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सफलता की कहानी- पीडिया में 21 साल बाद गूंजी स्कूल की घंटी, 539 बच्चों के जीवन में लौटी शिक्षा की नई उम्मीद

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कभी बंद पड़े स्कूलों में फिर लौटी रौनक, बदलते बस्तर की नई तस्वीर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।

प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत

पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।

बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई

माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।

इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य

कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

बदलते बस्तर की नई पहचान

पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने से पहले सरकार ने प्रभावित परिवारों को दिया पक्का आवास

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अतिक्रमण हटाने से प्रभावित 65 परिवारों का नया रायपुर में होगा सम्मानजनक पुनर्वास

रायपुर- नया रायपुर के ग्राम नकटी की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास और मानवीय संवेदनशीलता का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। शासन -प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित 65 परिवारों को बेघर छोड़ने के बजाय उन्हें नया रायपुर अटल नगर के सेक्टर-30 स्थित सर्वसुविधायुक्त ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित परिवारों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि बिजली, पेयजल, सड़क, सीवर, सामुदायिक भवन, उद्यान और अन्य शहरी सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो, इसके लिए आठ सदस्यीय समिति भी गठित कर दी गई है।

ग्राम नकटी की शासकीय भूमि पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा  लगभग 38 एकड़ भूमि में से करीब 12 एकड़ भूमि विशेष योजना के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष 26 एकड़ भूमि पर मंडल की स्ववित्तीय सामान्य आवास योजना विकसित की जाएगी।

भूमि पर अवैध रूप से निवासरत परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने 65 पात्र परिवारों की सूची गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को सौंपी है। इस सूची में शामिल परिवारों को 29 जून 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में निर्मित रिक्त ईडब्ल्यूएस आवासों का अस्थायी आवंटन कर दिया गया।

पुनर्वास को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए सरकार ने आवासों को रहने योग्य बनाने का काम भी तेज़ी से शुरू किया। आवासों में ट्यूबलाइट, पंखे और विद्युत व्यवस्था पूरी कर दी गई है।

सरकार ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्यालय के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में उपयुक्त, कार्यपालन अभियंता, संपदा अधिकारी और सहायक अभियंताओं सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र परिवार को निर्धारित आवास मिले और पुनर्वास पूरी तरह पारदर्शी एवं बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो।

सेक्टर-30 में कुल 1376 ईडब्ल्यूएस (जी+3) आवास निर्मित हैं। इनमें चतुर्थ तल पर उपलब्ध 109 रिक्त आवास पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए हैं। 31.45 वर्गमीटर (338.40 वर्गफीट) क्षेत्रफल वाले इन आवासों के परिसर में पक्की कंक्रीट सड़कें, वॉकिंग ट्रैक, सार्वजनिक उद्यान, सामुदायिक भवन, यूटिलिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीवर नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति जैसी सभी आवश्यक शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता केवल शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसी सोच के साथ आवासों के आवंटन से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक हर चरण की निगरानी की जा रही है ।

एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

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एआई मिशन के जरिए युवाओं को कौशल, रोजगार और नवाचार के मिलेंगे नए अवसर

शासन-प्रशासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एआई आधारित व्यवस्था होगी विकसित

मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु और डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों - एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग - पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

 अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं  चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

सरकारी योजना से बदली जिंदगीः मड़कम देवा ने झींगा पालन से लिखी सफलता की नई कहानी

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एक साल में 5 लाख रूपए की कमाई, दूर-दूर से खरीदने पहुंच रहे ग्राहक

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी जैसे आयवर्धक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

छत्तीसगढ के सुकमा जिले के दुब्बाटोटा गांव के किसान मड़कम देवा इसकी प्रेरक मिसाल बनकर उभरे हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने झींगा और मछली पालन शुरू किया और आज आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

सरकारी सहायता से मिली नई शुरुआत

मड़कम देवा ने मत्स्य पालन विभाग की योजना के तहत तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपए का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 4.20 लाख रुपये का अनुदान शामिल था। इसके अलावा क्रेड़ा विभाग से अनुदान पर सोलर पंप मिलने से उन्हें 24 घंटे सिंचाई और तालाब में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इससे उनका व्यवसाय शुरू करना आसान हो गया।

प्रशिक्षण और मेहनत ने दिलाई बड़ी सफलता

मड़कम देवा ने कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। वैज्ञानिक तरीके से झींगा और मछली पालन करने का परिणाम यह रहा कि इस वर्ष जून माह में उन्होंने लगभग 2.50 क्विंटल झींगा और 15 क्विंटल मछली का उत्पादन कर करीब 5 लाख रूपए की आय अर्जित की।

उनके झींगा और मछली की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि आसपास ही नहीं, दूर-दूर से लोग दुब्बाटोटा पहुंचकर खरीदारी करते हैं।

रायपुर में हुआ सम्मान

झींगा पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मड़कम देवा को सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी मेहनत और शासकीय योजनाओं के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा में मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएं हैं। मड़कम देवा जैसे किसान आज जिले के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे लाभकारी व्यवसायों से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं।

आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ता कदम

झींगा और मछली पालन कम भूमि और कम लागत में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आज अनेक किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मड़कम देवा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।

भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (SCMC) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

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भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (Sub Committee Meeting on Military Cooperation - SCMC) की 12वीं बैठक 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मलेशियाई सशस्त्र बलों के सहायक चीफ ऑफ स्टाफ (रक्षा संचालन एवं प्रशिक्षण) मेजर जनरल अमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।

प्रमुख बिंदु

  • दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

  • बैठक में सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, स्टाफ वार्ता, क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग तथा उभरते क्षेत्रों में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

रक्षा सहयोग को मिलेगा और बल

  • दोनों देशों ने नियमित द्विपक्षीय गतिविधियों की सफलता की सराहना की।

  • सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में अधिक भागीदारी, पेशेवर संवाद और सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी।

  • रक्षा उद्योग, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग

  • दोनों पक्षों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में एक-दूसरे की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts' Working Group on Counter-Terrorism) के तहत व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

  • बैठक में भारत-मलेशिया उन्नत रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) में रक्षा सहयोग को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया।

  • दोनों देशों ने आपसी विश्वास, साझा हितों और सुरक्षित, स्थिर एवं समृद्ध इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि के आधार पर रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अन्य प्रमुख गतिविधियां

  • मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की।

  • प्रतिनिधिमंडल ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली स्थित डीपीएसयू भवन का भी दौरा किया।

  • बैठक से पहले मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर पुष्पचक्र अर्पित कर भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

​सेंचुरी पार कर चुका मुरूमसिल्ली बाँध पूरी तरह सुरक्षित

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अफवाहों पर लगा विराम, मानसून से निपटने जल संसाधन विभाग मुस्तैद

​रायपुर- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के मुकुटमणि और गंगरेल जलाशय के मुख्य मददगार मुरूमसिल्ली बाँध को लेकर सोशल मीडिया पर तैर रहीं तमाम तरह की आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 103 साल पुराना यह ऐतिहासिक बाँध पूरी तरह सुरक्षित, अडिग और मजबूत है। मानसून की आहट के बीच बाँध की दीर्घकालिक सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर विभाग न केवल सतर्क है, बल्कि विशेषज्ञ अभियंताओं की देखरेख में नियमित तकनीकी परीक्षण और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

दरअसल, मानसून के आगमन के साथ ही बांधों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की अफवाहें सिर उठाने लगती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की तथ्यहीन खबरों का शिकार न हों और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

​शीर्ष तकनीकी टीम ने परखी एक-एक दीवार

परियोजना की संवेदनशीलता और इसके महत्व को देखते हुए हाल ही में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता  के नेतृत्व में शीर्ष अधिकारियों के एक दल ने मुरूमसिल्ली बाँध का सघन और विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय टीम में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता  तथा अनुविभागीय अधिकारी शामिल थे।

इस दौरान टीम ने बाँध के तटबंधों, संरचनात्मक स्थिति और जल निकासी (स्लुइस गेट्स) की व्यवस्था का गहन बारीकी से परीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाँध की दीवारों या मुख्य ढांचे में किसी भी प्रकार की दरार या क्षति नहीं है।

​रेनकट रोकने के लिए 'वर्षा पूर्व' सुरक्षा चक्र

तेज बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव (रेनकट) से बाँध के किनारों को सुरक्षित रखना एक सामान्य और अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया है। मुख्य अभियंता ने इसी कड़ी में वर्षा पूर्व तटबंधों के संरक्षण और मरम्मत कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अमला इस समय युद्धस्तर पर मुस्तैद होकर इन सुरक्षात्मक कार्यों को अंजाम दे रहा है, ताकि आने वाले समय में बाँध की कार्यक्षमता और जन सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहे।

​भविष्य के संकट से निपटने के लिए जल प्रबंधन

इस वर्ष पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए विभाग अभी से बेहद वैज्ञानिक और दूरदर्शी जल प्रबंधन अपना रहा है। वर्तमान में मुरूमसिल्ली बाँध अपनी क्षमता के शिखर की ओर बढ़ रहा है। यहाँ 130.07 एमसीएम (80.29 प्रतिशत) जल संग्रहण हो चुका है, जबकि मुख्य गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (42.50 प्रतिशत) पानी दर्ज किया गया है।​चूंकि मुरूमसिल्ली में जलस्तर काफी बेहतर स्थिति में है, इसलिए भविष्य में यदि कम वर्षा या अवर्षा के हालात बनते हैं, तो भी सिंचाई और पेयजल का संकट न हो, इस रणनीति के तहत मुरूमसिल्ली से नियंत्रित और सुरक्षित मात्रा में पानी गंगरेल जलाशय की ओर छोड़ा जा रहा है। 

वर्ष 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बाँध केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी व्यवस्था का एक ऐतिहासिक हिस्सा है। वर्तमान में इसके रख-रखाव के लिए किए जा रहे सभी कार्य पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।


वन विभाग की बड़ी कार्रवाई : दो बाघ की खाल के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

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सीमावर्ती क्षेत्र में संयुक्त अभियान की सफलता, न्यायालय ने भेजा न्यायिक हिरासत में’

रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देशन में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग की संयुक्त टीम ने दो बाघों की खाल के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर स्थित बांदे परिक्षेत्र में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर गोपनीय सूचना के आधार पर की गई।

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के निवासी ब्येश्वर और बाबूराव के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव बाघ की दो खालों की अवैध तस्करी कर रहे थे। संयुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।

इस कार्रवाई में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के उत्तरी एवं मध्य क्षेत्र, राज्य उड़नदस्ता दल (छत्तीसगढ़ वन विभाग), एंटी पोचिंग यूनिट (यूएसटीआर) तथा स्थानीय वन अमले ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है तथा जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति सरकार की सख्ती

छत्तीसगढ़ सरकार वन्यजीव संरक्षण और वन्यजीव की अवैध तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। वन विभाग द्वारा विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित निगरानी और संयुक्त अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों के संरक्षण को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वन विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।


फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर रवाना हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण आज फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुईं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

प्रमुख बिंदु

  • वित्त मंत्री भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic & Financial Dialogue - EFD) की सह-अध्यक्षता फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलां लेस्क्योर (Roland Lescure) के साथ ऐक्स-आं-प्रोवांस (Aix-en-Provence) में करेंगी।

  • इस संवाद के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

उद्योग जगत से संवाद

  •  सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (CEOs) के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी।

  • साथ ही, प्रमुख उद्योगपतियों के साथ राउंडटेबल चर्चा में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, संरचनात्मक सुधारों, निवेश के अवसरों और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगी।

वैश्विक आर्थिक मंच में भागीदारी

  • वित्त मंत्री Les Rencontres Économiques d'Aix-en-Provence में "नए मध्यम वर्ग की वृद्धि को कैसे बढ़ावा दिया जाए" विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेंगी।

  • यह यूरोप के प्रमुख वार्षिक आर्थिक मंचों में से एक है, जहां विभिन्न देशों के सरकार प्रमुख, मंत्री, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

ITER और साइबर सुरक्षा केंद्र का दौरा

  •  सीतारमण कैडाराश (Cadarache) स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का दौरा करेंगी।

  • ITER दुनिया की सबसे बड़ी नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश सहभागी हैं।

  • वह Campus Cyber का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र है। इस दौरे का उद्देश्य साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना है।

क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा

  • वित्त मंत्री प्रोवांस-आल्प्स-कोट डी'अज़ूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनो मुसेलियर (Renaud Muselier) से मुलाकात करेंगी।

  • दोनों पक्ष निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

भारतीय समुदाय से संवाद

  • अपनी यात्रा के अंतिम चरण में सीतारमण फ्रांस में बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ एक विशेष कार्यक्रम में भी भाग लेंगी।

डीआरआई ने सोना तस्करी और विदेशी मुद्रा तस्करी के बड़े रैकेट का किया भंडाफोड़

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राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने सीमा पार से होने वाली सोने की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए दिल्ली स्थित एक बड़े सोना तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह पूर्वोत्तर भारत से अलग-अलग ट्रेनों के माध्यम से कई वाहकों (कैरियर्स) का उपयोग कर विदेशी मूल का सोना दिल्ली पहुंचाता था। पकड़े जाने के जोखिम को कम करने के लिए तस्करों को अलग-अलग समय पर भेजा जाता था। गिरोह दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध रूप से सोना गलाने (मेल्टिंग) की इकाई भी संचालित कर रहा था।

प्रमुख घटनाक्रम

  • 26 जून 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने एक समन्वित अभियान में न्यू कूचबिहार रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल) और मानसी जंक्शन (बिहार) पर दो वाहकों को पकड़ा।

  • इनके पास से शरीर पर छिपाकर रखा गया लगभग 2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया।

  • इसी दौरान दिल्ली में भी दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लगभग 1.2 किलोग्राम तस्करी का सोना बरामद किया गया।

  • जांच के दौरान दिल्ली में संचालित एक अवैध सोना गलाने की इकाई का भी पता चला।

  • इस कार्रवाई में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

महिला तस्कर से 3.3 किलोग्राम सोना बरामद

  • उसी दिन एक अन्य अभियान में सैरांग से कोलकाता जा रही एक महिला यात्री को ट्रेन में पकड़ा गया।

  • उसके विशेष रूप से तैयार किए गए कमर बेल्ट में छिपाकर रखी गई विदेशी भाषा के चिन्हों वाली 20 सोने की ईंटें, जिनका कुल वजन लगभग 3.3 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

  • महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

चेन्नई में विदेशी मुद्रा तस्करी का खुलासा

  • डीआरआई ने चेन्नई एयर कार्गो में घरेलू हवाई कार्गो के माध्यम से विदेशी मुद्रा की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भी पर्दाफाश किया।

  • अधिकारियों ने 7,58,500 अमेरिकी डॉलर (USD) और 35,00,000 थाई बहत (Thai Baht) बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹8.15 करोड़ है।

  • इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • जांच में पता चला कि इस विदेशी मुद्रा को भारत से अवैध रूप से बाहर भेजकर उससे सोना और चांदी की तस्करी के लिए वित्तपोषण किया जाता था।

बेंगलुरु में आगे की कार्रवाई

  • जांच के आधार पर दुबई से लौट रहे एक व्यक्ति को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पकड़ा गया।

  • उसके पास से 1.8 किलोग्राम सोना बरामद हुआ।

  • उसके घर की तलाशी में लगभग 42 किलोग्राम चांदी, 700 ग्राम सोने के आभूषण तथा ₹26.67 लाख भारतीय मुद्रा जब्त की गई।

  • जांच से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में अवैध रूप से जुटाई गई विदेशी मुद्रा को विदेश भेजकर उसी धन से सोना और चांदी की संगठित तस्करी की जा रही थी।

कुल बरामदगी

डीआरआई की इन संयुक्त कार्रवाइयों में:

  • लगभग 9 किलोग्राम विदेशी मूल का तस्करी का सोना,

  • 42 किलोग्राम चांदी,

  • ₹8.15 करोड़ मूल्य की विदेशी मुद्रा,

  • ₹26.67 लाख भारतीय नकदी जब्त की गई।

इन मामलों में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

रायपुर में हनीट्रैप का सनसनीखेज मामला, आपत्तिजनक फोटो वायरल करने की धमकी देकर 2.65 लाख की वसूली

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी थाना क्षेत्र में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने दो महिलाओं पर नशीला पदार्थ पिलाकर आपत्तिजनक तस्वीरें लेने और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लाखों रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बीरगांव के गांधी नगर निवासी दुलीचंद कुम्हार की पहचान अशोक नगर श्मशान घाट के पास रहने वाली मांगेश्वरी सिंह उर्फ जोगेश्वरी उर्फ रिंकी से थी। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि 6 जनवरी 2026 को महिला के बुलाने पर वह उसके घर पहुंचा, जहां एक अन्य महिला भी मौजूद थी।

आरोप है कि दोनों महिलाओं ने उसे जबरन शराब पिलाई, जिसमें नशीला पदार्थ मिलाया गया था। इसके बाद बेहोशी की हालत में उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींच ली गईं। पीड़ित का कहना है कि दो दिन बाद उसे फिर बुलाया गया और तस्वीरें दिखाकर परिवार व सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देते हुए पैसों की मांग की गई।

बदनामी के डर से पीड़ित ने आरोपियों को अलग-अलग किस्तों में रकम देना शुरू कर दिया। शिकायत के मुताबिक जनवरी से जून 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से कुल 2 लाख 65 हजार रुपये आरोपियों को दिए गए। इसके बावजूद आरोपी लगातार और अधिक पैसों की मांग करते रहे तथा तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाते रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुढ़ियारी थाना पुलिस ने दोनों महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों

नाव्या मलिक ड्रग्स सिंडिकेट केस में ED की एंट्री, मनी ट्रेल और पूरे नेटवर्क की होगी जांच

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 रायपुर। राजधानी के चर्चित नाव्या मलिक ड्रग्स सिंडिकेट मामले में अब Enforcement Directorate (ED) की एंट्री हो गई है। एजेंसी अब ड्रग्स कारोबार से जुड़े मनी ट्रेल, आर्थिक लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जांच करेगी। जानकारी के मुताबिक, ED ने रायपुर पुलिस से मामले की चार्जशीट और जांच से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।


पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, नाव्या मलिक का संपर्क शहर के कई कारोबारी, इवेंट आयोजकों और कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल लोगों से था। जांच में दावा किया गया है कि Delhi से ड्रग्स मंगाकर Raipur के कई होटल, पब और टेक्नो पार्टियों में इसकी सप्लाई की जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, दिल्ली का एक कथित सप्लायर, जिसे नेटवर्क में ‘टोयोटा’ के नाम से जाना जाता था, ड्रग्स उपलब्ध कराता था। गिरफ्तार आरोपी मोनू बिश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वह कई बार ड्रग्स की खेप रायपुर लाकर नाव्या और उसके नेटवर्क तक पहुंचा चुका था।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि जांच के दौरान कुछ कारोबारी और इवेंट आयोजकों के नाम सामने आए, जिनसे पुलिस ने पूछताछ की। हालांकि, केवल नाम सामने आने का अर्थ किसी व्यक्ति के दोषी होने से नहीं है और इनमें से सभी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

पुलिस के अनुसार, नाव्या मलिक को अगस्त 2025 में Mumbai से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हाई-प्रोफाइल पार्टियों और निजी आयोजनों में ड्रग्स की सप्लाई करती थी। उसके मंगेतर अयान परवेज को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। चार्जशीट में दावा किया गया है कि अयान द्वारा दी गई सूचना के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क तक पहुंच सकी।

अब Enforcement Directorate यह जांच करेगी कि ड्रग्स कारोबार से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, साथ ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन में किन-किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: दो बाघों की खाल और पैंगोलिन शल्क बरामद

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 जगदलपुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। Wildlife Crime Control Bureau (WCCB), वन विभाग, पुलिस और Udanti-Sitanadi Tiger Reserve की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन सेफ पैसेज के तहत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो बाघों की खाल बरामद की गई है।


जानकारी के अनुसार संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को एक मोटरसाइकिल समेत पकड़ा। दोनों के खिलाफ पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल (जिला कांकेर) में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 दर्ज किया गया है।

जांच के दौरान आरोपियों के ठिकानों से पैंगोलिन के शल्क भी बरामद किए गए हैं। इससे अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय वन्यजीव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क के संचालन की आशंका गहरा गई है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी कथित तौर पर पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं। वहीं, आशंका जताई जा रही है कि बरामद बाघों का शिकार Indravati National Park–अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया हो सकता है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

वन विभाग ने इस कार्रवाई को मध्य भारत के करीब 400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव तस्करी और शिकार में शामिल अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा।

आज से छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी, नई दरें लागू

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छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आज से बिजली का उपयोग महंगा हो गया है। 1 जुलाई से राज्य में नई बिजली दरें लागू हो गई हैं। नई दरों के अनुसार औसतन 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।

नई दरों के लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना होगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी नई टैरिफ व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।

बिजली कंपनियों का कहना है कि उत्पादन, खरीद और वितरण लागत में वृद्धि को देखते हुए टैरिफ में संशोधन आवश्यक था। वहीं, उपभोक्ता संगठनों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की बात कही है।

नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो चुकी हैं और अब इसी के अनुसार बिजली बिल जारी किए जाएंगे।

बस्तर में खाली हुए सुरक्षा कैंप अब बनेंगे स्कूल, वर्षों बाद फिर गूंजेगी बच्चों की पढ़ाई

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और हालात सामान्य होने के बाद एक बड़ी पहल शुरू की गई है। जिन सुरक्षा कैंपों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा, ताकि वर्षों से शिक्षा से वंचित बच्चों को फिर से पढ़ाई का अवसर मिल सके।

लंबे समय तक नक्सली हिंसा के कारण कई सरकारी स्कूल बंद हो गए थे या सुरक्षा बलों के अस्थायी कैंप के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। इससे हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और कई गांवों में शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप हो गई थी।

अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद प्रशासन इन भवनों को दोबारा शिक्षा के लिए तैयार कर रहा है। आवश्यक मरम्मत, फर्नीचर, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद इन भवनों में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों को फिर से खोलना ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि शिक्षा के विस्तार से क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे।

स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे बस्तर में शांति, विकास और शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

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