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खेत में करंट लगने से पूर्व सरपंच की मौत, धान रोपाई की तैयारी के दौरान हुआ हादसा

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बस्तर। जिले के भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम कुम्हली में धान रोपाई की तैयारी के दौरान एक दर्दनाक हादसे में किसान एवं पूर्व सरपंच टीकम सिंह बघेल की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।


जानकारी के अनुसार, टीकम सिंह बघेल खेत में मोटर पंप का बिजली कनेक्शन जोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक करंट की चपेट में आ गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही भानपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी है।

इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों ने किसानों से बिजली संबंधी कार्य करते समय आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।

पद्मश्री और राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों तथा संस्कृति जगत की विभूतियों ने मुक्तकाश मंच से पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान की घोषणा

गृहग्राम गनियारी को कलाग्राम के रूप में किया जाएगा विकसित

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर की घोषणा

रायपुर- छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, साधना और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रेरणा एवं मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनके जन्मस्थल गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम में मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु वेणु देशमुख को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर वेणु देशमुख ने श्रद्धांजलि समारोह के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरी लोककला परंपरा का सम्मान है।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वर कभी मौन नहीं होते। वे समय की सीमाओं को लांघकर युगों तक जनमानस की चेतना में गूंजते रहते हैं। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का स्वर छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का अमर नाद है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकगौरव से सदैव जोड़ता रहेगा। वे केवल एक महान लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सजीव पहचान थीं। राज्य को उन पर सदैव गर्व रहेगा और उनकी अमर लोकधुने हमारी सांस्कृतिक चेतना में अनवरत गूंजती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा तीजन बाई की स्मृति में की गई घोषणाएं इसी संकल्प का विस्तार हैं।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वर्गीय तीजन बाई के जीवन और कला यात्रा पर आधारित विशेष ब्रोशर का विमोचन किया। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संस्कृति विभाग द्वारा उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने भावुक होकर देखा।

सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार पुष्पा निषाद के पंडवानी गायन से हुई। इसके बाद स्वर्गीय तीजन बाई की शिष्याएं तरूणा साहू और आराध्या साहू तथा दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में प्रभावशाली पंडवानी प्रस्तुति देकर अपनी गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए। दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में पंडवानी गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्वर्गीय तीजन बाई से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कला साधना को याद किया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर कलाकारों ने स्वर्गीय तीजन बाई को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने तथा उनके नाम पर पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी राज्य सरकार के समक्ष रखी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्रकार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज, यूसीसी सदस्य मोहन पवार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

साहित्य जगत से डॉ. पी.सी. लाल यादव, परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी तथा कला जगत से पद्मश्री ममता चंद्राकर, पद्मश्री भारती बंधु, पद्मश्री उषा बारले, पद्मश्री राधेश्याम बारले, मीर अली मीर, निर्मला ठाकुर, मोक्षदा चंद्राकर, सुनील सोनी, किरण शर्मा, कविता वासनिक, राकेश तिवारी, सरस्वती बारले, वंदना बारले, दुर्गा साहू, इतिहासकार आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रीय, चेतन देवांगन, रत्ना पांडे तथा सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। मंच का संचालन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा तथा अरुण निर्मलकर ने किया।

समारोह के अंत में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने अपने स्वर से केवल पंडवानी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी लोककला, उनकी परंपरा और उनके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। आज यहां उपस्थित प्रत्येक कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी की सहभागिता उनके प्रति सामूहिक सम्मान का प्रतीक है। संस्कृति विभाग और राज्य सरकार इस अमूल्य विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। महान कलाकार भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी कला, उनकी साधना और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव समाज की चेतना में जीवित रहती है। स्वर्गीय पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का अमर स्वर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और छत्तीसगढ़ की लोकधारा में अनवरत गूंजता रहेगा।

कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन के सभागार में राज्य के शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के ब्रोशर का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शासकीय सेवकों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और सहज वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जब कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर कार्य करेंगे, तभी शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए निजी साहूकारों अथवा ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने की विवशता का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से वे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस, सुरक्षित और पारदर्शी है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त विभाग की टीम को बधाई देते हुए सभी शासकीय सेवकों से विकसित छत्तीसगढ़ और सुशासन के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने के बाद अब वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना प्रारंभ की गई है, जिससे तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के मात्र दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया है तथा 27 हजार कर्मचारी इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी तथा आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक और त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

उल्लेखनीय है कि यह सुविधा ई-कोष प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ऋण स्वीकृति एवं वितरण त्वरित रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त) ऋषभ पराशर, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

एस.डी.जी. 2.0 और 'बस्तर अंजोर' से विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की उपस्थिति में राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. राज्य एवं जिला संकेतक फ्रेमवर्क 2.0 तथा मेटाडेटा हैंडबुक का भी विमोचन किया गया। साथ ही बस्तर संभाग के समावेशी, अभिसरण आधारित और मापनीय विकास के लिए तैयार की गई अभिनव पहल 'बस्तर अंजोर' की भी शुरुआत की गई।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सटीक डेटा और परिणाम आधारित मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है। एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क शासन को साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय तथा योजनाओं की नियमित निगरानी के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल 'विकसित छत्तीसगढ़ @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल विकास योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। एस.डी.जी. 2.0 के माध्यम से विकास की प्रगति को अधिक पारदर्शी, मापनीय और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

नए एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क के अंतर्गत राज्य स्तर पर संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इससे विकास कार्यों की अधिक व्यापक, सटीक और वैज्ञानिक निगरानी संभव होगी। मेटाडेटा हैंडबुक में प्रत्येक संकेतक की गणना पद्धति एवं रिपोर्टिंग प्रणाली को मानकीकृत किया गया है, जिससे पूरे राज्य में डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने 'बस्तर अंजोर' की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह अभिसरण (कन्वर्जेंस) आधारित विकास मॉडल है, जिसे बस्तर संभाग को देश का सर्वाधिक विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने के संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि 'बस्तर अंजोर' के 3+4 मॉडल के अंतर्गत जिला स्तर की तीन प्रमुख पहल - नियद नेल्लानार 2.0, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर - का अभिसरण चार प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास फ्रेमवर्क - एस.डी.जी. 2030, विकसित छत्तीसगढ़ @2047, आकांक्षी जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम से किया गया है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त संसाधनों के बिना बेहतर समन्वय के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में ठोस एवं मापनीय परिणाम प्राप्त करना है।

'बस्तर अंजोर' अंत्योदय से सर्वोदय की भावना पर आधारित एक दूरदर्शी पहल है, जो बस्तर को समावेशी, सतत एवं परिणामोन्मुख विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

साय कैबिनेट के बड़े फैसले: बिजली भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव, कई अहम प्रस्तावों को मिली मंजूरी

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 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –


1. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए वर्तमान त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement) के स्थान पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (Direct Debit Mandate-DDM) व्यवस्था लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

इस निर्णय से एनटीपीसी सहित अन्य सीपीएसयू से विद्युत आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी तथा भुगतान सुरक्षा की व्यवस्था आरबीआई के वर्तमान प्रावधानों के अनुरूप हो सकेगी। राज्य शासन पर इससे कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि वितरण कंपनी द्वारा भुगतान की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी तथा आवश्यक होने पर पहले लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की व्यवस्था प्रभावी रहेगी।

2. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स), फाइटर आरक्षक सेवा (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति दी गई है।

3. मंत्रिपरिषद् द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की अनुशंसाओं के अनुरूप निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन बनाया गया है।

इसके तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान लागू करने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इसमें आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं को यूजीसी एवं सक्षम नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।

4. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने के साथ ही उससे संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी द्वितीय अपीलों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना भी हो चुकी है। ऐसे में पृथक वाणिज्यिक कर अधिकरण की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस संशोधन के बाद अधिकरण में लंबित प्रकरणों का स्थानांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा, जिससे अपीलों के निराकरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी हो सकेगी।

5. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। इससे कर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, करदाताओं को सुविधा मिलेगी साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

6. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को तैयार करने में अन्य अग्रणी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का भी अध्ययन किया गया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

7. मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल एवं समयबद्ध बनाना है। इस तरह का विधेयक लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।

इसके अंतर्गत डीम्ड परमिशन (Deemed Permission), स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification), तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party Verification), जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) तथा दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इससे निवेशकों के लिए अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी, कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी तथा राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।

8. मंत्रिपरिषद् ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों पर देय ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने हेतु वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी दी है।

इस योजना से पात्र आबंटितियों को निर्धारित शर्तों के तहत बकाया देयों के नियमितीकरण, परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने में मदद मिलेगी, जो विकास करने के इच्छुक है उनको अवसर मिलेगा और जो इच्छुक नहीं है, वे समय पर आबंटित भूमि को सरेंडर कर सकेंगे। इस निर्णय से मुकदमेबाजी में कमी आएगी, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

9. मंत्रिपरिषद् ने जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में अंगीकार करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

भारत सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन का उद्देश्य पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन पर आर्थिक दंड का प्रावधान तथा दंड निर्धारण एवं अपील की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है। इस निर्णय से राज्य में पर्यावरणीय नियमन को सरल बनाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

10. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा देना और किरायेदारी से जुड़े विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस संशोधन में भवन स्वामी और किरायेदार के अधिकार व दायित्व स्पष्ट किए गए है, साथ ही संपत्ति प्रबंधक, किराया प्राप्ति, अधिकरण के अध्यक्ष की पदावधि और न्यायालय शुल्क से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए है। यह संशोधन भारत सरकार के आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के अनुरूप है।

11. मंत्रिपरिषद् द्वारा राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए 'भुवनेश्वर घोषणा' को अपनाया गया

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जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को सशक्त बनाने' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन भुवनेश्वर घोषणा (Bhubaneswar Declaration) को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणा प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत@2047' के विजन को साकार करने की दिशा में जनजातीय ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने वाले मजबूत संस्थानों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

कार्यशाला में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों, राज्य जनजातीय कल्याण विभागों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी संगठनों, उद्योग, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा नागरिक समाज के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें भारत के जनजातीय अनुसंधान तंत्र के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

पहले दिन की प्रमुख चर्चाएं

पहले दिन चार विषयगत समूह चर्चाएं और विशेषज्ञ पैनल आयोजित किए गए। इनमें निम्नलिखित विषयों पर विशेष जोर दिया गया—

  • जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को ज्ञान एवं सांस्कृतिक संसाधन केंद्रों के रूप में विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण एवं डिजिटल संरक्षण।

  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए मजबूत जनजातीय डेटा प्रणाली, आधारभूत सर्वेक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा नवाचार आधारित तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान, योजना, सेवा वितरण और निगरानी को सशक्त बनाना।

  • संस्थागत सुधार, सुशासन, मानव संसाधन विकास और रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से TRIs को पेशेवर एवं टिकाऊ संस्थानों के रूप में विकसित करना।

दूसरे दिन राष्ट्रीय रोडमैप पर सहमति

दूसरे दिन सभी कार्य समूहों ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिन पर विशेषज्ञों एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा हुई। इन सिफारिशों के आधार पर जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया।

सचिव रंजना चोपड़ा का वक्तव्य

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव  रंजना चोपड़ा ने कहा कि—

"जनजातीय अनुसंधान संस्थान जनजातीय समुदायों की आवाज़ हैं। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्हें अधिक संस्थागत और वित्तीय स्वायत्तता मिलनी चाहिए तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और अन्य ज्ञान संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। भुवनेश्वर घोषणा जनजातीय विकास को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है।"

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सात TRIs सम्मानित

जनजातीय अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, ज्ञान सृजन एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सात जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए—

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, छत्तीसगढ़

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, ओडिशा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं सांस्कृतिक संस्थान, त्रिपुरा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, महाराष्ट्र

  • किर्टाड्स (KIRTADS), केरल

  • जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, तेलंगाना

  • डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान, झारखंड

भुवनेश्वर घोषणा के प्रमुख संकल्प

घोषणा में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी—

  • TRIs को उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) के रूप में विकसित करना।

  • सामुदायिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता देना।

  • राष्ट्रीय TRI अनुसंधान एजेंडा (2027–2032) तैयार करना।

  • Model TRI Framework 2030 को लागू करना।

  • सभी TRIs के लिए परिणाम एवं रैंकिंग प्रणाली विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, संस्कृति, संगीत, पारंपरिक ज्ञान एवं कला का संरक्षण करना।

  • अनुसंधान गुणवत्ता, डेटा प्रबंधन और नैतिक मानकों को मजबूत करना।

  • AI, डेटा एनालिटिक्स और साझा तकनीकी अवसंरचना का उपयोग बढ़ाना।

  • विश्वविद्यालयों, उद्योग और तकनीकी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना।

  • जनजातीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

समापन

कार्यशाला के समापन पर भुवनेश्वर घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया गया। यह घोषणा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को अनुसंधान, ज्ञान सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मार्गदर्शक दस्तावेज़ होगी। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का संरक्षण करते हुए 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य को साकार करने में जनजातीय समुदायों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन के लिए एनएलडीएसएल और पंजाब सरकार के बीच समझौता

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एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय ने 7 जुलाई, 2026 को यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) के माध्यम से पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की दृश्यता बढ़ाना, परिचालन दक्षता में सुधार करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रियल-टाइम लॉजिस्टिक्स डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान के माध्यम से डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। इस पहल से राज्य के उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निर्यातकों तथा अन्य लॉजिस्टिक्स हितधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस सहयोग के तहत एनएलडीएसएल, यूएलआईपी के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण सुनिश्चित कर पंजाब सरकार को एक डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग देगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, नीतिगत एवं परिचालन संबंधी निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा तथा विनिर्माण, कृषि और निर्यात केंद्र के रूप में पंजाब की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

यूएलआईपी विभिन्न सरकारी प्रणालियों से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा को एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में यह 12 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 46 प्रणालियों को 142 एपीआई के माध्यम से जोड़ता है, जिनमें 2,000 से अधिक डेटा फील्ड शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 260 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं तथा 450 करोड़ से अधिक एपीआई लेनदेन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापकता, विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाते हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परिवहन, वेयरहाउसिंग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, लोक निर्माण विभाग, नागरिक उड्डयन तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक इंटरैक्टिव यूएलआईपी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पंजाब की आवश्यकताओं के अनुरूप यूएलआईपी के उपयोग के मामलों की पहचान करना, लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का समाधान करना, आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता बढ़ाना तथा राज्य में कारोबार सुगमता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला के दौरान एनएलडीएसएल ने अपने प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म—लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB), कोयला शक्ति–स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड, ट्रैक योर ट्रांसपोर्ट (TYT), ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) और लॉजिस्टिक्स ई-मार्केटप्लेस (LeMP)—का प्रदर्शन किया। इन प्लेटफॉर्मों ने दिखाया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स डेटा किस प्रकार परिसंपत्ति ट्रैकिंग, परिचालन योजना, अंतर-विभागीय समन्वय और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।

यह समझौता पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पर एनएलडीएसएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ताकायुकी कानो तथा पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक जसप्रीत सिंह, आईएएस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह, आईएएस भी उपस्थित रहे।

यह पहल राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक तथा एनएलडीएसएल के अध्यक्ष रजत कुमार सैनी, आईएएस के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल एकीकरण और सहयोगात्मक प्रशासन के माध्यम से लॉजिस्टिक्स दक्षता को मजबूत करना है।

एनआईसीडीसी देश में ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज़ और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से भारत के औद्योगिक परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। 20 औद्योगिक स्मार्ट शहरों की सफलता के बाद एनआईसीडीसी को भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एनआईसीडीसी पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का भी क्रियान्वयन कर रहा है।

एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL), जो एनआईसीडीसी की लॉजिस्टिक्स शाखा है, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है। 30 दिसंबर, 2015 को स्थापित एनएलडीएसएल, NICDC Industrial Development Trust (NICDIT) और जापान की NEC Corporation का एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है।

विशेष लेख : ​राजस्व सुधारों की नई इबारत लिखता छत्तीसगढ़: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

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​99.95 प्रतिशत ऑटो म्यूटेशन सफलता दर ने रचा रिकॉर्ड, ऑटो डायवर्सन में 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का हुआ निराकरण

​कोरिया बना नंबर-1, धमतरी ने टॉप-5 में दर्ज कराई दमदार मौजूदगी; जिलों के प्रदर्शन ने दिखाई जवाबदेह प्रशासन की तस्वीर

​NGDRS इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा और रिकवरी मॉड्यूल से राजस्व सेवाओं को मिलेगा नया डिजिटल ढांचा

​आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर से राहत, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण के साथ सुशासन का मजबूत मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़

​रायपुर-सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। 'ऑटो म्यूटेशन' (स्वतः नामांतरण) और 'ऑटो डायवर्सन' (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।

पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही, भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

​आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा

राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।

वहीं दूसरी ओर, 'ऑटो डायवर्सन' व्यवस्था के तहत कुल 5 हजार 661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4 हज़ार 739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं; अतः इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।

​ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर

किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुराने दौर में पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिसने भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दिया।

आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीनी धोखाधड़ी पर लगाम लगी है।

इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।

​ऑटो डायवर्सन से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया हुई तेज

कृषि भूमि को आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में बदलना (डायवर्सन) शहरीकरण, निवेश और रोजगार सृजन की रीढ़ है। पहले आवेदकों को शुल्क, आवश्यक दस्तावेजों और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।

फरवरी से जून 2026 के बीच 5 हजार 661 आवेदनों में से 4 हजार 739 का त्वरित निस्तारण यह दिखाता है कि विभाग ने गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण जैसी पेचीदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर दिया है। वर्तमान में जो 922 लंबित मामले हैं, उनके पीछे अपूर्ण दस्तावेज, चालान राशि में तकनीकी अंतर या नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) के मास्टर प्लान से भिन्न प्रयोजन होना जैसे व्यावहारिक कारण हैं। इन चुनौतियों को सार्वजनिक करना विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

​जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति

ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जो यह प्रमाणित करती है कि सुधार जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं। कोरिया जिला कुल 59 प्रकरणों में से सभी 59 का शत-प्रतिशत निराकरण कर 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर रहा।कोरबा जिला 98.46 प्रतिशत की सफलता दर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी तरह ​मुंगेली जिला 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।​बालोद जिला 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहा।​धमतरी जिला कुल 165 प्रकरणों में से 153 का वैधानिक निराकरण कर 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पाँचवाँ (शीर्ष-5) स्थान प्राप्त किया। धमतरी का यह प्रदर्शन नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली का परिणाम है।

​तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स

विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक एकीकृत 'डिजिटल इकोसिस्टम' के निर्माण में जुटा है। ​NGDRS API Integration इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।

​'Diverted to Diverted' मॉड्यूल:

यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत निस्तारण के लिए 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।

​'मल्टीपल खसरा' मॉड्यूल

एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 रखा गया है।

​'रिकवरी' मॉड्यूल

पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित किया गया है।

​सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़

​यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएँ मिल रही हैं।

दिसंबर 2026 तक के लिए तय किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी  से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस बेजोड़ संगम से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित शासन की एक नई मिसाल पेश की है।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में अनूठी पहल : मुनगा पौधारोपण से घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश

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महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत  विशेष अभियान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और स्वस्थ छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण संवर्धन को जनआंदोलन बनाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर प्रदेशभर में कुपोषण और एनीमिया के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत आयोजित "मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान" ने पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रभावी संदेश दिया।

बेमेतरा जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से  महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), सेक्टर दाढ़ी-2 एवं सेक्टर कन्हेरा में अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा एनीमिक महिलाओं के 18 घरों में मुनगा के पौधे रोपे गए और परिवारों को पौधों की देखभाल एवं नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

मुनगा (सहजन) को "सुपर फूड" के रूप में जाना जाता है। इसकी पत्तियों, फलियों और फूलों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-सी तथा अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका नियमित सेवन गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार, एनीमिया की रोकथाम तथा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक होता है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान हितग्राहियों को मुनगा के पोषण एवं औषधीय महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।

अभियान को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि "विथ सेल्फी अभियान" के माध्यम से लोगों को इस जनअभियान का सक्रिय सहभागी बनाया गया। इससे पौधों के संरक्षण और नियमित उपयोग के प्रति लोगों में सकारात्मक जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया। विभाग का मानना है कि जब प्रत्येक परिवार अपने घर में पोषण देने वाले पौधे लगाएगा और उनका उपयोग करेगा, तब कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से जीती जा सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बच्चों, किशोरियों और माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में ऐसे नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में सेक्टर सुपरवाइजर, मिशन शक्ति की जेंडर विशेषज्ञ, सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक , आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

समय पर खाद, बीज और ऋण से खुशहाल हुई खेती

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को समय पर कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम छत्तीसगढ के सुकमा जिले में देखने को मिल रहा है। खरीफ सीजन से पहले जिला प्रशासन ने किसानों को खाद, उन्नत बीज और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण समय पर उपलब्ध कराया, जिससे किसानों को बिना किसी परेशानी के खेती की तैयारी करने में सुविधा मिली।


सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम कुम्हाररास के किसान सोमारू राम इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। दो एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले सोमारू राम को छिंदगढ़ सहकारी समिति के माध्यम से सब्सिडीयुक्त किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मिला। साथ ही कुकानार समिति से उन्हें समय पर उन्नत धान का बीज तथा एक-एक बोरी यूरिया, डीएपी, एनपीके और पोटाश भी उपलब्ध कराया गया।

सोमारू राम बताते हैं कि पहले खेती के मौसम में खाद, बीज और पैसे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होती थी। इस बार सभी आवश्यक सामग्री समय पर मिल जाने से उनकी बोआई समय पर शुरू हो गई और आर्थिक चिंता भी दूर हो गई। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे हैं।

वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से छोटे किसानों को बड़ा सहारा मिला है। समय पर मिली सहायता से खेती आसान हुई है और किसानों में उत्साह का माहौल है।

जिला प्रशासन केवल खाद, बीज और ऋण उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खाद, बीज की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और बिचौलियों पर भी लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमें नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध हो।

समय पर ऋण, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान और प्रभावी निगरानी की इस व्यवस्था ने सुकमा जिले के किसानों का विश्वास मजबूत किया है। इससे न केवल खेती का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है, बल्कि इस खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी बढ़ी है।

भारत ने नई दिल्ली में 13वीं आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति की बैठक की मेजबानी की

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भारत ने 6 से 10 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (ASEAN-India Trade in Goods Agreement - AITIGA) की समीक्षा के तहत वार्ताओं की प्रगति का आकलन करने के लिए 13वीं AITIGA संयुक्त समिति (Joint Committee - JC) तथा संबंधित बैठकों की मेजबानी की। ये बैठकें हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही हैं।

13वीं संयुक्त समिति की बैठक के साथ-साथ AITIGA संयुक्त समिति के अंतर्गत गठित आठ उप-समितियों में से तीन की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाएं एवं व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), राष्ट्रीय उपचार एवं बाजार पहुंच उप-समिति (SC-NTMA) तथा उद्गम नियम उप-समिति (SC-ROO) शामिल हैं। ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने, आपसी समझ बढ़ाने तथा रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही हैं।

संयुक्त समिति ने उप-समितियों को उनके-अपने कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया और AITIGA समीक्षा के अंतर्गत लंबित अध्यायों को शीघ्र अंतिम रूप देने का आग्रह किया। वार्ताओं की गति बनाए रखने के लिए उप-समितियों को समयबद्ध लक्ष्य सौंपे गए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर ठोस परिणाम हासिल करने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

13वीं AITIGA संयुक्त समिति की बैठक 7 जुलाई, 2026 को आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव तथा मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। बैठक में आसियान के सभी सदस्य देशों—ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम—के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

आसियान भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और व्यापार एवं निवेश सहयोग के विस्तार की नई संभावनाएं प्रदान करता है।

BIG NEWS : महादेव बेटिंग ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार

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 रायपुर : महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले के प्रमुख आरोपी और मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय जांच एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। चंद्राकर पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। इस बड़ी कामयाबी के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया तेज कर दी है।


मस्कट के हाई-सिक्योरिटी डिटेंशन सेंटर में है आरोपी

रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को फिलहाल मस्कट के हाई-सिक्योरिटी 'अल खौद डिटेंशन सेंटर' में रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, उसने अपनी कानूनी पैरवी के लिए स्थानीय वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट और अवैध प्रवेश से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण उसे ओमान में आसानी से जमानत मिलना बेहद मुश्किल होगा।

यूएई से ओमान भागने की थी फिराक

सौरभ चंद्राकर पिछले काफी समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को जटिल बनाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से ही उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया और ओमान में प्रवेश किया।

इंटरपोल ने खारिज की थी याचिका

हाल ही में इंटरपोल की 'कमीशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स' (CCF) ने भी सौरभ चंद्राकर को बड़ा झटका दिया था। आयोग ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस को हटाने की मांग की थी। आयोग ने स्पष्ट माना कि यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि किसी राजनीतिक उत्पीड़न से।

ईडी की अब तक की बड़ी कार्रवाई

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई (CBI) मिलकर कर रही हैं। यह मामला हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) इस मामले में अब तक निम्नलिखित कार्रवाई कर चुकी है:

  • छापेमारी: देश भर में 175 से अधिक ठिकानों पर रेड।

  • गिरफ्तारी व आरोपी: अब तक 13 मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और कुल 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

  • चार्जशीट: रायपुर की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में पांच अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल।

  • संपत्ति की जब्ती: अब तक कुल 4,336 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।

आगे की राह: यदि ओमान की अदालत भारत सरकार के अनुरोध और प्रत्यर्पण को मंजूरी देती है, तो सौरभ चंद्राकर को जल्द ही भारत लाया जाएगा, जिसके बाद छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में उसके खिलाफ लंबित मामलों में आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हाईटेक हुई पुलिस: अब घटनास्थल से ही दर्ज होगी एफआईआर, डिजिटल होगी विवेचना

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 दुर्ग। अपराध विवेचना को तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में दुर्ग पुलिस ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब जिले के थाना एवं चौकियों में पदस्थ विवेचक घटनास्थल से ही एफआईआर, गवाहों के बयान और अन्य आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा उपलब्ध कराए गए Samsung Galaxy XCover आधारित Mobile Data Terminal (MDT) विवेचकों को वितरित किए गए हैं।


इन आधुनिक उपकरणों का वितरण 7 जुलाई को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, दुर्ग के प्रशासनिक भवन स्थित दधीचि प्रशिक्षण हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न थाना एवं चौकियों में पदस्थ विवेचकों को एमडीटी सौंपे गए।

घटनास्थल से ही होगी ऑनलाइन विवेचना

दुर्ग पुलिस के अनुसार, Mobile Data Terminal के माध्यम से विवेचक घटनास्थल पर ही अपराध से संबंधित आवश्यक जानकारी, एफआईआर, गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे विवेचना प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी होगी तथा मामलों के शीघ्र निराकरण में मदद मिलेगी।

डिजिटल पुलिसिंग को मिलेगा नया आयाम

Samsung Galaxy XCover आधारित इन उपकरणों के उपयोग से डिजिटल पुलिसिंग को और मजबूती मिलेगी। इससे कागजी कार्रवाई पर निर्भरता कम होगी और जांच संबंधी सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं तत्काल ऑनलाइन रिकॉर्ड की जा सकेंगी। इससे जांच की गुणवत्ता और जवाबदेही में भी सुधार आएगा।

विवेचकों को दिए गए आवश्यक निर्देश

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने सभी विवेचकों को निर्देश दिए कि वे उपलब्ध कराए गए उपकरणों का जिम्मेदारी, दक्षता और निष्ठा के साथ उपयोग करें। साथ ही प्रत्येक प्रकरण की गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि आम नागरिकों को त्वरित और बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

दुर्ग पुलिस ने कहा कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अपराध विवेचना को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण में पुलिस का सहयोग करने की अपील भी की गई है।

जिंदा मासूम को बोरी में बंद कर तालाब में फेंका था; वारदात का मुख्य आरोपी मुठभेड़ में ढेर

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 कोलकाता / बारुईपुर: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने मुठभेड़ (एनकाउंटर) में ढेर कर दिया है। पुलिस के अनुसार, मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को घटनास्थल का मुआयना कराने के दौरान आरोपी ने एक पुलिसकर्मी की सर्विस रिवॉल्वर छीनकर फायरिंग कर दी और भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।


जांच के दौरान पुलिस टीम पर हमला

बारुईपुर पुलिस के मुताबिक, जांच अधिकारी अपनी टीम के साथ आरोपी प्रभास मंडल को रात करीब 12:45 बजे सूर्यपुर स्थित घटनास्थल पर साक्ष्य जुटाने के लिए लेकर पहुंचे थे। मौके का निरीक्षण शुरू होने से पहले ही आरोपी ने अचानक एक पुलिसकर्मी पर हमला कर उसका हथियार छीन लिया और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा और आरोपी को रोकने के लिए पुलिस को जवाबी फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें आरोपी को गोली लगी।

लापता होने के अगले दिन मिला था मासूम का शव

यह जघन्य मामला शनिवार को तब सामने आया था, जब बारुईपुर के सूर्यपुर इलाके से एक 11 वर्षीय बच्ची संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों के अनुसार, बच्ची शाम करीब चार बजे घर के बाहर खेलते समय गायब हुई थी। रातभर तलाश करने के बाद अगले दिन सुबह सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब से बच्ची का शव बरामद हुआ। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और उग्र भीड़ ने प्रदर्शन, आगजनी व पुलिस पर पथराव भी किया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी बच्ची को फुसलाकर एक झोपड़ी में ले गया था, जहां दो अन्य आरोपी पहले से मौजूद थे। वारदात को अंजाम देने से पहले तीनों ने नशीले पदार्थ का सेवन किया था। दरिंदगी के बाद मासूम को प्लास्टिक की बोरी में बंद कर तालाब में फेंक दिया गया।

प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जब बच्ची को तालाब में फेंका गया, तब वह जीवित थी, क्योंकि उसके फेफड़ों में पानी पाया गया है। पुलिस फिलहाल विस्तृत फॉरेंसिक और विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

उपद्रवियों पर पुलिस की सख्त कार्रवाई

बच्ची का शव मिलने के बाद भड़की हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने हत्या के संदेह में एक अन्य युवक की पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) कर दी थी। पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति, सरकारी वाहनों और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने के आरोप में करीब 200 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

बारिश पर लगेगा ब्रेक, अब बढ़ेगा तापमान; रायपुर समेत प्रदेश में खिली धूप

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से जारी झमाझम बारिश के दौर पर अब विराम लगने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से प्रदेश में वर्षा की गतिविधियों में कमी आएगी और अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बुधवार सुबह धूप खिलने से मौसम का मिजाज बदलता नजर आया।


मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश कराने वाले मौसमी सिस्टम अब प्रदेश से आगे बढ़ रहे हैं और कमजोर पड़ रहे हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में धूप और उमस का असर बढ़ सकता है। हालांकि स्थानीय प्रभाव के कारण प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सीजनल द्रोणिका (ट्रफ लाइन) की स्थिति में बदलाव के कारण मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसका असर प्रदेश के तापमान पर पड़ेगा।

मंगलवार को प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान दुर्ग में 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

रायपुर का मौसम

राजधानी रायपुर में बुधवार को दिनभर आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। शहर के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार रायपुर का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव बढ़ेगा, हालांकि स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

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