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छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज और MBBS की सीटें बढ़ाने का उद्देश्य ही यही है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक बच्चों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिले।


जायसवाल ने कहा है कि डोमिसाइल को लेकर अगर कहीं कोई शंका या शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी।व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाया गया है। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कहीं नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया गया तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने मेहनत की है, उनके भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाना हमारी उपलब्धि है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों को ही मिले। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।

नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग

पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी काउंसलिंग, मेरिट और आवंटन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रचलित प्रवेश नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपादित की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग समिति ने नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नियम 7 के तहत होगा सत्यापन

छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) स्नातक प्रवेश नियम, 2025 के नियम 7 के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीयन, प्राथमिकता क्रम का निर्धारण, आवंटन, मूल दस्तावेजों की संवीक्षा एवं प्रवेश की प्रक्रिया शामिल है। पात्रता परीक्षण के दौरान मूल निवासी प्रमाण-पत्र, श्रेणी/संवर्ग संबंधी प्रमाण-पत्र तथा नियमानुसार अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवंटन के बाद अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और उनके सत्यापन में पात्र पाए जाने के उपरांत ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।

गलत जानकारी दी तो निरस्त होगा प्रवेश

प्रवेश नियम के नियम 12 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा झूठी या गलत जानकारी देकर अथवा प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर प्रवेश प्राप्त किया गया हो, या प्रवेश के बाद किसी भी समय यह पाया जाए कि अभ्यर्थी को किसी त्रुटि अथवा चूक के कारण प्रवेश प्राप्त हो गया है, तो नियमानुसार उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। मूल निवासी अथवा अन्य दस्तावेजों को लेकर कोई शिकायत या तथ्य सामने आने पर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।

अफवाहों से बचें, पोर्टल पर करें शिकायत दर्ज

राज्य काउंसलिंग समिति ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि काउंसलिंग को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रम या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। किसी भी शंका, समस्या या शिकायत की स्थिति में अभ्यर्थी अधिकृत काउंसलिंग पोर्टल पर Candidate Login में उपलब्ध "Candidates Grievances and Query Redressal System" के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अथवा काउंसलिंग शाखा के ई-मेल cgdme.counseling@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

 

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।


छत्तीसगढ़ भी सौर ऊर्जा की अपनी अपार संभावनाओं का उपयोग करते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूती दे रहा है। प्रदेश में मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘संवाद’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला यह अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन है। अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और सुझावों का यह सार्थक संवाद छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को नई गति देगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऊर्जा विकास की बुनियादी आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही मजबूत स्थिति में है और वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹3 लाख 50 हजार करोड़ के एमओयू हुए हैं, जिनसे आने वाले समय में लगभग 30 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

स्वच्छ ऊर्जा से सुरक्षित होगा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन एनर्जी के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दे रहे हैं। सूर्य हमें प्रकृति से प्राप्त स्वच्छ, अक्षय और प्रचुर ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में आने वाले समय में 4 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने सामान्य परिवारों को ऊर्जा उपभोक्ता के साथ ऊर्जा उत्पादक बनने का भी अवसर दिया है। छत्तीसगढ़ में योजना को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदेश में अब तक लगभग 95 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्रदेश के 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सोलर उद्योगों, वेंडर्स, बैंकिंग संस्थाओं और नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित करने पर केंद्र सरकार द्वारा ₹30 हजार और राज्य सरकार द्वारा ₹15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। इसी प्रकार 3 किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर लगभग ₹1 लाख 8 हजार की सब्सिडी उपलब्ध है। डीएमएफ वाले क्षेत्रों में अनुदान की अंतर राशि डीएमएफ से उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इससे अधिक से अधिक परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

सौर ऊर्जा से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही नारी शक्ति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की बहनें अब सोलर वेंडर के रूप में आगे आ रही हैं और हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित करने का कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला वेंडरों से संवाद किया। महिलाओं ने बताया कि वे स्वयं हितग्राहियों के घर जाकर सोलर संयंत्र स्थापित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की प्रेरक तस्वीर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 82 हजार स्व-सहायता समूहों से 30 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारी माताएं-बहनें प्रतिभा और उद्यमशीलता से परिपूर्ण हैं। सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों से उन्हें जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और आयवृद्धि के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम अपने नाम के अनुरूप सार्थक सिद्ध हुआ है। सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के एक मंच पर आने, अनुभव साझा करने और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने से निश्चित रूप से प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें सूर्य के रूप में ऊर्जा का असीम स्रोत दिया है। घरों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करके परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई के क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो रहा है और लगभग ढाई लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किए जा चुके हैं। आने वाले समय में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग का और विस्तार किया जाना चाहिए। इससे ऊर्जा पर होने वाले व्यय में कमी के साथ किसानों को भी दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विकास की मजबूत नींव रखी गई है और अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसे नई गति मिल रही है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संतोष मिश्रा ने कहा कि ‘संवाद’ कार्यक्रम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नए विचारों, संभावनाओं और संकल्पों को साझा करने का प्रभावी मंच बना है। प्रदेश में हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उद्योगों, वेंडर्स, वित्तीय संस्थाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को एक मंच मिलने से इस क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि ‘हर घर सोलर, हर घर ऊर्जा आत्मनिर्भर’ के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सोलर उद्योगों के स्टॉलों का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम परिसर में सोलर उद्योगों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने सोलर पैनल, उपकरणों, नवीन तकनीकों और हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली संस्थाओं, बैंकों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन की डायरेक्टरी का विमोचन भी किया। डायरेक्टरी में प्रदेशभर के एसोसिएशन पदाधिकारियों और वेंडर्स के संपर्क विवरण के साथ शासन की ऊर्जा संबंधी योजनाओं की उपयोगी जानकारी संकलित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ सोलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति एवं वेंडर्स, बैंक अधिकारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मंत्री केदार कश्यप के काफिले से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, 6 घायल

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 कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में रविवार को वन मंत्री केदार कश्यप के काफिले के साथ बड़ा सड़क हादसा हो गया। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के घोड़ागांव के पास NH-30 पर तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने मंत्री के वाहन को साइड से टक्कर मार दी। इसके बाद अनियंत्रित स्कॉर्पियो काफिले में चल रही फॉलो वाहन से जा भिड़ी।


हादसे में 6 लोग घायल हुए हैं। इनमें चार पुलिस जवानों और फॉलो वाहन के चालक की हालत गंभीर बताई जा रही है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि काफिले की तीन गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।

घोड़ागांव के पास हुआ हादसा

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मंत्री केदार कश्यप का काफिला NH-30 से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही स्कॉर्पियो ने मंत्री के वाहन को साइड से टक्कर मार दी। इसके बाद स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पीछे चल रही फॉलो वाहन से टकरा गई।

दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए कोंडागांव जिला अस्पताल पहुंचाया।

घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे मंत्री

हादसे की जानकारी मिलने के बाद वन मंत्री केदार कश्यप भी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायलों का हालचाल जाना और डॉक्टरों से उनके उपचार की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

हादसे की जांच जारी

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

पत्नी संग भिलाई पहुंचे CM साय, पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में हुए शामिल

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 दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भिलाई पहुंचे। यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा वाचित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर कथा का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया।


सीएम साय ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

शिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर देवाधिदेव भगवान महादेव की विशेष कृपा है। प्रदेश में भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर विराजित देवी-देवताओं की भी असीम कृपा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों में आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है।

साइबर जागरूकता पोस्टर का किया विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साइबर जागरूकता से संबंधित पोस्टर का विमोचन भी किया। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने की अपील की।

सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन भिलाई में भक्ति और आस्था का माहौल रहा। मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

तिहारू भी जान गया है, क्या है सुराज

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 छगन लाल लोन्हारे - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य गाँवों और शहरों के द्वार पर पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गत माह आयोजित इस अभियान के तहत जनता से सीधे संवाद और विकास कार्यों को गति दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन पोर्टल पर जा सकते हैं।


बस्तर का आयतु हो या सरगुजा जिले का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार अपनी बात बेबाकी से प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय के समक्ष खड़े होकर कह सकता है कि साहब हमारे यहां पीडीएस यानी सरकारी उचित मूल्य की दुकान का अनाज एवं अन्य खाद्यान सामग्री किफायती दर पर और सही समय पर मिल रहा है अथवा नहीं ? सुशासन जो कि गुड गवर्नेस कहने पर आसानी से लोगों के जहन में बसता है इसका वास्तविक अर्थ है ऐसा शासन जो लोक-केंद्रित हो, पारदर्शी हो और जिसमें जनता की आवाज सर्वाेपरि हो।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रशासन की सहजता से पहुंच

पिछले दिनों सफलता पूर्वक सम्पन्न सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने औचक ग्रामीणों के बीच पहुँचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि शासन को इस प्रकार संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचे। सुशासन तिहार इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। इसी मंशा से प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों ने भी गाँव की चौपाल में अपने मुखिया के समक्ष विभिन्न सार्वजनिक जरूरतों के बारे में प्रमुखता से अपनी बात रखी। चाहे वह हेण्डपम्प की हो या तालाब में घाट का निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाडी भवन, पहुंचमार्ग का निर्माण अथवा विद्युत लाईन का विस्तार, मध्यान्ह भोजन की बात हो या स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के संबंध में अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान

सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की छोटी-छोटी सार्वजनिक जरूरतों को मौके पर ही तुरन्त अपनी मंजूरी प्रदान की। गांव वालों के बीच हेलीकॉप्टर का अचानक उतरना लोगों के लिए कौतूहल का विषय होता है, उनके बीच प्रदेश के मुखिया उनके दुःख-दर्द का हालचाल जानने आए हैं, वह भी बैशाख-जेठ महिने की तपती दोपहरी में। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीण भी सहज होकर आत्मीयता से अपनी बात रखते। मुख्यमंत्री भी उनकी सार्वजनिक जरूरतों की मांग को मौके पर ही पूरा कर देते। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसानों की विभिन्न समस्याओं का यथा संभव तुरन्त समाधान करने इस वर्ष पूरे प्रदेश में 01 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार संचालित किया गया।

ग्रामीणों से चौपाल में समस्याओं तथा जरूरतों की भी ली जानकारी

छत्तीसगढ़ में सरकार और जनता के बीच परस्पर संवाद के एक प्रभावी माध्यम के रूप में सुशासन तिहार संचालित हुआ जो सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया। इस वर्ष भी प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखण्डों में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अभियान दलों का गठन कर उन्हें गांवों में भेजा गया। राज्य में कुल 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत गांव की संख्या 19 हजार 820 के आसपास हैं। अभियान के तहत् विभिन्न विभागों के हजारों अधिकारी और कर्मचारी अलग-अलग जत्थों में पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गांवों में रात रूक कर ग्रामीणों से चौपाल में उनकी समस्याओं तथा जरूरतों की जानकारी भी ली।

शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में भाग लिया। मुख्यमंत्री और सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों तथा प्रभारी सचिवों ने इस दौरान विभिन्न जिलों के गांवों का आकस्मिक दौरा कर सुशासन तिहार का सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हुए शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन भी किया। अभियान के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अन्त्योदय अन्न योजना, अनाज भण्डारण और वितरण की स्थिति, भौगोलिक दृष्टि से पहुंचविहीन क्षेत्रों में मानसून के पहले आवश्यक वस्तुओं के समुचित भण्डारण, बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की भी समीक्षा की गई।

श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व - प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा

महात्मा गांधी नरेगा तथा अन्य रोजगार मूलक कार्यों की प्रगति और उनमें लगे श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व - प्रकरणों के निराकरण के अंतर्गत आविवादित नामांतरण, बटवारा और सीमांकन के मामलों की स्थिति, पेयजल व्यवस्था और पेयजल स्त्रोंतो की साफ-सफाई सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल ग्राम योजना, विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाईनों के समुचित रख-रखाव, कृषि पम्पों के विद्युतिकरण और एकल बत्ती कनेक्शन से संबंधित शासकीय प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

स्वाइन फ्लू की एंट्री से दुर्ग में बढ़ी सतर्कता, बच्ची H1N1 पॉजिटिव

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 दुर्ग। जिले में स्वाइन फ्लू का पहला पुष्ट मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 2 साल 11 माह की बच्ची की जांच रिपोर्ट H1N1 पॉजिटिव आई है। बच्ची का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


सिविल सर्जन डॉ. आशीष कुमार मिंज के अनुसार, बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के चलते दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वाइन फ्लू की आशंका को देखते हुए उसका आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया गया। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।

परिवार के सदस्यों के भी लिए गए सैंपल

बच्ची की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए हैं। विभागीय टीम ने बच्ची के घर और आसपास के क्षेत्र में सर्वे शुरू कर दिया है। संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के भी सैंपल लिए गए हैं और उनकी जांच कराई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संक्रमण के प्रसार की आशंका को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।

तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी प्रमुख लक्षण

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर लोगों को लापरवाही न बरतते हुए तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी गई है।

दुर्ग जिले में H1N1 संक्रमण का यह पहला पुष्ट मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से बिगड़े हालात, कई गांवों का संपर्क टूटा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है, जबकि कुछ जगह सड़कें जलमग्न होने और पुराने पुलों को नुकसान पहुंचने से आवागमन मुश्किल हो गया है। 

उफान पर नदियां, गांवों में बढ़ी परेशानी

लगातार बारिश के बाद कई नदी-नालों में पानी तेजी से बढ़ा है। सूरजपुर के ओड़गी ब्लॉक का रसौकी गांव करीब छह दिनों से लगभग कटा हुआ है, जहां बरगा नदी के जलस्तर बढ़ने के बाद तहसील और जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क और पुलों पर भी असर

बारिश का असर राज्य के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं और पुराने पुलों को नुकसान पहुंचने से आवाजाही बाधित हुई है। इससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।

12 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का दौर आगे भी जारी रह सकता है। राज्य के 12 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिनमें सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, बेमेतरा और कबीरधाम समेत अन्य जिले शामिल हैं। 

राहत और बचाव पर प्रशासन की नजर

लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राहत एवं बचाव दलों को भी जरूरत के अनुसार तैनात किया गया है। प्रशासन लोगों से उफनती नदियों और नालों को पार करने से बचने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है। 

बड़ी बात

छत्तीसगढ़ में मानसून की बारिश ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के कमजोर सड़क और पुल नेटवर्क की समस्या को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांवों का संपर्क बनाए रखना और प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर बड़ा सवाल: रॉकेट लॉन्च लागत में भारत सबसे महंगा?

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नई दिल्ली- भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लंबे समय से अपनी कम लागत और “frugal engineering” के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन Cambridge University और Politecnico di Torino के शोधकर्ताओं की एक नई peer-reviewed study ने इसी धारणा पर सवाल खड़े किए हैं।

अध्ययन के अनुसार, 2025 में भारत से Low Earth Orbit (LEO) में 1 किलोग्राम payload भेजने की अनुमानित लागत करीब $13,302 प्रति किलोग्राम थी। यह अध्ययन में शामिल प्रमुख space powers में सबसे अधिक है।

भारत की लागत अमेरिका से करीब चार गुना

अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार 2025 में अनुमानित LEO launch cost इस प्रकार थी:

  • भारत — $13,302/kg

  •  यूरोप — $9,897/kg

  •  रूस — $6,682/kg

  •  चीन — $5,809/kg

  •  जापान — $5,287/kg

  •  अमेरिका — $3,225/kg

वैश्विक औसत करीब $3,868/kg था। यानी भारत का अनुमानित per-kilogram cost अमेरिका के मुकाबले लगभग चार गुना था।

भारत की लागत इतनी ज्यादा क्यों?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।

यह आंकड़ा किसी ग्राहक से वसूली जाने वाली सीधी commercial launch price नहीं है। यह शोधकर्ताओं द्वारा निकाला गया औसत cost-per-kilogram estimate है।

शोध के अनुसार भारत में अपेक्षाकृत छोटे payloads और कम launch frequency के कारण एक rocket launch की fixed लागत कम kilograms पर distribute होती है। इससे हर kilogram की अनुमानित लागत बढ़ जाती है।

दूसरी ओर, अमेरिका में बड़े rockets, ज्यादा launch frequency और reusable launch systems ने cost efficiency को काफी बढ़ाया है।

 भारत की “कम लागत वाली Space Power” वाली छवि पर सवाल

भारत की ISRO को लंबे समय से कम लागत में बड़े space missions पूरा करने के लिए सराहा जाता है।

उदाहरण के तौर पर, Cambridge Judge Business School ने भी भारत के Mars Orbiter Mission और Chandrayaan-3 को relatively modest budgets में हासिल किए गए महत्वपूर्ण space achievements के रूप में रेखांकित किया है।

लेकिन नई study एक अलग चीज मापती है:

एक पूरे space mission की कुल लागत नहीं, बल्कि Low Earth Orbit तक 1 kilogram payload पहुंचाने की अनुमानित लागत।

इसलिए दोनों आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

Study कितनी बड़ी थी?

शोधकर्ताओं Alessio Terzi और Francesco Nicoli ने दशकों के rocket-launch data का इस्तेमाल किया। संबंधित research में हजारों launches का database इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ launch technology और experience से costs कैसे बदलती हैं।

शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि launch frequency और accumulated experience लागत घटाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका को क्यों मिल रहा है बड़ा फायदा?

अमेरिका के space-launch ecosystem में बड़ी commercial कंपनियां और high-frequency launch operations हैं।

विशेष रूप से SpaceX ने reusable rockets और लगातार launches के जरिए launch economics को बदल दिया है।

Cambridge की एक अन्य 2026 analysis के अनुसार, 2025 में SpaceX का global orbital payload market में करीब 75% हिस्सा था।

इस तरह बड़े पैमाने पर launches होने से infrastructure, technology और operational experience की लागत ज्यादा missions में spread होती है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

यह study भारत के बढ़ते commercial space sector के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा सकती है।

भारत अब सिर्फ सरकारी space missions तक सीमित नहीं रहना चाहता। देश में private launch companies और satellite businesses तेजी से विकसित हो रहे हैं।

ऐसे में वैश्विक launch market में प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को:

  •  launch frequency बढ़ानी होगी

  •  ज्यादा payload capacity विकसित करनी होगी

  •  reusable launch technology पर काम बढ़ाना होगा

  •  private-sector participation को मजबूत करना होगा

  •  economies of scale हासिल करनी होंगी

 क्या इसका मतलब है कि ISRO के सभी missions महंगे हैं?

नहीं।

यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि भारत का हर space mission अमेरिका से महंगा है।

Study का आंकड़ा खास तौर पर estimated cost per kilogram to Low Earth Orbit से संबंधित है। यह किसी एक मिशन की कुल लागत या ISRO की पूरी space programme की लागत को नहीं दर्शाता।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत अगले दशक में अपने space economy को तेजी से विस्तार देने की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में global launch market में कम लागत और high-frequency launches भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

इस study का संदेश साफ है:

भारत ने कम लागत वाले space missions में शानदार सफलता हासिल की है, लेकिन commercial orbital launch economics में अभी अमेरिका और अन्य प्रमुख space powers से बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 Bottom Line

Cambridge-linked research के अनुसार 2025 में भारत का estimated LEO launch cost $13,302 प्रति किलोग्राम था—major space powers में सबसे ज्यादा।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत का पूरा space programme महंगा है। असल चुनौती launch scale, payload capacity, launch frequency और reusable technology में है।

अगर भारत इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार करता है, तो उसकी बढ़ती private space industry आने वाले वर्षों में global launch market में ज्यादा competitive बन सकती है।

मुंबई में गणेश प्रतिमा गिरने से बड़ा हादसा: 2 की मौत, 5 घायल

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मुंबई - मुंबई के भुलेश्वर इलाके में शनिवार रात गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। 22 फीट ऊंची ‘भुलेश्वरचा राजा’ गणेश प्रतिमा आगमन जुलूस के दौरान अचानक गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।

कहां और कैसे हुआ हादसा?

यह घटना रात करीब 10 बजे भुलेश्वर के बालाराम मर्चेंट रोड, जय अंबे चौक के पास हुई। प्रतिमा को बायकुला से भुलेश्वर ले जाया जा रहा था और पंडाल से करीब 50–60 मीटर पहले यह अचानक असंतुलित होकर गिर गई। 

 दो लोगों की मौत

हादसे में संकेत नेवशे (33) और ब्रिजेश हेमंत जोशी (30) की मौत हो गई। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।

घायलों में दो बच्चे—5 साल की लावण्या और 7 साल की दिव्या भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार घायल सभी पांच लोगों की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।

प्रतिमा गिरने की वजह क्या थी?

शुरुआती जानकारी में प्रतिमा के सपोर्टिंग फ्रेम के कुछ nuts और bolts ढीले होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी बताया है कि प्रतिमा के असंतुलित होने की संभावना की जांच की जा रही है। हादसे की अंतिम वजह अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है। 

मौके पर पहुंचीं राहत टीमें

हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, 108 एंबुलेंस और BMC की टीमों को मौके पर भेजा गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के साथ इलाके में भीड़ और यातायात को नियंत्रित किया गया।

पुलिस की जांच जारी

हादसे को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिमा के गिरने के पीछे फ्रेम की तकनीकी खराबी, असंतुलन या परिवहन व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं। 

बड़ी बात

गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच हुए इस हादसे ने बड़ी और भारी गणेश प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन और स्थापना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज और घटना की पूरी जांच पर है। 

हादसे में 2 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 लोग घायल हुए हैं। प्रतिमा गिरने की सटीक वजह की जांच जारी है।

ओडिशा तट के पास बड़ा समुद्री हादसा: 24 क्रू सदस्यों वाला कार्गो जहाज डूबा, 2 लोग बचाए गए

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भुवनेश्वर- ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ है। पनामा-फ्लैग वाला बल्क कैरियर MV Ocean Winner शनिवार को समुद्र में डूब गया। जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य सवार थे। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बड़े पैमाने पर Search and Rescue Operation शुरू किया है।

जहाज कहां जा रहा था?

MV Ocean Winner ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट से 20 अगस्त की रात अपनी यात्रा शुरू की थी। जहाज करीब 72,100–72,200 मीट्रिक टन लौह अयस्क (Iron Ore Fines) लेकर सिंगापुर जा रहा था। 

हादसे के समय जहाज पर 24 विदेशी क्रू सदस्य मौजूद थे:

  • 20 चीनी नागरिक

  •  3 म्यांमार के नागरिक

  •  1 बांग्लादेशी नागरिक

अचानक टूट गया संपर्क

अधिकारियों के अनुसार, जहाज के साथ संपर्क टूटने की सूचना 22 अगस्त को मिली। इसके बाद Maritime Rescue Coordination Centre और भारतीय एजेंसियों ने तुरंत Search and Rescue Operation शुरू किया।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार जहाज समुद्री tracking system से भी गायब हो गया था। हादसे की सटीक वजह अभी सामने नहीं आई है और इसकी जांच की जा रही है। 

 2 क्रू सदस्य सुरक्षित मिले

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी राहत की खबर सामने आई। पास से गुजर रहे MT AISOPOS नामक जहाज ने दो अलग-अलग life rafts से 2 क्रू सदस्यों को जीवित बचा लिया। 

फिलहाल बाकी 22 क्रू सदस्यों की तलाश जारी है।

Coast Guard और Navy ने संभाला मोर्चा

भारतीय तटरक्षक बल ने Search and Rescue Operation को तेज करते हुए कई जहाजों को तैनात किया है। ICGS Varad और ICGS Anmol को ऑपरेशन में लगाया गया है, जबकि ICGS Vijit को भी खोज अभियान में शामिल किया गया है। आसपास मौजूद अन्य जहाजों को भी राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए अलर्ट किया गया है। 

खराब समुद्री परिस्थितियां बनी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने समुद्र की स्थिति भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के अनुसार कुछ क्रू सदस्य life rafts या lifebuoys के सहारे समुद्र में हो सकते हैं, इसलिए बचाव दल लगातार संभावित इलाकों में तलाश कर रहे हैं। 

जहाज क्यों डूबा?

फिलहाल MV Ocean Winner के डूबने की वजह स्पष्ट नहीं है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि:

  • क्या जहाज में कोई तकनीकी खराबी आई थी?

  • क्या समुद्र की खराब स्थिति हादसे की वजह बनी?

  • संपर्क टूटने से पहले क्या कोई distress signal भेजा गया था?

  • जहाज tracking system से क्यों गायब हुआ?

  • जहाज इतनी तेजी से कैसे डूबा?

अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। 

अभी की सबसे बड़ी खबर

MV Ocean Winner के 24 क्रू सदस्यों में से 2 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 22 अन्य की तलाश भारतीय Coast Guard और Navy द्वारा जारी है।

यह हादसा ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में हुआ है। बचाव अभियान लगातार जारी है। 

2029 में 22 राज्यों के साथ विधानसभा चुनाव? NDA के One Nation, One Election प्लान की पूरी कहानी

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नई दिल्ली- भारत में चुनावी व्यवस्था को लेकर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में सत्तारूढ़ NDA 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

यह प्रस्ताव “One Nation, One Election” यानी “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में मौजूदा योजना से भी पहले कदम बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है। अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और मामला राजनीतिक तथा संवैधानिक चर्चा के दौर में है।

क्या है पूरा मामला?

भारत में फिलहाल लोकसभा और अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। इसका मतलब है कि देश में लगभग हर साल कहीं न कहीं चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है।

One Nation, One Election का विचार यह है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ या एक समन्वित चुनाव चक्र में कराया जाए।

अब NDA के सामने जो विकल्प बताया जा रहा है, उसके अनुसार 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ 22 NDA-शासित/समर्थित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।

22 राज्यों में चुनाव क्यों?

रिपोर्ट के अनुसार इन 22 राज्यों/UTs में NDA या उसके सहयोगी दलों की सरकार/बहुमत है। इनमें से कई राज्यों की विधानसभा का सामान्य कार्यकाल 2029 लोकसभा चुनाव से पहले समाप्त हो जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से 11 राज्यों/UTs में अगले दो वर्षों के दौरान चुनाव होने हैं।

इनमें प्रमुख रूप से 2027 और 2028 में चुनाव वाले राज्य शामिल हैं, जैसे:

  • छत्तीसगढ़

  • मध्य प्रदेश

  • मेघालय

  • राजस्थान

  • त्रिपुरा

इसके अलावा हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 2029 के आसपास चुनाव होने हैं।

एक महत्वपूर्ण तथ्य

ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव पहले से ही लोकसभा चुनाव के साथ होते हैं। इसलिए इन राज्यों को एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत कम समायोजन की जरूरत होगी।

सबसे बड़ा सवाल: कार्यकाल खत्म होने से पहले विधानसभा कैसे भंग होगी?

यही इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण और विवादित हिस्सा है।

अगर किसी राज्य की विधानसभा का कार्यकाल 2030 या उसके आसपास तक है, लेकिन 2029 में लोकसभा के साथ चुनाव कराना है, तो उस विधानसभा को अपने सामान्य कार्यकाल से पहले समाप्त करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि संबंधित राज्यों में NDA सरकारें अगले वर्षों में बनी रहती हैं, तो जनवरी 2029 तक कुछ विधानसभाओं को भंग करने का विकल्प विचाराधीन हो सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है। विधानसभा भंग होने के बाद कानून के अनुसार चुनाव निर्धारित अवधि के भीतर कराना होता है।

इसलिए 2029 में एक साथ चुनाव कराने के लिए राजनीतिक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण होंगी।

अभी योजना क्या है और बदलाव क्या होगा?

मौजूदा One Nation, One Election से जुड़े प्रस्तावों के अनुसार चुनावों को धीरे-धीरे एक चक्र में लाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।

वर्तमान विधायी ढांचे की रिपोर्ट की गई टाइमलाइन में पहला पूर्ण समकालिक चुनाव चक्र 2034 के आसपास दिखाई देता है।

लेकिन NDA के भीतर अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इसे 2029 से ही शुरू किया जा सकता है।

यानी सरल भाषा में:

मौजूदा प्रस्ताव → 2034 के आसपास पूर्ण समन्वय

NDA में विचाराधीन विकल्प → 2029 से बड़ा हिस्सा एक साथ

संसद की संयुक्त समिति क्या कर रही है?

“One Nation, One Election” से संबंधित विधेयकों की जांच के लिए संसद की Joint Parliamentary Committee (JPC) काम कर रही है।

समिति विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और दूसरे हितधारकों से चर्चा कर रही है। इसमें संवैधानिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद, नागरिक समाज और अन्य पक्ष भी शामिल हैं।

समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने इस मुद्दे पर कहा है कि अगर चुनाव पहले कराए जाने हैं तो यह फैसला मुख्य रूप से NDA के मुख्यमंत्रियों/राज्य सरकारों से संबंधित होगा और यह समिति के मूल अधिकार-क्षेत्र से अलग मुद्दा है।

क्या 2029 में ऐसा करना कानूनी रूप से आसान होगा?

नहीं। यह सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं होगा।

एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान और चुनाव संबंधी कानूनों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। विधानसभा और लोकसभा के कार्यकाल, विधानसभा भंग होने की स्थिति और चुनावी चक्र को एक साथ लाने जैसे मुद्दे इसमें शामिल हैं।

इसीलिए “One Nation, One Election” सिर्फ चुनाव की तारीख बदलने का मामला नहीं है; यह भारत की चुनावी व्यवस्था में बड़ा संस्थागत बदलाव होगा।

विपक्ष की क्या आपत्ति है?

विपक्षी दलों की मुख्य चिंताओं में से एक यह है कि अगर किसी राज्य की विधानसभा का सामान्य कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव करा दिए जाते हैं, तो राज्य की लोकतांत्रिक अवधि कम हो सकती है।

विपक्ष यह सवाल भी उठा सकता है कि क्या राष्ट्रीय चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव होने पर स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के पीछे दब जाएंगे।

कुछ विपक्षी दल इसे संघीय ढांचे के लिए चुनौती के रूप में भी देखते हैं। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि बार-बार चुनावों से होने वाले खर्च और प्रशासनिक व्यवधान को कम किया जा सकता है।

सरकार/NDA के पक्ष में मुख्य तर्क

One Nation, One Election के समर्थकों के अनुसार इसके कई संभावित फायदे हैं:

1. चुनावी खर्च में कमी
बार-बार चुनाव होने से सरकार, राजनीतिक दलों और चुनाव मशीनरी पर लगातार खर्च होता है। एक साथ चुनाव कराने से इसमें कमी आ सकती है।

2. बार-बार Model Code of Conduct से राहत
चुनाव की घोषणा के बाद Model Code of Conduct लागू होता है। लगातार चुनाव होने पर सरकारों के नीतिगत और विकास कार्यों पर असर पड़ने की दलील दी जाती है।

3. प्रशासनिक मशीनरी पर कम दबाव
पुलिस, सुरक्षा बलों और सरकारी कर्मचारियों को बार-बार चुनाव ड्यूटी में लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

4. राजनीतिक स्थिरता
समर्थकों का कहना है कि सरकारें लगातार चुनावी तैयारी करने के बजाय लंबे समय की नीतियों पर ध्यान दे सकती हैं।

लेकिन इसके खिलाफ प्रमुख तर्क क्या हैं?

1. राज्यों की स्वायत्तता का सवाल
भारत एक संघीय व्यवस्था है, जहां राज्य सरकारों का अपना राजनीतिक और संवैधानिक महत्व है।

2. विधानसभा का कार्यकाल छोटा करने की समस्या
यदि किसी सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले विधानसभा भंग होती है, तो इसे लेकर राजनीतिक विवाद हो सकता है।

3. स्थानीय मुद्दों पर असर
लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ होने पर बेरोजगारी, सड़क, बिजली, पानी, कृषि जैसे राज्य-विशिष्ट मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के पीछे चले जाने की आशंका जताई जाती है।

4. सरकार गिरने की स्थिति
अगर किसी राज्य में चुनाव के बाद सरकार गिर जाती है और नई सरकार नहीं बनती, तो एक साथ चुनाव चक्र को बनाए रखना कठिन हो सकता है।

2029 का प्रस्ताव इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

अगर NDA इस योजना को लागू करने में सफल होता है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत के चुनावी इतिहास में एक बड़े बदलाव का शुरुआती बिंदु बन सकता है।

इसका मतलब यह होगा कि देश के बहुत बड़े हिस्से में मतदाता एक ही चुनावी अवधि में:

लोकसभा + विधानसभा

के लिए मतदान कर सकते हैं।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि 22 राज्यों में 2029 में एक साथ चुनाव कराने की खबर अभी एक विचाराधीन राजनीतिक विकल्प की रिपोर्ट है, अंतिम निर्णय नहीं।

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब होगा?

अगर योजना लागू होती है, तो 2029 में कई राज्यों के मतदाताओं को लोकसभा और विधानसभा के लिए एक ही चुनाव अवधि में वोट देना पड़ सकता है।

मतदाता को दो अलग-अलग स्तरों पर सरकार चुननी होगी:

केंद्र के लिए → लोकसभा सांसद

राज्य के लिए → विधायक

इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों वोट एक ही पार्टी को देना जरूरी होगा। मतदाता लोकसभा में एक पार्टी और विधानसभा में दूसरी पार्टी को भी वोट दे सकता है।

सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है:

क्या NDA 2029 में 22 राज्यों/UTs में विधानसभा चुनाव कराने के लिए राजनीतिक और संवैधानिक सहमति जुटा पाएगा?

इसके लिए अगले चरण में राज्य सरकारों की भूमिका, संसद में विधायी प्रक्रिया, संवैधानिक संशोधन और विपक्ष की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी।

निष्कर्ष

One Nation, One Election को 2029 से बड़े स्तर पर लागू करने की संभावित चर्चा भारत की चुनावी राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम है।

लेकिन अभी इसे “2029 में 22 राज्यों में चुनाव पक्का” कहना सही नहीं होगा।

सही स्थिति यह है कि NDA 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ 22 NDA-बहुमत वाले राज्यों/UTs में विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है, जबकि मौजूदा विधायी टाइमलाइन का पूर्ण समकालिक चक्र 2034 के आसपास बताया गया है। आगे की तस्वीर संसद, राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत से साफ होगी।

शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र, भावी पीढ़ी को शिक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री कंवर समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई सामाजिक सेवा और दायित्वों के निर्वहन की शपथ

जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कर रही कार्य

नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर में विकास ने पकड़ी रफ्तार, जनजातीय युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर

कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 1.55 करोड़ रुपए से अधिक की राशि देने की घोषणा

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने कंवर समाज के सामुदायिक भवन परिसर में लगाया सिंदूर का पौधा

रायपुर- शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी भावी पीढ़ी को मिलने वाली शिक्षा, संस्कार और अवसरों पर निर्भर करती है। समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले, यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज विकास समिति के प्रदेश अध्यक्ष सहित नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कंवर समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। संत गहिरा गुरु जैसे महान संतों और समाज के पुरोधाओं ने शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का जो मार्ग दिखाया है, उसी पर आगे बढ़ते हुए नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सामाजिक सेवा और अपने दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने प्रकृति शक्ति तथा कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन किया। इस अवसर पर समाज के युवक-युवतियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

मुख्यमंत्री साय ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज द्वारा सौंपा गया दायित्व समाज को आगे ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी निष्ठा, समर्पण और सामूहिक भावना के साथ समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कंवर समाज के पदाधिकारियों का पूरा निर्वाचन निर्विरोध और सर्वसम्मति से संपन्न होना समाज की एकता और संगठन की मजबूती का प्रमाण है। समाज की यही एकजुटता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक और मजबूत बनाकर पहुंचाना होगा। उन्होंने स्मरण किया कि एक समय कंवर समाज अलग-अलग इकाइयों में बंटा हुआ था, लेकिन वरिष्ठजनों और समाज के पुरोधाओं के प्रयासों से सभी को एक सूत्र में जोड़ा गया। उन्होंने महाराष्ट्र से आए कंवर समाज के प्रतिनिधियों और सगा-बंधुओं का भी छत्तीसगढ़ में आत्मीय स्वागत किया।

शिक्षा से खुलते हैं जीवन में आगे बढ़ने के अनेक रास्ते

मुख्यमंत्री साय ने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शासकीय नौकरी प्राप्त करना नहीं है। एक सफल उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी अच्छी शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को निर्णय लेने की क्षमता देती है और समाज को प्रगति की दिशा दिखाती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। समाज के सक्षम और प्रबुद्ध लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करें और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

मोदी की गारंटी से जनकल्याण को मिली नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए वादों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया है। सरकार गठन के दूसरे ही दिन 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है और तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। प्रदेश के लगभग भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से बुजुर्गों की तीर्थयात्रा की इच्छा पूरी की जा रही है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।

जनजातीय समाज का सम्मान और विकास सरकार की प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6 हजार 661 गांवों को शामिल किया गया है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से सड़क, आवास, बिजली, राशन कार्ड और नल से जल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन के अंतर्गत देशभर में बन रही लगभग 4 हजार किलोमीटर सड़कों में से 2 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें छत्तीसगढ़ में बन रही हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 57 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की सुविधा दे रही हैं।

नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर में विकास की नई सुबह

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का एक बड़ा भू-भाग चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद की त्रासदी के कारण विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य चुनौतीपूर्ण थे, आज वहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से ढाई वर्षों में 500 से अधिक गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बस्तर में व्यापक स्वास्थ्य अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और गंभीर अथवा लंबे समय से बीमार 40 हजार से अधिक लोगों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है। शांति और विश्वास के नए वातावरण के साथ बस्तर में शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी खुल रहे हैं।

प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की ताकत

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। प्रदेश में आयरन ओर, कोयला, बॉक्साइट, लिथियम, टिन, सोना और हीरा जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। बस्तर की वनोपज के वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर तैयार हों।

उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी तेजी से अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए पिछले ढाई वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है और इस अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कंवर समाज से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सेवा के साथ प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि कंवर समाज छत्तीसगढ़ की जनजातीय समाज व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है। शिक्षा समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। कोई भी बालक-बालिका शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज को सामूहिक प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि कंवर समाज सहित प्रदेश की 42 जनजातियों का छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। समाज को शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।

कंवर समाज विकास समिति के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पद के साथ समाज की एकता, सेवा, शिक्षा, संस्कार और उत्थान की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को समाज के नवनिर्माण और विकास की नई संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन कंवर भवन भविष्य में समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

सामुदायिक भवनों के लिए 1.55 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपए से अधिक की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें रायपुर के लाभांडी में नवनिर्माणाधीन कंवर भवन के विकास एवं आवश्यक अधोसंरचना के लिए 70 लाख रुपए, राजनांदगांव के छुरिया परिक्षेत्र में कंवर समाज भवन के लिए 25 लाख रुपए, कंवर पैंकरा समाज सर्कल तमोरा में सामुदायिक शेड के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम खैरझिटी में आदिवासी कंवर (पैंकरा) समाज के सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, महासमुंद जिले के पथरी परिक्षेत्र के ग्राम नरतोरा में सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम झलप में सामाजिक भवन के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 20 लाख रुपए तथा गरियाबंद जिले के ग्राम जोजरा में कंवर समाज भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए शामिल हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाया सिंदूर का पौधा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लाभांडी स्थित कंवर समाज के नवनिर्माणाधीन सामुदायिक भवन परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री के साथ समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों, वरिष्ठ सगा-जनों और प्रबुद्धजनों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, महासचिव शिव कुमार कंवर, कार्यकारी अध्यक्ष थान सिंह दीवान, महिला प्रभाग की अध्यक्ष  सविता साय, कोषाध्यक्ष प्रेम सिंह कंवर, आर.के. साय, भीम सिंह कंवर सहित कंवर समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

यूक्रेन में रूस का भीषण ड्रोन हमला, शॉपिंग सेंटर तबाह; 16 की मौत, 130 से ज्यादा घायल

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह में शुक्रवार को रूस के ड्रोन हमले ने भारी तबाही मचा दी। रूसी ड्रोन ने शहर के एक व्यस्त शॉपिंग सेंटर को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और 130 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों में 23 बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

एक के बाद एक दो हमले

यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, शॉपिंग सेंटर पर दो बार ड्रोन हमला किया गया। पहला हमला होने के करीब 30 मिनट बाद दूसरा ड्रोन उसी इलाके में पहुंचा। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि दूसरे हमले का उद्देश्य घटनास्थल पर पहुंचे बचावकर्मियों और आपातकालीन सेवाओं को निशाना बनाना हो सकता है। इसी वजह से इसे ‘डबल-टैप स्ट्राइक’ कहा जा रहा है।

 बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग घायल

हमले में 130 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इनमें कम से कम 23 बच्चे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार करीब 29 घायल गंभीर स्थिति में हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। घायलों का अस्पतालों में इलाज जारी है। 

मलबे में अभी भी तलाश जारी

हमले के बाद शॉपिंग सेंटर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और वहां आग भी लग गई। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाकर लोगों की तलाश में जुटे हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 9 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 2 बच्चे शामिल हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। 

जेलेंस्की ने जताया कड़ा विरोध

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की कड़ी निंदा की है और रूस पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन को और मजबूत एयर डिफेंस सहायता देने तथा रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की है।

एक नजर में पूरी खबर

  • स्थान: क्रिवी रिह, यूक्रेन

  •  हमला: रूसी ड्रोन हमला

  •  मौत: कम से कम 16

  •  घायल: 130+

  •  बच्चे घायल: करीब 23

  •  गंभीर घायल: करीब 29

  •  लापता: 9, जिनमें 2 बच्चे

  •  स्थिति: बचाव एवं मलबा हटाने का अभियान जारी

  •  यूक्रेन का आरोप: दूसरा हमला राहतकर्मियों को निशाना बनाने के लिए किया गया। 

यह हमला रूस-यूक्रेन युद्ध में नागरिक इलाकों पर जारी बढ़ते हवाई हमलों के बीच हुआ है। शनिवार को भी यूक्रेन के कई हिस्सों में रूसी हमलों की खबरें सामने आईं।

पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: और तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगी ‘Reform Express’

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Economic Times World Leaders Forum 2026 में भारत की आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा को लेकर बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में देश में रिफॉर्म की रफ्तार और तेज होगी और सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार काम करती रहेगी।

‘Reform Express’ और तेज होगी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में पिछले वर्षों में कई नेक्स्ट-जेनरेशन रिफॉर्म्स किए गए हैं और आने वाले समय में इन सुधारों को और गति दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “Reform Express” अब और अधिक तेजी से आगे बढ़ेगी। 

उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस सिर्फ आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि Ease of Living और Ease of Doing Business को भी बेहतर बनाने पर है। इसका लाभ युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग तक पहुंचाने की बात प्रधानमंत्री ने कही।

लाइसेंस राज से PLI तक बदलाव

प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक नीतियों में आए बदलाव का उदाहरण देते हुए पुराने Licence Raj की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले उत्पादन बढ़ाने पर भी कई तरह की पाबंदियां थीं, जबकि अब सरकार उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए Production Linked Incentive (PLI) जैसी योजनाएं चला रही है।

पीएम मोदी ने इसे भारत की आर्थिक सोच में बड़े बदलाव के रूप में पेश किया और कहा कि सरकार का उद्देश्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण देना है।

भारत को बताया ‘Growth और Hope का Bright Spot’

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की एक मजबूत किरण के रूप में देख रही है। उन्होंने भारत की राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता को इसकी बड़ी ताकत बताया। 

उन्होंने यह भी कहा कि एक स्थिर और सुरक्षित भारत न केवल अपने विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि दुनिया की स्थिरता में भी योगदान दे सकता है।

उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर

पीएम मोदी ने सरकार की नीतियों को उद्योग और उत्पादन को बढ़ावा देने वाली बताया। उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सीमा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। 

सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें कारोबार शुरू करना, निवेश करना और उत्पादन बढ़ाना पहले की तुलना में आसान हो।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकसित भारत के लक्ष्य को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम करती रहेगी।

उन्होंने खास तौर पर कहा कि आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business को और विस्तार दिया जाएगा तथा युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए सरकार का काम जारी रहेगा।

पीएम मोदी के बयान की बड़ी बातें

  • 🚄 ‘Reform Express’ और तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगी।

  • 📈 आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर जोर।

  • 🏭 उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों पर फोकस।

  • 🇮🇳 भारत को वैश्विक विकास और उम्मीद का ‘Bright Spot’ बताया।

  • 🏛️ राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता को भारत की ताकत बताया।

  • 👨‍💼 Ease of Doing Business और 👨‍👩‍👧 Ease of Living को और बेहतर करने का दावा।

  • 🎯 विकसित भारत के लक्ष्य के लिए सुधारों की गति बढ़ाने पर जोर।

तेलंगाना की फार्मा फैक्ट्री में भीषण रिएक्टर ब्लास्ट, 2 मजदूरों की मौत; 9 घायल

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हैदराबाद- तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले के पोचमपल्ली मंडल में शुक्रवार देर रात एक फार्मास्युटिकल यूनिट में रिएक्टर फटने से बड़ा हादसा हो गया। विस्फोट के बाद फैक्ट्री में तेज आग लग गई। इस हादसे में दो कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य घायल हुए हैं।

शिफ्ट बदलने के दौरान हुआ धमाका

पुलिस के अनुसार, हादसा शुक्रवार देर रात उस समय हुआ जब फैक्ट्री में कर्मचारियों की शिफ्ट बदल रही थी। इसी दौरान यूनिट में लगे एक केमिकल रिएक्टर में अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज था कि इसके बाद फैक्ट्री परिसर में आग फैल गई और आसपास अफरा-तफरी मच गई। 

विस्फोट के तुरंत बाद मौके पर दमकल विभाग और पुलिस की टीमें पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाया। 

2 की मौत, 9 घायल

पुलिस के मुताबिक, हादसे में दो कर्मचारियों की मौत हुई है। वहीं 9 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से दो को 50 प्रतिशत से अधिक जलने की चोटें आई हैं, जबकि बाकी सात लोगों को मामूली चोटें बताई गई हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 

घायलों का अस्पताल में इलाज

गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, घायलों को बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद के निजी अस्पतालों में ले जाया गया है। दो गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। 

आग पर पाया गया काबू

रिएक्टर में विस्फोट के बाद लगी आग ने फैक्ट्री परिसर में काफी दहशत पैदा कर दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग को नियंत्रित किया। इसके बाद पुलिस और राहत दलों ने घटनास्थल पर स्थिति को संभाला।

हादसे की वजह की जांच शुरू

फिलहाल रिएक्टर में विस्फोट किस वजह से हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। जांच में रिएक्टर की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा मानकों और फैक्ट्री में अपनाई जा रही प्रक्रिया समेत अन्य पहलुओं को देखा जा रहा है। 

पहले भी हुआ था हादसा

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि इसी फैक्ट्री में पिछले महीने भी एक हादसा हुआ था, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हुई थी। हालांकि, इस पुराने हादसे और मौजूदा विस्फोट के बीच कोई आधिकारिक संबंध अभी स्थापित नहीं किया गया है।

हादसे की बड़ी बातें

  • 📍 स्थान: पोचमपल्ली मंडल, यादाद्री भुवनगिरी, तेलंगाना

  • 🏭 घटना: फार्मा यूनिट में केमिकल रिएक्टर ब्लास्ट

  • 💥 समय: शुक्रवार देर रात, 21 अगस्त

  • ⚫ मौत: 2 कर्मचारी

  • 🏥 घायल: 9 कर्मचारी

  • 🔥 गंभीर रूप से झुलसे: 2, 50% से अधिक जलने की चोटें

  • 🚒 आग: दमकल विभाग ने काबू पाया

  • 👮 जांच: पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

फिलहाल हादसे की सटीक वजह और मृतकों की पहचान से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

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