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'साल में 300 दिन खुलें दफ्तर' , सरकारी छुट्टियों पर उठे सवाल: मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

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 रायपुर। ​छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में मिलने वाली छुट्टियों को लेकर अब एक नई बहस छिड़ गई है। किसान मजदूर संघ (छत्तीसगढ़, रायपुर) ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरकारी दफ्तरों में छुट्टियों की संख्या कम की जाए और साल में कम से कम 300 दिन काम अनिवार्य किया जाए। संघ का मानना है कि ज्यादा छुट्टियों की वजह से आम जनता के काम रुक जाते हैं और उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।


​संघ के संयोजक ललित चन्द्रनाहू ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव विकास शील के नाम एक ज्ञापन सौंपा है।


​ छुट्टियों का गणित: साल में 125 दिन बंद रहते हैं दफ्तर

​किसान मजदूर संघ ने अपने पत्र में छुट्टियों का पूरा हिसाब-किताब दिया है। पत्र में बताया गया है कि
​शनिवार और रविवार की छुट्टियां और सप्ताह में 5 दिन के कार्य के कारण साल में 47 शनिवार और 49 रविवार (कुल 96 दिन) की छुट्टी रहती है।

सरकारी छुट्टियां: इसके अलावा 29 दिन का अन्य शासकीय अवकाश होता है।
​ अतिरिक्त अवकाश: संत रविदास जयंती जैसी नई घोषित छुट्टियों को मिलाकर साल के 365 दिनों में से करीब 125 दिन केवल छुट्टियों में निकल जाते हैं।

​ बचे हुए दिनों में भी बैठकों की वजह से अटकते हैं काम

​संघ का कहना है कि 125 दिन की छुट्टियों के बाद साल में सिर्फ 240 कार्य दिवस (Working Days) बचते हैं। लेकिन इन 240 दिनों में भी आम जनता का काम पूरी तरह नहीं हो पाता है।
​ कलेक्टर कार्यालय की टीएल बैठक: हर सप्ताह मंगलवार को यह बैठक होती है।
​ राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक: महीने के पहले और चौथे सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर यह बैठक आयोजित होती है।
​इन बैठकों के कारण महीने में लगभग 6 दिन आम जनता के सरकारी काम सही तरीके से संपादित नहीं हो पाते हैं। इसके साथ ही, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के समय, मुख्यमंत्री के जिला प्रवास के कारण तीन-तीन दिनों तक काम प्रभावित रहता है।

​ कर्मचारियों की छुट्टियों से भी काम पर असर

​पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न प्रकार के अवकाशों से भी जनहित के काम रुकते हैं:-
​कैजुअल और अर्जित अवकाश: कर्मचारियों को 13 दिन का आकस्मिक अवकाश (Casual Leave), 30 दिन का अर्जित अवकाश (Earned Leave) और 3 दिन का ऐच्छिक अवकाश मिलता है।

​ कलेक्टर द्वारा घोषित छुट्टियां: जिला कलेक्टरों द्वारा 2 अतिरिक्त और 48 अन्य अवकाश दिए जाते हैं।

​ मातृत्व और पितृत्व अवकाश: महिला कर्मचारियों को 365-365 दिनों का मातृत्व अवकाश और पुरुष कर्मचारियों को 30 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलता है।
​संघ का तर्क है कि इन सब छुट्टियों के जुड़ने से असल में केवल 192 दिन ही काम हो पाता है, जिससे आम नागरिक लगातार परेशान होते हैं।

​ किसान मजदूर संघ की प्रमुख मांगें

​जनहित को ध्यान में रखते हुए संघ ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:-

  • ​ 300 कार्य दिवस अनिवार्य हों: साल के 365 दिनों में से सरकारी कार्यालयों में कम से कम 300 दिन काम करना अनिवार्य किया जाए।
  • ​ गैर-शासकीय आयोग का गठन: छुट्टियों का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए 3 सदस्यीय गैर-शासकीय आयोग बनाया जाए।
  • ​ संविदा कर्मचारियों की तर्ज पर नियम: लाखों संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की तरह ही मातृत्व और पितृत्व अवकाश को अवैतनिक किया जाए।

​ अर्जित अवकाश में कटौती: कर्मचारियों के अर्जित अवकाश को घटाकर 13 दिन किया जाए।

​ त्योहारों की छुट्टियों की समीक्षा: शाकम्भरी जयंती, छेरछेरा, रामनवमी, महावीर जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, ईद-उल-जुहा, कबीर जयंती, हरेली, ईद-ए-मिलाद, रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका (तीज), महात्मा गांधी जयंती, महाशिवरात्रि, कर्मा जयंती और विश्व आदिवासी दिवस जैसे अवसरों की छुट्टियों को निरस्त करने अथवा ऐच्छिक अवकाश घोषित करने पर विचार किया जाए।

​किसान मजदूर संघ का कहना है कि आम जनता के हित में यह कदम उठाना बेहद जरूरी है ताकि सरकारी सेवाएं बिना किसी रुकावट के लोगों को मिल सकें।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बड़ी कार्रवाई, वन्यजीव शिकार के आरोप में 6 गिरफ्तार

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 बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन अमले ने ग्राम नीतिकाकलेर क्षेत्र में दबिश देकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान वन्यप्राणी का मांस और शिकार में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक तौर पर मांस के नीलगाय का होने की आशंका जताई जा रही है।


जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को परिक्षेत्र पासेवाड़ा के अंतर्गत नीतिकाकलेर क्षेत्र में वन विभाग को वन्यजीवों के शिकार की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और 6 संदिग्धों को पकड़ लिया।

तलाशी के दौरान वन्यप्राणी का मांस और शिकार से संबंधित सामग्री बरामद होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

बारिश और दुर्गम इलाकों के बीच भी निगरानी जारी

मानसून के दौरान लगातार बारिश, नदी-नालों में बढ़े जलस्तर और दुर्गम इलाकों में आवागमन की चुनौतियों के बावजूद इंद्रावती टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला लगातार गश्त और निगरानी कर रहा है। वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में सूचना तंत्र मजबूत करने के साथ अवैध शिकार पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।

इस कार्रवाई में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधीक्षक, फरसेगढ़-पासेवाड़ा, सेण्ड्रा, कुटरू बफर, कुटरू कोर और मद्देड़ बफर के परिक्षेत्र अधिकारियों सहित मैदानी वन अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वन विभाग ने की सूचना देने की अपील

वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि जंगल में अवैध शिकार या वन्यजीवों से जुड़ी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल नजदीकी वन विभाग कार्यालय को सूचना दें। विभाग ने कहा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

छत्तीसगढ़ में 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण, 7 हजार से ज्यादा शिक्षकों की पदोन्नति; शिक्षा मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शुक्रवार को विभागीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षक पदोन्नति और भर्ती, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण, विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश उपलब्ध कराने, बहुभाषी शिक्षा, ऑनलाइन अटेंडेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल अधोसंरचना समेत कई विषयों पर विभाग के कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।


10,538 स्कूलों का हुआ युक्तियुक्तकरण
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रदेश में 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इसके तहत 15,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का समायोजन किया गया। वहीं 453 शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय स्कूलों में भी शिक्षकों की पूर्ति की गई।

7 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में 7 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति की गई है। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478 पदों पर कुल 2,813 प्राचार्यों की पदोन्नति हुई। इसके अलावा 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति की गई।

सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक, सहायक शिक्षक से शिक्षक और शिक्षक से प्रधान पाठक के पदों पर भी पदोन्नति की गई है। विभाग ने 2,621 बीएड योग्यताधारी सहायक शिक्षकों का सहायक शिक्षक विज्ञान-प्रयोगशाला के रूप में समायोजन किया है। पदस्थापना की प्रक्रिया ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से की गई।

5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी
मंत्री ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 62 पदों पर 2025 में सीधी भर्ती की गई। पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्तियां हुई हैं।

इसके अलावा करीब 5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसमें सहायक शिक्षक के 2,292, सहायक शिक्षक प्रयोगशाला के 200, शिक्षक के 1,654 और व्याख्याता के 854 पद शामिल हैं।

CBT से होगी संविदा भर्ती परीक्षा
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय समेत अन्य संस्थाओं के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक संविदा पदों पर भर्ती के लिए Computer Based Test (CBT) व्यवस्था शुरू की गई है।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171 पदों समेत कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया जारी है। विभाग के अनुसार CBT परीक्षा का परिणाम परीक्षा के एक सप्ताह के भीतर जारी करने का लक्ष्य है।

2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए सभी स्कूलों में एक समान शैक्षणिक समय-सारणी लागू की गई है। इसमें पढ़ाई के साथ खेल, योग, नैतिक शिक्षा और संस्कार शिक्षा पर भी जोर दिया गया है।

वहीं आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 को 1 अप्रैल 2027 से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर जोर
स्कूल शिक्षा विभाग ने बहुभाषी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी है। विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने भाषा मैपिंग की है। बस्तर और सरगुजा संभाग में बच्चों की घरेलू भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सदरी जैसी भाषाओं को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस
स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है। विभागीय कार्यालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक और स्कूलों में TSK मोबाइल ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज की जा रही है।

विभाग के मुताबिक प्रतिदिन करीब 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है।

45 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें
कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। विभाग के अनुसार इससे 45,33,261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। पुस्तकों के वितरण और सत्यापन के लिए स्कैनिंग व्यवस्था का भी उपयोग किया जा रहा है।

परीक्षा परिणाम में करीब 2 प्रतिशत सुधार
मंत्री ने बताया कि सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में करीब 2 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया। परीक्षा की तैयारी के लिए संभाग स्तर पर बैठक, ब्लू प्रिंट निर्माण, अध्यापन और पालक-शिक्षक बैठकों पर जोर दिया गया।

700 स्कूलों के नए भवनों का प्रावधान
पिछले तीन वर्षों में 504 नए स्कूलों को स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन स्कूलों के लिए नए भवन का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 अतिरिक्त कक्षों को भी मंजूरी दी गई।

स्कूलों के शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52.39 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विभाग का लक्ष्य प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक ऐसा विद्यालय स्थापित करना है।

बस्तर में बंद स्कूल फिर खुले
मंत्री ने बताया कि बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद 48 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है, जबकि 36 नए स्कूल भी खोले गए हैं।

बस्तर संभाग में द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

AI से होगी स्कूलों की मॉनिटरिंग
स्कूल शिक्षा विभाग ने AI आधारित विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित किया है। इसके माध्यम से स्कूलों की अधोसंरचना, पीएम पोषण, HRMIS और बुनियादी शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।

विभाग के अनुसार पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से करीब 40 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

PVTG बच्चों के लिए आवासीय सुविधा
प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय और छात्रावासों में करीब 33 हजार बच्चों को सुविधा मिल रही है।

कुल मिलाकर स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती-पदोन्नति, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण, डिजिटल तकनीक, बहुभाषी शिक्षा, अधोसंरचना और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर विभिन्न उपलब्धियों का दावा किया है।

 

प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का वीडियो वायरल, PM मोदी की आरती पर मचा विवाद; प्रेस क्लब ने दी सफाई

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नई दिल्ली- दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर/कटआउट के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में कुछ लोग पीएम मोदी को भगवान राम के स्वरूप में दर्शाए गए कटआउट के सामने आरती करते और ‘जय जय मोदी, हर हर मोदी’ के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। 

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

वीडियो में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बड़ा कटआउट नजर आया, जिसमें उन्हें धनुष-बाण के साथ धार्मिक स्वरूप में दिखाया गया था। कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनर पर ‘भगवान नरेंद्र मोदी चालीसा’ लिखा हुआ दिखाई दिया।

कार्यक्रम में मौजूद लोग कटआउट के सामने आरती करते और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। 

कार्यक्रम किसने आयोजित किया था?

रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्यक्रम बिहार स्टेट ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड से जुड़े लोगों द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में धार्मिक शैली का कार्यक्रम किए जाने की बात सामने आई है। 

बताया गया है कि कार्यक्रम के आयोजकों में बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. राजन सिंह का नाम सामने आया है। उन्होंने कार्यक्रम का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति सम्मान और समर्थन जताया। 

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने क्या कहा?

वीडियो वायरल होने और विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया।

प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का आयोजन क्लब ने नहीं किया था। उसके मुताबिक, एक संगठन ने परिसर का हॉल प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए किराए पर लिया था। बाद में जब आयोजकों ने हॉल के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया तो क्लब प्रशासन ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रोक दिया। 

यानी प्रेस क्लब के अनुसार, हॉल की बुकिंग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए की गई थी, लेकिन वहां आयोजित गतिविधियां बुकिंग की शर्तों के अनुरूप नहीं थीं।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि एक संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री को धार्मिक स्वरूप में प्रस्तुत कर उनकी आरती और चालीसा का पाठ किया गया।

कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक व्यक्ति का धार्मिक महिमामंडन बताया, जबकि कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने प्रधानमंत्री के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान को इसका आधार बताया।

कार्यक्रम को बीच में रोक दिया गया

प्रेस क्लब की ओर से दी गई सफाई के मुताबिक, जैसे ही क्लब प्रशासन को बुकिंग की शर्तों के उल्लंघन का पता चला, उसने हस्तक्षेप किया और कार्यक्रम को रोक दिया। इस वजह से क्लब ने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो के आधार पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि कार्यक्रम प्रेस क्लब द्वारा आयोजित या समर्थित था। 

PM मोदी के मंदिर का भी जिक्र

इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर से जुड़ी योजना का भी जिक्र सामने आया है। कार्यक्रम से जुड़े राजन सिंह ने बिहार में प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित मंदिर बनाने की योजना की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित मंदिर की लागत करीब ₹112 करोड़ बताई गई है।

अब क्या है पूरा मामला?

फिलहाल इस पूरे विवाद का केंद्र वायरल वीडियो और प्रेस क्लब की सफाई है। वीडियो में दिखाई गई गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है, जबकि प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि उसने कार्यक्रम आयोजित नहीं किया था और नियमों के उल्लंघन के बाद उसे रोक दिया गया था।

निष्कर्ष

दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में ‘मोदी चालीसा’, आरती और पीएम मोदी को धार्मिक स्वरूप में दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, प्रेस क्लब ने कार्यक्रम से दूरी बनाते हुए कहा है कि हॉल प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए किराए पर दिया गया था और शर्तों का उल्लंघन होने पर कार्यक्रम रोक दिया गया।

अब यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर राजनीति, धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक संस्थानों के इस्तेमाल को लेकर बहस का विषय बन गया है।

लद्दाख में ‘We Are Gen Z’ वाला वीडियो वायरल: सेना से बहस करने वाली महिला ने मांगी माफी

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लद्दाख के मिनिमर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षाकर्मियों के साथ एक महिला पर्यटक की बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में महिला सड़क पर लगी पाबंदी और यात्रियों को रोके जाने को लेकर सुरक्षाकर्मियों से बहस करती नजर आई। इसी दौरान उसके “We are Gen Z” वाले बयान पर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आईं।


 5 घंटे इंतजार के बाद भड़का गुस्सा

रिपोर्टों के मुताबिक, महिला और अन्य पर्यटक सड़क बंद होने के कारण कई घंटे तक इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान महिला ने सुरक्षाकर्मियों से सवाल-जवाब शुरू कर दिए। वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर आम यात्रियों को रोके जाने और कुछ वाहनों को आगे जाने देने पर नाराजगी जताती दिखाई दी। 

वीडियो में महिला ने खुद को Gen Z बताते हुए कहा कि वह इस तरह की स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उसके व्यवहार की आलोचना की और सेना के जवानों के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल

वीडियो वायरल होने के बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। पूर्व सैन्य अधिकारियों और नेताओं ने भी महिला की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह का रवैया संवेदनशील इलाकों में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच बने भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है।

पूर्व सेना अधिकारियों की ओर से भी महिला की टिप्पणी की आलोचना की गई। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सैनिकों के त्याग और जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए महिला के बयान पर सवाल उठाया। 

विवाद बढ़ने के बाद महिला ने मांगी माफी

वीडियो पर बढ़ते विवाद के बीच महिला ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। उसने कहा कि कई घंटों तक इंतजार करने की वजह से वह गुस्से और निराशा में थी और उसी दौरान उससे ऐसी बातें कही गईं, जिन्हें वह अब गलत मानती है। 

महिला ने अपने बयान में सेना के जवानों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उसका इरादा सैनिकों का अपमान करना नहीं था। उसने अपने व्यवहार को उस समय की नाराजगी का परिणाम बताया। 

पूर्व सेना प्रमुख ने भी दी अलग राय

इस विवाद के बीच पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने Gen Z को लेकर संतुलित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी चीजों को अलग तरीके से देख सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत है। उन्होंने युवाओं को समझने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

संवेदनशील इलाका होने के कारण बढ़ी चर्चा

लद्दाख और कारगिल जैसे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क बंद करने या यातायात रोकने के पीछे सुरक्षा संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए पर्यटकों से भी सुरक्षा निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

निष्कर्ष

लद्दाख के मिनिमर्ग चेकपोस्ट का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद बन चुका है। एक तरफ महिला की ‘We are Gen Z’ टिप्पणी को लेकर आलोचना हुई, वहीं महिला ने बाद में भारतीय सेना और पुलिस से माफी मांगते हुए इसे गुस्से में कही गई बात बताया। इस पूरे मामले ने संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों के व्यवहार, सुरक्षा प्रोटोकॉल और नई पीढ़ी के रवैये को लेकर बहस छेड़ दी है। 

गरियाबंद में हत्या आरोपी को पकड़ने पुलिस का अनोखा ऑपरेशन, 7 घंटे तक चला रेस्क्यू; मिर्च के धुएं से बाहर निकला आरोपी

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गरियाबंद- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हत्या के एक आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को ऐसा तरीका अपनाना पड़ा, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। आरोपी अपने घर के छप्पर के अंदर छिप गया था और पुलिस के सामने बाहर आने को तैयार नहीं था। करीब सात घंटे तक चले ऑपरेशन में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी उसे बाहर निकालने में जुटे रहे। जब तमाम कोशिशें नाकाम रहीं तो पुलिस ने छप्पर पर तीखी मिर्च जलाकर धुआं किया। धुआं घर के अंदर भरते ही आरोपी बाहर निकल आया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पड़ोसी की हत्या के बाद घर में छिपा था आरोपी

जानकारी के मुताबिक, आरोपी हीरा पर अपने पड़ोसी की कुल्हाड़ी से हत्या करने का आरोप है। वारदात के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। जब पुलिस आरोपी को पकड़ने उसके ठिकाने पर पहुंची तो वह अपने घर में जाकर छिप गया।

पुलिस ने उसे बाहर आने के लिए कहा, लेकिन आरोपी ने सरेंडर करने के बजाय खुद को घर के अंदर बंद कर लिया। इसके बाद मामला कई घंटे तक चले ऑपरेशन में बदल गया।

50 से ज्यादा जवानों की टीम पहुंची

आरोपी को पकड़ने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक 50 से ज्यादा जवानों ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की।

लेकिन आरोपी घर से बाहर आने को तैयार नहीं था। बताया गया कि वह पुलिसकर्मियों पर गुलेल से हमला भी कर रहा था। इसके कारण पुलिस के लिए सीधे घर के अंदर जाकर उसे पकड़ना मुश्किल हो गया।

सात घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ऑपरेशन

पुलिस और आरोपी के बीच यह गतिरोध करीब सात घंटे तक चला। जवानों ने आरोपी को समझाने और बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह घर के अंदर ही छिपा रहा।

स्थिति लंबी खिंचने के बाद पुलिस को ऐसी रणनीति अपनानी पड़ी, जिससे बिना सीधे टकराव के आरोपी को घर से बाहर निकाला जा सके।

छप्पर पर जलाई गई तीखी मिर्च

जब सामान्य प्रयास सफल नहीं हुए तो पुलिस ने छप्पर पर तीखी मिर्च जलाकर धुआं करना शुरू किया।

मिर्च के धुएं की तीव्रता बढ़ने के बाद घर के अंदर रहना आरोपी के लिए मुश्किल हो गया। आखिरकार वह धुएं से परेशान होकर घर से बाहर निकल आया।

आरोपी के बाहर आते ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया।

पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी आरोपी को सुरक्षित पकड़ना

इस ऑपरेशन में पुलिस के सामने दोहरी चुनौती थी। एक तरफ आरोपी हत्या के मामले में वांछित था, वहीं दूसरी तरफ वह गिरफ्तारी से बचने के लिए घर के अंदर छिपा हुआ था और कथित तौर पर गुलेल से पुलिसकर्मियों पर हमला कर रहा था।

ऐसे में पुलिस ने सीधे बल प्रयोग करने के बजाय आरोपी को बाहर निकालने के लिए अलग रणनीति अपनाई। अंततः मिर्च के धुएं की वजह से आरोपी को घर से बाहर आना पड़ा।

पत्नी के घर छोड़ने की भी बात सामने आई

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी और आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत हो रहा था। हालांकि, उसकी मानसिक स्थिति से संबंधित किसी भी निष्कर्ष की पुष्टि आधिकारिक जांच के बिना नहीं की जा सकती।

अब पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब हत्या के पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। हत्या की वजह, वारदात की परिस्थितियां और आरोपी की भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने गरियाबंद में पुलिस के लिए आरोपी को पकड़ने की चुनौती और ऑपरेशन के असामान्य तरीके को चर्चा में ला दिया है।

निष्कर्ष

गरियाबंद में हत्या के आरोपी को पकड़ने के लिए चला यह सात घंटे लंबा ऑपरेशन बेहद नाटकीय रहा। 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की कोशिशों के बावजूद जब आरोपी छप्पर वाले घर से बाहर नहीं निकला, तो पुलिस ने तीखी मिर्च का धुआं इस्तेमाल किया। धुएं से परेशान होकर आरोपी बाहर आया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल हत्या के मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ के बाद वारदात से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में B.Sc. Agriculture की परीक्षा रद्द, प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद 4 सदस्यीय जांच समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर से जुड़ी B.Sc. Agriculture की परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया है। परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर सामने आए विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।

विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद अब छात्रों के बीच परीक्षा की नई तारीख को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल जांच समिति पूरे मामले की पड़ताल कर रही है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था या नहीं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

परीक्षा से पहले ही सामने आया प्रश्नपत्र का मामला

मामला B.Sc. Agriculture की परीक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा में इस्तेमाल होने वाला प्रश्नपत्र निर्धारित समय से पहले ही कुछ लोगों तक पहुंच गया था। इसको लेकर छात्रों और संबंधित लोगों के बीच सवाल उठे।

मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचने के बाद परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने विवादित परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया।

हालांकि, प्रश्नपत्र लीक होने की बात को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद होगी।

चार सदस्यीय जांच समिति करेगी जांच

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की तह तक जाने के लिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति परीक्षा से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि:

  • प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?

  • प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक किस प्रक्रिया से पहुंचा?

  • प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसी बाहरी व्यक्ति तक कैसे पहुंचा?

  • क्या वास्तव में प्रश्नपत्र लीक हुआ था?

  • यदि लीक हुआ तो इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?

  • परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं?

जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला किया जाएगा।

छात्रों की चिंता बढ़ी

परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ी चिंता छात्रों को लेकर है। B.Sc. Agriculture के विद्यार्थी लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उनकी पढ़ाई और आगे की अकादमिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

छात्र अब विश्वविद्यालय प्रशासन से नई परीक्षा तारीख, परीक्षा पैटर्न और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी की उम्मीद कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय के लिए भी चुनौती यह है कि नई परीक्षा ऐसी व्यवस्था में कराई जाए, जिससे प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

पेपर लीक के आरोपों ने खड़े किए सवाल

देशभर में प्रतियोगी और विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मामले लगातार चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा से जुड़ा यह मामला भी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।

खास तौर पर प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, स्टोरेज और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही से हजारों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि मामला वास्तविक प्रश्नपत्र लीक का था या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता का। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नई परीक्षा को लेकर क्या होगा फैसला?

अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले आदेश पर है। जांच के साथ-साथ नई परीक्षा आयोजित करने की तैयारी भी की जानी होगी।

विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोबारा परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और गोपनीयता के मानकों का सख्ती से पालन हो।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में B.Sc. Agriculture की परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द करना विश्वविद्यालय प्रशासन का बड़ा फैसला है। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा और इसके पीछे किसकी भूमिका थी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी। फिलहाल छात्रों को नई परीक्षा तारीख और आगे की प्रक्रिया का इंतजार है।

विष्णु भैया के नेतृत्व में आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

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• डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक

रायपुर- किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को "महतारी गौरव वर्ष" के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 30 किस्तों के माध्यम से 19 हजार 444 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।

महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा।बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड "वोकल फॉर लोकल" अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को "सुशासन से समृद्धि" की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।

युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ ने रखा युवा-केंद्रित अर्थव्यवस्था का रोडमैप

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वैश्विक मंच से निवेशकों को दिया छत्तीसगढ़ में निवेश का आमंत्रण

नई औद्योगिक नीति के बाद प्रदेश को मिले 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और फार्मा बनेंगे नई अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन

बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए द्वार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के बल पर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें, इसी सोच के साथ राज्य की नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

फोरम में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत की विकास दर

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए विकास और जनकल्याण को समान प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। इन सुधारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई संभावनाएं तैयार हुई हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप, युवा बनेंगे रोजगार सृजक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल नए व्यवसाय खड़े होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निर्मित होंगे।

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं

मुख्यमंत्री साय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे तथा 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है।

नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते डिजिटल और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा तथा युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बस्तर की औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बस्तर में पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।

ग्रीन एनर्जी से जुड़ेगा छत्तीसगढ़ का विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

कच्चे माल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है।

इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम से निवेश प्रक्रिया होगी और आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है।

इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें।

संसाधन से नवाचार तक - नए छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल

मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल और युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है। निवेश इस परिवर्तन का माध्यम है, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार  आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

H1N1 को लेकर केंद्र अलर्ट: जेपी नड्डा ने की समीक्षा, दिल्ली में अस्पतालों की तैयारियों का लिया जायजा

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नई दिल्ली- देश में H1N1 इन्फ्लुएंजा की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति, अस्पतालों की तैयारियों और इन्फ्लुएंजा की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह भी बैठक में शामिल हुए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने और मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया है।

H1N1 की स्थिति पर केंद्र की पैनी नजर

बैठक के दौरान देश में इन्फ्लुएंजा की राष्ट्रीय निगरानी और महामारी विज्ञान संबंधी स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही Influenza-like Illness (ILI) और Severe Acute Respiratory Infection (SARI) के ट्रेंड पर भी चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों और प्रयोगशालाओं से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर इन्फ्लुएंजा के मामलों में होने वाले किसी भी असामान्य बढ़ोतरी या एक जगह पर मामलों के समूह यानी क्लस्टर की समय रहते पहचान करने पर जोर दिया।

जेपी नड्डा ने अधिकारियों को लगातार सतर्कता, मजबूत निगरानी और पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए।

दिल्ली के अस्पतालों की तैयारियों की भी समीक्षा

बैठक में दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अस्पतालों की क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।

इस दौरान मुख्य रूप से इन व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई:

  • अस्पतालों में उपलब्ध बेड

  • क्रिटिकल केयर सुविधाएं

  • ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड

  • वेंटिलेटर की उपलब्धता

  • जरूरी दवाइयां

  • जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाएं

  • अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री

  • मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने की व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में पर्याप्त surge capacity बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव न पड़े।

गंभीर मरीजों के लिए रेफरल सिस्टम मजबूत करने पर जोर

जेपी नड्डा ने कहा कि ऐसे मरीज जिन्हें विशेषज्ञ या गंभीर चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, उनके लिए सीमलेस रेफरल सिस्टम होना जरूरी है।

इसका मतलब है कि यदि किसी अस्पताल में मरीज की स्थिति के मुताबिक जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे बिना अनावश्यक देरी के बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में भेजने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।

जल्द पहचान और समय पर जांच जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन्फ्लुएंजा के मामलों की जल्दी पहचान, समय पर टेस्टिंग और उचित इलाज को मजबूत करने पर जोर दिया।

उन्होंने मौजूदा निगरानी और लैब नेटवर्क का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए, ताकि बीमारी के ट्रेंड को लगातार ट्रैक किया जा सके और किसी भी असामान्य स्थिति का पता शुरुआती स्तर पर ही चल जाए।

10 जुलाई को राज्यों को भेजी गई थी एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने की सलाह दे चुका है। 10 जुलाई 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर Acute Respiratory Illness (ARI) को लेकर निगरानी और तैयारियां मजबूत करने को कहा था।

राज्यों को सलाह दी गई थी कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों पर लगातार नजर रखी जाए।

लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी तैयारियों के साथ-साथ जन-जागरूकता और बचाव के उपायों पर भी जोर दिया।

लोगों को खास तौर पर:

  • श्वसन संबंधी स्वच्छता बनाए रखने,

  • नियमित रूप से हाथों की सफाई करने,

  • सांस से जुड़ी समस्या होने पर सावधानी बरतने,

  • लगातार या गंभीर लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने

की सलाह दी गई है।

यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर चेतावनी वाले लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

डेंगू और मलेरिया पर भी नजर

बैठक में केवल H1N1 या इन्फ्लुएंजा ही नहीं, बल्कि डेंगू और मलेरिया जैसी अन्य मौसमी बीमारियों की स्थिति और रोकथाम पर भी चर्चा हुई।

जेपी नड्डा ने राज्य सरकारों से मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए proactive और preparedness-oriented approach अपनाने को कहा।

उन्होंने स्थानीय निकायों और नगर पार्षदों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय स्तर पर लोगों को बीमारी की रोकथाम, संक्रमण के प्रसार और नियंत्रण के उपायों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया।

TB की पहचान में स्थानीय निकायों की भूमिका का उदाहरण

बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में टीबी के मामलों की पहचान में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसमें स्थानीय निकायों की सक्रिय भागीदारी और whole-of-government approach की भूमिका रही है।

जेपी नड्डा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों तक सही और evidence-based जानकारी पहुंचाई जा सकती है। साथ ही इससे समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

H1N1 क्या है?

H1N1 इन्फ्लुएंजा एक प्रकार का वायरल फ्लू है, जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। मौसमी इन्फ्लुएंजा की तरह इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं।

कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, खासकर जब सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण विकसित हों। इसलिए लगातार या गंभीर श्वसन संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सरकार ने कहा- स्थिति पर लगातार निगरानी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा समेत संबंधित बीमारियों की स्थिति पर लगातार और करीबी निगरानी रखी जा रही है।

केंद्र सरकार राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर रही है, ताकि मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जा सके।

निष्कर्ष

H1N1 और मौसमी इन्फ्लुएंजा को लेकर केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। जेपी नड्डा की समीक्षा बैठक में दिल्ली समेत पूरे देश की निगरानी व्यवस्था, अस्पतालों की क्षमता, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, दवाओं और टेस्टिंग सुविधाओं की समीक्षा की गई।

सरकार का जोर फिलहाल घबराहट पर नहीं बल्कि निगरानी, समय पर जांच, बेहतर अस्पताल तैयारियों और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और स्थानीय निकायों से भी मौसमी बीमारियों के खिलाफ सक्रिय और समन्वित तरीके से काम करने को कहा है।

जयपुर में CJP टीम पर हमले का मामला: आशुतोष रांका पर मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

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जयपुर- राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में हुई इस घटना में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत पार्टी के कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों की ओर से घटना को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची थी CJP टीम

जानकारी के मुताबिक, CJP की टीम अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत जयपुर के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने पहुंची थी। रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल का निरीक्षण भी इसी अभियान का हिस्सा था।

CJP की ओर से स्कूल की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों की कक्षाएं वैकल्पिक स्थान पर संचालित होने की बात भी सामने आई है।

लेकिन टीम के गांव पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला कहासुनी से बढ़कर धक्का-मुक्की और कथित मारपीट तक पहुंच गया।

CJP का आरोप- बीजेपी समर्थकों ने बनाया निशाना

घटना के बाद CJP ने आरोप लगाया कि उनकी टीम पर पहले से योजनाबद्ध तरीके से हमला किया गया। पार्टी नेताओं का दावा है कि हमला करने वाले सामान्य ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी समर्थक लोग थे।

CJP नेताओं के मुताबिक, कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, उन्हें गांव से बाहर खदेड़ा गया और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं।

CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर पाई।

ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए पूरी घटना की अलग तस्वीर पेश की है। ग्रामीणों का कहना है कि CJP की टीम जिस तरह गांव में पहुंची और गतिविधियां कर रही थी, उससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हुई।

ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया कि CJP कार्यकर्ताओं के पास हथियार मौजूद थे और गांव में उन्होंने कथित तौर पर ‘देश विरोधी’ नारे लगाए। हालांकि, ये ग्रामीणों के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

गाड़ियों के शीशे खुद तोड़ने का भी दावा

इस विवाद में ग्रामीणों ने CJP पर ही एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि टीम के सदस्यों ने कथित तौर पर अपनी ही गाड़ियों के शीशे खुद तोड़े, ताकि घटना को हमले के रूप में पेश किया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके ऊपर हमला करने या वाहनों में तोड़फोड़ करने के आरोप सही नहीं हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और घटना से जुड़े वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

CJP ने बताई स्कूल की बदहाल स्थिति

विवाद के बीच CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल से टकराव करना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की स्थिति को सामने लाना है।

पार्टी की टीम जिस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी, उसकी हालत को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे। रिपोर्टों में स्कूल भवन के असुरक्षित होने और वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई कराए जाने की बात सामने आई है। CJP का दावा है कि वह इसी तरह के स्कूलों की स्थिति को जनता और सरकार के सामने लाने के लिए अभियान चला रही है।

आशुतोष रांका ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

घटना के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी निशाना साधा। CJP की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रांका ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कथित हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है। CJP ने मांग पूरी नहीं होने पर राजस्थान में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

घटना के बाद मामला सिर्फ स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा। CJP नेताओं ने बीजेपी पर सीधे आरोप लगाए, जबकि ग्रामीणों की ओर से CJP की गतिविधियों और उनके दावों पर सवाल उठाए गए।

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी घटना को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और CJP कार्यकर्ताओं पर कथित हमले की आलोचना की।

इस तरह सरकारी स्कूल के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानून-व्यवस्था के मुद्दे में बदलता दिखाई दे रहा है।

आखिर विवाद की असली वजह क्या है?

पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

CJP का पक्ष:

  • टीम स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी।

  • ग्रामीणों ने उन्हें रोककर कथित तौर पर मारपीट की।

  • वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव किया गया।

  • हमले के पीछे बीजेपी समर्थकों के होने का आरोप है।

  • पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का पक्ष:

  • CJP की टीम के आने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया।

  • ग्रामीणों ने CJP के कार्यकर्ताओं पर हथियार रखने और कथित ‘देश विरोधी’ नारे लगाने का आरोप लगाया।

  • ग्रामीणों ने CJP के वाहनों के शीशे खुद तोड़े जाने का दावा किया।

  • बीजेपी से जुड़े होने के आरोपों को ग्रामीणों ने खारिज किया है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो/अन्य साक्ष्यों से ही स्पष्ट होंगी।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

जयपुर की इस घटना ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, राजनीतिक संगठनों के स्कूल निरीक्षण और ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक टकराव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP टीम पर वास्तव में किसने हमला किया, वाहनों में तोड़फोड़ किसने की और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हथियार व कथित नारेबाजी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच निष्पक्ष जांच से ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

https://youtube.com/shorts/i5VV-v__PeQ?feature=share

निष्कर्ष

जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में CJP टीम के स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आशुतोष रांका और CJP ने बीजेपी समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए CJP कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक तरफ CJP ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बता रहे हैं। ऐसे में अब पुलिस और प्रशासन की जांच अहम होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शुक्रवार को गांव में वास्तव में क्या हुआ था।

चित्रकूट और बांदा में पान मसाला-गुटखा के अवैध कारोबार का भंडाफोड़, 27 मशीनें और 15.50 लाख पाउच जब्त; ₹185 करोड़ की टैक्स चोरी

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चित्रकूट- उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जरदा और गुटखा के अवैध निर्माण के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। लखनऊ जोनल यूनिट की डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने खुफिया जानकारी के आधार पर छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तैयार माल, कच्चा माल और पैकिंग सामग्री बरामद की है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने 27 ऐसी पाउच-पैकिंग मशीनें पकड़ीं, जिन्हें विभाग के सामने घोषित नहीं किया गया था। कार्रवाई में करीब 15.50 लाख तैयार पाउच भी जब्त किए गए। शुरुआती जांच में इस पूरे नेटवर्क से करीब ₹185 करोड़ की GST, HSNS Cess और Central Excise Duty की कथित चोरी का पता चला है।

आधी रात के बाद शुरू हुई कार्रवाई

DGGI लखनऊ जोनल यूनिट को अवैध निर्माण और टैक्स चोरी से संबंधित विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद अधिकारियों की टीम ने 18 अगस्त 2026 की आधी रात के आसपास चित्रकूट और बांदा स्थित छह परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया।

ये सभी परिसर दो फर्मों से जुड़े हुए थे। इनमें से एक फर्म पान मसाला और इससे जुड़े उत्पादों के निर्माण में तथा दूसरी ट्रेडिंग गतिविधियों में शामिल थी।

अधिकारियों ने तलाशी के दौरान उत्पादन और पैकिंग से जुड़ी कई ऐसी मशीनें बरामद कीं, जिनका विभागीय रिकॉर्ड में खुलासा नहीं किया गया था।

27 पाउच-पैकिंग मशीनें मिलीं

जांच के दौरान कुल 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें बरामद की गईं। इनमें:

  • 6 मशीनें सुगंधित जरदा के लिए

  • 9 मशीनें पान मसाला के लिए

  • 12 मशीनें दोहरा/देसी गुटखा के लिए

बताई गई हैं।

इसके अलावा मिश्रण, सुपारी काटने और सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी मौके से मिलीं। अधिकारियों के मुताबिक, मशीनों की वास्तविक क्षमता के आधार पर टैक्स और सेस की देनदारी निर्धारित होती है, इसलिए मशीनों को छिपाकर रखना कथित तौर पर टैक्स चोरी के इस मॉडल का अहम हिस्सा था।

15.50 लाख से ज्यादा तैयार पाउच जब्त

छापेमारी के दौरान DGGI को बड़ी मात्रा में तैयार माल मिला। कुल 15,50,922 पाउच जब्त किए गए। इनमें पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जरदा और सुगंधित सुपारी शामिल हैं।

तैयार माल के अलावा बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी बरामद की गई।

बरामदगी का पूरा आंकड़ा

  • सामग्री
  • बरामद मात्रा
  • सुपारी और कटी हुई सुपारी
  • 32.9 मीट्रिक टन
  • तंबाकू
  • 2.8 मीट्रिक टन
  • पैकिंग सामग्री, पाउच और लैमिनेट
  • 8.4 मीट्रिक टन
  • कत्था पाउडर
  • 470 किलोग्राम
  • ग्लिसरीन
  • 850 किलोग्राम
  • एसेंस
  • 545 किलोग्राम
  • बिना पैक किया पान मसाला
  • 256 किलोग्राम
  • तैयार उत्पाद
  • 15,50,922 पाउच

₹185 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा

DGGI की शुरुआती जांच में इस नेटवर्क द्वारा करीब ₹185 करोड़ की GST, HSNS Cess और Central Excise Duty की कथित चोरी का पता चला है।

जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध कारोबार से जुड़े परिसरों में उत्पादन किया जा रहा था और तैयार माल को बिना लागू कर एवं सेस का भुगतान किए कथित तौर पर गुप्त तरीके से बाजार में भेजा जा रहा था।

अधिकारियों को ऐसे सबूत भी मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि यह पूरा कारोबार बिना पंजीकृत परिसरों और अघोषित मशीनरी के नेटवर्क के जरिए संचालित किया जा रहा था।

कैसे चल रहा था पूरा नेटवर्क?

DGGI की जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर अघोषित मशीनों की मदद से पान मसाला, जरदा और गुटखा तैयार किया जाता था। इसके बाद तैयार उत्पादों को बिना संबंधित कर और सेस का भुगतान किए क्लैंडेस्टाइन यानी गुप्त तरीके से बाहर निकाला जाता था।

प्रारंभिक जांच में निर्माण करने वाली फर्म के प्रोपराइटर की भूमिका भी सामने आई है। DGGI के अनुसार, वह प्रथम दृष्टया इस पूरे अवैध निर्माण और तैयार माल की गुप्त निकासी की व्यवस्था करने और उसे संचालित करने वाला व्यक्ति पाया गया।

फर्म के प्रोपराइटर को गिरफ्तार किया गया

DGGI ने मामले में निर्माण फर्म के प्रोपराइटर को 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी HSNS Cess Act, 2025 की धारा 26 और Central Excise Act, 1944 की धारा 13 के तहत की गई। आरोपी को लखनऊ में स्पेशल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम्स) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और DGGI को आगे और बरामदगी तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है।

1 फरवरी 2026 से बदला टैक्स सिस्टम

पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में टैक्स चोरी रोकने के लिए 1 फरवरी 2026 से क्षमता-आधारित सेस और टैक्स व्यवस्था लागू की गई है।

इसके तहत पान मसाला पर Health Security and National Security Cess (HSNS) क्षमता-आधारित मासिक सेस लगाया जाता है। इसकी गणना स्थापित पैकिंग मशीनों की संख्या, प्रकार और क्षमता के आधार पर की जाती है।

वहीं, चबाने वाले तंबाकू, जरदा और गुटखा पर भी Central Excise Act, 1944 के तहत क्षमता-आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है।

यही वजह है कि कुछ अवैध निर्माता कथित तौर पर अपनी मशीनों और वास्तविक उत्पादन क्षमता को छिपाकर टैक्स और सेस की देनदारी से बचने की कोशिश करते हैं।

DGGI ने बढ़ाई इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई

सरकार के मुताबिक, इस तरह की टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए DGGI ने पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाई तेज कर दी है।

इसके लिए डेटा एनालिटिक्स और अलग-अलग DGGI formations के बीच समन्वय का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी संदिग्ध कारोबार और उत्पादन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद फील्ड में कार्रवाई की जा रही है।

देशभर में अब तक 27 मामले दर्ज

DGGI के मुताबिक, 1 फरवरी 2026 से देशभर में 27 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। इन मामलों में उत्पादन छिपाने, तैयार माल की गुप्त निकासी और लागू टैक्स/सेस की चोरी का पता चला है।

इन मामलों में अब तक कुल करीब ₹668 करोड़ की ड्यूटी, टैक्स और सेस चोरी का पता लगाया गया है।

जांच के दौरान ₹11.7 करोड़ का स्वैच्छिक भुगतान भी किया गया है।

इसके अलावा देशभर की कार्रवाई में कुल 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की जा चुकी हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चित्रकूट-बांदा की कार्रवाई क्यों अहम?

चित्रकूट और बांदा में हुई कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यहां सिर्फ तैयार गुटखा या पान मसाला ही नहीं मिला, बल्कि उत्पादन की पूरी व्यवस्था का पता चला है। मशीनों से लेकर कच्चे माल, पैकिंग सामग्री और तैयार उत्पाद तक की बरामदगी से कथित अवैध निर्माण नेटवर्क के बड़े पैमाने पर संचालित होने के संकेत मिले हैं।

DGGI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हैं, तैयार माल कहां-कहां भेजा जाता था और टैक्स चोरी से जुड़े पूरे कारोबार का वास्तविक आकार कितना है।

निष्कर्ष

चित्रकूट और बांदा में DGGI की कार्रवाई ने पान मसाला, सुगंधित जरदा और गुटखा के कथित अवैध निर्माण के एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया है। 27 अघोषित मशीनों, 15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच और भारी मात्रा में कच्चे माल की बरामदगी के साथ करीब ₹185 करोड़ की कर एवं सेस चोरी का पता चला है।

एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच अब नेटवर्क के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है। DGGI के देशव्यापी आंकड़े भी बताते हैं कि क्षमता-आधारित टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद इस सेक्टर में अवैध उत्पादन और कर चोरी के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई तेज हुई है।

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