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विशेष लेख : आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

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रायपुर- किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को ष्महतारी गौरव वर्षष् के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।

महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा।

बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को ‘सुशासन से समृद्धि‘ की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।


हड़ताल का मुख्य कारण मानवीय मूल्यों की समझ का अभाव, बच्चों की पढ़ाई बाधित होना चिंता का विषय: गेंदलाल कोकड़िया

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रायपुर- प्रदेश में शिक्षकों की हड़ताल को लेकर सामाजिक चिंतन सामने आया है। समाजसेवी गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व बच्चों के भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकीय पेशा केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। एक शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की समझ और जीवन दृष्टि की कमी के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षकों को 'जीवन विद्या' जैसे मानवीय मूल्यों पर आधारित अध्ययन और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो उनकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का बंद होना बच्चों के साथ अन्याय है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षाओं की तैयारी बाधित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है। सरकार और शिक्षक संगठनों को आपसी संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान निकालना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है और समाधान के सभी प्रयासों के बाद भी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान को दी जानी चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया ने अंत में कहा कि "एक शिक्षक उपकार का कार्य करता है। उसका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि : जिला अस्पतालों में बढ़ी जटिल ऑपरेशन की क्षमता

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सूरजपुर जिला चिकित्सालय में 6 सफल टोटल हिप रिप्लेसमेंट ऑपरेशन, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहर

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सूरजपुर जिला चिकित्सालय ने सफलतापूर्वक 6 टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ऑपरेशन कर यह साबित किया है कि अब जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा जैसी अत्याधुनिक सेवाएं भी जिला स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

इस उपलब्धि से न केवल सूरजपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे इलाज के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी तीनों की बचत होगी।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा और सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम के नेतृत्व में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू एवं डॉ. अमन गुप्ता ने इन जटिल शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास भगत और डॉ. अनिल कुमार ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि में नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। समर्पित टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के कारण सभी ऑपरेशन सफल रहे।

ऑपरेशन के बाद सभी मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना पर किए जा रहे निवेश का सकारात्मक परिणाम अब आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पतालों में टीएचआर जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की उपलब्धता से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे गंभीर अस्थि रोगों के उपचार की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने पूरी चिकित्सा टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के नागरिकों को अपने जिले में ही बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

SYNCHN 2026: लैब से मरीज तक स्वास्थ्य नवाचार पहुंचाने पर जोर, THSTI ने आयोजित किया तीसरा इंडस्ट्री बिजनेस मीट

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जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के अंतर्गत बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (BRIC) के संस्थान ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) ने आज फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर में अपना तीसरा वार्षिक इंडस्ट्री बिजनेस मीट SYNCHN 2026 (Synergistic Collaboration in Healthcare Innovation) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

इस सम्मेलन में वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित शोध को व्यावसायिक स्तर पर मरीजों तक पहुंचाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योग–शोध संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना था।

मुख्य अतिथि डॉ. किरण मजूमदार-शॉ, कार्यकारी अध्यक्ष, बायोकॉन, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि 21वीं सदी जीवविज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की होगी। उन्होंने कहा कि भारत में उत्कृष्ट वैज्ञानिक संस्थान हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वैज्ञानिक खोजों को बाजार और मरीजों तक पहुंचाना है। THSTI और SYNCHN जैसे मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

THSTI के कार्यकारी निदेशक प्रो. गणेशन कार्तिकेयन ने बताया कि 2024 में SYNCHN के पहले संस्करण में 13 लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 19 रणनीतिक समझौतों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि उसे सफल उत्पाद और उपचार में बदलना है।

उन्होंने THSTI के अत्याधुनिक मेडिकल रिसर्च सेंटर (MRC) और APEX (Accelerated Productisation and Epidemic Preparedness) पहल की भी जानकारी दी। MRC में प्रारंभिक चरण के क्लिनिकल ट्रायल, CAR-T सेल रिसर्च यूनिट और भारत की पहली Controlled Human Infection Studies (CHIS) सुविधा उपलब्ध है।

कार्यक्रम में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि CDSCO जैविक दवाओं (Biologics) के लिए नई नियामक व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें उद्योग विशेषज्ञों की भी भागीदारी होगी। वहीं नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने शोध को सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने के लिए उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग पर जोर दिया।

BIRAC के डॉ. मनीष दीवान ने Research Development and Innovation (RDI) Fund को स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए वित्तीय सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वहीं IVCA के अमित पांडेय ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 18% वार्षिक वृद्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल को तेज करने, जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और शोध से व्यवसाय तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने THSTI के वैज्ञानिकों के साथ खुली चर्चा की और संस्थान की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का दौरा भी किया।



आईपीसी और यूपीपीपीसी के बीच एमओयू, दवा एवं मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को मिलेगा नया बल

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उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और दवा क्षेत्र की नियामक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडियन फार्माकोपिया आयोग (IPC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता 14 जुलाई 2026 को ग्रेटर नोएडा में आयोजित YEIDA MedTech Investors Meet & Site Visit 2026 के दौरान किया गया।

इस साझेदारी का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में गुणवत्ता, नियामक अनुपालन, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

इस एमओयू के तहत प्रमुख पहलें:

  • दवा और मेडिकल डिवाइस उद्योग में गुणवत्ता मानकों और नियामक अनुपालन को मजबूत किया जाएगा।

  • इंडियन फार्माकोपिया, फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।

  • रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री–अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • एमएसएमई (MSME) इकाइयों को प्रतिकूल घटनाओं (Adverse Events) की रिपोर्टिंग के लिए डिजिटल टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • गुणवत्ता आश्वासन और पोस्ट-मार्केट सर्विलांस के माध्यम से मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

इस समझौते के माध्यम से IPC ने एक बार फिर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और मजबूत नियामक प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, यह पहल उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइस और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


गोंचा पर्व की तैयारियों में तुपकी निर्माण से बढ़ी आजीविका, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी बन रहा माध्यम

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महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक संबल की राशि, बस्तर की परंपरा और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रही नई ताकत

रायपुर- महतारी वंदन योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उनकी पारंपरिक आजीविकाओं और स्थानीय संस्कृति को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रदेश के बस्तर अंचल में इसका एक प्रेरक उदाहरण देखने को मिला है, जहां बस्तर जिला के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम मांझीगुड़ा की चंदा ने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग गोंचा पर्व में उपयोग होने वाली पारंपरिक तुपकी के निर्माण में किया है। इससे न केवल उनके परिवार की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। पर्व की तैयारियों के बीच चंदा अपने पति चिगडू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में तुपकी तैयार कर रही हैं। गोंचा पर्व के दौरान इन तुपकियों की विशेष मांग रहती है, जिससे परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

तुपकी बांस से बनाया जाने वाला बस्तर का पारंपरिक यंत्र है, जिसमें मलाग्नी वृक्ष के बीज (पेंगू) का उपयोग कर बन्दूक जैसी ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालु इसी तुपकी से पारंपरिक सलामी देते हैं। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है और आज भी पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

चंदा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्रत्येक माह मिलने वाली राशि ने उन्हें आर्थिक आत्मविश्वास दिया। इसी सहायता से उन्होंने तुपकी निर्माण के लिए आवश्यक बांस और अन्य सामग्री खरीदी। अब पूरा परिवार इस कार्य में जुटा है और गोंचा पर्व के दौरान अच्छी आय होने की उम्मीद है।

उनका कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपनी पारंपरिक कला एवं कौशल को आजीविका से जोड़ने का अवसर भी है। इससे परिवार की आय बढ़ रही है और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी हो रहा है।

गौरतलब है कि योजना के प्रारंभ से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को सीधे उनके खातों में उपलब्ध कराई जा चुकी है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

महासमुंद पुलिस को बड़ी सफलता: तीन बड़ी चोरियों का खुलासा, पारधी गिरोह समेत 12 आरोपी गिरफ्तार

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 महासमुंद : महासमुंद जिला पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चोरी की तीन बड़ी वारदातों का पर्दाफाश किया है। थाना महासमुंद, सिंघोड़ा और तुमगांव पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय पारधी गिरोह सहित कुल 12 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 107.009 ग्राम सोना और 747.730 ग्राम चांदी समेत कुल ₹21,39,640 मूल्य की संपत्ति बरामद की है।


पुलिस अधीक्षक (SP) प्रभात कुमार ने कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का खुलासा किया। एसपी ने बताया कि गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी है।

1. हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चोरी: मध्य प्रदेश के अनूपपुर से दबोचे गए 4 आरोपी

थाना महासमुंद अंतर्गत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बीते 18 मई की रात को हुई चोरी के मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पूछताछ में कबूला जुर्म: आरोपियों ने महासमुंद में दो स्थानों सहित बालोद, कोरबा और अन्य जिलों में भी चोरी की वारदातें करना स्वीकार किया है।

बरामदगी: इनके पास से चांदी के आभूषण, 5 मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई 2 मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं। इस मामले में 2 आरोपी अब भी फरार हैं।

2. सिंघोड़ा पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर 'पारधी गिरोह', 7 सदस्य गिरफ्तार

बीते 22 जून को सिंघोड़ा क्षेत्र में हुई नकबजनी के मामले में पुलिस ने बेहद सक्रिय और शातिर 'पारधी गिरोह' के 7 सदस्यों को दबोचने में सफलता पाई है।

अंतर-जिला नेटवर्क: जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महासमुंद के अलावा आरंग और सक्ती जिले के जैजैपुर में भी चोरियां की थीं।

बरामदगी: गिरोह के कब्जे से सोने-चांदी के जेवर और 3 मोटरसाइकिलें सहित लगभग ₹12.46 लाख का माल बरामद हुआ है।

ज्वेलर भी रडार पर: चोरी का माल खरीदने के आरोप में रायपुर के एक व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई है, जिस पर कार्रवाई की जा रही है।

3. तुमगांव: ग्राइंडर से ताला काटने वाला हाईटेक चोर राहुल साहू गिरफ्तार

थाना तुमगांव अंतर्गत ग्राम अछोली में 8-9 मार्च की दरम्यानी रात एक सूने मकान में हुई हाईटेक चोरी का भी पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने आरोपी राहुल उर्फ भोजदास साहू को गिरफ्तार किया है।

वारदात का तरीका: आरोपी ने एक हार्डवेयर दुकान से बकायदा ग्राइंडर मशीन खरीदी और उससे मकान का ताला काटकर लाखों के जेवरात उड़ा दिए थे।

बरामदगी: आरोपी से 53.34 ग्राम सोना, 468.230 ग्राम चांदी, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और ग्राइंडर मशीन बरामद की गई है, जिसकी कुल कीमत ₹7.26 लाख आंकी गई है। चोरी का माल खरीदने वाले रायपुर और महासमुंद के ज्वेलर्स के खिलाफ भी पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसा है।

"पुलिस की संयुक्त टीमों ने तकनीकी और मैदानी इनपुट के आधार पर इन गिरोहों को बेनकाब किया है। फरार आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और क्षेत्र के अन्य अनसुलझे मामलों में भी इनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।"

CG NEWS : अंधविश्वास का खौफनाक अंजाम: टोनही के शक में विधवा महिला की डंडे से पीट-पीटकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

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 जशपुर (पत्थलगांव)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से अंधविश्वास और क्रूरता की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ पत्थलगांव थाना क्षेत्र के डूंगरजोर गांव में जादू-टोना (टोनही) का आरोप लगाकर एक व्यक्ति ने अपनी ही विधवा बहू पर डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोटें आने के कारण महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात के चंद घंटों के भीतर ही आरोपी जेठ को गिरफ्तार कर लिया है।


पारिवारिक मौतों के लिए बहू को ठहराया जिम्मेदार

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, डूंगरजोर निवासी आरोपी सुखसिंह राठिया सोमवार सुबह अपने छोटे भाई की विधवा पत्नी (बहू) नवीना राठिया के घर पहुंचा। सुखसिंह को लंबे समय से संदेह था कि नवीना जादू-टोना (टोनही) करती है, और उसी की वजह से उसके परिवार के लोगों की अकाल मृत्यु हो रही है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।

विरोध करने पर डंडे से किया जानलेवा वार

जब नवीना ने सुखसिंह द्वारा लगाए गए इन झूठे आरोपों का कड़ा विरोध किया, तो आरोपी गुस्से से आगबबूला हो उठा। उसने आव देखा न ताव, पास में ही रखा एक भारी डंडा उठाया और नवीना के सिर पर लगातार कई वार कर दिए। हमला इतना घातक था कि अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोट के कारण नवीना की मौके पर ही मौत हो गई।

घर में छिपा था आरोपी, घेराबंदी कर दबोचा

घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर पत्थलगांव थाना पुलिस तत्काल बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर शव का पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

थाना प्रभारी का बयान:

"घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई थी। वारदात को अंजाम देकर आरोपी सुखसिंह राठिया अपने घर में छिपा हुआ था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।"

अपील: जादू-टोना या टोनही जैसी कुप्रथाएं केवल अंधविश्वास और कानूनी अपराध हैं। ऐसी किसी भी भ्रामक बातों में न आएं और कानून को अपने हाथ में न लें।

बास्तील दिवस पर फ्रांस हाई अलर्ट पर, 70,000 सुरक्षाकर्मी तैनात

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बास्तील दिवस (Bastille Day) के अवसर पर फ्रांस में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया गया है। देशभर में आयोजित समारोहों और फीफा विश्व कप 2026 से जुड़े प्रमुख आयोजनों को देखते हुए सरकार ने लगभग 70,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है।

सरकार का यह कदम बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और हाल के वैश्विक घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी और खराब मौसम की आशंका के कारण भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

पेरिस सहित कई प्रमुख शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल, सेना और आपातकालीन सेवाओं को तैनात किया गया है। सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और आयोजन स्थलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

फ्रांसीसी सरकार ने नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना अधिकारियों को दें। प्रशासन का कहना है कि इन व्यापक सुरक्षा इंतज़ामों का उद्देश्य राष्ट्रीय पर्व और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।


पहले वनडे में भारत की शानदार जीत, इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया

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भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में 1-0 की बढ़त बना ली है।

मैच में शुभमन गिल ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए 80 रनों की शानदार पारी खेली और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। वहीं अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑलराउंडर की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें खूब सराहा जा रहा है।

भारत के गेंदबाज़ों ने शुरुआत से ही इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाए रखा, जिसके कारण इंग्लिश टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी। इसके बाद भारतीय बल्लेबाज़ों ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाते हुए लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया।

इस जीत से भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उसकी नज़र सीरीज़ के अगले मुकाबले को जीतकर सीरीज़ अपने नाम करने पर होगी।



मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई तेज

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मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सैन्य हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच यह टकराव मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) के आसपास देखा जा रहा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी आई है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। कई देशों ने अपने जहाजों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है।

महासमुंद: चंडी मंदिर के पीछे जंगल में चल रहे जुआ फड़ पर पुलिस का छापा, 12 गिरफ्तार, 4 फरार

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 महासमुंद। जिले में जुए के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बागबाहरा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने ग्राम घुचापाली स्थित प्रसिद्ध चंडी मंदिर के पीछे जंगल में चल रहे एक बड़े जुआ फड़ पर दबिश देकर 12 जुआरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। वहीं, अंधेरे का फायदा उठाकर 4 आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।


मुखबिर की सूचना पर देर रात घेराबंदी पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि चंडी मंदिर के पीछे जंगल में बड़े पैमाने पर जुआ खिलाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम का गठन कर देर रात मौके पर घेराबंदी की गई। पुलिस की धमक देखते ही जुआरियों में हड़कंप मच गया और वे भागने लगे। हालांकि, मुस्तैद पुलिस जवानों ने घेराबंदी कर 12 आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया।

नकद समेत गाड़ियां और मोबाइल जब्त इस कार्रवाई में पुलिस ने जुआ फड़ से भारी मात्रा में मशरूका बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं:

  • नकद राशि: ₹3,60,100 (तीन लाख साठ हजार एक सौ रुपये)

  • वाहन: 5 मोटरसाइकिल और 2 कारें

  • अन्य सामान: 14 मोबाइल फोन, 52 पत्ती ताश और रोशनी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा एक सीएफएल बल्ब।

जब्त की गई इस पूरी संपत्ति की कुल कीमत ₹20,35,100 (बीस लाख पैंतीस हजार एक सौ रुपये) आंकी गई है।

कड़ी धाराओं में मामला दर्ज, भेजे गए जेल बागबाहरा पुलिस ने पकड़े गए सभी 12 आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2022 की धारा 3(2) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 (छोटे संगठित अपराध) के तहत अपराध दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार 4 अन्य आरोपियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और पुनर्वास नीति से मिली निर्णायक सफलता - मुख्यमंत्री

दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याण की योजनाएं, शासन पर बढ़ा लोगों का विश्वास - मुख्यमंत्री साय

बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री

बस्तर रोडमैप 2.0 के माध्यम से पर्यटन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के समग्र विकास पर विशेष फोकस - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सल हिंसा के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना किया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा बस्तर की जनता के विश्वास और सहयोग से प्रदेश इस चुनौती से निर्णायक रूप से मुक्त होकर शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनेक वर्षों के सतत प्रयासों, सुनियोजित रणनीति, सुरक्षा बलों के पराक्रम तथा आम नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इकाइयों तथा अभियान में सहभागी सभी सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए समन्वित सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति अपनाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की सतत समीक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को अपेक्षित गति मिली।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अनुरूप सुरक्षा अभियानों को गति देने के साथ-साथ विकास कार्यों का भी समानांतर विस्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अभियान की नियमित समीक्षा की। स्वयं उन्होंने बस्तर क्षेत्र का लगातार दौरा कर सुरक्षा बलों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न गांवों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समाज के उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक और मानवीय नीति लागू की गई।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति का अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहां शासन की योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से पहुंचें, ताकि लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन आए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए 'बस्तर रोडमैप 2.0' तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 'नियद नेल्ला नार 2.0' तथा 'बस्तर मुन्ने अभियान' के अंतर्गत 31 योजनाओं एवं 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे 5 हजार 542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शासन की सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंचेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को अब बहुआयामी सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन्हें 'शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित करते हुए नागरिक सुविधाओं, जनसेवाओं और आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत बस्तर के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। इससे नागरिकों को समयबद्ध एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार' योजना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों में 17 विभागों की 43 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। इससे ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा प्रशासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 6 लाख 79 हजार परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। बस्तर संभाग में 17 लाख लोगों के जनधन खाते खोले जा चुके हैं।  24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं।  22 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। 1 लाख 18 हजार लोगों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। साथ ही 3 लाख 89 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में 1 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि  बस्तर संभाग के 240 नक्सल प्रभावित गांवों में पूर्व में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 विद्यालयों का पुनः संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में आधारभूत अधोसंरचना के विस्तार को भी तेज गति से आगे बढ़ा रही है। 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर कार्य जारी है, जिससे बस्तर की रेल संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

उन्होंने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है। यह परियोजना बस्तर को देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि खेल एवं संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजन किए गए। इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता हुई, जिससे सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी को नई मजबूती मिली।

उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव के नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति के माध्यम से बस्तर आज विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. ममता साहू ने संभाली छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की कमान

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महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त डॉ. ममता साहू ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया।

शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में उन्होंने कार्यभार संभालते हुए महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण, उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण तथा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. ममता साहू ने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और सभी से समर्पण, पारदर्शिता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। उन्होंने आयोग के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण कर कार्यालयीन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनकी शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण तथा उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग महिलाओं के हितों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया, नगर निगम रायपुर के पार्षद महेश ध्रुव, दुर्गेश राव, रजनी शेंगडे, जितेन्द्र साहू, कृष्णा साहू, सीमा डहरिया, गीतेश साहू सहित आयोग के सचिव, सहायक संचालक, लेखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति,नीति बनाने समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत आने वाले विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के हित में एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर, इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के निर्धारण के लिए राज्य शासन द्वारा सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में 07 सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है, जिसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, पूर्व में इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। लेकिन शिक्षाकर्मी पद समाप्त होने के बाद जल संसाधन विभाग ने 13 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी कर सीआईडीसी ((CIDC) के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया था। सीआईडीसी में पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के कई महत्वपूर्ण प्रकरण लंबे समय से लंबित हो गए थे। इसके चलते आश्रित परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति गठित, 1 माह में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता, उच्च न्यायालय के निर्देशों और कर्मचारी हित को सर्वाेपरि रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। गठित की गई 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को सौंपनी होगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट (मंत्रि-परिषद्) से अंतिम अनुमोदन लिया जाएगा, जिसके बाद नई नीति को विधिवत अधिसूचित कर दिया जाएगा।

शासन का मुख्य उद्देश्य

राज्य शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इस नई नीति के लागू होने से वर्षों से लंबित प्रकरणों का तेजी से निपटारा होगा और पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार व आर्थिक संबल मिल सकेगा।

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