Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

रक्षाबंधन पर बिखरेगा हरियाली का संदेश

No comments Document Thumbnail

रायगढ़ में स्व-सहायता समूह की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी बीज राखियां

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार की थीम पर बिहान की अभिनव पहल

रायपुर- रक्षाबंधन पर केवल भाई-बहन का प्रेम ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। पेड़ों को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा का वचन देना और मिट्टी से बने इको-फ्रेंडली पौधे वाली राखियों का इस्तेमाल पर्यावरण को हरा-भरा रखने में मदद करता है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज

इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

गांव-गांव में दिख रहा उत्साह

जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।

सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।

जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।


साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

डिफॉल्ट सर्विस चार्ज वसूलने पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन, देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के तहत ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline-NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। शिकायतों के साथ प्रस्तुत बिलों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित रेस्तरां उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना उनके बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे।

जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि यह प्रथा 4 जुलाई 2022 को जारी होटलों एवं रेस्तरां में सर्विस चार्ज वसूली संबंधी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की रोकथाम और उपभोक्ता हित संरक्षण दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी गाइडलाइन की वैधता

28 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में सीसीपीए की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइन को वैध ठहराते हुए कहा कि अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के विरुद्ध है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी होटल एवं रेस्तरां इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं तथा सीसीपीए कानून के अनुसार इनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

सीसीपीए की गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन के बिल में स्वतः या डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।

  • किसी अन्य नाम से भी सर्विस चार्ज की वसूली नहीं की जा सकती।

  • उपभोक्ता को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक एवं वैकल्पिक है।

  • सर्विस चार्ज नहीं देने पर किसी भी उपभोक्ता को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • भोजन के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सीसीपीए की कार्रवाई

एक मामले में चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.) पर उपभोक्ता के बिल में डिफॉल्ट सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता से वसूला गया सर्विस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्राधिकरण ने कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के बिल में स्वतः सर्विस चार्ज या इसी प्रकार का कोई शुल्क न जोड़ा जाए।

सीसीपीए ने निम्नलिखित रेस्तरां के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए हैं—

  • कैफे ब्लू बॉटल, पटना

  • चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड

  • फिएस्टा बारबेक्यू नेशन

  • फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट

  • एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड

  • ज़ोरो – द लग्जरी नाइट क्लब

  • चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.)

अन्य रेस्तरां के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उपभोक्ता कहां करें शिकायत?

यदि किसी रेस्तरां द्वारा आपकी सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर टोल-फ्री नंबर 1915 या एनसीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

सीसीपीए ने कहा है कि वह सर्विस चार्ज से संबंधित शिकायतों पर लगातार नजर रखे हुए है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता हितैषी व्यावसायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, चारों छात्रों ने जीते पदक

No comments Document Thumbnail

12 से 19 जुलाई 2026 के दौरान विलनियस, लिथुआनिया में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (International Biology Olympiad-IBO 2026) में भारत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए चारों प्रतिभागी छात्रों ने पदक अपने नाम किए। भारतीय दल ने 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

पदक विजेता

  • भाव्या गुणवाल (महेंद्रगढ़, हरियाणा) – स्वर्ण पदक

  • सौमिल मैती (हावड़ा, पश्चिम बंगाल) – रजत पदक

  • निशित कलानी (पाली, राजस्थान) – रजत पदक

  • अनमोल कुमार (मानसा, पंजाब) – रजत पदक

भारतीय दल के साथ टीम लीडर के रूप में प्रो. रेखा वरताक (सेवानिवृत्त, एचबीसीएसई-टीआईएफआर, मुंबई) और डॉ. अनुपमा रोनाड (एचबीसीएसई-टीआईएफआर) मौजूद थीं। वैज्ञानिक पर्यवेक्षक (Scientific Observers) के रूप में डॉ. रंजीतसिंह देवकर (एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा) तथा डॉ. सिद्धेश घाग (यूएम-डीएई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन बेसिक साइंसेज, मुंबई) ने दल का मार्गदर्शन किया।

इस वर्ष आयोजित ओलंपियाड में 78 देशों के 307 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में कुल 31 स्वर्ण, 61 रजत तथा 91 कांस्य पदक प्रदान किए गए।

चुनौतीपूर्ण रही प्रतियोगिता

आईबीओ-2026 की परीक्षाओं का आयोजन विलनियस विश्वविद्यालय के लाइफ साइंसेज सेंटर द्वारा किया गया, जिसमें माध्यमिक स्तर के जीवविज्ञान ज्ञान को उच्च स्तर पर परखा गया।

कुल छह घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा में प्रतिभागियों को चार विशिष्ट क्षेत्रों में जटिल वैज्ञानिक प्रयोग करने पड़े—

  • आणविक जीवविज्ञान एवं जैव रसायन (Molecular Biology & Biochemistry) में प्लास्मिड पर प्रतिबंध एंजाइम (Restriction Digestion), एगारोज़ जेल विश्लेषण तथा एंजाइम परीक्षण।

  • पशु शरीर क्रिया विज्ञान (Animal Physiology) में एस्पिरिन की फार्माकोकाइनेटिक्स का अध्ययन तथा विशेष मोबाइल एप एवं लाइट बॉक्स कलोरीमीटर की सहायता से रक्त नमूनों का विश्लेषण।

  • पशु आकारिकी एवं वर्गीकरण (Animal Morphology & Systematics) में कीट नमूनों का वर्गीकरण तथा मुखांगों (Mouth Parts) का सूक्ष्म विच्छेदन।

  • पादप कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान (Plant Computational Biology) में ImageJ सॉफ्टवेयर की सहायता से पौधों की जड़ों की लंबाई का विश्लेषण, विभिन्न पौध प्रजातियों का उच्च-आयामी मैक्रोफीनोटाइप अध्ययन तथा जटिल ट्रांसक्रिप्टोम विश्लेषण।

सैद्धांतिक परीक्षा भी रही अत्यंत कठिन

प्रयोगात्मक परीक्षा के अतिरिक्त प्रतिभागियों को दो चरणों में आयोजित छह घंटे की सैद्धांतिक परीक्षा भी देनी पड़ी। इसमें 100 अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रश्न शामिल थे, जो वास्तविक वैज्ञानिक अनुसंधान एवं क्षेत्रीय अध्ययनों पर आधारित थे।

प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की केवल तथ्यात्मक जानकारी ही नहीं, बल्कि समस्या-समाधान क्षमता का भी मूल्यांकन किया गया। परीक्षा में कोशिका एवं आणविक जीवविज्ञान, पादप एवं प्राणी विज्ञान, आनुवंशिकी एवं विकासवाद, पारिस्थितिकी, प्राणी व्यवहार विज्ञान तथा जैव वर्गिकी जैसे विषय शामिल थे।

भारतीय दल को बधाई

भारत के सभी पदक विजेता छात्रों तथा पूरे भारतीय प्रतिनिधिमंडल को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई।

देशभर के शिक्षकों, मार्गदर्शकों तथा एचबीसीएसई (HBCSE) की जीवविज्ञान ओलंपियाड इकाई ने प्रशिक्षण शिविरों एवं प्रस्थान-पूर्व ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही राष्ट्रीय संचालन समिति, शिक्षक संगठनों तथा भारत सरकार की वित्तपोषण एजेंसियों के सतत सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया गया।

भारत का शानदार रिकॉर्ड

यह अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड में भारत की 26वीं भागीदारी थी।

अब तक इस प्रतियोगिता में भारत के 104 छात्र भाग ले चुके हैं, जिनमें—

  • 17 स्वर्ण पदक

  • 69 रजत पदक

  • 17 कांस्य पदक

  • 1 सम्मानजनक उल्लेख (Honourable Mention)

प्राप्त हुए हैं।

पिछले 10 वर्षों में भारत का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। इस अवधि में भारतीय प्रतिभागियों की स्वर्ण पदक सफलता दर 25 प्रतिशत तथा रजत पदक सफलता दर 68 प्रतिशत रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती वैज्ञानिक प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।

जल संचय जन भागीदारी : ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण को मिल रही नई गति

No comments Document Thumbnail

28 जून 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से वर्षा की प्रत्येक बूंद को बचाने और जल संरक्षण के जन आंदोलन को निरंतर गति देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के इस आह्वान के अनुरूप 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशभर में एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण तथा जनभागीदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा—

"कैच द रेन अभियान के माध्यम से हमें वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सामूहिक रूप से संरक्षित करना है। मैं सभी देशवासियों से वर्षा जल की हर एक बूंद को बचाने का विशेष आग्रह करता हूं।"

अभियान के प्रमुख कार्य

  • प्रत्येक घर, आवासीय परिसर एवं कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन प्रणाली (Rain Water Harvesting System) अपनाना।

  • उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण तथा अनुपयोगी बोरवेलों को पुनर्जीवित कर भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित करना।

  • बावड़ियों, कुओं एवं पारंपरिक जलाशयों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।

  • आसपास के तालाबों एवं जलाशयों से गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाना, ताकि मानसून के अधिकतम जल का संरक्षण हो सके।

  • जल संरक्षण क्षेत्रों में अधिकाधिक वृक्षारोपण कर हरित आवरण का विस्तार करना।

जल संचय जन भागीदारी 1.0 (6 सितंबर 2024)

जल संरक्षण में जनसहभागिता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह अभियान समुदाय (Community), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और लागत प्रभावशीलता (Cost) अर्थात 3Cs के सिद्धांत पर आधारित है। इसके माध्यम से सामुदायिक सहभागिता, संस्थागत सहयोग, सीएसआर योगदान तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय से जल संरक्षण को गति प्रदान की गई।

इस पहल का उद्देश्य कम लागत वाले भूजल पुनर्भरण एवं जल संचयन ढांचों का निर्माण, अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक समाधान अपनाना है।

1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 के बीच संचालित इस अभियान ने कम-से-कम 10 लाख भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के लक्ष्य को पार करते हुए देशभर में 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण दर्ज किया।

जल संचय जन भागीदारी 2.0 (2025)

पहले चरण की सफलता के बाद 1 जून 2025 को JSJB 2.0 प्रारंभ किया गया। इसका विशेष फोकस अत्यधिक दोहन (Over-Exploited) एवं गंभीर (Critical) श्रेणी वाले जिलों में कम लागत वाले स्थानीय उपायों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना था।

31 मई 2026 तक एक करोड़ भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जबकि देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं निर्मित होने की सूचना प्राप्त हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से 50 प्रतिशत अधिक है। इन संरचनाओं का वर्तमान में भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।

JSJB 1.0 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों एवं संस्थाओं को नवंबर 2025 में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार के दौरान सम्मानित किया गया।

जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन (2026)

1 जून 2026 को ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन’ (JSJB: CTR) अभियान का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से जल संचय जन भागीदारी (JSJB) और जल शक्ति अभियान : कैच द रेन (JSA: CTR) का एकीकरण किया गया।

यह अभियान वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण तथा जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य प्रत्येक वर्षा को जल संरक्षण के अवसर में बदलना तथा कम लागत वाले स्थानीय समाधानों के माध्यम से जल सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलन को मजबूत करना है।

यह अभियान अनेक केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं के समन्वय से संचालित किया जा रहा है, जिनमें—

  • विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)

  • जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन (RRR)

  • CAMPA

  • वित्त आयोग अनुदान

  • विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाएं

शामिल हैं।

इस अभियान का मूल आधार जन भागीदारी है, जिसके अंतर्गत पंचायती राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, महिला समूह, युवा, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन एवं स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जल शक्ति अभियान : कैच द रेन

विश्व जल दिवस (22 मार्च 2021) के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "कैच द रेन—जहां वर्षा हो, वहीं और उसी समय जल का संचयन करें" थीम के साथ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन का शुभारंभ किया।

यह अभियान वर्ष 2019 के जल शक्ति अभियान की सफलता पर आधारित है, जिसके अंतर्गत 256 जिलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त विकास खंडों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलागम विकास, जलाशयों के पुनर्जीवन एवं वृक्षारोपण को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया गया।

इसके बाद यह अभियान प्रत्येक वर्ष नई थीम एवं प्राथमिकताओं के साथ संचालित किया जा रहा है।

2021 – कैच द रेन : जहां वर्षा हो, वहीं जल संचयन

  • वर्षा जल संचयन

  • जल संरक्षण

  • जल निकायों की जियो-टैगिंग

  • वैज्ञानिक योजना निर्माण

  • जल शक्ति केंद्र एवं जन-जागरूकता

2022 – जल संरक्षण गतिविधियों का विस्तार

  • पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन

  • भूजल पुनर्भरण

  • जलागम विकास

  • आर्द्रभूमि एवं नदियों का संरक्षण

  • झरनों के जलग्रहण क्षेत्रों का विकास

2023 – पेयजल स्रोतों की स्थिरता

  • 150 जल-संकटग्रस्त जिलों पर विशेष फोकस

  • पेयजल स्रोतों का सुदृढ़ीकरण

  • भूजल पुनर्भरण

  • जनभागीदारी एवं निगरानी

2024 – नारी शक्ति से जल शक्ति

  • महिलाओं के नेतृत्व में जल संरक्षण

  • जलाशयों की सफाई एवं गाद निकालना

  • अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन

  • वृक्षारोपण एवं स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण

महिलाओं के नेतृत्व में संचालित इन पहलों को स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है।

जल शक्ति केंद्र

देशभर के जिलों में स्थापित जल शक्ति केंद्र (JSKs) जल संरक्षण संबंधी ज्ञान एवं तकनीकी सहायता के प्रमुख केंद्र हैं। ये केंद्र वर्षा जल संचयन तकनीकों का प्रचार-प्रसार करते हैं, स्थानीय प्रशासन एवं समुदायों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं तथा जल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देते हैं।

वर्षा जल संचयन से ग्रामीण समृद्धि तक

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में जल संरक्षण आज राष्ट्रीय प्राथमिकता और जन आंदोलन बन चुका है। कैच द रेन तथा जल संचय जन भागीदारी जैसे अभियानों ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनसहभागिता, वैज्ञानिक योजना और संसाधनों के समन्वय पर आधारित व्यापक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप प्रदान किया है।

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलाशयों का पुनर्जीवन तथा जल के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देना कृषि, ग्रामीण आजीविका, जलवायु अनुकूलन और भावी पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्थानीय भागीदारी, वैज्ञानिक योजना एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से यह अभियान ग्रामीण भारत में टिकाऊ जल परिसंपत्तियों का निर्माण कर रहा है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल मांग के वर्तमान दौर में वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण ही देश की जल सुरक्षा का आधार बनेगा तथा कृषि और सतत ग्रामीण विकास को नई मजबूती प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ सहित विभिन्न मंचों से जल संरक्षण पर दिया गया सतत संदेश आज देश के नागरिकों, संस्थाओं एवं सरकारों को एकजुट होकर जल सुरक्षा की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

विक्रम-1 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर टीडीबी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी बधाई

No comments Document Thumbnail

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को विक्रम-1 मिशन की सफल उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है। यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और सशक्त बनाती है तथा देश में विकसित डीप-टेक नवाचारों की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करती है।

यह ऐतिहासिक सफलता टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है, जिसके तहत बोर्ड व्यावसायीकरण की मजबूत संभावनाओं वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन देता रहा है।

स्वदेशी प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) प्रौद्योगिकियों के विकास में स्काईरूट एयरोस्पेस के अग्रणी योगदान को देखते हुए, कंपनी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 के अवसर पर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा नेशनल टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक भी उपस्थित थे।

यह पुरस्कार स्काईरूट एयरोस्पेस को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण बाजार के लिए विकसित स्वदेशी क्रायोजेनिक, लिक्विड और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीकों के विकास के लिए प्रदान किया गया था। इससे कंपनी की तकनीकी उत्कृष्टता और व्यावसायिक क्षमता को उसके शुरुआती चरण में ही मान्यता मिली। आज विक्रम-1 मिशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कारों का उद्देश्य भारत की उन कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, जो क्रांतिकारी तकनीकों के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा,

"स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप पुरस्कार से सम्मानित एक उभरते स्टार्ट-अप से लेकर भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने तक की उनकी यात्रा, भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। अपने नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI Fund) के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड को एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।"

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड लगातार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार-आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करता रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस जैसी कंपनियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर संस्थागत पहचान और निरंतर सहयोग भारत के नवाचार-आधारित उद्यमियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में हासिल हुई एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

No comments Document Thumbnail

सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू 

क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद,  तथा प्रबंध संचालक रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। 

एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।

एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 

कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

निवेशकों का नया भरोसा बना छत्तीसगढ़

No comments Document Thumbnail

 रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निवेशक-हितैषी नीतियों, सुशासन और प्रशासनिक सुधारों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। क्रिसिल-नीति आयोग इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (IFI) 2026 में छत्तीसगढ़ ने नियमों में आसानी (Regulatory Ease) और संस्थागत माहौल (Institutional Environment) जैसे निवेश के सबसे महत्वपूर्ण मानकों में देश के 17 बड़े राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं पर्यावरणीय लचीलेपन (Environment Resilience) में राज्य दूसरे स्थान पर रहा है। यही नहीं, निवेशकों के बढ़ते विश्वास का परिणाम है कि पिछले 18 महीनों में छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के उद्योग भी शामिल हैं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार की बागडोर संभालने के बाद से ही निवेश, उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया है। उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की इसी नीति का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्र आकलन में छत्तीसगढ़ ने कई स्थापित औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

क्रिसिल और नीति आयोग के संयुक्त आकलन में राज्य को कुल 47.5 अंक प्राप्त हुए हैं। समग्र रैंकिंग में छत्तीसगढ़ 17 बड़े राज्यों में नौवें स्थान पर है, लेकिन निवेशकों के भरोसे से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मानकों में उसका प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ रहा है।

कारोबार शुरू करना पहले से कहीं आसान

नियमों में आसानी (Regulatory Ease) के मानक में छत्तीसगढ़ को 12 में से 8.4 अंक मिले हैं, जो राजस्थान, गुजरात, पंजाब और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों से भी अधिक हैं। यह मानक इस बात का आकलन करता है कि किसी उद्योग को मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है, एनओसी, निर्माण अनुमति, बिजली और पानी के कनेक्शन कितनी तेजी से उपलब्ध होते हैं, वाणिज्यिक न्यायालय कितनी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं और व्यवसाय बंद करने की प्रक्रिया कितनी सरल है।

इस श्रेणी में पहला स्थान मिलने का सीधा अर्थ है कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों को कम प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अनुमतियां तेजी से मिलती हैं, अनुपालन की लागत कम है और निवेशकों को हर स्तर पर बेहतर प्रशासनिक सहयोग प्राप्त होता है।

मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनी निवेशकों की ताकत

संस्थागत माहौल में भी छत्तीसगढ़ ने 6 में से 4.5 अंक प्राप्त कर देश के बड़े राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। यह श्रेणी शासन की गुणवत्ता, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, श्रमिक विवाद, नीतिगत स्थिरता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करती है।

इस उपलब्धि से स्पष्ट है कि राज्य में स्थिर, भरोसेमंद और निवेशक-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था विकसित हुई है। उद्योगों को नीति में निरंतरता, त्वरित निर्णय और विवादों के शीघ्र समाधान का लाभ मिल रहा है, जिससे दीर्घकालीन निवेश का विश्वास मजबूत हुआ है।

पर्यावरणीय सुरक्षा में भी अग्रणी

पर्यावरणीय लचीलापन के मानक में छत्तीसगढ़ देश के बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा है। राज्य को 5 में से 4 अंक प्राप्त हुए हैं और इस श्रेणी में केवल तमिलनाडु उससे आगे है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी के मामले में भी छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन बड़े राज्यों के औसत से काफी बेहतर रहा है।

इसका अर्थ यह है कि औद्योगिक परिसंपत्तियां और आपूर्ति श्रृंखला अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हैं, जिससे दीर्घकालीन निवेश के लिए राज्य की विश्वसनीयता और बढ़ती है।

संसाधनों और वित्तीय अनुशासन ने बढ़ाया भरोसा

संसाधनों की उपलब्धता के मामले में छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों में तीसरे स्थान पर है। राज्य देश का दूसरा सबसे बड़ा कोयला एवं लिग्नाइट उत्पादक है तथा धातु और अधात्विक खनिजों के उत्पादन में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है।

वित्तीय स्वास्थ्य के मानक में राज्य को 7 में से 5.4 अंक प्राप्त हुए हैं, जो मजबूत वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत स्थिरता का संकेत हैं। राज्य के सकल मूल्य वर्धित में उद्योग क्षेत्र की 52.8 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे देश की सबसे अधिक औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं वाले राज्यों की श्रेणी में स्थापित करती है।

भरोसेमंद बिजली और सशक्त कार्यबल

छत्तीसगढ़ की एक बड़ी ताकत उसकी ऊर्जा उपलब्धता भी है। राज्य में उद्योगों को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो रही है। महिलाओं की कार्यबल में 58.1 प्रतिशत भागीदारी बड़े राज्यों के औसत से लगभग 41 प्रतिशत अधिक है। वहीं कारोबार बंद करने की प्रक्रिया में कानूनी और अन्य संबंधित खर्च भी देश में सबसे कम लागत वाले राज्यों में शामिल हैं।

सुधारों की नई पहचान बना छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने निवेश को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से उद्योगों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ जन विश्वास अधिनियम का दूसरा संस्करण लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना, जिसके तहत 279 छोटे कारोबारी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 लागू कर जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था लागू करने वाला भी छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है। इससे उद्योगों पर अनावश्यक नियामकीय बोझ कम हुआ है और निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल एवं पारदर्शी बनी है।

एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था का नया केंद्र

नवा रायपुर में देश के पहले एआई डेटा सेंटर पार्क का निर्माण तेजी से चल रहा है। लगभग 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से विकसित हो रही इस परियोजना की क्षमता एक लाख GPU तक होगी। इसके साथ ही हाइपरनेक्स्ट के माध्यम से देश का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर भी छत्तीसगढ़ में स्थापित किया जा रहा है। इससे राज्य उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।

आठ लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, नई अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव

राज्य सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों और निवेशकों के अनुकूल वातावरण का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि ढाई साल में छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, एग्रो-प्रोसेसिंग और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि क्रिसिल-नीति आयोग इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन हमारी सुशासन आधारित नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर देश की मुहर है। नियमों में आसानी और संस्थागत माहौल में देश के बड़े राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि हमने उद्योगों और निवेशकों के लिए भरोसेमंद, सरल और तेज़ व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि रोजगार, औद्योगिक विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार तैयार करना है। औद्योगिक विकास नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, डिजिटल अधोसंरचना और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में किए गए सुधारों के परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। हमें विश्वास है कि छत्तीसगढ़ देश के सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्यों में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

No comments Document Thumbnail

प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय मंच पर चमकी धमतरी की अभिनव पहल, सीएससी स्थापना दिवस पर PACS ड्रोन मॉडल को मिली विशेष पहचान

No comments Document Thumbnail

कोलकाता में आयोजित 17वें सीएससी स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के कृषि नवाचार की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार का बना मॉडल

रायपुर- कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की अभिनव पहल PACS ड्रोन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। कार्यक्रम में जिले द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित ड्रोन सेवाओं, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा किसान पंजीयन (फार्मर रजिस्ट्री) जैसे नवाचारों की सराहना की गई। समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष थे।


 कार्यक्रम के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी जयंत नाहटा ने PACS के माध्यम से कृषि उन्नयन“ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं के विस्तार तथा PACS को ’वन स्टॉप रूरल सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से ड्रोन द्वारा तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले की एक अभिनव पहल है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में PACS के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा किसानों को तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ सहजता से प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी-व्हीएलई को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल शासन के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिल कुमार सहित देशभर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं सीएससी प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

No comments Document Thumbnail

भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के दूरदर्शी निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन ‘आगमन’ के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष साक्षी बनते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। इस मिशन के तहत विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अपने निर्धारित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई जिसने भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए नहीं खोला होता तो यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने ISRO, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की भी सराहना करते हुए कहा कि इनके सहयोग से तैयार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा दी है। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और युवा उद्यमियों की प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर की तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में उच्च तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के अधिकांश पहले प्रक्षेपण केवल डमी पेलोड लेकर उड़ान भरते हैं, जबकि विक्रम-1 अपने साथ कई प्रयोगात्मक पेलोड, तकनीकी प्रदर्शन और भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के पेलोड भी लेकर गया। इससे भारत की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। कुछ वर्षों पहले जहां निजी लॉन्च इकोसिस्टम लगभग नहीं था, वहीं आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप, पहला स्पेस यूनिकॉर्न और लगभग 9 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूद है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

पूरी तरह भारत में विकसित विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियां शामिल हैं, जैसे—

  • भारत का पहला ऑल-कार्बन कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट,

  • 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन,

  • उन्नत अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम,

  • और देश के सबसे लंबे मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक।

इस मिशन ने प्रणोदन (Propulsion), एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल परीक्षण किया, जिससे भारत के भविष्य के व्यावसायिक ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीति सुधारों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और भारतीय नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं रहा।"

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

No comments Document Thumbnail

भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त प्रतीक है विक्रम-1 : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन की नीतियों के फलस्वरूप आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना रहा है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण इसी परिवर्तनकारी सोच का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस को मिली हरी झंडी, कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज वर्चुअल माध्यम से रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की पहली सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे। यह पहली बार है जब रामनगर और देहरादून के बीच सीधी एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है और कुमाऊँ तथा गढ़वाल के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा।

ट्रेन का संचालन और समय

  • यह एक्सप्रेस हर बुधवार और शुक्रवार संचालित होगी।

  • ट्रेन संख्या 15310 रामनगर से सुबह 05:50 बजे रवाना होकर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी।

  • वापसी में ट्रेन संख्या 15309 देहरादून से 15:55 बजे प्रस्थान कर 23:30 बजे रामनगर पहुंचेगी।

  • मार्ग में ट्रेन काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी।

सभी वर्गों के यात्रियों के लिए सुविधाएं

ट्रेन में एसी द्वितीय श्रेणी, एसी तृतीय श्रेणी, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, द्वितीय बैठक (सेकंड सिटिंग) तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे उपलब्ध होंगे, जिससे विभिन्न श्रेणी के यात्रियों को आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

यात्रियों को होगा बड़ा लाभ

इस नई सेवा से उत्तराखंड के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। छात्र, किसान, व्यापारी और आम नागरिक एक ही दिन में देहरादून या हरिद्वार जाकर अपने सरकारी, शैक्षणिक, व्यावसायिक या व्यक्तिगत कार्य पूरे कर वापस लौट सकेंगे।

पर्यटन और तीर्थाटन को मिलेगा बढ़ावा

नई ट्रेन सेवा से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, गिरिजा देवी मंदिर, सीतामढ़ी/सीतावनी जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही हरिद्वार और देहरादून के माध्यम से चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन उत्तराखंड के कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को नई मजबूती देगी। उन्होंने बताया कि:

  • ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को हरिद्वार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी और हरिद्वार–ऋषिकेश के बीच यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य तेजी से चल रहा है। राज्य के 11 रेलवे स्टेशनों—देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लालकुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर—का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास में गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भीड़भाड़ न बढ़े। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू हुई टनकपुर–नांदेड़ एक्सप्रेस को अच्छा प्रतिसाद मिला है और क्षेत्र में चल रही वंदे भारत सेवाएं भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की शुरुआत उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यवासियों को इस नई सेवा के लिए बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उत्तराखंड में कई नई ट्रेन सेवाएं शुरू होने से रेल संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवनरेखा साबित होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड रेल बजट मिला है, जबकि राज्य में ₹40,000 करोड़ से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में नई रेल अवसंरचना और ट्रेन सेवाओं की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

इस अवसर पर हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी तथा रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आसमान से बरसी मौत: बारिश से बचने पेड़ के नीचे छिपे थे मासूम, बिजली गिरने से दो की मौत, दो गंभीर

No comments Document Thumbnail

 अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले के लुंड्रा थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार शाम ग्राम नागम बांसपारा में आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। तेज बारिश से बचने के लिए सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे खड़े चार मासूम बच्चे वज्रपात की चपेट में आ गए। इस आसमानी कहर ने दो बच्चों की मौके पर ही जान ले ली, जबकि दो सगे भाई गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।


खेलते-खेलते अचानक आई आफत, पेड़ बना काल

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, शुक्रवार शाम ग्राम नागम निवासी संदीप नगेसिया (11 वर्ष), रोशन पनिका (12 वर्ष), प्रभु राम नगेसिया (12 वर्ष) और दिनेश नगेसिया (11 वर्ष) गांव में ही खेल रहे थे। इसी बीच अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। झमाझम बारिश से बचने के लिए चारों बच्चे ग्राम पंचायत नागम के पास सड़क किनारे लगे एक पेड़ की छांव में जाकर खड़े हो गए। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस पेड़ को वो अपनी ढाल बना रहे हैं, वही काल बन जाएगा। कुछ ही पलों में तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली सीधे उसी पेड़ पर आ गिरी।

चीख-पुकार के बीच दो ने मौके पर तोड़ा दम, अस्पताल रेफर

वज्रपात इतना भयानक था कि बिजली की चपेट में आते ही संदीप नगेसिया और रोशन पनिका ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, प्रभु राम और दिनेश नगेसिया गंभीर रूप से झुलस कर अचेत हो गए। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े और लहूलुहान बच्चों को लेकर धौरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहाँ डॉक्टरों ने संदीप और रोशन को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से झुलसे दोनों सगे भाइयों को प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

हादसे के वक्त पास में था मोबाइल? जांच में जुटी पुलिस

चर्चाओं का बाजार गर्म: इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि घटना के वक्त बच्चों के पास एक चालू मोबाइल फोन भी था। हालांकि, प्रशासन या मौसम वैज्ञानिकों द्वारा इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि बिजली गिरने की मुख्य वजह मोबाइल सिग्नल था या पेड़ की ऊंचाई। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

सावधान! अलर्ट पर रखें ध्यान, पेड़ कतई सुरक्षित नहीं

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली (Lightening Alert) की चेतावनी जारी की है।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.