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दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और पुनर्वास नीति से मिली निर्णायक सफलता - मुख्यमंत्री

दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याण की योजनाएं, शासन पर बढ़ा लोगों का विश्वास - मुख्यमंत्री साय

बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री

बस्तर रोडमैप 2.0 के माध्यम से पर्यटन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के समग्र विकास पर विशेष फोकस - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सल हिंसा के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना किया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा बस्तर की जनता के विश्वास और सहयोग से प्रदेश इस चुनौती से निर्णायक रूप से मुक्त होकर शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनेक वर्षों के सतत प्रयासों, सुनियोजित रणनीति, सुरक्षा बलों के पराक्रम तथा आम नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इकाइयों तथा अभियान में सहभागी सभी सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए समन्वित सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति अपनाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की सतत समीक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को अपेक्षित गति मिली।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अनुरूप सुरक्षा अभियानों को गति देने के साथ-साथ विकास कार्यों का भी समानांतर विस्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अभियान की नियमित समीक्षा की। स्वयं उन्होंने बस्तर क्षेत्र का लगातार दौरा कर सुरक्षा बलों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न गांवों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समाज के उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक और मानवीय नीति लागू की गई।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति का अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहां शासन की योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से पहुंचें, ताकि लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन आए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए 'बस्तर रोडमैप 2.0' तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 'नियद नेल्ला नार 2.0' तथा 'बस्तर मुन्ने अभियान' के अंतर्गत 31 योजनाओं एवं 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे 5 हजार 542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शासन की सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंचेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को अब बहुआयामी सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन्हें 'शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित करते हुए नागरिक सुविधाओं, जनसेवाओं और आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत बस्तर के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। इससे नागरिकों को समयबद्ध एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार' योजना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों में 17 विभागों की 43 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। इससे ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा प्रशासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 6 लाख 79 हजार परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। बस्तर संभाग में 17 लाख लोगों के जनधन खाते खोले जा चुके हैं।  24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं।  22 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। 1 लाख 18 हजार लोगों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। साथ ही 3 लाख 89 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में 1 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि  बस्तर संभाग के 240 नक्सल प्रभावित गांवों में पूर्व में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 विद्यालयों का पुनः संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में आधारभूत अधोसंरचना के विस्तार को भी तेज गति से आगे बढ़ा रही है। 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर कार्य जारी है, जिससे बस्तर की रेल संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

उन्होंने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है। यह परियोजना बस्तर को देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि खेल एवं संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजन किए गए। इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता हुई, जिससे सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी को नई मजबूती मिली।

उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव के नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति के माध्यम से बस्तर आज विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. ममता साहू ने संभाली छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की कमान

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महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त डॉ. ममता साहू ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया।

शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में उन्होंने कार्यभार संभालते हुए महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण, उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण तथा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. ममता साहू ने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और सभी से समर्पण, पारदर्शिता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। उन्होंने आयोग के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण कर कार्यालयीन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनकी शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण तथा उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग महिलाओं के हितों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया, नगर निगम रायपुर के पार्षद महेश ध्रुव, दुर्गेश राव, रजनी शेंगडे, जितेन्द्र साहू, कृष्णा साहू, सीमा डहरिया, गीतेश साहू सहित आयोग के सचिव, सहायक संचालक, लेखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति,नीति बनाने समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत आने वाले विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के हित में एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर, इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के निर्धारण के लिए राज्य शासन द्वारा सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में 07 सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है, जिसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, पूर्व में इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। लेकिन शिक्षाकर्मी पद समाप्त होने के बाद जल संसाधन विभाग ने 13 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी कर सीआईडीसी ((CIDC) के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया था। सीआईडीसी में पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के कई महत्वपूर्ण प्रकरण लंबे समय से लंबित हो गए थे। इसके चलते आश्रित परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति गठित, 1 माह में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता, उच्च न्यायालय के निर्देशों और कर्मचारी हित को सर्वाेपरि रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। गठित की गई 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को सौंपनी होगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट (मंत्रि-परिषद्) से अंतिम अनुमोदन लिया जाएगा, जिसके बाद नई नीति को विधिवत अधिसूचित कर दिया जाएगा।

शासन का मुख्य उद्देश्य

राज्य शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इस नई नीति के लागू होने से वर्षों से लंबित प्रकरणों का तेजी से निपटारा होगा और पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार व आर्थिक संबल मिल सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना

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नई दिल्ली- डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) आज राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से गति देने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था बन चुका है।

मेघालय के उमियाम स्थित NESAC के दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह केंद्र भारत-म्यांमार सीमा तथा पूर्वोत्तर के अंतरराज्यीय सीमाक्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संसाधन, सुशासन और अन्य तकनीक आधारित परियोजनाओं के माध्यम से अंतरिक्ष कार्यक्रम के लाभ आम लोगों तक पहुँचा रहा है।

इस अवसर पर NESAC के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने केंद्र की उपलब्धियों और वर्तमान कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केंद्र लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें 50 परियोजनाएँ हाल ही में पूर्ण हुई हैं तथा 78 परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। ये परियोजनाएँ कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भू-विज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय नियोजन, भू-सूचना विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, उपग्रह संचार, यूएवी (ड्रोन) अनुप्रयोग, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक विकासात्मक समाधानों में बदलने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यह संस्था वैज्ञानिक क्षमताओं और पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की विकासात्मक आकांक्षाओं के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरी है। राज्य सरकारों के साथ बढ़ते सहयोग से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी योजना निर्माण, प्रशासन, संसाधन प्रबंधन और जनसेवा का प्रभावी माध्यम बन रही है।

उन्होंने पूर्वोत्तर गन्ना एवं बांस विकास परिषद (NECBDC) तथा राज्य सरकारों के साथ NESAC के समन्वय को और मजबूत करने का आह्वान किया ताकि बांस संसाधनों की वैज्ञानिक मैपिंग का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे बांस मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ होगी, संसाधनों की बेहतर योजना बनेगी, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मंत्री ने NESAC की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक एवं स्थान-विशिष्ट बनाने पर भी जोर दिया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर प्रभावी सूचना उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने रामकृष्ण मिशन, चेरापूंजी द्वारा विकसित जल संचयन मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाने का सुझाव दिया, जिससे क्षेत्र की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC की जियोस्पेशियल तकनीक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने 'मंज़िल-एनई' (GeoTourism ManzilNE) डैशबोर्ड को और सशक्त बनाने तथा निजी पर्यटन क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का भी आह्वान किया, ताकि पूर्वोत्तर की प्राकृतिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत को तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने NESAC से केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, स्टार्टअप्स, निजी उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, व्यापक साझेदारी से वैज्ञानिक नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू कर क्षेत्र की विकासात्मक चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है, जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी समावेशी विकास के प्रमुख साधन बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NESAC अपनी अनुप्रयोग-आधारित परियोजनाओं और रणनीतिक पहलों के माध्यम से सुशासन, आपदा लचीलापन, सतत संसाधन प्रबंधन तथा तकनीक-सक्षम समृद्ध पूर्वोत्तर के निर्माण में भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान 3.0, विधानसभा परिसर में सीएम विष्णु देव साय और डॉ. रमन सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा

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लोकतंत्र के मंदिर से पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान का सशक्त संदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।

कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, अब नगर पालिका बनेगा राजिम, अधिसूचना जारी

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राजिमवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा दे दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत राजिम नगर पंचायत की वर्तमान सीमाएं ही नगर पालिका की सीमाएं रहेंगी। सरकार के इस फैसले से पूरे राजिम क्षेत्र में खुशी का माहौल है और विकास को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।


विकास कार्यों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि नगर पालिका बनने से राजिम के सुनियोजित शहरी विकास को नई गति मिलेगी। सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।




केंद्र और राज्य की योजनाओं का मिलेगा बेहतर लाभ

सरकार का कहना है कि नगर पालिका बनने के बाद राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न शहरी विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से नागरिकों तक पहुंच सकेगा। इससे शहर के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल-जब मासूम की चौखट पर खुद पहुँचा प्रशासन, दूर हुई आधार की बाधा

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रायपुर- ई-गवर्नेंस (e-Governance) का वास्तविक उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सुशासन, पारदर्शिता और दक्षता स्थापित करना है। इसका असली मकसद तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल बनाना है, ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम, सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सके। सरकारी योजनाएँ जब फाइलों से निकलकर सीधे जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुँचती हैं, तो वह केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की एक खूबसूरत मिसाल बन जाती है। सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला प्रशासन ने हाल ही में कुछ ऐसी ही संवेदनशीलता दिखाई है, जहाँ तमाम बंदिशों और कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे एक मासूम के घर पहुँचकर उसका आधार कार्ड बनाया गया।

मुश्किल हालात और पहचान का संकट

शासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक ऐसे बच्चे की पहचान की गई थी, जिसकी उम्र 5 वर्ष से अधिक होने के बाद भी उसका आधार नामांकन नहीं हो पाया था। इस मासूम का परिवार अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था।बच्चे की माता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, और पिता काफी समय पहले परिवार को छोड़कर अलग हो चुके हैं। देखभाल कर रहे परिजनों ने बिलाईगढ़, भटगांव, सरसीवा और सारंगढ़ के कई आधार केंद्रों के चक्कर लगाए, लेकिन विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को केंद्र तक ले जाकर प्रक्रिया पूरी कराना मुमकिन नहीं हो पा रहा था।

​'होम-सर्विस', मिनटों में हुआ समाधान

जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, तो कलेक्टर ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ई-जिला प्रबंधक (EDM) की टीम तुरंत सक्रिय हुई। निर्देशों का पालन करते हुए आधार ऑपरेटर आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों के साथ सीधे बच्चे के घर पहुँचे। बिना किसी देरी के बच्चे के घर पर ही संवेदनशीलता के साथ आधार नामांकन की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क संपन्न की गई। ई-गवर्नेंस (इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस) का अर्थ नागरिकों और व्यवसायों को सरकारी सेवाएं, जानकारी और संचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग करना है। इसका मुख्य उद्देश्य शासन को "SMART" (सरल, नैतिक, जवाबदेह, उत्तरदायी और पारदर्शी) बनाना और भ्रष्टाचार को कम करना है।

​खुला सरकारी योजनाओं का मार्ग

इस एक दस्तावेज के बन जाने से अब इस मासूम के लिए भविष्य में मिलने वाली सभी सरकारी, सामाजिक और शैक्षणिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने का रास्ता साफ हो गया है। ​इस संवेनदशील पहल से गद्गद होकर आवेदनकर्ता सुमत राम बंजारे और सुमित्रा कुमारी घृतलहरे ने प्रशासन का सहृदय धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब हम थक-हार कर बैठ गए थे, तब प्रशासन ने खुद आगे बढ़कर हमारे बच्चे की सुध ली। कलेक्टर साहब, ईडीएम और ऑपरेटर की इस मानवीय पहल को हम कभी नहीं भूलेंगे। यह केवल एक कार्ड नहीं, हमारे बच्चे के सुरक्षित भविष्य की पहचान है। ​जिला प्रशासन की यह त्वरित और संवेदनशील कार्यशैली यह साबित करती है कि ई-गवर्नेंस का असली मकसद तकनीक के जरिए अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाना है।


नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

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राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

राजिम की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी, बना नगर पालिका : राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।



भारत की महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास, लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीतकर बनाया नया कीर्तिमान

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 270 रन से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई दी है।

'क्रिकेट के मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीतना किसी भी क्रिकेटर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होती है। भारतीय महिला टीम की यह शानदार जीत देश में महिला क्रिकेट के निरंतर विकास, खिलाड़ियों के अदम्य साहस, कौशल, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट चरित्र का प्रमाण है।

यह ऐतिहासिक विजय भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय महिला टीम की बढ़ती प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है। साथ ही, यह उपलब्धि उन लाखों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी, जो भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं।

बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मनहास ने कहा:

"यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे गौरवपूर्ण क्षणों में से एक है। लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीतना अत्यंत विशेष उपलब्धि है और यह इस टीम के साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिचायक है। खिलाड़ियों ने इस चुनौती को शानदार ढंग से स्वीकार किया और पूरे देश को गौरवान्वित किया। मैं बीसीसीआई के पूर्व मानद सचिव एवं वर्तमान आईसीसी अध्यक्ष जय शाह के दूरदर्शी नेतृत्व और महिला क्रिकेट के विकास के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की भी सराहना करता हूँ, जिसने ऐसी उपलब्धियों की मजबूत नींव रखी है। बीसीसीआई की ओर से मैं हरमनप्रीत कौर, सभी खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को इस अविस्मरणीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।"

बीसीसीआई के मानद सचिव देवजीत सैकिया ने कहा:

"यह ऐतिहासिक जीत महिला क्रिकेट में वर्षों से किए गए सतत निवेश और विश्वास का परिणाम है। बीसीसीआई ने मजबूत घरेलू ढाँचे, बेहतर अवसरों और पेशेवर सहयोग के माध्यम से महिला क्रिकेटरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य किया है। मैं बीसीसीआई के पूर्व मानद सचिव एवं वर्तमान आईसीसी अध्यक्ष श्री जय शाह के दूरदर्शी नेतृत्व को भी श्रेय देना चाहता हूँ। उनके ऐतिहासिक निर्णय—केंद्रीय अनुबंधित महिला खिलाड़ियों के लिए समान वेतन, घरेलू महिला क्रिकेटरों की मैच फीस में वृद्धि तथा महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की शुरुआत—ने भारत में महिला क्रिकेट की तस्वीर बदल दी है। लॉर्ड्स में मिली यह ऐतिहासिक जीत उन्हीं प्रयासों और सबसे बढ़कर खिलाड़ियों एवं सहयोगी स्टाफ की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।"

बीसीसीआई भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सभी खिलाड़ियों, कोचों, सहयोगी स्टाफ और उनसे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता है। यह जीत आने वाली पीढ़ियों की महिला क्रिकेटरों को प्रेरित करेगी तथा भारत में महिला क्रिकेट के विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कारगिल विजय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में 'शौर्य विजय यात्रा' का शुभारंभ

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कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी आयोजन के अंतर्गत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह स्मारक मोटरसाइकिल अभियान द्रास (लद्दाख) स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक जाएगा।

इस अभियान में 28 मोटरसाइकिल सवार, जिनमें सेवारत एवं सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी तथा उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, लगभग 1,900 किलोमीटर की कठिन हिमालयी यात्रा तय करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। इस अभियान का ध्येय वाक्य है—"One Ride, One Nation, One Salute" (एक यात्रा, एक राष्ट्र, एक सलाम)।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसे आज भी विश्व की सेनाएँ सम्मान के साथ अध्ययन करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊँचाई और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे के अत्यंत कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से प्रत्येक चोटी, पहाड़ी और बंकर को पुनः प्राप्त किया तथा तिरंगे की आन-बान-शान को कायम रखा। यह विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश की भूमि, अस्मिता और सम्मान पर उठने वाली हर शत्रुतापूर्ण नजर का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) तथा सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) सहित सभी वीर सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का जीवन देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करता रहेगा।

यात्रा के दौरान प्रतिभागी चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक तथा लेह युद्ध स्मारक सहित विभिन्न सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे वीर नारियों से भी मिलेंगे और उनके साहस एवं धैर्य का सम्मान करेंगे। यह यात्रा 26 जुलाई 2026, अर्थात कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक पहुँचकर सम्पन्न होगी।

इस अभियान की एक विशेषता यह है कि यात्री अपने साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा एक कलश लेकर चलेंगे, जिसे कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक की यह पवित्र मिट्टी जब कारगिल की पावन धरती से मिलेगी, तब यह वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीरों के अदम्य पराक्रम के पावन संगम का प्रतीक बनेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि शौर्य विजय यात्रा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक और देश के विभिन्न भागों से आए नागरिक एक साथ भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सभी की भाषाएँ, परंपराएँ और पृष्ठभूमियाँ अलग-अलग हों, लेकिन एक तिरंगा, एक राष्ट्र और अपने वीरों के प्रति समान सम्मान ही भारत की वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट भी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना जगाएगी तथा यह संदेश देगी कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, संस्कारों और मूल्यों में भी होती है।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

शौर्य विजय यात्रा भारतीय सेना की ऑपरेशन विजय के दौरान प्रदर्शित मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और निःस्वार्थ सेवा—को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अभियान वीर सैनिकों की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाते हुए आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान के आदर्शों के प्रति प्रेरित करने का प्रयास है।

वक्फ बोर्ड में राम मंदिर से भी बड़ा घोटाला, मुख्यमंत्री योगी से जांच की मांग

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 बरेली : ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तर प्रदेश के सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों और जमीनों की हेराफेरी का आरोप लगाया है। मौलाना रजवी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और सही दिशा में जांच की गई, तो यह देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।


सपा शासनकाल में हुआ वक्फ संपत्तियों का अवैध सौदा: मौलाना बरेलवी

सोमवार को बरेली में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पत्र जारी करते हुए मौलाना रजवी ने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) की पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया:

  • समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान वक्फ की बेशकीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त और अवैध कब्जे का धंधा खूब फला-फूला।

  • तत्कालीन वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों और जिम्मेदार लोगों ने मिलीभगत कर सरकारी व धार्मिक जमीनों के सौदे किए।

  • मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की कमान आजम खां के पास थी। इस दौरान उनके पसंदीदा और चहेते लोगों को ही वक्फ बोर्ड में चेयरमैन और सदस्य के पदों पर बैठाया गया।

"गरीबों के हक की जमीनें कौड़ियों के दाम बेचीं"

मौलाना रजवी ने वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वक्फ की जमीनें मूल रूप से मुस्लिम समाज के गरीब, कमजोर, यतीमों और बेसहारा लोगों के कल्याण के लिए थीं। इन जमीनों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे बनाए जाने चाहिए थे, लेकिन बोर्ड के तत्कालीन कर्ताधर्ताओं ने इन्हें निजी स्वार्थ के लिए बेचकर भारी लूट-खसोट की। उन्होंने कहा, "अगर वक्फ संपत्तियों और उससे होने वाली आय का सही व पारदर्शी उपयोग हो, तो पूरे देश के मुसलमानों का शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ापन दूर किया जा सकता है।"

मौलाना ने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से अपील की है कि वक्फ बोर्ड के घोटालों की गहनता से जांच कराकर सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए।

इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हाजी नसीर अहमद नूरी, मुफ्ती फारुख मिस्बाही, हाजी नाजिम बेग, राहत हुसैन मुन्ना, काशिफ खान, डॉ. अनवर रज़ा कादरी और हाफिज रजी अहमद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

महासमुंद-राजिम मार्ग पर सनसनी: नाले में तैरती मिली युवक की सड़ी-गली लाश, जांच में जुटी पुलिस

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 राजिम। महासमुंद-राजिम मार्ग पर फिंगेश्वर के पास स्थित सरगी नाले में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पानी में तैरती हुई एक अज्ञात युवक की सड़ी-गली लाश बरामद हुई। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। यह पूरा मामला फिंगेश्वर थाना क्षेत्र का है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों ने नाले में एक पुराना शव तैरते हुए देखा, जिसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही फिंगेश्वर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पानी से बाहर निकलवाकर पंचनामा की कार्रवाई की और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस द्वारा मृतक की शिनाख्त के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

हत्या या दुर्घटना? जांच में जुटी पुलिस

शव काफी पुराना होने के कारण पूरी तरह सड़-गल चुका है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के लोगों और ग्रामीणों से पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवक की मौत हत्या है, दुर्घटना है या फिर कोई अन्य कारण। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

भगवान की भक्ति में लीन थे पुजारी, आरती करते-करते आया हार्ट अटैक, मौके पर ही मौत

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 रांची: झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद भावुक और स्तब्ध कर देने वाला मामला सामने आया है। रातू रोड स्थित इंद्रपुरी (रोड नंबर-9) के एक मंदिर में सोमवार शाम संध्या आरती के दौरान मुख्य पुजारी आचार्य रजनी कांत मिश्रा (60) का दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया। भगवान की भक्ति में लीन पुजारी के हाथ में उस वक्त डमरू और शंख था। भक्तों के सामने ही उन्होंने पूजा स्थल पर दम तोड़ दिया।


शंखनाद के बीच अचानक बिगड़ी तबीयत

प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के अनुसार, सोमवार शाम आचार्य रजनी कांत मिश्रा हर दिन की भांति भगवान की संध्या आरती कर रहे थे। पूरा मंदिर भजनों और शंखनाद की ध्वनि से गूंज रहा था और श्रद्धालु श्रद्धाभाव से आरती में लीन थे। इसी बीच अचानक आचार्य मिश्रा असहज हुए, उन्होंने अपना सीना पकड़ा और पलक झपकते ही पूजा स्थल पर अचेत होकर गिर पड़े। पुजारी को अचानक गिरता देख मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आरती में शामिल श्रद्धालु तुरंत उनकी मदद के लिए आगे बढ़े।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

घटना के वक्त मंदिर में वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश सिंह और भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए आचार्य मिश्रा को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल लाने से पहले ही उनका निधन हो चुका था।

क्षेत्र में शोक की लहर

आचार्य रजनी कांत मिश्रा के आकस्मिक निधन से स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आचार्य मिश्रा एक बेहद सरल, सौम्य और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। ईश्वर की आराधना करते हुए और साक्षात भगवान के दरबार में उनका इस तरह चले जाना पूरे इलाके के लोगों को गहरा सदमा दे गया है।

CG NEWS : डीजल चोर गिरोह को पकड़कर छोड़ने के आरोप में एसआई निलंबित, एसएसपी ने दिए जांच के आदेश

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 बिलासपुर। डीजल चोरी के मामले में गंभीर लापरवाही और संदिग्ध आचरण बरतने के आरोप में बिलासपुर एसएसपी ने कोनी थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर (एसआई) उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एसआई पर आरोप है कि उन्होंने डीजल चोरी के पांच आरोपियों को हिरासत में लिया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए बिना उनमें से तीन को चुपके से छोड़ दिया।


200 लीटर डीजल और दो स्कॉर्पियो जब्त

मिली जानकारी के अनुसार, कोनी पुलिस ने डीजल चोरी के एक मामले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी का 200 लीटर डीजल, दो स्कॉर्पियो वाहन, पाइप और लोहे की छड़ें जब्त की हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले में संलिप्त तीन अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।


सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से खुली पोल

इस बीच, ग्राम पंचायत सेमरताल के भदौरियाखार (बरपाली) में पुलिस टीम द्वारा दी गई दबिश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में कोनी पुलिस बैसाखु लोनिया, उसके बेटे राजू लोनिया, राजेश लोनिया और भानु लोनिया समेत अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर थाने ले जाती दिख रही है। वीडियो में कुछ आरोपियों के हाथों में हथकड़ी भी साफ नजर आ रही है।

लेनदेन के आरोप, एसएसपी ने बैठाई जांच

वायरल वीडियो के बाद यह बात सामने आई कि हिरासत में लिए गए लोगों में से बैसाखु, राजेश, राजू और एक महिला को बाद में थाने से ही छोड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे और सोशल मीडिया पर आरोपियों को सांठगांठ व भारी लेनदेन के बाद छोड़ने के आरोप लगाए जाने लगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से एसआई उमेश उपाध्याय को सस्पेंड कर दिया है। एसएसपी ने पूरे मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश देते हुए सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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