Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

भारी बारिश से उफान पर चित्रकोट जलप्रपात, 90 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी का विहंगम दृश्य

No comments Document Thumbnail

 जगदलपुर: बस्तर अंचल में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते प्रसिद्ध चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात पूरे उफान पर आ गए हैं। भारत के 'नियाग्रा' नाम से विख्यात चित्रकोट जलप्रपात में करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी की विशाल गर्जना दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। बारिश के कारण जलप्रपात का जलस्तर और चौड़ाई काफी बढ़ गई है, जिससे इसका प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर पहुँच गया है।


मौसम साफ होने के बाद यहाँ देश-विदेश से भारी संख्या में पर्यटकों के पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है।

सड़कों पर जलभराव, पेड़ गिरने से आवागमन बाधित

एक ओर जहाँ जलप्रपातों की खूबसूरती निखर आई है, वहीं दूसरी ओर लगातार बारिश से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है:

  • अस्पताल मार्ग जलमग्न: शहर के मुख्य महारानी अस्पताल मार्ग पर भारी जलभराव हो जाने से राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

  • पेड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध: करंजी के समीप एक विशालकाय पेड़ मुख्य सड़क पर आ गिरा, जिससे यातायात थम गया। स्थानीय ग्रामीण पेड़ की शाखाओं को काटकर रास्ता साफ करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

  • जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर लगा जाम: जगदलपुर-सुकमा मार्ग की घाटी में लोहे का भारी सामान ले जा रहा एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे सामान सड़क पर बिखर गया। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

प्रशासनिक टीम और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुँचकर यातायात व्यवस्था को बहाल करने और गिरे हुए सामान को हटाने के कार्य में जुटी हुई है।

CG NEWS : साथी का मोबाइल चुराकर ₹4.87 लाख उड़ाने वाला आरक्षक गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 जांजगीर-चांपा। साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए 11वीं बटालियन धनरास में पदस्थ एक आरक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने ही साथी का मोबाइल फोन चोरी कर उसमें उपलब्ध व्यक्तिगत विवरणों का दुरुपयोग करते हुए नया यूपीआई आईडी बनाया और बैंक खाते से करीब ₹4.87 लाख की अनधिकृत निकासी कर ली। पुलिस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन गेम खेलने का आदी था और उसने पूरी रकम गेमिंग ऐप में उड़ा दी।


बैरक से चोरी हुआ था मोबाइल

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम चांदो (जिला बलरामपुर-रामानुजगंज) निवासी आरक्षक सुधीर कुमार सिंह (41), जो 11वीं बटालियन में कार्यरत हैं, ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि 23 अप्रैल 2026 की रात उन्होंने अपना वीवो Y21 मोबाइल बैरक में चार्जिंग पर लगाया था। अगले दिन ड्यूटी पर जाने से पहले मोबाइल गायब मिला।

संदेही आरक्षक से पूछताछ में खुला राज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान 11वीं बटालियन में ही पदस्थ आरक्षक सुनील कुमार यादव की गतिविधियों पर संदेह हुआ। घटना के बाद से आरोपी का परिसर से गायब होना पुलिस का शक गहरा गया। पुलिस ने जब घेराबंदी कर उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

फर्जी UPI आईडी से निकाली रकम

जांच में सामने आया कि आरोपी ने चोरी किए गए मोबाइल से पीड़ित के व्यक्तिगत विवरणों का उपयोग करके एक नई यूपीआई आईडी बनाई। इसके बाद अलग-अलग किस्तों में कुल ₹4,87,911 अपने खाते व गेमिंग वॉलेट में ट्रांसफर कर लिए। पूछताछ में उसने बताया कि यह पूरी राशि उसने ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान गंवा दी।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी

पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल और तकनीकी साक्ष्य जब्त किए हैं। मेमोरेंडम कथन के आधार पर पुलिस ने आरोपी आरक्षक सुनील कुमार यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66-C और 66-D के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सड़क हादसे में घायल, झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती

No comments Document Thumbnail

 रायपुर / झांसी : छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव एक भीषण सड़क दुर्घटना में घायल हो गए हैं। हादसा उस समय हुआ जब वे मध्य प्रदेश स्थित बागेश्वर धाम में दर्शन-पूजन के बाद छत्तीसगढ़ लौट रहे थे। दुर्घटना में उनके कमर, कूल्हे और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें तुरंत झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।


ट्रक से टकराई अनियंत्रित कार, अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त

मिली जानकारी के अनुसार, सफर के दौरान सामने से आ रही एक तेज रफ्तार गाड़ी ने अचानक कट मार दिया। दुर्घटना से बचने के लिए किरण देव के चालक ने वाहन को तुरंत मोड़ा, जिससे कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा इंजन तक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त (चकनाचूर) हो गया।

काफिले की अन्य गाड़ियां सुरक्षित, सहयोगियों को आई मामूली चोटें

गनीमत यह रही कि काफिले में पीछे चल रही अन्य गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित रहीं। हादसे के वक्त कार में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष के पीएसओ (PSO), पीए (PA) और चालक को हल्की एवं मामूली चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, किरण सिंह देव की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा देखभाल दी जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

टूटा पुल बना स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बाधा, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाए उपेक्षा के आरोप

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खट्टा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क पर बना जर्जर पुल और क्षतिग्रस्त सड़क बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी बहने लगता है, जिससे आसपास के छह गांवों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों को स्कूल नहीं पहुंच पाना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल खट्टा, कोकड़ी, रखमखेड़ा सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते से स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा, खट्टा हाई स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा कोकड़ी शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं।

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि बरसात के दौरान पुल के ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे छात्र-छात्राओं का स्कूल जाना जोखिम भरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बालिकाएं तेज बहाव के बीच पुल पार करने से डरती हैं, जिसके कारण कई बार वे स्कूल नहीं जा पातीं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यही मार्ग गर्भवती महिलाओं, बीमार मरीजों और अन्य ग्रामीणों के लिए अस्पताल एवं आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। पुल पर पानी आने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के सरपंच डॉ. राजकमल पटेल तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा रामस्वरूप दीवान का निवास भी इसी गांव में है और उन्हें भी इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि लंबे समय से पुल और सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक, सांसद और संबंधित विभाग से मांग की है कि बरसात समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना पुल की तत्काल मरम्मत अथवा वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई तो इसका सबसे अधिक असर स्कूली शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा पर पड़ेगा। उनका मानना है कि सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने का किया स्वागत

No comments Document Thumbnail

करोड़ों युवाओं के सुरक्षित भविष्य, ईमानदार प्रतिभा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की दिशा में  ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम - मुख्यमंत्री साय

परीक्षा माफिया, प्रश्नपत्र लीक और संगठित अनियमितताओं पर लगेगा प्रभावी अंकुश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने का स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के सुरक्षित भविष्य, ईमानदार प्रतिभा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार युवाओं के सपनों, उनके परिश्रम और उनके भविष्य की रक्षा के लिए निरंतर ठोस एवं प्रभावी निर्णय ले रही है। यह संशोधन उसी दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

https://x.com/i/status/2082441032570937404

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं करोड़ों युवाओं की वर्षों की मेहनत, आशाओं और विश्वास का आधार होती हैं। प्रश्नपत्र लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा अपराध जैसी गतिविधियां न केवल योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे अपराधों पर कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया यह संशोधन परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधन विधेयक के माध्यम से परीक्षा संबंधी अपराधों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाया गया है। इससे परीक्षा माफिया, संगठित आपराधिक गिरोहों तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई का मार्ग और मजबूत होगा। साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों एवं सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही भी और अधिक सुनिश्चित होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और विश्वसनीय बनेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, रोजगार सृजन, डिजिटल पारदर्शिता तथा अब परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में यह संशोधन युवाओं के भविष्य को सशक्त बनाने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे प्रतिभाशाली और मेहनती युवाओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब युवाओं को उनकी योग्यता और परिश्रम के अनुरूप निष्पक्ष अवसर प्राप्त हों। यह संशोधन उसी सोच को साकार करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ईमानदार प्रतिभा को संरक्षण देने और परीक्षा सम्बन्धी अनियमितताओं पर कठोर प्रहार करने का कार्य करेगा।

शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन कौशल परीक्षा अगस्त में होगी आयोजित

No comments Document Thumbnail

रायपुर, दुर्ग सहित विभिन्न संभागों में बने परीक्षा केंद्र

रायपुर- शीघ्रलेखन एवं मुद्रलेखन कम्प्यूटर कौशल परीक्षा परिषद, लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा अगस्त 2026 में विभिन्न तिथियों पर मुद्रलेखन एवं कम्प्यूटर मुद्रलेखन कौशल परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा के सफल संचालन के लिए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर संभागों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

परीक्षा कार्यक्रम एवं तिथियाँ

01 अगस्त 2026 को अंग्रेजी मुद्रलेखन (गति 10,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) की परीक्षा  05 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी। इसी प्रकार 02 अगस्त 2026 हिन्दी मुद्रलेखन (गति 10,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर में चयनित 05 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी।  

08 अगस्त 2026 को अंग्रेजी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) 08 परीक्षा केंद्रों में, 09 अगस्त 2026 को हिन्दी कम्प्यूटर मुद्रलेखन (गति 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा) 09 परीक्षा केंद्र एवं 16 अगस्त 2026 को बिलासपुर और सरगुजा संभाग में 01-01 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएंगी। 

परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

परीक्षार्थियों को परिषद द्वारा आबंटित परीक्षा केंद्र पर ही निर्धारित बैच एवं समय पर उपस्थित होना अनिवार्य है। परीक्षा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट https://ctsp.cg.nic.in पर उपलब्ध है। प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सूचना परीक्षार्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS  के माध्यम से भेज दी गई है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश हेतु अभ्यर्थियों को मूल पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या मतदाता परिचय पत्र में से कोई भी एक मूल पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ ने सभी परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना पर हाईकोर्ट सख्त, केवल सात जिलों तक सीमित रखने पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि यह योजना केवल सात जिलों तक ही क्यों सीमित रखी गई है, जबकि राज्य के अन्य जिलों के स्कूली बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। न्यायालय ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि योजना के सीमित दायरे के पीछे क्या कारण हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी पात्र विद्यार्थियों को समान रूप से इसका लाभ मिले। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि सीमित जिलों में योजना लागू होने से अन्य क्षेत्रों के बच्चों के साथ असमानता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पीएम पोषण मिलेट चिक्की योजना के तहत विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पोषणयुक्त मिलेट (श्री अन्न) से बनी चिक्की उपलब्ध कराई जाती है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, कुपोषण को कम करना और मोटे अनाज (मिलेट) के उपयोग को बढ़ावा देना है।

याचिका में योजना को केवल सात जिलों तक सीमित रखने के निर्णय पर सवाल उठाया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत यह जानना चाहती है कि योजना का विस्तार पूरे राज्य में क्यों नहीं किया गया और अन्य जिलों के विद्यार्थियों को इससे वंचित रखने का आधार क्या है।

अब राज्य सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि योजना के चयनित जिलों में ही लागू होने के पीछे प्रशासनिक, वित्तीय या अन्य क्या कारण हैं तथा भविष्य में इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की क्या योजना है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला शिक्षा और पोषण योजनाओं में समान अवसर सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ ने लागू किया 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026', निवेश और उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026' लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य उद्योगों की स्थापना और संचालन से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को तेज, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

नए कानून के तहत ट्रस्ट-बेस्ड (विश्वास आधारित) और रिस्क-बेस्ड (जोखिम आधारित) नियामक व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके तहत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार, निवेश और जोखिम के आधार पर किया जाएगा। कम जोखिम वाले उद्योगों को बार-बार निरीक्षण और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से उद्योगों को विभिन्न विभागों से समयबद्ध मंजूरी मिलेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुमति नहीं मिलने पर कई मामलों में 'डीम्ड अप्रूवल' (स्वतः स्वीकृति) का प्रावधान भी लागू होगा। साथ ही, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को स्व-प्रमाणन (Self-Certification) जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे अनुपालन लागत और प्रशासनिक बोझ कम होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून पारंपरिक निरीक्षण-आधारित व्यवस्था की जगह पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशक-अनुकूल शासन प्रणाली को बढ़ावा देगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि-आधारित उद्योग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को नई रफ्तार मिल सकती है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल करना है। नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़ में विकसित होंगे 4 नए औद्योगिक पार्क

No comments Document Thumbnail

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने चार नए औद्योगिक पार्क (मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अंतर्गत औद्योगिक विकास योजना की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।

इन 4 जिलों में बनेंगे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर

समिति की दूसरी बैठक के दौरान प्रदेश के चार जिलों में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें स्वीकृति दी गई। राजनांदगांव जिले में स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, पटेवा, धमतरी जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, धूम्रपाली, जांजगीर-चांपा जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, सलखान और बस्तर जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, नियानार में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई।

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

भारत औद्योगिक योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी औद्योगिक विकास नीति के तहत प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य में इस योजना के सुचारू संचालन और विभिन्न परियोजनाओं को समयबद्ध मंजूरी देने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

बैठक में राज्य के प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें डॉ. रोहित यादव (सचिव, वित्त विभाग), अंकित आनंद (सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग), रजत कुमार (सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग), डॉ. सारांश मित्तर (सचिव, ऊर्जा विभाग), इफ्फत आरा (विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) सहित अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी शामिल थे।

कांकेर में मलेरिया का कहर: एक और महिला की मौत, अब तक 4 की गई जान, 10 से अधिक छात्र भर्ती

No comments Document Thumbnail

 कांकेर/भानुप्रतापपुर। बस्तर अंचल के कांकेर जिले में मलेरिया का प्रकोप जानलेवा होता जा रहा है। छात्रावास के तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद अब भानुप्रतापपुर ब्लॉक के चिच गांव में एक महिला ने मलेरिया के कारण दम तोड़ दिया। जिले में मलेरिया से मौतों का आंकड़ा बढ़कर चार पहुंच गया है। संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांकेर पहुंचकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।


तेज बुखार के बाद इलाज के दौरान महिला ने तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, चिच गांव निवासी राकेश्वरी कोला (पति-...) को बीते कुछ दिनों से तेज बुखार आ रहा था। जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर मितानिन कार्यकर्ता द्वारा दवाइयां दी गई थीं, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। मंगलवार देर रात गंभीर हालत में परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में भर्ती 10 छात्र, 2 की हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर
जिले के विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले 10 से अधिक छात्र-छात्राएं फिलहाल मलेरिया से पीड़ित हैं और अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इनमें से दो छात्रों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य टीमों द्वारा छात्रावासों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने ली हाई लेवल बैठक, बस्तर संभाग में अलर्ट जारी
मलेरिया के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की। उन्होंने प्रभावित इलाकों में त्वरित जांच, पर्याप्त दवा वितरण, फॉगिंग और घर-घर सर्वे के सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, धरातल पर रोजाना सामने आ रहे नए मामलों से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

भारी बारिश पर एक्शन में सीएम साय: कलेक्टरों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश, बाढ़ प्रभावितों को तत्काल मिले राहत

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। छत्तीसगढ़ भर में हो रही मुसलाधार बारिश और नदियों-नालों के उफान को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक अमले को अलर्ट मोड पर ला दिया है। सीएम ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन 24 घंटे तैयार रहे।


मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो प्रभावित लोगों तक बिना किसी देरी के राहत और बचाव सामग्री पहुंचाई जानी चाहिए। प्रशासन पूरे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

दिल्ली में राष्ट्रपति मुर्मू से मिलेगा बस्तर का प्रतिनिधिमंडल

अपने प्रवास की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वे बुधवार रात एक दिवसीय दौरे पर दिल्ली रवाना हो रहे हैं। इस दौरान विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व से जुड़े मांझी, चालकी और मुड़िया जनजाति का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात करेगा। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय खुद प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहेंगे।

गुरु पूर्णिमा पर बनोरा आश्रम में लिया आशीर्वाद

दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री रायगढ़ दौरे पर रहेंगे। दौरे से पूर्व उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। अपने धार्मिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि वे हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बनोरा आश्रम जाकर पूज्य बाबा का आशीर्वाद लेते हैं। इसके साथ ही वे पिछले 30 वर्षों से अनवरत तपस्या में लीन पूज्य संत नारायण से भी आशीर्वाद प्राप्त करते आ रहे हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

वैश्विक बाघ दिवस 2026: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रकृति से गहरा जुड़ाव और संरक्षण आधारित जीवनशैली अपनाने का किया आह्वान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए प्रकृति के साथ समाज के गहरे जुड़ाव और संरक्षण-आधारित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, अग्रिम पंक्ति के वनकर्मी, विद्यार्थी और विभिन्न हितधारक उपस्थित रहे।

यादव ने कहा कि संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके साथ संतुलित संबंध स्थापित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, "प्रकृति केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उसका सम्मान करना और उससे आत्मिक शांति प्राप्त करना भी जरूरी है।" उन्होंने लोगों से प्रकृति से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

भारत ने बाघ संरक्षण में हासिल की बड़ी उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 हो गई है तथा देश में अब 58 टाइगर रिजर्व हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में हाथी रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक रिजर्व और आर्द्रभूमियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

एनटीसीए का इको-टूरिज्म पोर्टल लॉन्च

समारोह के दौरान यादव ने एनटीसीए के इको-टूरिज्म वेबपेज का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह मंच देश के सभी टाइगर रिजर्व की प्रमाणिक वेबसाइटों को एकीकृत करता है, जिससे सफारी और आवास की बुकिंग संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी और जिम्मेदार एवं सतत प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

वन अधिकारियों से अनुभव साझा करने की अपील

यादव ने कहा कि वनों की कहानियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें पारंपरिक ज्ञान, वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण और वर्षों का अनुभव भी शामिल होता है। उन्होंने वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों से अपने अनुभवों को लिखित रूप में साझा करने का आग्रह किया, ताकि वे भविष्य की प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक बन सकें।

क्षमता निर्माण और वैश्विक सहयोग पर जोर

उन्होंने वन अधिकारियों और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच भारत के नेतृत्व में दुनिया भर में ज्ञान साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

उत्कृष्ट योगदान के लिए एनटीसीए पुरस्कार

बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों और अन्य योगदानकर्ताओं को एनटीसीए पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों के योगदान को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी

मंत्री ने 'सेव टाइगर' विषय पर आयोजित पेंटिंग, स्केचिंग, स्लोगन लेखन और मास्क निर्माण प्रतियोगिताओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके अलावा, मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के ईको-क्लबों के माध्यम से विशेषकर टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित विद्यालयों में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया।

पांच महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन

समारोह के दौरान बाघ संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े पांच प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें एनटीसीए आउटरीच जर्नल 'स्ट्राइप्स' (जुलाई 2026 अंक), 24 टाइगर रिजर्व की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट, भारत के टाइगर लैंडस्केप में स्लॉथ भालुओं के आवास उपयुक्तता मूल्यांकन रिपोर्ट, 'टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड' तथा 'द रहमान खेड़ा टाइगर' शामिल हैं।

भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

वैश्विक बाघ दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान, वैज्ञानिक प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार इको-टूरिज्म, ज्ञान साझाकरण और जनभागीदारी के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत और निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।

पृष्ठभूमि

करीब एक शताब्दी पहले एशिया में लगभग 1 लाख जंगली बाघ पाए जाते थे, लेकिन आज वे अपने ऐतिहासिक आवास के 8 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र में सीमित रह गए हैं। अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, आवास का विनाश, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों ने बाघों की संख्या को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में 13 बाघ-आवास वाले देशों ने ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP) की शुरुआत की और 29 जुलाई को प्रतिवर्ष वैश्विक बाघ दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य बाघ संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और बाघों तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गुरु पूर्णिमा: ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का पावन पर्व

No comments Document Thumbnail

"गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। इस दिन उनका जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की तथा अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया। उनके अतुलनीय योगदान के कारण उन्हें 'आदि गुरु' के रूप में सम्मानित किया जाता है।

भारतीय परंपरा में गुरु का अर्थ केवल विद्यालय के शिक्षक तक सीमित नहीं है। माता-पिता, आचार्य, संत, आध्यात्मिक गुरु और वे सभी लोग, जो हमें जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं, गुरु के समान हैं। गुरु हमारे भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने और जीवन के अंधकार को दूर करने का कार्य करते हैं।

आज के आधुनिक और डिजिटल युग में जानकारी प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही ज्ञान, विवेक और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन आज भी गुरु ही प्रदान करते हैं। तकनीक हमें सूचना दे सकती है, परंतु जीवन जीने की कला, सही निर्णय लेने की क्षमता और मानवीय मूल्यों का बोध गुरु ही कराते हैं।

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। यह दिन हमें अपने जीवन में उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है, जिन्होंने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चा ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ विनम्रता, अनुशासन और सेवा की भावना जुड़ी हो।

आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरु के बताए आदर्श—सत्य, ईमानदारी, करुणा, संयम और सदाचार—पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु से मिले संस्कारों को जीवन में उतारे, तो एक सशक्त, शिक्षित और नैतिक समाज का निर्माण संभव है।

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम अपने सभी गुरुओं को नमन करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ज्ञान, संस्कार और मानवता से परिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लें।

"गुरु का सम्मान केवल एक दिन का नहीं, बल्कि जीवनभर की साधना और कृतज्ञता का प्रतीक है।"

वैश्विक बाघ दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी शुभकामनाएं, बाघ संरक्षण के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता

No comments Document Thumbnail

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक बाघ दिवस (Global Tiger Day) के अवसर पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोगों के लिए यह गर्व की बात है कि विश्व की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में निवास करती है।

उन्होंने कहा कि भारत के बाघ संरक्षण प्रयास प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और देशवासियों की सामूहिक इच्छाशक्ति से संचालित होते हैं।

मोदी ने विज्ञान-आधारित संरक्षण, जनभागीदारी तथा सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो बाघ संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाते हैं।

प्रधानमंत्री ने बाघों की सुरक्षा में वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के समर्पण एवं योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

एक्स (X) पर अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा:

“वैश्विक बाघ दिवस पर सभी वन्यजीव प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत के लोगों को इस बात पर गर्व है कि विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघ हमारे देश में हैं। भारत के बाघ संरक्षण के प्रयास प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और हमारे लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति से सशक्त होते हैं। हम विज्ञान-आधारित संरक्षण, जनभागीदारी और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराते हैं, जो बाघ संरक्षण को और मजबूत बनाते हैं।”

“हमारे वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों के अथक प्रयास तथा समर्पण ने भी बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी भावना के साथ भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.