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नारायणपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों का हथियार और विस्फोटक डंप बरामद

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 नारायणपुर। जिले के अदनार क्षेत्र में पुलिस और BSF की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जंगल में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का डंप बरामद किया है।


सुरक्षा बलों ने मौके से 10 राइफल, 2 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, 13 जिंदा BGL शेल, 16 कारतूस और करीब 2 किलो विस्फोटक पदार्थ बरामद किया है। बरामद सामग्री को सुरक्षा मानकों के तहत जब्त कर लिया गया है।

29 अगस्त को चलाया गया सर्च अभियान

पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त को अदनार क्षेत्र के जंगलों में सर्चिंग और एरिया डॉमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस और 129वीं वाहिनी BSF की संयुक्त टीम ग्राम अदनार के उत्तर-पश्चिम दिशा में जंगल की तलाशी ले रही थी।

सर्चिंग के दौरान जवानों को एक स्थान पर कुछ संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिले। इलाके की बारीकी से तलाशी लेने पर वहां नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखा गया हथियार और विस्फोटक सामग्री का डंप मिला।

ये हथियार और सामग्री हुई बरामद

303 राइफल – 1
315 राइफल – 4
12 बोर राइफल – 5
बैरल ग्रेनेड लॉन्चर – 2
टेलिस्कोपिक साइट – 1
जिंदा BGL शेल – 13
12 बोर कारतूस – 16
विस्फोटक पदार्थ – करीब 2 किलो
पुराने नक्सली डंप की तलाश जारी

सुरक्षा बलों के अनुसार, बरामद हथियार और अन्य सामग्री नक्सलियों ने पहले किसी स्थान पर छिपाकर रखी थी। सर्चिंग के दौरान डंप का पता चलने के बाद सभी सामग्री को सुरक्षित तरीके से जब्त किया गया।

पुलिस के मुताबिक, नारायणपुर जिले में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए लगातार अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में एरिया डॉमिनेशन एवं सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य जंगलों में पहले से छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य नक्सली संसाधनों को खोजकर निष्क्रिय करना है।

बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री के संबंध में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अभियान के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल–तिब्बत में कुदरत का कहर: ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़, 900+ मौतें और हजारों लापता

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26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन (तिब्बत) सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और पत्थर नीचे की ओर तेजी से बह निकले।

इससे नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बेहद तेज बाढ़ आ गई। पानी के साथ आया मलबा इतना शक्तिशाली था कि घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं के हिस्से तक बह गए। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ हुआ?

नेपाल में रसुवा, नुवाकोट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। चीन की तरफ तिब्बत के Gyirong County और सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

त्रिशूली नदी के आसपास कई Hydropower Projects स्थित हैं। बाढ़ और मलबा इन परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंच गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अंदर फंस गए या लापता हो गए। 

कितनी बड़ी है तबाही?

31 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में आधिकारिक रूप से 794 मौतों की पुष्टि हुई है और 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। =

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,700 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं। इसका कारण अलग-अलग समय पर जारी किए गए अपडेट और अलग-अलग सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल है। इसलिए अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं माना जा सकता। 

अभी सबसे बड़ी चिंता:

  • हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
  • इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
  • कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
  • खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर और जमीन से बचाव अभियान कई बार बाधित हुआ है। 

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

इस हादसे का सबसे मुश्किल हिस्सा Hydropower Project की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना है।

बाढ़ का पानी, कीचड़ और पत्थर सुरंगों के रास्तों में भर गए हैं। कई स्थानों पर बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सुरंगों से लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर सुरंग में पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 

नेपाल की ओर से सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है।

भारत की भूमिका क्या है?

भारत ने नेपाल के बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहायता कर रही है। चीन ने भी अपनी विशेष Tunnel Rescue Team भेजी है।

इसके अलावा भारत की नदियों में भी कुछ शव मिलने की सूचना मिली है, जिनके नेपाल की बाढ़ में बहकर आने की आशंका जताई गई है।

एक और खतरा: नई झील बन गई

बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता कुछ जगहों पर बंद हो गया और पानी जमा होकर नई झील जैसी स्थिति बन गई।

ऐसी स्थिति में यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो उसके पीछे जमा पानी एक और अचानक बाढ़ की लहर पैदा कर सकता है।

इसी वजह से कुछ इलाकों में बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। 

खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी समस्या बन रहा है।

कई जगहों पर:

  • हेलीकॉप्टर उड़ाना मुश्किल

  • सड़कें और पुल टूटे

  • मोबाइल/संचार व्यवस्था प्रभावित

  • कीचड़ और मलबे से रास्ते बंद

  • नदी का जलस्तर तेजी से बदल रहा है

  • सुरंगों में प्रवेश बेहद जोखिमपूर्ण है

इस कारण बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियरों की अस्थिरता और बढ़ते तापमान को इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा है।

हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि इस विशेष घटना के सटीक वैज्ञानिक कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

विदेशी नागरिक भी लापता

इस हादसे में कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है।

तिब्बत की तरफ अधिकारियों ने 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें नेपाल और भारत के नागरिकों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। 

नेपाल में भी कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क में नहीं होने की खबरें आई हैं।

बचाव अभियान में कौन-कौन लगा है?

बचाव अभियान में मुख्य रूप से:

  • नेपाल सेना और सुरक्षा बल
  • चीन की रेस्क्यू टीमें
  • भारत की विशेषज्ञ टीम
  • अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां और रेड क्रॉस

शामिल हैं।

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक खोज एवं राहत अभियान में लगे हैं। चीन ने भी बड़ी संख्या में बचावकर्मियों, ड्रोन, उपकरण और राहत सामग्री को लगाया है।

आर्थिक नुकसान कितना?

तबाही इतनी व्यापक है कि नेपाल को कई अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

घर, सड़क, पुल, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ आकलनों में नुकसान को नेपाल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के बराबर बताया गया है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है। 

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता है:

1. जीवित लोगों को ढूंढना
2. सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना
3. लापता लोगों की पहचान करना
4. शवों को बरामद कर पहचान कराना
5. प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा देना
6. नए भूस्खलन और बाढ़ से लोगों को बचाना
7. क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था को बहाल करना

सबसे महत्वपूर्ण बात

यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं थी। ग्लेशियर/चट्टान के टूटने से पानी और मलबे की अचानक आई बेहद शक्तिशाली लहर ने कुछ ही समय में हिमालयी घाटियों और नदी किनारे के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।

और सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतकों की संख्या से भी कहीं ज्यादा लोग अभी लापता हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बचाव अभियान अभी जारी है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है क्योंकि नेपाल और चीन की एजेंसियां अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट कर रही हैं। ऊपर मैंने 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों और इस अंतर को ध्यान में रखकर जानकारी दी है।

चलती स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप! ड्राइवर-कंडक्टर ने सुनसान सफर में की दरिंदगी, दोनों गिरफ्तार

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 नई दिल्ली। दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके से नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि नोएडा जाने के लिए बस में बैठी 16 वर्षीय छात्रा को ड्राइवर और कंडक्टर ने अपना शिकार बनाया। वारदात के बाद दोनों आरोपी छात्रा को सड़क किनारे उतारकर फरार हो गए।


पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस भी जब्त कर ली गई है।

बारिश और अंधेरे में बस में बैठी थी छात्रा

पुलिस के मुताबिक, छात्रा अपने परिवार से नाराज होकर घर से निकली थी और नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने रिश्तेदार के पास जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह रास्ते में परी चौक के पास उतर गई।

इसी दौरान उसे एक स्लीपर बस दिखाई दी। छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया। बस में उस समय ड्राइवर और कंडक्टर के अलावा कोई यात्री नहीं था। आरोप है कि दोनों ने छात्रा से कहा कि वे नोएडा सेक्टर-63 की ओर जा रहे हैं और उसे बस में बैठा लिया।

स्लीपर बस के पर्दों के पीछे वारदात

आरोप है कि बस में बैठाने के बाद दोनों ने छात्रा के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं और बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। स्लीपर बस में लगे पर्दों के कारण बाहर से किसी को वारदात की जानकारी नहीं हो सकी।

घटना के बाद आरोपी छात्रा को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतारकर फरार हो गए।

थाने पहुंचकर बताई पूरी आपबीती

घटना के बाद छात्रा कश्मीरी गेट थाने पहुंची और पुलिस को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को तिमारपुर इलाके की बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बस को भी कब्जे में ले लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

ICC का बड़ा फैसला: श्रीलंका से छीनी गई महिला चैंपियंस ट्रॉफी-2027 की मेजबानी, भारत को मिल सकता है मौका

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 नई दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने श्रीलंका को बड़ा झटका देते हुए महिला चैंपियंस ट्रॉफी-2027 की मेजबानी वापस ले ली है। यह टूर्नामेंट पहली बार आयोजित होने जा रहा है और इसकी मेजबानी पहले श्रीलंका को सौंपी गई थी। हालांकि, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड और सरकार के बीच जारी विवाद तथा क्रिकेट प्रशासन में कथित सरकारी दखल के चलते आईसीसी ने यह फैसला लिया है।


महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 14 से 18 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है। टूर्नामेंट में छह टीमें हिस्सा लेंगी। हालांकि, श्रीलंका से मेजबानी वापस लिए जाने के बाद अब यह टूर्नामेंट किस देश में आयोजित होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

सरकारी दखल बना वजह

ESPNcricinfo की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड में लंबे समय से जारी सरकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप आईसीसी के लिए चिंता का विषय रहा है। आईसीसी के नियमों के मुताबिक सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड को सरकार के हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करना होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी ने श्रीलंका को क्रिकेट प्रशासन में आवश्यक सुधार करने के लिए कई बार कहा था। अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद आईसीसी ने मेजबानी वापस लेने का फैसला किया।

अक्टूबर में नए मेजबान का ऐलान संभव

श्रीलंका क्रिकेट के अधिकारी प्रकाश शैफ्टर ने भी पुष्टि की है कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी अब श्रीलंका में आयोजित नहीं होगी। हालांकि, टूर्नामेंट के नए आयोजन स्थल को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

आईसीसी की अक्टूबर में होने वाली बोर्ड बैठक में नए मेजबान देश की घोषणा किए जाने की संभावना है। इस टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए भारत का नाम भी संभावित दावेदारों में बताया जा रहा है।

श्रीलंका की टीम के सामने भी क्वालीफिकेशन का संकट

महिला चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबान देश के अलावा निर्धारित मानदंडों के अनुसार शीर्ष रैंकिंग वाली टीमों को जगह मिलने की बात कही गई है। श्रीलंका की महिला टीम फिलहाल आईसीसी रैंकिंग में छठे स्थान पर है।

ऐसे में मेजबानी गंवाने के बाद टीम के सीधे क्वालीफाई करने को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, अंतिम क्वालीफिकेशन व्यवस्था और टीमों की सूची आईसीसी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

तीन साल में दूसरी बार छीनी गई मेजबानी

श्रीलंका से तीन साल के भीतर दूसरी बार किसी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी वापस ली गई है। इससे पहले 2023 में श्रीलंका से 2024 पुरुष अंडर-19 विश्व कप की मेजबानी भी वापस लेकर दक्षिण अफ्रीका को सौंप दी गई थी। उस समय भी क्रिकेट प्रशासन में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर आईसीसी और श्रीलंका के बीच विवाद सामने आया था।

विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026: छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा 10 श्रेणियों में सम्मान, जानें कैसे कर सकते है आवेदन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों, संस्थाओं एवं व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार योजना के तहत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े होटल, पंजीकृत टूर ऑपरेटर, जिले, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, पर्यटक सूचना केंद्र, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म साइट और एडवेंचर टूरिज्म संचालकों को सम्मानित किया जाएगा।


इस वर्ष पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जाएंगे। प्रत्येक श्रेणी के विजेता को 11 हजार रुपए की पुरस्कार राशि और मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

इन 10 श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

  1. सर्वश्रेष्ठ होटल
  2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर
  3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड
  4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार
  5. CTB Star Performer- सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट
  6. CTB Star Performer- सर्वश्रेष्ठ पर्यटक सूचना केंद्र
  7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे
  8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
  9. सर्वश्रेष्ठ इको-टूरिज्म साइट अवॉर्ड
  10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड

उत्कृष्ट सेवाओं और नवाचार को मिलेगा सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होटल का चयन आतिथ्य सेवाओं, सुविधाओं, वित्तीय प्रदर्शन, वार्षिक कारोबार, आयोजित कार्यक्रमों, पर्यटन प्रचार, CSR गतिविधियों और रोजगार सृजन जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा। वहीं पंजीकृत टूर ऑपरेटरों के लिए पर्यटन पैकेज, परिवहन, आवास, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग को मूल्यांकन का आधार बनाया जाएगा।

पर्यटन विकास में बेहतर काम करने वाले जिले होंगे सम्मानित

सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड के लिए उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पर्यटन स्थलों के विकास, गंतव्य प्रबंधन और घरेलू व विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहतर कार्य किया है। स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, हरित उपाय, स्थानीय संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली, प्रकृति आधारित गतिविधियों और पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन जैसे पहलुओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।

स्टार्टअप और होमस्टे को भी मिलेगा मंच

पर्यटन क्षेत्र में नए विचारों, तकनीक और व्यावसायिक मॉडल के जरिए नवाचार करने वाले स्टार्टअप एवं उद्यमियों को पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार दिया जाएगा। इसी तरह सर्वश्रेष्ठ होमस्टे के चयन में बुकिंग, राजस्व, पर्यटकों की संख्या, सुविधाओं, ग्राहक समीक्षा और स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने के प्रयासों को महत्व दिया जाएगा।

डिजिटल प्रचार और इको-टूरिज्म पर जोर

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेणी में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

वहीं इको-टूरिज्म श्रेणी में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। एडवेंचर टूरिज्म श्रेणी में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों के सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन तथा नए पर्यटन अनुभव विकसित करने वाले संचालकों का चयन किया जाएगा।

15 सितंबर तक भेज सकते हैं आवेदन

इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं और पात्र पर्यटन हितधारक अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।

प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित पात्रता एवं मानदंडों के आधार पर संबंधित निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा। पुरस्कारों का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नवाचार, बेहतर सेवाओं, सतत पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना है।

अब धमाकों की नहीं, रेडियो की गूंज

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दूरस्थ वनांचल छिंदनार के लोगों ने सुनी प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’

ग्रामीणों ने उत्साह से सुना प्रधानमंत्री का संदेश, मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद

रायपुर- नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बदलते बस्तर की नई तस्वीर रोज सामने आ रही है। आज दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में भी एक नया नजारा देखने को मिला। पूरे देश के साथ वहां के लोगों ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। छिंदनारवासियों के लिए यह पहला मौका था, जब पूरा गांव प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटा था। प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुनने को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह था। उन्होंने बेहद तल्लीनता से प्रधानमंत्री की बातें सुनीं। 

छिंदनार में आज बिलकुल अलग तरह का माहौल था। प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ को लेकर लोग खासे उत्साहित थे। गांव के कई लोगों ने आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुना। वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा के विधायक चैतराम अटामी ने भी ग्रामीणों के साथ ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। बस्तर के दूरस्थ वनांचल में आज एक नई तस्वीर दिख रही थी। कुछ महीनों पहले तक रोज धमाकों की आवाज के बीच दहशत में जीने वाले छिंदनार के लोग आज चैन से रेडियो सुन रहे थे।  

‘मन की बात’ सुनने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम देश को एक सूत्र में बांधता है। इसके माध्यम से वे देश के विभिन्न भागों में बदलाव लाने वाले सकारात्मक कार्यों और नवाचारों को पूरे देश के सामने रखते हैं। इससे अन्य लोग भी अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम समाज और देश के विकास के लिए जनभागीदारी की भावना को बढ़ाता है। यह कार्यक्रम नागरिकों की नई सोच, नई पहलों, अनूठी कोशिशों और नवाचारों से पूरे देश को वाकिफ कराता है और उसे पहचान दिलाता है। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से लोगों को छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की संस्कृति, विरासत और सकारात्मक कार्यों की जानकारी मिलती है।

छिंदनार में ‘मन की बात’ के लिए लोगों का जुटना बस्तर में तेजी से आ रहे बदलावों की झलक मात्र है। पूरे बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के साथ ही सड़कों, मोबाइल कनेक्टीविटी, स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य बुनियादी जरूरतों की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक पहुंचकर नक्सलवाद के कारण दशकों तक ठप्प पड़े विकास कार्यों, बुनियादी जरूरतों और नागरिक सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है।


छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’, 10 श्रेणियों में होगा सम्मान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटन क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले उद्यमियों, संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार दूसरे वर्ष ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान करने जा रहा है। इस बार पर्यटन क्षेत्र की पूरी श्रृंखला को ध्यान में रखते हुए 10 अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।

प्रत्येक श्रेणी में एक विजेता का चयन किया जाएगा। विजेताओं को ₹11 हजार की पुरस्कार राशि और मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

इन 10 श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने पर्यटन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को पुरस्कार योजना में शामिल किया है। इनमें—

  1. सर्वश्रेष्ठ होटल

  2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर

  3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड

  4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार

  5. CTB Star Performer – सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट

  6. CTB Star Performer – पर्यटक सूचना केंद्र

  7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे

  8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर

  9. सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड

  10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड शामिल हैं।

पर्यटन के साथ पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी फोकस

इस पुरस्कार की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ पर्यटन स्थलों या होटल कारोबार को ही नहीं, बल्कि होमस्टे, डिजिटल प्रचार, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, पर्यटन स्टार्टअप और जिला स्तर पर पर्यटन विकास जैसे क्षेत्रों को भी सम्मान के दायरे में रखा गया है।

इको-टूरिज्म श्रेणी में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने वाली पहलों को भी महत्व मिलेगा।

सोशल मीडिया के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन की ब्रांडिंग करने वालों को भी मौका

सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की श्रेणी भी रखी गई है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आधारित रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और वन्यजीवों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

होमस्टे से गांवों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वालों का सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होमस्टे श्रेणी में बुकिंग, घरेलू पर्यटकों की संख्या, राजस्व और वार्षिक वृद्धि के साथ पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर पैदा करने वाले होमस्टे को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।

एडवेंचर टूरिज्म को भी मिलेगा प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का संचालन करने वाले श्रेष्ठ संचालक को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड दिया जाएगा। इसमें पर्यटकों की संख्या, गंतव्य प्रबंधन, राजस्व, नए एडवेंचर प्रोडक्ट और पर्यटकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराने जैसे मानकों को देखा जाएगा।

15 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पात्र व्यक्ति, संस्थाएं और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक अपनी प्रविष्टियां 15 सितंबर 2026 तक ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं। प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित पात्रता और मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर राज्य पर्यटन विभाग/निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा।

पर्यटन को नई पहचान देने की पहल

‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ के जरिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार, सतत पर्यटन, बेहतर सेवाओं, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इससे राज्य के पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारकों को अपने काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा।

जोक नदी के पुराने पुल पर कार-बाइक में भीषण टक्कर, एक की मौत; बाइक सवार युवक लापता

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 पिथौरा/महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सांकरा थाना क्षेत्र में जोक नदी के पुराने पुल पर कार और बाइक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद दोनों वाहन पुल से नीचे नदी में जा गिरे। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि बाइक सवार युवक गहरे पानी में लापता बताया जा रहा है। उसकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।


कार में सवार थे चार लोग

जानकारी के मुताबिक, रविवार को कार में चार लोग सवार होकर जोक नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान पुराने पुल पर सामने से आ रही बाइक से कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन पुल से नीचे नदी में जा गिरे।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल राहत-बचाव का प्रयास शुरू किया। स्थानीय लोगों ने कार में सवार तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई।

बाइक सवार युवक की तलाश जारी

हादसे के दौरान बाइक सवार युवक नदी के गहरे पानी में जा गिरा और लापता हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सांकरा पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। लापता युवक की तलाश के लिए रेस्क्यू टीम द्वारा नदी में अभियान चलाया जा रहा है।

घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल लापता युवक की तलाश जारी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

विष्णु भैया की पहल से बदली तस्वीर, तालाब बना महिलाओं की तरक्की का आधार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।


जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। शासकीय तालाबों के दीर्घकालीन पट्टे, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं की मेहनत ने मछली पालन को उनके लिए आय का मजबूत जरिया बना दिया है।

भभरी में तालाब बना समृद्धि का माध्यम

जशपुर जिले के विकासखंड मनोरा के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से ग्राम पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली पालन कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और विभागीय मार्गदर्शन से मछली पालन को सफल आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया है।

समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इस आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।

सिमड़ा की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं। समूह ने संगठित प्रयासों और निरंतर मेहनत से इस गतिविधि को आय के प्रभावी साधन में बदल दिया है।

समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई हैं।

शासकीय योजनाओं ने खोले आत्मनिर्भरता के नए रास्ते

महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। मछली पालन से प्राप्त आय ने महिलाओं को परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले आय के सीमित साधनों के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। मछली पालन शुरू करने के बाद नियमित आय का माध्यम मिला और अब वे स्वयं अपनी आजीविका गतिविधियों का संचालन करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी लाभ, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज इन समूहों की महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योगदान दे रही हैं।

नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर :  जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो उसके साथ परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला एवं संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नारी शक्ति सम्मान समारोह पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।


सम्मानित महिलाएं हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सम्मानित महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं का सम्मान वास्तव में उस नारी शक्ति का सम्मान है, जो परिवार को संस्कार देती है, समाज को दिशा देती है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, सिया-राम और राधा-कृष्ण जैसे संबोधन हमारी उस सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं, जिसमें नारी को शक्ति, करुणा, सृजन और संस्कार का आधार माना गया है। राज्य सरकार इसी भावना को योजनाओं और नीतियों के माध्यम से धरातल पर उतार रही है।

महिला आयोग न्याय के साथ जागरूकता का भी बने सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी मिली है। उनका सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का अनुभव, कानून की समझ और उच्च शिक्षा इस दायित्व के निर्वहन में उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ममता साहू के नेतृत्व में राज्य महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और पीड़ित महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आयोग गांवों, कस्बों, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे तथा महिलाओं को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करे। महिलाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि किसी भी कठिन परिस्थिति में शासन और उसकी संस्थाएं संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को मिले नए अवसर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को नई पहचान, सम्मान और आगे बढ़ने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आसीन होना पूरे देश की नारी शक्ति के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि विकसित भारत की यात्रा महिलाओं के नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी संकल्प के साथ प्रदेश की मातृशक्ति को विकास की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से जोड़ रही है।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन उनके सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। गांवों की महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बहनों के खातों में सहायता राशि समय से पहले अंतरित की। प्रदेश की माताओं-बहनों की खुशियां और उनकी आवश्यकताएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

13.85 लाख से अधिक लखपति दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, कृषि एवं वनोपज आधारित गतिविधियों, लघु उद्योग और स्वरोजगार के साथ महिलाएं अब ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।

प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन का प्रमाण है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

‘महतारी गौरव वर्ष’ मातृशक्ति के योगदान को समर्पित

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के साथ उनके लिए नए अवसरों के सृजन का भी वर्ष है।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत प्रदेश में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, ताकि बेटियों को विद्यालयों में बेहतर और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान तीन महतारी सदनों का लोकार्पण भी किया गया है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

महिलाओं के नाम संपत्ति से मजबूत हो रहा आर्थिक आधार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक अधिकार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उनके नाम पर संपत्ति पंजीयन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति होने से उनका आर्थिक आधार मजबूत होता है तथा परिवार में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दी जा रही रियायतों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन महिलाओं के नाम पर हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए समाज की सोच और व्यवस्था दोनों में सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है। हमारी बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले, युवतियों को रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलें, महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान मिले तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित न्याय मिले - सरकार इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है और जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो पूरा परिवार आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि महिला आयोग पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनके उत्थान के लिए प्रभावी कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है। नारी के सम्मान और सशक्तिकरण के बिना समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करें। आज यह सुखद अवसर है कि महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के पिता श्री कृपाराम साहू भी अपनी पुत्री को महत्वपूर्ण दायित्व संभालते हुए देख रहे हैं।उन्होंने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों के सशक्तिकरण और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना न परिवार की प्रगति संभव है और न ही समाज एवं राष्ट्र का समग्र विकास। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भी सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। यह प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की दिशा में आयोग की लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को नई मजबूती दी है।

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक  मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के अध्यक्षगण, संतजन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाएं उपस्थित थीं।

‘मन की बात’ देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों और प्रेरक प्रयासों को देती है राष्ट्रीय पहचान : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी का श्रवण किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का देश के 140 करोड़ नागरिकों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे नवाचारों, प्रेरक प्रयासों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले लोगों की उपलब्धियों को पूरे देश के सामने रखते हैं।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि देशवासियों को प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम की प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इसमें ऐसे अनेक विषयों और व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हैं, जिनके बारे में सामान्यतः देश के लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती। इससे जहां अच्छे कार्य करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ता है, वहीं उनके प्रयास लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के दूरस्थ गांवों और छोटे-छोटे क्षेत्रों में अनेक लोग बिना किसी प्रचार और स्वार्थ के समाज तथा राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, कोई स्वच्छता के लिए कार्य कर रहा है, तो कोई स्थानीय संसाधनों के माध्यम से नवाचार कर अपने क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे सामान्य लोगों के असाधारण कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देते हैं। इससे देश में सकारात्मकता और जनभागीदारी की भावना मजबूत होती है तथा दूसरे लोगों को भी कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज ‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखना परिवार, समाज और राष्ट्र सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज को झेलने पड़ते हैं। स्वस्थ, समर्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नशामुक्ति के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने और युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

‘हर घर तिरंगा’ में दिखा देशवासियों का राष्ट्रप्रेम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति देशवासियों के अभूतपूर्व उत्साह का भी उल्लेख किया। अभियान के अंतर्गत 8 करोड़ से अधिक देशवासियों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड की। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के प्रति देशवासियों के सम्मान, गौरव और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ आज जन-जन का अभियान बन चुका है। ऐसे अभियान राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के साथ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका और कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं।

पीएम स्वनिधि से मातृशक्ति को मिल रही आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की भी चर्चा की। रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को योजना के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई गति दे रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को मजबूत बनाती है, बल्कि समाज और देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

स्वच्छता केवल अभियान नहीं, जन-जन का संकल्प बने

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। स्वच्छता में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब यह केवल सरकारी अभियान न रहकर प्रत्येक नागरिक की आदत और जिम्मेदारी बने।

उन्होंने कहा कि जब किसी गांव, शहर अथवा क्षेत्र के लोग स्वयं अपने परिवेश को स्वच्छ रखने का संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस स्थान की पहचान और वहां के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

अंतरिक्ष विज्ञान में बेटियों की उड़ान, छत्तीसगढ़ की महिमा राजपूत पर गर्व

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज भारत की बेटियां अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। उनकी आकांक्षाओं की उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ में मिशन शक्ति सैट जैसे प्रेरक प्रयास का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को समझने, सीखने और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रदेश की महिमा राजपूत भी इस महत्वपूर्ण मुहिम का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने महिमा राजपूत को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां प्रदेश की दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेश के लिए गौरव

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की विभिन्न कड़ियों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर छत्तीसगढ़ और यहां के उल्लेखनीय प्रयासों का उल्लेख किया है। बस्तर ओलंपिक से लेकर मल्हार में मिले प्राचीन ताम्रपत्रों और काले हिरण के संरक्षण तक, छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं और उपलब्धियों को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने रखा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के नवाचारों, संस्कृति, विरासत और सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात है। इससे छत्तीसगढ़ के अच्छे कार्यों को देशभर में पहचान मिलने के साथ प्रदेश के लोगों का उत्साह भी बढ़ता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों को एक सूत्र में जोड़ती है। यह कार्यक्रम नागरिकों को स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, नवाचार, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों के लिए प्रेरित करने के साथ जनभागीदारी की भावना को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह सतत संवाद देशवासियों में कर्तव्यबोध जगाकर विकसित भारत के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू एवं  पुरंदर मिश्रा, संतजन, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

रंग-तरंग में सजेगा छत्तीसगढ़ का लोक-संगीत, संस्कृति और आधुनिक सुरों का संगम

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1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर होगा भव्य आयोजन, पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ दिखेगा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का रंग

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘रंग तरंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 1, 2 एवं 3 सितंबर 2026 को प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा।

‘रंग तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने-सुनने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें समकालीन संगीत के साथ जोड़कर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।

लोक वाद्यों की गूंज के साथ सजेगी संगीत की महफिल

‘रंग तरंग’ को संस्कृति, रंगों और सुरों का फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को सांस्कृतिक विरासत का नया अनुभव प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया मंच

तीन दिवसीय इस आयोजन के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही आम लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग तरंग’ में लोक और आधुनिकता का यह मेल दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर भी बनेगा।

तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और प्रदेश की कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। ‘रंग तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक ही मंच पर लाकर संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की पहल है।

लखनऊ कैंट में 100 करोड़ से अधिक के 14 विकास कार्यों का भूमि पूजन, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ रहे मौजूद

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लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 30 अगस्त 2026 को लखनऊ कैंट में 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन किया। इनमें दो परियोजनाएं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से संयुक्त रूप से लागू की जाएंगी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य लखनऊ कैंट क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, स्वच्छता, जलापूर्ति और शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक और बेहतर बनाना है।

कैंट में शुरू होंगी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं

भूमि पूजन किए गए प्रमुख विकास कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, आधुनिक शवदाह गृह और 1500 KL क्षमता वाला भूमिगत जलाशय शामिल हैं।

इसके साथ ही पुरानी और जर्जर जलापूर्ति पाइपलाइनों को बदलने तथा SCADA ऑटोमेशन से लैस 8 नए ट्यूबवेल बनाने की योजना है। पानी की बेहतर आपूर्ति के लिए SCADA प्रणाली वाले ओवरहेड टैंक भी बनाए जाएंगे।

जलापूर्ति व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूप

लखनऊ कैंट में पानी की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने और अनुपयोगी पाइपलाइन नेटवर्क को बदला जाएगा। इसके साथ ही नए ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंकों को आधुनिक SCADA ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

इससे जलापूर्ति की निगरानी और संचालन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। 1500 किलोलीटर क्षमता वाला भूमिगत जलाशय भी जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर विशेष जोर

कैंट क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए AI आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से हटाने और उसका निस्तारण करने के लिए Legacy Waste Bio-Mining एवं Bio-Remediation परियोजना भी शुरू की जाएगी।

इन पहलों से क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

युवाओं के लिए मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए उपयुक्त वातावरण देना है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल बड़े प्रोजेक्ट और आधुनिक इमारतें बनाना नहीं है। इसका अर्थ यह भी है कि युवाओं को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें।

शिक्षा के क्षेत्र में भी होंगे बड़े काम

लखनऊ कैंट में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी कई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं।

दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा RA बाजार माध्यमिक विद्यालय और Rainbow Model School में अतिरिक्त कक्षाओं और शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

स्वास्थ्य सुविधाओं को भी मिलेगा विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से लागू होने वाली दो प्रमुख परियोजनाओं में RA बाजार सिटी पॉलीक्लिनिक और मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर शामिल हैं।

सिटी पॉलीक्लिनिक के माध्यम से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा, जबकि अभ्युदय कोचिंग सेंटर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहायता प्रदान करेगा।

मल्टी-लेवल रोबोटिक पार्किंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

लखनऊ कैंट में बढ़ती पार्किंग जरूरतों को देखते हुए मल्टी-लेवल रोबोटिक कार पार्किंग एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा।

आधुनिक पार्किंग व्यवस्था से सीमित शहरी क्षेत्र में पार्किंग क्षमता बढ़ाने और यातायात प्रबंधन को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विकास का लक्ष्य—लोगों के जीवन में सीधा बदलाव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ कैंट का विकास सीधे तौर पर लखनऊ के विकास से जुड़ा हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वित प्रयासों से विकास और सुशासन की गति को तेज किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ सिर्फ भव्य परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं हैं। इसका मतलब है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचे, युवाओं को खेल और प्रतिभा प्रदर्शन के अवसर मिलें और दिव्यांग बच्चों को कभी यह महसूस न हो कि समाज उन्हें पीछे छोड़ रहा है।

ब्रिटिश दौर से जुड़े कई बाजारों के बदले नाम

राजनाथ सिंह ने लखनऊ कैंट में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल से जुड़े नामों को हटाकर स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम दिए गए हैं।

Royal Artillery Bazar का नाम Ekta Bazar, British Cavalry Bazar का नाम Uda Devi Bazar, British Infantry Bazar का नाम Matadin Valmiki Bazar और एक अन्य British Infantry Bazar का नाम Mangal Pandey Bazar रखा गया है।

वहीं Kanedy Market का नाम बदलकर Atal Bihari Vajpayee Market किया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भारत की विरासत और स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ना तथा उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना है।

‘मन की बात’ भी सुनी, करीब 4 हजार लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 4,000 लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम भी सुना।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री असीम अरुण, सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, लखनऊ की मेयर सुषमा खारवाल, रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता, HAL के CMD रवि के, BEL के CMD मनोज जैन सहित रक्षा बलों, केंद्र एवं राज्य सरकार और लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

एक नजर में प्रमुख परियोजनाएं

  • AI आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट

  • मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

  • आधुनिक शवदाह गृह

  • 1500 KL भूमिगत जलाशय

  • पुरानी जलापूर्ति पाइपलाइनों का प्रतिस्थापन

  • SCADA ऑटोमेशन के साथ 8 नए ट्यूबवेल

  • SCADA आधारित ओवरहेड टैंक

  • दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय

  • RA बाजार माध्यमिक विद्यालय में अतिरिक्त कक्षाएं और शौचालय

  • Rainbow Model School में अतिरिक्त कक्षाएं और शौचालय

  • मल्टी-लेवल रोबोटिक कार पार्किंग एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

  • Legacy Waste Bio-Mining एवं Bio-Remediation

  • RA बाजार सिटी पॉलीक्लिनिक

  • मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर

कुल मिलाकर, लखनऊ कैंट में शुरू की जा रही ये परियोजनाएं नागरिक सुविधाओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, स्वच्छता, जल प्रबंधन और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से कैंट क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

नेपाल की भीषण बाढ़ में चाय का ब्रेक बना जिंदगी का सहारा, रायपुर के 5 दोस्तों की बाल-बाल बची जान

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रायपुर- नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी पांच दोस्तों की जिंदगी महज कुछ मिनट के अंतर से बच गई। घूमने के लिए नेपाल गए इन दोस्तों ने रास्ते में चाय पीने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया, और यही छोटा-सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गया।

रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर नेपाल यात्रा पर गए थे। सभी की उम्र करीब 50 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी।

चाय के लिए रुके और सामने बह गया रास्ता

यात्रा के दौरान पांचों दोस्त मालेंखु इलाके से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चाय पीने के लिए गाड़ी रोक दी। यह फैसला उस वक्त सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात तेजी से बदल गए।

बाढ़ का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा और आगे का रास्ता बेहद खतरनाक हो गया। जिस मार्ग से उन्हें आगे बढ़ना था, वहां मौजूद पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया। अगर वे चाय के लिए नहीं रुकते और तय समय पर आगे बढ़ जाते, तो संभव था कि वे भी उसी रास्ते पर फंस जाते।

आंखों के सामने दिखा बाढ़ का खौफनाक मंजर

चाय के लिए रुकने के बाद जब बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई तो दोस्तों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर शरण ली। इसके बाद उन्हें करीब दो दिन तक मालेंखु में फंसे रहना पड़ा।

उन्होंने ऊंचाई वाले स्थान से त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन और मलबा नदी में बहते नजर आए। हालात सामान्य होने तक दोस्तों ने अपनी कार में रात गुजारी और स्थानीय लोगों तथा प्रशासन की मदद से सुरक्षित रहने की कोशिश की।

भारतीय हेल्पलाइन से भी मिला सहयोग

मुश्किल हालात के बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन ने पांचों दोस्तों की मदद की। भारतीय अधिकारियों की हेल्पलाइन के जरिए भी उन्हें संपर्क बनाए रखने और आवश्यक सहायता हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद वे सुरक्षित रूप से रायपुर लौट सके।

रायपुर लौटने के बाद दोस्तों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि चाय के लिए कुछ देर रुकना उनके लिए वरदान साबित हुआ। कुछ मिनटों की देरी ने उन्हें उस रास्ते से दूर रखा, जहां कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा था।

स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

इस कठिन समय में नेपाल के स्थानीय लोगों ने भी मानवीयता का परिचय दिया। पांचों दोस्तों ने बताया कि संकट की घड़ी में उन्हें स्थानीय लोगों से सहयोग मिला।

इस दौरान एक भावुक क्षण भी सामने आया, जब स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने दोस्तों की कलाई पर रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधी। आपदा के बीच यह छोटा-सा मानवीय पल उनके लिए यादगार बन गया।

नेपाल में जारी है बाढ़ का खतरा

26 अगस्त की आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ से सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। 30 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 700 से अधिक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत अभियान जारी है।

इस बीच अधिकारियों ने कुछ नदी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने को लेकर नए अलर्ट भी जारी किए हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ मिनट का फासला

रायपुर के इन पांच दोस्तों की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। एक साधारण-सा चाय का ब्रेक उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ।

कभी-कभी जिंदगी बचाने के लिए किसी बड़े चमत्कार की नहीं, बस सही समय पर लिया गया एक छोटा-सा फैसला ही काफी होता है।

भारत-चिली CEPA वार्ता में तेजी, इस साल समझौता पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता

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सैंटियागो- भारत और चिली के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) को लेकर वार्ता आगे बढ़ाने के प्रयास तेज हो गए हैं। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री पाउला एस्तेवेज वीनस्टीन से मुलाकात की। बैठक में भारत-चिली CEPA वार्ता को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने पर चर्चा हुई।

संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर जोर

बैठक के दौरान भारत ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए खुलेपन, निरंतर संवाद और संतुलित दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का जोर ऐसे समझौते पर है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी वास्तविक और ठोस अवसर पैदा हो सकें।

दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चिली के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को CEPA के जरिए और व्यापक बनाया जाए। दोनों पक्ष चाहते हैं कि समझौते में तय किए जाने वाले साझा लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा लाभ दोनों देशों के कारोबार और उद्योगों को मिले।

ग्लोबल साउथ के साझा दृष्टिकोण को बताया महत्वपूर्ण

भारत और चिली दोनों Global South का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक मुद्दों पर कई समान विचार आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देश अपनी समान प्राथमिकताओं का लाभ उठाते हुए व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं। CEPA को इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

हेल्थकेयर से लेकर ऊर्जा और कृषि तक कई क्षेत्रों में संभावनाएं

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत और चिली के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया।

उन्होंने विशेष रूप से इन क्षेत्रों का उल्लेख किया—

  • हेल्थकेयर और चिकित्सा क्षेत्र

  • फार्मास्यूटिकल्स

  • ऊर्जा

  • खनिज एवं महत्वपूर्ण खनिज संसाधन

  • कृषि

  • मशीनरी

  • इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्र

भारत का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के उद्योगों को नए बाजार मिल सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

CEPA से व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति

भारत और चिली के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित CEPA के सफल निष्कर्ष से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

समझौते से कंपनियों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने के साथ-साथ व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इससे दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक साझेदारी को दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

तकनीक, प्रतिभा और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद

CEPA केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए तकनीक, प्रतिभा और मजबूत एवं भरोसेमंद सप्लाई चेन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है।

बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में भारत और चिली के बीच सहयोग दोनों देशों की कंपनियों को नए अवसर देने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इसी साल CEPA पूरा करने का भारत का लक्ष्य

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह भारत-चिली CEPA वार्ता को इसी वर्ष पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत का लक्ष्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जो दोनों देशों के लिए संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक हो। भारत चाहता है कि समझौते के परिणाम दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों के लिए समान और वास्तविक अवसर पैदा करें।

भारत-चिली संबंधों के लिए अहम कदम

भारत-चिली CEPA को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे व्यापार और निवेश के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है।

भारत का कहना है कि CEPA दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव तैयार करेगा और साझा समृद्धि की दिशा में नए अवसर पैदा करेगा।

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