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आज की बड़ी खबरें | 6 नवंबर 2026 | छत्तीसगढ़, देश-दुनिया और शेयर बाजार

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नमस्कार! आज के बुलेटिन में छत्तीसगढ़ से लेकर देश-दुनिया तक की प्रमुख खबरें, राजनीति, अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, बैंकिंग, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और खेल जगत शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी खबरें

बस्तर में जुए और मुर्गा लड़ाई पर बड़ी पुलिस कार्रवाई

  • जंगल में चल रहे अवैध जुए और मुर्गा लड़ाई के आयोजन पर पुलिस ने कार्रवाई की।

  • 156 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • 47 वाहन और 12 मोबाइल फोन जब्त किए गए।

  • कथित तौर पर मुर्गा लड़ाई पर 20 लाख रुपये तक के दांव लगाए जा रहे थे।
 महादेव सट्टा ऐप मामला

सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाकर रायपुर में पेश किए जाने के बाद CBI जांच आगे बढ़ रही है। रायपुर कोर्ट ने उन्हें आठ दिन की CBI हिरासत दी थी। इस मामले में कथित वित्तीय लेनदेन और संरक्षण नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण है।

 रायपुर में 400 करोड़ रुपये का अस्पताल

आर्टेमिस शांति अस्पताल में 350 बेड और 11 उत्कृष्टता केंद्र बनाए गए हैं। यह रायपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बड़ी पहल है।

NIT रायपुर में AI और ड्रोन तकनीक
  • NIT रायपुर में एयरोस्पेस और ड्रोन तकनीक के लिए नई पहल।

  • खनन और स्वास्थ्य क्षेत्र में AI आधारित अनुसंधान के लिए भी केंद्र की खबर सामने आई है।

  • उद्योग और तकनीकी शिक्षा के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर

शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा

रायपुर में D.Ed अभ्यर्थियों ने 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग उठाई। 400 से अधिक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की रिपोर्ट सामने आई है।

छत्तीसगढ़ की अन्य खबरें
  • रायपुर में 1,900 स्ट्रीट लाइट सेट बांटे गए, लेकिन कई इलाकों में रोशनी की समस्या बरकरार है।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों की नियुक्ति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

  • बस्तर ओलंपिक की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
देश की बड़ी खबरें

DRDO ने किया मिसाइल परीक्षण

भारत ने ओडिशा तट के पास स्वदेशी प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। यह रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

झारखंड में भीषण सड़क दुर्घटना

खूंटी जिले में तेज रफ्तार ट्रक ने भीड़ को कुचल दिया। इस दुर्घटना में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें चार महिलाएं और तीन बच्चे बताए गए हैं।

नेपाल के प्रधानमंत्री भारत आएंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह 22 नवंबर से तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आएंगे। जल संसाधन, ऊर्जा, व्यापार और दोनों देशों के संबंधों पर बातचीत संभावित है।

उत्तराखंड में ट्रेकिंग हादसा

केदारताल मार्ग पर हिमस्खलन के बाद लापता ट्रेकर्स में से दो और के शव मिले। मरने वालों की संख्या छह हो गई है और दो अन्य की तलाश जारी है।

मेडिकल उपकरणों पर चिंता

भारतीय चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी गंभीर प्रतिकूल घटनाओं में छह साल के दौरान लगभग तीन गुना वृद्धि के आंकड़े सामने आए हैं।

निर्वाचन आयोग

चार और राज्यों तथा दो केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़ी खबरें सामने आई हैं।

राजनीति और सरकारी नीतियां
  • कर्नाटक: चुनावी धोखाधड़ी और Form-7 के कथित दुरुपयोग की जांच होगी।

  • पश्चिम बंगाल: नई निवेश नीति को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

  • मेघालय: स्थानीय हथकरघा और कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए नए विभाग की घोषणा।

  • केंद्र सरकार: VB-G RAM G कानून के तहत चारा सुरक्षा और पशुधन अवसंरचना के लिए 22 कार्यों की पहचान।

  • भारत-अमेरिका: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से अंतरिम व्यापार समझौते पर असर नहीं पड़ने की सरकारी सूत्रों की जानकारी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
  1. अमेरिका: मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की सफलता के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ी है।

  2. यूरोप: लगभग 30 उड़ानों को बम की झूठी धमकियों के कारण डायवर्ट या रोकना पड़ा। कई देशों में सुरक्षा जांच बढ़ाई गई।

  3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: इस समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए दक्षिण कोरिया ने समुद्री निगरानी विमान और विस्फोटक निष्क्रिय करने वाली टीम भेजने की योजना बनाई है।

  4. जलवायु संकट: संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के अनुसार लगभग 9 करोड़ विस्थापित लोग जलवायु संबंधी खतरों के प्रति संवेदनशील देशों में रह रहे हैं।

  5. न्यूजीलैंड: आम चुनाव का प्रचार अपने अंतिम दिन में पहुंच गया है। मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है।

  • रूस-अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव से मुलाकात की पुष्टि की है।

अर्थव्यवस्था और कारोबार
  • पश्चिम बंगाल: जय बालाजी ग्रुप की स्टील और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 6,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना।

  • भारत-नेपाल: बाढ़ प्रभावित बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और ऊर्जा सहयोग पर बातचीत।

  • सेवा क्षेत्र: अक्टूबर में भारत के सर्विस सेक्टर की वृद्धि चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची। घरेलू मांग में सुधार इसका प्रमुख कारण रहा।

  • विशेष उर्वरक: चीन पर निर्भरता कम करना भारत के लिए एक बड़ी औद्योगिक और कृषि चुनौती है।
 शेयर बाजार की विशेष रिपोर्ट

वैश्विक बाजारों में दबाव

सूचकांक

  पिछला बंद/गिरावट

Sensex

   79,310.01

Nifty 50

   24,536.60

Dow Jones

    -1.14%

S&P 500

   -3.09%

Nasdaq

   -4.80%

आज सुबह की बड़ी बात:

  • जापान का Nikkei लगभग 6% गिरा।

  • दक्षिण कोरिया का Kospi लगभग 9% नीचे आया और सर्किट ब्रेकर के कारण कारोबार कुछ समय रोका गया।

  • AI और टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली।

  • भारतीय बाजार पिछले सत्र में लगातार छठे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ था।

    निवेशकों के लिए आज नजर रखने वाले क्षेत्र: बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, IT, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और विदेशी निवेश।

ध्यान दें: ऊपर Sensex और Nifty के आंकड़े 5 नवंबर के बंद भाव हैं, 6 नवंबर के लाइव भाव नहीं।

बैंकिंग और वित्त

  • RBI ने कृषि अवसंरचना के लिए प्रति उधारकर्ता बैंक ऋण की कुल सीमा 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित की है।

  • RBI ने गैर-बैंक भुगतान प्रणाली संचालकों की साइबर सुरक्षा निगरानी कड़ी की है।

  • CERT-In ने बैंकों और फिनटेक कंपनियों को AI आधारित फंड ट्रांसफर धोखाधड़ी के प्रति चेतावनी दी है।

  • बैंकिंग क्षेत्र के दूसरी तिमाही के शुद्ध लाभ में लगभग 20% वृद्धि की रिपोर्ट है।
रक्षा और सुरक्षा
  • DRDO का प्रलय मिसाइल परीक्षण महत्वपूर्ण रक्षा उपलब्धि।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय।

  • यूरोप में विमानों को बम की धमकियों के कारण सुरक्षा अलर्ट।

  • छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद विरोधी अभियान और सुरक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय चर्चा जारी है।

विज्ञान, AI और टेक्नोलॉजी

AI से साइबर सुरक्षा में नई उपलब्धि

OpenAI ने बताया कि उसके AI पाइपलाइन ने कुछ ही घंटों में Linux की 948 सुरक्षा खामियां खोजने और ठीक करने में मदद की।

अन्य अपडेट:
  • भारत के IndiaAI मिशन के तहत स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल EKA-1 और Dhīr मॉडल पेश किए गए हैं।

  • टेराहर्ट्ज तरंगों को अवरोधों के पार जाने देने वाली नई सिलिकॉन चिप भविष्य की 6G तकनीक में मदद कर सकती है।

  • भारतीय खगोलविदों ने UBC 63 तारा समूह को दोहरे क्लस्टर सिस्टम के रूप में पहचानने में योगदान दिया।

स्वास्थ्य और शिक्षा

  • चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी गंभीर प्रतिकूल घटनाओं में वृद्धि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चिंता का विषय।

  • रायपुर में आर्टेमिस शांति अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।

  • NIT रायपुर में ड्रोन, एयरोस्पेस और AI आधारित तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा।

  • वाराणसी में काशी तमिल संगमम 5.0 की तैयारियों की समीक्षा की गई।

कृषि और पर्यावरण

  • केंद्र सरकार ने पशुधन और चारा सुरक्षा के लिए 22 कार्यों की पहचान की।

  • भारत में विशेष उर्वरकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा।

  • जलवायु परिवर्तन से दुनिया के करोड़ों विस्थापित लोगों के प्रभावित होने की चेतावनी।

  • भारत COP31 में समाधान आधारित और समान जलवायु कार्रवाई पर जोर देगा।

 खेल समाचार

बैडमिंटन में तन्वी पात्री की उपलब्धि

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री ने चीन की खिलाड़ी के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया।

  • जसप्रीत बुमराह शनिवार को न्यूजीलैंड के लिंकन में भारत-A के लिए रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी करेंगे।

  • विराट कोहली के विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने की संभावना पर चर्चा जारी है, हालांकि उनकी तरफ से औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • भारत-श्रीलंका का 13 दिसंबर का पहला ODI दिल्ली से विशाखापत्तनम स्थानांतरित किया गया है।

मनोरंजन और वायरल खबरें

  • तमिलनाडु में अभिनेता विजय की राजनीतिक सफलता के बाद फिल्म जगत से राजनीति में आने को लेकर चर्चा तेज है।

  • रायपुर में BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रैली की तस्वीरें चर्चा में हैं।

आज का संपादकीय निष्कर्ष

आज की तीन सबसे महत्वपूर्ण थीम हैं:

  1. छत्तीसगढ़: बस्तर में अवैध गतिविधियों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई और रायपुर में स्वास्थ्य एवं तकनीकी सुविधाओं का विस्तार।

  2. भारत: रक्षा तकनीक, नेपाल के साथ संबंध और घरेलू अर्थव्यवस्था।

  3. दुनिया: अमेरिका की राजनीति, मध्य पूर्व की सुरक्षा और टेक शेयरों में भारी गिरावट।


छत्तीसगढ़ में ठंड की एंट्री! रायपुर-बिलासपुर में गिरेगा रात का पारा, मौसम विभाग ने दिया बड़ा अपडेट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब धीरे-धीरे सर्दी का असर दिखाई देने लगा है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में सुबह और रात के तापमान में बदलाव महसूस किया जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण मौसम सामान्य बना हुआ है, लेकिन शाम होते ही हल्की ठंडक का एहसास होने लगा है। मौसम विभाग ने आने वाले तीन दिनों में उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान जताया है। इससे रायपुर और बिलासपुर समेत आसपास के इलाकों में ठंड का असर बढ़ सकता है।


मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल प्रदेश में कड़ाके की ठंड या शीतलहर जैसी स्थिति बनने की संभावना नहीं है। हालांकि रात के तापमान में गिरावट के चलते सुबह जल्दी घर से निकलने वाले लोगों को ठंडक ज्यादा महसूस हो सकती है।

रायपुर में कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को रायपुर-माना में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक रहा। वहीं लालपुर मौसम केंद्र में न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, शुक्रवार 6 नवंबर को राजधानी में आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। शनिवार और रविवार को भी मौसम लगभग ऐसा ही बना रह सकता है। फिलहाल राजधानी में बारिश की संभावना बेहद कम है।

10 और 11 नवंबर को 17 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा

राजधानी रायपुर के सात दिवसीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 9 नवंबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। इसके बाद 10 और 11 नवंबर को न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। इन दिनों रात का पारा 17 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है। आसमान साफ रहने और ठंडी हवाओं का प्रभाव बढ़ने से रात के समय ठंडक अधिक महसूस होगी। हालांकि दिन में धूप निकलने के कारण अधिकतम तापमान में फिलहाल बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं।

बिलासपुर में भी बढ़ेगी ठंड, पेंड्रारोड में पहले से ज्यादा ठंडा मौसम

बिलासपुर और पेंड्रारोड के तापमान में फिलहाल काफी अंतर देखने को मिल रहा है। गुरुवार को बिलासपुर में अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री अधिक रहा।

वहीं पेंड्रारोड में अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यहां रात का तापमान बिलासपुर के मुकाबले काफी कम रहा। दोनों शहरों के न्यूनतम तापमान में 3.8 डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे के दौरान दोनों मौसम केंद्रों पर बारिश नहीं हुई।

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण बिलासपुर में भी सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ सकता है।

छत्तीसगढ़ के इन इलाकों में भी बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, 6 नवंबर को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि बिलासपुर और पेंड्रारोड के लिए अलग से बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।

7 नवंबर से बस्तर संभाग में भी न्यूनतम तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। वहीं 9 नवंबर के आसपास प्रदेश के कुछ इलाकों में रात के तापमान में फिर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

अभी नहीं पड़ेगी कड़ाके की ठंड, धीरे-धीरे बढ़ेगा सर्दी का असर

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, प्रदेश को प्रभावित करने वाली मौसमी प्रणालियों का प्रभाव कमजोर होने के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। आसमान साफ रहने और ठंडी हवाओं के प्रभाव से रात का तापमान धीरे-धीरे नीचे आ सकता है।

फिलहाल छत्तीसगढ़ में शीतलहर जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन नवंबर का पहला सप्ताह समाप्त होने के साथ ही सर्दी की दस्तक तेज होने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान में संभावित गिरावट के बाद राजधानी रायपुर, बिलासपुर और उत्तर छत्तीसगढ़ के इलाकों में सुबह-शाम ठंड का असर अधिक महसूस किया जा सकता है।

Dhanteras 2026: आज धनतेरस पर ऐसे करें भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूरी विधि

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Dhanteras 2026 : दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का आगाज आज शुक्रवार, 6 नवंबर से धनतेरस के साथ हो गया है। हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में आरोग्य एवं खुशहाली बनी रहती है।


धनतेरस के मौके पर बाजारों में भी रौनक देखने को मिल रही है। लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी को शुभ मानते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में बरकत और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। लेकिन धनतेरस पर खरीदारी के साथ पूजा और दीपदान का भी विशेष महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा का सही समय और भगवान धन्वंतरि से लेकर माता लक्ष्मी की आराधना करने की पूरी विधि।

धनतेरस 2026: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। प्रदोष काल में धनतेरस की पूजा करना विशेष शुभ माना गया है।

  • धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक

  • पूजा की अवधि: 1 घंटा 56 मिनट

  • प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक

  • वृषभ काल: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ अवधि में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की क्यों है परंपरा?

धनतेरस के दिन सोना, चांदी और धातुओं से बनी वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन ज्वेलरी दुकानों और बर्तन बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर नई वस्तुएं घर लाने से धन-धान्य और वैभव में वृद्धि होती है। हालांकि, इस दिन खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भी पर्व मनाया जा सकता है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का क्या है महत्व?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है।

इस दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और दीर्घायु की कामना की जाती है। वहीं, माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी तथा भगवान कुबेर को धन का संरक्षक माना जाता है। यही कारण है कि धनतेरस पर इन तीनों की पूजा की जाती है।

धनतेरस पूजा के लिए ये सामग्री रखें तैयार

पूजा के समय किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पहले से ही सभी जरूरी सामग्री एकत्र कर लें।

  • भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर

  • घी या तेल का दीपक

  • रोली और अक्षत

  • फूल और फूलों की माला

  • धूप और अगरबत्ती

  • फल और मिठाई

  • जल और पंचामृत

  • कलावा या मौली

  • पूजा की थाली और कपूर

धनतेरस पूजा विधि: इन आसान चरणों में करें पूजा

1. घर और पूजा स्थल की सफाई: धनतेरस के दिन सुबह घर की साफ-सफाई करें। शाम को पूजा स्थल पर चौकी लगाकर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित करें।

2. भगवान गणेश का स्मरण: पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करें। दीपक जलाकर गणेश जी का ध्यान करें और पूजा निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करें।

3. धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर का पूजन: इसके बाद भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का ध्यान करें। उन्हें जल, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

4. फल और मिठाई का भोग: सभी देवी-देवताओं को फल, मिठाई और सात्विक पकवान अर्पित करें। धूप और दीप दिखाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

5. कथा और आरती: धनतेरस की कथा का श्रवण करें और अंत में भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, धन्वंतरि तथा कुबेर जी की आरती करें।

6. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं: पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। इसके साथ ही यमराज के निमित्त यम दीपदान करने की परंपरा भी निभाएं।

धनतेरस पर यम दीपदान क्यों किया जाता है?

धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

इस तरह धनतेरस का पर्व केवल धन और खरीदारी का उत्सव नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और परिवार की खुशहाली का प्रतीक भी है। इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करें और जरूरतमंदों की सहायता कर पर्व की खुशियां साझा करें।

छत्तीसगढ़ में 1703 पदों पर बंपर भर्ती, कर्मचारी चयन मंडल ने जारी किया नोटिफिकेशन; 10 जनवरी 2027 को होगी लिखित परीक्षा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB), रायपुर ने समूह-2, तृतीय श्रेणी (स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर) उपसमूह-02 के अंतर्गत विभिन्न विभागों के 1703 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। मंडल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार भर्ती परीक्षा 10 जनवरी 2027 को आयोजित की जाएगी।

10 विभागीय पदों पर होगी भर्ती

जारी विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न पदों का विवरण इस प्रकार है—

  1. शीघ्रलेखक (हिन्दी) – 30 पद

  2. शीघ्रलेखक (अंग्रेजी) – 03 पद

  3. शीघ्रलेखक (द्विभाषी) – 13 पद

  4. उप निरीक्षक-अ (शीघ्रलेखक), सामान्य शाखा (हिन्दी) – 34 पद

  5. डाटा एंट्री ऑपरेटर – 25 पद

  6. स्टेनो टाइपिस्ट – 23 पद

  7. सहायक ग्रेड-3 – 1206 पद

  8. पंजीयन लिपिक – 50 पद

  9. सहायक उप निरीक्षक-अ (सामान्य शाखा) – 40 पद

  10. सहायक उप निरीक्षक-अ (जिला इकाई संवर्ग) – 279 पद

कुल रिक्तियां – 1703 पद।

आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां

कर्मचारी चयन मंडल ने ऑनलाइन आवेदन और परीक्षा से संबंधित कार्यक्रम भी जारी कर दिया है।

  • ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 5 नवंबर 2026

  • आवेदन की अंतिम तिथि: 27 नवंबर 2026, शाम 5 बजे तक

  • आवेदन में त्रुटि सुधार: 28 नवंबर से 30 नवंबर 2026, शाम 5 बजे तक

  • लिखित परीक्षा: 10 जनवरी 2027 (रविवार)

  • प्रवेश पत्र जारी होने की संभावित तिथि: 4 जनवरी 2027

दो घंटे 15 मिनट की होगी परीक्षा

जारी कार्यक्रम के अनुसार लिखित परीक्षा 10 जनवरी 2027 को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए प्रदेश के पांचों संभागीय मुख्यालयों में परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं।

स्थानीय अभ्यर्थियों को मिलेगी परीक्षा शुल्क वापसी

विज्ञप्ति में दी गई जानकारी के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों को परीक्षा में उपस्थित होने पर परीक्षा शुल्क वापस कर दिया जाएगा। शुल्क की वापसी उसी बैंक खाते में की जाएगी, जिससे ऑनलाइन आवेदन के दौरान भुगतान किया गया होगा।

आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है विस्तृत जानकारी

भर्ती से संबंधित विस्तृत जानकारी, ऑनलाइन आवेदन और अन्य निर्देश छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

आधिकारिक वेबसाइट: https://cgssb.cgstate.gov.in

अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक विज्ञप्ति में दिए गए पात्रता मानदंड, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य शर्तों का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर लें।


सोशल मीडिया कंपनियों पर केंद्र सरकार की बड़ी सख्ती की तैयारी

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Facebook, Instagram, YouTube और X की कानूनी जिम्मेदारी बढ़ सकती है।

केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour Protection में बदलाव करने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए पहले से ज्यादा जवाबदेह होना पड़ सकता है।

इसका असर करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल मीडिया कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर पड़ सकता है।

आखिर सरकार क्या बदलना चाहती है?

इस पूरे मामले का केंद्र है Information Technology Act, 2000 की धारा 79 (Section 79)।

इस धारा के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को एक विशेष कानूनी सुरक्षा मिलती है, जिसे Safe Harbour Protection कहा जाता है।

इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति Facebook पर गलत पोस्ट करता है, Instagram पर आपत्तिजनक वीडियो डालता है या YouTube पर गैरकानूनी कंटेंट अपलोड करता है, तो सामान्यतः उस यूजर के कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, बशर्ते कंपनी कानून की निर्धारित शर्तों और उचित सावधानियों का पालन करे।

सरकार अब इसी कानूनी सुरक्षा की समीक्षा कर रही है।

सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल दूसरों की पोस्ट दिखाने का काम नहीं करतीं, बल्कि उनके एल्गोरिदम यह भी तय करते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सा वीडियो, पोस्ट या कंटेंट ज्यादा दिखाया जाए।

इसलिए सरकार यह सवाल उठा रही है कि जब कंपनियां खुद कंटेंट की पहुंच और लोकप्रियता को प्रभावित करती हैं, तो उन्हें उसकी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग क्यों रखा जाए?

Safe Harbour Protection क्या है? आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए:

  • किसी व्यक्ति ने Facebook पर किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ झूठी और मानहानिकारक पोस्ट डाल दी।

  • किसी यूजर ने YouTube पर भ्रामक वीडियो अपलोड कर दिया।

  • किसी ने Instagram पर किसी महिला की फर्जी तस्वीर या Deepfake वीडियो डाल दिया।

ऐसी स्थिति में पोस्ट करने वाला व्यक्ति अपने कंटेंट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हो सकता है।

लेकिन मौजूदा व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनी को केवल इसलिए स्वतः दोषी नहीं माना जाता कि उसके प्लेटफॉर्म पर किसी यूजर ने ऐसा कंटेंट अपलोड किया है।

हालांकि यह सुरक्षा बिना शर्त नहीं है। कंपनियों को कानून के अनुसार उचित सावधानियां बरतनी होती हैं और निर्धारित परिस्थितियों में गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई करनी होती है।

प्रस्तावित बदलाव के बाद: अगर प्लेटफॉर्म अपने एल्गोरिदम के जरिए किसी कंटेंट को बढ़ावा देता है, उसकी पहुंच बढ़ाता है या उसे यूजर्स तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी पर अधिक गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

किन सोशल मीडिया कंपनियों पर पड़ेगा असर?

Facebook

यूजर्स की पोस्ट, वायरल कंटेंट और एल्गोरिदम से कंटेंट प्रमोशन पर अधिक जवाबदेही का सवाल उठेगा।

Instagram

Reels, Deepfake, फर्जी अकाउंट और आपत्तिजनक तस्वीरों से जुड़े मामलों में अधिक जिम्मेदारी आ सकती है।

YouTube

वीडियो रिकमेंडेशन, भ्रामक वीडियो और वायरल कंटेंट को बढ़ावा देने के मामलों की जांच हो सकती है।

X (Twitter)

राजनीतिक पोस्ट, भ्रामक जानकारी और एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट की पहुंच बढ़ाने पर जवाबदेही का सवाल उठ सकता है।

सरकार ऐसा कदम क्यों उठाना चाहती है?

इस प्रस्ताव के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:

(A) फेक न्यूज पर नियंत्रण

सोशल मीडिया पर कई बार गलत जानकारी तेजी से वायरल हो जाती है। सरकार चाहती है कि प्लेटफॉर्म की भूमिका और जवाबदेही भी तय हो।

(B) Deepfake और AI से बने फर्जी वीडियो

AI की मदद से किसी नेता, अभिनेता या आम नागरिक का नकली वीडियो बनाया जा सकता है। इससे प्रतिष्ठा, सुरक्षा और निजी जीवन को नुकसान पहुंच सकता है।

(C) महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा

बिना सहमति के निजी तस्वीरें और वीडियो साझा करना, यौन शोषण से संबंधित सामग्री और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराध गंभीर चिंता हैं।

(D) एल्गोरिदम की जवाबदेही

किसी वीडियो को लाखों लोगों तक पहुंचाने में प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम की भूमिका होती है। सरकार जानना चाहती है कि ऐसे मामलों में कंपनियों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए।

(E) भारतीय कानूनों का पालन

सरकार चाहती है कि भारत में काम करने वाली वैश्विक टेक कंपनियां भारतीय कानूनों और नियामकीय निर्देशों का पालन करें।

WhatsApp और दूसरे मैसेजिंग ऐप पर क्या असर होगा?

प्रस्ताव पर उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ऐसी सेवाओं को अलग रखने पर विचार कर रही है जो केवल एक यूजर का संदेश दूसरे यूजर तक पहुंचाती हैं और कंटेंट की रैंकिंग या प्रमोशन में सक्रिय भूमिका नहीं निभातीं।

इसलिए Peer-to-Peer Messaging Services को सोशल मीडिया फीड और रिकमेंडेशन प्लेटफॉर्म से अलग श्रेणी में रखने का विचार है।

इसका मतलब यह नहीं है कि WhatsApp को सभी भारतीय कानूनों से छूट मिल जाएगी। केवल Safe Harbour में प्रस्तावित बदलाव का दायरा अलग हो सकता है।

आम सोशल मीडिया यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो आम लोगों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं:

क्षेत्र

 संभावित असर

फेक न्यूज

 गलत जानकारी फैलाने पर निगरानी बढ़ सकती है

Deepfake

 नकली फोटो-वीडियो हटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है

Reels और Shorts

 कंटेंट रिकमेंडेशन पर जवाबदेही बढ़ सकती है

मानहानिकारक पोस्ट

 शिकायतों पर प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ सकती है

निजी तस्वीरें

 बिना सहमति साझा सामग्री हटाने के लिए मजबूत व्यवस्था बन सकती है

कंटेंट क्रिएटर्स

 कंटेंट मॉडरेशन और नियमों का पालन अधिक महत्वपूर्ण होगा

क्या सरकार के पास शिकायत करने पर वीडियो तुरंत हटाया जा सकेगा?

सरकार एक अन्य प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।

इसके तहत किसी व्यक्ति को सीधे सोशल मीडिया कंपनी से शिकायत करके अपने खिलाफ पोस्ट किए गए Deepfake, निजी तस्वीर या बिना सहमति साझा किए गए वीडियो को हटाने की मांग करने की सुविधा दी जा सकती है।

अभी कई मामलों में पीड़ित को पुलिस, साइबर क्राइम पोर्टल या अदालत की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य पीड़ितों को तेज राहत देना है। हालांकि प्रस्तावित प्रक्रिया, समय-सीमा और शिकायतों के निपटारे के नियम अभी अंतिम रूप में घोषित नहीं हुए हैं।

क्या सोशल मीडिया कंपनियों को भारी जुर्माना भी लग सकता है?

यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

सरकार की चर्चा केवल Safe Harbour खत्म करने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अनुपालन और शिकायत निवारण की व्यवस्था मजबूत करने पर भी विचार हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी बच्चों के यौन शोषण से संबंधित ऑनलाइन सामग्री रोकने में प्लेटफॉर्म की विफलताओं पर चिंता जताई है और अधिक अनुपातिक दंड व्यवस्था की जरूरत पर चर्चा की है।

संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं:

  • आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था।

  • गैरकानूनी कंटेंट पर समयबद्ध कार्रवाई।

  • शिकायतों का बेहतर निपटारा।

  • प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और कंटेंट प्रमोशन की जवाबदेही।

लेकिन अभी इन प्रस्तावों की अंतिम कानूनी रूपरेखा तय नहीं है।

इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं?

संभावित फायदे

        संभावित चिंताएं

फेक न्यूज पर नियंत्रण

    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होने का खतरा

Deepfake पर कार्रवाई

    कंपनियां जरूरत से ज्यादा पोस्ट हटा सकती हैं

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा

    सरकारी हस्तक्षेप बढ़ने की आशंका

प्लेटफॉर्म की जवाबदेही

    छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ

पीड़ितों को जल्द राहत

    कानूनी विवाद और लागत बढ़ सकती है

इसलिए इस कानून में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बेहद जरूरी होगा।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल: क्या सरकार ने यह कानून लागू कर दिया है?

अभी प्रस्तावित / विचाराधीन

5 नवंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार:

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस विषय पर विचार-विमर्श कर रहा है।

  2. Safe Harbour Protection में बदलाव के प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

  3. Section 79 में बड़ा बदलाव करने के लिए IT Act में संशोधन की जरूरत पड़ सकती है।

  4. इस तरह के संशोधन के लिए संसद की विधायी प्रक्रिया आवश्यक होगी।

  5. टेक कंपनियों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श भी किया जा सकता है।

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Facebook, Instagram, YouTube और X की कानूनी सुरक्षा खत्म हो चुकी है।

परीक्षा और सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न

     उत्तर

संबंधित मंत्रालय

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्रालय (MeitY)

संबंधित कानून

    Information Technology Act, 2000

संबंधित धारा

    Section 79

कानूनी सुरक्षा का नाम

    Safe Harbour Protection

मुख्य मुद्दा

   User-generated content की कानूनी जवाबदेही

संबंधित कंपनियां

   Meta, Google, X आदि

प्रस्ताव की स्थिति

   विचाराधीन, अंतिम निर्णय नहीं


छत्तीसगढ़ में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए 15 नवंबर से चलेगा दो महीने का अभियान, रायपुर-कोरबा-रायगढ़ पर विशेष नजर

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए दो महीने का विशेष राज्यव्यापी जांच अभियान चलाने की घोषणा की है। यह अभियान 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 28 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में सभी जिलों के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की तैयारियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा की थी।

सरकार के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य केवल संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि अवैध रूप से रहने में मदद करने वाले नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, बिचौलियों और जानबूझकर आश्रय या रोजगार देने वालों की भूमिका की भी जांच करना है। रिपोर्टों में विशेष रूप से बांग्लादेश से अवैध रूप से आए नागरिकों की पहचान पर ध्यान देने की बात कही गई है।

15 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा अभियान

राज्य सरकार की घोषित योजना के अनुसार, यह अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में एक साथ चलाया जाएगा। प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी और संबंधित पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने, संदिग्ध मामलों की पहचान करने और दस्तावेजों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने की भी जानकारी दी गई है।

किन जगहों पर होगी जांच?

अभियान के दौरान उन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिक या अन्य लोग रहते अथवा काम करते हैं।

  • औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्रियां।

  • सड़क एवं भवन निर्माण स्थल।

  • कुटीर उद्योग और गुड़ निर्माण इकाइयां।

  • किराए के मकान और आवासीय परिसर।

  • होटल, लॉज और धर्मशालाएं।

  • श्रमिक ठेकेदारों के ठिकाने और आवागमन के प्रमुख स्थान।

सरकार ने औद्योगिक गतिविधियों वाले रायपुर, कोरबा और रायगढ़ में विशेष निगरानी और जांच की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

मकान मालिकों और ठेकेदारों की भी होगी जांच

अभियान में केवल संदिग्ध व्यक्तियों की ही नहीं, बल्कि उन्हें काम या रहने की जगह उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी।

  • मकान मालिकों को किराएदारों के पहचान संबंधी दस्तावेज लेकर उनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ठेकेदारों और नियोक्ताओं को श्रमिकों के दस्तावेजों की जांच करने को कहा गया है।

  • होटल, लॉज और धर्मशालाओं में ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड जांच के दायरे में रहेगा।

  • जानबूझकर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को आश्रय या रोजगार देने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

ग्राम सभाओं और पार्षदों की भी ली जाएगी मदद

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और शहरी क्षेत्रों में वार्ड पार्षदों के सहयोग से स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी।

सरकार की योजना के अनुसार, स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं को संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल अफवाह या सूचना के आधार पर उसे विदेशी नागरिक घोषित नहीं किया जा सकता। उसकी पहचान और नागरिकता का सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।

फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वालों पर भी कार्रवाई

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की जांच करना है।

सरकार ने ऐसे बिचौलियों और गिरोहों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जो कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट या अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करते हैं।

यदि कोई दस्तावेज जांच में फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से उसे नियमानुसार निष्क्रिय या निरस्त कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल कराने वालों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।

जिलों के बीच जानकारी साझा करने के लिए बनेगा विशेष सॉफ्टवेयर

अभियान को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करने की योजना बनाई है। इसके माध्यम से अलग-अलग जिलों में चल रही जांच और सत्यापन से संबंधित जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

इसमें निम्न जानकारियां दर्ज रखने की योजना है:

  • सत्यापन के दायरे में आए मामलों का रिकॉर्ड।

  • संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच की स्थिति।

  • विभिन्न जिलों में हुई जांच का विवरण।

  • संदिग्ध अवैध प्रवासन नेटवर्क से संबंधित सूचनाएं।

  • संबंधित पुलिस इकाइयों की जांच और कार्रवाई की जानकारी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य जिलों के बीच समन्वय बढ़ाना और एक ही मामले की बार-बार जांच होने से बचाना है।

 आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड को लेकर गृह मंत्री का बयान

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या राशन कार्ड अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। लंबे समय तक भारत में रहने मात्र से भी किसी व्यक्ति को स्वतः भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाती।

इसलिए किसी व्यक्ति की नागरिकता और भारत में रहने की वैधता का सत्यापन केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और लागू कानूनों के अनुसार किया जाएगा।

नागरिकों से मांगा गया सहयोग, हेल्पलाइन नंबर जारी

राज्य सरकार ने आम नागरिकों से भी अभियान में सहयोग करने की अपील की है। जारी जानकारी के अनुसार, अवैध प्रवासन से संबंधित सूचना देने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन- 1800-233-1905, टोल फ्री

प्राप्त सूचना की संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी।

अवैध प्रवासन की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई होगी?

सरकार की घोषित योजना के अनुसार, जांच में यदि किसी विदेशी नागरिक के भारत में अवैध रूप से रहने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर निर्वासन यानी संबंधित देश वापस भेजने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

इसके अलावा, फर्जी दस्तावेज बनाने, उपलब्ध कराने या जानबूझकर अवैध रूप से रह रहे लोगों को शरण देने में शामिल व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कार्रवाई से पहले उसकी पहचान, नागरिकता और कानूनी स्थिति का सत्यापन आवश्यक होगा।

आम नागरिकों के लिए क्या महत्वपूर्ण है?

इस अभियान के दौरान मकान मालिकों, होटल संचालकों, ठेकेदारों और नियोक्ताओं को अपने यहां रहने या काम करने वाले लोगों के दस्तावेजों का उचित रिकॉर्ड रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन कराने पर ध्यान देना चाहिए।

साथ ही, किसी व्यक्ति की भाषा, पहनावे, क्षेत्र या बाहरी राज्य से आने के आधार पर उसे विदेशी नागरिक नहीं माना जा सकता। संदेह की स्थिति में तथ्यात्मक जानकारी संबंधित अधिकारियों को दें और सत्यापन का निर्णय कानून के अनुसार होने दें।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार का यह अभियान 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेगा। सरकार का कहना है कि इसके माध्यम से अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क की जांच और अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि अभियान शुरू होने के बाद जिलों में जांच किस तरह आगे बढ़ती है और प्रशासन कितने मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन कर पाता है। फिलहाल रायपुर, कोरबा और रायगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों पर विशेष नजर रखे जाने की तैयारी है।


महासमुंद में प्रधानमंत्री आवास योजना पर बवाल, रोजगार सहायिका पर हजारों रुपये वसूलने का आरोप

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम कोमा में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की रोजगार सहायिका और उसके पति पर आवास स्वीकृत कराने का झांसा देकर हितग्राहियों से 3 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने शपथ पत्र के साथ कलेक्टर से शिकायत की है और रोजगार सहायिका को पद से हटाने की मांग की है।


शपथ पत्र लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, लगाए गंभीर आरोप

ग्राम कोमा के कई ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाने और आवास स्वीकृत कराने का भरोसा देकर अलग-अलग हितग्राहियों से 3 हजार, 5 हजार, 10 हजार और 20 हजार रुपये तक लिए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तैयार शपथ पत्र भी जिला प्रशासन को सौंपे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा प्रशासन के पास पहुंचना पड़ा।

रकम लेने के बाद भी नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास

ग्रामीणों के मुताबिक, जिन हितग्राहियों से कथित तौर पर पैसे लिए गए, उनमें से कई लोगों के प्रधानमंत्री आवास अब तक स्वीकृत नहीं हुए हैं। आरोप है कि जब हितग्राहियों ने अपनी रकम वापस मांगी तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित रोजगार सहायिका को पद से हटाने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

जिला पंचायत CEO ने जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पंचायत CEO के अनुसार, जनपद पंचायत स्तर से इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित रोजगार सहायिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

प्रशासन अब जांच रिपोर्ट और रोजगार सहायिका के जवाब का परीक्षण करेगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई

फिलहाल रोजगार सहायिका और उसके पति पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, इस शिकायत के सामने आने से प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पटवारी आंदोलन पर सरकार की सख्ती: 150 से अधिक निलंबन की खबर, 1,000 से ज्यादा को ब्रेक-इन-सर्विस नोटिस; धमतरी में भी दो पटवारी निलंबित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर के पटवारी आंदोलन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस, निलंबन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

5 नवंबर को प्रकाशित द रूरल प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 1,000 से अधिक पटवारियों को ब्रेक-इन-सर्विस का नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, उसी दिन विस्तारित न्यूज की रिपोर्ट में अब तक 123 पटवारियों पर निलंबन और तबादले की कार्रवाई का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए कार्रवाई की कुल संख्या को अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार समझना जरूरी है।

13 अक्टूबर से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल

राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले प्रदेश के पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

हड़ताल के चलते किसानों और आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों से जुड़े कई कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीदी का सीजन नजदीक होने के कारण यह आंदोलन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार ने दिखाई सख्ती, नोटिस और निलंबन की कार्रवाई

द रूरल प्रेस की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों सहित प्रदेशभर में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस में निर्धारित समय के भीतर काम पर लौटने और अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

धमतरी में दो पटवारी निलंबित, 148 कर्मचारी हड़ताल पर

धमतरी जिले में भी पटवारियों का आंदोलन लगातार जारी है। 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 168 पटवारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 148 पटवारी हड़ताल में शामिल हैं। शेष 20 प्रशिक्षु पटवारी आंदोलन में शामिल नहीं बताए गए हैं।

प्रशासन ने जिले में दो पटवारियों को निलंबित किया है:

  1. चिम्मन लाल ध्रुव – हल्का पांवद्वार, नगरी क्षेत्र।

  2. चैतन्य नेताम – मुख्यालय बेलोरा, मगरलोड क्षेत्र।

रिपोर्ट के अनुसार, चिम्मन लाल ध्रुव को समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। वहीं, चैतन्य नेताम के निलंबन का आदेश मगरलोड तहसीलदार की ओर से जारी किया गया।

इसके अलावा धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुरुद क्षेत्र के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। 4 नवंबर को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, धमतरी के गांधी मैदान में आंदोलन कर रहे पटवारियों ने प्रशासनिक नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।

आखिर क्यों नाराज हैं पटवारी?

पटवारी संघ की नाराजगी के पीछे कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे प्रमुख है PV ऐप यानी Physical Verification App से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं।

पटवारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • PV ऐप में सुधार: ऐप की तकनीकी खामियां दूर की जाएं और इसकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जाए।

  • वेतन विसंगति दूर करना: लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी विसंगतियों का निराकरण किया जाए।

  • पदोन्नति का लाभ: राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नति सहित लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए।

  • अतिरिक्त कार्यभार में राहत: डिजिटल सर्वे और अन्य ऑनलाइन कार्यों के दबाव को कम किया जाए।

  • कार्रवाई वापस लेना: आंदोलन के दौरान जारी निलंबन, नोटिस और तबादले के आदेश वापस लिए जाएं।

PV ऐप को लेकर क्या है विवाद?

पटवारियों का आरोप है कि गांवों और खेतों में नेटवर्क की समस्या के कारण PV ऐप ठीक से काम नहीं करता। कई बार सर्वर डाउन होने से डेटा अपलोड करने में काफी समय लगता है।

उनका यह भी कहना है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के पॉलीगॉन मैपिंग जैसे तकनीकी काम की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, किसान पंजीयन और स्वामित्व योजना जैसे कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी पटवारियों पर है।

पटवारियों का कहना है कि वे काम करने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन तकनीकी सुविधाएं और पर्याप्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराए बिना काम का दबाव बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। ये समस्याएं पटवारी संघ की ओर से उठाई गई हैं।

हड़ताल से किसानों को हो रही परेशानी

पटवारियों की हड़ताल का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। राजस्व विभाग से जुड़े कई काम प्रभावित होने की खबर है।

प्रमुख रूप से प्रभावित कार्य:

  1. डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी।

  2. धान खरीदी से पहले फसल संबंधी सत्यापन।

  3. किसान पंजीयन और किसान अभिलेख सत्यापन।

  4. भूमि नामांतरण और बंटवारा।

  5. सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कार्य।

  6. विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन।

खासकर धान खरीदी से पहले फसल का डिजिटल सर्वे पूरा होना जरूरी है। ऐसे में सर्वे में देरी होने पर किसानों के पंजीयन और धान खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।

कर्मचारी फेडरेशन ने भी किया हस्तक्षेप

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फेडरेशन की मांग है कि पटवारियों के खिलाफ जारी निलंबन, नोटिस और तबादले की कार्रवाई पर रोक लगाकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए। साथ ही PV ऐप की तकनीकी समस्याओं को दूर करने और वेतन विसंगति तथा पदोन्नति से जुड़े मुद्दों का निराकरण किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

एक तरफ प्रशासन पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और ग्रामीण नागरिकों को हो रही है। धान खरीदी का समय नजदीक है और राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।


रायपुर में D.Ed अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन, 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों का आक्रोश गुरुवार, 5 नवंबर को देखने को मिला। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत अभ्यर्थी गुरुवार तड़के अपने माता-पिता और परिजनों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के नवा रायपुर स्थित शासकीय बंगले पहुंच गए। यहां उन्होंने बंगले का घेराव कर परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि वर्ष 2023 की सहायक शिक्षक भर्ती के शेष लगभग 2,300 पदों पर पात्र D.Ed अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए और सरकार नियुक्ति की निश्चित तारीख घोषित करे।

D.Ed अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन, 2,300 पदों पर नियुक्ति की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों ने गुरुवार सुबह अपना विरोध तेज करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के शासकीय बंगले का घेराव कर दिया। अभ्यर्थी अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नवा रायपुर स्थित मंत्री के बंगले पहुंचे और परिसर में बैठकर धरना शुरू कर दिया।

321 दिनों से जारी है आंदोलन

अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे पिछले 321 दिनों से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। करीब 10 महीने से जारी इस आंदोलन के बावजूद उन्हें नियुक्ति को लेकर कोई निश्चित तारीख नहीं मिली है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे इंतजार और लगातार प्रदर्शन के बाद भी जब उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तब उन्हें मंत्री के बंगले तक पहुंचकर अपनी बात रखने का फैसला लेना पड़ा।

2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग

प्रदर्शन कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों की मुख्य मांग वर्ष 2023 की सहायक शिक्षक भर्ती के शेष लगभग 2,300 पदों पर पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिक्त पदों पर नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि नियुक्ति कब तक पूरी होगी।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय नियुक्ति का स्पष्ट कार्यक्रम और निश्चित तारीख घोषित करे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं और अब अनिश्चितता के बीच आंदोलन जारी रखने को मजबूर हैं।

परिवार के साथ मंत्री के बंगले पहुंचे अभ्यर्थी

इस प्रदर्शन में अभ्यर्थियों के साथ उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हुए। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से नौकरी की प्रतीक्षा के कारण उनके परिवार भी परेशान हैं। पढ़ाई पूरी करने और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी उम्मीदें रखने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है।

परिजनों की मौजूदगी के साथ अभ्यर्थियों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी नियुक्ति से जुड़ा स्पष्ट जवाब मांगने के लिए मंत्री से मिलना चाहते हैं।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई कहासुनी

मंत्री के बंगले पर प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों से निर्धारित धरना स्थल पर लौटने को कहा। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस और कहासुनी हुई।

कुछ समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने अभ्यर्थियों को समझाने का प्रयास किया। बाद में हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में आरंग SDM रवि सिंह के हवाले से बताया गया कि अभ्यर्थियों को बसों के माध्यम से रायपुर ले जाया जा रहा है और आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शन के समय शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बंगले में मौजूद नहीं थे।

न्यायालय के आदेशों के पालन की भी मांग

अभ्यर्थियों ने अपनी मांग के समर्थन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन का मुद्दा भी उठाया है। उनका दावा है कि भर्ती से जुड़े न्यायिक निर्देशों के बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। हालांकि, इन आदेशों का वास्तविक दायरा और वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर उनका प्रभाव संबंधित न्यायिक आदेशों तथा शासन के आधिकारिक पक्ष से स्पष्ट होना जरूरी है।

अब सरकार के फैसले पर टिकी नजरें

321 दिनों से जारी आंदोलन और गुरुवार को मंत्री के बंगले तक पहुंचे प्रदर्शन के बाद सहायक शिक्षक भर्ती का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार रिक्त पदों की स्थिति स्पष्ट करे, पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति पर निर्णय ले और नियुक्ति की निश्चित समय-सीमा घोषित करे।

अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यही है कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि नियुक्ति को लेकर ठोस निर्णय मिले।


चुनाव आयोग ने छह और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची संशोधन की घोषणा की

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भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SSR) की प्रक्रिया का विस्तार किए जाने की खबर है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलतियों को सुधारना और अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों की जाँच करना है।

छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा मतदाता सूची का पुनरीक्षण

5 नवंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने चार राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक अद्यतन बनाना और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं सहित सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सूची में शामिल करना है।

किन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगी प्रक्रिया?

इस बार पुनरीक्षण अभियान निम्नलिखित छह क्षेत्रों में चलाया जाएगा:

  1. अरुणाचल प्रदेश

  2. मिजोरम

  3. ओडिशा

  4. सिक्किम

  5. चंडीगढ़

  6. दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इनमें चार राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

क्या है विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)?

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी Special Summary Revision मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत:

  • 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाएंगे।

  • जिन मतदाताओं के नाम सूची में छूट गए हैं, उन्हें शामिल करने का अवसर मिलेगा।

  • मतदाता सूची में दर्ज नाम, पता और अन्य विवरणों में सुधार किया जा सकेगा।

  • मृत्यु या स्थायी रूप से स्थानांतरित होने जैसे मामलों में नियमानुसार नाम हटाने की प्रक्रिया की जाएगी।

  • मतदाता सूची में दोहराव और अन्य त्रुटियों की जाँच की जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो।

महत्वपूर्ण तारीखें

निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:

प्रक्रिया

    निर्धारित तारीख

मतदान केंद्रों का युक्तिकरण एवं पुनर्व्यवस्था

    20 नवंबर 2026 तक

प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन

    30 नवंबर 2026

दावा एवं आपत्ति दर्ज करने की अवधि

    30 नवंबर से 30 दिसंबर 2026

दावे एवं आपत्तियों का निपटारा

    18 जनवरी 2027 तक

अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

    21 जनवरी 2027


युवाओं और नए मतदाताओं को मिलेगा विशेष अवसर

इस अभियान में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इसके अलावा, निर्वाचन आयोग ने उन युवाओं के लिए अग्रिम आवेदन की सुविधा भी दी है, जो 2027 में 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी करेंगे। उनके आवेदन पात्रता की संबंधित तिमाही में प्रक्रिया के लिए लिए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या है इसका महत्व?

छत्तीसगढ़ का नाम इस बार घोषित किए गए छह नए क्षेत्रों की सूची में नहीं है। राज्य को पहले घोषित पुनरीक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया था। इसलिए छत्तीसगढ़ के मतदाताओं को अपने राज्य के लिए जारी कार्यक्रम और संबंधित निर्वाचन कार्यालय की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

मतदाताओं को क्या करना चाहिए?

मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अपना नाम और विवरण अवश्य जाँचें। यदि नाम छूट गया हो या किसी प्रकार की गलती हो, तो निर्धारित समय-सीमा में संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। आधिकारिक जानकारी के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट Voters' Services Portal देख सकते हैं।

निष्कर्ष

निर्वाचन आयोग का यह कदम आगामी चुनावी प्रक्रिया से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने, पुराने रिकॉर्ड में सुधार करने और मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करने के लिए यह अभियान चलाया जाएगा। अब सभी की नजर 30 नवंबर को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची और 21 जनवरी 2027 को जारी होने वाली अंतिम सूची पर रहेगी।


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