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PM मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात शुक्रवार को, रक्षा से परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को प्रस्तावित अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा सहयोग, आधुनिक सैन्य तकनीक, Su-57 लड़ाकू विमान और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भविष्य की सैन्य जरूरतों को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। खासतौर पर Su-57 को लेकर संभावित सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग पर भी बातचीत की उम्मीद है। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, मोदी-पुतिन की यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक से दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

शहरों में नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों में लाएं तेजी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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अमृत मिशन के कार्य मिशन मोड में पूरे कर शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में चलेंगी 240 ई-बसें

800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे सीबीजी प्लांट

रायपुर- शहरों का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर, 31 का निर्माण प्रगतिरत

मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेश के नगरीय निकायों में युवाओं को अध्ययन के लिए आधुनिक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन परिसरों के कार्यों में तेजी लाते हुए इन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने इन परिसरों में प्रस्तावित सीटों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की।

सुनियोजित और नागरिक-केंद्रित हों प्रदेश के शहर

मुख्यमंत्री साय ने नगरोत्थान योजना की समीक्षा करते हुए शहरों में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 नगर निगमों के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास सहित यातायात से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत नगरीय विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि नगरीय निकायों के सतत, संगठित एवं नागरिक-केंद्रित विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके अंतर्गत 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नागरिकों से सीधे जुड़ी इन सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायपुर के प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना

बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त अनटाइड एवं टाइड ग्रांट से किए जा रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इसके माध्यम से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि रायपुर नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक प्राप्त कर देश में छठा स्थान हासिल किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी तथा वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर के साथ स्वस्थ और बेहतर शहरी जीवन के लिए हरित क्षेत्र भी जरूरी हैं। उन्होंने वार्डों में उद्यान विकसित करने तथा जिन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या कम है, उनका चिन्हांकन कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को शीघ्र मिले आवास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत आवासों, निर्माण की स्थिति, आबंटन और व्यवस्थापन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि आवासों के आवंटन एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि पात्र परिवारों को शीघ्र अपने पक्के आवास का लाभ मिल सके।

चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसों से मजबूत होगा सार्वजनिक परिवहन

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना संबंधी कार्य मार्च 2027 से पहले पूर्ण कर ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री साय ने संबंधित सभी निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस सेवा से नागरिकों को आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

नागरिकों की शिकायतों का हो त्वरित और प्रभावी समाधान

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित प्राप्त शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण से संबंधित विषयों और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की भी जानकारी ली। उन्होंने नगरीय निकायों को विद्युत देयकों का नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। 

मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संकलन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर संकलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित की जाए।

अमृत मिशन के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, मिशन मोड में काम करने के निर्देश

मुख्यमंत्री साय ने अमृत मिशन 2.0 की समीक्षा के दौरान अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता का विषय है। अमृत मिशन के लंबित कार्यों को मिशन मोड में लेते हुए तेजी से पूरा किया जाए।मुख्यमंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में उच्च गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्लम रिडेवलपमेंट और लैंड मोनेटाइजेशन की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

800 करोड़ रुपये की लागत से 8 नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट

बैठक में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने भारत सरकार द्वारा परिवहन एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वच्छ एवं सतत ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सतत योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं में परिणाम स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, निर्माण की गुणवत्ता की सतत निगरानी तथा सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार

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धनंजय राठौर 

संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योगों, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक हो रहा बड़े फैसलों का असर

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों से हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से ज्यादा केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में व्यवस्था बदलने वाले फैसलों के रहे हैं। सरकार ने एक ओर गरीब, किसान और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा, वहीं दूसरी ओर उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास में लंबे समय तक असर डालने वाले नीतिगत सुधार शुरू किए।

सरकार बनने के तुरंत बाद सबसे बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास को लेकर हुआ। पहली कैबिनेट में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। 

इसी तरह सरकार ने धान खरीदी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनाया। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से  धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे। 

महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार  करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।  

बस्तर में बदलाव सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। नक्सलवाद दशकों से बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक जीत हासिल हुई है। बस्तर में सुरक्षा कार्रवाई के साथ विकास और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने की नीति अपनाई गई, जिससे बस्तर के लोगों का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ। ‘नियद नेल्ला नार 2.0‘ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान‘ के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। बस्तर में  लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना‘ तैयार की गई है। 

बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। सरकार का जोर अब बस्तर को संघर्ष की पहचान से निकालकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योगों की नई पहचान देने पर है। 

उद्योग के क्षेत्र में राज्य में निवेश लाने के साथ उद्योगों की स्थापना की प्रक्रियाओं को आसान पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। 

रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन की वायरल तस्वीर ने बढ़ाई हलचल, King के सेट से मुलाकात की चर्चा

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मुंबई- बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी और अभिनेता अभिषेक बच्चन की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर शाहरुख खान की आगामी फिल्म King के सेट से जुड़ी है। तस्वीर सामने आने के बाद दोनों सितारों के फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर यूजर्स अलग-अलग तरह के कयास लगा रहे हैं। कई फैंस रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन को एक साथ देखकर पुराने दौर की यादें ताजा कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स तस्वीर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं।

खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने तस्वीर के AI-generated होने की संभावना भी जताई है। हालांकि, तस्वीर की वास्तविकता या King के सेट पर दोनों की मुलाकात को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

वायरल तस्वीर ने एक बार फिर बॉलीवुड फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब फैंस को इंतजार है कि इस तस्वीर को लेकर रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन या फिल्म से जुड़े किसी आधिकारिक सूत्र की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं।

Instagram Reel के चक्कर में 30 फीट की छलांग, चट्टानों पर गिरा युवक; दोनों पैर फ्रैक्चर

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झांसी- सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत में एक युवक को खतरनाक स्टंट करना भारी पड़ गया। झांसी में Instagram Reel बनाने के लिए युवक ने करीब 30 फीट की ऊंचाई से बांध में छलांग लगा दी। छलांग के बाद वह पानी में सुरक्षित उतरने के बजाय चट्टानों पर जा गिरा, जिससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया।

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने युवक को बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए जान जोखिम में डालकर स्टंट करने के बढ़ते चलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सेकंड की Reel या सोशल मीडिया लाइक्स के लिए इस तरह के खतरनाक स्टंट गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं। युवाओं को वायरल होने की होड़ में अपनी सुरक्षा से समझौता करने से बचना चाहिए।

एक छोटी सी Reel के लिए उठाया गया जोखिम युवक को लंबे इलाज और चोट की परेशानी में डाल गया।

संजू सैमसन और श्रीसंत का वीडियो वायरल, कथित अनबन को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा

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केरल- Kerala Cricket League के फाइनल के बाद भारतीय क्रिकेटर संजू सैमसन और एस. श्रीसंत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद दोनों के बीच कथित अनबन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं।

वायरल वीडियो में दोनों के बीच बातचीत और माहौल को लेकर यूजर्स अलग-अलग तरह के कयास लगा रहे हैं। हालांकि, वीडियो के आधार पर दोनों के बीच किसी विवाद या अनबन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फाइनल मुकाबले के बाद सामने आए इस वीडियो ने क्रिकेट फैंस का ध्यान खींच लिया है। सोशल मीडिया पर लोग वीडियो को शेयर करते हुए अपने-अपने रिएक्शन दे रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि संजू सैमसन और श्रीसंत की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन कथित विवाद की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रवि किशन की ‘Money Follows’ लाइन का जलवा, वायरल मीम अब बना पूरा गाना

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मुंबई- अभिनेता और सांसद रवि किशन की एक वायरल लाइन “Money Follows” अब सोशल मीडिया मीम से निकलकर बाकायदा गाने का रूप ले चुकी है। उनकी चर्चित लाइन को लेकर इंटरनेट पर पहले से ही खूब मीम्स और शॉर्ट वीडियो वायरल हो रहे थे, लेकिन अब इसी लाइन पर तैयार किया गया गाना लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

सोशल मीडिया यूजर्स इस नए अंदाज को लेकर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। देखते ही देखते रवि किशन की यह लाइन इंटरनेट कल्चर का हिस्सा बन गई और अब इसे म्यूजिक के साथ पेश किए जाने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है।

रवि किशन की दमदार और अलग अंदाज वाली डिलीवरी ने इस लाइन को खास पहचान दिलाई। यही वजह है कि मीम से शुरू हुआ यह ट्रेंड अब गाने तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे शेयर कर रहे हैं और इसके अलग-अलग मजेदार वर्जन भी देखने को मिल रहे हैं।

मीम से म्यूजिक तक पहुंची रवि किशन की यह लाइन सोशल मीडिया पर चर्चा का नया केंद्र बन गई है।

आस्था, परंपरा और भव्यता के रंग में सजेगा ऐतिहासिक बस्तर दशहरा

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75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष

रायपुर- ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की।

बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष

बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।

नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।

केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही।

उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प

बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया।

उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया।

भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा।

1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित

बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी।

बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार

कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।

बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सकारात्मक पहल

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राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंट

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में  चर्चा की।

छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा

भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल

राज्यपाल डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय  पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा

भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के  विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक एवं अर्चना पाठक उपस्थित थीं।

सरगुजा एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री हुए सख्त: जिला कलेक्टर से की फोन पर सीधी बात

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा - बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं

जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश

विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बंदियों की गणेश प्रतिमाएं

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केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधे

रायपुर- गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।

बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा

केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान श्री गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है।

आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं

जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


PM-SETU के तहत ITI आधुनिकीकरण को बड़ी मंजूरी, राजस्थान-UP-तेलंगाना के लिए ₹735.70 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- देश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना के तहत 5वीं राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹735.70 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) के महानिदेशक दिलीप कुमार, अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार जी. मधुमिता दास, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर सहित मंत्रालय और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के साझेदार शामिल हुए।

9 ITI क्लस्टरों में अब तक ₹2,171 करोड़ का निवेश

5वीं NSC की मंजूरी के बाद PM-SETU के तहत अब तक 9 ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹2,171 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, नई तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

PM-SETU के तहत इंडस्ट्री-लेड हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जा रहा है। इसमें एक प्रमुख Hub ITI के साथ कई Spoke ITI को जोड़ा जाता है, जिससे संसाधनों, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय हो सके।

राजस्थान को ₹241 करोड़ की मंजूरी

राजस्थान के भिवाड़ी ITI क्लस्टर के लिए ₹241 करोड़ के Strategic Investment Plan (SIP) को मंजूरी दी गई है। इसे H.G. Infra Engineering Limited (HGIEL) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI Bhiwadi को Hub ITI बनाया गया है, जबकि Government ITI Alwar, Neemrana, Tijara और Kishangarh Bas को Spoke ITI के रूप में शामिल किया गया है।

तेलंगाना के लिए ₹254.30 करोड़

तेलंगाना के Medchal ITI क्लस्टर के लिए ₹254.30 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव ZEN Technologies Limited ने प्रस्तुत किया था।

यह प्रस्ताव पहले 4वीं NSC बैठक में कुछ स्पष्टीकरणों के अभाव में टाल दिया गया था। बाद में कोर्स स्ट्रक्चर, वित्तीय गणना, पात्रता, दस्तावेज और सिविल वर्क्स से जुड़े विस्तृत स्पष्टीकरण दिए गए, जिसके बाद समिति ने जवाबों को संतोषजनक मानते हुए प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

इस क्लस्टर में Government ITI Medchal Hub के रूप में होगा, जबकि Alwal, Shameerpet, Kukunoorpally और Siddipet ITI को Spoke संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ ITI क्लस्टर को ₹240.40 करोड़

उत्तर प्रदेश के Meerut ITI क्लस्टर के लिए ₹240.40 करोड़ के Strategic Investment Plan को भी मंजूरी मिली है। यह प्रस्ताव National Skill Development Corporation (NSDC) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI, Saket, Meerut को Hub ITI बनाया गया है। इसके साथ Ghaziabad, Hapur, Gautam Buddha Nagar और Baghpat के Government ITI को Spoke ITI के रूप में जोड़ा गया है।

उद्योग की भागीदारी से बदलेगा ITI का स्वरूप

PM-SETU का उद्देश्य सरकारी ITI को आधुनिक तकनीक, बेहतर आधारभूत ढांचे और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस करना है। स्वीकृत योजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, मौजूदा ट्रेड्स का अपग्रेडेशन, नए लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू करना तथा संस्थानों की संचालन क्षमता मजबूत करना शामिल है।

इन योजनाओं से ITI में पढ़ने वाले युवाओं को उभरती तकनीकों और बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसरों के लिए युवाओं की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।

राजस्थान बना PM-SETU के तहत SHA साइन करने वाला पहला राज्य

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल हुई। H.G. Infra Engineering Limited, राजस्थान सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (भारत सरकार) के बीच Shareholders' Agreement (SHA) पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा की मौजूदगी में हुए इस समझौते के साथ भिवाड़ी ITI क्लस्टर में PM-SETU के तहत कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई। इसके साथ राजस्थान PM-SETU के तहत SHA पर हस्ताक्षर करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर

PM-SETU केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य ITI इकोसिस्टम को उद्योग के साथ जोड़कर आधुनिक बनाना है। योजना के तहत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और उद्योग आधारित कौशल के जरिए युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के तीन ITI क्लस्टरों के लिए ₹735.70 करोड़ की ताजा मंजूरी को देश में आधुनिक, उद्योग-उन्मुख और भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार ITI विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शराब घोटाले को लेकर सियासत गरम, पिछली कांग्रेस सरकार पर बड़े आरोप

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

मंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार के दौरान शराब कारोबार में कथित गड़बड़ियों के चलते सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही है।

शराब कारोबार में गड़बड़ी का आरोप

मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शराब की खरीदी-बिक्री और वितरण व्यवस्था में कथित तौर पर ऐसी अनियमितताएं हुईं, जिनका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा। उनका दावा है कि इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान हुआ है।

हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

जांच को लेकर बढ़ सकती है सियासत

शराब कारोबार से जुड़े आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं। सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई करती है और क्या पूरे मामले में कोई आधिकारिक जांच या दस्तावेजी खुलासा सामने आता है।

नवा रायपुर में सजेगा गोल्फ का बड़ा मंच, 15 सितंबर से शुरू होगा Nava Raipur Open 2026

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ में गोल्फ प्रेमियों के लिए सितंबर का महीना खास होने जा रहा है। नवा रायपुर में 15 से 18 सितंबर 2026 तक प्रतिष्ठित Nava Raipur Open 2026 गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन किया जाएगा। चार दिवसीय इस प्रतियोगिता में देशभर के 132 प्रोफेशनल गोल्फर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

टूर्नामेंट की कुल पुरस्कार राशि ₹1 करोड़ रखी गई है, जिससे प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। नवा रायपुर में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट प्रदेश में गोल्फ को नई पहचान देने और राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को खेल के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कपिल देव होंगे खास आकर्षण

टूर्नामेंट के लॉन्च कार्यक्रम में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज कपिल देव भी शामिल होंगे। उनके जुड़ने से आयोजन को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। खेल जगत की बड़ी हस्ती की मौजूदगी नवा रायपुर में होने वाले इस आयोजन को खास आकर्षण देगी।

चार दिन तक चलेगा रोमांच

15 से 18 सितंबर तक चलने वाले Nava Raipur Open 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रोफेशनल गोल्फर खिताब और बड़ी पुरस्कार राशि के लिए मुकाबला करेंगे। प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों को उच्च स्तर के गोल्फ मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।

नवा रायपुर में इस बड़े आयोजन से प्रदेश में स्पोर्ट्स टूरिज्म, गोल्फ संस्कृति और खेल अधोसंरचना को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर खेल जगत की नजरें अब नवा रायपुर पर टिक गई हैं।

आरंग के छात्रावासों की व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच की मांग

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आरंग- आरंग के अकोली रोड स्थित प्री-मैट्रिक, आश्रम और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने छात्रावासों की व्यवस्था से संबंधित कुछ गंभीर आरोपों की जानकारी देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की अधीक्षिका के नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत सामने आई है। वहीं प्री-मैट्रिक एवं आश्रम छात्रावास की अधीक्षिका के संबंध में भी छात्रावास परिसर में निवास नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

फर्जी प्रवेश और खाद्यान्न को लेकर भी शिकायत

शिकायत में छात्रावास में फर्जी विद्यार्थियों के प्रवेश को दर्शाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा छात्रावास में बच्चों के लिए उपलब्ध चावल को कथित तौर पर अजय गुप्ता नामक व्यक्ति को बेचे जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला

छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि वास्तव में छात्रावासों में अधीक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं है, विद्यार्थियों की संख्या में गड़बड़ी है या खाद्यान्न के वितरण में अनियमितता हो रही है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय हो सकता है।

इसलिए छात्रावासों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति, प्रवेश रजिस्टर, खाद्यान्न स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर तथा अधीक्षकों की उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

पुलिस विभाग में पति होने का प्रभाव दिखाने का भी आरोप

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित अधीक्षिका अपने पुलिस विभाग में पदस्थ पति का प्रभाव दिखाकर लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास करती हैं। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अचानक निरीक्षण से सामने आ सकती है सच्चाई

मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम संबंधित विभाग द्वारा अचानक छात्रावास निरीक्षण करना होगा। यदि अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया जाता है तो छात्रावास में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति, भोजन व्यवस्था और उपलब्ध खाद्यान्न की स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड की जांच कर यह भी देखा जाना चाहिए कि छात्रावास में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तव में उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या में कोई अंतर तो नहीं है।

विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों द्वारा सामने रखी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों को देखते हुए अब संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो विभाग द्वारा स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

फिलहाल मामला जांच का विषय है और किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित पक्ष का पक्ष जानना आवश्यक है।

अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग आरंग के इन छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाता है या नहीं।


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