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कीमतों को काबू में रखना सरकार की प्राथमिकता: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल

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नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार  कीमतों को नियंत्रण  में रखने को प्राथमिकता देती है। इसी वजह से भारत  में मुद्रास्फीति  कई विकसित देशों की तुलना में कम है। मंत्रियों का समूह नियमित रूप से बैठक कर कीमतों पर चर्चा करता है।


केंद्रीय मंत्री गोयल बुधवार को यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 143 रुपये बढ़ाकर 2,183 रुपये प्रति क्विंटल करने के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कीमतों को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले औसत महंगाई दर 10-12 फीसदी रहती थी, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले नौ साल में यह दर 4.5 फीसदी पर आ गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक ओर जहां हम एमएसपी बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमने महंगाई को नियंत्रण में रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत में कीमतें ज्यादातर विकसित देशों की तुलना में कम हैं, जहां महंगाई दर दहाई अंकों में चल रही है।


मुख्यमंत्री बघेल के ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार ने दी अनुमति

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा केन्द्र सरकार से स्टील इंडस्ट्री को ऑक्सीजन के उपयोग की अनुमति के संबंध में भेजे गए प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार ने अनुमति प्रदान कर दी है। केन्द्र सरकार की सचिव स्तर की समिति ने छत्तीसगढ़ के 11 इस्पात उद्योगों को ऑक्सीजन उपयोग की सहमति दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के प्रति आभार प्रकट किया है।





गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के स्टील उद्योगों को राज्य में उत्पादित 20 प्रतिशत आक्सीजन के उपयोग की अनुमति दिए जाने के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के द्वारा अवगत कराया गया है कि गृह मंत्रालय द्वारा चिकित्सा और रक्षा उत्पादन से जुड़े उद्योगों को मेडिकल आक्सीजन के उपयोग की अनुमति 26, 27 और 28 अप्रैल को जारी की जा चुकी है। इसी प्रकार इंडियन स्टील एसोसिएशन से आक्सीजन की आवश्यकता के संबंध में प्रस्ताव पर उद्योगों को प्रतिदिन 17 मेट्रिक टन आक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्टील उद्योगों में लगातार कामकाज के संचालन के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह भी बनाया गया है, इस समूह द्वारा स्टील उद्योगों में आक्सीजन के उपयोग पर मंजूरी दे दी गई है।





मुख्यमंत्री बघेल ने इस संबंध प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 16 मई को दूरभाष पर हुई चर्चा और इसके पहले प्रधानमंत्री द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ ली गई वीडियो कांफ्रेसिंग में कोरोना की स्थिति में सुधार तथा आक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता को दृष्टिगत रखते हुए स्टील उद्योगों को 20 फीसदी आक्सीजन के उपयोग की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। मोदी ने इस पर विचार का आश्वासन दिया था।





मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को इस संबंध में पत्र लिखकर यह अवगत कराया था कि राज्य में कोरोना महामारी की स्थिति में निरन्तर सुधार हो रहा है। ऑक्सीजन उत्पादक इकाईयों को ऑक्सीजन की मांग के अभाव में क्षति हो रही है तथा ऑक्सीजन की कमी के कारण राज्य की सभी स्टील निर्माता इकाईयां बंद पड़ी है, जिसके कारण लाखों मजदूर बेरोजगार हो गये हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य की स्टील निर्माता इकाईयों को राज्य में उत्पादित 20 प्रतिशत मात्रा (92 मीट्रिक टन) के उपयोग की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि भविष्य में किसी भी समय अतिरिक्त मेडिकल ऑक्सीजन की मांग यदि उत्पन्न भी होती है, तो स्टील निर्माता इकाईयों को ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकी जा सकती है।


भूपेश बघेल ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री श्री गोयल को लिखा पत्र, कहा- धान की खेती छत्तीसगढ़वासियों की आजीविका का प्रमुख साधन

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल (CM writes latter to Piyush Goyal) को पत्र लिखकर राज्य के किसानों के हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में राज्य की पीडीएस की आवश्यकता से अतिरिक्त समस्त सरप्लस धान का चावल केन्द्रीय पूल अंतर्गत उपार्जन किये जाने के लिए भारतीय खाद्य निगम में 24 लाख मैट्रिक टन चावल की अनुमति की मात्रा को वृद्धि कर 40 लाख मैट्रिक टन उपार्जित किये जाने की अनुमति यथाशीघ्र प्रदाय करने का अनुरोध किया है ।





CM बघेल ने अपने पत्र में लिखा है कि- छत्तीसगढ़ प्रदेश में खरीफ विपणन सीजन में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजना के अंतर्गत खाद्य विभाग भारत सरकार के साथ हुए एम.ओ.यू. के तहत की जाती है । प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 28 जनवरी, 2021 की स्थिति में विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजनांतर्गत समर्थन मूल्य पर 20.29 लाख किसानों से 90 लाख मैट्रिक टन धान का उपार्जन किया जा चुका है एवं धान खरीदी का कार्य दिनांक 31 जनवरी, 2021 तक किया जावेगा ।





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  छत्तीसगढ़ प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 हेतु समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन राजस्व विभाग के माध्यम से बोए गए धान के रकबे का भौतिक सत्यापन एवं गिरदावरी के पश्चात किया गया एवं उक्तानुसार पंजीकृत किसानों से ही धान का उपार्जन किया गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में धान की कृषि यहां के निवासियों के आजीविका का प्रमुख साधन है । प्रदेश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों (एलडब्ल्युई) में भी वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन किया जाकर धान की खरीदी (CM writes latter to Piyush Goyal )का कार्य किया गया है । वनांचलों में निवासरत कृषकों से उनकी उपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी नक्सल समस्या के उन्मूलन में सहायक सिद्ध होगी ।

खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए भारत सरकार की खाद्य सचिवों की बैठक में छत्तीसगढ़ के लिए 60 लाख मैट्रिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिये जाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई है, इससे वर्तमान में उपार्जित लगभग 89 लाख मैट्रिक टन धान का निराकरण संभव हो सकेगा। किंतु खाद्य विभाग भारत सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2020-21 में भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत 24 लाख मैट्रिक टन चावल (16 लाख मैट्रिक अन उसना एवं 8 लाख मैट्रिक टन अरवा) ही लिये जाने की अनुमति प्रदान की गई है । राज्य की पीडीएस हेतु 20 लाख मैट्रिक टन चावल की आवश्यकता होगी एवं इसके अतिरिक्त 3 लाख मैट्रिक टन चावल का स्टॉक नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा रखा जावेगा । इस प्रकार कुल उपार्जित होने वाले 47 लाख मैट्रिक टन चावल से 70.50 लाख मैट्रिक टन धान का निराकरण संभव हो सकेगा । राज्य में खरीफ वर्ष 2020-21 में लगभग 93 स्डज् चावल उपार्जित होना अनुमानित है ।




बघेल ने पत्र में लिखा है कि- एम.ओ.यू. की कंडिका 18 के तहत उपार्जित धान में से राज्य की पीडीएस की आवश्यकता के अतिरिक्त चावल का स्टॉक भारतीय खाद्य निगम को प्रदाय किये जाने के निर्देश हैं, अतः उक्त प्रावधानों के तहत भारत सरकार द्वारा राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त शेष समस्त सरप्लस धान का अनुपातिक चावल 40 लाख मैट्रिक टन को भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत लिये जाने का अनुरोध है। यदि भारत सरकार द्वारा उपरोक्त हेतु अनुमति प्रदान नहीं की जाती है तो सरप्लस धान के निराकरण में लगभग राशि रू. 2500 करोड़ की आर्थिक हानि संभावित है, जो राज्य शासन को वहन करनी पड़ेगी। यह स्थिति अत्यंत ही चिंतनीय है ।





बघेल ने लिखा कि - भारत सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 575.36 लाख मैट्रिक टन धान का उपार्जन 20 जनवरी 2021 तक किया गया है, जो खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में समान अवधि में उपार्जित धान की मात्रा 466.22 लाख मैट्रिक टन से 23.41 प्रतिशत अधिक है । छत्तीसगढ़ प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में उपार्जित धान की मात्रा 90 लाख मैट्रिक टन गत वर्ष खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में उपार्जित धान की मात्रा 83.94 लाख मैट्रिक टन से 7.2 प्रतिशत अधिक है अतः उपरोक्त से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में उपार्जित धान की मात्रा का गत वर्ष खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में उपार्जित धान की मात्रा से तुलनात्मक वृद्धि राष्ट्रीय औसत के अंतर्गत है ।





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  मुख्यमंत्री ने लिखा है कि - राज्य शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का बोनस भुगतान की घोषणा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से नहीं की गई है । पूर्व में भारत सरकार द्वारा राज्य में प्रचलित “राजीव गांधी किसान न्याय योजना के संबंध में वस्तुस्थिति की चाही गई जानकारी राज्य शासन के द्वारा खाद्य विभाग भारत सरकार को प्रेषित की गई है ।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस भुगतान के संबंध में किसी प्रकार की प्रेस-विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है । समर्थन मूल्य पर उपार्जन उपरांत धान खरीदी केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों में खुले में रखा हुआ है । धान लंबी अवधि तक खुले में अनिराकृत स्थिति में रखे होने पर धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है ।




बघेल ने केन्द्रीय मंत्री (CM writes latter to Piyush Goyal) से किसान हित से जुड़े उपरोक्त विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में राज्य की पीडीएस की आवश्यकता से अतिरिक्त समस्त सरप्लस धान का चावल केन्द्रीय पूल अंतर्गत उपार्जन किये जाने के लिए भारतीय खाद्य निगम में 24 लाख मैट्रिक टन चावल की अनुमति की मात्रा को वृद्धि कर 40 लाख मैट्रिक टन उपार्जित किये जाने की अनुमति यथाशीघ्र प्रदाय किये जाने का अनुरोध किया है।


उपार्जित धान का समय पर कस्टम मिलिंग हो: CM बघेल

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खरीफ वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जा रहे धान का समय पर कस्टम मिलिंग कराने के संबंध में केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में राज्य की कस्टम मिलिंग की क्षमता का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय पूल के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।





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मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल (Union Food Minister Piyush Goyal) को लिखे पत्र में कहा है कि भारतीय खाद्य निगम के द्वारा पूर्व खरीफ वर्षो 2016-17 एवं उसके पहले उसना के साथ-साथ अरवा चावल भी उपार्जित किया जाता रहा है। अतः एफ.सी.आई. द्वारा राज्य की आवश्यकता से अतिशेष चावल उसना के साथ-साथ अरवा चावल के रूप में भी लिया जाना होगा ताकि डी.सी.पी. योजना अंतर्गत उपार्जित समस्त धान का समय पर निराकरण किया जा सके और धान के रख-रखाव में कोई क्षति न हो।  





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 मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा है राज्य में स्थापित 400 उसना राईस मिलों की उसना मिलिंग क्षमता 5.68 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह और 1504 अरवा मिलों की अरवा मिलिंग क्षमता 18.83 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह है। इसे ध्यान में रखते हुए खरीफ वर्ष 2020-21 में भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति दी जाए।





धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन





 उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जाने वाले धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन चावल लेने की कार्ययोजना का अनुमोदन भारत सरकार द्वारा किया गया है। इसमें से भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत अनुमानित सरप्लस 40 लाख मेट्रिक टन चावल उपार्जित किया जाएगा तथा शेष 20 लाख मेट्रिक टन (एन.एफ.एस.ए. अंतर्गत 15 लाख मेट्रिक टन अरवा व स्टेट पूल अंतर्गत 4.80 लाख मेट्रिक टन अरवा एवं 0.20 लाख मेट्रिक टन उसना) चावल राज्य में पीडीएस की आवश्यकता हेतु छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में उपार्जित किया जाएगा।


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