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देशभर में 4 से 10 मई तक ‘फायर सेफ्टी वीक’ का आयोजन, स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा पर जोर

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4 मई से 10 मई 2026 तक देशभर में ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत की है। इस अभियान में सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय शामिल हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने “Fire Safety in Health Facilities” थीम के तहत शपथ दिलाई और कहा कि अस्पतालों व स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित फायर ऑडिट, प्रशिक्षण और आपातकालीन तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य कृष्ण एस. वात्सा ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए एक व्यवस्थित और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। वहीं अग्निशमन सेवाओं के महानिदेशक सुनील कुमार झा ने सुरक्षा मानकों के पालन, नियमित जांच और प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने “National Guidelines on Fire and Life Safety in Healthcare Facilities (2026)” भी जारी कीं। इन दिशानिर्देशों में जोखिम प्रबंधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

फायर सेफ्टी वीक के दौरान देशभर में मॉक ड्रिल, फायर ऑडिट, जागरूकता अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्रालय ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित और सतर्क स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तकनीकी अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ पर दिया जोर

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राजनाथ सिंह ने कहा है कि तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में देश को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ (अचानक रणनीतिक बढ़त) पर लगातार ध्यान देना होगा। वे 4 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।


रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में कुछ ही वर्षों में युद्ध टैंक और मिसाइलों से ड्रोन व सेंसर आधारित हो गया है। उन्होंने कहा कि आज सामान्य उपयोग की वस्तुएं भी खतरनाक हथियार बन सकती हैं, जिससे सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध में जीत उसी की होती है जिसके पास “सरप्राइज” का तत्व होता है। इसलिए भारत को ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जिससे जरूरत पड़ने पर दुश्मन को चौंकाया जा सके।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्धों की दिशा प्रयोगशालाओं में तय हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया है।

उन्होंने जानकारी दी कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 4500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है। साथ ही, नई तकनीक हस्तांतरण नीति के तहत शुल्क में छूट दी गई है और अब तक 2200 से अधिक तकनीकों का हस्तांतरण किया जा चुका है।

रक्षा मंत्री ने उद्योगों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक हथियार और स्पेस तकनीक जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्वदेशी तकनीकों जैसे आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस का सफल उपयोग हुआ, जो भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। देश का रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर है।

इस अवसर पर सेना प्रमुख, वायुसेना अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और शिक्षाविद भी मौजूद रहे। सिम्पोजियम में 284 कंपनियों ने अपने स्वदेशी तकनीकी समाधान प्रदर्शित किए।

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन भारत को तकनीकी और सैन्य रूप से और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों को लेकर आयुष मंत्रालय की अहम बैठक

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नई दिल्ली में आज आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, योग गुरु तथा योग संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के सफल आयोजन के लिए योजना और समन्वित क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। उन्होंने कहा कि योग आज केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है, जो लोगों को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित कर रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है, जिससे योग को वैश्विक पहचान मिली है।

मंत्री ने सभी मंत्रालयों से “whole-of-government approach” अपनाने का आह्वान करते हुए 21 जून को होने वाले कॉमन योग प्रोटोकॉल में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, स्कूलों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य संस्थानों में योग को शामिल करने, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय दूतावास और मिशन IDY 2026 के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने जापान में चल रहे योग अभ्यास कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसमें लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली है।

आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ अब एक वैश्विक स्वास्थ्य अभियान बन चुका है।

वहीं एच. आर. नागेंद्र ने बताया कि पिछले वर्ष 26 करोड़ से अधिक लोगों ने योग दिवस में भाग लिया था और इस वर्ष यह संख्या 30 करोड़ से पार जाने की उम्मीद है।

बैठक में IDY 2026 के लिए विभिन्न योजनाओं, गतिविधियों और रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें युवाओं की भागीदारी, डिजिटल पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

आयुष मंत्रालय ने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों और व्यापक भागीदारी के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को और भी भव्य और सफल बनाया जाएगा।

निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री का श्रमदान: श्रमिक बहनों के साथ की ईंट जोड़ाई

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“ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए… मसाला बढ़िया से डालिए” - जब श्रमिक बहन ने मुख्यमंत्री को सिखाया काम

रायपुर- सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में चल रहे औचक निरीक्षण और जनसंवाद के क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम लोखन में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सुशासन के ध्येय को और अधिक जीवंत बना दिया। 

निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल औपचारिक समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चुना, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उनके इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुशासन केवल नीति और कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में कार्य कर रहीं श्रमिक बहनों के बीच जाकर कुछ समय उनके साथ ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया।  

इसी दौरान श्रमिक बहन संगीता ने पूरे आत्मीय अधिकार और सहजता के साथ मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से कहा - “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह संवाद एक सामान्य वाक्य से कहीं अधिक था; इसमें वह विश्वास झलकता है, जो आज सरकार और जनता के बीच विकसित हो रहा है। यह वह स्थिति है, जहाँ आम नागरिक बिना झिझक अपनी बात रखता है और नेतृत्व उसे उसी सहजता से स्वीकार करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता का रिश्ता बनता है, तभी विकास की प्रक्रिया प्रभावी और स्थायी बनती है। उनके अनुसार, यही आत्मीयता और साझेदारी सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हों और श्रमिकों के लिए पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

सुशासन तिहार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, सहभागिता और विश्वास पर आधारित एक जीवंत व्यवस्था बन चुका है। यहाँ सरकार और जनता के बीच दूरी नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और साझेदारी का संबंध है - और यही संबंध प्रदेश के समग्र विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।

एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, “रविशंकर” नाम से गूंजा गांव का आंगन

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रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।

इसी दौरान ग्राम की निवासी ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी। 

मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली।जब  ऋषि बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम “रविशंकर” रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया। 

यह दृश्य जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक भी बन गया।

इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है। 

मुख्यमंत्री साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।

एक ग्रामीण का न्योता, मुख्यमंत्री का अपनापन - प्रधानमंत्री आवास से साकार हुआ सपना, मुख्यमंत्री ने कराया गृह प्रवेश

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 रायपुर : कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में आज एक अत्यंत भावनात्मक, आत्मीय और जनसरोकारों से जुड़ा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक सामान्य ग्रामीण के सादे निमंत्रण को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे अपने व्यवहार से एक यादगार क्षण में परिवर्तित कर दिया। गांव में उनके आगमन से जहां उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ था, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने शासन और आमजन के बीच के आत्मीय संबंधों को भी जीवंत रूप में सामने रखा।


ग्राम लोखान निवासी मोहन मरावी के नए पक्के घर का आज गृह प्रवेश कार्यक्रम था। जैसे ही उन्हें यह जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री गांव के दौरे पर हैं, वे बिना देर किए सीधे उनके पास पहुंचे और अपने घर आने का न्योता दे दिया। यह एक ग्रामीण का असाधारण प्रेम भरा अनुरोध था, जिसे मुख्यमंत्री ने उसी सहजता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया और उनके घर पहुंचकर इस अवसर को विशेष बना दिया।


प्रधानमंत्री आवास से साकार हुआ सपना, मुख्यमंत्री ने कराया गृह प्रवेशमुख्यमंत्री के मोहन मरावी के घर पहुंचते ही वहां एक आत्मीय और पारिवारिक वातावरण बन गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के पूरे स्नेह और अपनत्व के साथ नारियल फोड़ा, दीप प्रज्वलित किया और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गृह प्रवेश की रस्म संपन्न कराई। इस दौरान परिवार के सदस्यों के चेहरे पर जो संतोष, गर्व और खुशी झलक रही थी, वह इस बात का प्रतीक थी कि उनके सपनों का घर अब साकार हो चुका है। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी इस क्षण को उत्साहपूर्वक देखा और मुख्यमंत्री की सादगीपूर्ण शैली की सराहना की।

इस आत्मीय संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए मोहन से पूछा—“आवास कोन भेजिस?” इस पर मोहन ने सहजता के साथ उत्तर दिया—“मोदी जी ने।” यह छोटा-सा संवाद पूरे माहौल को भावनात्मक गहराई से भर गया और यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का क्रियान्वयन सीधे लोगों के जीवन में किस प्रकार आशा और विश्वास का संचार कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने मोहन मरावी और उनके परिवार से विस्तार से बातचीत करते हुए उनके नए घर के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जाना। मोहन ने बताया कि उनका यह घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त राशि और अपने परिश्रम से तैयार हुआ है। पहले उनका घर कच्चा था, लेकिन वर्ष 2024–25 में आवास स्वीकृत होने के बाद उनके भीतर पक्का घर बनाने का हौसला जागा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वयं ईंट बनाकर चार कमरों का सुदृढ़ और व्यवस्थित घर खड़ा किया, जो उनके श्रम, संकल्प और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने घर की गुणवत्ता, संरचना और उसमें झलक रही मेहनत की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि जब शासन की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं और उसमें लोगों की अपनी मेहनत व सहभागिता जुड़ती है, तभी विकास का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। उन्होंने इस पहल को आत्मनिर्भरता, जनभागीदारी और सकारात्मक बदलाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही राज्य के समग्र विकास की नींव को मजबूत करते हैं।

मोहन मरावी ने यह भी बताया कि उन्हें योजना के तहत राशि तीन किस्तों में प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप वे अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक पक्का घर तैयार कर सके।

मुख्यमंत्री ने पूरे परिवार को नए घर की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और इस अवसर को गांव के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जो यह संदेश देता है कि संकल्प, श्रम और शासन की योजनाओं के समन्वय से हर सपना साकार हो सकता है।

सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है।


बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर

इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के  कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

महासमुंद की बेटियों ने बढ़ाया जिले का मान, मेरिट सूची में शामिल छात्राओं का कलेक्टर ने किया सम्मान

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 महासमुंद : छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम में महासमुंद जिले की छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले को गौरवान्वित किया है। कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में जिले की 8 छात्राओं तथा कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 4 छात्राओं ने प्रदेश की टॉप-टेन सूची में स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।


इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह ने आज छात्राओं और उनके पालको को सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कलेक्टर ने छात्राओं को गुलाब पुष्प, शॉल एवं स्मृति शील्ड भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। साथ ही छात्राओं के अभिभावकों का भी सम्मान कर उनकी सकारात्मक भूमिका की प्रशंसा की।

कलेक्टर लंगेह ने छात्राओं से आत्मीय बातचीत करते हुए कहा कि यह सफलता आपकी प्रतिभा, अनुशासन, कठिन परिश्रम और सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा ही जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। छात्राओं की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, विद्यालय और शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में भी इसी लगन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा अपने सपनों को साकार करने के लिए शुभकामनाएं दीं। कलेक्टर ने बालिकाओं द्वारा पूछे गए सवालों का क्रमशः जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 12वीं के पश्चात स्नातक परीक्षा आवश्यक है। साथ -साथ अपने विशेष लक्ष्य की तैयारी करते रहे। छात्राओं ने सिविल सर्विसेस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया।

इस अवसर पर कक्षा 10वीं की टॉपर छात्राओं में एकलव्य इंग्लिश स्कूल अर्जुंदा की कु. संध्या नायक ने कहा कि वे सीजीपीएससी के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती है। एकलव्य इंग्लिश मीडियम हायर सेकेण्डरी स्कूल बलोदा की कु. परीरानी प्रधान ने मेडिकल क्षेत्र में जाने की इच्छा जताई। एकलव्य इंग्लिश स्कूल अर्जुंदा की कु. रानू सिद्धीमयी साहू, कु. रेणुका प्रधान, कु. चाहत चौधरी, कु. तिषा साहू, कु. भारती चंद्रा एवं कु. लता चौधरी ने अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई कर कैरियर संवारना चाहती है। वहीं कक्षा 12वीं की टॉपर छात्राओं में के.जी. कॉन्वेंट हायर सेकेण्डरी स्कूल सरायपाली की कु. शहनाज परवीन एवं के.पी.आई. हायर सेकेण्डरी स्कूल चट्टीगिरोला सरायपाली की कु. गीतिका प्रधान ने कहा कि वे आई.ए.एस. की तैयारी करना चाहती है। इसी तरह सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेण्डरी स्कूल बागबाहरा की कु. पौर्वी देवांगन तथा एकलव्य इंग्लिश स्कूल अर्जुंदा की कु. दिव्या अग्रवाल ने भी अपने अनुभव बताएं। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती कुमारी भास्कर, जिला शिक्षा अधिकारी श्री बी.एल. देवांगन, जिला मिशन समन्वयक श्री रेखराज शर्मा, सहायक संचालक नंदकुमार सिन्हा, शिक्षा विभाग के शिक्षकगण एवं छात्राओं के अभिभावक उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं हेतु जिले से कुल 12 हजार 851 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 12 हजार 663 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। जिले का कुल परीक्षा परिणाम 79.35 प्रतिशत रहा। इसी तरह कक्षा 12वीं में जिले से कुल 10 हजार 664 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जिनमें 10 हजार 579 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। जिले का कुल परीक्षा परिणाम 80.89 प्रतिशत दर्ज किया गया।

बंगाल रुझानों से गदगद मंत्री ओपी चौधरी, बंगले के बाहर मुफ्त झालमुड़ी; CM साय बोले- जनता के भरोसे की जीत

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 रायपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भाजपा की बढ़त से छत्तीसगढ़ में उत्साह का माहौल नजर आ रहा है। राज्य के मंत्री ओपी चौधरी ने रायपुर स्थित अपने सरकारी बंगले के बाहर लोगों को निःशुल्क झालमुड़ी खिलाकर खुशी जाहिर की।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, बंगाल की 293 सीटों पर मतगणना जारी है, जबकि फालता सीट पर 21 मई को मतदान होना है। शुरुआती रुझानों में भाजपा को बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। खबर लिखे जाने तक भाजपा 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को लगभग 45% और TMC को करीब 42% वोट मिलते नजर आ रहे हैं।


भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगे चल रही हैं, जबकि सुवेंदु अधिकारी पीछे बताए जा रहे हैं। वहीं, जिस इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी खाई थी, वहां की चारों सीटों—झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम—पर भाजपा बढ़त में है।

बताया जा रहा है कि 2021 के मुकाबले इस बार भाजपा का वोट शेयर करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ता नजर आ रहा है और सीटों में भी उल्लेखनीय बढ़त मिलती दिख रही है।

CM साय की प्रतिक्रिया

इधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलरामपुर स्थित भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान चुनावी रुझानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा के पक्ष में आ रहे रुझान जनता के भरोसे और विकास कार्यों की स्वीकृति का प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त पर खुशी जताते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने विकास, सुशासन और जनकल्याण की राजनीति को समर्थन दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मौजूदा रुझान यह संकेत देते हैं कि जनता स्थिर सरकार और विकास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की नीतियां लगातार जनविश्वास को मजबूत कर रही हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री साय एक दिन पहले बलरामपुर दौरे पर पहुंचे थे और रात्रि विश्राम के बाद उन्होंने भाजपा कार्यालय में संगठनात्मक बैठक लेकर विकास कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद वे अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म: छत्तीसगढ़ के कृषि अधिकारी को रेप केस में उम्रकैद , SC/ST एक्ट में भी दोषी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से जुड़े एक गंभीर मामले में विशेष अदालत ने कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को दुष्कर्म और एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।


अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और पीड़िता के बीच कॉलेज के दौरान परिचय हुआ, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गया। आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए और नौकरी लगने के बाद विवाह करने का भरोसा दिलाता रहा।

पीड़िता ने अदालत में बताया कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया और कथित रूप से जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए संबंध खत्म करने की कोशिश की। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को भरोसे के नाम पर शोषण करने वालों के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

ममता के किले में कमल खिलने की उम्मीद, मतगणना जारी; BJP-TMC में कड़ा मुकाबला

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 कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से राज्यभर के 77 केंद्रों पर शुरू हो गई है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती रुझान सामने आने लगे हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं।


मुख्यमंत्री Mamata Banerjee चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में हैं, जबकि भाजपा ने इस बार सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने राज्य में ताबड़तोड़ रैलियां कर चुनावी माहौल को गर्म रखा।

इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर रही, जहां ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा नेता Suvendu Adhikari से है। वहीं सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से भी मैदान में हैं। भवानीपुर में मतगणना के दौरान भाजपा और TMC कार्यकर्ताओं के बीच हल्की झड़प की खबर भी सामने आई है।

राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 293 पर 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान हुआ, जबकि फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा। इस बार करीब 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अपने आप में रिकॉर्ड है।

निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। Election Commission of India ने मतगणना के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। आयोग ने 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक भी तैनात किए हैं।

चुनाव में कुल 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार चुनावी हिंसा में किसी की मौत की खबर नहीं आई।

बंगाल में इस बार मुख्य मुकाबला TMC और BJP के बीच रहा, जबकि कांग्रेस और वाम दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे। कांग्रेस नेता Adhir Ranjan Chowdhury बरहामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

ऐसे देखें नतीजे:

मतदाता Election Commission of India की आधिकारिक वेबसाइट results.eci.gov.in पर जाकर राज्यवार और सीटवार परिणाम देख सकते हैं। यहां उम्मीदवारों के नाम, पार्टी और वोटों की पूरी जानकारी उपलब्ध है।

 
 

छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा: बेकाबू कार नदी में गिरी, 4 की मौत, 2 गंभीर घायल

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 कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा पांडातराई थाना क्षेत्र के गड़ई गांव के पास हाफ नदी पुल के नजदीक हुआ।


जानकारी के अनुसार, बिरगांव (रायपुर) निवासी कुछ युवक शादी समारोह में शामिल होने पंडरिया गए थे। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात शादी की रस्में पूरी कर सभी कार से वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हो गया।

तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह

पुलिस के मुताबिक कार तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया। कार पुल की रेलिंग तोड़ते हुए सीधे नदी में जा गिरी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

रेस्क्यू ऑपरेशन में निकाले गए घायल

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। हादसे में घायल दो युवकों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

मृतकों और घायलों की पहचान

मृतकों की पहचान बिरगांव निवासी अरमान खान, सौंफ, अनस और कौनेन के रूप में हुई है। वहीं घायलों में जुनैद रजा और आरजू खान शामिल हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों को सूचना दे दी है। इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर कर दिया है।

West Bengal Election Result 2026 : शुरुआती रुझानों में BJP आगे, TMC से कड़ी टक्कर

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 West Bengal Election Result 2026 : पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद आज मतगणना जारी है। सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों की गिनती के साथ प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद ईवीएम खोली जा रही हैं। शुरुआती रुझानों में बंगाल में भाजपा बढ़त बनाती दिख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस भी कड़ी टक्कर दे रही है।


बंगाल में फलता सीट को छोड़कर 293 विधानसभा सीटों के लिए 77 केंद्रों पर मतगणना हो रही है। संवेदनशील इलाकों को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मतगणना से पहले भाजपा और टीएमसी ने एक-दूसरे पर गड़बड़ी के आरोप भी लगाए।

अन्य राज्यों से भी रुझान शुरू

तमिलनाडु से पहले रुझान में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी बढ़त बनाती दिखी है। केरल में यूडीएफ एक सीट पर आगे है, जबकि असम में शुरुआती रुझानों में भाजपा चार और कांग्रेस एक सीट पर आगे चल रही है। बंगाल में भी शुरुआती आंकड़ों में टीएमसी दो और भाजपा तीन सीटों पर आगे रही।

दोपहर तक साफ होगी तस्वीर

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। अब मतगणना के साथ ही दोपहर तक नतीजों की तस्वीर साफ होने लगेगी। एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में हैं, वहीं भाजपा राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत की उम्मीद लगाए बैठी है।

293 सीटों पर ही क्यों हो रही गिनती?

राज्य की 294 में से 293 सीटों पर ही मतगणना हो रही है। दक्षिण 24 परगना जिले की फलता सीट पर मतदान के दौरान गड़बड़ी की शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने वहां 29 अप्रैल को हुई वोटिंग रद्द कर दी थी। इस सीट पर अब 21 मई को पुनर्मतदान होगा और 24 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

पुनर्मतदान भी कराया गया

दक्षिण 24 परगना जिले की दो विधानसभा सीटों के 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया। यह फैसला निर्वाचन अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया।

असम में भी कांटे की टक्कर

असम की 126 सीटों पर मतगणना जारी है, जहां 722 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। 35 जिलों में 40 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती हो रही है।

राज्य में इस बार मुकाबला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के बीच चर्चा में है। सरमा जहां जलुकबाड़ी सीट से लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं, वहीं गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव में जोरहाट से मैदान में हैं।

असम में इस बार पहचान की राजनीति, कल्याणकारी योजनाएं और क्षेत्रीय मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे। 85.96% मतदान के साथ इस बार रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है।

कुल मिलाकर, आज के नतीजे न सिर्फ इन राज्यों की सत्ता तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

 
 

बगिया से बस्तर' तक गूंजा सुशासन का स्वर-जनता से सीधा संवाद बना विश्वास का आधार

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 रायपुर : किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकारें योजनाएं बनाती हैं, बजट प्रस्तुत करती हैं और विकास के दावे करती हैं, लेकिन इन सबकी सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और लोग स्वयं अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस करें। छत्तीसगढ़ में इसी सोच को साकार करने के लिए ‘सुशासन तिहार’ जैसे अभिनव अभियान की शुरुआत की गई है।


1 मई से 10 जून तक चलने वाला यह 40 दिवसीय अभियान शासन को सीधे जनता के द्वार तक ले जाने का एक प्रभावी प्रयास है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी गांव-गांव और शहरों के वार्डों में पहुंचकर आमजन की समस्याएं सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह पहल केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहभागिता और समाधान पर केंद्रित है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस अभियान में सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती है। उनका विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जमीनी हकीकत का आकलन करना और आम जनता से सीधा संवाद करना यह दर्शाता है कि नेतृत्व केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी प्रतिबद्ध है। तेज गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उनकी यह सक्रियता प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक प्रेरणा है।

‘सुशासन तिहार’ का मूल उद्देश्य शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाना है। जब अधिकारी सीधे गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं, तो न केवल वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है, बल्कि लोगों के भीतर यह विश्वास भी मजबूत होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है। इस प्रकार की पहल प्रशासन में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व दोनों को सुदृढ़ करती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 'लोगों की सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं' की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार ही शासन की छवि तय करता है। इसलिए आमजन के साथ संवाद करते समय शालीनता, धैर्य और सम्मान अनिवार्य होना चाहिए। जब कोई नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह अनुभव होना चाहिए कि उसकी बात गंभीरता से सुनी जा रही है।

प्रदेश में आयोजित समाधान शिविर इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर लोगों से आवेदन लेकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे शासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।

हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता उसके दीर्घकालिक प्रभाव और निरंतरता पर निर्भर करती है। निश्चित ही राज्य सरकार ‘सुशासन तिहार’ से प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी सुधार करेंगे और यह संवाद की यह प्रक्रिया भी लगातार जारी रहेगी। ‘सुशासन तिहार’ एक अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इस बात का संकेत है कि यदि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता बनी रहे, तो विकास की राह न केवल सशक्त होती है, बल्कि अधिक समावेशी बनेगी।

(लेखक-एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

चंदागढ़ में CM साय की जनचौपाल: बरगद की छांव में सुनीं समस्याएं, विकास की घोषणाएं

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 रायपुर : सुशासन तिहार (Sushasan Tihar) में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में पहुंचकर संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन की एक प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर जैसे ही चंदागढ़ में उतरा, ग्रामीणों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका भव्य स्वागत किया।


मुख्यमंत्री सीधे पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम भैंसामुड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने बजरंग बली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद गांव के बीचों-बीच बरगद के विशाल पेड़ की शीतल छांव में जनचौपाल सजी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार (Sushasan Tihar) 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य सरकार को जनता के द्वार तक ले जाना है, ताकि समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वे जनता की समस्याएं सुनने आए हैं और ग्रामीणों की समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने ग्रामवासियों से राशन, नमक, शक्कर की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था, बिजली, पटवारी से संबंधित समस्याओं सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने “लखपति दीदी” सुमिला कोरवा और पुष्पलता चौहान से आत्मीय संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने जाना कि महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं ईंट निर्माण, किराना दुकान और बीसी सखी जैसे कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 8 लाख लखपति दीदी बन जा चुकी हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में यह संख्या 3 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन है।

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम चंदागढ़ और भैंसामुड़ा के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण, मिनी स्टेडियम निर्माण, सीसी रोड निर्माण तथा बच्चों के लिए क्रिकेट किट और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को सामुदायिक भवन के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का भी जायजा लिया। कलावती चौहान ने बताया कि गांव में महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को मिल रहा है, जिस पर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की स्थिति की जानकारी ली और चरण पादुका योजना के लाभ के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य में श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से आमजन को धार्मिक और सामाजिक रूप से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं और ग्रामीणों को ऑनलाइन बैंकिंग एवं अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी समस्याओं का प्राथमिकता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों को उनका लाभ समय पर मिले।

इस अवसर पर विधायक पत्थलगांव गोमती साय, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। (Sushasan Tihar)

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