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छत्तीसगढ़ में बंद हुए सभी टाइगर रिजर्व और अभयारण्य, 1 अक्टूबर तक जंगल सफारी पर रोक

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 रायपुर। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए छत्तीसगढ़ के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्यों को 15 जून से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। यह प्रतिबंध 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद 2 अक्टूबर से जंगल सफारी और पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।


पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और अभयारण्यों को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है।

राज्य सरकार ने प्रकृति संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान जंगलों के भीतर बने कच्चे रास्ते और सफारी ट्रैक बारिश की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। लगातार बारिश से नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने और जलभराव के कारण आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है।

इसके अलावा बारिश का मौसम वन्यजीवों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह समय अधिकांश वन्य प्रजातियों के प्रजनन और शावकों के पालन-पोषण का होता है। ऐसे में वन्यजीवों को शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए मानव हस्तक्षेप सीमित किया जाता है।

ये प्रमुख पर्यटन स्थल रहेंगे बंद

अगले साढ़े तीन महीनों तक प्रदेश के कई प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित राज्य के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।

बंद के दौरान चलेगा विशेष अभियान

पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग जंगलों के भीतर कई महत्वपूर्ण कार्य करेगा। इसमें अवैध शिकार रोकने के लिए गश्त बढ़ाना, वन्यजीवों की निगरानी, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और सफारी मार्गों व रिसॉर्ट्स की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं।

वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जंगलों और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह “ग्रीन ब्रेक” पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है। अब 2 अक्टूबर 2026 से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए रोमांच के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार होंगे।

NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा फैसला, 22 जून तक Telegram पर बैन

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 नई दिल्ली। NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने परीक्षा की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Telegram पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगा दिया है, जबकि 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर भी बंद रहेगा।


यह फैसला 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए लिया गया है। National Testing Agency (NTA) की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट 2000 की धारा 69A के तहत यह आदेश जारी किया।

NTA के मुताबिक, Telegram पर कई फर्जी चैनल जैसे “PAPER LEAKED NEET” और “Re-NEET 2026” छात्रों को पेपर दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे थे। साथ ही मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल कर पेपर लीक के फर्जी सबूत बनाए जा रहे थे।

एजेंसी ने छात्रों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट NEET Official Portal से ही लें।

साइबर शिकायत हेल्पलाइन: 1930 | साइबर पोर्टल: National Cyber Crime Portal

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित, 13,343 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित

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नई दिल्ली- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। 24 मई 2026 को आयोजित इस परीक्षा के आधार पर कुल 13,343 अभ्यर्थियों को सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2026 में प्रवेश के लिए योग्य घोषित किया गया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी सफल अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी अनंतिम (Provisional) है। चयनित अभ्यर्थियों को 19 जून से 28 जून 2026 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर आवश्यक विवरण भरना एवं सत्यापित करना अनिवार्य होगा।

इस अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को निम्न कार्य करने होंगे:

  • मुख्य परीक्षा में प्रवेश हेतु ₹200 शुल्क का भुगतान (महिला, दिव्यांग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों को छूट)।

  • आवश्यकता होने पर स्क्राइब, सहायक उपकरण तथा बड़े फॉन्ट वाले प्रश्नपत्र संबंधी विवरण अपडेट करना।

  • सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 के लिए कैडर वरीयता (Cadre Preference) भरना।

UPSC ने चेतावनी दी है कि सभी योग्य अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित अवधि में पोर्टल पर लॉगिन कर आवेदन पत्र का अंतिम सबमिशन करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर मुख्य परीक्षा के लिए ई-एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा और अभ्यर्थी आगे की परीक्षा प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सिविल सेवा परीक्षा 2025 की 1087 रिक्तियों के लिए 14,161 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा हेतु चयनित किया गया था। वहीं इस वर्ष 1016 रिक्तियों के विरुद्ध 13,343 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।

आयोग ने यह भी बताया कि प्रारंभिक परीक्षा 2026 के अंक, कट-ऑफ और उत्तर कुंजी पूरी परीक्षा प्रक्रिया समाप्त होने तथा अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही सार्वजनिक किए जाएंगे।

अभ्यर्थी किसी भी प्रकार की जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए UPSC के हेल्पलाइन नंबर 011-40303444 एवं 011-24041001 पर सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।


वीडियो बनाने और ईनाम पाने का सुनहरा अवसर, पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की अनोखी पहल

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 आरंग/रायपुर। पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़' ने एक बेहद अनूठा और आकर्षक जनजागरण अभियान शुरू किया है। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत को पहचानते हुए संस्था ने युवाओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यावरण से जोड़ने के लिए 'वीडियो बनाओ, इनाम पाओ' प्रतियोगिता की घोषणा की है। इस अभियान का डिजिटल मीडिया पार्टनर www.media24media.com है।


​संस्था का मुख्य ध्येय वाक्य है:

​"जब तक पौधा, पेड़ न बन जाए। तरु-मित्र बनकर फर्ज निभाएं।"

​ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका

​इस अभियान के तहत कंटेंट क्रिएटर्स और रील्स बनाने वाले युवाओं को पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के महत्व पर केंद्रित वीडियो बनाने होंगे। चयनित उत्कृष्ट वीडियो क्रिएटर्स को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कारों की श्रेणी इस प्रकार है:-


पुरस्कार राशि

पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से प्रथम पुरस्कार 5001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र, मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से द्वितीय पुरस्कार ₹ 2001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र,

तृतीय पुरस्कार ₹ 1001/- नगद एवं प्रशस्ति पत्र एवं मोबाइल मास्टर आरंग की ओर से ही

प्रदाय किया जाएगा।

प्रतियोगिता के नियम और शर्तें:

​ वीडियो की अवधि: रील्स या वीडियो की लंबाई 30 से 60 सेकंड के बीच होनी चाहिए।

​ अपलोड और टैगिंग: वीडियो बनाने के बाद इसे अपने इंस्टाग्राम आईडी पर पोस्ट करना होगा। पोस्ट करते समय #piplawelfarefoundation और facebook पर #Media24Media पेज पर अनिवार्य रूप से टैग करना होगा।

​ अंतिम तिथि: प्रविष्टि टैग करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है (जो आवश्यकतानुसार परिवर्तनीय है)।

​ विशेष प्राथमिकता: वीडियो में 'पीपला फाउंडेशन' का लोगो इस्तेमाल करने वाले क्रिएटर्स को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।

​ नियम व व्यवस्था

​आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से एक जनजागरण अभियान है। इसमें विजेताओं के चयन का सर्वाधिकार संस्था के पास सुरक्षित रहेगा और किसी भी स्तर पर कोई दावा-आपत्ति या चुनौती मान्य नहीं होगी।

​ व्हाट्सएप पर करें संपर्क:

प्रतियोगिता और अभियान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए प्रतिभागी केवल व्हाट्सएप नंबर 9753896810 पर संपर्क कर सकते हैं।

​संस्था ने प्रदेश के सभी ऊर्जावान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पर्यावरण प्रेमियों से इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और धरती को हरा-भरा बनाने में अपना डिजिटल योगदान देने की अपील की है।

महासमुंद : सर्जरी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं, सोहम हॉस्पिटल में रोज मिलेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

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 महासमुंद। जिले के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में अब सोहम हॉस्पिटल, महासमुंद में जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. चक्रधार (एम.एस. जनरल सर्जरी) प्रतिदिन उपलब्ध रहेंगे। इससे मरीजों को सर्जरी संबंधी परामर्श, ऑपरेशन एवं ऑपरेशन के बाद की देखभाल के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।



सोहम हॉस्पिटल में वर्तमान में प्रत्येक महीने 50 से अधिक जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। आधुनिक तकनीक एवं अनुभवी सर्जिकल टीम की सहायता से मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है।

अस्पताल में हर्निया, अपेंडिक्स (Appendix), पित्त की थैली की पथरी (Gall Bladder Stone), बवासीर (Piles), फिशर, फिस्टुला, हाइड्रोसील, लिपोमा, स्तन की गांठ, थायरॉइड की गांठ, डायबिटिक फुट, तीव्र पेट दर्द (Acute Abdomen) तथा आंतों एवं पेट की विभिन्न सर्जरी नियमित रूप से की जा रही हैं। साथ ही दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) तकनीक द्वारा सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है, जिससे कम चीरा, कम दर्द और शीघ्र रिकवरी संभव होती है।

सोहम हॉस्पिटल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थायी जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन उपलब्ध हैं। अधिकांश अस्पतालों में सर्जन केवल ऑपरेशन के समय उपलब्ध रहते हैं, जबकि सोहम हॉस्पिटल में मरीज का प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन (Pre-operative Assessment), ऑपरेशन के दौरान निगरानी तथा पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग (Post-operative Monitoring) डिस्चार्ज तक विशेषज्ञ सर्जन के मार्गदर्शन में की जाती है।

अस्पताल में 24×7 आपातकालीन शल्य चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल रहा है। इससे महासमुंद और आसपास के लोगों को अब बेहतर सर्जिकल सुविधाएं अपने जिले में ही मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा छूट का लाभ

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छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड की तुलना में सस्ती बिजली

बीते वर्षों में महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए विद्युत टैरिफ दरों में की गई है मामूली वृद्धि

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में बढ़ी महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत तथा पूर्व वर्षों के घाटे की भरपाई को देखते हुए यह मामूली वृद्धि, जरूरी और न्यायसंगत है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि उपभोग के अलग-अलग स्लैब के अनुसार यह बढ़ोतरी 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक रहेगी। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि निर्धारित की गई है। राज्य के लाखों परिवारों पर बढ़े हुए टैरिफ का वास्तविक प्रभाव केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास होगा। टैरिफ वृ द्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का ध्यान रखा है। 

सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा।

इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत ही कम होने की संभावना है।

गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा।

उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपये प्रति केवीए की वृद्धि की गई है। 33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।

नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।

आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।

गर्मी में बिजली का झटका: छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से बढ़ेंगी बिजली दरें, बढ़ेगा मासिक बिल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी, जिससे घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी होगी।


बिजली वितरण कंपनी ने आयोग के सामने 8.40 पैसे प्रति यूनिट यानी करीब 24 फीसदी टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते हुए औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके तहत 7.13 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली महंगी होगी।

नई व्यवस्था के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं को अब प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे अधिक चुकाने होंगे। वहीं व्यावसायिक और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। कृषि क्षेत्र के लिए भी बिजली शुल्क में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि तय की गई है।

हालांकि किसानों को राहत देते हुए गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंपों पर ऊर्जा शुल्क में छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही कृषि पंप कनेक्शन धारकों को 100 वॉट तक लाइट और पंखे की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी।

आयोग ने कुछ श्रेणियों को राहत भी दी है। स्थानीय निकाय कार्यालयों, छात्रावासों और कुछ संस्थानों को गैर-घरेलू श्रेणी से हटाकर घरेलू (एलवी-1) श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे उनके बिजली खर्च में कमी आएगी। इसके अलावा Chhattisgarh Housing Board की कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइट और जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी घरेलू श्रेणी का टैरिफ लागू होगा।

बस्तर और सरगुजा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के छात्रावासों को भी घरेलू श्रेणी का लाभ मिलेगा। वहीं इन इलाकों में संचालित मोबाइल टावरों के लिए ऊर्जा शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट जारी रहेगी।

नई दरों के तहत अस्थायी घरेलू और गैर-घरेलू कनेक्शनों पर अब सामान्य टैरिफ के 1.5 गुना शुल्क देना होगा, जबकि पहले यह दर 1.25 गुना थी। इसके अलावा 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे (TOD) टैरिफ लागू किया गया है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक सोलर घंटों में 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले कुछ उपभोक्ताओं को 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट मिलेगी।

इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहन देने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली दर 7.13 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित उद्योगों और व्यवसायों को ऊर्जा शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट पहले की तरह जारी रहेगी।

नई बिजली दरों के लागू होने के बाद आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा। सरकार और आयोग का कहना है कि बढ़ती लागत और बिजली व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।

नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन, युवाओं को मिलेगा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव

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नई दिल्ली- युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 15 से 17 जून 2026 तक नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन कर रहा है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, नीति-निर्माण और संसदीय कार्यप्रणाली से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक उद्घाटन 16 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया जाएगा। पूर्व संस्करणों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए यह पहल युवाओं को शासन और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान करेगी।

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अनुसार, विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा जनआंदोलन है जो देश के युवाओं की ऊर्जा, विचारों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ता है। कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए संकल्प और सुझाव विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

यह कार्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया गया है।

जिला स्तरीय चरण में देशभर के 757 नोडल विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में “आपातकाल के 50 वर्ष : भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख” विषय पर व्यापक चर्चा आयोजित की गई। प्रत्येक जिले से शीर्ष पांच प्रतिभागियों को राज्य स्तरीय चरण में भाग लेने का अवसर मिला।

राज्य स्तरीय चरण विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और प्रमुख सरकारी परिसरों में आयोजित किया गया, जहां “केंद्रीय बजट 2026 : युवा शक्ति संचालित बजट” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इन सत्रों की अध्यक्षता राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों और राज्यपालों ने की, जिससे युवाओं को क्षेत्रीय शासन व्यवस्था को समझने का अवसर मिला।

अब राष्ट्रीय चरण में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित प्रतिभागी नई दिल्ली में एकत्रित हुए हैं। 15 से 17 जून तक चलने वाले इस चरण में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक राज्य की टीम का एक प्रतिनिधि “नारी शक्ति वंदन : समावेशिता और विकसित भारत 2047 को गति देने वाला अभियान” विषय पर तीन मिनट का संबोधन देगा।

इसके बाद प्रश्नकाल आयोजित होगा, जिसमें प्रतिभागी संसदीय परंपराओं के अनुरूप प्रश्न पूछेंगे और उत्तर देंगे। प्रत्येक प्रश्न और उत्तर के लिए तीन-तीन मिनट का समय निर्धारित किया गया है।

प्रतिभागियों के नेतृत्व और संवाद कौशल को निखारने के लिए एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व द्वारा वक्तृत्व कला और सार्वजनिक भाषण पर विशेष मास्टरक्लास भी आयोजित की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री संग्रहालय (PM Sangrahalaya) का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे भारत की राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की यात्रा को समझ सकेंगे। साथ ही उन्हें नए संसद भवन का भी दौरा कराया जाएगा, जिससे वे देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च संस्थान को निकट से देख सकें।

कार्यक्रम का समापन 17 जून 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मंत्रालय का मानना है कि यह पहल युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए एक नई पीढ़ी के जागरूक और जिम्मेदार नेतृत्व का निर्माण करेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इंदौर में सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की

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इंदौर- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं संस्थान के निदेशक वलेटी प्रेमचंद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा क्षेत्रीय केंद्र के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण से हुई। पंचवटी की अवधारणा के अनुरूप संस्थान परिसर में बरगद, पीपल, बेल, अशोक और आंवला के पांच पौधे लगाए गए।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर वलेटी प्रेमचंद ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध अध्ययनों तथा बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) की गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से संचालित एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, जिसे पुनर्वास परिषद भारत (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं—सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य—महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, संरक्षण तथा समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रतिभागियों से नियमित रूप से फीडबैक लिया जाए। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता, जमीनी स्तर पर उनके लाभ तथा क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों का उपयोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तथा जनोन्मुखी बनाने में किया जा सकता है।

एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय और समुदाय में मनोसामाजिक परामर्श सेवाओं की आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं की नई पीढ़ी तैयार करेगा, जो बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

उन्होंने संस्थान के बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र के प्रतिभागियों के साथ “पोषण भी, पढ़ाई भी” राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रही उत्कृष्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आए सखी वन स्टॉप सेंटरों के प्रशिक्षुओं से भी बातचीत की। इस दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से जुड़े मामलों और केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सहायता सेवाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग जमीनी स्तर पर मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की समर्पण भावना तथा उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

टॉप क्लास एजुकेशन योजना से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिल रही नई उड़ान, शिक्षा से सशक्त हो रहा भारत

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नई दिल्ली- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराकर समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहा है। मंत्रालय की टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम फॉर एससी स्टूडेंट्स के माध्यम से देशभर के हजारों छात्र-छात्राएं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इस योजना का उद्देश्य ऐसे मेधावी एससी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है, जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है। योजना के तहत छात्रों को ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, पुस्तकों, कंप्यूटर तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

वर्ष 2007-08 में शुरू हुई इस योजना का दायरा लगातार बढ़ा है। योजना के तहत लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या 2007-08 में 195 से बढ़कर 2025-26 में 4,742 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में योजना पर वार्षिक व्यय 2.17 करोड़ रुपये से बढ़कर 117.19 करोड़ रुपये हो गया है।

आज इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थी देश के प्रमुख संस्थानों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

तकनीकी क्षेत्र में सफलता की मिसाल

योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अमूल शतूरिया, जिन्होंने IIIT इलाहाबाद से सूचना प्रौद्योगिकी में बी.टेक की पढ़ाई की, योजना की सहायता से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर एक अग्रणी तकनीकी कंपनी में 56 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नियुक्त हुए। एक स्कूल बस चालक के पुत्र होने के बावजूद उनकी सफलता इस योजना की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाती है।

इसी प्रकार सुश्मिता पोथुराजू ने IIIT इलाहाबाद में अध्ययन के दौरान कोडिंग, इंटर्नशिप और नेतृत्व गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की और बाद में अमेज़न में 45 लाख रुपये वार्षिक पैकेज के साथ नियुक्ति प्राप्त की।

राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान

आईआईटी पालक्काड की सिविल इंजीनियरिंग छात्रा थम्बल्ला सिंधु ने योजना के सहयोग से पेशेवर शिक्षा प्राप्त की और बाद में देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी के रूप में चयनित हुईं।

वहीं, आईआईटी पालक्काड के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्नातक नलन एस ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में नियुक्ति प्राप्त की। वे अपने समुदाय के प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं और उनकी सफलता इस योजना की व्यापक सामाजिक प्रभावशीलता को दर्शाती है।

कानून, प्रबंधन और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी सफलता

बोग्गिति शाइनी जैस्पर ने भारतीय प्लांटेशन प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु से पीजीडीएम की पढ़ाई पूरी कर कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफल करियर बनाया। वहीं, ऋषभ भास्कर लाडे ने महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, मुंबई से बी.ए. एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी कर आईडीबीआई बैंक में सहायक विधि प्रबंधक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की।

रचनात्मकता, उद्यमिता और अनुसंधान को बढ़ावा

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद की छात्रा वार्तिका सोनकर ने योजना के सहयोग से डिजाइन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को निखारा और आज एक सफल ज्वेलरी डिजाइनर के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

वहीं, चिंतला संजय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग आधारित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं को आगे बढ़ाया है।

आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को मिल रही नई दिशा

यह योजना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और बेहतर भविष्य के प्रति आकांक्षा का भी निर्माण कर रही है। योजना के लाभार्थी विद्यार्थी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और पेशेवर विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच ही समावेशी और विकसित भारत की आधारशिला है। टॉप क्लास एजुकेशन योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो प्रतिभा, अवसर और दृढ़ संकल्प को जोड़कर देश के लिए नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रबंधकों, विधि विशेषज्ञों, उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को तैयार कर रही है।

योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रत्येक सफलता यह साबित करती है कि उचित अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह पहल विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


पिछले 12 वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत ने हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। इस दौरान देश की जैव-अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐतिहासिक सफल लैंडिंग हुई, अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ तथा मौसम पूर्वानुमान और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई।

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में आयोजित “विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में परिवर्तनकारी विकास के 12 वर्ष” विषयक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं से निकलकर आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं और देश के विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरे हैं।

उन्होंने कहा कि आज सरकार की लगभग सभी प्रमुख योजनाएं भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तंत्र से विकसित तकनीकों पर आधारित हैं। नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उद्योग सहभागिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर सरकार के विशेष जोर ने स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, मौसम विज्ञान, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपलब्धियों को नई गति दी है।

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2014 में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर आज 190 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है और वर्ष 2030 तक इसे 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, जीनोमिक्स, डायग्नोस्टिक्स और बायोफार्मास्यूटिकल्स में स्वदेशी नवाचारों के बल पर भारत वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अगली पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, किफायती CAR-T सेल थेरेपी, जीनोमिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

सीएसआईआर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक संस्थान उद्योगों, स्टार्टअप्स, किसानों और स्थानीय समुदायों से पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि इस पहल ने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों के हजारों किसानों को उच्च मूल्य वाली कृषि से जोड़कर आजीविका के नए अवसर प्रदान किए हैं।

मौसम एवं जलवायु सेवाओं में सुधार का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 मौसम रडार थे, जबकि आज लगभग 50 रडार कार्यरत हैं और मिशन मौसम के तहत 50 अतिरिक्त रडार स्थापित किए जाने की योजना है। मौसम पूर्वानुमान की पहुंच 300 शहरों से बढ़कर लगभग 1,700 स्थानों तक पहुंच गई है, जिससे किसानों, नागरिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।

अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है। अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर सैकड़ों में पहुंच गई है। चंद्रयान-3 की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना।

उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डॉ. सिंह ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को भी हाल के वर्षों का एक महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने कहा कि इससे निवेश, नवाचार और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने मिशन मौसम, डीप ओशन मिशन, मत्स्य 6000 और वराह जैसी स्वदेशी गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों सहित कई उपलब्धियों की जानकारी दी। वहीं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने बायोई3 नीति, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति जैसी पहलों पर प्रकाश डाला।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत को वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति न केवल देश की रणनीतिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रही है, बल्कि नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान और नवाचार की यह यात्रा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

गया में 170 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होगा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी केंद्र, एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

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गया (बिहार), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के गया जिले के खिजरसराय में प्रस्तावित प्रौद्योगिकी केंद्र (टेक्नोलॉजी सेंटर) की आधारशिला रखी। इस अवसर पर पारंपरिक भूमि पूजन के साथ परियोजना का शुभारंभ किया गया।

यह महत्त्वपूर्ण परियोजना क्षेत्र में एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र और औद्योगिक आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, बिहार सरकार के मंत्रियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय हितधारकों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि गया का यह प्रौद्योगिकी केंद्र न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्यों के एमएसएमई उद्यमों को भी तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में प्रौद्योगिकी आधारित केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिससे उद्योगों को आधुनिक तकनीकी सहायता और कौशलयुक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि जो कार्य कभी असंभव प्रतीत होता था, वह आज संभव हो रहा है। यह केंद्र प्रतिवर्ष लगभग 7,000 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगा और कौशल विकास तथा रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर में ऐसे प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना का अवसर मिलना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय रोजगार सृजन के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। उन्होंने बिहार के युवाओं से तकनीक, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भरत खेड़ा ने बताया कि मंत्रालय देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रौद्योगिकी केंद्र और विस्तार केंद्र स्थापित कर रहा है। हाल ही में पटना में एक प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया गया है और अब गया में नया केंद्र स्थापित किया जा रहा है।

एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने भारत और बिहार में एमएसएमई क्षेत्र की प्रगति तथा गया प्रौद्योगिकी केंद्र की विशेषताओं की जानकारी दी।

खिजरसराय, गया में स्थापित होने वाला यह केंद्र 170 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा, जिसमें लगभग 86 करोड़ रुपये सिविल निर्माण कार्यों तथा 84 करोड़ रुपये संयंत्र एवं मशीनरी पर व्यय किए जाएंगे।

यह केंद्र जनरल इंजीनियरिंग, हेवी इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल टेस्टिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को आधुनिक तकनीकी सहायता, परीक्षण सुविधाएं और कौशल विकास सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इससे गया, औरंगाबाद, नवादा, नालंदा, जहानाबाद और मुंगेर जिलों के एमएसएमई उद्यमों को लाभ मिलेगा।

प्रस्तावित केंद्र उद्योग की वर्तमान एवं उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 7,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करेगा। साथ ही, टूलिंग सेवाओं और जॉब वर्क के माध्यम से 1,000 से अधिक स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को प्रतिवर्ष सहायता प्रदान करेगा।

दक्षिण बिहार के औद्योगिक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने वाला यह प्रौद्योगिकी केंद्र तकनीकी अंतराल को कम करने, स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने तथा ऐतिहासिक मगध क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डीआरडीओ ने लंबी दूरी की भूमि आक्रमण क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया

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नई दिल्ली- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 15 जून 2026 को ओडिशा तट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूर्णतः हासिल कर लिया गया। यह पुष्टि चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) द्वारा तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर की गई।

एलआरएलएसीएम एक स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल है, जिसके सभी उप-प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं तथा भारतीय उद्योग साझेदारों द्वारा किया गया है। इस परियोजना की नोडल प्रयोगशाला एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु है।

मिसाइल के प्रक्षेपण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी तथा भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलआरएलएसीएम के सफल उड़ान परीक्षण पर डीआरडीओ की टीम और उद्योग साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (R&D) के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों की निगरानी की। उन्होंने सफल परीक्षण में योगदान देने वाले सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और टीम सदस्यों को बधाई दी।

यह सफल परीक्षण भारत की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को और सशक्त बनाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आईआईसीए के राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की दिवाला एवं पुनर्गठन व्यवस्था के भविष्य पर मंथन

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नई दिल्ली- भारत के दिवाला एवं पुनर्गठन ढांचे (Insolvency and Restructuring Ecosystem) के एक दशक के अनुभवों और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श के लिए भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने एसोसिएशन ऑफ इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल एंटिटीज (AIPE) के सहयोग से राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। प्रधानमंत्री संग्रहालय सभागार, तीन मूर्ति मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन का विषय था— “भारत के पुनर्गठन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्परिभाषित करना: सीख का एक दशक और भविष्य की दिशा”।

सम्मेलन के साथ ही आईआईसीए के प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट इंसॉल्वेंसी प्रोग्राम (PGIP) के छठे बैच का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें 40 विद्यार्थियों को डिग्री एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अशोक भूषण, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT), ने दीक्षांत भाषण देते हुए कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने पिछले दस वर्षों में उल्लेखनीय विकास किया है। उन्होंने वर्ष 2016 से 2021 तक की अवधि को “स्थापना का युग” तथा वर्तमान समय को “परिष्कार का युग” बताया। उन्होंने कहा कि आईबीसी (संशोधन) अधिनियम, 2026 इस कानून की परिपक्वता और निरंतर विकास का प्रतीक है।

मुख्य वक्ता न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), ने आईबीसी की न्यायिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए समयबद्ध और मूल्य-संवर्धक समाधान सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक एवं संस्थागत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सीमा-पार दिवालियापन (Cross-Border Insolvency) के लिए UNCITRAL मॉडल कानून को अपनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने अपने विशेष संबोधन में आईबीसी को भारत की वित्तीय और कॉर्पोरेट व्यवस्था में “व्यवहारिक क्रांति” बताया। उन्होंने कहा कि समाधान प्रक्रियाओं के माध्यम से लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है, जबकि ऋणदाताओं को परिसमापन मूल्य का लगभग 170 प्रतिशत प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि 32 हजार से अधिक मामलों का समाधान औपचारिक स्वीकृति से पहले ही हो गया, जिससे लगभग 14 लाख करोड़ रुपये के ऋण मूल्य का संरक्षण संभव हुआ।

आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पीजीआईपी कार्यक्रम दिवाला पेशेवरों की नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि सात बैचों के माध्यम से अब तक 239 पेशेवरों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित हुआ है, जिनमें से कई पंजीकृत दिवाला पेशेवर के रूप में सक्रिय हैं।

दीक्षांत समारोह के दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। आशीष कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त कर 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार जीता, जबकि अरुण कुमार को द्वितीय स्थान के लिए 30 हजार रुपये और के. गीता वैष्णवी को तृतीय स्थान के लिए 20 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। ये पुरस्कार AZB एंड पार्टनर्स द्वारा प्रायोजित किए गए थे।

कार्यक्रम के दौरान आईबीसी के दस वर्षों की यात्रा और प्रभाव पर आधारित राष्ट्रीय सम्मेलन स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही पीजीआईपी विद्यार्थियों के लिए पीएम विद्या लक्ष्मी मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) प्लेटफॉर्म की सुविधा भी आईआईसीए को प्रदान की गई, जिससे शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक संसाधनों तक सहज पहुंच प्राप्त होगी।

सम्मेलन में दिवाला एवं पुनर्गठन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, नियामकों, न्यायिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं में सीमा-पार दिवालियापन, ऋणदाता-प्रेरित समाधान प्रक्रिया (CIIRP), संकटग्रस्त परिसंपत्ति बाजार, वैकल्पिक निवेश कोष, मध्यस्थता तंत्र तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुधारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

सम्मेलन के समापन अवसर पर आईआईसीए के सेंटर फॉर इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी के प्रमुख सुधाकर शुक्ला ने सभी वक्ताओं, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन ने भारत की दिवाला एवं पुनर्गठन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने तथा भविष्य के सुधारों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

तिगलारी एवं पुरानी कन्नड़ लिपियों में आयुर्वेद पांडुलिपियों के लिप्यंतरण हेतु राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

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भारत की पारंपरिक ज्ञान-संपदा के संरक्षण के निरंतर प्रयासों के अंतर्गत, तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों में लिखित आयुर्वेद पांडुलिपियों के लिप्यंतरण पर एक क्षमता-विकास कार्यशाला का आज उडुपी स्थित श्री पुत्तिगे नरसिंह सभाभवन, गीता मंदिर में शुभारंभ किया गया।

इस कार्यशाला का संयुक्त आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) तथा शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) द्वारा श्री वादिराज अनुसंधान फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम परम पूज्य श्री श्री सुगुणेंद्र तीर्थ श्रीपाद, पीठाधीश्वर, श्री पुत्तिगे मठ, तथा परम पूज्य श्री श्री सुष्रिंद्र तीर्थ श्रीपाद, कनिष्ठ पीठाधीश्वर, श्री पुत्तिगे मठ, के आशीर्वाद से आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्वानों में तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों में संरक्षित आयुर्वेद पांडुलिपियों को पढ़ने, समझने और लिप्यंतरित करने की विशेषज्ञता विकसित करना है। ये पांडुलिपियाँ मुख्यतः कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में श्री नागराज आचार्य, प्रशासक एवं दीवान, श्री पुत्तिगे मठ; डॉ. जी. पी. प्रसाद, सहायक निदेशक, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद; डॉ. टी. महेश्वर, सहायक निदेशक, केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), बेंगलुरु; तथा डॉ. सुधीर राज के., निदेशक, भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) केंद्र, निट्टे विश्वविद्यालय, उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन विद्वान गोपालाचार्य, निदेशक, श्री वादिराज अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने आयुर्वेद ज्ञान के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रसार के लिए CCRAS द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा देश की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर डॉ. सुधीर राज के. ने भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए अनुसंधान और ज्ञान-वितरण को सुदृढ़ करने में भारतीय ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर बल दिया।

यह 15-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयुर्वेद और संस्कृत पृष्ठभूमि के युवा विद्वानों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अप्रकाशित आयुर्वेद पांडुलिपियों के पाठ-वाचन, लिप्यंतरण, संपादन तथा प्रकाशन-पूर्व तैयारी का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

CCRAS और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह तीसरी कार्यशाला है। इससे पूर्व ओडिशा के पुरी में करणी/देवनागरी लिपियों पर तथा केरल के गुरुवायूर में वट्टेजुत्तु/मलयालम लिपियों पर केंद्रित कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।

इस कार्यशाला में श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर आयुर्वेद महाविद्यालय, उडुपी, श्री धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर आयुर्वेद महाविद्यालय, हासन, तथा श्री पुत्तिगे मठ के गुरुकुल के संस्कृत विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी है।

कार्यक्रम के दौरान तैयार की गई लिप्यंतरित पांडुलिपियों को बाद में CCRAS और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित किया जाएगा, जिससे भारत की पारंपरिक ज्ञान-संपदा के संरक्षण और व्यापक प्रसार को और अधिक बल मिलेगा।

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