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जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

फूल और मिठाई देकर नर्सों का सम्मान

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महासमुंद- नर्स डे के अवसर पर मां डिजिटल एक्स-रे एवं पैथोलॉजी सर्विसेस व माँ मेडिकल स्टोर के संचालक ललित कुमार चक्रधारी ने जिला अस्पताल तथा बागबाहरा सीएचसी के सभी अलग-अलग वार्ड सर्जिकल वार्ड, मेडिसिन वार्ड, डेलीवरी वार्ड, चाइल्ड वार्ड, इमर्जेंसी वार्डों में जाकर वहां उपस्थित सभी नर्सों का सम्मान गुलाब और मिठाई देकर किया। ललित कुमार चक्रधारी ने कहा कि अस्पताल में जो स्टाफ नर्स रहते हैं उनका मरीजों की देखभाल में बड़ा योगदान रहता है। डॉक्टर के इलाज के  बाद नर्स का सबसे बड़ा दायित्व रहता है। ऑपरेशन थिएटर से लेकर मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज तक वह मरीज का समय-समय पर ड्रेसिंग दवाइयां एवं उनके भोजन व्यवस्था को ध्यान में रखकर बेहतर सेवा प्रदान करती हैं। नर्स की सेवा अतुलनीय है।



भूपेंद्र यादव ने गिर में ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट इवेंट का उद्घाटन किया; भारत करेगा IBCA समिट 2026 की मेजबानी नई दिल्ली में

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज गुजरात के सासन गिर में ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट इवेंट का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) समिट 2026 के प्री-सम्मिट स्पीशीज इवेंट्स की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किया गया।

इस अवसर की अध्यक्षता गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वर्चुअल माध्यम से की। कार्यक्रम में गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, राज्य के वन राज्य मंत्री प्रवीण माली सहित आईबीसीए, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वसुधैव कुटुम्बकम्” के विजन के लिए आभार व्यक्त किया, जिसके कारण आईबीसीए की स्थापना एक वैश्विक बिग कैट संरक्षण पहल के रूप में संभव हुई। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण ने दुनिया भर में बिग कैट संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई है।

उन्होंने गिर क्षेत्र में एशियाटिक शेर के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि गिर इस बात का उदाहरण है कि आर्थिक विकास और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने बताया कि बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को भी एशियाटिक शेरों के प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत 1–2 जून 2026 को नई दिल्ली में पहली बार IBCA समिट 2026 की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “Save Big Cats, Save Humanity, Save Ecosystem” थीम के साथ यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर संरक्षण सहयोग को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि सासन गिर भारत की जैव विविधता और संरक्षण प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। गिर का शेर केवल गुजरात की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश की शान, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एशियाटिक शेर जनसंख्या आकलन, जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल सेंटर और बर्दा वन्यजीव अभयारण्य के विकास जैसे कदम मिशन मोड में आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 2025 में ग्रेटर गिर क्षेत्र में शेरों की संख्या बढ़कर लगभग 891 हो गई है, जो 2020 की तुलना में 32 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है। एशियाटिक शेर को CITES के Appendix-I और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के Schedule-I के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। ‘प्रोजेक्ट लायन’ के तहत दीर्घकालिक संरक्षण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में ‘लायन कंजर्वेशन ब्रोशर’ का भी विमोचन किया गया तथा बिग कैट संरक्षण पर आधारित प्रस्तुतियाँ और फिल्में प्रदर्शित की गईं।


आईआईएम समन्वय फोरम बैठक में ‘विकसित भारत @ 2047’ पर मंथन, संस्थागत सहयोग और नवाचार पर जोर

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जो आईआईएम समन्वय फोरम के अध्यक्ष भी हैं, ने आज भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) के समन्वय फोरम की बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय (MoE) द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद के सहयोग से आईआईएम अहमदाबाद परिसर में आयोजित की गई।

इस बैठक में आईआईएम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, विभिन्न आईआईएम के निदेशक तथा उच्च शिक्षा विभाग और गुजरात एवं उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आईआईएम के बीच सहयोग को मजबूत करना और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।

मंत्री प्रधान ने कहा कि बैठक में “विकसित भारत @ 2047” के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें छात्र कल्याण, संस्थागत समन्वय, शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत के आईआईएम राष्ट्र निर्माण और आर्थिक परिवर्तन के मजबूत आधार बन चुके हैं और नेतृत्व एवं प्रबंधन शिक्षा में वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर, वैश्विक चुनौतियों के अनुसार ढलकर और मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर आईआईएम राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित हो सकते हैं और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने आईआईएम समन्वय फोरम की भूमिका को संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया।

बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई उनमें “विकसित भारत” लक्ष्यों में आईआईएम का योगदान, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार यूजी प्रवेश परीक्षाओं का समन्वय, एमबीए प्रवेश के लिए एसओपी और छात्रों के इंटर-आईआईएम माइग्रेशन एवं फीस रिफंड नीति, युवा फैकल्टी को एक्सपोजर देने के लिए सेकंडमेंट नीति, तथा फैकल्टी और नॉन-फैकल्टी के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करना शामिल था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘कलाम एंड कवच 3.0’ में आत्मनिर्भरता और संयुक्तता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा— “किसी भी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेना, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी तेजी से एक साथ सोच और काम कर सकते हैं,” उन्होंने आत्मनिर्भरता और जॉइंटनेस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता आवश्यक है। वे 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित रक्षा रणनीतिक संवाद “कलाम एंड कवच 3.0” के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से नीति निर्माताओं, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, राजनयिकों, स्टार्टअप्स, अकादमिक जगत और रणनीतिक विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय का युद्धक्षेत्र उन लोगों का साथ देगा जो विचार, प्रोटोटाइप और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के समय को कम कर सकेंगे। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों, चल रहे संघर्षों, साइबर खतरों, आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों और हाइब्रिड युद्ध के नए स्वरूपों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को पुराने सिद्धांतों पर आधारित नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताया और कहा कि जो देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहता है, वह संकट के समय असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख प्रणालियों को देश के अपने पारिस्थितिकी तंत्र में ही विकसित, उत्पादित, मेंटेन और अपग्रेड करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध अब साइलो में काम नहीं करता, बल्कि भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष—इन सभी क्षेत्रों में समन्वय की आवश्यकता है, साथ ही प्रयोगशालाओं, उद्योगों, स्टार्टअप्स, नीति-निर्माताओं और सैन्य संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

उद्घाटन संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने “कलाम एंड कवच” को एक ऐसा मंच बताया जहाँ विचार राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि “कलाम” ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का प्रतीक है, जबकि “कवच” सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने बदलते युद्ध परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के खतरे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और पूर्वानुमान आधारित तैयारी आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत JAI (Jointness, Aatmanirbharta & Innovation) की अवधारणा को भारत की भविष्य की सुरक्षा संरचना का आधार बताया।

उन्होंने हालिया ऑपरेशनल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की क्षमताओं का उदाहरण बताया और कहा कि यह आत्मनिर्भर प्रणालियों, तेज प्रतिक्रिया और संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत का रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात और ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन हासिल करना है।

एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने विशेष संबोधन में स्वदेशी नवाचार को भारत की रणनीतिक भविष्य सुरक्षा का आधार बताया।

“कलाम एंड कवच 3.0” में AI आधारित युद्ध, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम C4ISR, रक्षा उत्पादन विस्तार और रणनीतिक साझेदारियों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।

एनसीबी की राष्ट्रीय कार्यशाला में आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) पर मंथन, कंक्रीट स्थायित्व और गुणवत्ता आश्वासन पर विशेषज्ञों की चर्चा

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राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) ने 9 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में “आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) के अनुसार कंक्रीट के स्थायित्व डिज़ाइन और गुणवत्ता आश्वासन” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में निर्माण उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के विशेषज्ञों ने भाग लिया और स्थायित्व-आधारित कंक्रीट डिज़ाइन तथा प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण उन्नत कंक्रीट प्रौद्योगिकी (एडवांस्ड कंक्रीट टेक्नोलॉजी - एसीटी) पर छह माह के ऑनलाइन प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ रहा, जिसे भारत सरकार के कौशल विकास मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। एनसीबी के प्रमुख (सीसीई) डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि यह 25-सप्ताह का हाइब्रिड कार्यक्रम है, जिसमें सप्ताहांत ऑनलाइन कक्षाएँ और एनसीबी बल्लभगढ़ में चार दिवसीय ऑन-साइट मॉड्यूल शामिल है। इसमें मिक्स डिज़ाइन, स्थायित्व, गुणवत्ता आश्वासन/नियंत्रण प्रणाली, आरएमसी संचालन और उन्नत सतत कंक्रीट जैसे विषय शामिल होंगे।

समापन पैनल चर्चा “क्या हम आईएस 456:2025 को लागू करने के लिए तैयार हैं?” में उद्योग की तैयारी, कार्यान्वयन चुनौतियों और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र का संचालन एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. अमित त्रिवेदी ने किया, जबकि विशेषज्ञों ने प्रदर्शन-आधारित मानकों और मजबूत गुणवत्ता आश्वासन प्रथाओं पर जोर दिया। एनसीबी के प्रमुख (सीआईएस)जी. जे. नायडू ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार रामानर्चला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक (मानकीकरण) ई. संजय पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह भी कार्यक्रम में शामिल रहे।

तकनीकी सत्रों में एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. पी. एन. ओझा, आईआईटी मद्रास के प्रो. मनु संतानम, एनसीबी के पूर्व संयुक्त निदेशक ई. वी. वी. अरोड़ा तथा टंडन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रो. महेश टंडन ने कंक्रीट स्थायित्व डिज़ाइन, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और ड्राफ्ट कोड के अनुरूप प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट प्रावधानों पर अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन’ का ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 35 वर्षों के अनुभवों का वर्णन

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नई पुस्तक ‘अपनापन’ की घोषणा की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के संबंधों, अनुभवों और कार्यशैली को व्यक्तिगत दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

यह पुस्तक 26 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा उपस्थित रहेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व शैली, संवेदनशीलता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण का एक आत्मीय दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि उनकी और नरेंद्र मोदी की पहचान 1991 की एकता यात्रा से शुरू हुई थी, जो समय के साथ संगठनात्मक कार्य, शासन और सार्वजनिक जीवन की साझी यात्रा में बदल गई।

उन्होंने कहा कि दुनिया नरेंद्र मोदी को एक निर्णायक और प्रभावशाली नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक कर्मयोगी, राष्ट्रहित के प्रति समर्पित और संवेदनशील व्यक्ति के रूप में करीब से देखा है। चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री देर रात तक काम करने के बावजूद हर नए दिन समान ऊर्जा और स्पष्टता के साथ देशसेवा में जुट जाते हैं।

एकता यात्रा को याद करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक अभियान मानते थे, वहीं नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना का आंदोलन बना दिया। उनका उद्देश्य केवल श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना नहीं था, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना जगाना था।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संगठन क्षमता, चुनावी रणनीति, जमीनी स्तर तक विचार पहुँचाने की क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को उनकी प्रमुख विशेषताओं में बताया। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने यह भी देखा कि जटिल और लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संवाद, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प से कैसे किया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य, दूरदृष्टि और संतुलित निर्णय क्षमता का परिचय दिया, जिससे देश को दिशा और विश्वास मिला।

उन्होंने कहा कि ‘अपनापन’ विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी और यह संदेश देगी कि राष्ट्र परिवर्तन के लिए केवल बड़ा पद नहीं, बल्कि महान संकल्प, अनुशासन, सेवा भावना और लोगों से आत्मीय जुड़ाव आवश्यक है।

’मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ : ’आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, आसान हुआ पुराने बिजली बिलों का भुगतान’

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 धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक राहत पहल है। इसके तहत पुराने बकाये पर सरचार्ज में छूट मिल रही है। बकाया बिजली बिल पर लगने वाला पूरा सरचार्ज (ब्याज) माफ या मूल बकाया राशि एकमुश्त या किस्तों में जमा करने की सुविधा। यह योजना बीपीएल, सामान्य घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को लंबे समय से लंबित बिजली बिलों के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए लाई गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान देने के लिए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। इसी कड़ी में शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो पुराने बकाया बिजली बिल और बढ़ते सरचार्ज के कारण आर्थिक दबाव में थे।

’क्या है मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के पुराने और लंबित बिजली बिलों का सरल समाधान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बकाया बिजली बिलों पर लगने वाले सरचार्ज को पूरी तरह माफ किया जा रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को शेष राशि का भुगतान एकमुश्त या आसान किस्तों में करने की सुविधा भी दी गई है। पात्र श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि पर भी विशेष छूट का लाभ मिल रहा है।

’28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को मिल चुकी है राहत’

राज्य शासन के अनुसार इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपए से अधिक के सरचार्ज माफ होंगे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना न केवल व्यापक स्तर पर लागू की गई है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए वास्तविक आर्थिक सहायता का माध्यम भी बनी है।

’किन उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ’

इस योजना का लाभ मुख्य रूप से बीपीएल परिवारों, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल लंबे समय से बकाया हैं और जो एकमुश्त भुगतान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वे इस योजना के माध्यम से अपने बकाया का समाधान कर सकते हैं।

योजना से होने वाले प्रमुख फायदे

सरचार्ज की पूरी माफी, पुराने बकाया बिलों पर लगने वाला सरचार्ज अक्सर मूल राशि से भी अधिक हो जाता है। इस योजना के तहत सरचार्ज की पूर्ण माफी से उपभोक्ताओं को तत्काल बड़ी राहत मिलती है।

’आसान किस्तों में भुगतान’

बड़ी राशि एक साथ जमा करने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। उपभोक्ता अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। घरेलू बजट पर कम दबाव और सरचार्ज माफी और किस्त सुविधा से परिवारों को अपने मासिक खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलती है।

’बिजली विच्छेदन का खतरा कम’

बकाया राशि के कारण बिजली कटने की आशंका रहती है। योजना का लाभ लेने से उपभोक्ता नियमित भुगतान व्यवस्था में लौट सकते हैं। इससे किसानों को सीधा लाभ हो रहा है। कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के बोझ से राहत मिलती है, जिससे सिंचाई और खेती का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सकता है।

’मानसिक तनाव से राहत’

लंबित बिलों की चिंता से मुक्ति मिलने पर परिवार आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। जो उपभोक्ता लंबे समय से भुगतान नहीं कर पा रहे थे, उन्हें फिर से नियमित भुगतान प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है।

’योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें’

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1912 पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देशों के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है।

’योजना की अवधि’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं से समय रहते योजना का लाभ लेने की अपील की है।

’जनहित और सुशासन का प्रभावी उदाहरण’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच का उदाहरण है। यह योजना केवल बकाया बिलों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को आर्थिक राहत, मानसिक संतोष और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का अवसर भी प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जो पुराने बिजली बिलों के बोझ से परेशान हैं। सरचार्ज माफी, मूल राशि पर छूट और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं इसे एक प्रभावी और जनहितकारी योजना बनाती हैं। यह योजना आम नागरिकों को राहत देने के साथ-साथ उन्हें नियमित भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेशवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिलों का समाधान करें और आर्थिक राहत प्राप्त करें।

छत्तीसगढ़ में सनसनीखेज हत्याकांड : बेटे ने बेटे संग मिलकर की परिवार के 4 लोगों की हत्या

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के भवंतरा गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस जघन्य वारदात को मृतक के पुत्र सोना साय कश्यप ने अपने बेटे गोलू के साथ मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


मृतकों की पहचान मेदनी प्रसाद कश्यप, पीताम्बर कश्यप, शांति बाई और कुमारी मोगरा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पूरा मामला पैतृक संपत्ति विवाद से जुड़ा हुआ है। परिवार में लंबे समय से जमीन और संपत्ति के बंटवारे को लेकर तनाव बना हुआ था, जो धीरे-धीरे गंभीर विवाद में बदल गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी सोना साय कश्यप का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है। जानकारी के अनुसार, उसने पूर्व में अपने बड़े भाई की हत्या की थी, जिसके चलते वह करीब 15 वर्षों तक जेल में रहा। हाल ही में सजा पूरी कर गांव लौटने के बाद भी परिवारिक विवाद खत्म नहीं हुआ और संपत्ति को लेकर लगातार तनाव बना रहा।

बताया जा रहा है कि इसी विवाद के चलते आरोपी ने अपने बेटे के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। शिवरीनारायण पुलिस ने पहले भी आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी, लेकिन विवाद शांत नहीं हो सका।

सुबह मिस्त्री ने देखे शव, फिर खुला मामला

गौरतलब है कि गुरुवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि भवंतरा गांव में बुधवार देर रात एक ही परिवार के चार लोगों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई है। मृतकों में पति-पत्नी और उनके नाती-नातिन शामिल हैं। सभी के शव निर्माणाधीन मकान में खाट पर पड़े मिले।
पुलिस के अनुसार, घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह काम पर पहुंचे एक मिस्त्री ने शव देखे और तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम पहुंची और जांच शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ है।

रील बनाने के दौरान नदी में डूबा युवक, 48 घंटे बाद मिला शव

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 कोरबा:  जिले के Kusmunda थाना क्षेत्र स्थित अहिरन नदी में रील बनाने के दौरान एक युवक की डूबने से मौत हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


मृतक की पहचान 25 वर्षीय निखिल सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, निखिल अपने तीन दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था। इसी दौरान उसने नदी में छलांग लगाई, जबकि उसके दोस्त मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि छलांग लगाने के बाद निखिल कुछ देर तक पानी में हाथ-पैर मारता रहा। दोस्तों को पहले लगा कि वह सामान्य रूप से तैर रहा है, लेकिन देखते ही देखते वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान कोई भी दोस्त उसे बचाने के लिए पानी में नहीं उतरा।

घटना मंगलवार दोपहर की बताई जा रही है। हादसे के बाद दोस्तों ने पुलिस और परिजनों को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और गोताखोरों की टीम ने युवक की तलाश में लगातार दो दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया।
करीब 48 घंटे की तलाश के बाद बुधवार देर शाम युवक का शव नदी में पानी के ऊपर दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी गर्मी, 16 मई से हीट वेव का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में गर्मी और तेज होने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले चार दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक बढ़ोतरी हो सकती है।


मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने के प्रभाव से 16 मई से मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो इलाकों में ग्रीष्म लहर (हीट वेव) चलने की प्रबल संभावना है। खासकर दोपहर के समय तेज गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

हालांकि बढ़ती गर्मी के बीच प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं रहेगा। स्थानीय मौसम प्रणालियों के असर से अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कुछ स्थानों पर मेघगर्जन, तेज हवाओं और हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय जरूरी काम होने पर ही घर से निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

आंधी-तूफान का कहर: 74 लोगों की मौत, 38 जिलों में येलो अलर्ट जारी

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 उत्तर प्रदेश में बुधवार को आए भीषण आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। प्रदेश के कई जिलों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने, बिजली गिरने और टीन शेड उड़ने जैसी घटनाओं में अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई है। इस बीच मौसम विभाग ने प्रदेश के 38 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।


100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती सिस्टम और दक्षिण राजस्थान से आ रही पूरवा हवाओं के प्रभाव से प्रदेश के कई इलाकों में 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। बुधवार दोपहर बाद शुरू हुआ मौसम का बदलाव शाम तक भीषण तूफान में बदल गया।

उन्नाव और प्रयागराज में दोपहर करीब ढाई बजे तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। कई जिलों में तेज हवाओं से पेड़ उखड़ गए, टीन शेड उड़ गए और साइन बोर्ड गिर पड़े। उन्नाव में सड़क किनारे खड़ी कार पर विशाल पेड़ गिर गया। वहीं प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़ और बांदा में आंधी की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। बरेली और बदायूं में कई यूनिपोल और साइन बोर्ड गिरने की घटनाएं सामने आईं।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

आंधी-तूफान और बारिश से प्रदेश के कई जिलों में जनहानि हुई है। भदोही में 10, प्रयागराज में 17, फतेहपुर में 8, उन्नाव में 7, बदायूं में 6, बरेली में 4, सीतापुर में 2 और रायबरेली में 1 व्यक्ति की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा हरदोई, झांसी, कानपुर देहात, संभल, प्रतापगढ़ समेत अन्य जिलों में भी लोगों की जान गई है।

प्रयागराज में 17 लोगों की मौत

प्रयागराज जिले में सबसे ज्यादा 17 लोगों की मौत हुई। सदर तहसील में 1, हंडिया में 7, फूलपुर में 4, सोरांव में 3 और मेजा में 2 लोगों की जान गई। मृतकों में पांच महिलाएं, चार बच्चे और आठ पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा पांच लोग घायल हुए हैं। प्रशासन के अनुसार, जिले में 20 पशुओं की भी मौत हुई है और 16 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

उन्नाव में मासूम समेत 7 की मौत

उन्नाव जिले में तेज आंधी और बारिश के दौरान अलग-अलग हादसों में सात लोगों की मौत हो गई। दही थाना क्षेत्र में आम का पेड़ गिरने से 70 वर्षीय किसान राम आश्रय की मौत हो गई। वहीं आसीवन थाना क्षेत्र में यूकेलिप्टस का पेड़ गिरने से 9 वर्षीय अंश की जान चली गई। दो अन्य गंभीर घायलों को इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।

बिजली व्यवस्था और यातायात प्रभावित

तूफान के चलते सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सड़क मार्गों पर भी यातायात प्रभावित रहा। कई जगहों पर मकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है।

38 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़, बांदा समेत 38 जिलों में अगले कुछ घंटों के दौरान तेज बारिश, बिजली गिरने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और पेड़ों व बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।

10 साल से खांसी में खून की समस्या से जूझ रहे युवक को अम्बेडकर अस्पताल में मिली नई जिंदगी

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 रायपुर : डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।


अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग 10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी। प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा।


मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है।

सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था। इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा जाता है, जिसमें फेफड़े के संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।

परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया।

डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।

पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।

मिशन मोड में संचालित होंगी शासन की प्रमुख योजनाएं, मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशा अनुसार छत्तीसगढ़ शासन विशिष्ट क्षेत्रों में तीव्र और लक्षित विकास के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यों को मिशन मोड में संचालित करेगा। इस संबंध मे आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने लक्षित विकास के लिए नए मिशन शुरू किए है। जिन्हें पूरी तरह मिशन मोड में संचालित किया जाएगा। अधिकारियों ने बैठक में अपनी विभागीय योनजाओं के संबंध में प्रस्तुतिकरण के जरिए विस्तार से जानकारी रखी।



बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री एआई मिशन के संबंध में बताया कि उभरती हुए तकनीकों और प्रौद्योगिकियों में छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी राज्य बनाना है। इसके लिए यहां के युवाओं को एआई आधारित स्टार्टअप के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। शासन व्यवस्था के कार्यों में भी एआई का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए शासन के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसी तरह से छात्र-छात्राओं, युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत ग्रामीण और जमीनी स्तर पर छिपी हुई खेल प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारा जाएगा। खिलाड़ियों को सुविधाएं दी जाएगी। राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना तथा महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन के अंतर्गत प्रमुख पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए थीम-आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे। सांस्कृतिक मेलों, उत्सवों और प्रदर्शनियों का आयोजन तथा स्थानीय स्तर पर ’होमस्टे’ योजना को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटन के तहत स्थानीय युवाओं को टूर-गाइडों के कौशल विकास के जरिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराये जाएंगे।

मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के जरिए राज्य के बुनियादें ढांचें, सड़कों, पुलों और शहरी-ग्रामीण कनेक्टिविटी को मिशन मोड में मजबूत करना है। प्रदेश में आर्थिक विकास को गति देने के लिए अधोसंरचना का तेजी से निर्माण किया जाना है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन के तहत प्रदेश के युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देना और नए व्यापारिक विचारों को जमीन पर उतारना। नए स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता और सरल प्रक्रियाएं सुनिश्चित किए जाएंगे।

बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव रजत कुमार, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, विशेष सचिव वित्त चंदन कुमार, विशेष सचिव उच्च शिक्षा जय प्रकाश मौर्य सहित सूचना प्रौद्योगिकी एवं चिप्स के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : शासन बना बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह बना सामाजिक बदलाव का उत्सव

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर - उप संचालक (जनसंपर्क)


रायपुर : त्तीसगढ़ में इन दिनों जब भी सामूहिक विवाह समारोहों में शहनाइयां गूंजती हैं, तो वह केवल दो लोगों के वैवाहिक बंधन में बंधने का अवसर नहीं होता, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और संवेदनशील शासन व्यवस्था का जीवंत उत्सव बन जाता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह योजना प्रदेश में सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है। हजारों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाली यह पहल वास्तव में “बेटियों के साथ सुशासन का आशीर्वाद” बनकर उभरी है।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने हजारों गरीब परिवारों की चिंताओं को कम करते हुए बेटियों के सपनों को नई पहचान दी है। यह योजना आज प्रदेश में सामाजिक समरसता, महिला सम्मान और जनकल्याण का ऐसा मॉडल बन चुकी है, जिसने यह साबित किया है कि शासन की योजनाएं यदि संवेदनशील सोच के साथ लागू हों, तो वे सीधे लोगों के जीवन में खुशियां ला सकती हैं।

एक योजना, जिसने बदली हजारों परिवारों की स्थिति

गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेटियों का विवाह अक्सर आर्थिक चिंता का बड़ा कारण बन जाता है। कई बार परिवार कर्ज लेने को मजबूर होते हैं, तो कई बार सामाजिक दबाव और फिजूलखर्ची उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर देती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत की गई।

योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि विवाह को गरिमामय, सादगीपूर्ण और सामाजिक सहयोग का माध्यम बनाना है। यह योजना सामूहिक विवाहों को बढ़ावा देकर दहेज जैसी कुरीतियों पर भी प्रभावी रोक लगाने का काम कर रही है।
राज्य शासन ने योजना को और अधिक मानवीय स्वरूप देते हुए विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी इसमें शामिल किया है, इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा और संवेदनशीलता की मिसाल बन गई है।

50 हजार रुपये की सहायता, सम्मान के साथ नई शुरुआत

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों तथा मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के कार्डधारी परिवारों की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो कन्याओं को लाभ प्रदान किया जाता है।
प्रत्येक कन्या विवाह हेतु शासन द्वारा अधिकतम 50 हजार रुपये तक सहायता दी जाती है। इसमें वर-वधु के लिए श्रृंगार सामग्री, उपहार सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही 35 हजार रुपये की राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में दी जाती है, जिससे नवदंपति आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपने नए जीवन और खुशहाल की शुरुआत कर सकें। विवाह आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी प्रति कन्या 8 हजार रुपये तक खर्च किया जाता है।

24 हजार से अधिक बेटियों के जीवन में आई नई खुशियां

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में 24 हजार से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की खुशी और राहत की कहानी है, जिनके लिए बेटियों का विवाह कभी बड़ी चिंता हुआ करता था।

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3200 विवाहों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 347 विवाह पहले ही संपन्न हो चुके थे, जबकि 8 मई 2026 को आयोजित राज्यव्यापी सामूहिक विवाह समारोहों में 1385 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इस प्रकार अब तक कुल 1732 जोड़े वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत कर चुके हैं।

8 मई 2026 को प्रदेशभर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों ने छत्तीसगढ़ को उत्सवमय बना दिया। रायपुर से लेकर दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक हजारों लोगों ने इन आयोजनों में भाग लिया। हर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों और सादगी के साथ विवाह सम्पन्न हुए।
इन समारोहों की सबसे बड़ी खूबी इसकी समावेशी भावना रही। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह बंधन में बंधे। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील पहल

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस योजना को प्रभावी और जनहितकारी स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रदेशभर में सुव्यवस्थित सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
श्रीमती राजवाड़े लगातार यह सुनिश्चित कर रही हैं कि हर आयोजन में नवदंपति और उनके परिजनों को गरिमापूर्ण वातावरण मिले। विवाह स्थलों की सजावट, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था विभाग द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना केवल सहायता योजना नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और सामाजिक समानता का अभियान है।

6412 जोड़ों का विवाह और विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाई है। 10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में 6412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया और इसके लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि सामूहिक विवाह केवल सामाजिक सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनभागीदारी की मजबूत मिसाल भी बन सकता हैं।

सुशासन का संवेदनशील चेहरा

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज छत्तीसगढ़ में सुशासन के संवेदनशील और मानवीय स्वरूप का प्रतीक बन चुकी है। यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटियों को सम्मान, परिवारों को आत्मविश्वास और समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम कर रही है।

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