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जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान में हासिल किया पहला स्थान

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रायपुर- जल संरक्षण और जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान के तहत बेहतर प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य की इस उपलब्धि को जल संरक्षण के प्रति सरकार, प्रशासन और आम लोगों की बढ़ती भागीदारी का परिणाम माना जा रहा है।

अभियान के दौरान राज्य में बारिश के पानी को सहेजने, भूजल स्तर को बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया। गांवों से लेकर शहरों तक जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

पांच जिले देश के टॉप-10 में शामिल

छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि राज्य के पांच जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में जमीनी स्तर पर व्यापक गतिविधियां संचालित की गईं।

स्थानीय स्तर पर लोगों को जल संरक्षण से जोड़ने, वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए।

जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत

‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। जल संरक्षण को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न मानकर आम नागरिकों, पंचायतों, स्थानीय संस्थाओं और विभिन्न संगठनों को भी अभियान से जोड़ा गया।

लोगों को वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की साफ-सफाई और संरक्षण तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। सामुदायिक भागीदारी के जरिए जल संरक्षण को एक जनअभियान का रूप देने का प्रयास किया गया।

बारिश के पानी को सहेजने पर विशेष जोर

अभियान के तहत वर्षा के दौरान मिलने वाले पानी को अधिक से अधिक मात्रा में जमीन में पहुंचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। इसके लिए जल संचयन से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण और पुनर्जीवन जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के पानी का संरक्षण भूजल स्तर को बनाए रखने के साथ-साथ गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल

देश में पहला स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह राज्य में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का संकेत भी है।

राज्य के पांच जिलों का टॉप-10 में शामिल होना इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाता है। अब जरूरत इस बात की है कि जल संरक्षण के इन प्रयासों को लगातार जारी रखा जाए और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए।

जल है तो कल है—इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

गरियाबंद में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी बनी मजबूरी

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गरियाबंद/मैनपुर- शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में स्कूली बच्चों के सामने पढ़ाई तक पहुंचने के लिए ही जान जोखिम में डालने की मजबूरी खड़ी हो गई है। यहां देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर वर्षों से अधूरा पड़ा पुल बच्चों के लिए परेशानी और खतरे का बड़ा कारण बन गया है।

मानसून के दौरान पैरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चे स्कूल जाने के लिए अधूरे पुल के एक पिलर पर लगी करीब 20 फीट ऊंची और संकरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पीठ पर भारी स्कूल बैग और नीचे तेज बहाव वाली नदी—इस खतरनाक रास्ते से गुजरना बच्चों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है।

छह साल से अधूरा पड़ा है पुल

मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले लगभग 5-6 वर्षों से चल रहा है। लंबे समय के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता बंद हो जाता है। यही वजह है कि बच्चों को अधूरे पुल के पिलर और उससे जुड़ी लोहे की सीढ़ी के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।

एक गलती और हो सकता है बड़ा हादसा

इस पूरे रास्ते में सबसे बड़ा खतरा बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। लोहे की सीढ़ी संकरी है और बारिश के दौरान फिसलन भी बढ़ जाती है। इसके अलावा निर्माणाधीन पुल के कई हिस्सों में लोहे के सरिए बाहर निकले हुए बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन सरियों से चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

जब बच्चे सीढ़ी से ऊपर-नीचे होते हैं, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। जरा सा पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर नीचे बह रही नदी में गिरने का गंभीर खतरा है।

बारिश में और भयावह हो जाती है स्थिति

पैरी नदी सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत शांत रहती है। गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी कम हो जाने से कई स्थानों पर लोग आसानी से आवागमन कर लेते हैं। लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण नदी उफान पर आ जाती है और बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों के स्कूल जाने की चिंता अभिभावकों को लगातार सताती रहती है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए वे इस जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्माण पूरा करने के निर्देश

जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण में देरी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने और निर्धारित समय में पुल पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।

अब बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

लंबे समय से पुल का निर्माण पूरा नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई और पुल का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और नेशनल हाईवे-130C पर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा

मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। रिपोर्टों के अनुसार गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कही है। प्रशासन की ओर से बच्चों के लिए सुरक्षित अस्थायी आवागमन की व्यवस्था और अधूरे पुल के निर्माण की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब खत्म होगा बच्चों का यह जोखिम?

एक ओर सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मैनपुर क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह मामला सिर्फ अधूरे पुल का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा तक उनकी पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर सवाल है।

अब ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तत्काल व्यवस्था की जाए और वर्षों से अधूरे पड़े पुल का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए और अधिक प्रयास जरूरी -राज्यपाल रमेन डेका

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वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

राज्यपाल ने टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित

राज्यपाल डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में हुई। शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सेशेल्स संसदीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन में सेशेल्स गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेशेल्स की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम अज़रेल अर्नेस्टा ने किया।

प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर वहां की सरकार और जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महामहिम  अज़रेल अर्नेस्टा को सेशेल्स नेशनल असेंबली की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर बधाई दी और जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) में उनकी भागीदारी का उल्लेख किया।

दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और स्थायी संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेशेल्स उनके लिए विशेष स्थान रखता है। उन्होंने अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए सेशेल्स की अपनी यात्रा को स्नेहपूर्वक याद किया। यह भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी पहली विदेश यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले के साथ अपनी मुलाकातों को भी याद किया तथा सेशेल्स की जनता द्वारा दिए गए स्नेह और आतिथ्य का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2026 भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के बीच दो राजकीय यात्राएं हुईं। भारत के प्रधानमंत्री ने जून 2026 में सेशेल्स में आयोजित 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लिया, जबकि राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने फरवरी 2026 में भारत की राजकीय यात्रा की। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले ने फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश इस वर्ष राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं और विश्वास व्यक्त किया कि सेशेल्स के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की वर्तमान यात्रा से दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को और गति मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने फरवरी 2026 में भारत द्वारा सेशेल्स के लिए घोषित 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पैकेज दोनों देशों के विकास और सुरक्षा संबंधी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा सचिवालय द्वारा संसद के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने संसदीय कार्यवाही के बढ़ते डिजिटलीकरण, कार्यवाही के एक साथ कई भाषाओं में अनुवाद, संसद की कार्यवाही को कागज रहित और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा संसदीय दस्तावेजों के डिजिटल अभिलेख तैयार करने का उल्लेख किया। उन्होंने सेशेल्स नेशनल असेंबली के साथ भारत के अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने की इच्छा व्यक्त की तथा सेशेल्स की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप अध्ययन यात्राएं और विशेष रूप से तैयार क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने की पेशकश की।

जनता के बीच संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स में भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेष रूप से गुजराती और तमिल समुदायों, के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये समुदाय दोनों देशों के बीच मित्रता के एक स्थायी सेतु के रूप में कार्य करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि सेशेल्स नेशनल असेंबली की अध्यक्ष नियमित रूप से योग का अभ्यास करती हैं। उन्होंने कहा कि योग भारत और सेशेल्स के बीच घनिष्ठ जन-से-जन संबंधों का एक मजबूत प्रतीक है। उन्होंने आने वाले वर्षों में दोनों संसदीय संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद और और अधिक सहयोग की आशा व्यक्त की।

अंत में, उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स की अध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों को भारत में उनके सुखद एवं सफल प्रवास के लिए शुभकामनाएं दीं।

जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब दुकानें-बार रहेंगे बंद

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 रायपुर : राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।


जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।

शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

​सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जल-क्रांति, समृद्ध किसान - सशक्त को कर रहा है साकार

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 विष्णु प्रसाद वर्मा -सहायक संचालक

रायपुर : पानी को जीवन का पर्याय माना गया है, लेकिन मानसून में यही पानी जब खेतों से बहकर व्यर्थ निकल जाता है, तो किसानों के हाथ केवल सूखी मिट्टी और निराशा ही लगती है। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने इस निराशा को आशा में बदलने की ठानी है। जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और 'विकसित भारत-जी राम जी' (VBGRJ) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब गाँव-गाँव में पानी सहेजने की एक मौन क्रांति आकार ले रही है। कभी बह जाने वाला वर्षा जल अब डबरियों (कच्चे तालाबों) में सिमटकर किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया आधार बन चुका है।


प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजना

प्रशासनिक सजगता और स्पष्ट कार्ययोजना के बल पर जिले के ग्रामीण अंचलों में जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन के प्रयासों को नई दिशा मिल रही है। प्रशासन के कुशल निर्देशन में 'डबरी निर्माण' को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि जिले में कुल 319 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें से 200 डबरियों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 119 डबरियों का कार्य अंतिम चरणों में है। क्षेत्रवार स्थिति पर नज़र डालें तो बिलाईगढ़ में 132, बरमकेला में 103 तथा सारंगढ़ में 84 डबरियाँ स्वीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संवर्धन को मजबूती दी जा रही है।

​25 करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन और 300 एकड़ भूमि की सिंचाई

​इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—वर्षा जल का विशाल संचयन। पूर्ण और निर्माणाधीन डबरियों के माध्यम से जिले में लगभग 25 करोड़ लीटर वर्षा जल को सहेजने का लक्ष्य है।​ संचित जल से जिले की लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि को प्रत्यक्ष सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा डबरियों में जल ठहरने से आसपास का भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से रीचार्ज हो रहा है, जिससे कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी सुधरा है।

सिंचाई के साथ मछली पालन

​डबरी अब केवल पानी रोकने की संरचना नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए एक बहुआयामी आजीविका मॉडल बन चुकी है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसान अब केवल खरीफ (धान) की फसल तक सीमित नहीं हैं। वे गर्मी और रबी के मौसम में हरी सब्जियों तथा नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं।

​ संचित जल का उपयोग न केवल फसल अपितु मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे किसान अपनी ही जमीन पर बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के हर साल अच्छी-खासी पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। ​इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोहरे तरीके से मजबूती प्रदान की है। एक तरफ जहाँ निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को उनके ही गाँव और खेतों में रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनके पास एक ऐसी टिकाऊ परिसंपत्ति तैयार हो गई, जो आने वाले कई दशकों तक उनकी आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

​ ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत हुआ यह जल-संवर्धन कार्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह जल-क्रांति न केवल जल संकट का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर रही है, बल्कि 'समृद्ध किसान - सशक्त जिला' की सोच को भी साकार कर रही है।

धमतरी में भारी बारिश से उफान पर नदियां, गंगरेल बांध के खुले 3 गेट, महानदी तटीय गांवों में अलर्ट जारी

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 रायपुर : धमतरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है, वहीं क्षेत्र के सभी प्रमुख जलाशय अब पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। कैचमेंट एरिया से हो रही पानी की भारी आवक को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के तीन गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें से 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में बह रहा है, जबकि 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के रास्ते मुख्य नहर में प्रवाहित किया जा रहा है।


मौसम विभाग द्वारा आगे भी बारिश की संभावना जताए जाने से महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है, जिसे देखते हुए कलेक्टर ने तटीय और निचले इलाकों में स्थित गांवों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

वर्तमान में जिले के जलाशयों की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। मुरूमसिल्ली जलाशय अपनी क्षमता का 98.61 प्रतिशत भर चुका है और उसमें 362 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। वहीं गंगरेल जलाशय 97.40 प्रतिशत भरकर 3,365 क्यूसेक आवक दर्ज कर रहा है। इसके अलावा दुधावा जलाशय 86.86 प्रतिशत (437 क्यूसेक आवक) और सोंढूर जलाशय 69.25 प्रतिशत (167 क्यूसेक आवक) तक भर चुके हैं। जलाशयों में लगातार बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ही महानदी में जलप्रवाह बढ़ाया गया है।

बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर धमतरी ने अधिकारियों और मैदानी अमले को 24 घंटे सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास न जाएं तथा उफनती नदी को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। तटीय गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर बनाए गए राहत केंद्रों में पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल अधिकृत प्रशासनिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया गया है।

सांप काटे तो झाड़-फूंक नहीं, सीधे अस्पताल जाएं; मुंगेली में ग्रामीणों को किया जागरूक

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 मुंगेली। बारिश के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुंगेली जिले के ग्राम दाऊकापा के सांवरा मोहल्ले में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव और सांप के काटने की स्थिति में तत्काल किए जाने वाले जरूरी उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में इलाज में देरी नहीं करने की अपील की गई।


अंधविश्वास से बचने की दी सलाह

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनीष बंजारा ने ग्रामीणों को सर्पदंश से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सर्पदंश के गंभीर मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित झाड़-फूंक और घरेलू उपचार जैसी मान्यताओं से बचने की सलाह दी।

डॉ. बंजारा ने बताया कि कई बार जहरीले सांप के काटने के बाद शुरुआती समय में लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते। इसलिए सांप के जहरीला होने या न होने को लेकर अनुमान लगाने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी है।

सांप काटे तो तुरंत अस्पताल पहुंचाएं

ग्रामीणों को समझाया गया कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या किसी घरेलू नुस्खे के भरोसे इलाज में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है।

अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकता के अनुसार उपचार किया जाता है। गंभीर मामलों में चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम (ASV) समेत अन्य उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं। समय पर उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे को कम किया जा सकता है।

बारिश में विशेष सावधानी बरतने की अपील

कार्यक्रम में बताया गया कि बारिश के दौरान सांप अपने बिलों और छिपने के स्थानों से बाहर निकलकर घरों, खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने और अंधेरे या सुनसान स्थानों पर जाने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को सर्पदंश से जुड़े अंधविश्वासों से दूर कर समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक करना रहा।

CG NEWS : आधी रात घर में घुसा भालू, घंटों दहशत में रहा परिवार; वीडियो वायरल

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 कांकेर। कांकेर शहर के रिहायशी इलाके गोविंदपुर में जंगली भालुओं की बढ़ती आवाजाही से लोगों में दहशत का माहौल है। इसी बीच बीती रात एक भालू अचानक एक घर में घुस गया। घर के अंदर भालू को देखकर परिवार के सदस्य घंटों तक सहमे रहे और खुद को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलने से बचते रहे।


जानकारी के अनुसार, भालू भोजन की तलाश में घर में दाखिल हुआ था। घर के अंदर पहुंचने के बाद वह आसपास रखी चीजों को सूंघते हुए भोजन तलाशता रहा। कुछ देर तक घर में घूमने के बाद भालू वहीं आराम करता हुआ भी नजर आया।


इस दौरान परिवार के सदस्यों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित रखा। भालू के घर में घुसने की जानकारी सामने आने के बाद आसपास के इलाके में भी हड़कंप मच गया। परिवार ने दूर से पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले भी रिहायशी इलाकों में पहुंच चुके हैं भालू

स्थानीय लोगों के मुताबिक, गोविंदपुर इलाके में भालुओं का रिहायशी क्षेत्र में पहुंचना कोई नई घटना नहीं है। भोजन और पानी की तलाश में भालू कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में घरों के दरवाजों को भी नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं।

भालुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण शाम के बाद लोगों में विशेष सतर्कता देखने को मिल रही है। स्थानीय रहवासियों को बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

वन विभाग से कार्रवाई की मांग

रिहायशी इलाके में बार-बार भालुओं के पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि भालुओं को केवल मौके से खदेड़ने के बजाय उनकी आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार हो रही आवाजाही के कारणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

लोगों ने क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाने, भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। घटना के बाद गोविंदपुर क्षेत्र में लोगों के बीच भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

सड़क हादसे का राज खुला तो निकली हत्या! ट्रक विवाद में युवक को पीटा, फिर दुर्घटना का दिया रूप

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 जांजगीर-चांपा। जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के रूप में सामने आई युवक की संदिग्ध मौत का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि युवक की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं, बल्कि हत्या के कारण हुई थी। आरोपियों ने हत्या के बाद शव और घटनास्थल को इस तरह पेश करने की कोशिश की, ताकि मामला सड़क हादसा नजर आए।


पुलिस के मुताबिक, 24 जून 2026 को सोनादुला-सांकर भारतमाला रोड पर वाहन क्रमांक CG 10 BP 9060 से जुड़ी घटना में सकरी, बिलासपुर निवासी 26 वर्षीय अरविंद सिंह लोधी की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जांच में सामने आया हत्या का राज

मामले की जांच के दौरान पुलिस को घटनाक्रम को लेकर संदेह हुआ। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, परिस्थितियों और आसपास की जानकारी की बारीकी से पड़ताल की। इसके बाद संदिग्धों से पूछताछ की गई, जिसमें घटना की परतें खुलने लगीं।

जांच में सामने आया कि ट्रक के लेन-देन को लेकर अरविंद और उसके परिचितों के बीच पुराना विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर अरविंद के साथ मारपीट की और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसके बाद हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई

पुलिस की जांच और पूछताछ में हत्या की आशंका सामने आने के बाद मामले को अब सड़क दुर्घटना के बजाय हत्या के रूप में जांचा जा रहा है। पुलिस ने वारदात में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस हत्या के पीछे की पूरी वजह, वारदात में शामिल अन्य लोगों और घटनाक्रम से जुड़े सभी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

इस पुलिस खुलासे के बाद 24 जून की कथित सड़क दुर्घटना का मामला हत्या में बदल गया है। पुलिस अब घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करने में जुटी है।

गिरौदपुरी जा रहे श्रद्धालुओं से भरी माजदा पलटी, 30 से ज्यादा सवार; कई घायल

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 बलौदाबाजार। बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं से भरी माजदा वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में वाहन सवार कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ लोगों को गंभीर चोटें आने की भी बात कही जा रही है।


जानकारी के अनुसार, माजदा वाहन में 30 से अधिक श्रद्धालु सवार थे, जो गिरौदपुरी धाम दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान नेशनल हाईवे-130 बी पर सेल और छांछी के बीच मोड़ के पास अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क पर पलट गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

राहगीरों ने पहुंचकर की घायलों की मदद

दुर्घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों की मदद शुरू की। सूचना मिलते ही हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस व अन्य वाहनों की मदद से कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों का उपचार कर रही है।

हादसे की जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद कसडोल पुलिस भी मौके पर पहुंची और हादसे की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वाहन के अचानक अनियंत्रित होने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता पुलिस की जांच के बाद ही चल सकेगा।

फिलहाल घायलों की संख्या, उनकी स्थिति और हादसे के कारणों को लेकर पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जानकारी का इंतजार है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

बलौदाबाजार के सकरी गांव से दुखद खबर, नहीं रहीं उर्मिला देवी साहू

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*बलौदाबाजार* । जिले के सकरी गांव की वरिष्ठ और सम्मानित नागरिक श्रीमती उर्मिला देवी साहू का निधन हो गया है। उन्होंने 74 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। बीती रात बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात लगभग 2 बजे उनका देहावसान हुआ। इस दुखद खबर से पूरे सकरी गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

स्व. उर्मिला देवी साहू


पारिवारिक पृष्ठभूमि

​श्रीमती उर्मिला देवी साहू एक जाने-माने और प्रतिष्ठित परिवार से थीं। वे दस्तावेज लेखक श्री राजाराम साहू की धर्मपत्नी थीं। वे साहू फोटोकॉपी बलौदाबाजार के संचालक श्री परस राम साहू, दस्तावेज लेखक श्री भानु प्रताप साहू और अधिवक्ता श्री कौशल साहू की माताजी थीं। इसके साथ ही वे अधिवक्ता श्री गणेश शंकर साहू की पूजनीय बुआ थीं। 

वे अपने पीछे बच्चों, नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। पोतों में विजय शंकर, प्रखर, सौमित्र, पोतियों में लिली साहू, लीनु, स्विटी, अंजू, खुशी शामिल हैं।

 धार्मिक और सामाजिक जीवन


उर्मिला देवी साहू से चर्चा करते हुए मंत्री टंक राम वर्मा (फ़ाइल फोटो)


​उर्मिला देवी साहू की पहचान  अत्यंत धार्मिक और सरल स्वभाव की महिला के रूप में थी। वे गायत्री परिवार से गहराई से जुड़ी हुई थीं। उनका मन हमेशा पूजा-पाठ, धर्म-कर्म और अध्यात्म में लगा रहता था। अपने अच्छे विचारों और धार्मिक जुड़ाव के कारण उनकी समाज में बहुत प्रतिष्ठा थी। लोग उनका बहुत आदर करते थे।


​आज होगा अंतिम संस्कार

​उर्मिला देवी साहू के निधन की खबर मिलते ही गांव के लोग और परिचित शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने पहुँच रहे हैं। उर्मिला देवी जी का अंतिम संस्कार आज, 3 सितम्बर को किया जाएगा। यह अंतिम संस्कार उनके गृहग्राम सकरी (बलौदाबाजार) में सुबह 11 बजे संपन्न होगा।

H1N1 ने बढ़ाई चिंता: छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के 170 के करीब मरीज, रायपुर हॉटस्पॉट

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 CG Swine Flu: छत्तीसगढ़ में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या अब 170 के करीब पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में 7 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। राजधानी रायपुर संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बना हुआ है, जहां अब तक 73 मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं, प्रदेश के 19 जिलों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल चुका है।


रायपुर में सबसे ज्यादा मरीज

रायपुर जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिला अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को मरीजों की निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर में भी स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों की संख्या 12 से बढ़कर 13 हो गई है। यहां फिलहाल 3 एक्टिव केस हैं। वहीं, सरगुजा में एक नया मरीज मिलने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 3 हो गई है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी संक्रमण के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।

इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। विभाग के मुताबिक इन वर्गों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

अस्पतालों को तत्काल सूचना देने के निर्देश

स्वाइन फ्लू के नियंत्रण और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं। किसी भी मरीज में H1N1 स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर इसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को देने के लिए कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। ऐसे में इसे सामान्य बीमारी समझकर इलाज में देरी करना भारी पड़ सकता है।

सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खासकर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ बढ़ रही हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर बरतें सावधानी

स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली श्वसन बूंदों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। ऐसे में बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता का ध्यान रखने और लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल देश में बना मिसाल, ‘जल संचय जन भागीदारी’ में प्रदेश अव्वल

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 रायपुर : बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।


सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।

कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।

इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।

इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।

दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया।

अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है।

इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है।

छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में

राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

भू-जल की स्थिति में सुधार के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन’ प्लान : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। इससे जल संरक्षण के लिए राज्यवार स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति निर्धारित की जा सकेगी।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ प्रारंभ करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी - इन तीनों के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।

जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोकने तथा उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका सीधा लाभ खेती को मिल सकता है और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है। गांवों में पेयजल स्रोतों की स्थिति बेहतर होने से परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में भी कमी आ सकती है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जल संरक्षण केवल संरचनाओं के निर्माण का विषय नहीं है। यह सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का एक छोटा-सा हिस्सा पानी के लिए छोड़ने से शुरू हुई पहल भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने के बड़े अभियान का आधार बन सकती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भाजपा ने प्रकोष्ठों में की नई नियुक्तियां, चुन्नीलाल साहू बने संकुल संयोजक

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छत्तीसगढ़ ने संगठनात्मक विस्तार के तहत विभिन्न प्रकोष्ठों में नई नियुक्तियां की हैं। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति के बाद पार्टी ने संयोजक, सहसंयोजक और प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय की हैं।


भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन मार्कण्डेय की ओर से जारी आदेश के अनुसार चुन्नीलाल साहू को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक नियुक्त किया गया है। वहीं लाभचंद बाफना को प्रकोष्ठ संकुल सहसंयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


पार्टी के अनुसार, इन नियुक्तियों का उद्देश्य संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा संगठनात्मक कार्यों में समन्वय को मजबूत करना है।

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