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भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत सेवाधि म्यूजियम एंड इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (SEMIRI), कुमारनल्लूर, कोट्टायम, केरल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य SEMIRI में संरक्षित चिकित्सा पांडुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग तैयार करना है।

SEMIRI के पास 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का विशाल संग्रह है, जिसमें मंदिर से संबंधित अभिलेख भी शामिल हैं। इस संग्रह में आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मौजूद हैं।

इन पांडुलिपियों में चिकित्सा विचारों के विकास, उपचार पद्धतियों, औषधीय द्रव्यों, निदान संबंधी अवधारणाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा की विद्वत परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

MoU के तहत CCRAS-NIIMH तकनीकी एवं शोध विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और नाजुक पांडुलिपियों को बार-बार संभालने की आवश्यकता भी कम होगी।

तैयार होगा विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग

इस पहल के तहत पांडुलिपियों का एक व्यापक Descriptive Catalogue भी तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध जानकारी के आधार पर शीर्षक, लेखक, विषय, लिपि, भाषा, सामग्री, आकार, फोलियो विवरण, स्थिति, स्रोत एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जाएंगे।

यह कार्य AYUSH Manuscripts Advanced Repository के निर्धारित प्रारूप के अनुसार किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं और विद्वानों को संबंधित पांडुलिपियों की पहचान करने तथा भविष्य के शोध के लिए प्राथमिक स्रोतों तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी।

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन और भारत सरकार द्वारा देश की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार के प्रयासों के अनुरूप है। चिकित्सा संबंधी पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान समाहित है।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने कहा कि चिकित्सा पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीय कार्य नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से दुर्लभ चिकित्सा ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सुलभ रहेगा।

वहीं, SEMIRI के अध्यक्ष डॉ. सी.एस. उन्नी ने कुमारनल्लूर और कोट्टायम क्षेत्र की समृद्ध विरासत को सामने लाने में इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। CCRAS-NIIMH के प्रमुख डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी चुनौतियों एवं आगे की रणनीति पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर SEMIRI के क्यूरेटर डॉ. एस. राजेंदु, CCRAS के रिसर्च ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ. संतोष एस. माने, डॉ. राकेश नारायणन सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

CCRAS-NIIMH की विशेषज्ञ टीम ने संस्थान की Collection, Digitization and Cataloguing of AYUSH Manuscripts and Rare Books परियोजना के तहत पांडुलिपियों का मौके पर ही व्यवस्थित डिजिटलीकरण भी शुरू कर दिया है।

यह सहयोग भारत की पारंपरिक चिकित्सा एवं पांडुलिपि विरासत को डिजिटल, संरक्षित और शोध के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों को महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।


राज्यपाल डेका ने 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश की पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड‘ का किया विमोचन

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज रायपुर के 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश सुल्तानिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का विमोचन किया। उन्होंने दिव्यांश के रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

दिव्यांश ने अपने दादा की प्रेरणा से इस पुस्तक की रचना की है। पुस्तक में एक युवा छात्र के दृष्टिकोण से ईश्वर और आध्यात्मिकता से जुड़े विचारों, सवालों और उसकी अपनी समझ को सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। कम उम्र में गंभीर और विचारपरक विषय पर पुस्तक लिखने के दिव्यांश के प्रयास को राज्यपाल ने सराहनीय बताया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने मास्टर दिव्यांश की दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ के कवर को भी लॉन्च किया। यह पुस्तक बच्चों और युवाओं में कम उम्र से ही पैसे की बचत, निवेश और वित्तीय जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से छात्र द्वारा लिखी जा रही है। इसमें गुल्लक के माध्यम से बचत की आदत विकसित करने और बचाई गई राशि के उचित निवेश के विचार को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर विचार करने की आदत विकसित करना उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने दिव्यांश को अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की ललक को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर दिव्यांश के पिता सुधीर सुल्तानिया, माता सरिता सुल्तानिया सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘अमृत उद्यान समर एनुअल्स एडिशन 2026’ का किया शुभारंभ

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज 14 अगस्त 2026 को ‘अमृत उद्यान समर एनुअल्स एडिशन, 2026’ का शुभारंभ किया।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 16 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान उद्यान सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा और अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे तक होगा। रखरखाव के कारण उद्यान प्रत्येक सोमवार बंद रहेगा।

प्रवेश से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:

  • प्रवेश और निकास गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू रोड के पास स्थित है।

  • आगंतुकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।

  • यात्रा से पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक करना अनिवार्य होगा।

  • स्लॉट की बुकिंग संबंधित दिन से एक दिन पहले सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

  • मौके पर टिकट/स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

आगंतुकों की सुविधा के लिए रास्ते में पीने का पानी, फर्स्ट एड पोस्ट, रेन शेल्टर और रेस्ट रूम की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से अमृत उद्यान के प्रवेश द्वार तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। ‘SHUTTLE SERVICE FOR AMRIT UDYAN’ नाम वाली यह बस सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक हर 30 मिनट के अंतराल पर चलेगी।

ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग: visit.rashtrapatibhavan.gov.in

54 एकड़ शासकीय जमीन पर तकरार ,ग्रामीणों के आगे झुका प्रशासन,10 दिन के लिए टला 'चक्काजाम

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 आरंग : ग्राम पंचायत रसनी की 54 एकड़ (22 हेक्टेयर) बहुउद्देश्यीय शासकीय भूमि को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को सौंपने के विरोध में ग्रामीणों द्वारा 15 अगस्त को नेशनल हाईवे पर किए जाने वाले अनिश्चितकालीन चक्काजाम को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के सम्मान और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया है।


​मामले को सुलझाने के लिए आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसमें पुलिस, उद्योग विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो रसनी के ग्रामीण एक बार फिर नेशनल हाईवे पर उतरकर बेमियादी चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

​इस प्रशासनिक वार्ता में एसडीएम अभिलाषा पैकरा के साथ सीएसपी लंबोदर पटेल, आरंग तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे, थाना प्रभारी हरीश साहू, उद्योग विभाग के प्रतिनिधि, रायपुर जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर,उपसरपंच पारसमणि चन्द्राकर,सूरज शर्मा,गोपाल चन्द्राकर,मोहित चन्द्राकर,होरी चन्द्राकर,खुबचंद चन्द्राकर,समीर चन्द्राकर,भरत चन्द्राकर सहित ग्राम पंचायत रसनी के स्थानीय प्रतिनिधि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन पर ग्रामीणों ने अपना रुख नरम किया है, लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद आंदोलन दोबारा तेज होने के आसार है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन के पीड़ितों को दी विनम्र श्रद्धांजलि

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान हिंसा और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले लाखों निर्दाेष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


’विभाजन देश के इतिहास की एक अत्यंत पीड़ादायक त्रासदी’

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि 1947 का विभाजन भारत के इतिहास का एक अत्यंत दुखद अध्याय था। इस दौरान असंख्य लोगों ने अपनों को खोया और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर बेघर होना पड़ा। यह वेदना देश की सामूहिक स्मृति में दर्ज है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन सभी निर्दाेष लोगों के त्याग, असीम संघर्ष और पीड़ा को याद करने का अवसर है, जिन्होंने उस भयावह दौर का सामना किया।


’राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर बल’

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह दिवस हमें सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और भाईचारे की डोर को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है। हमें इस त्रासदी से सीख लेते हुए समाज में प्रेम, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। एक एकजुट, समरस और संगठित समाज ही एक सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण की असली आधारशिला है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन की विभीषिका में अपनी जान गंवाने वाले सभी निर्दाेष नागरिकों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

उप मुख्यमंत्री साव के नेतृत्व में 14 गांवों में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजा देशभक्ति का जयघोष

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नेतृत्व में लोरमी क्षेत्र के कई गांवों में मोटर साइकिल से तिरंगा यात्रा निकाली। गांवों की सड़कों और चौक-चौराहों से गुजरती यात्रा में देशभक्ति का गजब का उत्साह दिखाई दिया। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष से गांव गूंज उठे।


उप मुख्यमंत्री साव ने लोरमी के पुराना बस स्टैंड तहसील चौक झंझपुरी से अनेक गांव होते हुए दाऊकापा तक तिरंगा यात्रा निकाली, जो ग्राम डोंगरिया, उरईकछार, अखरार, सारिसताल, धनियाडोली, अमलडीही, गोड़खाम्ही और बोड़तराकला होते हुए आगे बढ़ी। गांवों की गलियों और ग्रामीण रास्तों पर लहराते तिरंगे ने देशभक्ति का संदेश दिया। ग्रामीणों ने उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया।


यात्रा हरदी, खेकतरा और खैरवार होते हुए दाऊकापा पहुंची। जगह-जगह तिरंगे के प्रति सम्मान और देशप्रेम का भाव दिखाई दिया। तिरंगे की शान में बढ़ता हर कदम देश की एकता और अखंडता का संदेश दे रहा था।

दाऊकापा में तिरंगा यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हर नागरिक की भागीदारी का संकल्प लिया।

लोरमी में गूंजा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

उप मुख्यमंत्री साव के नेतृत्व में लोरमी में भी मातृभूमि के प्रेम से सराबोर तिरंगा यात्रा निकली। मानस मंच से शुरू हुई यात्रा नगर के मुंगेली चौक, हटरी चौक, नया बस स्टैंड, गुरुद्वारा चौक, पुराना बस स्टैंड से होकर गुजरी। इस दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष से पूरा नगर गूंज उठा। नगरवासियों ने उत्साह के साथ यात्रा में सहभागिता की। हर ओर तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति गर्व का भाव दिखाई दिया।

वीर शहीदों के सपनों का भारत बनाने का लिया संकल्प

साव ने कहा कि तिरंगा यात्रा वीर शहीदों को नमन करने और उनके बलिदान को याद करने का अवसर है। यह भारत माता के सम्मान और घर-घर देशभक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प है। वीर शहीदों के सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी हम सभी की है। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में हर नागरिक को योगदान देना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमें भी कदम से कदम मिलाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी है। एक नागरिक एक कदम आगे बढ़ाएगा, तो देश 140 करोड़ कदम आगे बढ़ेगा।

तिरंगा यात्रा में लोरमी नगर पालिका के अध्यक्ष सुजीत वर्मा, जनपद अध्यक्ष वर्षा सिंह, जिला पंचायत सदस्य रत्ना काटले, अनिता साहू, धनीराम यादव औरज्योतिनंदन दुबे सहित पार्षदगण, एल्डरमैन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

“बड़े सपने देखें और कड़ी मेहनत से उन्हें साकार करें” मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा के मेधावी विद्यार्थियों से की मुलाकात

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 रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम उनके निवास कार्यालय में सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए मेधावी छात्र-छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की। अंबिकापुर क्षेत्र के सात शासकीय विद्यालयों के लगभग 50 विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभव, रुचियों तथा भविष्य के सपनों के बारे में जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस दौर में देखा गया सपना और उसे पूरा करने के लिए किया गया परिश्रम जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को साकार करने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करना चाहिए। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से जीवन में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सफलता का अर्थ केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है। आज युवाओं के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, खेल, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी प्रतिभा और रुचि होती है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी क्षमता को पहचाने, सही लक्ष्य चुने और पूरी प्रतिबद्धता के साथ उसे हासिल करने में जुट जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की विभिन्न प्रतिभाओं और उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तित्वों के प्रेरक प्रसंग भी सुनाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विस्तार हुआ है। आज छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित हैं, जहां प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के मन में नई जिज्ञासा पैदा करने के साथ उनके सपनों को नया विस्तार देते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल के बच्चों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से परिचित कराने और उन्हें भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की नींव होता है। जिस प्रकार किसी मजबूत भवन के लिए उसकी नींव मजबूत होना आवश्यक है, उसी प्रकार उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, परिश्रम और समय का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस महत्वपूर्ण समय का उपयोग अपने लक्ष्य को पहचानने, ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण में करने का आह्वान किया।

शैक्षणिक भ्रमण में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकालों, बकिरमा, सुखरी, रामपुर, मेंड्राकला एवं करजी तथा शासकीय सेजेस केशवपुर के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), ट्राइबल म्यूजियम और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय सहित विभिन्न प्रमुख संस्थानों एवं स्थलों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इन संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन के अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। राजधानी और नवा रायपुर के प्रमुख संस्थानों को नजदीक से देखने का अनुभव विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक रहा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर सहित शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति दिलीप सिंह जूदेव जी का समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धेय स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया और राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा, उनके स्वाभिमान और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने आजीवन कार्य किया। समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के लोगों से गहरा आत्मीय जुड़ाव था। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में उन्होंने समाज को संगठित करने, लोगों में आत्मविश्वास जगाने और उनकी आवाज को मजबूती देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंवदा सिंह जूदेव, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।

जनगणना 2027: केंद्र सरकार ने 'जनसंख्या गणना' के लिए जारी की 40 प्रश्नों की अधिसूचना

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 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी 'जनसंख्या गणना' (Population Enumeration) के लिए 40 प्रश्नों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। भारत के महारजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, इस बार की जनगणना में सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई नए व महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया गया है।


जाति और कोविड टीकाकरण पर रहेंगे खास सवाल

नवीनतम प्रश्नावली के तहत नागरिकों से उनकी जाति तथा कोविड-19 टीकाकरण के स्थान से जुड़े विवरण मांगे जाएंगे। जनगणना कर्मचारी प्रत्येक परिवार से यह जानकारी लेंगे कि वे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंध रखते हैं या नहीं, और उनकी विशिष्ट जाति कौन सी है। इसके अलावा, महामारी के बाद स्वास्थ्य डेटाबेस को मजबूत करने के उद्देश्य से कोविड टीकाकरण का स्थान और उससे जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।



बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से शुरुआत
सर्दियों में भारी बर्फबारी और विषम मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गिनती की प्रक्रिया 1 से 30 सितंबर के बीच पूरी की जाएगी। 

इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  • लद्दाख
  • जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्र
  • हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय इलाके
  • उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र

मुख्य बिंदु:

  • कुल प्रश्न: जनसंख्या गणना चरण के लिए 40 सवाल तय।
  • पहला चरण: जनवरी में मकान सूचीकरण (House Listing) के लिए 33 सवाल अधिसूचित किए गए थे।
  • उद्देश्य: देश के नागरिकों का सटीक सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और जनसांख्यिकी डेटाबेस तैयार करना।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्यौरा

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) कार्यालय द्वारा जारी 'हाउसहोल्ड शेड्यूल' में रहन-सहन, पेयजल, बिजली, शौचालय, वाहन, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए गए हैं, जिससे देश की भावी योजनाओं के निर्माण में मदद मिलेगी।

CG NEWS : मिठाई का लालच देकर नाबालिगों से छेड़छाड़, आरोपी गिरफ्तार

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 कवर्धा। कबीरधाम जिले के उड़ियाकला गांव में नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। महिला थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


मिठाई का लालच देकर की हरकत

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 9 अगस्त की शाम की है। आरोपी जागेश्वर साहू (39 वर्ष), निवासी उड़ियाकला, ने दो सगी नाबालिग बहनों और उनकी पड़ोस की एक अन्य बच्ची को मिठाई का लालच देकर अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान उसने बच्चियों के साथ अश्लील हरकतें कीं। बच्चियों द्वारा शोर मचाने और विरोध करने पर आरोपी मौके से फरार हो गया।

बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने 11 अगस्त को कबीरधाम महिला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 8 के तहत मामला पंजीकृत किया। पीड़ितों के बयान दर्ज कर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल

जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 12 अगस्त को आरोपी जागेश्वर साहू को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के प्रति अपराधों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

इंटर्न्स की समस्याओं पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक, स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग पर विचार का आश्वासन

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इंटर्न्स एवं आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा के मध्य  मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा

रायपुर- आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आईएमए प्रतिनिधियों और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इंटर्न्स की समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।

स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग

बैठक के दौरान इंटर्न्स ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही। इस पर विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्र हित में सरकार द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और इंटर्न्स की स्टाइपेंड संबंधी माँग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

हॉस्टल निर्माण को मंजूरी

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में प्रायः सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जो छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न करने की अपील

बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से अपील की गई कि स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होती हैं, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी परिस्थिति में सेवाएँ प्रभावित न हों।

बैठक में IMA-MSN Chhattisgarh  के संयोजक शाहदिल ख़ुसरू ने कहा कि आज की यह बैठक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हुई है। दोनों पक्षों ने सकारात्मक वातावरण में चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और बैठक का समापन भी सकारात्मक माहौल में हुआ। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि प्रशासन और इंटर्न्स, दोनों की ओर से इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रहेगी तथा इस समस्या का जल्द ही संतोषजनक समाधान निकलेगा।

बैठक में पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर (PT. JNM Raipur), छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS Bilaspur), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव (GMC Rajnandgaon), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कांकेर (GMC Kanker) एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर (GMC Ambikapur) के इंटर्न्स उपस्थित रहे।

CGMSC पर लगा 1 लाख का जुर्माना निरस्त,सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को पलटा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्य शैली और नियम आधारित टेंडर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को  रद्द कर दिया है, जिसमें CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना (हर्जाना) लगाया गया था। इस फैसले से साफ हो गया है कि कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और नियमों के हिसाब से थी।

पूरा मामला यह था कि टेंडर से जुड़े एक मामले में एक ठेकेदार ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना लगा दिया था। इसके खिलाफ CGMSC सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि निगम की तरफ से कोई गलती नहीं हुई थी।

अदालत ने माना कि ठेकेदार ने फॉर्म में जो अपनी ऑफिशियल ईमेल आईडी दी थी, उसी पर समय रहते सारी जरूरी जानकारियां और मैसेज भेजे गए थे। ठेकेदार ने खुद तय समय में जवाब नहीं दिया, इसलिए नियमों के तहत ही उसे टेंडर से बाहर किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पूरे मामले में CGMSC का काम बिल्कुल सही था और उस पर लगा 1 लाख का जुर्माना ग़लत है। इस फैसले से साबित हो गया है कि CGMSC अपने सभी टेंडर और खरीदारी में पूरी ईमानदारी और नियमों का पालन करता है। निगम ने कहा है कि वह आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऐसे ही पूरी ईमानदारी के साथ काम करता रहेगा।

विभाजन विभीषिका दिवस: बंटवारे के ज़ख्मों को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले.....

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 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' (Partition Horrors Remembrance Day) के अवसर पर 1947 के विभाजन से प्रभावित लोगों के अदम्य साहस, संघर्ष और जिजीविषा को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि देश के विभाजन ने लाखों परिवारों को रातों-रात बेघर कर दिया और असहनीय दर्द दिया, लेकिन प्रभावित लोगों ने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी शून्य से नई शुरुआत कर देश के निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया।


इसी के साथ प्रधानमंत्री ने देशवासियों से राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सद्भाव के संकल्प को मजबूत करते हुए 'विकसित भारत' के निर्माण में जुटने का आह्वान किया।

'इतिहास का वह दौर, जिसने तहस-नहस कर दी थीं अनगिनत जिंदगियां'
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा:

"आज हम 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को नमन करते हैं, जो 1947 के विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह हमारे इतिहास का वह दर्दनाक दौर था, जिसने अनगिनत जिंदगियां तहस-नहस कर दीं। परिवार उजड़ गए, अपनों को खो दिया और लोगों ने असीम वेदना सही।"

पीएम ने आगे लिखा कि इतने बड़े संकट के बावजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मुश्किलों को अपनी ताकत बनाया, शून्य से अपनी जिंदगी फिर से शुरू की और देश की तरक्की में बड़ा योगदान दिया।

इंसानी जज्बे की मिसाल और एकता का संकल्प

पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन पीड़ित लोगों की जीवन-यात्राएं इंसानी जज्बे और जिजीविषा की अद्भुत ताकत की याद दिलाती हैं। उन्होंने अपील की कि यह दिन हमें आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने का संदेश देता है, ताकि देश फिर कभी ऐसे काले दौर से न गुजरे और हम सब एकजुट होकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर बढ़ें।

आजादी के जश्न के साथ जुड़ा विभाजन का दर्द

उल्लेखनीय है कि भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी। स्वतंत्रता दिवस हर देशवासी के लिए गर्व और उल्लास का अवसर है, लेकिन आजादी की इस सुबह के साथ बंटवारे का गहरा और कभी न भरने वाला दर्द भी जुड़ा हुआ था। देश के विभाजन के दौरान हुई हिंसा में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई और करोड़ों लोग विस्थापित हुए।

इसी ऐतिहासिक त्रासदी और शहीदों व पीड़ितों के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

धमतरी: गंगरेल बांध में मिली भगवान नेमिनाथ की दुर्लभ प्रतिमा, जैन समाज में उत्साह

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 धमतरी : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गंगरेल बांध क्षेत्र से भगवान नेमिनाथ की एक दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई है। सफेद संगमरमर से निर्मित इस प्रतिमा के मिलने से क्षेत्र के जैन समाज और स्थानीय लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है। प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।


बोटिंग चालक से मिली प्रतिमा

मिली जानकारी के अनुसार, गंगरेल बांध घूमने पहुंचे जैन समाज के कुछ पर्यटकों की नजर एक स्थानीय बोटिंग चालक के पास रखी इस प्रतिमा पर पड़ी। बारीक नक्काशी और विशेषताओं को देखकर पर्यटकों ने इसकी पहचान जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा के रूप में की।

दिगंबर जैन मंदिर में कराई गई सुरक्षित

प्रतिमा की ऐतिहासिकता और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे धमतरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में पूर्ण आदर एवं सुरक्षा के साथ स्थापित कर दिया गया है।

पुरातत्व विभाग करेगा जांच:

प्रतिमा कितनी प्राचीन है और यह गंगरेल बांध क्षेत्र तक कैसे पहुंची, इसका सटीक पता लगाने के लिए पुरातत्व विशेषज्ञों से इसकी वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही प्रतिमा के वास्तविक कालखंड और ऐतिहासिक संदर्भ का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

कोकड़ी की 11.22 हेक्टेयर वनभूमि पर प्रस्तावित रिसॉर्ट को लेकर ग्रामीणों का विरोध

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ग्रामीणों ने कहा—यह भूमि पशु चराई और ग्रामीणों की जरूरतों का प्रमुख सहारा, औद्योगिक/व्यावसायिक उपयोग में न दी जाए

पटेवा- ग्राम कोकड़ी में प्रस्तावित रिसॉर्ट निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत खट्टा के आश्रित ग्राम कोकड़ी में स्थित शासकीय भूमि, जो वर्तमान में घास/चरागाह मद में दर्ज है, गांव के पशुधन और ग्रामीणों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। इसी भूमि के एक हिस्से को रिसॉर्ट निर्माण के लिए चिन्हांकित किए जाने की जानकारी के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।


ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर महासमुंद को दिए गए आवेदन के अनुसार खसरा नंबर 164 की कुल 11.22 हेक्टेयर भूमि घास चरागाह मद में दर्ज है। आवेदन में बताया गया है कि इसमें से लगभग 2.40 हेक्टेयर भूमि को रिसॉर्ट निर्माण के लिए चिन्हांकित कर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड को आवंटित किए जाने की प्रक्रिया का ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कोकड़ी गांव में पशुओं के निस्तारी और चराई के लिए यह प्रमुख उपलब्ध भूमि है। इसके अलावा ग्रामीणों के मुताबिक आसपास अन्य पर्याप्त शासकीय भूमि या चराई की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस भूमि का व्यावसायिक उपयोग होने से गांव के पशुपालकों और ग्रामीणों के सामने भविष्य में परेशानी खड़ी हो सकती है।

ग्राम सभा में भी उठ चुका है मुद्दा

दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत स्तर पर भी इस विषय को लेकर चर्चा की गई है। बैठक की कार्यवाही में ग्रामीणों द्वारा वन/चराई से जुड़ी भूमि को सुरक्षित रखने तथा प्रस्तावित औद्योगिक/व्यावसायिक उपयोग पर आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख दिखाई देता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खसरा नंबर 164 की पूरी 11.22 हेक्टेयर भूमि को ग्राम कोकड़ी के निस्तारी एवं चराई के लिए सुरक्षित रखा जाए और इसे किसी अन्य औद्योगिक अथवा व्यावसायिक कार्य में न दिया जाए।

ग्रामीणों की मांग—पहले गांव की जरूरत, फिर विकास

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास या पर्यटन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास कार्य के लिए ऐसी भूमि का चयन नहीं होना चाहिए जो गांव के पशुधन, चराई और दैनिक जरूरतों का आधार हो।

ग्रामीणों ने कलेक्टर महासमुंद एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर भूमि की वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित आवंटन तथा ग्रामवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्ति और ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है।


दस्तावेजों में उपलब्ध तथ्य:

  • स्थान : ग्राम कोकड़ी, तहसील पटेवा, जिला महासमुंद

  • खसरा नंबर : 164

  • कुल भूमि : 11.22 हेक्टेयर

  • ग्रामीणों के अनुसार रिसॉर्ट हेतु चिन्हांकित भूमि : लगभग 2.40 हेक्टेयर

  • मुख्य मांग : भूमि को ग्राम के निस्तारी/चराई के लिए सुरक्षित रखा जाए

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