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बड़ा विमान हादसा: टेक-ऑफ के दौरान C-130 क्रैश, 66 की मौत

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 बोगोटा / कोलंबिया: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार को एक भीषण सैन्य विमान हादसा हो गया। एयरफोर्स का हरक्यूलिस C-130 विमान टेक-ऑफ के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें अब तक 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 4 सैनिक अब भी लापता हैं।


सेना, वायुसेना और पुलिस के जवान शामिल

सैन्य सूत्रों के अनुसार, मृतकों में 58 सैनिक, 6 वायुसेना कर्मी और 2 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में कुल 114 सैनिक और 11 क्रू मेंबर सवार थे।

पेरू सीमा के पास हुआ हादसा

यह हादसा प्यूर्टो लेगुइजामो में हुआ, जो पेरू की सीमा के पास स्थित है। कोलंबिया के रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने बताया कि विमान टेक-ऑफ के तुरंत बाद नियंत्रण खो बैठा और रनवे से करीब 1.5 किलोमीटर दूर जाकर गिर गया।

राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे के बाद सेना, राहत दल और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

 मुख्य बिंदु:

टेक-ऑफ के दौरान C-130 विमान क्रैश
66 लोगों की मौत, 50+ घायल
4 सैनिक अब भी लापता
पेरू सीमा के पास अमेजन क्षेत्र में हादसा
राहत और बचाव अभियान जारी

BIG NEWS : 12वीं हिंदी बोर्ड परीक्षा रद्द, 10 अप्रैल को दोबारा होगी परीक्षा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए बड़ी खबर है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कक्षा 12वीं के हिंदी विषय की बोर्ड परीक्षा को रद्द कर दिया है। 14 मार्च 2026 को आयोजित यह परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद निरस्त की गई है।


मंडल के निर्णय के अनुसार, अब हिंदी विषय की परीक्षा 10 अप्रैल 2026 को दोबारा आयोजित की जाएगी। यानी जिन विद्यार्थियों ने पहले परीक्षा दी थी, उन्हें पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा।

इस फैसले के बाद छात्रों के बीच चिंता का माहौल है, क्योंकि उन्हें दोबारा उसी विषय की तैयारी करनी पड़ेगी। वहीं बोर्ड का कहना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोपरि है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

माना जा रहा है कि पेपर लीक मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पापा राव के सरेंडर से नक्सलवाद पर निर्णायक वार: सीएम साय

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 रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर पापा राव के संभावित आत्मसमर्पण को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मजबूत इरादों तथा लगातार चल रहे अभियानों के चलते नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।


17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण की संभावना

मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के लिए निर्धारित समयसीमा 31 मार्च 2026 अब निकट है। ऐसे में यदि पापा राव जैसे बड़े नक्सली नेता आत्मसमर्पण करते हैं, तो इसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर सकता है। इसके लिए पुलिस की एक टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के एक गुप्त स्थान के लिए रवाना हुई है। संभावना जताई जा रही है कि उसे जल्द जगदलपुर लाया जाएगा, जहां वह बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकता है।

रणनीतिक भूमिका वाला बड़ा नक्सली चेहरा

करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव को नक्सल संगठन का प्रमुख रणनीतिक चेहरा माना जाता रहा है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य रह चुका है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के संचालन और हमलों की रणनीति तैयार करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

लगातार दबाव से कमजोर हुआ नेटवर्क

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हाल के समय में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। लगातार चल रहे अभियानों और सरेंडर नीति के चलते नक्सल संगठन पर दबाव बढ़ा है, जिससे उसका नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पापा राव का आत्मसमर्पण यदि होता है, तो यह बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है और संगठन की गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ेगा।

भारत-रूस रिश्तों को नई दिशा, पीएम मोदी के दौरे का इंतजार: लावरोव

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Modi Russia Visit 2026 : भारत और रूस के रिश्तों को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक संकेत सामने आया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे का इंतजार कर रहा है।


लावरोव ने “इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा” विषय पर आयोजित एक सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए यह बात कही। इस सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए।

रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी

लावरोव के बयान को भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग मजबूत रहा है। संभावित दौरे के दौरान:

ऊर्जा सहयोग, खासकर तेल आपूर्ति
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी
रक्षा सौदे और तकनीकी सहयोग
अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सहयोग

जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

वैश्विक परिदृश्य में बढ़ी अहमियत

यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर कई भू-राजनीतिक घटनाक्रम चल रहे हैं। एक ओर पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव बना हुआ है, वहीं भारत ने संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हुए सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखा है।

भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भी तटस्थ रुख अपनाया और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया, जिसे रूस सकारात्मक रूप में देखता है।

ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर फोकस

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता रहा है। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग है। भविष्य में संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।

एनआईए की कार्रवाई: 7 विदेशी नागरिक गिरफ्तार

इसी बीच, भारत में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 13 मार्च को देश के तीन एयरपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से तीन यूक्रेनी नागरिक
चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से तीन यूक्रेनी नागरिक
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से एक अमेरिकी नागरिक

जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है।

म्यांमार बॉर्डर से जुड़ी गतिविधियों की जांच

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग बिना अनुमति के मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंचे और वहां से अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार गए। वहां कुछ सशस्त्र समूहों से संपर्क और प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

रूस की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दौरे का संकेत जहां द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, वहीं देश के भीतर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई भी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सतर्कता को दर्शाती है। आने वाले समय में दोनों ही घटनाक्रमों पर नजर बनी रहेगी।

राजधानी में हाई अलर्ट: दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

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 Delhi Assembly Bomb Threat : राजधानी दिल्ली में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले। यह धमकी ऐसे समय आई, जब विधानसभा में बजट पेश होने वाला था। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं और पूरे परिसर की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।


अधिकारियों के अनुसार, सुबह दो अलग-अलग समय पर धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए। पहला ईमेल सुबह 7:28 बजे विधानसभा के आधिकारिक ईमेल पर आया, जबकि दूसरा ईमेल सुबह 7:49 बजे विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के इनबॉक्स में भेजा गया। दोनों ही ईमेल में विधानसभा भवन को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी।

इस बीच, रेखा गुप्ता द्वारा बजट भाषण दिए जाने से कुछ घंटे पहले मिली इस धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया।

धमकी में विधानसभा मेट्रो स्टेशन का भी उल्लेख किया गया, जिसके बाद मेट्रो परिसर और आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई। यात्रियों की जांच तेज कर दी गई और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ईमेल में कई प्रमुख नेताओं के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिनमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, एस. जयशंकर, तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर टीम को लगाया गया है। साथ ही, किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही हैं। हालांकि, प्रारंभिक तौर पर किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

भारत में वज़न घटाने वाली GLP-1 दवाओं की बिक्री पर सख्ती

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नई दिल्ली- भारत में वज़न घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली GLP-1 आधारित दवाओं की बढ़ती मांग और उनके गलत उपयोग को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया (CDSCO) ने देशभर में इन दवाओं की बिक्री और प्रचार पर निगरानी कड़ी कर दी है।

हाल के समय में इन दवाओं के कई जनरिक (सस्ते) वेरिएंट बाजार में आए हैं, जिसके बाद यह दवाएं रिटेल मेडिकल स्टोर्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, थोक विक्रेताओं और वेलनेस क्लीनिक्स के जरिए आसानी से उपलब्ध होने लगी हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका उपयोग करने से गंभीर साइड इफेक्ट्स और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

सरकार की बड़ी कार्रवाई

स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, केंद्र सरकार और राज्य औषधि नियामकों ने मिलकर सप्लाई चेन में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

  • 10 मार्च 2026 को एडवाइजरी जारी
    सभी दवा कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे:

    • किसी भी तरह के भ्रामक या अप्रत्यक्ष विज्ञापन (Surrogate Ads) न करें

    • दवाओं के गलत या ऑफ-लेबल उपयोग को बढ़ावा न दें

देशभर में जांच और निरीक्षण

पिछले कुछ हफ्तों में जांच अभियान तेज किया गया:

  • 49 संस्थानों का निरीक्षण, जिनमें शामिल हैं:

    • ऑनलाइन फार्मेसी वेयरहाउस

    • थोक दवा विक्रेता

    • रिटेल मेडिकल स्टोर

    • वेलनेस और स्लिमिंग क्लीनिक्स

  • जांच में फोकस रहा:

    • बिना अनुमति दवा बिक्री

    • गलत प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिस

    • भ्रामक मार्केटिंग

  • नियम तोड़ने वालों को नोटिस जारी किए गए हैं

कौन लिख सकता है ये दवा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि GLP-1 दवाएं केवल इन विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दी जा सकती हैं:

  • एंडोक्राइनोलॉजिस्ट

  • इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ

  • कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई

नियामक ने चेतावनी दी है कि आगे भी निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर:

  • लाइसेंस रद्द

  • जुर्माना

  • कानूनी कार्रवाई

जैसे कदम उठाए जाएंगे।

आम जनता के लिए सलाह

सरकार ने लोगों से अपील की है कि:

  • वज़न घटाने की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न लें

  • केवल प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श लें

  • ऑनलाइन या बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं खरीदने से बचें

निष्कर्ष

GLP-1 दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रहे और दवाओं का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी से बढ़ेगी परेशानी, 3 दिन में 4 डिग्री तक चढ़ेगा पारा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम फिलहाल पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और बारिश के कोई आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में प्रदेश के किसी भी हिस्से में वर्षा दर्ज नहीं की गई। हालांकि तापमान सामान्य से थोड़ा कम रहा, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें बढ़ोतरी के संकेत हैं।


सोमवार को राजधानी रायपुर का अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.4 डिग्री कम है। वहीं न्यूनतम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम है। सुबह और शाम के समय हवा में नमी क्रमशः 37% और 31% दर्ज की गई, जबकि बादल केवल 20% रहे, जिससे दिनभर आसमान साफ बना रहा।

प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ। बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और पेंड्रारोड सहित अन्य क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री तक कम बना रहा।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कोई सक्रिय मौसम तंत्र नहीं है, जिससे प्रदेश में शुष्क मौसम बना रहेगा। अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में विशेष परिवर्तन की उम्मीद नहीं है।

आज का मौसम (रायपुर)

मंगलवार, 24 मार्च को राजधानी रायपुर में आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की है, जिससे फिलहाल मौसम सामान्य और स्थिर बना रहेगा।

सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान

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रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर  विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।

विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।

तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।

72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

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तमनार के बाद लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में अफीम खेती का भंडाफोड़, आरोपी हिरासत में

जिला प्रशासन की कार्रवाई से संलिप्त लोगों में हड़कंप 

ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्रवाई जारी

कलेक्टर-एसएसपी ने ली प्रेस वार्ता, गैर कानूनी अफीम की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही कार्रवाई की दी जानकारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 

कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। 

इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई। लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

27 अप्रैल को गो सम्मान आह्वान अभियान की तैयारी जोरों पर

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आरंग- 27 अप्रैल को "गो सम्मान आह्वान अभियान"  के तहत पूरे देश में  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी जोरों पर हैं। गौ सेवक नगर  सहित गांव-गांव में पहुंचकर इस अभियान को सफल बनाने आमंत्रण पत्र भेंटकर अपील कर रहे हैं। 

इसी कड़ी में धर्म नगरी आरंग में भी गौ सेवको द्वारा 27 अप्रैल को कुमारेश्वर महादेव मंदिर से बाजे-गाजे के साथ गौ माता की जयकारे के साथ शोभायात्रा निकालकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही हैं। जिसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।इसी कड़ी में गौ सेवक रविवार को आरंग सहित, गुल्लू, देवरी, अकोलीकला, परस्कोल, समोदा , बनरसी, नारा,सहित विभिन्न गांवों में पहुंचकर जनमानस को गौ सम्मान आह्वान अभियान को सफल बनाने अपील किए।

अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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22 हजार से अधिक बैगा-गुनिया परिवार होंगे लाभान्वित

'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना'  के अंतर्गत हितग्राहियों को मिलेगी धनराशि

बलौदाबाजार में 25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम

रायपुर- छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।

इस योजना के तहत इस साल 4 लाख 95 हज़ार 965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10 हज़ार रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के 'न्याय और सुशासन' की गूंज होगी। 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

प्रकृति की गोद में रोमांच- मोहरेंगा नेचर सफारी, मोहरेंगा में जिप्सी सफारी और कॉटेज सुविधा शुरू

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 रायपुर : प्रकृति के करीब, पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना और स्थानीय संस्कृति व वन्यजीवों का सम्मान करते हुए की जाने वाली यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव का संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाना ही ईको-पर्यटन है। रायपुर जिले के खरोरा के पास ग्राम मोहरेंगा में ‘नेचर सफारी मोहरेंगा’ में नई ईको-पर्यटन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। विधायक सर्वश्री  किरण सिंहदेव, अनुज शर्मा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन और वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान हमारे घने जंगलों और जैव विविधता से है। हमारा लक्ष्य केवल पर्यटन का विकास करना नहीं है, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच एक संतुलन बनाना है। ये नवनिर्मित संरचनाएं पर्यटकों को प्रकृति के और करीब लाएंगी, जिससे पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। साथ ही, ईको-पर्यटन के माध्यम से हम स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।


यह सफारी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तिल्दा-खरोरा मार्ग पर स्थित है और करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। मोहरेंगा नेचर सफारी के माध्यम से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्र के स्थानीय युवा और बच्चों को प्रकृति के महत्व से जोड़ सकेंगे। यहां पर्यटक 10 किलोमीटर लंबी जिप्सी सफारी का आनंद ले सकते हैं। सफारी के दौरान चीतल, जंगली सूअर, खरगोश, अजगर जैसे वन्यजीवों और नीलकंठ, कोयल, ईगल जैसे पक्षियों को देखा जा सकता है।

पर्यटकों के लिए वॉच टॉवर, किड्स प्ले एरिया और सुंदर गार्डन की सुविधा भी विकसित की गई है। रात्रि विश्राम के लिए यहां चार सुसज्जित कॉटेज बनाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां के रेस्टोरेंट का संचालन ‘जय माँ अंबे महिला स्व-सहायता समूह’ द्वारा किया जा रहा है। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। मोहरेंगा नेचर सफारी पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्यटन विकास का एक अच्छा उदाहरण है, जो भविष्य में रायपुर के पास एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा।

सफारी क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए 8 तालाब, एनीकट और घास के मैदान विकसित किए गए हैं, जहां सौर ऊर्जा आधारित पंपों से पानी की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए लगभग 16 किलोमीटर लंबी चौनलिंक फेंसिंग भी की गई है। यह क्षेत्र साजा, खैर, महुआ, अर्जुन जैसे उपयोगी वृक्षों और सफेद मुसली, सतावर जैसी औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है। साथ ही यहां स्थित ‘दोहरा तिहरा माता’ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।

कोरबा में गौ तस्करी की अफवाह पर बवाल, दो पक्षों में झड़प

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 कोरबा। शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रविवार देर रात गौ तस्करी की आशंका को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पुलिस लाइन मुख्य मार्ग पर हुई इस घटना में गौ सेवकों और खटाल संचालक के बीच तीखी झड़प हो गई, जो देखते ही देखते तनावपूर्ण स्थिति में बदल गई। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस और सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे और हालात को काबू में किया।


जानकारी के अनुसार, गौ सेवकों को एक माजदा वाहन (CG 12 BV 4529) में मवेशी ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने रिसदी चौक के पास वाहन को रोककर जांच की। वाहन में आधा दर्जन से अधिक भैंस और बछड़े भरे हुए पाए गए। पूछताछ के दौरान चालक संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिससे संदेह गहराया और विवाद शुरू हो गया।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि मवेशियों को गोकुलनगर स्थित एक खटाल से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान खटाल संचालक भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और हालात बिगड़ गए। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग किया और दस्तावेजों की जांच की। जांच में मवेशियों के परिवहन से संबंधित वैध कागजात प्रस्तुत किए गए, जिससे स्पष्ट हुआ कि मवेशियों को कानूनी रूप से स्थानांतरित किया जा रहा था। इसके बाद स्थिति को शांत कराया गया।

हालांकि, इस दौरान वाहन चालक के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई है। चालक की शिकायत पर पुलिस ने मारपीट करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, मवेशियों के परिवहन की स्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए वाहन चालक के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस ने समय रहते मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच जारी है।

जशपुर में ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई रफ्तार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में ‘लखपति दीदी’ अभियान ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।


प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध जशपुर की महिलाएं अब खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। गांव-गांव में सक्रिय कृषि सखियां और पशु सखियां किसानों तक आधुनिक तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं। जिले में वर्तमान में 12 हजार 808 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 1 लाख 37 हजार 912 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सामूहिक प्रयासों से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।


राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 से 2027 तक जशपुर जिले में 30 हजार 877 ‘लखपति दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 18 हजार 218 महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, जबकि शेष महिलाओं को भी आगामी वर्षों में इस श्रेणी में लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से व्यापक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये मुद्रा लोन, 76 करोड़ रुपये बैंक लिंकेज और 13 करोड़ रुपये सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सहायता दी गई है। साथ ही लगभग 70 हजार महिलाओं को कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है।

इसके अतिरिक्त करीब 8500 संभावित लखपति दीदियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया है और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निगरानी भी की जा रही है। महिलाएं डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री और फूड प्रोसेसिंग जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि महिलाओं को नई तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने के उद्देश्य से 23 से 25 मार्च 2026 तक कृषि महाविद्यालय, कुनकुरी में ‘कृषि क्रांति एक्सपो 2.0’ का आयोजन किया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रहा है। जशपुर की यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार, गांव और पूरे राज्य की प्रगति सुनिश्चित होती है।

टाइगर रिजर्व में ‘मौत का सिस्टम’! तड़पता रहा लकड़बग्घा, सोता रहा विभाग… एक महीने में दूसरी मौत

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 सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास नेशनल पार्क से एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बीमार और घायल लकड़बग्घे की इलाज के अभाव में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि समय पर उपचार और रेस्क्यू की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह दर्दनाक घटना हुई।


यह मामला बिहारपुर क्षेत्र के मकराद्वारी जंगल का है। जानकारी के अनुसार, जंगल में आग से प्रभावित होकर अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर बाहर निकला लकड़बग्घा गंभीर रूप से बीमार और कमजोर था। स्थानीय ग्रामीणों ने उसकी हालत बिगड़ती देख वन विभाग को सूचना दी, लेकिन समय पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

सूत्रों के मुताबिक, उस समय पार्क का वन्यजीव चिकित्सक अवकाश पर था। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े संरक्षित क्षेत्र में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का अभाव क्यों है। वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण वन्यजीव को उपचार नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई।

एक महीने में दूसरी घटना, बढ़ी चिंता

यह कोई पहली घटना नहीं है। लगभग एक महीने पहले इसी क्षेत्र में एक तेंदुआ कुएं में गिर गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी और बाद में उपचार में कथित लापरवाही के चलते उसकी भी मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संरक्षण के दावों पर उठे सवाल

गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व

गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, जो राज्य का सबसे बड़ा संरक्षित वन क्षेत्र माना जाता है, बाघ, तेंदुआ, भालू और लकड़बग्घा जैसे कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों का आवास है। बावजूद इसके, लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर संरक्षण व्यवस्था में खामियां हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रो

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर उपचार और रेस्क्यू की व्यवस्था होती, तो लकड़बग्घे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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