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नवविवाहिता की मौत का 48 घंटे में खुलासा, पति ने रस्सी से गला घोंटकर की थी हत्या

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 धमतरी। जिले के सुपेला गांव में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। महिला ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसके पति ने ही नायलॉन की रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। वारदात के बाद आरोपी ने शव को फंदे पर लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में हत्या की साजिश सामने आ गई।


जन्माष्टमी के दिन मिली थी आत्महत्या की सूचना

मामला भखारा थाना क्षेत्र के सुपेला गांव का है। 5 सितंबर, जन्माष्टमी के दिन पुलिस को वीणा उर्फ बबली ठाकुर के आत्महत्या करने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की।

जांच के दौरान महिला के गले पर पतली वस्तु या बारीक कपड़े से गला घोंटे जाने जैसे निशान मिले। वहीं मृतिका के पति विवेक ध्रुव उर्फ गोलू ने पुलिस को बताया कि वह खेत से लौटने के बाद पत्नी के कमरे में गया था। शाम करीब साढ़े पांच बजे कमरे में पहुंचने पर पत्नी संदिग्ध हालत में मिली। परिजनों ने पहले इसे दिल का दौरा समझकर डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया।

मायके पक्ष ने जताया था हत्या का संदेह

घटना के बाद मायके पक्ष ने महिला की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर परिजनों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए। इसी दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत मानववध (Homicidal) पाए जाने के बाद पुलिस ने आत्महत्या के बजाय हत्या के एंगल से जांच शुरू की।

पूछताछ में पति ने कबूला जुर्म

जांच के दौरान पुलिस ने मृतिका के पति विवेक ध्रुव को थाने बुलाकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने हत्या की बात कबूल कर ली।

पुलिस के अनुसार, आरोपी को अपनी पत्नी के मोबाइल फोन के जरिए किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करने का शक था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि 4 सितंबर की शाम करीब 5 बजे विवाद के दौरान गुस्से में आकर उसने नायलॉन की रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया।

हत्या के बाद रची आत्महत्या की कहानी

पत्नी की हत्या करने के बाद आरोपी घबरा गया। पुलिस के मुताबिक, कानून से बचने के लिए उसने शव को फंदे पर लटका दिया और पूरी घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। लेकिन घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसकी कहानी की पोल खोल दी।

आरोपी पति के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने विवेक ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस की त्वरित जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के पीछे छिपी हत्या की पूरी कहानी 48 घंटे के भीतर सामने आ गई।

9 सितंबर को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 9 सितंबर को मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। बैठक सुबह 11:30 बजे मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष एम-5/20 में आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों और प्रस्तावों पर चर्चा के साथ कई अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है।


एक महीने बाद हो रही कैबिनेट बैठक

मंत्रिपरिषद की पिछली बैठक 5 अगस्त को हुई थी। करीब एक महीने बाद होने जा रही इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में विकास योजनाओं, प्रशासनिक विषयों और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।

पिछली बैठक में AI मिशन को मिली थी मंजूरी

पिछली कैबिनेट बैठक में ‘छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी गई थी। पांच वर्ष की अवधि वाले इस मिशन पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।

मिशन के तहत 100 AI डेटा लैब और पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता देने, छह लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI प्रशिक्षण देने तथा 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

BEML को रियायती दर पर जमीन देने की मंजूरी

कैबिनेट ने राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित करने के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। राज्य में प्रस्तावित यह अपनी तरह का पहला उद्योग होगा। इससे बड़े निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और MSME क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।

निर्माण कार्यों के लिए WAMIS लागू करने का फैसला

लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए Works and Account Management Information System (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को भी मंजूरी दी गई थी। इसके तहत कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन और गुणवत्ता निगरानी जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।

ग्राम सड़क योजना में किए गए बदलाव

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत बारहमासी सड़कों के निर्माण संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी दी थी। इसके तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा भी बढ़ाया गया है।

ADB से मिलेगा 15 करोड़ रुपये का अनुदान

‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के क्रियान्वयन के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से ‘Anjor LIGHT’ तकनीकी सहायता परियोजना के तहत 15 करोड़ रुपये का पूर्ण अनुदान प्राप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली थी। तीन वर्ष की इस परियोजना में राज्य शासन या केंद्र सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।

परियोजना के तहत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को मजबूत करने, PPP इकोसिस्टम विकसित करने, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देने और जलवायु अनुकूल परियोजनाओं के विकास पर काम किया जाएगा।

सरकारी योजनाओं के लिए S-SNA मॉडल मंजूर

राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक राशि निष्क्रिय रहने के बजाय केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से जरूरत के अनुसार सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। इससे वित्तीय अनुशासन और रियल-टाइम निगरानी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

CSPGCL को 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने की अनुमति

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) या बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

इससे कंपनी को वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प मिलेंगे और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश तथा विद्युत अवसंरचना के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। राज्य शासन की ओर से मूलधन और ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी भी प्रदान की जाएगी।

अब 9 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में किन नए प्रस्तावों पर मुहर लगती है और सरकार की ओर से कौन से महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

जस्टिस महापात्र ने संभाली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कमान, बने 16वें मुख्य न्यायाधीश

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रायपुर :  राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति  कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व  कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश  कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश  महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 


इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री  तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  सुनील सोनी,  अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।


समारोह में मुख्य न्यायाधीश  महापात्र की धर्मपत्नी अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक  अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता  विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल  रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि  महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।

बिहान से बदली राह 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

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उजाला उत्पादक समूह की दीदियों ने सामूहिक खेती से हासिल की नई पहचान, सीधे थोक बिक्री से 6 लाख रूपए की आय

रायपुर-  पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं, जिनमें  ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती जैसी प्रेरणादायक मिसालें शामिल हैं, जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थी और आज लाखों की कमाई कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर भी टमाटर, बैंगन, लौकी या करेला, खीरा जैसी सब्जियां उगाकर किसान प्रति बीघा या एकड़ कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल लागत घटाई, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन कर करीब 6 लाख रूपए की आय अर्जित की है।

2 लाख रूपए की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान

वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के ज़रिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाज़ार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से स्टार्टअप राशि 50 हजार रूपए, सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से ऋण 1 लाख 50 हजार रूपए, कुल शुरुआती पूंजी 2 लाख रूपए। इस पूंजी की मदद से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की।

600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार

महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढने लगी तो महिलाओं का हौसला बढ़़ा। इसके साथ ही फसल का दायरा बढ़ाने लगी, जिससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होने लगी। महिलाओं ने सामूहिक खेती कर लौकी 250 क्विंटल, करेला 250 क्विंटल, खीरा 100 क्विंटल का उत्पादन की। कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल होने लगा। 

बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव

सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की विपणन (मार्केटिंग) रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे फसल का उचित दाम मिला और कुल आय 6 लाख रूपए तक पहुंच गई।

सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत् मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

छत्तीसगढ़- सात सिंचाई योजनाओं के लिए 30.74 करोड़ रूपए स्वीकृत,किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा

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बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर जिले के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को मिलेगा फायदा

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन विभाग ने राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 30 करोड़ 74 लाख 39 हजार रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग नहरों के जीर्णाेद्धार, रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग और भूमिगत पाइपलाइन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा।

जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिलेवार स्वीकृत कार्यों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के बलौदा शाखा नहर (वितरक 11 एवं 12)में रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग एवं पक्के निर्माण कार्यों के लिए 4.99 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, इससे 339.05 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार सोंढूर परियोजना (बेन्द्री वितरक नहर) के भाटापारा शाखा नहर के बेन्द्री वितरक नहर की रिमॉडलिंग व सीसी लाइनिंग के लिए 4.82 करोड़ मंजूर। इससे 355 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी मिलेगा। 

रायपुर जिला (धरसींवा विकासखंड) के भाटापारा शाखा नहर कार्य में महानदी परियोजना अंतर्गत विभिन्न सुधार कार्यों हेतु 4.20 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 14) के आर.डी. 2700 मीटर से 3500 मीटर तक नहर को ह्यूम पाइप के माध्यम से भूमिगत करने के लिए 4.90 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। मांढ़र ब्रांच केनाल सर्विस रोडरू आर.डी. 31600 मीटर से 32900 मीटर तक डामर रोड निर्माण के लिए 1.90 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 8 व माइनर 1) में भूमिगत पाइपलाइन तथा कंक्रीट व मुरमीकरण रोड निर्माण के लिए 4.92 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 11।, 13, 14 व माइनर्स) महानदी परियोजना समूह के अंतर्गत जीर्णाेद्धार कार्यों के लिए 4.97 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है।

जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इन विकास कार्यों से क्षेत्र में जल प्रबंधन बेहतर होगा और अंतिम छोर (टेल एरिया) तक किसानों के खेतों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

डिजिटल क्रांति की राह पर सारंगढ़-बिलाईगढ़

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विष्णु प्रसाद वर्मा,गुलाब डडसेना,    

सहायक संचालक

तकनीक से बदली खेती की तस्वीर, डिजिटल क्रॉप सर्वे में रचा इतिहास

रायपुर- छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ तकनीक के प्रभावी उपयोग और दूरदर्शी प्रशासनिक रणनीति के बल पर प्रदेश में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कृषि क्षेत्र को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में संचालित राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल क्रॉप सर्वे के क्रियान्वयन में जिले ने समूचे प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है। प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में 87 प्रतिशत कार्य पूर्णता के साथ सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने यह शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि 86 प्रतिशत के साथ खैरागढ़ दूसरे और 81 प्रतिशत के साथ कोरिया तीसरे स्थान पर है।

प्रदेश में 88.45 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे

मैदानी स्तर पर मुस्तैदी और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के बूते जिले में कुल 53 हजार 524 लक्षित प्लॉटों के सापेक्ष 47 हजार 350 प्लॉटों का सर्वे पूरा कर लिया गया है, जो 88.45 प्रतिशत की वास्तविक प्रगति को दर्शाता है। केवल सर्वे ही नहीं, बल्कि डेटा सत्यापन और अनुमोदन में भी तेजी लाते हुए 35 हजार 476 मामलों को अनुमोदित किया जा चुका है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सभी छह तहसीलों में सर्वे का काम एक होड़ की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसमें 93.27 प्रतिशत प्रगति के साथ सारसींवा तहसील सबसे आगे है। इसके ठीक पीछे भटगांव तहसील ने 93.15 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। जिले के सबसे बड़े राजस्व क्षेत्र सारंगढ़ ने भी 88.60 प्रतिशत सर्वे पूर्ण करने के साथ-साथ सर्वाधिक 84.36 प्रतिशत अनुमोदन दर्ज कराकर प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश की है। इसी तरह सारिया, बिलाईगढ़ और बरमकेला तहसीलों में भी 84 से 86 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।

डिजिटल ब्यौरा सटीक पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा

राजस्व और कृषि विभाग की पूरी टीम शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए मुस्तैद है। मैदानी अमले के साथ सतत समन्वय और नियमित समीक्षा के बल पर बचे हुए प्लॉटों का काम भी तेजी से निपटाया जा रहा है। फसलों का यह सटीक डिजिटल ब्योरा न केवल पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा, बल्कि आने वाले समय में किसानों को बीमा दावों से लेकर शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

राज्यपाल डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

समारोह में मुख्य न्यायाधीश महापात्र की धर्मपत्नी अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि कृष्न राम महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।


कन्या छात्रावास में हड़कंप: अधीक्षक गायब, खाना नहीं मिला तो 38 छात्राओं को घर ले गए परिजन

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 मानपुर-मोहला। मानपुर ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र नवागांव स्थित शासकीय प्री-कन्या छात्रावास में रविवार को अव्यवस्था का मामला सामने आया। छात्रावास अधीक्षक के ड्यूटी पर मौजूद नहीं होने के दौरान भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई। शाम को भोजन नहीं मिलने से नाराज छात्राओं के परिजन छात्रावास पहुंचे और 40 में से 38 छात्राओं को अपने साथ घर ले गए। फिलहाल छात्रावास में दो छात्राओं के ही रहने की जानकारी है।


अधीक्षक की अनुपस्थिति से बिगड़ी व्यवस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार, छात्रावास अधीक्षक बिना पूर्व सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित थीं। उनके नहीं रहने के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप है। रविवार शाम रसोई में भोजन नहीं बनने की जानकारी सामने आने के बाद छात्राओं और कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई।

मामले की जानकारी मिलने पर कई अभिभावक छात्रावास पहुंचे। बच्चों की सुरक्षा और भोजन व्यवस्था को देखते हुए उन्होंने अपनी बेटियों को घर ले जाना उचित समझा। बताया गया कि छात्रावास में कुल 40 बालिकाएं दर्ज हैं, जिनमें से 38 छात्राएं अपने परिजनों के साथ घर लौट गईं।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी छात्रावास पहुंचे। उन्होंने छात्राओं के भोजन, सुरक्षा और नियमित देखरेख को लेकर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।

स्थानीय निवासी हेमंत कुमार मेश्राम ने बताया कि शाम के समय कई छात्राओं को अपने माता-पिता के साथ घर जाते देखा गया। कर्मचारियों से जानकारी लेने पर अधीक्षक के अनुपस्थित होने की बात सामने आई।

वहीं ग्रामीण कृष्णा मोहुरले ने कहा कि छात्रावास में आसपास के गांवों की छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। कई छात्राएं 10 से 15 किलोमीटर दूर से आती हैं। ऐसे में छात्रावास में भोजन, सुरक्षा और नियमित देखरेख जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित होना जरूरी है।

शिक्षा मंत्री के दौरे से पहले मामला आया सामने

मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के जिले में प्रथम आधिकारिक आगमन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। मंत्री के दौरे से ठीक पहले सरकारी कन्या छात्रावास में सामने आई अव्यवस्था ने विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने छात्रावास में तत्काल जिम्मेदार अधीक्षक की व्यवस्था करने के साथ ही भोजन, सुरक्षा और दैनिक देखरेख की व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।

प्रशासनिक जांच से स्थिति होगी स्पष्ट

अधीक्षक की अनुपस्थिति, भोजन व्यवस्था प्रभावित होने और छात्राओं के घर लौटने की परिस्थितियों की जांच की मांग की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अधीक्षक के अनुपस्थित रहने की वजह क्या थी और उनकी गैरमौजूदगी में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इन बिंदुओं पर प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सुशासन एवं स्वप्रगटीकरण की दिशा में अभिनव पहल का एक वर्ष पूर्ण, जानकारी सबकी, निगरानी सबकी

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वीबी - जीरामजी योजना के क्यूआर कोड को मिले 7 लाख से अधिक स्कैन, औसत प्रतिदिन 2 हजार से अधिक लोगों ने ली जानकारी

प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने की अभिनव पहल ने पूरा किया एक वर्ष

रायपुर- सुशासन, पारदर्शिता एवं स्वप्रगतिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई अभिनव पहल ‘क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली ने एक वर्ष पूर्ण कर लिया है। वर्तमान में वीबी जी राम जी, पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में पिछले वर्ष क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए थे। इस नवाचार के माध्यम से ग्रामीणों एवं आमजन को संबंधित ग्राम पंचायत में योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में कराए गए कार्यों, भुगतान तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही स्थान पर सहज, सरल एवं सुलभ रूप से उपलब्ध कराई गईं।

एक वर्ष में क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया

इस पहल को प्रदेशवासियों का उल्लेखनीय प्रतिसाद मिला है। पिछले एक वर्ष में इन क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया, यानी औसतन प्रतिदिन 2 हजार से अधिक बार ग्रामीणों एवं आमजन ने योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त की। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि तकनीक आधारित सूचना व्यवस्था को आमजन ने व्यापक रूप से अपनाया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला नया आयाम

क्यूआर कोड के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों एवं उनसे संबंधित जानकारी आमजन की पहुंच में आने से पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिली है। ग्रामीण अब अपने क्षेत्र में योजना के तहत हुए कार्यों, उनके भुगतान एवं अन्य संबंधित विवरणों की जानकारी स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। इससे सूचना के लिए किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और आमजन को ‘सूचना मांगने’ के बजाय ‘सूचना देखने’ की सुविधा मिली है। इस नवाचार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने से सामाजिक निगरानी और जनभागीदारी को बढ़ावा मिला है।

आरटीआई एवं शिकायतों में भी कमी

क्यूआर कोड के माध्यम से योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी ग्राम पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध होने का सकारात्मक प्रभाव सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों तथा योजना संबंधी शिकायतों पर भी देखने को मिला है। जानकारी की सहज उपलब्धता से ऐसे आवेदनों एवं शिकायतों में कमी आई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनी है।

मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित हुआ नवाचार

क्यूआर कोड आधारित इस स्वप्रगतिकरण नवाचार की प्रभावशीलता और उपयोगिता को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सुशासन को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की यह पहल उल्लेखनीय और अनुकरणीय है।

‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की दिशा में प्रभावी कदम

बीबी- जीरामजी योजना के क्यूआर कोड ने ग्राम पंचायतों में सूचना को सीमित दायरे से निकालकर सीधे आमजन तक पहुंचाया है। पिछले एक वर्ष में 7 लाख से अधिक स्कैन इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। यह पहल न केवल पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को मजबूत कर रही है, बल्कि स्वप्रगतिकरण एवं सुशासन की अवधारणा को भी धरातल पर साकार कर रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से आमजन स्वयं अपने क्षेत्र में योजना के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं।

एक वर्ष की अवधि में क्यूआर कोड आधारित इस नवाचार ने यह सिद्ध किया है कि तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी का समन्वय सुशासन को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बना सकता है। प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में लागू यह पहल आने वाले समय में डिजिटल पारदर्शिता एवं जनसशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

डिजिटल छत्तीसगढ़- अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

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नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश,पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

रायपुर- राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation)  की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ  लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न  पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत  तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन  जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।

राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट  (E-Court)  सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।

 सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील

नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।

मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी। 

ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम

राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।

राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल- खेतों से मशरूम उत्पादन तक मिथिला दीदी ने लिखी सफलता की नई कहानी

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स्व-सहायता समूह के सहयोग से 1.5 लाख की पूंजी से शुरू किया काम, अब हर महीने कमा रही हैं 50 हजार रुपये

रायपुर- पारंपरिक कृषि पर निर्भरता से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली ग्रामीण महिलाओं की सूची में अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी का नाम भी जुड़ गया है। अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और शासकीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बदौलत मिथिला दीदी ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

सीमित आय से आर्थिक मजबूती की ओर

महिलाओं में आत्मनिर्भरता की जो लहर उठ रही हैए उसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी हैए जिनके लिए मशरूम उत्पादन की खेती वरदान साबित हुई है। शुरुआत में परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इस चुनौती से निपटने के लिए मिथिला दीदी ने अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

1 लाख 50 हजार रूपए की शुरुआती पूंजी से सफर का आगाज

मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने सखी क्लस्टर संगठन से ऋण 1 लाख 20 हजार रूपए, अपनी व्यक्तिगत बचत से 30 हजार रूपए इस प्रकार कुल शुरुआती लागतरू 1 लाख 20 हजार रूपए से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू की। शुरुआती दौर में यह कार्य नया था, लेकिन सीखने की ललक और निरंतर प्रयासों से जल्द ही मशरूम उत्पादन एक सफल आजीविका गतिविधि में बदल गया। शुरुआती दौर में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी कई समस्याएं सामने आईं। लेकिन मिथिला दीदी ने प्रशिक्षण लेकर और आपसी सहयोग से इन सभी चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

हर माह 50 हजार रूपए की आय और प्रेरणादायक पहल

बेहतर गुणवत्ता और उत्पादन के चलते स्थानीय बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बेचती हैं और प्रतिमाह लगभग 50 हजार रूपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी यह सफलता आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है।

सुशासन नीति और बेहतर मॉनिटरिंग का परिणाम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर गढ़ रही हैं। आज आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतारते हुए यह संदेश दे रही है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

यूक्रेन शांति वार्ता में नहीं बनी सहमति

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अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बिना किसी बड़े समझौते के कीव से लौटे, आगे बातचीत जारी रहने की उम्मीद

कीव- रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में चल रही शांति वार्ता को लेकर एक बार फिर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों बनी हुई हैं। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में महत्वपूर्ण बातचीत के बाद वापसी कर ली है, लेकिन वार्ता में फिलहाल कोई बड़ी सफलता या ठोस समझौता नहीं हो सका।

अमेरिकी प्रतिनिधियों की यूक्रेनी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि, विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।

बातचीत में क्या हुआ?

अमेरिकी दूतों ने यूक्रेनी पक्ष के साथ युद्ध की मौजूदा स्थिति और संभावित शांति प्रक्रिया को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान युद्ध समाप्त करने, सुरक्षा गारंटी और भविष्य की व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

हालांकि बैठक के बाद किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गई। इसके बावजूद बातचीत को पूरी तरह विफल नहीं माना जा रहा है और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।

शांति की कोशिशों पर टिकी दुनिया की नजर

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधियों की कीव यात्रा को शांति प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वार्ता में तत्काल सफलता नहीं मिलने के बावजूद बातचीत का जारी रहना इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। आने वाले दौर की बातचीत में विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है।

आगे क्या?

अमेरिकी दूतों के कीव से लौटने के बाद अब निगाहें अगली दौर की वार्ता पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आगे की बातचीत में युद्धविराम, सुरक्षा व्यवस्था और स्थायी शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को और आगे बढ़ाया जाएगा।

फिलहाल किसी अंतिम समझौते पर पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन बातचीत का जारी रहना रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान की कोशिशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RBI ने बैंकिंग सिस्टम से ₹6.12 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी खींची

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बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ी अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक की बड़ी कार्रवाई

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद असामान्य रूप से अधिक अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने विभिन्न लिक्विडिटी-एब्जॉर्प्शन ऑपरेशंस के जरिए करीब ₹6.12 लाख करोड़ की तरलता वापस खींची है।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता सामान्य से काफी अधिक हो जाने के बाद RBI ने यह कदम उठाया। अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना मौद्रिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने और बाजार में नकदी के प्रवाह को व्यवस्थित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ी थी नकदी?

बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी उपलब्ध होने पर उसे अतिरिक्त तरलता माना जाता है। ऐसी स्थिति में RBI बाजार से अतिरिक्त धनराशि को वापस खींचने के लिए अलग-अलग मौद्रिक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता को संतुलित रखना होता है।

RBI की इस कार्रवाई से बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त फंड को अस्थायी रूप से केंद्रीय बैंक के पास वापस लाया गया है। इससे बाजार में नकदी की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

RBI की कार्रवाई का क्या असर होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करना बैंकिंग सिस्टम में नकदी के स्तर को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अल्पावधि में मनी मार्केट की स्थितियों और बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है।

RBI लगातार बैंकिंग सिस्टम में तरलता की स्थिति पर नजर रखता है और जरूरत के अनुसार नकदी डालने या वापस लेने के उपाय करता है। मौजूदा कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में पर्याप्त लेकिन संतुलित तरलता बनाए रखना है।

मौद्रिक नीति के लिहाज से अहम कदम

₹6.12 लाख करोड़ की तरलता को अवशोषित किया जाना RBI की ओर से उठाए गए बड़े कदमों में शामिल है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी को लेकर सक्रिय रूप से प्रबंधन कर रहा है।

RBI का यह कदम वित्तीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने और मौद्रिक नीति के प्रभावी संचालन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जिला साहू संघ महासमुंद की ऐतिहासिक पहल

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शिक्षक दिवस पर 280 शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

महासमुंद- शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला साहू संघ महासमुंद द्वारा कर्मा सदन, महासमुंद में समाज के शिक्षकों के सम्मान में भव्य एवं गरिमामय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ-साथ सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समाज के कुल 280 शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

जिला साहू संघ महासमुंद की यह पहल शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और उनके योगदान को रेखांकित करने वाली एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में सामने आई। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, सामाजिक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

शिक्षकों का सम्मान शिक्षा और संस्कार के प्रति सम्मान

समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू तथा सभाध्यक्ष प्रो. ढालूराम साहू सहित जिला साहू संघ महासमुंद के पदाधिकारियों एवं मंचासीन अतिथियों ने शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के चेहरों पर खुशी और गर्व का भाव देखने को मिला।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला साहू संघ के अध्यक्ष प्रो. ढालूराम साहू ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उनके व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर उन्हें बेहतर नागरिक बनाने का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। शिक्षक स्वयं ज्ञान का प्रकाश बनकर विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशित करते हैं। वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में शिक्षक समाज के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने नशामुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने में भी शिक्षा और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

शिक्षक सम्मान समाज की कृतज्ञता का प्रतीक

प्रो. ढालूराम साहू ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में शिक्षा, ज्ञान, संस्कार और शिक्षक धर्म के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक है। शिक्षक दिवस केवल औपचारिक आयोजन का अवसर नहीं, बल्कि उन सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, जिन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से पीढ़ियों के भविष्य को दिशा दी है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों के योगदान को भी किया नमन

समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों का विशेष रूप से सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षकों का अनुभव, मार्गदर्शन और सामाजिक योगदान समाज के लिए अमूल्य है। अपने सेवाकाल में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान कर समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान वर्तमान और नई पीढ़ी के शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से समाज को निरंतर लाभ मिलता रहेगा।

आयोजन की सफलता में इनका रहा योगदान

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के सफल आयोजन में नंदकुमार साहू, डाक्टर तरुण साहू, डाक्टर देवेंद्र साहू, राजेश साहू, आत्माराम साहू, पवन साहू, नोहर साहू, केवल साहू, अशोक साहू, देवेंद्र साहू, खेमिन साहू, डोलमणी साहू, आकाशकरण साहू, आशीष साहू, टीकम साहू, सीएल साहू सहित पूरी आयोजक टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बड़ी संख्या में शिक्षक हुए सम्मानित

समारोह में सम्मानित होने वाले शिक्षकों में जितेन्द्र कुमार साहू, देवेंद्र साहू, द्वारिका साहू, भोज साहू, मनोहर साहू, कैलाश साहू, ईश्वरी साहू, मानिक साहू, लक्ष्मण साहू, कोमल साहू, ईश्वर साहू, मोहन साहू, ललित साहू, राधेश्याम साहू, कार्तिक राम साहू, शंकर साहू, मुकेश साहू, मोनिका साहू, क्रांति साहू, खुमलता साहू, गोमेश्वरी साहू, पूर्णिमा साहू, नेहा साहू, पुष्पा साहू और वासना साहू सहित समाज के अनेक शिक्षक एवं सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल रहे।

शिक्षा और सामाजिक समरसता को मिला बढ़ावा

शिक्षक सम्मान समारोह के माध्यम से समाज में शिक्षा के महत्व और शिक्षकों की भूमिका को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने युवा पीढ़ी को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों और समाजजनों ने जिला साहू संघ महासमुंद की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के शिक्षकों को एक मंच पर लाकर उनका सम्मान करना निश्चित रूप से गौरवपूर्ण कार्य है। इस तरह के आयोजन सामाजिक एकता, समरसता और शिक्षा के प्रति जागरूकता को मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला साहू संघ महासमुंद के अध्यक्ष प्रो. ढालूराम साहू सहित संघ की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

जिला साहू संघ महासमुंद का यह शिक्षक सम्मान समारोह शिक्षा, संस्कार और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को नई ऊंचाई देने वाली एक यादगार पहल के रूप में सामने आया। समारोह ने समाज में शिक्षकों की भूमिका और उनके योगदान को सम्मान देने के साथ ही शिक्षा के महत्व का भी प्रभावी संदेश दिया।

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का भीषण विस्फोट, 8 एयरपोर्ट बंद; 1.70 लाख यात्री प्रभावित

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जकार्ता- इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) के लगातार हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट ने देश के हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ज्वालामुखी से निकल रही राख के कारण सुरक्षा के मद्देनजर आठ एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन रोक दिया गया, जिससे करीब 1.70 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं।

आसमान में छाई ज्वालामुखी की राख

अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में शुक्रवार से गतिविधियां तेज हुई थीं। रविवार को हुए विस्फोट के बाद राख का गुबार हजारों फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया और तेज हवाओं के कारण राख इंडोनेशिया के कई इलाकों तक फैल गई। रिपोर्टों के मुताबिक राख का गुबार करीब 50,000 फीट तक पहुंचा।

ज्वालामुखी से निकलने वाली राख विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए खतरनाक मानी जाती है। इसी वजह से अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए कई एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकने का फैसला लिया।

1,500 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित

हवाई सेवाओं पर इस प्राकृतिक आपदा का बड़ा असर पड़ा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 1,558 से ज्यादा उड़ानें रद्द या प्रभावित हुईं और करीब 1.70 लाख यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अकेले जकार्ता के मुख्य सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जुड़ी 900 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं।

एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्री अपनी उड़ानों की स्थिति जानने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। कई यात्रियों को अपनी यात्रा आगे बढ़ानी पड़ी, जबकि कुछ को वैकल्पिक एयरपोर्ट और उड़ानों का सहारा लेना पड़ा।


स्कूल भी ऑनलाइन किए गए

ज्वालामुखी की राख का असर सिर्फ हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। राख के कारण कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जकार्ता और आसपास के कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाओं में बदल दिया गया है। लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने और राख के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी गई है।

अभी भी बनी हुई है खतरे की स्थिति

अधिकारियों का कहना है कि ज्वालामुखी की गतिविधि और मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है। इसी वजह से यह तय करना मुश्किल है कि एयरपोर्ट और उड़ान सेवाएं पूरी तरह सामान्य कब होंगी। सोमवार को भी कई एयरपोर्ट पर संचालन प्रभावित रहा।

2018 की घटना की याद हुई ताजा

अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी का नाम इंडोनेशिया की एक बेहद खतरनाक प्राकृतिक आपदा से भी जुड़ा है। 2018 में इसी ज्वालामुखी की गतिविधि से सुनामी आई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, मौजूदा विस्फोट को लेकर अधिकारियों ने तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया है।

 एक नजर में

  •  ज्वालामुखी: माउंट अनाक क्राकाटोआ

  • देश: इंडोनेशिया

  •  प्रभावित एयरपोर्ट: 8

  •  प्रभावित यात्री: करीब 1.70 लाख

  •  प्रभावित उड़ानें: 1,500 से ज्यादा

  •  मुख्य समस्या: ज्वालामुखी की राख

  •  अन्य असर: कुछ क्षेत्रों में स्कूल ऑनलाइन

  •  स्थिति: ज्वालामुखी और हवाई सेवाओं पर निगरानी जारी

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा है। मौसम और ज्वालामुखी की गतिविधि को देखते हुए एयरपोर्ट संचालन को लेकर अगले कुछ घंटों में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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