Media24Media.com: Chaitra Navratri

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label Chaitra Navratri. Show all posts
Showing posts with label Chaitra Navratri. Show all posts

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा: जानें कथा और मंत्र

No comments Document Thumbnail

Chaitra Navratri : आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधाव है। मां शैलपुत्री को कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली माना जाता है। माता मुश्किलों के समयों अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। इसी के साथ उनकी सारी इच्छाओं को पूरा करती हैं। मां शैलपुत्री साधक के मूलाधार चक्र को जागृत करने में भी मदद करती हैं। मूलाधार चक्र हमारे शरीर में ऊर्जा का केंद्र है।


कैसा है मां शैलपुत्री का स्वरुप?

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप अत्यंत शांत, सरल और दया से पूर्ण है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प शोभायमान है। उनकी सवारी वृषभ है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है।

कलश स्थापना

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का बहुत महत्व है। कलश स्थापना की दौरान देवी मां की चौकी लगाई जाती है और पूरे 9दिनों तक उनके 9अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसे में कलश की स्थापना मुहूर्त के अनुसार ही होनी चाहिए।

घटस्थापना का मुहूर्त - उदया तिथि के अनुसार, इस बार नवरात्रि का शुभारंभ 30मार्च (रविवार) से होगा। ऐसे में कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6बजकर 13मिनट पर शुरु होगा। इसका समापन सुबह 10बजकर 22मिनट पर होगा।

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - अभिजीत मुहूर्त की शुरुआत दोपहर 12बजकर 01मिनट पर होगी। जिसका समापन 12बजकर 50मिनट पर होगा।

कलश स्थापना की पूजन-विधि

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का बहुत महत्व है। घट यानी मिट्टी का घड़ा। घटस्थापना के लिए ईशान कोण शुभ माना जाता है। घट में पहले थोड़ी सी मिट्टी डालें और फिर जौ डालकर इसकी पूजा करें। फिर इसे ईशान कोण में स्थापित कर दें। कलश स्थापना की दौरान देवी मां की चौकी लगाई जाती है और पूरे 9दिनों तक उनके 9अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

मां शैलपुत्री का भोग

माता शैलपुत्री की पूजा में विशेष रूप से सफेद रंग का बहुत महत्व है। सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है। इसलिए मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए सफेद रंग की चीजों का भोग लगाना चाहिए। मां शैलपुत्री के भोग में आप सफेद मिठाई, जैसे खीर, खाजा अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा दूध और दही का भी भोग लगा सकते हैं।

मां शैलपुत्री का मंत्र

वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

मां शैलपुत्री की पूजा से लाभ:

माना जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा से विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है।

घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और समृद्धि का वास होता है।
इसके अलावा, यह पूजा घर में सुख-शांति, प्रेम और समृद्धि लाती है।
श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।

Chaitra Navratri : नवरात्रि के छठे दिन आज मां कात्यायनी की पूजा विधि और मंत्र, यहां जानें

No comments Document Thumbnail

Chaitra Navratri : चैत्र नवरात्रि का छठा दिन आज 14 अप्रैल दिन रविवार को है. चैत्र मा​ह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को नवरात्रि का छठा दिन होता है और उस दिन मां दुर्गा के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी की आराधना करने से व्यक्ति को शक्ति और अभय यानी निडरता प्राप्त होती है. उनके आशीर्वाद से कठिन से कठिन कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. नकारात्मकता का अंत होता है और यश की प्राप्ति होती है. आज मां कात्यायनी की पूजा रवि योग में होगी. जानते हैं कि मां कात्यायनी की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, भोग, आरती क्या है?


चैत्र नवरात्रि के छठे दिन का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:27 एएम से 05:12 एएम तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:56 एएम से 12:47 पीएम तक
चर-सामान्य मुहूर्त: 07:33 एएम से 09:09 एएम तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: 09:09 एएम से 10:45 एएम तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 10:45 एएम से 12:21 पीएम तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: 01:58 पीएम से 03:34 पीएम तक

आज बने हैं 2 शुभ योग

आज के दिन दो शुभ योगों का निर्माण हुआ है. आज के दिन रवि योग सुबह 05:56 एएम से बन रहा है, जो देर रात 01:35 एएम तक है. वहीं त्रिपुष्कर योग आज देर रात 01:35 एएम से कल सुबह 05:55 एएम तक है. आज पूरे दिन आर्द्रा नक्षत्र है, जिसका समापन देर रात 01:35 एएम पर होगा.

कौन हैं मां कात्यायनी?

सिंह पर सवार रहने वाली मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं, जिसमें वे कमल, तलवार आदि धारण करती हैं. कात्यायन ऋषि ने मां दुर्गा को अपने तप से प्रसन्न किया था, देवी ने जब उनको दर्शन देकर आशीर्वाद मांगने को कहा तो उन्होंने उनको अपनी पुत्री के रूप में पाने की इच्छा प्रकट की. मां दुर्गा उनके घर पुत्री के रूप में प्रकट हुईं, जिनका नाम कात्यायनी पड़ा. वे अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं.

मां कात्यायनी का प्रिय भोग

आज पूजा के समय मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा आप देवी को
मीठा पान और लौकी का भी भोग लगा सकते हैं.

मां कात्यायनी का पूजा मंत्र
1. मां देवी कात्यायन्यै नमः

2. या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कात्यायनी की पूजा विधि

आज सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. आज रवि योग में सूर्य पूजा अत्यंत शुभ फलदायी मानी जाती है. उसके बाद शुभ मुहूर्त में मां कात्यायनी की पूजा शुरू करें. मां कात्यायनी का जल से अभिषेक करें. फिर मंत्रोच्चार के साथ उनको अक्षत्, लाल रंग के फूल, सिंदूर, लाल चुनरी, फल, धूप, दीप, शहद चढ़ाएं. मां कात्यायनी के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं. उसके बाद मां कात्यायनी की कथा पढ़ें और अंत में आरती करें. फिर आपकी जो भी मनोकामना है, उसके मां कात्यायनी के समक्ष व्यक्त कर दें.

राज्यपाल ने नवरात्रि के पहले दी प्रज्वलित की ज्योति कलश, CM ने की गंगादई माता की पूजा

No comments Document Thumbnail

राज्यपाल अनुसुईया उइके ने चैत्र नवरात्रि पर्व के पहले दिन राजभवन के उपासना कक्ष में विधिवत घट स्थापना और ज्योति कलश प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की। राज्यपाल उइके ने मां दुर्गा की पूजा-आरती कर देश और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। 

मुख्यमंत्री ने की गंगादई माता की पूजा

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर के पुजारीपारा में स्थित गंगादई माता के मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। साथ ही प्रदेश की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर मौके पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, सांसद दीपक बैज, बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप,विधायक चित्रकोट राजमन बेंज़ाम, विधायक दंतेवाड़ा देवती कर्मा, ऊर्जा विकास बोर्ड के अध्यक्ष मिथलेश स्वर्णकार, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एमआर निषाद,  जगदलपुर महापौर सफीरा साहू, कमिश्नर श्याम धावड़े, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, मुख्य वन संरक्षक मोहम्मद शाहिद, कलेक्टर रजत बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र मीणा समेत जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

गंगादई माता के प्रति है बस्तरवासियों की श्रद्धा

बस्तर रियासत की पूर्व राजधानी बस्तर में माता की प्रतिमा की उत्पत्ति बांस के जड़ को एक ग्रामीण द्वारा उसके कंद को निकालते समय अपने आप जमीन से हुई है, जिसे गंगादई माता का नाम दिया गया। ये दंतेश्वरी माता की ही बहन है। बाद में भव्य मंदिर का रूप दिया गया। राजा प्रवीरचंद भंजदेव भी यहां पूजा करने आया करते थे। ये राजा महाराजा के जमाने का मंदिर है।

ये मंदिर बस्तर के 112 गांवों के लोगों के देवी आस्था का केंद्र है। हर साल माघ पूर्णिमा को मेला भरता है, जिसमें सभी 112 गांवों के देवी देवता माता से भेंट करने आते हैं। इसी मंदिर परिसर में एक प्राकृतिक जल कुंड भी स्थित है। इस कुंड का जल कभी सूखता नहीं है। इसके जल से कई प्रकार की चर्म रोग, बीमारी ठीक हो जाती है। प्राचीन समय से कुंड के जल से ही माता का स्नान किया जाता है।

सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए CM 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विकासखंड मुख्यालय बस्तर के लालबहादुर शास्त्री मैदान में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होकर नव दंपत्तियों को आशीर्वाद प्रदान किया।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.