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पंजाब के एंटी-ड्रग कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार, मानसा में तनाव

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मानसा में दिनदहाड़े गोली मारकर की गई थी हत्या; पंजाब और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार पकड़ा गया। घटना के बाद आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी हुई, जबकि प्रशासन ने उसके घर के एक हिस्से को गिराया।

मानसा- पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया है। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी एक मेडिकल स्टोर का संचालक है। गिरफ्तारी पंजाब और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के साथ कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी बरामद की है। इस मामले में एक अन्य व्यक्ति को आरोपी को भागने में मदद करने के संदेह में पकड़े जाने की भी खबर है।

इस हत्या के बाद मानसा में आक्रोश फैल गया। बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इसी दौरान जिला प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को अवैध निर्माण से संबंधित कार्रवाई के तहत गिराया। घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

दुकान पर विवाद के दौरान हुई गोलीबारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना मंगलवार, 13 अक्टूबर को मानसा में हुई। परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ सक्रिय थे और कथित तौर पर मेडिकल दुकानों से नशीली या प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के मुद्दे को उठाते रहे थे।

घटना के दिन झोटा अपने कुछ साथियों के साथ एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे। वहां कथित तौर पर कुछ दवाओं की बिक्री को लेकर दुकान संचालक अश्वनी कुमार से उनका विवाद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इसी विवाद के दौरान गोलीबारी हुई और झोटा की मौत हो गई। घटना में उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की भी खबर है।

राजस्थान के सालासर से हुई गिरफ्तारी

हत्या के बाद मुख्य आरोपी के फरार होने की खबर सामने आई। इसके बाद पंजाब पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और राजस्थान पुलिस के साथ समन्वय किया।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, अश्वनी कुमार को राजस्थान के चूरू जिले के सालासर में बालाजी मंदिर के पास स्थित श्री गंगानगर धर्मशाला से पकड़ा गया। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी वहां कथित तौर पर भेष बदलकर ठहरा हुआ था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्तौल बरामद करने की भी जानकारी दी।

पुलिस की कार्रवाई में आरोपी को कथित रूप से फरार होने में मदद करने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी पकड़े जाने की खबर है। मामले में आगे की जांच के दौरान पुलिस वारदात के कारण, हथियार के इस्तेमाल और अन्य संभावित संलिप्तताओं की पड़ताल करेगी।

हत्या के बाद मानसा में विरोध और आगजनी

झोटा की हत्या के बाद मानसा में लोगों का गुस्सा सामने आया। बुधवार को आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। दुकान के सामान को बाहर निकालने और आग लगाए जाने की खबरें भी सामने आईं।

इस बीच, जिला प्रशासन ने आरोपी के घर के सामने वाले हिस्से को गिराने की कार्रवाई की। हिंदुस्तान टाइम्स और द ट्रिब्यून की रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन ने कार्रवाई को अनधिकृत निर्माण से संबंधित बताया। दुकान पर हुई आगजनी और तोड़फोड़ के दौरान क्षेत्र में पुलिस की तैनाती रही।

यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि दुकान पर भीड़ द्वारा की गई तोड़फोड़ और आगजनी एक अलग घटना है, जबकि घर पर प्रशासन की कार्रवाई को अवैध निर्माण से जुड़ा बताया गया है। दोनों कार्रवाइयों को एक ही प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा।

नशे के खिलाफ अभियान पर उठे सवाल

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशे की समस्या और उसे रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर सरकार की आलोचना की है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 16 अक्टूबर को पंजाब में नशा विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक निर्धारित की है। बैठक में नशे के हॉटस्पॉट, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और अभियान की प्रगति की समीक्षा किए जाने की बात कही गई है।

झोटा की हत्या ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए। हालांकि, इस विशेष मामले में हत्या के पीछे की मंशा और कथित नशीली दवाओं के कारोबार से संबंध की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।

आगे की जांच में किन बातों पर रहेगी नजर?

पुलिस जांच में मुख्य रूप से गोलीबारी की परिस्थितियों, इस्तेमाल किए गए हथियार, विवाद की वजह और घटना में अन्य लोगों की संभावित भूमिका से जुड़े तथ्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। पुलिस की आधिकारिक जानकारी और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य ही मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

फिलहाल प्रमुख तथ्य यह है कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन आरोपी की दोषसिद्धि अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा: 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस, 11.4 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्पादकता-आधारित बोनस को दी मंजूरी, पात्र रेलवे कर्मचारियों को त्योहार से पहले आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों को दिवाली से पहले बड़ी राहत देते हुए पात्र कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता-आधारित बोनस (Productivity Linked Bonus—PLB) को मंजूरी दी है। इस फैसले से भारतीय रेलवे के लगभग 11.4 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बोनस का उद्देश्य कर्मचारियों के योगदान को मान्यता देना और त्योहार के दौरान उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह निर्णय रेलवे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे देश की प्रमुख परिवहन व्यवस्था है, जहां ट्रेन संचालन, यात्रियों की सुरक्षा, माल ढुलाई, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं।

क्या है 78 दिनों के बोनस का मतलब?

उत्पादकता-आधारित बोनस कर्मचारियों को उनके कार्य और रेलवे के प्रदर्शन से जुड़े निर्धारित मानकों के आधार पर दिया जाता है। यह नियमित मासिक वेतन से अलग भुगतान होता है। पात्र कर्मचारियों को मिलने वाली राशि निर्धारित नियमों, वेतन की गणना और लागू अधिकतम सीमा पर निर्भर करती है।

इसलिए 78 दिनों के बोनस का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी को 78 दिनों के वास्तविक वेतन के बराबर पूरी राशि मिलेगी। अंतिम भुगतान संबंधित पात्रता और बोनस की गणना के नियमों के अनुसार किया जाता है।

लगभग 11.4 लाख कर्मचारियों को फायदा

सरकार के इस निर्णय से रेलवे के विभिन्न परिचालन और गैर-राजपत्रित कर्मचारी वर्गों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें पात्रता के नियमों के अधीन ट्रेन संचालन, स्टेशन सेवाओं, तकनीकी रखरखाव, ट्रैक और सिग्नल व्यवस्था तथा अन्य सहायक कार्यों से जुड़े कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, किस श्रेणी के कितने कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और प्रत्येक कर्मचारी को कितनी राशि प्राप्त होगी, इसका निर्धारण आधिकारिक आदेश और संबंधित सेवा नियमों के आधार पर किया जाएगा।

त्योहार के समय कर्मचारियों को आर्थिक राहत

दिवाली के दौरान घरेलू खर्च, खरीदारी, यात्रा और अन्य जरूरतों के कारण परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे समय में अतिरिक्त बोनस कर्मचारियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

इसके अलावा, त्योहारों के दौरान रेलवे पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालने, विशेष ट्रेनों के संचालन और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे में कर्मचारियों के योगदान को मान्यता देने के लिहाज से बोनस को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेलवे की सेवाओं में कर्मचारियों की अहम भूमिका

भारतीय रेलवे रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों और माल की आवाजाही सुनिश्चित करता है। ट्रेनें समय पर चलें, पटरियों और सिग्नल प्रणाली का रखरखाव हो, स्टेशन पर व्यवस्था बनी रहे और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की जा सके—इन सभी कार्यों में कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उत्पादकता-आधारित बोनस की व्यवस्था इसी योगदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की जाती है।

कर्मचारियों को कब मिलेगा बोनस?

बोनस के भुगतान की सटीक तारीख, पात्रता की विस्तृत शर्तें और अधिकतम देय राशि की पुष्टि संबंधित मंत्रालय या रेलवे बोर्ड के आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए। कर्मचारियों को अपने विभागीय कार्यालय, वेतन अनुभाग या रेलवे की आधिकारिक सूचना से भुगतान संबंधी विवरण प्राप्त करना चाहिए।

निष्कर्ष: पात्र रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर उत्पादकता-आधारित बोनस की मंजूरी त्योहार से पहले राहत देने वाला निर्णय है। इससे लगभग 11.4 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक बोनस राशि प्रत्येक कर्मचारी की पात्रता और लागू गणना नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

मणिपुर में Telegram पर अश्लील सामग्री साझा कर कमाई करने के आरोप में 13 गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल

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महिलाओं की निजी तस्वीरें और वीडियो बिना सहमति प्रसारित करने का आरोप; बाल यौन शोषण सामग्री के वितरण की भी जांच, 14 मोबाइल और एक लैपटॉप जब्त

इंफाल- मणिपुर पुलिस ने टेलीग्राम (Telegram) के विभिन्न चैनलों के जरिए महिलाओं की निजी तस्वीरें और वीडियो कथित तौर पर साझा करने, उनकी खरीद-फरोख्त करने और उनसे कमाई करने के मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में कानून के साथ संघर्ष की स्थिति में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, मामले में महिलाओं की अंतरंग सामग्री बिना सहमति प्रसारित करने के साथ-साथ बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के कथित वितरण की भी जांच की जा रही है।


14 अक्टूबर 2026 को शाम 4:45 बजे प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में ‘ऑपरेशन डिग्निटी’ शुरू किया था। ऑनलाइन माध्यमों से कथित तौर पर ऐसी सामग्री के प्रसार और व्यावसायिक शोषण की विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई। मामले में बिष्णुपुर जिले के एक पुलिस थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त

पुलिस ने अब तक जांच के दौरान 14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए कथित गतिविधियों से जुड़े लोगों, टेलीग्राम चैनलों और सामग्री के प्रसार के तरीकों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

जांचकर्ताओं का ध्यान इस बात पर भी है कि संबंधित तस्वीरें और वीडियो कहां से प्राप्त किए गए, इन्हें किन लोगों ने टेलीग्राम चैनलों पर अपलोड किया और चैनलों का संचालन कौन कर रहा था। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग शामिल थे या नहीं।

महिलाओं की निजी सामग्री बिना सहमति साझा करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर मणिपुर की महिलाओं की अंतरंग तस्वीरें और वीडियो उनकी सहमति के बिना प्रसारित करने का आरोप है। रिपोर्ट में ऐसी सामग्री को विभिन्न टेलीग्राम चैनलों के जरिए साझा करने, उसका लेन-देन करने और उससे आर्थिक लाभ लेने की आशंका का उल्लेख किया गया है।

किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना प्रसारित करना उसकी निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन हो सकता है। ऐसे मामलों में सामग्री को आगे भेजने, उसे प्रकाशित करने या उससे पैसा कमाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होती है।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कथित गतिविधियों से कितनी रकम अर्जित की गई, भुगतान किस माध्यम से हुआ या गिरफ्तार किए गए प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

बाल यौन शोषण सामग्री के पहलू की भी जांच

इस मामले का एक गंभीर पहलू बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material—CSAM) के कथित वितरण से जुड़ा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या संबंधित चैनलों के जरिए ऐसी सामग्री भी साझा की गई थी और यदि ऐसा हुआ, तो इसमें कौन-कौन शामिल था।

नाबालिग से संबंधित मामलों में उसकी पहचान और निजता की रक्षा करना विशेष रूप से आवश्यक है। पुलिस ने गिरफ्तार नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

13 गिरफ्तार लोगों में अलग-अलग जिलों के निवासी

NDTV की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से गिरफ्तार किए गए 13 लोगों की जानकारी दी गई है। इनमें 12 वयस्क और एक नाबालिग शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों के नाम और रिपोर्ट में उल्लिखित उम्र इस प्रकार हैं:

  • एन. राजेश सिंह उर्फ मैपाकचाओ — 21 वर्ष

  • एच. धनजीत सिंह उर्फ टैसन — 19 वर्ष

  • एस. सफाबा सिंह — 19 वर्ष

  • थ. कैवेंडिश सिंह उर्फ इंगोचा — 21 वर्ष

  • एच. रोजित सिंह — 19 वर्ष

  • एम. क्लिंटन सिंह — 28 वर्ष

  • ख. बिपिन सिंह — 31 वर्ष

  • एक नाबालिग, जिसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई

  • एस. सिम्पसन सिंह — 34 वर्ष

  • ए. आरिया सिंह — 24 वर्ष

  • एस. अलेक्जेंडर सिंह — 31 वर्ष

  • के. राकेश सिंह — 18 वर्ष

  • च. रॉबर्ट सिंह — 27 वर्ष

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार लोग बिष्णुपुर, इंफाल पश्चिम, काकचिंग और थौबल जिलों से संबंधित हैं। गिरफ्तारी का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है; मामले में सभी आरोपियों की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

आर्थिक लेन-देन और अन्य लोगों की भूमिका की तलाश

जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सामग्री के प्रसार से किसी व्यक्ति या समूह को आर्थिक लाभ हुआ या नहीं और यदि हुआ, तो धन किसके पास पहुंचा।

पुलिस यह भी जांच रही है कि टेलीग्राम चैनलों के एडमिन कौन थे, सामग्री को कितने लोगों तक पहुंचाया गया और क्या अन्य उपयोगकर्ता या आर्थिक लाभार्थी भी इसमें शामिल थे। संभावित पीड़ितों की पहचान करना और कथित नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाना भी जांच का हिस्सा है।

फिलहाल पुलिस ने संभावित पीड़ितों की संख्या, प्रसारित सामग्री की कुल मात्रा और कथित नेटवर्क की पूरी संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निजता की सुरक्षा फिर चर्चा में

यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निजी तस्वीरों और वीडियो के दुरुपयोग तथा ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले कथित शोषण को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। किसी व्यक्ति की अंतरंग सामग्री को उसकी सहमति के बिना साझा करना उसके निजी जीवन, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना, पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखना और सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होता है।

फिलहाल जांच जारी है। पुलिस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वित्तीय लेन-देन और टेलीग्राम चैनलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल के जरिए अन्य संभावित आरोपियों और पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।


बीजापुर में CRPF के सब-इंस्पेक्टर की मौत, 131वीं बटालियन में थे तैनात; जांच में जुटी पुलिस

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मेटागुड़ा कैंप में हुई घटना, गोली चलने की आवाज सुनकर साथी जवान पहुंचे; सुकमा के एल्मागुंडा कैंप में इलाज के दौरान तोड़ा दम

बीजापुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक दुखद खबर सामने आई है। बीजापुर जिले के जंगल क्षेत्र में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के मेटागुड़ा कैंप में तैनात सब-इंस्पेक्टर देवानंद यादव की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात हुई थी। देवानंद यादव CRPF की 131वीं बटालियन में पदस्थ थे।

गोली चलने की आवाज सुनकर पहुंचे साथी जवान

अधिकारियों के अनुसार, कैंप में गोली चलने की आवाज सुनकर वहां मौजूद अन्य जवान और अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल सब-इंस्पेक्टर को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें फील्ड एंबुलेंस से सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एल्मागुंडा कैंप ले जाया गया।

वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद कैंप और सुरक्षा बल के अधिकारियों के बीच शोक का माहौल रहा।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी थे देवानंद यादव

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, देवानंद यादव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के करजहा गांव के निवासी थे। घटना की सूचना उनके परिजनों को दिए जाने और शव को पैतृक गांव भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

आत्महत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस ने मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें घटना का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।

सुरक्षा बलों के जवानों का मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण

बस्तर क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के जवान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, कठिन कार्य परिस्थितियां और व्यक्तिगत समस्याएं किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, इस मामले में इन कारकों की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसी घटनाएं सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, समय पर परामर्श और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद उपलब्ध कराने के महत्व की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। घटना के कारणों और अन्य परिस्थितियों के संबंध में पुलिस या CRPF की ओर से कोई अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।


बाल विवाह रोकने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने में भारत के प्रयासों की UN ने की सराहना

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संयुक्त राष्ट्र ने बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा और सशक्तीकरण पर दिया जोर; सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बताया बदलाव का अहम आधार

नई दिल्ली- भारत में बाल विवाह रोकने और लड़कियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र (UN) ने सराहना की है। बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, उनकी शिक्षा जारी रखने और कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक समस्या को समाप्त करने की दिशा में सरकारी योजनाओं, सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र और उसकी सहयोगी संस्थाएं लंबे समय से भारत में बाल विवाह की रोकथाम, किशोरियों के सशक्तीकरण और शिक्षा तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टों और कार्यक्रमों में इस बात पर जोर दिया गया है कि लड़कियों को स्कूल में बनाए रखना और परिवारों को जागरूक करना बाल विवाह रोकने के प्रभावी उपायों में शामिल हैं।

लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता

लड़कियों की शिक्षा उनके व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और देश की प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण है। शिक्षित बालिकाओं के पास भविष्य में रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने के अधिक अवसर होते हैं।

भारत में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी पहल, छात्रवृत्ति योजनाएं, स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार और परिवारों को जागरूक करने के प्रयास बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने में योगदान देते हैं। हालांकि, आर्थिक कठिनाइयों, स्कूलों की दूरी, सामाजिक रूढ़ियों और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण कई लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा बना रहता है।

ऐसे में बालिकाओं को माध्यमिक और उच्च शिक्षा तक पहुंचाने, स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने तथा सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

बाल विवाह रोकने में सामुदायिक भागीदारी अहम

बाल विवाह केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल अधिकारों और सामाजिक समानता से जुड़ा विषय है। कम उम्र में विवाह होने पर लड़कियों की पढ़ाई बाधित होने, आर्थिक निर्भरता बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का सामना करने की आशंका अधिक रहती है।

इस समस्या को रोकने के लिए सरकारी विभागों, स्कूलों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण है। परिवारों को बाल विवाह के कानूनी परिणामों और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देना, जोखिम की स्थिति में समय पर हस्तक्षेप करना और बालिकाओं को अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद करना जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाओं के कार्यक्रमों में किशोरियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने, समुदायों के साथ संवाद बढ़ाने और बाल विवाह के पीछे मौजूद सामाजिक कारणों को दूर करने पर जोर दिया जाता है।

UNICEF और UNFPA के कार्यक्रमों से मिल रहा सहयोग

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) भारत में बाल विवाह की रोकथाम तथा किशोरियों के सशक्तीकरण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग करते हैं।

इन पहलों में लड़कियों को स्कूल में बने रहने या पढ़ाई दोबारा शुरू करने में सहायता, जीवन कौशल का विकास, परिवारों और समुदायों के साथ जागरूकता संवाद तथा बाल संरक्षण सेवाओं को मजबूत करना शामिल है। UNICEF की दिसंबर 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट The Turning Point: Transformative Actions for Ending Child Marriage in India में 13 राज्यों के अनुभवों और बाल विवाह समाप्त करने के लिए अपनाए गए उपायों का संकलन किया गया है।

इन प्रयासों का उद्देश्य केवल कम उम्र में विवाह को रोकना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां तैयार करना भी है जिनमें लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी कर सकें, कौशल विकसित कर सकें और अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।

कानून के साथ सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी

भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधान हैं। सामान्य कानूनी परिभाषा के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है।

हालांकि, केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के साथ समाज में जागरूकता बढ़ाना, परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना तथा लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।

ग्रामीण और वंचित समुदायों में समय पर हस्तक्षेप, स्कूलों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय तथा बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र का व्यापक संदेश

संयुक्त राष्ट्र का संदेश है कि प्रत्येक लड़की को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और अपने भविष्य को चुनने का अवसर मिलना चाहिए। बाल विवाह समाप्त करने के लिए शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, परिवारों की भागीदारी और भेदभावपूर्ण सामाजिक मान्यताओं में बदलाव पर एक साथ काम करना जरूरी है।

निष्कर्ष: भारत में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और बाल विवाह रोकने के प्रयास बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग, सरकारी योजनाएं और समुदायों की सक्रिय भागीदारी मिलकर ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दे सकती हैं, जहां हर लड़की को पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिले।

छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली बनी ऑरेंज ओकलीफ, पंख बंद करते ही दिखती है सूखा पत्ता

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अनोखे छद्मावरण और नीले-नारंगी रंगों के लिए मशहूर तितली को राज्य वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी, जैव विविधता को मिलेगी नई पहचान

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता को नई पहचान मिलने जा रही है। सूखे पत्ते जैसी दिखाई देने वाली खूबसूरत ऑरेंज ओकलीफ (Orange Oakleaf) तितली को प्रदेश की पहली राजकीय तितली के रूप में चुना गया है। छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड ने इसे राजकीय तितली घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस पहल को प्रदेश की प्राकृतिक विरासत और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंख बंद होते ही सूखे पत्ते जैसा रूप

ऑरेंज ओकलीफ तितली की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक छद्मावरण है। इसे डेडलीफ (Dead Leaf) और इंडियन ओकलीफ (Indian Oakleaf) के नाम से भी जाना जाता है। जब यह अपने पंख बंद कर लेती है, तो इसका आकार, रंग और बनावट किसी सूखे या मुरझाए पत्ते जैसी दिखाई देती है।

जंगल में जमीन पर गिरे सूखे पत्तों के बीच यह आसानी से घुल-मिल जाती है। इससे शिकार करने वाले पक्षियों और दूसरे संभावित शिकारियों के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है। प्रकृति की यह अनोखी अनुकूलन क्षमता इसे तितलियों की विशिष्ट प्रजातियों में शामिल करती है।

पंख फैलाते ही दिखते हैं आकर्षक रंग

पंख बंद होने पर साधारण सूखे पत्ते जैसी दिखने वाली यह तितली पंख फैलाते ही बिल्कुल अलग नजर आती है। इसके पंखों के भीतरी हिस्से में चमकीले नारंगी और गहरे नीले रंग दिखाई देते हैं। यही रंगों का अंतर इसे खास बनाता है।

इसका छद्मावरण केवल देखने में रोचक नहीं है, बल्कि प्राकृतिक वातावरण में जीवों के बचाव की एक महत्वपूर्ण रणनीति भी है। खतरा महसूस होने पर तितली तेजी से उड़कर दूसरी जगह जा सकती है और आसपास के वातावरण में छिपने की कोशिश करती है।

जनभागीदारी से हुआ चयन

छत्तीसगढ़ में पहली राजकीय तितली के चयन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जनभागीदारी की प्रक्रिया अपनाई थी। इसके तहत 24 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से नागरिकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों से सुझाव और वोट मांगे गए थे।

चयन की दौड़ में ऑरेंज ओकलीफ के साथ कॉमन बैंडेड पीकॉक और स्पॉट स्वॉर्डटेल जैसी तितलियां भी शामिल थीं। जनता की राय और विशेषज्ञों की अनुशंसा पर विचार करने के बाद ऑरेंज ओकलीफ को प्राथमिकता दी गई। राज्य वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के बाद इसे प्रदेश की पहली राजकीय तितली बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

छत्तीसगढ़ की जैव विविधता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

छत्तीसगढ़ के विस्तृत वन क्षेत्र अनेक प्रकार के वन्यजीवों, पक्षियों, कीटों और तितलियों का प्राकृतिक आवास हैं। तितलियां पर्यावरण की स्थिति को समझने में भी उपयोगी मानी जाती हैं, क्योंकि उनकी मौजूदगी और विविधता पर वनस्पति, मौसम तथा आवास की गुणवत्ता का प्रभाव पड़ता है।

किसी प्रजाति को राजकीय प्रतीक का दर्जा देने से उसके बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ाने, प्रकृति शिक्षा को प्रोत्साहित करने और संरक्षण के प्रति जनभागीदारी विकसित करने में मदद मिल सकती है। ऑरेंज ओकलीफ का चयन प्रदेश के लोगों को स्थानीय जैव विविधता से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा।

कांगेर घाटी जैसे वन क्षेत्रों में तितलियों की विविधता

बस्तर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राकृतिक क्षेत्रों में से एक है। यहां के वन, नमी और विविध वनस्पतियां अनेक प्रकार के जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। तितलियों के संरक्षण के लिए ऐसे प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तितलियों और अन्य छोटे जीवों का संरक्षण केवल किसी एक प्रजाति को बचाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए जंगलों, स्थानीय वनस्पतियों, जलस्रोतों और उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

संरक्षण के साथ जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद

ऑरेंज ओकलीफ को राजकीय तितली के रूप में चुनने की पहल से स्कूलों, कॉलेजों और पर्यावरण से जुड़े संस्थानों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। प्रकृति भ्रमण, तितली अवलोकन और पर्यावरण शिक्षा जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को स्थानीय प्रजातियों के महत्व से परिचित कराया जा सकता है।

निष्कर्ष: ऑरेंज ओकलीफ का छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली के रूप में चयन प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देने वाला कदम है। पंख बंद करते ही सूखे पत्ते जैसी दिखने और पंख फैलाते ही आकर्षक रंग बिखेरने वाली यह तितली अब जैव विविधता संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण प्रतीक बन सकती है।



छत्तीसगढ़ में 35 लाख के इनामी 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, तीन महिलाएं भी शामिल

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बीजापुर पुलिस के सामने छोड़ी हिंसा की राह, चार ओडिशा में थे सक्रिय; पुनर्वास नीति और सुरक्षा अभियानों का दिखा असर

बीजापुर- छत्तीसगढ़ में माओवादी उन्मूलन अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में तीन महिलाओं समेत छह माओवादी कैडरों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में चार माओवादी ओडिशा में सक्रिय थे, जबकि दो पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन से जुड़े थे।

यह आत्मसमर्पण 12 अक्टूबर 2026 को हुआ था। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों, संगठनात्मक कमजोरी और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के प्रभाव से जोड़कर देखा है। 

तीन महिलाएं भी शामिल, पुलिस ने जारी किए नाम

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले छह कैडरों की पहचान इस प्रकार है:

  1. रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (30 वर्ष) — ओडिशा में सक्रिय माओवादी कैडर, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।

  2. पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता (28 वर्ष) — ओडिशा में सक्रिय कैडर, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।

  3. सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष (27 वर्ष) — ओडिशा इकाई से जुड़ा कैडर, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।

  4. कोसा माड़वी उर्फ सतीश (30 वर्ष) — छत्तीसगढ़ इकाई से जुड़ा कैडर, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।

  5. देवे मड़कम उर्फ जन्नी (22 वर्ष) — ओडिशा इकाई से जुड़ा पार्टी सदस्य, जिस पर 2 लाख रुपये का इनाम था।

  6. लालू ताती (25 वर्ष) — बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र में सक्रिय पार्टी सदस्य, जिस पर 1 लाख रुपये का इनाम था।

इन छह लोगों पर घोषित इनाम की कुल राशि 35 लाख रुपये थी। पुलिस के अनुसार, इनमें चार प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (PPCM) और दो पार्टी सदस्य (PM) स्तर के कैडर शामिल थे। 

ओडिशा में भी सक्रिय था माओवादी नेटवर्क

इस मामले की एक प्रमुख विशेषता यह है कि आत्मसमर्पण करने वाले छह लोगों में से चार का संबंध ओडिशा में सक्रिय माओवादी इकाई से बताया गया है। पुलिस के अनुसार, रानी सोढ़ी, पांडो पोड़ियम और सुक्कू कुड़ियम ओडिशा इकाई की कंपनी नंबर-8 में प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थे।

देवे मड़कम भी ओडिशा इकाई से जुड़ा था। वहीं कोसा माड़वी छत्तीसगढ़ इकाई की कंपनी नंबर-2 में सक्रिय था और लालू ताती बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र में संगठन के साथ जुड़ा हुआ था।

इस घटनाक्रम से छत्तीसगढ़ और पड़ोसी ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ जारी कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया गया है। 

आत्मसमर्पण के पीछे क्या रहे कारण?

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी, माओवादी संगठन की कमजोर होती संरचना और उसकी हिंसक विचारधारा से मोहभंग को अपने निर्णय के कारणों में शामिल किया।

पुलिस ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, पूर्व माओवादियों के पुनर्वास के प्रयासों और आदिवासी क्षेत्रों में विकास गतिविधियों का भी प्रभाव पड़ा है।

आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बीजापुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन सहित संबंधित सुरक्षा इकाइयों के समन्वित प्रयासों की भूमिका बताई गई है। 

पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने पर जोर

राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना है। पुनर्वास से जुड़े प्रयासों में पात्रता के अनुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास और आजीविका से संबंधित सहयोग जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, इन छह लोगों को मिलने वाली व्यक्तिगत सहायता और पुनर्वास लाभों का विस्तृत विवरण उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं किया गया है।

माओवादी उन्मूलन अभियान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम

बीजापुर में छह माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण बस्तर क्षेत्र में जारी सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास प्रयासों के बीच हुआ है। तीन महिलाओं सहित छह कैडरों का हिंसा छोड़ने का निर्णय सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

पुलिस का कहना है कि सुरक्षा अभियान के साथ-साथ आत्मसमर्पण, पुनर्वास और विकास संबंधी पहल भी माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

निष्कर्ष: बीजापुर में 35 लाख रुपये के इनामी छह माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ के माओवादी विरोधी अभियान से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर है। अब उनके पुनर्वास, मुख्यधारा में वापसी और क्षेत्र में शांति एवं विकास की दिशा में आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

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पति सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने का मामला, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद अदालत का फैसला

मेरठ- उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। दोनों को मुस्कान के पति और पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या तथा सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत का यह फैसला करीब 13 महीने तक चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने के बाद आया है। 

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी थे और लंदन से मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची।

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, सौरभ की हत्या करने के बाद उनके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से ढक दिया गया, ताकि अपराध छिपाया जा सके।

17 मार्च 2025 को ड्रम से दुर्गंध आने के बाद मामला सामने आया। पुलिस ने जांच शुरू की और मुस्कान तथा साहिल को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद यह घटना अपनी भयावह प्रकृति के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गई। 

30 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे दोनों

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। करीब 13 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया में 126 सुनवाइयां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा सबूत नष्ट करने के मामले में दोषी करार दिया था। अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की थी। अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। 

14 अक्टूबर को सुनाई गई मौत की सजा

बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई। रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान और साहिल को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया था।

सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध के लिए अपराधियों को सजा देना भी धर्म है। मामले में अदालत ने अपराध की गंभीरता और प्रस्तुत साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय दिया। 

https://youtube.com/shorts/xrGMaADvYWI?si=HpW3ub_BLbh7H2uk

सौरभ के परिवार ने की थी कड़ी सजा की मांग

सौरभ राजपूत के परिवार ने शुरुआत से ही दोनों दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। अदालत के फैसले से पहले सौरभ की मां और भाई ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई थी। परिवार के लिए यह मामला लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा से जुड़ा रहा।

अब आगे क्या होगा?

मृत्युदंड के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए भेजा जाता है। दोषियों को कानून के अनुसार अपील करने का अधिकार भी होता है। इसलिए अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाया जाना महत्वपूर्ण फैसला है, लेकिन सजा के अंतिम क्रियान्वयन से पहले निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

निष्कर्ष: मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। 14 अक्टूबर 2026 को आए फैसले ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव तय किया है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

42 वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाने वाली शिक्षिका उर्मिला को भावभीनी विदाई, 2 हजार से अधिक लोग हुए शामिल

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अपने वेतन से 1 लाख रुपये मानव जागृति सेवा संस्थान को दान करेंगे गेंदलाल कोकडिया, गांव के सामाजिक कार्यों के लिए भी दिए 7 हजार रुपये

महासमुंद- शिक्षक केवल बच्चों को शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उनके जीवन में संस्कार, मानवीय मूल्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। इसी भावना का प्रेरक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब 42 वर्षों तक अध्यापन कार्य करने वाली शिक्षिका उर्मिला के विदाई समारोह में गांव-शहर, मायके, ससुराल, मित्रों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े 2 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। यह समारोह केवल एक शिक्षिका की सेवानिवृत्ति का अवसर नहीं, बल्कि उनके योगदान, सामाजिक समर्पण और मानवीय परंपरा के सम्मान का उत्सव बन गया।

उर्मिला पुटका पुरी शासकीय विद्यालय में अध्यापिका के रूप में सेवाएं दे रही थीं। चार दशकों से अधिक समय तक विद्यार्थियों को शिक्षित करने के बाद अब वह अपने शेष समय को मानव समाज में जागरूकता और मानवीय मूल्यों के प्रसार के लिए समर्पित करेंगी।

शिक्षक का सम्मान, मानवीय परंपरा का सम्मान है : गेंदलाल कोकडिया

मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि उर्मिला साहसी, निडर, स्वावलंबी, जनप्रिय, समाजसेवी, बाल हितैषी, पर्यावरण प्रेमी और कवयित्री हैं। जैविक कृषि सहित अनेक क्षेत्रों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक चेतना के साथ कार्य करते हैं और आने वाली पीढ़ी को तैयार करते हैं। इसलिए किसी शिक्षक का सम्मान करना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज और मानवीय परंपरा का सम्मान है। ऐसे विदाई एवं सम्मान समारोह बच्चों और समाज को सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी के लिए प्रेरित करते हैं।

विद्यार्थियों को मानवीय समाज की सेवा के लिए किया प्रेरित

उर्मिला के पढ़ाए छह से अधिक विद्यार्थी आज विभिन्न जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों और सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उनकी बचपन की छात्रा राखी गेंदलाल कोकडिया वर्तमान में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद की संचालिका हैं।

इसी तरह उनके पूर्व विद्यार्थी अनिल साव, अभ्युदय संस्थान, अछोटी, दुर्ग से जुड़े हैं। नित्यानंद डड़सेना, रूपा, लक्ष्मी, ईशु, अनिल साव सहित अन्य विद्यार्थी मानवीय जागृति सेवा संस्थान, बुलाकी गोर्रा डीपा, रायगढ़ तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

बताया गया कि उनके छह से अधिक विद्यार्थियों ने जीवन विद्या अध्ययन का एक वर्षीय शिविर पूरा कर मानव समाज की सेवा और अखंड समाज-सार्वभौम व्यवस्था की स्थापना के उद्देश्य से स्वयं को समर्पित किया है। यह उनके शिक्षकीय जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

समाज सेवा के लिए दान कर प्रस्तुत की प्रेरक मिसाल

समारोह के अवसर पर सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग की भी प्रेरक पहल सामने आई। गेंदलाल कोकडिया ने मानव जागृति सेवा संस्थान, बुलाकी गोर्रा डीपा, रायगढ़ के लिए अपने वेतन से 1 लाख रुपये दान करने की घोषणा की। इसके साथ ही गांव में सामाजिक कार्यक्रमों के लिए बर्तन की व्यवस्था हेतु 7 हजार रुपये समर्पित किए। रायपुर की श्रीमती लक्ष्मी ने भी 25 हजार रुपये का योगदान दिया।

इन सहयोगों को सामाजिक सहभागिता, सामूहिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

गांव से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक दिखा सम्मान और अपनापन

विदाई समारोह में गांव के लगभग हर परिवार, मायके एवं ससुराल पक्ष के सदस्यों, मित्रों, मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद के सदस्यों, कोकड़ी शासकीय स्कूल तथा मानव जागृति सेवा संस्थान, बुलाकी गोर्रा डीपा, रायगढ़ से जुड़े लोगों सहित आसपास के क्षेत्रों के 2 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही।

उर्मिला का 42 वर्षों का शिक्षकीय जीवन, विद्यार्थियों के प्रति स्नेह, सामाजिक सक्रियता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि शिक्षक का वास्तविक सम्मान उनके विचारों को जीवन में उतारने, समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और आने वाली पीढ़ियों को मानवीय दिशा देने में निहित है।

प्रकाशन से पहले ध्यान दें: दान की राशि के संबंध में मूल जानकारी में 1 लाख रुपये दान करने की बात है। यदि यह राशि वास्तव में दान की जा चुकी है, तो “दान करने की घोषणा की” के स्थान पर “दान किए” लिखा जा सकता है।

दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी पर एनएचएआई ने एजेंसी पर लगाई 10 लाख की पेनाल्टी

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रायपुर- राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-अंबिकापुर खंड में दुर्घटना प्रबंधन में लापरवाही पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच एआई) ने संबंधित एजेंसी मेसर्स रविंद्र सिंह पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। विगत 12 अक्टूबर को सुबह करीब 3 बजे चोटिया टोल प्लाजा के पास दो ट्रक-ट्रेलरों की भिड़ंत हुई थी। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने में देरी के कारण मार्ग बाधित रहा।

जांच में सामने आया कि घटना के दौरान एजेंसी का परियोजना प्रबंधक मौके पर मौजूद नहीं था। क्रेन ऑपरेटर की अनुपलब्धता और रिकवरी उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं होने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। 1033 हेल्पलाइन पर बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर आवश्यक सहायता नहीं मिल सकी।

एनएचएआई ने इसे घटना प्रबंधन और हाईवे पेट्रोलिंग के निर्धारित मानकों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है।

जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में गूंजेगा ‘सुखी-समृद्ध परिवार, सुखी-समृद्ध संसार’ का संदेश

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देश-विदेश के हजारों प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना, विकसित भारत-विकसित संसार और मानवीय मूल्यों पर होगा संवाद

महासमुंद- छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, मानवीय मूल्यों और जीवन विद्या के अध्ययन से देश-विदेश के अध्ययनार्थियों को परिचित कराने की दिशा में जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन में ‘सुखी-समृद्ध परिवार, सुखी-समृद्ध संसार’ की अवधारणा के साथ ‘विकसित भारत-विकसित संसार’ के निर्माण के उपायों पर भी व्यापक संवाद होगा। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, पाली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं प्रतिनिधि सपरिवार शामिल हुए।

मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि सम्मेलन को अधिक मानवीय, पर्यावरण-अनुकूल और जनभागीदारीपूर्ण बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि सम्मेलन को प्लास्टिक एवं डिस्पोजेबल कप, थाली और गिलास से मुक्त रखा जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश व्यवहार में भी दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन की प्रभावी तैयारी के लिए सभी सेवाभावी सदस्य आयोजन से एक माह पूर्व ही अभ्युदय संस्थान, अछोटी, दुर्ग पहुंचकर व्यवस्थाओं एवं विभिन्न गतिविधियों में सहयोग करें। सम्मेलन का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रहकर मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन दृष्टि को परिवार, समाज और शिक्षा व्यवस्था में स्थापित करने की दिशा में सार्थक पहल करना है।

मानवीय मूल्यों और शिक्षा पर होगा व्यापक विमर्श

सम्मेलन में सार्वभौमता, सार्वजनिकता, संस्कार, मानवीय संविधान की आवश्यकता, मानवीय मूल्य, मानवीय शिक्षा, संबंध, न्याय, धर्म, सत्य तथा प्रकृति संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया जाएगा। इसके साथ ही पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों के संरक्षण तथा युद्ध, आतंकवाद और अपराध से मुक्त समाज के निर्माण पर भी विचार साझा किए जाएंगे।


‘सुखी-समृद्ध परिवार-सुखी-समृद्ध संसार’ की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए ‘विकसित भारत-विकसित संसार’ के निर्माण के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा होगी। चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला के संचालन, जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थान देने तथा सभी पाठ्यक्रमों और पाठ्यपुस्तकों में इनके समावेश की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिनिधि

बैठक का संचालन अंकित पोगुला, मानव तीर्थ, बेमेतरा ने किया। आयोजन की जिम्मेदारी राममिलन यादव एवं उनकी मित्र मंडली, पाली ने निभाई।

बैठक में मुख्य रूप से साधन भट्टाचार्य, मानव तीर्थ; डॉ. संकेत ठाकुर, अंतर्राष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक, अभ्युदय संस्थान, अछोटी; गेंदलाल कोकडिया, मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद; चंद्रशेखर राठौड़; महावीर अग्रवाल, अछोटी;  बाबूलाल नायक; शुक्लांबर पटेल; प्रदीप पुरोहित, रायगढ़; धमतरी से  जितेन्द्र कुमार साहू एवं ओमन साहू; पेंड्रा-बिलासपुर से  निष्ठा सोनी; महासमुंद से  राखी एवं अन्य प्रतिनिधि; राजिम से हेमंत कुमार देवांगन; पाली से रामचरण, गायत्री परिवार; संतोष कुमार साहू, रायतुम तथा पटेवा के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल देवदास सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

आयोजकों के अनुसार, बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 20 जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में 300 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही।

जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से मानवीय शिक्षा, पारिवारिक सौहार्द, सामाजिक समरसता, प्रकृति के साथ संतुलित जीवन और विश्व शांति के विचारों को व्यापक स्तर पर साझा करने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन दृष्टि ही सुखी परिवार, समृद्ध समाज और शांतिपूर्ण संसार के निर्माण का आधार बन सकती है।

11 लाख रुपये के लेन-देन में CAF आरक्षक का अपहरण, महिला समेत दो गिरफ्तार

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 11 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के एक आरक्षक के अपहरण और मारपीट का मामला सामने आया है। मामले में पुलगांव पुलिस ने कोहका निवासी हरजीत कौर और कार चालक कृष्णा सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वहीं, घटना में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।


कंट्रोल रूम में आरक्षक ने दी अपहरण की सूचना

एएसपी शोजराज अग्रवाल के मुताबिक, रायगढ़ छठवीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक विजय सील ने रविवार शाम पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर अपने अपहरण की सूचना दी थी। सूचना मिलने के बाद पुलगांव पुलिस की टीम गोकुल नगर पहुंची। वहां एक कार में महिला, चालक और दो अन्य लोग मिले। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की और उनके मोबाइल नंबर व तस्वीरें दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

11 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद

आरक्षक विजय सील ने पुलिस को बताया कि उसने हरजीत कौर से ब्याज पर 11 लाख रुपये लिए थे। आरोप है कि पिछले करीब सात महीने से वह रकम का भुगतान टाल रहा था। इसी राशि की वसूली को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ।

शिकायत के अनुसार, हरजीत कौर ने आरक्षक को दुर्ग बस स्टैंड बुलाया था। वहां नाश्ता कराने के बहाने उसे कार में बैठाया गया और फिर गोकुल नगर ले जाया गया।

बंधक बनाकर मारपीट करने का आरोप

आरक्षक का आरोप है कि गोकुल नगर पहुंचने के बाद उसके साथ मारपीट की गई और उसे बंधक बनाकर रखा गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की। कार्रवाई के दौरान हरजीत कौर और कार चालक कृष्णा सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, घटना में शामिल दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। मामले में 11 लाख रुपये के लेन-देन, कथित अपहरण और मारपीट से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।

रेलवे में TTE की नौकरी का झांसा देकर युवक से 13.07 लाख रुपये की ठगी

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 बिलासपुर। रेलवे में सरकारी नौकरी पाने की चाहत एक युवक को महंगी पड़ गई। ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 13 लाख 7 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने रेलवे के बड़े अधिकारियों से संपर्क होने का दावा कर युवक को नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद अलग-अलग किश्तों में UPI के माध्यम से रकम वसूल ली। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस नहीं लौटाए जाने पर पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की है।


अधिकारियों से पहचान का दिया हवाला

मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है। दयालबंद निवासी रविकांत यादव के मुताबिक, आरोपी ने उन्हें रेलवे में TTE की नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। उसने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से अच्छी पहचान होने की बात कही और इसी भरोसे पर युवक से पैसे लेना शुरू कर दिया।

सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में रविकांत आरोपी की बातों में आ गए। उन्होंने अलग-अलग किश्तों में UPI के जरिए कुल 13.07 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

न नौकरी मिली, न वापस हुई रकम

रकम लेने के बाद भी जब युवक को नौकरी नहीं मिली, तो उसने आरोपी से अपने पैसे वापस मांगे। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उसे टालमटोल किया जाने लगा। काफी प्रयासों के बाद भी पैसे वापस नहीं मिलने पर पीड़ित ने पुलिस का रुख किया।

शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और कथित ठगी में अन्य लोगों की भी कोई भूमिका है या नहीं। मामले में जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी नौकरी के नाम पर रकम मांगने वालों से रहें सावधान

सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों के झांसे में आने से बचें। किसी व्यक्ति के बड़े अधिकारियों से संपर्क होने के दावे पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। नौकरी के लिए केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया का पालन करें।

अवैध पटाखों का जखीरा बरामद, 8.56 लाख का माल जब्त

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 जांजगीर-चांपा। दीपावली से पहले जिले में अवैध पटाखों के भंडारण और बिक्री के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। बलौदा पुलिस ने ग्राम बैजलपुर स्थित महामाया क्रेशर के एक खाली मकान में छापा मारकर करीब 176 किलोग्राम विभिन्न प्रकार के पटाखे जब्त किए हैं। जब्त पटाखों की अनुमानित कीमत 8 लाख 56 हजार रुपये बताई गई है। मामले में 52 वर्षीय दीपक कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम बैजलपुर में महामाया क्रेशर के खाली मकान में रिहायशी इलाके के भीतर पटाखों का अवैध भंडारण किया गया है और वहां से बिक्री भी की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी।

अलग-अलग कार्टून में रखे थे पटाखे

छापेमारी के दौरान मकान में अलग-अलग कार्टून के भीतर विभिन्न प्रकार के पटाखे रखे मिले। पुलिस ने करीब 176 किलोग्राम पटाखों को विधिवत जब्त किया। बरामद सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 8.56 लाख रुपये आंकी गई है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने वार्ड क्रमांक 4, नैला निवासी दीपक कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया गया है।

पुलिस अवैध रूप से पटाखों के भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई कर रही है। त्योहार के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर पटाखे जमा करने और बेचने से आगजनी जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

सावधान! NIA अधिकारी बनकर WhatsApp कॉल, रायपुर में बुजुर्ग महिला से 7 लाख की ठगी

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां ठगों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बनकर 62 वर्षीय महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और 7 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने महिला के आधार नंबर से फर्जी बैंक खाता खोलकर मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने की बात कही। गिरफ्तारी वारंट का भय दिखाकर उन्हें किसी से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई। इसके बाद करीब पांच दिनों तक फोन और वीडियो कॉल के जरिए दबाव बनाकर रकम ट्रांसफर करा ली।


पुलिस के मुताबिक, स्टेशन रोड के नर्मदापारा निवासी रीता खन्ना की मशीनरी की दुकान है। उनके दो बेटे हैं, जिनमें से एक अमेरिका और दूसरा देहरादून में रहता है। 7 अक्टूबर को उनके व्हाट्सएप पर कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र में NIA का अधिकारी विक्रम सिंह बताया।

आरोपी ने महिला को बताया कि उनके आधार नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है। उसने गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। साथ ही मामले की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देने की चेतावनी दी।

NOC दिलाने के नाम पर मांगे रुपये

ठगों ने महिला से उनकी संपत्ति, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दिलाने का झांसा देकर रकम ट्रांसफर करने को कहा।

बैंक में लगातार तीन दिन की छुट्टी होने के कारण महिला तत्काल पैसे नहीं भेज सकीं। इसके बाद 12 अक्टूबर को उन्होंने आरोपियों के बताए बैंक खाते में RTGS के माध्यम से 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह साइबर ठगों ने गिरफ्तारी का भय दिखाकर महिला की जमा पूंजी ठग ली।

घटना का एहसास होने के बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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