Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

एआई तकनीक से हाथी-मानव संघर्ष पर लगी लगाम, सुरक्षित हुए गांव और वन्यजीव

No comments Document Thumbnail

वन विभाग की अभिनव पहल बनी लोगों के लिए सुरक्षा कवच

रायपुर- छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित 'एलीफेंट अलर्ट सिस्टम' हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।


समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।

पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं

इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।

तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल

वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।

दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

'चिरायु' दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से 15 वर्षीय माड़कम हुंगा का हुआ निःशुल्क उपचार, परिवार को मिली बड़ी राहत

रायपुर- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित 'चिरायु' दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

जन्म से थी गंभीर समस्या

माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।

स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान

आरबीएसके के 'चिरायु' दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।

निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी

25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास

आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का 'चिरायु' दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

इलाज के साथ आत्मनिर्भरता का मॉडल, सोठी आश्रम के काम से प्रभावित हुए CM साय

No comments Document Thumbnail

रायपुर/जांजगीर-चांपा- भारत में कुष्ठ रोग के मामलों में कमी आई है, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इलाज के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें बीमारी से ज्यादा समाज की दूरी, उपेक्षा और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम एक ऐसे मॉडल के रूप में सामने आता है, जहाँ कुष्ठ रोगियों को केवल उपचार नहीं, बल्कि आश्रय, पुनर्वास, कौशल और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर दिया जा रहा है।

करीब छह दशक पुराना यह संस्थान अब केवल कुष्ठ रोग उपचार केंद्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग का केंद्र बन चुका है। 5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी और स्वयं कुष्ठ रोग से प्रभावित रहे स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे द्वारा स्थापित इस आश्रम का उद्देश्य शुरुआत से ही रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना रहा है। यही कारण है कि सोठी का यह आश्रम दान या सहानुभूति से आगे बढ़कर गरिमा-आधारित पुनर्वास के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

आश्रम में 20 बिस्तरों का अस्पताल है, जहाँ कुष्ठ रोगियों और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज, दवा, पट्टी, खाना, कपड़े और रहने की सुविधा दी जाती है। यहाँ जाँच के लिए लैब और एक्स-रे जैसी सुविधाएँ भी हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े अस्पताल भेजा जाता है। अभी यहाँ 75 मरीज रह रहे हैं और करीब 120 लोग उनकी सेवा में लगे हैं।

यह आश्रम सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होना भी सिखाता है। यहाँ खेती, बागवानी, चॉक, कालीन, रस्सी बनाना, सिलाई, कम्प्यूटर, वेल्डिंग और गाड़ी चलाने जैसे काम सिखाए जाते हैं, ताकि मरीज आत्मनिर्भर बन सकें। उनके बच्चों की पढ़ाई का भी ध्यान रखा जाता है।

आश्रम समय-समय पर मुफ्त स्वास्थ्य और आँखों की जांच शिविर भी लगाता है। अब तक 10 हजार से ज्यादा मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए जा चुके हैं। बुधवार को लगे स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की जांच हुई और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बारे में जागरूकता भी दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को आश्रम का दौरा कर संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं और पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने आश्रम को “मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ” बताते हुए कहा कि कुष्ठ रोग केवल शारीरिक पीड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का भी कारण रहा है। ऐसे लोगों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर देना समाज की बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया और कहा कि किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना समाज की सबसे बड़ी सेवा है।

सोठी आश्रम केवल छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय संस्था नहीं, बल्कि यह उस मानवीय विकास मॉडल का सशक्त उदाहरण है, जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और गरिमा-आधारित पुनर्वास साथ-साथ चलते हैं। ऐसे दौर में, जब विकास की चर्चा अक्सर सड़कों, इमारतों और निवेश तक सीमित रह जाती है, सोठी आश्रम यह बताता है कि किसी समाज की असली प्रगति इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे उपेक्षित और वंचित लोगों को कितना सम्मान, सहारा और आत्मनिर्भरता दे पाता है।

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।


खण्ड एवम अल्प वर्षा की संभावनाओं के बीच किसानों से सरकार का अपील

No comments Document Thumbnail

धान की खेती रोपा पद्धति के बजाय सीधी बुवाई पर दे विशेष जोर

डीएसआर तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की होती है बचत, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले हो जाती है तैयार

उच्चहन भूमि में दलहनी-तिलहनी अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन जैसी फसलों की खेती अपनाने की सलाह

रायपुर- खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे अंतराल तक वर्षा नहीं होने (खण्ड वर्षा) एवम् अल्प की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

राज्य सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों एवं मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा खेतों में मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी तथा मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है। फसलों की कतार पद्धति से बुवाई पर भी बल दिया गया है। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। इसके तहत कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा धान के लिए एजोस्थिरिलम, अन्य फसलों के लिए एजोटोबेक्टर और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम (10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव करने को कहा गया है।

सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों एवं कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर इस संचित जल का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती के जोखिम को कम करने की अपील की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो किसानों के लिए कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं। राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है।

सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित

162 करोड़ से अधिक की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ, 1352 नई सहकारी समितियों के गठन से गांवों तक पहुंचा सहकार का विस्तार

पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मिल रहा है बढ़ावा

किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है सहकारिता

उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से किया गया सम्मानित, महिला स्व सहायता समूह को वितरित किया गया लाभांश

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

बिहार के मुंगेर का लगभग 700 वर्ष पुराना बरगद वैज्ञानिक रूप से दिनांकित सबसे प्राचीन बरगद घोषित

No comments Document Thumbnail

बिहार के मुंगेर स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने बरगद (Ficus benghalensis) को रेडियोकार्बन डेटिंग के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से दिनांकित दुनिया का सबसे प्राचीन बरगद (Oldest Accurately Dated Banyan Tree) माना गया है। यह पहली बार है जब किसी बरगद के वृक्ष की आयु का निर्धारण लोककथाओं या ऐतिहासिक अभिलेखों के बजाय पूर्णतः वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर किया गया है।

बरगद के वृक्ष अपनी विशाल जड़ों और शाखाओं के जटिल तंत्र के कारण पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। अब तक ऐसे प्राचीन वृक्षों की आयु का अनुमान लोककथाओं, स्थानीय मान्यताओं या ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर लगाया जाता था, जो अक्सर सटीक नहीं होता था। उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले अधिकांश वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वृक्ष-वृत्त (Growth Rings) नहीं होने के कारण पारंपरिक डेंड्रोक्रोनोलॉजी (वृक्ष-वर्ष निर्धारण) तकनीकें प्रभावी नहीं थीं। इसलिए उच्च सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग जैसी वैकल्पिक वैज्ञानिक पद्धति की आवश्यकता महसूस की गई।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences), लखनऊ की वैज्ञानिक डॉ. त्रिणा बोस को बिहार वन विभाग ने मुंगेर के इस ऐतिहासिक बरगद की आयु निर्धारित करने का दायित्व सौंपा। उन्होंने उष्णकटिबंधीय वृक्षों के लिए पारंपरिक विधियों की सीमाओं को देखते हुए एक नई वैज्ञानिक पद्धति विकसित करने की पहल की।

डॉ. त्रिणा बोस के नेतृत्व में डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव की शोध टीम ने वृक्ष के द्वितीयक तने तथा प्राचीन प्राथमिक शाखा के केंद्र (Pith) के निकट से लकड़ी के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों से पौधों की कोशिका भित्ति के सबसे स्थिर घटक अल्फा-सेलुलोज़ (Alpha-Cellulose) को अलग किया गया।

इसके बाद इन नमूनों की एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (Accelerator Mass Spectrometry–AMS) आधारित उच्च-सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग की गई। प्राप्त परिणामों का नवीनतम IntCal20 कैलिब्रेशन कर्व तथा OxCal सॉफ्टवेयर की सहायता से विश्लेषण कर वृक्ष की आयु लगभग 700 वर्ष निर्धारित की गई।

यह निष्कर्ष उस पूर्व धारणा को भी गलत सिद्ध करता है कि इस बरगद का रोपण ऐतिहासिक 'बड़ा बंगला (Burra Bunglow)' के निर्माण के समय किया गया था। वास्तुशिल्प के आधार पर यह भवन लगभग 300–350 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे शासकों एवं आम जनता के संवाद, ग्राम सभाओं तथा सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग किया जाता था।

नए वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि यह लगभग 700 वर्ष पुराना बरगद उस प्राकृतिक वन का अवशेष है, जो कभी इस क्षेत्र में विद्यमान था। अर्थात यह वृक्ष 'बड़ा बंगला' के निर्माण से भी पहले अस्तित्व में था और उसने उसके निर्माण का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया। इस प्रकार यह अध्ययन क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाक्रम की समयरेखा को नए सिरे से परिभाषित करता है।

यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Quaternary Research में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में विकसित वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से अब विरासत वृक्षों (Heritage Trees) की आयु का सटीक निर्धारण किया जा सकेगा। इससे सरकारों, वन विभागों और संरक्षण एजेंसियों को सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों की पहचान और संरक्षण में सहायता मिलेगी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के प्राचीन वृक्षों पर भी लागू की जा सकती है। इससे जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा अतीत की जलवायु एवं ऐतिहासिक परिदृश्यों के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी।

यह शोध उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के प्राचीन एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्षों के वैज्ञानिक आयु निर्धारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो दक्षिण एशिया सहित विश्वभर में प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को सशक्त आधार प्रदान करेगी।


'विकसित भारत 2047' के लिए क्षमता निर्माण के साथ संस्थागत समन्वय भी आवश्यक : डॉ. जितेंद्र सिंह

No comments Document Thumbnail

मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का "समग्र सरकार (Whole of Government)" दृष्टिकोण विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थानों की क्षमताओं के समन्वय पर आधारित है, जहाँ सभी संस्थान और पेशेवर अपनी-अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण (Capacity Building) अब केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि संस्थागत समन्वय (Institutional Synergy) को भी मजबूत करना होगा, ताकि 'विकसित भारत 2047' की आकांक्षाओं के अनुरूप शासन व्यवस्था तैयार की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission - CBC) तथा स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'दक्ष (DAKSH - Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony)' नेतृत्व विकास कार्यक्रम के तीसरे बैच का उद्घाटन कर रहे थे। यह एक वर्ष का नेतृत्व विकास कार्यक्रम है, जिसे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सहयोग से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के वरिष्ठ अधिकारियों को भविष्य में बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में लोक उद्यम विभाग के सचिव के. मोसेस चलाई, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल, स्कोप के अध्यक्ष एवं एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. पी. महादेवस्वामी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन मदन पिल्लुतला, स्कोप के महानिदेशक अतुल सोबती, उपाध्यक्ष एवं गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ब्रजेश कुमार उपाध्याय सहित अनेक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि तथा कार्यक्रम के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी इस कार्यक्रम की विश्वसनीयता और उपयोगिता को दर्शाती है। उन्होंने वर्तमान बैच में महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना करते हुए इसे भारत के बदलते नेतृत्व परिदृश्य का सकारात्मक संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के तहत लागू किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधारों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह एक नया संस्थागत प्रयोग था, लेकिन आज यह पूरे सरकारी तंत्र में क्षमता निर्माण का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।

मंत्री ने कहा कि सरकार की कार्यशैली अब 'Whole of Government' से आगे बढ़कर 'Whole of Government and Whole of Nation' की अवधारणा की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण तभी सार्थक होगा जब विभिन्न संस्थान अलग-अलग कार्य करने के बजाय अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का समन्वित उपयोग करें। इस दिशा में क्षमता निर्माण आयोग विभिन्न श्रेणियों के लोक सेवकों को साझा प्रशिक्षण मंच उपलब्ध कराकर व्यक्तिगत दक्षताओं के साथ-साथ संस्थागत समन्वय को भी सुदृढ़ कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्ष (DAKSH) कार्यक्रम को देश के विकसित होते क्षमता निर्माण तंत्र का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भविष्य के नेतृत्व का निर्माण कर रहा है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि पूर्व बैचों के कई प्रतिभागी अब बोर्ड स्तर के पदों पर पहुँच चुके हैं, जो कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच की पारंपरिक सीमाएँ धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इसलिए वरिष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों को निजी क्षेत्र, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और आधुनिक प्रबंधन मॉडल से भी परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि वे तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

प्रौद्योगिकी में तीव्र बदलाव का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज के दौर में नेतृत्व के लिए निरंतर सीखना (Continuous Learning) अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ज्ञान तेजी से बदल रहा है, इसलिए सफल नेतृत्व के लिए अनुकूलन क्षमता और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को वरिष्ठ अधिकारियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक अनुकूलित (Customized) बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए सुझाव दिया कि दक्ष जैसे कार्यक्रमों में संरचित एवं गोपनीय फीडबैक प्रणाली विकसित की जाए, जिससे कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण को एकतरफा व्याख्यानों के बजाय संवाद-आधारित बनाया जाए, ताकि प्रतिभागी अपने व्यावसायिक अनुभव भी साझा कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों तथा विषय-विशेष उत्कृष्टता केंद्रों के साथ अधिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नेतृत्व विकास कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्ष (DAKSH) जैसे कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भारत के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब क्षमता निर्माण आयोग और स्कोप जैसे संस्थान 'विकसित भारत' की यात्रा में अपने महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व कर सकेंगे।

इस अवसर पर क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि आज नेतृत्व विकास केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनों और संस्थानों को नई प्रौद्योगिकियों तथा बदलते प्रशासनिक मॉडल के अनुरूप सक्षम बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उभरती प्रौद्योगिकियों और संस्थागत अनुकूलन जैसे भविष्य उन्मुख विषयों को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल कर रहा है तथा प्रतिभागियों के फीडबैक के आधार पर कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा रहा है।

क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल ने कहा कि दक्ष (DAKSH) भारत के भावी नेतृत्व में एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश है। उन्होंने बताया कि यह एक वर्षीय कार्यक्रम व्यवहार विज्ञान, नेतृत्व अनुसंधान तथा रणनीतिक सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना तथा उन्हें नैतिक नेतृत्व, नवाचार, लचीलापन और राष्ट्रीय दृष्टि के साथ संस्थानों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाना है।

एआईआईएमएस ऋषिकेश के कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष शिविर का आयोजन

No comments Document Thumbnail

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के अधीन उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून के कार्यालय द्वारा भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) के प्रावधानों के तहत एक विशेष शिविर (कैंप सिटिंग) का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश के कर्मचारियों से संबंधित लंबे समय से लंबित ग्रेच्युटी मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण करना था।

इस विशेष शिविर की अध्यक्षता उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून ने अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority) के रूप में की। दिनभर चली सुनवाई के दौरान एआईआईएमएस ऋषिकेश से संबंधित लगभग नौ माह से लंबित 169 अपीलों पर सुनवाई की गई।

सुनवाई के उपरांत 46 अपीलों का कर्मचारियों के पक्ष में सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया, जिससे संबंधित कर्मचारियों को लगभग 40 लाख रुपये की वैधानिक ग्रेच्युटी राशि का तत्काल लाभ सुनिश्चित हुआ। यह विशेष अभियान मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन की उस सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिसके माध्यम से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके दावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यवाही के दौरान संबंधित ठेकेदार एवं उसके प्रतिनिधियों मैसर्स प्रिंसिपल सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसेज को भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनिवार्य अनुपालन के संबंध में सख्त निर्देश एवं जागरूकता प्रदान की गई। अपीलीय प्राधिकारी ने समय पर ग्रेच्युटी का भुगतान, वैधानिक अभिलेखों का समुचित संधारण तथा श्रमिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इस पर ठेकेदार ने प्राधिकरण को आश्वासन दिया कि अधिनियम के सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने तथा पात्र कर्मचारियों के सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण करने के लिए तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।


वायु सेना मार्शल अर्जन सिंह स्मृति हॉकी टूर्नामेंट के 7वें संस्करण का सफल आयोजन

No comments Document Thumbnail

 मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह स्मृति हॉकी टूर्नामेंट के 7वें संस्करण का आयोजन 23 जून से 3 जुलाई 2026 तक एयर फोर्स स्टेशन, जलहल्ली स्थित अमित सिंह बख्शी हॉकी स्टेडियम में सफलतापूर्वक किया गया। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कुल 16 टीमों ने भाग लिया।

टूर्नामेंट का समापन समारोह 3 जुलाई 2026 को प्रातः 7:30 बजे आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, प्रशिक्षण कमान (Training Command) रहे।

समापन समारोह में भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बलजीत कौर तथा ओलंपियन एवं भारतीय पुरुष हॉकी खिलाड़ी पी.आर. श्रीजेश विशिष्ट अतिथि (Guest of Honour) के रूप में उपस्थित रहे।

टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना की टीमों के बीच खेला गया। रोमांचक मुकाबले में भारतीय वायु सेना ने 2-1 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।

भारतीय वायु सेना के सार्जेंट आनंद लकड़ा को 'मैन ऑफ द मैच' तथा एजीवी (एस) अग्यापाल को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' घोषित किया गया।

कोरबा को मिली 37.28 करोड़ रूपए की ऐतिहासिक सौगात, 15वें वित्त आयोग अंतर्गत 116 विकास कार्यों को स्वीकृति

No comments Document Thumbnail

रायपुर- हर गली पक्की बने, कहीं जलभराव न हो और कोरबा एक सुव्यवस्थित एवं विकसित शहर बनेकृ इसी संकल्प को साकार करते हुए नगर विधायक एवं प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, वाणिज्यिक कर (आबकारी) एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के सतत प्रयासों से नगर पालिक निगम कोरबा को 15वें वित्त आयोग अंतर्गत 37 करोड़ 28 लाख रूपए से अधिक राशि के 116 विकास कार्यों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अप्रैल 2026 में विभिन्न निर्माण कार्यों की स्वीकृति हेतु राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इन प्रस्तावों की शीघ्र स्वीकृति के लिए मंत्री लखन लाल देवांगन ने गुरुवार को उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से भेंट कर तत्काल स्वीकृति का आग्रह किया। उनके विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप सभी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्री देवांगन के नेतृत्व में कोरबा नगर के विकास के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं एवं मदों से राशि स्वीकृत हो रही है। अब तक कोरबा शहर के लिए लगभग 1000 करोड़ रूपए के विकास कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, जिनका लाभ अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

इस स्वीकृति के अंतर्गत शहर के सभी वार्डों में सीसी सड़क, आरसीसी नाली, जल निकासी, पेयजल प्रबंधन, सड़क निर्माण तथा अन्य मूलभूत अधोसंरचना से जुड़े 116 विकास कार्यों को स्वीकृति मिली है। इनमें वार्डवार गली-गली तक सड़क एवं नाली निर्माण के कार्य शामिल हैं, जिससे वर्षों से चली आ रही जलभराव एवं आवागमन की समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।

स्वीकृत सूची में वार्ड क्रमांक 1 से लेकर सभी वार्डों तक सड़क एवं नाली निर्माण, तालाबों के आसपास जल निकासी व्यवस्था, प्रमुख मार्गों का उन्नयन तथा मोहल्लों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। यह स्वीकृति कोरबा नगर के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि डबल इंजन नहीं, अब ट्रिपल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों के साथ-साथ गली-मोहल्लों की छोटी-छोटी समस्याओं का भी तेजी से समाधान किया जा रहा है। उनका लक्ष्य है कि कोरबा का कोई भी वार्ड विकास से अछूता न रहे और प्रत्येक नागरिक को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

उन्होंने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से कोरबा तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। आने वाले समय में भी शहर के सर्वांगीण विकास के लिए इसी प्रकार निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।   

   15वें वित्त आयोग अंतर्गत नगर पालिक निगम कोरबा में स्वीकृत विकास कार्य

वार्ड क्र. 01 रामसागर में तुलसी घर के आगे सड़क निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 01 अंतर्गत गीता ज्वेलर्स से स्वर्ण भूमि तक आर.सी.सी. नाली का निर्माण कार्य -  38.13 लाख रूपए, वार्ड क्र. 01 अंतर्गत रामसागर तालाब बस्ती साइड में आर.सी.सी. नाला निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 03 प्राथमिक स्कूल के पीछे तुलसी नगर में आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  15.80 लाख रूपए, वार्ड क्र. 04 गृहणी अनाज से पोषण किराना दुकान तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  40.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 05 देवांगन पारा अंतर्गत कोरबा फाटक से गणेश स्टोर गोकुल चंद लालूमल की दुकान के सामने से होते हुए गांधी चौक तक नाली निर्माण कार्य -  10.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 05 देवांगन पारा अंतर्गत लवली केयर स्कूल से कदम पेड़ नाला तक नाला निर्माण कार्य - 10.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 06 अंतर्गत गुरुघासी से लेकर कृपाल सिंह के घर तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 07 धनुहार मोहल्ला में जवरीहिन सनवाल के घर से लेकर तारा चंद्र श्रीवास के घर तक रोड निर्माण -  7.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 08 अंतर्गत मोतीसागर पारा पूर्व पार्षद बेरी महिलाओं के घर के आगे वाली गली, वृद्ध आश्रम एवं प्राथमिक शाला जाने के मुख्य मार्ग/गली निर्माण कार्य -  8.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 09 इमलीडुग्गू अंतर्गत पोखरी पारा स्थित तालाब के चारों ओर नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 10 मिलाई खुर्द अंतर्गत बरबसपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मंदिर के समीप सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 11 अंतर्गत मोनू सारथी के घर से राजकुमारी महंत एवं बबलू के घर से महेश दास के घर तक सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -   20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 12 बंटी स्टोर के सामने गुप्ता गली में रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  18.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 12 सिटी कोतवाली के सामने से अशोका भवन की ओर मनोकामना मंदिर तक जाने वाली रोड एवं नाली निर्माण कार्य - 15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 13 शारदा विहार अंतर्गत पानी टंकी मोहल्ले में नाला निर्माण कार्य -  20.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 14 अंतर्गत न्यू अमरैयापारा में खान घर से विनोद श्रीवास के घर तक सी.सी. रोड एवं आर.सी.सी. नाली निर्माण कार्य -  18.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 14 अंतर्गत शारदा विहार रेलवे फाटक से चिमनी भट्ठा तक सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  26.74 लाख रूपए, वार्ड क्र. 15 इंदिरा नगर स्कूल के पीछे इन्द्रापारा एवं 15 ब्लॉक में आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  19.63 लाख रूपए, वार्ड क्र. 16 पंप हाउस अंतर्गत आत्मानंद स्कूल के पीछे इमरी मोहल्ला में सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  17.68 लाख रूपए, वार्ड क्र. 17 घाटघोरा रोड से प्रेम खटाल तक सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  25.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 18 भवानी मंदिर के पास निर्मित पूर्वांचल शेड से भवन तक जाने हेतु रोड एवं नाली निर्माण कार्य -  26.30 लाख रूपए, वार्ड क्र. 19 अंतर्गत गिरिराजचंद्र घर के पास से रविशंकर दिवाकर घर तक, महंत घर से कॉलोनी तक, नीलगिरी बस्ती से श्रीवास्तव घर से दिलीप दिवान घर तक आर.सी.सी. नाली एवं सी.सी. रोड निर्माण कार्य -  10.41 लाख रूपए, वार्ड क्र. 20 नीलगिरी बस्ती में आंगनबाड़ी- 1 से आश्रम के पीछे तक नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए, वार्ड क्र. 20 सामुदायिक भवन के पीछे से आश्रम के पीछे तक नाली निर्माण कार्य -  15.00 लाख रूपए की स्वीकृति शामिल है।


बंदूक छोड़ी, सम्मान पाया : आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर- हिंसा की राह छोड़ जब कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो न सिर्फ एक जीवन सुधरता है बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा मिलती है। नारायणपुर जिला के ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी नक्सल संगठन की कड़ियों में उलझे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया। आज वे न केवल खुद एक सम्मानित जीवन जी रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

भटके हुओं को दिखाई राह, शासन ने दिया सहारा

आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को सर्वाेपरि माना। उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी सकारात्मक बदलाव और सामाजिक योगदान को देखते हुए राज्य शासन की पुनर्वास योजनाओं का सीधा लाभ उन तक पहुँचाया गया, जिससे उनके वर्षों पुराने पक्के घर का सपना साकार हो सका।

योजनाओं के समन्वय से तैयार हुआ सपनों का घर

कमलू राम को मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए गए। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत 'आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना' के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें 1.20 लाख रुपए की लागत से पक्का आवास प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से स्वीकृत हुआ।आवास निर्माण के दौरान ही उन्हें मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के माध्यम से 23 हज़ार 490 रुपए की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिसने निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल दिया। नए आशियाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है। 

मिला सम्मानजनक जीवन

कमलू राम नुरेटी ने कहा कि पहले मैं परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था, जहाँ हर दिन नई कठिनाइयाँ सामने आती थीं। आज अपना पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार बेहद खुश है। हमें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है।

पुनर्वास योजनाएं ला रही हैं क्षेत्र में बदलाव

जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर बेहद सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासन की नीतियां और समाज का सहयोग एक साथ मिले, तो किसी भी जीवन को संवारा जा सकता है। यह बदलाव बस्तर और आस-पास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और अटूट विश्वास को मजबूत कर रहा है।

मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन और चटिया मिल से संवरी लच्छंतीन बाई की जिंदगी

No comments Document Thumbnail

 बिहान से बनीं सफल महिला उद्यमी

उत्तर बस्तर कांकेर- बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जिले के स्व-सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं तथा उनके जीवन को नई दशा और दिशा दी है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कराठी निवासी लच्छंतीन बाई दरपट्टी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। वह तुलसी स्व सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं, जो महिला शक्ति संकुल संगठन कन्हारगांव से जुड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय से लगभग 08 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में ‘बिहान’ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है।

लच्छंतीन बाई ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में बहुत परेशानी होती थी तथा परिवार को कठिन समय में आर्थिक मदद नहीं मिल पाती थी। थोड़े से पैसे के लिए उन्हें अक्सर दूसरे लोगों से ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था। खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव था और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का सपना केवल सपना ही बनकर रह गया। इस दौरान उन्हें बिहान योजना के बारे में पता चला, वहां 10 दीदी मिलकर एक समूह गठन कर बचत करते हैं और जरूरत के समय वहीं से आसानी से ऋण भी मिल जाती है। गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद नियमित बैठक एवं बचत करना शुरू किया। अब जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से समूह के माध्यम से ऋण मिलने लगा, जिससे दूसरों पर निर्भरता समाप्त हो गई। उन्हें चक्रीय निधि एवं प्रोत्साहन राशि का लाभ मिला है। आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने के लिए बैंक से 01 लाख 20 हजार रुपये का ऋण भी प्राप्त हुआ। अब मैं बैंक से लेन-देन आसानी से कर रही हूॅ। इस दौरान बिहान के बीपीएम द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया गया। अधिकारियों के माध्यम से उन्हें मुद्रा ऋण की जानकारी मिली और बैंक से आवश्यक सहायता प्राप्त हुई। आज मैं चटिया मिल (लघु प्रसंस्करण इकाई), मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन, कृषि कार्य जैसे विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हूॅ। इन गतिविधियों से लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह तथा करीब 01 लाख 45 हजार रूपये वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बच्चों की शिक्षा बेहतर ढंग से हो रही है, इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। लच्छंतीन बाई आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की प्रेरणा स्रोत बन गई है।



सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे में अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR–NCL), पुणे ने अपने नवनिर्मित एवं अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र (Skill Development Center) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस आधुनिक सुविधा का उद्घाटन सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार, नोडल वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल (CSIR-Integrated Skill Initiative), सीएसआईआर-एचआरडीसी, गाज़ियाबाद, तथा एनवेलियर (Envalior) टीम के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। एनवेलियर ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत इस केंद्र के आधुनिकीकरण को प्रायोजित किया है। कार्यक्रम में डॉ. राजेश गोनाडे, एनसीएल स्किल नोडल अधिकारी, तथा कनिका गोयल, नियंत्रक प्रशासन (COA), सीएसआईआर-एनसीएल सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

सीएसआईआर की एकीकृत कौशल पहल (CSIR-ISI) के अंतर्गत संचालित सीएसआईआर-एनसीएल के कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Program–SDP) का उद्देश्य राष्ट्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वस्तरीय उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसका लक्ष्य प्रयोगशाला की विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कुशल मानव संसाधन का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम एनसीएल के अनुभवी वैज्ञानिकों तथा अत्याधुनिक अनुसंधान अवसंरचना के माध्यम से संचालित किया जाता है।

उन्नत कौशल विकास केंद्र को एक समर्पित एवं पूर्णतः एकीकृत सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ एनसीएल की सभी कौशल विकास एवं तकनीकी प्रशिक्षण गतिविधियों का संचालन एक ही परिसर में किया जाएगा। इस आधुनिक केंद्र में इंटरैक्टिव स्मार्ट डिस्प्ले और डिजिटल पोडियम से युक्त अत्याधुनिक कक्षाएँ, समर्पित कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष, उन्नत डिजिटल कॉन्फ्रेंस रूम, विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाएँ तथा कौशल विकास कार्यक्रम (SDP) के लिए केंद्रीकृत कार्यालय जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. आशीष लेले ने कहा कि नई सुविधाएँ प्रशिक्षुओं को अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी, उनकी औद्योगिक दक्षता को सुदृढ़ करेंगी तथा नवाचार को बढ़ावा देंगी।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार ने इस आधुनिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि यह सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल के उस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक कौशल को सशक्त बनाना तथा देश में टिकाऊ तकनीकी क्षमता का विकास करना है।



6 महीने बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा तमनार हिंसा का मास्टरमाइंड, पुलिस पर हमले और आगजनी का है मुख्य आरोपी

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : रायगढ़ जिले के तमनार में दिसंबर 2025 में हुई हिंसा, आगजनी और पुलिस पर हमले के बहुचर्चित मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। घटना के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी राजेश मरकाम (39) को पुलिस ने आखिरकार छह महीने बाद गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को गुरुवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।


पुलिस के मुताबिक, कसडोल निवासी राजेश मरकाम इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य साजिशकर्ता था। उस पर आंदोलनकारियों को भड़काकर पुलिस बल पर हमला करवाने, सरकारी संपत्ति में आगजनी कराने और हिंसा फैलाने का आरोप है। लंबे समय से फरार आरोपी की तलाश जारी थी। मुखबिर से सूचना मिलने पर तमनार और पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम ने ग्राम बरपाली में घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने हिंसक घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।

JPL की जनसुनवाई के विरोध से शुरू हुआ था विवाद

यह पूरा मामला Jindal Power Limited (JPL) की कोल ब्लॉक जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर 2025 से धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर की सुबह लिबरा चौक पर करीब 300 ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू किया। प्रशासन और पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें हटाया, लेकिन कुछ ही देर में भीड़ बढ़कर करीब एक हजार तक पहुंच गई।

दोपहर करीब ढाई बजे माहौल अचानक हिंसक हो गया। उग्र भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस जवानों पर पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में थाना प्रभारी कमला पुषाम समेत कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक घायल हुए। महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए।

सरकारी गाड़ियों को किया आग के हवाले, प्लांट में जमकर तोड़फोड़

हिंसक भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप, एम्बुलेंस समेत कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुस गए और वहां कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर सहित कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कार्यालय परिसर में भी जमकर तोड़फोड़ की गई।

घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग मामलों में कुल 16 एफआईआर दर्ज की थीं। अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच में राजेश मरकाम की भूमिका हिंसा भड़काने और भीड़ को उकसाने में सामने आने पर मामले में BNS की धारा 49 भी जोड़ी गई है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूरी हिंसा में अहम भूमिका निभाई थी।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.