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अंधविश्वास बना जानलेवा, भतीजे ने चाचा की कुल्हाड़ी से हत्या

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 दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जादू-टोना के शक में एक भतीजे ने अपनी मां की मौत का बदला लेने की भावना से अपने ही चाचा की टंगिया (कुल्हाड़ी) से बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


मां की मौत का शक बना हत्या की वजह

घटना 3 फरवरी 2026 की है। मृतक की पहचान कोसा मंडावी (50 वर्ष) निवासी ग्राम पोंदुम-2, गोटखुटापारा के रूप में हुई है। आरोपी भतीजा मुड़ा उर्फ मनकू मंडावी (27) को शक था कि उसकी मां सुकड़ी मंडावी की मौत जादू-टोना के कारण हुई है और इसके पीछे उसके चाचा कोसा मंडावी का हाथ है।

इसी संदेह को लेकर आरोपी और मृतक के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

टंगिया से ताबड़तोड़ वार कर की हत्या

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बदला लेने की नीयत से हत्या की साजिश रची। 3 फरवरी को वह मौका पाकर अपने चाचा के घर पहुंचा और टंगिया से सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार कर उनकी मौके पर ही हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी फरार हो गया।

जांच में जुटी पुलिस, जंगल से पकड़ा गया आरोपी

घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घर के आंगन में मृतक का शव खून से लथपथ मिला। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी ग्राम पोंदुम और जारम के बीच जंगल में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस और डीआरजी की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में ले लिया।

 जुर्म कबूल, हथियार बरामद

पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से

  • हत्या में प्रयुक्त टंगिया (कुल्हाड़ी)
  • खून से सना हाफ नेकर

जब्त किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

 पुलिस का बयान

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.के. बर्मन ने बताया कि यह जघन्य वारदात जादू-टोना के अंधविश्वास के चलते की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है।

Accident: स्कूल जाते वक्त मौत, पुलिस टो-ट्रक की टक्कर से छात्र की जान गई

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 रायपुर : रायपुर के छत्तीसगढ़ क्लब के पास आज शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कूल जा रहे स्कूटी सवार छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ मौजूद छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा सेंट्रल बैंक रोड के एक अंधे मोड़ पर हुआ।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार में आ रहे पुलिस के क्रेन वाहन (टो-ट्रक) ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।

 स्कूल जाते वक्त हादसा

बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे स्कॉलर्स स्कूल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे टो-ट्रक ने ओवरटेक करते हुए स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छात्रा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

 चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हादसे के बाद टो-ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रा को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस ने बताया कि वाहन और चालक की पहचान की जा रही है और जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हृदयविदारक हादसे के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। साथ ही स्कूल जाते बच्चों की सुरक्षा और पुलिस वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Chhattisgarh : रजिस्ट्री सेवाएं होंगी आसान, राज्य में खुलेंगे 4 नए कार्यालय

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 Chhattisgarh Sub Registrar Office : आम नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन सेवाएं सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने चार नए उप पंजीयक कार्यालय खोलने की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह फैसला रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के तहत लिया गया है।


 इन क्षेत्रों में खुलेंगे नए कार्यालय

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नए उप पंजीयक कार्यालय निम्न स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे—

  • धमतरी जिला : भखारा
  • बलौदाबाजार-भाटापारा जिला : तहसील मुख्यालय लवन
  • बिलासपुर जिला : सकरी
  • बिलासपुर जिला : राजकिशोर नगर

इन कार्यालयों के शुरू होने से स्थानीय नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

 समय और धन दोनों की बचत

सरकार का मानना है कि इस पहल से

  • नागरिकों का समय और खर्च बचेगा
  • पंजीयन कार्यालयों में भीड़ कम होगी
  • प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी
  • स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम जनता को पंजीयन से जुड़े कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी।

10 डिजिटल सुविधाओं का लाभ

वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि नागरिक सुविधाओं का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पंजीयन विभाग द्वारा पहले ही

  • ऑटो डीड जनरेशन
  • आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन
  • घर बैठे रजिस्ट्री
  • स्वतः नामांतरण
  • कैशलेस भुगतान
  • डिजिलॉकर एकीकरण

सहित 10 डिजिटल नवाचार लागू किए जा चुके हैं। अब इन नई जगहों के नागरिकों को भी इन सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

कौवों की रहस्यमयी मौत, H5N1 वायरस की पुष्टि से अलर्ट

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 H5N1 virus scare : तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के अलग-अलग इलाकों में सैकड़ों कौवे मृत पाए गए। लैब जांच में इन पक्षियों में H5N1 (एवियन इन्फ्लूएंजा) वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।


अचानक हुई इन मौतों ने इलाके में बर्ड फ्लू फैलने की आशंका बढ़ा दी है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और एहतियाती निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

 एडवाइजरी जारी, सख्त निर्देश

स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि

  • मरे हुए कौवों और पोल्ट्री पक्षियों के शवों को बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत नष्ट किया जाए
  • शवों को या तो जलाया जाए या गहरे गड्ढे में दफनाया जाए
  • आम लोग मरे हुए पक्षियों को छूने या उठाने से बचें
  • किसी भी नए मामले की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें

इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल और व्यापक फील्ड सर्विलांस के निर्देश दिए हैं।

H5N1 क्या है?

H5N1, इन्फ्लूएंजा-A वायरस का एक खतरनाक प्रकार है, जिसे बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है। यह वायरस मुख्य रूप से पक्षियों, खासकर पोल्ट्री को संक्रमित करता है।

हालांकि यह बीमारी आम तौर पर पक्षियों तक सीमित रहती है, लेकिन संक्रमित पक्षियों, उनके मल, लार या दूषित सतहों के सीधे संपर्क में आने से इंसान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

कितना खतरनाक है H5N1?

पक्षियों में यह वायरस तेजी से फैलता है और बड़ी संख्या में मौतों का कारण बन सकता है

  • इंसानों में संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन जब होता है तो गंभीर निमोनिया और सांस की तकलीफ हो सकती है
  • पिछले प्रकोपों में H5N1 की मृत्यु दर सामान्य फ्लू से कहीं अधिक पाई गई है
  • फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है।

EMI पर फिलहाल कोई राहत नहीं, RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा

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 RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का ऐलान किया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस फैसले से लोन लेने वालों को EMI में राहत मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है।


तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समीक्षा के अंत में यह निर्णय लिया गया। RBI का यह रुख बताता है कि बैंक फिलहाल महंगाई के आउटलुक को लेकर सतर्क है, हालांकि ब्याज दरों पर स्थिरता बनाए रखना चाहता है।

RBI गवर्नर ने कहा कि हालिया वैश्विक और घरेलू डील्स के चलते ग्रोथ आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।

कटौती की उम्मीद पहले से कम थी

विशेषज्ञों का मानना था कि फरवरी में रेपो रेट कटौती की संभावना कम है। केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने कैपेक्स को 12% बढ़ाने और राजकोषीय घाटा 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा बाहरी माहौल में भी सुधार के संकेत हैं। अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18% करना और भारत-EU FTA से ट्रेड व निवेश बढ़ने की उम्मीद ने RBI को सतर्क रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया।

पिछले एक साल में 4 बार कटौती

फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच RBI ने चार बार रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी।

  • फरवरी 2025: 0.25%
  • अप्रैल 2025: 0.25%
  • जून 2025: 0.50%
  • दिसंबर 2025: 0.25%

इन कटौतियों से EMI में राहत मिली थी, लेकिन फरवरी 2026 की बैठक में दरें स्थिर रखी गई हैं।

खेलो भारत नीति-2025 लॉन्च: खेलों के माध्यम से राष्ट्र का समग्र विकास

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने 10 जुलाई 2025 को खेलो भारत नीति-2025 की शुरुआत की। इस नीति का उद्देश्य देश में एक मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन-केंद्रित खेल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। नीति का मूल उद्देश्य है:

“राष्ट्र निर्माण के लिए खेल – खेल की शक्ति से राष्ट्र का समग्र विकास”।

नीति के मुख्य उद्देश्य और विशेषताएँ:

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खेल बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाना।

  • प्रारंभिक प्रतिभाओं की पहचान और उनका समर्थन।

  • खेलों में समान अवसर सुनिश्चित करना, विशेष रूप से महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।

  • स्कूल शिक्षा में खेलों का समावेश और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना।

  • आधुनिक खेल संरचना और प्रशिक्षण प्रणाली में निवेश, साथ ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों का विकास।

नीति का उद्देश्य खेलों के अवसरों को हर वर्ग तक पहुंचाना और शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना है। इसके तहत प्रशिक्षण सुविधाएँ, खेल ढांचे और प्रतियोगिताओं के मंच विकसित किए जाएंगे।

राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका:

चूंकि खेल राज्य विषय हैं, इसलिए खेलों के प्रचार और विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय खेल नीति के अनुरूप इन प्रयासों का समर्थन और निगरानी करती है। नीति और योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन तीसरे पक्ष द्वारा किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

यह जानकारी युवा मामले एवं खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।


पूर्वी नागालैंड के विकास को मिलेगी नई गति: पीएम मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्वी नागालैंड के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूर्वी नागालैंड के विकास पथ को मजबूती देगा और क्षेत्र के लोगों के लिए अवसरों व समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास को नई गति देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और क्षेत्र में शांति, प्रगति तथा समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कदम पूर्वोत्तर भारत के प्रति केंद्र सरकार की शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार का मानना है कि इस समझौते से पूर्वी नागालैंड में आधारभूत ढांचे, आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक विकास को बल मिलेगा, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा।



राजधानी के स्कूल में सुरक्षा में बड़ी चूक, क्लासरूम में चाकू लहराने का वीडियो वायरल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने स्कूलों की सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वामी आत्मानंद स्कूल, मोवा के एक क्लासरूम में छात्रों द्वारा चाकू लहराने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आते ही अभिभावकों, शिक्षकों और आम लोगों में दहशत का माहौल बन गया।


वीडियो वायरल होते ही पुलिस की त्वरित कार्रवाई

मामले की जानकारी मिलते ही पंडरी थाना पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। पुलिस ने स्कूल से जुड़े तीन छात्रों को हिरासत में लिया है। इनमें एक छात्र बालिग है, जबकि दो नाबालिग बताए जा रहे हैं। तीनों छात्र स्वामी आत्मानंद स्कूल, मोवा में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि घटना स्कूल परिसर के अंदर ही हुई थी, जो सुरक्षा मानकों और विद्यालयीन नियमों का खुला उल्लंघन है।

परिजन और प्राचार्य को थाने बुलाया गया

पुलिस ने हिरासत में लिए गए तीनों छात्रों से पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही छात्रों के परिजनों और स्कूल के प्राचार्य को भी थाने बुलाया गया है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि छात्र चाकू स्कूल परिसर में कैसे लेकर आए, उनका उद्देश्य क्या था और क्या इसके पीछे किसी प्रकार का दबाव या साजिश शामिल है।

स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन प्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सरकारी स्कूलों, विशेषकर स्वामी आत्मानंद योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में क्लासरूम के भीतर चाकू लहराने जैसी घटना ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कल शाम रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित समस्त कार्यकारिणी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। यह देश के पुराने एवं प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनिर्वाचित पदाधिकारी प्रेस क्लब की गरिमा और प्रतिष्ठा को और ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं। पत्रकार समाज के प्रति सजग रहते हुए साहस के साथ गरीबों, वंचितों और आमजन की आवाज को बुलंद करते हैं। साथ ही शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र की डबल इंजन सरकार ने सुदृढ़ रणनीति के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध लगातार निर्णायक सफलता हासिल की है। बीते दो वर्षों में हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और पराक्रम के कारण नक्सलवाद आज समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्णतः खात्मा किया जाएगा, जो निश्चित रूप से शीघ्र साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार पत्रकार कठिन एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं। हमारी बहन-बेटियाँ भी पत्रकारिता के क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी और साहस के साथ अपनी भूमिका निभा रही हैं, जो समाज के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सदैव चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और अधिकारों की पक्षधर रही है। गत वर्ष के बजट में पत्रकारों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। पत्रकारों के विभिन्न समूहों को अध्ययन एवं भ्रमण के लिए देश के अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया, जिसमें महिला पत्रकार भी शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों द्वारा लौटकर साझा किए गए अनुभव अत्यंत सकारात्मक और प्रेरणादायक रहे।

मुख्यमंत्री साय ने फेक न्यूज़ के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक गंभीर विषय है, जिस पर विचार और समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस दिशा में पत्रकार समुदाय द्वारा सकारात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि पत्रकारों के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी है तथा प्रेस क्लब अध्यक्ष द्वारा रखी गई मांगों पर सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकार समाज के अभिन्न अंग हैं। पत्रकारों द्वारा उठाए गए विषय सदैव समाजहित से जुड़े होते हैं और उनसे शासन-प्रशासन को समाज की वास्तविक जरूरतों को समझने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर पत्रकारों के साथ है और रायपुर प्रेस क्लब के सुदृढ़ विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने भी सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी एवं प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहन तिवारी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।कार्यक्रम के दौरान बसंत वीर उपाध्याय की पुस्तक “आईएएस की तैयारी और श्रीरामचरितमानस” का विमोचन भी किया गया।

इस मौके पर विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार कृष्णा दास सहित प्रशांत शर्मा, मोहित साहू, संदीप पौराणिक, अंशुमान शर्मा तथा रायपुर के अनेक वरिष्ठ पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कर्मयोगी पत्रकार राजेश शर्मा: खुशबू बनकर हवाओं में बिखर गए

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महासमुंद- साप्ताहिक 'राष्ट्रीय अभियोजक' के संस्थापक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश शर्मा का आज शुक्रवार, 6 फरवरी को सुबह 5.13 बजे देहावसान हो गया। उन्होंने एम्स रायपुर में अंतिम सांसें ली। वे बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। वे अपने पीछे लौकिक दुनिया में दो पुत्रियों और एक पुत्र को रोते-बिलखते छोड़ कर अलविदा कह गए। 

कल 5 फरवरी को शाम 4.27 बजे प्रेस क्लब महासमुंद व्हाट्सएप ग्रुप में उन्होंने अंतिम चार लाइन लिखी-

 " कौन कहता है कि जाऊँगा, 

         तो गुजर जाऊंगा। 

             मैं तो खुशबू हूँ, 

               हवाओं में बिखर जाऊँगा। "

फिर, 

उनकी अपील थी कि "तबियत बिगड़ती जा रही है। मेरे लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।"

तब पता नहीं क्यों मुझे आभास सा हो गया कि एक 'कर्मयोगी कलमकार' हमसे विदाई के पूर्व संकेत दे रहे हैं। आत्मा पंक्षी उन्मुक्त गगन में उड़ने को तैयार है। अपनों का स्नेह उसे जकड़े रखना चाहता है। तभी तो अंतिम क्षणों में भी अपनों से ईश्वरीय प्रार्थना की अपेक्षा की जाती है। 

उनकी चार लाइन ने मन को झकझोर दिया। बहुत से साथियों ने पूर्ण स्वस्थ, शीघ्र स्वस्थ, यह दौर गुजर जाएगा कि दुआ, स्वस्थ और शतायु होने की प्रार्थना,  स्वस्थ होकर घर आने, ईश्वर की कृपा बनी रहने, पूरी तरह ठीक होने की शक्ति, बाबा महाकाल की कृपा जैसी प्रार्थनाएं की। बहन उत्तरा विदानी ने अधिकार जताया। एक बेटी का अधिकार- 

"आपका स्वस्थ होकर लौटना निहायत जरूरी है काका साहब। मेरे पास शब्द नहीं है, बस एक प्रार्थना है भगवान जी से कि आपको जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिले। आप कुछ और नहीं मेरी हिम्मत हैं... एकमात्र ऐसा हौसला... जो बेटियों को सिर्फ पिता से मिलती है।"

साक्षी दृष्टा भाव से किंकर्तव्यविमूढ़ सभी की भावनाओं को पढ़ता रहा।  मन से कुछ आवाज आयी। तब मैंने लिखा- 

"कौन कहता है कि आप थम जाएंगे,

आप तो विश्वास हो, 

हर मन में बस जाओगे।

देह की पीड़ा क्षणिक है, 

आत्मा अमर है,

कर्मपथ के यात्री हो, 

फिर उठ खड़े हो जाओगे।

ईश्वर आपके साथ है हर श्वास में,

हर वेदना में भी उसका आशीर्वाद छुपा है।

जो तप कर निखरता है, 

वही तेजस्वी होता है,

यह शरीर नहीं,

आत्मबल ही सबसे बड़ा सहारा है।

परमात्मा से प्रार्थना है —

आपको आरोग्य, धैर्य और शक्ति प्रदान करें।

आपके अच्छे कर्मों का फल

शीघ्र स्वस्थ होकर

फिर से जीवन में खुशबू बनकर

बिखरने का वरदान दें।

ईश्वर की कृपा से

 यह समय भी बीत जाएगा ,

और आप फिर से

 कर्म और साहस के साथ पत्रकारिता

जीवन की धारा में

और भी मजबूत होकर लौट आएंगे।

" देह तो माध्यम मात्र है, 

आत्मा अजर-अमर-अविनाशी है।"

यह लिखते हुए मन रो रहा था। उनके साथ बिताए पलों को याद कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि बस....

अब साथ छूटने ही वाला है। गीता ज्ञान की तरह सहज ही यह निकल पड़ा- 

" एक न एक दिन हम सबको देह त्यागना है। 

देह अभिमान से ऊपर उठकर आत्मबल के साथ आपके जीवन यात्रा से प्रेरणा लेकर, ऐसे ही सभी को 'बिंदास' होकर जीना चाहिए। "

आज जब अलसुबह बहन उत्तरा विदानी का फोन आया। उन्होंने प्रेस क्लब ग्रुप में लिखा- 

" अभी पांच बजकर 13 मिनट पर डॉक्टर का जवाब आ गया है। साथियो, अब राजेश काका साहब भी आ जाएंगे। काका साहब को रायपुर से महासमुंद लाया जा रहा है। नीलम बहन का इरादा है कि 'राष्ट्रीय अभियोजक' कार्यालय में ही उनका पडाव हो अंतिम दर्शन के लिए।  क्योंकि वहीं उन्होंने अधिकांश समय व्यतीत किया है, उसके बाद ही (अनंत की यात्रा) यात्रा पर निकलेंगे। आप सभी सूचना जानें। "

फिर प्रेस क्लब अध्यक्ष रत्नेश सोनी जी की प्रेस क्लब ग्रुप में 'प्रथम श्रद्धांजलि' जो तस्वीर आप देख रहे हैं। 

एक राज की बात मैं आपको बता दूं कि राजेश शर्मा जी की अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन की खबर मैं लिखूं। वे कई बार हंसी-ठिठोली में यह कहते थे। मैं नम आंखों से आज उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति कर रहा हूँ।

प्रेस क्लब के साथी भाई ललित मानिकपुरी ने सभी साथियों के लिए लिखा था। 'यदि हम पेड़ होते.. ..' उन्होंने राजेश शर्मा को 'बरगद' से नवाजा। इस तरह से वट वृक्ष का ढह जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है। 

बस इतना ही कहूंगा कि- "कर्मयोगी कलमकार कभी मरा नहीं करते।"

राजेश कुमार शर्मा की आत्मा की यह आवाज-

" कौन कहता है कि जाऊँगा, 

         तो गुजर जाऊंगा। 

             मैं तो खुशबू हूँ, 

               हवाओं में बिखर जाऊँगा। "

चिर काल तक अविस्मरणीय रहेगा। भावपूर्ण श्रद्धासुमन। 

@ आनंदराम पत्रकारश्री.

DSP कल्पना वर्मा निलंबित, विभाग ने जारी किया आदेश

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में गृह (पुलिस) विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।


जारी आदेश के अनुसार, शिकायत की प्राथमिक जांच में डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच में वित्तीय लेनदेन, दिए गए कथनों तथा व्हाट्सएप चैट में तथ्यों के बीच विरोधाभास पाया गया है। साथ ही, कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करने, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी सामने आए हैं।


इन कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर शासन ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया।

निलंबन अवधि के निर्देश

  • निलंबन अवधि में डीएसपी कल्पना वर्मा का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है
  • उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा

1475 पेज की जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे

गौरतलब है कि डीएसपी कल्पना वर्मा और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन से जुड़े विवाद की जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए थे। शासन के निर्देश पर एडिशनल एसपी स्तर पर जांच कराई गई थी, जिसकी करीब 1475 पेज की रिपोर्ट शासन को सौंपी गई।

जांच रिपोर्ट में डीएसपी वर्मा और दीपक टंडन के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का भी उल्लेख है, जिसमें पुलिस विभाग से जुड़ी संवेदनशील और खुफिया जानकारियां साझा किए जाने की बात सामने आई। इसे खुफिया जानकारी लीक करने जैसे गंभीर अपराध की श्रेणी में माना गया है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शासन ने कार्रवाई करते हुए डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित कर दिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला

रायपुर- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।    

कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

प्रधानमंत्री आवास केवल मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नींव हैं – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना में रचा राष्ट्रीय कीर्तिमान: चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण

रायपुर- प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की पहली ही बैठक  में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।  निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी जिलों के सतत, संगठित एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है।चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिलों में स्थित आरसेटी के माध्यम से 6,000 से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 960 से अधिक महिलाएँ तथा 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं। यह पहल कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बन रही है।

आवास हितग्राहियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत वर्तमान में प्रदेश में 10,000 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण प्रगतिरत है। 

इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल आवासों का तीव्र गति से निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इनके साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं, जो राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहे हैं।

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चालू  वित्तीय वर्ष 2025 -26 में मात्र 10 माह की अवधि में छत्तीसगढ़ में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण होना, जो देश में सर्वाधिक है, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मैंने प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय इसलिए लिया, ताकि राज्य का कोई भी गरीब और जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मेरे लिए प्रधानमंत्री आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार हैं, और इनके माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर हम छत्तीसगढ़ को समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।"- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ द्वारा 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण करना राज्य की प्रशासनिक क्षमता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण को जोड़कर योजना को समग्र विकास का माध्यम बनाया गया है। यह राष्ट्रीय कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन पर आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है। - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

बस्तर ओलंपिक बना छत्तीसगढ़ की नई पहचान, प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में किया उल्लेख

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ का 'बस्तर ओलंपिक' अब राज्य की नई पहचान बन चुका है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में किया। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताते हुए बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर उभरने का प्रतीक कहा। 

 पीएम मोदी का सदन में उल्लेख 

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा- "बस्तर ओलंपिक ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र को खेलों की धरती बना दिया है। यह लाखों आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।" उन्होंने बस्तर को "भय से भविष्य की ओर" बदलते क्षेत्र के रूप में चित्रित किया, जहां 3.91 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। 




देखिए VIDEO : PM मोदी ने क्या कुछ कहा सदन में



बस्तर ओलंपिक की सफलता 

2025-26 सत्र में आयोजित इस मेगा इवेंट में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो समेत 11 खेल हुए।  गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व समापन में इसे "नक्सलवाद के अंतिम कील" कहा था, जो 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का संकेत देता है।  अब सरगुजा ओलंपिक भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे युवा सशक्तिकरण का मॉडल बताया। बस्तर ओलंपिक ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की राष्ट्रीय मान्यता भी पाई।  यह आयोजन विकास, शांति और खेल को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग की ब्रीफिंग

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा आम चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की ब्रीफिंग बैठकें आयोजित कीं।

इन बैठकों में कुल 1,444 अधिकारी शामिल हुए, जिनमें 714 सामान्य पर्यवेक्षक, 233 पुलिस पर्यवेक्षक और 497 व्यय पर्यवेक्षक हैं। यह ब्रीफिंग बैठकें 5 और 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित IIIDEM में तीन चरणों में आयोजित की जा रही हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों को संबोधित किया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पर्यवेक्षक निर्वाचन आयोग के “प्रकाश स्तंभ” हैं और उन्हें स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि 824 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले चुनावों के दौरान पर्यवेक्षकों की उपस्थिति से पूरी चुनावी मशीनरी में ऊर्जा आएगी।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू ने पर्यवेक्षकों से कहा कि वे क्षेत्र में तैनात चुनाव अधिकारियों के लिए मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाएं। उनकी तैनाती का व्यापक प्रचार हो तथा वे आम मतदाताओं के लिए सुलभ रहें, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो और किसी भी प्रकार के पक्षपात की धारणा न बने।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने निर्देश दिया कि आयोग के सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) का समय पर वितरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक के दौरान पर्यवेक्षकों के साथ शंका-समाधान सत्र भी आयोजित किया गया। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें निर्वाचन नामावलियों की तैयारी, चुनाव संचालन, आईटी एप्लीकेशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मीडिया प्रबंधन से संबंधित पहलुओं पर जानकारी दी।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों को आयोग की आंख और कान बताते हुए उन्हें सभी चुनावी कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों से भली-भांति परिचित रहने तथा उनके निष्पक्ष अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्हें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए हमेशा सुलभ रहने को कहा गया।

पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों का दौरा कर आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं (AMFs) सहित मतदाताओं की सुविधा से जुड़ी हालिया पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई।

उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

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