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कोरबा में खनन माफिया पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, 14 वाहन और मशीनें जब्त

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कोरबा-छत्तीसगढ़ में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोरबा जिले में खनन माफिया पर शिकंजा कस दिया है। विशेष खनिज उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वॉड) की दो टीमों ने जिले के 15 संदिग्ध स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान अवैध खनन और परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे 14 वाहन और मशीनें जब्त की गईं।

अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान अवैध रूप से खनिजों के उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए चलाया गया। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित वाहनों को कब्जे में लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हानि रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। 

मुख्य बिंदु:

  • 15 संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी

  • 14 वाहन और मशीनें जब्त

  • खनन माफिया के खिलाफ सख्त अभियान

  • कानूनी कार्रवाई शुरू

  • प्रशासन ने आगे भी कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए 


इज़रायल का ईरान पर बड़ा पलटवार, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

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तेहरान/यरुशलम- मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इज़रायल ने सोमवार को ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इज़रायली सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा हाल ही में दागी गई मिसाइलों के जवाब में की गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान, इस्फहान, तबरीज़ और कराज समेत कई शहरों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। इज़रायल का दावा है कि हमलों का निशाना सैन्य ढांचे और मिसाइल लॉन्चिंग सुविधाएं थीं। 

वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इज़रायल ने आगे भी हमले जारी रखे तो उसका जवाब और अधिक कड़ा होगा। ईरानी अधिकारियों ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेहरान के आसपास का हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। कई पड़ोसी देशों ने भी सुरक्षा कारणों से अपने एयरस्पेस पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सैन्य टकराव पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर असर डाल सकता है।


राष्ट्रीय कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता के मस्कट ‘पहाड़ी मैना’ का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में 36वीं राष्ट्रीय सब जूनियर एवं जूनियर कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता के मस्कट ‘पहाड़ी मैना’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास का सशक्त आधार हैं। प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को नई प्रेरणा देगी और राज्य की खेल पहचान को और मजबूत बनाएगी।


उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कायाकिंग-केनोईंग एसोसिएशन द्वारा भारतीय कायाकिंग-केनोईंग संघ एवं छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के संयुक्त तत्वावधान में 36वीं राष्ट्रीय सब जूनियर एवं जूनियर कायाकिंग-केनोईंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 12 से 14 जून 2026 तक नवा रायपुर स्थित सेंध लेक में आयोजित होगी।

कायाकिंग-केनोईंग एक ओलम्पिक खेल है, जिसमें छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अनेक पदक अर्जित किए हैं। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी राज्य की राजधानी में होना प्रदेश के खेल इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, भारतीय कायाकिंग-केनोईंग महासंघ एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कायाकिंग-केनोईंग एसोसिएशन के सहसचिव प्रशांत सिंह रघुवंशी सहित छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

मछुआरा समाज के उत्थान के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार मछुआरा समाज के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र को आधार बनाकर प्रदेश में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुआरा संघ के विधानसभा पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह एवं समाजिक प्रगति चिंतन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए समाज हित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।उन्होंने मछुआरा कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय भरत लाल मटियारा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान समाज सदैव याद रखेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार किया है।

मुख्यमंत्री ने मत्स्य क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि हसदेव-बांगो जलाशय में 37 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क स्थापित किया जा रहा है। इससे मछली उत्पादन, प्रोसेसिंग, निर्यात और मत्स्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं दुधवा जलाशय में वैज्ञानिक पद्धति से तिलापिया और पंगास मछली का पालन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क दुर्घटना बीमा प्रदान किया जा रहा है। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले मत्स्य पालकों को प्रतिवर्ष राज्योत्सव में बिलासा देवी केंवट सम्मान से सम्मानित किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गंगरेल डूबान क्षेत्र समिति को ठेका पद्धति समाप्त कर पुनः मछली पालन की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि मछली पालन किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी व्यवसाय है और सरकार इसके विस्तार के लिए हर संभव सहयोग दे रही है।

उन्होंने सुशासन तिहार के अनुभव साझा करते हुए बताया कि अब तक 31 जिलों का दौरा कर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का निरीक्षण किया गया है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अंतिम व्यक्ति तक सभी योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की जल्द शुरुआत की भी घोषणा की, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मछुआरा समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है और प्रदेश में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मत्स्य पालकों के हितों की रक्षा और उनके आर्थिक विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी चेतावनी दी कि कार्य में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति ने समाज के लोगों से नशामुक्ति का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित होना होगा। उन्होंने आगामी जनगणना में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

कार्यक्रम को राष्ट्रीय मछुआरा संघ की अध्यक्ष गायत्री गायग्वाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक ललित चंद्राकर, महासचिव ओमप्रकाश धीवर, नंद कुमार सिंह धीवर सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह -ऐतिहासिक दस्तावेजों से होंगे नागरिक रूबरू

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महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय की आर्ट गैलरी में लगेगी दुर्लभ अभिलेखों की प्रदर्शनी, 9 जून को होगा विशेष व्याख्यान

रायपुर- संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह के अवसर पर 8 से 12 जून 2026 तक राजधानी रायपुर में विशेष प्रदर्शनी एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय स्थित आर्ट गैलरी में होगा, जहां आम नागरिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों को ऐतिहासिक अभिलेखों और दस्तावेजों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। प्रदर्शनी में नीति, नियम और शासन संबंधी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों के छायाचित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। इन अभिलेखों के माध्यम से प्रदेश और देश के प्रशासनिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण झलक देखने को मिलेगी। प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 5 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

इतिहास और स्मृति के संरक्षण पर होगा विशेष व्याख्यान

अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार सप्ताह के अंतर्गत 9 जून 2026 को विशेष व्याख्यान कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। न्याय के लिए अभिलेखागार, अधिकार, स्मृति और भविष्य विषय पर आयोजित इस व्याख्यान में अभिलेखों के महत्व, उनके संरक्षण और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली के विशेषज्ञ दीपक तथा भुवनेश्वर, (ओडिशा) के सत्यनारायण मिश्र विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार साझा करेंगे। दोनों विशेषज्ञ अभिलेखागारों की उपयोगिता, ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण की चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे।

शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी अवसर

आयोजकों के अनुसार यह प्रदर्शनी और व्याख्यान कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों तथा अभिलेख संरक्षण में रुचि रखने वाले नागरिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को अभिलेखागारों की भूमिका, ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।

आयोजन का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना

पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, रायपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा अभिलेखागारों के महत्व को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना है। नागरिक 8 से 12 जून तक आर्ट गैलरी, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर पहुंचकर इस विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।

उदयपुर और लखनपुर में 8 से 14 जून तक चलेगा पारंपरिक शिल्प एवं कला प्रशिक्षण शिविर

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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर सरगुजा संभाग में ‘आकार-2026’ का आयोजन

युवाओं को मिलेगा लोक कलाओं का प्रशिक्षण

रायपुर-  संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा “आकार-2026” पारंपरिक शिल्प एवं विविध कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 8 जून से 14 जून 2026 तक सरगुजा संभाग के उदयपुर और लखनपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रदेश की लोक कला परंपराओं से जोड़ना तथा उनमें पारंपरिक शिल्प और कला के प्रति रुचि विकसित करना है।

14 पारंपरिक कला विधाओं का दिया जाएगा प्रशिक्षण 

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को नृत्य, नाटक, वाद्ययंत्र, चित्रकला, क्ले आर्ट, म्यूरल आर्ट, हस्तकढ़ाई, ड्राई फ्लावर आर्ट, कोरिया कला, रजवार मिट्टी चित्र, मेहंदी, मृदा शिल्प, गोदना कला और बांस शिल्प सहित कुल 14 पारंपरिक कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन विधाओं में प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों और पारंगत कला गुरुओं द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को कला के व्यावहारिक एवं तकनीकी पक्षों की जानकारी मिल सके।

प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया हो चुकी है 6 जून से प्रारंभ 

शिविर के अंतर्गत उदयपुर में प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित होगा, जबकि लखनपुर में पीएमश्री स्कूल परिसर में शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए पंजीयन प्रक्रिया 6 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित शुल्क जमा कर इसमें भाग ले सकते हैं।

विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना

“आकार-2026” का उद्देश्य केवल पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रदेश की विलुप्तप्राय और लोक जीवन से जुड़ी कला विधाओं को संरक्षित करना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से युवा कलाकारों को अनुभवी गुरुओं के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे और भविष्य में स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण शिविर के लिए पंजीयन शुल्क मात्र 100 रुपये निर्धारित किया गया है। दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को शुल्क में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम 

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा उन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी में लोक कला और शिल्प परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। “आकार-2026” न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बनेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी साबित होगा।

वेबसाइट www.cgculture.in से आवेदन पत्र का प्रारूप डाउनलोड किया जा सकता है। ई-मेल sanskriti.rajbhasha@gmail.com एवं वेबसाइट www.cgculture.in से प्रशिक्षण  से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अन्य जानकारी हेतु अनूप किंडो प्रभारी अधिकारी आकार से मोबाइल नंबर 77730-49560 और संचालनालय संस्कृति विभाग रायपुर के टेलीफोन नंबर 0771-2995629 और 0771-2537404 पर कार्यालयीन समय पर संपर्क कर सकते हैं।

भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ पर्यटन का रोड शो- पर्यटन, संस्कृति और निवेश की संभावनाओं का भव्य प्रदर्शन

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 रायपुर 7 जून 2026/ छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने सहयोगी संस्था फिक्की (FICCI) के साथ मिलकर भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन सेंटर में भव्य छत्तीसगढ़ पर्यटन रोड शो का सफल आयोजन किया गया। इस रोड शो में छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों, आध्यात्मिक स्थलों, प्राकृतिक जलप्रपातों, घने वनों, वन्यजीव अभ्यारण्यों, लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। साथ ही पर्यटन निवेश, नए पर्यटन उत्पादों और संभावित व्यावसायिक अवसरों पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई।


इस कार्यक्रम में पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों, टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों, ट्रैवल एजेंट्स, मीडिया प्रतिनिधियों और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना तथा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पर्यटन सहयोग को और मजबूत बनाना था।


छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओडिशा के टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स और होटल व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने और अपने पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ लाने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन का विकास केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए निजी क्षेत्र, पर्यटन उद्योग और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। श्री शर्मा ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच संयुक्त पर्यटन गतिविधियों और आयोजनों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय पर्यटन को नई गति मिलेगी और दोनों राज्यों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे।

छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन विभाग के सचिव श्री एस. भारती दासन ने कहा कि राज्य सरकार सतत और अनुभव-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय जीवन, आध्यात्मिक स्थलों और रोमांचक पर्यटन गतिविधियों का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर रही है तथा नई दिल्ली, कोलकाता, वडोदरा और भोपाल सहित प्रमुख शहरों में पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। जल्द ही ओडिशा में भी छत्तीसगढ़ पर्यटन का कार्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों और पर्यटन उद्योग को और अधिक सुविधा मिल सकेगी।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य ने कहा कि पर्यटन बोर्ड राज्य में पर्यटन अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर करने और छत्तीसगढ़ को देश के उभरते पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने ओडिशा के ट्रैवल ट्रेड पार्टनर्स को छत्तीसगढ़ के विभिन्न थीम आधारित पर्यटन सर्किटों और विशेष पर्यटन अनुभवों के प्रचार-प्रसार में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बी-टू-बी सत्र ने बढ़ाया आकर्षण

कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद रोड शो सत्र में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, निवेश संभावनाओं और नए पर्यटन उत्पादों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इससे पहले आयोजित बी-टू-बी नेटवर्किंग सत्र में ओडिशा के टूर ऑपरेटर्स और छत्तीसगढ़ के पर्यटन हितधारकों के बीच सार्थक संवाद हुआ। इस दौरान भविष्य में संयुक्त पर्यटन पैकेज, व्यवसायिक साझेदारी और पर्यटन प्रचार-प्रसार के विभिन्न अवसरों पर चर्चा की गई।

पर्यटन उद्योग ने दिखाई रुचि

कार्यक्रम में उपस्थित ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और एडवेंचर पर्यटन के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने में रुचि व्यक्त की। आयोजन का समापन नेटवर्किंग डिनर के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों ने पर्यटन क्षेत्र में सहयोग और साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

भीषण गर्मी में बेजुबानों की प्यास बुझाने जनसहयोग से रख रहे जलपात्र, लोग नियमित डाल रहे पानी

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मूक पशुओं के लिए वरदान बना जलदान अभियान, 4 साल से बांटे जा रहे जलपात्र


आरंग से शुरू हुई मुहिम महासमुंद, रायपुर, दुर्ग सहित दर्जनों शहरों और गांवों में फैली

आरंग/महासमुंद। कड़ाके की धूप और भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां इंसान पानी के लिए बेहाल हैं, वहीं मूक पशु-पक्षियों के लिए पानी की तलाश और भी बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे समय में स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन का जलदान अभियान बेजुबानों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है।


विगत चार वर्षों से लगातार चलाए जा रहे इस सेवाभावी अभियान की आज छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में जमकर सराहना हो रही है। इस अभियान के तहत संस्था द्वारा जनसहयोग से जगह-जगह मूक पशुओं के लिए बड़े जलपात्र (कुंड) रखे जा रहे हैं। संस्था न केवल ये पात्र रख रही है, बल्कि स्थानीय नागरिकों से इनमें नियमित रूप से साफ पानी डालने का विनम्र आग्रह भी करती है, ताकि कोई भी बेजुबान प्यासा न रहे। फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य महेंद्र पटेल ने बताया कि इस मानवीय पहल की शुरुआत कुछ वर्ष पहले आरंग क्षेत्र से एक छोटे स्तर पर की गई थी। संस्था के सदस्यों ने जब मूक पशुओं को पानी के लिए तड़पते देखा, तो उन्होंने आपसी सहयोग से मिट्टी और सीमेंट के जलपात्र रखवाने शुरू किए। देखते ही देखते यह मुहिम एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो गई।


आज पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आरंग के साथ-साथ रायपुर, नया रायपुर, भिलाई, दुर्ग, मंदिर हसौद, धरसींवा, तिल्दा, राजिम, अभनपुर, महासमुंद, पिथौरा, सरायपाली और तुमगांव सहित आसपास के सैकड़ों गांवों में हजारों जलपात्र रखवाए जा चुके हैं। पीपला फाउंडेशन के इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह है कि अब इसके लिए संस्था को लोगों से मिन्नतें नहीं करनी पड़तीं। संस्था की ईमानदारी और बेजुबानों के प्रति समर्पण को देखकर आम जनता अब स्वप्रेरित होकर इस कार्य में हाथ बंटा रही है।

बड़ी संख्या में लोग खुद आगे आकर पशुओं के लिए जलपात्र खरीदने हेतु सहयोग राशि दान कर रहे हैं। कई लोग अपने घरों, दुकानों और चौक-चौराहों के सामने इन पात्रों को रखवाकर उनकी सुरक्षा और रोज पानी भरने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे हैं। इस अभियान ने समाज में जीव दया और आपसी सहयोग की एक अनूठी मिसाल पेश की है।

समृद्ध, संगठित और शिक्षित समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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चंद्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के 55वें केंद्रीय अधिवेशन में शामिल हुए मुख्यमंत्री, समाज की एकता और संगठन शक्ति की सराहना

छाती-झूरानवागांव सड़क, नवीन हायर सेकेंडरी भवन, नगर पंचायत और नवा रायपुर में सामाजिक भवन हेतु भूमि की घोषणा

रायपुर- संगठित, शिक्षित और जागरूक समाज ही मजबूत राष्ट्र निर्माण की वास्तविक शक्ति होता है। समाज जितना सशक्त होगा, राष्ट्र उतना ही प्रगतिशील, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज धमतरी जिले के ग्राम छाती स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित चन्द्रनाहू (चंद्राकर) कुर्मी-क्षत्रिय समाज के 55वें केंद्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस गौरवशाली समाज के केंद्रीय अधिवेशन में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी-क्षत्रिय समाज समृद्ध परंपराओं, सामाजिक चेतना, संगठन क्षमता और उत्कृष्ट मूल्यों का वाहक है। यह वही समाज है जिसने देश को छत्रपति शिवाजी महाराज और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं, जिनके आदर्श आज भी राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोई भी समाज शिक्षा, संगठन, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व के बल पर निरंतर आगे बढ़ता है। चन्द्रनाहू समाज ने कृषि, शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, सामाजिक सेवा और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज की नई पीढ़ी शिक्षा, तकनीकी दक्षता और नवाचार के माध्यम से विकास की नई इबारत लिख रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने छाती से झूरानवागांव तक सड़क निर्माण, ग्राम छाती को भविष्य में नगर पंचायत का दर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने, नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण तथा समाज के लिए नवा रायपुर में सामाजिक भवन हेतु भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की घोषणाओं का उपस्थित जनसमुदाय ने जोरदार स्वागत किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐसे अधिवेशन केवल सामाजिक आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज को संगठित, जागरूक और सशक्त बनाने के प्रभावी मंच होते हैं। जब समाज के लोग एकत्र होकर विचार-विमर्श करते हैं, अनुभव साझा करते हैं और नई पीढ़ी के लिए दिशा निर्धारित करते हैं, तब सामाजिक एकता और विकास की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं।

उन्होंने समाज द्वारा प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, खेल, व्यवसाय तथा अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले प्रतिभावान व्यक्तियों और विद्यार्थियों के सम्मान की सराहना करते हुए कहा कि सम्मान की संस्कृति समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा देती है। ऐसे प्रयास युवाओं को आगे बढ़ने और नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार बनती है। राज्य सरकार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा के विस्तार के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने समाज के उद्यमियों और व्यवसायियों से राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति का अध्ययन करने और निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। नई औद्योगिक नीति में युवाओं, उद्यमियों और निवेशकों के लिए अनेक प्रोत्साहन प्रावधान किए गए हैं। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने समाज की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक धरोहर पर आधारित पुस्तक ‘अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम्’ का विमोचन भी किया। इस दौरान प्रशासनिक सेवाओं, विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों तथा अन्य क्षेत्रों में चयनित और कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ शैक्षणिक एवं खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।समाज के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्राकर ने समाज का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि केंद्रीय अधिवेशन का यह 55वां वर्ष समाज की संगठनात्मक शक्ति, सामाजिक जागरूकता और निरंतर प्रगति का प्रतीक है।

इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, विधायक अजय चंद्राकर, विधायक ललित चंद्राकर, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, लालबहादुर चंद्रवंशी, पूनम चंद्राकर, समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

प्रेम संबंध का राज खुलने का था डर, भतीजी ने प्रेमी संग मिलकर की चाची की हत्या

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 अंबिकापुर। सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में चाची की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए मृतका की भतीजी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि चाची द्वारा दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लेने के बाद भेद खुलने के डर से उन्होंने हत्या की वारदात को अंजाम दिया था।


पुलिस के अनुसार, भुईंयापारा, जुना लखनपुर निवासी रंजीत लकड़ा ने 31 मई को अपनी परिजन लक्ष्मी लकड़ा (65) की संदिग्ध मौत की सूचना थाना लखनपुर में दी थी। सूचना पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। घटनास्थल के निरीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर चोट एवं घर्षण के निशान पाए गए, जिससे हत्या की पुष्टि हुई।

इसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज की। जांच के दौरान आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें घटना वाली रात एक युवक मृतका के घर आते-जाते दिखाई दिया। फुटेज में मृतका की भतीजी तेरेसा एक्का भी उसी युवक के साथ मोटरसाइकिल पर जाती हुई नजर आई।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तेरेसा एक्का और उसके प्रेमी आशीष कुमार गुप्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने हत्या करना स्वीकार कर लिया।

आरोपियों ने बताया कि घटना से पहले मृतका लक्ष्मी लकड़ा ने दोनों को एक साथ देख लिया था। इस बात के उजागर होने के डर से उन्होंने लक्ष्मी लकड़ा को दीवार पर धक्का दिया और मारपीट कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद दोनों मौके से फरार हो गए थे।

पुलिस ने आरोपी आशीष कुमार गुप्ता (30), निवासी बाजारपारा, लखनपुर तथा तेरेसा एक्का (20), निवासी लोसगा, रानीकछार, थाना लखनपुर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जशपुर में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, नवाचारों से मजबूत हो रहा भू-जल संवर्धन

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सोक पिट, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी और नवा तरिया जैसी संरचनाएं बढ़ा रही जल संचयन क्षमता

मनरेगा और जनभागीदारी से जल सुरक्षा की दिशा में जशपुर का अभिनव मॉडल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


विश्व साइकिल दिवस पर देशभर में उमड़ा जनसैलाब, 4 लाख से अधिक लोगों ने लिया ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ अभियान में हिस्सा

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नई दिल्ली- विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित विशेष साइक्लिंग कार्यक्रम में हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में अभिनेता विक्रांत मैसी विश्व चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता मुक्केबाज नूपुर श्योराण और प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी भी शामिल हुए।

नई दिल्ली में 15,000 से अधिक फिटनेस प्रेमियों ने साइकिल चलाई, जबकि देशभर में एक ही दिन में 4 लाख से अधिक लोगों ने इस अभियान में भागीदारी की। कारगिल और लेह से लेकर कन्याकुमारी और अल्लेप्पी तक तथा त्रिपुरा से वडोदरा तक हजारों स्थानों पर साइक्लिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए।

30 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा अभियान

दिसंबर 2024 में केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा शुरू किया गया ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ अभियान अब तक 30 लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुका है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अभिनेता विक्रांत मैसी के साथ मैत्रीपूर्ण रस्साकशी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और बाद में हजारों प्रतिभागियों के साथ साइकिल चलाते हुए "भारत माता की जय" और "फिट इंडिया, हिट इंडिया" के नारे लगाए।

साइकिलिंग से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ

डॉ. मांडविया ने कहा कि यह ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ का 77वां संस्करण है। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके साथ ही यह बढ़ती ट्रैफिक समस्या का भी प्रभावी समाधान है।

उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री के फिटनेस मंत्र को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट साइकिलिंग या अन्य शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए तो अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

सुरक्षा बलों और संस्थाओं की व्यापक भागीदारी

इस राष्ट्रीय अभियान में विभिन्न राज्यों के खेल विभागों के अलावा National Cadet Corps, सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल, सीआईएसएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और एसएसबी सहित अनेक सुरक्षा बलों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।

इसके अलावा माय भारत स्वयंसेवक, किसान संगठन, खिलाड़ी, फिट इंडिया साइक्लिंग क्लब, शारीरिक शिक्षा संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया।

युवाओं को स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह

अभिनेता विक्रांत मैसी ने कहा कि इस अभियान ने उन्हें बचपन की यादें ताजा कर दीं, जब बच्चे घंटों बाहर खेलते और साइकिल चलाते थे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना और उन्हें मैदानों की ओर प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है।

फिटनेस के प्रति बढ़ी जागरूकता

मुक्केबाज नूपुर श्योराण ने कहा कि फिट इंडिया जैसे अभियानों ने लोगों में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रतिदिन कम से कम 15 से 30 मिनट किसी न किसी शारीरिक गतिविधि के लिए निकालने की अपील की।

महिलाओं के लिए विशेष साइक्लिंग प्रतियोगिताएं

कार्यक्रम के तहत देशभर में महिलाओं के लिए विशेष "अस्मिता साइक्लिंग टूर्नामेंट" भी आयोजित किए गए। अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग संस्था Union Cycliste Internationale (यूसीआई) ने भी इस अभियान में सहयोग किया।

खेल और मनोरंजन का संगम

साइक्लिंग के अलावा प्रतिभागियों के लिए बैडमिंटन, शतरंज, कैरम, लूडो, नींबू दौड़, रस्साकशी, स्क्वाट और पुश-अप जैसी मनोरंजक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और बढ़ गया।

यह अभियान युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा Cycling Federation of India, योगासन भारत, राहगिरी फाउंडेशन और माय भारत के सहयोग से आयोजित किया गया। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित यह पहल फिटनेस, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।


मोदी सरकार के 12 वर्षों में बदला भारत का आत्मविश्वास, नवाचार और अवसरों का नया युग: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत एक आकांक्षी, आत्मविश्वासी और नवाचार-प्रधान राष्ट्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि सुशासन, तकनीकी लोकतंत्रीकरण और नागरिक-केंद्रित नीतियों ने देशवासियों के सोचने और भविष्य को देखने के तरीके में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। 

मीडिया से बातचीत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लगातार 4,399 दिनों के कार्यकाल में शासन व्यवस्था, विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने नागरिकों में यह विश्वास जगाया है कि मेहनत और प्रतिभा के बल पर कोई भी सफलता हासिल कर सकता है।

स्टार्टअप और स्पेस सेक्टर में अभूतपूर्व वृद्धि

डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 350-400 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 2.3 लाख से अधिक हो गई है। इन स्टार्टअप्स ने लगभग 24 से 25 लाख रोजगार सृजित किए हैं। इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में संचालित हो रहे हैं, जबकि 35 से 39 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं के नेतृत्व में हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ वर्ष पहले जहां स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक में थी, वहीं आज यह संख्या लगभग 400 तक पहुंच चुकी है। देश की स्पेस अर्थव्यवस्था वर्तमान में करीब 9 अरब डॉलर की है, जिसके अगले 7 से 8 वर्षों में बढ़कर 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

नागरिकों पर भरोसे की नई संस्कृति

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के शुरुआती फैसलों में दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी के सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त कर स्व-प्रमाणन (Self-Attestation) को अनुमति देना एक महत्वपूर्ण कदम था। इससे युवाओं और आम नागरिकों के प्रति सरकार के भरोसे का संदेश गया।

उन्होंने सरकारी नौकरियों की कई श्रेणियों में इंटरव्यू समाप्त करने के फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे भाई-भतीजावाद, पक्षपात और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुईं तथा योग्यता आधारित चयन प्रणाली को मजबूती मिली।

बदली सोच, बढ़ा आत्मविश्वास

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव लोगों की मानसिकता में आया है। अब देश के युवा यह सोचते हैं कि "मैं भी कर सकता हूं"। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं का सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफल होना इसी परिवर्तन का प्रमाण है।

विज्ञान और नवाचार को मिला नया सम्मान

उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशनों जैसी उपलब्धियों ने विज्ञान और तकनीक के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों को असफलताओं से सीखने और सफलताओं का जश्न मनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा मिला। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की सफल लैंडिंग ने देश में वैज्ञानिक चेतना को नई ऊर्जा दी है।

निजी क्षेत्र के लिए खुले नए अवसर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलना एक ऐतिहासिक निर्णय रहा है। इससे उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं तथा नवाचार को गति मिली है।

पारदर्शी और समावेशी कल्याणकारी योजनाएं

डॉ. सिंह ने कहा कि आवास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी जाति, धर्म या क्षेत्रीय भेदभाव के पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे सरकारी संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है।

विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ता देश

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी, महिलाओं और युवाओं की अधिक भागीदारी तथा अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और क्वांटम तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक ऐसे सशक्त, आत्मनिर्भर और आकांक्षी समाज का निर्माण करना है जो विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।

राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला में भारत को वैश्विक सीफूड निर्यात महाशक्ति बनाने पर जोर

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विशाखापत्तनम- मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से 5 और 6 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, निर्यातकों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों ने भाग लेकर भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जारापु राममोहन नायडू तथा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कार्यशाला में भाग लिया

गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर

कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि भारत को केवल मात्रा आधारित निर्यातक नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता और मूल्य संवर्धित समुद्री उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जाए। विशेषज्ञों ने नवाचार, आधुनिक तकनीक, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और गुणवत्ता प्रमाणन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई ताकि भारतीय सीफूड उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।

₹1 लाख करोड़ से अधिक निर्यात का लक्ष्य

कार्यशाला के दौरान सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को ₹1 लाख करोड़ से अधिक तक पहुंचाने के लक्ष्य को रेखांकित किया। इसके लिए कोल्ड चेन, एयर कार्गो, क्वारंटीन सुविधाओं और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं

विशेषज्ञों ने कहा कि देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। पिंजरा मत्स्य पालन, जलाशय आधारित एक्वाकल्चर, मोती उत्पादन, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती और सजावटी मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाई जा सकती है।

स्टार्टअप और एमएसएमई बनेंगे विकास के नए इंजन

कार्यशाला में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने माना कि नवाचार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और नई तकनीकों के उपयोग से भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, रोजगार सृजन और निर्यात विविधीकरण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

हितधारकों ने रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, कोल्ड चेन की कमी, क्वारंटीन सुविधाओं की सीमाएं, कड़े अंतरराष्ट्रीय मानक और ट्रेसबिलिटी जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। इन समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित नीति और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सामूहिक प्रयासों से बनेगा मजबूत निर्यात तंत्र

कार्यशाला का समापन केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्यमियों की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सभी पक्षों ने सतत उत्पादन, गुणवत्ता, प्रमाणन, बुनियादी ढांचे के विकास और बाजार विविधीकरण के माध्यम से भारत को विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी सीफूड निर्यातक राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों और योजनाओं को दिशा देंगे तथा भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में और मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेंगे।


जल संरक्षण का महाअभियान: मनरेगा से गांवों में बढ़ रहा जल भंडार, हरियाली और आजीविका

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 रायपुर : जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक जनअभियान आकार ले रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन, हरित विकास और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संरक्षण अब केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभागीदारी से संचालित एक व्यापक सामाजिक पहल के रूप में विकसित हो रहा है।


अभियान के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें तालाब, डबरियां, चेकडैम, जल संवर्धन संरचनाएं, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, खेत तालाब और अन्य जल संरक्षण कार्य शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि में रोकना, भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को सुदृढ़ करना है।


इन कार्यों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस प्रकार जल संरक्षण का यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है।

जल संरक्षण से आजीविका का सृजन

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाज के संवेदनशील और कमजोर वर्गों की निजी भूमि पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर मिल रहे हैं।

इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। इन जल संरचनाओं को स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों की आजीविका से जोड़ने की पहल की गई है, जिससे जल संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है।

पहाड़ियों पर ट्रेंच, मैदानों में जल संचयन

प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में ढलान और पहाड़ी भूभागों पर स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तेज बहाव को रोककर उसे भूमि में समाहित होने का अवसर देती हैं। इससे मिट्टी का कटाव कम होता है, भू-जल स्तर में सुधार होता है और वृक्षारोपण को आवश्यक नमी उपलब्ध होती है। जल संरक्षण और वृक्षारोपण के इस समन्वित प्रयास से हरित आवरण में वृद्धि हो रही है तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिल रही है।

तकनीक से जल संरक्षण को नई दिशा

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की एक प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है।

भू-जल स्तर की निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का नियमित मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर जल स्तर की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

पारदर्शिता और जनभागीदारी का मॉडल

मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत और पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों की भागीदारी और निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भागीदारी से साझेदारी की ओर

जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम सभाओं, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज यह दिखा रहा है कि जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर ग्रामीण विकास का एक स्थायी और समावेशी मॉडल विकसित किया जा सकता है। यह अभियान केवल पानी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि गांवों में समृद्धि, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन की नई नींव रख रहा है।

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