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मुख्यमंत्री के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से परसा में बनेंगे नए स्कूल भवन

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी की पहल पर रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बैरागी के आश्रित ग्राम परसा में प्राथमिक और माध्यमिक शाला के नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से दोनों भवनों के लिए कुल 33 लाख 90 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।


नए भवन बनने से गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर और सुविधायुक्त स्थान मिलेगा। यह पहल वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा के अवसर और आधारभूत सुविधाएं मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्राथमिक शाला के लिए 14.30 लाख, माध्यमिक शाला के लिए 19.60 लाख स्वीकृत

नवीन प्राथमिक शाला भवन के निर्माण के लिए 14 लाख 30 हजार रुपये और नवीन माध्यमिक शाला भवन के लिए 19 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। दोनों कार्यों को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है। यह स्वीकृति डीएमएफ शासी परिषद की 11 मई 2026 को हुई बैठक के निर्णय के अनुरूप जारी की गई है। निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपी गई है।

डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को बढ़ावा दिया जा रहा है। परसा में स्कूल भवनों का निर्माण इसी उद्देश्य के अनुरूप किया जाएगा।

निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा पर रहेगी नजर

जिला प्रशासन ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण शुरू होने से पहले, कार्य के दौरान और पूरा होने के बाद स्थल के फोटो लेना अनिवार्य होगा। कार्यस्थल पर सूचना फलक लगाया जाएगा, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि तथा निर्माण शुरू होने और पूरा होने की तिथि दर्ज रहेगी।

निर्माण एजेंसी को हर महीने की 5 तारीख तक कार्य की प्रगति रिपोर्ट डीएमएफ को भेजनी होगी। साथ ही, निर्माण कार्य स्वीकृत राशि के भीतर ही पूरा करना होगा।

पत्नी को शिवनाथ नदी में धक्का देकर हत्या करने का आरोप, पति गिरफ्तार; जेल भेजा गया

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 राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पत्नी की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि घरेलू विवाद के दौरान पति ने अपनी पत्नी को शिवनाथ नदी में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना 21 अक्टूबर की शाम मोहारा नदी के छोटे पुलिया के पास की बताई जा रही है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे न्यायिक प्रक्रिया के बाद जिला जेल भेज दिया है।


विवाद के बाद पत्नी को नदी में दिया धक्का

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान मयूर मेश्राम उर्फ रिंकू के रूप में हुई है। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर विवाद होता था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई। इसी दौरान गुस्से में आकर आरोपी ने कथित तौर पर अपनी पत्नी को शिवनाथ नदी में धक्का दे दिया। इस घटना में महिला की जान चली गई।

मृतका के भाई की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

घटना के बाद मृतका के भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर बसंतपुर थाना पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

न्यायालय में पेशी के बाद जिला जेल भेजा

पुलिस ने आरोपी मयूर मेश्राम उर्फ रिंकू को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से जेल वारंट जारी होने के बाद आरोपी को जिला जेल राजनांदगांव भेज दिया गया है। मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी है।

कवर्धा में पांच बैगा बच्चों की मौत से चिंता, जांच के लिए गांव पहुंची कांग्रेस की टीम; स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल

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छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांव नंदनी कुमान में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। मामले की पड़ताल के लिए प्रदेश कांग्रेस की छह सदस्यीय जांच टीम शुक्रवार को प्रभावित गांव पहुंची। टीम ने मृत बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई।

कांग्रेस ने बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, बच्चों की मौत का वास्तविक कारण अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुआ है। इसलिए किसी बीमारी, कुपोषण या विभागीय लापरवाही को मौतों का निश्चित कारण बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।

चार महीने में पांच बच्चों की मौत से बढ़ी चिंता

प्राप्त समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कबीरधाम जिले के रेंगाखार वनांचल क्षेत्र के नंदनी कुमान गांव में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की मौत हुई है। इन घटनाओं के बाद गांव में बच्चों के स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर चिंता सामने आई है।

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य जांच के दौरान गांव के कई बच्चों को उपचार के लिए बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। कुछ रिपोर्टों में 16 से 17 बच्चों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी दी गई है। 

कांग्रेस की जांच टीम में कौन-कौन शामिल रहे?

लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार, गांव पहुंची छह सदस्यीय टीम में कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:

  • इंदर साव मंडावी — विधायक, मोहला-मानपुर

  • सावित्री मनोज मंडावी — विधायक, भानुप्रतापपुर

  • जनक ध्रुव — विधायक, बिंद्रानवागढ़

  • हर्षिता बघेल — विधायक, डोंगरगढ़

  • ममता चंद्राकर — पूर्व विधायक

टीम ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर मामले से संबंधित जानकारी जुटाई।

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे कारण हो सकते हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष उठाने की बात भी कही है। ये कांग्रेस के आरोप और मांगें हैं

प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें गांव में पहुंचकर बच्चों की जांच और परिवारों का सर्वे कर रही हैं।

प्रमुख गतिविधियां:

  • बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जांच।

  • प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाना।

  • जरूरतमंद बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में उपचार और निगरानी के लिए भेजना।

  • बच्चों की पुरानी चिकित्सा जानकारी और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 16 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि मौतों के कारणों पर निष्कर्ष निकालने से पहले चिकित्सकीय जानकारी और अन्य तथ्यों की जांच जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल: पांच बच्चों की मौत कैसे हुई?

फिलहाल तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं:

  1. क्या बच्चों की मौत किसी बीमारी, कुपोषण या अन्य चिकित्सकीय कारण से हुई?

  2. क्या बच्चों को समय पर जांच और उपचार मिल पाया था?

  3. क्या स्वास्थ्य सेवाओं या सरकारी योजनाओं में कोई ऐसी कमी थी, जिसे दूर करके भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है?

इन सवालों का उत्तर आधिकारिक चिकित्सकीय जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

निष्कर्ष: कबीरधाम जिले के नंदनी कुमान गांव में पांच बैगा बच्चों की मौत गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस की जांच टीम गांव पहुंचकर अपनी पड़ताल कर चुकी है। अब मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाना, प्रभावित बच्चों को उचित उपचार देना और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण है।


अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का अहम फैसला: भाई की आपत्ति से दूसरे भाई का दावा खारिज नहीं होगा, नगर निगम का आदेश निरस्त

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले बेटे का दावा केवल दूसरे भाई की आपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। संबंधित विभाग को लागू नियमों और नियुक्ति नीति के अनुसार सभी तथ्यों की जांच करके उचित निर्णय लेना होगा।

जस्टिस बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने भिलाई-चरोदा नगर निगम द्वारा 15 अप्रैल 2025 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने निगम को मामले में नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने आदेश के निरस्त होने से याचिकाकर्ता को अपने आप अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित साउथ वसुंधरा नगर निवासी खिलेश्वर प्रसाद से जुड़ा है। उनके पिता परस राम भिलाई-चरोदा नगर निगम में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। 29 सितंबर 2023 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था।

पिता की मृत्यु के बाद परिवार के सामने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया।

29 सितंबर-2023, पिता का निधन

परस राम का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया।

4 दिसंबर-2023, खिलेश्वर ने किया आवेदन

पिता की मृत्यु के बाद खिलेश्वर प्रसाद ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए नगर निगम में आवेदन प्रस्तुत किया।

15 जुलाई-2024, दूसरे भाई ने जताई आपत्ति

दुमेश कुमार टंडन ने खिलेश्वर के आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराई और स्वयं भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा प्रस्तुत किया।

15 अप्रैल-2025, नगर निगम ने आवेदन खारिज किया

खिलेश्वर के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

घटनाक्रम प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के आधार पर।

हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने क्या दलीलें दीं?

याचिकाकर्ता की ओर से: खिलेश्वर की ओर से दलील दी गई कि दूसरे भाई की आपत्ति मात्र के आधार पर उनके आवेदन को खारिज करना उचित नहीं है। सक्षम प्राधिकारी की जिम्मेदारी थी कि वह लागू नियमों के अनुसार आवेदन पर विचार करता और कारण सहित निर्णय देता।

नगर निगम और दूसरे भाई की ओर से: परिवार में विवाद, सहमति और अनुकंपा नियुक्ति नीति में निर्धारित शर्तों का हवाला दिया गया। दूसरे भाई ने भी स्वयं को बेरोजगार और दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित बताते हुए नियुक्ति का दावा किया था।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

हाईकोर्ट ने मामले में निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. भिलाई-चरोदा नगर निगम का 15 अप्रैल 2025 का आदेश निरस्त किया जाए।

  2. दोनों भाइयों को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।

  3. सक्षम प्राधिकारी यह जांच करे कि दूसरे भाई ने भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए अलग से आवेदन दिया है या नहीं।

  4. लागू नीति में दावेदारों की पात्रता और प्राथमिकता के संबंध में क्या प्रावधान हैं, इसकी जांच की जाए।

  5. सभी तथ्यों और नियमों पर विचार करके आठ सप्ताह के भीतर कारण सहित नया निर्णय लिया जाए।

अदालत ने परिवार की विधवा की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत सहमति संबंधी शपथपत्र पर भी विचार करने को कहा। हालांकि, केवल इस सहमति के आधार पर दूसरे पात्र दावेदार का दावा स्वतः समाप्त नहीं माना जा सकता।

क्या अब खिलेश्वर प्रसाद को नौकरी मिल जाएगी?

नहीं, अभी नियुक्ति का अंतिम आदेश नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने नगर निगम के पुराने आदेश को रद्द करके नए सिरे से निर्णय लेने को कहा है। इसका अर्थ यह है कि खिलेश्वर के दावे पर दोबारा विचार होगा, लेकिन नियुक्ति मिलेगी या नहीं, यह लागू नीति और पात्रता की जांच के बाद तय होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों से राहत देना है।

इस फैसले का क्या महत्व है?

यह फैसला बताता है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में विभाग को पारिवारिक विवाद या किसी दूसरे सदस्य की आपत्ति के आधार पर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए। उसे संबंधित नीति, पात्रता, प्राथमिकता और सभी पक्षों के दस्तावेजों पर विचार करना होगा।

हालांकि, यह फैसला सभी मामलों में नियुक्ति की गारंटी नहीं देता। प्रत्येक मामले का निर्णय संबंधित विभाग पर लागू नियमों और परिस्थितियों के अनुसार ही होगा।


रामचंडी दिवस-2026 में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गढ़फुलझर में होगा कार्यक्रम

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज शनिवार, 24 अक्टूबर को महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम गढ़फुलझर के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री यहां श्री श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर परिसर में आयोजित ‘रामचंडी दिवस-2026’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस अवसर पर धार्मिक आयोजन के साथ कोलता समाज का वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने तैयारियां की हैं। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने पहले ही कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।

मुख्यमंत्री का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

11:30-सुबह, रायपुर से रवाना

मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से प्रस्थान करेंगे।

11:40-सुबह, हेलीकॉप्टर से गढ़फुलझर के लिए रवाना

रायपुर पुलिस लाइन हेलीपैड से महासमुंद जिले के लिए उड़ान भरेंगे।

12:20-दोपहर, गढ़फुलझर पहुंचेंगे

बसना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गढ़फुलझर स्थित हेलीपैड पर आगमन प्रस्तावित है।

12:30–1:30 दोपहर, रामचंडी दिवस-2026 में सहभागिता

श्री श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे।

1:50-दोपहर, गढ़फुलझर से प्रस्थान

कार्यक्रम के बाद हेलीपैड के लिए रवाना होंगे और आगे दुर्ग जिले के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

समय जारी दौरा कार्यक्रम पर आधारित है; वास्तविक समय में बदलाव संभव है।

कार्यक्रम में कौन-कौन होंगे शामिल?

रामचंडी दिवस के अवसर पर बाबा बिसाशहे कुल कोलता समाज द्वारा वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन का आयोजन किया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम में इन जनप्रतिनिधियों और अतिथियों के शामिल होने की संभावना है:

  • धर्मेंद्र प्रधान — संबलपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री।

  • दयाल दास बघेल — छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री।

  • रूपकुमारी चौधरी — महासमुंद की सांसद।

  • डॉ. संपत अग्रवाल — बसना विधायक।

  • गिरधारी साहू — बाबा बिसाशहे कुल कोलता समाज, रायपुर के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष।

रामचंडी दिवस का सामाजिक महत्व

रामचंडी दिवस के अवसर पर आयोजित यह सम्मेलन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी अवसर है। वार्षिक स्नेह सम्मेलन और बंधु मिलन के माध्यम से समाज के सदस्यों के एकत्र होने, आपसी संबंध मजबूत करने और सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।

प्रशासन ने क्या तैयारियां कीं?

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मंदिर परिसर तथा आसपास की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था। आयोजन के दौरान सुरक्षा, हेलीपैड और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर तैयारी की गई।


आज की बड़ी खबरें | 24 अक्टूबर 2026 | छत्तीसगढ़ से देश-दुनिया तक

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नमस्कार! आप सभी का आज के इस विशेष समाचार बुलेटिन में स्वागत है। आइए, सुबह की शुरुआत देश-दुनिया की बड़ी खबरों, छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और दिनभर के लिए उपयोगी जानकारियों के साथ करते हैं।

छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें

1. सिरपुर को यूनेस्को की अस्थायी सूची में जगह

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित ऐतिहासिक सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। यह राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सिरपुर में प्राचीन लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और अन्य पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। हालांकि, अस्थायी सूची में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि सिरपुर को अभी आधिकारिक विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है।

2. बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार चर्चा में

बस्तर का ऐतिहासिक दशहरा अपनी अनूठी आदिवासी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुरिया दरबार में प्रस्तावित भागीदारी को लेकर विशेष चर्चा है।

यह आयोजन बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर है। कार्यक्रम की ताजा स्थिति के लिए आधिकारिक सूचना देखना उचित होगा।

3. दुर्ग के स्टील प्लांट में हादसा

दुर्ग जिले के रसमड़ा स्थित जेडी स्टील प्लांट में पिघली धातु की चपेट में आने से एक ठेकेदार की मौत की खबर सामने आई है। मामले में पुलिस ने प्लांट निदेशक और एक ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा, श्रमिकों के संरक्षण और फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े किए हैं। 

4. मनेंद्रगढ़ में बस दुर्घटना

मनेंद्रगढ़ क्षेत्र से केल्हारी जा रही एक यात्री बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हादसे में छह लोगों की मौत हुई और कई अन्य लोग प्रभावित हुए।

यह घटना एक बार फिर तेज रफ्तार, सड़क सुरक्षा और यात्री वाहनों की नियमित जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

5. ग्रामीण विकास और जल संरक्षण

छत्तीसगढ़ में सामुदायिक डबरी निर्माण जैसे कार्य जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे जलस्रोत खेती, पशुपालन और वर्षा जल के उपयोग में मदद कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ समाचार का निष्कर्ष: आज राज्य के लिए सिरपुर की सांस्कृतिक पहचान, बस्तर की परंपराएं, औद्योगिक सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाएं और ग्रामीण विकास प्रमुख विषय हैं।

देश की प्रमुख खबरें

1. प्रधानमंत्री मोदी का सामाजिक एकता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज में एकता बनाए रखने और विभाजनकारी ताकतों का मिलकर सामना करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।

2. भारत-पोलैंड संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच 21 से 23 अक्टूबर तक भारत में आधिकारिक मुलाकात हुई।

दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और अन्य द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और पोलैंड के रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना है। 

3. दिल्ली में 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच

भारत 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की मेजबानी करेगा।

इस बैठक में सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में संसदीय सहयोग, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल बदलाव, सतत विकास और वैश्विक शासन सुधार शामिल हैं। 

4. चुनावी मतदाता सूची पर विवाद

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की खबर है। इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद के साथ मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिकों के मतदान अधिकारों को लेकर बहस जारी है। 

5. स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा

अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले कुछ चिकित्सा उपकरणों के दोबारा उपयोग पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के फैसले की खबर सामने आई है।

इसका उद्देश्य संक्रमण के जोखिम को कम करना और मरीजों की सुरक्षा को बेहतर बनाना है। हालांकि, संबंधित आदेश का दायरा और लागू होने की शर्तें आधिकारिक अधिसूचना से सत्यापित की जानी चाहिए। 

अंतरराष्ट्रीय समाचार

1. तिब्बत में शक्तिशाली भूकंप

तिब्बत क्षेत्र में लगभग 7 तीव्रता के भूकंप के बाद बड़े नुकसान की खबर आई है। शुरुआती रिपोर्टों में 16 लोगों की मौत और 32 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है।

भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मृतकों और घायलों की संख्या बदल सकती है, इसलिए अंतिम आंकड़ों के लिए आधिकारिक अपडेट जरूरी है। 

2. जॉर्डन में चर्च पर गोलीबारी

जॉर्डन में एक चर्च के भीतर गोलीबारी की घटना में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है।

घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और हमले के पीछे के कारणों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। शुरुआती खबरों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। 

3. फ्रांस में गोलीबारी की घटना

पेरिस के पास त्राप शहर में गोलीबारी के बाद एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घटना को नस्लवादी आतंकवादी हमला बताया है। मामले की जांच और हमले के पीछे के कारणों पर आगे की जानकारी का इंतजार है।

4. पश्चिम एशिया में तनाव

इजरायल और फिलिस्तीन से जुड़े क्षेत्रों में हिंसा तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। इन घटनाओं का प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है।

5. वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका

भारत विभिन्न देशों के साथ व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। आगामी ब्रिक्स संसदीय मंच भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा का अवसर बनेगा। 

अर्थव्यवस्था, कारोबार और शेयर बाजार

1. वैश्विक तेल बाजार पर नजर

अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण बना हुआ है।

भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

2. भारत के व्यापारिक संबंध

भारत और पोलैंड के बीच हालिया बातचीत में व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे भविष्य में औद्योगिक और तकनीकी सहयोग के अवसर बन सकते हैं। 

3. बैंकिंग और वित्त

बैंकिंग क्षेत्र में निवेशकों की नजर बैंकों के तिमाही नतीजों, ऋण वृद्धि, जमा वृद्धि और खराब ऋणों पर बनी रहती है।

निवेशकों के लिए जरूरी बात: आज के लाइव शेयर भाव, निफ्टी-सेंसेक्स के स्तर और बैंकिंग शेयरों की चाल की पुष्टि ताजा बाजार डेटा से करें। बिना सत्यापित लाइव आंकड़ों के किसी शेयर में तेजी या गिरावट का दावा करना उचित नहीं होगा।

4. आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?

  • तेल महंगा होने पर पेट्रोलियम उत्पादों और परिवहन लागत पर दबाव पड़ सकता है।
  • वैश्विक तनाव बढ़ने पर शेयर बाजार में अस्थिरता आ सकती है।
  • व्यापारिक सहयोग बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं।

मौसम समाचार: आज की महत्वपूर्ण चेतावनी

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की आशंका

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अगले कुछ दिनों में और मजबूत हो सकता है। इसके चक्रवाती तूफान में बदलने और 28 अक्टूबर के आसपास उत्तर आंध्र प्रदेश तथा दक्षिण ओडिशा के तटों के निकट पहुंचने की आशंका जताई गई है।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

  • मौसम में बदलाव और संभावित बारिश पर नजर रखें।
  • किसानों को धान की कटाई, सुखाने और भंडारण के लिए स्थानीय पूर्वानुमान देखना चाहिए।
  • बिजली कड़कने या तेज हवाओं की चेतावनी मिलने पर खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
  • तटीय क्षेत्रों की यात्रा करने वालों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

विज्ञान, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

स्वास्थ्य तकनीक में नए फीचर

डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों में गतिविधियों की निगरानी और फिटनेस ट्रैकिंग को बेहतर बनाने के लिए नए सॉफ्टवेयर फीचर चर्चा में हैं। ऐसी तकनीक लोगों को अपनी गतिविधियों और दैनिक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को समझने में मदद कर सकती है। 

नैतिक AI पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

26–27 अक्टूबर को होने वाले ब्रिक्स संसदीय मंच में नैतिक AI और डिजिटल परिवर्तन पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सुरक्षा, गलत जानकारी, रोजगार और तकनीक की जवाबदेही महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं।

आम लोगों के लिए तकनीकी संदेश

  • किसी भी AI-जनित खबर को साझा करने से पहले उसका स्रोत जांचें।
  • बैंकिंग OTP, पासवर्ड और निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
  • फर्जी वीडियो और आवाज के जरिए होने वाली ठगी से सावधान रहें।

स्वास्थ्य समाचार

मलेरिया से बचाव और वैक्सीन

भारत बायोटेक द्वारा मलेरिया वैक्सीन की कीमत में कटौती से संबंधित खबर भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम Gavi और UNICEF से जुड़े समझौते के अंतर्गत उठाया गया है। 

आज की स्वास्थ्य सलाह

  • स्वच्छ पानी पिएं और भोजन को ढककर रखें।
  • बुखार होने पर स्वयं एंटीबायोटिक लेना शुरू न करें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।
  • गंभीर लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सहायता लें।

शिक्षा और रोजगार

AI और उच्च शिक्षा

भारत में AI से संबंधित शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल के साथ डेटा सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और तार्किक सोच भी विकसित करनी चाहिए।

नौकरी तलाशने वालों के लिए जरूरी सलाह

  • भर्ती की जानकारी केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से सत्यापित करें।
  • आवेदन की अंतिम तिथि और पात्रता ध्यान से पढ़ें।
  • नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले संदिग्ध व्यक्तियों से सावधान रहें।

 कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि और धान की महत्वपूर्ण भूमिका है। अक्टूबर के इस समय किसानों के लिए फसल की स्थिति, मौसम और सुरक्षित भंडारण से जुड़ी जानकारी विशेष उपयोगी है।

किसानों के लिए आज की उपयोगी बातें:

  1. कटाई से पहले स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान देखें।
  2. कटी हुई फसल को बारिश और नमी से बचाने की व्यवस्था रखें।
  3. धान को सुरक्षित और सूखे स्थान पर संग्रहित करें।
  4. खाद, बीज और कृषि योजनाओं से जुड़ी जानकारी कृषि विभाग के आधिकारिक माध्यमों से लें।

कानून, प्रशासन और बुनियादी ढांचा

1. मतदाता सूची और नागरिक अधिकार

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज होने के महत्व को सामने लाती है। 

2. राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुविधाएं

राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर शौचालय और पार्किंग जैसी सुविधाओं की निगरानी सुधारने के लिए नए नियमों की खबर सामने आई है। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित आधिकारिक दिशानिर्देश देखना जरूरी है।

3. औद्योगिक सुरक्षा

छत्तीसगढ़ के स्टील प्लांट में हुई दुर्घटना के बाद औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण और नियमित निरीक्षण का महत्व फिर सामने आया है।

खेल जगत की बड़ी खबरें

1. एशियाई पैरा खेलों में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन

भारत ने 2026 के एशियाई पैरा खेलों में 114 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

भारत की पदक तालिका में शामिल हैं:

  • 🥇 30 स्वर्ण पदक
  • 🥈 35 रजत पदक
  • 🥉 49 कांस्य पदक

भारत प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहा। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खिलाड़ियों की मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है।

2. बिलियर्ड्स में पंकज आडवाणी

भारतीय क्यू स्पोर्ट्स खिलाड़ी पंकज आडवाणी के विश्व बिलियर्ड्स में 29वां विश्व खिताब जीतने की खबर भी खेल जगत की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। 

 आज के करेंट अफेयर्स: परीक्षा के लिए 5 सवाल

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ का कौन-सा पुरातात्विक स्थल यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ है?
उत्तर: सिरपुर।

प्रश्न 2: 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच भारत में कब आयोजित होगा?
उत्तर: 26 और 27 अक्टूबर 2026।

प्रश्न 3: 2026 एशियाई पैरा खेलों में भारत ने कुल कितने पदक जीते?
उत्तर: 114 पदक।

प्रश्न 4: भारत और पोलैंड के प्रधानमंत्रियों के बीच किन प्रमुख विषयों पर बातचीत हुई?
उत्तर: व्यापार, निवेश, तकनीक और द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दे।

प्रश्न 5: बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे मौसम तंत्र को लेकर किन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता की जरूरत है?
उत्तर: उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में। 


इसी के साथ आज का विशेष समाचार बुलेटिन यहीं समाप्त होता है।

आपका दिन शुभ हो। नमस्कार!


Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर क्यों होती है लड्डू गोपाल की विशेष पूजा? जानें भोग, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

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 Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास लीला की थी। यही वजह है कि ब्रज सहित देश के कई हिस्सों में इस दिन भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बाल स्वरूप में पूजे जाने वाले लड्डू गोपाल की सेवा करने वाले भक्त भी इस अवसर पर उनका विशेष शृंगार करते हैं और प्रिय भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।


शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल की पूजा क्यों है खास?

शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जोड़ा जाता है। ब्रज की धार्मिक परंपराओं में इस रात का विशेष स्थान है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस लीला को प्रेम, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप हैं। भक्त उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह मानकर उनकी दैनिक सेवा करते हैं। शरद पूर्णिमा जैसे विशेष पर्व पर लड्डू गोपाल का शृंगार करने, भोग लगाने और भजन-कीर्तन करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान से घर में सुख-शांति, खुशहाली और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।

शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?

शरद पूर्णिमा पर खीर का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन दूध और चावल से खीर बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है। इसके अलावा लड्डू गोपाल को उनकी पसंद के अनुसार माखन-मिश्री, दूध, फल और अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।

भगवान श्रीकृष्ण को माखन प्रिय माना जाता है, इसलिए कई भक्त शरद पूर्णिमा पर माखन-मिश्री अर्पित करते हैं। भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें।

शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की क्या है परंपरा?

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान माना जाता है। इसी विश्वास के चलते लोग खीर को खुले स्थान पर चांदनी में रखते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

इस अवसर पर कुछ श्रद्धालु पहले खीर का भोग लड्डू गोपाल को लगाते हैं और फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हालांकि, चंद्रमा की किरणों से खीर में विशेष औषधीय गुण आने की मान्यता धार्मिक विश्वास का हिस्सा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

शरद पूर्णिमा पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा

शरद पूर्णिमा के दिन लड्डू गोपाल की पूजा श्रद्धापूर्वक और विधि-विधान से की जा सकती है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन करें:

  1. मंदिर की सफाई करें: सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

  2. लड्डू गोपाल का शृंगार करें: भगवान को साफ वस्त्र पहनाएं और अपनी परंपरा के अनुसार उनका शृंगार करें।

  3. दीपक जलाएं: भगवान के सामने घी का दीपक जलाकर फूल अर्पित करें।

  4. भोग लगाएं: लड्डू गोपाल को खीर, माखन-मिश्री, फल या सात्विक मिठाइयां अर्पित करें।

  5. मंत्र और भजन करें: भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें, मंत्र जाप करें और भजन-कीर्तन करें।

  6. प्रसाद वितरित करें: पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें।

लड्डू गोपाल की पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा को प्रेम, भक्ति और आनंद से जोड़कर देखा जाता है। शरद पूर्णिमा पर लड्डू गोपाल की आराधना करने वाले श्रद्धालु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने और परिवार में सुख-शांति की कामना करते हैं। इस दिन पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों को भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा की विधि और रीति-रिवाज अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में भिन्न हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का दूसरा दिन : मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मुकाबला 3-3 से ड्रॉ

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प्रहलाद बने 'स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच', करण धनुक को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार

रायपुर- छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के दूसरे दिन आज पहले मैच में कड़े मुकाबले के बीच मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मैच 3-3 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पहले दो क्वार्टर्स में ओलंपियन प्रदीप मोर की टीम मैनपाट टाइटन्स का दबदबा रहा, जबकि आखिरी दो क्वार्टर्स में ओलंपियन चिंगलेनसाना सिंह की टीम बैलाडिला बुल्स ने बेहतर खेल दिखाया। शानदार खेल के लिए प्रहलाद को 'स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच' चुना गया, जबकि करण धनुक को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार मिला।

मैच का पहला हमला चौथे मिनट में देखने को मिला। मैनपाट के खिलाड़ियों ने सर्कल में प्रवेश तो किया, लेकिन विपक्षी डिफेंडरों ने आसानी से गेंद को बाहर निकाल दिया। इसके बाद जवाबी हमले में बैलाडिला बुल्स ने भी सर्कल में जगह बनाई, लेकिन उनके पास डिफेंस को चुनौती देने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं थी। मैच के 7वें मिनट में मैनपाट के पास गोल करने का एक बेहतरीन मौका आया, जब प्रहलाद टांडी को सर्कल के अंदर गेंद मिली, लेकिन बैलाडिला बुल्स के गोलकीपर ने तेजी से आगे आकर इस मौके को नाकाम कर दिया।

लगातार हमलों के बीच बैलाडिला को अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे संदीप ठाकुर ने गोल में बदल दिया। यादव अपनी बाईं ओर नहीं जा सके, जबकि गेंद उनके काफी करीब थी। बहरहाल, पहला क्वार्टर बिना किसी और हलचल के समाप्त हुआ। दूसरे क्वार्टर में मैनपाट ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया। हालांकि ज्यादा मौके नहीं बने थे, लेकिन हाफ-टाइम से कुछ मिनट पहले प्रवीण यादव ने गोल कर दिया। प्रहलाद ने सर्कल के अंदर शानदार दौड़ लगाई और प्रवीण ने गेंद को बेहतरीन तरीके से डिफ्लेक्ट करके गोल में बदल दिया। हाफ-टाइम तक स्कोर 2-0 हो गया था।

शुरुआती बढ़त मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि मैनपाट अपना दबदबा बनाए रखेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बैलाडिला ने लगातार हमले कर विपक्षी डिफेंस पर दबाव बना दिया। उन्होंने कई बार सर्कल के अंदर प्रवेश किया और आखिरकार उनकी लगातार कोशिशों का फल उन्हें मिला। जसकरण सिंह सर्कल के काफी अंदर तक गए और उन्होंने राहुल यादव की तरफ गेंद फ्लिक की, जिसे राहुल ने गोल में बदल दिया। पिछले क्वार्टर की लय को बरकरार रखते हुए जसकरण ने चौथे क्वार्टर की शुरुआत में ही पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर बराबर कर दिया। सर्कल के बाहर से लगाए गए एक 'टोमाहॉक' शॉट की वजह से बैलाडिला को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे मैनपाट के गोलकीपर अल्फ़ाज़ खान ने रोक दिया।

मैनपाट के प्रहलाद को सर्कल के अंदर कुछ खाली जगह मिली, जहाँ से उन्होंने एक 'रिवर्स फ़्लिक' के ज़रिए अपनी टीम के लिए गोल कर दिया। मैच के अंत के करीब बैलाडिला के निहाल हुसैन अंसारी ने पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर शॉट लगाकर अपनी टीम के लिए बराबरी का गोल किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

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बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता, सामूहिक आस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अब मांझियों कोे 5000 रूपए और चालकियों को 3500 रूपए मिलेगा मासिक मानदेय

रायपुर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।

मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ बस्तर के परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को अवसर देना आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा और जनजातीय समुदाय के लोग अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सहभागिता से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


दंडकारण्य की सांस्कृतिक स्मृतियों में रची-बसी है बस्तर की विरासत

राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित अनेक प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की पवित्रता और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

प्रकृति संरक्षण जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा

राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में पेड़-पौधों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता के रूप में देखा जाता है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, जल, फल, फूल, भोजन और औषधियां प्रदान करती है। इसलिए प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसका संरक्षण और संवर्धन भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप करते हुए इनके संरक्षण और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर जनजातीय समाज के लोगों से अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।

बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कुटुम्ब जात्रा के माध्यम से ग्राम देवी-देवताओं की विदाई तथा 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को इस उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।

राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता एवं संस्कारों में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं। बड़ों की बात सुनना और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना जनजातीय समाज की सहज परंपरा रही है।

राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ समाज को साथ लेकर चलने की सीख भी देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों एवं समुदायों के लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राजशाही की समाप्ति के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी रही और जनतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है। जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तब कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने मांझी, मुखिया, पुजारी, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन सहित उन सभी लोगों के योगदान की सराहना की, जिनके सामूहिक परिश्रम और श्रद्धा से यह विश्वप्रसिद्ध परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी का बस्तर की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था। इसके बाद बस्तर पंडुम के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। आज बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से समस्त बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज में निहित समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति से उत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा प्रारंभ की गई है तथा रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे़, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ भारत आएंगे, BRICS संसदीय मंच में लेंगे हिस्सा

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ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) के 26 अक्टूबर 2026 से भारत में शुरू होने वाले दो दिवसीय 12वें BRICS संसदीय मंच में शामिल होने की उम्मीद है। यह सम्मेलन 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित संसद परिसर के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित होगा।

BRICS संसदीय मंच क्या है?

BRICS संसदीय मंच एक अंतरराष्ट्रीय बैठक है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय नेता अपने देशों की संसदों के बीच सहयोग, वैश्विक चुनौतियों और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

इस बार सम्मेलन की मुख्य थीम “Fostering Parliaments for People-Centric Development” यानी जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना है।

सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?

भारत की लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी।

  • संस्थागत मजबूती: संसदों की कार्यक्षमता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना।

  • AI और डिजिटल तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिम्मेदारी से इस्तेमाल और डिजिटल बदलाव।

  • वैश्विक शासन में सुधार: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और संसदीय सहयोग।

  • सतत विकास: पर्यावरण संरक्षण, समावेशी विकास और भविष्य की चुनौतियों से निपटना।

सम्मेलन में द्विपक्षीय बैठकें और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत भी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से संवाद करने की जानकारी भी दी गई है।

ईरान के अध्यक्ष की यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

ग़ालिबाफ की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं।

  • ईरान-अमेरिका संबंध: ग़ालिबाफ ईरान की ओर से अमेरिका और इज़राइल से जुड़े संघर्ष संबंधी वार्ताओं में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य: यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे जुड़े तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।

  • भारत-ईरान संवाद: BRICS सम्मेलन दोनों देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को साझा मुद्दों पर बातचीत का अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, किसी विशिष्ट द्विपक्षीय समझौते की घोषणा की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

भारत को क्या फायदा हो सकता है?

इस यात्रा से भारत को बहुपक्षीय मंच पर ईरान सहित अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। संभावित रूप से चर्चा के प्रमुख क्षेत्र होंगे:

  • क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा।

  • ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार।

  • संसदीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

  • डिजिटल तकनीक, AI और वैश्विक संस्थाओं में सुधार।

ये संभावित सहयोग के क्षेत्र हैं; इन्हें किसी घोषित समझौते या अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सम्मेलन कब और कहाँ होगा?

तारीख- 26–27 अक्टूबर 2026

स्थान- संविधान सदन का केंद्रीय कक्ष, नई दिल्ली

मेजबान- भारत की संसद; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।


पीयूष गोयल ने जलवायु वित्त पर विकसित देशों से जवाबदेही की मांग की

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भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में जलवायु वित्त (Climate Finance) के मुद्दे पर विकसित देशों की प्रतिबद्धताओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों को विकासशील देशों से किए गए वित्तीय वादों को पर्याप्त रूप से पूरा करना चाहिए।

इस मुद्दे का महत्व इसलिए है क्योंकि विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, प्रदूषण कम करने, जलवायु आपदाओं से निपटने और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा विकसित करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है।

समाचार की मुख्य बातें

1. विकसित देशों से सालाना 100 अरब डॉलर के वादे पर सवाल

पीयूष गोयल ने 22 अक्टूबर 2026 को बर्लिन में आयोजित Berlin Global Dialogue के दौरान कहा कि विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार इस सहायता को लेकर किए गए वादे पर्याप्त रूप से पूरे नहीं हुए हैं।

2. भारत के उत्सर्जन और आबादी का मुद्दा उठाया

गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की लगभग 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उसका हिस्सा 3% से कम है। उन्होंने यूरोप के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन की तुलना भारत से करते हुए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी को अधिक न्यायसंगत तरीके से बाँटने की मांग की। ये आँकड़े उनके भाषण में दिए गए दावे हैं।

3. विकासशील देशों को किस तरह की मदद चाहिए?

जलवायु वित्त का उद्देश्य विकासशील देशों को इन क्षेत्रों में सहायता देना है:

  • सौर और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएँ।

  • बाढ़, सूखा, चक्रवात और अन्य जलवायु आपदाओं से निपटने की तैयारी।

  • उद्योगों और परिवहन में कार्बन उत्सर्जन कम करना।

  • पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और हरित बुनियादी ढाँचे में निवेश।

  • छोटे द्वीपीय और कमजोर देशों को जलवायु जोखिमों से निपटने में मदद।

4. यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स पर भी चिंता

गोयल ने यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) पर भी सवाल उठाए। यह व्यवस्था कुछ आयातित वस्तुओं, जैसे स्टील, के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन पर लागत लागू करती है। भारत की चिंता है कि ऐसी व्यवस्थाएँ विकासशील देशों के निर्यातकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल सकती हैं।

5. भारत का रुख क्या है?

भारत का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की जिम्मेदारी सभी देशों की है, लेकिन ऐतिहासिक उत्सर्जन, आर्थिक क्षमता और विकास की जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना चाहता है, साथ ही बड़ी आबादी की ऊर्जा, भोजन और आर्थिक विकास की जरूरतों को भी पूरा करना चाहता है।

निष्कर्ष

बर्लिन में पीयूष गोयल का संदेश था कि जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्रवाई केवल लक्ष्य तय करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विकसित देशों को विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग की अपनी प्रतिबद्धताओं पर भी ठोस प्रगति दिखानी चाहिए।


छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों का मानदेय ₹30,870 करने की तैयारी, करीब 7,900 जवानों को मिल सकता है लाभ

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छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों (होमगार्ड जवानों) के लिए मानदेय बढ़ोतरी से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के गृह विभाग ने करीब 7,900 नगर सैनिकों का कुल मासिक मानदेय ₹19,500 से बढ़ाकर ₹30,870 करने की अनुशंसा की है।

यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश और गृह मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार किए जाने की खबर है। हालांकि, इसे लागू करने की अंतिम सरकारी मंजूरी और भुगतान शुरू होने की तारीख की पुष्टि अभी उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

प्रस्तावित मानदेय का पूरा हिसाब

प्रस्तावित कुल मासिक राशि-₹30,870

मूल मानदेय-₹19,500
महंगाई भत्ता (58%)- ₹11,310
वर्दी धुलाई भत्ता-₹60

कुल प्रस्तावित मानदेय-₹30,870

कितनी बढ़ोतरी हो सकती है?

विवरण

    राशि

वर्तमान मासिक मानदेय

    ₹19,500

प्रस्तावित कुल मासिक राशि

    ₹30,870

संभावित मासिक अंतर

    ₹11,370

12 महीने का अंतर, यदि दर पूरे साल लागू रहे

    ₹1,36,440

ये गणनाएं प्रस्तावित राशि के आधार पर हैं। वास्तविक भुगतान ड्यूटी, पात्रता और अंतिम सरकारी आदेश की शर्तों पर निर्भर करेगा।

मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों बनाया गया?

मीडिया रिपोर्टों में इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं:

  • महंगाई: बढ़ती कीमतों के बीच नगर सैनिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना।

  • कार्य की जिम्मेदारी: कानून-व्यवस्था, अग्निशमन और आपदा प्रबंधन जैसी सेवाओं में उनकी भूमिका।

  • न्यायालय के निर्देश: मानदेय से संबंधित न्यायालयीन निर्देशों को भी प्रस्ताव का आधार बताया गया है।

इससे कितने नगर सैनिकों को फायदा मिल सकता है?

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 7,900 नगर सैनिकों को प्रस्तावित बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। ये जवान पुलिस और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण, आपदा के समय राहत कार्य और अन्य आवश्यक सेवाओं में सहयोग देते हैं।

पहले कब-कब बढ़ा था मानदेय?

  • 2017: मासिक मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹13,200 किया गया।

  • 2023: 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी बढ़ोतरी के बाद राशि ₹19,500 हुई।

  • 2026: अब कुल राशि ₹30,870 करने की अनुशंसा की खबर सामने आई है।

नया मानदेय कब से मिलेगा?

सबसे जरूरी बात: अभी उपलब्ध रिपोर्टें इसे प्रस्ताव या अनुशंसा के रूप में बताती हैं। नई दर लागू होने की निश्चित तारीख, एरियर मिलने की स्थिति और भुगतान शुरू होने के महीने की पुष्टि अंतिम सरकारी आदेश से ही होगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सभी नगर सैनिकों को ₹30,870 मिलना शुरू हो गया है।

खबर का निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के करीब 7,900 नगर सैनिकों के मानदेय को ₹19,500 से बढ़ाकर ₹30,870 प्रतिमाह करने का प्रस्ताव आर्थिक राहत की दिशा में महत्वपूर्ण खबर है। अब आगे की स्थिति शासन की अंतिम मंजूरी और आधिकारिक आदेश पर निर्भर करेगी।


छत्तीसगढ़ में 16 हजार कोटवारों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन: नियमितीकरण और ₹15,000 मासिक मानदेय की मांग

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छत्तीसगढ़ में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेश के लगभग 16,000 कोटवारों ने 23 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा। संगठन ने जिला मुख्यालयों में धरना देकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की थी। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर भी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

यह आंदोलन कोटवारों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया गया। संगठन का कहना है कि ग्रामीण स्तर पर शासन-प्रशासन के कामों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली है।

कोटवारों की प्रमुख चार मांगें

1. नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा

कोटवारों की मांग है कि उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए और राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए, ताकि उनकी सेवा को स्थायी सरकारी सेवा के रूप में मान्यता मिल सके।

2. न्यूनतम ₹15,000 मासिक मानदेय

संगठन ने महंगाई को देखते हुए पारिश्रमिक बढ़ाकर कम-से-कम ₹15,000 प्रतिमाह करने की मांग की है। फिलहाल पारिश्रमिक व्यवस्था में सेवा भूमि और श्रेणी के आधार पर अंतर होने की रिपोर्टें हैं।

3. कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता

संगठन चाहता है कि कोटवार की नियुक्ति या पद रिक्त होने पर नियमों के अनुसार उसके परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। गैर-वंशजों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है।

4. सेवा संबंधी समस्याओं और अधिकारों का समाधान

संगठन की मांग है कि कोटवारों की लंबित सेवा समस्याओं का निराकरण किया जाए और उनके परिवारों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएं। विस्तृत मांगपत्र में नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा सुरक्षा से जुड़े विषय भी उठाए गए हैं।

पहले भी हो चुका है आंदोलन

कोटवार एसोसिएशन ने इससे पहले 3 जुलाई 2026 को तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों के निराकरण की अपील की गई थी।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, तीन महीने बाद भी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को आंदोलन का दूसरा चरण आयोजित करने का फैसला लिया गया।

कोटवारों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। वे स्थानीय सूचनाएं पहुंचाने और राजस्व प्रशासन से जुड़े विभिन्न कार्यों में सहयोग करते हैं। संगठन का तर्क है कि उनकी जिम्मेदारियों और लंबे समय की सेवाओं के अनुरूप पारिश्रमिक तथा सेवा सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्या सरकार ने मांगें मान ली हैं?

उपलब्ध रिपोर्टों में 23 अक्टूबर के प्रदर्शन के आह्वान और मांगों की जानकारी है, लेकिन इन मांगों को स्वीकार करने या मानदेय बढ़ाने के संबंध में सरकार के किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए ₹15,000 मासिक मानदेय को फिलहाल कोटवार संगठन की मांग के रूप में ही समझना चाहिए।


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