Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

छत्तीसगढ़ में डिजिटल न्याय प्रणाली को मिलेगी नई धार, रायपुर में जुटेगी न्यायपालिका और पुलिस की टीम

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सशक्त, सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आगामी 2 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में ’नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीकों के समावेश के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी कार्यक्रम में सहभागी होंगे। राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला के दौरान अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस), डिजिटल न्यायिक समन्वय, नवीन आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण तथा न्याय एवं पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।

इन विषयों के संबंध में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे। यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य समन्वित डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नागरिकों को त्वरित, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह भी पढ़े :-

CM साय ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से की मुलाकात, संगठन व जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

No comments Document Thumbnail

 रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों प्रमुख नेताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों और राज्य के जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सेवा, सुशासन और जनकल्याण' के संकल्प को जन-जन तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद सकारात्मक बताते हुए जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार बैठकों व संवाद का दौर जारी है।

'बच्चे हमारे ही हैं, उन्हें माफ करना चाहता हूँ': विवादित बयानों पर बोले PM मोदी

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली : NEET (UG) परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी।


एक कड़े राजनीतिक या प्रशासनिक कदम के बजाय, प्रधानमंत्री ने एक परिपक्व अभिभावक की भूमिका निभाते हुए युवाओं के आक्रोश को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "गाली-गलौज से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता।"

"दांत से जीभ कटे तो दांत नहीं तोड़ते" — PM मोदी

अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए लगभग तीन मिनट के एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत माताजी को निशाना बनाकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद, उन्होंने सहानुभूति जताते हुए कहा:

"कम उम्र में युवाओं से गलतियाँ होना स्वाभाविक है और उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए। कभी-कभी हमारी जीभ दाँतों के बीच आ जाती है और खून निकल आता है, फिर भी हम अपने दाँत नहीं तोड़ते—क्योंकि दाँत और जीभ दोनों हमारे ही हैं। ये बच्चे भी हमारे ही हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है।"

कानूनी पचड़ों में उलझाने के बजाय सुधार पर जोर

प्रधानमंत्री ने युवाओं को अदालती मामलों से दूर रखने की वकालत करते हुए कहा कि उन्हें सजा देने या समाज में परेशान करने से स्थिति में बदलाव नहीं आएगा।

क्षमा और स्वीकार्यता: पीएम ने कहा, "मैं उन्हें दिल से माफ करना चाहता हूँ और समाज को भी इस दृष्टिकोण को स्वीकार करना चाहिए।"

भविष्य के प्रति समर्पण: युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैं आपके लिए जीता हूँ और खुद को आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित करता हूँ। आइए, पुरानी गलतियों से सीख लेकर साथ मिलकर आगे बढ़ें।"

वायरल वीडियो से शुरू हुआ था विवाद

गौरतलब है कि यह मामला नोएडा की रहने वाली रुचिका सिंह (सेक्टर 168) के उस वीडियो के वायरल होने के बाद गरमाया, जिसमें वे प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करती नजर आई थीं।

पुलिस कार्रवाई: उत्तर प्रदेश पुलिस ने संज्ञान लेते हुए एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ 'जीरो FIR' दर्ज की है।

लागू धाराएं: यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत दर्ज किया गया है।

आगे की प्रक्रिया: दिल्ली पुलिस अब इस 'जीरो FIR' की सामग्री और साक्ष्यों की आगे जांच कर रही है।

प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या में चावल कारोबारी की हत्या, बिजनेस पार्टनर ही निकला कातिल , आरोपी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 धमतरी : जिले के चर्चित चावल कारोबारी नीरज साहू हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मृतक के कारोबारी साथी को गिरफ्तार कर लिया है। कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या के चलते उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था।


पुल के पास मिला था रक्तरंजित शव

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गत 22 जुलाई को नारी महानदी पुल के मुख्य मार्ग पर 27 वर्षीय नीरज साहू का रक्तरंजित शव बरामद किया गया था। मृतक के गले और सिर पर धारदार व भारी वस्तु से हमले के गंभीर निशान थे। घटनास्थल पर ही उसकी बोलेरो पिकअप गाड़ी खड़ी मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

संयुक्त टीम ने खंगाले सैकड़ों सीसीटीवी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भावना पांडे के निर्देशन में कुरूद व मगरलोड थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम का गठन किया गया। जांच टीम ने घटनास्थल तथा आसपास के क्षेत्रों में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर संदेह की सुई सांकरा (मगरलोड) निवासी बिरेंद्र कुमार साहू की ओर घूमी, जो खुद भी चावल कारोबार से जुड़ा है।

तेजी से बढ़ते व्यापार से रखता था रंजिश

हिरासत में लेकर की गई पूछताछ में आरोपी बिरेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि नीरज साहू का कारोबार बहुत तेजी से फल-फूल रहा था, जिससे वह लगातार ईर्ष्या और जलन महसूस कर रहा था। इसी रंजिश के चलते उसने सुनसान रास्ते पर नीरज को रोका और कैंची व पाने (Spanner) से हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी।

हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त कैंची और पाना बरामद कर लिया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध, होटल-रेस्तरां में भी नहीं होगा इस्तेमाल

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से राज्यभर में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के स्थान पर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर तथा अन्य वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है। देखने और स्वाद में यह पनीर जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसका पोषण स्तर असली दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश

राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को बाजार, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान चलाकर नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ में लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर लागू है। देश के अन्य राज्यों में इसके निर्माण या बिक्री पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

इस बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के लिए नए मानक और लेबलिंग संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा, खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना को मंजूरी दी

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan) राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) के लिए वित्त वर्ष 2030–31 तक ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह अब तक का भारत का सबसे महत्वाकांक्षी अपतटीय तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान है।

यह निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण परिणाम है।

‘समुद्र मंथन’ योजना इन सुधारों को जमीन पर उतारते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक नया अध्याय शुरू करती है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और हर वर्ष लगभग 144 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹13 लाख करोड़) का कच्चा तेल आयात करता है। हाल की वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और निर्बाध उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना आयात पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधार

वर्ष 2014 से सरकार ने हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में कई संरचनात्मक सुधार किए हैं—

  1. ऑफशोर क्षेत्रों को खोलना – पहले प्रतिबंधित ("नो-गो") क्षेत्रों में से लगभग 99% क्षेत्र खोल दिए गए, जिससे भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पहली बार अन्वेषण संभव हुआ।

  2. अनुबंध प्रणाली में सुधार – उत्पादन साझेदारी अनुबंध (Production Sharing Contract) की जगह राजस्व साझेदारी अनुबंध (Revenue Sharing Contract) लागू किया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और प्रशासनिक हस्तक्षेप कम हुआ।

  3. विधायी सुधार – ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) संशोधन अधिनियम, 2025 के माध्यम से कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाया गया, अनुबंधीय स्थिरता सुनिश्चित की गई तथा विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत किया गया।

  4. नए नियमों का कार्यान्वयन – पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 लागू कर कारोबार को आसान बनाया गया और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल किया गया।

  5. समान निर्णय प्रणाली – सभी अनुबंध व्यवस्थाओं के लिए सशक्त सचिव समिति (Empowered Committee of Secretaries) की संरचना और अधिकारों को एकरूप बनाया गया।

  6. अन्वेषण पर विशेष जोर – ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के प्रदर्शन मानकों में बदलाव कर अन्वेषण गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई।

क्यों जरूरी है यह योजना?

तेल एवं गैस का अन्वेषण अत्यधिक पूंजी-गहन और लंबी अवधि वाली प्रक्रिया है। किसी ब्लॉक के आवंटन से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में सामान्यतः 5 से 10 वर्ष लगते हैं।

इसके अलावा, मौजूदा तेल एवं गैस क्षेत्रों का उत्पादन हर वर्ष लगभग 6–7% स्वाभाविक रूप से घटता है। इसलिए नई खोजें और निरंतर अन्वेषण आवश्यक हैं।

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अन्वेषण-आधारित विकास (Exploration-led Growth) की रणनीति अपनाई है।

‘समुद्र मंथन’ योजना की प्रमुख विशेषताएं

इस योजना के तहत सरकार गहरे समुद्र (Deepwater) में खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का अधिकतम 50% वहन करेगी। इससे निवेशकों का जोखिम कम होगा, निजी निवेश बढ़ेगा और भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता का तेजी से विकास होगा।

भारत की भविष्य की तेल एवं गैस संभावनाएं मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी तथा अंडमान जैसे गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में हैं। यहां एक खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर लगभग 125–150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।

इसीलिए सरकार जोखिम-साझेदारी (Risk Sharing) मॉडल अपनाकर अन्वेषण को प्रोत्साहित करेगी।

₹84,084 करोड़ की योजना के चार प्रमुख घटक

  1. आधुनिक अपतटीय भूकंपीय (Seismic) डेटा संग्रह एवं प्रसंस्करण – ₹28,534 करोड़

  2. 60 गहरे समुद्री खोजी कुओं की ड्रिलिंग – ₹43,200 करोड़

    • सरकार पात्र लागत का अधिकतम 50% या ₹675 करोड़ प्रति कुआं (जो भी कम हो) सहायता देगी।

  3. साझा अपतटीय अवसंरचना (Common Offshore Infrastructure Hubs) – ₹10,000 करोड़

  4. ऑयल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र (Manufacturing & Services Zones) – ₹2,000 करोड़

इसके अतिरिक्त योजना के निगरानी, डिजिटल हस्तक्षेप, मानव संसाधन, जन-जागरूकता एवं मूल्यांकन जैसे कार्यों के लिए ₹350 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

संभावित लाभ

यदि अन्वेषण सफल रहता है तो इस योजना से—

  • भारत का घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE प्रतिवर्ष हो सकता है।

  • देश का हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार 1.6 अरब टन तेल समतुल्य (TOE) से बढ़कर 2.2 अरब TOE तक पहुंच सकता है।

  • कच्चे तेल के आयात में हर वर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ की कमी आने की संभावना है।

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर दीर्घकालिक निर्भरता घटेगी।

बेहतर डेटा, जोखिम-साझेदारी, साझा अवसंरचना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत को गहरे समुद्र में तेल एवं गैस अन्वेषण तथा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल सिद्ध होगी।

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

No comments Document Thumbnail

38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

मां-बेटे की जोड़ी का खौफनाक कारनामा: बुजुर्ग महिला की चेन छीनी, CCTV फुटेज से पकड़े गए आरोपी

No comments Document Thumbnail

 भिलाई: मॉर्निंग वॉक पर निकली एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को क्या पता था कि मदद मांगने के बहाने रुके लोग ही उनकी जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर देंगे। भिलाई में हुई इस सनसनीखेज चेन स्नैचिंग की वारदात का खुलासा करते हुए भिलाई भट्ठी थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इस अपराध को किसी पेशेवर गिरोह ने नहीं, बल्कि सगे मां-बेटे की जोड़ी ने मिलकर अंजाम दिया था।


झांसा देकर गले से पार की 20 ग्राम सोने की चेन

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना 31 जुलाई की सुबह करीब 6:10 बजे की है। सेक्टर-1 (सड़क नंबर-2) निवासी उमा देवी रोज की तरह अपने घर के पास मॉर्निंग वॉक कर रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार एक युवक और महिला उनके पास आकर रुके।

बाइक से उतरी महिला ने उमा देवी को बातों में उलझाया और लकड़ी की मदद से पेड़ से फूल तोड़ा देने का आग्रह किया। जैसे ही बुजुर्ग महिला उसकी मदद करने लगीं, आरोपी महिला ने बड़ी सफाई से उनके गले से लगभग 20 ग्राम वजनी सोने की चेन झपट ली और अपने बेटे के साथ बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गई। गायब हुई सोने की चेन की कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये आंकी गई है।

CCTV और मुखबिर की मदद से पकड़े गए आरोपी

वारदात के बाद पीड़िता ने तुरंत भिलाई भट्ठी थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया। मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में लिया।

कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैंप-1 शांतिपारा निवासी जी. गौतम (20 वर्ष) और उसकी मां जे. पार्वती (48 वर्ष) के रूप में हुई है।

सोने की चेन और बाइक बरामद, पुलिस की सतर्क रहने की अपील

पुलिस ने मां-बेटे के कब्जे से छीनी गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि क्या इस जोड़ी ने शहर में पहले भी इस तरह की स्नैचिंग की घटनाओं को अंजाम दिया है।

हाल के दिनों में भिलाई में सुबह टहलने निकलने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

CWG 2026: बॉक्सिंग में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, सभी 10 मुक्केबाज फाइनल में पहुंचे; 10 गोल्ड जीतने का मौका

No comments Document Thumbnail

 ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के सभी 10 मुक्केबाजों ने जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बना ली। इसके साथ ही भारत के 10 पदक पक्के हो गए हैं और अब सभी खिलाड़ी स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे।


भारतीय बॉक्सिंग दल ने इस प्रदर्शन के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन गोल्ड कोस्ट 2018 में रहा था, जहां भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 9 पदक (3 स्वर्ण, 3 रजत और 3 कांस्य) जीते थे। ग्लासगो 2026 में भारत अब कम से कम 10 पदक हासिल करेगा, जबकि सभी फाइनल जीतने पर 10 स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर सकता है।

सेमीफाइनल में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन

  • लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा): तुवालु की तरोना ताफाकी को 5-0 से हराकर फाइनल में पहुंचीं।
  • अरुंधति चौधरी (70 किग्रा): 2022 की गोल्ड मेडलिस्ट वेल्स की रोसी एकल्स को 4-0 से हराया।
  • साक्षी चौधरी (51 किग्रा): कनाडा की एंबर-जेन वॉल को 5-0 से मात दी।
  • प्रीति पवार (54 किग्रा): जाम्बिया की कैथरीन मवापे को 5-0 से हराया।
  • जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा): लेसोथो की रापेलैंग मासेलेला को आरएससी से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
  • प्रिया घनघस (60 किग्रा): इंग्लैंड की लुसी किंग्स-व्हीटली को 5-0 से हराया।
  • जादुमणि सिंह (55 किग्रा): नामीबिया के फिलिप हाओसेब को 5-0 से हराया।
  • सचिन सिवाच (60 किग्रा): वेल्स के ओवेन हैरिस-एलन को 5-0 से मात दी।
  • अंकुश पंघाल (80 किग्रा): कनाडा के जोशुआ ओफोरी को हराकर फाइनल में पहुंचे।
  • नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा): त्रिनिदाद एवं टोबैगो के नाइजेल पॉल को 5-0 से हराया।

फाइनल मुकाबलों में भारत के खिलाड़ी

  • जादुमणि सिंह (55 किग्रा) बनाम जे डिक्सन (ऑस्ट्रेलिया)
  • सचिन सिवाच (60 किग्रा) बनाम ट्राईअगेन नडेवेलो (नामीबिया)
  • अंकुश पंघाल (80 किग्रा) बनाम डिमेजी शिट्टू (इंग्लैंड)
  • नरेंद्र बेरवाल (+90 किग्रा) बनाम दमार थॉमस (इंग्लैंड)
  • साक्षी चौधरी (51 किग्रा) बनाम रूबी व्हाइट (इंग्लैंड)
  • प्रीति पवार (54 किग्रा) बनाम स्कारलेट डेलगाडो (कनाडा)
  • अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) बनाम चैंटल रीड (इंग्लैंड)
  • जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा) बनाम माइकेला वॉल्श (उत्तरी आयरलैंड)
  • लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) बनाम एमा-सू ग्रीनट्री (ऑस्ट्रेलिया)
  • प्रिया घनघस (60 किग्रा) बनाम मैरी-बाथौल अल-अहमदिया (कनाडा)

भारत की नजर अब इन सभी 10 फाइनल मुकाबलों में जीत दर्ज कर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग के इतिहास का सबसे सफल अभियान पूरा करने पर होगी।

 
 
 

अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

इस महीने की शुरुआत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा की निर्मम और सुनियोजित हत्या की गई थी तथा उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare)" श्रेणी का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को घर लौटने के बाद दोबारा किसी काम से बाहर गए थे, लेकिन वापस नहीं आए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 एंटी-मॉर्टम (मृत्यु से पहले लगी) चोटें दर्ज की गई थीं, जो धारदार हथियारों और कुंद वस्तुओं से किए गए हमले की ओर संकेत करती थीं। जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जबकि 24 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।

सुरक्षा के दृष्टि से केन्द्रीय जेल रायपुर में मुलाकात व्यवस्था में अस्थाई परिवर्तन

No comments Document Thumbnail

रायपुर- केन्द्रीय जेल रायपुर में विगत माह बंदियों से मुलाकात के दौरान कुछ परिजनों द्वारा दैनिक उपयोग की सामग्रियों में प्रतिबंधित वस्तुएँ छिपाकर जेल परिसर के भीतर पहुँचाने का प्रयास किया गया था। जेल शासन के सघन तलाशी एवं सतर्क सुरक्षा व्यवस्था के कारण ऐसे सभी प्रयास विफल कर दिए गए तथा संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जप्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई।

अधीखक केन्द्रीय जेल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल की सुरक्षा एवं अनुशासन को दृष्टिगत रखते हुए और सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन द्वारा एहतियातन बंदियों के दैनिक उपयोग की कुछ चयनित सामग्रियों को जेल केन्टीन से क्रय कर बंदियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अन्य सभी स्वीकृत सामग्री पूर्ववत् नियमानुसार बंदियों के परिजन स्वयं उपलब्ध करा सकते हैं।

यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी है तथा इसका उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की जेल में संभावित प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जेल केन्टीन में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियाँ गुणवत्तापूर्ण हैं तथा उनकी दरें सामान्य बाजार दरों से कम निर्धारित की गई हैं, जिससे बंदियों के परिजनों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।

5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव की पहल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री से पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का किया आग्रह

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे चावल के परिवहन में तेजी आएगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया और अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय पूल के लिए 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। चावल के समयबद्ध उठाव को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने राज्य को हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री के आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे।

कटघोरा में अटलजी की कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित

No comments Document Thumbnail

रायपुर- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर में स्थापित कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से आज उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।

कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल उत्तरदायी पाये गये हैं। उनके इस कृत्य के पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

No comments Document Thumbnail

उर्वरकों का 98 प्रतिशत भंडारण, किसानों को डीबीटी से हजारों करोड़ की सहायता, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति

कृषि मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभागीय उपलब्धियों पर दी विस्तृत जानकारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एमडी अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग संचालक लोकेश चंद्राकर, मत्सय विभाग के संचालक एनएस नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मण्डी बोर्ड के एमडी  महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के डॉ. विनित सक्सेना उपस्थित थे।  

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।

मंत्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। राज्य में कृषि एवं उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

प्रदेश में पर्याप्त खाद और बीज की उपलब्धता

प्रेसवार्ता में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 30 जुलाई 2026 तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा लगभग 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है।

यूरिया का लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत भंडारण किया गया है, जबकि डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अवैध भंडारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 30 जुलाई तक 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें अनेक मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण तथा उर्वरक जब्ती जैसी कार्रवाई की गई।

प्रदेश में खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।

कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली बड़ी आर्थिक ताकत

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाखों किसानों को लाभ

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

बढ़ रहा है कृषि का रकबा, 83 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस वर्ष खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में औसत वर्षा भी सामान्य से अधिक दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।

आधुनिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राज्य में कृषि यंत्रीकरण के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभान्वित करते हुए लगभग 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्रदान किया गया है। 
प्राकृतिक खेती को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।

दलहन-तिलहन उत्पादन पर विशेष जोर

मंत्री राम विचार नेताम प्रेसवार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स जैसी योजनाओं के माध्यम से दलहन एवं तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन तथा अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

एग्रीस्टैक से डिजिटल कृषि को नई पहचान

प्रदेश के 19,389 ग्रामों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा किया जा चुका है तथा 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम-आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे किसानों को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

उद्यानिकी में लगातार बढ़ रहा क्षेत्र और उत्पादन

बीते ढाई वर्षों में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑयल पाम के क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत तथा बांस रोपण में 79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरियों, टिश्यू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पैक हाउस तथा कोल्ड स्टोरेज जैसी अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। आगामी वर्षों में बलरामपुर एवं जशपुर में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नई उपलब्धियांपशुधन विकास विभाग के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में दूध, अंडा एवं मांस उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के बीच हुए समझौते के बाद दुग्ध उत्पादकों को अब प्रत्येक दस दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। दूध संकलन दर भी बढ़ाई गई है तथा नई दुग्ध समितियों, चिलिंग सेंटर और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार किया गया है। मोबाइल वेटेरिनरी यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। गौधाम योजना, गौशालाओं के अनुदान में वृद्धि तथा नए गौ-अभ्यारण्यों की स्थापना भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल

मंत्री नेताम ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने ढाई वर्षों में जलक्षेत्र विकास, मत्स्य उत्पादन, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया है। राज्य का मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है। प्रदेश आज देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।

कृषि विपणन और अधोसंरचना को गति

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से प्रदेश की 21 मंडियां जुड़ चुकी हैं। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के अंतर्गत प्रदेश ने 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। प्रदेश की मंडियों एवं उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य स्वीकृत एवं निर्मित किए गए हैं।

राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन साथी (ै।ज्भ्प्) पोर्टल से जोड़ा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला कृषकों को बीज प्रमाणीकरण शुल्क पर शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वर्ष 2025-26 में 7,510 किसानों को लाभ मिला। रायपुर स्थित बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है, जो छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का सफल परीक्षण किया गया।

प्रेसवार्ता के अंत में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं, आधुनिक तकनीक और प्रभावी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

बस्तर के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की पहल, केंद्र से विशेष सहायता का आग्रह

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की मुलाकात

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत बस्तर संभाग के 7 जिलों के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए कहा कि जिन गांवों में वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण विकास नहीं पहुंच सका, वहां अब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार से तीन वित्तीय वर्षों में सहायता मांगी गई है।

वर्ष 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये, यानी कुल 435 करोड़ रुपये केंद्र से अपेक्षित हैं, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि बस्तर के दूर-दराज़ गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही उस पर तत्काल स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए धनराशि की कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी और केंद्र सरकार बस्तर के विकास के लिए पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नई संभावनाओं की पहचान बन रहा है। इन 461 गांवों तक बिजली पहुंचना उसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.