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सहकार से समृद्धि छत्तीसगढ़ में खुशहाली का नया मार्ग

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 धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)

अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

रायपुर : छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो अब 'सहकार से समृद्धि' के विजन के साथ विकास के एक नए और आधुनिक ढांचे में बदल रहा है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में सहकारी समितियों को मजबूत कर ग्रामीण विकास और किसान सशक्तिकरण को नई गति दी जा रही है। एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना। सहकारिता के इस शाश्वत मंत्र को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सहकार से समृद्धि विजन ने आज भारत के ग्रामीण और शहरी परिदृश्य में एक नई क्रांति का आधार बना दिया है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में यह संकल्प आज एक आर्थिक संबल बनकर उभर रहा है। यह मात्र एक व्यवस्था नहीं, बल्कि अंत्योदय की वह भावना है जहाँ समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहा है।

सहकारिता विकास का आधुनिक ढांचा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने सहकारिता के दायरे को केवल कृषि तक सीमित न रखकर इसे व्यापार और सेवा क्षेत्र का प्रमुख स्तंभ बना दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की संकल्पनाओं को धरातल पर उतारते हुए राज्य के सहकारी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है।

समृद्धि के प्रमुख आधार क्रांतिकारी कदम

सहकारिता के माध्यम से खुशहाली सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित प्रयास किए जा रहे हैं। 515 नवीन पैक्स (PACS) का गठन सहकारी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का गठन किया गया है। अब राज्य में कुल पैक्स समितियों की संख्या 2 हजार 573 हो गई है। ये समितियाँ अब केवल ऋण वितरण नहीं, बल्कि बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में कार्य कर रही हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा

इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज के साथ-साथ जन औषधि केंद्र, उर्वरक वितरण और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसी सुविधाएं सीधे उनके गांव में मिल रही हैं। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत किसान अब अपनी उपज का स्थानीय स्तर पर सुरक्षित भंडारण कर सकेंगे। इससे उन्हें फसल को कम दामों पर बेचने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। महिला और युवा सशक्तिकरण को बढावा देने दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में सहकारी समितियों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को उद्यमिता से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा रही है।

तकनीक, पारदर्शिता और सुशासन

सहकारिता में स्व से ऊपर सर्व के कल्याण की भावना निहित है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया है। समितियों के कंप्यूटरीकरण से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और हर लेनदेन पारदर्शी हुआ है। ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से स्थानीय सहकारी उत्पादों को अब राष्ट्रीय और वैश्विक मंच प्राप्त हो रहा है।

विकसित छत्तीसगढ़ - विकसित भारत

सहकार से समृद्धि केवल एक नारा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों, महिलाओं और युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक जीवंत अभियान है। जब हमारे गांव के पैक्स केंद्र सशक्त होंगे, तभी राष्ट्र समृद्ध होगा। जुड़िए सहकारिता से, बढ़िए समृद्धि की ओर की पहल के साथ छत्तीसगढ़ आज विकास के ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर है, जहाँ सामूहिक सहयोग ही प्रत्येक व्यक्ति की प्रगति का आधार है।

"छत्तीसगढ़ में सहकारिता केवल ऋण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आधार है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को आत्मसात करते हुए हमारी सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने सहकारी समितियों (पैक्स) को बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में विकसित किया है, ताकि किसान और ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव के समीप ही खाद-बीज के साथ-साथ बैंकिंग, स्वास्थ्य और तकनीकी सुविधाएँ मिल सकें। जब हमारा गांव और वहां का सहकारी तंत्र मजबूत होगा, तभी हम 'विकसित छत्तीसगढ़' और 'विकसित भारत' के स्वप्न को साकार कर पाएंगे।"
—  विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

’इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका’

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है।

डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पाेरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।


ग्लासगो CWG 2026 की तैयारियों की समीक्षा, खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों की तैयारी और समन्वय पर दिया जोर

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केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games 2026) की भारत की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य सभी संबंधित हितधारकों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना और खेलों की तैयारी कर रहे भारतीय खिलाड़ियों के लिए सहयोग प्रणाली को मजबूत करना था।

इस बैठक में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के प्रतिनिधि, जिनमें CWG 2026 के चीफ डी मिशन शामिल थे, तथा भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अधिकारी उपस्थित रहे। इन सभी ने संचालन योजना, खिलाड़ियों की तैयारी और समन्वय व्यवस्था पर जानकारी साझा की।

खेल मंत्री ने भारतीय खिलाड़ियों की तैयारी, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, कल्याण और समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की।

डॉ. मांडविया ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने समयबद्ध योजना, अंतर-एजेंसी समन्वय और खिलाड़ी-केंद्रित तैयारी पर विशेष जोर दिया।

बैठक में 2026 CWG के समापन समारोह की तैयारियों पर भी चर्चा हुई, जहां भारत को 2030 में अहमदाबाद (गुजरात) में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान के रूप में औपचारिक रूप से बागडोर सौंपी जाएगी।

इस संदर्भ में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया और तैयारियों पर चर्चा की।

बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी समन्वय की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसे खेल सचिव द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है।

चर्चा में समन्वय तंत्र, सुविधा व्यवस्था और भारतीय दल से संबंधित सभी तैयारियों के सुचारू संचालन पर जोर दिया गया।

SAI और मंत्रालय के अधिकारियों ने खेलों के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप की जानकारी दी, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता अनुभव, सहायक स्टाफ की तैनाती और आकस्मिक योजना शामिल है।

यह बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि मंत्रालय, IOA, SAI, गुजरात सरकार और अन्य सभी हितधारक मिलकर भारत के CWG 2026 अभियान की व्यापक तैयारी के लिए प्रतिबद्ध हैं।

महाराष्ट्र में PMAY-G के तहत 5 लाख घरों के गृह प्रवेश, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी ₹8,368 करोड़ की सहायता और कई विकास परियोजनाओं की सौगात

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल मैदान में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने 5 लाभार्थियों को घर की चाबियाँ सौंपी तथा ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खनन एवं पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई, लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव (पाटिल), राज्य मंत्री (ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज) योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे घर में न रहे और हर पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्का आवास मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य किया है और रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूरे कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणाम-आधारित प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

 शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महाराष्ट्र को ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस राशि से राज्य में ग्रामीण गरीबों के लिए आवास निर्माण में तेजी आएगी और “आवास-विहीन ग्रामीण महाराष्ट्र” के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम सूची में नहीं आ सका है, उनके लिए सर्वे और सत्यापन के बाद आगे भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल घर बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर को बिजली, पानी, स्वच्छता और सम्मानजनक जीवन के साथ समग्र रूप से सुधारना है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के तहत महाराष्ट्र के लिए ₹122.98 करोड़ की 35 सड़क परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की। इन परियोजनाओं से 95.99 किलोमीटर सड़क निर्माण होगा, जिससे 35 ग्रामीण बस्तियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बाजार जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।

“महा आवास अभियान” के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों और अधिकारियों को सम्मानित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण की भावना एक साथ आती है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं।

उन्होंने “विकसित भारत जी-रैम-जी योजना” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल 1 जुलाई से शुरू होगी और गांवों के समग्र व योजनाबद्ध विकास की मजबूत नींव बनेगी। इसके तहत ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजना तैयार करेंगी, जिससे बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुविधाओं और आजीविका के अवसरों में तेजी आएगी।

किसानों से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्याज किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई उत्पादन और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार कीमतों पर असर पड़ा है, इसलिए आज से ही NAFED ₹12.35 प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की खरीद शुरू करेगा, जिससे किसानों को तुरंत सहायता मिल सके।

उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं पर भी केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को 30 लाख घरों की मंजूरी मिली है, जिनमें से 5 लाख घर रिकॉर्ड समय में पूरे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लक्ष्य रखती है कि महाराष्ट्र को आवास-विहीन राज्य बनाया जाए।

इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, लाभार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।

जल जीवन मिशन 2.0 को गति देने के लिए जिला कलेक्टरों के 8वें पेयजल संवाद का आयोजन

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जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों का 8वां पेयजल संवाद आयोजित किया। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर/उपायुक्त तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के जल जीवन मिशन (JJM) के मिशन निदेशक शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन को तेज करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।

इस संवाद की अध्यक्षता DDWS के सचिव अशोक के.के. मीना ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन तथा DDWS के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सचिव ने अपने संबोधन में बताया कि 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और सामुदायिक स्रोतों पर निर्भरता को घटाकर घर-घर नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी प्रगति हुई है। कोविड काल की चुनौतियों के बावजूद मिशन ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और अब इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। वर्तमान में लगभग 81% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध है।

उन्होंने स्थिरता (Sustainability) पर जोर देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से हुआ है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता स्थानीय शासन पर निर्भर करती है। JJM 2.0 के तहत गांव के भीतर की जल आपूर्ति व्यवस्था ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी, जबकि बड़े ढांचे राज्य सरकारों के पास रहेंगे। ग्राम पंचायतों को स्थानीय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करना होगा और ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने जिला स्तर पर सेवा सुधार के लिए DWSM बैठकों के महत्व पर भी जोर दिया और जिला कलेक्टरों से हर महीने नियमित बैठकें करने, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की समीक्षा करने तथा विवरण डैशबोर्ड पर अपलोड करने का आग्रह किया।

सचिव ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2024 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन में जिला कलेक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने कहा कि JJM 2.0 और अन्य सुधारों के तहत जिला स्तर के नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर मिशन के लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगामी 22 मई 2026 को होने वाली जिला कलेक्टरों की बैठक में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया, जिसमें JJM 2.0 और SBM-G के तहत प्राथमिक कार्यों पर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

परियोजना निगरानी और सुधार प्रणाली पर प्रस्तुति

बैठक में सुजलम भारत PM गति शक्ति मोबाइल ऐप के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर प्रस्तुति दी गई, जिसके माध्यम से जल जीवन मिशन की योजनाओं की निर्माण, परीक्षण, कमीशनिंग और हैंडओवर तक की निगरानी की जा सकती है।

इसके साथ ही व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (CIRP) फ्रेमवर्क पर भी प्रस्तुति दी गई, जिसमें भौतिक प्रगति, वित्तीय प्रबंधन, जल गुणवत्ता, शासन सुधार और डिजिटल निगरानी को शामिल किया गया है।

जिलों द्वारा सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुति

नागपुर (महाराष्ट्र):

जल संकट वाले क्षेत्र में सोलर आधारित पंप और वर्षा जल संचयन से 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे लागत में भारी कमी आई।

कोरापुट (ओडिशा):

पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग आधारित प्रणाली, सोलर योजनाएं और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति मजबूत की गई।

कोल्लम (केरल):

100% मीटरिंग, 24 घंटे शिकायत निवारण प्रणाली और 24 घंटे जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश):

नदी पुनर्जीवन, तालाब संरक्षण और समुदाय आधारित जल संरक्षण अभियानों के माध्यम से जल स्तर में सुधार किया गया।

पाली (राजस्थान):

जल संकट से निपटने के लिए भूजल और सतही जल के संयोजन, वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचनाओं को अपनाया गया।

धनबाद (झारखंड):

डिजिटल ऐप के माध्यम से जल संपत्तियों की निगरानी, तालाब पुनर्जीवन और सूखे बोरवेल्स को पुनः सक्रिय किया गया।

निष्कर्ष

इन प्रस्तुतियों ने जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और नवाचारों को उजागर किया। अंत में अतिरिक्त सचिव कमल किशोर सोआन ने जिला कलेक्टरों की सक्रिय भूमिका को मिशन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

IITM पुणे में WISE-2026 के तहत मौसम और जलवायु स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ

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भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत आता है, ने आज मौसम और जलवायु से संबंधित स्टार्टअप्स के लिए अपना समर्पित इन्क्यूबेशन सेंटर औपचारिक रूप से शुरू किया। इस ऐतिहासिक अवसर को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Weather and Climate Innovation Meet for Startups and Entrepreneurs (WISE-2026)” के साथ मनाया गया, जो भारत में मौसम सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

इस केंद्र का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शैलेश नाइक (निदेशक, NIAS एवं पूर्व सचिव, MoES), डॉ. सूर्यचंद्र राव (निदेशक, IITM) तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह इन्क्यूबेशन सेंटर “नेशनल एंटरप्राइज फॉर एटमॉस्फेरिक टेक्नोलॉजी (NEAT)” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो “मिशन मौसम” के अंतर्गत एक महत्वाकांक्षी पहल है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

मौसम और जलवायु चुनौतियों से निपटने में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की जटिलता बढ़ रही है, इसलिए पारंपरिक शोध से आगे बढ़कर एक समावेशी और बहु-हितधारक प्रणाली विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि “मिशन मौसम” एक मौसम-स्मार्ट और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र बनाने की दिशा में एक आधारभूत कदम है, जिसमें उन्नत अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडलिंग और स्थानीय स्तर पर जानकारी के प्रसार को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा—

“विभिन्न क्षेत्रों के युवा उद्यमियों को अन्य हितधारकों की जरूरतों की बेहतर समझ होती है, इसलिए हमें मिलकर काम करना होगा। यह सहयोग न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन और आजीविका बचाने के लिए भी आवश्यक है।”

प्रगति के चार स्तंभ: सचिव ने मौसम विज्ञान प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए चार मुख्य आधार बताए—

  1. अवलोकन (Observations)

  2. मॉडलिंग (Modeling)

  3. उपयोगकर्ता-विशिष्ट अनुप्रयोग (User-specific Applications)

  4. सूचना प्रसार (Dissemination)

मिशन मौसम: इसे पाँच वर्षों की एक योजना के रूप में लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान और जलवायु विश्लेषण को विभिन्न मंत्रालयों और स्टार्टअप्स के सहयोग से एक “स्वास्थ्य प्रणाली दृष्टिकोण” के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने नवाचारकर्ताओं को मंत्रालय के मुक्त डेटा संसाधनों—जैसे रिमोट सेंसिंग और रिऐनालिसिस डेटा—का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया, ताकि कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सटीक और स्थानीय समाधान विकसित किए जा सकें।

कार्यक्रम के दौरान एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें यह बताया गया कि मौसम और जलवायु विज्ञान अब शोध से आगे बढ़कर स्टार्टअप-आधारित व्यावहारिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है। इसमें कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर यह भी कहा गया कि “मौसम की जानकारी ही आर्थिक जानकारी है”, और वैज्ञानिक डेटा को वास्तविक जीवन के उपयोगी उपकरणों में बदलना आवश्यक है।

WISE 2026 कार्यक्रम में लगभग 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 100 स्टार्टअप संस्थापक शामिल थे। इस कार्यक्रम में NCMRWF, IMD, NCPOR, ICRISAT, IISER पुणे तथा IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे और IIT गांधीनगर सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए।

यह पहल भारत में जलवायु तकनीक (Climate Tech) को बढ़ावा देने और एक मजबूत, स्मार्ट एवं लचीली मौसम प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आंध्र प्रदेश में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ₹15,000 करोड़ की AMCA सहित कई रणनीतिक रक्षा परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 15 मई 2026 को आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के पुट्टपर्थी में कई रणनीतिक एयरोस्पेस और रक्षा परियोजनाओं की आधारशिला रखी तथा विभिन्न ग्राउंडिंग (शिलान्यास) समारोहों की अध्यक्षता की।

पुट्टपर्थी में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और अन्य भविष्य की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के त्वरित विकास के लिए कोर इंटीग्रेशन एवं फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा अनकापल्ली जिले के टी. सिरसापल्ली गांव में नेवल सिस्टम्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की आधारशिला रखी गई, जो उन्नत अंडरवॉटर हथियारों और नौसैनिक युद्ध प्रणालियों की जरूरतों को पूरा करेगी।

इसके साथ ही श्री सत्य साईं जिले के मदकासिरा में डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी और एम्युनिशन एवं इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके अलावा कर्नूल में आठ ड्रोन कंपनियों के एक समूह द्वारा ड्रोन सिटी स्थापित करने की घोषणा की गई। विभिन्न कंपनियों ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ रक्षा इकाइयों की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने इन परियोजनाओं की शुरुआत को “ऐतिहासिक” बताया और कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में लक्ष्य किसी अन्य देश पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ तीनों सेनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करेंगी और देश को भविष्य के लिए तैयार बनाएंगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से आंध्र प्रदेश के विकास को भी नई गति मिलेगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएँ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगी। स्थानीय शैक्षणिक संस्थान जैसे इंजीनियरिंग कॉलेज और आईटीआई इस पहल का हिस्सा बनेंगे। इससे एक मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पुट्टपर्थी जल्द ही उन चुनिंदा वैश्विक स्थानों में शामिल होगा जहाँ से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे।

नेवल सिस्टम्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की परियोजना) पर 480 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें अंडरवॉटर ड्रोन, काउंटर-मेज़र सिस्टम और टॉरपीडो बनाए जाएंगे। इससे भारतीय नौसेना की क्षमताएँ मजबूत होंगी और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी (अग्न्यास्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड) पर लगभग 1500 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जबकि एम्युनिशन और इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट (HFCL लिमिटेड) लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जाएगा।

ड्रोन सिटी को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आधुनिक युद्ध में गेम चेंजर साबित होगी और यह क्षेत्र “ड्रोन हब” के रूप में उभरेगा।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश की रक्षा क्षमता और वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती ताकत और तकनीकी प्रगति का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि नया आंध्र प्रदेश “नवाचार, अवसंरचना और औद्योगिकीकरण” के आधार पर विकसित हो रहा है और “विकसित भारत” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री किन्जरापु राममोहन नायडू, राज्य सरकार के मंत्री, रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक में मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन क्षेत्र में सुधार एवं आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने 14 मई 2026 को रांची में सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस समीक्षा बैठक में सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक नीलेंदु कुमार सिंह, एमईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक आई. डी. नारायण, सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक तथा सीएमपीडीआई, सीसीएल और एमईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 में सीएमपीडीआई द्वारा अन्वेषण, प्रतिवेदन तैयार करना, पूंजीगत व्यय, अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल तथा सौर परियोजनाओं के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों पर भी चर्चा की गई।

मंत्री ने सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की सराहना करते हुए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक अन्वेषण के महत्व पर बल दिया, जो देश की भविष्य की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए बाजार पहुंच में सुधार करने और अधिक बोलीदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि खदान बंदी गतिविधियों को स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक अवसरों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने पुनः प्राप्त खनन क्षेत्रों में मखाना की खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इसे सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” पहल से जोड़ा जा सके। यह दूरदर्शी पहल परित्यक्त खनन क्षेत्रों को कृषि एवं जलीय कृषि परिसंपत्तियों में बदलकर स्थानीय लोगों को दीर्घकालिक और सतत आर्थिक सहायता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

बैठक के दौरान सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड तथा मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के बीच कोयला तथा ऊर्जा एवं गैर-ऊर्जा खनिजों के अन्वेषण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु 14 मई 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह संयुक्त अन्वेषण गतिविधियां देश में कोयला एवं अन्य खनिजों के राष्ट्रीय भंडार को बढ़ाने तथा नई खदानों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने, भारत की खनिज संपदा के विकास को गति देने तथा खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका

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वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ - मुख्यमंत्री साय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले

रायपुर- छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे ।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है। 

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पोरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

 राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

अफवाहों पर ध्यान न दें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता : कलेक्टर

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 धमतरी : जिले में पेट्रोल पंपों पर इन दिनों बढ़ती भीड़ एवं कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ईंधन एवं घरेलू गैस की कमी संबंधी अफवाह फैलाए जाने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अबिनाश मिश्रा ने जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारियों (एसडीएम) को अपने-अपने क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर आवश्यकतानुसार कार्यपालिक दण्डाधिकारी एवं फूड इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


 कलेक्टर  मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से संचालित हो रही है। इसी प्रकार एलपीजी (घरेलू गैस) की भी जिले में किसी प्रकार की कमी अथवा शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा फैलायी जा रही भ्रामक सूचनाओं के कारण अनावश्यक रूप से पेट्रोल पंपों पर भीड़ एकत्र हो रही है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हो रही है।

 उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पेट्रोल पंपों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अव्यवस्था पाए जाने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस एवं प्रशासनिक अमले को भी स्थिति पर सतत नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

 कलेक्टर  मिश्रा ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना अथवा अफवाह पर ध्यान न दें और आवश्यकता के अनुरूप ही ईंधन एवं गैस क्रय करें। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा जिले में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अवैध रेत उत्खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 5 हाईवा वाहन जब्त

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 रायपुर : राज्य में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले में राजस्व एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने केवा, भादा और नवापारा घाट क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की।


   संयुक्त जांच के दौरान अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए जाने पर 5 हाईवा वाहनों को जब्त किया गया। सभी जब्त वाहनों को अग्रिम कार्रवाई हेतु पुलिस लाइन जांजगीर में सुरक्षित रखा गया है।

    कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने पर वाहन चालक जोहन कुमार और संतोष मिरी के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार निरंतर और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

महासमुंद में बिजली गिरने से बड़ा हादसा, बेटे की मौत, पिता जिंदगी की जंग लड़ रहा

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 महासमुंद। तुमगांव थाना क्षेत्र में आज शुक्रवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। घटना की चपेट में आने से बेटे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पिता गंभीर रूप से झुलस गए। घायल पिता का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।


बताया जा रहा है कि मौसम खराब होने के दौरान दोनों खेत की ओर गए हुए थे, तभी अचानक तेज गरज-चमक के बीच आकाशीय बिजली गिर गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।

इधर, छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। रायपुर में शुक्रवार सुबह गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश की संभावना जताई है। वहीं 17 मई से मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीटवेव चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान पेन्ड्रा रोड में 22.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

छत्तीसगढ़ में हाथियों का आतंक जारी, 53 हाथी चार झुंडों में घूम रहे, किसानों की फसलें तबाह

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में 53 हाथी चार झुंडों में विचरण कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ताजा मामला कुदमुरा रेंज का है, जहां धरमजयगढ़ वन मंडल से पहुंचे दो दंतैल हाथियों ने गीतकुंवारी गांव में किसानों की खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया।


जानकारी के मुताबिक, कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज स्थित मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों का बड़ा दल डेरा जमाए हुए है। बताया जा रहा है कि हर साल गर्मी के मौसम में हाथियों का झुंड करीब ढाई से तीन महीने तक इस इलाके में रहता है। इस बार मार्च महीने से हाथियों का दल कटोरीमोती के पास कुकरीचकहर से मेउड़ पहाड़ क्षेत्र में सक्रिय है।

करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेउड़ पहाड़ में हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। हालांकि भोजन की तलाश में हाथी अक्सर पहाड़ से नीचे उतरकर गांवों की ओर रुख कर लेते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ जाता है।

गुरुवार रात धरमजयगढ़ वन मंडल से आए दो दंतैल हाथी गीतकुंवारी गांव में घुस गए। हाथियों ने कई एकड़ में लगी धान की फसल रौंद दी। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक फसलों को भारी नुकसान पहुंच चुका था।

ग्रामीणों का कहना है कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन हाथियों के हमले से पूरी मेहनत बर्बाद हो गई। लगातार हाथियों की आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के लोग भय के साये में जी रहे हैं। रात होते ही ग्रामीण घरों में दुबकने को मजबूर हैं और खेतों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है।

वन विभाग की टीम गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क कर रही है। साथ ही हाथी मित्र दल भी लगातार निगरानी में जुटा हुआ है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें, अकेले हाथियों के पास न जाएं और उन्हें छेड़ने की कोशिश न करें।
वन विभाग के अनुसार फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है। वहीं मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के दल की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, ताकि उन्हें रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके।
जिले में लगातार बढ़ रही हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

21 जून को दोबारा होगी NEET-UG परीक्षा, NTA ने जारी की नई तारीख

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 नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ी घोषणा की है। एनटीए ने शुक्रवार को बताया कि NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा अब रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।


एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। एजेंसी ने परीक्षार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल NTA के आधिकारिक माध्यमों पर जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।

शिक्षा मंत्री के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, NEET-UG की दोबारा परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा को लेकर गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परीक्षा आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी, सचिव (स्कूल शिक्षा) संजय कुमार, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, CBSE चेयरपर्सन राहुल सिंह, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

पेपर लीक के बाद रद्द हुई थी परीक्षा

गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 22.79 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद NTA ने दोबारा परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करने की बात कही थी।
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी और न ही कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।

पेपर लीक मामले में CBI की जांच जारी

NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को हिरासत में लिया, वहीं दो अन्य संदिग्धों को भी पकड़ा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच एजेंसी NTA के भीतर संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है। सीबीआई का कहना है कि इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
NTA देशभर के MBBS, BDS और अन्य अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा आयोजित करती है। यह परीक्षा इस वर्ष देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की गई थी।

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह से बढ़ी हलचल, सरकार ने कहा- पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर फैली अफवाहों के बाद कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।


खाद्य सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऑयल कंपनियों और राज्य शासन के समन्वय से सभी पेट्रोल पंपों तक लगातार सप्लाई पहुंचाई जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक में आकर जरूरत से ज्यादा ईंधन की खरीदारी न करें।

खाद्य विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 45,474 किलोलीटर पेट्रोल और 84,654 किलोलीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं प्रतिदिन पेट्रोल की खपत करीब 3,635 किलोलीटर और डीजल की आवश्यकता लगभग 5,873 किलोलीटर है। विभाग का कहना है कि ऑयल डिपो तक नियमित रूप से आपूर्ति पहुंच रही है तथा वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रदेश में कुल 2516 पेट्रोल-डीजल पंप संचालित हैं। इनमें रायपुर के 326 पंपों में से 35 और बिलासपुर के 156 पंपों में से 13 पंप फिलहाल अस्थायी रूप से ड्राई आउट बताए गए हैं। खाद्य विभाग के मुताबिक इन पंपों तक तेजी से स्टॉक पहुंचाने का काम जारी है।

पिछले दो दिनों में कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की खबरों के बाद लोगों में अचानक घबराहट बढ़ गई थी। बड़ी संख्या में लोगों द्वारा जरूरत से अधिक पेट्रोल-डीजल खरीदे जाने के कारण कुछ स्थानों पर कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन गई।
खाद्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं है। यह स्थिति केवल अचानक बढ़ी मांग के कारण बनी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी अफवाह या भ्रम में आकर ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें। शासन और ऑयल कंपनियां मिलकर सभी पेट्रोल पंपों पर नियमित सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं।
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