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छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती विवाद: अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन करने पर भीम आर्मी प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद समेत 11 पर FIR, OCM चौक पर लगा था जाम

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार जारी है। इसी बीच अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करने वाली भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद समेत 11 लोगों के खिलाफ रायपुर पुलिस ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि 4 नवंबर को राजधानी के OCM चौक के पास प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़क पर बैठकर आवागमन बाधित किया, जिससे लंबा जाम लग गया। इस जाम में एंबुलेंस और स्कूल बसें भी फंस गई थीं। कोतवाली थाना पुलिस ने सार्वजनिक मार्ग बाधित करने के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, 4 नवंबर 2026 को भीम आर्मी के बैनर तले करीब 100 से 150 कार्यकर्ता पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में एकजुट हुए थे। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने का निर्णय लिया।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी OCM चौक पहुंचे और मुख्य सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। सड़क पर प्रदर्शन के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और शहर के प्रमुख मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए गए थे।

 एंबुलेंस और स्कूल बसें भी जाम में फंसीं

प्रदर्शन के कारण OCM चौक और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सबसे गंभीर स्थिति तब बनी जब:

  • मरीजों को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस जाम में फंस गईं।

  • स्कूली बच्चों को घर छोड़ने वाली बसें आगे नहीं बढ़ सकीं।

  • कामकाज के लिए निकले लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।

  • मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने की अपील की, लेकिन तत्काल सड़क खाली नहीं हुई।

पुलिस ने लाउडस्पीकर से की समझाइश

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। लाउडस्पीकर के माध्यम से उन्हें मुख्य सड़क खाली करने के लिए कहा गया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि नवा रायपुर के तूता में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल उपलब्ध है। उनसे वहां जाकर अपनी मांगें रखने की अपील की गई।

हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने सार्वजनिक मार्ग बाधित करने के आरोप में FIR दर्ज की।

दिनेश आजाद समेत किन 11 लोगों पर FIR?

कोतवाली थाना पुलिस द्वारा दर्ज मामले में भीम आर्मी के इन पदाधिकारियों के नाम सामने आए हैं:

  1. दिनेश आजाद – प्रदेश अध्यक्ष, भीम आर्मी

  2. देवेंद्र मैरिसा – जिला अध्यक्ष

  3. युवराज ढीढी

  4. अन्य आठ लोग

कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

ध्यान दें: FIR दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों का निपटारा कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

आखिर क्यों नाराज हैं पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी?

इस पूरे विवाद की जड़ छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया है। राज्य में वर्ष 2023-24 में कुल 5,967 आरक्षक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।

चयन परिणाम और सूची जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई हैं और कुछ योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर रह गए हैं।

अभ्यर्थियों की प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार हैं:

पहला – मेरिट सूची में कथित गड़बड़ी

कुछ अभ्यर्थियों का आरोप है कि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ, जबकि उनसे कम अंक पाने वाले कुछ उम्मीदवारों को चयन सूची में जगह मिली।

दूसरा – नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर सवाल

अलग-अलग पालियों में आयोजित परीक्षाओं के अंकों को सामान्यीकृत करने की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता की मांग की है।

तीसरा – फिजिकल टेस्ट पर सवाल

कुछ उम्मीदवारों ने शारीरिक दक्षता परीक्षा में दौड़, ऊंचाई और सीना मापने की प्रक्रिया में कथित पक्षपात के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

चौथा – दूसरी चयन सूची जारी करने की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि कुल 5,967 पदों में से लगभग 4,367 पदों पर चयन हुआ है और करीब 1,600 पद खाली बताए जा रहे हैं। वे इन रिक्त पदों के लिए दूसरी चयन सूची जारी करने की मांग कर रहे हैं।

भर्ती विवाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है

आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।

The Lens और The Rural Press की रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी 2026 में बिलासपुर हाईकोर्ट में भर्ती से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। याचिकाकर्ताओं ने फिजिकल टेस्ट कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी की कार्यप्रणाली और कुछ उम्मीदवारों को अतिरिक्त अंक दिए जाने पर सवाल उठाए थे।

याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की थी। इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही और किसी भी अंतरिम आदेश की वर्तमान स्थिति को नवीनतम आधिकारिक न्यायालय रिकॉर्ड से अलग से सत्यापित किया जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

इस घटनाक्रम के बाद दो अलग-अलग मुद्दों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • FIR का मामला: पुलिस दर्ज आरोपों की जांच करेगी और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

  • भर्ती विवाद: अभ्यर्थियों की शिकायतों, खाली पदों और दूसरी चयन सूची की मांग पर सरकार तथा संबंधित भर्ती अधिकारियों का रुख महत्वपूर्ण होगा।

  • न्यायिक प्रक्रिया: भर्ती से संबंधित याचिकाओं पर अदालत में आगे होने वाली सुनवाई भी इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।

अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में दूसरी चयन सूची जारी करने को लेकर कोई अंतिम सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है।

निष्कर्ष

रायपुर के OCM चौक पर हुआ प्रदर्शन अब पुलिस कार्रवाई के कारण चर्चा में है। एक तरफ 5,967 आरक्षक पदों की भर्ती में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और खाली पदों पर दूसरी सूची जारी करने की अभ्यर्थियों की मांग है। दूसरी तरफ सार्वजनिक सड़क पर प्रदर्शन के कारण एंबुलेंस, स्कूल बसों और आम नागरिकों को हुई परेशानी को लेकर पुलिस ने FIR दर्ज की है।

अब देखना होगा कि सरकार भर्ती अभ्यर्थियों की शिकायतों पर क्या कदम उठाती है और पुलिस इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई करती है।


छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ा अपडेट: कृषक उन्नति योजना खरीफ-2026 का अनुदान अब डिजिटल रिकॉर्ड से होगा तय, एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को आर्थिक सहायता देने वाली कृषक उन्नति योजना खरीफ-2026 के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए धान खरीदी पोर्टल, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे, किसान आईडी और फार्म आईडी के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ा जाएगा।

6 नवंबर को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पात्र किसानों को अनुदान की राशि देने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और त्रुटिरहित हो। इसका उद्देश्य किसानों से बार-बार दस्तावेज मांगने की जरूरत कम करना और वास्तविक खेती के रकबे के आधार पर पात्रता की जांच करना है।

क्या है कृषक उन्नति योजना?

कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि सहायता योजना है। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि लागत में सहायता देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना और खेती को लाभकारी बनाना है।

खरीफ-2026 के लिए योजना के क्रियान्वयन में धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मिलेट्स जैसी वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार अब इस योजना के अनुदान वितरण में डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग बढ़ाना चाहती है, ताकि पात्रता का निर्धारण वास्तविक भूमि और फसल संबंधी जानकारी के आधार पर किया जा सके।

तीन बड़े डिजिटल रिकॉर्ड होंगे आपस में लिंक

सरकार की नई व्यवस्था में तीन प्रमुख डेटाबेस का एकीकरण किया जाएगा:

  • धान खरीदी पोर्टल: किसान ने कितनी मात्रा में धान बेचा और खरीदी का लेन-देन हुआ या नहीं, इसकी जानकारी।

  • एग्रीस्टैक: किसान की डिजिटल पहचान और कृषि भूमि से संबंधित रिकॉर्ड।

  • डिजिटल क्रॉप सर्वे: किसान के खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है और उसका रकबा कितना है, इसकी जानकारी।

इसके साथ किसान आईडी, फार्म आईडी और गिरदावरी के रिकॉर्ड का भी मिलान किया जाएगा।

इससे सरकार को एक ही डिजिटल व्यवस्था में किसान की पहचान, जमीन और फसल का विवरण मिल सकेगा। किसानों को अलग-अलग विभागों में बार-बार एक जैसी जानकारी देने की जरूरत कम होगी।

योजना का लाभ लेने के लिए किन शर्तों पर ध्यान देना होगा?

6 नवंबर की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पात्रता संबंधी प्रक्रिया स्पष्ट रखने के निर्देश दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के लिए निम्न बिंदु महत्वपूर्ण होंगे:

  1. किसान का एग्रीस्टैक में पंजीयन होना आवश्यक होगा।

  2. संबंधित भूमि पर डिजिटल क्रॉप सर्वे में धान की फसल दर्ज होनी चाहिए।

  3. किसान की विशिष्ट फार्म आईडी की पुष्टि की जाएगी।

  4. धान खरीदी पोर्टल पर कम से कम एक सफल खरीदी लेन-देन का रिकॉर्ड जरूरी बताया गया है।

  5. योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

महत्वपूर्ण: ये 6 नवंबर की समीक्षा बैठक में बताई गई प्रक्रिया और शर्तों का विवरण है। अंतिम पात्रता, आवेदन की समय-सीमा और दस्तावेजों की सूची के लिए सरकार के विस्तृत आधिकारिक दिशा-निर्देश देखना जरूरी होगा।

टोकन जारी करते समय होगा रकबे का सत्यापन

धान खरीदी के दौरान टोकन जारी करते समय अनुदान के लिए दर्ज किए गए कृषि रकबे का सत्यापन किया जाएगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान ने जितने क्षेत्र में धान की खेती की है, रिकॉर्ड में भी उसी के अनुरूप जानकारी दर्ज हो। डिजिटल सर्वे, गिरदावरी और जमीन के रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर जांच की जा सकेगी।

पिछले साल धान नहीं बेचने वाले किसानों पर विशेष ध्यान

जिन किसानों ने पिछले वर्ष धान नहीं बेचा था, उनके मामलों में भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। यानी जरूरत पड़ने पर अधिकारी खेत और फसल की वास्तविक स्थिति की जांच कर सकते हैं। इससे गलत रकबा दर्ज कराकर योजना का लाभ लेने की संभावना कम करने की कोशिश होगी।

धान के अलावा दूसरी फसलों को भी मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार की योजना केवल धान उत्पादकों तक सीमित नहीं है। खरीफ सीजन में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • दलहन: अरहर, उड़द, मूंग और अन्य दलहन फसलें।

  • तिलहन: सोयाबीन, मूंगफली, तिल आदि।

  • मिलेट्स: कोदो, कुटकी और रागी।

इससे किसानों को धान के अलावा दूसरी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने, पानी की खपत कम करने और खेती के विकल्प बढ़ाने का लक्ष्य है।

इससे जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला यह भी है कि खरीफ-2026 के नए ढांचे में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों तथा धान से दूसरी खरीफ फसलों की ओर जाने वाले किसानों के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता का प्रावधान मंजूर किया गया है। इसकी पात्रता और लागू होने की शर्तें संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होंगी।

किसानों को अभी क्या करना चाहिए?

योजना का लाभ लेने की तैयारी कर रहे किसानों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • एग्रीस्टैक में अपना पंजीयन और किसान आईडी की स्थिति जांचें।

  • अपनी फार्म आईडी और भूमि रिकॉर्ड में नाम तथा रकबे की जानकारी मिलाएं।

  • डिजिटल क्रॉप सर्वे में बोई गई फसल सही दर्ज हुई है या नहीं, इसकी जानकारी लें।

  • धान खरीदी पोर्टल पर दर्ज जानकारी और खरीदी संबंधी रिकॉर्ड की जांच करें।

  • यदि जमीन, फसल या रकबे की जानकारी गलत है, तो संबंधित कृषि, राजस्व या सहकारी समिति कार्यालय से सुधार की प्रक्रिया पूछें।

  • आवेदन और अनुदान की अंतिम तारीख के लिए आधिकारिक सूचना पर नजर रखें।

किसानों के लिए जरूरी

केवल एग्रीस्टैक में पंजीयन करा लेना अनुदान मिलने की गारंटी नहीं है। फसल का डिजिटल रिकॉर्ड, भूमि का सत्यापन और योजना की अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी होनी चाहिए।

बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हुए?

मंत्रालय महानदी भवन में हुई बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से:

  • मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह

  • वित्त एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव

  • खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले

  • कृषि विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी

  • सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना

  • राजस्व विभाग की सचिव शम्मी आबिदी

  • कृषि संचालक राहुल देव

  • भू-अभिलेख संचालक विनीत नंदवार

  • मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला

बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव विकासशील ने की।

किसानों के लिए इस बदलाव का क्या महत्व है?

पुरानी व्यवस्था की चुनौती

  नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य

अलग-अलग विभागों में जानकारी देना

  डेटाबेस का एकीकरण

भूमि और फसल के रकबे में अंतर

  डिजिटल सर्वे से मिलान

अपात्र लाभार्थियों की पहचान में कठिनाई

  रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन

आवेदन प्रक्रिया में परेशानी

  फार्म आईडी आधारित सरल प्रक्रिया

वैकल्पिक फसलों की कम जानकारी

  दलहन, तिलहन और मिलेट्स को प्रोत्साहन

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार कृषक उन्नति योजना खरीफ-2026 के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सहायता की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और धान खरीदी पोर्टल को जोड़ने से पात्रता जांचने में आसानी हो सकती है। वहीं, दलहन, तिलहन और मिलेट्स को प्रोत्साहन देने से राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि आवेदन की प्रक्रिया कब शुरू होती है, पात्रता की अंतिम शर्तें क्या होंगी और अनुदान की राशि कब खातों में पहुंचेगी।



चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला: OMSS के तहत बिक्री का लक्ष्य दोगुना कर 50 लाख टन किया

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नई दिल्ली- देश में चावल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) यानी OMSS (D) के तहत चावल बेचने का लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। इसका उद्देश्य बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ाना, कीमतों को स्थिर रखने में मदद करना और जमाखोरी पर अंकुश लगाना है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 6 नवंबर को इन उपायों की जानकारी दी।

क्या है सरकार का नया फैसला?

केंद्र सरकार ने OMSS (D) के तहत निजी कारोबारियों को ई-नीलामी के माध्यम से बेचे जाने वाले चावल की मात्रा का लक्ष्य दोगुना कर दिया है।

  • पहले बिक्री का लक्ष्य: 25 लाख मीट्रिक टन

  • नया बिक्री लक्ष्य: 50 लाख मीट्रिक टन

  • 31 अक्टूबर 2026 तक बिक्री: 25 लाख मीट्रिक टन

  • पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में बिक्री: 11 लाख मीट्रिक टन

इसका मतलब है कि चालू वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में OMSS के माध्यम से काफी अधिक चावल बाजार में पहुंचाया जा चुका है।

क्या है OMSS और इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?

OMSS यानी Open Market Sale Scheme केंद्र सरकार की एक व्यवस्था है, जिसके तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) अपने उपलब्ध खाद्यान्न भंडार से चावल और गेहूं जैसी उपज खुले बाजार में बेचता है।

इस योजना के तहत चावल की ई-नीलामी की जाती है और निजी खरीदार इसमें हिस्सा ले सकते हैं। सरकार का उद्देश्य जरूरत के समय बाजार में अनाज की अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

इससे संभावित रूप से:

  • बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ सकती है।

  • थोक बाजार में आपूर्ति का दबाव कम हो सकता है।

  • चावल की कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

  • कारोबारियों के पास अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होने से आपूर्ति बेहतर हो सकती है।

  • उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिल सकता है।

हालांकि, इसका असर खुदरा कीमतों पर कितनी जल्दी और कितना होगा, यह स्थानीय आपूर्ति, मांग, चावल की किस्म और व्यापारियों की कीमतों पर भी निर्भर करेगा।

चावल की कीमतों पर क्यों बढ़ रही है चिंता?

चावल की कीमतों में तेजी के पीछे कमजोर और असमान मानसूनी बारिश को एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। बारिश की कमी और फसल के पकने के दौरान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भारत के चावल उत्पादन में पिछले करीब एक दशक में पहली बार गिरावट आने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह उत्पादन संबंधी अनुमान है, अंतिम सरकारी आंकड़ा नहीं।

Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में खुदरा चावल महंगाई सालाना आधार पर 8.25 प्रतिशत रही, जबकि अगस्त में यह 5.89 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में औसत खुदरा कीमत लगभग 48.23 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। कुछ दक्षिण भारतीय किस्मों की कीमतों में इससे भी अधिक तेजी दर्ज की गई।

कारोबारियों और मिल मालिकों को हर शुक्रवार देना होगा स्टॉक का ब्यौरा

सरकार ने केवल चावल की बिक्री का लक्ष्य नहीं बढ़ाया है, बल्कि जमाखोरी और बाजार में कृत्रिम कमी रोकने के लिए स्टॉक रिपोर्टिंग को भी अनिवार्य कर दिया है।

6 नवंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, देशभर के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी रिटेल चेन, प्रोसेसर और राइस मिल मालिकों को अपने चावल और धान के स्टॉक की जानकारी देनी होगी।

स्टॉक की जानकारी छह श्रेणियों में देनी होगी:

  1. बासमती चावल

  2. गैर-बासमती प्रीमियम चावल

  3. गैर-बासमती चावल

  4. पारबॉयल्ड यानी उसना चावल

  5. टूटा हुआ चावल

  6. धान

सभी संबंधित इकाइयों को हर शुक्रवार सरकारी Food Stock Portal पर स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी। गलत जानकारी देने या नियमों का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक लिमिट लगाने की अनुमति

चावल की उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच दक्षिणी राज्यों को धान और चावल पर स्टॉक लिमिट लागू करने की सहमति दी है।

इन राज्यों में शामिल हैं:

  • आंध्र प्रदेश

  • कर्नाटक

  • केरल

  • तमिलनाडु

  • तेलंगाना

राज्य सरकारें आवश्यकता के अनुसार अपने नियंत्रण आदेशों के जरिए स्टॉक सीमा लागू कर सकती हैं। ये सीमाएं 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रह सकती हैं।

इस कदम का उद्देश्य बाजार में चावल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोकना है।

भारत चावल की उपलब्धता भी बढ़ाई जाएगी

सरकार ने आम उपभोक्ताओं तक किफायती चावल पहुंचाने के लिए भारत चावल की अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

इसके लिए तीन एजेंसियों को अतिरिक्त स्टॉक आवंटित किया जा रहा है:

  • नैफेड (NAFED)

  • एनसीसीएफ (NCCF)

  • केंद्रीय भंडार (Kendriya Bhandar)

इन एजेंसियों को वितरण के अधिक से अधिक माध्यम तलाशने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में भारत चावल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

आम आदमी और किसानों पर क्या पड़ेगा असर?

सरकार के इन फैसलों का सीधा उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चावल उपलब्ध कराना है।

आम उपभोक्ताओं के लिए: बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में तेजी को रोकने में मदद मिल सकती है। भारत चावल की अतिरिक्त उपलब्धता से किफायती विकल्प भी बढ़ सकते हैं।

व्यापारियों के लिए: स्टॉक की नियमित जानकारी देना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों के लिए: बाजार में धान की कीमतों और सरकारी खरीद पर इन फैसलों का अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, OMSS के तहत चावल बेचने का निर्णय अपने आप में किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या सरकारी खरीद व्यवस्था में बदलाव नहीं है।

निष्कर्ष

चावल की बढ़ती कीमतों और संभावित उत्पादन दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम एक साथ उठाए हैं। OMSS के तहत बिक्री का लक्ष्य 50 लाख मीट्रिक टन करना, कारोबारियों के लिए साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्टिंग अनिवार्य बनाना, पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक लिमिट की अनुमति देना और भारत चावल की उपलब्धता बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन फैसलों का असर आने वाले दिनों में थोक और खुदरा बाजार में चावल की कीमतों पर कितना पड़ता है।


भारतीय मूल की नित्या रमन बनीं लॉस एंजिलिस की नई मेयर, करेन बास को हराकर रचा इतिहास

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अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर के मेयर चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने मौजूदा मेयर करेन बास को हराकर शहर की अगली मेयर बनने का रास्ता साफ कर लिया है। चुनाव के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नित्या रमन को 52.70 प्रतिशत, जबकि करेन बास को 47.30 प्रतिशत वोट मिले। इस तरह रमन ने करीब 5.4 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत हासिल की।

चुनाव में क्या रहा खास?

3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव में शुरुआती मतगणना के दौरान मुकाबला कड़ा रहा। लेकिन जैसे-जैसे नए मतों की गिनती हुई, नित्या रमन की बढ़त मजबूत होती गई। 5 नवंबर को करेन बास ने अपनी हार स्वीकार करते हुए रमन को फोन कर जीत की बधाई दी। इसके बाद एसोसिएटेड प्रेस ने भी रमन को विजेता घोषित किया।

लॉस एंजिलिस काउंटी के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
  • नित्या रमन: 4,60,772 वोट — 52.70%

  • करेन बास: 4,13,519 वोट — 47.30%

  • जीत का अंतर: 47,253 वोट

ये मतगणना के उपलब्ध आंकड़े हैं; इन्हें अंतिम प्रमाणित परिणाम समझने से पहले आधिकारिक चुनाव प्रमाणन का इंतजार करना चाहिए।

कौन हैं नित्या रमन?

नित्या रमन भारत में जन्मी अमेरिकी राजनीतिज्ञ और शहरी नियोजन विशेषज्ञ हैं। वह लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल की सदस्य रही हैं। शहर की आवास व्यवस्था, शहरी विकास और बेघर लोगों की समस्या जैसे मुद्दों पर उनका काम और राजनीतिक सक्रियता चर्चा में रही है।

रमन की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने मौजूदा मेयर को हराया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दो दशकों से अधिक समय में लॉस एंजिलिस के किसी मौजूदा मेयर को चुनाव में हराकर पद से हटाने वाली वह पहली चुनौती देने वाली उम्मीदवार बनी हैं।

किन मुद्दों पर लड़ा चुनाव?

नित्या रमन ने अपने अभियान में लॉस एंजिलिस की कुछ बड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया:

  1. बेघर लोगों की समस्या: शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले बेघर लोगों के लिए बेहतर व्यवस्था और आवास उपलब्ध कराने का वादा।

  2. किफायती आवास: घरों की बढ़ती कीमतों और किराये के दबाव को कम करने के लिए अधिक आवास निर्माण पर जोर।

  3. सड़क और बुनियादी सुविधाएं: खराब सड़कों, टूटे फुटपाथों, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार।

  4. सार्वजनिक सुरक्षा: पुलिस व्यवस्था और शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर बदलाव की बात।

  5. प्रशासनिक सुधार: नगर प्रशासन को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने का लक्ष्य।

उनके अभियान में 2028 ओलंपिक से पहले सड़क पर रहने वाले बेघर लोगों की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को कम करने का लक्ष्य भी शामिल था।

करेन बास की हार क्यों अहम है?

करेन बास लॉस एंजिलिस की मौजूदा मेयर थीं। उनके कार्यकाल के दौरान शहर को आवास संकट, बेघर लोगों की समस्या और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जनवरी 2025 में लगी भीषण पैलिसेड्स आग और उसके दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर भी उनके प्रशासन की आलोचना हुई थी। इन मुद्दों ने चुनावी बहस को प्रभावित किया।

करेन बास को गवर्नर गैविन न्यूसम, कमला हैरिस और नैन्सी पेलोसी जैसे प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं का समर्थन भी मिला था। इसके बावजूद रमन की जीत ने शहर की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया।

भारतीय मूल के लोगों के लिए क्यों खास है यह जीत?

नित्या रमन की सफलता भारतीय मूल के लोगों के लिए गर्व का विषय है। अमेरिका के एक बड़े और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले शहर की मेयर बनने जा रहीं रमन की जीत यह दिखाती है कि प्रवासी पृष्ठभूमि से आने वाले नेता भी अमेरिकी स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, उनकी जीत को केवल भारतीय मूल की पहचान तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा। यह चुनाव स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की अपेक्षाओं और मौजूदा प्रशासन के प्रति असंतोष का भी परिणाम है।

अब आगे क्या होंगी चुनौतियां?

लॉस एंजिलिस अमेरिका के सबसे बड़े शहरों में से एक है। यहां आवास की ऊंची लागत, बेघर लोगों की समस्या, सार्वजनिक सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं को सुधारना नई मेयर के सामने बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा 2028 में लॉस एंजिलिस ओलंपिक की मेजबानी करेगा, इसलिए शहर की तैयारियों और प्रशासनिक क्षमता पर भी उनकी सरकार की परीक्षा होगी।

निष्कर्ष: नित्या रमन की 52.70 प्रतिशत वोटों के साथ जीत लॉस एंजिलिस की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वह चुनावी वादों को जमीन पर उतारकर शहर की समस्याओं का समाधान किस तरह करती हैं।

चुनाव परिणाम

California Mayor, 2026

अनुमानित कुल वोटों में से 76.3% की गिनती पूरी

Nithya Raman- विजेता (AP की घोषणा के अनुसार), गैर-दलीय- 52.7%, 4,60,772 वोट

Karen Ruth Bass- गैर-दलीय- पदासीन- 47.3%- 4,13,519 वोट


असम में Oil India के टैंक फार्म में भीषण आग और विस्फोट, 1 कर्मचारी की मौत, 6 गंभीर रूप से घायल

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डिब्रूगढ़- असम के डिब्रूगढ़ जिले में शुक्रवार सुबह सरकारी तेल कंपनी Oil India Limited (OIL) की एक महत्वपूर्ण तेल भंडारण सुविधा में भीषण आग लगने और विस्फोट की घटना सामने आई। इस हादसे में एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि छह अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए।

यह घटना तेंगाखाट (Tengakhat) स्थित कंपनी के Intermediate Tank Farm (ITF) में हुई। आग इतनी तेजी से फैली कि मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। दमकल विभाग की कई गाड़ियों को आग बुझाने के लिए लगाया गया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय कर्मचारी मेंटेनेंस का काम कर रहे थे। आग में झुलसे सभी सात कर्मचारी एक निजी ठेकेदार कंपनी से जुड़े थे, जो Oil India के लिए संचालन और रखरखाव का काम करती है।

कहां और कब हुआ हादसा?
  • दिनांक: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

  • समय: सुबह लगभग 9:05 बजे

  • स्थान: Intermediate Tank Farm (ITF)

  • गांव/इलाका: तेंगाखाट

  • जिला: डिब्रूगढ़

  • राज्य: असम

  • कंपनी: Oil India Limited

यह सुविधा कच्चे तेल के भंडारण और तेल परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हादसा कैसे हुआ?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब सुविधा में रखरखाव का काम चल रहा था।

Oil India के बयान के मुताबिक, आग Indirect Bath Heater (IBH) क्षेत्र में लगी। यह उपकरण कच्चे तेल और गैस को गर्म रखने में इस्तेमाल होता है, ताकि पाइपलाइन में उनका प्रवाह बना रहे।

प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों में वाल्व पर काम करते समय विस्फोट होने की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि विस्फोट और आग लगने का वास्तविक कारण अभी जांच का विषय है।

खास बात यह है कि संबंधित IBH क्षेत्र को 4 नवंबर से ही मेंटेनेंस के लिए अलग रखा गया था।

हादसे में किसकी मौत हुई?

मृतक: राजू दत्ता (Raju Dutta)

निवासी: बोरडोलोंगोनी गांव, तेंगाखाट, डिब्रूगढ़

एक कर्मचारी की मौत

रिपोर्टों के अनुसार राजू दत्ता हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए थे और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वह Oil India के लिए काम करने वाली ठेका कंपनी से जुड़े थे।

छह घायल कर्मचारियों की हालत कैसी है?

हादसे में छह अन्य कर्मचारी झुलस गए। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

मीडिया रिपोर्टों में पांच घायलों को Assam Medical College and Hospital (AMCH), डिब्रूगढ़ और एक को Oil India Hospital, दुलियाजान में भर्ती कराने की जानकारी दी गई है।

रिपोर्टों में पहचाने गए पांच घायल कर्मचारी:

नाम

उम्र

निवास

तपस गोगोई    

40 वर्ष    

मिलन नगर, डिब्रूगढ़

शैलेन गोगोई

45 वर्ष

तेंगाखाट

कुमुद गोगोई

38 वर्ष

तेंगाखाट

गोलाप दत्ता

58 वर्ष

तेंगाखाट

इंद्र गोगोई

40 वर्ष

तेंगाखाट

घायलों को जलने की चोटें आई हैं। सभी का उपचार जारी होने की जानकारी दी गई है।

आग बुझाने के लिए चलाया गया बड़ा अभियान

आग की सूचना मिलते ही Oil India की फायर सर्विस टीम घटनास्थल पर पहुंची।

राहत और बचाव अभियान के प्रमुख बिंदु:

  • कंपनी की फायर सेफ्टी टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

  • फिक्स्ड फायरफाइटिंग सिस्टम को सक्रिय किया गया।

  • दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल पर लगाया गया।

  • कुल 11 फायर टेंडर आग बुझाने के अभियान में लगाए गए।

  • छह घायल कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाया गया।

  • दोपहर लगभग 12:30 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।

कंपनी के अनुसार इसके बाद स्थिति नियंत्रण में थी।

आग लगने का असली कारण क्या था?

फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है।

जांच में मुख्य रूप से इन पहलुओं को देखा जाएगा:

  1. मेंटेनेंस के दौरान तकनीकी खराबी हुई या नहीं।

  2. Indirect Bath Heater में विस्फोट कैसे हुआ।

  3. वाल्व और पाइपलाइन सिस्टम में कोई खराबी थी या नहीं।

  4. सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

  5. आग से उपकरणों और तेल भंडारण सुविधा को कितना नुकसान पहुंचा।

Oil India ने घटना की जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित की है। समिति हादसे के तत्काल और मूल कारणों का पता लगाने के साथ नुकसान का आकलन और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी।

Oil India Limited ने क्या कहा?

Oil India Limited ने अपने बयान में घटना पर दुख व्यक्त किया और बताया कि:

  • आग सुबह लगभग 9:05 बजे लगी थी।

  • संबंधित क्षेत्र में रखरखाव का काम चल रहा था।

  • सात कर्मचारी झुलसे, जिनमें एक की मौत हो गई।

  • छह घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

  • कंपनी की फायर सर्विस ने तत्काल कार्रवाई की।

  • घटना की जांच के लिए आंतरिक समिति बनाई गई है।

कंपनी ने मृत कर्मचारी के परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

इस घटना का Oil India और देश पर क्या असर पड़ सकता है?

Oil India Limited देश की प्रमुख सरकारी तेल एवं गैस कंपनियों में से एक है।

इस घटना के बाद कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं:

  • तेल भंडारण केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है?

  • मेंटेनेंस के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए क्या अतिरिक्त उपाय जरूरी हैं?

  • तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों में आग से बचाव की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

  • ठेका कर्मचारियों को किस स्तर का सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है?

हालांकि इस हादसे के कारण देश में तेल आपूर्ति बाधित होने की कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

घटना की पूरी टाइमलाइन

  1. 4 नवंबर 2026

    संबंधित IBH क्षेत्र को रखरखाव के लिए अलग किया गया।

  2. सुबह 9:05 बजे, 6 नवंबर

    तेंगाखाट स्थित Oil India सुविधा में आग लगी।

  3. सुबह

    सात कर्मचारी झुलसे। छह को अस्पताल पहुंचाया गया और एक की मौत हुई।

  4. दोपहर 12:30 बजे

    दमकल टीमों ने आग पर काबू पाया।

  5. इसके बाद

    Oil India ने आंतरिक जांच समिति गठित की।

निष्कर्ष: असम के डिब्रूगढ़ में Oil India के टैंक फार्म में हुई आग की घटना ने औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक कर्मचारी की जान चली गई और छह कर्मचारी घायल हुए। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन हादसे की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।

पंजाब में कर्मभूमि एक्सप्रेस के 4 डिब्बों में भीषण आग, 1,500 यात्रियों में मची अफरा-तफरी; सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

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पंजाब- पंजाब के पटियाला जिले में राजपुरा के पास शुक्रवार दोपहर एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। अमृतसर से पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी जा रही कर्मभूमि एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12508) के चार डिब्बों में अचानक आग लग गई।

आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। ट्रेन को तुरंत रोककर यात्रियों को बाहर निकाला गया। रेलवे कर्मचारियों, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया।

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 1,500 यात्री ट्रेन में सवार थे। किसी यात्री की मौत या घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

 कहां और कब हुआ हादसा?

  • दिनांक: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

  • समय: दोपहर लगभग 1:30 बजे

  • स्थान: सराय बंजारा रेलवे स्टेशन के पास

  • जिला: पटियाला, पंजाब

  • नजदीकी शहर: राजपुरा

  • रेलवे सेक्शन: राजपुरा–सरहिंद

  • ट्रेन नंबर: 12508 कर्मभूमि एक्सप्रेस

यह ट्रेन अमृतसर से न्यू जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल) की ओर जा रही थी।

ट्रेन के किन डिब्बों में लगी आग?

शुरुआती जानकारी के अनुसार आग इंजन के पीछे पांचवें डिब्बे में देखी गई।

इसके बाद आग आसपास के डिब्बों तक फैल गई।

  • तीन जनरल कोच आग से बुरी तरह प्रभावित हुए।

  • चौथे कोच को भी नुकसान पहुंचा।

  • डिब्बों से काफी धुआं और आग की लपटें निकलती दिखाई दीं।

  • रेलवे कर्मचारियों ने प्रभावित कोचों को बाकी ट्रेन से अलग कर दिया।

इस कार्रवाई का उद्देश्य आग को अन्य डिब्बों तक फैलने से रोकना था।

आग लगने का कारण क्या था?

आग लगने की असली वजह अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों में दो संभावनाएं सामने आईं:

  1. पैंट्री में आग: पटियाला के डिप्टी कमिश्नर के अनुसार शुरुआती जानकारी में आग पैंट्री से शुरू होने की बात सामने आई।

  2. शॉर्ट सर्किट: कुछ शुरुआती रिपोर्टों में बिजली के पंखे या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई।

हालांकि रेलवे ने तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। इसलिए अभी किसी एक कारण को निश्चित नहीं माना जा सकता।

यात्रियों को कैसे बचाया गया?

आग की सूचना मिलते ही रेलवे ने आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय की।

  • ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया।

  • यात्रियों को प्रभावित डिब्बों से बाहर निकाला गया।

  • लोको पायलट और गार्ड ने प्रभावित डिब्बों को अलग करने की कार्रवाई की।

  • दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।

  • स्थानीय ग्रामीणों ने भी यात्रियों की मदद की।

  • पुलिस और जिला प्रशासन ने राहत कार्य संभाला।

कुछ यात्रियों ने घबराहट में चलती ट्रेन से कूदने की कोशिश भी की। एक रिपोर्ट में 2–3 यात्रियों को मामूली चोट आने की बात कही गई है, हालांकि रेलवे की रिपोर्टों में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं की गई।

कितने यात्री प्रभावित हुए?

विवरण

         जानकारी

ट्रेन में यात्री

        लगभग 1,500

प्रभावित डिब्बे               

             4

गंभीर रूप से प्रभावित

           3 कोच

चौथा कोच

    आंशिक नुकसान

मृतक

    कोई पुष्टि नहीं

घायल

    आधिकारिक पुष्टि नहीं

दूसरी ट्रेनों पर क्या असर पड़ा?

इस घटना के बाद रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर राजपुरा–सरहिंद रेल सेक्शन में कुछ समय के लिए रेल परिचालन नियंत्रित किया।

  • आठ अन्य ट्रेनों को डायवर्ट किया गया।

  • प्रभावित ट्रेन के यात्रियों के लिए वैकल्पिक ट्रेन की व्यवस्था की गई।

  • रेलवे कर्मचारियों ने प्रभावित डिब्बों को हटाने और ट्रैक सामान्य करने का काम किया।

  • यात्रियों को सुरक्षित तरीके से आगे की यात्रा कराने की व्यवस्था की गई।

रेलवे ने क्या कहा?

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि कर्मभूमि एक्सप्रेस के चार डिब्बों में आग लगने की सूचना मिली थी।

रेलवे की सुरक्षा प्रणाली समय पर सक्रिय हुई, जिसके कारण ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोका जा सका। आग पर काबू पाने के प्रयास किए गए और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।

रेलवे ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू की है।

घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश

रेलवे प्रशासन ने आग लगने की वजह पता लगाने के लिए तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।

जांच में इन पहलुओं को देखा जाएगा:

  • इलेक्ट्रिकल वायरिंग में खराबी।

  • पंखे और अन्य बिजली उपकरणों की स्थिति।

  • पैंट्री में आग लगने की संभावना।

  • कोचों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था।

  • आग एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक कैसे फैली।

जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी।

यात्रियों के लिए इस घटना से क्या सीख मिलती है?

रेल यात्रा के दौरान यात्रियों को कुछ सावधानियां रखनी चाहिए:

  1. ट्रेन में आग या धुआं दिखाई देने पर तुरंत रेलवे स्टाफ को सूचना दें।

  2. आपातकालीन अलार्म और निकास द्वार की जानकारी रखें।

  3. घबराकर चलती ट्रेन से कभी न कूदें।

  4. गैस सिलेंडर, पेट्रोल, पटाखे और अन्य ज्वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा न करें।

  5. रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

निष्कर्ष: पंजाब के पटियाला जिले में कर्मभूमि एक्सप्रेस के चार डिब्बों में आग लगने की घटना गंभीर थी। करीब 1,500 यात्रियों की सुरक्षा चुनौती बन गई थी, लेकिन समय पर ट्रेन रोकने और प्रभावित डिब्बों को अलग करने से बड़ा नुकसान टल गया। आग लगने का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।


84 नगरीय निकायों में PM आवास मंजूर, संतोष पांडेय ने कांग्रेस को घेरा; बैज पर भी किया पलटवार

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 रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ के 84 नगरीय निकायों में नए आवासों को मंजूरी मिलने पर सांसद संतोष पांडेय ने प्रसन्नता जताई है। धनतेरस के मौके पर मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के सिर पर अपनी छत होना जरूरी है। गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दौरान उन्होंने आवास योजना, युवाओं की भर्ती और बस्तर में बदलते हालात को लेकर अपनी बात रखी, वहीं कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा।


सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि चुनाव में जीत के बाद सरकार ने सबसे पहले आवास के मुद्दे को प्राथमिकता दी। पिछली सरकार के कार्यकाल में जिन आवासों को रोक दिया गया था, उन्हें वर्तमान साय सरकार ने आगे बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि 84 नगरीय निकायों में नए आवासों की स्वीकृति गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत है।

1000 से अधिक पदों पर भर्ती, युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से एक हजार से अधिक पदों पर भर्ती की घोषणा को सांसद ने युवाओं के लिए बड़ी सौगात बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सराहना करते हुए कहा कि अग्निवीर के बाद प्रदेश के युवाओं को रोजगार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण अवसर मिलने जा रहा है। सरकार लगातार युवाओं को रोजगार और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रही है।

कांग्रेस में अंदरूनी कलह पर संतोष पांडेय का तंज

कांग्रेस की रैली में शामिल नहीं होने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चर्चाओं पर सांसद ने विपक्षी पार्टी को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में अपने ही नेताओं और विरोधियों की सूची तैयार की जा रही है। पार्टी के भीतर आपसी खींचतान और गुटबाजी का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में अंदरूनी टकराव लगातार बढ़ रहा है।

दीपक बैज के अर्जुन वाले बयान पर बोले- यह अर्जुन नहीं, दुर्योधन है

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कांग्रेस को अर्जुन बताते हुए हर चक्रव्यूह तोड़ने वाले बयान पर संतोष पांडेय ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, "यह अर्जुन नहीं, दुर्योधन है और 10 जनपद में गांधारी पट्टी बांधकर बैठी हैं।" सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेताओं के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता। उन्होंने पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठाते हुए उसके पतन की बात कही।

रामलीला मैदान में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल

रामलीला मैदान में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी संतोष पांडेय ने कटाक्ष किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर मंच और कुर्सियां खाली नजर आ रही थीं। उन्होंने इस आधार पर कांग्रेस के प्रदर्शन की सफलता पर सवाल उठाए और पार्टी की जनसमर्थन जुटाने की क्षमता पर निशाना साधा।

बस्तर में दीपोत्सव को बताया शांति और बदलाव का प्रतीक

बस्तर के विभिन्न गांवों में दीपोत्सव मनाए जाने पर सांसद संतोष पांडेय ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कोंटा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव और बस्तर क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब अमन-चैन की बयार बह रही है और दीपों की रोशनी क्षेत्र में शांति एवं सकारात्मक बदलाव का संदेश दे रही है।

भारतीय रेलवे की नई डोर-टू-डोर पार्सल सेवा: अब घर बैठे भेज सकेंगे सामान, स्टेशन जाने की जरूरत नहीं!

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भारतीय रेलवे अब पार्सल भेजने की पारंपरिक व्यवस्था को बदलने की तैयारी कर रहा है। रेलवे जल्द ही 'Rail Parcel App – Ghar Se Ghar Tak' नाम से एक नई डिजिटल सेवा शुरू करने जा रहा है।

इस सुविधा के माध्यम से आम नागरिक, व्यापारी और छोटे कारोबारी अपने घर या दुकान से ही पार्सल बुक कर सकेंगे। निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियां सामान को आपके घर से उठाएंगी, रेलवे ट्रेन से दूसरे शहर तक पहुंचाएगा और वहां से डिलीवरी पार्टनर सामान को सीधे प्राप्तकर्ता के घर तक पहुंचाएगा।

इसका मतलब है कि अब पार्सल भेजने और प्राप्त करने के लिए रेलवे स्टेशन के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

किन 8 शहरों में सबसे पहले शुरू होगी सेवा?

रेलवे बोर्ड की 26 अक्टूबर 2026 की नीति के अनुसार शुरुआत में आठ प्रमुख शहरों को शामिल किया गया है।

पहले चरण के 8 शहर

दिल्ली

मुंबई

कोलकाता

चेन्नई

अहमदाबाद

हैदराबाद

बेंगलुरु

पुणे

ये शुरुआती शहर हैं। देशभर में विस्तार का फैसला आगे के अनुभव और तैयारी के आधार पर होगा।

क्या छत्तीसगढ़ और रायपुर भी शामिल हैं?

फिलहाल शुरुआती आठ शहरों की सूची में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई शामिल नहीं हैं। हालांकि भविष्य में सेवा का विस्तार दूसरे शहरों में भी किया जा सकता है। अभी रायपुर के लिए लॉन्च की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है।

घर से दूसरे शहर तक पार्सल कैसे पहुंचेगा?

इस सेवा में तीन चरण होंगे:

पहला चरण: घर से पार्सल पिकअप

निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी आपके घर या दुकान से सामान उठाकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचाएगी।

दूसरा चरण: ट्रेन से परिवहन

भारतीय रेलवे पार्सल को ट्रेन के जरिए गंतव्य शहर के रेलवे स्टेशन तक पहुंचाएगा।

तीसरा चरण: घर तक डिलीवरी

गंतव्य स्टेशन से लॉजिस्टिक्स कंपनी पार्सल लेकर सीधे प्राप्तकर्ता के पते पर पहुंचेगी।


उदाहरण: मान लीजिए आपको दिल्ली से मुंबई अपने रिश्तेदार को कोई सामान भेजना है।
  • कंपनी दिल्ली में आपके घर से सामान उठाएगी।

  • रेलवे उसे ट्रेन से मुंबई पहुंचाएगा।

  • मुंबई में डिलीवरी पार्टनर आपके रिश्तेदार के घर सामान पहुंचाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया की बुकिंग और भुगतान ऑनलाइन किया जा सकेगा।

मोबाइल ऐप से बुकिंग कैसे होगी?

रेलवे इसके लिए एक नया ऐप और वेबसाइट तैयार कर रहा है।

प्रस्तावित ऐप का नाम है Rail Parcel App – Ghar Se Ghar Tak।

बुकिंग की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:

  1. मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाना होगा।

  2. मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा।

  3. पार्सल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले का पता दर्ज करना होगा।

  4. सामान का वजन, आकार और उसकी जानकारी भरनी होगी।

  5. उपलब्ध लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर (LSP) का चयन करना होगा।

  6. घर से पिकअप और घर तक डिलीवरी का विकल्प चुनना होगा।

  7. ऐप पर रेलवे और लॉजिस्टिक्स के अलग-अलग शुल्क देख सकेंगे।

  8. UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान कर सकेंगे।

इसके बाद बुकिंग और पार्सल की स्थिति मोबाइल पर देखी जा सकेगी।

कितने दिन पहले पार्सल बुक कर सकेंगे?

रेलवे के प्रस्तावित नियमों के अनुसार:

नियम

   जानकारी

एडवांस बुकिंग

  15 दिन पहले तक

अंतिम बुकिंग

  ट्रेन रवाना होने से कम से कम 1 दिन पहले

पिकअप स्लॉट

  ऐप पर उपलब्ध समय के अनुसार

रेलवे को पार्सल सौंपना

  ट्रेन रवाना होने से 12 घंटे से 1 घंटे पहले के बीच

बुकिंग

  ट्रेन में जगह उपलब्ध होने पर

इसका मतलब है कि ग्राहक पहले से अपनी डिलीवरी की योजना बना सकेंगे।

पार्सल भेजने का किराया कितना लगेगा?

अभी रेलवे ने सभी सामानों के लिए कोई एक निश्चित दर घोषित नहीं की है।

किराया मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करेगा:

  • पार्सल का वजन।

  • पार्सल की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई।

  • कितनी दूरी तक सामान भेजना है।

  • किस श्रेणी की ट्रेन से सामान जाएगा।

  • घर से पिकअप और घर तक डिलीवरी का शुल्क।

  • अतिरिक्त पैकेजिंग या स्टोरेज सेवा।

खास बात: ऐप में रेलवे का किराया और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी का शुल्क अलग-अलग दिखाया जाएगा। ग्राहक दोनों सेवाओं का भुगतान एक ही ट्रांजैक्शन में कर सकेंगे।

अभी यह कहना सही नहीं होगा कि यह सेवा हर स्थिति में निजी कोरियर से सस्ती होगी। वास्तविक तुलना किराया घोषित होने के बाद ही की जा सकेगी।

कौन-कौन सा सामान भेज सकेंगे?

रिपोर्टों में जिन सामानों की श्रेणियों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:

फल और सब्जियां


इलेक्ट्रॉनिक सामान


फर्नीचर


दोपहिया वाहन


मशीनरी और औजार


खाद्य एवं उपभोग की वस्तुएं

इन श्रेणियों में सामान स्वीकार करने की शर्तें लागू होंगी। हर वस्तु की बुकिंग स्वतः अनुमत नहीं होगी।

कौन-सा सामान नहीं भेज सकेंगे?
  • विस्फोटक पदार्थ।

  • ज्वलनशील पदार्थ।

  • खतरनाक रसायन और प्रतिबंधित वस्तुएं।

  • गैरकानूनी सामान।

  • रेलवे नियमों के तहत प्रतिबंधित वस्तुएं।

सामान की सही जानकारी और उचित पैकिंग देना ग्राहक की जिम्मेदारी होगी।

पार्सल कैंसिल करने पर कितना रिफंड मिलेगा?

रेलवे ने इसके लिए अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार नियम बनाए हैं।

कैंसिल करने का समय

      रिफंड का नियम

पिकअप से पहले

      रेलवे किराया वापस, ₹10 क्लर्केज कटेगा

लॉजिस्टिक्स कंपनी के पिकअप के बाद

      सामान्यतः रिफंड नहीं

रेलवे रसीद (PRR) बनने के बाद

      सामान्यतः कैंसिलेशन नहीं

विशेष तकनीकी या परिचालन समस्या

      निर्धारित मंजूरी से अपवाद संभव

घर से पिकअप और घर तक डिलीवरी के शुल्क का रिफंड संबंधित निजी कंपनी की अपनी नीति के अनुसार होगा।

पार्सल की लोकेशन कैसे पता चलेगी?

इस सुविधा में डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी।

ग्राहक को मोबाइल पर सूचना मिलेगी:

  • पार्सल पिकअप होने पर।

  • रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर।

  • ट्रेन में लोड होने पर।

  • गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने पर।

  • अंतिम डिलीवरी के लिए निकलने पर।

  • प्राप्तकर्ता को सामान सौंपे जाने पर।

पार्सल की रेलवे रसीद यानी PRR डिजिटल रूप में मिलेगी। सामान की डिलीवरी और प्राप्ति के समय OTP सत्यापन भी होगा।

इस योजना से किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

लाभार्थी

       संभावित फायदा

छोटे व्यापारी

     दूसरे शहरों में सामान भेजना आसान

किसान 

     उपयुक्त वस्तुओं को दूसरे बाजारों तक भेजने का विकल्प

ऑनलाइन विक्रेता

     माल की आवाजाही में अतिरिक्त विकल्प

आम नागरिक

     घर बैठे सामान भेजने की सुविधा

फर्नीचर व्यवसाय

     बड़े सामान के परिवहन का विकल्प

इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी

    रेलवे नेटवर्क से लंबी दूरी पर सामान भेजना

यह सेवा कब शुरू होगी?

अभी परीक्षण और तैयारी जारी

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

  • रेलवे बोर्ड ने 26 अक्टूबर 2026 को इस योजना के लिए नीति दिशानिर्देश जारी किए हैं।

  • ऐप iOS, Android और वेबसाइट के लिए विकसित किया जा रहा है।

  • Centre for Railway Information Systems (CRIS) को आवश्यक टेस्टिंग पूरी करनी है।

  • टेस्टिंग पूरी होने के बाद संबंधित रेलवे जोन को लागू करने की तारीख बताई जाएगी।

  • अभी आठ शहरों में सेवा की शुरुआत की निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल इसे शुरू हो चुकी सेवा नहीं, बल्कि जल्द शुरू होने वाली प्रस्तावित सुविधा समझना चाहिए।

रेलवे की इस योजना का महत्व क्या है?

भारतीय रेलवे पहले से ही लंबी दूरी पर बड़े पैमाने पर माल और पार्सल का परिवहन करता है। लेकिन आम नागरिक के लिए स्टेशन जाकर पार्सल बुक करना और गंतव्य स्टेशन से उसे प्राप्त करना कई बार मुश्किल होता है।

नई योजना में रेलवे और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियां मिलकर काम करेंगी।

इससे:

  • रेलवे की पार्सल परिवहन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।

  • निजी कोरियर कंपनियों को एक नया प्रतिस्पर्धी विकल्प मिलेगा।

  • छोटे कारोबारियों को देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

  • ग्राहकों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग, भुगतान और ट्रैकिंग की सुविधा मिलेगी।

मेरी राय: इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रेलवे की लंबी दूरी की परिवहन सुविधा सीधे आम नागरिक और छोटे व्यापारियों तक पहुंच सकेगी। खासकर भविष्य में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों को भी इसमें शामिल किया जाता है, तो छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को काफी लाभ मिल सकता है।

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