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CG Murder Case : ग्रामीण की हत्या से सनसनी, किसने उतारा मौत के घाट… किसी ने नहीं देखा

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 बेमेतरा। जिले के नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत भद्रराली में एक सनसनीखेज हत्या की वारदात सामने आई है। गांव निवासी कन्हैया बंजारे (लगभग 45 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में निर्मम हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, कन्हैया बंजारे की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हत्या के कारणों और आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, मृतक गांव में सामान्य जीवन व्यतीत करता था। ऐसे में अचानक हुई इस वारदात ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या अन्य किसी कारण की भी पड़ताल की जा रही है। घटना के बाद गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

प्रिसिजन मेडिसिन और जीन थेरेपी से बदलेगा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य, भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर इनोवेशन हब: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- डॉक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine), जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य उभरती तकनीकें भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने कहा कि भारत स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान विकसित कर रहा है और तेजी से विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

डॉक्टर्स डे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल आनुवंशिक (Genetic) विविधता, विभिन्न प्रकार की बीमारियों का व्यापक स्वरूप और मजबूत होता वैज्ञानिक ढांचा देश को "भारतीय मरीजों के लिए भारतीय डेटा आधारित भारतीय उपचार" विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल देश की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि दुनिया को भी किफायती और प्रभावी चिकित्सा समाधान मिलेंगे।

प्रिसिजन मेडिसिन से बदलेगा इलाज का तरीका

उन्होंने कहा कि भविष्य में इलाज मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। इससे रोगों का अधिक सटीक निदान, लक्षित उपचार और बेहतर परिणाम संभव होंगे।

जीनोम इंडिया मिशन बना मजबूत आधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीनोम इंडिया मिशन के तहत अब तक 10,000 से अधिक लोगों का जीनोम सीक्वेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है और भारत दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक डाटाबेस में से एक तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) पर शोध को नई गति मिलेगी।

जीन थेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन में बड़ी उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में हीमोफीलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जो देश की चिकित्सा अनुसंधान क्षमता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही न्यूक्लियर मेडिसिन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज जीनोम विश्लेषण, रोगों की पहचान, मेडिकल शिक्षा, बायोमेडिकल रिसर्च और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में तेजी से उपयोग हो रहा है। इससे जटिल चिकित्सा डेटा का विश्लेषण तेजी से संभव हो रहा है और दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं।

स्वदेशी दवा अनुसंधान में भारत आगे

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विदेशों में विकसित दवाओं का निर्माण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, क्लिनिकल ट्रायल और नवाचार के माध्यम से नई दवाएं विकसित कर रहा है। हाल ही में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक इसका प्रमाण है।

जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में तेजी

डॉ. सिंह ने बताया कि BioE3 नीति और Bio-RIDE मिशन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति मिल रही है। वहीं भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीक विकसित कर रहा है।

आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ नेटवर्क की सराहना

उन्होंने आयुष्मान भारत को दुनिया की सबसे समावेशी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीमेडिसिन ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है।

रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में डायबिटीज, कैंसर और फैटी लिवर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से निपटने के लिए समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान में निरंतर निवेश तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी भारत को अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे... आज हर साल 2.5 लाख की कमाई

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रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर- कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  

अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 

अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  

फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

गोवा को मिला अत्याधुनिक ‘कैप्टन ऑफ पोर्ट्स’ टर्मिनल, समुद्री प्रशासन और जल परिवहन को मिलेगी नई मजबूती

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पणजी- केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा में ₹48.87 करोड़ की लागत से निर्मित नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक वाटरफ्रंट सुविधा समुद्री प्रशासन को मजबूत बनाने, जहाजों की निगरानी एवं नेविगेशन में सुधार करने और गोवा के सतत समुद्री विकास के विजन को गति देने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस नया टर्मिनल

गोवा स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GSIDC) द्वारा निर्मित यह G+3 भवन 4,405 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है। यह भवन पुराने कैप्टन ऑफ पोर्ट्स कार्यालय का स्थान लेगा, जो बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया था।

मांडवी नदी के किनारे खड़े जहाज की आकृति से प्रेरित इस भवन में आधुनिक यात्री सुविधाएं, डबल-हाइट पब्लिक लॉबी, कॉन्फ्रेंस हॉल, मरीन एवं हाइड्रोग्राफिक कार्यालय, नेविगेशन कंट्रोल सेंटर, रेडियो कम्युनिकेशन सेंटर, सार्वजनिक सुविधाएं, 450 सीटों वाला रूफटॉप एम्फीथिएटर, इनडोर रेस्तरां और ओपन टैरेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

समुद्री क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धियां

उद्घाटन समारोह में सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह भवन केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि गोवा की समुद्री पहचान, आधुनिकीकरण और सतत विकास का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है—

  • बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हुई।

  • जहाजों का टर्नअराउंड समय 95 घंटे से घटकर 41 घंटे रह गया।

  • भारतीय नाविकों (Seafarers) की संख्या 3.23 लाख से अधिक पहुंच गई।

  • तटीय माल परिवहन दोगुने से अधिक बढ़ा।

  • क्रूज़ यात्रियों की संख्या चार गुना से अधिक हुई।

  • परिचालित राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 3 से बढ़कर 32 हो गई।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब सकल टन भार (Gross Tonnage) के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग देश बन चुका है।

गोवा समुद्री सुधारों में अग्रणी

सोनोवाल ने कहा कि इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 लागू करने वाला गोवा देश का पहला राज्य है। प्रस्तावित गोवा मैरीटाइम बोर्ड, गोवा शिपबिल्डिंग एवं शिप रिपेयर नीति और मैरीटाइम मास्टर प्लान राज्य के समुद्री क्षेत्र को और मजबूत करेंगे।

गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को मिली प्राथमिकता

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि प्रस्तावित गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को अब फेज-1 में शामिल कर प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गोवा में पर्यावरण-अनुकूल, तेज और टिकाऊ शहरी जल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगी।

मोरमुगाओ पोर्ट का तेज विकास

उन्होंने बताया कि मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी में वर्ष 2014 से अब तक ₹1,300 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि ₹2,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी है। इनमें बर्थ नंबर-9 का पुनर्विकास, वास्को बे परियोजना, आधुनिक फिशिंग हार्बर, गहरे ड्राफ्ट के लिए ड्रेजिंग और आधुनिक सीफेयरर्स क्लब शामिल हैं।

मोरमुगाओ पोर्ट देश का पहला ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिप इंसेंटिव शुरू करने वाला पहला बंदरगाह भी बन चुका है।

समुद्री शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

सोनोवाल ने गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम एक्सीलेंस (GIME) की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्थान समुद्री शिक्षा, अंतर्देशीय जलमार्ग, पोत संचालन, सुरक्षा, वाटर स्पोर्ट्स और कौशल विकास का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गोवा को विश्वस्तरीय समुद्री अवसंरचना विकसित करने में हरसंभव सहयोग देती रहेगी। नया कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल गोवा की नदी परिवहन व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बनने के साथ-साथ राज्य की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक भी बनेगा। यह परियोजना सागरमाला कार्यक्रम और मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत बंदरगाह आधारित विकास, बेहतर लॉजिस्टिक्स और सतत आर्थिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती देगी।

29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

विकसित भारत 2047 की आधारशिला है एमएसएमई क्षेत्र : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के संकल्प और लाखों छोटे व्यवसायों के संघर्ष व सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत @2047' का सपना एक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र के बिना संभव नहीं है।

उद्यमिता का अपना अनुभव साझा किया

उपराष्ट्रपति ने अपने उद्यमिता के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से एक छोटा गारमेंट व्यवसाय शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद लगातार सीखने, मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने काम को सीखने और बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता (Quality) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। लागत कम करने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि असली सफलता वही है, जब कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की जाएं।

हर छोटा उद्यम आगे बढ़ने का लक्ष्य रखे

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम बनने और प्रत्येक लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योगों को एक ही स्तर पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश, नवाचार और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए आसान वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतियों की आवश्यकता है।

एमएसएमई का सार्वभौमिक पंजीकरण जरूरी

उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय से सभी उद्यमों का व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे सरकार को वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।

एआई को अवसर के रूप में अपनाएं

संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम "AI-Driven Future में Human-Centered Entrepreneurship" का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर रोजगार खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नए अवसर पैदा किए। एआई भी भविष्य में नए रोजगार और व्यवसायिक संभावनाएं लेकर आएगा।

खादी और ग्रामोद्योग की सराहना

उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने शहद उत्पादन और खादी वस्त्रों के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित खादी को आधुनिक तकनीक और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।

कई नई डिजिटल पहल की शुरुआत

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) को शेड्यूल 'A' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कई नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनमें शामिल हैं—

  • PMEGP 2.0 पोर्टल

  • समाधान 2.0 पोर्टल

  • प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) 2.0 पोर्टल

  • MSME ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल

  • टेस्टिंग सेंटर पोर्टल

  • एमएसएमई मंत्रालय की बहुभाषी डिजिटल पहल

  • MSME आइडिया हैकाथॉन 6.0

इसके अलावा सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड और पीएम विश्वकर्मा योजना पर आधारित ई-बुक्स का विमोचन तथा KVIC के नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार, एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

रविवार को 35.98 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की दो बूंद

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 रायपुर : देश भर में रविवार को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ ने भी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अभियान के तहत राज्य के पांच वर्ष तक के 35 लाख 98 हजार 904 बच्चों को पोलियो से बचाव हेतु दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी।


अभियान के संचालन हेतु 28,791 टीमों के साथ 57 हजार से अधिक वैक्सीनेटर तैनात किए गए हैं। बूथ दिवस के बाद 29 एवं 30 जून को टीमें घर-घर पहुंचकर ऐसे बच्चों को भी पोलियो की खुराक पिलाएंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाए।

अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला एवं विकासखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठकें आयोजित कर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और टीकाकरण दलों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। माइक्रोप्लान का सत्यापन, वैक्सीन की उपलब्धता, कोल्ड चेन प्रबंधन तथा आवश्यक लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

इस अभियान में दूरस्थ गांवों, वनांचल क्षेत्रों, शहरी बस्तियों, ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों तथा प्रवासी और घुमंतू परिवारों के बच्चों तक विशेष रूप से पहुंच बनाई जाएगी। बूथ दिवस के बाद टीमें घर-घर भ्रमण कर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच पाएंगे।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वी. आर. भगत ने बताया, "राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण कर ली गई हैं। अभियान के दौरान बूथों के साथ-साथ घर-घर भ्रमण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जन्म से पांच वर्ष तक का कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। अभिभावक अपने बच्चों को निर्धारित बूथों पर अवश्य लेकर आएं। यदि किसी कारणवश वे बूथ तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो घर पहुंचने वाली स्वास्थ्य टीम को सहयोग करें। पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने में प्रत्येक परिवार की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे जन्म से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसे पहले नियमित टीकाकरण अथवा पल्स पोलियो अभियान में दवा मिल चुकी हो, इस अभियान में भी पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं। पोलियो मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पहुंचना आवश्यक है।

CM साय की सख्ती का असर: अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 3 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर जब्त

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 जेसीबी मशीन तथा 3 ट्रैक्टर वाहनों को जप्त किया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की शून्य सहिष्णुता की नीति को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किए जाने का प्रमाण है।


जिले के देवराजपारा-सधवानी तथा बंधी-बचरवार क्षेत्र में खनिज मुरूम एवं मिट्टी के अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कराई गई। वहीं सिलपहरी क्षेत्र में खनिज रेत के अवैध परिवहन की सूचना पर भी खनिज विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों को जप्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान देवराजपारा-सधवानी क्षेत्र से दो जेसीबी, बंधी-बचरवार क्षेत्र से एक जेसीबी तथा सिलपहरी क्षेत्र से रेत परिवहन में लगे तीन ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर सुरक्षित रूप से पुलिस लाइन अमरपुर में रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि सधवानी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1076 तथा कलेक्टर के समक्ष अवैध उत्खनन की शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री की जनहितकारी शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की सक्रियता और खनिज विभाग की तत्परता से शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे आमजन का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है।

कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण जैसी किसी भी गतिविधि को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी, सतत निरीक्षण तथा शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सके और शासन को राजस्व की क्षति न पहुंचे।

खनिज विभाग के अनुसार जप्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। नियमानुसार अर्थदंड एवं समझौता राशि निर्धारित खनिज मद में जमा कराने के बाद ही संबंधित वाहनों को मुक्त किया जाएगा।

इस कार्रवाई में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू सहित जिला खनिज उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार अवैध खनन के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए जनशिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।


दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है।


पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील

गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश

उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की।

सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं

चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें।

पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप

वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।

इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कांग्रेस शिविर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने उठाए प्रशिक्षण की मंशा पर सवाल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के हालिया बयानों को लेकर अब भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से मजबूत करने के बजाय पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की रणनीति सिखाने का माध्यम बन गया है।


रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान पुरंदर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता अमरजीत भगत लगातार भाजपा सरकार पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले अपने कार्यकाल का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमरजीत भगत उनके “प्रिय छोटे भाई” हैं और जिस तरह वह कांग्रेस में खुलकर अपनी बात रखते हैं, उसी तरह वे भी भाजपा में अपनी राय बेबाकी से रखते हैं।

भाजपा विधायक ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के पांच साल और भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल की तुलना खुद कर सकती है। उनके मुताबिक विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों के आधार पर दोनों सरकारों के कामकाज में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के संगठनात्मक प्रशिक्षण शिविर की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस शिविर का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने के तरीकों पर चर्चा करना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की बैठकों में कार्यकर्ताओं को यह सिखाया जा रहा है कि पार्टी के लिए चंदा कैसे एकत्र किया जाए और आर्थिक व्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस संगठन इस समय आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है और पार्टी के कई नेता बड़ी जिम्मेदारियों की दौड़ में सक्रिय हैं। मिश्रा का दावा है कि अमरजीत भगत भी संगठन में बड़ी भूमिका पाने की कोशिश कर रहे हैं और इसी वजह से भाजपा सरकार पर लगातार आक्रामक बयान देकर पार्टी नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

भाजपा विधायक ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर राजनीतिक विचारधारा से ज्यादा राजनीतिक रणनीति और संसाधन जुटाने पर केंद्रित दिखाई देता है। उनके अनुसार जनता अब राजनीतिक दलों के दावों और जमीनी हकीकत के बीच फर्क समझने लगी है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर भी दिखेगा।

दरअसल, इससे पहले अमरजीत भगत ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि सत्ता पक्ष के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उनका दावा था कि भाजपा नेतृत्व के पास ऐसी रिपोर्टें हैं, जिनमें सरकार की दोबारा वापसी को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

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