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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा ऐलान: धान छोड़ दूसरी फसल उगाने पर किसानों को ₹15 हजार प्रति एकड़

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026 में कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलें लेने वाले किसानों के लिए भारी वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है। इस योजना के अंतर्गत जो किसान धान के बदले अन्य फसलें अपनाएंगे, उन्हें 15 हज़ार रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं खरीफ वर्ष 2026 में दलहन, तिलहन, मक्का और मोटे अनाजों (मिलेट्स) की खेती करने वाले कृषकों को 10 हज़ार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता प्रदान की जाएगी।


इन फसलों को मिलेगा योजना का लाभ

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन राशि का लाभ अरहर, उड़द, मूंगफली और तिल फसलों के उत्पादन पर मिलेगा। इसी तरह मक्का, रागी और लघु धान्य जैसे कोदो-कुटकी भी शामिल किया गया है। इस विशेष योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अपनी उपज (धान) सहकारी समितियों के माध्यम से बेचते हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल क्रॉप सर्वे/गिरदावरी के माध्यम से रकबे (भूमि क्षेत्र) की पुष्टि होने के बाद ही मान्य रकबे पर सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा।

हजारों किसानों को मिला लाभ

गत वर्ष 2025 में इस योजना के सफल क्रियान्वयन के चलते अकेले सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले में ही बड़े पैमाने पर किसानों को लाभान्वित किया गया। जिले में धान के बदले अन्य फसल लेने वाले 144 किसानों को 13 लाख रुपए की राशि वितरित की गई। दलहन- तिलहन व अन्य फसल उगाने वाले 10 हजार 408 किसानों के खातों में 2 करोड़ 91 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर की गई।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के उप संचालक कृषि ने क्षेत्र के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या समिति प्रबंधक से तुरंत संपर्क करें। किसान भाई कैरी फॉरवर्ड या नए पंजीयन के समय धान के बदले अन्य फसल या दलहन-तिलहन फसल बोए गए रकबा के विकल्प का चयन कर अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराएं, ताकि समय पर प्रोत्साहन राशि उनके खातों में भेजी जा सके।

एल-नीनो की चुनौती को अवसर में बदलें किसान- कृषि विभाग

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 रायपुर : प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।


कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं।

दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन

राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है।

अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह

कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।

कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

सरगुजा सहकारी बैंक घोटाला: 30 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पर ED की एंट्री, जांच शुरू

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की तीन शाखाओं में सामने आए 30.51 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच अपने हाथ में ले ली है।


जानकारी के मुताबिक शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज शाखाओं में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और ऋण वितरण में भारी अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। आरोप है कि करीब 500 किसानों के नाम पर बिना जानकारी और सहमति के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन स्वीकृत किए गए और बैंकिंग नियमों की अनदेखी की गई।

किसानों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड सामने आने के बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम पर फर्जी तरीके से ऋण स्वीकृत कर खातों में लेन-देन किया गया। शिकायतों के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता गया।

मामले पर रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के हस्तक्षेप के बाद प्रभावित शाखाओं में खाद और बीज वितरण व्यवस्था भी दोबारा बहाल की गई है।

इस पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, ऋण दस्तावेज और करोड़ों के लेन-देन की जांच कर रही हैं।

गौरतलब है कि रामानुजगंज क्षेत्र के किसानों ने कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी, जिसके बाद जांच और तेज हुई।

अब ED की एंट्री के बाद प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के इस कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आधे से ज्यादा प्रदेश कवर… कई जिलों में बारिश का अलर्ट

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 CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून अब तक राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर चुका है, जबकि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे कुछ जिलों में अभी मानसून पहुंचना बाकी है।


सरगुजा संभाग तक पहुंचा मानसून, कई जिलों में झमाझम बारिश
दक्षिण छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से प्रवेश करने के बाद मानसून अब सरगुजा संभाग तक पहुंच चुका है। इसके असर से जशपुर, मुंगेली, बिलासपुर, बेमेतरा, कबीरधाम, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
India Meteorological Department (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अलर्ट वाले जिलों में जशपुर, सरगुजा, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, दुर्ग, रायपुर, गरियाबंद और कोंडागांव शामिल हैं। बाकी जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।

किसानों के लिए राहत, खरीफ बुवाई का बेहतर समय
लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। मौसम अनुकूल होने के कारण अब खरीफ फसलों, खासकर धान की बुवाई के लिए बेहतर परिस्थितियां बन रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कम से कम पांच इंच बारिश होने के बाद बुवाई शुरू करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है।

राजनांदगांव रहा सबसे ठंडा शहर
बारिश के असर से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को Rajnandgaon प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं रायपुर में 25.5 डिग्री, बिलासपुर में 27.1 डिग्री, पेंड्रा रोड में 23 डिग्री, अंबिकापुर में 24 डिग्री, जगदलपुर में 23.5 डिग्री और दुर्ग में 23.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।

फिलहाल प्रदेशभर में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बने रहने की संभावना है और कई इलाकों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

बाल संप्रेक्षण गृह से 11 अपचारी बालक फरार, खिड़की तोड़कर भागे… पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से बड़ी खबर सामने आई है। शहर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार देर शाम 11 अपचारी बालक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए फरार हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने सभी फरार बालकों की तलाश के लिए शहर सहित आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।


जानकारी के मुताबिक, घटना के वक्त इलाके में तेज बारिश हो रही थी और अचानक बिजली गुल हो गई थी। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर अपचारी बालकों ने पहले खिड़की तोड़ी और फिर पीछे की दीवार फांदकर एक-एक कर फरार हो गए। माना जा रहा है कि भागने की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी।

हैरानी की बात यह है कि घटना के समय संप्रेक्षण गृह के मुख्य गेट पर दो सुरक्षाकर्मी तैनात थे, इसके बावजूद 11 बालकों का एक साथ फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना जा रहा है। इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही संप्रेक्षण गृह प्रबंधन में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने फरार बालकों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है।

फिलहाल पुलिस रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, ग्रामीण इलाकों और संभावित ठिकानों पर लगातार सर्च अभियान चला रही है। शुरुआती जांच में बारिश और बिजली गुल होने की स्थिति को कारण माना जा रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के एंगल से भी जांच जारी है।

इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि फरार हुए सभी 11 अपचारी बालकों को पुलिस कब तक पकड़ पाती है।

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की 10वीं बैठक आयोजित, व्यापारियों के हितों पर हुई व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) की 10वीं बैठक आज नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित की गई। बैठक में देशभर के सदस्य डिजिटल माध्यम और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। यह आयोजन डिजिटल इंडिया पहल के तहत तकनीक आधारित सुशासन और जनभागीदारी का एक सफल उदाहरण माना गया।

बैठक में व्यापारियों के कल्याण और व्यापार सुगमता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और पहलों की समीक्षा की गई। सदस्यों को हाल ही में शुरू की गई राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति की जानकारी दी गई, जिसमें व्यापार ऋण सहायता, बीमा सहायता और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

DigiDukaan पहल पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान "डिजीडुकान (DigiDukaan)" पहल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। यह योजना छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

बोर्ड को बताया गया कि 19 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा द्वारा DigiDukaan का शुभारंभ किया गया, जिसे व्यापारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब इसे मुंबई, बेंगलुरु सहित अन्य प्रमुख शहरों और बाद में पूरे देश में लागू करने की योजना है।

व्यापारियों की प्रमुख समस्याओं पर मंथन

बैठक में व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं, निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • GST सरलीकरण और तर्कसंगतता

  • व्यापारिक अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना

  • पुराने व्यापारिक बकायों के लिए वन-टाइम सेटलमेंट

  • निर्यात को बढ़ावा देना

  • लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह अवसंरचना

  • डिजिटल कॉमर्स और ONDC से जुड़ाव

  • सस्ती ऋण सुविधा

  • व्यापारियों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

MSME और निर्यात बढ़ाने पर जोर

बैठक में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और व्यापारियों की निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। निर्यात के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संस्थागत सहायता को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

बैठक की शुरुआत में बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के सुशासन, आर्थिक सुधारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास और "विकसित भारत" के विजन में योगदान की सराहना की गई।

व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने का संकल्प

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने की।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में GST सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और Ease of Doing Business जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया है और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

बैठक के अंत में बोर्ड ने व्यापारियों के कल्याण, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


अंधेरे से उजाले की ओर सुकमा- 'मिशन दृष्टि' से 42 ग्रामीणों का मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन, मिला नई जिंदगी का उपहार

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 रायपुर  : कभी विकास की मुख्यधारा से कटे और नक्सल प्रभावित रहे सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में शासन के सुशासन और संवेदनशीलता की एक नई सुबह हुई है। 


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गम जगरगुंडा तहसील के दूरस्थ अंदरूनी गाँवों के 42 मोतियाबिंद मरीजों का सफल और निःशुल्क ऑपरेशन कर उनके जीवन से अंधेरे को हमेशा के लिए मिटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने खुद कड़े रास्तों को पार कर घर-घर सर्वे किया, मरीजों की पहचान की और उन्हें पूरे सम्मान के साथ विशेष वाहनों से जिला चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ सिविल सर्जन डॉ. एम.आर. कश्यप और नेत्र सर्जन डॉ. खुशबू देवांगन की देखरेख में मिशन 'दृष्टि योजना' के तहत यह जीवन बदलने वाली सर्जरी पूरी हुई।

​इस मुहिम की सबसे खूबसूरत और भावुक कर देने वाली तस्वीर दूरस्थ पहुँचविहीन गाँव गेड़ापार के निवासी माड़वी मुये के रूप में सामने आई। पिछले तीन महीनों से आँखों की धुंधली होती रोशनी के कारण लाचारी का जीवन जी रहे माड़वी के दोनों आँखों का जिला अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ, जिससे उनकी दुनिया एक बार फिर से रोशन हो उठी है। अपनी आँखों में नई चमक और चेहरे पर मुस्कान लिए माड़वी मुये ने भावुक होकर कहा, "मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन की वजह से मुझे नया जीवन मिला है, मैं सदा उनका आभारी रहूँगा।" अस्पताल से छुट्टी के वक्त मरीजों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें फल बांटे गए, जिससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और रविवार को उन्हें पूरे सम्मान के साथ सकुशल उनके घरों तक वापस छोड़ा गया।

​नक्सल गतिविधियों में आई भारी कमी के बाद, सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का यह विस्तार सुकमा की बदलती और मुस्कुराती हुई तस्वीर को बयां करता है। अब गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े और महंगे शहरों की तरफ भटकना नहीं पड़ रहा है, बल्कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सीधे उनके दरवाजे तक पहुँच रही हैं। जिला प्रशासन के द्वारा मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद मरीजों को फल और अन्य सामग्री का निःशुल्क वितरण किया गया। डिस्चार्ज हुए मरीजों और उनके परिजनों से प्रशासन ने अपील की है कि वे अपने आस-पड़ोस के अन्य जरूरतमंदों को भी इलाज के लिए प्रेरित करें, जिसके बाद प्रशासन की यह संवेदनशील पहल अब एक जन-जागरूकता आंदोलन का रूप ले चुकी है।

छत्तीसगढ़ बनेगा स्वच्छ ऊर्जा का नया हब, मंत्रिपरिषद ने दी सीजी-सीबीजी नीति 2026 को मंजूरी

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 को मंजूरी प्रदान की गई। यह नीति राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।




छत्तीसगढ़ में कृषि एवं फसल अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, पशु गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस अपशिष्ट, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा नेपियर जैसी ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 1.65 लाख मेट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावना है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।

नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल एवं डीजल के समतुल्य ईंधन की आपूर्ति सीबीजी के माध्यम से की जा सकेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों एवं जैविक अपशिष्टों के बेहतर उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

सीबीजी संयंत्रों से सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वरता संरक्षित रहेगी और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह नीति राज्य को हरित विकास और जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीबीजी के उपयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी तथा छत्तीसगढ़ नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में प्रभावी योगदान दे सकेगा।

भारत सरकार द्वारा सतत एवं किफायती परिवहन को बढ़ावा देने के लिए संचालित SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल के अनुरूप यह नीति तैयार की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों में छत्तीसगढ़ की यह पहल महत्वपूर्ण योगदान देगी।

राज्य में विकसित हो रहे सिटी गैस वितरण नेटवर्क तथा गैस अधोसंरचना का लाभ भी इस नीति को मिलेगा। इससे सीबीजी उत्पादन, वितरण और उपयोग की मजबूत पारिस्थितिकी विकसित होगी तथा निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) द्वारा वर्ष 2024 से सीबीजी क्षेत्र में सक्रिय पहल की जा रही है। वर्तमान में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा सहित आठ स्थानों पर बीपीसीएल एवं गेल इंडिया लिमिटेड के निवेश से सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं के लिए भूमि आबंटन की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है।

राज्य में निजी क्षेत्र से भी सीबीजी उद्योग के प्रति उल्लेखनीय रुचि दिखाई गई है तथा लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नई नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन तथा औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और अधिक बल मिलेगा।

मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस नीति के छह प्रमुख आधार स्तंभ हैं - आधारभूत अधोसंरचना सहायता, फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, संयंत्र स्थापना एवं संचालन सहायता, जैव उर्वरक प्रबंधन एवं सहायक अधोसंरचना विकास, सीबीजी मांग सृजन एवं परिवहन क्षेत्र में एकीकरण तथा निवेश प्रोत्साहन एवं उद्योग विकास।

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह नीति छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित उद्योग, जैविक कृषि और सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

दिल्ली में पेंशन अदालत का आयोजन, पेंशनभोगियों की शिकायतों का हुआ समाधान

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नई दिल्ली- प्रधान मुख्य नियंत्रक संचार लेखा (Pr. CCA), दिल्ली कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के लिए आज सफलतापूर्वक पेंशन अदालत (Pension Adalat) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त सीसीए (पेंशन) रजत त्रिपाठी ने की, जबकि सहायक सीसीए (पेंशन) श्याम लाल दास भी उपस्थित रहे।

इस दौरान BSNL, MTNL और दूरसंचार विभाग (DoT) के पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों की विभिन्न शिकायतों को सुना गया और उनका समाधान किया गया। पेंशन भुगतान, कम्यूटेशन (पेंशन रूपांतरण), पारिवारिक पेंशन तथा अन्य लाभों से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी मंच

पेंशन अदालत ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर प्रदान किया। पेंशन स्वीकृति, पेंशन संशोधन, पारिवारिक पेंशन और अन्य संबंधित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।

कार्यवाही के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया।

पेंशनभोगियों के हित में जारी रहेंगे ऐसे आयोजन

प्रधान मुख्य नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली कार्यालय ने कहा कि वह पेंशनभोगियों को समयबद्ध और प्रभावी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यालय भविष्य में भी पेंशनभोगियों के कल्याण और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इस प्रकार की पेंशन अदालतों का नियमित आयोजन करता रहेगा।

"दिल्ली में आयोजित पेंशन अदालत में BSNL, MTNL और DoT के पेंशनभोगियों की शिकायतों का समाधान किया गया। पेंशन भुगतान, पारिवारिक पेंशन और अन्य लाभों से जुड़े मामलों पर अधिकारियों ने सुनवाई की।"


12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत से दुनिया तक योग का महापर्व

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नई दिल्ली- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) ने भारत और विश्वभर में अभूतपूर्व भागीदारी के साथ एक नया इतिहास रच दिया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) रही, जिसने शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और समग्र स्वास्थ्य में योग की भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विशाल योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर लगभग 35,000 लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

दुनिया ने अपनाया योग का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, मिस्र सहित अनेक देशों में बड़े पैमाने पर योग सत्र आयोजित किए गए। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लेकर यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और पूर्वी एशिया के प्रमुख शहरों तक लाखों लोगों ने योग दिवस में भाग लिया। इससे यह साबित हुआ कि योग आज वैश्विक स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण का प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग मानवता को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का एक सशक्त माध्यम है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी किया योग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने लद्दाख के लेह में योग दिवस मनाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में सांसदों के साथ योग सत्र का नेतृत्व किया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश

इस वर्ष का सबसे विशेष अभियान "गंगोत्री से गंगासागर" रहा। लगभग 2,525 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और हुगली सहित अनेक प्रमुख घाटों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस पहल ने भारत की दो महान धरोहरों—गंगा और योग—को एक सूत्र में पिरोते हुए स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

योग संगम पोर्टल पर रिकॉर्ड भागीदारी

योग संगम पोर्टल पर 3.07 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। देश के 780 जिलों और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पोर्टल पर 7.46 लाख से अधिक तस्वीरें अपलोड की गईं और 2.66 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए।

रिकॉर्ड बनाने वाला योग दिवस

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों ने भी कई रिकॉर्ड बनाए।

  • महाराष्ट्र के बुलढाणा में लगभग 5,000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया।

  • कान्हा शांति वनम में 6,000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन कर नया रिकॉर्ड बनाया।

  • 14 जून 2026 को आयुष मंत्रालय ने अपने यूट्यूब लाइव योग सत्र के दौरान 4,35,831 दर्शकों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

सेना से युवाओं तक, हर वर्ग ने निभाई भागीदारी

रक्षा मंत्रालय ने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर कन्याकुमारी तक योग कार्यक्रम आयोजित किए। रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित हजारों सैनिकों ने योग किया।

वहीं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने देशभर के 5,000 से अधिक स्थानों पर 8.30 लाख से ज्यादा कैडेटों के साथ योगाभ्यास कर युवाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की।

भारत ने फिर दिखाया विश्व को मार्ग

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का मार्ग है। करोड़ों लोगों की भागीदारी और वैश्विक उत्साह के साथ भारत ने योग के माध्यम से विश्व कल्याण और स्वस्थ जीवन का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

"12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर भारत से दुनिया तक योग का महापर्व देखने को मिला। करोड़ों लोगों ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के संदेश को अपनाते हुए स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाया।"




टिश्यू कल्चर तकनीक से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ : वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज अरण्य भवन, नवा रायपुर में आज “सागौन प्रबंधन एवं उन्नत सागौन रोपण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण पाण्डेय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




सागौन है सुरक्षित और लाभकारी हरित निवेश

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सागौन (टीक) का प्रबंधन और उन्नत रोपण उच्च गुणवत्ता वाली इमारती लकड़ी के उत्पादन और शानदार मुनाफे का सौदा है स उन्होंने कहा कि सागौन विश्व की सबसे मूल्यवान इमारती लकड़ियों में से एक है। इसकी मजबूती, टिकाऊपन और दीमक-रोधी गुणों के कारण इसे लकड़ी का राजा कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए बैंक में निवेश करते हैं, उसी तरह सागौन का पौधा लगाना भी एक दीर्घकालिक और सुरक्षित निवेश है। इससे किसानों को भविष्य में बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है।

टिश्यू कल्चर पौधों से बढ़ेगी उत्पादकता

वन मंत्री कश्यप ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार सागौन के पौधे सामान्य पौधों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं। इन पौधों का तना सीधा और गुणवत्तापूर्ण होता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता की लकड़ी प्राप्त होती है और किसानों की आय बढ़ती है।

अंतरवर्ती फसलों से होगी अतिरिक्त आमदनी

 कश्यप ने बताया कि किसान सागौन रोपण के शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच खाली स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसलें लेकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। वहीं 8 से 10 वर्ष बाद वृक्षों की छंटाई (थिनिंग) से भी आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। राज्य शासन द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है।

5 एकड़ तक के किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान

छोटे और सीमांत किसानों के लिए 5 एकड़ तक सागौन रोपण पर 100 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। इसके तहत प्रति पौधा 94.50 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

बड़े वृक्षारोपण प्रकल्पों को 50 प्रतिशत सहायता

5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण करने वाले किसानों एवं संस्थाओं को 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक जानकारी

कार्यशाला में कोयम्बटूर से आईं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रेखा आर. वारियर और डॉ. आर. यशोदा ने किसानों को उन्नत सागौन उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी के चयन, पौधों की देखभाल, रोग प्रबंधन तथा टिश्यू कल्चर आधारित पौधों की विशेषताओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

छत्तीसगढ़ में सागौन उत्पादन की व्यापक संभावनाएं

विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी सागौन उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। बीजापुर, भोपालपटनम, कोटा, अंबागढ़ चौकी, रायगढ़, सराईपाली और नारायणपुर सहित कई क्षेत्रों में सागौन आधारित कृषि वानिकी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

खेत में सागौन, हर किसान समृद्ध किसानों से अपील

कार्यशाला के समापन अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने किसानों से बड़े पैमाने पर सागौन रोपण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि श्खेत में सागौन, हर किसान समृद्धश् का संकल्प प्रदेश में हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।

CG NEWS : घर में रची गई खूनी साजिश, बेटे ने ही कर दी पिता की हत्या

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 सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में पुलिस ने महज आठ दिनों के भीतर एक सनसनीखेज हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है। 45 वर्षीय व्यक्ति की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके ही बेटे ने अपने मौसा और दोस्त के साथ मिलकर की थी। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बोरे में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया था ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।


मामला बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के चिरमी बचरापोड़ी गांव का है। पुलिस के मुताबिक, 10 जून की रात आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया, जबकि 11 जून की रात शव को बोरे में बांधकर दूसरे स्थान पर फेंक दिया गया। दो दिन पहले शव की पहचान शिव प्रसाद सिंह गोंड (45) निवासी चिरमी बचरापोड़ी के रूप में हुई थी।

बेटा, मौसा और दोस्त गिरफ्तार

जांच में सामने आया कि शिव प्रसाद सिंह की हत्या उसके घर चिरमी परसापारा में ही की गई थी। आरोपियों ने टांगी और लोढ़ा से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को बोरे में भरकर सुनसान जगह पर फेंक दिया गया, ताकि घटना को छिपाया जा सके।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि हत्या की पूरी साजिश मृतक के बेटे ने रची थी। वारदात को अंजाम देने में उसके मौसा और एक दोस्त ने साथ दिया। वहीं मृतक की मां पर भी सबूत मिटाने और आरोपियों की मदद करने का आरोप है।

घरेलू विवाद बना हत्या की वजह

प्रारंभिक जांच में पता चला कि मृतक अक्सर पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और घरेलू प्रताड़ना करता था। लंबे समय से चल रही इसी प्रताड़ना से तंग आकर बेटे ने पिता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी।

रामानुजनगर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों के आधार पर महज 8 दिनों में पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

महासमुंद - रेत में दबी मिली युवती की लाश, हत्या की आशंका; शिनाख्ती में जुटी पुलिस

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 महासमुंद। जिले के खल्लारी थाना क्षेत्र अंतर्गत रामखेड़ा झारा नाला के पास उस वक्त सनसनी फैल गई, जब रेत में दबी एक युवती की लाश बरामद हुई। शव का कुछ हिस्सा रेत के बाहर दिखाई दे रहा था, जबकि बाकी हिस्सा रेत में दबा हुआ था। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है।


जानकारी के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों ने नाले के पास रेत में शव दबे होने की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही Chhattisgarh Police की खल्लारी थाना टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा जांच शुरू की। घटना की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक चप्पल और बालों का गुच्छा बरामद हुआ है, जिन्हें साक्ष्य के तौर पर जब्त कर जांच में शामिल किया गया है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक शव करीब दो दिन पुराना बताया जा रहा है, हालांकि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

फिलहाल मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों की जांच कर रही है और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि मृतका की शिनाख्त के साथ घटना के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

साय कैबिनेट बैठक खत्म, ग्रामीण परिवारों को हर साल मिलेगा 125 दिन काम, जानें 3 बड़े फैसले

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक खत्म हो गई है। बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को अपने ही गांव में रोजगार देने के लिए तीन बड़े मास्टरस्ट्रोक खेले हैं।


1. मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ’’विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।

इस योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण तथा पीएम गति शक्ति से समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। विकास कार्यों की बेहतर कार्ययोजना एवं निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रणालियों का उपयोग करते हुए पारदर्शिता, सुशासन एवं जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाएगा।

इस योजना के क्रियान्वयन में केंद्र एवं राज्य के व्यय का अनुपात 60:40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2. मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र आदि), विपणन केंद्र तथा आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।

’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ के माध्यम से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा व्यवसाय, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा तथा ग्रामीण बाजारों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की ग्रामीण आजीविका को मजबूत आधार प्राप्त होगा।

3. मंत्रिपरिषद ने आज “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप का भी अनुमोदन किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा।

इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य नोडल एजेंसी तथा ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

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