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जल संचय जन भागीदारी : ‘कैच द रेन’ अभियान से जल संरक्षण को मिल रही नई गति

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28 जून 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से वर्षा की प्रत्येक बूंद को बचाने और जल संरक्षण के जन आंदोलन को निरंतर गति देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के इस आह्वान के अनुरूप 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशभर में एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण तथा जनभागीदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा—

"कैच द रेन अभियान के माध्यम से हमें वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सामूहिक रूप से संरक्षित करना है। मैं सभी देशवासियों से वर्षा जल की हर एक बूंद को बचाने का विशेष आग्रह करता हूं।"

अभियान के प्रमुख कार्य

  • प्रत्येक घर, आवासीय परिसर एवं कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन प्रणाली (Rain Water Harvesting System) अपनाना।

  • उपयुक्त स्थानों पर रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण तथा अनुपयोगी बोरवेलों को पुनर्जीवित कर भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित करना।

  • बावड़ियों, कुओं एवं पारंपरिक जलाशयों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।

  • आसपास के तालाबों एवं जलाशयों से गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाना, ताकि मानसून के अधिकतम जल का संरक्षण हो सके।

  • जल संरक्षण क्षेत्रों में अधिकाधिक वृक्षारोपण कर हरित आवरण का विस्तार करना।

जल संचय जन भागीदारी 1.0 (6 सितंबर 2024)

जल संरक्षण में जनसहभागिता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह अभियान समुदाय (Community), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और लागत प्रभावशीलता (Cost) अर्थात 3Cs के सिद्धांत पर आधारित है। इसके माध्यम से सामुदायिक सहभागिता, संस्थागत सहयोग, सीएसआर योगदान तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय से जल संरक्षण को गति प्रदान की गई।

इस पहल का उद्देश्य कम लागत वाले भूजल पुनर्भरण एवं जल संचयन ढांचों का निर्माण, अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक समाधान अपनाना है।

1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 के बीच संचालित इस अभियान ने कम-से-कम 10 लाख भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के लक्ष्य को पार करते हुए देशभर में 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण दर्ज किया।

जल संचय जन भागीदारी 2.0 (2025)

पहले चरण की सफलता के बाद 1 जून 2025 को JSJB 2.0 प्रारंभ किया गया। इसका विशेष फोकस अत्यधिक दोहन (Over-Exploited) एवं गंभीर (Critical) श्रेणी वाले जिलों में कम लागत वाले स्थानीय उपायों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना था।

31 मई 2026 तक एक करोड़ भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जबकि देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं निर्मित होने की सूचना प्राप्त हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से 50 प्रतिशत अधिक है। इन संरचनाओं का वर्तमान में भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।

JSJB 1.0 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों एवं संस्थाओं को नवंबर 2025 में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार के दौरान सम्मानित किया गया।

जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन (2026)

1 जून 2026 को ‘जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन’ (JSJB: CTR) अभियान का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से जल संचय जन भागीदारी (JSJB) और जल शक्ति अभियान : कैच द रेन (JSA: CTR) का एकीकरण किया गया।

यह अभियान वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल भंडारण तथा जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य प्रत्येक वर्षा को जल संरक्षण के अवसर में बदलना तथा कम लागत वाले स्थानीय समाधानों के माध्यम से जल सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलन को मजबूत करना है।

यह अभियान अनेक केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं के समन्वय से संचालित किया जा रहा है, जिनमें—

  • विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)

  • जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण एवं पुनर्स्थापन (RRR)

  • CAMPA

  • वित्त आयोग अनुदान

  • विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाएं

शामिल हैं।

इस अभियान का मूल आधार जन भागीदारी है, जिसके अंतर्गत पंचायती राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, महिला समूह, युवा, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन एवं स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

जल शक्ति अभियान : कैच द रेन

विश्व जल दिवस (22 मार्च 2021) के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "कैच द रेन—जहां वर्षा हो, वहीं और उसी समय जल का संचयन करें" थीम के साथ जल शक्ति अभियान : कैच द रेन का शुभारंभ किया।

यह अभियान वर्ष 2019 के जल शक्ति अभियान की सफलता पर आधारित है, जिसके अंतर्गत 256 जिलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त विकास खंडों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलागम विकास, जलाशयों के पुनर्जीवन एवं वृक्षारोपण को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया गया।

इसके बाद यह अभियान प्रत्येक वर्ष नई थीम एवं प्राथमिकताओं के साथ संचालित किया जा रहा है।

2021 – कैच द रेन : जहां वर्षा हो, वहीं जल संचयन

  • वर्षा जल संचयन

  • जल संरक्षण

  • जल निकायों की जियो-टैगिंग

  • वैज्ञानिक योजना निर्माण

  • जल शक्ति केंद्र एवं जन-जागरूकता

2022 – जल संरक्षण गतिविधियों का विस्तार

  • पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन

  • भूजल पुनर्भरण

  • जलागम विकास

  • आर्द्रभूमि एवं नदियों का संरक्षण

  • झरनों के जलग्रहण क्षेत्रों का विकास

2023 – पेयजल स्रोतों की स्थिरता

  • 150 जल-संकटग्रस्त जिलों पर विशेष फोकस

  • पेयजल स्रोतों का सुदृढ़ीकरण

  • भूजल पुनर्भरण

  • जनभागीदारी एवं निगरानी

2024 – नारी शक्ति से जल शक्ति

  • महिलाओं के नेतृत्व में जल संरक्षण

  • जलाशयों की सफाई एवं गाद निकालना

  • अनुपयोगी बोरवेलों का पुनर्जीवन

  • वृक्षारोपण एवं स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण

महिलाओं के नेतृत्व में संचालित इन पहलों को स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है।

जल शक्ति केंद्र

देशभर के जिलों में स्थापित जल शक्ति केंद्र (JSKs) जल संरक्षण संबंधी ज्ञान एवं तकनीकी सहायता के प्रमुख केंद्र हैं। ये केंद्र वर्षा जल संचयन तकनीकों का प्रचार-प्रसार करते हैं, स्थानीय प्रशासन एवं समुदायों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं तथा जल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देते हैं।

वर्षा जल संचयन से ग्रामीण समृद्धि तक

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में जल संरक्षण आज राष्ट्रीय प्राथमिकता और जन आंदोलन बन चुका है। कैच द रेन तथा जल संचय जन भागीदारी जैसे अभियानों ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर जनसहभागिता, वैज्ञानिक योजना और संसाधनों के समन्वय पर आधारित व्यापक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप प्रदान किया है।

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जलाशयों का पुनर्जीवन तथा जल के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देना कृषि, ग्रामीण आजीविका, जलवायु अनुकूलन और भावी पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्थानीय भागीदारी, वैज्ञानिक योजना एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से यह अभियान ग्रामीण भारत में टिकाऊ जल परिसंपत्तियों का निर्माण कर रहा है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल मांग के वर्तमान दौर में वर्षा की प्रत्येक बूंद का संरक्षण ही देश की जल सुरक्षा का आधार बनेगा तथा कृषि और सतत ग्रामीण विकास को नई मजबूती प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ सहित विभिन्न मंचों से जल संरक्षण पर दिया गया सतत संदेश आज देश के नागरिकों, संस्थाओं एवं सरकारों को एकजुट होकर जल सुरक्षा की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

विक्रम-1 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर टीडीबी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी बधाई

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को विक्रम-1 मिशन की सफल उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी है। यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और सशक्त बनाती है तथा देश में विकसित डीप-टेक नवाचारों की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करती है।

यह ऐतिहासिक सफलता टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है, जिसके तहत बोर्ड व्यावसायीकरण की मजबूत संभावनाओं वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन देता रहा है।

स्वदेशी प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) प्रौद्योगिकियों के विकास में स्काईरूट एयरोस्पेस के अग्रणी योगदान को देखते हुए, कंपनी को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2022 के अवसर पर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा नेशनल टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर तत्कालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक भी उपस्थित थे।

यह पुरस्कार स्काईरूट एयरोस्पेस को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण बाजार के लिए विकसित स्वदेशी क्रायोजेनिक, लिक्विड और सॉलिड प्रोपल्शन तकनीकों के विकास के लिए प्रदान किया गया था। इससे कंपनी की तकनीकी उत्कृष्टता और व्यावसायिक क्षमता को उसके शुरुआती चरण में ही मान्यता मिली। आज विक्रम-1 मिशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कारों का उद्देश्य भारत की उन कंपनियों को प्रोत्साहित करना है, जो क्रांतिकारी तकनीकों के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा,

"स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप पुरस्कार से सम्मानित एक उभरते स्टार्ट-अप से लेकर भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने तक की उनकी यात्रा, भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। अपने नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI Fund) के अंतर्गत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड को एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।"

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड लगातार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार-आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करता रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस जैसी कंपनियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर संस्थागत पहचान और निरंतर सहयोग भारत के नवाचार-आधारित उद्यमियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में हासिल हुई एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

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सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू 

क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद,  तथा प्रबंध संचालक रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। 

एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।

एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 

कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

निवेशकों का नया भरोसा बना छत्तीसगढ़

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 रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निवेशक-हितैषी नीतियों, सुशासन और प्रशासनिक सुधारों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। क्रिसिल-नीति आयोग इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (IFI) 2026 में छत्तीसगढ़ ने नियमों में आसानी (Regulatory Ease) और संस्थागत माहौल (Institutional Environment) जैसे निवेश के सबसे महत्वपूर्ण मानकों में देश के 17 बड़े राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं पर्यावरणीय लचीलेपन (Environment Resilience) में राज्य दूसरे स्थान पर रहा है। यही नहीं, निवेशकों के बढ़ते विश्वास का परिणाम है कि पिछले 18 महीनों में छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के उद्योग भी शामिल हैं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार की बागडोर संभालने के बाद से ही निवेश, उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया है। उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की इसी नीति का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्र आकलन में छत्तीसगढ़ ने कई स्थापित औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

क्रिसिल और नीति आयोग के संयुक्त आकलन में राज्य को कुल 47.5 अंक प्राप्त हुए हैं। समग्र रैंकिंग में छत्तीसगढ़ 17 बड़े राज्यों में नौवें स्थान पर है, लेकिन निवेशकों के भरोसे से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मानकों में उसका प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ रहा है।

कारोबार शुरू करना पहले से कहीं आसान

नियमों में आसानी (Regulatory Ease) के मानक में छत्तीसगढ़ को 12 में से 8.4 अंक मिले हैं, जो राजस्थान, गुजरात, पंजाब और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों से भी अधिक हैं। यह मानक इस बात का आकलन करता है कि किसी उद्योग को मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है, एनओसी, निर्माण अनुमति, बिजली और पानी के कनेक्शन कितनी तेजी से उपलब्ध होते हैं, वाणिज्यिक न्यायालय कितनी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं और व्यवसाय बंद करने की प्रक्रिया कितनी सरल है।

इस श्रेणी में पहला स्थान मिलने का सीधा अर्थ है कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों को कम प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अनुमतियां तेजी से मिलती हैं, अनुपालन की लागत कम है और निवेशकों को हर स्तर पर बेहतर प्रशासनिक सहयोग प्राप्त होता है।

मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनी निवेशकों की ताकत

संस्थागत माहौल में भी छत्तीसगढ़ ने 6 में से 4.5 अंक प्राप्त कर देश के बड़े राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। यह श्रेणी शासन की गुणवत्ता, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, श्रमिक विवाद, नीतिगत स्थिरता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करती है।

इस उपलब्धि से स्पष्ट है कि राज्य में स्थिर, भरोसेमंद और निवेशक-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था विकसित हुई है। उद्योगों को नीति में निरंतरता, त्वरित निर्णय और विवादों के शीघ्र समाधान का लाभ मिल रहा है, जिससे दीर्घकालीन निवेश का विश्वास मजबूत हुआ है।

पर्यावरणीय सुरक्षा में भी अग्रणी

पर्यावरणीय लचीलापन के मानक में छत्तीसगढ़ देश के बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा है। राज्य को 5 में से 4 अंक प्राप्त हुए हैं और इस श्रेणी में केवल तमिलनाडु उससे आगे है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी के मामले में भी छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन बड़े राज्यों के औसत से काफी बेहतर रहा है।

इसका अर्थ यह है कि औद्योगिक परिसंपत्तियां और आपूर्ति श्रृंखला अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हैं, जिससे दीर्घकालीन निवेश के लिए राज्य की विश्वसनीयता और बढ़ती है।

संसाधनों और वित्तीय अनुशासन ने बढ़ाया भरोसा

संसाधनों की उपलब्धता के मामले में छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों में तीसरे स्थान पर है। राज्य देश का दूसरा सबसे बड़ा कोयला एवं लिग्नाइट उत्पादक है तथा धातु और अधात्विक खनिजों के उत्पादन में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है।

वित्तीय स्वास्थ्य के मानक में राज्य को 7 में से 5.4 अंक प्राप्त हुए हैं, जो मजबूत वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत स्थिरता का संकेत हैं। राज्य के सकल मूल्य वर्धित में उद्योग क्षेत्र की 52.8 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे देश की सबसे अधिक औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं वाले राज्यों की श्रेणी में स्थापित करती है।

भरोसेमंद बिजली और सशक्त कार्यबल

छत्तीसगढ़ की एक बड़ी ताकत उसकी ऊर्जा उपलब्धता भी है। राज्य में उद्योगों को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो रही है। महिलाओं की कार्यबल में 58.1 प्रतिशत भागीदारी बड़े राज्यों के औसत से लगभग 41 प्रतिशत अधिक है। वहीं कारोबार बंद करने की प्रक्रिया में कानूनी और अन्य संबंधित खर्च भी देश में सबसे कम लागत वाले राज्यों में शामिल हैं।

सुधारों की नई पहचान बना छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने निवेश को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से उद्योगों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ जन विश्वास अधिनियम का दूसरा संस्करण लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना, जिसके तहत 279 छोटे कारोबारी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 लागू कर जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था लागू करने वाला भी छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है। इससे उद्योगों पर अनावश्यक नियामकीय बोझ कम हुआ है और निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल एवं पारदर्शी बनी है।

एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था का नया केंद्र

नवा रायपुर में देश के पहले एआई डेटा सेंटर पार्क का निर्माण तेजी से चल रहा है। लगभग 1,000 करोड़ रुपए के निवेश से विकसित हो रही इस परियोजना की क्षमता एक लाख GPU तक होगी। इसके साथ ही हाइपरनेक्स्ट के माध्यम से देश का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर भी छत्तीसगढ़ में स्थापित किया जा रहा है। इससे राज्य उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।

आठ लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, नई अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव

राज्य सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों और निवेशकों के अनुकूल वातावरण का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि ढाई साल में छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, एग्रो-प्रोसेसिंग और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि क्रिसिल-नीति आयोग इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन हमारी सुशासन आधारित नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर देश की मुहर है। नियमों में आसानी और संस्थागत माहौल में देश के बड़े राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि हमने उद्योगों और निवेशकों के लिए भरोसेमंद, सरल और तेज़ व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि रोजगार, औद्योगिक विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार तैयार करना है। औद्योगिक विकास नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, डिजिटल अधोसंरचना और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में किए गए सुधारों के परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। हमें विश्वास है कि छत्तीसगढ़ देश के सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्यों में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

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प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय मंच पर चमकी धमतरी की अभिनव पहल, सीएससी स्थापना दिवस पर PACS ड्रोन मॉडल को मिली विशेष पहचान

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कोलकाता में आयोजित 17वें सीएससी स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के कृषि नवाचार की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार का बना मॉडल

रायपुर- कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की अभिनव पहल PACS ड्रोन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। कार्यक्रम में जिले द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित ड्रोन सेवाओं, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा किसान पंजीयन (फार्मर रजिस्ट्री) जैसे नवाचारों की सराहना की गई। समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष थे।


 कार्यक्रम के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी जयंत नाहटा ने PACS के माध्यम से कृषि उन्नयन“ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं के विस्तार तथा PACS को ’वन स्टॉप रूरल सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से ड्रोन द्वारा तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले की एक अभिनव पहल है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में PACS के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा किसानों को तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ सहजता से प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी-व्हीएलई को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल शासन के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिल कुमार सहित देशभर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं सीएससी प्रतिनिधि उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान: भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण

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भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के दूरदर्शी निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से मिशन ‘आगमन’ के सफल प्रक्षेपण का प्रत्यक्ष साक्षी बनते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। इस मिशन के तहत विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक अपने निर्धारित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रवेश किया। इसके साथ ही स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई जिसने भारतीय धरती से ऑर्बिटल लॉन्च करने का इतिहास रच दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र, वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदाना और भरत डाका को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए नहीं खोला होता तो यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने भारतीय स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना तक पहुंच प्रदान की और विश्वस्तरीय अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का अवसर दिया।

उन्होंने ISRO, IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग की भी सराहना करते हुए कहा कि इनके सहयोग से तैयार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा दी है। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और युवा उद्यमियों की प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर की तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में उच्च तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। दुनिया के अधिकांश पहले प्रक्षेपण केवल डमी पेलोड लेकर उड़ान भरते हैं, जबकि विक्रम-1 अपने साथ कई प्रयोगात्मक पेलोड, तकनीकी प्रदर्शन और भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के पेलोड भी लेकर गया। इससे भारत की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि 2020 के सुधारों के बाद भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। कुछ वर्षों पहले जहां निजी लॉन्च इकोसिस्टम लगभग नहीं था, वहीं आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप, पहला स्पेस यूनिकॉर्न और लगभग 9 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मौजूद है। सरकार का लक्ष्य अगले दशक में इसे बढ़ाकर 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

पूरी तरह भारत में विकसित विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊंचा है और 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियां शामिल हैं, जैसे—

  • भारत का पहला ऑल-कार्बन कंपोजिट ऑर्बिटल रॉकेट,

  • 100 प्रतिशत 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन,

  • उन्नत अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम,

  • और देश के सबसे लंबे मोनोलिथिक कार्बन-कंपोजिट रॉकेट स्टेज में से एक।

इस मिशन ने प्रणोदन (Propulsion), एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल परीक्षण किया, जिससे भारत के भविष्य के व्यावसायिक ऑर्बिटल लॉन्च मिशनों की मजबूत नींव तैयार हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीति सुधारों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और भारतीय नवाचार के बल पर भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, "भारत के लिए अब आसमान भी सीमा नहीं रहा।"

आत्मनिर्भर भारत की ऐतिहासिक उड़ान : विक्रम-1 की सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त प्रतीक है विक्रम-1 : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन की नीतियों के फलस्वरूप आज भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई पहचान बना रहा है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण इसी परिवर्तनकारी सोच का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस को मिली हरी झंडी, कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू

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नई दिल्ली- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज वर्चुअल माध्यम से रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की पहली सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे। यह पहली बार है जब रामनगर और देहरादून के बीच सीधी एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है और कुमाऊँ तथा गढ़वाल के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा।

ट्रेन का संचालन और समय

  • यह एक्सप्रेस हर बुधवार और शुक्रवार संचालित होगी।

  • ट्रेन संख्या 15310 रामनगर से सुबह 05:50 बजे रवाना होकर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी।

  • वापसी में ट्रेन संख्या 15309 देहरादून से 15:55 बजे प्रस्थान कर 23:30 बजे रामनगर पहुंचेगी।

  • मार्ग में ट्रेन काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी।

सभी वर्गों के यात्रियों के लिए सुविधाएं

ट्रेन में एसी द्वितीय श्रेणी, एसी तृतीय श्रेणी, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, द्वितीय बैठक (सेकंड सिटिंग) तथा सामान्य द्वितीय श्रेणी के डिब्बे उपलब्ध होंगे, जिससे विभिन्न श्रेणी के यात्रियों को आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

यात्रियों को होगा बड़ा लाभ

इस नई सेवा से उत्तराखंड के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। छात्र, किसान, व्यापारी और आम नागरिक एक ही दिन में देहरादून या हरिद्वार जाकर अपने सरकारी, शैक्षणिक, व्यावसायिक या व्यक्तिगत कार्य पूरे कर वापस लौट सकेंगे।

पर्यटन और तीर्थाटन को मिलेगा बढ़ावा

नई ट्रेन सेवा से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, गिरिजा देवी मंदिर, सीतामढ़ी/सीतावनी जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही हरिद्वार और देहरादून के माध्यम से चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह ट्रेन उत्तराखंड के कुमाऊँ और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को नई मजबूती देगी। उन्होंने बताया कि:

  • ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को हरिद्वार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी और हरिद्वार–ऋषिकेश के बीच यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य तेजी से चल रहा है। राज्य के 11 रेलवे स्टेशनों—देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लालकुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर—का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास में गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भीड़भाड़ न बढ़े। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू हुई टनकपुर–नांदेड़ एक्सप्रेस को अच्छा प्रतिसाद मिला है और क्षेत्र में चल रही वंदे भारत सेवाएं भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस की शुरुआत उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यवासियों को इस नई सेवा के लिए बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उत्तराखंड में कई नई ट्रेन सेवाएं शुरू होने से रेल संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवनरेखा साबित होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड रेल बजट मिला है, जबकि राज्य में ₹40,000 करोड़ से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार में नई रेल अवसंरचना और ट्रेन सेवाओं की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

इस अवसर पर हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी तथा रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आसमान से बरसी मौत: बारिश से बचने पेड़ के नीचे छिपे थे मासूम, बिजली गिरने से दो की मौत, दो गंभीर

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 अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले के लुंड्रा थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार शाम ग्राम नागम बांसपारा में आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। तेज बारिश से बचने के लिए सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे खड़े चार मासूम बच्चे वज्रपात की चपेट में आ गए। इस आसमानी कहर ने दो बच्चों की मौके पर ही जान ले ली, जबकि दो सगे भाई गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।


खेलते-खेलते अचानक आई आफत, पेड़ बना काल

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, शुक्रवार शाम ग्राम नागम निवासी संदीप नगेसिया (11 वर्ष), रोशन पनिका (12 वर्ष), प्रभु राम नगेसिया (12 वर्ष) और दिनेश नगेसिया (11 वर्ष) गांव में ही खेल रहे थे। इसी बीच अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। झमाझम बारिश से बचने के लिए चारों बच्चे ग्राम पंचायत नागम के पास सड़क किनारे लगे एक पेड़ की छांव में जाकर खड़े हो गए। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस पेड़ को वो अपनी ढाल बना रहे हैं, वही काल बन जाएगा। कुछ ही पलों में तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली सीधे उसी पेड़ पर आ गिरी।

चीख-पुकार के बीच दो ने मौके पर तोड़ा दम, अस्पताल रेफर

वज्रपात इतना भयानक था कि बिजली की चपेट में आते ही संदीप नगेसिया और रोशन पनिका ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, प्रभु राम और दिनेश नगेसिया गंभीर रूप से झुलस कर अचेत हो गए। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े और लहूलुहान बच्चों को लेकर धौरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहाँ डॉक्टरों ने संदीप और रोशन को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से झुलसे दोनों सगे भाइयों को प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

हादसे के वक्त पास में था मोबाइल? जांच में जुटी पुलिस

चर्चाओं का बाजार गर्म: इस दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि घटना के वक्त बच्चों के पास एक चालू मोबाइल फोन भी था। हालांकि, प्रशासन या मौसम वैज्ञानिकों द्वारा इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि बिजली गिरने की मुख्य वजह मोबाइल सिग्नल था या पेड़ की ऊंचाई। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

सावधान! अलर्ट पर रखें ध्यान, पेड़ कतई सुरक्षित नहीं

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली (Lightening Alert) की चेतावनी जारी की है।

पुरानी रंजिश में दंपती की टांगी मारकर निर्मम हत्या, साक्ष्य मिटाने के लिए शवों को फूंका; दो सगे भाई गिरफ्तार

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 धरमजयगढ़ (रायगढ़)। धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम क्रोंधा में वर्षो पुराने भूमि विवाद को लेकर दो सगे भाइयों ने एक वृद्ध दंपती की टांगी (कुल्हाड़ी) से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपियों ने दोहरे हत्याकांड को हादसे का रूप देने के उद्देश्य से शवों को घर के भीतर ही आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने डॉग स्क्वॉड 'रूबी' और फॉरेंसिक टीम (FSL) की मदद से अंधे कत्ल की गुत्थी को महज कुछ ही घंटों में सुलझाते हुए दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।


सुबह काम पर पहुंचे नौकर ने देखा मंजर

पुलिस के अनुसार, ग्राम क्रोंधा निवासी मंगल राठिया (65 वर्ष) और उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया (55 वर्ष) अपने घर में अकेले थे। उनका नौकर रामलाल चौहान जब सुबह करीब 6 बजे काम पर पहुंचा, तो घर के दरवाजे खुले हुए थे और एक कमरे से धुआं निकल रहा था। अंदर जाने पर उसने दंपती के जले हुए शव जमीन पर पड़े देखे। नौकर की सूचना पर परिजनों और तत्काल पुलिस को अवगत कराया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी सिद्धांत तिवारी, धरमजयगढ़ थाना प्रभारी राजेश जांगड़े और घरघोड़ा थाना प्रभारी कुमार गौरव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 238(बी) और 326(जी) के तहत मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।

स्निफर डॉग 'रूबी' ने खोला राज

घटनास्थल की कमान संभालते ही पुलिस के खोजी कुत्ते 'रूबी' ने हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी की गंध ली और सीधे संदेही श्याम लाल राठिया के पास जाकर रुक गई। पुलिस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर संदेही श्याम लाल और उसके भाई जीवन लाल राठिया को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

क्या था विवाद?

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने एक जमीन खरीदी थी, जिसे बाद में मूल मालिक ने अधिक पैसे मिलने के लालच में मृतक मंगल राठिया को बेच दिया था। हालांकि आरोपियों को उनकी रकम वापस मिल गई थी, लेकिन मंगल राठिया द्वारा उसी भूमि पर मकान बनाकर खेती करने से दोनों भाई लंबे समय से रंजिश पाले हुए थे।

सोते समय बोला धावा

इसी विवाद के चलते 14 जुलाई की रात दोनों भाई टांगी लेकर मंगल के घर में घुसे। दरवाजा खुलते ही उन्होंने वृद्ध मंगल राठिया पर ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। चीख-पुकार सुनकर बीच-बचाव करने आई पत्नी पुनाई बाई को भी आरोपियों ने टांगी से काट डाला। साक्ष्य मिटाने के लिए उन्होंने शवों पर कपड़े और सोफा कवर डालकर आग लगा दी और मौके से फरार हो गए।

गिरफ्तार आरोपी:

  • श्याम लाल राठिया (32 वर्ष)
  • जीवन लाल राठिया (48 वर्ष)

(दोनों निवासी: ग्राम कोंध्रा, धरमजयगढ़)

एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन और एएसपी अनिल सोनी के मार्गदर्शन में इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में धरमजयगढ़ व घरघोड़ा पुलिस टीम सहित एफएसएल और श्वान दल की मुख्य भूमिका रही। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं।

छत्तीसगढ़ में रूह कंपा देने वाली वारदात: महिला की हत्या के बाद शव से दुष्कर्म, आरी से टुकड़े कर नदी में बहाया, आरोपी गिरफ्तार

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के चंदनू थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने 50 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव के टुकड़े-टुकड़े कर शिवनाथ नदी में फेंक दिए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी रामप्रसाद सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है।


7 जुलाई से लापता थी महिला

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका 7 जुलाई से अपने घर से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता थी। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन करने के बाद भी जब उसका कुछ पता नहीं चला, तो चंदनू थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

नदी किनारे दो गठरियों में मिले शव के टुकड़े

मामले में मोड़ तब आया जब 9 जुलाई को महिला के बेटे को अमरैया नाला और शिवनाथ नदी के संगम के पास पानी में तैरती हुई साड़ी से बंधी दो संदिग्ध गठरियां दिखाई दीं। पुलिस की मौजूदगी में जब इन्हें खोला गया, तो एक गठरी में महिला का धड़ और दूसरी गठरी में कटे हुए हाथ-पैर बरामद हुए। शव काफी हद तक सड़ चुका था।

विरोध करने पर फावड़े से किया वार

थाना प्रभारी के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस को मृतका और गांव के ही रामप्रसाद सोनवानी के संबंध में अहम सुराग मिले। हिरासत में लेकर की गई कड़ाई से पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह 6 जुलाई की रात करीब 10 बजे महिला के घर गया था। उस समय महिला घर में अकेली थी। आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया, जिसका विरोध करने पर उसने पास ही रखे फावड़े के बेंट (हैंडल) से महिला के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

शव के साथ बर्बरता और लूट

आरोपी ने कबूला कि हत्या के बाद उसने मृतका के शव के साथ दुष्कर्म (शवकामुकता) जैसी घिनौनी हरकत की। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसने घर में रखी आरी से शव के दोनों हाथ और पैर काट दिए। उसने शव के हिस्सों को अलग-अलग गठरियों में बांधकर अपनी झोपड़ी में छिपा दिया और अगली रात का फायदा उठाकर उन्हें शिवनाथ नदी में फेंक दिया।

इतना ही नहीं, आरोपी जाते-जाते मृतका के घर से ₹2,500 की नकदी भी लूट ले गया था। पुलिस ने आरोपी के पास से बचे हुए ₹500 और घटना में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य छिपाने, लूट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

Raipur Sensation: राजधानी में दहला देने वाली वारदात, एक ही घर में बिछीं 5 लाशें; सुसाइड या मर्डर? उलझी पुलिस

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। टिकरापारा थाना क्षेत्र के संजय नगर (मदनी चौक) स्थित एक मकान में एक ही परिवार के 5 सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।


हत्या या सामूहिक खुदकुशी? जांच में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जांच और आस-पास के लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि परिवार के मुखिया ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को जहर देकर मौत की नींद सुलाया और उसके बाद खुद फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि, पुलिस मामले की जांच हत्या और सामूहिक आत्महत्या दोनों ही एंगल से कर रही है। मौत के असली कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।


कमरे का नजारा देख दहल गए लोग

पुलिस के अनुसार, मृतकों में परिवार के मुखिया साजिद अली (50 वर्ष) का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया। वहीं एक अन्य कमरे में उनकी पत्नी राबिया, 19 साल का बेटा और दो नाबालिग बेटियों के शव बिस्तर पर पड़े मिले।

मृतकों के नाम:

  • साजिद अली (50 वर्ष) - मुखिया
  • राबिया - पत्नी
  • इरशाद अली (19 वर्ष) - पुत्र
  • शाहिदा बेगम (17 वर्ष) - पुत्री
  • इरशाबा परवीन (16 वर्ष) - पुत्री

शाम से बंद था दरवाजा

मकान मालिक और पड़ोसियों ने बताया कि यह परिवार मूल रूप से शीतला मंदिर के पास, मतपुर का निवासी था और पिछले 8 महीनों से यहां सैयद जहीर के मकान में किराए पर रह रहा था। शुक्रवार शाम से ही घर का दरवाजा अंदर से बंद था और कोई हलचल नहीं हो रही थी। जब शनिवार को भी दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को शक हुआ। खिड़की से झांककर देखने पर भीतर लाशें दिखाई दीं, जिसके बाद तुरंत टिकरापारा थाना पुलिस को सूचना दी गई।

फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल को किया सील

टिकरापारा थाना प्रभारी राजेश मराई ने बताया कि घटना वाली जगह को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया है, जो फिंगरप्रिंट और संदिग्ध सामग्रियों के सैंपल ले रही है। सभी शवों को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है और पुलिस परिजनों व आस-पास के लोगों से पूछताछ कर रही है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रही है सरकार : CM साय

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 रायपुर :  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के विश्वास और जनादेश के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव तथा नगरीय निकाय चुनावों में जनता ने विकास, सुशासन और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने जनता से किए गए अधिकांश वादों और मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की उपलब्धियां स्वयं उसकी कार्यशैली और जनविश्वास का प्रमाण हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं, आदिवासियों तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो वर्षों के बकाया बोनस का भुगतान, महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख महिलाओं को 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि तथा गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी है। महतारी वंदन योजना के साथ-साथ 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया गया है। महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों को पुनः रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं और महिलाओं का आशीर्वाद ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि के लिए रिकॉर्ड धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, फसल विविधीकरण, उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता तथा सिंचाई क्षमता के विस्तार जैसे अनेक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल संसाधन परियोजनाओं के लिए रिकॉर्ड प्रशासनिक स्वीकृतियां दी गई हैं तथा सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज के विकास के लिए सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाया गया, चरणपादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई तथा वनाधिकार पत्रधारकों को राहत देने वाले निर्णय लिए गए। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से हजारों जनजातीय गांवों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों तक सड़क, बिजली, पेयजल, आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जनजातीय युवाओं के लिए दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल का विस्तार, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी तथा जनजातीय संग्रहालय और शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक जैसी पहलें भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा, विकास और जनविश्वास की रणनीति के माध्यम से प्रदेश में शांति का नया वातावरण बना है। रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है तथा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए नए साइबर थानों की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के कारण राज्य में निवेश का वातावरण मजबूत हुआ है। देश और विदेश में आयोजित निवेश सम्मेलनों के माध्यम से 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों रोजगार सृजित होंगे। वस्त्र उद्योग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई-सेज, डेटा सेंटर पार्क तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 76 हजार से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। किसानों के सिंचाई पंपों का बड़े पैमाने पर ऊर्जीकरण किया गया है तथा राज्य ने प्लांट लोड फैक्टर के मामले में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नई ताप विद्युत परियोजनाओं, पम्प स्टोरेज तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और जिला खनिज संस्थान निधि के प्रभावी संचालन से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है। रिकॉर्ड खनिज राजस्व अर्जित करने के साथ खनिज ऑनलाइन 2.0 और डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किए गए हैं। 82 हजार से अधिक विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं तथा खनिज ब्लॉकों की नीलामी, लीथियम जैसे रणनीतिक खनिजों के विकास और नई रेत नीति के माध्यम से पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की गई है। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल अधोसंरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दूरस्थ क्षेत्रों में 829 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा भारतनेट फेज-3.0 के माध्यम से हजारों ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा में युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षकविहीन विद्यालयों की समस्या समाप्त की गई है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत राज्य के अधिकांश परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशासनिक सुधार और ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट, ऑटो म्यूटेशन, मॉडल स्मार्ट रजिस्ट्री कार्यालय, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076' के माध्यम से आम नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की समयबद्ध और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि 435 प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ को सुशासन का मॉडल बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, इको-टूरिज्म, वन संवर्धन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान महत्व दे रही है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम की यात्रा कर चुके हैं तथा राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है।

अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता का अटूट विश्वास सरकार के साथ है और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

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