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राष्ट्रपति भवन में गूंजी बस्तर की जनजातीय संस्कृति

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 ​रायपुर : बस्तर के घने जंगलों, अनूठी सामाजिक व्यवस्था और समृद्ध जनजातीय विरासत की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंच राष्ट्रपति भवन तक जा पहुंची है। नारायणपुर जिले के पारंपरिक मांझी-चालकी और 'बस्तर पंडुम' प्रतियोगिता के विजेताओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल हाल ही में नई दिल्ली पहुंचा, जहां उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति से सौजन्य मुलाकात की। इस आत्मीय भेंट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बस्तर की जीवंत परंपराओं, लोक कलाओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराया।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई 2026 में राष्ट्रपति भवन का दौरा किया, जिसमें बस्तर पंडुम के विजेता, मांझी-चालकी और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे।


​इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को नारायणपुर से हुई थी, जब नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने हरी झंडी दिखाकर इस दल को दिल्ली के लिए रवाना किया था। पूरे जिले के लिए यह एक अत्यंत गर्व का क्षण था। इसके बाद 30 जुलाई को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में बस्तर की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करने का यह सुनहरा अवसर आया।


​मुलाकात के दौरान बस्तर की कला और परंपरा के प्रमुख ध्वजवाहकों ने अपनी माटी का प्रतिनिधित्व किया। इनमें 'बस्तर पंडुम' के जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा शामिल थीं, जिन्होंने पारंपरिक आभूषणों के सौंदर्य और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं, बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था का नेतृत्व करते हुए एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई तथा करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों का परिचय दिया।

​प्रतिनिधिमंडल की इस मुलाकात से न केवल नारायणपुर और समूचा बस्तर संभाग गौरवान्वित महसूस कर रहा है, बल्कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंचों से जनजातीय कला, परंपराओं और लोक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में लोक भवन से ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ

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 रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज देशभर में प्रारंभ हुए ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन तथा विभिन्न युवा संगठनों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया और समाज को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।


इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए 100 सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और यदि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग करें, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान किया।

लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं ने उत्साहपूर्वक देखा। राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।

उल्लेखनीय है कि ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ 2 अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर आगामी 100 सप्ताह तक देशभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), माय भारत युवा संगठन तथा अन्य युवा संगठनों के सहयोग से विविध जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम, जागरूकता रैलियाँ, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद, निबंध लेखन, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लघु फिल्म प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान तथा सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।

अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर इसे जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनाया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

दोस्ती: जीवन का सबसे खूबसूरत रिश्ता, फ्रेंडशिप डे पर खास

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 जीवन में कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम अपनी पसंद और विश्वास से चुनते हैं। यही कारण है कि मित्रता को दुनिया का सबसे अनमोल और निस्वार्थ रिश्ता माना जाता है। हर वर्ष अगस्त माह के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फ्रेंडशिप डे हमें अपने दोस्तों के प्रति सम्मान, विश्वास और प्रेम व्यक्त करने का अवसर देता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां रिश्तों के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है, वहीं सच्चा दोस्त हर सुख-दुख में साथ खड़ा नजर आता है। बचपन की शरारतों से लेकर स्कूल, कॉलेज, नौकरी और जीवन के हर पड़ाव तक दोस्त हमारी यादों और अनुभवों का अहम हिस्सा बन जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में दोस्त का साथ न केवल हौसला बढ़ाता है, बल्कि जीवन को नई दिशा भी देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत मित्रता मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होती है। अच्छे दोस्त तनाव कम करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि मित्रता को केवल एक सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे का मजबूत आधार भी माना जाता है।

समय के साथ दोस्ती का स्वरूप जरूर बदला है। अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग दूर रहकर भी जुड़े रहते हैं, लेकिन वास्तविक मित्रता की पहचान आज भी विश्वास, ईमानदारी और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से होती है। ऑनलाइन संदेशों और पोस्ट के साथ-साथ व्यक्तिगत मुलाकात, एक फोन कॉल या हालचाल पूछने का छोटा-सा प्रयास भी रिश्तों को और मजबूत बना सकता है।

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मित्रता से जुड़े कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। युवा अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड बांधकर, शुभकामनाएं देकर और यादगार पल साझा कर इस दिन को खास बनाते हैं।

यह दिन हमें यह संदेश भी देता है कि सच्ची दोस्ती जाति, धर्म, भाषा और आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर केवल इंसानियत, विश्वास और अपनत्व पर आधारित होती है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में सच्ची मित्रता के मूल्यों को अपनाए, तो समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना और अधिक मजबूत हो सकती है।

फ्रेंडशिप डे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन रिश्तों को संजोने और उन्हें समय देने का अवसर है, जो जीवन की हर कठिन राह को आसान बना देते हैं। आखिरकार, सच्चा दोस्त वही होता है, जो परिस्थितियां बदल जाने पर भी कभी साथ नहीं छोड़ता।

निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

बीएसपी लोहा चोरी कांड: रसूख का नशा उतरा! कारोबारी भास्कर मुदलियार गिरफ्तार, 17 आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे

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 भिलाई । भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में हुए करोड़ों रुपये के लोहा चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने शनिवार को एक और बड़ी सफलता हासिल की है। मामले में संलिप्तता उजागर होने पर पुलिस ने शहर के रसूखदार कारोबारी भास्कर मुदलियार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।




संयंत्र के भीतर संचालित होती थीं गाड़ियां

पुलिस जांच के अनुसार, वैशाली नगर निवासी भास्कर मुदलियार की गाड़ियां लंबे समय से भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर संचालित हो रही थीं। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य मिले, जिनसे चोरी के इस खेल में मुदलियार की सीधी संलिप्तता की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, और गिरफ्तारियां संभव

इस हाई-प्रोफाइल लोहा चोरी मामले में पुलिस अब तक जीएम (जनरल मैनेजर), इंजीनियर, एसोसिएट और मुख्य साजिशकर्ता समेत कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोहा चोरी से जुड़े पूरे सिंडिकेट और नेटवर्क की गहन जांच जारी है। पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और प्रमुख लोगों की गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल समापन, IIT दिल्ली में नवाचारों को मिला मंच

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नई दिल्ली- वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 – "वीविंग इनोवेशंस" का सफल समापन फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT), IIT दिल्ली में हुआ। हैकाथॉन में देशभर से 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से शीर्ष 100 चयनित टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए 280 प्रतिभागियों ने भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।

इस हैकाथॉन ने नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और हथकरघा विशेषज्ञों को करघों के आधुनिकीकरण, डिजाइन नवाचार, सतत विकास, बाजार तक पहुंच और बुनकरों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। प्रतिभागियों ने उत्पादकता बढ़ाने, पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करने और हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने वाले कई नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मंत्रालय डॉ. एम. बीना (IAS), IIT दिल्ली के वस्त्र एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता, IIT दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव पंकज कपाड़िया तथा थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक संजीवा शिवेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग की मजबूत मिसाल पेश की।

इस अवसर पर डॉ. एम. बीना ने कहा कि "हैंडलूम हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि तकनीक भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैंडलूम हैकाथॉन के माध्यम से हम इन दोनों को जोड़कर बुनकर समुदाय को सशक्त बना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र स्वाभाविक रूप से सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। उन्होंने करघा प्रक्रियाओं, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए इंडियन हैंडमेड पोर्टल का उल्लेख किया, जो बुनकरों को बिना किसी तीसरे पक्ष के अपने उत्पाद सीधे वैश्विक बाजार में बेचने का अवसर प्रदान करता है।

डॉ. बीना ने IIT और NIFT जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जो बुनाई की पारंपरिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक सटीकता लाए, श्रम को कम करे और बुनकरों की आय बढ़ाने में सहायक बने।

IIT दिल्ली की डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि संस्थान में स्थापित होने जा रहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी तकनीक और हथकरघा के बेहतर समन्वय को बढ़ावा देगा। इससे उत्पादकता और मानकीकरण में सुधार होगा, जबकि हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता भी बनी रहेगी। यह केंद्र अगले सप्ताह वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया जाएगा।

पंकज कपाड़िया ने कहा कि तकनीक हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जबकि संजीवा शिवेश ने फाइनलिस्ट टीमों को बधाई देते हुए उन्हें भविष्य में भी सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने वाले नवाचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

हैकाथॉन के विजेताओं को चार प्रमुख श्रेणियों—बुनकर आजीविका एवं वित्तीय समावेशन, मार्केट एक्सेस एवं डिजिटल इंटीग्रेशन, सतत विकास एवं पर्यावरणीय प्रभाव, तथा डिजाइन एवं संचालन में नवाचार—में सम्मानित किया गया। विजेता समाधानों में एआई आधारित बुनकर सहायता प्लेटफॉर्म, डिजिटल मार्केटिंग टूल, पर्यावरण अनुकूल रंगाई एवं निगरानी प्रणाली तथा करघा आधुनिकीकरण से जुड़े तकनीकी नवाचार शामिल रहे।

विजेता टीमों में केसीजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, IIHT सलेम, IIT मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, श्री ईश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, KLB IIHT हैदराबाद और स्टार्टअप साविन्या स्टूडियो के प्रतिभागी शामिल रहे।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल आयोजन वस्त्र मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत नवाचार, शिक्षा-उद्योग सहयोग और तकनीक आधारित समाधानों के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को अधिक सक्षम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है, ताकि देश के बुनकरों की आजीविका और समृद्धि को नई गति मिल सके।

युद्ध टला, समझौते का रास्ता साफ: ट्रंप ने रद्द की ईरान पर बड़े हमले की तैयारी, 'हॉर्मुज' जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलेगा

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 वाशिंगटन / तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर एक अत्यंत भीषण हमले की पूरी तैयारी कर ली थी। उनके अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य हमला होता। हालांकि, ईरान और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के अन्य देशों की अपील पर इस प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया गया है।


राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के तहत 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को समुद्री आवाजाही के लिए पूरी तरह से खोला जाएगा और ईरान अपने परमाणु हथियार (न्यूक्लियर बम) कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करेगा।

'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप का बड़ा दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिकी सेना इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद थी। उन्होंने कहा:

"मध्य पूर्व के देशों की अपील पर, दुनिया के सुरक्षित भविष्य और एक सफल व खुशहाल ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए, मैं इस हमले को रद्द करने पर सहमत हुआ हूँ—बशर्ते हम जल्द ही एक समझौते पर पहुँच जाएँ। इज़राइल भी इस प्रतिबद्धता में अमेरिका के साथ काम करने के लिए सहमत है।"

ईरान ने स्वीकार कीं शर्तें!

ट्रंप के अनुसार, मध्य पूर्व के देश और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा तय किए गए समझौते के मानकों को मानने पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते की मुख्य शर्तों में शामिल हैं:

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की पूर्ण बहाली: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और तेल टैंकरों के लिए इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखा जाएगा।

परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान भविष्य में कोई भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

सैन्य तैयारी और परामर्श जारी

अमेरिकी प्रशासन ने हमले से पहले सुरक्षात्मक उपाय के रूप में अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की थी। इसमें मध्य पूर्व में उड़ानों के रद्द होने और सुरक्षा जोखिमों के प्रति आगाह करते हुए अमेरिकी नागरिकों को जल्द से जल्द क्षेत्र छोड़ने या सतर्क रहने का परामर्श दिया गया था।

फिलहाल, अमेरिका और उसके सहयोगियों का ध्यान इस समझौते को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है।

नोटों के बंडल का लालच पड़ा भारी: भिलाई में महिला गंवा बैठी सोने का मंगलसूत्र और नकदी

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 भिलाई। पावर हाउस स्थित जवाहर मार्केट में ठगों के एक गिरोह ने महिला को 500 रुपये के नोटों की गड्डी का लालच देकर सोने का मंगलसूत्र और 2,000 रुपये नकदी पार कर दिए। पीड़िता को बाद में पता चला कि नोटों की गड्डी में ऊपर सिर्फ एक असली नोट था और अंदर रद्दी कागज भरा हुआ था। मामला छावनी थाने का है।


रास्ता पूछने के बहाने की बातचीत
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जवाहर मार्केट निवासी पीड़िता टी. चंद्रावती स्थानीय बाजार में किराना दुकान चलाती हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे वह सब्जी खरीदने बाजार गई थीं। इसी दौरान एक अज्ञात युवक ने उनसे दुर्ग जाने का रास्ता पूछा और बातचीत में उलझा लिया।

नागपुर जाने और सेठ की कहानी गढ़ी
कुछ ही देर में वहाँ एक महिला और एक अन्य पुरुष आ पहुँचे। उन्होंने खुद को बिलासपुर का निवासी बताते हुए कहा कि उनके सेठ ने उन्हें काम से निकाल दिया है और अब उन्हें नागपुर जाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत है।

ऐसे दिया ठगी को अंजाम
बातचीत के दौरान गिरोह के एक सदस्य ने 500-500 रुपये के नोटों का एक बंडल दिखाया। उसने महिला से कहा कि यदि वह अपना पुराना मंगलसूत्र दे दे, तो वे बदले में पूरा बंडल उसे सौंप देंगे। झांसे में आकर महिला ने अपना मंगलसूत्र उतारकर उन्हें दे दिया। इसके बाद शातिरों ने नागपुर जाने का किराया बताते हुए 2,000 रुपये नकद भी ले लिए और रफूचक्कर हो गए।

घर पहुँचकर खुला राज, मामला दर्ज
घर पहुँचने पर जब महिला ने बंडल खोला, तो उसके उड़ गए। ऊपर सिर्फ एक 500 रुपये का असली नोट था, जबकि नीचे केवल रद्दी कागज भरे थे। ठगी का अहसास होने पर महिला ने अपने बेटे के साथ छावनी थाना पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दिल्ली-एनसीआर में तड़के भूकंप के झटके, असम और अरुणाचल में भी डोली धरती

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 नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के तीन राज्यों में रविवार तड़के भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। दिल्ली के उत्तरी जिले (North District) में सुबह-सुबह आई इस भूगर्भीय हलचल से कुछ देर के लिए लोग दहशत में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।


दिल्ली में 2.9 रही तीव्रता

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, दिल्ली में भूकंप तड़के 4:14 बजे आया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.9 दर्ज की गई।

  • केंद्र (Epicenter): नॉर्थ दिल्ली
  • गहराई (Depth): जमीन से 8 किलोमीटर नीचे
  • एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट साझा कर भूकंप की पुष्टि की।

असम और अरुणाचल प्रदेश में भी महसूस हुए झटके

  1. दिल्ली के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश में भी रविवार सुबह भूकंप दर्ज किया गया:
  2. असम (बारपेटा): सुबह 5:25 बजे 2.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 4 किलोमीटर थी।
  3. अरुणाचल प्रदेश (तवांग): सुबह 5:38 बजे 2.8 तीव्रता के झटके महसूस किए गए, इसका केंद्र 5 किलोमीटर गहराई पर था।

कम गहराई वाले (Shallow) भूकंप क्यों होते हैं खतरनाक?

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, 0 से 700 किमी गहराई तक आने वाले भूकंपों को तीन श्रेणियों—शैलो (कम गहराई), इंटरमीडिएट (मध्यम) और डीप (गहरे) में बांटा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई वाले भूकंप की तीव्रता भले ही कम हो, लेकिन इनकी तरंगें सतह तक बहुत तेज़ी से पहुँचती हैं। इसके चलते ज़मीन पर झटके अधिक तेज़ महसूस होते हैं और यदि तीव्रता अधिक हो, तो नुकसान की संभावना काफी बढ़ जाती है।

ध्यान दें: दिल्ली सीस्मिक जोन-4 (Seismic Zone-4) में आता है, जो भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहाँ समय-समय पर हल्के और मध्यम दर्जे के झटके आते रहते हैं।

बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का दो माह का राज्यव्यापी आंदोलन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर की स्थापना और बिजली सब्सिडी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यभर में दो महीने तक चलने वाले चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

कांग्रेस का आरोप है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार बिजली दर वृद्धि पर पुनर्विचार करे, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।

प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, आंदोलन के दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जनसभाएं, प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि वह बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को व्यापक रूप से उठाएगी।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि बिजली क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और दक्ष बनाना है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की वास्तविक खपत का सटीक आकलन होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे राज्यव्यापी जनआंदोलन के रूप में चलाने की तैयारी कर रही है।

मुख्य न्यायाधीश ने किया राजनांदगांव जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण, न्यायिक अधोसंरचना और डिजिटल व्यवस्था का लिया जायजा

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राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने शनिवार को राजनांदगांव जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण कर न्यायिक कार्यप्रणाली, अधोसंरचना एवं डिजिटल सुविधाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों तथा न्यायालयीन कर्मचारियों से संवाद कर न्यायिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

अपने प्रवास के दौरान उन्होंने जिला न्यायालय परिसर स्थित विभिन्न न्यायालय कक्षों, सेंट्रल प्रोसेस अनुभाग, सर्वर कक्ष, लीगल एड डिफेंस सिस्टम, अभिलेखागार, मालखाना, लेखा अनुभाग, पुस्तकालय, डिजिटलीकरण एवं स्कैनिंग केंद्र, पीड़ित विश्राम कक्ष तथा ‘किलकारी कक्ष’ सहित अन्य विभागों का निरीक्षण किया और उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की।

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालयीन कार्यों में कार्यकुशलता, जवाबदेही, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव तथा न्यायालय परिसर की स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने न्यायालयों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने तथा आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक उपयोग के निर्देश देते हुए न्याय व्यवस्था को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि न्यायिक अधोसंरचना का आधुनिकीकरण और डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग समय की आवश्यकता है, जिससे आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जा सके।

उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार प्रदेश के विभिन्न जिला एवं दूरस्थ न्यायालयों का दौरा कर न्यायिक व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में राज्य की अदालतों में आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण एवं न्यायिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण को नई गति मिली है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने जिला न्यायालय परिसर में मौलश्री के पौधे का रोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, जॉइंट रजिस्ट्रार-सह-प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी, प्रोटोकॉल अधिकारी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजनांदगांव, जिले के सभी न्यायिक अधिकारी, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी एवं अधिवक्ता, जिला कलेक्टर, लोक निर्माण विभाग तथा पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे।

आधार सेवा केंद्र बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का आधार

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वर्षों से बंद पड़ी सुविधाएं हुईं बहाल,आयते को फिर मिलने लगा योजनाओं का लाभ

रायपुर- राज्य शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए संचालित आधार सेवा केंद्र अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम तोयलंका की निवासी आयते की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है, जिनकी वर्षों पुरानी आधार संबंधी समस्या का समाधान होने से उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ फिर से मिलने लगा है।

आयते लंबे समय से आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण परेशान थीं। आधार निष्क्रिय होने से उन्हें पेंशन, राशन और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार प्रयास करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाने से वे निराश हो चुकी थीं।

इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आधार सेवा केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां आधार संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। जानकारी मिलते ही वे सेवा केंद्र पहुंचीं और अपनी समस्या अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताई।

जांच में पता चला कि लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं होने के कारण उनका आधार निष्क्रिय हो गया था। सेवा केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई और आधार को पुनः सक्रिय कर दिया। पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की गई।

आधार पुनः सक्रिय होने के बाद आयते को अब पेंशन, राशन और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्र के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा ने उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

राज्य शासन की मंशा है कि हर नागरिक को बिना अनावश्यक परेशानी के शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिले। आधार सेवा केंद्रों के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर अपडेट और आधार सक्रियण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो रही है और डिजिटल सेवाओं पर उनका भरोसा मजबूत हो रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया

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पुणे- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पुणे में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेसुनेत्रा पवार, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि है। उन्होंने कहा कि तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का मंत्र देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वराज तभी संभव है जब शासन व्यवस्था, भाषा, संस्कृति और धर्म मजबूत हों।

शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन से जोड़ा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि तिलक महान शिक्षक, निर्भीक पत्रकार, प्रखर चिंतक और कर्मयोगी थे, जिनकी विचारधारा आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि तिलक ने न्यू इंग्लिश स्कूल, डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी और फर्ग्यूसन कॉलेज जैसी संस्थाओं की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके समाचार पत्र 'केसरी' और 'द मराठा' ब्रिटिश शासन के लिए सबसे प्रभावशाली आवाज बने।

अजीत डोभाल के योगदान की सराहना

अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि समाज को प्रेरित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए असाधारण योगदान दिया है और यह सम्मान देश सेवा के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब अहमदाबाद सहित देशभर में हुए बम धमाकों की जांच के दौरान अजीत डोभाल ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप कई मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा हुआ।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिली है, जिसमें अजीत डोभाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने कहा कि 1972 से लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक बनने तक डोभाल ने देश के लगभग हर बड़े सुरक्षा अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, पंजाब तथा पाकिस्तान में कार्य करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत किया। पाकिस्तान में उनका छह वर्षों का कार्यकाल भी देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद केंद्र सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) को मजबूत किया, जो आज देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने कहा कि MAC की मजबूत नींव रखने में अजीत डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया और वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं।

अमित शाह ने कहा कि डोभाल के कार्यकाल में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सशक्तीकरण और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जिनमें उनका अनुभव और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

वन विभाग की सतर्कता से टला बड़ा खतरा, केरावाहारा में तेंदुआ सुरक्षित पकड़ा गया

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वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार त्वरित कार्रवाई, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद होगी आगे की प्रक्रिया

रायपुर- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केराबाहरा गांव में आतंक मचाने वाला एक तेंदुआ 1 अगस्त 2026 की सुबह वन विभाग द्वारा सुरक्षित पकड़ लिया गया। यह तेंदुआ पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार रिहायशी इलाके में आ रहा था और ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगाया और जानवर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वनमंडल के वन परिक्षेत्र गरियाबंद अंतर्गत ग्राम केरावाहारा (ग्राम पंचायत जोवा) में वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार गतिविधियों को देखते हुए लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) में शुक्रवार को तेंदुआ सुरक्षित रूप से पकड़ा गया। वन विभाग की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को टाल दिया गया।

तेंदुए की गतिविधियों पर रखी जा रही थी विशेष निगरानी

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के. ने बताया कि तेंदुए ने पहले क्षेत्र में पालतू मवेशियों पर हमला किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी के आसपास भी उसकी मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए।

केज ट्रैप और रेस्क्यू टीम की रणनीति रही सफल

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन और वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में ग्राम जोवा और केरावाहारा में केज ट्रैप लगाए गए थे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया था। इस कार्रवाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।

सुरक्षित रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य पर रखी जा रही निगरानी

वन विभाग की लगातार निगरानी और सुनियोजित रणनीति के चलते तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में आ गया। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी शुरू कर दी। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

पकड़े गए तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट या बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

अफवाहों से बचें, वन विभाग को दें तुरंत सूचना

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। तेंदुए से संबंधित कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत नजदीकी वन अमले को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक कदम नियमानुसार उठाए जा रहे हैं।

कुलगाम आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के मृत श्रमिकों के परिजनों को राज्य सरकार देगी 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि

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कुलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है छत्तीसगढ़ सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों पर किए गए कायराना हमले में सक्ती जिले के निवासी दीपक रात्रे तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के निवासी भूपेंद्र भैना के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने इस जघन्य और अमानवीय आतंकी घटना की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध अपराध है और ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से दोनों दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता  राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को  जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त की जाएगी, जो परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। 

मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

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