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सेवा सेतु से आसान हुई दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया, विद्यार्थियों के भविष्य को मिला नया सहारा

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल पर संचालित सेवा सेतु पोर्टल ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस पहल के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक शासकीय दस्तावेज सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया से उपलब्ध हो रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों का समय, श्रम और आर्थिक खर्च बच रहा है।


पुत्र की पढ़ाई के लिए आसानी से बना निवासी प्रमाण पत्र

बड़े बचेली के कोआपारा निवासी राजू कुंजाम ने अपने पुत्र रेवांथ कुंजाम का निवासी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सेवा सेतु केंद्र में आवेदन किया। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र की आगे की पढ़ाई और विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए निवासी प्रमाण पत्र आवश्यक था।

कुंजाम ने बताया कि पहले ऐसे दस्तावेज बनवाने के लिए कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन सेवा सेतु के माध्यम से उनका आवेदन आसानी से स्वीकार किया गया और समय पर निवासी प्रमाण पत्र मिल गया। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र मिलने से उनके पुत्र की शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी सुविधा हुई है।

आय प्रमाण पत्र मिलने से योजनाओं और शिक्षा का लाभ आसान

इसी तरह ग्राम मल्लेमुंडा, ग्राम पंचायत मुचनार निवासी श्री संतुराम वेक ने अपने पुत्र सुभाष वेक का आय प्रमाण पत्र सेवा सेतु के माध्यम से बनवाया। उन्होंने बताया कि आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता शैक्षणिक कार्यों और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए थी। सेवा सेतु अभियान के माध्यम से उन्हें बिना किसी अनावश्यक परेशानी के आवश्यक प्रमाण पत्र मिल गया। वेक ने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण परिवारों को दस्तावेज बनवाने में काफी सुविधा मिल रही है।

शासन की सेवाएं अब ग्रामीणों के द्वार तक

सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से दंतेवाड़ा जिले के अनेक ग्रामीण परिवारों को विभिन्न प्रमाण पत्र और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। यह पहल प्रशासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी कम कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सेवा सेतु जैसी जनहितकारी पहल से शासन की सेवाएं अब वास्तव में लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। यह सुविधा विद्यार्थियों और ग्रामीण परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मां की अर्थी सजाते वक्त शिक्षक बेटे को आया हार्ट अटैक: एक ही घर से निकलीं दो अर्थियां, साथ-साथ जलीं मां-बेटे की चिताएं

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 सूरजपुर (छत्तीसगढ़) : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और मार्मिक घटना सामने आई है। रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम दौना में बुधवार को कुछ ही घंटों के भीतर मां और बेटे दोनों का निधन हो गया। जिस बेटे को अपनी मां को अंतिम विदाई देनी थी, उसकी भी अर्थी उसी दिन सज गई। एक ही आंगन से एक साथ उठीं दो अर्थियों और साथ-साथ जलीं दो चिताओं को देखकर पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।


मां के निधन के बाद चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी

जानकारी के अनुसार, दौना गांव निवासी रामधन साहू (52) स्थानीय प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक (हेडमास्टर) के पद पर कार्यरत थे। बुधवार सुबह करीब नौ बजे उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ले ली। मां के जाने के बाद घर में शोक का माहौल छा गया और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए।

सीने में उठा तेज दर्द, अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

दोपहर में बारिश के बीच जब मां की अंतिम यात्रा की तैयारियां चल रही थीं, उसी दौरान रामधन साहू ने अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की। परिजन तत्काल उन्हें श्रीनगर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार उनकी मृत्यु दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से हुई।

कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित शिक्षक थे रामधन साहू

दिवंगत रामधन साहू एक पैर से दिव्यांग थे, लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपने कर्तव्यों के बीच नहीं आने दिया। वे अपने सरल स्वभाव, ईमानदारी और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। पिछले वर्ष ही पदोन्नति पाकर वे सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक बने थे और अपने ही गांव के स्कूल में सेवाएं दे रहे थे।

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और शाम को नम आंखों के साथ मां-बेटे का एक ही दिन अंतिम संस्कार किया गया।

छत्तीसगढ़ में जल्द लागू होगी UCC, आगामी शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करेगी साय सरकार

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घोषणा की है कि सरकार आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है।


 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़' सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन भूमि है, इसलिए महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूती देने के उद्देश्य से ही यह पहल की जा रही है।

नई औद्योगिक नीति से युवाओं को मिलेगा रोजगार

रोजगार के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों के जरिए हर युवा को रोजगार देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक नीति तैयार की गई है। इसके तहत स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष सरकारी प्रोत्साहन और रियायतें दी जाएंगी, जिससे प्रदेश में निवेश और निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे।

महिला सशक्तिकरण और 'लखपति दीदी' योजना पर जोर

प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए सीएम साय ने कहा कि 'महतारी वंदन योजना' के जरिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही, पूर्ववर्ती सरकार के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों से वापस लिया गया ‘रेडी टू ईट’ का काम दोबारा उन्हें सौंप दिया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य की लगभग 30 लाख महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि 40 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर चुकी हैं।

प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना लक्ष्य-मुख्य सचिव विकासशील

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मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हर घर नल-जल जीवन मिशन की प्रगति पर कलेक्टर कॉन्फ्रेंस सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।


पूर्ण योजनाओं को 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन करें

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने कार्ययोजना तैयार करें 

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।

जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग करें

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

सीएसआईआर ने आयोजित किया प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम, चार स्वदेशी तकनीकें उद्योगों को सौंपीं

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नई दिल्ली- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने आज नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ द्वारा किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, प्रौद्योगिकी अपनाने वाले संस्थानों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को हस्तांतरण, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आईओटी (IoT) आधारित जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली का व्यावसायिक शुभारंभ तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), पंचकूला से स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन पर मिली रॉयल्टी का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने बताया कि इंडक्शन मोटर स्टेथोस्कोप (MSCOPE), पोर्टेबल एंड यूनिवर्सल मोटर-कम-पंप परफॉर्मेंस मॉनिटर (PU-MPPM) तथा आई-पावर क्वालिटी एनालाइज़र (IPQA) जैसी तकनीकों का लाइसेंस एम/एस पंप अकादमी प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु को दिया गया है। वहीं, एसयू-30 विमान के लिए हेड-अप डिस्प्ले (HUD) का ऑप्टिकल मॉड्यूल एवं बीम कंबाइनर असेंबली तकनीक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), पंचकूला को हस्तांतरित की गई।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकसित किफायती आईओटी आधारित जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली के व्यावसायिक शुभारंभ की भी घोषणा की। यह प्रणाली जल की गुणवत्ता, मात्रा और सेवा वितरण की आधुनिक एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी।

प्रो. भट्टाचार्य ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में BEL, पंचकूला से स्वदेशी सैन्य एवियोनिक्स तकनीकों—जिनमें हेड-अप डिस्प्ले (HUD), ड्रोग लाइट्स, टैक्सी लैंडिंग लाइट्स, HUD-I लेवल टेस्टर और बोरसाइट अलाइनमेंट टूल शामिल हैं—के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए 1.67 करोड़ रुपये की रॉयल्टी प्राप्त हुई है। उन्होंने इसे भारतीय उद्योग के साथ सीएसआईआर-सीएसआईओ की मजबूत साझेदारी और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में उसके महत्वपूर्ण योगदान का प्रमाण बताया।

अपने संबोधन में डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण के लिए सीएसआईआर-सीएसआईओ की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकों का सफल व्यावसायीकरण, अनुसंधान को उद्योग एवं समाज के लिए उपयोगी उत्पादों और प्रक्रियाओं में बदलने की दिशा में सीएसआईआर के मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने वैज्ञानिकों से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न के अनुरूप उद्योगोन्मुख अनुसंधान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-सीएसआईओ के बिजनेस डेवलपमेंट ग्रुप (BDG) के प्रमुख द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

विधायी प्रारूपण के 36वें बेसिक कोर्स का शुभारंभ, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 18 अधिकारी ले रहे हैं प्रशिक्षण

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नई दिल्ली- विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग एंड रिसर्च (ILDR) द्वारा आयोजित विधायी प्रारूपण (Legislative Drafting) के 36वें बेसिक कोर्स का शुभारंभ 22 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित विधायी सभागार, कर्तव्य भवन-02 में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों के लिए आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में विधायी विभाग एवं विधिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अतिरिक्त सचिव एवं कोर्स निदेशक (ILDR) डॉ. मनोज कुमार तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. राजीव मणि ने पूरे देश में विधायी प्रारूपण में एकरूपता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कानूनों में स्पष्टता, समानता और कानूनी निश्चितता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर हो रहे विधायी सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण और एकसमान प्रारूपण अत्यंत आवश्यक है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 जुलाई से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसमें 13 राज्य सरकारों और एक केंद्रशासित प्रदेश से आए 18 प्रशिक्षु अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को विधायी प्रारूपण के सिद्धांतों की गहन समझ प्रदान करना तथा विधायी दस्तावेजों के मसौदा-निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रभावी प्रारूपण के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल से सुसज्जित करना है।

यह कोर्स देशभर में विधायी प्रारूपण की एकरूपता, सटीकता और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की संस्थागत क्षमता को भी मजबूत करेगा।

पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिस जवानों का जाना हाल

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रैली के दौरान ड्यूटी निभाते हुए 16 पुलिस जवान हुए घायल, चिकित्सकों से चर्चा कर कमिश्नर ने उपचार की जानकारी ली

रायपुर- रायपुर में आज एक रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल द्वारा बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा अचानक पत्थर एवं बोतलें फेंके जाने से अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई, जिसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिस के 16 जवान घायल हो गए। घायलों में एक महिला आरक्षक शामिल थी, दो पुलिस जवानों को गंभीर चोटें आई हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला में अस्पताल पहुंच भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायल जवानों के स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली तथा सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि बैरिकेटिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया। वहीं, प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है, जिनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल, एसीपी नीलेश द्विवेदी, टीआई राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा

बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू

इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

'नियद नेल्ला नार' से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं श्रीमती सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सफलता की कहानी-आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

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बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर

रायपुर- सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। 

बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।

नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग

बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय

ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।

विशेष लेख-सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम

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जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

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सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -डेका

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।

राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान,शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

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रायपुर- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। 

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

भारत ने इंटरनेशनल ओलंपियाड 2026 में रचा इतिहास, 12 गोल्ड और 7 सिल्वर मेडल जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

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नई दिल्ली- भारत के युवा वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित भारतीय छात्रों ने 12 स्वर्ण (Gold) और 7 रजत (Silver) पदक जीतकर अब तक की सबसे शानदार उपलब्धियों में से एक हासिल की। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) ओलंपियाड में भारतीय टीम ने सभी स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।

इस ऐतिहासिक सफलता पर परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy-DAE) ने छात्रों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की 'युवा शक्ति' और देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए वर्षों से किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।

चार अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन

वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय टीम का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—

  • अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) – सभी 5 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) – सभी 4 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO) – 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक।

  • अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) – 2 स्वर्ण और 4 रजत पदक।

इस तरह भारत ने कुल 12 गोल्ड और 7 सिल्वर पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक और गणितीय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

DAE अध्यक्ष ने दी बधाई

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के समर्पण तथा दशकों में विकसित मजबूत संस्थागत व्यवस्था का परिणाम है।

HBCSE की अहम भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के इस राष्ट्रीय केंद्र को परमाणु ऊर्जा विभाग का सहयोग प्राप्त है। HBCSE देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराता है।

HBCSE के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि विभाग के निरंतर सहयोग के कारण भारत का ओलंपियाड कार्यक्रम विश्व के सबसे सम्मानित कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह सफलता विज्ञान और गणित में उत्कृष्टता की संस्कृति को और मजबूत करेगी।

दशकों की मेहनत का परिणाम

परमाणु ऊर्जा विभाग का कहना है कि उसका योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। विभाग ने HBCSE और TIFR के माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है, जिसने वर्षों से देश की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

DAE ने सभी पदक विजेता छात्रों, टीम लीडर्स, मेंटर्स, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), अंतरिक्ष विभाग (DOS) और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग की भी सराहना की।

भारत के वैज्ञानिक भविष्य की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि न केवल देश के युवाओं को प्रेरित करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की महाशक्ति बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

मानसून का प्रकोप: आज देश के 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ भी शामिल, रहें सावधान

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 नई दिल्ली / रायपुर : देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई हिस्सों में इसका कड़ा असर देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का यह दौर यूं ही जारी रहेगा। आज (22 जुलाई) देश के 18 राज्यों में अति-भारी बारिश (मूसलाधार बारिश) की चेतावनी जारी की गई है।


मौसम विभाग ने सतर्क करते हुए बताया कि बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) तथा मैदानी व निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

इन राज्यों के लिए जारी हुआ रेड/ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, आज जिन राज्यों में भारी बारिश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • मध्य व पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा।
  • उत्तर व उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर।
  • पश्चिम व दक्षिण भारत: गुजरात, महाराष्ट्र, केरल और तेलंगाना।
  • पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्य।

मौसम विभाग ने आम जनता को बिना वजह जलभराव वाले क्षेत्रों और पहाड़ी रास्तों पर यात्रा न करने की सलाह दी है।

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