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UCC को लेकर बड़ा अपडेट, 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में लागू करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- समान नागरिक संहिता यानी UCC (Uniform Civil Code) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद देश की राजनीति में UCC को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

अमित शाह के मुताबिक, UCC का उद्देश्य नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में NDA सरकारें आगे काम करेंगी।

कई राज्यों में पहले से चल रही प्रक्रिया

UCC को लेकर कुछ राज्यों में पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि अन्य NDA शासित राज्यों में भी इसे लेकर प्रक्रिया और चर्चा आगे बढ़ रही है। अब 2029 से पहले सभी 21 NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है UCC?

समान नागरिक संहिता का मकसद व्यक्तिगत कानूनों के अलग-अलग प्रावधानों की जगह एक समान नागरिक कानून व्यवस्था लाना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

अमित शाह के ताजा बयान के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि अलग-अलग NDA शासित राज्यों में UCC को लागू करने के लिए सरकारें किस तरह की विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं।

UCC का मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति और कानून व्यवस्था से जुड़ी बहस का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।

BRICS Summit में PM मोदी का बड़ा संदेश, बोले- वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग जरूरी

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नई दिल्ली- राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं और तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई। पीएम मोदी ने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियां किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऐसे में देशों के बीच सहयोग, विश्वास और सामूहिक प्रयास पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक और रणनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने के साधन के तौर पर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वैश्विक विकास और साझा समृद्धि प्रभावित हो सकती है।

सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर

पीएम मोदी ने वैश्विक सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने BRICS देशों के बीच Logistics Supply Chain Cooperation Framework को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि संकट के समय जरूरी सामान और संसाधनों की आपूर्ति बाधित न हो।

महामारी से निपटने के लिए Early Warning System

BRICS Summit में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम सामने आया। पीएम मोदी ने BRICS Integrated Early Warning System की पहल का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य संक्रामक बीमारियों के संभावित खतरों की समय रहते पहचान और बेहतर प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना है।

Global South की आवाज मजबूत करने का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS के प्रति Global South का भरोसा बढ़ रहा है, क्योंकि विकासशील देशों की आवाज और चिंताओं को इस मंच पर जगह मिल रही है। उन्होंने BRICS से लिए गए फैसलों को सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित न रखकर उन्हें जमीन पर लागू करने और आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने पर जोर दिया।

इसके साथ ही भारत ने स्टार्टअप्स, डिजिटल कृषि, ऊर्जा भंडारण, आपदा प्रबंधन और MSME सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहलों पर जोर दिया। पीएम मोदी का संदेश साफ रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग, नवाचार और सामूहिक विकास ही आगे बढ़ने का रास्ता है।

BRICS Summit में भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

भारत की बेटियों ने रचा इतिहास, श्रीलंका को 72 रन से हराकर 8वीं बार जीता महिला एशिया कप

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दुबई- भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर एशिया में अपना दबदबा साबित कर दिया है। कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया ने महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से करारी शिकस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 8वीं बार महिला एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम की।

2024 के फाइनल में श्रीलंका के हाथों मिली हार का बदला भी भारतीय टीम ने शानदार अंदाज में ले लिया। इस बार फाइनल में भारत ने बल्ले और गेंद दोनों से ऐसा प्रदर्शन किया कि श्रीलंकाई टीम पूरे मुकाबले में दबाव से बाहर नहीं निकल सकी।

शैफाली और स्मृति ने मचाई तबाही

टॉस जीतकर भारत ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय ओपनर्स शैफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने टीम को तूफानी शुरुआत दिलाई।

शैफाली ने महज 39 गेंदों में 68 रन की विस्फोटक पारी खेली, जबकि स्मृति मंधाना ने भी 39 गेंदों में 59 रन बनाकर शानदार अर्धशतक जड़ा।

दोनों बल्लेबाजों के बीच 129 रनों की शानदार साझेदारी हुई, जिसने भारत को बड़े स्कोर की नींव दी। शैफाली ने अपनी पारी के दौरान सिर्फ 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो महिला टी20 एशिया कप के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक रहा।

भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 183 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 184 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की कमर तोड़ी

184 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी।

भारतीय स्पिनर श्री चरणी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके। वहीं अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।

श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू ने 36 रन बनाकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के लगातार दबाव के सामने उनकी टीम पूरी तरह बिखर गई।

श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मुकाबला 72 रन से जीत लिया।

2024 की हार का लिया बदला

इस जीत की सबसे खास बात यह रही कि भारत ने दो साल पहले मिली हार का हिसाब भी बराबर कर दिया।

2024 के महिला एशिया कप फाइनल में श्रीलंका ने भारत को हराकर पहली बार खिताब जीता था। उस मुकाबले में श्रीलंका ने शानदार रन चेज करते हुए भारत को मात दी थी।

लेकिन 2026 के फाइनल में हरमनप्रीत कौर की टीम ने कोई मौका नहीं दिया और शुरुआत से ही मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत रखी।

पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा भारत

भारत का प्रदर्शन सिर्फ फाइनल तक ही सीमित नहीं रहा। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अजेय रहते हुए खिताब अपने नाम किया।

ग्रुप स्टेज में भारत ने पाकिस्तान सहित अपने विरोधियों को हराया। पाकिस्तान के खिलाफ तो भारतीय स्पिनरों ने कमाल करते हुए उसे सिर्फ 55 रन पर ऑलआउट कर दिया था। भारत ने 56 रन का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया था।

इसके बाद सेमीफाइनल में भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई।

दीप्ति शर्मा का भी शानदार टूर्नामेंट

भारतीय ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने पूरे टूर्नामेंट में गेंद से जबरदस्त प्रदर्शन किया। फाइनल से पहले ही वह 11 विकेट लेकर टूर्नामेंट की सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज थीं।

फाइनल में भी उन्होंने तीन विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

स्मृति मंधाना ने भी रचा इतिहास

इस एशिया कप में स्मृति मंधाना ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

हांगकांग के खिलाफ 124 रन की शानदार पारी के दौरान मंधाना ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया और मिताली राज के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

भारत की बेटियों की ऐतिहासिक जीत

फाइनल का पूरा स्कोरकार्ड:

भारत – 183/5 (20 ओवर)
शैफाली वर्मा – 68 रन
स्मृति मंधाना – 59 रन

श्रीलंका – 111 रन ऑलआउट
श्री चरणी – 4 विकेट
दीप्ति शर्मा – 3 विकेट

नतीजा: भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराया।

खास उपलब्धि: भारत 8वीं बार महिला एशिया कप चैंपियन बना।

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एशियाई क्रिकेट में उसका दबदबा कायम है। शैफाली और स्मृति की तूफानी बल्लेबाजी, श्री चरणी और दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी और पूरी टीम के बेहतरीन प्रदर्शन ने भारत को एक और ऐतिहासिक खिताब दिला दिया।

भारत की बेटियों ने सिर्फ एशिया कप नहीं जीता, बल्कि पूरे देश को गर्व करने का एक और मौका दे दिया।

Ganesh Chaturthi 2026: आज घर-घर विराजेंगे बप्पा, जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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 Ganesh Chaturthi 2026: गणेश उत्सव का पावन पर्व आज, 14 सितंबर 2026, सोमवार से शुरू हो गया है। देशभर में गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी घरों से लेकर सार्वजनिक गणेश पंडालों तक बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्त अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और आराधना करेंगे। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त में बप्पा की स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी की तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। इस दौरान भक्त विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना कर पूजा कर सकते हैं।

  • गणेश चतुर्थी तिथि शुरू: 14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026, सुबह 7:44 बजे
  • गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
  • मुहूर्त की अवधि: 2 घंटे 29 मिनट
  • गणपति विसर्जन: 25 सितंबर 2026, शुक्रवार
  • चंद्र दर्शन वर्जित समय: 14 सितंबर को सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक

गणपति स्थापना के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?

अगर आप घर पर गणपति की स्थापना कर रहे हैं तो पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें। पूजा के लिए मिट्टी की इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, आम के पत्ते, नारियल, दूर्वा, रोली, चंदन, अक्षत, कलावा, जनेऊ, फूल, मोदक या लड्डू, फल, दीपक, धूप और कपूर रखें।

धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को दूर्वा और लाल फूल विशेष प्रिय माने गए हैं। पूजा में 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है।

बप्पा को लगाएं मोदक का भोग

गणेश चतुर्थी की पूजा में भगवान गणेश को भोग लगाने का भी विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार मोदक भगवान गणेश का प्रिय भोग है। इसके अलावा बप्पा को लड्डू, पूरन पोली, खीर या पायस, केला, नारियल, मौसमी फल, मेवे और गुड़ का भोग भी लगाया जा सकता है।

गणेश जी के प्रमुख पूजा मंत्र

गणपति की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

गणेश बीज मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः।

वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गणेश गायत्री मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

घर में गणपति की स्थापना कैसे करें?

1. पूजा स्थल तैयार करें

सबसे पहले घर के पूजा स्थल या उपयुक्त स्थान पर चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर फूलों से सजावट करें।

2. शुभ मुहूर्त में बप्पा को विराजमान करें

शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक चौकी पर स्थापित करें। इसके साथ ही जल से भरा कलश रखें। कलश में आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें।

3. पूजा का संकल्प लें

दाहिने हाथ में फूल और अक्षत लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद विधि-विधान से पूजा शुरू करें।

4. शुद्धिकरण और पूजन करें

जल के छींटे देकर पूजा स्थल और पूजा सामग्री का शुद्धिकरण करें। इसके बाद भगवान गणेश को जल अर्पित करें।

5. तिलक और जनेऊ अर्पित करें

भगवान गणेश को रोली, चंदन और अक्षत लगाएं। इसके बाद कलावा और जनेऊ अर्पित करें।

6. दूर्वा और फूल चढ़ाएं

भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें। इसके साथ लाल फूल चढ़ाकर बप्पा का पूजन करें।

7. भोग लगाएं

पूजा के बाद भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, फल और अन्य पसंदीदा प्रसाद का भोग लगाएं। श्रद्धानुसार पान-सुपारी भी अर्पित की जा सकती है।

8. आरती कर प्रार्थना करें

अंत में घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान गणेश की आरती करें। आरती के बाद भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि और सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें। पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा याचना करें।

10 दिनों तक होगी गणपति की आराधना

गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला गणेश उत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का पर्व है। इन दिनों घरों और पंडालों में भगवान गणेश की विशेष पूजा, आरती और भजन-कीर्तन किए जाते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार गणपति को डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या पूरे 10 दिनों तक विराजमान रखते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है और प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न की शिकायत मिलते ही हो तत्काल कार्रवाई, दोषी किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा असुरक्षित वातावरण से संबंधित किसी भी शिकायत को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवासीय विद्यालय और छात्रावास बच्चों के लिए केवल अध्ययन के स्थान नहीं, बल्कि उनके घर की तरह हैं। माता-पिता अपने बच्चों को विश्वास के साथ इन संस्थानों में भेजते हैं। इस विश्वास की रक्षा करना शासन-प्रशासन और संस्थान से जुड़े प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना हर परिस्थिति में सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को मामले की गंभीरता से जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर बिना किसी विलंब के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। यदि किसी स्तर पर शिकायत की अनदेखी, उसे दबाने का प्रयास अथवा कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।

मुख्यमंत्री साय ने इस प्रकरण के संदर्भ में सभी जिलों को व्यापक सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि जिले में संचालित बालिका छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि इन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी निर्धारित व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है। छात्रावासों में अधीक्षकों एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तथा बच्चों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों से जुड़ी शिकायतों के मामले में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, सतत संवाद और प्रभावी निगरानी के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों को पहले ही पहचानने और रोकने की व्यवस्था विकसित की जाए। विद्यालय एवं छात्रावास प्रबंधन को भी यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता गंभीरता से ली जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा उन्हें डराने-धमकाने जैसी किसी भी शिकायत की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करें। आवश्यक होने पर पीडि़त छात्राओं को काउंसलिंग एवं अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बेटियां निर्भय होकर पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें, इसके लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रदेश के प्रत्येक आवासीय विद्यालय और छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वाेपरि है। इस दिशा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

छत्तीसगढ़ में मानसून मेहरबान: सामान्य वर्षा का 99.9% कोटा पूरा

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 ​रायपुर : छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून की मेहरबानी से जल संकट काफी हद तक दूर हो चुका है। राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी बारिश रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 13 सितंबर 2026 तक प्रदेश में औसत सामान्य वर्षा की 99.9% आपूर्ति दर्ज की जा चुकी है। राज्य भर में अब तक कुल 988.5 मिमी औसत बारिश हुई है, जो पिछले 10 वर्षों के 989.9 मिमी के ऐतिहासिक औसत के बिल्कुल बराबर है। वहीं पिछले 24 घंटों के भीतर प्रदेश में 12.6 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई, जिसमें दंतेवाड़ा जिले में सर्वाधिक 46.3 मिमी बारिश हुई है।


​वर्षा आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में मानसून का रूप भिन्न रहा है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले ने 1482.8 मिमी कुल बारिश और सामान्य औसत के मुकाबले 177% वर्षा के साथ पूरे प्रदेश में बाजी मारी है। इसके बाद सारंगढ़-बिलाईगढ़ में औसत का 146.3%, रायपुर में 131.8%, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 127.1% और महासमुंद में 125.7% बारिश दर्ज की गई है। मैदानी जिलों में बलौदाबाजार, मुंगेली, गरियाबंद और धमतरी जैसे इलाकों में भी सामान्य से अधिक वर्षा होने से कृषि गतिविधियों को काफी मजबूती मिली है।


​दूसरी ओर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अब भी अच्छी बारिश की दरकार बनी हुई है। बेमेतरा जिला प्रदेश भर में सबसे कम 563.8 मिमी (औसत का 78.2%) वर्षा के साथ तालिका में सबसे नीचे है। सरगुजा संभाग के मुख्य सरगुजा जिले में केवल 589.4 मिमी (79.7%) बारिश ही हो पाई है। वहीं बस्तर संभाग के कांकेर जिले में ऐतिहासिक औसत की तुलना में मात्र 67.1% (924.5 मिमी), सुकमा में 70.5% (975.2 मिमी) और बीजापुर में 74.7% (1313.0 मिमी) ही वर्षा दर्ज की गई है, हालांकि नारायणपुर (1352.7 मिमी) और दंतेवाड़ा (1216.0 मिमी) में बस्तर के अन्य जिलों की तुलना में बेहतर स्थिति है।

​मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों की बात करें तो बिलासपुर (963.0 मिमी), कोरबा (1056.9 मिमी), दुर्ग (742.4 मिमी), सक्ती (927.8 मिमी) और जशपुर (894.7 मिमी) जैसे जिलों ने अपने 10-वर्षीय औसत के लगभग 95% से 107% तक का आंकड़ा हासिल कर लिया है, जो संतुलित स्थिति को दर्शाता है। राजनांदगांव, कबीरधाम, रायगढ़, कोंडागांव और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से थोड़ा कम रहने के बावजूद खरीफ फसलों के लिए राहतजनक स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष की ओर से आगामी दिनों में भी कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है।

CG NEWS : 19 हाथियों ने मचाई दहशत, जान बचाने बिजली टावर पर चढ़े कर्मचारी

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 कोरबा। जिले के बंजारी परिसर के जंगल में हाथियों के झुंड की मौजूदगी से दहशत का माहौल है। क्षेत्र में इन दिनों 19 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इनमें 18 हाथियों का झुंड और एक लोनर हाथी शामिल है। इसी बीच टावर लाइन के नीचे साफ-सफाई का काम करने पहुंचे कर्मचारियों के सामने अचानक हाथियों का दल आ गया। जान बचाने के लिए कर्मचारियों ने बिजली टावर के ढांचे पर चढ़कर खुद को सुरक्षित किया।


अचानक सामने आ गया हाथियों का झुंड

जानकारी के मुताबिक, ग्राम बंजारी में टावर लाइन के नीचे साफ-सफाई का काम करने के लिए कर्मचारी पहुंचे थे। इसी दौरान जंगल की ओर से अचानक हाथियों का दल वहां पहुंच गया और कर्मचारियों के काफी करीब आ गया। हाथियों को अपनी ओर बढ़ता देखकर कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।

खतरे को भांपते हुए कर्मचारियों ने तत्काल बिजली टावर के ढांचे पर चढ़कर अपनी जान बचाई। बताया जा रहा है कि हाथियों का दल काफी देर तक टावर लाइन के नीचे ही विचरण करता रहा।

वन अमला और हाथी मित्र दल ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही बंजारी परिसर के परिसर रक्षक ऋषभ राठौर तथा हाथी मित्र दल के राजेश त्रिवेदी और अशोक बिंझवार मौके पर पहुंचे। वन अमले और हाथी मित्र दल ने हाथियों की गतिविधियों का जायजा लिया और स्थिति सामान्य होने के बाद कर्मचारियों को सावधानीपूर्वक टावर से नीचे उतारा।

इसके बाद सभी कर्मचारियों को सुरक्षित घटनास्थल से बाहर निकाला गया। राहत की बात रही कि घटना में किसी कर्मचारी के घायल होने की जानकारी नहीं है।

19 हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत

बंजारी क्षेत्र में 19 हाथियों के विचरण को देखते हुए वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथियों की मौजूदगी से आसपास के ग्रामीणों और जंगल क्षेत्र में काम करने वाले लोगों में भी दहशत का माहौल है।

वन विभाग ने लोगों से हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। साथ ही हाथियों के करीब नहीं जाने, उन्हें छेड़ने या उनका रास्ता रोकने से बचने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि सावधानी बरतकर ही किसी अप्रिय घटना को रोका जा सकता है।

गंगरेल बांध के 7 गेट खोले गए, 42,540 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा

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जलाशयों में तेजी से बढ़ा जलस्तर, महानदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट


धमतरी : जिले में और कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा तथा जलाशयों में पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। 13 सितंबर की सुबह 8 बजे की स्थिति में जिले के प्रमुख जलाशयों में जलभराव का स्तर तेजी से बढ़ा है। गंगरेल जलाशय 97.16 प्रतिशत, मुरुमसिल्ली 99.47 प्रतिशत, दुधावा 94.83 प्रतिशत और सोदुर जलाशय 76.58 प्रतिशत भर चुका है।

वर्तमान में गंगरेल जलाशय में 40,390 क्यूसेक, मुरुमसिल्ली में 1,804 क्यूसेक, दुधावा में 4,009 क्यूसेक तथा सोदुर जलाशय में 118 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है।

गंगरेल बांध के 7 गेट खोलकर 42,540 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा

आगामी वर्षा तथा जलाशयों में पानी की बढ़ती आवक को ध्यान में रखते हुए गंगरेल बांध के 7 गेट खोलकर लगभग 42,540 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। रुद्री बैराज के माध्यम से इसमें से लगभग 5,500 क्यूसेक पानी महानदी मुख्य नहर तथा लगभग 37,000 क्यूसेक पानी महानदी में प्रवाहित किया जा रहा है। जलाशय में पानी की आवक और आगामी वर्षा की स्थिति को देखते हुए पानी निकासी की मात्रा को आवश्यकता अनुसार बढ़ाया भी जा सकता है।

पानी की निकासी के कारण महानदी के जलस्तर में वृद्धि की संभावना को देखते हुए नदी के किनारे बसे गांवों में प्रशासन द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। संबंधित विभागों एवं मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने तथा आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

नदी-नालों से दूर रहें, अनावश्यक जोखिम न लें

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी, नाले, रपट, छोटे पुल-पुलिया एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। अनावश्यक रूप से नदी-नालों को पार न करें। तेज बहाव वाले पानी में वाहन अथवा पैदल जाने का प्रयास न करें। बच्चों को नदी-नालों एवं जलभराव वाले स्थानों से दूर रखें।

यदि किसी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने अथवा बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है, तो नागरिक प्रशासन द्वारा चिन्हांकित सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाएं तथा प्रशासन एवं राहत दलों के निर्देशों का पालन करें।

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा—सावधानी ही सुरक्षा

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि “जिले में लगातार वर्षा और जलाशयों में पानी की आवक को देखते हुए प्रशासन द्वारा पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंगरेल बांध के सात गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है, जिसके कारण महानदी के जलस्तर में वृद्धि हो सकती है। नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक जोखिम न लें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर पहुंचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन को दें।”

उन्होंने कहा कि “सावधानी ही सुरक्षा है। नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन के साथ सहयोग से किसी भी संभावित परिस्थिति का सुरक्षित ढंग से सामना किया जा सकता है।”

जिला प्रशासन धमतरी की अपील:

सतर्क रहें—सुरक्षित रहें।
नदी-नालों से दूर रहें।
अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाएं।
जल है तो कल है।

चाय की होटल में भाजपा नेता पर चाकू से हमला, गर्दन पर किया वार; आरोपी फरार

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 दुर्ग। जिले के उतई थाना क्षेत्र के जोरातराई गांव में शनिवार सुबह भाजपा नेता राजेंद्र यादव पर चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि राजेंद्र यादव रोजाना की तरह एक होटल में चाय पी रहे थे। इसी दौरान उनका पुराना दोस्त वहां पहुंचा और पीछे से उनकी गर्दन पर चाकू से वार कर दिया।


अचानक हुए हमले से होटल में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। वारदात के बाद आरोपी चाकू लहराते हुए मौके से फरार हो गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी भाजपा नेता पर हमला करता नजर आ रहा है।

3-4 साल से बंद थी दोनों की बातचीत

घायल राजेंद्र यादव ने पुलिस को बताया कि आरोपी से उनकी पहले अच्छी दोस्ती थी, लेकिन पिछले 3-4 वर्षों से दोनों के बीच बातचीत नहीं थी। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि उनके और आरोपी के बीच किसी तरह की दुश्मनी या पुरानी रंजिश नहीं थी।

हमले में घायल राजेंद्र यादव को उपचार के लिए भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने सामने आए वीडियो फुटेज को भी जांच में शामिल किया है। आरोपी की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

जल्द गिरफ्तारी का दावा

दुर्ग ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि जोरातराई गांव में दो लोगों के बीच मारपीट की घटना हुई है। इसमें एक व्यक्ति ने दूसरे पर चाकू से हमला किया और मौके से फरार हो गया। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बैंक ग्राहकों को बनाया निशाना, गोल्ड ETF में निवेश के नाम पर ठगी; मैनेजर गिरफ्तार

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 दुर्ग। निवेश के नाम पर लोगों से ठगी के मामले में सुपेला पुलिस ने HDFC बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर राजकुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने बैंक पद का कथित तौर पर फायदा उठाकर बड़ी रकम वाले खाताधारकों की जानकारी जुटाई और उन्हें गोल्ड ETF में निवेश के नाम पर हर महीने 10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा दिया। मामले का मुख्य आरोपी योगेश साहू पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।


पुलिस के अनुसार, राजकुमार तिवारी बड़े बैंक खातों वाले ग्राहकों से संपर्क करता था और उन्हें गोल्ड ETF में निवेश करने पर भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था। निवेशकों से चेक के माध्यम से रकम लेकर उसे मुख्य आरोपी योगेश साहू के बैंक खाते में जमा कराने का आरोप है।

शुरुआत में दिया मुनाफा, फिर बंद हुआ भुगतान

पुलिस के मुताबिक, निवेशकों का भरोसा कायम रखने के लिए शुरुआत में राजकुमार तिवारी के खाते से लाभांश की रकम भी भेजी जाती थी। कुछ समय बाद लाभांश का भुगतान बंद हो गया। इसके बाद निवेशकों को रकम वापस करने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।

15 लाख रुपये निवेश करने के बाद सामने आया मामला

मामले की शिकायत सेक्टर-7, भिलाई निवासी राजू नामदेव ने सुपेला थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने अन्य ग्राहकों के बैंक स्टेटमेंट दिखाकर निवेश योजना को भरोसेमंद बताया था। इसके बाद राजू नामदेव ने 21 मार्च 2025 को 15 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर किए।

शुरुआत में उन्हें लाभांश की रकम मिली, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। जांच के दौरान उन्हें पता चला कि अन्य निवेशकों से भी इसी तरह रकम लेने का आरोप है।

कई निवेशकों के बयान और दस्तावेजों की जांच

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान मोहम्मद रफी, साधना मिश्रा, शिबा शेख समेत अन्य निवेशकों के बयान दर्ज किए और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। बैंक खातों की जांच में राजकुमार तिवारी की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच

पुलिस अब इस कथित निवेश योजना से जुड़े अन्य लोगों और संबंधित बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

India vs Afghanistan 1st T20I: दिल्ली में भारत-अफगानिस्तान की भिड़ंत, ओपनिंग कॉम्बिनेशन पर सबकी नजर

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दिल्ली- भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की T20I सीरीज का पहला मुकाबला आज, 13 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा। मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस में जबरदस्त उत्साह है। भारत की नजर जहां सीरीज में जीत के साथ शुरुआत करने पर होगी, वहीं अफगानिस्तान की टीम भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

इस मुकाबले से पहले सबसे बड़ा सवाल भारत के ओपनिंग कॉम्बिनेशन को लेकर बना हुआ है। टीम मैनेजमेंट के सामने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी संजू सैमसन में से किसे पारी की शुरुआत का मौका दिया जाए, इसे लेकर चर्चा तेज है। इंग्लैंड के खिलाफ पिछली T20I सीरीज में दोनों खिलाड़ियों को अलग-अलग मौकों पर आजमाया गया था।

अभिषेक शर्मा का ओपनिंग स्लॉट मजबूत माना जा रहा है। उनके साथ वैभव सूर्यवंशी या संजू सैमसन में से किसी एक को उतारने की रणनीति पर विचार हो सकता है। हालांकि, ईशान किशन की फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन भी अंतिम प्लेइंग XI को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान के पास राशिद खान, मोहम्मद नबी और नूर अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। कप्तान इब्राहिम जादरान ने भी संकेत दिया है कि उनकी टीम भारत के प्रमुख खिलाड़ियों के खिलाफ खास रणनीति के साथ मैदान पर उतरेगी। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अफगान टीम के रडार पर हैं।

यह मुकाबला दिल्ली में चल रहे BRICS Summit के बीच हो रहा है, जिसके चलते सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। DDCA ने साफ किया है कि मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही खेला जाएगा।

तीन मैचों की यह सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जाएगी। पहला मुकाबला शाम 7 बजे से शुरू होने की जानकारी दी गई है।

मैच से पहले बड़ा सवाल

क्या भारत अनुभव पर भरोसा करेगा या युवा वैभव सूर्यवंशी को मौका देकर भविष्य की तैयारी करेगा? दिल्ली में होने वाले पहले T20I में टीम इंडिया का ओपनिंग कॉम्बिनेशन मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण रहने वाला है।

रायपुर-दुर्ग रेल रूट पर बदली व्यवस्था, 3 दिन इन MEMU ट्रेनों का ठहराव रहेगा रद्द

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 रायपुर। संरक्षा और आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को ध्यान में रखते हुए रायपुर रेल मंडल के रायपुर-दुर्ग सेक्शन में कुछ MEMU पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव में अस्थायी बदलाव किया गया है। रेलवे के अनुसार, 13 सितंबर से 15 सितंबर 2026 तक ‘C’ और ‘D’ केबिन पर कुछ ट्रेनों का ठहराव निरस्त रहेगा।


इस अवधि में संबंधित ट्रेनों को इन केबिनों पर निर्धारित ठहराव नहीं मिलेगा। यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा से पहले ट्रेन के ठहराव और समय की जानकारी जरूर जांच लें।

‘C’ केबिन पर इन ट्रेनों का ठहराव रहेगा निरस्त

  1. 68703 रायपुर–दुर्ग MEMU पैसेंजर
  2. 68705 रायपुर–डोंगरगढ़ MEMU पैसेंजर
  3. 68764 रायपुर–तोड़ोकी MEMU पैसेंजर
  4. 68717 रायपुर–दुर्ग MEMU पैसेंजर
  5. 68709 रायपुर–डोंगरगढ़ MEMU पैसेंजर

‘D’ केबिन पर इन ट्रेनों का ठहराव नहीं होगा

  1. 68730 डोंगरगढ़–रायपुर MEMU पैसेंजर
  2. 68702 दुर्ग–रायपुर MEMU पैसेंजर
  3. 68704 दुर्ग–रायपुर MEMU पैसेंजर
  4. 68765 तोड़ोकी–रायपुर MEMU पैसेंजर
  5. 68708 दुर्ग–रायपुर MEMU पैसेंजर
  6. 68706 डोंगरगढ़–बिलासपुर MEMU पैसेंजर

तीन दिनों तक लागू रहेगी व्यवस्था

रेलवे के मुताबिक, यह अस्थायी व्यवस्था 13, 14 और 15 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद संबंधित ट्रेनों के ठहराव सामान्य व्यवस्था के अनुसार बहाल किए जाएंगे। यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए यात्रा से पहले रेलवे की ओर से जारी अपडेट की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

BRICS Summit में भारत का दबदबा, PM मोदी ने वैश्विक चुनौतियों पर रखा भारत का पक्ष

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नई दिल्ली- राजधानी नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit का आयोजन हो रहा है। दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख नेताओं की इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और Global South की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा केंद्र में है।

भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Summit में भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख रहे हैं।

ऊर्जा सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता

BRICS बैठक में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आई है। मौजूदा वैश्विक तनाव और कई महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते जोखिम के बीच सदस्य देशों ने ऊर्जा की लगातार और सुरक्षित आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया है।

भारत का कहना है कि विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि के लिए सस्ती, भरोसेमंद और uninterrupted energy supply बेहद जरूरी है।

BRICS देशों ने ऊर्जा infrastructure की सुरक्षा, supply chains को मजबूत करने और भविष्य में clean energy की ओर व्यवस्थित transition पर भी जोर दिया है।

Global South की आवाज को मजबूत करने पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को किसी देश या समूह के खिलाफ मंच बनाने के बजाय सहयोग और विकास का मंच बताया है।

भारत का जोर इस बात पर है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली का संदेश साफ है—Global South केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि वैश्विक नियमों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भागीदार होना चाहिए।

UN Security Council Reform का मुद्दा भी प्रमुख

Summit में संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं में सुधार की मांग भी महत्वपूर्ण रही है।

भारत लंबे समय से United Nations Security Council में सुधार और विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।

भारत का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की दुनिया की वास्तविक आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करतीं। इसलिए उन्हें ज्यादा representative, inclusive और effective बनाने की जरूरत है।

भारत-चीन संबंधों पर भी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच महत्वपूर्ण बातचीत भी हुई।

दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर और बेहतर बनाने के साथ-साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भारत और चीन के बीच किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दोनों देश BRICS के प्रमुख सदस्य हैं और एशिया की राजनीति एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी बड़ी भूमिका है।

UAE और Iran के साथ भारत की कूटनीति

Summit के दौरान भारत ने UAE और Iran के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीत की।

UAE के साथ defence, AI, space, energy, critical minerals और connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

वहीं Iran के साथ बातचीत में Middle East की स्थिति, maritime security और energy routes जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।

भारत की कोशिश है कि BRICS के मंच का इस्तेमाल केवल आर्थिक सहयोग के लिए ही नहीं, बल्कि संवाद और diplomatic engagement के लिए भी किया जाए।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा

BRICS देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार में alternative payment mechanisms और national currencies के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा जारी है।

इसका उद्देश्य अचानक डॉलर को खत्म करना नहीं है, बल्कि BRICS देशों को international trade और financial system में वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराना है।

अगर सदस्य देशों के बीच local currencies में व्यापार और payment systems बढ़ते हैं, तो इससे cross-border trade को कुछ परिस्थितियों में अधिक flexibility मिल सकती है।

Infrastructure और Supply Chain की सुरक्षा

BRICS Summit में यह भी स्पष्ट हुआ कि आज के दौर में infrastructure का मतलब केवल सड़क, रेलवे, बंदरगाह और बिजली संयंत्र नहीं है।

अब digital networks, energy grids, undersea cables, transportation corridors और critical mineral supply chains भी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं।

ऐसे infrastructure को cyber attacks, physical attacks और geopolitical disruptions से सुरक्षित रखना BRICS देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह Summit?

BRICS Summit भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

एक तरफ भारत Global South की leadership को मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ चीन, रूस, UAE और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर भी BRICS के माध्यम से मिलता है।

भारत का प्रयास है कि वह East और West दोनों के साथ अपने strategic और economic relations को संतुलित रखते हुए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करे।

Bottom Line

नई दिल्ली में चल रहा BRICS Summit केवल नेताओं की बैठक नहीं है। यह बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में भारत और अन्य emerging economies की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है।

Energy security से लेकर global trade, infrastructure protection से लेकर UN reforms और Global South की आवाज तक—इन सभी मुद्दों पर भारत अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख रहा है।

नई दिल्ली से संदेश साफ है—BRICS के जरिए भारत एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की पैरवी कर रहा है जिसमें विकासशील देशों की आवाज ज्यादा मजबूत, प्रतिनिधित्व ज्यादा व्यापक और वैश्विक सहयोग ज्यादा प्रभावी हो।

हरतालिका तीज पर क्या करें और क्या न करें? जानें व्रत के जरूरी नियम

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14 सितंबर को मनाई जाएगी हरतालिका तीज, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना से सुहागिन महिलाएं रखेंगी व्रत


हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन माना जाता है। इस दौरान व्रती महिलाओं को कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। पंडित राकेश झा के अनुसार, व्रत के दौरान खान-पान, पूजा और आचरण से जुड़े कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

हरतालिका तीज व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

काले, नीले और सफेद वस्त्र पहनने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन काले, नीले और सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। शुभ अवसर पर लाल, पीले या हरे जैसे रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

नमक और मीठे का सेवन न करें

मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज के निर्जला व्रत में नमक और मीठे व्यंजनों का सेवन नहीं किया जाता। कुछ धार्मिक मान्यताओं में मीठा खाने को अगले जन्म से जुड़ी मान्यताओं के साथ जोड़ा गया है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।

पति और परिवार से विवाद न करें

व्रत के दिन मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसलिए पति या परिवार के किसी सदस्य से वाद-विवाद करने, अपशब्द बोलने और नकारात्मक विचार रखने से बचना चाहिए।

अनाज और फल का सेवन न करने की मान्यता

हरतालिका तीज का व्रत पारंपरिक रूप से निर्जला रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में अनाज और फल का सेवन भी नहीं किया जाता। फल खाने को लेकर भी कुछ लोक मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें अगले जन्म से जुड़ी बातें कही जाती हैं।

निर्जला व्रत में पानी पीने से बचें

हरतालिका तीज को निर्जला व्रत के रूप में रखने की परंपरा है। यानी व्रत के दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर जबरन निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

दिन में सोने से बचें

मान्यता है कि हरतालिका तीज के व्रत में दिन में शयन नहीं करना चाहिए। इसके बजाय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करने की परंपरा है। रात में जागरण करने की भी धार्मिक मान्यता है।

पारण के बाद तामसिक भोजन न करें

व्रत के अगले दिन पारण करते समय भी सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। पारण के तुरंत बाद तामसिक या अत्यधिक भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

हरतालिका तीज पर क्या करना चाहिए?

सूर्योदय से पहले स्नान करें

व्रती महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारी करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लाल, पीले या अन्य शुभ रंग के वस्त्र धारण किए जा सकते हैं।

सात्विक आचरण रखें

व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने और मन, वचन व कर्म से सात्विक रहने की परंपरा है। घर में भी सात्विक भोजन बनाने और सकारात्मक माहौल बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

सोलह श्रृंगार करें और मेहंदी लगाएं

हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन मेहंदी लगाती हैं और सुहाग से जुड़ी वस्तुओं का श्रृंगार करती हैं। पूजा के दौरान सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करने की भी परंपरा है।

भगवान शिव-पार्वती की पूजा और मंत्र जाप करें

व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना चाहिए। मंत्र जाप, भजन-कीर्तन और हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अगले दिन विधि से करें व्रत का पारण

हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन पूजा के बाद पारण करके पूरा किया जाता है। पारण के समय पहले जल ग्रहण करने और इसके बाद हल्का व सात्विक भोजन करने की परंपरा है।

ध्यान दें: हरतालिका तीज के व्रत से जुड़े नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में कुछ अलग हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में उल्लास से मना तीजा-पोरा तिहार

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रायपुर :  नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास आज तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।

शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि

कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।

सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान

तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।


उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि अपने घरों और आसपास मुनगा लगाएं और इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाएं। घर-घर मुनगा लगाने की यह पहल जनभागीदारी के माध्यम से सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।

राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ करेगा जागरूक

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर पोषण संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को और गति दी जा रही है।

नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन

कार्यक्रम में आत्मीयता का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार और पोषण से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से भी आत्मीय संवाद किया और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी ली।

महतारी वंदन से माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि माताओं-बहनों के बैंक खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर इस योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की अनेक प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कोई बहन महतारी वंदन की राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही है, तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही है। अनेक माताएं-बहनें सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसायों में इस राशि का उपयोग कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के हाथ में अपनी राशि होने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध हों।

लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक - बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि माताओं-बहनों की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर अनेक नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं। निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ‘ड्रोन दीदी’ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की माताओं-बहनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का सुंदर उदाहरण बताया।

महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहन, स्वामित्व से बढ़ रहा आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहन मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।

हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत का संकल्प

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार कर रही है।

मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश

तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच प्रदेश की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखेर दिए।

माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से भाग लिया। मेहंदी लगवाने और झूला झूलने के साथ उन्होंने तीजा के मायके वाले उल्लास का आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा वातावरण ऐसा था मानो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में साकार हो उठी हों।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। हमारी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति का पर्व : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना माताओं-बहनों को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।

मंत्री राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से अपने घरों और आसपास मूनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंत्री  गजेंद्र यादव, मंत्री  दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, महापौर मीनल चौबे, वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव सुश्री शहला निगार, विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

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