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स्वदेशी फैशन शो में आत्मसमर्पित महिलाओं की स्वैच्छिक भागीदारी, बढ़ा आत्मविश्वास

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सुकमा की 9 पुनर्वासित महिलाओं ने स्वेच्छा से किया रैंप वॉक

रायपुर- छत्तीसगढ़ में हाथकरघा और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित स्वदेशी फैशन शो में समाज की मुख्यधारा में लौट रही आत्मसमर्पित महिलाओं की सशक्त भागीदारी देखने को मिली। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने अपनी स्वेच्छा से बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन परिधान पहनकर रैंप वॉक किया।

7 अगस्त को हुआ था आयोजन

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस (7 अगस्त) के अवसर पर रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के हाथकरघा उत्पादों का प्रचार- प्रसार करना और बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

विभाग का स्पष्टीकरण- पूर्णतः स्वैच्छिक भागीदारी

ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुकमा जिला प्रशासन द्वारा 19 जुलाई 2026 को इन महिलाओं की सहभागिता की जानकारी दी गई थी और सभी 9 चयनित महिलाओं ने इसके लिए अपनी लिखित सहमति दी थी। महिलाओं ने बिना किसी दबाव के, स्वेच्छा से इस आयोजन में भाग लिया। विभाग के अनुसार यह पहल पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है।

160 हितग्राहियों को मिलेगा निःशुल्क हाथकरघा प्रशिक्षण

महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के लिए बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों (प्रत्येक केंद्र से 20) को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का नया प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 54.40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क नए करघे और आवश्यक उपकरण भी प्रदान किए जाएंगे, ताकि वे घर बैठे ही रोजगार और आय प्राप्त कर सकें।

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा कि पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

होम थिएटर ब्लास्ट केस में आरोपी को उम्रकैद, शादी के तोहफे में छिपाया था बम

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प्रेम संबंध के चलते प्रेमिका के पति को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश, धमाका होते ही मची थी सनसनी

रायपुर- छत्तीसगढ़ के चर्चित होम थिएटर ब्लास्ट केस में अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी ने कथित तौर पर अपनी प्रेमिका के पति को रास्ते से हटाने के लिए शादी के तोहफे के रूप में एक ऐसा होम थिएटर भेजा था, जिसमें विस्फोटक छिपाया गया था। दूल्हे ने जब शादी के बाद मिले इस तोहफे को चलाने की कोशिश की, तभी जोरदार धमाका हो गया और उसकी मौत हो गई।

शादी का तोहफा बना मौत का सामान

मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपी ने सामान्य शादी के तोहफे का सहारा लिया। होम थिएटर के अंदर बम लगाया गया था, ताकि उसे चालू करते ही विस्फोट हो जाए। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।

प्रेम संबंध से जुड़ी थी साजिश

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी का मृतक की पत्नी से प्रेम संबंध था। शादी के बाद जब महिला का पति उसके रास्ते में आया तो आरोपी ने उसे हटाने की साजिश रची। इसी योजना के तहत शादी में होम थिएटर को तोहफे के तौर पर भेजा गया था।

धमाके ने खोला साजिश का राज

होम थिएटर में विस्फोट के बाद पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच में यह सामने आया कि घटना महज हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या की साजिश थी। पुलिस की जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई और मामला अदालत तक पहुंचा।

अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा

मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद इस चर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन हुआ। घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि निजी रिश्तों और प्रतिशोध की भावना किस तरह एक खतरनाक अपराध का रूप ले सकती है।

मामले ने पूरे प्रदेश में मचाई थी सनसनी

शादी के तोहफे में बम रखकर हत्या की साजिश का यह मामला सामने आने के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में इसकी चर्चा हुई थी। सामान्य दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान को हत्या के हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने से पुलिस जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे।

अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। यह मामला इस बात की भी मिसाल है कि अपराध को अंजाम देने के लिए अपनाई गई कितनी भी शातिर योजना क्यों न हो, जांच एजेंसियों की पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपराधी तक पहुंचा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ NEET UG काउंसलिंग में आज अहम दिन, चॉइस फिलिंग और लॉकिंग की अंतिम तारीख

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MBBS-BDS में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी आज रात तक दर्ज और लॉक करें अपनी पसंद, 18 अगस्त को जारी होगी मेरिट लिस्ट

रायपुर- छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 काउंसलिंग के राउंड-1 में शामिल अभ्यर्थियों के लिए आज, 17 अगस्त, बेहद महत्वपूर्ण दिन है। मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया आज रात तक पूरी करनी होगी। आधिकारिक काउंसलिंग पोर्टल पर राउंड-1 के लिए MBBS और BDS प्रवेश की प्रक्रिया जारी है।

16 अगस्त को खत्म हुआ रजिस्ट्रेशन

राउंड-1 काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान की अंतिम तारीख 16 अगस्त 2026 थी। अब 17 अगस्त को अभ्यर्थियों के लिए अपने पसंदीदा मेडिकल और डेंटल कॉलेजों तथा पाठ्यक्रमों का चयन कर उसे लॉक करने का अंतिम अवसर है।

18 अगस्त को आएगी मेरिट लिस्ट

काउंसलिंग कार्यक्रम के अनुसार 18 अगस्त को प्रोविजनल मेरिट लिस्ट और NRI एलिजिबल लिस्ट जारी की जाएगी। इसके बाद सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और राउंड-1 सीट अलॉटमेंट से संबंधित परिणाम 19-20 अगस्त के आसपास जारी होने की प्रक्रिया में है।

MBBS और BDS में प्रवेश का मौका

यह काउंसलिंग छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जा रही है। NEET UG 2026 में पात्र अभ्यर्थियों को अपनी रैंक, श्रेणी, उपलब्ध सीटों और पसंद के आधार पर कॉलेजों का चयन करना होगा।

चॉइस लॉक करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

अभ्यर्थियों को कॉलेजों की पसंद भरते समय अपनी NEET रैंक, कैटेगरी, उपलब्ध सीटें और कॉलेज की प्राथमिकता को ध्यान में रखना चाहिए। पसंद भरने के बाद उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर लॉक करना जरूरी है। अंतिम समय में तकनीकी परेशानी से बचने के लिए प्रक्रिया समय रहते पूरी करना बेहतर रहेगा।

अभ्यर्थी काउंसलिंग से संबंधित नोटिस, सीट मैट्रिक्स और आगे की जानकारी छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग के आधिकारिक काउंसलिंग पोर्टल पर देख सकते हैं।

अभ्यर्थियों के लिए जरूरी तारीखें

  • रजिस्ट्रेशन/फीस भुगतान: 9 से 16 अगस्त 2026

  • चॉइस फिलिंग एवं लॉकिंग: 9 से 17 अगस्त 2026

  • मेरिट लिस्ट/NRI एलिजिबल लिस्ट: 18 अगस्त 2026

  • राउंड-1 सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया: 19 अगस्त से आगे

  • अलॉटेड सीट पर प्रवेश/स्क्रूटिनी: अगले चरण में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार

अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे आज ही अपनी पसंद भरकर लॉक कर दें और आगे की प्रक्रिया के लिए आधिकारिक पोर्टल पर लगातार अपडेट चेक करते रहें।

शिक्षकों की कमी से छात्राओं का फूटा आक्रोश, स्कूल में जड़ा ताला

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पांच प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित, छात्राओं के साथ अभिभावक भी उतरे विरोध में

धमतरी- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बारना स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। लंबे समय से पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया।

पांच विषयों की पढ़ाई पर संकट

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, रसायन, भूगोल और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं और उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा और भविष्य की तैयारी के लिए विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षकों के अभाव में उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने और कठिन विषयों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश में भी प्रदर्शन पर डटे रहे विद्यार्थी और ग्रामीण

शिक्षकों की मांग को लेकर विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण स्कूल परिसर पहुंचे। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

कई बार दे चुके हैं आवेदन

ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पहले भी संबंधित अधिकारियों को आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विद्यार्थियों और अभिभावकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है।

पढ़ाई के साथ भविष्य की चिंता

विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक नहीं होने का असर केवल वर्तमान पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर भी पड़ रहा है। खासकर उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या बन गई है।

अभिभावकों ने भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में यदि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होना स्वाभाविक है।

प्रशासन से तत्काल नियुक्ति की मांग

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल में खाली पदों पर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पढ़ाई सुचारु करने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक समस्या को लेकर उनका विरोध जारी रह सकता है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के कई हिस्सों में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों और ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर लगा ब्रेक, जुलाई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री दोनों उम्मीद से कमजोर; घरेलू मांग में सुस्ती से बढ़ा दबाव

बीजिंग- दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के लिए जुलाई के आर्थिक आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई, जो जून में 5.3 प्रतिशत थी। यह बाजार के 4.8 प्रतिशत के अनुमान से भी कम रही। वहीं, खुदरा बिक्री में महज 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने 1.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।

घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी चुनौती

आंकड़ों से संकेत मिलता है कि चीन की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग की कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता खर्च की रफ्तार धीमी हुई है और संपत्ति क्षेत्र में जारी संकट ने लोगों के भरोसे और खर्च करने की क्षमता पर दबाव डाला है। जुलाई में ऑटो बिक्री लगातार दसवें महीने घटी, हालांकि गिरावट की रफ्तार कुछ कम हुई।

निवेश में भी गिरावट

अर्थव्यवस्था के लिए निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक नहीं रही। 2026 के पहले सात महीनों में फिक्स्ड-एसेट निवेश में 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जनवरी-जून की अवधि में यह गिरावट 5.7 प्रतिशत थी। इससे चीन में निवेश गतिविधियों की कमजोरी और स्पष्ट होती है।

मौसम और वैश्विक परिस्थितियों का भी असर

जुलाई में चीन के कई हिस्सों में खराब मौसम और तीन तूफानों ने औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित किया। पूर्वी और दक्षिणी चीन के विनिर्माण केंद्रों में इसका असर देखने को मिला। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ, मध्य-पूर्व में संघर्ष और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं भी चीन की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

निर्यात ने संभाला मोर्चा, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर

चीन के लिए राहत की बात यह है कि वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग से उसके निर्यात को मजबूती मिल रही है। इससे औद्योगिक क्षेत्र को कुछ सहारा मिला है। लेकिन मजबूत निर्यात के बावजूद घरेलू खपत और निवेश की सुस्ती आर्थिक रिकवरी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकार पर बढ़ा आर्थिक प्रोत्साहन का दबाव

कमजोर आंकड़ों के बाद चीन की सरकार पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों ने राजकोषीय खर्च तेज करने और घरेलू मांग को मजबूत करने के लिए समय पर नीतिगत कदम उठाने का संकेत दिया है, हालांकि अभी तक किसी बड़े नए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा नहीं हुई है।

जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि चीन की आर्थिक रिकवरी अभी भी पूरी तरह मजबूत आधार पर नहीं पहुंची है। घरेलू उपभोग, रियल एस्टेट और निवेश में सुधार आने वाले महीनों में चीन की विकास गति के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे।

भारत में सोयाबीन तेल का रिकॉर्ड आयात संभव, रूस-यूक्रेन युद्ध से बदला खाद्य तेल बाजार

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अगस्त में 6.2 लाख टन तक पहुंच सकता है सोयाबीन तेल का आयात, सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से बढ़ी मांग

नई दिल्ली- रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अब भारत के खाद्य तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। भारत में अगस्त 2026 के दौरान सोयाबीन तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। व्यापारियों के मुताबिक अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है, जो चालू मार्केटिंग वर्ष के मासिक औसत से लगभग 46 प्रतिशत अधिक होगा।

सूरजमुखी तेल की सप्लाई में बड़ी गिरावट

रूस और यूक्रेन भारत के लिए सूरजमुखी तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। युद्ध के कारण ब्लैक सी क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की खेप प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत में अगस्त के दौरान सूरजमुखी तेल का आयात घटकर करीब 1.80 लाख टन रहने का अनुमान है, जो फरवरी 2026 के बाद सबसे निचला स्तर हो सकता है।

सूरजमुखी तेल की उपलब्धता कम होने के कारण खासकर दक्षिण भारत के खरीदार सोयाबीन तेल की ओर रुख कर रहे हैं। देश के पश्चिमी और दक्षिणी तटों के बंदरगाहों पर सोयाबीन तेल की खेप पहुंच रही है।

सोयाबीन तेल की कीमत बनी आकर्षक

सोयाबीन तेल और पाम तेल के बीच कीमत का अंतर भी कम हुआ है। पहले सोयाबीन तेल पर पाम तेल की तुलना में 100 डॉलर प्रति टन से अधिक का प्रीमियम था, जो अब घटकर करीब 50 डॉलर प्रति टन रह गया है। इस वजह से आयातकों के लिए सोयाबीन तेल अपेक्षाकृत आकर्षक विकल्प बन गया है।

सितंबर से दिसंबर के लिए भी बड़ी खरीद

भारत ने सितंबर से दिसंबर के बीच डिलीवरी के लिए पहले ही करीब 14 लाख टन सोयाबीन तेल की खरीद कर ली है। अर्जेंटीना और ब्राजील भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं। इसके अलावा चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्किये से भी सोयाबीन तेल की खरीद की जा रही है।

त्योहारी सीजन से भी बढ़ी मांग

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य तेल की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। इससे पहले ही रिफाइनरियों और आयातकों ने अपने स्टॉक को मजबूत करना शुरू कर दिया है। जुलाई में भारत का कुल खाद्य तेल आयात 1.48 मिलियन टन रहा, जो सितंबर 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था। इसी दौरान सोयाबीन तेल का आयात 31 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.99 लाख टन पहुंच गया था।

घरेलू उत्पादन को लेकर भी चिंता

देश में घरेलू तिलहन उत्पादन को लेकर भी बाजार में कुछ चिंता बनी हुई है। एल नीनो से जुड़ी आशंकाएं घरेलू तिलहन उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में आयात पर निर्भरता बढ़ने की संभावना भी बाजार में सोयाबीन तेल की मांग को समर्थन दे रही है।

आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

सोयाबीन तेल की बढ़ती उपलब्धता से बाजार में सूरजमुखी तेल की कमी की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात लागत, रुपये की विनिमय दर और घरेलू मांग के आधार पर आने वाले दिनों में खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारतीय खाद्य तेल बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

E20 पेट्रोल पर बड़ा बयान: CEA ने E10 को फिर उपलब्ध कराने की वकालत की

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पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प देने का सुझाव, E20 को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया बयान

नई दिल्ली- देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल, जैसे E10, को फिर से उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए। उनका सुझाव है कि E10 को E20 के साथ विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराया जा सकता है।

पुराने वाहनों को ध्यान में रखने की जरूरत

नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी ने अपने लेख में कहा कि देश में बड़ी संख्या में पुराने वाहन अभी भी सड़कों पर चल रहे हैं। खासतौर पर पुराने दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ ईंधन सिस्टम और रबर कंपोनेंट अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे। ऐसे में पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल वाला ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने से वाहन मालिकों की चिंताओं को कम किया जा सकता है।

E10 और E20 में क्या अंतर है?

E10 पेट्रोल में करीब 10 प्रतिशत एथेनॉल और E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है। भारत ने एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के तहत E20 को बड़े पैमाने पर अपनाया है। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है।

माइलेज को लेकर भी चल रही है बहस

E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच माइलेज और वाहन के प्रदर्शन से जुड़ी चिंताएं लगातार चर्चा में हैं। सरकार ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, वाहन का रखरखाव, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनिंग जैसे कई कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

वहीं, CEA के सुझाव में पुराने वाहनों के लिए अलग ईंधन विकल्प रखने पर जोर दिया गया है, ताकि E20 नीति को जारी रखते हुए पुराने वाहनों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सके।

सरकार की E20 नीति पर क्या है स्थिति?

फिलहाल यह E10 को दोबारा अनिवार्य रूप से लागू करने का सरकारी फैसला नहीं है, बल्कि मुख्य आर्थिक सलाहकार की ओर से दिया गया सुझाव है। सरकार पहले E20 की सुरक्षा और इसके आर्थिक व पर्यावरणीय लाभों को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है। इसलिए E10 को फिर से पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराने के लिए आगे कोई आधिकारिक निर्णय आता है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह सुझाव?

यदि E10 को E20 के साथ विकल्प के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, तो पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने का विकल्प मिल सकता है। वहीं, नए और E20 के अनुकूल वाहनों के लिए E20 का इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है।

इससे सरकार की एथेनॉल नीति और पुराने वाहनों से जुड़े उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाने का रास्ता निकल सकता है।

तारापीठ होटल में भीषण आग, 7 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

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चार मंजिला होटल में तड़के लगी आग से मचा हड़कंप, सोते हुए श्रद्धालु धुएं में फंसे; राहत-बचाव अभियान जारी

तारापीठ- पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारापीठ में सोमवार तड़के एक होटल में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में तीर्थयात्री भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सुबह करीब 5 बजे लगी आग

पुलिस के अनुसार, तारापीठ मंदिर के पास स्थित एक चार मंजिला होटल में सुबह करीब 5 बजे आग लगने की सूचना मिली। आग उस समय लगी जब होटल में ठहरे अधिकांश लोग सो रहे थे। आग सबसे पहले निचले हिस्से में लगी और देखते ही देखते धुआं और लपटें ऊपर की मंजिलों तक फैल गईं।

बताया गया कि होटल की संरचना में कांच के पैनल और बंद दरवाजे होने के कारण बाहर से आग और धुआं आसानी से दिखाई नहीं दे रहा था। इसके चलते अंदर मौजूद लोगों को समय रहते खतरे का अंदाजा लगाने में मुश्किल हुई।

22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ होटल के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। पुलिस के मुताबिक 22 लोगों को सुरक्षित बचाया गया, जबकि कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

घायलों को इलाज के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।

आग लगने के कारणों की जांच

प्रारंभिक जानकारी में आग लगने की वजह बिजली से जुड़ी खराबी या शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, आग का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। अधिकारियों की ओर से होटल में मौजूद अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है।

घटना के बाद होटल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने कथित सुरक्षा संबंधी लापरवाही के मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।

तीर्थयात्रियों में दहशत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

तारापीठ प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में होटल में हुए इस हादसे ने तीर्थस्थलों के आसपास बने होटल और लॉज में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की ओर से घटना की जांच की जा रही है। हादसे के बाद इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं और घायलों के बेहतर इलाज पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित है।

नोट: शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 7 बताई गई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 8 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। इसलिए खबर प्रकाशित करते समय नवीनतम आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि करना जरूरी है।

अशोक धाम मंदिर में भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत; 14 घायल

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श्रावण के तीसरे सोमवार को उमड़ी थी भारी भीड़, बिजली के तार गिरने की अफवाह के बाद मची अफरा-तफरी

लखीसराय- बिहार के लखीसराय जिले के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। श्रावण के तीसरे सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर के पास भगदड़ मच गई, जिसमें 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए हैं।

भारी भीड़ के बीच बिगड़े हालात

बताया जा रहा है कि सुबह मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। इसी दौरान दो ट्रेनों के लगातार पहुंचने से भीड़ अचानक बढ़ गई। भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। अधिकारियों के अनुसार, बिजली का खंभा गिरने या करंट फैलने की अफवाह के बाद लोगों में घबराहट बढ़ी, जिसके चलते भगदड़ की स्थिति पैदा हुई। हादसे के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

सभी मृतक महिलाएं बताई जा रहीं

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी सात श्रद्धालु महिलाएं थीं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। प्रशासन ने घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की जांच की जा रही है। इस हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह हादसा ऐसे समय हुआ जब सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर अशोक धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे थे। घटना से इलाके में शोक का माहौल है।

भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी थाईलैंड रवाना

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18 से 31 अगस्त तक होगा 15वां संस्करण, जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों का होगा संयुक्त प्रशिक्षण

नई दिल्ली- भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV (2026)’ में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी आज थाईलैंड के लिए रवाना हुई। इस अभ्यास का आयोजन 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के विभावादी रंगसित कैंप, सूरत थानी में किया जाएगा। इस अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित हुआ था।

अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी की 85-85 सैनिकों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के जवान शामिल हैं, जबकि रॉयल थाई आर्मी की टुकड़ी 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 3वीं बटालियन के सैनिकों से बनी है।

जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में होगा प्रशिक्षण

मैत्री-XV के दौरान कंपनी स्तर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभ्यास का मुख्य फोकस जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने की क्षमता विकसित करना होगा।

यह प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत आतंकवाद विरोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।

फील्ड एक्सरसाइज से लेकर आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान फील्ड एक्सरसाइज, युद्ध संबंधी चर्चा, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंत में एक वैधता परीक्षण अभ्यास (Validation Exercise) आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियानों से जुड़े अपने परिचालन अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, संयुक्त अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

2006 में हुई थी अभ्यास की शुरुआत

‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। यह भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और दोनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।

अभ्यास के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, आपसी समझ और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।

भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन, 1,943 करोड़ रुपये का हुआ करार

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General Atomics के साथ रक्षा मंत्रालय ने किया समझौता, हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता होगी मजबूत

नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian High-Altitude Long-Endurance (HALE) Remotely Piloted Aircraft Systems (RPAS) को 30 महीने की अवधि के लिए लीज पर लेने हेतु General Atomics Aeronautical Systems Inc. (GA-ASI) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार की कुल कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये है।

यह अनुबंध 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत

MQ-9B Sea Guardian HALE RPAS अत्याधुनिक प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड से लैस हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness (MDA) यानी समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी और जानकारी जुटाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

ये सिस्टम समुद्री क्षेत्र के विशाल इलाकों में लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर भारत की नजर और मजबूत होगी तथा किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर समय रहते निगरानी एवं प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।

यह करार भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका नौसेना का 8वां EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न

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विशेषज्ञों ने IED, बारूदी सुरंग निष्क्रिय करने और अंडरवॉटर सिस्टम के इस्तेमाल पर साझा किए अनुभव

कोच्चि- भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच आयोजित 8वां Explosive Ordnance Disposal (EOD) अभ्यास 2026 दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं की टीमों ने गहन पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान और विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस द्विपक्षीय अभ्यास ने EOD अभियानों के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। विषय विशेषज्ञों के बीच हुए आदान-प्रदान में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से उत्पन्न वास्तविक समय के खतरों, विस्फोटकों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रियाओं, बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने तथा मानवरहित अंडरवॉटर सिस्टम के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

डाइविंग ऑपरेशन में भी हुआ संयुक्त प्रशिक्षण

अभ्यास के क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में डाइविंग से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें डूबे हुए जहाजों या संरचनाओं का पता लगाना और उन्हें निकालना, विशेषज्ञ उपकरणों का इस्तेमाल तथा स्लिदरिंग ऑपरेशन शामिल रहे।

संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों नौसेनाओं की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और तकनीकी कौशल में वृद्धि हुई। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच बेहतर आपसी समझ और परिचालन क्षमता विकसित करने में भी मदद मिली।

अभ्यास का सफल समापन भारत और अमेरिका की नौसेनाओं की विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल, सहयोग और आपसी क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से की मुलाकात

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नई दिल्ली- भारतीय रक्षा संपदा सेवा (Indian Defence Estates Service) के 2025 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। ये अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान (NIDEM) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने देशभर में रक्षा भूमि के प्रबंधन और छावनी बोर्डों के नगर प्रशासन में रक्षा संपदा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

‘सेवा भाव’ के साथ काम करें अधिकारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने में लोक सेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सिविल सेवकों से पूरे ‘सेवा भाव’ के साथ लोगों के अनुकूल तरीके से सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को नियमित रूप से आम लोगों से मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। इससे उनकी वास्तविक चिंताओं को समझने के साथ-साथ लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास तथा आश्वासन की भावना मजबूत होगी।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान

रक्षा मंत्री ने लोक सेवकों और युवा अधिकारियों से अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों को आध्यात्मिक मार्ग अपनाने और नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी।

इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

कतर से भारत भेजें पैसे, अब UPI से तुरंत पहुंचेगी रकम

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कतर पोस्ट के आउटलेट से सीधे UPI-सक्षम भारतीय बैंक खातों में भेजी जा सकेगी रकम

दोहा- कतर में रहने वाले भारतीयों के लिए बड़ी सुविधा शुरू हुई है। PosTransfer powered by UPI के जरिए अब कतर पोस्ट के आउटलेट से भारत में UPI-सक्षम बैंक खातों में सीधे पैसे भेजे जा सकेंगे। यह सेवा 15 अगस्त 2026, भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कतर में शुरू की गई।

यह सेवा कतर पोस्ट, इंडिया पोस्ट, यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के इंटरकनेक्शन प्लेटफॉर्म (UPU-IP) और NPCI International Payments Limited (NIPL) के सहयोग से विकसित की गई है। इसका उद्देश्य डाक नेटवर्क की व्यापक पहुंच को भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure) से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण को आसान और सुविधाजनक बनाना है।

कतर पोस्ट से सीधे UPI खाते में पहुंचेगी रकम

इस सुविधा के तहत ग्राहक कतर पोस्ट के किसी आउटलेट पर जाकर भारत में पैसे भेज सकते हैं। इसके लिए उन्हें भारत में पैसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति की UPI ID और आवश्यक पहचान संबंधी जानकारी देनी होगी। लाभार्थी को अपने UPI ऐप के माध्यम से विदेशी धनराशि प्राप्त करने की सुविधा सक्रिय करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद भेजी गई रकम लाभार्थी के UPI-सक्षम बैंक खाते में तुरंत जमा हो जाएगी।

10 से 4,000 कतर रियाल तक भेज सकेंगे

इस सेवा के तहत एक लेनदेन में QAR 10 से QAR 4,000 तक की राशि भेजी जा सकती है। हालांकि, प्रति लेनदेन अधिकतम सीमा ₹1 लाख के समतुल्य होगी। प्रत्येक लेनदेन पर QAR 15 का फ्लैट सेवा शुल्क निर्धारित किया गया है।

कतर में रह रहे भारतीयों को होगा बड़ा फायदा

कतर में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है। ऐसे में यह सुविधा भारत में अपने परिवारों और प्रियजनों को पैसे भेजने वाले लोगों के लिए एक विश्वसनीय, आसान और किफायती माध्यम उपलब्ध कराएगी। डाक नेटवर्क की पहुंच और UPI की डिजिटल क्षमता के मेल से दोनों देशों के बीच वित्तीय संपर्क को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

स्वतंत्रता दिवस पर हुआ सेवा का शुभारंभ

सेवा के शुभारंभ के अवसर पर कतर में भारतीय दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स संदीप कुमार ने दोहा के LuLu Mall स्थित कतर पोस्ट आउटलेट का दौरा किया और संबंधित हितधारकों से बातचीत की। इस अवसर पर भारत-कतर के बीच डिजिटल वित्तीय संपर्क और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने में इस पहल के महत्व को रेखांकित किया गया।

अन्य देशों में भी शुरू होंगे नए कॉरिडोर

UPU-IP को भारत के UPI इकोसिस्टम से जोड़कर PosTransfer powered by UPI को अंतरराष्ट्रीय आवक धन प्रेषण सेवा के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य भागीदार देशों के डाक ऑपरेटरों के माध्यम से भारत में UPI-सक्षम बैंक खातों तक सुरक्षित और सरल तरीके से धनराशि पहुंचाना है।

इंडिया पोस्ट अन्य देशों के डाक ऑपरेटरों के साथ भी ऐसे नए PosTransfer powered by UPI कॉरिडोर शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत में पैसे भेजने की सुविधा और मजबूत होने की उम्मीद है।

केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

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तिरुवरुर- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तिरुवरुर स्थित केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय (CUTN) के 11वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने के लिए बधाई दी।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज तथा विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण, दृढ़ता और संघर्ष का उत्सव है।

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों ने अपने बच्चों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक वर्तमान सुख-सुविधाओं का त्याग किया है।

थिरुवरुर ज्ञान, आध्यात्म और कला की धरती

उपराष्ट्रपति ने थिरुवरुर के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान त्यागराज के भव्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वता और कला की उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। जब संस्कृति, शिक्षा और मूल्य एक साथ विकसित होते हैं, तभी वास्तविक महानता का निर्माण होता है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर देखते हैं कि पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं डिग्री और पदक प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य बदलाव बताया।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों के आधार पर नहीं मापा जा सकता।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि व्यक्ति स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, मिलकर काम करने और जीवनभर सीखते रहने में कितना सक्षम है।

उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय द्वारा बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा पर दिए जा रहे जोर की सराहना की।

परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक जरूरी

संसद द्वारा हाल ही में पारित लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड सरकार ने भी इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था और तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने उस पर तुरंत हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद वह कानून बन सका।

उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज में गलत कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत कदम उठाने पर जोर दिया।

विद्यार्थी ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें

उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे “ज्ञान के उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता, अनुकरण करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक और अनुयायी बनने के बजाय नेता बनें।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यों में “राष्ट्र प्रथम—राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोच्च स्थान देने और अपने ज्ञान, कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील

उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों तथा नशे के प्रसार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और पूरे समाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। युवाओं को इस खतरे से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से “नशे को ना कहें—Say No to Drugs” का संदेश अपनाने और अपने मित्रों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

1,103 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 50 को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 50 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कुल स्नातकों में 616 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 50 स्वर्ण पदकों में से 37 पदक छात्राओं ने हासिल किए।

समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, नागपट्टिनम से लोकसभा सांसद थिरु वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन, कुलपति सीनियर प्रो. सुलोचना शेखर, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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