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सीजी पीएससी द्वारा एस आई भर्ती परीक्षा,सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें

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केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें

रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत आयोजित सूबेदार, उप-निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रारंभिक लिखित परीक्षा परिणाम 04 अगस्त 2026 को घोषित किए गए। परिणाम जारी होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर भ्रामक व तथ्यहीन जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।

अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं जो ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज है

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (रील्स और शॉर्ट्स वीडियो) पर कुछ अभ्यर्थियों के नामों को लेकर उनका उपहास उड़ाया जा रहा है और परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही इन रील्स और वीडियो में प्रदर्शित दावों का सख्ती से खंडन किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम में अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं, जो उन्होंने स्वयं अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज कर अंतिम रूप से सबमिट किए थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन, शारीरिक परीक्षण (PST) और प्रारंभिक लिखित परीक्षा संपन्न हुई थी।

अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे

अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन किया गया। अवर सचिव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सभी अभ्यर्थियों और जनसामान्य से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही ऐसी किसी भी असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी या अफ़वाहों पर विश्वास न करें। परीक्षा से जुड़ी किसी भी अधिकृत जानकारी के लिए केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

छत्तीसगढ़ की दो खिलाड़ी भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम में, चीन में होने वाले एशिया कप में दिखाएंगी दम

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राष्ट्रीय टीम में चुनी गईं कांसाबेल की मधु सिदार और बोड़ला की गीता यादव खेलो इंडिया एक्सीलेंस सेंटर, बिलासपुर में ले रहीं प्रशिक्षण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दोनों खिलाड़ियों को दी बधाई, वीडियो-कॉल पर बात कर तैयारियों की भी ली जानकारी

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ के लिए खेल जगत से आज एक और बड़ी खुशखबरी आई है। बिलासपुर के खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दो खिलाड़ियों गीता यादव और मधु सिदार का चयन भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है। ये दोनों चीन के मोकी में आगामी 30 अगस्त से 13 सितम्बर तक होने वाले जूनियर एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और दम दिखाएंगी। 

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने गीता यादव और मधु सिदार से वीडियो-कॉल पर बात कर भारतीय टीम में चयन पर बधाई दी। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को जूनियर एशिया कप हॉकी में अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामना देते हुए उनकी तैयारियों की भी जानकारी ली। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयनित ये दोनों ही खिलाड़ी प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक राकेश टोप्पो एवं मुख्य प्रशिक्षक अजीत लकड़ा से हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। 

ऐसा रहा है टीम इंडिया तक दोनों खिलाड़ियों का सफर

मधु सिदार

मधु सिदार हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले जशपुर जिले के कांसाबेल के छोटे से गांव पोंगरो की रहने वाली है। उनके माता-पिता कृषक हैं। वह सब-जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप 2024-25, स्कूल नेशनल 2024-25 तथा हरियाणा में सब-जूनियर इंटर जोन चैम्पियनशिप-2025 में भागीदारी कर चुकी हैं। उनकी टीम ने आंध्रप्रदेश में 1 अगस्त से 12 अगस्त 2025 तक आयोजित हॉकी इंडिया नेशनल चैम्पियनशिप में चतुर्थ स्थान हासिल किया था। मधु इस साल मार्च-अप्रैल में छत्तीसगढ़ में आयोजित देश के पहले खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स में भी खेल चुकी है। वह अप्रैल-2026 से बेंग्लुरू में भारतीय टीम के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं।

गीता यादव

कबीरधाम जिले के बोड़ला की गीता यादव ने हॉकी का प्रारंभिक प्रशिक्षण कोच श्री शिवा चौहान से प्राप्त किया है। गीता के अंतरराष्ट्रीय करियर का सफर वर्ष-2024 में प्रारंभ हुआ, जब उन्होंने 12 नवम्बर से 21 नवम्बर 2024 तक नीदरलैण्ड और बेल्जियम टूर में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद 15 मई से 2 जून 2025 तक अर्जेंटीना टूर और 5 जुलाई से 14 जुलाई 2026 तक इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड टूर में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं।

सिम्स में पहली बार 78 वर्षीय महिला के अंडाशय कैंसर की सफल सर्जरी

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एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवन

रायपुर- छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन हुआ बिल्कुल मुफ्त 

निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।

15×12×10 सेमी का विशाल ट्यूमर और 3 अगस्त को सफल सर्जरी

सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने हासिल की सफलता

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉक्टरों ने बताया अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।

सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन से रामलला एवं बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रवाना

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रामलला दर्शन योजना से बुजुर्गों, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का वर्षों पुराना सपना हो रहा है साकार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को जनकल्याण से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों के वर्षों पुराने सपनों को साकार कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। इसी कड़ी में अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं को लेकर भारत गौरव ट्रेन अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में रवाना हुई।

रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही भक्ति और उल्लास का अनूठा वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ स्टेशन पहुंचे। पूरा परिसर जय श्रीराम, हर-हर महादेव और जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपने आराध्य के दर्शन का उत्साह और भावनात्मक खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अनेक परिवार पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जहां परिजनों ने तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर यात्रियों को शुभ यात्रा की मंगलकामनाओं के साथ विदा किया।

भारत गौरव ट्रेन को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मंजूषा भगत (महापौर), हरविंदर सिंह टिनी (सभापति), नीरूपा सिंह (जिला पंचायत अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, जिला प्रशासन तथा भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए यात्रा की शुभकामनाएं दीं।


दर्शन योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं को श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के दिव्य दर्शन तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरी यात्रा का संचालन पर्यटन विभाग एवं आईआरसीटीसी के समन्वय से सुव्यवस्थित रूप से किया जा रहा है।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आरामदायक रेल यात्रा, स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, पौष्टिक शुद्ध शाकाहारी भोजन, पेयजल, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अनुभवी एस्कॉर्ट दल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं तथा दिव्यांग यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण कर सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच है कि आर्थिक स्थिति किसी भी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी भावना के अनुरूप रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क धार्मिक यात्रा का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह योजना केवल दर्शन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशवासियों को उनकी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि रामलला दर्शन योजना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व की ऐसी जनकल्याणकारी पहल है, जिसके माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने का अभियान है। मैं सभी श्रद्धालुओं से प्रार्थना करता हूं कि वे प्रभु श्रीराम और बाबा विश्वनाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के कल्याण की कामना करें तथा यात्रा से लौटकर अपने अनुभव समाज के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित हों।यात्रा पर रवाना होने वाले श्रद्धालुओं ने भी भावुक होकर राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। अनेक बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने कहा कि जीवनभर इच्छा होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के कारण अयोध्या और काशी की यात्रा संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर देकर उनके जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना पूर्ण कर दी है।

एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी अच्छी व्यवस्था के साथ अयोध्या और काशी की यात्रा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने हम जैसे सामान्य परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया है। हम सभी उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

एक वरिष्ठ श्रद्धालु ने कहा कि सरकार ने हमारी पूरी यात्रा की चिंता अपने ऊपर ले ली है। भोजन, आवास, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी व्यवस्थाएं होने से हम पूरी निश्चिंतता और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। यह योजना वास्तव में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के सतत प्रयासों से संचालित रामलला दर्शन योजना आज प्रदेशवासियों की आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन ही नहीं करा रही, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकात्मता से भी जोड़ रही है। सरगुजा संभाग से रवाना हुई भारत गौरव ट्रेन इसी जनसेवा, सुशासन और जनआस्था के सशक्त समन्वय का प्रेरक उदाहरण है।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का करें समयबद्ध क्रियान्वयन , प्रत्येक पात्र व्यक्ति को मिले शासन की योजनाओं का लाभ : मुख्यमंत्री साय

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   रायपुर : शासन की योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित कर आमजन को अधिकतम लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। डबल इंजन सरकार का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से शासन की प्रमुख योजनाओं और जनसेवाओं की नियमित निगरानी के लिए विकसित पारस (Project Assessment, Review and Analysis System) पोर्टल सुशासन का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित पारस पोर्टल की पहली राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने सीएम हेल्पलाइन 1076, सेवा सेतु, एग्रीस्टैक, विकसित भारत जी-रामजी, डीबीएन वित्तपोषित मोबाइल टॉवर परियोजना तथा स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों की विभागवार विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक विभाग निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप परिणाम सुनिश्चित करे।

सीमांकन मामलों में लापरवाही पर मुख्यमंत्री की नाराजगी

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने राजस्व विभाग में सीमांकन से संबंधित लंबित मामलों पर विशेष नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं और सक्षम अधिकारी के आदेश के बाद भी कई मामलों में समय पर सीमांकन नहीं हो रहा है। यह स्थिति आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी में डालती है तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमांकन संबंधी प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि यह जमीनी स्तर पर लापरवाही तथा जिला स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव का परिणाम है। सभी कलेक्टर नियमित समीक्षा कर ऐसे मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करें।

एग्रीस्टैक में शत-प्रतिशत किसान पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने एग्रीस्टैक में प्रत्येक पात्र किसान का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह केवल धान खरीदी की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की आधारभूत व्यवस्था है।

उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिलेवार विशेष अभियान संचालित कर प्रत्येक पात्र किसान का समय पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आई थीं, लेकिन इस वर्ष किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण कोई पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित होता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

सीएम हेल्पलाइन को बनाया जाए प्रभावी जनसमस्या समाधान का माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय  ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 का उद्देश्य नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से बचाना है। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, इसलिए प्राप्त शिकायतों और फीडबैक का गंभीर विश्लेषण कर व्यवस्थागत सुधार किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों की विशेष समीक्षा करते हुए विभागवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों का प्रदर्शन अपेक्षित नहीं है, वहां विशेष अभियान चलाकर शिकायतों का समयबद्ध एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन में अब तक एक लाख 10 हजार से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 65 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। प्राप्त फीडबैक में 55.29 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने सकारात्मक संतुष्टि व्यक्त की है।

सेवा सेतु के माध्यम से सभी सेवाएं हों ऑनलाइन

मुख्यमंत्री ने सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान में 27 विभागों की 721 अधिसूचित सेवाएं इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन सेवाओं को अभी तक ऑनलाइन नहीं लाया गया है, उन्हें भी शीघ्र सेवा सेतु से जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) तथा अटल सेवा केंद्रों के माध्यम से सेवा सेतु का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिकाधिक नागरिक घर के निकट ही ऑनलाइन सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

विकसित भारत जी-रामजी योजना में ग्राम पंचायतों को मिले प्राथमिकता

बैठक में विकसित भारत जी-रामजी योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आधारभूत विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए। जिन पंचायतों में अभी तक कार्य स्वीकृत नहीं हुए हैं, वहां तत्काल प्रस्ताव स्वीकृत कर विकास कार्य प्रारंभ किए जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत अधोसंरचना को तेजी से सुदृढ़ किया जा सके।

मोबाइल कनेक्टिविटी और स्कूल शिक्षा की भी हुई समीक्षा

बैठक में डीबीएन वित्तपोषित 476 मोबाइल टॉवरों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, सरस्वती साइकिल योजना तथा प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।

स्कूलों में पोषण और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्कूल परिसरों में किचन गार्डन विकसित करने के अभियान को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को ताजा एवं पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। उन्होंने स्कूल परिसरों में सहजन, कटहल सहित अन्य उपयोगी पौधों के रोपण पर भी विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन के महत्व से अवगत कराया जाए, ताकि वे स्वप्रेरणा से इस अभियान से जुड़ें और विद्यालयों में विकसित हो रही इस सकारात्मक पहल को जनआंदोलन का स्वरूप मिल सके।

प्रत्येक माह होगी पारस पोर्टल के माध्यम से समीक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारस पोर्टल शासन की योजनाओं की प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा की कि अब प्रत्येक माह के अंतिम मंगलवार को पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य स्तर पर सभी प्रमुख योजनाओं एवं जनसेवाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, समस्याओं का समय पर समाधान होगा और जनता तक शासकीय सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद एवं श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री कमलप्रीत सिंह, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने 'मेरी बेटी–मेरा अभिमान' अभियान का किया शुभारंभ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी के अंतर्गत राज्यव्यापी 'मेरी बेटी–मेरा अभिमान' अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान प्रदेश के प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सभी शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान बेटियों के सम्मान, ग्रामीण स्वच्छता, सामाजिक गरिमा और आधारभूत सुविधाओं को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार का ऐतिहासिक कदम है।


         मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक शौचालय की लागत 4.30 लाख रुपए निर्धारित की गई है। इसी प्रकार प्रदेश के 6,524 गांवों में 391.44 करोड़ रुपए की लागत से प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जाएंगे, जिनकी प्रति इकाई लागत 6 लाख रुपए होगी। इसके अतिरिक्त 18.22 करोड़ रुपए की लागत से 549 मुक्तिधामों का भी निर्माण किया जाएगा, जिनकी प्रति इकाई लागत 3.32 लाख रुपए निर्धारित की गई है।

         मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10,027 बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में 52.14 करोड़ रुपए की लागत से सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। प्रति इकाई लागत लगभग 52 हजार रुपए निर्धारित की गई है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि होगी, वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल स्वीकृत कर शीघ्र प्रारंभ कराया जाए।

ग्रामीण विकास और रोजगार का सबसे बड़ा अभियान
        मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है। योजना के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा तथा मजदूरी की दर बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत–2047' के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी के माध्यम से राज्य को लगभग 6,855 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे, जो ग्रामीण रोजगार और विकास कार्यों के लिए राज्य में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। भारत सरकार से योजना की प्रथम किस्त के रूप में 1,538 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।

किसानों और श्रमिकों दोनों के हितों का रखा गया विशेष ध्यान
        मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में किसानों और श्रमिकों दोनों के हितों का संतुलित ध्यान रखा गया है। कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है, जिससे खेती और रोजगार दोनों प्रभावित न हों।

318 प्रकार के विकास कार्यों से बदलेगी गांवों की तस्वीर
       मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना में 318 प्रकार के कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें 107 प्रकार के जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्य, 90 प्रकार के ग्रामीण अधोसंरचना विकास कार्य, 86 प्रकार के आजीविका संवर्धन कार्य तथा 35 प्रकार के जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन संबंधी कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के अंतर्गत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल संरक्षण, मृदा संरक्षण और वृक्षारोपण को प्राथमिकता मिलेगी। वहीं ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, अतिरिक्त स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला, किचन शेड, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम और पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
        मुख्यमंत्री ने बताया कि आजीविका संवर्धन के अंतर्गत ग्रामीण हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन तथा पशुपालन से संबंधित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। वहीं जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन के अंतर्गत बाढ़ एवं चक्रवात आश्रय, ड्रेनेज, तटबंध, जंगलों में आग की रोकथाम तथा प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

युक्तधारा द्वारा ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अव्वल
        मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीबी-जी राम जी के क्रियान्वयन की तैयारियों में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण कर राज्य देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि परिसंपत्तियों की 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अव्वल रहा है।

जल संरक्षण और 'मोर गांव–मोर पानी' अभियान को मिलेगी नई गति
        मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। विभिन्न विकासखंडों में जल उपलब्धता के आधार पर जल संरक्षण कार्यों पर न्यूनतम निर्धारित व्यय सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार के 'मोर गांव–मोर पानी' महाअभियान को भी इस योजना से नई गति मिलेगी।

5,591.42 करोड़ रुपए का बजट, पहली तिमाही में 1,264 करोड़ रुपए खर्च
         मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी के लिए 5,591.42 करोड़ रुपए का प्रस्तावित बजट रखा गया है। वहीं अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में ही 1,264 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है।

पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध होगा क्रियान्वयन
          मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक अधोसंरचना और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाते हुए आत्मनिर्भर एवं विकसित गांवों का निर्माण करना है। प्रत्येक कार्य का अनुमोदन ग्राम सभा से कराया जाएगा। डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर मजदूरी भुगतान, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से योजना का पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

        पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वीबी-जी राम जी के आयुक्त  तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।

CG NEWS : बुजुर्ग महिला से दो लाख के जेवर ठगे: बस स्टैंड का रास्ता पूछकर शातिरों ने बनाया शिकार

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 बिलासपुर। शहर में ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने एक बुजुर्ग महिला को अपनी बातों के जाल में फंसाकर करीब दो लाख रुपये मूल्य के सोने के जेवर पार कर दिए। शातिरों ने पहले बस स्टैंड का पता पूछने के बहाने बातचीत शुरू की, फिर अपराध का डर दिखाकर जेवर सुरक्षित रखने का झांसा दिया और अंत में गहनों की जगह कागज की पोटली थमाकर रफूचक्कर हो गए। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के व्यस्ततम नेहरू चौक के पास की है।


ऑटो में बैठाकर दिया वारदात को अंजाम

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिंधी कॉलोनी निवासी विद्या मोटवानी घर से सब्जी खरीदने के लिए बृहस्पति बाजार जा रही थीं। नेहरू चौक के पास पहुंचते ही ऑटो में सवार दो युवकों ने उन्हें रोककर बस स्टैंड का रास्ता पूछा। बातचीत चल ही रही थी कि उनका तीसरा साथी भी वहां पहुंच गया। तीनों ने महिला को बातों में उलझाया और झांसा देकर ऑटो में बैठा लिया।

'लूट हो जाएगी' का डर दिखाकर उतरवाए गहने

सफर के दौरान आरोपियों ने महिला से कहा कि खुले में सोने के गहने पहनकर घूमना सुरक्षित नहीं है, क्षेत्र में लूट और चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके बाद उन्होंने गहनों को कपड़े में बांधकर सुरक्षित रख लेने की सलाह दी। आरोपियों की बातों में आकर महिला ने अपने सोने के जेवर उतारकर उन्हें सौंप दिए।

कागज की पोटली थमाकर हुए फरार

शातिरों ने बड़ी सफाई से जेवर कपड़े में बांधने का नाटक किया और कुछ दूरी पर ले जाकर जेवर की जगह कागज से भरी पोटली महिला के हाथ में थमा दी। इसके तुरंत बाद वे महिला को ऑटो से उतारकर मौके से चंपत हो गए। जब महिला ने शक होने पर पोटली खोली, तो उसमें गहने न देखकर उनके होश उड़ गए। पीड़ित महिला ने तुरंत सिविल लाइन थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई और मामला दर्ज कराया।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

टीबी के खिलाफ लड़ाई में आगे आएं, बनें किसी मरीज की उम्मीद

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जशपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के 19 मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान कर रहे हैं निरंजन

रायपुर- टीबी केवल एक बीमारी नहीं है। यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी ऐसी चुनौती है, जो हर साल हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तब उसके सामने केवल दवा लेने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने, नियमित उपचार जारी रखने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी अनेक कठिनाइयाँ भी खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में "निक्षय मित्र" की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पर्याप्त पोषण। लेकिन दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मरीज केवल इसलिए उपचार बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों के मनोबल को भी मजबूत बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के बीच स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करते हुए  राष्ट्रीय स्वास्थ्य  मिशन कार्यरत  जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न केवल पीवीटीजी समुदाय के 19 टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं आवश्यक सहयोग प्रदान कर उपचार की राह में उनका साथ निभाया।

जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण मरीज अक्सर उपचार में देरी कर देते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।

निरंजन गुप्ता की पहल केवल पोषण किट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।

टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा और निदान जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है पोषण और सामाजिक सहयोग। कुपोषण और टीबी का संबंध एक दुष्चक्र की तरह है कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। ऐसे में निक्षय मित्र द्वारा दिया गया पोषण सहयोग मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नहीं है। यह समाज के हर उस व्यक्ति का दायित्व है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जशपुर की यह पहल बताती है कि एक व्यक्ति भी यदि संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज केवल संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।

बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

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किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों की राष्ट्रीय मंच पर गूंज

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बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विष्णुभोग चावल और केवची के प्राकृतिक शहद ने बटोरी सराहना

स्वसहायता समूहों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, जैविक उत्पादों के लिए खुले देश-विदेश के नए बाजार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, महिला स्वसहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के महिला स्वसहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठन द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों ने देश के सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित जैविक उद्योग व्यापार मेला एवं सम्मेलन  ’बायोफैच इंडिया-2026’  में  अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला एवं सम्मेलन में जिले के प्रसिद्ध ’अरपा बिहान विष्णुभोग राइस’  तथा  ’केवची के जंगलों से संग्रहित प्राकृतिक शहद’ का राष्ट्रीय स्टॉल में आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों ने देश-विदेश से पहुंचे खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह उपलब्धि न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली साबित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा महिला स्वसहायता समूहों की आर्थिक मजबूती को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच का परिणाम है कि बिहान से जुड़ी महिलाएं आज केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजनों में अपने उत्पादों का सफल प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

बायोफैच इंडिया-2026 प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों तथा मोटे अनाज आधारित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने वाला विश्वस्तरीय मंच है, जहां देश-विदेश के आयातक, निर्यातक, विपणन विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और व्यापारिक संस्थाएं एकत्रित होकर जैविक उत्पादों के व्यापार एवं निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रभावी उपस्थिति राज्य के किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

जिला मिशन प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जैविक विष्णुभोग धान एवं प्राकृतिक शहद के साथ-साथ सूरन, कटहल तथा अन्य जैविक सब्जियों के उत्पादन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति तथा विशिष्ट स्वाद के कारण राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बनने के साथ लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्पादों की भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए बेहतर विपणन के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के प्रत्येक जिले की विशिष्ट कृषि एवं वन आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में सतत वृद्धि हो तथा स्थानीय उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित पहचान और मूल्य प्राप्त हो। बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जैविक उत्पादों की प्रभावशाली उपस्थिति इसी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

सम्मेलन में राज्य स्तर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राजन सोनी, जिले से जिला कार्यक्रम प्रबंधक अभिषेक जायसवाल तथा तिपान किसान उत्पादक संगठन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेन्द्र खैरवार ने सहभागिता कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जैविक उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों से जिले के उत्पादों को खरीदारों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच व्यापक सराहना प्राप्त हुई।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल

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बाल देखरेख संस्थाओं के अनाथ एवं निराश्रित बच्चों को कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने बैंकिंग और सामाजिक संस्थाओं का साझा प्रयास

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत अनाथ एवं निराश्रित बच्चों के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय पहल की है।

इसी क्रम में उन्होंने अपने निवास कार्यालय में एक्सिस बैंक के भारत प्रमुख विजय तथा कैटलिस्ट फॉर सोशल एसोसिएशन की भारत प्रमुख स्मिता रांधे से मुलाकात कर बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और रोजगारोन्मुख अवसरों से जोड़ने के विषय पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में एक्सिस बैंक के सी.एस.आर. फंड के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, कौशल आधारित प्रशिक्षण देने तथा उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। यह पहल बच्चों को केवल संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा देने का प्रयास है।

राजवाड़े ने कहा कि "अनाथ और निराश्रित बच्चों को शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाला प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़े।"

उन्होंने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व सामुदायिक सहयोग से बाल संरक्षण एवं बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत बच्चों के सामाजिक पुनर्वास के लिए यह पहल प्रारंभ की गई थी। वर्तमान में प्रदेश के पांच जिलों में इसका सफल क्रियान्वयन किया जा चुका है। अब इसे विस्तार देते हुए राज्य के सभी जिलों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार, सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट क्षेत्र तथा औद्योगिक घरानों के सहयोग से बच्चों के समग्र विकास और प्रभावी पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों को कौशल विकास, डिजिटल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर एक्सिस बैंक के भारत सी.एस.आर. प्रभारी, क्षेत्रीय प्रबंधक, संस्था से संचालक दीपेश, राज्य प्रमुख जिनेश तथा बैंक के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

CSIR-NIScPR ने ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया

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सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), नई दिल्ली ने 4–5 अगस्त 2026 को CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव (फेज-III) के अंतर्गत ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ विषय पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।

संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, मीडिया और उद्योग जगत से 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण को अनुभव-आधारित (Experiential Learning) बनाया गया, जिसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, संवादात्मक चर्चाएं और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान संचार और उभरती प्रौद्योगिकियों की व्यापक जानकारी दी गई।

विज्ञान संचार में जिम्मेदारी और एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन CSIR-NIScPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संस्थान लंबे समय से देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और विज्ञान संचार को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिम्मेदार विज्ञान संचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे वैज्ञानिक जानकारी को अधिक विश्वसनीय, प्रभावी और व्यापक बनाया जा सकता है।

विज्ञान और समाज के बीच सेतु है विज्ञान संचार

CSIR-NIScPR के प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख मुकेश ए. पुंड ने स्वागत भाषण में कहा कि विज्ञान संचार वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

कार्यक्रम की नोडल प्रधान अन्वेषक (PI) मीताली भारती ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया और पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। वहीं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. परमानंद बर्मन ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा शैक्षणिक सत्रों का संचालन किया।

आधुनिक विज्ञान संचार के विभिन्न पहलुओं पर हुआ प्रशिक्षण

दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विज्ञान संचार के विभिन्न समकालीन विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें—

  • विज्ञान संचार की मूल अवधारणाएं एवं विभिन्न प्रारूप

  • श्रोताकेंद्रित संचार रणनीतियां

  • व्यवहारिक विज्ञान (Behavioural Insights)

  • सोशल मीडिया प्रबंधन

  • पॉडकास्ट निर्माण

  • इन्फोग्राफिक्स और लघु वीडियो तैयार करना

  • विज्ञान संचार में एआई आधारित ऐप्स का उपयोग

  • नैतिकता एवं पेशेवर जिम्मेदारियां

  • विज्ञान संचार में उभरते करियर अवसर

जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में डॉ. हेमांसी और प्रियंका (अशोका विश्वविद्यालय), डॉ. परमानंद बर्मन, डॉ. वी. वी. बिनॉय (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़, बेंगलुरु), डॉ. एच. एस. सुधीरा (निदेशक, गुब्बी लैब्स), डॉ. मेहर वान तथा CSIR-NIScPR के संकाय सदस्यों ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए प्रतिभागियों की अपेक्षाओं, सीखने के परिणामों और अनुभवों का मूल्यांकन पूर्व एवं पश्चात प्रशिक्षण सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया।

प्रतिभागियों को प्रदान किए गए प्रमाणपत्र

समापन सत्र में मुकेश ए. पुंड और मीताली भारती ने प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी और उनसे अपने-अपने संस्थानों में साक्ष्य-आधारित एवं जिम्मेदार विज्ञान संचार को बढ़ावा देने के लिए अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग करने का आह्वान किया।

CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के सह-प्रधान अन्वेषक सलीम अंसारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय किया। कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।


मुंबई में शुरू हुआ BRICS WAVES Bazaar 2026, रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मिलेगा वैश्विक मंच

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BRICS WAVES Bazaar का शुभारंभ आज मुंबई में हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य ऑडियो-विजुअल और रचनात्मक उद्योगों में संवाद, व्यापारिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सीमा-पार साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

इस आयोजन में विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग संगठन, फिल्म निर्माता, कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स, निवेशक, ब्रॉडकास्टर्स, OTT प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी कंपनियां, स्टार्टअप्स, सांस्कृतिक संस्थान और रचनात्मक उद्यम शामिल हो रहे हैं।

मुंबई वैश्विक क्रिएटिव इकोसिस्टम का केंद्र: आशीष शेलार

उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्तव्य देते हुए महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई एवं संस्कृति मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने मुंबई को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि कला और प्रौद्योगिकी के बीच की सीमाएं तेजी से समाप्त हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि BRICS WAVES Bazaar केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने वाला उच्च स्तरीय मंच है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक बार फिर 'विश्वगुरु' के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इस दिशा में 'ऑरेंज इकोनॉमी' महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां भारत की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और आधुनिक व्यापार का संगम होता है।

प्रधानमंत्री की सांस्कृतिक दृष्टि का विस्तार: चंचल कुमार

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार संस्कृति और रचनात्मकता को देशों और समाजों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताते रहे हैं। इसी दृष्टि से भारत का BRICS देशों के साथ सिनेमा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि मुंबई में आयोजित BRICS WAVES Bazaar और नवंबर 2026 में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के साथ आयोजित होने वाला BRICS फिल्म फेस्टिवल रचनात्मक उद्योगों को दो अलग-अलग लेकिन पूरक मंच उपलब्ध कराएंगे। एक मंच व्यापार, साझेदारी और बाजार तक पहुंच के लिए होगा, जबकि दूसरा फिल्मों, फिल्मकारों और दर्शकों को जोड़ने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के पास कहानियों, प्रतिभा, दर्शकों, तकनीक और उद्यमिता का विशाल भंडार है। WAVES Bazaar का उद्देश्य इन सभी क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाना है, जहां नई परियोजनाएं, सह-निर्माण (Co-production), निवेश और नए बाजारों के अवसर विकसित हो सकें।

BRICS देशों के कंटेंट को मिले व्यापक पहुंच

चंचल कुमार ने कहा कि BRICS देशों की फिल्मों, वेब सीरीज, एनीमेशन, संगीत और डिजिटल कंटेंट की सदस्य देशों के भीतर बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में अपने अनुभव साझा करने और संस्थागत एवं व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि भारत WAVES, WAVES Bazaar, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, इंडिया सिने हब तथा क्रिएटर स्किलिंग एवं स्टार्टअप्स जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

साथ ही उन्होंने सभी BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों को 2027 में मुंबई में आयोजित होने वाले अगले WAVES संस्करण में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

IFFI 2026 में दिखाई जाएंगी 250 फिल्में

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं IFFI के फेस्टिवल डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने सभी प्रतिभागियों को IFFI 2026 में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 8 क्यूरेटेड सेक्शनों में लगभग 250 फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति और समाज को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम उसका सिनेमा होता है। BRICS WAVES Bazaar जैसे मंच फिल्म निर्माताओं, लेखकों और निवेशकों को एक साथ लाकर नए सहयोग और नई फिल्मों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में रचनात्मक उद्योगों की बढ़ती भूमिका

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (MER-III) राजीव बोडवाडे ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS WAVES Bazaar 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है।

उन्होंने बताया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक GDP का लगभग 3.1 प्रतिशत योगदान देती है और अंतरराष्ट्रीय सेवा निर्यात में 1.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का योगदान करती है। उन्होंने कहा कि BRICS देश अपनी डिजिटल क्षमता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

दो दिनों तक होंगे सम्मेलन और बिजनेस मीटिंग्स

नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में उच्च स्तरीय सम्मेलन, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, बिजनेस नेटवर्किंग और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, कंटेंट फाइनेंसिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बौद्धिक संपदा (IP), महिला उद्यमिता, उभरती तकनीक, सार्वजनिक नीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समापन पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि BRICS WAVES Bazaar भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नवाचार, उद्यमिता, रोजगार और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

यह आयोजन BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, ‘प्रादेशिक सेना’ की भूमिका पर हुआ मंथन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘प्रादेशिक सेना (Territorial Army)’ के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के उद्देश्य, भूमिका और प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने सेना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बलों की मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान देती है।

उन्होंने कहा, “प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ (Citizen-Soldier) की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य अपने नागरिक व्यवसायों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त सैन्य क्षमता (Surge Capacity) तैयार करती है। यह प्रशिक्षित सैनिकों का ऐसा रिजर्व बल है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद जब ये सैनिक पुनः नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेषकर युवाओं को रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

वर्तमान में प्रादेशिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी और 59 विभिन्न इकाइयाँ हैं। रक्षा मंत्री ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पहला प्रतिक्रिया बल (First Responders) बताते हुए कहा कि यह राहत एवं बचाव कार्यों तथा चिकित्सा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम की बाढ़ के दौरान प्रादेशिक सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में प्रादेशिक सेना के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी इकोलॉजिकल टास्क फोर्स (Ecological Task Forces) अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘मिशन LiFE’ और ‘पंचामृत’ लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रादेशिक सेना की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

'वे डाल-डाल हैं, तो हम पात-पात': मिलावटखोरों पर गरजे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल; कांग्रेस पर भी साधा निशाना

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी कीमत पर मिलावटखोरों को नहीं छोड़ेगी। कार्रवाई केवल एनालॉग पनीर तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध, दही, मक्खन और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालों पर भी लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।


500 किलो संदिग्ध पनीर मामले पर दिया जवाब

रायपुर रेलवे स्टेशन पर 500 किलो संदिग्ध पनीर जब्त होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई न होने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि रेलवे परिसर से जुड़े मामलों की प्रक्रिया अलग होती है और इसमें रेलवे प्रशासन की भूमिका रहती है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे जांच या कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी।

मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, "वे डाल-डाल हैं, तो हम पात-पात हैं। मिलावट करने वालों के खिलाफ हमारी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।"

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सरकार गंभीर

मेडिकल कॉलेज के छात्रों द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन पर मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। छात्रों से इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और मुख्यमंत्री से भी बातचीत की गई है। सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है।

कांग्रेस पर बोला हमला

वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के दावों पर पलटवार करते हुए जायसवाल ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की "एक जेब में पेट्रोल और दूसरी जेब में माचिस" है और पार्टी अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी एकजुट होकर काम नहीं कर पाती; वह सिर्फ योजनाएं बनाती है, लेकिन उन्हें लागू करने में विफल रहती है।

बृजमोहन अग्रवाल के पत्र का किया समर्थन

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के विस्तार को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा लिखे गए पत्र का समर्थन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। विपक्ष की आलोचना पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बृजमोहन अग्रवाल से जनप्रतिनिधि के दायित्वों का निर्वहन करने और जनता के हित में काम करने की सीख लेनी चाहिए।

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