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विश्व कौशल एशिया 2025: भारत ने अपनी पदार्पण भागीदारी में हासिल की 8वां स्थान

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भारत ने विश्व कौशल एशिया प्रतियोगिता (WSAC) 2025 में अपनी पहली भागीदारी के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की, जिसमें 29 प्रतिभागी देशों में से 8वां स्थान प्राप्त किया। क्षेत्र की प्रमुख कौशल प्रणालियों के सामने पदार्पण करते हुए भारत ने उच्च मांग और उभरते ट्रेडों में अनुशासन, नवाचार और वैश्विक मानकों की उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया।

मंत्रालय के नेतृत्व में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), एनएसडीसी और अन्य तकनीकी साझेदारों द्वारा प्रशिक्षण और तैयारी को मार्गदर्शन दिया गया। भारतीय दल में 23 प्रतियोगी शामिल थे, जिन्होंने 21 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा की। इन्हें 21 विशेषज्ञों द्वारा समर्थित किया गया।

भारत ने पारंपरिक और तकनीकी-आधारित कौशल श्रेणियों दोनों में असाधारण प्रदर्शन किया। भारत ने एक रजत पदक, दो कांस्य पदक और तीन उत्कृष्टता पदक प्राप्त किए, जो देश की वैश्विक कौशल उत्कृष्टता में तेजी से बढ़ती उपस्थिति को दर्शाते हैं।

पदक उपलब्धियां:

  • रजत: पेंटिंग और डेकोरेटिंग – मुस्कान

  • कांस्य: इंडस्ट्रियल डिज़ाइन टेक्नोलॉजी – कोमल पांडा

  • कांस्य: रोबोट सिस्टम इंटीग्रेशन – शिवम सिंह और दिनेश आर

  • उत्कृष्टता पदक: सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन डेवलपमेंट फॉर बिजनेस – मोहम्मद माफाज़ पी आर

  • उत्कृष्टता पदक: वेब टेक्नोलॉजीज़ – आदित्य नंदन

  • उत्कृष्टता पदक: इलेक्ट्रिकल इंस्टालेशन्स – धनुष एम जी

महिला प्रतियोगियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पदक सूची में महत्वपूर्ण योगदान दिया, और यह दर्शाया कि भारत की कौशल प्रणाली में युवा महिलाओं की नेतृत्व क्षमता बढ़ रही है।

जयराम चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास और उद्यमिता ने कहा:

"विश्व कौशल एशिया 2025 में भारत का प्रदर्शन हमारे युवा प्रतिभा की आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अनुशासन को दर्शाता है। यहां अर्जित हर पदक और मान्यता हमारे प्रतियोगियों के कठिन परिश्रम, प्रशिक्षकों की प्रतिबद्धता और भारत की बढ़ती कौशल प्रणाली की ताकत का प्रमाण है।"

प्रतियोगियों का चयन IndiaSkills National Competition 2024 के माध्यम से किया गया था और उन्हें उद्योग-नेतृत्व वाले प्रशिक्षण और वैश्विक विशेषज्ञों के समर्थन से कई महीनों तक तैयार किया गया।

विश्व कौशल एशिया 2025 ने एशिया के विभिन्न देशों के 500+ युवा प्रतिभागियों को एक मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने नवाचार और भविष्य-तैयार क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता ने स्थानीय शिक्षा, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया।

भारत की लगातार वृद्धि इस क्षेत्र में राष्ट्रीय कौशल पहलों की प्रभावशीलता और युवा पेशेवरों की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।

मनसेर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर: वित्तीय शासन सुदृढ़ करने पर जोर

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वित्त मंत्रालय के खर्च विभाग (DoE), मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय ने 28 से 30 नवंबर 2025 तक मनसेर, हरियाणा में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय के अधिकारी, हरियाणा राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सार्वजनिक वित्तीय तंत्र से मूल्यवान अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए।

शिविर का उद्देश्य और उद्घाटन

शिविर का शुभारंभ पवन कुमार, मुख्य सलाहकार लागत, के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने समकालीन लोक प्रशासन में सतत सीखने और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद डॉ. गौरी रंगड़ा (हार्टफुलनेस फाउंडेशन) द्वारा “हार्टफुलनेस कम्युनिकेशन” पर सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व और प्रभावी हितधारक संलग्नता को बढ़ावा देना था।

पहला दिन: महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श

पहले दिन मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:

  1. अंतरराष्ट्रीय ज्ञान निकाय (International Knowledge Body) का विकास

  2. नगरपालिका सेवाओं के लिए मानकीकृत लागत निर्धारण (Standardised Costing)

इसके बाद वी. वुअलनाम, सचिव, DoE को प्रमुख विचार और सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुख्य सिफारिशों में शामिल थे:

  • DoE के तहत एक नोडल सेल की स्थापना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत लागत ढांचे विकसित करे, जिसमें नगरपालिका निकायों के लिए भी स्थानीय और वैश्विक संस्थाओं के साथ सहयोग शामिल हो।

  • समयबद्ध रणनीतिक कदमों के माध्यम से मौजूदा चुनौतियों का समाधान और वित्तीय शासन को सुदृढ़ बनाना।

  • भविष्य के चिंतन शिविरों में युवाओं को केंद्रीय भूमिका देने का प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण दोहराया गया।

दूसरा दिन: योग और ज्ञान सत्र

दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद विशेषज्ञों और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से विभिन्न ज्ञान सत्र आयोजित किए गए:

  • राजीव शोरे, IIIT सूरत: AI/ML जैसे उभरते तकनीकी उपकरणों का प्रशासनिक दक्षता, विश्लेषणात्मक क्षमता और पारदर्शिता बढ़ाने में उपयोग।

  • प्रो. नवीन सिरोही, IICA: कॉर्पोरेट गवर्नेंस सिद्धांत और हितधारक सहभागिता रणनीतियाँ।

  • प्रो. संदीप गोयल, MDI गुड़गांव: फोरेंसिक अकाउंटिंग और वित्तीय निगरानी तंत्र का महत्व।

  • प्रो. ऋषभ अग्रवाल, ISB हैदराबाद: सार्वजनिक डेटा और AI के महत्व, और न्यायसंगत यूजर-चार्ज ढांचे का विकास।

इसके बाद राउंड-टेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिसमें यूजर-चार्ज ढांचे, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ICoAS की भूमिका पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विश्लेषण और थीम-वार सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

अंतिम दिन: पेशेवर विकास और नए अवसर

30 नवंबर को “Professional Evolution and New Growth Avenues” पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें उभरते क्षेत्रों और कार्यात्मक क्षेत्रों की चर्चा हुई, जहां ICoAS अधिकारी तकनीकी और आर्थिक विकास के संदर्भ में परिवर्तन ला सकते हैं।

शिविर के समापन में मुख्य सलाहकार लागत ने अधिकारियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, समर्पण और वित्तीय शासन सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का धन्यवाद मनमोहन सचदेवा, अतिरिक्त मुख्य सलाहकार लागत, ने किया और अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार रहने की प्रेरणा दी।


उत्तराखंड में आपदा पूर्वानुमान होगा और सशक्त: डॉ. जितेंद्र सिंह ने किए तीन नए वेदर रडारों की घोषणा

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केंद्र सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि उत्तराखंड में सुरकंडा देवी, मुक्तेश्वर और लैंसडौन में पहले ही तीन वेदर रडार लगाए जा चुके हैं और जल्द ही हरिद्वार, पंतनगर और औली में तीन और रडार स्थापित किए जाएंगे। इससे राज्य की रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान क्षमता और मजबूत होगी।

"विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन" को संबोधित करते हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपने भौगोलिक स्वरूप, हिमालयी पारिस्थितिकी और प्राकृतिक अनुभवों के कारण वैश्विक आपदा-रोधक चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद नरेश बंसल, एनडीएमए के सदस्य अग्रवाल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव नितीश कुमार झा, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कमल घनसाला, डीजी दुर्गेश पंत, एसडीएमए उपाध्यक्ष रोहिला सहित विशेषज्ञ, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा ने राज्य को आपदा प्रतिक्रिया और प्रशासन में विशिष्ट पहचान दी है। उन्होंने सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को याद किया, जिसे दो वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक पूरा किया गया था और जिसे वैश्विक आपदा प्रबंधन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में उत्तराखंड में हाइड्रो-मीटियोरोलॉजिकल आपदाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। 2013 की केदारनाथ आपदा और 2021 की चमोली घटना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से पीछे हटते ग्लेशियर, जीएलओएफ का बढ़ता जोखिम, हिमालयी पहाड़ों की नाजुकता, वनों की कटाई और प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में मौसम और आपदा-निगरानी बुनियादी ढांचे को बड़ी मात्रा में बढ़ाया है। राज्य में 33 मौसम वेधशालाएँ, रेडियो-सोंडे और रेडियो-विंड सिस्टम्स, 142 स्वचालित मौसम स्टेशन, 107 वर्षामापक यंत्र, जिला व ब्लॉक स्तर के मॉनिटरिंग सिस्टम तथा किसानों के लिए ऐप-आधारित चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है।

उन्होंने बताया कि तीन वेदर रडार पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और तीन और जल्द स्थापित होंगे, जिससे पूर्वानुमान पद्धति और अधिक सटीक होगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि अचानक होने वाले क्लाउडबर्स्ट की परिस्थितियों को समझने के लिए भारत ने एक विशेष हिमालयी जलवायु अध्ययन कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने बताया कि "नाउकास्ट" प्रणाली—जो तीन घंटे पहले की भविष्यवाणी देती है—अब उत्तराखंड में भी व्यापक रूप से लागू की जा रही है।

उन्होंने एनडीएमए, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत जंगल-आग मौसम सेवाओं का उल्लेख किया और इसे "पूरा-सरकार" और "पूरा-विज्ञान" मॉडल बताया।

कुछ क्षेत्रों में आईएमडी चेतावनियों की अनुपालना न होने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की एक घटना का उल्लेख किया जहाँ एक नए आईएएस अधिकारी ने आईएमडी रेड अलर्ट के बाद तुरंत हाईवे बंद कर बड़ी त्रासदी को टाल दिया।

उन्होंने कहा कि एनडीएमए, पर्यावरण मंत्रालय और शहरी विकास निकायों के भूमि उपयोग नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। नदी तटों और नई हाईवे के पास अवैध खनन को उन्होंने बेहद खतरनाक मानवजनित खतरा बताया।

डॉ. सिंह ने हिमालयी क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में कृषि-स्टार्टअप्स और सीएसआईआर आधारित वैल्यू-एडिशन मॉडलों की चर्चा की। जम्मू-कश्मीर के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे कई तकनीकी और प्रबंधन स्नातक निजी नौकरियाँ छोड़कर इन उद्यमों से जुड़े हैं। उन्होंने इसी मॉडल को उत्तराखंड में भी दोहराने की अपील की।

भारत की वैश्विक आपदा-रोधक क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब पड़ोसी देशों को तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के COP-26 में घोषित 2070 नेट ज़ीरो लक्ष्य की भी चर्चा की।

अंत में, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोजनकर्ताओं को विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी और कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर आपदा-नियंत्रण, जलवायु अनुकूलन और लचीले विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।


‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’— पीएम मोदी का पुलिस नेतृत्व को संबोधन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में आयोजित पुलिस महानिदेशकों/पुलिस महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लिया। तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय था— ‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’।

प्रधानमंत्री ने युवाओं के बीच पुलिस की सकारात्मक और पेशेवर छवि स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुलिस में व्यवसायिकता, संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

शहरी पुलिसिंग को मजबूत करने, टूरिस्ट पुलिस को पुनर्जीवित करने और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया, जो औपनिवेशिक कानूनों का स्थान ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस तथा प्रशासन को निर्देश दिया कि वे निर्जन द्वीपों के एकीकरण, NATGRID के डेटाबेस के प्रभावी उपयोग और इन प्रणालियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जोड़कर कारगर इंटेलिजेंस तैयार करने के लिए नवाचारी रणनीतियाँ अपनाएँ।
उन्होंने विश्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों को पुलिस जांच में फोरेंसिक के उपयोग पर केस स्टडी करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा, जिससे आपराधिक न्याय प्रणाली और मजबूत होगी।

उन्होंने प्रतिबंधित संगठनों की नियमित निगरानी, वामपंथी उग्रवाद से मुक्त क्षेत्रों के समग्र विकास, और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए मॉडल अपनाने की आवश्यकता दोहराई। प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा-निरोध के लिए “Whole-of-Government Approach” जरूरी है, जिसमें प्रवर्तन के साथ पुनर्वास और सामुदायिक हस्तक्षेप भी शामिल हों।

सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
विजन 2047 के लिए पुलिसिंग का दीर्घकालीन रोडमैप, आतंकवाद-निरोध, प्रौद्योगिकी द्वारा महिला सुरक्षा को बढ़ावा, विदेश में छिपे भारतीय भगोड़ों की वापसी, और फोरेंसिक क्षमता को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं—चक्रवात, बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों, विशेषकर वर्तमान चक्रवात दितवा—में प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पूर्व-योजना, वास्तविक समय समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया, और Whole-of-Government Approach जीवन बचाने और न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पुलिस नेतृत्व से विकसित भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप पुलिसिंग की शैली में बदलाव लाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए। उन्होंने शहरी पुलिसिंग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को भी पुरस्कार दिए—यह सम्मान पहली बार शुरू किया गया है, ताकि नवाचार और सुधार को बढ़ावा मिले।

सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्रीगण, गृह सचिव, सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के DGP और IGP, CAPFs एवं केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख उपस्थित थे, जबकि 700 से अधिक अधिकारी देशभर से वर्चुअल रूप से जुड़े।


जनरेशन Z में दिखा उत्साह, 2 दिसंबर से शुरू होगा काशी तमिल संगमम् 4.0

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जनरेशन Z के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि 2 दिसंबर से शुरू होने वाले काशी तमिल संगमम् 4.0 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इस आयोजन का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के प्राचीन सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को नई पीढ़ी की ऊर्जा के साथ जोड़ना है।

पहले दल के रूप में बड़ी संख्या में GenZ छात्र 29 नवंबर को कन्याकुमारी से विशेष ट्रेन द्वारा यात्रा पर निकले। यह लंबी रेल यात्रा युवाओं के लिए सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुकी है—जिसमें खेल, समूह गतिविधियाँ, उत्साहभरी बातचीत और रचनात्मक साझेदारियाँ शामिल हैं। यह अनुभव उनके लिए रोमांचक और यादगार बन गया है।

तमिलनाडु की अर्चना, जो इस विशेष ट्रेन से यात्रा कर रही हैं, ने कहा कि उन्हें घर पर मंदिरों में जाने का कम अवसर मिलता है, इसलिए यह यात्रा उनके लिए एक दिव्य संयोग है। वह पहली बार काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं।

इसी तरह, तिरुपुर की मालथी, जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, ने कहा कि तमिलनाडु और काशी का आध्यात्मिक संबंध सदियों से संतों जैसे माणिक्कवाचार द्वारा मनाया जाता रहा है। काशी तमिल संगमम् इस पवित्र संबंध को आधुनिक तरीके से और सशक्त बना रहा है। काशी की यात्रा उनके लिए गर्व का क्षण है।

उधर काशी में भी घाटों और विश्वविद्यालय परिसरों में हो रहे प्री-इवेंट कार्यक्रमों में GenZ बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। ‘Run for KTS 4.0’ जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को फिटनेस के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मंच दिया।

विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र और अन्य घाटों पर GenZ द्वारा किए गए नुक्कड़ नाटकों ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों को नए, रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। वहीं Reel-making प्रतियोगिताओं ने सोशल मीडिया पर उत्साह की लहर पैदा कर दी है, जिससे पूरे देश के युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है।

इस वर्ष काशी तमिल संगमम् 4.0 का थीम है— “Learn Tamil – Tamil Karkalam”, जिसका उद्देश्य भाषा और संस्कृति को और अधिक निकट लाना है। इसमें GenZ की सक्रिय भागीदारी इस थीम को और अधिक प्रभावी और सार्थक बना रही है।


कुरुक्षेत्र में गूंजे गीता के संदेश: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का संबोधन

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भारत के उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 के तहत आयोजित अखिल भारतीय देवस्थानम् सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर उपस्थित होकर स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं—एक ऐसी भूमि जिसे “वेदों की धरती” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह वही पावन स्थल है जहां हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्‌गीता का दिव्य उपदेश दिया था। कुरुक्षेत्र आज भी यह स्मरण कराता है कि कितना भी शक्तिशाली अधर्म क्यों न प्रतीत हो, अंततः विजय धर्म की ही होती है।

उपराष्ट्रपति ने भगवद्‌गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि “सत्यनिष्ठ जीवन, साहसिक कर्म और प्रबुद्ध चेतना का सार्वभौमिक मार्गदर्शक” बताया। उन्होंने कहा कि धर्म द्वारा निर्देशित होकर कर्म करने का श्रीकृष्ण का संदेश आज भी अर्थपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की कुंजी है।

चरित्र निर्माण के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चरित्र संपत्ति या भौतिक उपलब्धियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि गीता मनुष्य को सदाचार, अनुशासन और नैतिक जीवन की ओर ले जाती है—और यह भी याद दिलाती है कि नैतिक शक्ति, उद्देश्य की स्पष्टता और धर्म के प्रति समर्पण से ही उत्पन्न होती है।

तेज़ी से बदलते युग में गीता की शिक्षाएँ व्यक्तियों, समाजों और राष्ट्रों को शांति और सद्भाव की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी, यह विश्वास भी उन्होंने व्यक्त किया।

कार्यक्रम की प्रगति की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में गीता जयंती एक वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव का रूप ले चुकी है। उन्होंने हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नैब सिंह सैनी को महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने और हरियाणा को प्रगति के नए आयामों की ओर अग्रसर करने के लिए बधाई दी।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों, श्रीमद् भगवद्‌गीता की शिक्षाओं और सनातन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सभी आयु वर्गों तक अत्यंत सहज तरीके से पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने महोत्सव को एक ऐसे मंच के रूप में सराहा जो भारत को सदियों से संबल देने वाले मूल्यों—धर्म, कर्तव्य, आत्म-अनुशासन और उत्कृष्टता की भावना—को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यही मूल्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय दृष्टि की आधारशिला हैं।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और गीता नॉलेज इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित इस सम्मेलन की भी उन्होंने प्रशंसा की, जिसमें देशभर के संत, विद्वान, तकनीकी विशेषज्ञ, कलाकार और सांस्कृतिक नेताओं ने भाग लिया। ऐसे आयोजन संवाद को गहराते हैं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करते हैं और युवाओं को गीता को दूरस्थ ग्रंथ नहीं, बल्कि साहस, विनम्रता और ज्ञान का जीवंत मार्गदर्शक के रूप में देखने के लिए प्रेरित करते हैं।

अपने संबोधन के अंत में सी. पी. राधाकृष्णन ने सभी से आग्रह किया कि वे गीता की अनंत शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें—धर्म के मार्ग पर चलें, ज्ञान की खोज करें, शांति अपनाएँ और मानव कल्याण में योगदान दें।

कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नैब सिंह सैनी, स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इससे पहले उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कुरुक्षेत्र स्थित माँ भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।


मन की बात सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं यह देश की सामूहिक चेतना का बन गया है उत्सव : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 128वीं कड़ी को सुना और इसे अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ देश की सामूहिक चेतना का उत्सव बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देश की बातों को देशवासियों के सामने रखते हैं और हर माह राष्ट्र को प्रेरणादायक संदेश देते हैं।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों, जनभागीदारी और उत्कृष्ट प्रयासों को पहचान दिलाते हैं, जिससे राष्ट्र निर्माण में लगे समर्पित लोगों को सम्मान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, विभिन्न राज्यों में शहद प्रसंस्करण की उन्नत विधियां, शहद उत्पादन में वृद्धि, नौसेना सशक्तिकरण, नेवल म्यूजियम, नेचर फॉर्मिंग के महत्व, तथा सऊदी अरब में पहली बार सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति और लातविया सहित कई देशों में आयोजित गीता महोत्सवों के भव्य आयोजनों की प्रशंसा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नेचर फॉर्मिंग के लिए छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं हैं और यहां के किसान व युवा उद्यमी इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई है और इसमें छत्तीसगढ़ का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज के ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई उपयोगी जानकारियाँ अत्यंत प्रेरक हैं। प्रधानमंत्री ने स्पेस टेक्नोलॉजी में जेन-ज़ी युवाओं द्वारा मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन परीक्षण, असफल चंद्रयान-2 से सफल चंद्रयान-3 की प्रेरणादायी कहानी, महिला खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन, कुरुक्षेत्र में आयोजित गीता महोत्सव, कुरुक्षेत्र में ही महाभारत आधारित 3D लाइट एवं साउंड म्यूज़ियम, राष्ट्र को समर्पित स्वदेशी डिज़ाइन वाले युद्धपोत ‘आईएनएस माहे’, भूटान यात्रा, बनारस में आयोजित होने वाले चौथे ‘काशी तमिल संगमम’, विंटर टूरिज्म एवं विंटर गेम्स, तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत देशभर में चल रहे नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और ‘मन की बात’ के माध्यम से वे सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक आयामों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ देशवासियों तक पहुँचाते हैं। उनके अनुभवों का खजाना हमें यह सीख देता है कि ‘लोकल को ग्लोबल’ कैसे बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आज का दिन विशेष है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं रायपुर में मौजूद हैं और इसी दौरान हमें ‘मन की बात’ सुनने का अवसर मिला।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में 26 नवंबर ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर सेंट्रल हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की शानदार शुरुआत, 25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा के आरोहण तथा उसी दिन कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में ‘पांचजन्य’ स्मारक के लोकार्पण की जानकारी साझा की।

प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में विश्व की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) सुविधा के उद्घाटन को भारत की एयरोस्पेस क्षमता में बड़ी छलांग बताया। उन्होंने पिछले सप्ताह मुंबई में भारतीय नौसेना को समर्पित INS ‘माहे’ के शामिल होने और भारत के स्पेस इकोसिस्टम में स्काईरूट के ‘इन्फिनिटी कैंपस’ द्वारा नई उड़ान दिए जाने का भी उल्लेख किया, जो भारत की नई सोच, नवाचार और युवा शक्ति का प्रतीक है। कृषि क्षेत्र में भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत ने 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। दस वर्ष पहले की तुलना में यह उत्पादन 100 मिलियन टन अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है और हाल ही में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिलने की घोषणा देश के लिए गर्व का क्षण है।

कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सहभागिता भी अत्यंत विशेष रही। उन्होंने बताया कि यूरोप और सेंट्रल एशिया के कई देशों के लोग गीता से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में इस महोत्सव में शामिल हुए। इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार सार्वजनिक मंच पर गीता का वाचन हुआ, जबकि लातविया में आयोजित महोत्सव में लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, केबिनेट मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत, रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक आरंग नवीन मार्कण्डेय, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

स्लीपर कोच यात्रियों के लिए राहत : रेलवे का बड़ा फैसला, अब नॉन-AC कोच में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा

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 नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्लीपर कोच में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब तक सिर्फ AC कोचों में उपलब्ध बेडरोल सुविधा (चादर, तकिया और कवर) को नॉन-AC स्लीपर कोच में भी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से यात्रा और अधिक आरामदायक व सुविधाजनक होने की उम्मीद है।


अब स्लीपर कोच में भी AC जैसी सुविधा

अब तक बेडरोल सुविधा केवल 3AC, 2AC और 1st AC यात्रियों तक सीमित थी, लेकिन अब स्लीपर कोच यात्री भी निर्धारित शुल्क देकर यह सेवा प्राप्त कर सकेंगे। रेलवे का कहना है कि यह सेवा ऑन-डिमांड और ऑन-पेमेंट आधार पर उपलब्ध होगी, और यात्रियों को पूरी तरह से स्वच्छ व सैनिटाइज्ड बेडरोल दिया जाएगा।

1 जनवरी 2026 से चेन्नई डिविजन में शुरुआत

दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन द्वारा यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस सेवा की शुरुआत की जा रही है।
यह सुविधा 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा ट्रेनों में शुरू होगी। इस घोषणा के बाद यात्रियों ने सोशल मीडिया पर इसे एक स्वागतयोग्य कदम बताया है।

स्लीपर यात्रियों को बड़ी राहत

स्लीपर कोच में यात्रा करने वालों को अब तक चादर, कंबल और तकिया खुद लेकर चलना पड़ता था, जो विशेषकर सर्दियों में काफी परेशानी भरा होता था।
नई व्यवस्था से :

  • अतिरिक्त सामान ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
  • मामूली शुल्क देकर आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा

कितना होगा किराया?

रेलवे ने शुल्क भी तय किए हैं—

  • बेडशीट : लगभग ₹20
  • तकिया / कवर : अलग शुल्क
  • भविष्य में ₹20, ₹30 और ₹50 की स्लैब में सुविधा उपलब्ध होने की योजना

सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद फैसला

इस सेवा को 2023-24 में NINFRIS स्कीम के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था।
पायलट फेज में मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद इसे अब स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाने के साथ यात्रियों को बेहतर अनुभव भी देगा।

देशभर में लागू होने की संभावना

अधिकारियों का मानना है कि अगर चेन्नई मॉडल सफल रहा, तो इसे प्रयागराज, झांसी, आगरा, कानपुर, लखनऊ सहित पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

 

चुनाव आयोग ने SIR की डेडलाइन बढ़ाई- अब 11 दिसंबर तक फॉर्म जमा कर सकेंगे

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 नई दिल्ली / रायपुर। Election Commission of India (ECI) ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब मतदाता फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तिथि 11 दिसंबर 2025 तय की गई है। 


 किन-कौन से राज्य / क्षेत्र शामिल हैं

इस विस्तार का असर उन राज्यों/UTs पर है, जहाँ SIR पहले से जारी थी — इनमें शामिल हैं:

  • अंडमान और निकोबार
  • छत्तीसगढ़
  • गोवा
  • गुजरात
  • केरल
  • लक्षद्वीप
  • मध्य प्रदेश
  • पुडुचेरी
  • राजस्थान
  • तमिलनाडु
  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल 


 नया शेड्यूल — प्रमुख तिथियाँ

प्रक्रियानई तिथि / अवधि
फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि (Enumeration)11 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Roll) प्रकाशन16 दिसंबर 2025
दावा-आपत्ति (Claims & Objections) अवधि16 दिसंबर 2025 – 15 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची (Final Roll) प्रकाशन14 फरवरी 2026

 क्यों ज़रूरी था यह विस्तार

  • कई राज्यों में बूथ-स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा ठीक से घर-घर सर्वे करना कठिन हो रहा था, जिससे SIR पूरी तरह समय पर नहीं हो पा रहा था।
  • आयोग ने कहा है कि यह कदम मतदाता सूची को और Sटीक, पारदर्शी व अद्यतित बनाने के लिए लिया गया है।

CM साय सपरिवार मिले PM मोदी से - भावुक क्षण को बताया जीवनभर की प्रेरणा

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। मुलाकात के बाद उन्होंने X पर पोस्ट साझा करते हुए इस क्षण को जीवनभर याद रहने वाला प्रेरणादायक अनुभव बताया।


CM साय ने अपनी पोस्ट में लिखा -

“सत्पुरुषसंसर्गो हि कृतार्थयति जीवनम्।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हमारे परिवारजनों से हुई मुलाकात जीवन भर याद रहने वाला प्रेरक अनुभव है। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच जिस आत्मीयता से मोदीजी ने सबका हाल-चाल पूछा, बच्चों से सहज होकर बात की और आशीर्वाद दिया, वह अविस्मरणीय है।


माननीय प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान परिवार की तीन पीढ़ियों को एक साथ उनके सान्निध्य में बैठने का अवसर मिला, यह हमारे लिए भावुक कर देने वाला क्षण था। इस गरिमामय और आत्मीय भेंट के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी की भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण मुलाकात को CM साय ने परिवार के लिए गर्व और सौभाग्य का क्षण बताया।

बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 11 से 13 दिसम्बर तक

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उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की

आयोजन से जुड़े सभी विभागों को उत्कृष्ट और पुख्ता तैयारियों के निर्देश, स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक से जोड़ने कहा

संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में 3500 खिलाड़ी दिखाएंगे अपना कौशल और दमखम, नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी करेंगे भागीदारी

रायपुर-उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक-2025 के संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में 11 दिसम्बर से 13 दिसम्बर तक इसका आयोजन किया जाएगा। बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के तीन हजार विजेता खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। करीब 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी इन स्पर्धाओं में हिस्सेदारी करेंगे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के रायपुर के सिविल लाइन स्थित निवास कार्यालय में हुई बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार भी शामिल हुए। संभागायुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ तथा खेल अधिकारी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार बस्तर के युवाओं को खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहती है। उन्होंने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं के सफल और उत्कृष्ट आयोजन के लिए सभी विभागों को परस्पर समन्वय के साथ पुख्ता तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभागियों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी या खामी नहीं छोड़ते हुए आयोजन स्थलों, खेल प्रबंधन, आवास, साफ-सफाई, भोजन, परिवहन, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों इत्यादि के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं बनाने को कहा। साव ने कहा कि बस्तरवासियों के साथ ही देश और दुनिया में बस्तर ओलंपिक का बहुत अच्छा और सकारात्मक संदेश जाना चाहिए।

उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को इसे यादगार बनाने अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप दायित्वों का गंभीरता व सक्रियता से वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा उनकी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित करने स्थानीय लोगों के साथ ही ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ियों को बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन से जोड़ने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को पिछले बस्तर ओलंपिक के विजेताओं और इस बार के विजेताओं को यूथ-आइकॉन बनाकर ज्यादा से ज्यादा गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा जिससे अन्य लोग भी प्रेरित हों। 

बस्तर जिले के प्रभारी खेल अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने बैठक में बताया कि बस्तर ओलंपिक में भाग लेने के लिए संभाग के सभी 32 विकासखंडों के कुल तीन लाख 91 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन कराया था। विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं के दस हजार से अधिक विजेता खिलाड़ियों ने जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी की। जिला स्तरीय आयोजनों के करीब तीन हजार विजेता संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं में लगभग 500 नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित नक्सली भी हिस्सेदारी करेंगे। 11 खेलों एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में ये अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

तिवारी ने बताया कि बस्तर ओलंपिक के संभाग स्तरीय आयोजन के दौरान जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में फुटबॉल, व्हॉलीबॉल, कराटे, वेटलिफ्टिंग एवं बैडमिंटन स्पर्धाएं होगी। पंडरीपानी स्थित खेलो इंडिया सेंटर में हॉकी के मैच होंगे। वहीं धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में कबड्डी, खो-खो, आर्चरी, एथलेटिक्स और रस्साकसी की प्रतियोगिताएं होंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनूजा सलाम, उप संचालक  रश्मि ठाकुर एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश की उपलब्धियां और युवा सशक्तिकरण की कहानी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 के 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए देश की विभिन्न उपलब्धियों, युवा सशक्तिकरण, कृषि, खेल और संस्कृति के क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक खेती, मधुमक्खी पालन, खेल और पर्यटन जैसे विषयों पर जोर देते हुए लोगों से ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाने का आग्रह किया।

विज्ञान, अंतरिक्ष और नौसेना में प्रगति

प्रधानमंत्री ने हाल ही में हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO सुविधा का उद्घाटन किया और मुंबई में भारतीय नौसेना में INS 'महे' के शामिल होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह देश की नई सोच, नवाचार और युवाओं की शक्ति का परिचायक है।

उन्होंने ISRO द्वारा आयोजित मार्स ड्रोन प्रतियोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि पुणे की टीम ने बार-बार असफलताओं के बावजूद अपने ड्रोन को मार्स जैसे वातावरण में उड़ाने में सफलता पाई। प्रधानमंत्री ने इसे युवाओं की समर्पित मानसिकता और वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

कृषि और मधुमक्खी पालन में देश की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने भारत में खाद्यान्न उत्पादन की उपलब्धि का जिक्र किया। देश ने 357 मिलियन टन उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो 10 साल पहले की तुलना में 100 मिलियन टन अधिक है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के 'रम्बन सुलाई हनी', कर्नाटक के 'शिवगंगा कलंजीया', और नागालैंड के 'क्लिफ-हनी' जैसे विशेष मधुमक्खी पालन कार्यक्रमों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि देश में मधुमक्खी पालन के माध्यम से 1.5 लाख टन से अधिक शहद का उत्पादन हो रहा है और एक्सपोर्ट में तीन गुना वृद्धि हुई है।

खेल और सहनशक्ति वाले खेल

प्रधानमंत्री मोदी ने खेल क्षेत्र में भी देश की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस महीने भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ICC वुमेन्स वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा, भारत ने टोक्यो में डिफ ओलंपिक्स में 20 पदक, कबड्डी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड बॉक्सिंग कप और ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने 'एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स' और 'आयरनमैन ट्रायथलॉन' जैसे खेलों में बढ़ती युवा भागीदारी को सराहा और Fit India Sundays जैसे कार्यक्रमों का उदाहरण दिया।

संस्कृति, पर्यटन और प्राकृतिक खेती

प्रधानमंत्री ने कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का जिक्र करते हुए बताया कि दुनिया भर से लोग गीता के अद्भुत संदेश से प्रेरित हो रहे हैं।

उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर युवाओं के रुझान और दक्षिण भारत में बढ़ती जागरूकता पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने 'काशी-तमिल संगम' का उल्लेख करते हुए तमिल संस्कृति और भाषा को देश की गौरवशाली धरोहर बताया।

सर्दियों के पर्यटन पर भी उन्होंने ध्यान केंद्रित किया और उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन स्थलों, हाई अल्टिट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन, और ‘Wed in India’ अभियान की लोकप्रियता का जिक्र किया।

वोकल फॉर लोकल और हस्तशिल्प

प्रधानमंत्री ने G20 शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए भारत के हस्तशिल्प और शिल्पकला के उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाएं, केवल देश में बने उत्पाद खरीदें और इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

संदेश और प्रेरणा

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि युवा, विज्ञान, खेल, कृषि, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहें। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद समर्पण और टीमवर्क से हर क्षेत्र में सफलता संभव है।

प्रधानमंत्री ने सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और आने वाले महीनों में नई कहानियों और उपलब्धियों पर चर्चा करने का संदेश भी दिया।

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के लिए प्रेरणा और उपलब्धियों का उत्सव है। विज्ञान, कृषि, खेल, संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के संदेश से भरा यह कार्यक्रम देशवासियों में उत्साह और नई ऊर्जा भरता है।


वर्ष 2025-26 में 26 हजार 400 पीएम आवास निर्माण स्वीकृत

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25 हजार 580 हितग्राहियों को पहली किश्त की राशि जारी

ग्राम पंचायतों में आवास चौपाल का आयोजन

रायपुर-प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों को पक्का मकान प्रदान करने का क्रांतिकारी कदम है जो ना केवल आवास की कमी को दूर करती है बल्कि ग्रामीण जीवन को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों को शीघ्र प्रारंभ कराने एवं समय-सीमा में पूर्ण कराने कलेक्टर बलौदाबाजार के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी  के मार्गदर्शन में सभी ग्राम पंचायतो में आवास चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 26 हजार 400 आवास निर्माण स्वीकृत

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2025-26 हेतु जिले में 26 हजार 400 आवास निर्माण को स्वीकृत किया गया, जिसमें से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्योत्सव के अवसर पर 25 हजार 580 हितग्राहियों के खाते में पहली किश्त की राशि जारी की गई। आवास चौपाल का आयोजन सभी ग्राम पंचायतों में तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमे, सभी नवीन स्वीकृति उपरांत राशि प्राप्त आवास के हितग्राही, पूर्व वर्षाे के स्वीकृति उपरांत अपूर्ण आवास के हितग्राही, राजमिस्त्री, निर्माण, सामाग्री सप्लायर, सरपंच, सचिव एवं अन्य संबंधित शामिल होते हैं। 

आवास चौपाल का उद्देश्य कनीकी जानकारी उपलब्ध कराना

आवास निर्माण की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना। रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराना।  सौर सुजला के तहत सौर पैनल लगवाने की जानकारी देना शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्रथम क़िस्त जारी 25 हजार 580 आवास के हितग्राहियों को क़िस्त जारी किए गए हैं। सभी आवासों का निर्माण कार्य प्रारंभ कराना। योजना के तहत कन्वर्जेन्स के माध्यम से मिलने वाले अन्य लाभ का जानकारी देना।  राजमिस्त्री एवं निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर पंचायतों में आवास चौपाल में चर्चा की जा रही है ।  अब तक बलौदाबाजार में 56, भाटापारा 34, कसडोल में 24 और पलारी 22 पंचायतों में आवास चौपाल करा किया गया है। इस चौपाल में पूर्व वर्षाे के आवासों को जल्दी पूर्ण कराना। 

योजना पूर्णतः निःशुल्क अनाधिकृत वसूली से सावधान

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण पारदर्शी और निःशुल्क योजना है जहां किसी भी स्तर पर कोई शुल्क नही लिया जाता। कलेक्टर बलौदाबाजार ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत वसूली, कमीशन या सुविधा शुल्क की मांग नहीं कर सकता। यदि कोई ब्यक्ति आवास पास करान,े क़िस्त जल्दी दिलाने या अन्य किसी बहाने से पैसा की मांग करता है, अनाधिकृत वसूली करने पर, तत्काल शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, सीईओ जिला पंचायत या कलेक्टर कार्यालय में दर्ज करायें। ऐसे मामलों का त्वरित जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।


किसानों के लिए आय में वृद्धि का नया अध्याय पीएम-आशा योजना

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रायपुर- प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की गई,  जिससे किसानों की आय बढ़ाने और दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है। योजना का उद्देश्य कृषकों से दलहनी तथा तिलहनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय करना है।

दालों के उत्पादन को बढ़ाकर  किसानों की आमदनी को है बढ़ाना

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम.आशा) एक व्यापक सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करके लाभकारी मूल्य दिलाना है। इसमें तीन मुख्य घटक शामिल हैं: मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), और मूल्य घाटा भुगतान योजना (PDPS) है । इसका मुख्य लक्ष्य किसानों की आय को बढ़ाना और उनकी आय के संरक्षण की दिशा में काम करना है। इस योजनांतर्गत राज्य में उत्पादित किये जाने वाली अरहर, उड़द एवं मसूर का शत् प्रतिशत उपार्जन तथा शेष फसलों यथा मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना, सरसों का राज्य के उत्पादन का 25 प्रतिशत उपार्जन केन्द्र सरकार द्वारा अपनी प्रापण संस्थाओं (प्रोक्योरमेंट एजेंसीज) नाफेड तथा एनसीसीएफ के माध्यम से किया जायेगा। सबसे खास बात यह है कि सरकार न केवल दालों के उत्पादन को बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, बल्कि किसानों की आमदनी को बढ़ाना चाहती है। 

किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम

सरकार चाहती है कि दाल उगाने वाले किसानों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा मिले और उनकी फसल की समय पर खरीद की जा सके। इसी दिशा में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) शुरू किया गया है, जो किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। इसके तहत किसानों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की जाएगी। 

बलौदाबाजार जिले में 5 उपार्जन केन्द्र

पीएम-आशा के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत जिले में 5 उपार्जन केन्द्रों  विकासखंड बलौदाबाजार जिले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति बलौदाबाजार, विकासखंड पलारी में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति अमेरा, विकासखंड भाटापारा में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति धुर्राबांधा, विकासखंड कसडोल में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति कसडोल, विकासखंड सिमगा में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति सिमगा का नाम शासन द्वारा अधिसूचित किया गया है। 

उपज विक्रय के लिए इच्छुक किसान को अपना पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल पर होगा करना  

योजनांतर्गत उपज विक्रय हेतु इच्छुक कृषक को अपना पंजीयन एकीकृत किसान पोर्टल पर कराना तथा समीपस्थ उपार्जन केन्द्र संबंधित का उल्लेख करना अनिवार्य है। पंजीयन के दौरान चिन्हित उपार्जन केन्द्र के चयन द्वारा विपणन किया जा सकता है। प्रत्येक अधिसूचित फसल की उपार्जन अवधि 90 दिवस निर्धारित होती है। इस योजना के माध्यम से न सिर्फ कृषक द्वारा उसके उत्पाद का उचित मूल्य पर विक्रय किया जा सकता है अपितु प्रतिस्पर्धा विकास के द्वारा बाजार में उपज का अधिक मूल्य भी प्राप्त हो सकता है। यह समस्त स्थिति फसल विविधिकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियों निर्मित करने में भी सहायक हो सकती है।

एड्स मुक्त भारत की ओर: NACP-V के साथ राष्ट्रीय प्रयासों का सशक्तीकरण

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  • विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • 2025 का थीम है: “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण”
  • भारत में मजबूत नीतिगत ढांचा: HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 जैसे ऐतिहासिक कदम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और भेदभाव को प्रतिबंधित करते हैं।
  • राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के माध्यम से प्रगति: भारत ने नए संक्रमणों में कमी लाने और ART तक पहुंच बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल की है।

परिचय

विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को एक वैश्विक अभियान के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य HIV/AIDS महामारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना, HIV से संबंधित बीमारियों से मरने वाले लोगों को याद करना और एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना है। इसे पहली बार 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मनाया गया था और तब से यह सरकारों, समुदायों और व्यक्तियों के लिए रोग के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने का प्रमुख मंच बन गया है।

इस वर्ष का थीम “विघटन पर विजय, एड्स प्रतिक्रिया का रूपांतरण” है। यह न सिर्फ अब तक की प्रगति को सुरक्षित रखने, बल्कि HIV सेवाओं को अधिक सुदृढ़, न्यायसंगत और समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडल में बदलने की आवश्यकता पर जोर देता है। यह थीम उन व्यवधानों से निपटने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है, जो महामारी, संघर्षों और असमानताओं के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करते हैं।

भारत में विश्व एड्स दिवस को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नेतृत्व में देशभर में जागरूकता अभियानों, समुदाय-आधारित कार्यक्रमों और सरकारी प्रतिबद्धताओं के साथ व्यापक स्तर पर मनाया जाता है।

भारत की यात्रा

भारत का एड्स नियंत्रण कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर एक सफल मॉडल के रूप में माना जाता है।
प्रारंभिक चरण (1985–1991) का उद्देश्य HIV मामलों की पहचान, सुरक्षित रक्त संक्रमण सुनिश्चित करना और लक्षित जागरूकता फैलाना था।

1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) की स्थापना के साथ भारत की प्रतिक्रिया मजबूत हुई। समय के साथ, कार्यक्रम का ध्यान अधिक विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण, NGOs की भागीदारी और PLHIV नेटवर्क्स को सशक्त बनाने की ओर बढ़ा।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP)

NACP ने पाँच चरणों में विकास किया है, जिनमें जागरूकता से लेकर व्यापक रोकथाम, परीक्षण, उपचार और स्थिरता तक का समावेश है:

NACP-I (1992–1999)

  • भारत का पहला व्यापक HIV/AIDS नियंत्रण कार्यक्रम

  • लक्ष्य: HIV के प्रसार को धीमा करना और एड्स से बीमारी/मृत्यु को कम करना

NACP-II (1999–2006)

मुख्य उद्देश्यों:

  • HIV के प्रसार में कमी

  • दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण

NACP-III (2007–2012)

लक्ष्य: 2012 तक HIV महामारी को रोकना और उलटना।
रणनीति:

  • उच्च जोखिम समूहों (HRGs) और सामान्य जनसंख्या में रोकथाम को बढ़ाना

  • रोकथाम, देखभाल, समर्थन और उपचार सेवाओं का एकीकरण

मुख्य उपलब्धि: जिला एड्स रोकथाम और नियंत्रण इकाइयों (DAPCUs) की स्थापना, जिसमें कलंक/भेदभाव रिपोर्टिंग शामिल है।

NACP-IV (2012–2017)

उद्देश्य: महामारी को तेज़ी से उलटना और एकीकृत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।

मुख्य लक्ष्य:

  • नए संक्रमणों में 50% की कमी

  • PLHIV को व्यापक देखभाल, समर्थन व उपचार

विस्तारित अवधि (2017–2021) की प्रमुख पहलें:

  • HIV/AIDS (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017: PLHIV के खिलाफ भेदभाव पर प्रतिबंध, गोपनीयता की सुरक्षा और सूचित सहमति अनिवार्य।

  • मिशन संपर्क: ART छोड़ चुके PLHIV का पता लगाकर उन्हें सेवाओं से पुनः जोड़ना।

  • ‘टेस्ट एंड ट्रीट’ नीति: निदान के तुरंत बाद ART शुरू।

  • वायरल लोड की नियमित निगरानी।

NACP-V (2021–2026)

₹15,471.94 करोड़ के बजट के साथ एक केंद्रीय क्षेत्र योजना।
लक्ष्य:
UN SDG 3.3 के अनुरूप 2030 तक HIV/AIDS को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना।

HIV/AIDS जागरूकता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

1. राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान मजबूत करना

NACO बहुआयामी मीडिया अभियानों का नेतृत्व करता है—टीवी, रेडियो, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया सभी प्लेटफार्मों पर।


2. बाहरी प्रचार का विस्तार

होर्डिंग्स, बस पैनलों, सूचना कियोस्क, लोक-नृत्य/नाटक और IEC वैन के माध्यम से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।


3. समुदाय-स्तरीय कार्यक्रम

महिला स्वयं सहायता समूहों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायत सदस्यों आदि के लिए प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम।

4. उच्च जोखिम समूहों के लिए लक्षित हस्तक्षेप

अक्टूबर 2025 तक देशभर में 1587 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएँ सक्रिय हैं।

5. कलंक और भेदभाव के खिलाफ थीम आधारित अभियान

यह अभियान कार्यस्थलों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में लागू किए जाते हैं।


6. राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल की नियुक्ति

HIV/AIDS अधिनियम, 2017 के तहत 34 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लोकपाल नियुक्त हैं, जो PLHIV से संबंधित भेदभाव की शिकायतों का समाधान करते हैं।

निष्कर्ष

भारत की HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई दृढ़ता, नवाचार और साझेदारी की उल्लेखनीय कहानी प्रस्तुत करती है।
NACP के प्रारंभिक चरणों से लेकर वर्तमान NACP-V तक, भारत ने अधिकार-आधारित नीतियों, समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों, मीडिया अभियानों और व्यापक स्वास्थ्य ढांचे के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व दिखाया है।

भारत में HIV संक्रमणों में गिरावट वैश्विक औसत से अधिक है, जिसका श्रेय व्यापक परीक्षण, ART तक बढ़ी पहुंच, उच्च जोखिम समूहों तक लक्षित सेवाओं और कलंक-निरोधक पहलों को जाता है।

यह यात्रा तत्काल संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर मानवाधिकारों की रक्षा, सामुदायिक सशक्तिकरण और स्थायी स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर अग्रसर एक दीर्घकालिक सफलता का संकेत देती है।


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