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छत्तीसगढ़ में NSS गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार,उच्च शिक्षा विभाग ने 29 अंशकालीन जिला संगठकों की सूची की जारी

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​रायपुर- छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों को और अधिक सुचारू, प्रभावी और गतिशील बनाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 29 अंशकालीन जिला संगठकों  की नियुक्ति की गई है, जिसमें संबंधित प्राध्यापकों व व्याख्याताओं को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ आगामी 02 वर्षों के लिए जिला संगठक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

कलेक्टरों के समन्वय से गठित होगी 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति'

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में राज्य के सभी प्रमुख जिलों और अंचलों को शामिल किया गया है। सभी नवनियुक्त जिला संगठकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के कलेक्टर से तत्काल संपर्क स्थापित कर 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति' का गठन सुनिश्चित करें और नियमानुसार बैठकों का आयोजन करें। सभी संगठकों को हर महीने अपना दौरा कार्यक्रम, कार्यों का संकलित प्रतिवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संबंधित विश्वविद्यालयीन रासेयो प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।  

जिला संगठक अपने क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के रासेयो इकाईयों, जिसमें कृषि व तकनीकी शिक्षा से संबंधित इकाईयां भी शामिल हैं,के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित विश्वविद्यालयीन प्रकोष्ठ को देंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभिन्न निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड एवं अन्य संस्थाओं में नियुक्तियों पर दी बधाई

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नवनियुक्त पदाधिकारी विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को देंगे नई गति : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड, समिति एवं अन्य संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी होने पर सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर गौरीशंकर श्रीवास तथा सदस्य पद पर देवशरण सेन, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में डॉ. ममता साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर रामलाल चौहान, उपाध्यक्ष पद पर वेदराम मनहरे एवं सदस्य के रूप में सौरभसिंह जागृत, दुर्गा महेश्वर तथा दयावंत धर बांधे की नियुक्ति की गई है।

छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर आनंद निषाद तथा सदस्य पद पर नेतराम निषाद, छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डल रायपुर के अध्यक्ष पद पर राजेश कुमार राजपूत तथा सदस्य पद पर सुमन मुथा एवं शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष पद पर राजेन्द्र नायक तथा सदस्य के रूप में बसंत पटेल,  प्रेमलाल पटेल, संतोष पटेल और प्रेम पटेल की नियुक्ति की गई है।

छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष पद पर सुधीर गौतम, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य पद पर मनमथ नाथ शर्मा तथा छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के सदस्य पद पर प्रसन्ना अवस्थी की नियुक्ति की गई है। रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद पर डॉ. जे.पी. शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष पद पर किशोर महानंद, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष पद पर आनंद कुमार तिवारी ( राजीव लोचन दास महाराज) तथा छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर मंगल दास ठाकुर को दायित्व सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारी जनसेवा, सुशासन और लोककल्याण के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति प्रदान करेंगे।

https://x.com/i/status/2074521869680796000

जीपीएम का ‘विष्णुभोग’ चावल बना महिलाओं की समृद्धि का नया ब्रांड, आधे घंटे में 45 हजार रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री

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बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के जैविक उत्पाद को जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का भरपूर समर्थन

 स्थानीय से राष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ रहा अरपा-बिहान विष्णुभोग चावल

रायपुर- छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) का प्रयास लगातार सफल हो रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से उत्पादित और प्रसंस्कृत अरपा-बिहान विष्णुभोग चावल को अब जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा स्थित असेंबली हॉल में आयोजित स्थानीय जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान महज 30 मिनट में 45 हजार रुपये से अधिक मूल्य के विष्णुभोग चावल की बिक्री हुई।

यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, गुणवत्ता आधारित उत्पादन और राज्य सरकार की आजीविका उन्मुख योजनाओं पर बढ़ते जनविश्वास का प्रमाण है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से सीधे चावल खरीदकर उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपची तथा कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वयं विष्णुभोग चावल खरीदकर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया। वहीं स्थानीय निवासी पंकज तिवारी ने एक साथ 200 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदकर अब तक के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव प्राप्त किया। उनके इस कदम ने अन्य नागरिकों को भी स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) इस पहल की प्रमुख कड़ी बनकर उभरी है। महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से उत्पादित विष्णुभोग धान का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण, आकर्षक ब्रांडिंग, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और व्यवस्थित विपणन किया जा रहा है। इससे उत्पाद को बेहतर बाजार मिलने के साथ-साथ किसानों और महिला उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।

जिले में इस पहल को आगे बढ़ाने में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुकेश रावटे की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और सार्वजनिक मंचों पर लगातार विष्णुभोग चावल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परिणामस्वरूप इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और अधिक महिलाएं इस मॉडल से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि जिले में मिशन के अंतर्गत 179 सीएमएसए (कम्युनिटी मैनेज्ड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) ग्रामों का चयन किया गया है। इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विष्णुभोग धान के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा मिले, किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो और स्व-सहायता समूहों की महिलाएं लखपति दीदी अभियान के तहत आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकें।

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, जैविक खेती की गुणवत्ता, आधुनिक विपणन व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी के समन्वय से अरपा-बिहान विष्णुभोग अब केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की महिला शक्ति, स्थानीय उद्यमिता और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है। जिस गति से इस उत्पाद को बाजार और उपभोक्ताओं का विश्वास मिल रहा है, उससे यह आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट कृषि पहचान के रूप में स्थापित होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहीं बबीता यादव, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

रायपुर- संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।



रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की संपत्तियों की बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन

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घर बैठे करें आवेदन, बुकिंग और मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान

कमल विहार एवं रावभाटा सहित लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां पोर्टल पर उपलब्ध

रायपुर- रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे।

प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके।

ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी।

रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव

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“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मानित करना है। “दीदी के गोठ” ने बीते एक वर्ष में महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री एव पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा द्वारा की जाएगी।

कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएँ एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित होकर इस सफल यात्रा के साक्षी बनेंगे।

विदित हो कि “दीदी के गोठ” के प्रथम एपिसोड का प्रसारण अगस्त 2025 में हुआ था, जो “लखपति दीदी” विषय पर केंद्रित था। इसके उपरांत प्रत्येक माह के द्वितीय गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों की समूह की महिलाओं द्वारा ड्रोन दीदी, एफपीसी, जेंडर, सरस मेला, वित्तीय जागरूकता, साइबर सुरक्षा, सरस मेला तथा “छत्तीसकला” ब्रांड जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सफलता की प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं। “दीदी के गोठ” की एकवर्षीय सफल यात्रा का विशेष प्रसारण 09 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

“दीदी के गोठ” ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। यह मंच न केवल संवाद का माध्यम बना है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बनकर उभरा है।

कार्यक्रम में वर्षभर की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण, “दीदी के गोठ” में प्रतिभागिता करने वाली महिलाओं का सम्मान तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन- बिहान द्वारा सभी नागरिकों ,संबंधित हितधारकों, स्व सहायता समूहों, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा,छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

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ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना

पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी

यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है।

रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता

वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है।

जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी।

वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

फर्जी अंकसूची का खेल उजागर, GST विभाग ने दो कर्मचारियों को किया बर्खास्त

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 रायपुर। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में राज्य जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक करने के आदेश जारी किए हैं।


जानकारी के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों का चयन वर्ष 2013 में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) भर्ती के दौरान हुआ था। आरोप है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत की थी, जिसमें 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए गए थे। इसी आधार पर उन्हें नौकरी मिली और बाद में दोनों को पदोन्नति देकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त कर दिया गया।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायत मिलने पर मामले की जांच शुरू हुई। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि दोनों कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत अंकसूचियां फर्जी हैं। इसके समर्थन में संबंधित स्कूल के परीक्षा रिकॉर्ड और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेज भी पेश किए गए, जिनमें अंकसूची और वास्तविक परीक्षा रिकॉर्ड के बीच गंभीर विसंगतियां सामने आईं।

शिकायत के बाद विभाग ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया। शुरुआती जांच में रिकॉर्ड को सही बताया गया, लेकिन दोबारा जांच और विधानसभा में मामला उठने के बाद जांच तेज हुई। विस्तृत जांच में अनियमितता की पुष्टि होने पर विभाग ने दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त करने का फैसला लिया।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल उठ रहे हैं। जिन अधिकारियों ने प्रारंभिक सत्यापन में दस्तावेजों को सही बताया था, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप प्रमाणित हो चुके हैं, तो विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल इस संबंध में किसी आपराधिक कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से की सौजन्य भेंट

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ और झारखंड के साझा विकास, जनजातीय क्षेत्रों के सशक्तीकरण तथा पारस्परिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल पड़ोसी राज्य ही नहीं, बल्कि साझा जनजातीय विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और आत्मीय सामाजिक संबंधों से भी जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से जशपुर और झारखंड के बीच वर्षों से पारिवारिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक निकटता रही है, जो दोनों राज्यों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाती है।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, जनकल्याण, आपसी समन्वय तथा अनुभवों के आदान-प्रदान को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।


सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न यह भेंट दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, समन्वय और विकासोन्मुखी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी पहनेंगे ‘मेक इन इंडिया’ जूट परिधान, प्राकृतिक रेशों को मिलेगा वैश्विक मंच

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नई दिल्ली- भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) ने टिकाऊ (सस्टेनेबल) वस्त्रों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक रेशों में भारत की नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी और टीम के सदस्य पहली बार जूट-विस्कोस (Jute-Viscose) मिश्रित कपड़े से बने विशेष परिधान पहनेंगे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मेक इन इंडिया" और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने 100 प्रतिशत जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े को एक टिकाऊ और आधुनिक वस्त्र विकल्प के रूप में विकसित किया है।

नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आधिकारिक किट अनावरण एवं विदाई समारोह में केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहला अवसर होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता में भारतीय दल जूट आधारित परिधान पहनकर दुनिया के सामने उतरेगा। इससे न केवल भारत के जूट उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्माताओं की कारीगरी और जूट किसानों के योगदान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा।

जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े का विकास कोलकाता की ग्लॉस्टर जूट मिल्स के सहयोग से किया गया, जबकि इन परिधानों की डिजाइन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने तैयार की है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 72 देशों के खिलाड़ी भाग लेंगे। भारत की ओर से 124 सदस्यीय दल, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला खिलाड़ी शामिल हैं, प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड का मानना है कि यह पहल जूट विविधीकरण कार्यक्रम को नई गति देगी, जूट उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार खोलेगी तथा प्राकृतिक रेशों को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह देश के लाखों जूट किसानों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का विषय भी बनेगी।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 8 जुलाई को करेंगे डूमरतराई के नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण

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आधुनिक अधोसंरचना से व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को मिलेगा आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय व्यापारिक परिसर

रायपुर- छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा रायपुर के डूमरतराई में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण समारोह अब 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का लोकार्पण एवं नामकरण कर इसे प्रदेशवासियों और व्यापारियों को समर्पित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में 5 जुलाई 2026 को प्रस्तावित था, किन्तु अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह समारोह 8 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह अत्याधुनिक थोक बाजार व्यापारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुगम यातायात व्यवस्था, सुव्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना तथा आवश्यक नागरिक सुविधाओं का समुचित प्रावधान किया गया है। यह बाजार रायपुर सहित पूरे प्रदेश के व्यापारिक विकास को नई दिशा देने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।

डूमरतराई व्यापारिक परिसर का विकास चरणबद्ध रूप से किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए, जिससे व्यापारियों को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित व्यावसायिक सुविधाएँ उपलब्ध हुईं। वहीं द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से विभिन्न श्रेणियों की 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं समग्र थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिलेगी।

यह नवीन थोक बाजार प्रदेश के व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसरों का सृजन करते हुए रायपुर को एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली यह परियोजना उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराएगी।

लोकार्पण एवं नामकरण समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा एवं सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, गणमान्य नागरिक तथा मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।

डूमरतराई का नवीन थोक बाजार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की गुणवत्ता, नवाचार एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

CG NEWS : घर का भरोसेमंद ही निकला लुटेरा, 24 घंटे में पूर्व केयरटेकर गिरफ्तार

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 दुर्ग। दुर्ग जिले के नेवई थाना क्षेत्र में बुजुर्ग दंपती से हुई लूट की सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घर में घुसकर चाकू की नोक पर लूट करने वाला कोई बाहरी बदमाश नहीं, बल्कि दंपती का पूर्व केयरटेकर निकला। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त बाइक, धारदार हथियार और घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं।


पुलिस के अनुसार, नेवई थाना क्षेत्र के प्रगति नगर स्थित शुभकामना हाइट्स में रहने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी पत्नी घर पर अकेले थे। इसी दौरान पूर्व केयरटेकर विभान्शु महोबिया मुंह पर कपड़ा बांधकर घर में घुसा और धारदार हथियार दिखाकर दोनों को धमकाया। आरोपी ने सोने-चांदी के जेवर और नकदी की मांग की तथा महिला के गले से सोने का नेकलेस लूटकर फरार हो गया।

नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। सूचना मिलते ही नेवई थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजय अग्रवाल के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे करीब तीन महीने पहले केयरटेकर की नौकरी से हटा दिया गया था। इसी रंजिश में उसने बदला लेने की नीयत से लूट की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक, धारदार हथियार तथा घटना के दौरान पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अब आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि वह पहले किसी अन्य आपराधिक घटना में शामिल रहा है या नहीं।

पति को पहले छत से फेंका, बच गया तो कैनुला से टॉयलेट क्लीनर पहुंचाकर हत्या का आरोप

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 निजामाबाद (तेलंगाना)। तेलंगाना के निजामाबाद जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला ने अपने कथित प्रेमी और उसके सहयोगी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि पहले पति को इमारत की छत से धक्का दिया गया और जब वह गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गया, तो बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसके शरीर में कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस के मुताबिक, मृतक प्रशांत (35) की मां ने 1 जुलाई को शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उन्हें 30 जून को अपने बेटे की मौत की सूचना मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटे की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और उन्हें उसके घर लौटने तथा मौत से जुड़ी घटनाओं की जानकारी नहीं दी गई थी। शिकायत में उन्होंने अपनी बहू संध्या पर संदेह जताया।

जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर पता चला कि संध्या (32) का अनिल (35) नामक व्यक्ति के साथ कथित प्रेम संबंध था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने प्रशांत को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और इसके लिए वेंकट साई नामक व्यक्ति की मदद ली।

पुलिस के अनुसार, 29 जून को वेंकट साई ने प्रशांत को शराब पिलाई और उसे इमारत की छत पर ले जाकर कथित रूप से नीचे धक्का दे दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद प्रशांत की मौत नहीं हुई। इसके बाद उसे इलाज के लिए पहले सरकारी और फिर निजी अस्पताल ले जाया गया।

जांच में पुलिस ने दावा किया है कि बाद में संध्या ने कथित रूप से प्रशांत के हाथ में लगे मेडिकल कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा पहुंचाई। इसके बाद उसे चारपाई से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

सड़क पर केज व्हील वाले ट्रैक्टर दौड़े तो कटेगा चालान

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रायपुर- खेतों में जुताई और मिट्टी पलटने के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के केज व्हील (पिंजरा पहिया) लगे ट्रैक्टर अब सार्वजनिक सड़कों और सीमेंट रोड पर नहीं चल सकेंगे। ऐसे ट्रैक्टर सड़क पर चलते पाए जाने पर परिवहन विभाग मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई करेगा। जिला परिवहन विभाग ने किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को इस संबंध में चेतावनी जारी करते हुए नियमों का पालन करने की अपील की है।

परिवहन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर सभी जिला परिवहन अधिकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर केज व्हील लगे ट्रैक्टरों का संचालन रोकने और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, यह फैसला उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर एक जनहित याचिका के बाद लिया गया है। याचिका में कहा गया था कि कृषि कार्यों के लिए बनाए गए केज व्हील का उपयोग केवल खेतों तक सीमित होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इन्हें सड़कों और राजमार्गों पर भी चलाया जा रहा है। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। परिवहन विभाग का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों पर ऐसे ट्रैक्टरों का संचालन मोटरयान अधिनियम और प्रचलित नियमों के अनुरूप नहीं है।

परिवहन विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि जुताई या मिट्टी पलटने का कार्य पूरा होने के बाद ट्रैक्टर से केज व्हील हटाकर सामान्य रबर के टायर लगाएं और उसके बाद ही सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाएं। इससे सड़कें सुरक्षित रहेंगी और हादसों की आशंका भी कम होगी। परिवहन विभाग ने कहा है कि अपील के बावजूद यदि कोई ट्रैक्टर चालक केज व्हील लगे ट्रैक्टर के साथ सार्वजनिक सड़क पर चलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार चालान सहित विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

PM-SETU योजना को मिली बड़ी मंजूरी: देशभर के 200 आईटीआई क्लस्टरों में होगा विस्तार, ₹1,237.58 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आज प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) की चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशक (DGT) दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समिति ने PM-SETU योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर देशभर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता और तैयारियों के आधार पर इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकेंगे।

समिति ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए। इनमें उद्योगों की अधिक भागीदारी, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की भूमिका बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹1,237.58 करोड़ की स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को मंजूरी देना रही। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में उद्योगों की साझेदारी से आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

राज्यवार प्रमुख निवेश

ओडिशा

  • गवर्नमेंट आईटीआई बरबिल को हब बनाया गया है।

  • जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.21 करोड़

गुजरात

  • गवर्नमेंट आईटीआई सूरत को हब बनाया गया है।

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.18 करोड़

तेलंगाना
तीन आईटीआई क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है—

  • गवर्नमेंट आईटीआई ओल्ड सिटी – एंकर पार्टनर: अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड (₹241.01 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई पटानचेरू – एंकर पार्टनर: श्री सिद्धार्थ इंफ्राटेक एंड सर्विसेज (SSISPL) (₹275.24 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई संगारेड्डी – एंकर पार्टनर: न्यूलैंड फाउंडेशन (₹240.94 करोड़)

PM-SETU योजना क्या है?

PM-SETU केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत उद्योगों के सहयोग से आईटीआई में आधुनिक मशीनें, बेहतर आधारभूत संरचना, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल मिल सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।

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