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छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: आकाशीय बिजली और डूबने से 3 लोगों की मौत, कई जिलों में हाई अलर्ट

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में मानसून अब आफत बनकर बरस रहा है। पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के कारण नदियाँ और नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है।

इस बीच प्रदेश से दर्दनाक घटनाएँ भी सामने आई हैं। अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और डूबने की घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। इन हादसों के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है।

मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास न जाएँ तथा आकाशीय बिजली के समय खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य अपडेट

  • तीन लोगों की मौत आकाशीय बिजली और डूबने की अलग-अलग घटनाओं में।

  • कई जिलों में भारी बारिश, नदियाँ और नाले उफान पर।

  • जलभराव से जनजीवन प्रभावित, कई मार्गों पर आवागमन बाधित।

  • मौसम विभाग का भारी बारिश का अलर्ट जारी।

  • प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।


इंडोनेशिया और सिंगापुर ने मजबूत की साझेदारी, मलक्का जलडमरूमध्य को खुला रखने पर बनी सहमति

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जकार्ता- दक्षिण-पूर्व एशिया के दो प्रमुख देशों इंडोनेशिया और सिंगापुर ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री व्यापार को लेकर अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। दोनों देशों के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक में मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सभी देशों के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर सहमति बनी।

मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। नेताओं ने कहा कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को बनाए रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच इंडोनेशिया और सिंगापुर की यह साझेदारी पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है।

मुख्य बातें

  • इंडोनेशिया और सिंगापुर ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

  •  मलक्का जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सुरक्षित और खुला रखने का संकल्प।

  •  समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सहयोग बढ़ाने पर जोर।

  •  क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए मिलकर काम करने का भरोसा।

भारत की स्वच्छ परिवहन नीति में हो सकते हैं बड़े बदलाव, E25 योजना की समीक्षा शुरू

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नई दिल्ली- देश में प्रदूषण कम करने और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार अपनी स्वच्छ परिवहन (Clean Transport) नीति की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिश्रण (E25) लागू करने की योजना पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य एथेनॉल के अधिक उपयोग से विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है। हालांकि विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल उद्योग का मानना है कि सभी वाहन E25 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। इससे कुछ पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और रखरखाव पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से सरकार तकनीकी पहलुओं, वाहन निर्माताओं की तैयारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कर रही है। समीक्षा के बाद ही E25 को लागू करने की दिशा में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने पर भी लगातार काम कर रही है। देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, बैटरी तकनीक को बेहतर बनाने और EV अपनाने को आसान बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को स्वच्छ परिवहन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एथेनॉल आधारित ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलित रणनीति अपनानी होगी।

मुख्य बातें

  •  E25 (25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) योजना की समीक्षा जारी।

  •  पुराने वाहनों की तकनीकी अनुकूलता पर सरकार का विशेष ध्यान।

  •  इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ावा।

  •  लक्ष्य—प्रदूषण कम करना, विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना।

मानसून सत्र से पहले भाजपा विधायक दल की अहम बैठक आज, सीएम साय के निवास पर बनेगी रणनीति

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा में सरकार की रणनीति तय करने और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम 7 बजे नवा रायपुर स्थित अपने सरकारी निवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई है। विधायक दल के सचिव ने सभी भाजपा विधायकों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।


बैठक में 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर सरकार की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जा सकने वाले संभावित मुद्दों, उनके जवाब और सदन में सरकार के पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में राजभवन पहुंचकर राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की थी। इस दौरान विधानसभा के आगामी मानसून सत्र सहित विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई थी।

13 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित होंगी। सत्र के दौरान वित्तीय कार्यों के साथ-साथ विभिन्न विधायी और शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। साथ ही जनहित से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को सदन में मजबूती से रखने की रणनीति बना रही है, वहीं विपक्ष भी जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है।

पद्म विभूषण स्व. तीजन बाई को 8 जुलाई को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार देंगे श्रद्धांजलि

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद व विधायकगण होंगे शामिल 

 पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार भी होंगे मौजूद

रायपुर- पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच से आयोजित होगा। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा।

पद्मविभूषण तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया।

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया।

प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।

पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है।

उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।

स्टेयरिंग ने बदली जिंदगी: पुनर्वास केंद्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े सुकमा के युवा

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रायपुर- कभी भय और अनिश्चितता से घिरे जीवन जीने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए आज नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद है।

पुनेम ज्योति

सोड़ी सोमड़ी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुकमा द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे आसानी से रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।

इस प्रशिक्षण से जुड़ी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि यहां हमें सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सिखाया जा रहा है। अब हमें विश्वास है कि हम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके लिए हम सरकार और प्रशासन के आभारी हैं।

इसी तरह पुनेम ज्योति कहती हैं कि रोजाना मिलने वाले प्रशिक्षण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। ड्राइविंग सीखने के बाद हम रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज सुकमा के ये युवा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ-साथ अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजनाओं की सार्थक सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी में हज-2027 के ऑनलाइन आवेदन हेतु निःशुल्क ई-सुविधा केंद्र शुरू

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20 जुलाई 2026 तक भरे जाएंगे आवेदन, निर्धारित अवधि तक वैध पासपोर्ट अनिवार्य -मिर्ज़ा एजाज़ बेग

रायपुर- हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। हज यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी ने मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार स्थित अपने कार्यालय में निःशुल्क ई-हज सुविधा केंद्र प्रारंभ किया है।

छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज बताया कि इस केंद्र के माध्यम से हज 2027 के इच्छुक आवेदकों के ऑनलाइन आवेदन निःशुल्क भरे जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन बेग ने बताया कि अनेक आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन भरने में कठिनाई होती है। ऐसे में समय सीमा के भीतर आवेदन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से यह विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास 31 दिसंबर 2027 तक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है।

 बेग ने हज यात्रा के इच्छुक सभी आवेदकों से निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी कार्यालय में इसके लिए एक विशेष काउंटर स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर आवेदक अपना ऑनलाइन आवेदन भरवा सकते हैं। अधिक जानकारी अथवा ऑनलाइन आवेदन संबंधी सहायता के लिए कार्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी, मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार, रायपुर अथवा दूरभाष क्रमांक 0771-4266646 पर संपर्क किया जा सकता है।

'गरीबों के साथ नहीं होगा अन्याय', नकटी विवाद पर बोले मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर, 6 जुलाई। रायपुर से लगे नकटी गांव के भूमि विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर प्रदेश में भ्रम और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।


मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विवादित भूमि के आबंटन की प्रक्रिया वर्ष 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने बताया कि करीब 15.47 हेक्टेयर भूमि के आबंटन का प्रस्ताव उसी समय तैयार किया गया था और नियमानुसार सभी संबंधित विभागों से आपत्तियां भी आमंत्रित की गई थीं। उनके अनुसार किसी भी विभाग ने इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि नकटी गांव में वर्षों के दौरान अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया। पहले जहां लगभग 3 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण था, वह बढ़कर करीब 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया। कश्यप ने कहा कि कांग्रेस अब इसी मुद्दे को लेकर लोगों को भड़काने और धरना-प्रदर्शन की राजनीति कर रही है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी गरीब परिवार के साथ अन्याय नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और सरकार सभी निर्णय नियमानुसार तथा कानून के दायरे में रहकर करेगी।

केदार कश्यप ने बताया कि विवादित भूमि हाउसिंग बोर्ड के लिए प्रस्तावित है। इस भूमि का भविष्य में किस उद्देश्य से उपयोग किया जाएगा, इसका निर्णय हाउसिंग बोर्ड करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नकटी गांव में किसी भी व्यक्ति को एक इंच भूमि का व्यक्तिगत आबंटन नहीं किया गया है।

प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने कांग्रेस विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पत्र लिखने और बयानबाजी के माध्यम से केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है।

 

रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो-राज्यपाल डेका

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित प्रणवानंद अकादमी में रोबोटिक्स लैबोरेट्री का लोकार्पण किया। इस लैबोरेट्री की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेछानुदान मद से राशि प्रदान की गई है ।

इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स जैसे तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाते है। लेकिन आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानव जीवन के कल्याण और समाज के विकास के लिए किया जाए।

उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल  उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों से नहीं होती, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों से होती है जो ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दें।  प्रणवानंद अकादमी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है यह प्रसन्नता का विषय है।

राज्यपाल ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें विश्व को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। कोई भी नया आविष्कार या नवाचार मानवता के हित में होना चाहिए। मानव पर खुद का नियंत्रण होना चाहिए न कि कोई तकनीक उसे नियंत्रित करे।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में संतोष का विशेष महत्व है। हमें जो प्राप्त है, उसमें प्रसन्न रहना सीखना चाहिए तथा कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव एवं चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन गिरने के बाद फिर से उठना और आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि समाज ने हमें क्या दिया, यह सोचने के बजाय हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज को क्या दे सकते हैं। समाज के प्रति सेवा, सहयोग, संवेदनशीलता और पड़ोसियों के प्रति आत्मीयता की भावना हमारे जीवन में आनंद लाता है। 

कार्यक्रम में अकादमी के अध्यक्ष स्वामी शिवरूपानंद ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्राचार्य नीति यदुवंशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

हरी खाद से संवर रही खेतों की सेहत, प्राकृतिक खेती की मिसाल बने किसान नरेंद्र सिंह

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ढैंचा की खेती से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता, घट रही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता

कृषि विभाग किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कर रहा प्रोत्साहित

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल का सकारात्मक परिणाम सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगंवा में देखने को मिला है, जहां प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह ने लगभग चार एकड़ भूमि में ढैंचा की फसल उगाकर उसे खेत में पलट दिया है। अब वे इसी खेत में धान की खेती करेंगे।

किसान नरेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की खेती अपनाई। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले ढैंचा को खेत में पलट देने पर यह कुछ ही दिनों में सड़कर प्राकृतिक जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा जैसी दलहनी हरी खाद वाली फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं। इसके साथ ही फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे आगामी फसल का विकास बेहतर होता है।

हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में उल्लेखनीय सुधार होता है। ढैंचा के अपघटन से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे उसमें हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और फसल अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनती है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। ढैंचा की सघन बढ़वार खरपतवारों की वृद्धि को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होगा, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह की बैठक शुरू, महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास पर मंथन

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कोच्चि- भारत की BRICS अध्यक्षता-2026 के तहत सोमवार को केरल के कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह (Women's Working Group- WWG) की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। बैठक में BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी महिला सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा साझा हितों के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।


बैठक का उद्घाटन करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति BRICS देशों की साझा प्रतिबद्धता उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बैठक सार्थक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को नई दिशा देगी।

अनिल मलिक ने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान महिला ट्रैक को चार प्रमुख प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें महिलाओं के नेतृत्व और सुशासन को बढ़ावा देकर अधिक सशक्त BRICS का निर्माण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहन, महिला उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर सदस्य देशों के बीच सहयोग और विचार-विमर्श जारी है, जो कोच्चि बैठक में भी चर्चा का मुख्य आधार रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य देशों के बीच सकारात्मक सहयोग की भावना बैठक के सफल परिणाम सुनिश्चित करेगी।

बैठक भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण) के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जो मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती है।

महिला कार्य समूह की बैठक के बाद 8 और 9 जुलाई 2026 को कोच्चि में BRICS देशों के महिला एवं बाल विकास मंत्रियों की दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की, लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर दिया जोर

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नई दिल्ली- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को नई दिल्ली में नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) की समीक्षा बैठक की। बैठक में देशभर में विकसित किए जा रहे मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs), रोपवे, इंटरमोडल स्टेशन और वे-साइड सुविधाओं (Way Side Amenities) की परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।

बैठक के दौरान गडकरी ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत में भविष्य के अनुरूप, आधुनिक और एकीकृत परिवहन तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि इन पहलों से मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी, नए आर्थिक अवसर सृजित होंगे, क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और देश की लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

केंद्रीय मंत्री ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही प्रमुख चुनौतियों की भी समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों को सभी बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कर परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

गडकरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के समयबद्ध पूरा होने से लॉजिस्टिक्स प्रणाली अधिक दक्ष बनेगी, परिवहन लागत में कमी आएगी और यात्रियों को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

कानून मंत्रालय का ‘रिफॉर्म्स उत्सव एवं चिंतन शिविर-2026’ संपन्न, विकसित भारत-2047 के लिए कानूनी सुधारों का तैयार हुआ रोडमैप

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नई दिल्ली- केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग और विधि कार्य विभाग द्वारा 4 और 5 जुलाई 2026 को राजस्थान के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में दो दिवसीय ‘रिफॉर्म्स उत्सव एवं चिंतन शिविर-2026’ का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था विकसित करने के लिए कानूनी, विधायी और संस्थागत सुधारों पर व्यापक मंथन करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने किया। उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को हाल की उपलब्धियों की समीक्षा करने, कानूनी एवं विधायी सुधारों पर विचार-विमर्श करने और भारत की न्यायिक एवं विधायी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।

विधायी विभाग एवं विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने मंत्रालय की उस परिकल्पना को साझा किया, जिसके तहत सुशासन को मजबूत करने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक प्रभावी, सुलभ और भविष्य के अनुरूप कानूनी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोज कुमार ने शिविर की थीम, उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी। दो दिनों तक चले मंथन में कानूनी शासन, विधायी सुधार, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग, तकनीक आधारित प्रशासन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

विचार-विमर्श के बाद मंत्रालय के लिए एक व्यापक विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया, जिसमें कानूनी एवं संस्थागत सुधारों से जुड़े ठोस सुझाव और उनके क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना शामिल की गई।

समापन सत्र में सचिव डॉ. राजीव मणि ने ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इसमें अधिकारियों ने संविधान और विधि के शासन के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखने, कानूनी प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट और नागरिक-केंद्रित बनाने, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने तथा ईमानदारी, नवाचार और उत्कृष्टता के साथ राष्ट्रसेवा का संकल्प लिया।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिविर के सफल आयोजन पर दोनों विभागों के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारत की कानूनी एवं विधायी व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिविर में तैयार सुधार एजेंडा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

श्रम मंत्रालय की बड़ी पहल: जागरूकता, सुलह और त्वरित कार्रवाई से श्रमिकों को मिला करोड़ों का लाभ

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] संगठन देशभर में श्रमिक कल्याण, औद्योगिक सौहार्द और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। जबलपुर, भुवनेश्वर, रायपुर और कानपुर में हाल ही में की गई पहलें इस दिशा में संगठन की सक्रिय भूमिका को दर्शाती हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य श्रम संहिताओं (Labour Codes) को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना, श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है।

जबलपुर में सामाजिक सुरक्षा संहिता पर जागरूकता कार्यक्रम

जबलपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के प्रबंधन प्रतिनिधियों, मानव संसाधन (HR) अधिकारियों और कर्मचारियों को संहिता के तहत उनके अधिकारों और दायित्वों की जानकारी दी गई। विशेष रूप से कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार, मातृत्व लाभ, सुरक्षित कार्य वातावरण और क्रेच सुविधा संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

भुवनेश्वर में 81 संविदा श्रमिकों को मिले ₹51.27 लाख

भुवनेश्वर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गेल (GAIL) से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का सफल समाधान किया। सुलह प्रक्रिया के बाद 81 संविदा श्रमिकों को बकाया वेतन, अवकाश वेतन और बोनस सहित कुल ₹51.27 लाख का भुगतान कराया गया। इस पहल से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई।

रायपुर में सात श्रमिकों को मिला ग्रेच्युटी का भुगतान

रायपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने बैकोंठ सीमेंट वर्क्स में कार्यरत पूर्व संविदा श्रमिकों की ग्रेच्युटी भुगतान संबंधी शिकायत का समाधान किया। समय पर हस्तक्षेप और ठेकेदार तथा प्रधान नियोक्ता के बीच समन्वय स्थापित कर सात पात्र श्रमिकों को कुल ₹3.31 लाख की ग्रेच्युटी दिलाई गई। यह कार्रवाई श्रमिकों को उनके वैधानिक लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कानपुर में बीमार श्रमिक को घर पहुंचकर मिला ₹20.32 लाख का भुगतान

कानपुर में क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर पड़े एक श्रमिक से जुड़े औद्योगिक विवाद का मानवीय संवेदनशीलता के साथ समाधान किया। सुलह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित श्रमिक को ₹20.32 लाख की अंतिम भुगतान राशि उसके घर जाकर सौंपी गई, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक देरी से बचते हुए उसे समय पर न्याय मिल सका।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) संगठन जागरूकता कार्यक्रमों, प्रभावी सुलह प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, जिम्मेदार रोजगार प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा देशभर में श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


स्वस्थ छत्तीसगढ़ करेगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण- मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में 103 करोड़ रुपये से अधिक लागत के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेगा। प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यह परियोजनाएं प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेंगी तथा मरीजों, विद्यार्थियों और चिकित्सकों सभी को इसका लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास, कैंसर भवन के विस्तार तथा चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के आवासीय परिसर सहित विभिन्न निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछली बार मेडिकल कॉलेज आने पर विद्यार्थियों ने छात्रावास निर्माण की मांग रखी थी, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए आज उसके निर्माण की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में जनता से किए गए अधिकांश वादों को पूरा किया है और 'मोदी की गारंटी' को धरातल पर उतारा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए स्वस्थ छत्तीसगढ़ आवश्यक है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र सरकार का छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि डीएम कार्डियक कोर्स की स्वीकृति से लेकर अन्य स्वास्थ्य परियोजनाओं तक केंद्र सरकार ने हर मांग पर सकारात्मक सहयोग दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में छत्तीसगढ़ को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद) की भी सौगात मिलेगी, जिससे राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पतियों एवं आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब  नक्सलवाद से मुक्त होकर तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दूरस्थ क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लाखों लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया है। उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सरगुजा से लेकर बस्तर तक प्रदेश के हर क्षेत्र में सेवाएं देने का संकल्प लें और केवल शहरों तक सीमित रहने की मानसिकता न रखें।

उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, छात्रावास एवं आधुनिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्रावास, कैंसर संस्थान विस्तार एवं अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा से पहले एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, नर्सिंग कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, फिजियोथेरेपी कॉलेजों का विस्तार तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 एकड़ क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में लंबित कोरबा, कांकेर एवं महासमुंद मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य प्रारंभ कराए हैं। बिलासपुर स्थित सिम्स का भी व्यापक उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि डीएम कार्डियक कोर्स प्रारंभ हो चुका है तथा जगदलपुर में जल्द ही छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा हार्ट सेंटर स्थापित किया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम परियोजना के तहत 200 सीटर आधुनिक छात्र-छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।

दूसरी परियोजना के तहत कैंसर भवन का द्वितीय से छठे तल तक विस्तार किया जाएगा। लगभग 11 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस भवन में आधुनिक लैब, 64-64 बिस्तरों वाले वार्ड, सिंगल रूम, आईसीयू तथा अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर विकसित किए जाएंगे, जिससे कैंसर रोगियों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

तीसरी परियोजना के अंतर्गत छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त कमरे, डॉरमेट्री, लाइब्रेरी, रिक्रिएशन हॉल तथा सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं बेहतर आवासीय वातावरण उपलब्ध हो सके।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

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