Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

मछली पालन से बदली तकदीर: प्रकाश धीवर बने आत्मनिर्भर, 20 लोगों को दे रहे रोजगार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर विकासखंड तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत बेलदार सिवनी के निवासी  प्रकाश धीवर आज मछली पालन के क्षेत्र में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। मछली पालन उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आजीविका का मुख्य स्रोत बन चुका है।


बता दें कि सिवनी निवासी  प्रकाश धीवर ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में मछली पालन विभाग से संपर्क किया। विभाग से उन्हें यह जानकारी मिली कि ग्राम पंचायत के तालाबों को पट्टे पर लेकर मछली पालन किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने बिना विलंब किए एक समिति का गठन किया और शासन के नियमानुसार ग्राम पंचायत सिवनी के तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर लिया। साथ ही कुछ निजी तालाबों को लीज पर लेकर मछली पालन कार्य प्रारंभ किया।

वर्तमान में उनकी समिति के पास कुल पांच तालाब (8.835 हेक्टेयर) पट्टे पर हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 22 से 25 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। श्री धीवर “जय महामाया मछुआ सहकारी समिति, बेलदार सिवनी” के अध्यक्ष हैं, जिसमें 21 सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान पर एक चार पहिया वाहन भी प्राप्त हुआ है। इस वाहन की सहायता से वे रायपुर, खरोरा, तिल्दा और बलौदा बाजार जैसे बड़े मछली बाजारों में जीवित मछली का विक्रय कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। विभिन्न स्रोतों से उनकी वार्षिक आय लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

मछली पालन के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति हेतु श्री धीवर जिला सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से न्यूनतम ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का ऋण भी लेते हैं, जिसका उपयोग मछली बीज, चुना और जाल खरीदने में किया जाता है।

शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर श्री प्रकाश धीवर न केवल आत्मनिर्भर मत्स्य कृषक बने हैं, बल्कि क्षेत्र के लगभग 15 से 20 लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस, 'ई-श्रम साथी' एप लॉन्च

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के कार्यों और योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमला पूरी प्रतिबद्धता के साथ श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। इस अवसर पर श्रम मंत्री लखन देवांगन उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिकों के हित में व्यापक पहल हुई है और चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों को घर बैठे रोजगार की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मेहनत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, इसलिए उनके योगदान का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समीक्षा बैठक में श्रम विभाग की संरचना, श्रमायुक्त संगठन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा तीनों प्रमुख मंडलों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रदेश के सभी जिलों में श्रम कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ दोनों सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, सियान सहायता, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता, आवास सहायता योजना, निःशुल्क कोचिंग सहायता तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना प्रमुख हैं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6वीं में हर वर्ष 100 बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 31 जिलों के 95 विद्यार्थी 8 जिलों के 14 विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिसे इस शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल द्वारा भी विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

श्रम कल्याण मंडल के तहत 14 योजनाएं संचालित हैं और वर्ष 2025-26 में 5.21 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना, श्रम सम्मेलन कार्यक्रम और मोबाइल कैंप के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-केवाईसी के माध्यम से हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 55 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया।

इस अवसर पर मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, श्रम विभाग सचिव हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।

'प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।


थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल

अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था।


फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’

नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं।

3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी

अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया।

'प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन

10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी

रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है।

मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’

कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

बदलाव की कहानी

कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बुधवार, 29 अप्रैल को जारी किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है।


शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार दोपहर 2:30 बजे बोर्ड परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। परिणाम जारी होने के बाद छात्र-छात्राएं मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे।

मंत्री यादव ने कहा कि यह केवल अंकों की घोषणा नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, अनुशासन, अभिभावकों के सहयोग और शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि हर परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और प्रत्येक विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

सुकमा जहाँ सड़कें खत्म होती हैं, वहाँ से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था।


यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है।


दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर

हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया।

आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो।

आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम

छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।

जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव

अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।

पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

संदीप पाठक के घर के बाहर फूटा गुस्सा: AAP कार्यकर्ताओं ने लिखा ‘गद्दार’, जमकर किया हंगामा

No comments Document Thumbnail

 मुंगेली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी माहौल गरमा गया है। उनके इस फैसले से नाराज आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को मुंगेली जिले के लोरमी क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव बटहा में घर के बाहर प्रदर्शन किया।


जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान घर की दीवार पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखकर नाराजगी जताई गई। कार्यकर्ताओं ने संदीप पाठक पर अवसरवाद और विश्वासघात के आरोप लगाए।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि जिस पार्टी ने उन्हें पहचान दिलाई, उसी को छोड़कर उन्होंने समर्थकों और जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

गौरतलब है कि संदीप पाठक आम आदमी पार्टी में प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे। पंजाब में पार्टी की सरकार बनाने में उनकी अहम भूमिका बताई जाती है।

उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत सात राज्यसभा सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी। बाद में इन सांसदों को भाजपा में शामिल होने की मंजूरी भी मिल गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।

भीषण गर्मी का असर: हीटवेव से बाघ भी बेहाल, वन विभाग ने शुरू किया खास इंतजाम

No comments Document Thumbnail

 देहरादून। अप्रैल महीने में ही बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन के साथ वन्यजीवों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में इस बार मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। हीटवेव का असर अब बाघों पर भी देखने को मिला है, जिसके बाद वन विभाग ने विशेष इंतजाम शुरू किए हैं।


जानकारी के अनुसार, हाल ही में रेस्क्यू किए गए चार घायल बाघों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसे लक्षण पाए गए। इनमें एक बाघ की मौत हो चुकी है, जबकि एक बाघिन सहित तीन अन्य बाघों को कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। बताया जा रहा है कि बाघिन की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाघों को राहत देने के लिए ग्लूकोज चढ़ाने के साथ विशेष प्रकार की आइसक्रीम दी जा रही है। इस आइसक्रीम में इलेक्ट्रोलाइट, मिनरल और जरूरी दवाएं मिलाई गई हैं, ताकि शरीर में पानी और ऊर्जा की कमी पूरी की जा सके।
कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि घायल होने के बाद संभव है कि बाघ लंबे समय तक धूप में पड़े रहे हों या पानी तक नहीं पहुंच पाए हों, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि बाघ सामान्यतः मौसम सहन कर लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक भीषण गर्मी और पानी की कमी उनके लिए भी खतरनाक हो सकती है।

मौसम विभाग ने मंगलवार से राज्य के कुछ जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई है, जिससे तापमान में राहत मिलने की उम्मीद है।

आईएनएस सुनयना सिंगापुर पहुंची, समुद्री सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को मिली मजबूती

No comments Document Thumbnail

भारतीय महासागर जहाज (IOS) सागर के तहत संचालित  आईएनएस सुनयना 26 अप्रैल 2026 को चांगी नेवल बेस (सिंगापुर)पहुंचा। यह इस चल रहे मिशन का चौथा पोर्ट कॉल है, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के तहत संचालित किया जा रहा है।

इस जहाज में 16 मित्र देशों के नौसैनिक शामिल हैं, और इसे पहले माले, फुकेत और जकार्ता में भी पोर्ट कॉल मिल चुका है।

सिंगापुर पहुंचने पर जहाज का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे भारत और सिंगापुर के बीच मजबूत समुद्री संबंधों की पुष्टि हुई। भारत के उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले ने जहाज पर क्रू से मुलाकात कर उनके कार्य की सराहना की।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने क्रांजी वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की और सिंगापुर नौसेना के 9वें फ्लोटिला कमांडर से समुद्री सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

इस दौरान जहाज को आम जनता, छात्रों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी खोला गया, जिससे उन्हें समुद्री जीवन का अनुभव मिला। “One Ocean, One Mission” थीम पर भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ रन का आयोजन भी किया गया।

जहाज पर सिंगापुर नौसेना के साथ पेशेवर आदान-प्रदान, योग सत्र, थिंक टैंक इंटरैक्शन और डेक रिसेप्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

आईएनएस सुनयना 29 अप्रैल 2026 को सिंगापुर से रवाना होकर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएगा।

रायपुर सुसाइड केस: पूर्व मंत्री के बेटे की मौत पर पत्नी के गंभीर आरोप

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। राजधानी रायपुर में पूर्व विधायक एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री धनीराम साहू के पुत्र जय साहू की आत्महत्या का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मृतक की पत्नी किरण साहू ने परिवार के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कई अहम बातें सामने रखी हैं।


किरण साहू ने आरोप लगाया कि उनके जेठ द्वारा उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। उनका कहना है कि परिवार में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके चलते लंबे समय से तनाव का माहौल बना हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कई बार डराया-धमकाया गया, जिससे मानसिक दबाव लगातार बढ़ता गया।

मामले में आर्थिक तनाव का पहलू भी सामने आया है। किरण साहू के अनुसार, जय साहू को ट्रेडिंग में करीब 13 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। इससे पहले भी उन्हें कई लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा था, जिसके कारण वे आर्थिक दबाव में थे।

पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के पीछे पारिवारिक विवाद, आर्थिक तनाव और मानसिक दबाव सहित सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

पत्नी को मनाने पहुंचा पति, प्रेमी के घर के सामने लगाई फांसी

No comments Document Thumbnail

 बालोद। जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां पत्नी को वापस घर लाने की कोशिश में जुटे पति ने निराश होकर आत्महत्या कर ली। घटना अर्जुन्दा थाना क्षेत्र की है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।


जानकारी के अनुसार, ग्राम किलेपार (रनचिरई) निवासी 42 वर्षीय परमानंद यादव की पत्नी कुछ दिन पहले अपने प्रेमी के साथ चली गई थी। पत्नी के जाने के बाद परमानंद लगातार उसे वापस लाने का प्रयास कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह पिछले तीन दिनों से पत्नी को मनाने में लगा था, लेकिन पत्नी ने उसके साथ लौटने से इनकार कर दिया।

इसके बाद परमानंद यादव पत्नी के प्रेमी के गांव चौरेल (अर्जुन्दा) पहुंचा, जहां उसने प्रेमी के घर के सामने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रविवार सुबह उसका शव फंदे पर लटका मिला, जिसके बाद गांव में हड़कंप मच गया।

सूचना मिलने पर अर्जुन्दा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आत्महत्या के कारणों को लेकर परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।

एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर सख्त संदेश, भारत ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई

No comments Document Thumbnail

राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को Shanghai Cooperation Organisation (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में बिश्केक में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के केंद्र अब दंड से अछूते नहीं रहेंगे। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद किसी भी देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है और इस पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने SCO से अपील की कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने, शरण देने या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद से बिना किसी अपवाद के मुकाबला करना क्षेत्रीय सुरक्षा को शांति और समृद्धि का आधार बना सकता है। उन्होंने पिछले वर्ष की “टियांजिन घोषणा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख और जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या धर्म नहीं होता और सभी देशों को इसके खिलाफ एकजुट और सुसंगत रुख अपनाना चाहिए। SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया को एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है जहां सह-अस्तित्व, सहयोग और करुणा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है” और हमें शांति, संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि SCO के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, समानता और सहयोग को मजबूत कर इस संगठन को शांति और आशा का प्रतीक बनाया जा सकता है। भारत इस दिशा में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, वर्ष 2026 में SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो संगठन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

रायपुर में IPL का धमाका! इस दिन से शुरू होगी टिकट बिक्री, जानिए कितनी होगी कीमत

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) मैचों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजकों के अनुसार मैचों के टिकट मई के पहले सप्ताह से बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। टिकटों की शुरुआती कीमत करीब 2000 रुपये रखी गई है, जबकि प्रीमियम श्रेणी के टिकट 8000 रुपये तक मिलेंगे।


दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीटिंग कैटेगरी के अनुसार टिकटों की अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। सूत्रों के मुताबिक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम 8 मई को रायपुर पहुंचेगी और 14 मई तक शहर में रहेगी। इस दौरान टीम मैचों के साथ अभ्यास सत्र में भी हिस्सा लेगी।

स्टेडियम प्रशासन ने बताया कि इस बार दर्शकों के लिए कई नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। इनमें बेहतर सीटिंग अरेंजमेंट, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और फूड जोन शामिल हैं। आयोजन को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है और क्रिकेट प्रेमियों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है।

बिरयानी और तरबूज खाने के बाद परिवार खत्म, मुंबई में 4 की दर्दनाक मौत

No comments Document Thumbnail

 मुंबई के पायधुनी इलाके से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां फूड पॉइजनिंग के कारण एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी दो मासूम बेटियां शामिल हैं।


बताया जा रहा है कि परिवार ने रात के खाने में बिरयानी खाई थी, जिसके बाद तरबूज भी खाया। खाना खाने के कुछ ही समय बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान एक-एक कर सभी ने दम तोड़ दिया।

विशेषज्ञों के मुताबिक फूड पॉइजनिंग भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस, फंगस, रसायन या पहले से बने जहरीले तत्वों की वजह से हो सकती है। गर्मी के मौसम में बासी, अधपका या गलत तरीके से रखा गया खाना जल्दी खराब हो जाता है। तरबूज जैसे फल भी यदि कटे हुए या संक्रमित हों तो नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।

परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

No comments Document Thumbnail

एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम

रायपुर- परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।

राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

ईश्वरचरण पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद ईश्वरचरण पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्न

No comments Document Thumbnail

ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं-मुख्य सचिव श्री विकासशील

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। 

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ सुनील मिश्रा शामिल हुए।

वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ 

छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।  

बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव  निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.