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111 खातों से साइबर ठगी का जाल: 86 लाख का ट्रांजेक्शन, 10 आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग। जिले में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें 111 बैंक खातों के जरिए करीब 86 लाख रुपए के अवैध लेन-देन का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने बैंक खाते किराए पर देकर ठगी की रकम ट्रांसफर कराने में शामिल थे। इन खातों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से ठगी गई राशि को जमा और निकासी की जा रही थी।

इस पूरे मामले की जानकारी भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर दुर्ग स्टेशन रोड स्थित कर्नाटक बैंक की शाखा में संचालित 111 खातों की जांच की गई।

जांच में सामने आया कि इन खातों के जरिए अब तक 86,33,247 रुपए का अवैध ट्रांजेक्शन किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जो लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड और पासबुक उनके हवाले कर देते हैं। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।

गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 24 से 56 वर्ष के बीच है। इनमें मधु साहू, ज्योति गौतम, फरहद खान, भूपेश गोहिल, अजय कुमार उर्फ मोनू, मसीर आलम, नवीन भागवत, भूपेंद्र कुमार टंडन, संतोष बिसाई और हीरा सिंह शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपना बैंक खाता, ओटीपी या पासबुक किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें, क्योंकि ऐसे मामलों में खाताधारक भी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।

शादी से मुकरा प्रेमी, युवती ने दी जान; आरोपी गिरफ्तार

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 बलौदाबाजार। जिले के गिरौदपुरी क्षेत्र में प्रेम संबंध से जुड़ा एक दुखद मामला सामने आया है, जहां शादी का वादा कर संबंध बनाने के बाद मुकर जाने पर आहत युवती ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस मामले में आरोपी प्रेमी अजय टंडन (31) निवासी ग्राम बलौदा (हसुवा), थाना गिधौरी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।


पुलिस के अनुसार, आरोपी ने युवती को प्रेम संबंध में रखकर शादी का भरोसा दिलाया था। 25 जनवरी 2026 को युवती ने उसे अपने घर बुलाकर विवाह की बात कही, लेकिन आरोपी ने इनकार कर दिया और वहां से चला गया। इस घटना से मानसिक रूप से आहत युवती ने अपनी कलाई काट ली और कीटनाशक का सेवन कर लिया।

परिजनों ने गंभीर हालत में युवती को कसडोल होते हुए बलौदाबाजार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 1 फरवरी को उसकी मौत हो गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देश पर गिरौदपुरी चौकी में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। यह घटना प्रेम संबंधों में धोखे के गंभीर परिणामों की ओर संकेत करती है।

नक्सलवाद पर अमित शाह का सख्त संदेश: “अन्याय का जवाब हथियार नहीं”

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 Amit Shah in Lok Sabha: लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि अन्याय किसी के साथ भी हो सकता है, लेकिन उसके खिलाफ हथियार उठाना कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।


उन्होंने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है, और खासकर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में इसे लगभग समाप्त कर दिया गया है। सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश नक्सलवाद मुक्त भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

अमित शाह ने विपक्ष, विशेष रूप से Indian National Congress, पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि उनके शासनकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और आदिवासी कल्याण क्यों सुनिश्चित नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) का विकास से कोई संबंध नहीं है।

अपने संबोधन में उन्होंने ऐतिहासिक शख्सियतों का उल्लेख करते हुए कहा कि Bhagat Singh और Birsa Munda जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना हथियार उठाकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से करना पूरी तरह गलत और अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि ये महान हस्तियां अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी थीं, जबकि आज का भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां अपनी बात रखने के लिए संवैधानिक रास्ते मौजूद हैं।

गृह मंत्री ने साफ किया कि सरकार की नीति दो टूक है—जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, सरकार उनके पुनर्वास के लिए तैयार है। लेकिन जो हिंसा का रास्ता चुनेंगे, उन्हें सख्ती से जवाब दिया जाएगा।

अंत में उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में स्थिरता और सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं, और यह समय भारत के लिए शुभ साबित हुआ है।

शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव: अटल और नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय को मिले नए कुलपति

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक अहम प्रशासनिक खबर सामने आई है। राज्यपाल द्वारा प्रदेश के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों (वीसी) की नियुक्ति कर दी गई है। इस संबंध में राजभवन से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।


जारी आदेश के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति पद पर डॉ. ललित कुमार पटेरिया की नियुक्ति की गई है। डॉ. पटेरिया वर्तमान में शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ में कुलपति के रूप में कार्यरत थे।


वहीं, प्रोफेसर विनय चौहान, जो जम्मू एंड कश्मीर विश्वविद्यालय के बिजनेस स्कूल के डायरेक्टर हैं, उन्हें शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ का नया कुलपति नियुक्त किया गया है।

राजभवन के इस फैसले के बाद दोनों विश्वविद्यालयों में नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू होगी। शिक्षा जगत में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे शैक्षणिक गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नई दिशा मिलेगी।

भारत आने वाले ईरानी विमान पर हमला, बढ़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव

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 ईरान। मशहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े एक ईरानी नागरिक विमान को अमेरिकी एयरस्ट्राइक में निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि महान एयर (Mahan Air) का यह विमान भारत आने वाला था और मानवीय सहायता मिशन का हिस्सा था।


न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह विमान 1 अप्रैल को सुबह 4 बजे दिल्ली पहुंचने वाला था, जहां इसे राहत सामग्री लानी थी। लेकिन एयरपोर्ट पर खड़े होने के दौरान ही यह हमले की चपेट में आ गया, जिससे सहायता अभियान प्रभावित हो गया।

अमेरिका की पुष्टि नहीं

इस हमले को लेकर अब तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ईरानी सूत्रों ने इसे अमेरिकी कार्रवाई बताया है।

ईरान ने बताया ‘युद्ध अपराध’

ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास के मुताबिक, विमान में विभिन्न देशों से मंगाई गई दवाइयां और चिकित्सा उपकरण मौजूद थे और यह पूरी तरह मानवीय मिशन पर था।

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

ईरान ने शिकागो कन्वेंशन 1944, मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1971 और जिनेवा कन्वेंशन प्रोटोकॉल I का हवाला देते हुए कहा कि नागरिक विमान पर हमला अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस घटना की तत्काल जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

पहले से प्रतिबंधों में है एयरलाइन

गौरतलब है कि महान एयर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है। वॉशिंगटन का आरोप है कि इसके संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से हैं, हालांकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

इस घटना के बाद युद्धग्रस्त क्षेत्रों में नागरिक विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया।

चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि चंदूलाल वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया।

अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।”

यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का जगदलपुर में शंखनाद

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महाराष्ट्र और अरुणाचल के धावकों ने बिखेरी स्वर्णिम चमक

रायपुर- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत एथलेटिक्स की स्पर्धाओं में विशेष रूप से 5000 मीटर की दौड़ आकर्षण का केंद्र रही, जहाँ धावकों के बीच सेकंड के सौवें हिस्से तक की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस दौरान 110 मीटर बाधा दौड़ पुरूष एवं महिला वर्ग का पहला राउंड और 400 मीटर दौड़ महिला एवं पुरूष के पहले राउंड की प्रतियोगिता आयोजित की गई। बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में सोमवार को चार दिवसीय खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के पहले ही दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय एथलीटों ने अपनी खेल कुशलता का परिचय दिया।

पुरुष वर्ग में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र के धावकों ने ट्रैक पर अपना एकतरफा दबदबा कायम किया। महाराष्ट्र के गोविंद प्रकाश पाड़ेकर ने 15:11.35 का शानदार समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके ठीक पीछे छाया की तरह चल रहे उन्हीं के राज्य के सूरज जयराम माशी ने 15:11.64 के समय के साथ रजत पदक हासिल कर महाराष्ट्र की झोली में दोहरी सफलता डाल दी। इसी स्पर्धा में मध्य प्रदेश के रंगलाल दोदियार ने 15:22.48 के समय के साथ तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

वहीं महिला वर्ग में महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभा का लोहा देखने को मिला l अरुणाचल प्रदेश की नेदी नगी ने 18.24.66 की रफ्तार के साथ दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीतते हुए अपनी राज्य का मान बढ़ाया। इस मुकाबले में मध्य प्रदेश की आरती डावर ने 18:19.28 के समय के साथ कड़ा संघर्ष करते हुए रजत पदक अपने नाम किया, जबकि नागालैंड की टी सूचोई टी ने 18:35.68 के साथ कांस्य पदक जीता।

पहले दिन की खेल समाप्ति के बाद पदक तालिका में महाराष्ट्र एक स्वर्ण और एक रजत के साथ शीर्ष स्थान पर काबिज है, जबकि अरुणाचल प्रदेश एक स्वर्ण पदक जीतकर दूसरे स्थान पर बना हुआ है। मध्यप्रदेश ने एक रजत और एक कांस्य के साथ अपनी स्थिति मजबूत की है, वहीं नागालैंड एक कांस्य पदक के साथ तालिका में चौथे स्थान पर है। बस्तर की धरती पर शुरू हुआ यह खेल महाकुंभ आने वाले तीन दिनों में और भी रोमांचक मुकाबलों का गवाह बनेगा, जहाँ जनजातीय युवा अपनी खेल प्रतिभा से राष्ट्रीय मंच पर नई इबारत लिखेंगे।



चार साल की बेटी को घर पर छोड़, असम की भारोत्तोलक पल्लवी ने जीता खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक

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पल्लवी की बेटी महज छह महीने की थी जब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया

बीएसएफ में कार्यरत पति के सहयोग के बगैर आसान नहीं था यह वापसी का सफर

रायपुर- जब पल्लवी पायेंग की बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब असम की इस वेटलिफ्टर के सामने एक कठिन फैसला था। या तो वह अपने पसंदीदा खेल को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। ऐसे समय में उनके पति सुखावन थौमंग ने उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मां ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। पल्लवी ने इस त्याग को सार्थक करते हुए यहां आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।

असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने उनके खेल जीवन की रफ्तार को रोक दिया। इसी दौरान वह मां बनीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग मंच पर वापसी की इच्छा उनके भीतर हमेशा बनी रही। हालांकि, मां बनने के बाद खेल में लौटने का विचार जितना उत्साहजनक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।

पल्लवी ने साई मीडिया से कहा, “यह आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने मां बनने के बाद शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन एक महिला ही समझ सकती है कि पूरी फिटनेस में लौटने के लिए उसे किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बेटी को तब छोड़ा जब वह सिर्फ छह महीने की थी, ताकि मैं दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर सकूं। यह भावनात्मक फैसला था, लेकिन मुझे लगा कि यही सही समय है।” अब चार साल की उनकी बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार स्थित नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है।



यह फैसला आसान नहीं था।

बेटी से दूर लंबे समय तक रहना और कई बार अपने निर्णय पर सवाल उठाना, पल्लवी के सफर का हिस्सा रहा। लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया है, जबकि मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि जब मैं प्रतियोगिताओं के लिए बाहर जाती हूं, तो मेरी बेटी का पूरा ख्याल रखा जाए।” पल्लवी के पति, जो राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाजी पदक विजेता रह चुके हैं, वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं और जम्मू में तैनात हैं।

इसके बावजूद वापसी का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। मां बनने के बाद 2023 में गोलाघाट में हुए राज्य चैंपियनशिप में पल्लवी छठे स्थान पर रहीं। अगले साल डिब्रूगढ़ में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब प्रतियोगिता देर रात तक चली और वह अपनी लय नहीं बना सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाने लगी। तेजपुर में हुए राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और उसी साल अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस वर्ष भी अस्मिता लीग में एक और स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया।

रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक उनके लिए खास रहा। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक मेरे करियर के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला है कि मैं इस स्तर की खिलाड़ी हूं।”

कायस्थ मंगल भवन का लोकार्पण: सामाजिक एकजुटता और विकास की नई पहल

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कायस्थ समाज का देश-प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

सर्व समाज के लिए उपयोगी होगा कायस्थ मंगल भवन: संजय श्रीवास्तव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज चंदखुरी में कायस्थ मंगल भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कायस्थ समाज को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता कौशल्या की पावन भूमि चंदखुरी में इस मंगल भवन का शुभारंभ होना पूरे समाज के लिए खुशी और गौरव का विषय है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कायस्थ समाज सदैव से एक प्रबुद्ध और जागरूक समाज रहा है, जिसने देश एवं प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन से लेकर सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज की सक्रिय भूमिका रही है, जो प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है और उन्हें विश्वास है कि कायस्थ समाज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जब समाज संगठित होकर कार्य करता है, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हो रहे विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि आज अंबिकापुर से दिल्ली और कलकत्ता के लिए सीधी हवाई सेवा प्रारंभ की गई है, जिससे प्रदेशवासियों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने बजट में सीजी वायु योजना का प्रावधान किया है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के सभी हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। साथ ही कार्गो सेवा भी प्रारंभ की गई है, जिससे किसान अपने उत्पाद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंचा सकेंगे।

इस अवसर पर नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने कहा कि कायस्थ मंगल भवन का निर्माण समाज की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह भवन किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि सर्व समाज के उपयोग के लिए बनाया गया है। यहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकेगा, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह भवन आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वी.वाय. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने कहा कि इस मंगल भवन का निर्माण पूरे समाज के सहयोग से संभव हुआ है और इसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या की पावन भूमि पर इस भवन का निर्माण होना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है और यह भवन निश्चित रूप से शुभ कार्यों में उपयोगी सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, सहित कायस्थ समाज के समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026-महिला हॉकी में मिजोरम और ओडिशा पहुँचे फाइनल में

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रायपुर- 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के अंतर्गत सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में महिला हॉकी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबले आज उत्साह और रोमांच के बीच खेले गए।

पहले सेमीफाइनल मैच में मिजोरम की टीम ने झारखंड को कड़े मुकाबले में 3-2 से पराजित कर फाइनल में स्थान बनाया। दोनों टीमों के बीच मैच बेहद प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जिसमें मिजोरम ने अंत तक बढ़त बनाए रखी।

दूसरे सेमीफाइनल मैच में उड़ीसा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश को 8-0 से हराया। उड़ीसा की टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।

इन परिणामों के साथ मिजोरम और उड़ीसा की टीमें अब फाइनल में आमने-सामने होंगी, जहाँ खेल प्रेमियों खिताब के लिए रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।


'हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई यात्रा कर सके' प्रधानमंत्री का यह सपना छत्तीसगढ़ में भी हो रहा है साकार : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : प्रदेश में हवाई संपर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी से अंबिकापुर–दिल्ली - कोलकाता हवाई सेवा का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख शहरों को विमान सेवाओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे आमजन को भी सुलभ हवाई यात्रा का लाभ मिल सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह परिकल्पना रही है कि “हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके” और छत्तीसगढ़ में यह सपना अब साकार होता दिख रहा है। उन्होंने सरगुजा अंचल के नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय सांसद के प्रयासों से यह महत्वपूर्ण सुविधा संभव हो पाई है। राजधानी दिल्ली और कोलकाता से सीधा जुड़ाव होने से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश में हवाई सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है और हाल ही में बिलासपुर एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सुविधा भी प्रारंभ हुई है। इसके साथ ही बजट में ‘सीजी वायु’ योजना के माध्यम से घरेलू विमान सेवाओं के सुचारू संचालन का प्रावधान भी किया गया है। रायपुर एयरपोर्ट पर कार्गो सेवा प्रारंभ होने से प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।


उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि अंबिकापुर (दरिमा) में 72-सीटर विमान के संचालन से दिल्ली–अंबिकापुर–कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश को बड़ी सुविधा प्राप्त हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि बिलासपुर में नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू होने के साथ-साथ दक्षिण छत्तीसगढ़ में जगदलपुर में भी एयर कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है।

कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से मंत्री श्री राजेश अग्रवाल एवं सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने भी मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।

उल्लेखनीय है कि निर्धारित शेड्यूल के तहत यात्रियों को आने-जाने दोनों दिशाओं में सुविधा उपलब्ध होगी तथा बिलासपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय होने के साथ उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वाणिज्यिक केंद्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा एवं खनिज भंडार से समृद्ध है। साथ ही मैनपाट, तातापानी एवं विविध जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।

हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सरगुजा संभाग सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जुड़ जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा।

एलायंस एयर का फ्लाइट शेड्यूल (सप्ताह में 4 दिन)

विमानन कंपनी एलायंस एयर द्वारा इन उड़ानों का संचालन किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग आधिकारिक वेबसाइट पर प्रारंभ हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमान यहां संचालित हो सकते हैं। माँ महामाया एयरपोर्ट दरिमा, अम्बिकापुर लगभग 365 एकड़ में फैला हुआ है, एयरपोर्ट के सिविल एवं विद्युतीकरण कार्य हेतु राशि रू. 48.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, जिससे इस एयरपोर्ट में सभी कार्य डीजीसीए मानक अनुरूप कराया गया है। मां महामाया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों के अनुरूप कराया गया। हवाई अड्डे में लगभग 100 वाहन की पार्किंग की व्यवस्था के साथ टर्मिनल भवन तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया है।

दिल्ली रूट (सोमवार और बुधवार)

सोमवार (फ्लाइट नं. 91613): दिल्ली से बिलासपुर होते हुए सुबह 11:35 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। वापसी में दोपहर 12:00 बजे अम्बिकापुर से सीधे दिल्ली के लिए उड़ान भरेगी। बुधवार (फ्लाइट नं. 91614): दिल्ली से सुबह 10:25 बजे अम्बिकापुर आगमन और दोपहर 12:00 बजे बिलासपुर होते हुए दिल्ली प्रस्थान करेगी।

कोलकाता रूट (गुरुवार और शनिवार)

शनिवार (फ्लाइट नं. 91763): कोलकाता से बिलासपुर होते हुए सुबह 10:00 बजे अम्बिकापुर आगमन और 10:25 बजे सीधे कोलकाता प्रस्थान करेगी। गुरुवार (फ्लाइट नं. 91765): कोलकाता से सुबह 08:50 बजे अम्बिकापुर आगमन और 09:15 बजे बिलासपुर होते हुए कोलकाता प्रस्थान करेगी।

आधुनिक तकनीक के साथ संवेदनशीलता ही नई पुलिसिंग की पहचान है - मुख्यमंत्री

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चंदखुरी स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी में आयोजित उप निरीक्षक संवर्ग के दीक्षांत (पासिंग आउट परेड) समारोह में शामिल हुए। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। इस अवसर पर सूबेदार, उप निरीक्षक एवं प्लाटून कमांडर संवर्ग के अधिकारियों को सफल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस सत्र में कुल 859 प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण पूर्ण किया, जिनमें 54 सूबेदार, 528 उप निरीक्षक (जीडी), 02 उप निरीक्षक (कंप्यूटर), 01 उप निरीक्षक (रेडियो), 01 उप निरीक्षक (अंगुली चिन्ह), 68 उप निरीक्षक (एसबी) तथा 205 प्लाटून कमांडर शामिल हैं।


मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन सभी प्रशिक्षुओं के जीवन का एक यादगार पड़ाव है, जहाँ से वे राष्ट्र और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए संकल्पित होकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कठोर प्रशिक्षण के बाद प्राप्त यह उपलब्धि न केवल प्रशिक्षुओं के लिए, बल्कि उनके परिजनों और पूरे प्रदेश के लिए भी गर्व का विषय है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले वर्ष जब उन्होंने इन्हीं युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए थे, तब उनके पास प्रतिभा थी, और आज प्रशिक्षण के बाद उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का समावेश हो चुका है, जो उन्हें एक सफल अधिकारी बनाएगा।


मुख्यमंत्री साय ने पुलिस सेवा को अत्यंत प्रतिष्ठित एवं जिम्मेदारीपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी प्रतिष्ठित सेवा का आधार सत्यनिष्ठा होती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि पुलिस का मूल दायित्व नागरिकों की रक्षा करना है। जब भी कोई नागरिक असुरक्षित महसूस करता है, तो सबसे पहले पुलिस के पास ही जाता है। इसलिए जनता का विश्वास बनाए रखना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा का संकल्प और उससे जुड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसे हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी कभी आसान नहीं होती, लेकिन क्षमता और समर्पण के साथ इसे सफलतापूर्वक निभाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान किए गए कठिन परिश्रम की तरह ही सेवा में भी निरंतर प्रयास और समर्पण से संतोष और सफलता प्राप्त होती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज का यह निष्क्रमण केवल अकादमी से बाहर निकलना नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यक्षेत्र में प्रवेश का संकेत है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के ‘निष्क्रमण संस्कार’ से जोड़ते हुए बताया कि जैसे शिशु पहली बार घर से बाहर निकलता है, उसी प्रकार आज ये प्रशिक्षु सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण से निकलकर व्यापक जिम्मेदारियों वाले सेवा क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पुलिसिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। पिछले दो वर्षों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं त्वरित बनाया गया है, आधुनिक तकनीक और उपकरणों को पुलिस बल में शामिल किया गया है तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। साथ ही प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक स्वरूप दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं होगी, बल्कि एक सक्रिय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगी, जिसके लिए उसे प्रतिक्रियात्मक से सक्रियात्मक एजेंसी में रूपांतरित होना होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश वर्तमान में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जिसमें औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानून लागू किए गए हैं। यह दीक्षांत समारोह इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है कि यह उप निरीक्षकों का पहला बैच है, जिसने इन नवीन संहिताओं के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये अधिकारी इन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा, विकास और विश्वास इन तीन स्तंभों पर कार्य कर रही है और पुलिस की भूमिका इन तीनों को सशक्त बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज से जुड़कर लोगों का विश्वास जीतना चाहिए, क्योंकि क्षेत्र डर से जीता जा सकता है, लेकिन दिल केवल विश्वास से ही जीता जा सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में स्मार्ट, तकनीक-संचालित और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पुलिस डिजिटल, तकनीकी और उन्नत साधनों से लैस होगी, लेकिन जनता का विश्वास केवल व्यवहार, आचरण और निष्ठा से ही अर्जित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इन प्रशिक्षुओं का जीवन केवल व्यक्तिगत नहीं रहा, बल्कि समाज और राज्य की सेवा के लिए समर्पित हो गया है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय न्याय, ईमानदारी और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। अंत में उन्होंने सभी को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपनी निष्ठा और समर्पण से छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, सशक्त और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी केवल कानून के रक्षक ही नहीं, बल्कि प्रदेश की आशाओं और विश्वास के संरक्षक भी हैं।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके सभी उप निरीक्षकों एवं उनके परिजनों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये प्रशिक्षु छत्तीसगढ़ पुलिस की ताकत को और सुदृढ़ करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न हुई है, जो शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे ऐसा वातावरण बनाएँ जिसमें अपराधियों के मन में कानून का भय और आम नागरिकों के मन में पुलिस के प्रति विश्वास बना रहे।

समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं—सर्वेश कुमार, किरण, मीताली बुग्गे, देवेन्द्र सिंह, भरत कुमार, जयप्रकाश राठौर, सचिन यादव, सुंदर मनीष, जितेन्द्र कुमार वैष्णव, जितेंद्र सिंह राजपूत एवं राकेश वैष्णव—को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, एडीजी श्री दीपांशु काबरा, अकादमी के संचालक श्री अजय यादव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक पल्लव सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं के परिजन उपस्थित थे।

एशियाई खेलों के चयन पर नजर, तीरंदाज कोमालिका बारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में दमदार प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त

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 रायपुर : साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं।


हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।

अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।

कोमालिका ने साई मीडिया को कहा कि, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।”

झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे कहा कि, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।” वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार- चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।

कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।

प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था।

वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।”

उन्होंने आगे कहा कि , “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”

24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वे कहती हैं कि, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।”

महासमुंद में दिल दहला देने वाली घटना, प्रेमी जोड़े ने उठाया खौफनाक कदम

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां प्रेम में असफल एक प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।


जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-53 स्थित मुरई धुआं नाला के पास एक खेत में पेड़ पर दोनों के शव लटके हुए मिले। सुबह खेत में काम करने पहुंचे ग्रामीणों ने यह दृश्य देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पेड़ से नीचे उतारकर कब्जे में लिया। फिलहाल मृतकों की पहचान आधिकारिक रूप से नहीं हो पाई है।

प्रारंभिक जांच में प्रेम संबंधों में पारिवारिक नाराजगी या दबाव के चलते इस कदम की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आत्महत्या के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: जंगल से हथियारों का जखीरा बरामद

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 मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। डीआरजी और आईटीबीपी के जवानों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जंगल से माओवादियों का हथियारों से भरा डंप बरामद किया है।


पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया। विश्वसनीय सूचना के आधार पर कांकेर जिले के उयकाटोला और कोवाचीटोला तथा मानपुर ब्लॉक के कलवर गांव के बीच जंगल में छिपाकर रखा गया यह डंप बरामद किया गया।

बरामद हथियारों में एक AK-47 रायफल, एक इंसास रायफल, कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री शामिल है। सुरक्षा बलों ने सभी सामान को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, माओवादी इस डंप का उपयोग बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए कर सकते थे, लेकिन समय रहते इसे बरामद कर लिया गया।

गौरतलब है कि इसी उयकाटोला क्षेत्र में कुछ समय पहले आरकेबी डिवीजन के पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। लगातार चल रहे अभियानों से नक्सलियों पर दबाव बढ़ रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिल रही है।

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