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नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपाल रामेन डेका ने किया शुभारंभ

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Chhattisgarh Local Body Election Year Book- 2026 का किया विमोचन

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।

उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।

सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव  शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।

मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

झीरम घाटी हत्याकांड के दोषियों को मृत्युदंड न्याय की जीत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने कहा - झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पीड़ादायक अध्याय, इसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक देती रहेंगी पीड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व में सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने कहा - दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा

आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए भी आत्मचिंतन का अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी हत्याकांड मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने को न्याय की जीत बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में प्राण गंवाने वाले सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि  दी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: मामूली विभागीय सजा पर निलंबन अवधि का पूरा वेतन देने का आदेश

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच के बाद केवल मामूली विभागीय सजा दी जाती है और उसे सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए उसके पूरे वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन अपने आप में कोई सजा नहीं है, बल्कि विभागीय जांच पूरी होने तक की एक अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है। ऐसे में यदि जांच के बाद कर्मचारी के खिलाफ केवल मामूली दंड लगाया गया है, तो निलंबन अवधि के वेतन को रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

रायपुर में पदस्थ महिला ASI से जुड़ा था मामला

यह मामला रायपुर में पदस्थ एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (ASI) से संबंधित था। विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित किया गया था। बाद में विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन्हें सेवा में वापस बहाल कर दिया गया और उनके खिलाफ केवल मामूली विभागीय दंड लगाया गया।

मामले में निलंबन अवधि के दौरान रोके गए वेतन को लेकर विवाद सामने आया। इसी मुद्दे पर न्यायालय के समक्ष मामला पहुंचा, जहां कोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन और बाद में दी गई विभागीय सजा के बीच के संबंध को देखते हुए वेतन भुगतान के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य आधार यह है कि निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जा सकता। यदि विभागीय जांच का परिणाम गंभीर सजा के रूप में सामने नहीं आता और कर्मचारी को मामूली दंड के साथ सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की पूरी अवधि के वेतन को रोकने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे मामले में कर्मचारी को 100 प्रतिशत वेतन दिए जाने का अधिकार है।

इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निलंबन अवधि के दौरान वेतन और विभागीय कार्रवाई के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रकाशित न्यायिक समाचार के आधार पर तैयार की गई है; किसी मामले में अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित आदेश/निर्णय के मूल पाठ पर निर्भर करता है।

रायपुर में महिला को सड़क पर जलाने का मामला, इलाज के दौरान मौत

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक महिला को सड़क पर आग के हवाले किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, महिला को माना एयरबेस के पास आग के हवाले किया गया था। आग में झुलसने के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर बताई गई और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, बाद में उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच के बाद पुलिस ने मामले में एक आरोपी को हिरासत में लिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान विरू धीवर के रूप में हुई है।

पुलिस अब घटना के पीछे की वजह, आरोपी और महिला के बीच संबंध तथा वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और जांच पूरी होने के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

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79 किलो संदिग्ध नारकोटिक्स और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल बरामद, 8 गिरफ्तार

धमतरी/गरियाबंद- छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगे इलाकों में नारकोटिक्स और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एवं वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। तीन दिनों में चलाए गए अलग-अलग ऑपरेशनों में करीब 79 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल जब्त किए गए हैं। इस मामले में कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR), डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI), मलकानगिरी और सुकमा वन विभाग के समन्वय से की गई। पहली कार्रवाई 10 सितंबर को हुई, जब वन जांच चौकी पर संदिग्ध बाइक की गतिविधि सामने आई। इसके बाद करीब 31 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ बरामद किया गया।

इसके बाद 11 सितंबर को ओडिशा के नबरंगपुर क्षेत्र में फॉलो-अप कार्रवाई की गई, जहां करीब 48 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और एक स्कूटी जब्त की गई। आगे मिले सुरागों के आधार पर मलकानगिरी के गोविंदपल्ली इलाके में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की गई, जहां 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल, तीन मोटरसाइकिल और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन गतिविधियों के पीछे कोई अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय है। अधिकारियों के अनुसार, नारकोटिक्स और वन्यजीव उत्पादों के बीच संभावित बार्टर नेटवर्क की आशंका की भी जांच की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति हाशिम थाची को 25 साल की सजा, युद्ध अपराधों में दोषी करार

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द हेग- कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति हाशिम थाची को हेग स्थित कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स ने 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़े युद्ध अपराधों के मामले में दोषी करार देते हुए 25 साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें हत्या, यातना, क्रूर व्यवहार और गैरकानूनी/मनमाने तरीके से लोगों को हिरासत में रखने से जुड़े चार युद्ध अपराधों में दोषी पाया। 

किन अपराधों में दोषी ठहराया गया?

अदालत के फैसले के मुताबिक, थाची ने उस समय कोसोवो लिबरेशन आर्मी (KLA) के वरिष्ठ कमांडर के रूप में काम करते हुए ऐसे अपराधों में व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी निभाई, जिनका निशाना KLA के विरोधी माने जाने वाले लोग थे। Reuters के अनुसार, अदालत ने 96 लोगों की हत्या, 385 लोगों की गैरकानूनी हिरासत, 303 लोगों पर यातना और 49 लोगों के साथ क्रूर व्यवहार से जुड़े मामलों में उन्हें दोषी पाया।

हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों पर पर्याप्त सबूत नहीं पाए और उन आरोपों में उन्हें दोषी नहीं ठहराया।

मामला 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़ा

यह मामला 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़ा है, जब कोसोवो में अल्बानियाई अलगाववादी KLA और तत्कालीन यूगोस्लाव/सर्बियाई बलों के बीच संघर्ष हुआ था। थाची उस दौरान KLA के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स के अनुसार, अभियोग में मार्च 1998 से सितंबर 1999 के बीच कोसोवो के कई इलाकों तथा उत्तरी अल्बानिया के कुछ स्थानों पर कथित अपराधों का जिक्र था। 

कैसे चला मुकदमा?

थाची और तीन अन्य पूर्व KLA नेताओं—कादरी वेसेली, रेक्सहेप सेलिमी और जाकुप क्रास्नीकी—को नवंबर 2020 में हिरासत में लेकर हेग लाया गया था। मुख्य मुकदमे की सुनवाई अप्रैल 2023 में शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अप्रैल 2025 में अपना पक्ष पूरा किया, जबकि सबूतों की कार्यवाही दिसंबर 2025 में समाप्त हुई। मामले में बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजों को अदालत के सामने पेश किया गया।

हाशिम थाची कौन हैं?

हाशिम थाची कोसोवो की राजनीति के प्रमुख नेताओं में रहे हैं। वह प्रधानमंत्री और बाद में राष्ट्रपति के पद पर रह चुके हैं। 2020 में उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था और युद्ध अपराधों के आरोपों का सामना करने के लिए हेग गए थे। उन्होंने मुकदमे के दौरान आरोपों से इनकार किया। 

फैसले पर कोसोवो में प्रतिक्रिया

फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों की ओर से विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। थाची को कोसोवो में कई लोग स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में देखते हैं। फैसले के बाद प्रिस्टिना में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई।

अदालत ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उसका फैसला KLA या कोसोवो की स्वतंत्रता के राजनीतिक उद्देश्य की वैधता पर फैसला नहीं है, बल्कि विशेष रूप से आरोपित युद्ध अपराधों से संबंधित है। 

आगे क्या होगा?

थाची के पास इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। इसलिए 25 साल की सजा सुनाया जाना ट्रायल-लेवल का फैसला है और मामला आगे अपीलीय प्रक्रिया में जा सकता है।

एक नजर में:

  • नाम: हाशिम थाची

  • पद: कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति

  • अदालत: कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स, द हेग

  • सजा: 25 साल की जेल

  • मामला: 1998-99 कोसोवो युद्ध

  • दोष: हत्या, यातना, क्रूर व्यवहार और गैरकानूनी हिरासत

  •  फैसला: 16 सितंबर 2026

  • अगला कदम: अपील का अधिकार मौजूद है। 

गाजा में इमारत ढहने से 19 लोगों की मौत, 25 घायल

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गाजा सिटी- गाजा सिटी में बुधवार तड़के युद्ध से क्षतिग्रस्त एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत में विस्थापित परिवारों ने शरण ले रखी थी। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक कम-से-कम 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। 

इमारत पहले संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 लोग, जिनमें बड़ी संख्या में विस्थापित लोग और लगभग 50 बच्चे शामिल थे, इस इमारत में रह रहे थे। इमारत के कमजोर ढांचे के बावजूद लोगों के पास सुरक्षित आवास के विकल्प बेहद सीमित थे। 

राहत और बचाव अभियान जारी

इमारत गिरने के बाद स्थानीय बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गए। बचाव कार्य भारी उपकरणों और मशीनरी की कमी के कारण मुश्किल हो रहा है। Reuters की रिपोर्ट में बताया गया कि कई जगहों पर बचावकर्मियों को सीमित संसाधनों के साथ मलबा हटाना पड़ रहा है।

अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी और लोग फंसे हो सकते हैं। इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। 

गाजा में बड़ी समस्या

यह घटना गाजा में युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए बढ़ते खतरे को सामने लाती है। Reuters के अनुसार, गाजा में करीब 2,000 क्षतिग्रस्त इमारतों में अभी भी लोग रह रहे हैं, जबकि लगभग 400 इमारतों को ढहने के जोखिम वाली इमारतों के रूप में बताया गया है। 

अरब सागर में भारत-पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज टकराए, भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब

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नई दिल्ली- भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक जहाज और पाकिस्तान नौसेना के एक पोत के बीच टक्कर हो गई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

क्या हुआ?

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का जहाज उत्तर अरब सागर में routine surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और manoeuvring के दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के इस व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर से भारतीय जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपना मिशन जारी रखने में सक्षम रहा।

पाकिस्तान के किस जहाज से हुई टक्कर?

मीडिया रिपोर्टों में पाकिस्तानी पोत की पहचान PNS Hunain के तौर पर की गई है। रिपोर्टों के अनुसार यह पाकिस्तान नौसेना का Yarmook-class offshore patrol vessel है।

कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि टक्कर के बाद PNS Hunain को नुकसान हुआ और वह अपने बंदरगाह की ओर रवाना हुआ।

भारत ने क्या कार्रवाई की?

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के अनुसार, पाकिस्तान के राजनयिक से कहा गया कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाया जाए कि समुद्र में सभी सैन्य इकाइयां उचित सावधानी बरतें और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का सम्मान करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

1991 के समझौते का भी दिया गया हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में हुए India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements का हवाला दिया है।

MEA के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक पोत का आचरण इस समझौते के Article 10 के सीधे contravention में था। भारत ने इसी आधार पर पाकिस्तान के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

क्या यह सैन्य हमला था?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों में इस घटना को जानबूझकर किया गया सैन्य हमला घोषित नहीं किया गया है। भारत ने इसे पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के unsafe और unprofessional conduct से जुड़ी collision बताया है।

वहीं, घटना को लेकर पाकिस्तान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए टक्कर की पूरी परिस्थितियों और दोनों पक्षों के दावों का स्वतंत्र आकलन आगे की जानकारी पर निर्भर करेगा।

क्यों अहम है यह घटना?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील संबंधों के बीच दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों का अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में इस तरह टकराना सुरक्षा और कूटनीति, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बड़े नुकसान या व्यापक सैन्य कार्रवाई की सूचना नहीं है। फिलहाल भारत की प्रतिक्रिया राजनयिक विरोध, सावधानी बरतने की मांग और द्विपक्षीय समझौतों के पालन पर केंद्रित है।

बड़ी बात

उत्तर अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए 1991 के द्विपक्षीय समझौते का हवाला दिया है। फिलहाल घटना में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

सोने की नाव, चांदी का पतवार और इंद्रावती तट पर पूजा, बस्तर में दिखी अनोखी लोकपरंपरा

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 जगदलपुर। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी लोक आस्था की अनूठी झलक ग्राम पंचायत घाट कवाली में देखने को मिली। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में नवाखाई यानी ‘नया खानी’ तिहार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्व से पहले ग्रामीणों ने पुरखों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इंद्रावती नदी के तट पर विशेष पूजा-अनुष्ठान किया।


ग्रामीणों ने इंद्रावती नदी को जीवनदायिनी मानते हुए जल की देवी जलनी आया की विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से सोने की नाव और चांदी का पतवार अर्पित किया गया। ग्रामीणों ने जलनी आया से गांव में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल, उत्तम स्वास्थ्य और नवाखाई तिहार के निर्विघ्न आयोजन की कामना की।


जलनी आया की अनुमति के बाद मनाया जाएगा तिहार

घाट कवाली के ग्रामीणों की मान्यता है कि इंद्रावती नदी और जलनी आया गांव के जीवन का आधार हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले जलनी आया की अनुमति और आशीर्वाद लेना आवश्यक माना जाता है। इसी परंपरा के तहत नदी किनारे विशेष सेवा-अर्जी का आयोजन किया गया।

पूजा में गांव के बैगा, सिरहा, पुजारी और मांझी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद माटी पुजारी और गांव के बुजुर्गों ने सभी ग्रामीणों के कल्याण, भरपूर अन्न-धन और खुशहाली की कामना की।

नई फसल के स्वागत का पर्व है नवाखाई

बस्तर में नवाखाई तिहार का कृषि और लोकजीवन से गहरा संबंध है। नई फसल के घर आने की खुशी में मनाए जाने वाले इस पर्व में खेतों से प्राप्त नई फसल, विशेषकर धान, को सबसे पहले देवी-देवताओं और पूर्वजों को अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद ही ग्रामीण नई फसल का सेवन करते हैं।

घाट कवाली में भी इसी परंपरा के तहत पहले जलनी आया से अनुमति ली गई। पूजा-अनुष्ठान के बाद अब ग्रामीण बुधवार को नवाखाई तिहार मनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

आसपास के गांवों से भी पहुंचे ग्रामीण

पारंपरिक घाटजात्रा में घाट कवाली के माटी पुजारी मंगतू कश्यप, ग्राम पटेल लच्छू कश्यप, ग्राम सिरहा सीताराम और श्यामसुंदर कश्यप सहित कुलधर कश्यप, गिरधर कश्यप, लखेश्वर कश्यप, जुगल बघेल, सोनधर निषाद, सोनसाय मौर्य और संपत कश्यप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इसके अलावा करंजी, भाटपाल, मरलेंगा, केसापुर, सुरीभाटा और किंजोली गांवों से भी ग्रामीण आयोजन में शामिल हुए। इंद्रावती नदी के तट पर हुए इस पारंपरिक अनुष्ठान में बस्तर की उस सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली, जिसमें प्रकृति, कृषि और लोक आस्था का गहरा जुड़ाव है।

SGST का बड़ा एक्शन: बिलासपुर-मुंगेली में 6 ठिकानों पर जांच, बावा होटल में 60 लाख की कार्रवाई

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 बिलासपुर। टैक्स चोरी और बिलिंग में अनियमितता की शिकायतों के बाद स्टेट जीएसटी विभाग ने बिलासपुर और मुंगेली में छह व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर जांच कार्रवाई की। विभाग की टीम ने दोनों जिलों में कारोबार से जुड़े दस्तावेज, बिलिंग और टैक्स रिकॉर्ड की जांच की। मुंगेली के पड़ाव चौक स्थित वैष्णव मिष्ठान भंडार (बावा होटल) में करीब 60 लाख रुपए की टैक्स और पेनाल्टी संबंधी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।


वहीं, धरमपुरा मेन रोड स्थित नुक्कड़ ढाबे पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी है। इसके अलावा मुंगेली के बलानी चौक स्थित मोनिका ज्वेलर्स और पड़ाव चौक स्थित दिनेश ज्वेलर्स में भी जीएसटी टीम ने जांच की।

कच्चे बिल और टैक्स अनियमितता की शिकायत

अधिकारियों के अनुसार, राज्यभर में टैक्स चोरी, बोगस बिलिंग और ई-वे बिल में अनियमितताओं को लेकर जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मुंगेली के कुछ होटल और अन्य प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में लिया गया। विभाग को कथित तौर पर शिकायतें मिली थीं कि कुछ प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को कच्चे बिल दिए जा रहे हैं और इससे टैक्स देनदारी में गड़बड़ी की जा रही है।

बावा होटल में 60 लाख की कार्रवाई

मुंगेली के पड़ाव चौक स्थित वैष्णव मिष्ठान भंडार (बावा होटल) में हुई जांच के दौरान करीब 60 लाख रुपए की टैक्स और पेनाल्टी संबंधी कार्रवाई की गई। हालांकि, विभाग की विस्तृत जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह राशि किस अवधि की टैक्स देनदारी और किन अनियमितताओं से संबंधित है।

बिलासपुर के व्यापार विहार में भी जांच

बिलासपुर के व्यापार विहार में जीएसटी टीम ने गुटखा, ड्राई फ्रूट्स और तेल कारोबार से जुड़े तीन व्यापारियों के प्रतिष्ठानों की जांच की। टीम ने यहां बिलिंग, खरीद-बिक्री और टैक्स से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया।

अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि टैक्स नियमों का उल्लंघन या अन्य अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार टैक्स, ब्याज और पेनाल्टी की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण की प्रक्रिया

रायपुर में बिना नक्शे निर्माण पर निगम सख्त, रावतपुरा फेस-2 में तोड़फोड़ शुरू

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 रायपुर। राजधानी के रावतपुरा फेस-2 कॉलोनी में बुधवार सुबह नगर निगम ने बिना स्वीकृत नक्शे के किए गए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। निगम का अमला करीब एक दर्जन बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंचा और चिन्हित मकानों में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की।


जानकारी के अनुसार, रावतपुरा फेस-2 में करीब 40 मकान मालिकों को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया था। निगम के मुताबिक, इन मकानों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया है। नोटिस जारी करने के बाद बुधवार को निगम की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की।

कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है। बड़ी संख्या में बुलडोजरों और निगम अमले के पहुंचने से कॉलोनी में हलचल बढ़ गई।

नगर निगम की टीम द्वारा चिन्हित मकानों पर कार्रवाई की जा रही है। मौके पर निगम का अमला कार्रवाई में जुटा हुआ है।

मक्का के करीब पहुंचा हूती ड्रोन, सऊदी एयर डिफेंस ने किया ध्वस्त; शहर में अलर्ट

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 रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के पास ड्रोन पहुंचने की घटना सामने आई है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, हूतियों की ओर से लॉन्च किए गए ड्रोन को मक्का के दक्षिण में प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करने से पहले एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। घटना के बाद मक्का समेत आसपास के इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया।


सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि मक्का और वहां आने वाले जायरीनों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सऊदी अधिकारियों ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश बताया है। इससे पहले 2017 में भी सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था।

मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी हुआ अलर्ट

ड्रोन की घटना से पहले 15 सितंबर को सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का, जेद्दा और ताइफ में संभावित खतरे को लेकर आपात चेतावनी जारी की थी। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने, घरों के अंदर रहने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। बाद में मक्का का अलर्ट हटा दिया गया और अधिकारियों ने बताया कि खतरा टल गया है।

हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से किया इनकार

सऊदी अरब की ओर से ड्रोन को मक्का की दिशा में भेजे जाने की बात कही गई है, लेकिन हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। हूती प्रवक्ता हाजेम अल-असद ने सऊदी दावे को गलत बताया है। ऐसे में ड्रोन के वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है।

यमन में फिर तेज हुआ संघर्ष

हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच हालिया दिनों में संघर्ष तेज हुआ है। हूतियों ने सऊदी अरब के कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है। सऊदी पक्ष के अनुसार, हालिया हमलों में कई लोग घायल हुए हैं और कुछ इलाकों में संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है।

संघर्ष बढ़ने के साथ यमन में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों के लिए भी प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

बाब-अल-मंदेब पर भी बढ़ी चिंता

यमन के पश्चिमी तट और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की बढ़ती गतिविधियों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। यह मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और तेल आपूर्ति पर असर की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल सऊदी अधिकारियों ने मक्का और अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस घटनाक्रम को लेकर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका के बीच सभी पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में मानसून सुस्त, बढ़ी गर्मी; 4 दिन बाद फिर बरसेंगे बादल!

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ गया है। मंगलवार को कई इलाकों में उमस और गर्मी से लोग परेशान रहे। हालांकि रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली।


मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले चार दिनों तक बारिश की गतिविधियों में कमी रहने की संभावना है। इसके बाद एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

सामान्य से 5 फीसदी कम बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक मौसमी बारिश सामान्य के आसपास रही है, हालांकि सामान्य की तुलना में करीब 5 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की गतिविधियों में कमी के कारण आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम शुष्क रहने के साथ तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

रायपुर में कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी रायपुर में 15 सितंबर को अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 16 सितंबर को राजधानी में आकाश आंशिक रूप से मेघमय रह सकता है। इस दौरान अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

मंगलवार को इन इलाकों में हुई बारिश

मंगलवार को रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के कुछ इलाकों में बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 6 सेमी बारिश जगदलपुर में हुई। इसके अलावा घुमका में 4 सेमी, कुटरू में 2 सेमी तथा दाढ़ी, बकावंड और धमधा में 1-1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

तापमान की बात करें तो 35 डिग्री सेल्सियस के साथ राजनांदगांव प्रदेश में सबसे गर्म रहा। वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

कब फिर सक्रिय होगा मानसून?

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में बारिश की तीव्रता कम रहने की संभावना है। अगले चार दिनों तक बारिश का दौर अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव और बारिश की गतिविधियों में फिर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

हालांकि बारिश की स्थिति जिलेवार अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और विभाग की ओर से जारी चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

UPI पर नए इंटरचेंज शुल्क की खबर, ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% चार्ज की चर्चा

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नई दिल्ली- डिजिटल पेमेंट से जुड़ी एक नई खबर इन दिनों चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% इंटरचेंज शुल्क लागू किए जाने की बात कही जा रही है। यह बदलाव 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की चर्चा है।

हालांकि, इस खबर को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरचेंज शुल्क को सीधे आम उपभोक्ता से वसूले जाने वाले सामान्य UPI चार्ज के रूप में नहीं समझना चाहिए। इंटरचेंज शुल्क मुख्य रूप से पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच लेनदेन से जुड़ी फीस होती है।

क्या हर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?

नहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह किसी भी तरह से हर UPI भुगतान पर लगाया जाने वाला सामान्य शुल्क नहीं है। प्रस्तावित/रिपोर्ट किए गए बदलाव का संबंध कुछ विशेष मर्चेंट पेमेंट्स से बताया जा रहा है, खासकर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन से।

इसलिए अगर कोई व्यक्ति किसी दुकान, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सेवा प्रदाता को UPI के जरिए भुगतान करता है, तो केवल इस खबर के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि उसे हर बार भुगतान राशि के ऊपर 0.4% अतिरिक्त देना पड़ेगा।

इंटरचेंज शुल्क क्या होता है?

इंटरचेंज शुल्क वह शुल्क है जो पेमेंट ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने वाले सिस्टम में संबंधित पक्षों के बीच निर्धारित नियमों के तहत लगाया जाता है। इसका उद्देश्य पेमेंट नेटवर्क में शामिल बैंकों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच लागत एवं राजस्व का संतुलन बनाए रखना होता है।

यानी 0.4% इंटरचेंज शुल्क का मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को सीधे 0.4% अतिरिक्त भुगतान करना ही होगा।

₹2,000 से अधिक के भुगतान पर क्या असर पड़ेगा?

रिपोर्ट में जिस व्यवस्था की चर्चा है, उसके तहत पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर इंटरचेंज शुल्क की गणना की जा सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर किस प्रकार के मर्चेंट, पेमेंट इंस्ट्रूमेंट और ट्रांजैक्शन कैटेगरी पर होगा, यह लागू नियमों और आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?

UPI भारत में रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। ऐसे में इंटरचेंज शुल्क से जुड़ी खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह भ्रम पैदा हो सकता है कि अब हर UPI भुगतान महंगा हो जाएगा।

फिलहाल इस खबर को 'हर UPI पेमेंट पर 0.4% शुल्क' के रूप में समझना सही नहीं है। उपभोक्ताओं पर सीधे कोई सामान्य UPI चार्ज लागू होने और पेमेंट इकोसिस्टम में इंटरचेंज शुल्क लगने—इन दोनों बातों में अंतर है।

आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार

15 अक्टूबर 2026 से संबंधित इस प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को लेकर अंतिम प्रभाव समझने के लिए NPCI, बैंकों और संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की स्पष्ट गाइडलाइन महत्वपूर्ण होगी। इसलिए ग्राहकों को सोशल मीडिया पर चल रही अधूरी जानकारी के बजाय आधिकारिक घोषणा और लागू नियमों पर भरोसा करना चाहिए।

Oracle की भारत में छंटनी की नई लहर, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग टीमों पर असर की आशंका

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नई दिल्ली- टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Oracle में चल रही नौकरी कटौती की नई लहर के भारत तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के भारत स्थित कुछ कर्मचारियों और खास तौर पर प्रोडक्ट इंजीनियरिंग टीमों पर छंटनी का असर पड़ सकता है।

भारत में कर्मचारियों पर बढ़ा संकट

Oracle की ओर से वैश्विक स्तर पर लागत और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के तहत नौकरियों में कटौती किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में भारत में भी कुछ टीमों और भूमिकाओं की समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रभावित होने वाले कर्मचारियों की सटीक संख्या को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रोडक्ट इंजीनियरिंग टीमें हो सकती हैं प्रभावित

रिपोर्ट्स में प्रोडक्ट इंजीनियरिंग से जुड़ी टीमों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में बताया गया है। इन टीमों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्ट से जुड़े तकनीकी कार्य और इंजीनियरिंग भूमिकाएं शामिल हो सकती हैं।

टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी

Oracle में यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक टेक इंडस्ट्री में कंपनियां लागत कम करने, संसाधनों को पुनर्गठित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों पर निवेश बढ़ाने के लिए अपने कार्यबल में बदलाव कर रही हैं।

फिलहाल Oracle की भारत में संभावित छंटनी को लेकर कर्मचारियों की संख्या और प्रभावित टीमों के बारे में अधिक आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

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