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अवैध रेत भंडारण और परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 1740 घनमीटर रेत जब्त

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  रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के तहत प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभागीय अमला दिन-रात सक्रिय रहकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए रात्रिकालीन गश्त, सघन निगरानी, औचक निरीक्षण और छापेमार कार्रवाई के साथ-साथ ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।


    सचिव खनिज साधन विभाग तथा संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम ने जिले के आरंग तहसील अंतर्गत ग्राम कागदेही में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान समोदा-कागदेही मार्ग तथा आर्या पेट्रोल पंप के दक्षिण दिशा में फॉरेस्ट नर्सरी के पास बिना वैध अनुमति के गौण खनिज साधारण रेत का अवैध भंडारण पाया गया। जांच में छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम 2009 के उल्लंघन की पुष्टि होने पर खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 1740 घनमीटर रेत जप्त की गई।


      जप्त रेत को नगर पंचायत समोदा के पार्षद  देवेंद्र कुमार साहू के सुपुर्द किया गया। वहीं सघन जांच के दौरान ग्राम समोदा के पास अवैध रेत परिवहन में संलग्न दो हाईवा वाहनों को भी जप्त कर आरंग थाना परिसर में खड़ा कराया गया।

मवेशी तस्करी का भंडाफोड़: जंगल में पेड़ों से बंधे मिले 28 पशु, मुख्य आरोपी समेत 5 गिरफ्तार

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 रायपुर : कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र में ग्रामीणों की सजगता से मवेशी तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने जंगल से 28 मवेशियों को बरामद कर मुख्य आरोपी रहमद खान समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में पशु क्रूरता अधिनियम और छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।


जानकारी के अनुसार, बतरा गांव के ग्रामीणों ने टावर मोहल्ला पाली निवासी विजय नेताम को जंगल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी थी। इसके बाद विजय नेताम ग्रामीणों के साथ भदरापारा क्षेत्र पहुंचे, जहां कुछ संदिग्ध लोग भाग निकले, जबकि पांच लोगों को मौके पर पकड़ लिया गया।

ग्रामीणों ने जंगल में 28 मवेशियों को पेड़ों से बंधा पाया। बताया जा रहा है कि पशुओं को लंबे समय से चारा और पानी नहीं दिया गया था, जिससे उनकी हालत खराब हो गई थी। सूचना मिलने पर पाली पुलिस मौके पर पहुंची और सभी मवेशियों को कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, बरामद मवेशियों की अनुमानित कीमत करीब 84 हजार रुपये है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है।

ग्रामीणों को मिल रही धमकियां

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फरार तस्करों और आरोपियों के परिजन फोन कर धमकियां दे रहे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस से मामले में आईटी एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने बढ़ाई निगरानी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में पहले भी मवेशी तस्करी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पुलिस ने ग्रामीणों की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा है कि जंगल से लगे इलाकों में गश्त बढ़ाई जाएगी और रात के समय विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना देने की अपील भी की गई है।

शराब घोटाले में अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सशर्त जमानत मंजूर

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी Anil Tuteja को जमानत दे दी। अदालत ने ट्रायल लंबा चलने और मामले के कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल जाने का हवाला देते हुए यह राहत प्रदान की।


सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि अनिल टुटेजा को 21 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में अभी लगभग 85 गवाहों से पूछताछ बाकी है, जिससे ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।

जमानत पर लगाई गईं सख्त शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए आरोपी पर कई कड़ी शर्तें लागू की हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि टुटेजा राज्य से बाहर रहेंगे, किसी भी सरकारी अधिकारी से संपर्क नहीं करेंगे और गवाहों को प्रभावित करने या जांच में हस्तक्षेप करने का प्रयास नहीं करेंगे।

ED ने लगाए हैं बड़े आरोप

Enforcement Directorate (ED) के अनुसार, कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले में करीब 3,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
ईडी का आरोप है कि शराब कारोबार से जुड़े इस कथित सिंडिकेट में नौकरशाह, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोग शामिल थे, जिन्होंने आबकारी नीति में बदलाव कर अवैध लाभ कमाया।
वहीं, ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा दाखिल आरोपपत्रों में कथित घोटाले की राशि लगभग 2,883 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में कई प्रभावशाली नामों की भूमिका की जांच की जा रही है।
फिलहाल मामला ट्रायल चरण में है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का किया शुभारंभ

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 रायपुर : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।


इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।


उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।


यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल

राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है।

आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का किया शुभारंभ

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी सशक्त

‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित सेवा से पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी, सड़क दुर्घटना और आपदा जैसी हर स्थिति में मिलेगी त्वरित सहायता

रायपुर- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं  की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच

‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल

राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है। 

आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

डीजल-पेट्रोल फिर होगा महंगा? होर्मुज संकट और रूसी तेल पर सख्ती से बढ़ी चिंता

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 Petrol-Diesel Price:  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की धीमी आवाजाही ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट आगे नहीं बढ़ाने से भारत की चिंता भी बढ़ गई है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।


दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन लागत प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। टैंकरों के इंश्योरेंस और शिपिंग खर्च में भी तेज इजाफा हुआ है।

भारत के सामने बढ़ी दोहरी चुनौती

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों का सीधा असर देश की महंगाई, सरकारी खर्च और आम लोगों के बजट पर पड़ता है।
यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत और चीन ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद जारी रखी। इससे भारत को लंबे समय तक सस्ता कच्चा तेल मिलता रहा और घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली। इसी दौरान रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया।
हालांकि अब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी गई अस्थायी राहत समाप्त कर दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों के लिए जोखिम और लागत दोनों बढ़ सकती हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था रूसी तेल आयात

डेटा के अनुसार, मई महीने में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था। कई महीनों तक भारत के कुल तेल आयात में रूसी क्रूड की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत रही। यही वजह थी कि भारत वैश्विक तेल संकट के बावजूद बड़े झटके से बचा रहा।

क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां टैक्स, सब्सिडी और स्टॉक मैनेजमेंट जैसे विकल्पों के जरिए तत्काल असर को सीमित करने की कोशिश कर सकती हैं।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह वैश्विक तनाव और तेल सप्लाई की स्थिरता पर निर्भर मानी जा रही है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से लूट, मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल झपटकर फरार हुआ बदमाश

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में आज सोमवार सुबह बड़ी लूट की वारदात सामने आई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल लूट का शिकार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई।


जानकारी के अनुसार, धरमलाल कौशिक सोमवार सुबह करीब 8:15 बजे मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। बताया जा रहा है कि उस समय वे अकेले थे। इसी दौरान बाइक सवार एक बदमाश ने उनका मोबाइल फोन झपट लिया और मौके से फरार हो गया।

घटना के बाद कौशिक ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया। पुलिस आरोपी की पहचान कर उसकी तलाश में जुटी हुई है।

गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में मोबाइल लूट और झपटमारी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में पंडरी इलाके में भी एक युवक पर ब्लेड से हमला कर उसका मोबाइल लूट लिया गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से शहरवासियों में दहशत का माहौल है।

UAE के परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमला, आग लगने से मचा हड़कंप

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 Drone Attack in Abu Dhabi : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि रविवार को उसके परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद आग लग गई। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तीन ड्रोन पश्चिमी सीमा की ओर से देश में दाखिल हुए थे। इनमें से दो ड्रोन को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, जबकि तीसरा ड्रोन अबू धाबी स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र की बाहरी सीमा के पास एक बिजली जनरेटर से टकरा गया, जिससे आग लग गई।


अधिकारियों ने बताया कि आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया और घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। साथ ही संयंत्र की परमाणु सुरक्षा व्यवस्था और संचालन पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

UAE ने कहा- जवाब देने का अधिकार सुरक्षित

UAE के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “खतरनाक उकसावा” और “अस्वीकार्य आक्रामकता” करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उचित जवाब देने का अधिकार है। हालांकि, UAE ने अभी तक किसी देश या संगठन को हमले के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।

UAE ने पहले भी ईरान पर अपने ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, ईरान ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि UAE क्षेत्रीय संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहा है।

IAEA ने जताई चिंता

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया।

पहले भी हो चुके हैं हमले

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में UAE और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। UAE का दावा है कि उसके नागरिक और ऊर्जा ढांचे को कई बार निशाना बनाया गया है। हालांकि, इन हमलों को लेकर क्षेत्रीय तनाव लगातार गहराता जा रहा है।

पीएम मोदी ने स्वीडिश कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित

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 PM Modi in Sweden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडिश कंपनियों से भारत में विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना समेत कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की रफ्तार तेजी से आगे बढ़ रही है और देश निवेश, नवाचार तथा विनिर्माण के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक केंद्रों में शामिल हो चुका है।


स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन (ERT) को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पूरी गति से चल रही है। उन्होंने स्वीडिश और यूरोपीय कंपनियों को भारत के विकास अभियान में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

कई क्षेत्रों में निवेश की अपील

प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप टेक मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा, अवसंरचना, शहरी परिवर्तन, गतिशीलता, स्वास्थ्य सेवा और लाइफ साइंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में सभी कंपनियों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं और सरकार निवेशकों को बेहतर माहौल देने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार की अगली लहर भारत में सह-निर्मित होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत की युवा आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे को देश की बड़ी ताकत बताया।

भारत-स्वीडन साझेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार और स्थिरता जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने स्वीडन की तकनीकी क्षमता और भारत के विशाल बाजार एवं प्रतिभा को साथ लाने की जरूरत बताई।

वोल्वो समूह द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोप और भारत की कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भारत-ईयू व्यापार समझौते को बताया अहम

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते संबंधों का स्वागत किया। उन्होंने हाल ही में संपन्न भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को “परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी” बताया।

उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापार, तकनीक, विनिर्माण, सेवाओं और मजबूत सप्लाई चेन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए दोनों पक्ष तेजी से काम कर रहे हैं।

भारत को बताया निवेश का आकर्षक केंद्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज निवेश, नवाचार और उत्पादन के लिए दुनिया के सबसे भरोसेमंद और आकर्षक देशों में से एक बन चुका है। उन्होंने “डिजाइन फॉर इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया” के विजन को दोहराते हुए यूरोपीय कंपनियों से भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया।

उन्होंने भारत और यूरोप के बीच शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत का युवा और कुशल कार्यबल भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा।

सुशासन तिहार में साकार हुआ पक्के घर का सपना

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों को सौंपी प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

रायपुर- “अपना पक्का घर केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और नए जीवन की मजबूत नींव होता है।” धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार 2026 के दौरान यह भाव उस समय जीवंत हो उठा, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चाबी सौंपकर उनके वर्षों पुराने सपनों को साकार किया। सुशासन तिहार  में भाटगांव की हितग्राही कुमारी यादव एवं  लता साहू को मुख्यमंत्री साय के हाथों आवास की चाबी प्रदान की गई। वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले इन परिवारों के लिए यह क्षण केवल एक सरकारी योजना का लाभ मिलने भर का नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व से भरे नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक बन गया।

हितग्राही कुमारी यादव ने बताया कि बरसात के दिनों में उनका परिवार लगातार परेशानियों का सामना करता था। कच्चे घर की टपकती छत और कमजोर दीवारों के कारण बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित महसूस कर रहा है और बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।

इसी प्रकार  लता साहू ने कहा कि पहले हर मौसम चिंता लेकर आता था, लेकिन अब पक्का घर मिलने से उनके परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ कार्य कर रही है और प्रत्येक पात्र एवं जरूरतमंद परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाया जा रहा है तथा जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई दिशा दी है।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

ग्रामीण अंचल की बेटी बनी प्रेरणा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सराहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

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सुशासन तिहार में मेधावी छात्रा कुसुम लता बिप्रे का सम्मान, टैबलेट देकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- धमतरी जिले के छोटे से ग्राम कंडेल की बेटी कुमारी कुसुम लता बिप्रे ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 97.40 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल धमतरी जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल भी प्रस्तुत की है।

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत धमतरी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुसुम लता को मंच पर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा आगे की पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से टैबलेट प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य सरकार उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकल रही ऐसी प्रतिभाएं विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं और सरकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, परिवार के संस्कार और विद्यार्थियों की मेहनत का सकारात्मक परिणाम है। साधारण परिवार से आने वाली कुसुम लता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

कुसुम लता ने बताया कि उन्होंने नियमित अध्ययन, अनुशासन और परिवार के सहयोग के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से जिले के अन्य विद्यार्थियों में भी शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। ग्रामीण अंचल की अनेक बेटियां अब उन्हें अपनी प्रेरणा के रूप में देख रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएं राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। शासन उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि सपनों की उड़ान गांवों से भी शुरू होकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है और प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

अबूझमाड़ में फैल रही है शिक्षा की रौशनी

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आज़ादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के अति दूरस्थ गांव कारकाबेड़ा में खुला नया प्राथमिक स्कूल

 नदी-नाले और पहाड़ पार कर 5 घंटे पैदल चलकर अधिकारियों ने कराया दाखिला

रायपुर- देश के गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शिक्षा की नई रोशनी की ओर बढ़ रहा है। इसका सबसे सुखद और ऐतिहासिक परिणाम नारायणपुर जिले के अति दूरस्थ ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला है, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी स्कूल की स्थापना हुई है। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस इलाके में अब बच्चों को बंदूक की जगह कलम और किताबें मिल रही हैं।

जनसमस्या शिविर से खुला विकास का रास्ता

​हाल ही में अबूझमाड़ के सुदूर क्षेत्र कोड़ेनार में एक जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में कारकाबेड़ा के ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए गांव में ही स्कूल खोलने की पुरजोर मांग की थी। कलेक्टर  ने मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए तत्परता दिखाई और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)  को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

​5 घंटे की पैदल यात्रा और सर्वे

​कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले कारकाबेड़ा गांव का सर्वे किया, जिसमें 20 बच्चे प्राथमिक शिक्षा के योग्य पाए गए। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी,खंड स्रोत समन्वयक, संकुल समन्वयक, सरपंच और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया। यह टीम दुर्गम रास्तों, कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग 5 घंटे की कठिन पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंची और नवीन प्राथमिक शाला का औपचारिक शुभारंभ किया।

मुफ्त गणवेश और शिक्षण सामग्री का वितरण

​स्कूल के पहले ही दिन बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही सभी 20 बच्चों को ​निःशुल्क गणवेश,​पाठ्यपुस्तकें और स्लेट,पेंसिल, श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं।

कारकाबेड़ा सरपंच रामूराम वड्डे ने कहा कि गांव में स्कूल खुलना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए जान जोखिम में डालकर दूर नहीं जाना पड़ेगा।

अतिथि शिक्षक की व्यवस्था,पड़ोसी गांवों को भी मिलेगा लाभ

​वर्तमान में इस स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक स्थानीय अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में कारकाबेड़ा के इस स्कूल का लाभ आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों, जैसे मरकूड़ के बच्चों को भी मिलेगा।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में स्कूल खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार और शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

विशेष लेख-नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई दस्तक

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चार दशकों बाद फिर सजी पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली की साप्ताहिक बाजारें

बंद पड़े हाट-बाजारों में लौटी रौनक, आदिवासी अंचलों की अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

रायपुर- कभी माओवाद के आतंक और भय के कारण वीरान पड़े बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल अब विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की मिसाल बनते जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर लौट रहा है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण उसूर ब्लॉक के आवापल्ली क्षेत्र अंतर्गत पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार हैं, जहां लगभग चार दशकों बाद फिर से रौनक लौट आई है।

एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में भय और असुरक्षा के कारण ग्रामीणों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी थी। माओवाद के प्रभाव के चलते यहां के पारंपरिक साप्ताहिक बाजार पूरी तरह ठप पड़ गए थे। लेकिन अब नक्सल मुक्त वातावरण बनने के बाद बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। ग्रामीण, व्यापारी और आदिवासी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

बस्तर की पहचान हैं साप्ताहिक हाट-बाजार

बस्तर अंचल केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि वनोपज आधारित समृद्ध परंपराओं के लिए भी देशभर में जाना जाता है। यहां के साप्ताहिक हाट-बाजार स्थानीय संस्कृति, सामाजिक जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

बीजापुर जिला चारों ओर से घने वनांचलों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समुदाय का जीवन जंगल और वनोपज पर आधारित है। इमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, तेंदू जैसी बहुमूल्य वनोपज यहां के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीण इन उत्पादों का संग्रहण कर साप्ताहिक बाजारों में विक्रय करते हैं तथा बदले में दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदते हैं।

इन बाजारों का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक जीवन का भी केंद्र होते हैं।

चार दशकों तक सन्नाटा, अब लौट रही जीवन की रफ्तार

उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार कभी आसपास के अनेक गांवों की आर्थिक धुरी हुआ करते थे। लेकिन माओवादी गतिविधियों और असुरक्षा के माहौल ने इन बाजारों की रौनक छीन ली। धीरे-धीरे यहां व्यापार बंद हो गया और क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगा।

अब जब क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, तब वर्षों से बंद पड़े बाजारों में फिर से दुकानें सजने लगी हैं। ग्रामीण दूर-दराज के गांवों से बाजार पहुंच रहे हैं। महिलाएं वनोपज लेकर आ रही हैं तो छोटे व्यापारी दैनिक उपयोग की सामग्री बेचने पहुंच रहे हैं। बाजारों में फिर से स्थानीय बोली, पारंपरिक वेशभूषा और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई देने लगी है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनः प्रारंभ हुए ये साप्ताहिक बाजार स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए आर्थिक संबल बनकर उभर रहे हैं। ग्रामीणों को अब अपने उत्पाद बेचने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है तथा स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर भी बढ़ रहे हैं।

बाजारों के पुनर्जीवित होने से छोटे व्यापारियों, किसानों और वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र में परिवहन, छोटे व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

शांति और विकास का नया प्रतीक बन रहा बीजापुर

बीजापुर में लौटती बाजार संस्कृति यह दर्शाती है कि शांति स्थापित होने पर विकास की संभावनाएं किस प्रकार तेजी से आकार लेती हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से अब वनांचल के गांव भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के बाजारों में लौटती रौनक केवल व्यापार की वापसी नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और समृद्ध भविष्य की वापसी का प्रतीक है। यह बदलता हुआ बीजापुर अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 का शुभारंभ

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गृह मंत्री विजय शर्मा ने किया कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण

रायपुर- प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक आधुनिक, त्वरित एवं नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 इंटीग्रेटेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस 2.0) का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर चलित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एवं 400 अत्याधुनिक डायल 112 वाहन का भी शुभारंभ किया जाएगा।

कार्यक्रम की तैयारियों के तहत प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। नेक्स्ट जेन सीजी डायल 112 प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से पुलिस सेवा, फायर सर्विस, मेडिकल इमरजेंसी सहायता, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपदा प्रबंधन सहायता तथा हाईवे इमरजेंसी जैसी सेवाओं को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे नागरिकों को त्वरित एवं समन्वित सहायता सुनिश्चित हो रही है। 

इस उन्नत प्रणाली में केंद्रीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, जीपीएस आधारित इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन, जीआईएस आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑटोमेटिक कॉल लोकेशन पहचान प्रणाली तथा तकनीक सक्षम डिस्पैच प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। नई व्यवस्था के माध्यम से अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा, सड़क दुर्घटना प्रतिक्रिया, चिकित्सकीय सहायता तथा जन-संकट की परिस्थितियों में और अधिक प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। 

प्रदेश में संचालित डायल 112 सेवा वर्ष 2018 से अब तक लाखों नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान कर चुकी है तथा वर्तमान में इसकी सेवाएं 16 जिलों तक सीमित थी अब यह प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तारित हो जायेगी।

राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग : B1 कोच जलकर खाक, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

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 त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में आज रविवार सुबह भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसा कोटा रेल मंडल के लूणी रीछा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच सुबह करीब 5:15 बजे हुआ। आग ट्रेन के B-1 एसी कोच और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में लगी, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


घटना की सूचना मिलते ही कोटा जंक्शन पर तुरंत अलर्ट जारी किया गया और राहत-बचाव दल को मौके के लिए रवाना किया गया। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, B-1 कोच में उस समय 68 यात्री सवार थे। ट्रेन के गार्ड ने सबसे पहले धुआं और आग देखी और तत्काल इसकी जानकारी लोको पायलट को दी। इसके बाद ट्रेन को इमरजेंसी में रोका गया।

15 मिनट में यात्रियों को निकाला गया सुरक्षित

सीनियर डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर Saurabh Jain ने बताया कि ट्रेन स्टाफ और आरपीएफ की तत्परता से करीब 15 मिनट के भीतर पूरे कोच को खाली करा लिया गया। आग तेजी से फैल रही थी और कुछ ही देर में पूरा कोच इसकी चपेट में आ गया। हालांकि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

आग फैलने से रोकने के लिए कोच किया अलग

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि आग को ट्रेन के अन्य डिब्बों तक पहुंचने से रोकने के लिए करीब 20 मिनट बाद प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया। आसपास के स्टेशनों से रेलवे कर्मचारी, तकनीकी टीमें और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंच गए।

आग इतनी भीषण थी कि B-1 कोच का अधिकांश हिस्सा जलकर खाक हो गया। वहीं लगेज वैन में रखा यात्रियों का सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। राहत एवं बचाव दल ने सुबह करीब 7:30 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।

धीरे-धीरे बहाल हो रहा रेल संचालन

रेलवे के अनुसार आग बुझने के बाद दोनों कोचों में भारी धुआं भर गया था, जिससे जांच और राहत कार्य में दिक्कतें आईं। फिलहाल दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर ट्रैक को धीरे-धीरे खोला जा रहा है और रुकी हुई ट्रेनों को आगे रवाना करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, राजधानी एक्सप्रेस सुबह 3:45 बजे Ratlam Junction से रवाना हुई थी और इसका अगला स्टॉप Kota Junction था। राजस्थान में प्रवेश से पहले विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के पास यह हादसा हो गया। रेलवे ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

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