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तमिलनाडु की थेनी जेल से 17 कैदी फरार होने के मामले में बड़ी कार्रवाई: उप जेल अधिकारी निलंबित, वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले; सभी कैदी दोबारा गिरफ्तार

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चेन्नई- तमिलनाडु के थेनी जिले की थेक्कमपट्टी उप-जेल से 17 कैदियों के फरार होने के मामले में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कड़ी कार्रवाई की है। जेल की सुरक्षा में गंभीर चूक और अधिकारियों की कथित लापरवाही को देखते हुए सरकार ने उप जेल अधिकारी को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जेलों की सुरक्षा और निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

26 अक्टूबर की रात जेल से फरार हुए थे 17 कैदी

जानकारी के अनुसार, यह घटना 26 अक्टूबर 2026 की रात थेनी जिले की थेक्कमपट्टी उप-जेल में हुई थी। जेल में बंद 17 विचाराधीन कैदियों ने कथित तौर पर मेडिकल इमरजेंसी का नाटक किया और ड्यूटी पर तैनात जेल कर्मचारियों को काबू में कर परिसर से फरार हो गए।

घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल तलाशी अभियान शुरू किया। फरार कैदियों की तलाश के लिए अलग-अलग पुलिस टीमों को लगाया गया और आसपास के इलाकों में सघन जांच की गई।

ड्रोन की मदद से चलाया गया तलाशी अभियान

फरार कैदियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने तकनीक की भी मदद ली। तलाशी अभियान के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, आठ फरार कैदियों को घनी झाड़ियों और वन क्षेत्र में छिपे होने के दौरान ड्रोन की मदद से खोजा गया।

पुलिस ने अभियान चलाकर सभी 17 कैदियों को दोबारा पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें फिर से हिरासत में लेकर जेल में भेज दिया गया। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

उप जेल अधिकारी एन. नागेश्वरन निलंबित

घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विजय ने थेक्कमपट्टी उप-जेल के प्रभारी उप जेल अधिकारी एन. नागेश्वरन को निलंबित करने का आदेश दिया। वे 6 अगस्त 2024 से इस उप-जेल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।

निलंबन आदेश 30 अक्टूबर 2026 से प्रभावी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कैदियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की उचित निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर चूक को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

जेल प्रशासन में बड़े स्तर पर फेरबदल

सरकार ने केवल एक अधिकारी के निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले भी किए हैं।

मदुरै सेंट्रल जेल के अधीक्षक आर. कृष्णराज को स्थानांतरित कर सलेम सेंट्रल जेल का अधीक्षक बनाया गया है।

इसके अलावा, जेल विभाग के पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर को तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (TANGEDCO) में मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद पर भेजा गया है। उनकी जगह के. शंकर को जेल एवं सुधार सेवाओं का अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री विजय ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री विजय ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य की सभी जेलों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ पालन करने को कहा है।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जेलों में सुरक्षा संबंधी लापरवाही, निगरानी में कमी या जिम्मेदारी निभाने में कोताही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

थेनी की उप-जेल से एक साथ 17 कैदियों का फरार होना राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना के बाद जेलों में कर्मचारियों की तैनाती, निगरानी प्रणाली, आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल और कैदियों की गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।

सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि इस घटना के बाद जेल प्रशासन में जवाबदेही तय करने और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल इस मामले में सभी 17 फरार कैदियों को दोबारा पकड़ लिया गया है। वहीं, जेल प्रशासन की चूक और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच तथा विभागीय कार्रवाई जारी है।


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘पब्लिक महाभियोग’: INDIA गठबंधन ने दिल्ली में किया प्रतीकात्मक विरोध, SIR और वोटर लिस्ट को लेकर उठाए सवाल

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नई दिल्ली- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने 31 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली में प्रतीकात्मक ‘पब्लिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार सहित विपक्षी दलों के कई नेता शामिल हुए।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उनके पद से हटाए जाने की मांग दोहराई है।

दिल्ली में आयोजित हुआ प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम

INDIA गठबंधन ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर यह कार्यक्रम आयोजित किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष की ओर से प्रस्ताव और आरोपों को प्रस्तुत किया। राहुल गांधी ने भी कार्यक्रम में अपनी बात रखी। विपक्ष ने इस आयोजन के जरिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया।

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्ति

विपक्षी दलों का मुख्य विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने या उनके मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका है।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित सत्यापन के नहीं हटाया जाना चाहिए। गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देने और शिकायतों का समाधान करने की मांग की है।

हालांकि, विपक्ष के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अलग-अलग पक्ष रखे गए हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उस पर लगाए गए आरोपों का अंतिम आकलन संबंधित दस्तावेजों, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

संसद में पहले भी उठाया जा चुका है हटाने का मुद्दा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष इससे पहले भी संसद में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर चुका है। मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में इस संबंध में नोटिस दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने उन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था।

इसके बाद विपक्षी दलों ने नए सिरे से रणनीति बनाई और विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश की। सितंबर में भी INDIA गठबंधन की बैठकों में इस मुद्दे पर संयुक्त कार्रवाई और कानूनी विकल्पों पर चर्चा हुई थी।

क्या होता है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का संवैधानिक प्रावधान?

भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग के प्रमुख को राजनीतिक दबाव से संवैधानिक सुरक्षा देना है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए:

  1. संसद के किसी भी सदन में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव लाया जा सकता है।

  2. प्रस्ताव में सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार होने चाहिए।

  3. लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है।

  4. प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।

  5. दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।

इसलिए किसी राजनीतिक दल या गठबंधन की मांग अथवा प्रतीकात्मक कार्यक्रम से मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली की तैयारी

INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत रैली आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इस रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने वाला है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राष्ट्रीय बहस

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है।

जहां विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं इस मामले में संवैधानिक प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में संसद, चुनाव आयोग और न्यायिक मंचों पर इस मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रहेगी।

महत्वपूर्ण: 31 अक्टूबर का ‘पब्लिक महाभियोग’ एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसे संसद द्वारा पारित वास्तविक महाभियोग या ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने की कार्रवाई नहीं समझना चाहिए।

दिल्ली की जूता फैक्ट्री में भीषण आग: चार मजदूरों की दर्दनाक मौत, दो गंभीर घायल; पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार रात एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में चार मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि फैक्ट्री के अंदर मौजूद कई मजदूर धुएं के बीच फंस गए। दमकलकर्मियों और पुलिस की टीम ने घंटों तक बचाव अभियान चलाकर छह लोगों को बाहर निकाला।

रात करीब 9:30 बजे लगी आग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार 30 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित जूता निर्माण फैक्ट्री में आग लगने की सूचना दमकल विभाग को मिली। आग फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी थी, जहां जूते बनाने और उनसे संबंधित सामान रखने का काम होता था।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आग बुझाने के साथ-साथ फैक्ट्री में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मियों को कई घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी।

धुएं के कारण ऊपरी मंजिलों पर फंसे मजदूर

फैक्ट्री की इमारत में बेसमेंट, भूतल और ऊपर की मंजिलें थीं। आग बेसमेंट में लगी, लेकिन उससे निकला घना धुआं ऊपरी हिस्सों तक पहुंच गया। इससे वहां मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने में परेशानी हुई।

बचाव अभियान के दौरान छह लोग बेहोशी की हालत में मिले। दमकलकर्मियों ने एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास से और पांच लोगों को ऊपर की मंजिल पर स्थित एक कमरे से बाहर निकाला। सभी को तत्काल संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, मंगोलपुरी पहुंचाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो घायलों का उपचार जारी है।

मृतकों की हुई पहचान

मीडिया रिपोर्टों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले चार मजदूरों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • अशोक – 25 वर्ष

  • हरिहर – 40 वर्ष

  • लाल बाबू – 38 वर्ष

  • प्रेम चंद – 50 वर्ष

इनमें अशोक बिहार के नालंदा जिले का निवासी बताया गया है। अन्य मृतकों के पते और परिजनों से संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है।

घायलों की पहचान हरेंद्र (35) और विकास (21) के रूप में बताई गई है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 287, 125(a), 105 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई है।

पुलिस ने मामले में सुरेश चंद और अशोक नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक, घटना के संबंध में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फैक्ट्री मालिक और ठेकेदार से भी पूछताछ की गई है।

आग लगने के कारणों की जांच जारी

फिलहाल आग लगने का वास्तविक कारण आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस और संबंधित विभाग यह भी जांच कर रहे हैं कि फैक्ट्री में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, आपातकालीन निकास की व्यवस्था कैसी थी और घटना के समय परिसर में कितने मजदूर मौजूद थे।

औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

मंगोलपुरी की यह घटना औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। फैक्ट्रियों में ज्वलनशील सामग्री, कच्चा माल और तैयार उत्पाद रखे जाते हैं। ऐसे स्थानों पर आग से बचाव के उपकरण, पर्याप्त निकास द्वार, अलार्म और आपातकालीन बचाव व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है।

एक बार फिर लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी की आशंका के बीच चार परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।


रायपुर में भीषण हिट एंड रन हादसा: तेज रफ्तार स्कोडा ने बलेनो को मारी टक्कर, 60 वर्षीय नरेंद्र सिंह भसीन की मौत; महिला और दो बच्चे गंभीर घायल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देर रात तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास एक तेज रफ्तार स्कोडा कार ने बलेनो कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बलेनो कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हादसे में 60 वर्षीय नरेंद्र सिंह भसीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार एक महिला और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।

शादी समारोह से लौट रहा था परिवार

मिली जानकारी के अनुसार, नरेंद्र सिंह भसीन अपने परिवार के साथ नया रायपुर में आयोजित अपनी भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। परिवार बलेनो कार में सवार था। इसी दौरान आधी रात के आसपास अग्रसेन धाम चौक के पास तेज रफ्तार स्कोडा कार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बलेनो कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में कार चला रहे नरेंद्र सिंह भसीन को गंभीर चोटें आईं और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। कार में मौजूद महिला और दो बच्चे भी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

हादसे के बाद कार छोड़कर फरार हुए चार युवक

बताया जा रहा है कि स्कोडा कार में चार युवक सवार थे। टक्कर के दौरान स्कोडा सवार युवकों को भी चोटें आईं, लेकिन हादसे के बाद वे अपनी कार मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलने पर तेलीबांधा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त स्कोडा कार को जब्त कर लिया।

पुलिस अब फरार युवकों की पहचान और उनकी तलाश में जुटी है। हादसे के समय वाहन कौन चला रहा था, इसकी भी जांच की जा रही है।

शराब सेवन से जुड़ा वीडियो भी आया सामने

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे से पहले स्कोडा कार में सवार युवकों का एमजी रोड स्थित सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते हुए एक वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, युवकों के नशे में होने और दुर्घटना का उससे संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच और मेडिकल परीक्षण के आधार पर ही हो सकेगी। इसलिए इस पहलू को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुलिस जांच में सामने आएंगे हादसे के कारण

इस दुर्घटना के बाद पुलिस की जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें स्कोडा कार की गति, वाहन कौन चला रहा था, चालक की स्थिति और हादसे के बाद युवकों के फरार होने के कारण शामिल हैं। जब्त वाहन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

राजधानी में देर रात तेज रफ्तार वाहनों से होने वाली दुर्घटनाएं एक बार फिर चिंता का विषय बन गई हैं। इस हादसे में एक बुजुर्ग की जान चली गई और एक महिला तथा दो बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। एक परिवार शादी समारोह से घर लौट रहा था, लेकिन रास्ते में हुई इस दुर्घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया।

सड़क पर वाहन चलाते समय निर्धारित गति सीमा का पालन करना, नशे की हालत में वाहन न चलाना और दुर्घटना होने पर घायलों की मदद करना हर वाहन चालक की जिम्मेदारी है। पुलिस जांच के बाद इस मामले में दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट होंगी।


62वें जन्मदिन पर प्रधान पाठक परमाल ने बच्चों को कराया न्योता भोज

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आरंग- 'आओ बांटें खुशियां' अभियान के तहत शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा के प्रधान पाठक कीर्ति कुमार परमाल ने अपना 62वां जन्मदिन बच्चों के साथ मनाया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को न्योता भोज कराया, जिसमें खीर-पूड़ी, मिठाई और फल परोसे गए।

अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने बच्चों के साथ 40 वर्षों से अधिक समय बिताया है। जो खुशी बच्चों के साथ मिलती है, वह कहीं और नहीं मिलती। बच्चों के साथ बिताए लम्हे अविस्मरणीय हैं। यह मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक है।

इस दौरान संस्था के शिक्षकों और बच्चों ने केक काटकर खुशी जाहिर की। जिससे प्रधान पाठक परमाल भावुक हो गए।

इस अवसर पर संकुल समन्वयक जीतेन्द्र शुक्ला सहित संस्था के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने श्री परमाल द्वारा बच्चों के साथ खुशियां बांटने की पहल की सराहना की।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 6 नए जजों की नियुक्ति की सिफारिश, 4 अधिवक्ता और 2 न्यायिक अधिकारी सूची में शामिल

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छह नामों की सिफारिश की है। 30 अक्टूबर 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में चार अधिवक्ताओं और दो न्यायिक अधिकारियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कॉलेजियम की ओर से जारी आधिकारिक प्रस्ताव में सभी छह नामों का उल्लेख किया गया है। इस फैसले के बाद अब इन नामों पर केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे विचार किया जाएगा। हालांकि, अभी इनकी नियुक्ति की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए सुझाए गए छह नाम

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए जिन छह व्यक्तियों के नामों को मंजूरी दी है, उनमें चार अधिवक्ता और दो न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।

चार अधिवक्ताओं के नाम

  1. आनंद शुक्ला (Anand Shukla)

  2. रत्ना निधि पुष्टी (Ratna Nidhi Pusty) — जिन्हें R.N. Pusty और Ratan Pusty के नाम से भी जाना जाता है।

  3. शशांक ठाकुर (Shashank Thakur)

  4. सौरभ शर्मा (Sourabh Sharma)

दो न्यायिक अधिकारियों के नाम

  1. रजनीश श्रीवास्तव (Rajnish Shrivastava)

  2. बलराम प्रसाद वर्मा (Balram Prasad Verma)

इस प्रकार कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा और अधिवक्ता वर्ग, दोनों से प्रतिनिधित्व रखते हुए कुल छह नामों की सिफारिश की है।

30 अक्टूबर को हुई कॉलेजियम की बैठक में फैसला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित हुई थी। इसी बैठक में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए छह और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए पांच नामों की सिफारिश की। इस तरह दोनों हाईकोर्ट के लिए कुल 11 नामों को मंजूरी दी गई।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए भी पांच नामों की सिफारिश

छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए भी पांच न्यायिक अधिकारियों के नामों को मंजूरी दी गई है। इनमें शामिल हैं:

  1. रेणुका कंचन (Renuka Kanchan)

  2. कृष्णमूर्ति मिश्रा (Krishnamurty Mishra)

  3. वीरेंद्र सिंह राजपूत (Virendra Singh Rajput)

  4. ममता जैन (Mamta Jain)

  5. अशिता श्रीवास्तव (Ashita Shrivastava)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए सभी पांच नाम न्यायिक सेवा से संबंधित अधिकारियों के हैं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कितने पद हैं खाली?

न्याय विभाग के 6 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 22 है। इनमें से 13 पदों पर न्यायाधीश कार्यरत थे, जबकि नौ पद रिक्त थे।

विवरण        संख्या
स्वीकृत न्यायाधीश पद           22
कार्यरत न्यायाधीश           13
रिक्त पद                    9
कॉलेजियम की नई सिफारिशें            6

यदि सभी छह सिफारिशों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो हाईकोर्ट की कार्यरत न्यायिक शक्ति में वृद्धि होगी। हालांकि, उस समय की वास्तविक रिक्तियों और नियुक्तियों की स्थिति अंतिम अधिसूचना के अनुसार ही तय होगी।

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद क्या होगी प्रक्रिया?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति तत्काल हाईकोर्ट के न्यायाधीश बन गए हैं। नियुक्ति के लिए आगे संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

आम तौर पर प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार होते हैं:

  1. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नामों की सिफारिश।

  2. सिफारिशों पर केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक परीक्षण और प्रक्रिया।

  3. नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति और वारंट जारी होना।

  4. नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना।

  5. संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाए जाने के बाद पदभार ग्रहण।

इसलिए फिलहाल इन छह व्यक्तियों को नियुक्ति के लिए अनुशंसित नाम कहना सही होगा, न कि नवनियुक्त न्यायाधीश।

न्यायिक व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पदों का असर मामलों की सुनवाई और न्यायिक कामकाज पर पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में छह नए नामों की सिफारिश से न्यायाधीशों की उपलब्ध संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इससे लंबित मामलों की सुनवाई, नियमित न्यायिक कार्य और अलग-अलग प्रकार के मुकदमों के निपटारे में भविष्य में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव नियुक्तियां पूरी होने और न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 30 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए चार अधिवक्ताओं और दो न्यायिक अधिकारियों सहित छह नामों की सिफारिश की है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार की आगे की कार्रवाई और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी होने वाली नियुक्ति अधिसूचना पर रहेगी।


शिक्षक भर्ती परीक्षा के पहले दिन 83.25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति, 34,514 परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र जारी

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1812 रिक्त संविदा पदों के लिए आयोजित सीबीटी परीक्षा में अभ्यर्थियों ने दिखाया उत्साह

शिक्षक गणित विषय में सर्वाधिक 90.25 प्रतिशत उपस्थिति, कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की अभ्यर्थियों ने की सराहना

रायपुर- छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1812 रिक्त संविदा पदों पर भर्ती के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के पहले दिन अभ्यर्थियों में उत्साह देखने को मिला। यह परीक्षा 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक आयोजित की जा रही है। पहले दिन प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में कुल 83.25 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा के पहले दिन प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में कुल 10 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 7,025 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जबकि 1,177 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।

विषयवार उपस्थिति के आंकड़ों के अनुसार शिक्षक गणित विषय में सर्वाधिक 90.25 प्रतिशत अभ्यर्थी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त व्याख्याता संस्कृत में 81.77 प्रतिशत, व्याख्याता सामाजिक विज्ञान में 84.87 प्रतिशत, व्याख्याता भौतिकी में 84.83 प्रतिशत, व्याख्याता जीव विज्ञान में 83.27 प्रतिशत, व्याख्याता इतिहास में 80.56 प्रतिशत, व्याख्याता रसायन में 77.07 प्रतिशत, व्यायाम शिक्षक में 76.9 प्रतिशत, व्याख्याता भूगोल में 64.29 प्रतिशत तथा व्याख्याता अर्थशास्त्र में 63.64 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

34,604 अभ्यर्थियों ने किया आवेदन, 99.74 प्रतिशत को प्रवेश पत्र जारी

इस भर्ती परीक्षा के लिए कुल 34,604 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इनमें से 34,514 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं, जो कुल आवेदकों का 99.74 प्रतिशत है। आवेदन करने वालों में 20,779 महिला अभ्यर्थी (60 प्रतिशत) तथा 13,825 पुरुष अभ्यर्थी (40 प्रतिशत) शामिल हैं। इस प्रकार महिला आवेदकों की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक रही है। कुल आवेदकों में 332 दिव्यांग अभ्यर्थी भी शामिल हैं। 

छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रथम दिवस परीक्षार्थियों में अत्यधिक उत्साह देखा गया। परीक्षार्थियों ने बताया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली, ओएमआर एवं पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी, सटीक एवं प्रभावी है।

कंप्यूटर द्वारा उत्तरों का स्वचालित मूल्यांकन होने के कारण कम समय में त्रुटिरहित परीक्षा परिणाम तैयार एवं घोषित किए जा सकेंगे। परीक्षार्थियों ने इसे राज्य शासन की एक सराहनीय पहल बताया। कंप्यूटर आधारित परीक्षा (ब्ठज्) में अभ्यर्थियों के उत्तर, उत्तर कुंजी, डिजिटल रिकॉर्ड एवं ऑडिट ट्रेल उपलब्ध होने से परीक्षा प्रक्रिया अन्य परीक्षा प्रणालियों की तुलना में अधिक पारदर्शी है। परीक्षार्थियों ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में अन्य भर्ती परीक्षाओं का आयोजन भी यथासंभव कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।

बस्तर की 485 बसाहटों को मिलेगी बारहमासी सड़क की सुविधा, 804 करोड़ के 263 नए सड़क कार्यों के प्रस्ताव

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रायपुर- दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में बड़ी पहल हुई है। संभाग की 485 बसाहटों में सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

इन प्रस्तावित सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर बताई गई है। इस पहल का उद्देश्य अंदरूनी वनांचल और दुर्गम गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि ग्रामीणों को पूरे साल आवागमन की सुविधा मिल सके।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हो रहा काम

बस्तर में सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी PMGSY-4 के तहत कार्य किए जा रहे हैं। योजना के प्रथम बैच में संभाग की 234 बसाहटों के सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है।

इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा जिले की 16 बसाहटें शामिल हैं।

इन कार्यों के माध्यम से ऐसे गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों के कारण आवागमन लंबे समय से चुनौती बना हुआ है।

280 अन्य बसाहटों के लिए 804 करोड़ के प्रस्ताव

PMGSY-4 के दूसरे बैच में 280 अन्य बसाहटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनकी अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है।

प्रस्तावित सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर है। इन कार्यों के आगे बढ़ने से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में आवागमन के साधन बेहतर हो सकते हैं।

इसके अतिरिक्त लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी DPR तैयार किए जा रहे हैं। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की संभावनाओं और जरूरतों का आकलन किया जा सकेगा।

373 पुलों के निर्माण पर भी पहल

बस्तर में केवल सड़कों का विस्तार ही नहीं, बल्कि नदी-नालों और बरसाती क्षेत्रों में आवागमन की समस्या दूर करने के लिए पुल निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, PMGSY-4 के प्रथम बैच के तहत 206 पुलों और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत 167 पुलों के प्रस्तावों पर अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में विचार किया गया है।

इस तरह कुल 373 पुलों के प्रस्तावों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं बस्तर संभाग में 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं।

नारायणपुर जिले में PM-JANMAN के तहत 22 लंबे पुलों के प्रस्ताव हैं, जिनकी अनुमानित लागत 87.45 करोड़ रुपये बताई गई है। इन पुलों के निर्माण से बरसात के दौरान नदी-नालों के कारण गांवों का संपर्क टूटने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

नक्सलवाद से मुक्त गांवों के लिए विशेष छूट की मांग

बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। यहां कई छोटी बसाहटें जंगलों और पहाड़ी इलाकों में बसी हैं। आबादी कम होने के कारण कुछ गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मौजूदा जनसंख्या संबंधी मानकों के तहत पात्रता हासिल नहीं कर पाते।

इसी समस्या को देखते हुए छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर विशेष छूट देने का अनुरोध किया था।

प्रस्ताव में 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी-छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क स्वीकृति देने और निर्धारित जनसंख्या संबंधी मानकों में राहत देने की बात रखी गई है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में सकारात्मक रुख जताते हुए आवश्यक प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षण की बात कही है।

शेष बसाहटों की पहचान के लिए चार महीने का सर्वे

बस्तर की शेष पात्र बसाहटों की पहचान और उनकी सड़क संबंधी जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (GSS) ऐप के माध्यम से चार महीने का सर्वेक्षण शुरू किया गया है।

इस सर्वे में गांवों की वास्तविक जरूरत, सड़क संपर्क की स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा। साथ ही प्रस्तावित सड़क मार्गों को प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

सड़क बनने से ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?

बारहमासी सड़क संपर्क से बस्तर के दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाएं: मरीजों को अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और एंबुलेंस तक पहुंचने में आसानी होगी। आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।

शिक्षा: विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए स्कूलों तक पहुंचना आसान होगा। बरसात में रास्ते बंद होने की समस्या कम हो सकती है।

कृषि और व्यापार: किसान अपनी उपज को बाजार और खरीदी केंद्रों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। परिवहन लागत और समय में कमी आने की संभावना है।

महिलाओं और बच्चों को सुविधा: आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सरकारी सुविधाओं तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

स्थानीय रोजगार: सड़क निर्माण और बेहतर संपर्क से स्थानीय व्यापार, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास कार्यों को गति

बस्तर में सड़क और पुल निर्माण को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय से कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया है।

निष्कर्ष: बस्तर की 485 बसाहटों में सड़क कार्यों की स्वीकृति और 280 अन्य बसाहटों के लिए 804.06 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क सुविधा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, प्रस्तावित सड़कों और पुलों के लिए आगे की स्वीकृति, निर्माण की शुरुआत और काम पूरा होने की समय-सीमा पर नजर रहेगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: 485 बसाहटों के कार्य स्वीकृत हैं; 280 बसाहटों के लिए 263 सड़क कार्य प्रस्तावित हैं; लगभग 474 अन्य बसाहटों के DPR तैयार हो रहे हैं। पुलों के प्रस्तावों पर विचार जारी है—उन्हें अभी पूर्ण स्वीकृति या निर्मित पुल नहीं माना जाना चाहिए।


छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटने पर कार्रवाई, प्राचार्य महेश प्रजापति हटाए गए

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बलरामपुर- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटे जाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों की शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को उनके पद से हटा दिया है। मामले की विभागीय जांच अभी जारी है।

यह पूरा मामला रघुनाथपुर गांव स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का है। बताया गया है कि 26 अक्टूबर 2026 को स्कूल में मध्य विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच कुछ पुस्तिकाएं बांटी गई थीं। इन पुस्तिकाओं में आसाराम से जुड़ी सामग्री होने की बात सामने आने के बाद अभिभावकों ने आपत्ति जताई।

बच्चों के घर पुस्तिकाएं पहुंचने के बाद खुला मामला

जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों को ‘संस्कार सरिता’, ‘व्रत नियम’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ नाम की पुस्तिकाएं दी गई थीं। अभिभावकों को इस बारे में तब पता चला, जब बच्चे पुस्तिकाएं लेकर घर पहुंचे।

इसके बाद कुछ अभिभावकों ने सवाल उठाया कि सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को ऐसी सामग्री किसकी अनुमति से बांटी गई। उनका आरोप था कि पुस्तिकाएं आसाराम से जुड़े लोगों के स्कूल पहुंचने के बाद प्राचार्य की मौजूदगी में वितरित की गईं।

कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों से पुस्तिकाओं की सामग्री पढ़ने और उसके आधार पर परीक्षा या टेस्ट की तैयारी करने को कहा गया था। हालांकि, इस संबंध में अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अभिभावकों ने शिक्षा विभाग में की शिकायत

मामला सामने आने के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की और स्कूल में बाहरी लोगों द्वारा सामग्री बांटे जाने पर सवाल उठाए।

अभिभावकों का कहना था कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकों और अन्य सामग्री की पहले जांच होनी चाहिए। किसी भी बाहरी संगठन या व्यक्ति को बिना उचित अनुमति के बच्चों के बीच सामग्री वितरित करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

DEO ने दिए जांच के निर्देश, प्राचार्य पर हुई कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने वाड्रफनगर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

जांच अधिकारी ने स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राचार्य महेश प्रजापति को स्कूल से हटा दिया गया और उन्हें कलेक्टर कार्यालय से संबद्ध किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।

प्राचार्य ने अपने बचाव में क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्राचार्य महेश प्रजापति ने अपने बचाव में कहा कि उन्हें पुस्तिकाओं की वास्तविक सामग्री की जानकारी नहीं थी। उनका कहना था कि स्कूल आए लोगों ने केवल किताबें बांटने की बात कही थी और उन्होंने इसी आधार पर अनुमति दी थी।

इसलिए जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में पुस्तिकाएं किस संगठन या व्यक्तियों द्वारा लाई गई थीं, उन्हें बांटने की अनुमति किसने दी और क्या विद्यार्थियों को वास्तव में इनके आधार पर टेस्ट देने के लिए कहा गया था।

जांच में किन बिंदुओं पर होगी पड़ताल?

शिक्षा विभाग की जांच में मुख्य रूप से इन सवालों पर तथ्य जुटाए जाने हैं:

  1. स्कूल में पुस्तिकाएं बांटने वाले लोग कौन थे और वे किस संगठन से जुड़े थे?

  2. पुस्तिकाएं स्कूल परिसर में किसकी अनुमति से वितरित की गईं?

  3. क्या प्राचार्य को पुस्तिकाओं की सामग्री की जानकारी थी?

  4. क्या विद्यार्थियों को इन पुस्तिकाओं को पढ़कर टेस्ट देने के निर्देश दिए गए थे?

  5. क्या स्कूल में बाहरी सामग्री बांटने से संबंधित विभागीय नियमों का पालन किया गया?

सरकारी स्कूलों में बाहरी सामग्री के वितरण पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों और संगठनों की गतिविधियों तथा विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकों की जांच की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री निर्धारित शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों के अनुरूप हो। किसी भी बाहरी सामग्री के वितरण से पहले उसकी विषयवस्तु और अनुमति की जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल प्राचार्य को प्रारंभिक जांच के आधार पर पद से हटाया गया है, लेकिन पूरे मामले की अंतिम जिम्मेदारी और पुस्तिकाओं के वितरण से जुड़े तथ्यों का निर्धारण विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा।


छत्तीसगढ़ में किसानों को बड़ी राहत: 360 नए धान खरीदी केंद्रों को मंजूरी, अब 3,100 केंद्रों पर होगी खरीदी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही प्रदेश में धान खरीदी केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत देना, खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम करना और कम समय में अधिक किसानों की उपज खरीदना है।

दो लाख से अधिक किसानों को मिल सकती है राहत

सरकार के अनुसार, नए धान खरीदी केंद्रों से प्रदेश के दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। नए केंद्र शुरू होने से किसानों को अपने गांव या आसपास के क्षेत्र में ही धान बेचने की सुविधा मिल सकेगी।

अभी कई किसानों को अपनी उपज लेकर दूर स्थित खरीदी केंद्रों तक जाना पड़ता है। इससे परिवहन पर अतिरिक्त खर्च होता है और समय भी अधिक लगता है। नए केंद्रों के संचालन से दूरी और परिवहन खर्च कम होने के साथ-साथ किसानों को लंबी कतारों से भी राहत मिलने की संभावना है।

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी

राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की है। इस अवधि में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जाएगी।

इस वर्ष किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तक धान खरीदी की व्यवस्था बताई गई है। धान का निर्धारित खरीदी मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल है।

10 नवंबर से मिलेगा ऑनलाइन टोकन

किसानों को खरीदी केंद्रों में बार-बार जाने और टोकन के लिए लंबी कतारों में खड़े होने से बचाने के लिए इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की सुविधा दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार, 10 नवंबर से ऑनलाइन टोकन उपलब्ध होंगे। किसान मोबाइल के माध्यम से घर बैठे टोकन प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराने की तैयारी है, जिससे किसान अपनी सुविधा के अनुसार धान विक्रय की तारीख तय कर सकेंगे।

2 से 5 नवंबर तक होगा ट्रायल रन

धान खरीदी शुरू होने से पहले समितियों में 2 नवंबर से 5 नवंबर तक ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान टोकन व्यवस्था, तकनीकी प्रणाली और खरीदी से जुड़ी अन्य तैयारियों की जांच की जाएगी, ताकि वास्तविक खरीदी शुरू होने पर किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

छोटे और सीमांत किसानों को विशेष फायदा

नए खरीदी केंद्रों का सबसे अधिक लाभ उन छोटे और सीमांत किसानों को मिलने की उम्मीद है, जिनके पास परिवहन के सीमित साधन हैं। गांव के नजदीक केंद्र उपलब्ध होने से उन्हें धान बेचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी।

इसके अलावा, मौजूदा केंद्रों पर किसानों की संख्या का दबाव कम होगा। इससे धान की तौल, गुणवत्ता जांच और अन्य प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सरकार का लक्ष्य: आसान, पारदर्शी और व्यवस्थित खरीदी

राज्य सरकार का कहना है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। नए केंद्रों की मंजूरी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

कुल मिलाकर, 360 नए धान खरीदी केंद्रों की मंजूरी से छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन व्यवस्था का विस्तार होगा। अब किसानों की नजर नए केंद्रों के संचालन, टोकन वितरण और 15 नवंबर से शुरू होने वाली खरीदी प्रक्रिया पर रहेगी।


बस्तर में 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती, नक्सलवाद में कमी के बाद सरकार का बड़ा फैसला; केदार कश्यप, दीपक बैज समेत कई दिग्गज नेताओं की सुरक्षा श्रेणी बदली

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में नक्सलवाद के प्रभाव में आई कमी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने 116 राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती करने का निर्णय लिया है। इस फैसले में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं को शामिल किया गया है।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है, बल्कि पिछले छह महीनों से बस्तर क्षेत्र की जमीनी परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत खतरे का आकलन करने के बाद लिया गया है। सरकार का कहना है कि अब सुरक्षा बलों का बेहतर उपयोग कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा।

किन नेताओं की सुरक्षा में हुई कटौती?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा श्रेणी में बदलाव से प्रभावित प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • केदार कश्यप: कैबिनेट मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • दीपक बैज: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, Z+ से Z श्रेणी।

  • कवासी लखमा: पूर्व मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • महेश गागड़ा: पूर्व मंत्री, Z+ से Z श्रेणी।

  • महेंद्र कर्मा के परिवार के कुछ सदस्य: सुरक्षा श्रेणी में बदलाव की खबर।

रिपोर्टों में कुल नौ प्रमुख व्यक्तियों की Z+ से Z श्रेणी में सुरक्षा बदलने की जानकारी दी गई है। हालांकि सभी 116 लोगों की आधिकारिक नामवार सूची सार्वजनिक नहीं हुई है।

अब किसे मिलेगी कौन-सी सुरक्षा?

सरकार ने सुरक्षा को चरणबद्ध तरीके से एक स्तर कम करने का फैसला किया है।

पहले की सुरक्षा

         नई सुरक्षा

Z+ श्रेणी

         Z श्रेणी

Z श्रेणी

          Y+ श्रेणी

Y+ श्रेणी

            Y श्रेणी

इसका मतलब यह है कि संबंधित नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त नहीं की जा रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों और सुरक्षा व्यवस्था का स्तर कम किया जा रहा है।

छह महीने बाद फिर होगी समीक्षा

गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन लक्ष्य की समय-सीमा पूरी होने के तुरंत बाद सभी नेताओं की सुरक्षा हटाना उचित नहीं माना गया।

इसी वजह से सरकार ने छह महीने तक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हालात की निगरानी की। अब व्यक्तिगत खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले छह महीने बाद यानी लगभग अप्रैल 2027 में दोबारा समीक्षा की जाएगी। उस समय की परिस्थितियों के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सरकार ने क्यों लिया सुरक्षा घटाने का फैसला?

बस्तर लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को नक्सली हमलों की आशंका के कारण विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती रही है।

लेकिन हाल के वर्षों में नक्सल विरोधी अभियानों के बाद सुरक्षा स्थिति में बदलाव आया है। सरकार का मानना है कि व्यक्तिगत खतरे का स्तर घटने पर सुरक्षा संसाधनों का पुनर्वितरण किया जाना चाहिए।

इस फैसले के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

  1. बस्तर में नक्सली हिंसा की घटनाओं में कमी।

  2. नक्सल विरोधी अभियानों में मिली सफलता।

  3. नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा का नए सिरे से आकलन।

  4. पुलिस बल को सामान्य कानून-व्यवस्था में लगाने की आवश्यकता।

  5. सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च और संसाधनों का बेहतर उपयोग।

5. सुरक्षा में कितने जवान और वाहन तैनात हैं?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में लगभग 400 सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा में 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 500 वाहन लगाए गए हैं।

केवल बस्तर संभाग में 250 से अधिक लोगों की सुरक्षा के लिए 1,000 से ज्यादा जवान तैनात बताए गए हैं।

सुरक्षा में कटौती से पुलिस बल के कुछ जवानों को सामान्य पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और अन्य आवश्यक जिम्मेदारियों में लगाया जा सकेगा।

कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर क्या कहा?

इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सुरक्षा घटाने के फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बस्तर में नक्सली खतरा कम जरूर हुआ है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त मानना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि विशेषकर अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में आने-जाने वाले जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। सुरक्षा कम करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति के खतरे का नए सिरे से आकलन होना जरूरी है।

क्या अब बस्तर में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है?

यह सवाल भी इस फैसले के बाद चर्चा में है।

केंद्र और राज्य सरकारों ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र वामपंथी उग्रवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा था। सरकार ने अभियान में मिली सफलता का उल्लेख किया है।

हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और किसी क्षेत्र में खतरे का पूरी तरह समाप्त होना दो अलग-अलग बातें हैं। स्थानीय सुरक्षा स्थिति और व्यक्तिगत खतरे का आकलन आगे भी जरूरी रहेगा।

आगे क्या होगा?

  • गृह विभाग की ओर से संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के औपचारिक आदेश जारी किए जाने हैं।

  • 116 नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में चरणबद्ध बदलाव लागू होगा।

  • व्यक्तिगत खतरे के अनुसार सुरक्षा की समीक्षा जारी रहेगी।

  • छह महीने बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी।

  • जरूरत पड़ने पर सुरक्षा श्रेणी में फिर बदलाव किया जा सकेगा।



छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, धान की फसल को भारी नुकसान; CM विष्णुदेव साय ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण धान की फसल जमीन पर गिर गई है, वहीं खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

धान की कटाई का समय नजदीक होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश

फसल नुकसान की खबरों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल खेतों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि प्रभावित किसानों की फसल क्षति का सही आकलन किया जाए और पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने राजस्व एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को सर्वे कार्य में तेजी लाने और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

फसल क्षति का आकलन राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 एवं लागू आपदा राहत प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

किन इलाकों में हुआ फसल को नुकसान?

रिपोर्टों के अनुसार बारिश और तेज हवाओं का असर बस्तर, रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग के कुछ क्षेत्रों में देखा गया है।

विशेष रूप से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसानों ने धान की फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत की है।

  • तेज हवाओं से खड़ी धान की फसल खेतों में गिर गई।

  • खेतों में पानी भरने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ा।

  • कटाई के लिए तैयार धान की बालियां प्रभावित हुईं।

  • खेत में काटकर सुखाने के लिए रखी गई फसल को भी नुकसान की आशंका है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कुछ किसानों ने अपनी फसल में 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान जताया है। यह किसानों का प्रारंभिक अनुमान है, सरकारी सर्वे का अंतिम आंकड़ा नहीं।

फसल बीमा कराने वाले किसान तुरंत ध्यान दें – 72 घंटे में दें सूचना

महत्वपूर्ण किसान अलर्ट

कृषि विभाग की एडवाइजरी के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसान फसल नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना दर्ज करा सकते हैं।

14447

कृषि रक्षक हेल्पलाइन – टोल फ्री नंबर

फसल नुकसान की सूचना दर्ज कराने के लिए इस नंबर पर संपर्क करें।

बीमा प्रक्रिया की निर्धारित समय-सीमा

कार्रवाई

                                समय

सर्वेयर की नियुक्ति

                                    48 घंटे

फसल नुकसान का सर्वे

                                    10 दिन

पात्र बीमा क्लेम का भुगतान

सर्वे के बाद                     15 दिन

धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द सहित अधिसूचित फसलों के बीमित किसान योजना की शर्तों के अनुसार दावा कर सकते हैं। कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल भी कटाई के 14 दिनों के भीतर हुई कुछ अधिसूचित आपदाओं से नुकसान पर बीमा सुरक्षा के दायरे में आ सकती है।

किसान क्या करें?

  1. खेत में हुए नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखें।

  2. नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं।

  3. बीमा पॉलिसी और आवेदन की जानकारी रखें।

  4. सूचना दर्ज होने का रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।

  5. अपने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।

31 अक्टूबर तक एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन भी जरूरी

आज अंतिम तिथि

धान और मक्का सहित खरीफ की अन्य फसल लेने वाले किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण सूचना है।

राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना एवं PM-AASHA योजना के तहत खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन तथा फसल एवं रकबे का आवश्यक सत्यापन या संशोधन कराने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

पंजीयन और पात्रता के अनुसार:

  • पिछले खरीफ में धान लेने वाले किसान यदि इस साल धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल लेते हैं, तो पात्रता के अनुसार ₹15,000 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान है।

  • अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली, तिल, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी अधिसूचित फसलों के लिए ₹10,000 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान है।

  • लाभ के लिए एग्रीस्टैक, एकीकृत किसान पोर्टल पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की शर्तें पूरी करना आवश्यक है।

किसान अपने नजदीकी सेवा सहकारी समिति या कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। अंतिम तिथि के बाद नया पंजीयन या संशोधन स्वीकार नहीं किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

किसानों के लिए सरकार से प्रमुख मांगें

  • प्रभावित गांवों में शीघ्र फसल सर्वे।

  • वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा।

  • पात्र किसानों को फसल बीमा का भुगतान।

  • खराब मौसम से प्रभावित किसानों को राहत।

  • धान खरीदी के दौरान प्रभावित फसल के लिए उचित व्यवस्था।



मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें किया नमन

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राष्ट्रीय एकता दिवस पर मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल के अतुलनीय योगदान को किया याद

देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार थे सरदार पटेल : मुख्यमंत्री साय

सरदार पटेल का दृढ़ संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का आदर्श सदैव प्रेरणादायी रहेगा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज यहाँ सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय एकता और अखंडता के महान शिल्पकार थे। उन्होंने अपने अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से स्वतंत्रता के बाद देश की सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर एक सशक्त और अखंड भारत की नींव रखी। राष्ट्र निर्माण में उनका यह असाधारण योगदान भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार पटेल का संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और देश की एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका व्यक्तित्व हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, सामूहिक प्रयास और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल के एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आज देश विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। सरदार पटेल के विचार और आदर्श इस राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक सशक्त बनाते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस केवल सरदार पटेल के महान योगदान को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का भी दिन है। भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और समुदायों को एकता के सूत्र में पिरोकर आगे बढ़ना ही सरदार पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सरदार वल्लभभाई पटेल के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर एक सशक्त, समरस और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए, ताकि विकसित भारत के निर्माण में हमारा प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा सके।

रायपुर कलेक्टोरेट की सीढ़ियों पर फंदे से लटका मिला चौकीदार का शव, 20 लाख से अधिक कर्ज की चर्चा

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के कलेक्टोरेट परिसर में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सीढ़ियों पर एक व्यक्ति का शव फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान कलेक्टोरेट में चौकीदार के पद पर कार्यरत दिनेश कुमार पटेल (50) के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जानकारी में मृतक पर 20 लाख रुपये से अधिक का कर्ज होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और मौत के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।


सुबह परिसर पहुंचे लोगों ने देखा शव

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह कलेक्टोरेट परिसर पहुंचे लोगों की नजर सीढ़ियों पर फंदे से लटके व्यक्ति पर पड़ी। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची सिविल लाइन पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

पुलिस ने मृतक की पहचान दिनेश कुमार पटेल, पिता प्रभु राम पटेल, निवासी श्री साईं नगर, बोरिया खुर्द, आरडीए कॉलोनी, थाना टिकरापारा के रूप में की है। वह कलेक्टोरेट परिसर में चौकीदार के तौर पर कार्यरत थे।

20 लाख रुपये से अधिक कर्ज होने की चर्चा

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दिनेश पटेल पर 20 लाख रुपये से अधिक का कर्ज होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि आमदनी की तुलना में अधिक कर्ज और लोन होने के कारण वह आर्थिक परेशानी से जूझ रहे थे। हालांकि, कर्ज को ही घटना की वजह मानने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच

सिविल लाइन थाना प्रभारी यामन देवांगन ने बताया कि शनिवार सुबह घटना की सूचना मिली थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह रही।

फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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