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बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री निवास में आज रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता, स्नेह और उल्लास के वातावरण में मनाया गया। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं माताओं-बहनों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें अपना स्नेह और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सभी बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि बहनों का यह स्नेह उनके लिए अनमोल है और उनका आशीर्वाद प्रदेश की सेवा के संकल्प को और मजबूत करता है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का पावन पर्व है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखद और मंगलमय जीवन की कामना करती है, वहीं भाई अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और सुख-दुःख में सदैव साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरे लिए यह बड़े सौभाग्य का दिन है कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से आप सभी बहनें रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाने मुख्यमंत्री निवास आई हैं। आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद मुझे प्रदेश की माताओं-बहनों के कल्याण के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।”


कार्यक्रम में स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे की धर्मपत्नी श्रीमती सरला दुबे ने मुख्यमंत्री साय को राखी बांधी। इस आत्मीय क्षण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे सेना में शामिल होने वाले छत्तीसगढ़ के पहले जवान थे। उनकी धर्मपत्नी दुबे से राखी बंधवाना उनके लिए विशेष रूप से भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है।


कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सविता दीदी एवं स्मृति दीदी, श्रीमती सावित्री जायसवाल, पद्मश्री डॉ. उषा बारले, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती ममता साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित महिला पत्रकारों, स्व-सहायता समूहों की दीदियों, लखपति दीदियों, ड्रोन दीदियों, ई-रिक्शा दीदियों, टीम प्रहरी, विभिन्न समाजों की महिलाओं और दिव्यांग बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी।

जवानों की कलाई पर सजी राखी में राष्ट्र के प्रति सम्मान का भाव

मुख्यमंत्री  साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के पर्व को देश और प्रदेश की सुरक्षा में समर्पित जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव से जोड़ना अत्यंत सुखद अनुभव रहा।




उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों की बहनों, दिव्यांग बहनों और शहीद जवानों के परिवारों की महिलाओं ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी सहित विभिन्न सुरक्षा बलों के लगभग 1600 जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति अपना स्नेह और सम्मान व्यक्त किया। हमारे जवान त्योहारों पर भी अपने परिवार से दूर रहकर देश और प्रदेश की सुरक्षा के दायित्व का निर्वहन करते हैं। ऐसे वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करना हम सभी का दायित्व है।

महिला पत्रकारों के साहस और समर्पण की मुख्यमंत्री ने की सराहना

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में उपस्थित महिला पत्रकारों का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कहा कि पत्रकारिता साहस, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का कार्य है। हमारी महिला पत्रकार अनेक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए समाज को देश-दुनिया के घटनाक्रम से अवगत करा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने आत्मीय प्रसंग साझा करते हुए बताया कि दिल्ली प्रवास से लौटने के दौरान आज सुबह एयरपोर्ट पर पत्रकार बहन जिज्ञासा ने उन्हें राखी बांधकर अपना स्नेह व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्व-सहायता समूहों की दीदियां, लखपति दीदियां, ड्रोन दीदियां, ई-रिक्शा दीदियां, सेटरिंग प्लेट दीदियां और मितानिन दीदियां अपने-अपने क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने से स्थानीय नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका और मजबूत हुई है। आज अनेक सरपंच दीदियां अपने नेतृत्व और नवाचार से गांवों के विकास को नई दिशा दे रही हैं।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसी उद्देश्य से महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व प्रदेश की माताएं-बहनें उत्साह और उमंग के साथ मना सकें, इसके लिए निर्धारित समय से पहले 25 अगस्त को ही महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में 631 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बहनों के बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है, बल्कि इसने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बचत और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के लिए कर रही हैं।

लक्ष्य से आगे बढ़ा छत्तीसगढ़, 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में सशक्त करने का संकल्प लिया है। देशभर में 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को 8 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन प्रदेश ने लक्ष्य से आगे बढ़कर पिछले दो वर्षों में 13 लाख 85 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाया है। यह छत्तीसगढ़ की माताओं-बहनों के परिश्रम, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गांव की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से जुड़ रही हैं। ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक एवं दवा का छिड़काव कर वे अपनी आय बढ़ा रही हैं। प्रति एकड़ छिड़काव से लगभग 300 रुपये की आय होती है और 20 से 25 एकड़ में कार्य कर ड्रोन दीदियां प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

ई-रिक्शा और सेटरिंग प्लेट से खुल रही स्वावलंबन की नई राह

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और विकास प्रक्रिया का मजबूत भागीदार बनाया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों की बहनें अब परंपरागत आजीविका गतिविधियों के साथ नए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण हो रहा है और प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं। इन आवासों के निर्माण में उपयोग होने वाली सेटरिंग प्लेट के व्यवसाय से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने ई-रिक्शा दीदियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नया रायपुर में 92 ई-रिक्शा दीदियां आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जशपुर प्रवास के दौरान रक्षाबंधन के अवसर पर अपने गांव बगिया में 50 बहनों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। ई-रिक्शा बहनों के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रहा है।

महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए नई औद्योगिक नीति में विशेष प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से इतना सशक्त बनाना है कि वे स्वयं उद्यम स्थापित करें और दूसरों को भी रोजगार दें। महतारी वंदन योजना से महिलाओं के बैंक खातों में नियमित राशि आने से उनकी आर्थिक विश्वसनीयता भी मजबूत हुई है और बैंक उन्हें व्यवसाय के लिए ऋण उपलब्ध कराने में आगे आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में लगभग 30 हजार महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति में महिला उद्यमियों के लिए विशेष रियायतों और प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। प्रदेश को अब तक लगभग 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने महिलाओं से औद्योगिक नीति में उपलब्ध प्रावधानों का अध्ययन कर उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ की बहनें नौकरी और स्वरोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

नक्सलवाद के अंत के साथ बस्तर में शांति और विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्र की जनता के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी हिंसा और भय का वातावरण था, वहां अब शांति, विश्वास और विकास की नई शुरुआत हुई है। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रही है, ताकि विकास की मुख्यधारा से दूर रहे क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवादियों ने अनेक बहनों का सिंदूर उजाड़ा, लेकिन भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध दृढ़ता के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आज का भारत शांति में विश्वास रखने वाला सशक्त राष्ट्र है, जो किसी को छेड़ता नहीं है, लेकिन देश की सुरक्षा और स्वाभिमान को चुनौती देने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना भी जानता है।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक एवं खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वरा भूमि और प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध प्रदेश है। यहां के लोगों की सरलता, सहजता और आत्मीयता ने पूरे देश में “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना मातृशक्ति के सशक्तिकरण के बिना पूरा नहीं हो सकता। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक माता-बहन को सम्मान और सुरक्षा मिले, वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें और अपने सामर्थ्य एवं प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के पूरे अवसर प्राप्त करें।

उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बहनों का स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद सरकार की शक्ति है। मातृशक्ति के सामर्थ्य से ही सशक्त परिवार, समृद्ध समाज और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।

PM मोदी ने स्कूली बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन, बच्चियों ने बांधी राखी; पूछा- बचपन का सपना क्या था?

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 नई दिल्ली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर स्कूली बच्चों के साथ त्योहार मनाया। इस दौरान बच्चियों ने प्रधानमंत्री की कलाई पर राखी बांधी। पीएम मोदी ने बच्चों से बातचीत की और उनके साथ हंसी-मजाक भी किया।


प्रधानमंत्री ने रक्षाबंधन के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।

बच्चियों ने पीएम मोदी की कलाई पर बांधी राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर कई स्कूली बच्चियां प्रधानमंत्री आवास पहुंचीं। बच्चियों ने पीएम मोदी की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उनका आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री ने भी बच्चों के साथ सहज अंदाज में बातचीत की, उनसे हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए ‘हाई-फाइव’ किया।

प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि 7, लोक कल्याण मार्ग पर रक्षाबंधन समारोह की कुछ यादगार झलकियां।

बच्ची ने पूछा- बचपन का सपना क्या था?

कार्यक्रम के दौरान बच्चों और प्रधानमंत्री के बीच दिलचस्प बातचीत भी हुई। एक बच्ची ने पीएम मोदी से पूछा कि बचपन में उनका सपना क्या था?

इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आप लोगों से मिलने का।” प्रधानमंत्री का यह जवाब सुनकर बच्चों के चेहरे पर खुशी नजर आई और माहौल खुशनुमा हो गया।

बच्चों के साथ पीएम का सहज अंदाज

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री बच्चों के साथ बेहद सहज नजर आए। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उनके सवालों का जवाब दिया। रक्षाबंधन के मौके पर प्रधानमंत्री और स्कूली बच्चों की यह मुलाकात खास रही।

रक्षाबंधन पर राज्यपाल रमेन डेका ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर बांधा रक्षासूत्र

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 रायपुर : रक्षाबंधन के पावन अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका एवं फर्स्ट लेडी श्रीमती रानी डेका काकोटी ने आज रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन एवं विधिवत पूजन-अर्चन कर रक्षासूत्र बांधा।


राज्यपाल डेका ने इस अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आपसी सौहार्द का पावन पर्व है, जो समाज में प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।
इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा एवं गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

दिल्ली दौरे से लौटे CM साय, रक्षाबंधन की दी शुभकामनाएं; नेपाल आपदा पर जताई चिंता

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को दिल्ली दौरे से रायपुर लौटे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ की त्रासदी बेहद दुखद है। आपदा के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद के लिए तैयार है।

नेपाल में फंसे लोगों के लिए कंट्रोल रूम

मुख्यमंत्री ने बताया कि नेपाल में फंसे या लापता लोगों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कंट्रोल रूम स्थापित किया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग या उनके परिजन इन माध्यमों से सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार नेपाल में संकट की स्थिति से प्रभावित छत्तीसगढ़ के नागरिकों की मदद के लिए लगातार प्रयास कर रही है और जरूरत के अनुसार हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात

मुख्यमंत्री साय ने दिल्ली दौरे के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने बताया कि इस दौरान छत्तीसगढ़ और प्रदेश भाजपा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

प्रदेश में भाजपा के नए संगठन प्रभारी की नियुक्ति के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नितिन नवीन पहले छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश के लिए नए संगठन प्रभारी की नियुक्ति होना स्वाभाविक है।

ढाई साल के कामकाज पर जताया भरोसा

भाजपा सरकार के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकार और संगठन स्तर पर बेहतर काम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनावों में भाजपा को जनता का समर्थन मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने करीब ढाई साल के कार्यकाल में विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। सरकार के कामकाज के आधार पर भाजपा आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी और जनता का मजबूत समर्थन हासिल करेगी।

CG NEWS : नाबालिग की मांग में भरा सिंदूर, फिर शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म; आरोपी को 20 साल की सजा

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में नाबालिग को प्रेम जाल में फंसाकर शादी का झांसा देने और उसकी मांग में सिंदूर भरने के बाद दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता को शारीरिक और मानसिक क्षति के लिए 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति दिए जाने की अनुशंसा की गई है।


माना कैंप थाना क्षेत्र का मामला

मामला माना कैंप थाना क्षेत्र का है। प्रकरण की अंतिम सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) अच्छेलाल काछी की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर प्रसाद साहू ने पैरवी की।

मोबाइल पर बातचीत के बाद नाबालिग को प्रेम जाल में फंसाया

अभियोजन के अनुसार, आरोपी संजय कुमार चंद्राकर उर्फ बबलू (25) मूल रूप से महासमुंद जिले के बागबाहरा का रहने वाला है और माना क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था। इसी दौरान उसकी पहचान 17 वर्षीय नाबालिग से हुई। दोनों के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत होने लगी। आरोप है कि आरोपी ने नाबालिग को प्रेम जाल में फंसा लिया और शादी का झांसा देने लगा।

बागबाहरा ले जाकर मांग में भरा सिंदूर

अभियोजन के मुताबिक, आरोपी 16 मई 2025 को शादी का झांसा देकर नाबालिग को बागबाहरा ले गया। वहां उसकी मांग में सिंदूर भरकर शादी हो जाने की बात कही। इसके बाद आरोपी नाबालिग को अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां लेकर घूमता रहा।

आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने शादी हो जाने का झांसा देकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।

साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई सजा

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना। इसके बाद पॉक्सो अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही प्रतिकर स्कीम 2018 के तहत पीड़िता को 5 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति दिए जाने की अनुशंसा की गई।

राष्ट्रीय सरोवर दिवस विशेष: आरंग में थे 6 कोरी 6 आगर तालाब, संरक्षण की है आवश्यकता

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 आरंग। गुरुवार को राष्ट्रीय सरोवर दिवस मनाया गया। जल संरक्षण और तालाबों के महत्व को लेकर मनाए जा रहे इस दिवस पर छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी आरंग की ऐतिहासिक धरोहर और जल-समृद्धि की कहानी याद आना स्वाभाविक है।


किंवदंती है कि प्राचीनकाल में आरंग में 6 कोरी 6 आगर अर्थात 126 तालाब थे। छत्तीसगढ़ में प्राचीनकाल में तालाब ही जल संरक्षण के मुख्य केंद्र थे। इतिहास के अध्येता शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल बताते हैं कि आरंग धार्मिक आस्था और दानी राजा मोरध्वज के साथ-साथ तालाबों की नगरी के रूप में विख्यात था।

महानदी के तट पर बसे होने के बावजूद यहां 126 तालाबों के निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह आज भी शोध का विषय है। पुराविदों के अनुसार आरंग को इसी कारण तालाबों की नगरी भी कहा जाता था। वर्तमान में यहां केवल 51 तालाबों के नाम ही ज्ञात हैं, जिनमें से कई पट चुके हैं और कई डबरी बनकर रह गए हैं। बढ़ती आबादी और अतिक्रमण के कारण तालाबों का अस्तित्व संकट में है।

ये है 51तालाबों के नाम

सेमरिया तालाब, रानी सागर, खरखरा, दबका, दंसेल, कांदा भैरा, रमचेंदवा, अंधियारखोप, कपूरताल, नवा तालाब, झिलमिली, मोहन डबरी, खल्लारी डबरी, कोहली पचरी, गुड़ियारी तालाब, छोटे कटी,बड़े नकटी तालाब, मझला नकटी, ठाकुरदिया, हथमार, झलमला, पंडरी तालाब, केंवसी तालाब, हाथी बुडान, कैंठा तालाब, कुकरी डबरी, गोड़धोवा, मुडधोवा, आमाडबरा, भंडारी तालाब, केशरवा डबरी, डमौउवा तालाब, जलसेन तालाब, ठरमुडिया, लामीकेंवसी, डंगनिया, अगार, हगरिया डबरी, छोटे घोघियई, बड़े घोघियई, भेंडी धोवान, पुरेना, बूढ़ी डबरी, नारायण डबरी, शिवनाथ डबरी, लीलबिलार डबरी, गस्ताही डबरी, नारायण बन, महामाया तालाब।

CG NEWS : नौकरी का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

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 धमतरी। कुरूद थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला को सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर कुरूद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।


पुलिस के अनुसार, महिला रोजगार की तलाश में थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात महेंद्र साहू और अजय वर्मा से हुई। आरोप है कि दोनों युवकों ने महिला को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और अपने साथ ले गए। महिला के मुताबिक, दोनों उसे मेघा पुल के पास स्थित एक नर्सरी की ओर ले गए। रास्ते में सुनसान स्थान देखकर आरोपियों ने उसके साथ जबरदस्ती की और घटना के बाद मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद महिला ने कुरूद थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पहले आरोपी महेंद्र साहू, निवासी बगदही, जिला बालोद के संबंध में जानकारी मिली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी अजय वर्मा की तलाश शुरू की।

अजय घटना के बाद से फरार था। पुलिस टीम ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। मामले की विवेचना जारी है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।

रेलवे सुरंग में बेखौफ घूमता दिखा तेंदुआ, लोको पायलट की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग के खोंगसरा-भनवारटंक रेलखंड की एक रेलवे सुरंग में तेंदुआ दिखाई देने से रेल कर्मचारियों और आसपास के लोगों में हलचल मच गई। सुरंग के भीतर रेलवे ट्रैक पर तेंदुए के बेखौफ घूमने का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, तेंदुआ रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच चलता हुआ सुरंग के अंदर जाता दिखाई दिया। इसी दौरान रेलकर्मियों की नजर उस पर पड़ी। बाद में वहां से गुजर रहे लोको पायलट ने भी तेंदुए को देखा और सावधानी बरतते हुए ट्रेन की गति कम कर दी। इस सतर्कता के चलते वन्यजीव के साथ संभावित टक्कर टल गई।

सुरंग में तेंदुए की मौजूदगी से बढ़ी चिंता

वन क्षेत्र से सटे इस रेलमार्ग पर जंगली जानवरों की आवाजाही कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन रेलवे ट्रैक और विशेषकर सुरंग के भीतर तेंदुए की मौजूदगी ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन और वन्यजीव के बीच अचानक आमना-सामना होने की स्थिति दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

सामने आए वीडियो में तेंदुआ रेलवे पटरी के बीच आराम से चलता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद रेल कर्मचारियों तथा आसपास के लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

लोको पायलट की सूझबूझ से बची वन्यजीव की जान

घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोको पायलट की सतर्कता रही। तेंदुए को ट्रैक पर देखकर ट्रेन की रफ्तार कम करना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से वन्यजीव की मौत हो सकती थी, लेकिन समय रहते सावधानी बरते जाने से संभावित दुर्घटना टल गई।

रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत

यह घटना एक बार फिर बताती है कि जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। ऐसे संवेदनशील रेलखंडों पर वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी, ट्रेन चालकों को सतर्क करने की व्यवस्था और रेलवे तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ऐसी घटनाओं में वन्यजीवों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

तेंदुए का सुरंग में दिखाई देना जहां प्रकृति और वन्यजीवों की मौजूदगी का प्रमाण है, वहीं यह मानव गतिविधियों और वन्यजीव आवास के बीच बढ़ते संपर्क की ओर भी संकेत करता है। ऐसे में विकास के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

संदेश साफ है—रेल की रफ्तार से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन की सुरक्षा। लोको पायलट की सतर्कता ने न केवल एक संभावित हादसा टाला, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी का भी उदाहरण पेश किया।

धनपुर की पुरातात्विक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण और संवर्धन का नया आधार

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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर एवं शहरखेरवा का किया व्यापक सर्वेक्षण

रायपुर- संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देशानुसार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर से पहुंचे चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का व्यापक मैदानी सर्वेक्षण एवं सूक्ष्म निरीक्षण किया।

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर के साथ बेनीबाई, भस्मासुर टापू एवं शहरखेरवा स्थित पुरातात्विक धरोहरों का निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की आवश्यकता तथा भविष्य में विकसित की जा सकने वाली संभावनाओं का अध्ययन किया।

उल्लेखनीय है कि मंत्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश के बाद संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइंस रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।

चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया मैदानी अध्ययन

रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज एवं शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे। दल ने विभिन्न स्थलों का मौके पर पहुंचकर बारीकी से अध्ययन किया तथा पुरातात्विक अवशेषों, मूर्तियों और स्मारकों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

धनपुर की प्राचीन धरोहरों का सूक्ष्म निरीक्षण

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर में स्थित प्राचीन मंदिर एवं वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों तथा उनके संरक्षण की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

इसके साथ ही धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य पुरावशेषों का भी गहन अवलोकन किया गया। दल ने इन पुरावशेषों के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का अध्ययन करते हुए उनके संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किया।

प्राचीन मंदिर परिसर का निरीक्षण करते हुए विशेषज्ञों ने संरचना के संरक्षण एवं आवश्यक सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का भी जायजा लिया।

बेनीबाई और भस्मासुर टापू की धरोहरों का भी अध्ययन

सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई एवं भस्मासुर टापू में संरक्षित एवं स्थापित प्राचीन मूर्तियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इन धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव तथा संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। मौके पर उपलब्ध पुरातात्विक सामग्री और स्मारकों की स्थिति को देखते हुए आवश्यक संरक्षण उपायों की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।

शहरखेरवा में पुरातात्विक संभावनाओं की तलाश

विशेषज्ञ दल ने ऐतिहासिक महत्व के स्थल शहरखेरवा का भी विस्तृत सर्वे किया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों एवं संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं का अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने स्थल की विशेषताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संरक्षण एवं आगे के अध्ययन की संभावनाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर ने विशेषज्ञ दल के साथ की बैठक

क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं निरीक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने रायपुर से आए विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली। बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरतों तथा आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों एवं स्मारकों के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित आवश्यक कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इन धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए योजनाबद्ध और व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि जिले की इस महत्वपूर्ण विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जा सके।

संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की भी संभावनाएं

धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का यह सर्वेक्षण केवल संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में इन स्थलों को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी आधार तैयार कर सकता है। व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन ऐतिहासिक स्थलों को जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पूरे फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायत धनपुर की टीम विशेषज्ञ दल के साथ मौजूद रही और सर्वेक्षण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन

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धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों ने दिए सुझाव 

​रायपुर- समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस द्वय शत्रुघ्न सिंह और एम.के.राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े के समक्ष आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों  की बैठक आयोजित कर समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव लिए गए।  संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक और सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है। पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है। इसके तहत मौखिक तलाक और कुछ अन्य धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव  देने के लिए उपस्थित रहे। 

समान नागरिक संहिता के लिए विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में  सुझाव देने वालों में उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के जान राजेश पॉल, अध्यक्ष मुस्लिम समाज सलाम रिजवी, अध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी इंद्रजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण ललित चंद्राकर,  राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा शामिलथे स इसी प्रकार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य  सरला कोसरिया तथा दीपिका सोरी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग विशेषर पटेल, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष लखन लाल धीवर, जैतू साव मठ के महंत राम सुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

एक समान विधिक ढाँचा तैयार करने की दिशा में बढ़ाया कदम 

छत्तीसगढ़ में सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान व न्यायसंगत अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाये जाने का सुझाव दिया। ​प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम में​ सर्व समावेशी समानता को शामिल किया गया है। धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक ढाँचा तैयार करना के दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसमें उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना और असमानता पैदा करने वाले नियमों को समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है।

जनजातीय परंपराओं का संरक्षण

राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। ​प्रदेशव्यापी जन-संवाद से समावेशी प्रारूप की तैयारी के लिए गठित यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक- धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से राज्य में एक पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।

“बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले रक्षक नहीं, भक्षक हैं” — गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के सरकारी स्कूल में शिक्षकों की हड़ताल और रैली का कोई असर देखने को नहीं मिला। विद्यालय के शिक्षक  गेंदलाल कोकडिया एवं हेमन्त कुमार देवांगन नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहे और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रखी। वहीं संकुल खट्टा सहित आसपास के अनेक विद्यालयों में शिक्षक हड़ताल में शामिल रहे और विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित रहा।

इस अवसर पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि “रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शुभता, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसे बांधने वाला व्यक्ति स्वयं जागरूक, जिम्मेदार और समझदार होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं भ्रमित हो, वह दूसरों को सुरक्षा और सही दिशा कैसे दे सकता है? इसी प्रकार यदि शिक्षक ही हड़ताल के कारण विद्यालय बंद कर दें और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो, तो यह शिक्षक के मूल दायित्व के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का सबसे सम्माननीय और जिम्मेदारी वाला पद है। शिक्षक का प्रथम कर्तव्य बच्चों को शिक्षा देना, उनके भविष्य को संवारना और उनमें आत्मविश्वास तथा संस्कार विकसित करना है। इसलिए शिक्षकों को अपनी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए हड़ताल या रैली में शामिल होने के बजाय अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संवाद करना चाहिए।

कोकडिया ने कहा कि “बच्चों का भविष्य किसी भी आंदोलन या मांग से अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यालय बंद होने से सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों का होता है, जिनकी शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षक के कंधों पर है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति रक्षक नहीं, भक्षक बनने जैसा कार्य करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चा शिक्षक वही है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों के बीच उपस्थित रहकर सुरक्षा, शुभता, संस्कार और आत्मविश्वास का भाव जगाए। शिक्षक केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का निर्माता और समाज का मार्गदर्शक होता है।

गेंदलाल कोकडिया ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा—

“शिक्षक सबसे पहले और सबसे अधिक सम्माननीय व्यक्ति है। इसलिए शिक्षक का पहला धर्म बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य की रक्षा करना होना चाहिए।”

CG NEWS : नक्सल पीड़ित 5 परिवारों के सदस्यों को मिली शासकीय सेवा

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 रायपुर : नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पांच नक्सल पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति प्रदान की गई है। जिला कार्यालय में बुधवार को आयोजित बैठक के दौरान मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कलेक्टर तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

आदिवासी विकास विभाग के आश्रमों और छात्रावासों में मिली

नक्सल पीड़ित परिवारों के इन पांच सदस्यों की नियुक्ति आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में भृत्य पद पर की गई है। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वालों में रवि दुग्गा, अजय कुमार सलामे, दिलसाय कोरेटी, समीला पूड़ो एवं पायल ईश्वर पूड़ो शामिल हैं। शासकीय सेवा का अवसर मिलने से इन परिवारों को नियमित रोजगार के साथ आर्थिक स्थिरता मिलेगी और वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

पुनर्वास नीति से पीड़ित परिवारों को मिल रहा नया संबल

नक्सल पुनर्वास नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी क्रम में पात्र परिवारों के सदस्यों को शासकीय सेवा का अवसर दिया जाना उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शासकीय नौकरी मिलने से प्रभावित परिवारों में भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ा है। यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।

शासकीय सेवा जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी

कलेक्टर सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासकीय सेवा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करें तथा शासन की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासकीय सेवा के माध्यम से नवनियुक्त कर्मचारी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेंगे।

बिहान की दीदियों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को राखी बांधकर दी बधाई, साझा किए गुजरात भ्रमण के अनुभव

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 रायपुर : कबीरधाम जिले के बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों और पशुपालकों का गुजरात के बनासकाठा स्थित डेयरी कोऑपरेटिव एवं अमूल डेयरी कोऑपरेटिव का शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी और प्रेरणादायी रहा। भ्रमण से वापस लौटने के बाद बिहान समूह की दीदियों ने कवर्धा निवास पहुंचकर उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान दीदियों ने उन्हें रक्षाबंधन की बधाई देते हुए राखी बांधी और गुजरात में मिले अनुभवों तथा सीखी गई नई तकनीकों की जानकारी साझा की।


उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सभी दीदियों और पशुपालकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब वहां से मिली सीख को अपने गांव और जिले में अपनाकर आजीविका के नए अवसर तैयार किए जाएं। उन्होंने दीदियों से बनासकाठा में देखी गई उन्नत डेयरी व्यवस्था, पशुपालन तकनीक, चारा प्रबंधन, दुग्ध संकलन, गुणवत्ता नियंत्रण और सहकारी मॉडल से मिली सीख को स्थानीय स्तर पर लागू करने का आह्वान किया।


बनासकाठा में देखा सफल डेयरी और सहकारी मॉडल

उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को गुजरात के बनासकाठा के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया था। दल ने वहां डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित आहार एवं चारा विकास, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपाय, दुग्ध संकलन एवं प्रसंस्करण की आधुनिक व्यवस्था, दूध की गुणवत्ता जांच, डेयरी उत्पाद निर्माण और उनके विपणन की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। इसके साथ ही सहकारी मॉडल के माध्यम से छोटे पशुपालकों को संगठित कर उनकी आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्था की भी जानकारी प्राप्त की।

सीख को कबीरधाम में लागू करने का संकल्प

गुजरात से लौटीं दीदियों ने बताया कि वहां पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को केवल व्यक्तिगत आय का साधन नहीं, बल्कि सामूहिक आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को बाजार से जोड़ने, गुणवत्ता बनाए रखने और दूध के बेहतर मूल्य प्राप्त करने की व्यवस्थाओं ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। दीदियों ने कहा कि बनासकाठा में मिली सीख से उन्हें अपने गांवों में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को और बेहतर ढंग से संचालित करने की प्रेरणा मिली है। वे वहां सीखी गई उपयोगी तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों को अन्य ग्रामीण महिलाओं तथा पशुपालकों के साथ साझा कर सामूहिक रूप से आजीविका के नए अवसर विकसित करने का प्रयास करेंगी।

ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बिहान स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वहीं पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कबीरधाम की दीदियों और पशुपालकों का बनासकाठा भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सीख को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के सफल डेयरी मॉडल से प्राप्त अनुभव आने वाले समय में कबीरधाम में दुग्ध उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।

खेलते-खेलते दो साल की बच्ची ने मुंह में डाल ली सेफ्टी पिन, सांस की नली में फंसी; डॉक्टरों ने दूरबीन से निकाला

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 जगदलपुर। बस्तर में खेलते समय दो साल की मासूम के मुंह में गई सेफ्टी पिन उसकी सांस की नली में फंस गई। गंभीर हालत में परिजन बच्ची को रात में शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय, जगदलपुर लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन पद्धति से सफलतापूर्वक सेफ्टी पिन निकालकर बच्ची की जान बचाई।


जानकारी के मुताबिक, बस्तर के मावलीबेड़ा निवासी दो वर्षीय मोनिका खेलते समय गलती से सेफ्टी पिन मुंह में डाल बैठी। पिन मुंह से होते हुए सांस की नली यानी ट्रैकिया में जाकर फंस गई। इसके बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में नाक, कान और गला (ईएनटी) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह ने बच्ची की जांच की। इसके बाद दूरबीन पद्धति से प्रक्रिया कर सांस की नली में फंसी सेफ्टी पिन को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।

डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

सेफ्टी पिन निकालने की इस जटिल प्रक्रिया में डॉ. हेमंत शर्मा ने सहयोग किया। वहीं निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि, डॉ. सुचिष्मिता और डॉ. काशी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। चिकित्सकों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद बच्ची खतरे से बाहर है।

छोटे बच्चों को लेकर बरतें विशेष सावधानी

डॉ. सुरजीत सिंह ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को सिक्के, पिन, बीज और छोटे खिलौने जैसी वस्तुओं से दूर रखें। ऐसी छोटी वस्तुएं खेलते समय बच्चे मुंह में डाल सकते हैं और इनके सांस की नली में फंसने से गंभीर या जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को अचानक लगातार खांसी होने लगे, सांस लेने में परेशानी हो या सांस लेने के दौरान असामान्य आवाज आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

प्लंबिंग पाइप की आड़ में गांजे की तस्करी, DRI ने 250 किलो गांजा पकड़ा

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में गांजा तस्करी के खिलाफ राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने बड़ी कार्रवाई की है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर DRI की टीम ने मंदिर हसौद के पास एक संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान ट्रक से करीब 250 किलो गांजा बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बरामद गांजे की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।


जानकारी के मुताबिक, तस्करों ने गांजे को छिपाने के लिए प्लास्टिक प्लंबिंग पाइप की आड़ ली थी, ताकि ट्रक में सामान्य माल की तरह नशीले पदार्थ को ले जाया जा सके। ट्रक की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद DRI टीम ने उसका पीछा किया और मंदिर हसौद के पास उसे रोककर जांच की। तलाशी के दौरान पाइप के बीच छिपाकर रखा गया गांजा बरामद किया गया।

ट्रक जब्त, चालक हिरासत में

कार्रवाई के बाद DRI ने ट्रक और गांजे को जब्त कर लिया है। वहीं ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।

तस्करी नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही DRI

प्रारंभिक जांच में प्लंबिंग पाइप की आड़ में गांजा छिपाकर ले जाने की बात सामने आई है। DRI अब चालक से पूछताछ के आधार पर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। खेप के स्रोत, संभावित गंतव्य, ट्रक के रूट और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरीके से पहले भी मादक पदार्थों की खेप दूसरे राज्यों तक पहुंचाई गई है। मामले में पूछताछ और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

फिलहाल DRI की कार्रवाई जारी है। जब्त गांजे की आधिकारिक मात्रा, अनुमानित कीमत और तस्करी नेटवर्क से जुड़ी विस्तृत जानकारी एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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