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किसान आंदोलन: आखिरकार सरकार और संगठनों के बीच बन रही सहमति की स्थिति

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किसान आंदोलन (Farmers Movement) को खत्म करने के लिए किसानों और सरकार के बीच वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचती हुई नजर आ रही है। किसान यूनियनों (Farmer Unions) ने 10वीं वार्ता के बाद अब आंदोलन (Farmers Protest Updates) समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को 18 महीने रोक लगाने के लिए तैयार हो गई है। माना कि अभी इस मामले को लेकर अंतिम नतीजे सामने नहीं आए हैं। इसके लिए अगली बैठक का इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि किसान संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव पर बताने के लिए वक्त मांगा गया है।





किसान यूनियनों से बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि' सरकार एक से डेढ़ साल तक नए कानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए सहमत है। इस दौरान किसान और सरकार के प्रतिनिधि मिलकर समस्याओं का हल खोजें और जो समाधान हो उस को आगे बढ़ाया जाए।' केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसान यूनियनों की ओर से 21 जनवरी को इस विषय में विस्तार पूर्वक चर्चा की जाएगी। इसके बाद 22 जनवरी को होने वाली बैठक में यूनियन अपना फैसला बताएंगे।





ट्रैक्टर निकालने की मांग को लेकर हुई बैठक(Farmers Protest Updates)





हालांकि गणतंत्र दिवस पर किसानों की ओर से ट्रैक्टर निकालने की मांग को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही। दिल्ली पुलिस ने किसानों को रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार किसान रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालने को लेकर आए हुए हैं। लेकिन गुरुवार को तीसरे दौर की वार्ता के बाद भी कोई नतीजा सामने नहीं आ रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर ट्रैक्टर रैली निकालने पर रोक लगा दी गई है।





प्रदर्शनकारियों की मौत जारी





कृषि कानूनों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठन और किसान राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर धरना देकर आंदोलन कर रहे हैं। लगभग 2 महीने से महीने से अधिक समय से यह आंदोलन चल रहा है। भारतीय किसान यूनियन के अनुसार आंदोलन में अब तक 100 से अधिक आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है। यह सिलसिला लगातार जारी है।





जुआरी बनकर पहुंचे ASP, जुआ अड्डे पर मारा छापा





मंगलवार रात ही हरियाणा के रोहतक निवासी एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। मृतक का नाम जय भगवान राणा बताया जा रहा है जो कि किसान था। करीब 2 महीने उनके प्रदर्शन में 5 किसानों ने अब तक आत्महत्या कर ली है। राणा ने मंगलवार शाम सल्फेट टेबलेट खा ली और सड़क पर गिर पड़ा। अस्पताल लाया गया लेकिन इस दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।


Farmers Protest: सरकार और किसान नेताओं के बीच आज बातचीत

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नई दिल्ली : किसान आंदोलन (Farmer protest Live Update) को खत्म करने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से मीटिंग के लिए आमंत्रण भेजा है। बताया जा रहा है कि आज दोपहर 3 बजे किसान नेताओं संग बैठक होगा। इससे पहले किसान नेताओं ने केंद्र की अपील को दरकिनार करते हुए सोमवार को कहा कि वे नए कृषि कानूनों के खिलाफ 'निर्णायक लड़ाई' के लिए दिल्ली आए हैं और मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन (Farmer Protest) जारी रहेगा।





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प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर किया हमला





वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कानूनों का बचाव किया और विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे सरकार के फैसले पर भ्रम फैला रहे हैं। उधर, विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और कहा है कि केंद्र को किसानों के 'लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान' (Farmer protest Live Update) करना चाहिए तथा संबंधित कानूनों को निरस्त करना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों के एक प्रतिनिधि ने सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।





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'मांगों से नहीं होगा समझौता'





भारतीय किसान यूनियन (दकौंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, 'हम अपनी मांगों से समझौता नहीं कर सकते।'' उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ पार्टी उनकी चिंता पर विचार नहीं करती तो उसे 'भारी कीमत' चुकानी होगी। किसानों के प्रतिनिधि ने कहा, 'हम यहां निर्णायक लड़ाई के लिए आए हैं।' उन्होंने कहा, 'हम दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे और यहां से अपनी रणनीति बनाएंगे। हम प्रधानमंत्री से यह कहने के लिए दिल्ली आए हैं कि वह किसानों के 'मन की बात' सुनें, अन्यथा सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को भारी कीमत चुकानी होगी।'





31 मामले दर्ज किए गए





वहीं, भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन को ''दबाने'' के लिए अब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगभग 31 मामले दर्ज किए गए हैं। चढूनी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि नए कृषि कानूनों से देश के कृषि व्यवसाय पर कॉरपोरेट घरानों का एकाधिकार हो जाएगा।


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