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मुख्यमंत्री साय ने शुरू की गौधाम योजना, अब प्रदेश के सभी गौधाम कहलाएंगे “सुरभि गौधाम”

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला बिलासपुर के तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम लाखासार स्थित गौधाम का शुभारंभ करते हुए प्रदेश में गोधन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने गोमाता की विधिवत पूजा-अर्चना करने के उपरांत गौधाम परिसर का अवलोकन कर वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।


मुख्यमंत्री साय ने गौधाम में आश्रय प्राप्त बेसहारा एवं आवारा पशुओं की देखरेख, चारा, पानी तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और चारागाह का भी अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि ग्राम लाखासार में लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में गौधाम विकसित किया गया है, जिसमें से 19 एकड़ भूमि पर पशुओं के लिए हरे चारे की खेती की जा रही है। गौधाम का संचालन कामधेनु गौशाला समिति द्वारा किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की जा रही गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गोधन संरक्षण और बेसहारा मवेशियों की देखभाल के लिए गौधाम योजना को राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे गौसेवा की परंपरा को मजबूती मिलने के साथ ही पशुधन संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि अब राज्य के सभी गौधाम “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के गौधामों में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे गौसेवा के साथ-साथ स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लाखासार ग्राम के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने लाखासार में महतारी सदन, मिनी स्टेडियम तथा 500 मीटर लंबाई के गौरव पथ के निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही लाखासार गौधाम में प्रशिक्षण भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत करने तथा एक काऊ कैचर और एक पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की, जिससे क्षेत्र में गौसंरक्षण और स्थानीय विकास कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्र के पशुपालकों और ग्रामीणों से संवाद कर गोधन संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली तथा इस सेवा कार्य में लगे लोगों की सराहना की। उन्होंने गौसेवा से जुड़े कार्यकर्ताओं को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्य जारी रखने की बात कही और सभी को गोधन संरक्षण तथा गौसेवा के लिए प्रेरित किया।

तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का चहुँमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो भी वादा करते हैं, उसे अवश्य पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय द्वारा तखतपुर क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से कई कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा अनेक कार्य प्रगतिरत हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों से क्षेत्र में विकास को नई गति मिली है।

छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अभिनंदन किया और गौधाम योजना के शुभारंभ के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस पहल से गोधन संरक्षण को नई दिशा मिलेगी तथा बेसहारा और निराश्रित गौवंश के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, कमिश्नर बिलासपुर सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

“जो उखाड़ना है उखाड़ लो…” भाजपा नेता की पोस्ट से पार्टी में घमासान

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की राजनीति में अचानक हलचल मच गई है। Bharatiya Janata Party के सालर मंडल अध्यक्ष Ramkumar Thuriya की एक फेसबुक पोस्ट ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है।


मंडल अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर जिले के प्रभारी मंत्री Tankram Verma को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा – “जो उखाड़ना है उखाड़ लो…”। यह पोस्ट सामने आते ही भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

रामकुमार थूरिया ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रभारी मंत्री की वजह से सारंगढ़ जिला कमजोर हो रहा है। इस बयान के बाद जिले की राजनीति गरमा गई और विपक्ष को भी बड़ा मुद्दा मिल गया।

वहीं Indian National Congress के नेताओं ने इस पोस्ट को लेकर भाजपा पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता इसे भाजपा की अंदरूनी कलह बताते हुए पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठा रहे हैं।

उधर भाजपा संगठन के भीतर भी इस पोस्ट को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक मंडल अध्यक्ष को अपने ही प्रभारी मंत्री के खिलाफ इतनी खुली टिप्पणी करने की जरूरत क्यों पड़ी।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी संगठन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रामकुमार थूरिया को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि अभी तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

फिलहाल यह मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इस विवाद के पीछे की असली वजह क्या है और पार्टी संगठन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।


मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया।


उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा।

उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है।

इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री 

साय ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजातीय समाज के  अंकित साकिनी और  डायमंड ध्रुव को सम्मानित किया। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिनका चयन NIT और IIT में हुआ है। मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए चेक भी प्रदान किए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया तथा पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत अटायर शो का आनंद लिया।

कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज एवं श्री इन्द्रकुमार साहू, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मण्डावी, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, आदिम विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ. सारंश मित्तर, टीआरटीआई की संचालक श्रीतमी हिना नेताम सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

सिंधी समाज की एकजुटता सराहनीय : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज की एकजुटता और उनकी संघर्षशील परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि सिंधी समाज ने देश के इतिहास के सबसे कठिन दौर—विभाजन की विभीषिका—का सामना किया है। इसके बावजूद इस समाज ने व्यापार और उद्यम के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विभाजन के समय सिंधी समाज के अनेक परिवारों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति और घर-बार छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था और परिश्रम के बल पर उन्होंने नई शुरुआत की और आज सिंधी समाज विकास के नए-नए सोपान रच रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज का यह जुझारूपन और आत्मविश्वास पूरे समाज के लिए प्रेरणास्पद है और इसके लिए समाज के सभी सदस्य प्रशंसा के पात्र हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज को एकजुट होने का अवसर मिलता है। जब समाज संगठित और मजबूत होता है तो राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की एकजुटता वास्तव में सराहनीय है और इस प्रकार के मेलों का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे। इस मेले में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सिंधी समाज के लोग देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं और अपनी मेहनत, लगन तथा उद्यमशीलता के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर अपने कार्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जो उनके परिश्रम और दूरदर्शिता का परिचायक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत प्रदेश सरकार ने अधिकांश गारंटियों को पूरा कर लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में आज से प्रारंभ की गई गौधाम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में गौधाम स्थापित किए गए हैं। इन गौधामों के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी। यहां पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, काऊ कैचर, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और हम उनका पूजन करते हैं। गाय से प्राप्त पंचगव्य को अमृत के समान माना गया है, जो हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को चेट्रीचंड्र पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी सराहना की।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंधी समाज अत्यंत मेहनतकश समाज है। उन्होंने समाज द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोती लाल साहू, धमतरी महापौर रामू रोहरा, पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष महेश दरयानी सहित सिंधी समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

गैस सिलेंडर को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, देश में कोई कमी नहीं: उप मुख्यमंत्री अरुण साव

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 रायपुर। गैस सिलेंडर को लेकर एजेंसियों में लग रही लंबी कतारों के बीच छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और अफवाहों के कारण ऐसी स्थिति बन रही है, जबकि देश में पेट्रोल और गैस की कोई कमी नहीं है।


मीडिया से चर्चा के दौरान अरुण साव ने लोगों से धैर्य रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कहीं भी कालाबाजारी होने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अफीम की खेती को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधानसभा घेराव के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ही अफीम की खेती शुरू हुई थी। उनके अनुसार कांग्रेस सरकार के दौरान नशे का कारोबार बढ़ा, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही सरकार ने तत्काल और कठोर कार्रवाई की है और किसी को भी नशे का कारोबार करने नहीं दिया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरे प्रदेश में सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में शुरू की जा रही गौधाम योजना को लेकर अरुण साव ने कहा कि पहले की गौठान योजना का सही उपयोग नहीं हुआ और इससे जनता के पैसे की बर्बादी हुई। उन्होंने कहा कि नई गौधाम योजना के तहत प्रदेश में 1460 गौधाम बनाए जाएंगे, जिनमें से 26 को स्वीकृति मिल चुकी है।

उन्होंने बताया कि गौधामों में चरवाहों को मानदेय दिया जाएगा और पशुओं के लिए चारा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। सरकार का दावा है कि यह योजना पशुपालन और गौसेवा को बढ़ावा देने में प्रभावी साबित होगी।

CG NEWS : फर्जी ‘पुलिस कॉल’ बनी मौत की वजह: डर के कारण युवक ने लगा ली फांसी

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 जांजगीर-चांपा। जिले में एक युवक की संदिग्ध मौत का मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद अचानक सुर्खियों में आ गया। वीडियो में युवक ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो सामने आई सच्चाई ने पूरे घटनाक्रम की दिशा ही बदल दी।


मिली जानकारी के अनुसार, जिले के चोरभट्टी निवासी सनत कुमार कश्यप (25 वर्ष) इन दिनों ग्राम पताढ़ी स्थित अशोक लीलैंड वर्कशॉप में रहकर काम कर रहा था। 13 मार्च 2026 को उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में उसने आरोप लगाया था कि पंतोरा चौकी से फोन कर उसे गाली-गलौज की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण वह यह कदम उठा रहा है।

वीडियो वायरल होते ही पुलिस पर सवाल उठने लगे। मामला गंभीर होता देख आईजी रामगोपाल गर्ग ने एसपी विजय पांडे को पूरे मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल के आधार पर जांच शुरू की।

जांच में पता चला कि कोरबा जिले के ग्रेवराबस्ती निवासी सचिन खरे की बहन स्नेहा खरे (21 वर्ष) को देखने के लिए लड़के वाले आने वाले थे। लेकिन उससे एक दिन पहले 12 मार्च को स्नेहा कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली और वापस नहीं लौटी। देर रात तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।

तलाश के दौरान परिजनों को जानकारी मिली कि स्नेहा अपने मामा के बेटे धीरेन्द्र पाटले के साथ चली गई है। इसके बाद गुस्से में आकर भाई सचिन खरे ने धीरेन्द्र के रूममेट सनत कश्यप से संपर्क किया।

पुलिस जांच में सामने आया कि सचिन खरे ने अपने भाई और मामा के बेटे शैलेन्द्र पाटले के मोबाइल नंबर से सनत कश्यप को फोन किया। फोन पर उसने खुद को पंतोरा चौकी का पुलिसकर्मी बताते हुए गाली-गलौज की और थाने बुलाने की धमकी दी।

अचानक आए इस फोन कॉल से सनत कश्यप बुरी तरह घबरा गया और मानसिक दबाव में आ गया। इसी दौरान उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने पुलिस द्वारा धमकाने की बात कही। बाद में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। जांच के दौरान पुलिस सचिन खरे तक पहुंची और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि फोन उसी ने पुलिस बनकर किया था।

इसके बाद थाना बलौदा में अपराध क्रमांक 113/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

इधर आरोपी की बहन स्नेहा खरे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना कुसमुंडा, जिला कोरबा में दर्ज कराई गई है। उस मामले की भी अलग से जांच की जा रही है।

शुरुआत में वायरल वीडियो के कारण पुलिस पर कई सवाल खड़े हो गए थे, लेकिन जांच के बाद सामने आई सच्चाई ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी।

रायपुर में ज्वेलरी दुकान से ‘रानी हार’ लेकर भागी महिला दुर्ग में गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के टिकरापारा इलाके में ज्वेलरी दुकान से सोने का रानी हार लेकर फरार हुई महिला को पुलिस ने दुर्ग से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने महिला के साथ उसके सहयोगी युवक को भी गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से करीब 5.33 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर तथा घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल जब्त की है।


पुलिस के अनुसार, ज्वेलरी दुकान के संचालक ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई कि 12 मार्च 2026 को दोपहर करीब 3:30 बजे एक महिला और एक युवक उनकी दुकान पर सोने का रानी हार खरीदने के बहाने पहुंचे। उस समय दुकान में संचालक के पुत्र भी मौजूद थे। दोनों ने महिला को रानी हार सहित अन्य जेवर दिखाए।

खरीदारी के दौरान महिला ने चालाकी से सोने का रानी हार, सोने की चांद बाली, सोने की अंगूठी, चांदी की पायल और चांदी की बिछिया पहन ली। इसके बाद उसने बहाना बनाया कि उसकी एक सहेली बैंक से पैसे लेकर आ रही है और वह भी एक हार खरीदेगी।

कुछ देर बाद महिला फोन पर बात करते हुए दुकान के बाहर चली गई और यह कहकर निकल गई कि वह अपनी सहेली को लेकर आती है। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर दुकान संचालक और उनके पुत्र को शक हुआ। उन्होंने महिला के साथ आए युवक से पूछताछ की, जिसने अपना नाम मेषराम साहू और महिला का नाम कमलेश्वरी साहू बताया। इसी दौरान युवक भी मौका पाकर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसे पकड़ लिया गया।

प्रार्थी की शिकायत पर थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 208/2026 धारा 305 भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया।

घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) संदीप पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त न्यू राजेंद्र नगर नवनीत पाटिल ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और चोरी गए जेवरों की बरामदगी के निर्देश दिए।

टिकरापारा पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रार्थी, उसके पुत्र और पकड़े गए आरोपी से पूछताछ की। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महिला आरोपी के भागने के संभावित रास्तों का पता लगाया गया। इस दौरान दुर्ग पुलिस से समन्वय स्थापित किया गया।

सघन पतासाजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने फरार महिला आरोपी को दुर्ग शहर से चोरी किए गए जेवरों सहित गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सोने का रानी हार, सोने की चांद बाली (1 जोड़ी), सोने की अंगूठी, चांदी की पायल (1 जोड़ी), चांदी की बिछिया (3 जोड़ी) और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जब्त की है। बरामद सामान की कुल कीमत लगभग 5,33,000 रुपये बताई जा रही है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस रिमांड लेकर उनसे अन्य चोरी की घटनाओं के संबंध में भी पूछताछ की जाएगी।

गिरफ्तार आरोपी:

कमलेश्वरी साहू (35 वर्ष), पति लक्ष्मीनारायण साहू, निवासी ग्राम चांपा, बजरंग चौक के पास, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा।

मेषराम साहू (21 वर्ष), पिता स्व. खूबचंद साहू, निवासी ग्राम बिरोदा, बकतरा रोड के पास, थाना अभनपुर, जिला रायपुर।

दुर्ग अफीम कांड में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर कृषि विस्तार अधिकारी सस्पेंड, दो कर्मचारियों को नोटिस

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 दुर्ग। जिले के समोदा गांव में अफीम की खेती मिलने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मामले की जांच में लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर अभिजीत सिंह ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है।


जानकारी के अनुसार, समोदा गांव में एक खेत में अफीम की खेती मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि जिस खेत को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां वास्तव में मक्का नहीं बल्कि धान की फसल लगी हुई थी। इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आने पर कृषि विस्तार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

मामले में पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने दोनों से जवाब मांगा है और फिलहाल उनके स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कृषि मैप पोर्टल पर असली किसान की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी। इतना ही नहीं, जिस प्रदर्शन प्लॉट की जानकारी दी गई थी, वहां सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया था। इसके अलावा खेत के आसपास अफीम की खेती होने के बावजूद इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को नहीं दी गई।

नोटिस के जवाब में कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू ने बताया कि प्रदर्शन प्लॉट किसान के बताए स्थान पर ही चुना गया था। उन्होंने कहा कि खराब नेटवर्क के कारण फोटो पोर्टल पर सही तरीके से अपलोड नहीं हो पाई। साथ ही किसान की तबीयत खराब होने के कारण उसके प्रतिनिधि की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि कार्यालय से प्रदर्शन बोर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया था। खेत के आसपास बिजली की फेंसिंग और आवारा पशुओं की वजह से पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करना संभव नहीं हो पाया। हालांकि जांच अधिकारियों ने इन कारणों को संतोषजनक नहीं माना और इसे गंभीर लापरवाही करार दिया।

दरअसल, 7 मार्च को जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने समोदा गांव में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगाए गए मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पता चला कि जिस खेत को मक्का का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां मक्का की फसल थी ही नहीं।

जांच में यह भी सामने आया कि फसल सर्वेयर ने सितंबर 2025 में खेत का डिजिटल सर्वे किया था। उस समय खसरा नंबर 309 को खाली जमीन और खसरा नंबर 310 में धान की फसल होने की जानकारी सॉफ्टवेयर में अपलोड की गई थी। बाद में इन्हीं जमीनों पर अफीम की खेती पाई गई।

नियमों के अनुसार, सर्वेयर द्वारा अपलोड किए गए डेटा का मौके पर जाकर सत्यापन करना पटवारी की जिम्मेदारी होती है। लेकिन बिना जांच किए ही रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई, जिसके चलते यह मामला समय रहते सामने नहीं आ सका।

जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन को मक्का का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वह बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार की जमीन है। मक्का की फसल दिखाकर उन्हें राज्य सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि इसी जमीन के आधार पर निजी बैंक से लोन भी लिया गया था।

रिपोर्ट में जो फोटो मक्का के खेत की बताकर लगाई गई थी, वह असली खेत की नहीं थी। किसी ग्रामीण को मक्का के खेत के पास खड़ा कर फोटो ली गई और उसे ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जिस जगह यह फोटो ली गई थी, वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर अफीम की खेती हो रही थी।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच जारी रखी है और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण एवं सहायक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।


उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण करते हुए उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप भी तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को 24 फरवरी 2026 को विस्तृत जानकारी के साथ पत्र भी भेजा जा चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पदों, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल के 25-25 पदों, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15, वाणिज्य के 75, विधि के 10 पदों पर भर्ती के साथ ही क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद तथा ग्रंथपाल के 50 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।

विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम तथा विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को प्रेषित कर दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के पश्चात भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्ति से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ता मिलेगी तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।

यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल तथा क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा का सामना न करना पड़े। विभाग द्वारा नियुक्त अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट एवं सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं से योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

रीवा में गहराया जल संकट, नारा लेखन कर दिया जा रहा है जल संरक्षण का संदेश

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 आरंग। शुक्रवार को स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन व ग्राम पंचायत रीवा के संयुक्त संयोजन में जल जागरूकता पर नारा लेखन कराया गया। जिसके तहत् ग्राम के मुख्य गली मोहल्ले, जल स्रोतों के आसपास जल ही जीवन है , जल है तो कल है, जल अनमोल है,जल बचाओ, जीवन बचाओ, इत्यादि जागरूकता नारे लिखाया गया। ग्राम के सरपंच घसिया राम साहू ने बताया ग्राम रीवा वर्षों से जल संकट जूझ रहा हैं।


बरसात निकलते ही यहां पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेता है। लोगों को आसपास के गांव से पानी लाकर गुजारा करना पड़ता है। इसलिए नारा लेखन के माध्यम से जल संरक्षण और जल जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है।


वहीं पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया गत वर्ष यहां जल संरक्षण को लेकर कार्यशाला आयोजित किया गया था।जिसमें भूगर्भ के विशेषज्ञो को आमंत्रित कर यहां जल की उपलब्धता पर संगोष्ठी कराया था।जिसे लोगों ने काफी सराहा।इस बार भी फाउंडेशन ग्राम रीवा में जल समस्या को लेकर भूगर्भ वैज्ञानिकों से संपर्क कर पानी की उपलब्धता हेतु शोध अध्ययन कर रहे हैं।

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। श्री साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।

इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

अफीम की खेती पर सख्त हुए मुख्यमंत्री साय,संलिप्त लोगों के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाई

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 रायपुर : प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन और प्रशासन के सभी अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि अपने-अपने जिलों के संवेदनशील एवं संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर सर्वे पूर्ण कर अपने हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख हो कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती तो नहीं की जा रही है।

प्रदेश में हाल ही में कुछ स्थानों पर अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।अवैध क़ब्ज़े के जेसीबी मशीन से हटाया गया ।

इसी प्रकार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्रीपानी (खजुरी) में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे (लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य) जब्त किए गए तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 एवं 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव: संसद में पहली बार अविश्वास नोटिस

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 नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने संसद में अविश्वास का प्रस्ताव लाने की पहल की है। शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा के कई सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर नोटिस जमा किया। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।


बताया जा रहा है कि यह देश के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से हटाने की मांग की गई है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हुई हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस पर इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इसका समर्थन करते हुए नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि पार्टी औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी इस पहल का समर्थन किया है।

नियमों के अनुसार, लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस दिया जा सकता है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल सत्तारूढ़ भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इसे पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी होता है।

बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: 51 लाख गुजारा भत्ता और बेटियों के लिए FD के बाद तलाक मंजूर

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 बिलासपुर। Chhattisgarh High Court की डिवीजन बेंच ने पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी है। जस्टिस Sanjay K. Agrawal और जस्टिस Arvind Kumar Verma की खंडपीठ ने यह निर्णय दंपती के बीच सुलह की संभावनाएं समाप्त होने और उनकी दो बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुनाया।


मध्यस्थता केंद्र में हुए समझौते के अनुसार पति ने पत्नी को 51 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने और दोनों बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 15-15 लाख रुपये की एफडी कराने पर सहमति जताई।

मामले के अनुसार महाराष्ट्र के राजोली निवासी व्यक्ति की शादी Chhattisgarh की निवासी महिला से 21 मई 2006 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद दोनों की दो बेटियां हुईं, लेकिन कुछ वर्षों बाद दोनों के बीच वैचारिक मतभेद शुरू हो गए और अक्टूबर 2018 से दोनों अलग रहने लगे थे।

अलग रहने के दौरान पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन 6 जुलाई 2024 को फैमिली कोर्ट ने क्रूरता साबित नहीं होने का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद पति ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। अदालत ने मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजा। लंबी चर्चा के बाद 18 अगस्त 2025 को दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।

समझौते के तहत पत्नी को अलग-अलग किस्तों में डिमांड ड्राफ्ट के जरिए राशि दी गई और 23 फरवरी 2026 तक शेष 46 लाख रुपये का भुगतान भी पूरा कर दिया गया। राशि मिलने के बाद पत्नी ने इसे स्वीकार कर लिया।

मध्यस्थता केंद्र में हुए इस समझौते के आधार पर हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी।

ज्वेलरी शॉप में महिला ने लगाया लाखों का चूना, गहने पहनकर फरार; CCTV खंगाल रही पुलिस

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Tikrapara थाना क्षेत्र के देवपुरी में एक महिला ज्वेलरी शॉप से करीब 5 लाख रुपये के गहने पहनकर फरार हो गई। पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।


जानकारी के मुताबिक एक महिला ग्राहक बनकर ज्वेलरी शॉप पहुंची थी। उसने सोने का रानी हार, बाली, अंगूठी और चांदी की पायल व बिछिया समेत करीब 4 लाख 93 हजार रुपये के गहने पहनकर देखने के लिए लिए।

इसके बाद महिला ने दुकान संचालक से कहा कि वह बाहर खड़े अपने दोस्तों से पैसे लेकर आती है। जैसे ही वह गहने पहनकर दुकान से बाहर निकली, वह मौके से फरार हो गई।

मामले में कुशालपुर, Purani Basti निवासी दुर्गा प्रसाद सोनी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है, ताकि आरोपियों के भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके।

पुलिस का कहना है कि आरोपी महिला की पहचान हो चुकी है और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।

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