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CG NEWS : आधी रात घर में घुसा भालू, घंटों दहशत में रहा परिवार; वीडियो वायरल

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 कांकेर। कांकेर शहर के रिहायशी इलाके गोविंदपुर में जंगली भालुओं की बढ़ती आवाजाही से लोगों में दहशत का माहौल है। इसी बीच बीती रात एक भालू अचानक एक घर में घुस गया। घर के अंदर भालू को देखकर परिवार के सदस्य घंटों तक सहमे रहे और खुद को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलने से बचते रहे।


जानकारी के अनुसार, भालू भोजन की तलाश में घर में दाखिल हुआ था। घर के अंदर पहुंचने के बाद वह आसपास रखी चीजों को सूंघते हुए भोजन तलाशता रहा। कुछ देर तक घर में घूमने के बाद भालू वहीं आराम करता हुआ भी नजर आया।


इस दौरान परिवार के सदस्यों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित रखा। भालू के घर में घुसने की जानकारी सामने आने के बाद आसपास के इलाके में भी हड़कंप मच गया। परिवार ने दूर से पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले भी रिहायशी इलाकों में पहुंच चुके हैं भालू

स्थानीय लोगों के मुताबिक, गोविंदपुर इलाके में भालुओं का रिहायशी क्षेत्र में पहुंचना कोई नई घटना नहीं है। भोजन और पानी की तलाश में भालू कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में घरों के दरवाजों को भी नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं।

भालुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही के कारण शाम के बाद लोगों में विशेष सतर्कता देखने को मिल रही है। स्थानीय रहवासियों को बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

वन विभाग से कार्रवाई की मांग

रिहायशी इलाके में बार-बार भालुओं के पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि भालुओं को केवल मौके से खदेड़ने के बजाय उनकी आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार हो रही आवाजाही के कारणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

लोगों ने क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाने, भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। घटना के बाद गोविंदपुर क्षेत्र में लोगों के बीच भय और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

सड़क हादसे का राज खुला तो निकली हत्या! ट्रक विवाद में युवक को पीटा, फिर दुर्घटना का दिया रूप

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 जांजगीर-चांपा। जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के रूप में सामने आई युवक की संदिग्ध मौत का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि युवक की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं, बल्कि हत्या के कारण हुई थी। आरोपियों ने हत्या के बाद शव और घटनास्थल को इस तरह पेश करने की कोशिश की, ताकि मामला सड़क हादसा नजर आए।


पुलिस के मुताबिक, 24 जून 2026 को सोनादुला-सांकर भारतमाला रोड पर वाहन क्रमांक CG 10 BP 9060 से जुड़ी घटना में सकरी, बिलासपुर निवासी 26 वर्षीय अरविंद सिंह लोधी की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जांच में सामने आया हत्या का राज

मामले की जांच के दौरान पुलिस को घटनाक्रम को लेकर संदेह हुआ। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, परिस्थितियों और आसपास की जानकारी की बारीकी से पड़ताल की। इसके बाद संदिग्धों से पूछताछ की गई, जिसमें घटना की परतें खुलने लगीं।

जांच में सामने आया कि ट्रक के लेन-देन को लेकर अरविंद और उसके परिचितों के बीच पुराना विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर अरविंद के साथ मारपीट की और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसके बाद हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई

पुलिस की जांच और पूछताछ में हत्या की आशंका सामने आने के बाद मामले को अब सड़क दुर्घटना के बजाय हत्या के रूप में जांचा जा रहा है। पुलिस ने वारदात में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस हत्या के पीछे की पूरी वजह, वारदात में शामिल अन्य लोगों और घटनाक्रम से जुड़े सभी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

इस पुलिस खुलासे के बाद 24 जून की कथित सड़क दुर्घटना का मामला हत्या में बदल गया है। पुलिस अब घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करने में जुटी है।

गिरौदपुरी जा रहे श्रद्धालुओं से भरी माजदा पलटी, 30 से ज्यादा सवार; कई घायल

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 बलौदाबाजार। बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं से भरी माजदा वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में वाहन सवार कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ लोगों को गंभीर चोटें आने की भी बात कही जा रही है।


जानकारी के अनुसार, माजदा वाहन में 30 से अधिक श्रद्धालु सवार थे, जो गिरौदपुरी धाम दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान नेशनल हाईवे-130 बी पर सेल और छांछी के बीच मोड़ के पास अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क पर पलट गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

राहगीरों ने पहुंचकर की घायलों की मदद

दुर्घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों की मदद शुरू की। सूचना मिलते ही हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस व अन्य वाहनों की मदद से कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों का उपचार कर रही है।

हादसे की जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद कसडोल पुलिस भी मौके पर पहुंची और हादसे की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वाहन के अचानक अनियंत्रित होने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता पुलिस की जांच के बाद ही चल सकेगा।

फिलहाल घायलों की संख्या, उनकी स्थिति और हादसे के कारणों को लेकर पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जानकारी का इंतजार है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

बलौदाबाजार के सकरी गांव से दुखद खबर, नहीं रहीं उर्मिला देवी साहू

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*बलौदाबाजार* । जिले के सकरी गांव की वरिष्ठ और सम्मानित नागरिक श्रीमती उर्मिला देवी साहू का निधन हो गया है। उन्होंने 74 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। बीती रात बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात लगभग 2 बजे उनका देहावसान हुआ। इस दुखद खबर से पूरे सकरी गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

स्व. उर्मिला देवी साहू


पारिवारिक पृष्ठभूमि

​श्रीमती उर्मिला देवी साहू एक जाने-माने और प्रतिष्ठित परिवार से थीं। वे दस्तावेज लेखक श्री राजाराम साहू की धर्मपत्नी थीं। वे साहू फोटोकॉपी बलौदाबाजार के संचालक श्री परस राम साहू, दस्तावेज लेखक श्री भानु प्रताप साहू और अधिवक्ता श्री कौशल साहू की माताजी थीं। इसके साथ ही वे अधिवक्ता श्री गणेश शंकर साहू की पूजनीय बुआ थीं। 

वे अपने पीछे बच्चों, नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। पोतों में विजय शंकर, प्रखर, सौमित्र, पोतियों में लिली साहू, लीनु, स्विटी, अंजू, खुशी शामिल हैं।

 धार्मिक और सामाजिक जीवन


उर्मिला देवी साहू से चर्चा करते हुए मंत्री टंक राम वर्मा (फ़ाइल फोटो)


​उर्मिला देवी साहू की पहचान  अत्यंत धार्मिक और सरल स्वभाव की महिला के रूप में थी। वे गायत्री परिवार से गहराई से जुड़ी हुई थीं। उनका मन हमेशा पूजा-पाठ, धर्म-कर्म और अध्यात्म में लगा रहता था। अपने अच्छे विचारों और धार्मिक जुड़ाव के कारण उनकी समाज में बहुत प्रतिष्ठा थी। लोग उनका बहुत आदर करते थे।


​आज होगा अंतिम संस्कार

​उर्मिला देवी साहू के निधन की खबर मिलते ही गांव के लोग और परिचित शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने पहुँच रहे हैं। उर्मिला देवी जी का अंतिम संस्कार आज, 3 सितम्बर को किया जाएगा। यह अंतिम संस्कार उनके गृहग्राम सकरी (बलौदाबाजार) में सुबह 11 बजे संपन्न होगा।

H1N1 ने बढ़ाई चिंता: छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के 170 के करीब मरीज, रायपुर हॉटस्पॉट

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 CG Swine Flu: छत्तीसगढ़ में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या अब 170 के करीब पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में 7 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। राजधानी रायपुर संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बना हुआ है, जहां अब तक 73 मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं, प्रदेश के 19 जिलों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल चुका है।


रायपुर में सबसे ज्यादा मरीज

रायपुर जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिला अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को मरीजों की निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर में भी स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों की संख्या 12 से बढ़कर 13 हो गई है। यहां फिलहाल 3 एक्टिव केस हैं। वहीं, सरगुजा में एक नया मरीज मिलने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 3 हो गई है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी संक्रमण के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।

इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। विभाग के मुताबिक इन वर्गों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

अस्पतालों को तत्काल सूचना देने के निर्देश

स्वाइन फ्लू के नियंत्रण और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं। किसी भी मरीज में H1N1 स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर इसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को देने के लिए कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। ऐसे में इसे सामान्य बीमारी समझकर इलाज में देरी करना भारी पड़ सकता है।

सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खासकर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ बढ़ रही हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर बरतें सावधानी

स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली श्वसन बूंदों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। ऐसे में बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता का ध्यान रखने और लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल देश में बना मिसाल, ‘जल संचय जन भागीदारी’ में प्रदेश अव्वल

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 रायपुर : बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।


सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।

कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।

इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।

इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।

दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया।

अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है।

इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है।

छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में

राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

भू-जल की स्थिति में सुधार के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन’ प्लान : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। इससे जल संरक्षण के लिए राज्यवार स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति निर्धारित की जा सकेगी।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ प्रारंभ करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी - इन तीनों के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।

जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोकने तथा उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका सीधा लाभ खेती को मिल सकता है और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है। गांवों में पेयजल स्रोतों की स्थिति बेहतर होने से परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में भी कमी आ सकती है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जल संरक्षण केवल संरचनाओं के निर्माण का विषय नहीं है। यह सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का एक छोटा-सा हिस्सा पानी के लिए छोड़ने से शुरू हुई पहल भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने के बड़े अभियान का आधार बन सकती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भाजपा ने प्रकोष्ठों में की नई नियुक्तियां, चुन्नीलाल साहू बने संकुल संयोजक

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छत्तीसगढ़ ने संगठनात्मक विस्तार के तहत विभिन्न प्रकोष्ठों में नई नियुक्तियां की हैं। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति के बाद पार्टी ने संयोजक, सहसंयोजक और प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय की हैं।


भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन मार्कण्डेय की ओर से जारी आदेश के अनुसार चुन्नीलाल साहू को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक नियुक्त किया गया है। वहीं लाभचंद बाफना को प्रकोष्ठ संकुल सहसंयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


पार्टी के अनुसार, इन नियुक्तियों का उद्देश्य संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा संगठनात्मक कार्यों में समन्वय को मजबूत करना है।

700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें - उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठक

​रायपुर- राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय

बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर  सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।

​न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण

वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया। 

​वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर

मंत्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल

छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।

नवा रायपुर में खुलेगा NMIMS का नया कैंपस, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) नवा रायपुर अटल नगर में अपना नया कैंपस स्थापित करने जा रहा है। इसके लिए जमीन का पंजीयन पूरा हो चुका है, जिससे प्रदेश में संस्थान की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

NMIMS के नए कैंपस के शुरू होने से नवा रायपुर को शिक्षा और प्रबंधन अध्ययन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम होगी और उन्हें प्रदेश में ही प्रतिष्ठित संस्थान में अध्ययन के अवसर मिल सकेंगे।

शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

नवा रायपुर में NMIMS कैंपस की स्थापना से उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। संस्थान के आने से विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे नवा रायपुर की शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नवा रायपुर के विकास को मिलेगा नया आयाम

नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक सुविधाओं और संस्थागत विकास के साथ एक प्रमुख शैक्षणिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की मौजूदगी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कैंपस के संचालन के बाद प्रबंधन, व्यवसाय और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

NMIMS का नवा रायपुर कैंपस छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए रास्ते खोलने के साथ ही राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते हुए शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़कर 35, तीन साल में लगभग दोगुनी हुई आबादी; संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में बाघ संरक्षण को लेकर बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। वर्ष 2022 में राज्य में बाघों की संख्या करीब 17-18 थी, जो अब बढ़कर 35 तक पहुंच गई है। इस तरह राज्य में बाघों की आबादी लगभग दोगुनी हुई है।

बाघों की संख्या में यह वृद्धि राज्य में वन्यजीव संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और बाघों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मानी जा रही है। बढ़ती संख्या से छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में बाघों के लिए बेहतर पर्यावास और अनुकूल परिस्थितियों के संकेत मिलते हैं।

संरक्षण के साथ बढ़ाई जा रही आबादी

राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इंद्रावती, उदंती-सीतानदी, अचानकमार और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला सहित चार टाइगर रिजर्व हैं।

वन विभाग बाघों के संरक्षण और उनके सुरक्षित आवागमन के लिए वन गलियारों, शिकार प्रजातियों और प्राकृतिक आवास की स्थिति पर भी लगातार नजर रख रहा है।

तीन बाघिनों के स्थानांतरण की तैयारी

राज्य में बाघों की संख्या और आनुवंशिक विविधता को और मजबूत करने के लिए तीन बाघिनों को मानसून के बाद दूसरे उपयुक्त वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की योजना भी सामने आई है। इससे उन क्षेत्रों में बाघों की आबादी को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां इनकी संख्या अभी कम है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत

छत्तीसगढ़ में बाघों की बढ़ती संख्या राज्य के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की संख्या में वृद्धि केवल बाघ संरक्षण की सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर होने का भी संकेत देती है।

आने वाले समय में बाघों के सुरक्षित आवास, वन्यजीव गलियारों और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर ध्यान देना राज्य में बाघ संरक्षण को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

रुपये को संभालने में RBI सक्रिय, डॉलर की बिक्री से बढ़ा समर्थन; तेल कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच मुद्रा बाजार पर नजर

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मुंबई- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को तेज गिरावट से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में अपना हस्तक्षेप बढ़ा दिया है। बाजार सूत्रों के मुताबिक, RBI डॉलर की बिक्री के जरिए रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

बुधवार को रुपया 94.89 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान सीमित दायरे में रहा। अंत में यह 94.97 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि मंगलवार को रुपया 94.95 के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में RBI के हस्तक्षेप के कारण रुपये को 95 प्रति डॉलर के स्तर के नीचे जाने से सहारा मिला।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95-97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, व्यापार घाटे और महंगाई पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की भूमिका इस समय काफी महत्वपूर्ण हो गई है।

RBI की डॉलर बिक्री से रुपये को मिला सहारा

बाजार विशेषज्ञों और कारोबारियों के मुताबिक, RBI पिछले कई कारोबारी सत्रों से रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री कर रहा है। बुधवार को भी केंद्रीय बैंक के बाजार खुलने से पहले और कारोबार के दौरान हस्तक्षेप करने की संभावना जताई गई। इसका उद्देश्य रुपये को किसी एक स्तर पर स्थायी रूप से रोकना नहीं, बल्कि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना है।

RBI के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से वह जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 729 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

NRI जमा से भी मजबूत हुई RBI की स्थिति

रुपये को समर्थन देने में विदेशी मुद्रा प्रवाह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गैर-निवासी भारतीयों (NRI) की विदेशी मुद्रा जमा में हाल के दिनों में तेज वृद्धि हुई है। इससे देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों को मजबूती मिली है और RBI की बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता बढ़ी है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ब्याज दरों और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन RBI का हस्तक्षेप तेज गिरावट और अत्यधिक अस्थिरता को सीमित कर सकता है।

फिलहाल RBI की सक्रियता ने रुपये को कुछ राहत दी है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

पश्चिम एशिया तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर असर, सेंसेक्स 374 अंक टूटा; निफ्टी 24 हजार के नीचे

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू बाजार में भी निवेशकों ने सतर्कता बरती और जमकर बिकवाली देखने को मिली।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49 प्रतिशत गिरकर 76,570.35 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 141.35 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 23,914.45 अंक पर बंद हुआ।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इससे तेल की कीमतों में तेजी आई और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई, आयात बिल और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई है।

बाजार में ऑटो और आईटी शेयरों पर खास दबाव रहा, जबकि कुछ बैंकिंग, तेल एवं गैस और बड़े शेयरों में खरीदारी ने शुरुआती गिरावट को कुछ हद तक संभालने में मदद की।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

आवारा कुत्ते के हमले से मची दहशत, 13 लोग पहुंचे अस्पताल

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 बालोद। जिले के डौंडीलोहारा नगर में एक आवारा कुत्ते के हमले से दहशत फैल गई। नगर के अलग-अलग इलाकों में कुत्ते ने 13 लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। घटना के बाद लोगों में डर का माहौल है और वे घर से बाहर निकलते समय सतर्कता बरत रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, आवारा कुत्ते ने नगर के विभिन्न स्थानों पर अचानक लोगों पर हमला किया। किसी के हाथ तो किसी के पैर में काटने से लोग घायल हुए। सभी घायलों को उपचार के लिए डौंडीलोहारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। इनमें से तीन घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

दुकान से लौट रही महिला पर किया हमला

टिकरापारा निवासी 60 वर्षीय भगवती यादव किराना दुकान से काम खत्म कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान आवारा कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें काटकर घायल कर दिया।

इसी तरह संजय नगर निवासी शशिकला शिव मंदिर में पूजा करने जा रही थीं। रास्ते में कुत्ते ने उन पर हमला कर हाथ-पैर में काट लिया।

वहीं, 60 वर्षीय मानो बाई चिल्हाटीकला गांव से बैंक संबंधी काम के लिए डौंडीलोहारा आई थीं। उन्हें भी आवारा कुत्ते ने अपना शिकार बना लिया। इन तीनों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

आवारा कुत्तों के नियंत्रण की मांग

एक ही दिन में 13 लोगों के कुत्ते के काटने की घटना सामने आने के बाद नगर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

लोगों ने संबंधित विभाग से आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल सभी घायलों का डौंडीलोहारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार जारी है।

भारत और नेपाल भाषा एआई के क्षेत्र में मिलकर करेंगे काम, डिजिटल समावेशन को मिलेगा बढ़ावा

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भारत और नेपाल ने भाषा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में संयुक्त सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की है। डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) और काठमांडू यूनिवर्सिटी के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र (DPI-AI) के बीच इस दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत हुई।

बैठक में नेपाल की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए मौजूदा भाषा मॉडल को मजबूत करने तथा कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं के लिए नए AI मॉडल विकसित करने पर जोर दिया गया। इसमें नेपाली, नेवारी, तामांग और गुरुङ जैसी भाषाओं के साथ-साथ प्रचलित लिपि और रंजना लिपि पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

दोनों पक्षों ने उच्च गुणवत्ता वाले भाषा डेटा के संग्रह और उसके उपयोग, विभिन्न भाषाओं एवं बोलियों के लिए प्रतिनिधि डेटासेट तैयार करने, अनुवाद क्षमताओं को बेहतर बनाने तथा आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।

बैठक में भाषा AI को वास्तविक जीवन में उपयोगी बनाने और आवाज आधारित डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। काठमांडू यूनिवर्सिटी के DPI-AI केंद्र की शोध, नवाचार और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में विशेषज्ञता को इस सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

भारत का भाषिणी प्लेटफॉर्म AI आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित सहयोग से नेपाल की भाषाई विविधता के अनुरूप डिजिटल सेवाओं और AI तकनीक के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

करेले की उन्नत खेती से चमकी किसान नारायण प्रसाद वर्मा की किस्मत

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प्रति एकड़ कमाया 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

रायुपर- पारंपरिक खेती से इतर आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों की तकदीर बदल रही है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत ग्राम टेंगराही के कृषक नारायण प्रसाद वर्मा ने इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से करेले की व्यावसायिक खेती अपनाकर वे न केवल अपनी आय दोगुनी कर चुके हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

सरकारी अनुदान और योजनाओं का मिला लाभ

युवा किसान की करेले की खेती से किस्मत चमक गई हैए जिसके तहत उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा मिल रहा हैं, जिसके लिए वह कई सालों से करेले की खेती कर लाखों रुपए मुनाफा कमा रहे हैं

1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि के मालिक वर्मा पहले केवल धान की पारंपरिक खेती करते थे, जिससे सीमित आय प्राप्त होती थी। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया। योजना के तहत शासन से उन्हें सब्जी क्षेत्र विस्तार हेतु 1 हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए 24,000 का अनुदान मिला। सपोर्ट सिस्टम स्थापना हेतु 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम लगाने के लिए 5,000 की राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से उनके खाते में हस्तांतरित की गई।

आधुनिक कृषि तकनीकों ने बढ़ाई उपज

वर्मा ने खेती में नवाचार करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इससे पानी की भारी बचत हुई और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि करेले की उन्नत और आधुनिक तकनीकों और मचान विधि से खेती करके किसान कम समय में लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। वर्मा ने बताया कि खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार रोकने के लिए मल्चिंग शीट और पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन, टपका सिंचाई का उपयोग किया जाता है।

12 टन उत्पादन और 1.07 लाख का शुद्ध मुनाफा

करेले की खेती कर रहे युवा किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने बताया कि पहले हम पारंपरिक खेती करते थे, पर इसमें उन्हें अधिक मुनाफा नहीं हो पा रहा था। इसके बाद उन्होंने करेले की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। उन्होंने तकनीकी प्रबंधन और उचित देखरेख के कारण उन्हें प्रति एकड़ करेले की फसल से लगभग 12 टन उत्पादन हासिल हुआ। बाजार में फसल का सही मूल्य मिलने पर सभी लागत और खर्चों को निकालकर उन्हें एक लाख 7 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। इस सफलता से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि कृषि के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

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