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‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धि: भारत में विकसित बीम कैचर जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट FAIR पहुंचा

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नई दिल्ली- भारत की वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। भारत में डिजाइन और निर्मित बीम कैचर (Beam Catcher) उपकरण की पहली इकाई जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट ‘फैसिलिटी फॉर एंटीप्रोटॉन एंड आयन रिसर्च (FAIR)’ में पहुंच गई है। यह उपकरण अब स्थापना की प्रतीक्षा में है और परियोजना के सुपर फ्रैगमेंट सेपरेटर (Super-FRS) का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जो रेडियोधर्मी आयन बीम तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

बीम कैचर को सीएसआईआर-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-CMERI), दुर्गापुर ने डिजाइन किया है। इसका विकास बोस संस्थान, कोलकाता के मार्गदर्शन में किया गया, जो FAIR परियोजना में भारत की वैज्ञानिक भागीदारी का प्रमुख समन्वयक संस्थान है।

यह उपकरण उच्च-ऊर्जा भारी आयन बीम के अवशेषों को सुरक्षित रूप से अवशोषित करने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करना है। इसके लिए इसमें फाइन-ग्रेन्ड ग्रेफाइट और उच्च-शुद्धता वाले तांबे से बने अवशोषक लगाए गए हैं, जिन्हें पिघलने से बचाने के लिए जल-शीतलन (Water Cooling) प्रणाली से लैस किया गया है। पूरा सिस्टम उच्च वैक्यूम तकनीक, सटीक मोटराइज्ड मूवमेंट और रेडियोधर्मिता से सुरक्षा के लिए विशेष आयरन शील्डिंग से युक्त है।

भारत 4 अक्टूबर 2010 को जर्मनी के विस्बाडेन में समझौते पर हस्ताक्षर कर FAIR परियोजना का संस्थापक सदस्य बना था। जर्मनी के डार्मस्टाट में बन रही यह विश्वस्तरीय कण त्वरक (Particle Accelerator) सुविधा दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इसमें भारत का योगदान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है।

FAIR परियोजना में भारत केवल बीम कैचर ही नहीं, बल्कि 58 अल्ट्रा हाई वैक्यूम चैंबर, 932 किलोमीटर विशेष आईटी एवं डायग्नोस्टिक केबल, और 524 अल्ट्रा-स्टेबल पावर कन्वर्टर जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियां भी उपलब्ध करा रहा है। इन उपकरणों का निर्माण बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कानपुर की भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया है। इसके अलावा वडोदरा की INOXCVA ने भी क्रायोजेनिक उपकरणों की आपूर्ति कर परियोजना में योगदान दिया है।

FAIR परियोजना के तहत भारतीय वैज्ञानिक न्यूक्लियर स्ट्रक्चर एंड एस्ट्रोफिजिक्स (NuSTAR) तथा कम्प्रेस्ड बैरियोनिक मैटर (CBM) जैसे अत्याधुनिक प्रयोगों के लिए उन्नत डिटेक्टर प्रणालियों का भी विकास कर रहे हैं।

बोस संस्थान के मार्गदर्शन में भारतीय उद्योगों की भागीदारी ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को वैश्विक स्तर पर मजबूती दे रही है। इस परियोजना से भारतीय कंपनियों की तकनीकी क्षमता अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंच रही है, जिससे भविष्य में ITER, CERN, TMT, SKA और LIGO जैसी वैश्विक मेगा साइंस परियोजनाओं में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।


भारत और श्रीलंका ने ऊर्जा सहयोग को नई गति देने पर किया मंथन, बिजली क्षेत्र में कई अहम परियोजनाओं की समीक्षा

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नई दिल्ली- भारत और श्रीलंका ने आज नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बिजली क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने किया, जबकि श्रीलंका की ओर से बंदरगाह एवं नागरिक उड्डयन तथा ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलके ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारत–श्रीलंका एचवीडीसी (HVDC) इंटरकनेक्शन परियोजना और संपूर सौर ऊर्जा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही सीमा-पार बिजली व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन अवसंरचना और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में परिवर्तन को गति देने के लिए आपसी सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। इस दौरान भारत ने टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने के अपने अनुभव भी साझा किए।

बैठक में मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के तहत हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए दोनों देशों ने सतत विकास और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिजली क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलके ने भारत के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी को और विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की।

बैठक में भारत सरकार की ओर से विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल में भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिणी कोलोन्ने तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

मिजोरम और असम में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई, 15 किलो मेथामफेटामाइन, 11 टन पोस्ता दाना और 10 टन तस्करी की सुपारी जब्त

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नई दिल्ली/आइजोल- भारत की उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर सीमा पार तस्करी और मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही के खिलाफ जारी अभियान के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने मिजोरम और असम में कई खुफिया आधारित अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। इन कार्रवाइयों में 15 किलोग्राम मेथामफेटामाइन (याबा) टैबलेट, करीब 11 मीट्रिक टन विदेशी मूल का पोस्ता दाना तथा 10 मीट्रिक टन तस्करी की विदेशी सुपारी जब्त की गई है।

डीआरआई अधिकारियों ने आइजोल-चम्फाई मार्ग पर साकेई बंगला के पास एक एंबुलेंस को रोका, जिस पर मादक पदार्थों की तस्करी का संदेह था। जांच के दौरान एंबुलेंस में मरीज के बिस्तर के पास रखे एक बैग से 15 ईंटनुमा पैकेटों में छिपाकर रखी गई 15 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुई। तस्करी को छिपाने के लिए बिस्तर पर एक डमी मरीज भी लिटाया गया था।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह खेप म्यांमार से चम्फाई–जोकहावथर सीमा के रास्ते मिजोरम लाई गई थी और इसे आगे असम भेजने की तैयारी थी। डीआरआई ने मादक पदार्थ, एंबुलेंस और अन्य सामान को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर लिया है। इस मामले में एंबुलेंस चालक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मेथामफेटामाइन, जिसे "याबा" के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यधिक नशीला सिंथेटिक मादक पदार्थ है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके सेवन से लत, आक्रामकता, मानसिक विकार और लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल नुकसान होने का खतरा रहता है।

इसी क्रम में 5 और 6 अगस्त 2026 की रात डीआरआई ने असम राइफल्स के सहयोग से असम के करीमगंज जिले के बदरपुर स्थित एक गोदाम में छापेमारी की। यहां से करीब 11 मीट्रिक टन विदेशी मूल का पोस्ता दाना बरामद किया गया, जिसे चाय की खेप और अन्य पैकेजों के बीच छिपाकर रखा गया था। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.67 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह खेप म्यांमार से भारत में तस्करी कर लाई गई थी।

डीआरआई ने इससे पहले 5 अगस्त 2026 को रंगिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संख्या 22411 के पार्सल वैन से 120 बोरियों में भरी 10 मीट्रिक टन विदेशी सुपारी भी जब्त की थी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच में सामने आया कि यह सुपारी भी म्यांमार से तस्करी कर भारत लाई गई थी और इसे उत्तर-पूर्व से बाहर के बाजारों में भेजा जा रहा था।

डीआरआई के अनुसार विदेशी सुपारी और पोस्ता दाने की तस्करी से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है तथा देश के वैध व्यापार और किसानों के हित भी प्रभावित होते हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा पर सक्रिय संगठित तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

भुवनेश्वर में संपन्न हुई 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भारत ने शिक्षा सहयोग को नई दिशा देने का किया आह्वान

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भुवनेश्वर- केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक के अंत में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा (Declaration) को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इस दौरान भारत ने "जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम" दृष्टिकोण के साथ ब्रिक्स देशों के बीच शिक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करे, साथ ही उन्हें मानवीय मूल्यों से भी जोड़े रखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

जोशी ने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी बल देते हुए कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत के "अतिथि देवो भव" और "वसुधैव कुटुम्बकम्" जैसे मूल्यों को वैश्विक सहयोग की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग परंपराओं और अनुभवों के बावजूद सभी देशों की प्रगति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

घोषणा पत्र की प्रमुख बातें

ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा में भारत की अध्यक्षता के तहत पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर सहमति बनी—

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने तथा सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर जोर।

  • कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा (TVET) में सहयोग बढ़ाने तथा भारत की अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन (International Skill Gap Study) पहल का स्वागत।

  • शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित एवं नैतिक उपयोग तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

  • शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में कार्य आगे बढ़ाने का निर्णय।

  • शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करने, ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम, छात्रवृत्ति कार्यक्रमों तथा STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर।

बैठक में भारत की पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग के लिए ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांत (BRICS Guiding Principles) की पहल का भी स्वागत किया गया।

इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM) का भी आयोजन किया, जिसमें समावेशी, सशक्त और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करता रहेगा। इसका समापन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मान समारोह, संत कबीर और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार किए प्रदान

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नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने संत कबीर हथकरघा पुरस्कार एवं राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। साथ ही भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। यह देश की सांस्कृतिक विविधता, क्षेत्रीय पहचान और पारंपरिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी, जिसका उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं, घरेलू उद्योगों और विशेष रूप से देश के हथकरघा बुनकरों को बढ़ावा देना था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में भारत सरकार वर्ष 2015 से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मना रही है।

उन्होंने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह दिवस भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का उत्सव है। यह सरकार और बुनकर समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है कि भारतीय हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान विश्व स्तर पर मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण प्रीमियम अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और समकालीन प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है तथा बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि "वेरिफाइड कल्चरल इकोनॉमी" की दिशा में उठाए गए कदमों से भारतीय हथकरघा उद्योग की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक और नवाचार के साथ बड़ी संख्या में युवा उद्यमी इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। सरकारी योजनाओं और संस्थानों के माध्यम से युवाओं को उचित मार्गदर्शन और सहयोग देकर इस क्षेत्र को दीर्घकालिक सफलता दिलाई जा सकती है। युवा उद्यमी, डिजाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक फैशन, ब्रांड और वैश्विक बाजार से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनेगा।

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश का सर्वोच्च सम्मान है, जो उत्कृष्ट शिल्प कौशल, आजीवन समर्पण और भारतीय बुनाई परंपराओं के संरक्षण में विशेष योगदान देने वाले बुनकरों को प्रदान किया जाता है। वहीं राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन बुनकरों और अन्य हितधारकों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक कौशल को संरक्षित रखते हुए गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता का परिचय दिया है।

योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग और आईआईएम रायपुर के बीच एमओयू

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 सुनील त्रिपाठी सहायक (संचालक जनसंपर्क)

रायपुर : योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ शासन एवं भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर (IIM Raipur) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य सुशासन, प्रभावी नीति निर्माण, संस्थागत क्षमता विकास, साक्ष्य-आधारित निर्णय, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में अकादमिक एवं व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करना है।


योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, राज्य नीति आयोग की ओर से सचिव  भुवनेश यादव एवं आईआईएम रायपुर की ओर से निदेशक-प्रभारी प्रो. संजीव पराशर ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान, परामर्श, डेटा एनालिटिक्स, शोध एवं दस्तावेजीकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।

प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर जोर

एमओयू के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों के लिए नेतृत्व विकास, मिड-कैरियर एग्जीक्यूटिव एवं कस्टमाइज्ड मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किए जा सकेंगे। इकोनोमेट्रिक्स, रिसर्च मेथडोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पब्लिक पॉलिसी, नेतृत्व एवं प्रबंधकीय कौशल जैसे क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिए जाएंगे।

नीति अनुसंधान और डेटा आधारित निर्णय को बढ़ावा

दोनों संस्थान नीति अनुसंधान, प्रभाव आकलन, मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन, बेंचमार्किंग, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, रणनीतिक परामर्श और डेटा आधारित निर्णय सहयोग के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। छत्तीसगढ़ की विकास प्राथमिकताओं से जुड़े शोध, केस स्टडी, पॉलिसी ब्रीफ एवं शोध रिपोर्ट भी तैयार की जा सकेंगी।

लाइव एनालिटिक्स प्रोजेक्ट और विद्यार्थियों की सहभागिता

आईआईएम रायपुर के फैकल्टी एवं विद्यार्थियों द्वारा डेटा एनालिटिक्स आधारित लाइव प्रोजेक्ट, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, गवर्नेंस इनोवेशन एवं एप्लाइड रिसर्च किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों को समर इंटर्नशिप, फील्ड इमर्शन, लाइव कंसल्टिंग, एक्शन रिसर्च एवं कैपस्टोन प्रोजेक्ट के माध्यम से शासकीय योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

ज्ञान एवं विशेषज्ञता का होगा आदान-प्रदान

एमओयू के तहत संयुक्त कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, पॉलिसी डायलॉग, स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन एवं राउंडटेबल आयोजित किए जाएंगे। आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों, शासकीय अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों की प्रशिक्षण, शोध एवं परामर्श गतिविधियों में सहभागिता होगी। लागू नियमों के अधीन अकादमिक संसाधन, शोध प्रकाशन, डेटाबेस, गैर-गोपनीय डेटा एवं तकनीकी विशेषज्ञता भी साझा की जा सकेगी।

यह समझौता छत्तीसगढ़ में नीति निर्माण एवं शासन व्यवस्था को अधिक डेटा-आधारित, शोधपरक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आईआईएम रायपुर की अकादमिक विशेषज्ञता और राज्य नीति आयोग एवं योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की नीतिगत समझ के समन्वय से राज्य की विकास प्राथमिकताओं पर अनुसंधान, नवाचार एवं प्रभावी नीति सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में अब तक औसतन 606.4 मिमी बारिश दर्ज, सामान्य का 99% कोटा पूरा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून की स्थिति कुल मिलाकर संतोषजनक बनी हुई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी राज्यस्तरीय आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 7 अगस्त 2026 तक प्रदेश में औसतन 606.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो कि सामान्य औसत वर्षा (612.8 मिमी) का लगभग 99 प्रतिशत है। राज्य में आज औसतन 10.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।


आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि राज्य के विभिन्न संभागों और जिलों में वर्षा का वितरण काफी असमान रहा है। जहां मैदानी व मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में मानसूनी बादल जमकर बरसे हैं, वहीं उत्तरी छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग) में औसत से काफी कम बारिश हुई है।

संभागजिलाकुल वर्षा (मिमी)सामान्य का %
रायपुरमहासमुंद771.9139.4%
 गरियाबंद731.8125.5%
 बलौदाबाज़ार701.8122.8%
 रायपुर648.7126.8%
 धमतरी651.4110.5%
बिलासपुरसारंगढ़-बिलाईगढ़ (सर्वाधिक)872.8187.8%
 जांजगीर-चांपा798.1126.0%
 सक्ती668.8119.4%
 बिलासपुर635.4108.5%
 कोरबा618.993.4%
 रायगढ़602.993.8%
 मुंगेली584.8107.1%
 गौरेला-पेन्ड्र-मरवाही577.498.6%
दुर्गबालोद686.9117.6%
 मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी530.973.3%
 राजनांदगांव517.497.5%
 दुर्ग504.6108.4%
 खैरागढ़-छुईखदान-गंडई418.094.8%
 कबीरधाम377.581.5%
 बेमेतरा354.977.5%
बस्तरनारायणपुर1008.7134.9%
 बीजापुर780.470.5%
 दंतेवाड़ा758.992.6%
 कोंडागांव598.687.4%
 सुकमा576.968.1%
 कांकेर572.969.9%
 बस्तर564.474.6%
सरगुजाबलरामपुर577.7119.0%
 सूरजपुर556.389.0%
 कोरिया515.093.3%
 मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर505.693.5%
 जशपुर437.671.0%
 सरगुजा (सबसे कम)304.565.6%

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा जीपीएम, 18 से 21 अगस्त तक जुटेंगे प्रदेशभर के खिलाड़ी

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पांचों संभागों के 540 खिलाड़ी जिम्नास्टिक, क्रिकेट, ताईक्वांडो और कबड्डी में दिखाएंगे दम

जिला प्रशासन ने शुरू की व्यापक तैयारियां

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खेल संस्कृति को नई गति मिल रही है। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 18 से 21 अगस्त तक आयोजित होने वाली 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा। चार दिवसीय इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों से 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 540 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

राज्य सरकार खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवन शैली का सशक्त आधार मानती है। शालेय स्तर पर आयोजित होने वाली ऐसी प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ-साथ बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती हैं।

चार खेलों की स्पर्धाओं से गूंजेगा जीपीएम

प्रतियोगिता के दौरान जिम्नास्टिक (बालक एवं बालिका), क्रिकेट (बालक), ताईक्वांडो (बालक एवं बालिका) तथा कबड्डी (बालिका) की स्पर्धाएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी पांचों संभागों के खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं अधिकारी सहभागिता करेंगे। आयोजन से खिलाड़ियों में प्रतिस्पर्धा की भावना, टीम भावना और खेल उत्कृष्टता को नई दिशा मिलेगी।

उत्कृष्ट आयोजन के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार

प्रतियोगिता के सफल एवं गरिमामय आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर विजय दयाराम के. ने विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक लेकर तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि राज्यभर से आने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सुरक्षा से लेकर आवास और चिकित्सा तक हर व्यवस्था पर विशेष ध्यान

बैठक में खेल स्थलों के चयन, खिलाड़ियों के आवास एवं भोजन, परिवहन, स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा उद्घाटन एवं समापन समारोह की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी सहित खेल एवं युवा कल्याण, वन, स्वास्थ्य, आदिवासी विकास, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विद्युत, खाद्य, परिवहन तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

यह प्रतियोगिता न केवल प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी, बल्कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को राज्य के प्रमुख खेल आयोजनों के सफल मेजबान के रूप में नई पहचान भी दिलाएगी।

नांदघाट-मुंगेली रोड होगा फोरलेन, राज्य शासन ने मंजूर किए 21.81 करोड़

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उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारी

रायपुर- राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक टू-लेन सड़क के फोरलेन में उन्नयन के लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 36.40 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।

उप मुख्यमंत्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।

कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। निर्माण कार्य की समयावधि में वृद्धि (Time Extension) नियमानुसार अर्थदंड सहित अधिरोपित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: भारतीय बुनकरों की कला और विरासत को मिला सम्मान

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नई दिल्ली- देशभर में आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा, कुशल बुनकरों के योगदान और स्वदेशी वस्त्रों की महत्ता को याद किया गया। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी और यह 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है।

इस अवसर पर विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनी, हस्तशिल्प मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बुनकर सम्मान समारोह आयोजित किए गए। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्थानीय हथकरघा उत्पादों को अपनाने और पारंपरिक बुनकरों का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय हथकरघा उद्योग केवल रोजगार का माध्यम ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक शिल्पकला का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। बदलते समय में हस्तनिर्मित वस्त्रों की बढ़ती मांग से बुनकरों को नए अवसर मिल रहे हैं और 'वोकल फॉर लोकल' जैसी पहल इस क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान कर रही है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्देश्य आम नागरिकों को भारतीय हस्तनिर्मित वस्त्रों के महत्व से जोड़ना, बुनकरों के परिश्रम का सम्मान करना तथा देश की समृद्ध वस्त्र विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखना है।

सड़क हादसे के बाद उपद्रव: बस और पुलिस जीप समेत 5 गाड़ियाँ फूंकीं, 10 किमी लंबा जाम

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 पटना : बिहार की राजधानी पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़ी पहाड़ी (ज़ीरो माइल) इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद भारी बवाल हो गया। एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बस ने स्थानीय युवक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और असामाजिक तत्वों ने जमकर उपद्रव मचाया।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उग्र भीड़ ने दुर्घटनाकारित बस को आग के हवाले कर दिया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस की तीन जीपों और आसपास खड़ी अन्य गाड़ियों समेत कुल पांच से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों और स्थिति पर काबू पाने आई पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की गई।

दमकल गाड़ियों को पहुंचने में हुई मशक्कत

आगजनी की सूचना मिलने के बाद मौके पर भेजी गईं दमकल की गाड़ियों को भी उग्र प्रदर्शनकारियों और भीषण सड़क जाम के कारण घटना स्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उपद्रव के कारण नेशनल हाईवे पर करीब 10 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम में कई स्कूली बसें और एम्बुलेंस फंस गईं, जिससे स्कूली बच्चों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति नियंत्रण में

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को खदेड़ा और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

पुलिस प्रशासन के अनुसार, स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। यातायात को सामान्य कराने और हाईवे से उपद्रवियों को हटाने का काम जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, साथ ही हिंसा, आगजनी और पथराव में शामिल उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अर्ध-शहरी इलाकों में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं

गौरतलब है कि पटना से सटे घनी आबादी वाले अर्ध-शहरी हाईवे इलाकों में सड़क हादसों के बाद अक्सर ऐसा तनाव देखने को मिलता है। इससे पूर्व गुरुवार को भी पटना के गौरीचक थाना क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक ऑटो हादसे में मां-बेटी की मौके पर ही मौत हो गई थी।

CG NEWS : पत्नी ने आपा खोकर की पति की हत्या, आरोपी पुलिस हिरासत में

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 बैकुंठपुर (कोरिया): चरचा थाना क्षेत्र के तिलवनडाँड़ गांव में पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के बाद हत्या की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर अपने पति को किसी अन्य महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था, जिसके बाद दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई और अंततः पत्नी ने पति की हत्या कर दी।


सूचना मिलते ही चरचा थाना पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पत्नी को हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CG NEWS : कम कीमत में सोना दिलाने के नाम पर 90 लाख की ठगी, महिला समेत 3 आरोपी गिरफ्तार

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 सक्ती : साइबर और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर शिकंजा कसते हुए सक्ती पुलिस ने 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह की मुख्य सूत्रधार एक महिला सहित कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपी एक नामी प्राइवेट फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी होने का फायदा उठाकर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते थे।


कम दाम में सोना दिलाने का जाल

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी महिला रेखा राठौर अपने परिचितों को बैंक तथा फाइनेंस कंपनियों में गिरवी रखे गए (जब्तशुदा) सोने को नीलामी से काफी कम कीमत में दिलवाने का झांसा देती थी। इसी झांसे में आकर सक्ती के वार्ड निवासी मूलचंद राठौर आरोपियों के जाल में फंस गए। पीड़ितों को भरोसे में लेकर आरोपियों ने किस्तों में कुल 90 लाख रुपये अलग-अलग खातों और माध्यमों से ट्रांसफर करवा लिए।

विश्वास टूटने पर खुला राज

लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब सोना नहीं मिला और आरोपी टालमटोल करने लगे, तब पीड़ित मूलचंद को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत सक्ती थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

त्वरित कार्रवाई में सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी महिला रेखा राठौर तथा उसके दो सहयोगियों—अफरोज खान एवं सुभाष साहू को धर दबोचा। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) के तहत मामला दर्ज कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के बैंक खातों और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

RAIPUR NEWS : ज्वेलर्स में डकैती की बड़ी साजिश नाकाम, हथियारबंद तीन अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी पुलिस ने प्रोएक्टिव पुलिसिंग के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पंडरी स्थित कल्याण ज्वेलर्स में डकैती की साजिश को वारदात से ठीक पहले नाकाम कर दिया है। गुढ़ियारी थाना पुलिस ने घेराबंदी कर तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से एक देशी पिस्टल, दो जिंदा कारतूस, दो चाकू, तीन मोबाइल फोन और नकदी जब्त की गई है। मामले के दो अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।


रेलवे स्टेशन के पास रची जा रही थी साजिश

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में संदिग्धों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-7 के पीछे कुछ युवक संदिग्ध हालत में किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने दबिश देकर तीनों युवकों को धर दबोचा। तलाशी में उनके पास से घातक हथियार बरामद हुए।

1 अप्रैल को की थी दुकान की रेकी

कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने कबूला कि वे पंडरी स्थित कल्याण ज्वेलर्स में रात के समय डकैती डालने वाले थे। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से 1 अप्रैल 2026 को कल्याण ज्वेलर्स की रेकी की थी। इस दौरान उन्होंने दुकान की सुरक्षा व्यवस्था, आसपास के इलाके और भागने के रास्तों का जायजा लिया था। फरार चल रहे दोनों साथी मोबाइल के जरिए रेकी की तस्वीरें साझा कर पूरी योजना बना रहे थे।

दिल्ली व बिहार के रहने वाले हैं आरोपी

पकड़े गए तीनों आरोपियों की उम्र महज 19 वर्ष है। इनकी पहचान देवांश शर्मा (सागरपुर, दिल्ली), सुशांत कुमार पासवान (नजफगढ़, दिल्ली) और मयंक सिंह (सिकंदरपुर, मुजफ्फरपुर, बिहार) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गुढ़ियारी थाना में अपराध क्रमांक 321/2026 के तहत बीएनएस की धारा 310(4) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया है।

यह सफल कार्रवाई डीसीपी उत्तर दीपमाला कश्यप, एडीसीपी आदित्य पांडेय और एसीपी पूर्णिमा लामा के निर्देशन में गुढ़ियारी थाना पुलिस द्वारा की गई। पुलिस अब इनके हथियार सप्लायर और फरार साथियों के नेटवर्क को खंगाल रही है।

जीरम घाटी कांड: 10 अगस्त को होगी अंतिम बहस, फैसले की ओर बढ़ी सुनवाई

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 जगदलपुर : बस्तर के बहुचर्चित जीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले की न्यायिक प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। जगदलपुर न्यायालय में लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में आगामी 10 अगस्त को अंतिम बहस होगी। इसके साथ ही अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखे जाने या निर्णय की तिथि घोषित किए जाने की संभावना है।


अभियोजन ने दर्ज कराए 101 गवाहों के बयान

मिली जानकारी के अनुसार, इस संवेदनशील मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही चल रही है। इनमें से एक आरोपी की प्रक्रिया के दौरान मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 10 आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई जारी है। अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती प्रदान करने के लिए अदालत में कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं। दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रकरण अंतिम तर्क के चरण में है।

तर्कों के आधार पर तय होगी जवाबदेही

10 अगस्त को आयोजित होने वाली अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने अंतिम तर्क पीठ के समक्ष रखेंगे। तर्कों के समापन के पश्चात अदालत साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। इसी के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध होते हैं और किन्हें राहत मिलती है।

प्रदेश समेत पूरे देश की नजरें

जीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक-नक्सली घटनाक्रम माना जाता है। इस कारण इस फैसले पर न केवल राज्य, बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। मामले में शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पाणिग्रही पैरवी कर रहे हैं। 10 अगस्त की सुनवाई के बाद आने वाला अदालती निर्णय वर्षों पुराने इस मामले में न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

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