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छत्तीसगढ़ में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए AI और रोबोटिक्स शिक्षा को बढ़ावा, स्कूलों-कॉलेजों में शुरू होंगे विशेष लर्निंग मॉड्यूल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों, ओपन स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर के अनुरूप AI-सक्षम लर्निंग मॉड्यूल शुरू करने की योजना है। 

विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ा जाएगा

प्रस्तावित लर्निंग मॉड्यूल विद्यार्थियों की कक्षा और शैक्षणिक स्तर के अनुसार तैयार किए जाएंगे। शुरुआत AI और डिजिटल तकनीक की बुनियादी जानकारी से होगी और आगे चलकर विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी अनुप्रयोगों से परिचित कराया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और उन्हें भविष्य की नौकरियों तथा उभरते उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। 

AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की तैयारी

इस तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है। इससे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और प्रयोग का अवसर भी मिल सकेगा।

राज्य की व्यापक AI रणनीति में शैक्षणिक संस्थानों में AI एवं रोबोटिक्स क्लब, डिजिटल लैब और स्मार्ट क्लासरूम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

कॉलेज विद्यार्थियों के लिए विशेष AI कोर्स

कॉलेजों में अध्ययनरत आदिवासी विद्यार्थियों के लिए विशेष और गहन AI पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। ये पाठ्यक्रम नियमित पढ़ाई के साथ किए जा सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। 

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी जोर

AI शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को भी नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थी AI, कोडिंग, रोबोटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

प्रायस स्कूलों को भी मिलेगा लाभ

यह पहल प्रायस आवासीय विद्यालयों के मॉडल को पारंपरिक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से आगे बढ़ाकर विद्यार्थियों को भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों के लिए तैयार करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। राज्य में पहले से ही इन विद्यालयों में IIT और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाई कराई जा रही है। अब उभरती तकनीकों जैसे AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स से विद्यार्थियों को परिचित कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में कदम

सरकार का यह प्रयास विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AI और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों तक शुरुआती स्तर पर पहुंच मिलने से विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता, नवाचार और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में AI और रोबोटिक्स शिक्षा का विस्तार आदिवासी युवाओं को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने और डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रायपुर में सीरियल रेप और हत्या का आरोपी गिरफ्तार: साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था, जांच में दो घटनाओं का कनेक्शन सामने आया

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रायपुर- राजधानी रायपुर में महिला से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच कर रही पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था और जुलाई तथा अगस्त में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में उसकी संलिप्तता सामने आई है।

21 जुलाई को महिला की हत्या का आरोप

पुलिस के मुताबिक, 21 जुलाई को 20 वर्ष की उम्र की एक महिला का आरोपी ने साइकिल से पीछा किया। आरोप है कि उसने न्यू स्वागतम विहार के पास पानी से भरे एक प्लॉट में महिला पर हमला किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में कई स्तरों पर सुराग जुटाए।

5 अगस्त की दूसरी घटना से जुड़ा कनेक्शन

जांच के दौरान पुलिस को 5 अगस्त को हुई एक अन्य घटना के बारे में जानकारी मिली। इस मामले में भी लगभग उसी उम्र की एक महिला का कथित रूप से साइकिल सवार व्यक्ति ने पीछा किया और उस पर हमला किया।

हालांकि, इस घटना में महिला ने शोर मचाकर मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस ने दोनों घटनाओं में समान पैटर्न को देखते हुए जांच आगे बढ़ाई। 

जांच में सामने आया समान पैटर्न

पुलिस जांच में दोनों मामलों के बीच समानताएँ सामने आने के बाद आरोपी तक पहुंचने की कोशिश तेज की गई। महिलाओं का पीछा करना और साइकिल का इस्तेमाल करना जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बना। इसी आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और अन्य तथ्यों की पुष्टि कानूनी जांच एवं आगे की विवेचना के माध्यम से की जाएगी। 

पुलिस जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों मामलों से जुड़े साक्ष्यों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की अन्य आपराधिक घटनाओं में कोई भूमिका रही है या नहीं।

इस घटना के बाद शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पुलिस का फोकस मामले की विस्तृत जांच करने, उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने और आरोपों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।

नोट: आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक संपन्न

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45 अन्वेषण परियोजनाओं को दिया गया अंतिम रूप

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी में राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद की अध्यक्षता में रायपुर स्थित पुराना सर्किट हाउस में भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्वेषण कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज कार्यक्रमों व प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान विशेष सचिव एवं संचालक भौमिकी-खनिकर्म रजत बंसल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)  के उप महानिदेशक अमित धरवाड़कर सहित प्रमुख केंद्रीय, राज्य एजेंसियों व निजी उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

45 अन्वेषण परियोजनाओं पर मुहर

राज्य में कुल 45 नई व जारी अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 35 क्रिटिकल व स्ट्रेटेजिक खनिज ब्लॉक, 4 डीप-सीटेड (गहन स्तर) खनिज ब्लॉक तथा 6 बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल हैं।

GSI की प्रमुख भूमिका महत्वपूर्ण है, इनमें से 25 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (रायपुर इकाई) द्वारा किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क के संसाधनों की पहचान व स्थापना की गई। उन्होंने आगे बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की चार अन्वेषण परियोजनाएं चालू वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेंगी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म द्वारा राज्य में 11 अन्वेषण प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 1 ग्रेफाइट, 2 चूना पत्थर, 4 लौह अयस्क, 2 ग्लॉकोनाइट, 1 आरईई एवं रेयर मेटल्स तथा 1 बॉक्साइट एवं एल्युमिनस लेटराइट युक्त महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉक शामिल हैं।

रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण 

सचिव पी. दयानंद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को खनन रॉयल्टी एवं राजस्व से लगभग 16,738 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत एनपीईए की 9 अन्वेषण परियोजनाएं चालू वर्ष में भी जारी रहेंगी। इससे राज्य में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों के अन्वेषण को निरंतर गति मिलने के साथ-साथ राज्य के खनिज संसाधन आधार को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।  विशेष सचिव रजत बंसल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025 26 के दौरान संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ द्वारा 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर संसाधन तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इसे राज्य में खनिज अन्वेषण गतिविधियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रणनीतिक एवं दुर्लभ खनिजों पर जोर

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई (REE) एवं रेयर मेटल्स, ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के ब्लॉकों को शामिल किया गया है।

बैठक में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण को तेज करने तथा अधिक गहराई में मौजूद (Deep-seated) खनिजों के सटीक आकलन के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया गया।

पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे 

इस अवसर पर GSI द्वारा छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे गए। बैठक में खनिज खोज की संभावनाओं को बढ़ाने, विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और राज्य में खनिज-आधारित उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार एक मजबूत रोडमैप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रमुख भूवैज्ञानिक एवं खनिज क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थाओं और शासकीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, सीएमपीडीआईएल, एमओआईएल, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन शामिल थे। इसके अतिरिक्त सीजीसीओएसटी, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों तथा उद्योग जगत से जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड एवं माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा डीजीएम की एमसीटीए टीम ने भी बैठक में भाग लिया।

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का आतंक: हमले में ग्रामीण की मौत, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

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कांकेर- छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्र में बाघ के हमले में एक ग्रामीण की मौत के बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों राज्यों के वन विभाग अलर्ट हो गए हैं। 

घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में वन विभाग की टीमों ने गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की नजर बाघ की गतिविधियों और उसके संभावित मूवमेंट पर बनी हुई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जबकि बाघ की लोकेशन पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप और ड्रोन के इस्तेमाल की भी तैयारी की जा रही है।

पखांजूर क्षेत्र में भी मिले बाघ के पदचिह्न

कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र के पीवी-19 गांव के आसपास बाघ के पदचिह्न मिलने की पुष्टि हुई है। इसी इलाके में एक गाय के शिकार की जानकारी भी सामने आई है। सड़क किनारे बाघ दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई है।

बताया गया है कि महाराष्ट्र के सीमावर्ती दोढाडा गांव में जंगल की ओर गए ग्रामीण हरीलाल वड्डडे पर बाघ ने हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह

वन विभाग ने जंगल और उससे लगे इलाकों में रहने वाले लोगों से अकेले जंगल में नहीं जाने की अपील की है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय जंगल, झाड़ियों और सुनसान इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि यदि बाघ दिखाई दे तो उसके करीब जाने, उसका पीछा करने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें। बाघ की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर सके।

वन विभाग की बढ़ी सक्रियता

ग्रामीण की मौत और छत्तीसगढ़ की सीमा में बाघ के पदचिह्न मिलने के बाद दोनों राज्यों के वन अमले ने संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की है। 

वन विभाग की अपील: ग्रामीण सावधानी बरतें, जंगल की ओर अकेले न जाएं और बाघ की किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित वन अधिकारियों को दें।

छत्तीसगढ़ में महिला IAS अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी: 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथ

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के बाद महिला IAS अधिकारियों पर भरोसा जताते हुए राज्य के 33 में से 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों को सौंपी है। यह कदम राज्य के जिला प्रशासन में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।


इन 12 जिलों में महिला कलेक्टर

  • कोंडागांव — नूपुर राशि पन्ना

  • बेमेतरा — प्रतिष्ठा ममगई

  • नारायणपुर — नम्रता जैन

  • बालोद — दिव्या मिश्रा

  • सूरजपुर — रेना जमील

  • सक्ती — जयश्री जैन

  • कबीरधाम — तुलिका प्रजापति

  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी — तनुजा सलाम

  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ — पद्मिनी भोई साहू

  • बलरामपुर-रामानुजगंज — चंदन संजय त्रिपाठी

  • मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर — संतंन देवी जांगड़े

  • कोरिया — रोक्तिमा यादव 

हालिया प्रशासनिक फेरबदल में 2016 बैच की IAS अधिकारी जयश्री जैन को सक्ती का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं तुलिका प्रजापति को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी से स्थानांतरित कर कबीरधाम की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि तनुजा सलाम को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का कलेक्टर बनाया गया है।

प्रशासनिक नेतृत्व में मजबूत होती महिला भागीदारी

कलेक्टर जिले में सरकार की योजनाओं और नीतियों को जमीन पर लागू करने की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व प्रशासन, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी अहम भूमिका रहती है।

ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर 12 महिला IAS अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक नेतृत्व में महिला भागीदारी को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह नियुक्तियां अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल पर सरकार के भरोसे को भी दर्शाती हैं। 

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 12 जिलों की कमान महिला अधिकारियों के हाथों में होना राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महिला नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी को रेखांकित करता है। 

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट: 13 जिलों के 173 गांव प्रभावित, 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 84,362 लोग और 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। 

4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य में 1,263 बाढ़ राहत केंद्र तैयार किए गए हैं, जिनमें से 41 फिलहाल संचालित हैं और इनमें 1,045 लोग रह रहे हैं। 

राज्य राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ की स्थिति और जारी राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन को जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को राहत शिविरों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। 

इन 13 जिलों में बाढ़ का असर

बाढ़ से प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं।

प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध रखने तथा नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

NDRF समेत बड़ी संख्या में राहत बल तैनात

बाढ़ से निपटने के लिए राज्य में 1,589 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 428 नाव एवं मोटरबोट और 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा NDRF की 16 टीमें भी राज्य में तैनात हैं। कई जिलों में SDRF और PAC के जवान भी राहत कार्यों में लगाए गए हैं।

राहत सामग्री के तहत अब तक प्रभावित लोगों को 15,238 खाद्यान्न पैकेट और 30,316 भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

मौसम और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी

प्रशासन नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रख रहा है। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित जिलों के साथ लगातार संपर्क में है। नागरिकों की शिकायतों और सूचनाओं के लिए 1070 हेल्पलाइन के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा रही है। 

राज्य सरकार के अनुसार, 1 से 18 अगस्त के बीच मौसम संबंधी चेतावनियों के लिए 140.52 करोड़ SMS लोगों को भेजे गए हैं। बाढ़ से बचाव और आपदा सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की जा रही है।

फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करना है।

अरुणाचल सीमा विवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान: 60 किमी चीनी घुसपैठ के दावे को बताया गलत

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नई दिल्ली- अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने 60 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिकों के प्रवेश के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है और सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो या सूचनाएँ साझा करना भ्रम पैदा कर सकता है।

रिजिजू ने कहा कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में वास्तविक समस्या है, लेकिन इसका प्रमुख कारण सीमा का जमीन पर पूरी तरह स्पष्ट रूप से सीमांकन (demarcation) न होना है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाएँ हैं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति को लेकर भ्रम बना रहता है।

60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे पर सफाई

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक प्रवेश कर लिया है या किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं होने के कारण दोनों पक्ष संबंधित भू-भाग पर अलग-अलग दावे करते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों द्वारा सीमा और पारंपरिक भूमि को लेकर उठाई गई चिंताएँ वास्तविक हैं और सरकार इन्हें गंभीरता से लेती है।

चीन की गतिविधियों पर भी नजर

रिजिजू ने माना कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में चीनी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने इसे 60 किलोमीटर की नई सैन्य घुसपैठ के रूप में पेश किए जाने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सीमा की स्थिति को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाने से देश में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है और सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, यह बयान अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले और लॉन्गजू क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर उठी चिंताओं के बीच आया है। 

सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर भी चर्चा

रिजिजू ने भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की तुलना में सीमा क्षेत्रों में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास को तेज किया है। 

सरकार का संदेश

केंद्रीय मंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि 60 किलोमीटर चीनी घुसपैठ या भारतीय गांव पर कब्जे की खबरों को सही नहीं माना जाना चाहिए, जबकि सीमा के कुछ हिस्सों में सीमांकन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियाँ मौजूद हैं। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। 

महत्वपूर्ण: 60 किमी घुसपैठ का दावा फिलहाल मंत्री के बयान के अनुसार गलत बताया गया है; इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

NEET परीक्षा सुरक्षा पर केंद्र का बड़ा दावा: सुप्रीम कोर्ट में बताया—सिस्टम ‘फुलप्रूफ’, पेपर लीक रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा

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नई दिल्ली- NEET-UG परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष परीक्षा प्रणाली में किए गए सुरक्षा उपायों का विस्तृत ब्यौरा रखा। केंद्र ने दावा किया कि वर्तमान NEET परीक्षा व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें सेंध लगाना बेहद मुश्किल है। 

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और परीक्षा के दौरान उसके इस्तेमाल तक कई स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। प्रश्नपत्रों के परिवहन की निगरानी GPS तकनीक के माध्यम से किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में भी सुरक्षा

केंद्र के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कई विषय विशेषज्ञ और मॉडरेटर शामिल होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि प्रश्न तैयार करने वाले सभी विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि अंतिम प्रश्नपत्र में कौन-से प्रश्न शामिल किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखना और संभावित लीक की संभावना को कम करना है।

परिवहन से लेकर परीक्षा केंद्र तक निगरानी

सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से पैक और परिवहन किया जाता है तथा उनके आवागमन पर निगरानी रखी जाती है। GPS-ट्रैकिंग सहित विभिन्न तकनीकी उपायों का इस्तेमाल प्रश्नपत्रों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए सीलबंद बॉक्स और CCTV जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—सिर्फ सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केवल मौजूदा सुरक्षा उपायों के विवरण पर संतोष व्यक्त करने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में स्थायी और संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने NTA की संस्थागत क्षमता, बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

अदालत ने केंद्र से यह भी बताने को कहा कि राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति की परीक्षा सुधार संबंधी सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। NTA को इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि NEET जैसी विशाल राष्ट्रीय परीक्षा के लिए केवल तात्कालिक या विवाद के बाद किए गए बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे। अदालत ने NTA को अधिक मजबूत, स्थायी और तकनीकी रूप से सक्षम संस्था के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। UPSC जैसी संस्थागत विशेषज्ञता और स्थायी व्यवस्था से सीख लेने की बात भी सुनवाई के दौरान सामने आई। 

600 विशेषज्ञों को परीक्षा प्रक्रिया से हटाने सहित सुधार

रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में सुधार के तहत NTA की परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं से लगभग 600 विशेषज्ञों को हटाने और NTA के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। NTA के कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाने और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक निगरानी एवं विशेषज्ञता लाने पर भी काम किया जा रहा है। 

क्या है पूरा मामला?

NEET-UG 2026 की परीक्षा प्रणाली में सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर हुई थीं। इसके बाद अदालत लगातार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। इससे पहले केंद्र ने प्रश्नपत्र को प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया अदालत के समक्ष रखने की बात कही थी। 

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि NEET जैसी परीक्षा के लिए ऐसी स्थायी, भरोसेमंद और संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक या अन्य गड़बड़ियों की संभावना न्यूनतम हो। केंद्र को NTA सुधारों और विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के क्रियान्वयन पर विस्तृत जानकारी देनी है।

निष्कर्ष: केंद्र ने NEET की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और लगभग अभेद्य बताया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल कागजी या अस्थायी सुरक्षा उपायों के बजाय स्थायी संस्थागत सुधार, मजबूत साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और जवाबदेही जरूरी है।

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट मामले की सुनवाई के लिए बनेगा विशेष मेडिकल बोर्ड, त्वरित जांच कर दी जाएगी रिपोर्ट

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समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली संयुक्त बैठक

रायपुर- दिव्यांगजनों, उभयलिंगी समुदाय तथा अन्य अंतर्विभागीय विषयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को महानदी भवन, मंत्रालय, अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट प्रकरणों की होगी त्वरित जांच  

बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से संबंधित प्रकरणों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य मेडिकल बोर्ड अथवा संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराए जाने पर चर्चा हुई। संबंधित व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर परीक्षण कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने तथा निर्धारित समयान्तराल में दिव्यांगता की भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले व्यक्तियों के प्रकरणों की समीक्षा किए जाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों की जांच के लिए राज्य मेडिकल एवं संभागीय मेडिकल बोर्ड में परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड की प्रक्रिया होगी सुगम  

बैठक में दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने, मेडिकल बोर्ड में विषय- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड एवं दिव्यांगता परीक्षण शिविर आयोजित करने पर चर्चा की गई। पात्र दिव्यांगजनों को समयबद्ध रूप से प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप अस्थायी एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी की स्थिति में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।

उभयलिंगी समुदाय के कल्याण पर भी हुई चर्चा  

बैठक में उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों के लिए राज्य की सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) संबंधी सहायता तथा समय-सीमा में पात्र हितग्राहियों को लाभ प्रदान करने पर चर्चा हुई। SRS के लिए सहायता अनुदान संबंधी दिशा-निर्देशों में आवश्यक सर्जरी को शामिल किए जाने तथा निर्धारित दरों में वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधन की कार्यवाही पर विचार किया गया। 

राज्य के शासकीय अस्पतालों में उभयलिंगी व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक/वार्ड की व्यवस्था किए जाने पर भी चर्चा हुई।

नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण पर जोर  

बैठक में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्रों की समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुरूप राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन तथा मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण से संबंधित प्रक्रिया की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशामुक्ति केंद्रों में उपचाररत व्यक्तियों को दी जा रही दवाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा केंद्रों के विस्तार एवं बेहतर संचालन पर भी चर्चा हुई।

इसके साथ ही दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, उभयलिंगी एवं नशा पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं संस्थागत संरक्षण के लिए संचालित शासकीय एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं में निवासरत हितग्राहियों के स्वास्थ्य परीक्षण की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा, समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा

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एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे उपराष्ट्रपति, व्यवस्थाओं को लेकर दिए निर्देश

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के 2 सितंबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों के संबंध में राज्य स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, चिकित्सा, स्वागत एवं कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 2 सितंबर को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे।

मुख्य सचिव ने दिए मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था के निर्देश 

मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के प्रवास के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल एवं मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक तथा वापसी के दौरान एंट्री एवं एग्जिट प्लान सहित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने एयरपोर्ट पर स्वागत व्यवस्था, रिसेप्शन लाइन, एम्स में रिसेप्शन एवं अन्य प्रोटोकॉल संबंधी व्यवस्थाओं के लिए रायपुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने एयरपोर्ट एवं कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की समुचित तैनाती तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।

सुरक्षा, चिकित्सा और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष जोर  

मुख्य सचिव ने उपराष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए गृह विभाग को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही ठहरने की व्यवस्था, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं तथा आकस्मिक चिकित्सा सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

बैठक में कार्यक्रम की बैठक व्यवस्था भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल एवं प्राप्त डायस प्लान के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के प्रारंभ में वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान सहित निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। 

मुख्य सचिव ने एम्स प्रबंधन एवं अधिकारियों को भी दीक्षांत समारोह के आयोजन से संबंधित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बंसल, रायपुर कमिश्नर श्याम धावड़े, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल, सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव अंशिका पांडेय, कलेक्टर रायपुर, आईजी रायपुर, एम्स रायपुर के चिकित्सा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विकसित भारत युवा नेता संवाद (VBYLD) 2027 की शुरुआत, देशभर के युवाओं के लिए ‘विकसित भारत क्विज’ लॉन्च

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विकसित भारत युवा नेता संवाद (VBYLD) 2027 की शुरुआत ‘विकसित भारत क्विज’ के शुभारंभ के साथ हो गई है। इसके माध्यम से देशभर के युवा नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की एक पारदर्शी एवं योग्यता-आधारित यात्रा में भाग ले सकेंगे। इस यात्रा का समापन नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विकसित भारत युवा नेता संवाद में होगा, जहाँ चयनित युवाओं को प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

VBYLD 2027 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप है, जिसके तहत गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से एक लाख युवा नेताओं को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को सार्वजनिक जीवन में आने, अपने विचार रखने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान देने के अवसर प्रदान करना है, जिनका परिवार में राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा है।

यह पहल विकसित भारत @2047 के निर्माण में योगदान देने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं की पहचान, प्रतिभा-विकास और उन्हें राष्ट्रीय मंच प्रदान करने पर केंद्रित है। पारदर्शी, योग्यता-आधारित और बहु-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिभागी डिजिटल क्विज से लेकर निबंध चुनौती, जिला चैंपियनशिप और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश स्तर के VBYLD से होते हुए राष्ट्रीय VBYLD तक पहुँचेंगे।

विकसित भारत क्विज से देशभर में भागीदारी का अवसर

प्रमुख विकसित भारत चैलेंज ट्रैक के पहले चरण के रूप में विकसित भारत क्विज का आयोजन 17 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक MY Bharat पोर्टल पर किया जा रहा है।

15 से 29 वर्ष की आयु के युवा इस क्विज में भाग ले सकते हैं। क्विज डिजिटल माध्यम से कई भाषाओं में आयोजित किया जाएगा, जिससे देशभर के युवाओं को इसमें शामिल होने का अवसर मिलेगा।

क्विज में शीर्ष 10 प्रतिशत प्रतिभागी, अधिकतम चार लाख प्रतिभागियों की सीमा के अधीन, अगले चरण विकसित भारत निबंध चुनौती के लिए पात्र होंगे। चयनित प्रतिभागियों को MY Bharat पोर्टल के माध्यम से विकसित भारत की निर्धारित थीम पर 500 शब्दों का निबंध प्रस्तुत करना होगा।

क्विज से जिला और राज्य चैंपियनशिप तक

विकसित भारत चैलेंज की पांच चरणों वाली प्रक्रिया होगी:

विकसित भारत क्विज → निबंध चुनौती → जिला चैंपियनशिप → राज्य/केंद्रशासित प्रदेश VBYLD → राष्ट्रीय VBYLD

जिला चैंपियनशिप में प्रत्येक जिले के शीर्ष 50 निबंधों को व्यक्तिगत प्रस्तुति चरण के लिए चुना जाएगा। प्रत्येक जिले से शीर्ष दो प्रस्तुतकर्ता राज्य स्तर के VBYLD के लिए क्वालीफाई करेंगे। जिला चैंपियनशिप 10 से 16 नवंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी।

राज्य/केंद्रशासित प्रदेश VBYLD का आयोजन 17 नवंबर से 7 दिसंबर 2026 तक होगा। इसमें विभिन्न VBYLD ट्रैक को राज्य/केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर एक साथ लाया जाएगा। जिला स्तर पर चयनित युवा निर्णायक मंडल के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और उनके प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय चरण के लिए राज्य टीमों का गठन किया जाएगा।

युवा प्रतिभा, नेतृत्व और नवाचार को प्रदर्शित करने के लिए छह ट्रैक

VBYLD 2027 में युवाओं के लिए छह प्रमुख ट्रैक होंगे:

  1. विकसित भारत चैलेंज: क्विज, निबंध चुनौती और प्रस्तुति-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लिए नवीन विचार एवं समाधान प्रस्तुत करने का प्रमुख ट्रैक।

  2. सांस्कृतिक ट्रैक: लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, वक्तृत्व और कविता लेखन जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करेगा।

  3. Design for Bharat: वास्तविक विकास संबंधी चुनौतियों के लिए उपयोगकर्ता-केंद्रित समाधान विकसित करने पर केंद्रित राष्ट्रीय डिजाइन चुनौती।

  4. Hack for Social Cause: सामाजिक एवं विकास संबंधी चुनौतियों के लिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले डिजिटल समाधान विकसित करने की तकनीक-आधारित नवाचार चुनौती।

  5. Youth Entrepreneurs Challenge: VBYLD 2027 में नया ट्रैक, जिसमें युवा उद्यमी राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जुड़े स्टार्टअप पिच और बिजनेस प्लान प्रस्तुत करेंगे।

  6. Youth Parliament: VBYLD 2027 में शामिल यह ट्रैक अपने राष्ट्रीय फाइनलिस्टों को राष्ट्रीय VBYLD में भाग लेने का अवसर देगा।

भारत की विकास प्राथमिकताओं के लिए 10-क्षेत्रीय ढाँचा

विकसित भारत चैलेंज में 10-क्षेत्रीय ढाँचा अपनाया जाएगा। इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और विकसित भारत @2047 की यात्रा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशिष्ट विषय निर्धारित किए जाएंगे।

इनमें भविष्य का शासन, जलवायु सुरक्षा, जनसांख्यिकीय लाभांश, सतत औद्योगिकीकरण, कनेक्टिविटी, विनिर्माण, जनजातीय नेतृत्व, नवाचार, फ्रंटियर टेक्नोलॉजी और ब्लू इकॉनमी जैसे विषय शामिल होंगे।

इस ढाँचे के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों के युवा अपने क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों की पहचान कर सकेंगे, नवीन समाधान विकसित कर सकेंगे और भारत की विकास यात्रा के लिए उपयोगी विचार प्रस्तुत कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री के समक्ष विचार प्रस्तुत करने का अवसर

यह पूरी यात्रा 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय विकसित भारत युवा नेता संवाद में culminate होगी।

सभी छह ट्रैक से चयनित राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की टीमें राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेंगी। विकसित भारत चैलेंज के अंतर्गत क्षेत्रीय टीमें अपने विचार विषय विशेषज्ञों, सचिवों और केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। क्षेत्रीय फाइनलिस्टों को प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

इस प्रकार VBYLD 2027 युवाओं के लिए जमीनी स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक नेतृत्व का एक मंच तैयार करेगा—विकसित भारत क्विज से शुरू होकर निबंध चुनौती, जिला और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश स्तर की चैंपियनशिप से होते हुए ऐसे राष्ट्रीय मंच तक, जहाँ चयनित युवा नेता नीति-निर्माताओं से संवाद कर सकेंगे और भारत के भविष्य के लिए अपने विचार प्रस्तुत कर सकेंगे।

प्रमुख तिथियाँ

  • विकसित भारत क्विज: 17 अगस्त – 30 सितंबर 2026

  • विकसित भारत निबंध चुनौती: 5 – 19 अक्टूबर 2026

  • जिला चैंपियनशिप: 10 – 16 नवंबर 2026

  • राज्य/केंद्रशासित प्रदेश VBYLD: 17 नवंबर – 7 दिसंबर 2026

  • राष्ट्रीय VBYLD, नई दिल्ली: 10 – 12 जनवरी 2027

भारत-मलेशिया के बीच लोक प्रशासन और सुशासन सुधारों पर दूसरी संयुक्त कार्य समूह बैठक आयोजित

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18 अगस्त 2026 को ‘लोक प्रशासन और सुशासन सुधारों के क्षेत्र में सहयोग’ पर भारत-मलेशिया संयुक्त कार्य समूह (JWG) की दूसरी बैठक आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के अपर सचिव पुनीत यादव तथा मलेशिया की ओर से लोक सेवा (विकास) के उप महानिदेशक दातुक डॉ. मोहद बखारी बिन इस्माइल ने की।

बैठक में DARPG, विदेश मंत्रालय (MEA), कुआलालंपुर स्थित भारतीय उच्चायोग (HCI) और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए पुनीत यादव ने भारत और मलेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत जन-सम्पर्क, साझा मूल्यों और पारस्परिक हितों पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त 2024 में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) तक बढ़ाया गया और फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा से द्विपक्षीय सहयोग को और गति मिली।

संयुक्त कार्य समूह ने 13 नवंबर 2024 को आयोजित अपनी पहली बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की। पहली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि एवं स्वीकृति की गई तथा सहमत गतिविधियों के समन्वय और क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों से संपर्क अधिकारियों (Points of Contact) को नामित किया गया।

बैठक में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत चल रहे क्षमता निर्माण सहयोग पर भी चर्चा हुई। मलेशियाई पक्ष ने शैक्षणिक मॉड्यूल, संस्थागत एवं क्षेत्रीय भ्रमण, कार्यक्रम समन्वय और प्रतिभागियों को प्रदान की गई आतिथ्य-सुविधाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। वर्ष 2026 और 2027 के बैचों के लिए प्रस्तावित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। मलेशियाई पक्ष ने वरिष्ठ मलेशियाई अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संभावनाएँ तलाशने के प्रस्ताव का स्वागत किया।

बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के आधुनिकीकरण और सुशासन सुधारों से संबंधित अनुभवों का भी आदान-प्रदान हुआ। मलेशिया ने ‘पीपल, प्रोसेस और टेक्नोलॉजी’ पर आधारित सार्वजनिक क्षेत्र परिवर्तन की अपनी रणनीति साझा की, जिसमें नवाचार को प्रमुख सक्षम कारक माना गया है। डिजिटल सरकार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड सेवाओं, साझा डिजिटल बुनियादी ढाँचे, साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, डेटा-आधारित निर्णय लेने और कनेक्टेड गवर्नमेंट जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसमें सरल, तेज और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।

भारतीय पक्ष ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के तहत नागरिक शिकायतों के केंद्रीकृत निवारण की जानकारी साझा की। CPGRAMS को दुनिया के सबसे बड़े 24x7 डिजिटल नागरिक इंटरफेस प्लेटफॉर्मों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया। DARPG द्वारा अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग के प्रयासों के तहत ‘समाधान दीदी’ का उल्लेख किया गया।

30 मई 2026 को शुरू किया गया AI-सक्षम वॉयस चैटबॉट ‘समाधान दीदी’, CPGRAMS को अधिक सुलभ, बहुभाषी और नागरिक-केंद्रित बनाने में सहायता करता है। यह चैटबॉट संवादात्मक AI का उपयोग कर नागरिकों को त्वरित, सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल जानकारी एवं प्रतिक्रियाएँ प्रदान करता है।

मलेशियाई पक्ष ने ‘Malaysia-India Governance Partnership: 2027–2029 Strategic Roadmap’ की कार्ययोजना प्रस्तुत की। इस पर चर्चा के माध्यम से शासन संबंधी सहयोग के लिए कार्यान्वयन एवं संस्थागत ढाँचा तैयार करने तथा समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों के लिए तीन वर्षीय रोडमैप बनाने की दिशा में आगे बढ़ा गया।

मलेशियाई पक्ष ने DARPG, NCGG और भारतीय उच्चायोग द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। दोनों पक्षों ने अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का स्वागत किया तथा सहयोग के लिए ठोस, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक का समापन संस्थागत सहभागिता, ज्ञान साझाकरण और क्षमता निर्माण को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसका उद्देश्य सार्वजनिक संस्थानों को सुदृढ़ करना, सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में सुधार करना और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने IIS और ISS अधिकारी प्रशिक्षुओं से कहा—सुशासन, जनसेवा और सत्यनिष्ठा को दें सर्वोच्च प्राथमिकता

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भारतीय सूचना सेवा (IIS) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के अधिकारी प्रशिक्षुओं के एक समूह ने आज (19 अगस्त, 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट की।

अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के कार्य भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों का साझा उद्देश्य सुशासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश की जनता की सेवा करना है। प्रभावी संचार और विश्वसनीय सूचना एक जीवंत एवं उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारी प्रशिक्षु जब अपने करियर की शुरुआत करें, तो उन्हें निरंतर सीखते और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालते रहना चाहिए। प्रौद्योगिकी, मीडिया, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति की दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासु बने रहने, नई दक्षताएँ विकसित करने और अनुभव से सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने निर्णयों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील तथा ईमानदारी के प्रति अडिग रहना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की गहरी जिम्मेदारी भी जुड़ी है।



राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा ने सरकार और नागरिकों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों की चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में, जहाँ सूचना बहुत तेजी से फैलती है, उनके संचार का मार्गदर्शन हमेशा सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित से होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि एक जागरूक नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज की डेटा-आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आँकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आँकड़ों के निर्माण, विश्लेषण और व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों का आधार बनते हैं।



उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों का कार्य अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को समर्थन देगा। उन्होंने उन्हें हमेशा याद रखने की सलाह दी कि हर आँकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। उन्होंने अधिकारियों से आँकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक, विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-सक्षम सांख्यिकीय व्यवस्था के निर्माण में उनका योगदान विकसित भारत (Viksit Bharat) की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

कांवड़ यात्रा के दौरान महिला पर एसिड अटैक, दो बच्चे भी झुलसे; आरोपी पूर्व सहकर्मी गिरफ्तार

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 दुर्ग। जिले के नंदिनी नगर थाना क्षेत्र में सोमवार को कांवड़ यात्रा पर जा रही एक महिला पर बाइक सवार युवक ने एसिड फेंक दिया। इस हमले में महिला का चेहरा और गला गंभीर रूप से झुलस गया, जबकि उनके साथ मौजूद दो बच्चे भी आंशिक रूप से चपेट में आ गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करंजी इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने बच्चों के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होने जा रही थी, तभी संदिग्ध युवक मोटरसाइकिल से आया और अचानक एसिड फेंक दिया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला का चेहरा व गला झुलसने के कारण उनकी हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, वहीं दोनों बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर है।

घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम को सूचना मिली कि हुलिए से मेल खाता संदिग्ध युवक करंजी क्षेत्र में देखा गया है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को पहले से जानते हैं तथा पूर्व में एक पेंट फैक्ट्री में साथ काम कर चुके हैं। नंदिनी नगर थाना पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अवैध बांग्लादेशी गिरफ्तार: बर्तन बेचने के बहाने करता था रेकी, 4 राज्यों में फैला था गिरोह का नेटवर्क

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 बेमेतरा : पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन में बेमेतरा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बर्तन बेचने की आड़ में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक अवैध बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी बिना किसी वैध पासपोर्ट व वीजा के भारत में अवैध रूप से रह रहा था और चार राज्यों में सक्रिय गिरोह का संचालन कर रहा था।


तकनीकी विश्लेषण से खुली पोल

थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र के सिंघौरी में बीते माह हुई चोरी के मामले में पुलिस द्वारा पूर्व में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। विवेचना के दौरान अत्याधुनिक तकनीकी विश्लेषण से मुख्य आरोपी की पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई। पकड़ा गया आरोपी मोहम्मद सुमोन खान (24 वर्ष), पिता मोहम्मद सलाम खान, निवासी रुस्तमनगर (जिला दिनाजपुर, बांग्लादेश) का रहने वाला है।

फर्जी पहचान पत्र और चोरी का तरीका

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने भारत में घुसपैठ के बाद कर्नाटक से फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवा लिए थे। वह बर्तन बेचने के बहाने किराए का मकान लेता था और गली-मोहल्लों में घूमकर रेकी करता था। मौका मिलते ही वह अपने साथियों के साथ चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाता था। वह छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सक्रिय था।

14 जिलों की पुलिस से साधा संपर्क

इस अवैध अप्रवासी गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए बेमेतरा पुलिस ने देश के 14 जिलों (कांकेर, कोरिया, इंदौर, साइबराबाद, पूर्वी दिल्ली, बड़गाम, दक्षिण दिनाजपुर, कृष्णानगर, नादिया, बागलकोट, बेलगाम, चंद्रपुर, नागपुर और कोरापुट) की पुलिस से संपर्क साधा है।

अपराधिक रिकॉर्ड

आरोपी के खिलाफ बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली और राजनांदगांव में चोरी, नकबजनी तथा आर्म्स एक्ट के 7 मामले दर्ज हैं। वह वर्ष 2019, 2022 और कर्नाटक व नागपुर में विभिन्न अपराधों में जेल जा चुका है। जुलाई 2026 में जेल से छूटने के बाद वह पुनः चोरी की वारदात में पकड़ा गया।

पुलिस की अपील: किरायेदारों का सत्यापन अनिवार्य

पुलिस प्रशासन ने मकान मालिकों से अपील की है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को किराए पर मकान देने से पूर्व उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर नजदीकी थाने में सूचना अवश्य दें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800-233-1905 पर दी जा सकती है, सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

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