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रायगढ़ : 6 औद्योगिक इकाइयों को अर्थदण्ड, श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला

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रायपुर। रायगढ़ जिले की 6 औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरणों में श्रम न्यायालय द्वारा सभी संबंधित इकाइयों के अधिभोगियों एवं प्रबंधकों को अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। यह कार्रवाई जिले में औद्योगिक दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन में जिले में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े मामलों की सतत निगरानी की जा रही है। औद्योगिक इकाइयों में घटित दुर्घटनाओं के पश्चात किए गए निरीक्षणों के दौरान पाई गई गंभीर अनियमितताओं एवं सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कार्यालय उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, रायगढ़ द्वारा कारखाना अधिनियम, 1948, छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली, 1962 तथा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 एवं नियम 2008 के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की गई।

उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा किए गए निरीक्षणों के आधार पर 6 औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध 6 आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय रायगढ़ में प्रस्तुत किए गए थे, न्यायालय द्वारा सुनवाई के पश्चात दोष सिद्ध होने पर मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (1 एमपीए स्लैग ग्राइंडिंग यूनिट), खरसिया रोड, रायगढ़ के अधिभोगी श्री सब्यसाची बन्योपाध्याय एवं कारखाना प्रबंधक अमरेश पांडे को पृथक-पृथक 1.50 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। मेसर्स नलवा स्पेशल स्टील लिमिटेड, ग्राम तराईमाल में सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी पर अधिभोगी सरदार सिंह राठी एवं कारखाना प्रबंधक रविन्द्र सिंह चौहान को 1.40 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

इसी प्रकार मेसर्स सिंघल स्टील एंड पावर लिमिटेड, ग्राम तराईमाल में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के उल्लंघन पर संचालक विनय कुमार शर्मा एवं ठेकेदार अजय कुमार दास पर 6-6 हजार रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया। इसी इकाई में कारखाना अधिनियम से संबंधित एक अन्य प्रकरण में अधिभोगी विनय कुमार शर्मा एवं कारखाना प्रबंधक जी.के. मिश्रा को कुल 2.80 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

मेसर्स एनआरव्हीएस स्टील्स लिमिटेड, ग्राम तराईमाल में अधिभोगी एवं कारखाना प्रबंधक पवन अग्रवाल को 1.60 लाख रुपये तथा मेसर्स एन.आर. इस्पात एंड पावर प्रा.लि., ग्राम गौरमुड़ी, पोस्ट सराईपाली में अधिभोगी एवं कारखाना प्रबंधक मोहित कुमार मिश्रा को 1.60 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। कलेक्टर ने कहा है कि औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।



महंगाई भत्ते में वृद्धि आदेश जारी, सरकारी कर्मचारियों को केन्द्र के समान 58 प्रतिशत महंगाई मिलेगा भत्ता

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा राज्य के शासकीय कर्मचारियों को मिल रहे 55 प्रतिशत महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किए जाने की घोषणा के परिपालन में आज छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग द्वारा यह आदेश जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के अनुसार अब राज्य के शासकीय कर्मचारियों को एक जनवरी 2026 से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा।  

यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य के सरकारी कर्मचारियों को केन्द्र के समान 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। एक सितम्बर 2025 से राज्य के कर्मचारियों से 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान में एक जनवरी 2026 से 58 प्रतिशत तथा छठवें वेतनमान में एक जनवरी 2026 से 257 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। महंगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के आधार की जाएगी।

धान खरीदी में नया रिकॉर्ड: 13 जनवरी तक 17.77 लाख किसानों के खातों में पहुंचा ₹23,448 करोड़

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे धान खरीदी महाअभियान ने इस वर्ष ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 

दिनांक 13 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को ₹23,448 करोड़ की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया गया है। यह अब तक के सभी वर्षों की तुलना में 13 जनवरी तक की सबसे अधिक खरीदी और सबसे अधिक भुगतान है।

यदि पिछले वर्षों के 13 जनवरी तक के आंकहोगा भीड़ों से तुलना की जाए तो सरकार की यह उपलब्धि और भी स्पष्ट रूप से सामने आती है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 17,49,003 किसानों से 72.15 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था। वर्ष 2021-22 में इसी अवधि तक 17,09,834 किसानों से 68.77 LMT धान खरीदा गया था, जिसके बदले ₹13,410 करोड़ किसानों को दिए गए थे।

खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 13 जनवरी तक 22,14,302 किसानों से 97.67 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹20,022 करोड़ का भुगतान हुआ था। इन सभी वर्षों की तुलना में वर्ष 2025-26 में धान खरीदी की मात्रा और किसानों को वितरित की गई राशि – दोनों ही उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी हैं।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां 2020-21 में 72.15 LMT, 2021-22 में 68.77 LMT और 2022-23 में 97.67 LMT धान खरीदा गया था, वहीं 2025-26 में मात्र 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान खरीदा जा चुका है, जो अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। इसी तरह किसानों को मिलने वाली राशि भी सीधे बढ़कर ₹23,448 करोड़ तक पहुँच गई है।

यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की पारदर्शी खरीदी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान प्रणाली और किसान-हितैषी नीतियों ने प्रदेश के किसानों का भरोसा मजबूत किया है। किसानों को उपज का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि हर पात्र किसान से हर दाना खरीदा जाएगा और हर रुपये का भुगतान समय पर किया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ का किसान और अधिक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सके।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान के भंडारण में सूखत एवं अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। जिन संग्रहण केन्द्रों में 0.5 प्रतिशत से अधिक एवं 1 प्रतिशत से कम कमी पाई गई, वहाँ केन्द्र प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 01 से 02 प्रतिशत तक कमी पाए जाने पर विभागीय जांच शुरू की गई, जबकि 02 प्रतिशत से अधिक कमी वाले केन्द्र प्रभारियों को निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की गई तथा आपराधिक पाए जाने पर एफ.आई.आर. दर्ज की गई है।

विगत 02 वर्षों में धान खरीदी एवं भण्डारण में अनियमितता तथा लापरवाही पाए जाने पर कुल 33 खाद्य निरीक्षकों एवं खाद्य अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए, 02 मामलों में संग्रहण केन्द्र प्रभारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई तथा 01 संग्रहण केन्द्र प्रभारी को निलंबित किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति शून्य सहनशीलता नीति पर कार्य कर रही है।

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में आई सूखत के संबंध में शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 06 जिला विपणन अधिकारियों एवं 06 संग्रहण केन्द्र प्रभारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने की दिशा में निर्णायक पहल है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 में कुल 25.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 80.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में खरीदी का दायरा, मात्रा और किसानों को मिलने वाला प्रत्यक्ष लाभ ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ा है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय पूल के अंतर्गत 78 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध लगभग 116 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण संभव हो पाया। शेष धान का निराकरण नीलामी के माध्यम से किया गया।केन्द्रीय लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त चावल की मिलिंग में FCI के पास गोदाम क्षमता कम होने के कारण धान के अंतिम निराकरण में लगभग 12 से 15 माह का समय लग गया, जिससे संग्रहण केन्द्रों में ड्रायज (सूखत) होना संभावित रहा। वर्तमान में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के अंतर्गत संग्रहण केन्द्रों में रखे धान का उठाव प्रगतिरत है तथा ऑक्शन एवं नीलामी से विक्रय किए गए धान का उठाव प्रक्रियाधीन है। संपूर्ण धान निराकरण के पश्चात ही कुल सूखत का वास्तविक आंकलन किया जा सकेगा।

राज्य सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि किसानों के धन, अनाज और विश्वास से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। धान खरीदी, भुगतान, भंडारण और निराकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी निगरानी में रखा गया है ताकि हर किसान को समय पर भुगतान और सुरक्षित व्यवस्था का लाभ मिले।


मंत्री भूपेन्द्र यादव ने नई दिल्ली में अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन: अरावली ग्रीन वॉल को मजबूत करना” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र के दौरान उन्होंने “अरावली परिदृश्य का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन” शीर्षक से संकला फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का विमोचन भी किया।

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना

भूपेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने अरावली ग्रीन वॉल परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और भारत की UNCCD के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि पुनर्स्थापित करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप शुरू की है।

इस पहल के तहत अरावली क्षेत्र में 6.45 मिलियन हेक्टेयर अपक्षय भूमि की पहचान की गई है, और 2.7 मिलियन हेक्टेयर में हरियाली कार्य प्रारंभ किया गया है, जो गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में फैला हुआ है। परियोजना का कार्य 29 अरावली जिलों के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल हों।

हरियाणा में संरक्षण और पुनर्वनीकरण

मंत्री ने बताया कि हरियाणा में नौरंगपुर से नूह तक लगभग 97 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि, जो अत्यधिक अपक्षयग्रस्त है, वनरोपण के लिए चिन्हित की गई है और इसे बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया गया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता के बाद अरावली की सुरक्षा और पुनर्वनीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और तब के हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सक्रिय समर्थन से संभव हुआ।

अरावली की पारिस्थितिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता

मंत्री ने कहा कि अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, जिसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है। अरावली पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा चार टाइगर रिज़र्व्स और 18 संरक्षित क्षेत्रों द्वारा सुनिश्चित की जा रही है, जबकि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त हरित हस्तक्षेप भी किए जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका

भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत ने वन्यजीवन संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। देश में दुनिया की सात बड़ी बिल्लियों में से पांच प्रजातियाँ और विश्व की करीब 70% बाघ जनसंख्या पाई जाती है, जो लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया गया है और सरकार इस कार्य को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन और रिपोर्ट

सम्मेलन में नीति निर्माता, वन अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रैक्टिशनर और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग लेते हुए अरावली की पारिस्थितिक महत्ता और पुनर्स्थापन के मार्गों पर विचार-विमर्श किया।

विमोचित रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को सुदृढ़ करने के लिए वैज्ञानिक, समुदाय-केंद्रित और पैमाने पर लागू होने योग्य ढांचा प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया है कि पुनर्स्थापन कार्य क्षेत्रीय पैमाने पर, डेटा-संचालित, समुदाय-केंद्रित और बहु-विषयक होना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल अलग-थलग प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि क्षेत्र में व्यापक अपक्षय और पारिस्थितिक दबाव विद्यमान हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

उद्घाटन सत्र में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तनमय कुमार, महानिदेशक वनों सुशील कुमार अवस्थी, भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और संकला फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

यह सम्मेलन अरावली क्षेत्र की सुरक्षा, हरित पहल और पारिस्थितिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आधुनिक ऑनलाइन तकनीकों ने बढ़ाई आबकारी विभाग की पारदर्शी व्यवस्था में विश्वसनीयता

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रायपुर। पारदर्शिता किसी मजबूत व्यवस्था की बुनियादी जरुरत होती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने ई-सर्विस को अपनाया। इस डिजिटल पहल ने बॉटलिंग से लेकर डिलीवरी तक की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बना दिया।

आबकारी विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार ई-चालान, सिंगल विंडो लॉग इन सिस्टम, यूजर रजिस्ट्रेशन, रियल टाइम कैश कलेक्शन इनफार्मेशन, सेंट्रल विडियो, मोनिटरी सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी है। इसी तरह एनओसी परमिट इशू सिस्टम, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, आधार इनेबल्ड बायो-मेट्रिक अटेंडेंस, और टोल-फ्री शिकायत सुविधा इन आधुनिक ऑनलाइन तकनीकों ने आबकारी विभाग को नई दक्षता और विश्वसनीयता दी है।

पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित व्यवस्था का परिणाम है कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण और राज्य के राजस्व में सतत वृद्धि करना। इस चालू वित्तीय वर्ष में 12 हज़ार करोड़ रुपये के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, दिसंबर माह तक ही 10.50 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 7 हजार 851 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार के सुशासन के लक्ष्यों को साकार करने के लिए कृत संकल्पित, छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बैठकों व नीति-निर्णय के दृश्य, आधुनिक वीडियो कंट्रोल रूम, कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल डैशबोर्ड व लाइव डेटा का संग्रहण किया जाता है। इसी प्रकार QR कोड, मोबाइल स्कैनिंग, GPS आधारित ट्रक ट्रैकिंग, बोतलों पर यूनिक कोड, डिलीवरी की डिजिटल पुष्टि, आधुनिक आउटलेट, सुव्यवस्थित, तकनीक-आधारित कार्यप्रवाह के माध्यम से किया जा रहा है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास में पोंगल पर्व मनाया

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में पोंगल पर्व के उत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर आईआईटी मद्रास द्वारा मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और परिसर में पारंपरिक ढंग से पोंगल समारोह का आयोजन किया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कैंपस कम्युनिटी हॉल में आईआईटी मद्रास परिवार के साथ इस फसल पर्व को मनाया, जो कृतज्ञता, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

मंत्री ने इस अवसर पर तमिलनाडु के लोगों तथा देशभर में पोंगल मनाने वाले सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जीवंत संस्कृति से जुड़ा पोंगल पर्व समृद्धि, सौहार्द और एकता की भावना को दर्शाता है।

आईआईटी मद्रास परिवार के साथ पोंगल मनाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह पर्व प्रचुरता, आत्मीयता और आपसी मेल-जोल की भावना को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कामना की कि यह अवसर सभी के जीवन में स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव लेकर आए।

इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि, संकाय सदस्य, विद्यार्थी, कर्मचारी तथा परिसर समुदाय के अन्य सदस्य उपस्थित रहे और उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया

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देशभर में 14 जनवरी 2026 को 10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस (Defence Forces Veterans’ Day) श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक रैलियां, शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु पुष्पांजलि समारोह, शिकायत निवारण काउंटर तथा सहायता एवं सुविधा डेस्क जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।


दिल्ली में मुख्य समारोह, रक्षा मंत्री हुए शामिल

मुख्य समारोह मानेकशॉ सेंटर, दिल्ली कैंट में आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से लगभग 2,500 पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, सामूहिक साहस के प्रतीक और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा देने, आपदा के समय नागरिक प्रशासन का सहयोग करने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

‘सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता’

 राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। ऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव, नेतृत्व और मूल्य देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा,
“वास्तव में एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी का रंग बदल सकता है, कार्यस्थल बदल सकता है, लेकिन देशभक्ति और सेवा की भावना कभी नहीं बदलती। पूर्व सैनिकों का कल्याण और सम्मान हमारी नैतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।”

ऑपरेशन पवन के वीरों को मिला सम्मान

रक्षा मंत्री ने लगभग 40 वर्ष पूर्व श्रीलंका में शांति स्थापना हेतु चलाए गए ऑपरेशन पवन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उस अभियान में भारतीय शांति सेना (IPKF) के जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अब उन सैनिकों के योगदान को खुले रूप में स्वीकार कर रही है और उन्हें हर स्तर पर उचित सम्मान दिया जा रहा है।

पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) के कार्यान्वयन और एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) को मजबूत किए जाने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज में दूरी या उम्र बाधा न बने।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा उन्हें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जा रही है।

पूर्व सैनिक दिवस: केवल समारोह नहीं, राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक

इस अवसर पर सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) श्रीमती सुकृति लिखी ने कहा कि पूर्व सैनिक दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने का दिन है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 60,000 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे देश में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग 35 लाख हो जाती है, और उनका कल्याण राष्ट्र की बड़ी जिम्मेदारी है।

देशभर में कार्यक्रम

देश के विभिन्न हिस्सों—राजौरी, अमृतसर, लखनऊ, रांची, गुवाहाटी, पुणे, गोवा और कोच्चि—में भी रैलियां और पुष्पांजलि समारोह आयोजित किए गए। सभी 34 राज्य सैनिक बोर्ड और 434 जिला सैनिक बोर्ड इस दिवस को मनाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मौके पर शिकायत निवारण, जागरूकता और सहायता के लिए विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए।

महान विरासत को नमन

यह दिवस हर वर्ष 14 जनवरी को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा, भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, की स्मृति में मनाया जाता है, जो इसी दिन 1953 में सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन देश के पूर्व सैनिकों की अद्वितीय सेवा, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करने का प्रतीक है।


मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति, एकजुटता और समृद्धि का प्रतीक – मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बलरामपुर जिले में आयोजित तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति सूर्य उपासना का पर्व है और यह भारतीय संस्कृति, एकजुटता तथा समृद्धि का सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति, लोहड़ी एवं पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस अवसर पर तातापानी महोत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।उन्होंने तपेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में प्राचीन शिव चबूतरे पर पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला मुख्यालय बलरामपुर में शासकीय महिला कर्मचारियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल, डाइट संचालन हेतु भवन, तथा जिला पंजीयन कार्यालय भवन निर्माण की घोषणा की। साथ ही उन्होंने 655 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले को विकास की नई सौगात दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार के दो वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और छत्तीसगढ़ की जनता से किए गए हर वादे को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक पात्र हितग्राही को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। अब किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है। 70 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। 5 लाख से अधिक भूमिहीन किसानों को दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत 10-10 हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की तीर्थ यात्रा कराई जा चुकी है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा सांसद चिंतामणि महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

बच्चों संग पतंग उड़ाकर मनाई मकर संक्रांति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तातापानी में 60 फीट ऊँची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा के समीप स्कूली बच्चों के साथ पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह और आत्मीय वातावरण में मनाया। इस भावपूर्ण दृश्य ने पर्व की सांस्कृतिक गरिमा के साथ-साथ बच्चों के चेहरे पर उल्लास और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।

200 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे 200 जोड़ों को उनके नवदाम्पत्य जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ और मंगलकामनाएँ प्रदान कीं, तथा उनके जीवन में प्रेम, विश्वास और समृद्धि से भरे उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

परंपरा से प्रगति तक: मुख्यमंत्री ने कुम्हार चाक घुमाकर दिया शिल्पकारों को सम्मान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक माटीकला और ग्रामीण हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करते हुए राजपुर विकासखंड के ग्राम आरा निवासी कुम्हार शिवमंगल के साथ स्वयं चाक पर मिट्टी डालकर चाक चलाया, जिससे शिल्पकारों में नया उत्साह और आत्मविश्वास झलक उठा। 

माटीकला से डिजिटल नवाचार तक—मुख्यमंत्री ने देखी विकास की जीवंत तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम स्थल पर विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए छत्तीसगढ़ की परंपरा और प्रगति के सुंदर संगम को करीब से महसूस किया। प्रदर्शनी में जनजातीय व्यंजन, प्रधानमंत्री आवास योजना, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, सड़क सुरक्षा, साइबर जागरूकता तथा ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसे नवाचारों से जुड़े स्टॉलों ने यह दिखाया कि छत्तीसगढ़ अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर भी भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक  उद्देश्वरी पैंकरा, विधायक शकुंतला पोर्ते, वन विकास निगम अध्यक्ष राम सेवक पैंकरा, विधायक अनुज शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

भारतीय सेना ने पूरे उत्साह के साथ मनाया वेटरन्स डे, वीर सैनिकों और उनके परिवारों को किया सम्मानित

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भारतीय सेना ने देशभर के अपने सैन्य स्टेशनों और प्रतिष्ठानों पर वेटरन्स डे को पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर नई दिल्ली, जयपुर, अमृतसर, लखनऊ, रांची, राजौरी सहित अनेक स्थानों पर पूर्व सैनिकों (वेटरन्स), वीर नारियों और उनके परिवारों के लिए विविध कल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

जयपुर में मुख्य आयोजन, थलसेना अध्यक्ष रहे मौजूद

दक्षिण पश्चिमी कमान के तत्वावधान में जयपुर सैन्य स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता थलसेना अध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की। इसके पश्चात एक पृथक इन्वेस्टिचर सेरेमनी में उन्होंने वीर सैनिकों और इकाइयों को वीरता पुरस्कार, COAS प्रशस्ति पत्र एवं सराहना पत्र प्रदान किए।

वेटरन्स डे लंच में पूर्व सैनिकों से संवाद

थलसेना अध्यक्ष ने पोलो ग्राउंड, जयपुर सैन्य स्टेशन में आयोजित आर्मी वेटरन्स डे लंच में भाग लिया और पूर्व सैनिकों व वीर नारियों से संवाद कर सेना की विरासत और देश की सुरक्षा में उनके अमूल्य योगदान को नमन किया।

इस अवसर पर जनरल द्विवेदी ने जिला सैनिक बोर्ड के उन अधिकारियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सराहनीय कार्य किया है। साथ ही उन्होंने भारतीय सेना पूर्व सैनिक निदेशालय द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘सम्मान’ का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में आर्मी वुमन वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष सुनीता द्विवेदी ने वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया।

राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि

अपने संबोधन में थलसेना अध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का कल्याण भारतीय सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता और स्थायी दायित्व है।

जनरल द्विवेदी ने युद्ध की बदलती प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना आधुनिकीकरण, नई तकनीकों के समावेश और परिचालन तत्परता पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही सम्मान, साहस और कर्तव्य जैसे अपने मूल मूल्यों को बनाए रखे हुए है। उन्होंने पूर्व सैनिकों को सेना की परंपराओं का आजीवन दूत और आदर्श बताते हुए युवाओं और समाज के साथ उनके निरंतर जुड़ाव का आह्वान किया।

वीरता और उत्कृष्ट सेवा को मिला सम्मान

आर्मी इन्वेस्टिचर सेरेमनी में थलसेना अध्यक्ष द्वारा:

  • 10 सेना मेडल (वीरता)

  • 49 COAS यूनिट प्रशस्ति पत्र

  • 60 इकाइयों को COAS प्रशंसा प्रमाण पत्र (जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के लिए 26 इकाइयाँ शामिल हैं)

प्रदान किए गए। ये सम्मान विभिन्न कमानों की उन इकाइयों को दिए गए, जिन्होंने साहस, समर्पण और उत्कृष्ट सेवा का परिचय दिया है। इसके अतिरिक्त, 6 पूर्व सैनिक उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं और 3 नागरिकों को भी भारतीय सेना के समर्थन में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

15 जनवरी को सेना दिवस परेड

वेटरन्स डे समारोहों का समापन 15 जनवरी 2026 को महाल रोड, जयपुर में आयोजित होने वाली सेना दिवस परेड के साथ होगा। इसके बाद सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में शौर्य संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारतीय सेना की व्यावसायिक दक्षता, परिचालन क्षमता और जनता के साथ गहरे संबंध का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा।

यह आयोजन भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, बलिदान और राष्ट्रसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।

खाद्य तेल क्षेत्र में सख्त निगरानी: संशोधित VOPPA आदेश 2025 के तहत नियामक ढांचा मजबूत

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भारत सरकार ने वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन एवं उपलब्धता (विनियमन) संशोधन आदेश, 2025 (VOPPA आदेश, 2025) के माध्यम से खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में नियामक निगरानी को और सुदृढ़ किया है। संशोधित आदेश के तहत सभी खाद्य तेल निर्माता, प्रोसेसर, ब्लेंडर एवं री-पैकर के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल (www.edibleoilindia.in) पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, उत्पादन, भंडारण और उपलब्धता से संबंधित मासिक विवरण (रिटर्न) दाखिल करना भी अनिवार्य किया गया है।

मासिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य

संशोधित VOPPA आदेश, 2025 के अनुसार अब कंपनियों को उत्पादन, स्टॉक, आयात, प्रेषण, बिक्री और खपत से संबंधित मासिक रिटर्न दाखिल करने होंगे। इसमें कच्चा एवं परिष्कृत वनस्पति तेल, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टेड तेल, ब्लेंडेड ऑयल, वनस्पति घी, मार्जरीन तथा अन्य अधिसूचित उत्पाद शामिल हैं। यह व्यवस्था पारदर्शी और डेटा-आधारित खाद्य तेल प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

देशभर में निरीक्षण एवं अनुपालन अभियान

देशव्यापी अनुपालन अभियान के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाए गए। इन निरीक्षणों में NSWS/VOPPA पंजीकरण की स्थिति, मासिक रिटर्न की सटीकता और समयबद्धता की जांच की गई तथा उद्योग से संवाद कर अनुपालन को बढ़ावा दिया गया।

इसके साथ ही विभाग द्वारा क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सटीक डेटा रिपोर्टिंग, NSWS पंजीकरण, VOPPA पोर्टल के उपयोग और समय पर रिटर्न दाखिल करने पर प्रशिक्षण दिया गया। इसी तरह की कार्यशालाएं अन्य प्रमुख राज्यों में भी आयोजित की जाएंगी।

गैर-अनुपालन पर कारण बताओ नोटिस

निरीक्षणों और समीक्षा के आधार पर विभाग ने कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बार-बार स्मरण, ई-मेल और फोन कॉल के बावजूद अनिवार्य मासिक उत्पादन रिटर्न जमा नहीं किए। यह संशोधित VOPPA आदेश, 2025 का उल्लंघन है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 6A के तहत उल्लंघन की स्थिति में निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है, जबकि धारा 6B के अनुसार जब्ती से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके तहत संबंधित इकाइयों को 7 दिन का समय दिया गया है कि वे लिखित जवाब प्रस्तुत करें।

आगे भी जारी रहेगी सख्ती

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो इकाइयाँ VOPPA ढांचे के तहत पंजीकृत नहीं हैं या जिन्होंने अनिवार्य रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र में समान अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा जनवरी 2026 में हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों में खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण प्रस्तावित है।

सरकार ने दोहराया है कि वह खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रभावी नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा अमेरिका के राजदूतों से परिचय पत्र स्वीकार किए

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 जनवरी 2026) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में त्रिनिदाद और टोबैगो, ऑस्ट्रिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनयिक प्रतिनिधियों से उनके परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) स्वीकार किए।

इस अवसर पर जिन राजदूतों एवं उच्चायुक्तों ने राष्ट्रपति को अपने परिचय पत्र प्रस्तुत किए, वे हैं:

  1. महामहिम चंद्रदत्त सिंह,
    त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य के उच्चायुक्त

  2. महामहिम डॉ. रॉबर्ट ज़िश्ग,
    ऑस्ट्रिया गणराज्य के राजदूत

  3. महामहिम सर्जियो गोर,
    संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत

यह समारोह भारत और इन देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर रहा।

दो दिवसीय राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव आज से, भव्य आयोजन के लिए सजा नगर

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आरंग-  दो दिवसीय (15 एवं 16 जनवरी को) आयोजित होने वाले राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव को लेकर नगर सहित अंचल में उत्साह  है। महोत्सव के लिए नगर को आकर्षक रोशनी, बैनर-पोस्टर से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। प्रचार वाहन नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण कर महोत्सव का संदेश पहुँचा रहे हैं।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। वहीं आयोजन की सतत निगरानी स्वयं कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब द्वारा की जा रही है।

दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा

पहले दिन 15 जनवरी को

महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट हेमचंद साहू द्वारा महोत्सव स्थल पर रेत कलाकृति से राम और श्याम की प्रतिकृति का निर्माण किया जाएगा। इसके पश्चात बाबा बागेश्वरनाथ मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक शोभायात्रा निकाली जाएगी।  मंच पर बाबा बागेश्वरनाथ महादेव की पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सुवा नृत्य (कोसमखुटा) एवं पंथी पार्टी (कुटेशर) की प्रस्तुति होगी।

इतिहासकारों एवं शिक्षाविदों के व्याख्यान के क्रम में आरंग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आयोजन की सार्थकता पर पटकथा लेखक आनंदराम साहू, वरिष्ठ इतिहासकार एवं पुराविद प्रो. आर.एन. विश्वकर्मा, वरिष्ठ पुराविद जी.एल. रायकवार, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन का वक्तव्य होगा।

इसके अलावा स्वरांजलि डांस ग्रुप की प्रस्तुति, राजा मोरध्वज की झांकी का मंचन, समाज प्रमुखों का सम्मान तथा सुनील सोनी स्टार नाइट का रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होगा। 

दूसरे दिन मुख्यमंत्री और कुमार विश्वास का कार्यक्रम

महोत्सव के दूसरे दिन 16 जनवरी को सुबह वेदमाता गायत्री यज्ञ-हवन एवं पूजन होगा। इसके बाद स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। लोरिक-चंदा (देउर गाँव, साजा) की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।

धमतरी से आई राजा मोरध्वज की जीवंत झांकी, अतिथियों का स्वागत एवं उद्बोधन के पश्चात राजा मोरध्वज अलंकरण सम्मान समारोह  होगा। अलग-अलग क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को मोरध्वज अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। 

महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। 

कवि डॉ. कुमार विश्वास सहित अन्य प्रतिष्ठित कवियों द्वारा काव्यपाठ के साथ ही महोत्सव संपन्न होगा। आयोजन को लेकर समूचे नगर में विशेष उत्साह एवं उल्लास का माहौल  है।

जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह 15 जनवरी को

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जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (2024-25) का पुरस्कार वितरण समारोह गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को अपराह्न 3:00 बजे से नई दिल्ली स्थित मावलांकर सभागार, संविधान क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समारोह की अध्यक्षता करेंगे और प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को पुरस्कार प्रदान करेंगे।

समारोह के दौरान “पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र)” के विद्यार्थी, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, अपनी “युवा संसद” की पुनः प्रस्तुति देंगे।

29 वर्षों से जारी युवा संसद की परंपरा

संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से जवाहर नवोदय विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में 2024-25 के दौरान आयोजित 26वीं प्रतियोगिता में नवोदय विद्यालय समिति के 8 क्षेत्रों में फैले 88 विद्यालयों ने भाग लिया।

युवा संसद योजना का उद्देश्य

युवा संसद योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, विभिन्न मतों के प्रति सहिष्णुता, लोकतांत्रिक मूल्यों, तार्किक अभिव्यक्ति तथा नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। इसके साथ ही यह योजना छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली, चर्चा एवं वाद-विवाद की तकनीकों से परिचित कराती है और उनमें आत्मविश्वास व प्रभावी वक्तृत्व कला को सुदृढ़ बनाती है।

विजेता एवं क्षेत्रीय पुरस्कार

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर “पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र)” को चल संसदीय शील्ड एवं ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, अपने-अपने क्षेत्रों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले निम्नलिखित 7 जवाहर नवोदय विद्यालयों को भी मेरिट ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा:

  1. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, वलसाड, गुजरात – पुणे क्षेत्र

  2. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश – लखनऊ क्षेत्र

  3. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश – चंडीगढ़ क्षेत्र

  4. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बीरभूम, पश्चिम बंगाल – पटना क्षेत्र

  5. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, गोलाघाट, असम – शिलांग क्षेत्र

  6. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मेडक, तेलंगाना – हैदराबाद क्षेत्र

  7. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, महासमुंद, छत्तीसगढ़ – भोपाल क्षेत्र

यह समारोह युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने और भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मकर संक्रांति और पोंगल: भारत की सांस्कृतिक एकता और समृद्धि का पर्व

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भारत विविधताओं का देश है, जहाँ अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही समय पर विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ पर्व मनाए जाते हैं। मकर संक्रांति और पोंगल ऐसे ही प्रमुख पर्व हैं, जो फसल, प्रकृति और नई शुरुआत का उत्सव माने जाते हैं। ये त्योहार न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं, बल्कि किसानों के परिश्रम, सूर्य उपासना और सामाजिक एकता का प्रतीक भी हैं।

मकर संक्रांति: सूर्य की उत्तरायण यात्रा का पर्व

मकर संक्रांति हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। इसे शुभ काल माना जाता है।
उत्तर भारत में इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और खिचड़ी का विशेष महत्व है। गुजरात और राजस्थान में पतंग उड़ाने की परंपरा है, वहीं महाराष्ट्र में तिल-गुड़ बांटकर “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला” कहा जाता है। यह पर्व आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता है।

पोंगल: दक्षिण भारत का प्रमुख फसल उत्सव

पोंगल तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत में चार दिनों तक मनाया जाने वाला प्रमुख फसल पर्व है। यह मुख्य रूप से धान की नई फसल के स्वागत का त्योहार है।

  • भोगी पोंगल: पुराने सामान को त्यागकर नई शुरुआत का प्रतीक

  • सूर्य पोंगल: सूर्य देव को धन्यवाद देने का दिन

  • मट्टू पोंगल: पशुधन, विशेषकर बैलों की पूजा

  • कानुम पोंगल: पारिवारिक मेल-मिलाप और सामाजिक उत्सव

इस अवसर पर घरों को सजाया जाता है, रंगोली (कोलम) बनाई जाती है और दूध-चावल से बनी विशेष मिठाई पोंगल पकाई जाती है।

कृषि, संस्कृति और एकता का संदेश

मकर संक्रांति और पोंगल दोनों ही पर्व कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाते हैं। ये त्योहार बताते हैं कि भारत की विविध संस्कृतियाँ अलग-अलग होते हुए भी एक साझा भावना से जुड़ी हैं—किसानों का सम्मान, प्रकृति की पूजा और समाज में सकारात्मकता।

आज के समय में भी ये पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने, पर्यावरण का सम्मान करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति और पोंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा के प्रतीक हैं।

दूरसंचार पेंशनरों के लिए बड़ी सुविधा: जनवरी 2026 में ‘जीवन प्रमाण’ शिविरों का आयोजन

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दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr. CCA) द्वारा पेंशनरों की सुविधा के लिए जनवरी 2026 माह में टेलीकॉम पेंशनर्स जीवन प्रमाण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। ये शिविर दिल्ली एवं एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होंगे।

ये शिविर Pr. CCA दिल्ली कार्यालय, दिल्ली संचार लेखा भवन, प्रसाद नगर, ईस्टर्न कोर्ट, जनपथ स्थित एक्सटेंशन काउंटर तथा MTNL/BSNL परिसरों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पेंशनरों से अनुरोध है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार निकटतम शिविर में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर मौके पर ही जीवन प्रमाण पत्र का सत्यापन करा सकते हैं।

पेंशनर सुविधा शिविरों का कार्यक्रम

  1. MTNL एक्सचेंज भवन, C-10 यमुना विहार, दिल्ली – 16 जनवरी 2026

  2. MTNL एक्सचेंज भवन, लक्ष्मी नगर, दिल्ली – 19 जनवरी 2026

  3. MTNL एक्सचेंज भवन, नरेला, दिल्ली – 20 जनवरी 2026

  4. MTNL एक्सचेंज भवन, द्वारका सेक्टर-6, दिल्ली – 22 जनवरी 2026

  5. MTNL एक्सचेंज भवन, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली – 27 जनवरी 2026

समय: प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक

शिविरों में उपलब्ध सुविधाएँ

  • डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने का प्रशिक्षण
    (वेबसाइट: www.jeevanpramaan.gov.in)

  • जीवन प्रमाण फेस ऑथेंटिकेशन ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण

  • KYP फॉर्म जमा करने की सुविधा
    (एक पासपोर्ट साइज फोटो एवं आधार कार्ड की प्रति साथ लाएं)

  • पेंशन से संबंधित शिकायतों एवं प्रश्नों का समाधान

महत्वपूर्ण सूचना: जिन पेंशनरों ने पहले ही अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर दिया है, उन्हें इस उद्देश्य से शिविर में आने की आवश्यकता नहीं है।

यह पहल पेंशनरों के लिए एक सराहनीय कदम है, जिससे उन्हें डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने और अपनी पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सहायता मिलेगी।

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