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सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

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रायपुर- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।

बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।

नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं

कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश

इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।


छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ पढ़ेंगे कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी

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देश का पहला राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठ

रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 

इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

स्थानीय कला-संस्कृति को पाठ्य सामग्री से जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।

विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश

आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है।  पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।

पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे पाठ्य सामग्री का हिस्सा

छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।

लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।

तीन दिनों में पाठ्य सामग्री से लेकर लघु फिल्म की पटकथा तक

कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी आर्ट रिपोजिटरी

छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

धान की फसल में कीट प्रकोप से बचाव के लिए किसान रहें सतर्क

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तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट की समय पर पहचान कर करें नियंत्रण, अधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की सलाह

रायपुर-   धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि कीटों के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग तथा लंबे समय तक अधिक जलभराव रहने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए किसान संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।

तना छेदक कीट से फसल को पहुंचता है नुकसान

तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में शामिल है। प्रारंभिक अवस्था में इसके प्रकोप की पहचान करना आसान है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई देते हैं तथा मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है।

बालियां सफेद पड़ना गंभीर प्रकोप का संकेत

तना छेदक का प्रकोप बढ़ने पर धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख जाती हैं। इससे पौधे में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए खेत में यदि कुछ पौधों की पत्तियां अचानक पीली पड़ती दिखाई दें या तने में छेद नजर आएं, तो किसान तुरंत फसल का निरीक्षण कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।

तना छेदक के नियंत्रण के लिए अनुशंसित छिड़काव

कृषि विभाग ने तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।

पत्ती मोड़क कीट की पहचान भी जरूरी

धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट भी नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कीट की हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे भाग को खाती है।

पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देना प्रमुख लक्षण

पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप के बाद पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। खेत में ऐसी पत्तियां दिखाई देने पर किसान फसल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें और शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।

पत्ती मोड़क के नियंत्रण के लिए ये विकल्प

कृषि विभाग ने पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।

अधिक उर्वरक और जलभराव से बचें

कृषि विभाग के अनुसार खेत में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग करने तथा लंबे समय तक अधिक पानी भरा रहने से कीटों के प्रकोप की स्थिति बन सकती है। किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और खेत में जलभराव की स्थिति न बनने दें। नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने से कीटों की शुरुआती पहचान और समय पर नियंत्रण संभव होगा।

समय पर पहचान और नियंत्रण से सुरक्षित रहेगी फसल

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खेतों में नियमित निगरानी रखें और पत्तियों के पीला पड़ने, तने में छेद होने, बालियां सफेद पड़ने अथवा पत्तियों पर सफेद-पारदर्शी धारियां दिखाई देने पर तत्काल उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर की गई कार्रवाई से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

गांव की बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर, बबली यादव ने फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय से बढ़ाई आय

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बिहान से मिला संबल, विष्णु भैया की योजनाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू हो रहे विष्णु के सुशासन का लाभ गांव-गांव तक पहुंच रहा है। शासन की योजनाओं और ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ऐसी ही मेहनतकश महिला हैं, जिन्होंने विष्णु भैया की सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता में बदला है।

बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर कंप्यूटर खरीदा और अपने घर पर ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आय का साधन भी मिल गया। एक छोटे से प्रयास ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।

बबली यादव ने अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से उन्हें आय का एक और साधन मिला है और स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़े हैं।

बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे विभिन्न कार्यों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। उनका कहना है कि पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित साधन थे, वहीं अब मेहनत और समूह से मिले सहयोग के कारण उनके पास आय के कई साधन हैं।

बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। शासन की विभिन्न योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। वे कहती हैं कि विष्णु भैया की सरकार में गांव की महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर भी मिल रहे हैं।

बबली अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

बबली यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विष्णु के सुशासन में योजनाओं का लाभ जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगता है। आज बबली स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

भिलाई में 32 वर्षीय नर्स की संदिग्ध मौत, हमर क्लीनिक के कमरे में फंदे पर मिला शव

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 भिलाई। घासीदास नगर स्थित हमर क्लीनिक में पदस्थ 32 वर्षीय नर्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नर्स नेहा बंजारे का शव सोमवार शाम क्लीनिक परिसर में बने कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी।


पांच साल से हमर क्लीनिक में कर रही थीं सेवा

जानकारी के मुताबिक, वार्ड-23 घासीदास नगर स्थित हमर क्लीनिक में नेहा बंजारे पिछले करीब पांच वर्षों से नर्स के रूप में कार्यरत थीं। वह क्लीनिक परिसर में बने एक कमरे में अपने पति के साथ रहती थीं। परिजनों के मुताबिक, नेहा की शादी करीब एक साल पहले हुई थी।

पति ने कमरे में देखा शव

बताया जा रहा है कि घटना सोमवार शाम करीब 6 बजे की है। जब नेहा के पति कमरे में पहुंचे, तो उन्होंने उन्हें फंदे से लटका देखा। इसके बाद तत्काल पुलिस को घटना की सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव का पंचनामा कराया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मौत की वजह का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस ने फिलहाल मौत के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। पुलिस पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही नर्स की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

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पटेवा- सावन माह के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली। विद्यालय प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक योगेश निर्मलकर एवं शिक्षक रामेश्वर ढीढी के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना दिया।

कांवड़ यात्रा के लिए बच्चों ने आकर्षक रूप से सजी कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान बच्चे भगवान शिव-पार्वती तथा विभिन्न गणों के आकर्षक वेशभूषा में नजर आए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति और धार्मिक उत्साह ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया।

जुन्ना तालाब से जल लेकर पहुंचे शिव मंदिर

विद्यालय से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा जुन्ना तालाब पहुंची, जहां बच्चों ने विधि-विधान से जल लिया। इसके बाद कांवड़ यात्री बच्चे तालाब स्थित शिव मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद गांव के मुख्य शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।

पूरे रास्ते बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह बच्चों का स्वागत किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, वहीं अनेक ग्रामीण उत्साहपूर्वक बच्चों के साथ नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। इससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

मुख्य शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

कांवड़ यात्रा गांव के मुख्य शिव मंदिर पहुंची, जहां बच्चों ने भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इस दौरान बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना की और गांव की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल को ग्रामीणों और पालकों का भी भरपूर सहयोग मिला। कार्यक्रम ने बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सामूहिकता, अनुशासन, सेवा और संस्कार की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

विद्यालय में हुई भजन संध्या

कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी बच्चे वापस विद्यालय पहुंचे। यहां पालकों और ग्रामीणों के साथ भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और भजनों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भजन संध्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन पर पालकों और गांववासियों के सहयोग से प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया।

ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन समिति, पालकों, शिक्षकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, योगीराम साहू, बैगा नंद ध्रुव, भुनेश्वर साहू, भीम यादव, कार्तिक सिन्हा, उमेश सिन्हा, पूर्णिमा यादव, देवकी सिन्हा, बरतनीन दीवान, प्रमिला ध्रुव, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव, तिलक यादव, भुवन साहू, तिलक साहू, उमेन्द्र दीवान, भूपेंद्र मनोज साहू, सुकदेव दीवान, लीलेश्वर साहू एवं विष्णु दीवान का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय परिवार ने सभी पालकों, ग्रामीणों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की सहभागिता और ग्रामीणों के उत्साह से कांवड़ यात्रा पूरे गांव के लिए यादगार बन गई।


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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, अगस्त में ₹23,544 करोड़ का निवेश

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है। Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने अगस्त 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार में ₹23,544 करोड़ का निवेश किया है। बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और भारतीय कंपनियों की बेहतर कारोबारी संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जुलाई के बाद अगस्त में भी जारी रही खरीदारी

अगस्त में विदेशी निवेश का यह रुझान जुलाई में शुरू हुई खरीदारी की निरंतरता है। जुलाई 2026 में FPIs ने भारतीय इक्विटी में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इससे पहले लगातार चार महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला था।

आंकड़ों के अनुसार, FPIs ने जून में करीब ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में लगभग ₹1.17 लाख करोड़ भारतीय इक्विटी से वापस निकाले थे। ऐसे में जुलाई और अगस्त की लगातार खरीदारी को बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की खरीदारी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें भारतीय कंपनियों के तिमाही परिणामों में सुधार, रुपये की स्थिरता और भारतीय अर्थव्यवस्था तथा कंपनियों की बेहतर विकास संभावनाएं शामिल हैं। इन सकारात्मक संकेतों से विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय बाजार को लेकर धारणा में सुधार हुआ है।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर निवेश का रुझान उभरते बाजारों की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने भी भारतीय इक्विटी को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखा है।

निवेश का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार और प्राथमिक बाजार में

अगस्त में अब तक हुए ₹23,544 करोड़ के कुल निवेश में लगभग ₹14,118 करोड़ स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से और करीब ₹9,426 करोड़ प्राथमिक बाजार (Primary Market) के जरिए आया है। इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक केवल सूचीबद्ध शेयरों में ही नहीं, बल्कि नए इश्यू और बाजार में आने वाली कंपनियों में भी रुचि दिखा रहे हैं।

वित्तीय, ऑटो और IT क्षेत्र में भी बढ़ी दिलचस्पी

अगस्त के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल और IT क्षेत्र में खरीदारी की। वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश की वापसी को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों की आय और विकास क्षमता को लेकर बढ़ते भरोसे का संकेत मिलता है।

फिर भी 2026 में विदेशी निवेश का कुल आंकड़ा नकारात्मक

हालांकि अगस्त में विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी सकारात्मक संकेत दे रही है, लेकिन पूरे 2026 के आंकड़ों को देखें तो FPIs अभी भी भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.3 लाख करोड़ रही है।

इसलिए अगस्त की खरीदारी को विदेशी निवेशकों के रुख में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसे स्थायी वापसी मानने से पहले आने वाले महीनों के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।

भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार दो महीनों की खरीदारी भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि यह निवेश प्रवाह आगे भी जारी रहता है, तो इससे भारतीय इक्विटी बाजार में तरलता, निवेशकों का भरोसा और बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है।

अगस्त में ₹23,544 करोड़ का FPI निवेश ऐसे समय आया है जब भारतीय कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन में सुधार और रुपये की स्थिरता ने बाजार को सहारा दिया है। हालांकि वैश्विक बाजारों की अस्थिरता और अन्य बाहरी जोखिमों के कारण आगे भी निवेशकों की नजर भारतीय बाजार की आय वृद्धि, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बनी रहेगी।

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: यौन उत्पीड़न की शिकायतों की प्राथमिकता से जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट का पैनल

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नई दिल्ली- दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शिकायतों की जांच के लिए अलग से नई कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस पूरे मामले की जांच के लिए पहले ही हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को महिला प्रदर्शनकारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

यह मामला 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए NEET संबंधी छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा को लेकर कई आरोप सामने आए थे। इनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति को पुलिस कार्रवाई, कथित अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों तथा पुलिस के खिलाफ प्रत्यारोपों की जांच का दायित्व दिया गया है।

यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता

सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी मांग रखी कि पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत सीधे किसी स्वतंत्र अधिकारी या न्यायिक अधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकें।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में इन शिकायतों को विशेष रूप से प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जा चुका है। समिति को इन मामलों की जल्द जांच कर अंतरिम रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा गया है।

शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि कथित पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायतें समिति तक किस प्रकार पहुंचाएंगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि समिति के अध्यक्ष को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतकर्ताओं को एक स्पष्ट और सुलभ माध्यम उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बाधा के अपनी शिकायत समिति के सामने रख सकें।

पांच सदस्यीय समिति करेगी व्यापक जांच

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC केवल यौन उत्पीड़न के आरोपों तक सीमित नहीं है। समिति को छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और हिंसा से जुड़े अन्य आरोपों की भी जांच करनी है।

समिति का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ, पुलिस कार्रवाई किस स्तर तक उचित थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश—शिकायतों की गंभीरता से जांच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के निर्देशों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को जांच प्रक्रिया में अलग से और गंभीरता के साथ देखा जाएगा। अदालत ने समिति को इन शिकायतों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने को कहा है।

फिलहाल अदालत ने अलग से नई जांच प्रक्रिया शुरू करने के बजाय मौजूदा हाई-पावर्ड कमेटी के माध्यम से मामले की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाया है। अब समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या घटनाएं हुईं और आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई आवश्यक होगी।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजर हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी की जांच और उसकी अंतरिम रिपोर्ट पर है। समिति द्वारा शिकायतों की जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश छात्र प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही और शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अजीत डोभाल चीन पहुंचे, 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता पर दुनिया की नजर

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नई दिल्ली- भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंच गए हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान डोभाल मंगलवार, 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 25वें Special Representatives (SR) स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे।

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने तथा सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। बैठक में डोभाल भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि की भूमिका निभाएंगे, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी वार्ता में शामिल होंगे।

सीमा विवाद और LAC पर रहेगा मुख्य फोकस

25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता का प्रमुख मुद्दा भारत-चीन सीमा प्रश्न रहेगा। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है। ऐसे में उच्चस्तरीय वार्ता को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

संबंधों में सुधार के बीच महत्वपूर्ण यात्रा

डोभाल की बीजिंग यात्रा भारत और चीन के बीच हाल में दिखाई दे रहे कूटनीतिक संपर्कों के बीच हो रही है। दोनों देश सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस वार्ता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आने वाले समय में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित संपर्क को लेकर भी चर्चा है। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले डोभाल की चीन यात्रा को महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

चीनी उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अजीत डोभाल अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि यात्रा केवल सीमा वार्ता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर भी उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना है।

आगे की राह के लिए अहम मानी जा रही वार्ता

भारत-चीन सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में 25वीं SR वार्ता से यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और आपसी विश्वास बहाल करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

डोभाल की बीजिंग यात्रा को भारत-चीन संबंधों में संवाद और कूटनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, वार्ता के वास्तविक परिणाम और किसी ठोस सहमति की जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।

मणिपुर के सेनापति में फिर भड़की हिंसा: कई घरों में आगजनी, गोलीबारी में CRPF जवान घायल

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इंफाल- मणिपुर के सेनापति जिले में सोमवार को एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। ताफू और आसपास के इलाकों में आगजनी के बाद दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया। हिंसा के दौरान कई घरों को आग के हवाले किए जाने की भी सूचना है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) को भी बाधित किया। प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

तड़के शुरू हुई आगजनी

पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब 2:30 से 2:40 बजे कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव में एक मकान में आग लगा दी गई। आग की सूचना मिलने के बाद दमकलकर्मियों को बुलाया गया और इलाके में पुलिस की तैनाती की गई।

इसके बाद सुबह करीब 4 बजे सेनापति जिले के नागा ताफू इलाके में कई मकानों को कथित तौर पर जला दिया गया। उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ पूरी तरह जल गए। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

गोलीबारी में 54 वर्षीय CRPF जवान घायल

आगजनी के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सुबह करीब 9:20 बजे ताफू नागा इलाके में दो गुटों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इसी दौरान 36वीं बटालियन के 54 वर्षीय CRPF कांस्टेबल को गोली लगने की सूचना है।

घायल जवान को तत्काल सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक जवान की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

NH-2 पर प्रदर्शन, यातायात प्रभावित

आगजनी की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने सेनापति गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर लकड़ियां और टायर जलाकर सड़क को बाधित किया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

NH-2 मणिपुर को नागालैंड और आगे देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सड़क अवरोध के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होना क्षेत्र की सामान्य आवाजाही के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

ग्रामीण प्रशासन ने की घटना की निंदा

ताफू कुकी विलेज अथॉरिटी ने मकानों को जलाए जाने और संपत्ति के नुकसान की कड़ी निंदा की है। स्थानीय प्राधिकरण ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तथा प्रशासन से मामले की जांच करने की अपील की है।

प्राधिकरण ने हिंसा, आगजनी और संपत्ति के नुकसान से दूर रहने की अपील भी की है।

इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

घटना के बाद सेनापति और कांगपोकपी के प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि हिंसा को आगे फैलने से रोका जाए और इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल की जाए। गोलीबारी किस पक्ष की ओर से शुरू हुई और आगजनी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं, इसकी जांच की जा रही है।

प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, संपत्ति के नुकसान और घटनाओं की पूरी स्थिति का आकलन अभी किया जा रहा है।

2023 से जारी तनाव की पृष्ठभूमि

सेनापति और कांगपोकपी सहित मणिपुर के कई इलाकों में लंबे समय से जातीय और सामुदायिक तनाव बना हुआ है। मई 2023 में शुरू हुए व्यापक संघर्ष के बाद राज्य में 260 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की रिपोर्ट सामने आई है।

सोमवार की ताजा घटना ने एक बार फिर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करना, घायल CRPF जवान का उपचार सुनिश्चित करना, दोषियों की पहचान करना और किसी भी संभावित जवाबी हिंसा को रोकना है।

नोट: यह एक विकसित होती हुई खबर है। आगजनी में क्षतिग्रस्त या जले मकानों की अंतिम संख्या और घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

हर विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों की पात्रता परीक्षा हो: गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और सरकारी सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विश्व प्रसिद्ध स्कूल चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी, महासमुंद के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तर्ज पर प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए भी समय-समय पर पात्रता परीक्षा आयोजित किए जाने की मांग की है।

टीईटी के संबंध में पूछे गए सवाल पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उनके अनुसार, सरकारी सेवा में नियुक्ति के बाद भी शिक्षकों का लगातार अपने ज्ञान, कौशल और कार्यप्रणाली को अपडेट करते रहना जरूरी है। बदलती तकनीक, नई शिक्षण पद्धतियां, डिजिटल माध्यम और नवीनतम ज्ञान के दौर में शिक्षकों के लिए निरंतर सीखते रहना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में हर पल बदलाव हो रहा है। ऐसे में शिक्षक यदि वर्षों पुराने तौर-तरीकों तक सीमित रहेंगे तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। उनके अनुसार, टीईटी की तैयारी के कारण शिक्षकों में अध्ययन और पठन-पाठन के प्रति गंभीरता बढ़ी है तथा वे अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करने का प्रयास कर रहे हैं।

केवल शिक्षकों की नहीं, हर विभाग में हो पात्रता परीक्षा

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि यदि शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की योग्यता और दक्षता का मूल्यांकन किया जा सकता है, तो इसी प्रकार पुलिस, डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए भी समय-समय पर पात्रता और दक्षता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि हर पांच या छह वर्ष में एक बार पात्रता परीक्षा अथवा दक्षता मूल्यांकन की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि सरकारी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी अपने ज्ञान, कौशल, तकनीकी दक्षता तथा कार्यप्रणाली को लगातार बेहतर करते रहें।

जनता के पैसे से वेतन लेने वालों की जवाबदेही जरूरी

कोकडिया ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन जनता के करों से प्राप्त राजस्व से दिया जाता है। इसलिए प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह समय के साथ अपनी पात्रता, दक्षता और कार्यक्षमता प्रमाणित करता रहे।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी मिलने के बाद वर्षों तक पुराने ढर्रे पर काम करता रहे, नई तकनीक और नई कार्यप्रणाली को न अपनाए तथा उसके कार्य से विभाग और जनता को अपेक्षित लाभ न मिले, तो उसकी कार्यक्षमता का मूल्यांकन क्यों न किया जाए?

उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी है। इसलिए कर्मचारियों और अधिकारियों में निरंतर सीखने, सुधार करने और बेहतर सेवाएं देने की भावना विकसित होना आवश्यक है।

“सुपात्र व्यक्ति पर हर कोई अपना तन-मन-धन लगाना चाहता है”

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि किसी भी संस्था या समाज की प्रगति योग्य और सक्षम लोगों से होती है। उनका कहना है कि “सुपात्र व्यक्ति पर हर कोई अपना तन-मन-धन लगाना चाहता है।” इसलिए सरकारी व्यवस्था में भी पात्रता और दक्षता को निरंतर बनाए रखने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय-समय पर पात्रता परीक्षा का उद्देश्य किसी कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि उसे अपडेट, सक्षम और जवाबदेह बनाए रखना होना चाहिए। इससे कर्मचारियों में अध्ययन की आदत, नई तकनीक सीखने की इच्छा और कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी।

विकसित भारत के लिए निरंतर दक्षता जरूरी

कोकडिया के अनुसार, “शिक्षक पात्रता परीक्षा” की अवधारणा को व्यापक बनाकर प्रत्येक सरकारी विभाग में निरंतर दक्षता मूल्यांकन की व्यवस्था विकसित भारत के निर्माण में उपयोगी हो सकती है। बदलती दुनिया और तेजी से विकसित हो रही तकनीक के साथ सरकारी सेवाओं में भी निरंतर कौशल-विकास और ज्ञान-वृद्धि आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि देश को विकसित भारत और विकसित संसार की दिशा में आगे बढ़ना है, तो केवल नई नियुक्तियां करना पर्याप्त नहीं है। पहले से कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को भी समय के साथ सीखने, स्वयं को अपडेट करने और अपनी कार्यक्षमता प्रमाणित करने के अवसर एवं जिम्मेदारी दोनों दिए जाने चाहिए।

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि पात्रता का निरंतर परीक्षण कर्मचारियों के विरुद्ध नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक सुधारात्मक कदम होना चाहिए।

CG NEWS : अनियंत्रित होकर पलटी स्कूल बस, 18 बच्चे थे सवार

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल की बस अनियंत्रित होकर खेत में पलट गई। हादसे के समय बस में करीब 17 से 18 बच्चे सवार थे। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। हादसे में कई बच्चों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


जानकारी के मुताबिक, ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल की बस क्रमांक CG 25 A 0218 बच्चों को लेकर जा रही थी। इसी दौरान सिंघपुर-झाल मार्ग पर खड़सरा और झाल के बीच बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गई।

ग्रामीणों ने बच्चों को बस से बाहर निकाला

हादसे के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने ड्राइवर और कंडक्टर की मदद से बस में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद घायल बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हादसा किस वजह से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद दुर्घटना के कारणों का पता चल सकेगा।

GENESIS EIR 3.0: नए उद्यमियों और नवोन्मेषकों को मिलेगा ₹10 लाख तक का सहयोग

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नई दिल्ली- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने MeitY Startup Hub (MSH) के माध्यम से GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort 3 की शुरुआत की है। यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम महत्वाकांक्षी उद्यमियों, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप संस्थापकों को अपने नवीन विचारों को तकनीक-आधारित व्यावसायिक उपक्रमों में बदलने के लिए सहायता प्रदान करेगा।

GENESIS EIR 3.0 का शुभारंभ 4 अगस्त 2026 को कोयंबटूर स्थित रथिनम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित GENESIS NextGen Startup Summit – Coimbatore Edition के दौरान किया गया। कार्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक आवेदक 3 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

शुरुआती चरण के नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा

GENESIS EIR 3.0, GENESIS (Gen-Next Support for Innovative Startups) योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में उभर रहे स्टार्टअप और नवोन्मेषकों की पहचान करना, उन्हें सहयोग देना और आगे बढ़ाना है।

Entrepreneur-in-Residence घटक के तहत चयनित नवोन्मेषकों को शुरुआती विचारों को प्रोटोटाइप और पायलट-रेडी समाधान में बदलने के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

MeitY Startup Hub द्वारा लागू GENESIS EIR Cohort-3 के तहत चयनित आवेदकों को ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। इसके अलावा प्रतिभागियों को GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, उत्पाद विकास, MVP तैयार करने, प्रोटोटाइपिंग, तकनीकी सत्यापन और व्यावसायीकरण के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

चयनित नवोन्मेषकों को प्रमुख रूप से मिलेंगे:

  • ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

  • GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच

  • विशेषज्ञों से वन-टू-वन मेंटरशिप

  • उत्पाद विकास और MVP तैयार करने में सहयोग

  • इनक्यूबेशन और बिजनेस ग्रोथ सपोर्ट

  • प्रोटोटाइप और तकनीकी विकास के लिए सहायता

  • उद्योग एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से संपर्क

  • व्यावसायीकरण और स्टार्टअप विकास के लिए मार्गदर्शन

DeepTech और उभरती तकनीकों पर विशेष फोकस

GENESIS EIR 3.0 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT, DeepTech, Artificial Intelligence/Machine Learning (AI/ML), Internet of Things (IoT), Semiconductor/VLSI, Cybersecurity, Blockchain, Quantum Technologies तथा AR/VR, Spatial & Immersive Technologies जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले नवोन्मेषकों को समर्थन दिया जाएगा।

कार्यक्रम में Technology Readiness Level (TRL) 1 से 4 तक के विचारों और समाधानों को पात्र माना गया है। इसमें आइडिएशन, Proof of Concept, प्रोटोटाइप, MVP और शुरुआती वैलिडेशन चरण शामिल हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस कार्यक्रम के लिए भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों में उद्यमी, नवोन्मेषक, शोधकर्ता, छात्र तथा शुरुआती चरण के स्टार्टअप के संस्थापक या सह-संस्थापक शामिल हैं।

स्टार्टअप टियर-II या टियर-III शहर में आधारित होना चाहिए और यदि स्टार्टअप पहले से पंजीकृत है, तो आवेदन की तारीख तक उसकी आयु दो वर्ष से कम होनी चाहिए। साथ ही, उसी प्रस्तावित विचार या स्टार्टअप के लिए किसी केंद्रीय या राज्य सरकार की योजना के तहत ₹10 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई होनी चाहिए।

3 सितंबर तक आवेदन का मौका

GENESIS EIR Cohort-3 के लिए आवेदन विंडो 4 अगस्त 2026 से 3 सितंबर 2026 तक खुली है। इच्छुक नवोन्मेषक और उद्यमी MeitY Startup Hub के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

₹490 करोड़ के GENESIS मिशन का हिस्सा

GENESIS यानी Gen-Next Support for Innovative Startups MeitY Startup Hub की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप को खोजने, सहयोग देने, विकसित करने और गति प्रदान करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।

कुल ₹490 करोड़ के बजट प्रावधान वाली इस योजना में Entrepreneur-in-Residence, Pilot, Investment और DeepTech Funding जैसे घटक शामिल हैं। यह योजना स्टार्टअप्स को शुरुआती विचार और प्रयोग से लेकर वैलिडेशन, निवेश और विस्तार तक सहायता देने पर केंद्रित है।

GENESIS EIR 3.0 के माध्यम से MeitY Startup Hub का लक्ष्य देशभर के नवोन्मेषकों को आवश्यक वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन उपलब्ध कराकर विचारों को बाजार के लिए तैयार तकनीकी समाधानों और स्केलेबल स्टार्टअप में बदलना है। यह पहल भारत के DeepTech और तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को भी गति प्रदान करेगी।

तालाबीरा II एवं III कोयला खदान: ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और सतत विकास की दिशा में भारत की नई उपलब्धि

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भारत सरकार के घरेलू कोयला उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों को नामित प्राधिकरण (Nominated Authority—NA) के तहत आवंटित और नीलाम की गई कोयला खदानों के माध्यम से और मजबूती मिल रही है। 2 मई 2016 को कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 की अनुसूची III के तहत NLC India Ltd. को आवंटित तालाबीरा II एवं III ओपन कास्ट कोयला खदान ऐसी NA-आवंटित खदानों में शामिल है, जो उत्पादन, डिस्पैच, प्रौद्योगिकी अपनाने, सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, रोजगार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

ओडिशा के संबलपुर और झारसुगुड़ा जिलों में स्थित यह खदान घरेलू कोयला उपलब्धता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में तालाबीरा II एवं III ने 19.14 मिलियन टन (MT) का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कोयला उत्पादन दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.28% की साल-दर-साल वृद्धि है। खदान ने 21 मार्च 2026 को 1,26,138.07 टन का सर्वाधिक दैनिक उत्पादन तथा मार्च 2026 में 3.39 MT का सर्वाधिक मासिक उत्पादन भी दर्ज किया।

उत्पादन के साथ-साथ खदान ने कोयला डिस्पैच में भी मजबूत प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 में खदान ने 17.69 MT का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक डिस्पैच हासिल किया। इसमें लगभग 10.72 MT बिजली क्षेत्र को तथा 6.97 MT गैर-विनियमित क्षेत्र को आपूर्ति किया गया। तालाबीरा II एवं III से प्राप्त कोयला कई राज्यों में स्थित विद्युत उत्पादन संयंत्रों को उपलब्ध कराया जाता है, जिनमें NTPC दर्लीपाली, NTPC गाडरवारा, NTPC खरगोन, NTPC कुडगी तथा ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के अन्य विद्युत संयंत्र शामिल हैं।

उत्पादन शुरू होने के बाद से खदान ने लगातार वृद्धि की है। 14 अगस्त 2026 तक संचयी कोयला उत्पादन 72.23 MT और संचयी डिस्पैच 70.89 MT तक पहुंच गया है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सरकार के कोयला-ब्लॉक आवंटन ढांचे के तहत आवंटित कोयला संसाधनों को परिचालन में लाकर किस प्रकार ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिचालन दक्षता

तालाबीरा II एवं III में परिचालन दक्षता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) RFID आधारित वाहन सत्यापन, AI-सक्षम कैमरों तथा तकनीक-सक्षम प्रवेश और निकास द्वारों के माध्यम से कोयला परिवहन एवं डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करता है।

DLMS लागू होने के बाद औसत एंट्री-गेट प्रोसेसिंग समय 1.42 मिनट से घटकर 0.54 मिनट प्रति वाहन हो गया, जबकि टैरे वेटमेंट का समय 1.34 मिनट से घटकर 0.48 मिनट रह गया। खदान में धूल-नियंत्रण प्रणाली से युक्त सरफेस माइनर्स, GPS आधारित फ्लीट मैनेजमेंट और जियो-फेंसिंग, GNSS रिसीवर के साथ 3D टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनिंग, ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, मशीनीकृत ट्रक लोडिंग, निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) और CCTV निगरानी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

तालाबीरा II एवं III OCP में डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) का कार्यान्वयन कोयला परिवहन और डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी एवं नियंत्रण के लिए किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन

खदान के परिचालन प्रदर्शन के साथ जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल खनन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। खदान पट्टा क्षेत्र के भीतर 23.43 हेक्टेयर में पौधरोपण किया गया है, जिसमें 64,288 पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पट्टा क्षेत्र के बाहर 29.48 हेक्टेयर में 65,202 पौधे लगाए गए हैं।

खदान में 11.68 kW की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें आसपास के गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और खदान के बुनियादी ढांचे में सौर प्रकाश व्यवस्था शामिल है।

धूल नियंत्रण के लिए वेट ड्रिलिंग, जल छिड़काव, फॉग कैनन, फिक्स्ड स्प्रिंकलिंग सिस्टम, विंड बैरियर, ट्रक-वॉशिंग सिस्टम और मशीनीकृत सड़क सफाई जैसी व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं।

सुरक्षा को प्राथमिकता

सुरक्षा खदान के प्रदर्शन का एक प्रमुख हिस्सा है। स्थापना के बाद से यहां कोई घातक दुर्घटना नहीं हुई है। सुरक्षा उपायों में सुरक्षा प्रबंधन योजना, बेहतर हॉल रोड एवं यातायात प्रबंधन, PPE अनुपालन, मजबूत ब्लास्टिंग प्रक्रियाएं, सुरक्षा प्रशिक्षण और ARAN Safety App के माध्यम से नियर-मिस रिपोर्टिंग शामिल हैं।

खदान को Annual Mines Safety Fortnight के तहत कई पुरस्कार एवं मान्यताएं प्राप्त हुई हैं। साथ ही, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक लगातार पांच वर्षों में कोयला मंत्रालय के Star Rating Evaluation के तहत Five-Star Rating हासिल की गई है।

रोजगार और कौशल विकास

खदान का प्रभाव उत्पादन और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है। तालाबीरा II एवं III से 3,277 रोजगार अवसर जुड़े हैं, जिनमें 1,277 प्रत्यक्ष और परिवहन तथा संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से लगभग 2,000 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

5 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (PAPs) को भुवनेश्वर स्थित Skill Development Institute में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 101 ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को RSETI तथा PMKVY केंद्रों के माध्यम से सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में प्रशिक्षित किया गया है।

सामुदायिक विकास और CSR

सामुदायिक विकास भी परियोजना के व्यापक प्रभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में ₹5.32 करोड़ का CSR व्यय किया गया, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, शिक्षा, स्कूल परिवहन, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सौर प्रकाश व्यवस्था जैसी पहलों को समर्थन दिया गया।

स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविरों से लगभग 1,500 लोगों को लाभ मिला, जबकि टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति से लगभग 10,000 लोग लाभान्वित हुए।

वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 तक ₹4.20 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए जा चुके हैं। इन पहलों में पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं में सहायता, सौर प्रकाश व्यवस्था, स्कूल और आंगनवाड़ी बुनियादी ढांचा, ग्रामीण सड़कें, सामुदायिक सुविधाएं तथा जलाशयों के पुनरुद्धार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

तालाबीरा II एवं III OCP, NLC India Ltd. द्वारा आयोजित मेगा मेडिकल कैंप।

ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान

2016 में आवंटन से लेकर उच्च क्षमता वाले निरंतर उत्पादन तक, तालाबीरा II एवं III ने यह प्रदर्शित किया है कि परिचालन में लाए गए कोयला संसाधन किस प्रकार घरेलू कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी आधारित खनन, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और स्थानीय विकास में योगदान दे सकते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उत्पादन और डिस्पैच, 72.23 MT के संचयी उत्पादन, 70.89 MT के संचयी डिस्पैच तथा इसके मापनीय सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों के साथ, तालाबीरा II एवं III भारत की ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के व्यापक विजन को समर्थन देने वाले NA-आवंटित कोयला संसाधनों के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड कर्मचारी से 63 लाख की ठगी

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 देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने एक रिटायर्ड फैक्ट्री कर्मचारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर करीब 63 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और उनकी जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली।


ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित सुरेश इंग्ले ने पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए देवास पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह की तलाश शुरू की। करीब 127 दिनों तक चले ऑपरेशन में 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमों ने देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय कर गिरोह से जुड़े आरोपियों और उनके नेटवर्क का पता लगाया।

12 आरोपी गिरफ्तार, 11 जेल भेजे गए

पुलिस ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में दबिश देकर गिरोह के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें से 11 आरोपियों को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी कमलकान्ति को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को पूछताछ में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

54.84 लाख रुपये बरामद

पुलिस कार्रवाई में ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा बरामद किया गया है। आरोपियों के कब्जे और उनके बैंक खातों से पुलिस ने 54 लाख 84 हजार रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मामलों में रकम की रिकवरी चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा सुरक्षित किया जा सका।

एसपी ने कहा- कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं

देवास के पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने लोगों को साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराता है और पैसों की मांग करता है, तो घबराने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक माध्यम पर दें।

 

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