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वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर दुर्लभ पैंगोलिन का सुरक्षित रेस्क्यू

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वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जान

रायपुर- वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

रविवार को ग्राम कुंजंटोला निवासी जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर महेंद्र बघेल और शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

सफलता की कहानी- तेन्दूपत्ता संग्रहण की नई पहल से अबुझमाड़ के 22 गांवों को मिला लाभ

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गांव के पास खुला फड़, 365 संग्राहकों को मिला सीधा आर्थिक लाभ

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया माध्यम बन गई है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली।

पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। अब गांव के पास फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च बचा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनकी आय बढ़ी है और काम करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। इससे ग्रामीणों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रति उत्साह बढ़ा। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।

इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इन फड़ों के माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।

संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।


इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।

छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल केवल तेन्दूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है।

शिवालयों की नगरी आरंग में गूंजेगी भक्ति की तान, भव्य शिवभक्ति गीत की शूटिंग पूरी

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​डिजिटल डेस्क, आरंग: "शिवालयों की नगरी" के नाम से सुप्रसिद्ध नगर आरंग अब भक्ति, संगीत और कला के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। अंचल के उभरते व सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भगवान शिव को समर्पित एक भव्य और अत्यंत मधुर शिवभक्ति गीत का निर्माण किया जा रहा है।

इस भक्ति गीत के बोल "कांशी जैइसे नगरी मोर आरिंग" हैं, जिसे आरंग अंचल के लोकप्रिय लोकगायक गंगा साहू ने कलमबद्ध किया है। इस गीत की परिकल्पना पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने की है।

​गीत की प्रमुख विशेषताएँ और टीम वर्क:

​मधुर स्वर: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा और लोकगायक गंगा साहू ने गीत को अपनी सुरीली आवाज दी है।

​संगीत संयोजन: भिलाई के प्रख्यात संगीतकार देवेंद्र साहू ने इस गीत को मनमोहक संगीत से सजाया है।

​फिल्मांकन व कोरियोग्राफी: प्रख्यात कोरियोग्राफर उत्तम साहू की टीम और कैमरामैन वीरू साहू ने गीत के फिल्मांकन में अहम भूमिका निभाई है।

​नगर के सभी शिवालयों के होंगे एक साथ दर्शन

​इस शिवभक्ति गीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आरंग नगर में स्थापित सभी प्रमुख शिवलिंगों और मंदिरों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। हाल ही में सोमवार को पंचमुखी महादेव मंदिर, बाबा बागेश्वर नाथ मंदिर, बस स्टैंड तथा समलेश्वरी मंदिर परिसर सहित नगर के विभिन्न शिवालयों में गीत के दृश्यों को शूट किया गया।

​शूटिंग के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो पूरे दिन कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही।

​स्थानीय लोगों में उत्साह

​आरंग के नागरिकों ने इस सांस्कृतिक व धार्मिक पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस गीत के माध्यम से न केवल देश-प्रदेश के लोग आरंग के पावन शिवालयों के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि इससे आरंग की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।

सफलता की कहानी -अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिली नई उड़ान

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बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सीजीपीएससी ने सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर किए जारी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने गृह (पुलिस) विभाग अंतर्गत सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग एवं प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 के संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिए हैं। संशोधित मॉडल उत्तर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in पर अपलोड कर दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत कुल 341 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए 12 जुलाई को राज्य के 33 जिलों के 183 परीक्षा केंद्रों में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के मॉडल उत्तर 13 जुलाई को जारी कर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 निर्धारित थी।

आयोग ने निर्धारित अवधि में प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का विषय विशेषज्ञ समिति से परीक्षण कराया। विशेषज्ञों की अनुशंसा एवं सक्षम परीक्षण के आधार पर संशोधित अंतिम मॉडल उत्तर तैयार किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं अंतिम मॉडल उत्तरों के आधार पर अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान  प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

सफलता की कहानी-सफर में भटकी बिहार की महिला को मिला नया सहारा

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सखी वन स्टॉप सेंटर दंतेवाड़ा ने परिवार से कराया सुरक्षित मिलन

रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा जिले में इसका एक संवेदनशील उदाहरण देखने को मिला, जहां बिहार की एक महिला को सुरक्षित आश्रय देकर उसके परिवार से मिलाया गया।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली सविता देवी अपने मायके से ससुराल जाने के लिए मोतीपुर स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वह सो गईं और कई स्टेशनों को पार करते हुए छत्तीसगढ़ के किरंदुल (जिला दंतेवाड़ा) पहुंच गईं। वहां से वह पैदल निकल पड़ीं और भटकते-भटकते भांसी तक पहुंच गईं।

स्थानीय लोगों ने उनकी स्थिति देखकर भांसी थाना को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा में अस्थायी आश्रय दिलाया।

सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर और थाना काटी से संपर्क किया। महिला का नाम, पता और फोटो भेजकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि महिला मुजफ्फरपुर जिले की ही निवासी हैं।

इसके बाद महिला के परिवार से संपर्क किया गया और उन्हें पूरी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही उनके पति दंतेवाड़ा पहुंचे और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।

महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है और वह पिछले करीब डेढ़ महीने से लापता थीं। परिवार ने उन्हें कई स्थानों पर खोजा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया था। दंतेवाड़ा में पत्नी को सुरक्षित देखकर उन्हें बड़ी राहत मिली।

उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा और महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली मदद ने उनके परिवार को फिर से एक कर दिया।

यह घटना दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श, समन्वय और परिवार से पुनर्मिलन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में सरकार की संवेदनशील पहल का प्रभावी उदाहरण है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

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डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

​छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में सुधार: सुशासन, डिजिटलीकरण और जन-राहत का नया सवेरा

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 विष्णु प्रसाद वर्मा ( सहायक संचालक)

​रायपुर : राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण और रजिस्ट्री जैसे कार्य ऑनलाइन और पारदर्शी बनाए गए हैं। इसके मुख्य लाभों में ऑटो म्यूटेशन, मोबाइल ऐप से रिकॉर्ड डाउनलोड और डिजिटल भुगतान शामिल हैं।


​ आम जनता के लिए राजस्व विभाग से जुड़े काम हमेशा से पेचीदा और समय लेने वाले माने जाते रहे हैं। जमीन के नामांतरण से लेकर कोर्ट के चक्कर काटने और नामांतरण-सीमांकन में होने वाली देरी से आम नागरिक अक्सर परेशान रहता था। इसी प्रशासनिक जटिलता को समाप्त कर प्रक्रिया को पारदर्शी, सुलभ और जन-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में कई युगांतरकारी और जनोन्मुख संशोधन किए हैं। यह सुधार न केवल आधुनिक दौर की डिजिटल जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि राज्य में सुशासन की नींव को और अधिक मजबूत करते हैं।

​इन संशोधनों की सबसे बड़ी खासियत राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण है। अब धारा 33 के तहत नोटिस और आधिकारिक सूचना प्रेषित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानूनी मान्यता दे दी गई है। इसके साथ ही, धारा 30 में संशोधन करते हुए राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण को अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़ी विवादित स्थितियों से निपटने के लिए धारा 107 के तहत अधिसूचित जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को अधिमान्यता दी गई है, जिससे जमीन से जुड़े सटीक आंकड़े और सीमांकन पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगे।

जमीनों के अनावश्यक विखंडन और भू-अर्जन के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। धारा 70 में किए गए संशोधन के अनुसार अब 05 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक लगा दी गई है, ताकि कृषि जोत का आकार व्यावहारिक बना रहे। वहीं धारा 165, 172 और 178 में बदलाव कर यह सुनिश्चित किया गया है कि भू-अर्जन (Land Acquisition) की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना या आशय पत्र जारी होते ही संबंधित भूमि के अंतरण, व्यपवर्तन (Divergent) और खाता विभाजन पर तुरंत रोक लग जाए, जिससे किसी भी तरह के अवैध लाभ या धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।

​ आम जनता को सबसे बड़ी राहत जमीन के नामांतरण (Mutation) और पारिवारिक उत्तराधिकार के नियमों में मिली है। धारा 110 में किए गए क्रांतिकारी संशोधनों के तहत अब 'स्वतः नामांतरण' (Auto e-Mutation) की व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत पंजीयन (रजिस्ट्री) विभाग को ही नामांतरण का वैधानिक अधिकार दे दिया गया है। यानी अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया भी सुगम हो जाएगी। इसके अलावा, राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध विधिक वारिसानों के पक्ष में स्वतः ई-नामांतरण का प्रावधान किया गया है। अब भूमि स्वामी को यह अधिकार भी मिल गया है कि वह अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध करा सके, जिससे भावी पीढ़ी को पारिवारिक विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकेगी।

​ संक्षेप में कहें तो, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए ये संशोधन केवल नियमों का बदलाव भर नहीं हैं, बल्कि यह आम जनता के समय, धन और मानसिक तनाव को बचाते हुए एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और जन-हितैषी राजस्व व्यवस्था की स्थापना की दिशा में राज्य सरकार का एक मील का पत्थर है।

महासमुंद बाल संप्रेक्षण गृह से खिड़की की ग्रिल तोड़कर 8 अपचारी बालक फरार

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 महासमुंद। जिले के बरोंडा बाजार स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए सोमवार तड़के 8 अपचारी बालक खिड़की की ग्रिल तोड़कर फरार हो गए। घटना रात करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।


विभिन्न गंभीर मामलों में थे निरुद्ध

जानकारी के अनुसार, फरार हुए आठों नाबालिग पिछले 4-5 महीनों से विभिन्न आपराधिक प्रकरणों के तहत संप्रेक्षण गृह में रखे गए थे। इनमें से एक पर दुष्कर्म, दो पर चोरी तथा अन्य के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट समेत अन्य धाराएं दर्ज हैं। ये नाबालिग महासमुंद, सरायपाली, धमतरी और पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न थाना क्षेत्रों के निवासी हैं।

अधिकारी पहुंचे मौके पर, सर्च ऑपरेशन जारी

घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों और आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर फरार बालकों की तलाश में जुटी हुई हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, दो साल पहले भी हुई थी ऐसी घटना

इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग दो वर्ष पूर्व भी इसी संप्रेक्षण गृह से बच्चों के भागने का मामला सामने आया था। फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा में चूक किस स्तर पर हुई और बालकों ने ग्रिल काटने के लिए किस साधन का उपयोग किया।

वन विभाग ने जारी किए IFS प्रशिक्षु अधिकारियों के पदस्थापना आदेश, विभिन्न वनमंडलों में मिली जिम्मेदारी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग ने 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) के प्रशिक्षु अधिकारियों के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न वनमंडलों में उप वनमंडलाधिकारी (SDO) के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें सरगुजा, कटघोरा, सुकमा, नारायणपुर और राजनांदगांव वनमंडल शामिल हैं।


वन विभाग के अनुसार, प्रशिक्षण अवधि के दौरान सभी प्रशिक्षु अधिकारी संबंधित वनमंडलों में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के रूप में कार्य करेंगे। इस दौरान उन्हें वन प्रबंधन, वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा विभागीय कार्यप्रणाली का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।


आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण अवधि पूर्ण होने के बाद भी ये अधिकारी फिलहाल इन्हीं उप वनमंडलों में अपनी सेवाएं देते रहेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को मैदानी (फील्ड) स्तर पर प्रशासनिक व तकनीकी अनुभव प्रदान कर भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है।

यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह बरी, कोर्ट से मिली बड़ी राहत

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 नई दिल्ली : महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए बृजभूषण शरण सिंह के साथ-साथ सह-आरोपी विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है।


यह मामला काफी समय से सुर्खियों में था, जिसमें छह महिला पहलवानों की शिकायत के आधार पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे।

'पहले दिन से था अदालत पर भरोसा'

कोर्ट का फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, "माननीय जज ने हमें सम्मान के साथ बरी किया है। मैंने जांच के पहले दिन ही कहा था कि अगर मुझ पर लगा एक भी आरोप साबित हो जाता है, तो मैं सख्त से सख्त सजा भुगतने को तैयार रहूंगा। आज अदालत के फैसले ने साबित कर दिया कि जो बात मैंने पहले दिन कही थी, वही सच थी।"

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी तरफ क्या रणनीति थी, इसका मुझे अंदाजा नहीं था, लेकिन मुझे हमेशा से न्याय प्रणाली और सच पर पूरा भरोसा था। आज का दिन मेरे लिए बेहद खुशी का पल है कि अंततः सत्य की जीत हुई।

पैसेंजर ट्रेन में लगी भीषण आग, इंजन समेत तीन बोगियां खाक; मची अफरा-तफरी

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 सिमरी बख्तियारपुर (बिहार): बिहार के सहरसा जिले में स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार तड़के एक बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन संख्या 63344 के इंजन में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने आसपास की तीन बोगियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे, जिन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए ट्रेन से कूदकर अपनी जान बचाई। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।


सुबह 3 बजे हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना तड़के लगभग 3:00 से 3:40 बजे के बीच की है। ट्रेन जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकी, अचानक उसके इंजन से तेज धुआं निकलने लगा और कुछ ही देर में आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। आग इतनी भयावह थी कि स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यात्री जान बचाने के लिए बदहवास होकर बोगियों से नीचे कूदने और प्लेटफॉर्म की तरफ भागने लगे।

दमकल विभाग ने पाया काबू

घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। असिस्टेंट फायर ऑफिसर निरंजन कुमार ने बताया, "रेलवे इंजन में आग लगने की सूचना मिलते ही सहरसा फायर स्टेशन से एक फोम टेंडर और एक वॉटर टेंडर को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। स्थिति अब नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय घटना या जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।"

यात्रियों को हुई भारी परेशानी

ट्रेन में सवार एक यात्री ने आपबीती बताते हुए कहा कि अचानक आग लगने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना के कारण रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ और यात्री घंटों स्टेशन पर फंसे रहे।

फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। रेलवे प्रशासन द्वारा मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

चरित्र पर शक में हैवान बना पति: नशे में पत्नी की हंसिया से काटकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

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 भिलाई/कुम्हारी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुम्हारी थानांतर्गत महामायापारा में चरित्र पर संदेह के चलते एक पति ने अपनी ही पत्नी पर हंसिया से जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना के बाद कुम्हारी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त हथियार जब्त कर लिया है।


शादी के 4 साल बाद ही उजड़ा परिवार

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, महामायापारा निवासी घनश्याम यादव (25) की शादी करीब 4 साल पहले दुर्गा यादव (22) के साथ हुई थी। दोनों का 6 महीने का एक मासूम बच्चा भी है। घनश्याम अत्यधिक शराब पीने का आदी था और आए दिन अपनी पत्नी के चरित्र पर बेवजह शक करता था। इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद और मारपीट होती रहती थी।

सुबह 9:30 बजे हुआ विवाद, हंसिया से किए ताबड़तोड़ वार

रविवार सुबह लगभग 9:30 बजे इसी बात को लेकर दंपति के बीच फिर से बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि घनश्याम ने आपा खो दिया और घर में रखे हंसिया से दुर्गा के माथे, गले और पीठ पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। लहूलुहान अवस्था में महिला वहीं गिर पड़ी।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची कुम्हारी पुलिस ने घायल महिला को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

आरोपी गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी

वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी घनश्याम यादव को हिरासत में ले लिया और कड़ाई से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयुक्त हंसिया भी बरामद कर लिया है।

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