Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

डिजिटल छत्तीसगढ़ : जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।

विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं — सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों। त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय


नवा रायपुर मेडिसिटी : मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई इबारत लिख रहा है छत्तीसगढ़

No comments Document Thumbnail

रायपुर। स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान किसी भी विकसित समाज की असली नींव होते हैं। भारत जब वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी प्रमुख प्राथमिकता बन चुकी हैं। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही ‘मेडिसिटी’ परियोजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी और भविष्यगामी स्वास्थ्य पहल के रूप में उभर रही है।

नवा रायपुर अटल नगर पहले से ही शिक्षा, परिवहन, उद्योग और आधुनिक शहरी ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब मेडिसिटी इसे राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर की राजधानी के रूप में स्थापित करने जा रहा है। अत्याधुनिक कनेक्टिविटी, व्यापक परिवहन नेटवर्क और भौगोलिक दृष्टि से रणनीतिक स्थिति नवा रायपुर को न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख गंतव्य बना रही है। हर वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्री यहां के एयरपोर्ट और रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं, और जल्द ही शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बाद मेडिकल टूरिज्म के विस्तृत अवसर यहां खुलने वाले हैं।

सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। 

मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। कार्डियोलॉजी, कैंसर साइंस, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और मल्टी–स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब्स यहां स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवासीय परिसर, छात्रावास, होटल और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित ह्यूमन–सेंट्रिक मेडिकल ज़ोन में बदल देंगी। ‘वॉक-टू-हॉस्पिटल’ मॉडल, पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, सुगम सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और पीएमजेएवाई व सीजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत किफायती उपचार सेवाएँ इस परियोजना को पूरी तरह समावेशी बनाती हैं।

उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर में पहले से सक्रिय उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान इस संरचना को और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल 2012 से बाल हृदय रोग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अग्रणी केंद्र है, जहाँ भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों से भी मरीज आते हैं। वहीं 2018 से संचालित 170 बिस्तरों वाला बालको कैंसर हॉस्पिटल सेंट्रल इंडिया के 500–600 किमी के दायरे में अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराता है। रायपुर का स्वच्छ वातावरण और कम जीवन–यापन लागत मरीजों के लिए इसे और उपयुक्त बनाती है। 

मेडिसिटी केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी विशाल केंद्र बनेगी। स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस और सपोर्ट सेवाओं में हजारों रोजगार सृजित होंगे। इसके आसपास किफायती आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नई सेवा गतिविधियों का विस्तार राज्य की जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ सरकार का वह संकल्प है जो कहता है—सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, कम लागत में उच्च सुविधा और सुरक्षित जीवन की गारंटी। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भविष्य की नई परिभाषा है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर मेडिसिटी न सिर्फ मध्य भारत बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श हेल्थकेयर मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ऐसा इंजन बनेगी, जो आने वाले दशकों तक राज्य की विकास रफ्तार को नई दिशा देगा। 200 एकड़ में विकसित हो रही यह विश्वस्तरीय हेल्थकेयर सिटी न सिर्फ उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगी। एम्स, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट, मेडिकल यूनिवर्सिटी और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों की स्थापना से नवा रायपुर राष्ट्रीय हेल्थ हब के रूप में उभरेगा।  मेडिसिटी का मॉडल ‘सुलभता, किफायत और उच्च गुणवत्ता’ के सिद्धांतों पर आधारित है और यह आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और हेल्थ इकोनॉमी का अग्रणी केंद्र बनाएगा।-वित्त मंत्री ओ पी चौधरी

नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही मेडिसिटी  मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत है। 200 एकड़ में विकसित हो रहा यह विशाल हेल्थकेयर सिटी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे क्षेत्र को अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगा। ‘नवा रायपुर मेडिसिटी’ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ, मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान और मेडिकल टूरिज्म सभी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हुए भारत के विकसित भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगी। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

स्पोर्टएज मेरठ का शुभारंभ: भारत को वैश्विक खेल और उद्यमिता में नेतृत्व देने के लिए नई पहल

No comments Document Thumbnail

मेरठ- कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री, जयंत चौधरी ने आज स्पोर्टएज मेरठ (Sports and Entrepreneurship Development for Growth & Excellence) का उद्घाटन किया। यह एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को खेल निर्माण, नवाचार और उद्यमिता में वैश्विक नेता बनाना और मेरठ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्पोर्ट्स हब में बदलना है।

सहयोग और भागीदार

इस पहल को Sports, Physical Education, Fitness & Leisure Skills Council (SPEFL-SC), British Asian India Foundation (BAIF) और NEST के सहयोग से विकसित किया जाएगा। ये संस्थान आधारभूत अनुसंधान, संचालन प्रबंधन और सीएसआर सहयोगों के माध्यम से स्थानीय स्पोर्ट्स क्लस्टर को सशक्त बनाएंगे।

  • BAIF और NEST 5,000 से अधिक नैनो-उद्यमियों को सीधे समर्थन और क्षमता विकास गतिविधियों के माध्यम से सशक्त करेंगे।

 जयंत चौधरी का संदेश

चौधरी ने कहा:

“खेल केवल पदक जीतने के लिए नहीं हैं; यह अनुशासन, आत्मविश्वास और उद्यमिता भी विकसित करते हैं। जैसे ही भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी करने जा रहा है और हमारे एथलीट विश्व स्तर पर अद्भुत प्रदर्शन कर रहे हैं, वैसे ही हमारा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र भी इस गति के अनुरूप विकसित होना चाहिए। मेरठ के पास वैश्विक खेल हब बनने की पूरी क्षमता है। स्पोर्टएज मेरठ के माध्यम से मेरठ के कारीगरों, उद्यमियों और युवाओं को आधुनिक कौशल, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच मिलेगी।”

स्पोर्टएज मेरठ के प्रमुख स्तंभ

  1. उद्योग और बाजार मूल्यांकन: मेरठ के खेल उद्योग का व्यापक मूल्यांकन और भारत तथा विदेशों के सफल खेल हब से सीख लेना।

  2. सतत आजीविका और उद्यमिता: महिलाओं द्वारा संचालित नैनो-उद्यमों और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, आय, उत्पादकता और वित्तीय पहुँच सुधारना।

  3. स्थानीय खेल प्रतिभा का विकास: स्कूलों और अकादमियों के सहयोग से प्रेरणादायक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएँ आयोजित करना, मेरठ के लिए 3-5 प्रमुख खेलों के लिए विकास योजना तैयार करना।

  4. लैंगिक समानता: महिलाओं को भागीदारी, उद्यमिता और खेल अवसरों में केंद्रित करना, महिला नेतृत्व और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।

लक्ष्य और प्रभाव

  • 1,000 महिला-नेतृत्व वाले नैनो उद्यमों को सशक्त बनाना और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना।

  • प्रति उद्यमी कम से कम ₹1 लाख वार्षिक आय सुनिश्चित करना और आय में 25% सुधार।

  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर सृजित करना।

  • उत्पाद डिजाइन, तकनीक और गुणवत्ता के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।

  • एक स्केलेबल मॉडल तैयार करना जिसे भारत के अन्य खेल क्लस्टरों में दोहराया जा सके।

केंद्र उत्कृष्टता का उद्घाटन

इसके अलावा, जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में Centre of Excellence in Sports Goods Manufacturing (बैडमिंटन रैकेट यूनिट) का उद्घाटन किया।

  • यह केंद्र आधुनिक प्रशिक्षण और उत्पादन सुविधा के रूप में कार्य करेगा।

  • युवाओं और स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीकी कौशल, उत्पाद डिजाइन और गुणवत्ता मानकों में प्रशिक्षित करेगा।

  • महिला सहभागिता को प्रोत्साहित करेगा और उद्योग–अकादमी सहयोग को मजबूत करेगा।

स्थानीय समर्थन और भविष्य

सांसद और स्थानीय विधायक अपने स्थानीय क्षेत्र विकास कोष (LADF) से खेल अवसंरचना के विकास में योगदान देंगे। इससे ग्रामीण स्तर पर गुणवत्ता वाले खेल सुविधाओं का विकास और समुदाय की सहभागिता बढ़ेगी।

स्पोर्टएज मेरठ भारत में खेल निर्माण, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में एक वैश्विक नेतृत्व मॉडल स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर युवाओं और नागरिकों की भारी भागीदारी

No comments Document Thumbnail

MY Bharat, युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा ने आज अपने चौथे दिन का उत्साहजनक आगाज़ किया। 26 नवंबर 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर अानंद से शुरू हुई यह पदयात्रा पूरे देश के युवाओं को एकजुट करने और भारत की एकता के वास्तुकार को सम्मानित करने के लिए आयोजित की जा रही है।

पदयात्रा की विस्तृत पहुंच

शुरुआत से ही पदयात्रा में असाधारण सहभागिता रही है। अब तक 15.5 लाख से अधिक नागरिकों ने 640 जिलों, 1,524 पदयात्राओं, 451 लोकसभा क्षेत्रों और 23,820 से अधिक संस्थानों में भाग लिया है।

  • क़रमसाद से केवड़िया तक राष्ट्रीय पदयात्रा ने चौथे दिन तक 57 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें समुदायों, युवा समूहों और MY Bharat स्वयंसेवकों का उत्साहपूर्ण सहयोग दिखाई दिया।

चौथे दिन की यात्रा

चौथे दिन की यात्रा में यश कॉम्प्लेक्स, ISKCON मंदिर (गोत्री रोड), BPCL चार्जिंग स्टेशन, ब्रह्माकुमारी अतलदरा और अतलदरा BAPS मंदिर शामिल थे।
इस अवसर पर पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री, वाणिज्य और उद्योग, पदयात्रा में शामिल हुए और युवाओं को प्रेरित किया।

अतलदरा BAPS मंदिर में विशेष कहानी कथन सत्र “सरदार गाथा: द डैज़लिंग कमांडर” आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित रहे:

  • डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री, युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार

  • जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

  • रवनीत सिंह बिट्टू, राज्य मंत्री, रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

MLAs, MPs और अन्य वरिष्ठ स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

जेपी नड्डा का संदेश

जे.पी. नड्डा ने सरदार पटेल के अद्वितीय योगदान और एकता की भावना को याद करते हुए कहा कि पटेल ही सच्चे राष्ट्रपुरुष थे, जिन्होंने एकीकृत भारत की नींव रखी। उन्होंने पटेल की लंदन में कानूनी शिक्षा, अहमदाबाद में प्रारंभिक सुधार, बारडोली आंदोलन और अहमदाबाद नगर निगम अध्यक्ष के रूप में योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि 1.6 करोड़ भारतीयों के लिए एकता का प्रतीक है।

मनसुख मांडविया का संदेश

डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की और कहा कि गुजरात में राष्ट्रीय पदयात्रा हर निर्वाचन क्षेत्र तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि यह एकता मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प का साकार दर्शन है।

नर्मदा और गोदावरी प्रवाह

  • नर्मदा प्रवाह, नागपुर से शुरू होकर पदयात्रा में शामिल हुआ।

  • गोदावरी प्रवाह, मुंबई से रवाना होकर मार्ग में है।
    ये प्रतीकात्मक रूप से भारत के नदी क्षेत्रों को एकजुट कर रहे हैं।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय गतिविधियाँ

  • स्मृति वन में प्राथमिक स्कूल के छात्रों द्वारा बनाई गई सरदार पटेल की चित्रकला प्रदर्शित की गई।

  • वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

प्रदर्शनियाँ और ग्राम सभा

  • नवलखी ग्राउंड, वडोदरा में “राज्य समेकन के सरदार – राष्ट्र की मौन क्रांति” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

  • दिन का समापन ग्राम सभा से हुआ, जिसमें डायरो प्रस्तुतियाँ, सामुदायिक चर्चाएँ और सरदार पटेल के आदर्शों का सामूहिक reaffirmation शामिल था।

समापन

Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा Statue of Unity की ओर बढ़ते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी, साझा प्रयास और राष्ट्रीय गर्व के माध्यम से पूरे भारत को एकजुट करने का संदेश दे रही है।


नवा रायपुर मेडिसिटी: मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई इबारत लिख रहा है छत्तीसगढ़

No comments Document Thumbnail

हेल्थकेयर हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है अटल नगर

रायपुर- स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान किसी भी विकसित समाज की असली नींव होते हैं। भारत जब वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी प्रमुख प्राथमिकता बन चुकी हैं। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही ‘मेडिसिटी’ परियोजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी और भविष्यगामी स्वास्थ्य पहल के रूप में उभर रही है।

नवा रायपुर अटल नगर पहले से ही शिक्षा, परिवहन, उद्योग और आधुनिक शहरी ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब मेडिसिटी इसे राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर की राजधानी के रूप में स्थापित करने जा रहा है। अत्याधुनिक कनेक्टिविटी, व्यापक परिवहन नेटवर्क और भौगोलिक दृष्टि से रणनीतिक स्थिति नवा रायपुर को न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख गंतव्य बना रही है। हर वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्री यहां के एयरपोर्ट और रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं, और जल्द ही शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बाद मेडिकल टूरिज्म के विस्तृत अवसर यहां खुलने वाले हैं।

सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। 

मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। कार्डियोलॉजी, कैंसर साइंस, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और मल्टी–स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब्स यहां स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवासीय परिसर, छात्रावास, होटल और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित ह्यूमन–सेंट्रिक मेडिकल ज़ोन में बदल देंगी। ‘वॉक-टू-हॉस्पिटल’ मॉडल, पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, सुगम सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और पीएमजेएवाई व सीजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत किफायती उपचार सेवाएँ इस परियोजना को पूरी तरह समावेशी बनाती हैं।

उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर में पहले से सक्रिय उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान इस संरचना को और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल 2012 से बाल हृदय रोग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अग्रणी केंद्र है, जहाँ भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों से भी मरीज आते हैं। वहीं 2018 से संचालित 170 बिस्तरों वाला बालको कैंसर हॉस्पिटल सेंट्रल इंडिया के 500–600 किमी के दायरे में अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराता है। रायपुर का स्वच्छ वातावरण और कम जीवन–यापन लागत मरीजों के लिए इसे और उपयुक्त बनाती है। 

मेडिसिटी केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी विशाल केंद्र बनेगी। स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस और सपोर्ट सेवाओं में हजारों रोजगार सृजित होंगे। इसके आसपास किफायती आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नई सेवा गतिविधियों का विस्तार राज्य की जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ सरकार का वह संकल्प है जो कहता है—सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, कम लागत में उच्च सुविधा और सुरक्षित जीवन की गारंटी। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भविष्य की नई परिभाषा है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर मेडिसिटी न सिर्फ मध्य भारत बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श हेल्थकेयर मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ऐसा इंजन बनेगी, जो आने वाले दशकों तक राज्य की विकास रफ्तार को नई दिशा देगा। 200 एकड़ में विकसित हो रही यह विश्वस्तरीय हेल्थकेयर सिटी न सिर्फ उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगी। एम्स, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट, मेडिकल यूनिवर्सिटी और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों की स्थापना से नवा रायपुर राष्ट्रीय हेल्थ हब के रूप में उभरेगा।  मेडिसिटी का मॉडल ‘सुलभता, किफायत और उच्च गुणवत्ता’ के सिद्धांतों पर आधारित है और यह आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और हेल्थ इकोनॉमी का अग्रणी केंद्र बनाएगा।-वित्त मंत्री ओ पी चौधरी

नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही मेडिसिटी  मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत है। 200 एकड़ में विकसित हो रहा यह विशाल हेल्थकेयर सिटी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे क्षेत्र को अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगा। ‘नवा रायपुर मेडिसिटी’ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ, मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान और मेडिकल टूरिज्म सभी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हुए भारत के विकसित भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगी। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

काशी तमिल संगम 4.0: तमिलनाडु और काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का चौथा संस्करण

No comments Document Thumbnail

वाराणसी, 29 नवंबर 2025: तमिलनाडु और काशी के सभ्यतागत और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित पहल काशी तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 से 15 दिसंबर 2025 तक वाराणसी में आयोजित होगा।

पहले ट्रेन का शुभारंभ

आज (29 नवंबर 2025) कन्याकुमारी से पहले बैच की यात्रा शुरू हुई, जिसमें 45 प्रतिनिधि शामिल हैं। त्रिची से 86 और चेन्नई से 87 प्रतिनिधियों के जुड़ने के बाद इस पहले बैच में कुल 216 प्रतिभागी होंगे। इस समूह में शामिल हैं:

  • 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ

  • 54 सांस्कृतिक विद्वान

  • छात्र, शिक्षक, शिल्पकार, शास्त्रीय गायक और आध्यात्मिक ग्रंथों के शिक्षक एवं छात्र

कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय विधायक एम.आर. गांधी और जनता ने प्रतिनिधियों को विदाई दी।

उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रम

काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन 2 दिसंबर 2025 को NaMo घाट, वाराणसी में होगा। इस वर्ष का आयोजन कार्तिकेय दीपम (4 दिसंबर), तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार के समय संपन्न हो रहा है।

इस कार्यक्रम में 1,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा करने के लिए ज्ञान-सत्रों में भाग लेंगे। आठ दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों जैसे प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इसके अलावा वे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर

  • NaMo घाट

  • हनुमान घाट

  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

  • सारनाथ

  • अयोध्या मंदिर

का भ्रमण भी करेंगे।

प्रमुख पहल और शिक्षा कार्यक्रम

  • “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत चार प्रमुख सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • इस वर्ष का विषय “चलो तमिल सीखें – तमिल कर्कलम” है, जो यह संदेश देता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की सदस्य हैं।

  • संत अगस्त्य वाहन यात्रा, तेनकसी (तमिलनाडु) से काशी (उत्तर प्रदेश) तक 2 दिसंबर को शुरू होकर 12 दिसंबर को वाराणसी में समाप्त होगी। यह यात्रा आदि वीर पराक्रमा पांडियन की ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण करती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की।

  • “उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल पढ़ाना” कार्यक्रम के तहत, यूपी के छात्र तमिलनाडु आएंगे और उन्हें तमिल भाषा की समृद्धि से परिचित कराया जाएगा। इसमें 10 बैचों में 30-30 कॉलेज छात्र शामिल होंगे।

उद्देश्य और महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल काशी तमिल संगम का उद्देश्य है:

  • तमिलनाडु और काशी के बीच स्थायी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों का संबंध मजबूत करना

  • इस सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी की बढ़ती उत्सुकता को पूरा करना

  • तमिल भाषा और संस्कृति को भारत के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना और प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रचार को बढ़ावा देना

यह आयोजन भारतीय विविधता और संस्कृति के सांस्कृतिक संवाद और एकता का प्रतीक है।



भारतीय नौसेना अकादमी (INA), एज़ीमला में भव्य पासिंग आउट परेड, 232 प्रशिक्षुओं ने पूरी की प्रारंभिक प्रशिक्षण यात्रा

No comments Document Thumbnail

29 नवंबर 2025 को भारतीय नौसेना अकादमी (INA), एज़ीमला में एक भव्य पासिंग आउट परेड (POP) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 232 प्रशिक्षुओं ने अपनी प्रारंभिक प्रशिक्षण यात्रा पूरी की। इसमें शामिल थे—

  • 109वीं भारतीय नौसेना अकादमी कोर्स के मिडशिपमैन

  • 39वें, 40वें, 41वें (नियमित और कोस्ट गार्ड) और 42वें (मैत्रीपूर्ण विदेशी देश) नौसेना ओरिएंटेशन कोर्स के कैडेट्स

इस पासिंग आउट कोर्स में 7 मैत्रीपूर्ण विदेशी देशों (बांग्लादेश, श्रीलंका, वियतनाम, मालदीव, म्यांमार, मोज़ाम्बिक, सेशेल्स) के 18 कैडेट्स भी शामिल थे, जो अकादमी की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच का प्रतीक हैं।

परेड का निरीक्षण

परेड का निरीक्षण जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने किया। उन्होंने मिडशिपमैन और कैडेट्स को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी। निरीक्षण अधिकारी के साथ अनुपमा चौहान, अध्यक्ष, डिफेंस वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में वाइस एडमिरल समीयर सक्सेना, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, साउदर्न नेवल कमांड, वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा, कमांडेंट INA, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित थे।

प्रमुख पुरस्कार और सम्मान

  • राष्ट्रपति गोल्ड मेडल (INA B.Tech कोर्स में प्रथम स्थान) – मिडशिपमैन विशेष कुमार

  • चीफ ऑफ नेवल स्टाफ सिल्वर मेडल – मिडशिपमैन शौर्य आदित्य प्रजापति

  • कमांडेंट्स चैंपियन स्क्वाड्रन बैनर – अचीवर स्क्वाड्रन को शैक्षणिक, सेवा विषय, बाहरी प्रशिक्षण, ड्रिल, खेल और सह-पाठ्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए

  • FOC-in-C (साउथ) ट्रॉफी – मिडशिपमैन सिद्धांत जाखड़ (NDA पूर्व प्रशिक्षुओं में सर्वोच्च मेरिट)

  • CNS गोल्ड मेडल (नौसेना ओरिएंटेशन कोर्स, एक्सटेंडेड) – कैडेट हृषिकेश वी. चैतन्य

  • कमांडेंट INA सिल्वर मेडल (नौसेना ओरिएंटेशन कोर्स, नियमित) – कैडेट सत्विक दीक्षित

  • डायरेक्टर जनरल कोस्ट गार्ड ट्रॉफी – कैडेट ईशान शेखर


CDS के संदेश

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने प्रशिक्षुओं की उत्कृष्ट परेड और ड्रिल प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण स्टाफ की मेहनत की प्रशंसा की और अभिभावकों के समर्थन को भी मान्यता दी। उन्होंने विदेशी प्रशिक्षुओं के समावेश के महत्व पर जोर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग मजबूत होता है और भारतीय नौसेना की वैश्विक प्रशिक्षण उत्कृष्टता उजागर होती है।

समापन समारोह

परेड के समापन पर CDS, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, कमांडेंट INA और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रशिक्षुओं को उनके नए रैंक स्ट्राइप्स प्रदान किए। उन्होंने परिवारों के साथ बातचीत की, जो अपने युवा अधिकारियों की सफलता का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

अब ये नव-नियुक्त अधिकारी भारतीय नौसेना के विभिन्न प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों और फ्रंटलाइन जहाजों में अपने पेशेवर कौशल को और विकसित करेंगे।



चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का मेघालय में भव्य शुभारंभ, पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों को वैश्विक पहचान देने पर जोर

No comments Document Thumbnail

शिलांग के कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आज चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम — APEDA बायर–सेलर मीट, पहला नॉर्थईस्ट इंडिया ऑर्गेनिक वीक, और चौथा IFOAM वर्ल्ड ऑर्गेनिक यूथ समिट (28 नवंबर – 1 दिसंबर 2025) — का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

यह कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, मेघालय सरकार द्वारा MEGNOLIA, APEDA, IFOAM–ऑर्गेनिक्स एशिया के सहयोग से तथा NERAMAC की सहायता से आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के अंतरराष्ट्रीय खरीदार, आयातक, ऑर्गेनिक विशेषज्ञ तथा युवाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख अतिथि

उद्घाटन समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:

  •  सतिंदर कुमार भल्ला, सचिव, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल

  • डॉ. विजय कुमार डी, आयुक्त एवं सचिव, मेघालय सरकार

  • अभिषेक देव, चेयरमैन, APEDA

  • डॉ. शकील पी. अहमद, मुख्य सचिव, मेघालय

  • स्मिता सलोनी वर्मा, उप सचिव, मेघालय सरकार

  • ब्रेंडन होयर, सलाहकार, IFOAM

  • जेनिफर चांग, कार्यकारी निदेशक, IFOAM एशिया

  •  भास्कर बरुआ, प्रबंध निदेशक, NERAMAC

  • डॉ. सस्वती बोस, महाप्रबंधक, APEDA

  • मैथ्यू जॉन, अध्यक्ष, IFOAM एशिया

  • स्मिता प्रियंका उदय, एसोसिएट डायरेक्टर, CRISIL

पूर्वोत्तर के ऑर्गेनिक उत्पादों को वैश्विक मंच पर ले जाने पर जोर

उद्घाटन में बोलते हुए अभिषेक देव, चेयरमैन APEDA, ने पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा:

“पूर्वोत्तर भारत ऑर्गेनिक उत्पादन का उभरता हुआ केंद्र है। इस पहले आयोजन में 22 देशों के हितधारकों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं में गहरी रुचि है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम को हर वर्ष पूर्वोत्तर के किसी राज्य में आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय ऑर्गेनिक मूल्य श्रृंखलाओं को विश्व स्तर पर अधिक मजबूती मिल सके। साथ ही उन्होंने मेघालय के किसानों और FPOs को आगामी BIOFACH में भाग लेने का आग्रह किया, जिसमें भारत भागीदार देश है।

कार्यक्रम का उद्देश्य

यह आयोजन पूर्वोत्तर भारत के ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार संपर्कों को मजबूत करना,

  • सतत एवं पुनर्योजी कृषि को प्रोत्साहित करना,

  • युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास,

  • तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान B2B सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और फील्ड विज़िट्स भी आयोजित किए जा रहे हैं, जो मेघालय और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऑर्गेनिक क्षमता को प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

EIMA Agrimach India 2025 संपन्न: ग्रीन फ्यूल आधारित कृषि मशीनरी पर मिला वैश्विक जोर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली— FICCI और इटली की कृषि उद्योग संस्था FederUnacoma द्वारा, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘EIMA Agrimach India 2025’ का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में भविष्य की कृषि मशीनरी को ग्रीन फ्यूल आधारित तकनीकों की ओर मोड़ने का आह्वान किया गया।

भव्य आयोजन में किसानों और उद्योग जगत की बड़ी भागीदारी

दिल्ली के पूसा (IARI ग्राउंड) में 27–29 नवंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में—

  • 20,000 से अधिक किसान — मुख्य रूप से यूपी, पंजाब, हरियाणा और ओडिशा से

  • 4,000+ डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर्स

  • 180+ देशी-विदेशी कंपनियां

  • 100+ विदेशी खरीदार (अल्जीरिया, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, ओमान, मलेशिया, मोरक्को, नाइजीरिया, वियतनाम, जापान आदि देशों से)
    ने भाग लिया।

इटली इस आयोजन का पार्टनर देश रहा, जबकि नीदरलैंड, जापान, अमेरिका और पोलैंड ने भी अपनी प्रमुख उपस्थिति दर्ज कराई।

ग्रीन फ्यूल आधारित मशीनरी पर जोर

उद्घाटन सत्र में डॉ. देवेश चतुर्वेदी, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि भारतीय कृषि के विजन 2047 को पूरा करने के लिए उद्योग को ग्रीन फ्यूल—इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और CBG आधारित मशीनों पर काम तेज करना होगा।

उन्होंने कहा:

“मशीनें इलेक्ट्रिक या ग्रामीण CBG प्लांट से प्राप्त बायोगैस पर चल सकें—यह दिशा आने वाले 5–10 वर्षों में आवश्यक है। इससे किसानों की रखरखाव व संचालन लागत भी घटेगी।”

महिला किसानों के लिए जेंडर-फ्रेंडली उपकरणों की मांग

2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि—

  • जेंडर बजटिंग का अर्थ केवल मशीनरी का मालिकाना हक देना नहीं है

  • बल्कि ऐसी मशीनें विकसित करना आवश्यक है जो महिला किसानों की मेहनत व शारीरिक बोझ को वास्तविक रूप से कम करें

भारत–इटली कृषि सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

इटली के भारत में राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने जल्द ही दूतावास में कृषि अटैची नियुक्त किए जाने की संभावना जताई, जिससे दोनों देशों के कृषि सहयोग को गति मिलेगी।

"कृषि को सेवा के रूप में विकसित करने की जरूरत"

EIMA Agrimach India के आयोजन समिति अध्यक्ष टी. आर. केसवन ने कहा कि कई महंगे उपकरण, जैसे सीडर, किसानों के लिए खरीदना मुश्किल है, इसलिए—

“कृषि मशीनरी को सेवा (Agriculture as a Service) के रूप में उपलब्ध कराना भविष्य का मॉडल बन सकता है।”

भारत–इटली कृषि बाजार का उज्ज्वल भविष्य

FederUnacoma की DG सिमोना रापास्टेला ने बताया कि—

  • 2023 में भारत का कृषि मशीनरी बाजार 13.7 बिलियन USD का था

  • 2033 तक इसके 31.6 बिलियन USD तक बढ़ने का अनुमान है

  • वार्षिक वृद्धि दर लगभग 9%

कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

FICCI कृषि समिति के सह-अध्यक्ष सुबरतो गीड ने कहा—

“भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए उत्पादकता बढ़ाना अनिवार्य है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक और मशीनीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

 FICCI–PwC रिपोर्ट हुई जारी

कार्यक्रम में ‘Farm Mechanisation: The Path Towards a Future-Ready India’ रिपोर्ट भी जारी की गई।

अगला आयोजन इटली में

कार्यक्रम के 10वें संस्करण का आयोजन अगले वर्ष इटली में किया जाएगा।

यदि आप चाहें, तो मैं इसका संक्षिप्त संस्करण, सोशल मीडिया पोस्ट, या हैशटैग सेट भी तैयार कर देता हूँ।

ईसीआई (ECI) ने नागरिकों से ECINet ऐप पर सुझाव मांगे, जनवरी 2026 में होगा आधिकारिक लॉन्च

No comments Document Thumbnail

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ECINet ऐप डाउनलोड करें और ऐप में उपलब्ध ‘Submit a Suggestion’ टैब के माध्यम से अपने सुझाव भेजें। सुझाव भेजने की अवधि 27 नवंबर 2025 से 27 दिसंबर 2025 तक निर्धारित की गई है।

बिहार चुनाव में रहा सफल ट्रायल

ECINet ऐप का ट्रायल वर्ज़न बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और हालिया उपचुनावों में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ने—

  • बेहतर वोटर सर्विसेज,

  • मतदान प्रतिशत ट्रेंड की तेज उपलब्धता,

  • और मतदान समाप्ति के 72 घंटे के भीतर इंडेक्स कार्ड जारी करने जैसी सुविधाएँ प्रदान कीं।

पहले यह प्रक्रिया कई हफ्तों या महीनों तक चलती थी। ट्रायल से मिले अनुभवों और CEO, DEO, ERO, प्रेक्षकों व फील्ड अधिकारियों के फीडबैक को अब ऐप को और मजबूत बनाने के लिए शामिल किया जा रहा है।

और अधिक यूज़र-फ्रेंडली बनेगा प्लेटफ़ॉर्म

निर्वाचन आयोग ने बताया कि नागरिकों के सुझावों की समीक्षा की जाएगी और प्लेटफ़ॉर्म को आगे और यूज़र-फ्रेंडली तथा फीचर-रिच बनाया जाएगा। ऐप का आधिकारिक लॉन्च जनवरी 2026 में प्रस्तावित है।

एकीकृत चुनाव ऐप: 40 एप्लिकेशन एक में

ECINet ऐप एक सिंगल यूनिफाइड प्लेटफॉर्म है, जिसमें पहले अलग-अलग उपयोग होने वाली लगभग 40 चुनाव-संबंधी ऐप्स/वेबसाइट्स को एकीकृत किया गया है। इनमें शामिल हैं—

  • Voter Helpline App (VHA)

  • cVIGIL

  • Saksham

  • Polling Trends (Voter Turnout App)

  • Know Your Candidate (KYC)
    आदि।

ऐप Google Play Store और Apple App Store दोनों पर उपलब्ध है।

 CEC के नेतृत्व में बड़ा डिजिटल सुधार

यह ऐप आयोग की उन प्रमुख पहलों में से एक है, जिन्हें मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार, तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के नेतृत्व में विकसित किया गया है। ऐप के विकास पर काम 4 मई 2025 को घोषणा के तुरंत बाद प्रारंभ किया गया था।


सीसीआरएएस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: मोटापा व मेटाबॉलिक सिंड्रोम पर आयुर्वेद और एकीकृत चिकित्सा के नए आयाम

No comments Document Thumbnail

आयुष मंत्रालय के अंतर्गत सेंटरल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज़ (CCRAS) तथा सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), बेंगलुरु की ओर से 1–2 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु के आईआईएससी (IISc) स्थित A.V. रामाराव ऑडिटोरियम में “आयुर्वेद एवं मोटापा व मेटाबॉलिक सिंड्रोम के एकीकृत दृष्टिकोण” पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन सीसीआरएएस के 57वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

यह सम्मेलन IISc और NIMHANS के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के प्रमाण-आधारित एकीकृत दृष्टिकोणों से खोजना है। यह आयुष मंत्रालय की शोध-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ बनाने की सोच को प्रतिबिंबित करता है।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा:

“भारत एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर रहा है, और इस परिवर्तन में आयुर्वेद केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। मोटापा और मेटाबॉलिक विकार आज की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से हैं। यह सम्मेलन आयुर्वेद के ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर प्रमाण-आधारित चिकित्सा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

आयुष मंत्रालय के सचिव ने कहा:

“मेटाबॉलिक रोगों के बढ़ते बोझ के लिए विज्ञान-आधारित सहयोगात्मक समाधान आवश्यक हैं। आयुर्वेद की समग्र, निवारक और व्यक्तिगत उपचार पद्धति आधुनिक बायोमेडिकल प्रगति के साथ मिलकर और प्रभावी बन जाती है। यह सम्मेलन भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और क्लिनिकल शोध को दिशा देगा।”

सीसीआरएएस के महानिदेशक डॉ. रबीनारायण आचार्य ने बताया:

“मेटाबॉलिक रोगों की बढ़ती चुनौती के बीच आयुर्वेद शक्तिशाली और व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। यह सम्मेलन पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और अत्याधुनिक बायोमेडिकल अनुसंधान को एक सेतु पर लाने का प्रयास है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य नीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”

सम्मेलन की आयोजक सचिव डॉ. सुचोलचन भट्ट ने कहा:

“सम्मेलन का उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक जैव-चिकित्सा विज्ञान के शीर्ष विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर मोटापा और मेटाबॉलिक विकारों की चुनौती का साक्ष्य-आधारित समाधान प्रस्तुत करना है। इस अवसर पर JDRAS के मोटापा एवं मेटाबॉलिक विकारों पर विशेषांक तथा 10 अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा।”

सम्मेलन की प्रमुख गतिविधियाँ

  • प्लेनरी सत्र, समानांतर वैज्ञानिक सत्र और ट्रांसलेशनल साइंस एवं टाइप-2 डायबिटीज़, मोटापा और डिसलिपिडेमिया के एकीकृत प्रबंधन पर संगोष्ठी।

  • 2 दिसंबर को IISc के TCS Smart-X Hub में नैनोटेक्नोलॉजी एवं मॉलिक्युलर बायोलॉजी पर विशेष कार्यशाला।

  • सामत्वम्, पाथशोध और CARI द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर (दोनों दिन)।

  • 25–27 नवंबर 2025 को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्चुअल वैज्ञानिक सत्र सम्पन्न।

प्रतिभागिता

इस सम्मेलन में 700 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें:

  • 267 मौखिक प्रस्तुतियाँ

  • 120 वर्चुअल पेपर

  • 70 पोस्टर

  • 16 की-नोट व प्लेनरी व्याख्यान

समग्र उद्देश्य

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एकीकृत शोध को बढ़ावा देने, वैश्विक सहयोग मजबूत करने, तथा आयुष आधारित नवाचार को सशक्त करने की दिशा में सीसीआरएएस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भारत की समग्र, सुलभ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

No comments Document Thumbnail

मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल

भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त 

छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान

रायपुर- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।


विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

सोनम त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं —  सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों।त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

ईरान में सरकार के दमन के खिलाफ नई हड़ताल और व्यापक प्रदर्शन

No comments Document Thumbnail

ईरान में सरकार की कड़ी नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, कई शहरों में सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों के घरों को नष्ट करने और विरोध करने वाले नागरिकों पर जबरदस्त दमन किया गया, जिससे व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

विशेष रूप से सावेह और जहेदान जैसे शहरों में युवा प्रदर्शनकारियों ने सरकारी केंद्रों, कार्यालयों और प्रतीकात्मक स्थानों पर हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों तरह के प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए सरकार से न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा की मांग की है।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी गिरफ्तारियाँ और बल प्रयोग की घटनाएँ बढ़ रही हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से युवा और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोग हैं, जो पिछले महीनों से जारी कड़े नियमों और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि यह अस्थिरता ईरान में राजनीतिक और सामाजिक संकट को गहरा सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी ईरानी सरकार से अपील की है कि वह संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाए, ताकि देश में और अधिक हिंसा और मानवाधिकार हनन को रोका जा सके।

ईरान में यह स्थिति दर्शाती है कि जनता और सरकार के बीच खाई गहरी होती जा रही है, और आने वाले महीनों में देश में और बड़े पैमाने पर विरोध और असंतोष देखने को मिल सकता है।


साइक्लोन डिटवॉह: श्रीलंका में 123 मौतें, भारत सतर्क

No comments Document Thumbnail

श्रीलंका में साइक्लोन डिटवॉह की वजह से अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 130 लोग लापता हैं। तेज़ हवाओं और भारी बारिश से कई घर और सड़कें तबाह हो गई हैं।


साइक्लोन अब भारत की ओर बढ़ रहा है, जिससे तमिलनाडु, पुदुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश में चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

भारत सरकार ने राहत और बचाव कार्य "ऑपरेशन सागर बंधु" के तहत शुरू कर दिया है। भारतीय वायु सेना ने श्रीलंका में फंसे लोगों तक राहत सामग्री और बचाव दल भेजे हैं।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24–48 घंटों में भारी बारिश और तेज़ हवाओं के साथ साइक्लोन तटीय इलाकों में दस्तक दे सकता है। नागरिकों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा न करने का आग्रह किया गया है।


हर जिले में डे केयर कैंसर सेंटर की दिशा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्रालय की दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 27 एवं 28 नवंबर को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में कैंसर देखभाल और शहरी स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्घाटन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने किया। इसमें प्रिंसिपल सेक्रेटरी, मिशन डायरेक्टर्स (NHM), वरिष्ठ अधिकारी, तथा कैंसर नियंत्रण, एनसीडी और शहरी स्वास्थ्य से जुड़े राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया।

कैंसर सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष बल

मुख्य संबोधन देते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने देशभर में कैंसर सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की सरकार की प्राथमिकता को दोहराया। उन्होंने केंद्रीय बजट 2025–26 की उस घोषणा का उल्लेख किया, जिसके तहत हर जिले में डे केयर कैंसर सेंटर (DCCC) स्थापित किए जाएंगे, ताकि कैंसर उपचार को विकेंद्रीकृत किया जा सके, तृतीयक केंद्रों पर भार कम हो सके और समय पर कीमोथेरेपी एवं फॉलो-अप देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने सामुदायिक स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग से लेकर जिला स्तर पर उपचार और उन्नत देखभाल तक कैंसर केयर की एक मजबूत निरंतर प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एनसीडी रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) व्यापक सेवाएं बढ़ाने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज जारी

उद्घाटन सत्र के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कई प्रमुख नीतिगत दस्तावेज जारी किए, जिनमें शामिल हैं—

  • NP-NCD प्रशिक्षण मॉड्यूल

  • FRU दिशा-निर्देश 2025

  • फ्री डायग्नोस्टिक्स इनिशिएटिव के तहत प्रयोगशाला सेवाओं को मजबूत करने हेतु संचालन दिशानिर्देश

कार्यशाला में DCCC मॉडलों, सामान्य कैंसरों के मानक उपचार वर्कफ्लो, क्रियान्वयन निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, वायरल हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग के एकीकरण और NQAS के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं।

विशेषज्ञों और राज्यों की भागीदारी

NHSRC, टाटा मेमोरियल सेंटर, AHPGIC ओडिशा, NCDC और ICMR के विशेषज्ञों ने नैदानिक एवं प्रोग्राम संबंधी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने पर अपने विचार साझा किए। ओडिशा, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश ने कैंसर स्क्रीनिंग, सामुदायिक भागीदारी और जिला-स्तरीय सेवा वितरण में अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को प्रस्तुत किया, जो अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रेरक मॉडल हैं।

एक राष्ट्रीय पैनल ने एकीकृत कैंसर देखभाल प्रणाली विकसित करने, बहु-विषयक समन्वय को बढ़ाने, शीघ्र पहचान में सुधार और जिला स्तर की क्षमता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने DCCC लागू करने, मानक उपचार वर्कफ्लो अपनाने, सामान्य कैंसरों की स्क्रीनिंग मजबूत करने और आयुष्मान आरोग्य मंडिरों से उच्च केंद्रों तक रेफरल प्रणाली सुधारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

दूसरा दिन: शहरी स्वास्थ्य पर केंद्रित

कार्यशाला के दूसरे दिन का फोकस राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) के तहत शहरी स्वास्थ्य एजेंडा पर रहा। इस दौरान संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुन्य सलिला श्रीवास्तव ने तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और उभरती जरूरतों को देखते हुए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से शहरी स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NHM) अराधना पटनायक ने शहर-विशिष्ट और एकीकृत रणनीतियाँ अपनाकर शहरी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। सौरभ जैन, संयुक्त सचिव (पॉलिसी), स्वास्थ्य मंत्रालय ने संशोधित NUHM ढाँचे का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य देशभर में शहरी स्वास्थ्य सेवा वितरण को सुदृढ़ करना है।

चर्चाओं में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला गया, जिनमें शामिल हैं—

  • बुनियादी ढांचे को मजबूत करना

  • सेवा वितरण में सुधार

  • रेफरल प्रणाली को मजबूत करना

  • शहरी स्थानीय निकायों और राज्य स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल

राज्यों ने शहरी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपने नवाचारपूर्ण मॉडल और श्रेष्ठ प्रथाएँ भी साझा कीं।

मंत्रालय की प्रतिबद्धता

मंत्रालय ने NUHM ढांचे को और परिष्कृत करने, शासन और निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने, और यह सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सभी नागरिकों—विशेषकर सबसे गरीब और कमजोर वर्गों—के लिए अधिक सुलभ, न्यायसंगत और मजबूत बनें।


© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.