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मनेंद्रगढ़-केल्हारी मार्ग में हुई बस दुर्घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

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मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा

घायलों के बेहतर उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मनेंद्रगढ़-केल्हारी मार्ग पर हुई भीषण बस दुर्घटना में 6 लोगों के असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को राज्य शासन की ओर से ₹5-5 लाख तथा घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने दुर्घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तत्परता से संचालित करने तथा घायलों के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दुर्घटना में घायल यात्रियों का सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ एवं जिला अस्पताल चिरमिरी में उपचार जारी है। गंभीर रूप से घायल 2 यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए अंबिकापुर रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता के अनुरूप हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें तथा सभी घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ दें।

दिवंगत पत्रकारों के नाम पर होंगी रायपुर की सड़कें, प्रेस क्लब ने महापौर को सौंपा प्रस्ताव

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पत्रकारिता और समाज सेवा में योगदान देने वाले दिवंगत पत्रकारों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने की पहल

रायपुर- लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता और समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दिवंगत पत्रकारों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने की दिशा में रायपुर प्रेस क्लब ने पहल की है। प्रेस क्लब  की कार्यकारिणी के निर्णय के अनुसार एक प्रेस क्लब  प्रतिनिधिमंडल ने आज महापौर मीनल चौबे को ज्ञापन सौंपकर रायपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत दिवंगत पत्रकारों के निवास स्थल के आसपास स्थित प्रमुख सड़क, चौक, तिराहा अथवा गली का नामकरण उनके नाम पर करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

रायपुर प्रेस क्लब ने प्रथम चरण में 26 दिवंगत पत्रकारों के नाम प्रस्तावित किए हैं। इस पहल का उद्देश्य पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान, सामाजिक सरोकारों और जनहित के लिए किए गए कार्यों को सम्मान देना तथा उनकी स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। प्रेस क्लब ने आग्रह किया है कि प्रस्ताव पर विचार कर इसे एमआईसी (महापौर परिषद) में पारित कराया जाए और आगे सामान्य सभा के अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाए।

प्रेस क्लब का मानना है कि पत्रकार समाज की समस्याओं को सामने लाने, जनमत निर्माण करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके नाम पर सड़कों और चौक-चौराहों का नामकरण उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ ही नई पीढ़ी को सकारात्मक पत्रकारिता और समाज सेवा के लिए प्रेरित करने का माध्यम बनेगा।

प्रथम चरण में प्रस्तावित नामों में स्व. विष्णु सिन्हा, स्व. अनल शुक्ला, स्व. रम्मू श्रीवास्तव, स्व. सत्येंद्र गुमास्ता, स्व. बसंत तिवारी, स्व. अश्विनी शर्मा, स्व. सुरेश तिवारी, स्व. कुमार साहू, स्व. कमल ठाकुर, स्व. गोपाल वोरा, स्व. एम.ए. जोसेफ, स्व. बसंत दीवान, स्व. कुलदीप निगम, स्व. देवेंद्र कर, स्व. विनय शर्मा, स्व. योगेश यदु, स्व. ठाकुर दिगंबर सिंह, स्व. विद्या शंकर शुक्ल, स्व. के.के. सिंह, स्व. जगदीश यादव, स्व. संजीत त्रिपाठी, स्व. भूपेंद्र टिकरिहा, स्व. नईम शिरो, स्व. आबिद अली और स्व. रमेश अवस्थी  सुखनंदन बंजारे, विकल्प शुक्ला शामिल हैं।

रायपुर प्रेस क्लब ने महापौर से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल करते हुए आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का अनुरोध किया है, ताकि पत्रकारिता जगत की इन विभूतियों के योगदान को शहर की पहचान और स्मृतियों का स्थायी हिस्सा बनाया जा सके।

इस अवसर पर प्रेस क्लब के  अध्यक्ष मोहन तिवारी , महासचिव गौरव शर्मा उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू, भूपेश जांगड़े,वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा,  रविंद्र ठेंगड़ी,  राजेंद्र निगम, सत्येंद्र कर शंकर चंद्राकर, जाकिर घुड़सेना, मनीष वोरा , एवं अन्य पत्रकार गण मौजूद रहे ।

101 वर्षों से जीवंत है लाफिनकला की रामलीला परंपरा, बालिकाओं ने निभाई अहम भूमिका

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महासमुंद- जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर ग्राम लाफिनकला में 101 साल पुरानी रामलीला की परंपरा आज भी जीवंत है। बदलते दौर और मनोरंजन के आधुनिक साधनों के बीच गांव के युवा हर साल दशहरा पर रामलीला का मंचन कर सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहे हैं। इस बार  आयोजन बाल समाज के युवाओं ने किया, जिसमें बालिकाओं की भागीदारी विशेष आकर्षण रही।लीला मंडली के सचिव रामजी साहू ने बताया कि समय के साथ पात्र जुटाना कठिन हो गया है, फिर भी परंपरा को टूटने नहीं दिया जा रहा। पहले गांव में 3 से 9 दिनों तक रामलीला-कृष्णलीला के साथ श्रवण कुमार, राजा हरिश्चंद्र, मोरध्वज, चरणदास चोर, मयारू भौजी, सती नाग चंपा जैसे नाटकों का मंचन होता था। बुजुर्ग बताते हैं कि तब मनोरंजन के साधन कम थे, लोग रातभर लीला देखते थे और इससे धर्म, सत्य, त्याग व कर्तव्य की शिक्षा मिलती थी। वहीं गांव शिक्षक गोवर्धन साहू व महेन्द्र पटेल ने कहा कि 101 वर्ष पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। इससे धार्मिक संदेश के साथ सामाजिक चेतना भी फैलती है। इस वर्ष पुरुष पात्रों की कमी के कारण बालिकाओं को भी शामिल किया गया, जिन्होंने उत्साह से विभिन्न भूमिकाएं निभाकर आयोजन को सफल बनाया। यह गांव की बदलती सोच का भी प्रतीक बना।

इस परंपरा की नींव स्व. सियाराम साहू, स्व. जीवन साहू, स्व.जगदेव साहू, स्व. उत्तम साहू, स्व. ओनूराम साहू, लीलाराम साहू व सुखेन्द पटेल ने रखी थी। बाद में जगदीश साहू, सुकदेव साहू, अनूप राम साहू व मंगतू साहू ने इसे आगे बढ़ाया।

इस वर्ष आयोजन में रामजी साहू, हरिराम साहू, गोवर्धन साहू, महेंद्र पटेल, जनक राम साहू, संतराम साहू, पंचराम साहू,टीका पटेल, नेतन पटेल, भानू  साहू, अनिल  साहू, विजय साहू,पुरानिक साहू सहित अन्य युवाओं  का विशेष सहयोग रहा। लाफिन कला की रामलीला अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।


भारत-पोलैंड के बीच अहम वार्ता: पीएम मोदी और डोनाल्ड टस्क की मुलाकात, व्यापार, रक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर

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नई दिल्ली- भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, उभरती तकनीकों और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की कोशिश

भारत और पोलैंड ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था। मौजूदा वार्ता इसी साझेदारी को व्यावहारिक सहयोग में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों पक्षों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में आपसी संपर्क बढ़ाना और साझा हितों से जुड़े क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

व्यापार और निवेश पर विशेष ध्यान

वार्ता के प्रमुख विषयों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना शामिल रहा। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। दोनों देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच संपर्क बढ़ाने और नए व्यावसायिक अवसर तलाशने के लिए 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम आयोजित किया गया।

पोलैंड मध्य यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने से उद्योग, मशीनरी, तकनीकी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर खुल सकते हैं। 

रक्षा और सैन्य तकनीक में सहयोग

रक्षा क्षेत्र भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। दोनों देश रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने, तकनीकी साझेदारी विकसित करने और संयुक्त उत्पादन जैसी संभावनाओं पर आगे काम करने में रुचि रखते हैं। पोलैंड की रक्षा कंपनियों के लिए भारत के साथ साझेदारी के अवसर महत्वपूर्ण हैं, जबकि भारत रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं को विस्तार देने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

हालांकि, रक्षा क्षेत्र में किसी विशेष समझौते या संयुक्त उत्पादन परियोजना को अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी को संबंधित आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही निश्चित माना जाना चाहिए।

अंतरिक्ष, आईटी और उभरती तकनीकों पर जोर

तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी इस दौरे का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। प्रधानमंत्री टस्क के कार्यक्रम में बेंगलुरु की यात्रा शामिल है, जहां वे सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस संपर्क से दोनों देशों के उद्योगों, तकनीकी कंपनियों और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने जैसे विषय भी भारत-पोलैंड साझेदारी के व्यापक एजेंडे का हिस्सा हैं।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिए भी अहम

भारत और पोलैंड के संबंध यूरोपीय संघ के साथ भारत की व्यापक साझेदारी से भी जुड़े हैं। व्यापार, निवेश, रक्षा और नई तकनीकों में बेहतर सहयोग से भारत और यूरोप के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संपर्क को मजबूती मिल सकती है। दोनों नेता आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श कर रहे हैं। 

बेंगलुरु में भी कारोबारी बैठकों का कार्यक्रम

डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा 21 से 23 अक्टूबर तक निर्धारित है। नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ता और बिजनेस फोरम के बाद वे 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे। वहां आईटी और अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत तथा भारत-पोलैंड कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान रहेगा। 

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड टस्क की बैठक भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को व्यापार, रक्षा, निवेश और तकनीक जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का अवसर है। आने वाले समय में इस वार्ता का वास्तविक प्रभाव दोनों देशों के बीच होने वाली ठोस पहलों, निवेश और लागू किए जाने वाले समझौतों से स्पष्ट होगा।


दशहरा पर AK-47 से फायरिंग करने वाली IPS अंकिता शर्मा को नोटिस, पुलिस मुख्यालय ने मांगा जवाब

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राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजा के बाद AK-47 राइफल से फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के मामले में राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (SP) एवं IPS अधिकारी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हथियार संचालन के निर्धारित नियमों और पुलिस बल की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। घटना के बाद पुलिस विभाग में हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, अनुशासन और पारंपरिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। 

शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव पुलिस लाइन स्थित रक्षित केंद्र में पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस के हथियारों और वाहनों की पूजा की गई।

कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें SP अंकिता शर्मा साड़ी पहने AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायर करती दिखाई दीं। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे परंपरा से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने हथियार संचालन के सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल उठाए।

मामले ने तब और ध्यान आकर्षित किया, जब हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े जानकारों ने वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों पर चिंता जताई। 

पुलिस मुख्यालय ने क्यों मांगा स्पष्टीकरण?

राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अजय यादव के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने घटना का संज्ञान लेते हुए SP अंकिता शर्मा से जवाब मांगा है। अधिकारियों के मुताबिक, फायरिंग का तरीका पुलिस के हथियार संचालन संबंधी नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया और वीडियो को लेकर की जा रही टिप्पणियों से पुलिस बल की छवि पर भी सवाल उठे।

IG अजय यादव ने बताया कि अंकिता शर्मा का जवाब मिलने के बाद वह अपना अभिमत दर्ज कर प्रकरण पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे। इसके बाद मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ अंतिम दोष-निर्धारण नहीं है। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। 

क्या शस्त्र पूजा में फायरिंग की परंपरा है?

दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है। पुलिस विभाग में भी इस अवसर पर हथियारों की पूजा कर कर्तव्य, सुरक्षा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण व्यक्त किया जाता है।

हालांकि, हथियारों की पूजा और उनसे फायरिंग करना दो अलग-अलग बातें हैं। सेवानिवृत्त IPS अधिकारी आर.के. विज ने कहा कि फायरिंग केवल सुरक्षित स्थान पर पर्याप्त सावधानियों के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शस्त्र पूजा का मूल उद्देश्य हथियारों की पूजा करना है, न कि उनसे गोली चलाना।

दूसरी ओर, एक अनाम पुलिस अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में कुछ स्थानों पर शस्त्र पूजा के दौरान आवाज पैदा करने वाले खाली कारतूस, जिन्हें आम बोलचाल में ‘आवाजी कारतूस’ कहा जाता है, इस्तेमाल करने की परंपरा रही है। हालांकि, इस विशेष घटना में इस्तेमाल किए गए कारतूसों की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि हवा में गोली चलाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। गोली नीचे लौटते समय लोगों को घायल कर सकती है। इसलिए ऐसे किसी भी आयोजन में हथियारों का इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार होना जरूरी है।

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने उठाए सुरक्षा संबंधी सवाल

वीडियो सामने आने के बाद पूर्व सैन्य अधिकारी के.जे.एस. ढिल्लों ने हथियार संभालने के तरीके पर चिंता जताई। उनकी आलोचना मुख्य रूप से हथियार को सुरक्षित दिशा में रखने, आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से संबंधित थी।

इस बीच, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अधिकारी का बचाव करते हुए कहा कि शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मामले का आकलन पूरी परिस्थितियों और इस्तेमाल किए गए कारतूसों की जानकारी के आधार पर होना चाहिए।

इस प्रकार, यह विवाद केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में सरकारी हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर भी चर्चा का विषय बन गया। 

अन्य जिलों में भी सामने आए फायरिंग के वीडियो

रिपोर्टों के मुताबिक, विजयादशमी पर शस्त्र पूजा के बाद राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर का भी फायरिंग करते हुए एक अलग वीडियो सामने आया। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर सहित अन्य जिलों से भी पुलिसकर्मियों द्वारा फायरिंग किए जाने के वीडियो साझा किए गए।

इन घटनाओं ने इस सवाल को महत्वपूर्ण बना दिया है कि पारंपरिक आयोजनों के दौरान हथियारों के इस्तेमाल के लिए क्या स्पष्ट और एकसमान सुरक्षा दिशा-निर्देश होने चाहिए तथा उनका पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए। 

उपमुख्यमंत्री ने भी मामले पर संज्ञान लेने की बात कही

वीडियो वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने की खबर सामने आई।

अब आगे की कार्रवाई अंकिता शर्मा के जवाब, रेंज IG की टिप्पणी और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल किसी अंतिम विभागीय दंड या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। 

आगे क्या होगा?

इस मामले में अब तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी:

  • अधिकारी का जवाब: नोटिस के जवाब में घटना और हथियार के इस्तेमाल के संबंध में उनका पक्ष सामने आएगा।

  • विभागीय समीक्षा: रेंज IG अपनी टिप्पणी के साथ मामला पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे।

  • आगे की कार्रवाई: पुलिस मुख्यालय उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेगा।

निष्कर्ष: दशहरा पर शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के बाद IPS अधिकारी अंकिता शर्मा को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है। विभागीय प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। यह मामला धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ सरकारी हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, पुलिस अनुशासन और सार्वजनिक सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

राशन कार्डधारियों के लिए जरूरी खबर: 30 अक्टूबर तक कराएं ई-केवाईसी, सत्यापन नहीं होने पर हो सकती है कार्रवाई

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मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में राशन कार्डधारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। खाद्य विभाग ने राशन कार्ड में पंजीकृत सभी सदस्यों की ई-केवाईसी (e-KYC) और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2026 तक पूरी कराने की अपील की है। जिन सदस्यों का ई-केवाईसी अब तक नहीं हुआ है, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर सत्यापन कराने की सलाह दी गई है।

राशन दुकान या मोबाइल ऐप से करा सकते हैं ई-केवाईसी

जिला खाद्य शाखा के अनुसार, राशन कार्डधारी अपनी नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान पर जाकर ई-पॉस (e-POS) मशीन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त भारत सरकार के ‘मेरा ई-केवाईसी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने का विकल्प उपलब्ध है।

हितग्राहियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपने परिवार के सभी पंजीकृत सदस्यों का ई-केवाईसी स्टेटस जांच लें। यदि किसी सदस्य का सत्यापन लंबित है, तो उसे जल्द पूरा कराएं।

ई-केवाईसी नहीं होने पर क्या होगा?

खाद्य विभाग के निर्देशों के अनुसार, जिन सदस्यों का ई-केवाईसी लंबित है, उनके संबंध में विभागीय खाद्य अधिकारी मॉड्यूल में उपलब्ध जानकारी के आधार पर आवश्यक सत्यापन कराया जाएगा। यह प्रक्रिया जनपद पंचायतों और नगरीय निकायों के अधिकृत अधिकारियों अथवा सत्यापनकर्ताओं के माध्यम से पूरी की जाएगी।

सत्यापन के दौरान यदि संबंधित सदस्य उपलब्ध नहीं मिलता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए राशन कार्डधारियों को सलाह दी गई है कि वे सत्यापन संबंधी सूचना को गंभीरता से लें और निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करने में सहयोग करें। 

उचित मूल्य दुकान संचालकों को भी निर्देश

जिला खाद्य शाखा ने शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालकों और विक्रेताओं से कहा है कि वे राशन कार्डधारी परिवारों को ई-केवाईसी की प्रक्रिया और निर्धारित समय-सीमा के बारे में जागरूक करें। जिन परिवारों के सदस्यों का सत्यापन बाकी है, उन्हें आवश्यक जानकारी देकर प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करें।

इस अभियान का उद्देश्य राशन कार्ड के रिकॉर्ड का सत्यापन करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखना है।

राशन कार्डधारी इन बातों का रखें ध्यान

  • अपने राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों का ई-केवाईसी स्टेटस जांचें।

  • जिन सदस्यों का सत्यापन लंबित है, वे नजदीकी उचित मूल्य दुकान पर संपर्क करें।

  • उपलब्ध सुविधा के अनुसार ई-पॉस मशीन या ‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप का उपयोग करें।

  • यदि किसी सदस्य का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, तो उचित मूल्य दुकान संचालक या स्थानीय खाद्य विभाग से मार्गदर्शन लें।

  • ई-केवाईसी और सत्यापन की प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2026 से पहले पूरी कराने का प्रयास करें।

खाद्य विभाग की अपील

जिला खाद्य अधिकारी विष्णु नारायण शुक्ला ने राशन कार्डधारी हितग्राहियों से अपील की है कि वे समय-सीमा के भीतर अपने परिवार के सभी पंजीकृत सदस्यों का ई-केवाईसी तथा आवश्यक सत्यापन पूरा कराने में सहयोग करें। 

महत्वपूर्ण सूचना: 30 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर दी गई है। अन्य जिलों के राशन कार्डधारी अपने स्थानीय खाद्य विभाग से लागू निर्देशों की पुष्टि करें। 


रायपुर के कारोबारी दीपक मित्तल की चंडीगढ़ के ताज होटल में संदिग्ध मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

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चंडीगढ़- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कारोबारी दीपक मित्तल की चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह व्यावसायिक बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे थे और सेक्टर-17 स्थित ताज होटल में ठहरे हुए थे। बुधवार सुबह होटल के कमरे में बेहोशी की हालत में मिलने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है। 

होटल के कमरे में बेहोश मिले कारोबारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 56 वर्षीय दीपक मित्तल मंगलवार को चंडीगढ़ के होटल में ठहरे थे। बुधवार सुबह होटल के कर्मचारी ने उनके कमरे का दरवाजा खुला पाया। अंदर जाने पर वह बिस्तर पर बेहोशी की हालत में मिले। कर्मचारी ने इसकी सूचना होटल प्रबंधन को दी।

इसके बाद होटल के कर्मचारी उन्हें तत्काल सरकारी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल (GMSH), सेक्टर-16 लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर सेक्टर-17 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। 

कमरे से शराब की बोतलें और दवाइयां मिलने की जानकारी

पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान होटल के कमरे से शराब की बोतलें और कुछ दवाइयां मिलने की बात सामने आई है। इन वस्तुओं को जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, कमरे में शराब या दवाइयां मिलने से अपने आप मौत का कारण साबित नहीं होता।

पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के परिणामों से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कारोबारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। अधिकारियों ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही है। 

रात में होटल पहुंची महिला से पूछताछ

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दीपक मित्तल से मिलने एक महिला मंगलवार रात होटल पहुंची थी। पुलिस इस मुलाकात और उससे जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। जांच के तहत महिला से पूछताछ किए जाने की भी खबर है।

पुलिस होटल के सीसीटीवी फुटेज, आगंतुकों के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि कारोबारी के कमरे में आने-जाने वाले लोगों तथा उनकी मौत से पहले की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला की किसी गलत गतिविधि में संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। केवल पूछताछ के आधार पर किसी व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। 

मार्कफेड की बैठक में शामिल होने आए थे चंडीगढ़

दीपक मित्तल रायपुर के चावल कारोबार से जुड़े थे और संजय ग्रेन प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह पंजाब की मार्कफेड से संबंधित व्यावसायिक बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ गए थे। बुधवार सुबह उनकी बैठक प्रस्तावित थी।

उनकी अचानक मौत की खबर सामने आने के बाद कारोबारी जगत में शोक का माहौल है। होटल प्रबंधन ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया और पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही है। 

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजरें

इस मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि दीपक मित्तल की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, संबंधित लोगों के बयानों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी संभावित कारण को अंतिम सच मानना उचित नहीं होगा।

फिलहाल स्थिति: रायपुर के कारोबारी दीपक मित्तल की चंडीगढ़ के होटल में मौत की पुष्टि मीडिया रिपोर्टों में हुई है। मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस की जांच जारी है।


बस्तर दशहरा में बड़ा हादसा: विजय रथ के पहिए के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौत, एक घायल

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जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। जगदलपुर में भीतर रैनी की रस्म के दौरान आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। घटना के बाद उत्सव स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे ने इतने बड़े पारंपरिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

रथ खींचने के दौरान हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना उस समय हुई जब जगदलपुर में बस्तर दशहरा की पारंपरिक रथ यात्रा निकाली जा रही थी। बड़ी संख्या में लोग विजय रथ को खींचने में शामिल थे। इसी दौरान रथ खींच रहे एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ गया और वह रथ के पहिए की चपेट में आ गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना में एक अन्य व्यक्ति के पैर में चोट आई। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घायल व्यक्ति की हालत खतरे से बाहर बताई गई। 

मृतक की पहचान को लेकर शुरुआती रिपोर्ट में जानकारी नहीं

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में मृतक की पहचान की पुष्टि नहीं की गई थी। हादसे के कारणों और उससे जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने घटना की जानकारी देते हुए रथ यात्रा में शामिल लोगों से सावधानी बरतने और रथ से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की।

क्या है भीतर रैनी की परंपरा?

बस्तर दशहरा देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से अलग है। यहां पर्व का मुख्य केंद्र मां दंतेश्वरी और बस्तर की विशिष्ट आदिवासी धार्मिक परंपराएं हैं। इस उत्सव में रावण दहन नहीं होता, बल्कि देवी-देवताओं, स्थानीय रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया जाता है।

भीतर रैनी बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्मों में से एक है। इस अवसर पर आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ को बड़ी संख्या में ग्रामीण और पारंपरिक रथ खींचने वाले लोग मिलकर आगे बढ़ाते हैं। धार्मिक परंपरा के तहत देवी दंतेश्वरी के छत्र से जुड़ी रस्में निभाई जाती हैं और रथ की परिक्रमा कराई जाती है। 

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

बस्तर दशहरा में हर साल बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, ग्रामीण, श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। विशाल रथ को खींचने के दौरान लोगों की भीड़ और रथ के पहियों की निकटता के कारण विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

इस घटना के बाद आयोजन के दौरान सुरक्षा घेरा मजबूत करने, रथ के आसपास पर्याप्त दूरी बनाए रखने, भीड़ को व्यवस्थित करने और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को सक्रिय रखने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों में पुलिस और स्वयंसेवकों की पर्याप्त तैनाती, स्पष्ट दिशा-निर्देश, सुरक्षित रास्ते और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

प्रशासन और श्रद्धालुओं के लिए अहम संदेश

बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस तरह के आयोजनों में परंपराओं के निर्वहन के साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

श्रद्धालुओं से अपील है कि वे रथ के पहियों और खींचने वाली रस्सियों से उचित दूरी बनाए रखें, भीड़ में धक्का-मुक्की न करें और पुलिस तथा आयोजन समिति के निर्देशों का पालन करें।

फिलहाल इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत और एक व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई है। मृतक की पहचान तथा घटना से संबंधित अन्य विवरणों की पुष्टि के लिए प्रशासन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जाना चाहिए।


नंदनवन जंगल सफारी में पसरा मातम, 25 साल की हिमालयन भालू ‘फफोरी’ ने तोड़ा दम

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में 25 वर्षीय मादा हिमालयन भालू ‘फफोरी’ की मौत हो गई। सफारी प्रबंधन के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि में फफोरी ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत का कारण बढ़ती उम्र यानी वृद्धावस्था बताया गया है। फफोरी के निधन से उसकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों में शोक का माहौल है।


गुवाहाटी से रायपुर लाई गई थी फफोरी

जंगल सफारी प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, फफोरी को वर्ष 2012 में वन्यप्राणी आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत असम के गुवाहाटी स्थित चिड़ियाघर से रायपुर लाया गया था। उस समय उसकी उम्र करीब 12 वर्ष थी। इसके बाद से वह नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में रह रही थी।

पोस्टमार्टम के बाद विधिवत अंतिम संस्कार

फफोरी की मौत के बाद वन्यप्राणी चिकित्साधिकारी ने नियमानुसार पोस्टमार्टम किया। इसके बाद जंगल सफारी प्रबंधन और वन्यजीवों की देखभाल में लगे कर्मचारियों की मौजूदगी में उसे श्रद्धांजलि दी गई और विधिवत अंतिम संस्कार किया गया।

इस दौरान नंदनवन जू एवं जंगल सफारी के संचालक सह वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत, सहायक संचालक, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पशुपालक और सुरक्षा कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रबंधन ने जताया दुख

फफोरी के निधन पर जंगल सफारी प्रबंधन और उसकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रबंधन के अनुसार, वन्यजीवों की नियमित देखभाल, स्वास्थ्य की निगरानी और संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं।

25 वर्षीय फफोरी का निधन नंदनवन जू एवं जंगल सफारी के लिए दुखद घटना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में जारी किया 200 रूपए का स्मारक सिक्का

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रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे।


पूज्य शदाणी दरबार रायपुर की 5 वीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की 200 वीं जयंती पर भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी किया गया है। सिंधी विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी होना समाज के लिए ऐतिहासिक मौका था। यह देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों सिंधी लोगों के लिए गर्व का विषय है। स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक इसे शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से बुक कर सकेंगे।


उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जारी इस विशेष सिक्के पर पूज्य माता हासी देवी जी की छवि अंकित है। सिक्के के एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। इस स्मारक सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन पूज्य शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने दिया।

इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित वरिष्ठ अधिकारी, पूज्य शदाणी दरबार के सदस्य सहित देशभर से आए हुए जनप्रतिनिधि और सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बस्तर दशहरा में रचेगा नया इतिहास: सिरहासार के मुरिया दरबार में पहली बार शामिल होंगी राष्ट्रपति मुर्मू

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 जगदलपुर : विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के इतिहास में शुक्रवार को एक स्वर्णिम और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सिरहासार में आयोजित होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। बस्तर की सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के इस ऐतिहासिक मंच पर पहुँचने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति होंगी।


इस गौरवशाली अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति बस्तर अंचल के पारंपरिक सामाजिक संरक्षकों और जनप्रतिनिधियों, मांझी-चालकी, नाइक-पाइक और मेंबर-मेंबरिन से रूबरू होकर उनसे आत्मीय संवाद करेंगी। अंचल के इन जमीनी प्रतिनिधियों के साथ होने वाली यह सीधी चर्चा बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर और जनजातीय पहचान के सम्मान का एक सशक्त प्रतीक बनेगी।

इस ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण को भव्य बनाने के लिए बस्तर दशहरा समिति और स्थानीय प्रशासन ने स्वागत की विशेष पारंपरिक तैयारियां की हैं। सिरहासार पहुँचने पर राष्ट्रपति का अभिनंदन बस्तर की लोक-संस्कृति के अनूठे प्रतीकों के साथ किया जाएगा, जिसके तहत उन्हें स्थानीय परंपरा के अनुरूप स्वागत किया जाएगा। बस्तर की इस गौरवमयी परंपरा में राष्ट्रपति की सहभागिता को लेकर पूरे अंचल में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति के बस्तर दौरे को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

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 जगदलपुर : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 23 अक्टूबर को निर्धारित बस्तर प्रवास को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। वीवीआईपी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए हैं, जिसके तहत चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों को नो ड्रोन फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।


जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तहत मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट जगदलपुर से 25 किलोमीटर की परिधि में 23 अक्टूबर को सुबह 06 बजे से शाम 04 बजे तक किसी भी प्रकार के ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।

इसी क्रम में सुरक्षा घेरे को और अधिक सुदृढ़ करते हुए सिरहासार भवन एवं दंतेश्वरी मंदिर परिसर से 03 किलोमीटर के दायरे में भी 23 अक्टूबर को सुबह 07 बजे से शाम 05 बजे तक ड्रोन संचालन को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। उक्त दोनों आदेश तत्काल प्रभावशील कर दिए गए हैं। इस आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधितों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही सिरपुर शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘विरासत भी, विकास भी’ के संकल्प के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना हमारी गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सिरपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की कीर्ति विश्वभर में और अधिक विस्तारित हो।

रायपुर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, CM विष्णुदेव साय ने किया स्वागत; आज कई कार्यक्रमों में होंगी शामिल

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 Raipur News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंच गई हैं। रायपुर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनका स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल रमेन डेका समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री और सांसद मौजूद रहे। राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान रायपुर में स्मारक सिक्के का विमोचन करने के साथ नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। वहीं, 23 अक्टूबर को जगदलपुर में मां दंतेश्वरी के दर्शन और ऐतिहासिक मुरिया दरबार में सहभागिता करेंगी।


रायपुर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का स्वागत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर एयरपोर्ट में उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ राज्यपाल रमेन डेका, मंत्री विजय शर्मा, मंत्री खुशवंत साहेब, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद विजय बघेल भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रदेश में विशेष तैयारियां की गई हैं। उनके प्रवास के दौरान रायपुर और बस्तर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

माता हासी देवी जी के सम्मान में जारी करेंगी 200 रुपये का स्मारक सिक्का

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को दोपहर 12:45 बजे रायपुर स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस दौरान पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।

इस कार्यक्रम को राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास के प्रमुख आयोजनों में शामिल माना जा रहा है।

शाम 4 बजे इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व का कार्यक्रम

लोकभवन में कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति शाम 4 बजे रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। नुआखाई पर्व के अवसर पर होने वाले इस आयोजन में वे सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

इस कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और युवा सहभागिता से जुड़े विषयों पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

कल जगदलपुर में मां दंतेश्वरी के करेंगी दर्शन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने दौरे के दूसरे दिन यानी 23 अक्टूबर को बस्तर प्रवास पर रहेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 11 बजे जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी।

इसके बाद दोपहर 12:45 बजे वे मुरिया दरबार एवं बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक संवाद व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें जनजातीय समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों की सहभागिता रहती है।

राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।

CM विष्णुदेव साय बोले- छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय

राष्ट्रपति के दौरे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ आगमन प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राष्ट्रपति माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये के स्मारक सिक्के का विमोचन करेंगी। इसके बाद वे बस्तर प्रवास पर जाएंगी और वहां आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होकर आमसभा को संबोधित करेंगी।

राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक आयोजनों और जनजातीय परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में खूनी विवाद: चाकू से हमले में युवक की मौत, साथी घायल

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 Dhamtari Crime News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आपसी विवाद के बाद चाकूबाजी की घटना सामने आई है। अर्जुनी थाना क्षेत्र के मुजगहन के पास बुधवार रात एक युवक ने दो लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। इस वारदात में गंभीर रूप से घायल दीपांशु साहू की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उसका साथी भी घायल हुआ है। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर उसकी तलाश तेज कर दी है।


आपसी विवाद के बाद चाकू से किया हमला

जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात मुजगहन निवासी दीपांशु साहू अपने एक साथी के साथ मौजूद था। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों का एक युवक से विवाद हो गया। शुरुआत में हुई कहासुनी देखते ही देखते बढ़ गई। इसके बाद आरोपी ने चाकू निकालकर दीपांशु और उसके साथी पर हमला कर दिया।

अचानक हुई चाकूबाजी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हमले में दीपांशु गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वहीं, हमले में घायल उसके साथी का इलाज जारी है।

वारदात के बाद आरोपी फरार, पुलिस कर रही तलाश

घटना की सूचना मिलने के बाद अर्जुनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस घटनास्थल से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही आरोपी की पहचान, उसके संभावित ठिकानों और घटना से संबंधित अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

वारदात के बाद आरोपी के फरार होने से उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।

हत्या की वजह का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस प्रारंभिक तौर पर इस घटना को आपसी विवाद के बाद हुई चाकूबाजी मानकर जांच कर रही है। हालांकि, विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और आरोपी ने हमला क्यों किया, इसका स्पष्ट खुलासा अभी नहीं हुआ है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। फिलहाल, एक युवक की मौत और दूसरे के घायल होने की घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

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