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सफलता की कहानी-पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि

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रायपुर- पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं।

औषधीय और सांस्कृतिक फूल है पलाश

पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है।

कटघोरा वनमण्डल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है

वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला।

20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान

वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल

पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।

पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग 

पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार

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विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल

पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

एक ही छत के नीचे जांच और दवा

​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।

​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।

​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना

प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

नारी शक्ति वंदन के संकल्प को मिला महिलाओं का व्यापक समर्थन

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राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित  कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन ने की सौजन्य मुलाकात : सदन का ऐतिहासिक सत्र सुनने विधानसभा पहुंची थी मिस इंडिया छत्तीसगढ़

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज विधानसभा में मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर अनुष्का ने मुख्यमंत्री को नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर विशेष सत्र आयोजित करना एक प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।

अनुष्का ने बताया कि वे आज विधानसभा की ऐतिहासिक कार्यवाही को सुनने विशेष रूप से पहुंची थीं और इस अनुभव को उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखना उनके लिए एक नई सीख रही, जिससे वे समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर सकेंगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं, जो एक सशक्त और जागरूक समाज की पहचान है। 

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगी तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए प्रेरित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी की बेटियां शिक्षा, कला, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अनुष्का सोन को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक बनें।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा उपस्थित थे।

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान

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छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

रायपुर- हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।

राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।

राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।

राजधानी के बड़े निजी स्कूलों को टक्कर दिया, प्रदेश का प्रयास विद्यालय

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प्रयास विद्यालयों के विद्यार्थियों का सीजी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन

10वीं एवं 12वीं में शत-प्रतिशत सफलता, मेरिट सूची में उल्लेखनीय स्थान

10वीं की छात्रा कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया

प्रयास विद्यालयों के 13 विद्यार्थियों ने टॉप-10 में बनाई जगह

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री रामविचार नेताम ने दी बधाई और शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़ के ‘प्रयास’ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों में रचा उत्कृष्टता का इतिहास: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

रायपुर- छत्तीसगढ़ के आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग  एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम की है। विभाग के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन में सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परिणाम देते हुए बड़े निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दी है। प्रयास विद्यालयों के 13 बच्चों ने सीजी बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 में जगह बनाने में सफलता हासिल की है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल 17 प्रयास विद्यालय संचालित है। जिसमें नक्सल प्रभावित बच्चों से लेकर सभी वर्गों के बच्चें अध्ययनरत है। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से बच्चों को एक नई हौसला मिला है, जो उनके सपनों को साकार करने में सार्थक हो रही है। बतादें कि प्रयास विद्यालय के माध्यम से बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा दी जाति है। साथ ही उच्चस्तर के कोचिंग संस्थाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं एनआईटी, आईआईटी, नीट, जेईई एवं अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।

प्रयास विद्यालय के इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रयास आवासीय विद्यालयों की अवधारणा की सार्थकता को प्रमाणित करती है। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु किए गए सतत प्रयास की सराहना की हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि राज्य के लिए गौरव का विषय है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रयास विद्यालय के बच्चों ने सीजी बोर्ड की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विभाग हमेशा बच्चों के शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्य के लिए यह उपलब्धि न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही दिशा, समर्पण और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।

प्रमुख सचिव बोरा ने जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बताया कि प्रदेश के 50 मेरिट छात्रों में से 13 विद्यार्थी प्रयास विद्यालय के है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बात के लिए प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और बेहतर कार्य करने को कहा।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि हायर सेकेंडरी परीक्षा (कक्षा 12वीं) में प्रयास आवासीय विद्यालय के कुल 128 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय, गुडियारी की 19 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। कोरबा जिले की छात्रा कु. रागिनी कंवर ने 95 प्रतिशत अंक अर्जित कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जीव विज्ञान विषय में दो छात्राओं द्वारा 100 में 100 अंक अर्जित किया जाना विशेष उपलब्धि है।हाईस्कूल परीक्षा (कक्षा 10वीं) में भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। कुल 119 छात्राओं में से 48 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। गणित विषय में 6 विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत अंक अर्जित किए। कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी टॉप 10 मेरिट सूची में 97.5 प्रतिशत अंकों के साथ स्थान अर्जित किया।

उल्लेखनीय है कि हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य सूची में कुल 42 विद्यार्थियों में से 21 विद्यार्थी आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालयों के हैं। इनमें प्रयास आवासीय विद्यालय के 11 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया है, जो विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

भारत–श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग मजबूत, IN–SLN DIVEX 2026 का सफल आयोजन

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भारत और श्रीलंका ने अपने बढ़ते समुद्री सहयोग को और मजबूत करते हुए IN–SLN DIVEX 2026 के चौथे संस्करण का सफल आयोजन किया। यह संयुक्त डाइविंग अभ्यास Colombo में 21 से 28 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुआ।

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू वेसल आईएनएस निरीक्षक के साथ दोनों देशों की नौसेनाओं के डाइविंग दलों ने हिस्सा लिया, जिससे आपसी तालमेल और पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

गहरे समुद्र में विशेष अभ्यास

यह अभ्यास जटिल पानी के भीतर संचालन (underwater operations) पर केंद्रित रहा। इसमें:

  • एडवांस डीप-सी डाइविंग अभ्यास

  • मिक्स्ड गैस डाइविंग ड्रिल्स

  • बंदरगाह और खुले समुद्र में गहन अभ्यास

विशेष रूप से, कोलंबो तट के पास द्वितीय विश्व युद्ध के जहाजों SS Worcester और SS Perseus के मलबे पर डाइविंग की गई।

बड़ी उपलब्धि

दोनों देशों के गोताखोरों ने 55 मीटर से अधिक गहराई तक सफल डाइव कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इससे:

  • अंडरवाटर सर्च और रेस्क्यू क्षमता मजबूत हुई

  • संयुक्त ऑपरेशन में समन्वय बेहतर हुआ

सहयोग और मित्रता

अभ्यास के दौरान:

  • संयुक्त बीच क्लीन-अप अभियान

  • मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र

का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों के बीच मित्रता और विश्वास और गहरा हुआ।

श्रद्धांजलि और मानवीय पहल

INS निरीक्षक के कमांडिंग ऑफिसर ने IPKF मेमोरियल पर जाकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

साथ ही, भारत की आरोग्य मैत्री पहल के तहत श्रीलंका को BHISM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव) क्यूब्स सौंपे गए, जिससे आपदा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

व्यापक महत्व

यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है।

कुल मिलाकर, IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी सहयोग का प्रतीक है।

DRDO और भारतीय नौसेना की बड़ी कामयाबी, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का दम दिखाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Navy ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर से किया गया।

इस परीक्षण की खास बात यह रही कि एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों को एक साथ (salvo) लॉन्च किया गया, जो भारत के लिए पहली बार है। दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी परीक्षण मानकों को पूरी तरह हासिल किया।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

NASM-SR मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें:

  • उन्नत सीकर और एवियोनिक्स सिस्टम

  • फाइबर-ऑप्टिक आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक

  • सटीक गाइडेंस और कंट्रोल तकनीक

जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे दुश्मन के जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती हैं।

सटीक निशाना और सफल परीक्षण

इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने वॉटरलाइन हिट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, यानी जहाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सटीक वार किया। परीक्षण की निगरानी चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई।

कई संस्थानों का संयुक्त प्रयास

इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) सहित DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, नौसेना, वायुसेना और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की समुद्री सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

वहीं DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत की सराहना की।

क्या है महत्व?

यह परीक्षण भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे:

  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

  • दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला संभव होगा

  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा

कुल मिलाकर, यह सफलता भारत को आधुनिक और शक्तिशाली रक्षा तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाती है।

लद्दाख में पवित्र पिपरहवा अवशेषों का आगमन, ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत

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गहरे आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से भरे वातावरण के बीच, भगवान  गौतम बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष आज लेह पहुंचे। इसके साथ ही लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ।

इन अवशेषों को दिल्ली से विशेष वायुसेना विमान द्वारा लाया गया, जिनके साथ ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे और खेनपो थिनलास चोसाल मौजूद थे। आगमन पर विनय कुमार सक्सेना (लद्दाख के उपराज्यपाल) ने धार्मिक और सामाजिक नेताओं की उपस्थिति में इनका भव्य स्वागत किया।

 भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान

  • पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए

  • लद्दाख पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

  • बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं

इसके बाद अवशेषों को भव्य शोभायात्रा के साथ जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई (2569वीं बुद्ध पूर्णिमा) से आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इस शोभायात्रा में भाग लिया।

विशेष महत्व

उपराज्यपाल ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि इन पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा क्षेत्र धन्य हो गया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया कि लद्दाख को इस आयोजन के लिए चुना गया।

यह पहली बार है जब इन अवशेषों को भारत में सार्वजनिक दर्शन के लिए उनके मूल स्थान से बाहर लाया गया है, जबकि इससे पहले इन्हें कई देशों में प्रदर्शित किया जा चुका है।

 वैश्विक महत्व और कार्यक्रम

  • थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार में प्रदर्शन

  • 2–10 मई: जीवेत्सल (लेह)

  • 11–12 मई: जांस्कर

  • 13–14 मई: धर्मा सेंटर, लेह

  • 15 मई: दिल्ली वापसी

विशिष्ट अतिथि

इस पवित्र अवसर पर अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री, राजदूत, मुख्यमंत्री और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि लेह पहुंचेंगे।

विशेष तैयारियां

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए:

  • वृक्षारोपण अभियान

  • फूलों की सजावट

  • शहरभर में स्वच्छता अभियान

यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि लद्दाख की बौद्ध परंपरा और सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है।

कोयला गैसीफिकेशन मिशन में बड़ी उपलब्धि

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कोयला मंत्रालय ने भारत के कोयला गैसीफिकेशन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना (Financial Incentive Scheme) के तहत राउंड-II की कैटेगरी-III में लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) जारी किया गया है।

इस अवसर पर  संजय कुमार झा अतिरिक्त सचिव (कोयला मंत्रालय) ने कार्तिकेय वायुनंदना प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के गडचिरोली में कोल-टू-एसेटिक एसिड प्लांट स्थापित करने के लिए LoA सौंपा।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • 💰 कुल निवेश: ₹793 करोड़

  • 🏭 उत्पादन: एसेटिक एसिड

  • ⚙️ क्षमता: 75,900 टन प्रति वर्ष (TPA)

  • 📍 स्थान: गडचिरोली, महाराष्ट्र

यह परियोजना घरेलू कोयले के वैल्यू-एडेड उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

योजना की प्रगति

  • पहले राउंड में 7 परियोजनाएं पहले से कार्यान्वयन में हैं।

  • राउंड-II के तहत कैटेगरी-II और III में निवेश को बढ़ावा देने के लिए RFP आमंत्रित किए गए हैं।

कैटेगरी-III के तहत:

  • प्रति प्रोजेक्ट ₹100 करोड़ तक या

  • कुल लागत (Capex) का 15% (जो कम हो) तक वित्तीय सहायता दी जाती है।

क्या होगा फायदा?

  • घरेलू केमिकल उत्पादन को बढ़ावा

  • आयात पर निर्भरता में कमी

  • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

  • स्वच्छ और कुशल कोयला उपयोग से टिकाऊ औद्योगिक विकास

यह पहल भारत में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने और कोयले के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

CGBSE 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026 जारी: खत्म हुआ इंतजार, टॉपर्स की लिस्ट भी घोषित

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम आधिकारिक रूप से जारी कर दिए हैं। लंबे इंतजार के बाद छात्र-छात्राएं अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।


बोर्ड द्वारा जारी परिणाम के अनुसार, 12वीं परीक्षा में बलौदाबाजार के जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं बेमेतरा की ओमनी दूसरे स्थान पर रही हैं।

इसी तरह 10वीं परीक्षा में इस वर्ष तीन छात्रों ने संयुक्त रूप से टॉप किया है। संध्या नायक, परी रानी और अंशुल शर्मा ने 594 अंक (98.03%) हासिल किए हैं। संध्या नायक और परी रानी महासमुंद की निवासी हैं, जबकि अंशुल शर्मा मुंगेली जिले से हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी 2026 में शुरू हुई थीं। 12वीं के हिंदी पेपर लीक होने के मामले के चलते 10 अप्रैल को पुनः परीक्षा आयोजित की गई थी।

ऐसे देखें अपना रिजल्ट

छात्र-छात्राएं अपना स्कोरकार्ड देखने के लिए निम्न स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in या results.cg.nic.in पर जाएं।
  • होमपेज पर “CGBSE 10th/12th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना रोल नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।
  • स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकता है।

SMS के जरिए भी उपलब्ध
वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक होने की स्थिति में छात्र SMS के माध्यम से भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं:

  • 12वीं के लिए: CG12 <रोल नंबर> टाइप कर 56263 पर भेजें।
  • 10वीं के लिए: CG10 <रोल नंबर> टाइप कर 56263 पर भेजें।

बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन रिजल्ट देखने के बाद मूल अंकसूची (मार्कशीट) के लिए अपने संबंधित स्कूल से संपर्क करें।

 
 

विशेष लेख : नन्हे कदम गढ़ेगें सशक्त भारत का भविष्य - आंगनबाड़ी केंद्रों का नया रूप, नई दिशा

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर - उप संचालक (जनसंपर्क)


रायपुर : देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है।


भवन ही बन गया शिक्षकरू ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid ¼BALA½ की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है।
रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है।

धमतरी का ‘बाला मॉडल’- सीखने का नया अनुभव

धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं।

ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं।

शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार

मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है।
इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है।

खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल

महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं।

पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र

आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं।

कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी

आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सशक्त भारत की मजबूत नींव

आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।

छत्तीसगढ़: शादी से लौट रहीं लड़कियां बनीं दरिंदगी का शिकार, इलाके में दहशत

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 अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां शादी समारोह से लौट रही दो नाबालिग लड़कियों के साथ कथित रूप से कई युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने की घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।


पुलिस के अनुसार, 24 अप्रैल की रात चार नाबालिग लड़कियां एक शादी समारोह से घर लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार 8-9 युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया। दो लड़कियां किसी तरह वहां से भागने में सफल रहीं, जबकि दो अन्य को आरोपी अलग-अलग स्थानों पर ले गए, जहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया।

घटना के बाद पीड़िताएं देर रात घर पहुंचीं, लेकिन भय के कारण तुरंत परिजनों को जानकारी नहीं दी। अगले दिन 25 अप्रैल को एक पीड़िता ने परिवार को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिजन थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने 26 अप्रैल को एक पीड़िता की मां की शिकायत पर प्रियांशु खलखो, आशीष, राहुल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) और POCSO Act की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों पीड़िताओं का चिकित्सकीय परीक्षण (MLC) भी कराया गया है।

अमोलक सिंह ढिल्लो (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और आरोपियों की तलाश की जा रही है। 29 अप्रैल को दोनों पीड़िताओं को आगे की कार्रवाई के लिए अंबिकापुर लाया गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में सस्ती गैस का रास्ता साफ, साय कैबिनेट के अहम निर्णय

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 रायपुर। विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने शहरी गैस वितरण नीति, खेल अधोसंरचना के विस्तार, आर्थिक सहायता और प्रशासनिक मामलों से जुड़े प्रस्तावों पर मुहर लगाई।


शहरी गैस वितरण नीति 2026 को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026’’ को स्वीकृति प्रदान की। इस नीति के तहत प्रदेश में स्वच्छ और सस्ती प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आम उपभोक्ताओं को एलपीजी के मुकाबले किफायती विकल्प मिलेगा, वहीं पाइपलाइन के जरिए गैस की त्वरित और सुगम आपूर्ति का विस्तार होगा।

इससे शहरी क्षेत्रों में ईंधन व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनेगी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और गैस पाइपलाइन अधोसंरचना के विकास के साथ बड़े पैमाने पर निवेश एवं रोजगार के अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनांदगांव में बनेगा आधुनिक क्रिकेट मैदान

कैबिनेट ने आधुनिक खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी के निर्माण के लिए जिला क्रिकेट एसोसिएशन, राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा की भूमि में से 5 एकड़ जमीन रियायती दर पर आवंटित करने का निर्णय लिया है।

स्वेच्छानुदान मद से 11.98 करोड़ की सहायता

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 6,809 व्यक्तियों और संस्थाओं को लगभग 11 करोड़ 98 लाख 84 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि की स्वीकृति दी है। यह सहायता जरूरतमंदों को त्वरित राहत, सामाजिक सहयोग को मजबूत करने और विभिन्न परिस्थितियों में सहारा देने के उद्देश्य से प्रदान की गई है।

IPS अधिकारियों पर पुराना आदेश निरस्त

कैबिनेट ने वर्ष 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों—संजय पिल्ले, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता—से संबंधित 26 सितंबर 2019 के पदावनति आदेश को पुनर्विलोकन के बाद निरस्त करने का निर्णय लिया। साथ ही 24 सितंबर 2019 के निर्णय को भी अपास्त करते हुए उससे जुड़े सभी आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित मान्य किया गया है।

 

काशी विश्वनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर लौटे पीएम मोदी, काशीवासियों का किया अभिवादन

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वाराणसी। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Kashi Vishwanath Dham में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और इसके बाद कॉरिडोर का भ्रमण किया। दर्शन के उपरांत उनका काफिला वापस रवाना हुआ। इस दौरान गेट नंबर-4 पर मौजूद लोगों का उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया।


बच्चों से किया संवाद
मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री ने नन्हे बच्चों से बातचीत की। बच्चों के साथ उनका संवाद आत्मीय रहा और वे मुस्कुराते नजर आए। वहीं श्रद्धालु भी प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को उत्साहित दिखे।

वैदिक विधि से संपन्न हुआ पूजन
मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री ने षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की। पंडित ओम प्रकाश मिश्र समेत ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान संपन्न कराया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

त्रिशूल-डमरू के साथ किया अभिवादन
पूजन के बाद प्रधानमंत्री ने त्रिशूल और डमरू दिखाकर बाबा विश्वनाथ के भक्तों का अभिवादन किया। परिसर में शंखनाद और “हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

रोड शो में उमड़ा जनसैलाब
प्रधानमंत्री का काफिला मंडुवाडीह, पुलिस लाइन, लहुराबीर, मैदागिन और चौक होते हुए मंदिर पहुंचा। इस दौरान रास्ते भर भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया।

स्कूली बच्चों और NCC कैडेट्स में उत्साह
बनारस रेलवे स्टेशन और लहुराबीर चौराहे के पास स्कूली बच्चे और NCC कैडेट्स प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पहुंचे। उनके हाथों में संदेश लिखे पोस्टर और छोटे उपहार भी नजर आए।

करीब एक साल बाद प्रधानमंत्री के काशी आगमन को लेकर शहर में खासा उत्साह देखने को मिला।

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