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भाटापारा में गौरव का दिन-विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया छत्तीसगढ़ महतारी और शहीद खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण

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रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अपने एक दिवसीय प्रवास पर भाटापारा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शहर को एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौगात देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और देश के वीर सपूत शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। शहीद को नमन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेगी। देश उनके सर्वाेच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।

इस गरिमामय समारोह में राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवेदनशील अवसर पर विधानसभाध्यक्ष डॉ. सिंह ने शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के परिजनों (पुत्री प्रिया खोण्डे और भाई प्रभाकर खोण्डे) से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना।

छत्तीसगढ़ महतारी चौक पर नमन

अपने प्रवास के दौरान डॉ. रमन सिंह सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने नवनिर्मित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।

1971 के युद्ध के नायक शहीद खोण्डे को दी श्रद्धांजलि

इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष भाटापारा स्थित शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर फ्लाइट लेफ्टिनेंट शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण किया।

समारोह में कई दिग्गज रहे मौजूद

इस ऐतिहासिक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा और डॉ. सनम जांगड़े उपस्थित थे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, जनप्रतिनिधिगणों के साथ-साथ बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ में पीएमजीएसवाय की उच्च स्तरीय समीक्षा,मुख्य सचिव ने दिए नई बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के निर्देश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में

मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है।

PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी

बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ।

पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति

भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

IDPA द्वारा MIFF 2026 में ओपन फोरम: “क्या AI रचनात्मकता का भविष्य है?” पर गहन चर्चा

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भारतीय डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IDPA) ने 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) के दौरान “क्या AI रचनात्मकता का भविष्य है?” विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया। इस सत्र में फिल्म निर्माण और कंटेंट क्रिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका, अवसरों, चुनौतियों और प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस चर्चा में सनाथ पी.सी. (Firefly Creative Studio Pvt. Ltd के सह-संस्थापक), उज्ज्वल निर्गुडकर (SMPTE अध्यक्ष), अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया और फिल्म निर्माता सुबोध मेनन (Fanboy Pictures) शामिल रहे।

AI बन रहा है फिल्म निर्माण का नया उपकरण

सत्र में वक्ताओं ने माना कि AI तेजी से क्रिएटिव इकोसिस्टम में अपनी जगह बना रहा है। यह कहानी कहने, प्रोडक्शन प्रक्रिया और तकनीकी सुधारों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन मानव रचनात्मकता और भावनात्मक समझ अभी भी केंद्र में बनी हुई है।

फिल्म तकनीक में AI की भूमिका

उज्ज्वल निर्गुडकर ने कहा कि AI फिल्म निर्माण के विकास का अगला चरण है। उन्होंने बताया कि पोस्ट-प्रोडक्शन जैसे साउंड एन्हांसमेंट, कलर करेक्शन, विजुअल सुधार और फिल्म रिस्टोरेशन में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

कहानी कहने में मानव तत्व जरूरी

फिल्म निर्माता सुबोध मेनन ने कहा कि AI कंटेंट जेनरेट कर सकता है, लेकिन कहानी की आत्मा हमेशा मानव अनुभव और भावनाओं से जुड़ी होती है। उन्होंने इसे विचार निर्माण और विश्लेषण का सहायक उपकरण बताया।

AI एक सहायक तकनीक

सनाथ पी.सी. ने कहा कि AI इमेज क्वालिटी, साउंड और ऑडियंस एक्सपीरियंस को बेहतर बना सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह निर्भरता के बजाय एक सपोर्ट टूल के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

कानूनी और कॉपीराइट पहलू

अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया ने AI-जनरेटेड कंटेंट में लाइसेंस डेटा और मानव भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट अधिकार मानव रचनाकारों के पास ही रहते हैं।

निष्कर्ष

सभी वक्ताओं ने सहमति जताई कि AI एक शक्तिशाली तकनीक है, जो रचनात्मकता को बढ़ावा देती है, लेकिन कहानी कहने का मूल आधार मानव कल्पना, भावना और कला ही रहेगा।

सत्र के बाद दर्शकों के साथ संवाद भी हुआ, जिसमें AI अपनाने, नैतिक मुद्दों, कॉपीराइट और रचनात्मक पेशों के भविष्य पर चर्चा की गई।

भारत इनोवेट्स 2026 का दूसरा दिन: डीपटेक इनोवेशन, निवेश और वैश्विक सहयोग पर रहा केंद्रित

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भारत इनोवेट्स 2026 (15 जून 2026) के दूसरे दिन वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच व्यापक और गहन संवाद हुआ। इस दिन का मुख्य फोकस नवाचार को गति देना, तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना और डीपटेक समाधानों के व्यावसायीकरण को आगे बढ़ाना रहा।

भारत सरकार की पहल और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित यह कार्यक्रम भारत के तेजी से बढ़ते इनोवेशन इकोसिस्टम को वैश्विक पूंजी, उद्योग विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में उभर रहा है।

इनोवेशन शोकेस में अत्याधुनिक तकनीकें प्रदर्शित

दिन की शुरुआत एक इनोवेशन शोकेस से हुई, जिसमें भारतीय स्टार्टअप्स और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। इनमें बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर्स, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, ऊर्जा, मोबिलिटी, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र शामिल रहे।

वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी

मुख्य वक्ता के रूप में एशियन पेंट्स लिमिटेड के को-प्रमोटर और एंजेल निवेशक जलज दानी ने वैज्ञानिक नवाचार को बाजार की जरूरतों और औद्योगिक साझेदारियों से जोड़ने पर जोर दिया।

पैनल चर्चाओं में प्रो. चेतन चिटनिस (इंस्टिट्यूट पाश्चर), ऑरेलि गिरो (CEO, Safran Reosc), बर्ट्रांड डेनिस (थेल्स अलेनिया स्पेस), फ्रेडरिक पेरिसोट (CEO, GIFAS), योको फुकाता (Sony Innovation Fund) और सुनील बख्शी (Mizuho Financial Group) जैसे वैश्विक विशेषज्ञ शामिल रहे।

स्टार्टअप–निवेशक संवाद

80 से अधिक डीपटेक स्टार्टअप्स ने 50 से अधिक वैश्विक निवेशकों के सामने अपने इनोवेशन प्रस्तुत किए। ये प्रस्तुतियाँ छह प्रमुख क्षेत्रों में आयोजित की गईं—

  • स्पेस और डिफेंस

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर्स

  • हेल्थकेयर और मेडटेक

  • बायोटेक और एग्रीटेक

  • एनर्जी और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी

  • एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग

इन सत्रों के दौरान 40 से अधिक स्टार्टअप्स को निवेशकों से आगे की बातचीत के लिए प्रतिबद्धता प्राप्त हुई।

प्रमुख उपलब्धियां

दूसरे दिन तक कार्यक्रम में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गईं—

  • 1,350 से अधिक B2B बैठकें

  • 50 से अधिक सहयोग समझौते

  • 10 से अधिक देशों के 50+ निवेशकों के साथ 80+ स्टार्टअप पिच

  • 40+ स्टार्टअप्स को निवेशक फॉलो-अप

  • लगभग 254.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश व फंडिंग की घोषणा

भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूती

इस आयोजन ने भारत को डीपटेक इनोवेशन और वैश्विक तकनीकी सहयोग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत, यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच नवाचार आधारित साझेदारी को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के अंतिम दिन टेक्नोलॉजी पार्क्स, एक्सेलेरेटर, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और वैश्विक स्केलिंग रणनीतियों पर फोकस रहेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की, किसानों के हितों को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्च स्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक की। बैठक में पूरे देश में खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में संभावित एल नीनो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष चर्चा की गई। मंत्री ने विशेष रूप से कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम वर्षा वाले जिलों के लिए अग्रिम आपदा प्रबंधन योजना पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों के हितों की सुरक्षा है।

कम वर्षा वाले जिलों के लिए विशेष तैयारी के निर्देश

चौहान ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम या असमान वर्षा की संभावना है, उन्हें पहले से चिन्हित किया जाए और राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसल-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जोखिम-प्रवण जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि 9–10 संभावित प्रभावित राज्यों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय बैठकें की जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी दी जाए, ताकि वे सुरक्षित फसल विकल्पों का चयन कर सकें।

कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष फोकस

बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। चौहान ने वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त किस्मों का चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतर-फसल प्रणाली को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए।

दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन

दलहन में आत्मनिर्भरता को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए बेहतर बीज उपलब्धता, क्षेत्र विस्तार और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उर्वरक और जल भंडारण की स्थिति की समीक्षा

बैठक में उर्वरक उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों की स्थिति और राज्यों में स्टॉक की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि देश में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।

कृषि संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों, KVKs और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी तभी उपयोगी है जब वह समय पर खेतों तक पहुंचे।

कृषि मंत्री ने कहा कि निरंतर संवाद, समीक्षा और फीडबैक से ही खरीफ 2026 को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।

योग पार्क पोर्टल लॉन्च: पार्कों को बनाया जाएगा सामुदायिक वेलनेस हब, योग और स्वस्थ जीवनशैली को मिलेगा बढ़ावा

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भारत में शहरी और ग्रामीण समुदायों के सार्वजनिक स्थल, पार्क और ओपन स्पेस हमेशा से लोगों को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। तेज़ रफ्तार शहरी जीवन के बीच इन सार्वजनिक स्थानों का महत्व अब और बढ़ गया है, क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।

इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय ने “योग पार्क पोर्टल” की शुरुआत की है, जिसके तहत देशभर के मौजूदा पार्कों को सामुदायिक वेलनेस हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा।

इस पोर्टल का शुभारंभ मध्य प्रदेश के खजुराहो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के 25-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा किया गया। इस अवसर पर योग संगम पोर्टल को भी पुनः लॉन्च किया गया।

पार्कों को वेलनेस हब में बदलने की पहल

योग पार्क पहल का उद्देश्य केवल पार्कों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायत राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, आरडब्ल्यूए, गैर-सरकारी संगठन और कॉर्पोरेट संस्थान मिलकर पार्कों को योग और ध्यान केंद्रों में बदल सकेंगे।

इन पार्कों में योग अभ्यास मंच, ध्यान क्षेत्र, हरित वातावरण, सामूहिक सत्रों के लिए खुले स्थान और स्वास्थ्य जागरूकता सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और CSR मॉडल

इस पहल की खास बात इसका सहयोगात्मक मॉडल है, जिसमें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की भी अहम भूमिका होगी। कंपनियां अपने CSR फंड के माध्यम से योग पार्कों के विकास में योगदान दे सकेंगी, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी राष्ट्रीय पहल

योग पार्क पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां सभी हितधारकों के लिए दिशानिर्देश, पंजीकरण प्रक्रिया और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसका उद्देश्य देशभर में एक संगठित और व्यापक वेलनेस आंदोलन तैयार करना है।

“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम से जुड़ाव

यह पहल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” से भी जुड़ी है। इसका उद्देश्य हर उम्र के लोगों—बच्चों, युवाओं, कामकाजी नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों—को योग और स्वास्थ्य गतिविधियों से जोड़ना है।

सतत वेलनेस की दिशा में कदम

योग पार्क पहल केवल एक आयोजन आधारित कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक स्थायी सामुदायिक स्वास्थ्य संरचना तैयार करने की दिशा में कदम है। यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और समग्र जीवनशैली सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

हांगकांग में अंतरराष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया पर WHO विशेषज्ञों की बैठक, भारत की सक्रिय भागीदारी

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हांगकांग एसएआर (चीन) में 16 से 18 जून 2026 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आयोजित इंटरनेशनल हर्बल फार्माकोपिया के विकास पर 5वीं विशेषज्ञ बैठक आयोजित की जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत की ओर से आयुष मंत्रालय के अंतर्गत फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H) सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

इस बैठक में WHO के सदस्य देशों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ वैश्विक स्तर पर हर्बल औषधियों के मानकों, गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता से जुड़े नियमों पर चर्चा कर रहे हैं।

भारत का प्रतिनिधित्व पीसीआईएम एंड एच के निदेशक डॉ. रमण मोहन सिंह विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कर रहे हैं। उनके साथ एक तकनीकी टीम भी वर्चुअल माध्यम से इस बैठक में शामिल हो रही है, जिसमें शामिल हैं—

  • डॉ. जयंती ए. (PSO - फार्माकोग्नोसी)

  • डॉ. विजय गुप्ता (PSO - आयुर्वेद)

  • डॉ. अनुपम मौर्य (SO - केमिस्ट्री)

  • डॉ. वी. विजयकुमार (SO - सिद्ध)

  • डॉ. निखिल जिरंकलगिकर (SO - आयुर्वेद)

बैठक के दौरान PCIM&H द्वारा विकसित विभिन्न हर्बल मोनोग्राफ और दस्तावेजों को WHO टीम के साथ मिलकर प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि उनका विस्तृत मूल्यांकन और समीक्षा की जा सके।

यह पहल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता के वैश्विक मानकों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

भारत की यह सक्रिय भागीदारी अंतरराष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया के निर्माण में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026 का शुभारंभ, युवाओं को लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान

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नई दिल्ली- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने आज संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026 कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

देशभर से आए युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे उस ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में उपस्थित हैं, जो भारत की गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय संविधान को विश्व का सबसे बड़ा और सभी नागरिकों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज बताते हुए युवाओं से विकसित भारत के निर्माण हेतु प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

ओम बिड़ला ने बताया कि देश में 50 लाख से अधिक युवा यूथ पार्लियामेंट कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए युवा एक ही संकल्प से जुड़े हैं—विकसित भारत 2047 का निर्माण। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र भारत की कार्य संस्कृति और प्राचीन परंपराओं में रचा-बसा है। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा को विश्व में अद्वितीय बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद विशाल विविधताओं के बावजूद भारत ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

उन्होंने भारतीय संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि संविधान ने प्रारंभ से ही सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए। समानता, न्याय और अवसर की समान उपलब्धता भारतीय संविधान की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने शुरुआत से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाकर महिलाओं और पुरुषों को समान मतदान अधिकार प्रदान किए।

युवाओं को नवाचार और परिवर्तन का प्रमुख वाहक बताते हुए श्री बिड़ला ने कहा कि नई पीढ़ी में देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता है। उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की।

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कई राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार, सेवा भावना और जवाबदेही के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व संवेदनशीलता और जनता के प्रति पूर्ण उत्तरदायित्व में निहित है।

कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया, लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सचिव पल्लवी जैन गोविल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

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 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


स्कूलों में बच्चों का हुआ अभिनंदन,प्राचार्य पुष्पा ने की संकुल के स्कूलों का निरीक्षण

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आरंग- मंगलवार को स्कूल खुलने से स्कूलों में रौनकता आई। प्रथम दिवस स्कूलों में साफ सफाई, मध्यान्ह भोजन और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता का विशेष रूप से ध्यान रखा गया। नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा,आरती और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा आरती कर और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। साथ ही मिठाई और चाकलेट वितरण कर बच्चों का उत्साह वर्धन किया। बच्चों में भी स्कूल खुलने से काफी उत्साह दिखा। वहीं भिलाई हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ नई प्राचार्य पुष्पा निषाद, समन्वयक जीतेंद्र शुक्ला, व्याख्याता सीएल साहू ने संकुल के  स्कूलों पहुंचकर स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसमें बच्चों व शिक्षको की उपस्थिति,साफ सफाई ,मध्यान्ह भोजन व अन्य भौतिक संसाधनों का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दी।इस अवसर पर संस्था प्रमुख सहित सभी शिक्षकों व बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति रही।



शादी के 6 महीने बाद मायके गई पत्नी, 48 साल बाद लौटी तो पति की आंखों से छलक पड़े आंसू

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 एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने रिश्तों, इंतजार और उम्मीद की मिसाल पेश कर दी। शादी के महज छह महीने बाद मायके गई पत्नी करीब 48 साल बाद अचानक अपने ससुराल लौटी, तो बुजुर्ग पति उसे देखकर खुद को रोक नहीं पाए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।


बताया जाता है कि पत्नी के घर छोड़कर जाने के बाद ललन मिश्रा ने उन्हें ढूंढने के लिए आसपास के कई गांवों में काफी तलाश की। इस दौरान उन्होंने अपनी नौकरी तक दांव पर लगा दी, लेकिन पत्नी का कोई सुराग नहीं मिल सका।

घर छोड़ने के बाद निर्मला देवी के पिता ने उनकी नौकरी नागपुर के एक सरकारी स्कूल में लगवा दी। इसके बाद वह वहीं रहने लगीं और अपने दम पर अपने जुड़वा बेटों की परवरिश की। आज उनका एक बेटा पुणे में इंजीनियर है, जबकि दूसरा अभी पढ़ाई कर रहा है।

दशकों बाद जब निर्मला देवी वापस बरियारपुर पहुंचीं, तो सबसे पहले Bihar Police के बख्तियारपुर थाने पहुंचकर अपने पति ललन मिश्रा के बारे में जानकारी ली। इसके बाद पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में वह अपने ससुराल पहुंचीं।

करीब 48 साल बाद अचानक घर पहुंची बुजुर्ग महिला को देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। तभी निर्मला देवी ने अपने हाथ पर बना पुराना गोदना (टैटू) दिखाया। यह निशान देखते ही ललन मिश्रा ने उन्हें तुरंत पहचान लिया।

भावुक ललन मिश्रा ने कहा, “अपने मन से घर छोड़कर चली गई थी। 48 साल बाद वापस आई है। मायके में रह रही थी। दरभंगा जिले के मिर्जापुर में उसका मायका है। मेरे दो बच्चे हैं।”

पत्नी की पहचान होते ही घर का माहौल खुशी से भर गया। परिवार के सदस्य भावुक होकर उनसे गले मिले। करीब पांच दशक बाद हुए इस पुनर्मिलन ने पूरे गांव को भावुक कर दिया है और हर तरफ इसी कहानी की चर्चा हो रही है।

जीवन के आखिरी पड़ाव पर ललन मिश्रा का वर्षों पुराना अकेलापन अब खत्म हो गया। यह कहानी रिश्तों, उम्मीद और लंबे इंतजार की एक अनोखी मिसाल बन गई है।

CG NEWS : गुटखा के लिए मां की हत्या, कलयुगी बेटे ने पत्थर से कुचल दिया सिर

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 सक्ती। जिले के डभरा थाना क्षेत्र के ग्राम भेड़ीकोना में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। गुटखा खाने के लिए पैसे नहीं मिलने पर एक युवक ने अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने पहले मां के साथ मारपीट की और फिर पत्थर से सिर कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।


गुटखा खाने के लिए मांगे थे पैसे

पुलिस के मुताबिक, 14 जून 2026 की शाम करीब 7:40 बजे आरोपी लखन माली (25) ने अपनी मां तिहारिन बाई माली से विमल गुटखा खरीदने के लिए पैसे मांगे। मां द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर आरोपी आगबबूला हो गया और हाथ-मुक्कों से मारपीट शुरू कर दी।

भाग रही मां पर पत्थर से किया हमला

मारपीट से बचने के लिए तिहारिन बाई वहां से भागने लगीं, लेकिन आरोपी ने घर के पास लगे टेप नल के पास रखा पत्थर उठाकर उनके सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर हालत में महिला को डभरा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने आरोपी को दबोचा, जुर्म कबूला

घटना की सूचना मिलते ही डभरा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी सुमित गुप्ता के निर्देशन में टीम गठित की गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी लखन माली को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद घटना में इस्तेमाल पत्थर भी बरामद कर लिया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े ठेकेदार दीपेश गांधी के यहां ईडी-EOW की छापेमार कार्रवाई

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 धमतरी। बहुचर्चित Enforcement Directorate (ईडी) और Economic Offences Wing (EOW) की संयुक्त टीम ने मंगलवार सुबह धमतरी में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतमाला परियोजना से जुड़े ठेकेदार दीपेश गांधी के निवास पर छापा मारा। इस कार्रवाई के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों की टीम सुबह से ही शहर के आमापारा क्षेत्र स्थित दीपेश गांधी के घर पर मौजूद है। टीम द्वारा विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, अनुबंधों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई Bharatmala Pariyojana से जुड़ी कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियां भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्यों और भुगतान प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।

हालांकि, मामले को लेकर ईडी और EOW की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छापेमारी की सूचना मिलते ही स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ गई और क्षेत्र में कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

बताया जा रहा है कि जांच टीम घर सहित अन्य संबंधित परिसरों के दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर इस मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों और ठिकानों पर भी आगे कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले को गोपनीय तरीके से आगे बढ़ा रही हैं। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किन आरोपों और तथ्यों के आधार पर की गई है।

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े होने लगे हैं और अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

छत्तीसगढ़ में बंद हुए सभी टाइगर रिजर्व और अभयारण्य, 1 अक्टूबर तक जंगल सफारी पर रोक

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 रायपुर। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए छत्तीसगढ़ के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्यों को 15 जून से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। यह प्रतिबंध 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद 2 अक्टूबर से जंगल सफारी और पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।


पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और अभयारण्यों को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है।

राज्य सरकार ने प्रकृति संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान जंगलों के भीतर बने कच्चे रास्ते और सफारी ट्रैक बारिश की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। लगातार बारिश से नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने और जलभराव के कारण आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है।

इसके अलावा बारिश का मौसम वन्यजीवों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह समय अधिकांश वन्य प्रजातियों के प्रजनन और शावकों के पालन-पोषण का होता है। ऐसे में वन्यजीवों को शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए मानव हस्तक्षेप सीमित किया जाता है।

ये प्रमुख पर्यटन स्थल रहेंगे बंद

अगले साढ़े तीन महीनों तक प्रदेश के कई प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित राज्य के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।

बंद के दौरान चलेगा विशेष अभियान

पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग जंगलों के भीतर कई महत्वपूर्ण कार्य करेगा। इसमें अवैध शिकार रोकने के लिए गश्त बढ़ाना, वन्यजीवों की निगरानी, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और सफारी मार्गों व रिसॉर्ट्स की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं।

वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जंगलों और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह “ग्रीन ब्रेक” पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है। अब 2 अक्टूबर 2026 से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए रोमांच के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार होंगे।

NEET री-एग्जाम से पहले बड़ा फैसला, 22 जून तक Telegram पर बैन

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 नई दिल्ली। NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने परीक्षा की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Telegram पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगा दिया है, जबकि 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर भी बंद रहेगा।


यह फैसला 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए लिया गया है। National Testing Agency (NTA) की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट 2000 की धारा 69A के तहत यह आदेश जारी किया।

NTA के मुताबिक, Telegram पर कई फर्जी चैनल जैसे “PAPER LEAKED NEET” और “Re-NEET 2026” छात्रों को पेपर दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे थे। साथ ही मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल कर पेपर लीक के फर्जी सबूत बनाए जा रहे थे।

एजेंसी ने छात्रों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट NEET Official Portal से ही लें।

साइबर शिकायत हेल्पलाइन: 1930 | साइबर पोर्टल: National Cyber Crime Portal

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