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CG NEWS : दिनदहाड़े युवती की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार आरोपी फरार

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 सक्ती। सक्ती जिले के जोंगरा गांव में शुक्रवार को दिनदहाड़े एक युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दो नकाबपोश बाइक सवार हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और दहशत का माहौल बन गया।


मृतका की पहचान पूर्णिमा चौहान के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वह Herbalife उत्पादों के व्यवसाय से जुड़ी हुई थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो युवक बाइक पर सवार होकर मौके पर पहुंचे। दोनों ने अपने चेहरे नकाब से ढके हुए थे। कुछ ही देर में आरोपियों ने पूर्णिमा चौहान पर ताबड़तोड़ गोली चला दी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ीं। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी तेजी से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।

पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस व्यक्तिगत रंजिश, कारोबारी विवाद समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच में जुटी हुई है।

इस सनसनीखेज वारदात के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख भवनों का होगा सुरक्षा ऑडिट

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रायपुर- हाल ही में देश में हुई अग्नि दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यभर के सभी प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में संभावित हादसों को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए। साथ ही जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exits), फायर अलार्म सिस्टम, बिजली व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां बेहतर होंगी और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

नशे में पहुंचे दूल्हे से शादी करने से किया इनकार, छत्तीसगढ़ की मुस्कान प्रधान बनीं नशामुक्ति अभियान की मिसाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की 22 वर्षीय मुस्कान प्रधान ने सामाजिक साहस और आत्मसम्मान की मिसाल पेश करते हुए नशे की हालत में विवाह स्थल पर पहुंचे दूल्हे से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस फैसले की पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है और प्रशासन ने भी उनके साहस की प्रशंसा की है।

जानकारी के अनुसार, विवाह समारोह के दौरान जब दूल्हा शराब के नशे में पहुंचा, तो मुस्कान ने स्थिति को देखते हुए विवाह करने से इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे ऐसे व्यक्ति के साथ अपना जीवन नहीं बिताना चाहतीं, जो नशे की हालत में विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार में शामिल हो।

मुस्कान के इस साहसिक निर्णय को परिवार और समाज के कई लोगों का समर्थन मिला। बाद में जिला प्रशासन ने भी उनके फैसले की सराहना करते हुए उन्हें नशामुक्ति अभियान का प्रेरणास्रोत बताया। उनके कदम को युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और सामाजिक जिम्मेदारी का मजबूत संदेश माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस और नशा मुक्त भारत अभियान के दौरान मुस्कान की यह पहल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि उनका निर्णय यह संदेश देता है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाना केवल व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।

मुस्कान प्रधान का यह साहसिक कदम अब कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

अग्नि सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी नई स्थिति रिपोर्ट

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से अग्नि सुरक्षा संबंधी तैयारियों और आधुनिकीकरण कार्यों पर नई स्थिति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अग्निशमन सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए 280 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत राज्यभर में नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, मौजूदा फायर स्टेशनों को सुदृढ़ किया जाएगा तथा अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन, बचाव उपकरण और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अग्निशमन विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने सरकार से इन योजनाओं की प्रगति, समय-सीमा और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्निशमन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

राज्य सरकार की इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मार्च 2027 तक पूरे होंगे छत्तीसगढ़ के दो बड़े भारतमाला हाईवे प्रोजेक्ट, सड़क संपर्क और व्यापार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य में सड़क संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन तेज होगा और व्यापार एवं औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

सरकार के अनुसार, दोनों हाईवे परियोजनाएं छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों से बेहतर ढंग से जोड़ेंगी, जिससे यात्रियों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी अधिक सुगम और सुरक्षित होगी। इससे यात्रा का समय कम होगा, परिवहन लागत में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

इन परियोजनाओं के पूरा होने से उद्योग, कृषि और खनिज क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण किसानों और उद्यमियों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, जबकि औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन भी तेज और किफायती होगा।

भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह सड़क नेटवर्क क्षेत्रीय विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी ला रही हैं।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी और मजबूत होगी तथा राज्य के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसके मसौदे (ड्राफ्ट) को तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रमासुब्रमणियन करेंगे। समिति में कानून, प्रशासन और समाज से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक विचार-विमर्श के बाद राज्य के लिए उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके।

सरकार के अनुसार, यह समिति विभिन्न राज्यों में लागू या प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रावधानों का अध्ययन करेगी, संबंधित कानूनों की समीक्षा करेगी और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक तथा कानूनी पक्षों से सुझाव प्राप्त करने के बाद अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी।

समिति राज्य के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से संवाद स्थापित कर एक संतुलित और व्यवहारिक मसौदा तैयार करेगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता की दिशा में ठोस पहल करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानूनों की संभावनाओं का अध्ययन करना और राज्य के हित में उपयुक्त सुझाव तैयार करना है।

मध्य-पूर्व में आपूर्ति सामान्य होने के बाद उद्योगों को फिर मिली एलपीजी की पूरी आपूर्ति

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के वाणिज्यिक (Commercial) और औद्योगिक (Industrial) उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। यह फैसला मध्य-पूर्व में आपूर्ति की स्थिति में सुधार के बाद लिया गया है।

हाल ही में मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने के कारण सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। अब हालात सामान्य होने के बाद ये प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

सरकार के इस निर्णय से होटल, रेस्तरां, छोटे उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें अब पहले की तरह नियमित एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कमी न हो और आवश्यक सेवाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें।

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 में 1.31 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी, हरिद्वार में राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ समापन

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17 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान देशभर में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जागरूकता एवं जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस अभियान के तहत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार, वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञा, रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताएं सहित अनेक सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

यह सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसका समापन 26 जून 2026 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV), हरिद्वार, उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।

4,000 लोगों ने निकाली नशा मुक्त रैली

कार्यक्रम के दौरान डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली निकाली गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की शपथ तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था (Ageing with Dignity) की शपथ दिलाई और नशामुक्त एवं समावेशी समाज के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

देशभर से हजारों लोगों की सहभागिता

कार्यक्रम में छात्रों, युवाओं, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय हितधारकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति उपचार केंद्रों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर नशा मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत किया।

दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच दो समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर रहा।

ये समझौते—

  • नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) तथा

  • अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)

के अंतर्गत किए गए।

इनका उद्देश्य देशभर में जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता, नशीले पदार्थों की मांग में कमी तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था के संदेश को बढ़ावा देकर वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को मजबूत करना है।

उत्कृष्ट योगदान देने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और अनुदान प्राप्त संस्थानों द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के तहत किए गए कार्यों की सराहना की गई।

साथ ही, नशा मुक्ति मित्रों को समुदाय में जागरूकता फैलाने और लोगों को जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितधारकों को भी सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत के लिए जनभागीदारी का आह्वान

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के सफल आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार 'सम्पूर्ण सरकार और सम्पूर्ण समाज' (Whole-of-Government & Whole-of-Society) दृष्टिकोण के माध्यम से नशामुक्त समाज बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने और "नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत" के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।

भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम, उर्वरक विभाग ने आयोजित की प्री-ईओआई बैठक

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सतत कृषि, कार्बन न्यूट्रैलिटी और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers - DoF) ने भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्रों की स्थापना के लिए प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (Pre-EOI) की उच्चस्तरीय बैठक का सफल आयोजन किया। यह बैठक प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL), नोएडा में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता उर्वरक विभाग के संयुक्त सचिव एवं PDIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के.के. पाठक ने की।

इस सप्ताह की शुरुआत में उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया था। प्री-ईओआई बैठक में NTPC, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI), ग्रीन अमोनिया एवं यूरिया प्रौद्योगिकी प्रदाता, प्रमुख उर्वरक कंपनियां, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माता, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया क्षेत्र की कंपनियां सहित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अनेक हितधारकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन भाग लिया। बड़ी संख्या में भागीदारी इस महत्वाकांक्षी पहल को साकार करने की व्यापक रुचि को दर्शाती है।

प्रमुख नीतिगत और परिचालन बिंदु

1. विभिन्न मंत्रालयों का समन्वित सहयोग

ग्रीन यूरिया उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए कई मंत्रालयों की वित्तीय सहायता सुनिश्चित की गई है।

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।

  • उर्वरक विभाग (DoF) ग्रीन अमोनिया को देश की उर्वरक उत्पादन प्रणाली में शामिल करने के लिए आवश्यक नीतिगत एवं संस्थागत ढांचा तैयार करेगा।

2. निर्माताओं के लिए सब्सिडी व्यवस्था

ग्रीन अमोनिया का उत्पादन फिलहाल पारंपरिक ग्रे अमोनिया की तुलना में महंगा है। इसे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार विशेष सब्सिडी व्यवस्था लागू करेगी।

  • SECI ग्रीन अमोनिया उत्पादकों से खरीदकर उर्वरक कंपनियों को ग्रे अमोनिया के बाजार मूल्य पर उपलब्ध कराएगा।

  • उर्वरक विभाग दोनों कीमतों के बीच का अंतर वहन करेगा, जिससे उर्वरक कंपनियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं पड़ेगा।

3. उत्पादकों को वित्तीय प्रोत्साहन

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत ग्रीन अमोनिया उत्पादकों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी।

  • प्रतिवर्ष 7.24 लाख मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की खरीद का लक्ष्य।

  • SECI द्वारा पारदर्शी ई-रिवर्स नीलामी के माध्यम से आवंटन।

  • नए ग्रीनफील्ड और निर्माणाधीन परियोजनाओं को सहायता।

  • व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद नकद प्रोत्साहन।

  • 10 वर्षों के लिए दीर्घकालिक खरीद समझौते (GAPA/GASA) के माध्यम से बाजार की सुनिश्चितता।

पुडिमाडका पायलट परियोजना बनी मॉडल

बैठक में आंध्र प्रदेश के पुडिमाडका स्थित 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट पर भी चर्चा हुई। NTPC की अनुसंधान इकाई NETRA द्वारा विकसित यह संयंत्र कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCUS) तथा वॉटर इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक का उपयोग करता है। यह परियोजना कार्बोनेटेड फ्लाई ऐश, फूड-ग्रेड उत्पादों और सिंथेटिक ईंधन जैसे उपयोगों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रीन यूरिया उत्पादन के लिए भारत की रणनीति

भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के माध्यम से ग्रीन अमोनिया उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, ग्रीन यूरिया के निर्माण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की भी आवश्यकता होती है।

इसके लिए तापीय बिजलीघर, सीमेंट और इस्पात संयंत्रों से प्राप्त कैप्चर की गई CO₂ का उपयोग किया जाएगा।

  • 12.7 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले एक विश्वस्तरीय यूरिया संयंत्र को हर वर्ष लगभग 10 लाख मीट्रिक टन CO₂ की आवश्यकता होगी।

  • भारत वर्तमान में हर वर्ष लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन यूरिया आयात करता है।

  • देश के कई मौजूदा यूरिया संयंत्र 30 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं, इसलिए नई उत्पादन क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बल

नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन यूरिया उत्पादन को एकीकृत करने वाली परियोजनाएं भारत की ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों को मजबूत करेंगी।

NTPC जैसी संस्थाएं, जिनके पास बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और उर्वरक क्षेत्र का अनुभव है, इन परियोजनाओं के नेतृत्व के लिए उपयुक्त मानी जा रही हैं।

सरकार ने निवेशकों से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और विकसित हो रहे कार्बन कैप्चर ढांचे का लाभ उठाकर एकीकृत ग्रीन यूरिया परियोजनाएं विकसित करने का आह्वान किया है।

यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित उर्वरक उत्पादन, तकनीकी आत्मनिर्भरता, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सतत कृषि की दिशा में एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है।

ASPIRE: ग्रामीण सपनों को उद्यम में बदलने की कहानी

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मेघालय के मावसिनराम की बारिश भरी एक सुबह, दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इस इलाके में रहने वाले बंशैलांग मारबानियांग आसमान में छाए बादलों को देख रहे थे। लेकिन उनके मन में बारिश नहीं, बल्कि एक सवाल था—देश के सबसे दूरदराज़ इलाकों में रहने वाला एक युवा, जहां अवसर बेहद सीमित हों, अपना भविष्य कैसे बनाए?

वर्षों तक उन्होंने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ते देखा। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना असंभव लगता था। लेकिन स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रचुरता ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या इन्हीं संसाधनों के आधार पर कोई उद्यम खड़ा किया जा सकता है।

ASPIRE योजना बनी जीवन का टर्निंग प्वाइंट

बंशैलांग के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा दिए जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी मिली। IIE, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industries and Entrepreneurship) योजना के अंतर्गत मेंटर संस्थान है।

इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की और यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और कौशल के साथ कहीं भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा

बंशैलांग की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में लोग अपने विचारों को व्यवसाय में नहीं बदल पाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए 2015 में MSME मंत्रालय ने ASPIRE योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता तथा रोजगार को बढ़ावा देना है।

2018 और 2023 में योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। अब इसका मुख्य केंद्र लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (LBIs) हैं, जो लोगों को कौशल से लेकर व्यवसाय स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

कैसे काम करते हैं LBI?

लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जो नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • आधुनिक मशीनों और तकनीक तक पहुंच

  • बिजनेस मेंटरिंग

  • उत्पाद विकास

  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

  • गुणवत्ता प्रमाणन

  • नियामकीय अनुमतियां

  • बाजार से जुड़ाव

  • वित्तीय सहायता तक पहुंच

इन इन्क्यूबेटर्स के संचालन में भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और IIT जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में बढ़ रहा ASPIRE का दायरा

ASPIRE के तहत देशभर में खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस उत्पाद, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर उद्योग जैसे क्षेत्रों में हजारों उद्यम विकसित किए जा रहे हैं।

जून 2026 तक—

  • 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 109 LBI स्वीकृत

  • 1.23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

  • वर्ष 2022-23 से अब तक 1,200 से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला बड़ा लाभ

ASPIRE योजना उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2022-23 से अब तक—

  • 28,500 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के अवसर

  • 8,700 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थी

  • 9,600 से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थी

  • 17,600 से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थी

ये आंकड़े बताते हैं कि अब उद्यमिता केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का नया माध्यम बन रही है।

मावसिनराम से कर्तव्य पथ तक

बंशैलांग मारबानियांग की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। वे पूर्वोत्तर भारत के उन दस उद्यमियों में शामिल थे जिन्होंने अपने प्रयासों और ASPIRE योजना के सहयोग से रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने तक का सफर तय किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ASPIRE योजना हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराकर उनके सपनों को सफल उद्यमों में बदल रही है। यह योजना केवल नए व्यवसाय नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

AI, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीकें तय करेंगी भारत का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

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अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने कहा कि 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, जिससे भारत अग्रणी तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन रहा है।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया कॉन्क्लेव में फायरसाइड चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और ऐसी क्षमताओं का विकास कर रहा है जो आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले दौर को परिभाषित करेंगी।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की विश्व व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इनका प्रभाव केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, "जो देश इन तकनीकों में पीछे रह जाएंगे, वे विकास और सुरक्षा दोनों में पिछड़ने का जोखिम उठाएंगे।"

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन ने निर्धारित समय से पहले कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मिशन की तेज प्रगति भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उभरती हुई तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान के पूरे इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI अब लगभग हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनती जा रही है और भविष्य में शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान तथा सार्वजनिक सेवाओं को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी। इसके साथ ही भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों में निवेश कर इस क्षेत्र का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी प्रगति ही विकास का प्रमुख आधार बन गई है और कोई भी देश नवाचार तथा अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाए बिना दीर्घकालिक विकास नहीं कर सकता। भारत समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए इस परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए अनेक नीतिगत सुधारों ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति के नए अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहल निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को गति देंगी।

उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मजबूत और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में परमाणु ऊर्जा भारत की तकनीक-आधारित विकास यात्रा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जिसने छात्रों के सीखने, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने पारंपरिक और कठोर शैक्षणिक ढांचे की जगह लचीले तथा बहुविषयक अवसर प्रदान किए हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि, योग्यता और आकांक्षाओं के अनुरूप करियर चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि NEP 2020 छात्रों को अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित कर एक मजबूत शोध संस्कृति विकसित कर रही है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता बेहतर होगी और नए नवोन्मेषकों, उद्यमियों तथा प्रौद्योगिकी नेताओं की पीढ़ी तैयार होगी।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) के व्यापक परिदृश्य पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल से आगे बढ़कर शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाला सहयोगात्मक मॉडल विकसित कर रहा है। वैज्ञानिक प्रगति के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का समन्वय आवश्यक है और देश ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है जो इस सहयोग को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है तथा वैज्ञानिक खोज, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान के व्यावसायीकरण के नए अवसर पैदा किए हैं।

भविष्य की ओर देखते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियां आने वाले दशकों में समाज को अभूतपूर्व गति से बदल देंगी। आज विकसित किए जा रहे संस्थान, नीतियां और तकनीकी क्षमताएं ही भविष्य में देशों की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने युवाओं से भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और सीखने के ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जो पहले कभी नहीं थे। उन्होंने छात्रों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को ज्ञान एवं नवाचार आधारित अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में किए गए सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे और देश को दुनिया की अग्रणी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करेंगे।

आवास मेला 2025 के लकी ड्रॉ विजेताओं को आज मिलेंगे आकर्षक उपहार, CM साय रहेंगे मुख्य अतिथि

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 के तहत लकी ड्रॉ में चयनित हितग्राहियों को आज 26 जून 2026 को उपहार वितरित किए जाएंगे। यह समारोह न्यू सर्किट हाउस परिसर, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित होगा। इसी दौरान मंडल के नए लोगो का भी विमोचन किया जाएगा।


गौरतलब है कि मंडल ने 23 नवंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों के लिए 22 जून 2026 को विशेष लकी ड्रॉ आयोजित किया था। इसमें विजेताओं का चयन मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन बाइक, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन समेत कई आकर्षक उपहारों के लिए किया गया।

समारोह में चयनित विजेताओं को सम्मानपूर्वक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही मंडल की नवीन लोगो डिजाइन प्रतियोगिता के विजेता रचनाकार को 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी।

कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता O. P. Choudhary करेंगे। इस अवसर पर मंडल के अध्यक्ष Anurag Singh Deo सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहेंगे।

यह कार्यक्रम शुक्रवार, 26 जून को दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। कार्यक्रम के बाद आवास एवं पर्यावरण मंत्री O. P. Choudhary दोपहर 3 बजे प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे। मंडल ने सभी विजेताओं, हितग्राहियों और मीडिया प्रतिनिधियों को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

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बीते दो माह में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 1747 प्रकरण दर्ज 

6.49 करोड़ रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल

बलौदाबाजार में अवैध उत्खनन, जांजगीर-चांपा में अवैध परिवहन और रायपुर में अवैध भंडारण के सबसे ज्यादा मामले

अवैध खनन पर डबल वार, ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ जुर्माना भी कई गुना बढ़ा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है। 

अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। 

अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं। 

अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है। 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री साय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण से मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बढ़ावा: नितिन गडकरी

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नागपुर- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर के आधुनिकीकरण और विस्तार से मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा, निवेश आकर्षित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदर्भ क्षेत्र में औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी।

नागपुर एयरपोर्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत GMR Group को सौंपने के औपचारिक समारोह में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित नागपुर तेजी से व्यापार, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, वाणिज्य और मल्टीमॉडल परिवहन का प्रमुख केंद्र बन रहा है। एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण से इस विकास को और गति मिलेगी।

समारोह में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, रामटेक सांसद श्यामकुमार बर्वे, राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

गडकरी ने कहा कि उन्नत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन, खनन, कृषि और निर्यात आधारित उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेहतर हवाई संपर्क से यात्रियों और माल परिवहन की सुविधा बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नागपुर को सिंगापुर और दुबई जैसे प्रमुख वैश्विक शहरों से सीधे जोड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए गडकरी ने सुझाव दिया कि नागपुर की प्रसिद्ध ऑरेंज बर्फी और अन्य क्षेत्रीय उत्पादों को एयरपोर्ट पर प्रदर्शित किया जाए, जिससे स्थानीय उद्यमियों को नया बाजार मिलेगा और विदर्भ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर नितिन गडकरी, के. राममोहन नायडू और देवेंद्र फडणवीस ने संयुक्त रूप से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नया लोगो भी लॉन्च किया, जो एयरपोर्ट के विकास के नए अध्याय का प्रतीक है।

एयरपोर्ट के दीर्घकालिक विकास कार्यक्रमों में आधुनिक कार्गो सुविधाएं, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्रियों के लिए उन्नत सुविधाओं का विकास शामिल है। इन पहलों से नागपुर को एक एयरपोर्ट-आधारित आर्थिक केंद्र और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए रासायनिक खाद छोड़ अपनानी होगी जैविक खेती: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

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 रायपुर : अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देना है, तो रासायनिक खादों की अंधी दौड़ से बाहर निकलना होगा। धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और इंसानी सेहत को संवारने का एकमात्र रास्ता जैविक और प्राकृतिक खेती ही है।


यह विचार प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भाटापारा में आयोजित 'जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला' के दौरान व्यक्त किए। शासकीय गजानन्द अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुए इस समारोह में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल भी विशेष रूप से मंच पर मौजूद रहे।

​अंधाधुंध रासायनिक उपयोग पर जताई चिंता

​कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में 1 से 30 जून तक 'खेत चलो अभियान' चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य ध्येय किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लाना है। छत्तीसगढ़ के 'धान का कटोरा' होने के गौरव को रेखांकित करते हुए उन्होंने चिंता जताई कि अधिक उत्पादन की लालसा में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे तात्कालिक पैदावार भले बढ़ रही हो, लेकिन यह मानव स्वास्थ्य और मिट्टी, दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सिर्फ पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि पशुपालन, मछलीपालन और बकरी पालन को जोड़कर अपनी आय के नए स्रोत बनाएं।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने सरकार प्रतिबद्ध

​ किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने 'कृषक उन्नति योजना' का दायरा और बढ़ा दिया है। अब खरीफ सीजन में धान के बदले दलहन (दालें) और तिलहन (तेल बीज) की खेती करने वाले किसानों को सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि (इनपुट सब्सिडी) दी जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से इस योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठाने का आग्रह किया।

​पशुधन आधारित खेती ही समृद्धि का आधार: मंत्री टंक राम वर्मा

​समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का सपना जैविक खेती के जरिए ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुराने समय में हमारी कृषि का मूल आधार पशुधन हुआ करता था, जिससे पर्यावरण और जमीन दोनों सुरक्षित थे। आज रासायनिक खादों के कारण पानी, हवा और भोजन सब प्रदूषित हो रहे हैं। जैविक खेती से जब हमारी जमीन की सेहत सुधरेगी, तभी हमें शुद्ध अन्न मिलेगा और हमारा समाज स्वस्थ रहेगा। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधायक श्री शिवरतन शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।

​योजनाओं के हितग्राहियों को मिला लाभ

​कार्यशाला केवल विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में अतिथियों के हाथों 5 किसानों को अरहर बीज किट, 5 किसानों को नैनो यूरिया और 2 मछुआ समितियों को आधुनिक महाजाल व आइस बॉक्स का वितरण किया गया। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम आशा योजना के तहत उत्कृष्ट काम करने वाले 5-5 किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

​इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, जिला पंचायत सीईओ, सहित भारी संख्या में प्रगतिशील किसान और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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