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CG NEWS : बारिश से बचने पेड़ के नीचे खड़े थे दो युवक, आकाशीय बिजली गिरी; एक की मौत, दूसरा गंभीर

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के बीच दुर्ग जिले में शुक्रवार को आकाशीय बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया। हादसा खैरागढ़-दुर्ग मुख्य मार्ग पर बोरी थाना क्षेत्र की लिटिया चौकी अंतर्गत ग्राम मोहंदी के पास हुआ।


जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर क्षेत्र में तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान सड़क से गुजर रहे दो युवक बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए। कुछ देर बाद तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में दोनों युवक आ गए। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया।

घटना की सूचना मिलते ही लिटिया चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं घायल युवक को गंभीर हालत में उपचार के लिए दुर्ग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। मानसून के दौरान आकाशीय बिजली की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से बारिश के समय सतर्क रहने और खुले स्थानों व पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है।

स्कूल जाने निकली दूसरी कक्षा की छात्रा को बस ने कुचला, मौके पर मौत

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 कोरिया। सोनहत थाना क्षेत्र के धनपुर बस्ती में शनिवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसे में दूसरी कक्षा की सात वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। बच्ची स्कूल जाने के लिए बस में सवार होने निकली थी, इसी दौरान वह स्कूल बस की चपेट में आ गई। गंभीर रूप से घायल छात्रा ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।


जानकारी के अनुसार धनपुर बस्ती निवासी प्रिंसि सोनहत स्थित भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा दूसरी की छात्रा थी। शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे वह स्कूल जाने के लिए बस में बैठने निकली थी। इसी दौरान वह बस की चपेट में आ गई। हादसे में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई।

घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत ले जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि हादसे में शामिल बस स्कूल संस्था की ही थी। घटना के बाद स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था और हादसे के दौरान संभावित लापरवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना मिलते ही सोनहत पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों के साथ ही घटना के दौरान बरती गई संभावित लापरवाही की भी जांच कर रही है।

मासूम की मौत की खबर से परिवार में मातम पसरा है। वहीं धनपुर बस्ती में भी शोक का माहौल है।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण हटाने का तहसीलदार ने दिया आदेश

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सात दिन में स्वयं कब्जा हटाने का अल्टीमेटम, नहीं हटाया तो पुलिस बल की मदद से होगी कार्रवाई

सरायपाली- पुराना टैक्सी स्टैंड के पास स्थित शासकीय भूमि पर किए गए कथित अवैध अतिक्रमण और निर्माण के मामले में तहसीलदार सरायपाली ने कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत जारी आदेश में शासकीय भूमि से अनधिकृत कब्जा एवं निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मामला लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा से संबंधित है।

यह प्रकरण उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में दायर डब्ल्यूपीसी क्रमांक 3818/2026 से जुड़ा हुआ है। उच्च न्यायालय द्वारा 23 जुलाई 2026 को पारित आदेश के पालन में जिला कलेक्टर के माध्यम से प्राप्त निर्देशों के आधार पर तहसील कार्यालय द्वारा 3 सितंबर 2026 को मौके का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान पंचनामा तैयार कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

जांच के दौरान सरायपाली स्थित खसरा नंबर 777 की कुल 7.453 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय आबादी मद के रूप में दर्ज पाई गई। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यालय भवन से संबंधित क्षेत्र में स्थित है। हल्का पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार, उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा द्वारा परिवार सहित वर्ष 2009 से उक्त शासकीय भूमि पर निवास किया जा रहा है।

मौके के निरीक्षण में पुराने कार्यालय भवन के समीप लगभग 798 वर्गफीट क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पाए जाने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार वहां डीपीसी कॉलम, दीवार सहित अन्य निर्माण किए गए थे। इसके अलावा करीब दो फीट अतिरिक्त क्षेत्र में एस्बेस्टस शेड का विस्तार भी पाया गया। डीपीसी के ऊपर लगभग सात फीट ऊंची दीवार का निर्माण किए जाने का भी उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है।

तहसीलदार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सुनवाई के दौरान अनावेदक द्वारा अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। उपलब्ध अभिलेखों एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर खसरा नंबर 777 की शासकीय भूमि के 798 वर्गफीट क्षेत्र में किए गए नवीन अनधिकृत अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश के तहत भुजरंग साय पैकरा को सात दिनों के भीतर, यानी 17 सितंबर 2026 तक, निर्माण सामग्री सहित अवैध निर्माण स्वयं हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने की स्थिति में राजस्व अमले एवं पुलिस बल की सहायता से अतिक्रमण हटाकर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में होने वाला पूरा खर्च एवं इसकी जिम्मेदारी अनावेदक की होगी।

तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी, मालजमादार एवं थाना प्रभारी सरायपाली को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने तथा कार्रवाई का पालन प्रतिवेदन तत्काल तहसील कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।



यह आदेश 11 सितंबर 2026 को तहसीलदार सरायपाली द्वारा जारी किया गया है।


छत्तीसगढ़ में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 5 दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम

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 CG Weather : छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के चलते अगले पांच दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 12 और 13 सितंबर को कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। 14 से 16 सितंबर तक भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।


12 सितंबर: बारिश के साथ भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा है। मौसम विभाग ने इस दिन यलो अलर्ट जारी किया है।

13 सितंबर: गरज-चमक के साथ बारिश

13 सितंबर को भी प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ वज्रपात हो सकता है। मौसम विभाग ने इस दिन भी यलो अलर्ट जारी किया है।

14 सितंबर: जारी रहेगा बारिश का सिलसिला

14 सितंबर को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, इस दिन मौसम विभाग ने किसी तरह की विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

15 और 16 सितंबर: कुछ हिस्सों में बारिश के आसार

15 सितंबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं 16 सितंबर को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दोनों दिनों के लिए मौसम विभाग ने कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

गरज-चमक के दौरान सावधानी की अपील

मौसम विभाग ने लोगों से गरज-चमक और वज्रपात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और उपस्थिति की गुणवत्ता बढ़ी, निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग

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महासमुंद- पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में समय से पहले छुट्टी दिए जाने का मामला सामने आने के बाद सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय संचालन की व्यवस्था को बेहतर बताते हुए चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

कोकडिया का कहना है कि पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के अनेक निजी स्कूलों में निर्धारित समय से पहले छुट्टी कर दी गई, जबकि सरकारी स्कूल पूरे निर्धारित समय तक संचालित होते रहे। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरणों से सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में अंतर स्पष्ट होता है।

‘ऑनलाइन उपस्थिति से सरकारी स्कूलों में बढ़ी जवाबदेही’

गेंदलाल कोकडिया के मुताबिक सरकारी स्कूलों में वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन में जवाबदेही बढ़ी है। उनका दावा है कि ऑनलाइन उपस्थिति के कारण शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचने और पूरे समय उपस्थित रहने के प्रति अधिक गंभीर हुए हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इसी तरह की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था निजी स्कूलों में भी अनिवार्य की जाए, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय के संचालन की नियमित निगरानी हो सके।

‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था लागू हो’

कोकडिया ने ‘एक देश, एक शिक्षा’ की तर्ज पर देशभर में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, शिक्षण सामग्री, निशुल्क गणवेश, मध्याह्न भोजन सहित विद्यार्थियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर बताते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और अभिभावकों को कई सुविधाएं बिना शुल्क उपलब्ध होती हैं।

निजी स्कूलों में सुरक्षा मानकों पर भी उठाए सवाल

गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाते। उनके अनुसार, कई बार स्कूली बच्चों को वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने की स्थिति देखने को मिलती है।

उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना है कि एक ही दोपहिया वाहन पर चार-पांच बच्चों को बैठाकर स्कूल लाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

फीस और परिवहन खर्च को लेकर भी उठाया मुद्दा

कोकडिया ने निजी स्कूलों में पढ़ाई और परिवहन पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, निजी स्कूलों में पढ़ाई की फीस करीब 6 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक और वाहन शुल्क करीब 8 हजार से 50 हजार रुपये तक हो सकता है। इसके विपरीत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कई मूलभूत सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति, विद्यालय समय के पालन और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

हालांकि, निजी स्कूलों से जुड़े इन आरोपों और दावों पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी हड़ताल पर, छत्तीसगढ़ में भी असर

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 रायपुर। देशभर में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिला। रायपुर, जगदलपुर समेत प्रदेश के कई स्थानों पर बैंक कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने 5-डे बैंकिंग लागू करने और पीएलआई (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) में समानता समेत विभिन्न मांगें उठाईं।


रायपुर में मोतीबाग चौक स्थित पीएनबी परिसर में बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी-कर्मचारी जुटे और मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। वहीं जगदलपुर में भी बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होकर बैंकिंग कार्यों का बहिष्कार किया।

लंबे समय से 5-डे बैंकिंग की मांग

बैंक कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिन काम और दो दिन अवकाश की व्यवस्था उनकी लंबे समय से लंबित मांग है। उनका तर्क है कि कई अन्य वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू है। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में भी इसे लागू किया जाना चाहिए। कर्मचारियों के मुताबिक इससे कार्यक्षमता के साथ वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा।

करीब 28 बैंकों के कर्मचारियों के शामिल होने का दावा

हड़ताल में सरकारी और निजी क्षेत्र के करीब 28 बैंकों के अधिकारी-कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों ने ग्राहकों से अपील की कि हड़ताल के दौरान जरूरी बैंकिंग कार्यों के लिए एटीएम, यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करें।

मांगें नहीं मानी तो सितंबर में तीन दिन की हड़ताल

बैंक कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा हड़ताल के बाद भी उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षा ऑडिट के आदेश, हॉस्टल से लेकर स्कूल और कोचिंग संस्थानों तक होगी जांच

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों और युवाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हॉस्टल, पीजी, स्कूल और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य संस्थानों में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और संभावित जोखिमों को समय रहते दूर करना है।

सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक समीक्षा

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इन संस्थानों में सुरक्षा इंतजामों की जांच की जाएगी। ऑडिट के दौरान भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, बिजली से जुड़े सुरक्षा मानक और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा पर जोर रहेगा।

विद्यार्थियों की सुरक्षा पर विशेष फोकस

हॉस्टल, पीजी और कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा रहते या पढ़ाई करते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी है। सरकार की इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं और वहां रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।

खामियां मिलने पर कार्रवाई की तैयारी

सुरक्षा ऑडिट के दौरान यदि किसी संस्थान में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन की ओर से संस्थानों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री के इस निर्देश को विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आने वाले दिनों में सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

भारत के कई पावर प्लांट में कोयले का संकट, करीब एक-तिहाई संयंत्रों में ईंधन भंडार बेहद कम

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नई दिल्ली- भारत के बिजली क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ती नजर आ रही है। देश के करीब एक-तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में ईंधन का भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंचने की खबर है। ऐसे में बिजली उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कोयले की सीमित उपलब्धता के बीच पावर प्लांट्स के लिए पर्याप्त ईंधन सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है। यदि कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कुछ संयंत्रों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है असर

कोयला भारत के बिजली उत्पादन का एक प्रमुख आधार है। बड़ी संख्या में थर्मल पावर प्लांट कोयले पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन भंडार में कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो बिजली उत्पादन की निरंतरता को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों की नजर अब कोयले की आपूर्ति, बिजली की मांग और पावर प्लांट्स के स्टॉक स्तर पर बनी हुई है। सरकार और बिजली क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना प्राथमिकता बन सकता है।

बढ़ती मांग के बीच चुनौती

बिजली की मांग में बढ़ोतरी के बीच कोयले की उपलब्धता में कमी पावर सेक्टर के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। आने वाले दिनों में कोयला आपूर्ति में सुधार और संयंत्रों के स्टॉक की स्थिति यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि बिजली उत्पादन पर इसका कितना असर पड़ता है।

शेयर बाजार में लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी चिंता

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मुंबई- भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें सप्ताह कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख शेयर सूचकांक साप्ताहिक आधार पर कमजोर बंद हुए।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव आने और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता बाजार sentiment पर असर डाल रही है।

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजारों के रुख पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इन कारकों में स्थिरता आने पर बाजार में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

BRICS Summit से पहले बड़ी कूटनीतिक हलचल, भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

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नई दिल्ली- भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत पहुंचे हैं। उनके दौरे को भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रपति पेजेशकियन के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी नजर

ईरान के राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में भारत और ईरान के बीच होने वाली बातचीत का क्षेत्रीय और रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता रहा है। दोनों नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी पर फोकस

भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। चाबहार के माध्यम से भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक बेहतर संपर्क स्थापित करने में रणनीतिक लाभ मिलता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और व्यापारिक मार्गों को मजबूत करना बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है।

 BRICS के संदर्भ में भी दौरा महत्वपूर्ण

ईरान की BRICS में भागीदारी के कारण राष्ट्रपति पेजेशकियन का भारत दौरा संगठन के व्यापक आर्थिक और रणनीतिक एजेंडे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत और ईरान के बीच बातचीत से दक्षिण-दक्षिण सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर नए अवसरों पर चर्चा का रास्ता खुल सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की प्रस्तावित बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। यह मुलाकात भारत-ईरान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ BRICS के भीतर सहयोग और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

PM मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात, व्यापार और रक्षा सहयोग पर हुई व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक के दौरान व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग, उर्वरक, महत्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष भारत-रूस के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के प्रयासों पर भी विचार कर रहे हैं।

2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

वार्ता में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहा। दोनों देशों के बीच 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके लिए ऊर्जा, विनिर्माण, उर्वरक, रेलवे, स्टील और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

रक्षा और ऊर्जा सहयोग भी अहम मुद्दा

भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देश बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।

परमाणु और नई तकनीक पर भी नजर

दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी बातचीत के एजेंडे में रहीं। भारत और रूस पहले से ही कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं और अब इसे नए क्षेत्रों तक विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।

यूक्रेन और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा

बैठक ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मुद्दे बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर भारत की स्थिति दोहराते रहे हैं।

BRICS सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण मुलाकात

पुतिन का भारत दौरा 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है। BRICS सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है, जिसमें कई प्रमुख देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में मोदी-पुतिन की यह बैठक भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ BRICS के भीतर आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और रूस के बीच यह मुलाकात दोनों देशों की लंबे समय से चली आ रही ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भंडारा सड़क दुर्घटना पर जताया गहरा शोक

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर घायलों और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए अधिकारियों की टीम रवाना

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई भीषण सड़क दुर्घटना में छत्तीसगढ़ के नागरिकों के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार एवं स्थानीय प्रशासन से निरंतर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घायलों के समुचित उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ से अधिकारियों की एक टीम घटनास्थल के लिए भेज दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

भारत की तटरेखा को पारिस्थितिकी, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी के एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत के तटवर्ती क्षेत्र को पारिस्थितिकी, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और मानव विकास से जुड़े एक परस्पर-समन्वित क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राष्ट्रीय तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा एवं स्थिरता सम्मेलन (CCESS) 2026 को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की 11,000–12,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री संसाधनों और ‘ब्लू इकॉनमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रदान करती है।


मंत्री ने कहा कि देश की लंबी तटरेखा और विस्तृत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र अनेक अवसर प्रदान करते हैं, लेकिन इनके लिए वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ने वाले समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास 11,000–12,000 किलोमीटर लंबा तटीय क्षेत्र है, जो दुनिया के सबसे लंबे तटीय क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने देश के भविष्य के विकास में समुद्र और तटीय क्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र के साथ भारत का ऐतिहासिक संबंध यह भी दर्शाता है कि हमारे पूर्वजों को समुद्री पर्यावरण के बारे में गहरा ज्ञान और समझ थी।

डीप ओशन मिशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर अब तक अन्वेषित नहीं किए गए गहरे समुद्र के संसाधनों की खोज की दिशा में आगे बढ़ रहा है और साथ ही स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि पूरी तरह स्वदेशी अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन हाल ही में लॉन्च किया गया है, जो गहरे समुद्र में अनुसंधान और अन्वेषण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्र की गहराइयों का अन्वेषण करने के लिए रोबोट और सबमर्सिबल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने गहरे समुद्र में अन्वेषण की भारत की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस क्षेत्र में देश की प्रगति से समुद्री संसाधनों को समझने तथा उनका उपयोग करने की नई संभावनाएँ खुलेंगी।

मंत्री ने गहरे समुद्र के अन्वेषण को भारत के उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ते हुए कहा कि यदि देश को अपनी अर्थव्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाना है, तो उसे ऐसे संसाधनों की ओर देखना होगा जिनका अभी तक पूरी तरह अन्वेषण नहीं हुआ है। उन्होंने समुद्री एवं तटीय संसाधनों, धातुओं, खनिजों और मत्स्य संसाधनों को महत्वपूर्ण संभावनाओं वाले क्षेत्र बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्री संसाधन पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ब्लैक सल्फाइड और खनिजों पर हो रहे अनुसंधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में समुद्री खनिजों के निष्कर्षण की संभावना उन क्षेत्रों में से एक है जिनका अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने मत्स्य क्षेत्र की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

मंत्री ने जोर दिया कि तटीय समुदाय व्यापक तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि तटीय संसाधनों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आजीविका में सुधार तथा पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने तटीय सुरक्षा के बढ़ते तकनीकी आयाम पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समुद्री निगरानी, सर्विलांस, संचार, रिमोट सेंसिंग, डेटा तथा उभरती प्रौद्योगिकियाँ तटीय और समुद्री पर्यावरण की समझ तथा उससे निपटने की भारत की तैयारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इन तकनीकी क्षमताओं को एक व्यापक ‘कोस्टल इंडिया’ दृष्टिकोण के माध्यम से एक साथ लाने की आवश्यकता है, जिसमें सरकार और पूरे राष्ट्र की भागीदारी हो। उन्होंने जोर दिया कि तटरेखा से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों का समाधान अलग-अलग क्षेत्रों द्वारा अलग-अलग काम करके नहीं किया जा सकता।

इसी संदर्भ में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा एवं स्थिरता सम्मेलन (CCESS) 2026 विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। सम्मेलन का बहुविषयक स्वरूप—जिसमें पृथ्वी विज्ञान, शिक्षाविद, रक्षा, समुद्री संस्थान, कानूनी विशेषज्ञ, उद्योग और तटीय हितधारक शामिल हैं—तटीय चुनौतियों की एकीकृत समझ विकसित करने का अवसर देता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि तटीय पारिस्थितिकी और तटीय सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। लचीले और सक्षम तटीय क्षेत्रों के लिए स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जागरूक समुदाय, प्रभावी शासन व्यवस्था और मजबूत वैज्ञानिक क्षमताएँ आवश्यक हैं।

उन्होंने समुद्री विज्ञान को राष्ट्रीय नीति से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान सीधे तटीय योजना और प्रबंधन में योगदान दे सके। उन्होंने तटीय समुदायों की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि उनकी आजीविका, पारंपरिक ज्ञान तथा भागीदारी टिकाऊ तटीय विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का तटीय बुनियादी ढाँचा और बंदरगाह संपर्क, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए केंद्रीय महत्व रखते हैं। इन परिसंपत्तियों का टिकाऊ विकास तटीय और समुद्री पर्यावरण की वैज्ञानिक समझ पर आधारित होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले पाँच वर्षों से चलाया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में 75 दिवसीय अभियान शुरू किया गया था, जिसमें तटीय राज्यों के नागरिकों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया था।

मंत्री ने कहा कि यह अभियान इस वर्ष भी 12 सितंबर से 19 सितंबर तक जारी रहेगा। इसके तहत सफाई अभियान सहित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) तथा अन्य संगठनों की भागीदारी होगी। उन्होंने भारत की तटरेखा को स्वच्छ रखने के लिए शपथ शुरू किए जाने का भी उल्लेख किया, जिससे अभियान में नागरिकों की भागीदारी का एक नया आयाम जुड़ा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि व्यापक उद्देश्य एक ऐसा ‘समग्र तटीय भारत (Coastal Bharat)’ दृष्टिकोण विकसित करना होना चाहिए, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक अवसर, वैज्ञानिक क्षमता और तटीय सुरक्षा एक-दूसरे को मजबूत करें। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर एक ऐसे एकीकृत ढाँचे की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वैज्ञानिक ज्ञान को सहयोग, अनुसंधान प्राथमिकताओं और व्यावहारिक कार्रवाई में बदल सके तथा एक सुरक्षित, टिकाऊ और समृद्ध तटीय भविष्य का निर्माण कर सके।

सेवानिवृत्ति प्रकरणों के त्वरित निपटारे और रिक्त पदों पर भर्ती के दिए निर्देश - मुख्य सचिव

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार साधक सचिवों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और महत्वपूर्ण कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सेवा निवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के प्रकरणों का निराकरण उनकी सेवानिवृत्ति से पहले ही सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विभागवार नियतकालिक सूची तैयार करने के निर्देश सचिवों को दिए।


बैठक में विभागों में रिक्त पदों तथा बैकलॉग के पदों पर सेटअप तैयार कर त्वरित भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।

लोक सेवा गारंटी व अन्य पोर्टल

बैठक में लोक सेवा गारंटी, सूचना का अधिकार, सेवा सेतु, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति, डी-रेगुलेशन और ग्रामीण विकास की योजनाओं की समीक्षा की गई। जानकारी दी गई कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अब तक लगभग 728 सेवाएं अधिसूचित की जा चुकी हैं।

कर्मचारियों के लिए mandatory i GOT प्रशिक्षण

अधिकारियों-कर्मचारियों को iGOT (iGOT Karmayogi) प्लेटफॉर्म के तहत विभाग की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को प्रतिमाह 1 से 3 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य होगा।

रिफ़ॉर्म उत्सव अभियान

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को विभागों से संबंधित रिफ़ॉर्म (सुधार) की जानकारी तैयार करने को कहा, जिसका प्रदर्शन आगामी दिनों में आयोजित होने वाले रिफॉर्म उत्सव अभियान में किया जाएगा।

मेरा युवा भारत पोर्टल पर पंजीकरण

केंद्रीय खेल एवं युवा मंत्रालय के मेरा युवा भारत (MY Bharat) पोर्टल पर राज्य के स्कूलों व कॉलेजों के 15 से 29 वर्ष के युवाओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिला समन्वयकों और प्राचार्यों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव शहला निगार, वित्त एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, ऊर्जा विभाग के सचिव सारांश मित्तर, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से किया संवाद, दिए सफलता के मंत्र

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 रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विद्यार्थियों ने भेंट की और संवाद किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए अनुशासन, आत्मनियंत्रण और कठोर परिश्रम को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।


’सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है सैनिक स्कूल’

राज्यपाल डेका ने कहा कि विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें सैनिक स्कूल जैसी उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्था में अध्ययन करने का अवसर मिला है। सैनिक स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, समय की पाबंदी तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्व भी सिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पढ़ाई, नौकरी और करियर को लेकर तनाव एक बड़ी चुनौती है। तनाव का सामना करने के लिए हमें जो प्राप्त है, उसमें संतुष्ट रहना सीखना होगा। अपनी क्षमताओं को पहचानकर उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए। मन को नियंत्रित रखते हुए अपनी योग्यता और ऊर्जा को सही दिशा में लगाएंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।

’लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें’

राज्यपाल ने कहा कि कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। योग्यता के साथ यदि निरंतर मेहनत की जाए तो सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें। गुरुजनों और पालकों की बातों को गंभीरता से सुनें, लेकिन निर्णय लेते समय अपने तर्क और बुद्धि का भी प्रयोग करें।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी ‘थिंकिंग प्रोसेस’ को हमेशा सक्रिय रखने की सलाह दी। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने राज्यपाल से उनके जीवन, करियर और सार्वजनिक जीवन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। राज्यपाल ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर देते हुए उन्हें अपने संवैधानिक पद के दायित्वों की जानकारी दी तथा अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव भी साझा किए। सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों को लोक भवन का भ्रमण भी कराया गया। इस अवसर पर सैनिक स्कूल अंबिकापुर के शिक्षकगण भी उपस्थित थे।a

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