Media24Media.com: RBI Repo Rate

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रिजर्व बैंक का ब्याज दरों को घटाने का एलान, लोन सस्ता होगा, EMI भी घटेगी

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 RBI Repo Rate : होम लोन की ईएमआई भरने वाले लोगों के लिए गुडन्‍यूज आ गई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 5 साल बाद मौद्रिक नीति में बदलाव करते हुए रेपो रेट घटा दी है. इसका असर आपकी होम लोन की ईएमआई पर पड़ सकता है. रेपो रेट में 0.25 बेसिस पॉइंट की कटौती का ऐलान किया गया है.


इस कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 6.25% हो गया. हालांकि, ये बता दें कि हर बैंक इस कटौती का लाभ अपने ग्राहकों को दें, वे इसके लिए बाध्‍य नहीं हैं. लेकिन स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक जैसे सरकारी बैंक आमतौर पर रेपो रेट घटने का लाभ ग्राहकों को देते रहे हैं.

रेपो रेट 6.50% घटकर 6.25% रह गया है, जिससे लोगों सस्‍ता लोन मिल सकता है, लेकिन यहां ध्‍यान रखने वाली बात यह है कि बैंक बाध्‍य नहीं हैं कि वह रेपो रेट घटने के बाद अपनी ब्‍याज दरों में कमी करें. अगर कोई बैंक चाहता है कि घटी हुई रेपो रेट का लाभ ग्राहक को न दे, तो वो ऐसा कर सकता है. हालांकि, जब एक बैंक लोन की ब्‍याज दरों में कटौती करता है, तो दूसरे बैंकों पर भी दबाव पड़ता है. क्‍योंकि अब कोई भी ग्राहक अपने लोन को किसी भी बैंक में शिफ्ट कर सकता है.

कितना कम हो सकती है आपकी EMI?

इसे आप एक उदाहरण के साथ समझ सकते हैं कि अगर राम ने किसी बैंक से 30 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया है. यह लोन राम ने 9 प्रतिशत ब्‍याज दर पर लिया है. अब अगर आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती का लाभ रमेश का बैंक उन्‍हें देता है, तो अब उनकी ब्‍याज दर 9% से 8.75 प्रतिशत रह जाएगा. इसके बाद रमेश की ईएमआई जो पहले 26,992 रुपये थी, वो अब 26,551 रुपये रह जाएगी. यानि 25 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती के बाद रमेश की ईएमआई 480 रुपये घट जाएगी. बता दें कि रमेश ईएमआई कम न करना चाहें, तो ईएमआई की संख्‍या भी कम कराई जा सकती है.

रेपो रेट क्‍या होता है?

आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि रेपो रेट में कमी की जाएगी. रेपो रेट उस दर को कहा जाता है, जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अन्‍य बैंकों को पैसा उधार देता है. अब समझिए कि अगर रिजर्व बैंक कम ब्‍याज दर पर अन्‍य बैंकों को पैसा उधार देगा, तो वे बैंक भी ग्राहकों से कम ब्‍याज दर वसूलेंगे. इसका सीधा असर ग्राहकों के होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन पर देखने को मिलेगा. रेपो रेट घटने से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है.

RBI ने सातवीं बार रेपो रेट 6.5% पर रखा बरकरार, जानें आपके लोन के EMI पर क्या पड़ेगा प्रभाव

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 RBI Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI ) ने फरवरी की अपनी मौद्रिक नीति में लगातार सातवीं बार फिर से बदलाव नहीं किया है। चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस बार भी आरबीआई ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के कारण आम जनता को ईएमआई में राहत नहीं मिलेगी।


भारतीय रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी की वित्त वर्ष 2024-25 की पहली बैठक पांच अप्रैल को हुई है। माना जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले आरबीआई अपने फैसले से चौंका सकता है मगर आरबीआई ने कोई बदलाव नहीं किया है। इसके साथ ही महंगाई को भी चार प्रतिशत पर लाने का प्रयास जारी है। वहीं वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से नीतिगत दर को यथावत रखा गया है। यह लगातार सातवां मौका है जबकि रेपो दर में बदलाव नहीं किया गया है।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने 2024-25 के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर के सात प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। वहीं खुदरा मुद्रास्फीति के 2024-25 में 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है। रेपो वह ब्याज दर है, जिसपर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये इसका उपयोग करता है। रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का मतलब है कि मकान, वाहन समेत विभिन्न कर्जों पर मासिक किस्त (ईएमआई) में बदलाव की संभावना कम है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बुधवार को शुरू हुई तीन दिन की बैठक में किये गये निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘एमपीसी ने मौजूदा स्थिति पर गौर करते हुए नीतिगत दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है।’’

उन्होंने कहा कि इसके साथ एमपीसी सदस्यों ने लक्ष्य के अनुरूप खुदरा महंगाई को लाने के लिए उदार रुख को वापस लेने के अपने निर्णय को भी कायम रखने का फैसला किया है। आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। रिजर्व बैंक ने फरवरी, 2023 में रेपो दर को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था। उससे पहले मई, 2022 से लगातार छह बार में नीतिगत दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि की गयी थी।

RBI Repo Rate: नहीं बदलेगी होम लोन की EMI, लगातार छठी बार Repo Rate में कोई बदलाव नहीं

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 RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बार फिर से रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 फरवरी को शुरू हुई थी। आज यानी 8 फरवरी को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों का ऐलान किया है। केंद्रीय बैंक ने एक बार फिर से रेपो रेट को यथावत रखते हुए उसमें कोई बदलाव नहीं किया है।


लगातार छठी बार रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला लिया गया है। आरबीआई के फैसले के बाद एक बार फिर से ब्याज दर 6.5 फीसदी पर बना हुआ है। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार रिजर्व बैंक रेपो रेट में कटौती कर सस्ते लोन का तोहफा देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सस्ते लोन के लिए अभी आपको और इंतजार करना होगा।


गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से मिले-जुले संकेत ही मिल रहे हैं। महंगाई भी नीचे आती दिख रही है। उन्होंने बताया कि इस बार की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है और कमिटी का फैसला है कि रेपो रेट को अभी 6.5 फीसदी पर ही स्थिर रखा जाए। छह में से पांच सदस्यों ने इस पक्ष में फैसला दिया है।

एक साल से स्थिर हैं दरें

आरबीआई करीब एक साल से रेपो रेट 6.50 फीसदी पर स्थिर रखा हुआ है। आरबीआई ने रेपो रेट आखिरी बार पिछले साल फरवरी 2023 में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर 6.25 फीसदी से 6.50 फीसदी कर दिया था। वहीं, दिसंबर, 2023 में खुदरा महंगाई दर 5.69 फीसदी के स्तर पर थी। ऐसे में इस बार भी रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम थी। रियल एस्टेट के दिग्गजों ने भी यह उम्मीद जताई थी कि डेवलपर्स और होम बॉयर्स को ध्यान में रखते हुए आरबीआई रेपो रेट को स्थिर रखेगा।

RBI Repo Rate : त्योहारी सीजन से पहले आरबीआई का तोहफा, नही बढ़ेगा लोन का बोझ

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 RBI Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को घोषणा की कि केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से अर्थशास्त्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रमुख रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का विकल्प चुना है। यह निर्णय चौथे अवसर का प्रतिनिधित्व करता है जब 6-सदस्यीय एमपीसी ने प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित छोड़ने का फैसला किया है।


भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि भारत दुनिया की वृद्धि का इंजन बनने को तैयार है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए कहा कि मजबूत मांग के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था जुझारू क्षमता दिखा रही है।

उन्होंने कहा कि जोखिम समान रूप से संतुलित हैं, ऐसे में 2023-24 में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया था। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार चौथी बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखने का फैसला किया है।

आरबीआई अधिनियम 1934 के तहत, आरबीआई विकास और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति संचालित करने के लिए जिम्मेदार है. एमपीसी देश के विकास और महंगाई पर काबू पाने में मदद करती है. एमपीसी की बैठक में 6 सदस्य हैं. इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर करते हैं.

 

RBI ने लगातार छठी बार दिया झटका , रेपो रेट में हुई 0.25% की बढ़ोतरी, महंगी हो जाएगी EMI

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 नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बार फिर आम आदमी को झटका दिया है. आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट या 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है. इसके बाद सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे. देश में महंगाई काबू में आने के बाद भी आरबीआई ने दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है. देश में महंगाई दर का आंकड़ा कम होने के बाद भी रिजर्व बैंक ने लगातार छठी बार नीतिगत दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इसके बाद रेपो रेट 6.25% से बढ़कर 6.50% हो गया है. यानी होम लोन से लेकर ऑटो और पर्सनल लोन सब कुछ महंगा हो जाएगा और आपको ज्यादा EMI चुकानी होगी. देश का आम बजट पेश किए जाने के बाद ये आरबीआई एमपीसी की बैठक थी और इसमें फिर से आम आदमी के झटका लगा है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को तीन दिवसीय एसपीसी बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान किया. बता दें एक्सपर्ट्स पहले से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी किए जाने की संभावना जता रहे थे. गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2022 में हुई MPC बैठक में ब्याज दरों को 5.90% से बढ़कर 6.25% किया गया था. आरबीआई ने बीते साल से अब तक छह बार रेपो रेट में इजाफा करते हुए कुल 2.50% की बढ़ोतरी की है.

6 बार में 2.50% की बढ़ोतरी

मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। इस वित्त वर्ष की पहली मीटिंग अप्रैल में हुई थी। तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था, लेकिन RBI ने 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया था।

22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में ये बदलाव हुआ था। इसके बाद 6 से 8 जून को हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया। इससे रेपो रेट 4.40% से बढ़कर 4.90% हो गई। फिर अगस्त में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई। सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गई। फिर दिसंबर में ब्याज दरें 6.25% पर पहुंच गई। अब ब्याज दरें 6.50% पर पहुंच गई है।

एक साल में करीब 2988 रुपए बढ़ी EMI

ब्याज दरों के बढ़ने के बाद मई से पहले जो होम लोन आपको 5.65% रेट ऑफ इंटरेस्ट पर मिल रहा था वो अब 8.15% पर पहुंच गया है। यानी 20 साल के लिए 20 लाख के लोन पर आपको हर महीने करीब 2,988 ज्यादा की EMI देनी होगी।

0.25% रेट बढ़ने से कितना फर्क पड़ेगा

मान लीजिए रोहित नाम के एक व्यक्ति ने 7.90% के फिक्स्ड रेट पर 20 साल के लिए 30 लाख का लोन लिया है। उसकी EMI 24,907 रुपए है। 20 साल में उसे इस दर से 29.77 लाख रुपए का ब्याज देना होगा। यानी, उसे 30 लाख के बदले कुल 59.77 लाख रुपए चुकाने होंगे।

रोहित के लोन लेने के बाद RBI रेपो रेट में 0.25% का इजाफा कर देता है। इस कारण बैंक भी 0.25% ब्याज दर बढ़ा देते हैं। अब जब रोहित का एक दोस्त उसी बैंक में लोन लेने के लिए पहुंचता है तो बैंक उसे 7.90% की जगह 8.15% रेट ऑफ इंटरेस्ट बताता है।

रोहित का दोस्त भी 30 लाख का ही लोन 20 साल के लिए लेता है, लेकिन उसकी EMI 25,374 रुपए की बनती है। यानी रोहित की EMI से 467 रुपए ज्यादा। इस वजह से रोहित के दोस्त को 20 साल में कुल 60.90 लाख रुपए चुकाने होंगे। ये रोहित से 1.13 लाख ज्यादा है।

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