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झारखंड में छात्र आंदोलन 23वें दिन भी जारी, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की चेतावनी

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रांची- झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र-युवा 23वें दिन भी आंदोलनरत हैं। प्रदर्शनकारियों ने अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है।

20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान

छात्र नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 20 अगस्त तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का समाधान, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब वे आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर नाराजगी

आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। प्रदर्शनकारी उम्मीदवार परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी JSSC CGL और JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं को रद्द करने तथा कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग भी कर रहे हैं।

तिरंगा यात्रा के बाद बढ़ा आंदोलन

15 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली। इसके जरिए छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखना है।

भूख हड़ताल से भी बढ़ी चिंता

आंदोलन के दौरान कुछ छात्र नेता भूख हड़ताल पर भी हैं। रिपोर्टों के अनुसार छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य रिपोर्ट में भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक ने अपनी बिगड़ती हालत को लेकर चिंता जताई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा ने 20 अगस्त को प्रस्तावित CM आवास घेराव को नैतिक समर्थन दिया है। वहीं सत्तारूढ़ झामुमो ने छात्रों से किसी भी तरह के भड़कावे में नहीं आने और आंदोलन को गलत दिशा में जाने से बचाने की अपील की है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से आंदोलन को लेकर अलग रुख सामने आया है।

24 जिलों में प्रदर्शन की तैयारी

छात्र नेताओं ने आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देने की भी घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार 23 दिनों से जारी आंदोलन अब झारखंड सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के राजनीतिक रूप लेने से मामला और संवेदनशील हो गया है।

अब सबकी नजर 20 अगस्त पर है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इससे पहले कोई सहमति नहीं बनती है, तो CM आवास घेराव का कार्यक्रम आंदोलन को नए चरण में पहुंचा सकता है।

कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को अहम सुनवाई, तमिलनाडु ने मांगा अपने हिस्से का पानी

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नई दिल्ली- कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होने वाली है। तमिलनाडु सरकार ने अदालत से कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी जल तत्काल जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु का दावा—26.954 TMC पानी की कमी

तमिलनाडु सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा के अनुसार कावेरी का पानी जारी नहीं किया है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि उसके हिस्से में 26.954 TMC (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की कमी है। इसी आधार पर तमिलनाडु ने अदालत से कर्नाटक को आवश्यक मात्रा में पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कावेरी का पानी राज्य के कृषि क्षेत्र और डेल्टा जिलों की सिंचाई के लिए बेहद अहम है। पानी की कमी का सीधा असर किसानों और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

कर्नाटक की अपनी दलील

दूसरी ओर, कर्नाटक लगातार यह तर्क देता रहा है कि राज्य को भी अपने पेयजल, सिंचाई और कृषि जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता है। हालिया घटनाक्रम में कर्नाटक सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने को लेकर आगे का फैसला किया जाएगा।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री ने यह भी कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश राज्य के लिए बहुत अधिक है और मौजूदा परिस्थितियों में इसका पालन करना चुनौतीपूर्ण है।

विवाद फिर क्यों बढ़ा?

कावेरी जल विवाद नया नहीं है। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कावेरी जल बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था और उसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) तथा कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के माध्यम से पानी छोड़ने और उसकी निगरानी की व्यवस्था की गई।

सितंबर 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विनियमन समिति के कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। उस समय समिति ने 5,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।

किसानों पर पड़ सकता है सीधा असर

कावेरी का पानी दोनों राज्यों के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए नदी पर बड़ी निर्भरता है। वहीं कर्नाटक में भी कावेरी बेसिन के किसानों और शहरों की पानी की जरूरतें इसी जल संसाधन से जुड़ी हैं।

ऐसे में मानसून, बांधों में जल भंडारण और कृषि जरूरतों के बीच संतुलन बनाना दोनों राज्यों के लिए बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में कावेरी जल को लेकर कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। 13 अगस्त को कावेरी जल छोड़ने के मुद्दे पर राज्यव्यापी बंद भी आयोजित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सभी की नजरें 17 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। तमिलनाडु चाहता है कि उसे उसके हिस्से का पानी जल्द से जल्द मिले, जबकि कर्नाटक अपने जल भंडार और राज्य की जरूरतों को देखते हुए पानी छोड़ने की मात्रा पर आपत्ति जता रहा है।

इस सुनवाई में अदालत का रुख दोनों राज्यों के बीच मौजूदा जल विवाद की दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। खासकर 26.954 TMC की कथित कमी और 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के मुद्दे पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

क्या है कावेरी विवाद का मूल मुद्दा?

कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके पानी के इस्तेमाल और बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जल बंटवारे को लेकर अपना महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जल प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया गया।

फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है। 17 अगस्त की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि तमिलनाडु को उसके दावे के अनुसार पानी उपलब्ध कराने और कर्नाटक की जल जरूरतों के बीच अदालत किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

भारत में LPG सप्लाई बढ़ाने की तैयारी, सरकार ने रिफाइनरियों के लिए तय किए उत्पादन लक्ष्य

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नई दिल्ली- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुई ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने घरेलू LPG सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों तथा तेल कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम दैनिक लक्ष्य तय किए हैं। इस कदम का उद्देश्य देश में खाना पकाने वाली गैस की उपलब्धता बनाए रखना, आयात पर निर्भरता के जोखिम को कम करना और भविष्य के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार करना है।

63,810 मीट्रिक टन प्रतिदिन का उत्पादन लक्ष्य

13 अगस्त 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार, देश की सरकारी और निजी रिफाइनरियों के लिए कुल 63,810 मीट्रिक टन LPG प्रतिदिन तक उत्पादन की क्षमता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यह व्यवस्था 24 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

सरकार ने कंपनियों को मौजूदा उत्पादन स्तर से आगे बढ़कर LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव उपाय करने को कहा है। इसमें उपलब्ध फीडस्टॉक के वैकल्पिक इस्तेमाल जैसे उपाय भी शामिल हैं, ताकि अधिक मात्रा में LPG तैयार की जा सके।

पश्चिम एशिया संकट से क्यों बढ़ी चिंता?

भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। 2025-26 में देश में LPG की खपत करीब 33.2 मिलियन टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 13.1 मिलियन टन था और लगभग 21.3 मिलियन टन LPG का आयात किया गया। यानी भारत की LPG जरूरतों में आयात की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत से अधिक रही।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री परिवहन और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर घरेलू LPG उपलब्धता पर पड़ सकता है।

सरकार का फोकस—घरेलू उत्पादन और बफर स्टॉक

सरकार का नया फैसला सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। रिफाइनरियों और संबंधित कंपनियों को LPG की स्टोरेज और परिवहन क्षमता मजबूत करने पर भी ध्यान देने को कहा गया है। इसका मकसद किसी संभावित वैश्विक सप्लाई संकट के दौरान देश के पास पर्याप्त घरेलू भंडार उपलब्ध रखना है।

Reliance को मिला सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य

निजी क्षेत्र की Reliance Industries को तय किए गए उत्पादन लक्ष्यों में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इससे देश की LPG जरूरतों को पूरा करने में बड़े निजी रिफाइनरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इससे पहले भी संकट के दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया था। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारतीय रिफाइनरियों का LPG उत्पादन सालाना आधार पर 30.8 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.4 मिलियन मीट्रिक टन हो गया था।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार का यह कदम मुख्य रूप से LPG की उपलब्धता और सप्लाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। घरेलू उत्पादन बढ़ने और बफर स्टॉक मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में अचानक आने वाली बाधाओं का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि LPG की कीमतों में तत्काल कमी आ जाएगी। LPG की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों, आयात लागत, परिवहन खर्च और सरकारी नीतियों समेत कई कारकों का असर पड़ता है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।

अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की भी तैयारी

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ भारत आयात के स्रोतों में भी विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। Reuters की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका से LPG खरीद बढ़ाई है और जून में अमेरिकी LPG आयात पहली बार 10 लाख टन से अधिक पहुंच गया था। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया से होने वाली आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करना है।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

सरकार द्वारा रिफाइनरी-वार LPG उत्पादन लक्ष्य तय करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता रहने की स्थिति में घरेलू उत्पादन, वैकल्पिक आयात स्रोत, पर्याप्त भंडारण और मजबूत परिवहन व्यवस्था भारत को LPG सप्लाई में संभावित झटकों से बचाने में मदद कर सकती है।

कुल मिलाकर, सरकार का नया फैसला ‘घरेलू उत्पादन बढ़ाओ, आयात जोखिम घटाओ और बफर स्टॉक मजबूत करो’ की रणनीति पर आधारित है। आने वाले महीनों में इन उत्पादन लक्ष्यों को किस तरह लागू किया जाता है, यह देश में LPG की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

उपराष्ट्रपति ने SRMIST के 22वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर चलने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के निकट चेंगलपट्टु के कट्टनकुलथुर स्थित एस.आर.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें।

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सीखने की यात्रा का उत्सव है। साथ ही, यह जिम्मेदारी और सेवा से जुड़ी आजीवन यात्रा की शुरुआत भी है।

सी. पी. राधाकृष्णन ने SRMIST द्वारा विकसित ऐसे शैक्षणिक वातावरण की सराहना की, जो अंतर-विषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि संस्थान का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर रिसर्च, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता ध्यान भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाज को आकार देगा।

उपराष्ट्रपति ने शोध को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए SRMIST के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध तभी अपनी सर्वोच्च सार्थकता प्राप्त करता है, जब वह समाज की सेवा करता है, लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है, उद्योग को मजबूत करता है और सतत विकास में योगदान देता है।

राधाकृष्णन ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मानवीय सहायता का व्यावसायीकरण करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने हाल ही में केन्या के स्पीकर के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई वैक्सीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के प्रयासों ने मानवता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया और दोहराया कि भारत शांति, विकास और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देश के हर हिस्से में AIIMS उपलब्ध होना चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके।

उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

सी. पी. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला विद्यार्थियों की संख्या 1.57 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं को डिग्री और पदक प्राप्त करते देखना स्वागत योग्य बदलाव है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्नातक छात्र भारत की ‘विकसित भारत @2047’ की यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य प्रत्येक युवा भारतीय से राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपेक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, विशेष रूप से युवा हैं। स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा: “भविष्य के लिए केवल खुद को तैयार न करें; भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।”

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशे और हर प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनना चाहिए।

उन्होंने तमिलनाडु में हाल ही में हुई उस घटना का उल्लेख किया, जिसमें नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण एक छात्र की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद पीड़ादायक है और उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने अपने परिवार के एक सदस्य को खो दिया हो।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनका ज्ञान, नवाचार और मेहनत भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान देनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण निजी हितों से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से भारतीय जीवन मूल्यों ज्ञान, कर्तव्य, करुणा और सेवा को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष श्री आर. वेलुसामी को मानद उपाधि प्रमाणपत्र प्रदान किया। उन्होंने स्नातकों को पदक, रैंक और डिग्रियां भी प्रदान कीं तथा छात्रों और स्नातकों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, SRMIST के चांसलर डॉ. टी. आर. पारिवेंधर, प्रो-चांसलर (प्रशासन) डॉ. रवि पचमुथु, प्रो-चांसलर (शैक्षणिक) डॉ. पी. सत्यनारायणन, कुलपति डॉ. सी. मुथमिझचेलवन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।

कैंसर की रोकथाम में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच जरूरी : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

15 मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ा दायरा : स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

शिवालयों की नगरी आरंग में निकली विशाल नारी शक्ति कांवर यात्रा,500 महिलाएं हुई कांवर यात्रा में शामिल

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आरंग- रविवार को शिवालयों की नगरी आरंग में नारी शक्ति कांवर यात्रा समिति के तत्वावधान में विशाल कांवर यात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें  करीब 500 महिलाएं शामिल हुई। कांवर यात्रा की शुरुआत आदिशक्ति मां महामाया मंदिर से जल लेकर की गई। इसके बाद भक्तों ने कुमारेश्वर महादेव में जलाभिषेक किया। वहां से यात्रा नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए राजराजेश्वर महादेव, बाबा बागेश्वर नाथ महादेव पहुंचकर जलाभिषेक कर आशीर्वाद लिया।राह में पड़ने वाले प्रत्येक शिवालय में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। यात्रा का समापन पंचमुखी महादेव मंदिर में हुआ।आयोजकों ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य आरंग के प्राचीन शिवालयों की महिमा को जन-जन तक पहुंचाना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। यात्रा के दौरान भक्त शिव भजनों और गीत-संगीत पर थिरकते रहे, जो आमजन के लिए आकर्षण वहीं का केंद्र बना रहा। इस विशाल कांवर यात्रा में नगर के महाकाल ग्रुप, पीपला वेलफेयर फाउंडेशन, रानी पद्मावती महिला संगठन सहित कई सामाजिक संगठन भी शामिल हुए। वहीं लोक बयार सांस्कृतिक टीम मोरध्वज नगरी आरंग के कलाकारों द्वारा शिव भजनों की प्रस्तुति सबका मन मोह लिया।

पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने "हर-हर महादेव" के जयकारों से वातावरण को शिवमय कर दिया।



RAIPUR NEWS : ज्वेलर्स दुकान में चोरी का खुलासा, दो महिलाओं समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर। टिकरापारा थाना क्षेत्र के रावतपुरा स्थित 'श्री गुरू ज्वेलर्स' की दीवार तोड़कर हुई चोरी का खुलासा पुलिस ने महज 72 घंटे में कर दिया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और टिकरापारा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 7.50 लाख रुपये मूल्य का चोरी का सामान बरामद किया है।


CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से पकड़े गए आरोपी

रावतपुरा कॉलोनी (फेस-02, मठपुरैना) स्थित ज्वेलर्स दुकान के संचालक निमाई डोंडा ने 10 अगस्त की सुबह दुकान की दीवार टूटी होने और सोने-चांदी के जेवरात चोरी होने की सूचना पुलिस को दी थी। शिकायत पर टिकरापारा थाने में अपराध दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 से अधिक विशेष टीमों का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों CCTV फुटेज खंगाले तथा संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी।

महिला से पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश

तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने पुरानी बस्ती निवासी आकांक्षा सोनी को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में चोरी में उसकी संलिप्तता की पुष्टि हुई। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों—उषा उर्फ सपना खुंटे, लोकेश राव उर्फ विकास, एम. मोहन राव उर्फ मोनी और मिराज आलम—को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, लोकेश राव और एम. मोहन राव इस चोरी के मुख्य साजिशकर्ता थे। दोनों ने दुकान की रेकी करने के बाद लोकेश की पत्नी उषा, आकांक्षा और मिराज को इस योजना में शामिल किया था।

दीवार तोड़कर की थी चोरी

घटना वाली रात एम. मोहन राव और मिराज आलम दीवार तोड़कर दुकान के अंदर दाखिल हुए और जेवरात समेट लिए, जबकि लोकेश बाहर निगरानी (रेकी) कर रहा था। चोरी के बाद माल को आपस में बांट लिया गया था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 2 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 1 सोने का लॉकेट, वारदात में इस्तेमाल की गई 2 दोपहिया वाहन और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास

जांच में मुख्य आरोपी एम. मोहन राव का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है; वह पूर्व में हत्या के 4 और चोरी के 1 मामले में जेल जा चुका है तथा हत्या के एक मामले में उसे 10 साल की सजा भी हो चुकी है। आरोपी लोकेश राव के खिलाफ दुर्ग जिले में NDPS और आबकारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं, वहीं उसकी पत्नी उषा भी टिकरापारा थाने के एक पुराने मामले में जेल जा चुकी है।

पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में बारिश का अलर्ट: IMD ने जारी की चेतावनी, सुरक्षा को लेकर गाइडलाइन

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 छत्तीसगढ़ में मानसूनी सिस्टम (बंगाल की खाड़ी में बने दबाव) के सक्रिय होने के कारण रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग समेत मध्य व उत्तर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आज हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। आने वाले 2-3 दिनों तक मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है।


मौसम विभाग (IMD) की मुख्य चेतावनियां व सलाह

  1. बिजली चमकने के दौरान सावधान रहें: खुले मैदान, बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों के पास खड़े होने से बचें।
  2. वाहन चलाते समय सतर्कता: कम दृश्यता (Visibility) और सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में अपने वाहन की रफ्तार नियंत्रित रखें।
  3. नदी-नालों से दूरी बनाए रखें: जब नदी या नाले उफान पर हों, तो उन्हें पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें और तेज बहाव से दूर रहें।
  4. घर से निकलने से पहले याद रखने योग्य बातें
  • छाता या रेनकोट साथ रखें: बाहर निकलते समय वॉटरप्रूफ गियर पास रखें।
  • जलभराव वाले रास्तों से बचें: निचले या जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से पहले वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सुरक्षा से इस्तेमाल: तेज चमक और कड़क के दौरान खुले में मोबाइल या धातु की वस्तुओं का उपयोग करने से बचें।

महासमुंद : मुड़पार बांध में डूबने से व्यापारी की मौत, स्वतंत्रता दिवस पर दोस्तों के साथ गया था घूमने

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 महासमुंद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुड़पार बांध में दोस्तों के साथ घूमने गए एक युवक की नहाते समय पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला।


मिली जानकारी के अनुसार, शहर के वार्ड क्रमांक 26 क्लब पारा निवासी 35 वर्षीय प्रणय गुर्वेकर (मिक्सचर व्यापारी) स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी पर अपने पांच अन्य दोस्तों के साथ महासमुंद से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित मुड़पार बांध गए हुए थे। पिकनिक के दौरान प्रणय नहाने के लिए बांध के पानी में उतरे, जहां अचानक गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे गहरे पानी में समा गए।

युवक को डूबता देख दोस्तों और आसपास मौजूद ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन असफलता मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस की टीम ने गोताखोरों को पानी में उतारा और कुछ समय बाद शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

अटल जी ने देश सेवा में समर्पित किया जीवन, उन्हें अद्वितीय दृष्टि का वरदान प्राप्त था: पुण्यतिथि पर बोले पीएम मोदी

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 नई दिल्ली: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं 'भारत रत्न' स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली स्थित वाजपेयी जी के स्मारक 'सदैव अटल' पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।


असाधारण नेता और दूरदर्शी नेतृत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी के सुशासन और राष्ट्र सेवा को याद करते हुए कहा, "अटल जी एक असाधारण राजनेता थे, जिन्हें अद्वितीय दृष्टि का वरदान प्राप्त था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा और उसके सशक्तिकरण में समर्पित कर दिया।" पीएम ने आगे जोर देकर कहा कि अटल जी की नीतियां, विचार और जन-कल्याण पर उनका जोर आज भी देश के विकास की दिशा तय कर रहा है।

भारत के विकास में ऐतिहासिक योगदान

भारतीय राजनीति में सर्वस्वीकार्य नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अटल जी के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां आज भी देश के विकास का आधार स्तंभ हैं:

  • परमाणु शक्ति के रूप में उभार: वर्ष 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण कर उन्होंने वैश्विक दबावों के बावजूद भारत को एक संप्रभु परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी क्रांति: 'स्वर्णिम चतुर्भुज' परियोजना और 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' के जरिए उन्होंने पूरे देश को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने की ऐतिहासिक शुरुआत की।

  • कठोर कूटनीति और कारगिल विजय: कारगिल युद्ध के दौरान उनके दृढ़ नेतृत्व ने भारत को विजय दिलाई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष बेहद मजबूती से रखा।

ओजस्वी वक्ता और संवेदनशील कवि राजनीतिक जीवन के इतर अटल जी अपनी प्रखर भाषण शैली और कविताओं के लिए जाने जाते थे। उनकी रचनाएं, जैसे "हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा", आज भी देशवासियों को निरंतर प्रेरित करती हैं।

अमिट विरासत 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के पहले नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री बने। 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ था। उनकी जयंती (25 दिसंबर) को प्रतिवर्ष देश भर में 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासी उनके बताए मार्ग और सिद्धांतों पर चलने का संकल्प दोहरा रहे हैं।

लोकपाल कार्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण, भ्रष्टाचार मुक्त शासन के संकल्प पर जोर

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नई दिल्ली- भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकपाल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर ने लोकपाल कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर लोकपाल के सदस्य न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी, न्यायमूर्ति संजय यादव, सुशील चंद्र, न्यायमूर्ति ऋतु राज अवस्थी, पंकज कुमार और अजय तिर्की सहित वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति खानविलकर ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के उस आदर्श को याद किया, जिसमें ऐसे राष्ट्र की कल्पना की गई है जहां मन भय से मुक्त हो और सिर ऊंचा रहे। उन्होंने सभी नागरिकों से इस आदर्श को अपने विचारों और कार्यों में बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की आजादी स्वतंत्रता सेनानियों और अनगिनत देशभक्तों के बलिदान का परिणाम है। राष्ट्रीय ध्वज फहराना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली अतीत और आजादी के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला अवसर है।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ भूख, अन्याय, उत्पीड़न और असमानता से मुक्ति के साथ हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है।

भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए लोकपाल की प्रतिबद्धता

उन्होंने लोकपाल संस्था की स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। लोकपाल को प्राप्त हो रही शिकायतों की बढ़ती संख्या को उन्होंने नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और संस्था के प्रति विश्वास का संकेत बताया।

उन्होंने संविधान, कानून का शासन, जवाबदेही, दक्षता, पारदर्शिता और सुगमता के प्रति लोकपाल की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से संस्था को और अधिक पारदर्शी, कुशल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता के साथ देखा जाए। उन्होंने कहा कि हर फाइल के पीछे एक नागरिक होता है, जो न्याय की उम्मीद रखता है और संस्थागत फैसलों से उसका जीवन प्रभावित होता है।

कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति खानविलकर ने लोकपाल के सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के समर्पण एवं व्यावसायिकता के लिए आभार व्यक्त किया। संबोधन का समापन ‘जय हिंद’ के देशभक्तिपूर्ण उद्घोष के साथ हुआ।


ग्रामीण विकास में तकनीक की नई पहल, RSVC AMRIT प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

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नई दिल्ली- भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने 15 अगस्त 2025 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर RSVC AMRIT प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित विकास को मजबूत करने और उपयुक्त तकनीकों को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नाबार्ड (NABARD) ने भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) के सहयोग से AMRIT प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म RuTAGe Smart Village Centre (RSVC) इकोसिस्टम के डिजिटल आधार के रूप में काम करेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण नवाचार, तकनीक हस्तांतरण और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने में मदद करना है।

तकनीक को गांवों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर

अपने संबोधन में प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि AMRIT को RSVC की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से समर्थन देने के लिए तैयार किया गया है। इसमें तकनीक की खोज और सत्यापन से लेकर उसके उपयोग, निगरानी, सहयोग और ज्ञान प्रबंधन तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाएगा।

प्लेटफॉर्म के जरिए इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स, स्टार्टअप्स, वैलिडेटर्स, एक्सेलरेटर्स, कार्यान्वयन साझेदार, फंडिंग एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान और ग्रामीण समुदाय एक साझा मंच पर जुड़ सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक तकनीक और नवाचार पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

ग्रामीण जरूरतों और नवाचार के बीच बनेगा सेतु

नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक संस्थानों, इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स और तकनीकी संस्थाओं का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, लेकिन ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप तकनीकों को सही स्थान तक पहुंचाना अभी भी एक चुनौती है।

AMRIT इसी अंतर को कम करने का प्रयास करेगा। यह ग्रामीण जरूरतों को नवाचार, संस्थानों और कार्यान्वयन तंत्र से जोड़कर जमीनी स्तर पर तकनीकों के प्रसार और उपयोग को मजबूत करेगा।

कृषि से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा तक कई क्षेत्रों पर फोकस

RSVC पहल के तहत शोध संस्थानों, इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स से विकसित उपयुक्त और किफायती तकनीकों को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने के लिए गांव स्तर पर टेक्नोलॉजी हब विकसित किए जा रहे हैं।

इनमें कृषि, ग्रामीण उद्यम, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, सहायक तकनीक, जल एवं स्वच्छता और नागरिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

AMRIT इस भौतिक नेटवर्क को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए ग्रामीण नवाचारों, तकनीकों, बेहतर कार्यप्रणालियों और सहयोग के अवसरों का एक राष्ट्रीय भंडार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

8 RSVC को मिल रहा समर्थन

नाबार्ड ने बताया कि वर्तमान में 8 RSVCs को समर्थन दिया जा रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए नाबार्ड ने OPSA और NABFOUNDATION के साथ त्रिपक्षीय समझौते की दिशा में भी काम किया है। नाबार्ड के मुंबई स्थित मुख्यालय में RSVCs के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया गया है।

नाबार्ड द्वारा साझा योजना के अनुसार, नए RSVCs को कॉरपोरेट्स की CSR पहलों के माध्यम से स्थापित किया जाएगा, जबकि NABFOUNDATION कार्यान्वयन साझेदार के रूप में भूमिका निभाएगा।

AMRIT प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक और नवाचार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में ग्रामीण भारत की भागीदारी और मजबूत हो सके।

खेल और युवा शक्ति बनेंगे विकसित भारत की ताकत, PM मोदी ने रोजगार और 2036 ओलंपिक पर रखा जोर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में खेल और युवा शक्ति की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने खेलों में भारत की बढ़ती उपलब्धियों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, स्टार्टअप, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और 2036 ओलंपिक की तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

युवाओं के लिए ₹1 लाख करोड़ की रोजगार योजना

प्रधानमंत्री ने ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत करीब 3.5 करोड़ युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को सरकार की ओर से ₹15,000 की सहायता दी जाएगी। वहीं, अधिक संख्या में नए रोजगार पैदा करने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

2036 ओलंपिक की मेजबानी पर भारत की नजर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत खेलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदार के रूप में आगे बढ़ रहा है। साथ ही भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भी करेगा।

उन्होंने कहा कि ओलंपिक में करीब 40 खेलों और 325 से 350 स्पर्धाओं का आयोजन होता है, लेकिन भारत आज लगभग दो-तिहाई स्पर्धाओं में हिस्सा नहीं लेता। ऐसे में इन खेलों में भारतीय प्रतिभाओं को आगे लाने की जरूरत है।

5 से 15 साल के बच्चों के लिए टैलेंट हंट

2036 ओलंपिक की तैयारी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने देशभर के गांवों, शहरों और स्कूलों में टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही। इसके तहत 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान की जाएगी।

चयनित बच्चों की क्षमताओं का आकलन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। प्रधानमंत्री ने इस अभियान में बेटियों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।

खेलों के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि TOPS योजना, खेलो इंडिया गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स और बीच गेम्स के साथ-साथ खेल बुनियादी ढांचे, कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन के क्षेत्र में भी भारत आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जो युवा खिलाड़ी नहीं भी बन पाते, उनके लिए भी खेलों से जुड़े सपोर्ट सिस्टम में रोजगार और करियर के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

कोचिंग संस्थानों की बढ़ती लागत को मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बताते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि भारत के पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभाशाली शिक्षक और विशेषज्ञ हैं। इन सभी संसाधनों को एक साथ जोड़कर युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने बताया कि Startup India के तहत देश में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हो चुके हैं। युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के Innovation Fund का भी उल्लेख किया और कहा कि युवा अपने सपनों के साथ आगे आएं, संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी।

नशामुक्त भारत का आह्वान

प्रधानमंत्री ने युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए ‘नशामुक्त भारत’ को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को मजबूत बनाना विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है और 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं की आकांक्षाओं और भागीदारी को विकास यात्रा से जोड़ना होगा।


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‘रक्षा शक्ति’ बनेगी विकसित भारत की ताकत, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर PM मोदी का जोर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से दिए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘रक्षा शक्ति’ को विकसित भारत के लिए सप्तधारा की सात प्रमुख शक्तियों में शामिल किया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत केवल दुनिया का बाजार बनकर नहीं रह सकता। देश को अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों का विकास कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक में नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया।

रक्षा उत्पादन में तेज बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है, जबकि रक्षा निर्यात में लगभग 50 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भारत के हथियार अब करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमाओं के भीतर या बाहर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना जरूरी है।

आधुनिक युद्ध के लिए नई तैयारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग सिस्टम, डेटा सेंटर, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और आधुनिक खतरों से निपटने के लिए रक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा में युवाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा को भी रक्षा का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ दुनिया के हित में किया जा सकता है।

नागरिक सुरक्षा का बनेगा मजबूत नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने नागरिकों की सुरक्षा को भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि पिछली सदी के युद्धों को ध्यान में रखकर बनाए गए मौजूदा नागरिक सुरक्षा तंत्र को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप बदलने की जरूरत है।

उन्होंने आने वाले समय में आधुनिक प्रणालियों से लैस एक व्यापक नागरिक सुरक्षा नेटवर्क और बड़ी स्वैच्छिक सिविल डिफेंस फोर्स तैयार करने की घोषणा की।

रक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भी देश की बेटियां नई भूमिका निभा रही हैं। NDA से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला कैडेट्स सैन्य नेतृत्व की क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और नागरिकों की तैयारियों के जरिए भारत को एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र बनाना विकसित भारत 2047 की यात्रा का अहम हिस्सा है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह : शालेय विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

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सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा में सरगुजा संभाग प्रथम और दुर्ग संभाग के विद्यार्थी  द्वितीय स्थान पर रहे 

रायपुर-  राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउण्ड, पर आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगभग साढ़े 800 स्कूली विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां दी। इन प्रस्तुतियों के बीच हुई स्पर्धा में छत्तीसगढ़ उत्तर क्षेत्र सरगुजा संभाग के स्कूली विद्यार्थियों को पहला, छत्तीसगढ़ पश्चिम क्षेत्र दुर्ग संभाग के विद्यार्थियों को दूसरा और मध्य क्षेत्र रायपुर संभाग को तीसरा स्थान मिला। मुख्यमंत्री ने शील्ड-मेडल देकर सभी विजेताओं को सम्मानित किया।

छत्तीसगढ़ उत्तर क्षेत्र सरगुजा संभाग के 286 स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा वंदे मातरम, जय हिंद हम सबका अभिमान...  जैसे रिमिक्स गीत पर देश भक्तिपूर्ण प्रस्तुति दी। इस नृत्य एवं गीत के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने वंदे मातरम के 150 वर्षों की तपस्या और मातृभूमि के अनंत प्रेम की कहानी को प्रदर्शित किया, साथ ही युवा शक्ति से लेस होकर नई ऊंचाईयों को छूते भारत को भी आकर्षक अंदाज में प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया।

पश्चिम क्षेत्र दुर्ग संभाग के 277 विद्यार्थियों ने सजता, संवरता, निखरता ये देश...  गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य एवं गीत के माध्यम से अनेक अवसरों पर होने वाले नृत्यों की भी सुन्दर छाप दर्शकों के बीच पेश की। स्कूल के बच्चों ने इस प्रस्तुति के माध्यम से अपने भावों को अपने कदमों की लय और ऊर्जा में पिरो कर राष्ट्र प्रेम की अटूट झलक भी प्रस्तुत की।  

मध्य क्षेत्र रायपुर संभाग के 280 बच्चों द्वारा संकल्प बोल के हम तो निकल पड़े... फ्यूजन गीत पर मनोरम प्रस्तुति दी गई। इस नृत्य एवं गीत के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने सैनिकों के शौर्य, उनके त्याग और बलिदान की गाथा को जीवंत किया।


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