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छत्तीसगढ़ NEET UG Round-1 सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, 2,560 सीटों पर मिला प्रवेश, जानें आगे क्या करना होगा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 राज्य स्तरीय काउंसलिंग के पहले चरण का प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी कर दिया गया है। कमिश्नरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME), रायपुर ने 25 अगस्त 2026 को MBBS और BDS पाठ्यक्रमों के लिए Round-1 की प्रोविजनल अलॉटमेंट लिस्ट जारी की। आधिकारिक वेबसाइट पर सीट अलॉटमेंट सूची उपलब्ध करा दी गई है।

2,560 सीटों पर हुआ Round-1 अलॉटमेंट

Round-1 में कुल 2,560 सीटें आवंटित की गई हैं। इनमें:

  • 2,114 MBBS सीटें

  • 446 BDS सीटें

शामिल हैं। यह अलॉटमेंट छत्तीसगढ़ की राज्य स्तरीय NEET UG काउंसलिंग के तहत किया गया है।

इस सूची में सरकारी और निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में उपलब्ध सीटों के आधार पर अभ्यर्थियों को उनकी NEET UG रैंक, मेरिट, आरक्षण श्रेणी, पसंद किए गए कॉलेज/कोर्स और उपलब्ध सीटों के अनुसार सीटें आवंटित की गई हैं।

पहले स्थगित हुआ था Round-1 का अलॉटमेंट

इस साल छत्तीसगढ़ NEET UG काउंसलिंग के पहले चरण का अलॉटमेंट पहले निर्धारित समय पर जारी नहीं हो सका था। DME की वेबसाइट पर 20 अगस्त 2026 को Round-1 allotment स्थगित किए जाने की सूचना जारी की गई थी। इसके बाद 25 अगस्त को प्रोविजनल अलॉटमेंट लिस्ट जारी की गई।

अभ्यर्थी कैसे चेक करें अपना रिजल्ट?

जिन अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ NEET UG 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग में भाग लिया है, वे अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस DME की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

रिजल्ट देखने के लिए ये स्टेप अपनाएं:

  1. सबसे पहले DME छत्तीसगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

  2. NEET UG 2026 Counselling/MBBS-BDS सेक्शन खोलें।

  3. “CG STATE NEET-UG (MBBS/BDS) 2026 Provisional Allotment List – Round 1” लिंक पर क्लिक करें।

  4. जारी PDF/अलॉटमेंट सूची में अपना रोल नंबर या नाम खोजें।

  5. अपनी आवंटित सीट और कॉलेज की जानकारी ध्यान से जांचें।

  6. आवश्यक होने पर Allotment Letter डाउनलोड करें और आगे की प्रवेश प्रक्रिया पूरी करें।

DME की आधिकारिक वेबसाइट पर 25 अगस्त को Round-1 की प्रोविजनल अलॉटमेंट लिस्ट प्रकाशित होने की पुष्टि की गई है।

आधिकारिक वेबसाइट: DME छत्तीसगढ़

सीट मिलने के बाद क्या करना होगा?

Round-1 में सीट मिलने के बाद अभ्यर्थियों को केवल रिजल्ट देखकर रुकना नहीं चाहिए। उन्हें DME द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

अभ्यर्थियों को अपने अलॉटमेंट लेटर में दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कॉलेज/प्रवेश केंद्र पर रिपोर्ट करना चाहिए।

आमतौर पर प्रवेश प्रक्रिया के दौरान NEET UG एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड, पहचान पत्र, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट/प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण, जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो), मेडिकल फिटनेस और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम दस्तावेज सूची और रिपोर्टिंग की तारीख वही मानी जानी चाहिए जो DME की आधिकारिक सूचना में दी गई है।

कॉलेज और कोर्स की जानकारी जरूर जांचें

अभ्यर्थियों को अलॉटमेंट लेटर में सिर्फ कॉलेज का नाम ही नहीं, बल्कि कोर्स (MBBS/BDS), कैटेगरी और सीट की स्थिति भी ध्यान से जांचनी चाहिए।

यदि किसी उम्मीदवार को उसकी पसंद के अनुसार सीट नहीं मिली है, तो उसे अगले काउंसलिंग चरणों से संबंधित DME की आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए। आगे की प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्प आधिकारिक काउंसलिंग नियमों के अनुसार होंगे।

इस साल की काउंसलिंग में पहले जारी हुई थी मेरिट लिस्ट

DME छत्तीसगढ़ ने 18 अगस्त 2026 को NEET UG 2026 Round-1 की मेरिट लिस्ट भी जारी की थी। इसके बाद 25 अगस्त को Round-1 की प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी की गई।

इससे पहले राज्य स्तरीय काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन, सीट मैट्रिक्स और काउंसलिंग शेड्यूल भी जारी किया गया था।

प्रोविजनल रिजल्ट का क्या मतलब है?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि DME ने Round-1 को Provisional Allotment List के रूप में जारी किया है। इसलिए अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के दौरान DME की ओर से जारी किसी संशोधन, सुधार या अतिरिक्त निर्देश पर भी नजर रखनी चाहिए।

किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट या अनधिकृत वेबसाइट की जानकारी के आधार पर प्रवेश संबंधी निर्णय लेने के बजाय DME छत्तीसगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिस को प्राथमिकता दें।

अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह

सीट अलॉट होने के बाद उम्मीदवार इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करके सुरक्षित रखें।

  • रिपोर्टिंग की अंतिम तारीख जरूर जांचें।

  • सभी मूल दस्तावेज और आवश्यक प्रमाणपत्र तैयार रखें।

  • कॉलेज की फीस और अन्य प्रवेश संबंधी शुल्क की जानकारी आधिकारिक स्रोत से लें।

  • यदि दस्तावेज सत्यापन आवश्यक है, तो निर्धारित समय पर उपस्थित हों।

  • अगले राउंड की जानकारी के लिए DME की वेबसाइट नियमित रूप से चेक करते रहें।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ NEET UG 2026 काउंसलिंग के Round-1 में 2,560 सीटों का प्रोविजनल अलॉटमेंट जारी हो चुका है। इनमें 2,114 MBBS और 446 BDS सीटें शामिल हैं। अब जिन उम्मीदवारों को सीट आवंटित हुई है, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वे अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की आगे की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करें।

नोट: रिपोर्ट में दी गई सीटों और रिजल्ट से संबंधित आंकड़े उपलब्ध आधिकारिक/ताजा रिपोर्टों पर आधारित हैं। प्रवेश की अंतिम तारीख, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और दस्तावेजों से जुड़ी शर्तों के लिए DME छत्तीसगढ़ का नवीनतम आधिकारिक नोटिस ही मान्य होगा।

तेलंगाना में भीषण सड़क हादसा, बस-ट्रक की टक्कर में 6 की मौत, कई घायल

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सूर्यापेट- तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में बुधवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल हो गए। हादसा हैदराबाद-विजयवाड़ा नेशनल हाईवे (NH-65) पर कोडाड मंडल के दोराकुंटा/दुर्गापुरम स्टेज के पास हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद से विजयवाड़ा और एलुरु जा रही एक निजी ट्रैवल बस पीछे से कंटेनर ट्रक से जा टकराई।

तड़के करीब 4:30 से 5:20 बजे के बीच हुआ हादसा

पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना बुधवार सुबह करीब 4:30 से 5:20 बजे के बीच हुई। बस में करीब 42-43 यात्री सवार थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार, बस ने आगे चल रहे या सड़क पर मौजूद कंटेनर ट्रक को पीछे से टक्कर मारी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

6 यात्रियों की मौके पर मौत

हादसे में 6 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में 5 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, कई अन्य यात्रियों को चोटें आई हैं। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 12 से 20 के बीच बताई गई है, इसलिए घायलों की अंतिम संख्या आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी है।

घायलों को तत्काल आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कुछ गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए विजयवाड़ा रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ट्रक को लेकर सामने आई अहम जानकारी

पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि कंटेनर ट्रक ने संभवतः दुर्घटना से कुछ समय पहले सड़क के डिवाइडर को टक्कर मारी थी। इसके बाद बस ने पीछे से ट्रक को टक्कर मार दी। हालांकि, हादसे की सटीक परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर पुलिस की जांच जारी है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना का मुख्य कारण तेज रफ्तार, ड्राइवर की सतर्कता में कमी, सड़क पर ट्रक की स्थिति या कोई अन्य तकनीकी कारण था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। क्षतिग्रस्त बस से यात्रियों को बाहर निकालकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस उनकी पहचान तथा हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जताया दुख

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

वहीं, तेलंगाना के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने भी हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले निजी ट्रैवल ऑपरेटरों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परिवहन विभाग को आवश्यक कदम उठाने की बात कही।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर निजी बसों की सुरक्षा, ड्राइवरों की सतर्कता और सड़क किनारे भारी वाहनों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक नेताओं ने भी सरकार से घायलों को बेहतर उपचार और मृतकों के परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

हादसे की बड़ी बातें

  • 📍 स्थान: सूर्यापेट जिला, तेलंगाना

  • 🛣️ हाईवे: हैदराबाद-विजयवाड़ा NH-65

  • 🚌 बस: निजी ट्रैवल बस

  • 🚛 दूसरा वाहन: कंटेनर ट्रक

  • 🕔 समय: बुधवार तड़के करीब 4:30–5:20 बजे

  • ⚫ मौतें: 6, जिनमें 5 महिलाएं

  • 🚑 घायल: कई यात्री; शुरुआती रिपोर्टों में 12 से 20 तक

  • 🔎 जांच: पुलिस द्वारा हादसे के कारणों की जांच जारी

फिलहाल हादसे की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद दुर्घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

छह महीने पुरानी हत्या का खुलासा: जीजा की हत्या कर नाले किनारे रेत में दफनाया शव, नाबालिग समेत 4 गिरफ्तार

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 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिले के मदनवाड़ा थाना क्षेत्र में करीब छह महीने पहले हुई हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, मृतक कदम भुआर्य (36) की उसके साले चंदन अंधारे ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की थी। वारदात के बाद शव को कोहका नाले के किनारे रेत में दफना दिया गया था। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी समेत नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


पत्नी से मारपीट करता था मृतक

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक को अपनी पत्नी के उसके ममेरे भाई चंदन अंधारे के साथ संबंध होने का शक था। इसी बात को लेकर वह अक्सर पत्नी के साथ मारपीट करता था। पुलिस के अनुसार, इसी विवाद के चलते चंदन ने अपने साथियों के साथ मिलकर कदम भुआर्य की हत्या की साजिश रची।

शराब पिलाने के बहाने खेत में बुलाया

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कदम भुआर्य को शराब पिलाने के बहाने खेत में बुलाया था। वहां गमछे से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद आरोपियों ने कोहका नाले के किनारे गड्ढा खोदकर शव को रेत में दफना दिया।

5 मार्च को मिला था शव

घटना 5 मार्च 2026 की है। भैंसाराटोला निवासी संजय हथगिया ने कोहका नाले के पास एक अज्ञात शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी थी। सूचना मिलते ही मदनवाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम कराया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की आशंका सामने आने के बाद पुलिस ने BNS की धारा 103(1) और 238 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने मृतक की पहचान कदम भुआर्य, निवासी राजकट्टा, थाना औंधी के रूप में की।

हैदराबाद से मुख्य आरोपी को पकड़ा

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाई.पी. सिंह के निर्देशन और SDOP विनोद मिंज के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। साइबर सेल की तकनीकी सहायता और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान मुख्य संदेही चंदन अंधारे की लोकेशन हैदराबाद में मिली। इसके बाद पुलिस टीम हैदराबाद पहुंची और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने हत्या की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और घटना से जुड़ी जानकारी दी।

नाबालिग समेत चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी चंदन अंधारे समेत नाबालिग सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल बाइक भी जब्त की गई है। पुलिस अब हत्या की साजिश, घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

दुर्ग में स्वाइन फ्लू के दो नए मरीज मिले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3 हुई

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 दुर्ग। जिले में स्वाइन फ्लू के दो नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। भिलाई और दुर्ग क्षेत्र में एक-एक मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। दोनों संक्रमितों की उम्र 45 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इससे पहले जिले में एक बच्चे में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। नए मामलों के साथ जिले में स्वाइन फ्लू संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।


एक मरीज अस्पताल में भर्ती

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संक्रमित मरीजों में से एक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, अन्य संक्रमितों के स्वास्थ्य की भी निगरानी की जा रही है। नए मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने के साथ जरूरी एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचने और स्वच्छता का ध्यान रखने को कहा गया है।

फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।

दुर्ग-भिलाई में निगरानी बढ़ाई

दो नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दुर्ग और भिलाई क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। संक्रमित मरीजों के स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतें और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करें।

सरकारी अस्पताल में भीषण आग, 15 नवजातों की मौत की खबर, जांच के आदेश

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 इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के प्रमुख सरकारी अस्पताल पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के महिला एवं बाल स्वास्थ्य वार्ड में बुधवार सुबह आग लगने से 15 नवजात शिशुओं की मौत की खबर सामने आई है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने अभी मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


‘जियो न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आग अस्पताल के उस वार्ड में लगी, जहां नवजात शिशुओं को भर्ती किया गया था। PIMS की प्रवक्ता डॉ. अनीजा जलील ने ‘डॉन’ को बताया कि घटना के समय वार्ड में 15 नवजात मौजूद थे। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों को संभवतः रात में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, इसलिए फिलहाल मृतकों की सटीक संख्या बताना मुश्किल है।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई गई है। आग सुबह करीब सात बजे लगी। सूचना मिलते ही छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और चार एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव टीमों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

अधिकारियों के मुताबिक, आग बुझने के बाद वार्ड को पूरी तरह ठंडा करने का काम किया गया, ताकि किसी तरह का दोबारा खतरा न रहे।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

हादसे में नवजात बच्चों की मौत की खबर से अस्पताल में परिजनों में मातम पसरा हुआ है। कई परिजन अपने बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन आग की घटना ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। कमेटी आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के साथ यह भी जांच करेगी कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जताया दुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में नवजात बच्चों की मौत पर शोक व्यक्त किया गया।

शहबाज शरीफ ने कहा कि बच्चों से जुड़ी कोई भी दुखद घटना ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। उन्होंने घटना के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।

1985 में हुआ था PIMS का निर्माण

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) का निर्माण वर्ष 1985 में हुआ था। यह इस्लामाबाद का सबसे बड़ा और प्रमुख सरकारी अस्पताल माना जाता है।

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में पाकिस्तान के कराची में एक शॉपिंग मॉल में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में करीब 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे।

TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की ‘टेट मुक्ति महारैली’, शिक्षा मंत्री बोले- विभागीय परीक्षा पर विचार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध अब तेज हो गया है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने ‘टेट मुक्ति महारैली’ निकाली। शिक्षकों ने पदोन्नति में TET की अनिवार्यता समाप्त करने सहित अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।

वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का सवाल- अब TET क्यों?

शिक्षक संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब उनकी भर्ती और पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य नहीं था। ऐसे में वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवा देने के बाद अब पदोन्नति के लिए TET की शर्त लागू किए जाने को शिक्षक अनुचित मान रहे हैं।

अंबिकापुर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सवाल उठाया कि 20 से 28 वर्षों तक शिक्षण कार्य कर चुके अनुभवी शिक्षकों को अब दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा का दावा है कि TET की अनिवार्यता से प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यह संख्या संगठन द्वारा बताई गई है, इसलिए इसे सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जिला मुख्यालयों पर निकली ‘टेट मुक्ति रैली’

आंदोलन के तहत प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। अंबिकापुर में बड़ी संख्या में शिक्षक कला केंद्र मैदान में एकत्र हुए। यहां धरना-प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टोरेट और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक ‘टेट मुक्ति महारैली’ निकाली।

शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के नाम कलेक्टर तथा संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

शिक्षकों की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं?

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

  2. पुरानी सेवा अवधि की गणना कर पेंशन संबंधी लाभ दिया जाए।

  3. केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।

  4. D.Ed. प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed. कराने की व्यवस्था की जाए।

  5. भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त किया जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि उनकी मांग केवल TET तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से लंबित सेवा और वेतन संबंधी मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, विभागीय परीक्षा का विकल्प तलाश रही सरकार

आंदोलन के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बयान शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री ने कहा है कि सरकार मध्य प्रदेश की तर्ज पर विभागीय परीक्षा आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रही है।

मंत्री के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार TET अनिवार्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट गई है और विभागीय TET परीक्षा आयोजित कराने की अनुमति मांग रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश को ऐसी विभागीय परीक्षा कराने की अनुमति देता है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने के विकल्प पर विचार कर सकती है।

यानी फिलहाल विभागीय परीक्षा को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, बल्कि इसे संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है?

TET विवाद की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के अनुसार TET, RTE Act की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है और संबंधित विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए इसे अनिवार्य माना गया है।

इसके बाद 29 मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने TET योग्यता हासिल करने की समय-सीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया। अदालत ने संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों से TET नियमित अंतराल पर आयोजित करने का प्रयास करने को भी कहा था, अधिमानतः वर्ष में दो बार।

यही न्यायिक पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के बीच चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है।

क्या विभागीय परीक्षा से शिक्षकों को राहत मिल सकती है?

यदि सरकार विभागीय TET या विभागीय परीक्षा की व्यवस्था लागू करने में सफल होती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए यह मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले एक अलग रास्ता हो सकता है। लेकिन इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

मौजूदा समय में मंत्री का बयान केवल विचाराधीन विकल्प की ओर संकेत करता है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि छत्तीसगढ़ में विभागीय परीक्षा निश्चित रूप से लागू हो गई है।

आंदोलन का असर स्कूलों पर भी पड़ा

TET को लेकर शिक्षकों के विरोध का असर कुछ स्थानों पर स्कूलों के संचालन पर भी दिखाई दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन अवकाश लिया, जिसके कारण कुछ स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और कुछ स्थानों पर स्कूल बंद भी रहे।

हालांकि, आंदोलन का उद्देश्य शिक्षकों के अनुसार सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना और पदोन्नति से जुड़ी TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार कराना है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। शिक्षकों की मांग है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी पुरानी सेवा और अनुभव के आधार पर पदोन्नति का अवसर दिया जाए तथा उन पर नई पात्रता शर्त को सीधे लागू न किया जाए।

दूसरी ओर, सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और शिक्षकों की मांगों के बीच कानूनी रूप से व्यवहार्य समाधान तलाशने की चुनौती है।

शिक्षा मंत्री की ओर से विभागीय परीक्षा के विकल्प पर विचार करने का संकेत मिलने के बाद शिक्षकों को कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का आंदोलन अब प्रदेशव्यापी मुद्दा बन चुका है। ‘टेट मुक्ति महारैली’ के जरिए शिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी नाराजगी और मांगें रखी हैं। वहीं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा विभागीय परीक्षा के विकल्प पर विचार किए जाने की बात ने इस पूरे विवाद में नया मोड़ ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार विभागीय परीक्षा का रास्ता निकालकर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत देगी, या TET की अनिवार्यता मौजूदा व्यवस्था के तहत ही लागू रहेगी? आने वाले दिनों में सरकार के फैसले से तस्वीर और साफ होगी।

अमेरिका ने 4 भारतीय कंपनियों पर ईरान से तेल कारोबार को लेकर लगाया प्रतिबंध, जानिए पूरा मामला

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नई दिल्ली- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक और वित्तीय कार्रवाई को और तेज करते हुए भारत में स्थित चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में भूमिका निभाई। यह कार्रवाई अमेरिका की नई “Operation Economic Outcast” मुहिम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान की तेल आय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है।

किन भारतीय कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

अमेरिका की कार्रवाई में चार भारत-स्थित कंपनियों के नाम सामने आए हैं:

  • Portease Partners LLP

  • Sadashiva Overseas Limited

  • PP Softtech Private Limited

  • Prakrutees Infra Impex

इन कंपनियों पर ईरानी मूल के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े कारोबार में शामिल होने के अमेरिकी आरोप हैं। इनके साथ जुड़े तीन भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लिया गया है।

करीब 119 मिलियन डॉलर के कारोबार का आरोप

अमेरिकी कार्रवाई से जुड़े विवरण के अनुसार, इन कंपनियों से संबंधित ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार की कुल रकम लगभग 11.9 करोड़ डॉलर (USD 119 million) बताई गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, Sadashiva Overseas Limited पर लगभग 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों को भारत लाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, Prakrutees Infra Impex पर लगभग 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात से जुड़े होने का आरोप है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोप और उनके आधार पर की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हैं; इन्हें कंपनियों के खिलाफ किसी भारतीय अदालत द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?

अमेरिका लंबे समय से ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र पर प्रतिबंधों के जरिए उसकी आय के स्रोतों को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन का तर्क है कि ईरान के तेल से होने वाली आय उसके सैन्य, मिसाइल और अन्य रणनीतिक कार्यक्रमों को आर्थिक समर्थन दे सकती है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों को प्रतिबंधों के दायरे में रखने के लिए अलग-अलग कार्यकारी आदेशों का इस्तेमाल किया है।

25 अगस्त 2026 को घोषित व्यापक अभियान में अमेरिका ने ईरान से जुड़े करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को निशाना बनाया। इसमें तेल कारोबार के साथ-साथ ईरान के सैन्य और वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कई पक्ष शामिल हैं।

क्या है ‘Operation Economic Outcast’?

अमेरिका की नई रणनीति को Operation Economic Outcast नाम दिया गया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले वित्तीय और कारोबारी रास्तों पर दबाव बढ़ाना है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस अभियान के तहत ईरान की आय के स्रोतों और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को निशाना बनाने की बात कही है। अभियान में केवल ईरानी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले विदेशी संस्थानों और व्यक्तियों पर भी कार्रवाई का दबाव बढ़ाया जा रहा है।

प्रतिबंध लगने के बाद क्या असर होगा?

अमेरिकी प्रतिबंधों का सबसे बड़ा प्रभाव संबंधित कंपनियों की अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच और अमेरिकी व्यक्तियों/संस्थाओं के साथ कारोबार पर पड़ सकता है।

ऐसी प्रतिबंध सूची में शामिल संस्थाओं के साथ अमेरिकी क्षेत्राधिकार में आने वाले वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों पर कड़े प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बैंक और कारोबारी संस्थाएं भी अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए ऐसी कंपनियों के साथ लेनदेन को सीमित कर सकती हैं।

इससे संबंधित भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान, बैंकिंग और व्यापारिक साझेदारियों में अतिरिक्त जांच और अनुपालन की जरूरत बढ़ सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण देश है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़े संबंध रहे हैं।

ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए विशेष रणनीतिक महत्व रखता है। यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक वैकल्पिक कनेक्टिविटी देने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है।

ऐसे में अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े कारोबार पर लगातार बढ़ते प्रतिबंध भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के बीच संतुलन की चुनौती पैदा कर सकते हैं।

क्या इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस कार्रवाई से भारत-अमेरिका संबंधों पर कितना व्यापक असर पड़ेगा। हालांकि, भारतीय कंपनियों को सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में लाया जाना दोनों देशों के लिए संवेदनशील मुद्दा जरूर है।

अमेरिका की नई नीति यह संकेत देती है कि वह ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी अधिक कड़ी नजर रख रहा है। इससे भारतीय कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को ईरान से जुड़े लेनदेन में अमेरिकी प्रतिबंधों और अनुपालन नियमों का अधिक सावधानी से आकलन करना पड़ सकता है।

अमेरिका का दबाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं

ईरान पर अमेरिकी दबाव का दायरा भारत तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले कई देशों और संस्थाओं को चेतावनी दी है। चीन, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और इराक जैसे देशों के कारोबार पर भी अमेरिकी प्रतिबंध नीति का असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में चीन की भूमिका इस पूरे विवाद को और महत्वपूर्ण बनाती है।

आगे क्या?

अमेरिका द्वारा चार भारतीय कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर कार्रवाई के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि भारत की कंपनियां और बैंक इस बढ़ते प्रतिबंध जोखिम से कैसे निपटते हैं।

ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था, शिपिंग, बीमा, बैंकिंग और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े अनुपालन नियम पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।

निष्कर्ष

अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ चार भारतीय कंपनियों पर लगाया गया प्रतिबंध नहीं है, बल्कि ईरान के तेल कारोबार से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय सप्लाई और वित्तीय श्रृंखला पर बढ़ते अमेरिकी दबाव का हिस्सा है। लगभग 119 मिलियन डॉलर के कथित ईरानी तेल एवं पेट्रोकेमिकल कारोबार को लेकर की गई यह कार्रवाई भारत के कारोबारी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।

फिलहाल इन कंपनियों पर लगाए गए आरोप अमेरिकी अधिकारियों के दावों पर आधारित हैं और मामले से जुड़े वास्तविक कारोबारी तथ्यों तथा संभावित कानूनी प्रतिक्रियाओं पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

अंबेडकर प्रतिमा लगाने को लेकर यूपी में बवाल, पथराव में 7 पुलिसकर्मी और एक नागरिक घायल

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उत्तर प्रदेश- उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद ने बुधवार को तनावपूर्ण रूप ले लिया। सिकरी गांव में प्रतिमा को लेकर विवाद के बाद शाम होते-होते पथराव शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद सामने आया। विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया और स्थिति पर नजर रखी।

मामला बढ़ने के बाद मौके पर डीएम और एसएसपी ने खुद मोर्चा संभाला। पुलिस ने क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

पथराव में पुलिसकर्मी घायल

विवाद के दौरान स्थिति बिगड़ने पर पथराव की घटना सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा में 7 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक के घायल होने की जानकारी है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजे जाने की बात सामने आई है।

घटना के बाद पुलिस ने संवेदनशील इलाके में गश्त बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

हालात बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल लगाया और पूरे क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की दोबारा हिंसा को रोकना है। अधिकारियों की ओर से स्थानीय लोगों से सहयोग करने की अपील की गई है।

प्रतिमा से जुड़े विवाद पहले भी सामने आए

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय में आंबेडकर प्रतिमाओं को लेकर विवाद की कई घटनाएं सामने आई हैं। जुलाई 2026 में देवरिया के पोखारभिंडा गांव में बिना प्रशासनिक अनुमति के खलिहान की जमीन पर आंबेडकर प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर विवाद हुआ था। उस मामले में पुलिस पर पथराव की घटना के बाद एक उपनिरीक्षक और दो आरक्षियों को निलंबित किया गया था।

बदायूं के ही फैजगंज बेहटा क्षेत्र में भी हाल में आंबेडकर की प्रतिमा गिराए जाने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था। पुलिस जब प्रतिमा को उठाने पहुंची तो उसका एक हाथ टूट गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने हंगामा किया था।

पुलिस की अपील—अफवाहों से बचें

ताजा घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। संवेदनशील इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है और घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि पथराव की शुरुआत कैसे हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले में दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

फिलहाल इलाके में तनाव, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल है, हालांकि प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास कर रहा है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती और गश्त जारी है।

महत्वपूर्ण: घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर जांच जारी है। इसलिए किसी व्यक्ति या समूह को दोषी ठहराने से पहले पुलिस की आधिकारिक जांच और पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।

रेल यात्रियों के खाने-पानी की क्वालिटी पर रेलवे अलर्ट, खाना कैसा और पानी कितना साफ? अब हर चीज पर रहेगी नजर

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नई दिल्ली- भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर रेलवे अब निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है। खासतौर पर IRCTC की रसोइयों में भोजन तैयार होने से लेकर उसके रखरखाव तक की प्रक्रिया पर तकनीक के जरिए नजर रखी जा रही है।

खाने की गुणवत्ता पर रेलवे की कड़ी नजर

ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं खाने की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत होती है तो कहीं भोजन में कीड़े या साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इन शिकायतों को देखते हुए रेलवे और IRCTC ने रसोई की निगरानी व्यवस्था को अधिक तकनीकी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, देशभर में यात्रियों के लिए खाना तैयार करने वाली 800 से अधिक IRCTC रसोइयों की निगरानी लगभग 2,400 AI आधारित CCTV कैमरों के माध्यम से की जा रही है। इन कैमरों की मदद से रसोई में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के रखरखाव और संभावित कीट-पतंगों जैसी समस्याओं पर नजर रखी जा रही है।

AI कैमरे बताएंगे रसोई में क्या चल रहा है

नई निगरानी व्यवस्था में AI तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि रसोई में चूहे, कॉकरोच, मच्छर या मक्खियों जैसी समस्या दिखाई देती है अथवा साफ-सफाई के मानकों में कमी मिलती है, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित एक मास्टर कंट्रोल रूम से इन कैमरों की निगरानी की जाती है। किसी रसोई में समस्या सामने आने पर संबंधित किचन मैनेजर को उसे ठीक करने के निर्देश दिए जाते हैं। लगातार लापरवाही होने पर कार्रवाई की व्यवस्था भी बताई गई है। 

रोटी और पराठे की गुणवत्ता भी होगी मॉनिटर

हाल ही में रेलवे की ओर से रोटी और पराठे की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की बात सामने आई है। इनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही कच्चे माल के स्टोरेज एरिया में अतिरिक्त कैमरे लगाने तथा PTZ कैमरे के जरिए निगरानी बढ़ाने की योजना बताई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भोजन तैयार करने से पहले इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी उचित परिस्थितियों में रखी जाए।

अब सवाल—रेलवे स्टेशन का पानी कितना साफ है?

खाने के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता भी यात्रियों के लिए बड़ा मुद्दा है। हालिया रिपोर्टों में CAG द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद रेलवे स्टेशनों की पानी व्यवस्था को लेकर कई कमियां सामने आने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया गया था। कुछ स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में E. coli और coliform bacteria पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पानी की नियमित जांच, टैंकों की सफाई और पानी की सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

करीब 20 हजार स्थानों पर पानी की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ने टैंक से नल तक पानी की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 20 हजार स्थानों पर सुधार के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है।

निरीक्षण में केवल पानी की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए उपलब्ध नलों और अन्य सुविधाओं से जुड़ी कमियां भी सामने आईं। ऐसे में रेलवे की ओर से पानी की व्यवस्था की नियमित निगरानी और रखरखाव पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

ट्रेन में पानी खरीदते समय यात्री भी रहें सावधान

रेलवे ने यात्रियों को ट्रेन या स्टेशन पर पानी खरीदते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अनधिकृत विक्रेताओं से पानी खरीदने के बजाय यात्रियों को अधिकृत स्टॉल और अधिकृत ब्रांड से ही पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर लेने की सलाह दी जाती है।

पानी की बोतल खरीदते समय यात्रियों को सील, ब्रांड और MRP जरूर देखनी चाहिए। यदि कोई विक्रेता अधिक कीमत वसूलता है या बिना अनुमति वाला ब्रांड बेचता है, तो इसकी शिकायत रेलवे हेल्पलाइन 139 पर की जा सकती है।

खाने-पानी में गड़बड़ी मिले तो क्या करें?

अगर ट्रेन में भोजन खराब हो, भोजन में कोई बाहरी वस्तु या कीड़ा मिले, खाना बासी लगे या पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो यात्री चुप रहने के बजाय शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

यात्री अपनी शिकायत के लिए:

  • रेलवे हेल्पलाइन 139 का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • RailMadad के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

  • स्टेशन पर होने की स्थिति में स्टेशन मास्टर या संबंधित रेलवे अधिकारी को सूचना दे सकते हैं।

  • शिकायत करते समय ट्रेन नंबर, PNR, कोच और सीट की जानकारी देना उपयोगी रहेगा।

  • भोजन या पानी में समस्या होने पर संभव हो तो फोटो/वीडियो भी सुरक्षित रखें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भारतीय रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों के लिए भोजन और पीने का पानी बुनियादी जरूरत है। ऐसे में केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और सही तरीके से परोसे जाने की निगरानी भी जरूरी है।

AI आधारित कैमरों और केंद्रीय निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल इस दिशा में रेलवे की निगरानी क्षमता को बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, पानी की नियमित जांच और सप्लाई सिस्टम में सुधार से यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

यात्रियों के लिए सीधा संदेश

रेलवे की निगरानी व्यवस्था मजबूत हो रही है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। ट्रेन या स्टेशन पर अनधिकृत वेंडर से खाना-पानी न खरीदें, पैकेज्ड पानी की सील और MRP जांचें और भोजन की गुणवत्ता खराब लगे तो तुरंत शिकायत करें।

यानी अब रेलवे का फोकस सिर्फ ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं, बल्कि यात्रियों को साफ, सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला खाना-पानी उपलब्ध कराने पर भी लगातार बढ़ रहा है।

भारत और सेशेल्स के बीच मत्स्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर उच्चस्तरीय बैठक

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मत्स्य विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने 25 अगस्त को सेशेल्स गणराज्य के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक आयोजित की। सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्यपालन, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्री महामहिम वालेस कॉसग्रो ने किया, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किया।

बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने मौजूदा सहयोग ढांचे की समीक्षा की तथा साझा हित के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग के लिए एक मजबूत सहयोगात्मक रोडमैप तैयार करने पर विचार किया गया।

भारतीय पक्ष ने सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच गहरे समुद्री संबंधों को रेखांकित किया। भारत ने मत्स्यपालन, जलीय कृषि, उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक स्थिरता तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत और सेशेल्स के बीच घनिष्ठ सहयोग महत्वपूर्ण है।

बैठक के दौरान दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने माना कि मत्स्य क्षेत्र और व्यापक ब्लू इकोनॉमी आर्थिक विकास, ग्रामीण रोजगार सृजन और सतत विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि भारत का कुल मछली उत्पादन रिकॉर्ड 19.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि समुद्री खाद्य निर्यात का मूल्य 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर है।

भारत ने टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन, जिम्मेदार मत्स्य दोहन और प्रौद्योगिकी आधारित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चल रही पहलों की जानकारी भी दी।

बैठक के व्यापक एजेंडे में कई तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • समुद्री जलीय कृषि (Mariculture)

  • आधुनिक हैचरी की स्थापना

  • टूना मत्स्यपालन का बेहतर प्रबंधन

  • मछली भंडार का वैज्ञानिक आकलन

  • उन्नत पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियरिंग

  • व्यापक समुद्री संरक्षण

दोनों देशों ने लक्षित तकनीकी अध्ययनों, संगठित मत्स्य विस्तार सेवाओं और औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान एवं तकनीकी हस्तांतरण को तत्काल बढ़ाने के अवसरों पर भी विचार किया।

क्षेत्र में नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने मत्स्य डेटा प्रणालियों, निगरानी, नियंत्रण एवं सर्विलांस (MCS) ढांचे तथा मत्स्य दोहन के प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की।

इसके अलावा, विशेष रूप से टूना प्रसंस्करण, उत्पाद विविधीकरण और मछली अपशिष्ट के टिकाऊ प्रबंधन के लिए वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया।

दीर्घकालिक और व्यवस्थित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों ने वार्षिक कार्य योजना, नियामकीय समन्वय, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान के व्यावसायीकरण में तेजी, एक-दूसरे की प्रयोगशालाओं तक पारस्परिक पहुंच तथा प्रभावशाली पायलट परियोजनाओं के संयुक्त विकास की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में एक विशेष द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) को उन्नत कार्य योजना के साथ जल्द लागू करने में गहरी रुचि दिखाई। सेशेल्स ने प्रशासनिक निकायों, अकादमिक शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच निरंतर एवं सुचारु संवाद के लिए संस्थागत सहयोग तंत्र स्थापित करने के महत्व पर भी जोर दिया।

बैठक के समापन पर दोनों पक्षों ने पारस्परिक अध्ययन एवं एक्सपोजर विजिट, विशेष तकनीकी आदान-प्रदान और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) की विशेषज्ञता के साझा उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।

उच्चस्तरीय बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई। दोनों देशों ने कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को परिणामोन्मुख कार्य योजनाओं में बदलने और भारत तथा सेशेल्स की दीर्घकालिक समुद्री समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए साझा दृष्टिकोण को दोहराया।

चरागाहों के संरक्षण और पशुपालक समुदायों के कल्याण पर भारत का जोर

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भारत ने चरागाहों (Rangelands) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि ये पशुपालक समुदायों की आजीविका बनाए रखने, जैव-विविधता के संरक्षण तथा जल और कार्बन चक्रों के नियमन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारत ने चरागाहों के पुनर्स्थापन के लिए विज्ञान आधारित दृष्टिकोण, सुरक्षित भूमि-अधिकार और समुदायों की भागीदारी पर आधारित प्रयासों का आह्वान किया है।

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) के 17वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (CoP17) में “चरागाहों का पुनर्स्थापन और पशुपालक समुदायों का कल्याण” विषय पर आयोजित मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वैज्ञानिक योजना और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से घासभूमियों और चरागाहों के पुनर्स्थापन में भारत के अनुभव को साझा किया।

पशुपालकों की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए यादव ने कहा, “सफल पुनर्स्थापन की शुरुआत पशुपालकों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि संरक्षक मानने से होती है।” उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर ऐसा पुनर्स्थापन किया जा सकता है जो पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सामाजिक रूप से समावेशी हो।

उन्होंने बताया कि भारत के चरागाह विभिन्न प्रकार के भू-दृश्यों में फैले हुए हैं—हिमालयी चरागाहों और मध्य भारत की सवाना घासभूमियों से लेकर शुष्क थार, कच्छ क्षेत्रों और दक्षिणी शोला क्षेत्रों तक। ये क्षेत्र देश के विशाल पशुधन और मानव आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि उपग्रह आधारित मरुस्थलीकरण एवं भूमि क्षरण एटलस घासभूमियों के मानचित्रण और पुनर्स्थापन की योजना बनाने के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं। वहीं, चराई के अधिकारों और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों की मान्यता स्थानीय समुदायों की भूमिका को मजबूत करती है और उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन में अधिक अधिकार देती है।

भारत की पारंपरिक सामुदायिक संरक्षण प्रणालियों का उदाहरण देते हुए यादव ने राजस्थान के ओरण (Orans) का उल्लेख किया। ये पवित्र वन क्षेत्र हैं, जिन्हें स्थानीय समुदाय सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व के कारण लंबे समय से संरक्षित करते आए हैं। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 25,000 ऐसे सामुदायिक रूप से संरक्षित पवित्र वन क्षेत्र हैं, जो लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि में फैले हैं। ये क्षेत्र सामुदायिक संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और साथ ही पशुपालकों के भूमि अधिकारों को सुरक्षित करने तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीवों के आवासों के संरक्षण में योगदान देते हैं। मंत्री के अनुसार, इनमें से कई पवित्र वन क्षेत्र कानूनी प्रावधानों के तहत भी संरक्षित हैं।

यादव ने खुले वनों और घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्रों के पुनर्स्थापन के लिए भारत के प्रयासों को भी रेखांकित किया। इनमें चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम और गुजरात के बन्नी घासभूमि जैसे क्षेत्रों में इसके संभावित विस्तार की योजना शामिल है।

उन्होंने कहा कि गहरी जड़ वाली घासें मिट्टी में कार्बन के भंडारण में योगदान देती हैं, पानी के भूमि में प्रवेश को बढ़ाती हैं और भूजल पुनर्भरण में सहायता करती हैं। भारत में लगभग 1 करोड़ हेक्टेयर स्थायी चरागाह और चराई भूमि इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

यादव ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण भूदृश्य प्रबंधन, जलग्रहण क्षेत्र विकास, टिकाऊ चराई, चारा विकास और आजीविका सहायता को एकीकृत करता है, जिसमें समुदायों की भागीदारी को केंद्र में रखा गया है।

उन्होंने कहा कि विकासशील देश जब भूमि क्षरण तटस्थता (Land Degradation Neutrality) के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तब वित्त, प्रौद्योगिकी और ज्ञान तक बेहतर पहुंच आवश्यक है। उन्होंने कहा:

“भारत चरागाहों के पुनर्स्थापन के लिए समर्पित और सुलभ वित्तीय सहायता का स्वागत करता है और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से अपने अनुभव और समाधान साझा करने के लिए तैयार है।”

छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय मानसून, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम अगले 24 घंटे तक प्रभावी रह सकता है। मंगलवार को प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई, जबकि सरगुजा संभाग को छोड़कर अन्य सभी संभागों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई।


प्रदेश में अब तक की मौसमी वर्षा सामान्य के आसपास बनी हुई है। सामान्य की तुलना में वर्षा में करीब 2 प्रतिशत का अंतर दर्ज किया गया है।

एक्टिव सिस्टम के आगे बढ़ने की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार 25 अगस्त को झारखंड और उसके आसपास बना निम्न दबाव का क्षेत्र फिलहाल उसी क्षेत्र में सक्रिय है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है और ऊंचाई के साथ दक्षिण दिशा की ओर झुका हुआ है।

मौसम विभाग ने बताया कि यह सिस्टम अगले 24 घंटे के दौरान लगभग पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी रायपुर में बुधवार को आसमान सामान्यतः बादलों से ढका रहेगा। इस दौरान एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

इन जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

मौसम विभाग ने बुधवार सुबह 7 बजे से अगले तीन घंटे के लिए कई जिलों में बारिश, मेघगर्जन और आकाशीय बिजली की संभावना जताई है। जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

बड़े बचेली में 17 सेमी बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। बड़े बचेली में सबसे ज्यादा 17 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा ओडगी में 12 सेमी, राजिम में 11 सेमी तथा कुटरू, गोबरा नवापारा और मस्तूरी में 10-10 सेमी बारिश हुई।

वहीं गंगालूर, भोपालपट्टनम और बीजापुर में 9-9 सेमी वर्षा दर्ज की गई।

तापमान में भी उतार-चढ़ाव

मंगलवार को प्रदेश में दुर्ग सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश के चलते तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 54 सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले का आरोप, NIA ने 5 राज्यों में की छापेमारी

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नई दिल्ली- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की वेबसाइटों को निशाना बनाकर किए गए कथित साइबर हमलों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। NIA ने साइबर आतंकवाद से जुड़े गुजरात मामले की जांच के तहत महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और दिल्ली में पांच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की 54 वेबसाइटों पर कथित रूप से Distributed Denial-of-Service (DDoS) हमले करने का प्रयास किया था। इन वेबसाइटों में महत्वपूर्ण सरकारी डिजिटल संसाधन और Critical Information Infrastructure से जुड़े सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।

पांच राज्यों में एक साथ कार्रवाई

NIA की तलाशी महाराष्ट्र के पुणे स्थित जुन्नर, गुजरात के खेड़ा स्थित नडियाद, तेलंगाना के करीमनगर स्थित रामागुंडम, बिहार के गोपालगंज और दिल्ली में की गई। यह मामला 25 जून 2025 को दर्ज साइबर आतंकवाद के केस से संबंधित है।

तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव समेत कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनसे कथित हैकिंग गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री मिलने की बात सामने आई है।

दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण के जरिए ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों को सहायता या सहयोग प्रदान किया था। इन्हीं कड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर तलाशी और पूछताछ की गई।

DDoS हमला ऐसी साइबर तकनीक है, जिसमें किसी वेबसाइट या सर्वर पर भारी मात्रा में अवैध इंटरनेट ट्रैफिक भेजकर उसकी सामान्य सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया जाता है।

NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सरकारी डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। मामले की आगे की जांच जारी है।


NH-53 पर तुमगांव के पास दो ट्रकों की आमने-सामने भिड़ंत, दोनों चालक घायल

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तुमगांव- राष्ट्रीय राजमार्ग-53 (NH-53) पर तुमगांव के पास दो ट्रकों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों ट्रकों के चालक घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रकों की भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि वाहनों के आगे के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में घायल दोनों चालकों को तत्काल तुमगांव अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में सहयोग किया। वहीं, पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटना की स्थिति का जायजा लिया।

फिलहाल हादसा किस कारण से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। हादसे के चलते कुछ समय तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा।

लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच NH-53 जैसे व्यस्त मार्गों पर वाहन चालकों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, निर्धारित गति का पालन करने और सामने से आने वाले वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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एक घंटे के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों का जान जोखिम में क्यों डाला गया?

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महासमुंद- साइबर सुरक्षा आज के समय में अत्यंत आवश्यक विषय है, लेकिन इसके नाम पर आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अवधि और व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। केवल एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए जिले के शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाना, वह भी तेज बारिश के मौसम में, क्या वास्तव में उचित है? क्या महज प्रमाण-पत्र देने से शिक्षक साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित हो जाएंगे?

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण की उपयोगिता पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दूर-दराज से जिला मुख्यालय बुलाने से शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बरसात के मौसम में लंबी दूरी तय करने के दौरान शिक्षकों की जान-माल की सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है। हाल के दिनों में बारिश के कारण कई स्थानों पर दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आई हैं, ऐसे में गैर-जरूरी आवागमन को कम करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कोकडिया का कहना है कि प्रशिक्षण में दी गई साइबर सुरक्षा से संबंधित अधिकांश सामान्य जानकारियां आज शिक्षकों तक टीवी, मोबाइल, समाचार माध्यमों और विभिन्न जागरूकता अभियानों के जरिए पहले से पहुंच रही हैं। यदि वास्तव में शिक्षकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए प्रशिक्षित करना है तो प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न होकर व्यावहारिक, संवादात्मक और विस्तृत होना चाहिए।

उनके अनुसार, इस प्रशिक्षण को जिला मुख्यालय पर केवल एक घंटे में आयोजित करने के बजाय संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों के माध्यम से भी कराया जा सकता है। पहले संकुल समन्वयकों को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाए और उसके बाद वे अपने-अपने संकुल के शिक्षकों को प्रशिक्षण दें। इससे शिक्षकों का यात्रा समय बचेगा, विद्यार्थियों की पढ़ाई कम प्रभावित होगी और प्रशासन का खर्च भी घटेगा।

एक घंटे का प्रशिक्षण कितना प्रभावी?

साइबर अपराध लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल भाषण सुनाकर या जानकारी देकर साइबर सुरक्षा की समझ विकसित नहीं की जा सकती। प्रशिक्षण में वास्तविक उदाहरण, साइबर ठगी के तरीके, फर्जी कॉल और लिंक की पहचान, बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाव, सोशल मीडिया सुरक्षा, पासवर्ड सुरक्षा, डेटा सुरक्षा तथा साइबर अपराध होने अथवा प्रयास किए जाने पर तत्काल क्या कदम उठाए जाएं—इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

वन-वे प्रशिक्षण प्रभावी नहीं होते। प्रशिक्षण में शिक्षकों को सवाल पूछने, अपने अनुभव साझा करने, उदाहरणों पर चर्चा करने और समस्याओं का समाधान समझने का अवसर मिलना चाहिए। आपसी संवाद और प्रश्नोत्तर ही किसी प्रशिक्षण को प्रभावी बनाते हैं।

साइबर अपराध रोकने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी

कोकडिया ने कहा कि केवल जनता को जागरूक करने से साइबर अपराध पूरी तरह नहीं रुकेंगे। साइबर कानूनों को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है।

यदि किसी व्यक्ति को ठगने का प्रयास किया जा रहा है, फर्जी कॉल या संदेश के माध्यम से धोखाधड़ी का प्रयास किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केवल पैसा खाते से निकल जाने के बाद ही कार्रवाई करने की बजाय धोखाधड़ी के प्रयास की सूचना पर भी तत्काल कार्रवाई और मार्गदर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस एवं संबंधित अधिकारियों को साइबर अपराध के नए तरीकों के बारे में लगातार प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को समय पर सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल सके।

टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाना होगा

आज साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों से साइबर अपराधों का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा। हमें आधुनिक तकनीक को समझना और उसका प्रभावी उपयोग करना होगा।

ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे संदिग्ध नंबर, फर्जी कॉल और साइबर ठगी के प्रयासों की पहचान जल्द से जल्द हो सके तथा संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंच सके। साइबर सुरक्षा केवल प्रशिक्षण का विषय नहीं, बल्कि तकनीक, कानून, पुलिस व्यवस्था और जन-जागरूकता—इन सभी के समन्वय का विषय है।

प्रमाण-पत्र नहीं, वास्तविक प्रशिक्षण चाहिए

एक घंटे के प्रशिक्षण के बाद यदि हजारों शिक्षकों के प्रमाण-पत्र तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो यह भी विचारणीय है कि उस खर्च से वास्तविक रूप से कितना साइबर सुरक्षा कौशल विकसित हुआ।

यदि शिक्षक पहले से सामान्य साइबर सुरक्षा जानकारी रखते हैं और प्रशिक्षण केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित रह जाता है, तो यह शिक्षकों के साथ भी अन्याय है और सरकारी संसाधनों का भी उचित उपयोग नहीं है।

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि सरकारी प्रशिक्षण केवल औपचारिकता के लिए एक घंटे का नहीं होना चाहिए। यदि प्रशिक्षण आवश्यक है तो उसे पर्याप्त समय देकर प्रभावी तरीके से कराया जाए।

पूरे दिन का प्रशिक्षण हो

साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कम से कम एक पूरे दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, वास्तविक साइबर ठगी के उदाहरण, प्रश्नोत्तर, साइबर अपराध की शिकायत की प्रक्रिया, डिजिटल सुरक्षा के उपाय और व्यवहारिक अभ्यास शामिल किए जाने चाहिए।

इसके साथ ही शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाने के बजाय पहले संकुल समन्वयकों को प्रशिक्षित कर संकुल स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इससे समय, धन और यात्रा का खर्च बचेगा तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई भी कम प्रभावित होगी।

गेंदलाल कोकडिया का कहना है कि साइबर सुरक्षा निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन प्रशिक्षण भी उतना ही गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। महज एक घंटे का प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र बांटना समाधान नहीं है। यदि उद्देश्य वास्तव में शिक्षकों को साइबर सुरक्षा के प्रति सक्षम बनाना है, तो प्रशिक्षण पूरे दिन का, संवादात्मक, व्यावहारिक और स्थानीय स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए।

सवाल यह नहीं है कि साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण जरूरी है या नहीं—सवाल यह है कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिससे वास्तव में शिक्षक और समाज साइबर अपराध से सुरक्षित हो सकें।

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