Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

माटी की महक और आस्था के स्वर: केवल कृष्ण के गीतों ने छेड़ा हृदय का तार

No comments Document Thumbnail

​रायपुर,छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी खुशबू और जनमानस की गहरी संवेदनाएं अब सुरों में ढलकर फिजाओं में तैर रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार केवल कृष्ण की लेखनी से उपजे दो गीतों ने इन दिनों प्रदेश के लोक-मन को झंकृत कर दिया है। जहाँ एक गीत में ममतामयी देवी की करुणा है, वहीं दूसरे में बस्तर की वादियों में लौटती शांति की गूंज।

​ममता की छाँव: 'तोर मया ला कइसे बरनव' 

​छत्तीसगढ़ी लोक-आस्था का केंद्र बिंदु सदैव 'दाई' (माँ) रही है। गीत “तोर मया ला कइसे बरनव वो, दाई अंगार मोती” केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि एक आर्त पुकार है।

​इसकी पंक्तियाँ उस आत्मीयता को स्वर देती हैं, जहाँ एक भक्त अपने समस्त सुख-दुख अपनी माँ के चरणों में समर्पित कर देता है।

​सरलता और भक्ति का ऐसा संगम विरल है, जो श्रोता को सीधे अपनी जड़ों और गांव-गली की स्मृतियों से जोड़ देता है।

https://youtu.be/M-BOa2EgnkY?si=OWIn5FpcPwT0jxmf

बस्तर की नई भोर: 'बोलत हावे ना' 

​दूसरा गीत “बोलत हावे ना” उस बदलते बस्तर की कहानी है, जहाँ कभी सन्नाटा पसरा था। यह गीत नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होते अंचल की तस्वीर पेश करता है।

​"वर्षों से खामोश रही बस्तर की मैना अब चहकने लगी है। दहशत की जगह अब सुकून और संगीत ने ले ली है।" सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह गीत शांति और विकास के नए युग का मधुर उद्घोष बन गया है।

​ शब्दों में सादगी, सुरों में जादू 

इन रचनाओं की सबसे बड़ी शक्ति इनकी लोकभाषा की मिठास है। इसमें कोई कृत्रिम आडंबर नहीं, बल्कि हृदय की सहज अभिव्यक्ति है। यह डिजिटल युग में छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति को सहेजने और उसे नई पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

रचनाकार का परिचय 

​इन गीतों के रचयिता केवल कृष्ण मूलतः एक सजग पत्रकार हैं। वे बहुत अच्छे स्क्रिप्ट राइटर भी हैं। अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को उकेरते रहे हैं। इससे पूर्व उनके द्वारा रचित छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'बघवा' पाठकों के बीच अपनी गहरी पैठ बना चुका है।

भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने 2 अप्रैल 2026 को कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के साथ एक कार्यान्वयन योजना (Plan of Implementation) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

यह परियोजना ‘Maritime Amrit Kaal Vision 2047’ के तहत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप है। ‘Support the Establishment of Development Strategies and to Build a Foundation for Skilled and Professional Talents for the Indian Shipbuilding and Marine Sector’ नामक इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

इस सहयोग के तहत KOICA, कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सहित अन्य संस्थाओं के सहयोग से भारत के शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्षेत्र का व्यापक अध्ययन करेगा। इसमें कार्यबल का आकलन, कौशल अंतर (स्किल गैप) की पहचान और मानव संसाधन विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह साझेदारी भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से एक नई पीढ़ी के कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त समुद्री पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जो भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

परियोजना के तहत भारत और कोरिया में संयुक्त कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद भाग लेंगे। इससे दोनों देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत में ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना पर भी अंतिम चरण की चर्चा चल रही है। यह केंद्र व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर शिपबिल्डिंग और समुद्री सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आत्मनिर्भर समुद्री क्षेत्र के निर्माण की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

दीनदयाल पोर्ट पर ₹132 करोड़ की ROB परियोजना को मंजूरी, लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

देश में पोर्ट-आधारित विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण में एलसी-235 पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹132.51 करोड़ है।

यह परियोजना केंद्र सरकार के प्रमुख सागरमाला कार्यक्रम का हिस्सा है और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देशभर में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है। वर्तमान में इस निर्माण कार्य को पश्चिमी रेलवे द्वारा डिपॉजिट आधार पर किया जा रहा है।

इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक, कुशल और निर्बाध पोर्ट कनेक्टिविटी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि यह ROB बंदरगाह पर मौजूद प्रमुख बाधाओं को दूर करेगा, माल परिवहन को सुगम बनाएगा और देश की लॉजिस्टिक्स प्रणाली को मजबूत करेगा।

हाल ही में इस प्रस्ताव की समीक्षा निवेश बोर्ड (DIB) की बैठक में की गई, जिसकी अध्यक्षता पोत परिवहन मंत्रालय के सचिव ने की। परियोजना की लागत को आधुनिक सुरक्षा मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किया गया है।

यह ROB परियोजना रेल क्रॉसिंग पर होने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण से माल की आवाजाही निर्बाध होगी, बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स श्रृंखला मजबूत होगी। इसके पूरा होने के बाद ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और माल की तेजी से निकासी संभव हो सकेगी।

सरकार ने प्रधानमंत्री के समन्वित बुनियादी ढांचा विकास के दृष्टिकोण के तहत सभी प्रमुख बंदरगाहों को अपने प्रोजेक्ट्स को पीएम गति शक्ति पोर्टल पर मैप करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे विभिन्न परियोजनाओं में बेहतर तालमेल और तेज विकास सुनिश्चित किया जा सके।

दरिंदगी की हद: महिला की बेरहमी से हत्या, दुष्कर्म के बाद मर्डर की आशंका, प्राइवेट पार्ट में मिली बोतल

No comments Document Thumbnail

 अंबिकापुर। शहर में एक अधेड़ महिला की निर्मम हत्या से सनसनी फैल गई है। कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रिंग रोड किनारे शुक्रवार सुबह महिला का खून से लथपथ शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है।


सिर कुचला, गले पर धारदार हथियार के निशान

जानकारी के अनुसार महामाया प्रवेश द्वार के पास रिंग रोड किनारे स्थित एक झोपड़ीनुमा मटन दुकान के पास महिला का शव पड़ा मिला। महिला के गले में धारदार हथियार के गहरे निशान थे, जबकि चेहरा और सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। घटनास्थल पर काफी मात्रा में खून फैला हुआ मिला।

दरिंदगी की आशंका, पहचान छिपाने की कोशिश

जांच के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट में प्लास्टिक की बोतल मिलने से मामला और भी गंभीर हो गया है । पुलिस आशंका जता रही है कि महिला के साथ पहले दरिंदगी की गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। पहचान छिपाने के लिए चेहरे को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया है।

CCTV में संदिग्ध के साथ दिखी महिला

फिलहाल मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच में महिला किसी संदिग्ध व्यक्ति के साथ जाती हुई दिखाई दी है। पुलिस उसकी पहचान कर तलाश में जुटी हुई है।

फॉरेंसिक और डॉग स्क्वॉड ने जुटाए साक्ष्य

घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी राजेश अग्रवाल, एएसपी अमोलक सिंह सहित फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंचे। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर अहम साक्ष्य जुटाए हैं।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत विधि कार्य विभाग ने चलाया जागरूकता अभियान

No comments Document Thumbnail

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग द्वारा स्वच्छता, स्वास्थ्य और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

इस अभियान की शुरुआत शास्त्री भवन स्थित कॉन्फ्रेंस रूम में सामूहिक स्वच्छता शपथ और स्वच्छ भारत गीत के साथ हुई। 2 अप्रैल 2026 को विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।

कार्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसके माध्यम से कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ने और इसे सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

जागरूकता बढ़ाने के लिए सेल्फी बूथ की भी व्यवस्था की गई, जहां प्रतिभागियों ने स्वच्छता के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आकर्षक चित्र प्रस्तुत किए गए।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कार्यस्थल और समाज में स्वच्छता बनाए रखने के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश मजबूत हुआ।

विधि कार्य विभाग ने स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

विशाखापट्टनम में आईएनएस तरागिरी नौसेना में शामिल, भारत की समुद्री ताकत को मिली नई मजबूती

No comments Document Thumbnail

विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में 3 अप्रैल 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तरागिरी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।

करीब 6,670 टन वजन वाला यह युद्धपोत वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा एमएसएमई के सहयोग से निर्मित किया गया है। इसमें उन्नत स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी रडार पकड़ काफी कम हो जाती है और यह दुश्मन के लिए अधिक घातक बन जाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस तरागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह जहाज लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रह सकता है और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हुए तुरंत जवाब देने में सक्षम है।

इस युद्धपोत में ब्रह्मोस मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसकी युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाते हैं। यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन, तटीय निगरानी और मानवीय सहायता जैसे विभिन्न अभियानों में अहम भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर होने के कारण एक मजबूत नौसेना की आवश्यकता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

उन्होंने आधुनिक समय में समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि अब केवल तटों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों, महत्वपूर्ण chokepoints और समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबल्स की सुरक्षा भी जरूरी हो गई है।

रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले लगभग 1,200 करोड़ रुपये था।

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आईएनएस तरागिरी की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप खुद को एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में विकसित कर रही है।

आईएनएस तरागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई ने योगदान दिया है। यह जहाज आधुनिक तकनीकों से लैस है और किसी भी परिस्थिति में, किसी भी मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।

आईएनएस तरागिरी के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि देश अब उन्नत युद्धपोतों के निर्माण में आत्मनिर्भर बन चुका है और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है।


पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, दो महीने का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली: West Asia में जारी संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। सरकार के अनुसार, भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।


पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि भारत के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार है। साथ ही सरकार इस भंडार को और बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

उन्होंने कहा कि देशभर में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक महीने में 3.33 लाख पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें से करीब 2.90 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिले हैं। इसके अलावा, लगभग साढ़े तीन लाख लोगों ने नए पीएनजी कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है।

सरकार ने पीएनजी उपयोगकर्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील भी की है। अब तक करीब 14,400 उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है।

कमर्शियल एलपीजी कोटा बढ़ाया

औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

हॉर्मुज जलमार्ग पर भारत का रुख

Strait of Hormuz में तनाव के बीच ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय बैठक में Vikram Misri ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संकट का समाधान केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है।

बैठक में 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया और हॉर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा की गई।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा कि ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग को बाधित किया है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।

दुर्ग में फर्जी स्वास्थ्य अधिकारी बनकर ठगी का खेल, अस्पतालों को डराकर मांगे पैसे

No comments Document Thumbnail

 दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अस्पताल संचालकों को निशाना बनाकर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बनकर अस्पतालों को कार्रवाई का डर दिखा रहे हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं।


मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र के आर्य नगर स्थित गंगोत्री अस्पताल से जुड़ा है। अस्पताल संचालक डॉ. ओम प्रकाश कराड़े की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

डॉ. कराड़े के अनुसार, 17 मार्च 2026 को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को अजय अग्रवाल बताते हुए रायपुर स्थित स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग के सचिव का पर्सनल स्टाफ बताया। आरोपी ने अस्पताल में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए कार्रवाई का डर दिखाया और मामले को खत्म कराने के नाम पर पैसे की मांग की।

शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने उन्हें मंत्रालय बुलाया। वहां पहुंचने पर उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया और गेट के बाहर ही इंतजार कराया गया। कुछ देर बाद वही व्यक्ति बाहर आया और फिर से दबाव बनाते हुए रकम देने को कहा।

आरोपी ने यह भी धमकी दी कि पैसे नहीं देने पर अस्पताल के खिलाफ जांच कराई जाएगी और मामला सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

संदेह होने पर डॉ. कराड़े ने स्वास्थ्य सचिव कार्यालय से जानकारी ली, जहां स्पष्ट हुआ कि अजय अग्रवाल नाम का कोई भी व्यक्ति वहां कार्यरत नहीं है। इसके बाद उन्होंने तुरंत मोहन नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अन्य अस्पतालों को भी निशाना बनाया है। चरौदा स्थित एएम हॉस्पिटल के संचालक के साथ भी इसी तरह की घटना हुई, जिसके बाद भिलाई-3 थाने में भी मामला दर्ज किया गया है।

दुर्ग जिले में अब तक ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस मोबाइल नंबर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। आशंका है कि आरोपी के पकड़े जाने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

“नक्सलवाद खत्म नहीं होने देना चाहते थे” - साव का बघेल पर सीधा हमला

No comments Document Thumbnail

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे कभी नहीं चाहते थे कि राज्य से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो।


मीडिया से बातचीत में साव ने कहा कि बघेल लगातार बस्तर से सुरक्षाबलों की वापसी की बात करते हैं, जबकि हालात सामान्य होने पर सुरक्षा बलों की वापसी स्वतः हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों के हाथ बांध दिए गए थे, जिससे नक्सलियों का मनोबल बढ़ा।

सरेंडर पॉलिसी का असर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति के तहत अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था की गई है और प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
साव के अनुसार, इसी नीति के चलते बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है और कम समय में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

ममता सरकार पर भी निशाना

पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारी को बंधक बनाए जाने की घटना पर टिप्पणी करते हुए साव ने Mamata Banerjee सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वहां कानून व्यवस्था कमजोर हो रही है और राज्य तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता ऐसी सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी।

पेट्रोल कीमतों पर प्रतिक्रिया

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर साव ने कहा कि यह वैश्विक परिस्थितियों का असर है और हालात सुधरने पर स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जनता सरकार के साथ है।

आरोपों को बताया निराधार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े नेता Manish Kunjam के आरोपों को खारिज करते हुए साव ने कहा कि नक्सली स्वेच्छा से सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं और किसी प्रकार की “डील” के आरोप गलत हैं।

भारत के सीफूड निर्यात में 11 वर्षों में दोगुनी बढ़ोतरी, झींगा निर्यात बना प्रमुख आधार

No comments Document Thumbnail

भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात में पिछले 11 वर्षों में मजबूत और निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान निर्यात में औसतन 7% की वार्षिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में ₹30,213 करोड़ के मुकाबले 2024-25 में यह बढ़कर ₹62,408 करोड़ हो गया है, जिसमें प्रमुख योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का रहा, जिसकी कीमत ₹43,334 करोड़ रही।

भारत का सीफूड निर्यात काफी विविध है, जिसमें 350 से अधिक उत्पादों की किस्में शामिल हैं और ये लगभग 130 देशों में भेजे जाते हैं। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42% हिस्सा अमेरिका को गया, जो सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व प्रमुख गंतव्य हैं।

निर्यात में फ्रोजन श्रिम्प का दबदबा बना हुआ है, इसके बाद फ्रोजन मछली, स्क्विड, सूखे उत्पाद, कटलफिश, सुरिमी आधारित उत्पाद और जीवित व चिल्ड सीफूड का स्थान है। साथ ही, वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 2.5% से बढ़कर 11% हो गई है, जिसकी निर्यात कीमत 742 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।

सरकार सीफूड निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछली उत्पादन, ब्रैकिश वाटर एक्वाकल्चर का विस्तार, नई तकनीकों को अपनाने, रोग प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली बंदरगाह और फिश लैंडिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।

उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, GIFT तिलापिया, ग्रूपर और टाइगर श्रिम्प के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत के निर्यात उत्पादों का दायरा और बढ़ सके।

अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुरूप बनने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। अमेरिका के मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (MMPA) के तहत आवश्यक शर्तों को पूरा करते हुए भारत को 2025 में मंजूरी मिली, जिससे अमेरिकी बाजार में निर्यात जारी रहेगा। साथ ही, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

व्यवसाय को आसान बनाने के लिए सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (SIP) प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर 72 घंटे रह गया है। कुछ उत्पादों के लिए SIP की आवश्यकता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्यात बढ़ाना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है। यूके, यूरोपीय संघ, आसियान और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्रयासों के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बताया राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि वे भारतीय गौरव के अमर प्रतीक और राष्ट्रीय स्वाभिमान के शाश्वत रक्षक छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट किया और हिंदवी स्वराज की स्थापना की। समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए उन्होंने एक सशक्त नौसेना का निर्माण किया, जो उनकी दूरदर्शिता और अद्वितीय रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन इस बात का आदर्श उदाहरण है कि एक शासक कैसे अपनी संस्कृति और भाषा की रक्षा करते हुए जनकल्याण के उच्चतम मानक स्थापित कर सकता है।

अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का संघर्ष और उनका जीवन देशवासियों को सदैव मातृभूमि के प्रति समर्पण और निष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।

होर्मुज संकट पर भारत का रुख स्पष्ट: कूटनीति और संवाद से ही समाधान संभव

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली। ईरान संकट के बीच भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को ब्रिटेन की ओर से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और समुद्री आवागमन को लेकर चर्चा की गई। बैठक में 60 से अधिक देशों ने भाग लिया।


सुरक्षित आवागमन पर भारत का जोर

बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध और सुरक्षित आवागमन के सिद्धांत को अहम बताया। विदेश सचिव ने कहा कि इस संकट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के दौरान नाविकों की जान गंवाने वाला भारत एक प्रमुख प्रभावित देश रहा है।

तनाव कम करना ही समाधान

भारत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और संबंधित पक्षों के बीच संवाद व कूटनीति को बढ़ावा देना है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जिम्मेदारी एशियाई और यूरोपीय देशों पर बताई थी। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिका ने हिस्सा नहीं लिया।

संयुक्त बयान से दूरी

भारत ने अभी तक ब्रिटेन और अन्य देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान का समर्थन नहीं किया है। सरकार का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान सीधे संवाद से निकाला जाना चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले भी तेहरान के साथ सीधी बातचीत की वकालत कर चुके हैं।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा है और सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है।
सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देश इसी रास्ते से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों को कच्चे तेल और गैस का निर्यात करते हैं। इस कारण यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

इस क्षेत्र में समय-समय पर तनाव और ईरान की ओर से मार्ग बंद करने की चेतावनियों के चलते इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आज भव्य समापन, सीएम साय होंगे मुख्य अतिथि

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ की मेजबानी में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम आज, 3 अप्रैल को शाम 5 बजे रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा।


समारोह में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर एम.सी. मैरीकॉम और भारतीय फुटबॉल के दिग्गज बाइचुंग भूटिया विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि 25 मार्च से राज्य के तीन शहर—रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर—में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 2000 जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारी शामिल हुए।

समापन समारोह की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

इसके अलावा राज्य शासन के मंत्रीगण, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर जिले के विधायकगण, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष भी समारोह में शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से तेलंगाना एवं अन्य प्रांतो में प्रवासित परिवारों के लिए पुर्नवास के लिए बनेगी कार्ययोजना

No comments Document Thumbnail

अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।

इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।

अपर मुख्य सचिव गृह पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी। 

वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

महासमुंद कांग्रेस भवन में बवाल: नेताओं के बीच मारपीट, कुर्सियां टूटीं

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद। जिला कांग्रेस भवन में आज गुरुवार को उस समय हंगामा मच गया, जब दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के दौरान जमकर मारपीट, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार, विवाद निर्मल जैन और पार्षद विजय साव के बीच शुरू हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में तब्दील हो गई। दोनों पक्षों के समर्थक भी इसमें शामिल हो गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस दौरान कुर्सियां तोड़े जाने की भी खबर है।

घटना के समय जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वारकाधीश यादव और पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक विवाद काफी बढ़ चुका था।

सूत्रों के अनुसार, विवाद किसी छोटे मुद्दे को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन पहले से चल रहे गुटीय मतभेद के कारण मामला तूल पकड़ गया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और खुद को निर्दोष बताया है।

मामला सिटी कोतवाली थाना पहुंच चुका है, जहां शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने सभी पक्षों के बयान लेना शुरू कर दिया है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के भीतर अनुशासन और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर कांग्रेस जैसे बड़े संगठन में इस तरह की घटनाएं अंदरूनी गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती हैं।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.