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CG NEWS : घर का भरोसेमंद ही निकला लुटेरा, 24 घंटे में पूर्व केयरटेकर गिरफ्तार

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 दुर्ग। दुर्ग जिले के नेवई थाना क्षेत्र में बुजुर्ग दंपती से हुई लूट की सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घर में घुसकर चाकू की नोक पर लूट करने वाला कोई बाहरी बदमाश नहीं, बल्कि दंपती का पूर्व केयरटेकर निकला। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त बाइक, धारदार हथियार और घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं।


पुलिस के अनुसार, नेवई थाना क्षेत्र के प्रगति नगर स्थित शुभकामना हाइट्स में रहने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी पत्नी घर पर अकेले थे। इसी दौरान पूर्व केयरटेकर विभान्शु महोबिया मुंह पर कपड़ा बांधकर घर में घुसा और धारदार हथियार दिखाकर दोनों को धमकाया। आरोपी ने सोने-चांदी के जेवर और नकदी की मांग की तथा महिला के गले से सोने का नेकलेस लूटकर फरार हो गया।

नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। सूचना मिलते ही नेवई थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजय अग्रवाल के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे करीब तीन महीने पहले केयरटेकर की नौकरी से हटा दिया गया था। इसी रंजिश में उसने बदला लेने की नीयत से लूट की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक, धारदार हथियार तथा घटना के दौरान पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अब आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि वह पहले किसी अन्य आपराधिक घटना में शामिल रहा है या नहीं।

पति को पहले छत से फेंका, बच गया तो कैनुला से टॉयलेट क्लीनर पहुंचाकर हत्या का आरोप

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 निजामाबाद (तेलंगाना)। तेलंगाना के निजामाबाद जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला ने अपने कथित प्रेमी और उसके सहयोगी के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि पहले पति को इमारत की छत से धक्का दिया गया और जब वह गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गया, तो बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसके शरीर में कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस के मुताबिक, मृतक प्रशांत (35) की मां ने 1 जुलाई को शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उन्हें 30 जून को अपने बेटे की मौत की सूचना मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटे की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और उन्हें उसके घर लौटने तथा मौत से जुड़ी घटनाओं की जानकारी नहीं दी गई थी। शिकायत में उन्होंने अपनी बहू संध्या पर संदेह जताया।

जांच के दौरान पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर पता चला कि संध्या (32) का अनिल (35) नामक व्यक्ति के साथ कथित प्रेम संबंध था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने प्रशांत को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और इसके लिए वेंकट साई नामक व्यक्ति की मदद ली।

पुलिस के अनुसार, 29 जून को वेंकट साई ने प्रशांत को शराब पिलाई और उसे इमारत की छत पर ले जाकर कथित रूप से नीचे धक्का दे दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद प्रशांत की मौत नहीं हुई। इसके बाद उसे इलाज के लिए पहले सरकारी और फिर निजी अस्पताल ले जाया गया।

जांच में पुलिस ने दावा किया है कि बाद में संध्या ने कथित रूप से प्रशांत के हाथ में लगे मेडिकल कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा पहुंचाई। इसके बाद उसे चारपाई से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

सड़क पर केज व्हील वाले ट्रैक्टर दौड़े तो कटेगा चालान

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रायपुर- खेतों में जुताई और मिट्टी पलटने के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के केज व्हील (पिंजरा पहिया) लगे ट्रैक्टर अब सार्वजनिक सड़कों और सीमेंट रोड पर नहीं चल सकेंगे। ऐसे ट्रैक्टर सड़क पर चलते पाए जाने पर परिवहन विभाग मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई करेगा। जिला परिवहन विभाग ने किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को इस संबंध में चेतावनी जारी करते हुए नियमों का पालन करने की अपील की है।

परिवहन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर सभी जिला परिवहन अधिकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर केज व्हील लगे ट्रैक्टरों का संचालन रोकने और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, यह फैसला उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर एक जनहित याचिका के बाद लिया गया है। याचिका में कहा गया था कि कृषि कार्यों के लिए बनाए गए केज व्हील का उपयोग केवल खेतों तक सीमित होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इन्हें सड़कों और राजमार्गों पर भी चलाया जा रहा है। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। परिवहन विभाग का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों पर ऐसे ट्रैक्टरों का संचालन मोटरयान अधिनियम और प्रचलित नियमों के अनुरूप नहीं है।

परिवहन विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि जुताई या मिट्टी पलटने का कार्य पूरा होने के बाद ट्रैक्टर से केज व्हील हटाकर सामान्य रबर के टायर लगाएं और उसके बाद ही सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाएं। इससे सड़कें सुरक्षित रहेंगी और हादसों की आशंका भी कम होगी। परिवहन विभाग ने कहा है कि अपील के बावजूद यदि कोई ट्रैक्टर चालक केज व्हील लगे ट्रैक्टर के साथ सार्वजनिक सड़क पर चलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार चालान सहित विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

PM-SETU योजना को मिली बड़ी मंजूरी: देशभर के 200 आईटीआई क्लस्टरों में होगा विस्तार, ₹1,237.58 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आज प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) की चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (National Steering Committee) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महानिदेशक (DGT) दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समिति ने PM-SETU योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर देशभर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी। अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता और तैयारियों के आधार पर इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकेंगे।

समिति ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए। इनमें उद्योगों की अधिक भागीदारी, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की भूमिका बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹1,237.58 करोड़ की स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को मंजूरी देना रही। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में उद्योगों की साझेदारी से आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

राज्यवार प्रमुख निवेश

ओडिशा

  • गवर्नमेंट आईटीआई बरबिल को हब बनाया गया है।

  • जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.21 करोड़

गुजरात

  • गवर्नमेंट आईटीआई सूरत को हब बनाया गया है।

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया एंकर इंडस्ट्री पार्टनर होगी।

  • प्रस्तावित निवेश: ₹240.18 करोड़

तेलंगाना
तीन आईटीआई क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है—

  • गवर्नमेंट आईटीआई ओल्ड सिटी – एंकर पार्टनर: अपोलो मेड-स्किल्स लिमिटेड (₹241.01 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई पटानचेरू – एंकर पार्टनर: श्री सिद्धार्थ इंफ्राटेक एंड सर्विसेज (SSISPL) (₹275.24 करोड़)

  • गवर्नमेंट आईटीआई संगारेड्डी – एंकर पार्टनर: न्यूलैंड फाउंडेशन (₹240.94 करोड़)

PM-SETU योजना क्या है?

PM-SETU केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत उद्योगों के सहयोग से आईटीआई में आधुनिक मशीनें, बेहतर आधारभूत संरचना, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल मिल सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।

अबूझमाड़ में कॉफी की खुशबू से बदलेगी तस्वीर: सतत खेती से आदिवासी समुदायों को मिलेगा नया रोजगार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और वनाच्छादित क्षेत्रों में शामिल अबूझमाड़ अब विकास की नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। वर्षों तक भौगोलिक दुर्गमता और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब कॉफी की खेती के माध्यम से स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार करने की पहल शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका बढ़ाने की नीति के तहत नारायणपुर जिला प्रशासन ने अबूझमाड़ के चयनित वन ग्रामों में कॉफी की खेती शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसी क्रम में नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों के साथ कुटुल, कच्छपाल, कोडलीयार, इराकभट्टी और टोके जैसे गांवों का दौरा कर वहां की जलवायु, मिट्टी, वर्षा, तापमान और ऊंचाई का वैज्ञानिक अध्ययन कराया।

विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, अबूझमाड़ की प्राकृतिक परिस्थितियां कॉफी आधारित कृषि-वनीकरण (Agroforestry) के लिए अनुकूल हैं। परियोजना के पहले चरण में उपयुक्त भूमि की पहचान, पौधशालाओं (नर्सरी) की स्थापना और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कॉफी के पौधे लगाए जाएंगे।

कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया पूरे प्रोजेक्ट के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन देगा, जिसमें नर्सरी विकास, पौधरोपण, फसल प्रबंधन और किसानों का प्रशिक्षण शामिल होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त वर्षा, उपजाऊ वन भूमि और प्राकृतिक छायादार वातावरण जैविक (ऑर्गेनिक) कॉफी उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), जगदलपुर द्वारा प्रकाशित तकनीकी अध्ययन में भी बस्तर को कॉफी उत्पादन के लिए संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र बताया गया है।

कॉफी आधारित कृषि से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। छायादार पेड़ मिट्टी का कटाव रोकने, जैव विविधता बनाए रखने, पोषक तत्वों के संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने में सहायक होंगे।

जिला प्रशासन का मानना है कि लगभग चार वर्षों के बाद कॉफी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो सकता है। इसके बाद स्थानीय लोगों को कॉफी उत्पादन, नर्सरी, पौधरोपण, रखरखाव, तुड़ाई और प्रसंस्करण जैसे कार्यों में स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य अबूझमाड़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से कॉफी की खेती इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ आजीविका का मजबूत आधार बन सकती है।

इसके अलावा भविष्य में अबूझमाड़ के उपयुक्त क्षेत्रों में चाय की खेती की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

यदि यह परियोजना सफल होती है, तो अबूझमाड़ में कॉफी की खेती केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं बनेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों के सतत विकास का एक नया मॉडल भी स्थापित करेगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण और फ्लैग-ऑफ किया, फुटबॉल प्रतिभाओं को बताया देश की ताकत

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तथा खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट वर्षों से देश के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता रहा है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी के लिए कई नई टीमें प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई टीमों की भागीदारी से इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की लोकप्रियता और बढ़ेगी। उन्होंने सभी भाग लेने वाली टीमों और खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है और यह उत्कृष्टता, एकता तथा खेल भावना का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में फुटबॉल खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से करोड़ों खेल प्रेमी प्रेरित होते हैं और यह खेल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वैश्विक फुटबॉल मंच पर भारत को अभी लंबा सफर तय करना है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट देश में नई फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि खेल भावना केवल मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समानता, सहयोग, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की सीख देती है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक "विकसित भारत" के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और जिस प्रकार फुटबॉल खिलाड़ी एकजुट होकर अपनी टीम को जीत दिलाते हैं, उसी तरह देशवासी भी एकजुट होकर विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।

मुख्य सचिव ने सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक

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विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए है।

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।

स्वेच्छानुदान मद से सुदूर वनांचल स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल, मांझीगुडा को 10 कंप्यूटर प्रदत्त

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने स्वेच्छानुदान मद से बस्तर जिले के विकासखंड दरभा के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा चिंगपाल को 10 कंप्यूटर प्रदान किए। इसके लिए राज्यपाल द्वारा पूर्व में स्वीकृति प्रदान की गई थी।

लोक भवन  में आज राज्यपाल ने विद्यालय के लिए कंप्यूटरों का औपचारिक रूप से हस्तांतरण किया। इन कंप्यूटरों के माध्यम से सुदूर वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके ज्ञान और कौशल का विकास होगा। 

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा (जिला बस्तर) के प्राचार्य उपस्थित थे।


महासमुंद: जर्जर सड़क और पुल से संकट में बच्चों की पढ़ाई, 15 दिन में काम शुरू नहीं हुआ तो कलेक्टर और मुख्यमंत्री से मिलेंगे छात्र-छात्राएं

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महासमुंद- महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत खट्टा के अंतर्गत स्थित जर्जर सड़क और पुल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। लगातार बारिश के बीच ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूली बच्चों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क और पुल की मरम्मत या नए ऊंचे पुल का निर्माण नहीं कराया गया, तो क्षेत्र के कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल वर्षों पुराना है और हर मानसून में क्षतिग्रस्त हो जाता है। उनका कहना है कि तेज बारिश के दौरान पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। यह मार्ग पटेवा से महासमुंद जाने का प्रमुख संपर्क मार्ग होने के साथ-साथ कोकड़ी शासकीय विद्यालय, खट्टा प्राथमिक, मिडिल एवं हाई स्कूल तथा रामखेड़ा प्राथमिक और मिडिल स्कूल तक पहुंचने का भी मुख्य रास्ता है।

कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया का कहना है कि यह समस्या नई नहीं, बल्कि कई दशकों से बनी हुई है। उनके अनुसार हर वर्ष बारिश में पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण शिक्षक, विद्यार्थी और ग्रामीण जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हो जाते हैं। उनका मानना है कि इस स्थान पर स्थायी समाधान के लिए एक नया और ऊंचा पुल बनाया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पूर्व में इस पुल पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले सड़क और पुल का स्थायी समाधान किया जाए।

विद्यालय की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सामूहिक रूप से कलेक्टर महासमुंद और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्या रखेंगे।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस कारण क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मांग है कि जल्द से जल्द नया, मजबूत और ऊंचा पुल तथा सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के दौरान भी बच्चों की पढ़ाई, शिक्षकों का आवागमन और आम लोगों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके।

पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

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 नई दिल्ली/जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, सरकार और वहां की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंधों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। दोनों देश विकास, सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और आपसी विश्वास का प्रतीक है तथा इससे भारत-इंडोनेशिया संबंधों का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू होगा। पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

चलती बस में गूंजी नवजात की किलकारी: प्रसव पीड़ा उठने पर महिला यात्रियों ने कराया सुरक्षित प्रसव, पढ़े पूरी खबर

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 बलरामपुर। जिले में इंसानियत और सूझबूझ की मिसाल पेश करने वाली एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। कोरबा से पटना जा रही एक यात्री बस सफर के दौरान उस समय अस्थायी डिलीवरी रूम में बदल गई, जब एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। बस में मौजूद महिला यात्रियों ने साहस और समझदारी का परिचय देते हुए सुरक्षित प्रसव कराया। इसके बाद मां और नवजात को बलरामपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों स्वस्थ हैं।


जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात तेज बारिश के बीच राजहसन बस कोरबा से पटना के लिए रवाना हुई थी। बस में कोरबा निवासी एक गर्भवती महिला अपने पति के साथ यात्रा कर रही थी। रात करीब 11 बजे अंबिकापुर पार करने के बाद महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बस चालक ने तत्काल वाहन सड़क किनारे रोक दिया।

बस में मौजूद महिला यात्री सुनती देवी और अन्य महिलाओं ने बिना समय गंवाए प्रसूता की मदद की। सीमित संसाधनों के बावजूद सभी ने मिलकर सुरक्षित प्रसव कराया और महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। इस दौरान बस में सवार अन्य यात्रियों ने भी सहयोग किया और पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बनाए रखा।

प्रसव के बाद बस बलरामपुर पहुंची, जहां करीब आधे घंटे बाद प्रसूता और नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों का उपचार किया गया। डॉक्टरों के अनुसार मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

बताया जा रहा है कि यह महिला का पहला प्रसव है। घटना के समय बस में लगभग 30 से 35 यात्री सवार थे। नवजात के सुरक्षित जन्म के बाद बस में खुशी का माहौल बन गया। कई यात्रियों ने परिवार को शुभकामनाएं देते हुए स्वेच्छा से आर्थिक सहायता भी प्रदान की।

छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: आकाशीय बिजली और डूबने से 3 लोगों की मौत, कई जिलों में हाई अलर्ट

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में मानसून अब आफत बनकर बरस रहा है। पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के कारण नदियाँ और नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है।

इस बीच प्रदेश से दर्दनाक घटनाएँ भी सामने आई हैं। अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और डूबने की घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। इन हादसों के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है।

मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास न जाएँ तथा आकाशीय बिजली के समय खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य अपडेट

  • तीन लोगों की मौत आकाशीय बिजली और डूबने की अलग-अलग घटनाओं में।

  • कई जिलों में भारी बारिश, नदियाँ और नाले उफान पर।

  • जलभराव से जनजीवन प्रभावित, कई मार्गों पर आवागमन बाधित।

  • मौसम विभाग का भारी बारिश का अलर्ट जारी।

  • प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।


इंडोनेशिया और सिंगापुर ने मजबूत की साझेदारी, मलक्का जलडमरूमध्य को खुला रखने पर बनी सहमति

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जकार्ता- दक्षिण-पूर्व एशिया के दो प्रमुख देशों इंडोनेशिया और सिंगापुर ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री व्यापार को लेकर अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। दोनों देशों के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक में मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सभी देशों के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर सहमति बनी।

मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। नेताओं ने कहा कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को बनाए रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच इंडोनेशिया और सिंगापुर की यह साझेदारी पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है।

मुख्य बातें

  • इंडोनेशिया और सिंगापुर ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

  •  मलक्का जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सुरक्षित और खुला रखने का संकल्प।

  •  समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सहयोग बढ़ाने पर जोर।

  •  क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए मिलकर काम करने का भरोसा।

भारत की स्वच्छ परिवहन नीति में हो सकते हैं बड़े बदलाव, E25 योजना की समीक्षा शुरू

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नई दिल्ली- देश में प्रदूषण कम करने और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार अपनी स्वच्छ परिवहन (Clean Transport) नीति की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिश्रण (E25) लागू करने की योजना पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य एथेनॉल के अधिक उपयोग से विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है। हालांकि विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल उद्योग का मानना है कि सभी वाहन E25 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। इससे कुछ पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और रखरखाव पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से सरकार तकनीकी पहलुओं, वाहन निर्माताओं की तैयारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कर रही है। समीक्षा के बाद ही E25 को लागू करने की दिशा में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने पर भी लगातार काम कर रही है। देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, बैटरी तकनीक को बेहतर बनाने और EV अपनाने को आसान बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को स्वच्छ परिवहन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एथेनॉल आधारित ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलित रणनीति अपनानी होगी।

मुख्य बातें

  •  E25 (25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) योजना की समीक्षा जारी।

  •  पुराने वाहनों की तकनीकी अनुकूलता पर सरकार का विशेष ध्यान।

  •  इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ावा।

  •  लक्ष्य—प्रदूषण कम करना, विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना।

मानसून सत्र से पहले भाजपा विधायक दल की अहम बैठक आज, सीएम साय के निवास पर बनेगी रणनीति

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा में सरकार की रणनीति तय करने और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम 7 बजे नवा रायपुर स्थित अपने सरकारी निवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई है। विधायक दल के सचिव ने सभी भाजपा विधायकों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।


बैठक में 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर सरकार की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जा सकने वाले संभावित मुद्दों, उनके जवाब और सदन में सरकार के पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में राजभवन पहुंचकर राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की थी। इस दौरान विधानसभा के आगामी मानसून सत्र सहित विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई थी।

13 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित होंगी। सत्र के दौरान वित्तीय कार्यों के साथ-साथ विभिन्न विधायी और शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। साथ ही जनहित से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को सदन में मजबूती से रखने की रणनीति बना रही है, वहीं विपक्ष भी जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है।

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