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किसान, महिला और जनजातीय समाज के सशक्तिकरण से बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

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कोरिया महोत्सव का शुभारंभ: जिलेवासियों को 156 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैकुंठपुर में तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन कोरिया महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कोरिया जिलेवासियों को 156 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने 70 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 104 कार्यों का लोकार्पण तथा 85 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक के 40 कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विकास कार्य केवल निर्माण परियोजनाएँ नहीं, बल्कि कोरिया जिले की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य के मजबूत आधार स्तंभ हैं।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ को संपन्न और समृद्ध प्रदेश के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार लगातार ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। राज्य सरकार ने अपने अधिकांश वादों को अल्प समय में पूरा कर दिखाया है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदेश की जनता से किए गए विकास संबंधी वादों को भी दो वर्षों के भीतर धरातल पर उतारा गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में सभी शेष संकल्प भी पूर्ण किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई थी और अब उनके निर्माण कार्य तेजी से जारी हैं। उन्होंने बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहने के कारण यह क्षेत्र विकास से वंचित रहा, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रयासों से नक्सल उन्मूलन में अभूतपूर्व सफलता मिली है। आज बस्तर के गांव-गांव में सड़क, अस्पताल और स्कूल खुल रहे हैं तथा उजड़े हुए गांव पुनः आबाद हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर में नियद नेल्ला नार योजना प्रारंभ की गई है, जिससे विकास कार्यों को गति मिली है।

मुख्यमंत्री साय ने किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। हाल ही में खरीदे गए धान की अंतर राशि होली से पहले किसानों के खातों में स्थानांतरित कर दी जाएगी, जिसके अंतर्गत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये किसानों को मिलेंगे।  उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं और अब तक लगभग 15 हजार करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने दो वर्षों में पारदर्शी प्रशासन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल सिस्टम से मजबूत बनाया गया है तथा पीएससी भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई गड़बड़ियों की जांच सीबीआई द्वारा कराई जा रही है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से भरपूर है तथा खनिजों के वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देकर आर्थिक विकास को नई दिशा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरिया जिले में पर्यटन की बेहद संभावनाएं हैं। उन्होंने जिले के विकास को गति देने के लिए देवगढ़ छुरी धाम को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने, पुलिस चौकी पोड़ी को थाना का दर्जा देने, पुलिस सहायता केंद्र पंडोपारा को चौकी में उन्नत करने, पीडब्ल्यूडी कार्यालय भवन एवं जिला पुरातत्व कार्यालय स्थापित करने तथा फूलपुर में अधोसंरचना निर्माण एवं ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने जिले में आवागमन सुविधा सुदृढ़ करने के लिए कई सड़क और पुल-पुलिया निर्माण कार्यों की भी घोषणा की। उन्होंने कोरिया से छिंदया शिवपुर गांव तक लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से पुल-पुलिया निर्माण, कुषहा से घुघरा मार्ग पर 6 करोड़ रुपये की लागत से पुल-पुलिया निर्माण तथा 18 करोड़ रुपये की लागत से सलका बाईपास निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेज होगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कोरिया महोत्सव को जिले का विशेष तिहार बताते हुए मुख्यमंत्री को विकास कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं तथा मुख्यमंत्री द्वारा जिले की छह महिलाओं को पिंक ई-रिक्शा प्रदान करना सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सांस्कृतिक आयोजन को स्थानीय प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया।

इस अवसर पर विधायक भैयालाल राजवाड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 156 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से जिले के विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक झा, जिला पंचायत अध्यक्ष मोहित पैकरा, कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, एसपी रविकुमार कुर्रे, जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं जिलेवासी उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़’ की दिशा में बड़ा कदम- शिक्षा, कौशल और रोजगार पर मंथन के लिए ‘शिक्षा संवाद’

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डिजिटल नवाचार से उद्योग साझेदारी तक- ‘शिक्षा संवाद’ में उच्च शिक्षा के भविष्य की रूपरेखा तय

रायपुर- राज्य में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर समन्वय को लेकर आज  ‘शिक्षा संवाद’ का आयोजन रायपुर के स्थानीय होटल में किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की भागीदारी रही। उच्च शिक्षा विभाग और आईआईटी मद्रास और लिंकन युनिवर्सिटी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन,आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन, सीईओ इलेट्स  डॉ. रवि गुप्ता, डायरेक्टर आई.सी.एफ.ए.आई. सुधाकर राव,हाइ कमिश्नर ऑफ सैशेल्स एच. ई. हरिसोया लालटीआना सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति,रजिस्ट्रार, प्रोफेसर उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार का सेतु, थीम पर आधारित सत्र में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों के समायोजन और क्षेत्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा हुई। आयोजन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को उद्योग की जरूरतों से जोड़ते हुए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करना है।  विभिन्न सत्रों में नई शिक्षा नीति, कौशल उन्नयन, उद्योग-शिक्षा साझेदारी, स्टार्टअप अवसर और भविष्य की रोजगार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं की रोजगार क्षमता दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा। ‘शिक्षा संवाद’ को छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

‘शिक्षा संवाद’ के दूसरे चरण में उच्च शिक्षा को डिजिटल, उद्योगोन्मुख और शोध आधारित बनाने पर गहन मंथन हुआ। विभिन्न सत्रों में कुलपतियों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने के सुझाव प्रस्तुत किए।

डिजिटल इनोवेशन से बदलती उच्च शिक्षा

इस सत्र में डिजिटल कैंपस, एलएमएस एवं ब्लेंडेड लर्निंग मॉडल, एआई आधारित शिक्षण-मूल्यांकन, डेटा आधारित प्रशासन तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि तकनीक के समुचित उपयोग से पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।

रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए इंडस्ट्रीज-अकादमिक सहयोग

इस सत्र में उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, इंटर्नशिप एवं अप्रेंटिसशिप, सेक्टर स्किल काउंसिल की भूमिका और परिणाम आधारित शिक्षा पर विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच मजबूत तालमेल से युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर मिलेंगे।

ज्ञान अर्थव्यवस्था की ओर -शोध, नवाचार और उद्यमिता

अंतिम तकनीकी सत्र में शोध के वर्तमान परिदृश्य, नवाचार केंद्रों की स्थापना, स्टार्टअप प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शोध के व्यावसायीकरण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शिक्षा संस्थानों में इनोवेशन कल्चर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘शिक्षा संवाद’ को राज्य में उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण, उद्योग सहयोग और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम का समापन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन और उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन के सार-संक्षेप के साथ हुआ। ‘शिक्षा संवाद 2026’ ने राज्य में भविष्य उन्मुख, नवाचार- प्रधान और उद्योग-संरेखित उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

उज्ज्वला गैस, पिंक ई-रिक्शा और गार्बेज रिक्शा वितरण से आत्मनिर्भरता को मिला नया संबल

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जनकल्याणकारी योजनाओं से बदल रही जिंदगी : मुख्यमंत्री ने हितग्राहीमूलक सामग्रियों का किया वितरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कोरिया प्रवास के दौरान कोरिया महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण कर लाभान्वित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में 105 पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि इस योजना से अब इन परिवारों को धुएं से मुक्ति मिलने के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के अनुकूल ईंधन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

इस अवसर पर स्व-रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 6 आजीविका दीदियों को पिंक ई-रिक्शा (ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस) प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने जिले की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 14 स्वच्छता दीदियों को गार्बेज रिक्शा भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यवस्था नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है, और इस दिशा में महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।


‘शिक्षा संवाद 2026’ का भव्य शुभारंभ—उच्च शिक्षा, कौशल और रोजगार को जोड़कर विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा तय

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उच्च शिक्षण संस्थानों को उभरते अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

शिक्षा नीति के समुचित कार्यान्वयन, डिजिटल एकीकरण और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से उच्च शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नई दिशा-सचिव डॉ. भारती दासन

रायपुर- छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के भविष्य पर केंद्रित फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘शिक्षा संवाद 2026’ का आज रायपुर के कोर्टयार्ड मैरियट में भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने किया। इस आयोजन का संचालन उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया गया, जिसमें एलिट्स टेक्नोमीडिया सहयोगी संस्था के रूप में जुड़ा रहा।

‘विकसित छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार का सेतु’ थीम पर आधारित उद्घाटन सत्र में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों के समायोजन और क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा हुई।

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा राज्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को उभरते अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। मंत्री ने संस्थागत क्षमता सुदृढ़ करने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और पाठ्यक्रमों को उद्योग की मांग के अनुरूप ढालने पर बल दिया। साथ ही विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच संरचित समन्वय की आवश्यकता बताई, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक दक्षता और रोजगारपरक कौशल प्राप्त हो सके। डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और नीतिगत सुधारों को भी गुणवत्ता सुधार का अहम माध्यम बताया गया।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने शासन के शिक्षा सुधारों, संस्थागत सशक्तीकरण और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि नीति के समुचित कार्यान्वयन, डिजिटल एकीकरण और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

इस अवसर पर एलिट्स टेक्नोमीडिया के सीईओ एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. रवि गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नीति, अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सतत संवाद मंच की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं, उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने आगे बढ़कर ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया, जिससे शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास का समेकित मॉडल विकसित हो सके।‘

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन और ‘स्वयं प्लस – आईआईटी मद्रास’ के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर रहा। इस समझौते के तहत उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन और ब्लेंडेड कोर्स, उद्योग-प्रासंगिक प्रमाणपत्र तथा क्रेडिट-लिंक्ड कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ के अंतर्गत क्रेडिट ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा तथा विद्यार्थियों को उन्नत कौशल आधारित मॉड्यूल्स का लाभ मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा विभाग ने मलेशिया के लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज (LUC) के साथ भी एमओयू किया। इस सहयोग का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारी, छात्र एवं संकाय विनिमय, संयुक्त शोध पहल और वैश्विक एक्सपोजर को बढ़ावा देना है।

शिक्षा संवाद 2026 में दिनभर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार, डिजिटल नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग, शोध और उद्यमिता जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा संवाद 2026’ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मजबूत सेतु बनाकर ही विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कुम्हार के चाक पर गढ़ा दीया, पारंपरिक शिल्पकारों से किया आत्मीय संवाद

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सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक के दौरान प्रदर्शनी में दिखा माटी से जुड़ाव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक आत्मीय और सहज रूप उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने कुम्हार के चाक पर स्वयं मिट्टी का दीया और कलश गढ़कर पारंपरिक शिल्प के प्रति सम्मान और जुड़ाव का सशक्त संदेश दिया। 

अवसर था सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक का, जिसमें शामिल होने वे कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर पहुंचे थे। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक के साथ परिसर में स्व-सहायता समूहों एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसी प्रदर्शनी में सोनहत विकासखंड निवासी शिल्पकार देवी दयाल प्रजापति इलेक्ट्रिक चाक पर मिट्टी से दीया और कलश बनाने का सजीव प्रदर्शन कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय उनके स्टॉल पर पहुंचे और कुछ देर तक उनकी शिल्पकला का बारीकी से अवलोकन किया। कला के प्रति उत्सुकता बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने स्वयं चाक पर हाथ आजमाने की इच्छा व्यक्त की। शिल्पकार की सहमति से उन्होंने घूमते हुए चाक पर रखी गीली मिट्टी को हाथों से साधा और देखते ही देखते उसे सुंदर दीये का आकार दे दिया। मुख्यमंत्री की सहज कुशलता देखकर स्वयं शिल्पकार भी आश्चर्यचकित रह गए, वहीं उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस क्षण का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री साय ने इस दौरान शिल्पकार देवी दयाल प्रजापति से उनके व्यवसाय, आय और परिवार की जानकारी ली तथा उन्हें शासन की विभिन्न स्वरोजगार एवं कारीगर हितैषी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प, कारीगरों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि स्थानीय कला और हुनर को नई पहचान और बाजार मिल सके।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक भैयालाल राजवाड़े, कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक रविकुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

चरौदा में विज्ञान माडल प्रदर्शनी मेला का आयोजन

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आरंग- शासन के निर्देशानुसार मंगलवार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में विज्ञान माडल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए एक से बढ़कर एक विज्ञान संबंधी माडलों का प्रदर्शन किया। जिसमें जल चक्र, जल शुद्धीकरण, पर्यावरण प्रदूषण, सौर पेनल से ऊर्जा उत्पन्न,मानव जीवन चक्र, पौधे के विभिन्न अंग, पवन चक्की,मानव मस्तिष्क, मानव नेत्र,मानव कंकाल इत्यादि माडल आकर्षण का केंद्र रहा।इस अवसर पर शिक्षको ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा विज्ञान माडल प्रदर्शनी मेला से बच्चों में वैज्ञानिक सोच जागृत होती है। विज्ञान के प्रति रूचि बढ़ती है।इस मौके पर संस्था प्रमुख के के परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर प्रसाद साहू, शिक्षिका संगीता पाटले सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की उपस्थिति रही।



सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समाज का सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा: वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति, 543 विकास कार्यों को मंजूरी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज कोरिया जिले के बैकुंठपुर में आयोजित सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में सरगुजा संभाग के जिलों में संचालित विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर नई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता में रखा है।प्राधिकरण के माध्यम से पिछड़े एवं वनांचल क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और क्षेत्र की समृद्धि के लिए सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सभी के सहयोग से इस क्षेत्र को प्रगति के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर 543 विकास कार्यों के लिए 4905.58 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई, जबकि वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 606 कार्यों को भी औपचारिक अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों को मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सोनहत विकासखंड में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में हाईमास्ट सोलर लाइट लगाने, किसानों की समस्याओं के समाधान, बिजली बिल त्रुटियों को दूर करने तथा गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्राधिकरण की पिछली बैठक जशपुर जिले के मयाली में आयोजित हुई थी, जिसके बाद मयाली की पहचान पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ी है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में विश्व के बड़े शिवलिंग को स्थान मिला तथा स्वदेश दर्शन योजना के तहत राशि स्वीकृत हुई। उन्होंने कहा कि बैकुंठपुर में आयोजित इस बैठक से भी जिले की पहचान और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि झुमका जलाशय सहित यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इस प्रकार विभिन्न जिलों में बैठक आयोजित करने से स्थानीय विकास को गति मिलती है।

बैठक में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

जनकल्याणकारी योजनाओं से बदल रही जिंदगी : मुख्यमंत्री ने हितग्राहीमूलक सामग्रियों का किया वितरण

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कोरिया प्रवास के दौरान कोरिया महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण कर लाभान्वित किया।


मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में 105 पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि इस योजना से अब इन परिवारों को धुएं से मुक्ति मिलने के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के अनुकूल ईंधन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।


इस अवसर पर स्व-रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 6 आजीविका दीदियों को पिंक ई-रिक्शा (ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस) प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री साय ने जिले की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 14 स्वच्छता दीदियों को गार्बेज रिक्शा भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यवस्था नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है, और इस दिशा में महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

7 महीने से फरार कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर गिरफ्तार

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 रायपुर। राजधानी पुलिस ने कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और कथित सूदखोर रोहित तोमर को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले सात महीनों से फरार चल रहा था और उस पर वसूली, मारपीट तथा अन्य आपराधिक मामलों के कई प्रकरण दर्ज हैं।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, रोहित तोमर लंबे समय से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। इस दौरान उसे सुप्रीम कोर्ट से कुछ अंतरिम राहत भी मिली थी, लेकिन पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी। आखिरकार पुलिस ने उसे हिरासत में लेने में सफलता हासिल की।

इससे पहले उसका भाई वीरेंद्र तोमर भी इसी तरह के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों भाइयों पर सूदखोरी और दबाव बनाकर रकम वसूलने के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके आपराधिक नेटवर्क, सहयोगियों तथा अन्य लंबित मामलों की भी जांच की जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि रोहित तोमर को शहर का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर माना जाता रहा है।

शिक्षा मंत्रालय ने भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में शिक्षा में AI पर विशेष सत्र का आयोजन किया

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के तहत शिक्षा मंत्रालय ने “Ministry of Education – Pushing the Frontier of AI in India” विषय पर विशेष सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी शामिल हुए।

कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीट जोशी, IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी कामकोटी, शिक्षाविद, शोधकर्ता और AI आधारित शिक्षा स्टार्टअप के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह समिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल है, जो भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को गति देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि AI भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देगा।

उन्होंने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि “शिक्षा में AI और AI में शिक्षा” दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और युवाओं को नवाचार के लिए AI का उपयोग करना चाहिए।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि समिट में शिक्षा, कौशल, शोध और वैश्विक नेतृत्व के लिए AI के संरचित एकीकरण पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने मंत्रालय और स्किल इंडिया पवेलियन में प्रदर्शित भारत-केंद्रित AI समाधानों की भी सराहना की।

सत्र में Zoho के संस्थापक डॉ. श्रीधर वेम्बू, Peak XV Partners के राजन आनंदन, IIT कानपुर के प्रो. मनींद्र अग्रवाल, IIT बॉम्बे की प्रो. सुनीता सरावगी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र शिक्षा में AI के जिम्मेदार उपयोग, नीति ढांचे, राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और उद्योग-अकादमिक सहयोग रहा।

यह सत्र भारत में शिक्षा के क्षेत्र में AI के राष्ट्रीय रोडमैप और उद्योग–अकादमिक–सरकार सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का 2026 का पहला ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप प्रोग्राम सफलतापूर्वक संपन्न

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत का 2026 का पहला दो सप्ताह का ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप प्रोग्राम (OSTI) 2 फरवरी 2026 को शुरू होकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, including दूरदराज क्षेत्रों से 71 विश्वविद्यालय-स्तरीय छात्रों ने भाग लिया और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।


समापन समारोह में NHRC के सचिव जनरल भारत लाल ने इंटर्न्स को बधाई दी और उन्हें मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील व जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे को संविधान के मूल स्तंभ बताते हुए कहा कि समाज के कमजोर वर्ग—जैसे भिखारी, ट्रांसजेंडर व्यक्ति और दिव्यांगजन—अक्सर अधिकारों के उल्लंघन का सामना करते हैं, जिन्हें न्याय दिलाने में समाज की भूमिका अहम है।

इससे पहले संयुक्त सचिव सैडिंगपुई चकचुआक ने इंटर्नशिप रिपोर्ट प्रस्तुत की और प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेंद्र सिंह ने दिया।


भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की भूमिका पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का संबोधन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “Innovation to Impact: AI as a Public Health Game-Changer” विषय पर सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI for India दृष्टिकोण “Artificial Intelligence नहीं बल्कि All-Inclusive Intelligence” है, जिसका लक्ष्य तकनीक को आम लोगों के जीवन से जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि AI को रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार तक स्वास्थ्य सेवा की पूरी श्रृंखला में लागू किया जा रहा है।

  • मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम 13 भाषाओं में रोग रुझानों की निगरानी कर रियल-टाइम अलर्ट देता है।

  • वन हेल्थ मिशन के तहत AI आधारित जीनोमिक सर्विलांस से संभावित जूनोटिक रोगों की भविष्यवाणी संभव हो रही है।

  • AI आधारित एक्स-रे और CA-TB टूल्स से टीबी मामलों की पहचान में 16% वृद्धि और उपचार परिणामों में 27% सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में स्केलेबल, किफायती और समावेशी AI समाधान जरूरी हैं। सरकार ने AIIMS दिल्ली, PGIMER चंडीगढ़ और AIIMS ऋषिकेश में AI के तीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि AI डॉक्टरों का विकल्प नहीं बल्कि सहायक है, ताकि चिकित्सक जटिल मामलों पर अधिक ध्यान दे सकें। साथ ही उन्होंने डॉक्टरों के लिए AI प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी.के. पॉल ने AI को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए रणनीतिक अवसर बताया और मजबूत डेटा, नीति और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

फिलिप्स के CEO रॉय जैकब्स ने कहा कि AI स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके लिए भरोसेमंद डेटा, पारदर्शिता और क्लिनिकल इंटीग्रेशन जरूरी है।

समापन में सभी वक्ताओं ने कहा कि AI को जिम्मेदारी, नैतिकता और बड़े पैमाने पर लागू कर भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत और भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है।


CG Weather Update : ठंड ढीली, गर्मी की दस्तक- रायपुर में पारा 33°C के पार

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 CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में अब ठंड का असर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। यानी मौसम फिलहाल शुष्क और स्थिर रहने की संभावना है।

सुबह हल्की धुंध और दिन में बढ़ती गर्मी

बीते 24 घंटों में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 32.9°C रायपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.3°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ। राजधानी में सुबह हल्की धुंध रहने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान लगभग 33°C और न्यूनतम 18°C के आसपास रह सकता है। दिन में हल्की गर्मी महसूस होगी, जबकि सुबह और शाम ठंड बनी रहेगी।

फरवरी: ठंड की वापसी या गर्मी की दस्तक?

जनवरी की तरह फरवरी में भी सामान्यतः आसमान साफ रहता है और हवाएं हल्की चलती हैं। हालांकि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कभी-कभी मौसम का मिजाज बदल देते हैं, जिससे बादल, गरज-चमक, हल्की बारिश, आंधी या ओलावृष्टि भी हो सकती है।

रायपुर में फरवरी का औसत दिन का तापमान 31.1°C और रात का तापमान 16.9°C रहता है। पूरे महीने में औसतन 16.3 मिमी बारिश दर्ज होती है और सामान्यतः 1–2 दिन ही वर्षा होती है। सुबह नमी लगभग 61% तक रहती है, जो दिन में घटकर करीब 35% हो जाती है। हवा की औसत गति लगभग 4.2 किमी प्रति घंटा रहती है, जिससे मौसम शांत बना रहता है।

रिकॉर्ड जो चौंकाते हैं

9 फरवरी 1893 को रायपुर में तापमान 5°C तक गिर गया था, जो अब तक की सबसे ठंडी तारीख मानी जाती है। वहीं 28 फरवरी 2009 को तापमान 38°C तक पहुंच गया था। 4 फरवरी 1917 को 24 घंटे में 57.4 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि 1901 में पूरे महीने में 118.9 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।

 बच्चों पर ठंड का असर

हाल के दिनों में कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ा। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार नवजात और सीजेरियन से जन्मे शिशु ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

 क्या है हाइपोथर्मिया?

हाइपोथर्मिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37°C से नीचे चला जाता है। शरीर तेजी से गर्मी खोने लगता है और अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ठंडे पानी में शरीर हवा की तुलना में लगभग 25 गुना तेजी से गर्मी खोता है।

 स्वास्थ्य विभाग की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने तापमान में अचानक बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और हाइपोथर्मिया के खतरे को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। आवश्यक होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें।

 इम्यूनिटी कैसे रखें मजबूत?

विटामिन C से भरपूर फल — संतरा, नींबू, आंवला — का सेवन करें

  • अदरक-तुलसी की चाय या काढ़ा पिएं
  • पर्याप्त गर्म भोजन और पानी लें

फिलहाल मौसम स्थिर बना हुआ है, लेकिन फरवरी का मिजाज अचानक बदल सकता है। इसलिए हल्की गर्मी के बीच ठंड को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।

वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान 2026 का आयोजन, भारत की समुद्री सोच पर जोर

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16 फरवरी 2026 को नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF), नई दिल्ली के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह वार्षिक व्याख्यान भारत में समुद्री रणनीतिक सोच को बढ़ावा देने वाले वाइस एडमिरल नय्यर की विरासत को सम्मानित करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करंबीर सिंह के उद्घाटन संबोधन से हुई। इसके बाद वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत की समुद्री जागरूकता और राष्ट्रीय विकास में नौसेना की भूमिका पर प्रकाश डाला।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की दोहरी जिम्मेदारी है—

  • गार्डियनशिप: वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों से निपटना

  • स्टूवर्डशिप: भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयारी

उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका, अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR), MILAN अभ्यास और IONS सम्मेलन का भी उल्लेख किया।

इस वर्ष का स्मृति व्याख्यान इन्फोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने ‘A Salute to a Life of Service’ विषय पर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य समुद्रों से जुड़ा है और भारतीय नौसेना देश की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की रक्षा करती है। उन्होंने AI, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और वाइस एडमिरल नय्यर के परिवारजन उपस्थित रहे। NMF भारत में समुद्री जागरूकता और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।


गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) 21 फरवरी को, हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा पर होगा मंथन

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गोवा- गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) का पांचवां संस्करण 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में आयोजित किया जाएगा। भारतीय नौसेना की प्रमुख रणनीतिक पहल के तहत आयोजित यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों और नौसैनिक नेतृत्व को एक मंच पर लाता है, जहां समकालीन समुद्री चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान और रणनीतियां तैयार की जाती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री होंगे मुख्य अतिथि

इस सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों और समुद्री बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मेजबानी करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया शामिल हैं।

सम्मेलन की थीम

इस वर्ष सम्मेलन की थीम है:

“हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां — IUU फिशिंग और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसी गतिशील चुनौतियों से निपटने के प्रयास”।
इसका उद्देश्य समुद्री देशों के बीच सहयोग, समन्वय और तालमेल को मजबूत करना है।

MAHASAGAR विज़न के अनुरूप पहल

गोवा मैरीटाइम सिम्पोजियम (GMS) और गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC) की शुरुआत 2016 और 2017 में की गई थी, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विज़न के अनुरूप हैं। यह मंच समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान और क्षमता निर्माण की दिशा तय करता है।

समुद्री सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ना (IUU Fishing), समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट और अवैध प्रवासन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और डार्क शिपिंग जैसी नई चुनौतियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।

विशेषज्ञों के विचार और मुख्य भाषण

सम्मेलन में समुद्री जानकारी के वास्तविक समय आदान-प्रदान और संयुक्त क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) मुख्य भाषण देंगे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक समाधान तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।


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