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समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अनियमितता, 38 कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई, 31 कर्मचारी निलंबित, तीन पर एफआईआर, एक की सेवा समाप्ति

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रायपुर। राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर की जा रही धान खरीदी में अनियमितता बरतने के फलस्वरूप समिति प्रबंधकों तथा धान खरीदी से जुड़े 38 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 31 कर्मचारियों के विरूद्ध निलंबन तथा निलंबित, एक की सेवा समाप्ति, दो को सेवा से पृथक, एक को कार्य से पृथक और तीन कर्मचारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है। ये कार्रवाईयां प्रदेश के 12 जिलों दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद तथा बलौदाबाजार-भाटापारा में की गई हैं। 

खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार धान खरीदी कार्य के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण में स्कंध में कमी के 5 मामले, स्कंध अधिक एवं अव्यवस्थित स्टेकिंग के 3 मामले, नीति विपरीत कार्य-निर्देशों का उल्लंघन के 4 मामले, अमानक धान खरीदी के 5 मामले, धान खरीदी में अनियमितता के 11 मामले, अवकाश के दिन धान खरीदी के 3 मामले सहित फर्जी खरीदी, अनियमितता, टोकन अनियमितता, बिना आवक पर्ची, अवैध वसूली, अव्यवस्था के एक-एक तथा बारदाना वितरण में अनियमितता के 2-2 मामलों पर कार्रवाई की गई है। 

दुर्ग जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य के भौतिक सत्यापन में स्कंध गड़बड़ी पाए जाने के फलस्वरूप झीट धान उपार्जन केन्द्र के समिति प्रबंधक सौरभ यादव तथा गोढ़ी के समिति प्रबंधक शेखर सिंह कश्यप, खिलोराकला के समिति प्रभारी देवदत पटेल, कन्हारपुर के समिति प्रभारी सेवाराम पटेल, ठेंगाभाट के समिति प्रभारी ईश्वर कुमार साहू, मुरमुंदा के समिति प्रभारी टिकेन्द्र कुर्रे को निलंबित किया गया है। इसी प्रकार सेलूद के सहायक समिति प्रबंधक रोमनदास वैष्णव और भृत्य हरिशंकर साहू को नीति के विपरित कार्य व उल्लंघन के मामले में निलंबित किया गया है। 

बेमेतरा जिले में अमानक धान खरीदी के मामले में धान उपार्जन केन्द्र बोरतरा के प्रभारी सहायक प्रबंधक टिकेश्वर निषाद, फड प्रभारी (लिपिक) किशन जंघेल, गाडाडी धान उपार्जन केन्द्र के प्रभारी समिति प्रबंधक भुनेश्वर वर्मा तथा फड प्रभारी गेंदलाल वर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं मऊ के सहायक समिति प्रबंधक उमेश कुमार साहू के विरूद्ध फर्जी धान खरीदी के मामले में निलंबित तथा एफआईआर की कार्रवाई की गई है। कबीरधाम जिले में धान उपार्जन केन्द्र कुकदूर के समिति प्रबंधक अनिल बाजपेयी के विरूद्ध भौतिक सत्यापन स्कंध में कमी पाए जाने के कारण निलंबन के साथ-साथ एफआईआर दर्ज किया गया है। बारदाना वितरण में अनियमितता के कारण चपोरा उपार्जन केन्द्र प्रभारी नरेश यादव को निलंबित किया गया है।

बिलासपुर जिले के धान उपार्जन केन्द्र पीपरतराई के प्रभारी तेजुराम को खराब धान खरीदी के मामले में निलंबित किया गया है। वहीं धान खरीदी केन्द्र एरमसाही के प्रभारी कामीराम खुंटे के विरूद्ध 920 बोरों की कमी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराया गया है। जांजगीर-चांपा जिले में धान खरीदी केन्द्र बोड़सरा के भृत्य हरिहर यादव, कम्प्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार तिवारी, चौकीदार निरंजन साहू को छुट्टी के दिन आवक लेने के फलस्वरूप निलंबित कर दिया गया है। धान उपार्जन केन्द्र कोसमंदा के कम्प्यूटर ऑपरेटर छविलाल मन्नेवार को टोकन में अनियमितता के कारण निलंबित किया गया है।  

रायगढ़ जिले में धान खरीदी में अनियमितता के फलस्वरूप मुकडेगा के सहायक समिति प्रबंधक तेलूराम सिदार, कोडसिया के सहायक समिति प्रबंधक प्रहलाद बेहरा, छाल के सहायक समिति प्रबंधक ठंडाराम बेहरा और जमरगीडीह के सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया को निलंबित किया गया है। सक्ती जिले के धान उपार्जन केन्द्र कांसा के प्रभारी एकलव्य चंद्राकर को बिना आवक पर्ची धान खरीदी के मामले में सेवा से पृथक कर दिया गया है। जगदलपुर जिले में कोलचूर प्रभारी समिति प्रबंधक गौतम तिवारी और रेटावण्ड के प्रभारी समिति प्रबंधक दीनबंधु पाणीग्रही को धान खरीदी में अनियमितता के फलस्वरूप निलंबित किया गया है। रायपुर जिले में नरदहरा के लिपिक-ऑपरेटर राकेश जांगड़े को किसानों से अवैध वसूली के मामले में सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है। 

गरियाबंद जिले में धान खरीदी में लापरवाही एवं अनियमितता के लिए लोहरसी के कर्मचारी संतोष कुमार साहू, मैनपुर के गोपी राम मरकाम को निलंबित तथा शोभा के भीखम मरकाम को कार्य से पृथक किया गया है। महासमुंद जिले में धान खरीदी में अनियमितता के मामले में पिरदा के उपार्जन केन्द्र प्रभारी रोहित पटेल और सिंगबहाल के उपार्जन केन्द्र प्रभारी बुध्दिवंत प्रधान के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराया गया है। साथ ही धान खरीदी में अव्यवस्था के कारण तोषगांव के उपार्जन केन्द्र प्रभारी नकुल साहू को निलंबित किया गया है।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में धान खरीदी केन्द्र सकरी के प्रभारी समिति प्रबंधक सतीष कुमार महिलांग द्वारा नीति के विपरित कार्य करने के फलस्वरूप निलंबित किया गया है तथा बारदाना प्रभारी कुमारी थानेश्वरी साहू को नीति के विपरीत कार्य करने के फलस्वरूप सेवा से पृथक किया गया है। करमदा के प्रभारी समिति प्रबंधक राजकमल साहू को धान स्कंध में कमी पाए जाने के फलस्वरूप निलंबित किया गया है।

बस्तर पंडुम अंतर्गत बस्तर और बकावंड में लोक संस्कृति के महापर्व में मांदर की थाप पर थिरके कलाकार

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रायपुर। बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा और लोक संस्कृति को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए बस्तर पंडुम 2026 का उत्साह अब पूरे शबाब पर है। इसी कड़ी में गुरुवार को विकासखंड मुख्यालय बस्तर और बकावंड में ब्लॉक स्तरीय बस्तर पंडुम का भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जहां मांदर की थाप और लोकगीतों की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

बस्तर की माटी से जुड़ी कला को मंच प्रदान करना है

बस्तर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और सांसद बस्तर महेश कश्यप भी शामिल हुए। उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर न केवल कलाकारों की हौसला अफजाई की, बल्कि बस्तर की माटी से जुड़ी कला को मंच प्रदान करने की इस पहल को सराहा। इसी तरह बकावंड में आयोजित कार्यक्रम में सांसद महेश कश्यप ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

परंपराओं को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक

गौरतलब है कि बस्तर पंडुम आयोजन के दौरान विकासखंड के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। यह आयोजन महज एक प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर बस्तर की 12 विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं के संरक्षण का माध्यम बना। कलाकारों ने जनजातीय नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्रों के वादन से लेकर बस्तर के स्वादिष्ट व्यंजनों, वन औषधियों और हस्तशिल्प का ऐसा प्रदर्शन किया कि उपस्थित अतिथि और दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर कहा कि अपनी जड़ों और परंपराओं को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत पर गर्व करना सिखाते हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों का मूल उद्देश्य हमारे तीज-त्यौहार, खान-पान, बोली-भाषा और रीति-रिवाजों को संरक्षित करना है। आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को न भूले, इसलिए शासन ने यह मंच तैयार किया है। हमारे कलाकारों के हुनर में वह जादू है जो दुनिया को आकर्षित करता है, और हमें इस विरासत को सहेजकर अगली पीढ़ी को सौंपना होगा।

बस्तर पंडुम 12 विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं के संरक्षण का माध्यम

वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि बस्तर के कण-कण में कला बसती है। गाँव-गाँव में छिपी इस प्रतिभा को निखारने के लिए बस्तर पंडुम एक क्रांतिकारी पहल है। आज यहाँ 12 विधाओं में जो प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, वह यह साबित करता है कि हमारी लोक कला आज भी उतनी ही जीवंत है। यह मंच हमारे ग्रामीण कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की पहली सीढ़ी है। इस मौके पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारी-कर्मचारी और बडी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।


रायपुर साहित्य उत्सव के प्रत्येक सत्र के बेहतर संचालन के लिए नियुक्त होंगे लायज़निंग अधिकारी

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रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर में 23 से 25 जनवरी तक आयोजित होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ संवाद के सभागृह में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्सव के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और कार्यक्रम-संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में राज्यभर से चयनित लायजनिंग अधिकारी शामिल हुए। लायजनिंग अधिकारियों को रायपुर साहित्य उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों के सुचारु आयोजन हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया गया।  

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उत्सव के विभिन्न सत्रों के संचालन को सुचारु बनाने के लिए एक विशेष सत्र-सहयोग टीम गठित की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक सत्र के लिए लायज़निंग अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो कार्यक्रम से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियों का समन्वय करेंगे।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन समयबद्ध, व्यवस्थित और उच्च स्तर का हो, ताकि देशभर से आने वाले साहित्यकारों, कलाकारों और दर्शकों को एक बेहतरीन अनुभव मिल सके। रायपुर साहित्य उत्सव को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की सक्रिय तैयारियाँ अब अंतिम चरण में पहुँच रही हैं।

इस बैठक में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, अपर संचालक जनसंपर्क उमेश मिश्रा तथा संयुक्त संचालक जितेन्द्र नागेश उपस्थित थेे। सभी ने आयोजन को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए।

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की बड़ी सफलता, 81 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, बंदूक के नहीं, विकास के साथ है भविष्य — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम’ के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। इन पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था, जिससे यह आत्मसमर्पण अभियान अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल हो गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक विजय बताया और कहा कि पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है। जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का माहौल था, वहाँ अब शासन की सशक्त उपस्थिति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच ने लोगों में भरोसा पैदा किया है। 

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत सरकार उन सभी भटके युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही है, जो हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, और यह व्यापक आत्मसमर्पण उसी भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को इस सफलता का आधार बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा है, जहाँ सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, आजीविका और शासन की पहुँच लगातार मजबूत हो रही है।

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य हेतु अंतर-विभागीय कार्ययोजना पर उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण, संवर्धन एवं समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित राज्य स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक रायपुर में आयोजित की गई। यह बैठक लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के संचालक ऋतुराज रघुवंशी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न शासकीय विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर जोर

बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को एक अनिवार्य एवं अभिन्न घटक के रूप में स्थापित करना रहा। इस अवसर पर संचालक रघुवंशी ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब वे मानसिक रूप से स्वस्थ, सशक्त एवं तनावमुक्त हों।

अंतर-विभागीय समन्वय से एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

बैठक में अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष बल देते हुए रघुवंशी ने निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को अपनी कार्यसूची में प्राथमिकता दें। प्रत्येक विभाग को अपनी-अपनी विस्तृत एवं विशिष्ट कार्ययोजना तैयार कर उसे तत्काल प्रभाव से धरातल पर क्रियान्वित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप विभिन्न विभागों की संसाधनों एवं विशेषज्ञता को समन्वित करते हुए एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया।

राज्य स्तरीय समिति निभाएगी सेतु की भूमिका

उल्लेखनीय है कि यह राज्य स्तरीय समिति प्रदेश के छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से गठित की गई है। समिति विभिन्न विभागों के बीच समन्वयक सेतु के रूप में कार्य करेगी, ताकि विद्यार्थियों को समय पर परामर्श, सहयोगात्मक सहायता एवं एक सकारात्मक, सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय पॉलिमर विज्ञान सम्मेलन में आईआईटी भिलाई के शोधकर्ताओं को मिला पुरस्कार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि संस्थान के शोधकर्ताओं ने एसपीएसआई मैक्रो 2025 के अठारहवें अंतरराष्ट्रीय पॉलिमर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार प्राप्त कर संस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मेलन 15 से 18 दिसंबर 2025 के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर द्वारा आयोजित किया गया था। इस आयोजन में पॉलिमर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और तकनीकी प्रगति पर चर्चा के लिए विश्वभर से प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और औद्योगिक विशेषज्ञों ने सहभागिता की। आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के तीन शोधार्थियों स्वरूप माईती, निशिकांत, सुदीप्त पॉल को उनके उत्कृष्ट पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

स्वरूप माईती को उनके शोध 'समायोज्य कंपन-अवशोषण और प्रभाव-सहनशीलता वाले स्व-उपचारक इलास्टोमरों के लिए गतिशील गैर-सहसंयोजक नेटवर्क का विकास' पर सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार मिला। यह कार्य प्रभाव सुरक्षा और कंपन अवशोषण हेतु उन्नत इलास्टोमेरिक सामग्रियों के विकास पर केंद्रित है। वहीं निशिकांत को 'अत्यंत सूक्ष्म सल्फर-बिंदुओं द्वारा मध्यस्थित सरल प्रकाश-प्रेरित बहुलकीकरण के माध्यम से त्रि-आयामी मुद्रण हेतु स्मार्ट इंजेक्टेबल स्याही का निर्माण' विषयक पोस्टर के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें अगली पीढ़ी की योगात्मक विनिर्माण (3डी प्रिंटिंग) तकनीकों के लिए नवीन बहुलकीकरण रणनीतियाँ प्रस्तुत की गई हैं।

सुदीप्त पॉल को 'स्मार्ट खिड़की और सुरक्षा अनुप्रयोगों हेतु पराबैंगनी किरण-अवरोधक ताप-संवेदी बहुक्रियात्मक पॉलिमरिक संरचना' पर किए गए शोध के लिए सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार प्राप्त हुआ, जो स्मार्ट और ऊर्जा-कुशल तकनीकों के लिए प्रभावी पॉलिमर-आधारित समाधान प्रदान करता है।

इस संबंध में तीनों अनुसंधानरत शोधार्थियों के मार्गदर्शक डॉ. संजीब बैनर्जी ने भी हर्ष व्यक्त किया। यह उपलब्धि उन्नत पॉलिमरिक सामग्रियों और सतत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में आईआईटी भिलाई की बढ़ती शोध-पहचान को रेखांकित करती है। इन अनुसंधानों में मौलिक रसायन विज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग जैसे स्मार्ट सामग्री, विनिर्माण प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का सशक्त समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

संस्थान के संकाय सदस्यों और शोधार्थियों ने पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि ऐसी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ आईआईटी भिलाई को उच्च-प्रभावी वैज्ञानिक अनुसंधान के एक उभरते केंद्र के रूप में और अधिक सुदृढ़ करती हैं।

तातापानी महोत्सव हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: मंत्री रामविचार नेताम

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रायपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला अपनी अनूठी संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए अपनी विशेष पहचान रखता है। इसी गौरवशाली विरासत को संजोने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को उत्साह से भर दिया। इस मौके पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। 

मंत्री नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि तातापानी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। प्रशासन और स्थानीय जनभागीदारी से यह आयोजन प्रतिवर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या के मुख्य आकर्षण प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार और पद्मश्री से सम्मानित अनुज शर्मा रहे। उन्होंने अपनी टीम के साथ छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की ऐसी जादुई प्रस्तुति दी कि पंडाल में मौजूद हजारों दर्शक मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर वनांचल की समृद्ध संस्कृति की छटा बिखेरी।

कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने न केवल पारंपरिक लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया, बल्कि जिले में हो रहे विकास कार्यों को भी रचनात्मक ढंग से मंच पर उतारा। अतिथियों ने बच्चों के इस हुनर की मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर रमनलाल, जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक मौजूद रहे। 

हनुमान जी का मुकुट चोरी, महिला व बुजुर्ग आरोपी गिरफ्तार

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 भिलाई नगर। भिलाई शहर के मंदिरों में हुई चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मंदिर से हनुमान जी का चांदी का मुकुट और लड्डू गोपाल की पीतल की मूर्ति चोरी करने वाली एक महिला और एक बुजुर्ग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।


अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर ने बताया कि इच्छापूर्ति दुर्गा गणेश मंदिर, मटका लाइन, कैम्प-02 भिलाई के समिति अध्यक्ष द्वारा थाना में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मंदिर के पुजारी भोला महाराज रोजाना की तरह 9 जनवरी 2026 की शाम करीब 4 बजे मंदिर खोलकर अपने कमरे में चले गए थे। शाम लगभग 6 बजे जब वे मंदिर लौटे, तो उन्होंने पाया कि हनुमान जी की मूर्ति पर लगा चांदी का मुकुट, स्टील के बर्तन और लड्डू गोपाल की पीतल की मूर्ति झूले सहित गायब थी। चोरी गए सामान की कीमत लगभग 20 हजार रुपये बताई गई।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और मुखबिरों को सक्रिय किया गया। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जहां उन्होंने चोरी की घटना को स्वीकार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से चोरी गया पूरा सामान बरामद कर लिया गया है।

गिरफ्तार आरोपी

  • रीना द्विवेदी (48 वर्ष), निवासी इस्पात नगर, रिसाली
  • बालमुकुंद सोनी (65 वर्ष), निवासी इस्पात नगर, रिसाली

पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विज्ञान एवं वाणिज्य विषय के अध्ययन-अध्यापन के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव सरकार की विशेष पहल

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रायपुर। प्रदेश में नक्सल प्रभावित जिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों में विज्ञान एवं वाणिज्य विषय के प्रति रुचि बढ़ाने एवं शिक्षकों की कमी दूर करने के उद्देश्य से शासन द्वारा विशेष पहल शुरू की गई है।

सरकार द्वारा आर्यभट्ट विज्ञान-वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना के तहत दुर्ग एवं जगदलपुर में 500-500 सीटर विज्ञान एवं वाणिज्य शिक्षण केंद्र स्थापित किए गए है। जिससे इन विशेष शिक्षण केंद्रो के माध्यम से इन वर्गाे के विद्यार्थियों को विशेष अवसर मिल रहा है। 

आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013-14 से शुरू की गई इस योजना के तहत स्नातक स्तर पर गणित एवं विज्ञान विषय हेतु 80-80 सीटें और वाणिज्य विषय हेतु 40 सीटें आरक्षित हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर विज्ञान हेतु 80 तथा वाणिज्य हेतु 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। बी.एड. कार्यक्रम के लिए कुल 200 सीटें स्वीकृत हैं। 500 स्वीकृत सीटों में 80 प्रतिशत सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं । अधिकारियों ने बताया कि इस योजना में चयनित विद्यार्थियों को शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित की जाने वाली प्री.बी.एड. और टी.ई.टी. परीक्षा हेतु मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन प्रदान किए जाते हैं। वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 2 करोड़ 40 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।

प्रदेश में अब प्रवेश और चयन के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों में आर्यभट्ट विज्ञान-वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना के माध्यम से रुचि और भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2023-24 में विज्ञान-वाणिज्य विकास केन्द्र दुर्ग में 452 बालिकाओं ने प्रवेश लिए थे। इसी प्रकार विज्ञान वाणिज्य विकास केन्द्र जगदलपुर में 168 बालकों ने प्रवेश लिया था। इस वर्ष विभिन्न पदों पर चयनित विद्यार्थियों की संख्या 49 रही। 

इसी प्रकार वर्ष 2024-25 में कन्या शिक्षण केन्द्र दुर्ग में प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 473 और बालक केन्द्र जगदलपुर में 199 हो गई, जबकि विभिन्न पदों पर चयनित विद्यार्थियों की संख्या इस वर्ष 10 रही। वही वर्ष 2025-26 में कन्या शिक्षण केन्द्र दुर्ग में 477 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ, वहीं बालक शिक्षण केन्द्र जगदलपुर में 275 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।

राज्य शासन की इस पहल से जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों के न केवल विज्ञान और वाणिज्य विषयों में रुचि में वृद्धि हो रही है, बल्कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के योग्य विद्यार्थियों को शिक्षकों के रूप में विशेष अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उनके करियर और सामाजिक विकास दोनों को मजबूती मिल रही है।

महासमुंद : जिले की 551 ग्राम पंचायतों में मॉडल जीपीडीपी को लेकर प्रशिक्षण प्रक्रिया जारी

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महासमुंद। जिले में ग्राम पंचायतों की समग्र एवं आवश्यकता आधारित विकास योजना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मॉडल ग्राम पंचायत विकास योजना (मॉडल जीपीडीपी) को लेकर व्यापक प्रशिक्षण प्रक्रिया संचालित की जा रही है। जिला पंचायत द्वारा दिए गए निर्देश के तहत महासमुंद जिले के सभी 551 ग्राम पंचायतों में ब्लॉकवार फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसी क्रम में आज महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना एवं सरायपाली विकासखंडों में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में मॉडल जीपीडीपी के क्रियान्वयन, ग्राम पंचायत योजना निर्माण समिति की भूमिका तथा सभी विभागों और समुदाय के सहयोग से नीड-बेस्ड जीपीडीपी योजना का निर्माण कर ग्राम सभा से पारित कराने की प्रक्रिया पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रशिक्षण के दौरान पीएआई इंडिकेटर्स के अनुरूप 9 एलएसडीजीएस थीम के आधार पर योजनाओं के निर्माण, समावेशी योजना प्रक्रिया तथा पंचायत स्तर पर समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

महासमुंद विकासखंड में आयोजित प्रशिक्षण में 14 ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, शिक्षक एवं पीएचई मैकेनिक शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों को विभागीय मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से प्रदान किया जा रहा है। फाउंडेशन की ओर से महेंद्र आर्य ने वीडियो माध्यम से मॉडल जीपीडीपी की अवधारणा, इसकी चरणबद्ध प्रक्रिया, फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका एवं पंचायत की सामूहिक सहभागिता को सरल रूप में समझाया। साथ ही प्रतिभागियों की समझ को मजबूत करने के लिए एक इंटरैक्टिव गतिविधि भी कराई गई। 

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता, 52 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 49 पर था 1.41 करोड़ रुपये का इनाम

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 बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आज गुरुवार को नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 52 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से 49 नक्सलियों पर कुल 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिला नक्सली भी शामिल हैं। ये सभी माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC), आंध्र–ओडिशा बॉर्डर डिवीजन और भामरागढ़ एरिया कमेटी (महाराष्ट्र) में सक्रिय थे।

पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सीआरपीएफ के अधिकारियों की मौजूदगी में ‘पूना मार्गेम’ (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण तक) पहल के तहत आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है।

इनामी नक्सलियों का विवरण

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी मेंबर लक्खू कारम उर्फ अनिल (32) तथा प्लाटून पार्टी कमेटी मेंबर लक्ष्मी माडवी (28) और चिन्नी सोढ़ी उर्फ शांति (28) शामिल हैं, जिन पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
इसके अलावा 13 नक्सलियों पर पांच-पांच लाख, 19 कैडरों पर दो-दो लाख और 14 नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। कुल 49 नक्सलियों पर 1.41 करोड़ रुपये का इनाम था।

तत्काल सहायता और पुनर्वास

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को तत्काल 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी और सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा।

लगातार बढ़ रहे आत्मसमर्पण

पुलिस के अनुसार बुधवार को पड़ोसी सुकमा जिले में 29 नक्सलियों, आठ जनवरी को दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों, जबकि सात जनवरी को सुकमा में 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। वर्ष 2025 में अब तक 1500 से अधिक नक्सली राज्य में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमंडल के स्पीकर्स और अधिष्ठान अधिकारियों की 28वीं कांफ्रेंस का उद्घाटन किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (15 जनवरी 2026) समविधान सदन के प्रतिष्ठित सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल के स्पीकर्स और अधिष्ठान अधिकारियों की 28वीं कांफ्रेंस (CSPOC) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रीगण, राज्यसभा उपाध्यक्ष हरिवंश, राष्ट्रमंडल देशों के संसदों के अधिष्ठान अधिकारी, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

स्वागत भाषण में लोकसभा अध्यक्ष के मुख्य बिंदु

  • ओम बिरला ने ध्यान आकर्षित किया कि तकनीकी बदलाव, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग मisinformation, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।

  • उन्होंने कहा कि वैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे इन चुनौतियों का समाधान खोजें और नैतिक AI और पारदर्शी, उत्तरदायी सोशल मीडिया ढांचे को विकसित करें।

  • भारत के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संसद और राज्य विधायिकाओं में AI और डिजिटल तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, और कई प्रक्रियाएँ पेपरलेस और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित की जा रही हैं।

  • उन्होंने भारत की सात दशकों की संसदीय यात्रा पर प्रकाश डाला, जिसमें लोक-केंद्रित नीतियाँ, कल्याणकारी कानून और निष्पक्ष चुनावी प्रणाली के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया गया है।

राष्ट्रमंडल संसदीय मंच की महत्ता

  • बिरला ने कहा कि CSPOC जैसे प्लेटफॉर्म विविध लोकतंत्रों के अधिष्ठान अधिकारियों को वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर देते हैं।

  • उन्होंने सम्मेलन के आधिकारिक एजेंडा पर प्रकाश डाला, जिसमें शामिल हैं:

    • अधिष्ठान अधिकारियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता

    • संसदों की विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास बढ़ाना

    • लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा बनाए रखना

सम्मेलन में भागीदारी और विषयवस्तु

  • सम्मेलन में 53 राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के स्पीकर्स और अधिष्ठान अधिकारी, 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि, CPA के महासचिव, IPU के अध्यक्ष और अन्य अधिकारी उपस्थित हैं।

  • कुल 61 अधिष्ठान अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 45 स्पीकर्स और 16 डिप्टी स्पीकर्स हैं।

  • प्लेनरी सेशन्स में चर्चा के विषय:

    • संसद में AI: नवाचार, निगरानी और अनुकूलन का संतुलन

    • संसद पर सोशल मीडिया का प्रभाव

    • नागरिक भागीदारी और संसद की समझ बढ़ाने के नवाचार

    • सांसदों और संसद कर्मचारी की स्वास्थ्य और कल्याण, और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने में अधिष्ठान अधिकारियों की भूमिका

प्रधानमंत्री की उपस्थिति का महत्व

  • लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति सम्मेलन के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

  • उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते हुए प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रदान करने में नेतृत्व को उजागर किया।

  • CSPOC का आयोजन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में, लोकतांत्रिक संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को मजबूत करने का प्रतीक है।

उम्मीद और निष्कर्ष

  • सम्मेलन में विचार-विमर्श से संसदीय चुनौतियों का सामूहिक समाधान निकलेगा।

  • यह संसदीय प्रक्रियाओं में सुधार, नागरिक भागीदारी बढ़ाने और लोकतंत्र में विश्वास मजबूत करने में सहायक होगा।

  • लोकसभा अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधियों की उत्साही भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि 28वीं CSPOC के परिणाम राष्ट्रमंडल में संसदीय लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे।


स्टार्टअप इंडिया के एक दशक: भारत के नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की कहानी

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में मजबूती से स्थापित है।

  • स्टार्टअप इंडिया के एक दशक में विचार (Ideation) से लेकर फंडिंग, मेंटरशिप और स्केल-अप तक पूर्ण जीवन-चक्र समर्थन प्रणाली विकसित हुई है।

  • लगभग 50% स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से उभर रहे हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण का संकेत है।

  • AIM 2.0 का फोकस इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने हेतु नए प्रयोगों (पायलट) और सफल मॉडलों के विस्तार पर है, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और समुदायों के साथ सहयोग किया जा रहा है।

  • SVEP, ASPIRE और PMEGP जैसे ग्रामीण और जमीनी कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यमों, महिला-नेतृत्व वाले उपक्रमों और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।

स्टार्टअप्स: आर्थिक परिवर्तन में निर्णायक भूमिका

16 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर स्टार्टअप इंडिया पहल के एक ऐतिहासिक दशक को चिह्नित किया जा रहा है। 2016 में उद्यमिता को गति देने के लिए शुरू हुई यह पहल आज विश्व के सबसे बड़े और विविध स्टार्टअप इकोसिस्टम में परिवर्तित हो चुकी है।
“स्टार्टअप इंडिया” के माध्यम से यह आंदोलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से गहराई से जुड़ा है, जिसमें आर्थिक आधुनिकीकरण के साथ समावेशी और क्षेत्रीय विकास को भी प्राथमिकता दी गई है।

पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं—जो नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ छोटे शहर भी इस गति में योगदान दे रहे हैं, जहाँ से लगभग 50% स्टार्टअप्स उभर रहे हैं।

आर्थिक विकास के प्रेरक के रूप में स्टार्टअप्स

स्टार्टअप्स:

  • तकनीकी नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देते हैं

  • बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करते हैं

  • वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुँच को मजबूत करते हैं

  • क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं

एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस, पर्यटन और एड-टेक जैसे क्षेत्रों में समाधान देकर स्टार्टअप्स ग्रामीण–शहरी अंतर को पाट रहे हैं।
दिसंबर 2025 तक 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक/भागीदार हैं, जो समावेशी और संतुलित विकास का स्पष्ट संकेत है।

स्टार्टअप इंडिया पहल: भारत के नवाचार तंत्र की रीढ़

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत DPIIT द्वारा संचालित स्टार्टअप इंडिया पहल आज एक बहुआयामी मंच बन चुकी है, जो विचार से लेकर विस्तार तक स्टार्टअप्स का समर्थन करती है।
2014 में जहाँ केवल 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं आज 120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियाँ हैं, जिनका संयुक्त मूल्यांकन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है।

स्टार्टअप्स भारत की युवा जनसंख्या का लाभ उठाते हुए प्रौद्योगिकी, सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार सृजित कर रहे हैं, साथ ही गिग इकॉनमी और सप्लाई चेन के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ा रहे हैं।

स्टार्टअप इंडिया के प्रमुख कार्यक्रम

फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS)

  • कुल कोष: ₹10,000 करोड़

  • 140+ AIFs के माध्यम से 1,370+ स्टार्टअप्स में ₹25,500+ करोड़ निवेश

क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS)

  • 330+ ऋण, ₹800 करोड़ से अधिक की गारंटी

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS)

  • कुल कोष: ₹945 करोड़

  • 215+ इनक्यूबेटर्स को स्वीकृति

स्टार्टअप इंडिया हब

  • निवेशकों, मेंटर्स, इनक्यूबेटर्स और उद्यमियों को जोड़ने वाला डिजिटल मंच

स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF)

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा

राष्ट्रीय मेंटरशिप पोर्टल (MAARG)

  • देशभर के स्टार्टअप्स को अनुभवी मार्गदर्शकों से जोड़ता है

स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल

  • SIDBI के सहयोग से स्टार्टअप्स और निवेशकों को जोड़ने वाला मंच

स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त करने वाली अन्य योजनाएँ

अटल इनोवेशन मिशन (AIM)

  • कुल परिव्यय: ₹2,750 करोड़ (2028 तक)

  • 10,000+ अटल टिंकरिंग लैब्स, 1.1 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित

AIM 2.0 में नई पहलें:

  • LIPI (भाषा समावेशन)

  • फ्रंटियर प्रोग्राम (J&K, NE, आकांक्षी जिले)

  • डीपटेक रिएक्टर

  • इंटरनेशनल इनोवेशन सहयोग

GENESIS (MeitY)

  • बजट: ₹490 करोड़

  • टियर-II/III शहरों में 1,600 डीपटेक स्टार्टअप्स को समर्थन

MeitY स्टार्टअप हब

  • 6,148+ स्टार्टअप्स, 517+ इनक्यूबेटर्स

TIDE 2.0

  • 51 इनक्यूबेटर्स के माध्यम से ICT आधारित स्टार्टअप्स को समर्थन

NIDHI (DST)

  • 12,000+ स्टार्टअप्स, 1.3 लाख+ रोजगार, 1,100+ IP

ग्रामीण और जमीनी स्तर की पहल

SVEP

  • 3.74 लाख उद्यमों को समर्थन (जून 2025 तक)

ASPIRE

  • ग्रामीण उद्योगों और माइक्रो-एंटरप्राइज को बढ़ावा

PMEGP

  • स्वरोजगार हेतु मार्जिन मनी सब्सिडी

  • विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 लाख तक परियोजना समर्थन

आगे की राह: नवाचार और क्रियान्वयन का भविष्य

स्टार्टअप इंडिया के एक दशक बाद, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ विस्तार से टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा जनसंख्या और सुधार-आधारित नीतियों के बल पर स्टार्टअप्स भारत की $7.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था (2030) और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।

स्टार्टअप्स अब केवल विकास के उत्प्रेरक नहीं, बल्कि भारत के भविष्य-तैयार, नवाचार-आधारित आर्थिक मॉडल के प्रतीक बन चुके हैं।

तमिलनाडु के कोंडगई झील से प्राप्त 4,500 वर्षों का विस्तृत जलवायु अभिलेख

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एक नए अध्ययन में तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के बाहरी क्षेत्र में स्थित कोंडगई अंतर्देशीय झील के नीचे से प्रायद्वीपीय भारत के अब तक के सबसे विस्तृत जलवायु अभिलेखों में से एक का पता चला है।

शोध पत्र का ग्राफिकल सार

स्थलीय तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून के प्रति संवेदनशील होने के बावजूद, अब तक अच्छी तरह दिनांकित बहु-प्रॉक्सी झील अभिलेख लगभग नहीं के बराबर थे। कीलाड़ी के समीप स्थित कोंडगई झील—जो संगम काल की एक उन्नत नगरीय सभ्यता के प्रमाणों के लिए प्रसिद्ध एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है और जिसकी तिथि संभवतः ईसा पूर्व छठी शताब्दी या उससे भी पहले की मानी जाती है—तमिल इतिहास को कई शताब्दियों पीछे ले जाती है। शोधकर्ताओं ने यह पहचाना कि प्राचीन बसाहट क्षेत्रों में स्थित यह झील अतीत के मानसून परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र की प्रतिक्रियाओं और मानव बसावट के साथ उनके संबंधों को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के शोधकर्ताओं ने झील से एक मीटर से कुछ अधिक गहराई तक का अवसाद (सेडिमेंट) प्रोफ़ाइल निकाला और 32 निकटवर्ती नमूने एकत्र किए, जिनमें से प्रत्येक समय के एक अलग चरण का प्रतिनिधित्व करता है। स्थिर समस्थानिक विश्लेषण, पराग अध्ययन, कण-आकार मापन और रेडियोकार्बन डेटिंग जैसी उन्नत तकनीकों के संयोजन का उपयोग कर उन्होंने असाधारण सटीकता के साथ अतीत की वर्षा, वनस्पति, झील के जल-स्तर और बाढ़ घटनाओं का पुनर्निर्माण किया।

जर्नल Holocene में प्रकाशित इस अध्ययन में, अंतर्देशीय तमिलनाडु से प्राप्त लेट होलोसीन काल की जलवायु और झील-पारिस्थितिकी तंत्र गतिकी का पहला उच्च-रिज़ॉल्यूशन बहु-प्रॉक्सी पुनर्निर्माण प्रस्तुत किया गया है। इसमें पिछले लगभग 4,500 वर्षों के दौरान तीन प्रमुख जलवायु चरणों की पहचान की गई—4.2 हजार वर्ष पूर्व का शुष्क (अरीड) चरण, 3.2 हजार वर्ष पूर्व का शुष्क चरण, और रोमन उष्ण काल—और इनके मानसून परिवर्तनशीलता, झील की जल-प्रणाली तथा मानव गतिविधियों से प्रत्यक्ष संबंधों को स्थापित किया गया है।

4,500 वर्षों के मानसूनी व्यवहार के पुनर्निर्माण के माध्यम से यह अध्ययन एक दीर्घकालिक जलवायु आधाररेखा प्रदान करता है, जो क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान को सुदृढ़ बनाती है तथा भविष्य में सूखा, अत्यधिक वर्षा या बाढ़ जैसी घटनाओं के पूर्वानुमान में सहायक है। तमिलनाडु जैसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य मानसून पूर्वानुमान मॉडलों को बेहतर बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह निष्कर्ष शिवगंगा और मदुरै जैसे सूखा-प्रवण जिलों में जल संसाधन प्रबंधन को भी प्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते हैं। अतीत के झील-स्तर उतार-चढ़ाव, अवसाद प्रवाह और जल-वैज्ञानिक परिवर्तनों की जानकारी सतत जलाशय पुनर्स्थापन, भूजल पुनर्भरण योजना, तालाबों के पुनर्वास तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि जल उपयोग को दिशा देती है। यह उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो मानसून-आधारित जल प्रणालियों पर निर्भर हैं।

प्राचीन बाढ़ निक्षेपों, स्थलीय अवसाद प्रवाह और भूमि अस्थिरता के चरणों की पहचान कर यह अध्ययन जोखिम मानचित्रण और आपदा-तैयारी में योगदान देता है। वैगई नदी बेसिन में बाढ़-संवेदनशील क्षेत्रों, नदी-मार्ग परिवर्तन और भूमि क्षरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए प्राधिकरण इन संकेतों का उपयोग कर सकते हैं।

(क) कोंडगई झील (KLD), तमिलनाडु का अध्ययन मानचित्र, जिसमें भूमि उपयोग और भूमि आवरण के साथ प्रोफ़ाइल स्थान दर्शाया गया है।
(ख) 1901 से 2020 ईस्वी तक कोंडगई ज़िले में औसत मासिक वर्षा (KNMI क्लाइमेटिक एक्सप्लोरर से प्राप्त)।
(ग) गूगल अर्थ छवि जिसमें अध्ययन स्थल, प्राचीन नदी-मार्ग (पेलियोचैनल) और वैगई नदी बेसिन की ऑक्स-बो झीलें दर्शाई गई हैं।
(घ) KK’ के साथ क्रॉस-सेक्शन, जहाँ T0 सक्रिय नदी-मार्ग और T1 नदी-चिन्ह तथा वैगई नदी के पेलियोचैनलों का स्थान दर्शाता है।
(ङ) कोंडगई दफ़न स्थल।

यह शोध पुरातत्व और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में भी अत्यंत लाभकारी है। कीलाड़ी बसाहट के निकट स्थित कोंडगई झील का पर्यावरणीय इतिहास यह समझने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है कि प्राचीन समाजों ने जलवायु परिवर्तनशीलता, जल-कमी और पारिस्थितिक दबावों के प्रति कैसे अनुकूलन किया। इससे पुरातात्विक व्याख्या, संरक्षण रणनीतियों और क्षेत्रीय विरासत नियोजन को मजबूती मिलती है।

पारिस्थितिक दृष्टिकोण से, यह अध्ययन जलीय उत्पादकता, ऑक्सीजन स्थितियों और जैविक पदार्थ स्रोतों में दीर्घकालिक परिवर्तनों का दस्तावेज़ीकरण कर आर्द्रभूमि और झील पुनर्स्थापन के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। इससे साक्ष्य-आधारित संरक्षण और जैव विविधता रणनीतियों के निर्माण में सहायता मिलती है।

रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय सेना दिवस पर शुभकामनाएँ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को भारतीय सेना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर भारतीय सेना के वीर जवानों एवं उनके परिवारजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र भारतीय सेना के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और देश की संप्रभुता व अखंडता की रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को नमन करता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर सदैव सतर्क रहने वाली और संकट के समय दृढ़ता से खड़ी रहने वाली भारतीय सेना ने अपनी पेशेवर दक्षता, अनुशासन एवं मानवीय सेवा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सम्मान अर्जित किया है। उन्होंने एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र गर्व और सम्मान के साथ अपने सैनिकों के साथ एकजुट खड़ा है।

दिन के उत्तरार्ध में रक्षा मंत्री जयपुर में आयोजित सेना दिवस समारोह में भी शिरकत करेंगे।


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