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भिलाई में लापता शिक्षिका सुरक्षित मिली, पुलिस ने संदिग्ध को पकड़ा

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 भिलाई। छावनी थाना क्षेत्र से आज सुबह गायब हुई महिला शिक्षिका राधा साहू (43) को पुलिस ने कुछ ही घंटों में सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


मिली जानकारी के अनुसार, महिला सुबह स्कूल के लिए निकली थी, लेकिन बीच रास्ते से लापता हो गई। जब काफी समय बीतने पर भी वह स्कूल नहीं पहुँची तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। इसी दौरान महिला के पति के मोबाइल पर फिरौती मांगने की कॉल और एक संदिग्ध फोटो भेजी गई, जिससे मामला गंभीर हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही ASP, CSP और SDOP की अगुवाई में पुलिस टीमों ने जांच शुरू की। टेक्निकल सर्विलांस और ग्राउंड इनपुट के आधार पर लोकेशन ट्रेस कर महिला को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

CSP अभिषेक झा ने बताया—
“महिला सुरक्षित है। एक संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हर एंगल से जांच की जा रही है।”

पुलिस फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि यह मामला वास्तविक अपहरण का है या किसी अन्य विवाद का हिस्सा। जांच जारी है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGP/IGP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया

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रायपुर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन दिवसीय 60वीं DGsP/IGsP कॉफ्रेंस का उद्घाटन किया। अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में DGP/IGP कॉफ्रेंस समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों से नीति निर्धारण तक, देश की आंतरिक सुरक्षा के समाधान का फोरम बन कर उभरी है।

गृह मंत्री ने नक्सलवाद के समूल नाश के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के एक्शनेबल प्वाइंट का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने विगत 7 वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाया है और इसी का परिणाम है कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी जो आज घटकर सिर्फ 11 रह गई है। 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश नक्सलवाद की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा। अमित शाह ने कहा कि पिछले 40 साल से देश नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लिए नासूर बने 3 हॉटस्पॉट - नक्सलवाद, नार्थ-ईस्ट और जम्मू-कश्मीर - की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। 

गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) कानूनों को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ ही नारकोटिक्स

भारत की कॉफी उद्योग: वैश्विक मंच पर नई पहचान गढ़ती एक सशक्त कहानी

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भारत की कॉफी यात्रा का आरंभ 1600 ईस्वी के आसपास माना जाता है, जब सूफी संत बाबा बूदान यमन के मोचा बंदरगाह से सात कॉफी के बीज लाकर कर्नाटक के चिक्कमंगलूर स्थित बाबा बूदान गिरी पहाड़ियों में रोपित किए थे। घरेलू बागानों से शुरू हुआ यह सफर समय के साथ वाणिज्यिक खेती में बदल गया और आज भारतीय कॉफी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ वैश्विक बाजार में अहम स्थान रखती है।

भारत में कॉफी की खेती लगभग 4.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पश्चिमी व पूर्वी घाटों तथा पूर्वोत्तर राज्यों में होती है। दो-स्तरीय छायादार कृषि प्रणाली, विविध वनस्पतियों और सतत खेती पद्धतियों के कारण भारतीय कॉफी पर्यावरण के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। करीब दो मिलियन लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जिनमें से अधिकांश छोटे किसान हैं—जो 99% खेतों और 70% उत्पादन के भागीदार हैं।

भारत का कॉफी परिदृश्य

देश की कुल कॉफी उत्पादन का 96% हिस्सा कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु से आता है। कर्नाटक 2,80,275 मीट्रिक टन के साथ सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत के 13 विशिष्ट कॉफी क्षेत्र अपनी अनूठी जलवायु, ऊंचाई और स्वाद के कारण विश्व बाजार में अलग पहचान बनाए हुए हैं।

GI टैग से बढ़ी विश्वसनीयता

भारत के पाँच क्षेत्रीय और दो विशेष कॉफी प्रकारों को भौगोलिक संकेतक (GI) मान्यता प्राप्त है—

  • कूर्ग अरेबिका, वायनाड रोबस्टा, चिकमगलूर अरेबिका, अराकू वैली अरेबिका, बाबा बूदानगिरी अरेबिका

  • विशेष श्रेणी: मॉन्सून्ड मालाबार रोबस्टा

स्पेशलिटी कॉफी—जैसे मॉन्सून्ड मालाबार AA, मैसूर नगेट्स, रोबस्टा कापी रॉयल—बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लोकप्रिय हो रही हैं।

कॉफी बोर्ड की भूमिका

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय आई संकट की स्थिति से निपटने के लिए 1942 में “कॉफी एक्ट” के तहत कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना हुई। यह बोर्ड अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, निर्यात और किसानों को तकनीकी–वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का काम करता है।

भारत के कॉफी निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक देश है।

  • FY 2024–25 में निर्यात 1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

  • प्रमुख निर्यात बाजार: इटली, जर्मनी, बेल्जियम, रूस, यूएई।

  • भारत इंस्टेंट कॉफी का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है, जिसकी हिस्सेदारी कुल निर्यात में 38% है।

सरकारी नीतियों से मिली रफ्तार

  • GST में कमी: इंस्टेंट कॉफी पर टैक्स 18% से घटाकर 5% किया गया, जिससे बाजार में 11–12% तक कीमत कम होने और खपत बढ़ने की उम्मीद है।

  • भारत–UK CETA: भारतीय रोस्टेड व इंस्टेंट कॉफी को ब्रिटेन में अब ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा।

  • भारत–EFTA TEPA: स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड द्वारा भारतीय कॉफी पर 0% शुल्क—प्रीमियम बाजारों में बड़ी अवसर वृद्धि।

फाइन कप अवॉर्ड्स में ओडिशा की चमक

कॉफी बोर्ड द्वारा आयोजित “फ्लेवर ऑफ इंडिया – फाइन कप” प्रतियोगिता में 2024 में कोरापुट कॉफी ने दो पुरस्कार जीते—धोई हुई (washed) और नैचुरल दोनों श्रेणियों में। इससे ओडिशा की ऊंचाई वाली आदिवासी कॉफी को राष्ट्रीय पहचान मिली।

TDCCOL का आदिवासी किसानों के लिए योगदान

ओडिशा की प्रमुख सहकारी संस्था TDCCOL ने 2019 से कोरापुट में घर-घर जाकर कॉफी खरीदना शुरू किया।
मुख्य उपलब्धियां—

  • किसानों को ICTA आधारित उचित मूल्य

  • सीधे बैंक खातों में भुगतान

  • मूल्य संवर्धन के साथ "Koraput Coffee" ब्रांड का शुभारंभ

  • भुवनेश्वर, पुरी, कोरापुट और नई दिल्ली में कुल 8 “कोरापुट कॉफी कैफ़े”

कॉफी बोर्ड ने TDCCOL को ड्राइंग यार्ड, पल्पर जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता भी दी है।

भविष्य की दिशा

भारत में कॉफी बाजार 2028 तक 8.9% CAGR की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। आउट-ऑफ-होम कॉफी सेगमेंट 15–20% CAGR के साथ 3.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कॉफी बोर्ड का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक उत्पादन को 9 लाख टन तक पहुंचाया जाए।

निष्कर्ष

भारत की कॉफी गाथा दृढ़ता, नवाचार और समावेशी विकास की कहानी है। परंपरा और आधुनिक तकनीक के मेल ने भारतीय कॉफी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। GI टैग, स्पेशलिटी कॉफी, आदिवासी समुदायों की भूमिका और तेजी से बढ़ते निर्यात के साथ भारत विश्व कॉफी उद्योग में अपनी मजबूत जगह बना रहा है। आने वाले वर्षों में गुणवत्ता, स्थिरता और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित कर भारत की कॉफी उद्योग नए आयाम छूने को तैयार है।


रायपुर में ऑल इंडिया DG–IG कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन: आंतरिक सुरक्षा पर बनेगी बड़ी रणनीति, PM मोदी और अमित शाह कर रहे नेतृत्व

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में आयोजित ऑल इंडिया DG–IG कॉन्फ्रेंस का आज दूसरा दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इस प्रतिष्ठित वार्षिक सम्मेलन में आज कई अहम रणनीतियों और निर्णायक प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज के सभी प्रमुख सत्रों में भाग ले रहे हैं, जबकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिन की शुरुआत योग सत्र से की और इसके बाद शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ रणनीतिक विचार–विमर्श किया।


सुबह से ही सम्मेलन स्थल पर अत्यंत अनुशासित वातावरण और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली। देश के विभिन्न राज्यों से आए डीजीपी, आईजी तथा वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने प्रदेशों की सुरक्षा चुनौतियों और अनुभवों को साझा कर रहे हैं।

आज चार प्रमुख सत्र प्रस्तावित

आज दिनभर चार मुख्य सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आंतरिक सुरक्षा से जुड़े प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा होगी।
पहले दिन के सत्र में नक्सलवाद, आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा तंत्र की मजबूती और ड्रग्स तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों पर विस्तृत विमर्श हुआ।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सत्र के दौरान स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि—
“ड्रग्स मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अंतरराज्यीय ड्रग्स गिरोहों पर निर्णायक और सख्त कार्रवाई की जाए।”

साइबर अपराध और तकनीकी सुरक्षा पर फोकस

बैठक में बढ़ते साइबर अपराध और नई तकनीकों के माध्यम से होने वाले अपराधों पर नियंत्रण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना साझेदारी, पुलिस बलों को उन्नत प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

कॉन्फ्रेंस में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि बदलते समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत, तकनीक–आधारित और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता से लैस बनाना अत्यंत आवश्यक है।

नक्सल मोर्चे पर बड़ी जीत: झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू ने हथियार डाले

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रायपुर । बस्तर को दहला देने वाले झीरम घाटी नरसंहार का खूंखार मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर हो गया। वह वही नक्सली है, जिस पर 29 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप है, और जिसे स्थानीय लोग बस्तर का “सबसे डरावना चेहरा” कहते रहे हैं।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैतू ने जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमले की साजिश इसी ने रची थी, जिसमें 32 लोग मारे गए, जिनमें कांग्रेस के कई शीर्ष नेता शामिल थे।

“बस्तर टाइगर” महेंद्र कर्मा को 100 गोलियां

हमले में सलवा जुडूम के संस्थापक महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने करीब 100 गोलियां मारीं और उनके शरीर पर चढ़कर नाचने जैसी भयावह क्रूरता की — एक बर्बर दृश्य जिसे बस्तर आज भी नहीं भूल पाया है।

चैतू पर 25 लाख का इनाम था और वह नक्सली संगठन में 45 साल तक सक्रिय रहा, जिनमें 35 साल बस्तर के जंगलों में छिपकर बिताए। कई बार पुलिस मुठभेड़ों में बच निकलने वाला चैतू अंततः सुरक्षा बलों की मजबूत रणनीति और दबाव के आगे झुक गया।

IG ने दी जानकारी

बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि चैतू सहित सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
अब पुलिस पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी, केंद्रीय समिति सदस्य रामदर, DKSZC सदस्य पापाराव और बार्से देवा सहित कई बड़े कमांडरों की तलाश में है।

चैतू का कबूलनामा

सरेंडर के बाद चैतू ने स्वीकार किया: -“रूपेश और सोनू दादा भी रास्ता छोड़ चुके हैं। मेरी उम्र 63 साल है। संगठन में अब कुछ नहीं बचा। हालात बदल चुके हैं, इसलिए हमने हिंसा छोड़ने का निर्णय लिया।”

झीरम हमला: पृष्ठभूमि

25 मई 2013, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से लौट रही थी।
करीब 200 नेता और कार्यकर्ता 25 गाड़ियों के काफिले में थे। सबसे आगे की गाड़ी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे।
दरभा घाटी में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया—जो छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा और दर्दनाक हमला माना जाता है।

बीती रात महासमुंद जिले में अवैध धान 2,986 कट्टा धान जब्त

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महासमुंदखरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अवैध धान भंडारण, परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाने के लिए महासमुंद जिले में जांच-पड़ताल कर अवैध धान की जब्ती का सिलसिला जारी है। बीती रात तथा शुक्रवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई कार्रवाई में कुल 2,986 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया।

कलेक्टर स्वयं प्रतिदिन धान खरीदी केंद्रों एवं जांच चौकियों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने आज बागबाहरा विकासखंड के अंतर्राज्यीय जांच चौकी टेमरी, नर्रा और खट्टी सहित परसुली धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया और अधिकारी-कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान खरीदी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर रविp साहू, एसडीएम नमिता मारकोले एवं तहसीलदार नीतिन ठाकुर मौजूद थे। 

आज शुक्रवार को पिथौरा क्षेत्र में एसडीएम बजरंग वर्मा के नेतृत्व में ग्राम श्रीरामपुर में मायाधार के घर से 81 कट्टा धान जब्त किया गया। ग्राम छूवालीपतेरा में दयाराम जांगड़े के घर से 320 बोरी संदिग्ध धान जब्त कर मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। बसना क्षेत्र में ग्राम जामनीडीह के दो प्रकरणों में 589 कट्टा और 53 कट्टा धान जब्त किया है। ग्राम पल्सापाली में दो प्रकरणों में 133 कट्टा और 59 कट्टा तथा ग्राम बांसुला में 153 कट्टा, ग्राम मोहका में 55 कट्टा अवैध धान जब्त किया गया। 

इसी तरह सरायपाली क्षेत्र में एसडीएम अनुपमा आनंद के नेतृत्व में ग्राम चारभाठा से 400 कट्टा, ग्राम सिंगबाहल में उपेंद्र साहू के घर व्यापारी दीपक साहू का 260 कट्टा, ग्राम चिराकूटा में आनंद प्रधान के घर एवं गोदाम से कुल 488 कट्टा और 160 कट्टा, ग्राम कोइलबाहल से 235 कट्टा धान जब्त किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान के अवैध परिवहन, भंडारण एवं खरीदी के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

किसानों के लिए जरूरी खबर - जिनके खसरे एग्रीस्टेक पोर्टल आईडी में लिंक नहीं, वे समितियों में जाकर करवा सकते हैं अपडेट

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रायपुर। धान खरीदी के संबंध में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान शासन द्वारा एग्री स्टेक पोर्टल में किया गया है। जिसके तहत एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत एक से अधिक खसरे वाले ऐसे किसान जिनके सभी खसरों में से कुछ खसरे पोर्टल में उनके एग्रीस्टेक आईडी में प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं या लिंक होना शेष रह गए हैं, ऐसे खसरों की पहचान कर समितिवार सूची बनाई गई है, तथा उसे समितियों के बाहर चस्पा किया गया है। 

किसानों से आग्रह किया जाता है कि वे समितियों में जाकर अपने छूटे हुए खसरों का मिलान कर उसे पोर्टल में लिंक करवा सकते हैं। इसके लिए किसान समितियों के किसान सहायता केंद्र में सुबह 09 से 05 तक समितियों में जाकर वहां के ऑपरेटर अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। खाद्य अधिकारी कबीरधाम ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी हेतु भारत सरकार, कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है।

एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान को प्राप्त फार्मर आईडी के साथ उनके फॉर्म आई डी (खसरे) को लिंक किया जाना है। वर्तमान में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत कृषक के ऐसे खसरे जो यूनीफाइड फार्मर पोर्टल में पंजीकृत थे वो कैरी फारवर्ड हो गए है परंतु वो समस्त खसरे एग्रीस्टेक में फार्मर आईडी के साथ लिंक नही है, उनमें से कुछ खसरे लिंक होने रह गए हैं। इन समस्त छुटे हुए खसरों को एग्रीस्टेक पोर्टल में माध्यम से जोड़ा जाना है ताकि समिति स्तर पर ये सभी खसरे खरीदी हेतु उपलब्ध हो सके। कबीरधाम जिले पंजीकृत किसानों के ऐसे 34 हजार 566 खसरे हैं जो किसानों के एग्री स्टेक आईडी में लिंक होने शेष हैं। इन्हें लिंक कराने की प्रक्रिया किसान स्वयं समिति में जाकर करवा सकते हैं। इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित है।


छत्तीसगढ़ : राज्य के स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता सुधार हेतु प्राचार्यों की पदोन्नति एवं पदस्थापना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के टी संवर्ग में वर्ष 2013 तथा ई संवर्ग में वर्ष 2016 के बाद पहली बार बड़ी संख्या में प्राचार्यों की पदोन्नति की गई है। लंबे समय से शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में प्राचार्य के पद रिक्त होने के कारण शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। 

इस समस्या के समाधान हेतु स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 30 अपै्रल 2025 को जारी आदेश के अनुसार टी संवर्ग में 12 वर्ष तथा ई संवर्ग में 09 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने वाले पात्र शिक्षकों को प्राचार्य पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। इस प्रक्रिया के तहत टी संवर्ग में 1335 तथा ई संवर्ग में 1478 व्याख्याताओं/प्रधान पाठकों को प्राचार्य बनाया गया।

2504 पदोन्नत प्राचार्य की पदस्थापना

इन पदोन्नतियों के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा स्थगन आदेश दिए जाने से पदस्थापना की कार्यवाही रोक दी गई थी। न्यायालय द्वारा याचिकाएँ खारिज किए जाने के बाद शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार पदस्थापना पुनः आरंभ की गई। शासन के पत्र दिनांक 10 अगस्त 2025 के अनुसार काउंसिलिंग के माध्यम से प्राचार्यों की पदस्थापना की गई, जिसमें टी संवर्ग की काउंसिलिंग 20 अगस्त 2025 से 23 अगस्त 2025 तक हुई और कुल 1222 प्राचार्यों का पदस्थापना आदेश जारी किया गया। इसी प्रकार ई संवर्ग की काउंसिलिंग 21 नवंबर से 24 नवंबर 2025 तक आयोजित की गई, जिसके अनुसार 1284 पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना आदेश जारी किए जा रहे हैं।

हर विद्यालय में मजबूत नेतृत्व सुनिश्चित करना

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि लंबे समय से प्राचार्य पद रिक्त होने से स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। उन्होंने कहा, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालयों में सक्षम नेतृत्व आवश्यक है। बड़े पैमाने पर की गई यह पदोन्नति और पदस्थापना राज्य के विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत प्रदान करेगी तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम स्कूल शिक्षा विभाग के व्यापक सुधार अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हर विद्यालय में मजबूत नेतृत्व सुनिश्चित करना है।

प्राचार्यों के रिक्त पदों की पूर्ति होने से विद्यालयों में प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था अधिक सुचारू होगी। इससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार होने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की अपेक्षा है।

छत्तीसगढ़ पवेलियन को 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में मिला 'स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल'

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रायपुर। छत्तीसगढ़ ने 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ के पवेलियन को उत्कृष्ट थीमैटिक प्रस्तुति और डिस्प्ले के लिए प्रतिष्ठित “स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” प्रदान किया गया। यह पुरस्कार नई दिल्ली के भारत मंडपम में दिया गया, जहाँ आईआईटीएफ 14 से 27 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ।

छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूरे होने पर मिला यह सम्मान

यह उपलब्धि ऐसे समय मिली है जब छत्तीसगढ़ वर्ष 2025 में अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की यात्रा को बेहद रोचक और अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया—जिसमें सांस्कृतिक परंपराएँ, जनजातीय विरासत, आजीविका आधारित पहल, सुशासन, औद्योगिक विकास, पर्यटन और सतत विकास जैसे सभी पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।

छत्तीसगढ़ का पवेलियन क्यों रहा खास

पवेलियन ने राज्य की 25 वर्ष की यात्रा, उसकी उपलब्धियों, आगामी लक्ष्य और “नवा छत्तीसगढ़” की अवधारणा को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया। इसमें बस्तर में हो रहे परिवर्तन को भी प्रमुखता से रखा गया—जहाँ हाल के वर्षों में बेहतर À№⅝_सड़क संपर्क, पर्यटन विकास, जनजातीय आजीविका में वृद्धि और शांति आधारित विकास ने नए अवसर खोले हैं।

पारंपरिक कारीगरी, जनजातीय कला, स्थानीय उत्पाद, व्यंजन और पर्यटन ने छत्तीसगढ़ की आत्मा को आधुनिक अंदाज़ और प्रामाणिकता के साथ पेश किया।

पवेलियन में छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024–30 को प्रमुखता के साथ दर्शाया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और उच्च स्तरीय निवेश आकर्षित करना है।

प्रदर्शनी में दो बड़े आगामी प्रोजेक्ट्स भारत का पहला AI डेटा सेंटर पार्क और छत्तीसगढ़ का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट को भी प्रदर्शित किया गया। ये दोनों परियोजनाएँ राज्य के युवाओं के लिए हजारों उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार अवसर तैयार करेंगी और छत्तीसगढ़ को तकनीकी रूप से उन्नत, निवेश-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार राज्य के रूप में वैश्विक मानचित्र पर प्रमुख स्थान देंगी।

मेले के दौरान पवेलियन में उल्लेखनीय संख्या में दर्शक पहुंचे। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और जीआई-टैग्ड ढोकरा कला, आकर्षक कोसा सिल्क और अन्य पारंपरिक उत्पादों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। संस्कृति, कारीगरी और कहानी कहने के प्रभावी मिश्रण ने इसे IITF 2025 के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल किया।

“स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” राज्य के बढ़ते आत्मविश्वास, नवाचार-आधारित विकास और मज़बूत आर्थिक भविष्य की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, जिसे हर साल इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) आयोजित करती है, देश के सबसे बड़े और विविधतम आयोजनों में से एक है। इसमें राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, पीएसयू, एमएसएमई, शिल्पकारों, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की भागीदारी रहती है, जिससे भारत मंडपम भारत की संस्कृति, व्यापार, नवाचार और उद्यमिता का जीवंत मंच बन जाता है। 

"स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल”

सम्मान ने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत किया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास मॉडल—दोनों के साथ आगे बढ़ रहा है। पवेलियन की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की प्रगति, उसके उद्योगों और उसके युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरक कदम के रूप में देखी जा रही है। यह सम्मान राज्य को और बेहतर प्रदर्शन, नवाचार और जनहितकारी विकास के लिए प्रोत्साहित करता है तथा आने वाले समय में ऐसे और भी गौरवपूर्ण अध्याय लिखे जाने की उम्मीद जगाता है।



बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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  • छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग की रणनीति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
  • अंजोर विजन के लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर व्यापक एवं गहन विमर्श
  • मुख्यमंत्री ने कहा — लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए कार्ययोजना ठोस हो और क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव  विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

बस्तर में शांति और विकास की नई दिशा : 65 लाख के इनामी 10 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे

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बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण हो रहा है स्थापित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि  “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पहल ने बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी भ्रमजाल में फँसे अनेक लोग अब हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास और मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। इसी क्रम में आज दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एवं 25 लाख के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा सहित कुल 65 लाख रुपए के इनाम वाले 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्यमंत्री ने इसे बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों की सफलता का स्पष्ट प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप सभी आत्मसमर्पित साथियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन हेतु आवश्यक पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने उल्लेख किया कि आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि जनता सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रही है और बस्तर तेजी से शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की प्रभावी रणनीति, पुलिस प्रशासन की सतत मेहनत और जनविश्वास का सामूहिक परिणाम बताते हुए बस्तर में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के डायमंड जुबली समापन समारोह में युवाओं को “सदैव तैयार” रहने का संदेश दिया

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 नवंबर, 2025) लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के डायमंड जुबली समारोह के समापन सत्र में शिरकत की और इसके 19वें राष्ट्रीय जंबूरी को संबोधित किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स पिछले 75 वर्षों से युवाओं का मार्गदर्शन कर रहा है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा भावना इस संगठन की सबसे बड़ी शक्ति है। चाहे बाढ़ हो, भूकंप हो या महामारी — स्काउट्स और गाइड्स हमेशा सहायता के लिए अग्रिम पंक्ति में रहते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए भी इस संगठन की सराहना की।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत में 63 लाख से अधिक स्काउट्स और गाइड्स हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े स्काउटिंग संगठनों में से एक बनाते हैं। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि इनमें से 24 लाख से अधिक लड़कियाँ स्काउट्स और गाइड्स से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इन सभी लड़कियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अनुशासन, समर्पण और समाज-मानवता की सेवा का मार्ग चुना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्काउट्स और गाइड्स का आदर्श वाक्य "सदैव तैयार" है, जिसका अर्थ है भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि तकनीकी कौशल, संचार क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान और नेतृत्व जैसे गुण उनके जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं और हमारी सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत के संरक्षक भी। एक सशक्त और संवेदनशील व्यक्ति कई अन्य लोगों को सशक्त और संवेदनशील बना सकता है, ठीक उसी प्रकार जैसे एक दीपक कई दीपकों को प्रकाश देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा राष्ट्र के विकास के लिए समर्पित रहेंगे।


जंगल-पहाड़ों के रास्तों से मतदाताओं तक पहुंच रही टीम

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नारायणपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण ने पकड़ी रफ्तार

रायपुर- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को नारायणपुर जिले में गति मिल रही है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीमें और बीएलओ जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर मतदाता सूची अद्यतन कार्य को निरंतर अंजाम दे रहे हैं। लक्ष्य है—कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

जिले में वर्तमान में कुल 92,637 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 77.25 प्रतिशत गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन अब तक पूरा किया जा चुका है। प्रशासनिक टीमें त्रुटिरहित अद्यतन सुनिश्चित करने के लिए नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के कार्य में पूरी गम्भीरता से जुटी हुई हैं।

बीएलओ समरूलाल यादव की प्रेरक कहानी

दुर्गम ग्राम गट्टाकाल से एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। मतदान केंद्र क्रमांक 09 के बीएलओ समरूलाल यादव को पुनरीक्षण कार्य के लिए पहाड़ी पगडंडियों पर मीलों पैदल चलना पड़ा। कई बार उन्हें बिना पुल वाले नदी-नालों को पार करना पड़ा, फिर भी वे लगातार घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का सत्यापन करते रहे।

इस मतदान केंद्र के 360 मतदाताओं में से 262 का पुनरीक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 98 मतदाताओं का कार्य भी तेजी से जारी है। समरूलाल यादव का कहना है कि कठिन रास्ते भी उन्हें लोकतंत्र को मजबूत करने के संकल्प से नहीं रोक पाते।

20 बीएलओ ने किया शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण

जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, जिले के 20 बीएलओ अपने-अपने क्षेत्रों में 100 प्रतिशत पुनरीक्षण कार्य पूरा कर चुके हैं। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कलेक्टर प्रतिष्ठा  द्वारा निरंतर प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा रहा है।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचकर मतदाताओं को जोड़ने का यह निरंतर प्रयास जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

नवा रायपुर में डीजीपी–आईजी कॉन्फ्रेंस शुरू, देश के सर्वश्रेष्ठ तीन पुलिस थानों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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रायपुर। नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में आज से तीन दिवसीय डीजीपी–आईजी कॉन्फ्रेंस 2025 का शुभारंभ हुआ। दोपहर 2:30 बजे शुरू हुए पहले सत्र में देशभर से आए पुलिस प्रतिनिधि, आमंत्रित अतिथिगण और पदक विजेता शामिल हुए।


इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सर्वश्रेष्ठ तीन पुलिस थानों को सम्मानित किया। पुरस्कार पाने वाले थाने इस प्रकार हैं—

  • प्रथम स्थान — गाजीपुर थाना (दिल्ली)
  • द्वितीय स्थान — पहरगांव थाना (अंडमान)
  • तृतीय स्थान — कवितला थाना, रायचूर (कर्नाटक)

इनका चयन देशभर के 70 चयनित थानों में से बहुस्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर किया गया।

70 कैटेगरी के आधार पर हुआ मूल्यांकन

थाने के प्रभारी यू. बाला शंकरन के अनुसार मूल्यांकन चार प्रमुख क्षेत्रों में किया गया था—

1. अपराध नियंत्रण

  • गंभीर अपराधों में कमी
  • महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध की रोकथाम
  • साइबर अपराध नियंत्रण
  • नशीली दवाओं की तस्करी पर रोक
  • अपराधियों की गिरफ्तारी दर और पुनरावर्ती अपराधियों की निगरानी
  • सीमा व संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त
  • वाहन चोरी की रिकवरी
  • घरेलू हिंसा मामलों पर त्वरित कार्रवाई

2. जांच एवं केस निपटान

  • केस क्लियरेंस रेट
  • फोरेंसिक तकनीक का उपयोग
  • अभियोजन सफलता दर
  • लंबित मामलों का निपटान
  • e-FIR, जीरो FIR सुविधा
  • अपराध स्थल प्रबंधन

3. थाने की भौतिक सुविधाएँ

  • स्वच्छता व भवन संरचना
  • महिलाओं/बच्चों के लिए अलग कक्ष
  • CCTV कवरेज
  • आधुनिक उपकरण व वाहन उपलब्धता
  • डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड रूम

4. जनसंपर्क व नागरिक संतुष्टि

  • शिकायत दर्ज करने की गति
  • हेल्प डेस्क संचालन
  • सोशल मीडिया फीडबैक
  • सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम
  • पुलिस व्यवहार और पारदर्शिता

कॉन्फ्रेंस में PM मोदी रहेंगे शामिल

आईआईएम में आयोजित सम्मेलन में कुल आठ सत्र होंगे—

  • पहला दिन — 2 सत्र
  • दूसरा दिन — 4 सत्र
  • तीसरा दिन — 2 सत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह सत्रों में शामिल होंगे, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूरे आठों सत्रों में उपस्थित रहेंगे।

छत्तीसगढ़ी हमारी अस्मिता—सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राजभाषा दिवस पर भरा स्वाभिमान का संकल्प

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ी भाषा नई नहीं, बल्कि हमारी विरासत का वह स्वर्णिम अध्याय है जिसका इतिहास अत्यंत पुराना और गौरवशाली है। यह बात सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित भव्य समारोह में कही। जहां छत्तीसगढ़ी भाषा की गौरवशाली परंपरा, उसकी विरासत और उसके संवर्धन पर सार्थक विमर्श हुआ।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को एक विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की।

छत्तीसगढ़ी भाषा को राजकीय सम्मान दिलाने और राजभाषा आयोग के गठन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मंच पर विशेष रूप से स्वागत और सम्मान किया गया। छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन के लिए उनका दृष्टिकोण, प्रयास और सतत संघर्ष आज प्रदेश के सांस्कृतिक इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय माना जाता है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि “छत्तीसगढ़ी केवल भाषा नहीं, हमारी अस्मिता है। इसे जन-जन की भाषा बनाने के लिए हमें इसे अपने व्यवहार, आचार और विचार में आत्मसात करना होगा।"

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया तथा छत्तीसगढ़ी साहित्य की सेवा में अविस्मरणीय योगदान देने वाले प्रतिष्ठित साहित्यकारों- पद्मश्री धर्मलाल सैनी, सरला शर्मा, एस. पी. जायसवाल, हेमलाल साहू ‘निर्मोही’, डॉ. प्रकाश पतंगीवार, काशी साहू को सम्मानित किया।

सांसद ने छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले महान साहित्यिक पुरोधाओं स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे और स्वर्गीय सुरजीत नवदीप को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आवाहन करते हुए कहा कि अब समय है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए समाज सामूहिक संकल्प ले कि, “हमारी भाषा ही हमारी पहचान है, और छत्तीसगढ़ का भविष्य उसकी अपनी मातृभाषा की मजबूती में ही सुरक्षित है।”

कार्यक्रम का सफल आयोजन छत्तीसगढ़ी भाषा के समृद्ध इतिहास, उसकी व्यापक स्वीकार्यता और भविष्य की दिशाओं पर एक प्रभावशाली विमर्श के रूप में याद किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रख्यात इतिहासकार रामेंद्रनाथ मिश्र, रामेश्वर, शशांक शर्मा, राजभाषा आयोग की सचिव श्रीमती अभिलाषा बेहार सहित बड़ी संख्या में लेखक, साहित्यकार व भाषा प्रेमी उपस्थित रहे।

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