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डील करो या तबाही झेलो! अमेरिका का ईरान को 10–15 दिन का अल्टीमेटम, US सेना हाई अलर्ट पर

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 मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को परमाणु समझौते पर सहमत होने के लिए 10–15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान समझौते पर नहीं आता, तो उसके लिए स्थिति “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” हो सकती है।


US सैन्य तैयारी तेज

मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ाई गई है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर समूहों सहित युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। मेडिटेरेनियन क्षेत्र में USS Gerald R. Ford सहित कई अमेरिकी युद्धपोतों की गतिविधि बढ़ी है, जिससे संभावित कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

ब्रिटेन ने एयरबेस देने से किया इनकार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार ने ईरान पर संभावित हमले के लिए अपने एयरबेस के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ब्रिटेन का कहना है कि बिना स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय अनुमति के पहले से हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।

 रूस के साथ ईरान का सैन्य अभ्यास

तनाव के बीच ईरान ने रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा।
ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि उस पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध भड़क सकता है।

 होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लाइव-फायर ड्रिल

ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू किया है। यह वही मार्ग है, जहाँ से दुनिया के लगभग 20% तेल का व्यापार गुजरता है।

 अमेरिकी सेना स्टैंडबाय पर

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप को ही लेना है।
इसी मुद्दे पर ट्रंप ने अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ उच्च स्तरीय बैठक भी की।

क्षेत्रीय युद्ध का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संघर्ष शुरू होता है, तो इसमें इज़राइल, खाड़ी देश और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भीषण सड़क हादसे: शादी की खुशियां मातम में बदलीं, मां-बेटी समेत 3 की मौत

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 दुर्ग–भिलाई में गुरुवार को दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं ने तीन परिवारों को उजाड़ दिया। तेज रफ्तार अज्ञात वाहनों की टक्कर से एक महिला और उसकी मासूम बेटी सहित तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हैं।


▪️ सिरसा गेट के पास दर्दनाक हादसा
रायपुर से लौट रहे राकेश दुबे की बाइक को पीछे से तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी। पत्नी अनीता दुबे की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो साल की बेटी सोनम ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। राकेश घायल हैं।

▪️ बाल कटवाने जा रहे भाइयों को कुचला
धमधा-खैरागढ़ मार्ग पर सगे भाई जगन्नाथ और रोहित साहू को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। रोहित की मौत हो गई, जबकि जगन्नाथ की हालत गंभीर है।

▪️ 20 फरवरी को घर में थी शादी
सबसे दर्दनाक बात—दोनों भाइयों के घर में सामूहिक विवाह की तैयारियां चल रही थीं। खुशियों का माहौल पल भर में मातम में बदल गया।

▪️ पुलिस जांच जारी
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर फरार वाहन चालक की तलाश की जा रही है।

अपील: सड़क पर निकलते समय सावधानी बरतें—एक पल की लापरवाही जिंदगी भर का दर्द बन सकती है।

Chhattisgarh में सामाजिक फैसला: सगाई के बाद मंगेतर नहीं करेंगे फोन पर अकेले बात

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक अहम सामाजिक निर्णय सामने आया है। सेन समाज ने सगाई के बाद टूटते रिश्तों को रोकने के उद्देश्य से नई नियमावली लागू की है। अब सगाई के बाद मंगेतर आपस में फोन पर अकेले बातचीत नहीं कर सकेंगे।


यह नियम फिलहाल बालोद जिले में लागू किया गया है, लेकिन समाज के नेता इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी में हैं। सेन समाज अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आता है और राज्य में इसकी आबादी लगभग 2.25 लाख बताई जाती है। समाज के करीब 70 प्रतिशत लोग सैलून व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बालोद जिले के अध्यक्ष संतोष कौशिक ने बताया कि मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि पहले की नियमावली में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं था।

जब सगाई टूटने के मामलों की समीक्षा की गई तो पाया गया कि शादी से पहले मोबाइल पर हुई बातचीत कई बार विवाद की वजह बन रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए तय किया गया कि सगाई के बाद और शादी से पहले लड़का-लड़की आपस में फोन पर अकेले बात नहीं करेंगे। यदि किसी कारण बातचीत आवश्यक हो, तो वह माता-पिता की उपस्थिति में ही होगी।

जूता-छुपाई की रस्म भी बंद

समाज के प्रवक्ता उमेश कुमार सेन ने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि शादी में दुल्हन की बहनें दूल्हे का जूता नहीं चुराएंगी। समाज का मानना है कि इस रस्म से दोनों पक्षों के बीच अनावश्यक विवाद की स्थिति बन सकती है।

अन्य प्रमुख निर्णय

बैठक में कुछ और अहम फैसले भी लिए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • सगाई में 15 से 20 लोगों को ही ले जाने की अनुमति।
  • विवाह में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने का निर्णय।
  • प्लास्टिक की जगह पत्तल में भोजन परोसने का संकल्प।

यदि समाज का कोई व्यक्ति अन्य धर्म अपनाता है, तो उसके साथ रोटी-बेटी का संबंध समाप्त किया जाएगा।

प्रदेश स्तर पर लागू करने की तैयारी

सेन समाज के प्रदेश संगठन मंत्री गौरी शंकर श्रीवास ने कहा कि बालोद में लिए गए फैसलों की जानकारी उन्हें है और वे इसे प्रदेश स्तर पर लागू करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल के समय में सगाई टूटने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। जांच में सामने आया कि फोन पर बातचीत के दौरान उत्पन्न मतभेद रिश्तों के टूटने का कारण बन रहे हैं।

नई पीढ़ी की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस फैसले पर नई पीढ़ी की राय बंटी हुई है। बालोद की 20 वर्षीय साक्षी ने निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मोबाइल की वजह से सगाई टूट रही है, तो शादी से पहले लंबी फोन बातचीत से बचना उचित है। उनके अनुसार, यह निर्णय परिवार और समाज के हित में लिया गया है।

छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, धैर्य, रणनीति और आदर्श नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है, इसलिए हम सभी को अपने जीवन में शिवाजी जैसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।


अफजल खाँ के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी ने संकट को भांपकर धैर्य और रणनीति से निर्णय लिया और विजय प्राप्त की। इसी प्रकार शाइस्ता खान के विरुद्ध उनकी युक्तिपूर्ण रणनीति यह सिखाती है कि बड़े से बड़े शत्रु को भी सूझबूझ और साहस से पराजित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने साइंस कॉलेज मैदान पहुंचकर ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ के मंचन के दौरान संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों वाले शासक भी थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों की आस्था का सम्मान किया और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। माता जीजाबाई के संस्कारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का चरित्र हमें मर्यादा, नैतिकता और सम्मानजनक आचरण का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए महाकवि भूषण की पंक्तियों का उल्लेख किया, जिनमें शिवाजी महाराज के पराक्रम और वीरता का अद्भुत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

राजधानी रायपुर में प्रारंभ हुआ ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का यह विशेष मंचन 22 फरवरी तक प्रतिदिन शाम को साइंस कॉलेज मैदान में प्रस्तुत किया जाएगा। लगभग तीन घंटे की यह भव्य प्रस्तुति छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की गाथा पर आधारित है, जिसमें सजीव दृश्य, विशाल मंच सज्जा और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से दर्शकों को ऐतिहासिक काल का जीवंत अनुभव कराया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के तत्वाधान में आयोजित इस महानाट्य के लिए महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में ऑडिशन आयोजित किए गए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 40 स्थानीय कलाकारों का चयन किया गया। चयनित कलाकारों ने निर्देशक श्री योगेश शिरोले के मार्गदर्शन में गहन अभ्यास किया। स्थानीय कलाकारों में प्रांजल बक्षी, वर्तिका क्षीरसागर, कृति लाड, आकांक्षा और आस्था काले सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

मंचन के दौरान घोड़ों के साथ सैनिकों की टुकड़ी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही, वहीं ऊंटों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया। पुणे से आए तकनीकी विशेषज्ञ कौशिक नाईक एवं वैभव जोशी मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पारंपरिक प्रस्तुतियों में कोली गीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक आयामों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महानाट्य ‘जाणता राजा’ के अजीत राव आप्टे सहित महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

रसनी में राष्ट्रीय गौरव रथ यात्रा का भव्य स्वागत

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आरंग : भारत क्रांति मिशन द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय गौरव रथ यात्रा’ (14 से 19 फरवरी 2026) नासिक से प्रारंभ होकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए 19 फरवरी को जगन्नाथ पुरी पहुंचेगी। मंगलवार सुबह 9 बजे ग्राम रसनी स्थित चन्द्राकर समाज परिसर (नेशनल हाईवे सर्विस रोड, ओवरब्रिज के पास) में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर वतन चन्द्राकर के नेतृत्व में सैकड़ो समाज जनों ने यात्रा का गरिमामय स्वागत किया गया। यात्रा के साथ शिवाजी महाराज के वंशज भी शामिल हैं, जिनका समाजजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अभिनंदन किया।


आयोजकों के अनुसार लगभग 500 श्रद्धालुओं के साथ निकली यह रथयात्रा 19 फरवरी को पुरी पहुंचेगी, जहां शिवाजी महाराज के वंशजों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा जगन्नाथ पुरी में स्थापित की जाएगी। यात्रा का उद्देश्य महाराज के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।रसनी उपक्षेत्र सामाजिक भवन मेंआयोजित स्वागत समारोह में उपक्षेत्र आरंग नगर के सामाजिक पदाधिकारियों ने पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं आतिशबाजी के साथ अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान जय भवानी, जय शिवाजी और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

कार्यक्रम में पूर्व राज अध्यक्ष वतन चंद्राकर, शंकरलाल चंद्राकर,उपक्षेत्र अध्यक्ष खूबचंद चंद्राकर,के.के. भारद्वाज,दिनेश चंद्राकर,सतीश चन्द्राकर,मनोज चंद्राकर,संतोष चंद्राकर,डोमार सिंह चंद्राकर,होरी चंद्राकर,जगमोहन चंद्राकर, सचिव भरत चंद्राकर,उमाशंकर चंद्राकर,अमन चंद्राकर,गोपाल चंद्राकर,विकास चंद्राकर,खुमेश चन्द्राकर,पारस चन्द्राकर,समीर चन्द्राकर,गौरव चन्द्राकर सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, सदस्य एवं युवा उपस्थित रहे।चन्द्राकर समाज द्वारा किए गए इस भव्य स्वागत ने सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया। आयोजन में उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

भिलाई में सफल नेत्रदान: आरंग टीम की तत्परता की सराहना

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 आरंग। गत दिवस भिलाई निवासी 80 वर्षीय स्व.अर्जुन लाल साहू के सफलता पूर्वक नेत्रदान कराने पर मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी मिथलेश चौधरी ने आरंग के नेत्र सहायक चिकित्सक टीम की जमकर सराहना किए। उन्होंने गुरूवार को रायपुर में आयोजित मासिक बैठक में ग्रामीण क्षेत्र में नेत्रदान की पहल और आरंग टीम द्वारा तत्परता पूर्वक समय में सफलता पूर्वक नेत्रदान कराए जाने पर नेत्र सहायक अधिकारी एस पी देवांगन, आर पी यादव, सालिक नौरंगे अन्नपूर्णा वर्मा और डाक्टर रामनारायण दास को प्रशस्ति और गुलदस्ता भेंटकर सम्मानित किया।


साथ ही लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया में असुविधा न हो इसके लिए सीएमएचओ चौधरी ने नेत्रदान संबंधी सभी उपकरण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आरंग में उपलब्ध कराने की बात कहा।नेत्र सहायक अधिकारी अन्नपूर्णा वर्मा ने बताया नेत्रदान मृत्युपरांत महज छः घंटे के भीतर करना होता है। अधिकतर परिजन मृत्यु पश्चात देर बाद इसकी सूचना दे पाते हैं। ऐसे में समय में नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करना चुनौती भरा कार्य होता है।

आरंग क्षेत्र में लंबे अंतराल पश्चात कोई 80 वर्ष के बुजुर्ग ने नेत्रदान कर एक मिसाल पेश किए हैं। नेत्रदान में अर्जुन के परिवार और ग्रामीणो का भरपूर सहयोग रहा। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथलेश चौधरी एवं नोडल अधिकारी अंधत्व डॉ समता रंगारी,बीएमओ विजय लक्ष्मी अनंत सहित डाक्टरों,कर्मचारी अधिकारियों ने नेत्र सहायक अधिकारियो की टीम को बधाई दिए हैं।

CG NEWS ; शिकायत के बाद एक्शन, 25 हजार लेते ही दबोचा गया अफसर

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 बलौदाबाजार। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने जनपद पंचायत पलारी के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग में पदस्थ एसडीओ गोपाल कृष्ण शर्मा को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।


मुरूम समतलीकरण कार्य के बदले मांगी थी रिश्वत

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भवानीपुर के उपसरपंच फागु सेन ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि मुरूम समतलीकरण कार्य कराने के बदले एसडीओ द्वारा 1 लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत की पुष्टि के बाद बिछाया गया जाल

शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर एसीबी टीम ने योजना बनाकर ट्रैप लगाया और आरोपी अधिकारी को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ लिया।

बताया जा रहा है कि गोपाल कृष्ण शर्मा का कुछ समय पहले ही प्रमोशन हुआ था और वे जनपद पंचायत पलारी के RES विभाग में एसडीओ के पद पर पदस्थ थे।

पूछताछ जारी, आगे होगी कार्रवाई

एसीबी की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है।

MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ASEAN नौसेना प्रमुखों से मुलाकात

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MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 फरवरी 2026 को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में ASEAN के नौ सदस्य देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ संवाद किया। इस बैठक में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और महासागर क्षेत्र में सुरक्षा व विकास के लिए परस्पर और समग्र प्रगति (MAHASAGAR) के विज़न के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

MILAN अभ्यास में ASEAN की बड़ी भागीदारी

रक्षा मंत्री ने MILAN 2026 में ASEAN नौसेनाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास 1995 में केवल चार विदेशी नौसेनाओं से शुरू होकर फरवरी 2026 में 74 देशों की भागीदारी वाला सबसे बड़ा संस्करण बन गया है।

उन्होंने Indian Ocean Naval Symposium (IONS) – Conclave of Chiefs और International Fleet Review 2026 की भूमिका को इंडो-पैसिफिक साझेदारों के बीच विश्वास और ऑपरेशनल समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।

MILAN 2026 के समुद्री चरण (Sea Phase) में जटिल समुद्री अभ्यास जैसे:

  • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW)

  • वायु रक्षा

  • खोज और बचाव (Search & Rescue)
    पर भी चर्चा हुई।

भारत-ASEAN रणनीतिक दृष्टिकोण

राजनाथ सिंह ने ASEAN को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताया और कहा कि साझा सुरक्षा ही क्षेत्रीय समृद्धि का आधार है।

उन्होंने ASEAN साझेदारों को भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से लाभ उठाने का आमंत्रण दिया, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के कारण विकसित हुआ है।
उन्होंने INS विक्रांत और विशाखापट्टनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों को भारत के ‘बिल्डर नेवी’ में परिवर्तन का प्रतीक बताया।

संयुक्त गतिविधियों का प्रस्ताव

ASEAN प्रतिनिधियों ने भारत की क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) की भूमिका की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, विशेष रूप से:

  • ASEAN-India Defence Think-Tank Interaction

  • युवा नौसैनिक अधिकारियों के बीच सहयोग पहल
    ताकि दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता

बैठक का समापन स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो “Camaraderie, Cooperation, and Collaboration” (सौहार्द, सहयोग और समन्वय)—MILAN 2026 का आधिकारिक विषय—पर आधारित है।

गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण, भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन में बड़ी उपलब्धि

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भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ड्रोग पैराशूट का योग्यता स्तर भार परीक्षण (Qualification Level Load Test) सफलतापूर्वक DRDO के टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ स्थित रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) सुविधा में किया गया।

RTRS एक विशेष उच्च-गति परीक्षण सुविधा है, जिसका उपयोग एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक परीक्षणों के लिए किया जाता है।

परीक्षण का विवरण

यह परीक्षण 18 फरवरी 2026 को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (ISRO), एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRDO) और TBRL की टीमों के सहयोग से किया गया।

RTRS डायनामिक परीक्षण में ऐसे भारों का अनुकरण किया गया, जो वास्तविक उड़ान में पड़ने वाले अधिकतम भार से भी अधिक थे। इससे पैराशूट के डिज़ाइन में अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन की पुष्टि हुई।

तकनीकी सफलता और स्वदेशी क्षमता

इस परीक्षण से यह साबित हुआ कि भारत उच्च-शक्ति रिबन पैराशूट डिजाइन और निर्माण करने में सक्षम है।
यह उपलब्धि अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों के लिए उन्नत परीक्षण सुविधाएं और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने में TBRL के महत्वपूर्ण योगदान को भी दर्शाती है।

रक्षा मंत्री और DRDO प्रमुख की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गगनयान ड्रोग पैराशूट के सफल परीक्षण पर DRDO, ISRO और उद्योग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

DRDO के सचिव एवं अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी।


भारत-मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

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भारत और मंगोलिया के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर “भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक अंतरप्रवाह” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के बृहत्तर भारत एवं क्षेत्र अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जो संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है। सम्मेलन का उद्घाटन आज नई दिल्ली स्थित IGNCA के संवेत ऑडिटोरियम में किया गया।

मंगोलियाई संस्कृति पर विशेष प्रदर्शनी

इस अवसर पर मंगोलियाई संस्कृति की दृश्य प्रस्तुति पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, जो 25 फरवरी तक IGNCA की दर्शनम गैलरी में आम जनता के लिए खुली रहेगी।
सम्मेलन में भारत, मंगोलिया, अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों के 31 विद्वान भाग ले रहे हैं, और दो दिनों में कुल 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

मुख्य अतिथि के विचार

मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह सम्मेलन भारत और मंगोलिया के बीच साझा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल धर्म तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खगोल विज्ञान, पंचांग विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और दर्शन जैसे क्षेत्रों तक फैले हैं।

उन्होंने मंगोलियन कांग्यूर को भाषाई और दार्शनिक विद्वत्ता का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बताया और कहा कि इसके संरक्षण और डिजिटलीकरण से सभ्यतागत संवाद और सांस्कृतिक कूटनीति मजबूत होती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के 2015 मंगोलिया दौरे के दौरान भारत को “आध्यात्मिक पड़ोसी” कहे जाने का उल्लेख किया और कहा कि यह सम्मेलन 70 वर्षों के कूटनीतिक संबंधों और सदियों पुराने सभ्यतागत रिश्तों को दर्शाता है।

संस्कृति मंत्रालय की भूमिका

संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत और मंगोलिया साझा सभ्यतागत स्मृति और सांस्कृतिक निकटता पर आधारित साझेदारी बना रहे हैं।
उन्होंने तेल रिफाइनरी परियोजना, रक्षा, शिक्षा और पांडुलिपि संरक्षण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट मौसमी और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत के तहत साझा अमूर्त विरासत को दस्तावेज़ करने और यूनेस्को में बहुराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंगोलिया के राजदूत का संबोधन

मंगोलिया के राजदूत गनबोल्ड डम्बाजाव ने भारत को मंगोलिया का “आध्यात्मिक पड़ोसी” और प्रमुख क्षेत्रीय साझेदार बताया।उन्होंने बौद्ध धर्म को दोनों देशों का साझा मूल्य बताया और कांग्यूर और तेंग्यूर जैसे बौद्ध ग्रंथों के संरक्षण और अनुवाद का उल्लेख किया।उन्होंने इनके प्रसार में भारत के सहयोग की सराहना की और दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन का उद्देश्य

यह सम्मेलन विद्वानों को भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा का मंच प्रदान करता है, जिसमें:

  • पुरातात्विक संबंध

  • धार्मिक और साहित्यिक परंपराएँ

  • मंगोलिया में संस्कृत पांडुलिपियाँ

  • कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

  • साझा भौतिक विरासत
    जैसे विषय शामिल हैं।


DPIIT और NPC द्वारा हैदराबाद में ‘बॉयलर चिंतन शिविर’ का आयोजन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के सहयोग से हैदराबाद में “बॉयलर पर चिंतन शिविर” का आयोजन किया।

इस चिंतन शिविर का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और “विजन 2047” जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतियों को समन्वित करना था। चर्चा का मुख्य फोकस बॉयलर उद्योग के लिए एक रोडमैप तैयार करना था, जिसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों को शामिल किया गया।

उच्चस्तरीय सहभागिता

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की महानिदेशक नीरजा शेखर,DPIIT के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे,और तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) एवं सचिव, केंद्रीय बॉयलर बोर्ड, संदीप सदानंद कुंभार शामिल हुए।

इसके अलावा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, बॉयलर निर्माता, बॉयलर उपयोगकर्ता, थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण (TPIA) और अन्य हितधारक भी चर्चा में शामिल हुए।

Boilers Act, 2025 पर चर्चा

प्रतिभागियों को बताया गया कि बॉयलर अधिनियम, 1923 (संविधान से पूर्व का कानून) की वर्तमान प्रासंगिकता की समीक्षा की गई थी। चूंकि यह कानून जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे बनाए रखने का निर्णय लिया गया, लेकिन इसके प्रावधानों को अद्यतन किया गया।

इसके परिणामस्वरूप कानून को Boilers Act, 2025 के रूप में पुनः अधिनियमित किया गया, जो 1 मई 2025 से लागू है।चिंतन शिविर का उद्देश्य इस नए कानून पर फीडबैक लेना और नियामक ढांचे को मजबूत बनाने के सुझाव आमंत्रित करना था।

तकनीकी सत्र और उद्योग विषय

तकनीकी सत्रों में निम्न विषयों पर चर्चा हुई:

  • Boilers Act, 2025 और इसके नियम व विनियम

  • ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार सुगमता)

  • थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण और सक्षम व्यक्तियों की भूमिका

  • पुराने बॉयलरों की शेष जीवन अवधि का आकलन

  • बॉयलर निर्माण में उन्नत तकनीक

  • सुपरक्रिटिकल बॉयलरों की स्थापना में आने वाली चुनौतियाँ

खुली चर्चा और सुझाव

कार्यक्रम का समापन पैनल चर्चा और ओपन हाउस संवाद के साथ हुआ, जिसमें हितधारकों से नियमों को सरल बनाने, अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार सुगमता बढ़ाने के सुझाव मांगे गए, जबकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करने पर जोर दिया गया।


इकलौते बेटे की मौत से भड़का आदिवासी समाज, NH-130C पर चक्काजाम

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 गरियाबंद। बड़े गोबरा स्थित शासकीय आदिवासी बालक आश्रम के छात्र राघव मंडावी की मौत से आक्रोशित आदिवासी समाज ने आज नेशनल हाईवे 130C पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। प्रदर्शनकारी आश्रम अधीक्षक पर कार्रवाई तथा मृतक छात्र के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।


जानकारी के अनुसार ग्राम भाठीगढ़ में संचालित आश्रम में रहकर ग्राम गजकन्हार, विकासखंड नगरी निवासी छात्र पढ़ाई कर रहा था। 20 जनवरी को उसने तबीयत खराब होने की शिकायत अपने साथियों और कर्मचारियों से की तथा माता-पिता से बात कराने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने बेटे को बेहद कमजोर अवस्था में बिस्तर पर पाया। इसके बाद उन्होंने अवकाश के लिए आवेदन दिया और 26 जनवरी को उसे घर ले जाकर उपचार शुरू किया। तबीयत में सुधार न होने पर धमतरी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे राघव मंडावी ने दम तोड़ दिया।

इकलौते पुत्र की मौत से दुखी पिता ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज मिल जाता तो उनके बेटे की जान बच सकती थी। जनपद सदस्य सुकचंद धुव्र ने भी आश्रम प्रबंधन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों पर केस दर्ज करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। प्रशासन द्वारा स्थिति को संभालने के प्रयास जारी हैं।

भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “भविष्य के महासागरों के लिए AI” पर उच्चस्तरीय चर्चा

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), भारत सरकार ने 16–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के तहत “AI for Our Oceans of Tomorrow: Data, Models and Governance” विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में महासागर शासन, आपदा प्रबंधन, समुद्री आजीविका और ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy) के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। इस सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

महासागरों की भूमिका और AI का महत्व

मुख्य भाषण देते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम. मोहापात्रा ने बताया कि महासागर जलवायु नियंत्रण, आपदा जोखिम कम करने, खाद्य सुरक्षा और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास महासागर अवलोकन, चक्रवात पूर्वानुमान, समुद्री डेटा सिस्टम और शुरुआती चेतावनी सेवाओं में मजबूत राष्ट्रीय क्षमताएं हैं, जिससे चरम मौसम घटनाओं में जान-माल के नुकसान में काफी कमी आई है।

उन्होंने यह भी बताया कि डेटा-आधारित और AI-सक्षम मॉडल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे महासागर तापमान वृद्धि, अम्लीकरण और समुद्र स्तर वृद्धि) को समझने में पारंपरिक भौतिक मॉडलों के पूरक हो सकते हैं।
उन्होंने डीप ओशन मिशन को एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल बताया, जो गहरे समुद्र की खोज, अपतटीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है।

भारत-नॉर्वे सहयोग और डिजिटल महासागर ढांचा

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने महासागरों और ब्लू इकॉनमी में भारत-नॉर्वे सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI मछली पालन, शिपिंग, बंदरगाह संचालन और तटीय लचीलापन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व भारत को खुले डेटा, साझा मानकों और जिम्मेदार डिजिटल शासन पर आधारित एक वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाता है, जिससे पूरी दुनिया को लाभ होगा।

डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकॉनॉमी

पैनल चर्चा में सरकारी, अकादमिक, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करते हुए एक डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर सकता है, जो खुले डेटा, AI आधारित इंटेलिजेंस और मजबूत शासन ढांचे को एकीकृत करेगा।

AI समुद्री आजीविका बढ़ाने, लागत घटाने और ब्लू इकॉनॉमी क्षेत्रों में डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए आवश्यक होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महासागर अभी भी डेटा की कमी वाला और जटिल क्षेत्र हैं, इसलिए भौतिक विज्ञान आधारित AI (Physics-informed AI) और फिजिकल इंटेलिजेंस की जरूरत है।

नीतिगत समर्थन, डेटा उपलब्धता, वित्तीय सहयोग और जोखिम साझा करने के साथ ब्लू इकॉनॉमी भारत और ग्लोबल साउथ के लिए दीर्घकालिक विकास का बड़ा इंजन बन सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे।

समापन टिप्पणी

सत्र का समापन डॉ. (कमांडर) पी. के. श्रीवास्तव, वैज्ञानिक G और सलाहकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने किया। उन्होंने महासागर कार्यक्रमों में AI के एकीकरण के लिए संरचित रोडमैप बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।


मध्य प्रदेश में CBN की बड़ी कार्रवाई: मेथामफेटामिन फैक्ट्री का भंडाफोड़, 51.992 किलो MD जब्त

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मध्य प्रदेश में अब तक किसी एजेंसी द्वारा की गई सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक में, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के अधिकारियों ने तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान इंदौर जिले के महू तहसील के थावलाय गांव में स्थित एक अवैध ड्रग फैक्ट्री का पता लगाया।

इस दौरान 43.820 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली मेथामफेटामिन (MD), 260 किलोग्राम से अधिक रसायन और अत्याधुनिक उपकरण जब्त किए गए। पूरे ऑपरेशन में कुल 51.992 किलोग्राम MD बरामद हुई। सभी जब्त पदार्थ और रसायन NDPS अधिनियम, 1985 के तहत जब्त किए गए।

बस में पकड़े गए आरोपी, 8.172 किलो MD बरामद

13 फरवरी 2026 की रात, CBN नीमच शाखा को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर, मंदसौर में एक बस में यात्रा कर रहे दो यात्रियों से 8.172 किलोग्राम क्रिस्टल मेथामफेटामिन बरामद की गई।

CBN की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस को रोका और NDPS अधिनियम के तहत तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक यात्री के पास संदिग्ध बॉक्स मिला, जिसमें उसने MD होने की बात स्वीकार की। दूसरे साथी से भी बॉक्स बरामद हुआ। दोनों आरोपियों ने ड्रग्स रखने की बात स्वीकार की और बताया कि वे इसे सीधे एक गुप्त लैब से ला रहे थे।

गुप्त लैब का पता लगाया गया

जानकारी मिलने के बाद CBN ने नीमच, मंदसौर, जावरा और उज्जैन की संयुक्त विशेष टीम बनाई और संदिग्ध लैब की तलाश शुरू की। जांच के बाद महू के पास लैब का पता चला।

14 फरवरी 2026 की सुबह संदिग्ध परिसर की पहचान की गई, लेकिन तेज रासायनिक गैस और बदबू के कारण तुरंत प्रवेश नहीं किया जा सका। स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए PPE (सुरक्षा उपकरण) के साथ विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया।

आधुनिक मशीनरी और तकनीकी टीम की मदद

लैब में आधुनिक मशीनरी और प्लांट लगे थे। इन्हें हटाने के लिए Government Opium and Alkaloid Works (GOAW), नीमच के इंजीनियर और रसायन विशेषज्ञों की मदद ली गई। मशीनरी को हटाकर जब्त किया गया और पूरी कार्रवाई 15 फरवरी 2026 की सुबह पूरी हुई।

आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

मंदसौर में पकड़े गए दोनों आरोपियों पर NDPS अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस घर में लैब चल रही थी, उसके मालिक को भी हिरासत में लिया गया है।
आगे की जांच में ड्रग्स के निर्माण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

CBN का संदेश

CBN ने कहा कि यह कार्रवाई उनकी प्रतिबद्धता, समन्वय और तेजी से की गई खुफिया कार्रवाई का उदाहरण है। एजेंसी ने नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और भारत को ड्रग-फ्री बनाने का संकल्प दोहराया।


छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेतृत्व गढ़ रहा है विकास के नए सोपान

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 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जन्मदिवस पर विशेष


छगन लाल लोन्हारे (उप संचालक जनसंपर्क)

रायपुर : छत्तीसगढ़ की खूबसूरत वादियों में स्थित जशपुर जिला के ग्राम बगिया में 21 फरवरी को जन्म लेने वाले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सज्जनता और सहृदयता की एक मिसाल है। दो वर्ष के अपने मुख्यमंत्रित्व काल में छत्तीसगढ़ राज्य में विकास का एक नया आयाम गढ़ने वाले तथा प्रदेश के नागरिकों के दिलों में राज करने वाले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपनी लोकप्रियता के शिखर पर विद्यमान है। विष्णुदेव साय जनता के बीच के एक ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं जिनकी सदाशयता और दूरगामी योजनाओं से प्रदेश में विकास और प्रगति का राह आसान हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आदिवासी पृष्ठभूमि से आते हैं।

केबिनेट बैठक में राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्वयं एक किसान पुत्र हैं वे किसानों की पीड़ा को भलीभांति जानते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षों में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी। किसान हितैशी सरकार के इस निर्णय से बाजार भी गुलजार होंगे, जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिखाई देगा, ट्रैक्टर आदि की बिक्री में वृद्धि होगी।

प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति से राज्य में अब तक 7 लाख 83 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अपने दो साल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ को पूरे देश में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की जनता के बीच जाकर जनता का न केवल विश्वास जीता है बल्कि उनके हित को ध्यान में रखकर उन्होंने ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे छत्तीसगढ़ का समग्र विकास सम्भव हो पाया है। यह केवल और केवल श्री विष्णुदेव साय जैसे एक संवेदनशील, कर्मठ तथा ऊर्जावान मुख्यमंत्री ही सम्भव कर सकते हैं।

विष्णु देव की सुशासन में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष घोषित किया गया है। राज्य सरकार ने मातृशक्ति का सम्मान करते हुए 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रूपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। प्रदेश के 42 हजार 878 महिला स्व- सहायता समूहों को आसान ऋण से अब तक 129.46 करोड़ रूपए का लाभ दिया गया है। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के अंतर्गत 4.81 लाख महिलाओं को 237 करोड़ रूपए की सहायता राशि दी गई है। राज्य की 19 लाख से अधिक महिलाओं को पूरक पोषण आहार सुनिश्चित की गई है। महिला सुरक्षा के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 की स्थापना की गई है। महिलाओं को रोजगार मूलक कार्यों के जरिए स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत स्तर पर 52.20 करोड़ की लागत से 179 महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री हेतु 200 करोड़ की लागत से नवा रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री की पहल पर दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5.62 लाख भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा आवास और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रख कर अब तक 26 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति किए गए हैं। स्वच्छ पेयजल सबका अधिकार है। प्रदेश के 41 लाख से अधिक घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति के लिए राज्य में 77 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई है। 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं से प्रदेश के 3208 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा राज्य के शत्-प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण किया जा रहा है।

डबल इंजन की सरकार में रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना के साथ रेल नेटवर्क मैप से बस्तर जुड़ रहा है। जगदलपुर-विशाखापट्नम और रायपुर-विशाखापट्नम नई सड़क परियोजनाओं से विकास की नई राहें खुल रही है। प्रदेश के 32 नगरीय निकायों में नॉलेज बेस्ड सोसाइटी हेतु लाइट हाउस निर्माण की पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने प्रदेश के हर वर्ग की बुनियादी सुविधाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पीएम आवास योजना, कृषक उन्नति योजना, नियद नेल्ला नार, अखरा निर्माण योजना जैसी योजनाओं का शुभारम्भ किया है और जनता के बीच अपनी एक अलग छवि निर्मित की है।

मुख्यमंत्री साय जनता के बीच और हर समुदाय के बीच एक ऐसा पुल बनाना जानते हैं जिससे सभी एक दूसरे से जुड़ सके और सभी प्रदेश के हित में अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह भी कर सके। उन्होंने अपने जीवन का बहुमूल्य समय पद्रेश की जनता को समर्पित कर यह सिद्ध कर दिया है कि उनका जीवन केवल उनका नहीं है अपितु प्रदेश की जनता की निः स्वार्थ सेवा के लिए समर्पित है। वे सही मायने में एक ऐसे जननेता हैं जिनके लिए जनता ही सब कुछ हैं। ऐसे सेवाभावी और लोकप्रिय जनसेवक बहुत कम होते हैं जिनके लिए जनता का विकास और जनता का साथ ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अब तक का कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व ईमानदार, समर्पित और जनता की आकांक्षाओं से जुड़ा हो तो विकास की राह कठिन नहीं होगी।

 

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