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Mahasamund : अवैध धान परिवहन पर संयुक्त टीम की कार्रवाई, कुल 230 कट्टा धान जप्त

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 महासमुंद : कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार जिले में अवैध धान परिवहन एवं भंडारण पर कार्रवाई तथा राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कार्य सतत जारी है। इसी क्रम में बीती रात एवं आज जिले में अवैध धान परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध सघन कार्रवाई कर 230 कट्टा धान जप्त किया गया।


सरायपाली विकासखंड अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनुपमा आनंद के नेतृत्व में संयुक्त टीम द्वारा कैदवा नवागढ़ क्षेत्र में माज़दा वाहन से परिवहन किए जा रहे 80 बोरे धान को पकड़कर कार्रवाई की गई तथा धान जब्त कर संबंधित थाना के सुपुर्द किया गया।

वहीं बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत डिप्टी कलेक्टर शुभम देव के नेतृत्व में जय अम्बे राइस मिल, तेन्दूकोना का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें 12,887 बोरा धान कम पाया गया। मामले की जांच जारी है। इसी क्रम में तेन्दूकोना में 80 कट्टा धान जब्त कर तेन्दूकोना थाना के सुपुर्द किया गया। इसके अलावा बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम चनाट में अवैध रूप से धान परिवहन करते हुए 70 पैकेट धान पकड़े गए, जिस पर मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

 

गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव का आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति  हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया।


उप सभापति  हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है।

उपसभापति  हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है।


मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं।

मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया।

उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।

आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

रायपुर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू, संजीव शुक्ला बने पहले कमिश्नर

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 रायपुर। रायपुर की पुलिस व्यवस्था के इतिहास में गुरुवार की रात एक नया अध्याय जुड़ गया। राज्य सरकार ने बड़े प्रशासनिक फैसले के तहत राजधानी रायपुर को उसका पहला पुलिस कमिश्नर दे दिया है।


गुरुवार देर रात जारी आदेश में बिलासपुर रेंज के आईजी आईपीएस संजीव शुक्ला को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का पहला कमिश्नर नियुक्त किया गया है। यह आदेश गृह (पुलिस) विभाग मंत्रालय के सचिव हिम शिखर गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी हुआ।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण एसपी की नियुक्ति

सरकार ने 2009 बैच के आईपीएस अमित तुकाराम कांबले को रायपुर का अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। वहीं रेल एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एसएसपी स्तर पर तबादले

रायपुर के एसएसपी लाल उम्मेद सिंह का तबादला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर किया गया है।
वहीं जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ भेजा गया है।

आईजी और एसपी स्तर पर बड़ा फेरबदल

जारी आदेश के अनुसार—

  • दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को बिलासपुर रेंज भेजा गया
  • अभिषेक शांडिल्य को राजनांदगांव से दुर्ग रेंज
  • बालाजी राव सोमावार को पुलिस मुख्यालय से राजनांदगांव रेंज
  • रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल को रेल एसपी बनाया गया

रायपुर कमिश्नरी में डीसीपी की पदस्थापना

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में निम्न अधिकारियों को पुलिस उपायुक्त (DCP) नियुक्त किया गया है—

  • उमेश प्रसाद गुप्ता – डीसीपी (मध्य)
  • संदीप पटेल – डीसीपी (पश्चिम)
  • मयंक गुर्जर – डीसीपी (उत्तर)
  • विकास कुमार – डीसीपी (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल)
  • स्मृतिक बघेरा – डीसीपी (क्राइम एवं साइबर)

इसके अलावा कुल 24 अधिकारियों की रायपुर कमिश्नरी में पदस्थापना की गई है।

पहले भी रायपुर में सेवाएं दे चुके हैं संजीव शुक्ला

आईपीएस संजीव शुक्ला इससे पहले रायपुर में एसपी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। स्थानीय प्रशासनिक अनुभव और मजबूत कार्यशैली के लिए उनकी पहचान है।
जनवरी 2027 में सेवानिवृत्ति के चलते उन्हें लगभग 11 माह का कार्यकाल मिलेगा, जिसमें कमिश्नरी व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

तालाब के पास पेड़ से लटका मिला महिला का शव, इलाके में हड़कंप

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रायपुर। रायपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नररैया तालाब परिसर में शुक्रवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक महिला का शव पेड़ से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह गार्डन में टहलने पहुंचे लोगों ने तालाब के पास एक पेड़ पर महिला को लटका देखा। पहले तो लोगों को संदेह हुआ, लेकिन पास जाकर देखने पर महिला की मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद तत्काल कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पंचनामा कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

मृत महिला की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है। फिलहाल महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई है, क्योंकि उसके पास से कोई पहचान पत्र बरामद नहीं हुआ है। पुलिस आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाल रही है।

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि महिला कब और कैसे तालाब परिसर पहुंची और घटना के समय वहां कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था या नहीं।

फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का यू-टर्न, अगले 48 घंटे बढ़ेगी ठंड

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 CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश में लगातार तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सुबह के समय ठंडक बढ़ रही है, जबकि दोपहर में हल्की गर्मी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 48 घंटों में प्रदेश में ठंड और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि उत्तर दिशा से आ रही सर्द हवाओं का असर तेज हो रहा है।


अगले 48 घंटे में बढ़ेगी ठंड

मौसम विभाग ने बताया कि उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिलों में न्यूनतम तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ में तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। ठंड के साथ हल्की धुंध देखने को मिल सकती है, हालांकि घने कोहरे की संभावना फिलहाल नहीं है।

तापमान का हाल

हाल के दिनों में प्रदेश में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.5 डिग्री अधिक रहा। वहीं दिन का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से ऊपर रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

25 साल का रिकॉर्ड टूटा

इस बार जनवरी का महीना छत्तीसगढ़ में खासा ठंडा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर छत्तीसगढ़ में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो बीते 25 वर्षों में दर्ज सबसे कम तापमानों में से एक माना जा रहा है। पूरे जनवरी माह में ठंड का असर सामान्य से कहीं अधिक रहा।

मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने, अलाव का सहारा लेने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट संभव है, ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है।

APEDA ने Gulfood 2026 में भारत की मजबूत और विस्तारित उपस्थिति के साथ बढ़ाई वैश्विक कृषि-खाद्य व्यापार में प्रतिष्ठा

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नई दिल्ली- कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत, Gulfood 2026 में एक विस्तृत और प्रभावशाली उपस्थिति के साथ भाग ले रहा है। इस बार भारत Gulfood 2026 का Partner Country है, जो भारत की वैश्विक कृषि-खाद्य व्यापार में बढ़ती भूमिका, विश्वसनीय स्रोत देश के रूप में प्रतिष्ठा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भारत की भागीदारी में बड़ा विस्तार

Gulfood 2026 में भारत की भागीदारी पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना बढ़ी है। भारतीय पवेलियन का आकार दोगुना हो गया है, जो भारतीय कृषि-खाद्य निर्यात के विस्तार, वैश्विक मांग में वृद्धि और निर्यातकों, संस्थानों एवं स्टार्टअप्स की भागीदारी में वृद्धि का संकेत है।

  • कुल प्रदर्शनी क्षेत्र: 1,434 वर्ग मीटर

  • प्रदर्शक: 161

  • श्रेणियाँ: प्रसंस्कृत खाद्य, ताजा और जमे हुए उत्पाद, दालें, अनाज, बीवरेज, वैल्यू-एडेड फूड, और कृषि-एक्सपोर्ट स्टार्टअप

25 राज्यों/क्षेत्रों से भागीदारी

भारत की विविध कृषि और क्षेत्रीय पहचान को प्रदर्शित करते हुए 25 राज्यों/क्षेत्रों के उत्पाद Gulfood 2026 में दिखाए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि।

इनमें GI-tagged, ऑर्गेनिक और वैल्यू-एडेड उत्पादों की भी प्रमुख प्रदर्शनी है, जो भारत के कृषि-उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय संस्थानों और सरकारी निकायों की भागीदारी

APEDA के साथ कई प्रमुख संस्थान और सरकारी निकाय भी Gulfood 2026 में शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • NAFED

  • National Cooperative Exports Limited

  • Spices Board India

  • Tea Board of India

  • National Turmeric Board

  • Indian Rice Exporters Federation (IREF)

  • IOPEPC

  • CAMPCO
    और कई अन्य संस्थाएँ।

BHARATI Pavilion: स्टार्टअप्स का प्रमुख मंच

APEDA का प्रमुख प्रयास BHARATI Pavilion है, जो Gulfood 2026 के Startup Zone में स्थित है। यह भारत के कृषि-खाद्य और कृषि-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर लाने का प्रयास है।

  • 8 स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया से चुना गया

  • 100+ आवेदकों में से चयन

  • स्टार्टअप्स अपनी नवोन्मेषी उत्पाद, टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान और निर्यात-सक्षम उत्पाद प्रस्तुत कर रहे हैं

कुलिनरी एरिया: भारतीय व्यंजनों की प्रस्तुति

भारतीय पवेलियन में एक विशेष Culinary Area भी है, जहां प्रसिद्ध शेफ लाइव कुकिंग डेमो के माध्यम से भारतीय व्यंजनों और मसालों की विविधता दिखा रहे हैं। यह क्षेत्र खरीदारों को भारत के स्वाद, संस्कृति और खाद्य परंपरा से जोड़ने का प्रमुख माध्यम है।

दाल, अनाज और अनाज-श्रेणी का विस्तृत प्रदर्शन

Gulfood 2026 में भारत के पल्सेस, ग्रेन्स और सीरियल्स का विशेष सेक्शन भी है, जिसमें भारत की विविध किस्में और गुणवत्ता प्रदर्शित की जा रही हैं। इससे भारत की वैश्विक बाजार में नेतृत्व स्थिति और आपूर्ति क्षमता का स्पष्ट संकेत मिलता है।

दो प्रमुख स्थानों पर भारत की मजबूत उपस्थिति

Gulfood 2026 दो प्रमुख स्थलों पर आयोजित हो रहा है:

  • Dubai Expo City (World Food Hall, Pulses, Grains & Cereals Hall, Gulfood Green)

  • Dubai World Trade Centre (DWTC) (Beverage Hall, Startup Hall और BHARATI Pavilion)

CEPA से बढ़ी संभावनाएँ

India–UAE CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) के तहत भारत और UAE के व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं। Gulfood 2026 में भारत की भागीदारी इस समझौते के अवसरों को और अधिक बढ़ा रही है, जिससे भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की बाजार पहुंच और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।

ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार

APEDA ने भारत की Partner Country स्थिति को ध्यान में रखते हुए दुबई में व्यापक ब्रांडिंग की है, जिसमें शामिल हैं:

  • मेट्रो स्टेशन ब्रांडिंग

  • बसों पर विज्ञापन

  • गैस स्टेशन पर ब्रांडिंग

  • पैनल विज्ञापन
    और अन्य प्रमुख आउटडोर स्थानों पर प्रचार

निष्कर्ष

Gulfood 2026 में भारत की विस्तारित और प्रभावशाली उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक कृषि-खाद्य बाजार में एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बन चुका है। APEDA के नेतृत्व में यह पहल भारतीय किसानों, निर्यातकों, और स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर अवसर प्रदान कर रही है और भारत के ‘Farm to Foreign’ दृष्टिकोण को साकार कर रही है।

यदि आप चाहें तो मैं इसी समाचार के लिए हैडलाइन, संक्षिप्त संस्करण (short news), या सोशल मीडिया पोस्ट भी बना सकता हूँ।

रायपुर में आज IND-NZ टी-20 मुकाबला, दर्शकों के लिए ट्रैफिक व्यवस्था तय

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 रायपुर। आज शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, रायपुर में भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 मुकाबला खेला जाएगा। मैच शाम 7 बजे से शुरू होगा। मुकाबले को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, वहीं दर्शकों की सुविधा के लिए विस्तृत ट्रैफिक रूट प्लान भी जारी किया गया है।


छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने इस बार स्टेडियम में प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि फर्स्ट इनिंग के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम में प्रवेश नहीं मिलेगा। दोनों टीमें 22 जनवरी को दोपहर 2:10 बजे चार्टर्ड विमान से रायपुर पहुंचीं। हालांकि वनडे मैच की तुलना में इस बार भीड़ अपेक्षाकृत कम देखी गई।

दर्शकों के लिए निर्धारित रूट और पार्किंग

रायपुर शहर से आने वाले दर्शक तेलीबांधा थाना तिराहा, सेरीखेड़ी ओवरब्रिज और नवा रायपुर मार्ग से होते हुए सत्य साईं अस्पताल एवं सेंध तालाब पार्किंग में वाहन खड़े कर पैदल स्टेडियम पहुंच सकेंगे।

वहीं बिलासपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग-भिलाई, महासमुंद, सरायपाली, जगदलपुर और धमतरी से आने वाले दर्शकों के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं, जिनसे होकर वे तय पार्किंग स्थलों तक पहुंचेंगे।

मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध

यातायात व्यवस्था के तहत 23 जनवरी को शाम 5 बजे से रात 1 बजे तक नवा रायपुर क्षेत्र के प्रवेश मार्गों पर मध्यम एवं भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

स्टेडियम में प्रतिबंधित वस्तुएं

सुरक्षा कारणों से स्टेडियम के भीतर शराब, सिगरेट, गुटखा, पानी की बोतल, टिफिन, छाता, बैट, चाकू, कांच की वस्तुएं, बैग, कैमरा, स्प्रे और अन्य संदिग्ध सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। केवल छोटे बच्चों के लिए सीमित खाने-पीने की सामग्री की अनुमति दी गई है।

प्रशासन ने दर्शकों से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों और पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें तथा सुरक्षा नियमों का पालन कर मैच का आनंद सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से लें।

CERT-In ने 2025 में साइबर सुरक्षा में दिखाई मजबूती, 29.44 लाख से अधिक घटनाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन

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नई दिल्ली-भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और बढ़ते साइबर खतरों के बीच, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने 2025 में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। CERT-In ने 2025 में 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया और देश की साइबर प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूती से स्थापित किया।

सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत काम करने वाली CERT-In, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कार्यरत है। यह राष्ट्रीय स्तर पर साइबर घटनाओं का नियंत्रण, जोखिम का आकलन, जागरूकता और सहयोग के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

2025 में CERT-In की प्रमुख उपलब्धियाँ

साइबर घटनाओं का प्रबंधन और चेतावनियाँ

  • 2025 में CERT-In ने 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं को संभाला।

  • 1,530 चेतावनियाँ (Alerts), 390 Vulnerability Notes और 65 Advisories जारी किए गए।

  • 29 Common Vulnerabilities and Exposures (CVEs) की पहचान और प्रकाशन किया गया।

साइबर सुरक्षा ऑडिट क्षमता में वृद्धि

  • CERT-In ने 231 प्रमाणित साइबर सुरक्षा ऑडिट संगठनों को सूचीबद्ध (Empanel) किया।

  • इससे सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की ICT प्रणाली की सुरक्षा और मजबूत हुई।

  • अधिकांश ऑडिट बैंकिंग, वित्त, पावर, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में किए गए।

क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण

  • CERT-In ने 32 विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम और 95 जागरूकता सत्र आयोजित किए।

  • 20,799 अधिकारियों और साइबर सुरक्षा पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया गया।

साइबर ड्रिल और तैयारी अभ्यास

  • 2025 में CERT-In ने 122 साइबर सुरक्षा ड्रिल और अभ्यास आयोजित किए।

  • इसमें लगभग 1,570 संगठनों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, वित्त, परिवहन, दूरसंचार और IT/ITeS क्षेत्र शामिल हैं।

सार्वजनिक जागरूकता

  • CERT-In ने 95 जागरूकता सत्र आयोजित किए, जिनमें 91,065 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

  • अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (NCSAM) के अंतर्गत “Cyber Smart Kids: Suraksha Guide” और वरिष्ठ नागरिकों के लिए “Cybersecurity Best Practices” जैसी गाइडबुक प्रकाशित की गई।

Cyber Swachhta Kendra (CSK): 98% डिजिटल आबादी को कवरेज

CERT-In द्वारा संचालित Cyber Swachhta Kendra (CSK) ने देश में साइबर स्वच्छता को बढ़ावा दिया है। दिसंबर 2025 तक CSK ने 98% डिजिटल आबादी को कवर किया है।

  • 1,427 संगठनों को CSK से जोड़ा गया।

  • 89.55 लाख से अधिक बार मालवेयर हटाने के उपकरण डाउनलोड किए गए।

CSK का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और मैलवेयर से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है।

वैश्विक स्तर पर मान्यता: भारत की साइबर सुरक्षा नेतृत्व क्षमता

CERT-In की निरंतर कार्यशैली और AI-आधारित खतरा पहचान तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंचों ने भी सराहा है।

  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने CERT-In के AI-आधारित खतरा पहचान और साइबर खतरे साझा करने के मॉडल की प्रशंसा की।

  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और WEF द्वारा प्रकाशित ‘Cyber Resilience Compass’ रिपोर्ट में CERT-In को महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बताया गया।

  • फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (ANSSI) द्वारा AI जोखिम आधारित दृष्टिकोण पर प्रकाशित रिपोर्ट में CERT-In को अंतरराष्ट्रीय साझेदार के रूप में शामिल किया गया।

निष्कर्ष

भारत की डिजिटल क्रांति के साथ साइबर खतरों में वृद्धि के बावजूद, CERT-In ने 2025 में अपने मजबूत और समन्वित सुरक्षा तंत्र से राष्ट्रीय साइबर प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया है। बड़े पैमाने पर घटनाओं का प्रबंधन, ऑडिटिंग, क्षमता निर्माण, जागरूकता और वैश्विक मान्यता ने CERT-In को भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति का केंद्र बनाया है।

सरकार की यह प्रतिबद्धता देश के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


एक जिला, एक उत्पाद: ग्रामीण कौशल से राष्ट्रीय गौरव तक

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मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • ODOP स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाकर पारंपरिक कला और कौशल को पुनर्जीवित करता है।

  • यह पहल पूरे देश में फैल चुकी है और 770 से अधिक जिलों को आर्थिक केंद्र में बदल चुकी है।

  • उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह पहल अब देश की सबसे प्रमुख स्थानीय आर्थिक परिवर्तन योजना बन चुकी है।

  • GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

परिचय: जहां से स्थानीय कला ने राष्ट्रीय क्रांति की शुरुआत की

उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद में सदियों से कारीगर पीढ़ियों से पीढ़ियों तक पीतल के बर्तन बनाते आए हैं। छोटे-छोटे कार्यशालाओं में काम करने वाले ये कारीगर अक्सर अपनी कला के बावजूद दुनिया से दूर रह जाते थे।

लेकिन 2018 में एक नई शुरुआत हुई। राज्य सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई एक अभिनव योजना के तहत मोरादाबाद के पीतल उद्योग को उस जिले की विशिष्ट पहचान के रूप में चुना गया—One District One Product (ODOP) के तहत।

यह विचार जितना सरल था, उतना ही क्रांतिकारी भी—हर जिले की एक विशिष्ट वस्तु को पहचान देना, उसे ब्रांडिंग, मार्केटिंग, संस्थागत समर्थन और visibility देना, और उस समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।

आज मोरादाबाद के हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर प्रदर्शित होते हैं। स्थानीय गौरव बढ़ा, आय में वृद्धि हुई और वह जिला आर्थिक दृष्टि से एक मॉडल बन गया।

मोरादाबाद एक अपवाद नहीं रहा; यह ODOP की बड़ी कहानी की पहली कड़ी बन गया। दिसंबर 2025 तक ODOP राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा चुकी है और 770 से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है, जिससे लाखों कारीगर, उद्यमी और किसान लाभान्वित हुए हैं।

जो शुरुआत उत्तर प्रदेश से हुई, वह अब देश की सबसे प्रशंसित स्थानीय आर्थिक परिवर्तन पहल बन चुकी है।

ODOP: विकास और समृद्धि का इंजन

संतुलित क्षेत्रीय विकास

ODOP का उद्देश्य हर जिले की विशिष्ट आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे विकसित करना है, ताकि क्षेत्रीय असंतुलन घटे और समावेशी विकास सुनिश्चित हो।

कारीगरों और उत्पादकों का सशक्तिकरण

ODOP किसानों, कारीगरों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादकों को आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

निर्यात को बढ़ावा

ODOP उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाकर निर्यात को बढ़ावा मिलता है।

संस्कृति और विरासत का संरक्षण

परंपरागत कला और शिल्प को संरक्षित करते हुए यह योजना सांस्कृतिक विरासत को भी बचाती है।

आर्थिक प्रभाव और रोजगार

ODOP ने स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक पहचान

ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और वैश्विक प्लेटफॉर्म के माध्यम से ODOP उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

जिलों को विकास का इंजन बनाना

ODOP को DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा संचालित किया जाता है। इसका लक्ष्य हर जिले की अनूठी आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।

इस पहल के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर जिला प्रशासन के साथ काम करते हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा क्षेत्र में उपलब्ध पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर उत्पाद चुने जाते हैं और DPIIT को सूची भेजी जाती है।

अब तक 1200 से अधिक ODOP उत्पाद DPIIT के डिजिटल पोर्टल पर सूचीबद्ध किए जा चुके हैं, जिनमें वस्त्र, खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प और खनिज शामिल हैं।

ई-कॉमर्स के जरिए बाजार विस्तार: GeM-ODOP बाज़ार

सरकार ने ODOP उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी पहुंच बढ़ाई है। GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को प्रदर्शित कर देश भर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: देश के लिए उदाहरण

ODOP की शुरुआत करने वाला उत्तर प्रदेश इस योजना के तहत सबसे बड़े बदलाव का अनुभव कर रहा है।

UPITS 2025 (Uttar Pradesh International Trade Show) में ODOP को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर ODOP को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की सफलता को सराहा।

ODOP पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए और ₹20.77 करोड़ के व्यापार सौदे हुए।

महाकुंभ 2025 में ODOP ने एक प्रमुख मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई। 6,000 वर्ग मीटर के प्रदर्शनी क्षेत्र में पूरे देश के कारीगरों ने अपनी कला दिखाई।

इसमें शामिल प्रमुख हस्तशिल्प:

  • बनारसी ब्रोकैड

  • कुशीनगर कालीन

  • फिरोजाबाद कांच

  • वाराणसी लकड़ी के खिलौने

  • धातु हस्तशिल्प

  • उत्तर प्रदेश के 75 GI टैग्ड उत्पाद (34 काशी क्षेत्र से)

उत्तर प्रदेश में ODOP के प्रभाव (Impact)

  • निर्यात में 76% वृद्धि, 2017-18 के ₹88,967 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.71 लाख करोड़

  • ODOP मार्जिन मनी योजना के तहत ₹6,000 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत

  • ODOP कौशल विकास और टूलकिट वितरण योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण दिए गए

PM Ekta Malls: कारीगरी की विरासत के प्रतीक

PM Ekta Malls (Unity Malls) ODOP, GI और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने के लिए विशेष रूप से बनाए जा रहे हैं। हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए स्थान आरक्षित किया जाएगा ताकि वे अपने उत्पादों को एक राष्ट्रीय मंच पर दिखा सकें।

मुख्य विशेषताएँ (Highlights)

  • सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग स्थान

  • ₹5,000 करोड़ का ब्याज रहित समर्थन, जिसमें हर राज्य को कम से कम ₹100 करोड़

  • 27 राज्यों में 29 Unity Malls को मंजूरी

  • आधुनिक सुविधाओं सहित आकर्षक वास्तुकला, अनुभव क्षेत्र, थिएटर, फूड कोर्ट

  • PPP मॉडल पर काम, राज्य की मालिकाना और पेशेवर प्रबंधन

  • ODOP को राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र और वैश्विक बाजार का मंच बनाना

ODOP का वैश्विक विस्तार

ODOP भारत के जिलों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाने में भी मदद कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?

  • ODOP वॉल SARAS Aajeevika Stores जैसे प्लेटफॉर्म पर जिला-विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करता है।

  • 80+ भारतीय मिशनों ने ODOP उत्पादों को विदेशों में प्रदर्शनों, स्टोरों या डिप्लोमैटिक गिफ्टिंग के माध्यम से बढ़ावा दिया है।

  • G-20 बैठकों में ODOP उत्पादों को उपहार के रूप में शामिल किया गया।

  • तीन अंतरराष्ट्रीय स्टोर्स में ODOP उत्पादों की बिक्री हो रही है:

    • सिंगापुर (Mustafa Centre और Kashmir Heritage)

    • कुवैत (Hakimi Centre)

निष्कर्ष: जिले की कहानी विश्व मंच पर चमक रही है

ODOP की कहानी भारत की कहानी है—वह कहानी जो पारंपरिक कारीगरी, जीवटता और आत्मनिर्भरता की है। मोरादाबाद के चमकते पीतल से लेकर PM Ekta Malls की शेल्फ तक, ODOP ने स्थानीय कौशल को राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक अवसर में बदल दिया है।

अब “एक जिला, एक उत्पाद” केवल एक योजना नहीं रह गई; यह लाखों आशाओं का प्रतीक बन चुकी है, जो अपने गाँव से निकलकर विश्व मंच पर चमक रही है। जैसे-जैसे नए बाजार खुलते हैं और PM Ekta Malls उभरते हैं, भारत की स्थानीय गलियाँ आत्मविश्वास के साथ दुनिया के मंच पर कदम रख रही हैं, और हर कारीगर के सपने साकार हो रहे हैं।


आपदा प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 की घोषणा

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नई दिल्ली- आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में असाधारण योगदान और निस्वार्थ सेवा के लिए सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) को संस्थागत श्रेणी में तथा लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के को व्यक्तिगत श्रेणी में सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया गया है।

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थापित यह वार्षिक पुरस्कार देश में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करने के उद्देश्य से दिया जाता है। यह पुरस्कार हर वर्ष 23 जनवरी, महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर घोषित किया जाता है।

आपदा प्रबंधन में देश ने किया उल्लेखनीय सुधार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों, शमन उपायों और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जानमाल के नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई है।

पुरस्कार 2026: चयन प्रक्रिया

वर्ष 2026 के लिए नामांकन 1 मई 2025 से आमंत्रित किए गए थे। इस पुरस्कार को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप देशभर से संस्थानों और व्यक्तियों की कुल 271 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। गहन मूल्यांकन के बाद विजेताओं का चयन किया गया।

व्यक्तिगत श्रेणी: लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के

भारतीय सेना की अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के ने वर्ष 2024 में केरल के वायनाड में आई बाढ़ और भूस्खलन के दौरान बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने नागरिक प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित निकासी, राहत सामग्री वितरण और आवश्यक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित की।

विपरीत मौसम और उच्च जोखिम की परिस्थितियों में उन्होंने कई साहसिक बचाव अभियानों का नेतृत्व करते हुए सैकड़ों नागरिकों की जान बचाई। उनके निर्देशन में चूरलमाला में 190 फीट लंबा बेली ब्रिज रिकॉर्ड समय में बनाया गया, जिससे दूरदराज के गांवों की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी बहाल हुई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने रात के समय केवल चार घंटे में एक अस्थायी पैदल पुल का निर्माण कर अभिनव इंजीनियरिंग समाधान प्रस्तुत किया।

लेफ्टिनेंट कर्नल शेल्के के नेतृत्व में 150 टन उपकरणों की तैनाती की गई, जिससे हजारों प्रभावित लोगों को समय पर राहत और पुनर्वास सहायता मिली। उन्होंने 2,300 से अधिक कर्मियों को आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय अभियानों का प्रशिक्षण भी दिया। उनका कार्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) में व्यावहारिक नेतृत्व और आपदा प्रबंधन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

संस्थागत श्रेणी: सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA)

वर्ष 2005 में स्थापित SSDMA ने सिक्किम में आपदा तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमताओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राधिकरण ने 1,185 प्रशिक्षित ‘आपदा मित्रों’ को तीन-स्तरीय ढांचे के तहत तैनात किया है—

  • ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन सहायक

  • ब्लॉक स्तर पर आपदा प्रबंधन पर्यवेक्षक

  • जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन समन्वयक

सभी ग्राम पंचायतों में आपदा प्रबंधन सहायक की तैनाती से सहभागितापूर्ण योजना, क्षमता निर्माण और पंचायत-स्तरीय समितियों को मजबूती मिली है।

2016 मंताम भूस्खलन और 2023 तीस्ता बाढ़ जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान SSDMA की रियल-टाइम समन्वय प्रणाली और प्रशिक्षित प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं ने 2,563 लोगों को सुरक्षित बचाने में अहम भूमिका निभाई और जानमाल के नुकसान को न्यूनतम किया।

SSDMA ने आपदा मित्र कार्यक्रम के माध्यम से एक समुदाय-केंद्रित, सतत और दोहराए जाने योग्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण मॉडल विकसित किया है, जो विशेष रूप से हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

निष्कर्ष

सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए चयनित ये दोनों विजेता देश में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में साहस, समर्पण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उनका कार्य न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि भविष्य की आपदा प्रबंधन नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा।


केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों, NABARD और RBI के कर्मचारियों व पेंशनर्स को वेतन-पेंशन में राहत

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नई दिल्ली- वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने और पेंशनर्स की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (PSGICs) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और NABARD के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन संशोधन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह निर्णय सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स के आर्थिक कल्याण और सम्मानजनक जीवन स्तर को सुनिश्चित किया जा रहा है।

PSGICs: वेतन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 1 अगस्त 2022 से वेतन संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत कुल वेतन बिल में 12.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिसमें मौजूदा मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। इस फैसले से 43,247 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

इसके अलावा, 1 अप्रैल 2010 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए एनपीएस (NPS) में सरकार के योगदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उनके भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

सरकार ने पारिवारिक पेंशन में भी सुधार करते हुए इसे 30 प्रतिशत की समान दर पर संशोधित किया है। इससे 15,582 में से 14,615 पारिवारिक पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।

वित्तीय प्रभाव:इस पूरे निर्णय से सरकार पर कुल ₹8,170.30 करोड़ का व्यय आएगा, जिसमें

  • ₹5,822.68 करोड़ वेतन एरियर,

  • ₹250.15 करोड़ एनपीएस योगदान,

  • ₹2,097.47 करोड़ पारिवारिक पेंशन पर खर्च होंगे।

PSGICs में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और एग्रीकल्चरल इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया शामिल हैं।

NABARD: वेतन और पेंशन में व्यापक सुधार

NABARD के ग्रुप ‘A’, ‘B’ और ‘C’ कर्मचारियों के लिए 1 नवंबर 2022 से वेतन और भत्तों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे करीब 3,800 वर्तमान और पूर्व कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

इसके साथ ही, 1 नवंबर 2017 से पहले सेवानिवृत्त NABARD पेंशनर्स, जिन्हें मूल रूप से NABARD द्वारा नियुक्त किया गया था, उनकी पेंशन को RBI-NABARD पेंशनर्स के समान कर दिया गया है।

वित्तीय प्रभाव:

  • वेतन संशोधन से वार्षिक वेतन बिल में लगभग ₹170 करोड़ की वृद्धि

  • एरियर के रूप में कुल ₹510 करोड़ का भुगतान

  • पेंशन संशोधन से ₹50.82 करोड़ का एकमुश्त एरियर

  • हर माह ₹3.55 करोड़ का अतिरिक्त पेंशन व्यय, जिससे 269 पेंशनर्स और 457 पारिवारिक पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।

RBI: पेंशन और पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनर्स की पेंशन में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई राहत पर 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।

इस संशोधन के बाद पेंशन में कुल मिलाकर 1.43 गुना प्रभावी बढ़ोतरी होगी, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मासिक आय में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इससे कुल 30,769 लाभार्थी, जिनमें 22,580 पेंशनर्स और 8,189 पारिवारिक पेंशनर्स शामिल हैं, लाभान्वित होंगे।

वित्तीय प्रभाव:इस फैसले से कुल ₹2,696.82 करोड़ का व्यय अनुमानित है, जिसमें

  • ₹2,485.02 करोड़ एकमुश्त एरियर

  • ₹211.80 करोड़ वार्षिक अतिरिक्त पेंशन व्यय शामिल है।

निष्कर्ष

इन निर्णयों से कुल मिलाकर लगभग 46,322 कर्मचारी, 23,570 पेंशनर्स और 23,260 पारिवारिक पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। यह कदम बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने, सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने और वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह देश के समावेशी और सतत आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्थाओं को निरंतर मजबूत करती रहेगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर दी श्रद्धांजलि, महाराष्ट्र की राजनीति को आकार देने वाले महान नेता को किया याद

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान जननेता बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने बालासाहेब ठाकरे को महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करने वाली एक प्रभावशाली और प्रेरणादायक शख्सियत बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे अपनी तेज़ बुद्धि, ओजस्वी वक्तृत्व कला और अडिग सिद्धांतों के लिए जाने जाते थे। उनके विचारों और व्यक्तित्व का जनता के साथ एक विशेष और सीधा जुड़ाव था, जो उन्हें एक असाधारण जननेता बनाता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि राजनीति के अलावा बालासाहेब ठाकरे को संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता के प्रति गहरा लगाव था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक कार्टूनिस्ट के रूप में की थी, जहाँ उनके चित्र समाज पर उनकी पैनी नज़र और विभिन्न मुद्दों पर निर्भीक टिप्पणी को दर्शाते थे। उनके कार्टून उस दौर की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का सशक्त प्रतिबिंब हुआ करते थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का संपूर्ण जीवन महाराष्ट्र के विकास और प्रगति के लिए समर्पित रहा। उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी शासन, समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपने विचार साझा करते हुए लिखा—

“महान बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर हम एक ऐसी महान विभूति को नमन करते हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से आकार दिया।

अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, प्रभावशाली वक्तृत्व और अडिग विचारों के लिए प्रसिद्ध बालासाहेब ठाकरे का जनता से एक अनूठा जुड़ाव था। राजनीति के साथ-साथ उन्हें संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता से गहरा प्रेम था। एक कार्टूनिस्ट के रूप में उनका करियर समाज पर उनकी पैनी दृष्टि और विभिन्न विषयों पर उनकी निर्भीक टिप्पणी को दर्शाता है।

हम महाराष्ट्र की प्रगति के लिए उनके दृष्टिकोण से अत्यंत प्रेरित हैं और उसे साकार करने के लिए सदैव प्रयासरत रहेंगे।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश से यह स्पष्ट होता है कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने समाज, संस्कृति और विचारधारा के स्तर पर भी गहरी छाप छोड़ी है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान के प्रतीक

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नई दिल्ली- नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान सेनानियों में से एक थे, जिनका जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने न केवल ब्रिटिश शासन को खुली चुनौती दी, बल्कि अपने क्रांतिकारी विचारों और संघर्षशील नेतृत्व से भारत की आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा प्रदान की।

प्रारंभिक जीवन

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक प्रतिष्ठित वकील थे, जबकि माता प्रभावती देवी धार्मिक और संस्कारवान महिला थीं। बचपन से ही सुभाष चंद्र बोस में असाधारण प्रतिभा, अनुशासन और देशभक्ति की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी।

उन्होंने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और बाद में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड गए और भारतीय सिविल सेवा (ICS) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन देश की आज़ादी के लिए उन्होंने यह प्रतिष्ठित नौकरी त्याग दी।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

भारत लौटने के बाद नेताजी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस से जुड़कर कार्य किया, लेकिन बाद में विचारों में मतभेद के कारण उन्होंने अलग मार्ग अपनाया। वे मानते थे कि भारत की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष आवश्यक है।

नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज (INA) का गठन कर अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ा। उनका प्रसिद्ध नारा —
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”
ने देशभर में क्रांति की ज्वाला जला दी।

आज़ाद हिंद सरकार और ऐतिहासिक योगदान

1943 में नेताजी ने सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की और भारत की स्वतंत्र सरकार का नेतृत्व किया। उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नाम शहीद और स्वराज रखा। INA के सैनिकों ने “दिल्ली चलो” का नारा देते हुए देश की सीमाओं तक पहुंचकर ब्रिटिश सत्ता को हिला दिया।

विचार और आदर्श

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन अनुशासन, त्याग और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक था। वे मानते थे कि सच्ची वीरता दूसरों की रक्षा में है। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

पराक्रम दिवस

नेताजी की जयंती 23 जनवरी को देशभर में पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन उनके अदम्य साहस, बलिदान और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा को स्मरण करने का अवसर है।

अमर विरासत

18 अगस्त 1945 को उनके निधन से जुड़ी परिस्थितियाँ आज भी रहस्य बनी हुई हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय इतिहास में अमर हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बना रहेगा।

नेताजी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—
देश सर्वोपरि है, और उसकी स्वतंत्रता के लिए हर बलिदान छोटा है।


श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया बसंत पंचमी का पावन पर्व, ज्ञान की देवी मां सरस्वती की हुई आराधना

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शहर में आज बसंत पंचमी का पावन पर्व हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा वातावरण पीले रंग की छटा में रंगा नजर आया। बसंत पंचमी को विद्या, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

प्रातःकाल से ही मंदिरों, विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्प, धूप-दीप अर्पित कर विद्या, विवेक और सफलता की कामना की। विद्यार्थियों ने पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की भी विधिवत पूजा की।

बसंत पंचमी के साथ ही वसंत ऋतु के आगमन का संदेश भी जुड़ा हुआ है। खेतों में लहलहाती सरसों, खिले फूल और सुहावना मौसम इस पर्व की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। पीले रंग के परिधानों और व्यंजनों ने पर्व को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और पतंगबाजी का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन समितियों और प्रशासन के सहयोग से सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए।

बसंत पंचमी का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता नजर आया।


मां की गोद से नवजात को उठाकर बंदर ने कुएं में फेंका, फिर....

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 जांजगीर-चांपा। जिले के सिवनी गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई। घर के आंगन में अपनी मां की गोद में बैठी 15 दिन की नवजात बच्ची को एक बंदर झपट्टा मारकर उठाकर ले गया और पास स्थित खुले कुएं में फेंक दिया। घटना इतनी अचानक हुई कि परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बंदर बच्ची को लेकर ओझल हो गया।


बच्ची के कुएं में गिरते ही मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद बच्ची को कुएं से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बताया जा रहा है कि नवजात ने डायपर पहन रखा था, जिससे वह पानी में पूरी तरह डूबने से बच गई और उसकी जान बच सकी। कुएं से बाहर निकालते ही बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत स्थिर बताई है। किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई है।

घटना के बाद गांव में भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों के आतंक पर नियंत्रण और खुले कुओं को सुरक्षित कराने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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