Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रस्तावित करेगा जुलाई 2026–जून 2027 में प्रवासन पर सर्वेक्षण

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जुलाई 2026 से जून 2027 के दौरान प्रवासन पर सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा है।

MoSPI समय-समय पर प्रवासन सर्वेक्षण आयोजित करता रहा है; सबसे हालिया प्रवासन डेटा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2020–21 और मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे (2020–21) के माध्यम से एकत्र किए गए थे। आगामी प्रवासन सर्वेक्षण ग्रामीण–शहरी और राज्य-स्तरीय प्रवासन की सीमा और पैटर्न, प्रवासन के कारण, वापसी प्रवासन, मौसमी प्रवासन, प्रवासियों की रोजगार प्रोफाइल आदि पर व्यापक और अद्यतन डेटा प्रदान करेगा।

इस सर्वेक्षण के परिणाम श्रम गतिशीलता, रेमिटेंस प्रवाह और संबंधित पहलुओं को समझने में सहायक होंगे। यह जानकारी नीति-निर्माताओं, योजनाकारों, शोधकर्ताओं और विकास कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होगी, क्योंकि इसके माध्यम से शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों की योजना बनाई जा सकेगी।

PLFS 2020–21 के अनुसार, भारत में प्रवासन दर 28.9% अनुमानित की गई थी।

सभी भारत स्तर पर पुरुषों में प्रवासन दर 10.7% और महिलाओं में 47.9% अनुमानित की गई। प्रवासन के कारण लिंग के अनुसार भिन्न हैं। महिलाओं में विवाह प्रमुख कारण है, जो सभी महिला प्रवासियों का लगभग 86.8 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत, पुरुषों में रोजगार या बेहतर रोजगार की तलाश में प्रवासन सबसे अधिक है, जो सभी भारत स्तर पर 22.8% है। ये विशिष्ट पैटर्न भारत में प्रवासन की लिंग-विशिष्ट प्रकृति को उजागर करते हैं, जिसमें महिलाओं का प्रवासन सामाजिक कारणों जैसे विवाह से प्रभावित है, जबकि पुरुषों का प्रवासन मुख्य रूप से श्रम बाजार के अवसरों से प्रभावित है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और संस्कृति मंत्रालय राज्यमंत्री राव इंदरजीत सिंह ने दी।


आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट: कृषि और ग्रामीण विकास में अभूतपूर्व प्रगति – शिवराज सिंह चौहान

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वेक्षण के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कृषि और ग्रामीण विकास—दोनों मोर्चों पर अभूतपूर्व प्रगति की है।

कृषि क्षेत्र में सतत और स्थिर विकास

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में स्थिर मूल्यों पर औसतन 4.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 की दशक अवधि में कृषि क्षेत्र ने 4.45 प्रतिशत की दशकगत वृद्धि दर हासिल की है, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में भी कृषि क्षेत्र ने 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो इसकी मजबूती और लचीलेपन को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024–25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों—जिसमें ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) भी शामिल हैं—के बेहतर उत्पादन के कारण हुई है। आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कई फसलों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका भी निभा रहा है।

बागवानी कृषि विकास का उज्ज्वल पक्ष

शिवराज चौहान ने कहा कि कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि का सबसे उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है। बागवानी उत्पादन वित्त वर्ष 2013–14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 367.72 मिलियन टन हो गया है।

इस अवधि में फल उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जी उत्पादन 219.67 मिलियन टन तथा अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अब विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है, जो वैश्विक प्याज उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है। साथ ही, भारत सब्जियों, फलों और आलू का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिनमें प्रत्येक श्रेणी में वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 12–13 प्रतिशत है।

ग्रामीण भारत में अवसंरचना का ऐतिहासिक विस्तार

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि ग्रामीण अवसंरचना—जिसमें सड़कें, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं—में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र बसावटों को सभी मौसमों में चलने योग्य सड़कों से जोड़ दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के अंतर्गत लाखों किलोमीटर सड़कों और हजारों पुलों का निर्माण किया गया है। पीएमजीएसवाई-IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश की लगभग 3,270 असंपर्कित बसावटों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।

आवास, डिजिटल सशक्तिकरण और आजीविका में परिवर्तन

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘सबके लिए आवास’ मिशन के तहत पिछले 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.70 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत 4.14 करोड़ आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अधिकांश को स्वीकृति दी जा चुकी है।

डिजिटल और तकनीकी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरे किए जा चुके हैं और 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए गए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 99.8 प्रतिशत भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ‘लखपति दीदी’ की संख्या 2.5 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में एक बड़ी उपलब्धि है।

शिवराज चौहान ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि सतत नीतिगत फोकस, संस्थागत सुधारों और लक्षित निवेशों ने कृषि को मजबूत किया है और ग्रामीण भारत का व्यापक रूप से रूपांतरण किया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां समावेशी विकास, किसान कल्याण और सतत ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में गांवों की केंद्रीय भूमिका सुनिश्चित होती है।


इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: नई दिल्ली में 16–20 फरवरी को होगा वैश्विक आयोजन

No comments Document Thumbnail

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा। यह अब तक आयोजित चार वैश्विक एआई सम्मेलनों में सबसे बड़ा होने की संभावना है, जो जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-उन्मुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गति को दर्शाता है।

इस समिट को वैश्विक समुदाय से अभूतपूर्व रुचि प्राप्त हुई है। आयोजन से पूर्व ही 35,000 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हो चुके हैं। समिट का प्रमुख उद्देश्य दृष्टि को व्यवहारिक क्रियान्वयन में बदलना है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर प्रभावी और सार्थक परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समिट में सरकारों, उद्योग जगत के नेताओं, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी अपेक्षित है, जो कार्यक्रम के एजेंडे को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता होने की संभावना है, जिनमें 15–20 राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री तथा वैश्विक और भारतीय कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े लगभग 500 प्रमुख व्यक्ति—जिनमें नवोन्मेषक, शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTOs) शामिल हैं—भी इसमें भाग लेंगे।

भागीदारी की व्यापकता को दर्शाते हुए, समिट में 500 से अधिक एआई स्टार्टअप्स की स्टार्टअप प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ लगभग 500 सत्रों का आयोजन होगा, जिससे यह एआई पर केंद्रित सबसे व्यापक वैश्विक आयोजनों में से एक बन जाएगा।

समिट से पहले की गतिविधियों में भी व्यापक भागीदारी देखने को मिली है। प्री-समिट आयोजनों के लिए 1,300 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अब तक भारत और वैश्विक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों एवं क्षेत्रों में 500 से अधिक प्री-समिट कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। समिट ढांचे के अंतर्गत सात प्रमुख (फ्लैगशिप) कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिनमें कुल मिलाकर 3,00,000 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही है। यह एआई इम्पैक्ट समिट प्रक्रिया में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रुचि को दर्शाता है।

वैश्विक एआई समिट प्रक्रिया समय के साथ विकसित हुई है—जिसकी शुरुआत ब्लेचली पार्क में एआई जोखिमों पर चर्चा से हुई, इसके बाद सियोल में नैतिकता और समावेशन पर विमर्श हुआ, और फिर पेरिस में साझा सिद्धांतों के क्रियान्वयन की दिशा में प्रगति हुई। यह समिट वैश्विक एआई विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से संबंधित विस्तृत जानकारी—जिसमें कार्यक्रम, विषयगत फोकस क्षेत्र और भागीदारी की प्रक्रियाएं शामिल हैं—समिट की आधिकारिक वेबसाइट https://impact.indiaai.gov.in/ पर उपलब्ध है। इच्छुक हितधारकों से अनुरोध है कि वे वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग को आगे बढ़ाने के इस वैश्विक संवाद का हिस्सा बनें।

समिट के लिए मीडिया मान्यता (Media Accreditation) प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। केवल मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों को ही समिट की कार्यवाही को कवर करने की अनुमति दी जाएगी। आवेदन आधिकारिक पोर्टल https://impact.indiaai.gov.in/media-accreditation के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाने आवश्यक हैं। मीडिया मान्यता हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 8 फरवरी 2026 है।


त्रि-सेवाओं का फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 02 फरवरी से नई दिल्ली में प्रारंभ

No comments Document Thumbnail

त्रि-सेवाओं के फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का तृतीय संस्करण 02 से 25 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में तथा सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज़ (CENJOWS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस संस्करण में सैन्य अभियानों में उभरते विशेषीकृत विषयों एवं डोमेन-विशिष्ट युद्धक विकास को समाहित करते हुए पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किया गया है।

यह कोर्स इस बात की गहन समझ विकसित करने पर केंद्रित है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी युद्ध संचालन को प्रभावित कर रही है, जिससे हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों तथा टैक्टिक्स, टेक्नीक्स और प्रोसीजर्स (TTPs) पर पुनर्विचार की आवश्यकता उत्पन्न हो रही है। पाठ्यक्रम के अंतर्गत महत्वपूर्ण विषयों का गहन अध्ययन, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन तथा रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों का भ्रमण भी शामिल है।

इस कोर्स में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि—जिनमें स्टार्टअप्स, एमएसएमई, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) तथा निजी उद्योग शामिल हैं—भाग ले रहे हैं। सेनाओं से भाग लेने वाले अधिकारियों की वरिष्ठता मेजर से लेकर मेजर जनरल (एवं समकक्ष) तक है, जहाँ कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता एवं नवाचार दृष्टिकोण के साथ योगदान दे रहे हैं, वहीं वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव एवं रणनीतिक ज्ञान से पाठ्यक्रम को समृद्ध कर रहे हैं।

फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन प्राथमिकताओं को स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमताओं के साथ संरेखित करना है तथा आधुनिक एवं भविष्य के युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर मुक्त एवं सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान पूर्व सैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व राजदूतों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों सहित विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा चुनौतियों का व्यापक, गहन एवं पेशेवर विश्लेषण किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, इस कोर्स में महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलताओं तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य जैसे विषयों के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, जो भविष्य में परिचालन योजना एवं संचालन के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन एवं विश्लेषण किए जाने वाले विषयों के दायरे को और विस्तृत करेंगे।

सितंबर 2024 में आयोजित उद्घाटन संस्करण की सफलता के आधार पर, यह विस्तारित तीन सप्ताह का कार्यक्रम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार करना है।


आयुष को सशक्त बनाने वाला बजट, समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम : प्रतापराव जाधव

No comments Document Thumbnail

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने वाले परिवर्तनकारी बजट घोषणाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए, केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रतापराव जाधव ने इन घोषणाओं को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया।

आयुष मंत्री ने बजट को “दूरदर्शी और भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि ये उपाय एक समग्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें आयुष एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

अपने बजट भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन, वैश्विक नेतृत्व, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म तथा कुशल मानव संसाधन विकास को विस्तार देने हेतु कई ऐतिहासिक पहलों की घोषणा की। ये कदम पारंपरिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का प्रमुख चालक बनाने की भारत की आकांक्षा को सुदृढ़ करते हैं।

बजट का एक ऐतिहासिक पहलू तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों की सफलता के आधार पर, ये संस्थान शैक्षणिक मानकों को ऊंचा उठाने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

बजट में आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उच्च प्रमाणन मानकों के अनुरूप उन्नत करने का भी प्रस्ताव है। इससे उत्पाद गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और प्रसंस्करण एवं विनिर्माण से जुड़े एमएसएमई को समर्थन मिलेगा।

भारत के वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करते हुए, जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को उन्नत किया जाएगा, जिससे अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और नीति संवाद को गहराई मिलेगी। इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रस्तावित पाँच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म हब में आयुष केंद्रों को शामिल किया जाएगा। ये केंद्र उन्नत चिकित्सा उपचार के साथ पारंपरिक उपचार, वेलनेस सेवाओं और पुनर्वास सहायता को जोड़ते हुए एकीकृत स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में विकसित होंगे। इससे आयुष चिकित्सकों, थैरेपिस्टों, योग प्रशिक्षकों और संबद्ध पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इसके अतिरिक्त, एनएसक्यूएफ से संरेखित केयरगिवर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योग और वेलनेस कौशल को शामिल किया गया है, जिसके तहत आगामी वर्ष में 1.5 लाख केयरगिवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे आयुष से जुड़े कौशल केयर इकॉनमी में मुख्यधारा में आएंगे और निवारक तथा जेरियाट्रिक देखभाल सेवाएं सशक्त होंगी।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि पिछले एक दशक में माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयुष क्षेत्र ने अभूतपूर्व संस्थागत विस्तार, वैश्विक मान्यता, डिजिटल विस्तार और अनुसंधान प्रगति देखी है। उन्होंने कहा, “यह बजट उसी मजबूत आधार पर आगे बढ़ते हुए विस्तार से समेकन, गुणवत्ता संवर्धन और वैश्विक एकीकरण की ओर ले जाता है। यह एक निर्णायक क्षण है, जहां पारंपरिक चिकित्सा को पूरक नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य भविष्य का अभिन्न अंग माना जा रहा है।”

आर्थिक प्रभाव पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि ये घोषणाएं स्वास्थ्य नीति को ग्रामीण आजीविका, निर्यात वृद्धि, युवा रोजगार और उद्यमिता से जोड़ती हैं, जिससे भारत के साक्ष्य-आधारित समग्र स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को बल मिलता है।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय वित्त मंत्री के प्रति उनके निरंतर समर्थन और दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से सम्मानित भारत के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में निर्णायक कदम है।


डस्टबिन से उद्योग तक- अंजना उरांव की आत्मनिर्भरता की उड़ान

No comments Document Thumbnail

 कभी-कभी जीवन की दिशा बदलने के लिए किसी बड़े मंच, बड़े अवसर या बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी एक डस्टबिन में पड़ा काग़ज़ का टुकड़ा भी जीवन की करवट बदल देता है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखण्ड के ग्राम तोलगा की अंजना उरांव की कहानी इसी सच्चाई को सशक्त रूप से सामने रखती है, जो कड़ी मेहनत और लगन से ही स्थायी सफलता हासिल की।


अंजना उरांव कोई उद्योगपति परिवार से नहीं आतीं, न ही उनके पास पूंजी, सिफ़ारिश या विशेष प्रशिक्षण था। वे जनपद पंचायत खड़गवां में एक अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं। स्नातकोत्तर डिग्री होने के बावजूद मात्र चार हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत हैं। जीवन एक तयशुदा सीमित दायरे में चल रहा था, तभी एक दिन कार्यालय के डस्टबिन में उन्हें एक फटा हुआ पन्ना मिला। उस पन्ने पर लिखा था प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना वह पन्ना कचरा नहीं था, वह संभावना थी। अंजना ने उसे पढ़ा, समझा और उसी क्षण मन में यह निश्चय किया कि वे सिर्फ़ नौकरी करने वाली नहीं, बल्कि कुछ सृजित करने वाली बनेंगी।


विरोध, संदेह और संघर्ष का दौर

योजना की जानकारी लेने जब उन्होंने जनपद कार्यालय में चर्चा की तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ मिलीं। किसी ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जाने की सलाह दी, तो किसी ने यह कहकर हतोत्साहित किया कि बैंक और योजनाओं के चक्कर में पड़ना बेवकूफी है। लेकिन अंजना ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक रोचक बात भी बताई कि एक बार मोबाइल व अखबार में जिला कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का बयान आया था कि महिलाएं किसी से कम नहीं है, अपने हिम्मत से आगे बढ़ सकती हैं। यह वाक्य उनके दिमाग बसा था, इसी जुनून ने आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।

अंजना ने जब जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से जानकारी लेने के बाद जब पोड़ी-बचरा क्षेत्र में फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई देखी, तो उनके भीतर एक उद्यमिता जन्म लेने लगा। उन्होंने तय किया कि वे भी फ्लाईऐश ईंट उद्योग स्थापित करेंगी।

इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष

दस्तावेज़ों की लंबी सूची, बैंकों के बार-बार चक्कर, ऋण अस्वीकृतियाँ और सामाजिक दबाव। मायके और ससुराल दोनों ओर से एक ही सलाह मिली यह लफड़ा मत पालो। अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें कि आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।

अंजना की जुनून के आगे बढ़ने में पति का रहा साथ

ऐसे समय में उनके पति अनिल कुमार उनके सबसे बड़े संबल बना। दसवीं तक पढ़े अनिल कुमार को उद्योग का अनुभव नहीं था, लेकिन मेहनत, खेती और परिवार की जिम्मेदारी निभाने का जज्बा भरपूर था। उन्होंने अंजना के सपने को अपना सपना बना लिया। अंततः बैकुंठपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं, शेड का निर्माण हुआ, कोरबा से फ्लाईऐश और स्थानीय स्तर से रेत-सीमेंट की व्यवस्था की गई।

सपना बना हकीकत

अगस्त 2025 में इकाई का लोकार्पण हुआ और अक्टूबर 2025 से उत्पादन शुरू हुआ है। आज अंजना उरांव की अंजना इंटरप्राइजेज फ्लाईऐश ब्रिक्स इकाई लगातार उत्पादन कर रही है। अब तक लगभग 80 हजार ईंटों का निर्माण हो चुका है। वे प्रतिमाह 60 हजार रुपये की बैंक किश्त नियमित रूप से जमा कर रही हैं, बिना किसी चूक के। संयुक्त परिवार, खेती, बच्चों की परवरिश और उद्योग, सब कुछ संतुलन के साथ चल रहा है। चार एकड़ भूमि पर धान और गेहूं की खेती भी जारी है। अब ईंटों की मांग बढ़ती जा रही है। जल्द ही वे ईंट रखने की लकड़ी की ट्रॉली (पीढ़ा) खरीदने वाली हैं। उनका लक्ष्य है प्रतिदिन 15 हजार ईंट उत्पादन और प्रतिमाह 6 से 7 लाख रुपये का कारोबार ।

डस्टबिन से मिली पहचान

आज वही परिवार और समाज, जिसने कभी उन्हें रोका था, उनके साहस की सराहना करता है। अंजना उरांव स्वयं कहती हैं, श्लोग जिस डस्टबिन को कचरा समझते हैं, उसी डस्टबिन ने मुझे मेरी पहचान दी। इसलिए जहाँ से भी ज्ञान मिले, उसे अपनाइए। मेहनत, जुनून और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।

सकारात्मक और प्रेरणादायक लोगों के साथ रहें, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का कहना है कि अंजना उरांव निश्चित ही उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो साधनों और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर आगे बढ़ने से रुक जाती हैं। सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लेकर एक सफल उद्यमी बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही अंजना पर गर्व किया जाना चाहिए।

यह एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश

अंजना उरांव की यह कहानी सिर्फ़ एक महिला उद्यमी की सफलता नहीं है। यह कहानी है सरकारी योजनाओं के सही उपयोग, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत की जमीनी तस्वीर और उस सोच की, जो अवसर को कचरे में भी खोज लेती है। डस्टबिन से उद्योग तक का यह सफ़र बताता है कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है, तभी मजिल को हासिल किया जा सकता है।

धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, एल.डी. मानिकपुरी सहायक जनसंपर्क अधिकारी

फिर हाथी का कहर - जंगल गए बुजुर्ग को कुचल डाला, गांवों में दहशत

No comments Document Thumbnail

 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मानव-हाथी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल रेंज अंतर्गत ग्राम चुहकीमार में जंगली हाथी के हमले से 70 वर्षीय गंगाराम सारथी की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।


जानकारी के अनुसार, गंगाराम सारथी रोज की तरह सुबह जंगल लकड़ी लेने गए थे। दोपहर करीब ढाई बजे जंगल के भीतर उनका सामना एक विशालकाय जंगली हाथी से हो गया। अचानक हुए हमले में हाथी ने उन्हें पटक-पटककर कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद गांव में सन्नाटा

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना पर वन विभाग की टीम और हाथी मित्र दल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

वन विभाग ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने की चेतावनी

वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और हाथियों के संभावित मूवमेंट रूट से दूरी बनाए रखें। क्षेत्र में लगातार हाथियों की गतिविधि के चलते विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

रायगढ़ जिले में 101 जंगली हाथी, खतरा बरकरार

वन विभाग के अनुसार, रायगढ़ जिले में इस समय कुल 101 जंगली हाथी विचरण कर रहे हैं।

  • रायगढ़ वन मंडल में – 59 हाथी
  • धरमजयगढ़ वन मंडल में – 42 हाथी

इनमें 32 नर, 48 मादा और 21 शावक शामिल हैं। ग्राम चुहकीमार के आसपास के जंगलों में फिलहाल 12 हाथियों का एक दल सक्रिय है, जिससे आसपास के गांवों में लगातार खतरा बना हुआ है।

रात में भी हाथियों का उत्पात

बीती रात लैलूंगा रेंज में भी दंतैल हाथी ने जमकर उत्पात मचाया।
टोंगोटोला, झारआमा, पाकरगांव और सागरपाली गांवों में पांच ग्रामीणों के मकान ध्वस्त हो गए। वहीं प्रेमनगर और कुडेकेला क्षेत्रों में खड़ी फसलों और सिंचाई पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

वन विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं और ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

सोशल मीडिया बना मौत की वजह! रील बनाने को लेकर विवाद, भिलाई में महिला की आत्महत्या

No comments Document Thumbnail

 भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक महिला की जान ले ली। यह घटना छावनी थाना क्षेत्र की है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।


मृतका की पहचान अंजली साव (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो भिलाई की निवासी थी। अंजली इंस्टाग्राम पर सक्रिय थी और रील बनाती थी, लेकिन उसका यह शौक उसके पति को पसंद नहीं था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

बच्चों के ट्यूशन जाने के बाद उठाया खौफनाक कदम

जानकारी के अनुसार, अंजली अपने पति पप्पू साव और दो बच्चों के साथ रहती थी। वह गृहिणी थी, जबकि पति निजी काम करता है। 30 जनवरी को भी दोनों के बीच रील बनाने को लेकर विवाद हुआ था।

शाम के समय जब दोनों बच्चे ट्यूशन के लिए घर से बाहर गए, उसी दौरान अंजली ने पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चों के वापस लौटने पर उन्होंने मां को फंदे से लटका देखा और जोर-जोर से चीखने लगे। बच्चों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस व पति को सूचना दी गई।

पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच

सूचना मिलते ही छावनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। रविवार को अंजली का अंतिम संस्कार किया गया।

पहले भी कर चुकी थी आत्महत्या की कोशिश

स्थानीय लोगों के अनुसार, अंजली मोहल्ले में रील और डांस वीडियो को लेकर काफी चर्चित थी। उसने 26 जनवरी को इंस्टाग्राम पर अपनी आखिरी पोस्ट साझा की थी। बताया गया है कि दिसंबर महीने में भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, तब उसने धतूरा खा लिया था। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी जान बच गई थी। इसके बाद से उसका व्यवहार चिड़चिड़ा हो गया था।

फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है।

छावनी थाना क्षेत्र में दूसरी आत्महत्या की घटना

इसी थाना क्षेत्र से आत्महत्या की एक और घटना सामने आई है। कैंप-1 श्याम नगर इलाके में रहने वाली 27 वर्षीय युवती नीतू कोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

नीतू अपने दो भाइयों के साथ रहती थी। यह घटना 31 जनवरी और 1 फरवरी की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। सूचना मिलने पर छावनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आत्महत्या के कारण अभी अज्ञात

फिलहाल नीतू कोरी द्वारा आत्महत्या किए जाने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। मामले की जांच के तहत परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।

मां महामाया की नगरी रतनपुर बनेगी कॉरिडोर सिटी, अरुण साव का ऐलान

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 1 फरवरी को रतनपुर में माघी पूर्णिमा एवं आदिवासी विकास मेला वर्ष-2026 का शुभारंभ किया। साव ने इस अवसर पर ऑडिटोरियम निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए और नगर पालिका भवन में बाउंड्रीवाल के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की।


उप मुख्यमंत्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि रतनपुर पवित्र और पौराणिक नगरी है, इसकी ख्याति दुनिया भर में है। इस ख्याति के अनुरूप यहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह कभी छत्तीसगढ़ की राजधानी रही है। इसके अनुरूप गरिमा बढ़ाने का काम करेंगे।


साव ने बताया कि रतनपुर को कॉरीडोर के रूप में विकसित करने का काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के धार्मिक स्थलों को सजाने और संवारने का काम हुआ है। मां महामाया की कृपा से रतनपुर को भी संवारेंगे। रतनपुर के तालाबों के सौंदर्यीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसे सुंदर बनाने पूरे मन से कार्य करेंगे।

विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत के अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी और नगर पालिका के अध्यक्ष लवकुश कश्यप सहित पार्षदगण एवं नगरवासी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

गरियाबंद में हिंसा: दो पक्षों की झड़प में 10 घर जले, पुलिसकर्मी घायल, भारी पुलिस बल तैनात

No comments Document Thumbnail

 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुराने विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के घरों पर हमला कर दिया और करीब 10 घरों में आग लगा दी, वहीं 3 से 4 वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


यह मामला फिंगेश्वर थाना क्षेत्र के बकली गांव का है। हालात बिगड़ने के बाद गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें एक जवान घायल हो गया। घायल पुलिसकर्मी को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देर रात आईजी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया गया, हालांकि गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें गांव में तैनात हैं। एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुराने विवाद से जुड़ा मामला

पुलिस के अनुसार, यह विवाद एक पुराने झगड़े और लूटपाट की घटना से जुड़ा है। चार आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच पहले भी मारपीट हो चुकी है।

चार महीने पहले का वीडियो बना था विवाद की जड़

बताया जा रहा है कि करीब चार महीने पहले हथखोज गांव से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक राहगीरों के साथ मारपीट और लूटपाट करते नजर आए थे। इसके बाद फिंगेश्वर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

जेल से छूटने के बाद फिर भड़का विवाद

रविवार (1 फरवरी) सुबह करीब 11 बजे, जेल से जमानत पर छूटे आरोपियों ने बकली गांव में शिकायतकर्ता को देखते ही उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते मामला दो पक्षों के बीच संघर्ष में बदल गया और हिंसा फैल गई।

आरोपियों के घरों में आगजनी

इसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने आरोपियों के घरों में आग लगा दी। आगजनी की इस घटना में कई मकान और वाहन जलकर क्षतिग्रस्त हो गए।

ग्रामीणों का आरोप: मंदिर विवाद से जुड़ा मामला

ग्रामीण जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि यह विवाद केवल ताजा घटना तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि डेढ़ साल पहले गांव के शिव मंदिर को तोड़ा गया था, जिसका मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और आरोपी जमानत पर बाहर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी पुराने विवाद को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है।

पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

दर्दनाक सड़क हादसा, दो बाइकों की टक्कर में 18 वर्षीय युवक गंभीर

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। ग्रामीण धरसीवा थाना क्षेत्र में देर शाम सड़क हादसा हो गया। दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में 18 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस समय हुआ जब युवक अपने गांव से बाइक पर पेट्रोल भरवाने के लिए निकला था।


घायल युवक की पहचान कुलेश्वर निषाद (18 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 1, सुभाष चौक के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही कुलेश्वर मुख्य सड़क पर पहुंचा, सामने से तेज रफ्तार में आ रही दूसरी बाइक से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर चोटें आईं।

घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। आपातकालीन सेवा की मदद से घायल युवक को मौके से डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) ले जाया गया, जहां उसे ओपीडी कैजुअल्टी में भर्ती कर तत्काल इलाज शुरू किया गया।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, युवक की हालत गंभीर है, लेकिन फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। इधर, धरसीवा थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी बाइक के चालक की पहचान भी की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफिक नियंत्रण की कमी और तेज रफ्तार वाहन सड़क हादसों का प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने और नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के शांति प्रिय धरा में कबीरपंथ का है व्यापक प्रभाव -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

No comments Document Thumbnail

डबल इंजन की सरकार से लोगों को मिल रहा है फायदा, विकसित प्रदेश बनने छत्तीसगढ़ तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सतगुरु कबीर संत समागम समारोह दामाखेड़ा में हुए शामिल 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ उदित मुनि नाम साहेब,पंथ प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस दौरान संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब  छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है।31 मार्च 2026 तक प्रदेश से समूल नष्ट होग़ा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। डबल इंजन की सरकार का फायदा लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे है। आज के कार्यक्रम में पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते है। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथीश्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया की इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतो के साथ ही विदेशो से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने मेला संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से 75 लाख रूपये करने पर मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व  विधायक शिवरतन शर्मा सहित  सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथी उपस्थित थे।

भिलाई दुष्कर्म केस में बड़ा खुलासा: 13 साल की नाबालिग से 8 साल तक अपराध, एक और आरोपी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 भिलाई। 13 वर्षीय नाबालिग किशोरी से वर्षों तक सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामला सामने आने के बाद से पुलिस द्वारा लगातार जांच की जा रही है और एक-एक कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।


पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में इससे पूर्व दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा जा चुका है। विवेचना के दौरान एक अन्य आरोपी की संलिप्तता सामने आने पर उसे भी विधिवत गिरफ्तार किया गया।

बताया गया कि पीड़िता की ओर से महिला थाना दुर्ग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2018 से 11 अक्टूबर 2025 के बीच लगभग आठ वर्षों तक उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

महिला थाना दुर्ग पुलिस द्वारा मामले की गंभीरता से विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान साक्ष्यों के आधार पर एक अन्य आरोपी की भूमिका प्रमाणित होने पर पुलिस ने उसे चिन्हित किया।

पुलिस ने इस मामले में राजनांदगांव निवासी गोविंद सिंह नागवंशी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस का कहना है कि प्रकरण में अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश जारी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने किया तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सिरपुर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके अंतर्गत आधुनिक सड़क, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, पर्यटक सुविधा केंद्र एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर का टूरिस्ट कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।


सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का भव्य शुभारंभ अवसर पर आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उक्त बात कही हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सिरपुर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली विरासत से परिचित हो सकें। उन्होंने जिलेवासियों को माघी पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महानदी के तट पर स्थित श्री गंधेश्वर महादेव के आशीर्वाद से यह क्षेत्र निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज जिले को लगभग 200 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी गई है, जिससे सड़क, पुल, पेयजल , पर्यटन, पेयजल एवं अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी आएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज यहां मलेशिया,कोरिया, जापान के बौद्ध विचारक पधारे है, उनका मैं स्वागत करता हूं।उन्होंने कहा कि सिरपुर में सनातन, बौद्ध और जैन संस्कृति का विस्तार हुआ, यह संस्कृति का अदभुत संगम है। सिरपुर में पर्यटन के विकास की संभावनाओं को देखते हुए सरकार इसे विश्व धरोहरों में शामिल करने गंभीरता से प्रयास कर रही है। देश दुनिया में सिरपुर का नाम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंचल के विकास के लिए सिरपुर बैराज की स्वीकृति भी जल्दी होगी। सिकासेर जलाशय से कोडार जलाशय में पानी लाने के लिए योजना पर शीघ्रता से कार्य जारी है। इससे क्षेत्र के किसानों को लगातार सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि सिरपुर महोत्सव आज जिले की विशिष्ट पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि सिरपुर महोत्सव के माध्यम से जिले को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इससे युवाओं को आगे बढ़ने का मंच मिल रहा है और स्थानीय प्रतिभाओं को नई दिशा प्राप्त हो रही है। प्रभारी मंत्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं एवं गरीब वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

विधायक महासमुंद योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि आज इस पावन धरती सिरपुर में इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महोत्सव का साक्षी बनने का अवसर मिला है। यह वही भूमि है जहाँ धर्म, कला और ज्ञान का अद्भुत संगम हुआ है। विधायक सिन्हा ने कहा कि आज हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सिरपुर के संरक्षण, विकास और वैश्विक पहचान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सड़क, बिजली, जल, पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं के विकास से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर हो रहा है।

इस अवसर पर विधायक महासमुंद योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक बसना संपत अग्रवाल, साजा विधायक ईश्वर साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद निखिल कांत साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा दीवान, नगर पंचायत अध्यक्ष बसना डॉ. खुशबू अभिषेक अग्रवाल, पूर्व विधायक डॉ विमल चोपडा, राज्य मुख्य आयुक्त, भारत स्काउट एवं गाइड संघ इंद्रजीत सिंह खालसा गोल्डी,कलेक्टर विनय लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, साडा के सीईओ धम्म शील गणवीर ,जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार सहित, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक - राज्यपाल डेका

No comments Document Thumbnail

 राजिम। त्रिवेणी संगम राजिम के पावन तट पर नवीन मेला मैदान राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल  डेका, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अतिथियों एवं संत-महात्माओं ने भगवान  राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।


शुभारंभ अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि राजिम की यह पावन भूमि, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, अत्यंत पुण्य और ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल पर आयोजित मेला, जिसे श्रद्धालु ‘कल्प कुंभ’ के नाम से जानते हैं, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का प्रतीक है।


महामहिम राज्यपाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का अनुभव हो रहा है। मुझे छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम के कुंभ मेला में आकर अत्यंत शांति महसूस होती है। धर्म, आस्था और संस्कृति के इस संगम राजिम कुंभ मेले में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं कुलेश्वर महादेव तथा राजीव लोचन भगवान, राजिम भक्ति माता से प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश और प्रदेश पर अपना आशीर्वाद बनाये रखें जिससे यहां हमेशा सुख-शांति और खुशहाली कायम रहे।

राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक

राज्यपाल ने आगे कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। यह एक ऐसा पावन आयोजन है जिसमें छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ-साथ देश भर के विभिन्न भागों से भी श्रद्धालुओं का आगमन होता है। राजिम प्राचीन समय से ही शैव और वैष्णव धर्म के केंद्र के रूप में विख्यात एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां राजीवलोचन मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान है। यहां भगवान शिव कुलेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हैं।

पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि कुलेश्वरनाथ महादेव, पटेश्वर नाथ महादेव, चंपेश्वर नाथ महादेव, ब्रम्ह्केश्वर नाथ, फनीकेश्वर नाथ महादेव, करपूरेश्वर महादेव की पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। प्राचीन मंदिरों की बहुलता राजिम को पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता प्रदान करती हैं। इन मंदिरों में मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं।

शास्त्रों में माघ के माह पुण्य माह माना गया है। माघ माह के इस पावन अवधि में सदियों से ही पवित्र नदियों एवं त्रिवेणी संगमों में पुण्य स्नान की परंपरा रही है। इस माह छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में मेले का आयोजन की प्राचीन परंपरा रही है। मेलों का विशेष सामाजिक और सामुदायिक महत्व हैै। इनमें विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।

आज यहां राजिम मेेले में पधारे समस्त संतों, विद्वानों और धर्मगुरूआंें को प्रणाम करता हूं। भारत साधु संतों की भूमि रही है। कहा जाता है जब किसी स्थान पर साधु संतों के चरण पड़ते हैं तो वह स्थान पवित्र हो जाता है। संतों के दिखाये मार्ग पर चलने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। जहां संतों का सम्मान होता है वहां समृद्धि, शांति और खुशहाली रहती है। उनका जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। संतों का समागम से हम एक बेहतर मनुष्य बनते है।

राजिम कुंभ मेला जैसे अद्भुत आयोजनों से पर्यटकों को भी विशेष आनंद आता हैं। मेले में कलाकारों का संगम, श्रद्धालुओं की अनगिनत आस्था और संतों के आशीर्वाद से राजिम मेले ने देश में अपनी विशेष पहचान बनाई है। आधुनिक युग में हमे अपनी कला, साहित्य और संस्कृति को आरक्षित और उन्नत करने की आवश्यकता है। हमंे इस प्रकार के कला, संस्कृति और धार्मिक आयोजनों के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में और उभर कर सामने आ सके।

मुझे यह देखकर विशेष प्रसन्नता हो रही है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस कुंभ को स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ भव्य रूप में आयोजित किया जाता है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करेगा, बल्कि पर्यटन, लोक संस्कृति और को भी नई दिशा देगा।

हमारे पूर्वजों ने नदियों, सरोवरों और वृक्षों की महत्ता और उनके संरक्षण पर विशेष बल दिया। आज आवश्यकता है कि हम अपने पूर्वजों द्वारा दिखाए राह पर चलें और अपने प्राकृतिक वातावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखें, नए पौधों का रोपण करें और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। माइक्रो प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक बनें तथा इसकी रोकथाम के उपाय करें।
मैं इस पवित्र मेले में पधारे सभी साधु-संतों, धार्मिक गुरूओं का पुनः स्वागत करता हूं और कामना करता हूं कि राजिम कुंभ कल्प 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ को आध्यात्मिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करें।

राजिम कुंभ ने बनाई विश्व स्तर पर पहचान

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भगवान श्री राजीवलोचन एवं कुलेश्वर महादेव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और कहा कि राजिम कुंभ कल्प पर्व हमारी सांस्कृतिक उत्सव परंपरा और लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव है, जो समाज के मूल्यों को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराएं आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। अपने स्थानीय परंपरा का सम्मान करना अत्यंत जरूरी है। आप सबके सहयोग से कुंभ कल्प पर्व सफल होगा।

राजिम कुंभ आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का प्रतीक

आयुक्त महादेव कावरे ने स्वागत भाषण में कहा कि त्रिवेणी संगम केवल नदियों की धाराओं का संगम नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प मेला मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता, एकता का संदेश देता है।

संत राजीव लोचन महाराज ने कहा कि वर्ष 2006 से छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में पहचान बना चुके राजिम कुंभ कल्प मेला की यह पावन श्रृंखला वर्ष 2026 में पहुंची चुकी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला आज पूरे देश को जोड़ने का कार्य कर रहा है और यह आयोजन भव्यता एवं दिव्यता के साथ निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।

पं. युवराज पांडेय ने कहा कि कुंभ पर्व नासिक, हरिद्वार, प्रयागराज एवं उज्जैन जैसे पावन तीर्थों पर आयोजित होता है। राजिम कुंभ कल्प आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। महानदी त्रिवेणी संगम के पावन तट पर आयोजित यह कुंभ कल्प मेला छत्तीसगढ़ की पहचान बन गया है।

इस अवसर पर राज्य गृह भंडार निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, नगर पालिका राजिम अध्यक्ष महेश यादव, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्षा ओमकुमारी साहू, गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित साधु-संत, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.