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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सीएसआईआर-सीआरआरआई और एएमएनएस इंडिया के बीच अनुसंधान समझौता

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सीएसआईआर–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और इस्पात क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AMNS India) के बीच एक अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स (Iron Ore Tailings) के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स का उपयोग “खनन अपशिष्ट से हरित सड़कें (Mine Waste to Green Roads)” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने बताया कि देश में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित विभिन्न आयरन ओअर बेनिफिशिएशन संयंत्रों से हर वर्ष लगभग 18–20 मिलियन टन आयरन ओअर टेलिंग्स उत्पन्न होते हैं। इन टेलिंग्स को आमतौर पर बड़े बांधों में संग्रहित किया जाता है और इन्हें स्लाइम्स भी कहा जाता है, जो पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से चुनौतियां पैदा करते हैं।

इस R&D समझौते का उद्देश्य आयरन ओअर टेलिंग्स के प्रबंधन की समस्या का समाधान करना और सड़क निर्माण में प्राकृतिक एग्रीगेट्स की मांग को कम करना है। इस पहल के अंतर्गत CSIR-CRRI के वैज्ञानिक प्रयोगशाला परीक्षण, सामग्री का विश्लेषण और पेवमेंट डिज़ाइन अध्ययन करेंगे, ताकि सड़क की विभिन्न परतों में आयरन ओअर टेलिंग्स की उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद बोधंकर, मुख्य सततता अधिकारी (Chief Sustainability Officer), AMNS इंडिया थे। उन्होंने कहा कि उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और टिकाऊ अवसंरचना के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर देश के विकास में योगदान देगी।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. च. रवि शेखर ने कहा कि संस्थान अगली पीढ़ी की टिकाऊ सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि AMNS इंडिया के साथ यह सहयोग सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स के वैज्ञानिक परीक्षण और फील्ड प्रदर्शन को संभव बनाएगा, जिससे भारत सतत पेवमेंट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका और मजबूत करेगा।

इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से आयरन ओअर टेलिंग्स को सड़क निर्माण में अच्छी मिट्टी और प्राकृतिक एग्रीगेट्स के विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के दौरान सतत परिवहन अवसंरचना से संबंधित कई नवीन तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें कृषि अपशिष्ट आधारित बायो-बिटुमेन, स्टील स्लैग आधारित ECOFIX त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक, स्लैग और फ्लाई ऐश आधारित TERASURFACING तकनीक, तथा वेस्ट प्लास्टिक आधारित मॉड्यूलर जियोसेल जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य सड़क निर्माण में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में AMNS इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों, CSIR-CRRI के वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और सड़क एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े कई हितधारकों ने भाग लिया। इस आयोजन ने भारत में सतत अवसंरचना विकास के लिए विज्ञान आधारित समाधानों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन ने वन्यजीव संस्थान, देहरादून (Wildlife Institute of India – WII) के सहयोग से 10-11 मार्च 2026 को देहरादून में “रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु को कम करने हेतु नीति कार्यान्वयन” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यक्रम में लगभग 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें MoEFCC के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन, रेल मंत्रालय, हाथी क्षेत्र वाले राज्यों के वन विभागों और प्रमुख संरक्षण वैज्ञानिकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यशाला में ईस्ट सेंट्रल रेलवे, ईस्ट कोस्ट रेलवे, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे, नॉर्दर्न रेलवे, साउथ ईस्टर्न रेलवे, साउदर्न रेलवे और साउथ वेस्टर्न रेलवे के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

भारत में विश्व की कुल एशियाई हाथी आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पाया जाता है। इनके प्रमुख आवास पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी और मध्य भारत में फैले हुए हैं। लेकिन आवासों के खंडित होने और हाथी क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के कारण कई राज्यों—असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़ और झारखंड—में रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मृत्यु के मामलों में वृद्धि हुई है। इस कार्यशाला का उद्देश्य संरक्षण और अवसंरचना क्षेत्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा वैज्ञानिक आधार पर समाधान विकसित करना था।

वन्यजीव मृत्यु की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए MoEFCC ने WII और रेल मंत्रालय के सहयोग से हाथी क्षेत्रों में 110 संवेदनशील रेलवे खंड तथा दो बाघ क्षेत्रों में 17 अतिरिक्त खंडों की पहचान की है। प्रोजेक्ट एलीफेंट, WII, राज्य वन विभागों और भारतीय रेल की संयुक्त टीमों द्वारा किए गए विस्तृत फील्ड सर्वेक्षणों में प्रत्येक स्थान की पारिस्थितिक परिस्थितियों का अध्ययन कर स्थान-विशिष्ट समाधान सुझाए गए।

कुल 127 रेलवे खंडों (3,452.4 किमी) के विस्तृत आकलन के आधार पर 14 राज्यों में 77 खंड (1,965.2 किमी) को प्राथमिकता दी गई है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही और दुर्घटना जोखिम को देखते हुए विशेष उपाय किए जाएंगे। इन प्राथमिक खंडों के लिए 705 शमन संरचनाओं की सिफारिश की गई है, जिनमें 503 रैंप और लेवल क्रॉसिंग, 72 पुलों का विस्तार या संशोधन, 39 फेंसिंग/ट्रेंच संरचनाएं, 4 एग्जिट रैंप, 65 नए अंडरपास और 22 ओवरपास शामिल हैं, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से रेलवे लाइन पार कर सकें।

कई नई रेलवे परियोजनाओं और ट्रैक विस्तार योजनाओं में भी वन्यजीव-अनुकूल संरचनाएं शामिल की गई हैं। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के अचनाकमार-अमरकंटक हाथी कॉरिडोर से गुजरने वाली गेवरा रोड–पेंड्रा रोड रेलवे लाइन, महाराष्ट्र की दरेकासा–सालेकासा ट्रैक ट्रिपलिंग परियोजना, नागभीड–इतवारी गेज परिवर्तन परियोजना और वडसा–गडचिरोली रेलवे लाइन (जो कान्हा–नवेगांव–ताडोबा–इंद्रावती टाइगर कॉरिडोर को काटती है) में ऐसे प्रावधान किए गए हैं।

असम के अजारा–कामाख्या रेलवे खंड के 3.5 किमी लंबे संवेदनशील हिस्से में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप प्रस्तावित है। यह हिस्सा रानी–गढ़भंगा–दीपोर बील हाथी कॉरिडोर से गुजरता है, जहां पहले कई हाथियों की मृत्यु हुई है। इस क्षेत्र में रेलवे लाइन को ऊंचा (एलीवेटेड) बनाया जाएगा ताकि हाथी सुरक्षित रूप से कॉरिडोर पार कर सकें।

तकनीकी समाधानों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में Distributed Acoustic System (DAS) आधारित Intrusion Detection System (IDS) लगाया जा रहा है, जो हाथियों की गतिविधि का पता लगाकर चेतावनी देता है। इसका पायलट प्रोजेक्ट नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के चार खंडों में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है, जो असम में कुल 64.03 किमी हाथी कॉरिडोर और 141 किमी रेलवे ब्लॉक सेक्शन को कवर करता है। इस प्रणाली को अब उत्तर बंगाल और ओडिशा के संवेदनशील रेलवे क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है।

इसके अलावा तमिलनाडु के मदुक्करई क्षेत्र में एक AI आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली भी लागू की गई है। इसमें 12 टावरों पर लगे थर्मल और मोशन-सेंसिंग कैमरे हाथियों की गतिविधि को ट्रैक करते हैं और ट्रैक से 100 मीटर के भीतर हाथियों के आने पर वन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना देते हैं, जिससे ट्रेन की गति कम की जा सके और हाथियों को सुरक्षित पार करने का अवसर मिल सके।

कार्यशाला में हाथियों की पारिस्थितिकी, अवसंरचना योजना और जैव विविधता संरक्षण पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने राज्यों के आंकड़ों, केस स्टडी और दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों—जैसे आवास विखंडन, भूमि उपयोग परिवर्तन, तेज ट्रेन गति, रात में संचालन और हाथियों की मौसमी आवाजाही—पर चर्चा की।

क्षेत्रीय कार्य समूहों ने विभिन्न परिदृश्यों (शिवालिक-गंगा मैदान, मध्य भारत एवं पूर्वी घाट, उत्तर-पूर्व भारत और पश्चिमी घाट) में चल रहे प्रयासों की समीक्षा की और क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियां सुझाईं। बेहतर प्रथाओं में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सेंसर और AI आधारित पहचान तकनीक, GIS निगरानी और सामुदायिक चेतावनी एवं गश्त नेटवर्क शामिल रहे।

कार्यशाला में रेलवे प्राधिकरणों, वन विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही जोखिम मूल्यांकन, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करने तथा डेटा साझाकरण को मजबूत करने की सिफारिश की गई। प्रतिभागियों ने AI आधारित पहचान, रिमोट सेंसिंग और अन्य शोध क्षेत्रों को भी प्राथमिकता देते हुए प्रोजेक्ट एलीफेंट और रेल मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि वैज्ञानिक और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से हाथी-ट्रेन टकराव की घटनाओं को कम किया जा सके।

जयशंकर की कूटनीति का असर: होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली हरी झंडी

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 Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई अहम बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से नई दिल्ली को बड़ी राहत मिली है।


यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और दुनिया के तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

भारत पहुंचा पहला तेल टैंकर

बुधवार (11 मार्च) को लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर Shenlong Suezmax सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर Mumbai Port पहुंच गया। यह जहाज शत्रुता शुरू होने के बाद भारत पहुंचने वाली कच्चे तेल की पहली खेप लेकर आया है।

यह टैंकर 1 मार्च को Ras Tanura Port से 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चे तेल के साथ रवाना हुआ था। 8 मार्च को इसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश किया और कुछ समय के लिए ट्रैकिंग रडार से गायब हो गया। बाद में 9 मार्च को यह दोबारा दिखाई दिया और सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज का कुछ समय के लिए रडार से ओझल होना सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि उन जलक्षेत्रों से सुरक्षित निकला जा सके जहां हाल के दिनों में ईरान ने कुछ व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा चोकपॉइंट्स में गिना जाता है।

दुनिया के कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि इस रास्ते में लंबे समय तक बाधा आती है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को दी गई अनुमति को कूटनीतिक स्तर पर भारत की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को फिलहाल राहत मिली है।

भाजपा छत्तीसगढ़ में मीडिया विभाग में फेरबदल, प्रवक्ता और मीडिया पैनलिस्ट की नई सूची जारी

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 रायपुर। भाजपा की छत्तीसगढ़ इकाई ने संगठन में फेरबदल करते हुए मीडिया विभाग में नई नियुक्तियों की घोषणा की है। पार्टी की ओर से प्रदेश स्तर पर प्रवक्ताओं और मीडिया पैनलिस्ट की सूची जारी की गई है।


जारी सूची के अनुसार सीए प्रवीण साहू, गोविंदा गुप्ता और राहुल राय को मीडिया विभाग में सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं गौरीशंकर श्रीवास सहित कुल 10 नेताओं को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। ये प्रवक्ता पार्टी की नीतियों और गतिविधियों को मीडिया और जनता के बीच रखने का कार्य करेंगे।


पार्टी संगठन का कहना है कि मीडिया विभाग में किए गए इस फेरबदल से संगठन की संवाद व्यवस्था और जनसंपर्क को और मजबूत किया जाएगा। नई टीम पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों और सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से आम जनता तक पहुंचाने का काम करेगी।

पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई है कि वे संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस का नया प्लान: भाजपा कार्यालय की जगह अब विधानसभा घेराव की तैयारी

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर नया अपडेट सामने आया है। Chhattisgarh Pradesh Congress Committee के नए निर्देश के बाद भाजपा कार्यालय घेराव का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।


पार्टी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक अब 17 मार्च को विधानसभा घेराव का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी वजह से पहले तय किया गया भाजपा कार्यालय घेराव कार्यक्रम टालने का फैसला लिया गया है।

कांग्रेस नेताओं ने सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से अपील की है कि कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी अपने-अपने क्षेत्रों में साथियों तक पहुंचा दें।

साथ ही यह भी बताया गया है कि 17 मार्च को होने वाले विधानसभा घेराव के विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी जल्द ही अलग से जारी की जाएगी।

तुमगांव : UPSC उत्तीर्ण करने वाले संजय डहरिया का सतनामी समाज द्वारा भव्य स्वागत

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तुमगांव। नगर पंचायत तुमगांव परिक्षेत्र के समस्त सतनामी समाज एवं सभी पदाधिकारियों द्वारा UPSC उत्तीर्ण कर IAS  के लिए स्थान बनाने वाले संजय डहरिया पिता लखन डहरिया का आगमन महासमुंद जिले के नगर पंचायत तुमगांव के पावन धारा में सतनामी समाज के बीच हुआ जहां IAS संजय डहरिया का भव्य स्वागत किया गया।

तथा यहां तुमगांव चौंक से बस स्टैंड के पास जैतखंभ में संजय डहरिया ने परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की आरती कर उन्होंने समाज को संबोधित कर अपने IAS बनने की अपने लगन और मेहनत का कठिनाई को पर चर्चा किया गया और समाज के सभी बच्चों को ऐसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया और उन्होंने यहां भी कहा कि बच्चे के माता पिता को भी बोला गया कि कोई बच्चा लगन और मेहनत कर रहा है पढ़ने के लिए तो उससे आगे पढ़ाते रहे जिसे आगे चलकर मेरी तरह बन सके।

यहां कार्यक्रम में सम्मिलित जिसमें हमारे परिक्षेत्र के अध्यक्ष वेदराम गिलहरे सर का महत्वपूर्ण योगदान बताया तथा। कार्यक्रम में सम्मिलित तुमगांव सभी सतनामी समाज को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के बच्चो को भी उनके करियर में आगे बढ़ाने के लिए उनके पालक का विशेष योगदान रहना चाहिए जिससे वह अपने मंजिल तक पहुंच पाए।...

नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी आम एवं उप निर्वाचन 2026 के लिए निर्वाचक नामावली तैयार एवं पुनरीक्षित किए जाने हेतु कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली दिनांक 01 अप्रैल 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम संबंधित स्थानीय निकाय के क्षेत्र, वार्ड अथवा पंचायत से संबंधित भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में दर्ज होंगे, वही मतदाता स्थानीय निकायों की निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराने के पात्र होंगे।

जारी कार्यक्रम के अनुसार दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 23 अप्रैल 2026 तक जिन मतदाताओं के नाम भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा निर्वाचक नामावली में दर्ज होंगे, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रारूप क-1 में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर स्थानीय निकाय की निर्वाचक नामावली में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे।

नगरीय निकाय उप निर्वाचन के अंतर्गत अध्यक्ष के कुल 02 पद, क्रमशः नगरपालिका परिषद सारंगढ़ (जिला-सारंगढ़-बिलाईगढ़) तथा नगरपालिका परिषद शिवपुर-चरचा (जिला-कोरिया) में रिक्त हैं, साथ ही पार्षदों के 15 पद भी रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त नवगठित चार निकायों—नगर पंचायत घुमका (जिला-राजनांदगांव), नगर पंचायत बम्हनीडीह (जिला-जांजगीर-चांपा), नगर पंचायत शिवनंदनपुर (जिला-सूरजपुर) तथा नगर पंचायत पलारी (जिला-बलौद)—में अध्यक्ष के 04 पद तथा पार्षदों के कुल 60 पद रिक्त हैं।

इसी प्रकार त्रिस्तरीय पंचायतों में जनपद पंचायत सदस्य के 08 पद, सरपंच के 78 पद तथा पंच के 1056 पद रिक्त हैं। इस प्रकार प्रदेश के 33 जिलों में कुल 1142 पद रिक्त हैं, जिनका निर्वाचन कराया जाना है।

निर्वाचक नामावली तैयार करने हेतु जारी कार्यक्रम के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा प्राधिकृत अधिकारियों का प्रशिक्षण 24 मार्च 2026 तक कराया जाएगा तथा निर्वाचक नामावली का मुद्रण 09 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, जिसके बाद दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावे-आपत्तियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि प्रारूप क-1 में दावा प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल 2026 होगी। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा दावे-आपत्तियों के निराकरण के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसा आदेश पारित होने के 05 दिवस के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष की जा सकेगी। निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा।



मां और शिशु का स्वस्थ भविष्य ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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माताओं के स्वास्थ्य और पोषण में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि : प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में मिला पहला स्थान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश की माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के क्रियान्वयन में बड़े राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 93.37 प्रतिशत नामांकन, 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर तथा 93.95 प्रतिशत शिकायतों के त्वरित समाधान का रिकॉर्ड दर्ज किया है। यह उपलब्धि राज्य में योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने इस सफलता का श्रेय महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम और समर्पित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि इनके अथक प्रयासों से प्रदेश की लाखों गर्भवती माताओं तक योजना का लाभ समय पर पहुँच रहा है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मां और शिशु का स्वस्थ भविष्य ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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बस्तर में बड़ा सरेंडर: 108 माओवादी आज छोड़ेंगे हथियार, मुख्यधारा में लौटेंगे

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 जगदलपुर। बस्तर में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बुधवार को 108 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े ये माओवादी जगदलपुर के शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करेंगे।


दोपहर दो बजे होने वाले इस कार्यक्रम में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और समाज के वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाएंगे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक समर्पण करने वाले कैडरों से मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने बीजापुर सहित बस्तर रेंज के कई जिलों में जंगलों में छिपाकर रखे हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री की बड़ी डंप बरामद की है। इन बरामद सामग्रियों को कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित भी किया जाएगा।

पुलिस के अनुसार पिछले दो वर्षों में बस्तर में 2700 से अधिक माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। शासन की पुनर्वास नीति के तहत समर्पित माओवादियों को आर्थिक सहायता, आवास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

आजीविका मिशन से मिली नई राह-मधु कंवर को

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सुशासन की मिसाल: मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ तक का सफर तय कर बनीं मधु कंवर ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा

रायपुर- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण गरीबी उन्मूलन परियोजना है। यह योजना स्व-रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण गरीबों को संगठित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत निवासी मधु कंवर आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।

कभी आर्थिक तंगी के कारण दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली मधु कंवर ने अपने संघर्ष, मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा बदल दी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

गांव में ही मिल रही डिजिटल सेवाएं

आज मधु कंवर अपने गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, आधार कार्ड अपडेट, श्रम कार्ड पंजीयन, आयुष्मान कार्ड, बिजली बिल भुगतान सहित कई ई-गवर्नेंस सेवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध हो रही हैं।

 इस पहल से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी शासकीय सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। इस कार्य से मधु को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है।

आजीविका मिशन से मिली नई राह

मधु कंवर बताती हैं कि एक समय परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “जय माँ कर्मा महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़कर नई शुरुआत की।

समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धान खरीदी-बिक्री, मशरूम उत्पादन और छोटे स्वरोजगार के कार्य शुरू किए। समूह से ऋण सुविधा मिलने पर उन्होंने अपने घर में ही कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किया, जो धीरे-धीरे उनकी आय का मजबूत साधन बन गया।

महिलाओं के लिए बढ़ रहा स्वरोजगार

मधु कंवर के समूह की महिलाएं आज कई आय संवर्धन गतिविधियों से जुड़ी हैं। इनमें मोमबत्ती निर्माण, केक बनाना, मशरूम उत्पादन, मछली पालन और बैंक सखी के रूप में कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

आज मधु कंवर न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके प्रयासों से गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

राज्य सरकार की योजनाओं और सुशासन की पहल से मधु कंवर जैसी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।

दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी सायरा बनो का हौसला

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सायरा बानो ई-रिक्शा चलाकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर- धमतरी जिले की सायरा बानो ने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो कोई भी कठिन परिस्थिति सफलता की राह नहीं रोक सकती। शारीरिक दिव्यांगता और अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद सायरा बानो आजआत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं।

कुछ समय पहले तक सायरा बानो का जीवन आर्थिक तंगी में गुजर रहा था। रोजगार के अभाव में उनके लिए रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और रोजगार के लिए जिला प्रशासन से सहायता की मांग की।

सायरा बानो की परिस्थितियों और उनके मजबूत इरादों को देखते हुए प्रशासन ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। उनके मार्गदर्शन में सायरा बानो को बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीखी। साथ ही उन्हें स्व-रोजगार से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी गई तथा पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद समाज कल्याण विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के अंतर्गत सायरा बानो को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।

आज सायरा बानो धमतरी शहर में आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय हो रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं। सरकार का उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं से जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि लाभार्थी दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

सायरा बानो की यह सफलता की कहानी न केवल दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए एक संदेश है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने का साहस और संकल्प हो।

नवा रायपुर में परम्परा से पहचान तक ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन

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राज्य के चिन्हांकित 43 जनजातियों और उपजातियों की संस्कृति, परिधान और चित्रकला का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल,सजेगा आदि रंग, परिधान और हाट

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में ’परम्परा से पहचान तक’ - आदि परब - 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 


भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उक्त आशय की जानकारी आज टीआरटीआई में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और प्रशिक्षण संस्थान के संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम ने दी।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक हिना अनिमेष नेताम ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर ‘आदि परब-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय समुदाय भी शामिल होंगे l आयोजन का उद्देश्य जनजातीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन को बढ़ावा देना है।

पहली बार एक मंच पर दिखेंगी 43 जनजातियों की वेशभूषाएँ

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” का आयोजन 13 मार्च को सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक और 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा। इस आयोजन में राज्य की 43 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों, स्थानीय संसाधनों और हाथों से बने वस्त्रों से तैयार ये परिधान जनजातीय जीवन शैली और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देंगे। इसमें भाग लेने के लिए 120 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। 

‘आदि रंग’ में चित्रकला के माध्यम से जल-जंगल-जमीन का संदेश

प्रमुख सचिव बोरा ने प्रेसवार्ता में बताया कि आदि परब के तहत “आदि रंग - जनजातीय चित्रकला महोत्सव” भी आयोजित होगा। इस महोत्सव में जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण, जनजातीय जीवन दर्शन और पर्यावरणीय चुनौतियों को प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में 155 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। चित्रकला प्रतियोगिता 18-30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की दो श्रेणियों में होगी।

दोनों श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही दोनों आयु वर्गों के 10-10 प्रतिभागियों को 2000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा।

आदि-हाट में मिलेगा जनजातीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि आयोजन के दौरान “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। यहां 14 समूहों द्वारा हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुक प्रदेश के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।

यूपीएससी में चयनित जनजातीय युवाओं का होगा सम्मान

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2025 में छत्तीसगढ़ से आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं के सहयोग से चयनित अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी डायमंड सिंह ध्रुव औरअंकित साकनी का सम्मान किया जाएगा। साथ ही इस मौके पर ‘प्रयास’ संस्थान के विद्यार्थियों को विभागीय योजनाओं के तहत लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखा ममता बनर्जी को कड़ा पत्र

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संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान जरूरी: आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान देश कभी स्वीकार नहीं करेगा : मुख्यमंत्री

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ा पत्र लिखकर भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हाल ही में हुए व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताई है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि जनजातीय समाज से आने वाली देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति के साथ किया गया यह व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था, आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में कहा है कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार पूरी दुनिया में सम्मानित रहे हैं। मतभेद को कभी भी मनभेद में न बदलने की हमारी संस्कृति रही है, लेकिन राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन न किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले एक जनजातीय समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में लापरवाही और उनका अपमान किया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह घटना देश के करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों, दलितों और मातृशक्ति की भावनाओं को गहराई से आहत करने वाली है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्य सरकार के व्यवहार को लेकर स्वयं राष्ट्रपति जी को अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक इतिहास में अत्यंत चिंताजनक है और इससे पश्चिम बंगाल जैसे प्रतिष्ठित राज्य की छवि को भी ठेस पहुंची है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में संदेशखाली की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी जनजातीय समाज की महिलाओं के साथ हुई घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि वंचित और जनजातीय समाज के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  ममता बनर्जी से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर देश और समाज से क्षमा मांगते हुए अपनी भूल स्वीकार करें तथा भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए देश को आश्वस्त करें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का प्रतीक हैं और उनके सम्मान से ही लोकतंत्र की गरिमा जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय समाज से आने वाली राष्ट्रपति के सम्मान से जुड़ा यह विषय पूरे देश की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है, इसलिए देश और समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रकरण में जिम्मेदारी के साथ कदम उठाए जाना आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी के निर्देश

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खाद्य सचिव रीना कंगाले ने आयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशानिर्देश

शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने सभी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में संचालित सभी 5 एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में एलपीजी गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इस अवसर पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को राज्य में एलपीजी गैस की दैनिक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में ऑयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेण्डर वर्तमान में केवल विशेष अत्यावश्यक संस्थाओं, जैसे अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को ही सप्लाई किए जा रहे हैं। इस पर खाद्य सचिव रीना कंगाले ने निर्देशित किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की परीक्षाएँ चल रही हैं, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं एवं छात्रावासों को गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।

बैठक के दौरान सचिव कंगाले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर 15 प्रतिशत कमर्शियल सप्लाई होटलों आदि को भी दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही जिलों में एलपीजी गैस के दुरुपयोग तथा अवैध गैस रिफिलिंग की रोकथाम के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके।

बैठक में राज्य में डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के तीनों डीजल-पेट्रोल डिपो में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। इस पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीजल और पेट्रोल की दैनिक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर भी नियमित निगरानी रखी जाए।

खाद्य सचिव  कंगाले ने राज्य के उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है और इन पेट्रोलियम पदार्थों की किसी प्रकार की कमी या शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेण्डर की आपूर्ति नियमानुसार नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं।

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