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CG Cabinet Meeting: कल होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर

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 CG Cabinet Meeting ; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार (22 जुलाई) को राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुबह 11:30 बजे नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) के मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी, जिसमें जनहित और विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा के बाद निर्णय लिए जाने की संभावना है।


गौरतलब है कि इससे पूर्व 8 जुलाई को साय कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें राज्य के औद्योगिक, सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए थे।

पिछली कैबिनेट बैठक के मुख्य निर्णय (8 जुलाई):

  • बिजली भुगतान के लिए DDM व्यवस्था: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए पुराने त्रिपक्षीय अनुबंध की जगह आरबीआई (RBI) के नियमानुसार 'डायरेक्ट डेबिट मैंडेट' (DDM) लागू करने की मंजूरी दी गई।

  • बस्तर फाइटर्स नियमों में संशोधन: छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स) आरक्षक भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

  • निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में बदलाव: राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026' के प्रारूप को हरी झंडी दी गई।

  • वाणिज्यिक कर अधिकरण होगा समाप्त: राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के गठन के बाद अब 'छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण' को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। अब लंबित मामलों का हस्तांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा।

  • जीएसटी और औद्योगिक नीतियों में सुधार:

    • GST संशोधन विधेयक 2026: कर प्रणाली को सरल बनाने और निर्यातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रावधान।

    • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन संशोधन: राज्य में निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और अनुकूल माहौल देने के उद्देश्य से नीति में संशोधन।

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक लाएगा छत्तीसगढ़: राज्य में कारोबार को सुगम, डिजिटल और समयबद्ध बनाने के लिए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026' के प्रारूप को मंजूरी दी गई। ऐसा कानून बनाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनेगा।

  • नवा रायपुर में वन टाइम सेटलमेंट (OTS): नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों व परिसरों पर देय ब्याज व अधिभार में राहत देने के लिए OTS योजना-2026 को मंजूरी दी गई।

  • आदर्श किरायेदारी कानून लागू करने की तैयारी: 'छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • राजनांदगांव को सौगात: राजनांदगांव में 2,000 सीट की क्षमता वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन को स्वीकृति दी गई।

  • पर्यावरण संरक्षण संकल्प: 'जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024' को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत करने का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ में मानसून का असंतुलन: कहीं 'इंद्रदेव' मेहरबान, तो कहीं पानी को तरसे किसान, देखें आपके जिले का हाल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में मानसून का दौर जारी है। राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 356.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा (408.7 मिमी) का 87.1 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 13% कम बारिश हुई है।


बीते 24 घंटों में राज्य में औसतन 21.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिसमें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 69.4 मिमी बारिश के साथ शीर्ष पर रहा।


सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सर्वाधिक बारिश

चालू मानसून सत्र में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला वर्षा के मामले में प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहाँ अब तक 576.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो जिले की सामान्य औसत वर्षा का 181.4% है।

अतिरिक्त बारिश वाले प्रमुख जिले:

  • जांजगीर-चांपा: 512.0 मिमी (120.4%)
  • बलौदाबाजार: 453.4 मिमी (119.7%)
  • बिलासपुर: 440.5 मिमी (114.1%)
  • महासमुंद: 427.3 मिमी (112.4%)
  • रायपुर: 395.7 मिमी (112.6%)
  • मुंगेली: 417.7 मिमी (110.4%)
  • बलरामपुर: 391.8 मिमी (160.0%)

इसके अलावा गरियाबंद (435.7 मिमी), सक्ती (419.8 मिमी), कोरबा (409.7 मिमी), दुर्ग (357.7 मिमी), कोरिया (356.0 मिमी), रायगढ़ (353.3 मिमी), बालोद (347.7 मिमी), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (337.0 मिमी) तथा सूरजपुर (313.0 मिमी) में भी स्थिति बेहतर है।

बस्तर संभाग और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अब भी पानी की कमी

प्रदेश के मैदानी और मध्य हिस्सों में मानसून की स्थिति बेहतर है, लेकिन बस्तर संभाग और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में अब भी औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।

सबसे कम बारिश वाले जिले:

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: 203.3 मिमी (सामान्य का महज 40.4%)

  • सुकमा: 304.5 मिमी (45.8%)
  • बीजापुर: 359.7 मिमी (49.3%)
  • कांकेर: 261.2 मिमी (50.8%)
  • कोंडागांव: 263.8 मिमी (56.5%)
  • बस्तर: 298.0 मिमी (60.7%)
  • सरगुजा: 185.8 मिमी (65.9%)

अन्य जिलों का हाल

  • दंतेवाड़ा: 438.9 मिमी (86.2%)
  • नारायणपुर: 384.8 मिमी (79.4%)
  • धमतरी: 349.2 मिमी (81.8%)
  • राजनांदगांव: 303.3 मिमी (81.2%)
  • जशपुर: 301.4 मिमी (78.3%)
  • खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: 274.2 मिमी (89.9%)
  • बेमेतरा: 253.1 मिमी (80.7%)
  • कबीरधाम: 240.6 मिमी (80.1%)

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

पिकनिक पार्टी में विवाद के बाद किन्नर की हत्या: सड़क किनारे मिली लाश, इलाके में फैला तनाव

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक किन्नर की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सकरी थाना क्षेत्र के जॉकी गांव में पिकनिक मनाने के दौरान हुए विवाद के बाद किन्नर तन्नू खान की कथित तौर पर गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।


पिकनिक पर हुआ था विवाद

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तन्नू खान अपने साथियों के साथ जॉकी गांव में पिकनिक मनाने गई थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसका साथी किन्नर रिया से विवाद हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इसी बीच तन्नू खान की गला दबाकर हत्या कर दी गई और आरोपी वारदात के बाद मौके से फरार हो गए।

गले पर दबाव के निशान, नाक से बह रहा था खून

सूचना मिलते ही सकरी थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिम्स (SIMS) अस्पताल भेजा। पुलिस के मुताबिक, मृतका के नाक से खून निकल रहा था और गले पर दबाव के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। प्राथमिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है; हालांकि मौत के सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

किन्नर समुदाय में भारी आक्रोश

वारदात की खबर फैलते ही बिलासपुर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के लोग सिम्स अस्पताल पहुंच गए। घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

पुलिस का बयान:

"घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

— सकरी थाना पुलिस

खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई तक अंतिम मौका, 10 फसलें अधिसूचित

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 गरियाबंद। खरीफ मौसम 2026 के लिए 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' के तहत किसान 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय पर्यवेक्षण समिति की बैठक में अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरियाबंद जिले के लिए धान (सिंचित व असिंचित), मक्का, उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली, कोदो, कुटकी और रागी सहित कुल 10 फसलों को अधिसूचित किया गया है। योजना का लाभ ऋणी एवं अऋणी किसान, भू-धारक, बटाईदार तथा वनपट्टाधारी किसान उठा सकते हैं। जिले में बीमा कार्य संपादित करने के लिए बजाज अलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अनुबंधित किया गया है।

किस फसल पर कितना प्रीमियम?

कृषि विभाग के अनुसार अनाज, दलहन और तिलहन फसलों के लिए कुल बीमित राशि का 2 प्रतिशत तथा लघुधान्य (मिलेट्स) फसलों के लिए 1 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है:

फसल का नाम,बीमित राशि (प्रति हेक्टेयर),निर्धारित प्रीमियम

 

फसल का नामबीमित राशि (प्रति हेक्टेयर)निर्धारित प्रीमियम
धान (सिंचित)₹66,000₹1,320
धान (असिंचित)₹49,500₹990
मूंगफली₹51,700₹1,034
मक्का₹50,600₹1,012
अरहर₹46,200₹1,012
उड़द / मूंग₹27,500₹550
कुटकी₹20,900₹209
कोदो₹19,800₹198
रागी₹18,700₹187

आवेदन प्रक्रिया व दस्तावेज

अऋणी किसान अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बी-1, पी-2 और फसल बुवाई प्रमाण पत्र के साथ नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC), संबंधित बैंक शाखा या लोक सेवा केंद्र में जाकर आवेदन कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी तेज: 24 जुलाई को होगी विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेजी से बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में UCC का कानूनी प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली औपचारिक बैठक 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्य सचिव विकास शील के कक्ष में होगी।


सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस की अध्यक्षता में बनी है कमिटी

इस हाई-लेवल समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:

  • शत्रुघ्न सिंह (पूर्व IAS अधिकारी, उत्तराखंड)
  • एम. के. रावत (पूर्व IAS अधिकारी, छत्तीसगढ़)
  • मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता)
  • ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्य)

बैठक का मुख्य एजेंडा

कानूनी ढांचे का अध्ययन: समिति राज्य में मौजूदा नागरिक कानूनों और UCC लागू करने की व्यावहारिक संभावनाओं का विस्तार से विश्लेषण करेगी।

प्रमुख मुद्दों का समावेशन: ड्राफ्ट तैयार करते समय विवाह, तलाक, भरण-पोषण (मंथली मेंटेनेंस), उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और गोद लेने (दत्तक ग्रहण) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट: व्यापक अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद समिति अपनी विस्तृत सिफारिशें एवं ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का विधायी कदम उठाया जाएगा।

इस बैठक को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक पहला और बेहद महत्वपूर्ण औपचारिक कदम माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय: आज कई जिलों में बारिश के आसार, मौसम विभाग का 'बिजली गिरने' का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रायपुर केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, आज प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।


मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात (बिजली गिरने) की स्थिति बन सकती है। खराब मौसम को देखते हुए विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और बेवजह यात्रा न करने की सलाह दी है।

बीते 24 घंटों में बदला मौसम, तापमान में आई गिरावट

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मध्यम दर्ज की गई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। रायपुर और सरगुजा संभाग के कुछ इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे तापमान में भी गिरावट आई है।

कम बारिश से चिंता, पर आगे उम्मीद:

चालू मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे इस कमी की भरपाई हो सकती है।

अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान

मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार, प्रदेश में 21 से 26 जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

बारिश की संभावना: अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश।

राहत: रुक-रुक कर होने वाली बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी।

विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर  :  शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रभावना का विकास करना है। शिक्षा संस्कारित समाज, सशक्त राष्ट्र और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है।


राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अधोसंरचना, तकनीकी संसाधन और समान अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की नई पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जामगांव (एम) में आयोजित राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026-27 को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय में पहली बार प्रवेश लेने वाले नन्हे बच्चों का तिलक लगाकर एवं मुंह मीठा कराकर आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को स्नेह पूर्वक आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे मन लगाकर अध्ययन करें, बड़े सपने देखें और अपने ज्ञान, प्रतिभा एवं संस्कारों से परिवार, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की मुस्कान और उनकी आंखों में बसे सपने ही विकसित छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कक्षा पहली, छठवीं एवं नवमी के चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, गणवेश एवं स्कूल बैग वितरित किए। साथ ही कक्षा नवमी की छात्राओं को साइकिल प्रदान कर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने राष्ट्रीय साधन सह प्रवीण्य छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी क्षेत्र या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती, आवश्यकता केवल सही अवसर और उचित मार्गदर्शन की होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को केवल बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक और समावेशी बना रही है। प्रदेश के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, समय पर निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश वितरण, अतिरिक्त पौष्टिक आहार, नियमित पालक-शिक्षक बैठक, न्योता भोज और भारतीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न नवाचारों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का वातावरण तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। आज प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है। दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। बस्तर के जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन हब विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वहां के बच्चों को भी बड़े शहरों जैसी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, 24 नालंदा परिसर विकसित किए जा चुके हैं तथा दिल्ली में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए 200 सीटों की छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग जिले के लिए शिक्षा एवं खेल अधोसंरचना से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के स्थान पर आधुनिक कम्पोजिट कार्यालय भवन के निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही दुर्ग शहर में सर्वसुविधायुक्त आधुनिक ऑडिटोरियम, खेल प्रतिभाओं के लिए फुटबॉल मैदान सह एथलेटिक्स ट्रैक तथा नीट एवं जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए 100-100 सीटर छात्र एवं छात्रा छात्रावास स्थापित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने विद्यालय की खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोल से जुड़े मॉडलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और नवाचार ही भविष्य के भारत की पहचान होंगे और राज्य सरकार बच्चों में विज्ञान एवं तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने विद्यालय परिसर में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत कटहल, सिंदूरी एवं मौलश्री के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के साथ न्योता भोज में भी सहभागिता की और आत्मीय संवाद करते हुए उनके अध्ययन, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय साधन सह प्रावीण्य छात्रवृत्ति परीक्षा में राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कु. पायल रजनी, सातवां स्थान प्राप्त करने वाले नैतिक आमटे तथा दसवां स्थान प्राप्त करने वाली कु. श्रद्धा इंदौरिया को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से कंप्यूटर शिक्षा का विस्तार कर रही है। बालिकाओं के लिए आठ हजार से अधिक नए शौचालयों का निर्माण, भाषा एवं गणितीय दक्षता बढ़ाने के विशेष अभियान तथा भारतीय संस्कृति एवं महापुरुषों के जीवन से विद्यार्थियों को जोड़ने जैसे नवाचार शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में निजी विद्यालयों की तर्ज पर शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पहले ही दिन सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें एवं गणवेश उपलब्ध हो सकें।

इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चंद्राकर, साजा विधायक  ईश्वर साहू, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पाण्डेय, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष  जितेन्द्र साहू, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, दुर्ग संभाग आयुक्त श्री सत्यनारायण राठौर, पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिषेक शांडिल्य, समग्र शिक्षा आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, कलेक्टर  अभिजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ - मंदिरों में चोरी करने वाले अंतर-जिला गिरोह का पर्दाफाश, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

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 मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में मंदिरों को निशाना बनाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। लालपुर थाना क्षेत्र के दो प्रमुख मंदिरों में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से करीब 1.75 लाख रुपये मूल्य के देवी-देवताओं के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के दो अन्य सदस्य पहले से ही जेल में बंद हैं।


महामाया मंदिरों को बनाया था निशाना

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, लालपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कंतेली और कोदवाबानी स्थित महामाया मंदिरों में बीते दिनों चोरी की बड़ी वारदात हुई थी। शातिर चोरों ने मंदिरों के ताले तोड़कर गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं के कीमती सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामग्रियां पार कर दी थीं। घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी।

सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से मिली सफलता

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) भोजराम पटेल के निर्देशन में साइबर सेल और लालपुर थाना पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था। टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तकनीकी साक्ष्यों (साइबर डेटा) का विश्लेषण किया और मुखबिरों को सक्रिय किया। पुख्ता इनपुट के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी अश्वनी आहिरे और चंपा बाई गोस्वामी को धर दबोचा।

पड़ोसी जिले कबीरधाम में भी की थी वारदात

पुलिस कस्टडी में हुई कड़ी पूछताछ में दोनों आरोपियों ने मुंगेली के अलावा पड़ोसी कबीरधाम (कवर्धा) जिले के सिल्हाटी स्थित महादेव मंदिर में भी चोरी की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह अंतर-जिला स्तर पर सक्रिय रहकर धार्मिक स्थलों को निशाना बना रहा था।

दो साथी पहले से हैं जेल में, जांच जारी

लालपुर पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े दो अन्य आरोपियों को पूर्व में ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। वहीं, ताजा कार्रवाई में पकड़े गए दोनों आरोपियों को भी स्थानीय न्यायालय में पेश कर रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क और इनसे जुड़े अन्य संदिग्धों को लेकर जांच अभी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में बड़ा पुलिस फेरबदल: भारी संख्या में ASP और DSP अफसरों के तबादले, देखें किसे कहां मिली जिम्मेदारी

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 Police Transfer : छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महकमे में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) और उप पुलिस अधीक्षकों (DSP) के बड़े पैमाने पर तबादले (Police Transfer) कर दिए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी इस नवीन सूची के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।


शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विभिन्न जिलों में लंबे समय से जमे या मैदानी आवश्यकताओं के मद्देनजर अफसरों की नई पदस्थापना की गई है।

प्रशासनिक कसावट की कवायद

माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला कानून-व्यवस्था की स्थिति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और पुलिसिंग में नई ऊर्जा फूंकने की दिशा में एक अहम कदम है। स्थानांतरण सूची में शामिल सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने वर्तमान पदभार से मुक्त होकर नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। (Police Transfer)









 


मोबाइल पर बात करना पड़ा भारी: मालगाड़ी की चपेट में आने से युवक का पैर कटा, हालत नाजुक

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 कोरबा। पवन टॉकीज फाटक के पास रविवार रात मोबाइल फोन का इस्तेमाल एक 22 वर्षीय युवक के लिए काल बन गया। कान में मोबाइल लगाए रेलवे ट्रैक पार कर रहा युवक तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गया। इस हृदयविदारक हादसे में युवक का एक पैर कटकर धड़ से अलग हो गया। गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।


लोको पायलट की चेतावनी रही बेअसर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बरमपुर निवासी रोशन पटेल (22) रविवार रात पटरी पार करते समय फोन पर बातचीत में पूरी तरह मशगूल था। इसी दौरान आ रही मालगाड़ी के लोको पायलट ने युवक को देख लिया था। चालक ने दुर्घटना टालने के लिए काफी दूर से ही लगातार हॉर्न बजाया और चिल्लाकर आवाज भी दी, लेकिन मोबाइल में खोए होने के कारण रोशन को न तो हॉर्न सुनाई दिया और न ही चालक की चेतावनी। पलक झपकते ही वह ट्रेन की चपेट में आ गया।

तड़पता रहा युवक, 108 एंबुलेंस ने पहुंचाया अस्पताल

ट्रेन की तेज आवाज और चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पटरी पर युवक लहुलुहान हालत में तड़प रहा था और उसका पैर कटकर दूर जा गिरा था। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए 108 संजीवनी एक्सप्रेस को सूचित किया। मौके पर पहुंची एंबुलेंस से घायल को फौरन अस्पताल भिजवाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक अत्यधिक खून बह जाने के कारण युवक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।

पुलिस ने मोबाइल किया जब्त, जांच शुरू

घटना की भनक लगते ही कोतवाली पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से युवक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जो हादसे के वक्त भी चालू स्थिति में था। शुरुआती जांच में पुलिस इसे पूरी तरह से लापरवाही का मामला मान रही है। पुलिस ने पीड़ित के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है और मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है।

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी: 4 से 60 साल के लोगों को मिलेगा 'क्यूडेंगा' का सुरक्षा कवच

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 नई दिल्ली: मानसून की दस्तक के साथ ही देश में मच्छरों से होने वाली बीमारियों, खासकर डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इस जानलेवा बीमारी के बढ़ते जोखिम के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय दवा नियामक ने जापान की प्रमुख दवा कंपनी 'टाकेडा फार्मास्युटिकल' की डेंगू वैक्सीन QDENGA (क्यूडेंगा) को मंजूरी दे दी है। यह भारत में स्वीकृत होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है।


चारों वेरिएंट्स से मिलेगी सुरक्षा, टेस्ट की जरूरत नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'क्यूडेंगा' एक टेट्रावैलेंट लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रकारों (सीरोटाइप) से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। इस वैक्सीन में वायरस के बेहद कमजोर रूप का इस्तेमाल किया गया है, जो शरीर को बिना बीमार किए उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाता है।

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले व्यक्ति को यह जांच कराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होगी कि उसे भूतकाल में कभी डेंगू हुआ था या नहीं। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जा सकेगी।

भारत में तेजी से बढ़े हैं मामले

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दशकों के भीतर भारत में डेंगू के मामलों में लगभग 11 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देश में डेंगू के 32,000 से अधिक मामले सामने आए थे, जबकि इससे पहले साल 2023 में 18,391 मामले रिपोर्ट किए गए थे। गंभीर स्थिति में डेंगू आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) का कारण बनता है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता रहा है।

बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी: भारत में होगा बंपर उत्पादन

भारत की विशाल आबादी तक इस वैक्सीन को पहुंचाने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए टाकेडा ने भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी की है।

इस समझौते के तहत:

सालाना उत्पादन: बायोलॉजिकल-ई भारत में हर साल लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) डोज तैयार करने की क्षमता विकसित करेगी।

वैश्विक लक्ष्य: इस साझेदारी की मदद से टाकेडा दशक के अंत तक दुनिया भर में हर साल 10 करोड़ (100 मिलियन) डोज बनाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहली वैक्सीन की मंजूरी से भारत में हर साल जुलाई से अक्तूबर के बीच अस्पतालों पर बढ़ने वाला दबाव काफी कम होगा और डेंगू की रोकथाम के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा।

धमतरी मॉडल बना देश के लिए प्रेरणा

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 धनंजय राठौर संयुक्त संचालक

शशिरत्न पाराशर उप संचालक



रायपुर : छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा रायपुर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में एक विशेष योजना चलाई जा रही है। इसके तहत, अनुपयोगी पड़ी घरों की बाड़ी में महिलाओं को सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे निरूशुल्क दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें घर पर ही नियमित आय मिल रही है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की महिलाओं द्वारा अनुपयोगी भूमि और यहाँ तक कि बेकार नाले के पानी का उपयोग कर औषधीय पौधे उगाने की कई प्रेरक पहलें देखने को मिली हैं। इन प्रयासों से न केवल बंजर जमीन हरी-भरी हो रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य का लाभ भी मिल रहा है।



“जहां कभी अनुपयोगी भूमि थी, वहां आज औषधीय पौधों की हरियाली लहरा रही है। जहां महिलाएं केवल पारंपरिक खेती तक सीमित थीं, वहीं आज वे लाखों रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।” यह केवल एक जिले की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि नवाचार का ऐसा मॉडल है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला आज औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। यहां कृषि, आजीविका, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को साकार करता है।

परंपरागत खेती से नवाचार की ओर

धमतरी कृषि प्रधान जिला है। यहां की अधिकांश आबादी धान आधारित खेती पर निर्भर रही है। हालांकि धान उत्पादन जिले की पहचान है, लेकिन सीमित आय, प्राकृतिक जोखिम और अनुपयोगी भूमि की चुनौती लंबे समय से बनी हुई थी। महानदी के किनारे की रेतीली भूमि, कटाव प्रभावित क्षेत्र और ग्राम पंचायतों की अनुपयोगी जमीन आर्थिक दृष्टि से पर्याप्त उपयोग में नहीं आ पा रही थी। ऐसे समय में जिला प्रशासन ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का निर्णय लिया। सोच स्पष्ट थीकृयदि अनुपयोगी भूमि पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनकी बाजार में स्थायी मांग हो, जिनमें लागत कम और लाभ अधिक हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।

दूरदर्शी नेतृत्व और समन्वित प्रयास

वर्ष 2025 में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) तथा राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण की अभिनव पहल प्रारंभ की। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे केवल कृषि कार्यक्रम नहीं माना गया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका का व्यापक मिशन बनाया गया। योजना के प्रारंभिक चरण में जिले का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। अनुपयोगी भूमि, रेतीले क्षेत्र और कम उत्पादक भूमि की पहचान कर वहां औषधीय खेती की संभावनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।

खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध


महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान का केंद्र बनाया गया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई। महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित फील्ड सपोर्ट दिया गया। सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था रहीकृशत-प्रतिशत बाय-बैक, जिससे किसानों और महिलाओं को अपने उत्पाद के विपणन की चिंता नहीं रही।

150 एकड़ से शुरू हुआ परिवर्तन

प्रथम चरण में लगभग 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को जोड़ा गया। लगभग 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच तथा 40 एकड़ में लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली का रोपण किया गया। कुछ ही समय में परिणाम सामने आने लगे। जो भूमि पहले अनुपयोगी मानी जाती थी, वहीं से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त होने लगी। महिलाओं ने इस आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतों, कृषि उपकरणों की खरीद और छोटे व्यवसाय शुरू करने में किया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

बदलती जिंदगी, बदलती सोच

आदर्श महिला कृषक समूह कंडेल सत्या ढीमर बताती हैं कि पहले उनकी पूरी निर्भरता धान की खेती पर थी। औषधीय खेती के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, पौध सामग्री और खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था ने उनका भरोसा बढ़ाया। आज उनकी आय कई गुना बढ़ चुकी है। समूह पूना साहू ,श्रीमती कुंती ढीमर कहती हैं कि इस योजना ने केवल आय ही नहीं बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दिया है। अब वे बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

किसान श्री अशोक नेताम बताते हैं कि कम पानी वाली भूमि में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें उम्मीद से कहीं अधिक सफल साबित हुई हैं। अब जिले के अनेक किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय खेती को भी अपनाने लगे हैं।

लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई गति

छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य में ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देने के लिए कृषि, वनोपज, पशुपालन और ग्रामीण उद्यमिता को एकीकृत किया जा रहा है।

धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इसी सोच का प्रभावी उदाहरण है। इस पहल ने महिलाओं को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट विजन है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थानीय संसाधनों पर आधारित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाया जाए। औषधीय एवं सुगंधीय फसलों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केवल खेती नहीं, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का विकास

धमतरी मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही भविष्य में औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), आवश्यक तेल (म्ेेमदजपंस व्पस) निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होते हैं, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, परिवहन लागत घटेगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। यह ग्रामीण औद्योगिकीकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

राष्ट्रीय पहचान बना धमतरी मॉडल

धमतरी के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित महाकुंभ-2025 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि जागरण के संयुक्त मंच पर जिले को औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के कृषिकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इसके बाद हैदराबाद, बिहार, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के किसान, अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाएं और विभिन्न संगठन धमतरी पहुंचकर इस मॉडल का अध्ययन करने लगे। आज धमतरी का मॉडल देश के अनेक जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

500 एकड़ विस्तार की नई उड़ान

प्रथम चरण की सफलता के बाद अब लक्ष्य इस पहल को 500 एकड़ तक विस्तारित करने का है। इसके माध्यम से 500 से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, बिहान तथा अन्य विभागों के समन्वय से चारों विकासखंडों में प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि अधिकाधिक किसान और महिला समूह इस अभियान से जुड़ सकें।

पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा का माध्यम

औषधीय खेती का महत्व केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं है। ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास और अन्य औषधीय पौधे स्वास्थ्य परंपरा को भी मजबूत करते हैं। इन फसलों से भूमि संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जैव विविधता का संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की अनुकूलन क्षमता भी बढ़ती है। आज जब पूरी दुनिया टिकाऊ कृषि (ैनेजंपदंइसम ।हतपबनसजनतम), प्राकृतिक खेती और जैव विविधता संरक्षण की बात कर रही है, तब धमतरी का यह मॉडल इन सभी उद्देश्यों को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में प्रेरक पहल

धमतरी की यह सफलता बताती है कि जब दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन, वैज्ञानिक तकनीक, महिला शक्ति और स्थानीय संसाधनों का समन्वय होता है, तब विकास की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। यह मॉडल केवल औषधीय खेती का नहीं, बल्कि ग्रामीण नवाचार, महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का जीवंत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय संसाधनों पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए सतत कार्य कर रही है। धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इन प्रयासों का उत्कृष्ट प्रतिफल है।

आज धमतरी जिला ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के हाथों में नई संभावनाएं सौंपकर भी संभव है। औषधीय खेती की यह हरियाली केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर गांवों, सशक्त महिलाओं, समृद्ध किसानों और विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन चुकी है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल निश्चित रूप से देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

CG NEWS : प्रेमी की सड़क हादसे में मौत से टूटी प्रेमिका, सदमे में लगाई फांसी

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सूरजपुर (छत्तीसगढ़)। जिले के करंजी चौकी क्षेत्र के राई गांव से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। एक सड़क दुर्घटना में प्रेमी की असमय मौत का सदमा उसकी प्रेमिका सहन नहीं कर सकी। प्रेमी की मौत के अगले ही दिन युवती ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस दोहरे हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।


शादी के देख रहे थे सपने, नियति को कुछ और था मंजूर

पुलिस के अनुसार, राई गांव निवासी युवती सुनीता पैकरा क्षेत्र के ही एक युवक वीरपाल से बेहद प्यार करती थी। दोनों भविष्य में विवाह कर साथ जीवन बिताने के सपने देख रहे थे। लेकिन बीते दिनों एक भीषण सड़क हादसे में वीरपाल की मौत हो गई। इस आकस्मिक घटना ने सुनीता को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया।

गुमसुम रहने के बाद उठाया आत्मघाती कदम

परिजनों ने पुलिस को बताया कि वीरपाल की मौत की खबर सुनने के बाद से ही सुनीता गहरी उदासी और मानसिक तनाव में चली गई थी। उसने लोगों से बातचीत करना बंद कर दिया था। घटना वाले दिन जब घर पर कोई नहीं था, तब उसने सूने मकान में फांसी लगा ली। जब परिजन घर लौटे तो उनके होश उड़ गए।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सूरजपुर एसडीओपी अभिषेक पैकरा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पुलिस मर्ग कायम कर सभी पहलुओं से मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ में महिला का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म, पार्क के पास मिली बेसुध

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 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला अस्मिता को तार-तार करने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। कांकेर जिले की रहने वाली एक महिला का अपहरण कर तीन अज्ञात दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को बालोद-दल्लीराजहरा मुख्य मार्ग पर स्थित पर्यावरण पार्क के पास बेसुध हालत में छोड़कर फरार हो गए।


डायल-112 की मदद से पहुंचाया अस्पताल

राहगीरों की सूचना पर पहुंची डायल-112 की टीम ने बेसुध महिला को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। होश में आने के बाद पीड़िता ने पुलिस को आपबीती सुनाई। महिला के बयानों के आधार पर बालोद थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच और पीड़िता के बयान के अनुसार, वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी ट्रक चालक बताए जा रहे हैं।

बारीकी से हो रही जांच: एडिशनल एसपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद हो गया है। एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि पीड़िता कांकेर जिले की निवासी है। उसके बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है। घटना में तीन आरोपी शामिल हैं, जिनकी पहचान और धरपकड़ के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'राम-नामी' को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय गौरव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रामनामी समाज की अनूठी परंपरा हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छत्तीसगढ़ के अद्वितीय रामनामी समुदाय की समृद्ध विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'राम-नामी' को 'सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री' का राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति तथा पूरी टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनामी समाज की अनूठी परंपरा श्रद्धा, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। इस विरासत को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का कार्य इस डॉक्यूमेंट्री ने किया है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय एवं लोक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत तथा प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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