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आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुँचा, आईओएस सागर पहल के तहत तीसरा पोर्ट कॉल

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भारतीय नौसेना का आईएनएस सुनयना, जो  आईओएस सागर  पहल के तहत तैनात है, 21 अप्रैल 2026 को जकार्ता पहुँचा। यह उसके हिंद महासागर क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनल तैनाती का तीसरा पोर्ट कॉल है।

यह पोत, जिसमें 16 मित्र देशों के बहुराष्ट्रीय दल के सदस्य सवार हैं, आगमन से पहले मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य जैसे संकरे मार्गों से होकर गुजरा, जिससे उसकी उच्च स्तरीय समन्वय क्षमता और नौवहन दक्षता का प्रदर्शन हुआ।

 आईओएस सागर , भारत की MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) की दृष्टि का व्यावहारिक रूप है। यह “साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति और शांति के माध्यम से प्रगति” की भावना को दर्शाता है। इस मिशन का हार्बर चरण 16 से 29 मार्च 2026 के बीच भारत में पूरा हुआ, और वर्तमान में यह समुद्री चरण (अप्रैल–मई 2026) में है, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों में पोर्ट कॉल शामिल हैं।

जकार्ता में ठहराव के दौरान, जहाज इंडोनेशियाई नौसेना (TNI AL) के साथ पेशेवर, सामाजिक और खेल गतिविधियों में भाग लेगा। आईएनएस सुनयना के कमांडिंग ऑफिसर ने कोडारेल III (नौसैनिक क्षेत्रीय कमान III) के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की।

निर्धारित कार्यक्रमों में पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, हितधारकों के लिए जहाज का दौरा और डेक रिसेप्शन शामिल हैं। प्रस्थान के समय इंडोनेशियाई नौसेना के साथ एक पासेज एक्सरसाइज (PASSEX) भी आयोजित की जाएगी।

यह पहल भारत की “Neighbourhood First” नीति और MAHASAGAR की सोच को मजबूत करती है, तथा यह संदेश देती है कि “स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक सभी देशों के हित में है।”

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को सरल और किसान हितैषी बनाने पर दिया जोर

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को साहूकारी प्रथाओं, ऊँची ब्याज दरों, जटिल ऋण प्रक्रियाओं और असंवेदनशील व्यवस्था से राहत मिलनी चाहिए।

ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण आवश्यक

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण प्राप्त करना अभी भी आसान नहीं है। किसानों को कई स्तरों की कागजी कार्रवाई, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना अत्यंत जरूरी है।

संवेदनशील और संतुलित व्यवस्था की जरूरत

मंत्री चौहान ने कहा कि व्यवस्था में संवेदनशीलता और संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान किसी के सामने याचक नहीं हैं, बल्कि वे अधिकार और गरिमा के साथ सिस्टम के पास आते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान का ₹18 लाख का ऋण ब्याज बढ़ने से ₹40 लाख हो गया। ऐसे मामलों में वन-टाइम सेटलमेंट जैसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसे सोच-समझकर लागू किया जाना चाहिए। कई बार सैटेलाइट आधारित सत्यापन में त्रुटियां होने से किसानों को परेशानी होती है। इसलिए कृषि विभाग, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक,भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थानों को मिलकर व्यावहारिक और विश्वसनीय प्रणाली विकसित करनी चाहिए।

ग्रामीण बैंकों में मानव संसाधन की कमी

उन्होंने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मनरेगा, पीएम-किसान जैसी योजनाओं के कारण काम का बोझ बढ़ा है, लेकिन स्टाफ सीमित है। किसान कई बार 8-10 किलोमीटर दूर बैंक पहुंचते हैं और लंबी कतारों में समय गंवाते हैं। इसलिए वर्तमान जरूरतों के अनुसार पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रगतिशील किसानों के लिए अधिक वित्तीय सहायता

मंत्री चौहान ने कहा कि केवल किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। आधुनिक खेती जैसे बागवानी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई आदि में अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहायता और ज्ञान उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

एकीकृत खेती को बढ़ावा

उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम जमीन वाले किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को अपनाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के समन्वय की आवश्यकता है।

व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर

उन्होंने वेयरहाउस रसीद वित्त योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। यदि किसानों को संग्रहित उपज के बदले आसान ऋण मिल सके, तो वे उचित समय पर बेहतर कीमत मिलने तक इंतजार कर सकते हैं।

आत्ममंथन और नवाचार का आह्वान

मंत्री चौहान ने सिविल सेवकों से आत्ममंथन करने, क्रियान्वयन में सुधार लाने और नवाचारी सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवा और परिणामों के लिए अधिकारियों को अपनी क्षमता और विचारों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए, ताकि किसानों और देश को अधिक लाभ मिल सके।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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भारत के उपराष्ट्रपतिसी. पी. राधाकृष्णन ने आज आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता की शुरुआत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्र एक ऐसे भारत में कदम रख रहे हैं जो तेजी से बदल रहा है और अवसरों से भरपूर है। उन्होंने वर्तमान समय को देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर बताया, जो परिवर्तनकारी बुनियादी ढांचे और विकास पहलों से चिह्नित है।

उन्होंने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आधुनिक, कुशल और टिकाऊ कनेक्टिविटी के उदाहरण हैं, जो छात्रों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।

“विकसित भारत” के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसमें युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” की भावना इस परिवर्तनकारी यात्रा का मूल है।

छात्रों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को अपनाने तथा विकास को समावेशी, सतत और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा बनाए रखने पर बल दिया।

उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत सफलता से आगे सोचने और अपनी आकांक्षाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने उन्हें नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नवाचार को अपनाने, स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने और स्वदेशी समाधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “विकसित भारत @ 2047” का दृष्टिकोण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक समावेशी विकास पहुंचाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोहों में महिलाएं लगातार अधिक संख्या में सम्मान और पदक प्राप्त कर रही हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। यह परिवर्तन उनकी दृढ़ता, अनुशासन और सहयोगी वातावरण का परिणाम है और भविष्य की पीढ़ियों को एक अधिक समावेशी और प्रगतिशील भारत की ओर प्रेरित कर रहा है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी, योगेश मोहन गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राउरकेला में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  ने आज (21 अप्रैल 2026) ओडिशा के  राउरकेला में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में प्लैनेटेरियम और साइंस सेंटर तथा निर्मल मुंडा परिवेश पथ का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने राउरकेला में ट्राइबल म्यूजियम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी उद्घाटन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सुंदरगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और विरासत अत्यंत आकर्षक हैं। यहां के घने जंगल, पहाड़, झरने और नदियां असीम आकर्षण का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि सुंदरगढ़ की कला और संस्कृति ने ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि को और बढ़ाया है तथा यह क्षेत्र वीर लोगों और खेल प्रेमियों की भूमि भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि राउरकेला में रोजगार और आजीविका के लिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों, सहित ओडिशा के लोग रहते हैं। यह एक कॉस्मोपॉलिटन शहर है जिसने ओडिशा की कला, साहित्य, संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और खेलों को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग का विकास हो। इसी सोच के साथ केंद्र और राज्य सरकारें जनजातीय कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही हैं। इससे सुंदरगढ़ जैसे जनजातीय बहुल जिलों के विकास को गति मिल रही है और जनजातीय समुदायों के आर्थिक उत्थान को प्राथमिकता दी जा रही है।

राष्ट्रपति ने लोगों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोग स्वयं आगे बढ़ें और दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें। उन्होंने सभी से अच्छे इंसान बनने और पीछे छूटे लोगों को आगे लाने का प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हमारा देश 2047 तक “विकसित भारत” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी तरह वर्ष 2036 में ओडिशा राज्य के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण के लिए समग्र विकास और समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण किसानों, मजदूरों, जनजातीय समुदायों, वंचित वर्गों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और विद्यार्थियों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण आबादी के सामूहिक प्रयास और समर्पण से ही संभव होगा।

महासमुंद में नशे पर बड़ा प्रहार: 47 किलो गांजा जब्त, 3 तस्कर गिरफ्तार

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 महासमुंद। जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और कोमाखान थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 47.300 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 23.65 लाख रुपये बताई जा रही है।


कार्रवाई के दौरान एक ट्रक, कार, मोबाइल फोन और नगदी समेत कुल 59.51 लाख रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई है।

नाकेबंदी में पकड़ा गया ट्रक

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ओडिशा से ट्रक के जरिए गांजे की बड़ी खेप लाई जा रही है। सूचना के आधार पर कोमाखान क्षेत्र में नाकेबंदी कर संदिग्ध ट्रक को रोका गया। तलाशी के दौरान चालक सीट के नीचे बनाए गए विशेष चेंबर और प्लास्टिक बोरियों में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ।

मुंगेली में खपाने की थी तैयारी

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गांजे की यह खेप ओडिशा के कालाहांडी से लाई गई थी, जिसे छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में खपाने की योजना थी। जांच में इस तस्करी नेटवर्क के तार ओडिशा के बलांगीर जिले से जुड़े पाए गए हैं।

ये आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद मिराज और रोहित पोंड (बलांगीर, ओडिशा) तथा दीपक साहू (मुंगेली, छत्तीसगढ़) को गिरफ्तार किया है।

तीन महीने में बड़ी कार्रवाई

महासमुंद पुलिस के अनुसार, पिछले तीन महीनों में जिले में 74 मामलों में 5685 किलो से अधिक गांजा जब्त किया जा चुका है और 192 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य कनेक्शनों की गहन जांच में जुटी हुई है।

घर में घुसा तेंदुआ, गांव में हड़कंप; जान बचाकर भागे लोग

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 मनेन्द्रगढ़। जनकपुर वन परिक्षेत्र के खिरकी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंचकर एक घर के अंदर घुस गया। तेंदुए को घर के भीतर बैठे देख परिवार के लोग घबरा गए और जान बचाने के लिए बाहर भागे। देखते ही देखते पूरे गांव में दहशत फैल गई।


जानकारी के अनुसार, तेंदुआ गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व से भटककर गांव में आ गया था। घटना की खबर फैलते ही ग्रामीण अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।

वन विभाग ने की घेराबंदी

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई, ताकि तेंदुआ बाहर निकलकर किसी को नुकसान न पहुंचा सके। इसके बाद सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

घंटों बाद काबू में आया तेंदुआ

वन विभाग की टीम ने कई घंटों की मशक्कत के बाद तेंदुए को काबू में कर सुरक्षित रूप से घर के अंदर से बाहर निकाला। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना रहा और लोग घरों से बाहर निकलने से बचते रहे।

जंगल में छोड़ा जाएगा

अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए तेंदुए को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, आसपास के गांवों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

ग्रामीणों में दहशत

घटना के बाद गांव में डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने और समय-समय पर सूचना देने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते बचा जा सके।

लू और डिहाइड्रेशन से बचाएंगी देसी चीजें, डाइट में शामिल करें ये ठंडक देने वाले फूड्स

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 नई दिल्ली। गर्मी ने अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच लू और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित और ठंडक देने वाली डाइट अपनाना भी बेहद जरूरी हो गया है।


मौसम में लगातार बदलाव—कभी बारिश तो कभी तेज धूप—लोगों को परेशान कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, जिससे लू का प्रभाव और तेज हो सकता है। ऐसे हालात में शरीर में पानी की कमी जल्दी होने लगती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

डाइट में शामिल करें ये देसी चीजें

फालसा का शरबत:
गर्मी के मौसम में फालसा का शरबत काफी फायदेमंद माना जाता है। इसमें विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम मौजूद होते हैं, जो शरीर को ठंडक देते हैं और लू के असर को कम करते हैं।

मखाना:
मखाने को भिगोकर खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन होता है, जो कमजोरी दूर करने में मदद करता है।

कच्चा प्याज:
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता के अनुसार, कच्चे प्याज का सेवन लू से बचाव का सरल उपाय है। यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में सहायक होता है। सलाद के रूप में इसका सेवन लाभकारी है।

तुकमारिया के बीज:
चिया सीड्स के मुकाबले तुकमारिया (सब्जा) के बीज सस्ते और अधिक प्रभावी माने जाते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखते हैं।

कच्चे आम का पानी:
कच्चे आम से बना नमक वाला पानी एक प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन C और मिनरल्स शरीर में पानी की कमी को जल्दी पूरा करते हैं और लू से बचाव करते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हल्का, पौष्टिक और पानी से भरपूर आहार लेना चाहिए। साथ ही, दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और धूप में निकलते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत, पत्नी के सामने हुआ हादसा, पढ़े पूरी खबर

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 मनेन्द्रगढ़। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के जनकपुर पार्क परिक्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और गंभीर घटना सामने आई है। जंगल में महुआ बिनने गए एक दंपति पर जंगली हाथी ने हमला कर दिया, जिसमें पति की मौत हो गई, जबकि पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।


मृतक की पहचान प्रेमलाल के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दंपति खोहरा बीट के जंगल में महुआ बीनने गए थे। इसी दौरान अचानक एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हमले में प्रेमलाल की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी के बावजूद वन विभाग द्वारा समय पर न तो कोई चेतावनी जारी की जाती है और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। विभाग द्वारा मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि भी प्रदान की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से सतर्कता बरती जाती और सूचना दी जाती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

2026 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, IMD की चेतावनी- कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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 नई दिल्ली। देश में बढ़ते तापमान के बीच वर्ष 2026 की गर्मी को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है, जो पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।


लगातार टूट रहे तापमान के रिकॉर्ड

अप्रैल 2024 से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग हर महीने अधिकतम, न्यूनतम या औसत तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मई, जून और जुलाई 2024 में भी कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। 2025 की शुरुआत में भी जनवरी और फरवरी में असामान्य गर्मी देखी गई, हालांकि मार्च में थोड़ी राहत मिली थी।

सुपर अल-नीनो का खतरा

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों NOAA और ECMWF के अनुसार 2026 में अल-नीनो बनने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है, जो आगे चलकर ‘सुपर अल-नीनो’ का रूप ले सकता है। इससे समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के मौसम पर पड़ेगा।

पहाड़ी और तटीय इलाकों में ज्यादा असर

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के इलाके इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और कर्नाटक-महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी गर्मी का असर अधिक रहेगा।

हीटवेव और जल संकट का खतरा

पूर्व, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हीटवेव के दिनों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। सूखी सर्दियों के बाद गर्मी बढ़ने से जल संकट, जंगलों में आग और सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

देश की करीब 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी फसलों के उत्पादन चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। पिछले अल-नीनो वर्षों में भी खरीफ फसलों को नुकसान और निर्यात पर असर देखा गया था।

स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी का असर खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर सबसे अधिक पड़ेगा। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बिजली की मांग में वृद्धि जैसे खतरे बढ़ सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन बना मुख्य कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो-ला नीना जैसे प्राकृतिक चक्र मिलकर तापमान में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर औसत तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जिसका असर भारत में भी स्पष्ट दिख रहा है।

तैयारी के निर्देश

IMD ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कूलिंग सेंटर, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की गर्मी केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी है, जिसके लिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है।

‘बादाम कांड’ के बाद हाउसिंग बोर्ड में कार्रवाई, नपे 2 अधिकारी

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 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बिलासपुर स्थित तिफरा कार्यालय में सामने आए ‘बादाम कांड’ ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। एक युवक द्वारा अफसर की टेबल पर बादाम बिखेरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए दो अधिकारियों को मुख्यालय अटैच कर दिया है।


जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी तरुण साहू पिछले एक वर्ष से फ्लैट रजिस्ट्रेशन की फाइल के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। हर बार उसे फाइल गुम होने की बात कहकर टाल दिया जाता रहा। लगातार हो रही देरी से परेशान होकर युवक 500 ग्राम बादाम लेकर कार्यालय पहुंचा और संबंधित अधिकारी की टेबल पर बिखेरते हुए तंज कसा कि “याददाश्त बढ़ेगी, फाइल मिल जाएगी।”

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए संपदा अधिकारी एल.पी. बंजारे और सहायक पुन्नम बंजारे को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय अटैच कर दिया।

यह मामला एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई जारी है।

मासूम की हत्या कर जंगल में छिपाया शव, अपहरण की झूठी कहानी बनाती रही मां, पढ़े पूरी खबर

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने ढाई साल के मासूम बेटे की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। घटना कापू थाना क्षेत्र के पारेमेर फिटिंगपारा गांव की है।


मिली जानकारी के अनुसार, बोधसाय मंछवार और उसकी पत्नी सोनमति के दो बच्चे हैं—चार साल की बेटी ढूलबाई और ढाई साल का बेटा अनुज। 16 अप्रैल को अनुज अचानक लापता हो गया। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बच्चा आखिरी बार अपनी मां सोनमति के साथ देखा गया था। पूछताछ में सोनमति बार-बार बयान बदलती रही और अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।

इसी बीच पुलिस को गांव के पास जंगल में बच्चे का शव बरामद हुआ। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ करने पर सोनमति ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह बेटे के साथ पैदल जा रही थी। तेज धूप में बच्चा बार-बार गोद में लेने की जिद कर रहा था, जिससे वह गुस्से में आ गई। इसी दौरान उसने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन बोधसाय घर से बाहर गया हुआ था। घर लौटने पर उसे केवल बेटी मिली। अगले दिन सोनमति अकेले घर पहुंची और वह शराब के नशे में थी। पति के पूछने पर उसने बेटे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। दो दिन तक बच्चे का कोई पता नहीं चलने पर बोधसाय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

पीएम विकास योजना के तहत बड़ा कदम: अल्पसंख्यक युवाओं को IIT पटना में मिलेगा उन्नत कौशल प्रशिक्षण

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नई दिल्ली: भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने Indian Institute of Technology Patna (आईआईटी पटना) के साथ पीएम विकास (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना के अंतर्गत एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते का आदान-प्रदान मंत्रालय की निदेशक नेहा गिरी, आईआईटी पटना के निदेशक टी. एन. सिंह तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।

600 युवाओं को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण

इस साझेदारी के तहत बिहार राज्य के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को आईआईटी पटना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोक्रेट और बिजनेस एनालिटिक्स एग्जीक्यूटिव जैसे उभरते और उच्च मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें बेहतर प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करना है। तकनीक आधारित आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल अंतर को कम करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

समावेशी विकास की दिशा में प्रयास

आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ साझेदारी से प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योग से जुड़ाव और बेहतर करियर परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे। यह पहल समावेशी विकास और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

अन्य संस्थानों के साथ भी सहयोग

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मंत्रालय ने  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर,सीएसआईआर–केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान,अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के साथ भी समझौते किए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार हो रहा है।

निष्कर्ष

यह पहल न केवल युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस करेगी, बल्कि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0: खाद्य उद्यमिता को मिलेगा नया प्रोत्साहन

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नई दिल्ली: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-तंजावुर) द्वारा 16 और 17 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय फूड बिजनेस स्टार्टअप सक्षम कार्यक्रम 2.0 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इच्छुक उद्यमियों, छात्रों और प्रारंभिक स्तर के स्टार्टअप संस्थापकों की क्षमताओं को मजबूत करना और उन्हें व्यवस्थित मार्गदर्शन प्रदान करना था।

उद्यमिता कौशल और ज्ञान का विकास

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों के ज्ञान में वृद्धि करना और उन्हें खाद्य व्यवसाय शुरू करने, संचालित करने तथा विस्तार करने की प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी देना था। साथ ही, यह कार्यक्रम खाद्य स्टार्टअप के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता, नियामकीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहा।

देशभर से 82 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 82 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के इच्छुक व्यक्ति, नवोदित उद्यमी और छात्र शामिल थे। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ज्ञान साझा करने और खाद्य व्यवसाय के बदलते परिदृश्य को समझने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े पेशेवरों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। इनमें पैकेजिंग तकनीक, कॉर्पोरेट कानून, प्रशासन एवं कराधान, ब्रांडिंग और विपणन रणनीतियाँ, मूल्य निर्धारण तथा निर्यात के अवसर शामिल रहे।

व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर

सत्रों में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, भंडारण नियंत्रण, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, मशीनरी चयन जैसे संचालनात्मक पहलुओं के साथ-साथ डिजिटल विपणन, ई-कॉमर्स, ग्राहक सहभागिता, व्यवसायिक विचारों का परीक्षण और नए उत्पाद विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

खाद्य सुरक्षा और नीतिगत जानकारी

कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों, सार्वजनिक नीतियों और खाद्य स्टार्टअप को समर्थन देने वाली अनुदान योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

निष्कर्ष

यह कार्यक्रम तकनीकी, प्रबंधकीय और नियामकीय पहलुओं की व्यापक समझ प्रदान करने वाला एक प्रभावी मंच साबित हुआ। इसने प्रतिभागियों को तेजी से विकसित हो रहे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सफल उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया।

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ: भारतीय नौसेना की क्षमता में होगा विस्तार

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कोलकाता: भारतीय नौसेना के लिए डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC) परियोजना के तहत चौथे जहाज DSC A 23 का 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टिटागढ़ में भव्य समारोह के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर दीपा शिवकुमार ने जहाज को लॉन्च किया, जबकि समारोह में वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार (चीफ ऑफ मटेरियल) सहित नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह आयोजन पारंपरिक नौसैनिक रीति-रिवाजों और गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें Titagarh Rail Systems Limited (TRSL) के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जो इस परियोजना का निर्माण कर रही है।

आधुनिक तकनीक से लैस जहाज

लगभग 30 मीटर लंबाई और 380 टन विस्थापन क्षमता वाले इस कैटमरैन-हुल डिजाइन जहाज में बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उत्कृष्ट समुद्री प्रदर्शन की विशेषताएँ हैं। यह जहाज तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों में डाइविंग अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

स्वदेशी तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा

इस परियोजना को भारतीय शिपिंग रजिस्टर के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में व्यापक परीक्षण और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।
करीब 70% उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करते हैं।

नौसेना की क्षमता में होगा इजाफा

इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवॉटर निरीक्षण, बचाव कार्य (Salvage) और तटीय अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आईएनएस सुदर्शिनी की मोरक्को यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न, समुद्री सहयोग को मिला नया बल

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 18 अप्रैल 2026 को कैसाब्लांका मोरक्को की अपनी सफल और सार्थक बंदरगाह यात्रा पूरी कर आगे बढ़ गया। यह दौरा ‘लोकायन 26’ तैनाती के तहत भारत-मोरक्को समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण पर जोर

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेशेवर बातचीत की, जिसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग को लेकर चर्चा हुई। भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने रॉयल मोरक्कन नौसैनिक विद्यालय के कैडेट्स के साथ क्रॉस-डेक विजिट और मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियों में भाग लिया।

राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत

इस यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, वहीं मोरक्को नौसेना की ओर से भी एक विशेष लंच का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने दोनों देशों के बीच पेशेवर और सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया।

वैश्विक मैत्री का संदेश

यह यात्रा भारत और मोरक्को के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों की पुष्टि करती है, जो साझा हितों और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं। अब आईएनएस सुदर्शिनी स्पेन के लास पाल्मास के लिए रवाना हो गया है, जहां वह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश फैलाते हुए अपनी अगली यात्रा जारी रखेगा।

निष्कर्ष

आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की मित्रता और सद्भावना के संदेश को भी आगे बढ़ाती है।

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