Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

छत्तीसगढ़ को मिलेगी पहली राजकीय तितली: 31 अगस्त तक जनता करेगी ऑनलाइन मतदान, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ जल्द ही अपनी पहली राजकीय तितली (State Butterfly) घोषित करने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस अनूठी पहल के तहत प्रदेशवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन जनमत संग्रह (Public Voting) शुरू किया है। नागरिक 31 अगस्त तक अपनी पसंद की तितली के पक्ष में मतदान कर सकेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य केवल राज्य की राजकीय तितली का चयन करना ही नहीं, बल्कि लोगों में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और तितलियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। तितलियां स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की पहचान मानी जाती हैं और परागण (Pollination) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वन विभाग का मानना है कि इस पहल से प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार ने सभी नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान कर इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।

राजकीय तितली की घोषणा के बाद यह प्रजाति छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगी और वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जनजागरूकता अभियानों में भी विशेष स्थान पाएगी।

आप निम्नलिखित तीन तितलियों में से अपनी पसंदीदा तितली को वोट दे सकते हैं:

1. ऑरेंज ओकलीफ

2. कॉमन बैंडेड पीकॉक

3. स्पॉट स्वॉर्डटेल

🗳️ वोट करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

https://forms.gle/7Mqa1kBLx4dnFA6b7

आपका एक वोट छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देगा। कृपया स्वयं मतदान करें तथा इस संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समूहों में अधिक से अधिक साझा करें।

“आपकी पसंद—छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली!” 🦋🌿

आज देवशयनी एकादशी: चातुर्मास का शुभारंभ, भगवान विष्णु की आराधना में लीन हुए श्रद्धालु

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चार माह तक चलने वाले चातुर्मास का शुभारंभ होता है।

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रख रहे हैं तथा सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर विशेष भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग का आयोजन भी किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के देवउठनी एकादशी पर जागृत होने के साथ ही शुभ एवं मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है।

धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं से विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा करने तथा जरूरतमंदों की सहायता एवं दान-पुण्य करने का भी आह्वान किया है।

देशभर में भारी बारिश का अलर्ट: कई राज्यों में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संबंधित जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। नागरिकों से मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

बिहार बंद आज: शिक्षा सुधार और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का बड़ा आंदोलन, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

No comments Document Thumbnail

पटना- ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों के आह्वान पर आज बिहार बंद का आयोजन किया गया है। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

बंद को देखते हुए पटना समेत कई जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और ट्रैफिक संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है। 

प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सत्य साई ग्राम के सेवा मॉडल को बताया जनकल्याण का प्रेरक उदाहरण

No comments Document Thumbnail

शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई सार्थक चर्चा, छत्तीसगढ़ में सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

No comments Document Thumbnail

कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने कहा

रायपुर- लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आज आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न संभागों के कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार और जेल अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक में जुड़े।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में प्रदेश की विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन बैरकों, बाउंड्रीवॉल्स, शौचालयों और वॉच टॉवर्स के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ ही सभी जेलों के अधीक्षकों से निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने को कहा।

बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और जेल अधीक्षकों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्रियों के परिवहन की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षकों को श्रमिकों को रोज काम के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नए बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मैदानी अधिकारियों, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को तेज गति से काम कर कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने को कहा।

इन कार्यों की हुई समीक्षा

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर के नगोई में 1500 आवास क्षमता के विशेष जेल, जिला जेल धमतरी और गरियाबंद में बाउंड्रीवॉल, जिला जेल जांजगीर, रामानुजगंज, सूरजपुर, कांकेर, संजारी-बालोद तथा उप जेल सारंगढ़ में बैरक निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागीय सचिव ने कवर्धा उप जेल में मुख्य दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य, केन्द्रीय जेल अंबिकापुर और जगदलपुर में कैदियों के लिए बैरक एवं शौचालय निर्माण, जिला जेल दंतेवाड़ा में शौचालय निर्माण, जिला जेल सुकमा की मुख्य दीवारों के चारों ओर कंसर्टीना वायर फेंसिंग तथा वॉच टॉवर निर्माण एवं उप जेल बीजापुर में वॉच टॉवर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

जगदलपुर केंद्रीय जेल में गूंजी शहनाई, दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी-प्रेमिका ने मंडप में लिए सात फेरे

No comments Document Thumbnail

 जगदलपुर : बस्तर जिले की केंद्रीय जेल परिसर में एक अनोखा विवाह संपन्न हुआ, जो इस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के विशेष निर्देश पर दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद एक युवक ने अपनी प्रेमिका के साथ जेल के भीतर बने मंडप में वैदिक रीतियों के अनुसार सात फेरे लिए।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया और मनमती कश्यप के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। दोनों अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते हैं, जिसके चलते युवती के परिजन इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुरेश के खिलाफ दुष्कर्म (Rape) की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कोर्ट में युवती ने ली प्रेमी की तरफदारी

सुरेश के जेल जाने के बाद मामले में नया मोड़ तब आया, जब युवती ने खुद अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। युवती ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि वह सुरेश से अपनी मर्जी से प्रेम करती है और उसी के साथ अपना जीवन बिताना चाहती है। इसके साथ ही उसने अदालत से विवाह की अनुमति देने का अनुरोध किया।

जेल प्रशासन की निगरानी में हुआ विवाह

युवती के बयान और परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को विवाह कराने के निर्देश जारी किए। आदेश मिलते ही केंद्रीय जेल परिसर में पहली बार विवाह मंडप सजाया गया। कड़े प्रशासनिक पहरे और कानूनी औपचारिकताओं के बीच दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम है नंदनवन जंगल सफारी

No comments Document Thumbnail

 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

अशोक कुमार चंद्रवंशी -सहायक जनसंपर्क अधिकारी


नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।


छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।


मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर

 
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।
 
इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।
 

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर

 
नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
 
विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
 

पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र

 
नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।
 

शाकाहारी सफारी

 
30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।

भालू सफारी

 
20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।

बाघ सफारी

 
20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
 

सिंह सफारी

 
20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।

 

जू जोन

 
50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।
 

दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण

 
नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
 

देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक

 
वनमंडलाधिकारी  थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
 

जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का केंद्र

 
नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
 

रायपुर से आसान पहुंच

 
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
 

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र

 
 
      नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है l

छत्तीसगढ़ में 11 कछुओं के साथ तस्कर गिरफ्तार, भेजा गया जेल

No comments Document Thumbnail

 पखांजूर (छत्तीसगढ़) : कांकेर जिले के पखांजूर में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। कापसी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत वन स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने ग्राम पीवी-124 के साप्ताहिक बाजार में छापेमारी कर 11 जीवित कछुओं के साथ एक तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।


पकड़ा गया आरोपी ग्राम पीवी-117 का निवासी दीपांकर राय बताया जा रहा है, जो बाजार में अवैध रूप से कछुओं की बिक्री कर रहा था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से बरामद किए गए 11 जीवित कछुओं का कुल वजन 7 किलोग्राम 10 ग्राम दर्ज किया गया है। वन विभाग की टीम ने कछुओं को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर आवश्यक वन्यजीव संरक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है।

न्यायालय के आदेश पर भेजा गया जेल

वन अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत (रिमांड) में जेल भेज दिया गया है।

वन विभाग की अपील:

वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि जैव विविधता और संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए यदि कहीं भी वन्यजीवों की अवैध खरीद-बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले, तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

राज्यपाल डेका से निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने की भेंट

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति गजराज पगारिया, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।

सीएसआर साझेदारी से पोषण और बाल विकास कार्यक्रमों को मिलेगी नई गति

No comments Document Thumbnail

महिला एवं बाल विकास विभाग ने उद्योगों के साथ बनाई दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति

"आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे" – प्रमुख सचिव शहला निगार

आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, कुपोषण उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और नवाचार आधारित परियोजनाओं पर विस्तृत मंथन

रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से राज्य में पोषण, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से आज सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उद्योगों से विभाग के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा, "आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।"

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग तीन प्रमुख आयामों—महिला सशक्तिकरण, बच्चों का संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण—पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, पोषण संवर्धन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।

बैठक में विभाग द्वारा तैयार की गई संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।

बैठक के दौरान उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि व्यक्त करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए। यह निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। विभाग इसके लिए उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समन्वय एवं समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 'पंखुड़ी' पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन द्वारा 'सर' (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी: वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन से कृषि को मिल रही नई दिशा

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत की कृषि व्यवस्था की नींव मानी जाने वाली मिट्टी को सुरक्षित और उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से देश में खेती को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।


देश के कुल 306.65 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 59 प्रतिशत भूमि कृषि के अंतर्गत आती है। ऐसे में मिट्टी की गुणवत्ता सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। इसी उद्देश्य से सरकार मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दे रही है।

25.89 करोड़ से अधिक किसानों को मिला मृदा स्वास्थ्य कार्ड

किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक पोषक स्थिति की जानकारी देने के लिए चलाई जा रही मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 25.89 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना के माध्यम से किसानों को फसल के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी जा रही है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत में भी कमी आ रही है।

प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत मार्च 2026 तक देशभर में 18,786 क्लस्टरों में 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया जा चुका है। इस अभियान से 18 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है।

'खेत बचाओ अभियान' से बढ़ी किसानों की जागरूकता

संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत देशभर में हजारों प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर और खेत प्रदर्शन आयोजित किए गए। इस अभियान से करीब 1.07 करोड़ किसानों और अन्य हितधारकों तक सीधा संदेश पहुंचा, जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से लगभग 4.5 करोड़ लोगों को जोड़ा गया।

AI और डिजिटल तकनीक बदल रही खेती की तस्वीर

अब खेती केवल पारंपरिक अनुभव पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकों पर भी आधारित हो रही है। सरकार भू-स्थानिक (Geospatial) मैपिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से किसानों को मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार सटीक सलाह उपलब्ध करा रही है। इससे उर्वरकों और पानी का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है तथा खेती अधिक लाभदायक बन रही है।

किसानों को मिला सीधा लाभ

झारखंड के धनबाद के किसान निरापदो गोराई ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया, जिससे प्रति एकड़ उर्वरक लागत में लगभग 720 रुपये की बचत हुई और धान की पैदावार 1,000 किलोग्राम से बढ़कर 1,320 किलोग्राम प्रति एकड़ हो गई। यह उदाहरण बताता है कि वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित हो रही है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो कृषि उत्पादन, किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से भारत टिकाऊ कृषि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रिश्तों का खून: दरिंदे पिता ने 14 वर्षीय बेटी को बनाया हवस का शिकार, गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 बालोद (गुंडरदेही) : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में मानवता और पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुंडरदेही थाना क्षेत्र अंतर्गत एक 37 वर्षीय कलयुगी पिता ने अपनी ही 14 वर्ष की नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म किया। आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर पिछले एक साल से इस घिनौनी वारदात को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के निर्देश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


डर के साए में बीता एक साल

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी पेशे से मजदूर है। पीड़िता ने बताया कि जब वह महज 13 वर्ष की थी, तब आरोपी ने पहली बार उसके साथ जबरन गलत काम किया था। इसके बाद वह लगातार पीड़िता को डरा-धमकाकर अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। आरोपी पीड़िता को धमकी देता था कि यदि उसने इस बात की जानकारी किसी को दी, तो वह उसे जान से मार डालेगा।

मां को बताई आपबीती, पहुंची थाने

लगातार हो रहे शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर नाबालिग ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और पूरी आपबीती अपनी मां को बताई। घटना की सच्चाई जानकर मां के होश उड़ गए। इसके बाद पीड़िता अपनी मां के साथ तुरंत गुंडरदेही पुलिस थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर आरोपी पिता को हिरासत में लिया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ी भाषा ला मिलिस नई पहचान, प्रकाशित होइस श्रीमद्भागवत गीता

No comments Document Thumbnail

 रायपुर / जांजगीर-चांपा: कहा जाता है कि यदि मन में अटूट लगन और जुनून हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। चांपा निवासी रवींद्र कुमार सोनी ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद कर इतिहास रच दिया है। यह पहला अवसर है जब भगवद्गीता छत्तीसगढ़ी में प्रकाशित हुई है, जिसे राज्य और राज्य की बोली के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


पेशे से ज्वेलर, पर साहित्य से गहरा लगाव

पेशे से सर्राफा व्यवसायी रवींद्र कुमार सोनी लंबे समय से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद ही उनके मन में श्रीमद्भगवद्गीता को छत्तीसगढ़ी भाषा में लाने का विचार आया था। इसके लिए उन्होंने लगातार 5 वर्षों तक पांडुलिपि तैयार की।

खुद की टाइपिंग और खुद ही तैयार किए चित्र

पांडुलिपि तैयार होने के बाद इसके प्रकाशन में कई व्यावहारिक कठिनाइयां आईं। छत्तीसगढ़ी के कठिन और विशिष्ट शब्दों के कारण कोई भी टाइपिस्ट टंकण के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे में रवींद्र सोनी ने हार नहीं मानी और स्वयं कंप्यूटर पर टाइपिंग सीखी। इतना ही नहीं, पुस्तक के लिए आवश्यक चित्रों को भी उन्होंने खुद ही तैयार किया और कंपोज़िंग की ज़िम्मेदारी भी उठाई। करीब 25 वर्षों की इस निरंतर तपस्या के बाद आखिरकार यह ग्रंथ प्रकाशित हो सका।

मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताया गर्व

रवींद्र कुमार सोनी ने इस ऐतिहासिक कृति की प्रति मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेंट की। मुख्यमंत्री ने उनकी 25 वर्षों की साधना की सराहना करते हुए इसे राजभाषा छत्तीसगढ़ी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला प्रयास बताया।

वहीं, जांजगीर-चांपा के विधायक व्यास कश्यप और स्थानीय नागरिकों ने भी रवींद्र सोनी को बधाई दी। चांपा वासियों का कहना है कि रवींद्र सोनी का यह योगदान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।

परिवार का मिला अटूट सहयोग

रवींद्र सोनी की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच उनके इस जुनून को समझते हुए परिवार ने उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया, जिससे यह ऐतिहासिक कार्य संभव हो सका।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की कवायद तेज़, ड्राफ्ट समिति की पहली बैठक आज

No comments Document Thumbnail

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। UCC के अध्ययन, सुझाव और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली आधिकारिक बैठक आज (24 जुलाई 2026) रायपुर में आयोजित हो रही है। यह बैठक दोपहर 12 बजे मुख्य सचिव विकास शील के कक्ष में शुरू होगी।


जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में मंथन

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। बैठक में समिति के अन्य प्रमुख सदस्य भी शामिल हो रहे हैं:

  • शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त IAS, उत्तराखंड)
  • एम.के. रावत (सेवानिवृत्त IAS, छत्तीसगढ़)
  • मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता)
  • ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचीर्य)

किन मुद्दों पर बनेगा नया रोडमैप?

समिति राज्य में लागू वर्तमान विधिक और कानूनी स्थिति का गहन अध्ययन करेगी। इसके साथ ही, निम्नलिखित मुख्य विषयों से जुड़े कानूनों और नियमों का एक साझा प्रारूप (Draft) तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा:

  • विवाह (Marriage) एवं तलाक (Divorce)
  • भरण-पोषण (Maintenance)
  • उत्तराधिकार व संपत्ति अधिकार (Inheritance)
  • गोद लेना / दत्तक ग्रहण (Adoption)
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.