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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक

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'नियद नेल्लानार' मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार

जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान होगा प्रारंभ

जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' इसी सोच का विस्तार है।

'नियद नेल्लानार' की सफलता से प्रेरित नई पहल

वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित 'नियद नेल्लानार' योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की।

योजना की सफलता को देखते हुए इसे 'नियद नेल्लानार 2.0' के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।

सुशासन से संतृप्ति की ओर

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी।

31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है।

इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं।इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है।

CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी।

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत 'सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड' विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी।

तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन

अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी।

दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे।

इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' और 'विकसित छत्तीसगढ़' का संकल्प साकार होगा। यह अभियान प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए विकास की यात्रा को और अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाएगा।

शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता, हाईकोर्ट ने कैदी को NEET परीक्षा देने की दी अनुमति

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए एक विचाराधीन कैदी को NEET-2026 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित अभ्यर्थी को 21 जून को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में पुलिस सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र ले जाया जाए, ताकि उसकी शिक्षा प्रभावित न हो और सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह अभी विचाराधीन कैदी है और उसके खिलाफ मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में उसे शिक्षा और भविष्य निर्माण के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है, विशेषकर तब जब वह अभी दोषी साबित नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि परीक्षा के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं तथा अभ्यर्थी को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया दोनों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।

इस फैसले को शिक्षा के अधिकार और न्यायिक संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो किसी कारणवश न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखना चाहते हैं।

NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला शिक्षा के महत्व और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेत खनन की रंजिश ने ली तीन जानें, भाजपा नेता को जिंदा जलाने का आरोप

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कोरिया- छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध रेत खनन को लेकर चल रही पुरानी दुश्मनी ने मंगलवार रात खूनी रूप ले लिया। कथित तौर पर सुनियोजित हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक स्थानीय भाजपा नेता भी शामिल हैं, जिन्हें हमलावरों द्वारा उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी समेत जिंदा जलाए जाने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना दो प्रभावशाली परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे रेत खनन विवाद से जुड़ी हो सकती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ितों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसके बाद मारपीट और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है तथा आरोपियों की तलाश में विशेष टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

इस सनसनीखेज हत्याकांड ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन इस तरह की हिंसक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। 

मुख्य बिंदु:

  • कोरिया जिले में रेत खनन विवाद ने लिया हिंसक रूप।

  • तीन लोगों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

  • भाजपा नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाने का आरोप।

  • पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला माना।

  • पुरानी रंजिश और खनन विवाद की जांच जारी।

UPSC को मिला नया कार्यालय, बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए बढ़ाया गया बुनियादी ढांचा

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नई दिल्ली- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने आज नई दिल्ली स्थित टॉकरा टोरा एनेक्सी (Talkatora Annexe) भवन में आयोग के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोग के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

नए कार्यालय की स्थापना UPSC की बढ़ती प्रशासनिक और संस्थागत जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से की गई है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार ने कहा कि आयोग लंबे समय से कार्यालयी स्थान की कमी का सामना कर रहा था। समय के साथ आयोग की जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) सहित विभिन्न नई संस्थागत पहलों के कारण आयोग की गतिविधियों का विस्तार हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ कार्यालयों को अंतरिम व्यवस्था के तहत टॉकरा टोरा एनेक्सी भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है, जब तक कि धौलपुर हाउस में स्थायी सुविधाओं का विकास नहीं हो जाता।

डॉ. अजय कुमार ने कहा कि UPSC देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पारदर्शी, निष्पक्ष तथा योग्यता-आधारित भर्ती प्रणाली के माध्यम से देश को उत्कृष्ट प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नया कार्यालय प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन में मदद करेगा।

गौरतलब है कि UPSC की स्थापना वर्ष 1926 में ली आयोग (Lee Commission) की सिफारिशों के आधार पर हुई थी। भारतीय संविधान लागू होने के बाद इसे संघ लोक सेवा आयोग के रूप में पुनर्गठित किया गया और देश की सिविल सेवाओं तथा अन्य सरकारी सेवाओं में योग्यता-आधारित भर्ती की जिम्मेदारी सौंपी गई।

वर्तमान में UPSC का मुख्यालय धौलपुर हाउस में स्थित है, जिसका निर्माण वर्ष 1920 में तत्कालीन धौलपुर रियासत के महाराज-राणा उदय भान सिंह के निवास के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इसे UPSC का मुख्यालय बनाया गया था।

नए कार्यालय के उद्घाटन को आयोग की संस्थागत क्षमता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर शुरू हुई बैरियर-फ्री टोल व्यवस्था, बिना रुके कटेगा टोल

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नई दिल्ली- देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राजस्थान में दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर स्थित दौलतपुरा टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर बैरियर हटा दिए गए हैं, जिससे वाहन बिना रुके और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के आसानी से गुजर सकेंगे। इससे ट्रैफिक जाम कम होगा और यात्रियों का समय बचेगा। NHAI अब शाहजहांपुर और मनोहरपुर टोल प्लाजा को भी इसी प्रणाली में बदलने की तैयारी कर रहा है, जिससे दिल्ली-जयपुर मार्ग पर सफर और अधिक सुगम हो जाएगा।

MLFF प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक और FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का उपयोग किया गया है। यह तकनीक वाहन की नंबर प्लेट को पहचानकर स्वचालित रूप से टोल शुल्क काट लेती है, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

इससे पहले NHAI गुजरात के सूरत-भरूच खंड के चोरयासी टोल प्लाजा और दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर भी MLFF प्रणाली लागू कर चुका है। इन परियोजनाओं से वाहनों की आवाजाही तेज हुई है, ईंधन की बचत हुई है और प्रदूषण में भी कमी आई है।

NHAI ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें। यदि FASTag में पर्याप्त राशि नहीं होगी या वह अमान्य पाया जाता है, तो संबंधित वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, नई टोल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, संचालन लागत कम होगी और देशभर में टोल प्रबंधन अधिक कुशल एवं आधुनिक बनेगा।

स्टेशन मास्टरों को मिलेगा अधिक अधिकार, रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की बड़ी समीक्षा बैठक

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नई दिल्ली- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टरों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित, कुशल और यात्री-केंद्रित बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर चर्चा की गई।

समीक्षा के दौरान स्टेशन मास्टरों की प्रशासनिक और परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान की गई तथा उनके समाधान के लिए कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। रेलवे मंत्री ने स्टेशन मास्टरों को अधिक प्रशासनिक और परिचालन अधिकार देने, उनके कैरियर विकास के अवसर बढ़ाने और उन्हें उच्च प्रबंधन स्तर तक पहुंचने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

बैठक में मल्टी-ट्रैक और अधिक यातायात वाले रेलखंडों में अतिरिक्त स्टेशन मास्टरों की नियुक्ति तथा रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही स्टेशन मास्टरों के लिए मोबाइल ऐप आधारित पेपरलेस कार्य प्रणाली और एकीकृत स्टेशन प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के प्रस्तावों की समीक्षा की गई, जिससे विभिन्न रेलवे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

रेल मंत्री ने आधुनिक प्रशिक्षण और कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। इसके तहत वर्चुअल रियलिटी (VR), सिम्युलेटर और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों को जटिल रेलवे संचालन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना पर चर्चा हुई।

यात्रियों की सुविधाओं में सुधार और स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए स्टेशन मास्टरों की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इससे स्टेशन स्तर पर रखरखाव कार्यों और यात्री सेवाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

बैठक में सुरक्षा संबंधी मुद्दों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से महिला स्टेशन मास्टरों और महिला पॉइंट्समैन की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए बेहतर सुरक्षा उपकरण और उपयोगकर्ता-अनुकूल कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

रेल मंत्रालय का मानना है कि इन सुधारों से स्टेशन मास्टरों को बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण और अधिक निर्णय लेने की क्षमता मिलेगी, जिससे भारतीय रेलवे का स्टेशन प्रबंधन तंत्र अधिक प्रभावी, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बन सकेगा।

झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा, केंद्रीय मंत्री ने जताई चिंता

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नई दिल्ली- केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में झारखंड के शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत धनराशि के कम व्यय पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मिशन के अंतर्गत उपयोग किए गए जल प्रबंधन, शौचालय एवं मूत्रालय निर्माण, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) तथा वेस्ट-टू-कम्पोस्ट परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी के कारणों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति तेज करने के लिए स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए गए, जिनकी निगरानी केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों द्वारा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में शुरू किए गए अर्बन चैलेंज फंड की भी जानकारी दी और राज्य सरकार से स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत अपने प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

झारखंड सरकार ने आश्वासन दिया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत सभी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के स्वच्छ और विकसित भारत के विजन को दोहराते हुए कहा कि सरकार झारखंड के शहरी क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर संकट के संकेत, सरकारी उधारी ने बढ़ाई चिंता

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लंदन- ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मई 2026 में सरकार की उधारी 23.3 अरब पाउंड तक पहुंच गई, जो बाजार के अनुमान से काफी अधिक है। बढ़ती ब्याज दरों, महंगे कर्ज और सरकारी खर्चों में वृद्धि ने देश की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार को अपने पुराने और नए कर्ज पर पहले से कहीं अधिक ब्याज चुकाना पड़ रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते खर्च ने सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला है। परिणामस्वरूप, सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए अधिक उधार लेना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन का कुल सार्वजनिक कर्ज अब देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो पिछले कई दशकों के उच्चतम स्तरों में शामिल है। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि अधिक कर्ज का मतलब भविष्य में अधिक ब्याज भुगतान और विकास योजनाओं के लिए कम संसाधन होना है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उधारी और कर्ज का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो सरकार को करों में वृद्धि, सरकारी खर्चों में कटौती या नई आर्थिक नीतियों जैसे कठिन कदम उठाने पड़ सकते हैं। इसका असर आम नागरिकों, व्यवसायों और निवेशकों पर भी पड़ सकता है।

वित्तीय बाजारों में भी इस खबर का असर देखने को मिला है। निवेशक सरकार की आर्थिक रणनीति और आने वाले बजट फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए संतुलित आर्थिक सुधारों की आवश्यकता होगी।

मुख्य तथ्य

  • मई 2026 में सरकारी उधारी: 23.3 अरब पाउंड

  • सार्वजनिक कर्ज: GDP का लगभग 95%

  • बढ़ते ब्याज भुगतान और सरकारी खर्च मुख्य कारण

  • वित्तीय बाजारों और निवेशकों में बढ़ी चिंता

  • सरकार पर आर्थिक सुधार और खर्च नियंत्रण का दबाव

निष्कर्ष:

ब्रिटेन की बढ़ती उधारी और रिकॉर्ड स्तर के सार्वजनिक कर्ज ने देश की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर दिया है। आने वाले महीनों में सरकार के आर्थिक फैसले यह तय करेंगे कि देश वित्तीय स्थिरता की ओर बढ़ता है या दबाव और बढ़ता है।

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को नई ताकत: नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की आधारशिला रखी गई

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नागपुर- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज नागपुर स्थित आयुध निर्माणी अंबाझरी में अत्याधुनिक 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा स्थापित की जा रही है और इसे देश की रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षमताओं को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि “जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की रक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।” उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भरता छोड़कर महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और सामग्रियों का स्वदेशी उत्पादन किया जा रहा है।

रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

प्रस्तावित एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। इसके माध्यम से रक्षा प्रणालियों, लड़ाकू विमानों, मिसाइल कार्यक्रमों, अंतरिक्ष अभियानों, रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए बड़े एवं जटिल एल्युमिनियम मिश्रधातु (Alloy) प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसे धातुओं की मांग करते हैं जो हल्के होने के साथ अत्यधिक मजबूत भी हों। यह नई सुविधा देश में ऐसे महत्वपूर्ण धातु उत्पादों के निर्माण की क्षमता विकसित करेगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों के साहस के साथ मजबूत स्वदेशी तकनीक का होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बड़ी सैन्य प्रणालियों की वास्तविक ताकत हजारों छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पुर्जों में छिपी होती है और यह परियोजना देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन जहां 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि:

  • 2014 में रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था।

  • 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

  • सरकार अगले कुछ वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

यंत्र इंडिया लिमिटेड की उपलब्धियां

रक्षा मंत्री ने कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमकरण के बाद स्थापित यंत्र इंडिया लिमिटेड आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

उन्होंने बताया कि:

  • OFB का उत्पादन 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया।

  • रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

  • इसमें YIL का योगदान 397 करोड़ रुपये रहा।

आधुनिक तकनीक और अनुसंधान पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई की सफलता के दो प्रमुख आधार हैं। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों से आधुनिक मशीनरी, नई तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निर्यातक देश बन रहा है और दुनिया भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं को पहचान रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद करेगी।



भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा स्वदेशी बल: 21 जून को तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का होगा कमीशनिंग समारोह

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कोलकाता- भारतीय नौसेना 21 जून 2026 को कोलकाता में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन अत्याधुनिक अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म — दुनागिरी, संशोधक और अग्रय — को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह ऐतिहासिक समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित ये तीनों प्लेटफॉर्म समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी अभियानों जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

दुनागिरी: अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट

दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सहित आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण में नई ताकत

संशोधक बड़े सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) श्रृंखला का चौथा जहाज है। इसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री भू-वैज्ञानिक और महासागरीय आंकड़ों के संग्रह के लिए तैयार किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया प्रहरी

अग्रय अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा पोत है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और शैलो वाटर सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो तटीय क्षेत्रों में छिपे पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता

इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इनके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला।

समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई

दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSMEs के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी क्षमता और ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस को नई मजबूती प्रदान करेगी।



आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



ऑपरेशन दृष्टि: रांची में सेना के मेगा आई कैंप से 300 से अधिक लोगों की लौटी रोशनी

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रांची- भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा टीम ने ऑपरेशन दृष्टि के तहत रांची के नामकुम स्थित सैन्य अस्पताल में 15 से 19 जून 2026 तक आयोजित 9वें मेगा सर्जिकल एडवांस्ड आई कैंप को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस पांच दिवसीय शिविर में 2,500 से अधिक मरीजों की जांच की गई और 300 से अधिक दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी की गईं।

शिविर के दौरान 260 से अधिक मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) ऑपरेशन किए गए, जिनमें 100 से अधिक गरीब आदिवासी मरीजों को लाभ मिला। इसके अलावा, आधुनिक मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS), डायबिटिक रेटिनोपैथी का सर्जिकल उपचार और दृष्टि बचाने वाले एंटी-VEGF इंजेक्शन भी उपलब्ध कराए गए।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ऑपरेशन दृष्टि टीम की समर्पण भावना और पेशेवर उत्कृष्टता की सराहना की। उन्होंने इस पहल को “सेवा परमो धर्मः” के संकल्प का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सेना चिकित्सा कोर की विशेषज्ञता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन दृष्टि की शुरुआत से अब तक देशभर में 75,000 से अधिक मरीजों की जांच की जा चुकी है और 3,000 से अधिक दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं।

लाभार्थियों के जीवन में आया नया उजाला

68 वर्षीय एक्का, जो बिहार रेजिमेंट के दिवंगत पूर्व हवलदार जॉन ऑगस्टस एक्का की पत्नी हैं, मोतियाबिंद के कारण अपनी दाईं आंख की दृष्टि लगभग खो चुकी थीं। सफल सर्जरी के बाद उनकी दृष्टि बहाल हो गई।

इसी तरह, रांची की 63 वर्षीय आदिवासी महिला एलिजा बेथ को भी उन्नत मोतियाबिंद सर्जरी का लाभ मिला। सेना से कोई संबंध न होने के बावजूद उन्हें आधुनिक नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

झारखंड के 50 वर्षीय आदिवासी निवासी अशोक देशमुख की भी सफल मोतियाबिंद सर्जरी की गई। सेना से संबद्ध न होने के बावजूद उन्हें सैनिकों और पूर्व सैनिकों के समान उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई।

देशभर में फैल रहा है ऑपरेशन दृष्टि का दायरा

इस शिविर का उद्घाटन सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक (DGAFMS) वाइस एडमिरल आरती सरीन ने किया था। ऑपरेशन दृष्टि के राष्ट्रीय विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

शिविर की सर्जिकल टीम का नेतृत्व ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा, प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ, आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली कैंट ने किया।

दिसंबर 2024 में देहरादून से शुरू हुआ ऑपरेशन दृष्टि अब जयपुर, बागडोगरा, उधमपुर, लक्षद्वीप, भुज, गोरखपुर, लेह-लद्दाख और अब रांची तक पहुंच चुका है। रांची इस मिशन का नौवां केंद्र बना है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • 2,500+ मरीजों की जांच

  • 300+ नेत्र सर्जरी

  • 260+ मोतियाबिंद ऑपरेशन

  • 100+ आदिवासी मरीजों को लाभ

  • 75,000+ लोगों की जांच (अब तक)

  • 3,000+ दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी

ऑपरेशन दृष्टि आज देश के सबसे बड़े और निरंतर चलने वाले सैन्य चिकित्सा जनसेवा अभियानों में से एक बन चुका है, जो समाज के हर वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुंचाने का कार्य कर रहा है।


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले कोलकाता में ‘दौड़ से ध्यान’ कार्यक्रम का आयोजन, हजारों लोगों ने लिया भाग

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कोलकाता- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के पूर्व आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत कोलकाता में “दौड़ से ध्यान 2026 – From Movement to Stillness” का भव्य आयोजन किया गया। स्वच्छता से स्वागत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस अनूठी पहल ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, नागरिक जिम्मेदारी और समग्र कल्याण के संदेश को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आज सुबह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी तथा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग तक आयोजित मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मैराथन के बाद राइटर्स बिल्डिंग परिसर में योग और ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति का संदेश दिया।

इस अवसर पर मंत्री इंद्रनील खान, अग्निमित्रा पॉल और तापस रॉय, विधायक विजय ओझा, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रसिद्ध पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी योग सत्र में भाग लेकर कार्यक्रम को विशेष उत्साह प्रदान किया।

11 स्थानों पर एक साथ आयोजित हुई योग दौड़

इस पहल के तहत कोलकाता के 11 प्रमुख स्थानों पर एक साथ 2 किलोमीटर की योग रन आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों को योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

योग रन के प्रमुख स्थानों में शामिल रहे:

  • पी.ए.सी. टेंट मैदान

  • एलियट पार्क

  • आरएसएम स्क्वायर (सेंट्रल)

  • ताला पार्क (बेलगछिया)

  • सुभाष सरोवर (बेलियाघाटा)

  • कैप्टन भेरी (ईएम बाईपास)

  • गोलपार्क (विवेकानंद पार्क)

  • गीतांजलि स्टेडियम (कस्बा)

  • केएफआर ग्राउंड (बेहाला)

  • संघमित्रा स्कूल मैदान (वेस्ट पोर्ट)

  • चंडीपुरा रंगसारा ग्राउंड (भांगर)

योग का मूल संदेश: गति से स्थिरता की ओर

कार्यक्रम का मुख्य संदेश “दौड़ से ध्यान” योग के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें शारीरिक गतिविधि से मानसिक शांति, अनुशासन से संतुलन और सामूहिक प्रयास से समग्र कल्याण की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।


अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय उन्मूलन मिशन की उपलब्धियों को सराहा

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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन की दिशा में देश द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने की सार्थक पहल बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जो विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (Carriers) का भी पता लगाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल मरीजों और वाहकों की पहचान की है, बल्कि उनके उचित उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर "सिकल मित्र" पहल शुरू की थी। इस पहल के अंतर्गत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेट्स के प्रतिनिधियों को जागरूकता फैलाने और मरीजों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


किसान हितैषी नीतियों ने दिलाई छत्तीसगढ़ को नई पहचान : छत्तीसगढ़ के कृषि विकास मॉडल का अध्ययन करने पहुंचा महाराष्ट्र का विधायक दल

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था, किसानों के हित में संचालित योजनाओं, कृषि क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली।


मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और यहां की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला एवं संस्कृति के प्रतीक बस्तर आर्ट का स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ कृषि निवेश में सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष में लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है, जो देश में धान खरीदी के सबसे बड़े अभियानों में से एक है। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में लगभग 2700 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी की जाती है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्रों और गोदामों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए पंजीयन से लेकर धान तौल, परिवहन और भुगतान तक की प्रक्रिया को तकनीक आधारित और सरल बनाया गया है। किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री ने कृषक उन्नति योजना सहित राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी में वृद्धि हो रही है।

चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के चार जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला समर्थन और प्रशासनिक प्रबंधन अत्यंत प्रभावी एवं अनुकरणीय है। राज्य में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने तथा खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण है। उन्होंने इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक क्षेत्रों में भी ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्यों के बीच अनुभवों और सफल मॉडलों का आदान-प्रदान देश के कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण से राज्यों को एक-दूसरे के सफल अनुभवों से सीखने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलता है।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, महाराष्ट्र के विधायक डॉ. परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, राजू कारेमोरे एवं संजय पुराम, छत्तीसगढ़ मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।


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