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डिजिटल क्रांति से सुदृढ़ होता राजस्व प्रशासन- सुशासन और पारदर्शिता की नई सुबह

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 विष्णु प्रसाद वर्मा (सहायक संचालक )

रायपुर : सुशासन की दिशा में अग्रसर राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन को डिजिटल बनाकर आम जनता के जीवन को सरल और चिंतामुक्त करने का एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू किया है। वह दौर अब बीते दिनों की बात हो चुका है, जब जमीन-जायदाद के कागजात दुरुस्त कराने, नामांतरण कराने या खसरा-नक्शा हासिल करने के लिए नागरिकों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। आज आधुनिक तकनीक के समन्वय से राजस्व सेवाएं न केवल पारदर्शी हुई हैं, बल्कि सीधे नागरिकों की पहुंच में आ चुकी हैं।


19 हजार 723 गांवों के भू - नक्शों का पूर्णतः कंप्यूटरीकृत

​छत्तीसगढ़ में भुईयां और भू-नक्शा डिजिटल पहल के तहत प्रदेश के 20 हजार 298 गांवों के खसरा एवं 19 हजार 723 गांवों के भू-नक्शों का पूर्णतः कंप्यूटरीकरण कर लिया गया है। इससे शुद्ध और प्रामाणिक भू-अभिलेख तुरंत उपलब्ध हो रहे हैं। डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के माध्यम से राज्य की स्वीकृत 172 तहसीलों में से 158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का निर्माण पूरा हो चुका है। भू-अभिलेखों के डिजिटल सुरक्षित संधारण से अभिलेखों के फटने, खराब होने या गुम होने की पुरानी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई है।

पक्षकारों के मोबाइल पर एसएमएसके माध्यम से सुनवाई की तारीख

​न्यायिक प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ई-कोर्ट व्यवस्था लागू की गई है। इसके माध्यम से नागरिक अब घर बैठे भूमि संबंधी विवादों के निपटारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से लेकर अंतिम फैसले तक की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। यही नहीं, पेशी की अगली तारीख की सूचना भी पक्षकारों को सीधे उनके मोबाइल पर एसएमएस (SMS) के जरिए भेज दी जाती है।

वर्ष 2025 से लागू की गई 'ऑटो नामांतरण' व्यवस्था

​प्रशासनिक सुगमता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण पंजीयन और नामांतरण प्रणाली का एकीकरण है। राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालय अब भुईयां पोर्टल से सीधे जुड़ चुके हैं। वर्ष 2025 से लागू की गई 'ऑटो नामांतरण' (Auto Mutation) व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री होते ही क्रेता के नाम पर नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित इस प्रणाली से ऑफलाइन नामांतरण में लगने वाले समय और अनावश्यक परेशानियों से नागरिकों को स्थायी राहत मिल रही है।

गाइडलाइन दर का निर्धारण स्वचालित प्रणाली से

​भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को भी 'ऑटो व्यपवर्तन' (Auto Diversion) के जरिए बेहद सरल बनाया गया है, जहाँ आवेदन मिलने के मात्र 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। गाइडलाइन दरों और प्रीमियम दरों का निर्धारण भी अब स्वचालित प्रणाली से संपन्न होता है।

डिजिटल किसान पुस्तिका उपलब्ध

​किसानों के हित में एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए भुईयां पोर्टल पर डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका उपलब्ध कराई जा रही है। पटवारी और उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर से युक्त यह प्रमाणित दस्तावेज़ सिस्टम द्वारा स्वतः तैयार हो जाता है। आगामी समय में इसे सिविल न्यायालयों से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे भूमि से जुड़े किसी भी अदालती स्थगन या आदेश की अद्यतन जानकारी इसमें पारदर्शी रूप से दर्ज रहेगी।

खसरा व बी-1 की​ डिजिटल सुलभता

​डिजिटल सुलभता की इस कड़ी को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए खसरा व बी-1 जैसे सभी मुख्य दस्तावेज़ अब व्हाट्सएप चैटबॉट (WhatsApp Chatbot) पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। निश्चित तौर पर, तकनीक आधारित इस राजस्व क्रांति ने न केवल समय और धन की बचत की है, बल्कि प्रदेश में सुशासन, प्रामाणिकता और पारदर्शिता की एक नई मिसाल पेश की है।

अपनी माटी और खेती-किसानी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आत्मीय जुड़ाव

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव आज एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में खेत पहुंचे और पारंपरिक रूप से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर बियासी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री श्री साय सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया।


मुख्यमंत्री साय ने हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी सुगंध और बैलों के साथ खेती करते हुए कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख ही अलग है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को असीम सुकून देने के साथ नई ऊर्जा से भर देता है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती-किसानी को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया है। खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। पीढ़ियों से हमारे किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचते हुए प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, हमारी समृद्ध कृषि परंपरा और हमारे मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में भरपूर फसल की कामना की।

खेती से मुख्यमंत्री का रहा है पुराना नाता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं। आज सुबह गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका यही गहरा लगाव दिखाई दिया।

तालाब में डूबे दम्पति : पति को बचाने गहरे पानी में कूदी थी पत्नी, दोनों की मौके पर मौत

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 बलरामपुर। जिले के कुसमी थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में पति-पत्नी की तालाब में डूबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तालाब में डूब रहे पति को बचाने के लिए पत्नी ने भी गहरे पानी में छलांग लगा दी। दोनों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण सफल नहीं हो सके। हादसा अमरपुर के बड़का जोभी गांव का बताया जा रहा है।


मृतकों की पहचान मुनेश्वर नाग और उनकी पत्नी घुघरी नाग के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मुनेश्वर नाग किसी काम से वन विभाग के तालाब के पास गए थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से वे तालाब में गिर गए और डूबने लगे। पति को पानी में डूबता देखकर घुघरी नाग ने उन्हें बचाने के लिए तालाब में छलांग लगा दी।

दोनों ने पानी से बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन तालाब की गहराई अधिक होने के कारण वे बाहर नहीं आ सके और डूब गए। इस दौरान वहां मौजूद उनकी रिश्तेदार जसमती ने भी दंपती को बचाने के लिए पानी में उतरने की कोशिश की। हालांकि, आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए जसमती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद कुसमी थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने तालाब में तलाश अभियान चलाया। काफी प्रयास के बाद मुनेश्वर नाग और घुघरी नाग के शवों को पानी से बाहर निकाला गया।

इसके बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेजा गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को निजी वाहन की व्यवस्था कर शवों को अस्पताल ले जाना पड़ा।

पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

Mahasamund: वैद्या फूड प्रोडक्ट पर खाद्य विभाग की छापेमारी, 300 किलो पनीर सील

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 महासमुंद। कलेक्टर के निर्देश पर जिला प्रशासन की टीम ने सोमवार देर रात महासमुंद के भलेसर रोड स्थित वैद्या फूड प्रोडक्ट में छापेमारी की। करीब तीन एकड़ में संचालित इस फैक्टरी में बड़ी मात्रा में पनीर का उत्पादन किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासनिक टीम ने मौके से पनीर के सैंपल लिए और करीब 300 किलोग्राम पनीर को सील कर दिया।


एडीएम के नेतृत्व में पहुंची टीम को फैक्टरी में बड़ी मात्रा में तैयार पनीर मिला। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानकों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि फैक्टरी में पनीर की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने देर रात कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद नकली या मिलावटी पनीर के कारोबार पर शिकंजा कसने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जब्त पनीर मानकों के अनुरूप है या नहीं।

UGC-NET में बड़ा फैसला: तीन विषयों की परीक्षा दोबारा होगी

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English, Commerce और Sociology के अभ्यर्थियों को फिर देना होगा एग्जाम; 9 और 10 सितंबर को प्रस्तावित री-एग्जाम

नई दिल्ली- UGC-NET जून 2026 परीक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने English, Commerce और Sociology विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया है। इन विषयों के प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। NTA के अनुसार, विशेषज्ञ समिति की जांच में प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषाई और अनुवाद संबंधी कई खामियां सामने आईं।

9 और 10 सितंबर को होगा दोबारा एग्जाम

NTA के ताजा फैसले के अनुसार प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए री-एग्जाम 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। परीक्षा की विस्तृत शिफ्ट, परीक्षा केंद्र और अन्य जरूरी जानकारी NTA की ओर से जारी की जाएगी। प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा के लिए अलग से परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा।

क्यों लिया गया री-एग्जाम का फैसला?

NTA की जांच में इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की समस्याएं सामने आईं। इनमें गलत या संदिग्ध तथ्य, भाषा संबंधी त्रुटियां, अनुवाद की खामियां और प्रश्नों से जुड़ी अन्य गंभीर विसंगतियां शामिल थीं। NTA ने माना कि इन समस्याओं का समाधान केवल कुछ प्रश्नों को हटाकर या उत्तर कुंजी में सुधार करके निष्पक्ष तरीके से नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रभावित तीनों विषयों की परीक्षा नए सिरे से कराने का फैसला किया गया।

बाकी 84 विषयों की परीक्षा पर असर नहीं

अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UGC-NET जून 2026 की पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई है। री-एग्जाम का फैसला केवल English, Commerce और Sociology विषयों के लिए है। बाकी 84 विषयों की परीक्षा पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

अभ्यर्थियों को नहीं देना होगा अतिरिक्त शुल्क

NTA ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को इन तीन विषयों की दोबारा परीक्षा में शामिल होना है, उनसे री-एग्जाम के लिए कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने एडमिट कार्ड और परीक्षा संबंधी ताजा निर्देशों के लिए NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

आंसर-की और रिजल्ट पर भी पड़ेगा असर

UGC-NET जून 2026 की प्रोविजनल आंसर-की जारी हो चुकी है और अभ्यर्थियों को अपने उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया है। हालांकि English, Commerce और Sociology के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए री-एग्जाम की प्रक्रिया अलग रहेगी। अंतिम उत्तर कुंजी और परिणाम संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी किए जाएंगे।

उम्मीदवार क्या करें?

अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। NTA और UGC-NET की वेबसाइट पर एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र, शिफ्ट और री-एग्जाम से जुड़ी जानकारी लगातार चेक करते रहें। NTA की आधिकारिक UGC-NET वेबसाइट पर परीक्षा संबंधी नोटिस उपलब्ध हैं।


नाग पंचमी पर गूंजा हर-हर महादेव, नाग देवता के दरबार में उमड़ी आस्था

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श्रद्धा के रंग में रंगा शहर, शिवालयों में सुबह से लगी भक्तों की कतारें

धमतरी- सावन की पावन बेला में सोमवार को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान शिव के साथ नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठे।

नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध, जल, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित कर पूजा की। वहीं भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भक्तों ने आशीर्वाद मांगा। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर तक चलता रहा।

सावन और नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं और सुख-शांति बनी रहती है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान होने के कारण सावन माह में नाग पंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ पूजा कर भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

बच्चों में भी दिखा उत्साह

नाग पंचमी को लेकर बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। घरों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। कई परिवारों ने सुबह स्नान के बाद नाग देवता की पूजा कर प्रसाद का वितरण किया।

जीव-जंतुओं की सुरक्षा का भी दिया संदेश

नाग पंचमी का पर्व जहां धार्मिक आस्था से जुड़ा है, वहीं यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। लोगों ने सांपों को नुकसान न पहुंचाने और उनके दिखाई देने पर वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद लेने की अपील की।

सावन की भक्ति और नाग पंचमी की आस्था से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार में सुख-शांति, अच्छी बारिश, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।

सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ महासंयोग: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और विशेष उपाय

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 सावन का पवित्र महीना इस बार श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। आज, 17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार के साथ-साथ नाग पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 04:52 बजे से शुरू होकर 17 अगस्त शाम 05:00 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियमानुसार नाग पंचमी का यह त्योहार 17 अगस्त को ही मनाया जा रहा है।


भगवान शिव के गले में नाग देवता आभूषण के रूप में सुशोभित रहते हैं, इसलिए सावन सोमवार के दिन नाग पंचमी का यह महासंयोग शिव आराधना के फल को कई गुना बढ़ा देता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज नाग पंचमी और सावन सोमवार की पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 06:04 बजे से लेकर सुबह 08:39 बजे तक है। (ध्यान दें: स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।)

क्या है इस महासंयोग का महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से परिवार को सर्प दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति व सुरक्षा का वास होता है। सोमवार का दिन होने के कारण श्रद्धालु एक ही दिन में भोलेनाथ के जलाभिषेक के साथ नाग देवता का पूजन भी कर सकेंगे। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को राहु-केतु और कालसर्प दोष की शांति के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

पूजा की विधि और विशेष उपाय

  • स्नान एवं संकल्प: सुबह शीघ्र उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत या पूजा का संकल्प लें।

  • शिवलिंग पूजन: शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल अर्पित करें।

  • धन लाभ का विशेष उपाय: शिव पुराण के अनुसार, इस दुर्लभ संयोग में शिवलिंग पर नीले रंग का अपराजिता पुष्प (नील पुष्प) अर्पित करने से जीवन से दरिद्रता दूर होती है तथा कर्ज से मुक्ति व धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

  • नाग देवता की पूजा: नाग देवता के चित्र या प्रतिमा पर फूल, अक्षत, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद कथा पढ़कर आरती करें।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • जीवित सांपों को नुकसान न पहुंचाएं: नाग पंचमी पर जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाने जैसी प्रथाओं से बचें। पूजा के लिए केवल प्रतिमा या तस्वीर का ही प्रयोग करें।

  • अहिंसा का पालन करें: इस पावन दिन किसी भी जीव को न सताएं और न ही कोई कष्ट दें।

  • सकारात्मक विचार रखें: पूजा के दौरान मन शांत रखें तथा क्रोध, विवाद व कटु वचनों से दूर रहें।

विद्यार्थियों ने देखी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी

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स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का प्रदर्शन

21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

रायपुर- 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा

प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।

योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर

प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।

महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।

सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक

प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।

एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।

​छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बढ़ा दाखिले का दायरा, अब 31 अगस्त तक ले सकेंगे प्रवेश

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 छात्रहित में लिया गया फैसला-मंत्री टंक राम वर्मा

रायपुर- उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार का मूल ध्येय प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाना है। दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के कई मेधावी युवा विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण समय पर प्रवेश नहीं ले सके थे। हम नहीं चाहते कि तिथियों के फेर में किसी भी योग्य विद्यार्थी का एक साल खराब हो या वह उच्च शिक्षा से वंचित रह जाए। छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रवेश की तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है। मैं सभी विद्यार्थियों से अपील करता हूँ कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।


छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। राज्य के जिन शासकीय और निजी महाविद्यालयों में अभी भी सीटें रिक्त हैं, वहाँ छात्र अब 31 अगस्त 2026 तक दाखिला ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत प्राचार्य स्तर पर प्रवेश की समय सीमा 31 जुलाई तक और कुलपति की अनुमति से 14 अगस्त तक तय की गई थी। लेकिन अंतिम तिथि बीतने के बाद भी कई महाविद्यालयों में सीटें खाली रह गई थीं और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कई अभ्यर्थी समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन ने तिथि विस्तार का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

फेसबुक विज्ञापन में दिग्गजों के फोटो से दिया झांसा, बीएसपी के पूर्व कर्मी से 45 लाख की साइबर ठगी, आरोपी गिरफ्तार

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 भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले स्थित भिलाई में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शातिर ठगों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और प्रख्यात समाजसेवी सुधा मूर्ति जैसे दिग्गजों के नामों व तस्वीरों का दुरुपयोग कर फर्जी निवेश योजना बनाई और भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से 45 लाख 18 हजार 998 रुपये की भारी-भरकम राशि ठग ली।


भिलाई नगर थाना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से 24 वर्षीय आरोपी विशाल नागले को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड की सरगर्मी से तलाश जारी है।

फेसबुक एड से शुरू हुआ ठगी का जाल

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित जयंत बागची (61 वर्ष) हुडको भिलाई के निवासी हैं। वे भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त होने के साथ-साथ पूर्व में भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि 10 मार्च 2026 को फेसबुक चला रहे थे, तभी उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश से जुड़ा एक विज्ञापन दिखा। विज्ञापन में देश की नामचीन हस्तियों के चेहरे और नाम का इस्तेमाल किया गया था, जिससे उन्हें इस योजना पर पूरा भरोसा हो गया। इसके बाद उन्होंने विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया।

रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ऐंठे 18 हजार

रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद कृतिका नाम की एक महिला ने उनसे संपर्क किया और खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उसने वरिष्ठ नागरिक होने का हवाला देते हुए रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 18,998 रुपये ऑनलाइन जमा करवा लिए। इसके बाद सिद्धार्थ विपुल नामक शख्स ने खुद को उनका 'अकाउंट मैनेजर' बताकर ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश की प्रक्रिया शुरू कराई। आरोपियों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए दावा किया कि उनकी कंपनी का नेटवर्क ब्रिटेन, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में फैला हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय युद्ध का हवाला देकर कराया मोटा निवेश

पीड़ित से किस्तों में लाखों रुपये जमा कराए गए। 17 मार्च को 1 लाख रुपये, जबकि 24 और 25 मार्च को 5-5 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। 26 मार्च को करण तनेजा नामक एक अन्य शख्स से बातचीत कराई गई, जिसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी तनाव व युद्ध का हवाला दिया। उसने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, इसलिए इसमें निवेश पर बड़ा मुनाफा होगा।

इसके बाद आरोपियों ने मार्जिन बढ़ाने, सोने-तेल में ट्रेडिंग और टैक्स चुकाने जैसे अलग-अलग बहानों से कुल मिलाकर 45.18 लाख रुपये से अधिक ऐंठ लिए। जब पीड़ित ने अपने पैसे निकालने चाहे, तो आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया।

पुलिस की कार्रवाई जारी

ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने भिलाई नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। साइबर सेल की मदद से पुलिस ने मध्य प्रदेश के बैतूल से आरोपी विशाल नागले को धर दबोचा। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और गिरोह के अन्य मुख्य सरगनाओं की पड़ताल में जुटी हुई है।

झारखंड में छात्र आंदोलन 23वें दिन भी जारी, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की चेतावनी

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रांची- झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र-युवा 23वें दिन भी आंदोलनरत हैं। प्रदर्शनकारियों ने अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है।

20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान

छात्र नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 20 अगस्त तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का समाधान, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब वे आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर नाराजगी

आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। प्रदर्शनकारी उम्मीदवार परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी JSSC CGL और JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं को रद्द करने तथा कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग भी कर रहे हैं।

तिरंगा यात्रा के बाद बढ़ा आंदोलन

15 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली। इसके जरिए छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखना है।

भूख हड़ताल से भी बढ़ी चिंता

आंदोलन के दौरान कुछ छात्र नेता भूख हड़ताल पर भी हैं। रिपोर्टों के अनुसार छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य रिपोर्ट में भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक ने अपनी बिगड़ती हालत को लेकर चिंता जताई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा ने 20 अगस्त को प्रस्तावित CM आवास घेराव को नैतिक समर्थन दिया है। वहीं सत्तारूढ़ झामुमो ने छात्रों से किसी भी तरह के भड़कावे में नहीं आने और आंदोलन को गलत दिशा में जाने से बचाने की अपील की है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से आंदोलन को लेकर अलग रुख सामने आया है।

24 जिलों में प्रदर्शन की तैयारी

छात्र नेताओं ने आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देने की भी घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार 23 दिनों से जारी आंदोलन अब झारखंड सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के राजनीतिक रूप लेने से मामला और संवेदनशील हो गया है।

अब सबकी नजर 20 अगस्त पर है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इससे पहले कोई सहमति नहीं बनती है, तो CM आवास घेराव का कार्यक्रम आंदोलन को नए चरण में पहुंचा सकता है।

कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को अहम सुनवाई, तमिलनाडु ने मांगा अपने हिस्से का पानी

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नई दिल्ली- कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होने वाली है। तमिलनाडु सरकार ने अदालत से कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी जल तत्काल जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु का दावा—26.954 TMC पानी की कमी

तमिलनाडु सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा के अनुसार कावेरी का पानी जारी नहीं किया है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि उसके हिस्से में 26.954 TMC (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की कमी है। इसी आधार पर तमिलनाडु ने अदालत से कर्नाटक को आवश्यक मात्रा में पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग की है।

तमिलनाडु के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कावेरी का पानी राज्य के कृषि क्षेत्र और डेल्टा जिलों की सिंचाई के लिए बेहद अहम है। पानी की कमी का सीधा असर किसानों और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

कर्नाटक की अपनी दलील

दूसरी ओर, कर्नाटक लगातार यह तर्क देता रहा है कि राज्य को भी अपने पेयजल, सिंचाई और कृषि जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता है। हालिया घटनाक्रम में कर्नाटक सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने को लेकर आगे का फैसला किया जाएगा।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री ने यह भी कहा है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तमिलनाडु के लिए 12,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश राज्य के लिए बहुत अधिक है और मौजूदा परिस्थितियों में इसका पालन करना चुनौतीपूर्ण है।

विवाद फिर क्यों बढ़ा?

कावेरी जल विवाद नया नहीं है। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कावेरी जल बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था और उसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) तथा कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के माध्यम से पानी छोड़ने और उसकी निगरानी की व्यवस्था की गई।

सितंबर 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विनियमन समिति के कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। उस समय समिति ने 5,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।

किसानों पर पड़ सकता है सीधा असर

कावेरी का पानी दोनों राज्यों के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए नदी पर बड़ी निर्भरता है। वहीं कर्नाटक में भी कावेरी बेसिन के किसानों और शहरों की पानी की जरूरतें इसी जल संसाधन से जुड़ी हैं।

ऐसे में मानसून, बांधों में जल भंडारण और कृषि जरूरतों के बीच संतुलन बनाना दोनों राज्यों के लिए बड़ी चुनौती है। हाल के दिनों में कावेरी जल को लेकर कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। 13 अगस्त को कावेरी जल छोड़ने के मुद्दे पर राज्यव्यापी बंद भी आयोजित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सभी की नजरें 17 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। तमिलनाडु चाहता है कि उसे उसके हिस्से का पानी जल्द से जल्द मिले, जबकि कर्नाटक अपने जल भंडार और राज्य की जरूरतों को देखते हुए पानी छोड़ने की मात्रा पर आपत्ति जता रहा है।

इस सुनवाई में अदालत का रुख दोनों राज्यों के बीच मौजूदा जल विवाद की दिशा के लिए अहम माना जा रहा है। खासकर 26.954 TMC की कथित कमी और 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन पानी छोड़ने के मुद्दे पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

क्या है कावेरी विवाद का मूल मुद्दा?

कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके पानी के इस्तेमाल और बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जल बंटवारे को लेकर अपना महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसके बाद केंद्र सरकार के स्तर पर जल प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया गया।

फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है। 17 अगस्त की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि तमिलनाडु को उसके दावे के अनुसार पानी उपलब्ध कराने और कर्नाटक की जल जरूरतों के बीच अदालत किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

भारत में LPG सप्लाई बढ़ाने की तैयारी, सरकार ने रिफाइनरियों के लिए तय किए उत्पादन लक्ष्य

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नई दिल्ली- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुई ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने घरेलू LPG सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों तथा तेल कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम दैनिक लक्ष्य तय किए हैं। इस कदम का उद्देश्य देश में खाना पकाने वाली गैस की उपलब्धता बनाए रखना, आयात पर निर्भरता के जोखिम को कम करना और भविष्य के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार करना है।

63,810 मीट्रिक टन प्रतिदिन का उत्पादन लक्ष्य

13 अगस्त 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार, देश की सरकारी और निजी रिफाइनरियों के लिए कुल 63,810 मीट्रिक टन LPG प्रतिदिन तक उत्पादन की क्षमता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यह व्यवस्था 24 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

सरकार ने कंपनियों को मौजूदा उत्पादन स्तर से आगे बढ़कर LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव उपाय करने को कहा है। इसमें उपलब्ध फीडस्टॉक के वैकल्पिक इस्तेमाल जैसे उपाय भी शामिल हैं, ताकि अधिक मात्रा में LPG तैयार की जा सके।

पश्चिम एशिया संकट से क्यों बढ़ी चिंता?

भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। 2025-26 में देश में LPG की खपत करीब 33.2 मिलियन टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 13.1 मिलियन टन था और लगभग 21.3 मिलियन टन LPG का आयात किया गया। यानी भारत की LPG जरूरतों में आयात की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत से अधिक रही।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री परिवहन और खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर घरेलू LPG उपलब्धता पर पड़ सकता है।

सरकार का फोकस—घरेलू उत्पादन और बफर स्टॉक

सरकार का नया फैसला सिर्फ उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। रिफाइनरियों और संबंधित कंपनियों को LPG की स्टोरेज और परिवहन क्षमता मजबूत करने पर भी ध्यान देने को कहा गया है। इसका मकसद किसी संभावित वैश्विक सप्लाई संकट के दौरान देश के पास पर्याप्त घरेलू भंडार उपलब्ध रखना है।

Reliance को मिला सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य

निजी क्षेत्र की Reliance Industries को तय किए गए उत्पादन लक्ष्यों में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इससे देश की LPG जरूरतों को पूरा करने में बड़े निजी रिफाइनरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इससे पहले भी संकट के दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाया था। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारतीय रिफाइनरियों का LPG उत्पादन सालाना आधार पर 30.8 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.4 मिलियन मीट्रिक टन हो गया था।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार का यह कदम मुख्य रूप से LPG की उपलब्धता और सप्लाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। घरेलू उत्पादन बढ़ने और बफर स्टॉक मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में अचानक आने वाली बाधाओं का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि LPG की कीमतों में तत्काल कमी आ जाएगी। LPG की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों, आयात लागत, परिवहन खर्च और सरकारी नीतियों समेत कई कारकों का असर पड़ता है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।

अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की भी तैयारी

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ भारत आयात के स्रोतों में भी विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। Reuters की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका से LPG खरीद बढ़ाई है और जून में अमेरिकी LPG आयात पहली बार 10 लाख टन से अधिक पहुंच गया था। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया से होने वाली आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करना है।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

सरकार द्वारा रिफाइनरी-वार LPG उत्पादन लक्ष्य तय करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता रहने की स्थिति में घरेलू उत्पादन, वैकल्पिक आयात स्रोत, पर्याप्त भंडारण और मजबूत परिवहन व्यवस्था भारत को LPG सप्लाई में संभावित झटकों से बचाने में मदद कर सकती है।

कुल मिलाकर, सरकार का नया फैसला ‘घरेलू उत्पादन बढ़ाओ, आयात जोखिम घटाओ और बफर स्टॉक मजबूत करो’ की रणनीति पर आधारित है। आने वाले महीनों में इन उत्पादन लक्ष्यों को किस तरह लागू किया जाता है, यह देश में LPG की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

उपराष्ट्रपति ने SRMIST के 22वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर चलने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के निकट चेंगलपट्टु के कट्टनकुलथुर स्थित एस.आर.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें।

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सीखने की यात्रा का उत्सव है। साथ ही, यह जिम्मेदारी और सेवा से जुड़ी आजीवन यात्रा की शुरुआत भी है।

सी. पी. राधाकृष्णन ने SRMIST द्वारा विकसित ऐसे शैक्षणिक वातावरण की सराहना की, जो अंतर-विषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि संस्थान का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर रिसर्च, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता ध्यान भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाज को आकार देगा।

उपराष्ट्रपति ने शोध को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए SRMIST के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध तभी अपनी सर्वोच्च सार्थकता प्राप्त करता है, जब वह समाज की सेवा करता है, लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है, उद्योग को मजबूत करता है और सतत विकास में योगदान देता है।

राधाकृष्णन ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मानवीय सहायता का व्यावसायीकरण करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने हाल ही में केन्या के स्पीकर के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई वैक्सीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के प्रयासों ने मानवता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया और दोहराया कि भारत शांति, विकास और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देश के हर हिस्से में AIIMS उपलब्ध होना चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके।

उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

सी. पी. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला विद्यार्थियों की संख्या 1.57 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं को डिग्री और पदक प्राप्त करते देखना स्वागत योग्य बदलाव है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्नातक छात्र भारत की ‘विकसित भारत @2047’ की यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य प्रत्येक युवा भारतीय से राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपेक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, विशेष रूप से युवा हैं। स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा: “भविष्य के लिए केवल खुद को तैयार न करें; भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।”

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशे और हर प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनना चाहिए।

उन्होंने तमिलनाडु में हाल ही में हुई उस घटना का उल्लेख किया, जिसमें नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण एक छात्र की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद पीड़ादायक है और उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने अपने परिवार के एक सदस्य को खो दिया हो।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनका ज्ञान, नवाचार और मेहनत भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान देनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण निजी हितों से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से भारतीय जीवन मूल्यों ज्ञान, कर्तव्य, करुणा और सेवा को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष श्री आर. वेलुसामी को मानद उपाधि प्रमाणपत्र प्रदान किया। उन्होंने स्नातकों को पदक, रैंक और डिग्रियां भी प्रदान कीं तथा छात्रों और स्नातकों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, SRMIST के चांसलर डॉ. टी. आर. पारिवेंधर, प्रो-चांसलर (प्रशासन) डॉ. रवि पचमुथु, प्रो-चांसलर (शैक्षणिक) डॉ. पी. सत्यनारायणन, कुलपति डॉ. सी. मुथमिझचेलवन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।

कैंसर की रोकथाम में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच जरूरी : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

15 मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ा दायरा : स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

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