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विशेष लेख-सेवा सेतु- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति

एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं।

इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है

इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया।

प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है।

व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान

तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं।

पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल

“सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

सुशासन तिहार: उलखर और बड़े नावापारा में उमड़ा जनसैलाब,मौके पर ही निराकृत हुई ग्रामीणों की समस्याएं

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​रायपुर- ​छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'सुशासन तिहार 2026' के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में  शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 1400 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। उलखर शिविर में जहां 638 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं बड़े नावापारा में 836 ग्रामीणों ने अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण हेतु पंजीयन कराया।

कलेक्टर  ने दोनों ही शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन कर यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग ने नि:शुल्क जांच शिविर लगाया, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा जाल वितरण और समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं तत्काल प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 के वितरण में तत्परता दिखाई, तो खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड सौंपे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने से कई परिवारों के अपने घर का सपना साकार हुआ।

प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ यह शिविर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें उपहार दिए गए और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का मन मोह लिया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने जल बचाने की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर कार्य किया, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सका।

विशेष-लेख- बस्तर में बैंकिंग क्रांति - विश्वास, विकास और बदलाव की नई इबारत

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नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई धारा-  बैंकिंग विस्तार से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

31 नई बैंक शाखाओं के साथ बस्तर में आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

रायपुर- एक समय नक्सल हिंसा और विकास की चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर अब बदल चुका है। आज बस्तर शांति, विश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान बन रहा है। नक्सलमुक्त होते बस्तर में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। कभी बैंकिंग सुविधाओं के अभाव, नकदी आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित वित्तीय पहुंच के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में अब परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। इसी परिवर्तन का सबसे मजबूत उदाहरण है पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना। विष्णु देव साय की सरकार के गठन के बाद बस्तर में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। दूरस्थ और पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच ने यह साबित किया है कि अब बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया बस्तर है, जहां बंदूक की आवाज नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और समृद्धि की नई गूंज सुनाई दे रही है।

बैंक शाखाएं नहीं, विकास के नए द्वार

दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की स्थापना ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव लेकर आ रही है। पहले लोगों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या अन्य कस्बों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई गांवों के लोगों को पूरा दिन खर्च कर बैंक पहुंचना पड़ता था। अब गांवों और ब्लॉक स्तर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचने से न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव भी बढ़ रहा है, इससे शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रहा है और पारदर्शिता मजबूत हुई है।

बैंकिंग नेटवर्क बना नए बस्तर की पहचान

बस्तर संभाग के गांवों और कस्बों में बैंक शाखाओं का खुलना केवल वित्तीय संस्थाओं का विस्तार नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश का प्रतीक है। जिन क्षेत्रों में कभी मूलभूत सेवाएं पहुंचाना चुनौती माना जाता था, वहां आज आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाएं शुरू हुई हैं, इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है। तर्रेम, जगरगुंडा, चिंतलनार, किस्टाराम, पामेड़, समलवार और कोहकामेटा जैसे क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का खुलना विकास और विश्वास दोनों का प्रतीक बन गया है।

नक्सलमुक्त बस्तर में बढ़ा विश्वास

बस्तर में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने के साथ अब विकास कार्यों को नई गति मिली है। बैंक शाखाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि अब शासन और जनता के बीच विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है। जहां कभी लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब गांवों और ब्लॉक स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे आम नागरिकों का जीवन आसान हुआ है और वे औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से तेजी से जुड़ रहे हैं। आज बस्तर के ग्रामीण बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, किसान कृषि ऋण, बीमा, पेंशन और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ आसानी से ले पा रहे हैं, इससे आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ी हैं।

आदिवासी अंचलों को मिला आर्थिक संबल

 बस्तर संभाग की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय की है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार से आदिवासी परिवारों को अब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे योजनाओं को लाभ सीधे हितग्राहियों के खाते में (डी बीटी के माध्यम) मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, तेंदूपत्ता बोनस, वन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत हुई है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी बैंकिंग सुविधाओं से बड़ी लाभ मिली है। समूहों को ऋण सुविधा मिलने से आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों को नई गति मिली है।स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत

31 नई बैंक शाखाओं के खुलने से बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया आधार मिला है। अब छोटे व्यापारियों, किसानों और युवाओं को वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी आधारित व्यवस्था की जगह डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, माइक्रो एटीएम और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंच चुकी हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक संगठित और पारदर्शी बन रही है। बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार से बाजार गतिविधियां बढ़ी हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

युवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा

बस्तर में बैंकिंग नेटवर्क मजबूत होने से युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़े हैं। बैंक ऋण और वित्तीय सहायता मिलने से युवा अब कृषि आधारित उद्योग, लघु व्यवसाय, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप गतिविधियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहक सेवा केंद्र, बैंक मित्र और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। इससे आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।

विकास और सुशासन का नया मॉडल बनता बस्तर

बस्तर में बैंकिंग विस्तार यह दर्शाता है कि अब यह क्षेत्र केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार यह साबित कर रहा है कि नक्सलमुक्त बस्तर अब आत्मनिर्भरता और समग्र विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की नई तस्वीर है- जहां विश्वास है, अवसर हैं और विकास की नई संभावनाएं हैं।

नया बस्तर- विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर

आज बस्तर बदल रहा है। गांवों तक पहुंचती बैंकिंग सेवाएं यह संदेश दे रही हैं कि अब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। नक्सलमुक्त बस्तर में मजबूत होता बैंकिंग नेटवर्क आने वाले समय में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

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9 करोड़ 45 लाख की लागत से बनेगा श्री नदी पर  उच्च स्तरीय पुल  

  झारखंड और ओडिशा राज्य को जोड़ने वाले मार्ग पर आवागमन होगा आसान  

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी-तपकरा-लवाकेरा मार्ग पर श्री नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि श्री नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

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जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

भारत में स्वदेशी टाइप-IV CNG कंपोजिट सिलेंडर निर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु TDB और NTF Energy Solutions के बीच समझौता

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भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा गतिशीलता को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी विनिर्माण को सशक्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने दिल्ली स्थित M/s NTF Energy Solutions Private Limited के साथ “टाइप-IV CNG सिलेंडर के व्यावसायीकरण हेतु विनिर्माण सुविधा की स्थापना” नामक परियोजना के लिए एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है, जिसके माध्यम से अत्याधुनिक फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च-दबाव परीक्षण तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट CNG सिलेंडरों का उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ परिवहन और उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक इस्पात सिलेंडरों का अगली पीढ़ी का विकल्प हैं, जो लगभग 75% तक वजन में कमी प्रदान करते हैं, जिससे वाहन की दक्षता बढ़ती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलिमर लाइनर, अनुकूलित CFRP ले-अप और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा, टिकाऊपन तथा रिसाव, कंपन और दबाव चक्रों के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इनका डिज़ाइन 600 बार से अधिक बर्स्ट प्रेशर प्राप्त करता है, जो नियामक मानकों से काफी अधिक है और संचालन सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

यह तकनीक NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और इसे भारत के तेजी से बढ़ते CNG मोबिलिटी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना सरकार के स्वच्छ परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रस्तावित सुविधा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग कर उच्च-दबाव कंपोजिट सिलेंडरों के लिए एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित करेगी। यह परियोजना आयात प्रतिस्थापन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में एक मजबूत स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडरों का विकास और व्यावसायीकरण भारत के स्वच्छ गतिशीलता ढांचे और स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NTF Energy Solutions को TDB का समर्थन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाली अगली पीढ़ी की तकनीकों को सक्षम बना रही है।”

NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. के प्रबंध निदेशक नवीन जैन और निदेशक नमन जैन ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता स्वदेशी हल्के कंपोजिट सिलेंडर तकनीकों के व्यावसायीकरण को तेज करेगी, जिससे कंपनी भारत के स्वच्छ और अधिक दक्ष गतिशीलता समाधान की दिशा में संक्रमण में योगदान दे सकेगी।

भारत-वियतनाम ने विज्ञान और तकनीक सहयोग को दी नई गति, जितेंद्र सिंह और वियतनाम मंत्री के बीच अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वु हाई क्वान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लगभग दो हजार वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की वर्ष 2024 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।

बैठक में स्टार्टअप सहयोग, रिसर्च पार्टनरशिप, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नियमित सहयोग जारी रखने और साझा विकास के लिए ठोस पहल करने पर सहमति व्यक्त की।


40 साल से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए देशभर में मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने दिल्ली स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए देशव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य देशभर के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार “श्रम शक्ति” और “युवा शक्ति” को सशक्त बनाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने रोजगार सृजन, श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया अब 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों की हर वर्ष मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस स्वास्थ्य परीक्षण के जरिए गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर ESIC अस्पतालों में उपचार और दवाइयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्री ने कहा कि नए श्रम संहिताओं के तहत पुरुष और महिला श्रमिकों को समान वेतन, महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना और वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि पहले श्रमिकों की समस्याओं को अनदेखा किया जाता था, लेकिन वर्तमान सरकार श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

जनगणना 2027: दिल्ली में जागरूकता वैन रवाना, लोगों से सेल्फ-एन्यूमरेशन में भाग लेने की अपील

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भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ के तहत नई दिल्ली स्थित जनगणना भवन से जागरूकता वैन को रवाना किया गया। इन वैन के जरिए लोगों को जनगणना में भागीदारी, सेल्फ-एन्यूमरेशन सुविधा और जनगणना 2027 की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।

दिल्ली एनसीटी में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का कार्य जारी है। एमसीडी क्षेत्रों में निवासी 15 मई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकते हैं। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक गणनाकर्ता घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।

सरकार के अनुसार अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 92 लाख परिवार सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। जनगणना से जुड़ा सारा डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय एवं विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा।


JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

भारत-फ्रांस के बीच विज्ञान और अंतरिक्ष सहयोग होगा मजबूत, जितेंद्र सिंह और फिलिप बैप्टिस्ट की अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में भारत-फ्रांस के बीच विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल साइंस और समुद्री अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 को ‘इंडो-फ्रेंच ईयर ऑफ इनोवेशन’ घोषित किया गया है, जो दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं का मार्ग खोलेगा।

उन्होंने ISRO और CNES के बीच लंबे समय से जारी सहयोग, मेघा-ट्रॉपिक्स, SARAL और TRISHNA जैसे संयुक्त मिशनों का भी उल्लेख किया। वहीं फ्रांस ने गगनयान मिशन में भारत को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Kharod News : वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में खरौद में तीसरे वर्ष हुआ ‘छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन’, कवियों ने बांधा समां

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खरौद- धार्मिक नगरी, छग की काशी के नाम से विख्यात खरौद में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में लक्ष्मणेश्वर मंदिर के सामने 'छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन' का आयोजन किया गया. आयोजन का यह तीसरा वर्ष रहा और काव्य रसिकों, नगरवासियों, क्षेत्रवासियों में काफी उत्साह दिखा. इस 'छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन' में राजनांदगांव के हास्य कवि पद्मलोचन शर्मा 'मुंहफट', बेमेतरा के हास्य कवि रामानंद त्रिपाठी, कोरबा की श्रृंगार कवियित्री संतोषी 'श्रद्धा', साजा के ओज कवि ईश्वर साहू 'आरुग', बालोद के हास्य कवि कैलाश कुंवारा शामिल हुए,  वहीं छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन का संचालन बिलाईगढ़ के कवि ( हास्य-व्यंग्य-गीत ) शशिभूषण सनेही ने किया. यहां सभी कवियों ने गीत, हास्य और ओज के स्वर में 3 घण्टे तक समां बांधे रखा. 

आपको बता दें, छग में खरौद पहली जगह है, जहां 'छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन' का आयोजन होते आ रहा है. यहां छतीसगढ़ी में सभी कवियों ने शानदार प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित काव्य रसिकों ने खूब सराहा और उनमें खासा उत्साह दिखा. 

'छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन' की शुरुआत मां सरस्वती, भगवान लक्ष्मणेश्वर और वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू के तैलचित्र के समक्ष पूजा-अर्चना से हुई, फिर सुमधुर स्वर की स्वामिनी कोरबा की कवियत्री संतोषी 'श्रद्धा' ने वंदना प्रस्तुत किया. यहां बालोद से आए हास्य व्यंग्य के कवि कैलाश कुंवारा ने खूब ठहाके लगवाए. साथ ही, सामाजिक कुरीतियों पर तंज कसे, वहीं साजा से आए ओज कवि ईश्वर साहू 'आरुग' ने राष्ट्रवादी कविताओं के साथ छत्तीसगढ़ी माटी, महतारी के सम्मान में ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में काव्यपाठ कर मंच को ऊंचाई दी. इसके पुनः संतोषी 'श्रध्दा' के द्वारा काव्यपाठ किया गया, जिसमें उन्होंने विशुद्ध प्रेम श्रृंगार की पंक्तियों से समां बांधते हुए काव्यांजलि दी. राजनांदगांव से पधारे वरिष्ठ कवि पद्मलोचन शर्मा 'मुंहफट' ने हास्य पैरोडी से जबरदस्त माहौल बनाया. साथ ही वरिष्ठ पत्रकार स्व. कुंजबिहारी साहू के प्रति अपनी श्रध्दा प्रकट करते हुए बातें रखी. फिर बेमेतरा से आए हास्य कवि रामानंद त्रिपाठी ने भी शानदार प्रस्तुति दी और अपने हास्य अंदाज से सबको खूब गुदगुदाया. अंत में, संचालन कर रहे बिलाईगढ़ से पहुंचे कवि शशिभूषण सनेही ने भाई, मां, परिवार पर संदेशपरक एवं मार्मिक मानवीय संवेदनाओं की कविताओं से सबको भाव-विभोर करते हुए प्रस्तुति दी. 'छत्तीसगढ़ी कबि सम्मेलन' में बौद्धिक जनमानस ने रात्रि 2:30 तक रचनाओं का रसपान करते हुए पूरी तन्मयता से खूब आनंद लिया. कार्यक्रम का समापन, कवियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया. 

कार्यक्रम का संचालन कोमल साहू और आभार प्रदर्शन आयोजन समिति के संयोजक राजकुमार साहू ने किया. इस मौके पर बिलासपुर से पहुंचे मोनू कश्यप, वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव, नपं खरौद के उपाध्यक्ष महेश्वर यादव, पार्षद डॉ. हरेकृष्ण साहू, नीलम यादव, हुलाश साहू, नागरिकगण सुबोध शुक्ला, पुष्कर साहू, टालूराम साहू, ओमप्रकाश शर्मा, रवि यादव, इंदलदेव सेवा समिति के कृष्णकुमार आदित्य, फिरत आदित्य, हेमंत साहू, लव सोनी, श्रवण आदित्य, कैलाश थवाईत, दिनेश यादव, जांजगीर के शम्भू सिंह, मोरिनबाई साहू, गीता देवी साहू, हिमांशु साहू, कविता साहू, उषाकिरण साहू, चाम्पा के अजय अग्रवाल, सिवनी ( चाम्पा ) के रामाधार देवांगन, बहेराडीह के बाबूलाल यादव, रामायण सिंह कंवर, उर्मिला यादव, पुष्पा यादव, साधना यादव, कोसमन्दा के विकास साहू समेत अन्य काव्य प्रेमी मौजूद थे.

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव का हुआ सम्मान 

बहेराडीह गांव में देश का पहला किसान स्कूल संचालित है, जिसके संचालक दीनदयाल यादव हैं. इन्होंने खरौद निवासी वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू के नाम में किसान स्कूल का 'नामकरण' किया है, इसलिए जनप्रतिनिधियों के साथ नगरवासियों ने दीनदयाल यादव का सम्मान किया. यहां जनप्रतिधियों और नगरवासियों ने दीनदयाल यादव की पहल और प्रयास की सराहना की.


आम की छांव में बदले सपनों के मायने: मुख्यमंत्री ने कहा—“अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए”

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सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर- कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे।

गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।

जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा - 

“आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।

कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।

सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।

कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत जिले के सुदूर व पहाड़ी कोरवा बसाहटों में 113 हैंडपंप व बोरवेल की होगी खुदाई

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कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य,   ग्रामीणों को  पेयजल से मिलेगी राहत

जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम

अम्बिकापुर- जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे  पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों  में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल,  लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।

कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि  हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर  दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित  करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना के शौर्य को किया सलाम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीकता और संकल्प को नमन किया। उन्होंने कहा कि सेना ने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता, तैयारी और आपसी समन्वय को प्रदर्शित किया। साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बढ़ती ताकत भी सामने आई।

मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे सशस्त्र बलों के सम्मान में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की डीपी बदलकर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीर लगाएं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को अपनी सेना पर गर्व है।

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