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चलती ट्रेन में असुरक्षित सफर: मोबाइल लूट का विरोध पड़ा भारी, यात्री के कटे दोनों पैर

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 महासमुंद। चलती ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार दोपहर महासमुंद जिले में मोबाइल स्नैचिंग की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां बदमाशों ने मोबाइल लूट का विरोध करने पर एक यात्री को चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। हादसे में यात्री के दोनों पैर कट गए और उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।


यह दर्दनाक घटना रायपुर से टिटलागढ़ जा रही पुशपुल पैसेंजर ट्रेन में शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुई। घायल यात्री की पहचान ओडिशा के नुआपड़ा जिले के कादोमेरी गांव निवासी संतू मांझी (45 वर्ष) के रूप में हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब ट्रेन महासमुंद शहर में बिठौबा टॉकीज के पीछे से गुजर रही थी, उस दौरान संतू मांझी अपने मोबाइल फोन पर कुछ देख रहे थे। इसी दौरान ट्रेन में मौजूद कुछ अज्ञात बदमाशों ने अचानक उनका मोबाइल छीन लिया। जब संतू मांझी ने इसका विरोध किया तो बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से धक्का दे दिया।

धक्का लगते ही संतू मांझी संतुलन खो बैठे और सीधे रेलवे ट्रैक पर गिर पड़े। दुर्भाग्यवश, उनके दोनों पैर ट्रेन की चपेट में आ गए, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।

घटना के बाद रेलवे ट्रैक के आसपास मौजूद स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद राहुल आंवड़े मौके पर पहुंचे और तत्काल डायल 112 को जानकारी दी। पार्षद और स्थानीय नागरिकों की मदद से गंभीर रूप से घायल संतू मांझी को रेलवे ट्रैक से निकालकर डायल 112 वाहन तक पहुंचाया गया। वाहन में ले जाते समय वे बेहोश हो गए थे।

प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है।

इधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस अज्ञात बदमाशों की तलाश में जुटी हुई है। ट्रेन में मौजूद यात्रियों से पूछताछ की जा रही है, वहीं रेलवे ट्रैक और आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। यात्रियों ने चलती ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रेलवे प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

यात्रियों से अपील:

ट्रेन में सफर के दौरान सतर्क रहें और कीमती सामान संभालकर रखें। ऐसी घटनाओं से जुड़े हर अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें — आपकी एक शेयर किसी और की जान बचा सकती है।

डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के लिए कौशल और रक्षा उद्योग सुधारों पर जोर दिया

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केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव ऑन डिफेंस, एयरोस्पेस और स्ट्रैटेजिक सेक्टर स्किल डेवलपमेंट के उद्घाटन अवसर पर कहा, “भारत अपने रक्षा और औद्योगिक यात्रा के निर्णायक क्षण में है, जहाँ आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुकी है।” उन्होंने पिछले दशक में भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूपांतरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर यह क्षेत्र आयात पर निर्भरता से हटकर एक सशक्त और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदल गया है, जिसमें डीफ़ेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs), निजी उद्योग, MSMEs और स्टार्टअप्स शामिल हैं।

रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और लगातार नीति सुधारों ने देश में स्वदेशी निर्माण में तेजी लाने में मदद की है, जिससे UAVs, सेंसर जैसी प्लेटफॉर्म्स से लेकर आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल जैसे जटिल सिस्टम का स्वदेशी डिज़ाइन और उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, रक्षा निर्यात 2025 में 23,162 करोड़ रुपये पार कर चुका है, जो 2014 की तुलना में लगभग 35 गुना वृद्धि है।

राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, अस्ट्रा BVR मिसाइल, धनुष आर्टिलरी गन और INS विक्रांत को उद्योग, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन के बीच बढ़ती सहक्रियाशीलता के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में बताया। उन्होंने दोहराया कि रक्षा में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ और तेजी से उन्नत तकनीकें भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौतियां और अभूतपूर्व अवसर दोनों प्रस्तुत करती हैं।

मानव संसाधन के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता केवल हार्डवेयर के स्वदेशीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा पर संप्रभुता भी शामिल है। उन्होंने भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रयासों का उल्लेख किया, जिसमें नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग मौजूदा क्षमताओं और भविष्य की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की Skilling and Employment through Technology Upgradation (PM-SETU) पहल का जिक्र करते हुए राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम अकादमी, उद्योग और रक्षा R&D के बीच अंतर को पाटने के लिए लॉन्च किया गया है। 5 वर्षों में कुल ₹60,000 करोड़ के निवेश के साथ, जिसमें 50% केंद्र सरकार का योगदान शामिल है, PM-SETU सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, डुअल अप्रेंटिसशिप, AI-सक्षम प्रशिक्षण उपकरण, और अग्निवीरों व पूर्व सैनिकों के लिए संरचित कौशल पथ स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों से अनुरोध किया कि वे प्रयोग और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के माध्यम से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाकर PM-SETU कार्यक्रम को सफल बनाएं, ताकि उद्योग-तैयार प्रतिभा का सृजन सुनिश्चित हो सके।

रक्षा सचिव ने पंजाब में रक्षा निर्माण के अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा पारिस्थितिकी नेटवर्क, MSME लिंक बढ़ाना, रक्षा R&D संस्थानों के साथ सहयोग, और समर्पित कौशल एवं परीक्षण अवसंरचना राज्य को रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में उभारने के लिए आवश्यक हैं।

अग्निवीरों की भूमिका पर जोर देते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अग्निपथ योजना ने एक ऐसा अनुशासित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा पूल तैयार किया है, जिसे राष्ट्रीय स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुसार रक्षा निर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।

यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार, Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Confederation of Indian Industry (CII) के सहयोग से आयोजित किया गया। रक्षा सचिव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने सरकार, उद्योग और अकादमी की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया कि भारत को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगी प्रयासों से पंजाब और उत्तर भारत रक्षा-प्रेरित विकास के प्रमुख चालक बन सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्योग के नेता, वरिष्ठ अधिकारी, अकादमिक प्रतिनिधि और सशस्त्र बल उपस्थित थे।

57 शोध विद्वानों के प्रतिनिधि दल ने एयर फोर्स स्टेशन हिंडन का दौरा कर भारतीय वायु सेना के संचालन और सहयोगी शोध पर किया संवाद

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10 जनवरी 2026 को भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख अड्डे एयर फोर्स स्टेशन हिंडन का दौरा करते हुए 57 शोध विद्वानों के एक प्रतिनिधि दल ने एक आउटरीच कार्यक्रम में भाग लिया। इस दल में मनोहर पर्रिकर - रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (MP-IDSA), ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF), विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF), सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (CAPSS), सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज (CLAWS), नेशनल मेरिटाइम फाउंडेशन (NMF), इंडिया फाउंडेशन, सेंटर फॉर कंटेम्पररी चाइना स्टडीज (CCCS), यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (USI) और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के शोध विद्वान शामिल थे।

इस दौरे का उद्देश्य शोध विद्वानों को भारतीय वायु सेना के कर्मियों के साथ संवाद करने, संचालन के विभिन्न पहलुओं को समझने और सहयोगी शोध के अवसरों का पता लगाने का अवसर प्रदान करना था। प्रतिनिधि दल का स्वागत एयर ऑफिसर कमांडिंग, एयर फोर्स स्टेशन हिंडन ने किया और उन्होंने IAF और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने में उत्साह व्यक्त किया।

शोध विद्वानों को IAF के संचालन, इतिहास, क्षमताओं और उपलब्धियों के बारे में विस्तृत ब्रिफिंग दी गई। प्रतिनिधि दल को IAF कर्मियों के साथ संवाद करने का भी अवसर मिला, जिन्होंने संचालन के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

यह दौरा IAF और प्रमुख थिंक टैंकों के बीच पारस्परिक समझ और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम था। साथ ही, यह आगे शोध परियोजनाओं और शैक्षणिक आदान-प्रदान के माध्यम से सहयोग के मार्ग को भी खोलता है।



डॉ. सुकांत मजूमदार ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और शिक्षा में सुधार का किया वर्णन

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केंद्रीय राज्य मंत्री, शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास, डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। इस अवसर पर डॉ. मजूमदार ने कहा कि विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक कानूनी वेतन रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है। यह अधिनियम सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विकास पहलों का समन्वय और सैचुरेशन-आधारित सेवाएं सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे ग्रामीण भारत का आधार समृद्ध, लचीला और आत्मनिर्भर बन सके।

उन्होंने आगे कहा कि संसद ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 पारित कर दिया है, जो भारत के ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे में निर्णायक सुधार को दर्शाता है। यह अधिनियम रोजगार को केवल एक कल्याणकारी हस्तक्षेप से निकालकर समग्र विकास का एकीकृत उपकरण बनाने पर केंद्रित है।

मंत्री ने जोर दिया कि यह कानून ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करेगा, शासन और जवाबदेही तंत्र को आधुनिक बनाएगा, और वेतन रोजगार को सतत और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ेगा, जिससे समृद्ध और लचीला ग्रामीण भारत सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान:

मंत्री ने बताया कि VB–G RAM G ढांचा ग्रामीण शिक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने वाले कार्यों को सीधे लागू करने में सक्षम है, जैसे कि शारीरिक सुविधाओं और बुनियादी सुविधाओं की लंबित आवश्यकताओं को पूरा करना। इसमें सरकारी स्कूलों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान, कंपाउंड दीवार, शौचालय और किचन शेड के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल है, जो सुरक्षित, कार्यात्मक और बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण सुनिश्चित करेंगे।

इसी प्रकार, आंगनवाड़ी भवनों और शौचालयों का निर्माण और रखरखाव प्रारंभिक बाल शिक्षा की नींव को मजबूत करेगा और सेवाओं की गरिमा, स्वच्छता और निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

डॉ. मजूमदार ने यह भी बताया कि ग्रामीण पुस्तकालय भवनों और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों का समावेश औपचारिक शिक्षा से परे सीखने के अवसरों का विस्तार करता है, और ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और वयस्क शिक्षार्थियों को ज्ञान संसाधनों और व्यावसायिक मार्गों तक पहुँच प्रदान करता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के पारित होने से भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया युग शुरू हुआ है। कानूनी रोजगार को 125 दिनों तक बढ़ाना, विकेंद्रीकृत और भागीदारीपूर्ण योजना लागू करना, जवाबदेही मजबूत करना, और सैचुरेशन-आधारित विकास संस्थागत करना, यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सशक्तिकरण, समावेशी विकास और समृद्ध, लचीला ग्रामीण भारत बनाने का रणनीतिक उपकरण बनाता है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2026 का उद्घाटन, “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” थीम विशेष आकर्षण

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले (NDWBF) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कतर के संस्कृति मंत्री H.E. Abdulrahman Bin Hamad Bin Jassim Bin Al Thani, स्पेन के संस्कृति मंत्री H.E. Ernest Urtasun Domènech, स्पेन के संस्कृति मंत्रालय की निदेशक Ms. Maria Jose Gálvez, उच्च शिक्षा सचिव डॉ.vineet Joshi, NBT के अध्यक्ष मिलिंद सुदाकर मराठे, NBT के निदेशक युवराज मलिक, कतर और स्पेन के गणमान्य अतिथि और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने “The Saga of Kudopali: The Unsung Story of 1857” नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो बंगाली, असमिया, पंजाबी, मलयालम, उर्दू और मराठी भाषाओं में उपलब्ध है। साथ ही Saga of Kudopali पर एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर प्रधान ने कहा कि NDWBF 2026, जो दुनिया का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला है, केवल विचारों का संगम ही नहीं बल्कि भारत की सशक्त और जीवंत पाठन संस्कृति का भव्य उत्सव भी है। उन्होंने बताया कि इस साल का थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” और कतर एवं स्पेन जैसे देशों की भागीदारी ने इस सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम का महत्व और बढ़ा दिया है।

मंत्री प्रधान ने कहा कि “The Saga of Kudopali: The Untold Story of 1857” पुस्तक ने संबलपुर की भूमि पर स्वतंत्रता संग्राम के कम ज्ञात अध्यायों को उजागर किया है। यह पुस्तक अब 13 भाषाओं में उपलब्ध है, जिसमें बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम, उर्दू और स्पेनिश सहित हिंदी, अंग्रेजी और उड़िया शामिल हैं। उन्होंने इसे वीर सुरेंद्र साई और कुदोपाली के शहीदों के बलिदानों को सम्मानित करने का सराहनीय प्रयास बताया। इस पहल ने भारत की बहुभाषी परंपरा और वैश्विक संवाद को भी मजबूत किया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पढ़ाई की संस्कृति को जन आंदोलन में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचा या तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सजग, विचारशील और ज्ञान-आधारित पीढ़ी का निर्माण करना है, जो ज्ञान को राष्ट्रनिर्माण की नींव मानती हो।

मंत्री प्रधान ने NBT इंडिया को बधाई दी और पुस्तक मेले के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पुस्तकों और संवाद के माध्यम से देश की पाठन संस्कृति में नई ऊर्जा भर रहा है।

स्पेन के संस्कृति मंत्री Ernest Urtasun Domènech ने स्पेन की भागीदारी पर प्रकाश डाला और कहा कि यह मेले स्पेनिश लेखकों को भारत में प्रस्तुत करने का मूल्यवान अवसर प्रदान करता है, जहाँ स्पेनिश भाषा और साहित्य में रुचि बढ़ रही है। उन्होंने जुआन रामोन हिमेनेज़ और रवींद्रनाथ टैगोर के ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों को याद किया।

कतर के संस्कृति मंत्री H.E. Abdulrahman bin Hamad bin Jassim Al Thani ने कहा कि कतर की भागीदारी दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाती है और संस्कृति और ज्ञान को जनसंपर्क और राष्ट्रनिर्माण की नींव मानने की आवश्यकता पर बल दिया।

दुनिया का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (NDWBF) NBT इंडिया द्वारा शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 10–18 जनवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा और पहली बार मेले में प्रवेश नि:शुल्क किया गया है। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) NDWBF 2026 का सह-आयोजक है। नौ दिवसीय इस मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000+ प्रकाशक, 600+ कार्यक्रम और 1,000+ वक्ता भाग लेंगे और 2 मिलियन से अधिक आगंतुकों की उम्मीद है।

इस वर्ष NDWBF का थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” है। इसके अलावा मेले में वंदे मातरम के 150 वर्ष और सदार वल्लभभाई पटेल @150 के जीवन को समर्पित विशेष प्रदर्शनियां भी होंगी।

NDWBF 2026 का केंद्रीय आकर्षण है थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75”, जो 1,000 वर्ग मीटर में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की स्वतंत्रता के बाद की वीरता, बलिदान और राष्ट्र निर्माण की भूमिका को दर्शाता है। इसे 360 डिग्री अनुभव के रूप में डिज़ाइन किया गया है और इसमें 500+ पुस्तकें, क्यूरेटेड प्रदर्शनी, पोस्टर, डॉक्यूमेंट्री और इंस्टॉलेशन शामिल हैं। प्रमुख आकर्षणों में अर्जुन टैंक, INS विक्रांत और LCA तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परम वीर चक्र पुरस्कार विजेताओं को श्रद्धांजलि, और बुड़गांव 1947 से ऑपरेशन सिंदूर तक के प्रमुख युद्ध और सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल हैं।

परीक्षा पे चर्चा 2026: 4 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को जोड़ती पहल

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज जानकारी दी कि परीक्षा पे चर्चा 2026 ने पिछले वर्ष के गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड 3.56 करोड़ पंजीकरण को पार कर लिया है, और अब तक 4 करोड़ से अधिक ऑनलाइन पंजीकरण हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक वार्षिक संवाद नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह देशभर के युवाओं के लिए तनाव-मुक्त वातावरण बनाने वाली एक राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है।

मंत्री ने सभी छात्रों, जिन्हें Exam Warriors कहा जाता है, से परीक्षा पे चर्चा 2026 में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आता है, छात्र प्रधानमंत्री मोदी के आत्मविश्वास, फोकस और मानसिक कल्याण पर आधारित मास्टरक्लास के माध्यम से परीक्षा से जुड़े तनाव को कम कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री की प्रमुख पहल परीक्षा पे चर्चा (PPC) के लिए पंजीकरण ने ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है, और 8 जनवरी 2026 तक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों सहित 4 करोड़ से अधिक पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं।

इस भारी प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि यह कार्यक्रम छात्रों की मानसिक भलाई पर सकारात्मक प्रभाव डालने में सफल है और परीक्षा के प्रति आत्मविश्वासी, सकारात्मक और तनाव-मुक्त दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहा है। इस कार्यक्रम में भागीदारी की विशालता और विविधता यह दर्शाती है कि परीक्षा पे चर्चा एक सच्चा जन आंदोलन बन चुका है, जो पूरे देश में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को गहराई से जोड़ता है। यह पहल केवल वार्षिक संवाद नहीं रही, बल्कि शिक्षा, मानसिक कल्याण और समग्र विकास पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन गई है।

परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 1 दिसंबर 2025 से MyGov पोर्टल पर शुरू हो गया था। यह पहल शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा वार्षिक रूप से आयोजित की जाती है और यह छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को सीधे प्रधानमंत्री के साथ संवाद करने का अवसर देती है।

जैसे-जैसे परीक्षा का मौसम करीब आता है, पूरे देश के छात्रों को परीक्षा पे चर्चा 2026 में भाग लेने और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के माध्यम से परीक्षा-संबंधित तनाव को प्रबंधित करने और आत्मविश्वास के साथ सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

पंजीकरण करें: 🔗 Pariksha Pe Charcha 2026

निर्मला सीतारमण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक में राज्य मंत्री वित्त पंकज चौधरी, मणिपुर के राज्यपाल, गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम के मुख्यमंत्री, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा आर्थिक मामले, व्यय और राजस्व विभागों के सचिव तथा केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों ने वित्त मंत्री को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट में विचार हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से कई प्रतिभागियों ने राज्यों के पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) को उच्च आवंटन के साथ जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना संपत्ति निर्माण को तेज़ करने में मदद करती है और विधानमंडल वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देती है।

यह उल्लेखनीय है कि 2020-21 से अब तक केंद्र सरकार ने SASCI के तहत राज्यों को 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक जारी किए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया और आश्वस्त किया कि उनके दिए गए सुझावों का उचित रूप से विश्लेषण कर बजट 2026-27 तैयार करने में विचार किया जाएगा।


जयपुर में राजस्थान पुलिस के 8 हजार से अधिक नव-नियुक्त कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र, गृह मंत्री अमित शाह ने किया संबोधन

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज जयपुर में राजस्थान पुलिस के नव-नियुक्त कांस्टेबलों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन राजस्थान पुलिस और राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज 8 हजार से अधिक युवा राजस्थान पुलिस में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये युवा पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुरक्षित राजस्थान के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि एक ओर हजारों जवानों को वर्दी मिली है, वहीं दूसरी ओर उनके परिवारों और परिजनों के मन में एक नई आशा का संचार हुआ है।

अमित शाह ने कहा कि आज मल्टीपर्पज़ इंडोर हॉल का वर्चुअल उद्घाटन किया गया तथा चूरू जिले के रतननगर पुलिस थाने को राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाना सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि आज नियुक्ति पत्र पाने वाले 8 हजार से अधिक कांस्टेबलों में 2500 से अधिक महिला कांस्टेबल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने इन युवाओं को बिना किसी रिश्वत और सिफारिश के, केवल उनकी योग्यता, क्षमता और मेरिट के आधार पर नौकरी दी है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के अंत और मेरिट के सम्मान को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य तभी आगे बढ़ सकता है, जब वहां प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर मिले और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल जी ने पिछली सरकार के दौरान हो रहे पेपर लीक की श्रृंखला को समाप्त कर राजस्थान को इस अभिशाप से मुक्त किया है। उन्होंने कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया तकनीक आधारित, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत आज नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये सभी युवा मार्च 1949 में स्थापित राजस्थान पुलिस का हिस्सा बनेंगे, जिस पर उन्हें गर्व होना चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि राजस्थान पुलिस देश की सबसे सक्षम और उन्नत पुलिस बलों में से एक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं—एक ओर पाकिस्तान के साथ 1070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा, चंबल के बीहड़ और विशाल थार मरुस्थल हैं, वहीं दूसरी ओर विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक किले और महल तथा रणथंभौर, सरिस्का और केवलादेव जैसे अभयारण्य हैं। इन परिस्थितियों में पुलिस की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। उन्होंने नव-नियुक्त जवानों से प्रशिक्षण के दौरान पूरी एकाग्रता और सतर्कता बनाए रखने का आग्रह किया, ताकि वे सुरक्षित राजस्थान के सपने को साकार कर सकें।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भजन लाल सरकार के गठन के बाद राजस्थान में कुल अपराधों में लगभग 14 प्रतिशत और गंभीर अपराधों में 19 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया कि राज्य में हत्या में 25 प्रतिशत, हत्या के प्रयास में 19 प्रतिशत, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 10 प्रतिशत, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 28 प्रतिशत, डकैती में 47 प्रतिशत और लूट में 51 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जब मजबूत इच्छाशक्ति वाली सरकार सत्ता में आती है, तो ऐसा सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

अमित शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल के नेतृत्व में राजस्थान पुलिस ने कई नई पहलें की हैं। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, पुलिस आधुनिकीकरण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। अभय कमांड सेंटर को CCTNS, 112 और ICJS से जोड़ा गया है। कालिका पेट्रोलिंग यूनिट शुरू की गई है और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए आज राजस्थान में I4C की तर्ज पर साइबर हेल्पलाइन शुरू की गई है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नव-नियुक्त जवान ऐसे समय में अपने सेवाकाल की शुरुआत कर रहे हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में 150 साल पुराने ब्रिटिश कानूनों को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता लागू की गई है। यह राजस्थान पुलिस का पहला बैच होगा, जो नए आपराधिक कानूनों के तहत सेवा में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि नए कानून नागरिकों के तन, मन, धन और सम्मान की सुरक्षा की संवैधानिक गारंटी को सशक्त बनाते हैं। नए कानूनों में तकनीक को विशेष महत्व दिया गया है और आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी पांच स्तंभ—पुलिस, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक साइंस लैब और न्यायालय—को ऑनलाइन जोड़ा गया है।

अमित शाह ने कहा कि किसी भी राज्य का विकास तभी संभव है, जब वहां कानून-व्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान में अपराधों में कमी और सजा दर में वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि जब सुशासन वाली सरकार आती है तो सकारात्मक परिणाम निश्चित होते हैं। उन्होंने कहा कि भजन लाल सरकार ने पेपर लीक समाप्त किए, कानून-व्यवस्था मजबूत की और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राजस्थान को देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बना दिया है। आज देशभर के निवेशक राजस्थान आने की होड़ में हैं, जो राज्य के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है।

राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का गांधीनगर में समापन, सतत खनन और महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा पर केंद्र–राज्यों की प्रतिबद्धता

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गांधीनगर, गुजरात- राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर 2026 का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा सतत खनन को आगे बढ़ाने तथा भारत की महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। चिंतन शिविर के दूसरे दिन भारत के खनन क्षेत्र को सशक्त बनाने से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, सतत खनन पद्धतियों और दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। विचार-विमर्श में खनन मूल्य शृंखला के सभी चरणों में घरेलू क्षमताओं को समन्वित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित किया गया।

विचार-विमर्श के दौरान विवेक कुमार बाजपेयी, संयुक्त सचिव, खान मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की रूपरेखा पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, अन्वेषण एवं नीलामी रणनीतियों, घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण से संबंधित पहलों को रेखांकित किया।

भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपशिष्ट ढेरों और टेलिंग्स से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों और द्वितीयक संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिससे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और परिपत्र (सर्कुलर) खनन पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए खनिज उपलब्धता में वृद्धि की जा सके।

सभा को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल, सचिव, खान मंत्रालय ने राष्ट्रीय विकास में खनन क्षेत्र के योगदान को बढ़ाने के लिए खदानों के समयबद्ध संचालन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने त्वरित और जवाबदेह प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि खान मंत्रालय देश की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप खनन गतिविधियों को तेज करने के लिए कदम उठा रहा है।

पंजाब के खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राज्य के खनन क्षेत्र की प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आधुनिक प्रौद्योगिकियों, सतत पद्धतियों और प्रभावी नीतिगत उपायों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि इस क्षेत्र को और सुदृढ़ किया जा सके।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने समावेशी और सतत विकास की आधारशिला के रूप में खनन क्षेत्र को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने खनन से प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधियों के प्रभावी उपयोग, मजबूत खान समापन योजनाओं की आवश्यकता और खनिज ब्लॉकों की समयबद्ध नीलामी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने दोहराया कि खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में राज्य प्रमुख भागीदार हैं और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप उत्तरदायी खनन और घरेलू खनिज सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

दो दिवसीय सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आठ से अधिक राज्यों के खनन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने हेतु सहकारी संघवाद की सशक्त भावना को दर्शाया।


दिल्ली में सड़क अवसंरचना और डी-कंजेशन योजनाओं की समीक्षा, ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य पर जोर

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली में प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति, यातायात भीड़ कम करने की रणनीतियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सेहरावत, दिल्ली के मुख्य सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


चर्चा की शुरुआत करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण–अनुकूल गतिशीलता प्रणालियों के माध्यम से “विकसित भारत” की भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण दिल्ली को एक आदर्श शहर के रूप में विकसित करना है—जो भीड़–मुक्त, बेहतर रूप से जुड़ा हुआ और भविष्य के लिए तैयार हो, साथ ही नागरिकों और यात्रियों के जीवन स्तर में सुधार लाए।

मल्होत्रा ने कहा कि “विकसित दिल्ली”—जो भीड़–मुक्त, जुड़ी हुई और नागरिक–केंद्रित हो—चार स्तंभों पर आधारित है:

  1. भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगाने वाली अवसंरचना, न कि केवल वर्तमान यातायात पर प्रतिक्रिया करने वाली।

  2. एकीकृत योजना—राजमार्गों को शहरी सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जोड़ना।

  3. सतत गतिशीलता—उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन।

  4. लोगों को प्राथमिकता देने वाला डिजाइन—सुरक्षा, पहुंच और सुविधा पर विशेष जोर।

मंत्री ने UER-II के साथ बनने वाली द्वितीयक सर्विस सड़कों की समीक्षा की, जो आस-पास के गांवों और बस्तियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना वर्तमान में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) चरण में है। स्थानीय नागरिकों की पहुंच, सुरक्षा और सर्विस सड़कों को कॉलोनियों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और संस्थागत परिसरों से जोड़ने से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने DDA को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि NHAI, कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, अपने दायित्व समयबद्ध रूप से पूरे करेगी। साथ ही, NHAI और DDA को आपसी समन्वय के साथ आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ाने के निर्देश दिए।

मंत्री हर्ष मल्होत्रा और सांसद कमलजीत सेहरावत ने UER-II के खुलने के बाद द्वारका उप-नगर में बढ़ी यातायात भीड़ पर भी ध्यान दिया। यद्यपि UER-II का निर्माण DDA मास्टर प्लान के अनुरूप किया गया है, लेकिन आंतरिक कॉलोनियों और सेक्टरों में यातायात के उचित वितरण के लिए त्वरित योजना और क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई।

मंत्री ने DDA, नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य हितधारकों को निर्देश दिए कि वे द्वारका उप-नगर में भीड़ कम करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार करें—जैसे आंतरिक सड़कों से होकर गुजरने वाले यातायात का विचलन, हवाई अड्डे और गुरुग्राम कॉरिडोर से बेहतर संपर्क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के साथ बेहतर एकीकरण तथा बुद्धिमान यातायात प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना।

मंत्री ने दिल्ली के उन तीन प्रमुख सड़क कॉरिडोरों की भी समीक्षा की, जिन्हें रखरखाव, मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए PWD से NHAI को सौंपा गया है। ये तीन मार्ग—मथुरा रोड (आश्रम से बदरपुर बॉर्डर), ओल्ड दिल्ली–रोहतक रोड (पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर) और महरौली–गुरुग्राम रोड (महरौली से गुरुग्राम शहर)—कुल 33 किमी लंबे हैं और दिल्ली को पड़ोसी क्षेत्रों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग हैं। मंत्री ने परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने दिल्ली डी-कंजेशन प्लान की भी समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डी-कंजेशन केवल यातायात कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वाहन उत्सर्जन में कमी, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।

दिल्ली डी-कंजेशन प्लान के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

  • दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे (NE-5) का KMPE से UER-II (NH-344M) तक विस्तार, जिससे UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और कटरा के बीच सीधा संपर्क मिलेगा।

  • UER-II (NH-344M) का अलीपुर के पास से दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) तक विस्तार, जो NH-44/दिल्ली आउटर–इनर रिंग रोड के लिए बाईपास का कार्य करेगा।

  • द्वारका एक्सप्रेसवे (शिव मूर्ति, महिपालपुर के पास) से नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज तक सड़क सुरंग का निर्माण, जिससे यातायात का सुगम प्रवाह सुनिश्चित होगा।

मंत्री ने केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) और सेतु बंधन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, धन आवंटन और कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाएं पूर्णता के निकट हैं। मंत्री ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में DDA, NHAI, PWD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली परिवहन विभाग, IGL के बीच लंबित अन्य मुद्दों—जैसे भूमि हस्तांतरण और राइट-ऑफ-वे स्वीकृतियां—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों के शीघ्र समाधान को परियोजनाओं की समय-सीमा बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया।

मंत्री ने सभी एजेंसियों को स्वीकृतियों के लिए समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। सभी एजेंसियों ने निरंतर समन्वय बनाए रखने और लंबित मामलों को शीघ्र निर्णय के लिए उच्च स्तर पर उठाने पर सहमति जताई।

दिल्ली के मुख्य सचिव ने कहा कि समन्वित और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही नागरिकों को वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

समापन टिप्पणी में हर्ष मल्होत्रा ने “विकसित दिल्ली — डी-कंजेस्ट दिल्ली” के लक्ष्य को साकार करने के लिए साझेदारी में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया और सभी विभागों की रचनात्मक भागीदारी की सराहना करते हुए दिल्ली के अवसंरचना परिवर्तन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का विशाखापत्तनम में भव्य समापन, समुद्री विरासत और पर्यटन को मिला नया आयाम

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विशाखापत्तनम में आयोजित दो दिवसीय इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का समापन भव्य रूप से हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इस आयोजन ने विशाखापत्तनम को “भारत की समुद्री विरासत और तटीय संस्कृति के एक प्रकाश-स्तंभ” के रूप में स्थापित किया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

“लाइटहाउस फेस्टिवल की परिकल्पना लोगों, संस्कृति और विरासत के उत्सव के रूप में की गई थी—और विशाखापत्तनम ने सभी अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया है। जीवंत प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों, स्थानीय हस्तशिल्प, विविध व्यंजनों, फैशन प्रस्तुतियों और रात्रिकालीन प्रकाश-सज्जा ने इस स्थल को भारत की तटीय पहचान के जीवंत उत्सव में बदल दिया। सबसे अधिक हर्ष की बात यह रही कि परिवारों, युवाओं, कलाकारों, उद्यमियों, छात्रों और आगंतुकों की उत्साही भागीदारी ने इस महोत्सव को जीवंत, समावेशी और यादगार बनाया।”

समापन सत्र में सर्बानंद सोनोवाल ने आंध्र प्रदेश के पहले लाइटहाउस संग्रहालय को विशाखापत्तनम में विकसित करने की घोषणा की। यह संग्रहालय समुद्री शिक्षा, विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन का केंद्र होगा। 75 लाइटहाउसों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की सफलता के आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार अब देशभर में अतिरिक्त 25 लाइटहाउस विकसित करने का प्रस्ताव रखती है, जिसमें आंध्र प्रदेश में और उपयुक्त स्थलों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि लाइटहाउस-आधारित पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके।

सोनोवाल ने यहां से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विजयपुरम (जंगलिघाट) में कर्मचारियों के क्वार्टरों के पुनर्निर्माण का शिलान्यास वर्चुअल माध्यम से किया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने गोवा के अगुआडा लाइटहाउस में लाइट एंड साउंड प्रोजेक्शन मैपिंग शो का भी वर्चुअल उद्घाटन किया।

सर्बानंद सोनोवाल ने देशभर में समुद्री सुरक्षा, विरासत और पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि असम में राष्ट्रीय जलमार्ग–2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर बोगीबील, सिलघाट, पांडु और बिस्वनाथघाट में चार नए लाइटहाउस बनाए जाएंगे, जिससे अंतर्देशीय जलमार्गों पर नौवहन सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारे लाइटहाउस केवल तटों पर ही नहीं, बल्कि लोगों के हृदय और मन में भी प्रकाश फैलाएं। इस महोत्सव की सफलता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि लाइटहाउस पर्यटन किस प्रकार स्थानीय आजीविका सृजित कर सकता है, समुद्री जागरूकता बढ़ा सकता है और तटीय समुदायों को उनके समुद्री इतिहास से भावनात्मक रूप से जोड़ सकता है।”

विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) के बीच विशाखापत्तनम में लाइटहाउस संग्रहालय के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। इस सहयोग के अंतर्गत VPA बंदरगाह परिसर के पुराने लाइटहाउस क्षेत्र में 3,156 वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराएगा। संग्रहालय में लाइटहाउसों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें प्राचीन नौवहन साधनों से लेकर आधुनिक समुद्री सुरक्षा प्रणालियों तक के विकास और भारत की समुद्री विरासत में उनकी भूमिका को दर्शाया जाएगा।

मोदी सरकार की लाइटहाउस पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) में निर्माणाधीन 77 मीटर ऊंचे लाइटहाउस संग्रहालय का उल्लेख किया, जिस पर ₹266 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह विश्व के सबसे बड़े समुद्री संग्रहालयों में से एक होगा और इसका लाइटहाउस संग्रहालय दुनिया का सबसे ऊंचा माना जाएगा। यह प्रतिष्ठित संरचना लाइटहाउसों के इतिहास और विकास को प्रदर्शित करेगी तथा भारत की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं का सशक्त प्रतीक बनेगी।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल के अवसर पर विशाखापत्तनम पोर्ट पर ₹230 करोड़ की परियोजनाएं

दिन में इससे पहले, इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) में ₹230 करोड़ की बंदरगाह अवसंरचना विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करना, जहाज मरम्मत क्षमताओं का विस्तार करना, प्रशासनिक अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना और बंदरगाह कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं में सुधार करना है, जो विश्वस्तरीय, भविष्य-तैयार समुद्री अवसंरचना के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के बंदरगाह विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इंजन के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं। आज विशाखापत्तनम पोर्ट पर शुरू की गई पहलें क्षमता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करती हैं, विजाग की आधुनिक समुद्री द्वार के रूप में भूमिका को मजबूत करती हैं और भारत के पूर्वी तट को सशक्त बनाती हैं।”

परियोजनाओं में LPG बर्थ पर अग्निशमन सुविधाओं का उन्नयन शामिल है, जिससे 40,000 DWT और उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को संभाला जा सकेगा। ₹52.24 करोड़ की यह परियोजना बंदरगाह की सुरक्षा तैयारी को काफी मजबूत करेगी।

जहाज मरम्मत और रखरखाव क्षमता बढ़ाने के लिए ORS ड्राई डॉक में अवसंरचना सुविधाओं के उन्नयन और विकास की भी शुरुआत की गई, जिस पर ₹35.87 करोड़ का निवेश होगा। यह परियोजना समुद्री मरम्मत गतिविधियों को समर्थन देगी और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। साथ ही, सर्बानंद सोनोवाल ने इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर (ISTC) की स्थापना की घोषणा की, जो इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (IMU) के अंतर्गत विशाखापत्तनम में स्थापित किया जाएगा। यह जहाज निर्माण डिजाइन, मानव संसाधन प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधाओं के समन्वय में भारत की क्षमताओं को बढ़ाएगा।

इसके अतिरिक्त, ₹97.70 करोड़ की लागत से नए प्रशासनिक कार्यालय भवन और ₹44.20 करोड़ की लागत से हार्बर पार्क में आवासीय अपार्टमेंट्स के निर्माण की भी शुरुआत की गई, जिससे कर्मचारियों के कल्याण और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

पिछले एक दशक में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2024–25 में देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों ने 855 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया, जबकि जहाजों का औसत टर्नअराउंड समय 2014 के 96 घंटों से घटकर 2025 में 49.5 घंटे हो गया। आज, नौ भारतीय बंदरगाह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल हैं, जिनमें विशाखापत्तनम पोर्ट कंटेनर ट्रैफिक में शीर्ष 20 में है। सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत ₹1.41 लाख करोड़ की 272 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, वहीं अंतर्देशीय जलमार्गों पर कार्गो परिवहन 700% से अधिक बढ़कर लगभग 150 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल भारत की समुद्री विरासत और लाइटहाउस पर्यटन के इस परिवर्तन को प्रदर्शित करने का एक प्रमुख मंच बनकर उभरा है। पहली कड़ी सितंबर 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा में, दूसरी अक्टूबर 2024 में पुरी (ओडिशा) में और तीसरी कड़ी विशाखापत्तनम में आयोजित की गई। यह महोत्सव निदेशालय जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) द्वारा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अंतर्गत आयोजित किया गया।


साधु के भेष में भीख मांगने का मामला: संदेह के आधार पर दो युवक हिरासत में

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 भिलाई (जामुल)। जामुल थाना क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब साधु के भेष में घर-घर भीख मांग रहे एक व्यक्ति को स्थानीय लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों के चलते पकड़ लिया। मामले की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और युवक को जामुल थाना पुलिस के हवाले कर दिया।


स्थानीय लोगों के अनुसार, साधु का भेष धारण कर तंबूरा बजाते हुए “राम-राम” और “जय श्रीराम” का उद्घोष करते हुए भीख मांग रहे व्यक्ति पर उन्हें शक हुआ। शंका के चलते लोगों ने उससे भगवान राम से जुड़े कुछ सामान्य प्रश्न पूछे, जिनका वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। सवालों के दौरान वह घबरा गया और रोने लगा।

मामले की सूचना बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर युवक को थाने पहुंचाया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मोर्या टॉकीज क्षेत्र के पास से एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है।

हिंदू संगठन से जुड़ी ज्योति शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान युवक घबरा गया और बार-बार छोड़ने की बात कहने लगा। संदेहास्पद गतिविधियों को देखते हुए उसे पुलिस के सुपुर्द किया गया। संगठन का दावा है कि यह एक अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि पांच लोगों का समूह हो सकता है।

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के अनुसार, पूछताछ के दौरान एक युवक ने अपना नाम हवलदार, पिता का नाम मुस्तफा बताया और खुद को मुस्लिम बताया। थाने में उसने अपना आधार कार्ड भी दिखाया है। संगठन का दावा है कि सभी युवक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

पुलिस का पक्ष

इस पूरे मामले पर सीएसपी छावनी प्रशांत कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। फिलहाल संदेह के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मामला केवल भेष बदलकर भीख मांगने का है या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य है। पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक लंच पर किया संवाद

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक अनौपचारिक लंच का आयोजन किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह पिछले एक दशक से समय-समय पर अपने आवास पर मीडिया के साथ इस प्रकार की अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते रहे हैं। यह आयोजन पत्रकारों के साथ खुले और सहज संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

इस अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन सुधार और राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने विभिन्न नीतिगत पहलों, उभरते जनहित के विषयों और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए तथा अनौपचारिक सुझाव भी दिए।

संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने SHANTI अधिनियम, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की भूमिका और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

सरकार के सुधार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि विज्ञान सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि शासन सुधार तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित हो रहे हैं। उन्होंने CPGRAMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रशासनिक और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि देखने को मिल रही है, जिसके चलते विदेशी छात्र भारत आकर इन मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया, जिससे पेंशनधारकों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी डिजिटल सुधार पहलें सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ वर्किंग” की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और विचार से प्रभाव तक की यात्रा तेज होगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 जैसे आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी साझा की, जो भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने लैवेंडर क्रांति जैसे विज्ञान आधारित सामाजिक-आर्थिक अभियानों का भी उल्लेख किया, जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्थानीय उद्यमिता को जोड़कर आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

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पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया के साथ निरंतर संवाद के महत्व पर जोर देते हुए पत्रकारों को जटिल नीतिगत पहलों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में सरकार का अहम साझेदार बताया। उन्होंने सूचित जन विमर्श और रचनात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।

यह अनौपचारिक लंच खुले संवाद और आपसी सराहना के माहौल में संपन्न हुआ, जिसने सरकार और मीडिया के बीच पारदर्शिता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) द्वारा बेंगलुरु में एक दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन

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राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) ने 10 जनवरी 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक स्टेट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन (KSCAA) के सहयोग से एक दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया।

इस आउटरीच कार्यक्रम का उद्घाटन NFRA के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने देश की विकास यात्रा में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे के पिछले कई दशकों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने KSCAA की सराहना करते हुए कहा कि संस्था अपने सदस्यों के कौशल और क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

 गुप्ता ने इस अवसर पर इस बात पर बल दिया कि भारतीय ऑडिट फर्मों, विशेष रूप से स्मॉल एंड मीडियम प्रैक्टिशनर्स (SMPs), को अपनी दक्षताओं में निरंतर वृद्धि करनी होगी ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें, विशेषकर बड़े और जटिल संस्थानों के ऑडिट के क्षेत्र में।

बेंगलुरु में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ऑडिट प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया, जिनमें SMPs के साथ-साथ बड़ी ऑडिट फर्मों के पेशेवर भी शामिल थे। विभिन्न आकार की फर्मों से आए प्रतिभागियों की भागीदारी ने सार्थक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान तथा ऑडिट गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों पर गहन चर्चा को संभव बनाया, जिससे समग्र विमर्श और अधिक समृद्ध हुआ।

NFRA के पूर्णकालिक सदस्य पी. डैनियल ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने NFRA की ऑडिट निरीक्षण (इंस्पेक्शन) रूपरेखा और ऑडिट गुणवत्ता में सुधार में निरीक्षणों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि निरीक्षण से प्राप्त निष्कर्ष ऑडिट फर्मों के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक का कार्य करते हैं और प्रणालियों, प्रक्रियाओं तथा पेशेवर विवेक को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।

आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत ऑडिट प्रैक्टिस के प्रमुख तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें ऑडिट रणनीति दस्तावेजीकरण, ऑडिट सैंपलिंग, महत्वपूर्ण त्रुटि जोखिम (Risk of Material Misstatements) तथा ऑडिट का निष्कर्ष निकालने जैसे विषय शामिल थे। इन सत्रों का उद्देश्य दैनिक पेशेवर कार्यों में ऑडिट गुणवत्ता को बेहतर बनाने हेतु व्यावहारिक जानकारियाँ प्रदान करना था।

NFRA हाल के समय में “Creating Better Financial Reporting Ecosystem” थीम के अंतर्गत देशभर में ऑडिट प्रैक्टिशनर्स के लिए ऐसे आउटरीच कार्यक्रमों और कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित कर रहा है, जिसका उद्देश्य ऑडिट गुणवत्ता को सुदृढ़ करना और पेशेवर क्षमताओं का विस्तार करना है।

इस पहल के तहत NFRA द्वारा इससे पूर्व हैदराबाद (26 सितंबर 2025) और इंदौर (06 अक्टूबर 2025) में भी आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का किया शुभारंभ

सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभाग एवं 5 जिलों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

रायपुर- गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करतेभुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में  सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद, श्रद्धेय अटल जी की अंत्योदय की अवधारणा और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व से हमने सुशासन को गहराई से समझा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, जिसके पीछे सुशासन सबसे बड़ा कारक है। डिजिटल भुगतान में भारत का विश्व में अग्रणी स्थान भी गुड गवर्नेंस का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव  विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी। 

जिला श्रेणी के विजेता नवाचार

दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।

नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार

इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया।एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, एससीएस गृह मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।

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