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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जन-हितैषी पहल,'मिशन कनेक्ट' से चौपाल तक पहुँचा प्रशासन

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गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है।

गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान

विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाड़ियों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ।

कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा

निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।

सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्ट' ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

करमरी में ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का दिया संदेश

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आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर- आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-  ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।    

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और      

आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। 

कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा

करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।


छत्तीसगढ़ को मिला देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार

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उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से किया गया सम्मानित

बेंगलुरु में आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में मिला पुरस्कार

रायपुर- छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को बधाई दी है। यह पुरस्कार राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है।

यह पुरस्कार बेंगलुरु, कर्नाटक में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वंे नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस में दिया गया। उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रभारी संयुक्त संचालक नीरज शाहा ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।

वन विभाग का नवाचार- बस्तर की इमली चटनी को राष्ट्रीय पहचान दिलाएंगी सुकमा की महिलाएं

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रायपुर- बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है l यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है l  सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। 

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सफलता की कहानी- तेंदूपत्ता संग्राहकों में खुशियों की लहर

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छत्तीसगढ़ सरकार ने फिर शुरू की चरणपादुका योजना, 12.40 लाख वनवासियों को मिला लाभ

रायपुर- तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सरकार द्वारा कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, जिसमें संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर (दुर्घटना मृत्यु या विकलांगता पर), और विभिन्न वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होता है l छत्तीसगढ़ में 5500 सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत लाभ दिए जा रहे हैं l 

छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह जनहितैषी योजना अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उनकी संवेदनशीलता के कारण फिर से शुरू की गई है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "गारंटी" के अनुरूप गरीब हितैषी शासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस योजना को तेज गति और पारदर्शिता के साथ धरातल पर लागू किया है।

12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को लाभ,वितरित हुई उच्च गुणवत्ता की चरणपादुकाएं

वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखिया को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं प्रदान की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये व्यय किए। इस कदम से जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं।

वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ

वन मंत्री कश्यप के विशेष प्रयासों से सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह निर्णय संग्राहक परिवारों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी सिद्ध होगा।

पारदर्शी प्रक्रिया — खरीदी जेम पोर्टल से

सरकार ने चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता पूर्ण हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है। यह सरकार की गुणवत्ता और लाभार्थी हितों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

वनांचल क्षेत्रों में उमंग, सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत मुख्यमंत्री साय और वन मंत्री कश्यप के इस निर्णय से वनांचल क्षेत्रों में खुशी और उत्साह का माहौल है। चरणपादुका योजना सीधे उन मेहनतकश तेंदूपत्ता संग्राहकों तक राहत पहुँचा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों में कार्य करते हैं और अपनी आजीविका जुटाते हैं।

यह योजना न केवल सुरक्षा और सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि वनवासियों को सम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है जो सुशासन और अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बन गई है।

राज्यपाल डेका नेअमिताभ जैन को मुख्य सूचना आयुक्त एवं उमेश कुमार अग्रवाल और शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त पद की शपथ दिलाई

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई।

शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल,धनवेंद्र जयसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नागदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए है।


“IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन: उत्तर-पूर्व के युवाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान का अवसर”

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गुवाहाटी (असम)- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्री,जयंत चौधरी ने आज गुवाहाटी विश्वविद्यालय में IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन किया। इस प्रतियोगिता में उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों के युवा 26 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

यह पहली बार है जब भारत की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आयोजित की जा रही है, जिससे यहां के युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का एक बड़ा अवसर मिल रहा है। इस आयोजन में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने कार्यान्वयन भागीदार के रूप में सहयोग किया।

उद्घाटन समारोह में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नानी गोपाल महंता, असम सरकार के प्रमुख सचिव ग्यानेंद्र देव त्रिपाठी, तथा MSDE की संयुक्त सचिव हेना उस्मान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की उत्तर-पूर्व पर निरंतर ध्यान और नीति प्राथमिकता ने क्षेत्र के युवाओं में आत्मविश्वास और अवसरों की नई लहर पैदा की है। उन्होंने IndiaSkills को केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कौशल, अनुशासन और श्रम की गरिमा का उत्सव बताया।

जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि NEP 2020 के अनुरूप शिक्षा और कौशल विकास के बीच तालमेल बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने के अवसर बढ़ते हैं।

यह क्षेत्रीय प्रतियोगिता उत्तर-पूर्व में कौशल विकास के मजबूत ढांचे को दर्शाती है। इस प्रतियोगिता में 162 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं और इसमें तकनीकी, डिजिटल, परंपरागत और सेवा क्षेत्रों के विविध कौशल शामिल हैं, जैसे:

  • ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी

  • क्लाउड कंप्यूटिंग

  • मोबाइल ऐप डेवलपमेंट

  • वेब टेक्नोलॉजी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • CNC मिलिंग/टर्निंग

  • वेल्डिंग

  • फैशन टेक्नोलॉजी

  • बेकरी और पेस्ट्री

  • होटल रिसेप्शन

  • रेस्टोरेंट सर्विस

  • स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल

  • रिटेल सेल्स

  • विजुअल मर्चेंडाइजिंग

प्रतियोगिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती हुई देखी गई, विशेषकर तकनीकी क्षेत्रों में जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, CNC, वेल्डिंग आदि। यह संकेत है कि उत्तर-पूर्व में कौशल क्षेत्र में लिंग समानता और डिजिटल-तकनीकी क्षमता का विकास हो रहा है।

IndiaSkills प्रतियोगिता एक चरणबद्ध मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए आयोजित की जाती है—जिला स्तर, राज्य स्तर, क्षेत्रीय स्तर, और फिर राष्ट्रीय स्तर। क्षेत्रीय विजेता IndiaSkills National Competition में भाग लेंगे, और सफल प्रतियोगियों को WorldSkills Competition 2026 (शंघाई) में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।


IFSCA–IRDAI ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट में बोले एम. नागराजू, “2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य में गिफ्ट सिटी की अहम भूमिका”

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मुंबई में आयोजित IFSCA–IRDAI–GIFT City ग्लोबल रीइंश्योरेंस समिट के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि भारत का रीइंश्योरेंस (पुनर्बीमा) क्षेत्र परिवर्तनकारी विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि समिट की थीम “Bridging India Today, Insuring India Tomorrow – the India Evolution Roadmap” सरकार के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन से पूरी तरह मेल खाती है।

अपने संबोधन की शुरुआत में नागराजू ने IFSC गिफ्ट सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने की दिशा में एक मजबूत मंच बताया। उन्होंने कहा कि बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र भारत की आर्थिक आकांक्षाओं को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेषकर तब जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (02/2025) का हवाला देते हुए नागराजू ने बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक बीमा उद्योग में प्रीमियम वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद, 2024 में भारत नाममात्र प्रीमियम के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत है। भारत में बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जो अभी भी बड़े अप्रयुक्त बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, ₹11.93 लाख करोड़ का प्रीमियम संग्रह किया, ₹8.36 लाख करोड़ के दावे निपटाए और 31 मार्च 2025 तक ₹74.44 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां दर्ज कीं। इसी अवधि में भारत का कुल रीइंश्योरेंस बाजार ₹1.12 लाख करोड़ का रहा।

नागराजू ने सरकार और बीमा नियामक द्वारा किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारकों की शिक्षा एवं संरक्षण कोष की स्थापना, डेटा संरक्षण कानून के अनुरूप प्रावधान और IRDAI की नियामक शक्तियों को मजबूत किया गया है।

अपने संबोधन के समापन में सचिव ने कहा कि IFSCA और गिफ्ट सिटी IFSC भारत को वैश्विक रीइंश्योरेंस हब बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गिफ्ट सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएं और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को साकार करें।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 88वीं बैठक सम्पन्न, संरक्षित क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन पर जोर

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (SC-NBWL) की स्थायी समिति की 88वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाए रखने से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुरूप संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, टाइगर रिजर्व और इको-सेंसिटिव जोन के भीतर और आसपास स्थित कुल 70 प्रस्तावों पर विचार किया। इन प्रस्तावों में जनोपयोगी सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े मामले शामिल थे। समिति ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावों पर चर्चा की।

जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े प्रमुख प्रस्तावों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावरों और विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों से संबंधित योजनाएं शामिल रहीं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में मध्यम सिंचाई परियोजना से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिससे एक ओर बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए बेहतर जल व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

समिति ने 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया, जो मुख्य रूप से लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और सिक्किम राज्य में सीमा एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रणनीतिक बुनियादी ढांचे से संबंधित थे। राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावों की अनुशंसा की गई, साथ ही वन्यजीव संरक्षण उपायों और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के सख्त पालन पर भी जोर दिया गया।

बैठक में पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों और निर्देशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) की समीक्षा भी की गई। विशेष रूप से नीतिगत सुधारों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और परिवेश पोर्टल में सुधार से संबंधित प्रगति पर चर्चा की गई। समिति ने निर्णय लिया कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी नीतियों और कार्यक्रमों तथा SC-NBWL के निर्देशों के अनुपालन की आगे की बैठकों में प्रभावी निगरानी की जाएगी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत किया गया है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों पर सरकार को परामर्श देना तथा यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्य संतुलित और सतत तरीके से किए जाएं।


77वें गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रनिर्माताओं का सम्मान, 10 हजार विशेष अतिथि होंगे शामिल

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नई दिल्ली- 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड इस बार जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों के सम्मान का भव्य उदाहरण बनेगी। इस अवसर पर देशभर से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों (पति/पत्नी सहित) को आमंत्रित किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इन विशेष अतिथियों में किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप उद्यमी, शोधकर्ता, खिलाड़ी, महिला स्वयं सहायता समूह, कारीगर, श्रमिक, छात्र, स्वयंसेवक और समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों से जुड़े वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनका चयन राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को सम्मानित करने और राष्ट्रीय आयोजनों में जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

विशेष अतिथियों की सूची में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के विजेता, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान, ‘पल्सेज आत्मनिर्भरता मिशन’ के अंतर्गत उत्कृष्ट किसान, पीएम-स्माइल योजना के तहत पुनर्वासित ट्रांसजेंडर और भिक्षुक, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना (ग्रामीण), पीएम फसल बीमा योजना, पीएम स्वनिधि, मुद्रा योजना, एनआरएलएम की ‘लखपति दीदी’, पीएम विश्वकर्मा योजना, खादी विकास योजना, महिला कॉयर योजना सहित कई योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं।

इसके अलावा इसरो, डीआरडीओ, डीप ओशन मिशन, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, नवाचार एवं स्टार्ट-अप क्षेत्र के उत्कृष्ट प्रदर्शनकर्ता, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के विजेता, अटल टिंकरिंग लैब के प्रतिभाशाली छात्र, ‘वीर गाथा’ परियोजना के विजेता तथा ‘मन की बात’ के प्रतिभागी भी परेड के साक्षी बनेंगे।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कलाकार, कारीगर, खिलाड़ी, आदिवासी उद्यमी, सीमा सड़क संगठन (BRO) के निर्माण श्रमिक, स्वच्छ गंगा मिशन के ‘जल योद्धा’, एनडीएमए के स्वयंसेवक, माय भारत वॉलंटियर्स, सर्वश्रेष्ठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह आयोजन विशेष रहेगा, जहां यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम-2026 के विदेशी प्रतिनिधि, दूसरे वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन में शामिल अंतरराष्ट्रीय व भारतीय भिक्षु प्रतिनिधिमंडल तथा खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी ओलंपियाड 2025 के पदक विजेता छात्र भी शामिल होंगे।

गणतंत्र दिवस समारोह के साथ-साथ इन विशेष अतिथियों के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्रहालय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थलों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। उन्हें संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से संवाद का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

यह पहल न केवल भारत की विविध उपलब्धियों को मंच पर लाएगी, बल्कि ‘जन भागीदारी से जन सशक्तिकरण’ के संकल्प को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगी।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को नया नेतृत्व, अमिताभ जैन बने मुख्य सूचना आयुक्त

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 रायपुर । राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई।


मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल, धनवेंद्र जायसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नामदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा डॉ.शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026: छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना का राष्ट्रीय उत्सव

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23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।

इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा। आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।

साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे।

इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे।

आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं।

साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी।

साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।

इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे।

24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा।

साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं। मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है।

दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है।

आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026  छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है। यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा।

रेलवे कर्मचारी बहु-राज्य सहकारी समितियों के साथ सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की अहम बैठक, संशोधित कानून के अनुरूप उपविधियों में बदलाव पर जोर

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नई दिल्ली- सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (CEA) ने 19 जनवरी 2026 को रेलवे कर्मचारियों की बहु-राज्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप समितियों की उपविधियों (Bye-laws) के समायोजन को सुगम बनाना था। इस बैठक में रेलवे कर्मचारियों की 16 बहु-राज्य सहकारी समितियों के 40 से अधिक पदाधिकारियों, जिनमें अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल थे, ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 2023 के संशोधन के बाद गठित CEA को बहु-राज्य सहकारी समितियों में मतदाता सूची तैयार करने और स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक देशभर में CEA द्वारा 220 चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए जा चुके हैं, जबकि 70 चुनाव वर्तमान में प्रगति पर हैं।

देश में रेलवे कर्मचारियों की लगभग 18 बहु-राज्य सहकारी समितियां हैं, जिनके सदस्य 8 से 10 लाख के बीच हैं। ये समितियां मुख्य रूप से अपने सदस्यों से जमा स्वीकार करने और रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने का कार्य करती हैं। इन समितियों द्वारा संचालित जमा और ऋण का कुल अनुमानित मूल्य लगभग ₹10,000 करोड़ है, जिनमें से चार समितियों के पास बैंकिंग लाइसेंस भी हैं।

CEA द्वारा अब तक रेलवे कर्मचारियों की पांच सहकारी समितियों में चुनाव कराए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, गोरखपुर और बीकानेर स्थित प्रमुख सहकारी बैंक और क्रेडिट सोसायटी शामिल हैं।

बैठक में संशोधित अधिनियम के अनुरूप उपविधियों में संशोधन, प्रतिनिधि सामान्य निकायों का गठन, प्रतिनिधियों का चुनाव, बोर्ड के कार्यकाल की समाप्ति से कम से कम छह माह पूर्व चुनाव प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कार्यात्मक वेबसाइट बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

CEA के उपाध्यक्ष आर. के. गुप्ता ने निर्वाचन प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रस्तुति दी। वहीं केंद्रीय सहकारी रजिस्ट्रार आनंद कुमार झा और CEA की सदस्य मोनिका खन्ना ने समय पर चुनाव कराने के लिए उपविधियों में शीघ्र संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में रेल मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने CEA की सक्रिय भूमिका की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए इस प्रकार की परामर्श बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।

सी-डॉट को ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए स्कॉच अवॉर्ड 2025, आपदा चेतावनी प्रणाली में देश को मिली बड़ी उपलब्धि

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नई दिल्ली- भारत सरकार के दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास के अग्रणी संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) को उसकी स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) तकनीक के लिए प्रतिष्ठित “SKOCH Award-2025” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान “Resourcing Viksit Bharat” विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच समिट के दौरान प्रदान किया गया।

स्कॉच अवॉर्ड देशभर में शासन और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सरकारी एवं निजी संस्थानों, परियोजनाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है। यह पुरस्कार वित्त, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली पहलों को मान्यता देता है।

C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक अत्याधुनिक आपदा एवं आपातकालीन चेतावनी मंच है, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जैसी संस्थाओं को एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म सभी मोबाइल ऑपरेटरों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से त्वरित चेतावनी संदेश प्रसारित करता है।

यह स्वदेशी, किफायती और पूर्णतः स्वचालित प्रणाली भौगोलिक रूप से लक्षित (Geo-targeted), बहु-आपदा और 21 भाषाओं में बहुभाषी चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र की ‘Early Warnings for All (EW4All)’, आईटीयू के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।

इस अवसर पर C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह सम्मान नागरिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक को समर्पित करने के C-DOT के संकल्प की पहचान है। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर जीवनरक्षक जानकारी पहुंचाकर सार्वजनिक सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाता है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है और भारत को वैश्विक स्तर पर इस तकनीक के चुनिंदा प्रदाताओं में शामिल करती है।

C-DOT, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में C-DOT 5G, 6G, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य की तकनीकों पर कार्य कर रहा है।

यह पुरस्कार C-DOT के ईवीपी डॉ. पंकज डलेला ने प्राप्त किया।

अबूझमाड़ जंगल से 82 BGL सेल और IED सामग्री बरामद, नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम

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 नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक बड़ी हिंसक साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। आदिंगपार–कुमेरादी क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 82 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) सेल समेत भारी मात्रा में IED निर्माण सामग्री बरामद की है।


जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने इन BGL सेल को प्लास्टिक शीट में लपेटकर जमीन में दफन कर रखा था। आशंका है कि इनका इस्तेमाल सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और बड़े हमलों को अंजाम देने के लिए किया जाना था। समय रहते बरामदगी होने से एक बड़ी घटना टल गई।

संयुक्त ऑपरेशन में मिली सफलता

यह कार्रवाई नारायणपुर पुलिस, आईटीबीपी और डीआरजी की संयुक्त टीम द्वारा की गई। खुफिया सूचना के आधार पर ओरछा, रायनार और धनोरा से लेकर आदिंगपार–कुमेरादी क्षेत्र तक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया।

इस दौरान BGL सेल के साथ-साथ IED बनाने में उपयोग होने वाली अन्य संदिग्ध सामग्री भी जब्त की गई है। बरामद विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया जारी है।

नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस बरामदगी से नक्सलियों के हथियार और विस्फोटक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र में आगे भी सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा ताकि किसी अन्य छिपे विस्फोटक या नक्सली गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

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