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छत्तीसगढ़ में मक्के के रकबे में 11 गुना की बढ़ोतरी

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छत्तीसगढ़ के किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में खेती-किसानी की स्थिति में तेजी से बदलाव दिखाई देने लगा है। राज्य में मक्के की अच्छी कीमत, समर्थन मूल्य पर खरीदी की बेहतर व्यवस्था, कोंडागांव जिले में मक्का प्रसंस्करण केंद्र के लिए डिमांड के चलते रबी सीजन में भी मक्के की खेती को लेकर किसानों का रूझान बढ़ा है। बीते तीन सालों में राज्य में रबी सीजन में मक्के की खेती के रकबे में लगभग 11 गुना की बढ़ोतरी हुई है और इसकी खेती का रकबा 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर एक लाख 46 हजार हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है। 

चालू रबी सीजन में अब तक एक लाख 26 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मक्के की बोनी हो चुकी है, जो कि रबी सीजन 2020-21 में राज्य में 93 हजार हेक्टेयर में हुई मक्के की बोआई से लगभग 33 हजार हेक्टेयर ज्यादा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में साल 2016-17 और साल 2017-18 के रबी सीजन में औसत रूप से 12-13 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती होती थी। धीरे-धीरे किसानों का रूझान मक्के की खेती की ओर बढ़ा और इसका रकबा बीते रबी साल 2020-21 में 93 हजार हेक्टेयर के पार हो गया था। रबी साल 2021-22 में राज्य में एक लाख 46 हजार 130 हेक्टेयर में मक्का बोनी लक्ष्य के विरूद्ध मार्च माह के अंत तक एक लाख 26 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में बोनी पूरी कर ली गई है।

राज्य के बस्तर संभाग में खेती के रकबे में लगभग आठ गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। बस्तर संभाग के जिलों में रबी वर्ष 2017-18 में औसत रूप से 10 हजार हेक्टेयर में मक्के की बोनी होती थी, अब यह रकबा बढ़कर 78 हजार के पार पहुंच गया है। कोंडागांव जिले में सर्वाधिक 45 हजार 750 हेक्टेयर में मक्के की बोनी हुई है। कांकेर जिले में चालू रबी सीजन में 28 हजार हेक्टेयर बोआई के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 21 हजार 690 हेक्टेयर में मक्का बोया जा चुका है। चालू रबी सीजन में रायपुर संभाग के गरियाबंद जिले में सर्वाधिक 11 हजार हेक्टेयर में बोनी के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक लगभग 8 हजार हेक्टेयर में मक्का की बोनी हो गई है।

ढाई गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी 

दुर्ग संभाग अंतर्गत बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव और कबीरधाम जिलों में इस साल 8780 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरूद्ध 9000 हेक्टेयर से अधिक में बोनी मक्के की खेती की ओर वनांचल के साथ-साथ मैदानी ईलाकों के किसानों के बढ़ते रूझान का प्रतीक है। यहां यह बताना जरूरी है कि दुर्ग संभाग के पांचों जिलों में रबी सीजन 2020-21 में मात्र 3590 हेक्टेयर में ही मक्के की खेती हुई थी। इस साल 9170 हेक्टेयर में मक्के की बोनी होना मक्के के रकबे में ढाई गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी को दर्शाता है। 

बिलासपुर संभाग में इस साल 19620 हेक्टेयर में मक्का बोआई के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 13 हजार से ज्यादा रकबे में बोआई हो चुकी है, जो बीते रबी सीजन में 12660 हेक्टेयर में मक्का बोनी से अधिक है। सरगुजा संभाग के जिलों में 10690 हेक्टेयर के विरूद्ध अब तक 5600 हेक्टेयर और बस्तर संभाग के जिलों में 85800 हेक्टेयर के विरूद्ध 78620 हेक्टेयर में मक्के की बोनी हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ में 3 साल के अंदर 10 गुना बढ़ा मक्के का रकबा

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छत्तीसगढ़ राज्य में बीते तीन-चार सालों के अंदर मक्के की खेती को लेकर किसानों का रूझान काफी तेजी से बढ़ा है, जिसकी वजह से मक्के का रकबा 13 हजार हेक्टेयर से बढ़कर एक लाख 46 हजार हेक्टेयर हो गया है, जो कि 10 गुना से भी ज्यादा है। राज्य में समर्थन मूल्य पर 1870 रूपए प्रति क्विंटल की दर से मक्के की खरीदी और कोंडागांव में प्रसंस्करण केंद्र शुरू होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने लगा है। इसके चलते मक्के के रकबे में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। 

केंद्र से अनुमति मिलने के बाद कोंडागांव मक्का प्रसंस्करण केंद्र में मक्का से स्टार्च के स्थान अब एथेनाल के उत्पादन के लिए प्लांट लगाए जाने की तैयारी जोर-शोर से जारी है। बीते रबी सीजन 2020-21 में राज्य में 93 हजार 200 हेक्टेयर में किसानों ने मक्के की खेती की गई थी, जिसका रकबा चालू रबी सीजन में बढ़कर एक लाख 46 हजार 130 हेक्टेयर हो गया है। एक साल के दौरान मक्के के रकबे के लक्ष्य में लगभग 53 हजार हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

मक्के की खेती का रकबा 327 गुना बढ़ा

गौरतलब है कि राज्य में रबी सीजन 2017-18 में सिर्फ 13 हजार 440 हेक्टेयर में मक्के की खेती किसानों ने की थी। साल 2016-17 में रबी सीजन में मात्र 12 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती हुई थी। राज्य में तीन-चार साल पहले 12 से ज्यादा जिले ऐसे थे, जहां मक्के की खेती लगभग नहीं के बराबर थी। आज स्थिति में कोरिया जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलों में मक्के की खेती किसान करने लगे हैं, जिसके चलते मक्के की खेती का रकबा 10 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। साल 2017-18 की तुलना में राज्य के बिलासपुर संभाग के जिलों में इस साल मक्के की खेती का रकबा 327 गुना बढ़ा है। 

बिलासपुर संभाग के जिलों में पहले मात्र 60 हेक्टेयर में मक्के की खेती होती थी, जिसका रकबा आज बढ़कर 19 हजार 662 हेक्टेयर हो गया है। राज्य के कोंडागांव जिले में सर्वाधिक 45 हजार 880 हेक्टेयर में मक्का की खेती किसान कर रहे हैं। यहां पहले बमुश्किल 4260 हेक्टेयर में मक्का बोया जाता था। यही स्थति लगभग कांकेर जिले की भी थी। तीन-चार सालों में कांकेर जिले में मक्के का रकबा 4,000 हेक्टेयर से बढ़कर 28 हजार हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। 

रायपुर संभाग में 21 हजार हेक्टेयर रकबा

रायपुर संभाग के जिलों में लगभग 1470 हेक्टेयर से बढ़कर मक्के का रकबा 21 हजार हेक्टेयर, दुर्ग संभाग में 1470 हेक्टेयर से बढ़कर 8780 हेक्टेयर और सरगुजा संभाग में 290 हेक्टेयर से बढ़कर 10690 हेक्टेयर और बस्तर संभाग के जिले में मक्के की खेती का रकबा 10,000 हेक्टेयर से बढ़कर 85,800 हेक्टेयर पहुंच गया है। राज्य में इस साल 1,46,130 हेक्टेयर में मक्का की खेती की जा रही है। कांकेर जिले के चारामा विकाखंड के बागडोंगरी के किसान नकछेड़ा राम नाइक कहते हैं कि अब तो मक्का की खेती में ही मजा आता है। 

'धान की खेती में ज्यादा फायदा नहीं'

धान की खेती में ज्यादा फायदा नहीं है। नाइक ने बताया कि वे बीते कुछ सालों से मक्का की खेती कर रहे हैं, जिसमें मेहनत, लागत और पानी भी कम लगता है, फायदा ज्यादा होता है। मक्का की खेती से एक एकड़ में लगभग 26 हजार रूपये की आमदनी हो जाती है। बीते साल उनके द्वारा दो एकड़ में मक्का ली गई थी, जिसे 50 हजार रूपये में बेचा गया था।



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