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अश्लील वीडियो देखने का डर दिखाकर शिक्षिका से 4.50 लाख की साइबर ठगी, तीन आरोपी गिरफ्तार

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 अंबिकापुर। सरगुजा जिले के गांधीनगर थाना क्षेत्र में एक शिक्षिका से अश्लील वीडियो देखने के नाम पर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर 4 लाख 50 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।


पुलिस के अनुसार, पीड़ित शिक्षिका ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 19 मार्च 2026 को स्कूल से घर लौटने के बाद उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि वह इंटरनेट पर अश्लील फोटो और वीडियो देखती हैं, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से शिक्षिका घबरा गईं। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने विभिन्न बहानों से उनसे फोन-पे और बैंक खातों के माध्यम से कुल 4 लाख 50 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।

शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान साइबर पोर्टल, बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम पहले विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई गई और बाद में दूसरे खातों में स्थानांतरित कर एटीएम के जरिए निकाली गई।

तकनीकी जांच और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में दबिश देकर काशीराम अहिरवार (34), पन्नालाल यादव (40) और अभिलाषा अहिरवार (20) को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, वीडियो कॉल या खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच अथवा किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस का बड़ा दांव, भूपेश बघेल बनाए गए पर्यवेक्षक

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 Rajya Sabha Election : झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Ajay Sharma को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इस संबंध में एआईसीसी महासचिव K. C. Venugopal ने आधिकारिक आदेश जारी किया है।


जारी आदेश के अनुसार, दोनों नेताओं को झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति, समन्वय और संगठनात्मक गतिविधियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे चुनाव प्रक्रिया के दौरान विधायकों और पार्टी नेतृत्व के बीच तालमेल सुनिश्चित करने का कार्य करेंगे।

कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी तैयारियों को मजबूत करने और संगठनात्मक समन्वय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह नियुक्ति की है। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के बीच पार्टी अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाए जाना कांग्रेस नेतृत्व के उनके प्रति विश्वास को दर्शाता है। वहीं अजय शर्मा भी लंबे समय से संगठनात्मक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, जिसके चलते उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने और पार्टी के भीतर बेहतर समन्वय स्थापित करने में दोनों नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यूएन में फिर कश्मीर मुद्दा उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब

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 India Slam Pakistan In UN: पाकिस्तान द्वारा एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर कश्मीर मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।


संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान की ओर से कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंचों का दुरुपयोग करता रहा है और इस बार भी उसने वही प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और इस विषय पर किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता एक बड़ी जिम्मेदारी है, न कि भ्रामक और झूठे दावे करने का मंच।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा, “मैं स्पष्ट रूप से दोहराना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की निराधार बयानबाजी और झूठे दावे इस सच्चाई को नहीं बदल सकते।”

हरीश ने सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट केवल घटनाओं का संकलन भर नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए परिषद की उपलब्धियों, चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं का भी समावेश होना चाहिए।

CG NEWS : दो कारों से 5.65 क्विंटल गांजा बरामद, तस्करों की तलाश में जुटी पुलिस

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 एमसीबी। जिले की नागपुर चौकी पुलिस को मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लावारिस कारों से कुल 565 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 6 लाख रुपये आंकी गई है।


जानकारी के अनुसार, नागपुर चौकी क्षेत्र के उजियारपुर में दो संदिग्ध लावारिस कारों के खड़े होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में दोनों वाहनों की तलाशी ली।

तलाशी के दौरान एक कार से 260 किलोग्राम तथा दूसरी कार से 305 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। इस तरह दोनों वाहनों से कुल 565 किलोग्राम (करीब 5.65 क्विंटल) मादक पदार्थ जब्त किया गया। पुलिस ने गांजा और दोनों वाहनों को जब्त कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

हालांकि, कार्रवाई के दौरान मौके से कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सका। पुलिस अब गांजा तस्करी से जुड़े आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर खपाने की योजना बनाई गई थी। मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।

किसान स्कूल बहेराडीह में विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘सीड बॉल अभियान’ का शुभारंभ

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जांजगीर-चांपा- पौधरोपण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए सीड बॉल एक सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम है। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर सीड बॉल निर्माण और वितरण के माध्यम से अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह बात चांपा एसडीएम पवन कोसमा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल, बहेराडीह में आयोजित ‘सीड बॉल अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल है, जो कम लागत और कम श्रम में अधिक पौधारोपण को संभव बनाती है। इस अवसर पर तहसीलदार प्रशांत पटेल ने कहा कि वर्ष 1973 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और बहेराडीह स्थित देश के पहले किसान स्कूल में इसे ‘सीड बॉल अभियान’ से जोड़कर अनोखे तरीके से मनाया गया है।

बलौदा जनपद पंचायत के संचार एवं संकर्म सभापति चूड़ामणि राठौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। वहीं, सिवनी संकुल के शैक्षिक समन्वयक एवं शिक्षक अशोक तिवारी ने 100 से अधिक पौधों के रोपण का अपना अनुभव साझा करते हुए लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे प्रकृति प्रेमी

अभियान में सिवनी की रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी, धुरकोट की धनबाई राजन, आरसेटी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बिहान की कृषि सखियां एवं पशु सखियां, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे।

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव एवं रामाधार देवांगन ने बताया कि जिले में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किसान स्कूल के माध्यम से लोगों को सीड बॉल वितरित किए गए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने की शपथ भी दिलाई गई।

आरसेटी के अरुण पाण्डेय ने सीड बॉल की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह मिट्टी, गोबर अथवा कम्पोस्ट और बीजों से तैयार की गई छोटी गोल गेंद होती है। इन्हें बंजर भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों के किनारों और खाली स्थानों पर फेंका जा सकता है। वर्षा होने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इस प्रक्रिया में गड्ढा खोदने या विशेष देखभाल की आवश्यकता बहुत कम होती है।

कार्यक्रम के दौरान वुशू खिलाड़ी संघ सिवनी की टीम ने किसान स्कूल को ब्रह्म कमल का पौधा भेंट किया। इस टीम में महासचिव गुलाबचंद यादव, अध्यक्ष प्रीतम दास महंत, व्यवस्थापक अविनाश मांझी, संस्थापक रीता धीवर, उपाध्यक्ष रितिका सिंह, सह सचिव ममता देवांगन सहित अन्य खिलाड़ी शामिल थे।

इस अवसर पर मितानिन रामबाई यादव, लक्ष्मीन यादव, भगवती यादव, सक्रिय महिला ललिता यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, आरबीके साधना यादव, कृषि सखी अंजू साहू, बीना यादव, धनबाई राजन, रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी सहित सक्ती एवं जांजगीर-चांपा जिले की कृषि सखियां, पशु सखियां, मितानिन, क्रेडर्स तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ की जल प्रबंधन पहल को मिली राष्ट्रीय पहचान

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कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-सीएडी) मॉडल पर छत्तीसगढ़ के प्रयासों की केंद्र सरकार ने की सराहना

अन्य राज्यों को भी छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाने की दी गई सलाह

रायपुर- छत्तीसगढ़ में सिंचाई दक्षता बढ़ाने, जल उपयोग क्षमता में सुधार लाने और किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए जा रहे नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य सरकार की पहल की  सराहना करते हुए अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-सीएडी) मॉडल के अनुरूप कार्य करने की सलाह दी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की समृद्धि, जल संरक्षण और उपलब्ध जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं प्रभावी उपयोग के लिए राज्य सरकार निरंतर नवाचार कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह स्वीकृति प्रदेश के किसानों, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा सुशासन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का सम्मान है।

उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों को जारी पत्र में छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य के स्वयं के संसाधनों से एम-सीएडी कार्यों के क्रियान्वयन का विशेष उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने एम-सीएडी एवं जल प्रबंधन योजना के उद्देश्यों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य प्रारंभ किए हैं, जो सिंचाई दक्षता बढ़ाने तथा सृजित सिंचाई क्षमता के अधिकतम उपयोग की दिशा में एक अनुकरणीय पहल है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह प्रयास छत्तीसगढ़ की सिंचाई क्षमता बढ़ाने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा अन्य राज्यों द्वारा भी अपनी परिस्थितियों और संसाधनों के अनुसार ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन और कृषि क्षेत्र का सशक्तीकरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनेक नवाचार आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुशासन सरकार का लक्ष्य उपलब्ध प्रत्येक बूंद पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है।

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सफलता की कहानी-मिलेट से बढ़ी आय, किसानों के जीवन में आई खुशहाली

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श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यम

रायपुर- छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है।

शासन की पहल से बढ़ा श्री अन्न का महत्व

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कृषि उन्नति योजना से मिली नई दिशा

जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है।

दिलीप मरकाम ने कोदो-कुटकी से कमाए डेढ़ लाख रुपये

ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं।

हलदर हेमला की मेहनत भी लाई रंग

ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है।

किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही योजना

दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है श्री अन्न

कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

सफलता की सीख

पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

समाज, संगठन और योग के प्रति समर्पित था रूपनारायण सिन्हा जी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली।

मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक अजय चंद्राकर, महापौर मीनल चौबे, रमेश बैस, राम प्रताप, पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

जम्मू में देश का 7वां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) शुरू, जल्द लखनऊ में भी बनेगा नया केंद्र

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जम्मू- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Meteorological Centre - RMC) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि मौसम पूर्वानुमान सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए जल्द ही लखनऊ में भी एक नया क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा।

जम्मू में स्थापित यह केंद्र देश का सातवां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र है, जो जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को विशेष मौसम सेवाएं, आपदा संबंधी चेतावनियां और जलवायु सहायता प्रदान करेगा।

मंत्री ने कहा कि यह केंद्र पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों वाले इस संवेदनशील इलाके में मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाएगा। यहां से जिला स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष पूर्वानुमान, पर्यटक सलाह, शहर आधारित मौसम सेवाएं तथा फ्लैश फ्लड, बादल फटना, हिमस्खलन, भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और भूस्खलन जैसी आपदाओं के लिए समय पर चेतावनी जारी की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इन सेवाओं से अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं, किसानों, परिवहन क्षेत्र, जलविद्युत परियोजनाओं, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को विशेष लाभ मिलेगा।

मौसम अवसंरचना में बड़ा विस्तार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में एक भी डॉप्लर वेदर रडार नहीं था, जबकि अब जम्मू, श्रीनगर, लेह और बनिहाल टॉप में चार डॉप्लर वेदर रडार संचालित हो रहे हैं। मिशन मौसम के तहत अनंतनाग, राजौरी, बारामूला, किश्तवाड़ और डोडा में पांच नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने का प्रस्ताव है।

क्षेत्र में मौसम निगरानी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में यहां 56 वेधशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें 15 मैनुअल वेधशालाएं, 25 स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) और 16 स्वचालित वर्षा मापक (ARG) शामिल हैं। वर्ष 2014 में यह संख्या क्रमशः 13 AWS और 14 ARG थी।

भूकंप निगरानी प्रणाली भी हुई मजबूत

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की भूकंपीय निगरानी प्रणाली का आधुनिकीकरण किया गया है। जम्मू और कश्मीर के भूकंप केंद्रों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया है तथा उधमपुर में एक नया भूकंपीय वेधशाला केंद्र स्थापित किया गया है। किश्तवाड़ में भी एक नया भूकंप निगरानी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।

उन्होंने घोषणा की कि पिछले वर्ष आई आपदा को देखते हुए किश्तवाड़ में एक स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) और भूकंप विज्ञान केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

क्षेत्र विशेष के लिए अलग-अलग मौसम पूर्वानुमान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब क्षेत्रीय, जिला स्तरीय, पर्यटकों के लिए अलग और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग मौसम पूर्वानुमान जारी किए जाएंगे। इससे हिमालयी क्षेत्रों की विशेष जरूरतों के अनुरूप अधिक सटीक और उपयोगी मौसम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि फ्लैश फ्लड, बादल फटना, हिमस्खलन, भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए समय पर चेतावनी जारी कर जन-धन की हानि को कम करने में मदद मिलेगी।

प्रमुख बिंदु

  • जम्मू में देश का 7वां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र शुरू।

  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को मिलेगा लाभ।

  • लखनऊ में भी जल्द स्थापित होगा नया RMC।

  • पांच नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने की योजना।

  • जिला, पर्वतीय और पर्यटन क्षेत्रों के लिए अलग मौसम पूर्वानुमान।

  • फ्लैश फ्लड, बादल फटना और हिमस्खलन जैसी आपदाओं की समय पर चेतावनी।


आईएनएस चिल्का में 12 जून को आयोजित होगी 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड

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भुवनेश्वर/चिल्का- भारतीय नौसेना के अग्निवीरों और भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के नाविकों के 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) 12 जून 2026 को आईएनएस चिल्का में आयोजित की जाएगी। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, जिसे भारतीय नौसेना के आठवें अग्निवीर बैच और भारतीय तटरक्षक बल के नाविकों ने पूरा किया है।

यह आयोजन प्रशिक्षुओं के अनुशासित, सशक्त और पेशेवर रूप से सक्षम ‘समुद्री योद्धाओं’ में परिवर्तन की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो अब राष्ट्र सेवा के लिए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल Sanjay Vatsayan मुख्य अतिथि एवं परेड के निरीक्षण अधिकारी होंगे। समारोह में प्रशिक्षुओं के परिजन, पूर्व सैनिक, प्रतिष्ठित खिलाड़ी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

पासिंग आउट परेड भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत प्रशिक्षण को एक पेशेवर और सक्षम युद्धक बल की नींव माना जाता है। आईएनएस चिल्का अपने संरचित शैक्षणिक, शारीरिक और बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित, आत्मविश्वासी और दक्ष समुद्री योद्धाओं के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रशिक्षण “कर्तव्य, सम्मान और साहस” के मूल्यों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि समापन समारोह (Valedictory Function) की अध्यक्षता करेंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, चैंपियन डिवीजन और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को पुरस्कार एवं ट्रॉफियां प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं की द्विभाषी पत्रिका ‘अंकुर’ का भी विमोचन किया जाएगा।

पासिंग आउट परेड के बाद प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों और भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (Live Streaming) उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।


भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

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फिलीपींस- भारत और फिलीपींस के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक 5 जून 2026 को मनीला में आयोजित की गई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा तथा फिलीपींस के व्यापार एवं उद्योग विभाग (इंटरनेशनल ट्रेड ग्रुप) के अवर सचिव एलन बी. गेप्ती ने की। दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का स्वागत किया। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रुझानों, प्राथमिकता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने फिल्म, ऊर्जा, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आईटी-बीपीएम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा औषधि क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

व्यापार को सुगम बनाने के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। इस दौरान सीमा शुल्क सहयोग, कृषि क्षेत्र में सहयोग, विशेष उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस प्राथमिकता व्यापार समझौते (PTA) पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया तथा एक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इसके अलावा, 4 जून 2026 को 14वीं JWGTI बैठक के अवसर पर फिलीपींस में कार्यरत भारतीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

JWGTI की अगली बैठक नई दिल्ली, भारत में आयोजित की जाएगी। यह मंच दोनों देशों को वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।


भारत की अर्थव्यवस्था ने फिर दिखाई मजबूती, चौथी तिमाही में 7.8% की शानदार वृद्धि

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.8 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि बाजार की अपेक्षाओं से अधिक रही, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विनिर्माण, सेवा और निवेश क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण आर्थिक विकास को गति मिली। सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, बुनियादी ढांचे में निवेश और बढ़ती घरेलू मांग ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।

इस उपलब्धि के साथ भारत ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी अपनी आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। आर्थिक वृद्धि के ताजा आंकड़े देश में निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • जनवरी-मार्च तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.8% रही।

  • वृद्धि दर बाजार के अनुमान से अधिक रही।

  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल।

  • विनिर्माण, सेवा और निवेश क्षेत्रों का रहा महत्वपूर्ण योगदान।


कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित

विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान

रायपुर- श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें।

इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रमिक तथा उनके परिवारजन उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ‘ग्लोबल करियर’ की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

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 विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक (जनसंपर्क)

रायपुर : छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) योजना’ शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है।


कौशल और रोजगार के बीच की खाई

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।
यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी।

फाइव‑पिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ

ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ

विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ ‘करके सीखना’ सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई‑लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि ‘लोकल’ शोध को ‘ग्लोबल’ पहचान मिल सके।

रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा।

करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस

इन‑हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, CGPSC, बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।

जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?

यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न फ़ँसें।

बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण

जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में जीतेगी।

मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है।

‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत ‘उपभोक्ता’ पहचान से उठाकर एक ‘नॉलेज स्टेट’ में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल निःसंदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

नैनो उर्वरक के उपयोग से धान उत्पादन में हुई वृद्धि, लागत में आई कमी - किसान निरंजन

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 रायपुर : कृषि में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसान उत्पादन में वृद्धि के साथ खेती की लागत को भी कम करने में सफल हो रहे हैं। महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम दूधीपाली के प्रगतिशील किसान निरंजन सिदार ने भी विगत वर्ष अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं।


सिदार ने बताया कि वे धान की खेती में नैनो डीएपी से बीज उपचार कर खेती की शुरुआत की। इसके बाद फसल की वृद्धि अवस्था में नैनो डीएपी तथा नैनो यूरिया का छिड़काव किया। आधुनिक उर्वरक तकनीक के उपयोग से उनकी फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम देखने को मिला, जिससे फसल स्वस्थ एवं मजबूत बनी रही। इसके साथ ही धान की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में कमी आई है। नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर छिड़काव किए जाने की सुविधा के कारण अलग-अलग बार मजदूरी लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। विभाग के अनुसार नैनो डीएपी का उपयोग बीजोपचार, पौध उपचार तथा प्रारंभिक वृद्धि अवस्था में छिड़काव के रूप में किया जा सकता है, जबकि नैनो यूरिया का उपयोग फसल की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विभिन्न अवस्थाओं में किया जाता है।

विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित मात्रा एवं विधि से उपयोग करने पर उत्पादन वृद्धि, गुणवत्ता सुधार तथा लागत में कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार नैनो डीएपी से बीज उपचार के लिए 1 किलोग्राम बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी के घोल को बीज में अच्छे तरीके से मिलाएं, उसके पश्चात 20 मिनट तक छांव में सूखने दें और फिर बुवाई करें। नैनो डीएपी से थरहा (पौध) उपचार के लिए 1 लीटर पानी में 5 एमएल नैनो डीएपी की दर से घोल बनाएं एवं रोपाई से पहले 20 मिनट तक थरहा को इस घोल में डूबे रहने दें, उसके पश्चात रोपाई करें।

पहला छिड़काव फसल 30-35 दिन का होने पर जब फसल में पत्तियां अच्छी आ जाएं, तब 1 लीटर पानी में 4-5 एमएल की दर से नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का पत्तियों में स्प्रेयर के माध्यम से छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव, प्रथम छिड़काव के 25-30 दिन बाद फूल आने से पहले 1 लीटर पानी में 4-5 एमएल की दर से नैनो यूरिया प्लस का पत्तियों में स्प्रेयर के माध्यम से छिड़काव करें। साथ ही नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर भी स्प्रे किया जा सकता है। लेकिन कॉपर युक्त कीटनाशक एवं फफूंद नाशक के साथ इसे नहीं मिलाया जाता है।

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