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परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

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एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम

रायपुर- परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।

राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

ईश्वरचरण पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद ईश्वरचरण पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्न

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ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं-मुख्य सचिव श्री विकासशील

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। 

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ सुनील मिश्रा शामिल हुए।

वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ 

छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।  

बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव  निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

तेंदुवा धाम में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिया संतों का आशीर्वाद

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छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान श्रीराम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ श्रीराम कथा का श्रवण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र, श्री राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान श्रीराम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है।

इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।

राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों - दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों - को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सांसद कमलेश जांगड़े, महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

NH-53 पर भीषण हादसा: रेत से भरे हाइवा ने बाइक सवारों को कुचला, दो युवकों की मौत

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 रायपुर। जिले के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-53 पर सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। तेज रफ्तार रेत से भरे अनियंत्रित हाइवा ने बाइक सवारों को पीछे से जोरदार टक्कर मारते हुए कुचल दिया।


यह हादसा ग्राम उमरिया के पास हुआ। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक होंडा मोटरसाइकिल (CG 04 LH 2236) पर सवार होकर जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे रेत लदे हाइवा (CG 04 QW 9904) ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए और उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।

घटना के बाद हाइवा चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन को जब्त कर लिया। फरार चालक की तलाश जारी है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा बेहद भयावह था और टक्कर के बाद दोनों युवकों के शरीर के अंग सड़क पर बिखर गए। फिलहाल पुलिस शवों की शिनाख्त में जुटी हुई है।
इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाइवा चालक नियमों की अनदेखी कर तेज गति से वाहन चलाते हैं, जिससे लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की मिसाल, मानव-वन्यजीव संघर्ष में आई बड़ी कमी

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 उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। यहां फायर वॉचर्स और वाटर वॉचर्स की प्रभावी तैनाती के चलते मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

वन विभाग द्वारा लागू की गई इस रणनीति के तहत जंगलों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों पर सतत नजर रखी जा रही है। साथ ही, जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन से जानवरों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाया गया है, जिससे उनके आबादी क्षेत्रों में भटकने की घटनाएं कम हुई हैं।

इस पहल का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। यह न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी राहत की बात है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है, जहां इस तरह के उपाय अपनाकर मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

कर्नाटक और केरल के राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता व रखरखाव की समीक्षा, नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश

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नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, ने कर्नाटक और केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया से प्राप्त फीडबैक के आधार पर की गई।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और अजय टम्टा सहित National Highways Authority of India (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और परियोजना ठेकेदारों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक के दौरान गडकरी ने कर्नाटक में 7,926 किलोमीटर और केरल में 61 परियोजनाओं के तहत 1,513 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने समय पर कार्य पूर्ण करने, उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि राजमार्ग बुनियादी ढांचा टिकाऊ और प्रभावी बन सके। साथ ही, जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने और आधुनिक निर्माण पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय मंत्री ने मानसून से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और यातायात के सुचारू संचालन के लिए निवारक उपायों और मजबूत प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों को मानसून के लिए अग्रिम योजना बनाने के निर्देश भी दिए, जिसमें जल निकासी प्रबंधन, ढलान संरक्षण उपाय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना शामिल है, ताकि बाधाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

थाईलैंड में लघु-स्तरीय मत्स्य सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रखा पक्ष

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डॉ. अभिलक्ष लिखी सचिव, मत्स्य विभाग, भारत सरकार, ने 27 से 30 अप्रैल 2026 तक हुआ हिन में आयोजित 5वें विश्व लघु-स्तरीय मत्स्य कांग्रेस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन का आयोजन Food and Agriculture Organization (FAO) और TBTI ग्लोबल द्वारा किया गया। सम्मेलन का विषय “न्यायपूर्ण समन्वय, युवा भविष्य और पुनर्योजी ज्ञान के लिए लघु-स्तरीय मत्स्य” रहा।

अपने संबोधन में डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लघु-स्तरीय मत्स्य और जलीय कृषि सामाजिक-आर्थिक विकास, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जहां 19.7 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। साथ ही, आधुनिक तकनीक और निवेश के कारण समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने सतत और ट्रेसएबल मत्स्य पालन, डिजिटल परिवर्तन तथा सामुदायिक भागीदारी आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया। साथ ही बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही, जिसमें भारत वर्तमान में अध्यक्ष है।

डॉ. लिखी ने FAO द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में भी भाग लिया, जिसमें राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) के माध्यम से लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चर्चा में यह बात सामने आई कि लघु-स्तरीय मछुआरों की संस्थागत और तकनीकी क्षमता बढ़ाना, वित्त और बुनियादी ढांचे तक पहुंच सुनिश्चित करना तथा नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही, सतत और समावेशी मत्स्य प्रबंधन के लिए सामुदायिक आधारित और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।

वैश्विक स्तर पर लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र लगभग 90% मछुआरों को रोजगार देता है और कुल मछली उत्पादन का लगभग 40% योगदान करता है। एशिया में यह क्षेत्र करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, लेकिन इसे जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और औद्योगिक मत्स्य से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में लगभग 40 लाख समुद्री मछुआरे इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो मुख्यतः 12 समुद्री मील के भीतर कार्य करते हैं। सरकार द्वारा Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने 2015 से अब तक मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 39,272 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इन पहलों का उद्देश्य मछुआरों की आय बढ़ाना, संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह सम्मेलन लघु-स्तरीय मत्स्य क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी की लास पालमास यात्रा संपन्न, समुद्री कूटनीति को मिली मजबूती

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 26 अप्रैल 2026 को कैनरी द्वीप समूह के लास पालमास में अपनी तीन दिवसीय ऐतिहासिक पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक संपन्न की। यह यात्रा उसके लोकायन 26 ट्रांसओशैनिक अभियान का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रही। स्पेन के इस द्वीप समूह की यात्रा ने समुद्री कूटनीति और पेशेवर सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसैनिक कमान के प्रमुख सैंटियागो डे कोल्सा ट्रुएबासे मुलाकात की। इस वार्ता में दोनों नौसेनाओं के बीच मजबूत होते संबंधों और बढ़ती साझेदारी पर जोर दिया गया।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज को आम लोगों के लिए भी खोला गया, जहां स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में पहुंचे। आगंतुकों को जहाज का भ्रमण कराया गया, जिसमें भारत की समृद्ध समुद्री विरासत, महासागरीय यात्रा के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मित्रता के भाव को साझा किया गया।

अब आईएनएस सुदर्शिनी अपनी अगली मंजिल मिंडेलो के लिए रवाना हो गया है, जो ट्रांस-अटलांटिक यात्रा से पहले उसका अंतिम अफ्रीकी पड़ाव होगा। अब तक यह जहाज पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में सात पोर्ट कॉल और नौसैनिक सहभागिता पूरी कर चुका है।

यह यात्रा भारतीय नौसेना की “मित्रता और विश्वास के पुल” बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।

न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं खेल संबंधों का भी उल्लेख किया।

वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह समझौता किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड की ओर से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।

यह FTA भारत के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है और पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों में शामिल है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे MSME सेक्टर और श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।

समझौते के तहत भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक वस्तुओं को संरक्षण दिया गया है। इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे संतुलन बना रहे।

सेवा क्षेत्र में भारत को 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच मिलेगी, जिसमें आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए 5000 विशेष वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर बढ़ेंगे।

छात्रों के लिए भी यह समझौता लाभकारी है। अब भारतीय छात्रों को न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे। युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीज़ा की सुविधा भी दी गई है।

यह समझौता MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत भारतीय भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।

यह समझौता व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, लागत कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर देता है। सीमा शुल्क निकासी को तेज किया जाएगा और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में भी यह समझौता ऐतिहासिक है। AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में यह अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा।

रूस के बाद भारत बनेगा फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश होगा जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। “स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स” विषय पर सांसदों और विधायकों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का विकास कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की।

यह रिएक्टर Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) द्वारा विकसित और BHAVINI द्वारा निर्मित है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग होता है, जो जितना ईंधन खर्च करता है उससे अधिक उत्पन्न करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता तरुण चुघ ने की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को परमाणु रणनीति के तीसरे चरण में थोरियम के उपयोग की दिशा में ले जाती है। पूरी तरह संचालन में आने के बाद भारत, रूस के बाद, व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बन जाएगा।

वर्तमान में केवल रूस ही व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है, जबकि भारत अपने रिएक्टर के कमीशनिंग के उन्नत चरण में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे कई देशों ने पहले प्रयोगात्मक फास्ट रिएक्टर विकसित किए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम अब बंद हो चुके हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की स्थापना भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परमाणु ईंधन के अधिक कुशल उपयोग को सक्षम बनाता है और थोरियम के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में केवल कुछ ही देशों ने प्रगति की है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भविष्य में निरंतर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जहां परमाणु ऊर्जा अपरिहार्य होगी।

मंत्री ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs), नीतिगत समर्थन और SHANTI एक्ट जैसी पहलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। “न्यूक्लियर मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2033 तक 5 SMRs स्थापित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि SMRs उद्योगों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और ग्रिड से दूर क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के लिए उपयोगी होंगे।

अंत में, उन्होंने कहा कि परमाणु, नवीकरणीय और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पोते ने दादी की हत्या, लगातार दूसरी वारदात से शहर में दहशत

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 डोंगरगढ़। शहर में एक बार फिर सनसनीखेज घटना सामने आई है। वार्ड क्रमांक 24 स्थित कश्मीरी पारा में एक युवक ने अपनी ही दादी की चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना सोमवार दोपहर की बताई जा रही है, जिसके बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी पोते ने धारदार चाकू से अपनी बुजुर्ग दादी पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे हिरासत में ले लिया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक आरोपी लंबे समय से नशे का आदी था और उसका दादी के साथ अक्सर विवाद होता रहता था। कई बार मारपीट जैसी स्थिति भी बन चुकी थी। पुलिस शुरुआती जांच में नशे की लत और पारिवारिक तनाव को घटना की मुख्य वजह मान रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की। एफएसएल और फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जो घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगी है। आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।

लगातार घटनाओं से बढ़ी चिंता

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले रामाटोला क्षेत्र में शादी समारोह के दौरान चाकूबाजी में एक युवक की मौत हुई थी। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने डोंगरगढ़ में कानून-व्यवस्था और सामाजिक हालात को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद जल्द ही पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में शादी बना मौत का मैदान: पुरानी रंजिश में युवक की चाकू मारकर हत्या

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 डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)। शादी समारोह के दौरान पुरानी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया। ग्राम रामाटोला में आयोजित एक विवाह कार्यक्रम के बीच चाकूबाजी की घटना में 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक घायल हो गया।


जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान योमिश सिन्हा (20), निवासी रामाटोला के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ग्राम सांखरा में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान योमिश का कुछ युवकों से विवाद हुआ था। इसी रंजिश को लेकर वारदात को अंजाम दिया गया।

बताया गया कि रविवार देर रात रामाटोला में एक अन्य शादी समारोह चल रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने योमिश को घेर लिया। पहले उसके साथ मारपीट की गई, इसके बाद चाकू से हमला कर दिया गया। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना में एक अन्य युवक भी घायल हुआ है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वारदात के बाद गांव में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

गरियाबंद में नहर में बहता मिला गांजा, पुलिस ने 17 पैकेट जब्त किए

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में गांजा तस्करी का अनोखा मामला सामने आया है। मोहतरा से अतरमरा के बीच नहर में गांजा से भरे पैकेट बहते हुए दिखाई दिए। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने एक-एक कर 17 पैकेट बरामद किए।


जानकारी के अनुसार, पाण्डुका थाना क्षेत्र अंतर्गत फिंगेश्वर वितरक शाखा नहर में गांजा से भरे पैकेट बहने की सूचना पुलिस को मिली थी। यह स्थान नेशनल हाईवे-130 से करीब 5 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नहर से पैकेट निकालने की कार्रवाई शुरू की।

पुलिस के अनुसार, बरामद पैकेटों में करीब 68 किलोग्राम से अधिक गांजा होने की आशंका है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7 लाख रुपये बताई जा रही है।

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए तस्करों ने गांजा से भरे पैकेट नहर में फेंक दिए होंगे। फिलहाल पुलिस आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि तस्करों तक पहुंचा जा सके।

पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह मादक पदार्थों की तस्करी का नया तरीका तो नहीं है। मामले की जांच जारी है।

शादी के कार्ड बांट रहा था कांग्रेस नेता, तभी पहुंची पुलिस... दुष्कर्म केस में 12 दिन पहले गिरफ्तार

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 कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शादी की तैयारियों के बीच कांग्रेस नेता रवि चंद्रवंशी को दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी शादी 7 मई को तय थी, लेकिन उससे 12 दिन पहले ही पुलिस कार्रवाई होने से मामला चर्चा में आ गया है।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी की महिला मित्र ने कवर्धा महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से रवि चंद्रवंशी के साथ रिश्ते में थी। आरोप है कि शादी का झांसा देकर आरोपी ने कई बार शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार किया और 26 अप्रैल को कवर्धा लाया गया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के समय वह शादी के कार्ड बांट रहा था।

रवि चंद्रवंशी कवर्धा जिला किसान कांग्रेस संघ का अध्यक्ष बताया जा रहा है। वह पहले जोगी कांग्रेस से भी जुड़ा रहा है और पंडरिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुका है। करीब दो वर्ष पहले उसने कांग्रेस में वापसी की थी, जिसके बाद उसे संगठन में जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कवर्धा एसडीओपी आशीष शुक्ला ने बताया कि पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

छत्तीसगढ़ में बारातियों से भरी बस में लगी आग, कूदकर बचाई जान… बड़ा हादसा टला

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 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शादी समारोह के बीच बड़ा हादसा टल गया। बारातियों से भरी एक चलती बस में अचानक आग लग गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई।


राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए, जिससे जनहानि नहीं हुई।

मिली जानकारी के अनुसार, शर्मा ट्रेवल्स की बस (CG 07 E 1171) कांकेर जिले के अरौद गांव से बारातियों को लेकर बालोद जिले के बड़गांव जा रही थी। इसी दौरान पुरुर थाना क्षेत्र के जगतरा मंदिर के पास चलती बस में अचानक आग लग गई।

आग लगते ही बस में सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस से उतरकर अपनी जान बचाई। कुछ ही देर में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वाहन जलकर खाक हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।


प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
यह घटना एक बार फिर यात्री वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

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