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मंदिर में शादी का झांसा, फिर दरिंदगी: एक दिन में दो बार रेप, आखिर में मौत, पढ़े पूरी खबर

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 जगतसिंहपुर (ओडिशा)। ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 23 वर्षीय युवती के साथ एक ही दिन में दो अलग-अलग आरोपियों ने दुष्कर्म किया और बाद में उसे चार मंजिला इमारत से नीचे फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।


पुलिस के अनुसार यह घटना 22 फरवरी की है। उस दिन सुबह करीब 10 बजे युवती अपने प्रेमी सोमनाथ ओझा के साथ घर से निकली थी। दोनों ने शादी करने की योजना बनाई थी। प्रेमी ने युवती को शादी का झांसा देकर जगतसिंहपुर स्थित सरला मंदिर बुलाया था।

मंदिर पहुंचने के बाद शादी करने के बजाय आरोपी उसे एक सुनसान जगह पर ले गया। वहां उसने युवती के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे रहमा बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो गया।

मदद के बहाने दूसरा आरोपी बना दरिंदा

घटना के बाद युवती रहमा बस स्टैंड पर काफी देर तक अकेली और परेशान हालत में खड़ी रही। इसी दौरान एक बाइक सवार युवक वहां पहुंचा, जिसकी पहचान झारखंड के धनबाद निवासी शुभम कुमार सिंह के रूप में हुई।

उसने युवती को अकेला देखकर मदद की पेशकश की और भरोसा दिलाया कि वह उसे सुरक्षित जगह पहुंचा देगा।

किराए के मकान में ले जाकर फिर किया दुष्कर्म

पुलिस के अनुसार आरोपी युवक युवती को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर पारादीप स्थित अपने किराए के मकान पर ले गया। वहां उसने युवती को मकान की छत पर ले जाकर उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया।

इसके बाद अपराध छिपाने और सबूत मिटाने की नीयत से आरोपी ने युवती को चार मंजिला इमारत की छत से नीचे धक्का दे दिया। नीचे गिरने से युवती की मौके पर ही मौत हो गई। अगले दिन सुबह युवती का शव बरामद किया गया।

भाई ने दर्ज कराई गुमशुदगी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 22 फरवरी की शाम जब युवती घर नहीं लौटी तो 23 फरवरी को उसके भाई ने तिरतोल पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

उसी दिन युवती का शव मिलने के बाद अस्वाभाविक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया। बाद में 25 फरवरी को भाई ने पारादीप मॉडल पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत देकर अपनी बहन के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया।

दोनों आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी प्रेमी सोमनाथ ओझा के खिलाफ बीएनएस की धारा 87, 75(2), 79, 69 और 64(2)(m) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वहीं दूसरे आरोपी शुभम कुमार सिंह पर बीएनएस की धारा 140(3), 103(1), 64(1), 64(2)(i) और 238 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं।

इलाके में आक्रोश, जांच जारी

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी सबूतों को जांच में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत में ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित

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भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 27 फरवरी 2026 को भारत के लिए ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित किए हैं। ये मानकनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयद्वारा जारी किए गए हैं। इन मानकों में उत्सर्जन की सीमा और पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करने पर अमोनिया और मेथनॉल को “ग्रीन” माना जाएगा, अर्थात् वे नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित किए गए हों।

ग्रीन अमोनिया के लिए मानक

भारत के लिए निर्धारित मानक के अनुसार ग्रीन अमोनिया में कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.38 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया (kg CO₂ eq/kg NH₃) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह गणना पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर की जाएगी।

ग्रीन मेथनॉल के लिए मानक

इसी प्रकार, ग्रीन मेथनॉल के लिए कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मेथनॉल संश्लेषण, शुद्धिकरण और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.44 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम मेथनॉल (kg CO₂ eq/kg CH₃OH) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह भी पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोत

अधिसूचना के अनुसार ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड निम्न स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है:

  • जैविक (Biogenic) स्रोत

  • Direct Air Capture (DAC)

  • मौजूदा औद्योगिक स्रोत

मंत्रालय समय-समय पर कार्बन डाइऑक्साइड के पात्र स्रोतों में संशोधन कर सकता है। ऐसे संशोधन भविष्य में लागू होंगे और उपयुक्त ग्रैंडफादरिंग प्रावधानों के साथ लागू किए जाएंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा की परिभाषा

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन में प्रयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा में वह बिजली भी शामिल होगी जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न होकर ऊर्जा भंडारण प्रणाली में संग्रहीत की गई हो या लागू नियमों के अनुसार ग्रिड के साथ बैंक की गई हो।

निगरानी और प्रमाणन

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग से जारी की जाएगी।

पहले से जारी निविदाएँ

अधिसूचना से पहले जारी की गई किसी भी टेंडर, बोली प्रक्रिया या निविदा पर उस समय लागू नियम और शर्तें लागू रहेंगी। हालांकि, यदि संभव हो और दोनों पक्ष सहमत हों, तो ऐसी निविदाओं को नए मानकों के अनुरूप भी बनाया जा सकता है।

उद्योग और निर्यात के लिए महत्व

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानकों की यह अधिसूचना उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी। यह उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने में सहायक होगी और भारत को ग्रीन ईंधनों के विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में मजबूत बनाएगी।

भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपर्स ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए निर्यात बाजारों को लक्ष्य बना रहे हैं। इन मानकों के जारी होने से भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों के लिए अपने नियामक ढांचे को और मजबूत किया है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: अधिकार, न्याय और कार्रवाई के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत

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नई दिल्ली- हर वर्ष International Women’s Day 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए इसका वैश्विक विषय “Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls” निर्धारित किया गया है, जो महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने, न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता के लिए ठोस कार्रवाई पर बल देता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। यह दिन लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को भी पुनः स्थापित करता है।

महिला अधिकारों की ऐतिहासिक यात्रा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के श्रमिक आंदोलनों से हुई। वर्ष 1917 में रूस में महिलाओं ने “रोटी और शांति” की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद 8 मार्च की तिथि को प्रतीकात्मक रूप से अपनाया गया। बाद में United Nations ने 1977 में इस दिवस को औपचारिक मान्यता दी।

आज यह दिवस दुनिया के अनेक देशों में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके अधिकारों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

“Give to Gain” वैश्विक अभियान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “Give to Gain” वैश्विक अभियान भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि जब व्यक्ति, संगठन और समाज मिलकर महिलाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, तो उससे समाज अधिक समावेशी और सशक्त बनता है।

भारत में महिला-नेतृत्व वाला विकास

भारत में विकास की अवधारणा समय के साथ “महिलाओं के लिए विकास” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” तक पहुंच गई है। अब महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति के प्रमुख प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है।

देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, सुरक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई पहलें महिलाओं के सशक्तिकरण को मजबूत कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह, उद्यमिता योजनाएँ और कौशल विकास कार्यक्रम महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यम निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं।

संविधान में लैंगिक समानता की गारंटी

भारत का संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और लैंगिक भेदभाव को निषिद्ध करता है।

  • अनुच्छेद 15 – धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।

  • अनुच्छेद 16 – सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करता है।

  • अनुच्छेद 39 – पुरुषों और महिलाओं के लिए समान आजीविका के अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।

  • अनुच्छेद 42 – मातृत्व राहत और मानवीय कार्य परिस्थितियों का प्रावधान करता है।

भारत ने स्वतंत्रता के समय से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू किया, जिससे महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान भागीदारी का अधिकार मिला।

शिक्षा और अवसरों का विस्तार

महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव शिक्षा से जुड़ी है। समग्र शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, और उच्च शिक्षा में विशेष सीटों जैसी पहलों ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया है।

उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में महिला सकल नामांकन अनुपात 22.9 से बढ़कर 30.2 हो गया।

Sukanya Samriddhi Yojana, जो Beti Bachao Beti Padhao अभियान के अंतर्गत 2015 में शुरू की गई, बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य के लिए बचत को प्रोत्साहित करती है। दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

स्वास्थ्य, पोषण और गरिमा

महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana के तहत मातृत्व सहायता प्रदान की जाती है।

  • Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के माध्यम से 10.56 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन महिलाओं को दिए गए हैं।

  • Jal Jeevan Mission के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल की उपलब्धता 16.72% से बढ़कर 81% से अधिक हो गई है।

  • Swachh Bharat Mission के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं।

इन प्रयासों से भारत में मातृ मृत्यु अनुपात 130 (2014-16) से घटकर 88 (2021-23) हो गया है।

सुरक्षा और न्याय

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Mission Shakti के तहत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और SHe-Box पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ स्थापित की गई हैं।

इसके अलावा Sexual Harassment of Women at Workplace Act 2013 कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करता है।

राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि

स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 73rd Constitutional Amendment Act और 74th Constitutional Amendment Act के माध्यम से पंचायतों और शहरी निकायों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं।

हाल ही में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।

आर्थिक सशक्तिकरण

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihood Mission के तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं।

  • Pradhan Mantri Mudra Yojana के तहत दिए गए ऋणों में लगभग 68% लाभार्थी महिलाएँ हैं।

  • Stand-Up India के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को सहायता मिली है।

इसके अतिरिक्त NaMo Drone Didi जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीकों से जोड़ रही हैं।

विकसित भारत 2047 की दिशा में नारी शक्ति

आज महिलाएँ उद्यमिता, विज्ञान, शासन, कृषि और तकनीक सहित अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से लेकर स्टार्ट-अप और स्थानीय शासन तक, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के विकास को अधिक समावेशी और सशक्त बना रही है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 इस परिवर्तन को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि अधिकार, न्याय और ठोस कार्रवाई के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी ही विकसित भारत 2047 की आधारशिला है।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर “शक्ति वॉक – #SheLeadsBharat” का आयोजन कर्तव्य पथ पर

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कल 8 मार्च 2026 को “शक्ति वॉक – #SheLeadsBharat” नामक महिला-नेतृत्व वाली पदयात्रा का आयोजन कर्तव्य पथ पर करेगा।

International Women’s Day, जो हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है, जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और योगदान का सम्मान करता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराता है। इसी भावना के साथ शक्ति वॉक का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एक प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को उजागर करना है।

शक्ति वॉक का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व और योगदान का उत्सव मनाना, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करना, महिलाओं के लिए चल रही प्रमुख सरकारी योजनाओं और पहलों को प्रदर्शित करना, विविध पृष्ठभूमि की महिलाओं के बीच एकजुटता और सामूहिक गर्व की भावना को बढ़ावा देना तथा यह संदेश देना है कि महिला-नेतृत्व वाला विकास राष्ट्रीय प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार है।

यह पदयात्रा सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक आयोजित की जाएगी और लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जो “इंडिया गेट से विजय चौक तक कर्तव्य पथ के मार्ग पर होगी।

इस कार्यक्रम में लगभग 3000 महिलाओं के भाग लेने की अपेक्षा है, जो 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल, सरकारी संस्थानों, उद्योग और जमीनी संगठनों की प्रतिनिधि महिलाएँ शामिल होंगी। प्रतिभागी #SheLeadsBharat विषय के अंतर्गत एक साथ पदयात्रा करेंगे, जो एक प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करेगा।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की महिला अधिकारी भी इसमें भाग लेंगी। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी देखने को मिलेगी।

इस पदयात्रा का नेतृत्व महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा, जिनमें केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, संसद सदस्य, विधायक तथा विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट महिला नेता और प्रमुख हस्तियाँ शामिल होंगी।

कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों के संक्षिप्त संबोधन से होगी, जिसके बाद पदयात्रा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।

कर्तव्य पथ पर महिलाओं के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली विशेष स्थापनाएँ (इंस्टॉलेशन) भी प्रदर्शित की जाएंगी।

इंडिया गेट पर एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जो नारी शक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना का उत्सव मनाएगी। इसमें डोल्लू कुनीथा, कलारीपयट्टू, श्रृंगारिमेलम, रनचंडी और घूमर जैसे पारंपरिक प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और महिलाओं की शक्ति को दर्शाती हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से होगी। इस अवसर पर “Shakti Walk – #SheLeadsBharat” संदेश वाले गुब्बारे भी आकाश में छोड़े जाएंगे।

ये समारोह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मानेकशॉ सेंटर में राष्ट्रीय समारोह आयोजित होगा

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भारत सरकार कल 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उत्सव मना रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक राष्ट्रीय स्तर का समारोह आयोजित करेगा, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जो हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान करता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती कार्यबल भागीदारी को प्रदर्शित किया जाएगा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख नीतियों और योजनाओं को भी दिखाया जाएगा।

इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य संबोधन (Keynote Address) देंगी।

इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी सभा को संबोधित करेंगी और देश में महिला-नेतृत्व वाले विकास को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों और पहलों पर प्रकाश डालेंगी।

उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम में दो पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।

  • पहली पैनल चर्चा का विषय होगा “लेबर कोड्स – महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा”।

  • दूसरी पैनल चर्चा “स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ उद्यमी के रूप में” विषय पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में लगभग 1000 महिलाओं के भाग लेने की अपेक्षा है, जो 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल तथा अन्य क्षेत्रों की प्रतिनिधि महिलाएँ शामिल होंगी। यह देशभर में महिलाओं के विविध योगदान और भारत सरकार की महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह कार्यक्रम लाइव वेबकास्ट के माध्यम से भी देखा जा सकेगा:


25 मार्च से 06 अप्रैल तक होगा ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का होगा आयोजन

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 रायपुर : प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और जनजातीय अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026’ का आयोजन 25 मार्च से 06 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर, सरगुजा और बस्तर के खेल मैदानों में होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक लेकर इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 न केवल वनांचल के खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच बनेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना, प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं की स्वीकृति एवं निर्माण, खेलो इंडिया की केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन, खेल अकादमियों की गतिविधियों, खेल अलंकरण, युवा महोत्सव और आगामी कार्ययोजना की भी समीक्षा की। उन्होंने विगत वर्षों में स्वीकृत वृहद एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अधोसंरचना परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ की मेजबानी छत्तीसगढ़ को प्रदान की गई है। इस आयोजन में कुल 7 प्रतिस्पर्धात्मक और 2 प्रदर्शनात्मक खेल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, स्वीमिंग और कबड्डी (डेमो), सरगुजा में कुश्ती एवं मलखम्ब (डेमो) तथा बस्तर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस प्रतियोगिता में देश के लगभग 30 राज्यों से करीब 2500 खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही मलखम्ब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखम्ब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में एक लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक स्तर के खेल आयोजनों के माध्यम से राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

बैठक में मुख्य सचिव विकाश शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक खेल तनुजा सलाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मिडिल ईस्ट जंग के बीच महंगा हुआ LPG सिलेंडर, घरेलू गैस ₹60 और कमर्शियल ₹115 तक बढ़े दाम

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 LPG Cylinder : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आम लोगों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। देश में एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये का इजाफा हुआ है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर 115 रुपये तक महंगा हो गया है। नई कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं।


रसोई गैस सिलेंडर के नए दाम

नई दरों के अनुसार अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये में मिलेगा, जिसकी कीमत पहले 853 रुपये थी। मुंबई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 852.50 रुपये से बढ़कर 912.50 रुपये हो गई है।

इसी तरह चेन्नई में सिलेंडर के दाम 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गए हैं, जबकि कोलकाता में घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब 939 रुपये में मिलेगा, जो पहले 879 रुपये था।

कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा

घरेलू गैस के साथ ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 1883 रुपये में मिलेगा।

मुंबई में इसकी कीमत बढ़कर 1835 रुपये, कोलकाता में 1990 रुपये और चेन्नई में 2043.50 रुपये हो गई है।

पहले भी बढ़ चुके हैं दाम

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इससे पहले भी बढ़ोतरी हो चुकी है। 1 मार्च को दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 28 रुपये महंगा हुआ था, जबकि अन्य महानगरों में इसकी कीमत करीब 31 रुपये तक बढ़ी थी। इसके अलावा 1 फरवरी को भी 19 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

वहीं घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत पिछले साल अप्रैल से स्थिर बनी हुई थी। 8 अप्रैल 2025 को घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 50 रुपये बढ़ाए गए थे। अब एक बार फिर 60 रुपये की बढ़ोतरी से आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

अपने पुत्र के जन्मदिन के अवसर पर पालक ने स्कूल में कराया न्योता भोज

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आरंग-  विकास खंड -आरंग के संकुल केन्द्र -सेमरिया (समोदा) के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया (परसदा)में दिनांक 5 मार्च 2026 दिन -गुरुवार को पालक टिकेश्वर साहू और टिकेश्वरी साहू ने अपने पुत्र कुणाल साहू कक्षा पहली के जन्मदिन के अवसर पर स्कूल में न्योता भोज कराया गया।  यह किसी पालक के द्वारा स्कूल में कराया गया पहला न्योता भोज कार्यक्रम है। इससे पहले स्कूल के शिक्षक/शिक्षिका के द्वारा ही स्कूल में न्योता भोज कराया गया था।इस न्योता भोज से  कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी बच्चे बहुत उत्साहित नजर आये। टिकेश्वर एवं टिकेश्वरी साहू एवं उनके सपरिवार के द्वारा खीर,पुड़ी, केक, भजिया, टमाटर चटनी वितरित कर अपने बच्चे का जन्मदिन भारी उत्साह , उमंग एवं भव्यता के साथ मनाया गया।इस अवसर पर ग्राम पंचायत सेमरिया के सरपंच कुमारी साहू, उपसरपंच अश्वनी साहू,शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रुपेन्द्र सिन्हा, उपाध्यक्ष पूर्णिमा देवांगन,खुमेश साहू, सोमनाथ साहू, एसकुमार साहू,खुलेश साहू,गैंदलाल साहू, रोशनी सिन्हा,नीरा साहू,सेवती साहू,रामेश्वरी साहू एवं विद्यालय के शिक्षक/शिक्षिकाएं उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे लखपति दीदियों से संवाद

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में रायपुर में आयोजित होगा ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम

रायपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा 7 मार्च 2026 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर प्रदेश भर से हजारों लखपति दीदियां कार्यक्रम में भाग लेंगी। 

मुख्यमंत्री साय इन महिलाओं से संवाद करते हुए उनकी सफलता की कहानियां सुनेंगे और शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी प्राप्त करेंगे। यह कार्यक्रम महिलाओं के आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के करकमलों से लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया जाएगा। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी ग्राम पोर्टल’ का शुभारंभ भी किया जाएगा। इन प्रकाशनों के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्राओं को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रदेश भर से उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया जाएगा। यह आयोजन महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित करेगा और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा।

होली पर किसानों के खातों में राशि अंतरण से दोगुनी हुई तिहार की खुशी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


समारोह के दौरान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग, रमेश ठाकुर, भागीरथी यादव, मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।


यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री साय ने वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह बघेल, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन होनहार बेटे-बेटियों की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

छत्तीसगढ़ में पहली बार अफीम की खेती पकड़ी गई, पुलिस ने मारा छापा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफीम की गुप्त खेती का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ज्वार की फसल के बीच चोरी-छिपे अफीम उगाई जा रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने छापा मारकर करीब डेढ़ एकड़ खेत में लगी अफीम की फसल को जब्त कर लिया।


जानकारी के अनुसार यह मामला Samoda Village का है, जो Jevra Sirsa चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को खेत में छापेमार कार्रवाई की। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने पाया कि करीब डेढ़ एकड़ खेत में अफीम की फसल बोई गई थी।

सबसे खास बात यह रही कि अफीम की खेती को छिपाने के लिए खेत के चारों तरफ ज्वार की फसल लगाई गई थी, ताकि किसी को शक न हो और खेती सामान्य दिखाई दे।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने खेत के मालिक से भी पूछताछ की। खेत मालिक ने बताया कि उसने अपनी जमीन लीज पर दी थी और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि वहां अफीम की खेती की जा रही है। बताया जा रहा है कि खेत में काम करने वाले मजदूर Khandwa के रहने वाले हैं। फिलहाल पुलिस ने Vinayak Tamrakar को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है। तहसीलदार और आरआई की मौजूदगी में आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं गांव में अफीम की खेती की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी तरह से सोची-समझी योजना के तहत अफीम की खेती की जा रही थी।

मामले में Manishankar Chandra (एएसपी) ने बताया कि समोदा गांव में अफीम की खेती की सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और संदिग्ध से पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि दुर्ग जिले में अफीम की खेती का यह पहला मामला सामने आया है।

छत्तीसगढ़ में दर्दनाक सड़क हादसा: बस-ट्रक की टक्कर में 4 की मौत, कई घायल

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 CG Accident : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच रायपुर–बिलासपुर नेशनल हाईवे National Highway 130 पर शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से यात्री बस को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक यात्री घायल हो गए।


जानकारी के अनुसार यह हादसा Simga थाना क्षेत्र के Darchura Village के पास सुबह करीब 11 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि बिलासपुर की ओर जा रही यात्री बस को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में सवार कई यात्री अंदर ही फंस गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों का इलाज जारी है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर  : प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव  उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। 

बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।

मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ओडिशा के मुंडाली में CISF के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए गृह मंत्री अमित शाह, जवानों की भूमिका की सराहना

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ओडिशा के मुंडाली में आयोजित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 57वें स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने CISF के तीन आवासीय परिसरों—कामरूप, नासिक और सीहोर—का शिलान्यास किया, जिनका निर्माण लगभग 890 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। साथ ही राजारहाट और दिल्ली में बने दो आवासीय परिसरों का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान,मोहन चरण माझी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि 56 वर्षों की यात्रा में CISF ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है, जो बल की समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की कहानी है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए औद्योगिक विकास आवश्यक है, और औद्योगिक विकास के लिए मजबूत औद्योगिक सुरक्षा बल की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि CISF ने समय के साथ हर चुनौती से सीखते हुए खुद को आधुनिक बनाया है, जबकि अपनी परंपराओं को भी जीवित रखा है। आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस होकर CISF हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत के औद्योगिक विकास की कल्पना CISF के बिना संभव नहीं है, क्योंकि यह बल हमेशा देश की सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में देश के सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी CISF को सौंपने का निर्णय लिया है।

अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो महत्वपूर्ण संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना और 2027 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना लक्ष्य है, जिसमें CISF एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि CISF के जवानों के बलिदान ने देश की आर्थिक मजबूती में बड़ा योगदान दिया है। पिछले 56 वर्षों में बल को 13,693 से अधिक वीरता और विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुए हैं, जो इसकी दक्षता और समर्पण का प्रमाण हैं।

गृह मंत्री ने बताया कि आज CISF देश के 70 हवाई अड्डों और 361 महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा कर रहा है। इसके अलावा ड्रोन सुरक्षा के लिए भी CISF को नोडल एजेंसी बनाया गया है। हाल के समय में कार्तव्य भवन, सेवा तीर्थ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट, लेंगपुई एयरपोर्ट, जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और भाखड़ा डैम जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा भी CISF को सौंपी गई है।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियानों में CISF ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल्द ही देश पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त होगा और सुरक्षा बल देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

यह समारोह CISF की गौरवशाली परंपरा, आधुनिक क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उसके अटूट समर्पण का प्रतीक रहा। 


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