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महाशिवरात्रि 2026 कब है- 15 या 16 फरवरी? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और राशियों पर प्रभाव

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 Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।


हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन शिवभक्त व्रत रखकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और रात्रि जागरण करेंगे।

इस बार महाशिवरात्रि पर लक्ष्मी नारायण योग, अमृत योग, शुक्रादित्य योग और श्रवण नक्षत्र जैसे शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार

  • चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 15 फरवरी, शाम 3:50 बजे
  • चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 फरवरी, शाम 4:25 बजे

उदयातिथि के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को ही रखा जाएगा, जबकि
व्रत का पारण 16 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

महाशिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त

  • विशेष पूजा का समय: शाम 3:54 बजे से रात 12:12 बजे तक
  • निशीथ काल (अत्यंत शुभ): रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक
  • शास्त्रों के अनुसार निशीथ काल में की गई शिव पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

महाशिवरात्रि 2026: इन राशियों के लिए रहेगा विशेष शुभ

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा। वहीं सूर्य और शुक्र की कुंभ राशि में युति से शुक्रादित्य योग बनेगा, जो कई राशियों को विशेष लाभ देगा।

मेष राशि:
नौकरी और व्यापार में उन्नति, आर्थिक मजबूती और विवाह के योग बन सकते हैं।

कन्या राशि:
संतान संबंधी चिंताओं से राहत, संपत्ति और वाहन सुख के योग, स्वास्थ्य में सुधार के संकेत।

कुंभ राशि:
व्यापार विस्तार, दांपत्य जीवन में सुख, विद्यार्थियों को सफलता और नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिलने की संभावना, साथ ही आय के नए स्रोत बन सकते हैं।

नवोत्थान और विकसित भारत–2047 के विजन का सशक्त दस्तावेज है केन्द्रीय बजट : मनोहर लाल

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 रायपुर : केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने केन्द्रीय बजट को नवोत्थान और समावेशी विकास का वाहक बताते हुए कहा कि यह बजट विकसित भारत–2047 के दीर्घकालिक विजन को साकार करने वाला एक सशक्त दस्तावेज है। वे राजधानी रायपुर में एक दिवसीय प्रवास के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।


मनोहर लाल ने विश्वास जताया कि बजट प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिजली, आवास, शहरी विकास एवं अधोसंरचना क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है।

प्रेस वार्ता में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद संतोष पाण्डेय एवं बृजमोहन अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बात न मानने पर हैवानियत: 70 साल के बुजुर्ग ने मासूम पर किया कुल्हाड़ी से वार

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। उतई थाना क्षेत्र में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने महज घर के अंदर खेलने पर ढाई साल के मासूम बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज निजी अस्पताल में जारी है।


जानिए पूरा मामला

घटना उतई थाना क्षेत्र के जोरातराई गांव की है। जानकारी के अनुसार आरोपी परदेशी देवांगन (70) के पड़ोस में रहने वाला ढाई साल का मासूम शनिवार को उसके घर के अंदर खेल रहा था। बुजुर्ग ने बच्चे को घर के भीतर खेलने से मना किया, लेकिन मासूम के नहीं मानने पर वह गुस्से में आ गया और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।

हमले के बाद बच्चा लहूलुहान होकर गिर पड़ा। परिजनों ने तत्काल उसे गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।

आरोपी गिरफ्तार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी परदेशी देवांगन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि बच्चे के बात न मानने पर उसने गुस्से में आकर हमला किया।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह घटना अत्यंत गंभीर है और नाबालिग पर हमले के मामले में सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

रायपुर प्रेस क्लब की खेल मड़ई में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बढ़ाया पत्रकार खिलाड़ियों का हौसला

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 रायपुर : महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खेल अत्यंत आवश्यक हैं। पत्रकारों की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खेलों के प्रति उनका उत्साह सराहनीय है। उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित खेल मड़ई को प्रेरणादायक पहल बताते हुए सभी आयोजकों और प्रतिभागी टीमों को शुभकामनाएं दीं।


रायपुर प्रेस क्लब द्वारा स्वर्गीय कुलदीप निगम की स्मृति में खेल मड़ई के अंतर्गत नेताजी सुभाष स्टेडियम, रायपुर में इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में पत्रकार जगत की विभिन्न टीमों के बीच उत्साहपूर्ण और रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य पत्रकारों को उनकी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर खेलों से जोड़ना, आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने मैदान में पहुंचकर प्रतियोगिता में भाग ले रहे पत्रकार खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों की खेल भावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आपसी सहयोग, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, सहसचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े, खेल आयोजन समिति के संयोजक विजय मिश्रा सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से 28.19 करोड़ रुपए की सड़क परियोजना को मिली स्वीकृति

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 रायपुर : महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सतत प्रयासों से भटगांव विधानसभा क्षेत्र को सड़क विकास की एक बड़ी सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा बीरपुर 12 मील हनुमान मंदिर (सिलफिली) से कालीघाट महावीरपुर (अंबिकापुर) तक राष्ट्रीय राजमार्ग–43 के डामरी मजबूतीकरण कार्य के लिए 28.19 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।


मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण परियोजना के माध्यम से लंबे समय से जर्जर सड़क की समस्या का समाधान होगा तथा आमजन को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी।

इस सड़क विकास कार्य से भटगांव विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, परिवहन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी। साथ ही अंबिकापुर जैसे प्रमुख शहरी केंद्र से संपर्क और अधिक मजबूत होगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सुशासन सरकार की प्राथमिकता जनसुविधाओं का विस्तार और संतुलित विकास है। भटगांव विधानसभा के विकास के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

नौकरी का झांसा देकर 7 साल तक नाबालिग से गैंगरेप, फरार आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग। दुर्ग जिले में नाबालिग से लंबे समय तक गैंगरेप के सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सात वर्षों से फरार चल रहे पीडब्ल्यूडी के टाइमकीपर राजू कश्यप उर्फ कृपा शंकर को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को दुर्ग लाने के लिए पुलिस की विशेष टीम गोरखपुर रवाना हो चुकी है। गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और तेज हो गई है।


आरोपी की तलाश में बनाई गईं कई टीमें

एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी लगातार पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था और गोरखपुर में अपने रिश्तेदारों के यहां छिपकर रह रहा था। आरोपी के राज्य से बाहर भागने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कीं। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। मोबाइल लोकेशन उत्तर प्रदेश में मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर किया शोषण

आरोपी राजू कश्यप मूल रूप से गोरखपुर का निवासी है और पीडब्ल्यूडी में नौकरी लगने के बाद परिवार सहित दुर्ग में रह रहा था। आरोप है कि उसने नाबालिग पीड़िता को नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब सात वर्षों तक उसके साथ लगातार गैंगरेप किया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर पीड़िता का शोषण जारी रखा।

जमानत याचिकाएं खारिज

इस मामले में आरोपी संजय द्वारा दुर्ग न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी (पॉक्सो) अनीश दुबे की अदालत ने खारिज कर दिया है। वहीं, पहले से गिरफ्तार आरोपी अनिल चौधरी की जमानत याचिका अदालत में विचाराधीन है।

एसएसपी ने बताया कि प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ऐसी शादी में कौन बुलाता है भाई! निमंत्रण कार्ड में QR कोड, दूल्हा बोला- घर बैठे करो शगुन, आना जरूरी नहीं

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 बागपत (उत्तर प्रदेश)। डिजिटल दौर में अब शादी के निमंत्रण भी हाईटेक हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां दूल्हे ने शादी के कार्ड पर QR कोड छपवाकर रिश्तेदारों से अलग अपील की है।


इस शादी के कार्ड में साफ लिखा है कि कार्यक्रम में आना अनिवार्य नहीं है। यदि चाहें तो रिश्तेदार घर बैठे ही QR कोड स्कैन कर ऑनलाइन शगुन भेज सकते हैं। दूल्हे का कहना है कि इसका मकसद लोगों को देर रात सफर की परेशानी और संभावित हादसों से बचाना है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कार्ड

बागपत में यह अनोखा शादी कार्ड इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कार्ड में रिश्तेदारों से अनुरोध किया गया है कि केवल रस्म निभाने के लिए दूर-दराज से सफर कर समय और पैसा खर्च न करें, बल्कि डिजिटल माध्यम से वर-वधु को आशीर्वाद दें।

हादसों से बचाने की सोच

दूल्हे के अनुसार, अक्सर देखने में आता है कि शादी में शामिल होने के दौरान देर रात सफर करते हुए लोग सड़क हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए उसने QR कोड के जरिए शगुन भेजने का विकल्प रखा है, जिससे समय और धन—दोनों की बचत हो सके।

आज बहन की, कल खुद की शादी

यह मामला बागपत के दोघट कस्बे का है। यहां रहने वाले आकाश बाल्मीकि की बहन की शादी 7 फरवरी को है, जबकि खुद आकाश की शादी 8 फरवरी को होने जा रही है। दोनों शादियों का विवरण एक ही कार्ड में QR कोड के साथ छपवाया गया है।

कार्ड में यह भी उल्लेख है कि कन्यादान, मुंहदिखाई या अन्य रस्मों के लिए शगुन देना चाहने वाले रिश्तेदार QR कोड स्कैन कर घर बैठे भुगतान कर सकते हैं।

व्हाट्सऐप से भेजा गया निमंत्रण

आकाश ने बताया कि उसने पारंपरिक तरीके से कार्ड बांटने की बजाय व्हाट्सऐप के जरिए निमंत्रण भेजा है। उसके कई रिश्तेदार दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे शहरों में रहते हैं, जिनके लिए केवल शगुन देने के लिए लंबा सफर तय करना मुश्किल होता है।

इस डिजिटल पहल से रिश्तेदारों को राहत मिली है और यही वजह है कि यह अनोखा शादी कार्ड इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

दामाखेड़ा का बदला नाम : राजपत्र में अधिसूचना जारी, सीएम साय ने की थी नाम परिवर्तन की घोषणा

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 बलौदाबाजार-भाटापारा। छत्तीसगढ़ में गांव का नाम बदला—दमाखेड़ा अब आधिकारिक रूप से ‘कबीर धर्म नगर दमाखेड़ा’ घोषित,छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य राजपत्र में अधिसूचना जारी कर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील स्थित गांव दमाखेड़ा का नाम बदलकर ‘कबीर धर्म नगर दमाखेड़ा’ कर दिया है।


यह निर्णय 04 जून 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया था, जिसे बाद में भारत सरकार के गृह मंत्रालय की सहमति प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा पूर्व में की गई नाम परिवर्तन की घोषणा अब औपचारिक रूप से लागू हो गई है।


सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नाम परिवर्तन हिंदी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में प्रभावी होगा।

देवनागरी में: कबीर धर्म नगर, दमाखेड़ा

रोमन में: KABIR DHARM NAGAR DAMAKHERA

अधिसूचना 5 फरवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी, जिसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, दस्तावेज़ों और प्रशासनिक कार्यों में नया नाम उपयोग किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले से दमाखेड़ा गांव को अब नई पहचान मिल गई है।

मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: दक्षिण बस्तर में 51 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।

प्रेस क्लब में राजेश शर्मा को भावभीनी शब्दांजलि और स्वरांजलि

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 महासमुंद । प्रेस क्लब महासमुंद में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष राजेश शर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। यह आयोजन भावुक करने वाला और ऐतिहासिक रहा। प्रेस क्लब में पहली बार शब्दांजलि के साथ स्वरांजलि भी गूंजी। अंत में दो मिनट का मौन रखकर शोक सभा संपन्न हुई। उल्लेखनीय है कि राजेश शर्मा (82) का 6 फरवरी की सुबह एम्स रायपुर में निधन हो गया। मुक्तिधाम महासमुंद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 7 फरवरी को प्रेस क्लब में शोक सभा आयोजित हुई।


प्रेस क्लब अध्यक्ष रत्नेश सोनी ने शब्दांजलि की शुरुआत की। उन्होंने श्री शर्मा से अपने आत्मीय संबंधों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि कुछ नीतिगत मामलों में मतभेद के बावजूद उनका स्वभाव स्नेहिल था। वे रिश्तों को जीवन भर निभाते रहे। उनका जाना अपूरणीय क्षति है। वे पत्रकारिता के वटवृक्ष थे। उनकी कलम में सरस्वती का वास था। वे विचारों में हमेशा जीवित रहेंगे।



भूतपूर्व अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री ने कहा कि कर्मयोगी कलमकार से बिछुड़ना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने श्री शर्मा की अंतिम पंक्तियां याद कीं—
“कौन कहता है कि जाऊंगा, तो गुजर जाऊंगा।
मैं तो खुशबू हूं, हवाओं में बिखर जाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि उनकी जीवटता और कर्मठता हम सबके लिए प्रेरणा है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग के लिए लिखा।
उनके दिखाए जनसेवा के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय अभियोजक’ को मिलकर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

भूतपूर्व अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने संघर्ष के दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा कि कोरियर सेवा से लेकर किराए के एक कमरे में पत्रकारिता की 21 वर्षों की यात्रा अद्भुत है। यह उनकी कलम साधना और समर्पण का प्रमाण है। कोविड काल में भी अखबार निर्बाध निकला। बीमारी में भी उन्होंने संपादन किया। अस्पताल में भर्ती होने तक वे अखबार निकालते रहे।

पूर्व अध्यक्ष श्रीमती उत्तरा विदानी ने भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राजेश काका ने उन्हें सबसे बड़ी बेटी जैसा स्नेह दिया। उनके जाने से पिता का साया उठने का अहसास हो रहा है। वे पढ़ने के शौकीन थे। उनकी एक पुस्तक उन्होंने धरोहर के रूप में सहेज कर रखी है। प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष व संरक्षक सदस्य श्रीरामकुमार तिवारी ‘सुमन’ ने कहा कि 26 वर्षों का साथ अविस्मरणीय है।
उन्होंने एक सच्चा मित्र खो दिया है। उनकी पत्रकारिता और प्रेस क्लब को लेकर चिंताएं हमेशा याद आएंगी। मन कहता है कि वे आज भी हमारे आसपास हैं।

वरिष्ठ पत्रकार के. पी. साहू ने कहा कि उनका मार्गदर्शन अमूल्य था। हर खबर पर उनकी पैनी नजर काबिले तारीफ थी।
किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि वे इस बार मौत से जंग हार गए।

विक्रम साहू, राकेश झाबक, विजय चौहान, अनिल चौधरी, संजय यादव, प्रज्ञा चौहान सहित अनेक पत्रकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
युवा पत्रकार व कलाकार अमित हिषीकर ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया—
“चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गा कर स्वरांजलि दी। इससे पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा।
इस तरह शब्दांजलि, स्वरांजलि और दो मिनट के मौन के साथ शोक सभा संपन्न हुई।

डंके की चोट पर बोले पीयूष गोयल - किसानों, MSME और देसी उद्योगों के हित पूरी तरह सुरक्षित

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 नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील की रूपरेखा को लेकर जारी संयुक्त बयान के बाद देश में उठ रही आशंकाओं पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी तरह भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया गया है और इसमें किसानों, MSME, हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम सेक्टर के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है।


पीयूष गोयल ने कहा,

“डंके की चोट पर मैं कह सकता हूं कि इस ट्रेड डील में भारत के किसानों, डेयरी सेक्टर, MSME और देसी उद्योगों के हितों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। GM फूड, मीट और डेयरी उत्पादों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी गई है।”

भारत को अमेरिका में बेहतर मार्केट एक्सेस

ट्रेड डील की रूपरेखा के बाद देश में जताई जा रही चिंताओं के बीच गोयल ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिका में कम टैरिफ पर बेहतर मार्केट एक्सेस मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत का बाजार केवल कुछ सीमित उत्पादों के लिए ही खोला गया है।

कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित

केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“जिस तरह से हमारे किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की रक्षा की गई है, वह सराहनीय है। भारत-अमेरिका के बीच देर रात फाइनल हुआ साझा बयान देश के हर कोने में सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।”

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक हैंडीक्राफ्ट कारीगर ने टैरिफ घटने से मिलने वाले फायदों को लेकर उम्मीद जताई है। कारीगर के अनुसार, 18 प्रतिशत टैरिफ होने से नए ऑर्डर मिलेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

18% टैरिफ, कई उत्पादों पर 0 ड्यूटी

गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह दर भारत के पड़ोसी देशों और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कई अहम सेक्टर ऐसे हैं, जहां अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर 0 प्रतिशत ड्यूटी जारी रहेगी, जिनमें शामिल हैं—

  • रत्न और हीरे
  • फार्मास्युटिकल उत्पाद
  • स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स

कृषि उत्पादों को भी बड़ी राहत

कृषि क्षेत्र में भी कई भारतीय उत्पाद अमेरिका में 0 रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ निर्यात किए जाएंगे। इनमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल व नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स, सुपारी, काजू, चेस्टनट, ब्राजील नट के साथ कई फल और सब्जियां शामिल हैं।

2047 के विकसित भारत की दिशा में अहम कदम

पीयूष गोयल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेड डील बेहद अहम है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सालाना 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के उद्देश्य से फरवरी 2024 में बातचीत शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा,
“टेक्सटाइल और ऐपेरल सेक्टर में भारत को बड़ा फायदा होगा। यह समझौता संतुलित है और दोनों देशों के नेताओं की दूरदृष्टि को दर्शाता है।”

ट्रेड डील की प्रमुख बातें

  • अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करेगा
  • भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा
  • अगले 5 वर्षों में भारत 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा, विमान, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है
  • रूसी तेल खरीद पर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क हटाया गया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

राष्ट्रपति के समक्ष बास्तानार के युवाओं ने ‘गौर नृत्य’ से बिखेरे अद्भुत लोक-रंग

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 रायपुर : शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।


बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।


नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।

नक्सलियों की रीढ़ टूटी! गरियाबंद के पहाड़ों से हथियारों का जखीरा बरामद

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। थाना मैनपुर क्षेत्र के अंतर्गत ओडिशा सीमा से सटे ग्राम भालूडिग्गी और मेटाल की दुर्गम पहाड़ियों में छिपाकर रखे गए नक्सलियों के भारी हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा संयुक्त पुलिस बल ने बरामद किया है।


यह कार्रवाई जिला पुलिस बल गरियाबंद की ई-30 ऑप्स टीम द्वारा की गई, जिसमें डीजीएन डिवीजन के माओवादियों द्वारा अलग-अलग 06 स्थानों पर डम्प किए गए हथियार बरामद किए गए।

 बरामद सामग्री में शामिल

  • 02 नग INSAS रायफल
  • 01 नग .303 रायफल
  • 02 नग 12 बोर बंदूक
  • 01 देशी कट्टा
  • भारी मात्रा में BGL सेल

हथियार निर्माण में उपयोग होने वाले औजार और उपकरण

गुप्त हथियार वर्कशॉप से संबंधित सामग्री

 मारे गए शीर्ष नक्सलियों से जुड़ा था नेटवर्क

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि यह पूरा हथियार निर्माण और भंडारण नेटवर्क ओडिशा स्टेट कमेटी के अंतर्गत संचालित हो रहा था।
इस वर्कशॉप की निगरानी मारे जा चुके तीन सेंट्रल कमेटी सदस्यों—चलपति, मनोज और गणेश उईके द्वारा की जाती थी। ये सभी नक्सली संगठन के तकनीकी दस्ते को निर्देश देते थे।

 नक्सल हिंसा की साजिश नाकाम

संयुक्त पुलिस बल की इस कार्रवाई से गरियाबंद क्षेत्र में बड़ी नक्सल हिंसा की साजिश पूरी तरह विफल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन हथियारों का उपयोग आगामी दिनों में बड़ी वारदातों के लिए किया जाना था।

 आंकड़ों में पुलिस की बड़ी सफलता

जनवरी 2025 से अब तक

  • 28 ग्रेडेड ऑटोमैटिक हथियार
  • 29 अन्य हथियार
  • कुल 57 हथियार
  • लगभग 300 कारतूस
  • भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री

बरामद की जा चुकी है।

 नक्सल प्रभाव क्षेत्र सिमटता जा रहा

लगातार हो रही सटीक और खुफिया-आधारित कार्रवाइयों से साफ है कि गरियाबंद और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ चुका है। सुरक्षा बलों की इस सफलता को नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

रेरा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में छत्तीसगढ़ रेरा का महत्वपूर्ण कदम, 14 बैंकों को फाइनल एम्पैनलमेंट किया गया

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन तथा रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 बैंकों को अंतिम पैनल (फाइनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया है।


रेरा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा 03 अप्रैल 2025 को 17 बैंकों को अस्थायी पैनल (प्रोविजनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया गया था। निर्धारित प्रक्रियाओं, आवश्यक शर्तों एवं मापदंडों की पूर्ति के उपरांत अब इनमें से 14 बैंकों को अंतिम पैनल में सम्मिलित किया गया है।

अंतिम पैनल में शामिल बैंकों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा यूको बैंक शामिल हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेरा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित पृथक रेरा खाते केवल उन्हीं बैंकों में संचालित किए जाएं, जो रेरा नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हों। इससे परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन स्थापित होगा, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा घर खरीदारों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने कहा कि रेरा के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बैंकों के अंतिम पैनल में शामिल होने से परियोजना खातों की निगरानी एवं नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे घर खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनेगा।

छत्तीसगढ़ रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी।

राहुल गांधी पर नवजोत कौर सिद्धू का विस्फोट- ‘पप्पू’ का ठप्पा उन्होंने खुद लगवाया!

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 नई दिल्ली/चंडीगढ़। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपनी ही पार्टी के भीतर तीखे हमले के घेरे में आ गए हैं। पंजाब की पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए राहुल गांधी पर तीखा और व्यक्तिगत हमला बोला है। सिद्धू ने साफ शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को मिला ‘पप्पू’ का ठप्पा किसी विरोधी ने नहीं, बल्कि उन्होंने खुद अपनी कार्यशैली से लगवाया है।


नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनने को तैयार नहीं हैं और पार्टी के भीतर वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने का उनके पास न समय है, न इच्छाशक्ति। उन्होंने लिखा कि एक ऐसा नेता, जो खुद को सबसे ईमानदार और सर्वज्ञ समझता है, वह जमीनी सच्चाइयों से पूरी तरह अनजान है।

सिद्धू ने अपने पोस्ट में कहा,

“आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने में उन्हें छह महीने लग जाते हैं—तब तक नुकसान हो चुका होता है। टिकट पहले ही बिक जाते हैं और फैसले बहुत देर से आते हैं।”

उन्होंने राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके आसपास ऐसे लोग हैं जो सत्ता और सुविधाओं का आनंद लेते हुए पार्टी को भीतर से खोखला कर रहे हैं। सिद्धू ने दावा किया कि राहुल गांधी के कई तथाकथित समर्थक अब भाजपा कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

‘अपने बनाए स्वर्ग में रहते हैं राहुल’

नवजोत कौर सिद्धू ने बेहद तीखे शब्दों में लिखा कि राहुल गांधी अपने बनाए एक काल्पनिक “स्वर्ग” में रहना पसंद करते हैं, जहां जमीनी संघर्ष और आम कार्यकर्ता की पीड़ा की कोई जगह नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे नेता को पंजाब जैसे राज्य की जमीनी राजनीति की समझ हो सकती है?

भाजपा का जिक्र, कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल

अपने बयान में सिद्धू ने यह भी कहा कि भाजपा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 2012 में सर्वे के आधार पर उन्हें विधायक का टिकट दिया। डॉक्टर होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी और स्वतंत्रता मिली, जबकि कांग्रेस में ईमानदारी और मेहनत करने वालों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने कहा,

“ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की बात करने का कोई मतलब नहीं, जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मानित किया जाता हो।”

‘मेरा समय सिर्फ पंजाब के लिए’

नवजोत कौर सिद्धू ने साफ कर दिया कि उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की जनता के लिए है। उन्होंने कहा कि वे राजनीति से बाहर रहकर भी सामाजिक कार्य और जनसेवा कर सकती हैं, लेकिन ऐसे नेतृत्व के साथ नहीं चल सकतीं जो सच सुनने का साहस न रखता हो।

कांग्रेस में बढ़ता अंतर्विरोध

नवजोत कौर सिद्धू का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस पहले से ही नेतृत्व संकट और आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। उनके इस हमले ने पार्टी के भीतर की खाई को और गहरा कर दिया है और एक बार फिर राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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