Media24Media.com: farmers protest update

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label farmers protest update. Show all posts
Showing posts with label farmers protest update. Show all posts

दो किसान संगठनों के जाने के बाद चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन खत्म, खुला रास्ता

No comments Document Thumbnail

26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली (Farmers' Tractor Rally) के दौरान हुई हिंसा के बाद अब कई किसान संगठनों ने आंदोलन से अपने पैर पीछे खींच लिए हैं। भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के दो गुट कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन से अलग हो गए हैं। जिसके बाद दिल्ली-नोएडा के चिल्ला बॉर्डर (Farmer Protest Chilla Border)पर आंदोलन खत्म हो गया है। चिल्ला बॉर्डर का ये रास्ता 58 दिन से बंद था, जो अब खोल दिया गया है।





राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वी एम सिंह ने कहा कि उनका संगठन मौजूदा आंदोलन से अलग हो रहा है, क्योंकि वे ऐसे विरोध प्रदर्शन में आगे नहीं बढ़ सकते, जिसमें कुछ लोगों की दिशा अलग है।





ट्रैक्टर परेड एक दुखद घटना(Farmer Protest Chilla Border)





वहीं, भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने भी बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर परेड के दौरान जो कुछ भी हुआ उससे वह काफी दुखी हैं और उनकी यूनियन ने अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया है।





राजधानी दिल्ली में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 2.8 मापी गई तीव्रता





इन दोनों किसान संगठनों के आंदोलन खत्म करने पर किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा है, ''जिन किसान संगठनों ने कल की हिंसा के बाद अपना आंदोलन खत्म कर दिया है वह अच्छी बात नहीं है। कल की हिंसा के बाद किसान आंदोलन को झटका लगा है। हम आत्मचिंतन करेंगे। अब हमें लोगों को दोबारा से इकट्ठा करना पड़ेगा। कल जो हुआ उसकी हमने नैतिक ज़िम्मेदारी ली है।''





किसान नेताओं पर कसा दिल्ली पुलिस का शिकंजा





बता दें कि ट्रेक्टर मार्च में हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं पर शिकंजा कस दिया है। पुलिस ने हिंसा के मामले में अबतक 37 किसान नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने किसान नेता दर्शन सिंह को नोटिस भेजकर तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा है। साथ ही एफआईआर में पंजाबी एक्टर दीप सिंधू और लक्खा सिधाना का नाम भी जोड़ा गया है। दीप सिंधू ने ही लाल किले पर खालसा पंत का झंडा फहराया था।


प्रदेश के सैकड़ों किसान कल राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन, दिल्ली रवाना

No comments Document Thumbnail

रायपुर : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर कल छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन (farmer protest CG News) से जुड़े घटक संगठनों द्वारा पूरे प्रदेश में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही कॉर्पोरेटपरस्त कृषि कानूनों को वापस लेने और फसल की सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाने की मांग की जाएगी।





ज्ञापन सौंपने के बाद सैकड़ों किसान और ग्रामीण जन दिल्ली में आयोजित किसान गणतंत्र परेड में शामिल होने के लिए रवाना होंगे। छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने आज यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी किसान गणतंत्र परेड आयोजित किये जा रहे हैं। सभी स्थानों पर ये परेड सरकारी कार्यक्रमों के बाद आयोजित किये जायेंगे।





इन कानूनों में पोल ही पोल (farmer protest CG News)





केंद्र सरकार द्वारा इन कानूनों के अमल पर डेढ़ साल तक रोक लगाने की बात को धोखाधड़ीपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि इन कानूनों में पोल ही पोल है, लेकिन इसके बावजूद यह सरकार इनको लागू करने पर तुली हुई है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा केंद्र सरकार की घोषणा को ठुकराए जाने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा है कि जिंदगी और मौत की लड़ाई में बीच का रास्ता नहीं होता और किसान विरोधी इन कानूनों की वापसी ही एकमात्र विकल्प है।





किसानों ने कहा- शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी





इस आंदोलन में डेढ़ सौ से ज्यादा किसानों ने अपनी शहादत दी है और ये शहादतें व्यर्थ नहीं जाएंगी और अंतिम सांस तक खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले इन कॉर्पोरेटपरस्त कानूनों के खिलाफ देश के किसान और अवाम मिलकर संघर्ष करेंगे।





रायपुर में 70 हजार रूपए की अवैध लकड़ी सहित वाहन जब्त





किसान सभा नेताओं ने कहा कि एक ओर सरकार समर्थन मूल्य की प्रणाली जारी रहने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर संघी गिरोह और गोदी मीडिया इसके उपयोगी न रहने का दुष्प्रचार कर रहा है। वास्तविकता यह है कि निजी मंडियों के अस्तित्व में आने के बाद और खाद्यान्न व्यापार को विश्व बाजार की कीमतों के साथ जोड़ने के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य की पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त जो जाएगी। इसलिए यदि मोदी सरकार अपने कहे के प्रति भी गंभीर है, तो आश्वासन से ऊपर उठकर उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का कानून बनाना चाहिए, ताकि किसान समुदाय को इस सरकार की कथनी पर विश्वास हो सके।





SDM और तहसीलदार अचानक लापता! पता बताने वाले को 11 सौ रुपये नकद इनाम देंगे विधायक





उन्होंने कहा कि हमारे देश के किसान न केवल अपने जीवन-अस्तित्व और खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि वे देश की खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष उस समूची अर्थव्यवस्था के कारपोरेटीकरण के खिलाफ भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका को तबाह कर देगा। इसलिए किसान सभा नेताओं ने आम जनता से अपील की है कि देश और अवाम को बचाने की इस लड़ाई में वे किसान आंदोलन को अपना समर्थन व सहयोग दें।


किसान आंदोलन : किसान संगठन और सरकार के बीच वार्ता टली, अब 20 जनवरी को होगी बातचीत

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली : केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (Farmer's Protest Updates) जारी है। किसान संगठनों और सरकार के बीच दसवें दौर की वार्ता अब 20 जनवरी यानी बुधवार को होगी। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि दोनों पक्ष जल्द से जल्द गतिरोध सुलझाना के इच्छुक हैं, लेकिन अलग विचारधारा के लोगों की एंट्री इसमें होने के कारण देरी हो रही है।





मिली जानकारी के मुताबिक पहले यह बैठक 19 जनवरी मंगलवार को निर्धारित थी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार अब यह बैठक 20 जनवरी को होगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, किसान संगठनों के साथ, सरकार की ओर से मंत्री समूह की बैठक 19 जनवरी 2021 की बजाय अब 20 जनवरी 2021 को दोपहर दो बजे विज्ञान भवन में होगी।





केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा (Farmer's Protest Updates)





केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने तोमर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “किसान यूनियनों से हर बार यही कहा गया है कि वे प्रावधान पर चर्चा करें, जिस प्रावधान से किसान को तकलीफ है उस पर विचार करने के लिए और उसमें संशोधन करने के लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है मगर यूनियन की तरफ से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है, इसलिए गतिरोध जारी है।”





कोरोना वैक्सीन को लेकर ICMR ने जारी की नई गाइडलाइन, टीके न लगवाएं अगर आप…





उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि अगले दौर की बैठक में किसान यूनियन विकल्पों पर चर्चा करेंगे तो समाधान का रास्ता निकलेगा। किसान संगठन पिछले 55 दिनों से दिल्ली की सीमा पर अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । किसान संगठनों और सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। सरकार कृषि सुधार कानूनों में संशोधन करना चाहती है जबकि किसान संगठन कानून वापस लेने कि मांग पर अड़े हुए है ।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.