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जमीन आवंटन पर भड़का आक्रोश, नेशनल हाईवे पर 15 अगस्त को चक्काजाम का ऐलान

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 रायपुर. जिले के आरंग तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रसनी में 22 हेक्टेयर (लगभग 54 एकड़) शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र विभाग को सौंपने की प्रशासनिक तैयारी चल रही है। इस फैसले के सामने आते ही पूरे गांव में विरोध का माहौल बन गया है और मामला काफी गंभीर हो गया है।


​ मामले की पूरी वजह

यह विवाद तब शुरू हुआ जब तहसीलदार आरंग ने खसरा नंबर 15, 16, 17, 33, 36, 37, 38, 50, 54, 57, 58, 248 और 250 से जुड़ी शासकीय भूमि पर ग्राम पंचायत रसनी से अभिमत मांगा। इस पर ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्रामीणों ने एकमत होकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया और उद्योग विभाग को जमीन देने के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन जबरन उनकी आरक्षित जमीन छीनना चाहता है।

​ जमीन का उपयोग और विरोध

जिला पंचायत रायपुर के सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर ने आरंग थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर इस आवंटन प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस 22 हेक्टेयर जमीन को उद्योग लगाने के लिए दिया जा रहा है, वह असल में गांव के सार्वजनिक कार्यों के लिए तय की गई है। इस जमीन का उपयोग खेल मैदान, धान खरीदी केंद्र, ग्रामीणों के लिए आबादी भूमि, चारागाह और वृक्षारोपण जैसे बेहद जरूरी कामों के लिए होना है। इसे उद्योग विभाग को देना ग्रामीणों के अधिकारों का सीधा हनन है।

​ ग्रामीणों की चेतावनी और चक्काजाम का ऐलान

वतन चंद्राकर द्वारा थाना प्रभारी को दिए गए पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 15 अगस्त से पहले जमीन आवंटन की प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई, तो समस्त ग्रामीण स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करेंगे। साथ ही 15 अगस्त की सुबह 9 बजे से नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान यदि कानून-व्यवस्था बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी। खबर लिखे जाने तक इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

तिहरे हत्याकांड के 5 दोषियों को आजीवन कारावास, कोर्ट परिसर में फूटा परिजनों का गुस्सा

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 धमतरी (छत्तीसगढ़)। बहुचर्चित भोयना तिहरे हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने अपना बड़ा फैसला सुनाया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह कोर्राम की अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी 5 वयस्क दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मृतकों के परिजनों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने परिसर में ही आरोपियों पर चप्पलें बरसा दीं।


परिजनों का छलका दर्द: आरोपियों पर बरसाईं चप्पलें

फैसले के तुरंत बाद जब पुलिसकर्मी दोषियों को अदालत कक्ष से बाहर ला रहे थे, तब मृतकों के परिजन रोते-बिलखते हुए उन पर टूट पड़े। "हमारा घर उजाड़कर तुम्हें क्या मिला?" कहते हुए परिजनों ने आरोपियों पर चप्पलों से हमला कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को सुरक्षा घेरे में लिया और पुलिस वाहन में बैठाकर मौके से रवाना किया।

मामूली विवाद में गई थी 3 लोगों की जान

यह सनसनीखेज वारदात 11 अगस्त 2025 की रात ग्राम भोयना स्थित अन्नपूर्णा ढाबा के पास हुई थी। मामूली बात पर शुरू हुए विवाद के बाद हुए खूनी हमले में रायपुर निवासी आलोक सिंह ठाकुर, नितिन टांडी और सुरेश हियाल की बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 3 नाबालिग थे। सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने 5 वयस्क आरोपियों को हत्या, बलवा, मारपीट और अवैध हथियार रखने का दोषी पाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

"डेढ़ साल की बेटी आज भी चॉकलेट लाने का इंतजार करती है"

अभियोजन पक्ष की ओर से दोषियों के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की गई थी, लेकिन फांसी की सजा न मिलने से परिजन बेहद आहत नज़र आए। मृतक नितिन की पत्नी ने कहा कि उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि हत्यारों को फांसी की सजा मिलेगी।

वहीं मृतक सुरेश की पत्नी अंजू भावुक होकर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "मेरी डेढ़ साल की बेटी आज भी टकटकी लगाए दरवाजे की तरफ देखती है। उसे लगता है कि उसके पापा अभी चॉकलेट लेकर वापस आएंगे।"

हाईकोर्ट में अपील करेंगे परिजन

निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट परिजनों ने साफ किया है कि न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। परिजनों का कहना है कि वे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा (फांसी) दिलाने के लिए उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की तैयारी, लोकसभा से बिल पास; अब राज्यसभा की बारी

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नई दिल्ली- केरल के नाम को बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त 2026 को पारित कर दिया। अब यह विधेयक राज्यसभा में विचार और पारित होने के लिए रखा जा रहा है। विधेयक के कानून बनने के बाद संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्य का नाम ‘Kerala’ से बदलकर ‘Keralam’ किया जाएगा।

क्यों बदला जा रहा है केरल का नाम?

‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा में राज्य के प्रचलित नाम से जुड़ा है। केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को राज्य का नाम ‘Kerala’ से ‘Keralam’ करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से संविधान में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।

केंद्र सरकार की ओर से फरवरी 2026 में इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विधेयक को संसद में लाने का रास्ता साफ हुआ।

लोकसभा से पारित हुआ बिल

Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त को पारित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उस दिन सदन में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक पारित हुआ और इस पर विस्तृत बहस नहीं हो सकी।

अब विधेयक की अगली मंजिल राज्यसभा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसे राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने का कार्यक्रम है।

क्या ‘केरलम’ नाम तुरंत लागू हो जाएगा?

नहीं। केवल लोकसभा से बिल पास होने के बाद नाम आधिकारिक रूप से नहीं बदलता। इसे संसद के दोनों सदनों से पारित होना और इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम में परिवर्तन के लिए संसद द्वारा कानून बनाया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत ‘Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026’ लाया गया है।

इसलिए फिलहाल खबर को ‘केरल का नाम बदलकर केरलम करने की प्रक्रिया’ के रूप में देखना अधिक सही है, न कि यह कहना कि राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदल चुका है।

‘केरल’ से ‘केरलम’ क्यों महत्वपूर्ण है?

‘केरलम’ मलयालम में राज्य के स्थानीय नाम को दर्शाता है। नाम परिवर्तन के समर्थकों का तर्क है कि आधिकारिक नाम को स्थानीय भाषाई पहचान के अनुरूप किया जाना चाहिए।

केरल विधानसभा द्वारा 2024 में पारित प्रस्ताव भी इसी मांग पर आधारित था। केंद्र सरकार के दस्तावेजों में भी यह दर्ज है कि राज्य सरकार ने संविधान की प्रथम अनुसूची में नाम बदलने का अनुरोध किया था।

आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण चरण राज्यसभा में विधेयक का पारित होना है। यदि राज्यसभा भी इसे मंजूरी देती है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तभी ‘Kerala’ की जगह ‘Keralam’ आधिकारिक नाम के रूप में लागू होगा।

नाम परिवर्तन के बाद सरकारी दस्तावेजों, संवैधानिक संदर्भों और विभिन्न आधिकारिक रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

क्या बदलेगा?

नाम परिवर्तन लागू होने के बाद मुख्य रूप से—

  • राज्य का आधिकारिक नाम Kerala से Keralam होगा।

  • संविधान की प्रथम अनुसूची में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

  • केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में नाम को अपडेट किया जाएगा।

  • सरकारी रिकॉर्ड, वेबसाइटों और अन्य आधिकारिक संदर्भों में चरणबद्ध तरीके से बदलाव किए जा सकते हैं।

एक नजर में पूरी खबर

राज्य: केरल
प्रस्तावित नया नाम: केरलम (Keralam)
राज्य विधानसभा का प्रस्ताव: 24 जून 2024
केंद्र की मंजूरी: फरवरी 2026
लोकसभा से बिल पास: 11 अगस्त 2026
अगला चरण: राज्यसभा में विचार और पारित होना

निष्कर्ष

केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया अब संसद के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब राज्यसभा की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। यदि संसद की प्रक्रिया पूरी होती है, तो केरल को आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ नाम मिल सकता है।

यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

साइबर ठगी पर केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन: 3,718 फर्जी ऐप्स ब्लॉक, 15.75 लाख से ज्यादा SIM और 5.77 लाख IMEI पर कार्रवाई

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नई दिल्ली- देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साइबर फ्रॉड से जुड़े 3,718 फर्जी और संदिग्ध मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही देशभर में 15.75 लाख से अधिक संदिग्ध SIM कार्ड और 5.77 लाख मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं।

सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल नेटवर्क को कमजोर करना और आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन कदमों के जरिए ₹11,158 करोड़ से अधिक की संभावित साइबर ठगी को रोकने में मदद मिली है।

3,718 संदिग्ध ऐप्स पर लगा प्रतिबंध

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी लोन ऐप, निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और अन्य संदिग्ध ऐप्स के माध्यम से लोगों से पैसे ऐंठने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

इन्हीं शिकायतों और विभिन्न पुलिस रिपोर्टों के आधार पर केंद्र सरकार ने 3,718 फर्जी या संदिग्ध मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन ऐप्स को साइबर अपराध से जुड़े इनपुट और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई के दायरे में लाया गया।

15.75 लाख से ज्यादा SIM कार्ड ब्लॉक

साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल नंबर एक महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। फर्जी पहचान या गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी SIM कार्ड का इस्तेमाल OTP फ्रॉड, बैंकिंग ठगी, फर्जी कॉल और अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है।

सरकार ने ऐसे संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों पर भी बड़ी कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 15.75 लाख से अधिक SIM कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। इससे साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों के नेटवर्क को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

5.77 लाख IMEI नंबर भी किए गए ब्लॉक

सिर्फ SIM कार्ड पर कार्रवाई करने के साथ सरकार ने मोबाइल डिवाइस के स्तर पर भी कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक 5.77 लाख IMEI नंबरों को ब्लॉक किया गया है।

IMEI यानी International Mobile Equipment Identity एक विशिष्ट नंबर होता है, जो मोबाइल डिवाइस की पहचान में मदद करता है। किसी डिवाइस का IMEI ब्लॉक होने के बाद उस डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

इस तरह सरकार ने साइबर अपराध के खिलाफ ऐप, SIM और मोबाइल डिवाइस—तीनों स्तरों पर कार्रवाई की है।

₹11,158 करोड़ से ज्यादा की संभावित ठगी रोकी गई

सरकार की इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका आर्थिक प्रभाव है। रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न साइबर सुरक्षा उपायों और कार्रवाई के चलते ₹11,158 करोड़ से अधिक की संभावित ठगी को रोका जा सका।

यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराध अब केवल व्यक्तिगत स्तर की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुका है।

साइबर अपराधियों के डिजिटल नेटवर्क पर शिकंजा

साइबर ठगी करने वाले अपराधी अक्सर एक साथ कई डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। फर्जी मोबाइल नंबर से कॉल करना, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाना, लिंक भेजना, OTP हासिल करना और बैंक खातों से रकम निकालना जैसे तरीके साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जाते हैं।

ऐसे में केवल किसी एक नंबर या ऐप को ब्लॉक करना पर्याप्त नहीं होता। सरकार द्वारा SIM कार्ड और IMEI नंबरों पर भी कार्रवाई किए जाने से अपराधियों के पूरे डिजिटल नेटवर्क को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।

‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ से पीड़ितों को राहत की कोशिश

साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ ठगी गई रकम को वापस दिलाने पर भी सरकार का ध्यान है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 से ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य साइबर ठगी के पीड़ितों की रकम की रिकवरी में मदद करना है।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर फ्रॉड के बाद पीड़ित के लिए केवल अपराधी को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ठगी गई राशि को वापस पाना भी बड़ी चुनौती होती है।

आम लोगों के लिए क्या है संदेश?

सरकार की कार्रवाई के बावजूद साइबर ठगी से बचने के लिए आम नागरिकों को भी सतर्क रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।

निवेश, लोन, नौकरी, KYC अपडेट या किसी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले संदिग्ध संदेशों और कॉल की पहले पुष्टि करना जरूरी है।

सरकार की कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े

                     कार्रवाईसंख्या
  • ब्लॉक किए गए फर्जी/संदिग्ध ऐप्स
  • 3,718
  • ब्लॉक किए गए SIM कार्ड
  • 15.75 लाख+
  • ब्लॉक किए गए IMEI नंबर
  • 5.77 लाख
  • संभावित साइबर ठगी से बचाई गई राशि
  • ₹11,158 करोड़+

निष्कर्ष

डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध भी तेजी से चुनौती बन रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा 3,718 ऐप्स, 15.75 लाख से अधिक SIM कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबरों पर कार्रवाई साइबर अपराध के डिजिटल ढांचे पर बड़े स्तर की कार्रवाई को दर्शाती है।

अब चुनौती यह है कि साइबर अपराधियों के नए तरीकों पर लगातार नजर रखी जाए और आम लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। सरकार की कार्रवाई के साथ नागरिकों की सतर्कता ही ऑनलाइन ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा बन सकती है।

छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच; परिजनों को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

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नई दिल्ली/छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा हस्तक्षेप करते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया। सर्वोच्च अदालत ने मामले में राज्य पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौत के बाद FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी हुई। कोर्ट ने मृतक के परिवार को राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला छत्तीसगढ़ में एक 34 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने व्यक्ति को 18 जनवरी 2024 को उसकी किराना दुकान के बाहर कथित रूप से शराब बिक्री के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के परिवार की ओर से हिरासत के दौरान उसके साथ हिंसा किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, हाई कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई थी। राज्य की ओर से इन निष्कर्षों पर विवाद नहीं किया गया।

FIR दर्ज करने में दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सबसे गंभीर सवाल FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर उठाया। अदालत ने इस बात पर सवाल किया कि हिरासत में मौत जैसी गंभीर घटना के बावजूद राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग दो साल का समय क्यों लिया।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने पुलिस कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इसी पृष्ठभूमि में मामले की जांच राज्य पुलिस से हटाकर CBI को सौंपने का फैसला किया।

CBI अब करेगी पूरे मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच CBI करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से जांच कराने का निर्देश दिया गया है।

मामले की प्रगति पर CBI को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अगली महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग/सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है।

CBI जांच का उद्देश्य हिरासत में मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम, पुलिस की भूमिका, हिरासत के दौरान कथित हिंसा तथा FIR दर्ज करने में हुई देरी जैसे पहलुओं की निष्पक्ष जांच करना होगा।

परिवार को ₹25 लाख की अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को आर्थिक राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल अंतरिम राहत है और मामले की सुनवाई के दौरान अंतिम मुआवजे की राशि पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।

यह राहत विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हिरासत में मौत के मामलों में जवाबदेही का सवाल

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत में नागरिकों के अधिकारों और राज्य की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है।

किसी व्यक्ति की हिरासत के दौरान मौत होने पर जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में परिवार को समय पर न्याय मिलना और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना कानून के शासन में जनता के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मामले में FIR दर्ज करने में हुई कथित लंबी देरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीरता से लिया जाना भी इसी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या होगा?

CBI अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। जांच में हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड, पुलिस की कार्रवाई, मेडिकल एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों तथा उस दौरान हुई घटनाओं की जांच की जा सकती है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में व्यक्ति की मौत हुई। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु

  • 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में मौत के मामले की जांच अब CBI करेगी।

  • राज्य पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

  • छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश।

  • अंतिम मुआवजे की राशि पर बाद में निर्णय लिया जा सकता है।

  • CBI को मामले की निष्पक्ष जांच कर आगे की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

  • मामले की जांच अब राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में आगे बढ़ेगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के इस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट का CBI जांच का आदेश और ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का निर्देश पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक राहत है। साथ ही, FIR दर्ज करने में हुई देरी पर अदालत की नाराजगी पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

अब सभी की नजर CBI की जांच पर रहेगी। जांच से सामने आने वाले तथ्य यह तय करने में अहम होंगे कि हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और क्या इस मामले में किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है।

जीजामगांव के नवीन आईटीआई में शुरू हुआ ‘मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल’ ट्रेड; युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

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बदलती तकनीक और हरित परिवहन की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को मिलेगा आधुनिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण

ऑनलाइन प्रवेश पंजीयन प्रक्रिया शुरू

रायपुर- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवीन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), जीजामगांव में सत्र 2026-27 से पहली बार मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेड का प्रथम बैच प्रारंभ किया गया है। यह इस संस्था का भी पहला प्रशिक्षण सत्र होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए यह ट्रेड युवाओं के लिए करियर की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।

दो वर्षीय पाठ्यक्रम और आधुनिक प्रशिक्षण

मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के साथ-साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली (BMS), मोटर कंट्रोल, चार्जिंग सिस्टम, वाहन सर्विसिंग और फॉल्ट डायग्नोसिस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में यह ट्रेड छत्तीसगढ़ के चुनिंदा 5 शासकीय आईटीआई संस्थानों में ही संचालित है, जिससे जीजामगांव आईटीआई में इसकी शुरुआत जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रोजगार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर

ई-व्हीकल के बढ़ते चलन से अधिकृत सर्विस सेंटरों, ई-व्हीकल निर्माण कंपनियों, चार्जिंग स्टेशनों और बैटरी से संबंधित सेवा इकाइयों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, प्रशिक्षित युवा खुद का सर्विस सेंटर या तकनीकी सेवा शुरू कर स्वरोजगार भी स्थापित कर सकेंगे।

क्षेत्र का तेजी से हो रहा विकास

जीजामगांव क्षेत्र में फॉरेस्ट पार्क, फूड पार्क सहित विभिन्न विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नवीन आईटीआई भवन के लिए चिह्नित भूमि का निरीक्षण भी किया था। जिला धमतरी की नोडल संस्था शासकीय आईटीआई कुरूद के प्राचार्य योगेश देवांगन ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए इस नवीन ट्रेड में प्रवेश लें।

प्रवेश प्रक्रिया और अन्य सौगातें

आईटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए शासकीय आईटीआई कुरूद से संपर्क किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 23 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्राम करेली बड़ी में आयोजित समारोह में जिले के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की घोषणा की थी, जिसमें जीजामगांव में नवीन आईटीआई की स्थापना भी शामिल थी।


बस्तर तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 13 अगस्त को सुकमा जिले में होने वाली इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप भी शामिल होंगे।


राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है

मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित यह यात्रा बस्तर के उन गांवों और क्षेत्रों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित थे और अब शांति, सुरक्षा और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत इस यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।

सुकमा के दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचेगी यात्रा

13 अगस्त को तिरंगा यात्रा चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम होते हुए आवापल्ली और बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम किया जाएगा।

बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने लाना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना और नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों एवं नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही तिरंगे और संविधान के प्रति सम्मान का संदेश भी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल

बस्तर तिरंगा यात्रा में महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे। महिला बाइकर्स तिरंगा लेकर यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत होगा पौधरोपण

यात्रा के दौरान प्रत्येक शहीद स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत जितने लोग शहीद हुए हैं, उतने ही पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री निवास में उतरा गांव का रंग: हरेली पर साकार हुई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू - प्रदेश के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार पर आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक इस उत्सव के साक्षी बने।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।


पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री

हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री  साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक श्रीमती संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।

गौमाता को खिलाई पारंपरिक लोंदी, पशुधन संरक्षण का दिया संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खोला। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध ढंग से कम करते हुए अंततः शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। आज किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

पारिजात का पौधा लगाकर दिया हरियाली बढ़ाने का संदेश

हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। मंत्रीगण तथा विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, उसे सहेजने और लौटाने की भी सीख देती है। पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर और उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है।

आधुनिक कृषि तकनीक से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में लगाए गए कृषि एवं अन्य विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता और विशेषताओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण से किसानों की लागत और श्रम कम करने के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ड्रोन दीदी चंद्रकली की सफलता को मुख्यमंत्री ने सराहा

कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी श्रीमती चंद्रकली वर्मा से आत्मीय संवाद किया। श्रीमती वर्मा ने बताया कि वे ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं तथा प्रति एकड़ 300 रुपए पारिश्रमिक प्राप्त करती हैं। वे अब तक ढाई हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में लगभग 7 लाख रुपए की आय अर्जित की है।

मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कृषि में तकनीक का उपयोग महिलाओं के लिए भी आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर रहा है। ड्रोन दीदियां आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक कड़ी बन रही हैं।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने लिप बाम जैसे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर किसान श्री रामविशाल निषाद ने मुख्यमंत्री को नीम का पौधा भेंट किया।

गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी ने ताजा की गांव की यादें

मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और पारंपरिक ग्रामीण अलंकरण से सजाया गया था। परिसर में कदम रखते ही छत्तीसगढ़ के गांवों और मेलों जैसा वातावरण महसूस हो रहा था। हरियाली और लोक सज्जा के बीच गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

गेड़ी पर चढ़े कलाकारों और प्रतिभागियों ने हरेली की पहचान को जीवंत किया, वहीं ग्रामीण खेलों ने बच्चों और युवाओं को अपनी परंपरागत खेल संस्कृति से परिचित कराया। रहचुली ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा आनंद घोल दिया।

लोकधुनों पर कलाकारों के साथ झूमे मुख्यमंत्री श्री साय

मांदर, ढोलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हरेली के उल्लास में मुख्यमंत्री  साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कलाकारों का उत्साह दोगुना हो गया।

ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉलों ने आयोजन में पारंपरिक खानपान का रंग भरा। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन करते हुए नागरिकों और कलाकारों से संवाद किया तथा हरेली की खुशियां साझा कीं।

किसान की खुशहाली से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। कृषि औजारों, गौमाता और प्रकृति की पूजा हमारी कृतज्ञता की संस्कृति को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिल रहा है और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है। किसान का घर खुशहाल और गांव मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त होगा।

किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश समृद्ध होंगे : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का महापर्व है। हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण, पशुधन के सम्मान और अन्नदाता के श्रम के प्रति आदर का संदेश देती है। हरेली अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और खेती को अधिक समृद्ध बनाने का संकल्प लेने का अवसर है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और हमारी जड़ों का उत्सव है। आधुनिक विकास की तेज यात्रा के बीच अपनी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, ग्रामीण खेल, लोककला और खानपान को सहेजकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाबा भोलेनाथ, गौमाता और प्रकृति से प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खेत लहलहाएं, किसानों के घर खुशहाली आए और प्रदेश निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री जेंद्र यादव, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

विजन 2047 की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: उद्योगों से आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की नई पहल

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 छगन लाल लोन्हारे

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : छत्तीसगढ़ आज औद्योगिक विकास के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां विकास का उद्देश्य केवल नए उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और क्षेत्रीय संतुलन के माध्यम से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए पारदर्शी, निवेश-अनुकूल और रोजगारोन्मुख वातावरण तैयार किया है। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में नई औद्योगिक नीतियों ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।

25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का किया भूमिपूजन

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड 235 करोड़ रुपए के निवेश से यहां गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है। इस यूनिट से 4650 लोगों को रोजगार मिलेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने यह अहम कदम है।

प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार

बीते ढाई वर्षों में राज्य को 264 औद्योगिक परियोजनाओं से लगभग 8.22 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 1.72 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है। इनमें से 154 परियोजनाएं निर्माण, भूमि आवंटन अथवा उत्पादन के चरण तक पहुंच चुकी हैं, जबकि कई इकाइयां पहले ही उत्पादन प्रारंभ कर चुकी हैं। इसी अवधि में प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह दर्शाता है कि सरकार की औद्योगिक नीतियां केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर परिणाम दे रही हैं।

विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा लागू औद्योगिक विकास नीति 2024-30 ने उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन, एमएसएमई और सेवा उद्योगों को पहली बार विशेष लाभ, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फार्मा जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज तथा स्थानीय युवाओं के रोजगार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान इस नीति की प्रमुख विशेषताएं हैं। यही कारण है कि नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर एसईजेड और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश जैसी बड़ी पहलें आकार ले रही हैं।

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। 150 से अधिक सेवाओं वाला नया सिंगल विंडो सिस्टम, निवेशकों के लिए एआई आधारित वाणी प्रणाली, 500 से अधिक प्रशासनिक सुधार तथा प्रक्रियाओं का सरलीकरण निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रहा है। औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे, इसके लिए राज्य में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए तथा 15 जिलों में 26 नए औद्योगिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सरोरा में प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क जैसे प्रयास औद्योगिक आधार को और मजबूत बना रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना

हाल ही में विजन 2047 औद्योगिक विकास की संभावनाएं विषयक चर्चा में उद्योगमंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अधिकतम अवसर मिल सकें। आने वाले वर्षों के लिए सरकार निर्यात नीति, स्टार्टअप एवं नवाचार नीति, कौशल विकास, इंटर्नशिप, एमएसएमई सशक्तिकरण और बस्तर-सरगुजा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, प्रदेश के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है।

छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे

राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का वादा मिला है, जिससे अलग-अलग सेक्टर में 1.6 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर पैदा होने की संभावना है। टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा, राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना

राज्य में वस्त्र एवं परिधान उद्योग को प्रोत्साहित करने नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके 81 एकड़ क्षेत्र में 2758 वर्गमीटर से लेकर 38 हजार 180 वर्गमीटर आकार के भूखंड उपलब्ध हैं। टेक्सटाइल, गारमेंट एवं परिधान उद्योग, तकनीकी वस्त्र (ज्मबीदपबंस ज्मगजपसमे) तथा इनके सहायक एवं पूरक उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को यहां सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार

विजन 2047 की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह औद्योगिक अभियान केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण है जहां निवेश, नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास मिलकर आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 658.1 मिमी बारिश दर्ज: औसत के करीब पहुंचा आंकड़ा, जिलों में दिखा मानसून का मिला-जुला असर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 जून से 11 अगस्त तक की अवधि में औसतन 658.1 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई है। बीते 10 वर्षों की इस अवधि की औसत बारिश (658.5 मिमी) की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 99.9% है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश स्तर पर मानसून का संतुलन पटरी पर है, हालांकि जिलावार स्थिति में काफी विविधता देखने को मिल रही है—कहीं झमाझम बारिश हो रही है तो कहीं किसानों को अब भी अच्छी वर्षा का इंतजार है।


सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सर्वाधिक वर्षा, मैदानी इलाके आगे

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के मैदानी इलाकों में मानसून की मेहरबानी बनी हुई है।

शीर्ष जिला: सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 189.8% (947.3 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश में पहले स्थान पर है।

सामान्य से अधिक बारिश वाले अन्य जिले: महासमुंद (140.7%), नारायणपुर (128.0%), रायपुर (126.7%), बलौदाबाजार (124.7%) और बलरामपुर (124.0%) शामिल हैं।

जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, सक्ती, बालोद, मुंगेली, बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव में भी अब तक अच्छी वर्षा हुई है।

उत्तर और दक्षिण के जिलों में रफ्तार सुस्त

प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी पीछे है:

सरगुजा संभाग: सरगुजा में औसत की तुलना में महज 68.7% और जशपुर में 75.4% बारिश ही हुई है।

बस्तर संभाग: सुकमा (68.2%), कांकेर (69.2%), बीजापुर (71.7%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (72.1%) और बस्तर (74.9%) पिछड़े हुए हैं।

सामान्य के करीब दर्ज जिले: कबीरधाम (83.7%), कोंडागांव (83.9%) और बेमेतरा (80.4%)।

बीते 24 घंटों की स्थिति व मौसम का पूर्वानुमान

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में औसतन 5.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान बिलासपुर (28.9 मिमी), मुंगेली (24.6 मिमी) और बालोद (18.4 मिमी) में अच्छी वर्षा हुई, जबकि बस्तर, नारायणपुर और बीजापुर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में कम वर्षा वाले उत्तरी और दक्षिणी जिलों में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

नाबालिग को धमकाकर जेवर चोरी कराने वाला कांग्रेस पार्षद का बेटा दो साथियों संग गिरफ्तार, जेल भेजा गया

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 भिलाई। स्मृतिनगर चौकी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर उसी के रिश्तेदारों के घर चोरी करवाता था। इस मामले में पुलिस ने वार्ड नंबर-6 के कांग्रेस पार्षद रविशंकर कुर्रे के बेटे अनुराग कुर्रे (32) समेत उसके दो साथियों—करन सोनी (25) और रोहित गुप्ता (23)—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 8 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं।


धमकाकर कराई चोरी

ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि दुर्गानगर जुनवानी रोड निवासी मोहम्मद मोहसीन खान ने 9 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। करीब दो-तीन महीने पहले आरोपी अनुराग कुर्रे व उसके साथियों ने 17 वर्षीय नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर उसके मामा के घर से सोने की दो अंगूठियां, एक हार, एक जोड़ी कान की बालियां और एक मंगलसूत्र मंगवा लिया।

सगे घर में भी कराया हाथ साफ

दूसरी शिकायत नाबालिग की मां शाहीन परवीन ने दर्ज कराई। उनके घर से भी एक जोड़ी सोने के कंगन, एक मंगलसूत्र और दो अंगूठियां गायब थीं। जांच में पता चला कि ये जेवर भी नाबालिग ने आरोपियों के डर से उन्हें सौंपे थे।

ऑनलाइन बेटिंग की लगाई थी लत

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी अनुराग कुर्रे ने नाबालिग को ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाज़ी) ऐप की आदत डाली थी। तकनीकी जांच और सुरागों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को धर दबोचा और शत-प्रतिशत मशरूका बरामद कर लिया। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

बस्तर में 'तिरंगा यात्रा 2026' का आगाज़: महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल, पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेगा शांति और विकास का संदेश

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 रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर 12 से 15 अगस्त तक भव्य ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित इस मोटरसाइकिल यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी विशेष रूप से शामिल होंगे। यह यात्रा बस्तर के उन दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों एवं ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा व विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।




1. महिला बाइकर्स की विशेष सहभागिता

इस यात्रा में प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर्स के साथ-साथ महिला बाइकर्स भी हाथ में तिरंगा थामे विशेष रूप से शामिल होंगी। इसके अलावा स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, NCC, NSS, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी अपनी सहभागिता निभाएंगे।

2. 3 दिवसीय यात्रा का विस्तृत रूट प्लान

12 अगस्त (पहला दिन): यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

13 अगस्त (दूसरा दिन): दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

14 अगस्त (तीसरा दिन): बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी। यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले इस पहाड़ी स्थल पर तिरंगा फहराया जाएगा।

3. शहीदों को श्रद्धांजलि और शहादत स्थल की मिट्टी का संरक्षण

नक्सली हमलों में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के स्मरणीय स्थलों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। एक ऐतिहासिक पहल के रूप में, शहीदों की शहादत वाले स्थानों की पवित्र मिट्टी को संग्रहित कर भविष्य में निर्मित होने वाले शहीद संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें।

4. ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान एवं जन-जागरूकता

प्रत्येक घटना स्थल पर शहादत की संख्या के बराबर पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही यात्रा के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया जाएगा।

5. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विकास प्रदर्शनी

यात्रा के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व डिजिटल सेवाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी और मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) युवाओं की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

6. 'बस्तर शांति दौड़' का आयोजन

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य 'शांति दौड़', विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

बस्तर की नई पहचान का प्रतीक

‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की बदलती सुखद तस्वीर को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अभियान है।

हरेली त्योहार: छत्तीसगढ़ की हरियाली, संस्कृति और किसान जीवन का उत्सव

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भारत त्योहारों और परंपराओं की भूमि है। यहां मनाया जाने वाला हर त्योहार अपने साथ एक विशेष संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्य लेकर आता है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्वों में हरेली का विशेष स्थान है। हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, पशुधन और किसान जीवन के प्रति सम्मान प्रकट करने वाला पर्व है। यह त्योहार छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और लोकजीवन की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करता है।

हरेली का अर्थ और महत्व

‘हरेली’ शब्द का संबंध हरियाली से माना जाता है। सावन के मौसम में जब खेत-खलिहान हरियाली से भर जाते हैं और प्रकृति अपने सुंदरतम रूप में दिखाई देती है, तब हरेली का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कृषि कार्य में तेजी आने के साथ किसान अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हरेली हमें यह संदेश भी देती है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और कृषि से गहराई से जुड़ा हुआ है। खेतों में लहलहाती फसल, पेड़-पौधे, वर्षा और पशुधन ग्रामीण जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

कृषि उपकरणों की पूजा

हरेली के दिन किसान अपने हल, कुदाल, फावड़ा, बैल और अन्य कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। कृषि उपकरणों को साफ करके उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन उपकरणों की सहायता से किसान धरती को उपजाऊ बनाता है और पूरे समाज के लिए अन्न पैदा करता है।

इस दिन कई परिवार अपने घरों और कृषि उपकरणों पर नीम की पत्तियां भी लगाते हैं। नीम को पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य और प्राकृतिक सुरक्षा से जोड़ा जाता है।

पशुधन का विशेष महत्व

कृषि प्रधान समाज में पशुधन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए हरेली के अवसर पर गाय-बैल और अन्य पशुओं की भी देखभाल और पूजा की जाती है। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है और विशेष भोजन दिया जाता है।

यह परंपरा हमें सिखाती है कि मनुष्य को केवल अपने हित के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि उन पशुओं के प्रति भी कृतज्ञ होना चाहिए जो उसके जीवन और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बच्चों के लिए खास होता है हरेली का उत्सव

हरेली का त्योहार बच्चों और युवाओं के लिए भी बहुत उत्साह लेकर आता है। गांवों में इस अवसर पर गेड़ी चढ़ने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। बच्चे और युवा गेड़ी पर चढ़कर चलते हैं और अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

गेड़ी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति की पहचान भी है। आज भी कई स्थानों पर हरेली के दौरान गेड़ी प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

लोकपरंपराओं और व्यंजनों की खुशबू

हरेली के अवसर पर घरों में पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं। परिवार के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और त्योहार की खुशियां साझा करते हैं। गांवों में लोकगीत, पारंपरिक खेल और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां वातावरण को उत्सवमय बना देती हैं।

इस प्रकार हरेली केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह परिवार, समाज और समुदाय को एक-दूसरे के करीब लाने का अवसर भी बनती है।

प्रकृति संरक्षण का संदेश

आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है, हरेली का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें पेड़-पौधों, मिट्टी, जल, पशुओं और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की याद दिलाता है।

हरेली हमें प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति का सम्मान करें, पेड़ लगाएं, जल बचाएं और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।

छत्तीसगढ़ की पहचान है हरेली

हरेली छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की जीवंत पहचान है। इस पर्व में किसान का परिश्रम, प्रकृति की सुंदरता, पशुधन के प्रति सम्मान, पारिवारिक प्रेम और लोकपरंपराओं की झलक दिखाई देती है।

समय के साथ त्योहार मनाने के तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन हरेली की मूल भावना आज भी वही है—धरती, प्रकृति और कृषि के प्रति कृतज्ञता।

निष्कर्ष

हरेली हमें अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देती है। यह पर्व बताता है कि हमारे जीवन की खुशियां प्रकृति और किसान के परिश्रम से गहराई से जुड़ी हैं। इसलिए हरेली केवल छत्तीसगढ़ का एक लोकपर्व नहीं, बल्कि हरियाली, मेहनत, प्रकृति प्रेम और समृद्धि का उत्सव है।

हमें अपनी लोकपरंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए और हरेली के संदेश—प्रकृति का सम्मान करें, किसान का सम्मान करें और पर्यावरण की रक्षा करें—को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाज सेविका मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि मिनीमाता जी ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में समाज से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाई। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता जी के नाम पर राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी व्यक्तित्व हम सभी को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का कमाल-उन्नत मक्का बीज और कृषि सहायता से संवरी कृषक शुभम दुबे की राह

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।

मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।

सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद

कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार

कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।

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