Media24Media.com: Chandrayaan-3 Mission

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Chandrayaan-3 Mission : रोवर चंद्रमा के नमूने एकत्र करेगा और डेटा लैंडर को भेजेगा – डॉ. एस. उन्नीकृष्णन नायर

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Chandrayaan-3 Mission :  विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र  के निदेशक (Director) डॉ. एस. उन्नीकृष्णन नायर  ने कहा कि रोवर  चंद्रमा के नमूने एकत्र करेगा और डेटा लैंडर को भेजेगा  । लैंडर इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी), बेंगलुरु में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स को संदेश भेजेगा।


“गुरुवार को रात लगभग 12.30 बजे रोवर लैंडर से चंद्रमा की सतह पर आकर चारों ओर घूम रहा है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक डॉ. एस. उन्नीकृष्णन नायर ने बताया, यह चंद्रमा की सतह पर अपनी छाप छोड़ रहा है।” भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का लोगो और राष्ट्रीय प्रतीक को रोवर के पहियों पर उकेरा गया है, ताकि जब यह चारों ओर घूमे तो अपनी छाप छोड़ सके। उन्नीकृष्णन के अनुसार, रोवर के सौर पैनल और लैंडर के सौर पैनल खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रोवर चंद्रमा के नमूने एकत्र करेगा और प्रयोग करेगा और डेटा लैंडर को भेजेगा।


भारत का चंद्रमा लैंडर, जो बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित रूप से उतरा, वह इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी), बेंगलुरु में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स को संदेश भेजेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या लैंडर योजना के अनुसार उतरा है या इसमें कोई भिन्नता है, उन्नीकृष्णन ने कहा कि मौजूदा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सब कुछ योजना के अनुसार हुआ है। उन्नीकृष्णन ने कहा, “हमें आगे जानने के लिए उड़ान के बाद का आकलन करना होगा।”


गौरतलब है कि मून लैंडर और रोवर 600 करोड़ रुपये के चंद्रयान-3 मिशन का हिस्सा हैं। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान में एक प्रणोदन मॉड्यूल (वजन 2,148 किलोग्राम), एक लैंडर (1,723.89 किलोग्राम) और एक रोवर (26 किलोग्राम) शामिल है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, चंद्रमा रोवर में लैंडिंग स्थल के आसपास मौलिक संरचना प्राप्त करने के लिए अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) है। अपनी ओर से, लैंडर भी अपने पेलोड के साथ उसे सौंपे गए कार्यों को पूरा करेगा। इसरो ने कहा कि लैंडर और रोवर का मिशन जीवन 1 चंद्र दिवस या 14 पृथ्वी दिवस है।


Chandrayaan-3 के लिए अगले कुछ दिनों का सफर अहम - ISRO चीफ

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Chandrayaan-3 Mission : चंद्रयान-3 अच्छी दशा में है और चंद्रमा पर उतरने के लिए अहम चरण की ओर बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO ) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सोमवार को बताया कि यान को चंद्रमा पर 100 किमी के परिक्रमा पथ से सतह की ओर लाना बेहद नाजुक चरण होगा।


14 जुलाई को प्रक्षेपित यान इस समय चंद्रमा के चारों ओर 170 गुणा 4313 किमी के दीर्घवृत्ताकार पथ पर परिक्रमा कर रहा है। परिक्रमा पथ में बदलाव के अगले चरण नौ अगस्त और 17 अगस्त को प्रस्तावित हैं। इन चरणों के जरिये उसे चांद की सतह से महज 100 किमी ऊंचे वृत्ताकार परिक्रमा पथ पर लाया जाएगा। वहीं, 23 अगस्त को लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है। सोमनाथ ने बताया कि चंद्रमा के 100 किमी तक करीब पहुंचने में वे यान के लिए कोई मुश्किल नहीं देख रहे। समस्याएं लैंडर की सतह से सही पोजीशन का अनुमान लगाने के साथ शुरू होती हैं। इसे पथ निर्धारण प्रक्रिया कहा जाता है। अगर यह सही रहती है, तो बाकी प्रक्रियाएं आसानी से पूरी की जा सकेंगी।

चंद्रयान-2 के अनुभव से सीखे

सोमनाथ ने कहा कि 2019 का मिशन चंद्रयान-2 आंशिक सफल था, लेकिन इससे मिले अनुभव इसरो के चंद्रमा पर लैंडर उतारने के लिए नए प्रयास में काफी उपयोगी साबित हुए। इसके तहत चंद्रयान-3 में कई बदलाव किए गए।

अब तक सब मंगल

सोमनाथ ने बताया कि इस बार चंद्रयान-3 को बेहद सही ढंग से नीचे लाया गया है। परिक्रमा पथ में बदलाव जैसी योजना थी, वैसे ही हो रहे हैं। किसी तरह का पथ विचलन नहीं हुआ है। इसी वजह से अब तक शानदार परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि आगे भी सब ठीक होगा।

Chandrayaan-3 Mission : चंद्रमा के ऑर्बिट में आज एंट्री करेगा चंद्रयान-3

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 Chandrayaan-3 Mission : भारत का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-3 अपने सफर पर तेजी से आगे बढ़ता ही जा रहा है और इसने अब तक अपनी आधे से ज्यादा की दूरी कामयाबी के साथ तय कर ली है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज शुक्रवार को अपने इस मिशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की करीब दो-तिहाई दूरी पूरी कर ली है. इस अंतरिक्ष यान को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था.


राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि चंद्रयान-3 को छोड़े जाने के बाद से उसे कक्षा में ऊपर उठाने की प्रक्रिया को पांच बार कामयाबी के साथ पूरा किया जा चुका है. इसरो के अनुसार कल शनिवार का दिन चंद्रयान-3 के लिए अहम है क्योंकि एक और अहम प्रयास करते हुए अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

एक अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला

इससे पहले अंतिरक्ष यान को मंगलवार एक अगस्त को पृथ्वी की कक्षा से ऊपर उठाया गया और फिर चंद्रमा की ओर बढ़ाने की प्रक्रिया को सफलता के साथ पूरा किया गया. फिर यान को ट्रांसलूनर कक्षा में भेज दिया गया.

इसरो ने आज चंद्रयान के चंद्रंमा की कक्षा में स्थापित किए जाने को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि कल शनिवार को अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया (Lunar Orbit Injection,LOI) शाम करीब 7 बजे के लिए निर्धारित की गई है. इसरो की ओर से कहा गया कि यह कोशिश तब की जाएगी जब चंद्रयान-3 चंद्रमा के बेहद करीब पहुंच जाएगा.

23 को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग

इससे पहले, इसरो ने कहा था कि 23 अगस्त को चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की कोशिश की जाएगी. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 3 दिन पहले मंगलवार को जानकारी दी कि चंद्रमा की ओर रवाना होने के घंटों बाद भी चंद्रयान-3 सही तरीके से काम कर रहा है. इस दिन यान को पृथ्वी की कक्षा से ऊपर उठाकर चंद्रमा की ओर बढ़ाने की प्रक्रिया को पूरा किया गया था.

चौथा देश होगा भारत

अब तक अमेरिका, रूस व चीन ने ही चांद की सतह पर अपने लैंडर उतारे हैं। भारत ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के तहत लैंडर को उतारने का प्रयास किया था। हालांकि आखिरी क्षणों में लैंडर से संपर्क टूट गया था और उसकी क्रैश लैंडिंग हो गई थी। इस बार लैंडिंग सफल रहने के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। लांच व्हीकल यानी राकेट की लागत को हटा दें, तो चंद्रयान-3 की कुल लागत 250 करोड़ रुपये है। अन्य देशों की औसतन लागत इससे कई गुना ज्यादा रही है।

Chandrayaan-3 Mission update: ISRO ने ‘चंद्रयान 3’ को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की कवायद सफलतापूर्वक पूरी की

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 Chandrayaan-3 Mission update: चंद्रयान -3 ने 14 जुलाई को चांद के सफर पर निकल चुका है। तब से लगातार सोशल मीडिया पर चंद्रयान (Chandrayaan-3) को लेकर ट्रेंड बना हुआ है। लोगों में ये जानने की उत्‍सुकता है कि भारत का ये स्‍पेसक्राफ्ट कहां तक पहुंचा. इसको लेकर इसरो भी समय-समय पर अपडेट दे रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO) ने कहा कि जैसी उम्मीद थी चंद्रयान-3 ने 71351 किमी x 233 किमी की कक्षा हासिल कर ली है। इसरो के वैज्ञानिकों गुरुवार को चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद सफलतापूर्वक पूरी की। यह कार्य यहां इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) से किया गया।


अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इस तरह की अगली कवायद 25 जुलाई को दोपहर बाद दो और तीन बजे के बीच किए जाने की योजना है। इसने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय चंद्रमा दिवस के अवसर पर चंद्रयान-3 को चंद्रमा के और करीब पहुंचा दिया है। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था।


इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने इससे पहले कहा था कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा के सफर पर है। अगले कुछ दिनों में यह (लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतारने का कार्य) कर दिखाएगा। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जागरूकता प्रशिक्षण (स्टार्ट) कार्यक्रम 2023 के उद्घाटन भाषण में यह बात की। उन्होंने कहा कि मैं आश्वस्त हूं कि जहां तक विज्ञान की बात है, आप इस चंद्रयान-3 मिशन के जरिये कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेंगे। लैंडर को 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है।

इसरो चमकते खगोलीय एक्स-रे स्रोतों के विभिन्न आयामों का अध्ययन करने के लिए देश के पहले समर्पित ‘पोलरिमीटर मिशन-एक्सपोसैट’ (एक्स-रे पोलरिमीटर सैटेलाइट) को अंजाम देने के लिए लगभग तैयार है। यह बात अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि सूर्य का अध्ययन करने के लिए ‘आदित्य-एल-1’ मिशन की तैयारियां भी चल रही हैं। उन्होंने बताया कि सौर मंडल के बाहर स्थित ग्रहों का अध्ययन करने के लिए भी उपग्रह विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसरो के प्रमुख ने कहा कि हम चांद पर उतरने से जुड़े अन्य अभियानों पर भी चर्चा कर रहे हैं। अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी और जागरूकता प्रशिक्षण (स्टार्ट) कार्यक्रम 2023 के उद्घाटन समारोह को ऑनलाइन संबोधित करते हुए यह बात कही।

इसरो ने 14 जुलाई को चांद पर अपना ‘चन्द्रयान-3’ मिशन भेजा है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस मिशन (चन्द्रयान-3) के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में आपको कुछ अनोखा जरूर मिलेगा। सोमनाथ ने कहा कि हम आदित्य-एल-1 मिशन के माध्यम से सूर्य का अध्ययन करने और इसे समझने का भी प्रयास करेंगे। एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह लगभग तैयार है और हम तारों को बेहतर तरीके से समझने के लिए इसे (पोलरिमीटर उपग्रह) प्रक्षेपित करने पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अन्य खगोलीय पिंडों जैसे शुक्र को समझने के लिए मिशन पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि सौर मंडल से बाहर के खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने के लिए उपग्रह विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसरो के अधिकारियों ने बताया कि एक्सपोसैट (एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह) दो वैज्ञानिक उपकरणों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करेगा।

उन्होंने बताया कि पहला उपकरण ‘पीओएलआईएक्स’ (पोलरिमीटर इंस्ट्रूमेंट इन एक्स-रे) खगोलीय मूल के 8-30 किलो-इलेक्ट्रॉनवोल्ट वाले फोटॉन के मध्यम एक्स-रे ऊर्जा श्रेणी के पोलरिमीटर मानकों (ध्रुवीकरण की डिग्री और कोण) को मापेगा।


अधिकारियों ने कहा कि दूसरा उपकरण एक्सस्पेक्ट (एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड टाइमिंग) 0.8-15 किलोइलेक्ट्रॉनवोल्ट की ऊर्जा श्रेणी में स्पेक्ट्रोस्कोपिक सूचनाएं देगा। स्पेक्ट्रोस्कोपिक से तात्पर्य किसी भी वस्तु के आकार या प्रकृति का पता लगाने के लिए विद्युतीय या चुंबकीय तरंगों के उपयोग के विभिन्न तकनीकों से है। ‘आदित्य-एल-1’ सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन होगा।


Chandrayaan-3 Mission update : ISRO ने बताया किस हाल में भारत का मून मिशन

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Chandrayaan-3 Mission update : भारत का चंद्रयान अपनी मंजिल चांद की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसरो ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से अपने चंद्रयान-3 को चांद के लिए रवाना किया था। अभी तक चंद्रयान बिल्कुल सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया है कि चंद्रयान-3 ने पहली परीक्षा पास करते हुए पृथ्वी की पहली ऑर्बिट में एंट्री कर ली है। इसरो ने ट्वीट करते हुए बताया कि इस प्रक्रिया को चंद्रयान ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है। चंद्रयान-3 फिलहाल पृथ्वी की एक ऑर्बिट में है। इस ऑर्बिट की पृथ्वी से न्यूनतम दूरी 173 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 41 हजार 762 किलोमीटर है।

इस बीच विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के डायरेक्टर एस उन्नीकृष्णन नायर ने कहा कि शुक्रवार को लॉन्च किया गया चंद्रयान-3 मिशन 40 दिन के महत्वपूर्ण चरण से गुजरेगा और फिर चंद्रमा की सतह पर ‘लैंडिंग’ के लिए इसमें लगे ‘थ्रस्टर्स’ की मदद से इसे पृथ्वी से दूर ले जाया जाएगा। नायर ने कहा कि चंद्रयान ने अब तक बहुत शानदार प्रदर्शन किया है। ये अब तक स्पेस यान के शुरुआती सभी मानकों पर खरा उतरा है।

चंद्रयान के थ्रस्टर्स को किया गया फायर

इसरो ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए ‘चंद्रयान-3’ को लॉन्च किया था। शुक्रवार दोपहर 2.35 बजे उड़ान भरने के 17 मिनट बाद सैटेलाइट ने ऑर्बिट में एंट्री कर ली थी। नायर ने कहा, 'आज से चंद्रयान में लगे थ्रस्टर्स को ‘फायर’ किया जाएगा और 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर ‘लैंडिंग’ के लिए चंद्रयान-3 को पृथ्वी से दूर ले जाया जाएगा। नायर ने कहा कि चूंकि प्रयोग का पहला चरण सौ प्रतिशत सफल रहा है और अंतरिक्ष यान भी बहुत अच्छी स्थिति में है तथा यह अपनी प्रणोदन प्रणाली और उपकरणों का उपयोग करके चंद्रमा पर जाने में सक्षम होगा।


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