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छत्तीसगढ़ के दो और जिलों में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि

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रायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा जिले में बर्ड फ्लू से तीन पक्षियों की मौत की पुष्टि (Bird Flu Latest Updates) हुई है। राज्य के पशु चिकित्सा सेवा विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई- भाषा को बताया कि इसके साथ ही राज्य के बस्तर, दंतेवाड़ा और बालोद जिलों में एवियन इंफ्लुएंजा के मामलों की पुष्टि हो गई।





उन्होंने बताया कि बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में अलग-स्थानों पर एक कौआ और एक कबूतर मृत पाए गए थे, वहीं दंतेवाड़ा के बचेली कस्बे में एक कौआ मृत पाया गया था, जिनके नमूने 14 जनवरी को भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) में भेजा गया था।





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अधिकारी ने बताया, ‘‘ रविवार को इन सभी तीन नमूनों में एच5एन8 एवियन इंफ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई। ’’अधिकारी ने बताया कि हालांकि अब तक इन दो जिलो में पोल्ट्री पक्षियों में संक्रमण (Bird Flu Latest Updates) की खबरें नहीं आई हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित मामलों के मद्देनजर राज्य के सभी जिलों को अलर्ट पर रखा गया है और केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।





बस्तर जिले में पशु चिकित्सा सेवा की संयुक्त निदेशक लक्ष्मी अजगले ने बताया कि जैविक-सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार जगदलपुर में जिन दो स्थानों पर पक्षी मरे हुए पाए गए, वहां एक किलोमीटर के दायरे को ‘संक्रमित क्षेत्र’ घोषित कर दिया गया है। त्वरित प्रतिक्रिया टीम ने जरूरी कदमों को उठाना शुरू किया है। ऐसा ही कदम दंतेवाड़ा के बचेली कस्बे में भी उठाया गया है। पिछले सप्ताह बालोद जिले के एक पोल्ट्री फार्म में कुछ मरे मुर्गों के नमूनों में एवियन इंफ्लुएंजा की पुष्टि हुई थी।


छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू की हुई एंट्री, बालोद के पक्षियों की रिपोर्ट पॉजिटिव

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छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू दस्तक (Bird Flu Chhattisgarh Updates) दे दिया है। गुरुवार को विभाग ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। बालोद जिले में मृत पाए गए पक्षियों की सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव (Bird Flu Reports) आई है। इसके बाद से ही प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू का ये पहला मामला सामना आया है ।





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बालोद जिले में 13 कौओं और 274 कुक्कुट पक्षियों के मृत पाए जाने के बाद तत्काल नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया था। इसके बाद से ही राज्य सरकार ने अन्य जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन ने किसी भी प्रकार के पक्षी की मौत की सूचना (Bird Flu Chhattisgarh Updates) तत्काल पशुधन विभाग को देने की बात कही है।






गिधाली गांव के पोल्ट्री फार्म के मुर्गियों के सैंपल टेस्ट के लिए भेजे गए थे। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। विभाग ने पोल्ट्री फार्म के मालिक को इसकी सूचना देते हुए फार्म से दूर रहने की बात कही है। ग्रामीणों को भी इस पोल्ट्री फार्म से दूर रहने की हिदायत दी गई है।






राज्य के सभी चिड़ियाघर, अभ्यारण, राष्ट्रीय उद्यान और जंगल सफारी में पक्षियों पर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। ये टीम बर्ड फ्लू की सतत निगरानी कर रही है।


बर्ड फ्लू : कोरबा में 36 कबूतरों की मौत से मचा हड़कंप

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कोरबा में 36 कबूतरों की मौत से हड़कंप मच गया है। हालांकि पशु चिकित्सा विभाग ने पक्षियों के बर्ड फ्लू से मौत होने की पुष्टि नहीं की है। विभाग के अनुसार मृत पाए गए पक्षियों में विटामिन C की कमी होने के कारण मौत हुई है। विभाग ने पक्षी पालक और पोल्ट्री फॉर्म के संचालकों से सावधानी बरतने की अपील की है। पक्षियों के नाक और आंख में पानी आने जैसे लक्षण दिखते ही सूचना देने की अपील की है।





बर्ड फ्लू का खतरा: पक्षी विहार में रोज किया जा रहा दवा का छिड़काव





पशु चिकित्सा विभाग ने शुरुआती जांच कर कहा किअगर पक्षियों में किसी प्रकार की समस्या होती हैं, उनकी मौत होती है, तो तुरंत पशुधन विभाग को सूचना दी जाए। कोरबा के एसईसीएल कॉलोनी सुभाष ब्लॉक में रहने वाले बबलू मारवाह ने काफी समय से अपने घर में कबूतर पाल रखे हैं। इनकी संख्या 100 है, इस में से 36 कबूतर एक-एक कर मर गए। बबलू ने पशु चिकित्सा विभाग को सूचित किया। वेटरनरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर सोहम सिंह गुर्जर और उनके सहयोगी मौके पर पहुंचे। डॉक्टर्स ने कहा कि कबूतरों की मौत के पीछे बर्ड फ्लू जैसा लक्षण नहीं है और ना ही कोई कारण है।






कबूतरों में विटामिन C की कमी





बर्ड फ्लू के कारण पक्षियों के आंख और नाक से पानी आता है। मलद्वार में सूजन होने सहित पंखों के झड़ने की परेशानी होती है। कोरबा में कबूतरों की मौत पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है। विभाग ने माना कि विटामिन C की कमी से 36 कबूतरों की मौत हुई है।





पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर्स ने बर्ड फ्लू के मद्देनजर पक्षी पालकों से अपील की है। कहा कि अगर पक्षियों के मुंह और आंख से पानी आने जैसी समस्या नजर आए तो जानकारी दें। इसके अलावा पक्षियों की मौत होने पर भी अवगत कराएं। ऐसा करने से समय पर नियंत्रण किया जाना संभव होगा।


बर्ड फ्लू का खतरा: पक्षी विहार में रोज किया जा रहा दवा का छिड़काव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद गांव में कौवे का शव मिलने के बाद वन विभाग में हडकंप मचा हुआ है। राजधानी रायपुर स्थित पक्षी विहार गुरुवार से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। पक्षियों की बीमारी से बचाया जा सके, इसलिए बाडा और परिसर में रोजाना चूना व दवा का छिड़काव (Bird flu precaution in Chhattisgarh) करने का निर्देश दिया है। पक्षी विहार में विचरण कर रहे पक्षियों की इम्यूनिटी बढ़े इसलिए दाना और पानी में एंटीबायोटिक मिलाकर दिया जा रहा है। इसके अलावा पक्षी विहार में काम कर रहे कर्मचारियों को मास्क और सेफ्टी किट लगाना अनिवार्य है।





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350 से ज्यादा पक्षी नंदनवन पक्षी विहार में






वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार नंदनवन पक्षी विहार में वर्तमान में अफ्रीकन ग्रे पेलिकन, ब्लैक श्वान, कारोलाइन डक, क्रस्टेड डक, सिल्वर फीजेंट, क्रेस्टेज वुड, लव बर्ड, जेब्रा फ्रिंज, ब्लयूरिंगनेट, गोल्डन फ्रीजेंट, लेडिज हेमरेस्ट, एमोजोन, ग्रे पैरेट, कोहिनूर, शुर्तरमुर्ग व मकाऊ पक्षी हैं।





वन विभाग के डॉक्टर का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पक्षियों के बाड़े और परिसर में दवा व चूने का छिड़काव किया गया है। पक्षियों को इम्युनिटी मजबूत हो सके इसलिए दाना व पानी में एंटी एंटीबायोटिक मिलाकर (Bird flu precaution in Chhattisgarh) दिया जा रहा है।


छत्तीसगढ़ में अब तक बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं, 7 जिलों में हुई जांच

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छत्तीसगढ़ राज्य (Chhattisgarh State) में बर्ड फ्लू (Bird flu) का अब तक कोई भी मामला सामने नहीं (No case of bird flu so far in Chhattisgarh) आया है। केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश में बर्ड फ्लू (Bird flu) की पुष्टि होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य (Bird Flu Alert in Chhattisgarh) में भी इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है।









 इंसानों में भी फैल सकता है बर्ड फ्लू





पशुधन विकास विभाग द्वारा बर्ड फ्लू (Bird Flu Alert in Chhattisgarh)के प्रवेश को रोकने के संबंध में सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों सहित पशु चिकित्सा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को सीमावर्ती प्रदेश से पक्षियों के परिवहन पर कड़ी निगरानी रखने को कहा है। साथ ही सभी शासकीय और अशासकीय कुक्कुट पालन प्रक्षेत्रों और पोल्ट्री व्यवसायी केन्द्रों का सर्विलेंस करने के निर्देश दिए गए हैं।





7 जिलों से लिए गए थे सैंपल(Bird Flu Alert in Chhattisgarh)





बर्ड फ्लू (Bird flu) के मामले में एहतियातन पशुधन विकास विभाग द्वारा राज्य के 7 जिलों में स्थित शासकीय पोल्ट्री फार्मों से एकत्र सैंपल की जांच में बर्ड फ्लू (Bird flu)का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त और सचिव, कृषि विकास और जैव प्रौद्योगिकी विभाग एम. गीता ने बताया कि राज्य के दुर्ग, रायगढ़, जगलदपुर, बैकुण्ठपुर-कोरिया, बिलासपुर जिले के कोनी और सरगुजा जिले के कुनकुरी स्थित शासकीय पोल्ट्री फार्म से बर्ड फ्लू (Bird flu) की जांच पड़ताल के लिए वहां से सैंपल लेकर जांच की गई।





छत्तीसगढ़ में भी अब बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी, कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कही ये बात…





सभी सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई है। छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू (Bird flu) का अब तक कहीं से कोई भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि राज्य में बर्ड फ्लू (Bird flu) के प्रवेश को रोकने के संबंध में जिलों को विस्तृत दिशा- निर्देश जारी किए गए हैं। पक्षियों की असामान्य बीमारी और मृत्यु होने की स्थिति में अधिकारियों को सतर्कता बरतने की निर्देश दिए गए हैं।





पक्षियों के इलाकों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश





भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश (Guidelines issued by the Government of India) के मुताबिक सैंपल साइज का पालन करते हुए नमूने इकट्ठा कर राज्य स्तरीय रोग अन्वेषण प्रयोगशाला रायपुर भिजवाने के भी निर्देश दिए गए हैं। बत्तख पालन वाले क्षेत्र और जंगली अप्रवासी पक्षियों के इलाकों में विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। इसके साथ ही वन विभाग से समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय अभ्यारण्य, पोखर, झील को चिन्हांकित कर उन क्षेत्रों के समीप निगरानी के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर उसका अमल करने के निर्देश दिए गए हैं।






भारत के इन राज्यों में फैल रहा है बर्ड फ्लू का खतरा, अलर्ट जारी, जानिए इसके लक्षण और बचाव





पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों को बर्ड फ्लू (Bird flu) के रोकथाम और जैव सुरक्षा के सभी नियमों की जानकारी देने को कहा गया है। जिलों को बर्ड फ्लू (Bird flu) से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण, रासायन और पीपीई कीट तैयार रखने की भी हिदायत दी गई।


छत्तीसगढ़ में भी अब बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी, कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने कही ये बात...

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बर्ड फ्लू का कहर अब छत्तीसगढ़ भी पहुंच चुका है. छत्तीसगढ़ सरकार ने सावधानी बरतते हुए जिला पशुपालन अधिकारियों को सतर्क (bird flu in Chhattisgarh) रहने के निर्देश जारी कर दिए है। हालांकि अभी राज्य में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया हैं, जहां बर्ड फ्लू के लक्षण मिले हो। फिर भी सरकार अपनी तरफ से कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है।





कृषि और पशुपालन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि






राज्य के कृषि और पशुपालन मंत्री रविंद्र (Ravindra Choubey's Statement) चौबे ने पॉलेट्री फार्म और पक्षियों की मौत को लेकर सतत निगरानी को कहा गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी बर्ड फ्लू को लेकर सतर्कता के निर्देश जारी किये गये हैं। हमारे संयुक्त संचालक को इस बात का निर्देश जारी कर दिया गया है। पॉलेट्री फार्म और पक्षियों की मौत को लेकर सतत निगरानी को कहा गया है। पक्षियों की लगातार मौत पर किस तरह का कार्य किया जाना है, उसे लेकर भी निर्देश दिया गया है। हालांकि प्रदेश के पालेट्री फार्म में में बर्ड फ्लू का किसी भी तरह का कोई लक्षण नहीं मिला है।





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इन राज्यों में पहले से जारी हैं अलर्ट






आपको बता दें कि देश के कई हिस्सों में बर्ड फ्लू का अलर्ट (bird flu in Chhattisgarh) जारी हो चुका। मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो इस मामले को लेकर आज आपात बैठक भी बुलायी थी। वहीं मंदसौर में चिकन और अंडा बिक्री पर रोक भी लगा दिया गया है।





ये है बर्ड फ्लू के लक्षण (Symptoms Of Bird Flu)





बर्ड फ्लू होने पर आपको कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है।  अगर आपको लगता है कि आप बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं तो किसी और के संपर्क में आने से पहले डॉक्टर को दिखाएं। 





बर्ड फ्लू होने के कारण





बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं, लेकिन H5N1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो इंसानों को संक्रमित करता है।  इसका पहला मामला 1997 में हॉन्ग कॉन्ग में आया था।  उस समय बर्ड फ्लू के प्रकोप को पोल्ट्री फार्म में संक्रमित मुर्गियों से जोड़ा गया था। 





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मुर्गियों में आसानी से फैलता है यह फ्लू





H5N1 प्राकृतिक रूप से पक्षियों में होता है, लेकिन ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है।  ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से होता है।  संक्रमित मुर्गियों के 165ºF पर पकाए गए मांस या अंडे के सेवन से बर्ड फ्लू नहीं फैलता है, लेकिन संक्रमित मुर्गी के अंडों को कच्चा या उबालकर नहीं खाना चाहिए। 





इन लोगों को होता है बर्ड फ्लू का खतरा





 H5N1 में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती है।  संक्रमित पक्षियों के मल और लार में ये वायरस 10 दिनों तक जिंदा रहता है।  दूषित सतहों को छूने से ये संक्रमण फैल सकता है।  अगर इसके फैलने का सबसे ज्यादा खतरा मुर्गीपालन से जुड़े लोगों को होता है।   इसके अलावा संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों का देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।  





यह है इलाज





अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू का अलग-अलग तरीकों से इलाज किया जाता है, लेकिन ज्यादतर मामलों में एंटीवायरल दवाओं से इसका इलाज किया जाता है।  लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती हैं।  बर्ड फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के अलावा उसके संपर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने की सलाह दी जाती है, भले ही उन लोगों में बीमारी के लक्षण न हों। 





इस तरह करें बचाव





 इन्फ्लूएंजा से बचने के लिए डॉक्टर आपको फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा आप खुले बाजर में जाने, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने और अधपका चिकन खाने से बचें।  हाइजीन बनाए रखें और समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें। 


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