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शिक्षकों की मांग को लेकर NH-53 पर चक्काजाम, भगतदेवरी में ग्रामीणों का प्रदर्शन

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स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराज पालक-ग्रामीणों ने जताया विरोध, प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन

महासमुंद- जिले के भगतदेवरी गांव में स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर पालकों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों की व्यवस्था की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण NH-53 पर पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया। सड़क पर प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पालकों ने लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान करने और स्कूल में आवश्यक संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति अथवा वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग की।

NH-53 पर प्रदर्शन से बढ़ी परेशानी

शिक्षकों की मांग को लेकर ग्रामीणों के सड़क पर उतरने से NH-53 पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की।

ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने स्कूल की समस्याएं रखीं और जल्द से जल्द शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा मामला होने के कारण इस पर तत्काल ध्यान दिया जाना जरूरी है।

दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन

प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और सड़क पर यातायात सामान्य हुआ।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार जल्द ही स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित रूप से संचालित हो सके।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

भगतदेवरी में शिक्षकों की कमी को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकीय व्यवस्था की आवश्यकता को सामने ला दिया है। पालकों का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों में विषयवार और पर्याप्त संख्या में शिक्षक होना जरूरी है।

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था कब तक लागू होती है और विद्यार्थियों की पढ़ाई किस तरह सुचारु होती है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने को लेकर है।


सीआरपीएफ ने चलाया स्वच्छता अभियान, दिया स्वच्छता का संदेश

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आरंग- स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत बुधवार को डीआईजी उदयभास्कर बिल्ला एवं कमांडेंट आशीष यादव ग्रुप केंद्र सीआरपीएफ रायपुर के दिशा-निर्देशन एवं  उप कमांडेंट अजय सिंह के मार्गदर्शन में सीआरपीएफ कैंप भिलाई के जवानों ने शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया।अभियान के तहत विद्यालय परिसर ,खेल मैदान और सड़क किनारे की साफ-सफाई की गई। इस दौरान जागरूकता नारे लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया गया।इस अवसर पर असिस्टेंट कमांडेंट भरत भोई ने बच्चों को संबोधित कर स्वच्छता के प्रति प्रेरित और सचेत किया।

इस मुहिम में पीपला फाउंडेशन के संरक्षक व राष्ट्रीय किसान नेता पारसनाथ साहू, सरपंच देवशरण धीवर, पंच प्रेमलाल साहू, दुलार साहू, राकेश साहू, संस्था प्रधान के.के. परमाल, शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चंद्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू, सुशील कुमार आवडे, जितेन्द्र कुमार यदु, शिक्षिका पायल शुक्ला, प्रभा साहू, पार्वती साहू, संगीता पाटले सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सीआरपीएफ जवानों और ग्रामीणो ने भाग लिया। कार्यक्रम के संयोजन में शिक्षक महेन्द्र पटेल की अहम् भूमिका रही।


43 लाख खर्च, तीन महीने में सड़क खराब; विभाग ने बुलडोजर से तुड़वाया

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 कवर्धा। पंडरिया ब्लॉक के गुंझेटा गांव में करीब 43 लाख रुपये की लागत से बनाई गई सीसी सड़क निर्माण के महज तीन महीने बाद खराब हो गई। सड़क की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद विभाग ने जांच कराई। जांच में सड़क निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर विभाग ने खराब हिस्से को बुलडोजर चलाकर तुड़वा दिया। अब संबंधित ठेकेदार को खराब सड़क को हटाकर निर्धारित मापदंडों के अनुसार दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं।


जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं ग्रामीण विकास योजना के तहत गुंझेटा गांव में करीब 550 मीटर लंबी सीसी सड़क का निर्माण कराया गया था। निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगीं और कई जगहों पर सतह खराब हो गई। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत विभाग से की थी।

शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण किया। इसके बाद सड़क की कोर कटिंग कर नमूने लिए गए और तकनीकी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। जांच रिपोर्ट में सड़क निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद विभाग ने खराब हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की।

अधिकारियों के मुताबिक निर्माण के दौरान ठेकेदार को इंजीनियर की निगरानी और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार काम करने के निर्देश दिए गए थे। जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद खराब सड़क को बुलडोजर से तोड़ दिया गया।

विभाग ने ठेकेदार को निर्देश दिया है कि खराब हिस्से को पूरी तरह हटाकर गुणवत्तापूर्ण सड़क का दोबारा निर्माण कराया जाए। बताया गया है कि ठेकेदार के भुगतान पर भी रोक लगाई गई है। वहीं, ठेकेदार ने लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए सड़क का पुनर्निर्माण कराने की बात कही है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। गुंझेटा में की गई कार्रवाई को जिले में चल रहे अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी चेतावनी के तौ

दतरेंगा में चाकूबाजी से मचा हड़कंप, तीन युवक घायल; विवाद के बाद आरोपी फरार

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प्रेमिका से बातचीत को लेकर विवाद की बात सामने आई, बीच-बचाव करने पहुंचे दो युवकों को भी लगी चोट

रायपुर- राजधानी रायपुर के दतरेंगा गांव में चाकूबाजी की घटना सामने आने से इलाके में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रेमिका से बातचीत को लेकर हुए विवाद के बाद एक युवक ने दूसरे युवक पर चाकू से हमला कर दिया। घटना में कुल तीन युवकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान सागर साहू ने लीलाराम साहू पर चाकू से हमला किया। हमले में लीलाराम के कमर और पैर में चोटें आईं, जबकि हाथ की उंगली पर भी चोट लगने की जानकारी है। घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी बताया गया है।

बीच-बचाव करने पहुंचे दो युवकों पर भी हमला

घटना के दौरान विवाद शांत कराने और बीच-बचाव करने पहुंचे राकेश साहू और परमानंद साहू भी चाकू के हमले की चपेट में आ गए। दोनों को भी चोटें आई हैं।

एक ही विवाद में तीन युवकों के घायल होने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

आरोपी मौके से फरार

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस द्वारा घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। विवाद की वास्तविक वजह, हमले की परिस्थितियां और आरोपी के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पुलिस जांच के बाद और स्पष्ट होगी।

फिलहाल घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है और पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों को जुटा रही है।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

घटना को लेकर पुलिस की जांच जारी है। विवाद किस बात से शुरू हुआ और चाकूबाजी तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर पुलिस संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है।

दतरेंगा में हुई इस घटना ने एक बार फिर आपसी विवादों के हिंसक रूप लेने को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

रायपुर में अब 4 डिब्बों में अलग करना होगा कचरा, नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू

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गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग रखना होगा; नियमों के पालन पर नगर निगम की निगरानी

रायपुर- राजधानी रायपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को लेकर नए नियमों के तहत अब कचरा संग्रहण और निपटान की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग श्रेणियों में रखने पर जोर दिया गया है। नए नियम देशभर में 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं।

रायपुर नगर निगम द्वारा नागरिकों को नए नियमों की जानकारी देने और कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। निगम के अनुसार अब घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को मिलाकर देने के बजाय अलग-अलग श्रेणी में रखना होगा।

चार डिब्बों में रखना होगा कचरा

नई व्यवस्था के तहत कचरे को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में अलग किया जाना है—

1. गीला कचरा:
रसोई से निकलने वाला कचरा, भोजन के अवशेष, सब्जियों और फलों के छिलके, फूल तथा अन्य जैविक कचरा।

2. सूखा कचरा:
कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच, लकड़ी, रबर और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सूखी सामग्री।

3. सैनिटरी कचरा:
इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड, टैम्पोन और इसी तरह का सैनिटरी अपशिष्ट।

4. विशेष देखभाल वाला कचरा:
एक्सपायर्ड दवाइयां, बैटरी, CFL/बल्ब, पेंट के डिब्बे, घरेलू रसायन, इस्तेमाल की गई सिरिंज तथा अन्य ऐसे अपशिष्ट जिन्हें सामान्य कचरे के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए।

नगर निगम स्तर पर नागरिकों को चार अलग-अलग डिब्बों के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि कचरे की आगे की छंटाई और प्रसंस्करण की प्रक्रिया आसान हो सके।

अब सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं

नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन को केवल नगर निगम की जिम्मेदारी मानने के बजाय कचरा उत्पन्न करने वाले व्यक्ति और संस्थान की भी जिम्मेदारी तय की गई है।

इसका मतलब है कि घर से लेकर बड़े संस्थान तक कचरा पैदा होने के समय ही उसका पृथक्करण करें। यदि अलग-अलग कचरा एक साथ मिला दिया जाता है तो उसके पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण में परेशानी होती है।

नगर निकायों की जिम्मेदारी कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और परिवहन की व्यवस्था से जुड़ी है। वहीं सूखे कचरे की छंटाई और उपयोगी सामग्री को अलग करने में Material Recovery Facility (MRF) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

बड़े कचरा उत्पादकों पर भी जिम्मेदारी

नए नियमों में Bulk Waste Generator (BWG) के लिए भी जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली इमारत, प्रतिदिन 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाली इकाइयां इस श्रेणी में आ सकती हैं।

इनमें बड़े आवासीय परिसर, सरकारी संस्थान, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, होटल, मॉल, बाजार और अन्य बड़े प्रतिष्ठान शामिल हो सकते हैं। ऐसे संस्थानों को अपने कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी होगी।

कचरा प्रबंधन की होगी ऑनलाइन निगरानी

नए नियमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और निगरानी आधारित बनाने पर भी जोर दिया गया है।

कचरा उत्पन्न होने से लेकर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक करने की व्यवस्था का प्रावधान है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कचरा किस स्तर पर है और उसका निपटान किस तरीके से किया जा रहा है।

नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरणीय मुआवजा

नए नियमों में 'Polluter Pays Principle' यानी प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को भी शामिल किया गया है।

नियमों का पालन नहीं करने, बिना पंजीकरण संचालन, गलत रिपोर्टिंग या ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करने जैसी स्थितियों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाए जाने का प्रावधान है।

लैंडफिल में कम से कम कचरा भेजने का लक्ष्य

नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे कचरे की मात्रा कम करना है जिसे सीधे लैंडफिल में भेजना पड़ता है।

यदि घर और संस्थान स्तर पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखा जाए तो जैविक कचरे का प्रसंस्करण तथा सूखे कचरे में मौजूद पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की रिकवरी आसान हो सकती है। नियमों में गैर-पुनर्चक्रणीय और उपयुक्त रूप से निपटान योग्य अवशिष्ट कचरे के सुरक्षित निपटान पर जोर दिया गया है।

रायपुर में जागरूकता अभियान

रायपुर नगर निगम की ओर से शहर के विभिन्न वार्डों में नागरिकों को नए नियमों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। निगम की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में रखें और उसे आपस में मिलाकर न दें।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन समय पर नहीं पहुंचने की स्थिति में नागरिकों को नगर निगम की हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी जा रही है।

नागरिकों के लिए सीधा संदेश

कचरा अलग करें, शहर स्वच्छ रखें।

घर में कचरा निकलते ही उसे अलग-अलग श्रेणियों में रखें। गीला और सूखा कचरा मिलाने से बचें तथा सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को सामान्य कचरे में न डालें।

नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में नगर निगम के साथ-साथ नागरिकों, संस्थानों और बड़े कचरा उत्पादकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।

आरंग गोठान में गायों की बदहाली पर सवाल: गोठान से मुक्त करने और खेतों में बाड़ लगाने की उठी मांग

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“बेजुबानों पर अत्याचार नहीं, आजादी हर जीव का हक” — प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा और तत्काल कार्रवाई की मांग

आरंग- आरंग क्षेत्र के गोठान में रखी गई गायों की कथित बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 28 सितंबर को सामने आई तस्वीरों में गोठान में मौजूद मवेशियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पानी, स्वच्छ स्थान और सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि गोठान में रखे गए मवेशियों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है और लगातार पशुओं के बीमार पड़ने तथा मौत होने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, मौतों की वास्तविक संख्या और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

फसल बचाने के लिए गायों को कैद करना ही एकमात्र रास्ता क्यों?

इस पूरे मामले में अब एक अलग समाधान की मांग भी सामने आ रही है। मांग है कि यदि गोठान में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो गायों को गोठान में बंद रखने के बजाय उन्हें मुक्त छोड़ा जाए और किसान अपने खेतों की सुरक्षा के लिए स्वयं बाड़ लगाकर फसल की रक्षा करें।

किसानों के लिए फसल बचाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए बेजुबान पशुओं को ऐसी जगह बंद रखना उचित नहीं माना जा सकता जहां उनके भोजन, पानी, आश्रय और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था न हो।

“आजादी हर जीव का हक है”

पशु प्रेमियों और ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। गोठान में मौजूद सभी मवेशियों की स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त चारा-पानी, छाया एवं सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि व्यवस्था बनाए रखना संभव नहीं है तो पशुओं को वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

साथ ही किसानों को खेतों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने और अन्य मानवीय उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की मांग की जा रही है।

सवाल सिर्फ गायों का नहीं, व्यवस्था की जिम्मेदारी का भी है।

अगर इंसानों के लिए सुरक्षा जरूरी है तो बेजुबान पशुओं के लिए भी जीवन, भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण उतना ही जरूरी है।

“गायों को गोठान से छोड़िए, किसान अपने खेत में बाड़ लगाकर फसल बचाए।
बेजुबानों पर अत्याचार न करें।
आजादी हर जीव का हक है।”

प्रशासन से प्रमुख मांगें

  • गोठान में मौजूद सभी मवेशियों की तत्काल स्वास्थ्य जांच कराई जाए।

  • किसी भी पशु की मौत होने पर कारण की पशु चिकित्सकीय जांच/पोस्टमार्टम कराया जाए।

  • चारा, स्वच्छ पेयजल और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

  • गोठान की वास्तविक स्थिति की प्रशासनिक जांच कराई जाए।

  • यदि गोठान में पर्याप्त व्यवस्था संभव नहीं है तो पशुओं के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

  • किसानों को खेतों में बाड़ लगाने तथा फसल सुरक्षा के मानवीय उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

  • भविष्य में पशुओं को ऐसी परिस्थितियों में रखने से बचा जाए, जहां उनके जीवन और स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न हो।


प्राचार्यों, प्रोफेसरों और प्रधानपाठकों को सड़क सुरक्षा की जानकारी है या नहीं? — गेंदलाल कोकडिया

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गंभीर दुर्घटना के बाद ही जागेगा स्कूल शिक्षा विभाग?

महासमुंद- स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता को लेकर महासमुंद जिले में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों को लेकर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का आयोजन विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया एवं विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित चलने, यातायात नियमों का पालन करने तथा दुर्घटनाओं से बचाव के संबंध में जानकारी दी गई।

कोकड़ी विद्यालय के बच्चों में दिखी जागरूकता

शिक्षक गेंदलाल कोकडिया के अनुसार कार्यशाला के दौरान कोकड़ी शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर अच्छी जागरूकता देखने को मिली। बच्चों को सड़क पर पैदल चलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, सड़क पार करने का सुरक्षित तरीका क्या है और यातायात नियमों का पालन क्यों आवश्यक है—इसकी जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि विद्यालय के बच्चों को सड़क पर सुरक्षित आवागमन के नियमों की जानकारी है और वे उनका पालन करने के लिए जागरूक दिखाई दिए।

आसपास के स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के व्यवहार पर चिंता

कोकडिया ने आसपास के विभिन्न विद्यालयों, निजी स्कूलों और महाविद्यालयों में आने-जाने वाले विद्यार्थियों तथा वाहनों के आवागमन के तरीकों पर चिंता व्यक्त की।

उनका कहना है कि कई स्थानों पर स्कूल की छुट्टी के बाद विद्यार्थी एक साथ सड़क के बीच में चलते हुए यातायात को प्रभावित करते दिखाई देते हैं। कई बच्चे सड़क किनारे चलने के बजाय सड़क के बीच में चलते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कम उम्र के विद्यार्थी मोटरसाइकिल से स्कूल या कॉलेज आते-जाते दिखाई देते हैं, जो उनके अनुसार गंभीर चिंता का विषय है।

कम उम्र में दोपहिया वाहन चलाने पर रोक की मांग

शिक्षक ने कम उम्र के बच्चों द्वारा मोटरसाइकिल चलाने पर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि कई विद्यार्थी कम उम्र में ही दोपहिया वाहन चलाकर स्कूल या कॉलेज पहुंचते हैं।

उन्होंने प्रशासन और शिक्षा विभाग से ऐसे मामलों में प्रभावी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, ताकि नाबालिग विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन चलाने से रोका जा सके और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।

मोबाइल और ईयरफोन का इस्तेमाल भी बना खतरा

कोकडिया ने विद्यार्थियों द्वारा सड़क पर चलते या साइकिल चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल किए जाने पर भी चिंता जताई।

उनके अनुसार, कुछ विद्यार्थी कान में ईयरफोन लगाकर तेज गति से साइकिल चलाते हैं। इससे आसपास से आने वाले वाहनों का हॉर्न सुनाई नहीं देता और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि सड़क पर चलते या वाहन चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल न करें।

सड़क पर किताब-कॉपी लेकर चलने से भी खतरा

उन्होंने बताया कि कई बार विद्यार्थी स्कूल से निकलने के बाद सड़क पर समूह में चलते हुए किताब-कॉपी और अन्य सामान उछालते या आपस में खेलते नजर आते हैं। कुछ विद्यार्थी सड़क के किनारे अथवा सड़क पर ही बैठकर आराम करने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि सड़क वाहन आवागमन के लिए होती है, इसलिए वहां अनावश्यक रूप से बैठना, खेलना या लापरवाही करना दुर्घटना का कारण बन सकता है।

 विद्यार्थियों को सड़क किनारे चलने की आदत सिखाने की जरूरत

कोकडिया ने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही सड़क सुरक्षा के व्यावहारिक नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों से अपील की कि—

  • सड़क पर चलते समय निर्धारित किनारे/पैदल मार्ग का उपयोग करें।

  • सड़क के बीच में समूह बनाकर न चलें।

  • बिना आवश्यकता सड़क पर न बैठें।

  • साइकिल चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल न करें।

  • दोपहिया वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें।

  • कम उम्र के बच्चों को मोटरसाइकिल चलाने से रोकें।

  • सड़क पर तेज गति से वाहन न चलाएं।

  • दूसरे वाहनों को गलत तरीके से ओवरटेक न करें।

  • वाहन चलाते समय दूसरे वाहन को सुरक्षित तरीके से रास्ता देना अच्छी आदत है।

  • सड़क पार करते समय दोनों तरफ देखकर ही आगे बढ़ें।

स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता अभियान की मांग

शिक्षक गेंदलाल कोकडिया एवं विद्यालय प्रबंधन समिति ने मांग की है कि सरकारी और निजी स्कूलों तथा महाविद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा कार्यशालाएं आयोजित की जाएं।

उनका कहना है कि केवल सड़क सुरक्षा सप्ताह या किसी दुर्घटना के बाद जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय पूरे वर्ष विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने स्कूल बसों और अन्य शैक्षणिक वाहनों की स्थिति, वाहन चालकों की जिम्मेदारी तथा विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही पर भी विशेष ध्यान देने की मांग की है।

 प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग

 कोकडिया ने महासमुंद कलेक्टर, मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग तथा परिवहन एवं सड़क सुरक्षा से संबंधित अधिकारियों से इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज आने-जाने वाले विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए लगातार प्रेरित किया जाना चाहिए तथा विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानपाठक और शिक्षक भी विद्यार्थियों की यातायात संबंधी आदतों पर ध्यान दें।

सवाल यही है—दुर्घटना के बाद जागरूकता या पहले से सुरक्षा?

सड़क सुरक्षा को लेकर उठाई गई इस चिंता के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या स्कूल और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा की शिक्षा को नियमित शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा या किसी गंभीर दुर्घटना के बाद ही प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय होंगे?

सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही भी किसी विद्यार्थी के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए विद्यालय स्तर से ही बच्चों में “सुरक्षित सड़क व्यवहार” की आदत विकसित करना दुर्घटनाओं की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


भिलाई इस्पात संयंत्र में 250 टन कबाड़ चोरी का मामला, अब सीबीआई करेगी जांच

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दुर्ग/भिलाई- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़े करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले मामले की जांच पुरानी भिलाई पुलिस कर रही थी।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर इस मामले में सीबीआई को जांच का अधिकार दिया। मामला पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत दर्ज है।

कैसे सामने आया मामला?

मामला उस समय सामने आया जब 26 मई 2026 को पुलिस ने अकलोरडीह-खदानपारा, हथखोज क्षेत्र स्थित ए.के. ट्रेडर्स के परिसर में छापेमारी की।

पुलिस को वहां बड़ी मात्रा में लोहे की प्लेटें, बीम के कटे हुए टुकड़े और अन्य लौह सामग्री मिली। पुलिस के अनुसार यह सामग्री भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित तौर पर बाहर निकाली गई थी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में स्क्रैप के अलावा ट्रक, अर्थमूवर, क्रेन और अन्य मशीनरी भी जब्त की थी।

पुलिस के प्रारंभिक आकलन के अनुसार जब्त किए गए माल, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये थी, जबकि संदिग्ध चोरी के लोहे की कीमत लगभग 90 लाख रुपये बताई गई थी।

चोरी का माल बाहर कैसे पहुंचाया जाता था?

जांच में एक कथित तरीके की जानकारी सामने आई है, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, भिलाई इस्पात संयंत्र से निकलने वाली फ्लू डस्ट की खेपों में कथित तौर पर मूल्यवान लौह स्क्रैप को छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश की जाती थी।

फ्लू डस्ट इस्पात निर्माण प्रक्रिया से निकलने वाला एक उप-उत्पाद है। आरोप है कि इसी तरह के वैध परिवहन के बीच चोरी के स्क्रैप को बाहर निकालने का रास्ता बनाया गया।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर संयंत्र के अंदर काम करने वाले लोगों, परिवहन से जुड़े व्यक्तियों, स्क्रैप कारोबारियों और बाहर की औद्योगिक इकाइयों के बीच संभावित संबंधों के संकेत मिले।

अब तक 21 गिरफ्तारियां

इस मामले में पुलिस अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इनमें भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़े अधिकारी/कर्मचारी, परिवहन से जुड़े लोग तथा निजी क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। एक राजनीतिक पदाधिकारी का नाम भी गिरफ्तार आरोपियों में बताया गया है।

जांच का दायरा बढ़ते हुए एक निजी बिजली एवं इस्पात कंपनी तक भी पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशक को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 21 हो गई।

अब सीबीआई के सामने क्या बड़े सवाल हैं?

सीबीआई की जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि—

  • भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित रूप से स्क्रैप बाहर कैसे निकाला जाता था?

  • क्या संयंत्र के अंदर से किसी व्यक्ति या समूह ने इसमें मदद की?

  • परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल किस तरह किया गया?

  • चोरी का माल किन लोगों या कंपनियों तक पहुंचाया गया?

  • क्या बरामद 250 टन स्क्रैप ही पूरे मामले की सीमा है या इसके पीछे इससे बड़ा नेटवर्क था?

  • चोरी और बिक्री से होने वाले कथित आर्थिक लाभ में कौन-कौन लोग शामिल थे?

  • क्या इस मामले में दस्तावेज, परिवहन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक लेनदेन या डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?

स्थानीय पुलिस ने पहले ही मामले की कई कड़ियों की जांच की है। अब सीबीआई उन साक्ष्यों और केस डायरी की समीक्षा करके कथित नेटवर्क की आगे की कड़ियों की जांच कर सकती है।

क्या मामला हजारों करोड़ रुपये का है?

इस मामले में कुछ राजनीतिक दावे हजारों करोड़ रुपये की कथित चोरी को लेकर सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक सामने आई पुलिस कार्रवाई में करीब 250 टन स्क्रैप की बरामदगी और उससे संबंधित मामले की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध है।

इसलिए हजारों करोड़ रुपये के कथित नुकसान को फिलहाल जांच में साबित तथ्य के रूप में नहीं बताया जा सकता। वास्तविक नुकसान कितना हुआ और चोरी कितने समय से चल रही थी, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

भिलाई इस्पात संयंत्र भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों में से एक है। ऐसे संयंत्र से बड़ी मात्रा में सामग्री के कथित रूप से बाहर निकलने का मामला सुरक्षा, निगरानी, परिवहन व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण से जुड़े सवाल खड़े करता है।

सीबीआई जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री कथित रूप से संयंत्र से बाहर कैसे पहुंची और क्या इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी।

अब आगे क्या होगा?

सीबीआई अब राज्य पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच, गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े रिकॉर्ड और जब्त सामग्री सहित उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर सकती है।

जांच आगे बढ़ने पर संयंत्र से जुड़े कर्मचारी, ठेका एजेंसियां, ट्रांसपोर्टर, वाहन मालिक, स्क्रैप कारोबारी और कथित रूप से चोरी का माल प्राप्त करने वाली औद्योगिक इकाइयां जांच के दायरे में आ सकती हैं।

फिलहाल इस मामले में 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये गिरफ्तारियां पूरे कथित नेटवर्क तक पहुंचती हैं या इसके पीछे और लोग भी हैं।

बड़ी बात

भिलाई इस्पात संयंत्र से करीब 250 टन लौह स्क्रैप की बरामदगी से शुरू हुआ मामला अब केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंच गया है। 21 गिरफ्तारियों के बाद सीबीआई के सामने अब कथित चोरी के पूरे नेटवर्क, अंदरूनी मिलीभगत और चोरी के माल की अंतिम मंजिल का पता लगाने की चुनौती है।

वृद्ध चौकीदार की हत्या का खुलासा, 17 वर्षीय नाबालिग लड़की गिरफ्तार; पुलिस ने बताई वजह

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 सूरजपुर। जिले के महुआपारा में निर्माणाधीन मकान में 65 वर्षीय चौकीदार की गला काटकर हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, किशोरी ने पूछताछ में बताया कि चौकीदार ने उसके साथ कथित तौर पर जबरन दुष्कर्म किया था, जिसके बाद आक्रोश में उसने उस पर हमला कर दिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद किशोरी को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।


निर्माणाधीन मकान में मिला था शव

मामला सूरजपुर थाना क्षेत्र के महुआपारा का है। यहां एसईसीएल कर्मचारी कामता प्रसाद साहू का मकान निर्माणाधीन है। निर्माणाधीन मकान में सामानों की देखरेख के लिए 65 वर्षीय सीताराम गोंड चौकीदार के रूप में रहता था।

पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह निर्माण कार्य में लगे मजदूर मकान पर पहुंचे। इसी दौरान एक किशोरी को वहां से निकलकर जाते हुए देखा गया। मजदूरों ने अंदर जाकर देखा तो सीताराम गोंड मृत अवस्था में पड़ा था। उसके गले पर गंभीर चोट के निशान थे और आसपास खून फैला हुआ था।

पूछताछ में सामने आई घटना की जानकारी

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। घटनास्थल से निकलकर गई किशोरी के संबंध में जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में पता चला कि किशोरी मृतक की दूर की रिश्तेदार थी और कुछ दिनों से उसके साथ रह रही थी। किशोरी ने पुलिस को बताया कि रविवार रात वह चौकीदार के साथ सोई थी। उसके आरोप के मुताबिक, तड़के चौकीदार ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।

सब्बल और ब्लेड से हमला करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, किशोरी ने पूछताछ में बताया कि घटना के बाद उसने गुस्से में पास रखे सब्बल से चौकीदार के सिर पर वार किया। इसके बाद बिस्तर के पास रखे ब्लेड से उसके गले पर हमला किया। गंभीर चोट लगने से चौकीदार की मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद किशोरी कुछ समय तक वहीं रही और सुबह वहां से निकलने की कोशिश की। इसी दौरान निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने उसे देख लिया।

बाल संप्रेक्षण गृह भेजी गई किशोरी

सूरजपुर के एएसपी योगेश कुमार देवांगन के अनुसार, पुलिस पूछताछ में किशोरी ने चौकीदार पर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है और इसी के बाद हत्या किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस ने किशोरी को बाल न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। मामले में पुलिस की जांच जारी है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में राजनीतिक प्रकरण वापसी समिति की हुई अहम बैठक

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री एवं गृह तथा जेल मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े प्रकरणों की वापसी के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में प्रकरण वापसी समिति की बैठक आयोजित की गई।


बैठक में उप मुख्यमंत्री अरूण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, कृषि मंत्री राम विचार नेताम सहित प्रमुख सचिव गृह सुश्री निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव विधि मनीष ठाकुर, गृह सचिव नेहा चंपावत, डीजीपी अरूण देव गौतम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 16 प्रकरणों की वापसी से संबंधित मामलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें 8 लंबित प्रकरण शामिल थे, सभी मामलों में से 9 प्रकरणों की अनुशंसा की गई, 02 प्रकरणों को पुनर्विचार के लिए जिलों में भेज दिया गया। इसके अतिरिक्त शेष मामलों को राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा हुआ ना पाते हुए उनको समिति ने विचार कर उन्हें समिति ने अस्वीकृत कर दिया।

समिति ने अधिकारियों से पूर्व में अनुसंशित लंबित प्रकरणों, उनकी वर्तमान स्थिति तथा नियमानुसार आगे की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली गई एवं इसकी नियमित समीक्षा करते हुए न्यायालय में लंबित प्रकरणों को भी त्वरित गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने राजनीतिक प्रकरणों की वापसी से जुड़े मामलों की प्रकरणवार समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रियाओं को नियमानुसार आगे बढ़ाने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 3 बड़े फैसले: अतिथि व्याख्याता नीति बदली, पूर्व अग्निवीरों की भर्ती के नियम मंजूर

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 रायपुर, 30 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में तीन अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने शासकीय महाविद्यालयों की अतिथि व्याख्याता नीति-2026 में संशोधन को कार्योत्तर मंजूरी दी। वहीं, ‘हनुमान अंश’ फिल्म को टैक्स फ्री करने के आदेश का अनुसमर्थन किया गया। इसके अलावा पूर्व अग्निवीर सैनिकों के लिए भर्ती नियम-2026 को भी मंजूरी दी गई।


अतिथि व्याख्याता नीति में बदलाव

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन के बाद जारी संशोधित नीति-2026 का कार्योत्तर अनुमोदन किया है।

संशोधित नीति में मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता देने का प्रावधान किया गया है।

अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम पांच माह अध्यापन कार्य पूरा करने वाले अभ्यर्थी को अनुभव के लिए पांच अंक दिए जाएंगे। इससे राजकीय विश्वविद्यालयों में अध्यापन का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

कैबिनेट ने राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को उनके पूर्व कार्यानुभव के आधार पर रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर देने का निर्णय लिया है। साथ ही, मानदेय निर्धारण की विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाएगी।

अतिथि व्याख्याताओं और अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश से जुड़े प्रावधान भी स्पष्ट किए गए हैं।

‘हनुमान अंश’ फिल्म को टैक्स फ्री करने के आदेश का अनुसमर्थन

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 10 सितंबर 2026 को फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा के परिपालन में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश का अनुसमर्थन किया।

इसके तहत फिल्म के प्रदर्शन के लिए दर्शकों से लिए जाने वाले प्रवेश शुल्क पर देय राज्य माल एवं सेवा कर (SGST) के समतुल्य राशि की प्रतिपूर्ति सिनेमाघरों को की जाएगी।

पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती नियम-2026 मंजूर

राज्य सरकार पूर्व अग्निवीर सैनिकों को सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।

इस आरक्षण को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026 तैयार किए गए हैं। मंत्रिपरिषद ने इन नियमों को मंजूरी दे दी है। नियमों में पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों के साथ भर्ती के मापदंड, आरक्षण और चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

रेलवे स्टेशन पर गर्भवती महिला से पति ने की मारपीट, वीडियो वायरल होने के बाद RPF ने शुरू की जांच

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 कोरबा। कोरबा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर एक गर्भवती महिला के साथ उसके पति द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में एक व्यक्ति महिला के साथ मारपीट करता दिखाई दे रहा है। घटना के दौरान ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारी ने हस्तक्षेप कर महिला को सुरक्षित वहां से हटाया।


वीडियो सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

विवाद के बाद मारपीट का आरोप

जानकारी के अनुसार, महिला और उसका पति रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बैठे थे। इसी दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद पति ने अपनी गर्भवती पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी।

वायरल वीडियो में महिला खुद को बचाने का प्रयास करती दिखाई दे रही है। घटना के दौरान आसपास मौजूद यात्रियों का ध्यान भी इस ओर गया।

रेलवे कर्मचारी ने किया बीच-बचाव

मारपीट होते देख ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारी ने तत्काल हस्तक्षेप किया और महिला को उसके पति से अलग कराया। इसके बाद मौके पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

घटना का वीडियो स्टेशन पर मौजूद एक यात्री ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

RPF ने शुरू की जांच

वीडियो वायरल होने के बाद RPF ने मामले को संज्ञान में लिया है। अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो के आधार पर घटना की जांच की जा रही है। RPF स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटा रही है।

फिलहाल महिला और उसके पति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। विवाद की वास्तविक वजह और मारपीट की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद स्पष्ट होंगी। RPF का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क’

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 रायपुर : भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत छत्तीसगढ़ में इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में स्टेट लेवल कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (CRDA) द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।


बैठक में प्रस्तावित परियोजना के डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट, मास्टर प्लान, भूमि उपलब्धता, आवश्यक अधोसंरचना, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवस्था तथा ठभ्।टल्। की संचालन गाइडलाइन के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई। समिति द्वारा प्रस्ताव को भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।

’नवा रायपुर अटल नगर में प्रस्तावित है औद्योगिक पार्क’

CRDA द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क नवा रायपुर अटल नगर, जिला रायपुर में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। लगभग 406.72 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस औद्योगिक पार्क में विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवश्यक अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

’भारत सरकार को भेजा जाएगा परियोजना प्रस्ताव’

स्टेट लेवल कमेटी की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे भारत सरकार को भेजे जाने के लिए अनुमोदित किया गया है। अब ब्त्क्। द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव को CRDA, भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों पर कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, प्रबंध संचालक सीएसआईडीसी उमेश कुमार झा, एनआरडीए नवा रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित कलेक्टर रायपुर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित थे।

रायगढ़ गैंगरेप केस में 2 साल बाद फैसला, 2 दोषियों को उम्रकैद और 4 को 20-20 साल की सजा

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 रायगढ़। पुसौर थाना क्षेत्र में आदिवासी महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में करीब दो साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। नौ आरोपियों के खिलाफ दर्ज इस प्रकरण में अदालत ने छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इनमें दो दोषियों को आजीवन कारावास और चार दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है।


यह मामला 19 अगस्त 2024 का है। विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल के अनुसार, घटना के दिन पीड़िता शाम करीब छह बजे अकेले मेला देखने रायगढ़ जा रही थी। इसी दौरान केसाईपाली रोड पर उसकी पहचान के कृष्णा चौहान उर्फ राहुल चौहान ने अपने साथियों के साथ उसे रोक लिया।

धमकी देकर तालाब के पास ले जाने का आरोप

अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने महिला को कथित तौर पर जबरन तालाब की ओर ले जाकर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद तालाब के पास उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बाद में कृष्णा चौहान और उसका एक साथी पीड़िता को खेत के रास्ते मंदिर के पास स्थित एक खंडहरनुमा मकान में ले गए, जहां दोबारा दुष्कर्म किया गया।

घटना के बाद आरोपियों ने पीड़िता को किसी को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह किसी तरह वहां से निकली और गांव की कुछ महिलाओं को घटना की जानकारी दी। बाद में उसने सरपंच को फोन किया। सरपंच उसे बाइक से गांव लेकर पहुंचा।

अगले दिन थाने पहुंचकर दर्ज कराई रिपोर्ट

घर लौटने के बाद पीड़िता ने अगले दिन अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद वह अपनी मां और सरपंच के साथ पुसौर थाने पहुंची और मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा घटनास्थल का निरीक्षण कर नक्शा तैयार किया गया। मामले में एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस ने पीड़िता और आरोपियों का डीएनए परीक्षण कराया। जांच पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।

छह आरोपियों को सजा, तीन के मामले अलग

मामले में दो नाबालिग आरोपियों के खिलाफ प्रकरण किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद उसका प्रकरण अलग कर दिया गया।

सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सचीदानंद साहू उर्फ मुनु और उत्तम मिर्धा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं कृष्णा चौहान, नरेंद्र सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने पैरवी की। अदालत के फैसले के बाद दोषियों को निर्धारित सजा के अनुसार जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई।

पहले पीटा, फिर पट्टे से गला घोंटा; हत्या के बाद शव फंदे पर लटकाया, तीन गिरफ्तार

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 बिलासपुर। जिले के सकरी थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता की गला घोंटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दहेज की मांग और दो बेटियां होने को लेकर महिला के पति, देवर और सास ने उसके साथ मारपीट की और फिर पट्टे से गला कस दिया। महिला की मौत के बाद आरोपियों ने घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसके शव को साड़ी के सहारे फंदे पर लटका दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस के मुताबिक ग्राम सकर्रा निवासी दुर्गा निर्मलकर (26) की शादी वर्ष 2022 में सैदा निवासी रोहित निर्मलकर (30) से हुई थी। शादी के बाद दुर्गा ने दो बेटियों को जन्म दिया। मायके पक्ष का आरोप है कि दूसरी बेटी के जन्म के बाद से ससुराल वालों के व्यवहार में बदलाव आ गया था। उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। साथ ही मायके से 1 लाख 65 हजार रुपए लाने का दबाव भी बनाया जा रहा था।

अचानक तबीयत बिगड़ने की दी सूचना

26 सितंबर को दुर्गा के मायके वालों को सूचना दी गई कि उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई है और वह बेहोश हो गई है। परिजन और ससुराल वाले उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

पुलिस जांच में सामने आया कि 26 सितंबर को दहेज और पारिवारिक विवाद को लेकर दुर्गा के साथ मारपीट की गई थी। आरोप है कि इसी दौरान उसके गले में पट्टा डालकर खींचा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को कमरे में साड़ी के सहारे फंदे पर लटका दिया।

पड़ोसियों ने दुर्गा को फंदे पर लटका देखा तो फंदा काटकर उसे नीचे उतारा और अस्पताल पहुंचाया। हालांकि तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।

पति, देवर और सास जेल भेजे गए

पुलिस ने मामले में रोहित निर्मलकर, मोहित निर्मलकर (25) और सास ठगिया निर्मलकर (60) के खिलाफ बीएनएस की धारा 80, 238 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

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