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गांव की चौपाल में दिखी मुख्यमंत्री की सादगी और संवेदनशीलता

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पीपल के पेड़ तले खाट पर बैठकर ग्रामीणों से किया सीधा संवाद: समस्याएं सुनीं और मौके पर दिए समाधान के निर्देश

ग्राम कोसला में “महतारी सदन” एवं हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसला का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री साय के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण बन गया। मुख्यमंत्री साय का बेहद सहज, आत्मीय और सादगीपूर्ण स्वरूप उस समय देखने को मिला, जब वे बिना किसी औपचारिकता के गांव के पीपल पेड़ की छांव तले आयोजित चौपाल में ग्रामीणों के बीच खाट पर बैठकर उनसे सीधे संवाद करने लगे। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए यादगार बन गया और चौपाल आत्मीय संवाद तथा संवेदनशील शासन की मिसाल बन गई।

मुख्यमंत्री साय ने चौपाल में ग्रामीणों, महिलाओं और किसानों से सीधे चर्चा करते हुए शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार महिलाओं, किसानों, गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।

ग्रामीणों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूछा, “पटवारी नियमित रूप से गांव आते हैं या नहीं?” ग्रामीणों द्वारा सकारात्मक जवाब दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने गांव के पटवारी शत्रुघन कुर्रे को निर्देशित किया कि ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं का तत्परता से निराकरण सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

चौपाल के दौरान ग्राम कोसला की सावित्री कश्यप ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने नियमित रूप से सहायता राशि प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी करने में काफी मदद मिल रही है और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से आत्मीय चर्चा करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है।

इसी दौरान ग्राम की “लखपति दीदी” नीमा तिवारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें शुरुआत में 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इसके बाद उन्होंने आटा चक्की का व्यवसाय शुरू किया और आज उनके पास पांच आटा चक्कियां संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री ने गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में ग्राम कोसला में 474 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास प्लस सर्वेक्षण के माध्यम से छूटे हुए सभी पात्र हितग्राहियों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई थी और अब हजारों परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। महिलाओं की सुविधा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ग्राम कोसला में “महतारी सदन” निर्माण की घोषणा की। साथ ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और विद्यार्थियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है और किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है, जिससे उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से जनप्रतिनिधि और अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ पी चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

पीपला फाउंडेशन ने रीवा में 5000 लीटर की टंकी स्थापित की,ग्रामीणों को जल संकट से मिली राहत

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आरंग- भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच आरंग क्षेत्र के लोरिक नगर (गढ़रीवां) के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर आई है। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव में 5000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की है। 

इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि राहगीरों और पशुओं के लिए भी पेयजल सुलभ हो गया है। दरअसल, गांव के ट्यूबवेल के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। ग्रामीणों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। समस्या को देखते हुए पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने सरपंच घसियाराम साहू के समक्ष टंकी लगाने का प्रस्ताव रखा। पंचायत ने तत्काल सहमति देते हुए टंकी के लिए पक्का चबूतरा, पाइपलाइन और नलों की व्यवस्था कराई। शनिवार को आयोजित  कार्यक्रम में टंकी का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब इस सुविधा का लाभ रीवा के साथ-साथ लखौली और कुकरा के ग्रामीणों को भी मिल रहा है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह प्यास बुझाने का केंद्र बन गया है। गांव के सरपंच घसियाराम साहू का कहना है कि गांव में पानी की समस्या गंभीर थी। संस्था और पंचायत के इस तालमेल से अब पानी सहेजने में मदद मिलेगी। हम पीपला फाउंडेशन के इस सेवाभावी कार्य का आभार व्यक्त करते हैं। इस शुभारंभ अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू और फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने इस कार्य को जनहित में मील का पत्थर बताया। इस दौरान कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, संयुक्त सचिव संजय मेश्राम सहित सक्रिय सदस्य सीताराम साहू, ईश्वरी साहू, पोखराज साहू, हीराधर धीवर पंच वेदप्रकाश साहू, रमेश चंद्राकर, मीरा चंद्राकर, समाजसेवी अश्वनी चंद्राकर ,पी के चंद्राकर,  सहित ग्रामीण उपस्थित थे।


हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी - मुख्यमंत्री साय

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सुशासन तिहार बना त्वरित समाधान और जवाबदेह प्रशासन का प्रभावी माध्यम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायगढ़ में मुख्यमंत्री ने रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों की ली संयुक्त समीक्षा बैठक

राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, पेयजल, स्वास्थ्य एवं खरीफ तैयारी पर दिए विशेष निर्देश

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जल्द होगी शुरू, नागरिकों की शिकायतों का होगा समयबद्ध समाधान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत रायगढ़ जिला कार्यालय के सृजन सभाकक्ष में रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी और समयबद्ध ढंग से पहुंचे तथा आमजन की समस्याओं के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

बैठक में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक लालजीत सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविंद्र गवेल, महापौर जीवर्धन चौहान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव और शहरों तक दिखाई दे रहा है। शासन और प्रशासन सीधे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने राजस्व प्रकरणों की विशेष समीक्षा करते हुए समयसीमा से बाहर एवं एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े छोटे-छोटे मामले सीधे आम नागरिकों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनके निराकरण में संवेदनशीलता और गंभीरता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों को शीघ्र सुधारने तथा जानबूझकर गलती करने वाले संबंधित कर्मचारियों एवं पटवारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में बताया कि प्रदेश में शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक सीधे फोन अथवा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वर्षा ऋतु प्रारंभ होने के साथ संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अग्रिम तैयारी रखने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप डीजल एवं पेट्रोल के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री ने हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद-बीज भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध हो तथा किसी प्रकार की परेशानी न हो। डीएपी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।महिला सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री ने अधिक संख्या में “ड्रोन दीदी” तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का विस्तार होगा और महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए तथा अधिक से अधिक हितग्राहियों को योजना से जोड़ने पर बल दिया। आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि केवल कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार का लाभ भी मिलना चाहिए। कोरबा जिले में आयुष्मान कार्ड उपयोग की बेहतर स्थिति पर मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की सराहना की।

सेवा सेतु पोर्टल में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में आवेदनों के निरस्त होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि जांजगीर-चांपा जिले की डोंगा-कोहरोद सड़क निर्माण कार्य को इस वर्ष के बजट में शामिल किया गया है। संबंधित विभाग को शीघ्र प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री साय ने रायगढ़ जिले में निजी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणाम अपेक्षाकृत कम आने पर चिंता व्यक्त करते हुए कलेक्टर को इसकी जांच के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए विशेष प्रयास करने पर बल दिया।

इस अवसर पर संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग सहित रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ एवं अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

​खाद कटौती के खिलाफ फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा: रीवा सहकारी समिति में किसानों का शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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​आरंग- रासायनिक खाद की मात्रा में शासन द्वारा की गई भारी कटौती के विरोध में ग्रामीण सेवा सहकारी समिति रीवा (पं.क्र. 1527) के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुकरा, रसनी और रीवा के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने समिति परिसर में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम समिति प्रबंधक जगदीश साहू को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण की व्यवस्था को तत्काल पूर्ववत (पहले की तरह) बहाल किया जाए।

 ​नई व्यवस्था से खेती होगी घाटे का सौदा: किसान 

​धरना स्थल पर किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नई उर्वरक अनुशंसा के कारण खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और उत्पादन पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।

​ क्या है नई व्यवस्था? 

प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुशंसा का हवाला देकर फसलवार रासायनिक खाद की मात्रा घटा दी गई है। अब प्रति एकड़ केवल 1 बोरी यूरिया, आधा बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 2 बोतल नैनो यूरिया और 1 बोतल नैनो डीएपी देने का प्रावधान किया गया है।

 ​किसान क्यों कर रहे हैं विरोध? 

किसान वर्षों से प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया, 2 बोरी डीएपी और 1 बोरी पोटाश का उपयोग करते आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक समय सरकार ने ही 'अधिक अन्न उपजाओ' का नारा देकर रासायनिक खाद को बढ़ावा दिया था, और अब अचानक कटौती की जा रही है। इससे फसल उत्पादन घटेगा और किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी।

​ 'जमीन की वास्तविक स्थिति समझे सरकार' : वतन चन्द्राकर 

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सहकारी समिति रीवा के शेयर होल्डर एवं क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने कहा:

​"अन्नदाता की मेहनत और उसकी जरूरतों को नजरअंदाज कर बनाई गई कोई भी नीति कभी सफल नहीं हो सकती। किसान पहले से ही महंगी खेती, डीजल, बीज और मौसम की अनिश्चितता की मार झेल रहा है। ऐसे संकट के समय में खाद की मात्रा आधी करना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को जमीन की जमीनी हकीकत को समझते हुए तुरंत पुरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। किसान हितों की रक्षा के लिए हम हर स्तर पर आवाज बुलंद करेंगे।"


​ भानसोज के बाद अब रीवा में गूंजी विरोध की आवाज 

​उल्लेखनीय है कि खाद कटौती को लेकर किसानों का यह विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले 15 मई को भानसोज सोसायटी में भी किसानों द्वारा व्यापक धरना प्रदर्शन किया गया था। रीवा में जुटे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

​ प्रदर्शन में ये प्रमुख किसान रहे उपस्थित 

​इस शांतिपूर्ण आंदोलन और नाराजगी जताने वालों में मुख्य रूप से:

​दौलत साहू (पूर्व अध्यक्ष, सहकारी समिति रीवा),​वतन चन्द्राकर (जिला पंचायत सदस्य),हरि बंजारे, सुकुल साहू, दिलीप कुर्रे, रमेश चन्द्राकर, अश्वनी चन्द्राकर,​शोभाराम साहू, संतोष साहू, बेनु राम साहू, बिष्णु साहू, घनाराम साहू,मेघनाथ साहू, हेमलाल साहू, हेमू, मिलु, नोहर सिन्हा, प्रदीप साहू,संतोष चन्द्राकर, मोरज चन्द्राकर, चन्द्प्रकाश चन्द्राकर,सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में जागरूक किसान उपस्थित थे।

सिंघनपुर गुफा में रिसर्च टीम पर मधुमक्खियों का हमला, 4 की हालत गंभीर

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले स्थित प्रसिद्ध सिंघनपुर गुफा में रिसर्च के दौरान बड़ा हादसा हो गया। गुफा का निरीक्षण करने पहुंची वैज्ञानिकों की पांच सदस्यीय टीम पर अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। इस घटना में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि एक वनकर्मी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। सभी घायलों का इलाज OP Jindal Fortis Hospital में जारी है।


जानकारी के मुताबिक, रायपुर की एक यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम सिंघनपुर गुफा में मौजूद प्राचीन शैल चित्रों के अध्ययन और निरीक्षण के लिए पहुंची थी। टीम में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम गुफा के भीतर रिसर्च कार्य में जुटी, तभी अचानक मधुमक्खियों का झुंड उन पर टूट पड़ा।

मधुमक्खियों के हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए टीम के सदस्य इधर-उधर भागने लगे। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच रेस्क्यू अभियान चलाकर घायलों को स्ट्रेचर की मदद से नीचे लाया गया और अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घायल लोगों में ब्रम्हानंद धृतलहरे (27), स्मृद्धि (69), भाग्यश्री (30), सुमन (35), निहारिका (36) और गितेश्वर पटेल शामिल हैं। इनमें से चार लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

पक्के घर का सपना हुआ साकार : मुख्यमंत्री साय ने लेमरू में हितग्राही धरम सिंह के नए आवास में कराया गृह प्रवेश

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 रायपुर : सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कोरबा जिले के लेमरू पहुंचकर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राही धरम सिंह के नव निर्मित आवास का उद्घाटन एवं गृह प्रवेश कराया। वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले धरम सिंह के परिवार के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और नए घर के लिए शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री साय ने आवास का अवलोकन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और नई उम्मीद लेकर आई है। उन्होंने कहा कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।


मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत सोलर पैनल स्थापना हेतु डीएमएफ मद से हितग्राही अंशदान की 60 हजार रुपये की राशि प्रदान की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को केवल आवास ही नहीं, बल्कि बेहतर जीवन के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री के आगमन से धरम सिंह का परिवार भावुक हो उठा। परिवार ने आत्मीय स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले लाभों के लिए आभार व्यक्त किया। पूरे गांव में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा कि अब योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है और लोगों का शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

इस अवसर पर उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे कोसला धाम

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम कोसला पहुंचकर माता कौशल्या मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने माता कौशल्या एवं प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की।


मुख्यमंत्री साय के मंदिर परिसर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंदिर सेवा समिति एवं ग्रामीणों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी भी उनके साथ उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री  साय ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, आस्था और परंपराएं प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। हमारी सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मंदिर सेवा समिति द्वारा मुख्यमंत्री साय को माता कौशल्या मंदिर का आकर्षक छायाचित्र स्मृति स्वरूप भेंट किया गया।

मुख्यमंत्री साय के अचानक आगमन से क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन एवं स्थानीय नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ पुलिस को मिला स्थायी मुखिया, अरुण देव गौतम बने डीजीपी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। गृह (पुलिस) विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।


1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम अब तक प्रभारी डीजीपी के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा गठित पैनल की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने उन्हें नियमित डीजीपी नियुक्त किया है।


अरुण देव गौतम को राज्य के वरिष्ठ और अनुभवी पुलिस अधिकारियों में गिना जाता है। अपने लंबे प्रशासनिक और पुलिस सेवा कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।

किसान परिवार से आने वाले अरुण देव गौतम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव के निवासी हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद प्रयागराज से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल किया।

यूपीएससी परीक्षा में शुरुआती असफलता के बाद उन्होंने दोबारा तैयारी की और वर्ष 1992 में आईपीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।

उनका पुलिस करियर मध्य प्रदेश कैडर से शुरू हुआ। प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग जबलपुर में हुई। इसके बाद वे बिलासपुर में सीएसपी, कवर्धा में एसडीओपी और भोपाल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर रहे। वे मध्य प्रदेश पुलिस की 23वीं बटालियन के कमांडेंट भी रह चुके हैं। वहीं, एसपी के रूप में उनका पहला जिला राजगढ़ था।

जनगणना ड्यूटी में गई शिक्षिका के सूने घर में लाखों की चोरी, आरोपी गिरफ्तार

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 बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र के अशोक नगर स्थित पार्क लाइफ कॉलोनी में जनगणना ड्यूटी पर गई एक शिक्षिका के सूने मकान में चोरी का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि, सरकंडा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी गए सोने-चांदी के जेवर और नगदी भी बरामद कर ली है।


जानकारी के अनुसार, शिक्षिका जनगणना कार्य के सिलसिले में घर से बाहर गई हुई थीं। इसी दौरान आरोपी ने सूने मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और अलमारी में रखे सोने-चांदी के आभूषणों समेत नकदी रकम चोरी कर फरार हो गया।

ड्यूटी से लौटने पर शिक्षिका ने घर का सामान बिखरा देखा, जिसके बाद चोरी की जानकारी मिली। उन्होंने तत्काल सरकंडा थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और संदिग्धों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान गोलबाजार निवासी शरद कर्ष पर पुलिस को संदेह हुआ। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपी ने चोरी की वारदात कबूल कर ली।

पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है और उसे इलाके की पूरी जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर उसने सूने मकान को निशाना बनाया।

सरकंडा पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी का पूरा सामान बरामद कर लिया है। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
घटना के बाद कॉलोनी के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और खाली मकानों की निगरानी की मांग की है। वहीं पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लंबे समय के लिए घर से बाहर जाने पर इसकी जानकारी पड़ोसियों और स्थानीय पुलिस को जरूर दें, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

चलती कार में लगी भीषण आग, सवारों ने कूदकर बचाई जान

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 कोरबा। दर्री-कटघोरा मुख्य मार्ग स्थित जेलगांव चौक के पास शुक्रवार को चलती कार में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे के दौरान कार में सवार लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, हालांकि कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार दर्री से कटघोरा की ओर जा रही थी। इसी दौरान वाहन के इंजन से अचानक धुआं निकलने लगा। स्थिति को भांपते हुए चालक ने तत्काल कार को सड़क किनारे रोका और सभी सवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। बाद में दमकल विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हादसे के चलते कुछ समय तक मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

देशी दवाइयों और विदेशी मशीनों से इलाज का दावा, दो फर्जी डॉक्टर पुलिस के हत्थे चढ़े

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 तखतपुर। तखतपुर क्षेत्र में खुद को डॉक्टर बताकर दर्द का इलाज करने का दावा करने वाले उत्तरप्रदेश के दो युवकों को स्थानीय लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों युवक बिना किसी वैध डिग्री और दस्तावेज के लोगों का उपचार कर रहे थे। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।


जानकारी के अनुसार, स्थानीय युवकों को सूचना मिली थी कि कुछ बाहरी लोग क्षेत्र में किराए के कमरे में बैठकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। सूचना के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और युवकों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों युवक खुद को आयुर्वेदिक उपचार से जुड़ा बताते रहे, जबकि अपने एक रिश्तेदार को डॉक्टर होने की बात कहने लगे। हालांकि, उनके पास किसी प्रकार की वैध मेडिकल डिग्री या लाइसेंस नहीं मिला।

मामला संदिग्ध लगने पर स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे की तलाशी ली, जहां से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां, कुछ संदिग्ध चूर्ण और इलाज में उपयोग होने वाले उपकरण बरामद किए गए। बताया जा रहा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले कथित डॉक्टरों का एक साथी मौके से फरार हो गया।

फिलहाल पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है और बरामद दवाइयों व उपकरणों की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

​ खेती पर संकट: आरंग में फूटा किसानों का गुस्सा, खाद कटौती और डीजल किल्लत पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूँका

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 ​आरंग (लखौली)। खेती-किसानी का नया सीजन शुरू होने से ठीक पहले किसानों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शासन द्वारा रासायनिक खाद की आपूर्ति में की गई भारी कटौती और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गहराते डीजल संकट ने आरंग क्षेत्र के अन्नदाताओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ किसानों का आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।


​खौली महापंचायत: आर-पार की लड़ाई का शंखनाद

​किसान नेता श्रवण चन्द्राकर ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय की एक बेहद विवादास्पद अनुशंसा को आधार बनाकर शासन ने खाद की मात्रा घटाने का फैसला किया है। इस आत्मघाती निर्णय के विरोध में बुधवार को ग्राम खौली में किसानों की एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई। इस बैठक में आरंग क्षेत्र के सैकड़ों किसान एकजुट हुए और उन्होंने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी।


​किसानों का साफ कहना है कि यदि पूर्व में लागू खाद-बीज वितरण व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बहाल नहीं किया गया, तो आगामी 20 मई को स्थानीय विधायक निवास का घेराव किया जाएगा। बात यहीं नहीं रुकेगी, इसके बाद इस आंदोलन की गूंज राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचेगी।

​ खेती को बर्बाद करने वाला फैसला

​महापंचायत में जुटे किसानों और किसान नेताओं ने सरकारी नीति पर तीखे सवाल उठाए। किसान नेता भूपेन्द्र शर्मा ने सरकार को घेरते हुए कहा:
​"एक तरफ सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बिना कोई पर्याप्त जैविक विकल्प उपलब्ध कराए रासायनिक खाद की मात्रा में कटौती कर दी गई है। इस अव्यावहारिक फैसले से फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आएगी, जिससे किसान कर्ज के अंतहीन जाल में फंस जाएगा।"

​बैठक में इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया कि इस भीषण गर्मी के मौसम में किसान खेती की तैयारी करने के बजाय खाद और डीजल के लिए सोसायटियों और पेट्रोल पंपों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है।

​ दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हुए किसान

​आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए किसान नेताओं ने निर्णय लिया है कि पहले चरण में सोसायटियों के सामने शांतिपूर्ण धरना देकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी स्थानीय जागरूक युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सौंपी गई है। ​किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि समूचे किसान जगत के अस्तित्व की लड़ाई है। यही वजह है कि राजनीतिक भेदभाव को भुलाकर ग्राम खौली, टेकारी, कठिया, भानसोज सहित दर्जनों गांवों के प्रतिनिधि और ग्रामीण एक मंच पर आ चुके हैं।

​ एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, दी अंतिम मोहलत

​महापंचायत की समाप्ति के बाद, जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर एवं किसान नेता पारस नाथ साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) आरंग को मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहब के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को व्यवस्था सुधारने की अंतिम मोहलत दी गई है।
​महापंचायत में ये रहे उपस्थित
​इस महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक में क्षेत्र के प्रमुख किसान नेता और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से:

​गोविंद चन्द्राकर
​श्रवण चन्द्राकर
​जनक राम आवड़े
​द्रोण चन्द्राकर
​मोनू चन्द्राकर
​चिंता राम वर्मा
​हिरेश चन्द्राकर
​कमल चन्द्राकर
​धनाजिक चन्द्राकर

​इनके साथ ही क्षेत्र के अनेक किसान, ग्रामीणजन एवं ऊर्जावान युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को हर स्तर पर सफल बनाने का संकल्प लिया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 19 मई को बस्तर में आयोजित होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। 

बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री साय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

विशेष लेख-विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025,ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय

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1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम

रायपुर- भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा  का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ

125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा।

सुगम संक्रमण  की व्यवस्था

श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे।

विकसित भारत 2047 का आधार

यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी।

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट

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जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा

रायपुर- भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।नरेन्द्र भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया।

राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है।

पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास

छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्री श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

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