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रायपुर में Christian Forum अध्यक्ष अरुण पन्नालाल गिरफ्तार, सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा मामला गरमाया

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद मामला चर्चा में है। पुलिस ने 75 वर्षीय पन्नालाल को कथित तौर पर ऐसी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया, जिसे लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत सामने आई थी।

सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामला सोशल मीडिया पर भगवान शिव से संबंधित एक कथित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पोस्ट में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और इसके बाद अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल

गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, पन्नालाल की गिरफ्तारी के विरोध में कुछ ईसाई संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग उठाई है। वहीं, दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट को धार्मिक भावनाओं के लिए आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई का समर्थन किया गया है।

मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट की प्रकृति और उससे जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और पोस्ट के संदर्भ, उसकी मंशा तथा उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में बढ़ी संवेदनशीलता

सोशल मीडिया पर धार्मिक विषयों से जुड़ी टिप्पणियां अक्सर तेजी से फैलती हैं और उनसे विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। रायपुर का यह मामला भी इसी वजह से चर्चा में आया है। एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पन्नालाल के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं।

मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों के दावों के बीच फिलहाल पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।

मामले पर बनी हुई है नजर

रायपुर में हुई इस गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पोस्ट, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के सम्मान से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।

संसद ने Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को दी मंजूरी, डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मिलेगी मान्यता

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नई दिल्ली: डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में संसद ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने सोमवार को विधेयक को पारित किया, जबकि लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। इसके साथ ही बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने का रास्ता साफ हो गया है।

1891 के पुराने कानून की जगह लेगा नया कानून

यह विधेयक ब्रिटिश काल के Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को बदलने के उद्देश्य से लाया गया है। करीब 135 वर्ष पुराने कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा मुख्य रूप से पारंपरिक दस्तावेजों और खाताबही के संदर्भ में थी। नए कानून में बैंकिंग व्यवस्था में आए तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी स्पष्ट कानूनी आधार दिया गया है। 

डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को मिलेगा कानूनी आधार

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल अथवा क्लाउड आधारित माध्यमों में रखे गए रिकॉर्ड को भी बैंकिंग रिकॉर्ड के दायरे में शामिल किया जा सकेगा।

इसका मतलब है कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से तैयार होने वाले बैंक रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार मिलेगा।

बैंकिंग व्यवस्था में तकनीक के अनुरूप बदलाव

आज बैंकिंग क्षेत्र में अधिकांश लेनदेन डिजिटल माध्यमों से होते हैं। ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट जैसी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानून को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना जरूरी हो गया था।

नया विधेयक इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे डिजिटल रिकॉर्ड की कानूनी स्वीकार्यता को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया में ऐसे रिकॉर्ड के इस्तेमाल के लिए अधिक व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध होगी।

अदालतों में साक्ष्य पेश करने की प्रक्रिया होगी आसान

नए कानूनी ढांचे से बैंकिंग से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। बैंकिंग लेनदेन, खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विधेयक का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड के लिए उपयुक्त प्रमाणन व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है। इससे अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच और स्वीकार्यता की प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। 

डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर

डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के साथ उसकी प्रामाणिकता, सटीकता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित प्रमाणन और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के प्रावधानों पर भी जोर दिया गया है।

संसदीय समिति ने भी डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपायों की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया था। समिति ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाणपत्र की आवश्यकताओं को मजबूत करने की सिफारिश की थी।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

नया कानून बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंक अब बड़ी मात्रा में डेटा डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में सुरक्षित रखते हैं। ऐसे में पारंपरिक कागजी रिकॉर्ड पर आधारित पुराने कानूनी प्रावधानों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बदलना आवश्यक था।

यह बदलाव बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक तकनीक-अनुकूल बनाने और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के साथ कानून के तालमेल को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विधेयक?

Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को केवल बैंकिंग कानून में बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह भारत की तेजी से डिजिटल होती वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इससे:

  • डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की अदालतों में स्वीकार्यता को मजबूती मिलेगी।

  • बैंकिंग मामलों में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक आधुनिक होगी।

  • पुराने कागजी रिकॉर्ड आधारित कानूनी व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप बनाया जाएगा।

  • बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था के बीच तकनीकी तालमेल बेहतर होगा।

डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम

भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसे समय में बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानून का भी डिजिटल युग के अनुरूप होना जरूरी है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 इसी बदलाव को कानूनी रूप देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

संसद से दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक देश की बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड के उपयोग को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों युवाओं का प्रदर्शन

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झारखंड में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों का विधानसभा मार्च

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सोमवार, 10 अगस्त को रांची में सड़क पर उतरे और झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के मद्देनजर प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा बनाया गया था, ताकि प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके।

बैरिकेडिंग के बावजूद विधानसभा की ओर बढ़े छात्र

सोमवार को हजारों छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग को पार कर आगे बढ़ने में सफल रहे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति देखने को मिली।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से कुछ मामलों में CBI जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा वर्षों तक मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है। इसी वजह से अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

कई दिनों से जारी है आंदोलन

JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। सोमवार का विधानसभा मार्च इस आंदोलन का एक बड़ा चरण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्र लगातार कई दिनों से धरना और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर मार्च किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आंदोलन का मुख्य केंद्र रांची बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे हैं।

प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। विधानसभा के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर से दूर रखने के लिए सुरक्षा बलों ने लगातार निगरानी रखी।

हालांकि, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस कार्रवाई के बाद भी छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा और वे अपनी मांगों पर कायम रहे।

युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा झारखंड के युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

छात्रों का आंदोलन अब केवल परीक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

फिलहाल रांची में छात्र आंदोलन को लेकर स्थिति पर प्रशासन और अभ्यर्थियों की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, यह आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

नशीली दवाओं की अवैध तस्करी पर DRI की बड़ी कार्रवाई

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नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ लगातार जारी कार्रवाई के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड की गोलियों का गुप्त रूप से निर्माण, छिपाने और अफ्रीकी देशों में अवैध निर्यात करने में शामिल था।

एक सप्ताह तक चले खुफिया-आधारित अभियान में 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट, 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट, मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी एवं कच्चा माल जब्त किया गया। कार्रवाई में सिंडिकेट के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

2 अगस्त 2026 को खुफिया सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में नाइजीरिया भेजे जा रहे एक निर्यात कंसाइनमेंट को रोका। दस्तावेजों में इस खेप को 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन कैप्सूल बताया गया था। हालांकि, विस्तृत जांच में इसके भीतर छिपाकर रखी गई 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट (250 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 25 किलोग्राम, और 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट (200 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 20 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

DRI की त्वरित जांच में एक सुव्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा हुआ, जो कई स्तरों पर संचालित हो रही थी। ट्रामाडोल की गोलियों का महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित एक कारखाने में गुप्त रूप से निर्माण किया जाता था। उनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें सादे कार्टन में पैक किया जाता था। इसके बाद खेप को मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक गोदाम में ले जाया जाता था, जहां उन्हें दोबारा सफेद बोरियों में पैक कर नाइजीरिया अवैध रूप से भेजने की तैयारी की जाती थी।

सप्ताहभर में की गई कई समन्वित अनुवर्ती कार्रवाइयों के दौरान DRI अधिकारियों ने निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और भंडारण गोदाम से जुड़े विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली। निर्माण इकाई में की गई तलाशी के दौरान टैबलेट बनाने वाली मशीनरी के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया, जिसका इस्तेमाल मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में किया जाना था।

इस अभियान में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें IEC धारक/निर्यातक, आपूर्तिकर्ता-सह-समन्वयक और ट्रामाडोल टैबलेट का गुप्त निर्माता शामिल हैं।

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल पर कड़े नियंत्रण

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। इनके दुरुपयोग और निर्भरता के जोखिम को देखते हुए दोनों दवाएं कड़े नियामकीय नियंत्रण के अधीन हैं।

ट्रामाडोल को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मन:प्रभावी पदार्थ के रूप में अधिसूचित किया गया है। वहीं, टैपेंटाडोल वर्तमान में NDPS अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है, लेकिन यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत कड़ाई से नियंत्रित है।

इन दवाओं का अवैध निर्माण, डायवर्जन और तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और अक्सर संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ी होती है।

इस कार्रवाई के माध्यम से DRI ने मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण, भंडारण, छिपाने और उन्हें विदेश भेजने के प्रयास में शामिल एक संगठित नेटवर्क को प्रभावी रूप से ध्वस्त कर दिया है।

15 अगस्त 2026 को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

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15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाकर इसकी गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को अपना परंपरागत संबोधन देंगे। इस वर्ष के समारोह में युवा शक्ति को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष

लाल किले की फूलों से होने वाली सजावट में ‘वंदे मातरम्’ की थीम दिखाई देगी। ज्ञानपथ पर प्राचीर के सामने NCC और MY Bharat के कुल 2,500 छात्र-छात्रा कैडेट एवं स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। भारतीय वायुसेना का एक Mi-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैनर लेकर लाल किले पर मौजूद लोगों के ऊपर पुष्पवर्षा करेगा।

सैन्य बैंड प्रस्तुतियां

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एकजुट और प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत को श्रद्धांजलि देने के लिए 8 अगस्त 2026 से देशभर में विभिन्न बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।

सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड देशभर के 343 प्रमुख स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगे। ये कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 तक जारी रहेंगे। नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों में आम जनता के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

युवा शक्ति: विकसित भारत @2047 की यात्रा का नेतृत्व

स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्र-छात्राओं की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। इन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।

पृष्ठभूमि में लगाए गए विजुअल्स के माध्यम से परमाणु और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रदर्शित किया जाएगा। गार्ड ऑफ ऑनर क्षेत्र में फूलों की सजावट के माध्यम से विकसित भारत @2047 की भारत की यात्रा को दर्शाया जाएगा।

विशेष अतिथि

विकसित भारत की यात्रा में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 5,000 उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रमों के युवा नवोन्मेषक

  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के उत्कृष्ट इंटर्न

  • विभिन्न योजनाओं से सहायता प्राप्त उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • PM कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा

  • Startup India Seed Fund से समर्थित उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • उत्कृष्ट MY Bharat स्वयंसेवक

  • NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी

  • विभिन्न क्विज एवं प्रतियोगिताओं में चयनित दिल्ली सरकार के स्कूलों के विद्यार्थी

उद्यमियों, नवोन्मेषकों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के विकसित भारत @2047 में योगदान को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित वर्गों से भी विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है:

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक

  • PM Mudra Yojana की महिला उद्यमी

  • PMAY (U) के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • विभिन्न क्षेत्रों के नवोन्मेषक एवं वैज्ञानिक

  • दिल्ली में Bharat Taxi के सारथी/कैब चालक/टैक्सी चालक

  • PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के लाभार्थी

  • PM Vishwakarma योजना के कारीगर

  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के उत्कृष्ट किसान

विशेष अतिथियों में ऐसे मौन योद्धा भी शामिल हैं, जो दूसरों की सफलता में सहायता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उनके योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • PM SVANidhi के स्ट्रीट वेंडर

  • स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मचारी

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिल्ली मेट्रो कर्मचारी

  • कर्तव्य पथ/सेंट्रल विस्टा के उत्कृष्ट कर्मचारी

  • दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली (वार्ड अटेंडेंट) और अन्य कर्मचारी

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दिल्ली में रहने वाले 1,500 से अधिक लोगों को भी पारंपरिक परिधानों में समारोह देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। वे लाल किले पर भारत की विविधता का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करेंगे।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की भागीदारी

स्वतंत्रता दिवस से पहले रक्षा मंत्रालय ने MyGov के सहयोग से विभिन्न क्विज और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा कई ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इनमें भारतीय संविधान—मौलिक अधिकार, कर्तव्य, प्रमुख अनुच्छेद एवं संविधान निर्माता; भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका—रानी लक्ष्मीबाई से सरोजिनी नायडू तक; आधुनिक भारत के प्रमुख पड़ाव—तकनीकी प्रगति एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की उपलब्धियां; तथा परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की सफलता जैसे विषय शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के लगभग 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

अन्य मंत्रालयों/विभागों, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा भी नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व से जोड़ने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज एवं गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

जनसुविधाओं की विशेष व्यवस्था

  • क्लॉक रूम: आगामी समारोह के लिए छह स्थानों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं।

  • हेल्पडेस्क पर स्वयंसेवक: 200 स्वयंसेवक—MY Bharat के 100 और NCC के 100—पुलिसकर्मियों के साथ आगंतुकों की सहायता करेंगे।

  • व्हीलचेयर सुविधा: जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट 20 व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे।

  • मेट्रो सेवा: 15 अगस्त को लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू होगी। सभी आमंत्रितों को मेट्रो सेवा निःशुल्क उपलब्ध होगी। ई-निमंत्रण के साथ मेट्रो QR कोड दिए जाएंगे।

  • पार्किंग सुविधा: वैध पार्किंग पास/लेबल वाले आगंतुकों के लिए परेड ग्राउंड में पार्किंग की सुविधा होगी।

  • पैदल यात्रियों के लिए रैंप: ऊपरी सुभाष मार्ग से निचले सुभाष मार्ग तक सुगम आवागमन के लिए रैंप और सीढ़ियां बनाई गई हैं।

  • Google एवं Mappls Maps: मुख्य समारोह के दिन यातायात प्रतिबंधों की जानकारी Google और Mappls Maps पर उपलब्ध होगी।

  • रेन पोंचो: मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए माधव दास पार्क और 15 अगस्त पार्क में सभी आमंत्रितों को तथा प्राचीर पर मौजूद गणमान्य अतिथियों को रेन पोंचो उपलब्ध कराए जाएंगे।

निमंत्रण पत्र: जनसेवा और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा था कि ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और देशवासियों के कल्याण के लिए समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा।

इसी भावना के साथ इस वर्ष के मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्र पर ‘सेवा तीर्थ’ को प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। निमंत्रण पत्र पर बना धर्म चक्र धर्मपूर्ण कर्तव्य, निरंतर सेवा और निस्वार्थ कर्म की शाश्वत गति का प्रतीक है।

स्वच्छता अभियान

कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की भावना के साथ इस वर्ष समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसमें NCC कैडेट और MY Bharat स्वयंसेवक भाग लेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य दर्शकों के लौटने के बाद उसी दिन व्यवस्थित तरीके से प्लॉगिंग और कचरे को हटाना है। इसके माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान का संदेश दिया जाएगा। अभियान के बाद लाल किला देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए स्वच्छ रूप में उपलब्ध रहेगा।

प्रवेश कक्षों के नाम

VIP संस्कृति को समाप्त करने और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गणतंत्र दिवस 2026 में बैठने के कक्षों के नाम भारत की नदियों पर रखे गए थे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इन बैठने के कक्षों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं।

जल निकासी की व्यवस्था

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संभावित बारिश को देखते हुए जलभराव रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की पूरी तरह सफाई की जा रही है, ताकि बारिश की स्थिति में पानी का सुचारु निकास सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाथ में तिरंगा थामकर किया भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व

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मुख्यमंत्री ने कहा - 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधता है तिरंगा

हजारों कदमों के साथ गूंजा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संकल्प

तिरंगे के रंग में रंगा रायपुर, राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुआ जनसैलाब

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों की शौर्यगाथा का किया स्मरण, शहीद वीर नारायण सिंह और गुण्डाधुर को किया नमन

रायपुर- हाथों में लहराता तिरंगा, भारत माता के जयघोष, देशभक्ति के गीत और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हजारों नागरिकों का उत्साह - राजधानी रायपुर आज पूरी तरह तिरंगे के रंग में रंगी नजर आई। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा में हजारों नागरिक राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुए। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं हाथ में तिरंगा थामकर जनसैलाब के साथ कदम से कदम मिलाया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा हाथों में थामा गया लगभग एक किलोमीटर लंबा तिरंगा पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।

तिरंगा यात्रा के शुभारंभ से लेकर समापन तक राजधानी में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। हजारों हाथों में एक साथ लहराते राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता के जयघोष ने पूरे यात्रा मार्ग को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। मुख्यमंत्री साय भी नागरिकों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान नागरिकों में मुख्यमंत्री के साथ चलने और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। यह केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता, स्वाभिमान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे में देश के 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत शक्ति है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता के बावजूद तिरंगा हम सभी को भारतीय होने के एक साझा गौरव से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तिरंगा लहराता है तो प्रत्येक भारतीय के मन में स्वाभाविक रूप से राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान का भाव जागृत होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का साक्षी है। तिरंगा हमें अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज एक व्यापक जनअभियान का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान ने तिरंगे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराने तथा तिरंगा यात्राओं से जुड़कर राष्ट्रीय एकता के इस उत्सव को और भव्य बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में गर्व और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे लाखों देशवासियों का संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान जुड़ा हुआ है। देश के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर क्षेत्र और समाज के लोगों ने अपना योगदान दिया। किसी ने अपना जीवन समर्पित किया, किसी ने अपना घर-परिवार छोड़ा और अनेक वीरों ने मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र के गौरव का अनुभव कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी स्वतंत्र भारत में जन्मी और आगे बढ़ रही है। इसलिए उसे यह जानना आवश्यक है कि आजादी कितनी अनमोल है और इसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितना बड़ा संघर्ष किया। स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथाओं से परिचित होकर ही नई पीढ़ी स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य को समझ सकेगी।

उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के बलिदान का स्मरण कराता है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। स्वतंत्रता की इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, समर्पण, सेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव और अधिक मजबूत होगा।

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों ने स्वतंत्रता संग्राम में लिखी शौर्यगाथा

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों का स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भी वीरों, जननायकों और बलिदानियों की धरती रही है। देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष में छत्तीसगढ़ के अनेक वीर सपूतों ने अदम्य साहस और स्वाभिमान का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में गरीबों और जरूरतमंदों के हित में आवाज उठाई और अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उनका जीवन हमें बताता है कि राष्ट्रप्रेम के साथ जनसेवा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी सच्ची देशभक्ति का स्वरूप है।

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के महान जननायक गुण्डाधुर की शौर्यगाथा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित कर संघर्ष का बिगुल फूंका। बस्तर की धरती ने सदैव अपने स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। गुण्डाधुर का साहस और नेतृत्व आज भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, गुण्डाधुर सहित छत्तीसगढ़ के अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का संघर्ष हमारे गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। इन महानायकों की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके आदर्शों से युवाओं को परिचित कराना हमारा दायित्व है।

बदलते बस्तर में शांति और विकास के साथ लहराएगा तिरंगा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर आज हिंसा और भय के लंबे दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्रवासियों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंची है।

उन्होंने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा के कारण भय का वातावरण था, वहां अब विकास की नई रोशनी पहुंच रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ लोगों का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। बस्तर के लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते बस्तर की पहचान अब हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, विश्वास और नई संभावनाओं से बन रही है। इस वर्ष बस्तर में भी स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा तथा तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। बस्तर के गांवों और दूरस्थ अंचलों में भी तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहराएगा।

एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के साथ आगे बढ़ी नई पीढ़ी

तिरंगा यात्रा में स्कूली छात्र-छात्राओं का उत्साह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने लगभग एक किलोमीटर लंबे तिरंगे को अपने हाथों में थामकर अनुशासित पंक्तियों में यात्रा की। सड़क पर दूर तक फैला विशाल तिरंगा राजधानी में राष्ट्रीय एकता और गौरव की अनुपम छटा बिखेरता दिखाई दिया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। 

पुष्पवर्षा से स्वागत, भारत माता के जयघोष से गूंजा रायपुर

तिरंगा यात्रा को लेकर राजधानी के नागरिकों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने इसका आत्मीय स्वागत किया। कई स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से तिरंगा लहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते नजर आए।

यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसके साथ नागरिकों का उत्साह भी बढ़ता गया। देशभक्ति के गीतों और ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ तथा ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ के उद्घोष से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया। युवाओं के हाथों में लहराते तिरंगे और स्कूली बच्चों के उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दे रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी राजधानी ने तीन रंगों की चादर ओढ़ ली हो। हजारों हाथों में एक साथ लहराते तिरंगे और राष्ट्रभक्ति से भरे जयघोष के बीच पूरा रायपुर एक स्वर में यही संदेश देता नजर आया - भारत एक है, भारत श्रेष्ठ है और राष्ट्र सर्वोपरि है।

तिरंगा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देश स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व मनाने जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘हर घर तिरंगा’ तथा ‘तिरंगा यात्रा’ के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने कहा कि रायपुर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में युवा तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे हैं। यह उत्साह बताता है कि देश की नई पीढ़ी के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी मजबूत है। जिस तिरंगे ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को एकजुट किया था, आज उसी तिरंगे के सम्मान में पूरा रायपुर एक साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, गौरव और एकता का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने देशभर में राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की है। जब प्रत्येक घर पर तिरंगा लहराता है तो वह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के सम्मान, गौरव और संकल्प की अभिव्यक्ति बन जाता है।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से उत्साहपूर्वक जुड़ने का आह्वान किया।

तिरंगा यात्रा में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, सांसद  रूप कुमारी चौधरी, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, महापौर  मीनल चौबे, निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

विशेष लेख-विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान-खेती किसानी को मिला नया संबल

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छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति परंपरा व आस्था से जुड़ा है हरेली तिहार

रायपुर- प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन ढाई साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा। 

परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के गुड़ी में ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।

हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है  जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत, लोहार व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।

पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद रहता था। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के खेल मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।

हरेली तिहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं है यह समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम है। गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और कार्यक्रमों का आयोजन करते है। इस दिन परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ ही प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

पीपला फाउंडेशन ने किया शमी और बेल पौधे का वितरण

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हर साल करते धार्मिक महत्व के पौधों का दान 

आरंग- पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति को संवारने की दिशा में स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। संस्था प्रति वर्ष श्रावण माह के शुरू होते ही धार्मिक महत्व वाले शमी और बेल के पौधों का निःशुल्क वितरण कर लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित कर रही है। इन दोनों पौधों के पत्ते भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं। इसी धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए लोग पौधे लगाकर प्रतिदिन जल से सिंचाई कर पूजा करते हैं। फाउंडेशन का मानना है कि इस पहल से एक ओर जहां धार्मिक भावना जुड़ती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी स्वतः हो जाता है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र पटेल ने बताया कि संस्था अब तक पौधे दान जन अभियान के तहत हजारों पौधों का वितरण कर चुकी है। श्रावण में हर सोमवार को नगर के अलग-अलग मंदिरों में जाकर पौधे वितरित किए जाते हैं।पौधरोपण में दूजेराम धीवर, महेन्द्र कुमार पटेल, संजय मेश्राम, कोमल लाखोटी और प्रतीक टोंड्रे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीपला फाउंडेशन की इस पहल की नगर व क्षेत्रवासी खूब सराहना कर रहे हैं।



जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा

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इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पांडवानी ने बांधा समां

रायुपर- छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पांडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।


छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी

इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पांडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।

तीजन बाई के योगदान को याद किया

इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पांडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।


 सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी

तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी

धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।


देश की लोक परंपराओं का साझा मंच

आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

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छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल

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NDMA ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स

रायपुर- राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।

​त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी (SOP) को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

​अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर

कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।

​समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल (DRM), स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। ​प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

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बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।

बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक  की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं  शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। 

इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा किरण  कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

विशेष लेख-छत्तीसगढ़ का लोक-पर्व: हरेली तिहार

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छत्तीसगढ़ी संस्कृति में लोक-त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति, कृषि और जीव-जंतुओं के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इन्हीं त्योहारों में सबसे पहला और प्रमुख त्यौहार है — हरेली तिहार। सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन, कृषि परंपरा और पर्यावरण-प्रेम का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी प्रकृति नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएँ भी हैं।

छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में पर्व और त्यौहारों की बहुलता है। प्रत्येक माह कोई न कोई त्यौहार यहाँ लोक मानस को अपने रंग में रंग लेता है। ये त्यौहार जहॉं लोक जीवन में हंसी-खुशी के अवसर उपलब्ध कराती हैं, वहीं खेल और मनोरंजन के अनुकूल साबित होते हैं। प्रकति का यह हरापन छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में भी पूरी समाहित है। हरेली, भोजली, जँवारा हो या बसंत पंचमी सभी पर्वों में प्रकृति का मनोरम और इसका अप्रतिम सौंदर्य झलकता है। इस रूप-सौंदर्य में जीवन की चारों अवस्थाओं का उल्लास और उत्साह विविध रंगों में बिखरा हुआ है।

शायद ‘हरेली’ का हरापन हमारी परंपराओं में हमारे संस्कारों में और हमारे लोक जीवन में प्राकृतिक हरीतिमा का ज्यादा एहसास कराता है। हरेली का यह हरापन सबके जीवन में बिखरे और निखरे यही कामना है। यह भी कामना है कि भौतिकता की चकाचौंध से परे हमारी खेल परंपराएँ जीवित रहे ताकि माटी से जुड़े ग्रामीणजन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से सुदृढ़ रहें। माटी की सोंधी-सोंधी महक हमारे लोक गीतो से आती रहे और खेल परंपरा की यह अविरल धारा निरंतर गतिमान रहे।

हरेली शब्द का अर्थ और महत्व

'हरेली' शब्द 'हरियाली' से बना है। सावन के महीने में जब चारों तरफ़ खेतों और मैदानों में हरी-भरी फसलें और हरियाली लहलहाने लगती है, तब किसान इस पर्व को उल्लासपूर्वक मनाते हैं। इसे छत्तीसगढ़ का पहला तिहार माना जाता है, जहाँ से राज्य के प्रमुख लोक-पर्वों की श्रृंखला शुरू होती है।

कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा

हरेली का दिन मुख्य रूप से कृषकों और कृषि से जुड़े साधनों का धन्यवाद ज्ञापित करने का दिन है:

•कृषि यंत्रों की पूजा:-  हरेली की जड़ें छत्तीसगढ़ क्षेत्र की कृषि विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह एक उत्सव होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक भेंट भी है, लोगों के लिए प्रकृति, बारिश और अपने कृषि कार्य को सम्पन्न करने के बाद किसान अपने औजार, हल, फावड़ा, कुदाल, कुदाली, कुम्हड़ी, बिन्धना, बसुला, हथौड़ी, आरी,असिया, पैसुल, छूरा, खुर्पी आदि को धोकर स्वच्छ मिट्टी (मुरमी) का आसन से सजाकर किसान-किसानिन पूजा सामग्री रखकर धुले हुए चांवल आटे से हाथा लगाकर चन्दन, फूल, धुप-दीप व चीला रोटी से भोग लगाकर श्रीफल अर्पित करते हैं एवं भाव विभोर हो प्रार्थना करते हैं - ‘हे बलराम रूपी हल प्रचण्ड शक्ति के प्रतीक धारापति, आपने कंधा के रूप में माता को संवारा एवं सेवा करने में हमारी सहायता की कृषि कार्य बोनी ब्यासी रोपा के होते ही चहूओर हरियाली छाई इसके लिए कोटिशः धन्यवाद आपका कार्य सम्पन्न हुआ विश्राम करे। हमने आपको बड़ा कष्ट दिया, काम लिया, हमें क्षमा करें। आपकी दया हम पर सदैव बनी रहे, इसी प्रकार अन्य औजारों का कार्यानुसार निवेदन करते गेड़ी की पूजा कर शरीर के सामर्थ पैरो की रक्षा की कामना करते हैं।

•पशुधन का सत्कार: पशुधन किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में किसान मिश्रित कृषि प्रणाली अपनाते हैं, जिसमें फसल और पशुधन का संयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े-लिखे और अकुशल होने के कारण अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं।  बैल छत्तीसगढ़ कृषि की रीढ़ हैं। किसान, विशेषकर सीमांत और लघु किसान, जुताई, ढुलाई और उत्पादन और इनपुट दोनों के परिवहन के लिए बैलों पर निर्भर रहते हैं।

•खेती-किसानी के सच्चे साथी यानी गाय और बैलों की विशेष सेवा की जाती है। उन्हें नहला-धुलाकर आरती उतारी जाती है तथा 'गहूंता' (आटा, नमक और जड़ी-बूटी से बना पौष्टिक मिश्रण) खिलाया जाता है, ताकि वे रोगों से मुक्त रहें। जड़ी बुटियों से तैयार औषधि को गौठान में ले जाकर अन्डी एवं खम्हार के पत्तों में नमक, चावल या गेहूँ के गोला के साथ दवा डाल कर पशुओं को खिलाया जाता है। अरण्ड, खम्हार का पत्ता औषधि है, जो वायुजनित रोगों को दूर करता है। नमक उत्प्रेक्षण का कार्य करता है, चावल या गेहूँ के कारण दवा अधिक असरकारक बन जाती है। इससे पशु धन निरोग हो जाता है यह एक प्रकार टीकाकरण ही है।

परंपराएं एवं रीति-रिवाज

•गेड़ी चढ़ने का आनंद:- इस पर्व में गेंड़ी का काफी महत्व है बांस के मोटे डंडो एवं बांस के पहुये को विशेष विधि से कस कर बांधा जाता है। गेड़ी का उदारण हमें पुराणों में मिलता है। बलदाऊ-कृष्ण अपने सखाओं के साथ गेड़ी चढ़ा करते थे। कृष्ण लीला प्रसंग में इसका उदाहरण मिलता है तथा खेलों का आयोजन भी होते रहे हैं, जिसमें गेड़ी दौड़, पानी पिलाना, एक पैर में खड़े होना, एक पैर में कूदना आदि अनेक खेल का आयोजन प्राचीन काल से अब तक होते आ रहे हैं। बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी से भरे रास्तों पर चलने के साधन के रूप में शुरू हुई यह परंपरा आज एक मनोरंजक खेल बन चुकी है। 

•विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन:- हरेली में गाँव व शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता भी होती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली जुटती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता का आयोजन की जाती है। नारियल हारने और जीतने का यह सिलसिला देर रात तक चलता है। गाँव-गाँव में गेड़ी दौड़ का आयोजन होता है। कहीं खो-खो तो कहीं फुगड़ी, कहीं बिल्लस, कहीं अत्ती-पत्ती, डंडा पचरंगा खेल का आयोजन होते आ रहे हैं। गाँव का गौठान हो या स्कूल का मैदान, गाँव के बाहर सड़क हो या चौबट्टा लगता है सारे लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजे रहते हैं।

•टोटका और सुरक्षा का विधान:- मान्यतानुसार, इस दिन गाँव को बुरी नज़र और रोगों से बचाने के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर नीम की पत्तियाँ बांधी जाती हैं। लोहार द्वारा घरों के चौखट पर नीम की शाखाएं और लोहे की कीलें लगाई जाती हैं। स्थानीय मान्यता है कि इससे घर को बुरी शक्तियों और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यह प्रथा नीम के ज्ञात औषधीय गुणों और ग्रामीण स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक मान्यताओं में इसकी भूमिका से प्रेरित है।

•हरेली तिहार में बनाए जाने वाले ब्यंजन:- मुख्य रूप से गुड़ के चीला, अईरसा, चौसेला और बोबरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाए और बांटे जाते हैं। गुलगुला भजिया, गुड़हा चीला, सोहारी, बड़ा, ठेठरी, खुरमी और बोबरा जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों का भोग कृषि औजारों और गोधन को लगाया जाता है। इस दिन छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का विशेष आनंद लिया जाता है। 

सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश

हरेली तिहार केवल एक धार्मिक या लोक-अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव का प्रकृति के साथ अटूट संबंध दर्शाता है। यह पर्व सिखाता है कि जो प्रकृति और पशुधन हमें जीवन और भोजन देते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा परम कर्तव्य है।आज के समय में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर और 'छत्तीसगढ़िया क्रांति' के तहत पारंपरिक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को बढ़ावा देकर इस लोक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 11 अगस्त तक

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रायपुर- संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा सत्र 2026-27 हेतु संचालित सभी 4 डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (1.Diploma Engg. & Arch, 2.CDDM/ID, 3.MOM/HMCT, 4.Diploma Engg. (Lateral Entry)  में अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन हेतु निर्धारित अंतिम तिथि को 11अगस्त 2026 को शाम 06  बजे तक बढ़ाया गया है।आई आई टी के परिणाम घोषित हो चुके हैं, इसलिए  ITI उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करने हेतु रजिस्ट्रेशन की अवधि बढ़ाई गई है।

अतिरिक्त  संचालक संचालनालय तकनीकी शिक्षा नवा रायपुर अटल नगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया में अभ्यर्थी  की रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि में ही परिवर्तन किया गया है। शेष कोर्स के लिए  प्रवेश प्रक्रिया की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार यथावत रहेंगे।

अतः डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी 11अगस्त 2026 को शाम 06  बजे तक अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन  की प्रक्रिया पूर्ण कर लें। इस हेतु अभ्यर्थी को वेबसाइट https://dte.cg.gov.in/#/ एवं https://cgdte.admissions.nic.in/ पर उपलब्ध कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग, की अधिसूचना क्रमांक/एफ-9-5/2023/तक.शि./42 अटल नगर, दिनांक 11 मई 2023 में प्रकाशित प्रवेश नियम के अनुसार अर्हता होना अनिवार्य है।

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