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शहीद गुंडाधुर की धरती से लिखी जा रही बस्तर में बदलाव की कहानी

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 धनंजय राठौर संयुक्त संचालक,

जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर
रायपुर : कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर रहने वाले बस्तर के गांवों में अब विकास और विश्वास की एक नई और स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है। कभी जिन क्षेत्रों में खौफ का साया रहता था, अब वहां सुरक्षा कैंप विकास और जनसेवा के केंद्र में तब्दील हो चुके हैं। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है, जिसके तहत पहले चरण में 70 कैंपों को इन सेवा डेरों में बदला जा रहा है। यह पहल आज बस्तर के ग्रामीणों के लिए डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार का एक नया संबल बन चुकी है।


विकास की मुख्यधारा से जुड़ता बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से बस्तर आज नक्सलवाद के प्रभावों से मुक्त हो रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य इसे देश के अग्रणी विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शुमार करना है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से आज सुदूर अंचलों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। कृषि, पशुपालन और सिंचाई योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आय में लगातार इजाफा हो रहा है।


शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा सुशासन और जनविश्वास का प्रतीक

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। अब इस योजना का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। नेतानार वही ऐतिहासिक भूमि है जो बस्तर के महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली है। वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह में गुंडाधुर ने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए शोषणकारी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ हुंकार भरी थी। आज उसी ऐतिहासिक धरा पर खुला यह सेवा डेरा आदिवासी समाज के स्वावलंबन और आधुनिक विकास का नया केंद्र बन गया है।

एक ही छत के नीचे मिल रही हैं तमाम सरकारी सुविधाएं

पहले बस्तर के ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों, जैसे आधार कार्ड बनवाने, बैंक खाता खोलने या जाति-निवास प्रमाण पत्र के लिए कई-कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। लेकिन अब सेवा डेरा के माध्यम से यह सारी व्यवस्थाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध हो गई हैं। डिजिटल सेवाएं जैसे आधार कार्ड बनवाने व अपडेट कराने, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक करने और जन्म-मृत्यु, आय व जाति प्रमाण पत्र जैसी ऑनलाइन सुविधाएं अब स्थानीय स्तर पर मिल रही हैं।

बैंकिंग सेवाएं (बैंक सखी)

महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे गांव में ही पैसे निकालने, जमा करने और खाते खोलने जैसी बैंकिंग सुविधाएं दे रही हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुलभ हो रही हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों से आ रही आर्थिक क्रांति

सेवा डेरा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को बाजार से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम बन गया है। नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाला इमली पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग बताती हैं कि इस कार्य से जुड़कर महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की राह पर हैं। इसी तरह, सुखदेवी जैसी ग्रामीण महिलाओं के लिए जीवन आसान हुआ है, जिन्हें अब अपनी छोटी बच्ची का आधार बनवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता।

स्थानीय परंपरा को सहेजते हुए पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार करने और उसकी बिक्री से महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी हो रही है, जबकि धान की भूसी का उपयोग पशु आहार के रूप में हो रहा है। इसके अलावा, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

आधुनिक बाजार और बेहतर पैकेजिंग से जुड़ रहा बस्तर

इन उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अब पेशेवर संस्थानों की मदद ली जा रही है। हाल ही में अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग की टीम ने नेतानार पहुंचकर सिलाई, इमली प्रसंस्करण और पारंपरिक ढेकी के कार्यों का जायजा लिया तथा उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर चर्चा की। इससे बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

शहीद गुंडाधुर की पावन भूमि पर सुरक्षा कैंपों से लेकर सेवा डेरा तक की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नीतियों और प्रशासनिक मुस्तैदी से किस प्रकार सुदूर अंचलों की तस्वीर बदली जा सकती है। यह बदलाव केवल भौतिक विकास का नहीं, बल्कि बस्तर के हर नागरिक के जीवन में खुशहाली और आत्मविश्वास का नया सवेरा है।

रायपुर में AI की नई पहल: साधारण एक्स-रे से पता चलेगी हड्डियों की कमजोरी, शुरुआती परीक्षण में 97.7% सटीकता

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छत्तीसगढ़ के रायपुर से स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छह राष्ट्रीय संस्थान मिलकर ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो सामान्य एक्स-रे की मदद से हड्डियों की कमजोरी का आकलन कर सकेगा। इस तकनीक के शुरुआती परीक्षण में 97.7% तक सटीकता की रिपोर्ट दी गई है। अगर आगे के परीक्षणों में भी इसके परिणाम भरोसेमंद साबित होते हैं, तो हड्डियों की बीमारी का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

क्या है यह नई AI तकनीक?

आमतौर पर हड्डियों में कैल्शियम और खनिजों की मात्रा कम होने, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए विशेष जाँच की जरूरत पड़ती है। नई परियोजना का उद्देश्य सामान्य एक्स-रे में मौजूद जानकारी का AI के जरिए विश्लेषण करके हड्डियों की स्थिति के बारे में शुरुआती संकेत प्राप्त करना है।

इससे डॉक्टरों को ऐसे मरीजों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है, जिन्हें आगे विस्तृत जाँच कराने की जरूरत है।

इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन से संस्थान शामिल हैं?

AIIMS Raipur Hosts Climate Change Lecture, Unveils New Textbook

चार AIIMS संस्थान

  • AIIMS Raipur

  • AIIMS Deoghar

  • AIIMS Delhi

  • AIIMS Bhubaneswar

इन संस्थानों की भूमिका मरीजों के डेटा और चिकित्सकीय मूल्यांकन से जुड़ी है।

IIT ISM ICSDMP-2024 :: Home

दो तकनीकी संस्थान

  • IIT (ISM) Dhanbad

  • NIT Jamshedpur

इनकी भूमिका AI मॉडल और तकनीकी प्रणाली विकसित करने की है।

परियोजना का नेतृत्व AIIMS देवघर के प्रोफेसर डॉ. मनीष राज कर रहे हैं। AIIMS रायपुर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आलोक सी. अग्रवाल ने भी इस पहल से होने वाले संभावित लाभों पर जानकारी दी है।

प्रोजेक्ट की लागत और समय-सीमा

₹1.47 करोड़-परियोजना की कुल स्वीकृत राशि

₹1.01 करोड़-ICMR की स्वीकृत सहायता

1 फरवरी 2025-परियोजना की शुरुआत

31 जनवरी 2028-निर्धारित परियोजना समाप्ति

ये आँकड़े 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार हैं।

अभी कौन-सी जाँच की जाती है और AI से क्या बदलेगा?
Bone Densitometry (DEXA) | United Radiology

DEXA स्कैन क्या है?

DEXA या DXA हड्डियों के खनिज घनत्व को मापने वाली विशेष जाँच है। इसका इस्तेमाल ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के कमजोर होने के जोखिम का आकलन करने में किया जाता है।

वर्तमान में DEXA मशीनों की उपलब्धता हर जगह समान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस जाँच का खर्च कुछ स्थानों पर ₹8,000 तक हो सकता है। AI आधारित तकनीक सफल होने पर पहले से उपलब्ध एक्स-रे का विश्लेषण करके ऐसे मरीजों को चिन्हित करने में मदद कर सकती है, जिन्हें DEXA जाँच की जरूरत हो।

सामान्य प्रक्रिया

        प्रस्तावित AI आधारित प्रक्रिया

एक्स-रे की डॉक्टर द्वारा व्याख्या

        एक्स-रे का AI से अतिरिक्त विश्लेषण

जरूरत पड़ने पर DEXA की सलाह

        जोखिम के संकेत मिलने पर आगे की जाँच की सलाह देने         में मदद

विशेष जाँच के लिए अलग सुविधा की जरूरत

       मौजूदा एक्स-रे सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने की संभावना

यह तुलना प्रस्तावित उपयोग को दर्शाती है, न कि सभी अस्पतालों में लागू हो चुकी व्यवस्था को।

97.7% सटीकता का वास्तव में क्या मतलब है?

यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू है।

  • शुरुआती परीक्षण में 97.7% तक सटीकता की रिपोर्ट दी गई है।

  • उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में परीक्षण के नमूने का आकार, मरीजों की संख्या और इस सटीकता की गणना की पूरी तकनीकी जानकारी नहीं दी गई है।

  • इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि AI हर 100 मरीजों में 97 या 98 मरीजों की बीमारी निश्चित रूप से पहचान लेगा।

  • व्यापक और स्वतंत्र परीक्षणों के बाद ही पता चलेगा कि यह तकनीक अलग-अलग उम्र के मरीजों और विभिन्न अस्पतालों में कितनी भरोसेमंद है।


छत्तीसगढ़ और ग्रामीण मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?

समय रहते जोखिम की पहचान

सामान्य एक्स-रे कराते समय ही हड्डियों की कमजोरी के संभावित संकेत मिलने से आगे की जाँच में मदद मिल सकती है।

दूरदराज के क्षेत्रों में संभावित लाभ

यदि भविष्य में यह तकनीक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचती है, तो बड़े शहरों से दूर रहने वाले मरीजों को भी शुरुआती स्क्रीनिंग की सुविधा मिल सकती है।

जाँच के खर्च में कमी की संभावना

मौजूदा एक्स-रे का अतिरिक्त उपयोग कुछ मरीजों के लिए अलग जाँच की जरूरत पहचानने में मदद कर सकता है। वास्तविक बचत का पता तकनीक लागू होने के बाद ही चलेगा।

ये संभावित फायदे हैं। इनके लिए तकनीक का चिकित्सकीय सत्यापन, आवश्यक मंजूरी और स्वास्थ्य सेवाओं में सफल क्रियान्वयन जरूरी होगा।

निष्कर्ष

रायपुर के AIIMS सहित छह राष्ट्रीय संस्थानों की यह संयुक्त परियोजना भारत में सुलभ और किफायती स्वास्थ्य जाँच की दिशा में एक संभावनाशील पहल है। साधारण एक्स-रे से हड्डियों की कमजोरी के संकेत पहचानने की तकनीक सफल रहती है, तो ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का जोखिम समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।

हालाँकि, फिलहाल 97.7% का आँकड़ा शुरुआती परीक्षण से जुड़ा है। इसे प्रमाणित नियमित जाँच समझने से पहले विस्तृत परीक्षण और चिकित्सकीय सत्यापन आवश्यक हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र आंदोलन: चुनाव के ऐलान के बाद भी क्यों जारी है विरोध?

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दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की माँग को लेकर चल रहा आंदोलन आज फिर चर्चा में है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगभग 20 साल बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र चुनाव की निश्चित समय-सीमा और अपनी अन्य माँगों को लेकर असंतुष्ट हैं। सोमवार को परिसर में फिर विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

पूरा मामला क्या है?

जामिया में छात्र संघ के चुनाव वर्ष 2006 से नहीं हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्र संघ न होने के कारण विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं है।

छात्रों ने छात्र संघ की बहाली, चुनाव की तारीख तय करने और विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की माँग के साथ आंदोलन शुरू किया। अक्टूबर के मध्य से जारी इस आंदोलन में भूख हड़ताल भी शामिल रही।

आज 26 अक्टूबर को क्या हुआ?

सुबह, विश्वविद्यालय ने लिखित आदेश जारी किया

प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। विरोध के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जाँच के लिए समिति बनाने की बात भी कही गई।

दोपहर, फिर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

चुनाव प्रक्रिया को तेज करने और मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त करने की माँग को लेकर छात्र दोबारा जुटे। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर आई। परिसर के कुछ प्रवेश द्वारों पर भी तनाव की स्थिति बनी।

मुख्य विवाद- छात्रों ने समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए

प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कहा कि चुनाव की निश्चित तारीख और अन्य माँगों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। प्रशासन के आदेश में सार्वजनिक माफी और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की शर्त भी दर्ज है, जिस पर कुछ छात्रों ने आपत्ति जताई।

छात्रों की मुख्य माँगें क्या हैं?

ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों की प्रमुख माँगें ये हैं:

1. छात्र संघ चुनाव की निश्चित तारीख

छात्र चाहते हैं कि चुनाव प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय हो और मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाए।

2. छात्र संघ के संविधान को मंजूरी

छात्रों की माँग है कि 20 दिसंबर 2026 तक छात्र संघ का संविधान तैयार करके मंजूर किया जाए। इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया में देरी न हो।

3. निलंबन और नोटिस वापस लेना

प्रदर्शन से जुड़े निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की माँग की गई थी। विश्वविद्यालय ने अपने 26 अक्टूबर के आदेश में इन्हें वापस लेने की बात कही है।

4. सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जाँच

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार और कार्रवाई की जाँच के लिए समिति बनाने की बात कही गई है।

5. माफी की शर्त और अन्य माँगें

कुछ प्रदर्शनकारी सार्वजनिक माफी देने की शर्त से असहमत हैं। उन्होंने मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे, परिसर में सामान्य गतिविधियाँ बहाल करने और अन्य लंबित मुद्दों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

4. विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या फैसला लिया?

मुद्दा

                26 अक्टूबर के आदेश की स्थिति

छात्र संघ चुनाव

        संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव

चुनाव की निश्चित तारीख

                            अभी घोषित नहीं

छात्रों के निलंबन और नोटिस            

                           वापस लेने का आदेश

सुरक्षा कर्मचारियों की जाँच

                 समिति गठित करने का आश्वासन

सार्वजनिक माफी

   आदेश में शर्त दर्ज; कुछ छात्र इसका विरोध कर रहे हैं


सबसे महत्वपूर्ण बात: चुनाव कराने पर सहमति बनी है, लेकिन संविधान को मंजूरी कब मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है। इसी कारण छात्र चुनाव की तारीख और पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा पर सवाल उठा रहे हैं।

क्या कक्षाएँ बंद हैं?

विश्वविद्यालय ने 24 अक्टूबर को जारी निर्देश के तहत कक्षाओं को अगले आदेश तक ऑनलाइन मोड में चलाने का फैसला किया था। पुस्तकालयों और परिसर की गतिविधियों पर भी प्रतिबंधों की खबर आई थी। नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों में इन व्यवस्थाओं की बहाली की पुष्टि नहीं है, इसलिए छात्रों को विश्वविद्यालय के आधिकारिक नोटिस देखने चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

  • छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • मंजूरी के बाद 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का प्रशासन का आदेश लागू होगा।

  • छात्रों और प्रशासन के बीच माफी की शर्त तथा अन्य लंबित माँगों को लेकर विवाद बना रह सकता है।

  • प्रदर्शन और भूख हड़ताल की स्थिति में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में समझौते के बाद हड़ताल खत्म होने की बात है, जबकि अन्य में कुछ छात्रों के विरोध जारी रखने की जानकारी है।

पूरी खबर का निष्कर्ष

जामिया का विवाद अब केवल छात्र संघ चुनाव कराने तक सीमित नहीं है। चुनाव की समय-सीमा, छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक माफी की शर्त भी विवाद के प्रमुख मुद्दे हैं। प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के कदम उठाए हैं, लेकिन आंदोलन से जुड़े सभी मतभेद समाप्त हुए हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।


छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा: रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराई यात्री बस, 3 की मौत, 10 घायल

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सिमगा के दरचुरा गांव के पास सुबह करीब 5:30 बजे हुआ हादसा; बस में सवार थे लगभग 22 यात्री, गैस कटर की मदद से चलाया गया बचाव अभियान

बलौदाबाजार-भाटापारा- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सिमगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम दरचुरा के पास अंबिकापुर से रायपुर आ रही एक यात्री बस सड़क पर खराब होकर खड़े ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 8 से 10 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस तथा बचाव दल ने राहत कार्य शुरू किया।

सुबह करीब 5:30 बजे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रॉयल ट्रेवल्स की यात्री बस अंबिकापुर से यात्रियों को लेकर रायपुर की ओर जा रही थी। बस में लगभग 22 यात्री सवार थे। सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे दरचुरा गांव के पास, इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के नजदीक, बस सड़क पर खड़े खराब ट्रक से पीछे की ओर टकरा गई।

सुबह का समय होने के कारण कई यात्री सो रहे थे। अचानक हुई जोरदार टक्कर से यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

बस में फंसे यात्रियों को गैस कटर से निकाला गया

हादसे की सूचना मिलते ही सिमगा थाना पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। टक्कर के कारण बस का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया था, जिससे कुछ यात्री अंदर फंस गए थे।

बचाव दल ने गैस कटर और अन्य उपकरणों की मदद से बस के क्षतिग्रस्त हिस्से को काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से सिमगा के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।

तीन लोगों की मौत, घायलों का इलाज जारी

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई और कई यात्री घायल हुए हैं। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 8 से 10 के बीच बताई गई है। कुछ घायलों की हालत गंभीर होने की भी जानकारी सामने आई है। मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति के संबंध में आधिकारिक रूप से अद्यतन जानकारी मिलने पर विवरण स्पष्ट हो सकेगा।

ट्रक खराब होने और सुरक्षा संकेतों की जांच

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, ट्रक खराब होने के कारण सड़क पर खड़ा था। वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए उसके आसपास चेतावनी संकेतक या ट्रैफिक कोन रखे गए थे। इसके बावजूद बस ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। हालांकि, दुर्घटना की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका थी या नहीं।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना के बाद पुलिस और बचाव दल ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के साथ दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की कार्रवाई की, ताकि हाईवे पर यातायात प्रभावित न हो। मामले में आगे की जांच जारी है।

इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर खराब होकर खड़े वाहनों के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था रखने और वाहन चालकों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता को सामने ला दिया है।


महासमुंद के तीन शिक्षकों को मिला ‘समाज दीप रत्न सम्मान 2026’, राज्य स्तरीय समारोह में बढ़ाया जिले का गौरव

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नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियों एवं उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए जितेन्द्र कुमार साहू, विनय कुमार यादव और संदीप कुमार साहू सम्मानित

महासमुंद- शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, रचनात्मक गतिविधियों तथा समाज निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले महासमुंद ब्लॉक के तीन शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। शिक्षक कला प्रतिभा अकादमी छत्तीसगढ़ (समग्र विकास मंच) द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में जितेन्द्र कुमार साहू, विनय कुमार यादव और संदीप कुमार साहू को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों, शिक्षण के प्रति समर्पण एवं सामाजिक योगदान के लिए ‘समाज दीप रत्न सम्मान 2026’ प्रदान किया गया। शिक्षकों की इस उपलब्धि से महासमुंद ब्लॉक और जिले का गौरव बढ़ा है।


राज्य स्तरीय समारोह में हुआ सम्मान

26 अक्टूबर 2026, सोमवार को आयोजित इस गरिमामय समारोह में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। शासन द्वारा पंजीकृत संस्था शिक्षक कला प्रतिभा अकादमी छत्तीसगढ़ (समग्र विकास मंच) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार करने वाले, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित तथा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करना था।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद माननीय विजय बघेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर ग्रामीण के विधायक माननीय मोतीलाल साहू ने की। वहीं, भिलाई नगर के विधायक माननीय देवेंद्र यादव अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

विशिष्ट अतिथियों के रूप में अहिवारा विधानसभा के विधायक प्रतिनिधि माननीय सतीश साहू, समाजसेवी उपेंद्र गुप्ता तथा छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री, लोक कलाकार एवं समाजसेविका जागेश्वरी मेश्राम की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में अतिथियों ने सम्मानित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रयासों और सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण और भावी पीढ़ी के भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महासमुंद के इन तीन शिक्षकों को मिला सम्मान

राज्य स्तरीय समारोह में महासमुंद ब्लॉक के तीन शिक्षकों को मोमेंटो, शाल एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

1. जितेन्द्र कुमार साहू
शासकीय बालक प्राथमिक शाला, तुमगांव, महासमुंद।

2. विनय कुमार यादव
शासकीय प्राथमिक शाला, कुहरी, महासमुंद।

3. संदीप कुमार साहू
शासकीय प्राथमिक शाला, केशवा, महासमुंद।

तीनों शिक्षकों को यह सम्मान उनके शैक्षणिक समर्पण, नवाचारी सोच, रचनात्मक शिक्षण गतिविधियों तथा शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।


नवाचार और समर्पण से शिक्षा को बना रहे प्रभावी

शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ऐसे में शिक्षकों द्वारा अपनाई जाने वाली नवाचारी शैक्षणिक गतिविधियां बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।

शिक्षकों का सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान होने के साथ-साथ शिक्षा जगत के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है। इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों को नए प्रयोग करने, विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

महासमुंद ब्लॉक के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

महासमुंद ब्लॉक के तीन शिक्षकों का राज्य स्तरीय सम्मान के लिए चयनित होना जिले के शिक्षा जगत के लिए हर्ष और गौरव का विषय है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर भी शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

सम्मानित शिक्षकों की इस उपलब्धि से क्षेत्र के अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिलेगी और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक वातावरण तैयार होगा।

शिक्षकों को मिल रही बधाइयां

इस उपलब्धि पर आशीष साहू, नीरज साहू, अशोक साहू, सिराज बख्श, संगीता रात्रे, सालिक राम सेन, नीलम गोस्वामी, द्वारिका, मनोहर, कैलाश, भोज कुमार साहेब, शिव ध्रुव, मदन, संगम एवं बलराम नेताम सहित जिले के शिक्षकों, शिक्षा जगत से जुड़े लोगों और शुभचिंतकों ने तीनों सम्मानित शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वे आगे भी अपने शैक्षणिक कार्यों, नवाचारों और सामाजिक योगदान के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

महासमुंद ब्लॉक के लिए यह उपलब्धि गर्व का क्षण है। ‘समाज दीप रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित तीनों शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।


छत्तीसगढ़ में चक्रवात से निपटने की तैयारी तेज, राहत शिविरों से लेकर बचाव दल तक अलर्ट

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 रायपुर : भारत सरकार के केबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने आज नई दिल्ली से देश के सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान अर्नब के मद्देनजर राज्यों को व्यापक तैयारियों एवं चक्रवात से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए है। छत्तीसगढ़ राज्य से यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने राज्य में चक्रवाती तूफान से निपटने के लिए राज्य में जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।


अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने छत्तीसगढ़ राज्य की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। दक्षिण बस्तर क्षेत्र में 28 अक्टूबर को भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में सात राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार हैं।

होमगार्ड तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें भी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों, स्वास्थ्य सुविधाओं, खाद्य सामग्री, परिवहन तथा संचार व्यवस्था से संबंधित आवश्यक तैयारियां की गई हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत शिविर संचालित करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। राज्य शासन द्वारा जनहानि को रोकने तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।

बैठक में कैबिनेट सचिव ने राज्यों में चक्रवात के दौरान शून्य जनहानि के लक्ष्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने पेड़ों के गिरने, दीवारों के ढहने तथा यातायात के दौरान लोगों के असावधानीवश जोखिम में पड़ने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने कहा। उन्होंने प्रभावी चेतावनी प्रणाली, आवश्यकता के अनुसार समय पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राज्य शासन और जिला प्रशासन के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

छत्तीसगढ़ में गोवर्धन पूजा पर सार्वजनिक अवकाश घोषित

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए दीपावली का दूसरा दिन (गोवर्धन पूजा) के पावन अवसर पर सार्वजनिक/सामान्य अवकाश की घोषणा की है। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस वर्ष यह अवकाश 09 नवंबर 2026 (दिन-सोमवार) को रहेगा।


’पहले था ऐच्छिक अवकाश, अब हुआ सार्वजनिक अवकाश’

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना (क्रमांक GENS&2101@3340@2026&GAD&5) में बताया गया है कि इससे पहले विभाग की अधिसूचना दिनांक 06 नवंबर 2025 के जरिए इस पर्व को ऐच्छिक अवकाश की सूची में (सरल क्रमांक-50 पर) दिनांक 09 नवंबर, 2026 (सोमवार के लिए) घोषित किया गया था। अब शासन ने इसमें संशोधन करते हुए इसे सार्वजनिक/सामान्य अवकाश में परिवर्तित कर दिया है। इस आधिकारिक घोषणा के बाद अब 09 नवंबर 2026 को राज्य में सभी संबंधित शासकीय कार्यालयों और संस्थानों में गोवर्धन पूजा के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा।

छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत का मामला: पति की मौत के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही महिला को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI करेगी जांच

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस हिरासत के दौरान एक व्यक्ति की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, मृतक की पत्नी और बच्चों को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत से जुड़ा है। उनकी पत्नी लहराबाई तामरे ने पति की मौत के बाद न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब मामले की जांच CBI कर रही है। अदालत ने राज्य के अधिकारियों द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर भी कड़ी टिप्पणी की है।

क्या है पूरा मामला?

मामला बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र का है। श्रवण सूर्यवंशी तामरे को 18 जनवरी 2024 को कथित तौर पर छह लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जब्त शराब की कीमत लगभग ₹1,200 बताई गई थी।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा गया। 21 जनवरी 2024 को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन, 22 जनवरी की सुबह लगभग 6 बजे उनकी मौत हो गई।

परिवार को उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलने के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें श्रवण की मौत के बारे में पता चला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट, शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन और कई जगह चोट के निशान दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में सिर पर किसी कठोर और कुंद वस्तु से लगी चोट की जटिलताओं के कारण हृदय और श्वसन क्रिया बंद होने को मौत का कारण बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चोटें मौत से एक दिन पहले और कुछ चोटें लगभग दो से छह दिन पुरानी हो सकती थीं।

इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच की। 22 जुलाई 2024 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में भी मौत का कारण सिर की चोट से उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया।

हाईकोर्ट में क्या हुआ था?

मृतक की पत्नी और बच्चों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ₹50 लाख मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

3 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने माना कि श्रवण की मौत हिरासत के दौरान हुई हिंसा के परिणामस्वरूप हुई थी। अदालत ने राज्य सरकार को परिवार को ₹1 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कराने का आदेश नहीं दिया।

परिवार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

12 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:

  • CBI जांच: मामले में नियमित आपराधिक केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया।

  • ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा: छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक की पत्नी और बच्चों को अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

  • अधिकारियों की भूमिका की जांच: न्यायिक जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रखने को कहा गया।

  • वरिष्ठ अधिकारी से जांच: CBI को जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने राज्य के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि हिरासत में मौत जैसे गंभीर मामले में उचित कार्रवाई न होना चिंताजनक है।

लहराबाई तामरे की न्याय के लिए लड़ाई

इस मामले में श्रवण की पत्नी लहराबाई तामरे की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती हैं। पति की मौत के बाद उन्होंने अपनी दो बेटियों के भविष्य और न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

उनकी ओर से वकील राजीव कुमार दुबे ने निःशुल्क कानूनी सहायता दी। मामले में परिवार ने पुलिस और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI को मामले में आपराधिक जांच करनी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि श्रवण को चोटें कैसे लगीं, हिरासत के दौरान क्या हुआ और किन अधिकारियों की कोई भूमिका या लापरवाही थी।

13 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिरासत के दौरान श्रवण सूर्यवंशी तामरे की मौत का मामला अब CBI जांच के दायरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के साथ मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला हिरासत में लोगों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक जांच के निष्कर्षों पर समय पर कार्रवाई के महत्व को सामने लाता है।

तहसील कार्यालय में निकला कोबरा, अलमारी के पीछे छिपा था जहरीला सांप; रेस्क्यू टीम ने पकड़ा

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 कोरबा। तहसील कार्यालय की प्रतिलिपि शाखा में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब अलमारी के पीछे एक कोबरा सांप दिखाई दिया। कार्यालय में राजस्व संबंधी कामकाज के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में कार्यालय के भीतर जहरीले सांप की मौजूदगी से खतरे की आशंका बढ़ गई। सूचना मिलने पर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक कोबरा को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।


अलमारी के पीछे बैठा था कोबरा

जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह प्रतिलिपि शाखा में काम के सिलसिले में सहायक ग्रेड-2 आईपी डाहिरे और एक अन्य व्यक्ति पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर अलमारी के पीछे बैठे कोबरा पर पड़ी। अचानक सांप दिखाई देने से दोनों सतर्क हो गए। उन्होंने बिना देर किए वन विभाग और सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना दी।

टीम ने सावधानी से किया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम के सदस्य अविनाश यादव अपने सहयोगी मानस के साथ तहसील कार्यालय पहुंचे। टीम ने मौके का निरीक्षण किया और सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया। कुछ देर की मशक्कत के बाद कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास जंगल में छोड़ दिया गया।

सांप दिखने पर खुद पकड़ने की न करें कोशिश

घटना के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि घर, कार्यालय या किसी अन्य स्थान पर सांप दिखाई देने पर उसके पास जाने या खुद पकड़ने की कोशिश न करें। सांप को छेड़ने या पकड़ने का प्रयास खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि सांप को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके और लोगों को भी खतरे से बचाया जा सके।

खड़गे के बयान पर देशभर में सियासी घमासान, भाजपा का प्रदर्शन; कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर देश की राजनीति में विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार, 26 अक्टूबर को देशभर में विरोध-प्रदर्शन किए और कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग उठाई। भाजपा नेताओं ने इस टिप्पणी को अनुचित बताते हुए राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन करार दिया। 

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद रविवार, 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे।

अपने संबोधन में खड़गे ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, कथित वोट चोरी और केंद्र सरकार की नीतियों पर भाजपा को निशाना बनाया। इसी दौरान श्रोताओं में मौजूद एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं।

इस पर खड़गे ने जवाब में कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। 

भाजपा ने क्या कदम उठाया?

भाजपा ने बयान को प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक बताते हुए देशव्यापी विरोध का ऐलान किया। पार्टी ने अपने राज्य इकाइयों को प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए।

26 अक्टूबर को विभिन्न राज्यों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालयों तथा अन्य स्थानों पर प्रदर्शन किए। कई जगहों पर खड़गे से सार्वजनिक माफी की मांग की गई। बिहार के पटना और जम्मू सहित कई स्थानों पर विरोध मार्च और पुतला प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। 

अमित शाह और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खड़गे की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी बयान को अनुचित बताया और कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा।

भाजपा का कहना है कि राजनीतिक विरोध नीतियों और सरकार के कामकाज तक सीमित रहना चाहिए, न कि नेताओं के परिवारों को निशाना बनाना चाहिए।

कांग्रेस ने क्या सफाई दी?

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि खड़गे की टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ में समझा जाना चाहिए। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा के अनुसार, कार्यक्रम में पहले एक व्यक्ति ने खड़गे के दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी की थी। खेड़ा ने दावा किया कि खड़गे का संदर्भ प्रधानमंत्री के जैविक पिता से नहीं, बल्कि उनके वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से था।

यह कांग्रेस की ओर से दी गई सफाई है। भाजपा ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने के बजाय टिप्पणी की आलोचना जारी रखी।

विवाद का राजनीतिक असर

इस घटनाक्रम ने भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। एक ओर भाजपा ने सार्वजनिक जीवन में भाषा और राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा उठाया है, वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर बयान को संदर्भ से अलग करके पेश करने का आरोप लगाया है।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। कांग्रेस इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा ने खड़गे की टिप्पणी को मुद्दा बनाकर उनसे माफी की मांग की है। 

निष्कर्ष

26 अक्टूबर 2026 को मल्लिकार्जुन खड़गे की पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भाजपा ने देशभर में प्रदर्शन किए। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग की, जबकि कांग्रेस ने कहा कि बयान का संदर्भ प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक RSS से था।

फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी, सार्वजनिक भाषा की मर्यादा और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर जारी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।


राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आपस में टकराईं, सुल्तानपुर जाते समय हुआ हादसा

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 राहुल गांधी के सुल्तानपुर दौरे के दौरान सोमवार सुबह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनके काफिले के पीछे चल रही कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसे के समय राहुल गांधी लखनऊ से सुल्तानपुर जा रहे थे, जहां उन्हें एक मानहानि मामले में अदालत की सुनवाई के लिए पहुंचना था।

पुलिस के अनुसार, इस दुर्घटना में राहुल गांधी सुरक्षित रहे। उनकी गाड़ी इस टक्कर में शामिल नहीं थी। घटना के बाद काफिले ने कुछ देर रुकने के पश्चात सुल्तानपुर की ओर यात्रा फिर शुरू कर दी। 

कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना सोमवार सुबह करीब 10:15 बजे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुई। काफिले में आगे चल रही एक निजी गाड़ी के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया। इसके बाद पीछे आ रही गाड़ियां एक-दूसरे से टकरा गईं।

पुलिस के अनुसार, टक्कर में कांग्रेस नेताओं की चार निजी गाड़ियां शामिल थीं। कुछ अन्य रिपोर्टों में कुल पांच वाहनों के दुर्घटना में शामिल होने की जानकारी दी गई है। घटना के सटीक कारणों की पूरी पुष्टि होना बाकी है।

राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर क्या जानकारी है?

हादसे के बाद कांग्रेस की ओर से बताया गया कि राहुल गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी गाड़ी दुर्घटना में शामिल नहीं थी। काफिले के साथ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।

प्रारंभिक पुलिस बयान में किसी बड़ी चोट की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में काफिले के साथ चल रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर दी गई। घायलों की सटीक संख्या और उनकी स्थिति के बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।

अदालत में पेशी के लिए जा रहे थे राहुल गांधी

राहुल गांधी सुल्तानपुर की विशेष सांसद-विधायक (MP-MLA) अदालत में 2018 में दर्ज मानहानि मामले की सुनवाई के सिलसिले में जा रहे थे। यह मामला तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संबंध में राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

रिपोर्टों के अनुसार, काफिला दुर्घटना के बाद आगे बढ़ा और राहुल गांधी सुबह करीब 11:15 बजे अदालत परिसर पहुंचे।

https://youtube.com/shorts/Zzldd2SLY6A?si=G0ot0bVdGK5G2l4U

मुख्य बात

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले के पीछे चल रही गाड़ियों के बीच टक्कर हुई। राहुल गांधी सुरक्षित रहे और उनकी गाड़ी हादसे में शामिल नहीं थी। दुर्घटना के कारणों और घायलों की स्थिति को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में कुछ अंतर सामने आया है। 

राहुल गांधी को सुल्तानपुर कोर्ट से बड़ी राहत, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बरी

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित विशेष सांसद-विधायक (MP-MLA) अदालत ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को इस मामले में बरी कर दिया।

अदालत ने माना कि राहुल गांधी की संबंधित टिप्पणी मानहानिकारक प्रकृति की नहीं थी। फैसले के समय राहुल गांधी स्वयं अदालत में मौजूद थे। निर्णय के बाद अदालत परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी।

राहुल गांधी के बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि इस टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और यह मानहानि की श्रेणी में आती है।

इसके बाद 4 अगस्त 2018 को विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। मामला कई वर्षों तक अदालत में चला।

अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

26 अक्टूबर 2026 को सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने संबंधित टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना। इस फैसले से राहुल गांधी को लगभग आठ वर्षों से चल रहे इस कानूनी मामले में राहत मिली है।

हालांकि, यह फैसला इसी विशेष मानहानि मामले से संबंधित है। इसे राहुल गांधी के खिलाफ चलने वाले अन्य मामलों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

आठ साल तक कैसे चला मामला?

  • 4 अगस्त 2018: भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।

  • नवंबर 2023: अदालत ने राहुल गांधी को मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया।

  • फरवरी 2024: राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिली।

  • अक्टूबर 2026: अदालत में अंतिम सुनवाई के बाद फैसले की तारीख निर्धारित हुई।

  • 26 अक्टूबर 2026: सुल्तानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में बरी कर दिया।

राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

राहुल गांधी देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं में शामिल हैं और संसद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ लंबे समय से चल रहे इस मामले का फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। दूसरी ओर, इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर अदालत के निर्णय ने कानूनी बहस को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

अमित शाह से जुड़ा कौन-सा मामला था?

राहुल गांधी की टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले के संदर्भ में थी। अमित शाह उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। संबंधित आपराधिक मामले में 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने अमित शाह को आरोपों से मुक्त कर दिया था।

इसी पृष्ठभूमि में राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

निष्कर्ष

सुल्तानपुर की अदालत द्वारा राहुल गांधी को बरी किया जाना कांग्रेस नेता के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। वर्ष 2018 में अमित शाह पर की गई टिप्पणी से शुरू हुआ यह विवाद कई वर्षों तक अदालत में चला और 26 अक्टूबर 2026 को इस मामले में फैसला आया।


बलौदाबाजार बस हादसा: मौत का आंकड़ा 5 पहुंचा, रायपुर रेफर किए जा रहे दो घायलों ने भी दम तोड़ा

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 बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच होने की जानकारी सामने आई है। अंबिकापुर से रायपुर जा रही यात्री बस दरचुरा के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में पहले तीन लोगों की मौत हुई थी। वहीं, गंभीर रूप से घायल दो अन्य यात्रियों ने रायपुर रेफर किए जाने के दौरान दम तोड़ दिया। हालांकि, मृतकों की संख्या और पहचान की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।


खड़े ट्रक से टकराई यात्री बस

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रॉयल कंपनी की यात्री बस अंबिकापुर से रायपुर की ओर जा रही थी। इसी दौरान दरचुरा के पास बस सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई। हादसे के वक्त बस में करीब 22 यात्री सवार थे। टक्कर के बाद बस में अफरा-तफरी मच गई और कई यात्री घायल हो गए।

पहले तीन की मौत, फिर दो घायलों ने तोड़ा दम

हादसे के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना में पहले तीन यात्रियों की मौत हुई थी। गंभीर रूप से घायल दो अन्य यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उनकी मौत होने की सूचना मिली। इसके बाद मृतकों की संख्या पांच बताई जा रही है। मृतकों की पहचान में अतुल कुमार और सुंदर लाल के नाम भी सामने आए हैं।

8 से 10 यात्रियों के घायल होने की सूचना

दुर्घटना में करीब 8 से 10 यात्रियों के घायल होने की प्रारंभिक जानकारी है। घायलों को सिमगा और रायपुर के अस्पतालों में उपचार के लिए भेजा गया है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रायपुर रेफर किया जा रहा है।

गैस कटर से बस में फंसे यात्रियों को निकाला

हादसे के बाद कुछ यात्री बस के अंदर फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए गैस कटर की मदद ली गई। राहत एवं बचाव कार्य में जुटे लोगों ने यात्रियों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

हादसे के कारणों की जांच का इंतजार

फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से मृतकों की संख्या, पह

दुर्ग में पिकअप के गुप्त चेंबर से 4 करोड़ रुपये बरामद, रायपुर से नागपुर जा रही थी गाड़ी

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में वाहन जांच के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा में पुलिस ने एक बोलेरो मैक्स पिकअप से करीब 4 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। नकदी को वाहन के पिछले हिस्से में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चेंबर में छिपाकर रखा गया था। पिकअप रायपुर से नागपुर की ओर जा रही थी। पुलिस ने वाहन में सवार दो व्यक्तियों को रोककर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में आयकर विभाग को भी सूचना दी गई है।


संदिग्ध पिकअप की सूचना पर पुलिस ने की जांच

जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर दुर्ग पुलिस संदिग्ध वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक पिकअप में बड़ी मात्रा में नकदी ले जाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा के पास जांच तेज कर दी।

रात करीब 11 बजे पुलिस ने सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप क्रमांक CG 04 QU 5996 को रोककर तलाशी ली। वाहन के पिछले हिस्से में असामान्य बदलाव देखकर पुलिस को संदेह हुआ। बारीकी से जांच करने पर वहां एक गुप्त चेंबर मिला।

चेंबर खोलते ही सामने आई करोड़ों की नकदी

पुलिस ने गुप्त चेंबर खोलकर तलाशी ली तो उसके अंदर भारतीय मुद्रा के बंडल मिले। नकदी की गिनती करने पर कुल रकम करीब 4 करोड़ रुपये बताई गई। इसके बाद पुलिस ने वाहन और नकदी को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

वाहन में सवार दो व्यक्तियों की पहचान भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, भवेशभाई पिकअप चला रहा था। दोनों से बरामद रकम के स्रोत, वास्तविक मालिक और इसे नागपुर ले जाने के उद्देश्य के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

हवाला कनेक्शन की आशंका, अभी पुष्टि नहीं

पिकअप के गुप्त चेंबर में इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद हवाला कारोबार से संभावित संबंध समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। हालांकि, बरामद नकदी के हवाला से जुड़े होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किस व्यक्ति या संस्था की है और उसके परिवहन के लिए वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। नकदी के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए आयकर विभाग को सूचना दी गई है।

जांच के बाद स्पष्ट होगा रकम का स्रोत

फिलहाल पुलिस दोनों व्यक्तियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। जांच में नकदी के स्वामित्व, उसके स्रोत और परिवहन के उद्देश्य से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

चार करोड़ रुपये की बरामदगी के बाद यह मामला चर्चा में है। हालांकि, रकम का हवाला कारोबार से संबंध या किसी अन्य अवैध गतिविधि में इस्तेमाल होने की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर बड़ा अलर्ट: 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका

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बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Arnab) तेजी से ताकतवर हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान 28 अक्टूबर की सुबह से दोपहर के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है। इस दौरान तेज हवाओं, अत्यधिक भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा है। पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

तूफान कितना खतरनाक हो सकता है?

मौसम विभाग के 26 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, तूफान के और शक्तिशाली होकर अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है।

  • प्रमुख जानकारी
  • मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार
  • तूफान का नाम
  • अर्नब (Arnab)
  • वर्तमान क्षेत्र
  • मध्य बंगाल की खाड़ी
  • संभावित तट से टकराने की तारीख
  • 28 अक्टूबर 2026
  • संभावित तटीय क्षेत्र
  • बापटला से विशाखापत्तनम के बीच
  • अनुमानित हवा की रफ्तार
  • 115–125 किमी/घंटा
  • हवा के झोंकों की रफ्तार
  • 140 किमी/घंटा तक
सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंकातटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा

ध्यान दें: ये पूर्वानुमान हैं, निश्चित परिणाम नहीं। तूफान की दिशा, गति और तीव्रता में बदलाव हो सकता है।

तूफान अभी कहां है?

IMD के 26 अक्टूबर सुबह 5:30 बजे के बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात का केंद्र मध्य और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में था।

यह प्रमुख स्थानों से लगभग इतनी दूरी पर था:

  • विशाखापत्तनम: 650 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व।
  • काकीनाडा: 730 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व।
  • बापटला: 910 किलोमीटर पूर्व।
  • गोपालपुर, ओडिशा: लगभग 610 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व।

तूफान पिछले छह घंटों में लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम की ओर बढ़ा था। इसके बाद इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने का अनुमान था। 

27 से 29 अक्टूबर तक मौसम कैसा रहेगा?

27 अक्टूबर, मंगलवार

  • तटीय आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका।
  • काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सतर्कता जरूरी।
  • दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा।
  • समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं।

28 अक्टूबर, बुधवार

  • आंध्र प्रदेश के तट पर चक्रवात के पहुंचने की संभावना।
  • कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
  • हवा की गति 115–125 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान।
  • निचले तटीय इलाकों में समुद्री पानी घुसने का खतरा।

29 अक्टूबर, गुरुवार

  • आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है।
  • ओडिशा में भी भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका।
  • जलभराव, सड़क यातायात बाधित होने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है।

ये संभावित परिस्थितियां हैं। स्थानीय मौसम और चेतावनी के अनुसार वास्तविक असर अलग हो सकता है। 

किन जिलों में ज्यादा खतरा है?

आंध्र प्रदेश

विशेष सतर्कता वाले जिलों में शामिल हैं:

  • काकीनाडा
  • डॉ. बी.आर. आंबेडकर कोनसीमा
  • पूर्वी गोदावरी
  • पश्चिमी गोदावरी
  • एलुरु
  • अनकापल्ली
  • कृष्णा
  • एनटीआर
  • गुंटूर
  • बापटला

इनमें से कई जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 

ओडिशा

विशेष सतर्कता वाले जिलों में शामिल हैं:

  • गंजाम
  • गजपति
  • रायगड़ा
  • कोरापुट
  • मलकानगिरी

इन जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखा है। 

क्या स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे?

ओडिशा सरकार ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज तथा आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने की घोषणा की है। अन्य जिलों में भी स्थानीय प्रशासन मौसम की स्थिति के अनुसार फैसला ले सकता है। 

सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?

चक्रवात से निपटने के लिए दोनों राज्यों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

  • संवेदनशील तटीय क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी।
  • मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी।
  • राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखना।
  • बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में बहाली की व्यवस्था करना।
  • निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना।

रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में लगभग 5.7 लाख लोगों को संभावित जोखिम वाले समूह में चिह्नित किया गया है।

छत्तीसगढ़ पर क्या असर पड़ेगा?

छत्तीसगढ़ में भी 28 और 29 अक्टूबर को बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार:

  • 28 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
  • 29 अक्टूबर को उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका है।
  • गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है।

इसलिए किसानों को धान की कटी हुई फसल सुरक्षित रखने, खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने और स्थानीय मौसम चेतावनी पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। 

महासमुंद जिले में बारिश की वास्तविक स्थिति और चेतावनी के लिए जिला-स्तरीय पूर्वानुमान देखना जरूरी है। पूरे छत्तीसगढ़ में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है।

आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

  1. मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें।
  2. समुद्र में मछली पकड़ने न जाएं और पहले से समुद्र में मौजूद नावें सुरक्षित स्थान पर लौटें।
  3. तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहें।
  4. मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां, टॉर्च, पानी तथा सूखा भोजन तैयार रखें।
  5. तटीय क्षेत्र में प्रशासन के आदेश पर सुरक्षित आश्रय स्थल पर जाएं।
  6. बिजली के तार टूटने या पानी में गिरने पर उनके पास न जाएं।

खबर का निष्कर्ष

चक्रवात अर्नब के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का पूर्वानुमान है। इस दौरान तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में तेज हवाओं, अत्यधिक भारी बारिश और निचले इलाकों में समुद्री पानी घुसने का खतरा है। छत्तीसगढ़ में भी अगले कुछ दिनों में बारिश का असर हो सकता है।

तूफान की दिशा और तीव्रता में बदलाव संभव है। सबसे ताजा जानकारी के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें: IMD मौसम विभाग


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