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होली से पहले मिठाई दुकानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिठाइयों के लिए गए सैंपल

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महासमुंद। होली पर्व को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिठाई दुकानों की सघन जांच की गई। एसडीएम उमेश साहू के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ज्योति भानु ने टीम के साथ बागबाहरा और पिथौरा की प्रमुख मिठाई दुकानों पर दबिश देकर मिठाइयों के सैंपल लिए।

जांच के दौरान बागबाहरा के जलाराम मिष्ठान भंडार से जलेबी, बर्फी और कलाकंदके नमूने लिए गए। वहीं, दशमेश होटल से बूंदी लड्डू और गाठियाके सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए। हर्षद मिष्ठान्न भंडार से पेड़ा, चमचम और गुलाब जामुन के नमूने लिए गए। इसी तरह पिथौरा स्थित प्रतीक स्वीट्स से खोवा और कलाकंद के नमूने लिए गए।

एसडीएम साहू ने बताया कि त्योहार के दौरान मिठाइयों की खपत बढ़ जाती है, जिससे मिलावट की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुकानों की जांच की गई और संदेहास्पद खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम उमेश साहू ने दुकानदारों को साफ-सफाई और शुद्धता बनाए रखने की सख्त हिदायत दी। यदि किसी भी दुकान में मिलावट पाई जाती है तो संबंधित दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

 


स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी जिलों को बचाव और रोकथाम के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

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रायपुर। राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग ने देश और प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी जिलों को इससे बचाव और रोकथाम के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कोरोना के संभावित मरीजों के सैंपल की जांच में तेजी लाने को कहा है। विभाग द्वारा कोविड अनुरूप व्यवहारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने सभी जिलों के कलेक्टर को परिपत्र जारी कर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्र का उल्लेख करते हुए सभी कलेक्टरों से कहा है कि विगत कुछ दिनों से देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी कोरोना के संक्रमण की दर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। देश के कुछ राज्यों जैसे केरल में 26.4 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 21.7 प्रतिशत, गुजरात में 13.9 प्रतिशत और कर्नाटक में 8.5 प्रतिशत संक्रमण दर है, जो अधिक है। परन्तु संक्रमण के कारण रोग की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती होने की दर एवं मृत्यु दर कम है।

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमण की दर में सतत वृद्धि को देखते हुए सर्दी, खांसी और जुकाम के लक्षण वाले लोगों की लगातार निगरानी करने और ऐसे मरीजों की कोरोना जाँच के निर्देश दिए हैं। विभाग ने ऐसे जिलों जहां प्रतिदिन कोरोना जांच की संख्या कम है, वहां जांच बढ़ाने को कहा है। प्रत्येक जिले में रोजाना कम से कम 100 सैंपलों की जांच करने को कहा गया है। विभाग ने निर्देशित किया है कि सैंपलों की जांच यथासंभव आरटीपीसीआर विधि से ही किया जाए, जिससे कि पॉजिटिव मामलों के सैंपल को व्होल जीनोम सिक्वेसिंग (Whole Genome Sequencing) के लिए भेजा जा सके। विभाग ने सभी जिलों को कोविड-19 के उपचार के लिए अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन बिस्तर, आईसीयू बिस्तरों, वेंटिलेटर, मेडिकल ऑक्सीजन, दवाईयों इत्यादि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने जनसामान्य के बीच कोविड अनुरूप व्यवहार (Covid Appropriate Behavior) के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं। विभाग ने सर्दी, खांसी, जुकाम एवं बुखार के लक्षण वाले व्यक्तियों की तत्काल कोविड-19 जांच कराने के लिए कहा है। बुजुर्गों तथा डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, कैंसर, किडनी आदि बीमारियों के पीड़ितों एवं कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को भीड़-भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचने कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़-भाड़ एवं कम हवादार वाले स्थानों में मास्क लगाने, खांसते एवं छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर से मुंह एवं नाक को ढंकने, सर्दी-जुकाम वाले व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखते हुए समय-समय पर हाथ धोते रहने के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा है। 

टीबी के खतरे को कम करता है `नो स्मोक चूल्हा

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रायपुर. वार्ड 12 में रहने वाली राखी बाई  (परिवर्तित) को क्षय रोग से संक्रमित होने का पता तब चला जब एक दिन उनके मोहल्ले में टीबी चैंपियन गीता बर्मन उससे घर-घर सर्वे करने आई।  बात चीत में राखी ने गीता को बताया उसे काफी समय से खांसी रही है, बलगम भी बहुत आता है और कभी-कभी बलगम के साथ खून भी आता है. राखी बाई की थूक का सैंपल तुरंत लिया गया और उसकी जांच करवाने के बाद पता लगा उसे टीबी है.

``तब गीता दीदी ने मुझे बताया यह रोग पूरी तरह से ठीक होता है लेकिन उसके लिए  6 माह तक नियमित इलाज चलेगा। मुझे रोज़ दवा लेनी होगी क्योंकि अगर ऐसा करने से रोग और गंभीर हो सकता है जिसका उपचार लम्बा और ज्यादा मुश्किल होगा,’’ राखी ने बताया.


गीता ने उसको यह भी बताया कि घर के चूल्हे से निकलने वाले धुएं से भी बीमारी बढ़ सकती है इसलिए उससे धुआं रहित चूल्हे का उपयोग करना चाहिए.   धुआं-रहित चूल्हा या `नो स्मोकचूल्हा घर पर ही बनाया जाता है और इसमें खर्चा भी बहुत ही कम होता है.  कुछ ही दिनों में गीता की मदद से राखी के घर में भी `नो-स्मोकचूल्हा बनाया गया.  इस चूल्हे का धुआं एक पाइप के माध्यम से बाहर निकल जाता है  जिससे धुआं से होने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और खाना भी काफी समय तक चूल्हे पर गर्म रहता है.

टीबी चैंपियन सीखा रहे मिट्टी का चूल्हा बनाना

टीबी चैंपियन गीता बर्मन क्षय रोगियों और संभावित रोगियों को केवल इस रोग के बारे में बताती है बल्कि धुएं से होने वाले रोगों के बारे में भी जानकारी देती है.  चूल्हे पर खाना बनाने वालों को सिर्फ धुआं रहित (नो स्मोक) चूल्हे के बारे में बताती है बल्कि धुआं रहित चूल्हा लगवाने में भी मदद करती है.

गीता बर्मन कहती है: “वार्ड में चार घरों में धुआं रहित चूल्हा बनाया गया है. इस चूल्हे के निर्माण में 200 से 250 रुपये तक का खर्च आता है. इससे  घर के अंदर धुआं नहीं फैलता और  लकड़ी की खपत भी काफी कम होती है. यही इस चूल्हे की सबसे बड़ी विशेषता है. धुआं रहित चूल्हा होने की वजह से ही टीबी जैसी गंभीर बीमारी को पनपने से काफी हद तक रोका जा सकता है.विशेष रूप से चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं में टीबी के खतरे का जोखिम अधिक रहता है. परंपरागत चूल्हों से धुआं अधिक होता है. धुएं से होने वाले संक्रमण को भी कम कर देता है.“

क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी ने बताया: ‘’धुआं रहित (नो स्मोक) चूल्हे के लिये जिले में जोर-शोर से प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें मितानिन भी अहम भूमिका निभा रही हैं.यह चूल्हा कई मायनों में सबसे अलग और विशेष है जिसे टीबी रोग से बचाव हेतु एहतियाती सुरक्षा के लिए कोई भी अपने घर बनवा सकता है. डोर टू डोर टीबी जागरूकता के दौरान टीबी रोग के  संभावित मरीज चिन्हित होने की स्थिति में पीड़ित की सहमति से यह चूल्हा बनवाया जाता है.

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