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छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।


एक परिवार, एक ही विज्ञापन 

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।  

सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य 

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी 

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। 

आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:- 

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। 

1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र

2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र

3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र

4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति

5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत 

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि- 

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।  

​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।  

 ​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।  

​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

सख्ती से मचा हड़कंप 

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है। 

विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं। 

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप




छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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 नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।

​ एक परिवार, एक ही विज्ञापन

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।

​ सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

​ मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

​ आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:-

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र
2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र
3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र
4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति
5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

​कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि-

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।
​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।
​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।
​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

सख्ती से मचा हड़कंप

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है।
विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं।

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप



भारत–ऑस्ट्रेलिया के बीच CSIR-TKDL समझौता, पारंपरिक ज्ञान की वैश्विक सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और आईपी ऑस्ट्रेलिया (IP Australia) ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान CSIR की ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (CSIR-TKDL) तक पहुंच प्रदान करने संबंधी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुए द्विपक्षीय विचार-विमर्श के 18 प्रमुख परिणामों में से एक है। दोनों देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

क्या है TKDL?

ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) भारत द्वारा विकसित विश्व का पहला ऐसा डिजिटल डेटाबेस है, जिसका उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान के आधार पर गलत तरीके से पेटेंट दिए जाने को रोकना है।

इस समझौते के तहत IP Australia को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी, जिससे वह ऑस्ट्रेलिया में दायर पेटेंट आवेदनों की जांच के दौरान संबंधित पूर्व कला (Prior Art) का अध्ययन कर सकेगा। इससे पेटेंट जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी होगी तथा भारत की पारंपरिक विरासत पर अनुचित पेटेंट दिए जाने से रोकने में मदद मिलेगी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के धनी देश हैं। यह समझौता दोनों देशों की पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और बौद्धिक संपदा प्रणाली को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी IP Australia के पेटेंट आयुक्त एंड्रयू विल्किंसन, CSIR की महानिदेशक एवं DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी तथा CSIR-TKDL इकाई की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तीगेरी करेंगी।

TKDL के बारे में

वर्ष 2001 में भारत सरकार द्वारा CSIR और आयुष मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्थापित ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) दुनिया का पहला ऐसा डेटाबेस है, जिसे पारंपरिक ज्ञान की रक्षात्मक सुरक्षा (Defensive Protection) के लिए विकसित किया गया।

इस डेटाबेस में वर्तमान में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और योग से संबंधित 5.2 लाख से अधिक औषधीय सूत्रों और पारंपरिक प्रथाओं का विवरण उपलब्ध है। इसे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश सहित पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवादित किया गया है ताकि विश्वभर के पेटेंट परीक्षक इसका उपयोग कर सकें।

ऑस्ट्रेलिया के साथ इस समझौते के बाद अब 18 देशों के पेटेंट कार्यालयों को गोपनीयता समझौते (NDA) के तहत TKDL तक पहुंच प्राप्त हो चुकी है।

TKDL ने अब तक दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदनों को रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लेने या निरस्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह भारत की पारंपरिक ज्ञान संपदा की वैश्विक स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन, मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज कोयंबटूर में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence - CoE) का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पश्चात राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के वरिष्ठ नीति-निर्माता, वन प्रबंधक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और संरक्षण क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

अपने मुख्य संबोधन में भूपेंद्र यादव ने कहा कि आवास क्षेत्रों के विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष भारत की प्रमुख संरक्षण और विकास संबंधी चुनौतियों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा, "हमें समस्या-केंद्रित नहीं, बल्कि समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और आधुनिक तकनीकी प्रगति का उपयोग करना चाहिए।"

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में की गई घोषणा के अनुरूप स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र मानव–वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, क्षमता निर्माण तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

यादव ने कहा कि संस्थान को टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े मानव–वन्यजीव संघर्षों के प्रबंधन हेतु नीति निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मानव–वन्यजीव मुठभेड़ों से निपटने के लिए मिशन मोड में जनजागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। क्षेत्र-विशिष्ट और प्रजाति-विशिष्ट उपाय अपनाकर ऐसे संघर्षों का समाधान किया जा सकता है, जिससे समाज में फैलने वाली घबराहट को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने देशभर के वन विभागों से भी अपील की कि वे मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय एवं निवारक उपाय अपनाएं। इसके लिए स्थानीय समुदायों के साथ समन्वित और बहु-हितधारक परामर्श आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर नवाचारी सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित और व्यापक रूप से लागू किया जाना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, "पारिस्थितिकीय स्थिरता के लिए संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य हमारा मंत्र होना चाहिए।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता के कारण मानव–वन्यजीव संपर्क बढ़ा है, जो अब संरक्षण के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक मुद्दा भी बन गया है और आजीविका पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए दीर्घकालिक समाधान खोजने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और समुदायों के क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह उन्नत तकनीकों के माध्यम से डेटा दस्तावेजीकरण तथा वन्यजीव संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को बढ़ावा देगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूती मिलेगी।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल मंच देशभर में संघर्ष प्रबंधन के लिए डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझाकरण और निर्णय समर्थन प्रदान करेगा। इसके साथ ही "भारत में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन" शीर्षक प्रकाशन श्रृंखला के प्रथम संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें देश में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति, रुझानों और उभरती चुनौतियों का व्यापक आकलन प्रस्तुत किया गया है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया तथा विशेषज्ञ प्रस्तुतियों और पैनल चर्चाओं का आयोजन हुआ। चर्चा के प्रमुख विषय रहे:

  • मानव–हाथी संघर्ष

  • मानव–बड़ी बिल्ली (बाघ एवं तेंदुआ) संघर्ष

  • मानव–वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण में प्रौद्योगिकी और नवाचार

इन विचार-विमर्शों से राष्ट्रीय रणनीतियों को सुदृढ़ करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने और मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव प्राप्त होंगे।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना जैव विविधता संरक्षण और मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए भारत सरकार की विज्ञान-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और समुदाय-केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक, मंत्रालय एवं राज्य वन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

'अटेंशन की होड़ में भ्रामक खबरें लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय' : जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल

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रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में मीडिया की बदलती चुनौतियों, जिम्मेदार पत्रकारिता और प्रेस क्लब के विकास पर हुई चर्चा

रायपुर- डिजिटल युग में तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी पर गंभीर मंथन करते हुए जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि 'अटेंशन की होड़ में मिसलीडिंग (भ्रामक) खबरों का बढ़ना लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है।' 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में तथ्यपरक, संतुलित औरजिम्मेदार पत्रकारिता ही मीडिया की सबसे बड़ी ताकत है। वे रायपुर प्रेस क्लब के 'हमर पहुना' कार्यक्रम में पत्रकारों से संवाद कर रहे थे, जहां रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों ने भी मीडिया और जनसंपर्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और सतत संवाद को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और पत्रकारों की उपस्थिति में मीडिया की वर्तमान चुनौतियों, पत्रकारिता के मूल्यों तथा प्रेस क्लब के विकास को लेकर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।


नारायणपुर की अनूठी पहल: ट्रैक्टर से दुर्गम वनांचल गांवों तक पहुंचा 3 माह का राशन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न और पोषण सामग्री पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष रणनीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश है कि राज्य के पहुच विहीन क्षेत्रों में वर्षा व भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर राशन दुकानें खोलना, ट्रैक्टर के माध्यम से डोर-स्टेप डिलीवरी और मॉनसून से पहले तीन महीने का अग्रिम राशन भंडारण करने के निेर्दश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में नारायणपुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक विशेष और सराहनीय पहल की है। बारिश के मौसम और कठिन रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैक्टरों के माध्यम से अंदरूनी गांवों तक तीन माह का खाद्यान्न सुरक्षित पहुंचाया है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित छह गांवों मुरुमवाड़ा, गुडेकोर, दिवालूर, धोबे, बोटेर और हरबेल के राशनकार्डधारी हितग्राहियों को जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह का राशन एक साथ वितरित किया गया।

6 गांवों के 151 परिवारों को मिला लाभ

खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम क्षेत्रों में बसे कुल 151 राशनकार्डधारी परिवारों को उनकी निर्धारित मात्रा में तीन महीने का खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। लाभान्वित गांवों और परिवारों में मुरुमवाड़ा के 98 परिवार, दिवालूर के 32 परिवार, गुडेकोर के 13 परिवार, धोबे के 03 परिवार, हरबेल के 03 परिवार, बोटेर के 02 परिवार शामिल हैं।

बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को दी मात

इन वनांचल गांव घने जंगलों, कच्चे रास्तों और नदी-नालों से घिरे होने के कारण सामान्य दिनों में भी परिवहन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को राशन के लिए कई किलोमीटर की पैदल और जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ती थी। इस समस्या को भांपते हुए जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान राशन सामग्री को सीधे ट्रैक्टर के जरिए गांवों तक भिजवाया, जिससे ग्रामीणों को अपने घर के पास ही राशन मिल गया।

बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को मिली बड़ी राहत

खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में अत्यंत पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई गई। गांव में ही राशन मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस पहल से उनके समय और श्रम दोनों की बचत हुई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग हितग्राहियों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं रही, क्योंकि उन्हें अब राशन के लिए कठिन रास्तों से होकर नहीं गुजरना पड़ा।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य

इस संबंध में जिला प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद परिवार तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। इसके लिए दुर्गम क्षेत्रों में विशेष परिवहन व्यवस्था की कार्ययोजना पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि भौगोलिक कठिनाइयां भी जनता तक उनका हक पहुंचाने में बाधा नहीं बन सकतीं।

सुशासन के संकल्प को मिली नई मजबूती, आरंग विधानसभा को 128 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आरंग विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत समोदा में आयोजित कार्यक्रम में 128 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।


मुख्यमंत्री साय ने ग्राम पंचायत रीवा में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम निर्माण, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय समोदा में अहाता निर्माण, नगर पंचायत समोदा के पंचायत भवन में प्रथम तल निर्माण तथा ग्राम तुलसी के हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी विद्यालय में उन्नयन की घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन, विकास और जनकल्याण ही हमारी सरकार की पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि "मोदी की गारंटी, यानी गारंटी पूरा होने की गारंटी" केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार की कार्यशैली और जनविश्वास का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है तथा महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 28 किश्तों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी सोच के साथ बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन स्थापित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद, बीज एवं कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए सेवा सेतु के माध्यम से 520 से अधिक शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के जरिए शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सहकारिता, महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। उन्होंने नागरिकों से शासन की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ा दी गई है। पात्र उपभोक्ता "मोर बिजली" मोबाइल एप अथवा वेबसाइट के माध्यम से सितंबर तक पंजीयन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।

कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आरंग विधानसभा क्षेत्र को अब तक 858 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन की नई दिशा स्थापित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान के अंतर्गत आंवला का पौधारोपण किया। उन्होंने सरस्वती साइकिल योजना के तहत कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल वितरित की तथा जिला प्रशासन के मिशन उत्कर्ष के अंतर्गत उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अवैध उर्वरक परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 240 बोरी जैविक खाद जब्त

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रायपुर। किसानों के हितों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ में अवैध उर्वरक परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले में कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन किए जा रहे 240 बोरी जैविक खाद से भरे एक ट्रक को जब्त किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 08 जुलाई को थाना बसंतपुर पुलिस को अवैध उर्वरक परिवहन की सूचना मिली। सूचना के आधार पर वाहन क्रमांक सीजी-04 पीयू-5217 की जांच की गई। जांच के दौरान चालक जैविक खाद के परिवहन संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने वाहन को अभिरक्षा में लेकर कृषि विभाग को सूचित किया।

कृषि विभाग की टीम द्वारा वाहन का निरीक्षण करने पर उसमें 240 बोरी जैविक खाद परिवहन करते हुए पाया गया। नियमानुसार खाद का नमूना लेकर परीक्षण के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में उक्त जैविक खाद हरियाली एग्रो, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा निर्मित होना पाया गया, जिस पर निर्माण माह मई 2026 अंकित है।कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त उपस्थिति में वाहन को जब्त कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की गई है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि प्रकरण में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं प्रचलित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा अवैध उर्वरक के परिवहन एवं विक्रय पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से जिले में जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। 

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले तत्वों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

डुमरतराई थोक बाजार फेस-2 का नाम 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर, परिसर में स्थापित होगी 15 फीट ऊंची प्रतिमा - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के डुमरतराई में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित नवीन थोक बाजार फेस-2 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि परिसर का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर किया जाएगा तथा यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर उनकी 15 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की मजबूत नींव रखी। उनके नाम पर इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का नामकरण राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और रोजगार एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना विकसित होती है, वहां आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, नए निवेश आकर्षित होते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। डुमरतराई का यह आधुनिक थोक बाजार रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापार को नई गति देगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था तथा आधुनिक व्यापारिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ लिविंग' को भी समान महत्व दे रही है। व्यापार, उद्योग और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अनेक सुधार लागू किए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की अधोसंरचना विकास परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा अपनाई गई नई कार्यसंस्कृति और कुशल प्रबंधन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति देंगे।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में व्यापारिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में डुमरतराई में आधुनिक थोक बाजार की जो परिकल्पना की गई थी, वह आज साकार हुई है। इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम होगी।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि नवीन थोक बाजार मंडल की गुणवत्ता, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना प्रदेश में व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि डुमरतराई थोक बाजार का विकास दो चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए। द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिली है।

शराब के नशे में स्कूल पहुंचे हेडमास्टर! VIDEO वायरल होते ही मचा बवाल, शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

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 सूरजपुर। जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल से सामने आए कथित वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक हेडमास्टर स्कूल परिसर में कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है तथा मामले में सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।


जानकारी के अनुसार, मामला रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम शाल्ही स्थित खोरखोरीपारा प्राथमिक स्कूल का है। यहां पदस्थ हेडमास्टर हरिनंदन सिंह पर आरोप है कि वे स्कूल समय के दौरान शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे।

वायरल वीडियो में हेडमास्टर कथित रूप से स्कूल परिसर में जमीन पर लेटे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वे स्वयं को संभालने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं और आसपास मौजूद लोगों से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए भी नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि जहां बच्चों का भविष्य संवरता है, वहां इस तरह की घटना बेहद गंभीर है। उन्होंने दोषी पाए जाने पर संबंधित हेडमास्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इधर, शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

छत्तीसगढ़ में अब कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित

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 रायपुर : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ शासन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी विद्यालयों में कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 6 वर्ष निर्धारित कर दी है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संबंधित विभागों और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।


1 अप्रैल की स्थिति में तय होगी उम्र, अलग-अलग कक्षाओं के लिए ये हैं नियम

स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, बच्चों के फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत करने और प्राथमिक स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए संबंधित शैक्षणिक सत्र के 01 अप्रैल को बच्चे की आयु के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के लिए आयु सीमा इस प्रकार निर्धारित की गई है।

नर्सरी (बालवाटिका-1)- 3 वर्ष से अधिक एवं 4 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसी प्रकार केजी-1 (बालवाटिका-2)- 4 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष से कम, केजी-2 (बालवाटिका-3)- 5 वर्ष से अधिक एवं 6 वर्ष से कम, कक्षा पहली में- 6 वर्ष से अधिक एवं 7 वर्ष से कम होनी चाहिए।

आयु सीमा में 3 महीने की विशेष छूट

अभिभावकों और बच्चों की सुविधा के लिए शासन ने नियमों में थोड़ी शिथिलता भी दी है। इसके तहत यदि कोई बच्चा 01 अप्रैल को निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पा रहा है, लेकिन 01 जुलाई तक उसकी आवश्यक आयु पूर्ण हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन माह की छूट प्रदान करते हुए संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।

सभी निजी और सरकारी स्कूलों पर नियम लागू

यह नई व्यवस्था राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगी। साथ ही, शिक्षा का अधिकार (RTE) के अंतर्गत निजी विद्यालयों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेशों पर भी यह नियम पूरी तरह प्रभावी रहेगा।

इन छात्रों को मिलेगी छूट

विभागीय निर्देशों के अनुसार, यदि कोई छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की पूर्व-प्राथमिक (Pre-Primary) कक्षा से पास होकर (प्रोन्नत होकर) सीधे कक्षा पहली में प्रवेश ले रहा है, तो उस पर यह नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे छात्रों को उनके स्थानांतरण प्रमाण-पत्र(TC), अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही प्रवेश दे दिया जाएगा।

कड़ाई से पालन और प्रचार-प्रसार के निर्देश

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और सभी शाला प्रमुखों के माध्यम से इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही, अभिभावकों की जानकारी और सुविधा के लिए इन नए प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

अब 2 घंटे में मिलेगी थायराइड का रिपोर्ट, मां पैथोलॉजी में लगी नई मशीन

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 महासमुंद। जिले के नागरिकों को अब उन्नत पैथोलॉजी सुविधा के लिए रायपुर नहीं जाना पड़ेगा। महासमुंद स्थित मां पैथोलॉजी सर्विसेज में एवरलाइफ CPC कंपनी की थायराइड की अत्याधुनिक नई मशीन स्थापित की गई है।


इस नई मशीन के माध्यम से मात्र 2 घंटे में थायराइड प्रोफाइल T3, T4, TSH, विटामिन डी, विटामिन B12 एवं अन्य हार्मोनल जांचें की जाएंगी। कम समय में सभी ब्लड टेस्ट होने से मरीजों का समय बचेगा और सही समय पर इलाज शुरू हो सकेगा। इसके पहले इन जांचों के लिए मरीजों का ब्लड सैंपल रायपुर भेजा जाता था और रिपोर्ट दूसरे दिन प्राप्त होती थी। दूर-दराज गांव से आने वाले मरीजों को भी रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन आना पड़ता था। अब यह स्थिति नहीं रहेगी और सभी रिपोर्ट 2 घंटे के भीतर मिल जाएंगी।


मां पैथोलॉजी सर्विसेज प्रबंधन का उद्देश्य महासमुंद के लोगों को तेज, सटीक और भरोसेमंद जांच सुविधा उनके अपने शहर में उपलब्ध कराना है। मशीन के संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन भी तैनात किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में अब 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। आगामी शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र का संचालन अब प्रतिवर्ष 01 अप्रैल से 31 मार्च तक किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।


वर्तमान व्यवस्था में होगा बदलाव

जारी निर्देशों के अनुसार, वर्तमान में राज्य में संचालित होने वाले 16 जून से 30 अप्रैल के शिक्षा सत्र को अब समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों और मंडलों के समान ही अब छत्तीसगढ़ में भी नया सत्र 01 अप्रैल से प्रारंभ होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा। हालांकि, छात्रों को मिलने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश में कोई कटौती नहीं की गई है; 01 मई से 15 जून तक का ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले की तरह ही यथावत रहेगा।

सत्र के पहले ही दिन मिलेंगी सभी सुविधाएं

इस नए बदलाव को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने कड़े निर्देश दिए हैं। अब से हर साल 01 अप्रैल को सत्र शुरू होने के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण, सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकलों का वितरण, स्कूली गणवेश (यूनिफॉर्म) का वितरण, अन्य सभी छात्रहितैषी योजनाएं और गतिविधियां अनिवार्य रूप से प्रारंभ कर दी जाएंगी।

शिक्षण व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी

शासन का मानना है कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र के शुरुआती दिनों से ही पढ़ाई के लिए सभी आवश्यक सामग्रियां और सुविधाएं समय पर मिल सकेंगी। इससे न केवल छात्रों का समय बचेगा, बल्कि विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण रूप से संचालित हो सकेगी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को नई मजबूती, परमाणु ऊर्जा समेत कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर

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 India Australia Agreement : भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देते हुए रक्षा, सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।


बैठक में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा वैश्विक तनावों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी माध्यम बताया।

रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है, जिससे द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने भारत को ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख सुरक्षा साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देश स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध हैं।

दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय बढ़ाने, संयुक्त सैन्य अभ्यासों को और उन्नत बनाने तथा तीनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर नियमित उच्चस्तरीय परामर्श जारी रखने का भी निर्णय लिया गया।

खेत में करंट लगने से पूर्व सरपंच की मौत, धान रोपाई की तैयारी के दौरान हुआ हादसा

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बस्तर। जिले के भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम कुम्हली में धान रोपाई की तैयारी के दौरान एक दर्दनाक हादसे में किसान एवं पूर्व सरपंच टीकम सिंह बघेल की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।


जानकारी के अनुसार, टीकम सिंह बघेल खेत में मोटर पंप का बिजली कनेक्शन जोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक करंट की चपेट में आ गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही भानपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी है।

इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों ने किसानों से बिजली संबंधी कार्य करते समय आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।

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