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डिजिटल इंडिया BHASHINI और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच टोपोनिमी (भू-नाम) के लिए AI आधारित सहयोग

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डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन (DIBD), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 20 जनवरी 2026 को सर्वे ऑफ इंडिया (SoI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य AI आधारित भाषण और भाषा प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर भौगोलिक स्थान नामों (टोपोनिमी) के डिजिटाइजेशन, ट्रांसक्रिप्शन और मानकीकरण को सुदृढ़ करना है। यह पहल नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी, 2022 के अनुरूप सटीक, बहुभाषी और मानकीकृत टोपोनिमी डेटासेट के निर्माण को मजबूत करेगी।

सर्वे ऑफ इंडिया की भूमिका और सहयोग का महत्व

सर्वे ऑफ इंडिया, देश की राष्ट्रीय एजेंसी होने के नाते, भौगोलिक नामों के मानकीकरण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। यह स्थानीय भाषाओं में स्थान नामों को इकट्ठा करने के लिए बड़े पैमाने पर फील्ड सर्वेक्षण करता है और उन्हें राष्ट्रीय मानचित्र प्रणालियों में समेकित करता है।

इस सहयोग के तहत BHASHINI की speech-to-text और भाषा प्रसंस्करण क्षमताओं का उपयोग करके, स्थान नामों की बड़ी मात्रा में ऑडियो रिकॉर्डिंग को संरचित डिजिटल टेक्स्ट में परिवर्तित किया जाएगा। इससे 16 लाख से अधिक स्थानों को कवर करने वाले व्यापक और मान्य टोपोनिमी डेटाबेस के निर्माण में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय भू-नाम सूचना प्रणाली (NGNIS) का विकास

यह सहयोग नेशनल जियोग्राफिकल नेम इन्फॉर्मेशन सिस्टम (NGNIS) के विकास को भी समर्थन देगा। फील्ड में एकत्र किए गए ऑडियो डेटा को:

  • स्थानीय भाषा लिपियों में

  • देवनागरी में

  • रोमन में

  • अन्य प्रारूपों में

परिवर्तित करने की प्रक्रिया को तेज, सटीक और बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय मानचित्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सरकारी प्रणालियों में एकरूपता सुनिश्चित होगी।

उच्च गुणवत्ता वाले टोपोनिमी डेटा का निर्माण

यह पहल स्थान नामों के ऑडियो दस्तावेज़ीकरण को मजबूत करेगी, जिससे सही उच्चारण और स्थानीय भाषाई विविधताओं का संरक्षण संभव होगा। साथ ही, सर्वे ऑफ इंडिया टोपोनिमी मैनुअल और BIS कोड ऑफ प्रैक्टिस के अनुरूप मानकीकरण को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

इससे ओपन सीरीज मैप्स, सरकारी प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक जानकारी प्रणालियों में उपयोग होने वाले स्थान नामों के डेटासेट की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

भाषा AI से राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे को सशक्त बनाना

इस साझेदारी के माध्यम से Digital India BHASHINI Division अपनी भाषण और भाषा AI क्षमताओं को डेटा निर्माण, एनोटेशन और सत्यापन कार्यप्रणाली में उपयोग करेगा, जिससे मानव भाषण को बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले जियोस्पेशियल भाषा डेटासेट में परिवर्तित किया जा सके।

यह सहयोग यह भी दर्शाता है कि भाषा AI को राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में एकीकृत करना कितना महत्वपूर्ण है, विशेषकर तब जब भाषाई सटीकता सेवा वितरण और निर्णय-निर्माण के लिए आवश्यक हो।

परिणाम और उद्देश्य

यह MoU भारत के जियोस्पेशियल इकोसिस्टम को मजबूत करने में भाषा प्रौद्योगिकी की भूमिका को और पुष्ट करता है। यह सुनिश्चित करेगा कि विभिन्न क्षेत्रों और बोलियों के स्थान नाम सटीक रूप से कैप्चर, संरक्षित और मानकीकृत हों, जो कि शासन, आपदा प्रबंधन, अवसंरचना योजना और नागरिक सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने 100% वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की उपलब्धि हासिल की

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लखनऊ में शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के उद्घाटन के साथ शहरी सततता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया है। अब लखनऊ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत 100% वैज्ञानिक रूप से नगर निगम कचरे (Municipal Solid Waste) का प्रोसेसिंग करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है। यह उपलब्धि लखनऊ को ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर का दर्जा देती है।

लखनऊ: बढ़ती शहरी चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों वाला एक तेज़ी से बढ़ता शहरी केंद्र है। इस तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और विकास के साथ कचरा प्रबंधन, पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। लखनऊ नगर निगम (LMC) ने इन चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और स्थायी शहरी विकास की रणनीतियों से किया है।

शिवारी प्लांट: तीसरा ताजा कचरा प्रोसेसिंग प्लांट

लखनऊ ने शिवारी में अपना तीसरा Fresh Waste Processing Plant शुरू किया है। इस प्लांट की क्षमता 700 टन प्रतिदिन है। इस प्लांट के साथ लखनऊ नगर निगम अब 2,100 टन प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे को वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस कर सकता है, जिससे खुले में कचरा डालने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

कचरा प्रबंधन का वैज्ञानिक मॉडल

लखनऊ शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसे संभालने के लिए LMC और Bhumi Green Energy ने तीनों प्लांट स्थापित किए हैं, जिनकी क्षमता प्रत्येक 700 टन/दिन है। कचरे को ऑर्गेनिक (55%) और इनऑर्गेनिक (45%) भागों में अलग किया जाता है।

  • ऑर्गेनिक कचरा → कम्पोस्ट और बायोगैस

  • इनऑर्गेनिक कचरा → रिसाइकलिंग / RDF (Refuse Derived Fuel)

  • RDF का उपयोग सीमेंट और पेपर उद्योगों में को-प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है।

लखनऊ की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण क्षमता 96.53% तक बढ़ चुकी है, और सोर्स सेग्रिगेशन (कचरा अलग करने) का स्तर 70% से अधिक है।

लगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निपटान

लखनऊ में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.86 लाख मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा चुका है। इससे RDF, C&D waste, bio-soil, coarse fractions जैसे उपयोगी उत्पाद प्राप्त हुए हैं, जिन्हें:

  • रिसाइकलिंग

  • को-प्रोसेसिंग

  • लैंडफिलिंग

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
    में उपयोग किया गया है।

RDF और अन्य उत्पादों का उपयोग

  • RDF: लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन उद्योगों में भेजा गया

  • Coarse fraction: 4.38 लाख MT

  • Bio-soil: 0.59 लाख MT

  • C&D Waste: 2.35 लाख MT

शिवारी साइट का रूपांतरण

शिवारी साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि को पुनः विकसित किया गया और इसे एक पूर्ण-कार्यात्मक ताजा कचरा उपचार सुविधा में बदला गया। यहाँ windrow pads, internal roads, sheds, weighbridges सहित सम्पूर्ण कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गई है।

आगे की योजना: Waste-to-Energy (WtE) प्लांट

LMC शिवारी में Waste-to-Energy (WtE) प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित 15 MW WtE प्लांट RDF को बिजली में बदलने में सक्षम होगा। यह प्लांट प्रतिदिन 1,000–1,200 टन RDF का उपयोग करेगा, जिससे RDF को दूर के सीमेंट कारखानों तक ले जाने की लागत और दूरी कम होगी।

लखनऊ का मॉडल: सर्कुलर इकोनॉमी की मिसाल

लखनऊ का कचरा प्रबंधन मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों पर आधारित है—
संसाधन पुनर्प्राप्ति, लगेसी वेस्ट न्यूनतम करना, और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना। यह मॉडल न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अन्य शहरों के लिए प्रेरणादायक है।


मोपीएनजी ने मुंबई में upstream-focused कार्यक्रम आयोजित किया, तेल-गैस क्षेत्र में निवेश और सुधारों पर जोर

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मुंबई- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने मुंबई में एक दिन का upstream-focused कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय upstream ऑपरेटर, E&P सेवा प्रदाता, वैश्विक कंसल्टिंग फर्म, वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियाँ, अकादमिक और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में भारत के upstream सुधार एजेंडा और निवेश अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप  सिंह पुरी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि हाल के विधायी, नियामक और नीति सुधार भारत के upstream क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आए हैं। इन सुधारों और डेटा-आधारित खोज पहलों ने विशेषकर भारत के offshore और frontier क्षेत्रों में निवेश के अवसर खोल दिए हैं। उन्होंने निवेशकों के लिए स्थिर, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ढांचा प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

कार्यक्रम के प्रमुख घटक

कार्यक्रम में निम्न सत्र शामिल थे:

  • भारत की E&P वृद्धि के लिए वित्त पोषण पर कार्यशाला

  • Oilfields (Regulation and Development) Act में संशोधन, Petroleum and Natural Gas Rules और Model Revenue Sharing Contract (MRSC) पर सत्र

  • आगामी upstream bid rounds के लिए bid promotion event

MoPNG और Directorate General of Hydrocarbons (DGH) के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों से विभिन्न सत्रों में व्यापक बातचीत की।

E&P वृद्धि के लिए वित्त पोषण: नई चुनौतियाँ और समाधान

इस सत्र में upstream निवेश के बढ़ते जोखिम और पूंजी जरूरतों पर चर्चा हुई। वैश्विक कंसल्टिंग फर्मों (S&P Global, Deloitte, A.T. Kearney, EY) ने upstream वित्त पोषण मॉडल, जोखिम आवंटन और पूंजी जुटाने के अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए।

बैंक और बीमा कंपनियों (State Bank of India, New India Assurance, Bajaj Allianz) ने जोखिम मूल्यांकन, exposure और बैंक गारंटी ढांचों के बारे में जानकारी दी।

कार्यशाला में चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • upstream परियोजनाओं के वित्त पोषण के वर्तमान अभ्यास

  • balance-sheet आधारित lending की सीमाएँ

  • bank guarantee आवश्यकताओं का पूंजी दक्षता पर प्रभाव

  • insurance-backed surety bonds जैसे नए जोखिम-रहित वित्तीय उपकरण

MoPNG सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि timely और पर्याप्त पूंजी उपलब्धता upstream निष्पादन के लिए निर्णायक होगी।

ORD Act, PNG Rules और MRSC: नीति से अनुबंध तक स्पष्टता

विशेष सत्र में संशोधित Oilfields (Regulation and Development) Act, revised Petroleum and Natural Gas Rules, और updated MRSC की जानकारी दी गई।
MoPNG ने बताया कि ये सुधार upstream निवेशकों के लिए स्थिर और भविष्यसूचक नियमों का ढांचा प्रदान करते हैं, जिससे exploration गतिविधि के विस्तार में मदद मिलेगी।

DGH ने बताया कि updated MRSC इन सुधारों को लागू करने में सहायक है और नीति-इरादे तथा अनुबंध कार्यान्वयन में तालमेल सुनिश्चित करता है।

नई Upstream Bid Rounds: सुधारों को अवसर में बदलना

Bid promotion सत्र में आगामी bid rounds और निवेश अवसरों का विस्तार से परिचय कराया गया।

DGH के DG श्रीकांत नागुलपल्ली ने आगामी bid rounds की जानकारी दी:

  • OALP Bid Round X: 25 exploration blocks, 182,589 sq km (91% offshore)

  • DSF Bid Round IV: 9 contract areas, 55 discoveries, ~200 MMTOE 2P reserves

  • CBM Bid Rounds 2025–26: 16 blocks, 74 BCM prognosticated gas (2025), 200 BCM (2026)

डाटा और डिजिटल टेक्नोलॉजी: आगे की दिशा

University of Houston ने भारत के East Coast basins की prospectivity पर insights दिए।
Schlumberger ने डिजिटल समाधान के माध्यम से frontier और underexplored basins में investment अवसरों को दिखाया।

भारत की upstream निवेश कहानी: मजबूत रणनीतिक केस

सत्र में यह भी बताया गया कि भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश के लिए प्रमुख कारण हैं:

  • 3.9 बिलियन टन oil equivalent का yet-to-find resource potential

  • बड़ा घरेलू बाजार और पूर्ण marketing/pricing freedom

  • revenue-sharing contracts के तहत कम नियामक बोझ

  • National Data Repository के माध्यम से high-quality E&P data

  • घरेलू उत्पादन और energy security बढ़ाने के लिए मजबूत नीति

निष्कर्ष

MoPNG के इस upstream-focused कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि भारत की upstream सुधार यात्रा निवेशकों के लिए नए अवसर और विश्वास पैदा कर रही है। नीति, डेटा, वित्त और तकनीकी क्षमता के संयोजन से भारत का upstream क्षेत्र वैश्विक निवेश आकर्षण बन रहा है।


India–AI Impact Summit 2026: विश्व में पहला ‘Global South’ में आयोजित होने वाला AI समिट

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways):

  • India–AI Impact Summit 2026 पहली बार Global South में आयोजित होने वाला विश्व स्तर का AI समिट होगा।

  • यह समिट 16 से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

  • समिट की थीम “People, Planet और Progress” (तीन सूत्र/सुतर) पर आधारित है।

  • India AI Impact Expo में 400+ प्रदर्शक और 1.5 लाख से अधिक आगंतुक शामिल होंगे।

AI: भारत की विकास यात्रा का अहम स्तंभ

AI भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शासन (Governance), डिजिटल सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और वित्त जैसे क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। भारत की बहुभाषी और विविध संस्कृति AI के लिए एक मजबूत आधार बनाती है, जिससे multi-lingual और multi-modal AI विकसित हो सके।

समिट का उद्देश्य और महत्व

India–AI Impact Summit 2026 का उद्देश्य AI के वैश्विक मंच पर चर्चा को विकास और वास्तविक परिणामों से जोड़ना है। यह समिट AI के ज़रिये:

  • वैश्विक सहयोग को मजबूत करेगा

  • उत्तरदायी और सुरक्षित AI के मानकों को बढ़ावा देगा

  • आर्थिक और सामाजिक विकास को तेज करेगा

  • भारत को AI नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगा

तीन ‘सुतर’ और सात ‘चक्र’ (Sutras & Chakras)

तीन मूल स्तंभ (Sutras):

  1. People (लोग)

  2. Planet (पर्यावरण)

  3. Progress (प्रगति)

सात चक्र (Chakras):

  1. Human Capital – AI कौशल विकास

  2. Inclusion for Social Empowerment – सामाजिक समावेशन

  3. Safe and Trusted AI – सुरक्षित एवं भरोसेमंद AI

  4. Resilience, Innovation and Efficiency – टिकाऊ और प्रभावी AI

  5. Science – AI आधारित अनुसंधान

  6. Democratizing AI Resources – AI संसाधनों की समान उपलब्धता

  7. AI for Economic Growth & Social Good – आर्थिक विकास और सामाजिक लाभ

समिट में AI के प्रमुख उपयोग (Sectors)

1. स्वास्थ्य (Healthcare):

  • दूरस्थ निदान, AI आधारित टेस्टिंग

  • टेलीमेडिसिन और रोग पूर्वानुमान

  • AI से TB, कैंसर जैसी बीमारियों का तेज़ निदान

2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था:

  • मौसम और कीट अनुमान

  • ड्रोन और सैटेलाइट आधारित फसल निगरानी

  • किसान ई-मेरीटा जैसे प्लेटफॉर्म

3. शिक्षा:

  • व्यक्तिगत शिक्षा (Adaptive Learning)

  • भाषा अनुवाद और ट्यूटरिंग

  • DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म

4. वित्त और वाणिज्य:

  • फर्जीवाड़ा रोकथाम (Fraud Detection)

  • क्रेडिट स्कोरिंग

  • चैटबॉट आधारित बैंकिंग

5. शासन और सार्वजनिक सेवाएं:

  • न्यायिक अनुवाद, सेवा वितरण में तेज़ी

  • स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक प्रबंधन

  • सरकारी प्रक्रियाओं में AI का उपयोग

मुख्य कार्यक्रम और गतिविधियाँ (AI Impact Events)

Pre-Summit Events

  • विभिन्न देशों और राज्यों में AI विषयक पूर्व-चर्चाएँ

  • 8 राज्य स्तरीय AI सम्मेलन (Meghalaya, Gujarat, Odisha, etc.)

Main Summit

  • सात चक्रों पर आधारित सत्र

  • 700+ प्रस्ताव प्राप्त हुए

Flagship Events

  • AI for ALL: वैश्विक AI चुनौतियाँ

  • AI by HER: महिला-प्रेरित AI नवाचार

  • YUVAi: युवा AI चुनौतियाँ

  • Research Symposium

  • India AI Impact Expo (70,000 sq.m. क्षेत्र)

समिट का एजेंडा (16–20 Feb 2026)

  • दिन
  • कार्यक्रम
  • 16 Feb
  • Keynotes, Panel Discussion, AI Expo
  • 17 Feb
  • Knowledge Compendium Release, AI by HER
  • 18 Feb
  • Research Symposium, Summit Dinner
  • 19 Feb
  • Opening Ceremony, Leaders’ Plenary
  • 20 Feb
  • GPAI Council Meeting

समर्थनकर्ता संस्थाएँ (Institutional Frameworks)

  • MeitY (मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी)

  • IndiaAI Mission

  • STPI (Software Technology Parks of India)

  • Digital India Initiative

उम्मीदित परिणाम (Expected Outcomes)

  • AI आधारित सार्वजनिक सेवाओं और उद्योगों में तेजी

  • नीति और नियमन में स्पष्टता

  • AI स्किलिंग और रोजगार में वृद्धि

  • वैश्विक सहयोग और नवाचार में वृद्धि

  • भारत को AI के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना

समापन (Conclusion)

India–AI Impact Summit 2026, AI को भारत के विकास के लिए एक रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह समिट AI के उपयोग को वास्तविक दुनिया में लागू करने, सामाजिक लाभ और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा।


सुकन्या समृद्धि योजना के 11 वर्ष: करोड़ों बेटियों के सपनों को मिली आर्थिक उड़ान

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8.2% ब्याज दर, 4.53 करोड़ से अधिक खाते और ₹3.33 लाख करोड़ से ज्यादा जमा—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की सशक्त मिसाल

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) ने 22 जनवरी 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई यह योजना आज देशभर में बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। सरकार द्वारा अधिसूचित इस लघु बचत योजना के तहत वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की आकर्षक ब्याज दर दी जा रही है, जो बेटियों के लिए समर्पित बचत योजनाओं में सबसे ऊंची दरों में शामिल है।

योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2025 तक इसके अंतर्गत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और कुल जमा राशि ₹3.33 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। हर खाता एक परिवार के उस विश्वास का प्रतीक है, जो अपनी बेटी की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश कर रहा है।

सुकन्या समृद्धि योजना केवल एक वित्तीय योजना नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है। यह योजना माता-पिता और अभिभावकों को बेटी की शिक्षा और विवाह जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों के लिए समय से बचत करने को प्रेरित करती है। न्यूनतम ₹250 से खाता खोलने की सुविधा, ₹1.5 लाख तक की वार्षिक जमा सीमा, आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर लाभ और शिक्षा के लिए आंशिक निकासी जैसी सुविधाएं इसे अत्यंत व्यावहारिक और भरोसेमंद बनाती हैं।

योजना के अंतर्गत खाता बेटी के जन्म से 10 वर्ष की आयु तक खोला जा सकता है और 21 वर्षों में परिपक्व होता है। 18 वर्ष की आयु के बाद उच्च शिक्षा के लिए 50 प्रतिशत तक की राशि निकाली जा सकती है, जिससे बेटियों को अपने सपनों को साकार करने में आर्थिक सहारा मिलता है।

सरकार की यह पहल महिला सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। सुकन्या समृद्धि योजना यह संदेश देती है कि जब एक बेटी सशक्त होती है, तो पूरा परिवार, समाज और देश मजबूत होता है। 11 वर्षों की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि SSY केवल एक योजना नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य में किया गया भरोसेमंद निवेश है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने को दी मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने तथा इसके अंतर्गत प्रचारात्मक एवं विकासात्मक गतिविधियों और गैप फंडिंग के लिए सरकारी सहायता को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

कार्यान्वयन रणनीति (Implementation Strategy):

यह योजना वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रहेगी, जिसके लिए सरकार निम्नलिखित मदों में सहयोग प्रदान करेगी—

  • प्रचारात्मक एवं विकासात्मक गतिविधियाँ:असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक योजना की पहुंच बढ़ाने हेतु जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और आउटरीच गतिविधियाँ।

  • गैप फंडिंग:योजना की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने और इसके दीर्घकालिक सतत संचालन के लिए आवश्यक सहायता।

मुख्य प्रभाव (Major Impact):

  • लाखों निम्न आय वर्ग एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

  • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा और भारत के पेंशनयुक्त समाज की ओर संक्रमण को समर्थन मिलेगा।

  • विकसित भारत @2047 के विजन को मजबूती मिलेगी, क्योंकि यह योजना स्थायी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

पृष्ठभूमि (Background):

  • शुरुआत:अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।

  • योजना की विशेषताएं:APY के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रतिमाह तक की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाती है, जो योगदान पर आधारित होती है।

  • प्रगति:19 जनवरी 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 8.66 करोड़ से अधिक सदस्य नामांकित हो चुके हैं, जिससे यह भारत की समावेशी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

  • विस्तार की आवश्यकता:योजना की निरंतरता, व्यापक जागरूकता, क्षमता निर्माण और वित्तीय व्यवहार्यता बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन का जारी रहना आवश्यक है।

अटल पेंशन योजना का यह विस्तार देश के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक वृद्धावस्था प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव के द्वितीय चरण के अंतर्गत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आयोजित किया। यह द्वितीय चरण 19 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक मनाया जा रहा है।


कार्यक्रम का नेतृत्व मंत्रालय के सचिव तनय कुमार ने किया। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय परिसर में एकत्रित हुए और भावपूर्ण स्वर में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इस आयोजन की गूंज पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण लेकर आई। मंत्रालय के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी इसी प्रकार के सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उन कालजयी पंक्तियों के प्रति सामूहिक श्रद्धा व्यक्त की, जिन्होंने पिछले 150 वर्षों से पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

यह आयोजन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित उस व्यापक राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।


डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन ने उत्तर प्रदेश में आयोजित एआई आधारित नवाचार एवं क्षमता निर्माण सम्मेलन में भाग लिया

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन (DIBD) ने 20 जनवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित एआई आधारित नवाचार एवं क्षमता निर्माण सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस (CeG), आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया। सम्मेलन में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के साझेदार और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग, डिजिटल कौशल विकास और नवाचार क्षमता को मजबूत करना था।

कार्यक्रम के अंतर्गत एआई अनुप्रयोगों, उद्योग सहयोग, कौशल विकास पहलों और राज्य स्तरीय एआई कार्यक्रमों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें FutureSkills PRIME कार्यक्रम और AI PRAGYA पहल शामिल रहीं, जिनका फोकस जिम्मेदार और व्यापक एआई अपनाने के लिए संस्थागत और मानव क्षमता निर्माण पर था।

एक विशेष तकनीकी सत्र में BHASHINI प्लेटफॉर्म और बहुभाषी तथा वॉयस-फर्स्ट डिजिटल गवर्नेंस को सक्षम बनाने में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई। इस सत्र में अनुवाद एपीआई, ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन, टेक्स्ट-टू-स्पीच और संवादात्मक एआई टूल्स के उपयोग को रेखांकित किया गया, जिन्हें नागरिकों के लिए सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में एकीकृत किया जा सकता है। इस दौरान Shrutlekh, BHASHINI के स्पीच-टू-टेक्स्ट और अनुवाद टूल का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन और बहुभाषी अनुवाद की क्षमता प्रदर्शित की गई।

इस अवसर पर डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने “एआई आधारित, वॉयस-फर्स्ट, बहुभाषी प्लेटफॉर्म के सह-निर्माण में अनुभव साझा करना” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता तभी नागरिकों की प्रभावी सेवा कर सकती है, जब वह भारतीय भाषाओं को समझे और स्थानीय संदर्भों व उपयोग को दर्शाने वाले स्वदेशी डेटा पर प्रशिक्षित हो।”

सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि BHASHINI का दृष्टिकोण भारतीय भाषाई वास्तविकताओं पर आधारित बहुभाषी एआई क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। प्रभावी एआई प्रणालियों के लिए क्षेत्रीय और क्षेत्र-विशिष्ट रोज़मर्रा की भाषा को दर्शाने वाले स्वदेशी डेटा का उपयोग आवश्यक है। इस मिशन के तहत नागरिकों की भागीदारी से भाषा डेटा का योगदान और सत्यापन किया जाता है, जिसमें स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के साथ सहयोग किया जाता है। डेटा निर्माण और एनोटेशन से लेकर वास्तविक उपयोग और फीडबैक के माध्यम से निरंतर सुधार तक, एआई के पूरे जीवनचक्र में क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है।

प्रस्तुति में BHASHINI प्लेटफॉर्म के व्यापक संचालन स्तर को भी रेखांकित किया गया। इसमें 36 से अधिक भाषाओं में टेक्स्ट सपोर्ट, 22 से अधिक भाषाओं में वॉयस सपोर्ट, 350 से अधिक एआई भाषा मॉडल, 500 से अधिक वेबसाइटों पर एकीकरण और 100 से अधिक लाइव उपयोग मामलों का उल्लेख किया गया। साथ ही, अवधी और ब्रज जैसी क्षेत्रीय बोलियों को शामिल कर स्थानीय स्तर पर गहन सहभागिता को संभव बनाया गया है।

डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन की इस सहभागिता ने राज्य सरकारों को बहुभाषी, वॉयस-सक्षम और एआई-आधारित समाधान अपनाने में सहयोग देने की उसकी भूमिका को पुनः सुदृढ़ किया है। यह पहल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय भाषाओं के एकीकरण और राज्यों में समावेशी एआई-सक्षम शासन को आगे बढ़ाने के भारत सरकार के विजन के अनुरूप है।

राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता 2026: जोनल स्तर का समापन, ग्रैंड फिनाले के लिए 16 टीमें चयनित

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गणतंत्र दिवस समारोह 2026 के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता का जोनल स्तर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इसके अंतर्गत देश भर से 16 टीमों का चयन किया गया है, जो 24 जनवरी 2026 को नेशनल बाल भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भव्य फाइनल में अपनी प्रस्तुति देंगी।

इन 16 टीमों का चयन पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण—चारों जोनों से किया गया है। प्रत्येक जोन से ब्रास बैंड बॉयज़, ब्रास बैंड गर्ल्स, पाइप बैंड बॉयज़ और पाइप बैंड गर्ल्स—चार श्रेणियों में एक-एक टीम को फाइनल के लिए चुना गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देशभर के स्कूली बच्चों में देशभक्ति, एकता और अनुशासन की भावना को प्रोत्साहित करना है।

ग्रैंड फिनाले के लिए चयनित 16 टीमें

ब्रास बैंड (लड़के)

  1. सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, लुपुंगुटु, चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम – झारखंड (पूर्व)

  2. संजीवनी सैनिक स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, कोपरगांव – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पेरिये, कासरगोड – केरल (दक्षिण)

ब्रास बैंड (लड़कियां)

  1. होली क्रॉस हाई स्कूल, कारबुक, गोमती – त्रिपुरा (पूर्व)

  2. डॉन बॉस्को हाई स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, मुंबई – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सेंट जोसेफ कॉलेज, आशियाना, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. प्रोविडेंस गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, कोझिकोड – केरल (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़के)

  1. कैराली स्कूल, एचईसी टाउनशिप, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. श्री स्वामीनारायण गुरुकुल कुमार विद्यालय, गिर सोमनाथ – गुजरात (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बदली – दिल्ली (उत्तर)

  4. द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर – छत्तीसगढ़ (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़कियां)

  1. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कांके, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़ – राजस्थान (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट सर्वोदय कन्या विद्यालय, पालम कॉलोनी – दिल्ली (उत्तर)

  4. पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एएससी सेंटर, बेंगलुरु – कर्नाटक (दक्षिण)

पुरस्कार एवं मूल्यांकन

प्रत्येक श्रेणी में शीर्ष तीन टीमों को नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे—

  • प्रथम पुरस्कार: ₹51,000

  • द्वितीय पुरस्कार: ₹31,000

  • तृतीय पुरस्कार: ₹21,000

शेष टीम को ₹11,000 का सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन रक्षा मंत्रालय द्वारा नियुक्त जूरी करेगी, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सदस्य शामिल होंगे।

आयोजन एवं भागीदारी

यह प्रतियोगिता रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है। इसके प्रथम चरण में सीबीएसई, आईसीएसई, केवीएस, एनवीएस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, पीएम-श्री और सैनिक स्कूलों सहित सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यालयों ने भाग लिया।

इस वर्ष प्रतियोगिता में उत्साह और भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • 763 स्कूल बैंड टीमों ने राज्य स्तर पर भाग लिया

  • इनमें से 94 टीमें जोनल स्तर के लिए चयनित हुईं

  • जोनल स्तर पर 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 80 टीमों के 2,217 बच्चों ने हिस्सा लिया

यह प्रतियोगिता देशभर के विद्यार्थियों में अनुशासन, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और सशक्त बनाने का एक प्रभावशाली मंच बन रही है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने SIDBI को ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता को दी मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता प्रदान करने को मंजूरी दे दी है। यह इक्विटी पूंजी वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा SIDBI में तीन चरणों में निवेश की जाएगी।

इसके तहत वित्त वर्ष 2025–26 में ₹3,000 करोड़ की राशि 31 मार्च 2025 को ₹568.65 के बुक वैल्यू पर निवेश की जाएगी, जबकि वित्त वर्ष 2026–27 और वित्त वर्ष 2027–28 में ₹1,000 करोड़–₹1,000 करोड़ की अतिरिक्त इक्विटी संबंधित पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की बुक वैल्यू पर निवेश की जाएगी।

प्रभाव (Impact):

₹5,000 करोड़ की इक्विटी पूंजी निवेश के बाद, एमएसएमई को दी जाने वाली वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 76.26 लाख एमएसएमई लाभार्थियों की संख्या बढ़कर

  • वित्त वर्ष 2028 के अंत तक लगभग 1.02 करोड़ एमएसएमई तक पहुंचने की संभावना है।

इससे लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ेंगे।

एमएसएमई मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट (30.09.2025 तक उपलब्ध आंकड़ों) के अनुसार, 6.90 करोड़ एमएसएमई द्वारा लगभग 30.16 करोड़ रोजगार सृजित किए गए हैं, यानी औसतन प्रति एमएसएमई 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है।
इस औसत के आधार पर, 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थियों के जुड़ने से लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

पृष्ठभूमि (Background):

निर्देशित ऋण (Directed Credit) पर बढ़ते फोकस और अगले पांच वर्षों में इस पोर्टफोलियो के विस्तार को देखते हुए, SIDBI की बैलेंस शीट पर जोखिम-भारित परिसंपत्तियों (Risk-Weighted Assets) में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसके चलते पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी।

SIDBI द्वारा विकसित किए जा रहे डिजिटल और डिजिटल-सक्षम बिना जमानत ऋण उत्पाद, जो ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए हैं, तथा स्टार्ट-अप्स को दिए जा रहे वेंचर डेट से भी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में वृद्धि होगी, जिससे और अधिक पूंजी की आवश्यकता पड़ेगी।

निर्धारित मानकों से कहीं अधिक स्वस्थ CRAR बनाए रखना SIDBI की क्रेडिट रेटिंग को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। अतिरिक्त शेयर पूंजी निवेश से SIDBI को स्वस्थ CRAR बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे बैंक को उचित ब्याज दरों पर संसाधन जुटाने में सुविधा होगी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को प्रतिस्पर्धी दरों पर अधिक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

चरणबद्ध तरीके से प्रस्तावित यह इक्विटी निवेश SIDBI को अगले तीन वर्षों में

  • उच्च तनाव (High Stress) स्थिति में 10.50% से ऊपर, और

  • पिलर-1 एवं पिलर-2 के तहत 14.50% से ऊपर CRAR बनाए रखने में सक्षम बनाएगा।

यह निर्णय एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त करने, रोजगार सृजन बढ़ाने और समग्र आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ में मौसम बदलेगा करवट, पहले बढ़ेगा तापमान फिर गिरेगा पारा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश के न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे शीत लहर से कुछ हद तक राहत मिलेगी। हालांकि यह राहत अस्थायी होगी, क्योंकि इसके बाद ठंड फिर से तेज होने के आसार हैं।


मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि पहले चरण में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि संभव है। इसके बाद अगले दो दिनों में ठंड दोबारा जोर पकड़ सकती है और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। ऐसे में लोगों को पहले हल्की गर्माहट और फिर अचानक बढ़ती ठंड का सामना करना पड़ेगा।

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश का मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा। दुर्ग संभाग के एक-दो स्थानों पर शीत लहर की स्थिति देखी गई, जिससे सुबह और रात के समय ठंड का असर ज्यादा महसूस हुआ। फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय साइनॉप्टिक सिस्टम नहीं है, इसलिए बारिश की कोई संभावना नहीं है।

राजधानी रायपुर में 21 जनवरी की सुबह हल्की धुंध छाए रहने की संभावना जताई गई है। यहां अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आने वाले दिनों में भी मौसम शुष्क बना रहने की संभावना है।

साय कैबिनेट के 4 बड़े फैसले ,आबकारी नीति से लेकर शिक्षा, स्टार्ट-अप और स्वास्थ्य व्यवस्था तक अहम निर्णय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -


1) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव का अनुमोदन तथा इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया गया।

2) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जाने हेतु श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना के लिए सेक्टर-18 में चिन्हांकित लगभग 40 एकड़ भू-खण्ड का आबंटन लीज के रूप में एकमुश्त 90 वर्षाें के लिए करने की स्वीकृति प्रदान की है।

एसव्हीकेएम एक ख्याति प्राप्त संस्था है, जो वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत तथा वर्तमान में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित है, जोकि एक लाख से अधिक छात्रों को प्रति वर्ष प्री-प्राइमरी से लेकर डॉक्टोरल कार्यक्रमों में शिक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2025 में एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी रैकिंग में इस संस्था को 52वां रैंक प्राप्त हुआ है। नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूती मिलेगी।

3) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में 04 नवीन उद्यमिता केन्द्रों की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू का निर्णय लिया है। इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग तथा तकनीकी स्टार्ट-अप इको सिस्टम को प्रोत्साहित करने में यह एमओयू महत्वपूर्ण होगा।

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 68 केन्द्र संचालित है, जिनमें 60 भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट एग्री उद्यमिता केन्द्रों के माध्यम से आगामी तीन से पांच सालों में डोमेन विशेष के 133 स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देंगे। राज्य सरकार द्वारा छात्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं तथा उद्योगों को ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकसित करने में सहयोग प्रदान करने के लिए एसटीपीआई के माध्यम से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ईएसडीडी) केन्द्र स्थापित किया जाएगा, जो प्रति वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर, स्टार्टअप और एमएसएमई को सभी सहायता प्रदान करेगा।

4) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओ में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वर्तमान संसाधनों को सुदृढीकरण करने तथा निर्धारित मानक के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लैब के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक निर्णय लिए गए हैं। 

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker से एकीकरण

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प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr CCA), दिल्ली के कार्यालय ने दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी पेंशनरों को सूचित किया है कि SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण कर दिया गया है। यह पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप है।

इस एकीकरण के माध्यम से पेंशनर अब SAMPANN से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज—जैसे पेंशन भुगतान आदेश (e-PPO), ग्रेच्युटी स्वीकृति आदेश, कम्यूटेशन स्वीकृति आदेश और फॉर्म-16—को सीधे अपने DigiLocker खाते से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा मोबाइल या डेस्कटॉप के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी उपलब्ध है, जिससे सुरक्षित, पेपरलेस और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित होती हैं। इससे बैंकिंग, चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं में भी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर आशीष जोशी, प्रधान नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली ने कहा कि यह पहल भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और सरकार के पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस के विजन को साकार करता है।

पेंशनर इस सेवा का लाभ उठाने के लिए https://digilocker.gov.in पर आधार के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं, अपना PPO नंबर लिंक कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं। सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन और SAMPANN पोर्टल उपलब्ध हैं। DigiLocker और SAMPANN सेवाओं से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) नीचे दिए गए हैं।

SAMPANN के बारे में

SAMPANN (System for Accounting and Management of Pension) दूरसंचार विभाग की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसे नियंत्रक जनरल संचार लेखा कार्यालय द्वारा विकसित, स्वामित्व और संचालित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्रणाली पेंशन प्रशासन को प्रणाली-केंद्रित से पेंशनर-केंद्रित बनाती है।

SAMPANN ने पेंशन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ कर दिया है—मामलों की शुरुआत से लेकर e-PPO जारी करने, भुगतान, लेखा, ऑडिट, शिकायत निवारण तक। अब पेंशन सीधे बैंक खातों में जमा होती है। पेंशनर घर बैठे भुगतान की स्थिति देख सकते हैं, जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, विवरण अपडेट कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही हैं।

FAQ: DigiLocker के माध्यम से SAMPANN सेवाएं

1. DigiLocker क्या है?

DigiLocker भारत सरकार का सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक अपने महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं और साझा कर सकते हैं। यह डिजिटल वॉलेट की तरह कार्य करता है और कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करता है।

2. DigiLocker तक कैसे पहुंचें?

  • वेब पोर्टल: https://digilocker.gov.in

  • मोबाइल ऐप: Google Play Store (Android) या Apple Store (iOS) से DigiLocker ऐप डाउनलोड करें।

3. पंजीकरण और लॉग-इन कैसे करें?

  • मोबाइल नंबर/आधार से रजिस्ट्रेशन करें

  • OTP सत्यापन के बाद MPIN सेट करें

  • MPIN या OTP से लॉग-इन करें

4. DigiLocker पर सेवाएं कैसे खोजें?

लॉग-इन के बाद “Search Documents” विकल्प का उपयोग करें।
SAMPANN से जुड़ी सेवाओं को SAMPANN, DoT, Pension, Gratuity, Commutation जैसे कीवर्ड से खोजा जा सकता है।

5. DigiLocker पर उपलब्ध SAMPANN सेवाएं:

  • e-PPO

  • ग्रेच्युटी भुगतान आदेश

  • कम्यूटेशन भुगतान आदेश

  • फॉर्म-16

पेंशनर संबंधित सेवा में अपना PPO नंबर दर्ज कर “Get Document” पर क्लिक करके दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं।

यह पहल पेंशनरों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के लिए खुलेगा

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राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के दर्शन हेतु 3 फरवरी से 31 मार्च, 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान लोग सप्ताह में छह दिन उद्यान का भ्रमण कर सकेंगे। उद्यान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अंतिम प्रवेश शाम 5:15 बजे तक होगा।

सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। आगंतुक पहले से ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर कर सकते हैं। वहीं, वॉक-इन विज़िटर्स के लिए प्रवेश द्वार के पास सेल्फ-सर्विस विज़िटर रजिस्ट्रेशन कियोस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के मिलन बिंदु के पास स्थित है।

आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह शटल सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक हर 30 मिनट में चलेगी। शटल बसों की पहचान ‘Shuttle Service for Amrit Udyan’ के बैनर से की जा सकेगी।

अमृत उद्यान का यह आयोजन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगा, जहां वे राष्ट्रपति भवन के सुंदर और सुसज्जित उद्यानों का आनंद ले सकेंगे।

विद्युत मंत्रालय ने जारी की ‘ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026’, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को मिलेगा बल

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विद्युत मंत्रालय ने आज नई ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 जारी करने की घोषणा की। यह नीति देश के बिजली क्षेत्र को सशक्त और आधुनिक बनाने के साथ-साथ विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अंतिम रूप से लागू होने के बाद यह नीति वर्ष 2005 में अधिसूचित मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति का स्थान लेगी।

फरवरी 2005 में अधिसूचित पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति का उद्देश्य बिजली क्षेत्र की बुनियादी चुनौतियों—जैसे मांग-आपूर्ति में कमी, सीमित बिजली पहुंच और कमजोर अवसंरचना—का समाधान करना था। इसके बाद भारत के विद्युत क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। देश की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता चार गुना बढ़ी है, मार्च 2021 तक सार्वभौमिक विद्युतीकरण हासिल किया गया, दिसंबर 2013 में एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड अस्तित्व में आया और वर्ष 2024–25 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1,460 यूनिट (kWh) तक पहुंच गई। इसके साथ ही पावर मार्केट और एक्सचेंजों से बिजली खरीद में लचीलापन और दक्षता बढ़ी है।

हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद वितरण क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उच्च एटीएंडसी (AT&C) हानियां, बढ़ता कर्ज, गैर-लागत आधारित टैरिफ और अधिक क्रॉस-सब्सिडी के कारण औद्योगिक बिजली दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।

इसी पृष्ठभूमि में ड्राफ्ट NEP 2026 को तैयार किया गया है। इस नीति के तहत वर्ष 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट और वर्ष 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिसमें 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य शामिल है।

ड्राफ्ट NEP 2026 के प्रमुख प्रावधान:

संसाधन पर्याप्तता (Resource Adequacy):

डिस्कॉम और एसएलडीसी को राज्य स्तर पर अग्रिम योजना बनानी होगी, जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार करेगा।

वित्तीय स्थिरता एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा:

  • टैरिफ का स्वत: वार्षिक संशोधन उपयुक्त सूचकांक से जोड़ा जाएगा।

  • फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली डिमांड चार्ज के माध्यम से की जाएगी ताकि क्रॉस-सब्सिडी कम हो।

  • मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी व सरचार्ज से छूट।

  • 1 मेगावाट या उससे अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट का प्रावधान।

  • विवाद समाधान तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण:

  • बाजार आधारित तंत्र से आरई क्षमता में वृद्धि।

  • छोटे उपभोक्ताओं के लिए डिस्कॉम द्वारा ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था।

  • पी2पी (P2P) और एग्रीगेटर के माध्यम से अतिरिक्त ऊर्जा का व्यापार।

  • 2030 तक नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा के लिए समान शेड्यूलिंग व्यवस्था।

  • बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज को बढ़ावा।

थर्मल, न्यूक्लियर और हाइड्रो ऊर्जा:

  • थर्मल प्लांट्स में स्टोरेज का एकीकरण और पुराने यूनिट्स का पुन: उपयोग।

  • SHANTI अधिनियम 2025 के अनुरूप उन्नत परमाणु तकनीक, स्मॉल और मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य।

  • भंडारण आधारित जलविद्युत परियोजनाओं का तेज विकास।

पावर मार्केट, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन:

  • बाजार में निगरानी और नियंत्रण के लिए सशक्त नियामक ढांचा।

  • राइट ऑफ वे (RoW) समस्याओं के समाधान हेतु नई तकनीक और मुआवजा।

  • सिंगल-डिजिट AT&C हानियों का लक्ष्य।

  • साझा वितरण नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर (DSO) की स्थापना।

ग्रिड संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीक:

  • एसटीयू का फंक्शनल अनबंडलिंग और स्वतंत्र एसएलडीसी का गठन।

  • मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा और डेटा को भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य।

  • 2030 तक स्वदेशी SCADA सिस्टम और घरेलू सॉफ्टवेयर समाधान का विकास।

कुल मिलाकर, ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 एक भविष्य-उन्मुख, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और पर्यावरण के अनुकूल बिजली क्षेत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसका उद्देश्य देश को सस्ती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को हासिल करना है।

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