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स्लीपर कोच यात्रियों के लिए राहत : रेलवे का बड़ा फैसला, अब नॉन-AC कोच में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा

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 नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्लीपर कोच में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब तक सिर्फ AC कोचों में उपलब्ध बेडरोल सुविधा (चादर, तकिया और कवर) को नॉन-AC स्लीपर कोच में भी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से यात्रा और अधिक आरामदायक व सुविधाजनक होने की उम्मीद है।


अब स्लीपर कोच में भी AC जैसी सुविधा

अब तक बेडरोल सुविधा केवल 3AC, 2AC और 1st AC यात्रियों तक सीमित थी, लेकिन अब स्लीपर कोच यात्री भी निर्धारित शुल्क देकर यह सेवा प्राप्त कर सकेंगे। रेलवे का कहना है कि यह सेवा ऑन-डिमांड और ऑन-पेमेंट आधार पर उपलब्ध होगी, और यात्रियों को पूरी तरह से स्वच्छ व सैनिटाइज्ड बेडरोल दिया जाएगा।

1 जनवरी 2026 से चेन्नई डिविजन में शुरुआत

दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन द्वारा यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस सेवा की शुरुआत की जा रही है।
यह सुविधा 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा ट्रेनों में शुरू होगी। इस घोषणा के बाद यात्रियों ने सोशल मीडिया पर इसे एक स्वागतयोग्य कदम बताया है।

स्लीपर यात्रियों को बड़ी राहत

स्लीपर कोच में यात्रा करने वालों को अब तक चादर, कंबल और तकिया खुद लेकर चलना पड़ता था, जो विशेषकर सर्दियों में काफी परेशानी भरा होता था।
नई व्यवस्था से :

  • अतिरिक्त सामान ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
  • मामूली शुल्क देकर आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा

कितना होगा किराया?

रेलवे ने शुल्क भी तय किए हैं—

  • बेडशीट : लगभग ₹20
  • तकिया / कवर : अलग शुल्क
  • भविष्य में ₹20, ₹30 और ₹50 की स्लैब में सुविधा उपलब्ध होने की योजना

सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद फैसला

इस सेवा को 2023-24 में NINFRIS स्कीम के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था।
पायलट फेज में मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद इसे अब स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाने के साथ यात्रियों को बेहतर अनुभव भी देगा।

देशभर में लागू होने की संभावना

अधिकारियों का मानना है कि अगर चेन्नई मॉडल सफल रहा, तो इसे प्रयागराज, झांसी, आगरा, कानपुर, लखनऊ सहित पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

 

चुनाव आयोग ने SIR की डेडलाइन बढ़ाई- अब 11 दिसंबर तक फॉर्म जमा कर सकेंगे

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 नई दिल्ली / रायपुर। Election Commission of India (ECI) ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब मतदाता फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तिथि 11 दिसंबर 2025 तय की गई है। 


 किन-कौन से राज्य / क्षेत्र शामिल हैं

इस विस्तार का असर उन राज्यों/UTs पर है, जहाँ SIR पहले से जारी थी — इनमें शामिल हैं:

  • अंडमान और निकोबार
  • छत्तीसगढ़
  • गोवा
  • गुजरात
  • केरल
  • लक्षद्वीप
  • मध्य प्रदेश
  • पुडुचेरी
  • राजस्थान
  • तमिलनाडु
  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल 


 नया शेड्यूल — प्रमुख तिथियाँ

प्रक्रियानई तिथि / अवधि
फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि (Enumeration)11 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Roll) प्रकाशन16 दिसंबर 2025
दावा-आपत्ति (Claims & Objections) अवधि16 दिसंबर 2025 – 15 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची (Final Roll) प्रकाशन14 फरवरी 2026

 क्यों ज़रूरी था यह विस्तार

  • कई राज्यों में बूथ-स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा ठीक से घर-घर सर्वे करना कठिन हो रहा था, जिससे SIR पूरी तरह समय पर नहीं हो पा रहा था।
  • आयोग ने कहा है कि यह कदम मतदाता सूची को और Sटीक, पारदर्शी व अद्यतित बनाने के लिए लिया गया है।

CM साय सपरिवार मिले PM मोदी से - भावुक क्षण को बताया जीवनभर की प्रेरणा

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। मुलाकात के बाद उन्होंने X पर पोस्ट साझा करते हुए इस क्षण को जीवनभर याद रहने वाला प्रेरणादायक अनुभव बताया।


CM साय ने अपनी पोस्ट में लिखा -

“सत्पुरुषसंसर्गो हि कृतार्थयति जीवनम्।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हमारे परिवारजनों से हुई मुलाकात जीवन भर याद रहने वाला प्रेरक अनुभव है। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच जिस आत्मीयता से मोदीजी ने सबका हाल-चाल पूछा, बच्चों से सहज होकर बात की और आशीर्वाद दिया, वह अविस्मरणीय है।


माननीय प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान परिवार की तीन पीढ़ियों को एक साथ उनके सान्निध्य में बैठने का अवसर मिला, यह हमारे लिए भावुक कर देने वाला क्षण था। इस गरिमामय और आत्मीय भेंट के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी की भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण मुलाकात को CM साय ने परिवार के लिए गर्व और सौभाग्य का क्षण बताया।

बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 11 से 13 दिसम्बर तक

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उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

आयोजन से जुड़े सभी विभागों को उत्कृष्ट और पुख्ता तैयारियों के निर्देश, स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक से जोड़ने कहा

संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में 3500 खिलाड़ी दिखाएंगे अपना कौशल और दमखम, नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी करेंगे भागीदारी

रायपुर-उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 11 दिसम्बर से 13 दिसम्बर तक इसका आयोजन किया जाएगा। बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के तीन हजार विजेता खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। करीब 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी इन स्पर्धाओं में हिस्सेदारी करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के रायपुर के सिविल लाइन स्थित निवास कार्यालय में हुई बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार भी शामिल हुए। संभागायुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ तथा खेल अधिकारी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार बस्तर के युवाओं को खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहती है। उन्होंने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के सफल और उत्कृष्ट आयोजन के लिए सभी विभागों को परस्पर समन्वय के साथ पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी या खामी नहीं छोड़ते हुए आयोजन स्थलों, खेल प्रबंधन, आवास, साफ-सफाई, भोजन, परिवहन, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों इत्यादि के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं बनाने को कहा। साव ने कहा कि बस्तरवासियों के साथ ही देश और दुनिया में बस्तर ओलंपिक का बहुत अच्छा और सकारात्मक संदेश जाना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को इसे यादगार बनाने अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप दायित्वों का गंभीरता व सक्रियता से वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा उनकी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित करने स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन से जोड़ने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को पिछले बस्तर ओलंपिक के विजेताओं और इस बार के विजेताओं को यूथ-आइकॉन बनाकर ज्यादा से ज्यादा गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा जिससे अन्य लोग भी प्रेरित हों। 

बस्तर जिले के प्रभारी खेल अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने बैठक में बताया कि बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए संभाग के सभी 32 विकासखंडों के कुल तीन लाख 91 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन कराया था। विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं के दस हजार से अधिक विजेता खिलाड़ियों ने जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी की। जिला स्तरीय आयोजनों के करीब तीन हजार विजेता संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में लगभग 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी हिस्सेदारी करेंगे। 11 खेलों एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में ये अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

तिवारी ने बताया कि बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन के दौरान जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में फुटबॉल, व्हॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग एवं बैडमिंटन स्पर्धाएं होगी। पंडरीपानी स्थित खेलो इंडिया सेंटर में हॉकी के मैच होंगे। वहीं धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में कबड्डी, खो-खो, आर्चरी, एथलेटिक्स और रस्साकसी की प्रतियोगिताएं होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनूजा सलाम, उप संचालक  रश्मि ठाकुर एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश की उपलब्धियां और युवा सशक्तिकरण की कहानी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 के 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए देश की विभिन्न उपलब्धियों, युवा सशक्तिकरण, कृषि, खेल और संस्कृति के क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक खेती, मधुमक्खी पालन, खेल और पर्यटन जैसे विषयों पर जोर देते हुए लोगों से ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाने का आग्रह किया।

विज्ञान, अंतरिक्ष और नौसेना में प्रगति

प्रधानमंत्री ने हाल ही में हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO सुविधा का उद्घाटन किया और मुंबई में भारतीय नौसेना में INS 'महे' के शामिल होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह देश की नई सोच, नवाचार और युवाओं की शक्ति का परिचायक है।

उन्होंने ISRO द्वारा आयोजित मार्स ड्रोन प्रतियोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि पुणे की टीम ने बार-बार असफलताओं के बावजूद अपने ड्रोन को मार्स जैसे वातावरण में उड़ाने में सफलता पाई। प्रधानमंत्री ने इसे युवाओं की समर्पित मानसिकता और वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

कृषि और मधुमक्खी पालन में देश की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने भारत में खाद्यान्न उत्पादन की उपलब्धि का जिक्र किया। देश ने 357 मिलियन टन उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो 10 साल पहले की तुलना में 100 मिलियन टन अधिक है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के 'रम्बन सुलाई हनी', कर्नाटक के 'शिवगंगा कलंजीया', और नागालैंड के 'क्लिफ-हनी' जैसे विशेष मधुमक्खी पालन कार्यक्रमों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि देश में मधुमक्खी पालन के माध्यम से 1.5 लाख टन से अधिक शहद का उत्पादन हो रहा है और एक्सपोर्ट में तीन गुना वृद्धि हुई है।

खेल और सहनशक्ति वाले खेल

प्रधानमंत्री मोदी ने खेल क्षेत्र में भी देश की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस महीने भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ICC वुमेन्स वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा, भारत ने टोक्यो में डिफ ओलंपिक्स में 20 पदक, कबड्डी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड बॉक्सिंग कप और ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने 'एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स' और 'आयरनमैन ट्रायथलॉन' जैसे खेलों में बढ़ती युवा भागीदारी को सराहा और Fit India Sundays जैसे कार्यक्रमों का उदाहरण दिया।

संस्कृति, पर्यटन और प्राकृतिक खेती

प्रधानमंत्री ने कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का जिक्र करते हुए बताया कि दुनिया भर से लोग गीता के अद्भुत संदेश से प्रेरित हो रहे हैं।

उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर युवाओं के रुझान और दक्षिण भारत में बढ़ती जागरूकता पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने 'काशी-तमिल संगम' का उल्लेख करते हुए तमिल संस्कृति और भाषा को देश की गौरवशाली धरोहर बताया।

सर्दियों के पर्यटन पर भी उन्होंने ध्यान केंद्रित किया और उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन स्थलों, हाई अल्टिट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन, और ‘Wed in India’ अभियान की लोकप्रियता का जिक्र किया।

वोकल फॉर लोकल और हस्तशिल्प

प्रधानमंत्री ने G20 शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए भारत के हस्तशिल्प और शिल्पकला के उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाएं, केवल देश में बने उत्पाद खरीदें और इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

संदेश और प्रेरणा

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि युवा, विज्ञान, खेल, कृषि, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहें। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद समर्पण और टीमवर्क से हर क्षेत्र में सफलता संभव है।

प्रधानमंत्री ने सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और आने वाले महीनों में नई कहानियों और उपलब्धियों पर चर्चा करने का संदेश भी दिया।

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के लिए प्रेरणा और उपलब्धियों का उत्सव है। विज्ञान, कृषि, खेल, संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के संदेश से भरा यह कार्यक्रम देशवासियों में उत्साह और नई ऊर्जा भरता है।


वर्ष 2025-26 में 26 हजार 400 पीएम आवास निर्माण स्वीकृत

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25 हजार 580 हितग्राहियों को पहली किश्त की राशि जारी

ग्राम पंचायतों में आवास चौपाल का आयोजन

रायपुर-प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों को पक्का मकान प्रदान करने का क्रांतिकारी कदम है जो ना केवल आवास की कमी को दूर करती है बल्कि ग्रामीण जीवन को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों को शीघ्र प्रारंभ कराने एवं समय-सीमा में पूर्ण कराने कलेक्टर बलौदाबाजार के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी  के मार्गदर्शन में सभी ग्राम पंचायतो में आवास चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 26 हजार 400 आवास निर्माण स्वीकृत

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2025-26 हेतु जिले में 26 हजार 400 आवास निर्माण को स्वीकृत किया गया, जिसमें से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्योत्सव के अवसर पर 25 हजार 580 हितग्राहियों के खाते में पहली किश्त की राशि जारी की गई। आवास चौपाल का आयोजन सभी ग्राम पंचायतों में तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमे, सभी नवीन स्वीकृति उपरांत राशि प्राप्त आवास के हितग्राही, पूर्व वर्षाे के स्वीकृति उपरांत अपूर्ण आवास के हितग्राही, राजमिस्त्री, निर्माण, सामाग्री सप्लायर, सरपंच, सचिव एवं अन्य संबंधित शामिल होते हैं। 

आवास चौपाल का उद्देश्य कनीकी जानकारी उपलब्ध कराना

आवास निर्माण की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना। रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराना।  सौर सुजला के तहत सौर पैनल लगवाने की जानकारी देना शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्रथम क़िस्त जारी 25 हजार 580 आवास के हितग्राहियों को क़िस्त जारी किए गए हैं। सभी आवासों का निर्माण कार्य प्रारंभ कराना। योजना के तहत कन्वर्जेन्स के माध्यम से मिलने वाले अन्य लाभ का जानकारी देना।  राजमिस्त्री एवं निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर पंचायतों में आवास चौपाल में चर्चा की जा रही है ।  अब तक बलौदाबाजार में 56, भाटापारा 34, कसडोल में 24 और पलारी 22 पंचायतों में आवास चौपाल करा किया गया है। इस चौपाल में पूर्व वर्षाे के आवासों को जल्दी पूर्ण कराना। 

योजना पूर्णतः निःशुल्क अनाधिकृत वसूली से सावधान

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण पारदर्शी और निःशुल्क योजना है जहां किसी भी स्तर पर कोई शुल्क नही लिया जाता। कलेक्टर बलौदाबाजार ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत वसूली, कमीशन या सुविधा शुल्क की मांग नहीं कर सकता। यदि कोई ब्यक्ति आवास पास करान,े क़िस्त जल्दी दिलाने या अन्य किसी बहाने से पैसा की मांग करता है, अनाधिकृत वसूली करने पर, तत्काल शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, सीईओ जिला पंचायत या कलेक्टर कार्यालय में दर्ज करायें। ऐसे मामलों का त्वरित जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।


किसानों के लिए आय में वृद्धि का नया अध्याय पीएम-आशा योजना

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रायपुर- प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की गई,  जिससे किसानों की आय बढ़ाने और दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है। योजना का उद्देश्य कृषकों से दलहनी तथा तिलहनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करना है।

दालों के उत्पादन को बढ़ाकर  किसानों की आमदनी को है बढ़ाना

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम.आशा) एक व्यापक सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करके लाभकारी मूल्य दिलाना है। इसमें तीन मुख्य घटक शामिल हैं: मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), और मूल्य घाटा भुगतान योजना (PDPS) है । इसका मुख्य लक्ष्य किसानों की आय को बढ़ाना और उनकी आय के संरक्षण की दिशा में काम करना है। इस योजनांतर्गत राज्य में उत्पादित किये जाने वाली अरहर, उड़द एवं मसूर का शत् प्रतिशत उपार्जन तथा शेष फसलों यथा मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना, सरसों का राज्य के उत्पादन का 25 प्रतिशत उपार्जन केन्द्र सरकार द्वारा अपनी प्रापण संस्थाओं (प्रोक्योरमेंट एजेंसीज) नाफेड तथा एनसीसीएफ के माध्यम से किया जायेगा। सबसे खास बात यह है कि सरकार न केवल दालों के उत्पादन को बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, बल्कि किसानों की आमदनी को बढ़ाना चाहती है। 

किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम

सरकार चाहती है कि दाल उगाने वाले किसानों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा मिले और उनकी फसल की समय पर खरीद की जा सके। इसी दिशा में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) शुरू किया गया है, जो किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। इसके तहत किसानों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की जाएगी। 

बलौदाबाजार जिले में 5 उपार्जन केन्द्र

पीएम-आशा के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत जिले में 5 उपार्जन केन्द्रों  विकासखंड बलौदाबाजार जिले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति बलौदाबाजार, विकासखंड पलारी में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति अमेरा, विकासखंड भाटापारा में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति धुर्राबांधा, विकासखंड कसडोल में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति कसडोल, विकासखंड सिमगा में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति सिमगा का नाम शासन द्वारा अधिसूचित किया गया है। 

उपज विक्रय के लिए इच्छुक किसान को अपना पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल पर होगा करना  

योजनांतर्गत उपज विक्रय हेतु इच्छुक कृषक को अपना पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल पर कराना तथा समीपस्थ उपार्जन केन्द्र संबंधित का उल्लेख करना अनिवार्य है। पंजीयन के दौरान चिन्हित उपार्जन केन्द्र के चयन द्वारा विपणन किया जा सकता है। प्रत्येक अधिसूचित फसल की उपार्जन अवधि 90 दिवस निर्धारित होती है। इस योजना के माध्यम से न सिर्फ कृषक द्वारा उसके उत्पाद का उचित मूल्य पर विक्रय किया जा सकता है अपितु प्रतिस्पर्धा विकास के द्वारा बाजार में उपज का अधिक मूल्य भी प्राप्त हो सकता है। यह समस्त स्थिति फसल विविधिकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियों निर्मित करने में भी सहायक हो सकती है।

एड्स मुक्त भारत की ओर: NACP-V के साथ राष्ट्रीय प्रयासों का सशक्तीकरण

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  • विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • 2025 का थीम है: “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण”
  • भारत में मजबूत नीतिगत ढांचा: HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 जैसे ऐतिहासिक कदम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और भेदभाव को प्रतिबंधित करते हैं।
  • राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के माध्यम से प्रगति: भारत ने नए संक्रमणों में कमी लाने और ART तक पहुंच बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल की है।

परिचय

विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एक वैश्विक अभियान के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य HIV/AIDS महामारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना, HIV से संबंधित बीमारियों से मरने वाले लोगों को याद करना और एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना है। इसे पहली बार 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मनाया गया था और तब से यह सरकारों, समुदायों और व्यक्तियों के लिए रोग के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने का प्रमुख मंच बन गया है।

इस वर्ष का थीम “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण” है। यह न सिर्फ अब तक की प्रगति को सुरक्षित रखने, बल्कि HIV सेवाओं को अधिक सुदृढ़, न्यायसंगत और समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडल में बदलने की आवश्यकता पर जोर देता है। यह थीम उन व्यवधानों से निपटने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है, जो महामारी, संघर्षों और असमानताओं के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करते हैं।

भारत में विश्व एड्स दिवस को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेतृत्व में देशभर में जागरूकता अभियानों, समुदाय-आधारित कार्यक्रमों और सरकारी प्रतिबद्धताओं के साथ व्यापक स्तर पर मनाया जाता है।

भारत की यात्रा

भारत का एड्स नियंत्रण कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर एक सफल मॉडल के रूप में माना जाता है।
प्रारंभिक चरण (1985–1991) का उद्देश्य HIV मामलों की पहचान, सुरक्षित रक्त संक्रमण सुनिश्चित करना और लक्षित जागरूकता फैलाना था।

1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) की स्थापना के साथ भारत की प्रतिक्रिया मजबूत हुई। समय के साथ, कार्यक्रम का ध्यान अधिक विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण, NGOs की भागीदारी और PLHIV नेटवर्क्स को सशक्त बनाने की ओर बढ़ा।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP)

NACP ने पाँच चरणों में विकास किया है, जिनमें जागरूकता से लेकर व्यापक रोकथाम, परीक्षण, उपचार और स्थिरता तक का समावेश है:

NACP-I (1992–1999)

  • भारत का पहला व्यापक HIV/AIDS नियंत्रण कार्यक्रम

  • लक्ष्य: HIV के प्रसार को धीमा करना और एड्स से बीमारी/मृत्यु को कम करना

NACP-II (1999–2006)

मुख्य उद्देश्यों:

  • HIV के प्रसार में कमी

  • दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण

NACP-III (2007–2012)

लक्ष्य: 2012 तक HIV महामारी को रोकना और उलटना।
रणनीति:

  • उच्च जोखिम समूहों (HRGs) और सामान्य जनसंख्या में रोकथाम को बढ़ाना

  • रोकथाम, देखभाल, समर्थन और उपचार सेवाओं का एकीकरण

मुख्य उपलब्धि: जिला एड्स रोकथाम और नियंत्रण इकाइयों (DAPCUs) की स्थापना, जिसमें कलंक/भेदभाव रिपोर्टिंग शामिल है।

NACP-IV (2012–2017)

उद्देश्य: महामारी को तेज़ी से उलटना और एकीकृत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।

मुख्य लक्ष्य:

  • नए संक्रमणों में 50% की कमी

  • PLHIV को व्यापक देखभाल, समर्थन व उपचार

विस्तारित अवधि (2017–2021) की प्रमुख पहलें:

  • HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017: PLHIV के खिलाफ भेदभाव पर प्रतिबंध, गोपनीयता की सुरक्षा और सूचित सहमति अनिवार्य।

  • मिशन संपर्क: ART छोड़ चुके PLHIV का पता लगाकर उन्हें सेवाओं से पुनः जोड़ना।

  • ‘टेस्ट एंड ट्रीट’ नीति: निदान के तुरंत बाद ART शुरू।

  • वायरल लोड की नियमित निगरानी।

NACP-V (2021–2026)

₹15,471.94 करोड़ के बजट के साथ एक केंद्रीय क्षेत्र योजना।
लक्ष्य:
UN SDG 3.3 के अनुरूप 2030 तक HIV/AIDS को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना।

HIV/AIDS जागरूकता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

1. राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान मजबूत करना

NACO बहुआयामी मीडिया अभियानों का नेतृत्व करता है—टीवी, रेडियो, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया सभी प्लेटफार्मों पर।


2. बाहरी प्रचार का विस्तार

होर्डिंग्स, बस पैनलों, सूचना कियोस्क, लोक-नृत्य/नाटक और IEC वैन के माध्यम से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।


3. समुदाय-स्तरीय कार्यक्रम

महिला स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायत सदस्यों आदि के लिए प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम।

4. उच्च जोखिम समूहों के लिए लक्षित हस्तक्षेप

अक्टूबर 2025 तक देशभर में 1587 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएँ सक्रिय हैं।

5. कलंक और भेदभाव के खिलाफ थीम आधारित अभियान

यह अभियान कार्यस्थलों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में लागू किए जाते हैं।


6. राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल की नियुक्ति

HIV/AIDS अधिनियम, 2017 के तहत 34 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल नियुक्त हैं, जो PLHIV से संबंधित भेदभाव की शिकायतों का समाधान करते हैं।

निष्कर्ष

भारत की HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई दृढ़ता, नवाचार और साझेदारी की उल्लेखनीय कहानी प्रस्तुत करती है।
NACP के प्रारंभिक चरणों से लेकर वर्तमान NACP-V तक, भारत ने अधिकार-आधारित नीतियों, समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों, मीडिया अभियानों और व्यापक स्वास्थ्य ढांचे के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व दिखाया है।

भारत में HIV संक्रमणों में गिरावट वैश्विक औसत से अधिक है, जिसका श्रेय व्यापक परीक्षण, ART तक बढ़ी पहुंच, उच्च जोखिम समूहों तक लक्षित सेवाओं और कलंक-निरोधक पहलों को जाता है।

यह यात्रा तत्काल संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर मानवाधिकारों की रक्षा, सामुदायिक सशक्तिकरण और स्थायी स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर अग्रसर एक दीर्घकालिक सफलता का संकेत देती है।


MeitY, C-DAC और LEGO समूह ने इलेक्ट्रॉनिक टॉय इनोवेशन कार्यक्रम के दूसरे बैच के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सी-डैक, भारतीय खिलौना उद्योग और LEGO ग्रुप ने इंजीनियरिंग स्नातकों के दूसरे बैच के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया। इन स्नातकों ने ‘उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों (खिलौना उद्योग) के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी आधारित नियंत्रण एवं स्वचालन समाधान के विकास’ परियोजना के अंतर्गत एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा किया है। यह परियोजना मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास समूह की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करना है—प्रोटोटाइप विकसित करके और युवा इंजीनियरों, विशेषकर कम प्रतिनिधित्व वाली समुदायों से आने वाले युवाओं को ऐसे खिलौनों के डिजाइन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करके।

MeitY की इस पहल के तहत, देशभर से SC/ST और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) पृष्ठभूमि के युवा इंजीनियरों का चयन किया गया और उन्हें एक वर्ष के लिए आरएंडडी गतिविधियों में शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने पहले छह महीनों तक सी-डैक नोएडा की ई-टॉय लैब में इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के डिजाइन और विकास का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद, उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर खिलौनों के प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए उन्हें छह महीनों का औद्योगिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को एक वर्ष के लिए प्रतिमाह 25,000 रुपये का वजीफा प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान,अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, MeitY ने सी-डैक नोएडा में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक टॉय लैब का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का एक उभरता हुआ बाजार है और भारतीय खिलौना उद्योग के इकोसिस्टम को विकसित करने में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मुझे खुशी है कि इसके लिए मजबूत आधार तैयार हो रहे हैं और अगली पीढ़ी के इंजीनियर इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर औपचारिक रूप दिया जा सकता है, ताकि अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिले और खिलौना उद्योग के समग्र विकास में अधिक प्रभाव पड़े। सी-डैक नोएडा में स्थापित ई-टॉयज़ का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) NIELIT, MSH और अन्य संस्थानों को साथ जोड़ेगा। इससे उद्यमिता और स्टार्टअप को भी बढ़ावा मिलेगा। मैं सभी स्नातक छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।”

यह दीक्षांत समारोह 29 नवंबर 2025 को MeitY में आयोजित किया गया। इसमें अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, MeitY; सुनीता वर्मा, GC R&D, MeitY;  विवेक खनेजा, कार्यकारी निदेशक, सी-डैक नोएडा; अनिर्बन गुप्ता, टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया; LEGO ग्रुप इंडिया के निदेशक, GPA; तथा इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग से जुड़े अन्य सदस्य उपस्थित थे।

उप-एडमिरल संजय साधु ने युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक का पदभार संभाला

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उप-एडमिरल संजय साधु, एवीएसएम, एनएम ने 28 नवंबर 2025 को युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक (Controller of Warship Production & Acquisition - CWP&A) का पदभार संभाला। 1987 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले उप-एडमिरल एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर तथा रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन में एमफिल हैं।

38 से अधिक वर्षों के उनके विशिष्ट करियर के दौरान, ध्वज अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण संचालनात्मक, स्टाफ और शिपयार्ड संबंधी नियुक्तियाँ संभाली हैं। उन्होंने विभिन्न भूमिकाओं में विमानवाहक पोत आईएनएस विराट पर सेवा दी है, साथ ही अग्रिम पंक्ति के फ्रिगेट आईएनएस ब्रह्मपुत्र और आईएनएस दुनेगिरी पर भी कार्य किया है।

फ्लैग रैंक पर पदोन्नति से पहले उन्होंने कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए, जिनमें शामिल हैं—नेवल डॉकयार्ड (मुंबई) में अतिरिक्त महाप्रबंधक (प्रोडक्शन); नौसैनिक पोत मरम्मत यार्ड (कारवार) के कमोडोर अधीक्षक; और नौदल मुख्यालय, नई दिल्ली में प्रिंसिपल डायरेक्टर मरीन इंजीनियरिंग।

वे रूस से विमानवाहक पोत विक्रमादित्य के आधुनिकीकरण और अधिग्रहण से जुड़े प्रोजेक्ट का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने वारशिप ओवरसीइंग टीम (सेवेरोद्विन्स्क), रूस में सीनियर नेवल इंजीनियर ओवरसीयर, निदेशक विमानवाहक पोत परियोजनाएँ तथा नौदल मुख्यालय में प्रिंसिपल डायरेक्टर विमानवाहक पोत परियोजनाएँ जैसे दायित्व निभाए।

फ्लैग रैंक पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने निम्न दायित्वों का निर्वहन किया—अतिरिक्त महानिदेशक युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (पनडुब्बी डिजाइन समूह); चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल), पूर्वी नौसैनिक कमान; एडमिरल अधीक्षक डॉकयार्ड (विशाखापत्तनम); तथा चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल), पश्चिमी नौसैनिक कमान। ध्वज अधिकारी को पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर स्थित दो प्रमुख डॉकयार्ड का नेतृत्व करने और दोनों पश्चिमी एवं पूर्वी नौसैनिक कमानों के तकनीकी चीफ स्टाफ ऑफिसर के रूप में सेवा देने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है।

वे नौसैनिक युद्ध कॉलेज, गोवा के पूर्व छात्र हैं। उच्च कोटि की उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और नौसेना पदक (NM) से सम्मानित किया गया है। CWP&A का कार्यभार संभालने से पूर्व वे नई दिल्ली में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसेल प्रोग्राम के प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे।

उन्होंने उप-एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन, एवीएसएम, एनएम से पदभार ग्रहण किया, जो 30 नवंबर 2025 को 38 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उप-एडमिरल स्वामीनाथन के कार्यकाल के दौरान भारतीय नौसेना में आठ पोतों को शामिल किया गया।

विश्व एड्स दिवस 2025: भारत का समर्पण और NACP-V के तहत प्रगति

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा, 1 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में विश्व एड्स दिवस 2025 के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का नेतृत्व करेंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (नाको), तथा महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन HIV की रोकथाम, उपचार, देखभाल तथा कलंक-उन्मूलन के प्रति भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करेगा।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सरकारी नेतृत्व, विकास साझेदार, युवा प्रतिनिधि, सामुदायिक कार्यकर्ता, एचआईवी के साथ जी रहे लोग (PLHIV) और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मी शामिल होंगे, जो एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने की दिशा में भारत की यात्रा को गति देने हेतु एक संयुक्त प्रयास को दर्शाता है।

एक युवा-प्रेरित फ्लैश परफॉर्मेंस जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार के महत्व को रेखांकित करेगा। इसके बाद एक थीम आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा, जिसमें डिजिटल नवाचार, कार्यक्रम की उपलब्धियाँ और राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संक्रमित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत लागू सामुदायिक-आधारित मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। लाभार्थियों की अनुभव कथाएँ और एक ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुति NACP-V के तहत भारत की प्रगति तथा आगामी प्राथमिकताओं को उजागर करेगी।

इस अवसर का प्रमुख आकर्षण नाको की राष्ट्रीय मल्टीमीडिया पहल के तहत नई अभियान वीडियो श्रृंखला का शुभारंभ होगा, जो तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है—युवा एवं जागरूकता, ऊर्ध्वाधर संक्रमण का उन्मूलन, तथा कलंक और भेदभाव। इसके अतिरिक्त, प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम संसाधन भी जारी किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • संकलक का 7वाँ संस्करण

  • इंडिया HIV एस्टिमेट्स 2025

  • रिसर्च कम्पेंडियम

  • आईटी-सक्षम वर्चुअल इंटरवेंशन लैंडिंग पेज

कार्यक्रम में एक विशेष लाइव संगीत प्रस्तुति भी होगी, जिसका विषय प्रारंभिक परीक्षण, उपचार के प्रति अनुशासन तथा आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने पर आधारित होगा।

NACP-V के तहत भारत की प्रगति

भारत, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के वर्तमान चरण के तहत उल्लेखनीय प्रगति जारी रखे हुए है:

  • HIV परीक्षण 4.13 करोड़ (2020–21) से बढ़कर 6.62 करोड़ (2024–25) हुआ

  • एंटीरेट्रोवायरल उपचार की पहुँच 14.94 लाख से बढ़कर 18.60 लाख PLHIV तक पहुँची

  • वायरल लोड परीक्षण 8.90 लाख से बढ़कर 15.98 लाख तक लगभग दोगुना हो गया

2010 से 2024 के बीच भारत ने हासिल किया:

  • वार्षिक नए HIV संक्रमणों में 48.7% की कमी

  • एड्स से संबंधित मृत्यु में 81.4% की कमी

  • मां से बच्चे में HIV संक्रमण में 74.6% की कमी

ये उपलब्धियाँ वैश्विक औसत से बेहतर हैं और भारत के नेतृत्व, निरंतर घरेलू निवेश, साक्ष्य-आधारित रणनीतियों और सुदृढ़ सामुदायिक सहभागिता को दर्शाती हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम बदला-ठंड बढ़ी, बस्तर में हल्की बारिश की संभावना

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में ठंड एक बार फिर बढ़ने लगी है और इसके साथ मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। प्रदेश में रात का तापमान लगातार गिरा है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के कारण अगले दो दिनों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।


राजधानी रायपुर में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि माना एयरपोर्ट क्षेत्र में तापमान 11 डिग्री के करीब पहुंच गया। प्रदेश में सबसे ठंडा अंबिकापुर रहा, जहां पारा 8.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। मौसम विभाग के अनुसार, 30 नवंबर से अगले दो दिनों में प्रदेशभर में रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक बढ़त दर्ज की जा सकती है।

चक्रवाती तूफान 'दितवाह' का प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि चक्रवाती तूफान ‘दितवाह’ दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी श्रीलंका क्षेत्र के ऊपर सक्रिय है।
इसके रविवार सुबह तक उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्रप्रदेश के तटीय हिस्सों तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव के चलते रविवार को बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की वर्षा हो सकती है। मौसम में यह स्थिति अगले दो दिन बनी रह सकती है।

रायपुर का आज का मौसम

  • आसमान साफ रहने का अनुमान
  • अधिकतम तापमान : लगभग 28°C
  • न्यूनतम तापमान : 13°C

 

 

मन की बात: पीएम मोदी ने Gen-Z के जज्बे की तारीफ की, राम मंदिर और संविधान दिवस का किया उल्लेख

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PM Modi Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड के माध्यम से देश को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खाद्यान्‍न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि, अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रम, संविधान दिवस, अंतरिक्ष विज्ञान में नवाचार, और भारतीय पारंपरिक शिल्पकला जैसे कई विषयों पर चर्चा की।


युवाओं और इसरो की ‘ड्रोन प्रतियोगिता’ की तारीफ

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित अनोखी ड्रोन प्रतियोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता मंगल ग्रह जैसी कृत्रिम परिस्थितियों में आयोजित की गई, जिसमें देशभर के युवा, विशेषकर Gen-Z की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

उन्होंने बताया कि मंगल पर जीपीएस उपलब्ध नहीं होता, इसलिए प्रतियोगिता में शामिल ड्रोन को कैमरा और इनबिल्ट सॉफ्टवेयर की सहायता से दिशा, ऊंचाई और बाधाओं का अनुमान लगाना था। कई ड्रोन विफल होते देखे गए, लेकिन युवाओं का धैर्य और तकनीकी कौशल प्रेरणादायक रहा।

पीएम मोदी ने पुणे की एक युवा टीम की विशेष रूप से सराहना की, जिसने कई प्रयासों के बाद कृत्रिम मंगल परिस्थिति में ड्रोन उड़ाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि यह जज्बा उन्हें चंद्रयान-2 की असफलता और चंद्रयान-3 की सफलता से जुड़ी वैज्ञानिक लगन की याद दिलाता है।

“वीडियो में युवाओं की आंखों में वही दृढ़ता और चमक दिखी, जो हमारे वैज्ञानिकों में रहती है। यही जुनून विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


संविधान दिवस और सांस्कृतिक पर्वों का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने कहा कि नवंबर का महीना कई प्रेरणादायक अवसर लेकर आया।
उन्होंने बताया कि 26 नवंबर को संसद के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, वहीं वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में कार्यक्रमों की शुरुआत की गई।
उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा आरोहण और कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पांचजन्य स्मारक के लोकार्पण का भी उल्लेख किया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय शिल्पकला का सम्मान

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विदेशी नेताओं को भारतीय पारंपरिक शिल्पकला से निर्मित प्रतीक भेंट किए गए, जिनमें—

  • दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को तंजावुर की चोल कालीन शैली की कांस्य नटराज प्रतिमा
  • कनाडा के प्रधानमंत्री को उदयपुर की चांदी के अश्व की प्रतिकृति
  • जापान की प्रधानमंत्री को तेलंगाना- करीमनगर की चांदी की बुद्ध प्रतिमा

उन्होंने कहा कि ये शिल्पकृतियां भारत की समृद्ध विरासत और कला परंपरा का प्रतीक हैं।

छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ी गरमाहट, डिप्टी सीएम शर्मा बोले - 2003 की वोटर लिस्ट में ब्लड रिलेशन का नाम अनिवार्य

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में जारी SIR (State Investigation Register) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। राजधानी रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एक बयान दिया, जिसने पूरे मुद्दे पर नई बहस खड़ी कर दी।


उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2003 की मतदाता सूची में यदि किसी भी व्यक्ति के ब्लड रिलेशन का नाम शामिल नहीं है, तो ऐसे मामलों की जांच की जाएगी, और जांच में संदिग्ध पाए जाने पर फॉरेनर्स एक्ट समेत अन्य कानूनी धाराओं में कार्रवाई संभव है।

“2003 की वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी” - विजय शर्मा

डिप्टी सीएम के अनुसार, SIR प्रक्रिया के तहत घर-घर वितरित किया जा रहा गणना पत्र 2025 की मतदाता सूची के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा—

“सूची में शामिल मतदाता के किसी ब्लड रिलेशन का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होना चाहिए। यदि नहीं है तो परीक्षण होगा, और जांच में सामने आए व्यक्तियों पर फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा।”

फॉरेनर्स एक्ट किस पर लागू होता है?

पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि फॉरेनर्स एक्ट भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं होता है। यह कानून केवल विदेशी नागरिकों पर लागू होता है, जिनकी पहचान या देश में मौजूदगी संदिग्ध पाई जाती है।

4 दिसंबर तक चलेगी SIR प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में 4 नवंबर से शुरू हुई SIR प्रक्रिया को 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अब अंतिम तारीख में केवल कुछ ही दिन बचे हैं।

इसी बीच PCC प्रमुख दीपक बैज ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है—

“प्रदेश में BLO बहुत परेशान हैं। इतने दिनों में काम पूरा नहीं हो पाया है। अब केवल 6 दिनों में क्या होगा?”

फील्ड में काम कर रहे कई BLO भी समय कम पड़ने की बात कह रहे हैं।

बाल सुधार गृह से फिर बड़े स्तर पर फरारी - 7 नाबालिग दीवार फांदकर भागे, 4 पकड़े गए, 3 लापता

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दुर्ग। जिले के पुलगांव स्थित बाल सुधार गृह में एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई है। 28 नवंबर की रात 7 नाबालिग बालक दीवार फांदकर फरार हो गए। घटना के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए 4 नाबालिगों को पकड़ लिया, जबकि 3 अभी भी गायब हैं और उन्हें तलाशने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।


कैसे हुए फरार?

जानकारी के अनुसार, बच्चे देर रात दीवार फांदकर पीछे के हिस्से से भाग निकले। इससे पहले भी इसी तरीके का उपयोग किया गया था, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया, जो कई सवाल खड़ा करता है।

एक महीने में दूसरी बार फरारी

📍 3 नवंबर को भी पुलगांव बाल संप्रेक्षण गृह से 3 नाबालिग भागे थे, जिन पर हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज थे।
📍 सिर्फ 26 दिन बाद फिर 7 बच्चे भागने में सफल हो गए।

घटनाओं की यह श्रृंखला दर्शाती है कि प्रबंधन और सुरक्षा दोनों स्तर पर गंभीर लापरवाही है, जबकि विभाग के अधिकारी लगातार चुप्पी साधे हुए हैं।

पुलिस भी परेशान

पुलिस का कहना है कि बार-बार फरारी की घटनाओं से उनका कार्यभार बढ़ जाता है। कई बार बच्चे जिला सीमा पार कर जाते हैं, जिससे तलाश मुश्किल हो जाती है।
इस बार भी 3 बच्चों के दुर्ग से बाहर जाने की सूचना मिली है। पुलिस के अनुसार, बाकी 4 नाबालिगों को बरामद कर दोबारा सुधार गृह भेज दिया गया।

अफसरों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल

घटना के बाद जब मीडिया ने विभागीय अधिकारियों से बात करनी चाही, तो
📞 जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार जांभुलकर और
📞 महिला एवं बाल विकास अधिकारी अजय साहू
ने फोन रिसीव नहीं किया और न ही किसी तरह का बयान दिया।


 

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