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9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा पोषण पखवाड़ा 2026, बच्चों के बेहतर विकास और पोषण पर जोर

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नई दिल्ली- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 9 से 23 अप्रैल 2026 तक पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada) का 8वां संस्करण मनाने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में माताओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना और स्वस्थ भारत की नींव को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोषण के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि “एक स्वस्थ और पोषित बच्चा ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। पोषण अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन है।”

इस वर्ष पोषण पखवाड़ा का राष्ट्रीय शुभारंभ 9 अप्रैल 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में होगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक मौजूद रहेंगे।

इस वर्ष की थीम

“जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना”
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन और 6 वर्ष तक का समय उसके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान 85% तक मस्तिष्क विकास हो जाता है।

मुख्य फोकस क्षेत्र

  • मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था, स्तनपान और सही आहार पर जोर

  • 0–3 वर्ष: बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती गतिविधियां

  • 3–6 वर्ष: खेल आधारित शिक्षा और समग्र विकास

  • स्क्रीन टाइम कम करना: बच्चों में स्वस्थ आदतें बढ़ाना

  • आंगनवाड़ी सशक्तिकरण: सामुदायिक भागीदारी और बेहतर सुविधाएं

देशभर में जागरूकता अभियान

इस पखवाड़े के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में

  • पोषण पंचायत

  • जागरूकता कार्यक्रम

  • खेल आधारित शिक्षा

  • स्वस्थ जीवनशैली अभियान
    आयोजित किए जाएंगे, जिनमें माताएं, परिवार और समुदाय सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

जन आंदोलन के रूप में पोषण अभियान

पोषण अभियान आज एक जन आंदोलन बन चुका है, जिसमें लोगों की भागीदारी से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया जा रहा है।

निष्कर्ष

पोषण पखवाड़ा 2026 का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सही पोषण, देखभाल, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी से ही एक स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

PMMSY के तहत सिरसा में खारे पानी की झींगा पालन क्लस्टर की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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सिरसा (हरियाणा)- भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज हरियाणा के सिरसा जिले का दौरा कर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत विकसित खारे पानी (Saline Water) एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झींगा (श्रिम्प) और मछली किसानों से संवाद कर जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को समझा।

डॉ. लिखी ने किसानों को संबोधित करते हुए तकनीक आधारित झींगा पालन, वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन और मजबूत बायो-सिक्योरिटी उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिरसा जैसे खारे पानी वाले क्षेत्र झींगा पालन के लिए बेहद उपयुक्त हैं और इससे किसानों की आय में विविधता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने MPEDA को किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और निर्यात से जोड़ने के निर्देश भी दिए। साथ ही, स्थानीय स्तर पर परीक्षण किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया ताकि किसानों को दूर नहीं जाना पड़े।

चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (CDLU) में आयोजित एक समीक्षा बैठक में PMMSY के तहत क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक, NABARD, NFDB, MPEDA, मत्स्य किसान, सहकारी संस्थाएं और देशभर के प्रतिनिधि शामिल हुए। 500 से अधिक प्रतिभागियों ने बैठक में हिस्सा लिया। किसानों ने इस दौरान बिजली की ऊंची लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज की कमी और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं उठाईं और पंचायत भूमि को स्वयं सहायता समूहों को लीज पर देने की मांग की।

डॉ. लिखी ने सिरसा के रघुआना गांव में PMMSY के तहत विकसित एक सफल झींगा फार्म का भी दौरा किया। करीब 3 हेक्टेयर में फैले 7 तालाबों वाले इस फार्म से सालाना 28 टन उत्पादन हो रहा है, जिससे लगभग ₹90 लाख का कारोबार और स्थानीय रोजगार सृजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि झींगा पालन के विस्तार के लिए बेहतर बीज, फीड, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है।

हरियाणा ने PMMSY के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां ₹760.88 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। राज्य में 456 RAS और बायोफ्लॉक सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 3,766 हेक्टेयर तालाब और 2,204 हेक्टेयर खारे क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सिरसा में ₹110 करोड़ का एकीकृत एक्वापार्क स्थापित किया जा रहा है और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है।

भारत का झींगा निर्यात समुद्री उत्पादों का प्रमुख हिस्सा है, जो कुल निर्यात का लगभग 69% है। देश का समुद्री निर्यात पिछले दशक में दोगुना होकर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें झींगा का योगदान ₹43,334 करोड़ है।

देश में 34 मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सिरसा का खारा पानी क्लस्टर एक प्रमुख उदाहरण है। यह क्लस्टर झींगा, स्कैम्पी और सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

भारत का अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जो कुल उत्पादन का 75% योगदान देता है। 2013-14 से 2024-25 के बीच उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 153 लाख टन हो गया है। देश के विशाल जल संसाधनों को देखते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिसे सरकार प्राथमिकता दे रही है।

निष्कर्ष: सिरसा का यह मॉडल दर्शाता है कि सही नीति, तकनीक और सहयोग के जरिए खारे और अनुपयोगी क्षेत्रों को भी आय और रोजगार के मजबूत स्रोत में बदला जा सकता है।

INS त्रिकंड मोंबासा पहुंचा, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोंबासा बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही तैनाती के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। इस दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का केन्या दौरा भी हो रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज के क्रू द्वारा पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया जाएगा, साथ ही केन्या डिफेंस फोर्सेस को आवश्यक सामग्री भी सौंपी जाएगी। INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मोंबासा से प्रस्थान के बाद भारतीय और केन्याई नौसेना के बीच PASSEX (Passage Exercise) आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय और संचालन क्षमता को और मजबूत किया जा सके। यह दौरा भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।



INS सुदर्शिनी ने फ्रांस में बिखेरा जलवा, भारत की समुद्री ताकत और संस्कृति का प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप INS सुदर्शिनी 7 अप्रैल 2026 को फ्रांस के सेट (Sète) बंदरगाह से रवाना हुआ, जहां उसने प्रतिष्ठित ‘Escale à Sète’ समुद्री महोत्सव में सफल भागीदारी दर्ज की। यह महोत्सव भूमध्यसागर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में से एक है, जिसमें दुनिया भर के जहाज शामिल होते हैं। इस दौरान सुदर्शिनी ने विभिन्न समुद्री गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वर्कशॉप और खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय भाग लेकर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। खास आकर्षण फ्रांसीसी नौसेना की 400वीं वर्षगांठ पर आयोजित हेरिटेज सिटी परेड रही, जिसमें भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल ने ऐतिहासिक सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए अनुशासन और एकता का शानदार प्रदर्शन किया।

इस यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी की रोइंग टीम ने Jeux Maritimes प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। महोत्सव के समापन पर ग्रांडे परेड डे डिपार में जहाज ने अपने पाल खोलकर आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। बंदरगाह प्रवास के दौरान हजारों लोगों ने जहाज का दौरा किया, जिससे भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और समुद्री संबंध और मजबूत हुए। इस दौरान भारतीय राजदूत संजीव सिंगला द्वारा जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। अब INS सुदर्शिनी ‘Lokayan 26’ मिशन के तहत कैसाब्लांका की ओर बढ़ रही है, जहां वह भारत के वैश्विक समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।



आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: ICAR का जलवायु-सहिष्णु कृषि पर जोर, गेहूं-जौ अनुसंधान से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

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नई दिल्ली/करनाल- आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) देश में संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) और जलवायु-सहिष्णु गेहूं व जौ प्रणाली पर बड़े स्तर पर शोध कर रही है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।

ICAR के महानिदेशक एवं DARE के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने आज करनाल स्थित ICAR–गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) और मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) का दौरा कर चल रहे शोध कार्यों की समीक्षा की।

उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर फोकस

डॉ. जाट ने कहा कि भारत इस वर्ष गेहूं उत्पादन में बेहतर स्थिति में है और न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सहयोग देने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि ICAR का मुख्य लक्ष्य जलवायु-सहिष्णु और पोषक तत्वों से भरपूर फसल किस्में विकसित करना है, जिससे किसानों की आय और लोगों का स्वास्थ्य दोनों बेहतर हो सके।

बड़ी उपलब्धियां (Conservation Agriculture)

करनाल में चल रहे शोध से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं:

  • 85% तक सिंचाई जल की बचत

  • 28% तक उर्वरक की कमी

  • 51% ईंधन की बचत

  • 95% तक पराली जलाने में कमी

  • 46% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी

  • 33% तक उत्पादन में वृद्धि

  • किसानों की आय लगभग दोगुनी

पर्यावरण और मिट्टी की सेहत में सुधार

  • 15 वर्षों में मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक कार्बन दोगुना

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता मजबूत

  • कार्बन न्यूट्रल और “वन हेल्थ” लक्ष्य में योगदान

नई तकनीक: BNI (Biological Nitrification Inhibition)

  • उर्वरक उपयोग में 25% तक कमी संभव

  • उत्पादन पर कोई असर नहीं

  • अगर 25% क्षेत्र में लागू किया जाए तो
     हर साल ₹2000 करोड़ की बचत

गेहूं सुरक्षा और अनुसंधान

  • रस्ट (Rust) बीमारी से बचाव के लिए राष्ट्रीय निगरानी कार्यक्रम

  • 30+ संस्थानों का नेटवर्क, 1 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र कवर

  • हर साल 1000 से ज्यादा नई किस्मों का परीक्षण

जलवायु-सहिष्णु किस्में

  • जंगली प्रजातियों (Aegilops) के जरिए
    सूखा, गर्मी और लवणता सहने वाली नई किस्में विकसित

  • अब तक 55 बायोफोर्टिफाइड गेहूं किस्में जारी

  • 45% क्षेत्र में इनका उपयोग

जौ (Barley) की बढ़ती अहमियत

  • कम पानी और उर्वरक की जरूरत

  • स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद (हाई फाइबर)

  • फूड, फीड और इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

आधुनिक खेती तकनीक

  • जीरो टिलेज, मशीन से बुवाई, अवशेष प्रबंधन

  • 6–10% उत्पादन बढ़ोतरी

  • 70–75% समय और ईंधन की बचत

निष्कर्ष

ICAR के ये प्रयास न केवल किसानों को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सतत और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली की ओर भारत को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का बदला मिजाज: तीन दिन तक आंधी-बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाएं और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है।


तीन दिन तक असर, फिर बढ़ेगा तापमान

फिलहाल तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन तीन दिन बाद इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत हैं। अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

क्यों बदला मौसम?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण तथा दक्षिण भारत तक फैली द्रोणिका के कारण प्रदेश में वातावरण अस्थिर बना हुआ है। इसी वजह से मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

आज के लिए विशेष चेतावनी

विभाग ने चेताया है कि आज कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही आने वाले दिनों में भी हल्की बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना है।

राजधानी में गर्मी बरकरार

राजधानी रायपुर में आज मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है, लेकिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा, जिससे गर्मी का असर पूरी तरह कम नहीं होगा।

बारिश और तापमान का हाल

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजनांदगांव में सर्वाधिक 38.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जबकि अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में 1 से 3 सेंटीमीटर तक वर्षा भी हुई है।

विकास की राह पर बस्तर: सीएम साय ने पीएम को सौंपा प्लान, बोले कश्यप

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 रायपुर। मुख्यमंत्री साय के हालिया दिल्ली दौरे को लेकर प्रदेश सरकार ने बस्तर के विकास को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। मंत्री Kedar Kashyap ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को बस्तर के समग्र विकास का विस्तृत ब्लूप्रिंट सौंपा है, जिससे क्षेत्र में आने वाले समय में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।


मंत्री कश्यप ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से केंद्र सरकार की योजनाओं को गति मिलेगी और भाजपा सरकार बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में तेजी से काम करेगी।

भूजल गिरावट पर चिंता

कश्यप ने प्रदेश में गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई इलाकों में गर्मी के मौसम में फसल के दौरान भूजल उपयोग पर पाबंदी लगाई है। उन्होंने बताया कि इस पहल में किसानों का सहयोग भी मिल रहा है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस की प्रस्तावित बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री कश्यप ने कहा कि पार्टी को पहले अपने आंतरिक विवाद सुलझाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने आम जनता के लिए कौन सी ठोस योजनाएं लागू कीं।

नक्सलमुक्त गांवों को मिलेगा प्रोत्साहन

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को लेकर कश्यप ने बताया कि सरकार ने नक्सलमुक्त गांवों को एक करोड़ रुपये देने की योजना बनाई है। पंचायत स्तर पर इसकी घोषणा की जा चुकी है और जो गांव स्वयं को नक्सल मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर संभाग विकास के मामले में प्रदेश का सबसे समृद्ध क्षेत्र बनकर उभरेगा।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत, शांति बहाली की जताई उम्मीद

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 नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम (सीजफायर) पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।


अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के बाद क्षेत्र में जारी तनाव फिलहाल थमता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच करीब एक महीने से अधिक समय से चल रहा संघर्ष अब दो सप्ताह के लिए रोक दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।” मंत्रालय ने दोहराया कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का पक्षधर रहा है।

आम लोगों पर पड़ा गहरा असर

विदेश मंत्रालय ने कहा कि लंबे समय से जारी इस संघर्ष ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है। भारत ने विशेष रूप से Strait of Hormuz में निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यहां से व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहनी चाहिए।

28 फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष

गौरतलब है कि यह टकराव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर देखा गया।

करीब 40 दिनों तक चले इस तनावपूर्ण दौर के बाद अब दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी है। यह सहमति उस समय बनी, जब अमेरिका द्वारा तय की गई समयसीमा खत्म होने में केवल कुछ ही समय बचा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम है, हालांकि स्थायी शांति के लिए आगे भी कूटनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

बारात में गया परिवार, सूने घर में फिर चोरी - रिटायर्ड ASI के मकान को दोबारा बनाया निशाना

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चोरी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित सीएसईबी कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड एएसआई गलेटबिन कुमार के सूने घर को चोरों ने एक बार फिर निशाना बना लिया। खास बात यह है कि इससे पहले भी इसी मकान में बड़ी चोरी हो चुकी है।


जानकारी के अनुसार, गलेटबिन कुमार अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए बालको स्थित साईं मंगलम भवन में बारात लेकर गए हुए थे। इसी दौरान चोरों ने बंद पड़े घर में धावा बोल दिया। बुधवार सुबह पड़ोसियों ने घर का दरवाजा संदिग्ध स्थिति में देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चोर करीब 20 हजार रुपये नकद, एक लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी समेत मेहमानों का सामान लेकर फरार हो गए। वास्तविक नुकसान का आंकलन परिवार के लौटने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

CCTV से छेड़छाड़, DVR भी ले गए चोर

पहली चोरी के बाद सुरक्षा के लिए घर में CCTV कैमरे लगाए गए थे, लेकिन इस बार चोरों ने कैमरों से छेड़छाड़ कर DVR भी अपने साथ ले गए। इससे पुलिस को तकनीकी साक्ष्य जुटाने में दिक्कत आ रही है।

बताया जा रहा है कि इसी घर में जनवरी महीने में भी सेंधमारी की घटना हुई थी, जिसमें सोने-चांदी के जेवर और नकदी सहित करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। उस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जांच में जुटी पुलिस, डॉग स्क्वायड की मदद

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

लगातार एक ही घर में हो रही चोरी और पहले मामले में कार्रवाई न होने से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोन नहीं चुका पाया पति, पत्नी ने दे दी खौफनाक मौत..

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 मुजफ्फरपुर (बिहार)। जिले के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत केशवपुर गांव में 32 वर्षीय युवक अंशु कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने मृतक की पत्नी पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपी पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार, अंशु कुमार की शादी वर्ष 2021 में हुई थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं। उसने मकान निर्माण के लिए बैंक से करीब 18 लाख रुपये का लोन लिया था। आर्थिक तंगी के चलते वह किस्त नहीं चुका पा रहा था, जिसके कारण हाल ही में उसके घर पर नोटिस भी चस्पा किया गया था।

परिजनों का आरोप है कि पारिवारिक विवाद और आर्थिक दबाव के चलते पत्नी ने पहले अंशु को जहर दिया और बाद में साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से कमरे में आग लगाने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि कमरे का सामान जला हुआ था, जबकि मृतक का शरीर पूरी तरह झुलसा नहीं था।

घटना के दौरान कमरे से धुआं उठता देख ग्रामीणों ने अंशु को बाहर निकाला और तत्काल एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतक के भाई उदय सिंह सहित अन्य परिजनों ने पत्नी स्वीटी भारती पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिवार में लंबे समय से आर्थिक तनाव और विवाद चल रहा था।

पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मामला जहर सेवन से मौत का प्रतीत हो रहा है, वहीं आग लगाने की भी पुष्टि के प्रयास किए जा रहे हैं। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल टीम को बुलाया गया था।

उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पूर्व एक हादसे में अंशु का दाहिना पैर टूट गया था, जिसके कारण वह ठीक से चल-फिर नहीं पाता था। इसी वजह से वह कुछ समय से इमादपुर स्थित ससुराल में रह रहा था और हाल ही में केशवपुर लौटा था।

फिलहाल, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: EOW की बड़ी कार्रवाई, 3 गाड़ियां जब्त

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला में कथित शराब घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।


 क्या हुआ?

EOW ने कार्रवाई करते हुए 3 वाहनों को जब्त किया है। जांच में सामने आया है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल अवैध “पार्ट-बी” शराब को सीधे चुनिंदा सरकारी दुकानों तक पहुंचाने में किया जा रहा था।

कहां से हो रही थी सप्लाई?

जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड (कुम्हारी) से इस अवैध नेटवर्क का संचालन हो रहा था।

 कैसे चलता था खेल?

डिस्टिलरी संचालक अपने भरोसेमंद लोगों के जरिए काम कर रहे थे
छोटे ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों का इस्तेमाल
कुछ तय वाहनों का बार-बार उपयोग
अवैध शराब सीधे सरकारी दुकानों तक सप्लाई

 पहले भी हुई कार्रवाई

इससे पहले भी EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए:

कोटा (बिलासपुर) स्थित वेलकम डिस्टलरी
सरगांव (मुंगेली) स्थित भाटिया वाइंस

से कुल 16 वाहनों को जब्त किया था।

 जांच में और क्या सामने आया?

गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क की पुष्टि
कई अन्य वाहन भी इस रैकेट में शामिल
कुछ गाड़ियों को स्क्रैप कर दिया गया या अन्य कामों में लगा दिया गया

आगे क्या होगा?

EOW अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि:

और गिरफ्तारियां संभव
बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी

दुर्ग शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। लगातार हो रही जब्ती और खुलासे संकेत दे रहे हैं कि यह नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित हो सकता है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के 11 साल: करोड़ों उद्यमियों को मिला सशक्तिकरण

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने आज 11 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह योजना देश के छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना गारंटी के आसान ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस योजना के तहत गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे व्यवसायों को ₹20 लाख तक का कोलेटरल-फ्री लोन दिया जाता है, जिससे वे अपने व्यवसाय को शुरू या विस्तार कर सकें।

MSME सेक्टर की रीढ़ बनी योजना

MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये न केवल बड़े उद्योगों के सहयोगी हैं बल्कि रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। PMMY ने इन उद्यमों को नई ऊर्जा और वित्तीय पहुंच प्रदान की है।

वित्त मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:
“पिछले एक दशक में भारत में एक शांत क्रांति हुई है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया। PMMY ने ‘Funding the Unfunded’ के सिद्धांत पर काम करते हुए उन लोगों तक ऋण पहुंचाया, जो पहले बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे।”

उन्होंने आगे कहा कि इस योजना ने उद्यमिता को लोकतांत्रिक बनाते हुए क्रेडिट तक पहुंच की बाधाओं को खत्म किया है।


बड़ी उपलब्धियां

  • अब तक 57.79 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत

  • कुल ₹40.07 लाख करोड़ का वितरण

  • लगभग 2/3 लोन महिलाओं को मिले

  • करीब 20% लोन पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों को दिए गए

  • नए उद्यमियों को 12.15 करोड़ लोन (₹12 लाख करोड़)

समावेशी विकास की दिशा में कदम

योजना का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचा है:

  • महिलाएं: 67% लाभार्थी

  • OBC वर्ग: 51% लाभार्थी

  • SC/ST और अन्य वंचित वर्गों को भी बड़ा लाभ

योजना के मुख्य स्तंभ

भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तीन प्रमुख आधार हैं:

  1. Banking the Unbanked (बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ना)

  2. Securing the Unsecured (असुरक्षित को सुरक्षा देना)

  3. Funding the Unfunded (बिना वित्तीय सहायता वालों को ऋण देना)

PMMY इसी तीसरे स्तंभ का मुख्य आधार है।

लोन की श्रेणियां

  • शिशु: ₹50,000 तक

  • किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक

  • तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक

  • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक

ये लोन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े व्यवसायों के लिए दिए जाते हैं।

वर्षवार प्रगति (संक्षेप)

  • 2015-16: ₹1.37 लाख करोड़

  • 2020-21: ₹3.22 लाख करोड़

  • 2023-24: ₹5.41 लाख करोड़

  • 2025-26 (मार्च तक): ₹5.65 लाख करोड़

राज्य मंत्री का बयान

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा:
“मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाते हुए उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और आर्थिक विकास को गति मिली है।”

निष्कर्ष

11 वर्षों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करते हुए लाखों लोगों के उद्यमी बनने के सपनों को साकार किया है। यह योजना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो रही है।

जेलों में बढ़ती मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में जेलों के भीतर हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक वर्ष के भीतर राज्य की विभिन्न जेलों में 33 कैदियों की मौत होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने चिंता जताई है।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि कई मामलों में अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है या लंबित पड़ी है, जिससे मौत के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने जेल विभाग के महानिदेशक (DG) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और प्रत्येक मौत की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों और रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने किया युद्ध रोकने का ऐलान, होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा

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 वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई से ठीक पहले बड़ा यू-टर्न लेते हुए हमले रोकने का ऐलान कर दिया है। डेडलाइन खत्म होने से महज डेढ़ घंटे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि वह दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी और सैन्य अभियान स्थगित करने पर सहमत हैं।


ट्रंप के इस ऐलान के कुछ ही समय बाद ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी युद्धविराम को मंजूरी दे दी। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की।

होर्मुज स्ट्रेट दो हफ्तों के लिए खुलेगा

Abbas Araghchi ने बताया कि युद्धविराम की अवधि के दौरान Strait of Hormuz को खोला जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि यदि ईरान पर हमले पूरी तरह बंद होते हैं, तो उसकी सशस्त्र सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान रोक देंगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दो सप्ताह तक तकनीकी और सुरक्षा समन्वय के साथ जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।

ईरान के प्रस्ताव को अमेरिका की मंजूरी

इससे पहले Donald Trump ने ईरान पर हमले रोकने की घोषणा करते हुए उसके 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को बातचीत का आधार स्वीकार किया। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “व्यावहारिक” बताया।

ईरानी मीडिया ने इसे तेहरान की कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है, जबकि अमेरिकी पक्ष इसे अपने दबाव की सफलता मान रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह अचानक युद्धविराम फिलहाल तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह दो हफ्तों का समय ही तय करेगा कि यह समझौता स्थायी शांति में बदलता है या फिर क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ता है।

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