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RAIPUR NEWS : माइग्रेन ठीक करने का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म, नौकरी के नाम पर 44 लाख ऐंठे

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के अभनपुर क्षेत्र से महिला को बीमारी ठीक करने और नौकरी लगवाने का झांसा देकर दुष्कर्म और करीब 44 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्यप्रदेश निवासी आशाराम चौधरी ने खुद को बैगा बताकर महिला का माइग्रेन ठीक करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद नौकरी लगवाने का झांसा देकर उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 44 लाख रुपये ले लिए। महिला ने आरोपी पर दुष्कर्म करने और घटना की जानकारी किसी को देने पर बदनाम करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।


पीड़िता की शिकायत पर अभनपुर पुलिस ने आरोपी आशाराम चौधरी के खिलाफ दुष्कर्म, ठगी और धमकी से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

बीमारी ठीक करने के बहाने बनाया भरोसा

जानकारी के मुताबिक पीड़िता एक शासकीय कर्मचारी की पत्नी है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसे माइग्रेन की शिकायत थी। इसी दौरान उसकी पहचान मध्यप्रदेश निवासी आशाराम चौधरी से हुई, जो अभनपुर में किराए के मकान में रहता था।

महिला का आरोप है कि आशाराम ने खुद को बैगा बताते हुए झाड़-फूंक और अन्य तरीकों से उसकी बीमारी ठीक करने का दावा किया। बीमारी ठीक करने के बहाने उसने महिला का विश्वास हासिल कर लिया। इसके बाद वह महिला को नौकरी और भविष्य से जुड़ी बातों का हवाला देकर अपने प्रभाव में लेने लगा।

नौकरी लगवाने का झांसा, 44 लाख रुपये लिए

पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद अलग-अलग वजहों से उससे रकम की मांग की गई। महिला ने आरोपी को अलग-अलग किस्तों में करीब 44 लाख रुपये दे दिए। हालांकि, इसके बाद भी उसकी नौकरी नहीं लगी और आरोपी ने रकम वापस करने से इनकार कर दिया।

दुष्कर्म के बाद धमकी देने का आरोप

महिला ने पुलिस को बताया कि इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद उसने किसी को बताने या पुलिस में शिकायत करने पर बदनाम करने की धमकी दी। सामाजिक लोक-लाज और आरोपी की धमकी के चलते महिला ने लंबे समय तक घटना की जानकारी किसी को नहीं दी।

नौकरी नहीं लगने और रकम वापस नहीं मिलने पर जब महिला ने आरोपी से पैसे लौटाने की मांग की तो उसने कथित तौर पर रकम लौटाने से इनकार कर दिया और धमकी दी।

पति को बताई पूरी बात, फिर थाने पहुंची महिला

काफी समय तक परेशान रहने के बाद पीड़िता ने पूरे मामले की जानकारी अपने पति को दी। इसके बाद वह पति के साथ अभनपुर थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही आरोपी आशाराम चौधरी फरार हो गया। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस मामले में महिला के आरोपों और पैसों के लेनदेन समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में मानसून फिर सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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 CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। बस्तर संभाग में बारिश की गतिविधियां ज्यादा तेज रही हैं, जबकि रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।


बस्तर संभाग में बारिश का जोर

पिछले 24 घंटों में बस्तर संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है।

मौसम विभाग के अनुसार, 25 अगस्त को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है।

रायपुर में भी बारिश के आसार

राजधानी रायपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। मौसम में अगले कुछ दिनों के दौरान बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं और दिन के तापमान में भी कोई विशेष बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।

अगले 5 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 और 27 अगस्त को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात हो सकता है।

28 अगस्त को भी कई इलाकों में बारिश जारी रहने का अनुमान है। यानी आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना रह सकता है।

वज्रपात को लेकर रहें सावधान

बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। संभव हो तो किसी पक्के भवन के अंदर रहें और मौसम खराब होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर अभी जारी रहने वाला है। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष आज एक साथ, बन रहा दुर्लभ संयोग! जानिए पूजा विधि और महत्व

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 सावन का आखिरी मंगलवार इस बार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। 25 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत के साथ भौम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। ऐसे में एक ही दिन दोनों व्रत पड़ने से शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का विशेष अवसर बन रहा है।


क्यों खास है मंगला गौरी और भौम प्रदोष का संयोग?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को माता गौरी की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। जब मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है।

इस वजह से 25 अगस्त का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है। भक्त इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार दोनों व्रत रखकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

शिव-पार्वती के साथ हनुमान जी की पूजा क्यों?

मंगलवार का संबंध भगवान हनुमान से भी माना जाता है। इसलिए इस दिन मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की आराधना से साहस, आत्मविश्वास और संकटों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। ऐसे में भक्त भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं।

शिव पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। पूजा हमेशा अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।

मंगला गौरी व्रत में क्या करें?

मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।

पूजा में माता गौरी को रोली, अक्षत, फूल, फल और सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की एक साथ पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ता है।

एक दिन में तीन देव शक्तियों की आराधना

25 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन माता गौरी, भगवान शिव और मंगलवार के अधिष्ठाता माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा का अवसर मिल रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे शिव-शक्ति और भक्ति के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

भौम प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शिव पूजा के दौरान बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। वहीं भगवान शिव को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा सामग्री का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

ध्यान दें: व्रत, पूजा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए पूजा-विधि के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।

श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।

श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, परिस्थितियां नहीं रोक सकतीं आगे बढ़ने का रास्ता

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी खुल रहे शिक्षा और विकास के नए द्वार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।

श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

किसी का सपना आईएएस बनना, किसी को मिला अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास

समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।

रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।

बच्चों के बीच सहज हुए मुख्यमंत्री, साथ बैठकर किया भोजन

समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।

किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।

उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त की राशि करेंगे जारी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा। 

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

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रायपुर- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।

बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।

नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं

कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश

इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।


छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ पढ़ेंगे कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी

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देश का पहला राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़, 100 कलाविद लेखक तैयार करेंगे 100 पाठ

रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 

इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

स्थानीय कला-संस्कृति को पाठ्य सामग्री से जोड़ने की पहल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।

विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश

आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है।  पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।

पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे पाठ्य सामग्री का हिस्सा

छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।

लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।

तीन दिनों में पाठ्य सामग्री से लेकर लघु फिल्म की पटकथा तक

कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी आर्ट रिपोजिटरी

छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

धान की फसल में कीट प्रकोप से बचाव के लिए किसान रहें सतर्क

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तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट की समय पर पहचान कर करें नियंत्रण, अधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की सलाह

रायपुर-   धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि कीटों के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग तथा लंबे समय तक अधिक जलभराव रहने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए किसान संतुलित उर्वरक उपयोग और उचित जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।

तना छेदक कीट से फसल को पहुंचता है नुकसान

तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में शामिल है। प्रारंभिक अवस्था में इसके प्रकोप की पहचान करना आसान है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई देते हैं तथा मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है।

बालियां सफेद पड़ना गंभीर प्रकोप का संकेत

तना छेदक का प्रकोप बढ़ने पर धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख जाती हैं। इससे पौधे में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए खेत में यदि कुछ पौधों की पत्तियां अचानक पीली पड़ती दिखाई दें या तने में छेद नजर आएं, तो किसान तुरंत फसल का निरीक्षण कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।

तना छेदक के नियंत्रण के लिए अनुशंसित छिड़काव

कृषि विभाग ने तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।

पत्ती मोड़क कीट की पहचान भी जरूरी

धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट भी नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कीट की हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे भाग को खाती है।

पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देना प्रमुख लक्षण

पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप के बाद पत्तियों पर सफेद एवं पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। खेत में ऐसी पत्तियां दिखाई देने पर किसान फसल का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें और शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।

पत्ती मोड़क के नियंत्रण के लिए ये विकल्प

कृषि विभाग ने पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।

अधिक उर्वरक और जलभराव से बचें

कृषि विभाग के अनुसार खेत में आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग करने तथा लंबे समय तक अधिक पानी भरा रहने से कीटों के प्रकोप की स्थिति बन सकती है। किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और खेत में जलभराव की स्थिति न बनने दें। नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने से कीटों की शुरुआती पहचान और समय पर नियंत्रण संभव होगा।

समय पर पहचान और नियंत्रण से सुरक्षित रहेगी फसल

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। खेतों में नियमित निगरानी रखें और पत्तियों के पीला पड़ने, तने में छेद होने, बालियां सफेद पड़ने अथवा पत्तियों पर सफेद-पारदर्शी धारियां दिखाई देने पर तत्काल उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर की गई कार्रवाई से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

गांव की बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर, बबली यादव ने फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय से बढ़ाई आय

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बिहान से मिला संबल, विष्णु भैया की योजनाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लागू हो रहे विष्णु के सुशासन का लाभ गांव-गांव तक पहुंच रहा है। शासन की योजनाओं और ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ऐसी ही मेहनतकश महिला हैं, जिन्होंने विष्णु भैया की सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता में बदला है।

बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर कंप्यूटर खरीदा और अपने घर पर ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं बबली को नियमित आय का साधन भी मिल गया। एक छोटे से प्रयास ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।

बबली यादव ने अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को भी अपनाया। उन्होंने मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी का कार्य भी कर रही हैं। इस पहल से उन्हें आय का एक और साधन मिला है और स्थानीय स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़े हैं।

बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे विभिन्न कार्यों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुई हैं। उनका कहना है कि पहले जहां आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित साधन थे, वहीं अब मेहनत और समूह से मिले सहयोग के कारण उनके पास आय के कई साधन हैं।

बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। शासन की विभिन्न योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। वे कहती हैं कि विष्णु भैया की सरकार में गांव की महिलाओं को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर भी मिल रहे हैं।

बबली अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान, स्व-सहायता समूह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

बबली यादव की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विष्णु के सुशासन में योजनाओं का लाभ जब मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगता है। आज बबली स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में हो रहे प्रयासों की एक सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

भिलाई में 32 वर्षीय नर्स की संदिग्ध मौत, हमर क्लीनिक के कमरे में फंदे पर मिला शव

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 भिलाई। घासीदास नगर स्थित हमर क्लीनिक में पदस्थ 32 वर्षीय नर्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नर्स नेहा बंजारे का शव सोमवार शाम क्लीनिक परिसर में बने कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी।


पांच साल से हमर क्लीनिक में कर रही थीं सेवा

जानकारी के मुताबिक, वार्ड-23 घासीदास नगर स्थित हमर क्लीनिक में नेहा बंजारे पिछले करीब पांच वर्षों से नर्स के रूप में कार्यरत थीं। वह क्लीनिक परिसर में बने एक कमरे में अपने पति के साथ रहती थीं। परिजनों के मुताबिक, नेहा की शादी करीब एक साल पहले हुई थी।

पति ने कमरे में देखा शव

बताया जा रहा है कि घटना सोमवार शाम करीब 6 बजे की है। जब नेहा के पति कमरे में पहुंचे, तो उन्होंने उन्हें फंदे से लटका देखा। इसके बाद तत्काल पुलिस को घटना की सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव का पंचनामा कराया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मौत की वजह का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस ने फिलहाल मौत के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। पुलिस पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही नर्स की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

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पटेवा- सावन माह के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय सलिहाभांठा के बच्चों ने श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली। विद्यालय प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक योगेश निर्मलकर एवं शिक्षक रामेश्वर ढीढी के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना दिया।

कांवड़ यात्रा के लिए बच्चों ने आकर्षक रूप से सजी कांवड़ लेकर यात्रा प्रारंभ की। इस दौरान बच्चे भगवान शिव-पार्वती तथा विभिन्न गणों के आकर्षक वेशभूषा में नजर आए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति और धार्मिक उत्साह ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया।

जुन्ना तालाब से जल लेकर पहुंचे शिव मंदिर

विद्यालय से प्रारंभ हुई कांवड़ यात्रा जुन्ना तालाब पहुंची, जहां बच्चों ने विधि-विधान से जल लिया। इसके बाद कांवड़ यात्री बच्चे तालाब स्थित शिव मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद गांव के मुख्य शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।

पूरे रास्ते बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह बच्चों का स्वागत किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया, वहीं अनेक ग्रामीण उत्साहपूर्वक बच्चों के साथ नाचते-गाते हुए यात्रा में शामिल हुए। इससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

मुख्य शिव मंदिर में किया जलाभिषेक

कांवड़ यात्रा गांव के मुख्य शिव मंदिर पहुंची, जहां बच्चों ने भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित कर जलाभिषेक किया। इस दौरान बच्चों ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना की और गांव की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

विद्यालय द्वारा आयोजित इस पहल को ग्रामीणों और पालकों का भी भरपूर सहयोग मिला। कार्यक्रम ने बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सामूहिकता, अनुशासन, सेवा और संस्कार की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

विद्यालय में हुई भजन संध्या

कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद सभी बच्चे वापस विद्यालय पहुंचे। यहां पालकों और ग्रामीणों के साथ भजन संध्या का आयोजन किया गया। भक्ति गीतों और भजनों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भजन संध्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम के समापन पर पालकों और गांववासियों के सहयोग से प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और आगंतुकों को प्रसाद वितरित किया गया।

ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन समिति, पालकों, शिक्षकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पिरीत राम साहू, पंचराम ध्रुव, भोजराम साहू, योगीराम साहू, बैगा नंद ध्रुव, भुनेश्वर साहू, भीम यादव, कार्तिक सिन्हा, उमेश सिन्हा, पूर्णिमा यादव, देवकी सिन्हा, बरतनीन दीवान, प्रमिला ध्रुव, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव, तिलक यादव, भुवन साहू, तिलक साहू, उमेन्द्र दीवान, भूपेंद्र मनोज साहू, सुकदेव दीवान, लीलेश्वर साहू एवं विष्णु दीवान का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय परिवार ने सभी पालकों, ग्रामीणों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की सहभागिता और ग्रामीणों के उत्साह से कांवड़ यात्रा पूरे गांव के लिए यादगार बन गई।


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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, अगस्त में ₹23,544 करोड़ का निवेश

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है। Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने अगस्त 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार में ₹23,544 करोड़ का निवेश किया है। बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और भारतीय कंपनियों की बेहतर कारोबारी संभावनाओं ने विदेशी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जुलाई के बाद अगस्त में भी जारी रही खरीदारी

अगस्त में विदेशी निवेश का यह रुझान जुलाई में शुरू हुई खरीदारी की निरंतरता है। जुलाई 2026 में FPIs ने भारतीय इक्विटी में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इससे पहले लगातार चार महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला था।

आंकड़ों के अनुसार, FPIs ने जून में करीब ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में लगभग ₹1.17 लाख करोड़ भारतीय इक्विटी से वापस निकाले थे। ऐसे में जुलाई और अगस्त की लगातार खरीदारी को बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की खरीदारी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें भारतीय कंपनियों के तिमाही परिणामों में सुधार, रुपये की स्थिरता और भारतीय अर्थव्यवस्था तथा कंपनियों की बेहतर विकास संभावनाएं शामिल हैं। इन सकारात्मक संकेतों से विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय बाजार को लेकर धारणा में सुधार हुआ है।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर निवेश का रुझान उभरते बाजारों की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने भी भारतीय इक्विटी को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखा है।

निवेश का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार और प्राथमिक बाजार में

अगस्त में अब तक हुए ₹23,544 करोड़ के कुल निवेश में लगभग ₹14,118 करोड़ स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से और करीब ₹9,426 करोड़ प्राथमिक बाजार (Primary Market) के जरिए आया है। इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक केवल सूचीबद्ध शेयरों में ही नहीं, बल्कि नए इश्यू और बाजार में आने वाली कंपनियों में भी रुचि दिखा रहे हैं।

वित्तीय, ऑटो और IT क्षेत्र में भी बढ़ी दिलचस्पी

अगस्त के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल और IT क्षेत्र में खरीदारी की। वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश की वापसी को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों की आय और विकास क्षमता को लेकर बढ़ते भरोसे का संकेत मिलता है।

फिर भी 2026 में विदेशी निवेश का कुल आंकड़ा नकारात्मक

हालांकि अगस्त में विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी सकारात्मक संकेत दे रही है, लेकिन पूरे 2026 के आंकड़ों को देखें तो FPIs अभी भी भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.3 लाख करोड़ रही है।

इसलिए अगस्त की खरीदारी को विदेशी निवेशकों के रुख में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसे स्थायी वापसी मानने से पहले आने वाले महीनों के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।

भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार दो महीनों की खरीदारी भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि यह निवेश प्रवाह आगे भी जारी रहता है, तो इससे भारतीय इक्विटी बाजार में तरलता, निवेशकों का भरोसा और बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है।

अगस्त में ₹23,544 करोड़ का FPI निवेश ऐसे समय आया है जब भारतीय कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन में सुधार और रुपये की स्थिरता ने बाजार को सहारा दिया है। हालांकि वैश्विक बाजारों की अस्थिरता और अन्य बाहरी जोखिमों के कारण आगे भी निवेशकों की नजर भारतीय बाजार की आय वृद्धि, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बनी रहेगी।

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: यौन उत्पीड़न की शिकायतों की प्राथमिकता से जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट का पैनल

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नई दिल्ली- दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शिकायतों की जांच के लिए अलग से नई कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस पूरे मामले की जांच के लिए पहले ही हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को महिला प्रदर्शनकारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

यह मामला 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए NEET संबंधी छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा को लेकर कई आरोप सामने आए थे। इनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति को पुलिस कार्रवाई, कथित अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों तथा पुलिस के खिलाफ प्रत्यारोपों की जांच का दायित्व दिया गया है।

यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता

सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी मांग रखी कि पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत सीधे किसी स्वतंत्र अधिकारी या न्यायिक अधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकें।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में इन शिकायतों को विशेष रूप से प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जा चुका है। समिति को इन मामलों की जल्द जांच कर अंतरिम रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा गया है।

शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि कथित पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायतें समिति तक किस प्रकार पहुंचाएंगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि समिति के अध्यक्ष को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतकर्ताओं को एक स्पष्ट और सुलभ माध्यम उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बाधा के अपनी शिकायत समिति के सामने रख सकें।

पांच सदस्यीय समिति करेगी व्यापक जांच

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC केवल यौन उत्पीड़न के आरोपों तक सीमित नहीं है। समिति को छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और हिंसा से जुड़े अन्य आरोपों की भी जांच करनी है।

समिति का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ, पुलिस कार्रवाई किस स्तर तक उचित थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश—शिकायतों की गंभीरता से जांच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के निर्देशों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को जांच प्रक्रिया में अलग से और गंभीरता के साथ देखा जाएगा। अदालत ने समिति को इन शिकायतों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने को कहा है।

फिलहाल अदालत ने अलग से नई जांच प्रक्रिया शुरू करने के बजाय मौजूदा हाई-पावर्ड कमेटी के माध्यम से मामले की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाया है। अब समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या घटनाएं हुईं और आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई आवश्यक होगी।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजर हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी की जांच और उसकी अंतरिम रिपोर्ट पर है। समिति द्वारा शिकायतों की जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश छात्र प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही और शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अजीत डोभाल चीन पहुंचे, 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता पर दुनिया की नजर

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नई दिल्ली- भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंच गए हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान डोभाल मंगलवार, 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 25वें Special Representatives (SR) स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे।

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने तथा सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। बैठक में डोभाल भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि की भूमिका निभाएंगे, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी वार्ता में शामिल होंगे।

सीमा विवाद और LAC पर रहेगा मुख्य फोकस

25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता का प्रमुख मुद्दा भारत-चीन सीमा प्रश्न रहेगा। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है। ऐसे में उच्चस्तरीय वार्ता को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

संबंधों में सुधार के बीच महत्वपूर्ण यात्रा

डोभाल की बीजिंग यात्रा भारत और चीन के बीच हाल में दिखाई दे रहे कूटनीतिक संपर्कों के बीच हो रही है। दोनों देश सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस वार्ता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आने वाले समय में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित संपर्क को लेकर भी चर्चा है। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले डोभाल की चीन यात्रा को महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

चीनी उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अजीत डोभाल अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि यात्रा केवल सीमा वार्ता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर भी उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना है।

आगे की राह के लिए अहम मानी जा रही वार्ता

भारत-चीन सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में 25वीं SR वार्ता से यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और आपसी विश्वास बहाल करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

डोभाल की बीजिंग यात्रा को भारत-चीन संबंधों में संवाद और कूटनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, वार्ता के वास्तविक परिणाम और किसी ठोस सहमति की जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।

मणिपुर के सेनापति में फिर भड़की हिंसा: कई घरों में आगजनी, गोलीबारी में CRPF जवान घायल

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इंफाल- मणिपुर के सेनापति जिले में सोमवार को एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। ताफू और आसपास के इलाकों में आगजनी के बाद दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक जवान घायल हो गया। हिंसा के दौरान कई घरों को आग के हवाले किए जाने की भी सूचना है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) को भी बाधित किया। प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

तड़के शुरू हुई आगजनी

पुलिस और अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब 2:30 से 2:40 बजे कांगपोकपी जिले के ताफू कुकी गांव में एक मकान में आग लगा दी गई। आग की सूचना मिलने के बाद दमकलकर्मियों को बुलाया गया और इलाके में पुलिस की तैनाती की गई।

इसके बाद सुबह करीब 4 बजे सेनापति जिले के नागा ताफू इलाके में कई मकानों को कथित तौर पर जला दिया गया। उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ पूरी तरह जल गए। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

गोलीबारी में 54 वर्षीय CRPF जवान घायल

आगजनी के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सुबह करीब 9:20 बजे ताफू नागा इलाके में दो गुटों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इसी दौरान 36वीं बटालियन के 54 वर्षीय CRPF कांस्टेबल को गोली लगने की सूचना है।

घायल जवान को तत्काल सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक जवान की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

NH-2 पर प्रदर्शन, यातायात प्रभावित

आगजनी की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने सेनापति गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर लकड़ियां और टायर जलाकर सड़क को बाधित किया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

NH-2 मणिपुर को नागालैंड और आगे देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सड़क अवरोध के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होना क्षेत्र की सामान्य आवाजाही के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

ग्रामीण प्रशासन ने की घटना की निंदा

ताफू कुकी विलेज अथॉरिटी ने मकानों को जलाए जाने और संपत्ति के नुकसान की कड़ी निंदा की है। स्थानीय प्राधिकरण ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तथा प्रशासन से मामले की जांच करने की अपील की है।

प्राधिकरण ने हिंसा, आगजनी और संपत्ति के नुकसान से दूर रहने की अपील भी की है।

इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

घटना के बाद सेनापति और कांगपोकपी के प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि हिंसा को आगे फैलने से रोका जाए और इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल की जाए। गोलीबारी किस पक्ष की ओर से शुरू हुई और आगजनी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं, इसकी जांच की जा रही है।

प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, संपत्ति के नुकसान और घटनाओं की पूरी स्थिति का आकलन अभी किया जा रहा है।

2023 से जारी तनाव की पृष्ठभूमि

सेनापति और कांगपोकपी सहित मणिपुर के कई इलाकों में लंबे समय से जातीय और सामुदायिक तनाव बना हुआ है। मई 2023 में शुरू हुए व्यापक संघर्ष के बाद राज्य में 260 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की रिपोर्ट सामने आई है।

सोमवार की ताजा घटना ने एक बार फिर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और शांति बहाली को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित करना, घायल CRPF जवान का उपचार सुनिश्चित करना, दोषियों की पहचान करना और किसी भी संभावित जवाबी हिंसा को रोकना है।

नोट: यह एक विकसित होती हुई खबर है। आगजनी में क्षतिग्रस्त या जले मकानों की अंतिम संख्या और घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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