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छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का दूसरा दिन : मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मुकाबला 3-3 से ड्रॉ

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प्रहलाद बने 'स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच', करण धनुक को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार

रायपुर- छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के दूसरे दिन आज पहले मैच में कड़े मुकाबले के बीच मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मैच 3-3 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पहले दो क्वार्टर्स में ओलंपियन प्रदीप मोर की टीम मैनपाट टाइटन्स का दबदबा रहा, जबकि आखिरी दो क्वार्टर्स में ओलंपियन चिंगलेनसाना सिंह की टीम बैलाडिला बुल्स ने बेहतर खेल दिखाया। शानदार खेल के लिए प्रहलाद को 'स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच' चुना गया, जबकि करण धनुक को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार मिला।

मैच का पहला हमला चौथे मिनट में देखने को मिला। मैनपाट के खिलाड़ियों ने सर्कल में प्रवेश तो किया, लेकिन विपक्षी डिफेंडरों ने आसानी से गेंद को बाहर निकाल दिया। इसके बाद जवाबी हमले में बैलाडिला बुल्स ने भी सर्कल में जगह बनाई, लेकिन उनके पास डिफेंस को चुनौती देने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं थी। मैच के 7वें मिनट में मैनपाट के पास गोल करने का एक बेहतरीन मौका आया, जब प्रहलाद टांडी को सर्कल के अंदर गेंद मिली, लेकिन बैलाडिला बुल्स के गोलकीपर ने तेजी से आगे आकर इस मौके को नाकाम कर दिया।

लगातार हमलों के बीच बैलाडिला को अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे संदीप ठाकुर ने गोल में बदल दिया। यादव अपनी बाईं ओर नहीं जा सके, जबकि गेंद उनके काफी करीब थी। बहरहाल, पहला क्वार्टर बिना किसी और हलचल के समाप्त हुआ। दूसरे क्वार्टर में मैनपाट ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया। हालांकि ज्यादा मौके नहीं बने थे, लेकिन हाफ-टाइम से कुछ मिनट पहले प्रवीण यादव ने गोल कर दिया। प्रहलाद ने सर्कल के अंदर शानदार दौड़ लगाई और प्रवीण ने गेंद को बेहतरीन तरीके से डिफ्लेक्ट करके गोल में बदल दिया। हाफ-टाइम तक स्कोर 2-0 हो गया था।

शुरुआती बढ़त मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि मैनपाट अपना दबदबा बनाए रखेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बैलाडिला ने लगातार हमले कर विपक्षी डिफेंस पर दबाव बना दिया। उन्होंने कई बार सर्कल के अंदर प्रवेश किया और आखिरकार उनकी लगातार कोशिशों का फल उन्हें मिला। जसकरण सिंह सर्कल के काफी अंदर तक गए और उन्होंने राहुल यादव की तरफ गेंद फ्लिक की, जिसे राहुल ने गोल में बदल दिया। पिछले क्वार्टर की लय को बरकरार रखते हुए जसकरण ने चौथे क्वार्टर की शुरुआत में ही पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर बराबर कर दिया। सर्कल के बाहर से लगाए गए एक 'टोमाहॉक' शॉट की वजह से बैलाडिला को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे मैनपाट के गोलकीपर अल्फ़ाज़ खान ने रोक दिया।

मैनपाट के प्रहलाद को सर्कल के अंदर कुछ खाली जगह मिली, जहाँ से उन्होंने एक 'रिवर्स फ़्लिक' के ज़रिए अपनी टीम के लिए गोल कर दिया। मैच के अंत के करीब बैलाडिला के निहाल हुसैन अंसारी ने पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर शॉट लगाकर अपनी टीम के लिए बराबरी का गोल किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

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बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता, सामूहिक आस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अब मांझियों कोे 5000 रूपए और चालकियों को 3500 रूपए मिलेगा मासिक मानदेय

रायपुर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।

मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग दो माह पूर्व राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ बस्तर के परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को अवसर देना आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभा और संभावनाएं हैं। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति और सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर यह क्षेत्र प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा और जनजातीय समुदाय के लोग अपनी प्रतिभा, परिश्रम और सहभागिता से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


दंडकारण्य की सांस्कृतिक स्मृतियों में रची-बसी है बस्तर की विरासत

राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास से संबंधित अनेक प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की पवित्रता और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

प्रकृति संरक्षण जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा

राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में पेड़-पौधों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता के रूप में देखा जाता है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, जल, फल, फूल, भोजन और औषधियां प्रदान करती है। इसलिए प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसका संरक्षण और संवर्धन भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप करते हुए इनके संरक्षण और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर जनजातीय समाज के लोगों से अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और जंगलों को हरा-भरा बनाए रखने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।

बस्तर दशहरा के पारंपरिक अनुष्ठानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कुटुम्ब जात्रा के माध्यम से ग्राम देवी-देवताओं की विदाई तथा 27 अक्टूबर को माँ दंतेश्वरी और देवी मावली की डोली विदाई जैसे आयोजनों को इस उत्सव की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का परिचायक बताया। उन्होंने माँ दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।

राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता एवं संस्कारों में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं। बड़ों की बात सुनना और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना जनजातीय समाज की सहज परंपरा रही है।

राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी भव्यता के साथ समाज को साथ लेकर चलने की सीख भी देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों एवं समुदायों के लोग अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राजशाही की समाप्ति के बाद भी यह परंपरा निरंतर जारी रही और जनतांत्रिक संवाद के सशक्त मंच के रूप में विकसित हुई।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है। जब शासन और समाज आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तब कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने मांझी, मुखिया, पुजारी, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन सहित उन सभी लोगों के योगदान की सराहना की, जिनके सामूहिक परिश्रम और श्रद्धा से यह विश्वप्रसिद्ध परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी का बस्तर की धरती से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था। इसके बाद बस्तर पंडुम के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। आज बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से समस्त बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुरिया दरबार जनजातीय संस्कृति और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज में निहित समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति से उत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा प्रारंभ की गई है तथा रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे़, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ भारत आएंगे, BRICS संसदीय मंच में लेंगे हिस्सा

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ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) के 26 अक्टूबर 2026 से भारत में शुरू होने वाले दो दिवसीय 12वें BRICS संसदीय मंच में शामिल होने की उम्मीद है। यह सम्मेलन 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित संसद परिसर के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित होगा।

BRICS संसदीय मंच क्या है?

BRICS संसदीय मंच एक अंतरराष्ट्रीय बैठक है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय नेता अपने देशों की संसदों के बीच सहयोग, वैश्विक चुनौतियों और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

इस बार सम्मेलन की मुख्य थीम “Fostering Parliaments for People-Centric Development” यानी जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना है।

सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?

भारत की लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी।

  • संस्थागत मजबूती: संसदों की कार्यक्षमता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना।

  • AI और डिजिटल तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिम्मेदारी से इस्तेमाल और डिजिटल बदलाव।

  • वैश्विक शासन में सुधार: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और संसदीय सहयोग।

  • सतत विकास: पर्यावरण संरक्षण, समावेशी विकास और भविष्य की चुनौतियों से निपटना।

सम्मेलन में द्विपक्षीय बैठकें और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत भी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से संवाद करने की जानकारी भी दी गई है।

ईरान के अध्यक्ष की यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

ग़ालिबाफ की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं।

  • ईरान-अमेरिका संबंध: ग़ालिबाफ ईरान की ओर से अमेरिका और इज़राइल से जुड़े संघर्ष संबंधी वार्ताओं में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य: यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे जुड़े तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।

  • भारत-ईरान संवाद: BRICS सम्मेलन दोनों देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को साझा मुद्दों पर बातचीत का अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, किसी विशिष्ट द्विपक्षीय समझौते की घोषणा की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

भारत को क्या फायदा हो सकता है?

इस यात्रा से भारत को बहुपक्षीय मंच पर ईरान सहित अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। संभावित रूप से चर्चा के प्रमुख क्षेत्र होंगे:

  • क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा।

  • ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार।

  • संसदीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

  • डिजिटल तकनीक, AI और वैश्विक संस्थाओं में सुधार।

ये संभावित सहयोग के क्षेत्र हैं; इन्हें किसी घोषित समझौते या अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सम्मेलन कब और कहाँ होगा?

तारीख- 26–27 अक्टूबर 2026

स्थान- संविधान सदन का केंद्रीय कक्ष, नई दिल्ली

मेजबान- भारत की संसद; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।


पीयूष गोयल ने जलवायु वित्त पर विकसित देशों से जवाबदेही की मांग की

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भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में जलवायु वित्त (Climate Finance) के मुद्दे पर विकसित देशों की प्रतिबद्धताओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों को विकासशील देशों से किए गए वित्तीय वादों को पर्याप्त रूप से पूरा करना चाहिए।

इस मुद्दे का महत्व इसलिए है क्योंकि विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, प्रदूषण कम करने, जलवायु आपदाओं से निपटने और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा विकसित करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है।

समाचार की मुख्य बातें

1. विकसित देशों से सालाना 100 अरब डॉलर के वादे पर सवाल

पीयूष गोयल ने 22 अक्टूबर 2026 को बर्लिन में आयोजित Berlin Global Dialogue के दौरान कहा कि विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार इस सहायता को लेकर किए गए वादे पर्याप्त रूप से पूरे नहीं हुए हैं।

2. भारत के उत्सर्जन और आबादी का मुद्दा उठाया

गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की लगभग 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उसका हिस्सा 3% से कम है। उन्होंने यूरोप के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन की तुलना भारत से करते हुए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी को अधिक न्यायसंगत तरीके से बाँटने की मांग की। ये आँकड़े उनके भाषण में दिए गए दावे हैं।

3. विकासशील देशों को किस तरह की मदद चाहिए?

जलवायु वित्त का उद्देश्य विकासशील देशों को इन क्षेत्रों में सहायता देना है:

  • सौर और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएँ।

  • बाढ़, सूखा, चक्रवात और अन्य जलवायु आपदाओं से निपटने की तैयारी।

  • उद्योगों और परिवहन में कार्बन उत्सर्जन कम करना।

  • पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और हरित बुनियादी ढाँचे में निवेश।

  • छोटे द्वीपीय और कमजोर देशों को जलवायु जोखिमों से निपटने में मदद।

4. यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स पर भी चिंता

गोयल ने यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) पर भी सवाल उठाए। यह व्यवस्था कुछ आयातित वस्तुओं, जैसे स्टील, के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन पर लागत लागू करती है। भारत की चिंता है कि ऐसी व्यवस्थाएँ विकासशील देशों के निर्यातकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल सकती हैं।

5. भारत का रुख क्या है?

भारत का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की जिम्मेदारी सभी देशों की है, लेकिन ऐतिहासिक उत्सर्जन, आर्थिक क्षमता और विकास की जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना चाहता है, साथ ही बड़ी आबादी की ऊर्जा, भोजन और आर्थिक विकास की जरूरतों को भी पूरा करना चाहता है।

निष्कर्ष

बर्लिन में पीयूष गोयल का संदेश था कि जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्रवाई केवल लक्ष्य तय करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विकसित देशों को विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग की अपनी प्रतिबद्धताओं पर भी ठोस प्रगति दिखानी चाहिए।


छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों का मानदेय ₹30,870 करने की तैयारी, करीब 7,900 जवानों को मिल सकता है लाभ

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छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों (होमगार्ड जवानों) के लिए मानदेय बढ़ोतरी से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के गृह विभाग ने करीब 7,900 नगर सैनिकों का कुल मासिक मानदेय ₹19,500 से बढ़ाकर ₹30,870 करने की अनुशंसा की है।

यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश और गृह मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार किए जाने की खबर है। हालांकि, इसे लागू करने की अंतिम सरकारी मंजूरी और भुगतान शुरू होने की तारीख की पुष्टि अभी उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

प्रस्तावित मानदेय का पूरा हिसाब

प्रस्तावित कुल मासिक राशि-₹30,870

मूल मानदेय-₹19,500
महंगाई भत्ता (58%)- ₹11,310
वर्दी धुलाई भत्ता-₹60

कुल प्रस्तावित मानदेय-₹30,870

कितनी बढ़ोतरी हो सकती है?

विवरण

    राशि

वर्तमान मासिक मानदेय

    ₹19,500

प्रस्तावित कुल मासिक राशि

    ₹30,870

संभावित मासिक अंतर

    ₹11,370

12 महीने का अंतर, यदि दर पूरे साल लागू रहे

    ₹1,36,440

ये गणनाएं प्रस्तावित राशि के आधार पर हैं। वास्तविक भुगतान ड्यूटी, पात्रता और अंतिम सरकारी आदेश की शर्तों पर निर्भर करेगा।

मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों बनाया गया?

मीडिया रिपोर्टों में इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं:

  • महंगाई: बढ़ती कीमतों के बीच नगर सैनिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना।

  • कार्य की जिम्मेदारी: कानून-व्यवस्था, अग्निशमन और आपदा प्रबंधन जैसी सेवाओं में उनकी भूमिका।

  • न्यायालय के निर्देश: मानदेय से संबंधित न्यायालयीन निर्देशों को भी प्रस्ताव का आधार बताया गया है।

इससे कितने नगर सैनिकों को फायदा मिल सकता है?

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 7,900 नगर सैनिकों को प्रस्तावित बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। ये जवान पुलिस और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण, आपदा के समय राहत कार्य और अन्य आवश्यक सेवाओं में सहयोग देते हैं।

पहले कब-कब बढ़ा था मानदेय?

  • 2017: मासिक मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹13,200 किया गया।

  • 2023: 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी बढ़ोतरी के बाद राशि ₹19,500 हुई।

  • 2026: अब कुल राशि ₹30,870 करने की अनुशंसा की खबर सामने आई है।

नया मानदेय कब से मिलेगा?

सबसे जरूरी बात: अभी उपलब्ध रिपोर्टें इसे प्रस्ताव या अनुशंसा के रूप में बताती हैं। नई दर लागू होने की निश्चित तारीख, एरियर मिलने की स्थिति और भुगतान शुरू होने के महीने की पुष्टि अंतिम सरकारी आदेश से ही होगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सभी नगर सैनिकों को ₹30,870 मिलना शुरू हो गया है।

खबर का निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के करीब 7,900 नगर सैनिकों के मानदेय को ₹19,500 से बढ़ाकर ₹30,870 प्रतिमाह करने का प्रस्ताव आर्थिक राहत की दिशा में महत्वपूर्ण खबर है। अब आगे की स्थिति शासन की अंतिम मंजूरी और आधिकारिक आदेश पर निर्भर करेगी।


छत्तीसगढ़ में 16 हजार कोटवारों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन: नियमितीकरण और ₹15,000 मासिक मानदेय की मांग

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छत्तीसगढ़ में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेश के लगभग 16,000 कोटवारों ने 23 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा। संगठन ने जिला मुख्यालयों में धरना देकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की थी। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर भी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

यह आंदोलन कोटवारों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया गया। संगठन का कहना है कि ग्रामीण स्तर पर शासन-प्रशासन के कामों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली है।

कोटवारों की प्रमुख चार मांगें

1. नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा

कोटवारों की मांग है कि उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए और राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए, ताकि उनकी सेवा को स्थायी सरकारी सेवा के रूप में मान्यता मिल सके।

2. न्यूनतम ₹15,000 मासिक मानदेय

संगठन ने महंगाई को देखते हुए पारिश्रमिक बढ़ाकर कम-से-कम ₹15,000 प्रतिमाह करने की मांग की है। फिलहाल पारिश्रमिक व्यवस्था में सेवा भूमि और श्रेणी के आधार पर अंतर होने की रिपोर्टें हैं।

3. कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता

संगठन चाहता है कि कोटवार की नियुक्ति या पद रिक्त होने पर नियमों के अनुसार उसके परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। गैर-वंशजों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है।

4. सेवा संबंधी समस्याओं और अधिकारों का समाधान

संगठन की मांग है कि कोटवारों की लंबित सेवा समस्याओं का निराकरण किया जाए और उनके परिवारों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएं। विस्तृत मांगपत्र में नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा सुरक्षा से जुड़े विषय भी उठाए गए हैं।

पहले भी हो चुका है आंदोलन

कोटवार एसोसिएशन ने इससे पहले 3 जुलाई 2026 को तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों के निराकरण की अपील की गई थी।

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, तीन महीने बाद भी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को आंदोलन का दूसरा चरण आयोजित करने का फैसला लिया गया।

कोटवारों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। वे स्थानीय सूचनाएं पहुंचाने और राजस्व प्रशासन से जुड़े विभिन्न कार्यों में सहयोग करते हैं। संगठन का तर्क है कि उनकी जिम्मेदारियों और लंबे समय की सेवाओं के अनुरूप पारिश्रमिक तथा सेवा सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्या सरकार ने मांगें मान ली हैं?

उपलब्ध रिपोर्टों में 23 अक्टूबर के प्रदर्शन के आह्वान और मांगों की जानकारी है, लेकिन इन मांगों को स्वीकार करने या मानदेय बढ़ाने के संबंध में सरकार के किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए ₹15,000 मासिक मानदेय को फिलहाल कोटवार संगठन की मांग के रूप में ही समझना चाहिए।


सरगुजा में तीन सरकारी शिक्षक निलंबित, जानिए पूरा मामला

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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शिक्षा विभाग ने तीन शासकीय शिक्षकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, दो प्रधान पाठक और एक सहायक शिक्षक को अलग-अलग आपराधिक मामलों में निलंबित किया गया है। इनमें एक शिक्षक को अदालत से पांच साल की सजा मिल चुकी है, जबकि अन्य दो शिक्षक कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हैं।

प्रधान पाठक विजय कुमार यादव: हत्या के प्रयास के मामले में सजा

सराहनीय पहल: कलेक्टर नदी पारकर ऐसे पहुंचे गांव, फिर ली बच्चों की क्लास | Surguja DM Vilas Bhoskar crossed river to inspect government schools created a stir

पदस्थापना- शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, विकासखंड उदयपुर

मामला: आपराधिक प्रकरण में दोषसिद्धि

  • रिपोर्टों के अनुसार, विजय कुमार यादव के खिलाफ वर्ष 2019 में मारपीट और हत्या के प्रयास से संबंधित आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।

  • प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय, अंबिकापुर ने 3 जनवरी 2026 को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

  • इसके बाद उन्हें केंद्रीय जेल, अंबिकापुर में रखा गया।

  • उच्च न्यायालय में अपील के दौरान उन्हें सशर्त जमानत मिली और अक्टूबर 2026 में जेल से रिहाई हुई।

  • शिक्षा विभाग ने उनकी दोषसिद्धि और सेवा संबंधी नियमों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की।

प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा: वित्तीय धोखाधड़ी का मामला

Livelihood College Ambikapur (@lhcambikapur) on X

पदस्थापना- शासकीय प्राथमिक शाला कटघोरियापारा, विकासखंड उदयपुर

मामला: कथित वित्तीय धोखाधड़ी

रिपोर्टों के मुताबिक, राजकुमार पैकरा के खिलाफ अंबिकापुर के मणिपुर थाने में वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था।

  • उन्हें 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया।

  • गिरफ्तारी के बाद वे न्यायिक अभिरक्षा में रहे।

  • रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 1 अक्टूबर 2026 को जमानत मिली।

  • शिक्षा विभाग ने गिरफ्तारी और न्यायिक अभिरक्षा से जुड़े तथ्यों के आधार पर निलंबन का आदेश जारी किया।

सहायक शिक्षक त्रिपाल टोप्पो: क्रिप्टोकरेंसी और शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा आरोप

Homepage | Commissioner Surguja Division | Tradition Meets Transparent Governance | India

पदस्थापना- शासकीय प्राथमिक शाला जरहाडीह, विकासखंड उदयपुर

पद: सहायक शिक्षक (एलबी)

त्रिपाल टोप्पो के खिलाफ भी मणिपुर थाने में वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

  • उन्हें 31 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया।

  • गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

  • रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 6 अक्टूबर 2026 को जमानत मिली।

  • विभाग ने मामले और न्यायिक अभिरक्षा की अवधि को ध्यान में रखते हुए निलंबन की कार्रवाई की।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस मामले को क्रिप्टोकरेंसी और शेयर मार्केट ट्रेडिंग के नाम पर कथित ठगी से जोड़ा गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से आरोपों की पूरी जांच-रिपोर्ट या अदालत में अंतिम नतीजे की पुष्टि नहीं होती।

निलंबन के बाद क्या होगा?

शिक्षा विभाग की कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि तीनों शिक्षकों की नौकरी स्थायी रूप से समाप्त कर दी गई है।

  • निलंबन: विभागीय जांच या संबंधित नियमों के तहत कर्मचारी को अस्थायी रूप से सेवा से अलग रखा जाता है।

  • मुख्यालय: निलंबन अवधि के दौरान संबंधित शिक्षकों के लिए अलग-अलग कार्यालयों में मुख्यालय निर्धारित किए जाने की जानकारी है।

  • जीवन निर्वाह भत्ता: लागू सेवा नियमों के अनुसार पात्रता होने पर भत्ता दिया जा सकता है।

  • आगे की कार्रवाई: विभागीय प्रक्रिया और संबंधित न्यायालयीन मामलों की स्थिति के अनुसार आगे का निर्णय हो सकता है।

खबर का मुख्य निष्कर्ष

सरगुजा जिले में यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तीनों मामले सरकारी शिक्षकों के आचरण और सेवा नियमों से जुड़े हैं। एक मामले में अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि अन्य दो मामलों में धोखाधड़ी के आरोपों के आधार पर कार्रवाई हुई है।

6,000 से अधिक बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुँचा मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला का संदेश

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दशहरा अवकाश में 260 से अधिक बच्चों ने सीखा मानवीय मूल्यों का पाठ, हर रविवार जीवन विद्या अध्ययन करने आश्रम आने की जताई इच्छा

महासमुंद- मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद (छत्तीसगढ़) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन आधारित मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला का संदेश 6,000 से अधिक बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुँचा। कार्यशाला में प्रत्यक्ष रूप से 260 से अधिक बच्चों ने सहभागिता की। दशहरा अवकाश के दौरान बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति ने न केवल आयोजकों को गौरवान्वित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि बच्चे व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों को समझने के प्रति उत्सुक हैं।

मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया के अनुसार, इस कार्यशाला की सबसे विशेष बात यह रही कि बच्चों को यह स्पष्ट रूप से समझ में आया कि मानव व्यवहार सूत्र की बातें केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन और आपसी संबंधों में भी उपयोगी हैं। इसका उद्देश्य स्कूली पाठ्यक्रम, किताबी पढ़ाई या परीक्षा की तैयारी करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और व्यवहार में मानवीय मूल्यों को अपनाना है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सहभागिता इस बात का सकारात्मक संकेत है कि वे जीवन की सच्चाइयों को समझना चाहते हैं। वे न्याय, धर्म और सत्य को जानने के साथ-साथ अपने जीवन में उतारने की जिज्ञासा भी रखते हैं। व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों के अभाव में जीवन में अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए जीवन विद्या का अध्ययन व्यक्ति को स्वयं को समझने, दूसरों के साथ उचित व्यवहार करने और मानवीय संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हर रविवार आश्रम आने की जताई इच्छा

कार्यशाला में शामिल बच्चों ने आगे भी जीवन विद्या का अध्ययन जारी रखने की इच्छा जताई। बच्चों ने कहा कि वे प्रत्येक रविवार को आश्रम आकर जीवन विद्या का अध्ययन करना चाहेंगे। यह पहल कार्यशाला के प्रति उनकी रुचि और सीखने की निरंतरता बनाए रखने के संकल्प को दर्शाती है।

कार्यशाला का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के प्रयास ने बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच मानव व्यवहार सूत्र के प्रति रुचि पैदा की। आयोजकों की मंशा है कि व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों की समझ घर-घर तक पहुँचे, जिससे एक जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण हो सके।

कार्यशाला की सफलता में इनका रहा महत्वपूर्ण योगदान

कार्यशाला को सफल बनाने में राखी, रागेश्वर, तन्मय निर्मलकर, योगेश कुमार निर्मलकर (प्रधान अध्यापक, शासकीय विद्यालय सलिहाभांटा), घनश्याम दीवान (प्रधान अध्यापक, शासकीय विद्यालय मानपुर), शंकर खैरवार तथा खैरवार डेरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बच्चों की सक्रिय सहभागिता और जीवन विद्या के अध्ययन को आगे जारी रखने की इच्छा ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और परीक्षा में सफलता प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि जीवन को समझना, मानवीय मूल्यों को अपनाना और बेहतर इंसान बनना भी है। मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।


19 लाख के लालच में मां-बेटे का कत्ल! 13 दिन बाद खुला सूरजपुर डबल मर्डर का राज

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 सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मां और बेटे की हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने 13 दिन बाद खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 19 लाख रुपये के लालच में आरोपी ने पहले शिक्षिका रजनी बरेठ की हत्या की और फिर राज खुलने के डर से उनके बेटे सुजल राज को भी मौत के घाट उतार दिया। दोनों के शव अलग-अलग जगहों पर मिलने के बाद पुलिस के सामने हत्यारे तक पहुंचना बड़ी चुनौती थी। करीब 60 से 70 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पुलिस आरोपी प्रवेश कुमार तक पहुंची। पूछताछ में कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल कार सहित कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं।


19 लाख रुपये के लालच में रची हत्या की साजिश

पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत 9 अक्टूबर से हुई। मोटर पार्ट्स के कारोबार में नुकसान के कारण प्रवेश कुमार को पैसों की जरूरत थी। इसी दौरान उसे जानकारी मिली कि उसकी पत्नी की सहेली और शिक्षिका रजनी बरेठ ने करीब 19 लाख रुपये का लोन लिया है। पुलिस का दावा है कि इसी रकम के लालच में आरोपी रजनी के घर पहुंचा।

वहां पैसों को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान प्रवेश कुमार ने रजनी का गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी को आशंका हुई कि रजनी का बेटा सुजल राज घटना का राज खोल सकता है। इसी डर से उसने कथित तौर पर बेटे को भी रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पहले मां की हत्या, फिर बेटे को भी मार डाला

पुलिस के मुताबिक, रजनी की हत्या के बाद आरोपी सुजल राज को कार में बैठाकर ले गया। इसके बाद राय जंगल के पास सीमेंट के खंभे के टुकड़े से वार कर उसकी हत्या कर दी। मां और बेटे की हत्या के बाद आरोपी ने पुलिस से बचने की कोशिश की।

10 अक्टूबर को महावीरपुर के जंगल में सुजल राज का शव मिला। इसके अगले दिन रजनी बरेठ का शव उनके किराये के मकान के बाथरूम से बरामद हुआ। दोनों शव अलग-अलग स्थानों पर मिलने से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

60 से 70 CCTV कैमरों के फुटेज खंगालने पर मिला सुराग

दोहरी हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे करीब 60 से 70 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जांच के दौरान एक संदिग्ध की गतिविधियों और कार के नंबर से पुलिस को अहम सुराग मिला। इसके बाद जांच की दिशा बदल गई और पुलिस प्रवेश कुमार तक पहुंची।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी की भूमिका सामने आई। इसके बाद उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल कार, स्टील की बोतल, सीमेंट के खंभे का टुकड़ा और मोबाइल फोन सहित कई अहम साक्ष्य बरामद किए गए।

आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने जुटाए अहम साक्ष्य

पुलिस ने मां-बेटे की हत्या के मामले में प्रवेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी वारदात के घटनाक्रम और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में पुलिस का दावा है कि आर्थिक तंगी और करीब 19 लाख रुपये के लालच ने दोहरी हत्या की वारदात को जन्म दिया। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

CG NEWS ; खाद्य विभाग का सर्वर सुचारु, राशनकार्ड से जुड़े कार्यों का नियमित संचालन

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार नागरिकों को खाद्य विभाग से संबंधित सेवाएं सुचारु रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। रायपुर जिले में खाद्य विभाग का सर्वर सुचारु रूप से कार्य कर रहा है। राशनकार्ड से संबंधित सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वर डाउन होने के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने का कार्य बाधित होने जैसी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें।


जिला खाद्य नियंत्रक, रायपुर ने स्पष्ट किया है कि खाद्य विभाग का सर्वर सामान्य रूप से कार्यरत है और राशनकार्ड से संबंधित कार्यों का संचालन निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप किया जा रहा है। सर्वर की तकनीकी समस्या के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने में व्यवधान होने संबंधी जानकारी भ्रामक है।

खाद्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे विभागीय सेवाओं के संबंध में अपुष्ट जानकारियों से भ्रमित न हों। विभाग ने कहा है कि नागरिकों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और सेवाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

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 रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी से देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंदिर में माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया।


इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की अटूट श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहाँ की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति जी के प्रवास से बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। माँ दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था है और उनकी उपासना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। माँ दंतेश्वरी से जुड़ी आस्था बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में गहराई से रची-बसी है।

नशे से रोका तो दोस्त बना कातिल! 19 साल के शिवा की चाकू मारकर हत्या

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 दुर्ग। जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र के उरला बॉम्बे आवास में गुरुवार देर रात एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 19 वर्षीय शिवा सोनी के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नशा करने से रोकने की बात को लेकर शिवा और उसके दोस्त लक्ष्य कुमार के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान शिवा पर चाकू से हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल शिवा को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।


अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उरला बॉम्बे आवास में शिवा सोनी और आरोपी लक्ष्य कुमार के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद के दौरान शिवा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने की जांच

घटना की सूचना मिलते ही दुर्ग शहर के एएसपी शोभराज अग्रवाल, सीएसपी, मोहन नगर थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मृतक के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।

नशा करने से रोकता था शिवा, विवाद की यही वजह होने की आशंका

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि शिवा अपने दोस्त लक्ष्य कुमार को नशा करने से रोकता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने की जानकारी मिली है। हालांकि, हत्या के पीछे की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

आरोपी लक्ष्य कुमार की तलाश में जुटी पुलिस

दुर्ग शहर के एएसपी शोभराज अग्रवाल के मुताबिक, मोहन नगर थाना क्षेत्र में एक युवक पर चाकू से हमला किए जाने और उसकी मौत होने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मामले में आरोपी लक्ष्य कुमार के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल आरोपी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस घटना से जुड़े साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

कावेरी बीज कंपनी के रायपुर कार्यालय घेराव से पहले किसान नेताओं को किया गिरफ्तार

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भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही और जुगनू चंद्राकर गिरफ्तार , महासमुंद से ट्रेक्टर रैली लेकर रायपुर होना था रवाना।


महासमुंद। कावेरी सीड्स कंपनी द्वारा बीज उत्पादन कराने के बाद किसानों एवं मजदूरों का भुगतान नहीं किए जाने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को कंपनी के रायपुर स्थित कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जाना था प्रभावित किसान एवं मजदूर ट्रैक्टर-ट्रालियों तथा अन्य साधनों से महासमुंद से रायपुर के लिए रवाना होने इकट्ठा हो रहे थे।


किसान नेता एवं जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर ने बताया कि कावेरी सीड्स कंपनी लिमिटेड के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार रेड्डी के मार्गदर्शन में कंपनी के माध्यम से रबी सीजन 2024-25 में किसानों के खेत लीज (रेग) पर लेकर बीज उत्पादन कराया गया था। लेकिन किसानों एवं मजदूरों को अब तक उनकी मेहनत और उत्पादन का भुगतान नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सात जिलों के 176 किसानों का कुल 4 करोड़ 62 लाख 29 हजार 866 रुपये भुगतान लंबित है। इनमें अकेले महासमुंद जिले के 85 किसान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मजदूरों की 7 लाख 89 हजार 500 रुपये की मजदूरी भी बकाया है। इस प्रकार किसानों एवं मजदूरों का कुल मूल बकाया 4 करोड़ 70 लाख 19 हजार 366 रुपये है। यूनियन के अनुसार जुलाई 2025 से अक्टूबर 2026 तक 15 महीने की अवधि के लिए 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया राशि लगभग 6 करोड़ 11 लाख 25 हजार 175 रुपये हो गई है।

भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने बताया कि किसानों मजदूरों द्वारा शासन-प्रशासन से भुगतान प्रदान कराने हेतु आवेदन निवेदन किया जा चुका है परंतु अभी तक भुगतान नहीं मिलने से परेशान होकर सभी किसान मजदूर परिवार द्वारा 20 फरवरी 2026 को भी किसान रायपुर के लिए निकल रहे थे जिन्हे बेलसोण्डा के पास से प्रशासन ने भुगतान कराने का आश्वासन के साथ किसानों को मना लिये थे परंतु भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।

तेजराम विद्रोही ने सवाल उठाया कि ज़ब कावेरी बीज कंपनी बीज उत्पादन कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर मासिक वेतन पर मुंशी रखते थे जिन्हे छै महीने का भुगतान नहीं किया था उन्हें बाद में तीन महीने की भुगतान के साथ समझौता किया और छै मुंशियों को एक लाख अस्सी हजार रुपये का भुगतान किया है परंतु मुंशियों द्वारा काम कराये मजदूरों का भुगतान नहीं किया गया तथा जिन किसानों के खेत में बीज उत्पादन कराया उन किसानों को भुगतान न देकर कंपनी उनका आर्थिक व मानसिक शोषण क्यों कर रही है। कंपनी के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय आंदोलनकारी किसानों को नजरबंद करना कॉर्पोरेट परस्त सरकार की किसान विरोधी, लोकतंत्र विरोधी चेहरे को बेनक़ाब करती है।

कावेरी सीड्स कंपनी के रायपुर कार्यालय घेराव से पहले किसान नेता गिरफ्तार, किसानों-मजदूरों के 6 करोड़ रुपये से अधिक बकाया

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महासमुंद से ट्रैक्टर रैली लेकर रायपुर जाने की थी तैयारी, भारतीय किसान यूनियन ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल

महासमुंद- कावेरी सीड्स कंपनी द्वारा बीज उत्पादन कराने के बाद किसानों और मजदूरों का भुगतान नहीं किए जाने के विरोध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित कंपनी के कार्यालय का घेराव करने जा रहे किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही और जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता जागेश्वर उर्फ जुगनू चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद किसान आंदोलन का मामला गरमा गया है। प्रभावित किसान और मजदूर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित अन्य वाहनों से महासमुंद से रायपुर रवाना होने के लिए एकत्रित हो रहे थे।

176 किसानों का 4.62 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित

किसान नेता जागेश्वर उर्फ जुगनू चंद्राकर के अनुसार, कावेरी सीड्स कंपनी लिमिटेड के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार रेड्डी के मार्गदर्शन में रबी सीजन 2024-25 के दौरान किसानों के खेत लीज (रेग) पर लेकर बीज उत्पादन कराया गया था। आरोप है कि उत्पादन कार्य पूरा होने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का भुगतान नहीं किया गया। इसके साथ ही खेतों में काम करने वाले मजदूर भी अपनी मजदूरी के लिए लंबे समय से परेशान हैं।

चंद्राकर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के सात जिलों के 176 किसानों का कुल 4 करोड़ 62 लाख 29 हजार 866 रुपये बकाया है। इनमें महासमुंद जिले के 85 किसान शामिल हैं। वहीं, मजदूरों की 7 लाख 89 हजार 500 रुपये की मजदूरी भी लंबित है। इस तरह किसानों और मजदूरों का कुल मूल बकाया 4 करोड़ 70 लाख 19 हजार 366 रुपये बताया गया है।

भारतीय किसान यूनियन के अनुसार, जुलाई 2025 से अक्टूबर 2026 तक 15 महीने की अवधि के लिए 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग 6 करोड़ 11 लाख 25 हजार 175 रुपये हो गई है।

आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ भुगतान

भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने बताया कि प्रभावित किसान और मजदूर भुगतान की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष कई बार आवेदन और निवेदन कर चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 20 फरवरी 2026 को भी किसान रायपुर के लिए रवाना हो रहे थे। उस दौरान बेलसोंडा के पास प्रशासन ने भुगतान कराने का आश्वासन देकर किसानों को रोक लिया था। हालांकि, यूनियन का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया।

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मुंशियों को भुगतान, मजदूरों की मजदूरी अब भी बकाया होने का आरोप

तेजराम विद्रोही ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीज उत्पादन कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर मासिक वेतन पर मुंशियों की नियुक्ति की गई थी। उनके अनुसार, छह महीने का भुगतान लंबित रहने के बाद कथित समझौते के तहत छह मुंशियों को तीन महीने के भुगतान के रूप में कुल 1 लाख 80 हजार रुपये दिए गए।

विद्रोही का आरोप है कि मुंशियों के माध्यम से काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी और जिन किसानों के खेतों में बीज उत्पादन कराया गया, उनका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों और मजदूरों को उनकी मेहनत की राशि देने में देरी क्यों की जा रही है।

किसान नेताओं की गिरफ्तारी पर यूनियन ने जताई नाराजगी

तेजराम विद्रोही ने कहा कि बकाया भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन करने जा रहे किसान नेताओं को गिरफ्तार करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय आंदोलनकारी किसानों को नजरबंद और गिरफ्तार किया जा रहा है। यूनियन ने इसे किसान विरोधी और लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत कार्रवाई बताते हुए शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

किसानों और मजदूरों की मांग है कि कावेरी सीड्स कंपनी से बकाया मूल राशि के साथ ब्याज का भुगतान कराया जाए तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि किसानों की लंबित राशि के भुगतान को लेकर प्रशासन और कंपनी की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।


महासमुंद में भीषण सड़क हादसा: ट्रक में पीछे से घुसी कार, दो महिलाओं की मौत, तीन गंभीर

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर शुक्रवार सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। पटेवा थाना क्षेत्र के बावनकेरा चौक के पास तेज रफ्तार कार आगे चल रहे 16 चक्का ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी पांचों कार सवार ओडिशा के संबलपुर से लौट रहे थे।


ट्रक के पिछले हिस्से से टकराई कार

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार सवार ओडिशा के संबलपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर बावनकेरा चौक के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर 16 चक्का ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। टक्कर में कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला। सभी घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो महिलाओं को मृत घोषित कर दिया। तीन घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

मृतकों की पहचान में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कार में सवार सभी लोग राजनांदगांव जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। हालांकि, मृतकों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

हादसे के बाद पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न हो। फिलहाल पुलिस दुर्घटना के का

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