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सड़क निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त और समय-सीमा में करें पूरा- मुख्यमंत्री साय

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नारायणपुर-कोंडागांव निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का मुख्यमंत्री साय ने किया निरीक्षण

एनएच-130डी कोंडागांव से नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा तक जोड़ेगा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुर कोंडागांव के मध्य निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति

डबल इंजन की सरकार के तहत विकास कार्यों को गति देते हुए बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। एनएच-130डी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है, एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में 122 किमी लंबा हिस्सा

नेशनल हाईवे 130-डी का कोंडागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है, जबकि कुतुल से महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक 21.5 किलोमीटर की दूरी है। इस प्रकार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी में से लगभग 122 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा, सुरक्षित और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री के सहयोग से मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेज गति से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगा, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र में विश्वास, निवेश तथा आवागमन को नई दिशा देगी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रोजगार, स्वावलंबी युक्त ग्राम पंचायत बनाना हमारा लक्ष्य, वीबीजीरामजी से विकास की बढ़ेगी रफ्तार: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण की गति अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल,मोर गांव मोर पानी महाअभियान जल सरंक्षण में महत्वपूर्ण योगदान 

राज्य में दो साल में ही बने 8 लाख से अधिक मकान, 17 लाख 60 हजार आवास हुए पूर्ण, बस्तर संभाग में लंबित विकास योजनाओं को पूर्ण करने बनेगी विशेष रणनीति

केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कामकाज की समीक्षा

रायपुर- रोजगार एवं स्वाबलंबी युक्त ग्राम पंचायत बनाना हमारी सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण के लागू होने से गांवों में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ेगी। इसके लिए हमने बजट में लगभग डेढ़ गुणा अधिक स्वीकृति प्रदान की है। उक्त बाते केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही।

शिवराज चौहान ने छत्तीसगढ़ में तेजी से बन रहे आवास निर्माण की गति की प्रशंसा करते हुए अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बताया। उन्होंने आवास निर्माण के साथ ही गांव गांव में चलाएं गए मोर गांव मोर पानी महाअभियान की भी सराहना करते हुए जल सरंक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में और अधिक लखपति दीदी के माध्यम से महिलाओं को अधिक से अधिक स्वसहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने एवं मजदूरी भुगतान किसी भी स्थिति में लंबित नहीं करने के निर्देश प्रदेश के अधिकारियों को दिए है। इसके साथ ही बस्तर संभाग में लंबित परियोजना को पूर्ण करने के लिए विशेष रणनीति बनाने के निर्देश उच्च अधिकारियों दिए हैं। उन्होंने कहा बस्तर लंबे अरसे से विकास से दूर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम बस्तर के समग्र विकास के लिए आगे बढ़कर कार्य करेंगे।

इस दौरान शिवराज चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन बिहान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएमजनमन एवं आरसीपीएलडब्ल्यूईए योजनाओं का विस्तृत समीक्षा किए। उन्होंने प्रदेश में एनआरएलएम में रिक्त पदों शीघ्र भर्ती कराने के निर्देश प्रदेश के अधिकारियों को दिए हैं।

केंद्रीय केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित थे।

बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में  प्रधानमंत्री आवास के लिए 24.58 लाख को स्वीकृति मिली है। जिसमें से 17.60 लाख आवास का निर्माण पूर्ण हो चुके है। इसके साथ ही पीएमजनमन के तहत 33,246 स्वीकृत में 18,373 पूर्ण, विशेष परियोजना आत्मसमर्पित नक्सली के 3416 मकान स्वीकृत किए गए है। अभी सरकार गठन के बाद ही दो सालों में ही 8.41 आवास निर्माण पूर्ण किए है जो पूरे देश में अव्वल है। लखपति दीदी के माध्यम से अब तक प्रदेश में 8000 से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनीं है। इसके साथ ही 5000 से अधिक राज्य में मिस्त्री को प्रशिक्षण, डेढ़ लाख से अधिक आवासों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में हो रहे नवाचार, क्यूआर कोड, दीदी के गोठ, छत्तीस कला की जानकारी दी गई। 

इस बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग निहारिका बारिक सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित दिल्ली से आए विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री साय

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नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को बस देने की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय में अचानक छात्रों के बीच पहुंचे। विद्यालय पहुंचने पर संस्था में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र रंजीत बड्डे सहित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा स्वागत गीत, हनुमान चालीसा एवं बस्तर अंचल के पारंपरिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मांग पर मुख्यमंत्री साय ने विद्यालय को एक बस उपलब्ध कराने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं अच्छी हैं, उनका पूरा लाभ लेकर सभी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। उन्होंने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होता है। बच्चों ने जब उनसे पूछा गया कि उन्हें विद्यालय आकर कैसा लगा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। एक बच्ची के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें पिट्ठू, फुटबॉल जैसे खेल खेलना बहुत पसंद था।  

मुख्यमंत्री ने संस्था के सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर आशीर्वाद दिया। दिव्यांग बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुख्यमंत्री साय सहित राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह एवं आईजी सुंदरराज पी. ने सराहना की।

उल्लेखनीय है कि परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का शुभारंभ 11 सितंबर 2023 को किया गया था। इसका संचालन जिला खनिज न्यास निधि से किया जा रहा है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उनका आत्मविश्वास सुदृढ़ हो और वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकें। यह विद्यालय सामान्य और दिव्यांग बच्चों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में आडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, विशेष शिक्षा संगीत शिक्षा, खेलकूद, योग एवं व्यायाम, तथा कंप्यूटर शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अबूझमाड़ की धरती से देश-दुनिया को दिया जा रहा है अमन और शांति का मजबूत संदेश: मुख्यमंत्री साय

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अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर में अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन को दिखाई हरी झंडी

10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने लगाई दौड़, आत्मसमर्पित नक्सली भी बने आयोजन का हिस्सा

रायपुर- अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के समीप आयोजित हाफ मैराथन सहभागिता की और धावकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सांकेतिक रूप से स्वयं भी दौड़ लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाने वाले मैडल का अनावरण भी किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन और शांति का मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही अबूझमाड़ है, जहाँ कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुँचना भी कठिन था, लेकिन आज सकारात्मक वातावरण के कारण हजारों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में माओवाद से मुक्ति की दिशा में युवा वर्ग का जोश और उत्साह यह संकेत दे रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र खुशियों से आबाद होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी। उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया।

उल्लेखनीय है कि यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ मैराथन नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए 60 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों सहित बस्तर संभाग, प्रदेश एवं अन्य राज्यों के 10 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन से पूर्व हाईस्कूल परिसर में जुंबा वॉर्मअप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 

आत्मसर्पित माओवादी बने मैराथन का हिस्सा

इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया। नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया।

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक केदार कश्यप, जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी. सुंदरराज, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक राबिनसन गुरिया, जिला सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

नारायणपुर अंचल में अमन शांति, आजीविका और स्थानीय सहभागिता बढ़ाने पर फोकस: मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में हुए शामिल

रायपुर- दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित पीस हाफ मैराथन के शुभारंभ के साथ-साथ अनेक सामाजिक, खेल और पर्यटन गतिविधियों में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन और स्थानीय सहभागिता को बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का अवलोकन किया, उन्हें प्रोत्साहित किया तथा लोगों से संवाद कर सहभागिता और विश्वास को और मजबूत किया।

बाइकर्स को दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री साय ने शांत सरोवर के समीप रायपुर के छत्तीसगढ़ राइडिंग क्लब के 40 बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बाइकर्स समूह नारायणपुर के सुदूर पर्यटन स्थल कच्चापाल तक की यात्रा करेगा। इस पहल के माध्यम से अबूझमाड़ को जानने, समझने और शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शांत सरोवर में नौका विहार

बिजली गाँव के समीप स्थित शांत सरोवर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर महेश कश्यप एवं लघु वनोपज के अध्यक्ष रूपसाय सलाम के साथ नौका विहार का आनंद लिया। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष पहल स्थानीय प्रशासन के द्वारा की गई है। 

तीर-धनुष से साधा लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने बिंजली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीरंदाजी के स्थानीय युवा खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की और स्वयं तीर-धनुष उठाकर लक्ष्य साधते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आदिवासी समाज की पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। शांति, आजीविका और खेलों के विकास में प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन, खेल प्रतिभाओं को मंच देने और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया, सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

टाइम्स बी-स्कूल रैंकिंग 2026 में IIFT को प्रथम स्थान प्राप्त

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नई दिल्ली- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) को टाइम्स बी-स्कूल रैंकिंग 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जिसने इसे प्रबंधन शिक्षा में एक प्रमुख संस्थान के रूप में पुनः स्थापित किया है। IIFT का विशेष फोकस अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक व्यवसाय पर है। यह संस्थान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संस्था है, जिसके दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और GIFT सिटी में कैंपस हैं।

IIFT को शीर्ष स्थान हासिल करने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री,पीयूष गोयल ने बधाई देते हुए इसे संस्थान के छात्रों को कौशल, दृष्टि और महत्वपूर्ण क्षमताओं से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि IIFT भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने और भारत की वैश्विक व्यापार छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए वाणिज्य सचिव और IIFT के कुलाधिपति, राजेश अग्रवाल ने कहा कि संस्थान की प्रगति इसके मजबूत शैक्षणिक आधार, वैश्विक दृष्टिकोण और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि IIFT भारत के वैश्विक व्यापार में प्रमुख भूमिका निभाने के लक्ष्य का समर्थन करता है और विकसित भारत के विज़न में योगदान देता है, जिसमें यह राष्ट्रीय व्यापार, आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप वैश्विक रूप से सक्षम प्रबंधन पेशेवरों का पोषण करता है।

कुलपति, IIFT, प्रो. राकेश मोहन जोशी ने पीयूष गोयल और राजेश अग्रवाल का उनके दृष्टिकोण और स्थायी समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि IIFT अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए अपनी शैक्षणिक सख़्ती, नीति प्रासंगिकता, उद्योग सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय पहुँच को और बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि संस्थान आधुनिक यथार्थों को अपनी शिक्षा, अनुसंधान और संचालन में एकीकृत करके इसे विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

1963 में स्थापित, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन डिम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है। यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यवसाय में प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान करता है, जिसमें MBA, कार्यकारी शिक्षा और डॉक्टोरल शोध शामिल हैं, जो भारत की वैश्विक वाणिज्य और व्यापार नीति में योगदान करते हैं। IIFT के कैंपस दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और GIFT सिटी में स्थित हैं और संस्थान दुबई में अपना पहला ऑफशोर कैंपस शुरू करने की प्रक्रिया में है।


भारत पर्व 2026 में ऐतिहासिक लाल किले पर आंध्र प्रदेश दिवस का उत्सव

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नई दिल्ली-भारत पर्व 2026 के अवसर पर, जो ऐतिहासिक लाल किला में आयोजित किया गया, 30 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला।

भारत पर्व, जिसे पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाता है, एक भव्य राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है। यह मंच एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हस्तशिल्प और विरासत को प्रदर्शित करता है।

आंध्र प्रदेश पवेलियन इस अवसर का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें थीम-आधारित पर्यटन प्रदर्शन, पारंपरिक फूड कोर्ट और अद्भुत हैंडलूम प्रदर्शनी शामिल थे। आगंतुकों ने राज्य की ऐतिहासिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और रचनात्मक उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

आंध्र प्रदेश दिवस का एक प्रमुख आकर्षण कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य का भव्य प्रदर्शन था, जिसमें 46 विशिष्ट कलाकारों ने भाग लिया। इस प्रस्तुति में आंध्र प्रदेश के शास्त्रीय नृत्य की सौम्यता, विलक्षणता और आध्यात्मिक गहराई जीवंत हो उठी। प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और राज्य की गहन सांस्कृतिक धरोहर और शास्त्रीय कला के संरक्षण के प्रति समर्पण को प्रतिबिंबित किया।

भारतीय संस्कृति के प्रशंसक, पर्यटक और उत्सव में शामिल आगंतुक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, कलाकारों को प्रोत्साहित किया और इस राष्ट्रीय मंच पर आंध्र प्रदेश के गौरव में सहभागी बने।

भारत पर्व 2026 में आंध्र प्रदेश दिवस का आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की ताकतवर अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, और इस उत्सव की भूमिका को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में मजबूत किया।



भारत पर्व में IHM रांची की झारखंडी पाक और सांस्कृतिक विरासत ने बिखेरी ग्लोबल छवि

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नई दिल्ली-ऐतिहासिक लाल किला में आयोजित भारत पर्व 2026 में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जीवंत पल देखने को मिला, जब ब्राज़ीलियाई नागरिक ने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM) रांची के स्टॉल का दौरा किया और झारखंड की समृद्ध पाक और सांस्कृतिक विरासत में गहरी रुचि दिखाई।

IHM रांची के छात्रों ने मेहमान का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें झारखंडी व्यंजन, पारंपरिक भोजन प्रथाएँ, देशज सामग्री और राज्य की रंगीन सांस्कृतिक परंपराओं से अवगत कराया। उन्होंने भारत पर्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो पूरे देश की विविध संस्कृतियों, व्यंजनों और परंपराओं को एक मंच पर लाकर "विविधता में एकता" और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

शेफ हरे कृष्ण चौधरी, जो IHM रांची का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने विशेष रूप से झारखंडी भोजन पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारतीय खाद्य परंपराओं के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय व्यंजन स्थानीय भूगोल, जलवायु और जनजातीय विरासत से गहराई से प्रभावित होते हैं और झारखंडी व्यंजन भारत की समृद्ध पाक विविधता का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पर्व जैसे आयोजन सांस्कृतिक और पाक कूटनीति के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

ब्राज़ीलियाई अतिथि ने छात्रों और फैकल्टी की आतिथ्य भावना, ज्ञान और प्रस्तुति की सराहना की, और झारखंडी व्यंजन की सरलता, पोषण और सांस्कृतिक गहराई की प्रशंसा की। यह बातचीत सांस्कृतिक कूटनीति का उत्कृष्ट उदाहरण बनी और भारत पर्व के उद्देश्य को मजबूत किया कि भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाया जाए।

स्किल स्टूडियो गतिविधियों के तहत, शेफ हरे कृष्ण चौधरी ने लाइव कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन में पारंपरिक झारखंडी व्यंजन धुस्का के साथ आलू चना सब्जी प्रस्तुत किया। इस व्यंजन को आगंतुकों और खाद्य प्रेमियों से खूब सराहना मिली। डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से उन्होंने यह दिखाया कि झारखंडी व्यंजन सरल, पौष्टिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं, और कैसे देशज सामग्री एवं पारंपरिक पकाने की तकनीकें सतत और समुदाय-केंद्रित खाद्य प्रथाओं को दर्शाती हैं।

यह प्रस्तुति न केवल झारखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देती है, बल्कि IHM रांची के स्किल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी उजागर करती है। आगंतुकों ने व्यंजन के स्वाद, प्रस्तुति और सांस्कृतिक कहानी कहने के तरीके की तारीफ की, जिससे झारखंडी भोजन भारत पर्व का यादगार आकर्षण बन गया।

भारत पर्व 2026 में IHM रांची की भागीदारी यह पुष्टि करती है कि संस्थान क्षेत्रीय व्यंजनों के संरक्षण और प्रचार के प्रति प्रतिबद्ध है और छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्रदान करता है। स्किल स्टूडियो में शेफ हरे कृष्ण चौधरी की उपस्थिति ने संस्थान की भारत की विविध पाक विरासत को प्रमुख मंचों पर प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।




लक्ष्य ज़ीरो डंपसाइट: स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों के कचरा ढेर खत्म करने की भारत की पहल

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) के माध्यम से “ज़ीरो डंपसाइट” का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • अब तक 61% से अधिक लेगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक रूप से निपटान किया जा चुका है।

  • शेष कचरे के लगभग 80% वाले 214 उच्च-प्रभावी डंपसाइट्स को प्राथमिकता दी गई है।

  • रेमेडिएटेड कचरे का उपयोग सड़क निर्माण, नीचले इलाकों की भराई, रिसाइक्लिंग और RDF (रिफ्यूज़-डिराइव्ड फ्यूल) के रूप में किया जा रहा है।

  • डंपसाइट हटने से स्वच्छ हवा, सुरक्षित भूजल, आग की घटनाओं में कमी और भूमि का पुनः उपयोग संभव होता है।

परिचय

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी कचरा प्रबंधन और स्वच्छता ढांचे को मजबूत किया गया है। इसी क्रम में अब ध्यान वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट डंपसाइट्स को समाप्त करने पर केंद्रित है।

इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने नवंबर 2025 में डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) शुरू किया, जिसका लक्ष्य अक्टूबर 2026 तक “लक्ष्य: ज़ीरो डंपसाइट” हासिल करना है।

लेगेसी डंपसाइट्स: वर्तमान स्थिति

देशभर में लगभग 2,479 डंपसाइट्स चिन्हित की गई हैं, जिनमें करीब 25 करोड़ मीट्रिक टन कचरा जमा है और जो लगभग 15,000 एकड़ भूमि पर फैली हुई हैं।
वर्तमान में 1,428 डंपसाइट्स पर कार्य प्रगति पर है और 62% से अधिक कचरे का निपटान हो चुका है।

साल 2025 में ही 26 राज्यों के 438 शहरों में 459 डंपसाइट्स पूरी तरह रेमेडिएट की गईं।

स्वच्छ भारत से ‘मिशन ज़ीरो’ तक

SBM-Urban 2.0 (2021) के तहत कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया। DRAP इसी का अगला चरण है, जो पुराने कचरा ढेर खत्म करने और नए डंपसाइट बनने से रोकने पर केंद्रित है।

DRAP का 5P फ्रेमवर्क

यह कार्यक्रम 5P मॉडल पर आधारित है:

  1. राजनीतिक नेतृत्व (Political Leadership) – वरिष्ठ नेताओं द्वारा डंपसाइट गोद लेना

  2. सार्वजनिक वित्त (Public Finance) – ₹550 प्रति टन तक केंद्रीय वित्तीय सहायता

  3. साझेदारी (Partnerships) – PSU, उद्योग, सीमेंट प्लांट, NGOs के साथ सहयोग

  4. जनभागीदारी (People’s Participation) – स्थानीय समुदाय और सफाई मित्रों की भागीदारी

  5. परियोजना प्रबंधन (Project Management) – तकनीक आधारित निगरानी और जवाबदेही

डंपसाइट से संसाधन तक: बायोमाइनिंग प्रक्रिया

बायोमाइनिंग के जरिए पुराने कचरे को वैज्ञानिक ढंग से अलग-अलग हिस्सों में बदला जाता है:

  • इनर्ट व मिट्टी जैसे पदार्थ – सड़क व भूमि भराई में उपयोग

  • C&D वेस्ट – ईंट, टाइल, पावर ब्लॉक निर्माण

  • RDF – सीमेंट व ऊर्जा संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में

  • रीसाइक्लेबल्स – प्लास्टिक, कागज़, धातु

  • बायोडिग्रेडेबल कचरा – खाद और ऊर्जा उत्पादन

  • केवल अप्रयोज्य अवशेष वैज्ञानिक लैंडफिल में

SBM-Urban 2.0 के तहत कचरा प्रोसेसिंग ढांचा

  • 2,900 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) कार्यरत

  • 2,800 कम्पोस्ट प्लांट

  • 131 बायोमीथनेशन प्लांट

  • 17 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

आगे की राह: स्वच्छ शहर, स्वस्थ जीवन

2026 तक ज़ीरो डंपसाइट का लक्ष्य न केवल शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाएगा, बल्कि

  • SDG-11 (सतत शहर)

  • SDG-12 (जिम्मेदार उपभोग)

  • SDG-13 (जलवायु कार्रवाई)
    को भी मजबूती देगा।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप स्वच्छ, टिकाऊ और संसाधन-कुशल शहरों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।


सीएआरए ने गुवाहाटी में दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की

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भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने आज (30 जनवरी 2026) गुवाहाटी, असम में "विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना" विषय पर एक क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की।

पूरे दिन चलने वाली परामर्श बैठक में 122 हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (एसएआरए), विशेष गोद लेने एजेंसियां (एसएए), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू), मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य पेशेवर, बाल संरक्षण कार्यकर्ता और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। बड़ी संख्या में भागीदारी ने यह दर्शाया कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए गोद लेने और पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता बढ़ रही है।

कार्यशाला की शुरुआत सीएआरए की पहलों का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए हुई, जिनका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना है, इसके बाद एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया जिसमें विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को सफलतापूर्वक अपनाने की कहानियाँ दिखाई गईं। कार्यक्रम में आगे, प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों ने बच्चों को अपनाने और गैर-संस्थागत देखभाल को सुगम बनाने में वर्तमान चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अपनाये जा रहे अभिनव दृष्टिकोणों पर अपने अनुभव साझा किए।

विशेष विषयों से संबंधित सिफारिशों को सामने लाने के लिए एक समूह चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिनके बारे में जानकारी प्रतिनिधियों को पहले ही प्रदान की गई थीं। विचार-विमर्श निम्नलिखित विषयों से संबंधित थे:

  1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी मूल्यांकन
  2. दत्तक ग्रहण के कानूनी और प्रक्रिया संबंधी पहलू
  3. वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियाँ
  4. शिकायत निवारण और संस्थागत समन्वय

प्रत्येक समूह ने पहचान, प्रमाणीकरण, परामर्श, प्रतिस्थापन और दत्तक ग्रहण के बाद के सहायता तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू करने योग्य सिफारिशें प्रस्तुत कीं। कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण के संबंध में रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। अंतर-क्षेत्रीय समन्वय बढ़ाने, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमताओं का निर्माण करने और दत्तक ग्रहण करने वाले संभावित माता-पिता के बीच जानकारी आधारित निर्णय लेने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

परामर्श बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि दिव्यांग बच्चों को घरेलू स्तर पर गोद लेने को बढ़ावा दिया जाएगा, गैर-संस्थागत देखभाल तंत्र को मजबूत किया जाएगा और दत्तक ग्रहण जागरूकता माह के दौरान जागरूकता प्रयासों को तीव्र करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप विकसित किया जाएगा।

सीएआरए ने अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया कि प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसकी शारीरिक या विकासात्मक चुनौतियाँ कैसी भी हों, एक सुरक्षित, पोषणपूर्ण और स्थायी पारिवारिक वातावरण में पलना-बढ़ना चाहिए और गोद लेना बच्चों के कल्याण, पारदर्शिता और बच्चे के सर्वोत्तम हित के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होना चाहिए।


वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूएमईईडी पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल लॉन्च

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नई दिल्ली- वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनोन्मुखी और जवाबदेह बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) केंद्रीय पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल — सर्वे मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल — को 30 जनवरी 2026 को लॉन्च किया।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

सर्वे मॉड्यूल वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित सूचनाओं के संग्रहण, प्रबंधन और अद्यतन के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है, जिससे पोर्टल पर सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध कराया जा सके।

वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल को वक्फ संपत्तियों से संबंधित लीज प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मॉड्यूल लीज से जुड़ी प्रमुख जानकारियों जैसे लीज अवधि, लीज राशि और अन्य संबंधित विवरणों का सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रिकॉर्ड रखने और निगरानी में सहायता करता है, जिससे जवाबदेही और निगरानी तंत्र और सुदृढ़ होगा।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा डिजिटल गवर्नेंस उपकरणों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से इन मॉड्यूल्स के व्यापक कार्यान्वयन और पात्र लाभार्थियों के बीच इनके प्रति जागरूकता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

UMEED केंद्रीय पोर्टल, जिसका उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 6 जून 2025 को किया गया था, वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों की रीयल-टाइम अपलोडिंग, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।

यह पोर्टल देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए एक व्यापक परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखता है।

पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग सहित डिजिटल इन्वेंट्री, ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी लीज एवं उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस टूल्स के साथ एकीकरण, तथा सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स तक सार्वजनिक पहुंच शामिल है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय देशभर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है।

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा

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नई दिल्ली- भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, सततता और अनुपालन सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नीरजा शेखर, महानिदेशक, NPC तथा उमाशंकर प्रसाद, उप महानिदेशक (ग्रुप) ने किया।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, IICA,ज्ञानेश्वर कुमार सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने गणमान्य अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

अपने संबोधन में डीजी एवं सीईओ, IICA ने उद्योग जगत की बढ़ती और बदलती आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थानों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर प्रासंगिक बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की है और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थानों को व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से योगदान देना आवश्यक है।

दौरे के दौरान IICA के विभिन्न स्कूलों और केंद्रों के प्रमुखों द्वारा संस्थान के दायित्वों एवं गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नीति समर्थन, परामर्श और सलाहकारी सेवाओं में IICA की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया गया, जो सरकारी एवं निजी क्षेत्र दोनों के लिए सहायक है।

इस अवसर पर बातचीत के दौरान नीरजा शेखर, महानिदेशक, NPC ने बताया कि राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की स्थापना 1958 में, स्वतंत्रता के तुरंत बाद की गई थी, जब देश के पास सीमित संसाधन थे और उत्पादकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता थी। उन्होंने जापान गए ऐतिहासिक उत्पादकता प्रतिनिधिमंडल का उल्लेख किया, जिसने भारत में उत्पादकता प्रयासों के संस्थानीकरण की नींव रखी।

उन्होंने बताया कि समय के साथ NPC ने औद्योगिक क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए कृषि, सेवा क्षेत्र, एमएसएमई, सतत विकास, हरित उत्पादकता तथा ईएसजी से जुड़े पहलों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है।

नीरजा शेखर ने यह भी बताया कि NPC का एशियन प्रोडक्टिविटी ऑर्गनाइजेशन (APO) के साथ सक्रिय सहयोग है, जिसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अनुभव, अंतर-देशीय अध्ययन यात्राएं, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और उत्पादकता बेंचमार्किंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दिया जाता है। ये पहल विशेष रूप से एमएसएमई के लिए औद्योगिक तैयारी, संगठनात्मक क्षमता, वित्तीय सुदृढ़ता और विनिर्माण परिपक्वता का आकलन करने में सहायक हैं।

दोनों संस्थानों ने नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श में IICA की विशेषज्ञता तथा कार्यान्वयन-आधारित उत्पादकता अनुभव में NPC की क्षमता को एक साथ जोड़ते हुए सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रबल इच्छा व्यक्त की। इसका उद्देश्य भारत को एक उच्च आय, प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और सतत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करना है।

इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख – स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, IICA द्वारा किया गया।


सीसीआरएएस का आयुष में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इंटर्नशिप कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न

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नई दिल्ली- आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत केन्द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने आयुष में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर आयोजित अपने इंटर्नशिप कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन 30 जनवरी को किया। यह कार्यक्रम 15 दिसंबर से प्रारंभ हुआ था, जिसका उद्देश्य आयुष अनुसंधान में सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित दृष्टिकोण को सशक्त बनाना था।

इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए कुल 180 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से एक सुव्यवस्थित चयन प्रक्रिया के माध्यम से 33 छात्रों का चयन किया गया। चयनित इंटर्न मुख्य रूप से नई दिल्ली और आसपास के इंजीनियरिंग संस्थानों से थे। कार्यक्रम को आयुष प्रणालियों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में AI के व्यावहारिक अनुप्रयोगों का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था।

इंटर्नशिप के दौरान प्रतिभागियों ने औषधीय पादप अनुसंधान, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, प्रकृति मूल्यांकन, मेडिकल इमेजिंग, पोस्टर डिटेक्शन तथा पांडुलिपियों के ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसे विषयों पर AI आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया। ये परियोजनाएं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के डिजिटल प्रलेखन, साक्ष्य सृजन और प्रौद्योगिकी आधारित प्रमाणीकरण के CCRAS के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप थीं।

कार्यक्रम के दौरान एक इंटरएक्टिव और अंतर्विषयक सीखने का वातावरण प्रदान किया गया, जिससे इंटर्न आधुनिक संगणकीय उपकरणों के साथ पारंपरिक आयुष अवधारणाओं को एकीकृत कर सके। विषय विशेषज्ञों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन ने प्रतिभागियों में नवाचार, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक समस्या समाधान की क्षमता को बढ़ावा दिया।

यह इंटर्नशिप कार्यक्रम CCRAS की क्षमता निर्माण, नवाचार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल आयुष अनुसंधान एवं विकास में उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देकर एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहायक होगी।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. राकेश नारायण वी., अधिकारी-प्रभारी (आईटी) के नेतृत्व में नमन् गोयल,  साहिल, डॉ. गगनदीप एवं CCRAS मुख्यालय के आईटी सेल के अन्य तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया गया।

समापन सत्र को प्रो. रवी नारायण आचार्य, महानिदेशक (DG), CCRAS ने संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. एन. श्रीकांत, उप महानिदेशक (DDG), CCRAS, परिषद के वरिष्ठ अधिकारी एवं अनुसंधान अधिकारी उपस्थित रहे। गणमान्य अतिथियों ने इंटर्न्स के प्रयासों की सराहना करते हुए आयुष प्रणालियों में उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर बल दिया।

प्रो. आचार्य ने आयुष क्षेत्र को आगे बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया और बताया कि इंटर्नशिप के दौरान विकसित अनुप्रयोगों को संरचित परियोजना मोड में सत्यापन और विस्तार के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए।


महासमुंद में पूर्ण पारदर्शिता के साथ धान खरीदी सम्पन्न, प्रदेश में सर्वाधिक

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 महासमुंद : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी के अंतिम दिन भी खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता एवं सुव्यवस्थित ढंग से हुआ। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में सतत निगरानी, नियमित निरीक्षण, समन्वय एवं सक्रियता के साथ जिले में धान खरीदी किया गया।


31 जनवरी की स्थिति में महासमुंद जिले में 182 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से एक लाख 48 हजार 418 किसानों से कुल 10 लाख 187 मीट्रिक टन धान की खरीदी किया गया। जो कि प्रदेश में सर्वाधिक है। जिसमें मोटा धान 8 लाख 17 हजार 29 मीट्रिक टन, पतला 32.80 मीट्रिक टन एवं सरना एक लाख 83 हजार 125 मीट्रिक टन शामिल है। अब तक कुल 5 लाख 18 हजार 507 मीट्रिक टन धान का डी.ओ. जारी हो चुका है। हैं। जिसके विरूद्ध जिले में कुल 333 मिलों के माध्यम से 2 लाख 97 हजार 449 मीट्रिक टन धान का उठाव कर लिया गया है।

नक्सल हमले में घायल DRG जवानों से अस्पताल में मिले उपमुख्यमंत्री

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 रायपुर : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा शनिवार रायपुर के एक निजी अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए आईईडी ब्लास्ट में घायल पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की स्थिति की जानकारी ली तथा जवानों के परिजनों से भी चर्चा की।


उपमुख्यमंत्री शर्मा ने घायल जवानों से घटना की जानकारी ली और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि शासन एवं प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने अस्पताल में उपस्थित अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देश दिए कि जवानों के बेहतर एवं समुचित उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ।


उन्होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान में तैनात हमारे जवान अत्यंत साहस और समर्पण के साथ देश-प्रदेश की सुरक्षा में लगे हैं, और उनका त्याग अतुलनीय है।


ज्ञात हो कि बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में 25 जनवरी को एक के बाद एक कुल छह आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट हुए थे। इन विस्फोटों की चपेट में आने से डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 12 जवान घायल हो गए थे। यह घटना उस समय हुई, जब सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम तेलंगाना सीमा से लगे कर्रेगुट्टा हिल्स क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। घटना के बाद सभी घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया, जहाँ उनका उपचार एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। इनमें से 6 जवानों को उपचार उपरांत स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि शेष जवानों की स्थिति में भी लगातार सुधार हो रहा है।

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