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बगिया से बस्तर' तक गूंजा सुशासन का स्वर-जनता से सीधा संवाद बना विश्वास का आधार

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 रायपुर : किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकारें योजनाएं बनाती हैं, बजट प्रस्तुत करती हैं और विकास के दावे करती हैं, लेकिन इन सबकी सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब उनका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और लोग स्वयं अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस करें। छत्तीसगढ़ में इसी सोच को साकार करने के लिए ‘सुशासन तिहार’ जैसे अभिनव अभियान की शुरुआत की गई है।


1 मई से 10 जून तक चलने वाला यह 40 दिवसीय अभियान शासन को सीधे जनता के द्वार तक ले जाने का एक प्रभावी प्रयास है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी गांव-गांव और शहरों के वार्डों में पहुंचकर आमजन की समस्याएं सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह पहल केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहभागिता और समाधान पर केंद्रित है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस अभियान में सक्रिय भागीदारी इसे और अधिक प्रभावशाली बनाती है। उनका विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जमीनी हकीकत का आकलन करना और आम जनता से सीधा संवाद करना यह दर्शाता है कि नेतृत्व केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी प्रतिबद्ध है। तेज गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उनकी यह सक्रियता प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक प्रेरणा है।

‘सुशासन तिहार’ का मूल उद्देश्य शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाना है। जब अधिकारी सीधे गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं, तो न केवल वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है, बल्कि लोगों के भीतर यह विश्वास भी मजबूत होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है। इस प्रकार की पहल प्रशासन में संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व दोनों को सुदृढ़ करती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 'लोगों की सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं' की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार ही शासन की छवि तय करता है। इसलिए आमजन के साथ संवाद करते समय शालीनता, धैर्य और सम्मान अनिवार्य होना चाहिए। जब कोई नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह अनुभव होना चाहिए कि उसकी बात गंभीरता से सुनी जा रही है।

प्रदेश में आयोजित समाधान शिविर इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर लोगों से आवेदन लेकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे शासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।

हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता उसके दीर्घकालिक प्रभाव और निरंतरता पर निर्भर करती है। निश्चित ही राज्य सरकार ‘सुशासन तिहार’ से प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी सुधार करेंगे और यह संवाद की यह प्रक्रिया भी लगातार जारी रहेगी। ‘सुशासन तिहार’ एक अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इस बात का संकेत है कि यदि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता बनी रहे, तो विकास की राह न केवल सशक्त होती है, बल्कि अधिक समावेशी बनेगी।

(लेखक-एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

चंदागढ़ में CM साय की जनचौपाल: बरगद की छांव में सुनीं समस्याएं, विकास की घोषणाएं

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 रायपुर : सुशासन तिहार (Sushasan Tihar) में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में पहुंचकर संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन की एक प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर जैसे ही चंदागढ़ में उतरा, ग्रामीणों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका भव्य स्वागत किया।


मुख्यमंत्री सीधे पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम भैंसामुड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने बजरंग बली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद गांव के बीचों-बीच बरगद के विशाल पेड़ की शीतल छांव में जनचौपाल सजी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार (Sushasan Tihar) 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य सरकार को जनता के द्वार तक ले जाना है, ताकि समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वे जनता की समस्याएं सुनने आए हैं और ग्रामीणों की समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने ग्रामवासियों से राशन, नमक, शक्कर की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था, बिजली, पटवारी से संबंधित समस्याओं सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने “लखपति दीदी” सुमिला कोरवा और पुष्पलता चौहान से आत्मीय संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने जाना कि महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं ईंट निर्माण, किराना दुकान और बीसी सखी जैसे कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 8 लाख लखपति दीदी बन जा चुकी हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में यह संख्या 3 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन है।

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम चंदागढ़ और भैंसामुड़ा के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण, मिनी स्टेडियम निर्माण, सीसी रोड निर्माण तथा बच्चों के लिए क्रिकेट किट और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को सामुदायिक भवन के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का भी जायजा लिया। कलावती चौहान ने बताया कि गांव में महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को मिल रहा है, जिस पर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की स्थिति की जानकारी ली और चरण पादुका योजना के लाभ के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य में श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से आमजन को धार्मिक और सामाजिक रूप से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं और ग्रामीणों को ऑनलाइन बैंकिंग एवं अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी समस्याओं का प्राथमिकता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों को उनका लाभ समय पर मिले।

इस अवसर पर विधायक पत्थलगांव गोमती साय, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। (Sushasan Tihar)

नक्सलियों की साजिश में 4 जवान शहीद, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

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 कांकेर छत्तीसगढ़ के कांकेर-नारायणपुर सीमा पर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। ज़िला रिज़र्व गार्ड (DRG) के चार जवान IED विस्फोट में शहीद हो गए। रविवार को शहीदों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।


जानकारी के अनुसार, 2 मई को छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में DRG की टीम सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा लगाए गए IED का पता चला, जिसे निष्क्रिय करने की कार्रवाई की जा रही थी।

IED निष्क्रिय करते समय हुआ धमाका

IED को सुरक्षित तरीके से हटाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इस घटना में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और कांस्टेबल संजय गढपाले मौके पर ही शहीद हो गए। वहीं गंभीर रूप से घायल कांस्टेबल परमानंद कोर्राम को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

रविवार को शहीद जवानों के पार्थिव शरीर नारायणपुर पुलिस लाइन में लाए गए, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव शरीरों को उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना किया गया।

इस घटना के बाद पूरे बस्तर क्षेत्र में शोक की लहर है। जवानों के बलिदान ने एक बार फिर सुरक्षा बलों की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर किया है।

 

देवतुल्य शिक्षक सुरेन्द्र गुप्ता को भावभीनी विदाई, 3000 से अधिक लोगों की उपस्थिति में उमड़ा जनसैलाब

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महासमुंद- जिले के डूमरमूढा गांव में एक अनूठा और भावुक विदाई समारोह देखने को मिला, जहां शिक्षक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता को पूरे क्षेत्र ने मिलकर अश्रुपूर्ण विदाई दी। मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही महासमुंद और मानव जागृति सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 3000 से अधिक शुभचिंतक, 100 से अधिक गांवों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, अभिभावक और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि सुरेन्द्र गुप्ता ने अपने 20 वर्षों के सेवाकाल में न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जीवन विद्या आधारित शिक्षा को बढ़ावा देते हुए “सुखी समृद्ध व्यक्ति, परिवार और गांव” की अवधारणा को साकार किया।

विदाई समारोह के दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब गांव के बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षक गुप्ता के चरण स्पर्श कर, गले लगाकर और श्रीफल, शाल, वस्त्र, फूलमाला व मिठाई देकर सम्मान प्रकट किया। खास बात यह रही कि सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने स्वयं गांव के हर घर जाकर अभिभावकों से हाथ जोड़कर विदाई ली।

सुरेन्द्र कुमार गुप्ता की समाजसेवा भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपने वेतन के अंशदान से गांव में मानव जागृति सेवा संस्थान और श्रीराम मंदिर का निर्माण करवाया। उनके प्रयासों से 900 से अधिक ग्रामीणों को जीवन विद्या का अध्ययन कराया गया, जिसके लिए उन्होंने स्वयं शिविर आयोजित कर नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था भी की।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें “देवतुल्य शिक्षक” की संज्ञा दी।

यह विदाई समारोह न केवल एक शिक्षक के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और सेवा के महत्व को भी उजागर कर गया।

कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक का सपना हो रहा साकार,मुख्यमंत्री ने ईंट जोड़कर किया श्रमदान

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भैंसामुड़ा में पीएम आवास निर्माण का किया औचक अवलोकन

हितग्राही अनुसुइया पैंकरा ने जताया आभार

जशपुरनगर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आकस्मिक जशपुर जिला प्रवास के दौरानविकासखंड पत्थलगांव के ग्राम भैंसामुडा पहुंचे। मुख्यमंत्री साय जब गांव से गुजर रहे थे, तभी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राही अनुसुइया पैंकरा के निर्माणाधीन आवास पर पड़ी। वे तुरंत वाहन से उतरकर मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां कार्यरत श्रमिकों के प्रयासों की सराहना की। संवेदनशील और प्रेरणादायक पहल करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं करणी तथा सीमेंट गारा से ईंट जोड़कर निर्माण कार्य में भागीदारी निभाई। मुख्यमंत्री ने स्वयं ईंट जोड़कर श्रमदान कर लोगों को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री की इस सहज और आत्मीय पहल से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। हितग्राही अनुसुइया पैंकरा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका वर्षों पुराना सपना अब साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उन्हें पक्का घर मिल रहा है, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और बेहतर बनेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने चंदागढ़ के राजमिस्त्री सूक मोहन चक्रेश से भी बातचीत की। उन्होंने उनके रोजगार, दैनिक मजदूरी और परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी ली तथा श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल केवल एक निरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक रहा और शासन के प्रति विश्वास को और मजबूत करने वाला साबित हुआ। इस दौरान पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक गोमती साय, अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी लाल उमेद सिंह, डीएफओ शशि कुमार सहित ग्रामीण जन मौजदू रहे।


जब मुख्यमंत्री उतरे मैदान में: सुशासन तिहार में बच्चों संग खेला क्रिकेट, बढ़ाया हौसला

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सादगी और अपनापन: बच्चों के साथ खेलते दिखे मुख्यमंत्री साय

सीएम का स्नेहिल अंदाज: बच्चों के साथ खेलकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जशपुर जिला प्रवास के दौरान ग्राम भैंसामुड़ा में एक बेहद आत्मीय और उत्साहवर्धक दृश्य देखने को मिला, जब वे शासकीय प्राथमिक शाला चंदागढ़ के स्कूल परिसर में अचानक पहुंच गए। विद्यालय पहुंचते ही उनकी नजर मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर पड़ी, जिनका जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों की इस ऊर्जा ने मुख्यमंत्री को इतना आकर्षित किया कि वे बिना औपचारिकता के सीधे मैदान में उतर गए और उनके साथ क्रिकेट खेलने लगे। मुख्यमंत्री को अपने बीच खेलते देख बच्चों की खुशी दोगुनी हो गई और पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर उठा।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से सहज संवाद करते हुए उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और खेल के प्रति रुचि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे नियमित रूप से खेलते हैं या नहीं और किस खेल में उनकी विशेष रुचि है। बच्चों के साथ इस आत्मीय संवाद के बीच उन्होंने यह भी समझने का प्रयास किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की क्या स्थिति है और किन-किन संसाधनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 

मैदान में मौजूद खिलाड़ी प्रकाश ठाकुर से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा कर उनके अनुभवों और खेल से जुड़े पहलुओं के बारे में जाना, जिससे स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी उन्हें मिल सकी।

बच्चों के उत्साह और खेल के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने कौशल का समुचित विकास कर सकें और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण खेल और शिक्षा के संतुलित विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ग्राम पंचायत के सरपंच रोशन प्रताप सिंह से भी बातचीत कर गांव की स्थिति, चल रहे विकास कार्यों और स्थानीय आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गांव के समग्र विकास के लिए आवश्यक पहल सुनिश्चित की जाए, ताकि बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी संतुलित प्रगति हो सके।

मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के साथ बिताए गए उनके सहज और प्रेरणादायक क्षणों ने ग्रामीणों के मन में विशेष उत्साह और विश्वास का वातावरण निर्मित किया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि शासन जब जमीनी स्तर पर पहुंचकर सीधे संवाद करता है, तो वह केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं करता, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी करता है।

देश में गहराता जल संकट: 166 जलाशयों का स्तर 40% से नीचे, आठ राज्य ज्यादा प्रभावित

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 नई दिल्ली। देश में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट गहराता नजर आ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर घटकर कुल क्षमता के 40 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है, जिससे कई राज्यों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।


आंकड़ों के मुताबिक, इन 166 जलाशयों में वर्तमान लाइव स्टोरेज 71.082 अरब घन मीटर (BCM) है, जो उनकी कुल क्षमता 183.565 BCM का केवल 38.72 प्रतिशत है। 9 अप्रैल 2026 को यह स्तर 44.71 प्रतिशत था, यानी तीन सप्ताह में ही जल भंडारण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ये जलाशय देश की कुल अनुमानित भंडारण क्षमता का लगभग 71.20 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।

नदी घाटियों में भी गिरावट
केंद्रीय जल आयोग के साप्ताहिक बुलेटिन के अनुसार, कई प्रमुख नदी बेसिनों में जल स्तर में गिरावट देखी गई है। गंगा बेसिन का स्तर 53.8% से घटकर करीब 50.01% रह गया है। गोदावरी 47.58% से गिरकर 40.69% और नर्मदा 46.09% से घटकर 38.82% पर पहुंच गई है। कृष्णा बेसिन पहले से ही कमजोर स्थिति में है और अब भी लगभग 22.55% के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा कावेरी (35.74%) और महानदी (43.51%) में भी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ताप्ती अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में है।

कई जलाशयों की हालत गंभीर
देश के कई प्रमुख जलाशयों में जल स्तर अत्यंत निम्न स्तर पर पहुंच गया है। असम के खांडोंग जलाशय में जल स्तर करीब 21.16% है, जबकि झारखंड का चंदन डैम लगभग खाली हो चुका है। कर्नाटक के तट्टिहल्ला (24.63%), केरल के पेरियार (29.21%), तमिलनाडु के वैगई (15.17%), करायर (49.89%) और अलियार (48.89%) में भी जल स्तर काफी नीचे है।

22 जलाशयों में 80% तक कमी
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 166 जलाशयों में से 22 ऐसे हैं, जहां जल स्तर सामान्य से 80 प्रतिशत तक कम हो गया है। मध्य प्रदेश के जलाशयों में भी पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि गोवा में एकमात्र प्रमुख जलाशय में भी 12 प्रतिशत से अधिक कमी देखी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी जल प्रबंधन और संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले महीनों में कई क्षेत्रों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन

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 • धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)

• अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर : छत्तीसगढ़ के वनांचल की गोद में छिपी अमूल्य औषधि संपदा अब केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि प्रदेश की नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय बन रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन की जिस परिकल्पना को साकार कर रही है, उसे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप और छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम के मार्गदर्शन में धरातल पर उतार रहा है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पहचान

वनांचल में बिखरे पारंपरिक ज्ञान को महज एक स्मृति न रहने देने के संकल्प के साथ बोर्ड ने इसे वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन स्थानीय वैद्यों और जानकारों का चिन्हांकन शुरू किया गया है, जिनके पास असाध्य रोगों के उपचार का अद्भुत ज्ञान है। बोर्ड का प्रयास इन महिलाओं को एक उचित मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिले और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है जिसे ग्रामीण महिलाओं ने सदियों से सहेजकर रखा है। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक जड़ी-बूटी और जनजातीय ज्ञान को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से नई पहचान मिल रही है। राज्य के वनों में छिपे औषधीय खजाने को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित कर, उसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।


संग्रहण से प्रसंस्करण तक- उद्यमिता की नई उड़ान

आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब दिखाई दे रहा है, जब जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाली महिलाएं अब संग्राहक से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में नजर आ रही हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, महिला स्व-सहायता समूहों को औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के उन्नत गुर सिखाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल औषधीय पौधों का संरक्षण कर रही है, बल्कि वनवासियों और लघु वन उपज संग्राहकों की आय में वृद्धि करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। छत्तीसगढ़ में 1500 से अधिक सक्रिय वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और जड़ी-बूटियों के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह संस्था हर्बल उत्पादों की खेती, मूल्य संवर्धन, और मार्केटिंग में तकनीकी सहायता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है।

मूल्य संवर्धन (वेल्यू एडिशन)

छत्तीसगढ़ में जड़ी-बूटी मूल्य संवर्धन एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से राज्य के समृद्ध वन संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित (प्रोसेस) करके उनके आर्थिक मूल्य को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार 'छत्तीसगढ़ हर्बल्स' ब्रांड के तहत इन उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। जब ये महिलाएं वनों से प्राप्त कच्ची सामग्री को साफ कर, सुखाकर उसे चूर्ण, अर्क या तेल के रूप में परिवर्तित करती हैं, तो उत्पाद की कीमत और गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इस मूल्य संवर्धन का सीधा आर्थिक लाभ उनके बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे बिचौलियों का वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। 65 से अधिक लघु वन उपज प्रजातियों की
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी और उनका प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख हर्बल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम है।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स को वैश्विक पहचान

छत्तीसगढ़, जिसे 'जड़ीबूटि गढ़' भी कहा जाता है, अपने घने जंगलों, विशेषकर बस्तर में 160 से अधिक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक खजाना है। यहाँ की मिट्टी में अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी और तिखुर जैसी औषधियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। बाजार की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए बोर्ड ने विपणन (मार्केटिंग) तंत्र को पारदर्शी बनाया है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को सशक्त करने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से इन उत्पादों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'व्होकल फार लोकल' और मुख्यमंत्री के 'लखपति दीदी' अभियान को सफल बनाने में यह रणनीति संजीवनी का कार्य कर रही है।

नर्सरी प्रबंधन और स्थानीय रोजगार

जड़ी बूटियों को किचिन गार्डन, होम गार्डन में खिड़की, बालकनी, टेरिस पर गमलों, या अन्य कंटेनरों में कभी भी उगाया जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग में जड़ी-बूटियां उगाने का एक फायदा यह भी है कि जड़ी-बूटी को उसकी जरूरत के आधार पर मिट्टी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और नमी के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है तथा गमलों में उगाई गई प्रत्येक जड़ी-बूटी (हर्बल) को उसकी आदर्श स्थितियां दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों की 'मदर नर्सरी' विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपी जा रही है। इससे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए बारहमासी रोजगार के द्वार खुल गए हैं, जिससे वनांचल से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगा है।

समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़

राज्य शासन का यह समेकित दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड केवल एक प्रशासक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। सामूहिक नेतृत्व और संस्थागत सुधारों पर जोर देने से आज छत्तीसगढ़ की बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वनांचल की महिलाओं के चेहरे पर उपजी मुस्कान एक समृद्ध और स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की सच्ची तस्वीर पेश कर रही है।

गोद में उठाया, चश्मा पहनाया : भैंसामुड़ा में दिखा मुख्यमंत्री का आत्मीय रूप

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 रायपुर : सुशासन तिहार के दौरान जशपुर जिले के ग्राम भैंसामुड़ा में एक ऐसा आत्मीय और भावुक क्षण सामने आया, जिसने वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के मन को गहराई से छू लिया और पूरे वातावरण को संवेदनाओं से भर दिया। यह दृश्य उस मानवीय स्पर्श का जीवंत उदाहरण बन गया, जहां शासन और संवेदना एक साथ दिखाई देते हैं।


सुशासन तिहार के दौरान जैसे ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर 4 वर्षीय नन्हीं बच्ची मानविका चौहान पर पड़ी, वे सहज भाव से उसके पास पहुंच गए। उनके इस स्वाभाविक और अनायास कदम ने पूरे माहौल को एक अलग ही अपनत्व के वातावरण में बदल दिया।

मुख्यमंत्री साय ने स्नेहपूर्वक बच्ची को अपनी गोद में उठाया और मुस्कुराते हुए उससे आत्मीय संवाद करने लगे। उनके चेहरे पर झलकता स्नेह और व्यवहार की सरलता इस बात को दर्शा रही थी कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो लोगों के बीच जाकर उनके अपनेपन को महसूस करता है। मुख्यमंत्री साय के पूछने पर मासूमियत भरी आवाज़ में जब मानविका ने तुतलाते हुए कहा - "मुझे डॉक्टर बनना है", तो उस छोटे-से वाक्य में एक बड़े सपने की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

यह सुनकर मुख्यमंत्री साय के चेहरे पर सहज और स्नेहिल मुस्कान उभर आई। उन्होंने पूरे अपनत्व के साथ बच्ची को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह संवाद भले ही कुछ क्षणों का रहा, लेकिन उसमें जो भावनात्मक गहराई थी, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को यह महसूस कराया कि छोटे बच्चों के सपनों को भी सही प्रोत्साहन देने का कार्य भी मुख्यमंत्री का रहे हैं। इसी आत्मीयता में मुख्यमंत्री साय ने अपने पास रखा चश्मा निकालकर बड़े प्यार से बच्ची को पहनाया और उसे पुचकारते हुए उसका हौसला बढ़ाया।

मानविका की माता दीपांजलि चौहान ने बताया कि उनकी बेटी मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर बेहद उत्साहित थी और उनसे मिलकर अत्यंत खुश हुई। उन्होंने इस स्नेहपूर्ण व्यवहार के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के लिए एक यादगार अनुभव बन गया है।

यह पूरा प्रसंग संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े नेतृत्व का सजीव उदाहरण बन गया, जहां शासन केवल योजनाओं और नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्नेह, संवाद और विश्वास के माध्यम से सीधे लोगों के दिलों तक अपनी जगह बनाता है।

Mahasamund : शिशुपाल पर्वत के नीचे युवक-युवती के शव मिलने से सनसनी, शिनाख्त नहीं

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 महासमुंद। जिले के सरायपाली विकासखंड स्थित शिशुपाल पर्वत के नीचे एक युवक और युवती के शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। रविवार सुबह ग्रामीणों ने दोनों शव देखे और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सरायपाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।


शिनाख्त नहीं, जांच तेज

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दोनों मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शव कितने समय पुराने हैं और किन परिस्थितियों में दोनों की मौत हुई। मौके पर फोरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

हर एंगल से जांच

स्थानीय स्तर पर युवक-युवती के प्रेमी जोड़ा होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र पहले भी इस तरह की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। हालांकि पुलिस ने ऐसी किसी भी अटकल की पुष्टि नहीं की है और इसे शुरुआती कयास बताया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आत्महत्या, दुर्घटना और आपराधिक पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

 
 

बोरे बासी पर सियासत तेज: गजेंद्र यादव का भूपेश बघेल पर हमला, बताया ‘प्रोपेगेंडा’

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में ‘बोरे बासी दिवस’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। श्रमिक दिवस (1 मई) पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाकर इसे मनाने के बाद अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।


रविवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर रवाना होने से पहले गजेंद्र यादव ने कहा कि मिट्टी के बर्तन में बोरे बासी खाना सिर्फ एक “प्रोपेगेंडा” है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मिट्टी के बर्तन का उपयोग पिंडदान और पितृ भोज में होता है, ऐसे में क्या भूपेश बघेल कांग्रेस का पिंडदान करने गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस इस तरह के आयोजन कर आखिर क्या संदेश देना चाहती है—क्या छत्तीसगढ़ के लोग सिर्फ बासी भोजन ही करें?

चुनाव परिणाम पर जताया भरोसा

मंत्री यादव ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर भी भाजपा के पक्ष में मजबूत दावा किया। उन्होंने कहा कि परिणाम “बेहद शानदार” होंगे और बंगाल में “सुनामी” के रूप में भाजपा की सरकार बनेगी। उनके मुताबिक, पांच में से कम से कम तीन राज्यों में स्पष्ट बहुमत से भाजपा सरकार बनाएगी।

मेधावी छात्रों के लिए बड़ी घोषणा

इसी दौरान गजेंद्र यादव ने 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी सौगात की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मेरिट सूची में आने वाले छात्रों को एकमुश्त 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई में सुविधा मिल सके।

हेलीकॉप्टर यात्रा पर कांग्रेस पर निशाना

बच्चों को हेलीकॉप्टर यात्रा कराने के मुद्दे पर भी मंत्री यादव ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार छात्रों को नकद सहायता दे रही है, जिससे वे अपने परिवार के साथ बेहतर तरीके से यात्रा या अन्य जरूरतें पूरी कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में केवल एक बार हेलीकॉप्टर यात्रा कराई जाती थी, जबकि अब दी जा रही राशि से छात्र अधिक लाभ उठा सकेंगे।

राज्य में इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

 
 

CG NEWS : जनगणना ड्यूटी पर शिक्षक से मारपीट, आईडी कार्ड और शर्ट फाड़ी; आरोपी फरार

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट का मामला सामने आया है। बिल्हा ब्लॉक के ग्राम घोघरा में जनगणना ड्यूटी पर पहुंचे शिक्षक नेतराम पैकरा के साथ एक युवक ने तीन बार मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।


जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह शिक्षक नेतराम पैकरा मकान नंबर 141 के पास जनगणना संबंधी जानकारी एकत्र कर रहे थे। इसी दौरान गांव के ही निर्मल सतनामी ने उनका रास्ता रोककर विवाद शुरू किया और मारपीट करने लगा। शिक्षक द्वारा तहसीलदार का जारी आईडी कार्ड दिखाने के बावजूद आरोपी ने उसे फर्जी बताते हुए फाड़ दिया और उनकी शर्ट भी फाड़ दी।

बताया जा रहा है कि जान बचाकर शिक्षक पंचायत भवन पहुंचे, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गया और फिर से दुर्व्यवहार किया। बाद में जब शिक्षक दगौरी की ओर निकले, तो आरोपी ने चुराघाट तक उनका पीछा किया।

घटना के बाद शिक्षक ने प्रशासनिक और शिक्षा अधिकारियों को जानकारी दी, जिसके निर्देश पर बिल्हा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है।

20 मई से बदलेगा शुक्र का नक्षत्र: कई राशियों को मिल सकता है अचानक धन लाभ

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 नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 20 मई 2026 से शुक्र ग्रह आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहा है, जिसका व्यापक असर विभिन्न राशियों पर देखने को मिल सकता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक यह परिवर्तन धन, सुख-सुविधा, आकर्षण और भौतिक जीवन से जुड़े मामलों में तेजी ला सकता है।


आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु माने जाते हैं, जो अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित लाभ के कारक हैं। ऐसे में शुक्र और राहु के प्रभाव से कुछ राशियों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ने और रुका हुआ धन मिलने के योग बन रहे हैं। खासतौर पर व्यापार, मीडिया, कला और क्रिएटिव क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय लाभकारी माना जा रहा है।

इन राशियों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव

वृषभ राशि:
इस गोचर का सबसे अधिक लाभ वृषभ राशि के जातकों को मिल सकता है। अचानक धन लाभ के संकेत हैं। लंबे समय से अटका पैसा वापस मिल सकता है। नौकरी में नए अवसर मिलेंगे और कार्यस्थल पर स्थिति मजबूत होगी। व्यापार में भी फायदा होने की संभावना है। निजी जीवन में आकर्षण और संबंधों में सुधार देखने को मिलेगा।

कन्या राशि:
कन्या राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से राहत देने वाला रहेगा। आय में वृद्धि के संकेत हैं और निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे और वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा। क्रिएटिव और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल है। पारिवारिक माहौल भी शांत रहेगा।

तुला राशि:
तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर भाग्य को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है और यात्रा के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और रुके हुए काम पूरे होंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और लोगों से सराहना मिलेगी। रिश्तों में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे।

मीन राशि:
मीन राशि के जातकों के लिए यह समय कई तरह से लाभकारी रहने वाला है। अचानक धन प्राप्ति के योग हैं और पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। करियर में नए अवसर खुलेंगे और उन्नति के रास्ते बनेंगे। वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा और संबंध मधुर होंगे। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है।

ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कई राशियों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। हालांकि, किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

 
 

मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी सौगात : भारत सरकार से 1333 करोड़ रुपए स्वीकृत, 212 करोड़ की मजदूरी राशि का भुगतान

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रायपुर- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य की मांग एवं लंबित देनदारियों को ध्यान में रखते हुए कुल 1333 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण श्रमिक परिवारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

स्वीकृत राशि में से 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मजदूरी भुगतान हेतु जारी की गई है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता के साथ श्रमिकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

वर्तमान में राज्य के श्रमिकों के खातों में 212 करोड़ रुपए की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि भी शीघ्र ही चरणबद्ध तरीके से श्रमिकों के खातों में अंतरित की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ श्रमिकों की आजीविका को स्थायित्व प्राप्त होगा।

राज्य में संचालित “मोर गांव मोर पानी महा अभियान” के अंतर्गत जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। मनरेगा के माध्यम से आजीविका डबरी, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण कार्यों को व्यापक स्तर पर स्वीकृत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, भू-जल स्तर में सुधार हो तथा किसानों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन, ग्रामीण अधोसंरचना विकास तथा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

भारत सरकार से प्राप्त यह वित्तीय स्वीकृति छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास को नई गति देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

निर्माण गुणवत्ता में जरा भी लापरवाही नहीं चलेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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दाढ़ी (बेमेतरा) सीसी रोड प्रकरण पर सख्त रुख: कलेक्टर को मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेमेतरा जिले के नगर पंचायत दाढ़ी क्षेत्र में हाल ही में निर्मित सीसी रोड के अल्प समय में ही क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्रकाशित समाचार को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य है।

मुख्यमंत्री साय ने बेमेतरा की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सीसी रोड का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण व्यवस्था की समग्र जांच की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि यदि जांच में गुणवत्ता में कमी, मानकों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क का त्वरित रूप से पुनर्निर्माण कर आमजन को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी निर्देश दिए कि जिले में संचालित अन्य निर्माण कार्यों की भी विशेष समीक्षा की जाए, ताकि कहीं और इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही करने वालों के विरुद्ध जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई अनिवार्य होगी। उन्होंने  निर्देश दिए कि सतत मॉनिटरिंग, फील्ड निरीक्षण और प्रभावी गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के माध्यम से विकास कार्यों की विश्वसनीयता एवं टिकाऊपन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है - जनहित के प्रत्येक कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद अधोसंरचना का लाभ मिल सके।

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