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भिलाई में भारी वाहनों की एंट्री पर बड़ा प्रतिबंध: सुबह 6 से रात 11 बजे तक नो-एंट्री, 16 नवंबर तक लागू रहेगा आदेश

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भिलाई- त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन ने भिलाई के नंदिनी रोड पर भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है।

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत यह आदेश जारी किया है।

इस आदेश के अनुसार भिलाई के पावर हाउस चौक से छावनी चौक तक भारी और मध्यम मालवाहक वाहनों का आवागमन सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा।

यह व्यवस्था 6 नवंबर 2026 से लागू हो गई है और 16 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

किन इलाकों में रहेगा प्रतिबंध?

भिलाई में प्रतिबंधित मार्ग:

  • पावर हाउस चौक से छावनी चौक।

  • नंदिनी रोड का संबंधित मार्ग।

  • इस मार्ग पर भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

प्रतिबंध का समय:

प्रतिबंध शुरू- सुबह 6:00

प्रतिबंध समाप्त- रात 11:00

लागू होने की तारीख- 6 नवंबर 2026

अंतिम तारीख- 16 नवंबर 2026

प्रतिबंधित अवधि- 17 घंटे प्रतिदिन

किन वाहनों पर लगेगा प्रतिबंध?

प्रशासन के आदेश के अनुसार संबंधित मार्ग पर निम्न वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा:

  1. भारी मालवाहक ट्रक।

  2. मध्यम मालवाहक वाहन।

  3. बड़े माल परिवहन वाहन।

  4. अन्य ऐसे वाहन जो भारी एवं मध्यम मालवाहक श्रेणी में आते हैं।

यह प्रतिबंध सामान्य यात्री वाहनों पर लागू नहीं है।

किन वाहनों को मिलेगी छूट?

आवश्यक सेवाओं को छूट

प्रशासन ने आम जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को प्रतिबंध से बाहर रखा है।

वाहन का प्रकार

 छूट

एंबुलेंस

 हां

फायर ब्रिगेड

 हां

दवाइयां पहुंचाने वाले वाहन

 हां

पेट्रोल-डीजल टैंकर

 हां

LPG गैस सिलेंडर वाहन

 हां

सरकारी राशन वितरण वाहन

 हां

धान एवं चावल कस्टम मिलिंग वाहन

 हां

दूध, सब्जी एवं फल वाहन

 हां

दैनिक आवश्यक वस्तुओं के वाहन

 हां

इन आवश्यक सेवाओं को प्रतिबंध से छूट दी गई है।

प्रशासन ने आखिर क्यों लगाया प्रतिबंध?

जिला प्रशासन के अनुसार त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख सड़कों पर लोगों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है।

प्रतिबंध लगाने के प्रमुख कारण:

  • त्योहारों में बाजारों में भीड़ नियंत्रित करना।

  • भारी वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकना।

  • आम नागरिकों को सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना।

  • सड़कों पर जाम की समस्या कम करना।

  • पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

  • कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।

आदेश का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई होगी?

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित समय में नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम 1988 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इसमें संबंधित वाहन चालक और वाहन के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।

दुर्ग शहर के 9 प्रमुख मार्गों पर भी प्रतिबंध बढ़ाया गया

इस खबर का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। जिला प्रशासन ने दुर्ग शहर के 9 प्रमुख मार्गों पर भी भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहनों को दोपहर 12 से 2 बजे तक मिलने वाली छूट समाप्त कर दी है।

इन मार्गों में शामिल हैं:

  1. पुलगांव चौक से पोटिया रोड।

  2. पुलगांव चौक से गंजपारा चौक।

  3. गुरुद्वारा चौक से बटालियन रोड।

  4. धमधा नाका रेलवे ओवरब्रिज से ग्रीन चौक।

  5. पुष्पक नगर से कातुलबोर्ड रोड।

  6. ग्राम बघेरा से गंजपारा दुर्ग।

  7. 32 बंगला बायपास ब्रिज से दुर्ग शहर।

  8. ठगड़ा बांध से दुर्ग शहर।

  9. धनौरा बायपास से महाराजा चौक।

इन मार्गों पर भी सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक प्रतिबंध लागू किया गया है। आवश्यक सेवाओं को छूट जारी रहेगी।

वाहन चालकों के लिए जरूरी निर्देश
  • भारी वाहन चालक प्रतिबंधित समय में नंदिनी रोड पर प्रवेश न करें।

  • माल परिवहन करने वाले वाहन अपने रूट और समय की पहले से योजना बनाएं।

  • आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहन संबंधित छूट की शर्तों का पालन करें।

  • यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

  • किसी भी असुविधा से बचने के लिए यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लें।

यह प्रतिबंध कब समाप्त होगा?

16 नवंबर 2026- निर्धारित अंतिम तारीख

प्रशासन के आदेश के अनुसार 16 नवंबर के बाद पहले वाली यातायात व्यवस्था फिर से लागू होगी, जब तक कोई नया आदेश जारी नहीं होता।

निष्कर्ष

त्योहारों के मद्देनजर दुर्ग-भिलाई में यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहनों पर सख्ती बढ़ाई है।

भिलाई में पावर हाउस चौक से छावनी चौक तक सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों की नो-एंट्री रहेगी। यह व्यवस्था 16 नवंबर तक लागू रहेगी।


राहुल गांधी का E20 पेट्रोल पर बड़ा हमला: 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलने का आरोप, केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से मांगा जवाब

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नई दिल्ली- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने E20 पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक एथेनॉल मिलाए जाने के आरोप लगाकर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार द्वारा सात जिलों से एकत्र किए गए पेट्रोल के नमूनों की लैब जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि जांच किए गए 14 नमूनों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे वाहन चालकों को नुकसान हो सकता है और पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।

हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने इन जांच परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनका E20 पेट्रोल निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह विवाद पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर शुरू हुआ है।

  • कर्नाटक सरकार ने राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए।

  • इन नमूनों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया।

  • राहुल गांधी के अनुसार, 14 नमूनों में से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक मिली।

  • कुछ नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 30 प्रतिशत से भी अधिक बताई गई।

  • राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल निर्धारित है, तो इससे अधिक मात्रा कैसे पाई गई?

इस मामले ने पेट्रोल की गुणवत्ता, वाहन चालकों के खर्च और तेल कंपनियों की जवाबदेही पर बहस शुरू कर दी है।

किन कंपनियों के पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलने का दावा?

राहुल गांधी ने विभिन्न सरकारी और निजी तेल कंपनियों के पेट्रोल नमूनों का उल्लेख किया।

तेल कंपनी

 कथित एथेनॉल मात्रा

Indian Oil (IOCL)

 31.2%

Hindustan Petroleum (HPCL)

 30.5%

Bharat Petroleum (BPCL)

 निर्धारित सीमा से अधिक होने का दावा

Nayara Energy

 निर्धारित सीमा से अधिक होने का दावा

Shell

 निर्धारित सीमा से अधिक होने का दावा

ये आंकड़े राहुल गांधी और कर्नाटक सरकार द्वारा बताए गए परीक्षण परिणामों पर आधारित हैं। सभी कंपनियों के लिए अलग-अलग सटीक प्रतिशत सार्वजनिक रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं हैं।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से क्या सवाल पूछे?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार से कई सवाल किए।

उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  1. देश में बिकने वाले पेट्रोल में वास्तव में कितना एथेनॉल मिलाया जा रहा है?

  2. निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलने पर तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

  3. पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी क्यों नहीं दी जाती?

  4. तेल कंपनियों की प्रयोगशालाओं ने कथित तौर पर एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट क्यों नहीं की?

  5. उपभोक्ताओं को पेट्रोल की गुणवत्ता और संरचना जानने का अधिकार क्यों नहीं मिल रहा?

राहुल गांधी ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाते हुए सार्वजनिक बहस की अपनी चुनौती भी दोहराई।

E20 पेट्रोल क्या होता है?

E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।

एथेनॉल क्या है?

  • एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित जैव ईंधन (Biofuel) है।

  • इसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।

  • भारत में एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।

  • इसके इस्तेमाल से पेट्रोल में जीवाश्म ईंधन की खपत कम की जा सकती है।

भारत सरकार का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने से भी जुड़ा है।

क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम हो सकता है?

यह इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता संबंधी पहलू है।

एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है। इसलिए E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज कम हो सकता है।

संभावित प्रभाव:

  • पेट्रोल की तुलना में ईंधन दक्षता में कमी।

  • पुराने वाहनों में अनुकूलता संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

  • कुछ वाहनों में रबर और प्लास्टिक के ईंधन संबंधी पुर्जों पर असर पड़ सकता है।

  • वाहन की उम्र, इंजन डिजाइन और E20 अनुकूलता के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

महत्वपूर्ण: निर्धारित मानक के अनुरूप E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से हर गाड़ी का इंजन खराब होता है, ऐसा साबित नहीं है। सरकार ने पहले भी माइलेज में कुछ कमी की संभावना स्वीकार की है।

तेल कंपनियों ने राहुल गांधी के आरोपों पर क्या जवाब दिया?

राहुल गांधी के आरोपों के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार के परीक्षण परिणामों पर आपत्ति जताई है।

Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum ने संयुक्त बयान में कहा:

  • उनके द्वारा बेचा जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक IS 17021 के अनुरूप है।

  • E20 पेट्रोल में एथेनॉल की निर्धारित सीमा 19 से 21 प्रतिशत है।

  • कर्नाटक में किए गए परीक्षण निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार नहीं किए गए।

  • नमूने लेने और उनकी जांच की प्रक्रिया पर सवाल हैं।

  • कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से पूरी परीक्षण रिपोर्ट और नमूना संग्रह की जानकारी मांगी है।

इस प्रकार कर्नाटक सरकार के परीक्षण दावों और तेल कंपनियों के जवाब के बीच विवाद बना हुआ है।

सरकार E20 पेट्रोल क्यों लागू कर रही है?

भारत सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के पीछे कई उद्देश्य हैं:

  1. विदेशों से कच्चे तेल का आयात कम करना।

  2. विदेशी मुद्रा की बचत करना।

  3. गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाना।

  4. किसानों और एथेनॉल उत्पादकों को आर्थिक लाभ पहुंचाना।

  5. पेट्रोलियम क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना।

  6. जीवाश्म ईंधन की खपत और उससे जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करना।

तेल कंपनियों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 तक एथेनॉल कार्यक्रम से 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है।

आम जनता पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

मुद्दा

  संभावित असर

पेट्रोल की गुणवत्ता

  निर्धारित मानक का पालन जरूरी

माइलेज

  कुछ वाहनों में कमी संभव

इंजन

  वाहन की E20 अनुकूलता महत्वपूर्ण

मेंटेनेंस

  वाहन के प्रकार पर निर्भर

उपभोक्ता अधिकार

  ईंधन की गुणवत्ता की जानकारी जरूरी

किसान

  एथेनॉल की मांग से लाभ की संभावना

अब आगे क्या हो सकता है?

इस विवाद में कुछ महत्वपूर्ण कदमों की आवश्यकता है:

  • कर्नाटक में एकत्र किए गए सभी 14 नमूनों की परीक्षण प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।

  • स्वतंत्र और निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा जांच कराई जाए।

  • पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को ईंधन की गुणवत्ता संबंधी जानकारी दी जाए।

  • निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की पुष्टि होने पर जिम्मेदार कंपनियों पर कार्रवाई की जाए।

  • केंद्र सरकार और तेल कंपनियां जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करें।

फिलहाल आरोपों और तेल कंपनियों के जवाब के बीच अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

निष्कर्ष

E20 पेट्रोल को लेकर उठा यह विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि करोड़ों वाहन चालकों, किसानों और देश की ऊर्जा नीति से जुड़ा मामला है।

एक तरफ सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित में महत्वपूर्ण बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक के परीक्षणों के आधार पर निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल होने के आरोप लगाए गए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है: पेट्रोल पंप पर आम जनता को जो पेट्रोल मिल रहा है, उसमें वास्तव में कितना एथेनॉल है?


धनतेरस पर ज्वेलरी शॉप में महिला का हाथ साफ! ग्राहक बनकर आई, सोने का हार लेकर हुई रफूचक्कर

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 रायपुर। धनतेरस के मौके पर रायपुर के सराफा बाजार में चोरी की वारदात सामने आई है। सदर बाजार स्थित हलवाई लाइन के आनंद ज्वेलर्स में ग्राहक बनकर पहुंची एक महिला ने शातिर तरीके से सोने का हार पार कर दिया। महिला ने पहले दुकान के कर्मचारियों का ध्यान भटकाया और फिर मौका मिलते ही काउंटर पर रखा हार अपने पास छिपाकर वहां से निकल गई। चोरी की पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।


जानकारी के मुताबिक, धनतेरस के कारण दुकान में ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई थी। इसी दौरान साड़ी पहने एक महिला ग्राहक बनकर आनंद ज्वेलर्स पहुंची। उसने गहने देखने के बहाने कर्मचारियों को उलझाए रखा। इसी बीच मौका पाकर काउंटर पर रखा सोने का हार उठाया और चुपचाप अपने पास छिपा लिया। इसके बाद वह बिना किसी को शक हुए दुकान से बाहर निकल गई।

स्टॉक मिलान में खुली चोरी की पोल

दुकान संचालक आनंद पारख के मुताबिक, शुरुआत में किसी को भी चोरी का पता नहीं चला। बाद में जब कर्मचारियों ने गहनों का स्टॉक मिलाया तो एक सोने का हार गायब मिला। इसके बाद दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई। फुटेज में महिला की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। वह काउंटर के पास खड़ी होकर मौका मिलते ही हार उठाकर छिपाती नजर आ रही है।

CCTV फुटेज के आधार पर महिला की तलाश में पुलिस

घटना की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की। पुलिस महिला की पहचान करने के साथ ही उसके आने-जाने के रास्ते का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए आसपास की दुकानों और अन्य स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

धनतेरस जैसे बड़े त्योहार पर सराफा बाजार में हुई इस घटना से व्यापारियों में चिंता का माहौल है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध महिला की तलाश कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अनिवार्य सेवानिवृत्ति अपने आप में सजा या कर्मचारी के लिए कलंक नहीं – छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले को मिली मंजूरी

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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति शशि चंद्रशेखर की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करना अपने आप में कोई सजा नहीं है और न ही इससे कर्मचारी के चरित्र या ईमानदारी पर कोई आरोप सिद्ध होता है।

यह फैसला खास तौर पर छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 14 कर्मचारियों में से 5 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को बरकरार रखा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला छत्तीसगढ़ सरकार के विधि माप विज्ञान विभाग (Legal Metrology Department), रायपुर से जुड़े कर्मचारियों का है।

  • संबंधित कर्मचारी शुरुआत में चतुर्थ श्रेणी (Peon) के पद पर नियुक्त हुए थे।

  • बाद में उन्हें सहायक ग्रेड-3 (Assistant Grade-III) के पद पर पदोन्नति मिली।

  • वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करने के लिए सर्कुलर जारी किया।

  • इसके बाद विभाग ने 14 कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की।

  • स्क्रीनिंग कमेटी ने 5 कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सिफारिश की।

  • सरकार ने इन कर्मचारियों को 9 अक्टूबर 2017 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी।

इन कर्मचारियों ने सरकारी फैसले को अदालत में चुनौती दी। मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा:

  • अनिवार्य सेवानिवृत्ति को दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जाएगा।

  • इससे कर्मचारी पर किसी प्रकार का आपराधिक या अनुशासनात्मक दोष सिद्ध नहीं होता।

  • सरकार को जनहित में कर्मचारियों की कार्यक्षमता और उपयोगिता का आकलन करने का अधिकार है।

  • कर्मचारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सकता है।

  • यह फैसला मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि ठोस और वस्तुनिष्ठ तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

अदालत ने साफ किया कि प्रशासनिक दक्षता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

किन आधारों पर 5 कर्मचारियों को रिटायर किया गया?

स्क्रीनिंग कमेटी ने कर्मचारियों के पुराने और हाल के सेवा रिकॉर्ड की जांच की।

मुख्य रूप से इन बातों पर विचार किया गया:

  1. कार्यकुशलता: कर्मचारी अपने काम को कितनी दक्षता से कर रहे हैं।

  2. ईमानदारी: सेवा रिकॉर्ड में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से संबंधित आकलन।

  3. कार्य प्रदर्शन: पिछले वर्षों में कर्मचारियों का प्रदर्शन कैसा रहा।

  4. प्रशासनिक उपयोगिता: कर्मचारी की सेवाएं विभाग और जनता के हित में कितनी उपयोगी हैं।

  5. गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट (ACR): कर्मचारियों की Annual Confidential Reports में दर्ज प्रदर्शन और टिप्पणियां।

कमेटी ने पाया कि 5 कर्मचारियों का समग्र सेवा रिकॉर्ड निर्धारित मानकों से नीचे था। वहीं शेष 9 कर्मचारियों को सेवा जारी रखने के योग्य पाया गया।

क्या बिना कर्मचारी को बताए खराब गोपनीय रिपोर्ट का इस्तेमाल हो सकता है?

यह इस फैसले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर विचार करते समय कर्मचारी की ऐसी प्रतिकूल गोपनीय प्रविष्टियों (Adverse Entries) और निर्धारित मानक से नीचे की ग्रेडिंग को भी ध्यान में रखा जा सकता है, जिन्हें कर्मचारी को पहले सूचित नहीं किया गया था।

अर्थात केवल इस आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश रद्द नहीं होगा कि संबंधित प्रतिकूल टिप्पणियां कर्मचारी को नहीं बताई गई थीं।

क्या दूसरे कर्मचारियों से तुलना करके आदेश को चुनौती दी जा सकती है?

कर्मचारियों की ओर से यह तर्क दिया गया था कि समान परिस्थितियों और मिलते-जुलते सेवा रिकॉर्ड वाले दूसरे कर्मचारियों को सेवानिवृत्त नहीं किया गया, जबकि उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा:

  • प्रत्येक कर्मचारी का मूल्यांकन व्यक्तिगत रूप से किया जाता है।

  • दूसरे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखने से किसी अन्य कर्मचारी को भी सेवा में बनाए रखने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता।

  • संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति को मिली गलत रियायत के आधार पर समान रियायत मांगने का अधिकार नहीं देता।

इसे कानूनी भाषा में Negative Equality का सिद्धांत कहा जाता है।

क्या सरकार मनमाने तरीके से किसी कर्मचारी को रिटायर कर सकती है?
महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के अधिकार के साथ उसकी सीमाएं भी स्पष्ट की हैं।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय निम्न आधारों पर नहीं लिया जा सकता:

  • व्यक्तिगत दुश्मनी के आधार पर।

  • अधिकारियों की मनमर्जी से।

  • बिना किसी ठोस रिकॉर्ड या सबूत के।

  • पक्षपातपूर्ण या भेदभावपूर्ण तरीके से।

निर्णय के पीछे प्रासंगिक सामग्री और वस्तुनिष्ठ आधार होना आवश्यक है।

क्या कर्मचारी अदालत में इस फैसले को चुनौती दे सकता है?

हां। कर्मचारी को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार बना रहता है।

अदालत हस्तक्षेप कर सकती है, यदि:

  1. सेवानिवृत्ति का आदेश बिना किसी सबूत के जारी किया गया हो।

  2. संबंधित अधिकारी ने उपलब्ध रिकॉर्ड पर उचित विचार न किया हो।

  3. फैसला स्पष्ट रूप से मनमाना या विकृत हो।

  4. आदेश दुर्भावना (Mala Fide) से प्रेरित हो।

हालांकि अदालत प्रशासनिक अधिकारी की जगह बैठकर पूरे सेवा रिकॉर्ड का दोबारा मूल्यांकन नहीं करेगी।

इस फैसले का सरकारी कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

विषय

 फैसले का प्रभाव

अनिवार्य सेवानिवृत्ति

 सरकार को अधिकार

सेवा रिकॉर्ड

 महत्वपूर्ण आधार

ACR रिपोर्ट

 मूल्यांकन में शामिल

ईमानदारी

 समीक्षा का आधार

कर्मचारी की सुनवाई

 सामान्य दंडात्मक प्रक्रिया से अलग

न्यायिक चुनौती

 सीमित आधारों पर संभव

समान कर्मचारी का उदाहरण

 अपने आप में पर्याप्त आधार नहीं

ध्यान दें: इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि सरकार किसी भी कर्मचारी को बिना आधार नौकरी से निकाल सकती है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति और अनुशासनात्मक बर्खास्तगी दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

फैसले में कौन-कौन से न्यायाधीश शामिल थे?

  • न्यायमूर्ति मनमोहन (Justice Manmohan)

  • न्यायमूर्ति  चंद्रशेखर (Justice Shree Chandrashekhar)

इनकी पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 12 अप्रैल 2023 के आदेश को बरकरार रखा और सरकार के 2017 के सर्कुलर के तहत की गई कार्रवाई को सही पाया।

आम जनता और सरकारी कर्मचारियों के लिए इसका क्या महत्व है?

इस फैसले से स्पष्ट होता है कि सरकारी सेवा में केवल नौकरी की अवधि पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है। कर्मचारी की कार्यक्षमता, ईमानदारी, प्रदर्शन और विभागीय उपयोगिता भी महत्वपूर्ण हैं।

वहीं सरकार को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय निष्पक्ष और रिकॉर्ड पर आधारित हो

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जनहित में किसी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करना अपने आप में सजा नहीं है, लेकिन ऐसा करने के लिए सरकार के पास ठोस और निष्पक्ष आधार होना जरूरी है।

मुख्य बात: नौकरी में बने रहने का अधिकार सेवा नियमों के अधीन है और प्रशासनिक दक्षता भी जनहित का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


एंबुलेंस, ट्रक और फलों की आड़ में हो रही थी गांजा तस्करी, महासमुंद पुलिस ने 9 महीने में जब्त किया 50 करोड़ का माल

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महासमुंद : छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेशभर में पुलिस ने 970 मामलों में करीब 32 टन गांजा जब्त कर 1975 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं गांजा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में महासमुंद पुलिस ने प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है।


ऑपरेशन निश्चय के तहत महासमुंद पुलिस ने महज 9 महीने में करीब 50 करोड़ रुपये कीमत का 10 हजार किलो गांजा जब्त किया है। इस दौरान 177 मामलों में 501 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। खास बात यह है कि पुलिस अब केवल तस्करों और परिवहनकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर कार्रवाई कर रही है।

महासमुंद पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक ऑपरेशन निश्चय के तहत गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। इस दौरान 177 प्रकरण दर्ज कर 501 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 70 फरार आरोपियों की तलाश जारी है।गिरफ्तार आरोपियों में 289 परिवहनकर्ता शामिल हैं।पुलिस ने एंड-टू-एंड इन्वेस्टिगेशन के तहत बैकवर्ड लिंकेज में 145 आरोपियों को ओडिशा से गिरफ्तार किया, जबकि फॉरवर्ड लिंकेज में 67 आरोपियों को पकड़ा गया है।

गिरफ्तार आरोपियों में सबसे ज्यादा 162 ओडिशा, 138 छत्तीसगढ़, 103 महाराष्ट्र, 73 मध्यप्रदेश और 54 उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। जांच में सामने आया है कि गांजे की खेप ओडिशा से लाई जा रही थी और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान तथा हरियाणा तक पहुंचाई जा रही थी। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल किए गए करीब 10 करोड़ रुपये कीमत के वाहन भी जब्त किए हैं।

इनमें बस, ट्रक, पिकअप, एंबुलेंस और कोरियर सर्विस के वाहन शामिल हैं।तस्कर पुलिस से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे थे।कभी फलों के नीचे, कभी कंटेनर के चेंबर में, तो कभी एंबुलेंस, सब्जी वाहनों और पैकर्स एंड मूवर्स के सामान के बीच गांजे की खेप छिपाकर ले जाई जा रही थी। पुलिस ने इन तरीकों का खुलासा करते हुए तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई की है।

महासमुंद पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। अब पुलिस की नजर तस्करों की चल और अचल संपत्तियों पर भी है। अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

गाजियाबाद पुलिस चौकी में जोरदार धमाका, खिड़कियों के शीशे टूटे; 20 वर्षीय डिलीवरी एजेंट घायल

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी में अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज आसपास के इलाके में दूर तक सुनाई दी। इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि पुलिस चौकी की दो खिड़कियों के शीशे टूट गए और दीवार में दरारें आ गईं।

इस घटना में 20 वर्षीय फूड डिलीवरी एजेंट विशाल घायल हो गया। पुलिस और जांच एजेंसियां धमाके के कारणों की जांच कर रही हैं।

आखिर कहां और कब हुआ धमाका?
  • धमाका शुक्रवार रात करीब 9 बजे हुआ।

  • घटना वसुंधरा पुलिस चौकी में हुई, जो इंदिरापुरम थाने के अंतर्गत आती है।

  • पुलिस चौकी के पिछले हिस्से के पास विस्फोट हुआ।

  • धमाके से दो खिड़कियों के शीशे टूट गए।

  • इमारत की दीवार में दरारें आईं और AC यूनिट को भी नुकसान पहुंचा।

  • आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

डिलीवरी एजेंट कैसे हुआ घायल?

इस घटना में घायल युवक की पहचान विशाल (20 वर्ष) के रूप में हुई है। वह गाजियाबाद के अर्थला इलाके का निवासी बताया गया है।

  • विशाल फूड डिलीवरी का काम करता है।

  • घटना के समय वह पुलिस चौकी में डिलीवरी देने पहुंचा था।

  • धमाके के कारण खिड़की के शीशे टूटकर बिखर गए।

  • कांच का एक टुकड़ा उसके सिर में लगा।

  • उसे दिल्ली के सूर्य नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

  • पुलिस के अनुसार उसकी हालत स्थिर है और बाद में उसके पूरी तरह स्वस्थ होने की जानकारी दी गई।

इस घटना में किसी पुलिसकर्मी के घायल होने की खबर नहीं है।

धमाके की वजह क्या थी? AC कंप्रेसर या पटाखे?

धमाके के कारण को लेकर शुरुआती जांच में अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं।

जांच में सामने आए प्रमुख पहलू:

  1. शुरुआती आशंका थी कि पुलिस चौकी में लगे AC यूनिट में विस्फोट हुआ हो सकता है।

  2. कुछ रिपोर्टों में दिवाली के पटाखे AC यूनिट तक पहुंचने की संभावना जताई गई।

  3. हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार AC कंप्रेसर को धमाके का कारण मानने की पुष्टि नहीं हुई है।

  4. पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में घटनास्थल पर बारूद, विस्फोटक पदार्थ या रासायनिक अवशेष नहीं मिले।

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि धमाका AC या पटाखों के कारण ही हुआ था।

जांच के लिए कौन-कौन सी एजेंसियां पहुंचीं?
घटना की गंभीरता को देखते हुए कई जांच एजेंसियों को मौके पर बुलाया गया।
  • UP ATS: संभावित आपराधिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच।

  • बम निरोधक दस्ता: विस्फोट की प्रकृति का परीक्षण।

  • फॉरेंसिक टीम: घटनास्थल से नमूने और सबूत एकत्र करना।

  • खुफिया एजेंसियां: घटना से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की जांच।

  • दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल: जांच में सहयोग के लिए मौके पर पहुंची।

फॉरेंसिक नमूनों को आगे की जांच के लिए आगरा प्रयोगशाला भेजा गया है।

सोशल मीडिया पर संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने का दावा

धमाके के बाद सोशल मीडिया पर 'तहरीक-ए-मुजाहिदीन' नाम से एक संगठन द्वारा घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किए जाने की खबर सामने आई।

लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि:

  • सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच हो रही है।

  • सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

  • जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पोस्ट किसने और किस उद्देश्य से की।

  • किसी संगठन की संलिप्तता अभी स्थापित नहीं हुई है।

इसलिए इसे आतंकी हमला घोषित करना फिलहाल उचित नहीं होगा।

पुलिस का क्या कहना है?

गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ के अनुसार, पुलिस को रात करीब 9 बजे वसुंधरा पुलिस चौकी के पिछले हिस्से के पास विस्फोट की सूचना मिली थी।

पुलिस ने घटनास्थल से सबूत एकत्र किए हैं और सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही धमाके की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

जांच में सामने आए 5 बड़े सवाल
  1. पुलिस चौकी में धमाका किस वस्तु से हुआ?

  2. क्या यह तकनीकी खराबी थी या जानबूझकर की गई घटना?

  3. क्या AC यूनिट या पटाखों की कोई भूमिका थी?

  4. सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले दावे के पीछे कौन है?

  5. क्या आसपास के CCTV फुटेज से कोई महत्वपूर्ण सुराग मिलेगा?

निष्कर्ष: गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में हुआ धमाका सुरक्षा व्यवस्था और जांच एजेंसियों के लिए गंभीर मामला है। एक डिलीवरी एजेंट घायल हुआ है। फिलहाल धमाके का वास्तविक कारण और इसके पीछे किसी की साजिश होने की बात स्पष्ट नहीं हुई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।


असम: ऑयल इंडिया प्लांट में भीषण विस्फोट और आग, मौतों का आंकड़ा बढ़कर 3 हुआ

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असम के डिब्रूगढ़ जिले में ऑयल इंडिया लिमिटेड के तेल भंडारण परिसर में मेंटेनेंस कार्य के दौरान जोरदार विस्फोट हुआ। इसके बाद भीषण आग लग गई। हादसे में कई कर्मचारी झुलस गए।

महत्वपूर्ण अपडेट: 7 नवंबर की शाम 5:09 बजे प्रकाशित PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है। पहले मौतों की संख्या 1 थी, फिर 2 हुई और अब 3 हो चुकी है।

आखिर हादसा कैसे हुआ?

यह घटना ऑयल इंडिया के Intermediate Tank Farm (ITF), तेंगाखाट परिसर में हुई।

  • शुक्रवार सुबह करीब 9:05 बजे कर्मचारी मेंटेनेंस का काम कर रहे थे।

  • काम Indirect Bath Heater (IDBH) क्षेत्र में चल रहा था।

  • इस हिस्से को 4 नवंबर से मेंटेनेंस के लिए अलग रखा गया था।

  • इसी दौरान अचानक विस्फोट हुआ और आग फैल गई।

  • आग की चपेट में वहां काम कर रहे कर्मचारी आ गए।

कंपनी की शुरुआती जानकारी के अनुसार, मेंटेनेंस ऑपरेशन के दौरान दुर्घटनावश विस्फोट हुआ। हालांकि विस्फोट का वास्तविक तकनीकी कारण अभी जांच के अधीन है।

कितने लोगों की मौत और कितने घायल?

3-मौतें, 7 नवंबर शाम तक

7- घायल कर्मचारी, शुरुआती कुल संख्या

9- मौके पर कर्मचारी, कुल मौजूद लोग

3-गंभीर हालत में, नवीनतम उपलब्ध रिपोर्ट

कुल 9 कर्मचारी मौके पर मौजूद थे। उनमें से 7 घायल हुए और 2 सुरक्षित बच गए। बाद में घायलों में से तीन की मौत हो गई। नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक तीन अन्य घायल गंभीर हालत में हैं।

मृतकों की पहचान

अब तक मीडिया रिपोर्टों में तीन मृतकों की पहचान सामने आई है:

नाम

        जानकारी

राजू दत्ता

       हादसे के दिन घटनास्थल पर मौत

तपस ज्योति गोगोई

       70% तक जलने के बाद 7 नवंबर सुबह करीब 3 बजे मौत

रूपम गोगोई

        गंभीर रूप से झुलसने के बाद गुवाहाटी के अस्पताल में मौत

तपस ज्योति गोगोई पिछले 13 वर्षों से ठेका कंपनी में काम कर रहे थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और एक बेटी हैं।

राहत और बचाव कार्य

हादसे के बाद तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
  • ऑयल इंडिया की फायर सर्विस टीम मौके पर पहुंची।

  • दमकल की कुल 11 गाड़ियां आग बुझाने में लगाई गईं।

  • SDRF और जिला प्रशासन की टीम ने भी मोर्चा संभाला।

  • घायलों को डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

  • कंपनी के अनुसार दोपहर लगभग 12:30 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।

जिला प्रशासन ने आसपास के लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की अपील की।

हादसे की जांच कौन करेगा?

ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस दुर्घटना की जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित की है।

जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को देखा जाएगा:

  1. मेंटेनेंस के दौरान विस्फोट कैसे हुआ?

  2. क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था?

  3. जिस उपकरण की मरम्मत हो रही थी, उसमें कोई तकनीकी खराबी थी?

  4. क्या गैस, तेल या ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग लगी?

  5. क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई लापरवाही हुई?

फिलहाल किसी व्यक्ति या कंपनी की लापरवाही आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है।

सरकार और कंपनी की प्रतिक्रिया
  • केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने ऑयल इंडिया के CMD से बात कर स्थिति की जानकारी ली।

  • असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।

  • मृतकों के परिवारों के लिए ₹10 लाख और घायलों के लिए ₹5 लाख की अनुग्रह राशि घोषित की गई है।

यह हादसा क्यों महत्वपूर्ण है?

ऑयल इंडिया लिमिटेड देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों में से एक है। उसके उत्पादन और भंडारण परिसरों में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

इस हादसे से तीन गंभीर सवाल उठते हैं:

  • औद्योगिक संयंत्रों में मेंटेनेंस के दौरान सुरक्षा कितनी प्रभावी है?

  • ठेका कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण और उपकरण मिल रहे हैं या नहीं?

  • भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

मेरी टिप्पणी: इस घटना को केवल औद्योगिक दुर्घटना मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। जांच में मेंटेनेंस प्रक्रिया, सुरक्षा प्रोटोकॉल और ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए।


AI से फोटो से छेड़छाड़, फिर खबरों के जरिए ब्लैकमेलिंग! DSP कल्पना वर्मा केस से जुड़े दीपक टंडन गिरफ्तार

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 बिलासपुर/रायपुर। डिजिटल मीडिया के दौर में अब अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक के जरिए तस्वीरों से कथित तौर पर छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक खबरें प्रकाशित करने और ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगा है। मामले में सिरगिट्टी पुलिस ने एक निजी न्यूज पोर्टल के संचालक दीपक टंडन उर्फ अंबेडकर टंडन को रायपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।


गिरफ्तार दीपक टंडन का नाम इससे पहले छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग से जुड़े चर्चित डीएसपी कल्पना वर्मा प्रकरण में भी सामने आया था। इस मामले में उन्होंने और बरखा टंडन ने डीएसपी पर करोड़ों रुपये की कथित वसूली के आरोप लगाए थे। अब AI तकनीक के कथित दुरुपयोग और ब्लैकमेलिंग के मामले में गिरफ्तारी के बाद दीपक टंडन एक बार फिर चर्चा में हैं।

AI से तस्वीरों में छेड़छाड़ कर खबरें प्रकाशित करने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, बिलासपुर के तिफरा स्थित महाराणा प्रताप नगर निवासी मणीशंकर पांडेय ने 29 अक्टूबर 2026 को सिरगिट्टी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दीपक टंडन ने AI तकनीक का दुरुपयोग कर उनकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की। इसके बाद निजी न्यूज पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक, भ्रामक और अपमानजनक शीर्षकों के साथ खबरें प्रकाशित की गईं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन खबरों का उद्देश्य उनकी सामाजिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना तथा दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग करना था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिरगिट्टी पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।

रायपुर के अपार्टमेंट से पुलिस ने दबोचा, दो मोबाइल जब्त

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की लोकेशन रायपुर में ट्रेस की। इसके बाद सिरगिट्टी पुलिस ने न्यू राजेंद्र नगर स्थित रजत प्राइम अपार्टमेंट में कार्रवाई कर दीपक टंडन को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में इन मोबाइल फोन से कई आपत्तिजनक फोटो, वीडियो और ऑडियो क्लिप मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब जब्त डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित ब्लैकमेलिंग के इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।

DSP कल्पना वर्मा प्रकरण से भी जुड़ा है दीपक टंडन का नाम

दीपक टंडन की गिरफ्तारी का एक अहम पहलू उनका पुराना विवाद भी है। कुछ समय पहले वह छत्तीसगढ़ की चर्चित डीएसपी कल्पना वर्मा से जुड़े मामले को लेकर सुर्खियों में आए थे।

दीपक टंडन और बरखा टंडन ने रायपुर के खमतराई थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 से डीएसपी कल्पना वर्मा ने कथित तौर पर उन्हें प्रेम संबंधों के जाल में फंसाकर करीब 2.5 करोड़ रुपये की रकम और कीमती सामान हासिल किए। आरोपों में नकदी, लग्जरी कार, करीब 12 लाख रुपये की हीरे की अंगूठी और 5 लाख रुपये के सोने के गहने शामिल थे।

हालांकि, ये उस मामले में शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप थे।

1475 पन्नों की जांच रिपोर्ट के बाद सस्पेंड हुई थीं DSP

डीएसपी कल्पना वर्मा से जुड़े विवाद की जांच प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराई गई थी। जांच के बाद करीब 1475 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सामने आई थी।

इस प्रकरण में पुलिस अधिकारी और एक कारोबारी के बीच व्हाट्सएप चैट के जरिए गोपनीय एवं संवेदनशील जानकारियों के आदान-प्रदान का मामला भी चर्चा में आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

पुलिस खंगाल रही डिजिटल सबूत और अन्य कड़ियां

फिलहाल बिलासपुर पुलिस AI तकनीक के कथित दुरुपयोग, तस्वीरों से छेड़छाड़ और आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है। जब्त मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के साथ पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बनाया था या नहीं।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर AI तकनीक के दुरुपयोग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के खतरे को सामने ला दिया है।

CG Job Alert: छत्तीसगढ़ में 1501 सरकारी नौकरियां, बिजली कंपनी में भर्ती शुरू; 26 नवंबर तक मौका

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश की तीनों स्टेट पॉवर कंपनियों में कुल 1501 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज ने 38 प्रकार के पदों के लिए विस्तृत भर्ती विज्ञापन जारी किया है। इस भर्ती के जरिए जनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में अलग-अलग संवर्गों के रिक्त पद भरे जाएंगे।


छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने 5 नवंबर 2026 को भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी किया है। इसमें कुल 1501 पदों में द्वितीय श्रेणी के 195 और तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 1306 पद शामिल हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 6 नवंबर 2026 की शाम 8 बजे से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 26 नवंबर 2026 रात 11:55 बजे निर्धारित की गई है। भर्ती से संबंधित विस्तृत विज्ञापन कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट https://cspc.co.in पर उपलब्ध है।

डाटा एंट्री ऑपरेटर के 609 और जूनियर इंजीनियर के 167 पद

इस भर्ती में सबसे ज्यादा पद डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस पद के लिए कुल 609 रिक्तियां हैं। इनमें जनरेशन कंपनी के 95, ट्रांसमिशन कंपनी के 64 और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के 450 पद शामिल हैं।

वहीं, कनिष्ठ अभियंता (इलेक्ट्रिकल) के कुल 167 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें जनरेशन कंपनी के 11, ट्रांसमिशन कंपनी के 32 और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के 124 पद हैं। इन पदों के अलावा इंजीनियरिंग, आईटीआई, सुरक्षा, चिकित्सा और प्रशासनिक संवर्ग में भी भर्ती होगी।

सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के पदों का विवरण

तकनीकी एवं अधिकारी संवर्ग में विभिन्न विषयों के सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं की नियुक्ति की जाएगी।

सहायक अभियंता के पद:

  • मैकेनिकल – 26 पद

  • इलेक्ट्रिकल – 92 पद

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन – 10 पद

  • कंप्यूटर साइंस – 2 पद

  • सूचना प्रौद्योगिकी – 2 पद

  • सिविल – 20 पद

कनिष्ठ अभियंता के पद:

  • मैकेनिकल – 12 पद

  • इलेक्ट्रिकल – 167 पद

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन – 9 पद

  • कंप्यूटर साइंस – 1 पद

  • सूचना प्रौद्योगिकी – 1 पद

  • सिविल – 26 पद

सुरक्षा और फायर विभाग में भी निकली वैकेंसी

पॉवर कंपनी की भर्ती में सुरक्षा और अग्निशमन विभाग के लिए भी पद रखे गए हैं। इनमें फायर ऑफिसर के 1, सब फायर ऑफिसर के 6, सुरक्षा अधिकारी के 3, सुरक्षा निरीक्षक के 10 और सुरक्षा उप निरीक्षक के 19 पद शामिल हैं। इसके अलावा फायर अटेंडेंट ग्रेड-II के 45 पदों पर भी भर्ती की जाएगी।

ITI पास युवाओं के लिए भी मौका

आईटीआई और तकनीकी ट्रेड से जुड़े युवाओं के लिए भी इस भर्ती में अवसर दिया गया है। अलग-अलग ट्रेड में अटेंडेंट (प्लांट) ग्रेड-III के पदों का विवरण इस प्रकार है:

  • फिटर – 84 पद

  • टर्नर – 36 पद

  • इलेक्ट्रीशियन – 90 पद

  • इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक – 45 पद

  • इलेक्ट्रॉनिक्स – 45 पद

इसके अलावा शिफ्ट केमिस्ट के 6 और प्रोग्रामर के 3 पद भी निर्धारित किए गए हैं।

चिकित्सा और गैर-तकनीकी संवर्ग में भी नियुक्तियां

भर्ती के तहत चिकित्सा, वित्त, विधि और प्रशासनिक विभागों में भी रिक्त पद भरे जाएंगे। इनमें लेखा अधिकारी/सहायक प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) के 15, चिकित्सा अधिकारी के 15, सहायक विधि अधिकारी के 8 और सहायक औद्योगिक संबंध अधिकारी के 8 पद शामिल हैं।

चिकित्सा एवं पैरामेडिकल क्षेत्र के पदों में सहायक स्टाफ नर्स के 18, सहायक फार्मासिस्ट के 25, सहायक लैब तकनीशियन के 6, सहायक रेडियोग्राफर के 3, सहायक ड्रेसर के 5 और सहायक ईसीजी तकनीशियन के 3 पद शामिल हैं।

वहीं, स्टेनोग्राफर ग्रेड-III अंग्रेजी के 12 और हिंदी के 13 पदों पर भी नियुक्तियां की जाएंगी।

छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को मिलेगी प्राथमिकता

भर्ती विज्ञापन के अनुसार तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगे। अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। इनकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक भर्ती विज्ञापन में दी गई है।

तीनों पॉवर कंपनियों के साझा पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के समय कंपनियों की प्राथमिकता का क्रम भी बताना होगा। अंतिम चयन मेरिट सूची, उम्मीदवार की ओर से दी गई प्राथमिकता और संबंधित कंपनी में उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर किया जाएगा।

26 नवंबर रात 11:55 बजे है आवेदन की अंतिम तारीख

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 6 नवंबर 2026 की शाम 8 बजे से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 26 नवंबर 2026 रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। इसी समय तक नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से आवेदन शुल्क जमा किया जा सकेगा।

यह विस्तृत भर्ती विज्ञापन पहले 7 अगस्त 2026 को जारी किए गए संक्षिप्त विज्ञापन और 14 सितंबर 2026 को जारी संशोधन के आधार पर तैयार किया गया है।

पॉवर कंपनी प्रबंधन ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध भर्ती विज्ञापन को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। खासकर शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और अन्य पात्रता संबंधी नियमों की जानकारी लेने के बाद ही आवेदन करें।

पति को छुड़ाने थाने पहुंची महिला से सरकारी आवास में गैंगरेप, 11 साल बाद दो पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की जेल

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 सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद थाने से जुड़े 11 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की गुहार लेकर थाने पहुंची महिला के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास में गैंगरेप करने के मामले में कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश प्रबोध कुमार वर्मा ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया और उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।


इस मामले में दोषी ठहराए गए तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव अब सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि तत्कालीन एसएसआई वेदपाल सिंह उर्फ वेगपाल सिंह वर्तमान में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी तैनाती फिरोजाबाद में बताई गई है।

थानेदार के सरकारी आवास में महिला से हुआ था सामूहिक दुष्कर्म

मामला 6 अगस्त 2015 का है। पीड़िता अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की उम्मीद लेकर देवबंद थाने पहुंची थी। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव के सरकारी आवास में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। विरोध करने और घटना की जानकारी किसी को देने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव और एसएसआई वेदपाल सिंह को अदालत ने दोषी करार दिया है।

गैंगरेप में 20 साल की सजा, दोनों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी के तहत दोनों दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

वहीं, जान से मारने की धमकी देने के मामले में धारा 506 के तहत पांच-पांच साल के साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों धाराओं की सजाएं एक साथ चलेंगी।

कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत आदेश दिया है कि गैंगरेप के मामले में वसूले जाने वाले जुर्माने की पूरी रकम पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। धमकी देने के मामले में लगाए गए जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि भी पीड़िता को मिलेगी। शेष रकम सरकारी खजाने में जमा होगी। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

थाने से एसएसपी तक लगाई गुहार, हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई आसान नहीं रही। पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजीव तोमर और जपनीत सिंह छाबड़ा के मुताबिक, घटना के बाद महिला ने स्थानीय पुलिस से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

30 नवंबर 2015 को तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक के जरिए शिकायत भेजी गई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। करीब दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद 7 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई।

जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद भी पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने प्रोटेस्ट पिटीशन और परिवाद के जरिए अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी।

500 से ज्यादा तारीखें, परिवार पर 10 बार हमले का आरोप

करीब 11 साल तीन महीने तक चले इस मुकदमे में 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अधिवक्ताओं के अनुसार, इस दौरान पीड़ित परिवार को लगातार दबाव और परेशानियों का सामना करना पड़ा।

परिवार का आरोप है कि मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उसके सदस्यों पर करीब 10 बार हमले और मारपीट की गई। इसके अलावा पीड़ित परिवार के खिलाफ पांच से अधिक मुकदमे भी दर्ज कराए गए। तमाम मुश्किलों के बावजूद महिला अपनी गवाही पर कायम रही।

फैसले के दिन भी परिवार को सता रहा था हमले का डर

मुकदमे के दौरान हुए कथित हमलों के कारण पीड़ित परिवार शुक्रवार को फैसले के दिन भी दहशत में था। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सुरक्षा की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों को फोन किया गया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की।

परिवार के मुताबिक, शुक्रवार सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर देवबंद कोतवाली के सीयूजी नंबर पर तीन बार फोन किया गया। शुरुआत में कॉल रिसीव नहीं हुई और बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने रास्ता बदलकर सहारनपुर कचहरी पहुंचने का फैसला किया।

आखिरकार अदालत के फैसले के साथ महिला की 11 साल से अधिक लंबी कानूनी लड़ाई का अहम पड़ाव पूरा हुआ और दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।

2015 से 2026 तक ऐसे चली इंसाफ की लड़ाई

  • 6 अगस्त 2015: देवबंद थाने में पति को छुड़ाने पहुंची महिला के साथ सरकारी आवास में सामूहिक दुष्कर्म की घटना।

  • 30 नवंबर 2015: तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई।

  • 7 नवंबर 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।

  • 2017 से 2026: सीबीसीआईडी जांच, प्रोटेस्ट पिटीशन और अदालत में लंबी सुनवाई चली। 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज हुए।

  • 6 नवंबर 2026: फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने बृजमोहन यादव और वेदपाल सिंह को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

न्यायधानी में सड़क पर युवतियों का हाईवोल्टेज ड्रामा, बाल पकड़कर घसीटा और बरसाए लात-घूंसे

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में युवतियों के बीच सड़क पर मारपीट के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग स्थानों पर युवतियों के दो गुटों के बीच हुए विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। वायरल वीडियो में युवतियां एक-दूसरे के बाल पकड़कर खींचती, सड़क पर घसीटती और लात-घूंसे मारती दिखाई दे रही हैं। सार्वजनिक स्थानों पर हुई इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर मारपीट में शामिल युवतियों की पहचान शुरू कर दी है। फिलहाल विवाद की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा, लात-घूंसे भी चले

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में युवतियों के दो गुटों के बीच पहले कहासुनी होती दिखाई देती है। कुछ ही देर में विवाद बढ़ जाता है और दोनों पक्षों की युवतियां एक-दूसरे से मारपीट करने लगती हैं। इस दौरान बाल पकड़कर खींचने, सड़क पर घसीटने और लात-घूंसे चलाने के दृश्य सामने आए हैं।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोग तमाशबीन बने रहे, जबकि कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से मारपीट का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगे।

कुदुदंड पुल और सरकंडा-बहतराई मार्ग के आसपास की घटनाओं की चर्चा

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, मारपीट की घटनाओं को कुदुदंड पुल और सरकंडा-बहतराई मार्ग के आसपास के इलाकों से जोड़कर देखा जा रहा है। विवाद के पीछे पुरानी रंजिश होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, दोनों वायरल वीडियो में शामिल युवतियों के बीच विवाद कहां और किस वजह से हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर भी चर्चा

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दावा किया जा रहा है कि मारपीट में शामिल कुछ युवतियों ने इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर कथित तौर पर 'कैसा लगा' जैसे कैप्शन के साथ स्टेटस भी लगाए। हालांकि, इन पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को जांच के बाद ही सही माना जा सकेगा।

वायरल वीडियो से युवतियों की पहचान कर रही पुलिस

मामले में बिलासपुर पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और संबंधित थाना क्षेत्रों की पुलिस वीडियो के आधार पर युवतियों की पहचान करने में जुटी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अब तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इसके बावजूद पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर मारपीट और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही विवाद की वास्तविक वजह और घटना में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

बिजली विभाग में शराब कांड! मिठाई की जगह बोतलें बांटने का आरोप, EE से पूछताछ

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 कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बिजली विभाग का एक कार्यालय उस वक्त चर्चा में आ गया, जब त्योहार के दौरान मिठाई के डिब्बों की जगह शराब की बोतलें बांटे जाने का आरोप सामने आया। जिला मुख्यालय स्थित विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) कार्यालय में शराब की बोतलें मिलने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को लेकर विभाग पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने कार्यालय से शराब की बोतलें जब्त कर जांच शुरू कर दी है।


कांग्रेस ने लगाया शराब बांटने का आरोप

मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि त्योहार के मौके पर विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिठाई के बजाय उपहार के रूप में शराब की बोतलें दी जा रही थीं। कांग्रेस ने इसे विभागीय कार्यप्रणाली में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए मामले की जांच की मांग उठाई है।

आरोप सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ने लगा और पुलिस ने भी इसकी जांच शुरू कर दी।

EE को पूछताछ के लिए कोतवाली ले गई पुलिस

शराब की बोतलें मिलने की सूचना पर पुलिस टीम विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता कार्यालय पहुंची। यहां जांच के दौरान शराब की बोतलें जब्त की गईं। इसके बाद पुलिस कार्यपालन अभियंता को पूछताछ के लिए कोतवाली थाना लेकर गई।

इस घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद बिजली विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए। कार्यालय में शराब की बोतलें किसने रखीं, वे कहां से आईं और किस उद्देश्य से वहां लाई गई थीं, पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

अधिकारी ने जताई अनभिज्ञता, पुलिस पर लगाए अभद्रता के आरोप

दूसरी ओर, विद्युत विभाग के अधिकारी ने कार्यालय में शराब की बोतलें मिलने के संबंध में जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता कि शराब की बोतलें कार्यालय में कहां से आईं और किसने वहां रखीं।

अधिकारी ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर थाने ले गई और रास्ते में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने पुलिस के इस रवैये को अशोभनीय बताया है।

शराब की बोतलें जब्त, जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल पुलिस ने विद्युत विभाग के कार्यालय से मिली शराब की बोतलें जब्त कर ली हैं। मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कार्यालय तक कैसे पहुंची और इसके पीछे किसकी भूमिका है।

कांग्रेस के आरोपों और विभागीय अधिकारी के बयान के बीच अब जांच के नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ट्रंप को मारने की सनक! व्हाइट हाउस के पास हथियारों से लैस युवक गिरफ्तार

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 वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। व्हाइट हाउस के नजदीक एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों को उसकी कार से तीन हथियार और दर्जनों कारतूस मिले हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसके दिमाग में कुछ आवाजें आती थीं, जो उसे वॉशिंगटन जाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने के लिए उकसाती थीं।


अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के मुताबिक, यह कार्रवाई गुरुवार रात वॉशिंगटन डीसी में कॉन्स्टिट्यूशन एवेन्यू के पास की गई। सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने एक खड़ी कार में मौजूद व्यक्ति की गतिविधियों को संदिग्ध पाया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच के दौरान उसकी गाड़ी से एक पिस्तौल, दो राइफल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए।

कार में सोते मिला संदिग्ध, गूगल ट्रांसलेट से हुई पूछताछ

गिरफ्तार आरोपी की पहचान 26 वर्षीय रोनी योरड्रिक्स गुआनिपा क्रिनोस के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार रात करीब 11 बजकर 42 मिनट पर वह नीले रंग की फोर्ड F-150 पिकअप गाड़ी में सोता हुआ मिला था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने उससे पूछताछ शुरू की।

NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने अधिकारियों से बातचीत करने के लिए गूगल ट्रांसलेट का इस्तेमाल किया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर बताया कि उसके सिर में आवाजें सुनाई देती हैं, जो उसे राष्ट्रपति ट्रंप को मारने के लिए कहती हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी वर्ष 2024 में अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल हुआ था।

आरोपी ने किया चौंकाने वाला दावा, कार से मिले तीन हथियार

पूछताछ के दौरान क्रिनोस ने अधिकारियों को बताया कि कुछ लोग उसे मारना चाहते थे और उसने उन्हीं में से एक व्यक्ति से बंदूक छीन ली थी। उसका दावा था कि यह हथियार कार में रखे भूरे रंग के बैग में मौजूद है।

आरोपी ने यह भी बताया कि उसने करीब एक महीने पहले कुछ हथियार खरीदे थे और वह चोरी की गाड़ी में रह रहा था। उसने अधिकारियों से कहा कि वह अपने हथियार सरकार को सौंपना चाहता है।

इसके बाद अधिकारियों ने वाहन की तलाशी ली। तलाशी में एक पिस्तौल, दो राइफल और कई कारतूस बरामद किए गए। हथियारों की बरामदगी के बाद मामला और गंभीर हो गया और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

हथियार रखने और चोरी की गाड़ी इस्तेमाल करने के आरोप

क्रिनोस पर बिना वैध अनुमति हथियार रखने और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा बिना पंजीकरण के राइफल और पिस्तौल रखने तथा कारतूस से जुड़े तीन अलग-अलग आरोप भी दर्ज किए गए हैं।

आरोपी पर बिना अनुमति वाहन का इस्तेमाल करने, चोरी और चोरी की संपत्ति अपने पास रखने से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं। उसे सोमवार को फेडरल कोर्ट में पेश किया जाना है।

ट्रंप पर पहले भी हो चुके हैं तीन जानलेवा हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार जानलेवा हमलों और हत्या की कोशिशों का सामना कर चुके हैं। उनके खिलाफ अब तक तीन बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

1. 13 जुलाई 2024: पेंसिल्वेनिया के बटलर में हमला

ट्रंप एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान 20 वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रूक्स ने दूर स्थित एक इमारत की छत से उन पर गोलियां चलाईं। एक गोली ट्रंप के दाहिने कान को छूकर निकल गई। इस हमले में रैली में मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए। सीक्रेट सर्विस के स्नाइपर ने जवाबी कार्रवाई में हमलावर को मार गिराया।

2. 15 सितंबर 2024: फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में साजिश

ट्रंप अपने गोल्फ क्लब में मौजूद थे। इसी दौरान 58 वर्षीय रयान वेस्ली रॉथ झाड़ियों में राइफल लेकर छिपा हुआ मिला। सीक्रेट सर्विस के एक एजेंट ने उसकी संदिग्ध गतिविधि देखकर गोली चलाई, जिसके बाद वह भाग निकला। पुलिस ने बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया। सितंबर 2025 में अदालत ने उसे ट्रंप की हत्या की कोशिश के मामले में दोषी ठहराया।

3. 25 अप्रैल 2026: वॉशिंगटन डीसी के होटल में गोलीबारी

ट्रंप व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में शामिल होने के लिए वॉशिंगटन हिल्टन होटल पहुंचे थे। इसी दौरान 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन शॉटगन लेकर सुरक्षा जांच वाले क्षेत्र में घुस गया और बॉलरूम की तरफ बढ़ने लगा। उसने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई, जिसमें सीक्रेट सर्विस का एक अधिकारी घायल हो गया। बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण अधिकारी की जान बच गई। सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को पकड़ लिया और ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने एलन पर राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश का आरोप लगाया।

व्हाइट हाउस के पास हथियारों के साथ संदिग्ध की ताजा गिरफ्तारी ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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