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छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए बनेगा अलग संचालनालय, CM साय की अध्यक्षता में अहम बैठक संपन्न

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित समिति कक्ष में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्रदेश में अलग से संचालनालय गठन,नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।


मुख्यमंत्री साय ने कहा हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। हम उनकी चिंता कर नये विकास का कार्य कर रही है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह निवासरत है। हमारी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है।


हमारी सरकार समाज के महत्वपूर्ण किन्तु विकास में पीछे रह गये इन वर्गों के सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष बल देते हुए समग्र विकास के लिए कृत संकल्पित है।

संकल्प को पूर्ण करने हेतु हमारी सरकार ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग,मंत्रालय गठित किया है, जिससे इन वर्गों के विकास के लिए गति प्रदान की जा सके तथा इनके लिए नवाचार योजनाओं को लागू किया जा सके। इसके अतिरिक्त इन वर्गों के समस्याओं पर सम्यक रुप से विचार कर समस्या का समाधान किया जा सके, जिससे यह समाज भी विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके।

पिछड़ा वर्ग के विकास हेतु अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग भी गठित किया गया है। इसके लिए लौहशिल्प विकास बोर्ड, रजककार विकास बोर्ड तथा तेलघानी विकास बोर्ड भी गठित किया गया है।

इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभाग ने नवीन मुख्य बजट में इन वर्गों के शैक्षणिक विकास हेतु छात्रावास, आश्रम, प्रयास आवासीय विद्यालय संस्थान स्थापित किये गये है। इसके अतिरिक्त पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति को ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से छात्रवृत्ति विद्यार्थी के खाते में सीधे भुगतान किया जा रहा है। इस हेतु रुपये 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भुगतान की व्यवस्था को समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु नवाचार करते हुए निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं भुगतान चालू वर्ष में ही किये जाने की व्यवस्था की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के प्रशिक्षण हेतु आर्थिक सहायता की योजना मुख्य बजट में लाई गई है, जिसके माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेल्वे, बैंकिंग आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के छ.ग. राज्य के भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचनाओं के अध्ययन तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संबंध में अभिरुचि के विकास हेतु शैक्षणिक भ्रमण के लिए प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि हमने मुख्य बजट में नवीन योजना मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लाई गई है, जिसके माध्यम से जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनको अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान में 55 विभागीय छात्रावास स्वीकृत है। वर्तमान में नवीन बजट में 06 जिलों (रायगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर, धमतरी, रायपुर, जशपुर) में अन्य पिछड़ा वर्ग पो. मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किये गये है।

इस दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

उक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

Hindu Nav Varsh 2026: आज से शुरू हुआ हिंदू नववर्ष 2083, जानें कैसा रहेगा ‘रौद्र संवत्सर’

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 Hindu Nav Varsh 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुरुवार, 19 मार्च 2026 को हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो गई है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। सनातन धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।


इस वर्ष विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ है। ज्योतिष के अनुसार नववर्ष जिस दिन से शुरू होता है, उस दिन के ग्रह को वर्ष का राजा माना जाता है। इस बार गुरुवार होने के कारण गुरु बृहस्पति को वर्ष का राजा माना गया है, जबकि मंगल ग्रह को मंत्री (सेनापति) का पद प्राप्त हुआ है।

कैसा रहेगा ‘रौद्र संवत्सर’?

ज्योतिष शास्त्र में ‘रौद्र संवत्सर’ को उग्र और परिवर्तनकारी माना जाता है। ऐसा संवत्सर लगभग 60 वर्ष पहले 1966 में भी आया था। माना जा रहा है कि इस वर्ष दुनिया की राजनीति में हलचल देखने को मिल सकती है। कई देशों में सत्ता परिवर्तन या बड़े राजनीतिक फैसले संभव हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव

देश में शासन और नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप और असामान्य मौसम की स्थिति भी बन सकती है। मौसम में बदलाव का असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकेत

विश्व स्तर पर कई देशों के बीच नए समझौते हो सकते हैं, जिनका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विभिन्न देशों में कानून और नीतियों में बदलाव के संकेत भी हैं, जिससे सामाजिक संतुलन और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की संभावना भी जताई जा रही है।

विक्रम संवत 2083 यानी ‘रौद्र संवत्सर’ चुनौतियों और बदलावों से भरा वर्ष हो सकता है। हालांकि, इस दौरान सुधार और नई संभावनाओं के द्वार भी खुल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस समाचार में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय आकलनों पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

नववर्ष, नव ऊर्जा और नव संकल्प का संदेश: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी चैत्र नवरात्रि, नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।

जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वालों पर की जाए कड़ी कार्यवाही- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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निजी हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना: पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए - मुख्यमंत्री साय

केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए।

इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।

बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया।

बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम,  अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव एस. बसवराजू  सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

यात्रा वृत्तांत से सजीव होती है इतिहास और संस्कृति की तस्वीर- मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री ने 'मोदी के राज्य से लौटकर' पुस्तक का किया विमोचन

छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के गुजरात भ्रमण पर आधारित निशा द्विवेदी की पुस्तक

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित अपने कार्यालय के सभा कक्ष में युवा पत्रकार निशा द्विवेदी की पुस्तक 'मोदी के राज्य से लौटकर' का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा वृत्तांत से पाठकों के लिए इतिहास और संस्कृति की तस्वीर सजीव हो जाती है। पुस्तक में निशा द्विवेदी ने एक पत्रकार की नजर से गुजरात यात्रा का वर्णन किया है जो बहुत सराहनीय है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेतागण और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हमारे पत्रकार साथियों के जीवन में यह एक समानता है कि दोनों ही अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा व्यस्त रहते हैं। सक्रिय पत्रकारिता के बीच यात्रा वृत्तांत जैसी रचना के लिए समय निकाल पाना जरूर कठिन रहा होगा। ये बहुत सुखद है कि द्विवेदी ने अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप में हम सभी के सामने लेकर आई हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पत्रकार बहनों से मिलना हुआ था। मुलाकात में महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण के विषय में भी चर्चा हुई। ये बहुत खुशी की बात है कि पहली बार छत्तीसगढ़ की 26 महिला पत्रकारों का दल गुजरात राज्य के भ्रमण पर गया। भ्रमण से लौटने के बाद मैंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार बहनों से मुलाकात की। उसी समय मैंने उन्हें यह सुझाव दिया था कि वे अपनी यात्रा के अनुभवों को जरूर लिखें। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा इस वर्ष के बजट में भी हमने पत्रकारों के एक्सपोजर विजिट का प्रावधान किया है। हमारे पत्रकार साथी बड़े परिश्रम से सामाजिक सरोकार का कार्य करते हैं। हमारी सरकार हर स्तर पर पत्रकार साथियों को प्रोत्साहित कर रही है। अभी तक पत्रकारों के विविध दल महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, राजस्थान जैसे अनेक राज्यों में हुए हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुजरात भ्रमण का उद्देश्य महिला पत्रकारों को विकास के मॉडल को देखने, समझने और उससे सीखने का अवसर देना था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी इच्छा थी कि इस यात्रा को कोई महिला पत्रकार पुस्तक के रूप में लिखे, और यह पुस्तक उसी भावना का परिणाम है।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक सुशांत शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित अनेक पत्रकारगण उपस्थित रहे।

CG NEWS : इश्क का खौफनाक अंत: मायके वालों संग मिलकर पत्नी ने ली पति की जान, पढ़े पूरी खबर

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 जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह का अंत बेहद भयावह तरीके से हुआ। पत्नी ने मायके से अपने रिश्तेदारों को बुलाकर पति की बेरहमी से पिटाई करवा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में पत्नी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।


ऐसे हुआ पूरे मामले का खुलासा

मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थिया पार्वती बाई (55 वर्ष), निवासी ग्राम प्रेमनगर केराडीह थाना नारायणपुर, ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे हैं, जिनमें सबसे छोटे बेटे सुनील राम ने करीब 6 माह पहले थाना कांसाबेल क्षेत्र के ग्राम ढेंगुर जोर निवासी मीरा बाई (22 वर्ष) से प्रेम विवाह किया था।

पार्वती बाई अपने छोटे बेटे सुनील के साथ ही रहती थीं। 1 मार्च को सुनील घर आया और बताया कि उसकी पत्नी और उसके रिश्तेदारों ने उसके साथ मारपीट की है। घटना के बाद पत्नी अपने मायके वालों के साथ चली गई थी।

इलाज के दौरान हुई मौत

घटना के दो दिन बाद घायल सुनील राम की हालत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें शरीर पर आई गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया।

जांच में सामने आई साजिश

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतक की पत्नी मीरा बाई ने ही अपने रिश्तेदारों को बुलाया था। विवाद के दौरान सभी ने मिलकर सुनील राम के साथ मारपीट की, जिससे उसकी जान चली गई।

पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें:

  • मीरा बाई (पत्नी)
  • मुनिया बाई
  • मीना बाई
  • पुष्पा बाई
  • शंकर राम

सभी आरोपी जशपुर जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं। आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।

मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास : 140 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में शांति, विकास और विश्वास की नई तस्वीर सामने आई है। बीजापुर और कांकेर जिलों से आए 140 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने आज विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर मुख्यधारा में लौटने की खुशी साझा की।


मुख्यमंत्री साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों से आत्मसमर्पण से पहले के जीवन और वर्तमान परिस्थितियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। संवाद के दौरान नक्सलियों ने बताया कि अब उनका जीवन पूरी तरह बदल चुका है—जहां पहले वे जंगलों में असुरक्षा और भय के बीच जीवन बिताते थे, वहीं अब वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।


उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्रों में अब सड़कों, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे जीवन आसान हुआ है। कुछ आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने पहली बार होली जैसे त्योहार को परिवार के साथ मनाया—यह उनके लिए एक नया और सुखद अनुभव रहा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी का मुख्यधारा में स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि संविधान पर विश्वास जताकर सभी ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नक्सलवाद उन्मूलन के संकल्प को शीघ्र ही पूर्ण किया जाएगा।

इस अवसर पर गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक भी उपस्थित थीं।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यूपी के साथ अहम MoU

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ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में संरचनात्मक सुधारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश राज्य के साथ एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) आज हस्ताक्षरित किया गया। इसके साथ ही राज्य ने मिशन के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। जल जीवन मिशन 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह MoU जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीणा नाइक और उत्तर प्रदेश सरकार के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के बीच हस्ताक्षरित और आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर DDWS के सचिवअशोक के. के. मीणा, अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन, यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 अब सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं और इनका समय पर उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति को भी दोहराया।

मंत्री ने बताया कि SBI रिसर्च के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोजाना पानी लाने के कठिन कार्य से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच से प्रतिदिन करीब 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो सकती है और दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख वार्षिक मौतों को रोका जा सकता है।

उन्होंने जल संरक्षण और जन भागीदारी पर भी जोर देते हुए कहा कि जल संचय, वर्षा जल संचयन और स्रोत की स्थिरता पर समान ध्यान देना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल जीवन मिशन से पहले राज्य के बहुत कम गांवों में पाइप से पेयजल उपलब्ध था। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख किया और बताया कि अब स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं के कारण मृत्यु दर लगभग शून्य के करीब आ गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल और शौचालय सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्राओं के ड्रॉपआउट में कमी आई है। राज्य सरकार अब नियमित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस MoU में 11 प्रमुख सुधार क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें पेयजल प्रबंधन की संस्थागत संरचना, तकनीकी अनुपालन, जल गुणवत्ता, डिजिटल डेटा प्रबंधन, जन भागीदारी, क्षमता निर्माण और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं।

MoU के तहत ग्राम पंचायत आधारित, सेवा-उन्मुख और समुदाय केंद्रित जल प्रबंधन मॉडल को लागू किया जाएगा। साथ ही, पूर्ण हो चुकी योजनाओं को “जल अर्पण” प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों और समुदायों को सौंपा जाएगा।

इसमें डिजिटल योजना प्लेटफॉर्म (DSS), “जल सेवा आंकलन”, “मेरी पंचायत” ऐप और “जल उत्सव” जैसे अभियानों का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 की शुरुआत 8 मार्च 2026 को हुई और यह 22 मार्च 2026 (विश्व जल दिवस) तक चलेगा।

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही जन भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह पहल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डिजिटल युग में विज्ञापन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

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“विज्ञापन का उद्देश्य केवल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वास बनाना होना चाहिए,” सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने आज मुंबई में आयोजित AdTrust Summit 2026 में मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा। उन्होंने भारत में एक जिम्मेदार, पारदर्शी और विश्वसनीय विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब यह क्षेत्र तेजी से विस्तार और प्रभाव में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का विकास जारी रहना चाहिए, लेकिन विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र में जवाबदेही भी जरूरी है। मंत्रालय का दृष्टिकोण विश्वास निर्माण, विकास को समर्थन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

AdTrust Summit 2026 के पहले संस्करण का आयोजन एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) द्वारा किया गया, जिसमें विज्ञापन, मीडिया, तकनीक और सरकार के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदार विज्ञापन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। चर्चाओं का केंद्र उभरते रुझान, कानूनी ढांचे और नई तकनीकों का विज्ञापन प्रथाओं पर प्रभाव रहा।

संजय जाजू ने कहा कि विज्ञापन केवल एक व्यावसायिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह बाजारों को आकार देता है, ब्रांड बनाता है, उपभोक्ताओं को जानकारी देता है, संस्कृति को दर्शाता है और आकांक्षाओं को प्रभावित करता है। भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश में विज्ञापन नवाचार, आर्थिक गतिविधि, कंटेंट निर्माण और समावेशन का एक महत्वपूर्ण चालक बन गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब ब्रांड, स्टार्टअप, स्थानीय व्यवसायों और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने डिजिटल विज्ञापन से जुड़े जोखिमों—जैसे वित्तीय धोखाधड़ी, भ्रामक निवेश प्रचार और फर्जी नौकरी के ऑफर—पर भी चिंता जताई, जो अक्सर कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक अभिव्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन भ्रामक और धोखेबाज विज्ञापनों को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में एआई की भूमिका, डीपफेक, डार्क पैटर्न और एंटी-इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे उभरते मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संजय जाजू ने विज्ञापनदाताओं से केवल पहुंच नहीं बल्कि विश्वसनीयता पर ध्यान देने का आग्रह किया और कंटेंट क्रिएटर्स व इन्फ्लुएंसर्स से प्रामाणिकता बनाए रखने तथा भ्रामक प्रचार से बचने की अपील की।

उन्होंने जिम्मेदार विज्ञापन के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत भी बताए:

  1. सत्यता हर संचार में अनिवार्य होनी चाहिए

  2. विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार संबंधों में पारदर्शिता जरूरी है

  3. हर सामग्री के निर्माण और प्रस्तुति में जिम्मेदारी होनी चाहिए

  4. कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

  5. जवाबदेही के साथ नवाचार, ताकि तकनीकी और रचनात्मक प्रगति विश्वास को मजबूत करे

इस अवसर पर संजय जाजू ने ASCI की सचिव जनरल एवं सीईओ मनीषा कपूर, मैडिसन के चेयरमैन सैम बलसारा, ASCI के चेयरमैन एवं पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के एमडी सुधांशु वात्स, ASCI बोर्ड सदस्य प्रवीण त्रिपाठी तथा खैतान एंड कंपनी के पार्टनर्स ईशान जोहरी और तनु बनर्जी के साथ मिलकर “Ad Law Compendium” का शुभारंभ किया। यह विज्ञापन कानूनों और नियमों पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा, जिससे उद्योग में जागरूकता और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव ने विज्ञापन उद्योग के हितधारकों—ASCI नेतृत्व, मार्केटर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कानूनी विशेषज्ञों—के साथ एक बैठक भी की।

IOS सागर 2026 की शुरुआत, समुद्री सहयोग को नया बल

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हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, इंडियन ओशन शिप (IOS) सागर का दूसरा संस्करण 16 मार्च 2026 को प्रारंभ हुआ।

फरवरी 2026 में भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) की अध्यक्षता संभाली। इसलिए इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 IONS देशों की भागीदारी शामिल है।

यह पहल भारत के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग प्रयासों पर आधारित है और “सागर” (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के भारत सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है, साथ ही “महासागर” (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के व्यापक ढांचे को भी आगे बढ़ाती है।

IOS सागर एक अनूठा परिचालन कार्यक्रम है, जिसके तहत मित्र देशों के नौसैनिक कर्मियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर साथ प्रशिक्षण और यात्रा करने का अवसर मिलता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण मॉड्यूल में शामिल कर यह पहल व्यावहारिक सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी और समुद्री संचालन की साझा समझ को बढ़ावा देती है।

IOS सागर के इस संस्करण में 16 मित्र देशों के नौसैनिक कर्मी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों से होगी, जहां प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और समुद्री सुरक्षा के प्रमुख पहलुओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात किया जाएगा, जहां वे भारतीय नौसेना के कर्मियों के साथ समुद्र में परिचालन गतिविधियों में भाग लेंगे।

यात्रा के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहभागिता गतिविधियों और बंदरगाह दौरों को अंजाम देगा, जिससे क्षेत्र के साझेदार नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद संभव होगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करना है।

तटरक्षक बल को मिलेगा नया बल, OPV जहाज निर्माण में प्रगति

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छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (OPVs) में से दूसरे और तीसरे जहाज (यार्ड 16402 एवं 16403) की कील बिछाने (Keel Laying) समारोह 17 मार्च 2026 को रत्नागिरी स्थित M/s YMPL में आयोजित किया गया।

5000 नॉटिकल मील की रेंज के साथ ये जहाज अधिकतम 23 नॉट की गति प्राप्त करने में सक्षम होंगे। 117 मीटर लंबाई वाले इन जहाजों में 11 अधिकारियों और 110 कर्मियों की क्षमता होगी। इनमें अत्याधुनिक मशीनरी और उन्नत तकनीकी प्रणालियां भी शामिल होंगी, जैसे एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम, रिमोट पायलटेड ड्रोन, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम (IBS) और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS)।

यह जहाज ‘बाय (इंडियन-IDDM)’ श्रेणी के अंतर्गत स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है, जो सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। छह नेक्स्ट जेनरेशन OPVs के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को किया गया था।

यह पहल भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। नए NGOPVs का बेड़ा शामिल होने से भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में ICG की भूमिका और मजबूत होगी।

इस समारोह की अध्यक्षता आईजी सुधीर साहनी, टीएम, डीडीजी (एमएंडएम) ने की, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और एमडीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निर्यात क्लस्टरों के पुनरुद्धार पर मंथन, NICDC की अहम बैठक

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) ने निर्यात-उन्मुख औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार से संबंधित केंद्रीय बजट घोषणा पर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक परामर्श बैठक आयोजित की।

यह परामर्श “सतत और सुदृढ़ आर्थिक विकास” विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार के अनुवर्ती के रूप में बुलाया गया था, ताकि क्लस्टर पुनर्जीवन पर हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके और बजट घोषणाओं को उद्योग के सतत सहयोग के माध्यम से व्यावहारिक रणनीतियों में बदला जा सके। बैठक में निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs), उद्योग संघों, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों ने व्यापक भागीदारी की।

चर्चा के दौरान हितधारकों ने क्लस्टर पुनर्जीवन के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ-साथ क्षमता निर्माण, तकनीक अपनाने और बाजार तक बेहतर पहुंच को शामिल किया जाए। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां आयात पर निर्भरता अधिक है, घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम करने के लिए मजबूत परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता अवसंरचना की आवश्यकता पर भी बल दिया।

चर्चाओं में क्लस्टरों के भीतर नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के महत्व को भी उजागर किया गया। MSME को लक्षित समर्थन देकर उनकी उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

हितधारकों ने प्रभावी प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाली भागीदारी और निवेशकों व उद्यमों के समर्थन के लिए क्लस्टर स्तर पर सुविधा तंत्र की स्थापना शामिल है। नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी और पहुंच, तथा राज्य और जिला स्तर पर लचीलेपन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

परामर्श में एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिसमें कार्यबल को बनाए रखने और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सामाजिक और शहरी अवसंरचना शामिल हो। डिजाइन, नवाचार और बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, सतत वित्तपोषण मॉडल विकसित करने और उच्च संभावनाओं वाले क्लस्टरों को बढ़ाने के लिए सरकारी पहलों का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।

एक व्यापक सहमति बनी कि MSME को क्लस्टर विकास के केंद्र में रखा जाए, जिसमें वित्त तक पहुंच सुधारने, क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए। वैश्विक मांग के रुझानों के साथ क्लस्टर विकास को संरेखित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

यह परामर्श उद्योग और सरकार के बीच रचनात्मक संवाद का एक मंच बना और औद्योगिक क्लस्टर पुनर्जीवन पर बजट घोषणा के कार्यान्वयन के लिए ठोस सुझावों के आदान-प्रदान को संभव बनाया। यह बैठक बजट प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चर्चाओं का मार्गदर्शन NICDC के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने किया, जिन्होंने क्लस्टर विकास ढांचे को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए हितधारकों की निरंतर भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।

इस परामर्श में ASSOCHAM, FICCI, CII, PHDCCI, NASSCOM, SIDBI, CSIR, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC), इंडियन डेयरी एसोसिएशन, अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC), ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA), इंडियन मशीन टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMTMA), इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमेन, वेयरहाउसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों और संस्थानों की भागीदारी रही। रिलायंस, टाटा केमिकल्स, रिलैक्सो, ब्यूमर ग्रुप और JLL जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

बैठक की अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की।

NICDC के बारे में:

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है, जो ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों की योजना, विकास और कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने का कार्य करती है।

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा: आयात पर शून्य कस्टम ड्यूटी

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परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर शून्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लागू करने से देश में परमाणु ऊर्जा के विकास की गति तेज होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे परियोजनाओं की कुल लागत और प्रति यूनिट बिजली की लागत में कमी आएगी, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट अधिक व्यवहार्य बनेंगे, विशेष रूप से वे जिनमें विदेशी सहयोग और आयात की अधिक भागीदारी होती है।

लोकसभा में रमेश अवस्थी और रवि किशन द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2035 तक परमाणु ईंधन और रिएक्टर घटकों पर सीमा शुल्क में छूट से परियोजना लागत और बिजली उत्पादन लागत दोनों में कमी आएगी, जिससे परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार होगा।

700 मेगावाट के दस नए स्वीकृत प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) इकाइयों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के संबंध में मंत्री ने बताया कि न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने कई कदम उठाए हैं। इनमें निरंतरता बनाए रखने के लिए थोक ऑर्डर देना, आवश्यक सहयोग के साथ विक्रेता आधार का विस्तार करना, आयात के स्थान पर स्वदेशी उपकरणों को बढ़ावा देना, कुछ उपकरणों को श्रेणी-1 स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए आरक्षित करना तथा MSME को प्रोत्साहित करने और उन्हें निविदाओं में प्राथमिकता देने के लिए विक्रेता मीट आयोजित करना शामिल है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में अनुसंधान एवं विकास के लिए बढ़ी हुई फंडिंग के बारे में मंत्री ने कहा कि इसका उपयोग आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से बहु-विषयक प्रौद्योगिकी विकास में किया जा रहा है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में नए अनुसंधान रिएक्टरों का विकास, विशेष रूप से कैंसर उपचार के लिए आइसोटोप उत्पादन सुविधाएं, उन्नत रिएक्टर तकनीक जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और हाइड्रोजन उत्पादन, एक्सेलेरेटर तकनीक, लेजर आधारित अनुप्रयोग तथा उन्नत सामग्री और विनिर्माण तकनीक शामिल हैं।

मंत्री ने आगे बताया कि वर्तमान में तटीय राज्यों में प्रस्तावित परमाणु पार्कों के निर्माण और लॉजिस्टिक्स को प्रधानमंत्री गति शक्ति ढांचे के साथ जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

ब्राह्मण समाज का होली मिलन सम्पन्न,अनेक निर्णय भी पारित

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आरंग- ब्राह्मण समाज का होली मिलन आपसी सदभाव व भाईचारा के साथ सादगी पूर्वक ग़ुलाल का टीका व मिठाई बाट कर बडो के आशीर्वाद नगाड़ा व फाग गीत के साथ सम्पपन हुआ 

इस सम्बन्ध में सचिव तिलक शर्मा नें जानकारी देते हुए बताया कि आगामी माह अप्रेल में भगवान परशुराम जयंती कों भी प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी अभिषेक पूजन शोभायात्रा भोजन के साथ मनाया जायेगा. साथ ही ब्राह्मण समाज अध्यक्ष प्रदुमन शर्मा नें राजपुरोहित के रूप मुकेश शर्मा कों ग़ुलाल  लगाकर सम्मानित किया उपस्थित सभी पदाधिकारियों व सदस्यों नें ताली बजाकर उनका अभिनन्दन भी किया. अब कोई भी व्यक्ति राजपुरोहित प्रतिनिधि के रूप में नही होगा

इसके साथ ब्राह्मण समाज नें स्पष्ट किया है कि समाज की कोई अन्य संस्था ,समिति या  परिषद नहीं है और न ही ब्राह्मण समाज ऐसी किसी समिती परिषद का गठन चाहता है,यदि इस संबंध में कोई भी व्यक्ति विशेष समिति परिषद का गठन निर्माण करती है तो समाज उनका सहयोग नहीं करेंगी केवल आरंग ब्राह्मण समाज ही प्रमुख इकाई होंगी जो सभी प्रकार के त्यौहार व्रत आदि कि जानकारी समय समय पर प्रकाशित करती रहेंगी। विगत वर्ष परशुराम पुरोहित परिषद का गठन हुआ था जिसे उपस्थित सदस्यों के बहुमत के साथ भंग कर उसका विलय ब्राह्मण समाज में कर दिया गया है इसके साथ सूरज शर्मा का पुरोहित परिषद से निलंबन का प्रकाशन जो कहा गया था वह तथ्यहीन भ्रामक व अनैतिक है क्योंकि भंग परिषद कों किसी भी व्यक्ति कों पुनः संचालन का अधिकार ही नहीं है 

इस बैठक में अध्यक्ष प्रदुम शर्मा सचिव तिलक शर्मा कोषाध्यक्ष सचिन शर्मा सहसचिव सूरज शर्मा संदीप मिश्रा, मानिक मिश्रा राकेश शर्मा ,सुरेश शर्मा,वीरेंद्र शुक्ला, शशांक शर्मा,निलेश शुक्ला, नरेश चौबे ,हरीश दीवान मुकेश शर्मा ,भानु शर्मा, जीतेन्द्र शुक्ला,अभिषेक तिवारी,चंद्रेश तिवारी, संजय शुक्ला ,जितेंद्र शुक्ला, रमेश तिवारी, संतोष पाण्डेय,शैलेन्द्र चौबे,आकाश शर्मा,पुरुषोत्तम जोशी, अजय शुक्ला उपस्थित रहे।

​ लखौली के खोमन ने 40वीं बार रक्तदान कर पेश की मिसाल, ​जीवन भर रक्तदान करने का लिया है संकल्प

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 ​ आरंग । गायत्री परिवार विवेकानंद श्रेष्ठ युवा मंडल के सदस्य और ग्राम लखौली निवासी 35 वर्षीय खोमन साहू ने बुधवार को 40वीं बार रक्तदान कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। खोमन अब तक 40 जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर चुके हैं।


​उनका ब्लड ग्रुप 'ए पॉजिटिव' (A+) है। खोमन न केवल स्वयं रक्तदान करते हैं, बल्कि समय-समय पर अन्य जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने से उन्हें आत्मिक संतोष और खुशी मिलती है। समाज सेवा के साथ-साथ वे पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे जनसरोकार के कार्यों में भी सदैव सक्रिय रहते हैं। उनकी दिनचर्या और खान-पान पूरी तरह संतुलित और नियमित है।

​खोमन का कहना है कि रक्तदान से शरीर में नए रक्त का तेजी से निर्माण होता है, जिससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है। अक्सर लोग डर या भ्रम के कारण रक्तदान करने से कतराते हैं, लेकिन उनका संदेश है कि रक्तदान के समय मन प्रसन्न और सकारात्मक होना चाहिए, क्योंकि "रक्तदान ही जीवनदान है।" वे डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार जीवनभर रक्तदान करने का संकल्प लेकर चल रहे हैं।

​उन्होंने आम जन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति का हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम या उससे अधिक है, तो उन्हें आगे आकर रक्तदान करना चाहिए ताकि असमय किसी की जान बचाई जा सके।

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