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2026 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, IMD की चेतावनी- कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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 नई दिल्ली। देश में बढ़ते तापमान के बीच वर्ष 2026 की गर्मी को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है, जो पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।


लगातार टूट रहे तापमान के रिकॉर्ड

अप्रैल 2024 से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग हर महीने अधिकतम, न्यूनतम या औसत तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मई, जून और जुलाई 2024 में भी कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। 2025 की शुरुआत में भी जनवरी और फरवरी में असामान्य गर्मी देखी गई, हालांकि मार्च में थोड़ी राहत मिली थी।

सुपर अल-नीनो का खतरा

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों NOAA और ECMWF के अनुसार 2026 में अल-नीनो बनने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है, जो आगे चलकर ‘सुपर अल-नीनो’ का रूप ले सकता है। इससे समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के मौसम पर पड़ेगा।

पहाड़ी और तटीय इलाकों में ज्यादा असर

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के इलाके इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और कर्नाटक-महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी गर्मी का असर अधिक रहेगा।

हीटवेव और जल संकट का खतरा

पूर्व, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हीटवेव के दिनों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। सूखी सर्दियों के बाद गर्मी बढ़ने से जल संकट, जंगलों में आग और सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

देश की करीब 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी फसलों के उत्पादन चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। पिछले अल-नीनो वर्षों में भी खरीफ फसलों को नुकसान और निर्यात पर असर देखा गया था।

स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी का असर खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर सबसे अधिक पड़ेगा। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बिजली की मांग में वृद्धि जैसे खतरे बढ़ सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन बना मुख्य कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो-ला नीना जैसे प्राकृतिक चक्र मिलकर तापमान में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर औसत तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जिसका असर भारत में भी स्पष्ट दिख रहा है।

तैयारी के निर्देश

IMD ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कूलिंग सेंटर, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की गर्मी केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी है, जिसके लिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है।

‘बादाम कांड’ के बाद हाउसिंग बोर्ड में कार्रवाई, नपे 2 अधिकारी

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 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बिलासपुर स्थित तिफरा कार्यालय में सामने आए ‘बादाम कांड’ ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। एक युवक द्वारा अफसर की टेबल पर बादाम बिखेरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए दो अधिकारियों को मुख्यालय अटैच कर दिया है।


जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी तरुण साहू पिछले एक वर्ष से फ्लैट रजिस्ट्रेशन की फाइल के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। हर बार उसे फाइल गुम होने की बात कहकर टाल दिया जाता रहा। लगातार हो रही देरी से परेशान होकर युवक 500 ग्राम बादाम लेकर कार्यालय पहुंचा और संबंधित अधिकारी की टेबल पर बिखेरते हुए तंज कसा कि “याददाश्त बढ़ेगी, फाइल मिल जाएगी।”

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए संपदा अधिकारी एल.पी. बंजारे और सहायक पुन्नम बंजारे को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय अटैच कर दिया।

यह मामला एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई जारी है।

मासूम की हत्या कर जंगल में छिपाया शव, अपहरण की झूठी कहानी बनाती रही मां, पढ़े पूरी खबर

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने ढाई साल के मासूम बेटे की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। घटना कापू थाना क्षेत्र के पारेमेर फिटिंगपारा गांव की है।


मिली जानकारी के अनुसार, बोधसाय मंछवार और उसकी पत्नी सोनमति के दो बच्चे हैं—चार साल की बेटी ढूलबाई और ढाई साल का बेटा अनुज। 16 अप्रैल को अनुज अचानक लापता हो गया। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बच्चा आखिरी बार अपनी मां सोनमति के साथ देखा गया था। पूछताछ में सोनमति बार-बार बयान बदलती रही और अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।

इसी बीच पुलिस को गांव के पास जंगल में बच्चे का शव बरामद हुआ। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ करने पर सोनमति ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह बेटे के साथ पैदल जा रही थी। तेज धूप में बच्चा बार-बार गोद में लेने की जिद कर रहा था, जिससे वह गुस्से में आ गई। इसी दौरान उसने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन बोधसाय घर से बाहर गया हुआ था। घर लौटने पर उसे केवल बेटी मिली। अगले दिन सोनमति अकेले घर पहुंची और वह शराब के नशे में थी। पति के पूछने पर उसने बेटे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। दो दिन तक बच्चे का कोई पता नहीं चलने पर बोधसाय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

पीएम विकास योजना के तहत बड़ा कदम: अल्पसंख्यक युवाओं को IIT पटना में मिलेगा उन्नत कौशल प्रशिक्षण

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नई दिल्ली: भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने Indian Institute of Technology Patna (आईआईटी पटना) के साथ पीएम विकास (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना के अंतर्गत एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते का आदान-प्रदान मंत्रालय की निदेशक नेहा गिरी, आईआईटी पटना के निदेशक टी. एन. सिंह तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।

600 युवाओं को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण

इस साझेदारी के तहत बिहार राज्य के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को आईआईटी पटना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोक्रेट और बिजनेस एनालिटिक्स एग्जीक्यूटिव जैसे उभरते और उच्च मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें बेहतर प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करना है। तकनीक आधारित आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल अंतर को कम करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

समावेशी विकास की दिशा में प्रयास

आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ साझेदारी से प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योग से जुड़ाव और बेहतर करियर परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे। यह पहल समावेशी विकास और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

अन्य संस्थानों के साथ भी सहयोग

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मंत्रालय ने  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर,सीएसआईआर–केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान,अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के साथ भी समझौते किए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार हो रहा है।

निष्कर्ष

यह पहल न केवल युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस करेगी, बल्कि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0: खाद्य उद्यमिता को मिलेगा नया प्रोत्साहन

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नई दिल्ली: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-तंजावुर) द्वारा 16 और 17 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इच्छुक उद्यमियों, छात्रों और प्रारंभिक स्तर के स्टार्टअप संस्थापकों की क्षमताओं को मजबूत करना और उन्हें व्यवस्थित मार्गदर्शन प्रदान करना था।

उद्यमिता कौशल और ज्ञान का विकास

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के ज्ञान में वृद्धि करना और उन्हें खाद्य व्यवसाय शुरू करने, संचालित करने तथा विस्तार करने की प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी देना था। साथ ही, यह कार्यक्रम खाद्य स्टार्टअप के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता, नियामकीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा।

देशभर से 82 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 82 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के इच्छुक व्यक्ति, नवोदित उद्यमी और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ज्ञान साझा करने और खाद्य व्यवसाय के बदलते परिदृश्य को समझने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े पेशेवरों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। इनमें पैकेजिंग तकनीक, कॉर्पोरेट कानून, प्रशासन एवं कराधान, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियाँ, मूल्य निर्धारण तथा निर्यात के अवसर शामिल रहे।

व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर

सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, भंडारण नियंत्रण, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, मशीनरी चयन जैसे संचालनात्मक पहलुओं के साथ-साथ डिजिटल विपणन, ई-कॉमर्स, ग्राहक सहभागिता, व्यवसायिक विचारों का परीक्षण और नए उत्पाद विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

खाद्य सुरक्षा और नीतिगत जानकारी

कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों, सार्वजनिक नीतियों और खाद्य स्टार्टअप को समर्थन देने वाली अनुदान योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

निष्कर्ष

यह कार्यक्रम तकनीकी, प्रबंधकीय और नियामकीय पहलुओं की व्यापक समझ प्रदान करने वाला एक प्रभावी मंच साबित हुआ। इसने प्रतिभागियों को तेजी से विकसित हो रहे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सफल उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया।

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ: भारतीय नौसेना की क्षमता में होगा विस्तार

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कोलकाता: भारतीय नौसेना के लिए डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC) परियोजना के तहत चौथे जहाज DSC A 23 का 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टिटागढ़ में भव्य समारोह के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर दीपा शिवकुमार ने जहाज को लॉन्च किया, जबकि समारोह में वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार (चीफ ऑफ मटेरियल) सहित नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह आयोजन पारंपरिक नौसैनिक रीति-रिवाजों और गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें Titagarh Rail Systems Limited (TRSL) के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जो इस परियोजना का निर्माण कर रही है।

आधुनिक तकनीक से लैस जहाज

लगभग 30 मीटर लंबाई और 380 टन विस्थापन क्षमता वाले इस कैटमरैन-हुल डिजाइन जहाज में बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उत्कृष्ट समुद्री प्रदर्शन की विशेषताएँ हैं। यह जहाज तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों में डाइविंग अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

स्वदेशी तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा

इस परियोजना को भारतीय शिपिंग रजिस्टर के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में व्यापक परीक्षण और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।
करीब 70% उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करते हैं।

नौसेना की क्षमता में होगा इजाफा

इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवॉटर निरीक्षण, बचाव कार्य (Salvage) और तटीय अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आईएनएस सुदर्शिनी की मोरक्को यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न, समुद्री सहयोग को मिला नया बल

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 18 अप्रैल 2026 को कैसाब्लांका मोरक्को की अपनी सफल और सार्थक बंदरगाह यात्रा पूरी कर आगे बढ़ गया। यह दौरा ‘लोकायन 26’ तैनाती के तहत भारत-मोरक्को समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण पर जोर

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेशेवर बातचीत की, जिसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग को लेकर चर्चा हुई। भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने रॉयल मोरक्कन नौसैनिक विद्यालय के कैडेट्स के साथ क्रॉस-डेक विजिट और मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियों में भाग लिया।

राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत

इस यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, वहीं मोरक्को नौसेना की ओर से भी एक विशेष लंच का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने दोनों देशों के बीच पेशेवर और सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया।

वैश्विक मैत्री का संदेश

यह यात्रा भारत और मोरक्को के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों की पुष्टि करती है, जो साझा हितों और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं। अब आईएनएस सुदर्शिनी स्पेन के लास पाल्मास के लिए रवाना हो गया है, जहां वह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश फैलाते हुए अपनी अगली यात्रा जारी रखेगा।

निष्कर्ष

आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की मित्रता और सद्भावना के संदेश को भी आगे बढ़ाती है।

सी-डॉट और जंप्स ऑटोमेशन के बीच समझौता: साइबर सुरक्षा जागरूकता के लिए गेमिंग प्लेटफॉर्म विकसित होगा

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नई दिल्ली: दूरसंचार विकास केंद्र (सी-डॉट) ने साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिएजंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता सी-डॉट के सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यक्रम (Collaborative Research Programme) (CCRP) के तहत किया गया है।

इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय जंप्स ऑटोमेशन के टेक्नोलॉजी प्रमुख रोहन चांदक  बोर्ड सदस्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गेमिफिकेशन के जरिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक रोचक, इंटरैक्टिव और प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरीना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और चर्चा मंच शामिल होंगे। इसमें फ़िशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर प्रतिक्रिया और संकट प्रबंधन जैसे वास्तविक परिदृश्यों पर आधारित सिमुलेशन भी होंगे।

एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम

यह प्लेटफॉर्म एआई-आधारित एनालिटिक्स इंजन से लैस होगा, जो उपयोगकर्ताओं के प्रदर्शन का विश्लेषण करेगा, चुनौती के स्तर को स्वतः समायोजित करेगा और नए साइबर खतरों के अनुसार कंटेंट को अपडेट रखेगा। यह समाधान सी-डॉट की स्वदेशी तकनीकी क्षमता और जंप्स ऑटोमेशन की एआई विशेषज्ञता का संयोजन होगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने इस पहल को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म लोगों और संगठनों को साइबर खतरों की पहचान और उनसे निपटने में सक्षम बनाएगा।

वहीं, रोहन चांदक ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाएगा और मानव-जनित साइबर जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।

व्यावसायिक स्तर पर लागू होगा प्लेटफॉर्म

यह प्लेटफॉर्म एक SaaS (Software as a Service) मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में विभिन्न संस्थानों और कंपनियों में आसानी से लागू किया जा सकेगा।

निष्कर्ष

यह साझेदारी भारत में साइबर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

डाक विभाग की वार्षिक समीक्षा बैठक: रिकॉर्ड प्रदर्शन, अगले वर्ष के लिए तेज़ विकास की रणनीति तय

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नई दिल्ली:  डाक विभाग  ने वित्त वर्ष 2025–26 की वार्षिक व्यवसाय समीक्षा बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया (संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री) ने की। इसमें पोस्टल निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों और देशभर के 23 पोस्टल सर्किलों के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल शामिल हुए।

रिकॉर्ड राजस्व, ‘ऐतिहासिक वर्ष’ घोषित

बैठक की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री ने विभाग को ₹15,296 करोड़ का राजस्व अर्जित करने पर बधाई दी, जो पिछले वर्ष ₹13,218 करोड़ की तुलना में 16% अधिक है। उन्होंने 2025–26 को “ऐतिहासिक वर्ष” बताया। विभाग ने ₹17,546 करोड़ के लक्ष्य का 88% हासिल किया।
8 सर्किलों ने 90% से अधिक लक्ष्य हासिल किया, जबकि 14 सर्किलों का प्रदर्शन 80–90% के बीच रहा।

कोर क्षेत्रों पर और ध्यान देने की जरूरत

मंत्री ने कहा कि पार्सल, मेल और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जैसे प्रमुख क्षेत्रों में और अधिक सुधार की आवश्यकता है, ताकि विकास की पूरी क्षमता हासिल की जा सके।

तेज़ी से बढ़ते प्रमुख क्षेत्र

बैठक में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों के प्रदर्शन पर प्रकाश डाला गया:

  • सिटिजन सेंट्रिक सर्विसेज (CCS): 70% वृद्धि (दिल्ली सर्किल—782% वृद्धि)

  • पार्सल: 69% वृद्धि (राजस्थान सर्किल—265% वृद्धि)

  • मेल ऑपरेशंस: 34% वृद्धि (असम सर्किल—108% वृद्धि)

  • PLI/RPLI: 30% वृद्धि (आंध्र प्रदेश—47% वृद्धि)

  • पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (POSB): 13% वृद्धि (बिहार—27% वृद्धि)

राजस्थान बना सबसे बेहतर सर्किल

कुल प्रदर्शन में राजस्थान सर्किल 102% लक्ष्य हासिल कर सबसे आगे रहा, साथ ही 34% वृद्धि दर्ज कर अन्य सर्किलों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया।

भविष्य की रणनीति और सुधार

मंत्री ने स्पष्ट किया कि डाक विभाग का भविष्य पार्सल और मेल सेवाओं की मजबूती पर निर्भर करेगा। उन्होंने निर्देश दिए:

  • उच्च विकास वाले क्षेत्रों को और विस्तार देना

  • लागत नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करना

  • सर्किल स्तर पर चार प्रमुख वर्टिकल (पार्सल, HR, फाइनेंस, बिजनेस डेवलपमेंट) को मजबूत करना

  • ग्राहक-केंद्रित और बिक्री-आधारित दृष्टिकोण अपनाना

  • मेल और पार्सल सेवाओं का बेहतर एकीकरण

प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप बदलाव

मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत डाक विभाग एक आधुनिक, ग्राहक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार संगठन में बदल रहा है।

निष्कर्ष

बैठक के अंत में मंत्री ने विश्वास जताया कि डाक विभाग आने वाले वर्ष में और बेहतर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि पार्सल, मेल और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर निरंतर ध्यान देकर विभाग नई ऊँचाइयों को हासिल कर सकता है।

राष्ट्रपति से मुलाकात: युवा अधिकारियों को मिला राष्ट्रनिर्माण का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू से आज  राष्ट्रपति भवन में भारतीय रेल के प्रोबेशनरी अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) तथा केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी अभियंताओं (2021–2024 बैच) ने मुलाकात की।

‘विकसित भारत’ के निर्माण में अहम भूमिका

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे समय में सार्वजनिक सेवा में आए हैं, जब भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे और सड़क सेवाओं में उनकी भूमिका सीधे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर ही विकास की नींव

राष्ट्रपति ने कहा कि रेलवे और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई ट्रेन दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई सड़क किसी पिछड़े क्षेत्र को जोड़ती है, तो वहां विकास के नए अवसर पैदा होते हैं।

लोगों के जीवन में बदलाव ही असली सफलता

उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने कार्य को केवल आंकड़ों से न आंकें, बल्कि इस आधार पर देखें कि उनके फैसलों से लोगों के जीवन में कितना सुधार आया है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है, व्यापार बढ़ता है और निवेश को बढ़ावा मिलता है।

ईमानदारी और नवाचार पर जोर

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपील की कि वे सार्वजनिक सेवा के मूल्यों—ईमानदारी, जवाबदेही और उत्कृष्टता—को हमेशा प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के समय उनके मूल्य ही उन्हें सही दिशा देंगे। साथ ही, उन्होंने निरंतर सीखने और नवाचार को अपनाने की भी सलाह दी।

राष्ट्रनिर्माण के सशक्त भागीदार

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि ये अधिकारी केवल प्रशासक नहीं, बल्कि देश के विकास के सक्षम निर्माता और जनता के विश्वास के रक्षक हैं।


आम चुनाव और उपचुनाव 2026: अवैध सोशल मीडिया सामग्री पर ईसीआई की कार्रवाई

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 रायपुर : भारत निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि सभी हितधारक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम, 2021 और आदर्श आचार संहिता सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करेंगे।आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी भ्रामक या अवैध एआई-जनित या हेरफेर की गई सामग्री पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संज्ञान में लाए जाने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।


राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और अभियान प्रतिनिधियों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रचार के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी सिंथेटिक रूप से निर्मित या एआई-परिवर्तित सामग्री को स्पष्ट रूप से "एआई-जनित", "डिजिटल रूप से संवर्धित" या "सिंथेटिक सामग्री" के रूप में लेबल किया जाए, साथ ही पारदर्शिता और मतदाता विश्वास बनाए रखने के लिए मूल इकाई का खुलासा भी किया जाए।

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के चल रहे चुनावों में, ऐसी सोशल मीडिया सामग्री जैसे कि पोस्ट जो आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन हैं, कानून और व्यवस्था को बाधित करते हैं या जिनमें बाधित करने की क्षमता है, और मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के खिलाफ झूठी कहानियों की निगरानी की जा रही है और आईटी अधिनियम के तहत अधिसूचित संबंधित राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा उन पर कार्रवाई की जा रही है। तदनुसार 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से चल रहे चुनावों में सामग्री को हटाने, एफआईआर , स्पष्टीकरण और खंडन सहित 11 हजार से अधिक ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल की पहचान की गई है और उन पर कार्रवाई की गई है।

आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत प्रावधानों को भी दोहराया, जो मतदान की समाप्ति से पहले 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान मतदान क्षेत्रों में किसी भी चुनावी मामले के प्रदर्शन को प्रतिबंधित करते हैं। टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया सहित मीडिया प्लेटफॉर्मों को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।इसके अतिरिक्त, नागरिक/राजनीतिक दल/उम्मीदवार ईसीआई-नेट पर 'सी-विजिल' मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल तक, इन चुनावों में सी-विजिल ऐप का उपयोग करके 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 3,10,393 शिकायतें यानी 96.01% शिकायतों का समाधान 100 मिनट की निर्धारित समय अवधि के भीतर किया गया।

छत्तीसगढ़ में ‘वाटर एंबुलेंस’ बनी जीवनदायिनी, दूरस्थ गांवों को मिली त्वरित स्वास्थ्य सुविधा

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 रायपुर । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जिला प्रशासन की एक अनूठी पहल ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। कलेक्टर अविनाश मिश्रा की पहल पर शुरू की गई प्रदेश की पहली वाटर एंबुलेंस सेवा ने दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।


यह सेवा विशेष रूप से गंगरेल डैम के आसपास बसे उन गांवों के लिए शुरू की गई है, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल और समयसाध्य है। पहले इन क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए लगभग 50 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था, जिससे कई बार मरीजों की हालत गंभीर हो जाती थी। अब इस सुविधा के जरिए कुछ ही मिनटों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सेवा की उपयोगिता का ताजा उदाहरण ठेमली आइलैंड में सामने आया, जहां एक मजदूर को सांप ने काट लिया। सूचना मिलते ही वाटर एंबुलेंस मात्र 10 मिनट में मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम ने तत्काल मरीज को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया और अस्पताल पहुंचाया।

इस त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया कि दूरस्थ क्षेत्रों में यह सेवा कितनी कारगर है। जहां पहले ऐसे मामलों में घंटों लग जाते थे, वहीं अब समय पर इलाज मिलने से जान बचाने की संभावना काफी बढ़ गई है।

जिला प्रशासन के अनुसार, यह वाटर एंबुलेंस सेवा 32 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे इन गांवों में अब आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल रही है।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में इस सेवा को और सशक्त बनाने की योजना है।

ट्रेफिक सिंग्नल में प्रतीक्षा करने वालों को अब तेज धूप व बारिश में नहीं होगी परेशानी चौक.चौराहों में बनेंगे प्रतीक्षा शेड

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 रायपुर : शहर के चौक-चौराहों में लगे ट्रेफिक सिंग्नल के लाल होने के कारण नागरिको वाहन चालकों के रूकने के समय तेज धूप व बारिश के पानी से अब परेशानी नही होगी क्योंकि निगम शहर के ट्रेफिक सिग्नल वाले प्रमुख चौक-चौराहों में प्रतीक्षा शेड का निर्माण करा रहा है। रविवार को प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर संजूदेवी राजपूत ने सीएसईबी चौक में 32 लाख 30 हजार रूपये की लागत से बनने जा रहे 02 प्रतीक्षा शेड के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।


कोरबा शहर के विभिन्न चौक. चौराहों में आवागमन व्यवस्था सुचारू बनाये रखने के मद्देनजर ट्रेफिक सिग्नल स्थापित किये गये हैंए इन चौक-चौराहों से गुजरने वाले नागरिकों, वाहन चालकों को ट्रेफिक लाल होने के समय रूक कर प्रतीक्षा करनी होती है जिससे विशेष रूप से तेज धूप व बारिश के दौरान उन्हें परेशानी होती है। नागरिकों, वाहन चालकों को इस परेशानी से छुटकारा दिलाने हेतु नगर पालिक निगम केारबा द्वारा शहर के विभिन्न चौक-चौराहों में सड़क के ऊपर प्रतीक्षा शेड बनाये जाने की योजना बनाई गई है। प्रारंभ में सीएसईबी चौक में 02 नग प्रतीक्षा शेड बनाये जायेंगे जिनका भूमिपूजन रविवार को उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर संजूदेवी राजपूत के करकमलों से सम्पन्न हुआ तथा प्रतीक्षा शेड का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया।


आमजन को गर्मी, बरसात में नही होगी परेशानी

इस अवसर पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि चौक-चौराहों पर सड़क के ऊपर प्रतीक्षा शेड बन जाने से गर्मी की तेज धूप व बारिश के पानी से अब आमनागरिकों वाहन चालकों को परेशानी नही होगी महापौर राजपूत का यह कार्य सराहनीय है जो उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। कोरबा शहर के सड़कों के डामरीकरण की चर्चा करते हुये उद्योग मंत्री देवंागन ने कहा कि शहर की सभी सड़कों के डामरीकरण नवीनीकरण हेतु शासन द्वारा राशि स्वीकृत किये जाने के बाद निविदा आदि की कार्यवाही पूरी कर ली गई है 02 प्रमुख सड़कों के डामरीकरण का भूमिपूजन भी किया जा चुका है किन्तु ईरान इजरायल युद्ध के परिणाम स्वरूप डामर मिलने में अत्यंत कठिनाई हो रही है ठेकेदारों को डामर नहीं मिल पा रहा है इसके कारण डामरीकरण कार्य में देरी हो रही है, उन्होने कहा कि जैसे ही डामर की उपलब्धता बनेगी तेजी के साथ शहर की सड़कों का कायाकल्प कर दिया जायेगा। उन्होने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय व उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरूण साव के आशीर्वाद से कोरबा में विकास कार्याे हेतु धनराशि की कोई कमी नहीं हो रही तथा कोरबा का तेजी से विकास हो रहा है।

उद्योग मंत्री की प्रेरणा से बन रहे प्रतीक्षा शेड

महापौर श्रीमती राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन की प्रेरणा से मेरे मन में विचार आया कि सिग्नल के दौरान चौक-चौराहों में रूकने के दौरान तेज धूप व बारिश से आमलोगों को होने वाली परेशानी से कैसे छुटकारा दिलाया जाय तब चौक-चौराहों में प्रतीक्षा शेड निर्माण की योजना बनी जिसके प्रथम चरण में सीएसईबी चौक में 32 लाख 30 हजार रूपये की लागत से 02 प्रतीक्षा शेड बनेंगे इसके बाद दूसरे प्रमुख चौक.चौराहों पर भी शेडों का निर्माण होगा उन्होने बताया कि सीएसईबी चौक में आमनागरिकों की सुविधा हेतु सर्वसुविधायुक्त शौचालय भी बनाया जा रहा है वहीं चौक में स्थित पुराने जर्जर प्रतीक्षालय के स्थान पर सर्वसुविधायुक्त आधुनिक व वातानुकूलित प्रतीक्षालय का निर्माण भी कराया जायेगा।

सतनामी समाज व किन्नर समाज को मिलेंगे उनके अपने भवन

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन एवं महापौर संजूदेवी राजपूत द्वारा सुभाष ब्लाक जैतखंभ के पास सतनामी समाज के लिये 15 लाख रूपये की लागत से बनने जा रहे सामुदायिक भवन एवं हेलीपेड के पास किन्नर समाज के लिये 10 लाख रूपये से बनने जा रहे भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया गया। इस मौके पर उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि कोरबा में 52 समाजों के लिये उनके अपने भवन निर्मित कराये गये हैं तथा आज लगभग सभी समाजों के लिये उनके अपने भवन उपलब्ध हैं।

भूमिपूजन कार्यक्रमों के दौरान सभापति  नूतन सिंह ठाकुर पार्षद नरेन्द्र देवांगन, लक्ष्मण श्रीवास, मुकुंद सिंह कंवर, धनकुमारी गगर्, ममता यादव, सिमरनजीत कौर, नारायण लाल कुर्रे, प्रभा टीकम राठौर, रूबी देवी सागर, मण्डल अध्यक्ष राजेश राठौर एवं योगेश मिश्रा, सुशील गर्ग, शैलेन्द्र सिंह, पप्पी प्रफुल्ल, तिवारी नरेन्द्र, पाटनवार, गुलजार सिंह, आर पी खाण्डे, आर डी भारद्वाज, मालती देवी, दूजराम मिलन, विमला निराला, लक्ष्मीन खाण्डे, द्रौपदी मिरी धनबाई, विमला कुर्रे, अनिता बंजारे, सुफल महिलांगे, संतोष टण्डन, छतराम खुंटे, संतोष सुमन, सुरेन्द्र राजवाडे़, आशीष द्विवेदी, हेमंत देवांगन, विजय गुप्ता, मनोज सिंह, दिनेश कुमार, दीपक यादव, फुलगिरी गोस्वामी, गुलशन सोनी, गणेश भवसागर, गिरधारी रजक, लक्ष्मी महाराज आदि के साथ काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, 23 अप्रैल को होगा फैसला अहम

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 नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व विधायक अमित जोगी की ओर से दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।


सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं विचाराधीन रहीं। इनमें एक याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के तहत सरेंडर पर रोक लगाने से संबंधित थी, जिसे चैंबर में दायर किया गया था, जबकि दूसरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो नंबर बेंच में सुनवाई हुई।

अदालत ने दोनों याचिकाओं को एक साथ टैग करते हुए उनकी संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को तय की। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरेंडर से जुड़ी किसी भी अंतरिम राहत पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जाएगा और इस संबंध में निर्णय चैंबर जज द्वारा लिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान मृतक रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी के अधिवक्ता भी उपस्थित रहे और उन्होंने अपना पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत रखने के निर्देश दिए।

अमित जोगी का बयान

सुनवाई के बाद अमित जोगी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनके दोनों मामलों—25 मार्च 2026 के ‘लीव टू अपील’ आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) और 2 अप्रैल 2026 के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वैधानिक अपील—को एक साथ टैग कर दिया है। अब दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।

उन्होंने बताया कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग ने पक्ष रखा। जोगी ने अपनी कानूनी टीम का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।

गौरतलब है कि इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

घरेलू विवाद में पत्नी ने की पति की हत्या, सिलबट्टे से वार कर उतारा मौत के घाट

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 दुर्ग। शहर के छावनी थाना क्षेत्र में घरेलू विवाद ने जानलेवा रूप ले लिया। कैंप-2 दुर्गा मंदिर के पास रहने वाले एक व्यक्ति की उसकी पत्नी ने कथित तौर पर सिलबट्टे से वार कर हत्या कर दी।


पुलिस के अनुसार, मृतक डोमन साहू और उसकी पत्नी हीरामणि साहू के बीच देर रात किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर पत्नी ने पति के सिर पर सिलबट्टे से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं आरोपी पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

बताया जा रहा है कि मृतक पेशे से ड्राइवर था और पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। हालांकि, इस बार का झगड़ा जानलेवा साबित हुआ।

पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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