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यूपी में प्रचंड गर्मी का कहर, बांदा में पारा 47°C पार; दिल्ली-NCR में हीटवेव अलर्ट

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 नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। Uttar Pradesh में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है, जहां बांदा में अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी Lucknow में पारा 42.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है।


राष्ट्रीय राजधानी Delhi में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। शनिवार को यहां अधिकतम तापमान 43°C और न्यूनतम 25°C दर्ज किया गया। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में पिछले तीन दिनों से लू का असर बना हुआ है। मौसम विभाग ने आज के लिए ऑरेंज अलर्ट और अगले दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के मुताबिक, 27 अप्रैल से मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। तेज हवाओं, आंधी और हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

बिहार में भी गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। Bihar के बक्सर, रोहतास और अरवल सहित कई जिलों में तापमान काफी ऊंचा बना हुआ है। हालांकि, मौसम विभाग ने सीतामढ़ी, मधेपुरा और बांका समेत 21 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी लू चलने की संभावना जताई गई है। Madhya Pradesh और Rajasthan में 26 से 29 अप्रैल के बीच तेज हवाएं और हल्की बारिश के आसार हैं।

वहीं, पहाड़ी राज्यों Jammu and Kashmir, Uttarakhand और Himachal Pradesh में 26 से 30 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

दक्षिण भारत के Tamil Nadu, Kerala, Karnataka और Telangana में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और सतर्क रहने की सलाह दी है।

जलवायु परिवर्तन से महंगी फसलें प्रभावित, किसानों की आय पर बढ़ा संकट

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 नई दिल्ली। देश में बदलते मौसम के मिजाज ने किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालिया रबी सीजन में हाई-वैल्यू फसलें—जैसे फल, सब्जियां, मसाले और प्रीमियम चावल—जलवायु परिवर्तन की मार सबसे अधिक झेलती नजर आ रही हैं। मौसम में अचानक बदलाव से पैदावार, गुणवत्ता और किसानों की आय तीनों प्रभावित हो रही हैं।


महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के कारण अंगूर के बागानों को नुकसान पहुंचा है, वहीं हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सर्दी कम पड़ने से सेब की फसल प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड की कमी से सेब के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे उत्पादन घटता है।

देश के कई हिस्सों में लंबी चली हीटवेव ने सब्जियों और फलों की खेती पर भी असर डाला है। अधिक तापमान के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि टमाटर और शिमला मिर्च जैसी फसलों में फूल झड़ने की समस्या बढ़ी है। महाराष्ट्र के अंगूर और अनार उत्पादक क्षेत्रों में भी तेज गर्मी के कारण फलों के झुलसने और असमान पकने की शिकायतें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि Climate Change का स्पष्ट संकेत हैं। पिछले कुछ वर्षों में किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान से हटकर अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़े हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर भारत के कई राज्यों में बागवानी का रकबा तेजी से बढ़ा है और यह कई क्षेत्रों में आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है।

हालांकि, हाई-वैल्यू फसलें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। अनाज के विपरीत, इन फसलों में मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता—जैसे आकार, रंग, स्वाद और टिकाऊपन—भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में फूल आने के समय अधिक गर्मी या कटाई के दौरान बारिश होने से फसल की गुणवत्ता घट जाती है, जिससे बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

बारिश के पैटर्न में बदलाव भी चिंता का विषय बना हुआ है। कम समय में अधिक बारिश से जलभराव और मिट्टी के पोषक तत्वों का नुकसान होता है, जबकि लंबे सूखे से सिंचाई पर दबाव बढ़ता है। कटाई के समय बारिश होने पर फलों के फटने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने की समस्या भी सामने आती है।

कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, क्षेत्र-विशेष अनुसंधान, बेहतर फसल बीमा, माइक्रो-इरिगेशन और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाना चाहिए। इससे किसानों की आय को स्थिर रखने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाने में मदद मिल सकती है।

WHCD डिनर में फायरिंग से हड़कंप, ट्रंप को टेबल के नीचे छिपाया गया; सीक्रेट सर्विस ने सुरक्षित निकाला

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 वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राजधानी में स्थित Washington Hilton में शनिवार रात आयोजित White House Correspondents’ Dinner के दौरान कथित फायरिंग की घटना से अफरातफरी मच गई। कार्यक्रम में मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance और फर्स्ट लेडी Melania Trump को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है।


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम शुरू होने के कुछ ही देर बाद गोलियों जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने हॉल में मौजूद लोगों को तुरंत नीचे झुकने और सुरक्षित स्थान लेने के निर्देश दिए। कई मेहमान अपनी जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिप गए, जिससे हॉल में अफरातफरी का माहौल बन गया।

सूत्रों के अनुसार, उस समय राष्ट्रपति ट्रंप मंच पर मौजूद थे। United States Secret Service के एजेंटों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें और अन्य वीआईपी को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला। घटना के कुछ समय बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमलावर को पकड़ लिया गया है।

घटना के बाद होटल परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है तथा जांच शुरू कर दी गई है। आसमान में हेलिकॉप्टर गश्त करते नजर आए और सड़कों पर आपातकालीन वाहनों की आवाजाही बढ़ गई।

आयोजकों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से मेहमानों को कुछ समय तक बॉलरूम के भीतर ही रहने के निर्देश दिए गए। हालात सामान्य होने के बाद कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध व्यक्ति हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुंचा। इस घटना के बाद राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्यमंत्री की तत्परता से मिनटों में हरकत में आया प्रशासन: जरूरतमंद तक पहुँची राहत

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संवेदनशील नेतृत्व का प्रभाव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वृद्ध हितग्राही को मिली तत्काल राहत

मीडिया में खबर आते ही मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, प्रशासन हरकत में आया

तीन माह की लंबित पेंशन, राशन और योजनाओं का लाभ तत्काल सुनिश्चित

पेंशन और राशन मिल गया, अब मिली राहत… मुख्यमंत्री जी का आभारी हूँ – भीखलु राम ध्रुव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील, सजग और जनकेंद्रित नेतृत्व का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध हितग्राही की समस्या पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत राहत सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री निवासी भीखलु राम ध्रुव को जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है।

मीडिया के माध्यम से प्रसारित एक खबर में यह जानकारी सामने आई थी कि भीखलु राम ध्रुव लंबे समय से पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिना विलंब किए तत्काल संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि संबंधित हितग्राही को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर बीएस उइके ने स्वयं मामले की जानकारी ली और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि भीखलु राम ध्रुव का ई-केवाईसी किसी कारणवश लंबित था, जिसके कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रशासन द्वारा तत्काल ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई, जिससे उन्हें पुनः शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि भीखलु राम ध्रुव को तीन माह की लंबित वृद्धावस्था पेंशन एकमुश्त प्रदान की गई। 

वहीं खाद्य विभाग द्वारा भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके घर पहुंचकर 01 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया है। अब उन्हें नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस मानवीय और तत्पर हस्तक्षेप से राहत प्राप्त करने पर भीखलु राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पेंशन और राशन मिल जाने से मेरे जीवन में बड़ी राहत आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह संवेदनशीलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अब मुझे भरोसा है कि सरकार हमारी चिंता करती है। 

उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद तक उनका लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए निरंतर सजग और प्रतिबद्ध है।

डिजिटल जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में स्व-गणना को रफ्तार, 61,500+ नागरिकों ने कराया पंजीकरण

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 रायपुर। प्रस्तावित डिजिटल जनगणना 2027 के तहत छत्तीसगढ़ में स्व-गणना (Self-Enumeration) अभियान को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। अब तक राज्य के 61,503 नागरिकों ने आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जिनमें से बड़ी संख्या अपनी प्रक्रिया पूरी भी कर चुकी है।


47 हजार से अधिक ने पूरी की प्रक्रिया

जनगणना संचालन निदेशालय, छत्तीसगढ़ के अनुसार, पंजीकृत नागरिकों में से 47,419 लोग स्व-गणना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं। वहीं 14,084 नागरिक अभी भी अपनी जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं।

घर बैठे आसान प्रक्रिया

स्व-गणना प्रणाली के तहत नागरिक घर बैठे ही अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए OTP आधारित लॉगिन व्यवस्था लागू की गई है। सत्यापन के बाद आवास, सुविधाओं और परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी भरनी होती है। प्रक्रिया पूरी होने पर एक ‘जनगणना संदर्भ संख्या’ (CRN) जारी की जाती है।

नीति निर्माण में मिलेगी मदद

अधिकारियों के मुताबिक, इस डिजिटल पहल का उद्देश्य सटीक और विश्वसनीय डेटा तैयार करना है, जिससे भविष्य की सामाजिक-आर्थिक नीतियों और योजनाओं के निर्माण में सहायता मिल सके। डिजिटल माध्यम से न केवल जनभागीदारी बढ़ रही है, बल्कि प्रशासनिक कार्य भी सरल हो रहा है।

प्रशिक्षण और हेल्पलाइन की व्यवस्था

अभियान के सफल संचालन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन सेवाएं भी शुरू की गई हैं।

डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के तहत एकत्र की गई सभी जानकारी कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

लोगों से भागीदारी की अपील

जनगणना संचालन निदेशक डॉ. कार्तिकेय गोयल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ें, ताकि राज्य के समावेशी विकास के लिए मजबूत डेटा आधार तैयार किया जा सके।

सफलता की कहानी-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से फायदा,ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से दुबेलाल का बढ़ा मुनाफा

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रायपुर- प्रदेश के किसान शासन की योजनाओं का लाभ लेकर और आधुनिक खेती किसानी की तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदानी में इजाफा कर रहे हैं। ऐसे ही महासमुन्द जिले के अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह के किसान दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।दुबेलाल कोसरे, बताते हैं कि पूर्व में वे पारंपरिक रूप से धान एवं अन्य फसलों की खेती करते थे। इस पारंपरिक खेती में लागत अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उन्हें सीमित लाभ ही प्राप्त हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।

वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक का लाभ लिया। दुबेलाल कोसरे बताते है कि योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती प्रारंभ की।

कृषक दुबेलाल कोसरे द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ग्राफ्टेड पौध, सिंचाई हेतु ड्रिप प्रणाली तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया गया। वे बताते हैं कि उन्नत तकनीकों के समुचित उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 16 से 18 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में टमाटर का औसत विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 9 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।दुबेलाल कोसरे द्वारा अन्य किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। उनके मार्गदर्शन से ग्राम बम्बुरडीह के अन्य कृषक भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं।


दशकों का अँधेरा टूटा, अबूझमाड़ के ईरपानार गाँव में पहली बार पहुँची बिजली

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रायपुर- कभी नक्शे पर नाम भर रह गया ईरपानार आज उम्मीदों की नई पहचान बन गया है। अबूझमाड़ के गहरे जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम पगडंडियों के बीच बसे इस छोटे से गांव में पहली बार बिजली पहुँची है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला नहीं देखा, बल्कि विकास को महसूस किया।

ईरपानार नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन यह दूरी सामान्य रास्ते जैसी नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग, पहाड़ी चढ़ाई, घने वन क्षेत्र और कई स्थानों पर पैदल सफर करना पड़ता है। बरसात के मौसम में संपर्क और भी कठिन हो जाता है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, नारायणपुर संभाग ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया। कार्यपालन अभियंता सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मिशन मोड में काम कर सफलता हासिल की।

घने जंगलों के बीच चला विकास अभियान 

कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था। कई हिस्सों में बिजली खंभे, तार और सामग्री पहुंचाने के लिए कठिन श्रम करना पड़ा। टीम को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों, जंगलों और सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ा। कई स्थानों पर मशीनों की बजाय मानव श्रम और स्थानीय सहयोग से सामग्री पहुंचाई गई।बिजली लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर विभागीय टीम ने मिसाल पेश की है।

₹56.11 लाख की लागत, लेकिन असर पीढ़ियों तक

ग्राम ईरपानार के विद्युतीकरण कार्य पर कुल ₹56.11 लाख की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया , एवं उस सोच का प्रतीक है जिसमें अंतिम छोर पर बसे परिवार को भी विकास का समान अधिकार दिया जा रहा है।

अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला

बिजली आने से अब गांव के बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य सुविधा, जो शहरों में सहज है, अब यहां भी उपलब्ध होगी। पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से जीवन आसान होगा।

भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार सुविधाओं और छोटे व्यवसायों के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

ग्रामीणों की आंखों में दिखी खुशी 

जब पहली बार गांव में बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने घरों में पहली बार स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन, लकड़ी और सीमित साधनों पर निर्भर जीवन अब बदलने लगा है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली विभाग की टीम के प्रति आभार जताया। लोगों ने इसे गांव के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।

अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत 

ईरपानार जैसे अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।

47 नक्सलियों का सामूहिक सरेंडर, DVC पर बड़ा असर

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 जगदलपुर। नक्सल मोर्चे पर तेलंगाना से बड़ी खबर सामने आई है, जहां 47 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका मान रही हैं। बताया जा रहा है कि इस सामूहिक सरेंडर के बाद दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी (DVC) की गतिविधियां लगभग समाप्ति की ओर पहुंच गई हैं।


दो बड़े नेताओं ने की अगुवाई
इस सरेंडर की अगुवाई दक्षिण बस्तर DVC के प्रभारी हेमला आयथु उर्फ विज्जा और 9वीं बटालियन के कमांडर पोडियम लाचू उर्फ मनोज ने की। आत्मसमर्पण करने वालों में एक स्टेट कमेटी (SCM) स्तर का नेता, 3 DVCM/ CyPCM स्तर के सदस्य, 24 ACM/ PPCM कैडर और 19 अन्य पार्टी सदस्य शामिल हैं।

भारी मात्रा में हथियार बरामद
सरेंडर के साथ नक्सलियों ने 32 हथियार और 515 जिंदा कारतूस भी सौंपे हैं। इनमें एक LMG, 4 AK-47, 3 SLR, 2 INSAS राइफल, 12 सिंगल शॉट गन, 2 पिस्टल/रिवॉल्वर और 2 BGL गन शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 किलो कोर्डटेक्स वायर भी बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक लगाने में किया जाता है।

पुनर्वास नीति के तहत सहायता
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस सरेंडर के बाद करीब 1.50 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ के मूल निवासी कैडरों को 25-25 हजार रुपये की अंतरिम राहत भी दी गई है।

2026 में 260 नक्सली कर चुके सरेंडर
तेलंगाना पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 260 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। फिलहाल तेलंगाना मूल के केवल 4 सक्रिय नक्सली अन्य राज्यों में बचे हैं।

हिंसा छोड़ने की अपील
पुलिस ने शेष शीर्ष नक्सली नेताओं—गणपति, संतोष, सुजाता और मंगतू—से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात: निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उद्योगों के विस्तार के लिए बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में अपने निवेश को और बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एफसेनल के डायरेक्टर युकीहिरो मोमोसे, कोनोइके ट्रांसपोर्ट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर तोशीहीरो फूजीवारा, एफएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार दीक्षित तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के पूर्व सीएमडी के. डी. दीवान उपस्थित थे।

विदेशी फंडिंग पर सियासत तेज: BJP का कांग्रेस पर हमला, ‘बाहरी ताकतों से जुड़े तार’ का आरोप

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी नेताओं के करीबी लोगों के तार बाहरी ताकतों से जुड़े रहे हैं।


शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से चर्चा के दौरान पाण्डेय ने दावा किया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी बैंकों के डेबिट कार्ड के जरिए बड़े पैमाने पर रकम खपाई जा रही है। उनके अनुसार, बीते एक वर्ष में ऐसे क्षेत्रों में करीब 95 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें बस्तर और धमतरी में लगभग 6.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध खर्च सामने आए हैं।

कांग्रेस और भूपेश बघेल पर निशाना
पाण्डेय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में केंद्रीय जांच एजेंसियों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए, जिससे ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं के करीबी लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

FCRA और केंद्र सरकार के कदमों का जिक्र
भाजपा नेता ने केंद्र की Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) में किए गए संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विदेशी फंडिंग की निगरानी सख्त हो गई है। उनके अनुसार, विदेशी धनराशि अब निर्धारित बैंकिंग चैनल के जरिए आने से पारदर्शिता बढ़ी है और संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखना आसान हुआ है।

संगठनात्मक मजबूती पर भी जोर
पाण्डेय ने भाजपा के संगठनात्मक ढांचे और प्रशिक्षण व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि लगातार कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर काम करती है। जिलों और मंडलों में कार्यकर्ताओं को केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस द्वारा सरकार और प्रशासन में तालमेल की कमी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने अंदर झांकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए लगातार जनता के बीच काम कर रही है।

छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग का खुलासा: ED जांच में 95 करोड़ की संदिग्ध एंट्री, नक्सल इलाकों तक पहुंच

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 रायपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, विदेश से आए करोड़ों रुपये का उपयोग बस्तर और धमतरी क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों के विस्तार में किए जाने के संकेत मिले हैं।


95 करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन

ED के मुताबिक नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 95 करोड़ रुपये विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत लाए गए। इनमें से लगभग 6.5 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ में खर्च किए जाने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला The Timothy Initiative (TTI) और उससे जुड़े नेटवर्क से संबंधित बताया जा रहा है।

विदेशी नागरिक हिरासत में

इस मामले में विदेशी नागरिक मिकाह मार्क को बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने हिरासत में लिया। उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए, जिनका उपयोग भारत में बार-बार नकदी निकासी के लिए किया जा रहा था।

देशभर में ED की छापेमारी

ED ने 18 और 19 अप्रैल को देशभर में छह स्थानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि Truist Bank से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाकर विभिन्न राज्यों के एटीएम से नकद निकासी की जा रही थी, ताकि वित्तीय निगरानी प्रणाली से बचा जा सके।

FCRA नियमों का उल्लंघन

एजेंसी के अनुसार संबंधित संगठन FCRA के तहत पंजीकृत नहीं है, इसके बावजूद विदेशी फंड का उपयोग किया जा रहा था। लेन-देन के रिकॉर्ड के लिए ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी सामने आया है, जिसे कथित तौर पर विदेश से संचालित किया जा रहा था।

कैश, कार्ड और दस्तावेज जब्त

छापेमारी के दौरान ED ने 25 विदेशी डेबिट कार्ड, करीब 40 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी को आशंका है कि यह एक संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

जांच जारी

फिलहाल ED इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और फंडिंग के स्रोत, उपयोग तथा संभावित नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में दोहरे हत्याकांड से सनसनी: आरक्षक की पत्नी-बेटे की हत्या, बेटी ICU में, आरोपी महिला गिरफ्तार

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। स्मृति नगर चौकी क्षेत्र स्थित एसटीएफ कॉलोनी में एक महिला ने घर में घुसकर आरक्षक के परिवार पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में आरक्षक की पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल के ICU में भर्ती है।


अचानक घर में घुसकर किया हमला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला अचानक घर में दाखिल हुई और चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घर में मौजूद एक अन्य बच्चे ने बाथरूम में छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना के बाद कॉलोनी में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए।

आरोपी महिला गिरफ्तार

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला और आरक्षक नितेश यादव के बीच कथित अवैध संबंध थे, जिसके चलते विवाद की स्थिति बनी हुई थी।

बताया जा रहा है कि घटना से एक दिन पहले भी आरोपी महिला आरक्षक के घर पहुंची थी, लेकिन उस समय उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था। इसके बावजूद अगले दिन उसने इस वारदात को अंजाम दे दिया।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, घटना के पीछे की असली वजह और संभावित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।

इलाके में तनाव का माहौल

घटना के बाद एसटीएफ कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों में भय और तनाव का माहौल है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

SP भावना गुप्ता 117 दिन के अवकाश पर, ओपी शर्मा को अतिरिक्त प्रभार

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 बलौदाबाजार। जिले की पुलिस व्यवस्था में अहम प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पुलिस अधीक्षक (SP) भावना गुप्ता चार माह के मातृत्व अवकाश पर चली गई हैं।


गृह विभाग द्वारा उनका 117 दिनों का अवकाश, जो 14 अगस्त तक प्रभावी रहेगा, स्वीकृत किया गया है।


इस अवधि में उनकी अनुपस्थिति के दौरान ओपी शर्मा को बलौदाबाजार एसपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

बताया जा रहा है कि ओपी शर्मा वर्तमान में चौथी बटालियन, माना में कमांडेंट के पद पर पदस्थ हैं और अब वे अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में जिले की कानून-व्यवस्था की कमान संभालेंगे।

यह प्रशासनिक निर्णय जिले में कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

जापान ने रक्षा निर्यात नीति में किया बड़ा बदलाव, भारत-जापान सहयोग पर बढ़ी चर्चा

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 टोक्यो। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच जापान ने अपनी रक्षा नीति में अहम बदलाव किया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अपनाई गई शांतिवादी नीति में संशोधन करते हुए जापान सरकार ने हथियार निर्यात से जुड़े नियमों को पहले की तुलना में अधिक लचीला बना दिया है। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर चीन और उत्तर कोरिया की गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।


जापान सरकार का कहना है कि यह नीति परिवर्तन उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में भी योगदान देगा। इस फैसले का स्वागत भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों ने किया है।

भारत-जापान के बीच रक्षा सहयोग पर जोर

22 से 24 अप्रैल 2026 के बीच टोक्यो में भारत और जापान के बीच 8वीं "आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स" आयोजित हुई। इस बैठक में भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

चर्चा का मुख्य फोकस द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना रहा। दोनों देशों ने “मुक्त और समावेशी इंडो-पैसिफिक” क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि जापान की नई रक्षा नीति की समीक्षा का भारत स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ है।

संभावित रक्षा सहयोग: किन क्षेत्रों पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत और जापान के बीच रक्षा तकनीक और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, किसी भी विशेष हथियार प्रणाली के अधिग्रहण पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संभावित सहयोग के क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं:

उन्नत नौसैनिक प्लेटफॉर्म (जैसे हेलीकॉप्टर कैरियर तकनीक)
डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी तकनीक
मिसाइल डिफेंस सिस्टम और युद्धपोत
आधुनिक हेलीकॉप्टर और एविएशन सिस्टम
अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक
संतुलित दृष्टिकोण जरूरी

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की रक्षा खरीद नीति कई रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी कारकों पर आधारित होती है। ऐसे में किसी भी देश से हथियार खरीद का निर्णय व्यापक मूल्यांकन के बाद ही लिया जाता है।

साथ ही, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सहयोग का उद्देश्य संतुलन और स्थिरता बनाए रखना होता है, न कि किसी एक देश के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाना।

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ - मुख्यमंत्री

रायपुर- डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 



मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

सम्मेलन को सांसदबृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।

इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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