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साक्षरता मिशन के प्रमाण-पत्रों पर सवाल: क्या सिर्फ हस्ताक्षर कर पाना ही साक्षरता है?

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परीक्षा, प्रमाण-पत्र और वास्तविक साक्षरता के बीच बढ़ता अंतर

“क्या सिर्फ अपना नाम लिख और हस्ताक्षर कर पाना ही साक्षर होने की पहचान है?”

“बिना नियमित पढ़ाई के केवल परीक्षा में बैठने से क्या साक्षर भारत का लक्ष्य पूरा हो जाएगा?”

“क्या अभिभावक और ग्रामीण साक्षर होने के वास्तविक फायदे जानना नहीं चाहते?”

साक्षरता मिशन और साक्षर भारत कार्यक्रम को लेकर महासमुंद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षकों से जुड़े लोगों का कहना है कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य यदि बुनियादी पढ़ना-लिखना और संख्या ज्ञान विकसित करना है, तो केवल परीक्षा आयोजित कर प्रमाण-पत्र जारी करने के बजाय वास्तविक शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।


ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाली साक्षरता परीक्षाओं को लेकर यह भी शिकायत सामने आ रही है कि बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य वयस्कों को परीक्षा केन्द्रों तक लाने का दबाव बनाया जाता है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि जिन लोगों ने परीक्षा में शामिल नहीं होने की इच्छा लिखित रूप से व्यक्त की है, उन्हें भी विभिन्न सरकारी सुविधाओं से नाम कटने अथवा नुकसान होने की बात कहकर परीक्षा में बैठने के लिए दबाव डाला जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच और संबंधित विभाग से स्पष्ट स्थिति सामने आना आवश्यक है।

प्रश्न पत्र कौन बनाता है और तैयारी कितनी होती है?

कार्यक्रम से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल का संबंध परीक्षा की तैयारी से है। आरोप है कि कई स्थानों पर परीक्षा की तैयारी के लिए वयस्क परीक्षार्थियों को वर्षभर नियमित रूप से पढ़ाने के बजाय परीक्षा के समय औपचारिक तैयारी कराई जाती है। यहां तक कि प्रश्न-पत्र तैयार करने और परीक्षा की प्रक्रिया में बच्चों तथा शिक्षकों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है, तो यह जांच का विषय है कि परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित व्यवस्था क्या है और उसका पालन किस स्तर तक किया जा रहा है।

शिक्षक ने भी स्वीकार की कई व्यावहारिक समस्याएं

महासमुंद के कोकड़ी स्थित सरकारी स्कूल में चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय से जुड़े शिक्षक श्री गेंदलाल कोकडिया से संवाद में उन्होंने बताया कि साक्षरता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को बुनियादी पढ़ना-लिखना तथा संख्या ज्ञान प्रदान करना है।

उनके अनुसार, साक्षरता परीक्षा में शामिल होने वाले लोगों को पढ़ाने के लिए सरकार की ओर से अनुदेशक नियुक्त किए जाते हैं। कई स्थानों पर 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थी भी पढ़ाने में सहयोग करते हैं।

हालांकि, उनके अनुसार जमीनी स्तर पर कई व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। अनुदेशकों को मिलने वाला मानदेय कम होना, विद्यार्थियों की अपनी पढ़ाई एवं अन्य व्यस्तताएं तथा परीक्षार्थियों द्वारा बुनियादी साक्षरता के महत्व को पर्याप्त रूप से न समझ पाना—इन कारणों से वर्षभर नियमित पढ़ाई नहीं हो पाती।

नतीजा यह होता है कि कुछ लोग परीक्षा के समय केन्द्र तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन परीक्षा के बाद भी वे स्वतंत्र रूप से पढ़ने, लिखने और सामान्य संख्यात्मक जानकारी का उपयोग करने में सक्षम नहीं हो पाते।

साक्षर गांव घोषित होने के बाद फिर परीक्षा केन्द्र क्यों?

कोकडिया के अनुसार, पिछले वर्ष कोकड़ी गांव को सरपंच, पंच, सचिव, साक्षरता विभाग सहित संबंधित लोगों की प्रक्रिया के माध्यम से साक्षर गांव घोषित किया गया था। इसके बावजूद बाद में उसी तरह के क्षेत्रों में फिर से परीक्षा केन्द्र बनाए जाने और बार-बार परीक्षा प्रक्रिया दोहराए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

यदि किसी गांव को साक्षर घोषित किया गया है, तो उसके बाद वहां के लोगों की वास्तविक साक्षरता का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया? क्या साक्षरता का अर्थ केवल हस्ताक्षर कर पाना है या व्यक्ति को किसी सामान्य वाक्य को पढ़ने, समझने, लिखने और रोजमर्रा की गणना करने में भी सक्षम होना चाहिए?

इन सवालों का स्पष्ट उत्तर जरूरी है।

रविवार की परीक्षा से शिक्षक और परीक्षार्थी भी परेशान

बार-बार परीक्षा आयोजित किए जाने और रविवार को परीक्षा केन्द्रों पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षकों की परेशानियां भी सामने आ रही हैं। दूसरी ओर, रोजमर्रा के कामकाज पर निर्भर ग्रामीणों के लिए परीक्षा में शामिल होने के कारण काम प्रभावित होने की समस्या भी बताई जा रही है।

ऐसे में यह जरूरी है कि साक्षरता कार्यक्रम की सफलता केवल कितने लोगों ने परीक्षा दी और कितने प्रमाण-पत्र जारी हुए, इस आंकड़े से तय न की जाए। असली सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि कितने लोग वास्तव में पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणना करना सीख पाए।

सिर्फ प्रमाण-पत्र नहीं, वास्तविक साक्षरता चाहिए

साक्षरता मिशन का उद्देश्य यदि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, तो केवल परीक्षा में बैठाना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों को नियमित रूप से पढ़ाने की व्यवस्था, पर्याप्त मानदेय पर प्रशिक्षित अनुदेशक, समयानुकूल कक्षाएं और सीखने के बाद वास्तविक मूल्यांकन आवश्यक है।

साक्षरता का अर्थ केवल अपना नाम लिखना या हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि किसी लिखी हुई बात को पढ़कर समझ पाना, अपनी बात लिख पाना और रोजमर्रा के जीवन में बुनियादी संख्या ज्ञान का उपयोग कर पाना है।

इसलिए मांग यह होनी चाहिए कि—

  • जो व्यक्ति वास्तव में पढ़ना-लिखना और बुनियादी संख्या ज्ञान जानता है, उसी को परीक्षा में सफल घोषित किया जाए।

  • परीक्षा और प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष हो।

  • अनुदेशकों को उचित मानदेय दिया जाए।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित, आवश्यकता के अनुसार रात्रिकालीन अथवा सुविधाजनक समय पर कक्षाएं संचालित की जाएं।

  • परीक्षा से पहले नहीं, बल्कि पूरे वर्ष नियमित पढ़ाई कराई जाए।

  • प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले वास्तविक बुनियादी साक्षरता का परीक्षण किया जाए।

  • जिन गांवों को साक्षर घोषित किया जा चुका है, वहां दोबारा परीक्षा की आवश्यकता और उसके आधार को सार्वजनिक किया जाए।

  • किसी भी ग्रामीण को सरकारी योजनाओं, राशन कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र या अन्य सुविधाओं से नाम काटने का भय दिखाकर परीक्षा में शामिल करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।

सवाल अब भी कायम है

क्या साक्षर भारत का लक्ष्य केवल परीक्षा केन्द्रों में उपस्थिति, उत्तर पुस्तिका और प्रमाण-पत्र तक सीमित रहेगा, या वास्तव में ग्रामीणों को पढ़ना-लिखना सिखाने की दिशा में ठोस काम होगा?

सरकार और संबंधित विभाग को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। क्योंकि साक्षरता का प्रमाण-पत्र तभी सार्थक है, जब उसके पीछे वास्तविक ज्ञान और आत्मनिर्भरता हो।

सिर्फ कागज पर साक्षर गांव नहीं, वास्तव में पढ़ने-लिखने में सक्षम गांव चाहिए।

महानदी उफान पर, शिवरीनारायण का जांजगीर से संपर्क टूटा

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 जांजगीर-चांपा। जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। शिवरीनारायण क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नगर के शबरी पुल के ऊपर करीब छह फीट पानी बहने से जांजगीर और शिवरीनारायण के बीच संपर्क टूट गया है।


महानदी का जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी तटों को पार कर बिलासपुर रोड और केरा रोड तक पहुंच गया है। इसके चलते निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

वार्ड एक के लोगों को सांस्कृतिक भवन में ठहराया

वार्ड नंबर एक में पानी भरने के बाद प्रभावित लोगों को सांस्कृतिक भवन में ठहराया गया है। वहीं, मेला ग्राउंड में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है और कई लोग नाव के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रहे हैं।

SDRF की टीम तैनात

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF की टीम तैनात की गई है। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग स्थानों पर भोजन, पेयजल और ठहरने की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

राजधानी में खूनी रात, एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के माना थाना क्षेत्र के डूमरतराई स्थित साहू पारा में रविवार सुबह एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, परिवार के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और दो बच्चों पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने खुद को भी घायल कर लिया, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


मृतकों की पहचान खिलेश्वरी साहू, आशीष साहू (10) और ज्ञान साहू (8) के रूप में हुई है। वहीं आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू के रूप में बताई गई है।

विवाद के बाद वारदात की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह डूमरतराई के साहू पारा स्थित घर में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी और दोनों बच्चों पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद उसने खुद को भी घायल कर लिया।

घटना की सूचना मिलते ही माना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल की जांच शुरू कर दी है और जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

घटना की वजह स्पष्ट नहीं

फिलहाल वारदात के पीछे की वास्तविक वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारण और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

छात्रा की रेप की खबर पर भड़के छात्र, देर रात यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़

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 फगवाड़ा। पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से कथित रेप की सूचना को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। सोशल मीडिया पर छात्रा से कथित दुष्कर्म से जुड़ा एक मैसेज वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र देर रात यूनिवर्सिटी परिसर में जुट गए। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और परिसर में तोड़फोड़ की गई।


हालांकि, पुलिस ने अभी तक छात्रा से रेप की किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। पुलिस वायरल मैसेज की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह मैसेज कहां से आया और उसमें किए गए दावे की सच्चाई क्या है।

रात करीब 2 बजे जुटे छात्र

बताया जा रहा है कि रात करीब 2 बजे बड़ी संख्या में छात्र यूनिवर्सिटी परिसर में जमा हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन की शुरुआत गर्ल्स हॉस्टल के आसपास से होने की बात सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज में दावा किया गया था कि किसी बाहरी व्यक्ति ने एक छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया है।

मैसेज के वायरल होने के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया और प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। इस दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी की सूचना सामने आई।

यूनिवर्सिटी गेट पर भी तोड़फोड़

हंगामा बढ़ने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के बाहर पहुंच गए। यहां भी तोड़फोड़ की गई। इसके बाद छात्रों ने चंडीगढ़-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचकर धरना दिया और सड़क को बंद कर दिया। इससे हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ।

मौके पर पहुंची पुलिस

हंगामे की सूचना मिलने के बाद कपूरथला के एसपी गौरव तूर समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज की सत्यता का पता लगाना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित घटना वास्तव में हुई है या वायरल संदेश के आधार पर विवाद और प्रदर्शन शुरू हुआ।

पुलिस ने नहीं की रेप की पुष्टि

पुलिस के अनुसार, अभी तक छात्रा से रेप की घटना की पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यूनिवर्सिटी परिसर में हुए हंगामे, तोड़फोड़ और हाईवे जाम को लेकर भी पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

Pitru Paksha 2026: प्रतिपदा श्राद्ध आज, जानें कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त का समय

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 Pitru Paksha 2026 :  हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण अर्पित करने का विशेष समय माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान परिवार के दिवंगत सदस्यों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष का आरंभ हुआ। इसके बाद 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध किया जा रहा है।


श्राद्ध कर्म में समय का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना गया है।

प्रतिपदा श्राद्ध पर कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त

27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के दिन श्राद्ध कर्म के लिए तीन प्रमुख समय बताए गए हैं।

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि 48 मिनट है। इस दौरान श्राद्ध से जुड़े प्रमुख कर्म करना शुभ माना जाता है।

रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि भी 48 मिनट है। पितृ कर्म के लिए इस समय को महत्वपूर्ण माना जाता है।

अपराह्न काल: दोपहर 1:24 बजे से 3:48 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 24 मिनट है। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुतुप और रौहिण मुहूर्त के अलावा अपराह्न काल में भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

क्या है कुतुप मुहूर्त?

कुतुप मुहूर्त को पितृ कर्म के लिए विशेष समय माना जाता है। यह सामान्यतः दोपहर के आसपास पड़ता है और करीब 48 मिनट का होता है। पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध में इस अवधि में श्राद्ध से जुड़े प्रमुख कर्म किए जाते हैं।

रौहिण मुहूर्त का महत्व

कुतुप मुहूर्त के बाद रौहिण मुहूर्त आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में किए जाने वाले पार्वण श्राद्ध में कुतुप और रौहिण मुहूर्त का विशेष महत्व है। इसके बाद अपराह्न काल में भी श्राद्ध कर्म संपन्न किया जा सकता है।

अपराह्न काल में किया जाता है श्राद्ध कर्म

अपराह्न यानी दोपहर के बाद का समय भी श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग परंपरा के अनुसार, कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ अपराह्न काल की समाप्ति तक पार्वण श्राद्ध की प्रक्रिया पूरी की जाती है। श्राद्ध कर्म के अंत में पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है।

प्रतिपदा श्राद्ध किसके लिए किया जाता है?

प्रतिपदा श्राद्ध उन दिवंगत परिजनों के लिए किया जाता है, जिनका निधन प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। यह नियम शुक्ल और कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के लिए माना जाता है।

कुछ धार्मिक परंपराओं में प्रतिपदा तिथि को नाना-नानी के श्राद्ध के लिए भी उपयुक्त माना गया है, विशेषकर ऐसी स्थिति में जब उनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो। इस दिन पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।

पितृ पक्ष 2026 की अगली प्रमुख तिथियां

  • 27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
  • 28 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध
  • 29 सितंबर: तृतीया श्राद्ध एवं महाभरणी श्राद्ध
  • 30 सितंबर: चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
  • 1 अक्टूबर: षष्ठी श्राद्ध
  • 2 अक्टूबर: सप्तमी श्राद्ध
  • 3 अक्टूबर: अष्टमी श्राद्ध
  • 4 अक्टूबर: नवमी/मातृ नवमी
  • 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या

नोट: मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के आधार पर स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। धार्मिक कर्मकांड के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।

आज की न्यूज़ बुलेटिन — 27 सितंबर 2026, रविवार

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नमस्कार! स्वागत है आपके आज के न्यूज़ बुलेटिन में।

सुबह की शुरुआत करें देश-दुनिया की बड़ी, जरूरी और ताजा खबरों के साथ। राजनीति से लेकर बाजार, मौसम, खेल, टेक्नोलॉजी और मनोरंजन तक—जानिए आज क्या है खास।

भारत

  • भारत–पाकिस्तान तनाव: UN General Assembly में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल के मुद्दे को उठाया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया। 

  • चुनाव आयोग और SIR: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया और ECINET से जुड़े कुछ स्पष्टीकरण/फैसले जारी किए हैं। 

  • जम्मू-कश्मीर: विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से जुड़ी राजनीतिक गतिविधि जारी रही। 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: हिमाचल IED ब्लास्ट मामले में NIA ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। 

अर्थव्यवस्था & बिजनेस

  • भारत–अमेरिका व्यापार समझौता: अमेरिकी अधिकारी के अनुसार प्रस्तावित India-US trade deal पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और 90% से अधिक काम पूरा होने का दावा किया गया है। 

  • सरकारी उधारी: केंद्र ने FY27 के बाजार उधारी लक्ष्य को ₹15.99 लाख करोड़ किया है और लंबी अवधि की debt maturity पर जोर दिया है। 

  • RBI: निर्यात आय की repatriation से संबंधित पहले दी गई एक छूट वापस ली गई है। 

रक्षा

  • Exercise Yudh Abhyas 2026: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना ने SkyStriker kamikaze drones का परीक्षण किया, जिससे autonomous/drone warfare capabilities पर फोकस सामने आया।

दुनिया

  • UN General Assembly: न्यूयॉर्क में UNGA के दौरान Middle East और Ukraine युद्ध, AI governance और वैश्विक सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में बने हुए हैं।

  • ईरान–अमेरिका तनाव: ईरान को लेकर अमेरिका की कड़ी बयानबाजी और संभावित वार्ता की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। 

  • यूक्रेन युद्ध: युद्ध और उससे जुड़े ऊर्जा तथा खाद्य आपूर्ति के वैश्विक प्रभाव UN चर्चाओं के प्रमुख विषय हैं। 

मौसम

  • उत्तर भारत में भारी बारिश: Uttarakhand, Uttar Pradesh और Madhya Pradesh के कई हिस्सों में बारिश की चेतावनी है। उत्तराखंड में 26–27 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। 

  • UP के कुछ जिलों में भारी बारिश के कारण स्कूल बंद किए गए और flash-flood risk को लेकर प्रशासन सतर्क है। 

खेल

  • Asian Games 2026: भारत ने महिला और पुरुष—दोनों कबड्डी स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

  • क्रिकेट: आज भारत और वेस्टइंडीज के बीच पहला ODI निर्धारित है; मैच तिरुवनंतपुरम में है। 

विज्ञान/टेक

  • AI governance इस सप्ताह UN के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में है। AI के तेज विकास, regulation और वैश्विक governance को लेकर देशों के बीच चर्चा जारी है। 

 CG Special 

  • महासमुंद में मानव तस्करी/बंधुआ मजदूरी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: पुलिस ने 10 ठिकानों पर छापेमारी कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया और ₹1.48 करोड़ से अधिक नकद जब्त किया। पुलिस के अनुसार नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों तक जुड़े होने की जांच चल रही है।  
  • महासमुंद में महानदी का जलस्तर बढ़ा: लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है; बम्हनी क्षेत्र में पानी भरने की खबर है और दो सुरक्षाकर्मियों के रेस्क्यू की सूचना है।
  • CG में भारी बारिश: प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। 30 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बने रहने का पूर्वानुमान बताया गया है।
  • सुकमा में बिजली व्यवस्था प्रभावित: बाढ़ के पानी में बिजली के खंभे डूबने की खबर है, जिससे विद्युत कर्मचारियों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है।
  • रेल कनेक्टिविटी: रावघाट तक रेलवे लाइन पहुंच गई है; 95 किमी परियोजना के अंतिम 17.5 किमी हिस्से का काम पूरा होने की स्थानीय रिपोर्ट है।
  • कबड्डी: Asian Games में भारत के कबड्डी स्वर्ण के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने CG की खिलाड़ी संजू को बधाई दी। 

गणेश विसर्जन के दौरान खूनी विवाद, तीन युवकों पर चाकू से हमला; जूना बिलासपुर में भी मारपीट से मचा हंगामा

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बिलासपुर- बिलासपुर में गणेश विसर्जन के दौरान अलग-अलग इलाकों में विवाद और मारपीट की घटनाओं ने पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में विसर्जन के बाद लौट रहे युवकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि तीन युवकों पर चाकू से हमला कर दिया गया। हमले में घायल तीनों युवकों को उपचार के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वहीं, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के जूना बिलासपुर में भी गणेश विसर्जन के दौरान दो पक्षों के युवकों के बीच विवाद और मारपीट की घटना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मामले में कई युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है।

विसर्जन से लौटते समय शुरू हुआ विवाद

सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में नायक गणेश उत्सव समिति के पदाधिकारी और सदस्य गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए गए थे। विसर्जन के बाद लौटते समय बड़े बन्नाक तालाब के पास समिति से जुड़े कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, विवाद के समय कुछ युवक नशे की हालत में बताए जा रहे थे। मामूली कहासुनी देखते ही देखते बढ़ गई और युवकों के बीच मारपीट शुरू हो गई।

विवाद रोकने पहुंचे युवकों पर चाकू से हमला

बताया गया कि बन्नाक चौक के पास कुछ युवक आपस में विवाद कर रहे थे। इसी दौरान महावीर नगर निवासी राहुल सिंह ठाकुर, माता चौरा निवासी सिद्धांत ध्रुव समेत तीन युवकों ने विवाद कर रहे युवकों को समझाने और रोकने का प्रयास किया।

आरोप है कि इसी दौरान विवाद कर रहे युवकों ने समझाने पहुंचे तीनों युवकों पर ही हमला कर दिया। चाकू से किए गए हमले में तीनों घायल हो गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए सिम्स अस्पताल भेजा गया।

कई युवकों को पुलिस ने पकड़ा

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नायक गणेश उत्सव समिति के अध्यक्ष अनुज, शेखर कांति, करण रजक सहित कुछ अन्य युवकों को पूछताछ के लिए पकड़ा।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर विवाद की शुरुआत और चाकू से हमले की पूरी घटना का क्रम पता लगाने में जुटी है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में किसी पुरानी रंजिश के बजाय नशे की हालत में कहासुनी के बाद विवाद बढ़ने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

जूना बिलासपुर में भी दो पक्षों में मारपीट

गणेश विसर्जन के दौरान सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के जूना बिलासपुर में भी विवाद की स्थिति बन गई।

जानकारी के मुताबिक, गोंड़पारा और सरकंडा क्षेत्र से आए कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर पहले गाली-गलौज हुई। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और विवाद कर रहे युवकों को अलग किया। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने संबंधित युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की।

विसर्जन से पहले प्रशासन ने दिए थे सख्त निर्देश

गणेशोत्सव और विसर्जन को लेकर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने पहले ही आयोजन समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें विसर्जन के दौरान उपद्रव, हुड़दंग और विवाद से दूर रहने की अपील की गई थी।

प्रशासन की ओर से डीजे संचालन को लेकर भी निर्धारित नियमों और न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। आयोजन समितियों को भी जुलूस के दौरान अनुशासन बनाए रखने और किसी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनने देने की जिम्मेदारी दी गई थी।

इसके बावजूद शहर के अलग-अलग हिस्सों में विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आईं।

रास्ता रोककर डीजे बजाने से यातायात भी प्रभावित

गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान कुछ स्थानों पर रास्ते रोककर डीजे बजाने के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

जुलूस और वाहनों की आवाजाही के कारण कई स्थानों पर जाम जैसी स्थिति बनी, जिससे आम लोगों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुलिस की कार्रवाई जारी

गणेश विसर्जन के दौरान हुई दोनों घटनाओं को लेकर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सिरगिट्टी मामले में घायल युवकों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है, जबकि जूना बिलासपुर मामले में पुलिस ने विवाद में शामिल युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है।

पुलिस का कहना है कि विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का आरोप, हेडमास्टर का वीडियो वायरल; शिकायत की चुनौती देने के बाद निलंबित

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जांजगीर-चांपा- जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आया है। भांठापारा भुईगांव के शासकीय स्कूल में पदस्थ हेडमास्टर योगेश्वर सिंह कंवर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर में नजर आ रहे हैं।

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर मामले की जांच शुरू की गई, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पामगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय से अटैच किया गया है।

वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हेडमास्टर स्कूल परिसर में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि उस समय वे शराब के नशे में थे और उनका व्यवहार सामान्य नहीं था।

बताया जा रहा है कि स्कूल के कुछ शिक्षकों ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई। इसी दौरान कथित तौर पर उन्होंने शिक्षकों को शिकायत करने की चुनौती दी।

वायरल वीडियो में वे कथित तौर पर शिक्षकों से वीडियो बनाने और उसे जहां शिकायत करनी हो वहां भेजने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में BEO, DEO और कलेक्टर तक शिकायत करने का भी जिक्र बताया जा रहा है।

हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति और लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

महिला शिक्षक से विवाद का भी जिक्र

मामले के साथ स्कूल में हेडमास्टर और एक महिला शिक्षक के बीच कथित विवाद की बात भी सामने आई है।

आरोप है कि हेडमास्टर ने बच्चों के सामने महिला शिक्षक के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके पढ़ाने के तरीके पर टिप्पणी की। वायरल वीडियो में भी महिला शिक्षक से संबंधित बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों ने स्कूल पहुंचकर संभाली स्थिति

हेडमास्टर के कथित व्यवहार की जानकारी मिलने के बाद गांव के कुछ जनप्रतिनिधि भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने मामले को शांत कराने और हेडमास्टर को समझाने का प्रयास किया।

इसी दौरान स्कूल परिसर में हुई बातचीत और घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला प्रशासन तक पहुंचा।

कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई

वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जांच के निर्देश दिए।

जिला शिक्षा अधिकारी मनोहर प्रताप सिंह के अनुसार, हेडमास्टर के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने संबंधी जानकारी वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आई थी। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और पामगढ़ BEO कार्यालय से अटैच किया गया।

प्रशासन के अनुसार, जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमों के तहत आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्कूलों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश

घटना के बाद कलेक्टर ने जिले के शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी और सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण कर—

  • शिक्षकों की उपस्थिति,

  • अनुशासन,

  • स्कूल में शिक्षकों के आचरण,

  • शिक्षण व्यवस्था और

  • विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण

की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

इसके अलावा नशे की हालत में स्कूल आने या अनुशासनहीनता से संबंधित शिकायतें मिलने पर उनकी जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुराने मामलों की भी होगी समीक्षा

कलेक्टर ने जिले में पहले सामने आए शिक्षकों की अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों की जानकारी भी मांगी है। अधिकारियों से ऐसे मामलों में हुई विभागीय जांच और अब तक की गई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताने को कहा गया है।

इससे प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पूर्व में सामने आए मामलों में क्या कार्रवाई हुई और क्या कोई मामला अभी लंबित है।

अब जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर

फिलहाल हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है और मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच के दौरान वायरल वीडियो, संबंधित शिक्षकों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि हेडमास्टर के खिलाफ आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व से परिवर्तित भूमि को अन्य मद में परिवर्तित करने की सुविधा होगी ऑनलाइन

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सोमवार से ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने तक ऑफलाइन आवेदन की सुविधा रहेगी जारी

रायपुर- पूर्व से परिवर्तित भूमि को अन्य मद में परिवर्तित करने संबंधी ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित कर लिया गया है, जिसे आगामी सोमवार से राजस्व पोर्टल पर लाइव किया जाएगा। नागरिक ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।

ऑफलाइन आवेदन अभी जारी

राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में ऑफलाइन आवेदन की सुविधा बंद नहीं की गई है। ऑनलाइन मॉड्यूल के लाइव होने तक नागरिक पूर्व की भांति संबंधित कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

SDM कार्यालय रायपुर का निरीक्षण

ततसंबंध में SDM कार्यालय रायपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संबंधित प्रकरणों एवं अभिलेखों का परीक्षण किया गया। साथ ही इस संबंध में ऑनलाइन सुविधा लागू किये जाने तक अनिवार्यतः पूर्व अनुसार ऑफलाइन आवेदन ecourt अंतर्गत न्यायालय द्वारा स्वीकार करने का  निर्देश दिया ।

महासमुंद में मानव तस्करी नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 10 ठिकानों पर छापेमारी; 5 गिरफ्तार

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महासमुंद- महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी, अवैध श्रमिक परिवहन और कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोग शामिल बताए गए हैं। 

नाबालिग के गर्भवती होने से शुरू हुई जांच

पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले का खुलासा एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के गर्भवती होने की सूचना मिलने के बाद शुरू हुई जांच से हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, 21 सितंबर को एक अस्पताल/मेटरनिटी होम की ओर से पुलिस को सूचना मिली थी कि नाबालिग गर्भवती है।

जांच में सामने आया कि नाबालिग को उसके परिवार के साथ मजदूरी के लिए उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे पर भेजा गया था। वहां उसके कथित शोषण की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए जांच शुरू की। इसी जांच के दौरान पुलिस को मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने वाले एक बड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली।

गरीब परिवारों को एडवांस और कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, नेटवर्क पर आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर परिवारों को एडवांस रकम और कर्ज देकर दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में काम करने के लिए भेजा जाता था।

पुलिस को ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मिलने की बात कही गई है, जिनसे बड़ी संख्या में मजदूरों के दूसरे राज्यों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में बच्चों और नाबालिगों के भी अपने परिवारों के साथ मजदूरी के लिए बाहर जाने की बात सामने आई है।

10 ठिकानों पर एक साथ रेड

महासमुंद पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नेटवर्क से जुड़े 10 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में नकदी के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद की।

पुलिस के अनुसार जब्त सामान में—

  • ₹1,48,54,750 नकद

  • मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी

  • मोबाइल फोन

  • बैंक पासबुक

  • चेकबुक

  • ATM कार्ड

  • मॉर्गेज/स्टांप संबंधी दस्तावेज

  • नोट गिनने की मशीन

  • अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सामग्री

शामिल हैं। 

पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों के नाम मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पीयूष अग्रवाल बताए गए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े लोग शामिल हैं। 

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों की जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा इसके पूरे संचालन की जानकारी जुटाई जा रही है।

हजारों मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने की जांच

जांच एजेंसियों को मिले रिकॉर्ड से कथित तौर पर पता चला है कि नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में भेजा गया। जांच में ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जो हजारों मजदूरों के दूसरे राज्यों में भेजे जाने की ओर संकेत करते हैं। 

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितने मजदूरों को इस नेटवर्क के जरिए बाहर भेजा गया, उन्हें किन राज्यों में भेजा गया और वहां उनके साथ किस तरह की परिस्थितियां रहीं।

बाल मजदूरी और शोषण के आरोपों की भी जांच

पुलिस की जांच केवल मजदूरों के अवैध परिवहन तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच में नाबालिगों को काम के लिए दूसरे राज्यों में भेजने और उनके कथित शोषण से जुड़े साक्ष्य भी सामने आए हैं।

हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस फिलहाल जब्त दस्तावेजों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। 

संगठित अपराध की धारा भी जोड़ी गई

पुलिस के अनुसार, मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान भी जोड़ा गया है। 

अब आगे क्या होगा?

महासमुंद पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन किस स्तर तक फैला हुआ था। साथ ही उन मजदूरों और नाबालिगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें कथित तौर पर दूसरे राज्यों में भेजा गया था।

पुलिस की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जब्त रकम का स्रोत क्या था और बैंक खातों, दस्तावेजों तथा मोबाइल रिकॉर्ड से नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान होती है या नहीं।


छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, नदियां उफान पर; आज सभी स्कूल बंद

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। बस्तर संभाग समेत मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव जैसे हालात बने हुए हैं।

इंद्रावती, महानदी और शिवनाथ का बढ़ा जलस्तर

बस्तर में इंद्रावती नदी खतरे के निशान से करीब 7 फीट ऊपर बह रही है। वहीं धमतरी के गंगरेल बांध के सभी गेट खोले गए हैं, जिसके बाद महानदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी के उफान के कारण आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं।

राज्य के सभी स्कूल आज बंद

लगातार बारिश और बिगड़ते मौसम को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। इससे पहले कई प्रभावित जिलों में स्थानीय स्तर पर भी स्कूलों में छुट्टी की गई थी।

प्रशासन अलर्ट, राहत-बचाव अभियान तेज

निचले इलाकों में पानी भरने के कारण कई स्थानों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पूरी सतर्कता बरतने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित

भारी बारिश का असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कई मार्गों पर जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है। बस्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ के पानी के कारण गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

https://youtube.com/shorts/VriGcE7-P70?feature=share

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। मौसम की स्थिति को देखते हुए निचले और नदी किनारे के इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

फिलहाल प्रदेश में बारिश का असर बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

संभल मस्जिद सर्वे मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट, फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली- संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका संभल जामा मस्जिद समिति की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत मस्जिद का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद वर्ष 2024 में दायर एक सिविल मुकदमे से जुड़ा है। हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही जामा मस्जिद स्थित है, वहां पहले मंदिर था। इसी दावे के आधार पर स्थानीय अदालत ने मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। 

मस्जिद समिति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने मई 2025 में सर्वे के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। 

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार की दलीलें भी सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इसका मतलब है कि अदालत बाद की तारीख में अपना फैसला सुनाएगी

मस्जिद समिति की ओर से मामले में Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है। दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने सर्वे से संबंधित निचली अदालत के आदेश का बचाव किया है। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

संभल मस्जिद विवाद धार्मिक स्थलों से जुड़े मुकदमों और 1991 के Places of Worship Act की व्याख्या से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश से इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है और अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर है। 


तरंग शक्ति 2026: आसमान में दिखेगा दुनिया के आधुनिक लड़ाकू विमानों का दम, F-35 और Rafale समेत 80 से ज्यादा विमान होंगे शामिल

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जोधपुर- भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ शनिवार, 26 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर में शुरू हो रहा है। करीब दो सप्ताह तक चलने वाले इस बड़े सैन्य अभ्यास में भारत समेत कई देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अभ्यास में 80 से ज्यादा भारतीय और विदेशी विमान शामिल होंगे। 


पहली बार IAF के साथ अभ्यास करेगा अमेरिकी F-35

इस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की भागीदारी है। यह पहली बार है जब F-35 भारत में किसी बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ ऑपरेशनल एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा। इससे पहले F-35 भारत में Aero India जैसे एयर शो में दिखाई दे चुका है। 

Rafale और Tejas भी होंगे शामिल

अभ्यास में अमेरिकी F-35 के साथ फ्रांस के Rafale, भारत के Tejas और Su-30MKI सहित कई आधुनिक लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इसके अलावा UAE के F-16 समेत अन्य देशों के एयरक्राफ्ट और सपोर्ट प्लेटफॉर्म भी अभ्यास का हिस्सा होंगे। 

कई देशों की वायु सेनाएं एक साथ

तरंग शक्ति-2026 का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच ऑपरेशनल अनुभव, आपसी तालमेल (interoperability) और संयुक्त अभियानों की क्षमता को बेहतर करना है। अभ्यास में लड़ाकू विमानों के अलावा परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर, AWACS और अन्य हवाई संसाधनों के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है। 

करीब 1,500 सैन्यकर्मी होंगे शामिल

रिपोर्टों के अनुसार इस अभ्यास में लगभग 1,500 personnel, जिसमें एयरक्रू, तकनीकी विशेषज्ञ और ग्राउंड स्टाफ शामिल हैं, हिस्सा लेंगे। यह भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय एयर-कॉम्बैट अभ्यास बताया जा रहा है। 

क्या है अभ्यास का मुख्य उद्देश्य?

तरंग शक्ति के दौरान विभिन्न देशों के विमान एक साथ उड़ान संचालन, सामरिक प्रशिक्षण और संयुक्त मिशन से जुड़े अभ्यास करेंगे। इसका प्रमुख उद्देश्य एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं को समझना, संयुक्त अभियानों में तालमेल बढ़ाना और वास्तविक परिस्थितियों जैसे हवाई ऑपरेशंस में प्रशिक्षण लेना है

तरंग शक्ति-2026 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान F-35, Rafale, Tejas और अन्य आधुनिक विमान एक ही बहुराष्ट्रीय अभ्यास में नजर आएंगे, जिससे यह भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण मंच बन गया है। 


आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

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 रायपुर : सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया।


आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए।


महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में AFSPA फिर बढ़ा, 1 अक्टूबर से छह महीने तक रहेगा लागू

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को अगले छह महीनों के लिए बढ़ा दिया है। यह विस्तार 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा और अधिसूचना के अनुसार इसे पहले वापस नहीं लिया गया तो छह महीने तक लागू रहेगा। 

किन इलाकों में रहेगा AFSPA?

मणिपुर:
राज्य में AFSPA के तहत 'Disturbed Area' की घोषणा जारी रहेगी, हालांकि पांच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। 

नागालैंड:
AFSPA को 9 जिलों—Dimapur, Niuland, Chumoukedima, Mon, Kiphire, Noklak, Phek, Peren और Meluri में बढ़ाया गया है।

अरुणाचल प्रदेश:
राज्य के कुछ चिन्हित क्षेत्रों में भी AFSPA की अवधि आगे बढ़ाई गई है। यह फैसला संबंधित क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है। 


क्या है AFSPA?

Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 के तहत 'Disturbed Area' घोषित क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को कानून के तहत कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं। इनमें निर्धारित परिस्थितियों में गिरफ्तारी और बल प्रयोग से जुड़े अधिकार शामिल हैं। 

केंद्र सरकार के अनुसार, यह विस्तार संबंधित क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद किया गया है। 


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