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हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व  मंत्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

विशेष लेख-नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

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माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है 

अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध                                             रायपुर- विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।

स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।   स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है। 

अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)

जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।

शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान के बहुआयामी लाभ

शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।

मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध  स्थापित होता है।

समाज और परिवार की जिम्मेदारीस्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।

साय कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले: AI मिशन से लेकर भारी उद्योग और वित्तीय सुधारों को मंजूरी

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ब्यौरा देते हुए बताया कि राज्य में सुशासन, अत्याधुनिक तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति देने के लिए 5 वर्षों हेतु 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ की शुरुआत को हरी झंडी दे दी है।


उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार के IndiaAI Mission की तर्ज पर तैयार इस योजना के तहत प्रदेश भर में 100 AI डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, साथ ही 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सीधी वित्तीय व तकनीकी सहायता दी जाएगी। इस मिशन के माध्यम से राज्य के 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आम जनता के लिए 50 से अधिक AI-आधारित सुगम शासकीय सेवाएं विकसित की जा सकें।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाते हुए कैबिनेट ने भारत सरकार के प्रतिष्ठित मिनीरत्न उपक्रम BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) द्वारा ‘हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट’ की स्थापना के लिए रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। यह छत्तीसगढ़ का पहला भारी मशीनरी निर्माण उद्योग होगा, जिससे राज्य में भारी पूंजी निवेश आएगा, विनिर्माण (Manufacturing) व MSME क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग (PWD) में C-DAC पुणे द्वारा विकसित ‘वर्क्स एण्ड एकाउंट मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम’ (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को मंजूरी दी गई है। इस प्रणाली के लागू होने से ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेज़रमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान और लेखा प्रबंधन जैसी सभी प्रक्रियाएं एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ जाएंगी, जिससे निर्माण कार्यों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और भुगतान में लगने वाला समय घटेगा।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना’ के दिशा-निर्देशों में बड़ा संशोधन किया गया है। अब ग्रामीण आंतरिक गलियों में CC सड़क व नाली निर्माण और सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की पात्रता से छूटे सभी ग्रामीण मार्गों को इसमें शामिल कर योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है, जिसके लिए नाबार्ड ऋण, पर्यावरण व अधोसंरचना विकास मद तथा खनिज न्यास (DMFT) से संसाधन जुटाए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एशियाई विकास बैंक (ADB) से “Anjor LIGHT” तकनीकी सहायता परियोजना के तहत 15 करोड़ रुपये का 100% पूर्ण अनुदान (Grant) प्राप्त करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया है। 1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029 तक चलने वाली इस 3 वर्षीय परियोजना से राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और इसके माध्यम से ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप सार्वजनिक वित्त प्रबंधन, PPP इकोसिस्टम, ग्रीन फाइनेंस तथा जलवायु-अनुकूल परियोजनाओं के विकास के लिए ‘परियोजना प्रबंधन इकाई’ (PMU) का गठन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शासकीय धन के सदुपयोग और कड़े वित्तीय अनुशासन के लिए राज्य की सभी योजनाओं में State Single Nodal Agency लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बजट राशि बैंकों में लंबे समय तक अकारण निष्क्रियों के रूप में पड़ी नहीं रहेगी, बल्कि एक केंद्रीयकृत मदर अकाउंट से आवश्यकता पड़ने पर सीधे हितग्राहियों या वेंडरों के खातों में हस्तांतरित होगी। इससे नकदी प्रबंधन में सुधार होगा और गबन, बैंकिंग धोखाधड़ी तथा अनावश्यक ब्याज के बोझ पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।

सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए तय किया है कि ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करने और आमजन व संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (Listing) कराने की अनुमति दी गई है। इसके लिए राज्य सरकार मूलधन व ब्याज भुगतान पर अपनी गारंटी (Government Guarantee) प्रदान करेगी और प्रत्याभूति शुल्क में छूट देगी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और बिजली उत्पादन व वितरण प्रणाली को नई रफ्तार हासिल होगी।

चलती कार के सनरूफ से स्टंटबाजी पर हाईकोर्ट सख्त: SSP को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

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 बिलासपुर। चलती कारों के सनरूफ से बाहर निकलकर स्टंट करने और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने की बढ़ती खतरनाक प्रवृत्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। नेशनल हाईवे पर युवतियों द्वारा चलती गाड़ी के सनरूफ से निकलकर स्टंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद, अदालत ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह को व्यक्तिगत शपथपत्र (हलफनामा) पेश करने का आदेश दिया है।


कोनी-सेंदरी रोड का वीडियो बना आधार

यह पूरा मामला कोनी-सेंदरी मार्ग से जुड़ा है, जहां चलती कार का सनरूफ खोलकर युवक-युवतियों द्वारा स्टंट करने और रील बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए चलती कार से मोबाइल के जरिए शूटिंग की जा रही थी। मामले को बेहद गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया।

कोर्ट ने पुलिस से पूछे तीखे सवाल

  • हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि:
  • इस मामले में अब तक क्या-क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है?

भविष्य में इस प्रकार की जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस विभाग ने क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं?

पुलिस की कार्रवाई और पहचान की कोशिश

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि पुलिस लगातार मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत कार्रवाई कर रही है। कोर्ट को बताया गया कि 4 अगस्त को सामने आए इस घटनाक्रम के बाद एसएसपी के निर्देश पर संबंधित वाहन और उसमें सवार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल पुलिस वाहन चालक और स्टंट में शामिल युवतियों की पहचान में जुटी है।

केवल मौखिक आश्वासन नहीं, ठोस रोडमैप चाहिए

हाईकोर्ट केवल पुलिस के मौखिक दावों और सामान्य कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने बिलासपुर एसएसपी को सख्त निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर यह बताएं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर विस्तृत चर्चा

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नई दिल्ली में आज पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य विषय मानव–वन्यजीव संघर्ष (Human–Wildlife Conflict - HWC) तथा इसकी रोकथाम, शमन और मानव एवं वन्यजीवों के बीच दीर्घकालिक सह-अस्तित्व को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श था।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, समिति के सदस्य सांसद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCFs) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Wardens) उपस्थित रहे।

समिति को 18 दिसंबर 2025 को आयोजित पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई अनुवर्ती कार्रवाई की जानकारी दी गई। इसमें संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के सांसदों के साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किए गए परामर्श शामिल थे।

बैठक में बताया गया कि मानव–वन्यजीव संघर्ष का स्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग है। कई राज्यों में मानव–हाथी संघर्ष प्रमुख है, जबकि अन्य स्थानों पर बाघ, तेंदुआ, भालू, गैंडा, जंगली सूअर, गौर, बंदर तथा अन्य वन्यजीवों से जुड़े संघर्षों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।

समिति को बताया गया कि प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में घोषित मानव–वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence on Human–Wildlife Conflict) की स्थापना तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित SACON, WII South Centre में की गई है। यह केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, नीति निर्माण, क्षमता विकास तथा समुदाय-केंद्रित उपायों के माध्यम से मानव–वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय संस्थान के रूप में कार्य करेगा।

इसके अलावा, 10 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल शुरू किए जाने की जानकारी दी गई। यह पोर्टल संघर्ष की घटनाओं के रिकॉर्ड, डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझा करने तथा निर्णय समर्थन के लिए एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराएगा। साथ ही दक्षिण भारत के लिए हाथी संरक्षण क्षेत्रीय कार्ययोजना (Regional Action Plan on Elephant Conservation) को भी मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई।

बैठक में असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने अपने-अपने राज्यों में मानव–वन्यजीव संघर्ष की स्थिति, अपनाए गए समाधान, सामुदायिक भागीदारी, तकनीकी नवाचार तथा भविष्य की रणनीतियों पर प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में परिदृश्य आधारित योजना, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, आवास सुधार, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सामुदायिक सहभागिता तथा अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया।

राज्यों की प्रमुख पहलें

1. असम

  • हाथी, बाघ, तेंदुआ, गैंडा, जंगली भैंसा और जंगली सूअर से जुड़े संघर्षों के लिए परिदृश्य आधारित रणनीति प्रस्तुत की।

  • क्षेत्रवार कार्ययोजनाओं के लिए जोनल मानव–वन्यजीव संघर्ष जोखिम न्यूनीकरण समितियों का गठन किया।

  • आवास पुनर्स्थापन, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और वैकल्पिक आजीविका पर विशेष ध्यान दिया।

2. कर्नाटक

  • इंजीनियरिंग उपायों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कमांड सेंटर, त्वरित प्रतिक्रिया दल, सामुदायिक स्वयंसेवक नेटवर्क और e-Parihara डिजिटल मुआवजा प्रणाली पर आधारित छह-स्तंभीय मॉडल प्रस्तुत किया।

  • राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष मिशन, समान एसओपी (SOP), गलियारों की बहाली और अंतरराज्यीय समन्वय का सुझाव दिया।

3. केरल

  • मानव–वन्यजीव संघर्ष को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित करने, त्वरित प्रतिक्रिया दल, 273 संघर्ष प्रभावित पंचायतों की पहचान तथा जना जागरथा समितियों और SARPA स्वयंसेवी कार्यक्रम जैसी सामुदायिक पहलों की जानकारी दी।

  • वन्यजीव गलियारों की बहाली, आवास प्रबंधन, जिम्मेदार पर्यटन और तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दिया।

4. मध्य प्रदेश

  • 'प्रिवेंशन फर्स्ट' मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें AI आधारित निगरानी, GPS ट्रैकिंग, ड्रोन, गजरक्षक, त्वरित प्रतिक्रिया दल, प्रजाति-विशिष्ट एसओपी, समयबद्ध मुआवजा तथा बाघ मित्र, हाथी मित्र और इको-डेवलपमेंट समितियों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी शामिल है।

  • संघर्षकारी वन्यजीवों के वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानांतरण (Translocation) पर भी प्रकाश डाला।

5. उत्तराखंड

  • एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, 24×7 हेल्पलाइन 1926, ई-निगरानी, GPS ट्रैकिंग, जैविक बाड़, समयबद्ध मुआवजा तथा गांव-स्तरीय स्वयंसेवक नेटवर्क की जानकारी दी।

  • 'लिविंग विद लेपर्ड्स/टाइगर्स' पहल के तहत दीर्घकालिक सह-अस्तित्व रणनीति प्रस्तुत की।

6. उत्तर प्रदेश

  • बताया कि राज्य में अधिकांश मानव–वन्यजीव संघर्ष तेंदुओं से संबंधित हैं और तराई आर्क लैंडस्केप सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है।

  • त्वरित प्रतिक्रिया दल, चार बचाव केंद्र, सौर बाड़, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, स्वयंसेवी कार्यक्रम तथा वैज्ञानिक निगरानी पर आधारित रणनीति प्रस्तुत की।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि मानव–वन्यजीव संघर्ष का प्रभावी समाधान पारिस्थितिक संरक्षण, मानव जीवन और आजीविका की सुरक्षा को साथ लेकर चलने वाली समन्वित रणनीति से ही संभव है। आधुनिक तकनीकों जैसे GIS, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, रेडियो टेलीमेट्री और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स के उपयोग के साथ-साथ वन कर्मियों की क्षमता बढ़ाने, मुआवजा व्यवस्था में सुधार, जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।


बैठक के अंत में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानव–वन्यजीव संघर्ष की चुनौती का समाधान वैज्ञानिक प्रबंधन, संस्थागत समन्वय, तकनीक आधारित निगरानी और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल और उत्कृष्टता केंद्र राज्यों को डेटा आधारित रणनीति बनाने, अनुभव साझा करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में महत्वपूर्ण सहयोग देंगे।

बैठक की शुरुआत में पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सुझाव दिया कि विभिन्न आवास क्षेत्रों की धारण क्षमता (Carrying Capacity) का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र वन्यजीवों का कितना भार वहन कर सकता है। इससे संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की रणनीति बनाने में सहायता मिलेगी।

बैठक का समापन सांसदों द्वारा मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने और भारत की समृद्ध वन्यजीव विरासत के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर आवश्यक उपायों पर विस्तृत चर्चा के साथ हुआ।

यदि चाहें, मैं इसका संक्षिप्त हिंदी प्रेस विज्ञप्ति, समाचार शैली या सरल हिंदी सारांश भी तैयार कर सकता हूँ।

डॉक्टर पति की हैवानियत: पत्नी को नशीला पदार्थ देकर बनाए अश्लील वीडियो, ब्लैकमेल कर वसूले 42.5 लाख

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 गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से रिश्तों को तार-तार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़िता महिला डॉक्टर ने अपने डॉक्टर पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ हत्या के प्रयास, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और दहेज उत्पीड़न की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया है।


पीड़िता (35 वर्ष) का आरोप है कि उसका पति उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर देता था और उसकी अश्लील तस्वीरें व वीडियो बना लेता था। इन तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर आरोपी ने अब तक पीड़िता से 42.50 लाख रुपये (फॉर्च्यूनर कार के नाम पर 32.50 लाख और अन्य 10 लाख रुपये) हड़प लिए।

50 लाख के खर्चे के बाद भी फॉर्च्यूनर की मांग

पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 29 नवंबर 2019 को छत्तीसगढ़ निवासी डॉक्टर से हुई थी। शादी में करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे और फॉर्च्यूनर कार की मांग को लेकर पीड़िता को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे।

दूसरी शादी और जान से मारने की कोशिश

इसी बीच पीड़िता को पता चला कि आरोपी पति का कई अन्य महिलाओं से संबंध है और उसने एक अन्य महिला डॉक्टर से बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली है। विरोध करने पर आरोपी पति और ससुराल वालों ने पीड़िता के साथ मारपीट की तथा गले में रस्सी बांधकर पंखे से लटकाकर जान से मारने का प्रयास किया। किसी तरह जान बचाकर पीड़िता पुलिस के पास पहुंची।

पुलिस जांच शुरू

पीड़िता की तहरीर पर शाहपुर थाना पुलिस ने आरोपी डॉक्टर पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरपंच के मकान पर वन विभाग का छापा, लाखों का अवैध सागौन जब्त

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 बालोद। वन विभाग की टीम ने अवैध सागौन लकड़ी के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अंगारी गांव की सरपंच के मकान पर छापेमारी की। इस दौरान मकान परिसर से लाखों रुपये मूल्य के सागौन के चिरान और गोले बरामद किए गए। जब्त की गई पूरी लकड़ी को दो माजदा वाहनों में लोड कर वन विभाग के काष्ठागार भेज दिया गया है। मामले में सरपंच के पति अश्विनी डड़सेना के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।


गिनती और मूल्यांकन जारी

बालोद वन परिक्षेत्र के अंगारी गांव में मंगलवार को की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में भारी मात्रा में सागौन मिलने की पुष्टि हुई है। वन विभाग के अनुसार, जब्त लकड़ी का सटीक नाप-जोख और बाजार मूल्य का आकलन बुधवार को प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा।

"बरामद सागौन के चिरान और गोलों की गिनती की जा रही है। यह जांच भी जारी है कि यह लकड़ी कहां से काटी गई और किस आरा मिल में इसका चिरान कराया गया। मकान से सागौन निर्मित कुछ फर्नीचर भी मिले हैं, जिनकी वैधता के दस्तावेज देखे जा रहे हैं। नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।"

— अभिषेक अग्रवाल, डीएफओ, बालोद

पूरे नेटवर्क पर कस सकता है शिकंजा

वन विभाग की जांच अब सिर्फ जब्ती तक सीमित न रहकर पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने पर केंद्रित है। विभाग अवैध कटाई, अवैध परिवहन और अवैध चिरान करने वाली आरा मिलों के बीच के गठजोड़ को खंगाल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर इसमें शामिल अन्य आरोपियों और आरा मिल संचालकों पर भी गाज गिर सकती है।

मंत्रालय में आज साय मंत्रिपरिषद की अहम बैठक, प्रदेशवासियों को मिल सकती है नई योजनाओं की सौगात

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़ी कई नई योजनाओं एवं नीतिगत फैसलों पर चर्चा होने की संभावना है।


सूत्रों के अनुसार, बैठक में विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन से संबंधित अहम प्रस्ताव विचारार्थ रखे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकास और विभिन्न विभागों की वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हो सकती है।

यद्यपि शासन द्वारा बैठक का आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि आम जनता को राहत देने और राज्य में निवेश के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से कैबिनेट कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे सकती है।

ट्रंप के सांसद को मिर्ची: भारत के FCRA संशोधन बिल पर भड़के अमेरिकी नेता, बताया 'ईसाइयों पर हमला'

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 नई दिल्ली: भारत में संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) संशोधन बिल को लेकर अमेरिका में सियासत तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने इस प्रस्तावित संशोधन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे भारत में ईसाई समुदाय पर सीधा हमला करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


अमेरिकी सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि भारत में ईसाई समुदाय का इतिहास बेहद प्राचीन है, जो सेंट थॉमस द एपोस्टल के मालाबार तट पर आगमन के समय से चला आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस लंबे और समृद्ध इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA कानून में ऐसे संशोधन पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज पर नियंत्रण पाने का सीधा अधिकार मिल जाएगा। मूर ने कहा कि यदि यह बिल पास होता है, तो भारत और अमेरिका के आपसी रिश्ते चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकते हैं।

क्या है FCRA कानून और संशोधन?

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA), 2010 भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों तथा चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा विदेशों से प्राप्त होने वाले चंदे को नियंत्रित और विनियमित करता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। सरकार का उद्देश्य इस कानून के माध्यम से विदेशी फंड के पारदर्शी और वैध उपयोग को सुनिश्चित करना है।

आत्मसमर्पित 95 नक्सलियों को 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पुनर्वास को मिल रही गति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जलवायु मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत बीजापुर जिले के 95 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 करोड़ 40 लाख 86 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप ने नीति के प्रावधानों के अनुसार शस्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए राशि के आहरण और वितरण की स्वीकृति दी है।

यह प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें नया जीवन शुरू करने और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर मिल रहा है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और विकास को नई गति मिल रही है।

एसईसीएल की दीपका ओपनकास्ट परियोजना बनी भारत के कोयला क्षेत्र की नई पहचान, उत्पादन, लाभ और सतत विकास में स्थापित किए नए मानक

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रायपुर- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका ओपनकास्ट (OCP) परियोजना आज भारत के कोयला खनन क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। वर्ष 1992 में मात्र 10 लाख टन कोयला उत्पादन करने वाली यह परियोजना आज देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक खदानों में शामिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 37.5 मिलियन टन (एमटी) का रिकॉर्ड कोयला उत्पादन तथा 39.43 मिलियन टन कोयला प्रेषण (डिस्पैच) कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

हाल ही में परियोजना को 40 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) की पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त हुई है। साथ ही 60 MTPA तक क्षमता विस्तार के स्पष्ट रोडमैप के साथ दीपका परियोजना उत्पादन, दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की शानदार शुरुआत

पिछले वर्ष के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद दीपका परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष की भी मजबूत शुरुआत की है।

25 जुलाई 2026 तक परियोजना ने 12.66 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत हासिल किया। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो खदान की बेहतर उत्पादकता और मशीनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।

इसी अवधि में 13.87 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य का 109 प्रतिशत है। इससे देश के ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

उत्पादन के साथ लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय वृद्धि

दीपका परियोजना केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि वित्तीय प्रदर्शन में भी अग्रणी रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 3,230.91 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया, जिससे यह SECL के सबसे अधिक लाभ देने वाले परियोजनाओं में शामिल हो गई।

बेहतर लागत प्रबंधन और परिचालन दक्षता के कारण प्रति टन लाभ बढ़कर 827 रुपये पहुंच गया। इससे यह साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के साथ लागत नियंत्रण भी प्रभावी ढंग से संभव है।

भविष्य की उत्पादन क्षमता के लिए मजबूत आधार

दीर्घकालीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

मालगांव का सफल अधिग्रहण होने के बाद अब हरदी बाजार क्षेत्र में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए आधुनिक पुनर्वास नगर विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक भवन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पारदर्शी और सहभागी मॉडल से खनन के लिए भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

बेहतर आधारभूत संरचना से तेज हुआ कोयला परिवहन

दीपका परियोजना के पास कोयला परिवहन की अत्याधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है।

परियोजना में एमजीआर (MGR) आधारित साइलो, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) साइलो, रेलवे लोडिंग प्रणाली तथा सड़क परिवहन का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया गया है।

इस व्यवस्था के माध्यम से एनटीपीसी सीपत सहित पश्चिमी एवं मध्य भारत के कई ताप विद्युत संयंत्रों तक समय पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादकता

दीपका परियोजना ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

परियोजना में 42 घनमीटर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक रोप शोवेल, उच्च क्षमता के सरफेस माइनर, इन-पिट बेल्ट कन्वेयर, आधुनिक साइलो लोडिंग प्रणाली, ड्रोन आधारित निगरानी तथा डिजिटल माइन मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

इन तकनीकों से खदान की योजना, निगरानी और मशीनों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ जिम्मेदार खनन

दीपका परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि अधिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव हैं।

परियोजना में Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS), फॉग कैनन आधारित धूल नियंत्रण, व्हील वॉशिंग सिस्टम, वृहद वृक्षारोपण अभियान, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तथा प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण जैसी अनेक पर्यावरणीय पहलें लागू की गई हैं।

डिजिटल पर्यावरण निगरानी प्रणाली के माध्यम से नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा रही है।

40 MTPA से आगे 60 MTPA की ओर बढ़ता कदम

हाल ही में प्राप्त 40 MTPA पर्यावरणीय स्वीकृति दीपका परियोजना के विकास की अंतिम मंजिल नहीं बल्कि अगले विस्तार चरण की शुरुआत है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, आधुनिक आधारभूत संरचना और उन्नत तकनीक के सहारे परियोजना अब 60 MTPA उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

दीपका ओपनकास्ट परियोजना आज वैज्ञानिक खनन, तकनीकी नवाचार, वित्तीय अनुशासन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। SECL की यह प्रमुख परियोजना उत्पादन, लाभप्रदता, परिचालन दक्षता और सतत विकास के नए मानक स्थापित करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रही है।

खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

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छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोड़ने की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।


मुस्कुराता बस्तर कार्यशाला में बच्चों की कला ने बिखेरे रंग

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कार्टून और कैरिकेचर के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक पहचान को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई पहचान देने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारकर रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों ने सिखाईं कार्टून और कैरिकेचर की तकनीकें

कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्टों और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि किसी भी चित्र की अच्छी शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके साथ ही रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों के चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी ढंग से चित्रित करने के तरीके भी बच्चों को सरल भाषा में समझाए गए।

प्रशिक्षण से बढ़ा बच्चों का आत्मविश्वास

स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है।

चरणबद्ध मार्गदर्शन से आसान हुई चित्रकला

सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने कहा कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत की जानकारी नहीं थी, लेकिन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अब वे आसानी से कार्टून और कैरिकेचर बना पा रही हैं।

कल्पनाशीलता को मिली नई दिशा

सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों का मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।

बस्तर की सकारात्मक छवि को मिलेगा नया मंच

यह कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और मुस्कुराती हुई पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।


हाथीदांत तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

रायपुर- वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन में संगठित वन अपराध और वन्यजीव तस्करी पर रोक लगाने के लिए वन विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी अभियान के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाथीदांत तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में 3 अगस्त 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में छापेमारी की।

धर्मशाला के कमरे से तीन हाथीदांत (जबड़े) बरामद

संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 की तलाशी ली। जांच के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए। मौके पर तीन संदिग्ध व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड के पलामू जिले के संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष) तथा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष) शामिल हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई

आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्य प्राणी है, इसलिए इस मामले को गंभीर वन अपराध माना गया है।

वन विभाग ने जब्त किए गए हाथीदांत को अपने कब्जे में लेकर सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

वन्यजीव तस्करी पर सख्त निगरानी

वन परिक्षेत्राधिकारी, रामानुजगंज ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मछली बीज उत्पादन से किसान रयतु राम ने लिखी सफलता की नई कहानी

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बस्तर के किसान ने दो माह में अर्जित किए 30 हजार रूपए, मत्स्यपालन से बढ़ी आय और आत्मनिर्भरता

शासकीय योजनाओं से मिली सहायता और नई पहचान, अब व्यवसाय विस्तार की तैयारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश के किसान नवाचारों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले के ग्राम पंचायत सिवनी (हिरलाभाटा) निवासी प्रगतिशील किसान रयतु राम ने मछली बीज (स्पॉन) उत्पादन अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। कम समय में बेहतर आय अर्जित कर उन्होंने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के साथ मत्स्यपालन किसानों के लिए लाभकारी आजीविका का सशक्त माध्यम बन सकता है।

एक एकड़ तालाब से दो माह में मिली 30 हजार रूपए की आय

रयतु राम ने अपनी कुल 5 एकड़ कृषि भूमि में से लगभग एक एकड़ क्षेत्र में बने तालाब में इस वर्ष मछली बीज उत्पादन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस सीजन में तालाब में लगभग 30 पैकेट स्पॉन डाले गए। अब तक वे लगभग 60 किलोग्राम मछली बीज 500 रूपए प्रति किलोग्राम की दर से बेच चुके हैं, जिससे उन्हें 30 हजार रूपए की आय प्राप्त हुई है। तालाब में अभी भी 40 से 50 किलोग्राम मछली बीज उपलब्ध है, जिसकी बिक्री से उन्हें 20 से 25 हजार रूपए अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।

संघर्ष के बाद मिली सफलता

रयतु राम ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तालाब में तिलापिया जैसी अवांछित मछलियों की मौजूदगी, बोरवेल की सुविधा का अभाव और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। लेकिन इस बार उन्होंने तालाब की वैज्ञानिक ढंग से सफाई की, समय पर दाना-पानी की व्यवस्था की तथा मत्स्यपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन का पालन किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें मछली बीज उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता मिली।

अब व्यवसाय विस्तार की तैयारी

इस सीजन की सफलता से उत्साहित रयतु राम अब अपने खेत में एक नया तालाब तैयार कर मछली बीज उत्पादन का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बाजार में बीज की मांग और विभागीय सहयोग इसी प्रकार मिलता रहा, तो वे इस व्यवसाय को बड़े स्तर पर विकसित करेंगे। इससे उनकी आय में और वृद्धि होगी तथा आसपास के किसानों को भी गांव में ही गुणवत्तापूर्ण मछली बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

अन्य मत्स्यपालकों के लिए भी बनी प्रेरणा

मत्स्यपालन विभाग की स्पॉन संवर्धन योजना के अंतर्गत रयतु राम के गांव के मनकी बघेल, दयमती बघेल और जग्गु मौर्य भी लाभान्वित होकर मछली बीज उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इन किसानों की सफलता से क्षेत्र में मत्स्यपालन के प्रति रुचि बढ़ी है और यह गतिविधि ग्रामीणों के लिए आय संवर्धन का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।

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