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महासमुंद कांग्रेस भवन में बवाल: नेताओं के बीच मारपीट, कुर्सियां टूटीं

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 महासमुंद। जिला कांग्रेस भवन में आज गुरुवार को उस समय हंगामा मच गया, जब दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के दौरान जमकर मारपीट, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार, विवाद निर्मल जैन और पार्षद विजय साव के बीच शुरू हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में तब्दील हो गई। दोनों पक्षों के समर्थक भी इसमें शामिल हो गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस दौरान कुर्सियां तोड़े जाने की भी खबर है।

घटना के समय जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारकाधीश यादव और पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक विवाद काफी बढ़ चुका था।

सूत्रों के अनुसार, विवाद किसी छोटे मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन पहले से चल रहे गुटीय मतभेद के कारण मामला तूल पकड़ गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और खुद को निर्दोष बताया है।

मामला सिटी कोतवाली थाना पहुंच चुका है, जहां शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने सभी पक्षों के बयान लेना शुरू कर दिया है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के भीतर अनुशासन और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर कांग्रेस जैसे बड़े संगठन में इस तरह की घटनाएं अंदरूनी गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती हैं।

नई स्टडी में खुलासा: नदी जल में धातु प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों से अधिक खतरा

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नई दिल्ली/लखनऊ- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा-यमुना संगम से लिए गए जल नमूनों पर आधारित एक नई स्टडी में सामने आया है कि नदी जल में मौजूद सूक्ष्म धातु (ट्रेस मेटल) प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक स्वास्थ्य जोखिम है।

यह अध्ययन बिरबल साहनी पुराजीव विज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें नदी के पानी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पारंपरिक तरीके में पानी की औसत प्रदूषण स्तर को मापा जाता है, लेकिन इससे वास्तविक जोखिम का पूरा आकलन नहीं हो पाता, क्योंकि यह लोगों की उम्र, शरीर और संपर्क के स्तर पर निर्भर करता है।

अध्ययन के दौरान बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र से अलग-अलग स्थानों और मौसमों में पानी के नमूने लिए गए और उनमें आर्सेनिक, सीसा (लेड) और कैडमियम जैसे धातुओं की मात्रा का परीक्षण किया गया।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने ‘मोंटे कार्लो सिमुलेशन’ तकनीक का उपयोग करते हुए 10,000 संभावित परिस्थितियों का विश्लेषण किया, जिसमें पानी के सेवन, शरीर के वजन और प्रदूषण स्तर जैसे कारकों को शामिल किया गया।

स्टडी में पाया गया कि बच्चों में गैर-कैंसरजन्य जोखिम (नॉन-कार्सिनोजेनिक रिस्क) काफी अधिक है। लगभग 67% मामलों में ‘हैज़र्ड इंडेक्स’ सुरक्षित सीमा से ऊपर पाया गया। वहीं आर्सेनिक के संपर्क से कैंसर का खतरा भी गंभीर स्तर पर पाया गया।

शोध में यह भी सामने आया कि प्रदूषण के स्रोत प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों हैं, जिनमें कृषि अपशिष्ट, औद्योगिक उत्सर्जन, शहरी सीवेज और थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के संगम क्षेत्रों में दो अलग-अलग जल धाराओं के मिलने से प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ जाता है, जिससे धातुओं का संचरण और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

यह अध्ययन नदी स्वास्थ्य आकलन के लिए एक नया और प्रभावी तरीका प्रस्तुत करता है और जल सुरक्षा नीति, प्रदूषण नियंत्रण तथा जोखिम प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र में भारी धातुओं के नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ, जन-केंद्रित शासन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने आज मिशन कर्मयोगी के तहत ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देशभर के लोक सेवकों की क्षमता, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम 2 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए और “नागरिक देवो भव” की भावना से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने निरंतर सीखने, तकनीक और डेटा के उपयोग तथा कर्तव्य-आधारित सेवा दृष्टिकोण पर जोर दिया।

नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के साथ इस पहल की शुरुआत हुई, जो मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। यह कार्यक्रम ‘टेक्नोलॉजी, ट्रेडिशन और टैंजिबल आउटकम्स’ के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि यह पहल एक सक्षम, प्रतिबद्ध और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा के निर्माण को मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि अब प्रशिक्षण पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर ‘कभी भी, कहीं भी’ सीखने की दिशा में विकसित हुआ है, जिसे iGOT जैसे प्लेटफॉर्म संभव बना रहे हैं।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी ने सार्वजनिक सेवा में ज्ञान, कौशल और मूल्यों को एकीकृत कर एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ‘कर्मयोगी’ वह है जो ज्ञान और कर्म को जोड़ते हुए सहानुभूति के साथ शासन करता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह ने बताया कि iGOT प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, 8 करोड़ से अधिक कोर्स पूरे किए जा चुके हैं और 4,600 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि 130 से अधिक क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार की गई हैं।

कर्मयोगी भारत के अध्यक्ष सुब्रमण्यम रामदोराई ने कहा कि यह पहल सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने और आत्म-विकास की संस्कृति को मजबूत करती है। उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें ‘कर्मयोगी गीत’, ‘कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट’, ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ और ‘ट्रस्ट-बेस्ड पीयर असेसमेंट फ्रेमवर्क’ शामिल हैं। साथ ही AI आधारित ‘अमृत ज्ञान कोश’ केस स्टडी सूट भी लॉन्च किया गया।

मिशन कर्मयोगी, जो अब पांच वर्ष पूरे कर चुका है, ने पारंपरिक नियम-आधारित प्रणाली से हटकर एक दक्षता-आधारित ढांचा स्थापित किया है। ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगा।

इस कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

चंचल कुमार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव का पद संभाला

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नई दिल्ली- वरिष्ठ आईएएस अधिकारी चंचल कुमार ने 1 अप्रैल 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया। वे 1992 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।

पदभार ग्रहण करने के अवसर पर उन्हें निवर्तमान सचिव संजय जाजू और मंत्रालय के अन्य अधिकारियों एवं विभिन्न मीडिया इकाइयों द्वारा स्वागत किया गया। संजय जाजू को अब पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।

चंचल कुमार इससे पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वे राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सड़क और अवसंरचना परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बिहार सरकार में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और सचिव के पद शामिल हैं। साथ ही वे कई जिलों में जिला अधिकारी (डीएम) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

श्री चंचल कुमार ने आईआईटी कानपुर से बी.टेक और एम.टेक की डिग्री प्राप्त की है तथा पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की है, जो उनके प्रशासनिक अनुभव के साथ मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है।

यूआईडीएआई और मैपमायइंडिया के बीच समझौता, Mappls ऐप पर दिखेंगे अधिकृत आधार केंद्र

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नई दिल्ली- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए मैपमायइंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत आने वाले महीनों में Mappls ऐप पर देशभर के अधिकृत आधार केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से लोगों को अधिकृत आधार केंद्रों की पहचान करने और वहां तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, उपयोगकर्ता यह भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कौन-सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे वयस्क नामांकन, बच्चों का नामांकन या केवल पता और मोबाइल अपडेट।

यह सहयोग नागरिकों की सुविधा बढ़ाने, गलत जानकारी को रोकने और आधार सेवा केंद्रों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 1 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित हुआ।

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करेगी और देशभर में सत्यापित आधार केंद्रों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे लोगों को सही और अधिकृत केंद्र आसानी से मिल सकें।

इस सेवा के लागू होने के बाद, जब उपयोगकर्ता Mappls ऐप पर आधार केंद्र खोजेंगे, तो उन्हें सीधे अधिकृत केंद्रों की जानकारी मिलेगी। मैपमायइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर यूआईडीएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को एकीकृत कर सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।

मैपमायइंडिया के सह-संस्थापक और सीएमडी राकेश वर्मा ने कहा कि यह यूआईडीएआई के साथ जुड़कर लोगों को आधार सेवाओं तक आसान पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे, स्मारक डाक टिकट जारी

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC), सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे होने पर प्लेटिनम जुबली मनाई। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया, जो संस्थान की उत्कृष्ट प्रशिक्षण परंपरा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को दर्शाता है।

यह डाक टिकट केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली स्थित रंग भवन सभागार में जारी किया गया। इस कार्यक्रम में डाक सेवाओं के महानिदेशक जितेंद्र गुप्ता, सदस्य (वित्त) मनीष सिन्हा, सीजीसीए वंदना गुप्ता और सदस्य (एचआरडी) कर्नल एस. एफ. एच. रिजवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री सिंधिया ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि डाक प्रशिक्षण केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहां इतिहास जीवित है और निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों का यह सफर राष्ट्र निर्माण में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भविष्य की दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक न केवल देश बल्कि विश्व का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डाक विभाग और उसके कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2 अप्रैल 1951 को स्थापित डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर का उद्देश्य स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना था। यह संस्थान 56.71 एकड़ परिसर में फैला हुआ है और अब उत्तरी भारत के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के डाक कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाला प्रमुख संस्थान बन चुका है।

आज यह केंद्र 11 आधुनिक कंप्यूटर लैब और एक विशेष ई-स्टूडियो से सुसज्जित है, जहां हर साल करीब 3,000 कर्मचारियों को ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अनुशासन, विश्वसनीयता और जनसेवा जैसे मूल्यों को भी विकसित किया जाता है।

यह स्मारक डाक टिकट देशभर के फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती: गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी ने ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने के लिए समझौता किया

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘संपन्न’ (SAMPANN) डिजिटल पेंशन एवं वित्तीय प्रबंधन प्लेटफॉर्म को अपनाने के लिए गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी (CPA) के साथ समझौता किया है।

यह समझौता दूरसंचार विभाग के अंतर्गत नियंत्रक जनरल संचार लेखा (CGCA) कार्यालय की ओर से उप महानियंत्रक जी. संदीप कुमार गौड़, कोचीन पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अध्यक्ष कासिविश्वनाथ और गोवा सरकार की ओर से रेजिडेंट कमिश्नर शकील उल रहमान राथर द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

‘संपन्न’ (System for Accounting and Management of Pension) एक क्लाउड-आधारित, एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन प्रबंधन प्रणाली है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्लेटफॉर्म पेंशन की प्रक्रिया को शुरू से लेकर भुगतान और लेखांकन तक पूरी तरह डिजिटल बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन स्वीकृति, अधिकृतकरण, लेखांकन और भुगतान की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल मंच पर सरल और पारदर्शी बनाया गया है। गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी द्वारा इसे अपनाने से आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

संचार मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर महीने औसतन ₹1,650 करोड़ की पेंशन वितरित की जा रही है और अब तक कुल ₹72,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन की दिशा बदली है, जहां अब सेवाएं सीधे नागरिकों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के माध्यम से नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने की इस अवधारणा को अन्य संस्थानों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने डाक विभाग और दूरसंचार विभाग को भी ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

इस मौके पर संचार मंत्री ने ‘संपन्न’ कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को दर्शाया गया है।

कार्यक्रम के अंत में सीजीसीए वंदना गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि पेंशनर्स किसी एक विभाग से नहीं जुड़े होते, बल्कि उन्हें सर्वोत्तम सेवाएं मिलनी चाहिए, इसी सोच के साथ ‘संपन्न’ को सभी संस्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

वित्त वर्ष 2025–26 में कोयला क्षेत्र ने रचा इतिहास, उत्पादन 200 मिलियन टन के पार

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से संयुक्त उत्पादन और आपूर्ति पहली बार 200 मिलियन टन (MT) के आंकड़े को पार कर गई है।

31 मार्च 2026 तक इन खदानों से कुल कोयला उत्पादन 210.46 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 190.95 मिलियन टन की तुलना में 10.22% अधिक है। वहीं, डिस्पैच (आपूर्ति) भी बढ़कर 204.61 मिलियन टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 190.42 मिलियन टन के मुकाबले 7.35% की वृद्धि दर्शाता है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • 200 MT का ऐतिहासिक आंकड़ा पार: पहली बार उत्पादन और डिस्पैच 200 मिलियन टन से अधिक हुआ।

  • नई खदानों की शुरुआत: इस वर्ष 12 नई कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों को संचालन की अनुमति (MOP) मिली, जिससे 86 मिलियन टन वार्षिक क्षमता बढ़ी।

  • तेज उत्पादन शुरुआत: 7 खदानों ने उसी वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू किया, जो तेज निष्पादन और बेहतर समन्वय को दर्शाता है।

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों से उत्पादन और आपूर्ति में लगातार वृद्धि का रुझान देखने को मिला है, जो बेहतर लॉजिस्टिक्स और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाता है।

यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की नीतियों, आसान अनुमोदन प्रक्रिया और क्षेत्र में सुधारों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह प्रगति ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में अहम योगदान देगी। आने वाले समय में दक्षता, विस्तार और जिम्मेदार खनन पर जोर देते हुए यह क्षेत्र देश की औद्योगिक और आर्थिक वृद्धि को गति देता रहेगा।

युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दे रही सरकार, ‘युविका’ कार्यक्रम से मिल रहा बड़ा अवसर: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि सरकार ‘युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम’ (YUVIKA) जैसे समावेशी और भविष्य उन्मुख प्रयासों के माध्यम से स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच को व्यवस्थित रूप से विकसित कर रही है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कार्यक्रम की संरचना, पहुंच और प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में शुरू किया गया ‘युविका’ कार्यक्रम कक्षा 9 के छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से परिचित कराने के उद्देश्य से बनाया गया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम में हर राज्य से 10 और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश से 8 छात्रों का चयन किया जाता है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि चयन प्रक्रिया में ग्रामीण छात्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें पंचायत स्तर के स्कूलों के छात्रों के लिए 15% वरीयता शामिल है।

चयन प्रक्रिया में क्विज़, विज्ञान मेलों, ओलंपियाड और एनएसएस व स्काउट्स जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी को भी शामिल किया जाता है, जिससे छात्रों का समग्र मूल्यांकन किया जा सके।

अब तक इस कार्यक्रम के पांच संस्करणों में कुल 1,320 छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 और 2021 में यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका था। हाल के वर्षों में हर साल करीब 350 छात्रों का चयन किया जा रहा है, जो इसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

यह एक माह का आवासीय कार्यक्रम होता है, जो ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित किया जाता है। इसमें चयनित छात्रों को इसरो के प्रमुख केंद्रों जैसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (तिरुवनंतपुरम) और स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (अहमदाबाद) में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही महेंद्रगिरी (तमिलनाडु) और जोधपुर (राजस्थान) में दो नए केंद्र भी जोड़े जा रहे हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने के लिए देशभर में क्विज़ प्रतियोगिताएं, विज्ञान मेले और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने ‘विज्ञान ज्योति’ जैसी अन्य योजनाओं का भी उल्लेख किया, जो कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को STEM क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

मंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज़ी से हो रही प्रगति का भी जिक्र करते हुए बताया कि यह क्षेत्र अब लगभग 9 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2033 तक इसके 44 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत द्वारा 90% से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण किए गए हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि ‘युविका’ जैसे कार्यक्रम न केवल भविष्य के वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, बल्कि भारत को 2047 तक अंतरिक्ष तकनीक और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

विकसित भारत की कल्पना हो रहा है साकार,मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान

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रायपुर- गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।

यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।

यह परिवर्तन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी।

पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत

जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”

ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”

यात्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

महासमुंद में बड़ी कार्रवाई: 1432 किलो अफीम पोस्त डोडा जब्त, 2 तस्कर गिरफ्तार

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और थाना सिंघोड़ा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मादक पदार्थ तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 1432 किलोग्राम अफीम पोस्त डोडा जब्त किया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 2 करोड़ 14 लाख 80 हजार रुपये बताई जा रही है।


इसके अलावा तस्करी में प्रयुक्त पिकअप वाहन समेत कुल लगभग 2 करोड़ 25 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।

हरियाणा के दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में हरियाणा के करनाल जिले के रहने वाले दो आरोपियों—हरविंदर सिंह और सत्यवान वाल्मीकि—को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में दोनों के अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

सूचना पर की गई नाकाबंदी

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक पिकअप वाहन (HR46 F 4848) में भारी मात्रा में अफीम पोस्त डोडा ओडिशा की ओर से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा है। इसके बाद एनएच-53 पर रेहटीखोल के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका गया।

वाहन से बरामद हुआ मादक पदार्थ

तलाशी के दौरान पिकअप में रखी बोरियों से भारी मात्रा में अफीम पोस्त डोडा बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इस खेप को झारखंड के गुमला से रायपुर ले जा रहे थे।

बड़े नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स को पूरे नेटवर्क की जांच के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें सोर्स, ट्रांजिट रूट और डेस्टिनेशन तक की कड़ी जांच की जा रही है।

ममता के गढ़ में अमित शाह की हुंकार: बोले- चुनाव तक 15 दिन यहीं डेरा डालूंगा

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 कोलकाता। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सियासी तापमान बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के गढ़ में जोरदार हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों के मद्देनज़र वह 15 दिनों तक राज्य में ही रहकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएंगे।


शाह ने अपने संबोधन में राज्य की सत्तारूढ़ सरकार पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक मजबूती के साथ काम करने की अपील की और विश्वास जताया कि इस बार चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

गृह मंत्री के इस बयान को भाजपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी इस बयान पर पलटवार की संभावना जताई जा रही है, जिससे राज्य में सियासी घमासान और तेज हो सकता है।

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस: विशेष बच्चों के लिए संवेदनशील पहल

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 रायपुर : आज विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर कोपलवाणी स्कूल के स्पीच थेरेपी सेंटर के बच्चे अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के साथ लोक भवन पहुंचे और राज्यपाल रमेन डेका से शिष्टाचार भेंट की। यह अवसर न केवल बच्चों के लिए विशेष रहा, बल्कि समाज में ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।


राज्यपाल ने बच्चे और उनके अभिभावकों तथा विशेष बच्चों के लिए समर्पित शिक्षकों से आत्मीय संवाद किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने ऑटिज़्म को नज़दीक से समझने का अवसर प्राप्त किया तथा विशेष बच्चों की क्षमताओं और चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ जाना।


कार्यक्रम के दौरान श्री डेका बच्चों के साथ अत्यंत आत्मीयता से मिले और उनके साथ समय बिताया। सभी ने मिलकर नीले रंग के गुब्बारे आकाश में छोड़कर यह संदेश दिया कि समाज में हर बच्चे को समान अवसर, समझ और स्वीकार्यता मिलनी चाहिए।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने कोपलवाणी संस्था के बच्चों के आवागमन की सुविधा के लिए अपने स्वेच्छानुदान मद से ई-रिक्शा प्रदान किए और उन्होंने ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

कोपलवाणी की डायरेक्टर पद्मा शर्मा ने बताया कि यह पहला अवसर है जब विशेष बच्चे लोकभवन पहुँचे हैं। अभिभावकों ने भी इसे गर्व का विषय बताया कि उनके बच्चे आज राज्यपाल से भेंट कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सही मार्गदर्शन, विशेष शिक्षकों, अभिभावकों एवं समाज के संवेदनशील लोगों के सहयोग से ये बच्चे निश्चित ही जीवन में उत्कृष्ट मुकाम प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम में संस्था के शिक्षक, शिक्षिकाएं सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

जग्गी हत्याकांड में बड़ा झटका: अमित जोगी को जेल जाना तय, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस की बेंच) ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।


क्या है पूरा मामला?

4 जून 2003 को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना पूरे राज्य में सनसनी का विषय बन गई थी। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे और राजनीति के साथ-साथ कारोबार से भी जुड़े हुए थे।

निचली अदालत का फैसला

हत्या के मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अमित जोगी को उस समय सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

अब हाईकोर्ट का आदेश

रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, जहां से इसे पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का स्पष्ट आदेश जारी किया है।

अमित जोगी को बड़ा झटका

यह फैसला अमित जोगी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब अमित जोगी को तीन हफ्तों के अंदर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

इस मामले में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी समेत कई अन्य आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें उम्रकैद की सजा हो चुकी है। रामावतार जग्गी मूल रूप से कारोबारी थे। जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में आए, तब जग्गी भी उनके साथ पार्टी में शामिल हो गए और छत्तीसगढ़ में एनसीपी के कोषाध्यक्ष बने। उनकी हत्या ने उस समय राज्य की राजनीति को काफी प्रभावित किया था। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से अब मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: कई जिलों में ऑरेंज-येलो चेतावनी, तेज आंधी-बारिश का खतरा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। गरज-चमक के साथ तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के अनुसार सूरजपुर, कोरिया, पेंड्रा, कोरबा, मुंगेली, बिलासपुर, बालोद, राजनांदगांव और बेमेतरा जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज आंधी, बिजली गिरने और मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

वहीं चांपा, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और धमतरी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

मौसम विभाग ने नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने को कहा गया है। किसानों को भी फसल और मवेशियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने की हिदायत दी गई है।

क्या करें और क्या न करें

खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।
बिजली कड़कने के समय खुले मैदान में न रहें।
पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखें।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करें।

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