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रायपुर को मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करेगी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। रायपुर शहर के विकास में धन की कोई कमी आड़े नहीं आएगी। राज्य सरकार जनादेश और जनभावना के अनुरूप रायपुर को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं की आधुनिक और सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में रायपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

रायपुर शहर एवं आसपास स्थित क्षेत्रो के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नगरीय निकायों को अधोसंरचना विकास के लिए पूर्व की तुलना में ढाई गुना अधिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे राजधानी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध विकास कार्य संभव हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण रायपुर में यातायात, आवास, जल आपूर्ति और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर ठोस और व्यावहारिक योजना बनाकर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि शहर की जरूरतों को आने वाले दशकों तक पूरा किया जा सके।

कनेक्टिविटी,शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि रायपुर का समग्र विकास तभी संभव है जब नगर निगम, रेलवे और लोक निर्माण विभाग आपसी समन्वय के साथ योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा बताए गए जमीनी मुद्दों और आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ कार्ययोजनाओं में शामिल किया जाए।

बैठक में शहर के ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति, प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिक्रमण, निगम द्वारा निर्मित व्यवसायिक परिसरों में खाली दुकानों के पुनः विक्रय, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण तथा मेकाहारा मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं के उन्नयन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े अधोसंरचनाओं को समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश

इसके साथ ही सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, पेयजल आपूर्ति, जल शोधन संयंत्रों, सीवरेज नेटवर्क, खेल मैदानों के संरक्षण तथा झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास योजनाओं की प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई, ताकि शहरी जीवन की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाया जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अंडरग्राउंड विद्युत लाइनें, नए सड़क मार्ग, फ्लाईओवर, सार्वजनिक भवनों तथा स्टेडियमों के निर्माण जैसे प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स के सम्बन्ध में भी निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजे जाएँ और बुनियादी अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि रायपुर को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और नागरिक-अनुकूल राजधानी के रूप में विकसित किया जा सके।

बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त ओ.पी. चौधरी एवं कौशल उन्नयन मंत्री खुशवंत साहेब, सांस बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी सहि पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

एनसीसी आरडीसी में सीडीएस का संबोधन, युवाओं से सशस्त्र बलों में करियर अपनाने की अपील

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने 13 जनवरी 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) का दौरा किया। एनसीसी कैडेट्स और अधिकारियों को संबोधित करते हुए CDS ने लगातार चौथी बार आरडीसी शिविर में शामिल होने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कैडेट्स के उच्च मानकों और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि हर वर्ष उनमें नई ऊर्जा और देशभक्ति का भाव देखने को मिलता है।

युवाओं के लिए दृष्टि और इच्छाशक्ति के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा,

“यदि आप सही मार्ग चुनते हैं, तो सही मंज़िल तक पहुँचते हैं; आज सही मार्ग चुनना अत्यंत आवश्यक है।”
अपने जीवन और करियर के अनुभव साझा करते हुए CDS ने कैडेट्स को सशस्त्र बलों में करियर अपनाने के लिए प्रेरित किया और 2047 तक समृद्ध, सशक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“आप ही विकसित भारत के भविष्य के नेता हैं।”

जनवरी माह के महत्व को रेखांकित करते हुए CDS ने इसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों का महीना बताया। उन्होंने कहा कि जनवरी में

  • 12 जनवरी – राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती),

  • 14 जनवरी – वेटरन्स डे,

  • 15 जनवरी – सेना दिवस,

  • 23 जनवरी – पराक्रम दिवस (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती),

  • 26 जनवरी – गणतंत्र दिवस (संविधान अंगीकरण दिवस),

  • 30 जनवरी – शहीद दिवस
    मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी अवसर भारत की स्वतंत्रता, गणतांत्रिक मूल्यों और सच्ची राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक हैं।

CDS ने सेना, नौसेना और वायु सेना विंग के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल, उत्तराखंड के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत मधुर बैंड प्रदर्शन की प्रशंसा की। युवा कैडेट्स के जोश और ऊर्जा से प्रभावित होकर उन्होंने विविध और जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा ‘फ्लैग एरिया’ के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने एयरो और नेवल मॉडल्स की ब्रीफिंग, ड्रोन प्रदर्शन में भाग लेने वाले कैडेट्स की भी प्रशंसा की और कहा कि यह उनकी अनुशासनबद्धता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

अपने संबोधन के समापन में जनरल चौहान ने कैडेट्स से कहा कि वे अपने लक्ष्यों के लिए आज ही कार्य करना शुरू करें, कल का इंतजार न करें, और जीवन में सकारात्मक व आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखें।

पटना में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला, डिजिटल उपभोक्ता न्याय पर जोर

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उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार ने आज पटना, बिहार में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य उपभोक्ता शिकायत निवारण को मजबूत करना और उपभोक्ता आयोगों के कार्य संचालन में सुधार लाना था।

कार्यशाला में मामलों की लंबित संख्या कम करने, उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के बेहतर अनुपालन, त्वरित न्याय के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग, तथा डिजिटल बाजार में डार्क पैटर्न और अनुचित व्यापार प्रथाओं जैसी उभरती चुनौतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

डिजिटल उपभोक्ता न्याय को मजबूत करने पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में निधि खरे, सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने देशभर में उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों को रेखांकित किया।

उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 2.0) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला, जो एक प्री-लिटिगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में बहुभाषी सुविधा, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और तकनीक के माध्यम से त्वरित समाधान प्रदान करता है।

उन्होंने ई-जागृति (CONFONET 2.0) के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन की भी जानकारी दी, जो उपभोक्ता आयोगों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ई-जागृति में ई-दाखिल, ऑनलाइन केस प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डेटा डैशबोर्ड और एआई आधारित टूल्स को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ता मामलों के लिए एक एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो तैयार होता है।

निधि खरे ने कहा कि ई-जागृति खंडित प्रणालियों से हटकर एक पारदर्शी, कुशल और रियल-टाइम डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बदलाव का प्रतीक है, जिससे बेहतर निगरानी और मामलों का त्वरित निपटान संभव हो सकेगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत और ग्रामीण क्षेत्रों वाले राज्यों में डिजिटल प्लेटफॉर्म उपभोक्ता न्याय तक पहुंच को काफी बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों से वीडियो सुनवाई, स्वचालित केस टूल्स और परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

कृषि और मूल्य स्थिरता पर फोकस

निधि खरे ने दालों के घरेलू उत्पादन और खरीद को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोग में अनाज से हटकर दालों की ओर रुझान बढ़ रहा है।

बिहार के मजबूत कृषि आधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने दालों की खेती और संरचित खरीद व्यवस्था, विशेषकर दलहन खरीद, को बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में अरहर, चना और उड़द जैसी दालों का आयात म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से करता है और घरेलू क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने दोहराया कि जब बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे जाता है, तब MSP आधारित खरीद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बनी रहेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जब बाजार मूल्य अधिक हों, तो किसानों को उसका लाभ मिले। इससे किसान कल्याण और खाद्य सुरक्षा दोनों को समर्थन मिलेगा।

डिजिटल गवर्नेंस सुधारों का बिहार द्वारा स्वागत

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार ने डिजिटल पहलों पर केंद्रित चर्चा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सुधार भविष्य के लिए तैयार शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ऐसे उपभोक्ता के रूप में देखा जाना चाहिए जिन्हें स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार और समयबद्ध शिकायत निवारण का अधिकार है। उन्होंने ई-जागृति जैसी पहलों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि डार्क पैटर्न जैसे उभरते मुद्दों पर चर्चा से सार्थक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला की सिफारिशों को बिहार सरकार द्वारा लागू किया जाएगा और कहा कि सभी विभाग विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।

प्रमुख तकनीकी सत्र

कार्यशाला में उपभोक्ता संरक्षण के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:

  • तकनीकी सत्र I: “ई-जागृति: डिजिटल नवाचार के माध्यम से उपभोक्ता न्याय को आगे बढ़ाना” — इसमें उपभोक्ता आयोगों के डिजिटल परिवर्तन, केस प्रबंधन, हाइब्रिड सुनवाई और प्रदर्शन निगरानी पर चर्चा हुई।

  • तकनीकी सत्र II: “त्वरित निपटान सुनिश्चित करना: स्थगन कम करने के सर्वोत्तम अभ्यास” — इसमें प्रक्रिया सुधार, न्यायिक समय प्रबंधन और तकनीक आधारित शेड्यूलिंग पर विचार-विमर्श किया गया।

  • तकनीकी सत्र III: “अनुपालन सुनिश्चित करना: उपभोक्ता आयोग आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन” — इसमें आदेश के बाद अनुपालन, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र पर चर्चा की गई।

  • तकनीकी सत्र IV: “डिजिटल बाजारों में डार्क पैटर्न और उपभोक्ता संरक्षण” — इसमें ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में भ्रामक इंटरफेस, हेरफेरपूर्ण प्रथाओं और नियामक तैयारियों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, कानूनी माप विज्ञान सुधारों (ई-माप और जन विश्वास विधेयक) तथा मूल्य स्थिरीकरण के लिए खरीद और बाजार हस्तक्षेप पर भी समानांतर सत्र आयोजित किए गए।

समापन

कार्यशाला का उद्घाटन प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार तथा अभय कुमार सिंह, सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया गया। मुख्य संबोधन निधि खरे ने दिया और समापन सत्र में अनुपम मिश्रा, अपर सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में उपभोक्ता मामलों और कृषि विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और रजिस्ट्रार, वरिष्ठ अधिकारी, NIC प्रतिनिधि, NCCF के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का समापन डिजिटल अपनाने के विस्तार, संस्थागत क्षमता सुदृढ़ीकरण, आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। उपभोक्ता मामले विभाग ने बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा को तेज, सुलभ और प्रौद्योगिकी आधारित उपभोक्ता न्याय प्रणाली विकसित करने में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।


दिल्ली विश्वविद्यालय में ड्रग फ्री कैंपस अभियान का शुभारंभ, नशा मुक्त युवा से बनेगा विकसित भारत: उपराष्ट्रपति

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय में ड्रग फ्री कैंपस अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को नशे की लत से बचाने और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सतत एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान के केंद्र नहीं होते, बल्कि ऐसे संस्थान होते हैं जहाँ मूल्यों का निर्माण होता है, नेतृत्व को दिशा मिलती है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ा जाता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रतिष्ठित संस्थान नशे के विरुद्ध सख्त रुख अपनाता है, तो यह पूरे समाज को एक सशक्त संदेश देता है।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्त परिसर अभियान के अंतर्गत एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा मंच (https://pledge.du.ac.in/home) और मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया तथा देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से इसमें सक्रिय भागीदारी करने और नशा मुक्त परिसर की प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आग्रह किया कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान को सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

भारत को एक युवा राष्ट्र बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा और देश की जनसांख्यिकीय क्षमता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि नशे की लत शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सौहार्द, उत्पादकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करती है, साथ ही इसके संबंध नार्को-आतंकवाद से भी जुड़े हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ, नशामुक्त और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीएँ। नशामुक्त युवा कौशल अर्जन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास व राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान देने में अधिक सक्षम होते हैं।

शिक्षा और संस्कृति की भूमिका पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएँ आत्मअनुशासन, मानसिक संतुलन और मन व शरीर की शुद्धता को अत्यधिक महत्व देती हैं। उन्होंने कहा कि यह भाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्यान और योग को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने MY भारत पोर्टल और प्रधानमंत्री अनुसंधान योजना (PM Anusandhan Yojana) जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जो युवाओं की ऊर्जा को अनुसंधान, नवाचार, स्वयंसेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रवाहित करती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान जैसे प्रयास नीति की भावना के अनुरूप सुरक्षित, समावेशी और पोषक शैक्षणिक वातावरण बनाने में सहायक हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श तंत्र, छात्र-नेतृत्व वाली पहलों और विभिन्न हितधारकों के सहयोग को सराहते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब छात्र परिवर्तन के दूत बनते हैं, तो उसका प्रभाव परिसरों से आगे परिवारों और समाज तक फैलता है। उन्होंने छात्रों से सतर्क रहने, संकट में फंसे साथियों का सहयोग करने, नशे के विरुद्ध आवाज उठाने और स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के एक आदर्श नशा मुक्त परिसर के रूप में उभरने पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशा मुक्त भारत एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।


बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से मजबूत होगा जनविश्वास : मुख्यमंत्री साय

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बस्तर के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

डबल इंजन सरकार में बस्तर का हो रहा है सर्वांगीण विकास, विशेष केंद्रीय सहायता के लिए ठोस पहल

नक्सल उन्मूलन के साथ विकास के रोडमैप पर हुई व्यापक चर्चा

सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा के निर्देश

कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस

रायपुर- छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल हो रही है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा फिर कभी सिर न उठा सके और इसके लिए बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर मिशन मोड में उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्वस्फूर्त जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार कार्ड निर्माण, बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत चिन्हित स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण तथा युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने के पहल की विशेष रूप से सराहना की।

बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय एवं पीएमश्री स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएँ, आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी, दुल्हन की तरह सज रही है मोरध्वज नगरी आरंग

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आरंग। राजा मोरध्वज की नगरी के नाम से विख्यात आरंग इन दिनों उत्सव के रंग में रंगने तैयार है। 15 और 16 जनवरी को होने वाले राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 के स्वागत में नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। पूरे नगर में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल है। ऐसी लोक मान्यता है कि त्रेता में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और द्वापर में श्रीकृष्ण के चरण कमल आरंग की धरती पर पड़े थे। महोत्सव के लिए बन रहे भव्य मंच में राम और श्याम की झांकी आगंतुकों के मन को मोहने वाली है।

महोत्सव का यह भव्य आयोजन कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के संयोजन में, सर्व समाज, नगर पालिका परिषद आरंग एवं विधानसभा क्षेत्र आरंग के जन-जन की भागीदारी से पहली बार भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत 2023 में पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में हुई थी। इस साल पहली बार आरंग में भव्य महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किया जा रहा है। आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। 

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने तैयारियों का जायजा लेने के बाद कहा कि आरंग छत्तीसगढ़ का प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी है। इसके पुरावैभव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जो सम्मान मिलना चाहिए, वह भूगर्भ में दफन है। गढ़ रींवा में पुरातात्विक खोदाई से यह स्पष्ट हो गया है कि आरंग का वैभवशाली इतिहास श्रीपुर (सिरपुर) से भी प्राचीन है।

गौरव को पुनर्स्थापित करने महोत्सव महत्वपूर्ण

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी पहचान और गौरव को दूर-दूर तक प्रचारित करने में यह महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा। इस आयोजन को सभी के सहयोग से ऐतिहासिक बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आरंग ऐसा नगर है, जहाँ भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों का पदार्पण हुआ। माता कौशल्या का जन्मस्थली भी इसी पावन धरती चंदखुरी में हुआ माना जाता है। बाबा गुरु घासीदास जी का “मनखे-मनखे एक समान” का अमर संदेश उनकी कर्मभूमि भंडारपुरी धाम से निकलकर पूरी दुनिया में मानवता का प्रकाश फैला रहा है। नगर में शिद्ध शक्तिपीठ बाबा बागेश्वरनाथ महादेव सहित अनेक दिव्य स्वयंभू शिवलिंग हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मुख्यमंत्री सहित अनेक मंत्री होंगे महोत्सव में शरीक

महोत्सव को लेकर आरंग नगर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। जगह-जगह बैनर, पोस्टर, रोशनी, झालर, तोरण और पताकाएँ लगाई गई हैं। पूरा आरंग उत्सव नगरी का रूप ले चुका है। जगह-जगह ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से उत्सव का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।

महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और निगम मंडल के पदाधिकारी शिरकत करेंगे। सभी मंत्रियों और विधायकों को मंत्री गुरु खुशवंत साहेब स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं। नगर में सर्व समाज की बैठकें आयोजित कर जिम्मेदारियाँ तय की गई है। अतिथियों के सत्कार में कोई कमी न रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। 

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव को लेकर नगरवासियों में अपार उत्साह है। आरंग एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ देश-प्रदेश का ध्यान आकर्षित करने को तैयार है।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल: भारत की लॉजिस्टिक्स क्रांति और भविष्य की दिशा

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मुख्य निष्कर्ष

  • भारतीय रेल ने 306 गती शक्ति कार्गो टर्मिनल (GCTs) को मंजूरी दी है, जिनकी संयुक्त क्षमता 192 मिलियन टन प्रति वर्ष है; इनमें से 118 पहले ही चालू हैं।

  • 2014 से अब तक 2,672 मिलियन टन माल सड़क से रेल में स्थानांतरित किया गया, जिससे 143.3 मिलियन टन CO₂ की बचत हुई।

  • GCT नीति के तहत लगभग ₹8,600 करोड़ का निजी निवेश जुटाया गया।

  • GCT से होने वाली माल आय में 2022–23 से 2024–25 के बीच चार गुना वृद्धि हुई, जो ₹12,608 करोड़ तक पहुँच गई।

परिचय

भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर हाल के वर्षों में अद्भुत प्रगति कर रहा है। देश ने लॉजिस्टिक्स लागत को अब GDP का केवल 7.97% तक घटाने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। यह उपलब्धि लगातार सुधार और समग्र योजना की सफलता को दर्शाती है और भारत को वैश्विक मानकों के करीब लाती है।

इस परिवर्तन के केंद्र में PM गती शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान है, जिसने रेलवे, हाईवे, पोर्ट और एयरपोर्ट को एक एकीकृत ढांचे में लाया है। यह योजना उद्योग की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, Ease of Doing Business और Make in India जैसी पहलों का समर्थन करने और क्षेत्रीय विकास को संतुलित बनाने के लिए निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (GCTs) इस दृष्टि का मुख्य स्तंभ हैं, जो आधुनिक लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान कर रहे हैं और भारत को वैश्विक व्यापार हब के रूप में मजबूत कर रहे हैं।

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (GCTs)

रेलवे कार्गो टर्मिनल वह सुविधा है जहाँ माल को लोड, अनलोड और रेल और अन्य परिवहन मोड के बीच स्थानांतरित किया जाता है। यह लॉजिस्टिक्स चैन में महत्वपूर्ण हब के रूप में कार्य करता है।

पहले, भारत में माल ढुलाई सड़क, रेल और पोर्ट के बीच बिखरी हुई थी, जिससे देरी, उच्च लागत और जाम की समस्या होती थी। मल्टीमॉडल हब्स इन मोड्स को जोड़ते हैं, माल हैंडलिंग को तेज करते हैं और उत्सर्जन को कम करते हैं।

गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCTs), GCT नीति 2021 के तहत विकसित किए जा रहे आधुनिक टर्मिनल हैं, जो रेल को अन्य परिवहन मोड से जोड़ते हैं।

  • EOL (Engine-on-Load) संचालन: लोकोमोटिव लोडिंग/अनलोडिंग के दौरान टर्मिनल पर रहती है ताकि ट्रेन तुरंत प्रस्थान कर सके।

  • आधुनिक सुविधाएँ: मैकेनाइज्ड लोडिंग सिस्टम, सिलो आदि, जिससे हैंडलिंग समय कम होता है।

  • उद्देश्य: तेज, कुशल और भरोसेमंद माल परिवहन प्रदान करना, लागत कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना।

GCT नीति, 2021

रेल मंत्रालय द्वारा 15 दिसंबर 2021 को पेश की गई यह नीति आधुनिक कार्गो टर्मिनल को बढ़ावा देने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और भारत के फ्रीट इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से है।

मुख्य प्रावधान:

  • लागत छूट: विभागीय शुल्क, भूमि लाइसेंस शुल्क और स्टाफ लागत में छूट।

  • सहायक सुविधाएँ: रेलवे सामान्य उपयोग वाली सुविधाएँ बनाए और बनाए रखे।

  • फ्रीट रिबेट: 1 मिलियन टन या अधिक आउटवर्ड ट्रैफिक वाले टर्मिनल को 10% फ्रीट रिबेट।

  • संपत्ति रखरखाव: रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग और ओवरहेड उपकरण बनाए रखे।

  • कनेक्टिविटी अधिकार: अतिरिक्त टर्मिनल को कनेक्टिविटी का विस्तार।

  • व्यावसायिक भूमि उपयोग: अतिरिक्त रेलवे भूमि का विकास RLDA के तहत।

  • रणनीतिक महत्व: मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, बाधाओं में कमी, टर्नअराउंड सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा।

प्रगति और उपलब्धियाँ

  • मंजूरी और कमीशनिंग: 306 GCT को मंजूरी मिली, 118 चालू हैं।

  • क्षमता: 118 चालू टर्मिनल की संयुक्त क्षमता 192 मिलियन टन प्रति वर्ष।

  • निजी निवेश: लगभग ₹8,600 करोड़।

  • प्रदर्शन: 2022–23 से 2024–25 में माल आय में चार गुना वृद्धि।

  • पर्यावरण लाभ: 2014 से सड़क से रेल में 2,672 मिलियन टन माल स्थानांतरित, 143.3 मिलियन टन CO₂ बचत।

  • निर्माण समय: अनुमोदित एजेंसियों को 24 महीने में निर्माण पूरा करना अनिवार्य।

मुख्य टर्मिनल उदाहरण

  1. मानेसर (हरियाणा) GCT:

    • भारत का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल टर्मिनल।

    • 46 एकड़ में फैला, 8.2 किमी ट्रैक, 4.5 लाख वाहन प्रति वर्ष क्षमता।

    • हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर से जुड़ा।

  2. उत्तर-पूर्व टर्मिनल (मोइनारबंद और सिनामारा, असम):

    • कोयला, कंटेनर, खाद्य अनाज, उर्वरक, सीमेंट, पेट्रोलियम और ऑटोमोबाइल का संचालन।

    • मल्टीमॉडल हब के रूप में क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाते हैं।

  3. न्यू संजाली GCT, गुजरात:

    • पश्चिमी समर्पित फ्रीट कॉरिडोर पर पहला निजी भूमि आधारित टर्मिनल।

    • मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और उच्च क्षमता वाले माल परिवहन को बढ़ावा देता है।

आगे की दिशा

  • टर्मिनल विकास में निजी भागीदारी बढ़ाना।

  • उद्योग की मांग और क्षेत्रीय विकास के आधार पर नए GCT स्थानों की पहचान।

  • डिजिटल इंटीग्रेशन मजबूत करना – वास्तविक समय ट्रैकिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स।

  • भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करना और हरित परिवहन समाधानों को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

गति शक्ति कार्गो टर्मिनल आधुनिक भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नया आकार देने का महत्वपूर्ण कदम हैं। ये टर्मिनल अवसंरचना विकास, डिजिटल इंटीग्रेशन और निजी भागीदारी को जोड़कर लंबित असंगतियों को दूर करते हैं और राष्ट्रीय आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

GCTs के माध्यम से भारत का लॉजिस्टिक्स परिदृश्य अधिक कुशल, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनेगा।


भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: डिजिटल इंडिया से सीधे जानकारी

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डिजिटल इंडिया – हमारे विशेषज्ञों से पूछें, एपिसोड 38: भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की झलक

9 जनवरी, 2026 को आयोजित डिजिटल इंडिया – हमारे विशेषज्ञों से पूछें के 38वें एपिसोड में आगामी भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को प्रमुखता से पेश किया गया, जिसे जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को आकार देने वाला वैश्विक कार्यक्रम बताया गया।

इस सत्र में IndiaAI और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारी मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं:

  • शिखा दहिया, संयुक्त निदेशक – उभरती तकनीक, MeitY

  • कार्तिक शोभन सूरी, महाप्रबंधक – भविष्य की क्षमताएँ, IndiaAI

  • स्वदीप सिंह, महाप्रबंधक – डेटा साइंस, IndiaAI

  • अंशुल सिंघल, महाप्रबंधक – स्टार्टअप्स, IndiaAI

उन्होंने सीधे नागरिकों, स्टार्टअप्स, छात्रों और पेशेवरों के सवालों के जवाब दिए और भारत के AI रोडमैप पर जानकारी साझा की।

एपिसोड के दौरान, विशेषज्ञों ने समझाया कि समिट तीन प्रमुख स्तंभों या ‘सूत्रों’ – लोग (People), ग्रह (Planet), और प्रगति (Progress) – के चारों ओर केंद्रित है, जिसमें विशेष कार्य समूह या ‘चक्र’ बनाए गए हैं। इन समूहों की चर्चाएँ और परिणाम AI नीति, कौशल विकास रणनीतियों और भारत तथा ग्लोबल साउथ में कार्यान्वयन को प्रभावित करेंगे।

इसमें युवा, स्टार्टअप्स, महिला नवप्रवर्तनकार और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों के शिक्षार्थियों के लिए अवसरों को भी उजागर किया गया, जैसे AI & Data Labs, ग्लोबल चैलेंज, पिच फेस्ट और YUVAI Global Youth Challenge। दर्शकों को India AI Impact Expo 2026 के बारे में भी जानकारी दी गई, जो 16–20 फरवरी को भारत मंडपम में आयोजित होगी और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में AI समाधानों के परिवर्तन को प्रदर्शित करेगी।

नागरिकों ने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर, ओपन डेटा एक्सेस, हेल्थकेयर डेटासेट्स, स्टार्टअप्स की भागीदारी, गवर्नेंस, गैर-टेक उपयोगकर्ताओं की सहभागिता और ऑनलाइन भागीदारी जैसे सवाल उठाए। विशेषज्ञों ने आश्वासन दिया कि IndiaAI खुले, सुरक्षित और समावेशी प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है, जो व्यक्तियों, छोटे समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों की भागीदारी को सक्षम बनाएगा।

एपिसोड का समापन नागरिकों को पहला कदम उठाने, पंजीकरण करने, भाग लेने और योगदान देने के लिए आमंत्रित करते हुए किया गया, ताकि वे समिट की वेबसाइट https://impact.indiaai.gov.in/ पर भारत के बढ़ते AI पारिस्थितिकी तंत्र के सक्रिय भागीदार बन सकें।

डिजिटल इंडिया – हमारे विशेषज्ञों से पूछें नागरिकों और क्षेत्र विशेषज्ञों के बीच सीधे संवाद को सक्षम बनाता है, जिससे डिजिटल प्रौद्योगिकियों का जिम्मेदार और सूचित उपयोग प्रोत्साहित होता है। लाइव सत्र में पूरे देश के दर्शकों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए स्पष्ट और सुलभ व्याख्यान की सराहना की। एपिसोड 38 का पूर्ण रिकॉर्डिंग यहाँ उपलब्ध है: https://youtube.com/live/qV5BZ7O5AAI?feature=share

यह श्रृंखला डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रमुख इंटरैक्टिव पहल है, जो नागरिकों को सरकारी विशेषज्ञों के साथ लाइव चर्चा के माध्यम से जोड़ती है, ताकि वे डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं को आसानी से और आत्मविश्वास के साथ समझ और उपयोग कर सकें।

डिजिटल इंडिया YouTube चैनल पर लाइव स्ट्रीम: https://www.youtube.com/@DigitalIndiaofficial
आगामी एपिसोड और डिजिटल इंडिया पहलों के लिए: www.digitalindia.gov.in और www.negd.gov.in


प्रधानमंत्री मोदी ने Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 में युवाओं को सशक्त बनाने का दिया संदेश

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं और युवाओं को देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। अपने संदेशों में उन्होंने युवाओं की रचनात्मकता और देशभक्ति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश के हर क्षेत्र में संभावनाओं के अनंत द्वार खुले हैं। उन्होंने विशेष रूप से कंटेंट और क्रिएटिविटी के क्षेत्र में युवाओं को अवसरों का संकेत दिया, और यह उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे युवा रामायण और महाभारत की प्रेरक कहानियों को गेमिंग वर्ल्ड का हिस्सा बना सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “यहाँ तक कि हमारे हनुमान जी ही पूरी दुनिया की गेमिंग चला सकते हैं!”

प्रधानमंत्री ने नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स की चर्चा करते हुए कहा कि यह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है, और इसके केंद्र में देश की युवा शक्ति ही है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत और विचारों को हमेशा आगे रखें। इसके संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन का उदाहरण दिया, जो हमें यही सिखाता है।

प्रधानमंत्री मोदी के ये संदेश युवाओं के लिए रचनात्मकता, नेतृत्व और देशभक्ति की दिशा में प्रेरणा स्रोत साबित होंगे।



मुंबई में मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन पर TRAI की इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट जारी

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने नवंबर 2025 के दौरान मुंबई लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (LSA) के लिए किए गए इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट (IDT) के निष्कर्ष जारी किए हैं। ये ड्राइव टेस्ट TRAI के क्षेत्रीय कार्यालय, बेंगलुरु की निगरानी में किए गए, जिनका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों, संस्थागत हॉटस्पॉट्स, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों तथा उच्च गति कॉरिडोर सहित विभिन्न उपयोग परिवेशों में मोबाइल नेटवर्क के वास्तविक प्रदर्शन का आकलन करना था।

03 नवंबर 2025 से 07 नवंबर 2025 के बीच TRAI की टीमों ने मुंबई में कुल 320.2 किलोमीटर का परीक्षण किया, जिसमें 192.4 किमी सिटी ड्राइव, 7 हॉटस्पॉट्स, 3.1 किमी वॉक टेस्ट, 9.7 किमी कोस्टल ड्राइव तथा 115 किमी लोकल रेलवे ड्राइव शामिल हैं। परीक्षण के दौरान 2G, 3G, 4G और 5G तकनीकों का मूल्यांकन किया गया, जिससे विभिन्न हैंडसेट क्षमताओं वाले उपभोक्ताओं के सेवा अनुभव को दर्शाया जा सके। IDT के निष्कर्ष संबंधित सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) को आवश्यक कार्रवाई हेतु सूचित कर दिए गए हैं।

मूल्यांकित प्रमुख मापदंड

(क) वॉयस सेवाएँ:

कॉल सेटअप सफलता दर (CSSR), ड्रॉप कॉल दर (DCR), कॉल सेटअप समय, कॉल साइलेंस दर, स्पीच क्वालिटी (MOS) और कवरेज।

(ख) डेटा सेवाएँ:

डाउनलोड/अपलोड थ्रूपुट, लेटेंसी, जिटर, पैकेट ड्रॉप दर तथा वीडियो स्ट्रीमिंग विलंब।

वॉयस सेवा – सारांश

  • कॉल सेटअप सफलता दर (CSSR):
    एयरटेल 99.62%, MTNL 28.52%, RJIL 99.81% और VIL 96.07% (ऑटो-सेलेक्शन मोड: 5G/4G/3G/2G)

  • कॉल सेटअप समय:
    एयरटेल 1.32 सेकंड, MTNL 4.71 सेकंड, RJIL 0.60 सेकंड और VIL 5.07 सेकंड

  • ड्रॉप कॉल दर:
    एयरटेल 0.00%, MTNL 22.47%, RJIL 0.56% और VIL 6.43%

  • कॉल साइलेंस/म्यूट दर:
    एयरटेल 2.25%, RJIL 1.12% और VIL 1.40% (पैकेट स्विच्ड नेटवर्क – 4G/5G)

  • मीन ओपिनियन स्कोर (MOS):
    एयरटेल 3.91, MTNL 2.67, RJIL 3.80 और VIL 4.44

डेटा सेवा – सारांश

  • औसत डाउनलोड स्पीड:
    एयरटेल 84.99 Mbps, MTNL 4.05 Mbps, RJIL 221.34 Mbps और VIL 49.79 Mbps

  • औसत अपलोड स्पीड:
    एयरटेल 25.86 Mbps, MTNL 1.11 Mbps, RJIL 32.82 Mbps और VIL 18.94 Mbps

  • लेटेंसी (50वां परसेंटाइल):
    एयरटेल 35.00 ms, MTNL 34.27 ms, RJIL 21.36 ms और VIL 14.91 ms

हॉटस्पॉट्स पर डेटा प्रदर्शन (Mbps में)

एयरटेल:
4G डाउनलोड 33.56 | 4G अपलोड 7.11
5G डाउनलोड 134.32 | 5G अपलोड 36.85

RJIL:
4G डाउनलोड 42.39 | 4G अपलोड 12.21
5G डाउनलोड 319.76 | 5G अपलोड 34.13

VIL:
4G डाउनलोड 28.97 | 4G अपलोड 12.44
5G डाउनलोड 51.52 | 5G अपलोड 21.72

नोट: MTNL में 4G और 5G तकनीक का अवलोकन नहीं किया गया।

परीक्षण क्षेत्र

परीक्षण में मुंबई के उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों जैसे नेवी नगर, कोलाबा, कफ परेड, दादर, धारावी, सायन, बांद्रा ईस्ट, कुर्ला, चेंबूर, घाटकोपर, मानखुर्द आदि शामिल थे।
इसके अतिरिक्त कलेक्टर ऑफिस चेंबूर, CSMT रेलवे स्टेशन, घाटकोपर रेलवे स्टेशन, केईएम अस्पताल, साकीनाका मेट्रो स्टेशन, वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान एवं संग्रहालय जैसे स्थिर स्थानों पर भी परीक्षण किया गया।

वॉक टेस्ट लोकमान्य तिलक टर्मिनस, टाटा मेमोरियल अस्पताल एवं वडाला स्टेशन (पूर्व) में किए गए।
लोकल रेलवे ड्राइव टेस्ट CSMT से खोपोली तक तथा
कोस्टल ड्राइव टेस्ट गेटवे ऑफ इंडिया से करंजा और वापसी मार्ग पर किया गया।

परीक्षण TRAI द्वारा अंशांकित उपकरणों एवं मानकीकृत प्रोटोकॉल के माध्यम से वास्तविक समय परिवेश में किए गए। विस्तृत रिपोर्ट TRAI की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी जानकारी/स्पष्टीकरण हेतु ब्रजेंद्र कुमार, सलाहकार (क्षेत्रीय कार्यालय, बेंगलुरु), TRAI से ईमेल adv.bengaluru@trai.gov.in अथवा दूरभाष +91-80-22865004 पर संपर्क किया जा सकता है।

वर्ष के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय की प्रमुख पहलें, उपलब्धियाँ एवं कार्यक्रम

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ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना

ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए PLI योजना ₹25,938 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (Advanced Automotive Technology – AAT) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने, लागत संबंधी चुनौतियों को दूर करने और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। यह योजना 15.09.2021 को स्वीकृत की गई थी तथा इसका कार्यकाल वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक है, जबकि प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइड्रोजन फ्यूल सेल कंपोनेंट्स पर 13%–18% तथा अन्य AAT कंपोनेंट्स पर 8%–13% तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। योजना के तहत 82 आवेदकों को स्वीकृति दी गई है, जिनसे लगभग ₹42,500 करोड़ का निवेश, ₹2,31,500 करोड़ की अतिरिक्त बिक्री तथा पाँच वर्षों में लगभग 1.48 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

30.09.2025 तक PLI–ऑटो योजना के अंतर्गत ₹35,657 करोड़ का संचयी निवेश और ₹32,879 करोड़ की संचयी बिक्री दर्ज की गई है तथा 48,974 लोगों को रोजगार मिला है।
वित्त वर्ष 2023–24 पहला प्रदर्शन वर्ष रहा, जिसके लिए ₹322 करोड़ का भुगतान वित्त वर्ष 2024–25 में किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024–25 के लिए ₹1,999.94 करोड़ के दावे वितरित किए गए हैं।

31.12.2025 तक कुल 13,61,488 इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान किया गया है, जिसमें ई-टू व्हीलर, ई-थ्री व्हीलर, ई-फोर व्हीलर और ई-बसें शामिल हैं। योजना के अंतर्गत न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) अनिवार्य है।

पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना

₹10,900 करोड़ के परिव्यय के साथ PM E-DRIVE योजना 29.09.2024 को शुरू की गई। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना तथा EV विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। इस योजना को 31.03.2028 तक बढ़ाया गया है, जबकि ई-2W और ई-3W के लिए अंतिम तिथि 31.03.2026 ही रहेगी।

31.12.2025 तक ₹1,703.32 करोड़ के दावे वितरित किए गए तथा 21,36,305 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे गए। ई-थ्री व्हीलर (L5) का लक्ष्य दिसंबर 2025 में ही प्राप्त कर लिया गया।

इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (SMEC)

यह योजना 15 मार्च 2024 को अधिसूचित की गई, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश आकर्षित करना, भारत को इलेक्ट्रिक कार विनिर्माण का केंद्र बनाना और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

पीएम ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना

28 अक्टूबर 2024 को अधिसूचित यह योजना ₹3,435.33 करोड़ के परिव्यय के साथ सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा ई-बस संचालन में भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लागू की गई है।

एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI योजना

₹18,100 करोड़ के परिव्यय के साथ 50 GWh घरेलू बैटरी विनिर्माण क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना से अब तक ₹2,878 करोड़ का निवेश और 1,118 रोजगार सृजित हुए हैं।

कैपिटल गुड्स सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना – चरण II

इस योजना के अंतर्गत प्रौद्योगिकी नवाचार, कौशल विकास, परीक्षण एवं प्रमाणन तथा उद्योग त्वरकों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक 29 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है।

अन्य प्रमुख पहलें

  • बैटरी स्टोरेज मांग पर राष्ट्रीय स्तर की गोलमेज बैठक

  • ई-मोटर्स पर चिंतन शिविर

  • पीएम ई-ड्राइव के अंतर्गत ई-ट्रकों को प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ

  • भारत–सऊदी अरब औद्योगिक सहयोग पर उच्चस्तरीय बैठक

  • विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 का सफल कार्यान्वयन

  • भारी उद्योग मंत्रालय की हिंदी पत्रिका “उद्योग भारती” के द्वितीय संस्करण का विमोचन


राष्ट्रीय खेल महासंघों में अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं खेलों में मेक इन इंडिया समितियों के गठन की सलाह

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युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय ने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को अपने-अपने संगठनों के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति तथा खेलों में मेक इन इंडिया समिति के गठन की सलाह दी है।

भारत की खेल क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गठित अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति संबंधित अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों (IFs) एवं महाद्वीपीय महासंघों (CFs) में हो रहे विकासक्रमों की निगरानी करेगी। इसमें प्रतियोगिता नियमों एवं संरचनाओं में बदलाव, शासन व्यवस्था, चुनाव, तथा खिलाड़ी-केंद्रित कार्यक्रमों से जुड़े पहलू शामिल होंगे।

यह समिति द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय समझौता ज्ञापनों (MoUs), संयुक्त प्रशिक्षण शिविरों, विनिमय कार्यक्रमों, ज्ञान-साझाकरण पहलों तथा भारत में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के अवसरों को शामिल करते हुए एक मध्यम अवधि की अंतरराष्ट्रीय सहयोग योजना भी तैयार करेगी।

समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सभी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ भारत सरकार की नीतियों, ओलंपिक चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय महासंघों के नियमों के अनुरूप हों, और साथ ही सुशासन, एंटी-डोपिंग अनुपालन एवं खिलाड़ी सुरक्षा के सिद्धांतों का पालन करें।

इसके अतिरिक्त, समिति अन्य राष्ट्रीय महासंघों तथा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करेगी, ताकि भारतीय खिलाड़ियों को सर्वोत्तम प्रशिक्षण अवसर और खेल विज्ञान से संबंधित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यह समिति अंतरराष्ट्रीय महासंघों एवं संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर समय पर बोली प्रक्रियाओं (bidding processes) में भागीदारी सुनिश्चित करेगी तथा भारत में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से संबंधित सभी प्रस्तावों को अग्रिम रूप से मंत्रालय के साथ साझा करेगी, ताकि आवश्यकतानुसार सूचना, परामर्श अथवा प्रचलित दिशानिर्देशों के तहत पूर्व स्वीकृति प्राप्त की जा सके।

खेलों में मेक इन इंडिया समिति भारतीय निर्माताओं, स्टार्ट-अप्स, अनुसंधान संस्थानों तथा परीक्षण एवं मानकीकरण निकायों के साथ समन्वय स्थापित करेगी, जिससे संबंधित खेलों में उत्पाद विकास, परीक्षण एवं प्रमाणन को बढ़ावा दिया जा सके। इसका उद्देश्य मेक इन इंडिया के अंतर्गत घरेलू खेल निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करना है।

यह समिति स्वदेशी समाधानों को अपनाने पर समय-समय पर रिपोर्ट भी तैयार करेगी, जिसमें हुई प्रगति, सामने आई चुनौतियाँ तथा महासंघ के विचारार्थ सिफारिशें शामिल होंगी, विशेष रूप से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत में योगदान के संदर्भ में।

अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के लिए:

इस समिति में महासंघ के वरिष्ठ सदस्य, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, कोच तथा वैश्विक खेल प्रशासन और कूटनीति में सिद्ध अनुभव रखने वाले विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति की संरचना एवं कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) का विवरण इस परामर्श जारी होने के 30 दिनों के भीतर मंत्रालय को सूचित किया जा सकता है।

खेलों में मेक इन इंडिया समिति के लिए:

इस समिति में महासंघ के वरिष्ठ सदस्य, तकनीकी विशेषज्ञ, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तथा खेल उपकरण, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण या मानकों के क्षेत्र में अनुभव रखने वाला कम से कम एक सदस्य शामिल होगा। समिति की संरचना का विवरण इस परामर्श जारी होने के 60 दिनों के भीतर मंत्रालय को सूचित किया जा सकता है।

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी

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दुल्हन की तरह सज रही है मोरध्वज नगरी आरंग 

आरंग- राजा मोरध्वज की नगरी के नाम से विख्यात आरंग इन दिनों उत्सव के रंग में रंगने तैयार है।  15 और 16 जनवरी को होने वाले राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 के स्वागत में नगर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। पूरे नगर में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल है। ऐसी लोक मान्यता है कि त्रेता में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और द्वापर में श्रीकृष्ण के चरण कमल आरंग की धरती पर पड़े थे। महोत्सव के लिए बन रहे भव्य मंच में राम और श्याम की झांकी आगंतुकों के मन को मोहने वाली है।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल को महोत्सव का आमंत्रण देते हुए मंत्री गुरू खुशवंत साहेब

महोत्सव का यह भव्य आयोजन कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के संयोजन में, सर्व समाज, नगर पालिका परिषद आरंग एवं विधानसभा क्षेत्र आरंग के जन-जन की भागीदारी से पहली बार भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत 2023 में पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में हुई थी। इस साल पहली बार आरंग में भव्य महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किया जा रहा है। आयोजन  की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। 

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने तैयारियों का जायजा लेने के बाद कहा कि आरंग छत्तीसगढ़ का प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी है। इसके पुरावैभव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जो सम्मान मिलना चाहिए, वह भूगर्भ में दफन है। गढ़ रींवा में पुरातात्विक खोदाई से यह स्पष्ट हो गया है कि आरंग का वैभवशाली इतिहास श्रीपुर (सिरपुर) से भी प्राचीन है।

गौरव को पुनर्स्थापित करने महोत्सव महत्वपूर्ण 

ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण  स्थान है। इसकी पहचान और गौरव को दूर-दूर तक प्रचारित करने में यह महोत्सव मील का पत्थर साबित होगा।  इस आयोजन को सभी के सहयोग से ऐतिहासिक बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आरंग  ऐसा नगर है, जहाँ भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों का पदार्पण हुआ। माता कौशल्या का जन्मस्थली भी इसी पावन धरती चंदखुरी में हुआ माना जाता है। बाबा गुरु घासीदास जी का “मनखे-मनखे एक समान” का अमर संदेश  उनकी कर्मभूमि भंडारपुरी धाम से निकलकर पूरी दुनिया में मानवता का प्रकाश फैला रहा है। नगर में शिद्ध शक्तिपीठ बाबा बागेश्वरनाथ महादेव सहित अनेक दिव्य स्वयंभू शिवलिंग हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मुख्यमंत्री सहित अनेक मंत्री होंगे महोत्सव में शरीक 

महोत्सव को लेकर आरंग नगर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। जगह-जगह बैनर, पोस्टर, रोशनी, झालर, तोरण और पताकाएँ लगाई गई हैं। पूरा आरंग उत्सव नगरी का रूप ले चुका है। जगह-जगह ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से उत्सव का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।

महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित  छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और निगम मंडल के पदाधिकारी  शिरकत करेंगे। सभी मंत्रियों और विधायकों को मंत्री गुरु खुशवंत साहेब स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं। नगर में सर्व समाज की बैठकें आयोजित कर जिम्मेदारियाँ तय की गई है। अतिथियों के सत्कार में कोई कमी न रहे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। 

राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव को लेकर नगरवासियों में अपार उत्साह है। आरंग एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ देश-प्रदेश का ध्यान आकर्षित करने को तैयार है।

राज्य के 8 युवाओं और एक संगठन को मिला छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान

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खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने युवाओं को किया सम्मानित

दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और समर्पण से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़े युवा –  विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य के आठ युवाओं तथा धमतरी जिले के युवा स्टार सेवा समिति खुरतुली को आज राष्ट्रीय युवा दिवस पर सम्मानित किया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आज रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित युवा रत्न सम्मान समारोह में सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया। 

मुख्यमंत्री साय ने आज स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर रायपुर में उनके बिताए समय का स्मरण करते हुए समारोह में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मात्र 31 वर्ष की आयु में दुनिया में भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और सभ्यता का मान और सम्मान बढ़ाया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य की उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है। हमारी युवा प्रतिभाओं को पोषित, पल्लवित और आगे बढ़ाने का काम हम कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम, समर्पण और संकल्प से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने को कहा। 

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का परचम पूरी दुनिया में फहराया था। आज करोड़ों युवा उनसे प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से युवा रत्न सम्मान के लिए आवेदन आए हैं, उससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सरकार ने इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बड़ी पहल करते हुए आज राज्य में पहली बार व्यक्तिगत क्षमता में सुधार तथा समाज सेवा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने राज्य की प्रतिभाओं को "युवा रत्न सम्मान" से नवाजा है। राज्य के 15 वर्ष से 29 वर्ष की आयु के प्रतिभाओं के उत्कृष्ट कार्यों एवं उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया है।


खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि युवा रत्न सम्मान के लिए राज्य के बहुत से सक्षम युवाओं के आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से अलग-अलग क्षेत्रों से एक-एक नाम का चयन बहुत मुश्किल था। राज्य के युवा कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम कर रहे हैं। उनके कार्यों को सम्मानित और रेखांकित करने के लिए विभाग ने इस वर्ष से ये सम्मान शुरू किए हैं। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल और खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक रश्मि  ठाकुर सहित अनेक विभागीय अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

राज्य के इन युवाओं को मिला युवा रत्न सम्मान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित समारोह में बेमेतरा के एस्ट्रोफिजिक्स में सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक एवं पीएचडी छात्र तथा एनएएसओ (NASO) ओलंपियाड में स्वर्ण पदक से सम्मानित पीयूष जायसवाल को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया। उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कांकेर की शिल्पा साहू, साहित्य के क्षेत्र से सरगुजा के अमित यादव, नवाचार के लिए महासमुंद की मृणाल विदानी तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए दुर्ग की परिधि शर्मा को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी बिलासपुर की संजू देवी को खेल, कवर्धा के सचिन कुनहरे को कला एवं संस्कृति और आरू साहू को लोककला में उत्कृष्ट कार्यों के लिए युवा रत्न सम्मान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता, साक्षरता, महिला उत्थान, सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति, मतदाता जागरूकता, जल स्रोतों के संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए धमतरी जिले के खुरतुली के युवा स्टार सेवा समिति को भी छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया।

मीडिया के सभी माध्यमों का प्रयोग कर जनसंपर्क अधिकारी अपने कार्य को बना सकते हैं प्रभावशाली: आयुक्त डॉ. रवि मित्तल

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एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम 

जनसम्पर्क की नई चुनौतियाँ: जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर- मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी एक्सक्लूजिव स्टोरी तैयार करें और इसके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी नेशनल और स्टेट लेवल पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा। आयुक्त डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में जनसम्पर्क की नई चुनौतियां विषय पर जनसम्पर्क अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला में उक्त बाते कहीं। 

आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि वर्तमान दौरे में जनसंपर्क में सूचना एवं जनसंपर्क का माध्यम बदल रहे हैं। नए-नए तकनीक आ रहे हैं, जनसंपर्क अधिकारियों को भी उन तकनीकों का उपयोग कर अपने कार्य को प्रमाणिक, बेहतर और समय सीमा में पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया का बखूबी उपयोग करना है, ताकि शासन की फैसलों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए अधिकारियों को नए टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना होगा। उन्होंने इस मौके पर पत्रकारिता स्कूल-कॉलेजों के बच्चों को भी जनसंपर्क विभाग में इंटरशीप का अवसर देने पर बल दिया। 

उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों में अपर संचालक जवाहरलाल दरियो, संजीव तिवारी, उमेश मिश्रा, आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनसंपर्क के लिए प्रभावी संवाद सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रतिभागियों को दो दिनों तक चलने वाले सत्रों की रूपरेखा और अपेक्षाओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को अधिक सशक्त, आधुनिक, संवेदनशील और उन्मुखी बनाना है।

कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत पाठक-अनुकूल लेखन सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बात को पहचानने, सरल और सुबोध भाषा के प्रयोग, प्रभावी हेडलाइन एवं लीड पैराग्राफ लिखने की जानकारी दी। साथ ही, प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट के समय मीडिया से संतुलित और समयबद्ध संवाद की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की।

द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के लिए आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट के महत्व की जानकारी दी।

तीसरे सत्र में सोशल मीडिया और एआई टूल्स के उपयोग पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ राकेश साहू ने  एआई डिजिटल टूल्स का उपयुक्त उपयोग कर फोटो, वीडियो एडिटिंग के बारे में  मार्गदर्शन दिया।

आज के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन तथा आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपकरणों की जानकारी दी। कार्यशाला में राज्यभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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