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PF निकालना हुआ सुपरफास्ट! UPI के जरिए तुरंत ट्रांसफर, अप्रैल 2026 से लागू

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 नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करीब 8 करोड़ सदस्यों के लिए बड़ी सुविधा लाने जा रहा है। EPFO अप्रैल 2026 तक एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा, जिसके जरिए सदस्य अपने PF (EPF) का तय हिस्सा सीधे UPI के माध्यम से निकाल सकेंगे। इससे PF निकासी की प्रक्रिया तेज, आसान और पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी।


PTI की रिपोर्ट के अनुसार, EPF की कुल राशि का एक हिस्सा रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए लॉक रहेगा, जबकि शेष राशि UPI के जरिए सीधे सदस्य के लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी। यह सुविधा EPFO 3.0 अपग्रेड का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य PF सेवाओं को बैंकों के स्तर तक ले जाना है।

3 दिन में होगा PF क्लेम सेटलमेंट

फिलहाल EPFO सदस्यों को PF निकालने के लिए ऑनलाइन क्लेम दाखिल करना पड़ता है, जिसमें समय लगता है। लेकिन नई ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली के तहत क्लेम बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के अधिकतम 3 दिनों में इलेक्ट्रॉनिक रूप से निपटाए जाएंगे।

EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा पहले ही 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। इससे लाखों सदस्यों को तेजी से राहत मिलेगी और संगठन पर काम का बोझ भी कम होगा। EPFO हर साल करीब 5 करोड़ से ज्यादा क्लेम सेटल करता है, जिनमें ज्यादातर PF निकासी से जुड़े होते हैं।

UPI पिन डालते ही मिलेगा पैसा

नए सिस्टम के तहत सदस्य UPI पिन डालकर PF की राशि अपने बैंक खाते में लगभग तुरंत ट्रांसफर कर सकेंगे। लंबी क्लेम प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी। बीमारी, शिक्षा, विवाह और मकान जैसी जरूरतों के लिए PF का पैसा 3 दिनों के भीतर मिल सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक, UPI से PF निकासी पर प्रति ट्रांजैक्शन 25,000 रुपये तक की सीमा तय की जा सकती है। ऐप में यह भी साफ तौर पर दिखेगा कि कुल बैलेंस में से कितनी राशि निकासी के लिए उपलब्ध है। रिटायरमेंट सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुल PF बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा लॉक रहेगा।

यह सुविधा नए EPFO ऐप के जरिए दी जाएगी, जिसे BHIM ऐप और अन्य UPI प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा।

फिलहाल ट्रायल मोड में सिस्टम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय फिलहाल 100 डमी खातों पर इस सिस्टम का ट्रायल कर रहा है, ताकि किसी भी तकनीकी खामी को लॉन्च से पहले दूर किया जा सके। अप्रैल 2026 में पब्लिक लॉन्च के बाद UPI के जरिए PF निकासी के लिए नया ऐप मुख्य प्लेटफॉर्म होगा।

हालांकि, EPFO का यूनिफाइड मेंबर पोर्टल और UMANG ऐप अन्य सेवाओं के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे।

T20 World Cup 2026: ICC की दो-टूक के आगे झुका पाकिस्तान, T20 वर्ल्ड कप में खेलेगा भारत से मैच

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 T20 World Cup 2026: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला बहुप्रतीक्षित ग्रुप मैच अब तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भारत के खिलाफ मुकाबले के बॉयकॉट का अपना फैसला वापस ले लिया है। यह मैच 15 फरवरी को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाना है।


इससे पहले पीसीबी ने पाकिस्तान सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए भारत के खिलाफ मैच न खेलने का ऐलान किया था। हालांकि, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद पाकिस्तान ने अपने रुख में नरमी दिखाई।

ICC की पहल से सुलझा मामला

आईसीसी के प्रतिनिधि इमरान ख्वाजा और मुबाशिर उस्मानी हाल ही में लाहौर पहुंचे, जहां उन्होंने पीसीबी अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल भी शामिल रहे। चर्चा के दौरान आईसीसी ने पाकिस्तान को मैच न खेलने की स्थिति में संभावित वित्तीय नुकसान और अन्य परिणामों से अवगत कराया। इसके बाद पीसीबी ने विवाद को समाप्त करने का फैसला लिया।

पाकिस्तान सरकार ने दी मंजूरी

पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए पुष्टि की कि राष्ट्रीय टीम भारत के खिलाफ अपना निर्धारित मुकाबला खेलेगी। पोस्ट में कहा गया कि विभिन्न चर्चाओं और मित्र देशों की अपील को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि स्पिरिट ऑफ क्रिकेट और वैश्विक खेल की निरंतरता बनी रहे।

क्रिकेट फैंस में खुशी

इस फैसले के बाद दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों में उत्साह है। भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट के सबसे बड़े और रोमांचक मैचों में गिना जाता है, जिसे लेकर हमेशा जबरदस्त क्रेज रहता है।

आईसीसी की सक्रिय भूमिका और सभी बोर्ड्स की सहमति से टूर्नामेंट की एकता बनाए रखने में सफलता मिली है।

प्लास्टइंडिया 2026 में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का दौरा, प्लास्टिक इंडस्ट्री स्टेटस रिपोर्ट 2025 जारी

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केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित विश्व प्रसिद्ध प्लास्टिक प्रदर्शनी PLASTINDIA 2026 का दौरा किया। यह प्रदर्शनी 5 से 10 फरवरी 2026 तक आयोजित हो रही है।

इस अवसर पर मंत्री पासवान ने Plastic Industry Status Report 2025 का विमोचन किया और स्टार्टअप सर्च इनिशिएटिव के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। यह पहल प्लास्टइंडिया फाउंडेशन और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के सहयोग से विकसित की गई है।

उद्योग जगत को संबोधित करते हुए मंत्री चिराग पासवान ने अपशिष्ट कम करने और तकनीक के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने प्लास्टिक उद्योग के सतत उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान की सराहना की।

PLASTINDIA 2026 में भारत और विदेशों से उद्योग नेता, वैश्विक खरीदार, नवप्रवर्तक और नीति निर्माता शामिल हुए हैं, जिससे वैश्विक प्लास्टिक मूल्य श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका उजागर हुई है। रिपोर्ट में उद्योग की वृद्धि, निर्यात और स्थिरता की दिशा में परिवर्तन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।



रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रीस के रक्षा मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक, रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में हेलेनिक गणराज्य (ग्रीस) के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोहराया कि भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है।

दोनों देशों ने अपने-अपने स्वदेशी रक्षा उद्योगों की क्षमता को साझेदारी के माध्यम से विस्तार देने का निर्णय लिया। भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ग्रीस के ‘एजेंडा 2030’ रक्षा सुधारों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अगले पांच वर्षों के रोडमैप के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग तथा रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सैन्य सहभागिता की रूपरेखा तय करने के लिए वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का भी आदान-प्रदान किया गया।

दोनों प्राचीन समुद्री राष्ट्रों के बीच प्रमुख समुद्री मुद्दों पर अभिसरण को भी रेखांकित किया गया। ग्रीस ने गुरुग्राम स्थित इंडियन ओशन रीजन इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) में एक ग्रीक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी की तैनाती की घोषणा की।

बैठक से पहले ग्रीस के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मानेकशॉ सेंटर में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।

अपने दौरे के दौरान हेलेनिक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में प्रमुख रक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा किया तथा नई दिल्ली में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), रक्षा उद्योग और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यह दौरा भारत और ग्रीस के बीच दीर्घकालिक और घनिष्ठ संबंधों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।



राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर ने स्वर्ण जयंती मनाई, आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य में 50 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा

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जयपुर- भारत के प्रमुख आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा संस्थान राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर ने आज अपनी स्वर्ण जयंती मनाई, जो आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में 50 वर्षों की विशिष्ट सेवा का प्रतीक है। इस स्मृति कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा सहित आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में संस्थान की यात्रा को रेखांकित किया गया, जो 1976 में एक आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में स्थापना से लेकर वर्तमान में भारत के पहले आयुर्वेद डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय बनने तक पहुँची है। संस्थान ने शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, पांडुलिपि विज्ञान और रोगी देखभाल के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक जीवंत सेतु है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों की यह उपलब्धि केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि आयुर्वेद के माध्यम से जनस्वास्थ्य के प्रति समर्पण, अनुसंधान और सेवा की निरंतर यात्रा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ऐतिहासिक रूप से आयुर्वेद की समृद्ध भूमि रहा है, जो औषधीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से समृद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने और आयुर्वेद, योग तथा पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में राष्ट्रीय नेतृत्व की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि NIA देश के प्रमुख आयुर्वेद संस्थानों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने संस्थान के बुनियादी ढांचे के विस्तार, अकादमिक उत्कृष्टता और भविष्य उन्मुख विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण जयंती को नए संकल्प का क्षण बताते हुए कहा कि आने वाले दशकों में NIA को वैश्विक आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों को संस्थान की विरासत में योगदान के लिए बधाई दी।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्षों की यात्रा आयुर्वेद के विद्वानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की पीढ़ियों के अटूट समर्पण को दर्शाती है, जिन्होंने इस प्राचीन विज्ञान को संरक्षित और विकसित किया है। उन्होंने NIA को भारत की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली का आधार स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में मजबूती से एकीकृत किया गया है। उन्होंने बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं का उल्लेख करते हुए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और जामनगर में WHO के पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक केंद्र के उन्नयन को इस क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी कदम बताया।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आयुष को प्रमाण आधारित, वैज्ञानिक रूप से मान्य और वैश्विक रूप से स्वीकार्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि NIA जैसे संस्थान उन्नत अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य पहल, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रोगी-केंद्रित मॉडल के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए मंत्री जाधव ने संस्थान के भूमि और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए निरंतर समर्थन की अपेक्षा जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NIA “हील इन इंडिया” विज़न में महत्वपूर्ण योगदान देगा और समग्र कल्याण का वैश्विक केंद्र बनेगा।

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्वर्ण जयंती राजस्थान और देश दोनों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि 1976 में एक आयुर्वेद कॉलेज से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बनने तक की यात्रा इसकी अकादमिक उत्कृष्टता और सेवा भावना को दर्शाती है।

उन्होंने आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चिकित्सा को जनस्वास्थ्य के लिए मजबूत करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और NIA को विश्व स्तरीय आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें औषधीय पौधों के संरक्षण, शिक्षा और अनुसंधान के लिए “धन्वंतरी उपवन” औषधीय पौधा उद्यान का उद्घाटन, उन्नत सिमुलेशन प्रयोगशाला और नया ऑपरेशन थिएटर ब्लॉक शामिल हैं, जिससे संस्थान में क्लिनिकल प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमता और रोगी सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसके अलावा, बाह्य रोगी सेवाओं के विस्तार और रोगियों की सुविधा के लिए नया ओपीडी ब्लॉक “सुश्रुत भवन” का उद्घाटन किया गया। संस्थान के पॉडकास्ट स्टूडियो से पहला आधिकारिक पॉडकास्ट भी लॉन्च किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन एपिसोड रिकॉर्ड किया, जिससे डिजिटल संपर्क, अकादमिक संवाद और जन सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।

स्वर्ण जयंती समारोह ने आयुर्वेद के संरक्षण और विकास के लिए शिक्षा, अनुसंधान और करुणामय रोगी देखभाल के प्रति राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। कार्यक्रम का समापन NIA को आयुर्वेद ज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और प्रमाण आधारित पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।


स्थापना दिवस विशेष : बदला सफर का मतलब, मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

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 रायपुर : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित होते राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक प्रगति की धमनियां हैं। पिछले वर्षों में एनएचएआई ने राज्य के भौगोलिक नक्शे पर डामर और कांक्रीट से विकास की जो गाथा लिखी है, उसने छत्तीसगढ़ को देश के लॉजिस्टिक और औद्योगिक हब के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें केवल गंतव्य तक पहुँचने का रास्ता नहीं, बल्कि राज्य के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।


वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन - एनएच-53

छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-53 जो एशियाई मार्ग-46 का एक अभिन्न हिस्सा है, वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। महाराष्ट्र सीमा से शुरू होकर राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर, आरंग और सरायपाली होते हुए ओडिशा सीमा तक फैला यह शानदार फोरलेन खंड राज्य की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक पहचान दिला रहा है। इसी मार्ग पर आरंग के पास साल 2019 में महानदी पर बना एक किलोमीटर लंबा छत्तीसगढ़ का पहला भव्य सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। दुर्ग बायपास से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला यह राजमार्ग व्यापारिक सुगमता को नई ऊंचाइयां दे रहा है।


राजधानी और औद्योगिक केंद्रों का 'गोल्डन लिंक'

एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और ऊर्जाधानी कोरबा को आपस में जोड़ने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के माध्यम से रायपुर- से बिलासपुर और वहां से पथरापाली-कटघोरा तक की फोरलेन सड़क ने सफर के समय को आधा कर दिया है। इसी क्रम में चांपा-कोरबा-कटघोरा खंड (NH-149B) ने कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के परिवहन को नई गति प्रदान की है। उत्तर में अंबिकापुर और दक्षिण में धमतरी तक फैले सड़कों के इस जाल ने राज्य के सुदूर कोनों को मुख्य धारा से जोड़ दिया है।

रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर

वर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं में सबसे महत्वाकांक्षी 'रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर' है। रायपुर से धमतरी और कांकेर होते हुए कोंडागांव के बीच तैयार हो रहा यह 125 किलोमीटर का सिक्स-लेन मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे बंदरगाह से जोड़ेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता राज्य की पहली 3 किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल (सुरंग) है। यह कॉरिडोर बस्तर के घने वनों के बीच से गुजरते हुए पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में उभर रहा है।

फ्लाईओवर और आधुनिक इंटरचेंज

राजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो कभी अपनी जटिल बनावट के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र था, आज एनएचएआई के इंजीनियरिंग का गौरव है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्टैंड-अलोन फ्लाईओवर ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि इसे जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की दिशा में भी बड़ी सफलता हासिल की है। इसी तरह बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज आधुनिक कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ की ओर जाने वाले भारी वाहनों को बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुँचाता है।

औद्योगिक क्रांति का नया गलियारा - दुर्ग बायपास

शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात के दबाव को कम करने 92 किलोमीटर लंबा दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास निर्माणाधीन है। सिक्स-लेन का यह मार्ग मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर का हिस्सा होगा, जो राज्य में औद्योगिक निवेश के नए द्वार खोलेगा। 

रायपुर-धनबाद कॉरिडोर

छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच की दूरियां अब बीते दौर की बात होने वाली हैं। 627 किलोमीटर लंबा रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा इन दो राज्यों के रिश्तों को नई मजबूती देगा। इस कॉरिडोर का 384 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। इसके पूर्ण होने से रायपुर से धनबाद का 11 घंटे का सफर मात्र 7 घंटे में सिमट जाएगा, जिससे कोरबा और रायगढ़ के इस्पात एवं कोयला उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

पर्यटन और आस्था की सुगम राह

आधुनिक राजमार्गों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा तक पहुँच को अत्यंत सहज बना दिया है। एनएच-53 आज डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी, ऐतिहासिक सिरपुर और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहा है। इसी प्रकार, एनएच-130 श्रद्धालुओं को रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर से जोड़ने के साथ-साथ अंबिकापुर के रास्ते छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के नैसर्गिक सौंदर्य तक पहुँचने का सुगम मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं एनएच-30 छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम और गंगरेल बांध को राजधानी से जोड़ता है। बस्तर के पर्यटन केंद्रों तक पहुँचना भी अब बेहद आसान हो गया है। वहीं, एनएच-149बी के माध्यम से कोरबा के सतरेंगा, कोसगाई, मडवारानी और चांपा के प्रसिद्ध कोसा केंद्र व स्थानीय मंदिरों तक पहुँचना अब सुगम हो गया है। अब पर्यटकों को राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से विश्वस्तरीय सड़कों की सुविधा मिल रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की नई संभावनाएं जागृत हुई हैं।

सड़कों के साथ संरक्षण और सामाजिक सरोकार

एनएचएआई का लक्ष्य केवल कांक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना भी है। इसी कड़ी में बिलासपुर के भेलमुड़ी और रतनपुर में 'केटल शेल्टर' का निर्माण किया जा रहा है। राजमार्गों पर पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण की दिशा में यह एक अनूठी और संवेदनशील पहल है, जो सड़क सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है।

 “मजबूत सड़कें किसी भी राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। एनएचएआई और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे उद्योग, कृषि, खनन और पर्यटन सभी क्षेत्रों को नई गति मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी ने दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है और रोजगार, निवेश व व्यापार के नए अवसर पैदा किए हैं। यही सड़कें आज छत्तीसगढ़ की प्रगति की पहचान बन रही हैं।” - मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

“छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग केवल रास्ते नहीं, बल्कि विकास के कॉरिडोर बन चुके हैं। एनएचएआई द्वारा निर्मित आधुनिक सड़कें, फ्लाईओवर और आर्थिक गलियारे शहरों का दबाव कम कर रहे हैं और औद्योगिक निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से समय, ईंधन और लागत की बचत हो रही है, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। यह सड़क नेटवर्क छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव है।” - उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव

लंबे समय तक मोबाइल के इस्तेमाल से याददाश्त, एकाग्रता और मूड पर नकारात्मक असर पड़ता है-डॉ. युगल

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जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम थकान, तनाव और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा देता है

शिशु संस्कार में बच्चों-अभिभावकों को मोबाइल लत से बचाने जागरूकता कार्यक्रम

महासमुंद- आस्था वेलफेयर सोसायटी महासमुंद ने शिशु संस्कार स्कूल महासमुंद के साथ मिलकर कल शनिवार को शाला में मोबाइल नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता,पोस्टर प्रदर्शनी समेत मोबाइल के उपयोग को लेकर एक कार्यशाला का आयेजन किया गया जिसमें बच्चों तथा उनके पालकों ने भी हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम मिडिल स्कूल के बच्चों को लिए आयेजित था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सोहम अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर युगल चंद्राकर थे। अध्यक्षता स्कूल के संचालक पारस चोपड़ा था। विशेष अतिथि तथा वक्ता के रूप में पुलिस विभाग से चित्रलेखा नवरंगे, समाज कल्याण विभाग से अनिल कोसरिया, पत्रकारों की ओर से उत्तरा विदानी, आस्था संस्था की ओर से तारिणी चंद्राकर व साथी तथा प्राचार्य अवनीश वाणी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। पश्चात कार्यक्रम के अध्यक्ष अतिथि पारस चोपड़ा ने कहा कि बच्चे और पालक दोनों को स्कूल के नियमों का पालन करते हुए बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए। बच्चे में यदि किसी भी तरह की लत देखें तो पालक तत्काल एक्टिव हो जाएं और बच्चे को शांत मन से उस लत से छुटकारे की पहल करें। यदि शिक्षकों के सहयोग की जरूरत पड़े तो स्कूल पहुंचकर शिक्षकों से सहयोग लें। अपने बच्चे को नित्य प्रति स्कूल भेजें और अपने बच्चे के हर एक्टिविटीज पर ध्यान दें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर युगल चंद्राकर ने बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया कि मोबाइल किस तरह हमारे दिमाग पर असर करता है। उन्होंने बताया कि आज के समय में मोबाइल  फोन बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। स्कूल से घर तक खेलकूद से पढ़ाई तक, सब कुछ अब स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमने लगा है। कहा कि रिसर्च से पता चलता है कि मोबाइल की गलत आदतें बच्चों के दिमाग और ग्रोथ को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने सरल भाषा में बताया कि मोबाइल के बुरे प्रभाव कौन-कौन से हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

उन्होंने उपस्थित बच्चों और पालकों को बताया कि बच्चों के स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल डिवाइस पर बिताया गया समय उनके दिमाग की ग्रोथ, ध्यान, याददाश्त और व्यवहार पर असर डाल सकता है। एक बड़ी समीक्षा में यह पाया गया है कि मोबाइल और डिजिटल तकनीक बच्चों के दिमाग के प्रि.फ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्से को प्रभावित करती है, जो एक्जीक्यूटिव फंक्शन्स जैसे कि प्लान बनाना, निर्णय लेना और ध्यान बनाए रखना आदि को कंट्रोल करता है। लगातार मोबाइल फ ोन का इस्तेमाल दिमाग की फोकस क्षमता को कमजोर करता है। ब्लू लाइट नींद की गुणवत्ता बिगाड़ती है और लंबे समय तक इस्तेमाल से याददाश्त, एकाग्रता और मूड पर नकारात्मक असर पड़ता है। जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम थकान, तनाव और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा देता है।

समाज कल्याण विभाग से अनिल कोसरिया ने बताया कि बच्चों को मोबाइल से जो नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कतई संभव नहीं है। सबसे जरूरी बच्चों को मोबाइल की लत से छुटकारा है। अब हालात क्फी बिगड़ चुका है ऐसे में हमें खासकर पालकों को बच्चे तमाम गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनके साथ स्नेह से पेश आने की जरूरत है।

स्कूल के प्राचार्य अवनीश वाणी ने बच्चों को बताया कि मोबाइल भस्मासुर है। वह जिस किसी के हाथ में आता है, वह अपना आपा खो देता है। उन्होंने शिवजी और भस्मासुर वाली अध्याय को जोडक़र बच्चों के बीच प्रस्तुत करते कहा कि मोबाइल देखना गलत नहीं है. उसे आदत में शामिल करना गलत है। जब वह हमारी आदत में शामिल हो जाता है तो हमारा नींद, चैन सब कुछ छीन लेता है और यहांत क हम आत्महत्या तक की बात सोच लेते हैं। उन्होंने गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन से बड़ा कुछ भी नहीं होता। आपके हाथ में रहने वाले मोबाइल फोन आपसे स्मार्ट कभी नहीं हो सकता। हमारा हर बच्चा मोबाइल से कहीं अधिक स्मार्ट है लेकिन दु:खद यह है कि बच्चा खुद के बजाय मोबाइल को स्मार्ट समझकर उससे दोस्ती कर लेता है। वह आपका दोस्त नहीं है। वह सिर्फ भस्मासुर है।  

पुलिस विभाग से चित्रलेखा नवरंगे ने बच्चों को बताया कि किस तरह बच्चे मोबाइल के आदी होकर छोटे-बड़े अपराध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तो शराब, जुआ, सिगरेट से अधिक मोबाइल के चलते गैरकानूनी काम हो रहा है। जिले के कई बच्चे मोबाइल के लत में फंसकर ही गैर कानूनी काम कर रहे ह। लिहाजा पुलिस विभाग ने स्कूलों में जाकर बच्चों को अन्य नशे की तरह मोबाइल के नशे से छुटकारे के लिए भी जागरुकता कार्यक्रम चला रही है।

समाजसेवी तारिणी चंद्राकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि बच्चों के  ळिए खास पहल किया जाए। बच्चों के बच्चों को माता पिता साथ मिले, यह उनका अधिकार है। जब बच्चे अकेले महसूस करते हैं तो तरह-तरह के लत की ओर झुकाव हो जाता है। जो बड़े बुजुर्ग है, वे भी तब ही बच्चों पर ध्यान देना शुरू करते हैं जब उनका बच्चा किसी न किसी नशे तरह की लत में धंस चुका होता है। ऐसे में बच्चों का असामाजिक होना स्वाभाविक है। जिस समाज में मां बाप भाई बहन समाज के लोग होते हैं, वे ही खुद बच्चों पर ध्यान नहीं देते और बच्चे के संतुलन खो जाने पर उसे असामजिक कहते हैं।

पत्रकार उत्तरा विदानी ने कहा कि पालकों ने खुद ही बच्चों को समय देना छोड़ दिया है और चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे जाकर समाज और परिवार का नाम रौशन करे। जबकि हर पालक को अपने बच्चे का बेस्ट दोस्त बन जाना चाहिए। पालक स्कूल के भरोसे अपने बच्चे को छोडक़र खुद ही मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। बच्चा अकलेपन से ऊबकर मोबाइल से दोस्ती कर लेता है। उसका बुझा हुआ दिमाग मोबाइल से दोस्ती कर लेता है और जो दशा है वह साफ है। हर बच्चा अपने मां बाप और गुरुजनों से सीखता है। गुरू तो श्रृष्टि के शुरुआत से ही समाज निर्माण का कर्तव्य निभा रहा है लेकिन समय बजल चुका है। मोबाइल के प्रवेश के बाद पालकों ने लगभग अपनी जिम्मेदारी खत्म कर दी है। ऐसे में सिर्फ गुरुओं से ही श्रेष्ठ समाज की कल्पना बेईमानी है। पालकों को अपने बच्चे के साथ बच्चा बनना पड़ेगा। सच मानिये कि अपने बच्चे से बढिय़ा दोस्त कोई नहीं हो सकता।

इस दौरान बच्चों के लिए पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी हुई जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ स्थान प्राप्त बच्चों को सोहम हास्पीटल तथा आस्था वेलफेयर संस्था की ओर से पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम का संचालन तारिणी चंद्राकर भावना बजाज ने किया। इस अवसर पर आस्था संस्था से निरंजना, अर्चना, जय शोभा शर्मा, तुषार चंद्राकर तथा स्कूल स्टाफ मौजूद थे।

शुल्क कटौती और डिजिटल सहयोग से भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में नया अध्याय

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 प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुँच मिली

  • वस्त्र एवं परिधान पर शुल्क 50% से घटाकर 18%, जबकि रेशम पर 0% शुल्क

  • मशीनरी निर्यात पर शुल्क घटाकर 18%, जिससे 477 अरब डॉलर के बाजार में अवसर

  • 1.36 अरब डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात पर शून्य अतिरिक्त शुल्क

  • मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे और प्रोसेस्ड फूड पर शून्य शुल्क

  • डेयरी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित

  • 232 सेक्शन टैरिफ में भारत को विशेष तरजीही लाभ

भारत को क्या मिला?

  • 900 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर 18% प्रतिस्पर्धी शुल्क दर

  • 150 अरब डॉलर के आयात पर शून्य शुल्क

  • 720 अरब डॉलर के आयात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं

  • 350 अरब डॉलर के आयात पर छूट जारी

  • 232 टैरिफ पर विशेष तरजीही व्यवहार

परिचय

भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में स्थायी तरजीही पहुँच मिलेगी। समझौते में व्यापक शुल्क कटौती, बड़े उत्पाद वर्गों में शून्य शुल्क, डिजिटल और तकनीकी सहयोग तथा किसानों, MSME और घरेलू उद्योग की सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं।

2024 में भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 86.35 अरब डॉलर था, जिसे यह समझौता वस्त्र, चमड़ा, आभूषण, कृषि, मशीनरी, होम डेकोर, फार्मा और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में नई प्रतिस्पर्धी बढ़त देगा।

शुल्क कटौती से भारतीय निर्यात को लाभ

पारस्परिक शुल्क में बड़ी राहत

पहले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क था।

  • 30.94 अरब डॉलर के निर्यात पर शुल्क 50% से घटाकर 18%

  • 10.03 अरब डॉलर के निर्यात पर शुल्क 0%
    ➡️ इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे।

अतिरिक्त शुल्क से छूट

  • 1.04 अरब डॉलर के निर्यात को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं

  • कृषि निर्यात के 1.035 अरब डॉलर को पूर्ण शुल्क छूट

सेक्शन 232 टैरिफ राहत

  • 28.30 अरब डॉलर के उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क शून्य

प्रमुख क्षेत्रों को लाभ

वस्त्र एवं परिधान

  • शुल्क 50% → 18%

  • रेशम पर 0% शुल्क

  • रेडीमेड कपड़े, कालीन, कपास, बेडशीट, पर्दे आदि को बड़ा लाभ

चमड़ा और फुटवियर

  • शुल्क 50% → 18%

  • चमड़ा और जूते के निर्यात में बड़ी वृद्धि की संभावना

रत्न एवं आभूषण

  • शुल्क 50% → 18%

  • हीरे, प्लैटिनम और सिक्कों पर 0% शुल्क

होम डेकोर

  • फर्नीचर, लैंप, कुशन, सजावटी वस्तुओं को लाभ

खिलौने

  • शुल्क घटाकर 18%

  • MSME को वैश्विक सप्लाई चेन में अवसर

मशीनरी

  • शुल्क 50% → 18%

  • 477 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार में प्रवेश आसान

कृषि क्षेत्र: अवसर और सुरक्षा

शून्य शुल्क कृषि निर्यात (1.36 अरब डॉलर)

लाभान्वित उत्पाद:

  • मसाले, चाय, कॉफी

  • नारियल तेल, मेवे, फल-सब्जियां

  • अनाज, बेकरी उत्पाद, कोको

  • फल जूस, जैम और प्रोसेस्ड फूड

संवेदनशील कृषि क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित

  • दूध, मांस, पोल्ट्री

  • अनाज, दालें, तेल बीज

  • GM खाद्य, शराब, तंबाकू
    किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं।

औद्योगिक निर्यात पर 38 अरब डॉलर का शून्य शुल्क

  • विमान पार्ट्स, फार्मा, मशीनरी

  • हीरे, घड़ियाँ, रसायन, लकड़ी, रबर उत्पाद

डिजिटल और टेक्नोलॉजी सहयोग

  • सेमीकंडक्टर, AI चिप्स, डेटा सेंटर तकनीक तक आसान पहुँच

  • डिजिटल इंडिया को मजबूती

  • क्लाउड, फिनटेक, AI, हेल्थ-टेक में निवेश बढ़ेगा

स्वास्थ्य और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर

  • उन्नत मेडिकल उपकरणों तक बेहतर पहुँच

  • सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

रणनीतिक साझेदारी

यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति देगा।
➡️ निर्यात बढ़ेगा
➡️ उद्योग मजबूत होंगे
➡️ किसानों और MSME की सुरक्षा रहेगी
➡️ डिजिटल और तकनीकी विकास को गति मिलेगी

निष्कर्ष

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता भारत के लिए ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है। यह विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाते हुए भारत को निर्यात आधारित आर्थिक वृद्धि और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाता है।


11 फरवरी को साय कैबिनेट की अहम बैठक, बड़े फैसलों की आहट

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् (कैबिनेट) की एक अहम बैठक बुधवार, 11 फरवरी को सुबह 11 बजे आयोजित की जाएगी। यह बैठक नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी। माना जा रहा है कि बैठक में राज्य के विकास, नीतिगत निर्णयों और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी।


इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बस्तर पंडुम 2026 को लेकर एक वीडियो संदेश साझा किया। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को “परंपरा, पहचान और गौरव का उत्सव” बताते हुए कहा कि यह महोत्सव बस्तर की समृद्ध लोक परंपराओं, कला और संस्कृति को न केवल राज्य बल्कि विश्व मंच पर पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बस्तर पंडुम की संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ हुआ, जो इस महोत्सव की ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सुशासन सरकार के संकल्प से यह आयोजन बस्तरिया संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत और निर्णायक कदम है।

राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अहम इस दौर में, जहां एक ओर साय कैबिनेट की बैठक से बड़े फैसलों की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर बस्तर पंडुम 2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने का प्रतीक बनता नजर आ रहा है।

बस्तर पंडुम 2026-माँ दंतेश्वरी की धरती पर संस्कृति का उत्सव: बस्तर पंडुम 2026 ने जीता दिल

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सुकमा के जनजातीय वेशभूषा ने बिखेरा जलवा

गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

गुंजन नाग और किरण नाग ने बढ़ाया जिले का मान

जगदलपुर- बस्तर की आत्मा, उसकी परंपराएं और उसकी जनजातीय पहचान—इन सबका भव्य उत्सव बनकर उभरा “बस्तर पंडुम 2026” न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि यह सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनजातीय संरक्षण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बना। लाल बाग मैदान में हुए इस ऐतिहासिक समापन समारोह ने पूरे देश का ध्यान बस्तर की गौरवशाली विरासत की ओर आकृष्ट किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की परिकल्पना को प्रशासन ने पूरी निष्ठा के साथ साकार किया। यह आयोजन उन परंपराओं के लिए संजीवनी साबित हुआ, जो समय के प्रवाह में विलुप्त होने की कगार पर थीं। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, जनजातीय वेशभूषा, खानपान और शिल्प—सब कुछ अपने मूल स्वरूप में सहेजा गया, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

सुकमा बना सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

सुकमा जिला प्रशासन ने इस आयोजन में उत्कृष्ट समन्वय, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का परिचय दिया।  जिले के कलाकारों ने बस्तर की आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया। छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल सुकमा, बल्कि पूरे बस्तर का मान बढ़ाया। 

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर देश के गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया गया, जो शासन की कलाकारों के प्रति सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।

सहभागिता ने रचा इतिहास

सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंच और अवसर जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहे हैं। यह सहभागिता केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक रही।

विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण

बस्तर पंडुम 2026 यह स्पष्ट संदेश देता है कि श्री विष्णु देव साय सरकार का विकास मॉडल केवल सड़कों, भवनों और योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक आत्मसम्मान को समान महत्व देता है। यह आयोजन साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व दूरदर्शी, तो विकास और परंपरा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 का समापन,सुकमा के जनजातीय नाट्य ने बिखेरा जलवा

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मुड़िया जनजाति पर आधारित नाट्य का मंचन

गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

जगदलपुर- बस्तर संभाग की गौरवशाली संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण हेतु आयोजित 'बस्तर पंडुम 2026' में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित इस भव्य संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सुकमा के जनजातीय नाट्य दल विधा को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

देश के गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा के कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बस्तर के पारंपरिक नृत्य, गीत, खानपान, शिल्प और आंचलिक साहित्य के मूल स्वरूप को सहेजना और स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। प्रशासन की इस पहल से न केवल विलुप्त हो रही विधाओं को संजीवनी मिल रही है, बल्कि जनजातीय समूहों के सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

सुकमा के कलाकारों ने जीती प्रतियोगिता

कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर के कुशल प्रबंधन में सुकमा जिले से 12 विधाओं के कुल 69 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

प्रथम स्थान कोंटा विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत कोंडासांवली के आश्रित गांव पारला गट्टा की टीम ने नाट्य विधा में बाजी मारी।

कला का जीवंत चित्रण

मुड़िया जनजाति के 13 सदस्यीय दल (9 पुरुष, 4 महिला) ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे ताड़ का पत्ता, मयूर पंख, तीर-धनुष और मछली पकड़ने के जाल का कलात्मक प्रयोग कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इन कलाकारों ने बढ़ाया जिले का गौरव

कोंटा विकासखंड में स्थित पारला गट्टा निवासी कलाकार लेकम लक्का, प्रकाश सोड़ी, विनोद सोड़ी, जोगा सुदाम और उनकी टीम ने अपनी प्रतिभा से सुकमा जिले को गौरवान्वित किया है। कलाकारों की इस सफलता में नोडल अधिकारी मनीराम मरकाम और पी श्रीनिवास राव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने कलाकारों को संभाग स्तर तक पहुंचाने और प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई।


स्कूली बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित हुए केंद्रीय गृह मंत्री शाह , ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह

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 रायपुर : संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।


समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर  अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया।


कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा *मलखंभ प्रदर्शन* भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री  शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।



इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।

Valentine Week में ‘फिल्मी रोमांस’ ! NH-30 पर चलती बाइक पर कपल का खतरनाक स्टंट, वीडियो वायरल

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 कांकेर। वैलेंटाइन वीक की शुरुआत के साथ ही कांकेर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। NH-30 पर चलती बाइक पर सवार एक युवा जोड़े ने पब्लिक रोड को मानो फिल्मी सीन का सेट बना दिया।


चलती बाइक पर रोमांस करते हुए और खतरनाक स्टंट दिखाता यह कपल न केवल अपनी जान जोखिम में डालता नजर आया, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन गया।

यह पूरी घटना किसी राहगीर के मोबाइल कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हैरानी की बात यह है कि लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और जागरूकता अभियानों के बावजूद, ट्रैफिक नियमों को लेकर लापरवाही कम नहीं हो रही।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक व्यवहार बताते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर बाइक सवार की पहचान में जुट गई है। पहचान होने पर मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के अनुसार, इस तरह खतरनाक तरीके से वाहन चलाना और सड़क पर स्टंट करना दंडनीय अपराध है।

CG NEWS : 1 रुपये में सोनोग्राफी सेवा, महाशिवरात्रि से होगी शुरुआत

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 भिलाई। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रिकेश सेन ने क्षेत्र की महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक सराहनीय पहल की है। विधायक सेन ने गर्भवती महिलाओं के लिए मात्र 1 रुपये में सोनोग्राफी सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का शुभारंभ 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर किया जाएगा।


योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को जीरो रोड, शांति नगर स्थित विधायक कार्यालय में अवकाश दिवस को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक टोकन लेना होगा। टोकन प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड और चिकित्सक द्वारा जारी रेफर पर्ची अनिवार्य होगी। टोकन मिलने के बाद गर्भवती महिलाएं मात्र 1 रुपये में सोनोग्राफी करा सकेंगी।

इसी दिन एक और जनहितकारी योजना की शुरुआत की जा रही है, जिसके तहत जरूरतमंद मरीजों को 1 रुपये में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा विधायक कार्यालय में 25 दिसंबर से लगातार फ्री ब्लड टेस्ट सुविधा भी जारी है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन 31 प्रकार के जांच परीक्षण निःशुल्क किए जा रहे हैं।

विधायक रिकेश सेन ने यह भी घोषणा की है कि 2 अप्रैल से लोगों को मात्र 1 रुपये में पावर वाला चश्मा उपलब्ध कराने की योजना शुरू की जाएगी।

विधायक सेन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता है कि आमजन, विशेषकर महिलाएं और जरूरतमंद वर्ग, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अगर देर हो जाती तो… रायपुर में चलती कार में लगी भीषण आग

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाके में रविवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रिंग रोड पर अग्रसेन चौक के पास चलती सुमो ग्रैंड कार अचानक धू-धू कर जलने लगी। कुछ ही पलों में गाड़ी आग का गोला बन गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।


झारखंड के रहने वाले थे कार सवार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार में सवार सभी लोग झारखंड के निवासी थे और रायपुर से होकर गुजर रहे थे। इसी दौरान अचानक कार के इंजन से धुआं उठने लगा। चालक कुछ समझ पाता, उससे पहले ही आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। हालात की गंभीरता को भांपते हुए कार सवारों ने तुरंत दरवाजे खोले और बाहर कूदकर अपनी जान बचाई।

देखते ही देखते जलकर खाक हुई कार

घटना की सूचना मिलते ही तेलीबांधा थाना पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि सुमो ग्रैंड पूरी तरह जलकर खाक हो गई। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे बाद में पुलिस ने सामान्य कराया।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

सावधानी की अपील

पुलिस और विशेषज्ञों ने वाहन चालकों से अपील की है कि गर्मी या लंबी यात्रा के दौरान वाहन की वायरिंग, कूलेंट और इंजन की नियमित जांच कराएं। यदि चलते समय वाहन से धुआं या जलने की गंध आए, तो तुरंत गाड़ी सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर बाहर निकलें और मदद के लिए संपर्क करें।

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