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नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

भारत का खेल सामग्री उद्योग बनेगा वैश्विक हब, ISGF 2026 का उद्घाटन

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भारत के खेल सामग्री उद्योग को वैश्विक स्तर पर विकसित करने पर जोर देते हुए, इंडिया स्पोर्टिंग गुड्स फेयर (ISGF) 2026 का चौथा संस्करण बड़ी धूमधाम के साथ शुरू हुआ।

प्रदर्शकों, अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों और संबंधित पक्षों को संबोधित करते हुए, क्रीड़ा सचिव, युवा मामले और खेल मंत्रालय, हरि रंजन राव ने कहा,
“यह भारत के खेल सामग्री उद्योग की विकास यात्रा में एक सुनहरा समय है।”

राष्ट्रीय दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राव ने कहा कि भारत का लक्ष्य खेल सामग्री के निर्यात को लगभग ₹3,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹80,000 करोड़ करना है।

इस बड़े बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा,

“अगर हमें ₹3,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक पहुंचना है, तो प्रत्येक निर्माता को अपनी पैमाना लगभग 25 गुना बढ़ाना होगा। अगर आप बड़े सपने नहीं देखते, तो इसे हासिल नहीं कर पाएंगे।”

निर्माताओं को आह्वान किया गया कि वे तेजी से विस्तार करें, वैश्विक स्तर पर सक्रिय हों और नवाचार और निवेश से प्रेरित भविष्योन्मुख दृष्टिकोण अपनाएं। इसमें युवाओं और अगले पीढ़ी के उद्यमियों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।

“आइए हम भारत में विश्व का सबसे बड़ा खेल सामग्री प्रदर्शनी आयोजित करने का लक्ष्य रखें, जिसमें दुनिया भर के प्रदर्शक हिस्सा लें,” राव ने कहा।

सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राव ने बताया कि इस क्षेत्र के लिए साथ ही ₹500 करोड़ का बजट पहले ही संघीय बजट में आवंटित किया जा चुका है।

यह भी रेखांकित किया गया कि जबकि सरकार पूरी नीति समर्थन प्रदान करेगी, कार्यान्वयन उद्योग द्वारा ही नेतृत्व किया जाना चाहिए।

“हम यह भी देखना चाहते हैं कि खेल निर्माण क्षेत्र में कई नए निर्माता शामिल हों। उद्योग को संयुक्त उद्यम और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की सक्रिय रूप से खोज करनी चाहिए, और मंत्रालय ऐसे साझेदारी में सहायता करने के लिए तत्पर रहेगा,” सचिव (खेल) ने कहा।

सभा को संबोधित करते हुए, सह सचिव (खेल), विनील कृष्णा ने सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को साझा किया और कहा,
“सरकार खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र के विस्तार के प्रति बहुत महत्वाकांक्षी है, न केवल घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बल्कि भारत के वैश्विक निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए भी।”

“हमें उम्मीद है कि आवश्यक अनुमोदनों के बाद अगले कुछ महीनों में खेल सामग्री निर्माण योजना को लॉन्च किया जा सकेगा,” उन्होंने कहा।

सह सचिव (खेल) ने देश में खेल सामग्री निर्माण के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए कई राज्यों की बढ़ती रुचि को भी उजागर किया।

“अगला दशक खेल क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी होने वाला है, और आप सभी इस विकास कहानी का हिस्सा होंगे,” उन्होंने जोड़ा।

ISGF, जिसे स्पोर्ट्स गुड्स और खिलौना निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित किया गया है, 31 मार्च से 2 अप्रैल, 2026 तक यशोभूमि, द्वारका में आयोजित किया जा रहा है।

ISGF के चौथे संस्करण में 75 प्रदर्शक विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी कर रहे हैं, जिनमें एथलेटिक वस्त्र, बैडमिंटन और टेनिस उपकरण, बॉक्सिंग गियर, क्रिकेट उपकरण, फिटनेस उपकरण, खेल परिधान, इनडोर खेल उपकरण और खिलौने शामिल हैं।


डाक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. जितेंद्र सिंह से की मुलाकात, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

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डाक कर्मचारियों और विभिन्न डाक संघों के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) का समय-समय पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आभार व्यक्त किया।

बैठक के दौरान डाक विभाग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें कुछ वर्गों में कैडर पुनर्गठन, वित्तीय उन्नयन योजनाओं का क्रियान्वयन और पेंशन से संबंधित विषय शामिल थे। मेल मोटर सेवा (Mail Motor Service) की बदलती भूमिका और भविष्य को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने पेंशन और पारिवारिक पेंशन से जुड़े कई मामलों को उठाया। इस संदर्भ में डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए पेंशन अदालत, CPENGRAM और अन्य शिकायत निवारण मंचों का प्रभावी उपयोग करने का सुझाव दिया।

करियर प्रगति से जुड़े मुद्दों और विभिन्न क्षेत्रों में योजनाओं के समान क्रियान्वयन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) से जुड़े सामाजिक सुरक्षा और कल्याण उपायों पर भी विचार किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डाक कर्मचारियों की देश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने बदलती संचार प्रणाली और नई तकनीकों के अनुरूप कार्य संरचना और सेवाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंत्री ने यह भी कहा कि कैडर पुनर्गठन से जुड़े मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय में तय प्रक्रियाओं के अनुसार देखा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उठाए गए सभी मुद्दों पर संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ विचार किया जाएगा।

बैठक के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने इस संवाद को सकारात्मक बताते हुए नियमित और रचनात्मक बातचीत के अवसर के लिए आभार व्यक्त किया।

साधना सप्ताह 2026’ की शुरुआत: सिविल सेवाओं में क्षमता निर्माण का राष्ट्रीय अभियान

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क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) 2 से 8 अप्रैल 2026 तक ‘साधना सप्ताह’ (Sādhana Saptah 2026) की शुरुआत करेगा। यह भारत की सिविल सेवा प्रणाली में अब तक के सबसे बड़े सामूहिक क्षमता निर्माण अभियानों में से एक है। यह पहल आयोग के स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित की जा रही है।

‘साधना सप्ताह’ का अर्थ है—Strengthening Adaptive Development and Humane Aptitude for National Advancement (राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय क्षमता का सुदृढ़ीकरण)। इस पहल में केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश और 250 से अधिक सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान शामिल होंगे।

राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण का संगम

पहली बार देशभर में क्षमता निर्माण गतिविधियों को एक साझा थीम के अंतर्गत जोड़ा जा रहा है। इसमें प्रारंभिक स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी सिविल सेवक भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित और प्रभावी शासन के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना है।

तीन सूत्रों पर आधारित कार्यक्रम

साधना सप्ताह तीन प्रमुख सूत्रों पर आधारित होगा:

  • टेक्नोलॉजी (3–4 अप्रैल): एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा आधारित निर्णय

  • परंपरा (5–6 अप्रैल): भारतीय ज्ञान प्रणाली, नैतिक मूल्य, ऐतिहासिक प्रशासनिक परंपराएं

  • परिणाम (7–8 अप्रैल): नीतियों के प्रभाव और नागरिकों तक उनके लाभ सुनिश्चित करना

मिशन कर्मयोगी: नियम से भूमिका की ओर

पिछले पांच वर्षों में मिशन कर्मयोगी ने प्रशिक्षण प्रणाली को ‘रूल-आधारित’ से ‘रोल-आधारित’ दृष्टिकोण में बदलने की दिशा में कार्य किया है। इसमें केवल प्रक्रियाओं पर नहीं, बल्कि समस्या समाधान, नवाचार, सहयोग और संवेदनशीलता जैसे गुणों पर भी जोर दिया गया है।

2 अप्रैल को राष्ट्रीय कॉन्क्लेव से शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय कॉन्क्लेव से होगी। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति विशेषज्ञ और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

प्रमुख पहलें

इस अवसर पर कई नई पहलों की शुरुआत होगी:

  • कर्मयोगी गीत

  • कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट

  • राष्ट्रीय जन सेवा कार्यक्रम का विस्तार

  • ट्रस्ट आधारित मूल्यांकन प्रणाली

  • AI आधारित ‘अमृत ज्ञान कोष’

व्यापक भागीदारी

  • 100+ केंद्रीय मंत्रालय/विभाग

  • 30+ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

  • 250+ प्रशिक्षण संस्थान

  • 7 दिनों का कार्यक्रम

भविष्य के लिए तैयार शासन

‘साधना सप्ताह’ का उद्देश्य सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना है, ताकि प्रशासनिक तंत्र बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को ढाल सके और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम बन सके।

यह पहल संस्थागत सहयोग, ज्ञान साझा करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से एक सक्षम, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नागोया प्रोटोकॉल के तहत IRCC जारी करने में भारत बना वैश्विक अग्रणी

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भारत ने नागोया प्रोटोकॉल (Access and Benefit-sharing - ABS) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCCs) जारी करने में वैश्विक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है। विश्वभर में जारी कुल 6,311 प्रमाणपत्रों में से भारत ने 3,561 IRCCs जारी किए हैं, जो कुल का 56 प्रतिशत से अधिक है।

ABS क्लियरिंग-हाउस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 142 पंजीकृत देशों में से केवल 34 देशों ने अब तक IRCCs जारी किए हैं। इस सूची में भारत के बाद फ्रांस (964), स्पेन (320), अर्जेंटीना (257), पनामा (156) और केन्या (144) का स्थान है। यह उपलब्धि जैविक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के न्यायसंगत एवं पारदर्शी उपयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नागोया प्रोटोकॉल के तहत, किसी देश द्वारा आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच देने पर IRCC जारी करना आवश्यक होता है। ये प्रमाणपत्र इस बात का आधिकारिक प्रमाण होते हैं कि संसाधनों के उपयोग के लिए पूर्व सूचित सहमति (Prior Informed Consent) प्राप्त की गई है और उपयोगकर्ता एवं प्रदाता के बीच पारस्परिक रूप से सहमत शर्तें तय की गई हैं। इनकी जानकारी ABS क्लियरिंग-हाउस में दर्ज की जाती है।

IRCCs का उपयोग अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग तक जैविक संसाधनों के उपयोग की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभों का उचित और न्यायपूर्ण वितरण किया जाए।

भारत की यह उपलब्धि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत प्रभावी ABS ढांचे के कार्यान्वयन का परिणाम है, जिसे राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड/केंद्र शासित प्रदेश परिषदों और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं और मजबूत संस्थागत तंत्र ने आवेदन प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया है।

यह उपलब्धि वैश्विक जैव विविधता शासन में भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है और जैविक संसाधनों के न्यायसंगत एवं समान लाभ-साझाकरण को बढ़ावा देने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

‘दुनागिरी’ युद्धपोत भारतीय नौसेना को सौंपा गया, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को मिला बड़ा बल

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‘दुनागिरी’ (यार्ड 3023), नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पांचवां और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता में निर्मित दूसरा जहाज, 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म हैं, जो समुद्री क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

‘दुनागिरी’ पूर्व INS दुनागिरी (लींडर श्रेणी) का आधुनिक स्वरूप है, जिसने 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक 33 वर्षों तक देश की सेवा की। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टेल्थ, फायरपावर, ऑटोमेशन और सर्वाइवेबिलिटी में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस जहाज को वारशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और वारशिप ओवरसीइंग टीम (कोलकाता) की निगरानी में बनाया गया। P17A फ्रिगेट्स स्वदेशी जहाज डिजाइन, स्टेल्थ, सुरक्षा और युद्ध क्षमता में नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ की अवधारणा के तहत इसे निर्धारित समयसीमा में तैयार किया गया।

इन जहाजों में उन्नत हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें ब्रह्मोस मिसाइल, MF-STAR रडार, MRSAM सिस्टम, 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम, साथ ही पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं। यह CODOG (कंबाइंड डीजल या गैस) प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिसमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन का संयोजन होता है।

‘दुनागिरी’ पिछले 16 महीनों में नौसेना को सौंपी गई पांचवीं P17A श्रेणी की जहाज है। पहले चार जहाजों के निर्माण से प्राप्त अनुभव के कारण इसका निर्माण समय घटाकर 80 महीने कर दिया गया, जो पहले जहाज ‘नीलगिरी’ के 93 महीनों की तुलना में कम है।

इस परियोजना में 75% स्वदेशीकरण हासिल किया गया है और इसमें 200 से अधिक MSMEs शामिल रहे हैं। इससे लगभग 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह उपलब्धि देश की डिजाइन, निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है और भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भर भारत के प्रति दृढ़ संकल्प को मजबूत करती है।

संशोधक’ सर्वे वेसल भारतीय नौसेना को सौंपा गया, समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

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भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया अंतिम सर्वे वेसल (लार्ज) जहाज ‘संशोधक’ (यार्ड 3028), जिसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता में बनाया गया है, 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

चार सर्वे वेसल (लार्ज) जहाजों के निर्माण का अनुबंध 30 अक्टूबर 2018 को किया गया था। इसी श्रेणी के अन्य जहाज—INS संधायक, INS निर्देशाक और INS इक्षाक—को क्रमशः 3 फरवरी 2024, 18 दिसंबर 2024 और 6 नवंबर 2025 को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

ये जहाज भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के मानकों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। ‘संशोधक’ तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने में सक्षम है, जिसमें बंदरगाहों के मार्गों का अध्ययन और नेविगेशनल चैनलों का निर्धारण शामिल है। इसके अलावा, यह रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए समुद्र विज्ञान एवं भू-भौतिकीय डेटा भी एकत्र करेगा।

लगभग 3400 टन के विस्थापन और 110 मीटर लंबाई वाले इस जहाज में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जैसे डेटा अधिग्रहण एवं प्रोसेसिंग सिस्टम, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), डीजीपीएस लॉन्ग-रेंज पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार। दो डीजल इंजनों से संचालित यह जहाज 18 नॉट से अधिक गति प्राप्त कर सकता है।

इस जहाज की कील जून 2022 में रखी गई थी और जून 2023 में इसे लॉन्च किया गया। डिलीवरी से पहले इसने बंदरगाह और समुद्र में व्यापक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

‘संशोधक’ में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसकी डिलीवरी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत सरकार और भारतीय नौसेना के सतत प्रयासों का प्रमाण है, साथ ही यह MSMEs और भारतीय उद्योग के सहयोग से देश की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने का उदाहरण भी है।

INS त्रिकंड की मोज़ाम्बिक यात्रा संपन्न, भारत–मोज़ाम्बिक नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड ने 29 मार्च 2026 को मापुटो, मोज़ाम्बिक की अपनी पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरी की।

इस दौरान भारतीय नौसेना और मोज़ाम्बिक नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिससे आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को और मजबूती मिली।

भारत की ओर से मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री मोज़ाम्बिक को सौंपी गई। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. उस्सेने हिलारियो इस्से, भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग सहित अन्य वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, मोज़ाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया।

INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने मोज़ाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की।

पोर्ट कॉल के समापन पर, जहाज ने मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं, जिसके बाद वह अपने निर्धारित ऑपरेशनल तैनाती के लिए आगे बढ़ा।

यह पोर्ट कॉल ‘महासागर’ (MAHASAGAR - क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) की भारत की नीति को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


रक्षा मंत्रालय ने BEL के साथ 1,950 करोड़ रुपये का समझौता किया, स्वदेशी माउंटेन रडार से वायु रक्षा को मिलेगी मजबूती

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आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया के तहत भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ एक महत्वपूर्ण पूंजीगत खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारतीय वायुसेना के लिए दो माउंटेन रडार, उनसे जुड़े उपकरणों और आवश्यक अवसंरचना की खरीद के लिए लगभग 1,950 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

यह अनुबंध ‘बाय (इंडियन–इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के अंतर्गत 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में MoD और BEL के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह माउंटेन रडार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रडार विकास प्रतिष्ठान द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है तथा इसका निर्माण BEL द्वारा किया जाएगा। इन रडारों की स्थापना और कमीशनिंग से देश की वायु रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। साथ ही, इस खरीद से विदेशी उपकरणों पर निर्भरता भी कम होगी।

NCB और DTU के बीच समझौता, सीमेंट व निर्माण क्षेत्र में शोध सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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राष्ट्रीय सीमेंट और भवन निर्माण सामग्री परिषद (NCB) ने दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारत के सीमेंट और निर्माण क्षेत्र में शोध एवं अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस सहयोग का उद्देश्य सीमेंट और कंक्रीट प्रौद्योगिकी में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, छात्रों, पेशेवरों और हितधारकों के लिए प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करना तथा कौशल विकास और क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, यह साझेदारी अकादमिक जगत और उद्योग के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगी, जिससे श्रेष्ठ प्रथाओं और तकनीकी विशेषज्ञता का प्रसार संभव होगा।

यह साझेदारी देश में टिकाऊ और मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी और बेहतर तकनीकी क्षमताओं तथा संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत के निर्माण क्षेत्र को सशक्त बनाएगी।

यह समझौता 30 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित डीटीयू में एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह और डीटीयू के रजिस्ट्रार श्री बिनोद डोले द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर डीटीयू के कुलपति प्रोफेसर प्रतीक शर्मा, एनसीबी के संयुक्त निदेशक एवं सचिव डॉ. एस. के. चतुर्वेदी, महाप्रबंधक एवं प्रमुख (ETS) डॉ. संजय मुंद्रा तथा महाप्रबंधक एवं प्रमुख (CME) डॉ. कपिल कुकरेजा भी उपस्थित रहे।

पीएम मोदी ने साणंद में केन्स सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन किया, भारत के टेक इकोसिस्टम की तेज़ प्रगति पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में केन्स टेक्नोलॉजी (Kaynes Technology) के सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन के अवसर की झलकियां साझा कीं, जिससे इस इकाई में उत्पादन की शुरुआत हुई। उन्होंने उल्लेख किया कि वे 28 फरवरी को माइक्रोन प्लांट के उत्पादन शुभारंभ के लिए साणंद आए थे और ठीक एक महीने बाद फिर से केन्स की इस उपलब्धि के लिए उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग नहीं है, बल्कि यह भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के तेज़ी से विकास का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेशों में कहा:

“यह भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए गर्व का क्षण है कि केन्स सेमीकॉन OSAT सुविधा का साणंद, गुजरात में उद्घाटन हुआ है। इससे भारत के भविष्य की प्रौद्योगिकियों और नवाचार में अग्रणी बनने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।”

“‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ को बढ़ावा।”

“भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग विभिन्न राज्यों में तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे अनगिनत युवाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। इन प्रयासों को और विस्तार देने के लिए हम अब सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर काम कर रहे हैं।”


संस्कृति को सहेजने गढ़ रीवा में होगा चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव

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महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह 

आरंग-  ऐतिहासिक गढ़  रीवा गांव में चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव के आयोजन को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने किया।

बैठक में ग्राम के प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर महोत्सव के आयोजन पर चर्चा की और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ नागरिक मेहत्तर राम साहू, संतोष साहू, हीराधर धीवर, हीरालाल धीवर तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने आयोजन की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू ने कहा कि गढ़ रीवा और आरंग क्षेत्र से जुड़ी लोरिक-चंदा  की गाथा को चंदैनी लोकनाट्य परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है। इसे सहेजने के लिए ग्रामीणों और पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। चंदैनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा है, लेकिन आज इसकी कुछ ही टीमें सक्रिय रह गई हैं।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 अप्रैल के बाद ग्राम रीवा में लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा पर केंद्रित चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

बैठक में घसियाराम साहू, सूरज साहू, संतोष कुमार साहू, मेहत्तर राम साहू, महेन्द्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, प्रेमलाल साहू, हीराधर धीवर, वेद प्रकाश साहू, मनबोध साहू, रमेश चंद्राकर, बेनीराम साहू, अश्वनी चंद्राकर, अनिल साहू, हीरालाल धीवर, भागवत साहू, त्रिलोकीनाथ साहू, महेंद्र साहू, इंद्रपाल और फत्ते साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

नालंदा विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: ज्ञान, संवाद और वैश्विक विरासत का पुनर्जागरण

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 31 मार्च 2026 को बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेकर उसे संबोधित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत संकल्प की पुनर्पुष्टि है—एक ऐसा संकल्प कि ज्ञान सदैव जीवित रहेगा, संवाद कायम रहेगा और शिक्षा मानवता की सेवा करती रहेगी। उन्होंने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता उनके परिश्रम, अनुशासन और बौद्धिक समर्पण का परिणाम है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस वर्ष स्नातक करने वाले छात्रों में आधे से अधिक छात्र 30 से अधिक देशों से आए अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक विश्व का प्रसिद्ध ज्ञान केंद्र रहा। इसका पतन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक बड़ी क्षति थी। फिर भी नालंदा की भावना कभी समाप्त नहीं हुई। आज इसका पुनरुत्थान उस गौरवशाली विरासत को आधुनिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह विभिन्न देशों के सहयोग, दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि प्राचीन नालंदा में विभिन्न विचारधाराओं का स्वागत किया जाता था और वहाँ वाद-विवाद एवं संवाद की समृद्ध परंपरा थी। ज्ञान को समाज, नैतिकता और मानव कल्याण से जोड़कर देखा जाता था। आज के जटिल वैश्विक परिदृश्य में करुणा पर आधारित स्वतंत्र और आलोचनात्मक सोच की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने विश्वास जताया कि नालंदा विश्वविद्यालय एशिया और विश्व में एक अग्रणी शिक्षण संस्थान के रूप में उभरेगा।

राष्ट्रपति ने भारत और बौद्ध दर्शन के गहरे संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस संबंध को गंभीरता से समझते हुए भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहिए। नालंदा विश्वविद्यालय को बौद्ध अध्ययन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियाँ थीं। उसी प्रेरणा से आज जो निर्माण हो रहा है, वह भविष्य के लिए एक स्थायी धरोहर बनेगा। भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में नालंदा जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

CG NEWS : AK-47 के साथ दो हार्डकोर नक्सलियों ने किया सरेंडर, डेडलाइन के दिन बड़ी सफलता

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 कांकेर। नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच कांकेर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जिले के कोयलीबेडा क्षेत्र में सक्रिय दो हार्डकोर नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान शंकर और हिड़मे के रूप में हुई है। इनमें से एक नक्सली ने AK-47 राइफल के साथ सरेंडर किया, जिसे सुरक्षा बलों की अहम उपलब्धि माना जा रहा है।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वर्तमान में कांकेर जिले में करीब 15 नक्सली ही शेष बचे हैं, जिनके भी जल्द आत्मसमर्पण करने की संभावना जताई जा रही है।

लगातार अभियान का असर

सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सलियों में आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ी है। दोनों नक्सलियों ने कांकेर पुलिस के समक्ष औपचारिक रूप से सरेंडर किया, जिसकी पुष्टि पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने की है।

पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ

पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

नक्सल मुक्त भारत की दिशा में कदम

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की समय-सीमा तय की है। इसी डेडलाइन के अंतिम दिन यह आत्मसमर्पण हुआ है, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

प्रदेश की लाइफलाइन हुई सशक्त: मुख्यमंत्री साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी

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 रायपुर : प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक पहल की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 300 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एवं 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के सभी जिलों के लिए रवाना किया। इसके साथ ही 108 एम्बुलेंस की समस्त सेवाएं प्रदेशभर में तत्काल प्रभाव से प्रारंभ हो गई हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता सुनिश्चित होगी।


इस पहल के अंतर्गत पहली बार प्रदेश में 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंसों की शुरुआत की गई है, जो नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह सेवा राज्य की नवजात सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं को सुरक्षित रूप से उच्च स्तरीय उपचार केंद्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर सुदृढ़ हो रही हैं और पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ा है, जहां उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है। उप-स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण एवं उन्नयन के कारण अब लोगों को छोटे-छोटे इलाज के लिए दूर शहरों की ओर नहीं जाना पड़ रहा है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाए, ताकि हर जरूरतमंद मरीज तक समय पर स्वास्थ्य सहायता पहुंच सके। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा का यह विस्तार आम जनता के विश्वास को और सशक्त करेगा कि संकट की घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पहली बार शुरू की गई 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंस सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से आज का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक है और इससे लाखों लोगों को त्वरित चिकित्सा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एम्बुलेंस सेवा में किसी भी प्रकार की देरी या कमी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है।

प्रदेश में एम्बुलेंस सेवा की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद तक समय पर सहायता पहुंच सके।

नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इनमें प्रशिक्षित नवजात इमरजेंसी तकनीशियन, 24×7 ईएमटी एवं पायलट की उपलब्धता के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक का ऑनलाइन मार्गदर्शन सुनिश्चित किया गया है। इन एम्बुलेंसों में इन्क्यूबेटर, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, सिरिंज पंप, नेब्युलाइज़र, सक्शन मशीन, पर्याप्त ऑक्सीजन सपोर्ट एवं 41 प्रकार की आपातकालीन दवाओं सहित सभी आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इन्हें “चलते-फिरते नवजात आईसीयू” के रूप में स्थापित करती हैं।

इसके अतिरिक्त, BLS एवं ALS एम्बुलेंसों में मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक एवं उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ईसीजी मॉनिटर, ग्लूकोमीटर जैसी जांच सुविधाओं के साथ ऑक्सीजन सपोर्ट, नेब्युलाइजेशन एवं अन्य आपातकालीन उपचार व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। गंभीर मरीजों के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु पोर्टेबल वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर मॉनिटर, सिरिंज पंप, लैरिंजोस्कोप सहित अन्य उन्नत उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह समग्र पहल प्रदेश के शहरी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नागरिकों के लिए एक मजबूत जीवनरक्षक तंत्र के रूप में स्थापित होगी।
इस अवसर पर विधायक मोती लाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संजीव झा, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रणबीर शर्मा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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