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लापरवाही का खूनी गड्ढा: तीन आदिवासी बच्चों की मौत से गांव में पसरा मातम

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 डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरतालाव के आश्रित ग्राम गांधीनगर में बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ रेलवे निर्माण कार्य के दौरान खोदे गए एक गहरे गड्ढे में भरे बारिश के पानी में डूबने से तीन मासूम आदिवासी बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। एक ही गांव के तीन बच्चों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और गांव में मातम पसरा हुआ है।


देर शाम मिले शव, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए

मिली जानकारी के अनुसार, मृत बच्चों की पहचान सार्थक कोकोटे (8 वर्ष, पिता कमलेश कोकोटे), कृष मंडावी (8 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) और दानेश मंडावी (6 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) के रूप में हुई है। तीनों बच्चे बुधवार दोपहर से लापता थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने गड्ढे के पानी से तीनों बच्चों के शवों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ की मर्चुरी भिजवाया।

ग्रामीणों का आरोप: बिना सुरक्षा इंतजामों के खुला छोड़ दिया गड्ढा

ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि रेलवे कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा यहाँ जेसीबी से गहरी खुदाई की गई थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद गड्ढे को वैसे ही खुला छोड़ दिया गया। हाल ही में हुई बारिश के कारण इस गड्ढे में भारी मात्रा में पानी भर गया था, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था। आशंका जताई जा रही है कि खेलते-खेलते बच्चे इस गड्ढे के पास पहुंच गए और पैर फिसलने या गहराई का पता न चलने के कारण डूब गए। घटना के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था।

शिक्षकों की हड़ताल का भी साया

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में चल रही शिक्षकों की हड़ताल के कारण बुधवार को स्कूल में बच्चों की देखरेख और नियमित व्यवस्था प्रभावित थी। सामान्य दिनों में शिक्षक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखते थे या उन्हें सुरक्षित छोड़ते थे। हालांकि, प्रशासन और पुलिस इस पहलू को भी जांच के दायरे में रख रहे हैं कि स्कूल बंद होने का इस हादसे से क्या संबंध है।

प्रशासन का आश्वासन: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस मुस्तैदी से जांच में जुट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में निर्माण एजेंसी या ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी भारी कीमत तीन मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य शुभारंभ; आज शाम 4 बजे खींचे जाएंगे रथ, उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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 पुरी: ओडिशा के जगन्नाथ पुरी समेत पूरे देश के लिए आज का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ ही आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा का महापर्व शुरू हो गया है। इस वर्ष रथयात्रा के दिन 'रवि योग' का शुभ संयोग बनने से इस उत्सव का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।


श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और छत्तीस निजोग अनुष्ठान उप-समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज शाम ठीक 4:00 बजे से श्रद्धालुओं द्वारा रथों को खींचने का मुख्य अनुष्ठान शुरू किया जाएगा।

मौसी के घर 9 दिनों का प्रवास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महाउत्सव के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के साथ भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा देवी मंदिर' जाते हैं। भगवान यहाँ कुछ दिनों तक विश्राम और प्रवास करते हैं। इसके बाद आगामी 24 जुलाई को 'बहुदा यात्रा' (उलटी रथयात्रा) के साथ भगवान की वापसी होगी और 27 जुलाई को 'नीलाद्री बीजे' अनुष्ठान के साथ इस भव्य महापर्व का समापन होगा।

जाति-पांत के भेद से परे: रथ खींचने से धुलते हैं पाप

इस महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ मिलकर रथ खींचते हैं। माना जाता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु महाप्रभु के रथ की रस्सी खींचता है या इस यात्रा में शामिल होकर दर्शन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

तीन रंगों के भव्य रथ: सबसे पीछे चलेंगे महाप्रभु जगन्नाथ

रथयात्रा के लिए विशेष रूप से नीम की लकड़ियों से तीन विशाल और भव्य रथों का निर्माण किया गया है। परंपरा के अनुसार तीनों रथों का क्रम इस प्रकार रहेगा:

  • सबसे आगे (तालध्वज): बड़े भाई बलराम जी का रथ, जो लाल और हरे रंग का होता है।
  • मध्य में (दर्पदलन या पद्मरथ): बहन सुभद्रा जी का रथ, जो नीले और काले रंग का होता है।
  • सबसे पीछे (नंदिघोष या गरुड़ध्वज): स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ जी का रथ, जो लाल और पीले रंग के वस्त्रों से सुसज्जित रहता है।

सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण पूरी जगन्नाथ पुरी 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गुंजायमान है।

केंद्र के तीन बड़े फैसलों से छत्तीसगढ़ को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया आभार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के संकल्प को मिली नई उड़ान, प्रगतिशील किसान भानुप्रताप ने जुगाड़ तकनीक से तैयार की सीड ड्रिल

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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिली गुणवत्ता युक्त बीज की सौगात

कृषि विभाग के सहयोग से कम लागत में आधुनिक बुवाई का सफल मॉडल बना किसानों के लिए प्रेरणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी का सकारात्मक परिणाम गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली में देखने को मिला, जहां प्रगतिशील किसान एवं स्थानीय लोक कलाकार भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी सूझबूझ और नवाचार से पारंपरिक कृषि उपकरण को जुगाड़ तकनीक के माध्यम से सीड ड्रिल में परिवर्तित कर मूंगफली की वैज्ञानिक बुवाई का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए भानुप्रताप लगभग दो एकड़ क्षेत्र में बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और अपनी तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए कम लागत में सीड ड्रिल तैयार की, जिससे कम समय में समान दूरी पर व्यवस्थित बुवाई संभव हो सकी। इस नवाचार से श्रम की बचत होने के साथ-साथ बीज का संतुलित उपयोग और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशा के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को केवल योजनाओं का लाभ ही नहीं पहुंचा रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों और स्थानीय नवाचारों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। कृषि विभाग का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना है। ग्राम दरमोहली के किसान का यह प्रयास इस सोच को साकार करने वाला प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। उप संचालक कृषि श्री सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के अंतर्गत जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं। प्रगतिशील किसान भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ, किसानों की रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग मिलकर कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है और आत्मनिर्भर एवं समृद्ध कृषि की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करता है।

विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस : कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

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रायपुर- "कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।" इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की विशा में लगातार कार्य कर रही है।

विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना सार्थक होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में योजना के अंतर्गत राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रवाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम

राज्य सरकार ने युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं। अब पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21 वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।

गुणवत्ता पर विशेष जोर

छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है। 

प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। साथ ही सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इन व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन में सुधार हुआ है।

प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।

बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास

प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।

उद्योगों के साथ साझेवारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता

राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।

साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।

पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में व लॉन्ड्री बैग के साथ साझेदारी कर लॉन्ड्री सुपरवाइजर एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रारंभ किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से कार्डियक एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।

लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र

प्रदेश के जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।

आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार

राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों का निर्माण एवं भूमि आबंटन कार्य प्रगति पर है।

नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई विशा

विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह दर्शाता है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ वेश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान

प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। ईस्ट जोन क्षेत्रीय प्रतियोगिता, भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।

वहीं राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में राज्य के 03 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 01 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।

मैनपाट में 'नाशपाती' की मिठास : एग्री-टूरिज्म का नया गढ़ बना छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट

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नाशपाती से चमकी किसान मनोज यादव की किस्मत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में मशहूर पर्यटन स्थल मैनपाट अब एग्री-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ की अनुकूल जलवायु और राज्य शासन के उद्यानिकी विभाग की कल्याणकारी नीतियां स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। पारंपरिक खेती को छोड़कर यहाँ के प्रगतिशील किसान अब फलोद्यान की ओर रुख कर सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक सफलता की कहानी मैनपाट के ग्राम बारिमा निवासी कृषक मनोज यादव की है, जिन्होंने ग्राम कुदारीडीह (मेहता पॉइंट के पास) में नाशपाती का सफल बागान तैयार कर शानदार मुनाफा कमाया है।

सरकारी मदद से बंजर जमीन पर खड़े किए 170 फलदार वृक्ष

कृषक मनोज यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017-18 में मैनपाट के कमलेश्वरपुर स्थित शासकीय उद्यान रोपणी से नाशपाती के पौधे हासिल किए थे। उन्होंने अपनी 0.500 हेक्टेयर गोड़ा जमीन (पठारी और खाली पड़ी भूमि) पर लगभग 200 पौधे रोपे थे। कुछ पौधे प्राकृतिक कारणों से नष्ट जरूर हुए, लेकिन वर्तमान में उनके पास 170 पूरी तरह से फलदार पेड़ मौजूद हैं। मनोज ने अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग को देते हुए बताया कि कमलेश्वरपुर उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर बागान का निरीक्षण करते हैं और खाद की मात्रा से लेकर पौधों के रखरखाव के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

मौसम की मार के बाद भी कमाया 1.5 लाख का शुद्ध मुनाफा

इस वर्ष ओलावृष्टि और बाजार में बिक्री में हुई थोड़ी देरी के बावजूद, मनोज यादव के बागान से लगभग 2.5 पिकअप (करीब 260 कैरेट) नाशपाती का थोक उत्पादन हुआ। प्रति पिकअप 100 से 110 कैरेट की औसत से 500 रुपये प्रति कैरेट की दर पर थोक बाजार में फसल बेची गई, जिससे लगभग 1,30,000 रुपये की आय हुई। इसके अलावा खुले बाजार और पर्यटकों को सीधे फल बेचकर 25 से 30 हजार रुपये कमाए गए। इस तरह इस सीजन में उन्हें कुल 1.5 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। मनोज यादव ने बताया कि पिछले वर्ष अनुकूल मौसम के दौरान इसी बागान से उन्हें 2.5 से 3 लाख रुपये की बंपर कमाई हुई थी।

एग्री-टूरिज्म का हॉटस्पॉट बना कुदारीडीह

यह बागान अब केवल फल उत्पादन का जरिया नहीं रहा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण केंद्र बन चुका है। लालमाटी के नाम से मशहूर इस खूबसूरत स्थान से रायगढ़ क्षेत्र का बेहद मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहाँ रोजाना करीब 100 से 250 पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती का लुत्फ उठाने पहुँचते हैं। पर्यटक यहाँ आकर न केवल 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदते हैं, बल्कि खुद अपने हाथों से पेड़ों से फल तोड़ने का रोमांचक अनुभव भी लेते हैं। पर्यटकों के इस सीधे जुड़ाव से किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे अपनी उपज बेचने का एक बेहतरीन मंच मिल रहा है।

युवाओं और अन्य किसानों के लिए बने मिसाल

प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने क्षेत्र के युवाओं और किसानों से अपील की है कि वे अपनी खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि पर पारंपरिक खेती के साथ-साथ नाशपाती, लीची और अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाएं। इससे कम रकबे में भी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और पर्यटन क्षेत्रों के पास होने के कारण सीधे उपभोक्ताओं को फसल बेचकर अतिरिक्त लाभ भी लिया जा सकता है।

जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को फलोद्यान विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास लगातार जारी है। मनोज यादव जैसे किसान इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से बागवानी को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।


ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी।

उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।

एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा

उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स  तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक भावना बोहरा, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

दिल्ली में गोबर से बनेगी हरित ऊर्जा, एमसीडी और एनडीडीबी के बीच हुआ बड़ा समझौता

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच गोबर के वैज्ञानिक उपयोग के लिए कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित केंद्र और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अमित शाह ने कहा कि यह पहल देश के सभी बड़े शहरों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मॉडल साबित होगी। इससे न केवल पशुपालकों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्वच्छता, हरित ऊर्जा (CBG) उत्पादन और जैविक खेती को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यमुना नदी की सफाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीवेज, औद्योगिक कचरे और गोबर को नदी में जाने से रोकना बेहद जरूरी है।

अमित शाह ने बताया कि दिल्ली में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के शोधन के लिए लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम चल रहा है। साथ ही, भविष्य में 1.25 लाख मवेशियों के गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि यमुना में गोबर का एक भी कण न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी नहीं जाने देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

गोबर के प्रसंस्करण का कार्य नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर स्थित संयंत्रों में किया जाएगा। इस परियोजना के तहत पशुपालकों को गोबर के बदले ₹1 प्रति किलोग्राम का भुगतान भी किया जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल दिल्ली बल्कि देश के अन्य महानगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छता, हरित ऊर्जा उत्पादन और पशुपालकों की आर्थिक मजबूती का नया मॉडल बनेगी।


ग्राम गनेकेरा में रागी प्रोसेसिंग का पहला यूनिट स्थापित, अब स्थानीय स्तर पर होगा श्री अन्न का प्रसंस्करण

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यूनिट की स्थापना से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में होगी आसानी

रायपुर- जिले के किसानों को अब रागी (श्री अन्न) उत्पादन के साथ-साथ बेहतर बाजार एवं मूल्य संवर्धन का लाभ दिलाने ग्राम गनेकेरा में रागी मिलेट्स, मिलेट्स पफ एवं दलिया प्रोसेसिंग का पहला यूनिट की सफलतापूर्वक स्थापना की गई है। यूनिट का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद अब यह रागी के प्रसंस्करण के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके प्रारंभ होने से क्षेत्र के रागी उत्पादक किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण के लिए स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होगी। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा जिले में धान के बदले मिलेट्स, रागी फसलों के उत्पादन हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष 15 हजार हेक्टेयर में अन्य फसल उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

उपसंचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण कर मशीनों एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यूनिट का संचालन शीघ्र प्रारंभ करने तथा किसानों को इसका अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कश्यप ने बताया कि रागी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से परिवहन एवं प्रसंस्करण लागत में कमी आएगी, वहीं रागी के मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार होने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन एवं उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में यह यूनिट जिले में श्री अन्न आधारित कृषि को नई दिशा देने का कार्य करेगी।

उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्र में रागी की खेती अपनाने तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन कार्यक्रमों का लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रागी एक पौष्टिक, कम पानी में तैयार होने वाली तथा जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसल है, जिसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए किसानों के लिए यह लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। रागी प्रोसेसिंग यूनिट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे तथा महिला स्व-सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी रागी आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण एवं विपणन में नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। इससे जिले में श्री अन्न मिशन को गति मिलेगी और किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण एवं विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।


साही के अवैध शिकार पर वन विभाग का बड़ा एक्शन

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पांच आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

रायपुर- छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की मुस्तैदी का एक बड़ा असर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए वन विभाग ने साही (इंडियन पॉर्कुपाइन) के अवैध शिकार के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। वन विभाग की टीम ने त्वरित एक्शन लेते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।

आरक्षित वन में हुआ था शिकार, आपस में बांटा मांस

यह पूरी कार्रवाई वनमण्डलाधिकारी मयंक पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं उप वनमण्डलाधिकारी गोविंद सिंह के नेतृत्व में वन परिक्षेत्र बागबाहरा की टीम द्वारा की गई।

मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग को रैताल बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक-154 में साही के अवैध शिकार की सूचना मिली थी। वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा के नेतृत्व में टीम ने तत्काल जांच शुरू की। विवेचना के दौरान ग्राम नवाडीह (खम्हरिया) के पांच ग्रामीणों की संलिप्तता सामने आई। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने शिकार करने के बाद साही का मांस आपस में बांट लिया था। आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज

वन विभाग ने इस मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 22666/05 (दिनांक 13 जुलाई 2026) दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2(16), 9, 39, 50 एवं 51 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम में 

गिरधारी गोंड, लोकनाथ गोंड, नागेश्वर गोंड, सियाराम राजपूत और नरसिंह कुमार सहित सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

कार्रवाई में इनकी रही अहम भूमिका

इस त्वरित और सफल कार्रवाई में डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा, वनरक्षक डीलेश्वरी कंवर, नीलकंठ दीवान, वीरेंद्र दीवान सहित वन विभाग के अन्य स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय वन प्रबंधन समिति नवाडीह (खम्हरिया) के सदस्यों ने भी इस कार्रवाई में विभाग का सक्रिय सहयोग किया।

वन विभाग की अपील

वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या तस्करी से जुड़ी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दें। विभाग ने साफ किया है कि वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सघन गश्त और कड़ा निगरानी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।


14 सितंबर से सुर, ताल और घुंघरुओं की झंकार से गूंजेगा 41 वें चक्रधर समारोह का मंच

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स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को मिलेगा मंच

रामलीला मैदान में 10 दिनों तक सजेगा शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोक संस्कृति का महाकुंभ

रायगढ़ कलेक्टर की अध्यक्षता में कलाकार चयन समिति की बैठक संपन्न

रायपुर- रायगढ़ जिले की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक 41वें चक्रधर समारोह-2026 इस वर्ष 14 से 23 सितंबर 2026 तक स्थानीय रामलीला मैदान में आयोजित होगा। दस दिवसीय इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बनाने के लिए आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलाकार चयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर एवं चक्रधर समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कलाकारों के चयन, कार्यक्रम की रूपरेखा तथा आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि चक्रधर समारोह केवल शास्त्रीय कला का मंच नहीं, बल्कि रायगढ़ और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस वर्ष आयोजन में स्थानीय कलाकारों, नवोदित प्रतिभाओं तथा छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं लोक संस्कृति को विशेष स्थान दिया जाए, ताकि क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत का प्रभावी प्रदर्शन हो सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ-साथ रायगढ़ और प्रदेश के लोक कलाकारों को भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। छत्तीसगढ़ी लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं तथा स्थानीय प्रतिभाओं की प्रस्तुति समारोह का विशेष आकर्षण होगी। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी। समारोह के दौरान शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य, लोक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संतुलित कार्यक्रम तैयार करने पर समिति ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने कार्यक्रमों की समय-सारिणी, प्रस्तुति की गुणवत्ता तथा दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें आयोजन की अंतिम रूपरेखा में शामिल किया जाएगा। 

बैठक में मोती महल रायगढ़ (राज परिवार) से देवेन्द्र प्रताप सिंह एवं उर्वशी देवी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे, एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो, सहायक कलेक्टर गोकुल आर.के. संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल, प्रो. अम्बिका वर्मा, प्रदेश संयोजक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ अनुपम पाल, कलाकार भूपेन्द्र बरेठ तथा प्राचार्य राजेश डेनियल सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को लेकर विभागों को मिले निर्देश

बैठक में रामलीला मैदान में मंच निर्माण, आकर्षक सज्जा, दर्शक दीर्घा, ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता तथा अन्य जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। आयोजन के प्रत्येक पहलू में विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

सांस्कृतिक गरिमा और भव्यता के साथ होगा आयोजन

बैठक में आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष का 41वां चक्रधर समारोह सांस्कृतिक गरिमा, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और उच्चस्तरीय प्रस्तुतियों के कारण पहले से अधिक भव्य और ऐतिहासिक होगा। राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ स्थानीय एवं छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों की सहभागिता समारोह को नई पहचान देगी तथा रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगी।


एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास

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वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

​बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम

यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित  "AUAP - WURI  इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने  प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल ​शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड ​​स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।

​इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।

​समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम

बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।

इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन

AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।

WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

विशेष लेख : आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

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रायपुर- किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को ष्महतारी गौरव वर्षष् के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।

महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा।

बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को ‘सुशासन से समृद्धि‘ की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।


हड़ताल का मुख्य कारण मानवीय मूल्यों की समझ का अभाव, बच्चों की पढ़ाई बाधित होना चिंता का विषय: गेंदलाल कोकड़िया

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रायपुर- प्रदेश में शिक्षकों की हड़ताल को लेकर सामाजिक चिंतन सामने आया है। समाजसेवी गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व बच्चों के भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकीय पेशा केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। एक शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की समझ और जीवन दृष्टि की कमी के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षकों को 'जीवन विद्या' जैसे मानवीय मूल्यों पर आधारित अध्ययन और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो उनकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का बंद होना बच्चों के साथ अन्याय है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षाओं की तैयारी बाधित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है। सरकार और शिक्षक संगठनों को आपसी संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान निकालना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है और समाधान के सभी प्रयासों के बाद भी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान को दी जानी चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया ने अंत में कहा कि "एक शिक्षक उपकार का कार्य करता है। उसका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि : जिला अस्पतालों में बढ़ी जटिल ऑपरेशन की क्षमता

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सूरजपुर जिला चिकित्सालय में 6 सफल टोटल हिप रिप्लेसमेंट ऑपरेशन, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहर

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सूरजपुर जिला चिकित्सालय ने सफलतापूर्वक 6 टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ऑपरेशन कर यह साबित किया है कि अब जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा जैसी अत्याधुनिक सेवाएं भी जिला स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

इस उपलब्धि से न केवल सूरजपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे इलाज के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी तीनों की बचत होगी।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा और सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम के नेतृत्व में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू एवं डॉ. अमन गुप्ता ने इन जटिल शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास भगत और डॉ. अनिल कुमार ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि में नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। समर्पित टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के कारण सभी ऑपरेशन सफल रहे।

ऑपरेशन के बाद सभी मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना पर किए जा रहे निवेश का सकारात्मक परिणाम अब आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पतालों में टीएचआर जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की उपलब्धता से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे गंभीर अस्थि रोगों के उपचार की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने पूरी चिकित्सा टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के नागरिकों को अपने जिले में ही बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

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