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भारत–श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग मजबूत, IN–SLN DIVEX 2026 का सफल आयोजन

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भारत और श्रीलंका ने अपने बढ़ते समुद्री सहयोग को और मजबूत करते हुए IN–SLN DIVEX 2026 के चौथे संस्करण का सफल आयोजन किया। यह संयुक्त डाइविंग अभ्यास Colombo में 21 से 28 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुआ।

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू वेसल आईएनएस निरीक्षक के साथ दोनों देशों की नौसेनाओं के डाइविंग दलों ने हिस्सा लिया, जिससे आपसी तालमेल और पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

गहरे समुद्र में विशेष अभ्यास

यह अभ्यास जटिल पानी के भीतर संचालन (underwater operations) पर केंद्रित रहा। इसमें:

  • एडवांस डीप-सी डाइविंग अभ्यास

  • मिक्स्ड गैस डाइविंग ड्रिल्स

  • बंदरगाह और खुले समुद्र में गहन अभ्यास

विशेष रूप से, कोलंबो तट के पास द्वितीय विश्व युद्ध के जहाजों SS Worcester और SS Perseus के मलबे पर डाइविंग की गई।

बड़ी उपलब्धि

दोनों देशों के गोताखोरों ने 55 मीटर से अधिक गहराई तक सफल डाइव कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इससे:

  • अंडरवाटर सर्च और रेस्क्यू क्षमता मजबूत हुई

  • संयुक्त ऑपरेशन में समन्वय बेहतर हुआ

सहयोग और मित्रता

अभ्यास के दौरान:

  • संयुक्त बीच क्लीन-अप अभियान

  • मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र

का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों के बीच मित्रता और विश्वास और गहरा हुआ।

श्रद्धांजलि और मानवीय पहल

INS निरीक्षक के कमांडिंग ऑफिसर ने IPKF मेमोरियल पर जाकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

साथ ही, भारत की आरोग्य मैत्री पहल के तहत श्रीलंका को BHISM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव) क्यूब्स सौंपे गए, जिससे आपदा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

व्यापक महत्व

यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है।

कुल मिलाकर, IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी सहयोग का प्रतीक है।

DRDO और भारतीय नौसेना की बड़ी कामयाबी, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का दम दिखाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Navy ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर से किया गया।

इस परीक्षण की खास बात यह रही कि एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों को एक साथ (salvo) लॉन्च किया गया, जो भारत के लिए पहली बार है। दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी परीक्षण मानकों को पूरी तरह हासिल किया।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

NASM-SR मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें:

  • उन्नत सीकर और एवियोनिक्स सिस्टम

  • फाइबर-ऑप्टिक आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक

  • सटीक गाइडेंस और कंट्रोल तकनीक

जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे दुश्मन के जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती हैं।

सटीक निशाना और सफल परीक्षण

इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने वॉटरलाइन हिट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, यानी जहाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सटीक वार किया। परीक्षण की निगरानी चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई।

कई संस्थानों का संयुक्त प्रयास

इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) सहित DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, नौसेना, वायुसेना और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की समुद्री सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

वहीं DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत की सराहना की।

क्या है महत्व?

यह परीक्षण भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे:

  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

  • दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला संभव होगा

  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा

कुल मिलाकर, यह सफलता भारत को आधुनिक और शक्तिशाली रक्षा तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाती है।

लद्दाख में पवित्र पिपरहवा अवशेषों का आगमन, ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत

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गहरे आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से भरे वातावरण के बीच, भगवान  गौतम बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष आज लेह पहुंचे। इसके साथ ही लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ।

इन अवशेषों को दिल्ली से विशेष वायुसेना विमान द्वारा लाया गया, जिनके साथ ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे और खेनपो थिनलास चोसाल मौजूद थे। आगमन पर विनय कुमार सक्सेना (लद्दाख के उपराज्यपाल) ने धार्मिक और सामाजिक नेताओं की उपस्थिति में इनका भव्य स्वागत किया।

 भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान

  • पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए

  • लद्दाख पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

  • बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं

इसके बाद अवशेषों को भव्य शोभायात्रा के साथ जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई (2569वीं बुद्ध पूर्णिमा) से आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इस शोभायात्रा में भाग लिया।

विशेष महत्व

उपराज्यपाल ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि इन पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा क्षेत्र धन्य हो गया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया कि लद्दाख को इस आयोजन के लिए चुना गया।

यह पहली बार है जब इन अवशेषों को भारत में सार्वजनिक दर्शन के लिए उनके मूल स्थान से बाहर लाया गया है, जबकि इससे पहले इन्हें कई देशों में प्रदर्शित किया जा चुका है।

 वैश्विक महत्व और कार्यक्रम

  • थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार में प्रदर्शन

  • 2–10 मई: जीवेत्सल (लेह)

  • 11–12 मई: जांस्कर

  • 13–14 मई: धर्मा सेंटर, लेह

  • 15 मई: दिल्ली वापसी

विशिष्ट अतिथि

इस पवित्र अवसर पर अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री, राजदूत, मुख्यमंत्री और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि लेह पहुंचेंगे।

विशेष तैयारियां

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए:

  • वृक्षारोपण अभियान

  • फूलों की सजावट

  • शहरभर में स्वच्छता अभियान

यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि लद्दाख की बौद्ध परंपरा और सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है।

कोयला गैसीफिकेशन मिशन में बड़ी उपलब्धि

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कोयला मंत्रालय ने भारत के कोयला गैसीफिकेशन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना (Financial Incentive Scheme) के तहत राउंड-II की कैटेगरी-III में लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) जारी किया गया है।

इस अवसर पर  संजय कुमार झा अतिरिक्त सचिव (कोयला मंत्रालय) ने कार्तिकेय वायुनंदना प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के गडचिरोली में कोल-टू-एसेटिक एसिड प्लांट स्थापित करने के लिए LoA सौंपा।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • 💰 कुल निवेश: ₹793 करोड़

  • 🏭 उत्पादन: एसेटिक एसिड

  • ⚙️ क्षमता: 75,900 टन प्रति वर्ष (TPA)

  • 📍 स्थान: गडचिरोली, महाराष्ट्र

यह परियोजना घरेलू कोयले के वैल्यू-एडेड उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

योजना की प्रगति

  • पहले राउंड में 7 परियोजनाएं पहले से कार्यान्वयन में हैं।

  • राउंड-II के तहत कैटेगरी-II और III में निवेश को बढ़ावा देने के लिए RFP आमंत्रित किए गए हैं।

कैटेगरी-III के तहत:

  • प्रति प्रोजेक्ट ₹100 करोड़ तक या

  • कुल लागत (Capex) का 15% (जो कम हो) तक वित्तीय सहायता दी जाती है।

क्या होगा फायदा?

  • घरेलू केमिकल उत्पादन को बढ़ावा

  • आयात पर निर्भरता में कमी

  • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

  • स्वच्छ और कुशल कोयला उपयोग से टिकाऊ औद्योगिक विकास

यह पहल भारत में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने और कोयले के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

CGBSE 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026 जारी: खत्म हुआ इंतजार, टॉपर्स की लिस्ट भी घोषित

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम आधिकारिक रूप से जारी कर दिए हैं। लंबे इंतजार के बाद छात्र-छात्राएं अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।


बोर्ड द्वारा जारी परिणाम के अनुसार, 12वीं परीक्षा में बलौदाबाजार के जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं बेमेतरा की ओमनी दूसरे स्थान पर रही हैं।

इसी तरह 10वीं परीक्षा में इस वर्ष तीन छात्रों ने संयुक्त रूप से टॉप किया है। संध्या नायक, परी रानी और अंशुल शर्मा ने 594 अंक (98.03%) हासिल किए हैं। संध्या नायक और परी रानी महासमुंद की निवासी हैं, जबकि अंशुल शर्मा मुंगेली जिले से हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी 2026 में शुरू हुई थीं। 12वीं के हिंदी पेपर लीक होने के मामले के चलते 10 अप्रैल को पुनः परीक्षा आयोजित की गई थी।

ऐसे देखें अपना रिजल्ट

छात्र-छात्राएं अपना स्कोरकार्ड देखने के लिए निम्न स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in या results.cg.nic.in पर जाएं।
  • होमपेज पर “CGBSE 10th/12th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना रोल नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।
  • स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकता है।

SMS के जरिए भी उपलब्ध
वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक होने की स्थिति में छात्र SMS के माध्यम से भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं:

  • 12वीं के लिए: CG12 <रोल नंबर> टाइप कर 56263 पर भेजें।
  • 10वीं के लिए: CG10 <रोल नंबर> टाइप कर 56263 पर भेजें।

बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन रिजल्ट देखने के बाद मूल अंकसूची (मार्कशीट) के लिए अपने संबंधित स्कूल से संपर्क करें।

 
 

विशेष लेख : नन्हे कदम गढ़ेगें सशक्त भारत का भविष्य - आंगनबाड़ी केंद्रों का नया रूप, नई दिशा

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर - उप संचालक (जनसंपर्क)


रायपुर : देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है।


भवन ही बन गया शिक्षकरू ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid ¼BALA½ की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है।
रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है।

धमतरी का ‘बाला मॉडल’- सीखने का नया अनुभव

धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं।

ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं।

शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार

मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है।
इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है।

खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल

महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं।

पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र

आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं।

कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी

आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सशक्त भारत की मजबूत नींव

आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।

छत्तीसगढ़: शादी से लौट रहीं लड़कियां बनीं दरिंदगी का शिकार, इलाके में दहशत

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 अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां शादी समारोह से लौट रही दो नाबालिग लड़कियों के साथ कथित रूप से कई युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने की घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।


पुलिस के अनुसार, 24 अप्रैल की रात चार नाबालिग लड़कियां एक शादी समारोह से घर लौट रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार 8-9 युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया। दो लड़कियां किसी तरह वहां से भागने में सफल रहीं, जबकि दो अन्य को आरोपी अलग-अलग स्थानों पर ले गए, जहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया।

घटना के बाद पीड़िताएं देर रात घर पहुंचीं, लेकिन भय के कारण तुरंत परिजनों को जानकारी नहीं दी। अगले दिन 25 अप्रैल को एक पीड़िता ने परिवार को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिजन थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने 26 अप्रैल को एक पीड़िता की मां की शिकायत पर प्रियांशु खलखो, आशीष, राहुल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) और POCSO Act की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों पीड़िताओं का चिकित्सकीय परीक्षण (MLC) भी कराया गया है।

अमोलक सिंह ढिल्लो (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और आरोपियों की तलाश की जा रही है। 29 अप्रैल को दोनों पीड़िताओं को आगे की कार्रवाई के लिए अंबिकापुर लाया गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में सस्ती गैस का रास्ता साफ, साय कैबिनेट के अहम निर्णय

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 रायपुर। विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने शहरी गैस वितरण नीति, खेल अधोसंरचना के विस्तार, आर्थिक सहायता और प्रशासनिक मामलों से जुड़े प्रस्तावों पर मुहर लगाई।


शहरी गैस वितरण नीति 2026 को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026’’ को स्वीकृति प्रदान की। इस नीति के तहत प्रदेश में स्वच्छ और सस्ती प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आम उपभोक्ताओं को एलपीजी के मुकाबले किफायती विकल्प मिलेगा, वहीं पाइपलाइन के जरिए गैस की त्वरित और सुगम आपूर्ति का विस्तार होगा।

इससे शहरी क्षेत्रों में ईंधन व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनेगी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और गैस पाइपलाइन अधोसंरचना के विकास के साथ बड़े पैमाने पर निवेश एवं रोजगार के अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनांदगांव में बनेगा आधुनिक क्रिकेट मैदान

कैबिनेट ने आधुनिक खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी के निर्माण के लिए जिला क्रिकेट एसोसिएशन, राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा की भूमि में से 5 एकड़ जमीन रियायती दर पर आवंटित करने का निर्णय लिया है।

स्वेच्छानुदान मद से 11.98 करोड़ की सहायता

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 6,809 व्यक्तियों और संस्थाओं को लगभग 11 करोड़ 98 लाख 84 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि की स्वीकृति दी है। यह सहायता जरूरतमंदों को त्वरित राहत, सामाजिक सहयोग को मजबूत करने और विभिन्न परिस्थितियों में सहारा देने के उद्देश्य से प्रदान की गई है।

IPS अधिकारियों पर पुराना आदेश निरस्त

कैबिनेट ने वर्ष 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों—संजय पिल्ले, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता—से संबंधित 26 सितंबर 2019 के पदावनति आदेश को पुनर्विलोकन के बाद निरस्त करने का निर्णय लिया। साथ ही 24 सितंबर 2019 के निर्णय को भी अपास्त करते हुए उससे जुड़े सभी आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित मान्य किया गया है।

 

काशी विश्वनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर लौटे पीएम मोदी, काशीवासियों का किया अभिवादन

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वाराणसी। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Kashi Vishwanath Dham में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और इसके बाद कॉरिडोर का भ्रमण किया। दर्शन के उपरांत उनका काफिला वापस रवाना हुआ। इस दौरान गेट नंबर-4 पर मौजूद लोगों का उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया।


बच्चों से किया संवाद
मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री ने नन्हे बच्चों से बातचीत की। बच्चों के साथ उनका संवाद आत्मीय रहा और वे मुस्कुराते नजर आए। वहीं श्रद्धालु भी प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को उत्साहित दिखे।

वैदिक विधि से संपन्न हुआ पूजन
मंदिर के गर्भगृह में प्रधानमंत्री ने षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की। पंडित ओम प्रकाश मिश्र समेत ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान संपन्न कराया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

त्रिशूल-डमरू के साथ किया अभिवादन
पूजन के बाद प्रधानमंत्री ने त्रिशूल और डमरू दिखाकर बाबा विश्वनाथ के भक्तों का अभिवादन किया। परिसर में शंखनाद और “हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

रोड शो में उमड़ा जनसैलाब
प्रधानमंत्री का काफिला मंडुवाडीह, पुलिस लाइन, लहुराबीर, मैदागिन और चौक होते हुए मंदिर पहुंचा। इस दौरान रास्ते भर भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया।

स्कूली बच्चों और NCC कैडेट्स में उत्साह
बनारस रेलवे स्टेशन और लहुराबीर चौराहे के पास स्कूली बच्चे और NCC कैडेट्स प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पहुंचे। उनके हाथों में संदेश लिखे पोस्टर और छोटे उपहार भी नजर आए।

करीब एक साल बाद प्रधानमंत्री के काशी आगमन को लेकर शहर में खासा उत्साह देखने को मिला।

भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत, रूस से जल्द मिलेगी S-400 की चौथी यूनिट

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 India-Russia Defense Deal : भारत की हवाई रक्षा प्रणाली को जल्द ही बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, रूस से S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम की चौथी यूनिट अगले महीने की शुरुआत में भारत पहुंच सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब देश अपनी सीमाओं पर हवाई सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में जुटा है।


बताया गया है कि S-400 सिस्टम की तीन यूनिट पहले ही भारत को मिल चुकी हैं, जबकि चौथी यूनिट की आपूर्ति अंतिम चरण में है। वहीं, पांचवीं और आखिरी यूनिट नवंबर तक मिलने की संभावना जताई जा रही है।

2018 में हुआ था बड़ा रक्षा सौदा
भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ लगभग 5 अरब डॉलर में S-400 मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने का समझौता किया था। यह दुनिया के सबसे उन्नत लंबी दूरी के सतह से हवा में मार करने वाले रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है।

और यूनिट खरीदने की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने S-400 सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने को भी मंजूरी दी है। इसके बाद कुल यूनिट की संख्या 10 तक पहुंच सकती है। इसे मौजूदा सौदे का ही अगला चरण माना जा रहा है।

प्रतिबंधों की आशंका नहीं
यह सौदा अमेरिका की चेतावनियों के बावजूद किया गया था। अमेरिका ने CAATSA कानून के तहत प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, हालांकि अब तक भारत पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि नई खरीद पर भी प्रतिबंध की संभावना कम है।

ऑपरेशन में साबित हुई ताकत
हाल के सैन्य अभियानों में S-400 सिस्टम की उपयोगिता सामने आ चुकी है। इसने दुश्मन के हवाई खतरों को समय रहते ट्रैक और निष्क्रिय करने में अहम भूमिका निभाई है।

कई लक्ष्यों को एक साथ कर सकता है ट्रैक
S-400 ट्रायम्फ एक अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो एक साथ कई हवाई खतरों—जैसे फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल—को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चौथी यूनिट की तैनाती से भारत की ‘टू-फ्रंट’ चुनौती (चीन और पाकिस्तान) से निपटने की क्षमता और मजबूत होगी तथा देश की हवाई सुरक्षा और ज्यादा अभेद्य बनेगी।

आंध्र प्रदेश में रेलवे विकास को लेकर बड़ी घोषणाएं

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अश्विनी वैष्णव ने विशाखापत्तनम में गूगल क्लाउड इंडिया AI हब के ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह के दौरान आंध्र प्रदेश में रेलवे विकास को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा साउथ कोस्टल रेलवे ज़ोन के गठन को लेकर रही। उन्होंने बताया कि इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा और 1 जून 2026 से यह ज़ोन प्रभावी हो जाएगा। इससे राज्य में रेलवे प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश को इस बार ₹10,134 करोड़ का रिकॉर्ड रेलवे बजट मिला है, जो पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संयुक्त बजट ₹886 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है।

उन्होंने कहा कि राज्य में करीब ₹1,06,000 करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनका उद्देश्य बंदरगाहों, पर्यटन स्थलों और बड़े शहरों को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है। राज्य के 74 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इसके अलावा 832 फ्लाईओवर और अंडरपास पूरे हो चुके हैं, जबकि 299 पर काम जारी है। रेलवे ट्रैक के मामले में 1,759 किमी ट्रैक तैयार हो चुका है और 3,300 किमी निर्माणाधीन है।

मंत्री ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश का रेलवे नेटवर्क अब 100% विद्युतीकृत हो चुका है, जो इसे आधुनिक रेलवे प्रणाली में अग्रणी बनाता है।

यात्रियों की सुविधा के लिए राज्य में 16 वंदे भारत ट्रेन और 22 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रा तेज और आरामदायक हुई है।

ईस्ट कोस्ट रेलवे कॉरिडोर को चार लाइनों वाला नेटवर्क बनाया जा रहा है, जिससे इसकी क्षमता दोगुनी हो जाएगी और करीब 500 नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुलेगा। साथ ही, मालगाड़ी और कंटेनर सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

भविष्य की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर बात करते हुए मंत्री ने “हाई-स्पीड डायमंड” परियोजना का जिक्र किया, जिसके तहत प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय काफी कम हो जाएगा। जैसे:

  • अमरावती से हैदराबाद: लगभग 70 मिनट

  • अमरावती से चेन्नई: लगभग 112 मिनट

  • हैदराबाद से पुणे: लगभग 1 घंटा 55 मिनट

  • पुणे से मुंबई: लगभग 48 मिनट

  • चेन्नई से बेंगलुरु: लगभग 73 मिनट

  • हैदराबाद से बेंगलुरु: लगभग 2 घंटे 8 मिनट

मंत्री ने कहा कि ये सभी पहलें आंध्र प्रदेश को एक बड़ा रेलवे और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि केंद्र सरकार दक्षिणी राज्यों के संतुलित विकास और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

मछली पालन से बदली तकदीर: प्रकाश धीवर बने आत्मनिर्भर, 20 लोगों को दे रहे रोजगार

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 रायपुर : राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर विकासखंड तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत बेलदार सिवनी के निवासी  प्रकाश धीवर आज मछली पालन के क्षेत्र में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। मछली पालन उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आजीविका का मुख्य स्रोत बन चुका है।


बता दें कि सिवनी निवासी  प्रकाश धीवर ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में मछली पालन विभाग से संपर्क किया। विभाग से उन्हें यह जानकारी मिली कि ग्राम पंचायत के तालाबों को पट्टे पर लेकर मछली पालन किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने बिना विलंब किए एक समिति का गठन किया और शासन के नियमानुसार ग्राम पंचायत सिवनी के तालाबों को 10 वर्षीय पट्टे पर लिया। साथ ही कुछ निजी तालाबों को लीज पर लेकर मछली पालन कार्य प्रारंभ किया।

वर्तमान में उनकी समिति के पास कुल पांच तालाब (8.835 हेक्टेयर) पट्टे पर हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 22 से 25 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। श्री धीवर “जय महामाया मछुआ सहकारी समिति, बेलदार सिवनी” के अध्यक्ष हैं, जिसमें 21 सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान पर एक चार पहिया वाहन भी प्राप्त हुआ है। इस वाहन की सहायता से वे रायपुर, खरोरा, तिल्दा और बलौदा बाजार जैसे बड़े मछली बाजारों में जीवित मछली का विक्रय कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। विभिन्न स्रोतों से उनकी वार्षिक आय लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

मछली पालन के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति हेतु श्री धीवर जिला सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से न्यूनतम ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का ऋण भी लेते हैं, जिसका उपयोग मछली बीज, चुना और जाल खरीदने में किया जाता है।

शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर श्री प्रकाश धीवर न केवल आत्मनिर्भर मत्स्य कृषक बने हैं, बल्कि क्षेत्र के लगभग 15 से 20 लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस, 'ई-श्रम साथी' एप लॉन्च

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के कार्यों और योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमला पूरी प्रतिबद्धता के साथ श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। इस अवसर पर श्रम मंत्री लखन देवांगन उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिकों के हित में व्यापक पहल हुई है और चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों को घर बैठे रोजगार की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मेहनत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, इसलिए उनके योगदान का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समीक्षा बैठक में श्रम विभाग की संरचना, श्रमायुक्त संगठन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा तीनों प्रमुख मंडलों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रदेश के सभी जिलों में श्रम कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ दोनों सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, सियान सहायता, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता, आवास सहायता योजना, निःशुल्क कोचिंग सहायता तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना प्रमुख हैं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6वीं में हर वर्ष 100 बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 31 जिलों के 95 विद्यार्थी 8 जिलों के 14 विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिसे इस शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल द्वारा भी विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

श्रम कल्याण मंडल के तहत 14 योजनाएं संचालित हैं और वर्ष 2025-26 में 5.21 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना, श्रम सम्मेलन कार्यक्रम और मोबाइल कैंप के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-केवाईसी के माध्यम से हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 55 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया।

इस अवसर पर मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, श्रम विभाग सचिव हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।

'प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।


थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल

अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था।


फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’

नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं।

3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी

अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया।

'प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन

10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी

रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है।

मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’

कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

बदलाव की कहानी

कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बुधवार, 29 अप्रैल को जारी किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है।


शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार दोपहर 2:30 बजे बोर्ड परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। परिणाम जारी होने के बाद छात्र-छात्राएं मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे।

मंत्री यादव ने कहा कि यह केवल अंकों की घोषणा नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, अनुशासन, अभिभावकों के सहयोग और शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि हर परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और प्रत्येक विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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