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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने BIRAC–RDI फंड के तहत पहली राष्ट्रीय कॉल की घोषणा की, जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज BIRAC–RDI फंड के तहत पहली राष्ट्रीय कॉल की घोषणा की, जो सरकार के ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) पहल के तहत उच्च प्रभाव वाली जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल विज्ञान आधारित विकास के प्रति भारत के दृष्टिकोण में निर्णायक बदलाव को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि भारत अब उभरती तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दशक में भारत जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नीति संकोच से नीति तेज़ी की ओर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि 2014 में लगभग 50 बायोटेक स्टार्टअप से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गए हैं, जो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति का प्रमुख चालक बनेगी और भारत पहले ही अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है।

बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि BIRAC–RDI फंड के तहत अगले पांच वर्षों में ₹2,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2012 में 28 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर करना है।

इस फंड के तहत स्टार्टअप, एसएमई और उद्योग भागीदार 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।



VB-G RAM G अधिनियम 2025: ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, ग्राम पंचायत को मिलेगी मुख्य भूमिका

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VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का उद्देश्य ग्रामीण विकास ढांचे को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप बनाना है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जिससे आजीविका सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

इस योजना में विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (Viksit Gram Panchayat Plans) के माध्यम से समग्र योजना निर्माण, विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय (convergence), और डिजिटल एवं भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका इस अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है:

  • जिला पंचायत जिला स्तर पर योजना निर्माण, निगरानी और समन्वय करेगी।

  • ब्लॉक स्तर की पंचायत ब्लॉक स्तर की योजना तैयार करेगी और ग्राम पंचायतों को सहयोग देगी।

  • ग्राम पंचायत योजना निर्माण, कार्यान्वयन, कार्य आवंटन, रिकॉर्ड रखरखाव और सामाजिक ऑडिट की मुख्य जिम्मेदार संस्था होगी।

ग्राम पंचायत को ग्रामीण परिवारों का पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करना, कार्य आवेदन प्रक्रिया, तकनीकी मानकों का पालन, डिजिटल रिकॉर्ड, और ग्राम सभा के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

यह अधिनियम महात्मा गांधी नरेगा के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और ग्राम पंचायत को योजना के क्रियान्वयन का मुख्य आधार बनाया गया है।


प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 2024-25 में ₹630 करोड़ का फंड आवंटन, मांग आधारित प्रणाली से मिलती है सहायता

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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) केंद्रीय क्षेत्र की अम्ब्रेला योजना प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) का क्रियान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए PMKSY के तहत ₹630 करोड़ का फंड आवंटन किया गया था।

PMKSY के अंतर्गत घटक योजनाएं निम्नलिखित हैं:

(i) एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना (Integrated Cold Chain & Value Addition Infrastructure – ICC&VAI)
(ii) कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए अवसंरचना (Infrastructure for Agro-processing Clusters – APC)
(iii) खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता का सृजन/विस्तार (Creation/Expansion of Food Processing & Preservation Capacities – CEFPPC)
(iv) खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना (Food Safety and Quality Assurance Infrastructure – FSQAI)
(v) मानव संसाधन और संस्थान (अनुसंधान एवं विकास)
(vi) ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens – OG)
(vii) मेगा फूड पार्क (01.04.2021 से बंद)
(viii) बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का सृजन (01.04.2021 से बंद)

PMKSY के तहत पात्र संस्थाओं जैसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म, एलएलपी, सहकारी समितियां, एफपीओ/एफपीसी/एसएचजी आदि को खाद्य प्रसंस्करण/संरक्षण/परीक्षण/विश्लेषण अवसंरचना स्थापित करने और खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए अनुदान सहायता (ग्रांट-इन-एड) प्रतिपूर्ति आधार पर प्रदान की जाती है। यह योजना हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में लागू है।

PMKSY एक मांग आधारित योजना है और इसके तहत आवेदन एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) के माध्यम से पूरे देश से आमंत्रित किए जाते हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस योजना के तहत किसी भी घटक योजना में राज्यों के अनुसार धन आवंटित/स्वीकृत/जारी नहीं किया जाता। प्राप्त प्रस्तावों की पात्रता की जांच की जाती है और योजना दिशानिर्देशों के अनुसार तय मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। उपलब्ध निधि के आधार पर मेरिट के अनुसार पात्र प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाती है।

यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।


भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में इन-सिटू अभ्यास किया

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भारतीय वायु सेना (IAF) ने 09 से 12 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई वायु सेना (RTAF) के साथ एक इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत हुआ और आपसी समझ में वृद्धि हुई।

दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय अभ्यास हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना के Su-30MKI बहु-भूमिका लड़ाकू विमान और रॉयल थाई वायु सेना के SAAB Gripen जेट विमान शामिल थे। समुद्री क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के विमानों के विस्तारित परिचालन को IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकरों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमानों और थाई वायु सेना के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (GCI) तत्वों की उन्नत निगरानी और कमांड क्षमताओं के तहत आयोजित किया गया।

अभ्यास में भाग लेने वाली भारतीय वायु सेना की इकाइयाँ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयरबेस से संचालित हुईं, जबकि थाई Gripen विमान थाईलैंड के एयरबेस से संचालित हुए। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मित्र विदेशी देश के साथ भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता और अंतर-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस अभ्यास ने दोनों वायु सेनाओं को परिचालन अनुभव प्रदान किया और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान का अवसर दिया।

यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहरे होते “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को दर्शाता है, जो अब एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में भी विस्तारित हो रही है।


2025 में स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ TRAI की कड़ी कार्रवाई, 21 लाख से अधिक संसाधन डिस्कनेक्ट

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने वर्ष 2025 के लिए अनचाही वाणिज्यिक संचार (UCC) के प्रवर्तन और डू नॉट डिस्टर्ब (DND) पारिस्थितिकी तंत्र के तहत उपभोक्ता सहभागिता पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ नियामक कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित किया गया है।

वर्ष 2025 के दौरान, UCC मानदंडों का उल्लंघन करने वाले 7,31,120 अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स (UTMs) को नोटिस जारी किए गए। प्रगतिशील प्रवर्तन उपायों के तहत, 4,73,075 संस्थाओं पर एक महीने के लिए संचार प्रतिबंध लगाया गया, जबकि 89,936 बार-बार उल्लंघन करने वालों पर छह महीने का संचार प्रतिबंध लगाया गया। इसके अतिरिक्त, निरंतर अनुपालन न करने पर 1,84,482 दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया गया।

अगस्त 2024 से अब तक कुल मिलाकर 21.05 लाख से अधिक दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया जा चुका है, जो स्पैम नेटवर्क पर अंकुश लगाने और दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में अनुपालन को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ, उपभोक्ताओं को स्पैम की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास किए गए। वर्ष 2025 में सभी चैनलों के माध्यम से 31.09 लाख UCC शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 17.06 लाख शिकायतें (आधे से अधिक) DND ऐप के माध्यम से दर्ज की गईं, जो अनचाही संचार की रिपोर्टिंग में बढ़ी हुई उपभोक्ता भागीदारी को दर्शाता है।

इस पर टिप्पणी करते हुए, TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा:

“2025 में TRAI के प्रवर्तन प्रयास इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि उपभोक्ताओं को अनचाही वाणिज्यिक संचार पर नियंत्रण में स्पष्ट सुधार महसूस होना चाहिए। DND पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से बढ़ी हुई उपभोक्ता सहभागिता ने उल्लंघनों की तेजी से पहचान और लगातार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव की है।”

मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष भर अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतें कुल मामलों का बड़ा हिस्सा रहीं, जो पंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतों से कहीं अधिक थीं। यह प्रवृत्ति नियामक ढांचे से बाहर संचालित होने वाली अनधिकृत और गैर-अनुपालन संस्थाओं को लक्षित करने पर TRAI के फोकस को मजबूत करती है।

TRAI ने दो-स्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसके तहत पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से वैध और सहमति-आधारित वाणिज्यिक संचार को सक्षम किया जाता है, जबकि DLT (ब्लॉकचेन)-आधारित पंजीकरण, AI आधारित स्पैम पहचान, निर्धारित नंबर श्रृंखला का अनिवार्य उपयोग, मजबूत शिकायत तंत्र और गैर-अनुपालन प्रेषकों को डिस्कनेक्ट करने जैसे नियामक, तकनीकी और प्रवर्तन उपायों के माध्यम से अपंजीकृत संस्थाओं से आने वाले अनचाही संचार पर अंकुश लगाया जाता है।

DND पारिस्थितिकी तंत्र में अपनाने की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। DND ऐप इंस्टॉलेशन में वर्ष-दर-वर्ष 84.43% की वृद्धि दर्ज की गई और 2025 में कुल इंस्टॉलेशन 28.08 लाख तक पहुंच गए, जबकि 2024 में यह संख्या 15.22 लाख थी।

उपभोक्ता रिपोर्टिंग में वृद्धि और मजबूत प्रवर्तन तंत्र के संयोजन से उल्लंघनकर्ताओं की तेजी से पहचान और निर्णायक नियामक कार्रवाई संभव हुई है।

प्राधिकरण उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनचाही वाणिज्यिक संचार में संलग्न संस्थाओं के लिए गैर-अनुपालन के परिणामों को कड़ा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, साथ ही हितधारकों के सहयोग से DND ढांचे को और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रखेगा।

TRAI के बारे में:

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) TRAI अधिनियम, 1997 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है। TRAI भारत में दूरसंचार, प्रसारण और केबल टीवी सेवा क्षेत्रों का विनियमन करता है। इसका उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए निष्पक्ष नियम, पारदर्शी प्रक्रियाएं और बेहतर सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।


केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने RRIUM मुंबई के नवीनीकृत को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया

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केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव कल मुंबई में जे.जे. अस्पताल परिसर में स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकृत को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद यूनानी दिवस 2026 का औपचारिक समारोह तथा “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और साक्ष्य” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन होगा, जिसका आयोजन आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा किया जा रहा है।

लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकृत RRIUM को-लोकेशन सेंटर, यूनानी चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ समन्वित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1984 में स्थापित यह केंद्र नैदानिक अनुसंधान, शैक्षणिक प्रशिक्षण और रोगी देखभाल के लिए एक प्रमुख सुविधा के रूप में कार्य करता रहा है। उन्नत बुनियादी ढांचे से अब साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा उपलब्ध होगी, विशेष रूप से मुंबई के प्रमुख आधुनिक चिकित्सा परिसरों में से एक में।

राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 14 फरवरी को सुबह 10:30 बजे आयोजित होगा, जिसमें महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, भारतीय चिकित्सा प्रणाली राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष डॉ. मनीषा उपेंद्र कोठेकर, आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास, आयुष मंत्रालय के यूनानी सलाहकार डॉ. एम. ए. कासमी, राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान के निदेशक प्रो. सैयद शाह आलम और CCRUM के महानिदेशक डॉ. एन. ज़हीर अहमद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान सत्यापन और समन्वित स्वास्थ्य मॉडल पर विचार-विमर्श के माध्यम से यूनानी चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित प्रगति को बढ़ावा देना है। इसमें मुख्य व्याख्यान, वैज्ञानिक सत्र, पैनल चर्चा और प्रदर्शनी शामिल होगी, जिसमें यूनानी औषधि उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान कई संस्थागत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा, जिनमें CCRUM का नया सहयोगात्मक वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप्स, नई प्रकाशनों का विमोचन, समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान, यूनानी चिकित्सा पर वीडियो तथा अनुसंधान और व्यवहार में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान करना शामिल है।

हर वर्ष 11 फरवरी को हकीम अजमल खान की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यूनानी दिवस, यूनानी चिकित्सा की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और प्रचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।प्रतापराव जाधव के नेतृत्व में यूनानी दिवस 2026 का आयोजन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने और नवाचार, अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवा एकीकरण के माध्यम से उनकी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत सरकार की दृष्टि को रेखांकित करता है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ अभियान का शुभारंभ किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (13 फरवरी 2026) नई दिल्ली में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और ‘कर्मयोग फॉर एम्पावर्ड भारत’ नामक राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का भी शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता का भौतिक प्रगति के साथ एकीकरण संतुलित और समग्र विकास के लिए आवश्यक है। आर्थिक प्रगति समृद्धि को बढ़ावा देती है और तकनीकी प्रगति नवाचार, दक्षता और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है, जो एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखते हैं। हालांकि, नैतिकता के बिना आर्थिक और तकनीकी विकास समाज में असंतुलन पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, अनैतिक आर्थिक प्रगति से धन और संसाधनों का संकेन्द्रण, पर्यावरणीय क्षति और समाज के कमजोर वर्गों का शोषण हो सकता है। नैतिक मूल्यों के बिना तकनीक का उपयोग मानवता के लिए विनाशकारी हो सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिकता हमें मूलभूत मूल्य और नैतिक ढांचा प्रदान करती है, जो हमें कर्मयोग यानी निस्वार्थ सेवा का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करती है। आध्यात्मिकता सत्यनिष्ठा, करुणा, अहिंसा और दूसरों की सेवा जैसे गुणों पर भी जोर देती है, जो एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक सिद्धांत हैं। जब हमारे विचार आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होते हैं, तो हम स्वार्थ से ऊपर उठकर सभी के कल्याण के बारे में सोच पाते हैं। देश का नेतृत्व आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर न्यायसंगत और निष्पक्ष प्रशासनिक निर्णय ले सकता है, जो किसी एक वर्ग के लाभ के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के हित में होते हैं। जब सरकारी कार्य न्यायपूर्ण होते हैं, तो समाज में विश्वास और स्थिरता बढ़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय राजयोग की शिक्षा देता है। यह केवल एक स्थान पर बैठकर आत्मचिंतन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मयोग इसका मूलभूत हिस्सा है। कर्मयोग का अर्थ है सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उच्च आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करना। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े लाखों लोग नियमित रूप से कर्मयोग का अभ्यास करके सार्थक जीवन जी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मयोग के माध्यम से देश का प्रत्येक नागरिक भारत के सतत और समग्र विकास में योगदान दे सकता है। इससे न केवल भारत आर्थिक रूप से प्रगति करेगा, बल्कि हम एक ऐसा समाज भी बना सकेंगे जो विश्व के लिए मूल्य-आधारित जीवन का आदर्श बनेगा।



घर से निकलने से पहले चेक करें—रायपुर रूट की ट्रेनें कैंसिल

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 रायपुर : यात्रियों के लिए जरूरी सूचना है कि रेलवे ने 14 और 15 फरवरी को कई पैसेंजर और मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है। हथबंद–भाटापारा सेक्शन में गर्डर लॉन्चिंग कार्य के कारण कुल 8 ट्रेनें निरस्त रहेंगी, जबकि 9 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। ऐसे में इन तारीखों में यात्रा करने वाले यात्री घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें।


14 फरवरी को रद्द ट्रेनें

  • 68728 रायपुर–बिलासपुर मेमू
  • 68719 बिलासपुर–रायपुर मेमू
  • 68733 गेवरा रोड–बिलासपुर मेमू
  • 68734 बिलासपुर–गेवरा रोड मेमू
  • 58203 कोरबा–रायपुर पैसेंजर
  • 58205 रायपुर–नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) पैसेंजर
  • 15 फरवरी को रद्द ट्रेनें
  • 58206 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)–रायपुर पैसेंजर
  • 58202 रायपुर–बिलासपुर मेमू

अप्रैल में भी कई ट्रेनें रहेंगी रद्द

रेलवे के अनुसार अप्रैल माह में भी विभिन्न रूटों पर कार्य के चलते कई एक्सप्रेस, मेमू और पैसेंजर ट्रेनें अलग-अलग तिथियों में निरस्त रहेंगी, जिनमें प्रमुख रूप से शालीमार–लोकमान्य तिलक टर्मिनल, कोरबा–अमृतसर, हज़रत निजामुद्दीन–रायगढ़, विशाखापत्तनम–हज़रत निजामुद्दीन सहित कई ट्रेनें शामिल हैं।

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके।

TDB ने एंटीबायोटिक-मुक्त स्मार्ट प्रोटीन परियोजना के लिए एलमेंटोज़ रिसर्च के साथ समझौता किया

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आत्मनिर्भर भारत के सरकार के दृष्टिकोण और टिकाऊ तथा एंटीबायोटिक-मुक्त पशु पोषण समाधान को बढ़ावा देने के रणनीतिक उद्देश्य के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने भुवनेश्वर स्थित एम/एस एलमेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ “पोल्ट्री, जलीय कृषि और पालतू पशु आहार के लिए एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (AMP)-समृद्ध, टिकाऊ प्रिसिशन स्मार्ट प्रोटीन का विकास और वाणिज्यीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता हेतु एक समझौता किया है।

यह परियोजना ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन के वाणिज्यिक-स्तरीय उत्पादन की स्थापना का लक्ष्य रखती है। यह एक एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (AMP)-समृद्ध, प्रिसिशन-इंजीनियर्ड कार्यात्मक प्रोटीन है, जिसे कंपनी के स्वामित्व वाले कीट-आधारित जैव-निर्माण (insect biomanufacturing) प्लेटफॉर्म के माध्यम से विकसित किया गया है।

ओडिशा के भुवनेश्वर में मुख्यालय वाली इस कंपनी को डॉ. जयशंकर दास ने प्रवर्तित किया है। कंपनी पोल्ट्री, जलीय कृषि और पालतू पशु आहार क्षेत्रों के लिए एंटीबायोटिक-मुक्त, टिकाऊ और प्रिसिशन प्रोटीन समाधान प्रदान करने पर केंद्रित है। अपने स्वदेशी कीट-आधारित जैव-निर्माण प्लेटफॉर्म के माध्यम से, कंपनी ने ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन विकसित किया है, जिसे एंटीबायोटिक ग्रोथ प्रमोटर्स (AGPs) के विकल्प के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिससे फीड कन्वर्ज़न रेशियो (FCR) में सुधार, रोगों की घटनाओं में कमी और परिपत्र अपशिष्ट मूल्यवर्धन (circular waste valorisation) में योगदान मिलता है।

यह प्रौद्योगिकी स्थानीय रूप से उपलब्ध कृषि-खाद्य और औद्योगिक अपशिष्ट धाराओं को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करती है, जिससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं, आयात निर्भरता कम होती है और परिपत्र अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य होता है। ELGROW™ प्रोटीन मील और AMP-समृद्ध स्मार्ट प्रोटीन फॉर्मूलेशन के अलावा, कंपनी ELGROW™ ऑयल भी बनाती है, जिसमें आवश्यक फैटी एसिड (जैसे लिनोलिक एसिड – ओमेगा-6) होते हैं, जो पोल्ट्री और जलीय कृषि के विकास और प्रजनन के लिए लाभकारी हैं।

समर्थित परियोजना से न केवल बड़े पोल्ट्री और जलीय कृषि एकीकृत उद्यमों को, बल्कि छोटे और मध्यम किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह भारतीय कृषि प्रणालियों के अनुरूप लागत-प्रभावी और प्रदर्शन-वर्धक फीड विकल्प प्रदान करेगी। यह पहल एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR), फीड सुरक्षा और बढ़ती इनपुट लागत जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है, साथ ही पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान देती है।

समझौता हस्ताक्षर के अवसर पर, राजेश कुमार पाठक, सचिव, TDB ने कहा कि एलमेंटोज़ रिसर्च को बोर्ड का समर्थन स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास से उभरती प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यीकरण को बढ़ावा देने के उसके दायित्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक-मुक्त प्रिसिशन पोषण समाधान खाद्य सुरक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और भारत के पशुधन एवं जलीय कृषि क्षेत्रों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

एम/एस एलमेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के प्रवर्तक ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता कंपनी के स्वामित्व वाले कीट-आधारित जैव-निर्माण प्लेटफॉर्म के विस्तार में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ, लागत-प्रभावी और प्रदर्शन-आधारित प्रोटीन समाधान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे आयातित फीड एडिटिव्स पर निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय फीड सुरक्षा मजबूत होगी।


एनबीए ने लाभ-साझेदारी ढांचे के तहत 45 दिनों में ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग से उत्पन्न लाभों के निष्पक्ष और समान वितरण को सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को आगे बढ़ाते हुए, पिछले 45 दिनों में एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) ढांचे के तहत ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की है। यह राशि बीज तथा पशु आहार/कॉस्मेटिक क्षेत्रों से संबंधित संस्थाओं द्वारा जैविक संसाधनों के अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग हेतु प्राप्त दस आवेदनों से प्राप्त हुई है।

लाभ-साझेदारी योगदान विभिन्न कृषि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त हुआ है, जिनमें धान, प्याज, करेला, सरसों, कपास, लौकी, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, तोरई, टमाटर और समुद्री शैवाल की किस्में/हाइब्रिड शामिल हैं। ₹2.30 करोड़ की एक बड़ी राशि एम/एस पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से सरसों और धान के हाइब्रिड के वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्राप्त हुई है। शेष राशि एम/एस ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्रा. लि., एम/एस एडवांटा एंटरप्राइजेज लि., एम/एस टोकिता सीड इंडिया प्रा. लि., एम/एस एवेलो इंक और एम/एस सी6 एनर्जी प्रा. लि. से प्राप्त हुई है। इन जैविक संसाधनों का उपयोग उन्नत और हाइब्रिड बीज किस्मों सहित कृषि आधारित उत्पादों के विकास के लिए किया गया, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

ABS तंत्र के तहत, लाभ संबंधित संस्थानों, स्थानीय समुदायों, किसानों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों आदि के साथ साझा किया जाएगा, जिन्होंने बीजों की मूल किस्में प्रदान की थीं। यह प्रणाली आजीविका संवर्धन को समर्थन देती है और जमीनी स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

हाल के वर्षों में, NBA ने अनुपालन को आसान बनाने और व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं शुरू की हैं, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जमीनी स्तर के समुदायों के हित सुरक्षित रहें। बीज क्षेत्र ABS ढांचे के तहत अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। प्राधिकरण सभी हितधारकों, विशेषकर विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों का अनुपालन करने और जैव विविधता संरक्षण तथा लाभ-साझेदारी में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वर्तमान तक NBA ने बीज क्षेत्र से ₹3.42 करोड़ की राशि प्राप्त की है। नवीनतम प्राप्ति के साथ, NBA द्वारा अब तक प्राप्त कुल ABS राशि ₹266 करोड़ (लगभग 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुकी है। इसमें से ₹83 करोड़ केवल बीज क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, जिससे यह रेड सैंडर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।

NBA जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य-13 को प्राप्त करने में योगदान दे रहा है, जो ABS तंत्र के लिए विधायी उपायों पर जोर देता है।


Mahasamund : जंगल में मिला 17 वर्षीय युवक का शव, गर्लफ्रेंड से मिलने गया था और हो गया लापता

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 महासमुंद। जिले के भंवरपुर पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत जंगल में एक 17 वर्षीय नाबालिग युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान बलौदाबाजार जिले के ग्राम सर्वा निवासी उद्रेश वर्मा (17) के रूप में हुई है। वह करीब 15 दिन से लापता था।


जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी को उद्रेश अपने दोस्तों के साथ टूड्री गांव में मड़ाई मेला देखने गया था। लौटते समय उसने महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत जमदरहा के आश्रित गांव जमनीडीह में अपनी कथित गर्लफ्रेंड से मिलने की इच्छा जताई। दोस्तों के मना करने के बावजूद वह रात करीब 11 बजे जमनीडीह पहुंचा।

बताया गया है कि उसने दोस्त के मोबाइल से युवती को कॉल किया और उससे मिलने के बाद वह अचानक लापता हो गया। 30 जनवरी को उसके दोस्त धर्मेंद्र वर्मा ने भंवरपुर चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कुछ दिनों बाद युवक द्वारा उपयोग किया गया मोबाइल गांव के पास मिला, जिसके बाद पुलिस ने तलाश तेज कर दी।

तलाशी अभियान के दौरान डॉग स्क्वॉड और तकनीकी टीम की मदद ली गई, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस सुराग नहीं मिला। गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे युवती के गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में युवक का शव बरामद हुआ। शव के कुछ हिस्से जंगली जानवरों द्वारा क्षतिग्रस्त पाए गए।

फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। शव की स्थिति खराब होने के कारण पोस्टमार्टम के लिए रायपुर मेडिकल कॉलेज भेजने की तैयारी की जा रही है। परिजनों ने शव की पहचान उद्रेश वर्मा के रूप में की है।

पुलिस ने हत्या सहित सभी संभावित पहलुओं से जांच शुरू कर दी है। युवक की कथित गर्लफ्रेंड और उसके परिवार से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी और वे फोन पर बातचीत करते थे।

फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

वन संरक्षण और जैव विविधता में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धियां : वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर। वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, जैव विविधता संवर्धन और वनवासियों की आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी।


वन आवरण में वृद्धि

मंत्री कश्यप ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। अत्यंत सघन वनों में 348 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज होना पारिस्थितिक संतुलन में सुधार का संकेत है।

हरित छत्तीसगढ़ अभियान

“एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत वर्ष 2024 में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक तथा वर्ष 2025 में 2 करोड़ 79 लाख से अधिक पौधों का रोपण और वितरण किया गया।

किसान वृक्ष मित्र योजना

किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से निजी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। योजना के तहत पांच एकड़ तक 100 प्रतिशत और उससे अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ भूमि पर 3 करोड़ 67 लाख से अधिक पौधे लगाए गए।

देव स्थलों का संरक्षण

आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण के तहत पिछले दो वर्षों में 435 देवगुड़ियों का निर्माण किया गया, जिस पर लगभग 16.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

वन विभाग में भर्ती

पिछले दो वर्षों में तृतीय श्रेणी के 313 पदों पर भर्ती और 150 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई। वनरक्षक के 1484 पदों की शारीरिक परीक्षा पूर्ण हो चुकी है।

बाघ और वन्यजीव संरक्षण

गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन के बाद राज्य में बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35 हो गई है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे देखे गए हैं। राज्य पक्षी पहाड़ी मैना संरक्षण के लिए ‘मैना मित्र’ अभियान चलाया गया, जिससे इनकी संख्या 600-700 तक पहुंची है।

बर्ड सफारी और रामसर साइट

गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी शुरू की गई है, जहां 270 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। बिलासपुर का कोपरा जलाशय राज्य का पहला और देश का 96वां रामसर स्थल घोषित हुआ है।

इको-टूरिज्म और अधोसंरचना

प्रदेश में 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक स्वावलंबी बन चुके हैं। वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण किया गया है।

मानव-हाथी द्वंद नियंत्रण

‘गज संकेत’ ऐप के जरिए हाथियों की निगरानी की जा रही है। 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं। वर्तमान में राज्य में 355 हाथी दर्ज किए गए हैं।

महिला सशक्तिकरण और औषधीय पौधे

औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से महिलाओं को औषधीय पौध रोपण से जोड़ा गया है, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है।

वन विकास निगम की उपलब्धियां

राज्य वन विकास निगम द्वारा काष्ठ उत्पादन, वृक्षारोपण और ई-ऑक्शन के माध्यम से बिक्री की व्यवस्था लागू की गई है। वन अधिकार अधिनियम के तहत 1165 प्रकरणों में विकास कार्यों के लिए वनभूमि उपयोग की स्वीकृति दी गई है।

एशिया का सबसे बड़ा मरीन फॉसिल पार्क

मंत्री कश्यप ने बताया कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित मरीन फॉसिल पार्क एशिया का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क है, जो लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यहां 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म मिले हैं।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका भी सशक्त हो रही है।

अब वेतन खाते पर मिलेगा 1.25 करोड़ तक सुरक्षा कवर, छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के नियमित कर्मचारियों को आकर्षक और व्यापक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से Bank of Maharashtra और Government of Chhattisgarh के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।


इस समझौते के तहत बैंक में वेतन खाता संचालित करने वाले राज्य सरकार के सभी नियमित कर्मचारियों को ‘गवर्नमेंट प्राइड सैलरी सेविंग स्कीम’ के अंतर्गत उन्नत निःशुल्क सुविधाएं और बीमा कवर प्रदान किए जाएंगे।

बीमा एवं वित्तीय लाभ

समझौते के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा खाताधारक कर्मचारियों को—

  • व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा: ₹1.25 करोड़ तक
  • हवाई दुर्घटना बीमा: ₹1 करोड़ तक
  • स्थायी पूर्ण विकलांगता कवर: ₹1.25 करोड़ तक
  • टर्म इंश्योरेंस: ₹10 लाख

इसके अलावा ‘गोल्डन आवर’ प्रावधान के अंतर्गत ₹1 लाख तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध होगी। कर्मचारियों को बालिका विवाह सहायता के लिए ₹10 लाख तक तथा बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक का लाभ भी दिया जाएगा।

अतिरिक्त सुविधाएं

खाताधारकों को अन्य आकर्षक बैंकिंग लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। साथ ही स्वास्थ्य बीमा पर टॉप-अप जैसी वैकल्पिक सुविधाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह समझौता 10 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा तथा बैंक ऑफ महाराष्ट्र, रायपुर अंचल के अंचल प्रबंधक श्री वी. वेंकटेश की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह पहल राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और लाभकारी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

चुनावी महासंग्राम में छत्तीसगढ़ की एंट्री, असम और बंगाल में संभालेंगे मोर्चा

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 Assam-West Bengal Assembly Elections: आगामी समय में पांच राज्यों-  Assam, West Bengal, Kerala, Tamil Nadu और Puducherry— में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने असम और पश्चिम बंगाल में चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं।


जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री Arun Sao को असम की 9 विधानसभा सीटों का प्रभार दिया गया है। वहीं, राज्य के वित्त मंत्री OP Choudhary को असम की 10 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुर्ग से सांसद Vijay Baghel को भी असम की 10 विधानसभा सीटों का दायित्व दिया गया है।

इसी क्रम में, भाजपा के संगठन महामंत्री Pawan Sai को पश्चिम बंगाल की 56 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा विधायक Rajesh Munat और वरिष्ठ भाजपा नेता Shivratan Sharma को भी पश्चिम बंगाल में चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भाजपा संगठन के अनुसार, यह निर्णय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्टी अनुभवी और संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत नेताओं को अन्य राज्यों में भेजकर बूथ प्रबंधन, प्रचार अभियान और स्थानीय समन्वय को सशक्त करना चाहती है। इसे आगामी विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 14 फरवरी 2026 को विज्ञान भवन में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box)’ का आयोजन कर रहा है।

यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, आंतरिक/स्थानीय समितियों (ICs/LCs) के अध्यक्षों और सदस्यों, नोडल अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, उद्योग जगत के नेताओं, नागरिक समाज प्रतिनिधियों, मीडिया आदि की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

यह सम्मेलन सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उत्पीड़न-मुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करने तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (PoSH Act) के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने का प्रयास है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को SHe-Box पोर्टल लॉन्च किया था। यह एक सुरक्षित, उपयोगकर्ता-अनुकूल और बहुभाषी सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म है, जिसमें कड़ी गोपनीयता के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, संबंधित आंतरिक या स्थानीय समिति को स्वचालित रूप से भेजने और वास्तविक समय में शिकायत की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।

यह पोर्टल एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ कार्यस्थल अपनी अनुपालन संबंधी जानकारी जैसे समिति का विवरण, वार्षिक रिपोर्ट और जागरूकता एवं प्रशिक्षण गतिविधियाँ अपलोड कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा, SHe-Box लोगो का शुभारंभ, राष्ट्रीय PoSH प्रशिक्षण वीडियो, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री का विमोचन तथा प्रत्येक नागरिक के लिए करमयोगी भारत पर उपलब्ध PoSH प्रशिक्षण तक पहुंच शामिल होगी। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी, इसके बाद उनका मुख्य भाषण होगा।

मुख्य सत्रों में PoSH अनुपालन और कार्यस्थल संस्कृति को मजबूत करने पर राष्ट्रीय गोलमेज चर्चा (विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित) और वैश्विक कार्यस्थल सुरक्षा के सर्वोत्तम अभ्यासों पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों एवं बहुपक्षीय संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय गोलमेज चर्चा शामिल होगी। सम्मेलन में सुरक्षित कार्यस्थल के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाने के लिए PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट भी जारी की जाएगी।

इस सम्मेलन में सरकारी और निजी क्षेत्रों की 100 से अधिक संस्थाओं से लगभग 1,500 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम वेबकास्ट के माध्यम से ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है:

यह सम्मेलन PoSH अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अनुपालन को मजबूत करने, SHe-Box को अपनाने को बढ़ावा देने और सुरक्षित व सम्मानजनक कार्यस्थलों को आगे बढ़ाने में भारत की नेतृत्व भूमिका को सुदृढ़ करने का सरकारी प्रयास है।


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