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कचना धुरवा मंदिर – आस्था, इतिहास और वीरता का अद्भुत संगम

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कचना धुरवा मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का एक अत्यंत प्रसिद्ध, ऐतिहासिक और पूजनीय देवस्थल है। यह मंदिर रायपुर–गरियाबंद राष्ट्रीय मार्ग पर बारूका (छुरा प्रवेश मार्ग) के समीप मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोकगाथाओं, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी विशेष पहचान रखता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं और अपनी मनोकामनाएँ लेकर कचना धुरवा देव के चरणों में शीश नवाते हैं।

कचना धुरवा – आदिवासी समाज के आराध्य देव

कचना धुरवा को आदिवासी समाज एवं स्थानीय ग्रामीण अपने इष्टदेव, वन देवता और रक्षक देव के रूप में पूजते हैं। सदियों से यह मान्यता चली आ रही है कि इस क्षेत्र के घने जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों से यात्रा करने वाले लोग सबसे पहले कचना धुरवा मंदिर में माथा टेककर सुरक्षित यात्रा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कचना धुरवा देव की पूजा करता है, उसकी यात्रा सफल होती है तथा जीवन की अनेक बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इसी आस्था के कारण आज भी राहगीर और वाहन चालक यहाँ रुककर पूजा-अर्चना करते हैं।

मंदिर परिसर में सफेद घोड़े पर सवार वीर राजा धुरवा की भव्य प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा उनके शौर्य, साहस, न्यायप्रियता और जनकल्याणकारी व्यक्तित्व का प्रतीक मानी जाती है। दूर से ही यह प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है और मंदिर की विशेष पहचान बन चुकी है।

अमर प्रेम और वीरता की लोकगाथा

कचना धुरवा मंदिर का इतिहास केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमर प्रेम, त्याग और अदम्य वीरता की लोककथा से भी जुड़ा हुआ है।

लोकमान्यताओं के अनुसार बिंद्रानवागढ़ के वीर राजकुमार धुरवा अपनी वीरता और पराक्रम के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। कहा जाता है कि उनके पिता की हत्या शत्रु राजा द्वारा कर दी गई थी। अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए राजकुमार धुरवा ने दुश्मन राजा के विरुद्ध लगातार संघर्ष किया।

कहा जाता है कि उन्होंने अपने शत्रु से 46 बार युद्ध किया और हर बार असाधारण साहस का परिचय दिया। उनकी वीरता की चर्चा पूरे अंचल में होने लगी। किंतु जब युद्ध में विजय प्राप्त करना कठिन हो गया, तब शत्रु राजा ने छल का सहारा लिया।

लोककथा के अनुसार अंतिम युद्ध के दौरान राजकुमार धुरवा अपने सफेद घोड़े पर सवार होकर नदी पार कर रहे थे। उसी समय उनके घोड़े का एक पैर जल (नदी) में तथा दूसरा पैर थल (भूमि) पर था। इसी अवसर का लाभ उठाकर शत्रु ने धोखे से उन पर प्रहार कर दिया। इस विश्वासघाती हमले में राजकुमार धुरवा वीरगति को प्राप्त हुए।

उनके बलिदान से पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। लोगों ने उनकी वीरता, न्यायप्रियता और जनसेवा को अमर बनाने के लिए उन्हें देवतुल्य मानकर पूजा आरंभ कर दी। समय के साथ विभिन्न स्थानों पर उनके स्मृति-स्थल और मंदिर स्थापित किए गए, जिनमें गरियाबंद का कचना धुरवा मंदिर सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध माना जाता है।

राजकुमारी कचना और अमर प्रेम की कथा

स्थानीय लोककथाओं में राजकुमार धुरवा के साथ राजकुमारी कचना का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि दोनों का प्रेम त्याग, निष्ठा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। धुरवा की वीरगति के बाद राजकुमारी कचना ने भी अपने प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जिसे आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

इसी कारण इस देवस्थल को "कचना धुरवा" के नाम से जाना जाता है। यह स्थान प्रेम, विश्वास, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

अखंड ज्योति एवं नवरात्रि का भव्य मेला

कचना धुरवा मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ का वातावरण अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक हो जाता है।

इन पावन दिनों में मंदिर परिसर में अखंड ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक माता और कचना धुरवा देव की आराधना करते हैं। मंदिर परिसर दीपों की रोशनी, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से गूंज उठता है।

नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर परिसर में नारियल बाँधते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

मंदिर परिसर में स्थित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर

कचना धुरवा मंदिर परिसर केवल एक देवस्थल नहीं, बल्कि अनेक देवी-देवताओं की आराधना का प्रमुख केंद्र भी है। यहाँ श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर कई देवस्थलों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

मुख्य मंदिर के अतिरिक्त परिसर में निम्नलिखित देवस्थल स्थित हैं—

  • ग्राम देवी रूपई माता मंदिर

  • बंजारी माता मंदिर

  • सोनई माता मंदिर

इन सभी देवी-देवताओं की पूजा स्थानीय ग्रामीण एवं श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।

लोक आस्था और मान्यताएँ

कचना धुरवा मंदिर के संबंध में अनेक लोकमान्यताएँ प्रचलित हैं। लोगों का विश्वास है कि—

  • सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

  • यात्रा प्रारंभ करने से पहले यहाँ दर्शन करने से यात्रा सुरक्षित रहती है।

  • मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु नारियल, ध्वज और प्रसाद अर्पित करते हैं।

  • संकट और कठिनाइयों से मुक्ति के लिए लोग विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

  • यह स्थान वन, प्रकृति और मानव के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक माना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य

मंदिर चारों ओर से हरियाली, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है। शांत वातावरण, शुद्ध हवा और धार्मिक आस्था का संगम इस स्थान को और भी आकर्षक बनाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि प्रकृति की गोद में आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं।

सांस्कृतिक महत्व

कचना धुरवा मंदिर आदिवासी संस्कृति, लोकपरंपरा और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहाँ आयोजित धार्मिक अनुष्ठान, लोकगीत, लोकनृत्य और मेले इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को वीरता, त्याग, प्रेम और लोकआस्था की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

कचना धुरवा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वीरता, प्रेम, त्याग, लोकविश्वास और आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ की ऐतिहासिक लोकगाथाएँ, सफेद घोड़े पर विराजमान वीर धुरवा की प्रतिमा, नवरात्रि का विशाल मेला, अखंड ज्योति, प्राकृतिक वातावरण और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण देवस्थलों में शामिल करती हैं।

जो भी श्रद्धालु इस पवित्र धाम में श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुँचता है, वह आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और कचना धुरवा देव का आशीर्वाद लेकर लौटता है। यही कारण है कि गरियाबंद जिले का यह पावन देवस्थल आज भी लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

महादेव बेटिंग ऐप केस: टीवी होस्ट शेफाली बग्गा से ED की लगातार दूसरे दिन पूछताछ

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 रायपुर : करीब छह हजार करोड़ रुपये के 'महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। ED की टीम टीवी होस्ट शेफाली बग्गा से रायपुर स्थित जोनल कार्यालय में लगातार दूसरे दिन पूछताछ कर रही है। इससे पहले गुरुवार को भी उनसे करीब पांच से छह घंटे तक सघन सवाल-जवाब किए गए थे। शुक्रवार को उन्हें दोबारा कार्यालय बुलाकर कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।


वित्तीय लेन-देन और डिजिटल गतिविधियों की जांच

ED के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा शेफाली बग्गा के वित्तीय लेन-देन, ऑनलाइन बेटिंग ऐप के प्रचार-प्रसार, डिजिटल गतिविधियों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके टेलीग्राम चैनल से जुड़े सवाल किए जा रहे हैं।

जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों में शेफाली बग्गा की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें समन जारी किया गया था। एजेंसी को कुछ प्रमोशनल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल सामग्री मिली है, जिनमें कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग ऐप का प्रचार किया गया है। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस सिंडिकेट से उनका जुड़ाव किस स्तर पर था।

टेलीग्राम चैनल और विदेशी नेटवर्क पर नजर

सूत्रों का कहना है कि ED शेफाली बग्गा के एक टेलीग्राम चैनल की विशेष रूप से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस चैनल के माध्यम से ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े प्रमोशनल कंटेंट, बेटिंग टिप्स या अन्य संदिग्ध सामग्री तो साझा नहीं की जाती थी। इसके अलावा उनके मोबाइल, डिजिटल कम्युनिकेशन और बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है।

हवाला ऑपरेटर से संबंधों की पड़ताल

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू महादेव नेटवर्क से जुड़े खंजन जगदीश कुमार ठक्कर से शेफाली बग्गा के कथित संबंध हैं। ED का दावा है कि ठक्कर हवाला नेटवर्क का प्रमुख संचालक रहा है और बेटिंग कारोबार के वित्तीय प्रबंधन को देखता था। एजेंसी दोनों के बीच संभावित संपर्क, लेन-देन और विदेशी नेटवर्क से जुड़े लिंक की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही दुबई और लंदन से संचालित इस प्लेटफॉर्म के प्रचार में उनकी भूमिका और विदेशी ऑपरेटरों के साथ आर्थिक संबंधों की भी जांच जारी है।

मामले में बढ़ी सियासी तपिश

महादेव बेटिंग ऐप मामले में हाल के दिनों में जांच की रफ्तार काफी तेज हुई है। दिल्ली में भाजपा नेता विकास गर्ग के खिलाफ ED की कार्रवाई और अब शेफाली बग्गा से पूछताछ को इस मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है।

दूसरी ओर, मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आ चुकी है। इससे पहले उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन प्रत्यर्पण की तकनीकी जटिलताओं के कारण उसे भारत नहीं लाया जा सका था। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा नेता पर हुई कार्रवाई के बाद इस मामले में सत्ताधारी दल की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले दुबई के माध्यम से कथित रूप से भेजे गए 502 करोड़ रुपये के मामले पर भी ED की पैनी नजर बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का कहर: स्कूलों में छुट्टी घोषित, DEO ने जारी किया आदेश

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 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार जारी भीषण बारिश के कारण राज्य के तमाम नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। मौसम के इस आक्रामक रुख और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है।


जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जारी किया आधिकारिक आदेश

बिलासपुर में लगातार बिगड़ते मौसम और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले के अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) और अनुदान प्राप्त स्कूलों में तत्काल प्रभाव से अवकाश घोषित कर दिया गया है। प्रशासन ने यह निर्णय बच्चों को किसी भी संभावित खतरे या असुविधा से बचाने के लिए लिया है।


नदी-नाले उफान पर, प्रशासन अलर्ट मोड में

लगातार 48 घंटे से हो रही बारिश के चलते बिलासपुर सहित आसपास के जिलों में नदी और नाले डेंजर लेवल के करीब पहुंच चुके हैं। निचले इलाकों में पानी भरने की खबरें आ रही हैं। आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

प्रशासन ने आम नागरिकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को उफनते नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।

छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता बढ़ी: कई जिलों में मूसलाधार बारिश, मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों के लिए जारी किया अलर्ट

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गुरुवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि सरगुजा संभाग के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है।


राजधानी रायपुर में भी बीते शाम हुई तेज बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अब और अधिक मजबूत हो गया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे रहा है।

अगले 72 घंटे छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने इस मजबूत सिस्टम और सक्रिय मानसूनी द्रोणिका (Trough) के प्रभाव से आगामी तीन दिनों तक पूरे छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां काफी तेज रहेंगी।

इस दौरान प्रदेश के अधिकांश जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही विभाग ने कई क्षेत्रों के लिए गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का भी अलर्ट जारी किया है और लोगों को खराब मौसम में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

Iran US Conflict : लगातार छठे दिन अमेरिकी मिसाइलों ने मचाई तबाही; ब्रिज, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

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 Iran US Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। अमेरिकी वायुसेना ने लगातार छठे दिन ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई में ईरान के पुलों, रेलवे नेटवर्क और हवाई अड्डों को भारी नुकसान पहुँचा है। हमलों के कारण दक्षिणी ईरान के एक बड़े हिस्से में बिजली गुल हो गई है।


दूसरी ओर, तनाव की यह आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल गई है। बहरीन में अचानक एयर रेड (हवाई हमले) के सायरन बजने से हड़कंप मच गया। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है।

दक्षिणी ईरान में ब्लैकआउट, बुनियादी ढांचा तबाह

ईरानी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हमलों ने बंदर अब्बास और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों की मुख्य बिजली लाइनों (ग्रिड) को ध्वस्त कर दिया। इसके कारण नोबोनयाद-1 सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि कुछ प्रभावित इलाकों में बिजली की आपातकालीन आपूर्ति बहाल कर दी गई है। ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीक आवर्स के दौरान बिजली का कम से कम उपयोग करें ताकि ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

रणनीतिक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर लगातार दूसरे दिन बमबारी

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की निगरानी करने वाले सिरिक शहर पर अमेरिकी युद्धक विमानों ने लगातार दूसरे दिन भारी बमबारी की। इसके अलावा बुशेहर और खामिर बंदरगाह के पास स्थित दो रणनीतिक पुलों को भी मिसाइल हमले में उड़ा दिया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में दो नागरिकों की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

बहरीन में हड़कंप: अमेरिकी एयरबेस पर ईरान का दावा

इस बीच, बहरीन के आसमान में हवाई हमले के सायरन गूंजने से दहशत फैल गई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी है।

ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, ईरानी सेना ने बहरीन के साखिर एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी हेलीकॉप्टरों और जासूसी विमानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

एयरपोर्ट और रेलवे नेटवर्क को बनाया निशाना

बंदर अब्बास: यहाँ के अल्लाहो अकबर इलाके में हुए रिहायशी हमले में एक व्यक्ति की मौत और आठ लोगों के घायल होने की खबर है। इसके अलावा शहर को जोड़ने वाले रेलवे ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है।

इरानशहर एयरपोर्ट: अमेरिकी मिसाइलों ने इरानशहर एयरपोर्ट के रनवे और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाया, जिससे हवाई अड्डे का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि हमलों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ेगा।

आज लगाया गया हर पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर : आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।

छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।


इस अधिनियम का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।

अधिनियम के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।

अधिनियम के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।

अधिनियम के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।

अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।

इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026' राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। दोनों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पारंपरिक श्छेरा-पहराश् की रस्म निभाते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को विशेष विधि-विधान के साथ मंदिर से रथ तक लाया गया।


इसके पूर्व राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पारंपरिक रीति से सोने की झाड़ू द्वारा छेरा-पहरा की रस्म निभाकर रथमार्ग का प्रतीकात्मक शुद्धिकरण किया। इसके पश्चात महाप्रभु की प्रतिमाओं को श्रद्धापूर्वक रथ पर विराजित किया गया और रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, लोकपरंपरा और जन-जन की आस्था का महापर्व है। यह उत्सव समाज को सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देता है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ किसानों के आराध्य और अन्नदाता के रक्षक माने जाते हैं। उनकी कृपा से समय पर वर्षा होती है, खेतों में हरियाली आती है, धान की बालियों में दूध भरता है और किसानों के घरों में समृद्धि का आगमन होता है। उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ से प्रार्थना की कि इस वर्ष प्रदेश में भरपूर वर्षा हो, कृषि समृद्ध हो, किसानों की मेहनत सफल हो और छत्तीसगढ़ निरंतर विकास एवं खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ता रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर बना रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, एकता और सामूहिक चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होता है। छेरा-पहरा की परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सर्वाेच्च धर्म है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भगवान श्री जगन्नाथ के प्रति विशेष श्रद्धा और आस्था रही है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रथयात्रा का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाता है। उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच यह पर्व एक सशक्त सेतु का कार्य करता है।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न निगम-मंडलों एवं आयोगों के अध्यक्षगण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

RRB परीक्षा में हाईटेक नकल: डबल अंडरगारमेंट में मोबाइल छिपाकर पहुंचा युवक गिरफ्तार

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 रायपुर। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में हाईटेक तरीके से नकल करने की एक बड़ी कोशिश का भंडाफोड़ हुआ है। रायपुर के सरोना स्थित परीक्षा केंद्र में एक अभ्यर्थी डबल अंडरगारमेंट के भीतर मोबाइल फोन छिपाकर परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। आरोपी युवक परीक्षा के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर आ रहे प्रश्नों की तस्वीरें भी अपने मोबाइल से खींच रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।


सीसीटीवी और कक्ष निरीक्षक की मुस्तैदी से पकड़ा गया आरोपी

पुलिस के अनुसार, यह घटना 15 जुलाई 2026 की है, जब थाना डी.डी. नगर क्षेत्र के अंतर्गत आईडीजेड (IDZ) सरोना परीक्षा केंद्र में रेलवे भर्ती बोर्ड की कंप्यूटर आधारित परीक्षा की दूसरी पाली (सेकंड शिफ्ट) आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के दौरान वहां तैनात कक्ष निरीक्षक (इनविजिलेटर) को एक अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। संदेही पर लगातार पैनी नजर रखी गई और जब सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की गई, तो पुष्टि हुई कि वह परीक्षा कक्ष में छिपाकर लाए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है।

जांच में खुली पोल, नागपुर का है आरोपी

कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि वह सुरक्षा जांच को चकमा देने के लिए डबल अंडरगारमेंट पहनकर आया था और उसी के भीतर मोबाइल फोन छिपाकर परीक्षा केंद्र में दाखिल हुआ था। पुलिस ने जब उसके मोबाइल की जांच की, तो उसमें परीक्षा स्क्रीन पर प्रदर्शित प्रश्नों की तस्वीरें मिलीं, जो वास्तविक प्रश्नपत्र से हुबहू मेल खाती पाई गईं।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय अफताब (पिता: गुलाम मोहम्मद) के रूप में हुई है, जो संतरेजीपुरा, इतवारी, नागपुर (महाराष्ट्र) का निवासी है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में इस्तेमाल सैमसंग मोबाइल फोन, आधार कार्ड और रेलवे भर्ती परीक्षा का प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) जब्त कर लिया है।

कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज, सॉल्वर गैंग की आशंका

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर थाना डी.डी. नगर में अपराध क्रमांक 432/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) तथा नवगठित 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024' की धारा 10(1) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया है।

पुलिस अब इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि आरोपी इस धांधली को अकेले ही अंजाम दे रहा था या इसके पीछे अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग या किसी संगठित परीक्षा माफिया का हाथ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में किसी भी नेटवर्क की संलिप्तता सामने आने पर मामले में और भी बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

आयुष्मान भारत वय वंदन योजना : छत्तीसगढ़ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रथम, 81 प्रतिशत से अधिक बुजुर्गों के बने कार्ड

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 रायपुर : आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को सालाना 5 लाख रूपए तक का निःशुल्क और कैशलेस इलाज मिलता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है।


छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए संचालित केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत वय वंदन योजना के सफल क्रियान्वयन में यह जिला पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर उभरा है।

15 जुलाई 2026 को जारी राज्य स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह सफलता जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समर्पण को रेखांकित करती है।

81.17 प्रतिशत कवरेज के साथ बना मिसाल

योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, उनकी आय की परवाह किए बिना, प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज प्रदान किया जाता है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कुल निर्धारित लक्ष्य 27 हजार 514 सदस्यों के मुकाबले रिकॉर्ड 22 हजार 333 बुजुर्गों का सफलतापूर्वक वय वंदना कार्ड बनाया जा चुका है। जिला 81.17 प्रतिशत की अभूतपूर्व कवरेज दर के साथ समूचे छत्तीसगढ़ में पहले पायदान पर काबिज है, जबकि राज्य का औसत कवरेज 64 प्रतिशत है। जिले का यह मॉडल अब राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक रोल मॉडल और प्रेरणा स्रोत बन गया है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अमले की सक्रियता

इस गौरवपूर्ण सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला कलेक्टर ने कहा कि शासन की समस्त जनहितैषी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के पात्र व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचाना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की सक्रियता और रणनीतिक योजना को दिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इस सफलता को टीम भावना का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक रोशन सचदेव, समस्त खंड चिकित्सा अधिकारियों (BMOs), मैदानी अमले, मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने इसके लिए अद्वितीय समर्पण दिखाया है। टीम ने न केवल डेटा एंट्री के स्तर पर काम किया, बल्कि सक्रिय रूप से घर-घर जाकर सर्वे किया, पात्र लाभार्थियों की पहचान की और उन्हें त्वरित रूप से कार्ड उपलब्ध कराए।

इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्वास्थ्य विभाग का मनोबल बढ़ा है और जिला प्रशासन ने भविष्य में भी सभी स्वास्थ्य सूचकांकों व योजनाओं में उत्कृष्टता का यही स्तर बनाए रखने का संकल्प दोहराया है।

रेलवे के आधुनिकीकरण से यात्री सुविधाओं, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में रायपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दयानन्द ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आमंत्रण पत्र भेंट किया। भेंट के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों पर विकसित आधुनिक यात्री सुविधाओं, अधोसंरचना उन्नयन तथा स्टेशनों के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जिसका लाभ सीधे आम नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास को मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे आज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर यात्री सेवाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, पर्यटन और जनसुविधाओं की जीवनरेखा है। रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरोना एवं बालोद रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। रेल संपर्क के सुदृढ़ होने से प्रदेश में निवेश, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों का आवागमन अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को वर्चुअल माध्यम से देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकसित एवं नवीनीकृत रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण करेंगे। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुगम, सुरक्षित एवं यात्री-अनुकूल बनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

लापरवाही का खूनी गड्ढा: तीन आदिवासी बच्चों की मौत से गांव में पसरा मातम

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 डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरतालाव के आश्रित ग्राम गांधीनगर में बुधवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ रेलवे निर्माण कार्य के दौरान खोदे गए एक गहरे गड्ढे में भरे बारिश के पानी में डूबने से तीन मासूम आदिवासी बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। एक ही गांव के तीन बच्चों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और गांव में मातम पसरा हुआ है।


देर शाम मिले शव, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए

मिली जानकारी के अनुसार, मृत बच्चों की पहचान सार्थक कोकोटे (8 वर्ष, पिता कमलेश कोकोटे), कृष मंडावी (8 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) और दानेश मंडावी (6 वर्ष, पिता राकेश मंडावी) के रूप में हुई है। तीनों बच्चे बुधवार दोपहर से लापता थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने गड्ढे के पानी से तीनों बच्चों के शवों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ की मर्चुरी भिजवाया।

ग्रामीणों का आरोप: बिना सुरक्षा इंतजामों के खुला छोड़ दिया गड्ढा

ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि रेलवे कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा यहाँ जेसीबी से गहरी खुदाई की गई थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद गड्ढे को वैसे ही खुला छोड़ दिया गया। हाल ही में हुई बारिश के कारण इस गड्ढे में भारी मात्रा में पानी भर गया था, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था। आशंका जताई जा रही है कि खेलते-खेलते बच्चे इस गड्ढे के पास पहुंच गए और पैर फिसलने या गहराई का पता न चलने के कारण डूब गए। घटना के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था।

शिक्षकों की हड़ताल का भी साया

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में चल रही शिक्षकों की हड़ताल के कारण बुधवार को स्कूल में बच्चों की देखरेख और नियमित व्यवस्था प्रभावित थी। सामान्य दिनों में शिक्षक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखते थे या उन्हें सुरक्षित छोड़ते थे। हालांकि, प्रशासन और पुलिस इस पहलू को भी जांच के दायरे में रख रहे हैं कि स्कूल बंद होने का इस हादसे से क्या संबंध है।

प्रशासन का आश्वासन: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस मुस्तैदी से जांच में जुट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में निर्माण एजेंसी या ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी भारी कीमत तीन मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य शुभारंभ; आज शाम 4 बजे खींचे जाएंगे रथ, उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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 पुरी: ओडिशा के जगन्नाथ पुरी समेत पूरे देश के लिए आज का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ ही आज से विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा का महापर्व शुरू हो गया है। इस वर्ष रथयात्रा के दिन 'रवि योग' का शुभ संयोग बनने से इस उत्सव का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।


श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और छत्तीस निजोग अनुष्ठान उप-समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज शाम ठीक 4:00 बजे से श्रद्धालुओं द्वारा रथों को खींचने का मुख्य अनुष्ठान शुरू किया जाएगा।

मौसी के घर 9 दिनों का प्रवास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महाउत्सव के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के साथ भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा देवी मंदिर' जाते हैं। भगवान यहाँ कुछ दिनों तक विश्राम और प्रवास करते हैं। इसके बाद आगामी 24 जुलाई को 'बहुदा यात्रा' (उलटी रथयात्रा) के साथ भगवान की वापसी होगी और 27 जुलाई को 'नीलाद्री बीजे' अनुष्ठान के साथ इस भव्य महापर्व का समापन होगा।

जाति-पांत के भेद से परे: रथ खींचने से धुलते हैं पाप

इस महापर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ मिलकर रथ खींचते हैं। माना जाता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु महाप्रभु के रथ की रस्सी खींचता है या इस यात्रा में शामिल होकर दर्शन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

तीन रंगों के भव्य रथ: सबसे पीछे चलेंगे महाप्रभु जगन्नाथ

रथयात्रा के लिए विशेष रूप से नीम की लकड़ियों से तीन विशाल और भव्य रथों का निर्माण किया गया है। परंपरा के अनुसार तीनों रथों का क्रम इस प्रकार रहेगा:

  • सबसे आगे (तालध्वज): बड़े भाई बलराम जी का रथ, जो लाल और हरे रंग का होता है।
  • मध्य में (दर्पदलन या पद्मरथ): बहन सुभद्रा जी का रथ, जो नीले और काले रंग का होता है।
  • सबसे पीछे (नंदिघोष या गरुड़ध्वज): स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ जी का रथ, जो लाल और पीले रंग के वस्त्रों से सुसज्जित रहता है।

सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण पूरी जगन्नाथ पुरी 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गुंजायमान है।

केंद्र के तीन बड़े फैसलों से छत्तीसगढ़ को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया आभार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के संकल्प को मिली नई उड़ान, प्रगतिशील किसान भानुप्रताप ने जुगाड़ तकनीक से तैयार की सीड ड्रिल

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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिली गुणवत्ता युक्त बीज की सौगात

कृषि विभाग के सहयोग से कम लागत में आधुनिक बुवाई का सफल मॉडल बना किसानों के लिए प्रेरणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी का सकारात्मक परिणाम गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली में देखने को मिला, जहां प्रगतिशील किसान एवं स्थानीय लोक कलाकार भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी सूझबूझ और नवाचार से पारंपरिक कृषि उपकरण को जुगाड़ तकनीक के माध्यम से सीड ड्रिल में परिवर्तित कर मूंगफली की वैज्ञानिक बुवाई का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए भानुप्रताप लगभग दो एकड़ क्षेत्र में बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और अपनी तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए कम लागत में सीड ड्रिल तैयार की, जिससे कम समय में समान दूरी पर व्यवस्थित बुवाई संभव हो सकी। इस नवाचार से श्रम की बचत होने के साथ-साथ बीज का संतुलित उपयोग और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशा के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को केवल योजनाओं का लाभ ही नहीं पहुंचा रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों और स्थानीय नवाचारों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। कृषि विभाग का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना है। ग्राम दरमोहली के किसान का यह प्रयास इस सोच को साकार करने वाला प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। उप संचालक कृषि श्री सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के अंतर्गत जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं। प्रगतिशील किसान भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ, किसानों की रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग मिलकर कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है और आत्मनिर्भर एवं समृद्ध कृषि की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करता है।

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