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मुख्यमंत्री निवास में उतरा गांव का रंग: हरेली पर साकार हुई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू - प्रदेश के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार पर आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक इस उत्सव के साक्षी बने।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।


पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री

हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री  साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक श्रीमती संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।

गौमाता को खिलाई पारंपरिक लोंदी, पशुधन संरक्षण का दिया संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खोला। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध ढंग से कम करते हुए अंततः शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। आज किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

पारिजात का पौधा लगाकर दिया हरियाली बढ़ाने का संदेश

हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। मंत्रीगण तथा विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, उसे सहेजने और लौटाने की भी सीख देती है। पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर और उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है।

आधुनिक कृषि तकनीक से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में लगाए गए कृषि एवं अन्य विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता और विशेषताओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण से किसानों की लागत और श्रम कम करने के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ड्रोन दीदी चंद्रकली की सफलता को मुख्यमंत्री ने सराहा

कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी श्रीमती चंद्रकली वर्मा से आत्मीय संवाद किया। श्रीमती वर्मा ने बताया कि वे ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं तथा प्रति एकड़ 300 रुपए पारिश्रमिक प्राप्त करती हैं। वे अब तक ढाई हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में लगभग 7 लाख रुपए की आय अर्जित की है।

मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कृषि में तकनीक का उपयोग महिलाओं के लिए भी आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर रहा है। ड्रोन दीदियां आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक कड़ी बन रही हैं।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने लिप बाम जैसे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर किसान श्री रामविशाल निषाद ने मुख्यमंत्री को नीम का पौधा भेंट किया।

गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी ने ताजा की गांव की यादें

मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और पारंपरिक ग्रामीण अलंकरण से सजाया गया था। परिसर में कदम रखते ही छत्तीसगढ़ के गांवों और मेलों जैसा वातावरण महसूस हो रहा था। हरियाली और लोक सज्जा के बीच गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

गेड़ी पर चढ़े कलाकारों और प्रतिभागियों ने हरेली की पहचान को जीवंत किया, वहीं ग्रामीण खेलों ने बच्चों और युवाओं को अपनी परंपरागत खेल संस्कृति से परिचित कराया। रहचुली ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा आनंद घोल दिया।

लोकधुनों पर कलाकारों के साथ झूमे मुख्यमंत्री श्री साय

मांदर, ढोलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हरेली के उल्लास में मुख्यमंत्री  साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कलाकारों का उत्साह दोगुना हो गया।

ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉलों ने आयोजन में पारंपरिक खानपान का रंग भरा। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन करते हुए नागरिकों और कलाकारों से संवाद किया तथा हरेली की खुशियां साझा कीं।

किसान की खुशहाली से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। कृषि औजारों, गौमाता और प्रकृति की पूजा हमारी कृतज्ञता की संस्कृति को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिल रहा है और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है। किसान का घर खुशहाल और गांव मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त होगा।

किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश समृद्ध होंगे : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का महापर्व है। हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण, पशुधन के सम्मान और अन्नदाता के श्रम के प्रति आदर का संदेश देती है। हरेली अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और खेती को अधिक समृद्ध बनाने का संकल्प लेने का अवसर है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और हमारी जड़ों का उत्सव है। आधुनिक विकास की तेज यात्रा के बीच अपनी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, ग्रामीण खेल, लोककला और खानपान को सहेजकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाबा भोलेनाथ, गौमाता और प्रकृति से प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खेत लहलहाएं, किसानों के घर खुशहाली आए और प्रदेश निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री जेंद्र यादव, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

विजन 2047 की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: उद्योगों से आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की नई पहल

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 छगन लाल लोन्हारे

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : छत्तीसगढ़ आज औद्योगिक विकास के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां विकास का उद्देश्य केवल नए उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और क्षेत्रीय संतुलन के माध्यम से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए पारदर्शी, निवेश-अनुकूल और रोजगारोन्मुख वातावरण तैयार किया है। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन के मार्गदर्शन में नई औद्योगिक नीतियों ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है और छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।

25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का किया भूमिपूजन

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून 2026 में टेक्सटाइल पार्क की पहली यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड 235 करोड़ रुपए के निवेश से यहां गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है। इस यूनिट से 4650 लोगों को रोजगार मिलेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने यह अहम कदम है।

प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार

बीते ढाई वर्षों में राज्य को 264 औद्योगिक परियोजनाओं से लगभग 8.22 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 1.72 लाख से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है। इनमें से 154 परियोजनाएं निर्माण, भूमि आवंटन अथवा उत्पादन के चरण तक पहुंच चुकी हैं, जबकि कई इकाइयां पहले ही उत्पादन प्रारंभ कर चुकी हैं। इसी अवधि में प्रदेश में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 50,807 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह दर्शाता है कि सरकार की औद्योगिक नीतियां केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर परिणाम दे रही हैं।

विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा लागू औद्योगिक विकास नीति 2024-30 ने उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। विनिर्माण इकाइयों को 100 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र को 150 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन, एमएसएमई और सेवा उद्योगों को पहली बार विशेष लाभ, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फार्मा जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज तथा स्थानीय युवाओं के रोजगार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान इस नीति की प्रमुख विशेषताएं हैं। यही कारण है कि नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर एसईजेड और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश जैसी बड़ी पहलें आकार ले रही हैं।

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। 150 से अधिक सेवाओं वाला नया सिंगल विंडो सिस्टम, निवेशकों के लिए एआई आधारित वाणी प्रणाली, 500 से अधिक प्रशासनिक सुधार तथा प्रक्रियाओं का सरलीकरण निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रहा है। औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे, इसके लिए राज्य में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए तथा 15 जिलों में 26 नए औद्योगिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सरोरा में प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क जैसे प्रयास औद्योगिक आधार को और मजबूत बना रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना

हाल ही में विजन 2047 औद्योगिक विकास की संभावनाएं विषयक चर्चा में उद्योगमंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अधिकतम अवसर मिल सकें। आने वाले वर्षों के लिए सरकार निर्यात नीति, स्टार्टअप एवं नवाचार नीति, कौशल विकास, इंटर्नशिप, एमएसएमई सशक्तिकरण और बस्तर-सरगुजा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, प्रदेश के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है।

छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे

राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का वादा मिला है, जिससे अलग-अलग सेक्टर में 1.6 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर पैदा होने की संभावना है। टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा, राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना

राज्य में वस्त्र एवं परिधान उद्योग को प्रोत्साहित करने नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके 81 एकड़ क्षेत्र में 2758 वर्गमीटर से लेकर 38 हजार 180 वर्गमीटर आकार के भूखंड उपलब्ध हैं। टेक्सटाइल, गारमेंट एवं परिधान उद्योग, तकनीकी वस्त्र (ज्मबीदपबंस ज्मगजपसमे) तथा इनके सहायक एवं पूरक उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को यहां सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार

विजन 2047 की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह औद्योगिक अभियान केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण है जहां निवेश, नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास मिलकर आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 658.1 मिमी बारिश दर्ज: औसत के करीब पहुंचा आंकड़ा, जिलों में दिखा मानसून का मिला-जुला असर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 जून से 11 अगस्त तक की अवधि में औसतन 658.1 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई है। बीते 10 वर्षों की इस अवधि की औसत बारिश (658.5 मिमी) की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 99.9% है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश स्तर पर मानसून का संतुलन पटरी पर है, हालांकि जिलावार स्थिति में काफी विविधता देखने को मिल रही है—कहीं झमाझम बारिश हो रही है तो कहीं किसानों को अब भी अच्छी वर्षा का इंतजार है।


सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सर्वाधिक वर्षा, मैदानी इलाके आगे

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के मैदानी इलाकों में मानसून की मेहरबानी बनी हुई है।

शीर्ष जिला: सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 189.8% (947.3 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश में पहले स्थान पर है।

सामान्य से अधिक बारिश वाले अन्य जिले: महासमुंद (140.7%), नारायणपुर (128.0%), रायपुर (126.7%), बलौदाबाजार (124.7%) और बलरामपुर (124.0%) शामिल हैं।

जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, सक्ती, बालोद, मुंगेली, बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव में भी अब तक अच्छी वर्षा हुई है।

उत्तर और दक्षिण के जिलों में रफ्तार सुस्त

प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी पीछे है:

सरगुजा संभाग: सरगुजा में औसत की तुलना में महज 68.7% और जशपुर में 75.4% बारिश ही हुई है।

बस्तर संभाग: सुकमा (68.2%), कांकेर (69.2%), बीजापुर (71.7%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (72.1%) और बस्तर (74.9%) पिछड़े हुए हैं।

सामान्य के करीब दर्ज जिले: कबीरधाम (83.7%), कोंडागांव (83.9%) और बेमेतरा (80.4%)।

बीते 24 घंटों की स्थिति व मौसम का पूर्वानुमान

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में औसतन 5.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान बिलासपुर (28.9 मिमी), मुंगेली (24.6 मिमी) और बालोद (18.4 मिमी) में अच्छी वर्षा हुई, जबकि बस्तर, नारायणपुर और बीजापुर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में कम वर्षा वाले उत्तरी और दक्षिणी जिलों में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

नाबालिग को धमकाकर जेवर चोरी कराने वाला कांग्रेस पार्षद का बेटा दो साथियों संग गिरफ्तार, जेल भेजा गया

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 भिलाई। स्मृतिनगर चौकी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर उसी के रिश्तेदारों के घर चोरी करवाता था। इस मामले में पुलिस ने वार्ड नंबर-6 के कांग्रेस पार्षद रविशंकर कुर्रे के बेटे अनुराग कुर्रे (32) समेत उसके दो साथियों—करन सोनी (25) और रोहित गुप्ता (23)—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 8 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं।


धमकाकर कराई चोरी

ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि दुर्गानगर जुनवानी रोड निवासी मोहम्मद मोहसीन खान ने 9 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। करीब दो-तीन महीने पहले आरोपी अनुराग कुर्रे व उसके साथियों ने 17 वर्षीय नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर उसके मामा के घर से सोने की दो अंगूठियां, एक हार, एक जोड़ी कान की बालियां और एक मंगलसूत्र मंगवा लिया।

सगे घर में भी कराया हाथ साफ

दूसरी शिकायत नाबालिग की मां शाहीन परवीन ने दर्ज कराई। उनके घर से भी एक जोड़ी सोने के कंगन, एक मंगलसूत्र और दो अंगूठियां गायब थीं। जांच में पता चला कि ये जेवर भी नाबालिग ने आरोपियों के डर से उन्हें सौंपे थे।

ऑनलाइन बेटिंग की लगाई थी लत

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी अनुराग कुर्रे ने नाबालिग को ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाज़ी) ऐप की आदत डाली थी। तकनीकी जांच और सुरागों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को धर दबोचा और शत-प्रतिशत मशरूका बरामद कर लिया। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

बस्तर में 'तिरंगा यात्रा 2026' का आगाज़: महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल, पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेगा शांति और विकास का संदेश

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 रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर 12 से 15 अगस्त तक भव्य ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित इस मोटरसाइकिल यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी विशेष रूप से शामिल होंगे। यह यात्रा बस्तर के उन दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों एवं ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा व विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।




1. महिला बाइकर्स की विशेष सहभागिता

इस यात्रा में प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर्स के साथ-साथ महिला बाइकर्स भी हाथ में तिरंगा थामे विशेष रूप से शामिल होंगी। इसके अलावा स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, NCC, NSS, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी अपनी सहभागिता निभाएंगे।

2. 3 दिवसीय यात्रा का विस्तृत रूट प्लान

12 अगस्त (पहला दिन): यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

13 अगस्त (दूसरा दिन): दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

14 अगस्त (तीसरा दिन): बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी। यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले इस पहाड़ी स्थल पर तिरंगा फहराया जाएगा।

3. शहीदों को श्रद्धांजलि और शहादत स्थल की मिट्टी का संरक्षण

नक्सली हमलों में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के स्मरणीय स्थलों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। एक ऐतिहासिक पहल के रूप में, शहीदों की शहादत वाले स्थानों की पवित्र मिट्टी को संग्रहित कर भविष्य में निर्मित होने वाले शहीद संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें।

4. ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान एवं जन-जागरूकता

प्रत्येक घटना स्थल पर शहादत की संख्या के बराबर पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही यात्रा के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया जाएगा।

5. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विकास प्रदर्शनी

यात्रा के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व डिजिटल सेवाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी और मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) युवाओं की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

6. 'बस्तर शांति दौड़' का आयोजन

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य 'शांति दौड़', विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

बस्तर की नई पहचान का प्रतीक

‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की बदलती सुखद तस्वीर को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अभियान है।

हरेली त्योहार: छत्तीसगढ़ की हरियाली, संस्कृति और किसान जीवन का उत्सव

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भारत त्योहारों और परंपराओं की भूमि है। यहां मनाया जाने वाला हर त्योहार अपने साथ एक विशेष संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्य लेकर आता है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्वों में हरेली का विशेष स्थान है। हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, पशुधन और किसान जीवन के प्रति सम्मान प्रकट करने वाला पर्व है। यह त्योहार छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और लोकजीवन की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करता है।

हरेली का अर्थ और महत्व

‘हरेली’ शब्द का संबंध हरियाली से माना जाता है। सावन के मौसम में जब खेत-खलिहान हरियाली से भर जाते हैं और प्रकृति अपने सुंदरतम रूप में दिखाई देती है, तब हरेली का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कृषि कार्य में तेजी आने के साथ किसान अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हरेली हमें यह संदेश भी देती है कि मनुष्य का जीवन प्रकृति और कृषि से गहराई से जुड़ा हुआ है। खेतों में लहलहाती फसल, पेड़-पौधे, वर्षा और पशुधन ग्रामीण जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

कृषि उपकरणों की पूजा

हरेली के दिन किसान अपने हल, कुदाल, फावड़ा, बैल और अन्य कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। कृषि उपकरणों को साफ करके उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन उपकरणों की सहायता से किसान धरती को उपजाऊ बनाता है और पूरे समाज के लिए अन्न पैदा करता है।

इस दिन कई परिवार अपने घरों और कृषि उपकरणों पर नीम की पत्तियां भी लगाते हैं। नीम को पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य और प्राकृतिक सुरक्षा से जोड़ा जाता है।

पशुधन का विशेष महत्व

कृषि प्रधान समाज में पशुधन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए हरेली के अवसर पर गाय-बैल और अन्य पशुओं की भी देखभाल और पूजा की जाती है। उन्हें नहलाया जाता है, सजाया जाता है और विशेष भोजन दिया जाता है।

यह परंपरा हमें सिखाती है कि मनुष्य को केवल अपने हित के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि उन पशुओं के प्रति भी कृतज्ञ होना चाहिए जो उसके जीवन और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बच्चों के लिए खास होता है हरेली का उत्सव

हरेली का त्योहार बच्चों और युवाओं के लिए भी बहुत उत्साह लेकर आता है। गांवों में इस अवसर पर गेड़ी चढ़ने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। बच्चे और युवा गेड़ी पर चढ़कर चलते हैं और अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

गेड़ी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति की पहचान भी है। आज भी कई स्थानों पर हरेली के दौरान गेड़ी प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

लोकपरंपराओं और व्यंजनों की खुशबू

हरेली के अवसर पर घरों में पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं। परिवार के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और त्योहार की खुशियां साझा करते हैं। गांवों में लोकगीत, पारंपरिक खेल और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां वातावरण को उत्सवमय बना देती हैं।

इस प्रकार हरेली केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह परिवार, समाज और समुदाय को एक-दूसरे के करीब लाने का अवसर भी बनती है।

प्रकृति संरक्षण का संदेश

आज के समय में जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है, हरेली का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें पेड़-पौधों, मिट्टी, जल, पशुओं और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की याद दिलाता है।

हरेली हमें प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति का सम्मान करें, पेड़ लगाएं, जल बचाएं और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।

छत्तीसगढ़ की पहचान है हरेली

हरेली छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की जीवंत पहचान है। इस पर्व में किसान का परिश्रम, प्रकृति की सुंदरता, पशुधन के प्रति सम्मान, पारिवारिक प्रेम और लोकपरंपराओं की झलक दिखाई देती है।

समय के साथ त्योहार मनाने के तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन हरेली की मूल भावना आज भी वही है—धरती, प्रकृति और कृषि के प्रति कृतज्ञता।

निष्कर्ष

हरेली हमें अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देती है। यह पर्व बताता है कि हमारे जीवन की खुशियां प्रकृति और किसान के परिश्रम से गहराई से जुड़ी हैं। इसलिए हरेली केवल छत्तीसगढ़ का एक लोकपर्व नहीं, बल्कि हरियाली, मेहनत, प्रकृति प्रेम और समृद्धि का उत्सव है।

हमें अपनी लोकपरंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए और हरेली के संदेश—प्रकृति का सम्मान करें, किसान का सम्मान करें और पर्यावरण की रक्षा करें—को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाज सेविका मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि मिनीमाता जी ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरोध में समाज से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाई। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज एवं महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिनीमाता जी के नाम पर राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी व्यक्तित्व हम सभी को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का कमाल-उन्नत मक्का बीज और कृषि सहायता से संवरी कृषक शुभम दुबे की राह

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।

मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।

सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद

कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार

कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने लाइबेरिया के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की

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भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज नई दिल्ली के GPOA, ब्लॉक-3 में लाइबेरिया गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में लाइबेरिया की सीनेट और प्रतिनिधि सभा के सदस्य तथा लाइबेरिया के महिला विधायी कॉकस के सदस्य शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एलेन-अट्टोह व्रेह ने किया। बैठक में UN Women के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

यह प्रतिनिधिमंडल 10 से 15 अगस्त 2026 तक भारत के दौरे पर है। यह यात्रा दक्षिण-दक्षिण सहकर्मी सीख मिशन (South-South Peer Learning Mission) के तहत आयोजित की जा रही है। इस मिशन को UN Women का सहयोग प्राप्त है और इसका वित्तपोषण भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों द्वारा भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) फंड के माध्यम से किया जा रहा है। इस फंड का प्रशासन संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग कार्यालय (UNOSSC) द्वारा किया जाता है।

बैठक के दौरान लाइबेरियाई प्रतिनिधिमंडल को महिला-नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) के लिए भारत द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री  अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि भारत महिलाओं को राष्ट्रीय विकास की सक्रिय भागीदार के रूप में देखता है।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण के प्रति भारत की विधायी, कार्यक्रमगत और संस्थागत प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। इसमें महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व, लैंगिक उत्तरदायी शासन और बजट व्यवस्था, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने के लिए संस्थागत तंत्र, देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) तथा स्थानीय शासन में महिलाओं का नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

दोनों पक्षों ने साझा हित के विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के ढांचे के तहत भारत और लाइबेरिया के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक के अंत में लाइबेरियाई प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख एलेन-अट्टोह व्रेह को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने समूह फोटो भी खिंचवाई।



छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार, ₹2,883 करोड़ के मामले में ED की कार्रवाई

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच के तहत की गई है।

₹2,883 करोड़ की कथित अपराध से हुई आय

ED की जांच जिस मामले से जुड़ी है, उसमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW)/एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की चार्जशीट के आधार पर कथित घोटाले से हुई अपराध की आय लगभग ₹2,883 करोड़ आंकी गई है। ED के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2019 से 2022 के दौरान शराब की खरीद, लाइसेंसिंग और बिक्री से जुड़ी थीं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे मामले में राजनीतिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों, शराब निर्माताओं, FL-10A लाइसेंस धारकों और उनके सहयोगियों से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था और कथित तौर पर अवैध कमीशन की उगाही की गई।

ED की जांच में क्या सामने आया?

ED के अनुसार, कथित शराब घोटाले में अलग-अलग तरीकों से अवैध धन की व्यवस्था किए जाने की जांच की जा रही है। इनमें शराब की सरकारी खरीद पर कथित कमीशन, बिना हिसाब वाली देशी शराब की बिक्री तथा शराब निर्माताओं से कथित कमीशन जैसे पहलुओं की जांच शामिल है।

जांच के दौरान ED ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। एजेंसी ने पहले भी छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में तलाशी अभियान चलाकर नकदी, सोना, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। अप्रैल 2026 की एक कार्रवाई में लगभग ₹5.39 करोड़ की नकदी और सोना जब्त किए जाने की जानकारी ED ने दी थी।

आगे क्या?

रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ED कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध की आय से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला फिलहाल राज्य की राजनीति और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के केंद्र में है।


Air India में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन, Tewolde Gebremariam बने नए CEO और MD

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नई दिल्ली- Air India ने अपने बदलाव और पुनर्गठन के अगले चरण के लिए Tewolde Gebremariam को नया Chief Executive Officer (CEO) और Managing Director (MD) नियुक्त किया है। वह मौजूदा CEO Campbell Wilson का स्थान लेंगे। Air India के बोर्ड ने 5 अगस्त को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी।

कौन हैं Tewolde Gebremariam?

Tewolde Gebremariam विमानन क्षेत्र के अनुभवी अधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने करीब 36 वर्षों तक Ethiopian Airlines में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और 2011 से 2022 तक इसके Group CEO रहे। उनके नेतृत्व में Ethiopian Airlines ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की प्रमुख एयरलाइनों में अपनी पहचान मजबूत की।

उनके कार्यकाल में Ethiopian Airlines का राजस्व चार गुना से अधिक बढ़ा और एयरलाइन के बेड़े का आकार भी लगभग तीन गुना हुआ। उन्होंने COVID-19 महामारी और 2019 के Boeing 737 MAX हादसे जैसे गंभीर संकटों के दौरान भी एयरलाइन का नेतृत्व किया।

अब Air India के सामने बड़ी चुनौती

Tewolde ऐसे समय Air India की कमान संभाल रहे हैं, जब एयरलाइन बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Tata Group के स्वामित्व में आने के बाद Air India ने ब्रांड री-ब्रांडिंग, बेड़े के आधुनिकीकरण और Vistara के विलय जैसे कई बड़े कदम उठाए हैं। Campbell Wilson ने इस शुरुआती बदलाव की प्रक्रिया का नेतृत्व किया।

हालांकि, एयरलाइन के सामने वित्तीय नुकसान, परिचालन संबंधी चुनौतियां, सुरक्षा एवं नियामकीय अनुपालन और विमान बेड़े के आधुनिकीकरण जैसी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में Air India को 2 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ।

सुरक्षा और भरोसा सबसे बड़ी प्राथमिकता

2025 में अहमदाबाद में Air India के Boeing 787 हादसे के बाद एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन पर नियामकीय निगरानी बढ़ी है। ऐसे में नए CEO के सामने सुरक्षा मानकों, अनुपालन और संचालन व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

Tata Group को Tewolde से बड़ी उम्मीदें

Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने संकेत दिया है कि Air India के पूर्ण बदलाव में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में Tewolde के सामने एयरलाइन को अधिक कुशल, सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की चुनौती होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि Ethiopian Airlines को सफलतापूर्वक बदलने का Tewolde का अनुभव Air India के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि वह Air India के सामने मौजूद वित्तीय, परिचालन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।

Air India के लिए यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि उसके अगले बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।


बस्तर तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा होंगे शामिल

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नक्सल प्रभाव से बाहर आए गांवों तक पहुंचेगी बाइक रैली

महिला बाइकर्स भी होंगी सहभागी, शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि के साथ स्मृति के लिए मिट्टी का होगा संग्रहण

रायपुर- स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी शामिल होंगे। मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित होने वाली यह यात्रा बस्तर के उन क्षेत्रों और ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा एवं विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं गौरव की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।

बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है

यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने रखना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना तथा नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब अमन, विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा माध्यम से अब तिरंगा बस्तर के कोने कोने तक फहराया जायेगा और भारत का संविधान भी राज्य के कोने कोने में लागू होने का संदेश सभी को दिया जाएगा।

शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि, शहीद परिवारों का सम्मान

तिरंगा यात्रा के दौरान उन स्थानों पर विशेष रूप से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़े नक्सली हमले हुए अथवा व्यापक जनहानि हुई थी। प्रत्येक शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। 

आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें

इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शहीदों की शहादत वाले स्थानों की मिट्टी को श्रद्धापूर्वक संग्रहित एवं संरक्षित किया जाएगा। इस पवित्र मिट्टी को भविष्य में शहीदों के लिए निर्मित किए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। यह पहल शहीदों की स्मृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का भावनात्मक और ऐतिहासिक माध्यम बनेगी।

महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी

बस्तर तिरंगा यात्रा में वुमन बाइकर्स रैली  की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे और महिला बाइकर्स भी तिरंगा हाथ में लेकर इस यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। 

तीन दिनों में बस्तर के दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी तिरंगा यात्रा

बस्तर तिरंगा यात्रा 12 अगस्त को यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। 13 अगस्त को यात्रा दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम होगा। 14 अगस्त को यात्रा बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले कुर्रेगुट्टालु की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया जाएगा।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ से होंगे पौधरोपण

इस यात्रा के प्रत्येक घटना स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत स्थल पर जितने लोग शहीद हुए हैं उतने ही पौधों का पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। 

बस्तर की संस्कृति और विकास की झलक भी दिखेगी

तिरंगा यात्रा के दौरान सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पुनर्वासित युवाओं की सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। 

बस्तर की वादियों में होगी शांति की दौड़

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य बस्तर शांति दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा। विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान, शहीद सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। 

तिरंगा यात्रा बनेगी नए बस्तर की पहचान

 ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को प्रेरित करने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की नई पहचान को देश के सामने रखने का अभियान है। तिरंगे के साथ बस्तर के गांवों और उन स्थानों तक पहुंचने वाली यह यात्रा उन इलाकों में विश्वास का संदेश लेकर जाएगी, जहां कभी हिंसा और भय का साया था।

छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची

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गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से राज्य की खरीदी में एक वर्ष में 113 प्रतिशत की वृद्धि, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मिले ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹130 करोड़ की बचत

रायपुर- छत्तीसगढ़ को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के 10वें स्थापना दिवस समारोह में ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। GeM के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह की थीम ‘GeM 10: A Decade of Exponential Possibilities’ रही।

राज्य सरकारों के लिए निर्धारित ‘प्रीमियर अवार्ड्स – स्टेट गवर्नमेंट फेलिसिटेशन’ श्रेणी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार GeM के प्रभावी उपयोग तथा इसके माध्यम से शासकीय खरीदी के मूल्य और मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए प्रदान किया गया है।

खुली प्रतिस्पर्धा से ₹130 करोड़ की बचत

GeM प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन को ₹130 करोड़ की बचत हुई है। यह बचत विभागों द्वारा खरीदी के लिए अनुमानित लागत और खुली प्रतिस्पर्धी बोली के बाद प्राप्त वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर से हुई है।

GeM की खुली बोली प्रक्रिया, मानकीकृत विनिर्देश और प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल एवं ऑडिट योग्य रिकॉर्ड शासकीय खरीदी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रतिस्पर्धी खरीदी के माध्यम से राज्य शासन को कुल ₹235 करोड़ की बचत हुई है।

खरीदी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित जांच और निगरानी व्यवस्था लागू है। साथ ही निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विनिर्देशों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे खरीदी की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बनी रहे।

GeM से खरीदी में 113 प्रतिशत की वृद्धि

छत्तीसगढ़ में GeM के माध्यम से शासकीय खरीदी वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 113 प्रतिशत की वृद्धि है।

राज्य शासन द्वारा विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों की खरीदी को एक साझा एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के सुनियोजित प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे अधिकाधिक शासकीय खरीदी खुली प्रतिस्पर्धा के दायरे में आई है और प्रत्येक लेन-देन में प्रतिस्पर्धी दर निर्धारण तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

GeM के व्यापक उपयोग से शासकीय खरीदी में छोटे उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदी 61 प्रतिशत बढ़कर ₹1,800 करोड़ हो गई। यह निर्धारित 25 प्रतिशत MSE खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।

राज्य के प्राथमिकता वाले उद्यमी वर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। महिला उद्यमियों से खरीदी में 97 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों से खरीदी में 108 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं स्टार्टअप से खरीदी में सर्वाधिक 178 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

GeM ने उद्यमियों के लिए खोले शासकीय बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि GeM ने छत्तीसगढ़ के उद्यमियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे शासकीय मांग और बाजार से जुड़ने का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों और स्टार्टअप की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस पारदर्शी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खुला और पारदर्शी डिजिटल मार्केटप्लेस प्रत्येक उद्यमी को समान अवसर प्रदान करता है।  हमारी सरकार का प्रयास है कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्टार्टअप तक पहुंचे। हम पारदर्शी शासकीय खरीदी के साथ स्थानीय उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

बजाज फाइनेंस कर्मचारी पर 10 लाख की ठगी का आरोप, लोन बंद कराने के नाम पर की धोखाधड़ी, केस दर्ज

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 कोरबा। जिले में लोन बंद कराने और किस्त जमा करने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बजाज फाइनेंस कंपनी के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने ग्राहकों से रकम लेकर उसे कंपनी के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिया। जिले में अब तक ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पीड़ितों से करीब 10 लाख रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच व तलाश शुरू कर दी है।


केस 1: लोन बंद कराने के नाम पर 2 लाख ठगे

मामले में पहली शिकायत बालको क्षेत्र की एक महिला ने दर्ज कराई है। महिला के अनुसार, बजाज फाइनेंस कर्मचारी शशांक सिंह ने लोन की किस्त और खाता पूरी तरह बंद कराने का झांसा देकर उससे करीब दो लाख रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर करवा लिए। रकम लेने के बावजूद आरोपी ने यह पैसा संबंधित लोन खाते में जमा नहीं कराया। शिकायत पर बालको थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अमानत में खयानत (धोखाधड़ी) का मामला दर्ज किया है।

केस 2: जूस सेंटर संचालक को 5 लाख का चूना

दूसरा मामला बजरंग चौक, राताखार का है। पीड़ित संदीप सिंह, जो दीनदयाल मार्केट (पावर हाउस रोड) में जूस सेंटर चलाते हैं, ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 में बजाज फाइनेंस से ₹5,49,856 का लोन लिया था। इसकी मासिक किस्त 14,164 रुपये तय थी। आरोप है कि शशांक सिंह ने खुद को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी बताते हुए संदीप को झांसा दिया कि एकमुश्त राशि देने पर उनका लोन अकाउंट बंद करा दिया जाएगा।

भरोसा करके संदीप ने अगस्त 2025 में 3 लाख रुपये के दो चेक और 2 लाख रुपये नकद, यानी कुल 5 लाख रुपये आरोपी को दे दिए। आरोपी ने चेक अपने खाते में क्लियर करा लिए, लेकिन लोन अकाउंट बंद नहीं कराया।

केस 3: सीएसईबी चौकी में दर्ज हुआ तीसरा मामला

थगी का तीसरा मामला सीएसईबी पुलिस चौकी क्षेत्र में सामने आया है। पुलिस के अनुसार, तीनों मामलों को मिलाकर अब तक करीब 10 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज हो चुकी है।

फर्जी दस्तावेज से दूसरे लोन लेने का भी आरोप

पीड़ितों ने गंभीर आरोप लगाया है कि लोन प्रक्रिया के दौरान आरोपी शशांक सिंह ने उनके आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज लिए थे। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल (मिसयूज) कर आरोपी ने अन्य वित्तीय कंपनियों से पीड़ितों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन ले लिए और उन पैसों या खरीदे गए सामान को खुद रख लिया।

RPF कार्यालय के सामने कपल का खुलेआम रोमांस, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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 रायगढ़। रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर एक कपल के खुलेआम रोमांस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर काफी देर तक किस करते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना की खास बात यह रही कि जिस स्थान पर कपल यह हरकत कर रहा था, उसके ठीक सामने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का कार्यालय भी स्थित है।


जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन सोमवार को रेलवे स्टेशन के बाहर यात्रियों की काफी भीड़भाड़ थी। ट्रेनों की आवाजाही के दौरान बड़ी संख्या में यात्री और स्थानीय लोग वहां मौजूद थे। इसी दौरान कपल काफी देर तक एक-दूसरे के गले लगकर खड़ा रहा और सार्वजनिक स्थान पर ही किस करता रहा। इस दृश्य को देखकर आसपास मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई, जिसके बाद वहीं खड़े किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

वीडियो वायरल होने के बाद मामला RPF तक पहुंचा। RPF थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहा कपल घटना के वक्त शराब के नशे में धुत था। उन्होंने कहा कि जब दोनों सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की हरकत कर रहे थे, उसी समय RPF को इसकी सूचना दी जानी चाहिए थी।

थाना प्रभारी ने आगे बताया कि कपल कुछ देर बाद अपने आप ही वहां से चला गया। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक केस दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, स्टेशन जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थान पर हुई इस घटना की पूरे शहर में काफी चर्चा हो रही है।

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