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इंटरनेट की इस दुनिया में प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा रहेगा - राज्यपाल डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है। 

समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवों के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। 

डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। 

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।  

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा और आर कृष्णा दास, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में होमस्टे का किया शुभारंभ, एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में ग्राम केरे को किया जाएगा विकसित

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रायपुर। जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।  

एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के इस माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

जशपुर जिले के बच्चे अब पढ़ेंगे स्मार्ट क्लास रूम में : मुख्यमंत्री साय ने कांसाबेल में किया स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ

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रायपुर। जशपुर जिले के स्कूली बच्चे अब स्मार्ट क्लास रूम के जरिए पढ़ाई करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कांसाबेल के सरस्वती शिशु मंदिर में स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ किया। इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में विधायक  गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।  

अधिकारियों ने बताया कि एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टिकोण से विगत माह जिला प्रशासन एसईसीएल एवं ईडूसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।


जशक्राफ्ट को मिला राष्ट्रीय पहचान का नया मंच : महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से बनाए उत्पाद मिलेंगे देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर

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रायपुर। वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी एवं विधायक गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड

उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी। 

जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।

अवैध शिकार के मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार शिकारी गिरफ्तार

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 कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में जंगली सुअर के अवैध शिकार के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ग्राम लीमपानी और ग्राम बारीउमराव क्षेत्र में की गई।


वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम लीमपानी निवासी एक व्यक्ति ने जंगली सुअर का शिकार किया है। सूचना के बाद विभाग द्वारा विशेष टीम गठित कर गांव में दबिश दी गई। पंचों की मौजूदगी में आरोपी के घर की तलाशी ली गई।

घर से मांस और शिकार के औजार बरामद

तलाशी के दौरान आरोपी के घर से करीब 5 किलो जंगली सुअर का कच्चा मांस, दो पुराने जबड़े और तीन पैर बरामद किए गए। इसके साथ ही शिकार में उपयोग किए गए हथियार भी जब्त किए गए, जिनमें दो कुल्हाड़ी, एक परसुल, दो हंसिया, चार बंडल सेटिंग तार और लकड़ी का एक गुटका शामिल है।

फंदा लगाकर किया था शिकार

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पलमापहाड़ क्षेत्र में फंदा लगाकर जंगली सुअर का शिकार किया था। फंदे में फंसने से सुअर की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने गांव के तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर सुअर को काटा और मांस आपस में बांट लिया। कुछ मांस पकाकर खाए जाने की भी पुष्टि हुई है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज

वन विभाग ने बरामद सामग्री, आरोपियों के कथन और पंचनामा के आधार पर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराएं 9, 39, 44, 48(क), 51 और 52 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस संबंध में प्रकरण क्रमांक 32/01 दर्ज है।

न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी

24 जनवरी को सभी आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पाली के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 फरवरी 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में कटघोरा जेल भेज दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे भी जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध शिकार की इस गतिविधि में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण के तहत अवैध शिकार के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकारी डॉक्टर की नौकरी दिलाने के नाम पर 20 लाख हड़पे, आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग। सरकारी डॉक्टर के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर 20 लाख रुपये की ठगी का मामला दुर्ग जिले में सामने आया है। सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी विकास चंद्राकर (39) को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज करते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


पुलिस के अनुसार, अंजोरा निवासी सचिन मालगी (43) ने 29 अगस्त 2025 को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी विकास चंद्राकर ने सरकारी डॉक्टर के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर अलग-अलग समय पर कुल 20 लाख रुपये ले लिए।

न नौकरी लगी, न पूरी रकम लौटी

शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम लेने के बाद भी आरोपी न तो नौकरी दिला सका और न ही पूरी राशि वापस की। प्राथमिक जांच में मामला धोखाधड़ी का पाए जाने पर सिटी कोतवाली दुर्ग में आरोपी के खिलाफ धारा 420 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूला

विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि मई 2023 में उसने डॉक्टर की नौकरी लगवाने के नाम पर 20 लाख रुपये लिए थे।

चेक दिए, लेकिन जानबूझकर कराए बाउंस

आरोपी ने बताया कि नौकरी नहीं लग पाने पर उसने 8 लाख रुपये अलग-अलग किश्तों में पीड़ित सचिन मालगी और उसकी पत्नी कीर्ति पटानी के खातों में वापस किए। शेष 13 लाख रुपये लौटाने के लिए आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक के अपने खाते से 5 लाख और 8 लाख रुपये के दो चेक दिए, लेकिन खाते में जानबूझकर पे-ऑप्शन सक्रिय नहीं कराया, जिससे दोनों चेक बाउंस हो गए।

महासमुंद निवासी आरोपी जेल भेजा गया

पुलिस ने आरोपी के कृत्य को गंभीर मानते हुए विधिवत कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपी विकास चंद्राकर महासमुंद जिले का निवासी है। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

‘वोटर ही लोकतंत्र की आत्मा है’ : 2026 की पहली मन की बात में बोले पीएम मोदी

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 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वर्ष 2026 के पहले मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। अपने 130वें रेडियो संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए कहा कि वोटर ही लोकतंत्र की आत्मा है।


प्रधानमंत्री ने देश की इंडस्ट्री और स्टार्टअप जगत से आह्वान किया कि वे मैन्युफैक्चरिंग में एक्सीलेंस को नया बेंचमार्क बनाएं और भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बेहतरीन गुणवत्ता की पहचान दिलाएं।

‘जीरो डिफेक्ट’ और टॉप क्वालिटी का आह्वान

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कंपनियां और उद्यमी ‘जीरो डिफेक्ट’ उत्पाद बनाने का संकल्प लें।
उन्होंने कहा, “चाहे कपड़ा हो, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स या पैकेजिंग—हर क्षेत्र में भारतीय उत्पाद टॉप क्वालिटी का पर्याय बनने चाहिए। जो कुछ भी हम बनाते हैं, उसकी गुणवत्ता को सर्वोच्च बनाना होगा।”

स्टार्टअप इंडिया की सफलता की सराहना

प्रधानमंत्री ने 2016 से शुरू हुई स्टार्टअप इंडिया यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप उन क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं, जिनकी कल्पना एक दशक पहले मुश्किल थी।

युवा शक्ति को सलाम

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज शायद ही कोई ऐसा सेक्टर हो, जहां भारतीय स्टार्टअप न हो। मैं उन सभी युवा साथियों को सलाम करता हूं जो स्टार्टअप चला रहे हैं या शुरू करने का सपना देख रहे हैं।”

राष्ट्रीय पर्वों की शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और लोकतंत्र के इन उत्सवों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

जन जागरूकता से आएगी सड़क दुर्घटनाओं में कमी : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। यातायात नियमों के प्रति सजगता ही हमें जनहानि से बचा सकती है।


मुख्यमंत्री साय ने सड़क सुरक्षा का संदेश देते हुए स्वयं हेलमेट पहनकर बाइक चालकों के दल के साथ स्कूटी चलाई।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने राजधानी रायपुर के पंडरी में आधुनिक लाइसेंस सेंटर कार्यालय भवन पंडरी का भूमिपूजन और प्रदेश भर में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 12 नवीन मार्गों में 12 नवीन बसों का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। उन्होंने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए यातायात नियमों के पालन की अपील आम नागरिकों से की जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आज इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे राहगीरों, पुलिस मितान, चिकित्सकों, यातायात पुलिस कर्मियों सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया है। ये सभी लोग इस कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में किसी माता की कोख सूनी हो जाती है, कई भाई अपनी बहन से हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए रायपुर पुलिस ने अभिनव पहल करते हुए 4500 पुलिस मितान बनाए हैं। ये पुलिस मितान गांवों में सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगें। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम ज्यादा होता है। ऐसे में पुलिस मितान की बड़ी भूमिका होगी। हमने इन पुलिस मितान साथियों को हेलमेट और फर्स्ट ऐड किट भी वितरित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलमेट पहनना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में हेड इंजरी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह से लोगों की जान जाती है। अतः हमें दुपहिया वाहनों में अनिवार्यतः हेलमेट पहनना चाहिए और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट अवश्य लगाना चाहिए। वाहन चालक हमेशा ध्यान रखें कि वे वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात ना करें और ट्रैफिक सिग्नल ना तोड़े।

कार्यक्रम में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज का कार्यक्रम मात्र एक औपचारिकता ना रहे बल्कि सड़क सुरक्षा का जनांदोलन बने। सड़क दुर्घटना में तत्काल सहायता करने वाले राहगीरों को 25 हजार की राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क दुर्घटना प्रभावितों के इलाज के लिए डेढ़ लाख के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये महीना कई माताओं की गोद सूनी होने से बचाने का महीना है। हेलमेट पहनना अब अनिवार्य किया जाना चाहिए। एक्सीडेंट से कई परिवार उजड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। हेलमेट को अनिवार्य करने से वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करना भी बंद होगा और लोगों की जान बचेगी।

कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा मितान साथियों को 25 हजार व 5 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई और सड़क सुरक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, यातायात सिपाहियों, वाहनचालकों, भारत स्काउट गाइड के सदस्यों, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, एनएचएआई के अधिकारी तथा एनएसएस व एनसीसी कैडेट्स को भी सम्मानित किया गया ।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित की गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सड़क सुरक्षा पर स्कूल व कॉलेज के बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग और साइंस मॉडल की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी और पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, परिवहन सचिव एस प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त डी रविशंकर सहित बड़ी संख्या में स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उपनिषद से एआई तक : भाषा, ज्ञान और तकनीक पर हुआ मंथन

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 रायपुर : नवा रायपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा आयोजित हुई। इस परिचर्चा में वक्ता के रूप में ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास, वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर, वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल शामिल हुए। परिचर्चा के सूत्रधार साहित्यकार संजीव तिवारी रहे, परिचर्चा का यह सत्र कवि जगन्नाथ प्रसाद भानु को समर्पित रहा। इस अवसर पर डॉ. गोपाल कमल द्वारा लिखित पुस्तक, गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा का विमोचन किया गया।


ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि एआई का जो रूप आज हम देख रहे हैं, इसके पीछे विगत 30–40 वर्षों की मेहनत है। एआई निरंतर निखरता जा रहा है। तकनीक खुद को परिमार्जित करती जाती है, यह प्रक्रिया सतत है। एआई नेट पर उपलब्ध जानकारी, आंकड़ों और सूचनाओं का विश्लेषण कर हमें डिस्क्रिप्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में समझाता है। धीरे-धीरे एआई निखरा और प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी के रूप में काम करने लगा। आज एआई भविष्य की चीजों को भी बताता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 में पहली बार चैट जीपीटी आया। सिर्फ तीन साल में एआई का रूप कितना भव्य हुआ है, आप देखिए। हम एआई के भविष्य की अब कल्पना भी नहीं कर सकते। भाषा के मानकीकरण में एआई की क्या भूमिका होगी, यह हम सभी के बीच एक बड़ी चुनौती है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के 18 अध्यायों में सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। एआई को लेकर लोग चिंतित हैं कि एआई का फ्यूचर क्या होगा। एआई के आधार पर जापान ने जब रोबोट बनाया तो वह स्वयं को नेगेटिव प्रॉम्प्ट देने लगा। एआई कमांड और प्रॉम्प्ट पर काम करता है। एआई वही बताता है जो नेट पर उपलब्ध है। श्री केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे। वे एआई से बहुत ज्यादा आगे थे। यदि हम मैकाले की शिक्षा पद्धति की बात करें तो उसने हमें अच्छा उत्तर लिखने वाला बना दिया। प्रश्न जितना गहरा होगा, उत्तर भी उतना ही गहरा होगा। मानव के ज्ञान का उद्देश्य प्रकृति पर विजय पाना नहीं, उसके नियमों को समझकर अपने आपको प्रकृति के अनुरूप ढालना था।

वरिष्ठ लेखक डॉ. गोपाल कमल ने सत्र में अपने संबोधन में कहा कि हमारे साथ में सोचने की परंपरा ऋग्वेद से आती है। हम सभी एआई में डीप लर्निंग की बात करते हैं। भाषा कहां से आती है, वह आकार कैसे लेती है, मनुष्य भाषा तक कैसे पहुंचा, इस पर होने वाले कार्य और अध्ययन को साइकोलिंग्विस्टिक के नाम से जाना जाता है। जेनेटिक कोड के जरिए ही हम नई चीजों को सीख पाते हैं। डॉ. गोपाल ने कहा कि सोमदेव ने कथासरितसागर के नाम से संस्कृत में पुस्तक लिखी, इसे हम गुणाढ्य के रूप में देख सकते हैं। संस्कृत के लगभग 3900 सूत्र हैं। महेश्वर सूत्रों से हम सभी शब्दरूप और धातुरूप बना सकते हैं। एआई में हम जीरो से एक का सहारा लेते हैं। गुणसूत्र की भाषा से एआई के संचार नेटवर्क को गढ़ा गया है।

परिचर्चा के सूत्रधार, साहित्यकार श्री संजीव तिवारी ने कहा कि मेरे समझ में उपनिषद और एआई एक जैसे हैं। वेद ज्ञान का खजाना है, जिसका भाष्य उपनिषद है। एआई भी प्रश्नोत्तर शैली में उत्तर देता है। हमारा उपनिषद एआई का मूल है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल आईटी हैदराबाद जैसे संस्थान एआई को लेकर काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए दूसरे संस्थान भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं, ताकि एआई में बेहतर से बेहतर रूप में छत्तीसगढ़ी भाषा निखरकर आ सके। इस अवसर पर गणमान्य साहित्यकार एवं श्रोता उपस्थित रहे।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। 


यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा।

इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने फिल्म सिटी के प्रस्तावित मास्टर प्लान का किया अवलोकन

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन अवसर पर पर्यटन विभाग को मिले 4 प्रस्ताव

चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए।

गदर फिल्म के निर्माता श्री अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन श्री राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन श्री नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से श्री आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा।

उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक ब्लॉक जैसी सुविधाएं होंगी।

फिल्म शूटिंग, फेस्टिवल और रोजगार के नए अवसर

उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में न्यूटन, जहानाबाद, कौन प्रवीण तांबे, द ग्रेट इंडियन मर्डर, ग्राम चिकित्सालय जैसी फिल्मों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग हो चुकी है, जिससे राज्य में वाणिज्यिक फिल्म निर्माण की व्यापक संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को नए अवसर प्राप्त होंगे। फिल्म फेस्टिवल, अवॉर्ड शो एवं अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाएं भी सुदृढ़ होंगी। इसके साथ ही राज्य के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार होगा तथा फिल्म टूरिज्म के साथ सामान्य पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने की सौजन्य मुलाकात

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।


मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा उपस्थित थे।

स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज

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 रायपुर : नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने श्री शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया।


परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि श्री शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है।


नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं।

जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार श्री सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने श्री शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग श्री शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं।

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक श्री अनुभव शर्मा ने कहा कि श्री विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि श्री शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं।

अभिनेत्री टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार श्री विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को श्री शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं।

परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

CG NEWS : नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास

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 दुर्ग/पाटन। दुर्ग जिले के पाटन स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है।


पाटन के अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर ने मामले में आरोपी निखिल कुर्रे को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

क्या है पूरा मामला

यह घटना उस समय की है जब पीड़िता अपनी सहेली के घर से लौट रही थी। रास्ते में आरोपी निखिल कुर्रे ने उसे बहला-फुसलाकर अपने झांसे में लिया और बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गया। आरोपी पहले पीड़िता को रायपुर के पास अपनी दीदी के घर लेकर गया, जहां वह एक दिन रुका।

इसके बाद आरोपी पीड़िता को ट्रेन से नागपुर ले गया। नागपुर में आरोपी को पीड़िता के नाबालिग होने की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उसने जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

पुलिस ने नागपुर से किया बरामद

घटना के बाद पीड़िता के पिता ने थाना उतई में बेटी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता को नागपुर से सुरक्षित बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार किया।

संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई

जांच में सामने आया कि आरोपी को उसके परिजनों का संरक्षण मिला था। इस पर पुलिस ने आरोपी की दीदी विकेश मारकंडे, जीजा दिनेश बघेल और एक अन्य दीदी करुणा बघेल को भी गिरफ्तार किया।

कोर्ट का फैसला

पाटन पॉक्सो न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक शेखर वर्मा ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने पीड़िता, उसके परिजनों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिलेगा नया मंच, नवा रायपुर में बनेगी वर्ल्ड-क्लास फिल्म सिटी

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 Film City in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब राज्य को फिल्म उद्योग के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। राजधानी नवा रायपुर में ‘चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी’ का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 24 जनवरी 2026 को करेंगे।


यह फिल्म सिटी राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी फिल्म सिटी

नवा रायपुर में बनने वाली चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी को हाईटेक और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। यहां आधुनिक फिल्म स्टूडियो, आकर्षक आउटडोर शूटिंग लोकेशन, अत्याधुनिक पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, ऑडिटोरियम, होटल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे।

प्रशिक्षण केंद्रों में एक्टिंग, ड्रामा, फिल्म प्रोडक्शन और तकनीकी कौशल से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

100 एकड़ में होगा विकास, 3 साल में तैयार

यह फिल्म सिटी लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी और इसके तीन वर्षों में पूर्ण होने की उम्मीद है। इसके निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ फिल्म सिटी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नई पहचान मिलेगी।

देश-विदेश के फिल्म निर्माता और कलाकार यहां शूटिंग के लिए आकर्षित होंगे, जिससे राज्य में पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

रोजगार और स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को व्यापक अवसर मिलेंगे। फिल्म, मीडिया और मनोरंजन उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, चित्रोत्पला इंटरनेशनल फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ को फिल्म उद्योग के नए हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगी।

दंतेश्वरी मंदिर में बड़ी चोरी, सोने-चांदी के आभूषण ले उड़े चोर

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 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर में देर रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। अज्ञात चोरों ने मंदिर के पीछे स्थित दरवाजे का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया और माता दंतेश्वरी के सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषण चोरी कर लिए। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल है।


घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर परिसर को सुरक्षित कर लिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें एक संदिग्ध चोर कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है। इसके अलावा, शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है, ताकि चोरों की आवाजाही का पता लगाया जा सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। टीम टूटे ताले, दरवाजों और अन्य भौतिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही चोरी में शामिल आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच प्रक्रिया के चलते सुरक्षा कारणों से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

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