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CG NEWS : नौकरी का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

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 धमतरी। कुरूद थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला को सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर कुरूद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।


पुलिस के अनुसार, महिला रोजगार की तलाश में थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात महेंद्र साहू और अजय वर्मा से हुई। आरोप है कि दोनों युवकों ने महिला को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और अपने साथ ले गए। महिला के मुताबिक, दोनों उसे मेघा पुल के पास स्थित एक नर्सरी की ओर ले गए। रास्ते में सुनसान स्थान देखकर आरोपियों ने उसके साथ जबरदस्ती की और घटना के बाद मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद महिला ने कुरूद थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पहले आरोपी महेंद्र साहू, निवासी बगदही, जिला बालोद के संबंध में जानकारी मिली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी अजय वर्मा की तलाश शुरू की।

अजय घटना के बाद से फरार था। पुलिस टीम ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। मामले की विवेचना जारी है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।

रेलवे सुरंग में बेखौफ घूमता दिखा तेंदुआ, लोको पायलट की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही-छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग के खोंगसरा-भनवारटंक रेलखंड की एक रेलवे सुरंग में तेंदुआ दिखाई देने से रेल कर्मचारियों और आसपास के लोगों में हलचल मच गई। सुरंग के भीतर रेलवे ट्रैक पर तेंदुए के बेखौफ घूमने का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, तेंदुआ रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच चलता हुआ सुरंग के अंदर जाता दिखाई दिया। इसी दौरान रेलकर्मियों की नजर उस पर पड़ी। बाद में वहां से गुजर रहे लोको पायलट ने भी तेंदुए को देखा और सावधानी बरतते हुए ट्रेन की गति कम कर दी। इस सतर्कता के चलते वन्यजीव के साथ संभावित टक्कर टल गई।

सुरंग में तेंदुए की मौजूदगी से बढ़ी चिंता

वन क्षेत्र से सटे इस रेलमार्ग पर जंगली जानवरों की आवाजाही कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन रेलवे ट्रैक और विशेषकर सुरंग के भीतर तेंदुए की मौजूदगी ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन और वन्यजीव के बीच अचानक आमना-सामना होने की स्थिति दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

सामने आए वीडियो में तेंदुआ रेलवे पटरी के बीच आराम से चलता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद रेल कर्मचारियों तथा आसपास के लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

लोको पायलट की सूझबूझ से बची वन्यजीव की जान

घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोको पायलट की सतर्कता रही। तेंदुए को ट्रैक पर देखकर ट्रेन की रफ्तार कम करना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से वन्यजीव की मौत हो सकती थी, लेकिन समय रहते सावधानी बरते जाने से संभावित दुर्घटना टल गई।

रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत

यह घटना एक बार फिर बताती है कि जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। ऐसे संवेदनशील रेलखंडों पर वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी, ट्रेन चालकों को सतर्क करने की व्यवस्था और रेलवे तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ऐसी घटनाओं में वन्यजीवों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

तेंदुए का सुरंग में दिखाई देना जहां प्रकृति और वन्यजीवों की मौजूदगी का प्रमाण है, वहीं यह मानव गतिविधियों और वन्यजीव आवास के बीच बढ़ते संपर्क की ओर भी संकेत करता है। ऐसे में विकास के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

संदेश साफ है—रेल की रफ्तार से ज्यादा महत्वपूर्ण है जीवन की सुरक्षा। लोको पायलट की सतर्कता ने न केवल एक संभावित हादसा टाला, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी का भी उदाहरण पेश किया।

धनपुर की पुरातात्विक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण और संवर्धन का नया आधार

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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर एवं शहरखेरवा का किया व्यापक सर्वेक्षण

रायपुर- संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देशानुसार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर से पहुंचे चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का व्यापक मैदानी सर्वेक्षण एवं सूक्ष्म निरीक्षण किया।

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर के साथ बेनीबाई, भस्मासुर टापू एवं शहरखेरवा स्थित पुरातात्विक धरोहरों का निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की आवश्यकता तथा भविष्य में विकसित की जा सकने वाली संभावनाओं का अध्ययन किया।

उल्लेखनीय है कि मंत्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश के बाद संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइंस रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।

चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया मैदानी अध्ययन

रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज एवं शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे। दल ने विभिन्न स्थलों का मौके पर पहुंचकर बारीकी से अध्ययन किया तथा पुरातात्विक अवशेषों, मूर्तियों और स्मारकों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

धनपुर की प्राचीन धरोहरों का सूक्ष्म निरीक्षण

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर में स्थित प्राचीन मंदिर एवं वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों तथा उनके संरक्षण की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

इसके साथ ही धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य पुरावशेषों का भी गहन अवलोकन किया गया। दल ने इन पुरावशेषों के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का अध्ययन करते हुए उनके संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किया।

प्राचीन मंदिर परिसर का निरीक्षण करते हुए विशेषज्ञों ने संरचना के संरक्षण एवं आवश्यक सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का भी जायजा लिया।

बेनीबाई और भस्मासुर टापू की धरोहरों का भी अध्ययन

सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई एवं भस्मासुर टापू में संरक्षित एवं स्थापित प्राचीन मूर्तियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इन धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव तथा संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। मौके पर उपलब्ध पुरातात्विक सामग्री और स्मारकों की स्थिति को देखते हुए आवश्यक संरक्षण उपायों की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।

शहरखेरवा में पुरातात्विक संभावनाओं की तलाश

विशेषज्ञ दल ने ऐतिहासिक महत्व के स्थल शहरखेरवा का भी विस्तृत सर्वे किया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों एवं संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं का अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने स्थल की विशेषताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संरक्षण एवं आगे के अध्ययन की संभावनाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर ने विशेषज्ञ दल के साथ की बैठक

क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं निरीक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने रायपुर से आए विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली। बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरतों तथा आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों एवं स्मारकों के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित आवश्यक कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इन धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए योजनाबद्ध और व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि जिले की इस महत्वपूर्ण विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जा सके।

संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की भी संभावनाएं

धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का यह सर्वेक्षण केवल संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में इन स्थलों को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी आधार तैयार कर सकता है। व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन ऐतिहासिक स्थलों को जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पूरे फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायत धनपुर की टीम विशेषज्ञ दल के साथ मौजूद रही और सर्वेक्षण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन

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धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों ने दिए सुझाव 

​रायपुर- समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस द्वय शत्रुघ्न सिंह और एम.के.राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े के समक्ष आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों  की बैठक आयोजित कर समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव लिए गए।  संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक और सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है। पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है। इसके तहत मौखिक तलाक और कुछ अन्य धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव  देने के लिए उपस्थित रहे। 

समान नागरिक संहिता के लिए विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में  सुझाव देने वालों में उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के जान राजेश पॉल, अध्यक्ष मुस्लिम समाज सलाम रिजवी, अध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी इंद्रजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण ललित चंद्राकर,  राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा शामिलथे स इसी प्रकार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य  सरला कोसरिया तथा दीपिका सोरी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग विशेषर पटेल, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष लखन लाल धीवर, जैतू साव मठ के महंत राम सुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

एक समान विधिक ढाँचा तैयार करने की दिशा में बढ़ाया कदम 

छत्तीसगढ़ में सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान व न्यायसंगत अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाये जाने का सुझाव दिया। ​प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम में​ सर्व समावेशी समानता को शामिल किया गया है। धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक ढाँचा तैयार करना के दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसमें उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना और असमानता पैदा करने वाले नियमों को समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है।

जनजातीय परंपराओं का संरक्षण

राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। ​प्रदेशव्यापी जन-संवाद से समावेशी प्रारूप की तैयारी के लिए गठित यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक- धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से राज्य में एक पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।

“बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले रक्षक नहीं, भक्षक हैं” — गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के सरकारी स्कूल में शिक्षकों की हड़ताल और रैली का कोई असर देखने को नहीं मिला। विद्यालय के शिक्षक  गेंदलाल कोकडिया एवं हेमन्त कुमार देवांगन नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहे और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रखी। वहीं संकुल खट्टा सहित आसपास के अनेक विद्यालयों में शिक्षक हड़ताल में शामिल रहे और विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित रहा।

इस अवसर पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि “रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शुभता, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसे बांधने वाला व्यक्ति स्वयं जागरूक, जिम्मेदार और समझदार होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं भ्रमित हो, वह दूसरों को सुरक्षा और सही दिशा कैसे दे सकता है? इसी प्रकार यदि शिक्षक ही हड़ताल के कारण विद्यालय बंद कर दें और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो, तो यह शिक्षक के मूल दायित्व के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का सबसे सम्माननीय और जिम्मेदारी वाला पद है। शिक्षक का प्रथम कर्तव्य बच्चों को शिक्षा देना, उनके भविष्य को संवारना और उनमें आत्मविश्वास तथा संस्कार विकसित करना है। इसलिए शिक्षकों को अपनी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए हड़ताल या रैली में शामिल होने के बजाय अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संवाद करना चाहिए।

कोकडिया ने कहा कि “बच्चों का भविष्य किसी भी आंदोलन या मांग से अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यालय बंद होने से सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों का होता है, जिनकी शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षक के कंधों पर है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति रक्षक नहीं, भक्षक बनने जैसा कार्य करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चा शिक्षक वही है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों के बीच उपस्थित रहकर सुरक्षा, शुभता, संस्कार और आत्मविश्वास का भाव जगाए। शिक्षक केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का निर्माता और समाज का मार्गदर्शक होता है।

गेंदलाल कोकडिया ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा—

“शिक्षक सबसे पहले और सबसे अधिक सम्माननीय व्यक्ति है। इसलिए शिक्षक का पहला धर्म बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य की रक्षा करना होना चाहिए।”

CG NEWS : नक्सल पीड़ित 5 परिवारों के सदस्यों को मिली शासकीय सेवा

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 रायपुर : नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पांच नक्सल पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति प्रदान की गई है। जिला कार्यालय में बुधवार को आयोजित बैठक के दौरान मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के कलेक्टर तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

आदिवासी विकास विभाग के आश्रमों और छात्रावासों में मिली

नक्सल पीड़ित परिवारों के इन पांच सदस्यों की नियुक्ति आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में भृत्य पद पर की गई है। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वालों में रवि दुग्गा, अजय कुमार सलामे, दिलसाय कोरेटी, समीला पूड़ो एवं पायल ईश्वर पूड़ो शामिल हैं। शासकीय सेवा का अवसर मिलने से इन परिवारों को नियमित रोजगार के साथ आर्थिक स्थिरता मिलेगी और वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे।

पुनर्वास नीति से पीड़ित परिवारों को मिल रहा नया संबल

नक्सल पुनर्वास नीति का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी क्रम में पात्र परिवारों के सदस्यों को शासकीय सेवा का अवसर दिया जाना उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शासकीय नौकरी मिलने से प्रभावित परिवारों में भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ा है। यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।

शासकीय सेवा जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी

कलेक्टर सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शासकीय सेवा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करें तथा शासन की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासकीय सेवा के माध्यम से नवनियुक्त कर्मचारी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेंगे।

बिहान की दीदियों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को राखी बांधकर दी बधाई, साझा किए गुजरात भ्रमण के अनुभव

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 रायपुर : कबीरधाम जिले के बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी दीदियों और पशुपालकों का गुजरात के बनासकाठा स्थित डेयरी कोऑपरेटिव एवं अमूल डेयरी कोऑपरेटिव का शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी और प्रेरणादायी रहा। भ्रमण से वापस लौटने के बाद बिहान समूह की दीदियों ने कवर्धा निवास पहुंचकर उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान दीदियों ने उन्हें रक्षाबंधन की बधाई देते हुए राखी बांधी और गुजरात में मिले अनुभवों तथा सीखी गई नई तकनीकों की जानकारी साझा की।


उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सभी दीदियों और पशुपालकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब वहां से मिली सीख को अपने गांव और जिले में अपनाकर आजीविका के नए अवसर तैयार किए जाएं। उन्होंने दीदियों से बनासकाठा में देखी गई उन्नत डेयरी व्यवस्था, पशुपालन तकनीक, चारा प्रबंधन, दुग्ध संकलन, गुणवत्ता नियंत्रण और सहकारी मॉडल से मिली सीख को स्थानीय स्तर पर लागू करने का आह्वान किया।


बनासकाठा में देखा सफल डेयरी और सहकारी मॉडल

उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को गुजरात के बनासकाठा के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया था। दल ने वहां डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित आहार एवं चारा विकास, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपाय, दुग्ध संकलन एवं प्रसंस्करण की आधुनिक व्यवस्था, दूध की गुणवत्ता जांच, डेयरी उत्पाद निर्माण और उनके विपणन की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। इसके साथ ही सहकारी मॉडल के माध्यम से छोटे पशुपालकों को संगठित कर उनकी आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्था की भी जानकारी प्राप्त की।

सीख को कबीरधाम में लागू करने का संकल्प

गुजरात से लौटीं दीदियों ने बताया कि वहां पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को केवल व्यक्तिगत आय का साधन नहीं, बल्कि सामूहिक आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को बाजार से जोड़ने, गुणवत्ता बनाए रखने और दूध के बेहतर मूल्य प्राप्त करने की व्यवस्थाओं ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। दीदियों ने कहा कि बनासकाठा में मिली सीख से उन्हें अपने गांवों में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को और बेहतर ढंग से संचालित करने की प्रेरणा मिली है। वे वहां सीखी गई उपयोगी तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों को अन्य ग्रामीण महिलाओं तथा पशुपालकों के साथ साझा कर सामूहिक रूप से आजीविका के नए अवसर विकसित करने का प्रयास करेंगी।

ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बिहान स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वहीं पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कबीरधाम की दीदियों और पशुपालकों का बनासकाठा भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सीख को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के सफल डेयरी मॉडल से प्राप्त अनुभव आने वाले समय में कबीरधाम में दुग्ध उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।

खेलते-खेलते दो साल की बच्ची ने मुंह में डाल ली सेफ्टी पिन, सांस की नली में फंसी; डॉक्टरों ने दूरबीन से निकाला

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 जगदलपुर। बस्तर में खेलते समय दो साल की मासूम के मुंह में गई सेफ्टी पिन उसकी सांस की नली में फंस गई। गंभीर हालत में परिजन बच्ची को रात में शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय, जगदलपुर लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन पद्धति से सफलतापूर्वक सेफ्टी पिन निकालकर बच्ची की जान बचाई।


जानकारी के मुताबिक, बस्तर के मावलीबेड़ा निवासी दो वर्षीय मोनिका खेलते समय गलती से सेफ्टी पिन मुंह में डाल बैठी। पिन मुंह से होते हुए सांस की नली यानी ट्रैकिया में जाकर फंस गई। इसके बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में नाक, कान और गला (ईएनटी) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह ने बच्ची की जांच की। इसके बाद दूरबीन पद्धति से प्रक्रिया कर सांस की नली में फंसी सेफ्टी पिन को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।

डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

सेफ्टी पिन निकालने की इस जटिल प्रक्रिया में डॉ. हेमंत शर्मा ने सहयोग किया। वहीं निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि, डॉ. सुचिष्मिता और डॉ. काशी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। चिकित्सकों की टीम ने पूरी सावधानी के साथ प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद बच्ची खतरे से बाहर है।

छोटे बच्चों को लेकर बरतें विशेष सावधानी

डॉ. सुरजीत सिंह ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को सिक्के, पिन, बीज और छोटे खिलौने जैसी वस्तुओं से दूर रखें। ऐसी छोटी वस्तुएं खेलते समय बच्चे मुंह में डाल सकते हैं और इनके सांस की नली में फंसने से गंभीर या जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को अचानक लगातार खांसी होने लगे, सांस लेने में परेशानी हो या सांस लेने के दौरान असामान्य आवाज आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

प्लंबिंग पाइप की आड़ में गांजे की तस्करी, DRI ने 250 किलो गांजा पकड़ा

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में गांजा तस्करी के खिलाफ राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने बड़ी कार्रवाई की है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर DRI की टीम ने मंदिर हसौद के पास एक संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान ट्रक से करीब 250 किलो गांजा बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बरामद गांजे की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।


जानकारी के मुताबिक, तस्करों ने गांजे को छिपाने के लिए प्लास्टिक प्लंबिंग पाइप की आड़ ली थी, ताकि ट्रक में सामान्य माल की तरह नशीले पदार्थ को ले जाया जा सके। ट्रक की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद DRI टीम ने उसका पीछा किया और मंदिर हसौद के पास उसे रोककर जांच की। तलाशी के दौरान पाइप के बीच छिपाकर रखा गया गांजा बरामद किया गया।

ट्रक जब्त, चालक हिरासत में

कार्रवाई के बाद DRI ने ट्रक और गांजे को जब्त कर लिया है। वहीं ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।

तस्करी नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही DRI

प्रारंभिक जांच में प्लंबिंग पाइप की आड़ में गांजा छिपाकर ले जाने की बात सामने आई है। DRI अब चालक से पूछताछ के आधार पर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। खेप के स्रोत, संभावित गंतव्य, ट्रक के रूट और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरीके से पहले भी मादक पदार्थों की खेप दूसरे राज्यों तक पहुंचाई गई है। मामले में पूछताछ और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

फिलहाल DRI की कार्रवाई जारी है। जब्त गांजे की आधिकारिक मात्रा, अनुमानित कीमत और तस्करी नेटवर्क से जुड़ी विस्तृत जानकारी एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

16 लाख के राशन चावल गबन मामले में दुकान संचालक गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के जोरा वार्ड क्रमांक 51 स्थित शासकीय राशन दुकान में करीब 16 लाख रुपए के चावल के कथित गबन के मामले में पुलिस ने दुकान संचालक टोपेश्वर साहू को गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।


मामला अक्टूबर 2025 का है। खाद्य विभाग को कई हितग्राहियों ने शिकायत की थी कि उनका बायोमेट्रिक सत्यापन कराने के बावजूद उन्हें पीडीएस का चावल और शक्कर नहीं दिया गया। शिकायत के बाद विभाग ने राशन दुकान के रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

ई-पॉस में वितरण, हितग्राहियों को नहीं मिला राशन

जांच में सामने आया कि करीब 250 राशन कार्डों पर ई-पॉस मशीन के जरिए राशन वितरण की एंट्री दर्ज की गई थी। हालांकि, संबंधित हितग्राहियों ने राशन नहीं मिलने की शिकायत की। प्रारंभिक जांच में 81.07 क्विंटल चावल की कमी सामने आई।

इसके बाद दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच आगे बढ़ने पर ई-पॉस रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर बढ़कर 389.24 क्विंटल, यानी करीब 778 बोरी चावल तक पहुंच गया। खाद्य विभाग के मुताबिक, इससे शासन को करीब 15 लाख 91 हजार रुपए की वित्तीय क्षति हुई।

स्टॉक रजिस्टर और पावती भी नहीं मिली

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 12 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच दुकान में बड़ी मात्रा में चावल पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज था, लेकिन उसकी विधिवत पावती नहीं ली गई थी। निरीक्षण के दौरान आवश्यक स्टॉक रजिस्टर और सूचना बोर्ड भी नहीं मिले।

अनियमितताओं को लेकर खाद्य विभाग ने दुकान संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नवंबर 2025 में दुकान को निलंबित कर उसका संचालन दूसरी संस्था को सौंप दिया गया।

खाद्य विभाग की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई

जांच में मिले दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर खाद्य विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने दुकान संचालक टोपेश्वर साहू के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि राशन के कथित गबन को किस तरह अंजाम दिया गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। जांच एजेंसियां ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण, राशन कार्डों की एंट्री, चावल की आवक-जावक और दुकान के वास्तविक स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।

नेपाल बाढ़ संकट में भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, IAF ने C-130J विमान से भेजी 10 टन राहत सामग्री

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 नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश नेपाल की मदद के लिए तुरंत कदम बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना (IAF) ने राहत और बचाव अभियान के लिए विमान तथा हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं।


IAF ने भेजा C-130J विमान

भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर नेपाल के लिए भेजी जा रही सहायता की जानकारी दी। IAF ने बताया कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद तत्काल राहत पहुंचाने के लिए C-130J विमान तैनात किया गया है। इस विमान के जरिए करीब 10 टन जरूरी राहत सामग्री और मेडिकल सप्लाई नेपाल भेजी गई है।

वायुसेना के मुताबिक, जरूरत के अनुसार C-17 और C-130 विमानों के जरिए अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजी जाएगी। इसके अलावा हेलिकॉप्टरों को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है, ताकि प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

नेपाल में बाढ़ से भारी नुकसान

नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • बाढ़ और आपदा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
  • नेपाल पुलिस ने अब तक 157 शव बरामद किए हैं।
  • बाढ़ के बाद 133 भारतीय पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
  • ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य चीन सीमा के पास से लापता बताए जा रहे हैं।
  • 28 देशों के 466 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है।
  • नेपाल में कुल 844 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है।
  • बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और बचाव दलों की तैनाती से नेपाल में चल रहे राहत एवं बचाव अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नेपाल आपदा पर सीएम साय ने जताया दुख, फंसे छत्तीसगढ़वासियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में पूरा भारत एकजुट होकर नेपाल के पीड़ितों के साथ खड़ा है।


मुख्यमंत्री ने भगवान पशुपतिनाथ से दिवंगत आत्माओं की शांति, शोकसंतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने और लापता लोगों की सकुशल वापसी की प्रार्थना की।

नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सहायता और आपात स्थिति के लिए राज्य सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित नागरिक या उनके परिजन किसी भी मदद व जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन: 1070
  • दूरभाष नंबर: +91-771-2223471

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में अपने हर नागरिक के साथ है और नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़वासियों की सुरक्षित वापसी व आवश्यक सहायता के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है।

नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 163 की मौत; 750 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी शामिल

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 काठमांडू। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 163 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं।


बाढ़ के तेज बहाव में कई कस्बे और गांव प्रभावित हुए हैं। महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, पुलिस और राहत-बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियर या चट्टानों के खिसकने से अचानक बाढ़ की स्थिति बनी।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी उफान पर आ गई। इसके बाद त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई और इसका असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया।

चितवन में सबसे ज्यादा तबाही

नेपाल में अब तक बरामद हुए 163 शवों में सबसे अधिक 64 शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके अलावा धादिंग से 27, नवलपरासी पूर्व से 26, गोरखा से 20, नुवाकोट से 12, तनहूं से 9, रसुवा से 3 और नवलपरासी पश्चिम से 2 शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो में तबाही का भयावह मंजर दिखाई दे रहा है। तेज रफ्तार से बहता मलबा, चट्टानें और पानी अपने रास्ते में आने वाली इमारतों, वाहनों और पुलों को बहाते नजर आ रहे हैं।

130 से ज्यादा भारतीय लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद 130 से ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।

अधिकारियों के मुताबिक लापता लोगों में 133 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने भी अपने 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। ये लोग एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे।

तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अब तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिल गई है। पश्चिम बंगाल के भी कई लोगों के लापता होने की आशंका है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी शामिल बताया जा रहा है।

भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। भारतीय नागरिक +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

भारतीय दूतावास ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों के जल्द बचाव और राहत के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार ने भी नेपाल-तिब्बत सीमा और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के आसपास फंसे कर्नाटक के लोगों की जानकारी जुटाने के लिए 1070 और 080-22253707 नंबर जारी किए हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर आपदा पर दुख जताया और हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेपाल में आई बाढ़ पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बात की और संभावित प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन तथा राहत-बचाव टीमों के साथ NDRF को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी दी।

नेपाल में संचार व्यवस्था प्रभावित

भीषण बाढ़ के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित हो गई है, जिससे लापता लोगों की सही जानकारी जुटाने में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि पूरा देश इस आपदा से “सदमे में है और बहुत दुखी है।” सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

विष्णु देव की सरकार में महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान

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 लेख- तेजबहादुर सिंह भुवाल - सहायक जनसंपर्क अधिकारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन रहा है। विष्णु देव साय की सरकार महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार, तकनीक, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी कर प्रदेश की महिलाओं को रक्षाबंधन के पूर्व राखी का विशेष उपहार दिया गया है। यह पहल महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ उस विश्वास को भी मजबूत करती है कि परिवार और समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।


महतारी वंदन योजना: आर्थिक संबल का आधार

महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की पात्र महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा का एक नया आधार तैयार किया है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आवश्यकताओं में भी योगदान दे पा रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर 31वीं किस्त का उपहार महिलाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को दर्शाता है। आर्थिक सहायता का यह क्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

लखपति दीदी: कमाई के साथ बढ़ता आत्मविश्वास

राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में लखपति दीदी की योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और अन्य आयमूलक गतिविधियों के माध्यम से अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जब एक महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और परिवार के आर्थिक निर्णयों में उसकी भागीदारी भी मजबूत होती है।

ड्रोन दीदी: आसमान छूते सपने

आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रही हैं। ड्रोन दीदी जैसी पहल ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीक से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में सेवाओं के माध्यम से आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो महिलाएं कभी खेतों में परंपरागत तरीके से काम करती थीं, वे अब तकनीक का प्रशिक्षण लेकर ड्रोन संचालन जैसी आधुनिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं। यह बदलाव महिला सशक्तिकरण की बदलती तस्वीर को सामने लाता है। इन महिलाओं के देखकर अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

ई-रिक्शा दीदी: रोजगार की नई राह

महिलाओं को पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़ाकर नए क्षेत्रों में अवसर देने की दिशा में ई-रिक्शा दीदी जैसी पहल भी उल्लेखनीय है। ई-रिक्शा के माध्यम से महिलाएं परिवहन क्षेत्र में रोजगार का नया अवसर प्राप्त कर सकती हैं और अपनी आय का साधन विकसित कर सकती हैं। यह पहल महिला को केवल रोजगार नहीं देती, बल्कि उसे स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी देती है।

स्व-सहायता समूहों से मजबूत हो रही महिलाओं की भागीदारी

महिला सशक्तिकरण की इस यात्रा में स्व-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत, प्रशिक्षण, ऋण, उत्पादन और बाजार से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। आज महिला केवल किसी योजना की लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवार की अर्थव्यवस्था, गांव की अर्थव्यवस्था और प्रदेश के विकास की सक्रिय भागीदार बनने की ओर बढ़ रही है।

सहायता से आत्मनिर्भरता तक

विष्णु देव साय सरकार की महिला-केंद्रित पहलों को एक साथ देखें तो इनका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना दिखाई देता है।

  1. महतारी वंदन योजना आर्थिक संबल देती है,
  2. ड्रोन दीदी तकनीक से जोड़ती है,
  3. लखपति दीदी आय बढ़ाने का अवसर देती है,
  4. और ई-रिक्शा दीदी रोजगार की नई राह खोलती है।

इन पहलों से महिला सशक्तिकरण का एक व्यापक स्वरूप सामने आता हैकृजहां महिला सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास की नेतृत्वकर्ता बन रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त का उपहार इसी विश्वास को और मजबूत करता है कि प्रदेश की आधी आबादी को मजबूत किए बिना छत्तीसगढ़ के समग्र विकास की कल्पना पूरी नहीं हो सकती।

  • महिला मजबूत होगी, परिवार मजबूत होगा।
  • परिवार मजबूत होगा, तो छत्तीसगढ़ और मजबूत होगा।
  • महतारी सदन: गांवों में महिलाओं के लिए सशक्त मंच

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को एक ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे एकजुट होकर अपने सामाजिक, आर्थिक और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा सकें। महतारी सदन महिलाओं के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि संगठन, संवाद, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यहां महिलाएं स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों, प्रशिक्षण, आजीविका और विभिन्न योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकती हैं। इससे गांव की महिलाओं को अपने मुद्दों पर चर्चा करने, सामूहिक निर्णय लेने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत मंच मिलता है।

महतारी सदन में हॉल, किचन, स्टोर, कार्यालय कक्ष तथा दुकान संचालन के लिए पृथक स्थान सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। इस सदन में महिलाओं के प्रशिक्षण, बैठकों, उत्पादन, विपणन एवं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक स्थायी और सुसज्जित स्थल के रूप में उपयोगी साबित होगा। महतारी सदन गांव की माताओं-बहनों के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि उनके सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र होगा। इसके माध्यम से महिलाओं को अपनी बैठकों, प्रशिक्षण, स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों तथा विभिन्न आर्थिक कार्यों के संचालन के लिए स्थायी, सुविधाजनक और बेहतर स्थान उपलब्ध हो रहा है। राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 481 महतारी सदनों की स्वीकृति दी गई है।

यही है विष्णु देव साय की सरकार में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर-सुरक्षा से सम्मान, सहायता से स्वावलंबन और स्वावलंबन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़।

 

मुख्यमंत्री साय ने बाबा कर्मेश्वर का किया रुद्राभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड राजपुर अंतर्गत ग्राम कर्रा में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव पुराण कथा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने प्राचीन बाबा कर्मेश्वर धाम में भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा कर्मेश्वर की कृपा से यह क्षेत्र निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगी।


मुख्यमंत्री  साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम कर्रा की पावन भूमि पर श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव पुराण कथा का आयोजन होना अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कथावाचक आचार्य दिव्यानंद जी महाराज को नमन करते हुए आयोजन समिति और समस्त श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। भगवान भोलेनाथ से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा पूरे छत्तीसगढ़ पर बनी रहे और प्रत्येक परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो।

’छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत को सहेजने और संवारने का हो रहा कार्य’

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ धर्म, संस्कृति और आस्था की समृद्ध परंपराओं की भूमि है। यह माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। प्रदेश के गांव-गांव में प्राचीन शिवालयों, देवी मंदिरों और लोक आस्था के केंद्रों की गौरवशाली परंपरा रही है। राज्य सरकार इस समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से गहरा और आत्मीय संबंध है। राज्य सरकार की श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों की धार्मिक आस्था और तीर्थ दर्शन की अभिलाषा को ध्यान में रखते हुए तीर्थ दर्शन योजना भी प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत देशभर के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों को चिन्हांकित किया गया है। अब तक लगभग 10 हजार श्रद्धालु इस योजना का लाभ लेकर विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं।

’शांति और विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा बस्तर’

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बाबा कर्मेश्वर के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दशकों तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक परिवार तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्रा सहित बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भी विकास कार्यों को निरंतर गति दी जाएगी। क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

’सदियों पुरानी लोक आस्था का केंद्र है बाबा कर्मेश्वर धाम’

ग्राम कर्रा स्थित बाबा कर्मेश्वर धाम क्षेत्र की लोक आस्था का प्राचीन और महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। जनश्रुतियों के अनुसार लगभग नौवीं-दसवीं शताब्दी में साल के वृक्ष के खोल में शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में श्री कर्मेश्वर महादेव मंदिर जीर्णाेद्धार समिति द्वारा मंदिर के जीर्णाेद्धार का कार्य कराया जा रहा है।

बाबा कर्मेश्वर से क्षेत्र की लोक मान्यताओं का भी गहरा संबंध है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पुराने समय में जब क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होती थी, तब ग्रामीण भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते थे। शिवलिंग पर गाय के गोबर का लेप लगाने की भी एक पारंपरिक मान्यता रही है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में वर्षा होती थी। पीढि़यों से चली आ रही ऐसी लोक आस्थाओं ने बाबा कर्मेश्वर धाम को क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है।

’मां के नाम लगाया रुद्राक्ष का पौधा’

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बाबा कर्मेश्वर धाम मंदिर परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के अंतर्गत अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी साय के नाम पर रुद्राक्ष का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने भी मंदिर परिसर में बेल का पौधा लगाया। अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल, पत्थलगांव विधायक गोमती साय, आईजी  दीपक झा, सरगुजा संभागायुक्त  नरेंद्र दुग्गा, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक  वैभव बैंकर, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

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