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विशेष लेख : लखपति दीदी योजना : स्वावलंबी महिलाओं का सफर - झलक महिला स्वसहायता समूह की प्रेरणादायक यात्रा

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बेमेतरा। ज़िले में महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में, लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को एक मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे वित्तीय और सामाजिक रूप से सक्षम बन सकें। ज़िला महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। झलक महिला स्वसहायता समूह। यह समूह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक विकास और आत्मनिर्भरता की ओर एक प्रेरणादायक कदम भी है।

शुरुआत और प्रशिक्षण

झलक झंकार महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष, श्रीमती गायत्री सोनी, बताती हैं कि समूह की यात्रा अगस्त 2024 के अंत में शुरू हुई जब ज़िला प्रशासन द्वारा कलेक्टर की उपस्थिति में समूह को मशीन से रूई से फूलबाती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके तहत न केवल तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया, बल्कि आर्थिक सहायता भी दी गई, जिससे महिलाएं कच्चामाल और मशीनें खरीद सकीं।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को फूलबाती बनाने की विधि सिखाई गई, जो एक सरल प्रक्रिया होते हुए भी आर्थिक रूप से लाभदायक हो सकती है, विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में। महिलाएं अपने दैनिक घरेलू कामों को निपटाने के बाद, मशीन से फूलबाती बनाती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। इस योजना ने उन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक ठोस रास्ता प्रदान किया है, जो पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं।

आर्थिक सशक्तिकरण और विपणन

समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का सही उपयोग करते हुए अपना काम शुरू किया। उन्होंने कच्चा माल ख़रीदा और फूलबाती बनाने का काम तेज़ी से शुरू कर दिया। दिवाली का त्यौहार नज़दीक है और इस अवसर को भुनाने के लिए महिलाएं पूरी लगन से काम कर रही है।

फूलबाती की बढ़ती मांग को देखते हुए, स्थानीय बाजार से उन्हें अच्छे ऑर्डर मिलने लगे। इसके साथ ही, समूह ने स्थानीय स्तर पर भी मार्केटिंग शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ज़िला प्रशासन के अधिकारियों ने भी उनकी प्रोडक्ट्स को खरीदा, जिससे उन्हें और प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार, समूह की महिलाएं न केवल घरेलू कामों को निभा रही थीं, बल्कि समाज में अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

फूलबाती बनाने के इस कार्य ने झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेंगे। पहले जो महिलाएं केवल अपने घरों तक सीमित थीं, आज वे खुद का काम संभाल रही हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। इस कार्य ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सोनी ने बताया कि इस योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से महिलाएं आत्मविश्वास से भर गई हैं। उन्होंने यह साबित किया कि यदि सही दिशा और अवसर मिलें, तो महिलाएं हर चुनौती का सामना कर सकती हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं।

चुनौतियाँ और समाधान

शुरुआत में, झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जैसे कि कच्चे माल की उपलब्धता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा। लेकिन समूह ने अपनी एकजुटता और कड़ी मेहनत से इन समस्याओं का समाधान निकाला। उन्होंने अपनी गुणवत्ता पर ध्यान दिया और ग्राहक संतुष्टि को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही, ज़िला प्रशासन ने भी उनकी मदद की और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत और सहायता उपलब्ध कराई।

समूह की महिलाओं ने खुद को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान और वित्तीय सहायता का बेहतरीन उपयोग किया। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समाज के सामने एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया।

भविष्य की योजनाएँ

झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं अब और बड़े लक्ष्यों की ओर अग्रसर हैं। वे फूलबाती के अलावा अन्य उत्पादों के निर्माण की भी योजना बना रही हैं, ताकि उनकी आय में और इज़ाफा हो सके। समूह ने यह भी तय किया है कि वे आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ेंगी, ताकि उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।

समूह की सदस्याओं का मानना है कि लखपति दीदी योजना उनके जीवन में एक सुनहरा अवसर लेकर आई है, और वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष

झलक महिला स्वसहायता समूह की कहानी यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने जीवन में किसी भी बदलाव को संभव बना सकती हैं। लखपति दीदी योजना के तहत मिली सहायता और प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन को बदलकर रख दिया।

यह कहानी न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रयासों की भी है। बेमेतरा ज़िले की ये महिलाएं आज स्वावलंबी बनकर अपनी और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

179 महतारी सदन की मिली स्वीकृति, 25 सौ वर्गफुट में बनेगा महतारी सदन

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रायपुर। प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार महतारी सदन का निर्माण कार्य किया जाना है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास से 179 महतारी सदन की स्वीकृति आदेश जारी किया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि न्यू इंडिया के ग्रोथ साइकल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ रहा है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में बनने जा रहा महतारी सदन भी इसी दिशा में एक प्रयास है।

उन्होंने कहा कि लगातार ग्राम भ्रमण के दौरान महिलाओं द्वारा बैठने की स्थान न होने की शिकायत की और बैठने हेतु स्थान दिलाने की मांग की जाती रही इसलिए महतारी सदन बनाने का विचार आया। ततपश्चात महिलाओं को रोजगार दिलाने और उनको काम काज के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार गांवों में महतारी सदन बनाने जा रही है। 179 महतारी सदन की स्वीकृति इसी उद्देश्य को पूर्ति के लिये जारी किया गया है। कार्यों में एकरूपता के दृष्टिकोण से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्य का एक मानक डिजाईन एवं प्राक्कलन तैयार किया गया है। प्रति महतारी सदन की लागत राशि रुपये 29.20 लाख होगी। उक्त कार्य महतारी सदन योजना के बजट से 24.70 लाख तथा स्वच्छ भारत मिशन के बजट से 4.50 लाख के अभिसरण से किया जाएगा। इसप्रकार 179 महतारी सदन हेतु 52 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत किया गया है।

5 वर्षो में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाने की योजना

प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाया जाएगा। महतारी सदन बनाने की शुरुआत हो गयी है। पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में महतारी सदन बनना प्रारंभ किया जा रहा है व 5 साल में सभी ग्राम पंचायत में महतारी सदन बनेंगे।

प्रदेश में बनने वाले महतारी सदन का निर्माण लगभग 25 सौ वर्गफुट में कराया जाएगा। सदन में कमरा, शौचालय, बरामदा, हाल, किचन और स्टोररूम जैसी सुविधाएं रहेगी। पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमे बॉउंड्रीवाल भी बनाये जाएंगे। महतारी सदन में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री 5 अगस्त को गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को जारी करेंगे 15.72 करोड़ रूपए की राशि

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 5 अगस्त को गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 73वीं किश्त के रूप में 15 करोड़ 72 लाख रूपए की राशि का अंतरण सीधे उनके बैंक खातों में करेंगे। ऑनलाईन राशि अंतरण का यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में होगा। मुख्यमंत्री इस मौके पर 14-31 जुलाई 2023 तक गौठानों में गोबर विक्रय करने वाले ग्रामीण पशुपालक किसानों को 5 करोड़ 60 लाख रूपए तथा गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 9 करोड़ 69 लाख रूपए की राशि जारी करेंगे। गौठानों में जुलाई माह के द्वितीय पखवाड़े में 2 लाख 80 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी गोधन न्याय योजना के तहत की गई है। 

गौठानों में गोबर खरीदी में स्वावलंबी गोठानों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। गोबर विक्रेताओं को होने वाले 5.60 करोड़ रूपए के भुगतान में से मात्र 2.29 करोड़ रूपए का भुगतान शासन की ओर से किया जाएगा, जबकि 3.31 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठान स्वयं की राशि से करेंगे। राज्य में 10,278 गौठान निर्मित एवं संचालित हैं, जिसमें से 5985 गौठान पूरी तरह से स्वावलंबी हो चुके हैं। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 70.27 करोड़ रूपए का गोबर पशुपालक किसानों से स्वयं की राशि से किया है। गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को अब तक 526 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 5 अगस्त को 15.72 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 541.66 करोड़ रूपए हो जाएगा

जिसमें महिला समूहों को जारी 18 करोड़ रूपए की बोनस राशि भी शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में अब 128.34 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसमें से 125.54 लाख क्विंटल गोबर खरीदी की एवज में गोबर विक्रेताओं को 250.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 05 अगस्त को 5.60 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह राशि 556.68 करोड़ रूपए हो जाएगी। गौठानों समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 257.29 करोड़ रूपए के भुगतान किया जा चुका है। 9.69 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 266.98 करोड़ रूपए हो जाएगा।

स्वावलम्बी गौठान ने बदली निलजा गांव की जीवनदशा, महिलाओं में जागा आत्मविश्वास, हुई गौरवान्वित

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रायपुर। जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने गौठान आरंभ किये तो लोगों को लगा था कि खुले मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने और फसल सुरक्षा के लिए सरकार की यह बहुत अच्छी पहल है। एक-दो साल के भीतर यह पहल उनके जीवन और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव लाएगी, ऐसा सोचना भी मुश्किल था। राजधानी रायपुर के ही पास के एक निलजा गौठान को लें, यहां भी पशुधन रखने गौठान की शुरूआत हुई लेकिन अब यह आजीविकामूलक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
                      

जो लोग दूसरे के खेतों में काम करने मजबूर थे अब खुद का उद्यम कर रहे हैं। निलजा में ही 70 परिवार ऐसे हैं जो गौठान से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इन घरों के सपने परिवार के मुखिया के साथ ही गृहिणी भी पूरी कर रही हैं क्योंकि अब आर्थिक शक्ति उनके हाथों में भी आई है। निलजा गौठान ऐसा है जहां के बनाए वर्मी कम्पोस्ट की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि इनकी बड़ी माँग होती है इतनी की महिला समूह आपूर्ति नहीं कर पाता। इस गौठान के कारण महिलाएं अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मगौरव का अनुभव कर रहीं है। यहां के ग्रामीण कह रहे हैं धन्यवाद मुख्यमंत्री जी।

ग्राम निलजा की कहानी उस समय शुरू होती है जब राज्य सरकार ने नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना शुरू की। इस योजना के तहत निलजा में गौठान बनाए गए। साथ ही कुछ समय में ही आजीविका मूलक गतिविधियां भी शुरू की गई। वर्ष 2020 में गोधन योजना के तहत गोबर खरीदी शुरू की गई। एक साल तीन महीने के भीतर गौठान स्वावलंबी हो गया। सारे खर्च स्वयं उठाने लगा। समूह के अध्यक्ष घनश्याम वर्मा बताते है कि अब तक सात लाख 65 हजार गोबर की खरीदी हो चुकी है। गौठान द्वारा अब तक 2 हजार 185 किलो वर्मी कम्पोस्ट बनाया जा चुका हैं। गौठान समिति को अब तक करीब 21 लाख रूपए की आय हो चुकी है। साथ ही 2383 लीटर गौमूत्र की खरीदी की है जिससे 1200 लीटर ब्रम्हास्त्र बनाया जा चुका है। गौठान से जुड़कर महिलाओं आज अपने पैरो पर खड़ी है और आत्मविश्वास से भरी हुई है।

महिला समूह की अध्यक्ष श्रीमती शकुन वर्मा कहती है कि उनके समूह ने अब तक साढ़े सात लाख रूपए आय अर्जित की है। वे पहले दूसरे के खेतों में काम करती थीं अब खुद का काम कर रही है। उनके समूह में 11 सदस्य है जिन्हें प्रतिदिन औसतन प्रतिदिन करीब 150 से 200 रूपए की आय हो रही है। श्रीमती शकुन कहती हे कि उनके पति ट्रैक्टर चलाने का कार्य करते है। वह स्वयं दूसरे के खेतों में काम करने जाती थी। काम की अनिश्चितता रहती थी कभी अच्छा काम मिलता था तो कभी काम ही नहीं मिलता था।

गौठान से जुड़ने के बाद अब नियमित आय का साधन मिल गया है। स्वयं का काम करने से आत्मविश्चास तो आया, साथ ही आत्मसम्मान भी जागा है। जो कमाई हुई, उससे उन्होने घर में टाईल्स लगवाया और बच्चों के लिए सायकल खरीदी, घर चलाने में भी मदद करती है। श्रीमती वर्मा मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती है और कहती है कि उनके समूह की महिलाओं ने सोचा भी नहीं था कि गौठान से जुड़कर कोई रोजगार मिल सकता है और इससे कोई आत्मनिर्भर हो सकता है। श्रीमती राधाबाई वर्मा कहती हैं कि वे तीन साल से समूह से जुड़ी है। अब खुद का काम कर रही है। अच्छा लग रहा है। अपने पैरों पर खड़ी हैं। इस कमाई से उन्होंने पायल लिया है।

गोबर खरीदी में अब स्वावलंबी गौठान निभाने लगे हैं बराबर की भागीदारी

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रायपुर राज्य में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ग्रामीण पशुपालक किसानों से गोबर क्रय करने में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ-साथ अब स्वावलंबी गौठान भी बराबर की भागीदारी निभाने लगे हैं। राज्य में औसत रूप से प्रत्येक पखवाड़े 4 से 5 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी गौठानों में हो रही है, जिसमें से दो से ढ़ाई करोड़ रूपए का गोबर स्वावलंबी गौठान समितियां स्वयं की राशि से कर रही है। बीते कुछ पखवाड़े से यह स्थिति बन गई है कि गोधन न्याय योजना के तहत हो रही गोबर खरीदी की राशि का लगभग 50 फीसद भुगतान ही सरकार के जिम्मे आ रहा है।



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप गौठानों को स्वावलंबी और गौठान समितियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में आज की स्थिति में 3 हजार से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। गौठान समितियों के बैंक खाते में 102 करोड़ रूपए से अधिक की राशि लाभांश पूंजी के रूप में जमा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि गौठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय के उपरांत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित राशि गौठान समितियों को दी जाती है, जिसके चलते गौठान समितियों की जमा पूंजी में लगातार वृद्धि हो रही है।

स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक अपनी जमा पूंजी से 24 करोड़ 15 लाख रूपए का गोबर क्रय किया जा चुका है। 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक गौठानों में क्रय किए गए 2.35 लाख क्विंटल गोबर में से 1.16 लाख क्विंटल गोबर स्वावलंबी गौठानों में स्वयं की राशि से क्रय किया है, जिसका मूल्य 2.32 करोड़ रूपए हैं। अक्टूबर के द्वितीय पखवाड़े में क्रय गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालक किसानों को 4.69 करोड़ का भुगतान किया जाएगा, जिसमें मात्र 2.37 करोड़ रूपए का भुगतान शासन की ओर से होगा, शेष 2.32 करोड़ रूपए का भुगतान गौठान समितियों स्वयं की राशि से करेंगी।   

शासन की फ्लैगशीप योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही व उदासीनता बरतने वालों के विरूद्ध होगी कड़ी कार्यवाही : कलेक्टर

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मुंगेली। कलेक्टर राहुल देव ने आज जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक ली। बैठक में उन्होंने समय सीमा के लंबित प्रकरणों के संबंध में अधिकारियों से वन-टू-वन जानकारी प्राप्त की और लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में उन्होंने राज्य शासन की फ्लैगशीप योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किसानों, स्व सहायता समूह की महिलाओं और गौपालकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सक्षम व स्वावलंबी बनाने के लिए फ्लैगशीप योजना का संचालन किया जा रहा है।



उन्होंने इस योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही व उदासीनता बरतने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा नाइट्रावेट या अन्य नशीली दवाईयों का सेवन किया जा रहा है, जिसके कारण वे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इससे छुटकारा दिलाने के लिए उन्होंने जिले में नाइट्रावेट या अन्य नशीली दवाई बेचने वाले मेडिकल स्टोर की जांच करने एवं जांच में नाइट्रावेट या अन्य नशीली दवाई पाए जाने पर मेडिकल स्टोर संचालकों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

बैठक में उन्होंने क्वांटिफायबल डॉटा आयोग द्वारा वेब पोर्टल बहुकबण्पद के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्लूएस) वर्ग के लोगों की की जा रही गणना की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने और अपने परिवार की आवश्यक जानकारी क्वांटिफायबल डॉटा आयोग के पोर्टल पर 05 नवंबर तक पंजीयन कराने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखने हेतु सूचना तंत्र के बारे में जानकारी प्राप्त की और उन्होंने ग्राम स्तर पर सूचना तंत्र को सशक्त बनाने के लिए ग्राम कोटवारों की बैठक आयोजित करने और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्यों को सोशल गतिविधि का नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।

बैठक में उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत उत्पीड़ित व्यक्ति को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के उत्पीड़ित व्यक्ति को जाति प्रमाण पत्र के अभाव में क्षतिपूर्ति की समुचित राशि प्राप्त नहीं हो पाती। अतः उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति के उत्पीड़ित व्यक्ति को नियमानुसार शीघ्र जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने महिलाओं एवं बच्चियों की सुरक्षा और शिकायतों का समाधान करने के लिए अभिव्यक्ति एप लांच किया गया है।

इस एप के माध्यम से महिलाएं कहीं से भी शिकायत पुलिस के पास दर्ज करा सकती है। इस हेतु उन्होंने अभिव्यक्ति एप का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने चिट-फंड प्रकरण, सड़क सुरक्षा के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की और संबंधितों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 हेतु किसानों से समर्थन मूल्य पर 01 नवंबर से धान खरीदी के संबंध में की जा रही तैयारियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उन्होंने धान खरीदी कार्य प्रारंभ होने के पूर्व ही सभी प्रकार के आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

इसी क्रम में उन्होंने धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व गांव एवं अर्धशहरी इलाकों में कोचियों एवं बिचौलियों का चिन्हांकन करने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में उन्होंने महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि जिले के 06 गौठानों को महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस हेतु उन्होंने बाजार की मांग के अनुरूप सामाग्री तैयार करने के निर्देश दिए।  इसी क्रम में कलेक्टर देव ने मुख्यमंत्री जनचौपाल, कलेक्टर जनदर्शन, कॉल सेंटर के लंबित प्रकरणों की जानकारी प्राप्त की और लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निराकृत करने के निर्देश दिए।

बैठक में उन्होंने कृष्ण कुंज, जल जीवन मिशन, स्वामी आत्मानंद स्कूल, बालवाड़ी, ‘सशक्त युवा सशक्त मुंगेलीअभियान के अंतर्गत आनलाईन आकांक्षा प्लेटफॉर्म में युवाओं को रोजगारधन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिीनिक योजना, गोधन न्याय योजना के तहत सभी सक्रिय गौठानों में गोबर खरीदी आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की और संबंधितों को आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर तीर्थराज अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर नवीन भगत, श्रीमती नम्रता आनंद डोंगरे एवं श्रीमती मेनका प्रधान, सभी अनुविभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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