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मुख्यमंत्री साय का दुर्ग दौरा कल , 259 करोड़ के 191 विकास कार्यों की देंगे सौगात

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 दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मई को दुर्ग प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे शहर को 259 करोड़ रुपये के 191 विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे, वहीं नगर निगम द्वारा शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों के लिए अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति भी मांगी जाएगी।


248 करोड़ के 66 कार्यों का होगा भूमिपूजन

मुख्यमंत्री 248 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले 66 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें 77 एमएलडी क्षमता के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी के तहत कम्पोस्ट प्लांट, इंदिरा मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग, नालंदा परिसर निर्माण सहित विभिन्न वार्डों में सीसी रोड, आरसीसी नालियां, पुलिया और डामरीकरण कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण, केनाल रोड और सिकोला नाला विकास, जलागार निर्माण तथा पाइपलाइन विस्तार जैसे अधोसंरचना कार्यों की भी आधारशिला रखी जाएगी।

11.32 करोड़ के 25 कार्यों का लोकार्पण

मुख्यमंत्री 11.32 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 25 विकास कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इनमें मॉडल स्ट्रीट फूड हब, विभिन्न वार्डों में पेवर ब्लॉक और सड़क निर्माण, मेनोनाइट चौक से चौपाटी तक सड़क चौड़ीकरण तथा गंजपारा चौक से शिवनाथ नदी तक सड़क उन्नयन कार्य प्रमुख हैं।

महापौर सौंपेंगी 100 करोड़ के प्रस्ताव

दौरे के दौरान दुर्ग महापौर अलका बाघमार मुख्यमंत्री को करीब 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति संबंधी मांगपत्र सौंपेंगी। इसमें नगर निगम की नई प्रशासनिक बिल्डिंग, एक हजार क्षमता वाला ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सियान सदन, जलभराव निराकरण और शहर के अधोसंरचना विकास से जुड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।

नई निगम बिल्डिंग के लिए मांगे जाएंगे 20 करोड़

नगर निगम के कई विभाग वर्तमान में अलग-अलग भवनों से संचालित हो रहे हैं। सभी विभागों को एक ही परिसर में संचालित करने के उद्देश्य से नए निगम भवन की मांग लंबे समय से की जा रही है। सिंचाई विभाग से जमीन संबंधी एनओसी मिलने के बाद अब इस परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये की मांग की जाएगी।

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सियान सदन भी प्रस्तावित

एमआईसी की बैठक में तय प्रस्तावों के अनुसार आदित्य नगर चौक के पास पांच एकड़ भूमि पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, शहर में पांच सियान सदन, वार्ड-60 में अधूरा बैडमिंटन कोर्ट, इंदिरा मार्केट उन्नयन और जलभराव की समस्या के समाधान के लिए विशेष बजट की मांग भी रखी जाएगी।

इसके अलावा सभी 60 वार्डों में अधोसंरचना विकास के लिए 20 करोड़ रुपये तथा नालियों और पाइपलाइन को अलग-अलग करने की योजना के लिए भी वित्तीय स्वीकृति मांगी जाएगी।

कार्यक्रम की तैयारियां पूरी

मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने कार्यक्रम स्थल जेआरडी शासकीय स्कूल मैदान का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

 

CG NEWS : दिनदहाड़े सब्जी मंडी में व्यापारी से 25 हजार की लूट, चाकू की नोक पर वारदात

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 बालोद। जिले के मुख्यालय स्थित सब्जी मंडी में शनिवार सुबह दिनदहाड़े हुई लूट की वारदात से व्यापारियों में दहशत फैल गई। अज्ञात बदमाशों ने एक सब्जी व्यापारी को चाकू दिखाकर 25 हजार रुपये लूट लिए और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


सब्जी खरीदने और भुगतान के लिए लाया था नकदी

जानकारी के अनुसार ग्राम रेंघनी (मालीघोरी) निवासी डोमेश्वर पटेल सब्जी व्यवसाय से जुड़े हैं और विभिन्न बाजारों में दुकान लगाकर व्यापार करते हैं। शनिवार सुबह करीब 10 बजे वे बालोद सब्जी मंडी पहुंचे थे। उनके पास करीब 25 हजार रुपये नकद थे, जिनका उपयोग उन्हें सब्जी खरीदने और अन्य व्यापारियों को भुगतान करने के लिए करना था।

बाथरूम में घुसकर दिया वारदात को अंजाम

बताया जा रहा है कि सब्जी खरीदने के बाद डोमेश्वर पटेल मंडी परिसर स्थित बाथरूम गए। इसी दौरान कुछ युवक उनके पीछे अंदर घुस गए। आरोप है कि बदमाशों ने चाकू पेट पर अड़ाकर जान से मारने की धमकी दी और उनके पास रखे 25 हजार रुपये लूट लिए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

व्यापारियों में आक्रोश, थाने पहुंची शिकायत

घटना के बाद पीड़ित व्यापारी अन्य व्यापारियों के साथ बालोद थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। दिनदहाड़े मंडी परिसर में हुई इस घटना से व्यापारियों में रोष और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों ने मंडी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच तेज

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मंडी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।

10 संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ जारी

जांच के दौरान पुलिस ने पाण्डेयपारा, टिकरापारा और नयापारा क्षेत्र से 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिए गए लोगों में से एक की पहचान पीड़ित व्यापारी द्वारा किए जाने की चर्चा है। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जल्द होगा मामले का खुलासा

बालोद थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा ने बताया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। सभी संभावित पहलुओं पर काम किया जा रहा है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सब्जी मंडी जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थल पर दिनदहाड़े हुई लूट की इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में प्रतिदिन लाखों रुपये का नकद लेन-देन होता है, ऐसे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं।

 

घर की नौकरानी ही निकली मास्टरमाइंड, पति-जीजा संग मिलकर की लाखों की चोरी

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 दुर्ग। नेवई थाना क्षेत्र में चोरी के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने घर में काम करने वाली नौकरानी, उसके पति और जीजा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने मिलकर एक घर से करीब 12 लाख रुपये से अधिक के सोने-चांदी के गहने चोरी कर लिए थे। पुलिस ने उनके कब्जे से 12 लाख 22 हजार रुपये मूल्य का माल बरामद किया है।


काम के बहाने घर में बनाई रेकी

पुलिस के अनुसार आशीष नगर रिसाली निवासी दुर्गा प्रसाद नागपुरे ने घर में अधिक काम होने के कारण मालती ध्रुव नामक महिला को दो दिनों के लिए काम पर रखा था। काम समाप्त होने के बाद जब परिवार ने अलमारी की जांच की तो उसमें रखे कीमती गहने गायब मिले।

इसके बाद 27 मई को दुर्गा प्रसाद ने नेवई थाना पहुंचकर चोरी की शिकायत दर्ज कराई।

अलमारी से गायब मिले सोने-चांदी के जेवर

शिकायत के मुताबिक अलमारी में रखे 14.5 ग्राम सोने का हार, मांगटीका, नाक की नथ, हाथ के कड़े, मंगलसूत्र और कान के तीन जोड़ी टॉप्स सहित अन्य आभूषण गायब थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

पूछताछ में खुला चोरी का राज

विवेचना के दौरान पुलिस को घर में काम करने वाली मालती ध्रुव पर संदेह हुआ। इसके बाद मालती ध्रुव, उसके पति देवीलाल ध्रुव और जीजा हेमलाल मंडावी को थाना बुलाकर पूछताछ की गई। सख्ती से पूछताछ करने पर तीनों ने चोरी की वारदात कबूल कर ली।

गहने गिरवी रखकर लिया था लोन

आरोपी मालती ध्रुव ने पुलिस को बताया कि उसने 19 मई 2026 को दुर्गा प्रसाद नागपुरे के घर से गहनों की चोरी की थी। चोरी के बाद पति और जीजा की मदद से कुछ गहनों को मुथूट फाइनेंस में गिरवी रखकर लोन भी ले लिया गया था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से गिरवी रखने की रसीद, एक लाख रुपये नकद, एक स्कूटी, तीन मोबाइल फोन समेत चोरी से जुड़ा अन्य सामान बरामद किया है।

12.22 लाख रुपये का माल जब्त

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 12 लाख 22 हजार रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है। तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया।

 

सरकारी दफ्तर बना मयखाना! धान संग्रहण केंद्र में कर्मचारियों की शराब पार्टी का वीडियो वायरल

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 बालोद। जिले के मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र से सरकारी व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां पदस्थ कर्मचारियों द्वारा सरकारी कार्यालय में ही शराब पार्टी किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।


दफ्तर में छलकाए जाम, कैमरे में कैद हुई करतूत

वायरल वीडियो में धान संग्रहण केंद्र का दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी तिलेश्वर साहू कुछ अन्य लोगों के साथ कार्यालय परिसर में बैठकर शराब पीता दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी गतिविधि सरकारी कार्यालय के भीतर संचालित होती नजर आ रही है, जहां आमतौर पर सरकारी कामकाज और दस्तावेजों का संधारण किया जाता है।

दस्तावेजों की आलमारी में मिली शराब की बोतलें

वीडियो में सरकारी रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखने वाली आलमारी में शराब की बोतलें रखी दिखाई दे रही हैं। इससे सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग के साथ-साथ कार्यालयीन अनुशासन और नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है।

वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय अधिकारियों में हलचल मच गई है। स्थानीय लोगों ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि सरकारी कार्यालयों में इस तरह की गतिविधियां प्रशासन की छवि को धूमिल करती हैं और जनता का भरोसा कमजोर करती हैं।

DMO ने सवाल सुनने से पहले ही काटा फोन

मामले में जिला विपणन अधिकारी (DMO) टिकेंद्र राठौर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्होंने स्वयं को अवकाश पर होने की बात कहते हुए सवाल सुने बिना ही फोन काट दिया। इससे विभागीय जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और विपणन विभाग पर हैं। यदि वायरल वीडियो की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले ने सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।

 
 

राशन कार्डधारकों को बड़ी राहत: अब मिलेगा बेहतर गुणवत्ता वाला चावल, 90% खड़ा और सिर्फ 10% कनकी होगी शामिल

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 रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत एक रुपये किलो में मिलने वाले राशन चावल की गुणवत्ता में जल्द बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार खरीफ सीजन 2026 से नई ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत राशन में वितरित होने वाले चावल में 90 प्रतिशत खड़ा चावल और केवल 10 प्रतिशत कनकी (ब्रोकन राइस) शामिल होगी।


वर्तमान व्यवस्था में 75 प्रतिशत खड़ा चावल और 25 प्रतिशत कनकी की अनुमति है। नई नीति लागू होने के बाद राशन उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में बेहतर गुणवत्ता का चावल मिलेगा।

राइस मिलों को करनी होगी तकनीकी तैयारी

नई गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए प्रदेश की राइस मिलों को आधुनिक मशीनों और उन्नत तकनीक से लैस करना होगा। मिलिंग प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव कर निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप चावल तैयार किया जाएगा।

राइस मिलर्स से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि योजना उपभोक्ताओं के हित में है, लेकिन प्रदेश की कई मिलों में अभी आधुनिक तकनीक की कमी है। ऐसे में नए मानकों को लागू करने के लिए समय और निवेश की आवश्यकता होगी।

एथेनॉल उत्पादन में होगा कनकी का उपयोग

नई व्यवस्था के तहत बचने वाली अतिरिक्त 15 प्रतिशत कनकी का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया जाएगा। इसके लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और ब्रोकन राइस को एथेनॉल प्लांटों तक पहुंचाया जाएगा। इससे कनकी का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ मिलर्स को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

लाखों परिवारों को मिलेगा फायदा

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर वर्ष करीब 25 लाख मीट्रिक टन चावल का वितरण किया जाता है। राज्य के 82 लाख से अधिक राशन कार्डधारी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। नई नीति लागू होने से लाखों परिवारों को बेहतर गुणवत्ता का चावल उपलब्ध हो सकेगा।

AI आधारित होगी राशन वितरण व्यवस्था

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ‘सार्थक पीडीएस योजना-फेज 2’ के तहत राशन वितरण, परिवहन और निगरानी व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा।

मिलर्स से मांगे गए सुझाव

खाद्य विभाग की सचिव Reena Baba Saheb Kangale ने बताया कि नई इम्प्रूव्ड राइस स्कीम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राइस मिलर्स से सुझाव और व्यवहारिक समस्याओं की जानकारी मांगी गई है। परीक्षण और समीक्षा के बाद विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

नई नीति को गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाला खाद्यान्न उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 
 

छत्तीसगढ़ में आंधी-बारिश का अलर्ट, भीषण गर्मी से मिलेगी राहत; कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

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 रायपुर। भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे छत्तीसगढ़वासियों के लिए राहत भरी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दो दिनों तक गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।


मौसम विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ सहित देश के 19 राज्यों में शनिवार और रविवार को आंधी-तूफान के साथ बारिश हो सकती है। प्रदेश के कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

तापमान में आएगी गिरावट

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के कारण मौसम का मिजाज बदला है। इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा। अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलेगी।

मानसून की बढ़ रही रफ्तार

मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भी जल्द मानसूनी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

देश के कई राज्यों में अलर्ट

आईएमडी ने छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।

पिछले 24 घंटे में बदला मौसम

देश के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश दर्ज की गई है। हालांकि छत्तीसगढ़ के अधिकांश क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है, लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में कमी आएगी और लोगों को राहत मिलेगी।

मौसम विभाग ने नागरिकों से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने तथा खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

कोरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट किए गए 108 किलो फल, दुकानों पर छापेमारी

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​बैकुंठपुर/कोरिया- कोरिया जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले फल विक्रेताओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के निर्देश पर और कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले की अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर के नेतृत्व में टीम ने पिछले तीन दिनों 27 मई से 29 मई तक, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताबड़तोड़ निरीक्षण किया। इस दौरान भारी मात्रा में सड़े-गले फल जब्त कर नष्ट कराए गए, वहीं दुकानदारों को सख्त हिदायत भी दी गई। अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, 27 मई को अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से हुई। यहाँ टीम ने 6 फल दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी मात्रा में खराब फल पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। इस दौरान ​22 किलोग्राम आम, ​4 किलोग्राम सेब, ​14 दर्जन केले, ​1 किलोग्राम संतरा और 500 ग्राम अनार नष्ट कराया गया। इसी तरह से ​28 मई को कार्रवाई के दूसरे दिन टीम पटना पहुँची, जहाँ 9 फल दुकानों की जाँच की गई। टीम ने सभी दुकानदारों को सड़े एवं खराब फल न बेचने तथा दुकानों में स्वच्छता बनाए रखने की सख्त समझाइश दी। कार्रवाई के तीसरे दिन आज ​29 मई को जिला मुख्यालय में दोबारा कार्रवाई की गई। आज मुख्यालय के अलग-अलग क्षेत्र में फिर से 5 फल दुकानों का सघन जांच किया गया। यहाँ नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 77 किलोग्राम से अधिक फल और केले नष्ट कराए गए। जिनमें ​65 किलोग्राम तरबूज, 12 किलोग्राम आम, 0​1 किलोग्राम सेब, ​2 दर्जन केले, 0​1 किलोग्राम अंगूर और 0​1 किलोग्राम चुकंदर शामिल है। 

अभिहित अधिकारी नीलम ठाकुर ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि, लोगों के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं है। गर्मी के इस मौसम में सड़े-गले और हानिकारक रसायनों से पकाए गए फल बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी फल विक्रेताओं को अपनी दुकानों में साफ-सफाई रखने और केवल गुणवत्तापूर्ण फल ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, विभाग का यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इस कार्रवाई में नमूना सहायक प्रमोद पैकरा और निधि जायसवाल का योगदान रहा।


छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुभारंभ, मैंगो टूरिज्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा पर जोर

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भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है आम 

छत्तीसगढ़ में मैंगों टूरिज्म की है अपार संभावनाएं - रमेन डेका

रायपुर- आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादों को बडे रूप में विकसित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी है और देश में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओें का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां और महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों को एक-दूसरे की उन्नत खेती पद्धतियों, नई किस्मों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की बहुत संभावनाएं है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के व्यापक अवसर मौजूद है। मैंगों टूरिज्म की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं है।

राज्यपाल ने कहा कि आम उत्पादन के साथ-साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को मिलकर कार्य करना चाहिए। डेका ने कहा कि हमारे जीवन को ईको फैंडली बनाना आज की आवश्यकता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है। आम की पत्तियों और लकड़ियों का भी हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। हमारे घरों में मांगलिक कार्य होने पर हम आम की पत्तियों से तोरण बनाते है एवं आम की सूखी लकड़ियों का उपयोग हवन एवं पूजा में करते है।

इस महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियोें को इस महोत्सव का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। प्रदर्शनी मे बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े किस्मों के आम भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती भी इस संकल्प को पूरा करने के लिए सहायक सिद्ध होगी।

आम महोत्सव के उद्घाटन पश्चात राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी में आम के विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया । 

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, किसान एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समीक्षा बैठक में रिकॉर्ड प्रदर्शन, डिजिटल सुधार और वित्तीय समावेशन पर जोर

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वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान उनके परिचालन, वित्तीय और रणनीतिक प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस बैठक में DFS के विशेष सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एमडी एवं सीईओ तथा कार्यकारी निदेशक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान “आपकी पूँजी, आपका अधिकार (Your Money, Your Right)” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक देशभर में चलाए गए उस अभियान को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके अनक्लेम्ड वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और उन्हें वापस प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इस पहल के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और अन्य हितधारकों के सहयोग से पिछले छह महीनों में लगभग ₹6,800 करोड़ की राशि लगभग 29 लाख लाभार्थियों को वापस की गई है।

बैठक में DFS की नवीनीकृत वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तैयार यह पोर्टल अधिक सुगमता, सरल नेविगेशन और बेहतर सूचना प्रसार प्रदान करता है। यह वेबसाइट 23 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो समावेशी डिजिटल सेवा वितरण की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समीक्षा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के व्यवसाय वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, एमएसएमई ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया। बताया गया कि वित्त वर्ष 2025–26 में PSBs ने मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन किया है। कुल बैंकिंग व्यवसाय लगभग ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि शुद्ध लाभ बढ़कर लगभग ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) घटकर 1.93% और शुद्ध NPA घटकर 0.39% के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ गई है, जो बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पीएम मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल लेंडिंग जैसी वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

डिजिटल लोन प्रोसेसिंग, ई-केवाईसी, पेपरलेस सिस्टम और सरकारी प्लेटफॉर्म के एकीकरण जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में एमएसएमई क्षेत्र को ऋण उपलब्धता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और डिजिटल बैंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

अंत में सचिव ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बदलते वैश्विक परिदृश्य में सतर्क रहते हुए दक्षता, पारदर्शिता और ग्राहक सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को समर्थन मिल सके।

IGI Airport पर भारत की पहली SkyCast प्रणाली का उद्घाटन, विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान में नई क्रांति

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर भारत की पहली “SkyCast System” का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया।

मंत्री ने बताया कि इस तरह की केवल 18 उन्नत प्रणालियाँ अभी तक विश्वभर में स्थापित हैं, और भारत अब 19वाँ देश बन गया है जिसने विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत एटमॉस्फेरिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम को अपनाया है। IGI एयरपोर्ट के बाद ऐसी दूसरी सुविधा जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी विस्तारित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD, IITM, GMR और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद IITM के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुति और डेमो दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि “मिशन मौसम” के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने इस प्रकार की उन्नत मौसम अवसंरचना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर मौसम स्थितियों में रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली यात्रियों के लिए उड़ानों में देरी, डायवर्जन और रद्दीकरण को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी, क्योंकि यह पायलटों को लगभग तीन घंटे पहले तक सटीक चेतावनी दे सकेगी।

स्काईकास्ट प्रणाली में अत्याधुनिक एटमॉस्फेरिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 LiDAR आधारित सीलामीटर। यह सिस्टम धुंध, टर्बुलेंस, दृश्यता और मौसम संबंधी रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है।

मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य घटक रडार विंड प्रोफाइलर है, जो लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और टर्बुलेंस की निगरानी करता है, जिससे लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकें।

फॉग मॉनिटरिंग सिस्टम विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण और धुंध की परस्पर क्रिया दृश्यता को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमानन सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकें भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को और अधिक सटीक बनाएंगी और मिशन मौसम के तहत देशभर में ऐसी प्रणालियाँ विस्तारित की जाएंगी।

स्काईकास्ट प्रणाली भारत की “वेदर-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित विमानन सेवाओं की ओर देश को आगे ले जाएगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में संभाला कार्यभार

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वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने पर फ्लैग ऑफिसर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में विभिन्न कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, विभूति और किरण की कमान संभाली तथा फ्रिगेट त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की भी कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन किया गया।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा तथा रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यूनाइटेड किंगडम के स्नातक हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक (नेवल प्लान्स), निदेशक (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) और प्रधान निदेशक DSCT जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

फ्लैग रैंक में पदोन्नति के बाद उन्होंने 2018 में असिस्टेंट कंट्रोलर (कैरियर प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट कंट्रोलर (वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने वेस्टर्न फ्लीट की कमान संभाली और बाद में नेशनल डिफेंस अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया।

उन्होंने 25 मई 2024 को वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में उन्होंने नौसेना की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

पदभार ग्रहण से पहले वे अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया।

वाइस एडमिरल अजय कोचर का परिवार उनकी पत्नी रेमन, जो विज्ञापन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक कलाकार हैं, और उनके दो बच्चों से मिलकर बना है। उनकी पुत्री सबा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा पुत्र करण एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पुसा में खरीफ अभियान 2026 सम्मेलन, कृषि विकास को गति देने पर जोर

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पुसा,नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ भारतीय कृषि के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विकास को अब समयबद्ध, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित कार्यों के माध्यम से नीति, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ तेज करने की आवश्यकता है। राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को कृषि उन्नति के लिए एक सशक्त ‘टीम इंडिया’ मंच में बदल दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भगीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। इसके अलावा ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, महाराष्ट्र के मंत्री जयप्रकाश जयकुमार रावल, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई सवजीभाई वाघानी, तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू, मेघालय की कृषि मंत्री अम्पारीन लिंगदोह, मिजोरम के कृषि मंत्री पी. सी. वनलालरुआता, त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, सिक्किम के कृषि मंत्री पूरण कुमार गुरूंग, पश्चिम बंगाल के मंत्री अशोक कीर्तनिया तथा असम के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस विस्तृत विचार-विमर्श में शामिल हुए।

जनता को संबोधित करते हुए चौहान ने इस सम्मेलन को ‘भारत की कृषि टीम’ की ऐतिहासिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ‘मिनी इंडिया’ की भावना को दर्शाता है, जहां सभी एक साझा संकल्प के साथ राष्ट्रीय हित, किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए एकजुट हैं। नेतृत्व के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब मंत्री स्वयं योजनाओं का नेतृत्व करते हैं, तो अधिक गति, गंभीरता और ठोस परिणाम दिखाई देते हैं।

चौहान ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और राज्यों के सक्रिय सहयोग को दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चावल उत्पादन में विश्व में अग्रणी बन गया है, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद गति को धीमा नहीं किया जा सकता। भारत को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और पोषण सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की जीवनरेखा है, इसलिए सभी संबंधितों को मिशन मोड में काम करना होगा।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कपास मिशन और अन्य प्रमुख कृषि अभियानों की व्यक्तिगत समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने को कहा। विशेष रूप से तूर, सोयाबीन और तिलहन फसलों के लिए अल्प अवधि और उपयुक्त किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।

बीज उपलब्धता के मुद्दे पर चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज कृषि उत्पादकता की पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में पर्याप्त बीज उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पाते। उन्होंने सभी राज्यों को समय पर बीज उठाने, वितरण प्रणाली मजबूत करने और खरीफ मौसम में किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में खराब गुणवत्ता वाले बीज बाजार में नहीं आने चाहिए और इसके खिलाफ सख्त निगरानी एवं कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार प्रणाली स्थापित की गई है।

उन्होंने उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और फार्मर आईडी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल दस्तावेज न रहकर खेत स्तर पर उपयोग में लाए जाएं। उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

फार्मर आईडी को पारदर्शी और कुशल प्रणाली की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी की रोकथाम और वास्तविक किसानों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड पर उन्होंने कहा कि समय पर पूंजी उपलब्धता लाभकारी खेती के लिए आवश्यक है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ जल्द चर्चा की जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण पर उन्होंने कहा कि केवल मशीनों का वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किसान तक सही मशीन पहुंचनी चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर की समीक्षा और पारदर्शी चयन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बागवानी क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत में फल और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और अब लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि निर्यात गुणवत्ता का उत्पादन होना चाहिए।

उन्होंने नकली बीज, घटिया कीटनाशक और खराब कृषि इनपुट पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि राष्ट्रीय नुकसान है।

फसल बीमा योजना पर उन्होंने समय पर राहत, बैंक, बीमा कंपनियों और राज्यों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई।

दलहन और तिलहन की खरीद पर उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किए बिना आत्मनिर्भरता संभव नहीं है।

एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि ये संस्थान नवाचार और अनुसंधान को सीधे किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी कृषि कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए और केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नियम किसानों की सुविधा के लिए हैं, न कि किसान नियमों के लिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, राज्यों, वैज्ञानिकों और किसानों के सहयोग से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और वैश्विक उदाहरण बनेगा।

रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

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पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के दावणगेरे स्थित यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लैटिनम जुबली समारोह में भाग लिया और युवाओं से भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियरिंग संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समस्या-समाधानकर्ता, नवोन्मेषक, नैतिक नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र-निर्माता तैयार करें, जो भारत को तकनीकी प्रगति और वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की ओर अग्रसर कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में तकनीक, नवाचार और युवाशक्ति से प्रेरित एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के योगदान पर काफी हद तक निर्भर करेगी। संस्थान द्वारा अनुसंधान और नवाचार को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने एआईसीटीई आइडिया लैब, ड्रोन टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला तथा कॉलेज द्वारा विकसित उन्नत शोध अवसंरचना जैसी पहलों की प्रशंसा की।

उन्होंने प्लैटिनम जुबली को विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि संस्थान के 75 वर्ष दूरदृष्टि, दृढ़ता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और समाज सेवा का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट संस्थानों का निर्माण कई पीढ़ियों के दूरदर्शी संस्थापकों, समर्पित शिक्षकों, निष्ठावान प्रशासकों, मेहनती विद्यार्थियों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के योगदान से होता है।

संस्थान की स्थापना में ब्रह्मप्पा देवेंद्रप्पा तवनप्पनावर की दूरदर्शी परोपकारिता और महामहिम जयचामराजेंद्र वोडेयार के आशीर्वाद को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संस्थान शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे ज्ञान का उपयोग विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने का आग्रह किया। नवाचार के नैतिक पक्ष पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा के लिए होनी चाहिए,” और इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक प्रगति सदैव जनकल्याण और मानवीय मूल्यों से प्रेरित होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्ति के संबंध में भी सशक्त संदेश देते हुए विद्यार्थियों और समाज से “नशे को ना” कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने मन पर स्वयं नियंत्रण रखना चाहिए और किसी भी हानिकारक पदार्थ को अपने जीवन पर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए।

संस्थान के भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यूनिवर्सिटी बी.डी.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का केंद्र बनकर भारत की नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत; निर्मलानंदनाथ स्वामीजी; कर्नाटक के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर; सांसद यदुवीर वाडियार; सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन; कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं जिला प्रभारी एस.एस. मल्लिकार्जुन; बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, निफ्टेम के अध्यक्ष डॉ. टी.जी. सीताराम; वीटीयू के कुलपति डॉ. एस. विद्याशंकर; वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, विद्यार्थी और प्रतिष्ठित पूर्व छात्र भी उपस्थित थे।

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