इसका असर हवाई यात्रा के किराए पर पड़ सकता है। 

अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार

8. आज शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद

सोमवार की मजबूती के बाद आज भारतीय शेयर बाजार के सकारात्मक शुरुआत करने की उम्मीद है। GIFT Nifty करीब 22,648 के स्तर पर था। वैश्विक बाजारों की मजबूती और कुछ कंपनियों के अच्छे तिमाही अपडेट से बाजार को सहारा मिला है। 

9. RBI के फैसले पर बाजार की नजर

बुधवार को RBI की मौद्रिक नीति का फैसला आना है। महंगाई, कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल RBI के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। Reuters के सर्वे में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की संभावना जताई गई है।

10. रुपया दबाव में

भारतीय रुपया हाल के दिनों में रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास बना हुआ है। डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी के बाहर जाने से रुपये पर दबाव है। 

11. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी

आज कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है। Brent crude करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। मध्य-पूर्व से बढ़ी आपूर्ति और G7 के आपात भंडार से तेल जारी करने की योजना ने कीमतों पर दबाव बनाया है।

दुनिया की बड़ी खबरें

12. अमेरिकी शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी

अमेरिकी टेक शेयरों में तेजी के कारण Nasdaq रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। AI कंपनियों में मजबूत प्रदर्शन ने बाजार को सहारा दिया। Nvidia का बाजार मूल्य भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। 

 13. यूरो पर दबाव

फ्रांस की बढ़ती कर्ज समस्या और यूरोप में राजनीतिक अनिश्चितता के कारण यूरो 17 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है।

14. नाइजीरिया में सैन्य विमान हादसा

नाइजीरिया में एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 32 लोगों की मौत की खबर है। 

विज्ञान, AI और टेक्नोलॉजी

15. AI का असर भारतीय IT कंपनियों पर

भारतीय IT कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर AI और ग्राहकों द्वारा खर्च में सावधानी का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बड़ी IT कंपनियों की कमाई और भविष्य की growth guidance पर निवेशकों की नजर है। 

खेल जगत

 16. भारत ने पाकिस्तान को हराकर क्रिकेट में जीत दर्ज की

भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर पुरुषों का फाइनल जीता। इससे भारत ने इस प्रतियोगिता में पुरुष और महिला—दोनों वर्गों में खिताब अपने नाम किए। 

मौसम

छत्तीसगढ़ में अक्टूबर के इस दौर में कई इलाकों में बादल और स्थानीय बारिश की स्थिति बन सकती है। महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के अचानक बदलने की संभावना को देखते हुए स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखना बेहतर रहेगा। 


पीपला और ग्रामीणों की पहल से आदर्श ग्राम की ओर बढ़ता चरौदा, विशेष ग्राम सभा में पारित हुए चार लक्ष्य

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आरंग- शासन के निर्देशानुसार सोमवार को ग्राम पंचायत चरौदा में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। सभा में सरपंच देवशरण धीवर, सचिव, उपसरपंच, समस्त पंचगण, पटवारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूह एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजनों ने सहभागिता की।ग्राम सभा में गांधी जयंती, स्वच्छता अभियान, चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, ग्राम पंचायत विकास योजना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं, पेयजल, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं तथा आय-व्यय के साथ-साथ ग्रामीणों की समस्याओं एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

शिक्षक की पहल बनी आदर्श ग्राम की नींव

इस पूरे आदर्श ग्राम अभियान के प्रणेता शिक्षक एवं पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य महेन्द्र कुमार पटेल हैं। गत माह उन्हीं की पहल पर फाउंडेशन ने ग्रामवासियों और पंचायत के साथ मिलकर शासकीय गाइडलाइन अनुसार चरौदा को आदर्श ग्राम बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हर्ष के साथ स्वागत किया।

उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश व पटेल के निरंतर प्रयास और ग्रामीणों के सहयोग से चरौदा ने  चार बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। शत-प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश,  बाल विवाह मुक्त ग्राम चरौदा, हरियर ग्राम चरौदा, शत-प्रतिशत वय वंदन योजना में पंजीयन इन चारों लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ग्राम सभा में पारित किया गया। फाउंडेशन के सदस्यों ने ग्राम सभा में आदर्श ग्राम के शेष लक्ष्यों और उसे पूर्ण करने की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसकी उपस्थित ग्रामीणों ने  सराहना की।


सरपंच देवशरण धीवर ने बताया कि फाउंडेशन और उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में शेष लक्ष्यों पर भी तेजी से कार्य जारी है।

चरौदा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आदर्श बनते ग्राम का मॉडल बन रहा है।

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