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छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचा-बसा है सुआ नृत्य, अंचल में मची धूम

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आरंग। इन दिनों अंचल में सुआ नृत्य की धूम मची है। दीपावली के नजदीक आते ही बालिकाएं और महिलाएं समूह में घर-घर, गली-मोहल्ले में पहुंचकर सुआ गीतों के साथ नृत्य कर रही हैं।इस नृत्य में धार्मिक और सामाजिक संदेश से भरे गीत गाए जाते हैं।


बालिकाएं गोल घेरा बनाकर तालियों की थाप पर थिरकती हैं। यह विशुद्ध समूह नृत्य है, जिसमें किसी वाद्ययंत्र की आवश्यकता नहीं होती। कुछ बालिकाएं गीत की टेक उठाती हैं और शेष उसे दोहराते हुए नाचती हैं। समापन पर सुआ के लिए अन्न-धन मांगा जाता है और अन्न-धन मिलने पर आशीर्वाद गीत गाकर आशीष दिया जाता है।

हमर गांव हमर संस्कृति,,हमर पहचान,सुवा नृत्य लखौली

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जानकारों के अनुसार सुआ नृत्य की परंपरा कब से चली आ रही है, इसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं है। सुआ एक शाकाहारी पक्षी है जो हूबहू मनुष्य की आवाज निकाल सकता है। मान्यता है कि पहले युवतियां अपने मन की बातें सुआ पक्षी के सामने प्रकट करती थीं, जो धीरे-धीरे गीत और बाद में नृत्य का रूप ले लीं। वहीं संस्कृति प्रेमी शिक्षक महेन्द्र पटेल का कहना है कि सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचा-बसा है।

दीपावली नजदीक आते ही बालिकाएं इसके लिए उत्साहित रहती हैं। यह नृत्य दीपावली के साथ-साथ तीजा, पोला, छेरछेरा और शरद पूर्णिमा पर भी विशेष रूप से किया जाता है। आजकल गांव-गांव में सुआ नृत्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित होने लगी हैं, जो हमारी लोक-संस्कृति को सहेजने का सुंदर प्रयास है।

मंदार की थाप पर थिरकते दिखे CM विष्णुदेव साय, पत्नी के साथ किया पारंपरिक करम पूजन

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड अंतर्गत ग्राम बनगांव में आयोजित आंचलिक करम पूजा महोत्सव 2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने भगवान महादेव एवं माता पार्वती, छत्तीसगढ़ महतारी, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडाbके छायाचित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।


पारंपरिक उत्साह, उल्लास और श्रद्धा के साथ आयोजित इस महोत्सव में जनजातीय संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिली। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नर्तक दलों सहित उरांव समाज के 6 हजार से अधिक लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में करम राजा के चारों ओर मांदर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य किया। मुख्यमंत्री साय भी नर्तक दलों के साथ कदम मिलाकर पारंपरिक नृत्य में शामिल हुए। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और सभी को करम परब की शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देते हुए ग्राम बनगांव में सामाजिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बनगांव में अखड़ा निर्माण और सहसपुर में मिनी स्टेडियम निर्माण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि करम परब हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। यह पर्व प्रकृति के प्रति हमारी गहरी आस्था, प्रेम और सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करता है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की, वह आज भी संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायी है। करम परब हमें प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सामूहिक जीवन के मूल्यों से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक पहचान यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपर्वों, लोककलाओं और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव में निहित है। जनजातीय समाज ने अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा है। यह हमारी अमूल्य सांस्कृतिक पूंजी है, जिसका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता और विकास के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। हमारी युवा पीढ़ी अपनी भाषा, लोकगीतों, लोकनृत्यों, रीति-रिवाजों और पारंपरिक पर्वों से जुड़ी रहे, तभी हमारी समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के ज्ञान, जीवनमूल्यों और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

जनजातीय वीर नायकों का शौर्य और बलिदान देश के इतिहास का गौरवशाली अध्याय

मुख्यमंत्री  साय ने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय वीर नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। रानी दुर्गावती, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, गेंद सिंह और वीर बुधु भगत जैसे महान नायकों ने अपने साहस, संघर्ष और बलिदान से देश के इतिहास में अमिट स्थान बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध ऐतिहासिक संघर्ष किया। वहीं शहीद वीर नारायण सिंह ने अकाल और भुखमरी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए अंग्रेजों के गोदामों से अनाज निकलवाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाया। जनहित और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के कारण उन्हें अंग्रेजी शासन ने फांसी दे दी। ऐसे महान जनजातीय नायकों का जीवन हमें साहस, त्याग और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।

मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारकर हर वर्ग के जीवन में ला रहे सकारात्मक बदलाव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार माताओं-बहनों, किसानों, गरीबों, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए संकल्पों को प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है।

उन्होंने कहा कि दीपावली से पहले महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की माताओं-बहनों को बड़ी सौगात दी गई है। राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में योजना की 33वीं किस्त जारी की गई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसानों को लंबित बोनस का भुगतान कर सरकार ने अपना वादा भी पूरा किया है। इसी प्रकार भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1,600 पक्के आवास तैयार हो रहे हैं। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों और पात्र हितग्राहियों को प्रमुख तीर्थस्थलों की निःशुल्क यात्रा का अवसर प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प एवं मार्गदर्शन में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलताएं मिली हैं। सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पराक्रम और बस्तरवासियों के सहयोग से बस्तर अब नक्सलवाद की चुनौती से निकलकर शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा का सुदृढ़ वातावरण प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा जशपुर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। जिले में मेडिकल की पढ़ाई प्रारंभ हो चुकी है। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आर्चरी अकादमी विकसित की जा रही है, जिससे जिले के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता निखारने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि कुनकुरी विकासखंड के हर्राडांड़ में राज्य का पांचवां 400 केवी विद्युत सब स्टेशन स्थापित किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में विद्युत अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी। जिले में सड़क, पुल-पुलिया, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की रोशनी जशपुर के प्रत्येक गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, खेल और अधोसंरचना के विस्तार के साथ जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं का संरक्षण करते हुए जशपुर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाना हमारी प्राथमिकता है।

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, आंचलिक करम पूजा महोत्सव के अध्यक्ष  वेद प्रकाश भगत, कार्यकारी अध्यक्ष  बलराम भगत, आयोजन समिति के  गुलाब राम, श्री बोधसाय भगत, संजय निकुंज,  देवदत्त निकुंज सहित बड़ी संख्या में उरांव समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

छोटी दिवाली 2026: 7 या 8 नवंबर, कब मनाई जाएगी नरक चतुर्दशी? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व के बीच छोटी दिवाली की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोई 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी बता रहा है तो कहीं 8 नवंबर को छोटी दिवाली मनाने की बात कही जा रही है। इसकी मुख्य वजह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का दो दिनों तक रहना है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि आखिर छोटी दिवाली कब मनाई जाएगी और अभ्यंग स्नान के लिए कौन-सा समय सबसे शुभ रहेगा?


हिंदू पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में छोटी दिवाली की सही तारीख, चतुर्दशी तिथि, अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।

छोटी दिवाली 2026 कब मनाई जाएगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर, शनिवार को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी।

उदया तिथि और अभ्यंग स्नान की परंपरा के आधार पर इस वर्ष नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। हालांकि, तिथि के 7 नवंबर की रात तक रहने के कारण कुछ धार्मिक अनुष्ठानों और निशीथ काल की पूजा को लेकर तारीख में अंतर दिखाई दे रहा है।

छोटी दिवाली 2026: पूजा और अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त

छोटी दिवाली पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तिल के तेल से शरीर की मालिश करने और उबटन लगाकर स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

नरक चतुर्दशी 2026 के प्रमुख मुहूर्त:

  • पर्व की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे

  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे

  • अभ्यंग स्नान का शुभ समय: सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक

नोट: अभ्यंग स्नान का दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?

नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और नरक की यातनाओं से बचने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

छोटी दिवाली को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, ऐसा करने से सौंदर्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद लोग नए वस्त्र धारण करते हैं और घरों में दीपक जलाकर उत्सव मनाते हैं।

नरक चतुर्दशी पर किन देवी-देवताओं की होती है पूजा?

छोटी दिवाली पर भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में माता काली और हनुमान जी की पूजा-अर्चना भी की जाती है।

इस दिन शाम को घर के मुख्य द्वार और आसपास दीपक जलाए जाते हैं। इसके साथ ही यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

छोटी दिवाली की पूजा विधि

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा और स्नान के लिए कुछ विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है।

  1. सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान की तैयारी करें।

  2. स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर मालिश करें।

  3. पारंपरिक मान्यता के अनुसार उबटन लगाकर स्नान करें।

  4. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  5. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और फूल, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें।

  6. शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीपक जलाएं।

  7. यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करें।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली और अत्याचारी असुर था। उसने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं, उसने देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए थे और 16 हजार महिलाओं को बंदी बनाकर रखा था।

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध किया और नरकासुर का वध कर बंदी बनाई गई महिलाओं को मुक्त कराया।

मान्यता है कि नरकासुर के वध की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

7 नवंबर या 8 नवंबर, आखिर क्यों हो रहा है कन्फ्यूजन?

इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। वहीं, निशीथ काल में की जाने वाली कुछ विशेष धार्मिक पूजा और काली चौदस से जुड़े अनुष्ठान 7 नवंबर की रात को पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, नरक चतुर्दशी की परंपरा के अनुसार अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह किया जाएगा।

इसी वजह से दोनों तारीखों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और स्नान का समय भी देख सकते हैं।

अग्निवीरों को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर देने का निर्णय अभिनंदनीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल का दूरदर्शी निर्णय, अग्निवीरों के अनुभव और कौशल का राष्ट्रहित में होगा बेहतर उपयोग

युवाओं को राष्ट्रसेवा के साथ सैन्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के मिलेंगे नए अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों के लिए दो वर्ष के अतिरिक्त ‘सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी’ को स्वीकृति दिए जाने के निर्णय का हार्दिक स्वागत करते हुए इसे अभिनंदनीय एवं दूरदर्शी पहल बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस निर्णय से अग्निवीरों को चार वर्ष की प्रारंभिक सेवा पूरी करने के बाद दो वर्ष तक और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने वाले इच्छुक अग्निवीर नियमित सैन्य सेवा में भी शामिल हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय अग्निवीरों के अनुभव, कौशल और सामर्थ्य का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के साथ ही युवाओं को सैन्य सेवा में आगे बढ़ने के नए अवसर प्रदान करेगा। इससे देश की रक्षा व्यवस्था को भी अनुभवी एवं प्रशिक्षित युवाओं की क्षमताओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित युवाओं के मनोबल को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

जियो-पोर्टल से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का डेटा आधारित शासन, विकास योजनाओं को मिलेगी नई दिशा

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट से अब एक क्लिक पर मिलेगी भौगोलिक जानकारी

190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण, 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं समाधान विकसित

जीआईएस तकनीक से औद्योगिक भूमि चयन, बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगी मदद

रायपुर- छत्तीसगढ़ में सुशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में विकास योजनाओं के बेहतर निर्माण, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा सटीक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के विभिन्न विभागों के 200 से अधिक अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यशाला में राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

जीआईएस आधारित डेटा से योजनाओं के निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती

कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स द्वारा राज्य के लिए 190 से अधिक जीआईएस डेटा लेयर्स का एकीकरण किया जा चुका है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं के अनुरूप 35 से अधिक जीआईएस आधारित टूल्स एवं उपयोग आधारित समाधान विकसित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी समाधानों के माध्यम से विभागों को उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं का निर्माण एवं प्रभावी क्रियान्वयन करने में सहायता मिल रही है।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य चिप्स द्वारा विकसित राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल एवं डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से जिलों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को परिचित कराना था। इसके माध्यम से जिला स्तर पर उपलब्ध भौगोलिक आंकड़ों का उपयोग कर विकास संबंधी आवश्यकताओं की पहचान और योजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जियो-पोर्टल के उपयोग के लिए चिप्स द्वारा सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।

कार्यशाला में नई दिल्ली से आए ईसरी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत जोशी, हेड ई.आई.सी. पीयूष मिश्रा, ऑक्टेव इंडिया के विवेक चौहान, चंचल मुखर्जी, चिप्स सीईओ मयंक अग्रवाल, चिप्स के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख संदीप टिकरिहा तथा हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

एआई चैट बॉट से आसान होगी भौगोलिक जानकारी तक पहुंच

कार्यशाला का विशेष आकर्षण जियो-पोर्टल पर विकसित नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैट बॉट फीचर रहा। इस नई सुविधा से उपयोगकर्ताओं के लिए भौगोलिक जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक होगा। अब उपयोगकर्ता जियो-पोर्टल पर किसी भी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति अथवा स्थल का नाम चैट बॉट में लिखकर सीधे संबंधित स्थान तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए उन्हें ड्रॉप-डाउन मेन्यू या लंबी सूची में स्थान खोजने की आवश्यकता नहीं होगी।

चैट बॉट में स्थान का नाम दर्ज करते ही जियो- पोर्टल का मानचित्र संबंधित स्थान पर नेविगेट करेगा। साथ ही उस स्थान से जुड़ी विस्तृत भौगोलिक जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देश स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे। यह सुविधा जियो-पोर्टल को अधिक सरल, सहज और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के साथ ही विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं तेजी से उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।

औद्योगिक विकास से लेकर बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार तक उपयोगी होगी तकनीक

कार्यशाला में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी देते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने विभिन्न विभागों द्वारा अपनाए जा रहे जीआईएस आधारित समाधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा औद्योगिक भूमि के चयन और नियोजन के लिए 'लैंड पैच एनालिसिस' का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान, उपलब्ध भूमि का डिजिटल विश्लेषण तथा उपयुक्त स्थानों के चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाई जा सकेगी।

इसी प्रकार संस्थागत वित्त संचालनालय (डीआईएफ) द्वारा 'बैंक कवरेज एनालिसिस' के माध्यम से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इसके आधार पर नई बैंक शाखाएं स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों का निर्धारण किया जा सकेगा। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि भू-स्थानिक तकनीक केवल मानचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विशेषज्ञों ने बताए भू-स्थानिक तकनीक के नवीनतम उपयोग

कार्यशाला के दौरान ईसरी इंडिया (Esri India) एवं ऑक्टेव इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रस्तुतिकरण दी गई।  विशेषज्ञों ने जीआईएस तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों, आधुनिक भू-स्थानिक समाधानों तथा शासन की कार्यप्रणाली में इनके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर जानकारी साझा की।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने जीआईएस आधारित योजनाओं, डेटा विश्लेषण और विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित करने के विषय में विचार-विमर्श किया।

डेटा आधारित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का विस्तार विकास योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल है। भौगोलिक सूचनाओं के एकीकृत उपयोग से विभागों को स्थानीय जरूरतों की पहचान करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में सहायता मिलेगी। 

इस पहल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करते हुए विकास योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। आधुनिक जीआईएस तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

मुर्गा बाजार की आड़ में लाखों का जुआ! बीजापुर के जंगल में पुलिस की बड़ी रेड, 156 लोगों पर कार्रवाई; 20 लाख नकद और 47 गाड़ियां जब्त

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से जुए के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। बीजापुर जिले में मुर्गा लड़ाई के आयोजन की आड़ में कथित तौर पर लाखों रुपये का जुआ संचालित किया जा रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस ने जंगल में दबिश देकर बड़ी कार्रवाई की।

इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके पर मौजूद 156 लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। साथ ही 20 लाख 1 हजार 200 रुपये नकद, 47 चारपहिया वाहन और 12 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। सवाल यह है कि आखिर जंगल के भीतर इतने बड़े स्तर पर जुए का आयोजन कैसे चल रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी?

कहां चल रहा था जुए का पूरा खेल?

मामला बीजापुर जिले के भद्राकाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम रैगुड़ा के जंगल का है।

जानकारी के मुताबिक, यहां मुर्गा बाजार और मुर्गों की लड़ाई के आयोजन की आड़ में रुपये-पैसों का दांव लगाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग जुटते थे और मुर्गों की लड़ाई पर मोटी रकम लगाई जाती थी।

पुलिस को मुखबिर के माध्यम से इस कथित अवैध जुआ गतिविधि की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मौके पर कार्रवाई की योजना बनाई। 

 पुलिस ने घेराबंदी कर मारी दबिश

सूचना मिलने के बाद बीजापुर पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की।

पुलिस टीम ने रैगुड़ा जंगल में पहुंचकर घेराबंदी की और कथित जुए के आयोजन पर अचानक दबिश दी।

अचानक पुलिस को देखकर मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को पकड़कर पूछताछ की और नकदी सहित अन्य सामान जब्त किया।

20 लाख रुपये से ज्यादा नकदी, 47 वाहन जब्त

इस कार्रवाई का सबसे बड़ा पहलू मौके से बरामद हुई नकदी और वाहनों की संख्या है।

पुलिस की कार्रवाई में जब्त सामग्री का विवरण इस प्रकार है:

जब्त सामग्रीसंख्या / रकम
नकद राशि ₹20,01,200
चारपहिया वाहन 47
मोबाइल फोन 12
कार्रवाई के दायरे में आए लोग 156

इतनी बड़ी संख्या में चारपहिया वाहनों की मौजूदगी से आयोजन में लोगों की व्यापक भागीदारी का संकेत मिलता है। हालांकि, जब्त वाहनों के मालिकों और आयोजन में उनकी भूमिका की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। 

156 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर मिले 156 व्यक्तियों के विरुद्ध भद्राकाली थाने में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत कार्रवाई की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3(2) और सार्वजनिक द्यूत अधिनियम की धारा 4 एवं 13 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 156 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की खबर को सभी की गिरफ्तारी या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच जारी है। 

क्या पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचे थे लोग?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भी लोग पहुंचे थे।

यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो पुलिस के सामने आयोजन से जुड़े लोगों के नेटवर्क और संभावित अंतरराज्यीय संपर्कों की पड़ताल भी महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, इस संबंध में अंतिम आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जाना चाहिए। 

अब पुलिस की जांच में किन बातों पर रहेगा फोकस?

इस कार्रवाई के बाद पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं:

  • इस कथित जुआ आयोजन का संचालन कौन कर रहा था?

  • यहां कितने समय से जुए के दांव लगाए जा रहे थे?

  • जब्त मोबाइल फोन में लेनदेन और आयोजन से जुड़े क्या साक्ष्य हैं?

  • 47 वाहनों के मालिक कौन हैं और वे किस उद्देश्य से वहां पहुंचे थे?

  • क्या इस आयोजन में दूसरे जिलों या राज्यों के लोगों की भी भूमिका थी?

इन सभी बिंदुओं पर जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष

बीजापुर के रैगुड़ा जंगल में मुर्गा लड़ाई की आड़ में कथित जुआ गतिविधियों पर पुलिस की इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में चर्चा तेज कर दी है। 156 लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई, 20 लाख रुपये से अधिक नकदी और 47 चारपहिया वाहनों की जब्ती इस मामले को बड़ा बनाती है।

अब देखना होगा कि पुलिस की आगे की जांच में इस कथित जुआ आयोजन के संचालकों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क को लेकर क्या खुलासे होते हैं।


प्राथमिक शाला सलिहाभांठा में बच्चों ने सजाया हटरी, जाने व्यसाय के तरीके

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खरीदारी के लिए उमड़े लोग, पूर्व प्राचार्य समीरचंद्र प्रधान जी भी पहुँचे बच्चों के हटरी

पटेवा- प्राथमिक शाला सलिहाभांठा के बच्चों द्वारा प्रबंधन समिति व प्रधानपाठक योगेश निर्मलकर के मार्गदर्शन में हटरी लगाया गया। इस हटरी में बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ स्वयं से तैयारी करते हुए हटरी के लिए सामानों की व्यवस्था कर हटरी में बेचा। कुछ बच्चों ने समूह में तो कुछ ने अकेले ही अपना दुकान सजाया था। इसमें बच्चों के द्वारा अपने बाड़ी की सब्जी, जिमी कन्द, आलू-प्याज, भिंडी, केला, मूंगफली, मक्का भेल, मिर्ची भजिया, जलेबी, समोसा, पकौड़ा, लड्डू, बिस्किट, नड्डा और रंगोली, दीवाली फ़ोटो आदि का दुकान लगाए थे। बच्चों की हटरी में प्रथम खरीदारी सरपंच इंद्रा बाई सिन्हा ने की। गांव के लोगों ने इस हटरी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जमकर खरीददारी की। खाने वाले दुकान के पास लोगों की ज्यादा भीड़ रही। बच्चों की दुकानों से पूरा सामान बिक जाने के बाद भी गांव के लोगों का इस हटरी में आना जारी रहा। लोग बड़े ही उत्साह के साथ बच्चों के साथ मोलभाव करते दिखे। कुछ पालक बच्चों की मदद भी करते देखे गए। बच्चे भी मजे के साथ हिसाब-किताब में जुड़े रहे। लोगों ने बच्चों से सामान खरीदने में अधिक पैसों की भी परवाह नहीं किए।

बच्चों की हटरी में पहुंचे पूर्व प्राचार्य समीरचंद्र प्रधान

हटरी में पूर्व प्राचार्य समीरचंद्र प्रधान भी खरीदारी करने पहुंचे। इस दौरान बच्चों द्वारा लगाए सामानों के बारे में पूछते नजर आए। साथ ही पालकों से भी बात कर इस हटरी के बारे में जाना। इसके बाद बच्चों से थैला भरकर सब्जियां और खाने का सामान भी खरीदा। बच्चों और पालकों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के उद्यम से बच्चे कम उम्र से ही व्यवसाय की तैयारी व चुनौतियों को समझ पाएंगे साथ ही स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित होंगे। बचत का भी विश्वास और आदत बनेगा।

हटरी के समापन पर बच्चे अपनी मेहनत का फल पाकर बड़े खुश लग रहे थे साथ ही पालक भी अपने बच्चों की जिम्मेदारी को देखकर काफी उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। गाँव के लोगों ने बच्चों से खूब खरीदारी की। इस हटरी को सफल बनाने में शिक्षक रामेश्वर ढीढी, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पिरीत राम साहू, बिसनी बाई दीवान, हेमलता ध्रुव, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, सुकदेव दीवान, गुलाब ध्रुव, आशाराम ध्रुव, धनेश्वरी निषाद, रामप्यारी दीवान, लगन बाई ध्रुव, त्रिलोकी साहू के साथ ही पालकों एवं गांव के लोगों का भरपूर सहयोग रहा।


सेनानी परिवारों के उत्थान के लिए मंत्री ओपी चौधरी से आवश्यक पहल की मांग

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महासमुंद- विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिला महासमुंद के प्रमुखों ने आज यहां बरोंडा चौक पर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी का स्वागत कर उन्हें सेनानी परिवारों की भावनाओं से अवगत कराया और उनके उत्थान विषयक कुछ मांगें भी रखी। साथ ही जिले के 146 स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सहेजने के लिए संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए शासन स्तर से सहयोग का अनुरोध किया। 

संगठन के जिलाध्यक्ष नारायण नामदेव ने बताया कि जिले के 144 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम की शिला-पट्टिका एवं  प्रतिमा स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। तत्संबंध में प्रस्तावित स्मृति सदन हेतु शासन से सहयोग की मांग की गई है। सेनानी परिवारों के उत्थान के लिए इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए शासन स्तर से आवश्यक पहल की मांग भी की गई। विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सेनानी परिवार की भावनाओं के अनुरूप आवश्यक पहल का निवेदन मंत्री ओपी चौधरी से किया। इस मौके पर संगठन के चित्रसेन गिरी, कुबेर प्रकाश गिरी, संजय गिरी, शेषनारायण नामदेव, रोमांतक गिरी, बसंत चंद्राकर, आनंद गिरी, संजीव साव, खुमान चंद्राकर, योगेश जैन आदि मौजूद थे।

अमित जोगी के खिलाफ रायपुर में FIR! PM मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवादित वीडियो से मचा सियासी बवाल, पोस्ट हटाकर मांग चुके हैं माफी

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छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई है।

मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े एक कथित आपत्तिजनक व्यंग्यात्मक वीडियो का है। भाजपा नेताओं ने इस वीडियो को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की।

खास बात यह है कि विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी वीडियो को सोशल मीडिया से हटा चुके हैं और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा नेताओं की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बहस तेज हो गई है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, अमित जोगी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राजनीतिक व्यंग्य करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था।

वीडियो को 'ज्ञानू-जानू की शादी' नाम से प्रस्तुत किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलते-जुलते प्रतीकात्मक किरदारों को मुखौटों के साथ दिखाया गया था।

वीडियो में शादी और हनीमून से जुड़े दृश्य दिखाए जाने का आरोप है। भाजपा नेताओं ने इस प्रस्तुति को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि इसमें देश के प्रधानमंत्री और संवैधानिक संस्था के प्रमुख की छवि का अनुचित इस्तेमाल किया गया है।

हालांकि, वीडियो को लेकर अलग-अलग पक्षों की व्याख्या सामने आई है। अमित जोगी की ओर से इसे कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राजनीतिक व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था। 

भाजपा नेताओं ने थाने पहुंचकर की शिकायत

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने विरोध जताया। रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सिविल लाइंस थाने पहुंचा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दी गई।

शिकायत में वीडियो के निर्माण, संपादन और सोशल मीडिया पर प्रसारण से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

भाजपा नेताओं का आरोप था कि राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को लेकर इस तरह की सामग्री प्रसारित करना उचित नहीं है। 

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमित जोगी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की निम्न धाराओं और IT Act की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है:

कानूनी प्रावधान              मामला
BNS धारा 196         विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने से संबंधित
BNS धारा 352        जानबूझकर अपमान से शांति भंग कराने से संबंधित
BNS धारा 353(2)        विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या घृणा फैलाने वाले कथनों से संबंधित
BNS धारा 356(2)        मानहानि से संबंधित दंड का प्रावधान
IT Act धारा 67     इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से संबंधित

ध्यान दें कि इन धाराओं की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। FIR की आधिकारिक प्रति से इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। 

विवाद बढ़ने पर अमित जोगी ने हटाया वीडियो, मांगी माफी

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी है कि विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 नवंबर को उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद जताया और स्वीकार किया कि राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए अपनाया गया तरीका उचित नहीं था।

उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि विरोध जताने के लिए दूसरे तरीके भी अपनाए जा सकते थे। यदि उनकी पोस्ट से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं।

इसके बावजूद भाजपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की मांग जारी रखी और शिकायत दर्ज कराई। 

क्या होगी पुलिस की अगली कार्रवाई?

FIR दर्ज होने के बाद अब मामले की जांच पुलिस के हाथ में है।

जांच के दौरान पुलिस इन बिंदुओं पर ध्यान दे सकती है:

  • वीडियो किस सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया?

  • वीडियो बनाने और संपादित करने में किन लोगों की भूमिका थी?

  • वीडियो में इस्तेमाल किए गए प्रतीकात्मक पात्रों और दृश्यों का उद्देश्य क्या था?

  • वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और उसका प्रसार कैसे हुआ?

  • क्या संबंधित कानूनी धाराओं के तहत अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद हैं?

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में अमित जोगी की गिरफ्तारी या अदालत के किसी आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आगे की कार्रवाई को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में क्यों बढ़ा विवाद?

यह मामला केवल एक सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ दो बड़े मुद्दे जुड़ गए हैं।

पहला, कथित वोट चोरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और दूसरा, राजनीतिक व्यंग्य तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं।

भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक आलोचना की भी एक मर्यादा होनी चाहिए। वहीं, इस मामले में अमित जोगी की ओर से वीडियो को राजनीतिक व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था और बाद में उन्होंने माफी भी मांगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

निष्कर्ष

अमित जोगी के खिलाफ रायपुर में FIR दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो हटाने और सार्वजनिक माफी के बावजूद मामला अब कानूनी प्रक्रिया में पहुंच चुका है।

फिलहाल सबकी नजर रायपुर पुलिस की जांच और अमित जोगी के अगले कदम पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।


विकास की नई किरण- दंतेवाड़ा के सुदूर ‘लावा’ गाँव में पहली बार गूंजी टीवी की आवाज, CREDA और जिला प्रशासन की अनूठी पहल

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धनंजय राठौर संयुक्त संचालक

आमना खान सहायक संचालक, जनसंपर्क

रायपुर-  छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के धुर नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में विकास का पहिया अब तेजी से घूमने लगा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले एक अत्यंत सुदूर और दुर्गम पहाड़ी गाँव 'लावा' में जिला प्रशासन के सहयोग से क्रेडा (CREDA) विभाग द्वारा 'कम्युनिटी सोलर टीवी' (सामुदायिक सौर टीवी) की स्थापना की गई है। महज़ 21 परिवारों की आबादी वाले इस छोटे से आदिवासी गाँव के लिए यह किसी ऐतिहासिक क्रांति से कम नहीं है, क्योंकि यहाँ के ग्रामीणों ने अपने जीवन में पहली बार गाँव के भीतर ही टेलीविज़न स्क्रीन देखी है।

बस्तर के दूरदराज गाँवों तक विकास और खुशहाली पहुँचाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस अभूतपूर्व पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के हमारे दूरदराज और अंतिम छोर पर बसे गाँवों तक विकास, शिक्षा, और आधुनिक तकनीक की रोशनी पहुँचाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। दंतेवाड़ा के सुदूर लावा गाँव में सामुदायिक सोलर टीवी की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब नक्सलवाद के अंधेरे को पीछे छोड़कर हर आदिवासी भाई-बहन के जीवन तक पहुँच रहा है। जब इन सुदूर इलाकों के बच्चे और ग्रामीण पहली बार टीवी स्क्रीन पर देश-दुनिया की खबरें और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम देखेंगे, तो उनके सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी। हमारी सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ

बैलाडीला की ऊँची पहाड़ियों के पीछे और घने जंगलों के बीच बसा लावा गाँव भौगोलिक रूप से बेहद अलग-थलग है। किरंदुल के मुख्य लौह-अयस्क खनन क्षेत्र (NMDC) से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव तक पहुँचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। यहाँ के ग्रामीणों को अपनी बुनियादी ज़रूरतों, जैसे राशन दुकान (PDS) से चावल लाने के लिए आज भी पहाड़ी और पथरीले रास्तों से होकर मीलों पैदल सफर तय करना पड़ता है।

दशकों तक रहा नक्सलवाद का साया

लावा और इसके आसपास का पुरेंगल क्षेत्र दशकों तक घोर नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर नक्सलियों ने इस क्षेत्र को अपना गढ़ बना रखा था, जिसके कारण कई सालों तक यहाँ न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुँच पाता था और न ही कोई जनप्रतिनिधि। सुरक्षा कारणों से यह गाँव पूरी तरह से आधुनिक दुनिया से कटा हुआ था और यहाँ बुनियादी सुविधाओं का पहुँचना एक सपना बना हुआ था।

सुरक्षा बलों का प्रयास और बदला परिदृश्य

सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन्स और मुस्तैदी के बाद अब इस क्षेत्र में नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है। जहाँ कभी दहशत का माहौल था, वहाँ अब बदलाव की बयार बह रही है। हाल के दिनों में जिला कलेक्टर और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने खुद इस गाँव का दौरा कर ग्रामीणों की चौपाल ली। सुरक्षा और विश्वास के इसी माहौल का नतीजा है कि आज प्रशासन सीधे ग्रामीणों के दरवाज़े तक विकास योजनाएँ पहुँचा रहा है।

कम्युनिटी सोलर टीवी से बदलेगी तस्वीर

चूँकि यह गाँव पारंपरिक बिजली ग्रिड से काफी दूर है, इसलिए जिला प्रशासन और क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने यहाँ सौर ऊर्जा का सहारा लिया। गाँव में लगाए गए इस कम्युनिटी सोलर टीवी के जरिए अब निम्नलिखित बदलाव देखने को मिलेंगे:

आधुनिक दुनिया और सूचनाओं से जुड़ाव

दुर्गम पहाड़ी गाँव 'लावा' में टीवी के माध्यम से अब गांव के लोग छत्तीसगढ़, भारत और पूरी दुनिया में हो रही गतिविधियों और खबरों से सीधे जुड़ सकेंगे। इससे ग्रामीणों को सरकार की नई योजनाओं, कृषि तकनीकों और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों के बारे में आसानी से पता चल सकेगा।

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद ज्ञान 

गांव के बच्चों को अब टीवी के माध्यम से मनोरंजन के साथ पढ़ाई, ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद  कार्यक्रम देखने को मिलेंगे, जिससे उनकी समझ और सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। सुदूर क्षेत्र में रहने वाले इन बच्चों के लिए स्क्रीन पर देखकर सीखना एक नया और प्रभावी अनुभव होगा।

मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल

कम्युनिटी टीवी होने के कारण गांव के सभी 21 परिवार एक जगह इकट्ठा होकर कार्यक्रम देख सकेंगे। इससे ग्रामीणों के बीच आपसी जुड़ाव और बढ़ेगा।  दिनभर खेती और वनोपज इकट्ठा करने की कड़ी मेहनत के बाद, शाम को मनोरंजन के साधन मिलने से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

सौर ऊर्जा का बेहतरीन उपयोग

चूंकि यह इलाका बेहद सुदूर और बिजली की पारंपरिक लाइनों से दूर है, इसलिए सोलर पैनल आधारित टीवी पूरी तरह से आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे बिना बिजली कटौती की चिंता अपना कामकाज कर सकते हैं।

दशकों के अंधेरे और नक्सली खौफ को पीछे छोड़कर लावा गाँव अब सौर ऊर्जा की रोशनी और सूचना तंत्र के जरिए एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। जिला प्रशासन का यह प्रयास साबित करता है कि सरकार की नज़रें बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति पर भी हैं।

ईरान पर अमेरिका का नया हमला! क़ेश्म द्वीप पर एयर डिफेंस ठिकाने को बनाया निशाना, तेहरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

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मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के रणनीतिक क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की पुष्टि की है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई थी, जिसमें ईरान के एक एंटी-एयरक्राफ्ट यानी वायु रक्षा ठिकाने को निशाना बनाया गया।

वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई को सैन्य आक्रामकता बताते हुए अपने बचाव का अधिकार सुरक्षित रखा है। दूसरी ओर, क़तर दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या यह हमला एक सीमित सैन्य कार्रवाई तक ही रहेगा या अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर तेज हो सकता है?

क़ेश्म द्वीप पर क्या हुआ?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 2 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए। यह द्वीप फारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित है।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरानी बलों की ओर से अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के इस्तेमाल के जवाब में यह कार्रवाई की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में हमले की पुष्टि की और कहा कि निशाना एक एंटी-एयरक्राफ्ट सुविधा थी।

ट्रंप ने इसे सीमित हमला बताते हुए कहा कि यह व्यापक युद्ध की शुरुआत नहीं है। हालांकि, इस कार्रवाई ने क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। 

ईरान ने क्या प्रतिक्रिया दी?

हमले के बाद ईरान की ओर से कड़ा बयान सामने आया। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि जब तक सैन्य आक्रामकता पूरी तरह और स्थायी रूप से समाप्त नहीं होती, तब तक ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने भी कहा कि उनका देश बातचीत के जरिए संकट का समाधान चाहता है और युद्ध दोबारा शुरू होने से किसी को फायदा नहीं होगा।

हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने यह भी संकेत दिया कि देश किसी भी सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। यानी तेहरान की तरफ से एक ओर बातचीत का संदेश है, तो दूसरी ओर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?

क़ेश्म द्वीप की भौगोलिक स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है।

दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इसलिए क़ेश्म द्वीप पर हुआ हमला केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य घटनाक्रम नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। 

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का क्या हुआ?

दिलचस्प बात यह है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है।

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए सात शर्तों वाला प्रस्ताव रखा है। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने जैसी मांगें शामिल हैं।

लेकिन ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका के जवाब को असंतोषजनक बताया है। उनका कहना है कि जब तक ईरान की मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमति नहीं बनेगी।

वहीं, क़तर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और ईरान बातचीत की प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध हैं और दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान कराया जा रहा है।

समुद्री रास्तों पर भी बढ़ा खतरा

तनाव के बीच होर्मुज़ के आसपास समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार, ओमान के उत्तर-पूर्वी तट के पास एक टैंकर के इंजन कक्ष में दो अज्ञात प्रोजेक्टाइल आकर लगे। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।

इस घटना के बाद समुद्री जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। हालांकि, इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। 

दुनिया और तेल बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?

यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसके तीन बड़े प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:

  • कच्चे तेल की कीमतें: होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

  • वैश्विक व्यापार: समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से जहाजों का बीमा, परिवहन और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।

  • क्षेत्रीय सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ सकता है।

हालांकि, इन प्रभावों की वास्तविक गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश आगे सैन्य कार्रवाई करते हैं या बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका ने हमले को सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई बताया है, जबकि ईरान ने जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखा है।

दूसरी ओर, क़तर की मध्यस्थता से बातचीत जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन आगे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

इसलिए आने वाले दिनों में तीन बातों पर नजर रहेगी—ईरान की अगली प्रतिक्रिया, अमेरिका का सैन्य रुख और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत।

निष्कर्ष

ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले ने मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत साथ-साथ चल रही है। दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत से तनाव कम होगा या होर्मुज़ के आसपास एक नया सैन्य संकट खड़ा हो जाएगा।


अमेरिका में ट्रंप को बड़ा झटका! मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की ऐतिहासिक जीत, सीनेट और हाउस दोनों पर कब्जा, अब संसद में घिरेंगे राष्ट्रपति!

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वॉशिंगटन- अमेरिका के मध्यावधि चुनाव यानी मिडटर्म इलेक्शन 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 3 नवंबर को हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स—में बहुमत हासिल कर लिया है।

रॉयटर्स की 4 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी बड़ी जीत दर्ज की है, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था।

इस नतीजे से अमेरिका की राजनीति में सत्ता का संतुलन बदल गया है। जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने के बाद ट्रंप प्रशासन को संसद में विपक्ष के मजबूत नियंत्रण का सामना करना पड़ेगा।

आखिर क्या है पूरा चुनावी मामला?

अमेरिका में हर चार साल में राष्ट्रपति चुनाव होता है, जबकि हर दो साल में कांग्रेस के सदस्यों के चुनाव कराए जाते हैं। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होने वाले इन चुनावों को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है।

अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दो सदन हैं:

  • सीनेट (Senate): इसमें 100 सदस्य होते हैं।

  • हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House): इसमें 435 निर्वाचित सदस्य होते हैं।

3 नवंबर 2026 को हुए चुनाव में दोनों सदनों का नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथ में चला गया है। इसका मतलब है कि जनवरी 2027 से कांग्रेस में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अल्पमत में होगी।

रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ों में भी डेमोक्रेट्स की जीत

इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा उन राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत को लेकर है, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत प्रभाव माना जाता था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार:

  • टेक्सास: डेमोक्रेट जेम्स तालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराकर सीनेट सीट जीती।

  • साउथ कैरोलिना: डेमोक्रेट एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम को हराया।

  • कंसास: यहां डेमोक्रेट्स ने लगभग एक सदी बाद सीनेट सीट जीतकर इतिहास बनाया।

  • कई अन्य राज्यों में भी डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दी।
चुनाव में ट्रंप के खिलाफ नाराजगी क्यों दिखी?

रॉयटर्स की चुनावी रिपोर्ट के अनुसार, मतदाताओं के बीच कई मुद्दे चर्चा में रहे:

  1. महंगाई और महंगा जीवन: रोजमर्रा की जरूरतों और जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर मतदाताओं में चिंता।

  2. ईरान युद्ध: ईरान के साथ जारी युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों को लेकर असंतोष।

  3. टैरिफ नीति: अमेरिकी व्यापार शुल्क और उसके आर्थिक प्रभावों पर बहस।

  4. भ्रष्टाचार के आरोप: ट्रंप प्रशासन को लेकर उठे आरोप और राजनीतिक विवाद।

  5. सरकारी नीतियां: स्वास्थ्य सेवाओं, अर्थव्यवस्था और देश की दिशा को लेकर मतदाताओं की चिंताएं।

रॉयटर्स के अनुसार, चुनावी एग्जिट पोल में करीब आधे मतदाताओं ने कहा कि उनका वोट ट्रंप को राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से था।

अब अमेरिकी संसद में कितनी ताकत होगी डेमोक्रेट्स के पास?

अमेरिका की राजनीति में सीनेट और हाउस दोनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों सदनों में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को राष्ट्रपति के फैसलों पर निगरानी और विधायी प्रक्रिया में अधिक प्रभाव मिलेगा।

अमेरिकी सीनेट – 2026 चुनाव

U.S. general election · 100 seats

Democrats- 54 seats secured

51 seats needed for majority

Republicans- 44 seats secured

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स – 2026 चुनाव

House balance of power, 2026

U.S. general election · 435 seats

Democrats- 228 seats secured

218 seats needed for majority

Republicans- 139 seats secured

ट्रंप के लिए आगे क्या होंगी चुनौतियां?

डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने कई राजनीतिक और संवैधानिक चुनौतियां आ सकती हैं।

पहली चुनौती – सरकारी फैसलों की जांच

हाउस की समितियां ट्रंप प्रशासन की नीतियों, सरकारी खर्च और अधिकारियों के कामकाज की जांच कर सकती हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है।

दूसरी चुनौती – नए कानूनों पर टकराव

ट्रंप प्रशासन को अपने प्रस्तावित कानूनों को संसद से पास कराने में मुश्किल हो सकती है। डेमोक्रेट्स कई सरकारी प्रस्तावों का विरोध कर सकते हैं।

तीसरी चुनौती – नियुक्तियों पर असर

सीनेट में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से राष्ट्रपति की न्यायिक, कैबिनेट और राजनयिक नियुक्तियों की पुष्टि की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

चौथी चुनौती – बजट और सरकारी फंडिंग

सरकारी बजट, कर्ज की सीमा और फंडिंग को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत और राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।

क्या अब ट्रंप की शक्तियां खत्म हो जाएंगी?

नहीं। यह समझना बेहद जरूरी है कि अमेरिका में राष्ट्रपति का पद और कांग्रेस अलग-अलग संवैधानिक संस्थाएं हैं।

  • ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे।

  • उनके पास किसी विधेयक को वीटो करने का अधिकार रहेगा।

  • विदेश नीति और प्रशासनिक फैसलों में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण शक्तियां बनी रहेंगी।

  • कांग्रेस राष्ट्रपति के फैसलों की जांच और निगरानी कर सकती है।

  • राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए सामान्यतः कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।

इसलिए डेमोक्रेट्स का दोनों सदनों में बहुमत राष्ट्रपति की शक्तियां समाप्त नहीं करता, बल्कि उनके और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संतुलन बदलता है।

दुनियाभर की नजरें अमेरिका के इस चुनाव पर क्यों?

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहां की राजनीतिक नीतियों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल की कीमतों, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

रॉयटर्स के अनुसार, चुनाव परिणाम आने के बाद दुनिया के कई देशों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत के लिए भी अमेरिकी चुनाव के नतीजे महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं।

कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से:

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों पर राजनीतिक बहस प्रभावित हो सकती है।

  • टैरिफ और आयात-निर्यात नीतियों पर चर्चा बढ़ सकती है।

  • रक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े प्रस्तावों पर संसदीय निगरानी बढ़ सकती है।

  • अमेरिका की विदेश नीति पर कांग्रेस की भूमिका अधिक प्रभावशाली हो सकती है।

हालांकि, भारत-अमेरिका संबंधों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है।


आंध्र प्रदेश में चक्रवात 'मुरासु' का कहर! दो लोगों की मौत, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए, कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद!

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अमरावती- बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान 'मुरासु' आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही छोड़ गया है। तूफान के कारण अब तक कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं, जलभराव और पेड़ उखड़ने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

कब और कहां टकराया चक्रवात?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह करीब 3:30 से 5:30 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर लैंडफॉल किया।

यह तूफान नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास तट से टकराया।

लैंडफॉल के दौरान:

  • हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही।

  • हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचे।

  • कई तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई।

  • पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए।
दो लोगों की मौत, हजारों लोग प्रभावित

चक्रवात के गुजरने के बाद नुकसान का आकलन शुरू हुआ। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, तूफान से संबंधित घटनाओं में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है।

प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

नुकसान

आंकड़ा

मृतक

        2

क्षतिग्रस्त मकान

    312

प्रभावित कृषि भूमि             

    52,459 हेक्टेयर

राहत शिविरों में लोग

    12,230

प्रारंभिक आर्थिक नुकसान

    ₹344 करोड़

ये शुरुआती आंकड़े हैं और नुकसान का अंतिम आकलन अभी बदल सकता है।

कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद

चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए।

2 नवंबर को जारी आदेशों के अनुसार, इन आठ जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को 3 नवंबर के लिए बंद किया गया था:

  1. NTR

  2. कृष्णा

  3. गुंटूर

  4. बापटला

  5. पलनाडु

  6. प्रकाशम

  7. नेल्लोर

  8. मार्कापुरम

कुछ प्रभावित इलाकों में आंगनबाड़ी केंद्र और कॉलेज भी बंद रखे गए। ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी कुछ स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 4 नवंबर तक बंद रखने के आदेश दिए गए।

हजारों लोगों का रेस्क्यू, NDRF की टीमें तैनात

तूफान के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया था।

  • हजारों लोगों को निचले और संवेदनशील इलाकों से निकाला गया।

  • राहत शिविरों में लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई।

  • NDRF की तीन टीमें बचाव अभियान में लगाई गईं।

  • बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए तमिलनाडु से भी 500 बिजली विभाग के कर्मचारियों को भेजा गया।

  • पेड़ और मलबा हटाने के लिए आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
क्या अब कमजोर पड़ गया है चक्रवात?

मौसम विभाग के 4 नवंबर की सुबह के अपडेट के अनुसार, चक्रवात मुरासु अब कमजोर होकर गहरे दबाव (Deep Depression) में बदल गया है।

इसका प्रभाव आंध्र प्रदेश के साथ तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने आगे भी बारिश की संभावना जताई है।

यानी तूफान कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन भारी बारिश और जलभराव का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

किसानों की फसल को भारी नुकसान

चक्रवात और लगातार बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती आकलन में 52,459 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।

इसके अलावा सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और सिंचाई के छोटे जलाशयों पर भी दबाव बढ़ा है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है।

नोट: सभी नुकसान के आंकड़े शुरुआती सरकारी आकलन पर आधारित हैं। स्कूल बंद रहने की तारीखें जिला-विशेष के आदेशों के अनुसार हैं, पूरे राज्य के लिए एक समान छुट्टी नहीं थी।

सौरभ चंद्राकर से पूछताछ में खुलेंगे कई राज! सीएम साय का बड़ा बयान, कांग्रेस पर भी बरसे

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा इन्हीं लोगों से है। मुख्यमंत्री बुधवार को जशपुर में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा में शामिल होने के लिए रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी, अमित जोगी के बयान और कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।


सौरभ चंद्राकर की पेशी को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले के मुख्य आरोपी को विदेश से भारत लाया गया है। अब उससे पूछताछ होगी और पूछताछ के दौरान कई लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे की जांच से कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

अमित जोगी के बयान पर सीएम साय का पलटवार

सौरभ चंद्राकर को हीरो बताए जाने संबंधी अमित जोगी के बयान पर भी मुख्यमंत्री ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह उनकी सोच का परिणाम है। जैसी उनकी सोच है, उसी के अनुरूप वे अपनी क्वालिटी बता रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।

कांग्रेस पर लगाया लोकतंत्र की हत्या का आरोप

'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर मुख्यमंत्री साय ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोगों से है। कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतंत्र की हत्या की और देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किया था।

सीएम साय ने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर-कांग्रेसी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। मीडिया की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया गया और जनता द्वारा चुनी गई सरकारों को संविधान के अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर बर्खास्त किया गया।

हारने पर संवैधानिक संस्थाओं पर उठाती है सवाल

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव हारती है तो संवैधानिक संस्थाओं पर हार का ठीकरा फोड़ती है, जबकि जीत मिलने पर उसे जनता का जनादेश बताती है। ऐसे में कांग्रेस का लोकतंत्र की रक्षा की बात करना हास्यास्पद लगता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर में आयोजित पदयात्रा का उद्देश्य जनता को जागरूक करना और लोकतंत्र के प्रति लोगों को सजग करना है।

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