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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

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छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।

विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।

दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026: वैज्ञानिक सोच और नवाचार से सतत विकास का संकल्प

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33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों का राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण सम्पन्न

'साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी' विषय पर स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर जोर

रायपुर- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में किया गया। 

कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति तथा मूल्यांकन प्रणाली से अवगत कराना था, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणी बोरा तथा महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया।

विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए स्थानीय समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक 'ई' एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की रूपरेखा और परियोजना निर्माण की जानकारी

कार्यशाला में राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं समाजोपयोगी विषयों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो।

स्थानीय समस्याओं पर आधारित परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संचयन, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण, तथा खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य की स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।मिशन लाइफ़ की भावना से जोड़ने का आह्वान

राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम और उसके विभिन्न उपविषयों का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण एवं समाधान आधारित सोच के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए Mission LiFE की भावना के अनुरूप अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

R5 तकनीक से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डॉ. वी. के. कानूनगो ने अपने व्याख्यान में R5 सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ऊर्जा संरक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विशेष जोर

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।

वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह

वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को "एनर्जी एम्बेसडर" बनकर समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।

प्रदेशभर के शिक्षक होंगे वैज्ञानिक प्रतिभाओं के मार्गदर्शक

कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। आगामी राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें उत्कृष्ट प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।

छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस 2026 की तैयारियां शुरू, राज्य शासन ने जारी किए स्वतंत्रता दिवस आयोजन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने स्वतंत्रता दिवस 2026 को पूरे प्रदेश में गरिमामय, भव्य और प्रेरणादायी ढंग से मनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस विशेष होने जा रहा है, क्योंकि इस मौके पर राष्ट्रगीत श्वंदे मातरम्श् के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक उत्सव भी मनाया जाएगा। शासन द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों और विभागीय प्रमुखों को आयोजनों की समुचित निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं।


मुख्यमंत्री रायपुर में करेंगे ध्वजारोहण, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य

राजधानी रायपुर के स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में मुख्य राज्य स्तरीय समारोह 15 अगस्त की प्रातः 9:00 बजे आयोजित किया जाएगा। इस भव्य समारोह में माननीय मुख्यमंत्री जी ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे।

ऐतिहासिक अवसर वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सभी शासकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य किया गया है। परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (पुरुष व महिला), नगर सेना, एनसीसी तथा बैंड प्लाटून की टुकड़ियाँ भाग लेंगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जी प्रदेश की जनता के नाम संदेश देंगे।

जिला और ब्लॉक स्तर पर मंत्रियों व स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को कमान

जिला मुख्यालयों में शासन द्वारा नामित मंत्रीगण ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। यहाँ स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जनपद पंचायत मुख्यालयों में जनपद पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिकाओं व पंचायतों में उनके अध्यक्ष व सरपंच तथा बड़े गांवों में ग्राम प्रमुख ध्वजारोहण करेंगे। इन स्थलों पर राष्ट्रीय गान, भाषण तथा देश की एकता एवं अखण्डता का संदेश प्रसारित किया जाएगा।

शहीदों के परिजनों का सम्मान

जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि जिला स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को विशेष व सम्मानपूर्वक रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी होने वाले सरकारी विज्ञापन स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और छत्तीसगढ़ के शहीदों को समर्पित होंगे। इन विज्ञापनों का प्रकाशन 15 अगस्त के दिन समाचार पत्रों में सुनिश्चित किया जाएगा।

रात्रि में शासकीय भवनों पर होगी विशेष रोशनी

स्वतंत्रता दिवस की रात्रि को प्रदेश के सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को आकर्षक रोशनी (लाइटिंग) से सजाया जाएगा, जिसका खर्च संबंधित विभाग स्वयं वहन करेंगे। आम नागरिकों और निजी संस्थाओं से भी अपने भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और रात्रि में रोशनी करने की अपील की जाएगी।

संस्थानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

शासकीय एवं शिक्षण संस्थाओं में प्रातः 9:00 बजे से पहले ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, प्रभात फेरी, सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेलकूद और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम संपन्न कराने होंगे। लाउडस्पीकर के प्रयोग हेतु जिला कलेक्टर से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। लाउडस्पीकर पर केवल मर्यादित और देशभक्ति से ओतप्रोत गीत ही बजाए जा सकेंगे।

एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

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विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा  बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।

राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।

राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।

अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

डिजिटल इंडिया के तहत महाराष्ट्र विधानसभा में जल्द लागू होगी राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA)

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वन नेशन, वन एप्लिकेशन" के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र विधानमंडल ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। यह पहल डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर की विधानसभाओं और विधान परिषदों को पूरी तरह डिजिटल एवं पेपरलेस बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

इस संबंध में 16 जुलाई 2026 को विधान भवन, मुंबई में भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग तथा महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय के बीच NeVA परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव एवं NeVA मिशन लीडर डॉ. सत्य प्रकाश, महाराष्ट्र विधानमंडल की ओर से सचिव-1 जितेंद्र भोले तथा सचिव-4 सुदर्शन साठे उपस्थित रहे। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग की सचिव  सुप्रिया धिवरे, विधान परिषद सभापति के निजी सचिव पंडित खेडकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

जल्द होगा त्रिपक्षीय समझौता (MoU)

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय, महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय और महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग के बीच जल्द से जल्द समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएं, ताकि राज्य में NeVA परियोजना का शीघ्र क्रियान्वयन शुरू किया जा सके।

बैठक में हुई चर्चा से स्पष्ट हुआ कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर तथा महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे के मार्गदर्शन में राज्य सरकार और विधानमंडल एक पेपरलेस, पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित विधानमंडल स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक के दौरान NeVA परियोजना के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। इसमें सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली, तकनीकी अवसंरचना, संस्थागत तैयारियां, वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण, कार्यान्वयन की समय-सीमा तथा विभिन्न एजेंसियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श हुआ।

NeVA मिशन लीडर डॉ. सत्य प्रकाश ने परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी और वित्तीय प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। बैठक के अंत में महाराष्ट्र विधानमंडल ने MoU पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की।

क्या है राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA)?

राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक मिशन मोड परियोजना है, जिसे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य देश के सभी 37 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं एवं विधान परिषदों को एकीकृत डिजिटल मंच पर लाकर उनकी कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल बनाना है।

करीब 673.94 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से विधायक और विधान परिषद सदस्य अपने सभी विधायी कार्यों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संचालित कर सकेंगे। इससे कागज की खपत कम होगी तथा पारदर्शिता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

महाराष्ट्र में लगभग 48 करोड़ रुपये की परियोजना

महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद (मुंबई एवं नागपुर स्थित परिसरों सहित) में NeVA लागू करने की अनुमानित लागत लगभग 48 करोड़ रुपये है।

परियोजना लागू होने के बाद जनप्रतिनिधियों को अपने विधायी दायित्वों के निर्वहन में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही नागरिकों को भी विधानसभा एवं विधान परिषद की कार्यवाही, दस्तावेजों और विधायी गतिविधियों तक अधिक सरल और पारदर्शी पहुंच मिलेगी, जिससे जनभागीदारी और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

देशभर में तेजी से बढ़ रहा NeVA

अब तक देश के 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विधानमंडलों ने संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि 21 विधानमंडल पूरी तरह डिजिटल सदनों में परिवर्तित हो चुके हैं।

महाराष्ट्र विधानमंडल द्वारा NeVA को अपनाने का निर्णय देश में डिजिटल विधायी व्यवस्था के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत की डिजिटल शासन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।

नई दिल्ली में राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (NCRBC) 2026 का शुभारंभ

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (National Conference on Responsible Business Conduct - NCRBC) 2026 के चौथे संस्करण का शुभारंभ नई दिल्ली में हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का विषय "विकसित भारत के लिए ESG-आधारित परिवर्तन (ESG-led Transformation for Viksit Bharat)" रखा गया है। सम्मेलन का आयोजन भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (SBE) द्वारा किया गया है। IICA, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।

उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत की आधारशिला : नितिन गुप्ता

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण (Responsible Business Conduct) विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने, प्रतिस्पर्धी उद्योगों, विश्वसनीय बाजारों, समावेशी विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत ने सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब इन सूचनाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और निर्णय लेने में उपयोगिता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने जोर दिया कि सस्टेनेबिलिटी संबंधी जानकारी प्रासंगिक, तुलनीय, साक्ष्य-आधारित और सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

गुप्ता ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग में भी वही अनुशासन और कठोरता अपनाई जानी चाहिए जो वित्तीय रिपोर्टिंग और ऑडिट में अपनाई जाती है। उन्होंने दस्तावेजीकरण, ट्रेसबिलिटी, आंतरिक नियंत्रण, साक्ष्य संरक्षण, पेशेवर जांच और स्वतंत्र सत्यापन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि विशेषकर एमएसएमई (MSMEs) और आपूर्ति श्रृंखलाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से व्यावहारिक और संतुलित सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

ESG को आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा : ज्ञानेश्वर कुमार सिंह

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए ESG (पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन) को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण भारत की सांस्कृतिक परंपरा में निहित है। उन्होंने वर्ष 2009 में जारी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) संबंधी स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों से लेकर 2021 में लागू बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) ढांचे तक की यात्रा का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166(2) में हितधारकों के हितों को प्राथमिकता देने का सिद्धांत पहले ही शामिल कर लिया गया था, जो भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।

सिंह ने कहा कि भारत अब "ESG 1.0" से "ESG 2.0" की ओर बढ़ रहा है, जहां ESG केवल अनुपालन नहीं बल्कि दीर्घकालिक व्यवसायिक मूल्य, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत मजबूती का आधार बन चुका है।

उन्होंने बोर्ड स्तर पर ESG को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने, ग्रीनवॉशिंग रोकने के लिए सस्टेनेबिलिटी डेटा के कानूनी ढांचे को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया।

व्यवसायिक रणनीति में शामिल हों बाल अधिकार : यूनिसेफ

यूनिसेफ इंडिया के उप-प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा कि बाल अधिकारों को केवल परोपकारी गतिविधि नहीं बल्कि कंपनियों की मुख्य व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 40 करोड़ से अधिक बच्चे भविष्य के कार्यबल और उपभोक्ता हैं।

उन्होंने असम के एक चाय बागान का उदाहरण देते हुए बताया कि मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर क्रेच और जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला जैसी नीतियों से बच्चों के कल्याण के साथ-साथ कर्मचारियों की स्थिरता भी बढ़ती है।

भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का "रॉकेट शिप" : हेलन ब्रांड

ACCA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलन ब्रांड ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए भारत की तेज आर्थिक प्रगति की सराहना की और कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था "चंद्रमा की ओर बढ़ते रॉकेट शिप" की तरह तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने ACCA की ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर के वित्तीय पेशेवर अब ऐसे संगठनों में काम करना चाहते हैं जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालते हों तथा मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हों।

सतत विकास केवल अनुपालन नहीं, विकास की आधारशिला : प्रो. गरिमा दाधीच

स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रो. गरिमा दाधीच ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को केवल अनुपालन नहीं बल्कि विकास की आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सम्मेलन के तीन प्रमुख सिद्धांत बताए—

  • पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी

  • ऋग्वेद का संदेश "संगच्छध्वं संवदध्वं"

  • भारत के G20 मंत्र "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के अनुरूप विकास

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में हरित विकास, जलवायु परिवर्तन और सतत अवसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

उच्चस्तरीय पैनल में ESG पर व्यापक चर्चा

उद्घाटन सत्र के बाद "ESG, गवर्नेंस और बोर्ड-स्तरीय डिस्क्लोजर" विषय पर उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित हुई।

SEBI के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि भारत को वैश्विक मानकों की जल्दबाजी में नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी विकास आवश्यकताओं के अनुरूप ESG का मार्ग तय करना चाहिए।

ONGC के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि कंपनियों के इरादों और महत्वाकांक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भरोसा और नीयत ही सुशासन की असली पहचान है।

CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभ घोष ने कहा कि ESG को अक्सर बोझ समझा जाता है, जबकि भारत की हरित अर्थव्यवस्था में लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश अवसर मौजूद है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के वरिष्ठ सलाहकार शैलेश पाठक ने कहा कि पूंजी वहीं टिकती है जहां भरोसा होता है। उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज को सामाजिक उद्यमों और निवेशकों के बीच एक मजबूत सेतु बताया।

किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जॉर्ज वर्गीज ने कहा कि कड़े उत्सर्जन मानकों ने उनकी कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए अवसर खोले।

आईसीएआई (ICAI) के सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड के अध्यक्ष सीए प्रमोद जैन ने कहा कि भारत ESG आश्वासन को अनिवार्य बनाने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो गया है, जिससे बोर्ड स्तर की रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता वित्तीय विवरणों के समान हो गई है।

दूसरे दिन होंगे कई महत्वपूर्ण सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों में ESG के प्रभावी क्रियान्वयन, जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला, MSMEs में ESG को मुख्यधारा में लाने, BRSR से आगे सेक्टर आधारित ESG ढांचे तथा पर्यावरणीय मानकों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय चर्चा होगी।

यह सम्मेलन यूनिसेफ, पार्टनर्स इन चेंज, ACCA, ICAI, GAIN, UN Women, CEEW, WRI India और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित, समावेशी, टिकाऊ और नैतिक भारत के निर्माण में उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण को केंद्रीय भूमिका प्रदान करना है।

कोरोना की फिर दस्तक: आंध्र प्रदेश में 20 दिनों में 12 नए मामले, 4 मरीजों की मौत के बाद अलर्ट

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 अमरावती : आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामलों में अचानक आई तेजी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में अलर्ट जारी कर दिया है। पिछले करीब 20 दिनों के भीतर राज्य में 12 नए संक्रमित मरीज मिले हैं, जबकि संक्रमण की वजह से 4 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जान गंवाने वाले चारों मरीज पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों (को-मॉर्बिडिटीज) से पीड़ित थे।


26 जून को सामने आया था साल का पहला मामला

राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त जी. वीरपांडियन के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2026 का पहला कोविड मामला बीती 26 जून को कडप्पा जिले में दर्ज किया गया था। इसके बाद 1 जुलाई से 16 जुलाई के बीच 11 और लोग संक्रमित पाए गए। विभाग द्वारा की गई कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में सामने आया है कि इनमें से दो लोग पहले से संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आने के कारण वायरस की चपेट में आए।

कडप्पा और काकीनाडा में हुईं मौतें, RIMS में विशेष वार्ड तैयार

स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, मृतकों में से तीन कडप्पा जिले के और एक काकीनाडा के निवासी थे। लगातार बढ़ते मामलों और मौतों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। एहतियात के तौर पर कडप्पा स्थित रिम्स (RIMS) अस्पताल में एक विशेष कोविड वार्ड सक्रिय कर दिया गया है, जहाँ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

स्वास्थ्य विभाग की अपील: घबराएं नहीं, सावधानी बरतें

स्वास्थ्य आयुक्त जी. वीरपांडियन ने जनता से अपील की है कि इस स्थिति से घबराने या पैनिक होने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नागरिक पूरी सावधानी बरतें और सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसे कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपनी जांच करवाएं।

निश्चय कार्यक्रम से आत्मनिर्भर बन रहीं महिला बंदी, रायपुर सेंट्रल जेल में तैयार हो रहा स्वादिष्ट अचार

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 रायपुर : केंद्रीय जेल रायपुर में महिला बंदियों के सर्वांगीण सुधार और समाज की मुख्यधारा में उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे जेल के भीतर ही उनके रोजगार की राह आसान हुई है।


60 महिला बंदियों को मिला अचार और मसाला निर्माण का प्रशिक्षण

केन्द्रीय जेल रायपुर में विभिन्न अपराधों के तहत बंद 60 महिला बंदियों को बेसिक ऑफ पिकल (अचार) एवं मसाला निर्माण के व्यावसायिक उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को स्वयं की व्यावसायिक इकाई स्थापित करने के योग्य बनाना है।


प्रशिक्षण के दौरान इन बंदियों को खाद्य उत्पादों के निर्माण और उनकी उत्तम गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग एवं सुरक्षित भंडारण से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में ही नियमित रूप से अचार का निर्माण शुरू कर दिया है।

आस्था गृह उद्योग के जरिए मिल रहा बाजार, आत्मनिर्भर बन रहीं बंदी

महिला बंदियों द्वारा जेल के भीतर पूरी स्वच्छता के साथ आम, नींबू, गाजर और लहसुन जैसी विभिन्न वैरायटियों के स्वादिष्ट और हाइजीनिक अचार तैयार किए जा रहे हैं। इन गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था की गई है। तैयार उत्पादों को केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था मुंगोडी सेंटर (आस्था गृह उद्योग स्टॉल) और जेल कैंटीन के माध्यम से आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे इन महिला बंदियों के खातों में जमा किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

जेल सकारात्मक परिवर्तन का केंद्र- जेल अधीक्षक

इस सराहनीय पहल को लेकर केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी एक केंद्र है। जेल महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में जेलों में चलाए जा रहे निश्चय कार्यक्रम के माध्यम से महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं। यह कौशल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीने और आजीविका अर्जित करने में सहायक सिद्ध होगा। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंदियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे।

CG NEWS : रिश्तों को तार-तार करने वाली करतूत: कलयुगी पिता ने 7 वर्षीय मासूम बेटी से किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ स्मृति नगर चौकी क्षेत्र में एक कलयुगी पिता ने अपनी ही 7 वर्षीय मासूम बेटी के साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है। 


इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है, जिसमें आरोपी के सगे भाई—जो पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) हैं—पर पहली बार हुई वारदात को रफा-दफा कर आरोपी को बचाने का गंभीर आरोप लगा है।

एएसआई देवर ने दबाया था मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता ने पहली बार मार्च महीने में अपनी मासूम बेटी के साथ गलत हरकत की थी। डरी-सहमी बच्ची ने तुरंत अपनी मां को आपबीती सुनाई, जिसके बाद मां ने इस घिनौनी करतूत की जानकारी सबसे पहले अपने देवर (जो पुलिस में एएसआई है) को दी। लेकिन पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय, एएसआई ने अपने भाई का बचाव करते हुए पारिवारिक दबाव बनाया और मामले को शांत कराकर दबा दिया।

सदमे में थी मासूम, मां ने हिम्मत जुटाकर दर्ज कराई FIR

इस खौफनाक वारदात के बाद से मासूम बच्ची गहरे सदमे में थी। वह जब भी अपने पिता को देखती, डर के मारे अपनी मां से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगती थी। बच्ची की इस मानसिक स्थिति को देख आखिरकार मां ने हिम्मत जुटाई और 15 जुलाई को खुद थाने पहुंचकर आरोपी पति के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई।

आरोपी भेजा गया जेल

शिकायत मिलते ही स्मृति नगर चौकी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से गुरुवार को उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

कचना धुरवा मंदिर – आस्था, इतिहास और वीरता का अद्भुत संगम

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कचना धुरवा मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का एक अत्यंत प्रसिद्ध, ऐतिहासिक और पूजनीय देवस्थल है। यह मंदिर रायपुर–गरियाबंद राष्ट्रीय मार्ग पर बारूका (छुरा प्रवेश मार्ग) के समीप मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोकगाथाओं, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी विशेष पहचान रखता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं और अपनी मनोकामनाएँ लेकर कचना धुरवा देव के चरणों में शीश नवाते हैं।

कचना धुरवा – आदिवासी समाज के आराध्य देव

कचना धुरवा को आदिवासी समाज एवं स्थानीय ग्रामीण अपने इष्टदेव, वन देवता और रक्षक देव के रूप में पूजते हैं। सदियों से यह मान्यता चली आ रही है कि इस क्षेत्र के घने जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों से यात्रा करने वाले लोग सबसे पहले कचना धुरवा मंदिर में माथा टेककर सुरक्षित यात्रा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कचना धुरवा देव की पूजा करता है, उसकी यात्रा सफल होती है तथा जीवन की अनेक बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इसी आस्था के कारण आज भी राहगीर और वाहन चालक यहाँ रुककर पूजा-अर्चना करते हैं।

मंदिर परिसर में सफेद घोड़े पर सवार वीर राजा धुरवा की भव्य प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा उनके शौर्य, साहस, न्यायप्रियता और जनकल्याणकारी व्यक्तित्व का प्रतीक मानी जाती है। दूर से ही यह प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है और मंदिर की विशेष पहचान बन चुकी है।

अमर प्रेम और वीरता की लोकगाथा

कचना धुरवा मंदिर का इतिहास केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमर प्रेम, त्याग और अदम्य वीरता की लोककथा से भी जुड़ा हुआ है।

लोकमान्यताओं के अनुसार बिंद्रानवागढ़ के वीर राजकुमार धुरवा अपनी वीरता और पराक्रम के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। कहा जाता है कि उनके पिता की हत्या शत्रु राजा द्वारा कर दी गई थी। अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए राजकुमार धुरवा ने दुश्मन राजा के विरुद्ध लगातार संघर्ष किया।

कहा जाता है कि उन्होंने अपने शत्रु से 46 बार युद्ध किया और हर बार असाधारण साहस का परिचय दिया। उनकी वीरता की चर्चा पूरे अंचल में होने लगी। किंतु जब युद्ध में विजय प्राप्त करना कठिन हो गया, तब शत्रु राजा ने छल का सहारा लिया।

लोककथा के अनुसार अंतिम युद्ध के दौरान राजकुमार धुरवा अपने सफेद घोड़े पर सवार होकर नदी पार कर रहे थे। उसी समय उनके घोड़े का एक पैर जल (नदी) में तथा दूसरा पैर थल (भूमि) पर था। इसी अवसर का लाभ उठाकर शत्रु ने धोखे से उन पर प्रहार कर दिया। इस विश्वासघाती हमले में राजकुमार धुरवा वीरगति को प्राप्त हुए।

उनके बलिदान से पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। लोगों ने उनकी वीरता, न्यायप्रियता और जनसेवा को अमर बनाने के लिए उन्हें देवतुल्य मानकर पूजा आरंभ कर दी। समय के साथ विभिन्न स्थानों पर उनके स्मृति-स्थल और मंदिर स्थापित किए गए, जिनमें गरियाबंद का कचना धुरवा मंदिर सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध माना जाता है।

राजकुमारी कचना और अमर प्रेम की कथा

स्थानीय लोककथाओं में राजकुमार धुरवा के साथ राजकुमारी कचना का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि दोनों का प्रेम त्याग, निष्ठा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। धुरवा की वीरगति के बाद राजकुमारी कचना ने भी अपने प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जिसे आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

इसी कारण इस देवस्थल को "कचना धुरवा" के नाम से जाना जाता है। यह स्थान प्रेम, विश्वास, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

अखंड ज्योति एवं नवरात्रि का भव्य मेला

कचना धुरवा मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ का वातावरण अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक हो जाता है।

इन पावन दिनों में मंदिर परिसर में अखंड ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक माता और कचना धुरवा देव की आराधना करते हैं। मंदिर परिसर दीपों की रोशनी, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से गूंज उठता है।

नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर परिसर में नारियल बाँधते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

मंदिर परिसर में स्थित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर

कचना धुरवा मंदिर परिसर केवल एक देवस्थल नहीं, बल्कि अनेक देवी-देवताओं की आराधना का प्रमुख केंद्र भी है। यहाँ श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर कई देवस्थलों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

मुख्य मंदिर के अतिरिक्त परिसर में निम्नलिखित देवस्थल स्थित हैं—

  • ग्राम देवी रूपई माता मंदिर

  • बंजारी माता मंदिर

  • सोनई माता मंदिर

इन सभी देवी-देवताओं की पूजा स्थानीय ग्रामीण एवं श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।

लोक आस्था और मान्यताएँ

कचना धुरवा मंदिर के संबंध में अनेक लोकमान्यताएँ प्रचलित हैं। लोगों का विश्वास है कि—

  • सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

  • यात्रा प्रारंभ करने से पहले यहाँ दर्शन करने से यात्रा सुरक्षित रहती है।

  • मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु नारियल, ध्वज और प्रसाद अर्पित करते हैं।

  • संकट और कठिनाइयों से मुक्ति के लिए लोग विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

  • यह स्थान वन, प्रकृति और मानव के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक माना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य

मंदिर चारों ओर से हरियाली, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है। शांत वातावरण, शुद्ध हवा और धार्मिक आस्था का संगम इस स्थान को और भी आकर्षक बनाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि प्रकृति की गोद में आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं।

सांस्कृतिक महत्व

कचना धुरवा मंदिर आदिवासी संस्कृति, लोकपरंपरा और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहाँ आयोजित धार्मिक अनुष्ठान, लोकगीत, लोकनृत्य और मेले इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को वीरता, त्याग, प्रेम और लोकआस्था की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

कचना धुरवा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वीरता, प्रेम, त्याग, लोकविश्वास और आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ की ऐतिहासिक लोकगाथाएँ, सफेद घोड़े पर विराजमान वीर धुरवा की प्रतिमा, नवरात्रि का विशाल मेला, अखंड ज्योति, प्राकृतिक वातावरण और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण देवस्थलों में शामिल करती हैं।

जो भी श्रद्धालु इस पवित्र धाम में श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुँचता है, वह आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और कचना धुरवा देव का आशीर्वाद लेकर लौटता है। यही कारण है कि गरियाबंद जिले का यह पावन देवस्थल आज भी लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

महादेव बेटिंग ऐप केस: टीवी होस्ट शेफाली बग्गा से ED की लगातार दूसरे दिन पूछताछ

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 रायपुर : करीब छह हजार करोड़ रुपये के 'महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। ED की टीम टीवी होस्ट शेफाली बग्गा से रायपुर स्थित जोनल कार्यालय में लगातार दूसरे दिन पूछताछ कर रही है। इससे पहले गुरुवार को भी उनसे करीब पांच से छह घंटे तक सघन सवाल-जवाब किए गए थे। शुक्रवार को उन्हें दोबारा कार्यालय बुलाकर कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।


वित्तीय लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों की जांच

ED के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा शेफाली बग्गा के वित्तीय लेन-देन, ऑनलाइन बेटिंग ऐप के प्रचार-प्रसार, डिजिटल गतिविधियों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके टेलीग्राम चैनल से जुड़े सवाल किए जा रहे हैं।

जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों में शेफाली बग्गा की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें समन जारी किया गया था। एजेंसी को कुछ प्रमोशनल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल सामग्री मिली है, जिनमें कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग ऐप का प्रचार किया गया है। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस सिंडिकेट से उनका जुड़ाव किस स्तर पर था।

टेलीग्राम चैनल और विदेशी नेटवर्क पर नजर

सूत्रों का कहना है कि ED शेफाली बग्गा के एक टेलीग्राम चैनल की विशेष रूप से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस चैनल के माध्यम से ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े प्रमोशनल कंटेंट, बेटिंग टिप्स या अन्य संदिग्ध सामग्री तो साझा नहीं की जाती थी। इसके अलावा उनके मोबाइल, डिजिटल कम्युनिकेशन और बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है।

हवाला ऑपरेटर से संबंधों की पड़ताल

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू महादेव नेटवर्क से जुड़े खंजन जगदीश कुमार ठक्कर से शेफाली बग्गा के कथित संबंध हैं। ED का दावा है कि ठक्कर हवाला नेटवर्क का प्रमुख संचालक रहा है और बेटिंग कारोबार के वित्तीय प्रबंधन को देखता था। एजेंसी दोनों के बीच संभावित संपर्क, लेन-देन और विदेशी नेटवर्क से जुड़े लिंक की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही दुबई और लंदन से संचालित इस प्लेटफॉर्म के प्रचार में उनकी भूमिका और विदेशी ऑपरेटरों के साथ आर्थिक संबंधों की भी जांच जारी है।

मामले में बढ़ी सियासी तपिश

महादेव बेटिंग ऐप मामले में हाल के दिनों में जांच की रफ्तार काफी तेज हुई है। दिल्ली में भाजपा नेता विकास गर्ग के खिलाफ ED की कार्रवाई और अब शेफाली बग्गा से पूछताछ को इस मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है।

दूसरी ओर, मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आ चुकी है। इससे पहले उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन प्रत्यर्पण की तकनीकी जटिलताओं के कारण उसे भारत नहीं लाया जा सका था। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा नेता पर हुई कार्रवाई के बाद इस मामले में सत्ताधारी दल की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले दुबई के माध्यम से कथित रूप से भेजे गए 502 करोड़ रुपये के मामले पर भी ED की पैनी नजर बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का कहर: स्कूलों में छुट्टी घोषित, DEO ने जारी किया आदेश

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 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार जारी भीषण बारिश के कारण राज्य के तमाम नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। मौसम के इस आक्रामक रुख और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है।


जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जारी किया आधिकारिक आदेश

बिलासपुर में लगातार बिगड़ते मौसम और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले के अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) और अनुदान प्राप्त स्कूलों में तत्काल प्रभाव से अवकाश घोषित कर दिया गया है। प्रशासन ने यह निर्णय बच्चों को किसी भी संभावित खतरे या असुविधा से बचाने के लिए लिया है।


नदी-नाले उफान पर, प्रशासन अलर्ट मोड में

लगातार 48 घंटे से हो रही बारिश के चलते बिलासपुर सहित आसपास के जिलों में नदी और नाले डेंजर लेवल के करीब पहुंच चुके हैं। निचले इलाकों में पानी भरने की खबरें आ रही हैं। आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

प्रशासन ने आम नागरिकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को उफनते नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।

छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता बढ़ी: कई जिलों में मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों के लिए जारी किया अलर्ट

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गुरुवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि सरगुजा संभाग के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है।


राजधानी रायपुर में भी बीते शाम हुई तेज बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अब और अधिक मजबूत हो गया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे रहा है।

अगले 72 घंटे छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने इस मजबूत सिस्टम और सक्रिय मानसूनी द्रोणिका (Trough) के प्रभाव से आगामी तीन दिनों तक पूरे छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां काफी तेज रहेंगी।

इस दौरान प्रदेश के अधिकांश जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही विभाग ने कई क्षेत्रों के लिए गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का भी अलर्ट जारी किया है और लोगों को खराब मौसम में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

Iran US Conflict : लगातार छठे दिन अमेरिकी मिसाइलों ने मचाई तबाही; ब्रिज, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

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 Iran US Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। अमेरिकी वायुसेना ने लगातार छठे दिन ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई में ईरान के पुलों, रेलवे नेटवर्क और हवाई अड्डों को भारी नुकसान पहुँचा है। हमलों के कारण दक्षिणी ईरान के एक बड़े हिस्से में बिजली गुल हो गई है।


दूसरी ओर, तनाव की यह आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल गई है। बहरीन में अचानक एयर रेड (हवाई हमले) के सायरन बजने से हड़कंप मच गया। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है।

दक्षिणी ईरान में ब्लैकआउट, बुनियादी ढांचा तबाह

ईरानी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हमलों ने बंदर अब्बास और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों की मुख्य बिजली लाइनों (ग्रिड) को ध्वस्त कर दिया। इसके कारण नोबोनयाद-1 सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि कुछ प्रभावित इलाकों में बिजली की आपातकालीन आपूर्ति बहाल कर दी गई है। ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीक आवर्स के दौरान बिजली का कम से कम उपयोग करें ताकि ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

रणनीतिक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर लगातार दूसरे दिन बमबारी

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की निगरानी करने वाले सिरिक शहर पर अमेरिकी युद्धक विमानों ने लगातार दूसरे दिन भारी बमबारी की। इसके अलावा बुशेहर और खामिर बंदरगाह के पास स्थित दो रणनीतिक पुलों को भी मिसाइल हमले में उड़ा दिया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में दो नागरिकों की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

बहरीन में हड़कंप: अमेरिकी एयरबेस पर ईरान का दावा

इस बीच, बहरीन के आसमान में हवाई हमले के सायरन गूंजने से दहशत फैल गई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी है।

ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, ईरानी सेना ने बहरीन के साखिर एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी हेलीकॉप्टरों और जासूसी विमानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

एयरपोर्ट और रेलवे नेटवर्क को बनाया निशाना

बंदर अब्बास: यहाँ के अल्लाहो अकबर इलाके में हुए रिहायशी हमले में एक व्यक्ति की मौत और आठ लोगों के घायल होने की खबर है। इसके अलावा शहर को जोड़ने वाले रेलवे ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है।

इरानशहर एयरपोर्ट: अमेरिकी मिसाइलों ने इरानशहर एयरपोर्ट के रनवे और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाया, जिससे हवाई अड्डे का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि हमलों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ेगा।

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर : आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

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