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महानदी विवाद नहीं, छत्तीसगढ़-ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार बने : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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श्रमशक्ति भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़, ओडिशा की उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली- नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री  मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। यह किसानों, उद्योगों, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना से जुड़ी चिंताओं का सम्मान करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित अंचलों और भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक, व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल के वैज्ञानिक आकलन, कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा व्यवस्था तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम मुद्दों का समाधान किया जाए और केवल नीतिगत विषय ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाए जाएं।

साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से निष्पक्ष तकनीकी सहयोग, समयबद्ध कार्ययोजना तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महानदी विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और भाईचारे का सेतु बने।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और संवाद आधारित दृष्टिकोण ने वर्षों पुराने जटिल विषयों के समाधान का सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रक्रिया से दोनों राज्यों के किसानों, नागरिकों और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित होगा।

बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक रेल संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में  प्रमुख रेल परियोजनाओं को गति देने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से की विस्तृत चर्चा

रेल नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास का मजबूत आधार बनेगा : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडे उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।

बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।

बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं - सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) - को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी : बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और जनजातीय प्रतिनिधियों का हुआ विशेष सम्मान

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बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐसा वैभव देखने को मिला : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुँचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

रायपुर- बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।


इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।

प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।

राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।

बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम  छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं। 

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव - केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।

मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।

राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की अनुपम कलाकृति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को 'खोड़िया राजा' तथा मिटकी को 'गप्पा देई' के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान की सफल महिला सैन्य अधिकारियों को किया सम्मानित

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की नौकायन पोत आईएएसवी त्रिवेणी (IASV Triveni) पर सवार होकर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नामक पहले त्रि-सेवा (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) अखिल महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश लौटीं तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील की यात्रा कर चार महासागरों को पार करने वाली इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक और त्रि-सेवा संयुक्तता एवं समन्वय (Tri-service Jointness & Synergy) का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो देश के हर नागरिक को प्रेरित करेगा।

महिला अधिकारियों ने अभियान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा। इसी दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें भी प्रेरित किया है और यह सिद्ध करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों की क्षमता और आत्मविश्वास को “अद्भुत” बताते हुए कहा कि इस अभियान ने उन सभी रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जो यह मानती थीं कि महिलाएँ कठिन सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, “आपने साबित कर दिया है कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व किसी लिंग के बंधन में नहीं होते। भारत की हर बेटी अब आपसे प्रेरणा लेकर विश्वास कर सकती है कि वह भी महासागरों को पार कर दुनिया जीत सकती है।”

उन्होंने इस अभियान को ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी एक ही पोत पर, एक ही ध्वज के नीचे, एक साझा मिशन के लिए साथ आए। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

राजनाथ सिंह ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न देशों में भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमताओं और तकनीकी प्रगति का प्रभावी प्रदर्शन किया गया, जिससे दुनिया को यह संदेश मिला कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है।

इस अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोच्छर तथा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2026 को मुंबई में रक्षा मंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आईएएसवी त्रिवेणी का स्वागत (Flag-in) किया था। वहीं 11 सितंबर 2025 को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

करीब दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, सूक्ष्म योजना, 24×7 तटीय सहायता तंत्र और अनेक संस्थाओं के सहयोग से यह मिशन सफल हुआ। अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हुए सभी देशांतरों को पार किया, भूमध्य रेखा को दो बार, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया तथा केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे तीन महान केप्स का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया।

इसके अतिरिक्त, टीम ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ड्रेक पैसेज को पार कर केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई। यह सम्मान केवल उन नाविकों को दिया जाता है, जो इस कठिन समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करते हैं।

यह अभियान केवल एक समुद्री उपलब्धि नहीं, बल्कि सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) का भी प्रभावी माध्यम बना। विभिन्न देशों में ठहराव के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समुद्री परंपराओं, सैन्य पेशेवर उत्कृष्टता और मूल्यों का प्रदर्शन करते हुए मित्र देशों के साथ सद्भाव और सहयोग को और मजबूत किया।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को रेखांकित करेगी ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला

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'मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की सकारात्मक तस्वीर को कार्टून कला के माध्यम से मिलेगी नई अभिव्यक्ति

रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।

 इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।

कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।a

मलेरिया पर निर्णायक प्रहार जारी, एक भी मृत्यु न हो यही हमारा लक्ष्य : स्वास्थ्य मंत्री

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प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

रायपुर- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने  कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10  मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए  प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

राज्यसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, चर्चा के लिए 7 घंटे का समय निर्धारित

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 नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में सरकारी परीक्षाओं में धांधली रोकने से जुड़ा 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक' पेश किया गया। सदन में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए 7 घंटे का समय आवंटित किया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।


विधेयक पर विचार-विमर्श के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार और 2014 के बाद विपक्ष शासित राज्यों में हुई पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक निचले सदन (लोकसभा) से पहले ही पारित हो चुका है, जहाँ विपक्ष के हंगामे के बावजूद विस्तृत चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई थी। अब यह विधेयक मार्गदर्शन और परिपक्व निर्णय के लिए उच्च सदन के समक्ष आया है।

स्पेशल टास्क फोर्स 2-3 महीने में पूरी करेगी जांच

सदन को संबोधित करते हुए जितेंद्र सिंह ने बताया कि पेपर लीक मामलों की जांच के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अपनी जांच 2 से 3 महीने के भीतर पूरी करेगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में मोदी सरकार द्वारा मूल कानून लाए जाने से पहले, दशकों तक इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस और व्यापक कानूनी ढांचा क्यों तैयार नहीं किया गया था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट से 5 महीने में मिलेगा न्याय

नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। मामले में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है और अदालती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए संशोधन कानून के प्रभावी होने के बाद मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से की जाएगी और 5 महीने के भीतर फैसला आना तय होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले लोकसभा में हंगामे और नारेबाजी के बीच विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखा था, जिसके बाद निचले सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया था।

PoK में भारी हिंसा: सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 30 से अधिक की मौत, पूरे इलाके में इंटरनेट बंद

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 मुजफ्फराबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार और सेना के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने उग्र रूप ले लिया है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं। स्थिति को अनियंत्रित होते देख प्रशासन ने पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं।


डंडे और गोलियों से कार्रवाई, कई शव गायब करने के आरोप

सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया और सीधी गोलियां चलाईं। घटना के बाद बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि हिंसक कार्रवाई के बाद कई शवों को मौके से गायब कर दिया गया है।

12 विवादित सीटों और महंगाई को लेकर भड़का आक्रोश

यह आंदोलन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार अपनी पसंद का प्रधानमंत्री चुनने के लिए PoK की 12 सीटों में धांधली करती है। इसके अलावा, लगातार बढ़ती महंगाई, प्रशासनिक उपेक्षा और बुनियादी अधिकारों के हनन से तंग आकर आम नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं।

पाकिस्तान सरकार का सख्त रुख, बातचीत से इनकार

बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों को "दुश्मन" करार देते हुए किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। सरकार के सलाहकारों ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य की सत्ता को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त बल प्रयोग जारी रहेगा।

भारत ने जताया कड़ा ऐतराज

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार ने कहा है कि PoK में हो रहे प्रदर्शन वहां की जनता के आर्थिक शोषण और मानवाधिकारों के दमन का सीधा परिणाम हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर PoK के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के दमन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

CG NEWS : पुरानी रंजिश में युवक की चाकू मारकर हत्या, दोस्त घायल; आरोपी गिरफ्तार

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 डोंगरगढ़ (राजनांदगांव): डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के कश्मीरी पारा में पुरानी रंजिश को लेकर हुई हिंसक झड़प में एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। वारदात के बाद सक्रिय हुई डोंगरगढ़ पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


कश्मीरी पारा में डंडे और चाकू से हमला

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना 28 जुलाई की रात लगभग 9 बजे की है। शिकायतकर्ता शाहरुख खान अपने भाई फारुख खान और दोस्तों—सुमित विश्वकर्मा (उर्फ बोंगो) व धनु यादव (उर्फ धनेश) के साथ कश्मीरी पारा इलाके में मौजूद था। इसी दौरान पुरानी दुश्मनी के चलते आरोपी अभय निषाद हाथ में लकड़ी का डंडा लेकर वहां पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला कर दिया।

भागने के प्रयास में शाहरुख जमीन पर गिर गया, जिसके बाद आरोपी ने उसके सिर पर डंडे से वार किया। इसके तुरंत बाद आरोपी ने अपने पास छिपाकर रखे चाकू से धनु यादव के पेट पर घातक हमला कर दिया।

अस्पताल में तोड़ा दम

घटना के बाद गंभीर रूप से घायल धनु यादव को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल शाहरुख का इलाज जारी है।

BNS की धाराओं में मामला दर्ज, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 और डोंगरगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शाहरुख खान की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 419/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 एवं 103(1) में मामला दर्ज कर आरोपी अभय निषाद को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

अमानवीय: निजी स्कूल की शिक्षिका ने छात्र से 100 बार लिखवाईं अश्लील गालियां

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अंबिकापुर । छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल से एक सनसनीखेज और अमानवीय मामला सामने आया है। आरोप है कि दो छात्रों के बीच हुए मामूली विवाद के बाद एक शिक्षिका ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर छात्र से उसकी कॉपी में मां से जुड़ी अश्लील गालियां करीब 100 बार लिखवाईं। घटना के बाद छात्र मानसिक रूप से बेहद आहत है, वहीं परिजनों और छात्र संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच के आदेश दे दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के दौरान दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद संबंधित शिक्षिका ने एक छात्र को सजा देने के लिए कॉपी में कई पन्नों तक अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील भाषा लिखने को कहा। छात्र से मां के लिए इस्तेमाल होने वाली गालियां बार-बार लिखवाई गईं। घर पहुंचने पर जब परिजनों को इस बात की जानकारी मिली, तो वे सन्न रह गए।

परिजनों और छात्र संगठनों का विरोध

पीड़ित छात्र के परिजनों ने शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि:

"अनुशासन सिखाने के कई सकारात्मक रास्ते हो सकते हैं, लेकिन इस तरह की अश्लील भाषा लिखवाना नैतिक मूल्यों और शिक्षा के मंदिर की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। इससे बच्चे के मानसिक विकास पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।"

मामला सामने आते ही स्थानीय छात्र संगठनों ने भी स्कूल के बाहर विरोध दर्ज कराया और दोषी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।

जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा की जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल संज्ञान लिया है। विभाग के उप संचालक को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आते ही तथ्यों के आधार पर कड़े नियम-कायदों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षिका के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

सावन: शिव भक्ति, हरियाली और भारतीय संस्कृति का उत्सव

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"रिमझिम बरसती फुहारें, मिट्टी की सौंधी खुशबू, पेड़ों पर झूलों की मस्ती और 'हर-हर महादेव' के जयघोष..." यही है सावन की पहचान। श्रावण मास केवल हिंदू धर्म का एक पवित्र महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन का जीवंत उत्सव है।


बरसात की पहली बूंद जब धरती को स्पर्श करती है, तो सूखी वसुंधरा हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। खेतों में नई फसल की उम्मीद अंकुरित होती है, नदियां और तालाब जीवन से भर उठते हैं और प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेर देती है। यही कारण है कि सावन को नवजीवन, समृद्धि और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। तब से सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना करते हैं। सावन के सोमवार और कांवड़ यात्रा इस आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

सावन भारतीय लोक संस्कृति का भी सबसे रंगीन अध्याय है। गांवों में पेड़ों पर झूले पड़ते हैं, महिलाएं और युवतियां हरे परिधानों में सजकर कजरी और सावनी गीत गाती हैं। हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे पर्व सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक प्रेम और सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा देते हैं। यह महीना रिश्तों में अपनापन और जीवन में सकारात्मकता का संदेश लेकर आता है।

आज जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, तब सावन हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। हरियाली तभी बचेगी, जब हम पेड़ लगाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। भगवान शिव स्वयं प्रकृति के देवता माने जाते हैं, इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना भी उनकी सच्ची आराधना है।

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। आइए, इस पावन मास में भगवान शिव से यही प्रार्थना करें कि हमारे जीवन में शांति, समाज में सद्भाव और प्रकृति में सदैव हरियाली बनी रहे।

हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ!

वैश्विक प्रतिस्पर्धा रैंकिंग में भारत ने लगाई 25 स्थानों की छलांग, 82वें से 57वें स्थान पर पहुंचा

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नई दिल्ली- कॉम्पेटेरे फाउंडेशन की रिपोर्ट "इंडियाज़ नेक्स्ट ग्रोथ फ्रंटियर: रिड्यूसिंग एंटी-कम्पटीटिव मार्केट डिस्टॉर्शन्स टू बिल्ड ऑन इंडिया'स 2010–2023 रिफॉर्म प्रोग्रेस" के अनुसार, भारत ने वर्ष 2010 से 2023 के बीच वैश्विक रैंकिंग में 25 स्थानों की उल्लेखनीय छलांग लगाते हुए 82वें स्थान से 57वें स्थान पर पहुंचकर महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रगति बाजार संबंधी विकृतियों (Market Distortions) को कम करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा संरचनात्मक सुधारों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL) और कॉम्पेटेरे फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में यह रिपोर्ट जारी की गई।

रिपोर्ट में जीएसटी (GST), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), नियामकीय सुधार, व्यापार सुविधा प्रणालियों के आधुनिकीकरण तथा प्रतिस्पर्धा, निवेश, डिजिटल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े सुधारों को भारत की प्रगति का प्रमुख आधार बताया गया है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को प्रतिस्पर्धा नीति को और मजबूत करने, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश प्रतिबंधों की समीक्षा करने तथा वैश्विक व्यापार में नियामकीय बाधाओं को कम करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय सचिव एवं लद्दाख के राज्य निर्वाचन आयुक्त सुधांशु पांडेय ने मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि कॉम्पेटेरे फाउंडेशन के अध्यक्ष शंकर सिंघम ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में कानूनी, उद्योग, शैक्षणिक और नीति विशेषज्ञों ने भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और भविष्य के सुधारों पर चर्चा की।

छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का कहर: राजिम में बाढ़ जैसे हालात, कई मार्ग बंद, प्रशासन हाई अलर्ट पर

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 रायपुर। प्रदेशभर में बीते कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां और नाले उफान पर आने से गरियाबंद, दंतेवाड़ा और बीजापुर सहित कई जिलों का सड़क संपर्क टूट चुका है। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) जारी की है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों और आपदा राहत दलों (SDRF/NDRF) को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।


धार्मिक नगरी राजिम जलमग्न, कुलेश्वरनाथ मंदिर तक पहुंचा पानी

बारिश का सबसे व्यापक असर धार्मिक नगरी राजिम में देखने को मिल रहा है। गरियाबंद जिले में बीते 60 घंटों से जारी बारिश और सिकासेर जलाशय से लगभग 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके चलते त्रिवेणी संगम स्थित ऐतिहासिक बाबा कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पूरी तरह पानी से घिर गया है। सुरक्षा के लिहाज से श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

मार्ग बाधित: नेशनल हाईवे पर चढ़ा पानी, तेलंगाना संपर्क कटा

  • रायपुर-गरियाबंद मार्ग बंद: पैरी नदी के उफान पर होने से पंटोरा के पास नेशनल हाईवे-130C पर पानी भर गया है, जिससे रायपुर-गरियाबंद मार्ग पर वाहनों का परिचालन रोक दिया गया है। यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है।

  • अंतर्राज्यीय यातायात प्रभावित: बीजापुर जिले में नेशनल हाईवे-163 पर तारलागुड़ा के पास निर्माणाधीन पुल का डायवर्जन बह जाने से छत्तीसगढ़ का तेलंगाना से संपर्क कट गया है। इसके अलावा जल्लावागू नाले के उफान पर होने से भोपालपटनम के कई ग्रामीण इलाके कट गए हैं।

  • बस्तर में खतरे के निशान पर नदियां: दंतेवाड़ा के भैरमगढ़ स्थित पातरपारा पुल के ऊपर से तेज बहाव के कारण मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

राजधानी रायपुर में खारून नदी का जलस्तर बढ़ा

लगातार बारिश से राजधानी रायपुर के महादेव घाट पर खारून नदी का जलस्तर पुल के करीब पहुंच गया है। प्रशासन ने घाट क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है। शहर की निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति निर्मित होने से नगर निगम की टीमें निकासी कार्य में जुटी हैं।

प्रशासन की अपील:

जिला प्रशासन ने नागरिकों से उफान पर मौजूद नदी-नालों और रपटों को पार न करने की सख्त हिदायत दी है। किसी भी आपात स्थिति के लिए नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) के नंबर जारी किए गए हैं।

गांव में तालाब से अज्ञात युवती का शव बरामद, पहचान में जुटी पुलिस

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 रायपुर। राजधानी रायपुर से सटे अभनपुर थाना क्षेत्र के लखना गांव में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब गांव के बीच स्थित तालाब में एक अज्ञात युवती का शव तैरता हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।


बताया जा रहा है कि सुबह ग्रामीणों ने तालाब में एक शव तैरता देखा। नजदीक जाकर देखने पर पता चला कि शव एक युवती का है। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को बाहर निकलवाया और पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी (Missing) की रिपोर्टों का मिलान कर उसकी शिनाख्त का प्रयास कर रही है।

प्रारंभिक जांच में मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। ऐसे में पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि युवती की मौत डूबने से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक घटना है। इस संबंध में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है।

पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ घटनास्थल से मिले संभावित साक्ष्यों को भी खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल अज्ञात युवती का शव मिलने की इस घटना से लखना गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि मृतका की पहचान से संबंधित कोई जानकारी हो, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।

प्रिंसिपल ऑफ द ईयर समीर प्रधान का सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षा के मानवीयकरण में योगदान को सराहा

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा द्वारा 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर' से सम्मानित एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पटेवा के प्राचार्य समीर चंद्र प्रधान के सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों ने उनके 37 वर्षों के शैक्षणिक योगदान, मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका की सराहना की।

संकुल केंद्र खट्टा के प्रतिनिधि शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि समीर प्रधान का संपूर्ण शिक्षकीय जीवन शिक्षा के मानवीयकरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान ने विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, समय प्रबंधन, अनुशासन, चित्रकला, कविता, स्काउट-गाइड तथा जीवन विद्या अध्ययन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया। वे छुट्टी के दिनों में भी विद्यालय में गतिविधियां संचालित करते थे और कई बार स्वयं घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय लाने का कार्य भी करते थे।

उन्होंने बताया कि समीर प्रधान ने महासमुंद डीएमएस, स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा तथा मध्यप्रदेश के सागर सहित विभिन्न संस्थानों में लगभग 37 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्हें 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर', 'द बेस्ट प्रिंसिपल' तथा 'द मास्टर' सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्यों का उल्लेख अमेरिका की प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है।

गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण के दौरान दिल्ली में आयोजित नीति निर्माण समिति की बैठक में समीर प्रधान ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), रायपुर की ओर से लगभग 30 मिनट का प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसका भारत सरकार द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवाचार, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और समग्र शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करती है।

सम्मान समारोह में समीर प्रधान ने संकुल केंद्र खट्टा के प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, समन्वयक सुरेश कुमार साहू, वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया तथा सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने का प्रभावी माध्यम है तथा इसे विद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा ने समीर प्रधान को सिद्धांतनिष्ठ एवं आदर्श नीति निर्धारक बताया। वहीं प्राचार्य लिकेश कुमार साहू ने उन्हें शिक्षा के मानवीयकरण के लिए समर्पित प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया। समन्वयक सुरेश कुमार साहू ने उनके प्रशासनिक कौशल एवं व्यवहारिक नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम में दुलारी चंद्राकर, लखन साहू, चंद्रभान ध्रुव, तुलसी देवांगन सहित संकुल केंद्र खट्टा के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सितोष जुल्फे ने किया। समारोह के दौरान शिक्षकों ने समीर प्रधान के साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए उनके उज्ज्वल एवं प्रेरणादायी शिक्षकीय जीवन की सराहना की।

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