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CG NEWS : अनियंत्रित होकर पलटी स्कूल बस, 18 बच्चे थे सवार

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 बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल की बस अनियंत्रित होकर खेत में पलट गई। हादसे के समय बस में करीब 17 से 18 बच्चे सवार थे। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। हादसे में कई बच्चों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


जानकारी के मुताबिक, ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल की बस क्रमांक CG 25 A 0218 बच्चों को लेकर जा रही थी। इसी दौरान सिंघपुर-झाल मार्ग पर खड़सरा और झाल के बीच बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गई।

ग्रामीणों ने बच्चों को बस से बाहर निकाला

हादसे के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने ड्राइवर और कंडक्टर की मदद से बस में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद घायल बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हादसा किस वजह से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद दुर्घटना के कारणों का पता चल सकेगा।

GENESIS EIR 3.0: नए उद्यमियों और नवोन्मेषकों को मिलेगा ₹10 लाख तक का सहयोग

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नई दिल्ली- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने MeitY Startup Hub (MSH) के माध्यम से GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort 3 की शुरुआत की है। यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम महत्वाकांक्षी उद्यमियों, नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप संस्थापकों को अपने नवीन विचारों को तकनीक-आधारित व्यावसायिक उपक्रमों में बदलने के लिए सहायता प्रदान करेगा।

GENESIS EIR 3.0 का शुभारंभ 4 अगस्त 2026 को कोयंबटूर स्थित रथिनम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित GENESIS NextGen Startup Summit – Coimbatore Edition के दौरान किया गया। कार्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक आवेदक 3 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

शुरुआती चरण के नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा

GENESIS EIR 3.0, GENESIS (Gen-Next Support for Innovative Startups) योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में उभर रहे स्टार्टअप और नवोन्मेषकों की पहचान करना, उन्हें सहयोग देना और आगे बढ़ाना है।

Entrepreneur-in-Residence घटक के तहत चयनित नवोन्मेषकों को शुरुआती विचारों को प्रोटोटाइप और पायलट-रेडी समाधान में बदलने के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

MeitY Startup Hub द्वारा लागू GENESIS EIR Cohort-3 के तहत चयनित आवेदकों को ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। इसके अलावा प्रतिभागियों को GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, उत्पाद विकास, MVP तैयार करने, प्रोटोटाइपिंग, तकनीकी सत्यापन और व्यावसायीकरण के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

चयनित नवोन्मेषकों को प्रमुख रूप से मिलेंगे:

  • ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता

  • GENESIS इनक्यूबेटरों तक पहुंच

  • विशेषज्ञों से वन-टू-वन मेंटरशिप

  • उत्पाद विकास और MVP तैयार करने में सहयोग

  • इनक्यूबेशन और बिजनेस ग्रोथ सपोर्ट

  • प्रोटोटाइप और तकनीकी विकास के लिए सहायता

  • उद्योग एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से संपर्क

  • व्यावसायीकरण और स्टार्टअप विकास के लिए मार्गदर्शन

DeepTech और उभरती तकनीकों पर विशेष फोकस

GENESIS EIR 3.0 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT, DeepTech, Artificial Intelligence/Machine Learning (AI/ML), Internet of Things (IoT), Semiconductor/VLSI, Cybersecurity, Blockchain, Quantum Technologies तथा AR/VR, Spatial & Immersive Technologies जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले नवोन्मेषकों को समर्थन दिया जाएगा।

कार्यक्रम में Technology Readiness Level (TRL) 1 से 4 तक के विचारों और समाधानों को पात्र माना गया है। इसमें आइडिएशन, Proof of Concept, प्रोटोटाइप, MVP और शुरुआती वैलिडेशन चरण शामिल हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस कार्यक्रम के लिए भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों में उद्यमी, नवोन्मेषक, शोधकर्ता, छात्र तथा शुरुआती चरण के स्टार्टअप के संस्थापक या सह-संस्थापक शामिल हैं।

स्टार्टअप टियर-II या टियर-III शहर में आधारित होना चाहिए और यदि स्टार्टअप पहले से पंजीकृत है, तो आवेदन की तारीख तक उसकी आयु दो वर्ष से कम होनी चाहिए। साथ ही, उसी प्रस्तावित विचार या स्टार्टअप के लिए किसी केंद्रीय या राज्य सरकार की योजना के तहत ₹10 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई होनी चाहिए।

3 सितंबर तक आवेदन का मौका

GENESIS EIR Cohort-3 के लिए आवेदन विंडो 4 अगस्त 2026 से 3 सितंबर 2026 तक खुली है। इच्छुक नवोन्मेषक और उद्यमी MeitY Startup Hub के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

₹490 करोड़ के GENESIS मिशन का हिस्सा

GENESIS यानी Gen-Next Support for Innovative Startups MeitY Startup Hub की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप को खोजने, सहयोग देने, विकसित करने और गति प्रदान करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।

कुल ₹490 करोड़ के बजट प्रावधान वाली इस योजना में Entrepreneur-in-Residence, Pilot, Investment और DeepTech Funding जैसे घटक शामिल हैं। यह योजना स्टार्टअप्स को शुरुआती विचार और प्रयोग से लेकर वैलिडेशन, निवेश और विस्तार तक सहायता देने पर केंद्रित है।

GENESIS EIR 3.0 के माध्यम से MeitY Startup Hub का लक्ष्य देशभर के नवोन्मेषकों को आवश्यक वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन उपलब्ध कराकर विचारों को बाजार के लिए तैयार तकनीकी समाधानों और स्केलेबल स्टार्टअप में बदलना है। यह पहल भारत के DeepTech और तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को भी गति प्रदान करेगी।

तालाबीरा II एवं III कोयला खदान: ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और सतत विकास की दिशा में भारत की नई उपलब्धि

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भारत सरकार के घरेलू कोयला उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों को नामित प्राधिकरण (Nominated Authority—NA) के तहत आवंटित और नीलाम की गई कोयला खदानों के माध्यम से और मजबूती मिल रही है। 2 मई 2016 को कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 की अनुसूची III के तहत NLC India Ltd. को आवंटित तालाबीरा II एवं III ओपन कास्ट कोयला खदान ऐसी NA-आवंटित खदानों में शामिल है, जो उत्पादन, डिस्पैच, प्रौद्योगिकी अपनाने, सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, रोजगार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

ओडिशा के संबलपुर और झारसुगुड़ा जिलों में स्थित यह खदान घरेलू कोयला उपलब्धता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में तालाबीरा II एवं III ने 19.14 मिलियन टन (MT) का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कोयला उत्पादन दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.28% की साल-दर-साल वृद्धि है। खदान ने 21 मार्च 2026 को 1,26,138.07 टन का सर्वाधिक दैनिक उत्पादन तथा मार्च 2026 में 3.39 MT का सर्वाधिक मासिक उत्पादन भी दर्ज किया।

उत्पादन के साथ-साथ खदान ने कोयला डिस्पैच में भी मजबूत प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 में खदान ने 17.69 MT का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक डिस्पैच हासिल किया। इसमें लगभग 10.72 MT बिजली क्षेत्र को तथा 6.97 MT गैर-विनियमित क्षेत्र को आपूर्ति किया गया। तालाबीरा II एवं III से प्राप्त कोयला कई राज्यों में स्थित विद्युत उत्पादन संयंत्रों को उपलब्ध कराया जाता है, जिनमें NTPC दर्लीपाली, NTPC गाडरवारा, NTPC खरगोन, NTPC कुडगी तथा ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के अन्य विद्युत संयंत्र शामिल हैं।

उत्पादन शुरू होने के बाद से खदान ने लगातार वृद्धि की है। 14 अगस्त 2026 तक संचयी कोयला उत्पादन 72.23 MT और संचयी डिस्पैच 70.89 MT तक पहुंच गया है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सरकार के कोयला-ब्लॉक आवंटन ढांचे के तहत आवंटित कोयला संसाधनों को परिचालन में लाकर किस प्रकार ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिचालन दक्षता

तालाबीरा II एवं III में परिचालन दक्षता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) RFID आधारित वाहन सत्यापन, AI-सक्षम कैमरों तथा तकनीक-सक्षम प्रवेश और निकास द्वारों के माध्यम से कोयला परिवहन एवं डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करता है।

DLMS लागू होने के बाद औसत एंट्री-गेट प्रोसेसिंग समय 1.42 मिनट से घटकर 0.54 मिनट प्रति वाहन हो गया, जबकि टैरे वेटमेंट का समय 1.34 मिनट से घटकर 0.48 मिनट रह गया। खदान में धूल-नियंत्रण प्रणाली से युक्त सरफेस माइनर्स, GPS आधारित फ्लीट मैनेजमेंट और जियो-फेंसिंग, GNSS रिसीवर के साथ 3D टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनिंग, ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, मशीनीकृत ट्रक लोडिंग, निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) और CCTV निगरानी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

तालाबीरा II एवं III OCP में डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) का कार्यान्वयन कोयला परिवहन और डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी एवं नियंत्रण के लिए किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन

खदान के परिचालन प्रदर्शन के साथ जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल खनन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। खदान पट्टा क्षेत्र के भीतर 23.43 हेक्टेयर में पौधरोपण किया गया है, जिसमें 64,288 पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पट्टा क्षेत्र के बाहर 29.48 हेक्टेयर में 65,202 पौधे लगाए गए हैं।

खदान में 11.68 kW की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें आसपास के गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और खदान के बुनियादी ढांचे में सौर प्रकाश व्यवस्था शामिल है।

धूल नियंत्रण के लिए वेट ड्रिलिंग, जल छिड़काव, फॉग कैनन, फिक्स्ड स्प्रिंकलिंग सिस्टम, विंड बैरियर, ट्रक-वॉशिंग सिस्टम और मशीनीकृत सड़क सफाई जैसी व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं।

सुरक्षा को प्राथमिकता

सुरक्षा खदान के प्रदर्शन का एक प्रमुख हिस्सा है। स्थापना के बाद से यहां कोई घातक दुर्घटना नहीं हुई है। सुरक्षा उपायों में सुरक्षा प्रबंधन योजना, बेहतर हॉल रोड एवं यातायात प्रबंधन, PPE अनुपालन, मजबूत ब्लास्टिंग प्रक्रियाएं, सुरक्षा प्रशिक्षण और ARAN Safety App के माध्यम से नियर-मिस रिपोर्टिंग शामिल हैं।

खदान को Annual Mines Safety Fortnight के तहत कई पुरस्कार एवं मान्यताएं प्राप्त हुई हैं। साथ ही, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक लगातार पांच वर्षों में कोयला मंत्रालय के Star Rating Evaluation के तहत Five-Star Rating हासिल की गई है।

रोजगार और कौशल विकास

खदान का प्रभाव उत्पादन और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है। तालाबीरा II एवं III से 3,277 रोजगार अवसर जुड़े हैं, जिनमें 1,277 प्रत्यक्ष और परिवहन तथा संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से लगभग 2,000 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

5 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (PAPs) को भुवनेश्वर स्थित Skill Development Institute में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 101 ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को RSETI तथा PMKVY केंद्रों के माध्यम से सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में प्रशिक्षित किया गया है।

सामुदायिक विकास और CSR

सामुदायिक विकास भी परियोजना के व्यापक प्रभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में ₹5.32 करोड़ का CSR व्यय किया गया, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, शिक्षा, स्कूल परिवहन, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सौर प्रकाश व्यवस्था जैसी पहलों को समर्थन दिया गया।

स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविरों से लगभग 1,500 लोगों को लाभ मिला, जबकि टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति से लगभग 10,000 लोग लाभान्वित हुए।

वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 तक ₹4.20 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए जा चुके हैं। इन पहलों में पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं में सहायता, सौर प्रकाश व्यवस्था, स्कूल और आंगनवाड़ी बुनियादी ढांचा, ग्रामीण सड़कें, सामुदायिक सुविधाएं तथा जलाशयों के पुनरुद्धार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

तालाबीरा II एवं III OCP, NLC India Ltd. द्वारा आयोजित मेगा मेडिकल कैंप।

ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान

2016 में आवंटन से लेकर उच्च क्षमता वाले निरंतर उत्पादन तक, तालाबीरा II एवं III ने यह प्रदर्शित किया है कि परिचालन में लाए गए कोयला संसाधन किस प्रकार घरेलू कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी आधारित खनन, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और स्थानीय विकास में योगदान दे सकते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उत्पादन और डिस्पैच, 72.23 MT के संचयी उत्पादन, 70.89 MT के संचयी डिस्पैच तथा इसके मापनीय सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों के साथ, तालाबीरा II एवं III भारत की ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के व्यापक विजन को समर्थन देने वाले NA-आवंटित कोयला संसाधनों के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड कर्मचारी से 63 लाख की ठगी

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 देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने एक रिटायर्ड फैक्ट्री कर्मचारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर करीब 63 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और उनकी जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली।


ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित सुरेश इंग्ले ने पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए देवास पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह की तलाश शुरू की। करीब 127 दिनों तक चले ऑपरेशन में 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमों ने देश के 17 राज्यों के 33 जिलों में कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय कर गिरोह से जुड़े आरोपियों और उनके नेटवर्क का पता लगाया।

12 आरोपी गिरफ्तार, 11 जेल भेजे गए

पुलिस ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में दबिश देकर गिरोह के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें से 11 आरोपियों को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। वहीं, पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी कमलकान्ति को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को पूछताछ में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

54.84 लाख रुपये बरामद

पुलिस कार्रवाई में ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा बरामद किया गया है। आरोपियों के कब्जे और उनके बैंक खातों से पुलिस ने 54 लाख 84 हजार रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मामलों में रकम की रिकवरी चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा सुरक्षित किया जा सका।

एसपी ने कहा- कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं

देवास के पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने लोगों को साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर डराता है और पैसों की मांग करता है, तो घबराने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक माध्यम पर दें।

 

सावन का आखिरी सोमवार आज: भगवान शिव को जरूर करें ये 5 काम, जानें पूजा के जरूरी नियम

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 सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिव मंदिरों में दर्शन करते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक कर महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं। आज 24 अगस्त 2026 को सावन का आखिरी सोमवार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।


सावन के अंतिम सोमवार को भक्त भगवान शिव की आराधना के साथ दान-पुण्य और अच्छे कार्य कर इस पवित्र महीने का समापन कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस दिन किए जाने वाले पांच सरल और महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में।

1. शिवलिंग पर करें जलाभिषेक

सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं। जिन घरों में गंगाजल से पूजा करने की परंपरा है, वहां श्रद्धा के अनुसार गंगाजल भी अर्पित किया जा सकता है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाना भगवान शिव के प्रति समर्पण, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

2. भगवान शिव को अर्पित करें बेलपत्र

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के आखिरी सोमवार को ताजे बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय श्रद्धालु भगवान शिव का ध्यान और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय है। हालांकि, बेलपत्र चुनने और अर्पित करने की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है।

3. करें 'ॐ नमः शिवाय' का जाप

'ॐ नमः शिवाय' भगवान शिव से जुड़ा प्रमुख मंत्र माना जाता है। सावन के आखिरी सोमवार को पूजा के दौरान, जलाभिषेक करते समय या ध्यान लगाते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

मंत्र जाप मन को शांत और एकाग्र करने में मदद कर सकता है। कुछ समय शांत बैठकर शिव नाम का स्मरण करना भी इस पवित्र दिन को आध्यात्मिक रूप से खास बना सकता है।

4. शिव मंदिर जाएं या घर पर करें पूजा

अगर संभव हो तो सावन के आखिरी सोमवार को शिव मंदिर जाकर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना करें। यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर पर भी सरल तरीके से पूजा की जा सकती है।

घर पर पूजा के लिए पूजा स्थल की साफ-सफाई करें, दीपक जलाएं, शिवलिंग पर जल अर्पित करें, बेलपत्र और फूल चढ़ाएं, 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें। पूजा के बाद कुछ समय शांत बैठकर महादेव का ध्यान करें।

5. दान-पुण्य और अच्छे कार्य करें

हिंदू धर्म में पूजा के साथ दान और सेवा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सावन के आखिरी सोमवार पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या आवश्यक सामग्री का दान किया जा सकता है।

किसी जरूरतमंद को भोजन कराना, पशु-पक्षियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करना या किसी की मदद करना भी सेवा और करुणा का भाव दर्शाता है।

सावन के आखिरी सोमवार पर किन बातों का रखें ध्यान?

सावन सोमवार का व्रत और पूजा करने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार खान-पान और दिनचर्या में संयम रखते हैं। इस दिन साफ-सफाई, सात्विकता और संयम का विशेष ध्यान रखा जाता है।

साथ ही किसी से विवाद करने, कठोर शब्द बोलने या किसी को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में दिखावे से अधिक सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक भाव का महत्व होता है।

सरल तरीके से करें महादेव से प्रार्थना

सावन के आखिरी सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए लंबी या जटिल पूजा करना जरूरी नहीं है। जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप और आरती के बाद आंखें बंद कर भगवान शिव से अपने और परिवार के लिए शांति, शक्ति, सुख-समृद्धि और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

शांत मन से 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और सच्चे मन से अपनी प्रार्थना महादेव को अर्पित करें।

नोट: पूजा-पाठ और धार्मिक उपायों से जुड़े फल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज और MBBS की सीटें बढ़ाने का उद्देश्य ही यही है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक बच्चों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिले।


जायसवाल ने कहा है कि डोमिसाइल को लेकर अगर कहीं कोई शंका या शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी।व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाया गया है। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कहीं नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया गया तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने मेहनत की है, उनके भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाना हमारी उपलब्धि है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों को ही मिले। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।

नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग

पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी काउंसलिंग, मेरिट और आवंटन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रचलित प्रवेश नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपादित की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग समिति ने नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नियम 7 के तहत होगा सत्यापन

छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) स्नातक प्रवेश नियम, 2025 के नियम 7 के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीयन, प्राथमिकता क्रम का निर्धारण, आवंटन, मूल दस्तावेजों की संवीक्षा एवं प्रवेश की प्रक्रिया शामिल है। पात्रता परीक्षण के दौरान मूल निवासी प्रमाण-पत्र, श्रेणी/संवर्ग संबंधी प्रमाण-पत्र तथा नियमानुसार अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवंटन के बाद अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और उनके सत्यापन में पात्र पाए जाने के उपरांत ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।

गलत जानकारी दी तो निरस्त होगा प्रवेश

प्रवेश नियम के नियम 12 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा झूठी या गलत जानकारी देकर अथवा प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर प्रवेश प्राप्त किया गया हो, या प्रवेश के बाद किसी भी समय यह पाया जाए कि अभ्यर्थी को किसी त्रुटि अथवा चूक के कारण प्रवेश प्राप्त हो गया है, तो नियमानुसार उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। मूल निवासी अथवा अन्य दस्तावेजों को लेकर कोई शिकायत या तथ्य सामने आने पर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।

अफवाहों से बचें, पोर्टल पर करें शिकायत दर्ज

राज्य काउंसलिंग समिति ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि काउंसलिंग को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रम या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। किसी भी शंका, समस्या या शिकायत की स्थिति में अभ्यर्थी अधिकृत काउंसलिंग पोर्टल पर Candidate Login में उपलब्ध "Candidates Grievances and Query Redressal System" के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अथवा काउंसलिंग शाखा के ई-मेल cgdme.counseling@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

 

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।


छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित करने पर केंद्र सरकार द्वारा ₹30 हजार और राज्य सरकार द्वारा ₹15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार 3 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर लगभग ₹1 लाख 8 हजार की सब्सिडी उपलब्ध है। डीएमएफ वाले क्षेत्रों में अनुदान की अंतर राशि डीएमएफ से उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अधिक से अधिक परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

सौर ऊर्जा से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही नारी शक्ति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें अब सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित करने का कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 82 हजार स्व-सहायता समूहों से 30 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारी माताएं-बहनें प्रतिभा और उद्यमशीलता से परिपूर्ण हैं। सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों से उन्हें जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप सार्थक सिद्ध हुआ है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के एक मंच पर आने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने से निश्चित रूप से प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें सूर्य के रूप में ऊर्जा का असीम स्रोत दिया है। घरों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करके परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो रहा है और लगभग ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। आने वाले समय में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग का और विस्तार किया जाना चाहिए। इससे ऊर्जा पर होने वाले व्यय में कमी के साथ किसानों को भी दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विकास की मजबूत नींव रखी गई है और अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसे नई गति मिल रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संतोष मिश्रा ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए विचारों, संभावनाओं और संकल्पों को साझा करने का प्रभावी मंच बना है। प्रदेश में हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों, वेंडर्स, वित्तीय संस्थाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘हर घर सोलर, हर घर ऊर्जा आत्मनिर्भर’ के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम परिसर में सोलर उद्योगों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सोलर पैनल, उपकरणों, नवीन तकनीकों और हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन की डायरेक्टरी का विमोचन भी किया। डायरेक्टरी में प्रदेशभर के एसोसिएशन पदाधिकारियों और वेंडर्स के संपर्क विवरण के साथ शासन की ऊर्जा संबंधी योजनाओं की उपयोगी जानकारी संकलित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति एवं वेंडर्स, बैंक अधिकारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मंत्री केदार कश्यप के काफिले से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, 6 घायल

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 कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में रविवार को वन मंत्री केदार कश्यप के काफिले के साथ बड़ा सड़क हादसा हो गया। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के घोड़ागांव के पास NH-30 पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने मंत्री के वाहन को साइड से टक्कर मार दी। इसके बाद अनियंत्रित स्कॉर्पियो काफिले में चल रही फॉलो वाहन से जा भिड़ी।


हादसे में 6 लोग घायल हुए हैं। इनमें चार पुलिस जवानों और फॉलो वाहन के चालक की हालत गंभीर बताई जा रही है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि काफिले की तीन गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।

घोड़ागांव के पास हुआ हादसा

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मंत्री केदार कश्यप का काफिला NH-30 से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही स्कॉर्पियो ने मंत्री के वाहन को साइड से टक्कर मार दी। इसके बाद स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पीछे चल रही फॉलो वाहन से टकरा गई।

दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए कोंडागांव जिला अस्पताल पहुंचाया।

घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे मंत्री

हादसे की जानकारी मिलने के बाद वन मंत्री केदार कश्यप भी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायलों का हालचाल जाना और डॉक्टरों से उनके उपचार की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

हादसे की जांच जारी

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

पत्नी संग भिलाई पहुंचे CM साय, पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में हुए शामिल

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 दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भिलाई पहुंचे। यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा वाचित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर कथा का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया।


सीएम साय ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर देवाधिदेव भगवान महादेव की विशेष कृपा है। प्रदेश में भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर विराजित देवी-देवताओं की भी असीम कृपा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों में आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है।

साइबर जागरूकता पोस्टर का किया विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साइबर जागरूकता से संबंधित पोस्टर का विमोचन भी किया। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने की अपील की।

सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन भिलाई में भक्ति और आस्था का माहौल रहा। मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

तिहारू भी जान गया है, क्या है सुराज

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 छगन लाल लोन्हारे - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य गाँवों और शहरों के द्वार पर पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गत माह आयोजित इस अभियान के तहत जनता से सीधे संवाद और विकास कार्यों को गति दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन पोर्टल पर जा सकते हैं।


बस्तर का आयतु हो या सरगुजा जिले का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार अपनी बात बेबाकी से प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय के समक्ष खड़े होकर कह सकता है कि साहब हमारे यहां पीडीएस यानी सरकारी उचित मूल्य की दुकान का अनाज एवं अन्य खाद्यान सामग्री किफायती दर पर और सही समय पर मिल रहा है अथवा नहीं ? सुशासन जो कि गुड गवर्नेस कहने पर आसानी से लोगों के जहन में बसता है इसका वास्तविक अर्थ है ऐसा शासन जो लोक-केंद्रित हो, पारदर्शी हो और जिसमें जनता की आवाज सर्वाेपरि हो।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रशासन की सहजता से पहुंच

पिछले दिनों सफलता पूर्वक सम्पन्न सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने औचक ग्रामीणों के बीच पहुँचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि शासन को इस प्रकार संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचे। सुशासन तिहार इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। इसी मंशा से प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों ने भी गाँव की चौपाल में अपने मुखिया के समक्ष विभिन्न सार्वजनिक जरूरतों के बारे में प्रमुखता से अपनी बात रखी। चाहे वह हेण्डपम्प की हो या तालाब में घाट का निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाडी भवन, पहुंचमार्ग का निर्माण अथवा विद्युत लाईन का विस्तार, मध्यान्ह भोजन की बात हो या स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के संबंध में अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान

सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की छोटी-छोटी सार्वजनिक जरूरतों को मौके पर ही तुरन्त अपनी मंजूरी प्रदान की। गांव वालों के बीच हेलीकॉप्टर का अचानक उतरना लोगों के लिए कौतूहल का विषय होता है, उनके बीच प्रदेश के मुखिया उनके दुःख-दर्द का हालचाल जानने आए हैं, वह भी बैशाख-जेठ महिने की तपती दोपहरी में। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीण भी सहज होकर आत्मीयता से अपनी बात रखते। मुख्यमंत्री भी उनकी सार्वजनिक जरूरतों की मांग को मौके पर ही पूरा कर देते। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसानों की विभिन्न समस्याओं का यथा संभव तुरन्त समाधान करने इस वर्ष पूरे प्रदेश में 01 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार संचालित किया गया।

ग्रामीणों से चौपाल में समस्याओं तथा जरूरतों की भी ली जानकारी

छत्तीसगढ़ में सरकार और जनता के बीच परस्पर संवाद के एक प्रभावी माध्यम के रूप में सुशासन तिहार संचालित हुआ जो सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया। इस वर्ष भी प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखण्डों में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अभियान दलों का गठन कर उन्हें गांवों में भेजा गया। राज्य में कुल 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत गांव की संख्या 19 हजार 820 के आसपास हैं। अभियान के तहत् विभिन्न विभागों के हजारों अधिकारी और कर्मचारी अलग-अलग जत्थों में पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गांवों में रात रूक कर ग्रामीणों से चौपाल में उनकी समस्याओं तथा जरूरतों की जानकारी भी ली।

शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में भाग लिया। मुख्यमंत्री और सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों तथा प्रभारी सचिवों ने इस दौरान विभिन्न जिलों के गांवों का आकस्मिक दौरा कर सुशासन तिहार का सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हुए शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन भी किया। अभियान के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अन्त्योदय अन्न योजना, अनाज भण्डारण और वितरण की स्थिति, भौगोलिक दृष्टि से पहुंचविहीन क्षेत्रों में मानसून के पहले आवश्यक वस्तुओं के समुचित भण्डारण, बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की भी समीक्षा की गई।

श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व - प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा

महात्मा गांधी नरेगा तथा अन्य रोजगार मूलक कार्यों की प्रगति और उनमें लगे श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व - प्रकरणों के निराकरण के अंतर्गत आविवादित नामांतरण, बटवारा और सीमांकन के मामलों की स्थिति, पेयजल व्यवस्था और पेयजल स्त्रोंतो की साफ-सफाई सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल ग्राम योजना, विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाईनों के समुचित रख-रखाव, कृषि पम्पों के विद्युतिकरण और एकल बत्ती कनेक्शन से संबंधित शासकीय प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

स्वाइन फ्लू की एंट्री से दुर्ग में बढ़ी सतर्कता, बच्ची H1N1 पॉजिटिव

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 दुर्ग। जिले में स्वाइन फ्लू का पहला पुष्ट मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 2 साल 11 माह की बच्ची की जांच रिपोर्ट H1N1 पॉजिटिव आई है। बच्ची का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


सिविल सर्जन डॉ. आशीष कुमार मिंज के अनुसार, बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के चलते दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वाइन फ्लू की आशंका को देखते हुए उसका आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया गया। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।

परिवार के सदस्यों के भी लिए गए सैंपल

बच्ची की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए हैं। विभागीय टीम ने बच्ची के घर और आसपास के क्षेत्र में सर्वे शुरू कर दिया है। संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के भी सैंपल लिए गए हैं और उनकी जांच कराई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संक्रमण के प्रसार की आशंका को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।

तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी प्रमुख लक्षण

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर लोगों को लापरवाही न बरतते हुए तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी गई है।

दुर्ग जिले में H1N1 संक्रमण का यह पहला पुष्ट मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से बिगड़े हालात, कई गांवों का संपर्क टूटा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है, जबकि कुछ जगह सड़कें जलमग्न होने और पुराने पुलों को नुकसान पहुंचने से आवागमन मुश्किल हो गया है। 

उफान पर नदियां, गांवों में बढ़ी परेशानी

लगातार बारिश के बाद कई नदी-नालों में पानी तेजी से बढ़ा है। सूरजपुर के ओड़गी ब्लॉक का रसौकी गांव करीब छह दिनों से लगभग कटा हुआ है, जहां बरगा नदी के जलस्तर बढ़ने के बाद तहसील और जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क और पुलों पर भी असर

बारिश का असर राज्य के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं और पुराने पुलों को नुकसान पहुंचने से आवाजाही बाधित हुई है। इससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।

12 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का दौर आगे भी जारी रह सकता है। राज्य के 12 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिनमें सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, बेमेतरा और कबीरधाम समेत अन्य जिले शामिल हैं। 

राहत और बचाव पर प्रशासन की नजर

लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राहत एवं बचाव दलों को भी जरूरत के अनुसार तैनात किया गया है। प्रशासन लोगों से उफनती नदियों और नालों को पार करने से बचने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है। 

बड़ी बात

छत्तीसगढ़ में मानसून की बारिश ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के कमजोर सड़क और पुल नेटवर्क की समस्या को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांवों का संपर्क बनाए रखना और प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर बड़ा सवाल: रॉकेट लॉन्च लागत में भारत सबसे महंगा?

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नई दिल्ली- भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लंबे समय से अपनी कम लागत और “frugal engineering” के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन Cambridge University और Politecnico di Torino के शोधकर्ताओं की एक नई peer-reviewed study ने इसी धारणा पर सवाल खड़े किए हैं।

अध्ययन के अनुसार, 2025 में भारत से Low Earth Orbit (LEO) में 1 किलोग्राम payload भेजने की अनुमानित लागत करीब $13,302 प्रति किलोग्राम थी। यह अध्ययन में शामिल प्रमुख space powers में सबसे अधिक है।

भारत की लागत अमेरिका से करीब चार गुना

अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार 2025 में अनुमानित LEO launch cost इस प्रकार थी:

  • भारत — $13,302/kg

  •  यूरोप — $9,897/kg

  •  रूस — $6,682/kg

  •  चीन — $5,809/kg

  •  जापान — $5,287/kg

  •  अमेरिका — $3,225/kg

वैश्विक औसत करीब $3,868/kg था। यानी भारत का अनुमानित per-kilogram cost अमेरिका के मुकाबले लगभग चार गुना था।

भारत की लागत इतनी ज्यादा क्यों?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।

यह आंकड़ा किसी ग्राहक से वसूली जाने वाली सीधी commercial launch price नहीं है। यह शोधकर्ताओं द्वारा निकाला गया औसत cost-per-kilogram estimate है।

शोध के अनुसार भारत में अपेक्षाकृत छोटे payloads और कम launch frequency के कारण एक rocket launch की fixed लागत कम kilograms पर distribute होती है। इससे हर kilogram की अनुमानित लागत बढ़ जाती है।

दूसरी ओर, अमेरिका में बड़े rockets, ज्यादा launch frequency और reusable launch systems ने cost efficiency को काफी बढ़ाया है।

 भारत की “कम लागत वाली Space Power” वाली छवि पर सवाल

भारत की ISRO को लंबे समय से कम लागत में बड़े space missions पूरा करने के लिए सराहा जाता है।

उदाहरण के तौर पर, Cambridge Judge Business School ने भी भारत के Mars Orbiter Mission और Chandrayaan-3 को relatively modest budgets में हासिल किए गए महत्वपूर्ण space achievements के रूप में रेखांकित किया है।

लेकिन नई study एक अलग चीज मापती है:

एक पूरे space mission की कुल लागत नहीं, बल्कि Low Earth Orbit तक 1 kilogram payload पहुंचाने की अनुमानित लागत।

इसलिए दोनों आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

Study कितनी बड़ी थी?

शोधकर्ताओं Alessio Terzi और Francesco Nicoli ने दशकों के rocket-launch data का इस्तेमाल किया। संबंधित research में हजारों launches का database इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ launch technology और experience से costs कैसे बदलती हैं।

शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि launch frequency और accumulated experience लागत घटाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका को क्यों मिल रहा है बड़ा फायदा?

अमेरिका के space-launch ecosystem में बड़ी commercial कंपनियां और high-frequency launch operations हैं।

विशेष रूप से SpaceX ने reusable rockets और लगातार launches के जरिए launch economics को बदल दिया है।

Cambridge की एक अन्य 2026 analysis के अनुसार, 2025 में SpaceX का global orbital payload market में करीब 75% हिस्सा था।

इस तरह बड़े पैमाने पर launches होने से infrastructure, technology और operational experience की लागत ज्यादा missions में spread होती है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

यह study भारत के बढ़ते commercial space sector के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा सकती है।

भारत अब सिर्फ सरकारी space missions तक सीमित नहीं रहना चाहता। देश में private launch companies और satellite businesses तेजी से विकसित हो रहे हैं।

ऐसे में वैश्विक launch market में प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को:

  •  launch frequency बढ़ानी होगी

  •  ज्यादा payload capacity विकसित करनी होगी

  •  reusable launch technology पर काम बढ़ाना होगा

  •  private-sector participation को मजबूत करना होगा

  •  economies of scale हासिल करनी होंगी

 क्या इसका मतलब है कि ISRO के सभी missions महंगे हैं?

नहीं।

यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि भारत का हर space mission अमेरिका से महंगा है।

Study का आंकड़ा खास तौर पर estimated cost per kilogram to Low Earth Orbit से संबंधित है। यह किसी एक मिशन की कुल लागत या ISRO की पूरी space programme की लागत को नहीं दर्शाता।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत अगले दशक में अपने space economy को तेजी से विस्तार देने की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में global launch market में कम लागत और high-frequency launches भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

इस study का संदेश साफ है:

भारत ने कम लागत वाले space missions में शानदार सफलता हासिल की है, लेकिन commercial orbital launch economics में अभी अमेरिका और अन्य प्रमुख space powers से बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 Bottom Line

Cambridge-linked research के अनुसार 2025 में भारत का estimated LEO launch cost $13,302 प्रति किलोग्राम था—major space powers में सबसे ज्यादा।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत का पूरा space programme महंगा है। असल चुनौती launch scale, payload capacity, launch frequency और reusable technology में है।

अगर भारत इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार करता है, तो उसकी बढ़ती private space industry आने वाले वर्षों में global launch market में ज्यादा competitive बन सकती है।

मुंबई में गणेश प्रतिमा गिरने से बड़ा हादसा: 2 की मौत, 5 घायल

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मुंबई - मुंबई के भुलेश्वर इलाके में शनिवार रात गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। 22 फीट ऊंची ‘भुलेश्वरचा राजा’ गणेश प्रतिमा आगमन जुलूस के दौरान अचानक गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।

कहां और कैसे हुआ हादसा?

यह घटना रात करीब 10 बजे भुलेश्वर के बालाराम मर्चेंट रोड, जय अंबे चौक के पास हुई। प्रतिमा को बायकुला से भुलेश्वर ले जाया जा रहा था और पंडाल से करीब 50–60 मीटर पहले यह अचानक असंतुलित होकर गिर गई। 

 दो लोगों की मौत

हादसे में संकेत नेवशे (33) और ब्रिजेश हेमंत जोशी (30) की मौत हो गई। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।

घायलों में दो बच्चे—5 साल की लावण्या और 7 साल की दिव्या भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार घायल सभी पांच लोगों की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।

प्रतिमा गिरने की वजह क्या थी?

शुरुआती जानकारी में प्रतिमा के सपोर्टिंग फ्रेम के कुछ nuts और bolts ढीले होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी बताया है कि प्रतिमा के असंतुलित होने की संभावना की जांच की जा रही है। हादसे की अंतिम वजह अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है। 

मौके पर पहुंचीं राहत टीमें

हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, 108 एंबुलेंस और BMC की टीमों को मौके पर भेजा गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के साथ इलाके में भीड़ और यातायात को नियंत्रित किया गया।

पुलिस की जांच जारी

हादसे को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिमा के गिरने के पीछे फ्रेम की तकनीकी खराबी, असंतुलन या परिवहन व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं। 

बड़ी बात

गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच हुए इस हादसे ने बड़ी और भारी गणेश प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन और स्थापना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज और घटना की पूरी जांच पर है। 

हादसे में 2 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 लोग घायल हुए हैं। प्रतिमा गिरने की सटीक वजह की जांच जारी है।

ओडिशा तट के पास बड़ा समुद्री हादसा: 24 क्रू सदस्यों वाला कार्गो जहाज डूबा, 2 लोग बचाए गए

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भुवनेश्वर- ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ है। पनामा-फ्लैग वाला बल्क कैरियर MV Ocean Winner शनिवार को समुद्र में डूब गया। जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य सवार थे। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बड़े पैमाने पर Search and Rescue Operation शुरू किया है।

जहाज कहां जा रहा था?

MV Ocean Winner ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट से 20 अगस्त की रात अपनी यात्रा शुरू की थी। जहाज करीब 72,100–72,200 मीट्रिक टन लौह अयस्क (Iron Ore Fines) लेकर सिंगापुर जा रहा था। 

हादसे के समय जहाज पर 24 विदेशी क्रू सदस्य मौजूद थे:

  • 20 चीनी नागरिक

  •  3 म्यांमार के नागरिक

  •  1 बांग्लादेशी नागरिक

अचानक टूट गया संपर्क

अधिकारियों के अनुसार, जहाज के साथ संपर्क टूटने की सूचना 22 अगस्त को मिली। इसके बाद Maritime Rescue Coordination Centre और भारतीय एजेंसियों ने तुरंत Search and Rescue Operation शुरू किया।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार जहाज समुद्री tracking system से भी गायब हो गया था। हादसे की सटीक वजह अभी सामने नहीं आई है और इसकी जांच की जा रही है। 

 2 क्रू सदस्य सुरक्षित मिले

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी राहत की खबर सामने आई। पास से गुजर रहे MT AISOPOS नामक जहाज ने दो अलग-अलग life rafts से 2 क्रू सदस्यों को जीवित बचा लिया। 

फिलहाल बाकी 22 क्रू सदस्यों की तलाश जारी है।

Coast Guard और Navy ने संभाला मोर्चा

भारतीय तटरक्षक बल ने Search and Rescue Operation को तेज करते हुए कई जहाजों को तैनात किया है। ICGS Varad और ICGS Anmol को ऑपरेशन में लगाया गया है, जबकि ICGS Vijit को भी खोज अभियान में शामिल किया गया है। आसपास मौजूद अन्य जहाजों को भी राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए अलर्ट किया गया है। 

खराब समुद्री परिस्थितियां बनी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने समुद्र की स्थिति भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के अनुसार कुछ क्रू सदस्य life rafts या lifebuoys के सहारे समुद्र में हो सकते हैं, इसलिए बचाव दल लगातार संभावित इलाकों में तलाश कर रहे हैं। 

जहाज क्यों डूबा?

फिलहाल MV Ocean Winner के डूबने की वजह स्पष्ट नहीं है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि:

  • क्या जहाज में कोई तकनीकी खराबी आई थी?

  • क्या समुद्र की खराब स्थिति हादसे की वजह बनी?

  • संपर्क टूटने से पहले क्या कोई distress signal भेजा गया था?

  • जहाज tracking system से क्यों गायब हुआ?

  • जहाज इतनी तेजी से कैसे डूबा?

अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। 

अभी की सबसे बड़ी खबर

MV Ocean Winner के 24 क्रू सदस्यों में से 2 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 22 अन्य की तलाश भारतीय Coast Guard और Navy द्वारा जारी है।

यह हादसा ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में हुआ है। बचाव अभियान लगातार जारी है। 

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