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नाबालिग हत्याकांड: फरार आरोपी पर 10 हजार का इनाम, पुलिस ने जारी किए नंबर

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में फरार चल रहे आरोपी रविदास मानिकपुरी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने इनाम घोषित किया है। 22 वर्षीय आरोपी की तलाश में जुटी दुर्ग पुलिस ने उसके संबंध में विश्वसनीय जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुलिस ने आम नागरिकों से आरोपी की तलाश में सहयोग करने की अपील की है।


लुचकी तालाब इलाके के मकान में मिला था शव

मामला दुर्ग के कोतवाली थाना क्षेत्र के लुचकी तालाब इलाके का है। बीते 26 सितंबर को वार्ड नंबर 7 स्थित एक मकान में नाबालिग लड़की का शव बरामद हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। विशेषज्ञों ने मौके की जांच कर महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

मां ने आरोपी पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

मृतका की मां के अनुसार, उनकी बेटी पिछले करीब एक साल से आरोपी रविदास मानिकपुरी के साथ रह रही थी। मां ने आरोप लगाया कि आरोपी बेटी के साथ मारपीट करता था और उससे काम कराने के बाद पैसे भी नहीं देता था।

मां का कहना है कि घटना से दो दिन पहले उनकी बेटी आरोपी की कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उनके पास आई थी। आरोप है कि 26 सितंबर की शाम रविदास उसे जबरन अपने साथ ले गया था। इसके बाद नाबालिग का शव मिलने से मामला हत्या में बदल गया। मृतका की मां ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आरोपी की सूचना देने के लिए पुलिस ने जारी किए नंबर

दुर्ग पुलिस ने मामले में हत्या का अपराध दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश तेज कर दी है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि रविदास मानिकपुरी के बारे में कोई भी सटीक जानकारी मिलने पर तुरंत सूचना दें।

पुलिस से संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर:

  • पुलिस नियंत्रण कक्ष, दुर्ग: 94791-92099

  • थाना दुर्ग: 94791-92019

  • घोषित इनाम: 10,000 रुपये

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बारे में उपयोगी जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान गोपनीय रखी जाएगी। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।

छत्तीसगढ़ में दीपावली अवकाश अब 6 दिन का, स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया संशोधित आदेश

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षण सत्र 2026-27 के लिए पूर्व में घोषित दीपावली अवकाश में आंशिक संशोधन करते हुए अब कुल 6 दिनों का अवकाश घोषित किया है। संशोधित आदेश के अनुसार प्रदेश के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों तथा डी.एड., बी.एड., एम.एड. महाविद्यालयों में 6 नवंबर से 11 नवंबर 2026 तक दीपावली अवकाश रहेगा।


उप सचिव स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार पूर्व में 21 सितंबर 2026 को जारी शैक्षणिक कैलेंडर में दीपावली अवकाश 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक कुल 5 दिनों के लिए निर्धारित किया गया था।

राज्य शासन ने उक्त आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए दीपावली अवकाश की अवधि एक दिन बढ़ाकर 11 नवंबर 2026 तक कर दी है। इस निर्णय से प्रदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों को दीपावली पर्व के अवसर पर एक अतिरिक्त दिन का अवकाश मिलेगा।

महासमुंद में खैर लकड़ी तस्करी का खुलासा, 70 टन लकड़ी और 1.70 करोड़ रुपये जब्त

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अवैध तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश में दबिश देकर पुलिस ने तस्करी से अर्जित बताई जा रही 1 करोड़ 70 लाख रुपये की नकदी बरामद कर जब्त की है। पुलिस के अनुसार, यह रकम आरोपी मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े कथित तस्करी नेटवर्क से संबंधित है।


महासमुंद पुलिस अवैध वनोपज परिवहन और धोखाधड़ी के इस मामले में अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। इससे पहले पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार स्थित मकान पर कार्रवाई कर 81 लाख रुपये नकद जब्त किए थे।

हिमाचल प्रदेश में दबिश, 1.70 करोड़ रुपये जब्त

पुलिस के मुताबिक, खैर लकड़ी की कथित तस्करी के मामले की आगे जांच और आरोपियों की तलाश के दौरान महासमुंद पुलिस की विशेष टीम हिमाचल प्रदेश पहुंची। यहां उन ठिकानों पर दबिश दी गई, जहां कथित तौर पर मनीष अग्रवाल को अवैध खैर लकड़ी की खपत और बिक्री में मदद की जा रही थी।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े कथित नेटवर्क से संबंधित 1,70,00,000 रुपये नकद बरामद किए। पुलिस ने रकम को विधिवत जब्त कर लिया है। अब नकदी के स्रोत और तस्करी से उसके संबंध की जांच की जा रही है।

फर्जी एनओसी से खैर लकड़ी के परिवहन का मामला

यह मामला वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस (NTPS) एनओसी (NOC) में कूटरचना कर दस्तावेज का वास्तविक रूप में उपयोग किया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों में कूटरचना से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की।

विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित मकान पर दबिश देकर 81 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की गई।

अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी

महासमुंद पुलिस का कहना है कि अवैध खैर लकड़ी के परिवहन, कथित तस्करी से अर्जित रकम और इसमें सहयोग करने वाले लोगों की भूमिका की जांच जारी है। जब्त नकदी से संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

महिला से 7 साल तक प्रताड़ना का आरोप, पति के खिलाफ केस दर्ज

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 बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति और परिवार के चार अन्य सदस्यों पर लंबे समय तक शारीरिक शोषण, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि उसे कमरे में बंधक बनाकर भी रखा जाता था। परेशान होकर महिला ने हेल्पलाइन नंबर 181 पर संपर्क कर मदद मांगी, जिसके बाद प्रशासन की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। फिलहाल महिला का जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में इलाज चल रहा है।


7 साल से प्रताड़ना झेलने का आरोप

पीड़िता की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, उसे पिछले सात वर्षों से कथित तौर पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। महिला ने अपने पति, दो जेठ और दो देवरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय तक प्रताड़ना झेलने के बाद महिला ने हिम्मत जुटाई और महिला हेल्पलाइन 181 पर फोन कर सहायता मांगी।

सखी सेंटर की मदद से महिला को सुरक्षित निकाला

महिला हेल्पलाइन पर सूचना मिलने के बाद संबंधित प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। सखी सेंटर की सहायता से पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जानकारी के मुताबिक, रेस्क्यू के समय महिला की हालत गंभीर बताई गई, जिसके बाद उसे तत्काल जिला चिकित्सालय बलौदाबाजार में भर्ती कराया गया। वहां उसका उपचार जारी है।

पति के खिलाफ मामला दर्ज, अन्य आरोपों की जांच

मामले में पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए पति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। महिला द्वारा पति के अलावा दो जेठ और दो देवर पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज करने और मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के बाद अन्य आरोपियों की भूमिका के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना ने महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में समय पर सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को फिर रेखांकित किया है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

महासमुंद में झूले की रस्सी में फंसा चौथी के छात्र का गला, मौत

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक दर्दनाक हादसे में चौथी कक्षा के छात्र की जान चली गई। बसना विकासखंड के मुड़ीडीह शासकीय प्राथमिक स्कूल परिसर में पेड़ से बंधे रस्सी के झूले में गला फंसने से 10 वर्षीय छात्र तरुण चौहान की मौत हो गई। घटना शुक्रवार सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच की बताई जा रही है। हादसे के वक्त स्कूल परिसर में कोई शिक्षक या जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था। मामले में लापरवाही सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन ने प्रधानपाठक रघुनाथ चौधरी और सहायक शिक्षक (एलबी) गुणितराम चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


समय से पहले स्कूल पहुंचा था छात्र

जानकारी के अनुसार, तरुण चौहान शुक्रवार सुबह निर्धारित समय से पहले स्कूल पहुंच गया था। स्कूल परिसर में एक पेड़ से रस्सी बंधी हुई थी, जिसका इस्तेमाल बच्चे झूला झूलने और उल्टा लटककर खेलने के लिए करते थे। इसी दौरान खेलते समय तरुण का गला रस्सी में फंस गया। बताया जा रहा है कि उस समय परिसर में स्कूल का कोई शिक्षक मौजूद नहीं था।

कुछ महिलाएं जब स्कूल परिसर पहुंचीं, तो उन्होंने बच्चे को रस्सी से लटका देखा। उन्होंने तत्काल उसे नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलने के बाद भंवरपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा

पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बसना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

हादसे के बाद स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जांच में प्रधानपाठक रघुनाथ चौधरी और सहायक शिक्षक (एलबी) गुणितराम चौधरी की लापरवाही सामने आई है। इसके बाद दोनों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई।

भंवरपुर चौकी प्रभारी अनंजना चंद्रा ने बताया कि घटना सुबह की है। छात्र खेल रहा था, तभी रस्सी उसके गले में फंस गई। उस समय स्कूल परिसर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे यह दुखद हादसा हो गया। पुलिस मामले की आवश्यक कार्रवाई कर रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू का छत्तीसगढ़ दौरा तय, 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में होंगी शामिल

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 रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। अपने प्रवास के दौरान वह 23 अक्टूबर को बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव के तहत आयोजित मुरिया दरबार में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें बस्तर दशहरा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।


राष्ट्रपति के दौरे को लेकर बस्तर में तैयारियां तेज होने की संभावना है। उनका मुरिया दरबार में शामिल होना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मान्यताओं के लिए देशभर में जाना जाता है।

 बस्तर दशहरा की परंपराओं से रूबरू होंगी राष्ट्रपति

बस्तर का दशहरा देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव से अलग है। यह पर्व लंबे समय तक चलने वाली विशिष्ट परंपराओं और स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना से जुड़ा है। मुरिया दरबार इस उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां बस्तर की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था की झलक देखने को मिलती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। यह दौरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के दौरे की जानकारी के साथ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक, महिला टी-20 क्रिकेट मुकाबले, विधानसभा की कार्यवाही और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) जैसे विषयों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

Navratri 7th Day: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गुड़ का भोग, जानें पूजा विधि

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 Navratri 7th Day 2026 : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि मां कालरात्रि को समर्पित होती है। देवी का स्वरूप भले ही अत्यंत रौद्र माना जाता है, लेकिन वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली हैं। इसी कारण मां कालरात्रि को ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों को भय और बाधाओं से मुक्ति, साहस और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवी से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

नवरात्रि का सातवां दिन कब है?

पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को बताई गई है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। हालांकि, पूजा का सटीक समय निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग में सप्तमी तिथि और मुहूर्त का मिलान करना जरूरी है।

मां कालरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

उपलब्ध विवरण के अनुसार, 17 अक्टूबर को पूजा के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 बजे से 5:47 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
  • अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक

नोट: इन समयों की स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें। पूजा के लिए सप्तमी तिथि की उपलब्धता भी देखना आवश्यक है।

मां कालरात्रि का स्वरूप और धार्मिक महत्व

मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप माना जाता है। उनका वर्ण गहरे काले रंग का है और उनके बाल खुले हुए हैं। गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित रहती है। देवी की चार भुजाएं हैं और उनका वाहन गधा है।

मां के दाहिने हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में रहते हैं, जबकि बाईं ओर के हाथों में खड्ग और लोहे का कांटा बताया गया है। उनका स्वरूप बुराई के विनाश और भक्तों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से करने की परंपरा है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।
  3. चौकी पर मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  4. देवी के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं।
  5. मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
  6. श्रद्धानुसार गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
  7. मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  8. अंत में मां की आरती उतारकर सुख-शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

मां कालरात्रि के प्रिय मंत्र

मां कालरात्रि की पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

1. सामान्य मंत्र

ॐ कालरात्र्यै नमः॥

2. बीज मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः॥

3. देवी मंत्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

4. स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और प्रिय फूल

नवरात्रि की सप्तमी पर नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग के फूल, गुड़हल या सुगंधित पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। रात में खिलने वाली चमेली भी पूजा में चढ़ाई जाती है।

पूजा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता को माना जाता है।

मां कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाएं?

मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है। भक्त देवी को गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ अर्पित कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में मां की आराधना को भय और संकटों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। हालांकि, किसी विशेष भोग से राहु दोष शांत होने या अकाल मृत्यु का भय निश्चित रूप से दूर होने जैसे दावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए।

मां कालरात्रि की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों ने देवताओं और तीनों लोकों में आतंक फैलाया, तब देवताओं ने देवी से रक्षा की प्रार्थना की।

रक्तबीज को विशेष वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरते ही उसके समान एक और असुर उत्पन्न हो जाता था। इस कारण उसका वध करना कठिन हो गया। कथा के अनुसार, तब देवी ने उग्र रूप धारण कर रक्तबीज का सामना किया और उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोकते हुए उसका संहार किया।

मां कालरात्रि का यह स्वरूप बुराई पर शक्ति की विजय और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस कथा के माध्यम से साहस, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं।

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली।

काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतारा॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खड्ग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवे।

महाकाली मां जिसे बचावे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥

मां कालरात्रि की पूजा का क्या है महत्व?

नवरात्रि की सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा शक्ति, साहस और नकारात्मकता से रक्षा की कामना के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। इस दिन मां से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है।

आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही सीएम हेल्पलाइन 1076 : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर :  आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, संवेदनशील और प्रभावी समाधान सुशासन की पहली कसौटी है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 कम समय में ही प्रदेशवासियों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। राशन, पेंशन, बिजली, आवास, पेयजल और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। नागरिक घर बैठे 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।


मुख्यमंत्री साय ने आज नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 के कार्यालय पहुंचकर इसके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात कही। 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों, उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से लिए जा रहे फीडबैक तथा विभागवार और जिलेवार प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों से  जिलों में शिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जिलों के शिकायतकर्ताओं से स्वयं बातचीत कर जाना कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं। नागरिकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद में अपने अनुभव साझा किए और शिकायतों के निराकरण पर संतुष्टि व्यक्त की।

2.31 लाख शिकायतें दर्ज, 88.85 प्रतिशत का हो चुका निराकरण

समीक्षा बैठक में बताया गया कि 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सीएम हेल्पलाइन 1076 पर कुल 2 लाख 31 हजार 850 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 2 लाख 5 हजार 996 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 25 हजार 854 शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार अब तक प्राप्त कुल शिकायतों में से 88.85 प्रतिशत का निराकरण किया जा चुका है। हेल्पलाइन पर प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने हेल्पलाइन के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का निराकरण अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पिछली समीक्षा में दिए गए निर्देशों पर भी अच्छा कार्य हुआ है। इस व्यवस्था को निरंतर बेहतर बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतों का निराकरण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिक को वास्तविक रूप से राहत मिले और वह समाधान से संतुष्ट हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण सबसे महत्वपूर्ण है। शिकायत बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक की समस्या वास्तव में दूर हुई है। नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक ही इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता का आधार होना चाहिए।

एक शिकायत से 80 से अधिक परिवारों को मिली राहत, बदला गया खराब ट्रांसफॉर्मर

मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के शिकायतकर्ता श्री दमन साहू से सीधे बातचीत की। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इससे गांव के लगभग 80 से 85 परिवार प्रभावित थे। स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। श्री साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब गांव में बिजली व्यवस्था सामान्य है और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने संबंधित अधिकारियों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे आम नागरिक के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिकायत का संवेदनशीलता से समाधान कई परिवारों के जीवन में राहत ला सकता है।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के दस दिनों के भीतर मिली पीएम आवास की लंबित किस्त

जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड निवासी वीरेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनके आवास निर्माण की दूसरी किस्त मिलने में विलंब हो रहा था। राशि नहीं मिलने से आवास निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा था।

उन्होंने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज कराई। शिकायत के लगभग दस दिनों के भीतर उनके बैंक खाते में आवास की दूसरी किस्त के रूप में 55 हजार रुपए की राशि प्राप्त हो गई। श्री यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि राशि मिलने से अब वे अपने आवास का निर्माण आगे बढ़ा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। पात्र हितग्राहियों को योजना की किस्त समय पर मिलनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे प्रकरणों में विशेष संवेदनशीलता बरतने को कहा।

नौ महीने से रुकी थी पेंशन, 1076 पर शिकायत के बाद मिला लाभ

मुंगेली जिले के ग्राम करही निवासी श्री तोरण साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी माताजी को लगभग नौ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही थी। पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई। इसके बाद उनकी माताजी की पेंशन पुनः प्रारंभ हुई और लंबित राशि का भी भुगतान किया गया। श्री साहू ने समस्या का समाधान होने पर संतुष्टि जताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन वृद्धजनों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल है। पात्र हितग्राहियों को इसके लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

आम नागरिक के लिए छोटी समस्या भी हो सकती है बड़ी परेशानी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासन-प्रशासन की दृष्टि में कोई प्रकरण सामान्य हो सकता है, लेकिन संबंधित नागरिक के लिए वही समस्या बहुत महत्वपूर्ण होती है। राशन कार्ड में सुधार, पेंशन का भुगतान, बिजली आपूर्ति, पेयजल, आवास की किस्त या राजस्व संबंधी छोटे से कार्य में देरी भी किसी परिवार को लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य यही है कि नागरिक की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे और संबंधित विभाग उसकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा में समाधान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात के दौरान भी सीएम हेल्पलाइन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अनेक नागरिक बताते हैं कि 1076 पर शिकायत करने के बाद उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने का भी माध्यम है।

अच्छा काम करने वाले अधिकारियों की सराहना, लापरवाही पर जवाबदेही हो सुनिश्चित

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन-प्रशासन में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों के कारण योजनाएं धरातल तक पहुंच रही हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में लापरवाही या नागरिकों की समस्याओं के प्रति गंभीरता की कमी पूरे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को यह समझना होगा कि जनता की समस्या का समाधान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहन मिले और शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी अथवा लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।

शिकायतों के आंकड़े बनें नागरिक सेवाओं में सुधार का आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने समीक्षा के दौरान हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव होने की स्थिति, शिकायतों के पंजीयन, विभिन्न स्तरों पर उनके निराकरण, शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने की व्यवस्था तथा विभागवार शिकायतों के विश्लेषण की जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों को केवल व्यक्तिगत प्रकरणों के रूप में न देखा जाए। शिकायतों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण कर यह पता लगाया जाए कि किस विभाग, योजना, सेवा या क्षेत्र से संबंधित शिकायतें बार-बार आ रही हैं। यदि एक ही प्रकृति की शिकायतें बड़ी संख्या में प्राप्त हो रही हैं, तो उनके मूल कारण की पहचान कर व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के साथ शासन की नीतियों और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक सिस्टम के रूप में भी काम करेगी।

बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक पहुंचे 1076 की सुविधा

मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के जिलों से प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए सीएम हेल्पलाइन विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी समस्या लेकर जिला अथवा राजधानी स्तर के कार्यालयों तक आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन 1076 की जानकारी अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाए। ग्राम पंचायतों, उचित मूल्य दुकानों और कॉमन सर्विस सेंटरों में वॉल पेंटिंग सहित विभिन्न माध्यमों से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। स्थानीय स्तर पर भी नागरिकों को बताया जाए कि वे किस प्रकार हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को दूर कर और मजबूत होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन अभी अपने प्रारंभिक दौर में है। इसलिए शुरुआती अनुभवों से सीखते हुए तकनीकी और प्रक्रियागत कमियों को लगातार दूर किया जाए। कॉल रिस्पॉन्स, शिकायत पंजीयन, संबंधित विभाग को शिकायत भेजने, निर्धारित समय-सीमा में निराकरण और शिकायतकर्ता से फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नागरिक को शिकायत दर्ज कराने से लेकर उसके समाधान तक सहज अनुभव मिले। तकनीक का उद्देश्य प्रक्रियाओं को जटिल बनाना नहीं, बल्कि शासन को नागरिकों के और करीब लाना है।

जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री  साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना सरकार का दायित्व है और सीएम हेल्पलाइन 1076 इस दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास हो कि उसकी बात शासन तक पहुंचेगी, उसे सुना जाएगा और उसकी जायज समस्या का समय पर समाधान होगा।

उन्होंने कहा कि शासन और जनता के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, सुशासन की व्यवस्था उतनी ही प्रभावी होगी। सीएम हेल्पलाइन इसी विश्वास की कड़ी को मजबूत कर रही है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, विभिन्न विभागों के सचिव, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित  सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ में श्रम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही सरकार : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास अब कच्चे माल के उत्पादन से आगे बढ़कर तैयार उत्पादों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में शुक्रवार को नवा रायपुर में यश फैंस के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमिपूजन इसी बदलाव का संकेत है। ₹152.74 करोड़ के निवेश से बनने वाली इस इकाई से लगभग 3,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह राज्य का पहला उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण संयंत्र होगा।


राज्य सरकार की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का जोर निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। यश फैंस की यह परियोजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संयंत्र शुरू होने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बस्तर सहित आदिवासी बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को भी ऐसे औद्योगिक विस्तार का लाभ मिल सकता है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और भर्ती के अवसरों से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। औद्योगिक नीति इसी सोच के साथ तैयार की गई है, ताकि राज्य में निवेश बढ़े और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि यह संयंत्र छत्तीसगढ़ को उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मदद करेगा।

देश के प्रमुख ब्रांडों के उत्पाद बनेंगे छत्तीसगढ़ में

हैदराबाद स्थित यश फैंस इलेक्ट्रिक पंखों और रसोई उपकरणों का निर्माण करती है। कंपनी क्रॉम्पटन, हैवेल्स, उषा और मिल्टन जैसे प्रमुख ब्रांडों के लिए उत्पाद बनाती है। नवा रायपुर में संयंत्र स्थापित होने के बाद इन ब्रांडों के लिए उत्पादों का निर्माण छत्तीसगढ़ में भी किया जाएगा। इससे राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में एक नए उद्योग की शुरुआत होगी और विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार होगा।

इस परियोजना का लाभ केवल संयंत्र में काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। पुर्जों की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों के लिए भी अवसर पैदा होने की उम्मीद है। स्थानीय उद्यमियों को नए काम मिल सकते हैं और सहायक उद्योगों के विकास से रोजगार के अतिरिक्त अवसर बन सकते हैं।

स्टील और एल्युमिनियम से तैयार उत्पादों तक का सफर

छत्तीसगढ़ की पहचान देश के प्रमुख स्टील, कोयला और बिजली उत्पादक राज्यों में रही है। अब राज्य में उपलब्ध औद्योगिक संसाधनों को तैयार उत्पादों के निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यश फैंस का संयंत्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्टील और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल का उपयोग राज्य में ही तैयार उत्पाद बनाने के लिए होने से स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।

यश फैंस के अध्यक्ष रितेश नरेड़ी ने कहा कि छत्तीसगढ़ कंपनी के विनिर्माण विस्तार के लिए उपयुक्त स्थान है। यहां कच्चे माल की उपलब्धता, देशभर के बाजारों तक पहुंच के लिए अनुकूल भौगोलिक स्थिति, मेहनती कार्यबल और सरकार का सहयोग कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हैं। कंपनी के हैदराबाद और हिमाचल प्रदेश में पहले से 12 विनिर्माण संयंत्र संचालित हैं। नवा रायपुर में स्थापित होने वाली इकाई छत्तीसगढ़ में उसकी पहली विनिर्माण इकाई होगी।

‘मेड इन छत्तीसगढ़’ को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय से देश की औद्योगिक प्रगति में स्टील, कोयला और बिजली के माध्यम से योगदान देता रहा है। अब राज्य तैयार उत्पादों के निर्माण में भी अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यश फैंस का स्वागत करते हुए कंपनी को राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ के विजन के अनुरूप है।

नवा रायपुर में इस संयंत्र की स्थापना से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। निवेश को स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और छोटे उद्यमों की भागीदारी से जोड़ना इस परियोजना की सफलता का महत्वपूर्ण पहलू होगा। इससे प्रदेश के युवाओं को अवसर मिलने के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।

चरौदा की माता खल्लारी मंदिर का हो रहा जीर्णोद्धार, जन आस्था का केंद्र

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 आरंग। अंचल के ग्राम चरौदा में स्थित जन आस्था की केंद्र माता खल्लारी मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। स्वर्गीय बन्धु साहू की स्मृति में उनके सुपुत्र शिवकुमार साहू द्वारा मंदिर का नवनिर्माण कराया जा रहा है।


ग्रामीणों के अनुसार गांव की चारों दिशाओं में देवियां विराजमान हैं। पूर्व में प्रवेश द्वार पर माता खल्लारी, पश्चिम में माता चंडी, उत्तर में चितावर दाई और गांव के मध्य में माता शीतला स्थापित हैं। दोनों नवरात्रि में चारों बहनों की विशेष पूजा-अर्चना होती है और सैकड़ों मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की जाती हैं।


शिवकुमार साहू ने बताया कि माता खल्लारी की महिमा निराली है। सच्ची आस्था से मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना माता अवश्य पूरी करती हैं। माता के आशीर्वाद से उनकी मनोकामना पूरी हुई, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने जीर्णोद्धार का संकल्प लिया।

गांव में मान्यता है कि माता खल्लारी ग्राम की रक्षा करती हैं। विवाह के अवसर पर युवक-युवतियां माता से आशीर्वाद लेकर यहीं से चूलमाटी लेकर जाते हैं।
पहले मंदिर में पूजा स्व. पुनीत राम धीवर, फिर शंतु धीवर, खोरबाहरा यादव, शत्रुहन यादव, बुधारू यादव और शत्रुहन साहू द्वारा की जाती थी। पिछले कुछ वर्षों से पूजा का दायित्व सुरेन्द्र धीवर निभा रहे हैं। वर्तमान में निर्माण कार्य में शिवकुमार साहू के साथ मुकेश धीवर, चुरावन धीवर और सुरेन्द्र धीवर विशेष सहभागिता निभा रहे हैं।

पूर्वोत्तर में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की पहल, अगरतला पहुंचेगी पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’; 440 मीट्रिक टन प्याज भेजा गया

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त्योहारों के दौरान उपलब्धता बेहतर करने और कीमतों को नियंत्रित रखने पर जोर

अगरतला- पूर्वोत्तर भारत में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के दौरान आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष पहल की है। इसके तहत त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के लिए लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज भेजा गया है। इस खेप के 18 अक्टूबर तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। इस आपूर्ति को ‘कांदा एक्सप्रेस’ के नाम से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर के बाजारों तक प्याज पहुंचाने में मदद करना है।

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में प्याज की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना और मांग बढ़ने के समय कीमतों पर दबाव कम करने में सहायता करना है। त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।

बफर स्टॉक से भेजा जा रहा प्याज

भारतीय बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार बफर स्टॉक का इस्तेमाल करती है। जरूरत के अनुसार इस भंडार से प्याज विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाता है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सके।

पूर्वोत्तर राज्यों में बफर स्टॉक से रेल और सड़क मार्ग के माध्यम से अब तक 2,800 मीट्रिक टन से अधिक प्याज भेजा जा चुका है। अगरतला के लिए भेजी गई लगभग 440 मीट्रिक टन की खेप इसी आपूर्ति प्रयास का हिस्सा है।

रेल और सड़क मार्ग से आपूर्ति पर जोर

पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों तक कृषि उत्पादों को पहुंचाने में परिवहन और लॉजिस्टिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्याज जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तु की समय पर आपूर्ति के लिए रेल और सड़क मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। इससे बड़े स्तर पर प्याज की ढुलाई करने और स्थानीय बाजारों तक इसकी उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

अगरतला के लिए भेजी गई खेप के पहुंचने के बाद इसे स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था में शामिल किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार में इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्याज का वितरण कितनी तेजी से होता है और स्थानीय मांग के मुकाबले कुल उपलब्धता कितनी रहती है।

कीमतों पर क्या पड़ सकता है असर?

प्याज की कीमतों में तेजी आने पर आम परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ता है। ऐसे में बफर स्टॉक से अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में उपलब्धता बढ़ाने का एक उपाय है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की स्थिति में यह कदम कीमतों पर दबाव कम करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, केवल प्याज की खेप भेजे जाने से खुदरा कीमतों में गिरावट की गारंटी नहीं होती। अंतिम कीमतों पर परिवहन लागत, स्थानीय मांग, थोक बाजार की स्थिति और खुदरा विक्रेताओं तक वितरण जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश

केंद्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य पूर्वोत्तर में प्याज की आपूर्ति को मजबूत करना और त्योहारों के दौरान इसकी उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है। अगरतला के लिए भेजी गई खेप के साथ-साथ बफर स्टॉक से अन्य क्षेत्रों में की जा रही आपूर्ति भी बाजार में संतुलन बनाए रखने के प्रयास का हिस्सा है।

निष्कर्ष: लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज लेकर आने वाली ‘कांदा एक्सप्रेस’ से अगरतला में आपूर्ति बढ़ाने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर में अब तक 2,800 मीट्रिक टन से अधिक प्याज भेजे जाने का उद्देश्य क्षेत्रीय उपलब्धता बेहतर करना और त्योहारों के दौरान कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकने में मदद करना है।

भारतीय नौसेना को मिला पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज पोत INS समर्थक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिली नई ताकत

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कारवार में किया कमीशन; 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित पोत आधुनिक हथियारों, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण में निभाएगा अहम भूमिका

कारवार- भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी मल्टी-पर्पज पोत INS समर्थक को नौसेना में कमीशन किया। इस पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसका निर्माण भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित अपने शिपयार्ड में किया है।


 
यह पोत केवल समुद्री गश्त तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक हथियारों, रडार, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण तथा मूल्यांकन के लिए एक बहुउद्देशीय मंच के रूप में काम करेगा। इसके नौसेना में शामिल होने से भारत की स्वदेशी तकनीक विकसित करने, नई रक्षा प्रणालियों का परीक्षण करने और बदलती समुद्री चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

INS समर्थक का निर्माण केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया गया है। पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारतीय रक्षा उद्योग, इंजीनियरिंग और जहाज निर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

इस परियोजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। पोत के निर्माण में डिजाइन, इंजीनियरिंग, उत्पादन, उपकरण आपूर्ति और अन्य तकनीकी कार्यों से जुड़े भारतीय उद्योगों की भूमिका रही है। इससे रक्षा उत्पादन में घरेलू कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी को बढ़ावा मिलता है।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण का एक प्रमुख लाभ यह है कि देश अपनी जरूरतों के अनुरूप प्रणालियां विकसित करने और उनके रखरखाव तथा तकनीकी सुधार पर अधिक नियंत्रण रख सकता है। हालांकि, वास्तविक आत्मनिर्भरता के लिए उपकरणों के साथ-साथ उनके सॉफ्टवेयर, कलपुर्जों, रखरखाव और भविष्य के उन्नयन की घरेलू क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

आधुनिक हथियारों और सेंसर के परीक्षण में होगी मदद

INS समर्थक की प्रमुख भूमिका अगली पीढ़ी के हथियारों, सेंसर और उभरती समुद्री तकनीकों के परीक्षण एवं मूल्यांकन में होगी। नई रक्षा प्रणालियों को परिचालन में लाने से पहले उनके प्रदर्शन, विश्वसनीयता और विभिन्न परिस्थितियों में काम करने की क्षमता का परीक्षण करना आवश्यक होता है।

यह पोत ऐसे परीक्षणों के लिए एक समर्पित मंच उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से नौसेना को नई तकनीकों का मूल्यांकन करने और परीक्षणों से प्राप्त अनुभव को परिचालन क्षमता में बदलने में मदद मिलेगी।

पोत की बहुउद्देशीय संरचना उसे अलग-अलग तरह के मिशनों के लिए उपयोगी बनाती है। इसका इस्तेमाल समुद्री निगरानी, गश्त, लक्ष्य प्रणालियों की तैनाती और परीक्षण तथा मानवरहित प्रणालियों से जुड़े अभियानों में भी किया जा सकेगा।

मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के लिए बनेगा अहम मंच

आधुनिक समुद्री सुरक्षा में ड्रोन और अन्य मानवरहित या स्वायत्त प्रणालियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इन प्रणालियों का इस्तेमाल निगरानी, समुद्री क्षेत्र की जानकारी जुटाने और विभिन्न परिचालन कार्यों में किया जा सकता है।

INS समर्थक को ऐसी प्रणालियों के संचालन और परीक्षण में सहायता देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक ‘मदरशिप’ यानी सहायक मंच के रूप में मानवरहित प्रणालियों की तैनाती और उनसे जुड़े परीक्षणों में भूमिका निभा सकता है।

इससे नौसेना को नई तकनीकों के उपयोग का अनुभव प्राप्त करने और भविष्य की परिचालन जरूरतों के अनुसार अपनी क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, किसी भी प्रणाली की वास्तविक उपयोगिता उसके परीक्षण परिणामों, परिचालन परिस्थितियों और नौसेना की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी।

समुद्री निगरानी और गश्त में भी उपयोगी

भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को देखते हुए निगरानी तथा गश्त नौसेना के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं। INS समर्थक को समुद्री निगरानी, टोही और तटीय क्षेत्रों के आसपास गश्त जैसे कार्यों में सहयोग देने के लिए तैयार किया गया है।

इसके अतिरिक्त, यह कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी उपयोगी हो सकता है। ऐसे अभियानों में समुद्री क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखना, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और आवश्यकतानुसार अन्य नौसैनिक इकाइयों को सहयोग देना शामिल हो सकता है।

पोत की बहुउद्देशीय क्षमता का उद्देश्य एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई तरह की नौसैनिक जरूरतों को पूरा करना है, ताकि नई तकनीकों के परीक्षण और विभिन्न सहायक अभियानों के लिए अलग-अलग संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सके।

आपदा राहत और मानवीय सहायता में भी निभाएगा भूमिका

INS समर्थक को मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में सहयोग देने के लिए भी तैयार किया गया है। समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा, तटीय आपातस्थिति या राहत सामग्री पहुंचाने की जरूरत पड़ने पर नौसेना की बहुउद्देशीय इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर इस पोत को सीमित क्षमता वाले अस्पताल पोत में बदला जा सकता है। इसके अलावा, यह बचाव और समुद्री उपकरणों को निकालने से जुड़े कुछ अभियानों में भी सहयोग दे सकता है। 

यह क्षमता नौसेना के सैन्य कार्यों के साथ-साथ मानवीय सहायता से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाने में भी उपयोगी होगी।

चार पोतों की श्रृंखला का पहला जहाज है समर्थक

INS समर्थक भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने वाले चार स्वदेशी मल्टी-पर्पज पोतों की श्रृंखला का पहला पोत है। इसका निर्माण पूरा होने के बाद इसे 27 अगस्त 2026 को नौसेना को सौंपा गया था। अब 16 अक्टूबर को कमीशन किए जाने के साथ यह नौसेना की सक्रिय सेवा में शामिल हो गया है। 

इस श्रृंखला के अन्य पोत भी नौसेना की बहुउद्देशीय परिचालन जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं। ऐसी परियोजनाएं नौसेना को नई तकनीकों के परीक्षण, निगरानी और सहायक अभियानों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।

कारवार नौसैनिक अड्डे का रणनीतिक महत्व

INS समर्थक का कमीशनिंग समारोह कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर आयोजित किया गया। कारवार अरब सागर के निकट अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक गहरे बंदरगाह के कारण भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यहां चल रहा प्रोजेक्ट सीबर्ड नौसेना के लिए आधुनिक आधारभूत ढांचे को विकसित करने से जुड़ा है। इसका उद्देश्य युद्धपोतों और पनडुब्बियों को तैनात करने, उनकी देखभाल करने और परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कमीशनिंग समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन सहित नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधि और संबंधित उद्योगों से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।

आत्मनिर्भर नौसेना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

INS समर्थक का नौसेना में शामिल होना भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण और रक्षा तकनीक विकास कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री, निजी शिपयार्ड की भागीदारी और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के परीक्षण की क्षमता इसे बहुउद्देशीय पोत बनाती है।

इसका महत्व केवल एक नए जहाज के शामिल होने तक सीमित नहीं है। यह पोत भारतीय नौसेना को नई तकनीकों का परीक्षण करने, मानवरहित प्रणालियों के उपयोग का विस्तार करने और समुद्री निगरानी व राहत अभियानों में सहयोग देने के लिए अतिरिक्त मंच प्रदान करेगा।

आने वाले समय में इस परियोजना की उपयोगिता इस बात से भी आंकी जाएगी कि नौसेना किस तरह इस पोत का उपयोग परीक्षणों, परिचालन प्रशिक्षण और उभरती तकनीकों को अपनाने में करती है। भारत के लिए यह कदम घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार रहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

3,500 लोगों को मिलेगा रोजगार, नवा रायपुर में स्थापित होगी प्रदेश की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकाई

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में यश फैन्स की नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन

₹152.74 करोड़ के निवेश से स्थापित होगी इकाई, हजारों परिवारों को मिलेगा आजीविका का मजबूत आधार

प्रदेश में ही होगा स्टील और एल्युमिनियम का वैल्यू एडिशन, स्थानीय सहायक उद्योगों और उद्यमियों के लिए भी खुलेंगे नए अवसर

‘मेड इन छत्तीसगढ़’ की पहचान के साथ देशभर के घरों तक पहुंचेंगे यहां निर्मित उत्पाद : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर में यश फैन्स की नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया गया। ₹152.74 करोड़ के निवेश से स्थापित होने वाली इस इकाई में 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यह छत्तीसगढ़ की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकाई होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसी सोच के साथ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में ऐसे उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करें। उन्होंने कहा कि यश फैन्स की यह इकाई केवल एक औद्योगिक निवेश नहीं, बल्कि 3,500 लोगों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक संबल तथा बेहतर भविष्य का अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस इकाई की स्थापना से छत्तीसगढ़ कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी कदम रखेगा। यश फैन्स द्वारा क्रॉम्पटन, हैवेल्स, उषा और मिल्टन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के लिए इलेक्ट्रिक फैन्स एवं किचन एप्लायंसेस का निर्माण किया जाता है। नई इकाई प्रारंभ होने के बाद इन ब्रांड्स के उत्पाद अब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी बनाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस परियोजना से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय की नई श्रृंखला भी विकसित होगी। कल-पुर्जों की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय उद्यमियों और छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर बनेंगे। इससे नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता प्रदेश के संसाधनों का स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन है। छत्तीसगढ़ में उत्पादित स्टील और एल्युमिनियम का उपयोग अब प्रदेश में ही तैयार उत्पाद बनाने में होगा। इससे राज्य के संसाधनों का अधिक आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय से अपने स्टील, कोयले और बिजली के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता आया है। अब हमारा लक्ष्य यहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर तैयार उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ के संकल्प के अनुरूप आने वाले समय में ‘मेड इन छत्तीसगढ़’ उत्पाद देशभर के घरों तक पहुंचें, इस दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने यश फैन्स का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कंपनी को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि परियोजना तेजी से धरातल पर उतरे, उत्पादन शीघ्र प्रारंभ हो और प्रदेश के युवाओं को इसका रोजगार लाभ जल्द से जल्द मिले।

यश फैन्स के चेयरमैन रितेश नरेडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्टील और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की उपलब्धता, देश के मध्य में रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, मेहनती मानव संसाधन और राज्य सरकार का सहयोग इसे विनिर्माण के विस्तार के लिए उपयुक्त स्थान बनाता है। हैदराबाद स्थित यश फैन्स वर्तमान में हैदराबाद और हिमाचल प्रदेश में 12 विनिर्माण इकाइयों का संचालन कर रही है। नवा रायपुर की इकाई छत्तीसगढ़ में कंपनी की पहली इकाई होगी।

इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित यश फैन्स के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

शब्दबीज’ नवाचार से निखर रही बच्चों की भाषा दक्षता, प्रयोगात्मक शिक्षण से रोचक बन रही पढ़ाई

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सूरजपुर जिले की प्राथमिक शालाओं में बच्चों के पठन, पाठन लेखन और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने की अभिनव पहल

विद्यालयों का निरीक्षण कर परखी गई शैक्षणिक गुणवत्ता, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

रायपुर- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों में भाषा दक्षता विकसित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा अभिनव पहल की जा रही है। कलेक्टर रेना जमील के निर्देशन में जिले की सभी प्राथमिक शालाओं में संचालित ‘शब्दबीज’ नवाचार के माध्यम से बच्चों की शब्द संपदा, पठन, लेखन और अभिव्यक्ति कौशल को सशक्त बनाया जा रहा है। इस नवाचार से बच्चों में नए शब्द सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ ही अध्ययन-अध्यापन की प्रक्रिया को अधिक रोचक और सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शासकीय हाई स्कूल रजबहर, माध्यमिक शाला रजबहर, प्राथमिक शाला रजबहर एवं मोहली सहित विकासखंड ओड़गी के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला दवनसरा का निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और शिक्षण गुणवत्ता का जायजा लिया गया।

शब्दबीज पट्टिका से नए शब्द सीख रहे बच्चे

 कलेक्टर सूरजपुर की पहल पर संचालित ‘शब्दबीज’ नवाचार के अंतर्गत विद्यार्थियों को प्रतिदिन नए शब्दों से परिचित कराते हुए उनका अर्थ समझने और वाक्यों में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में नवाचार का प्रभावी क्रियान्वयन पाया गया। प्राथमिक शाला दवनसरा में बच्चों के लिए विशेष शब्दबीज पट्टिका तैयार की गई है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी नए शब्द सीखने के साथ उनका सही प्रयोग करने का अभ्यास कर रहे हैं। यह पहल बच्चों में भाषायी समझ, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

धागे के प्रयोग से बच्चों ने समझी खाद्य श्रृंखला की अवधारणा

निरीक्षण के दौरान हाई स्कूल रजबहर की कक्षा दसवीं में विज्ञान विषय के अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र का अध्यापन किया जा रहा था। इस दौरान जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) मनोज कुमार साहू ने धागे के माध्यम से विद्यार्थियों को खाद्य श्रृंखला की अवधारणा समझाई। उन्होंने विद्यार्थियों को धागा पकड़ाकर बताया कि पारिस्थितिकी तंत्र में प्रत्येक जीव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और किसी एक कड़ी के कमजोर होने अथवा टूटने से पूरी खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। इस प्रयोगात्मक गतिविधि से विद्यार्थियों को जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से समझने का अवसर मिला।

इसी प्रकार माध्यमिक शाला रजबहर की कक्षा छठवीं में सामाजिक अध्ययन विषय के अंतर्गत ‘हमारी सांस्कृतिक जड़ें’ पाठ के अध्यापन का अवलोकन किया गया। विद्यार्थियों से संस्कृति की अवधारणा और उसके महत्व के संबंध में प्रश्न पूछकर उनकी विषयगत समझ एवं कक्षा में सक्रिय सहभागिता का आकलन किया गया।

कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास कराने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान हाई स्कूल रजबहर के परीक्षा परिणामों एवं विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा भी की गई। डीएमसी मनोज कुमार साहू ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक उपलब्धियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। अध्ययन में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त अभ्यास कराया जाए तथा आगामी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ अध्यापन सुनिश्चित किया जाए।जिला प्रशासन की यह पहल विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार आधारित अध्यापन और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। ‘शब्दबीज’ जैसे नवाचार और प्रयोगात्मक शिक्षण पद्धतियों से बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित करने के साथ ही शिक्षा को अधिक सरल, प्रभावी और रुचिकर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सख्ती, 40 नगरीय निकायों को नोटिस; तीन दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम

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अधूरे कार्यों की जानकारी पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश, लापरवाही मिलने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों की धीमी प्रगति को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर प्रदेश के 40 नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित निकायों को तीन दिन के भीतर अधूरे विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति और प्रगति का पूरा विवरण निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।

तीन दिन में देनी होगी पूरी जानकारी

विभाग ने नोटिस के माध्यम से संबंधित नगरीय निकायों से राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत स्वीकृत और निर्माणाधीन विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी है। निकायों को बताना होगा कि कौन-सा कार्य किस चरण में है, अब तक कितना काम पूरा हुआ है और किन परियोजनाओं का काम अभी लंबित है।

इसके साथ ही अधूरे कार्यों का विवरण भी पोर्टल पर अद्यतन करना होगा। विभाग ने इसके लिए तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। निर्धारित समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने या कार्यों में अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी गई है।

बार-बार निर्देश के बाद भी प्रगति नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, विभाग की ओर से पहले भी नगरीय निकायों को विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कुछ निकायों में कार्यों की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। इसके बाद विभाग ने 40 निकायों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने की कार्रवाई की।

विभाग की चिंता उन परियोजनाओं को लेकर है, जिनके पूरा होने से शहरों और कस्बों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। विकास कार्यों में देरी का असर स्थानीय स्तर पर निर्माण, बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर पड़ सकता है।

करोड़ों की परियोजनाओं की प्रगति पर नजर

प्रदेश के नगरीय निकायों में अलग-अलग योजनाओं के तहत विकास कार्य स्वीकृत किए जाते हैं। इनमें निर्माणाधीन परियोजनाओं की स्थिति की नियमित निगरानी और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

विभाग चाहता है कि स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो और लंबित परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में सभी 40 निकायों के नाम, प्रत्येक परियोजना की लागत और अलग-अलग कार्यों में हुई देरी का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।

पोर्टल पर अपडेट से बढ़ेगी निगरानी

विकास कार्यों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होने से विभाग को परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन कार्यों में तेजी की जरूरत है और कहां प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं आ रही हैं।

तीन दिन की समय-सीमा के तहत निकायों को लंबित कार्यों का विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद विभाग उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकता है।

लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी

विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी और निर्धारित समय-सीमा में जानकारी अपडेट नहीं करने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इस कार्रवाई का उद्देश्य लंबित परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करना, निगरानी को मजबूत बनाना और विकास कार्यों को गति देना है।

आम नागरिकों के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि लंबित परियोजनाओं की निगरानी प्रभावी होती है और काम समय पर पूरे किए जाते हैं, तो शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को लाभ मिल सकता है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए संबंधित निकायों की प्रगति और विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रखनी होगी।


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