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बेंगलुरु में ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, वायुसेना प्रमुख ने किया उद्घाटन

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एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ का शुभारंभ 4 जनवरी 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) में हुआ। इस संगोष्ठी का उद्घाटन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने किया। अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख ने एलसीए तेजस की पहली उड़ान के 25 वर्ष पूर्ण होने पर ADA को बधाई दी तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय वायुसेना (IAF) की परिचालन तैयारियों को बनाए रखने के लिए निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने आयात पर निर्भरता कम करने और विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने के लिए स्वदेशी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के महत्व को रेखांकित किया।

यह संगोष्ठी एयरोस्पेस समुदाय के विशेषज्ञों, औद्योगिक भागीदारों, शैक्षणिक संस्थानों, विमानन उत्साही लोगों तथा वक्ताओं को एक साझा मंच प्रदान कर रही है, जहाँ वे एयरोनॉटिक्स के विकास, डिजाइन नवाचार, विनिर्माण तथा भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा कर रहे हैं। एयरोनॉटिक्स-2047 का मुख्य उद्देश्य आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करना है, जिनमें अगली पीढ़ी के विमानों के लिए विनिर्माण एवं असेंबली, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए एयरोडायनामिक्स, प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ, उड़ान परीक्षण तकनीकें, डिजिटल ट्विन तकनीक, प्रमाणन संबंधी चुनौतियाँ, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम एवं एवियोनिक्स, लड़ाकू विमानों के रखरखाव की चुनौतियाँ, विमान डिजाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा एक्चुएटर्स के लिए सटीक विनिर्माण शामिल हैं।

यह संगोष्ठी भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के भविष्य और एलसीए तेजस की यात्रा—स्केच से स्क्वाड्रन तक—को भी रेखांकित करेगी। ADA द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया एलसीए तेजस अब तक 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण पूरा कर चुका है। इस कार्यक्रम से 100 से अधिक डिजाइन एवं विकास केंद्र, जिनमें सरकारी प्रयोगशालाएँ, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग शामिल हैं, जुड़े रहे। कार्बन कंपोजिट, हल्के पदार्थ, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट जैसी कई विशिष्ट तकनीकों का विकास कर एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाया गया।

एलसीए एमके-1ए, स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित इस लड़ाकू विमान का उन्नत संस्करण है, जो भारतीय वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से पूरा करेगा। एलसीए एमके-2 और एलसीए नेवी संस्करण वर्तमान में विकासाधीन हैं। संगोष्ठी के दौरान तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी व्याख्यानों की श्रृंखला भी प्रस्तुत की जाएगी।

एलसीए तेजस के विकास से भारत को अभूतपूर्व लाभ मिला है, क्योंकि देश ने अब स्वदेशी रूप से लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता और सामर्थ्य दोनों हासिल कर ली हैं। एलसीए कार्यक्रम भारत के सबसे सफल स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में से एक है, जिसके माध्यम से भारतीय वायुसेना को एक उत्कृष्ट वायु श्रेष्ठता लड़ाकू विमान प्राप्त हुआ है। अब तक 38 विमान (32 लड़ाकू और 6 प्रशिक्षक) भारतीय वायुसेना की दो स्क्वाड्रनों में शामिल किए जा चुके हैं।

संगोष्ठी के अंतर्गत बड़ी संख्या में पीएसयू, डीपीएसयू, उद्योग और एमएसएमई अपने स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित एयरबोर्न अनुप्रयोगों से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि: पालक सहभागिता में देश में प्रथम

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81,533 पालकों का पंजीयन: देश में पहले स्थान पर छत्तीसगढ़

पालक सहभागिता में देश में प्रथम स्थान गौरव की बात : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

परीक्षा पे चर्चा में छत्तीसगढ़ अव्वल: देश के अभिभावकों के लिए बना रोल मॉडल

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।

'परीक्षा पे चर्चा' में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है।  बलोदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया। 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।

परीक्षा पे चर्चा से जुड़े प्रेरक अनुभव भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में शामिल हुई कु. युक्तामुखी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस वर्ष अधिक से अधिक विद्यार्थियों से पंजीयन कर अपने प्रश्न पूछने की अपील की है। उनका प्रेरक संदेश विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सक्रिय सहभागिता की भावना जागृत कर रहा है। 

इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में शीतकालीन अवकाश के दौरान आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” में सभी विद्यालयों, समुदाय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और इस आयोजन के परिणामस्वरूप एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए। इस सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी परीक्षा पे चर्चा मेलों का आयोजन किया जा रहा है और लोग उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में परीक्षा पे चर्चा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पंजीयन प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई और वहीं पर पंजीयन कराने में सहयोग दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन किया गया। 

पंजीयन प्रक्रिया 11 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी और इस बात की पूरी संभावना है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि “परीक्षा पे चर्चा” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसमें वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों से सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद में परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाता है तथा पालकों को यह संदेश भी दिया जाता है कि वे अधिक अंक लाने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाएँ। यह पहल अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है और परीक्षा को तनाव का विषय न मानकर उत्सव के रूप में मनाने की व्यापक सामाजिक चेतना विकसित कर रही है।

“परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ द्वारा प्राप्त की गई यह उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परीक्षा को तनाव नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का जो संदेश दिया गया है, उसे छत्तीसगढ़ ने दिल से अपनाया है। कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान और पालक सहभागिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे यहां अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इसी उत्साह के साथ हम 30 लाख से अधिक पंजीयन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के इस अभियान को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहेंगे।” - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महासमुंद-राजिम मार्ग सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए 147 करोड़ रुपए स्वीकृत

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महासमुंद- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य की सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पांच जिलों के लगभग 174 किलोमीटर लंबी सड़कों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राजिम–फिंगेश्वर–महासमुंद मार्ग के 35.5 किमी हिस्से के उन्नयन के लिए 146.86 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। 


इस संबंध में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने केंद्र एवं राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जारी बयान में कहा है कि केंद्र सरकार की यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देगी। बेहतर सड़कें न केवल यातायात को सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। उन्होंने आगे कहा कि महासमुंद से फिंगेश्वर और राजिम तक मार्ग का उन्नयन कार्य क्षेत्र की जनता के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। दोनों जिलों को जोड़ने वाले इस सड़क के माध्यम से व्यापार सहित अन्य गतिविधियां जुड़ी हुई है। लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी। महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के लोगों द्वारा भी काफी समय से इस मार्ग के उन्नयन की मांग की जा रही थी। राजिम पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल है। आगामी दिनों में यहां लगने वाले मेला में भीड़ उमड़ती है। महासमुंद से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु राजीवलोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते हैं, जिनका सफर अब सुगमता से पूरा होगा।

आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

महासमुंद को राजिम से जोड़ने वाले यह मार्ग आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से 35 किमी का सफर अब कम समय में और सुगमता से पूरा होगा। महासमुंद और गरियाबंद दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में नई गति आएगी। फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण जो महासमुंद की सीमा के आसपास हैं वें चिकित्सकीय सुविधा के लिए महासमुंद मेडिकल कॉलेज भी आते हैं। इन सभी के लिए यह काफी लाभदायक साबित होगा।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए चयन ट्रायल 6-8 जनवरी को रायपुर और बिलासपुर में

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ की मेजबानी में देश में पहली बार हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में राज्य की ओर से खेलने वाली टीमों के चयन के लिए ट्रायल 6 जनवरी से 8 जनवरी तक रायपुर और बिलासपुर में आयोजित किए जा रहे हैं। नेशनल ट्राइबल गेम्स में सात खेलों को शामिल किया गया है। इसमें भागीदारी के लिए वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के खिलाड़ियों का ट्रायल रायपुर में आयोजित किया गया है।


वहीं तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के खिलाड़ियों के ट्रायल बिलासपुर में होंगे। इच्छुक खिलाड़ी मोबाइल नम्बर +91-8871419609 पर फोन कर या वेबसाइट http://sportsyw.cg.gov.in के माध्यम चयन ट्रायल संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए खिलाड़ी अपना ऑनलाइन पंजीयन क्यूआर कोड और रजिस्ट्रेशन लिंक से कर सकते हैं। सभी ट्रायलस्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन भी किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ के स्थायी निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाड़ी ही चयन ट्रायल में भाग लेने के पात्र होंगे। महिला एवं पुरूष दोनों वर्गों में पात्र खिलाड़ियों के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने ट्रायल में हिस्सा लेने पहुंचने वाले सभी खिलाड़ियों से अपने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र और आधार कॉर्ड/स्थानीय प्रमाण पत्र की मूल कॉपी (Original Copy) साथ लाने को कहा है।

रायपुर में होंगे वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी के ट्रायल

रायपुर के स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा में 6 जनवरी को सवेरे नौ बजे से वेट-लिफ्टिंग, 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से कुश्ती तथा 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे नौ बजे से फुटबॉल के लिए ट्रायल होंगे। 7 जनवरी और 8 जनवरी को सवेरे नौ बजे से रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी खिलाड़ियों का ट्रायल होगा।

तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के ट्रायल बिलासपुर में

बिलासपुर के स्वर्गीय बी.आर. यादव स्टेडियम में 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से तीरंदाजी और एथलेटिक्स के ट्रायल होंगे। बिलासपुर के सरकंडा स्थित जिला खेल परिसर में 7 जनवरी को सवेरे नौ बजे से तैराकी खिलाड़ियों का ट्रायल होगा।

CGPSC : सूबेदार व SI भर्ती: 6 जनवरी से 6 फरवरी तक PMT और दस्तावेज सत्यापन

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर (गृह पुलिस विभाग) भर्ती परीक्षा 2024 के अंतर्गत अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ सत्यापन एवं शारीरिक माप परीक्षण की तिथियाँ घोषित कर दी गई हैं।


आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार यह प्रक्रिया 06 जनवरी से 06 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी। दस्तावेज़ सत्यापन एवं शारीरिक माप परीक्षण परीक्षा जिला सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, रायपुर एवं राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में निर्धारित केंद्रों पर संपन्न होगी।

अभ्यर्थियों के लिए प्रातः 07:00 बजे रिपोर्टिंग समय निर्धारित किया गया है, जबकि शारीरिक माप परीक्षण प्रातः 08:00 बजे से प्रारंभ होगा। आयोग ने बताया कि उक्त परीक्षा हेतु प्रवेश पत्र दिनांक 26 दिसम्बर 2025 को जारी कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov-in से डाउनलोड कर सकते है, एवं अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग द्वारा जानकारी दी गई है कि अभ्यर्थियों को पृथक से प्रवेश पत्र व्यक्तिशः नहीं भेजी जाएगी।

प्रदीप मिश्रा का बड़ा बयान: RSS की तुलना भगवान शिव से की, कहा- विष पीकर भी राष्ट्र की रक्षा करता है संघ

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 भोपाल। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना भगवान शिव से करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान शिव ने विष पीकर सृष्टि की रक्षा की, उसी तरह RSS भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा में लगा हुआ है।


पंडित प्रदीप मिश्रा यह बात शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में RSS द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए कही। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और मध्यभारत प्रांत के संघचालक अशोक पांडेय भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्ग अपने-अपने स्तर पर राष्ट्र सेवा में लगे हुए हैं, लेकिन यह आत्मचिंतन भी जरूरी है कि हमने व्यक्तिगत रूप से देश के लिए क्या योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जन्म चाहे किसी भी जाति में हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही होती है।

धर्मांतरण को बताया गंभीर षड्यंत्र

पंडित प्रदीप मिश्रा ने धर्मांतरण के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यह केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर षड्यंत्र है। उन्होंने समाज से सजग रहने और इससे बचने की अपील की।

उन्होंने ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है। यह पहल समाज को जोड़ने का काम कर रही है।

एकता ही हमारी पहचान: मोहन भागवत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विविधता के बावजूद एकता ही भारत की पहचान है। उन्होंने कहा कि बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं।

भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर विवाद नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है।

बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने के करीब? अमेरिका–वेनेजुएला तनाव ने बढ़ाई तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

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 Baba Vanga 2026 Predictions: फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस और बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि बाबा वेंगा ने वर्ष 2026 में बड़े वैश्विक युद्ध की चेतावनी दी थी, जो अब मौजूदा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से मेल खाती नजर आ रही है।


इसी कड़ी में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 3 जनवरी की रात अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया। इन दावों के सामने आने के बाद बाबा वेंगा की भविष्यवाणी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

क्या कहा था बाबा वेंगा ने?

बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों के अनुसार, वर्ष 2026 में दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा था कि यह दौर बेहद विनाशकारी होगा, जिसमें धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर व्यापक हिंसा फैलेगी। इंसान ही इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाएगा और पूरी दुनिया इसका खामियाजा भुगतेगी।

उन्होंने समुद्र से जुड़ी बड़ी दुर्घटनाओं और वैश्विक अस्थिरता की भी चेतावनी दी थी।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

वेनेजुएला से जुड़ी हालिया घटनाओं को बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में जनहानि और बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की बात कही जा रही है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति को लेकर अटकलें तेज हैं।

2026 को लेकर भविष्यवाणी में और क्या?

बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी शक्तियों के बीच टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इसमें रूस, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच सीधे या परोक्ष संघर्ष की संभावना जताई गई थी। उन्होंने कहा था कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह करेंगे हैदराबाद में स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म एवं अत्याधुनिक RAS सुविधा का उद्घाटन

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केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 5 जनवरी 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित सामान्य निकाय बैठक के पश्चात स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर फार्म एवं अनुसंधान संस्थान तथा अत्याधुनिक रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) सुविधा का उद्घाटन करेंगे।

स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड द्वारा स्थापित यह भारत का पहला वाणिज्यिक स्तर का उष्णकटिबंधीय रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) आधारित रेनबो ट्राउट एक्वाकल्चर फार्म एवं अनुसंधान संस्थान है, जो भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। यह परियोजना तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के कंदुकुर मंडल में स्थित है और यह निर्णायक रूप से सिद्ध करती है कि रेनबो ट्राउट जैसी उच्च मूल्य वाली शीत-जल प्रजातियों का उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी वर्षभर पालन संभव है। यह उपलब्धि सटीक इंजीनियरिंग, नियंत्रित जैविक प्रणालियों और उन्नत जल पुनर्चक्रण तकनीकों के माध्यम से हासिल की गई है।

यह परियोजना उन दीर्घकालिक धारणाओं को चुनौती देती है, जिनके अनुसार प्रीमियम एक्वाकल्चर प्रजातियाँ केवल विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों तक सीमित होती हैं, और यह स्थापित करती है कि एक्वाकल्चर की व्यवहार्यता में जलवायु नहीं बल्कि तकनीक निर्णायक कारक है।

यह परियोजना एक जीवंत प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन मंच के रूप में कार्य करती है, जहाँ युवाओं को उन्नत एक्वाकल्चर प्रणालियों, स्वचालन (ऑटोमेशन) तथा जैव-सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में मानव संसाधन सुदृढ़ होते हैं।

भारत सरकार ने मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर क्षेत्र के समग्र विकास हेतु कई परिवर्तनकारी पहलें आरंभ की हैं। वर्ष 2015 से अब तक विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत इस क्षेत्र के लिए कुल ₹38,572 करोड़ के निवेश को स्वीकृति अथवा घोषणा दी जा चुकी है, जिससे इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

शीत-जल मत्स्य पालन मत्स्य क्षेत्र का एक उभरता हुआ और उच्च संभावनाओं वाला खंड बनकर तेजी से सामने आ रहा है। प्रीमियम शीत-जल प्रजातियों की बढ़ती बाजार मांग, घरेलू एवं निर्यात अवसरों के विस्तार तथा सतत एक्वाकल्चर तकनीकों में बढ़ते निवेश के कारण यह उप-क्षेत्र आजीविका सृजन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, विशेषकर पर्वतीय और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।

ट्राउट पालन भारत के एक्वाकल्चर क्षेत्र का एक उच्च मूल्य वाला और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खंड है, जो मुख्यतः उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे हिमालयी एवं पर्वतीय राज्यों में केंद्रित है, जहाँ बर्फ से पोषित नदियों और नालों के शीतल एवं ऑक्सीजन-युक्त जल संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

मत्स्य पालन विभाग ने रेनबो ट्राउट हैचरी के विकास के माध्यम से इन संसाधनों के प्रभावी उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हुई है और स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। नई हैचरी की स्थापना और उन्नत एक्वाकल्चर तकनीकों के अपनाने से वार्षिक 14 लाख ट्राउट बीज उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के साथ ट्राउट मछली आपूर्ति हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किया है।

भारत सरकार लक्षित निवेश, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सुधारों के माध्यम से एक्वाकल्चर को एक रणनीतिक विकास इंजन के रूप में आगे बढ़ा रही है। RAS जैसी आधुनिक प्रणालियों, उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के विविधीकरण, क्षमता निर्माण तथा बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देकर सरकार इस क्षेत्र को पारंपरिक आजीविका-आधारित मॉडल से हटाकर एक तकनीक-प्रेरित, बाजारोन्मुखी पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर कर रही है। ये हस्तक्षेप उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने, क्षेत्रीय सीमाओं को कम करने और भारतीय एक्वाकल्चर को सतत एवं विस्तार योग्य तरीके से घरेलू मांग और उभरते निर्यात अवसरों को पूरा करने के लिए सक्षम बना रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में शीत-जल मत्स्य पालन क्लस्टर के विकास हेतु अधिसूचना जारी की है।

पारादीप पोर्ट प्राधिकरण ने 21वीं पारादीप मैराथन 2026 के साथ 65वां स्थापना दिवस मनाया

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पारादीप पोर्ट प्राधिकरण, ओडिशा ने शनिवार को 21वीं पारादीप मैराथन 2026 के सफल आयोजन के साथ अपना 65वां पोर्ट स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। इस आयोजन का संचालन पारादीप पोर्ट प्राधिकरण के गोपालबंधु क्रीड़ा संसद द्वारा किया गया। मैराथन को हनुमान मंदिर चौक से मुख्य अतिथि पी. एल. हरनाध, अध्यक्ष, पारादीप पोर्ट प्राधिकरण ने, विशिष्ट अतिथि टी. वेणु गोपाल, उपाध्यक्ष, पारादीप पोर्ट प्राधिकरण की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

14 किलोमीटर लंबी यह दौड़ गोपालबंधु स्टेडियम में संपन्न हुई, जहाँ पोर्ट टाउनशिप के निवासियों और विभिन्न संगठनों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस मैराथन में कुल 336 धावकों ने भाग लिया, जिनमें 280 पुरुष एवं 56 महिलाएँ शामिल थीं।

गोपालबंधु स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हरनाध ने स्मरण कराया कि 3 जनवरी 1962 को जिसकी आधारशिला रखी गई थी, वह पारादीप पोर्ट प्राधिकरण आज एक छोटे जेटी से विकसित होकर भारत के अग्रणी प्रमुख बंदरगाहों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह बंदरगाह रेटेड क्षमता के लिहाज से देश का सबसे बड़ा प्रमुख बंदरगाह, भारतीय प्रमुख बंदरगाहों में सर्वोत्तम बर्थ उत्पादकता वाला तथा सबसे अधिक लागत-कुशल प्रमुख बंदरगाह है। उन्होंने कहा कि सतत आधुनिकीकरण, हरित विकास पर विशेष बल और कर्मचारियों के कल्याण के साथ यह बंदरगाह 2030 तक 400 एमएमटी क्षमता की दिशा में निरंतर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पारादीप मैराथन भी इसी विकास, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता की भावना को दर्शाती है।

इस अवसर पर ओडिशा के उभरते धावक प्रतिक महाराणा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। हाल ही में उन्होंने चौथी दक्षिण एशियाई वरिष्ठ एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता तथा भारतीय पुरुष 4×100 मीटर रिले टीम के सदस्य के रूप में रजत पदक हासिल किया था। उन्हें यह सम्मान पी. एल. हरनाध, अध्यक्ष, पारादीप पोर्ट प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया गया।

पुरुष वर्ग में ओडिशा पुलिस के अशोक दंडसेना ने 43 मिनट 52.2 सेकंड के समय के साथ पारादीप मैराथन 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त किया। रांची के गुलसन डुंगडुंग ने 44 मिनट 11.9 सेकंड के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि झारखंड के राकेश महंता ने 44 मिनट 18.3 सेकंड के समय के साथ तृतीय स्थान हासिल किया।

महिला वर्ग में झारखंड की अनीता दास ने 51 मिनट 08.4 सेकंड में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। मयूरभंज की संध्या मुर्मू ने 54 मिनट 24.2 सेकंड के साथ द्वितीय स्थान, जबकि ओडिशा पुलिस की बसंती मांडिया ने 54 मिनट 51.6 सेकंड के समय के साथ तृतीय स्थान प्राप्त किया।

गोपालबंधु स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह में टी. वेणु गोपाल, उपाध्यक्ष, पारादीप पोर्ट प्राधिकरण सहित प्राधिकरण के विभिन्न विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहे।

मैराथन का सफल संचालन पारादीप पोर्ट स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारियों एवं तकनीकी सदस्यों द्वारा एच. एस. राउत, अध्यक्ष; डॉ. डी. पी. सेठी, कार्यकारी अध्यक्ष, गोपालबंधु क्रीड़ा संसद; धुना चंद्र तराई, सचिव, जीकेएस के नेतृत्व में तथा ओडिशा ओलंपिक संघ के अधिकारियों के सहयोग से किया गया।


छत्तीसगढ़ में बदला मौसम: बढ़ी ठंड, कोहरा छाने और हल्की बारिश के आसार

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ समेत प्रदेश के कई इलाकों में इन दिनों कड़ाके की ठंड लोगों को परेशान कर रही है। खासकर सुबह और देर रात ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। कई जिलों में सुबह के समय घना कोहरा छा रहा है, जिससे दृश्यता काफी कम हो रही है और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसी बीच Chhattisgarh Weather को लेकर मौसम विभाग ने अहम जानकारी साझा की है।


मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के आसपास एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। यह समुद्र तल से करीब 3.1 किलोमीटर ऊंचाई पर ऊपरी हवा के चक्रवात के रूप में स्थित है। इसके साथ ही मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में द्रोणिका (ट्रफ) भी जुड़ी हुई है। इसी मौसमी प्रणाली के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है।

मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही कई जिलों में घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी भी जारी की गई है। ऐसे में वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

Chhattisgarh Weather अपडेट के अनुसार, अगले 24 घंटे बाद प्रदेश में ठंड का असर और बढ़ सकता है। आगामी तीन दिनों के दौरान छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। इससे रात और सुबह की ठंड और ज्यादा बढ़ेगी। वहीं, कई जिलों में दिनभर बादल छाए रहने के भी आसार हैं।

कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में प्रदेशवासियों को ठंड, कोहरे और बदले मौसम के लिए पूरी तरह तैयार रहने की जरूरत है।

एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2026 का दिल्ली कैंट में भव्य शुभारंभ

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राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) 2026 का शुभारंभ दिल्ली कैंट स्थित डीजी एनसीसी कैंप में उत्साहपूर्ण और भव्य समारोह के साथ हुआ। इस वर्ष गणतंत्र दिवस शिविर में कुल 2,406 कैडेट्स भाग ले रहे हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से 127 कैडेट्स तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र से 131 कैडेट्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम (YEP) के अंतर्गत 25 मित्र देशों के कैडेट्स और अधिकारी भी इस शिविर में भाग लेंगे।

इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने एनसीसी परिवार को 77 वर्षों की सफल सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी। उन्होंने गणतंत्र दिवस शिविर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शिविर कैडेट्स को गणतंत्र दिवस से पूर्व राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित होने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का एक सशक्त मंच है।

मीडिया को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल वत्स ने बताया कि देश के 90 प्रतिशत से अधिक जिलों में एनसीसी इकाइयों की उपस्थिति सुनिश्चित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 1948 में स्थापना के समय जहाँ एनसीसी कैडेट्स की संख्या मात्र 20,000 थी, वहीं वर्तमान में यह संख्या बढ़कर लगभग 20 लाख हो गई है, जिसमें 40 प्रतिशत महिला कैडेट्स शामिल हैं। उन्होंने विभिन्न शिविरों के माध्यम से युवाओं में चरित्र निर्माण और अनुशासन विकसित करने में एनसीसी की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में एनसीसी ने 1,665 वार्षिक प्रशिक्षण शिविर, 06 विशेष राष्ट्रीय एकता शिविर तथा 33 ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ शिविर आयोजित किए, जिनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों के कैडेट्स के बीच एकता और आपसी संबंधों को सुदृढ़ करना था। इसके अलावा नियमित साहसिक गतिविधियों के साथ-साथ एनसीसी द्वारा निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ संचालित की गईं:

  • माउंट एवरेस्ट के लिए विशेष पर्वतारोहण अभियान

  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 75,000 कैडेट्स की भागीदारी, जिसमें नागरिक प्रशासन को सहयोग, चिकित्सा सहायता और स्वैच्छिक रक्तदान शामिल

  • वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान

  • ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 8 लाख पौधों का रोपण

  • विकसित भारत युवा नेता संवाद क्विज़ में 4 लाख से अधिक कैडेट्स की भागीदारी

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 8 लाख से अधिक कैडेट्स की सहभागिता

  • स्वच्छोत्सव में 50,000 से अधिक कैडेट्स की भागीदारी

  • ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में 6 लाख कैडेट्स की भागीदारी

  • 4 रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (RPTOs) में कैडेट्स को ड्रोन उड़ान प्रशिक्षण

  • 3,000 कैडेट्स को स्किल मंथन कार्यशालाओं में प्रशिक्षण

  • आइडिया एवं इनोवेशन प्रतियोगिता के अंतर्गत 340 कैडेट्स द्वारा 85 स्टार्टअप विचारों एवं समाधानों पर कार्य

वर्तमान में चल रहे अभियानों के बारे में जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल वत्स ने बताया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 21 निर्जन द्वीपों के चारों ओर एक विशेष नौकायन अभियान संचालित किया जा रहा है, जो परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित है। इसके साथ ही वीर बिरसा मुंडा और पेशवा बाजीराव की विरासत, सामाजिक सुधार गतिविधियों तथा ऐतिहासिक उपलब्धियों को स्मरण करने हेतु दो साइक्लिंग अभियान भी आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 315 जिलों के लगभग 94,400 एनसीसी कैडेट्स को युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत नामित किया गया है, जिन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के समन्वय से मार्च 2026 तक आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शिविर के दौरान अनेक गणमान्य अतिथि शिविर का दौरा करेंगे, जिनमें उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री, रक्षा सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तथा थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख शामिल हैं।

शिविर की गतिविधियों का समापन 28 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाली प्रधानमंत्री रैली के साथ होगा।


प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में ‘दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी “दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी एक शताब्दी से अधिक समय बाद पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों, रत्न-अवशेषों एवं अवशेष पात्रों का अब तक का सबसे व्यापक और दुर्लभ संग्रह एक साथ प्रस्तुत कर रही है, जिनमें हाल ही में भारत को प्रत्यावर्तित किए गए अवशेष भी शामिल हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा,

“125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की विरासत वापस लौटी है और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर अपने घर लौट आई है। आज से भारत की जनता भगवान बुद्ध के इन पावन अवशेषों के दर्शन कर सकेगी और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेगी।”

इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति, जिनमें भारत की आत्मा को शासन की कार्यवाही में रूपांतरित करने की अद्वितीय क्षमता है, सदैव प्रेरणादायी और विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री का स्वागत करना सभी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

यह उद्घाटन भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है, जो 127 वर्षों के बाद पिपरहवा अवशेषों के पुनः एकीकरण का साक्षी बना है। इस संग्रह में 1898 में कपिलवस्तु में हुए उत्खनन से प्राप्त अवशेष, 1972–75 के उत्खननों से मिली सामग्री, भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में संरक्षित धरोहर तथा पेप्पे परिवार का वह संग्रह शामिल है, जिसे जुलाई 2025 में भारत सरकार के निर्णायक हस्तक्षेप के बाद विदेश में नीलामी से रोककर भारत वापस लाया गया।

प्रधानमंत्री के आगमन पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत; केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू; दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना; संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने उनका स्वागत किया।

अपने भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भगवान बुद्ध की ध्यानमग्न प्रतिमा पर खटक और गुलाब की पंखुड़ियाँ अर्पित कीं। उन्होंने पिपरहवा स्थल से प्राप्त एक प्राचीन मुहर का अभिषेक किया, बोधि वृक्ष का पौधारोपण किया, आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, प्रदर्शनी कैटलॉग का विमोचन किया तथा उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं को चिवर दान अर्पित किया।

“दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” विषयवस्तु के अंतर्गत क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान काल तक की 80 से अधिक विशिष्ट और दुर्लभ वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। इनमें मूर्तियाँ, पांडुलिपियाँ, थंका चित्र, अनुष्ठानिक वस्तुएँ, अवशेष पात्र और रत्नजड़ित धरोहरें शामिल हैं। प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु वह विशाल एकाश्म पत्थर का संदूक है, जिसमें मूल रूप से ये पवित्र अवशेष खोजे गए थे।

1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु से संबद्ध प्राचीन स्तूप स्थल पर खोजे गए पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक हैं। आज इनका पुनः एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पुनः प्राप्त करने, संरक्षित करने और सम्मान देने की अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक सहभागिता में उसकी सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत की भूमिका लगातार सशक्त हुई है। अब तक 642 प्राचीन धरोहरें भारत वापस लाई जा चुकी हैं, जिनमें पिपरहवा अवशेषों की वापसी सांस्कृतिक कूटनीति और विरासत संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्रीगण, राजनयिक समुदाय के सदस्य, राजदूत, वंदनीय बौद्ध भिक्षु, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विद्वान, विरासत विशेषज्ञ, कला जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।

यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय की विरासत संरक्षण एवं सांस्कृतिक नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है तथा बुद्ध धम्म की जन्मभूमि के रूप में भारत की विशिष्ट पहचान और विश्व के साथ अपनी सभ्यतागत विरासत साझा करने के उसके स्थायी संकल्प का उत्सव है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पुनः कहा,

“125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की विरासत वापस लौटी है और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर अपने घर लौट आई है। आज से भारत की जनता भगवान बुद्ध के इन पावन अवशेषों के दर्शन कर सकेगी और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेगी।”





वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

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रायपुर। राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई माप्रतिशत मलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं। 

विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी।

वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है।

आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित, कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

राष्ट्रीय मीडिया अवार्ड–2025 के लिए 07 जनवरी तक आमंत्रित प्रविष्टियां, भारत निर्वाचन आयोग मतदाता शिक्षा एवं जागरूकता में उत्कृष्ट योगदान देने वाले मीडिया संस्थानों को करेगा सम्मानित

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता शिक्षा एवं जागरूकता (SVEEP) के क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले मीडिया संस्थानों को सम्मानित करने हेतु राष्ट्रीय मीडिया अवार्ड–2025 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं।इच्छुक मीडिया संस्थान अपनी प्रविष्टियां 07 जनवरी 2026 तक भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन, अशोका रोड, नई दिल्ली–110001 स्थित कार्यालय में भेज सकते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रविष्टियां ई-मेल के माध्यम से media_division@eci.gov.in पर भी प्रेषित की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय मीडिया अवार्ड–2025 के अंतर्गत आयोग द्वारा कुल चार श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इनमें प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टेलीविजन), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (रेडियो) तथा ऑनलाइन/इंटरनेट एवं सोशल मीडिया शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी में एक-एक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। चयनित मीडिया संस्थानों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर 25 जनवरी 2026 को सम्मानित किया जाएगा।

भारत निर्वाचन आयोग इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के माध्यम से उन मीडिया संस्थानों को प्रोत्साहित करेगा, जिन्होंने मतदाता जागरूकता अभियानों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है, नागरिकों को निर्वाचन प्रक्रिया एवं चुनाव से जुड़े आईटी एप्लीकेशनों की जानकारी दी है तथा मतदाताओं तक सटीक, संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाई है । साथ ही विशिष्ट एवं दुर्गम मतदान केंद्रों पर आधारित स्टोरीज़, विशेष कार्यक्रमों, चर्चाओं एवं विशेषज्ञ आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक जन-पहुंच बनाने और निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की नई पहलों को प्रभावी रूप से जनता तक पहुँचाने वाले मीडिया संस्थानों को भी सम्मानित किया जाएगा।

साथ ही, चुनाव से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं का खंडन करने, सही एवं सत्यापित जानकारी का प्रसार करने तथा जनसामान्य पर पड़े सकारात्मक प्रभाव के साक्ष्यों को भी पुरस्कार के मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की सौजन्य मुलाकात, ‘बस्तर पंडुम 2026’ में किया आमंत्रित

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं एवं लोक जीवन से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर पंडुम राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, वेशभूषा सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

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