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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

वैश्विक बाघ दिवस 2026: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रकृति से गहरा जुड़ाव और संरक्षण आधारित जीवनशैली अपनाने का किया आह्वान

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए प्रकृति के साथ समाज के गहरे जुड़ाव और संरक्षण-आधारित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, अग्रिम पंक्ति के वनकर्मी, विद्यार्थी और विभिन्न हितधारक उपस्थित रहे।

यादव ने कहा कि संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके साथ संतुलित संबंध स्थापित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, "प्रकृति केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उसका सम्मान करना और उससे आत्मिक शांति प्राप्त करना भी जरूरी है।" उन्होंने लोगों से प्रकृति से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

भारत ने बाघ संरक्षण में हासिल की बड़ी उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 हो गई है तथा देश में अब 58 टाइगर रिजर्व हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में हाथी रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक रिजर्व और आर्द्रभूमियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

एनटीसीए का इको-टूरिज्म पोर्टल लॉन्च

समारोह के दौरान यादव ने एनटीसीए के इको-टूरिज्म वेबपेज का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह मंच देश के सभी टाइगर रिजर्व की प्रमाणिक वेबसाइटों को एकीकृत करता है, जिससे सफारी और आवास की बुकिंग संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी और जिम्मेदार एवं सतत प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

वन अधिकारियों से अनुभव साझा करने की अपील

यादव ने कहा कि वनों की कहानियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें पारंपरिक ज्ञान, वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण और वर्षों का अनुभव भी शामिल होता है। उन्होंने वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों से अपने अनुभवों को लिखित रूप में साझा करने का आग्रह किया, ताकि वे भविष्य की प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक बन सकें।

क्षमता निर्माण और वैश्विक सहयोग पर जोर

उन्होंने वन अधिकारियों और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच भारत के नेतृत्व में दुनिया भर में ज्ञान साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

उत्कृष्ट योगदान के लिए एनटीसीए पुरस्कार

बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों और अन्य योगदानकर्ताओं को एनटीसीए पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों के योगदान को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी

मंत्री ने 'सेव टाइगर' विषय पर आयोजित पेंटिंग, स्केचिंग, स्लोगन लेखन और मास्क निर्माण प्रतियोगिताओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके अलावा, मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के ईको-क्लबों के माध्यम से विशेषकर टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित विद्यालयों में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया।

पांच महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन

समारोह के दौरान बाघ संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े पांच प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें एनटीसीए आउटरीच जर्नल 'स्ट्राइप्स' (जुलाई 2026 अंक), 24 टाइगर रिजर्व की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट, भारत के टाइगर लैंडस्केप में स्लॉथ भालुओं के आवास उपयुक्तता मूल्यांकन रिपोर्ट, 'टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड' तथा 'द रहमान खेड़ा टाइगर' शामिल हैं।

भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

वैश्विक बाघ दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान, वैज्ञानिक प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार इको-टूरिज्म, ज्ञान साझाकरण और जनभागीदारी के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत और निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।

पृष्ठभूमि

करीब एक शताब्दी पहले एशिया में लगभग 1 लाख जंगली बाघ पाए जाते थे, लेकिन आज वे अपने ऐतिहासिक आवास के 8 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र में सीमित रह गए हैं। अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, आवास का विनाश, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों ने बाघों की संख्या को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में 13 बाघ-आवास वाले देशों ने ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP) की शुरुआत की और 29 जुलाई को प्रतिवर्ष वैश्विक बाघ दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य बाघ संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और बाघों तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गुरु पूर्णिमा: ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का पावन पर्व

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"गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। इस दिन उनका जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की तथा अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया। उनके अतुलनीय योगदान के कारण उन्हें 'आदि गुरु' के रूप में सम्मानित किया जाता है।

भारतीय परंपरा में गुरु का अर्थ केवल विद्यालय के शिक्षक तक सीमित नहीं है। माता-पिता, आचार्य, संत, आध्यात्मिक गुरु और वे सभी लोग, जो हमें जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं, गुरु के समान हैं। गुरु हमारे भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने और जीवन के अंधकार को दूर करने का कार्य करते हैं।

आज के आधुनिक और डिजिटल युग में जानकारी प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही ज्ञान, विवेक और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन आज भी गुरु ही प्रदान करते हैं। तकनीक हमें सूचना दे सकती है, परंतु जीवन जीने की कला, सही निर्णय लेने की क्षमता और मानवीय मूल्यों का बोध गुरु ही कराते हैं।

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। यह दिन हमें अपने जीवन में उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है, जिन्होंने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चा ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ विनम्रता, अनुशासन और सेवा की भावना जुड़ी हो।

आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरु के बताए आदर्श—सत्य, ईमानदारी, करुणा, संयम और सदाचार—पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु से मिले संस्कारों को जीवन में उतारे, तो एक सशक्त, शिक्षित और नैतिक समाज का निर्माण संभव है।

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम अपने सभी गुरुओं को नमन करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ज्ञान, संस्कार और मानवता से परिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लें।

"गुरु का सम्मान केवल एक दिन का नहीं, बल्कि जीवनभर की साधना और कृतज्ञता का प्रतीक है।"

वैश्विक बाघ दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं, बाघ संरक्षण के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता

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 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक बाघ दिवस (Global Tiger Day) के अवसर पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोगों के लिए यह गर्व की बात है कि विश्व की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में निवास करती है।

उन्होंने कहा कि भारत के बाघ संरक्षण प्रयास प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और देशवासियों की सामूहिक इच्छाशक्ति से संचालित होते हैं।

मोदी ने विज्ञान-आधारित संरक्षण, जनभागीदारी तथा सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो बाघ संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाते हैं।

प्रधानमंत्री ने बाघों की सुरक्षा में वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के समर्पण एवं योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

एक्स (X) पर अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा:

“वैश्विक बाघ दिवस पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत के लोगों को इस बात पर गर्व है कि विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघ हमारे देश में हैं। भारत के बाघ संरक्षण के प्रयास प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और हमारे लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति से सशक्त होते हैं। हम विज्ञान-आधारित संरक्षण, जनभागीदारी और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराते हैं, जो बाघ संरक्षण को और मजबूत बनाते हैं।”

“हमारे वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के अथक प्रयास तथा समर्पण ने भी बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी भावना के साथ भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

मामूली विवाद ने लिया खूनी रूप: युवक की धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर हत्या

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 डोंगरगढ़। शहर के राधिका नगर (कश्मीरी पारा) इलाके में मंगलवार रात एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ मामूली कहासुनी के बाद एक युवक की धारदार हथियार से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा और शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।


मामूली विवाद में खूनी वारदात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कश्मीरी पारा निवासी धन्नू ठाकुर (33) मंगलवार रात लगभग 9 बजे अपने घर के पास मौजूद था। इसी दौरान किसी बात को लेकर एक ही परिवार के कुछ लोगों से उसकी बहस हो गई। विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने आपा खो दिया और धन्नू पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमले कर दिए। अत्यधिक खून बह जाने के कारण युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस जाँच व आरोपियों की तलाश तेज

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँचकर पूरे इलाके की घेराबंदी की। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है।

पुलिस का बयान:

"मामले में मर्ग कायम कर जाँच शुरू कर दी गई है। हत्या के कारणों का सटीक पता लगाया जा रहा है। वारदात में शामिल आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।"

चीनी की जमाखोरी पर केंद्र की नकेल: व्यापारी अब 4,000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे

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 नई दिल्ली । देश में आगामी त्योहारों के सीजन से पहले चीनी की जमाखोरी रोकने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देशभर के चीनी व्यापारियों पर सख्त 'स्टॉक लिमिट' (भंडारण सीमा) लागू कर दी है। यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होकर 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।


इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बाजार में चीनी की सुगम उपलब्धता बनाए रखना और कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले सट्टेबाजों पर रोक लगाना है।

क्या हैं नए नियम?

स्टॉक सीमा: देश का कोई भी चीनी डीलर या व्यापारी किसी भी समय 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा।

समय सीमा: व्यापारी चीनी प्राप्त होने की तिथि से अधिकतम 30 दिनों तक ही उसका भंडारण कर सकेंगे।

कानूनी आधार: यह पाबंदी 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' और 'चीनी (नियंत्रण) आदेश, 2025' के तहत लागू की गई है।

सट्टेबाजी और 'कागजी व्यापार' पर नकेल

सरकार ने हाल के दिनों में चीनी की एक्स-मिल (कारखाना) कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। जांच में सामने आया है कि कुछ व्यापारी और बिचौलिए मिलों से चीनी का वास्तविक भौतिक उठाव (Physical Delivery) किए बिना केवल कागजों पर सौदेबाज़ी और सट्टेबाजी कर रहे थे, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। सरकार का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा दाम मांग-आपूर्ति के वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाते।

हर हफ्ते देना होगा स्टॉक का हिसाब

नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी डीलरों और व्यापारियों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के आधिकारिक पोर्टल पर नियमित रूप से पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।

व्यापारियों को हर सप्ताह यह अपडेट करना होगा कि उनके पास कितनी चीनी आई, कितनी बेची गई और गोदाम में कितना स्टॉक बाकी है।

सरकार ने चेतावनी दी है कि स्थिति की समीक्षा के बाद आवश्यकता पड़ने पर और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में हुए शामिल

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के पदक विजेता खिलाड़ियों को दी प्रोत्साहन राशि

खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने छत्तीसगढ़ में गंभीरता से हो रहे काम, उत्कृष्ट खेल मिशन के लिए इस साल 100 करोड़ का प्रावधान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 

राज्य में खेलों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव - साय

कॉन्क्लेव के सुझावों और निष्कर्षों को शामिल कर बनाएंगे प्रभावी कार्ययोजना - उप मुख्यमंत्री  अरुण साव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन सत्र में शामिल हुए। उन्होंने राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित कॉन्क्लेव में विगत मार्च-अप्रैल में छत्तीसगढ़ में हुए देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। छत्तीसगढ़ में पहली बार इस स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न सत्रों में देशभर से आए खेल प्रशासकों, नीति निर्माताओं, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट्स, नामचीन खिलाड़ियों, विशेषज्ञों और खेल संघों के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, खेल प्रतिभाओं की खोज, प्रशिक्षण और सुदृढ़ खेल अधोसंरचना के रोडमैप पर दिनभर मंथन किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के बीच आज दिनभर हुए गंभीर विचार-विमर्श से राज्य में खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के कार्यों को सार्थक एवं प्रभावी दिशा मिलेगी। राज्य में खेलों के विकास के लिए यह कॉन्क्लेव मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने छत्तीसगढ़ में गंभीरता से काम हो रहे हैं। उत्कृष्ट खेल मिशन के अंतर्गत खेल अधोसंरचना को मजबूत करने इस साल के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। हमने हाल ही में प्रदेशभर के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दी है, जिन्हें आगे जाकर सरकार नौकरी में लाभ देगी। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों को खेलने के लिए अच्छा मंच उपलब्ध कराने बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन राज्य में हुए हैं। बस्तर ओलंपिक में करीब चार लाख और सरगुजा ओलंपिक में लगभग साढ़े तीन लाख खिलाड़ियों ने भागीदारी की है। राज्य की खेल प्रतिभाओं को उचित अवसर और संसाधन देने की आवश्यकता है। इसके लिए हम लोग सक्रियता से काम कर रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव कहा कि यह कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में बहुत मददगार होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में खेल और खिलाड़ियों की तरक्की और बेहतरी के लिए लगातार काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों में प्राकृतिक, शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत युवा निकलते हैं। प्राथमिक कक्षाओं से ही बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचान कर उन्हें तराशने और संवारने की कार्ययोजना पर हम काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज विशेषज्ञों के जो अमूल्य सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त हुए हैं, उन पर निश्चित रूप से अमल किया जाएगा। आज के निष्कर्षों को शामिल कर हम विस्तृत कार्ययोजना बनाएंगे और उसे प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करेंगे।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक तनुजा सलाम, ओलंपियन जिन्सन जॉनसन, प्रख्यात शिक्षाविद एवं खेल वैज्ञानिक डॉ. रत्नेश सिंह, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, हाई परफॉर्मेंस एनॉलिस्ट रोनक कोठारी, पीईएफआई के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पियूष जैन, खेलो इंडिया के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान सहित प्रदेश के अनेक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, सभी जिलों के खेल अधिकारी एवं खेल संघों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में कॉन्क्लेव में शामिल हुए।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक जीतने वाले 11 खिलाड़ियों और 3 टीमों को मिली प्रोत्साहन राशि, छत्तीसगढ़ ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदकों सहित जीते थे कुल 19 पदक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन सत्र में इस साल छत्तीसगढ़ में हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने इस वर्ष 3 अप्रैल को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदकों सहित कुल 19 पदक जीते थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में निकिता ने भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीता था। वहीं रिषिका कश्यप ने भारोत्तोलन, अनुष्का भगत ने तैराकी, लक्ष्मण सोढ़ी, अभिषेक, डमरू कुमार, गजेन्द्र ठाकुर और तिलक बारसे ने एथलेटिक्स में रजत पदक जीते थे। मनीष कुमार ने एथलेटिक्स, निखिल खलको ने तैराकी और लक्की बाबू ने भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीते थे।

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को दो लाख रुपए, रजत पदक विजेताओं को डेढ़ लाख रुपए और कांस्य पदक विजेताओं को एक लाख रुपए के चेक प्रदान किए। वहीं टीम खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला फुटबॉल टीम को 22 लाख रुपए, रजत पदक विजेता पुरूष फुटबॉल टीम को साढ़े 16 लाख रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाली पुरूष हॉकी टीम को 9 लाख रुपए की राशि दी गई।

रूस-यूक्रेन युद्ध फिर हुआ तेज: पूर्वी यूक्रेन पर रूसी हमले, 7 लोगों की मौत, कई घायल

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कीव- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्वी यूक्रेन के कई शहरों पर रूस ने ताजा मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमलों के बाद कई रिहायशी इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली और आपातकालीन सेवाएं राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।

यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध को ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक बार फिर दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसका असर केवल यूरोप ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें युद्ध के अगले घटनाक्रम और संभावित शांति प्रयासों पर टिकी हुई हैं।

मध्य पूर्व पर दुनिया की नजर: ट्रंप-नेतन्याहू की अहम मुलाकात, ईरान से लेकर गाजा तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

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वॉशिंगटन- वैश्विक राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व लगातार तनाव और संघर्ष का सामना कर रहा है, यह बैठक क्षेत्र की भविष्य की रणनीति तय करने में अहम मानी जा रही है।

बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, गाजा की स्थिति, लेबनान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां, क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिका-इजरायल रक्षा सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात के नतीजे केवल अमेरिका और इजरायल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, कूटनीतिक समीकरणों और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर ईरान को लेकर दोनों देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति तथा स्थिरता की दिशा में ठोस कदमों की उम्मीद कर रहा है। बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान और संभावित फैसलों को वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूरोप में भीषण जंगल की आग का कहर: फ्रांस और स्पेन में बड़े पैमाने पर तबाही, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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पेरिस/मैड्रिड- यूरोप में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के बीच फ्रांस और स्पेन के कई हिस्सों में जंगल की आग तेजी से फैल रही है। आग की चपेट में आने से लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जबकि हजारों लोगों को एहतियातन अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

दमकल विभाग, आपदा राहत एजेंसियां और सुरक्षा बल दिन-रात आग पर काबू पाने में जुटे हैं। कई इलाकों में तेज हवाओं और अत्यधिक तापमान के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जंगल की आग का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय आबादी, वन्यजीव, कृषि और पर्यटन क्षेत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद कर दिए गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाएं लगातार सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र और जलवायु विशेषज्ञों ने इस घटना को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का गंभीर संकेत बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, लंबे समय तक पड़ने वाला सूखा और चरम मौसम की घटनाएं भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को और बढ़ा सकती हैं।

प्रशासन ने लोगों से प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एजेंसियों से संपर्क करने की अपील की है।

असम में बाढ़ का कहर जारी: 4.45 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

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गुवाहाटी- असम में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 4.45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

बाढ़ के चलते हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। केंद्र और राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में समन्वय के साथ तेजी लाई जा रही है।

इस बीच, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। हालांकि कई क्षेत्रों में जलस्तर घटने के साथ हालात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और अपर असम में सड़क एवं संचार संपर्क पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इसके बावजूद कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है और राहत कार्य जारी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान, बेहतर जल प्रबंधन और बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। 

रायपुर में 70 लाख रुपये की चोरी का खुलासा, 12 दिन पहले रखे गए कुक ने दिया वारदात को अंजाम

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रायपुर- राजधानी रायपुर में एक कारोबारी के घर हुई करीब 70 लाख रुपये की नकदी और जेवरात चोरी के मामले का पुलिस ने महज छह घंटे में खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि सिर्फ 12 दिन पहले काम पर रखा गया कुक निकला।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने घर की गतिविधियों और कीमती सामान की पूरी जानकारी जुटाने के बाद मौके का फायदा उठाकर लाखों रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों का पीछा किया। लगातार कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महज छह घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी का बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने नौकरी के दौरान घर की सुरक्षा व्यवस्था और दिनचर्या को अच्छी तरह समझ लिया था, जिसके बाद उसने वारदात की योजना बनाई।

पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की वारदात में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है।

CGPSC भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी पर ED का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) से जुड़े मामले में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी के खिलाफ जांच को गति देते हुए ED ने मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध संपत्तियों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि ED यह जांच कर रही है कि कथित भर्ती अनियमितताओं के माध्यम से अर्जित धन का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और उसे वैध दिखाने के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया। एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

यह कार्रवाई राज्य में चर्चित CGPSC भर्ती घोटाले से संबंधित है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है और अब ED धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला प्रदेश की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है और इसकी जांच पर अभ्यर्थियों तथा आम जनता की नजर बनी हुई है।

सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री केदार कश्यप

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मंत्री ने की विभागीय कामकाज की समीक्षा ,किसानों के हित में दिए कड़े निर्देश

​रायपुर- ​सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के सभाकक्ष में सहकारिता विभाग की एक महत्वपूर्ण एवं उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई।  इस बैठक में विभाग की 16 प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और मैदानी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

समीक्षा बैठक के दौरान सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है। डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा।

​प्रमुख योजनाओं की समीक्षा एवं कड़े निर्देश:

​बैठक में उपस्थित अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को मंत्री श्री कश्यप ने निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। 

बैठक में मंत्री केदार कश्यप ने छतीसगढ़ में डेयरी तथा मत्स्य सोसाइटियों के कार्य प्रणाली को सक्रिय करने का निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ में दुग्ध सोसाइटियों को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ एओयू के तहत कार्ययोजना बनाकर दुग्ध उत्पादन तथा प्रसंस्करण करने के निर्देश दिए।

डिजिटलाइजेशन एवं पारदर्शिता: पैक्स (PACS) के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।

​किसान कल्याण व ऋण-खाद वितरण: अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई। प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 14 लाख से अधिक किसानों को 6932 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 79 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया।

​बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार: ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया।

​गोदाम निर्माण एवं नवगठित पैक्स 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व RIDF योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत  आबंटित 725 गोदामों में 712 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 13 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया।

जन-शिकायतें एवं ई-ऑफिस सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए।

​धान उपार्जन का अंतिम निराकरण: धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए।

​बैठक के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।

इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाए छत्तीसगढ़ रमेश शर्मा, मार्कफेड एमडी जितेंद्र शुक्ला,अपेक्स बैंक प्रबंध संचालक के एन कांडे, अपर पंजीयक यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को रेखांकित करेगी ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला

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'मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की सकारात्मक तस्वीर को कार्टून कला के माध्यम से मिलेगी नई अभिव्यक्ति

रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।

इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।

कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।

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