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कल से शुरू होने जा रहा है जनजातीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन का जीवंत उत्सव ‘बस्तर पंडुम’

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव ‘बस्तर पंडुम’ इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।

‘पंडुम’ शब्द का अर्थ ही उत्सव होता है और वास्तव में यह आयोजन बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम बन चुका है।

इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर, विकासखंड एवं जिला स्तर, संभाग/राज्य स्तरीय समापन समारोह। इन चरणों के माध्यम से बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में निवासरत आदिवासी कलाकारों, शिल्पकारों, लोक गायकों और नृत्य दलों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। बस्तर पंडुम में माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा सहित विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। मांदर, ढोल, तिरिया, बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे वातावरण को उत्सवी रंग में रंग देगी।

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय समाज की विशिष्ट वेशभूषा, प्राकृतिक रंगों से सजे परिधान, मनमोहक आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार दर्शकों को आकर्षित करेंगे। यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बस्तर पंडुम में आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजन, पेय पदार्थ, मोटे अनाज, कंद-मूल, साग-सब्ज़ी और औषधीय खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे पारंपरिक पोषण ज्ञान और स्थानीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

विभिन्न स्तरों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों, समूहों और प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। यह पहल कलाकारों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ लोक कलाओं को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रही है। बस्तर पंडुम के माध्यम से आदिवासी जीवन शैली, परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। आज बस्तर पंडुम एक उत्सव भर नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक बन चुका है। देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटक और संस्कृति प्रेमी इस उत्सव के माध्यम से बस्तर की आत्मा को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं।

युवाओं में नेतृत्व और सेवा भाव का सशक्त मंच बनेगी राष्ट्रीय जंबूरी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में पूर्व राज्यसभा सांसद एवं भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए जैन का स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पहली बार आयोजित हो रहे पाँच दिवसीय राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी आयोजन के लिए डॉ. अनिल जैन को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और इसे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए गौरव का विषय बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. अनिल जैन के सक्षम नेतृत्व में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का राष्ट्रीय स्तर का आयोजन छत्तीसगढ़ में आयोजित होना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह जंबूरी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा भाव को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी मंच बनेगी। देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, सामाजिक और युवा शक्ति का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन होगा।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह जंबूरी न केवल युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करेगी, बल्कि “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

’भौतिक सत्यापन में 2372 क्विंटल कम मिला धान, मिलर्स के विरुद्ध एफआईआर दर्ज’

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बलौदाबाजार। कलेक्टर दीपक सोनी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में जिले में धान खरीदी कार्य पारदर्शी एवं सुचारु रूप से संचालित हो रहा है। समितियों एवं उपार्जन केंद्रों में अवैध धान न खपा पाए इसको दृष्टिगत रखते हुए जिले के सभी राइस मिलो का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। इसी कड़ी में कविता रईस मिल में 2327.64 क्विंटल धान कम पाए जाने पर मिल संचालक़ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हथबंध स्थित कविता राइस इंडस्ट्रीज का भौतिक सत्यापन के दौरान 2372.64 क्विंटल धान कम पाए जाने पर छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 के तहत 5403.6 क्विंटल धान व 3362.5 क्विंटल चावल जब्त कर मेसर्स कविता राइस इंडस्ट्रीज के संचालक अंशुल जोतवानी के विरुद्ध पुलिस थाना हथबंद में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

गौरतलब है कि राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा पारदर्शितापूर्ण धान खरीदी सुनिश्चित करने तथा अवैध रूप से धान बिक्री करने वालों पर अंकुश लगाने सम्बंधितो पर कड़ी कार्यवाही की जा रही है। समिति एवं उपार्जन केंद्रों के साथ ही राईस मिल एवं थोक विक्रेताओ का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फिजी के कृषि एवं जलमार्ग मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक की

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में फिजी के कृषि एवं जलमार्ग मंत्री टोमासी टुनाबुना के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों के बीच जारी सहयोग की समीक्षा की गई तथा भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, जो आपसी सम्मान, सहयोग तथा मजबूत सांस्कृतिक और जन-जन के संपर्कों के आधार पर निरंतर सुदृढ़ हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों देश कृषि और खाद्य सुरक्षा को द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में मान्यता देते हैं।

बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की। दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन (MoU) को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने तथा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group – JWG) गठित करने पर सहमति व्यक्त की।

चर्चा के प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में छात्र आदान-प्रदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम, छोटे पैमाने की कृषि मशीनरी, डिजिटल कृषि उपकरणों का उपयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान अवसंरचना को सुदृढ़ करना, आनुवंशिक संसाधनों का आदान-प्रदान, तथा खाद्य हानि और अपव्यय को कम करने से संबंधित ज्ञान साझा करना शामिल रहा।

फिजी की ओर से प्रतिनिधिमंडल में टोमासी टुनाबुना, कृषि एवं जलमार्ग मंत्री;चरणजीत सिंह, बहु-जातीय मामलों एवं चीनी उद्योग मंत्री; जगन्नाथ सामी, फिजी के उच्चायुक्त; डॉ. विनीश कुमार, चीनी मंत्रालय के स्थायी सचिव; नित्य रेड्डी, फिजी शुगर कॉरपोरेशन के बोर्ड अध्यक्ष; तथा पाउलो डाउरेवा, फिजी उच्चायोग के परामर्शदाता शामिल थे।

भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी, DARE के सचिव एम. एल. जाट तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।

यह बैठक भारत–फिजी कृषि सहयोग को नई दिशा देने तथा खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।


वन विभाग की बड़ी कार्रवाई- उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में 6 शिकारी गिरफ्तार

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रायपुर। राज्य वन क्षेत्र अंतर्गत आ रहे शिकार के मामलों पर अंकुश लगाने व ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए जिससे वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, इसके लिए वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा, संरक्षण व संवर्धन के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है, जिसके फलस्वरूप वनमंत्री कश्यप के नेतृत्व व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के कुशल दिशा निर्देश का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग द्वारा लगातार एंटी स्नेयर वाक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे वन विभाग को लगातार सफलता मिल रही है।

वन क्षेत्र में शिकार पर अंकुश लगाने के लिए कठोर गश्तए वनकर्मियों की तैनाती, आधुनिक तकनीक,ड्रोन, ट्रैप कैमरे, का उपयोग, स्थानीय समुदायों को जोड़ना, कड़े कानून और जुर्माने, और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाने चाहिए, खासकर पिकनिक या अन्य गतिविधियों की आड़ में होने वाले अवैध शिकार को रोकने के लिए चौकसी बढ़ाया गयी है।

गरियाबंद जिले के परिक्षेत्र कुल्हाड़ीघाट के अंतर्गत ओड़ सर्कल में वन्यजीव अपराध के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। वन विभाग द्वारा अवैध शिकार को रोकने के लिए निरंतर निगरानी बरती जा रही है और नियमित एन्टी स्नेयर वाक अभियान चलाए जा रहे हैं। वन विभाग की मुस्तैदी के चलते ग्राम सुनाबेड़ा (ओडिशा) के 02 और ग्राम ओड़ के 04 अभियुक्तों को धर-दबोचा गया है। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से खरगोश पकड़ने के फंदे, तीर-कमान और मछली पकड़ने के जाल जैसे शिकार की सामग्री बरामद किए गए हैं। इन अभियुक्तों के विरुद्ध दो अलग-अलग प्रकरणों में पी.ओ.आर. (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है। गिरफ्तार किए गए सभी 06 अभियुक्तों को दिनांक 07 जनवरी को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया।

वन विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकारियों के हौसले पस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वन विभाग द्वारा वनों और वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए गश्त अभियान को और अधिक सशक्त किया गया है ताकि भविष्य में शिकार की ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

लोकसंस्कृति, जनजातीय गौरव और राष्ट्रबोध का संगम बना आदि लोकोत्सव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम, गोवा में आयोजित 'आदि लोकोत्सव' पर्व–2025 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 'आदि लोकोत्सव' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकोत्सव देश की आदिम संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत उत्सव है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। 

उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखना अत्यंत आवश्यक है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी भव्य तथा व्यापक स्वरूप में आयोजित होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती दी और अपने अदम्य साहस से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुष ऐसे हैं, जिन्हें देश के इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशभर में सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज की महान वीरांगना थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके गौरव को स्थायी स्वरूप देते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है और यहां के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन जनजातीय नायकों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। मुख्यमंत्री साय ने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस डिजिटल संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है कि आज देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति के रूप में भी जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री श्री मोदी की समावेशी सोच का प्रमाण है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों का स्मरण किया और कहा कि उनके कार्यकाल में ही पहली बार देश में आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें उनके साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान पहले नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में होती थी, लेकिन आज वह तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और राज्य अब शांति, विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन क्षेत्रों में पहले निवेश नहीं आते थे, वहां अब उद्योग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य के आर्थिक भविष्य की नई दिशा तय कर रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने एलपीयू के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, युवाओं से नैतिक जिम्मेदारी के साथ उत्कृष्टता अपनाने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के दीक्षांत समारोह में मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने युवाओं से देश और मानवता की सेवा में व्यावसायिक उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत @2047 की दृष्टि पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत स्वतंत्रता के शताब्दी समारोह की ओर अग्रसर होते हुए एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। यह दृष्टि केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समग्र विकास शामिल हैं, जिनका साकार होना मुख्यतः युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करता है।

उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत का वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने का लक्ष्य कभी भी अन्य छोटे राष्ट्रों को अपनी शर्तें थोपने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी देश भारत को अपनी शर्तें थोप न सके।

उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलाव की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वह चीज़ जो पाँच साल पहले प्रासंगिक थी, वह जल्द ही अप्रासंगिक भी हो सकती है। परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर तत्व है, और अनुकूलनशीलता तथा जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता ही सतत सफलता के लिए आवश्यक हैं।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से न करें, क्योंकि हर व्यक्ति की यात्रा और गति अलग होती है। उन्होंने अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार प्रयास, दृढ़ता और ईमानदारी किसी को भी साधारण शुरुआत से महान जिम्मेदारियों तक ले जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वयं के लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन केवल स्वयं के लिए जीने से जीवन के बड़े उद्देश्य की अवहेलना होती है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों के लिए तीन मार्गदर्शक सिद्धांत बताये —

• प्रभावी समय प्रबंधन अपनाना,
• दीर्घकालिक सफलता को कमजोर करने वाले शॉर्टकट से बचना,
• और हार न मानना।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक शब्दों — “उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” — को याद दिलाया।

उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी के ‘जय जवान स्कॉलरशिप’ की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों के बलिदानों का सम्मान करती है और उन्हें शैक्षिक समर्थन प्रदान करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्वविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्मित करने वाले संस्थान हैं।

उन्होंने ड्राय़ग्स के बढ़ते दुष्प्रभाव पर चिंता जताई और इसे युवा तथा समाज के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने छात्रों से दृढ़तापूर्वक “ड्रग्स को नहीं कहो” और अनुशासन, उद्देश्य तथा स्वस्थ जीवन को चुनने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने छात्रों को कहा कि वे हमेशा अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति कृतज्ञ रहें, जिनके मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्यों ने उनके चरित्र और भाग्य को आकार दिया है।

इस दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, पंजाब सरकार के मोहिन्दर भगत (प्रति संरक्षण कल्याण, स्वतंत्रता सेनानियों एवं बागवानी मंत्री) और डॉ. अशोक कुमार मित्तल (राज्यसभा सांसद तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर) सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।


राज्यपाल रमेन डेका ने प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का किया शुभारंभ

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युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। 

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया।

इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे।

शांति और विकास की ओर बस्तर का ऐतिहासिक मोड़: दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों का आत्मसमर्पण

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रायपुर। बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन है।

बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रमाण है कि “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।”

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।

उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय नहीं, भविष्य की भूमि बन रहा है — जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘समग्र शिक्षा 3.0’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘रीइमैजिनिंग समग्र शिक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शात्मक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।


बैठक में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अगले चरण में शासन, अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र हितलाभों को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक प्राथमिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); संजय कुमार, सचिव (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता); डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा); मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा सचिव एवं समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक; विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो। उन्होंने सीखने की खाइयों को पाटने, ड्रॉपआउट दर कम करने, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार, शिक्षक क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण कौशलों के विकास तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और सुझाव स्कूली शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने तथा समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक प्रतिस्पर्धी, भारतीय मूल्यों से जुड़ा और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और ज्ञान तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों को पुनः समाज के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष बाद देश शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार कर इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे विद्यालयों और राज्यों की जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण से तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना का व्यावहारिक रूप है, जहां विद्यालय परिवर्तन के केंद्र बनते हैं और बहुविषयक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के अपर सचिव धीरज साहू ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें समग्र शिक्षा और एनईपी 2020 के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी वर्षों के लिए रूपरेखा और प्रमुख उपलब्धि लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

समग्र शिक्षा एक एकीकृत, केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक संपूर्ण स्कूली शिक्षा को समग्र दृष्टिकोण से कवर करती है।


थल सेना प्रमुख का यूएई और श्रीलंका का आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न

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थल सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 05 से 08 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। यह दौरा पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को गहरा करने, सैन्य-से-सैन्य संपर्क को सुदृढ़ करने तथा रणनीतिक साझेदारियों को मजबूती प्रदान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा

05 से 06 जनवरी 2026 तक यूएई प्रवास के दौरान, थल सेना प्रमुख ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व, विशेष रूप से यूएई थल सेना के कमांडर के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने, आपसी संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने तथा संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान के नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जनरल द्विवेदी को यूएई थल सेना की संगठनात्मक संरचना, भूमिकाओं और परिचालन क्षमताओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया और अधिकारियों तथा सैनिकों से संवाद किया। इन बैठकों से सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिला।

थल सेना प्रमुख ने यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करते हुए रणनीतिक संवाद, नेतृत्व विकास तथा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

दौरे के दौरान उन्होंने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से भी मुलाकात की, जिसमें रक्षा कूटनीति और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

श्रीलंका की यात्रा

07 से 08 जनवरी 2026 तक श्रीलंका दौरे के दौरान, थल सेना प्रमुख ने श्रीलंका सेना के कमांडर, रक्षा उप मंत्री तथा रक्षा सचिव सहित वरिष्ठ सैन्य और असैनिक नेतृत्व के साथ सार्थक चर्चाएं कीं। इन वार्ताओं में प्रशिक्षण सहयोग, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

रक्षा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, जनरल द्विवेदी ने डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (DSCSC) में अधिकारियों को संबोधित किया तथा आर्मी वॉर कॉलेज, बुट्टाला में अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से संवाद किया। आर्मी वॉर कॉलेज में उन्होंने एक खेल परिसर की आधारशिला रखी और एंबुलेंस वैन औपचारिक रूप से सौंपे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने श्रीलंका सेना को 20 महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन और सिमुलेटर भी प्रदान किए, जिससे परिचालन क्षमता और प्रशिक्षण अवसंरचना को और मजबूती मिली।

थल सेना प्रमुख ने आईपीकेएफ युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया और भारत–श्रीलंका के साझा इतिहास तथा गहरे जन-जन संबंधों को पुनः रेखांकित किया। उन्होंने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से भी मुलाकात की।

प्रमुख उपलब्धियां और निष्कर्ष

इस यात्रा के माध्यम से यूएई और श्रीलंका दोनों के साथ रक्षा एवं सैन्य-से-सैन्य सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई। रणनीतिक संवाद को मजबूती मिली, पेशेवर सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान का विस्तार हुआ तथा ठोस क्षमता निर्माण पहलों को आगे बढ़ाया गया। इससे आपसी विश्वास सुदृढ़ हुआ, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ी और एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हुई।

यह सफल यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सहकारी सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है, साथ ही मित्र राष्ट्रों के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारियों को और गहराई प्रदान करती है।

उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में भारत क्लाइमेट फोरम 2026 का उद्घाटन संबोधन दिया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारत क्लाइमेट फोरम 2026 में उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि जलवायु कार्रवाई भारत के विकास के लिए कोई बाधा नहीं है, बल्कि यह समावेशी विकास को तेज़ करने, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के निर्माण का एक रणनीतिक अवसर है।

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समझ परिषद (Council for International Economic Understanding) की सराहना करते हुए, जिसने इस फोरम को गंभीर विमर्श और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित किया है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु और सततता से जुड़े मुद्दों पर भारत की प्रतिबद्धता उसकी सभ्यतागत सोच में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि स्थिरता के आधुनिक विमर्श से बहुत पहले ही भारतीय चिंतन में मानव गतिविधियों और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर बल दिया गया था, जो पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों, सतत कृषि पद्धतियों, जैव विविधता संरक्षण और प्रकृति तथा अपरिग्रह जैसे नैतिक सिद्धांतों में परिलक्षित होता है।

पिछले एक दशक में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश ने निरंतर विकास और समानता, वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने एक विकासशील राष्ट्र के रूप में जलवायु जिम्मेदारी को देखने के दृष्टिकोण को मूल रूप से परिभाषित किया है।

COP-26 में घोषित भारत की पंचामृत प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये लक्ष्य निम्न-कार्बन भविष्य की ओर स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं, जिनमें 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य शामिल है, साथ ही भारत की विकास प्राथमिकताओं और भावी पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व की पुष्टि भी करते हैं।

स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विकसित भारत केवल आयातित तकनीकों या कमजोर आपूर्ति शृंखलाओं पर आधारित नहीं हो सकता। इसका आधार स्वदेशी स्वच्छ प्रौद्योगिकियां, सुदृढ़ विनिर्माण क्षमता और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सतत सामग्री, जलवायु-स्मार्ट कृषि और डिजिटल जलवायु समाधानों जैसे क्षेत्रों में वैश्विक निर्माता के रूप में उभर रहा है—जिससे मेक इन इंडिया को मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड का स्वरूप मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियां सोलर मॉड्यूल, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन घटकों, इलेक्ट्रोलाइज़र और हरित ईंधन में बड़े निवेश कर रही हैं, जबकि स्टार्ट-अप्स जलवायु डेटा, ऊर्जा दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्रों में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

वैश्विक सहयोग पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है, जिसके लिए सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की साझेदारी की नीति सहयोग पर आधारित है, न कि निर्भरता पर। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) के संस्थापक बल के रूप में भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों को सस्ती और विस्तार योग्य सौर ऊर्जा समाधानों के लिए एकजुट किया है। आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) में भारत के नेतृत्व को उन्होंने जलवायु-जनित झटकों से अवसंरचना प्रणालियों को सुदृढ़ करने और विकास उपलब्धियों की रक्षा करने की दूरदर्शी पहल बताया।

इस अवसर पर भारत क्लाइमेट फोरम के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के पूर्व सांसद एन. के. सिंह; भारत क्लाइमेट फोरम की संयोजक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी; सह-अध्यक्ष सुमंत सिन्हा; तथा अध्यक्ष, भारत क्लाइमेट फोरम, डॉ. अश्विनी महाजन सहित देश-विदेश से आए नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, विशेषज्ञ, शिक्षाविद और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।


उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में भारतीय भाषाओं पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय भाषाओं पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन वैश्विक हिंदी परिवार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

विद्वानों, भाषाविदों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने भाषा को सभ्यता की अंतरात्मा बताया, जो पीढ़ियों के बीच सामूहिक स्मृति, ज्ञान प्रणालियों और मूल्यों को वहन करती है। प्राचीन शिलालेखों और ताड़पत्र पांडुलिपियों से लेकर आज की डिजिटल लिपियों तक, भाषाओं ने दर्शन, विज्ञान, काव्य और नैतिक परंपराओं को संरक्षित रखा है, जो मानवता को परिभाषित करती हैं।

चेन्नई में हाल ही में आयोजित सिद्ध दिवस समारोह में अपनी सहभागिता को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वहां उन्होंने बड़ी संख्या में ताड़पत्र पांडुलिपियां देखीं, जो भारत की विशाल और बहुभाषी ज्ञान परंपराओं की स्थायी साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रत्येक भाषा ने दर्शन, चिकित्सा, विज्ञान, शासन और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में गहरा योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि भारत की अनेक भाषाओं ने कभी भी देश को विभाजित नहीं किया, बल्कि उन्होंने साझा सभ्यतागत चेतना और समान धर्म को संरक्षित एवं सुदृढ़ किया है।

राज्यसभा के सभापति के रूप में संसद के अपने प्रथम सत्र के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अब संसद सदस्य बढ़ती संख्या में अपनी मातृभाषाओं में बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि हाल ही में भारत के संविधान का संथाली भाषा में अनुवादित संस्करण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा जारी किया गया, जिसे उन्होंने भाषाई समावेशन और सभी भाषाई समुदायों के प्रति लोकतांत्रिक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान और उसकी आठवीं अनुसूची भाषाई विविधता को मान्यता देकर और उसका उत्सव मनाकर भारत की प्राचीन बुद्धिमत्ता को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता समानता में नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान में निहित है, और लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में अभिव्यक्ति कर सके।

समकालीन चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि विश्वभर में अनेक स्वदेशी भाषाएं संकटग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे भाषा सम्मेलन अनुसंधान को सुदृढ़ करने, अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा विशेष रूप से संकटग्रस्त भाषाओं की प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की गई पहलों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रेखांकित किया, जो बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने भारतीय भाषाओं की पांडुलिपियों के संरक्षण और प्रसार के लिए ज्ञान भारतम मिशन की सराहना की और भारत की इस मान्यता को दोहराया कि ज्ञान पवित्र है और उसे साझा किया जाना चाहिए।

भाषा संरक्षण में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने डिजिटल अभिलेखागार, एआई-आधारित अनुवाद उपकरणों और बहुभाषी प्लेटफॉर्म के उपयोग का आह्वान किया, ताकि भारतीय भाषाएं वर्तमान में फलें-फूलें और भविष्य को आकार दें।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषाओं के संरक्षण से भारत अपनी सभ्यताओं का संरक्षण करता है; भाषाई विविधता के पोषण से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है; और प्रत्येक भाषा का उत्सव मनाकर मानव गरिमा को सम्मान मिलता है।

इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्याम परांडे सहित देश-विदेश से आए विद्वान, शिक्षाविद, भाषाविद, शोधकर्ता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी से बालोद बना भारत की युवा शक्ति का नया केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ का बालोद जिला आज देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा और गौरव का नया केंद्र बन गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिला बालोद के ग्राम दुधली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार रोवर-रेंजर अपनी सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक जंबूरी छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति को राष्ट्रीय मंच पर लाने का सुनहरा अवसर है। राष्ट्रीय स्तर के कैंपिंग, रोवर-रेंजर प्रशिक्षण, सांस्कृतिक संध्याओं और सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभागी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बालोद की धरती पर उमड़ा यह उत्साह भारत की भावी पीढ़ी की ऊर्जा, समर्पण और संकल्प को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के खेल, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित, प्रशिक्षित और आत्मविश्वासी युवा शक्ति ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने जंबूरी में भाग ले रहे सभी रोवर-रेंजरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनका उत्साह और सेवा भाव छत्तीसगढ़ का परचम देश-दुनिया में और ऊँचाई तक ले जाएगा।

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नमामि गंगे मिशन चरण–II के अंतर्गत सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं की महत्वपूर्ण प्रगति

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नमामि गंगे मिशन चरण–II के तहत वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) में 5 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया, जो विभिन्न राज्यों में प्रदूषण निवारण एवं नदी पुनर्जीवन के प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान अब तक कुल 9 परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी हैं, जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूसरी तिमाही (Q2) तक उत्तराखंड के उधम सिंह नगर, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, पश्चिम बंगाल के महेशतला एवं जंगीपुर में परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी थीं।

इन 5 नई परियोजनाओं के चालू होने के साथ, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 3,976 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज शोधन क्षमता का संचालन किया जा चुका है, जबकि परिचालित सीवेज शोधन संयंत्रों (STP) की कुल संख्या 173 हो गई है। ये उपलब्धियां नदियों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने तथा शहरी स्वच्छता अवसंरचना को सुदृढ़ करने के मिशन के मूल उद्देश्य को और मजबूत करती हैं।

उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में प्रदूषण निवारण प्रयासों को एक बड़ी मजबूती मिली है, जहां ₹65 करोड़ की लागत से विकसित 5 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक पर आधारित है। इस परियोजना से लगभग 3 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा, सीवेज का प्रभावी इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन सुनिश्चित होगा तथा गंगा नदी में सीवेज के प्रवाह को रोका जा सकेगा।

आगरा (उत्तर प्रदेश), जो यमुना बेसिन का एक प्रमुख शहर है, में प्रदूषण निवारण कार्य, आगरा परियोजना के अंतर्गत Q3 के दौरान 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो सीवेज शोधन संयंत्रों का संचालन शुरू किया गया है। ₹842 करोड़ की कुल लागत से स्वीकृत इस परियोजना में 13 एसटीपी के माध्यम से कुल 177.6 एमएलडी क्षमता विकसित की जानी है। HAM मॉडल के तहत SBR तकनीक पर आधारित यह परियोजना लगभग 25 लाख निवासियों को लाभान्वित करेगी, जिससे यमुना नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा।

पवित्र नगरी वाराणसी में अस्सी–बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹308 करोड़ की लागत से स्वीकृत यह परियोजना DBOT मॉडल के अंतर्गत SBR तकनीक पर आधारित है और लगभग 18 लाख की आबादी को सेवाएं प्रदान करेगी। इस संयंत्र के चालू होने से गंगा नदी को सीवेज प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी तथा शहर में दीर्घकालिक अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ बैरकपुर में Q3 के दौरान 30 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹154 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस परियोजना के अंतर्गत कुल 38 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी प्रस्तावित हैं। HAM मॉडल के तहत और एनजीटी मानकों के अनुरूप विकसित यह परियोजना लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ पहुंचाएगी तथा गंगा नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने में सहायक होगी।

इसके अतिरिक्त, बिहार के पटना स्थित कंकड़बाग एसटीपी, जिसे पहले 15 एमएलडी क्षमता के साथ आंशिक रूप से परिचालित किया गया था, वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही में इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है। इससे शहर में सीवेज शोधन अवसंरचना और अधिक सुदृढ़ हुई है तथा गंगा के किनारे प्रदूषण निवारण प्रयासों को बल मिला है।

ये सभी उपलब्धियां स्वच्छ नदियों और बेहतर शहरी स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं, साथ ही सतत एवं समग्र नदी पुनर्जीवन के मिशन के मूल उद्देश्य को और सशक्त बनाती हैं।


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