Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा

No comments Document Thumbnail

इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पांडवानी ने बांधा समां

रायुपर- छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पांडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।


छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी

इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पांडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।

तीजन बाई के योगदान को याद किया

इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पांडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।


 सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी

तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी

धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।


देश की लोक परंपराओं का साझा मंच

आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

https://www.facebook.com/share/v/1JPAvW4Gw3/

छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल

No comments Document Thumbnail

NDMA ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स

रायपुर- राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।

​त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी (SOP) को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

​अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर

कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।

​समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल (DRM), स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। ​प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

No comments Document Thumbnail

बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।

बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक  की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं  शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। 

इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा किरण  कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

विशेष लेख-छत्तीसगढ़ का लोक-पर्व: हरेली तिहार

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ी संस्कृति में लोक-त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति, कृषि और जीव-जंतुओं के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इन्हीं त्योहारों में सबसे पहला और प्रमुख त्यौहार है — हरेली तिहार। सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन, कृषि परंपरा और पर्यावरण-प्रेम का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी प्रकृति नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएँ भी हैं।

छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में पर्व और त्यौहारों की बहुलता है। प्रत्येक माह कोई न कोई त्यौहार यहाँ लोक मानस को अपने रंग में रंग लेता है। ये त्यौहार जहॉं लोक जीवन में हंसी-खुशी के अवसर उपलब्ध कराती हैं, वहीं खेल और मनोरंजन के अनुकूल साबित होते हैं। प्रकति का यह हरापन छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में भी पूरी समाहित है। हरेली, भोजली, जँवारा हो या बसंत पंचमी सभी पर्वों में प्रकृति का मनोरम और इसका अप्रतिम सौंदर्य झलकता है। इस रूप-सौंदर्य में जीवन की चारों अवस्थाओं का उल्लास और उत्साह विविध रंगों में बिखरा हुआ है।

शायद ‘हरेली’ का हरापन हमारी परंपराओं में हमारे संस्कारों में और हमारे लोक जीवन में प्राकृतिक हरीतिमा का ज्यादा एहसास कराता है। हरेली का यह हरापन सबके जीवन में बिखरे और निखरे यही कामना है। यह भी कामना है कि भौतिकता की चकाचौंध से परे हमारी खेल परंपराएँ जीवित रहे ताकि माटी से जुड़े ग्रामीणजन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से सुदृढ़ रहें। माटी की सोंधी-सोंधी महक हमारे लोक गीतो से आती रहे और खेल परंपरा की यह अविरल धारा निरंतर गतिमान रहे।

हरेली शब्द का अर्थ और महत्व

'हरेली' शब्द 'हरियाली' से बना है। सावन के महीने में जब चारों तरफ़ खेतों और मैदानों में हरी-भरी फसलें और हरियाली लहलहाने लगती है, तब किसान इस पर्व को उल्लासपूर्वक मनाते हैं। इसे छत्तीसगढ़ का पहला तिहार माना जाता है, जहाँ से राज्य के प्रमुख लोक-पर्वों की श्रृंखला शुरू होती है।

कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा

हरेली का दिन मुख्य रूप से कृषकों और कृषि से जुड़े साधनों का धन्यवाद ज्ञापित करने का दिन है:

•कृषि यंत्रों की पूजा:-  हरेली की जड़ें छत्तीसगढ़ क्षेत्र की कृषि विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह एक उत्सव होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक भेंट भी है, लोगों के लिए प्रकृति, बारिश और अपने कृषि कार्य को सम्पन्न करने के बाद किसान अपने औजार, हल, फावड़ा, कुदाल, कुदाली, कुम्हड़ी, बिन्धना, बसुला, हथौड़ी, आरी,असिया, पैसुल, छूरा, खुर्पी आदि को धोकर स्वच्छ मिट्टी (मुरमी) का आसन से सजाकर किसान-किसानिन पूजा सामग्री रखकर धुले हुए चांवल आटे से हाथा लगाकर चन्दन, फूल, धुप-दीप व चीला रोटी से भोग लगाकर श्रीफल अर्पित करते हैं एवं भाव विभोर हो प्रार्थना करते हैं - ‘हे बलराम रूपी हल प्रचण्ड शक्ति के प्रतीक धारापति, आपने कंधा के रूप में माता को संवारा एवं सेवा करने में हमारी सहायता की कृषि कार्य बोनी ब्यासी रोपा के होते ही चहूओर हरियाली छाई इसके लिए कोटिशः धन्यवाद आपका कार्य सम्पन्न हुआ विश्राम करे। हमने आपको बड़ा कष्ट दिया, काम लिया, हमें क्षमा करें। आपकी दया हम पर सदैव बनी रहे, इसी प्रकार अन्य औजारों का कार्यानुसार निवेदन करते गेड़ी की पूजा कर शरीर के सामर्थ पैरो की रक्षा की कामना करते हैं।

•पशुधन का सत्कार: पशुधन किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में किसान मिश्रित कृषि प्रणाली अपनाते हैं, जिसमें फसल और पशुधन का संयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े-लिखे और अकुशल होने के कारण अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं।  बैल छत्तीसगढ़ कृषि की रीढ़ हैं। किसान, विशेषकर सीमांत और लघु किसान, जुताई, ढुलाई और उत्पादन और इनपुट दोनों के परिवहन के लिए बैलों पर निर्भर रहते हैं।

•खेती-किसानी के सच्चे साथी यानी गाय और बैलों की विशेष सेवा की जाती है। उन्हें नहला-धुलाकर आरती उतारी जाती है तथा 'गहूंता' (आटा, नमक और जड़ी-बूटी से बना पौष्टिक मिश्रण) खिलाया जाता है, ताकि वे रोगों से मुक्त रहें। जड़ी बुटियों से तैयार औषधि को गौठान में ले जाकर अन्डी एवं खम्हार के पत्तों में नमक, चावल या गेहूँ के गोला के साथ दवा डाल कर पशुओं को खिलाया जाता है। अरण्ड, खम्हार का पत्ता औषधि है, जो वायुजनित रोगों को दूर करता है। नमक उत्प्रेक्षण का कार्य करता है, चावल या गेहूँ के कारण दवा अधिक असरकारक बन जाती है। इससे पशु धन निरोग हो जाता है यह एक प्रकार टीकाकरण ही है।

परंपराएं एवं रीति-रिवाज

•गेड़ी चढ़ने का आनंद:- इस पर्व में गेंड़ी का काफी महत्व है बांस के मोटे डंडो एवं बांस के पहुये को विशेष विधि से कस कर बांधा जाता है। गेड़ी का उदारण हमें पुराणों में मिलता है। बलदाऊ-कृष्ण अपने सखाओं के साथ गेड़ी चढ़ा करते थे। कृष्ण लीला प्रसंग में इसका उदाहरण मिलता है तथा खेलों का आयोजन भी होते रहे हैं, जिसमें गेड़ी दौड़, पानी पिलाना, एक पैर में खड़े होना, एक पैर में कूदना आदि अनेक खेल का आयोजन प्राचीन काल से अब तक होते आ रहे हैं। बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी से भरे रास्तों पर चलने के साधन के रूप में शुरू हुई यह परंपरा आज एक मनोरंजक खेल बन चुकी है। 

•विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन:- हरेली में गाँव व शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता भी होती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली जुटती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता का आयोजन की जाती है। नारियल हारने और जीतने का यह सिलसिला देर रात तक चलता है। गाँव-गाँव में गेड़ी दौड़ का आयोजन होता है। कहीं खो-खो तो कहीं फुगड़ी, कहीं बिल्लस, कहीं अत्ती-पत्ती, डंडा पचरंगा खेल का आयोजन होते आ रहे हैं। गाँव का गौठान हो या स्कूल का मैदान, गाँव के बाहर सड़क हो या चौबट्टा लगता है सारे लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजे रहते हैं।

•टोटका और सुरक्षा का विधान:- मान्यतानुसार, इस दिन गाँव को बुरी नज़र और रोगों से बचाने के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर नीम की पत्तियाँ बांधी जाती हैं। लोहार द्वारा घरों के चौखट पर नीम की शाखाएं और लोहे की कीलें लगाई जाती हैं। स्थानीय मान्यता है कि इससे घर को बुरी शक्तियों और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यह प्रथा नीम के ज्ञात औषधीय गुणों और ग्रामीण स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक मान्यताओं में इसकी भूमिका से प्रेरित है।

•हरेली तिहार में बनाए जाने वाले ब्यंजन:- मुख्य रूप से गुड़ के चीला, अईरसा, चौसेला और बोबरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाए और बांटे जाते हैं। गुलगुला भजिया, गुड़हा चीला, सोहारी, बड़ा, ठेठरी, खुरमी और बोबरा जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों का भोग कृषि औजारों और गोधन को लगाया जाता है। इस दिन छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का विशेष आनंद लिया जाता है। 

सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश

हरेली तिहार केवल एक धार्मिक या लोक-अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव का प्रकृति के साथ अटूट संबंध दर्शाता है। यह पर्व सिखाता है कि जो प्रकृति और पशुधन हमें जीवन और भोजन देते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा परम कर्तव्य है।आज के समय में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर और 'छत्तीसगढ़िया क्रांति' के तहत पारंपरिक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को बढ़ावा देकर इस लोक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 11 अगस्त तक

No comments Document Thumbnail

रायपुर- संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा सत्र 2026-27 हेतु संचालित सभी 4 डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (1.Diploma Engg. & Arch, 2.CDDM/ID, 3.MOM/HMCT, 4.Diploma Engg. (Lateral Entry)  में अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन हेतु निर्धारित अंतिम तिथि को 11अगस्त 2026 को शाम 06  बजे तक बढ़ाया गया है।आई आई टी के परिणाम घोषित हो चुके हैं, इसलिए  ITI उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करने हेतु रजिस्ट्रेशन की अवधि बढ़ाई गई है।

अतिरिक्त  संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा नवा रायपुर अटल नगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में अभ्यर्थी  की रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि में ही परिवर्तन किया गया है। शेष कोर्स के लिए  प्रवेश प्रक्रिया की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार यथावत रहेंगे।

अतः डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी 11अगस्त 2026 को शाम 06  बजे तक अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन  की प्रक्रिया पूर्ण कर लें। इस हेतु अभ्यर्थी को वेबसाइट https://dte.cg.gov.in/#/ एवं https://cgdte.admissions.nic.in/ पर उपलब्ध कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग, की अधिसूचना क्रमांक/एफ-9-5/2023/तक.शि./42 अटल नगर, दिनांक 11 मई 2023 में प्रकाशित प्रवेश नियम के अनुसार अर्हता होना अनिवार्य है।

विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान-खेती किसानी को मिला नया संबल

No comments Document Thumbnail

 छगन लाल लोन्हारे- संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन ढाई साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा।

परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के गुड़ी में ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।

हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधि युक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत, लोहार व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद रहता था। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के खेल मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

हरेली तिहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं है यह समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम है। गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और कार्यक्रमों का आयोजन करते है। इस दिन परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ ही प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। 

डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: 20 दिन में फेफड़ों की 9 जटिल सर्जरियाँ, मरीजों को मिला नया जीवन

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग के डॉक्टरों की टीम ने महज 20 दिनों के भीतर 9 लोबेक्टॉमी (Lobectomy) सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। पिछले दो महीनों के आंकड़ों को जोड़ें तो यह संख्या कुल 13 हो चुकी है।


अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में लोबेक्टॉमी सर्जरी करना छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान की तुलना में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।

आपातकालीन स्थिति में मिली नई जिंदगी

हाल ही में की गई सर्जरियों में दो ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। डॉक्टरों ने तुरंत आपातकालीन सर्जरी कर मरीजों की जान बचाई।

क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी?

विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मानव शरीर के दाएं फेफड़े में तीन और बाएं फेफड़े में दो लोब (हिस्से) होते हैं। जब एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर जैसी बीमारियां फेफड़े के किसी एक हिस्से तक सीमित रहती हैं, तो सर्जरी के जरिए केवल उसी बीमारीग्रस्त लोब को बाहर निकाल दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को लोबेक्टॉमी कहते हैं।

आधुनिक 'लंग स्टेपलर' तकनीक से जोखिम कम
अम्बेडकर अस्पताल में इन सर्जरियों के लिए आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर का उपयोग किया जा रहा है। डॉ. साहू के अनुसार, इस तकनीक से सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं—विशेष रूप से Bronchopleural Fistula (फेफड़े और चेस्ट कैविटी के बीच रिसाव)—का खतरा न के बराबर रह जाता है। सर्जरी के बाद मरीज आमतौर पर 6 से 8 दिनों में डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट जाते हैं।

बीमारी के प्रमुख कारण

  • छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के संक्रमण और खराबी का मुख्य कारण टीबी का पुराना इतिहास और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है:
  • एस्परजिलोमा: यह Aspergillus niger नामक फंगस से होता है, जो ज्यादातर दाएं फेफड़े के ऊपरी लोब को प्रभावित करता है।
  • ब्रोन्किएक्टैसिस व लंग एब्सिस: टीबी या अन्य संक्रमण के बाद फेफड़ों में कैविटी बन जाती है, जिससे खांसी में खून आता है।
  • लंग कैंसर: शुरुआती चरण के कैंसर में लोबेक्टॉमी के जरिए ट्यूमर वाले हिस्से को हटाकर मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

पड़ोसी राज्यों से भी पहुँच रहे मरीज

अम्बेडकर अस्पताल का हार्ट-चेस्ट विभाग न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण बना हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष औसतन 15 से 20 लोबेक्टॉमी के अलावा डिकॉर्टिकेशन, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी (पूरा फेफड़ा निकालने की सर्जरी) जैसी जटिल प्रक्रियाएँ की जाती हैं।

मैट्रिमोनियल साइट के जरिए दोस्ती, शादी और नौकरी का झांसा देकर 13 लाख ऐंठे; आरोपी दंपती गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 बिलासपुर : ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट के जरिए महिलाओं को झांसा देकर लाखों रुपये और जेवर ठगने वाले एक दंपती को तोरवा पुलिस ने दिल्ली-हरियाणा सीमा से गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को अविवाहित बताकर महिलाओं से संपर्क करता था और बाद में शादी व नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी को अंजाम देता था।


मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि कोरबा निवासी एक पीड़िता ने 9 मार्च को तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के अनुसार, 'शादी डॉट कॉम' के माध्यम से उसकी पहचान आरोपी पवन कुमार यादव (34) से हुई थी। पवन ने खुद को कुंवारा बताकर पीड़िता को शादी का भरोसा दिलाया और शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर महिला से नगदी और सोने-चांदी के जेवर सहित कुल 12 से 13 लाख रुपये ऐंठ लिए।

फरार आरोपी पर था 5 हजार का इनाम

अपराध दर्ज होने के बाद आरोपी पवन यादव फरार हो गया। पुलिस ने पामगढ़ और सरकंडा स्थित उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन उसका मोबाइल लगातार बंद आ रहा था। आरोपी की लगातार फरारी को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा उस पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पत्नी के बैंक खाते से मिला हरियाणा का सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के मोबाइल नंबर और बैंक खातों का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि पवन के अधिकतर बैंक खाते बंद थे, लेकिन उसकी पत्नी नवीता यादव (30) के खाते में लेन-देन जारी था। बैंक ट्रांजेक्शन की लोकेशन ट्रेस करने पर बल्लभगढ़ (हरियाणा) से पैसे निकाले जाने की जानकारी मिली। तकनीकी साक्ष्यों और च्वाइस सेंटर से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने दबिश देकर दोनों पति-पत्नी को बल्लभगढ़ से धर दबोचा।

बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत कार्रवाई

तोरवा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों को बिलासपुर लाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब ठगी गई रकम व जेवरों की बरामदगी के साथ यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अन्य कितनी महिलाओं को अपना शिकार बनाया है।

उफनते नरहरा जलप्रपात में उतरे दो युवक, तेज बहाव में फंसे; लोगों ने सुरक्षित निकाला

No comments Document Thumbnail

 धमतरी : जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सभी नदी-नाले और पर्यटन स्थल उफान पर हैं। इसके बावजूद पर्यटक सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। सोमवार को प्रसिद्ध नरहरा जलप्रपात में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहाँ पानी के तेज बहाव में उतरने के कारण दो युवक बहने की कगार पर पहुँच गए। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बारिश के कारण नरहरा जलप्रपात में जलस्तर और बहाव दोनों काफी तेज थे। प्रशासन द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद दोनों युवक गहरे पानी में उतर गए। अचानक पानी के तेज थपेड़ों में फंसने के बाद दोनों घबरा गए और बहने से बचने के लिए वहाँ लगी सुरक्षा रेलिंग को कसकर पकड़ लिया। युवकों को संकट में देखकर आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत हाथ बढ़ाकर रस्सी व अन्य साधनों की मदद से उन्हें बाहर निकाला।

पहले भी हो चुके हैं दर्दनाक हादसे

उल्लेखनीय है कि बारिश के दिनों में जिले के जलप्रपातों और नदी-नालों में जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। कुछ ही दिनों पूर्व तेज बहाव की चपेट में आने से दो लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद पर्यटकों द्वारा उफनते पानी में उतरने और सेल्फी लेने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों और लोगों की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़: मैनेजर और महिला दलाल समेत 9 गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 भिलाईनगर। जुनवानी स्थित 'ली वेलनेस स्पा सेंटर' में स्पा की आड़ में संचालित किए जा रहे अनैतिक देह व्यापार का पुलिस ने पर्दाफाश किया है।


स्मृति नगर पुलिस की विशेष टीम ने मुखबिर की सूचना पर रेड मारकर स्पा सेंटर के मैनेजर तनय सोनी और महिला दलाल हेमा सिंह उर्फ प्रीत समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने मौके से ग्राहकों और दलालों के कब्जे से करीब 4 लाख रुपये मूल्य के 19 मोबाइल फोन, नगदी और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। सभी आरोपियों के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सावन का दूसरा सोमवार : शिवालयों में दर्शन के लिए लगा भक्तों का तांता, बोल बम के जयकारों के साथ पहुंचे कांवड़िए

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। सावन माह में पूरा छत्तीसगढ़ शिवमय हो चुका है। शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है और दूर-दूर से भक्तों व कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।


आज सावन महीने का दूसरा सोमवार है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

रायपुर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़

सावन के दूसरे सोमवार पर राजधानी रायपुर के शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी हैं। पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान है। श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग

आज सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ संयोग बना है। करीब 6 साल बाद सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

फणीकेश्वर नाथ मंदिर में भी गूंजे जयकारे

उधर, गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर स्थित ऐतिहासिक फणीकेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ा है। सुबह से ही श्रद्धालु जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद ले रहे हैं। मंदिरों के आसपास का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

80वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के मुख्य कार्यक्रम में करेंगे ध्वजारोहण

No comments Document Thumbnail

केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू बिलासपुर, उपमुख्यमंत्री अरूण साव दुर्ग और विजय शर्मा बस्तर में फहराएंगे ध्वज

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव जिला मुख्यालय में करेंगे ध्वजारोहण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आगामी 15 अगस्त, को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। वहीं मुख्यालय जिला बिलासपुर में केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, दुर्ग में उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बस्तर में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सरगुजा में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, महासमुंद में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा में वन मंत्री केदार कश्यप, कबीरधाम में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहपण करेंगे। इसी प्रकार रायगढ़ में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कांकेर में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, जशपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बालोद में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, बलौदाबाजार में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सांसद संतोष पांडेय ध्वजारोहण करेंगे।

इसी प्रकार कोंडागांव में सांसद भोजराज नाग, बलरामपुर में सांसद चिंतामणि महाराज, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद  राधेश्याम राठिया, गरियाबंद में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सक्ती में सांसद  कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद महेश कश्यप, सुकमा में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में राज्यसभा सांसद  लक्ष्मी वर्मा ध्वजारोहण करेंगे।

जिला कोरबा में विधायक अमर अग्रवाल, धमतरी में विधायक अजय चंद्राकर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विधायक धरमजीत सिंह, मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक पुन्नूलाल मोहले, कोरिया में विधायक भैय्या लाल राजवाड़े और नारायणपुर जिला मुख्यालय में विधायक लता उसेंडी स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण करेंगे। इस अवसर पर समस्त मुख्य अतिथि जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

आकाशीय बिजली गिरने से महिला की मौत, रिश्तेदार गंभीर रूप से झुलसा, इलाज जारी

No comments Document Thumbnail

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेलर बरभाठा में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। खेत से रोपा लगाकर घर लौट रहे दो ग्रामीणों पर गाज गिर गई, जिससे एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका रिश्तेदार गंभीर रूप से झुलस गया।


खेत से लौटते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सेलर बरभाठा निवासी हीराबाई धुरी और उनके रिश्तेदार सुग्रीव धुरी रविवार को खेत में धान का रोपा लगाने के बाद घर लौट रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश के बीच अचानक आकाशीय बिजली गिर गई और दोनों उसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तत्काल दोनों को इलाज के लिए बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) अस्पताल पहुंचाया गया।

डॉक्टरों ने महिला को किया मृत घोषित

सिम्स अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद हीराबाई धुरी को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हादसे में गंभीर रूप से झुलसे सुग्रीव धुरी की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।

पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की

घटना की सूचना मिलते ही सीपत थाना पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मर्ग कायम कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

गांव में पसरा मातम

खेत से काम कर लौट रहे ग्रामीणों के साथ हुए इस दुखद हादसे के बाद से सेलर बरभाठा गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम का माहौल है।

गरियाबंद: भूतेश्वरनाथ से लौट रही श्रद्धालुओं की बस पुल पर धंसी, एक राहगीर घायल

No comments Document Thumbnail

 गरियाबंद। जिले के मरौदा गांव स्थित प्रसिद्ध भूतेश्वरनाथ धाम से दर्शन कर लौट रही श्रद्धालुओं से भरी बस रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गई। भकुर्रा मार्ग स्थित पुल के पास सामने से आ रहे एक वाहन को साइड देने के प्रयास में बस का अगला पहिया पुल के किनारे मिट्टी में धंस गया। हादसे के दौरान सड़क किनारे चल रहा एक राहगीर बस की चपेट में आकर घायल हो गया, जिसे तत्काल डायल 112 की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


54 यात्री बाल-बाल बचे

बताया जा रहा है कि बस में रायपुर के 54 श्रद्धालु सवार थे। पहिया धंसने से बस का सामने का शीशा पूरी तरह टूट गया। हालांकि, गनीमत रही कि बस में सवार सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं।

सावन सोमवार के कारण लगा भारी जाम

हादसे के बाद भकुर्रा मार्ग पर दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। सावन माह के दूसरे सोमवार के अवसर पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम की ओर जा रहे थे, जिन्हें जाम के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थिति यह रही कि कई महिलाएं और यात्री घंटों सड़क किनारे बैठने को मजबूर दिखे।

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभाली। काफी मशक्कत के बाद बस को सुरक्षित निकालकर आवागमन बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

चीन में टाइफून ‘डॉल्फिन’ का खतरा, रेड अलर्ट जारी; कई उड़ानें रद्द, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

No comments Document Thumbnail

बीजिंग- चीन में शक्तिशाली टाइफून ‘डॉल्फिन’ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है और प्रभावित इलाकों में एहतियाती कदम तेज कर दिए गए हैं।


टाइफून के चलते कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका जताई गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने नागरिकों से समुद्र तटीय और निचले इलाकों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत और बचाव दलों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।

टाइफून के चलते परिवहन और दैनिक जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा एवं राहत उपाय किए जा रहे हैं।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.