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बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का दो माह का राज्यव्यापी आंदोलन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर की स्थापना और बिजली सब्सिडी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यभर में दो महीने तक चलने वाले चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

कांग्रेस का आरोप है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार बिजली दर वृद्धि पर पुनर्विचार करे, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।

प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, आंदोलन के दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जनसभाएं, प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि वह बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को व्यापक रूप से उठाएगी।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि बिजली क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और दक्ष बनाना है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की वास्तविक खपत का सटीक आकलन होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे राज्यव्यापी जनआंदोलन के रूप में चलाने की तैयारी कर रही है।

मुख्य न्यायाधीश ने किया राजनांदगांव जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण, न्यायिक अधोसंरचना और डिजिटल व्यवस्था का लिया जायजा

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राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने शनिवार को राजनांदगांव जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण कर न्यायिक कार्यप्रणाली, अधोसंरचना एवं डिजिटल सुविधाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों तथा न्यायालयीन कर्मचारियों से संवाद कर न्यायिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

अपने प्रवास के दौरान उन्होंने जिला न्यायालय परिसर स्थित विभिन्न न्यायालय कक्षों, सेंट्रल प्रोसेस अनुभाग, सर्वर कक्ष, लीगल एड डिफेंस सिस्टम, अभिलेखागार, मालखाना, लेखा अनुभाग, पुस्तकालय, डिजिटलीकरण एवं स्कैनिंग केंद्र, पीड़ित विश्राम कक्ष तथा ‘किलकारी कक्ष’ सहित अन्य विभागों का निरीक्षण किया और उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की।

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालयीन कार्यों में कार्यकुशलता, जवाबदेही, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव तथा न्यायालय परिसर की स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने न्यायालयों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने तथा आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक उपयोग के निर्देश देते हुए न्याय व्यवस्था को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि न्यायिक अधोसंरचना का आधुनिकीकरण और डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग समय की आवश्यकता है, जिससे आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जा सके।

उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार प्रदेश के विभिन्न जिला एवं दूरस्थ न्यायालयों का दौरा कर न्यायिक व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में राज्य की अदालतों में आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण एवं न्यायिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण को नई गति मिली है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने जिला न्यायालय परिसर में मौलश्री के पौधे का रोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, जॉइंट रजिस्ट्रार-सह-प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी, प्रोटोकॉल अधिकारी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजनांदगांव, जिले के सभी न्यायिक अधिकारी, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी एवं अधिवक्ता, जिला कलेक्टर, लोक निर्माण विभाग तथा पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे।

आधार सेवा केंद्र बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का आधार

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वर्षों से बंद पड़ी सुविधाएं हुईं बहाल,आयते को फिर मिलने लगा योजनाओं का लाभ

रायपुर- राज्य शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए संचालित आधार सेवा केंद्र अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम तोयलंका की निवासी आयते की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है, जिनकी वर्षों पुरानी आधार संबंधी समस्या का समाधान होने से उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ फिर से मिलने लगा है।

आयते लंबे समय से आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण परेशान थीं। आधार निष्क्रिय होने से उन्हें पेंशन, राशन और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार प्रयास करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाने से वे निराश हो चुकी थीं।

इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आधार सेवा केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां आधार संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। जानकारी मिलते ही वे सेवा केंद्र पहुंचीं और अपनी समस्या अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताई।

जांच में पता चला कि लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं होने के कारण उनका आधार निष्क्रिय हो गया था। सेवा केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई और आधार को पुनः सक्रिय कर दिया। पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की गई।

आधार पुनः सक्रिय होने के बाद आयते को अब पेंशन, राशन और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्र के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा ने उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

राज्य शासन की मंशा है कि हर नागरिक को बिना अनावश्यक परेशानी के शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिले। आधार सेवा केंद्रों के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर अपडेट और आधार सक्रियण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो रही है और डिजिटल सेवाओं पर उनका भरोसा मजबूत हो रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया

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पुणे- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पुणे में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेसुनेत्रा पवार, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि है। उन्होंने कहा कि तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का मंत्र देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वराज तभी संभव है जब शासन व्यवस्था, भाषा, संस्कृति और धर्म मजबूत हों।

शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन से जोड़ा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि तिलक महान शिक्षक, निर्भीक पत्रकार, प्रखर चिंतक और कर्मयोगी थे, जिनकी विचारधारा आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि तिलक ने न्यू इंग्लिश स्कूल, डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी और फर्ग्यूसन कॉलेज जैसी संस्थाओं की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके समाचार पत्र 'केसरी' और 'द मराठा' ब्रिटिश शासन के लिए सबसे प्रभावशाली आवाज बने।

अजीत डोभाल के योगदान की सराहना

अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि समाज को प्रेरित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए असाधारण योगदान दिया है और यह सम्मान देश सेवा के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब अहमदाबाद सहित देशभर में हुए बम धमाकों की जांच के दौरान अजीत डोभाल ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप कई मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा हुआ।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिली है, जिसमें अजीत डोभाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने कहा कि 1972 से लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक बनने तक डोभाल ने देश के लगभग हर बड़े सुरक्षा अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, पंजाब तथा पाकिस्तान में कार्य करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत किया। पाकिस्तान में उनका छह वर्षों का कार्यकाल भी देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद केंद्र सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) को मजबूत किया, जो आज देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने कहा कि MAC की मजबूत नींव रखने में अजीत डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया और वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं।

अमित शाह ने कहा कि डोभाल के कार्यकाल में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सशक्तीकरण और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जिनमें उनका अनुभव और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

वन विभाग की सतर्कता से टला बड़ा खतरा, केरावाहारा में तेंदुआ सुरक्षित पकड़ा गया

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वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार त्वरित कार्रवाई, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद होगी आगे की प्रक्रिया

रायपुर- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केराबाहरा गांव में आतंक मचाने वाला एक तेंदुआ 1 अगस्त 2026 की सुबह वन विभाग द्वारा सुरक्षित पकड़ लिया गया। यह तेंदुआ पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार रिहायशी इलाके में आ रहा था और ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगाया और जानवर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वनमंडल के वन परिक्षेत्र गरियाबंद अंतर्गत ग्राम केरावाहारा (ग्राम पंचायत जोवा) में वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार गतिविधियों को देखते हुए लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) में शुक्रवार को तेंदुआ सुरक्षित रूप से पकड़ा गया। वन विभाग की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को टाल दिया गया।

तेंदुए की गतिविधियों पर रखी जा रही थी विशेष निगरानी

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के. ने बताया कि तेंदुए ने पहले क्षेत्र में पालतू मवेशियों पर हमला किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी के आसपास भी उसकी मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए।

केज ट्रैप और रेस्क्यू टीम की रणनीति रही सफल

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन और वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में ग्राम जोवा और केरावाहारा में केज ट्रैप लगाए गए थे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया था। इस कार्रवाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।

सुरक्षित रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य पर रखी जा रही निगरानी

वन विभाग की लगातार निगरानी और सुनियोजित रणनीति के चलते तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में आ गया। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी शुरू कर दी। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

पकड़े गए तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट या बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

अफवाहों से बचें, वन विभाग को दें तुरंत सूचना

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। तेंदुए से संबंधित कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत नजदीकी वन अमले को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक कदम नियमानुसार उठाए जा रहे हैं।

कुलगाम आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के मृत श्रमिकों के परिजनों को राज्य सरकार देगी 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि

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कुलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है छत्तीसगढ़ सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों पर किए गए कायराना हमले में सक्ती जिले के निवासी दीपक रात्रे तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के निवासी भूपेंद्र भैना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने इस जघन्य और अमानवीय आतंकी घटना की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध अपराध है और ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से दोनों दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता  राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को  जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त की जाएगी, जो परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। 

मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

छत्तीसगढ़ में डिजिटल न्याय प्रणाली को मिलेगी नई धार, रायपुर में जुटेगी न्यायपालिका और पुलिस की टीम

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 रायपुर : न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सशक्त, सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आगामी 2 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में ’नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीकों के समावेश के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी कार्यक्रम में सहभागी होंगे। राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला के दौरान अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस), डिजिटल न्यायिक समन्वय, नवीन आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण तथा न्याय एवं पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।

इन विषयों के संबंध में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे। यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य समन्वित डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नागरिकों को त्वरित, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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CM साय ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से की मुलाकात, संगठन व जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

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 रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों प्रमुख नेताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों और राज्य के जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सेवा, सुशासन और जनकल्याण' के संकल्प को जन-जन तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद सकारात्मक बताते हुए जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार बैठकों व संवाद का दौर जारी है।

'बच्चे हमारे ही हैं, उन्हें माफ करना चाहता हूँ': विवादित बयानों पर बोले PM मोदी

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 नई दिल्ली : NEET (UG) परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी।


एक कड़े राजनीतिक या प्रशासनिक कदम के बजाय, प्रधानमंत्री ने एक परिपक्व अभिभावक की भूमिका निभाते हुए युवाओं के आक्रोश को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "गाली-गलौज से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता।"

"दांत से जीभ कटे तो दांत नहीं तोड़ते" — PM मोदी

अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए लगभग तीन मिनट के एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत माताजी को निशाना बनाकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद, उन्होंने सहानुभूति जताते हुए कहा:

"कम उम्र में युवाओं से गलतियाँ होना स्वाभाविक है और उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए। कभी-कभी हमारी जीभ दाँतों के बीच आ जाती है और खून निकल आता है, फिर भी हम अपने दाँत नहीं तोड़ते—क्योंकि दाँत और जीभ दोनों हमारे ही हैं। ये बच्चे भी हमारे ही हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है।"

कानूनी पचड़ों में उलझाने के बजाय सुधार पर जोर

प्रधानमंत्री ने युवाओं को अदालती मामलों से दूर रखने की वकालत करते हुए कहा कि उन्हें सजा देने या समाज में परेशान करने से स्थिति में बदलाव नहीं आएगा।

क्षमा और स्वीकार्यता: पीएम ने कहा, "मैं उन्हें दिल से माफ करना चाहता हूँ और समाज को भी इस दृष्टिकोण को स्वीकार करना चाहिए।"

भविष्य के प्रति समर्पण: युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैं आपके लिए जीता हूँ और खुद को आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित करता हूँ। आइए, पुरानी गलतियों से सीख लेकर साथ मिलकर आगे बढ़ें।"

वायरल वीडियो से शुरू हुआ था विवाद

गौरतलब है कि यह मामला नोएडा की रहने वाली रुचिका सिंह (सेक्टर 168) के उस वीडियो के वायरल होने के बाद गरमाया, जिसमें वे प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करती नजर आई थीं।

पुलिस कार्रवाई: उत्तर प्रदेश पुलिस ने संज्ञान लेते हुए एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ 'जीरो FIR' दर्ज की है।

लागू धाराएं: यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत दर्ज किया गया है।

आगे की प्रक्रिया: दिल्ली पुलिस अब इस 'जीरो FIR' की सामग्री और साक्ष्यों की आगे जांच कर रही है।

प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या में चावल कारोबारी की हत्या, बिजनेस पार्टनर ही निकला कातिल , आरोपी गिरफ्तार

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 धमतरी : जिले के चर्चित चावल कारोबारी नीरज साहू हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मृतक के कारोबारी साथी को गिरफ्तार कर लिया है। कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या के चलते उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था।


पुल के पास मिला था रक्तरंजित शव

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गत 22 जुलाई को नारी महानदी पुल के मुख्य मार्ग पर 27 वर्षीय नीरज साहू का रक्तरंजित शव बरामद किया गया था। मृतक के गले और सिर पर धारदार व भारी वस्तु से हमले के गंभीर निशान थे। घटनास्थल पर ही उसकी बोलेरो पिकअप गाड़ी खड़ी मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

संयुक्त टीम ने खंगाले सैकड़ों सीसीटीवी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भावना पांडे के निर्देशन में कुरूद व मगरलोड थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम का गठन किया गया। जांच टीम ने घटनास्थल तथा आसपास के क्षेत्रों में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर संदेह की सुई सांकरा (मगरलोड) निवासी बिरेंद्र कुमार साहू की ओर घूमी, जो खुद भी चावल कारोबार से जुड़ा है।

तेजी से बढ़ते व्यापार से रखता था रंजिश

हिरासत में लेकर की गई पूछताछ में आरोपी बिरेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि नीरज साहू का कारोबार बहुत तेजी से फल-फूल रहा था, जिससे वह लगातार ईर्ष्या और जलन महसूस कर रहा था। इसी रंजिश के चलते उसने सुनसान रास्ते पर नीरज को रोका और कैंची व पाने (Spanner) से हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी।

हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त कैंची और पाना बरामद कर लिया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध, होटल-रेस्तरां में भी नहीं होगा इस्तेमाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से राज्यभर में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के स्थान पर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर तथा अन्य वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है। देखने और स्वाद में यह पनीर जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसका पोषण स्तर असली दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश

राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को बाजार, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान चलाकर नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ में लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर लागू है। देश के अन्य राज्यों में इसके निर्माण या बिक्री पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

इस बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के लिए नए मानक और लेबलिंग संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा, खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना को मंजूरी दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan) राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) के लिए वित्त वर्ष 2030–31 तक ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह अब तक का भारत का सबसे महत्वाकांक्षी अपतटीय तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान है।

यह निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण परिणाम है।

‘समुद्र मंथन’ योजना इन सुधारों को जमीन पर उतारते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक नया अध्याय शुरू करती है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और हर वर्ष लगभग 144 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹13 लाख करोड़) का कच्चा तेल आयात करता है। हाल की वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और निर्बाध उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना आयात पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधार

वर्ष 2014 से सरकार ने हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में कई संरचनात्मक सुधार किए हैं—

  1. ऑफशोर क्षेत्रों को खोलना – पहले प्रतिबंधित ("नो-गो") क्षेत्रों में से लगभग 99% क्षेत्र खोल दिए गए, जिससे भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पहली बार अन्वेषण संभव हुआ।

  2. अनुबंध प्रणाली में सुधार – उत्पादन साझेदारी अनुबंध (Production Sharing Contract) की जगह राजस्व साझेदारी अनुबंध (Revenue Sharing Contract) लागू किया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और प्रशासनिक हस्तक्षेप कम हुआ।

  3. विधायी सुधार – ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) संशोधन अधिनियम, 2025 के माध्यम से कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाया गया, अनुबंधीय स्थिरता सुनिश्चित की गई तथा विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत किया गया।

  4. नए नियमों का कार्यान्वयन – पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 लागू कर कारोबार को आसान बनाया गया और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल किया गया।

  5. समान निर्णय प्रणाली – सभी अनुबंध व्यवस्थाओं के लिए सशक्त सचिव समिति (Empowered Committee of Secretaries) की संरचना और अधिकारों को एकरूप बनाया गया।

  6. अन्वेषण पर विशेष जोर – ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के प्रदर्शन मानकों में बदलाव कर अन्वेषण गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई।

क्यों जरूरी है यह योजना?

तेल एवं गैस का अन्वेषण अत्यधिक पूंजी-गहन और लंबी अवधि वाली प्रक्रिया है। किसी ब्लॉक के आवंटन से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में सामान्यतः 5 से 10 वर्ष लगते हैं।

इसके अलावा, मौजूदा तेल एवं गैस क्षेत्रों का उत्पादन हर वर्ष लगभग 6–7% स्वाभाविक रूप से घटता है। इसलिए नई खोजें और निरंतर अन्वेषण आवश्यक हैं।

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अन्वेषण-आधारित विकास (Exploration-led Growth) की रणनीति अपनाई है।

‘समुद्र मंथन’ योजना की प्रमुख विशेषताएं

इस योजना के तहत सरकार गहरे समुद्र (Deepwater) में खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का अधिकतम 50% वहन करेगी। इससे निवेशकों का जोखिम कम होगा, निजी निवेश बढ़ेगा और भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता का तेजी से विकास होगा।

भारत की भविष्य की तेल एवं गैस संभावनाएं मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी तथा अंडमान जैसे गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में हैं। यहां एक खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर लगभग 125–150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।

इसीलिए सरकार जोखिम-साझेदारी (Risk Sharing) मॉडल अपनाकर अन्वेषण को प्रोत्साहित करेगी।

₹84,084 करोड़ की योजना के चार प्रमुख घटक

  1. आधुनिक अपतटीय भूकंपीय (Seismic) डेटा संग्रह एवं प्रसंस्करण – ₹28,534 करोड़

  2. 60 गहरे समुद्री खोजी कुओं की ड्रिलिंग – ₹43,200 करोड़

    • सरकार पात्र लागत का अधिकतम 50% या ₹675 करोड़ प्रति कुआं (जो भी कम हो) सहायता देगी।

  3. साझा अपतटीय अवसंरचना (Common Offshore Infrastructure Hubs) – ₹10,000 करोड़

  4. ऑयल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र (Manufacturing & Services Zones) – ₹2,000 करोड़

इसके अतिरिक्त योजना के निगरानी, डिजिटल हस्तक्षेप, मानव संसाधन, जन-जागरूकता एवं मूल्यांकन जैसे कार्यों के लिए ₹350 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

संभावित लाभ

यदि अन्वेषण सफल रहता है तो इस योजना से—

  • भारत का घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE प्रतिवर्ष हो सकता है।

  • देश का हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार 1.6 अरब टन तेल समतुल्य (TOE) से बढ़कर 2.2 अरब TOE तक पहुंच सकता है।

  • कच्चे तेल के आयात में हर वर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ की कमी आने की संभावना है।

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर दीर्घकालिक निर्भरता घटेगी।

बेहतर डेटा, जोखिम-साझेदारी, साझा अवसंरचना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत को गहरे समुद्र में तेल एवं गैस अन्वेषण तथा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल सिद्ध होगी।

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

मां-बेटे की जोड़ी का खौफनाक कारनामा: बुजुर्ग महिला की चेन छीनी, CCTV फुटेज से पकड़े गए आरोपी

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 भिलाई: मॉर्निंग वॉक पर निकली एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को क्या पता था कि मदद मांगने के बहाने रुके लोग ही उनकी जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर देंगे। भिलाई में हुई इस सनसनीखेज चेन स्नैचिंग की वारदात का खुलासा करते हुए भिलाई भट्ठी थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इस अपराध को किसी पेशेवर गिरोह ने नहीं, बल्कि सगे मां-बेटे की जोड़ी ने मिलकर अंजाम दिया था।


झांसा देकर गले से पार की 20 ग्राम सोने की चेन

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना 31 जुलाई की सुबह करीब 6:10 बजे की है। सेक्टर-1 (सड़क नंबर-2) निवासी उमा देवी रोज की तरह अपने घर के पास मॉर्निंग वॉक कर रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार एक युवक और महिला उनके पास आकर रुके।

बाइक से उतरी महिला ने उमा देवी को बातों में उलझाया और लकड़ी की मदद से पेड़ से फूल तोड़ा देने का आग्रह किया। जैसे ही बुजुर्ग महिला उसकी मदद करने लगीं, आरोपी महिला ने बड़ी सफाई से उनके गले से लगभग 20 ग्राम वजनी सोने की चेन झपट ली और अपने बेटे के साथ बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गई। गायब हुई सोने की चेन की कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये आंकी गई है।

CCTV और मुखबिर की मदद से पकड़े गए आरोपी

वारदात के बाद पीड़िता ने तुरंत भिलाई भट्ठी थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया। मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में लिया।

कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैंप-1 शांतिपारा निवासी जी. गौतम (20 वर्ष) और उसकी मां जे. पार्वती (48 वर्ष) के रूप में हुई है।

सोने की चेन और बाइक बरामद, पुलिस की सतर्क रहने की अपील

पुलिस ने मां-बेटे के कब्जे से छीनी गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि क्या इस जोड़ी ने शहर में पहले भी इस तरह की स्नैचिंग की घटनाओं को अंजाम दिया है।

हाल के दिनों में भिलाई में सुबह टहलने निकलने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

CWG 2026: बॉक्सिंग में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, सभी 10 मुक्केबाज फाइनल में पहुंचे; 10 गोल्ड जीतने का मौका

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 ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के सभी 10 मुक्केबाजों ने जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बना ली। इसके साथ ही भारत के 10 पदक पक्के हो गए हैं और अब सभी खिलाड़ी स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे।


भारतीय बॉक्सिंग दल ने इस प्रदर्शन के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन गोल्ड कोस्ट 2018 में रहा था, जहां भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 9 पदक (3 स्वर्ण, 3 रजत और 3 कांस्य) जीते थे। ग्लासगो 2026 में भारत अब कम से कम 10 पदक हासिल करेगा, जबकि सभी फाइनल जीतने पर 10 स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर सकता है।

सेमीफाइनल में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन

  • लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा): तुवालु की तरोना ताफाकी को 5-0 से हराकर फाइनल में पहुंचीं।
  • अरुंधति चौधरी (70 किग्रा): 2022 की गोल्ड मेडलिस्ट वेल्स की रोसी एकल्स को 4-0 से हराया।
  • साक्षी चौधरी (51 किग्रा): कनाडा की एंबर-जेन वॉल को 5-0 से मात दी।
  • प्रीति पवार (54 किग्रा): जाम्बिया की कैथरीन मवापे को 5-0 से हराया।
  • जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा): लेसोथो की रापेलैंग मासेलेला को आरएससी से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
  • प्रिया घनघस (60 किग्रा): इंग्लैंड की लुसी किंग्स-व्हीटली को 5-0 से हराया।
  • जादुमणि सिंह (55 किग्रा): नामीबिया के फिलिप हाओसेब को 5-0 से हराया।
  • सचिन सिवाच (60 किग्रा): वेल्स के ओवेन हैरिस-एलन को 5-0 से मात दी।
  • अंकुश पंघाल (80 किग्रा): कनाडा के जोशुआ ओफोरी को हराकर फाइनल में पहुंचे।
  • नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा): त्रिनिदाद एवं टोबैगो के नाइजेल पॉल को 5-0 से हराया।

फाइनल मुकाबलों में भारत के खिलाड़ी

  • जादुमणि सिंह (55 किग्रा) बनाम जे डिक्सन (ऑस्ट्रेलिया)
  • सचिन सिवाच (60 किग्रा) बनाम ट्राईअगेन नडेवेलो (नामीबिया)
  • अंकुश पंघाल (80 किग्रा) बनाम डिमेजी शिट्टू (इंग्लैंड)
  • नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) बनाम दमार थॉमस (इंग्लैंड)
  • साक्षी चौधरी (51 किग्रा) बनाम रूबी व्हाइट (इंग्लैंड)
  • प्रीति पवार (54 किग्रा) बनाम स्कारलेट डेलगाडो (कनाडा)
  • अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) बनाम चैंटल रीड (इंग्लैंड)
  • जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा) बनाम माइकेला वॉल्श (उत्तरी आयरलैंड)
  • लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) बनाम एमा-सू ग्रीनट्री (ऑस्ट्रेलिया)
  • प्रिया घनघस (60 किग्रा) बनाम मैरी-बाथौल अल-अहमदिया (कनाडा)

भारत की नजर अब इन सभी 10 फाइनल मुकाबलों में जीत दर्ज कर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग के इतिहास का सबसे सफल अभियान पूरा करने पर होगी।

 
 
 
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