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शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्र

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है। 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।


मुख्यमंत्री साय ने लिखा है  कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।

स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौर

मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।

तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता है

मुख्यमंत्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।

उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने कहा  कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।

हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँ

मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।

उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।

मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए

मुख्यमंत्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।

मुख्यमंत्री  साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।

हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।

मुख्यमंत्री  साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

उफनती नदी में चट्टान पर फंसे ग्रामीण का डीडीआरएफ टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

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 रायपुर : उफनती नदियों में फंसे लोगों और ग्रामीणों के सुरक्षित रेस्क्यू के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ प्रशासन, सेना और एसडीआरएफ (SDERF/SdRF) की टीमों ने जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। सूरजपुर जिले के ओड़गी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माढर में जिला प्रशासन और डीडीआरएफ (डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति की जान बचा ली। मछली पकड़ने के दौरान उफनती नदी के तेज बहाव में बहकर चट्टान पर फंसे ग्रामीण को घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।


’मछली पकड़ने के दौरान बहाव की चपेट में आया ग्रामीण’

जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के ओड़गी के ग्राम माढर निवासी अशोक सोनपाकर नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और वे तेज बहाव की चपेट में आ गए। खुद को संभालते हुए वे नदी के बीचों-बीच स्थित एक चट्टान पर जाकर फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही भैयाथान एसडीएम ने तत्काल जिला प्रशासन को सूचित किया।

’विपरीत परिस्थितियों में चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन’

सूचना मिलते ही जिला सेनानी संजय गुप्ता के निर्देश पर डीडीआरएफ की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उफनती नदी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने सूझबूझ और समन्वय के साथ जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अशोक सोनपाकर को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

’बचाव टीम की महत्वपूर्ण भूमिका’

इस सफल रेस्क्यू अभियान में डीडीआरएफ संयुक्त टीम प्रभारी हवलदार बीरबल गुप्ता, आनंद चौबे, धनश्य नेताम, हंसलाल, देवनारायण, त्रिनेत्र सिंह, शिवनारायण सिंह, सिद्धू सिंह, रिकेश कुमार एवं विदेश सिंह की सराहनीय भूमिका रही।

’प्रशासन की नागरिकों से अपील’

सफल रेस्क्यू के बाद जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में जल स्रोतों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के समीप जाने से बचें, सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासनिक अमले को सूचित करें।

नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर

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 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।


5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।


बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।


शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण

नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।

• स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
• समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।

तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन

बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:

• स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

• खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।

• सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।

शिक्षक दिवस पर संदेश

छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।

टेक्सटाइल उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार! CM साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से की मुलाकात

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 नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार और इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री ने राज्य में कोसा सहित हथकरघा और पारंपरिक वस्त्रों की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए इनके उत्पादन और बाजार को बढ़ाने के विषय पर केंद्रीय मंत्री से चर्चा की। साथ ही छोटे और स्थानीय उद्योगों को टेक्सटाइल क्षेत्र से जोड़ने, निवेश को बढ़ावा देने और कारीगरों व युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।

मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के विषय पर भी चर्चा हुई।

UP में South Indian डॉक्टर की फर्राटेदार अवधी ने जीता इंटरनेट का दिल, बोलीं—“कविता जैसी खूबसूरत है ये भाषा”

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में काम करने वाली एक दक्षिण भारतीय डॉक्टर इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने अनोखे अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। वजह है उनका फर्राटेदार अवधी बोलना, जिसने इंटरनेट यूजर्स का दिल जीत लिया है।

डॉक्टर का अवधी बोलने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह बेहद सहज और आत्मविश्वास के साथ स्थानीय भाषा में बातचीत करती नजर आ रही हैं। उनके उच्चारण और अवधी के प्रति लगाव को देखकर लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।

स्थानीय भाषा की जमकर तारीफ

वीडियो में डॉक्टर ने अवधी भाषा की खूबसूरती का जिक्र करते हुए इसे बेहद मधुर और कविता जैसी खूबसूरत भाषा बताया। उनके इस अंदाज ने लोगों का ध्यान खींच लिया।

दक्षिण भारत से होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की स्थानीय भाषा को इतनी सहजता से बोलते देख सोशल मीडिया यूजर्स काफी प्रभावित नजर आए। कई लोगों ने इसे भाषा और संस्कृति से जुड़ाव की खूबसूरत मिसाल बताया।

 इंटरनेट पर लोगों को पसंद आया अंदाज

डॉक्टर का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूजर्स उनके अवधी प्रेम और स्थानीय संस्कृति को अपनाने की भावना की सराहना कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि किसी क्षेत्र की भाषा सीखना और उसे सम्मान के साथ बोलना वहां के लोगों और संस्कृति के प्रति अपनापन दिखाता है। डॉक्टर का यह अंदाज इसी वजह से लोगों को खास पसंद आ रहा है।

भाषा बनी दिल जोड़ने का जरिया

भारत की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की भाषाएं लोगों को उनकी जड़ों और परंपराओं से जोड़ती हैं।

South Indian डॉक्टर का अवधी बोलने का यह अंदाज भी इसी विविधता की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा उनका वीडियो दिखाता है कि भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों के बीच जुड़ाव और अपनापन बढ़ाने का जरिया भी है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

डॉक्टर के अवधी बोलने के अंदाज को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। खास तौर पर उनकी भाषा के प्रति प्रशंसा और स्थानीय बोली को अपनाने की भावना लोगों को पसंद आ रही है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में काम करने वाली इस South Indian डॉक्टर ने अपनी फर्राटेदार अवधी और भाषा के प्रति सम्मान से इंटरनेट पर एक अलग ही छाप छोड़ी है।

गोरखपुर में फिल्म देखने के बाद थिएटर के बाहर हुआ सुंदरकांड पाठ, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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गोरखपुर- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद थिएटर के बाहर लोगों को सुंदरकांड का पाठ करते और प्रसाद वितरित करते हुए देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह आयोजन ‘हनुमान अंश’ फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद हुआ।

थिएटर के बाहर धार्मिक माहौल और सामूहिक रूप से सुंदरकांड पाठ करते लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इसकी खूब चर्चा हो रही है। वीडियो में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजन में शामिल होते दिखाई दे रहे हैं।

फिल्म देखने के बाद बदला थिएटर के बाहर का माहौल

फिल्म की स्क्रीनिंग खत्म होने के बाद थिएटर के बाहर सामान्य भीड़ के बजाय धार्मिक आयोजन का दृश्य देखने को मिला। लोगों ने एक साथ बैठकर सुंदरकांड का पाठ किया और इसके बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया।

इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने धार्मिक भजनों और पाठ में हिस्सा लिया। थिएटर के बाहर बने इस माहौल को कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलने लगा।

सोशल मीडिया पर वीडियो को मिल रही प्रतिक्रियाएं

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे भक्ति और धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स फिल्म देखने के बाद थिएटर के बाहर हुए इस आयोजन को अनोखा अनुभव बता रहे हैं।

वीडियो के वायरल होने की वजह से गोरखपुर, सुंदरकांड पाठ और ‘हनुमान अंश’ फिल्म से जुड़े कीवर्ड भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं।

 सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण बना आकर्षण

थिएटर के बाहर सुंदरकांड पाठ के साथ प्रसाद वितरण ने भी लोगों का ध्यान खींचा। धार्मिक आयोजन में शामिल लोगों के बीच प्रसाद बांटा गया और श्रद्धालुओं ने पाठ में हिस्सा लिया।

इस तरह किसी फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद थिएटर के बाहर धार्मिक आयोजन का वीडियो सामने आना सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई फिल्म को लेकर चर्चा

फिल्म से जुड़े इस वीडियो के वायरल होने के बाद ‘हनुमान अंश’ को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ गई है। फिल्म देखने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और थिएटर के बाहर हुए आयोजन की तस्वीरें एवं वीडियो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो को साझा करते समय उसके संदर्भ और स्थान की पुष्टि करना जरूरी है, क्योंकि कई बार पुराने या अधूरे वीडियो भी नए दावे के साथ प्रसारित किए जाते हैं।

निष्कर्ष

गोरखपुर में फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद थिएटर के बाहर सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। धार्मिक माहौल से जुड़े इस वीडियो पर यूजर्स अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और यह घटना फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

समय रैना और वरुण धवन का वीडियो वायरल, ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन को लेकर बढ़ी हलचल

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मुंबई- कॉमेडियन समय रैना का चर्चित कॉमेडी शो ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। शो के नए सीजन को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन की मौजूदगी वाले प्रोमो ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में समय रैना और वरुण धवन के बीच मजेदार बातचीत और हास्य से भरपूर अंदाज देखने को मिल रहा है। वीडियो सामने आते ही इसे लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया और शो के प्रशंसक नए एपिसोड को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

वरुण धवन की एंट्री ने बढ़ाया उत्साह

‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ में समय रैना अपने बेबाक और अलग तरह के हास्य के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में वरुण धवन जैसे लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेता की शो में मौजूदगी ने दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है।

प्रोमो में दोनों के बीच हल्के-फुल्के मजाक और मजेदार बातचीत देखने को मिलती है। यही वजह है कि शो का छोटा-सा वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

समय रैना के शो से जुड़े वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं। इस बार वरुण धवन की मौजूदगी ने इस चर्चा को और बड़ा बना दिया है।

प्रशंसक वीडियो को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग पूरे एपिसोड का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ दर्शक समय रैना और वरुण धवन की बातचीत को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर कर रहे हैं।

नए सीजन को लेकर दर्शकों में उत्सुकता

‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा बनी हुई है। शो का अनोखा प्रारूप, समय रैना की कॉमेडी और अलग-अलग मेहमानों की मौजूदगी इसे दर्शकों के बीच खास बनाती है।

वरुण धवन की एंट्री के बाद अब इस एपिसोड से दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। प्रोमो के बाद लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि पूरे एपिसोड में दोनों के बीच किस तरह की बातचीत और कॉमेडी देखने को मिलेगी।

आज स्ट्रीम होने की जानकारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन का वरुण धवन वाला एपिसोड 4 सितंबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने की जानकारी है। ऐसे में आज दर्शकों की नजर इस खास एपिसोड पर रहेगी।

मनोरंजन और वायरल कंटेंट का नया मेल

समय रैना का शो अपनी अनस्क्रिप्टेड और बेबाक कॉमेडी के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरता रहा है। दूसरी ओर, वरुण धवन की लोकप्रियता को देखते हुए इस एपिसोड के छोटे-छोटे हिस्सों के भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की संभावना है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, समय रैना और वरुण धवन की जोड़ी ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए एपिसोड को लेकर सोशल मीडिया का माहौल गर्म कर दिया है। वायरल प्रोमो और दोनों के मजेदार अंदाज ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर पूरे एपिसोड पर है कि इसमें दर्शकों को कितना मनोरंजन और कितना बेबाक हास्य देखने को मिलता है।

भारत को लेकर वायरल AI वीडियो पर अमेरिकी महिला का करारा जवाब, बोलीं—“यह भारत की असली तस्वीर नहीं”

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नई दिल्ली- भारत को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक AI-जनरेटेड वीडियो ने इन दिनों इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है। वीडियो में भारत की ऐसी तस्वीर पेश की गई है, जिसे कई लोग नकारात्मक और रूढ़िवादी नजरिए से जोड़कर देख रहे हैं। इसी बीच एक अमेरिकी महिला ने इस वीडियो पर खुलकर आपत्ति जताते हुए भारत के समर्थन में अपनी बात रखी है।

अमेरिकी महिला ने वायरल वीडियो की आलोचना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई कुछ तस्वीरों या वीडियो के आधार पर भारत जैसे विशाल और विविध देश को समझना सही नहीं है। उनका कहना है कि भारत की वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक और विविध है।

AI वीडियो को लेकर क्यों शुरू हुई बहस?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस AI वीडियो में भारत को कुछ चुनिंदा नकारात्मक दृश्यों और रूढ़िवादी धारणाओं के माध्यम से दिखाया गया। वीडियो तेजी से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होने लगा, जिसके बाद यूजर्स के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि AI तकनीक का इस्तेमाल किसी देश या समाज की छवि को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

आलोचकों का कहना है कि AI-generated कंटेंट कई बार वास्तविकता और कल्पना के बीच अंतर को धुंधला कर देता है। ऐसे में बिना स्रोत और संदर्भ की जांच किए किसी वायरल वीडियो को सच मान लेना भ्रामक हो सकता है।

अमेरिकी महिला ने भारत के पक्ष में रखी बात

वायरल वीडियो देखने के बाद अमेरिकी महिला ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट/वीडियो के जरिए इसकी आलोचना की। उन्होंने भारत की विविध संस्कृति, लोगों और जीवनशैली की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि किसी भी देश को केवल नकारात्मक या सीमित तस्वीरों के जरिए परिभाषित नहीं किया जा सकता।

उनकी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में भारतीय यूजर्स ने उनका समर्थन किया। कई लोगों ने कहा कि विदेशी नागरिक द्वारा भारत की वास्तविकता को लेकर इस तरह आवाज उठाना सकारात्मक संदेश देता है।

भारत की तस्वीर सिर्फ AI वीडियो से तय नहीं हो सकती

भारत दुनिया के सबसे विविध देशों में से एक है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं, खान-पान और जीवनशैली देखने को मिलती हैं। ऐसे में किसी AI मॉडल द्वारा तैयार किए गए कुछ दृश्यों को पूरे देश की वास्तविक तस्वीर मानना उचित नहीं होगा।

यह मामला एक बार फिर इस सवाल को भी सामने लाता है कि AI-generated कंटेंट के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच कितनी जरूरी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा

अमेरिकी महिला की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर और तेजी से चर्चा में आ गया है। कई यूजर्स ने उनके बयान की सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने AI तकनीक के जरिए देशों और समुदायों की छवि प्रस्तुत करने के तरीके पर सवाल उठाए।

फिलहाल यह पूरा मामला इस बात की याद दिलाता है कि वायरल होना और वास्तविक होना एक ही बात नहीं है। AI से तैयार किसी भी कंटेंट को शेयर करने से पहले उसके स्रोत, संदर्भ और वास्तविकता की जांच करना बेहद जरूरी है।

श्रीनगर एयरपोर्ट पर मुंबई से पहुंची फ्लाइट हादसे का शिकार, लैंडिंग के दौरान ब्रेक सिस्टम फेल होने की सूचना

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श्रीनगर- मुंबई से श्रीनगर पहुंची एक यात्री फ्लाइट शुक्रवार को श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी आने के बाद लैंडिंग के दौरान विमान नियंत्रण में नहीं रह सका और टक्कर हो गई।

हादसे के बाद एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

लैंडिंग के दौरान आई तकनीकी समस्या

बताया जा रहा है कि मुंबई से श्रीनगर पहुंची फ्लाइट सामान्य तरीके से एयरपोर्ट पर उतर रही थी। इसी दौरान लैंडिंग के बाद विमान के ब्रेक सिस्टम में तकनीकी समस्या सामने आई। ब्रेक ठीक से काम नहीं करने के कारण विमान को रोकने में दिक्कत हुई और इसके बाद विमान की टक्कर हो गई।

हादसे के तुरंत बाद एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षा और बचाव दल सक्रिय हो गए। विमान की जांच की गई और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई।

सभी यात्री सुरक्षित, बड़ा हादसा टला

इस घटना में सबसे राहत वाली खबर यह है कि किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। विमान के अगले हिस्से में नुकसान हुआ है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली गई।

घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से विमान की तकनीकी स्थिति और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ब्रेक सिस्टम में खराबी किस वजह से आई और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई।

हादसे की जांच जारी

विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां घटना के हर पहलू की जांच करेंगी। इसमें विमान के ब्रेक सिस्टम, लैंडिंग के दौरान उसकी गति, रनवे की स्थिति और चालक दल की कार्रवाई समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सकती है।

फिलहाल इस घटना में जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं होना राहत की बात है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए विमान को जांच के लिए अलग किया गया है और घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

CGPSC परीक्षा परिणाम जारी: 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का परिणाम जारी कर दिया है। परीक्षा में सफल 608 अभ्यर्थियों का चयन अब अगले चरण यानी साक्षात्कार के लिए किया गया है।

आयोग की प्रक्रिया के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी है। परिणाम जारी होने के साथ ही अभ्यर्थियों में आगे की चयन प्रक्रिया को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवार अब साक्षात्कार की तैयारी में जुट गए हैं। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

आगे क्या होगा?

  • मुख्य परीक्षा: परिणाम जारी

  • साक्षात्कार: 21 सितंबर 2026 से प्रस्तावित

  • चयनित अभ्यर्थी: 608

  • अगला चरण: साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन सूची

CGPSC के इस परिणाम का लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी खबर है। अब सभी चयनित उम्मीदवारों की नजर साक्षात्कार और अंतिम मेरिट सूची पर रहेगी।

एनवीडिया का बड़ा एआई कदम: हगिंग फेस को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी

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एनवीडिया (Nvidia) एआई के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी हगिंग फेस (Hugging Face) को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी कर रही है।

यह सौदा पूरा होने पर एआई उद्योग के सबसे बड़े अधिग्रहणों में शामिल हो सकता है। हगिंग फेस एआई मॉडल, मशीन लर्निंग टूल्स और डेवलपर्स के लिए ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के लिए जाना जाता है।

इस संभावित सौदे को एआई के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, तकनीक और प्रतिभाशाली विशेषज्ञों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एनवीडिया पहले से ही एआई चिप्स और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक प्रमुख कंपनी है, जबकि हगिंग फेस का मजबूत आधार एआई डेवलपर्स और ओपन-सोर्स मॉडल समुदाय में है।

अगर यह अधिग्रहण पूरा होता है, तो एनवीडिया को एआई सॉफ्टवेयर, मॉडल और डेवलपर समुदाय में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे एआई तकनीक के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में एनवीडिया की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, हगिंग फेस का संभावित अधिग्रहण यह दिखाता है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां एआई की अगली दौड़ में तकनीक के साथ-साथ एआई प्रतिभा और डेवलपर इकोसिस्टम पर भी बड़ा निवेश कर रही हैं।

Nepal Flood Rescue: 9 दिन बाद टनल से जिंदा निकले 2 कर्मचारी, देश में जगी नई उम्मीद

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काठमांडू- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बीच शुक्रवार को एक ऐसी खबर सामने आई जिसने राहत और बचाव अभियान में नई उम्मीद जगा दी। लगभग नौ दिनों से एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया। दोनों कर्मचारी Upper Trishuli 3A Hydropower Project की सुरंग में फंसे हुए थे।

बचाए गए दोनों कर्मचारियों की पहचान 30 वर्षीय Sanjay Sah, जो mechanical foreman हैं, और 45 वर्षीय Kabir Maharjan, जो mechanical supervisor हैं, के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को सुरंग के अंदर करीब 170 मीटर की गहराई से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

यह पूरा हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ, जब नेपाल के Trishuli River क्षेत्र में भारी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए ice और rock avalanche/glacier collapse के बाद अचानक आई बाढ़ ने नदी के आसपास के इलाकों, सड़कों और कई hydropower projects को भारी नुकसान पहुंचाया।

बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, चट्टान और मलबा लेकर आया। इससे जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के प्रवेश द्वार और अंदर के रास्ते बुरी तरह प्रभावित हुए। बड़ी संख्या में कर्मचारी लापता हो गए और कई लोगों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई।

सुरंग के अंदर कैसे बचे दोनों कर्मचारी?

Sanjay Sah ने rescue के बाद बताया कि जब बाढ़ का पानी underground area में घुसना शुरू हुआ, तब वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने पहले अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की।

Sah के मुताबिक, उस समय वहां सामान्य से कहीं ज्यादा लोग मौजूद थे और उन्होंने कई लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरों को बचाने की कोशिश में उनका खुद का बाहर निकलने का मौका निकल गया और वे सुरंग के अंदर फंस गए।

उन्होंने बताया कि सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्होंने प्रार्थना करते हुए समय बिताया और बाहर से मदद पहुंचने का इंतजार किया। उनके मुताबिक, आसपास कुछ और लोगों की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं, जिससे यह उम्मीद बढ़ी कि सुरंग में अन्य लोग भी जीवित हो सकते हैं।

आवाज सुनाई देने के बाद तेज हुआ Rescue Operation

कई दिनों तक सुरंग में फंसे लोगों की तलाश जारी रही। Rescue teams ने भारी मशीनों की मदद से सुरंग के रास्ते में जमा मलबा हटाना शुरू किया।

शुक्रवार को अभियान के दौरान rescuers को सुरंग के अंदर से आवाज सुनाई देने की सूचना मिली। इसके बाद बचाव दल ने उसी दिशा में खुदाई और मलबा हटाने का काम तेज कर दिया। लगभग 50 से 60 मीटर तक मलबा हटाने के बाद rescue teams उन कर्मचारियों तक पहुंचने में सफल हुईं।

बचाव अभियान में Nepal Army, Nepal Police और Armed Police Force के जवानों के साथ technical experts भी शामिल रहे। विदेशी tunnel-rescue specialists ने भी अभियान में सहायता और सलाह दी।

अस्पताल में कराया गया भर्ती

सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद दोनों कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर उन्हें काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, Sanjay Sah की हालत स्थिर बताई गई है, जबकि Kabir Maharjan को इलाज और निगरानी की जरूरत है। दोनों को rescue site से Kathmandu ले जाया गया।

Kabir Maharjan भी पहुंचे थे Maintenance के लिए

Kabir Maharjan स्थायी रूप से Trishuli 3A में तैनात नहीं थे। वे routine maintenance work के लिए वहां पहुंचे थे। उनके परिवार के मुताबिक, वह 25 अगस्त को project site के लिए रवाना हुए थे और अगले दिन बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया।

उनके परिवार के लिए नौ दिन बेहद मुश्किल रहे। फोन बंद होने के बाद परिवार लगातार अधिकारियों से संपर्क कर उनके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करता रहा। उनके जिंदा मिलने की खबर के बाद परिवार में राहत की लहर दौड़ गई।

लेकिन अभी Rescue Operation खत्म नहीं हुआ

दो कर्मचारियों के जिंदा मिलने से जहां राहत की उम्मीद बढ़ी है, वहीं Nepal में rescue operation अभी भी जारी है।

अधिकारियों के मुताबिक, कई hydropower projects की सुरंगों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में सैकड़ों workers के लापता होने और कई लोगों के सुरंगों में फंसे होने की बात कही गई है। Trishuli 3A site पर भी rescuers को उम्मीद है कि कुछ और लोग जीवित हो सकते हैं।

Rescue teams अब सुरंगों में संभावित survivable pockets की तलाश कर रही हैं। मशीनों, tunnel maps, oxygen systems और technical expertise की मदद से अभियान लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

9 दिन बाद मिली जिंदगी की उम्मीद

नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा में हजारों लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। ऐसे समय में नौ दिन तक सुरंग के अंदर फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना एक बड़ी राहत और उम्मीद की खबर बनकर सामने आया है।

दोनों की कहानी ने rescue teams को भी नई ऊर्जा दी है। अब उनकी सुरक्षित वापसी के बाद सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सुरंगों में फंसे अन्य लोगों को भी जल्द से जल्द जिंदा बाहर निकाला जा सके।

बड़ी बात

9 दिन तक अंधेरी और मलबे से घिरी सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना Nepal के अब तक के सबसे कठिन rescue operations में से एक में उम्मीद की किरण बन गया है। Rescue teams का अभियान जारी है और अब नजर इस बात पर है कि क्या सुरंग के अंदर से और लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

ISRO की बड़ी कामयाबी: GSLV-F17 ने EOS-05 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया

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भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 Earth Observation Satellite का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिशन भारत की पृथ्वी निगरानी और अत्याधुनिक satellite imaging क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

ISRO के मुताबिक, GSLV-F17 ने EOS-05 को निर्धारित Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया। EOS-05 को geosynchronous orbit से पृथ्वी की imaging के लिए भारत का पहला satellite बताया गया है।

सुबह 2:55 बजे हुआ लॉन्च

GSLV-F17/EOS-05 मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर को सुबह 2:55 बजे IST पर श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre के Second Launch Pad से किया गया। यह GSLV की 19वीं उड़ान है।

लॉन्च के दौरान रॉकेट ने निर्धारित चरणों को पूरा करते हुए EOS-05 को उसकी लक्षित कक्षा तक पहुंचाया। ISRO ने मिशन को सफल घोषित करते हुए कहा कि GSLV-F17 ने अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

क्या है EOS-05

EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी और imaging क्षमता को बढ़ाना है।

यह satellite geosynchronous orbit से पृथ्वी के बड़े हिस्से का observation करने में सक्षम होगा। इस तरह की क्षमता का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह में होने वाले बदलावों की निगरानी, प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन और विभिन्न Earth-observation applications में किया जा सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह मिशन?

EOS-05 की खासियत यह है कि इसे geosynchronous orbit से imaging के लिए तैयार किया गया है। इससे भारत की Earth-observation infrastructure को एक नई क्षमता मिलने की उम्मीद है।

इस तरह के satellite data का उपयोग भविष्य में कृषि, पर्यावरण निगरानी, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और strategic applications जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

हालांकि, satellite की सभी operational और security-related capabilities सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

GSLV-F17 की उपलब्धि

GSLV-F17 भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle कार्यक्रम का एक और महत्वपूर्ण मिशन है। ISRO की आधिकारिक सूची के अनुसार यह GSLV की 19वीं flight है।

इस मिशन की सफलता भारत की उस क्षमता को भी दर्शाती है जिसमें देश अपने भारी satellites को geosynchronous transfer-type trajectories तक पहुंचाने के लिए GSLV जैसे launch vehicles का इस्तेमाल कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी ISRO को बधाई

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि GSLV-F17 के जरिए EOS-05 का सफल प्रक्षेपण भारत के space sector की excellence, innovation और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।

उन्होंने ISRO और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी को भी भारत के space ecosystem के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Bottom Line

GSLV-F17 और EOS-05 मिशन की सफलता भारत के Earth-observation और space technology programme के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मिशन के जरिए भारत ने geosynchronous orbit से imaging की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाया है और देश की satellite-based Earth monitoring capabilities को मजबूत किया है।

ISRO की यह सफलता एक बार फिर दिखाती है कि भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

CG Murder Case: थप्पड़ का बदला लेने रची हत्या की साजिश, 16 साल के नाबालिग ने रेलवे सुपरवाइजर को मार डाला

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 बिलासपुर। तोरवा थाना क्षेत्र की आरपीएफ कॉलोनी में रेलवे ठेकेदार के सुपरवाइजर नरेश गुप्ता की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, बारिश के पानी के छींटे पड़ने के बाद सुपरवाइजर द्वारा थप्पड़ मारे जाने से नाराज नाबालिग ने बदला लेने की साजिश रची और रात में कंस्ट्रक्शन साइट में घुसकर वारदात को अंजाम दिया।


घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर पुलिस नाबालिग तक पहुंची। पूछताछ में उसने कथित तौर पर हत्या के पीछे की वजह बताई।

पानी की टंकी के पास मिला था शव

घटना गुरुवार सुबह सामने आई। रेलवे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने पहुंचे कर्मचारियों ने नरेश गुप्ता को आवाज दी और फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारियों ने अंदर जाकर देखा तो पानी की टंकी के पास नरेश का खून से सना शव पड़ा था।

मृतक नरेश गुप्ता (35) मूल रूप से आरा, बिहार का रहने वाला था। वह रेलवे ठेकेदार अनिल सिंह की कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहा था।

सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और तोरवा पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए।

CCTV में दिखा संदिग्ध

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक संदिग्ध युवक हाफ पैंट और टी-शर्ट में नजर आया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को नाबालिग के संबंध में सुराग मिला।

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर स्टोर रूम के पास रखे हथौड़े से नरेश के सिर पर हमला किया। गंभीर चोट लगने से वह जमीन पर गिर गया और उसकी मौत हो गई।

बारिश के पानी के छींटे से शुरू हुआ विवाद

पूछताछ में नाबालिग ने पुलिस को बताया कि मंगलवार रात तेज बारिश हो रही थी और वह साइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े नरेश के ऊपर साइकिल से बारिश के पानी के छींटे पड़ गए।

पुलिस के मुताबिक, इसी बात को लेकर नरेश ने नाबालिग को रास्ते में रोककर कथित तौर पर तीन थप्पड़ मारे थे। नाबालिग ने पूछताछ में बताया कि इस घटना से वह खुद को अपमानित महसूस कर रहा था और उसने इसका बदला लेने की ठान ली।

रात में साइट में घुसकर किया हमला

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर पहले हत्या की योजना बनाई। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे वह कंस्ट्रक्शन साइट के पीछे से अंदर दाखिल हुआ। वहां से हथौड़ा लेकर वह नरेश के कमरे के पास पहुंचा।

पुलिस के मुताबिक, नरेश के सो जाने के बाद नाबालिग ने कथित तौर पर उसके सिर पर हथौड़े से कई वार किए। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया।

फिलहाल पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लेकर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्या में इस्तेमाल हथौड़े सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

CG NEWS : सहकारी बैंकों में 1,360 पदों पर होगी भर्ती, सरकार ने दी मंजूरी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सहकारिता विभाग ने प्रदेश के पांच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक क्षेत्रों और उनसे संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में कुल 1,360 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी है।


इनमें जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के विभिन्न संवर्गों के 198 पद और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 1,162 समिति प्रबंधक के पद शामिल हैं। समिति प्रबंधकों के 1,162 पदों में से 596 पद सीधी भर्ती और 566 पद सीमित चयन के माध्यम से भरे जाएंगे।


पांच बैंक क्षेत्रों में होगी भर्ती

भर्ती के लिए सबसे अधिक पद रायपुर क्षेत्र में 508 स्वीकृत किए गए हैं। इसके बाद बिलासपुर में 444, बस्तर-जगदलपुर में 187, दुर्ग-राजनांदगांव में 154 और रायगढ़ में 67 पदों पर भर्ती होगी।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में उप प्रबंधक, प्रोग्रामर, सहायक प्रबंधक, फील्ड ऑफिसर, सहायक प्रोग्रामर और सामान्य सहायक समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

मंत्री के निर्देश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने 21 अगस्त को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में सहकारी बैंकों और समितियों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने संबंधित बैंकों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण किया और कर्मचारी सेवा नियम, आरक्षण प्रावधान तथा वित्तीय मानदंडों के आधार पर भर्ती की अनुमति जारी की।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार सहकारी व्यवस्था को अधिक सक्षम और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 1,360 पदों पर भर्ती से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ सहकारी बैंकों और समितियों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

किसानों और खाताधारकों को मिलेगी बेहतर सुविधा

नए कर्मचारियों की नियुक्ति से जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। इससे किसानों के ऋण प्रकरण, बैंकिंग लेन-देन और अन्य सेवाओं का संचालन अधिक सुगमता और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

समिति प्रबंधकों की नियुक्ति से पैक्स समितियों के दैनिक कामकाज, अभिलेख संधारण, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, समितियों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी नए कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

नियमों और आरक्षण प्रावधानों के तहत होगा चयन

भर्ती प्रक्रिया संबंधित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक कर्मचारी सेवा नियम-2023, आरक्षण नियमों, स्वीकृत पदों की संख्या और निर्धारित वित्तीय मानदंडों के अनुसार पूरी की जाएगी। भर्ती एवं चयन समिति में संबंधित संभागीय संयुक्त पंजीयक को अनिवार्य सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। हालांकि, यह भर्ती प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन विशेष अनुमति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी।

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