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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 54 सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमले का आरोप, NIA ने 5 राज्यों में की छापेमारी

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नई दिल्ली- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की वेबसाइटों को निशाना बनाकर किए गए कथित साइबर हमलों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। NIA ने साइबर आतंकवाद से जुड़े गुजरात मामले की जांच के तहत महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और दिल्ली में पांच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार की 54 वेबसाइटों पर कथित रूप से Distributed Denial-of-Service (DDoS) हमले करने का प्रयास किया था। इन वेबसाइटों में महत्वपूर्ण सरकारी डिजिटल संसाधन और Critical Information Infrastructure से जुड़े सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।

पांच राज्यों में एक साथ कार्रवाई

NIA की तलाशी महाराष्ट्र के पुणे स्थित जुन्नर, गुजरात के खेड़ा स्थित नडियाद, तेलंगाना के करीमनगर स्थित रामागुंडम, बिहार के गोपालगंज और दिल्ली में की गई। यह मामला 25 जून 2025 को दर्ज साइबर आतंकवाद के केस से संबंधित है।

तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव समेत कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। इनसे कथित हैकिंग गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री मिलने की बात सामने आई है।

दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण के जरिए ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों को सहायता या सहयोग प्रदान किया था। इन्हीं कड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर तलाशी और पूछताछ की गई।

DDoS हमला ऐसी साइबर तकनीक है, जिसमें किसी वेबसाइट या सर्वर पर भारी मात्रा में अवैध इंटरनेट ट्रैफिक भेजकर उसकी सामान्य सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया जाता है।

NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सरकारी डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। मामले की आगे की जांच जारी है।


NH-53 पर तुमगांव के पास दो ट्रकों की आमने-सामने भिड़ंत, दोनों चालक घायल

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तुमगांव- राष्ट्रीय राजमार्ग-53 (NH-53) पर तुमगांव के पास दो ट्रकों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों ट्रकों के चालक घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रकों की भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि वाहनों के आगे के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में घायल दोनों चालकों को तत्काल तुमगांव अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में सहयोग किया। वहीं, पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटना की स्थिति का जायजा लिया।

फिलहाल हादसा किस कारण से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। हादसे के चलते कुछ समय तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा।

लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच NH-53 जैसे व्यस्त मार्गों पर वाहन चालकों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, निर्धारित गति का पालन करने और सामने से आने वाले वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।

https://www.youtube.com/shorts/LmNZ_y45V8g?feature=share

एक घंटे के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों का जान जोखिम में क्यों डाला गया?

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महासमुंद- साइबर सुरक्षा आज के समय में अत्यंत आवश्यक विषय है, लेकिन इसके नाम पर आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अवधि और व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। केवल एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए जिले के शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाना, वह भी तेज बारिश के मौसम में, क्या वास्तव में उचित है? क्या महज प्रमाण-पत्र देने से शिक्षक साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित हो जाएंगे?

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण की उपयोगिता पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दूर-दराज से जिला मुख्यालय बुलाने से शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बरसात के मौसम में लंबी दूरी तय करने के दौरान शिक्षकों की जान-माल की सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है। हाल के दिनों में बारिश के कारण कई स्थानों पर दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आई हैं, ऐसे में गैर-जरूरी आवागमन को कम करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कोकडिया का कहना है कि प्रशिक्षण में दी गई साइबर सुरक्षा से संबंधित अधिकांश सामान्य जानकारियां आज शिक्षकों तक टीवी, मोबाइल, समाचार माध्यमों और विभिन्न जागरूकता अभियानों के जरिए पहले से पहुंच रही हैं। यदि वास्तव में शिक्षकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए प्रशिक्षित करना है तो प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न होकर व्यावहारिक, संवादात्मक और विस्तृत होना चाहिए।

उनके अनुसार, इस प्रशिक्षण को जिला मुख्यालय पर केवल एक घंटे में आयोजित करने के बजाय संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों के माध्यम से भी कराया जा सकता है। पहले संकुल समन्वयकों को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाए और उसके बाद वे अपने-अपने संकुल के शिक्षकों को प्रशिक्षण दें। इससे शिक्षकों का यात्रा समय बचेगा, विद्यार्थियों की पढ़ाई कम प्रभावित होगी और प्रशासन का खर्च भी घटेगा।

एक घंटे का प्रशिक्षण कितना प्रभावी?

साइबर अपराध लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल भाषण सुनाकर या जानकारी देकर साइबर सुरक्षा की समझ विकसित नहीं की जा सकती। प्रशिक्षण में वास्तविक उदाहरण, साइबर ठगी के तरीके, फर्जी कॉल और लिंक की पहचान, बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाव, सोशल मीडिया सुरक्षा, पासवर्ड सुरक्षा, डेटा सुरक्षा तथा साइबर अपराध होने अथवा प्रयास किए जाने पर तत्काल क्या कदम उठाए जाएं—इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

वन-वे प्रशिक्षण प्रभावी नहीं होते। प्रशिक्षण में शिक्षकों को सवाल पूछने, अपने अनुभव साझा करने, उदाहरणों पर चर्चा करने और समस्याओं का समाधान समझने का अवसर मिलना चाहिए। आपसी संवाद और प्रश्नोत्तर ही किसी प्रशिक्षण को प्रभावी बनाते हैं।

साइबर अपराध रोकने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी

कोकडिया ने कहा कि केवल जनता को जागरूक करने से साइबर अपराध पूरी तरह नहीं रुकेंगे। साइबर कानूनों को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है।

यदि किसी व्यक्ति को ठगने का प्रयास किया जा रहा है, फर्जी कॉल या संदेश के माध्यम से धोखाधड़ी का प्रयास किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केवल पैसा खाते से निकल जाने के बाद ही कार्रवाई करने की बजाय धोखाधड़ी के प्रयास की सूचना पर भी तत्काल कार्रवाई और मार्गदर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस एवं संबंधित अधिकारियों को साइबर अपराध के नए तरीकों के बारे में लगातार प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को समय पर सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल सके।

टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाना होगा

आज साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों से साइबर अपराधों का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा। हमें आधुनिक तकनीक को समझना और उसका प्रभावी उपयोग करना होगा।

ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे संदिग्ध नंबर, फर्जी कॉल और साइबर ठगी के प्रयासों की पहचान जल्द से जल्द हो सके तथा संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंच सके। साइबर सुरक्षा केवल प्रशिक्षण का विषय नहीं, बल्कि तकनीक, कानून, पुलिस व्यवस्था और जन-जागरूकता—इन सभी के समन्वय का विषय है।

प्रमाण-पत्र नहीं, वास्तविक प्रशिक्षण चाहिए

एक घंटे के प्रशिक्षण के बाद यदि हजारों शिक्षकों के प्रमाण-पत्र तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो यह भी विचारणीय है कि उस खर्च से वास्तविक रूप से कितना साइबर सुरक्षा कौशल विकसित हुआ।

यदि शिक्षक पहले से सामान्य साइबर सुरक्षा जानकारी रखते हैं और प्रशिक्षण केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित रह जाता है, तो यह शिक्षकों के साथ भी अन्याय है और सरकारी संसाधनों का भी उचित उपयोग नहीं है।

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि सरकारी प्रशिक्षण केवल औपचारिकता के लिए एक घंटे का नहीं होना चाहिए। यदि प्रशिक्षण आवश्यक है तो उसे पर्याप्त समय देकर प्रभावी तरीके से कराया जाए।

पूरे दिन का प्रशिक्षण हो

साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कम से कम एक पूरे दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, वास्तविक साइबर ठगी के उदाहरण, प्रश्नोत्तर, साइबर अपराध की शिकायत की प्रक्रिया, डिजिटल सुरक्षा के उपाय और व्यवहारिक अभ्यास शामिल किए जाने चाहिए।

इसके साथ ही शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाने के बजाय पहले संकुल समन्वयकों को प्रशिक्षित कर संकुल स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इससे समय, धन और यात्रा का खर्च बचेगा तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई भी कम प्रभावित होगी।

गेंदलाल कोकडिया का कहना है कि साइबर सुरक्षा निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन प्रशिक्षण भी उतना ही गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। महज एक घंटे का प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र बांटना समाधान नहीं है। यदि उद्देश्य वास्तव में शिक्षकों को साइबर सुरक्षा के प्रति सक्षम बनाना है, तो प्रशिक्षण पूरे दिन का, संवादात्मक, व्यावहारिक और स्थानीय स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए।

सवाल यह नहीं है कि साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण जरूरी है या नहीं—सवाल यह है कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिससे वास्तव में शिक्षक और समाज साइबर अपराध से सुरक्षित हो सकें।

बहनों ने बांधी स्नेह की डोर, ‘विष्णु भैया’ ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा

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 रायपुर : रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले राजधानी रायपुर में आज भाई-बहन के स्नेह और राष्ट्ररक्षा के संकल्प का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर जब स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने रक्षा सूत्र बांधे तो पूरा वातावरण आत्मीयता, सम्मान और कृतज्ञता के भाव से भर उठा।


कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद उपनिरीक्षक  युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री इस अवसर पर भावुक हो उठे। उन्होंने शहीद  वर्मा के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के साथ सदैव खड़े रहने का संकल्प दोहराया।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राखी का यह धागा केवल भाई-बहन के स्नेह का बंधन नहीं, बल्कि एक शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। हमारे वीर जवानों का बलिदान और उनके परिवारों का त्याग छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता। शहीदों के परिवार हमारे अपने परिवार हैं और उनके सम्मान, स्वाभिमान तथा हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़े रहने का यह रिश्ता सदैव अटूट रहेगा।

नक्सलवाद के अंत से बहनों को मिला सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि देश और छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कराने के लिए हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है और अनेक जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ हमारी बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। अब वह समय आ रहा है जब नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग नहीं उजड़ेगा, किसी मां को अपना बेटा नहीं खोना पड़ेगा और किसी बहन को अपने भाई के सकुशल घर लौटने की चिंता नहीं सताएगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता ने बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और विकास के नए युग का मार्ग प्रशस्त किया है। इस परिवर्तन में बस्तर की जनता का विश्वास और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर की पहचान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पर्यटन और नई संभावनाओं से होगी। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रहे क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसर तेजी से पहुंचाए जा रहे हैं। सरकार का संकल्प बस्तर को देश के श्रेष्ठ और विकसित आदिवासी अंचलों में शामिल करना है।

जवानों की कलाइयों पर सजी बहनों की राखी

‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सेना और पुलिस के लगभग 800 जवान शामिल हुए। स्कूली छात्राओं, दिव्यांग बेटियों, स्वच्छता दीदियों, ड्रोन दीदियों, लखपति दीदियों और महिला स्व-सहायता समूहों की बहनों ने जवानों की कलाइयों पर राखी बांधी और राष्ट्र तथा समाज की सुरक्षा में उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा आत्मीय और अद्भुत दृश्य पहली बार देखा है। देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए घर-परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले जवानों को जब इतनी बड़ी संख्या में बहनों ने राखी बांधी तो रक्षाबंधन का पर्व अपने व्यापक अर्थ में साकार होता दिखाई दिया। हमारे जवान केवल सीमाओं और समाज के सुरक्षा प्रहरी नहीं, बल्कि प्रदेश की बहनों के भाई भी हैं।

इस अवसर पर सुरक्षा बलों के जवानों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जवानों का सम्मान किया।

बहनों का स्नेह मेरी सबसे बड़ी शक्ति : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें छत्तीसगढ़ की लाखों-करोड़ों बहनों का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला है। बहनों का यही विश्वास और अपनापन जनसेवा के लिए नई ऊर्जा देता है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण आज शासन की नीतियों के केंद्र में है। छत्तीसगढ़ में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति दीदी अभियान ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है और प्रदेश की 13 लाख 85 हजार बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ गांव और समाज के विकास का नेतृत्व भी कर रही हैं।

रक्षाबंधन से पहले लगभग 68 लाख बहनों को 631 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बनी है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में लगभग 68 लाख बहनों के बैंक खातों में करीब 631 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश की माताएं-बहनें आर्थिक रूप से मजबूत बनें, अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने त्योहार पूरे उत्साह एवं सम्मान के साथ मना सकें।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय को भी रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए उनके सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

देश की एकता और जवानों के सम्मान का दिलाया संकल्प

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने तथा देश के वीर जवानों के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखने का संकल्प दिलाया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल वर्दीधारी जवानों का दायित्व नहीं है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करे तथा राष्ट्रविरोधी शक्तियों के विरुद्ध सजग रहे। जवानों के प्रति सम्मान की भावना समाज और नई पीढ़ी में और मजबूत हो, ‘स्नेह की डोर’ जैसे आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में केंद्रीय सुरक्षा बलों और पैरामिलिट्री फोर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने साहस के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ी है।

उन्होंने कहा कि एक समय नक्सल हिंसा के कारण अनेक परिवारों ने अपने बेटे, भाई और जीवनसाथी खोए, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। वह दिन दूर नहीं जब किसी बहन को यह नहीं कहना पड़ेगा कि उसका भाई ड्यूटी पर गया था और लौटकर नहीं आया। उन्होंने समाज से वैचारिक रूप से भी सजग रहने और देश की एकता-अखंडता को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

रायपुर जिले को मिले पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा तैयार पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स—‘हरित पोषणम्’, ‘प्रोजेक्ट निरामय’, ‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’, ‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ और ‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ का शुभारंभ किया।

‘हरित पोषणम्’ के माध्यम से आंगनबाड़ियों और महिला समूहों को फलदार पौधे तथा सब्जियों के उन्नत बीज उपलब्ध कराकर पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने के साथ महिलाओं और समुदाय को पोषण अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना है।

‘प्रोजेक्ट निरामय’ के अंतर्गत रायपुर जिले के 215 उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के 65 हजार 920 छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य एवं रक्त जांच की जाएगी। जांच में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाए जाने पर आवश्यकतानुसार निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।

‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’ के माध्यम से रायपुर में प्रत्येक माह सामाजिक समरसता, संस्कृति, सुशासन, युवा नेतृत्व और राष्ट्रभावना से जुड़े विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।

‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित हस्तियों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों के जीवन, अनुभव और विचारों को पॉडकास्ट के माध्यम से सामने लाया जाएगा।

‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ के माध्यम से जिले के सौंरा (सपेरा) समुदाय के परिवारों को शासन की मुख्यधारा और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जॉब कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं और आवश्यक दस्तावेजों का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने की पहल की जाएगी।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कांवड़िया, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधि, सुरक्षा बलों के अधिकारी-जवान, स्कूली विद्यार्थी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

महासमुंद में 27 अगस्त को एक साथ बनेंगे दिव्यांग और मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र

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 महासमुंद : जिला चिकित्सालय महासमुंद (वर्तमान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय महासमुंद) में संचालित मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांगजनों को दिव्यांग प्रमाणपत्र सत्यापन, नवीनीकरण एवं नवीन दिव्यांग प्रमाणपत्र तथा मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।


संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय ने बताया कि मेडिकल बोर्ड द्वारा सामान्यतः प्रत्येक बुधवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र का सत्यापन, नवीनीकरण एवं नवीन प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। वहीं प्रत्येक शुक्रवार को हितग्राहियों को मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

26 अगस्त 2026, बुधवार को ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी) तथा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर सार्वजनिक, सामान्य अवकाश होने के कारण दिव्यांग प्रमाणपत्र एवं मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया 27 अगस्त 2026, गुरुवार को एक साथ की जाएगी।

जिले के दिव्यांगजन एवं संबंधित हितग्राही निर्धारित तिथि 27 अगस्त 2026, गुरुवार को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर आवश्यक प्रमाणपत्र संबंधी कार्यवाही करा सकते हैं। यह व्यवस्था केवल 27 अगस्त 2026 के लिए लागू रहेगी।

ATR के प्रतिबंधित क्षेत्र में जाना पड़ा भारी, बाघिन के हमले में युवक की मौत

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 मुंगेली। अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में मशरूम (पिहरी) लेने गए 23 वर्षीय युवक की बाघिन के हमले में मौत हो गई। घटना के समय बाघिन अपने दो शावकों के साथ इलाके में मौजूद थी। हमले के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की सख्त हिदायत दी है।


दोस्तों के साथ जंगल गया था युवक

जानकारी के मुताबिक, ग्राम बांधा निवासी धर्मजीत धृतलहरे (23) अपने साथियों भानु प्रताप, शिवशंकर ध्रुव, दशरथ धृतलहरे और रामफल धृतलहरे के साथ 24 अगस्त को मशरूम लेने जंगल गया था। सभी युवक जोगीपुर परिसर के पाड़ाडोंगरी के पास पहुंचे थे।

इसी दौरान दो शावकों के साथ मौजूद बाघिन ने युवकों पर हमला कर दिया और उन्हें दौड़ाया। भागने के दौरान धर्मजीत बाघिन की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि बाघिन ने उसकी गर्दन पर हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। साथियों ने उसे बचाने और जंगल से बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

वन विभाग और पुलिस ने बरामद किया शव

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने शव को बरामद कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। एटीआर के एसडीओ समीर जोनाथन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बाघिन के हमले से युवक की मौत की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की स्थिति और स्पष्ट होगी।

शावकों के साथ आसपास मौजूद है बाघिन

वन विभाग के अनुसार, बाघिन अभी भी अपने दोनों शावकों के साथ घटनास्थल के आसपास मौजूद है। इसे देखते हुए आसपास के ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की सख्त हिदायत दी गई है। वनकर्मी और स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (STPF) इलाके में लगातार निगरानी कर रहे हैं।

31 अक्टूबर तक प्रतिबंधित है प्रवेश

वन विभाग के अनुसार, मानसून अवधि में 15 जून से 31 अक्टूबर तक टाइगर रिजर्व के कोर और प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। इसके बावजूद युवक अन्य साथियों के साथ जंगल में प्रवेश कर गया था।

वन विभाग और STPF की ओर से ग्रामीणों को लगातार प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने की समझाइश दी जा रही है। विभाग ने अपील की है कि बारिश के मौसम में जंगल और वन्यजीवों के संभावित इलाकों में अनावश्यक रूप से न जाएं और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

बीज राखियों से सजेगा रक्षाबंधन, स्नेह के साथ मिलेगा हरियाली का संदेश

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 रायपुर : रायगढ़ जिले में इस बार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश भी देगा। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, मक्का, बरबट्टी, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, भिंडी, उड़द, मसूर और मूंगफली सहित स्थानीय बीजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार कर रही हैं। यह नवाचार महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का नया अवसर भी बन रहा है।


बीज राखी निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए जिले के सातों विकासखंडों में प्रतियोगिता आयोजित कर उत्कृष्ट राखियां तैयार करने वाली महिलाओं का चयन किया गया। चयनित महिलाओं ने जिला कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी सहित अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई बीज राखियां पहनाईं। कलेक्टर ने महिलाओं को प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया।

कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप स्व-सहायता समूह की महिलाओं को नवाचार, सशक्तिकरण और आजीविका से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय संसाधनों और हुनर से महिलाएं आय के नए साधन विकसित कर रही हैं।

बीज राखियों की विशेषता यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं। कम लागत, आकर्षक डिजाइन और पर्यावरण हितैषी स्वरूप के कारण इनकी मांग बढ़ रही है। इस तरह बीज राखी भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली का सुंदर संदेश भी जन-जन तक पहुंचाएगी।

CG NEWS : जलप्रपात में फंसे तीन युवक, 15 घंटे बाद सुरक्षित रेस्क्यू

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 कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देवपहरी जलप्रपात में अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी के बीच टापू पर फंसे तीन युवकों को करीब 15 घंटे की मशक्कत के बाद मंगलवार सुबह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हसदेव नदी में बढ़ते जलस्तर, तेज बहाव और अंधेरे के कारण रातभर रेस्क्यू अभियान में काफी परेशानी आई। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से रस्सी के सहारे तीनों युवकों को सुरक्षित निकाला गया।


फोटो खिंचाने टापू तक पहुंचे थे युवक

जानकारी के मुताबिक, गुरमा श्यांग गांव निवासी धनेश्वर सारथी, घनश्याम महंत और सूरज सारथी सोमवार को घूमने के लिए देवपहरी जलप्रपात पहुंचे थे। बताया गया कि तीनों फोटो खिंचाने के लिए हसदेव नदी के बीच बने टापू तक चले गए थे।

इसी दौरान क्षेत्र में लगातार हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। पानी का बहाव तेज होने से वापस लौटने का रास्ता डूब गया और तीनों युवक टापू पर फंस गए।

छतरी में बिताई रात, वीडियो कॉल से मांगी मदद

जलस्तर तेजी से बढ़ता देख तीनों युवकों ने टापू पर बनी छतरी में शरण ली। उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए रेस्क्यू टीम से संपर्क किया और अपने परिजनों को भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही लेमरू थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों ने रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया, लेकिन अंधेरा, तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण युवकों तक पहुंचना मुश्किल था। रेस्क्यू टीम ने पूरी रात मौके पर निगरानी बनाए रखी।

15 घंटे बाद सुरक्षित निकाले गए तीनों युवक

कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया और एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया था। रातभर रेस्क्यू अभियान चलाया गया, लेकिन जलस्तर कम नहीं होने के कारण युवकों को बाहर निकालने में परेशानी हुई। मंगलवार सुबह पानी का बहाव कुछ कम होने के बाद रेस्क्यू अभियान फिर तेज किया गया।

करीब 15 घंटे की मशक्कत के बाद मंगलवार सुबह तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय लोगों की मदद से रस्सी के सहारे उन्हें नदी के बीच से सुरक्षित स्थान तक लाया गया। तीनों के सुरक्षित बाहर आने के बाद उनके परिजनों और रेस्क्यू टीम ने राहत की सांस ली।

बारिश में जलप्रपातों पर सावधानी जरूरी

देवपहरी जलप्रपात और आसपास का क्षेत्र बारिश के मौसम में बेहद आकर्षक हो जाता है, लेकिन इसी दौरान हसदेव नदी और जलप्रपात का जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा भी रहता है। घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान नदी के बीच बने टापुओं और जलप्रपात के संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के खतरे को सामने ला दिया है।

प्रशासन और पुलिस ने पर्यटकों से अपील की है कि बारिश के मौसम में जलप्रपात, नदी और नालों के आसपास विशेष सावधानी बरतें। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी के बीच या संवेदनशील हिस्सों में जाने से पूरी तरह बचें।

RAIPUR NEWS : माइग्रेन ठीक करने का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म, नौकरी के नाम पर 44 लाख ऐंठे

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के अभनपुर क्षेत्र से महिला को बीमारी ठीक करने और नौकरी लगवाने का झांसा देकर दुष्कर्म और करीब 44 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्यप्रदेश निवासी आशाराम चौधरी ने खुद को बैगा बताकर महिला का माइग्रेन ठीक करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद नौकरी लगवाने का झांसा देकर उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 44 लाख रुपये ले लिए। महिला ने आरोपी पर दुष्कर्म करने और घटना की जानकारी किसी को देने पर बदनाम करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।


पीड़िता की शिकायत पर अभनपुर पुलिस ने आरोपी आशाराम चौधरी के खिलाफ दुष्कर्म, ठगी और धमकी से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

बीमारी ठीक करने के बहाने बनाया भरोसा

जानकारी के मुताबिक पीड़िता एक शासकीय कर्मचारी की पत्नी है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसे माइग्रेन की शिकायत थी। इसी दौरान उसकी पहचान मध्यप्रदेश निवासी आशाराम चौधरी से हुई, जो अभनपुर में किराए के मकान में रहता था।

महिला का आरोप है कि आशाराम ने खुद को बैगा बताते हुए झाड़-फूंक और अन्य तरीकों से उसकी बीमारी ठीक करने का दावा किया। बीमारी ठीक करने के बहाने उसने महिला का विश्वास हासिल कर लिया। इसके बाद वह महिला को नौकरी और भविष्य से जुड़ी बातों का हवाला देकर अपने प्रभाव में लेने लगा।

नौकरी लगवाने का झांसा, 44 लाख रुपये लिए

पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद अलग-अलग वजहों से उससे रकम की मांग की गई। महिला ने आरोपी को अलग-अलग किस्तों में करीब 44 लाख रुपये दे दिए। हालांकि, इसके बाद भी उसकी नौकरी नहीं लगी और आरोपी ने रकम वापस करने से इनकार कर दिया।

दुष्कर्म के बाद धमकी देने का आरोप

महिला ने पुलिस को बताया कि इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद उसने किसी को बताने या पुलिस में शिकायत करने पर बदनाम करने की धमकी दी। सामाजिक लोक-लाज और आरोपी की धमकी के चलते महिला ने लंबे समय तक घटना की जानकारी किसी को नहीं दी।

नौकरी नहीं लगने और रकम वापस नहीं मिलने पर जब महिला ने आरोपी से पैसे लौटाने की मांग की तो उसने कथित तौर पर रकम लौटाने से इनकार कर दिया और धमकी दी।

पति को बताई पूरी बात, फिर थाने पहुंची महिला

काफी समय तक परेशान रहने के बाद पीड़िता ने पूरे मामले की जानकारी अपने पति को दी। इसके बाद वह पति के साथ अभनपुर थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही आरोपी आशाराम चौधरी फरार हो गया। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस मामले में महिला के आरोपों और पैसों के लेनदेन समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में मानसून फिर सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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 CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। बस्तर संभाग में बारिश की गतिविधियां ज्यादा तेज रही हैं, जबकि रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।


बस्तर संभाग में बारिश का जोर

पिछले 24 घंटों में बस्तर संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है।

मौसम विभाग के अनुसार, 25 अगस्त को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है।

रायपुर में भी बारिश के आसार

राजधानी रायपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। मौसम में अगले कुछ दिनों के दौरान बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं और दिन के तापमान में भी कोई विशेष बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।

अगले 5 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 और 27 अगस्त को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात हो सकता है।

28 अगस्त को भी कई इलाकों में बारिश जारी रहने का अनुमान है। यानी आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना रह सकता है।

वज्रपात को लेकर रहें सावधान

बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। संभव हो तो किसी पक्के भवन के अंदर रहें और मौसम खराब होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर अभी जारी रहने वाला है। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष आज एक साथ, बन रहा दुर्लभ संयोग! जानिए पूजा विधि और महत्व

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 सावन का आखिरी मंगलवार इस बार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। 25 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत के साथ भौम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। ऐसे में एक ही दिन दोनों व्रत पड़ने से शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का विशेष अवसर बन रहा है।


क्यों खास है मंगला गौरी और भौम प्रदोष का संयोग?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को माता गौरी की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। जब मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है।

इस वजह से 25 अगस्त का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है। भक्त इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार दोनों व्रत रखकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

शिव-पार्वती के साथ हनुमान जी की पूजा क्यों?

मंगलवार का संबंध भगवान हनुमान से भी माना जाता है। इसलिए इस दिन मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की आराधना से साहस, आत्मविश्वास और संकटों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। ऐसे में भक्त भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं।

शिव पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। पूजा हमेशा अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।

मंगला गौरी व्रत में क्या करें?

मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।

पूजा में माता गौरी को रोली, अक्षत, फूल, फल और सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की एक साथ पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ता है।

एक दिन में तीन देव शक्तियों की आराधना

25 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन माता गौरी, भगवान शिव और मंगलवार के अधिष्ठाता माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा का अवसर मिल रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे शिव-शक्ति और भक्ति के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

भौम प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शिव पूजा के दौरान बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। वहीं भगवान शिव को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा सामग्री का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

ध्यान दें: व्रत, पूजा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए पूजा-विधि के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।

श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।

श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, परिस्थितियां नहीं रोक सकतीं आगे बढ़ने का रास्ता

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी खुल रहे शिक्षा और विकास के नए द्वार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।

श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

किसी का सपना आईएएस बनना, किसी को मिला अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास

समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।

रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।

बच्चों के बीच सहज हुए मुख्यमंत्री, साथ बैठकर किया भोजन

समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।

किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।

उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त की राशि करेंगे जारी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा। 

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

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रायपुर- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।

बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।

नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं

कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश

इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।


छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ पढ़ेंगे कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी

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देश का पहला राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठ

रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 

इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

स्थानीय कला-संस्कृति को पाठ्य सामग्री से जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।

विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश

आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है।  पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।

पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे पाठ्य सामग्री का हिस्सा

छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।

लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।

तीन दिनों में पाठ्य सामग्री से लेकर लघु फिल्म की पटकथा तक

कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी आर्ट रिपोजिटरी

छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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