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अबूझमाड़ का नया सवेरा: डोंडरीबेड़ा से कटेर की सड़क ने मिटाया दशकों का सन्नाटा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) अंचल में हुए एक विशिष्ट सड़क विकास से दशकों तक कटा रहा l दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों (जैसे डोंडरबेड़ा और कटेर) को मुख्य मार्गों से जोड़कर आवागमन की बाधाओं, पलायन और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के अंधकार को मिटा रही है।


ये पक्की सड़कें न केवल दशकों का सन्नाटा तोड़ती हैं, बल्कि सुदूर इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, और बाज़ार तक पहुंच जैसे मौलिक लाभ भी पहुंचाती हैं।

गहरे जंगलों से घिरा अबूझमाड़... एक ऐसा अंचल, जिसका नाम सुनते ही कभी जेहन में दुर्गम रास्ते, कटी हुई जिंदगी और विकास की अंतहीन प्रतीक्षा की तस्वीर उभरती थी। लेकिन आज इस अबूझमाड़ की फिजा बदल रही है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत नारायणपुर जिले के अतिदुर्गम इलाके में बनी एक नई सड़क ने यहाँ के ग्रामीणों के जीवन में खुशियों का एक नया अध्याय लिख दिया है।

​डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक बनी 8.75 किलोमीटर लंबी यह सड़क सिर्फ डामर की पट्टी नहीं है, बल्कि दशकों से मुख्यधारा से कटे जनजातीय गांवों के लिए उम्मीद और भरोसे की एक मजबूत डोर है।

​पगडंडियों का दर्द और बारिश का वो खौफ

​कुछ समय पहले तक, इस इलाके के गांवों तक पहुँचने का एकमात्र जरिया संकरी और पथरीली पगडंडियां थीं। मानसून के आते ही ये रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते थे, जिससे ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर थे। बच्चों को स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था।एम्बुलेंस का गाँवों तक आना नामुमकिन था। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर अस्पताल न पहुँच पाने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती थी। ग्रामीण अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई कृषि और वनोपज को हाट-बाजारों तक नहीं ले जा पाते थे, जिससे उन्हें उनके हक़ की सही कीमत नहीं मिलती थी।

​856.19 लाख रुपए की लागत से बदला भूगोल

​प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और 'पीएम-जनमन' योजना की ताकत से 856.19 लाख रुपये की भारी लागत के साथ इस दुर्गम चुनौती को पार किया गया। डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक की इस चमचमाती सड़क ने अब इन गांवों की किस्मत बदल दी है। ​पहली बार गाँव की चौखट तक पहुँची एम्बुलेंस और विकास।​सड़क बनने से पूरे अंचल की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर में जादुई बदलाव आया है।

सुगम यातायात से शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का हुआ विस्तार

​ अब 108 एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और प्रशासनिक टीमें सीधे ग्रामीणों के घर तक पहुँच रही हैं। रास्तों की सुगमता से अब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों नियमित रूप से स्कूल पहुँच रहे हैं, जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। स्थानीय किसान अब अपनी उपज को सीधे और आसानी से बड़े बाजारों तक पहुँचा पा रहे हैं। बिचौलियों का खेल खत्म हो रहा है और ग्रामीणों की जेब में सीधे पैसा आ रहा है।

​पक्के मकानों का सपना हुआ सच

सड़क बनते ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाने के लिए सीमेंट, छड़ और रेत जैसी निर्माण सामग्रियां बिना किसी बाधा के गाँवों तक पहुँचने लगी हैं। इसके साथ ही बिजली और पेयजल योजनाओं के काम ने भी रफ्तार पकड़ ली है।

​गाँव के बुजुर्गों और युवाओं के चेहरे पर अब एक अलग ही चमक है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहाँ नारायणपुर या नजदीकी बाजार जाने के लिए हमें घंटों पैदल चलना पड़ता था और पूरा दिन बर्बाद हो जाता था, वहीं अब गाड़ियां सीधे हमारे घरों के सामने आकर रुकती हैं। बच्चों की पढ़ाई और इलाज की चिंता अब पूरी तरह खत्म हो गई है। ऐसा लगता है जैसे हमें एक नई जिंदगी मिल गई है।

​मुख्यधारा से जुड़ता अबूझमाड़

​पीएम-जनमन योजना के माध्यम से निर्मित यह सड़क इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि संपर्क (Connectivity) मजबूत हो, तो देश का सबसे दूरस्थ और पिछड़ा क्षेत्र भी सामाजिक और आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है। डोंडरीबेड़ा से कटेर तक का यह सफर, अबूझमाड़ के आदिवासियों के आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का एक ऐतिहासिक गवाह बन चुका है।

आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की किश्त के साथ योजना के अंतर्गत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में नारी शक्ति के सशक्तिकरण का जो व्यापक अभियान चल रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार उसी संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान माताएं और बहनें स्वयं उन्हें बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

अनेक महिलाओं ने इस राशि से छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, कई ने सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया है, जबकि बड़ी संख्या में परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में इसका उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के ये अनुभव इस योजना की वास्तविक सफलता और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभाव के प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 'लखपति दीदी' जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शत-प्रतिशत पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश भी दिए।

उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू की गई है। योजना के तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार जैसी गतिविधियों को भी नई मजबूती मिली है।

महतारी वंदन योजना: मुख्यमंत्री ने जारी की 29वीं किस्त; 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंचे ₹626 करोड़

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी 'महतारी वंदन योजना' के तहत आज प्रदेश की लाखों माताओं-बहनों के लिए बड़ी सौगात सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना की 29वीं किस्त की राशि का सफलतापूर्वक ऑनलाइन अंतरण कर दिया है। 


इस किस्त के माध्यम से प्रदेश की 66 लाख से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ₹626 करोड़ से अधिक की राशि सीधे (डीबीटी के माध्यम से) भेजी गई है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश की सभी लाभार्थी माताओं और बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

आर्थिक सशक्तीकरण का नया अध्याय

शासकीय आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के प्रारंभ से लेकर अब तक कुल ₹18,800 करोड़ से अधिक की विशाल राशि सीधे प्रदेश की महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निरंतर सहायता से राज्य की मातृशक्ति का आर्थिक सशक्तीकरण हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

आवश्यक कार्यों में हो रहा राशि का सदुपयोग

योजना के प्रभाव की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि इस वित्तीय सहायता का उपयोग प्रदेश की माताएं-बहनें बेहद सकारात्मक कार्यों में कर रही हैं।

  • दैनिक खर्चों में राहत: महिलाएं घर के रोजमर्रा के खर्चों को सुगमता से पूरा कर पा रही हैं।
  • बच्चों की शिक्षा: इस राशि का एक बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और सुनहरे भविष्य पर खर्च हो रहा है।

बचत और निवेश: महिलाएं भविष्य की सुरक्षा के लिए बचत कर रही हैं तथा 'सुकन्या समृद्धि योजना' जैसी महत्वपूर्ण सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में निवेश कर अपना व अपने परिवार का आधार मजबूत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश:

"महतारी वंदन योजना केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि हमारी माताओं-बहनों के सम्मान और स्वावलंबन का प्रतीक है। अब तक ₹18,800 करोड़ से अधिक का सीधा लाभ देकर हम अपनी मातृशक्ति को हर स्तर पर सुदृढ़ और सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।"

पंजाब कांग्रेस में घमासान: बघेल से बैठक से पहले चन्नी के तेवर सख्त, बोले- 'तेल देखिए और तेल की धार देखिए'

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 चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। संकट दूर करने के लिए पंजाब पहुंचे प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल आज (शनिवार) पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं के साथ चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में चन्नी सहित करीब 50 नेता शामिल होने पहुंचे हैं।


हालांकि, इस बैठक से ठीक पहले पूर्व सीएम चन्नी के तेवर काफी तल्ख नजर आए। मीटिंग में जाने से पहले मीडिया से बात करते हुए चन्नी ने बड़े ही आक्रामक अंदाज में कहा, "तेल देखिए और तेल की धार देखिए, फिर बात करेंगे।"

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मचा है बवाल

पंजाब कांग्रेस में यह कलह 1 जुलाई को कांग्रेस आलाकमान द्वारा जारी की गई संगठनात्मक सूची के बाद शुरू हुई। इस सूची में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जबकि पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। चन्नी गुट ने इस सूची पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राजा वडिंग के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और मांग की है कि चन्नी को ही प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए।

नीति आयोग ने ‘शांति अधिनियम, 2025’ के कार्यान्वयन पर हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की

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नीति आयोग ने 10 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता ऑडिटोरियम में ‘शांति अधिनियम, 2025’ (SHANTI Act, 2025) के कार्यान्वयन पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित किया। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रमुख नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इस ऐतिहासिक अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिचालन ढांचे (Operational Framework) पर विचार-विमर्श किया।

बैठक की अध्यक्षता प्रो. अभय करंदीकर, सदस्य, नीति आयोग ने की। इस अवसर पर पंकज अग्रवाल (सचिव, विद्युत मंत्रालय), घनश्याम प्रसाद (अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण), गुरदीप सिंह (सीएमडी, एनटीपीसी लिमिटेड), डॉ. अंशु भारद्वाज (कार्यक्रम निदेशक, नीति आयोग), राजनाथ राम (सलाहकार, नीति आयोग), डॉ. गरिमा शर्मा (प्रमुख, एसएसएसडी, परमाणु ऊर्जा विभाग) तथा  हरि कुमार (विशिष्ट वैज्ञानिक एवं निदेशक, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड) सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

तकनीकी चर्चाओं को अधिनियम के सफल कार्यान्वयन के लिए तीन प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया:

1. विधायी एवं नियामकीय ढांचा (Legislative & Regulatory Framework):

इस सत्र में शांति अधिनियम, 2025 के मसौदा नियमों, विनियमों तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा हुई। साथ ही अधिनियम के तहत वैधानिक अनुपालन (Statutory Compliance) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई और इस बात पर विचार किया गया कि घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विदेशी निवेश को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।

2. वित्त, बीमा एवं जनधारणा (Finance, Insurance & Public Perception):

हितधारकों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय तंत्र तथा जोखिम-प्रबंधन व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया। दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्था, जन-जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय समुदायों का विश्वास मजबूत करने तथा परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति व्यापक जन-स्वीकृति विकसित करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।

3. विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता निर्माण (Manufacturing, Operations & Capacity Building):

इस सत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन चरण पर विशेष ध्यान दिया गया। घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने, परिचालन तैयारियों को सुनिश्चित करने, कुशल मानव संसाधन विकसित करने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा उद्योग के विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने पर विचार किया गया।

बैठक के दौरान हितधारकों ने इन तीनों प्रमुख विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव और विचार साझा किए। इन सुझावों से ‘शांति अधिनियम, 2025’ के कार्यान्वयन ढांचे को और अधिक प्रभावी, मजबूत एवं व्यावहारिक बनाने में सहायता मिलेगी।

सनक: एकतरफा प्यार में फार्मेसी छात्रा की चाकू मारकर हत्या, आरोपी फरार

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 भिलाई। वैशाली नगर थाना क्षेत्र के रामनगर में शुक्रवार दोपहर एकतरफा प्रेम की सनक में एक युवक ने फार्मेसी छात्रा की उसके किराए के कमरे में बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस मर्ग कायम कर आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है।


एक महीने से कर रहा था परेशान

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पिंटू साहू पिछले करीब एक महीने से अलग-अलग मोबाइल नंबरों से मृतका खुशी साहू (19 वर्ष) को लगातार फोन कर परेशान कर रहा था। मृतका ने परेशान होकर उसका नंबर ब्लॉक कर दिया था। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे आरोपी ने खुशी को दो बार फोन किया, लेकिन नंबर ब्लॉक होने के कारण बात नहीं हो सकी। इसके बाद सुबह 11:10 बजे उसने खुशी की सहेली को कॉल किया। सहेली द्वारा खुशी के पास मोबाइल न होने की बात कहने पर आरोपी बाइक से सीधे उसके कमरे पर पहुंच गया।

सहेली के नहाने जाने पर दिया वारदात को अंजाम

घटना के वक्त खुशी की सहेली बाथरूम में थी। इसी बीच कमरे में दाखिल हुए आरोपी ने पहले खुशी का गला दबाया, जिससे वह बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपी ने उसकी पीठ, हाथ और पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ 10 वार किए। गंभीर रूप से घायल होने के कारण खुशी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

अस्पताल पहुंचने से पहले हुई मौत

सहेली जब बाहर आई, तो उसने खुशी को खून से लथपथ हालत में पाया। उसने तत्काल मकान मालिक और पास के एक कैफे संचालक को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामले की सूचना डायल 112 को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतका को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

ट्रंप का ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम: कहा- होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलें, वरना भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

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 वॉशिंगटन/मस्कट: अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम देते हुए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने की मांग की है। 


अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने सार्वजनिक रूप से व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने की प्रतिबद्धता नहीं जताई, तो उसे गंभीर सैन्य व आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।

'कल तक घोषणा नहीं की, तो दिन अच्छा नहीं होगा'

'एक्सियोस' (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार, वाइट हाउस ने यह कड़ा संदेश ईरान को सीधे और क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से भेजा है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अगर कल तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की ईरान की आधिकारिक घोषणा नहीं आती है, तो उसके लिए आने वाला दिन अच्छा नहीं होगा।"

अमेरिका की प्रमुख मांगें

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:

  • सार्वजनिक घोषणा: ईरान आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाज पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

  • पुरानी कार्रवाई पर खेद: वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान यह स्वीकार करे कि उसके द्वारा जहाजों पर की गई पिछली कार्रवाइयां गलत थीं।

  • कोई अवैध शुल्क नहीं: समुद्री व्यापार मार्गों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त या अवैध शुल्क (टोल टैक्स) न लगाया जाए।

समझौते के उल्लंघन का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने पिछले महीने हुए 'समझौता ज्ञापन' (MoU) का सीधे तौर पर उल्लंघन किया है। ईरान द्वारा कारोबारी जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद ही अमेरिका को दो बार जवाबी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी थी।

ओमान में आज अहम बैठक पर नजरें

इस बीच, संकट के समाधान के लिए आज शनिवार को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी और ओमानी अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हो रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद है कि ओमान के मध्यस्थता प्रयासों के बाद ईरान नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने पर सहमत हो जाएगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य एजेंडा समुद्री सुरक्षा ही है।

क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान के जवाब में ईरान ने इस जलमार्ग को आंशिक रूप से बाधित कर दिया था, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया है।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

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कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

छत्तीसगढ़ में 24 IPS अधिकारियों का तबादला, 12 जिलों के SP बदले, गृह विभाग ने जारी किया आदेश

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 24 अधिकारियों के तबादले किए हैं। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के तहत एक आईजी रेंज, कई डीआईजी, एआईजी और 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) की नई पदस्थापना की गई है।


आदेश के अनुसार अजय कुमार यादव को राजनांदगांव रेंज का पुलिस महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया गया है। वहीं, राजनांदगांव रेंज के तत्कालीन आईजी बालाजी राव सोमावर को पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में पदस्थ किया गया है। इसके अलावा प्रशांत कुमार अग्रवाल, जो अब तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) बस्तर क्षेत्र में आईजी के पद पर थे, उन्हें भी पुलिस मुख्यालय में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।



राज्य सरकार ने जिला स्तर पर भी व्यापक बदलाव करते हुए दंतेवाड़ा, कोरिया, धमतरी, बलौदाबाजार-भाटापारा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, बालोद, सूरजपुर, कबीरधाम और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों का तबादला किया है।

सरकार का कहना है कि प्रशासनिक आवश्यकता और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। नई पदस्थापना के आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

छत्तीसगढ़ की इकलौती छात्रा, महासमुंद की बेटी का कमाल-इंटरनेशनल मून मिशन' के लिए रागनी साहू का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

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रायपुर- महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन 'शक्तिसैट' (ShaktiSat) के लिए 'नेशनल फाइनलिस्ट' के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।

देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं

इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद 'केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट' का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।

108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह

'मिशन शक्तिसैट' एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।

इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग

विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।

नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन

यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन 'स्पेस किड्ज इंडिया' की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।


एक परिवार, एक ही विज्ञापन 

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।  

सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य 

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी 

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। 

आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:- 

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। 

1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र

2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र

3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र

4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति

5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत 

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि- 

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।  

​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।  

 ​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।  

​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

सख्ती से मचा हड़कंप 

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है। 

विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं। 

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप




छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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 नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।

​ एक परिवार, एक ही विज्ञापन

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।

​ सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

​ मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

​ आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:-

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र
2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र
3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र
4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति
5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

​कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि-

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।
​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।
​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।
​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

सख्ती से मचा हड़कंप

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है।
विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं।

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप



भारत–ऑस्ट्रेलिया के बीच CSIR-TKDL समझौता, पारंपरिक ज्ञान की वैश्विक सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और आईपी ऑस्ट्रेलिया (IP Australia) ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान CSIR की ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (CSIR-TKDL) तक पहुंच प्रदान करने संबंधी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुए द्विपक्षीय विचार-विमर्श के 18 प्रमुख परिणामों में से एक है। दोनों देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

क्या है TKDL?

ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) भारत द्वारा विकसित विश्व का पहला ऐसा डिजिटल डेटाबेस है, जिसका उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान के आधार पर गलत तरीके से पेटेंट दिए जाने को रोकना है।

इस समझौते के तहत IP Australia को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी, जिससे वह ऑस्ट्रेलिया में दायर पेटेंट आवेदनों की जांच के दौरान संबंधित पूर्व कला (Prior Art) का अध्ययन कर सकेगा। इससे पेटेंट जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी होगी तथा भारत की पारंपरिक विरासत पर अनुचित पेटेंट दिए जाने से रोकने में मदद मिलेगी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के धनी देश हैं। यह समझौता दोनों देशों की पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और बौद्धिक संपदा प्रणाली को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी IP Australia के पेटेंट आयुक्त एंड्रयू विल्किंसन, CSIR की महानिदेशक एवं DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी तथा CSIR-TKDL इकाई की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तीगेरी करेंगी।

TKDL के बारे में

वर्ष 2001 में भारत सरकार द्वारा CSIR और आयुष मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्थापित ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) दुनिया का पहला ऐसा डेटाबेस है, जिसे पारंपरिक ज्ञान की रक्षात्मक सुरक्षा (Defensive Protection) के लिए विकसित किया गया।

इस डेटाबेस में वर्तमान में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और योग से संबंधित 5.2 लाख से अधिक औषधीय सूत्रों और पारंपरिक प्रथाओं का विवरण उपलब्ध है। इसे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश सहित पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवादित किया गया है ताकि विश्वभर के पेटेंट परीक्षक इसका उपयोग कर सकें।

ऑस्ट्रेलिया के साथ इस समझौते के बाद अब 18 देशों के पेटेंट कार्यालयों को गोपनीयता समझौते (NDA) के तहत TKDL तक पहुंच प्राप्त हो चुकी है।

TKDL ने अब तक दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदनों को रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लेने या निरस्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह भारत की पारंपरिक ज्ञान संपदा की वैश्विक स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन, मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज कोयंबटूर में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence - CoE) का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पश्चात राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के वरिष्ठ नीति-निर्माता, वन प्रबंधक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और संरक्षण क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

अपने मुख्य संबोधन में भूपेंद्र यादव ने कहा कि आवास क्षेत्रों के विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष भारत की प्रमुख संरक्षण और विकास संबंधी चुनौतियों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा, "हमें समस्या-केंद्रित नहीं, बल्कि समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और आधुनिक तकनीकी प्रगति का उपयोग करना चाहिए।"

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में की गई घोषणा के अनुरूप स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र मानव–वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, क्षमता निर्माण तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

यादव ने कहा कि संस्थान को टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े मानव–वन्यजीव संघर्षों के प्रबंधन हेतु नीति निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मानव–वन्यजीव मुठभेड़ों से निपटने के लिए मिशन मोड में जनजागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। क्षेत्र-विशिष्ट और प्रजाति-विशिष्ट उपाय अपनाकर ऐसे संघर्षों का समाधान किया जा सकता है, जिससे समाज में फैलने वाली घबराहट को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने देशभर के वन विभागों से भी अपील की कि वे मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय एवं निवारक उपाय अपनाएं। इसके लिए स्थानीय समुदायों के साथ समन्वित और बहु-हितधारक परामर्श आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर नवाचारी सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित और व्यापक रूप से लागू किया जाना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, "पारिस्थितिकीय स्थिरता के लिए संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य हमारा मंत्र होना चाहिए।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता के कारण मानव–वन्यजीव संपर्क बढ़ा है, जो अब संरक्षण के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक मुद्दा भी बन गया है और आजीविका पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए दीर्घकालिक समाधान खोजने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और समुदायों के क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह उन्नत तकनीकों के माध्यम से डेटा दस्तावेजीकरण तथा वन्यजीव संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को बढ़ावा देगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूती मिलेगी।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल मंच देशभर में संघर्ष प्रबंधन के लिए डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझाकरण और निर्णय समर्थन प्रदान करेगा। इसके साथ ही "भारत में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन" शीर्षक प्रकाशन श्रृंखला के प्रथम संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें देश में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति, रुझानों और उभरती चुनौतियों का व्यापक आकलन प्रस्तुत किया गया है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया तथा विशेषज्ञ प्रस्तुतियों और पैनल चर्चाओं का आयोजन हुआ। चर्चा के प्रमुख विषय रहे:

  • मानव–हाथी संघर्ष

  • मानव–बड़ी बिल्ली (बाघ एवं तेंदुआ) संघर्ष

  • मानव–वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण में प्रौद्योगिकी और नवाचार

इन विचार-विमर्शों से राष्ट्रीय रणनीतियों को सुदृढ़ करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने और मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव प्राप्त होंगे।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना जैव विविधता संरक्षण और मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए भारत सरकार की विज्ञान-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और समुदाय-केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक, मंत्रालय एवं राज्य वन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

'अटेंशन की होड़ में भ्रामक खबरें लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय' : जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल

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रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में मीडिया की बदलती चुनौतियों, जिम्मेदार पत्रकारिता और प्रेस क्लब के विकास पर हुई चर्चा

रायपुर- डिजिटल युग में तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी पर गंभीर मंथन करते हुए जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि 'अटेंशन की होड़ में मिसलीडिंग (भ्रामक) खबरों का बढ़ना लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है।' 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में तथ्यपरक, संतुलित औरजिम्मेदार पत्रकारिता ही मीडिया की सबसे बड़ी ताकत है। वे रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में पत्रकारों से संवाद कर रहे थे, जहां रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों ने भी मीडिया और जनसंपर्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और सतत संवाद को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और पत्रकारों की उपस्थिति में मीडिया की वर्तमान चुनौतियों, पत्रकारिता के मूल्यों तथा प्रेस क्लब के विकास को लेकर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।


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