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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के X अकाउंट पर बड़ा एक्शन, भारत में हुआ बंद

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 नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के एक बयान के विरोध में शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट भारत में बंद कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस ऑनलाइन अभियान की काफी चर्चा हो रही थी।


पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पहले अकाउंट को हैक करने की कोशिश की गई, लेकिन असफल रहने के बाद इसे बंद कर दिया गया। एक्स पर अकाउंट खोलने पर अब “लीगल डिमांड के चलते यह अकाउंट विदहेल्ड किया गया है” संदेश दिखाई दे रहा है।

बताया जा रहा है कि CJP के एक्स पर 1.6 लाख से अधिक फॉलोवर्स थे, जबकि इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या 13 मिलियन के पार पहुंच गई है।

कैसे शुरू हुआ अभियान?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से यह ऑनलाइन कैंपेन 16 मई को शुरू हुआ था। दरअसल, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं के रवैये को लेकर “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल किया था।

इसी बयान के विरोध में अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, “क्या हो अगर सारे कॉकरोच इकट्ठा हो जाएं?” इसके बाद देखते ही देखते ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से ऑनलाइन कैंपेन वायरल हो गया और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ने लगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब छह लाख लोगों ने इस अभियान के लिए खुद को रजिस्टर किया है। सोशल मीडिया पर इसके फॉलोअर्स की सूची में कई नेता और सेलिब्रिटीज के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।

कौन हैं अभिजीत दीपके?

30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

वे पेशे से एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट हैं और राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल रणनीति तैयार करने का काम करते हैं।

CJP की प्रमुख मांगें

कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट भी लाइव है और पार्टी ने अपना मेनिफेस्टो जारी किया है। इसमें कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें-

  • चीफ जस्टिस को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा न भेजा जाए
  • सदन की सीटें बढ़ाए बिना महिलाओं को 50% आरक्षण मिले
  • दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर 20 साल का प्रतिबंध लगाया जाए

जैसी मांगें शामिल हैं।

 
 

15 लाख गबन का आरोप! महिला सरपंच और पति के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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 कवर्धा। जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नेउरगांव में महिला सरपंच से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मारपीट, धमकी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर ग्रामीणों का एक पक्ष बड़ी संख्या में एसपी कार्यालय पहुंचा और शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।


ग्रामीणों ने वर्तमान महिला सरपंच और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व सरपंच द्वारा कराए गए विकास कार्यों की राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। साथ ही करीब 15 लाख रुपये के कथित गबन को लेकर गांव में विवाद की स्थिति बनी हुई है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, विवाद के दौरान मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं भी हुई हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच और उनके पति द्वारा लोगों को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी जाती रही है। इस संबंध में पहले भी शिकायत किए जाने का दावा किया गया है।

वहीं दूसरे पक्ष पर भी गांव के लोगों के साथ मारपीट करने के आरोप लगे हैं। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद के चलते गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने एसपी कार्यालय में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू करने की बात कही है।

पत्नी की मौत के बाद पति ने किया डांस! सरगुजा में सनसनीखेज मामला

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 सरगुजा। जिले के उदयपुर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मृतका के मायके पक्ष ने उसके पति पर करंट लगाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया है।


जानकारी के अनुसार मामला लैंगा गांव का है, जहां 25 वर्षीय महिला का शव घर में संदिग्ध हालत में मिला। परिजनों का कहना है कि महिला के हाथों में जलने के निशान मिले हैं, जिससे करंट देकर हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

मृतका के भाई और अन्य परिजनों ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही महिला को प्रताड़ित किया जाता था। वर्ष 2020 में शादी होने के बाद संतान नहीं होने पर पति उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करता था।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पति का किसी दूसरी महिला से संबंध था। सोशल मीडिया पर दूसरी युवती की तस्वीरें साझा करने को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था।

बताया जा रहा है कि मामले को लेकर समाज स्तर पर दो बार पंचायत भी हुई थी, जहां पति को पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करने की समझाइश दी गई थी। इसके बावजूद उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

परिवार वालों का दावा है कि आरोपी पति ने पहले भी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी थी। वहीं घटना के बाद पति के डांस करने की बात भी सामने आई है, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

रिश्तों को किया शर्मसार: भतीजे ने चाची से किया दुष्कर्म, CCTV से खुला राज

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 उत्तर प्रदेश के इटावा से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पति की गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर एक युवक ने अपनी ही चाची के साथ घर में घुसकर जबरन दुष्कर्म किया। आरोपी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसकी करतूत घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो रही है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।


जानकारी के मुताबिक घटना इटावा के बलरई थाना क्षेत्र की है। पीड़िता का पति रोजगार के सिलसिले में गुजरात में रहता है, जबकि महिला अपने बच्चों के साथ घर पर अकेली रहती है। आरोप है कि मंगलवार रात रिश्ते में भतीजा लगने वाला मिथुन उर्फ लोली घर में घुस आया और महिला के साथ जबरदस्ती करने लगा।

महिला ने विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसका मुंह दबाकर दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने महिला को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की तो उसे जान से मार देगा।

बताया जा रहा है कि घर के आंगन में लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी की गतिविधियां रिकॉर्ड हो गईं। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

वहीं, पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर बलरई थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने महिला की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बोतल में पेट्रोल नहीं मिला तो ट्रैक्टर-टॉली में बाइक लादकर पेट्रोल पंप पहुंचा युवक

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 गरियाबंद। जिले में पेट्रोल पंपों पर बोतल, जरेकिन और प्लास्टिक डब्बों में पेट्रोल देने पर लगी रोक के बीच एक अनोखा मामला सामने आया है। बाइक में पेट्रोल खत्म होने के बाद एक युवक ऐसा देसी जुगाड़ लेकर पेट्रोल पंप पहुंचा कि वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। युवक अपनी मोटरसाइकिल को ट्रैक्टर-टॉली में लादकर सीधे पेट्रोल भरवाने पहुंच गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


जानकारी के मुताबिक मामला गरियाबंद जिले के शांति फ्यूल्स पेट्रोल पंप का है। बताया जा रहा है कि युवक की बाइक रास्ते में पेट्रोल खत्म होने के कारण बंद हो गई थी। उसने आसपास काफी कोशिश की, लेकिन जिले में लागू प्रतिबंध के चलते उसे कहीं भी बोतल या जरेकिन में पेट्रोल नहीं मिल सका। इसके बाद युवक ने अनोखा तरीका अपनाया और अपनी बाइक को ट्रैक्टर-टॉली में लादकर सीधे पेट्रोल पंप पहुंच गया।

पेट्रोल पंप परिसर में जब ट्रैक्टर-टॉली पहुंची तो वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए हैरान रह गए। ट्रॉली में सामान की जगह एक मोटरसाइकिल रखी हुई थी। बाद में युवक ने बाइक में पेट्रोल भरवाया और वहां से रवाना हो गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

इधर, जिले के देवभोग ब्लॉक में डीजल को लेकर अब भी परेशानी बनी हुई है। पेट्रोल पंपों के बाहर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। प्रशासन द्वारा डिब्बों और जरेकिन में तेल देने पर रोक लगाने के साथ ही डीजल की मात्रा भी सीमित कर दी गई है। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर वाहनों को अधिकतम 2 हजार रुपए तक का डीजल दिया जा रहा है, जिससे किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को खेती-किसानी के कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका के बीच कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासन से किसानों और कृषि कार्य में लगे वाहनों के लिए अलग गाइडलाइन जारी करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर किसानों के साथ बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का कहर, कई जिलों में तापमान 43 डिग्री पार; बिलासपुर सबसे गर्म

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। Bilaspur प्रदेश का सबसे गर्म जिला रिकॉर्ड किया गया, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।


मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, अगले 5 दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क और गर्म बने रहने की संभावना है। मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीट वेव को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।

बिलासपुर में 45 डिग्री पहुंचा पारा

मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 मई को बिलासपुर में सबसे अधिक 45°C तापमान दर्ज किया गया। वहीं Mungeli में 43.9°C, Sakti में 43.8°C, Balod और Kabirdham में 43.5°C तापमान रिकॉर्ड किया गया।

राजधानी Raipur में अधिकतम तापमान 43.5°C दर्ज हुआ, जो सामान्य से 1.4 डिग्री अधिक रहा। वहीं प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान Ambikapur में 24 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

अगले 5 दिनों तक राहत नहीं

मौसम विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और आने वाले दिनों में तापमान में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नहीं हैं। विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में लू चलने की आशंका जताई है।

रायपुर के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। शहर में अधिकतम तापमान 44°C और न्यूनतम तापमान 30°C के आसपास रहने की संभावना है।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

भीषण गर्मी और लू को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, अधिक पानी पीने और धूप में निकलते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने को कहा गया है।

प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर

मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की बारिश जरूर दर्ज की गई, लेकिन अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा।

कांग्रेस लोकतांत्रिक मर्यादाएं भूल चुकी है, देश की जनता सब देख रही है : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए ‘गद्दार’ जैसे अशोभनीय शब्द के प्रयोग की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह बयान कांग्रेस की हताशा, राजनीतिक दिवालियापन और संकुचित मानसिकता को उजागर करता है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय से सत्ता से दूर रहने की निराशा में कांग्रेस अब लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सीमाएं लांघ चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करते हुए देश की सुरक्षा को नई मजबूती दी, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया और देश को विश्व मंच पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया, उसी नेतृत्व के खिलाफ इस प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे संवैधानिक पद केवल व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रतीक होते हैं। राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसकी आड़ में अपमानजनक और अतिवादी भाषा का प्रयोग स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी कांग्रेस नेतृत्व की राजनीतिक परिपक्वता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि देश की 140 करोड़ जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राष्ट्र की सुरक्षा, विकास और आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचते हुए देख रही है। ऐसे में कांग्रेस का यह गैर-जिम्मेदाराना और लोकतंत्र-विरोधी आचरण देश की जागरूक जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली, चार दशक बाद पहली बार गांव पहुंचा प्रशासन, जनगणना कार्य संपन्न

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 रायपुर : लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और भय के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा रहा बीजापुर जिले का दारेली गांव, अब बदलाव और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। पिछले चार दशकों से इस क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक गतिविधि नहीं हो पाई थी, यहाँ तक कि वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से भी यह गांव वंचित रह गया था, लेकिन अब इतिहास बदलते हुए पहली बार जिला प्रशासन की टीम सीधे दारेली गांव पहुंची और वहां सुचारू रूप से जनगणना का कार्य संपन्न कराया।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब उन सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले विकास की कल्पना करना भी बेहद कठिन था।


प्रशासनिक अमले का ऐतिहासिक दौरा और आत्मीय स्वागत

इसी कड़ी में कलेक्टर बीजापुर विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी मुकेश देवांगन तथा उसूर एसडीएम भूपेंद्र गावरे ने दारेली गांव का सघन दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने उनका आत्मीय और भावुक स्वागत किया। ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ है कि शासन-प्रशासन उनके द्वार तक पहुंचा है। इस दौरान गांव में हुए जनगणना कार्य को ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक और सुखद पहल बताया।

शिविर लगाकर बुनियादी दस्तावेज बनाने के निर्देश

कलेक्टर बीजापुर ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और जमीन के पट्टे, आधार कार्ड, बैंक खाते तथा राशन कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की उपलब्धता की समीक्षा की। कई ग्रामीणों के दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्होंने मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांव में विशेष शिविर का आयोजन किया जाए, ताकि सभी पात्र ग्रामीणों का शत-प्रतिशत सैचुरेशन (दस्तावेजीकरण) सुनिश्चित हो सके।

मौके पर ही संवेदनशील संज्ञानरू किसान की समस्या का त्वरित समाधान

भ्रमण के दौरान एक स्थानीय किसान ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई कि उसके पिता के निधन के बाद भी लंबे समय से जमीन का नामांतरण नहीं हो पाया है। इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद राजस्व अधिकारियों को नामांतरण प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के कड़े निर्देश दिए और कहा कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी करेंगे। प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली को देखकर किसान भावुक हो गया और उसने अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

जनकल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति की घोषणा

कलेक्टर ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत दारेली के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के भी निर्देश दिए। जो दारेली गांव कभी भय, उपेक्षा और सन्नाटे का प्रतीक माना जाता था, वह आज विकास, आपसी विश्वास और नई उम्मीदों की राह पर कदम बढ़ा चुका है। प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने ग्रामीणों के भीतर शासन के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत किया है।

पेयजल की नियमित जलापूर्ति और शुद्धता की जांच जरूरी- मुख्य सचिव

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 रायपुर : मुख्य सचिव विकासशील ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में नियमित जलापूर्ति और पेयजल की शुद्धता की निरंतर जांच कराने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज यहाँ मंत्रालय (महानदी भवन) में श्राज्य जल एवं स्वच्छता मिशनश् की अपेक्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।


बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन की कार्ययोजना, पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था, आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण, जनभागीदारी, जल संरक्षण तथा श्सुजलम भारतश् डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, भू-जल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए श्जल अर्पणश् की नई पहल पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बुनियादी ढांचे के बाद अब सुचारू संचालन और मॉनिटरिंग पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न गांवों और बसाहटों में पानी की टंकियां तथा नल लगाने का काम पूरा होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता बनाए रखना है।

ग्राम पंचायतों को नल-जल योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए गठित समितियों में महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सहयोग करने के निर्देश दिए। नल-जल योजनाओं की निरंतर और प्रभावी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीधे जिला कलेक्टरों की होगी।

वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग के कड़े निर्देश

मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत गाइडलाइंस के अनुरूप पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग केवल स्वीकृत मदों में ही किया जाए। पानी की सप्लाई चौन में किसी भी प्रकार की खराबी को तुरंत सुधारने के लिए उन्होंने सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म और पीएम गति शक्ति ऐप के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, उन्होंने एलडब्ल्यूई (नक्सल) प्रभावित एवं दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वीकृत योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि वर्ष 2028 की समय-सीमा से पहले छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई जाए।

सिंगल विलेज और बल्क वॉटर स्कीम की प्रगति

बैठक में अधिकारियों ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत रिफॉर्म प्लान की प्रगति की जानकारी दी। सिंगल विलेज स्कीम के तहत इस विकेंद्रीकृत योजना के तहत गांवों में ही उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग कर पाइपलाइन के जरिए हर घर में नल कनेक्शन दिया जाता है। राज्य के विभिन्न गांवों में ऐसी 29 हजार 90 योजनाएं बनाई गई हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों, शहरों या कई गांवों के समूहों तक भारी मात्रा में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 70 योजनाएं संचालित हैं, जिनमें पानी को दूरस्थ स्रोतों से लाकर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है।

पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था के तहत 1,531 गांवों के अंतर्गत आने वाले (20 परिवारों से कम वाली) करीब 920 बसाहटों और एलडब्ल्यूई क्षेत्रों के छूटे हुए परिवारों के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम जारी है।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, वित्त विभाग के सचिव रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, इसके साथ ही भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में वर्चुअली व प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।

खाद-डीजल की किल्लत से भड़के किसान,आरंग में मंत्री कार्यालय का घेराव कर दी आंदोलन की चेतावनी

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​आरंग- खेती-किसानी के ऐन वक्त पर खाद और डीजल की भारी किल्लत से नाराज आरंग क्षेत्र के किसानों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में किसानों ने एकजुट होकर न केवल उग्र प्रदर्शन किया, बल्कि क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री के कार्यालय का घेराव कर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद किसान अपनी मांगों को लेकर घंटों मौके पर डटे रहे।

किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और पोटाश की भारी कमी है, जिसके कारण उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, डीजल संकट और ट्रैक्टर-हार्वेस्टर के लिए डिब्बे में डीजल देने पर लगी रोक ने कृषि उपकरणों के पहिए थाम दिए हैं, जिससे खेती का काम पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की बुनियादी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे इस साल उत्पादन पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।​मंत्री की अनुपस्थिति में आक्रोशित किसानों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रति एकड़ दो बोरी डीएपी, दो बोरी यूरिया व एक बोरी पोटाश की तुरंत उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दो महीने तक डीजल की निर्बाध आपूर्ति करने की मांग की है। साथ ही, ट्रैक्टर व हार्वेस्टर के लिए डिब्बे में डीजल न देने संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त करने और फसल बीमा योजना को ऐच्छिक बनाने की बात कही गई है। किसान नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में राजधानी रायपुर में एक बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस प्रदर्शन में पारसनाथ साहू, वतन चंद्राकर, धनाजी, हिरेश, द्रोण, कमल, कृष्णकुमार सहित सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के किसान मौजूद थे।



भिलाई में बीमा पॉलिसी के नाम पर बड़ा फ्रॉड, दो आरोपी गिरफ्तार

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 दुर्ग । भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के एक कर्मचारी से बीमा पॉलिसी में अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर 38 लाख 30 हजार रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले का मुख्य आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है।


मामले की शिकायत Bhilai के सेक्टर-4 निवासी संतोष कुमार ने भिलाई भट्टी थाना में दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह Bhilai Steel Plant में इलेक्ट्रीशियन के पद पर कार्यरत हैं।

संतोष कुमार के अनुसार, उन्होंने सिविक सेंटर स्थित एक बीमा कार्यालय में पॉलिसी कराई थी, जिसकी अवधि वर्ष 2022 में पूरी हो गई थी। पॉलिसी बंद कराने के लिए वह बीमा कार्यालय पहुंचे थे, जहां फॉर्म भरने में परेशानी होने पर सेक्टर-6 निवासी के. देवासहायम ने उनकी मदद की। इस दौरान उसने खुद को बीमा एजेंट बताया और दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ गई।

आरोप है कि देवासहायम ने संतोष कुमार को अधिक रिटर्न देने वाली बीमा पॉलिसियों का लालच दिया। इसके बाद संतोष ने आरोपी को 14 लाख रुपये का चेक दिया। वहीं परिवार के अन्य सदस्यों की बीमा पॉलिसी कराने के नाम पर 17 लाख 30 हजार रुपये भी सौंप दिए।

इसके अलावा आरोपियों ने सुपर बाजार से करीब 7 लाख रुपये के इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदवाए। जब संतोष कुमार ने पॉलिसी संबंधी दस्तावेज मांगे, तो आरोपी लगातार टालमटोल करने लगे। इसी बीच चेक के जरिए रकम भी निकाल ली गई।

इसके बाद पीड़ित ने भिलाई भट्टी थाना पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई और संबंधित दस्तावेज व साक्ष्य पुलिस को सौंपे।

Bhilai Bhatti Police Station ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की और सेक्टर-6 निवासी रवि कुमार तथा के. राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी अब भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।

सियान गुड़ी बन रही वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहारा और सम्मान का केंद्र

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सियान गुड़ी बुजुर्गों के लिए देखभाल, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रही है।


समाज कल्याण विभाग की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत जिले में अब तक 94 वरिष्ठ नागरिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 32 बुजुर्गों को नियमित रूप से फिजियोथेरेपी की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें शारीरिक समस्याओं से राहत मिल रही है।

हाल ही में जिला अस्पताल की विशेषज्ञ टीम, जिसमें चिकित्सा अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, साइकेट्रिक नर्स और लैब तकनीशियन शामिल थे, इस टीम ने सियान गुड़ी और नशामुक्ति केंद्र के हितग्राहियों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्त जांच किया। टीम ने वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सलाह और काउंसिलिंग भी प्रदान की।

सियान गुड़ी में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से वरिष्ठ नागरिक विभिन्न मनोरंजक, सामाजिक और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों में भाग लेते हैं। दिनभर की गतिविधियों के बाद शाम 6 बजे सभी पंजीकृत वरिष्ठ नागरिकों और कर्मचारियों की उपस्थिति में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है, जिससे आध्यात्मिक और मानसिक शांति का वातावरण बनता है।

सियान गुड़ी से लाभान्वित वरिष्ठ नागरिकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केंद्र उनके लिए सम्मान, देखभाल और आत्मीयता का स्थान बन गया है।

समाज कल्याण विभाग ने जिले के सभी वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सियान गुड़ी पहुंचकर इस उपयोगी सुविधा का लाभ उठाएं।

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर

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नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर

रायपुर- छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है।

स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ

नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी।

वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है।

परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम

रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है।

महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी

नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है।

लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है।

मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।

इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण

कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है।

पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार

नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं।

सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी।

सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब

नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है।

यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है।

सतत विकास और हरित पहल

“पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है।

बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है:

सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास।
  • राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन।
  • 500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार।
  • नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना।
  • वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना।
  • वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन।
  • प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास।
  • इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन।
  • सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन।
नई राजधानी, नए भारत की पहचान

नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत के सबसे आधुनिक, निवेश-अनुकूल और जीवन गुणवत्ता से परिपूर्ण शहरों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है।

राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं।

प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।

सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है।

छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं।

ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में देशभर में मेडिकल स्टोर्स बंद, 15 लाख दवा विक्रेताओं की हड़ताल

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 नई दिल्ली। देशभर में आज यानी 20 मई को मेडिकल स्टोर्स की हड़ताल देखने को मिल रही है। फार्मासिस्ट, केमिस्ट और दवा डिस्ट्रीब्यूटरों के राष्ट्रीय संगठन All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) के आह्वान पर देशभर के 15 लाख से अधिक दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखीं। यह हड़ताल ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों और उनसे जुड़े सरकारी नियमों के विरोध में की जा रही है।


AIOCD का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) नोटिफिकेशन की वजह से ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां बिना स्पष्ट और सख्त नियमों के काम कर रही हैं। संगठन का आरोप है कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवाइयों की बिक्री के लिए पर्याप्त निगरानी व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

AIOCD के महासचिव Rajiv Singhal ने कहा कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फर्जी या गलत प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर भी दवाइयां बेच रहे हैं। संगठन का कहना है कि जिस तरह पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स पर सख्त नियम लागू होते हैं, उसी तरह ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों पर भी कड़े कानून लागू किए जाने चाहिए।

ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठे सवाल

दवा व्यापारियों का कहना है कि मेडिकल स्टोर्स डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही दवाइयां देते हैं और एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाएं तथा प्रेग्नेंसी किट जैसी संवेदनशील दवाओं का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं। वहीं, ई-फार्मेसी कंपनियों पर आरोप है कि वे बिना उचित जांच के दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि कई online कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। जबकि सामान्य मेडिकल स्टोर संचालकों को सीमित मुनाफा मिलता है, ऐसे में बड़े डिस्काउंट देना सामान्य व्यापार नियमों के खिलाफ प्रतीत होता है।

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