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रामनवमी पर दिव्य नजारा: अयोध्या में रामलला के ललाट पर सूर्यदेव का तिलक, श्रद्धालु हुए भावविभोर

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 अयोध्या। पावन पर्व रामनवमी के अवसर पर अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का आयोजन इस वर्ष अत्यंत भव्य और दिव्य रूप में किया जा रहा है। दोपहर ठीक 12 बजे एक अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब सूर्य की किरणों ने रामलला के ललाट पर तिलक किया। यह दिव्य क्षण लगभग चार मिनट तक चला और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।


धार्मिक मान्यता के अनुसार यही समय भगवान श्रीराम के जन्म का माना जाता है। ऐसे में सूर्य तिलक का ठीक उसी क्षण होना इस आयोजन को और भी विशेष बना गया। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, वहीं लाइव प्रसारण के माध्यम से करोड़ों लोगों ने भी इस ऐतिहासिक पल के दर्शन किए।

इस वर्ष रामनवमी पर रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग भी बना है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का अभिषेक, श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना विधि-विधान से संपन्न की गई।

इस भव्य आयोजन से पहले मंदिर प्रशासन द्वारा तीन दिनों तक लगातार सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। बृहस्पतिवार से शुरू हुए परीक्षण में दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों को सटीक रूप से रामलला के मस्तक तक पहुंचाने की प्रक्रिया को परखा गया, जो पूरी तरह सफल रही। शुक्रवार को भी इसी प्रक्रिया को दोहराया गया।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, सूर्य तिलक के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। मंदिर के ऊपरी तल पर विशेष रिफ्लेक्टर, लेंस और मिरर सिस्टम लगाए गए हैं। सूर्य की किरणें इन लेंसों के माध्यम से दूसरे तल पर लगे दर्पण तक पहुंचती हैं और वहां से परावर्तित होकर लगभग 75 मिलीमीटर के आकार में रामलला के ललाट पर तिलक के रूप में दिखाई देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सूर्य की दिशा और गति के अनुसार सटीक रूप से निर्धारित की गई है।

रामनगरी अयोध्या में इस दिव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था और भक्ति का संचार कर दिया है। रामनवमी का यह पावन पर्व इस बार एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रूप में मनाया जा रहा है।

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बड़ा फैसला, राज्यों को 70% LPG आवंटन के निर्देश

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Global Energy Crisis : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अलर्ट मोड में आ गई है और देशभर में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के वितरण को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक करें, ताकि उद्योगों और व्यवसायों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके।


इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीजर मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संशोधित आवंटन योजना की जानकारी दी है। नई व्यवस्था के तहत मौजूदा 50 प्रतिशत कॉमर्शियल एलपीजी आवंटन के अलावा अतिरिक्त 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिससे कुल आवंटन 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यह स्तर संकट से पहले की स्थिति के करीब माना जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि इस बढ़े हुए आवंटन का लाभ प्राथमिकता के आधार पर स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को दिया जाएगा। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में आम जनता को यह भरोसा दिलाया गया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईंधन आपूर्ति तंत्र पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

इस बीच सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील भी की है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर्याप्त है और उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, ताकि भविष्य में भी आपूर्ति बाधित न हो।

गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों का चौथा हफ्ता जारी है और अब तक इस संघर्ष के समाप्त होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसी बीच Strait of Hormuz के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।

भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हुई है, वहीं औद्योगिक ईंधन डीजल के दाम भी बढ़ाए गए हैं। इससे पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को सीमित कर दिया गया था, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है और सरकार लगातार संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हुई है, ताकि आम लोगों और उद्योगों दोनों की जरूरतें सुचारु रूप से पूरी की जा सकें।

डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल पर ₹10 की कटौती—केंद्र सरकार के फैसले का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया स्वागत

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मुख्यमंत्री ने कहा—140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय, प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का परिचायक

रायपुर- केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।

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भारत की अध्यक्षता में पहली ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक 2026 का आयोजन

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 भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा कार्य विभाग ने 25 मार्च 2026 को वर्चुअल माध्यम से पहला ब्रिक्स (BRICS) युवा समन्वय बैठक आयोजित की। यह बैठक शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे (IST) तक चली और इसमें सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत द्वारा वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ ही इस बैठक के माध्यम से “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत युवा सहयोग की दिशा निर्धारित की गई।

बैठक के दौरान भारत ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख पहलें शामिल थीं—कार्य समूह बैठकों का आयोजन, विषयगत सहभागिता, ‘Serve BRICS’ स्वयंसेवी गतिविधियां, युवा विकास मंच, युवा परिषद बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक।

चर्चा के दौरान सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें शिक्षा एवं कौशल विकास, युवा उद्यमिता, विज्ञान और नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य एवं खेल, पर्यावरण एवं सतत विकास, अंतर-धार्मिक संवाद तथा युवा आदान-प्रदान शामिल हैं।

यह बैठक सदस्य देशों के बीच व्यापक विषयों पर सहमति बनाने और ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिससे भारत की अध्यक्षता के दौरान आगामी कार्यक्रमों की मजबूत नींव रखी गई।

डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का याउंडे, कैमरून में शुभारंभ

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विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून की राजधानी याउंडे में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ने की। इस अवसर पर WTO की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद मंत्रियों ने WTO के मूलभूत मुद्दों और उसके सिद्धांतों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि WTO में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-प्रधान प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को केंद्र में रखते हुए संगठन के मूल सिद्धांतों—जैसे भेदभाव-रहित व्यवस्था, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता—को बनाए रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के पहले दिन के दौरान पीयूष गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री महामहिम डायोन नगुटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को मजबूत करने सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने WTO की महानिदेशक से भी मुलाकात कर MC14 के एजेंडे पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी MC14 के दौरान चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मैक्सिको, पेरू, रूस, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडे के साथ-साथ व्यापार संबंधों को बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। चिली और पेरू के साथ भारत-चिली तथा भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं की प्रगति पर बातचीत हुई। वहीं यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ हाल ही में संपन्न FTA वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और रात्रिभोज के साथ हुआ।

BIG NEWS : पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत, सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी

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 नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है। सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।


सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे पेट्रोल करीब 10 रुपये और डीजल 10 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है।

ऊर्जा संकट के बीच बड़ा फैसला

यह निर्णय पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के चलते उत्पन्न ऊर्जा संकट को देखते हुए लिया गया है। सरकार ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद देश ने अगले 60 दिनों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर लिया है।

नायरा एनर्जी ने बढ़ाए थे दाम

इससे पहले देश की प्रमुख रिफाइनरी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए एक्साइज ड्यूटी में कटौती का निर्णय लिया।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कीमतों में उछाल आया था, लेकिन हाल ही में इसमें कुछ नरमी दर्ज की गई है।

जानकारों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा के बाद बाजार को थोड़ी राहत मिली है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI के दामों में गिरावट देखने को मिली है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर दुनियाभर के बाजारों और ईंधन की कीमतों पर पड़ा है।

वंदे भारत में ‘कीड़े वाले दही’ की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई, IRCTC पर 10 लाख का जुर्माना

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 Vande Bharat: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, वंदे भारत एक्सप्रेस की पटना-टाटानगर (ट्रेन संख्या 21896) में सफर कर रहे एक यात्री ने भोजन की खराब गुणवत्ता और ‘कीड़े वाले दही’ मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। यह मामला 15 मार्च 2026 का बताया जा रहा है।


शिकायत के बाद भारतीय रेलवे ने जांच कराई, जिसमें लापरवाही सामने आई। इसके बाद रेलवे ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए सख्त कार्रवाई की।

कार्रवाई के तहत IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि संबंधित सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पर 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका गया है।

इतना ही नहीं, रेलवे ने दोषी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट भी समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों के स्वास्थ्य और सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी लापरवाही पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे हैं श्रीराम

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रामनवमी पर्व पर विशेष


छत्तीसगढ़ की धरती पर राम बसते हैं। यहां की संस्कृति में राम रचे-बसे हैं। यहां दिन की शुरुआत 'राम-राम' से होती है। और जीवन यात्रा का अंत होता है 'राम नाम सत्य है' से।

सुबह लोग उठते ही कहते हैं — हे राम। रात को सोने से पहले भी कहते हैं — 'हे राम, हे भगवान'। राम का नाम यहां के लोगों के मन में बसा है।

श्रीराम और भांचा राम

माता कौशल्या दक्षिण कोशल की बेटी थीं। दक्षिण कोशल आज का छत्तीसगढ़ है। इसी कारण छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। 

छत्तीसगढ़ के लोग श्रीराम को अपना भांजा मानते हैं। भांजे को श्रीराम का रूप माना जाता है छत्तीसगढ़ में भांजे को बहुत सम्मान मिलता है। लोग भांजे को श्रीराम का स्वरूप मानते हैं। उसे प्रणाम करते हैं। यहाँ पर भांजे के पांव पखारने की परंपरा है। उसकी पूजा-आरती की जाती है। भांजे को दान भी दिया जाता है। इसे भांचा दान कहा जाता है। कई परिवार भांजे का पालन-पोषण भी करते हैं। उसे अच्छे संस्कार और शिक्षा देते हैं।भांजे से कोई गलती हो जाए, तो भी उसे डांटा नहीं जाता। मामा-मामी की मृत्यु के बाद दफनाते समय भांजे से मिट्टी दबवाई जाती है। विवाह संस्कार के बाद मामा-मामी भांजे से आशीर्वाद लेते हैं। वे कहते हैं —
हमें मिट्टी देकर कृतार्थ करना।

'राम-राम' से होता है अभिवादन

छत्तीसगढ़ में लोग एक-दूसरे को 'राम-राम' कहकर नमस्कार करते हैं। कहीं-कहीं पर लोग जय श्रीराम भी कहते हैं। भाइयों की जोड़ी को राम-लक्ष्मण कहा जाता है। पति-पत्नी की जोड़ी को राम-सीता का उदाहरण दिया जाता है। धान नापते समय किसान पहली गिनती 'राम' बोलकर करते हैं।

लोकजीवन में भी राम

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में राम मंदिर मिल जाते हैं। साल भर रामकथा और रामचरितमानस का पाठ होता है। जन्म हो या मृत्यु —
दोनों अवसरों पर रामकथा होती है। यहां की लोक परंपराओं में भी राम हैं। ददरिया में राम हैं। विवाह गीतों में राम हैं। कर्मा और सुआ गीतों में भी राम हैं।

नामों में भी राम की महिमा

छत्तीसगढ़ में लोग अपने बच्चों के नाम के आगे अथवा पीछे 'राम' जोड़ते हैं। जिससे उनके बच्चे राम की तरह ही संस्कारवान हों। जैसे- रामकुमार,रामलाल,रामदयाल, रामप्रसाद, रामगोपाल। इसी तरह कई लोग नाम के अंत में भी राम जोड़ते हैं। जैसे-जयराम, दयाराम, गंगाराम,राजाराम, आनंदराम।

राम को समर्पित रामनामी समुदाय

छत्तीसगढ़ में रामनामी संप्रदाय भी है। इस संप्रदाय के लोग अपने पूरे शरीर पर 'राम-राम' गोदना से लिखवाते हैं। वे जीवन भर राम की भक्ति करते हैं। राम के आदर्शों का प्रचार करते हैं। छत्तीसगढ़ में जीवन के हर पड़ाव पर राम हैं। जन्म पर राम नाम का संकीर्तन होता है। मृत्यु के बाद जब अर्थी श्मशान जाती है। अंतिम यात्रा में लोग कहते हैं —
"राम नाम सत्य है
सबकी यही गति है।"
यानी जन्म से मृत्यु तक
राम ही राम।

छत्तीसगढ़ में वनवास काल

भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के 14 वर्षों में से लगभग 12 वर्ष दण्डकारण्य में बिताए। इसी दण्डकारण्य का बड़ा हिस्सा
आज का छत्तीसगढ़ है छत्तीसगढ़ के पौराणिक स्थल छत्तीसगढ़ में कई स्थान रामायण से जुड़े हैं। तुरतुरिया में
लव-कुश के जन्म की कथा मिलती है। राजिम में भगवान कुलेश्वर नाथ का मंदिर है। सरगुजा के रामगढ़ में सीताकुंड है। रामपुर, सीतापुर और जनकपुर भी राम कथा से जुड़े स्थान हैं।

छत्तीसगढ़ में राम सिर्फ मंदिरों में नहीं हैं। राम यहां के लोकजीवन में हैं। संस्कारों में हैं।परंपराओं में हैं। इसलिए कहा जाता है — छत्तीसगढ़ की संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बसे हैं।

कर्नाटक के तैराक मणिकांता ने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने जीता दूसरा पदक

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ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक ने चोट के बावजूद वेटलिफ्टिंग में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर- कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं।

मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।

मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2ः25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2ः34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2ः36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2ः53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2ः59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3ः06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।

मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।”

मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

रजत बंसल बने मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष सचिव, जनसंपर्क आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार

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 ​ नवा रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी रजत बंसल को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। 2012 बैच के आईएएस अधिकारी रजत बंसल अब मुख्यमंत्री सचिवालय में अपनी भूमिका निभाएंगे। जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने पर नए जनसंपर्क आयुक्त को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। रजत बंसल की नियुक्ति से सभी अटकलों पर विराम लग गया है।


​महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी

​सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, रजत बंसल को निम्नलिखित पदों पर नियुक्त किया गया है:
​ विशेष सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय: उन्हें अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है। 


 आयुक्त, जनसंपर्क: उन्हें जनसंपर्क विभाग के आयुक्त की कमान सौंपी गई है। ​ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), संवाद: छत्तीसगढ़ सरकार की संवाद एजेंसी के सीईओ का प्रभार भी अब उनके पास होगा।

​ खनिज विभाग का भी मिला जिम्मा

​मुख्यमंत्री सचिवालय और जनसंपर्क के साथ-साथ श्री बंसल को खनिज संसाधन क्षेत्र में भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म तथा प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम (CMDC) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
​ पृष्ठभूमि: इस नियुक्ति से पहले रजत बंसल 'विशेष सचिव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग' के रूप में कार्यरत थे, साथ ही उनके पास खनिज विभाग के उक्त पदों का अतिरिक्त प्रभार पहले से था, जिसे यथावत रखते हुए उनकी भूमिका का विस्तार किया गया है।

​ डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हुआ आदेश

​यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से सचिव रजत कुमार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से जारी किया गया है। आदेश की प्रतियां भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और राजभवन सहित सभी संबंधित विभागों को सूचनार्थ भेज दी गई हैं।

भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “भारत महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण को तेजी से बढ़ाने, स्टार्टअप-प्रधान खनन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए मजबूत घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण कर रहा है।”




यह बात उन्होंने “नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट” (NMET) के संचालन निकाय की बैठक में जीपीओए कॉम्प्लेक्स में कही। बैठक की सह-अध्यक्षता कोल और खनन मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री एवं NMET के संचालन निकाय के अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने की। बैठक में खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CSIR–इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटीरियल्स टेक्नोलॉजी (CSIR–IMMT) के निदेशक, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट के निदेशक, परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधि, अन्वेषण एजेंसियों के अधिकारी और राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण की गति को वैश्विक मांग और भारत की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप रखना जरूरी है। उन्होंने राजस्थान के सिवाना बेल्ट और जम्मू एवं कश्मीर के सलाल–हाइमना ब्लॉक में चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और अधिक संभावित क्षेत्रों में स्वदेशी अन्वेषण प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि भारत में कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में प्रवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाना आवश्यक है। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की सफलता का हवाला देते हुए कहा कि इसी तरह की संस्थागत मदद, लक्षित प्रोत्साहन और मार्गदर्शन खनन तकनीकों और अन्वेषण विधियों में नवाचार को सक्षम कर सकते हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि निजी अन्वेषण एजेंसियों में क्षमता निर्माण दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने नोटिफाइड प्राइवेट एक्सप्लोरेशन एजेंसियों (NPEAs) की भूमिका को मजबूत करने, तकनीक और वित्त तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने और परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

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मंत्री ने आगे कहा कि तेजी से अनुमोदन, बेहतर खरीद प्रणालियाँ और समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लियरेंस अन्वेषण गतिविधियों में गति बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में वन स्वीकृतियों से संबंधित मुद्दे समयसीमा पर प्रभाव डालते हैं और इन्हें हल करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

स्थानीय भागीदारी पर उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अन्वेषण चल रहा है, वहां निर्वाचित प्रतिनिधियों जैसे सांसद और विधायक को जोड़ा जा सकता है। इससे स्थानीय समुदाय में जागरूकता बढ़ेगी और परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एंड-टू-एंड घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास आवश्यक है, जिसमें प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात में प्रसंस्करण क्षमता स्थापित करने के प्रयासों का उल्लेख किया, जो भारत की वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता तक पहुँच बनाई जा सकती है, जबकि CSIR–IMMT और परमाणु ऊर्जा विभाग जैसी संस्थाओं के माध्यम से स्वदेशी तकनीक विकास पर ध्यान बनाए रखना चाहिए।

बैठक के दौरान NMET की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वार्षिक योजनाओं, परियोजना अनुमोदन, वित्तीय सहायता और संस्थागत तंत्र पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि NMET को नवाचार का समर्थन जारी रखना चाहिए, अन्वेषण एजेंसियों को सक्षम बनाना चाहिए, राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए और महत्वपूर्ण खनिजों की वसूली के लिए पायलट परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि वे खनिज विकास के दीर्घकालिक लाभ को समझ सकें।

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इस अवसर पर जी. किशन रेड्डी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे और उनके अन्वेषण को प्राथमिकता देने, तेज नीलामी प्रक्रिया सुनिश्चित करने और राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।

खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने NMET की गतिविधियों की प्रगति, स्टार्टअप पहल, परियोजना अनुमोदन तंत्र और समन्वय व दक्षता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।

1 मई से मकान सूचीकरण शुरू, महासमुंद में फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण

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 महासमुंद : जनगणना के प्रथम चरण में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में मकान सूचीकरण का कार्य 1 मई से शुरू होने वाला है। इस संबंध में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में महासमुन्द, बागबाहरा, कोमाखान और तुमगांव चार्ज के लिए नियुक्त फील्ड ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण वन प्रशिक्षण शाला महासमुन्द में आयोजित किया गया।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा ने कहा कि फील्ड ट्रेनर्स गंभीरता पूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करें क्योंकि उन्हें अपने अपने चार्ज में प्रगणक और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देना है इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी मनोज कुमार खांडे ने भी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान जनगणना कार्य निदेशालय रायपुर के उप संचालक मनोज कुमार महिलांगे तथा जिला मास्टर ट्रेनर तोषण गिरि गोस्वामी ने पावर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जनगणना संबंधी अधिनियम , आधारभूत शब्दों, नजरी नक्शा तैयार करने की विधि तथा प्रगणक द्वारा पूछे जाने वाले कुल 34 प्रश्नों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रगणकों तथा सुपरवाइजरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोबाइल एप में जानकारी भरने के तरीके की जानकारी दी गई। इसके लिए मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रत्येक फील्ड ट्रेनर्स को उनके मोबाइल में एचएलओ एप इंस्टॉल और लाॅगिन करवा कर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। जहां फील्ड ट्रेनर्स ने अलग-अलग तरह की परिस्थितियों में मोबाइल एप में जानकारी भर कर देखा।

इस दौरान तहसीलदार भवानी शंकर साव, प्रभारी अधिकारी रणधीर सिंह बघेल, ओमनारायण शर्मा आदि उपस्थित रहे।

बौद्ध धर्म में प्रमुख स्थल श्रावस्ती के लिए नई 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे की मंजूरी: राष्ट्रीय राजमार्ग 927 (बराबंकी–बहराइच)

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उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले का बौद्ध धर्म और इतिहास में अत्यधिक महत्व है। माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहाँ कई वर्षाओं में प्रवास किया और अनेक उपदेश दिए। श्रावस्ती विद्वानों, आध्यात्मिक साधकों और भारत की समृद्ध बौद्ध धरोहर में रुचि रखने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है।

इस वैश्विक स्तर पर सम्मानित बौद्ध स्थल तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए, केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजमार्ग 927 के बराबंकी–बहराइच खंड में 4-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दी है। यह परियोजना श्रावस्ती जिले तक यात्रा को तेज, सुरक्षित और कुशल बनाएगी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पर्यटन आधारित आर्थिक विकास के नए अवसर खोलेगी।

हालांकि श्रावस्ती का वैश्विक महत्व है, लेकिन लंबे समय तक कनेक्टिविटी की समस्याओं के कारण इसका पर्यटन पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया। अब नए 101.5 किलोमीटर लंबे बराबंकी–बहराइच हाईवे के बनने से यह स्थिति बदलने की उम्मीद है। एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में यह परियोजना औसत वाहन गति को 40 किमी/घंटा से बढ़ाकर 80 किमी/घंटा कर देगी और बराबंकी से बहराइच की यात्रा समय लगभग 150 मिनट से घटाकर 75 मिनट कर देगी।

बेहतर कनेक्टिविटी से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। थाईलैंड, श्रीलंका, जापान और म्यांमार जैसे देशों के नागरिक भारत के बौद्ध धरोहर स्थलों से गहरा आध्यात्मिक संबंध रखते हैं और श्रावस्ती की बेहतर पहुंच इन देशों के तीर्थयात्रियों को अधिक आकर्षित करेगी।

यह हाईवे बहु-मोडल कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा, जिससे प्रमुख राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक्स हब से सुगम और विश्वसनीय यात्रा सुनिश्चित होगी।

श्रावस्ती में बौद्ध पर्यटन के विकास से स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर उत्पन्न होंगे। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी भी यात्रियों के लिए भीड़ कम करने, यात्रा की सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगी।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • परियोजना: 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड NH-927 (बराबंकी–बहराइच)

  • लंबाई: 101.51 किमी

  • कुल पूंजी लागत: ₹6,969.04 करोड़

  • कार्यान्वयन मोड: हाइब्रिड एन्नुइटी मोड (HAM)

  • मुख्य हाईवे कनेक्शन: NH-27, NH-330B, NH-730

  • राज्य राजमार्ग लिंक: SH-13, SH-30B

  • मुख्य कनेक्टिविटी:

    • हवाई अड्डे: लखनऊ, श्रावस्ती

    • रेलवे स्टेशन: बराबंकी, रसौली, जंगीराबाद, राफिनगर, बिंदौरा, बुरहवाल, चौकाघाट, घाघरघाट, जरवल और बहराइच

    • लैंड पोर्ट: रूपैढ़ी लैंड पोर्ट

  • जुड़े नोड्स: 3 आर्थिक नोड्स (SEZ और मेगा फूड पार्क सहित), 2 सामाजिक नोड्स (अभिनव जिलों), 12 लॉजिस्टिक्स नोड्स

  • मुख्य नगर: बराबंकी, रामनगर, जरवाल, कैसरगंज, फखरपुर, बहराइच

  • रोजगार सृजन: 36.54 लाख व्यक्ति-दिन (प्रत्यक्ष) एवं 43.04 लाख व्यक्ति-दिन (अप्रत्यक्ष)

यह परियोजना श्रावस्ती जिले में बौद्ध पर्यटन को नई दिशा देने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

पेट्रोलियम और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी रिटेल फ्यूल आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और देश के किसी भी हिस्से में किसी प्रकार की कमी नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की जानबूझकर फैलाई गई, भ्रामक और सामूहिक अफवाहों पर विश्वास न करें, जो अनावश्यक घबराहट फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर साझा की जा रही हैं।

पेट्रोल और डीजल: कोई कमी नहीं, कोई राशनिंग नहीं

  1. भारत ऊर्जा सुरक्षा का एक मॉडल है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को ईंधन आपूर्ति करता है। भारत एक नेट निर्यातक देश है, इसलिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। देश के 1 लाख से अधिक रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पूरी तरह से खुले हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन प्रदान कर रहे हैं। किसी भी आउटलेट को राशनिंग करने के लिए नहीं कहा गया है।

क्रूड ऑइल आपूर्ति: कोई अंतर नहीं

  1. हॉर्मुज जलसंधि की स्थिति के बावजूद, भारत वर्तमान में दुनिया भर के 41 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से पहले से अधिक क्रूड ऑइल प्राप्त कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मात्रा उपलब्ध होने के कारण किसी भी व्यवधान की भरपाई हो गई है। सभी भारतीय रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। अगले 60 दिनों की क्रूड आपूर्ति पहले से ही तय कर ली गई है।

स्ट्रैटेजिक रिजर्व: वास्तविक स्थिति

  1. अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि देश में केवल 6 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। वास्तविकता यह है कि भारत के पास कुल 74 दिनों की रिजर्व क्षमता है और वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें क्रूड, उत्पाद स्टॉक और स्ट्रैटेजिक स्टोरेज शामिल हैं। इसलिए किसी भी तरह की कमी की बात करना पूरी तरह गलत है।

LPG: उत्पादन बढ़ा, आयात कम, आपूर्ति सुनिश्चित

  1. LPG की कोई कमी नहीं है। घरेलू रिफाइनरी उत्पादन को 40% बढ़ाकर दैनिक 50 हजार मीट्रिक टन किया गया है, जो हमारी आवश्यकताओं का 60% से अधिक है। कुल आवश्यकता लगभग 80 हजार मीट्रिक टन है। आयात की आवश्यकता घटकर 30 हजार मीट्रिक टन रह गई है। 800 हजार मीट्रिक टन सुनिश्चित एलपीजी कार्गो पहले से ही अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से भारत के 22 एलपीजी आयात टर्मिनलों में आ रहा है। रोजाना 50 लाख सिलेंडर सफलतापूर्वक वितरित किए जा रहे हैं।

PNG: लंबी अवधि की योजना, संकट प्रतिक्रिया नहीं

  1. पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि यह सस्ता, साफ और सुरक्षित ईंधन है। भारत वर्तमान में 92 MMSCMD गैस घरेलू रूप से उत्पादन करता है, कुल दैनिक आवश्यकता 191 MMSCMD है। PNG कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गए हैं। PNG को LPG की कमी के कारण नहीं बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के हिस्से के रूप में बढ़ाया जा रहा है।

मंत्रालय की चेतावनी: भ्रामक जानकारी के खिलाफ कार्रवाई

  1. मंत्रालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और पोस्ट फैल रही हैं, जो कतिपय देशों में राशनिंग की झूठी जानकारी देकर भारत में संकट का भ्रम फैला रही हैं।

  2. कुछ पोस्ट सरकारी आदेशों को आपात स्थिति के रूप में गलत तरीके से पेश कर रही हैं, जबकि वे केवल सामान्य प्रशासनिक उपाय हैं।

  3. इस भ्रामक जानकारी के फैलाव से अनावश्यक चिंता और अफवाहें पैदा हो रही हैं। मंत्रालय सभी नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे ईंधन और गैस की उपलब्धता के बारे में केवल आधिकारिक सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। गलत जानकारी फैलाना कानून के तहत अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भारत-श्रीलंका सहयोग को नई दिशा: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन पर साझा अनुभव

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श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रैटेजिक डेवलपमेंट संबंधी सेक्टोरल ओवरसाइट कमेटी का एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल, एस. एम. मरिक्कर, सांसद (अध्यक्ष) के नेतृत्व में, इस समय भारत के एक सप्ताह के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर है।

इस दौरे के तहत जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (SBM-G) पर एक विस्तृत प्रस्तुति का आयोजन किया।

इस अवसर पर DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना, अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NJJM) कमल किशोर सोअन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सचिव, DDWS अशोक के. के. मीना ने बताया कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से लागू करती हैं, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक आवश्यक सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि भारत में ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए दो प्रमुख मिशन—जल जीवन मिशन (2019) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (2014)—लागू किए जा रहे हैं।

उन्होंने इन मिशनों के क्रियान्वयन से जुड़े चार प्रमुख बिंदुओं को साझा किया:

  • ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकरण और समुदाय आधारित सेवा वितरण

  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय

  • पारदर्शिता और निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग

  • सतत विकास, जैसे ग्रे-वॉटर प्रबंधन और वर्षा जल संचयन

इसके बाद जल जीवन मिशन के निदेशक हरि नारायणन मुरुगन ने भारत-श्रीलंका पेयजल सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की घोषणा की थी, जिसके बाद जल जीवन मिशन शुरू किया गया। वर्तमान में 17% से बढ़कर 82% ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंच चुका है और 15 करोड़ से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर JJM 2.0 के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें संचालन, रखरखाव, जनभागीदारी और सतत जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए उप सचिव कृतिका कुलहरी ने बताया कि यह मिशन 2014 में शुरू हुआ था और 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। अब इसका दूसरा चरण ODF प्लस और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत:

  • 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए

  • 2.72 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों का निर्माण हुआ

  • शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है

इसके बाद एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रीलंकाई प्रतिनिधियों ने भारत के अनुभवों से सीखने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने अपने देश में जल स्रोतों में भारी धातुओं (जैसे पारा) की समस्या और जल शुद्धिकरण की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया तथा सस्ती और प्रभावी तकनीकों के लिए सहयोग का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक ने कहा कि भारत और श्रीलंका आपसी सहयोग और ज्ञान साझा करने के माध्यम से जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

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