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तीर्थों की गरिमा बनाए रखें, पिकनिक स्पॉट न बनाएं: देवकीनंदन ठाकुर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं से तीर्थ स्थलों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आजकल लोग तीर्थों को घूमने-फिरने या पिकनिक स्पॉट की तरह देखने लगे हैं, जबकि तीर्थ आत्मशुद्धि, आस्था और साधना के केंद्र हैं।


कथा के दौरान उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है। धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वच्छता, पवित्रता और अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तीर्थों की मर्यादा भंग होती है, तो उनकी दिव्यता और आध्यात्मिक महत्व धीरे-धीरे कम होने लगता है।

देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि तीर्थ यात्रा के दौरान ऐसा कोई आचरण न करें जिससे धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, स्वच्छता और सदाचार के साथ की गई तीर्थ यात्रा ही वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।

इस बीच आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर से आशीर्वाद प्राप्त किया और कथा श्रवण किया।


मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस पावन अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को सत्य, करुणा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। ऐसी आध्यात्मिक अनुभूतियां मन को शांति प्रदान करती हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

नक्सलियों की संरक्षक है कांग्रेस : भाजपा

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नन्दन जैन ने कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव द्वारा दुर्दांत नक्सली कमांडर हिड़मा का महिमामण्डन किए जाने पर बेहद कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सोमवार को यहाँ भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में आहूत पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए जैन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब कांग्रेस का नक्सल प्रेम खुलकर सामने आया है। कांग्रेस का इतिहास हमेशा से नक्सलियों के संरक्षण और उन्हें खाद-पानी देने का रहा है।


भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने कहा कि हजारों निर्दोष आदिवासियों, आम नागरिकों और देश के वीर जवानों के खून से जिसके हाथ रंगे हैं, उस खूँखार नक्सली हिड़मा का महिमामण्डन करना कांग्रेस की विकृत मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव का यह कृत्य बस्तर के शहीदों और उनके परिवारों का घोर अपमान है। इसके लिए उन्हें और उनकी पार्टी को देश से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

जैन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस और नक्सलियों का 'भाईचारा' दशकों पुराना है। जब-जब देश में नक्सलियों पर कड़ा प्रहार होता है, तब-तब कांग्रेस नेताओं का दर्द छलक उठता है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ नेता राजबब्बर जैसे बड़े कांग्रेसी नेता समय-समय पर नक्सलियों के पक्ष में खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं। राजबब्बर ने तो नक्सलियों को 'क्रांतिकारी' तक कह दिया था। खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी हिड़मा जैसे राष्ट्रविरोधी तत्वों का महिमामण्डन कर चुके हैं, जो उनके देशविरोधी एजेंडे को साफ उजागर करता है।

जैन ने कहा कि संसद पर हमला करने वाले अफ़ज़ल गुरु के लिए जिनकी सहानुभूति हो, उनके नेताओं के लिए माओवादी और नक्सलवादी “आदर्श” बन जाएँ तो हैरानी कैसी? कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र अब किसी से छिपा नहीं है। देश पहले, या वोट बैंक पहले— जवाब जनता अच्छी तरह जानती है।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जैन ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में नक्सलियों के वैचारिक आकाओं को पालने-पोषने का काम किया गया। इसी कड़ी में अमर्त्य सेन जैसे चेहरों को व्यवस्था में ऊँचा ओहदा देकर नवाजा गया, जो नक्सलियों की 'वैचारिक ढाल' बनकर काम करते थे। आज जब केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के नेतृत्व में सुरक्षाबल नक्सलियों को उनके मांद में घुसकर ढेर कर रहे हैं, तो कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह बौखला गया है। अपने अस्तित्व को खतरे में देख कांग्रेस अब हिड़मा जैसे दुर्दांत अपराधियों के सहारे अपनी राजनीति चमकाना चाहती है। श्री जैन ने कहा कि कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव अपने इस देशविरोधी और शर्मनाक बयान के लिए तुरंत बस्तर की जनता, जवानों के परिवारों और पूरे देश से बिना शर्त माफी मांगें। साथ ही कांग्रेस आलाकमान स्पष्ट करे कि क्या वह अपने विधायक के इस नक्सल प्रेम का समर्थन करता है? बस्तर में शांति और विकास की राह में रोड़ा अटकाने वाली और नक्सलियों की पैरवी करने वाली कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वैभव बैस ने कहा कि जब चरणदास महंत मध्यप्रदेश शासन में गृह मंत्री थे तब एडिशनल एसपी भास्कर दीवान की शहादत हुई थी। तबसे लेकर स्वर्गीय एडिशनल एसपी आकाश गिरिपुंजे की शहादत तक कांग्रेस को नक्सली हिंसा से कोई मतलब नहीं रहा है। सुरक्षा बल के जवान पुलिस के जवान व प्रदेश के माटी पुत्र वहाँ पर अपनी शहादत देते रहे।

बैस ने कांग्रेस से सवाल पूछा है कि क्या कांग्रेसी नेता शहीदों की शहादत का सम्मान करती है? क्या कांग्रेस पार्टी अपने वरिष्ठ नेता जिसमें स्व. विद्याचरण शुक्ला, महेंद्र कर्मा सहित कई बड़े नेताओं की शहादत का सम्मान करती है? उन्होंने झीरम घाटी के हमले में अपनी जान गवाही। अगर कांग्रेस अपने शहीद नेताओं का सम्मान करती है तो अपने विधायक अटल श्रीवास्तव पर कार्रवाई करके दिखाए। सुरक्षा बल के सैकड़ो लोगों, हज़ारों आम नागरिकों की हत्या का जिम्मेदार हिड़मा था, जो कांग्रेसियों के लिए आदर्श है। बस्तर की पावन भूमि ने महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव जैसे जननायक दिया है उस बस्तर में हिड़मा कभी नायक नहीं हो सकता।

इस दौरान प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शताब्दी पांडेय, प्रदेश मीडिया सह संयोजक गोविन्दा गुप्ता, प्रदेश सह कार्यालय मंत्री प्रीतेश गांधी मौजूद रहे।

ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर कोलकाता-2026 में ‘बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस’ सम्मान से बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा

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21 राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अभिनव पवेलियन को मिला राष्ट्रीय सम्मान

 तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, पर्यटन साझेदारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

रायपुर- ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए      “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।

मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विधानसभा में दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का अनमोल रत्न खो दिया: आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव रहेंगी प्रेरणा की स्त्रोत - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र  के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

छत्तीसगढ़ को मिली 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 नई MBBS सीटों को मंजूरी

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार

रायपुर- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छत्तीसगढ़ में पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को मंजूरी दे दी है। ये मेडिकल कॉलेज गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में 50-50 MBBS सीटें स्वीकृत की गई हैं। इस प्रकार राज्य में कुल 250 नई MBBS सीटों की बढ़ोतरी होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा के अवसरों का भी व्यापक विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा अपने ही राज्य में मिल सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर आदिवासी अंचल कुनकुरी (जशपुर) तक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना डबल इंजन सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत विकास का लाभ प्रदेश के हर क्षेत्र तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल विद्यार्थियों के लिए नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। नए मेडिकल कॉलेजों से दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी जिलों के विद्यार्थियों को राज्य के भीतर ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग से राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि ये संस्थान केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेंगे। इससे नई पीढ़ी के कुशल डॉक्टर तैयार होंगे और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में राज्य को और अधिक सशक्त बनाएगी।

https://x.com/i/status/2076588311737500136

श्रम मंत्रालय के प्रयासों से धनबाद में तीन पुराने औद्योगिक विवादों का समाधान, श्रमिकों को ₹55 लाख से अधिक की राहत

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] के क्षेत्रीय तंत्र ने धनबाद में तीन लंबे समय से लंबित औद्योगिक विवादों का सफलतापूर्वक समाधान कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा मृत कर्मचारियों के आश्रितों को 55 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय राहत दिलाई है।

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद तथा सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I एवं II के प्रयासों से हुए इन समझौतों ने समय पर न्याय, सामाजिक सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

BCCL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मिलेगा दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-I, धनबाद ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की बुर्रागढ़ कोलियरी के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को मुआवजा दिलाने से जुड़े विवाद का समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन कोयला इस्पात मजदूर पंचायत के बीच कई दौर की सुलह-वार्ता के बाद 1 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन (MoS) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत आश्रित को 60 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 30 लाख रुपये है।

FCIL के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिला लंबित ब्याज भुगतान

सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय)-II, धनबाद ने फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (FCIL) के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों पर देय ब्याज के लंबे समय से लंबित विवाद का भी समाधान कराया।

7 जुलाई 2026 को हुए समझौते के अनुसार FCIL प्रबंधन सेवानिवृत्ति की तिथि से लेकर अनुग्रह राशि (Ex-gratia) और अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) के वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भुगतान करेगा। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव करीब 14 लाख रुपये है।

सुलह प्रक्रिया के दौरान नियोक्ताओं की यह वैधानिक जिम्मेदारी भी रेखांकित की गई कि सेवानिवृत्ति लाभों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। FCIL प्रबंधन ने भविष्य में ऐसी देरी रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

ECL के दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को भी मिली राहत

क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के एक दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को वित्तीय सहायता दिलाने से जुड़े विवाद का भी सफल समाधान कराया।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन के बीच सुलह-वार्ता के बाद 3 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते का अनुमानित वित्तीय प्रभाव लगभग 11 लाख रुपये है। इसके तहत आश्रित को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उसे समय पर आर्थिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी।

सुलह प्रक्रिया के दौरान ECL प्रबंधन को कर्मचारियों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के प्रति अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करने के महत्व से भी अवगत कराया गया।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) का क्षेत्रीय तंत्र नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से श्रम कानूनों के पालन, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवानिवृत्ति लाभों के समयबद्ध वितरण तथा उद्योगों में विश्वास और सहयोग का वातावरण मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को समय पर न्याय, वित्तीय सुरक्षा और उनके वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने FCNR(B), ECB और OFCB योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

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केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (PFIs) के प्रबंध निदेशकों (MDs) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) [FCNR(B)] जमा, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) तथा ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (OFCBs) से संबंधित भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्वैप योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में वित्तीय सेवा विभाग, आर्थिक कार्य विभाग और राजस्व विभाग के सचिव, मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारतीय रिज़र्व बैंक के उप-गवर्नर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों ने वित्त मंत्री को बताया कि RBI की स्वैप योजनाओं के तहत FCNR(B), ECB और OFCB को भारतीय प्रवासी समुदाय (NRI) से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। बैंकों ने बताया कि ताज़ा FCNR(B) जमाओं पर ब्याज दर की सीमा हटाए जाने के बाद वे आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं, जिससे विशेषकर पाँच वर्ष की जमा योजनाओं में रुचि बढ़ी है।

बैंक प्रमुखों ने बताया कि सिंगापुर, हांगकांग, पश्चिम एशिया, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अन्य देशों में रहने वाले भारतीयों ने इन योजनाओं में विशेष रुचि दिखाई है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) में ECB के माध्यम से पूंजी जुटाने में और तेजी आएगी।

बैंकों ने बताया कि उन्होंने NRI समुदाय तक पहुँच बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों सहित विशेष संपर्क अभियान शुरू किए हैं, जिससे FCNR(B) जमा में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि गुजरात के GIFT सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) की इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट्स (IBUs) का उपयोग यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, पश्चिम एशिया, हांगकांग, सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने बैंकों से GIFT सिटी में उपलब्ध वित्तीय सेवाओं और संस्थागत ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

RBI के उप-गवर्नर ने आश्वस्त किया कि केंद्रीय बैंक जमा जुटाने और पात्र विदेशी उधार को सुगम बनाने के लिए बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को पूरा सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि RBI की दैनिक रिपोर्टिंग व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं की प्रगति की पारदर्शी और वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है।

वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने योजनाओं को मिली शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए बैंकों से NRI समुदाय के बीच संपर्क अभियान और तेज करने, नए जमा उत्पाद विकसित करने तथा शेष अवधि में विदेशी मुद्रा जुटाने की गति बनाए रखने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि RBI ने 5 जून 2026 की मौद्रिक नीति घोषणा में इन स्वैप योजनाओं की शुरुआत की थी। इनके तहत नई FCNR(B) जमाओं के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा तथा पात्र ECB और OFCB के लिए रियायती स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाह्य क्षेत्र की मजबूती बढ़ाना है।

FCNR(B) जमा योजना 30 सितंबर 2026 तक, जबकि ECB और OFCB योजनाएँ 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेंगी।

​कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: धमतरी में विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह शुरू

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13 से 18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीका

रायपुर- धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

​कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

​यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),​जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और ​निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।

​बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

​धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

​कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है।  सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

छत्तीसगढ़ विधानसभा: राम मंदिर चंदा विवाद पर सदन में भारी हंगामा, विपक्षी दल का वॉकआउट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे के मुद्दे पर सदन में जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक हाथों में पोस्टर लेकर विधानसभा पहुंचे और इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।


जनभावनाओं और पारदर्शिता का हवाला

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि वे यह मुद्दा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था का प्रतिनिधित्व करते हुए उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया,

"देशभर के श्रद्धालुओं ने अटूट विश्वास के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण राशि (चंदा) दी थी। यदि उस राशि के रखरखाव या उपयोग को लेकर कोई सवाल उठ रहे हैं, तो इस पर सदन में खुली चर्चा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।"

कांग्रेस विधायकों ने इस विषय पर काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव के माध्यम से विस्तृत चर्चा कराने की मांग पर जोर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने राम मंदिर के लिए श्रद्धापूर्वक योगदान दिया है। जनता से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति न देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं: सत्ता पक्ष

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने विपक्ष की इस मांग का कड़ा विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा मामला पूरी तरह से केंद्रीय और स्वायत्त विषय है, जो राज्य सरकार के प्रशासनिक या विधायी दायरे में नहीं आता। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल उन्हीं विषयों पर चर्चा कर सकती है जो राज्य सूची के अंतर्गत आते हों, इसलिए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज किया प्रस्ताव

दोनों पक्षों के बीच बढ़ते गतिरोध को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने व्यवस्था दी कि प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव नियमों के अनुरूप राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है। इस आधार पर उन्होंने विपक्ष के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष के इस निर्णय के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।

 

MeitY ने BFSI क्षेत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In), वित्तीय क्षेत्र कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (CSIRT-Fin) और SISA के सहयोग से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (BFSI) तथा डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया।

रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों, नियामकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से बदलते साइबर खतरों का समग्र आकलन उपलब्ध कराती है।

रिपोर्ट जारी करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि साइबर खतरे लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि CERT-In, CSIRT-Fin और SISA के बीच यह सहयोग भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।

रिपोर्ट डिजिटल फॉरेंसिक एवं इंसिडेंट रिस्पॉन्स (DFIR) अनुसंधान, CERT-In और CSIRT-Fin के विश्लेषण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित खतरों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि पिछले संस्करण में किए गए सात प्रमुख पूर्वानुमानों में से छह अब वास्तविकता बन चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी नए साइबर खतरे के सामने आने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय तेजी से घट रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडेंशियल चोरी, सप्लाई-चेन पर हमले और क्लाउड का दुरुपयोग जैसे खतरे अब सामान्य हमले की रणनीतियां बन चुके हैं। आधुनिक साइबर हमले अब वैध लॉगिन, अधिकृत भुगतान या सामान्य उपयोगकर्ता गतिविधि की तरह दिखाई देते हैं, जिससे उन्हें समय रहते पहचानना बेहद कठिन हो जाता है।

SISA के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि नवाचार और उसके दुरुपयोग के बीच की दूरी काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि BFSI क्षेत्र का आधार विश्वास है और साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि संस्थानों की विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत का वित्तीय तंत्र जितना अधिक डिजिटल और परस्पर जुड़ा हुआ होगा, साइबर सुरक्षा उतनी ही साझा जिम्मेदारी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट संस्थानों को उभरते खतरों का पूर्वानुमान लगाने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में मदद करेगी।

रिपोर्ट में 'एनाटॉमी ऑफ साइबर फेल्योर' नामक चार-स्तरीय ढांचा (4-Layer Gap Archetype Framework) भी प्रस्तुत किया गया है, जो यह समझने में मदद करता है कि आधुनिक साइबर हमले किन कमजोरियों का लाभ उठाकर बड़े सुरक्षा उल्लंघन में बदल जाते हैं। इसके आधार पर संस्थान जोखिमों की पहचान कर अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

रिपोर्ट में अगले 18 महीनों का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बुनियादी सुरक्षा उपायों को मजबूत करने, निरंतर जोखिम मूल्यांकन, समन्वित प्रतिक्रिया और अधिक सक्षम साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

आईएनएस सुदर्शिनी बोस्टन पहुँचा, 'सेल बोस्टन 2026' में भारत का किया प्रतिनिधित्व

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भारतीय नौसेना का सेल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क में Sail4th 250 समारोह में सफल भागीदारी के बाद 12 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन पहुँचा। जहाज ने ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स (Grand Parade of Sails) में भाग लेकर सेल बोस्टन 2026 के शुभारंभ में हिस्सा लिया।

बोस्टन स्थित भारत के महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स और बोस्टन में जहाज के औपचारिक प्रवेश के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर सवार हुए। भारतीय तिरंगा लहराते हुए आईएनएस सुदर्शिनी ने कैसल आइलैंड और सीपोर्ट डिस्ट्रिक्ट जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए बोस्टन फिश पियर पर लंगर डाला।

20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक पाल नौकाओं (Tall Ships) के अंतरराष्ट्रीय बेड़े के साथ आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 2026 ट्रांसओशैनिक अभियान के तहत भारत के समुद्री सद्भावना दूत (Maritime Ambassador of Goodwill) के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। जहाज 12 से 15 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए भी खुला रहेगा।

नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर और न्यूयॉर्क की सफल यात्राओं के बाद सेल बोस्टन 2026 में आईएनएस सुदर्शिनी की भागीदारी भारत-अमेरिका के बढ़ते समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करती है तथा वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करती है।

भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड 2026 में भारतीय छात्रों का स्वर्णिम प्रदर्शन, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (International Physics Olympiad - IPhO) 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय दल के कनिष्क जैन, ऋद्धेश अनंत बेंदाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन छात्रों की यह उपलब्धि देश की युवा शक्ति (युवा शक्ति) की असीम क्षमता तथा विज्ञान और अनुसंधान के प्रति उनके समर्पण का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है।

मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले एक दशक में भारतीय विद्यार्थियों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के विभिन्न संस्करणों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर लिखा:

“हमारे युवाओं का शानदार प्रदर्शन!

कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय दल के कनिष्क जैन, ऋद्धेश अनंत बेंदाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी को हार्दिक बधाई।

उनकी यह उपलब्धि हमारी युवा शक्ति की असीम क्षमता तथा विज्ञान और अनुसंधान के प्रति उनके जुनून का एक और प्रेरणादायक उदाहरण है। यह भी अत्यंत प्रशंसनीय है कि पिछले एक दशक में हमारे विद्यार्थियों ने इस मंच के विभिन्न संस्करणों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।”

जेल से छूटते ही खूनी संघर्ष: बदला लेने पहुंचे बदमाश की पीट-पीटकर हत्या

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 दुर्ग। जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुंद्रापारा इलाके में रविवार को पुरानी रंजिश के चलते एक बार फिर खूनी संघर्ष हो गया। जेल से छूटने के बाद बदला लेने पहुंचे आदतन बदमाश लेखराम कोठारी की दूसरे पक्ष ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसे देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।


प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद जेल से छूटा था मृतक

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक लेखराम कोठारी और चेलक पक्ष के लोगों के बीच पिछले दो दिनों से लगातार विवाद चल रहा था। इससे पहले भी दोनों गुटों के बीच मारपीट हुई थी, जिसकी शिकायत पद्मनाभपुर थाने तक पहुंची थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने लेखराम के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई कर उसे जेल भेज दिया था।

बदला लेने की नीयत से पहुंचा था आरोपी

बताया जा रहा है कि रविवार को जेल से रिहा होते ही लेखराम अपने साथियों को लेकर चेलक पक्ष से बदला लेने के लिए उनके इलाके में पहुंच गया। वहां दोनों पक्ष एक बार फिर आमने-सामने आ गए। शुरुआत में उनके बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते लाठी-डंडों और हिंसक मारपीट में बदल गई।

7 से 8 लोगों ने घेरकर उतारा मौत के घाट

आरोप है कि विवाद के दौरान चेलक पक्ष के 7 से 8 लोगों ने लेखराम को चारों तरफ से घेर लिया और उस पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में लेखराम गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि बचाव में आए कुछ अन्य लोगों को भी चोटें आईं। घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद लेखराम को मृत घोषित कर दिया।

इलाके में पसरा सन्नाटा, जांच में जुटी पुलिस

हत्या की खबर मिलते ही पद्मनाभपुर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कुंद्रापारा में तनाव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आसपास के लोगों व चश्मदीदों से पूछताछ कर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आज से

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज (सोमवार) से शुरू होने जा रहा है, जो 17 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस पांच दिवसीय सत्र के दौरान कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र के दौरान राज्य सरकार सदन में नौ महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है।


पहले ही दिन स्थगन प्रस्ताव की तैयारी

सत्र के दौरान किसानों की समस्याएं, प्रदेश की कानून-व्यवस्था और नवा रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सदन में भारी हंगामे के आसार हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र के पहले ही दिन नकटी गांव के संवेदनशील मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।

दिवंगत तीजन बाई को दी जाएगी श्रद्धांजलि

विधानसभा की परंपरा के अनुसार, सत्र के पहले दिन देश की प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित दिवंगत तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। शोक प्रकट करने के बाद ही सदन की औपचारिक कार्यवाही शुरू होगी।

सत्र में गूंजेंगे 1033 सवाल, सत्ता पक्ष भी रेस में

इस मानसून सत्र को लेकर विधायकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। विधानसभा सचिवालय को कुल 1033 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि नियम के मुताबिक 36 विधायकों ने अपने कोटे के अधिकतम 20-20 सवाल लगाए हैं। इन सवाल पूछने वाले विधायकों में सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि जनहित के कई अहम मुद्दों पर सदन में तीखी और विस्तृत चर्चा देखने को मिलेगी।

सत्र का कार्यक्रम

शुरुआती चार दिन (सोमवार से गुरुवार): प्रश्नकाल और शासकीय कार्य (संशोधन विधेयकों पर चर्चा और पारित करना)।

अंतिम दिन (17 जुलाई, शुक्रवार): गैर-शासकीय संकल्पों पर चर्चा और उनका निपटारा किया जाएगा।

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