Media24Media.com: होली का त्योहार

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Safe Holi Tips: जानिए, कैसे मनाएं सुरक्षित होली, बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी

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Safe Holi Tips: देशभर में इस बार होली का त्योहार ‘8 मार्च 2023’ को मनाया जाएगा। ऐसे में होली पर खुशियां बरकरार रहें इसके लिए होली खेलने से पहले कुछ सावधानियां जरूर बरतें क्योंकि होली त्योहार है रंगों और खुशियों का।


रंगों के चुनाव में बरतें सावधानी

होली खेलते समय रंगों का चुनाव करते समय एहतियात जरूर बरतें क्योंकि होली उत्सव के दौरान सावधानी रखना बहुत जरूरी है। इस सम्बंध में एम्स के नेत्र विशेषज्ञ एवं चीफ, आरपी सेंटर डॉ. जीवन सिंह तितियाल बताते हैं कि रंगों के साथ-साथ कभी-कभी हमें नुकसान भी पहुंचता है। बहुत सारे रंग ऐसे होते हैं जो त्वचा, आंखों व बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में बच्चे, परिवार वाले ऐसा कलर यूज करें जिसमें टॉक्सिसिटी न हो। जो लोग होली पर गंदे पदार्थ या कीचड़ का इस्तेमाल करते हैं, वे ऐसा न करें क्योंकि इससे शरीर को काफी नुकसान पहुंच सकता है। छोटे बच्चों को रंग न लगाएं क्योंकि उनकी स्किन ज्यादा सेंसेटिव होती है। ऐसे में उन्होंने रंगों से नुकसान भी पहुंच सकता है।

होली सिर्फ सूखे रंगों से ही खेलें

ऐसे में हमें होली के माहौल में सावधान रहना चाहिए। होली सिर्फ सूखे रंगों से ही खेलें। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। सिर्फ सफाई से बनी हुई मिठाई का ही सेवन करें। इन सभी सावधानियों के साथ होली का त्योहार मनाएं और लापरवाही न करें।

त्वचा या आंख में जलन हो तो विशेषज्ञ को दिखाएं

डॉ. जीवन सिंह तितियाल यह भी बताते हैं कि यदि गुलाल आंख में चला जाता है तो आंखों को रगड़े नहीं। ऐसे में आंखों को साफ पानी से धोएं। यदि घर में कोई टीयर ड्रॉप उपलब्ध है तो उसे आंखों में डाल सकते हैं। इससे आंखों के अंदर के सारे गंदे पदार्थ बाहर निकल कर आ जाएंगे। उसके बावजूद भी यदि आंख में चुभन होती है तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर डॉक्टर की सलाह लें।

होली खेलते समय ये बात रखें ध्यान

जब भी रंगों से होली मनाएं तो पास में एक साफ पानी की बाल्टी जरूर भरकर के रखें। जब भी आपको आंख धोनी है या चेहरा धोना है तो पहले एक काम अवश्य करें कि आपके हाथ में और बालों में जो रंग है उसको अलग से पहले धो लें, उसके बाद ही आप अपनी आंखों को और चेहरे को धोएं। रंग उतारने के लिए साबुन और पानी का प्रयोग करें।

रंग का आंखों पर प्रभाव

– आंखों में रंग को न जानें दें
– आंख में रंग जाने पर साफ पानी से धो लें
– घर में रखी टीयर ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते हैं
– आराम न मिले तो विशेषज्ञ को दिखाएं
– पानी या रंग भरे गुब्बारे का प्रयोग न करें

कैसे मनाएं सुरक्षित होली ?

– पूरे बाजू के कपड़े पहनें
– कपड़े ऐसे पहने जिससे त्वचा का ज्यादा हिस्सा ढका रहे
– रंग से खेलने से पहले बालों में तेल लगाएं
– आंखों में चोट या रंग न जाए इसके लिए चश्मा पहने लें
– प्राकृतिक रंगों से होली खेलें
– छोटे बच्चों को रंग न लगाएं
– रंग से आंख व त्वचा को नुकसान हो सकता है
– होली सिर्फ सूखे रंगों से ही खेलें
– खाने का ध्यान रखें
– स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
– सफाई से बनी मिठाई ही खांए

 

होली की उमंग के बीच खान-पान में रखें सावधानी, शराब, भांग और अन्य मादक पदार्थों से रहें दूर

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होली यानि रंगों और कई प्रकार के पकवानों के इस त्योहार के दौरान खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में उमंग और उत्साह के मौसम बसंत ऋतु में मनाए जाने वाले होली पर्व को आरोग्य के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। क्योंकि इस त्योहार में मन ईर्ष्या, द्वेष, शत्रुता, क्रोध जैसे मानसिक अवगुणों से मुक्त होकर प्रफुल्लित रहता है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ संजय शुक्ला ने बताया कि इस समय वातावरण में कई पराग कण मौजूद रहते हैं, जो एलर्जिक रोग पैदा करते हैं। इसलिए होलिका दहन में अगरू, आम, साल, नीम के सूखे पेड़ों की टहनियों और गूगुल, कपूर इत्यादि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग हवन के रूप में करना चाहिए, ताकि वातावरण संक्रमण रहित हो सके। 

विशेष सावधानी बरतने की जरूरत 

डॉ. शुक्ला ने बताया कि होली त्योहार के दौरान लोगों को रंग-गुलाल के साथ ही खान-पान में लापरवाही के कारण अनेक बार सेहत से जुड़ी समस्याओं से जूझना पड़ता है। इन दिनों बाजार में बिकने वाले अधिकांश रंग और गुलाल केमिकल और सिंथेटिक होते हैं जो अनेक बार आंख और त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं। इसलिए रंग और अबीर के चयन में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

प्राकृतिक रंग और गुलाल का उपयोग 

डॉ. ने बताया कि टेसू समेत अनेक वनस्पतियों जिससे प्राकृतिक रंग और गुलाल बनाया जाता है, उनमें औषधि गुण भी होते हैं। फलस्वरूप ये त्वचा और आंखों के लिए सुरक्षित होने के साथ ही चर्म रोगों में भी गुणकारी होते हैं। आजकल एरोमा थेरेपी यानि सुगंध से इलाज भी प्रचलन में है इसलिए सुगंध युक्त रंग-गुलाल से मन प्रसन्नचित्त हो जाता है जिससे होली का उमंग दोगुना हो जाता है। इसके अलावा मेहंदी और नीम की पत्तियों, गुड़हल, गेंदा, गुलाब, हरसिंगार फूल और नील पौधे की फलियों को उबालकर रंग और गुलाल बनाया जाता है। होली में हमें प्राकृतिक रंग और गुलाल का ही उपयोग करना चाहिए।

शरबत और गन्ना रस का उपयोग लाभकारी

डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि होली के समय और बसंत ऋतु में आयुर्वेद पद्धति में पाचन तंत्र के लिए सुरक्षित और सुपाच्य आहार व पेय के विशेष निर्देश हैं। शीत ऋतु में शरीर में जमा कफ इस ऋतु में पिघलता है जिसका प्रभाव यकृत यानि लिवर में पड़ता है जो पाचन तंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण अंग है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार इस ऋतु में गेहूं और मिश्रित आटे की रोटी, मूंग की दाल, खिचड़ी, हरी सब्जियां जैसे भिंडी, करेला, मुनगा यानि सहजन, भाजी, पुदीना, लहसुन, अदरक जैसे भोजन, सब्जियों और मसालों को अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। 

रसीले और पानीदार फलों का सेवन

होली और ग्रीष्म ऋतु में छाछ, नीबू, आंवला, बेल, खस का शरबत और गन्ना रस का उपयोग करना चाहिए, लेकिन बाजार में बिकने वाले इन पेय पदार्थों के सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि साफ-सफाई के अभाव में अनेक रोगों के संक्रमण का खतरा हो सकता है। इस समय अंगूर, संतरा, मौसंबी, तरबूज और खरबूज जैसे रसीले और पानीदार फलों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को निर्जलीकरण से बचाता है। 

सावधानियों के पालन से होली का उमंग दोगुना    

लोगों को आसन्न गर्मी के लिहाज से होली त्योहार में अधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थों, गरिष्ठ भोजन, मांसाहार, भांग इत्यादि मादक पदार्थों तथा शराब के सेवन से बचना चाहिए। नहीं तो ये कई रोगों का खतरा बढ़ सकता है जो रंग में भंग डाल सकता है। आयुर्वेद में बताए गए इन सावधानियों के पालन और खान-पान से होली का उमंग दोगुना हो सकता है।

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