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काव्यांश में सूत्र के सम्मान में काव्य गोष्ठी आयोजित, 18 को आयोजित होगा सम्मान समारोह

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 महासमुन्द । समकालीन सूत्र जगदलपुर और काव्यांश साहित्य एवं कला पथक संस्थान महासमुन्द के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 18 फरवरी 2024 रविवार को वन प्रशिक्षण सभागार महासमुन्द में सम्मान समारोह का आयोजन होगा। प्रख्यात साहित्यकार एवं संभागीय आयुक्त संजय अलंग के मुख्यातिथ्य, डां.भूपेन्द्र कुलदीप कुलसचिव हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय दुर्ग की अध्यक्षता और त्रिलोक महावर, रवि श्रीवास्तव के विशेष आतिथ्य में डां.जमुना बीनी को प्रतिष्ठित सूत्र सम्मान प्रदान किया जायेगा।


इस कार्यक्रम के पूर्व अवलोकनार्थ सूत्र जगदलपुर के अध्यक्ष-विजय सिंह और सचिव नंदन विशेष रुप से उपस्थित थे। अतिथियों के सम्मान में काव्यांश के द्वारा सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुरेन्द्र मानिकपुरी के मधुर मातृवंदना से हुआ। काव्य पाठ से पूर्व काव्यांश के वरिष्ठ सदस्य और श्रीपुर एक्सप्रेस के प्रधान सम्पादक आनंदराम पत्रकारश्री ने काव्यांश के उत्तरोत्तर प्रगति पर प्रकाश डालते हुए काव्यांश के बीजारोपण से वटवृक्ष बनने पर चर्चा करते हुए सूत्र के साहित्यकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रथम काव्य पुष्प के रुप डां.वृन्दावन पटेल ने विजय विश्व हो इस तिरंगा का प्रस्तुत कर देशभक्ति की भावना को सम्बल दिया ।
संस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार सिराज बख्श 'साकिब' ने

"तहु जाबे महू जाहू
खुटेरी के मेला।
रेंगत रेंगत जाबो संगी
खुटेरी के मेला।"

डां.साधना कसार ने- 
" चंचल झरने सा ,जगमग जलते दीपक सा ,पत्तों की चरमर सा, बहती सरसर पवन सा
गुड़ की मीठी ढेली सा,खट्टी मीठी कैरी सा
मेरा प्यारा बचपन लौटा दो" प्रस्तुत कर सबका ध्यान बचपन की ओर आकृष्ट किया।

सूत्र के अध्यक्ष विजय सिंह ने अपनी नई कविता -
"जंगल के सन्नाटों में पत्तियां गुपचुप बतियाती है। पत्तियों को सुनना है तो आपको वृक्ष होना होगा ।"
इसी कड़ी में सूत्र के सचिव ने अपनी कविता -"इस समय ,समय की स्याह स्लेट पर मां की कहानियां लिख रहा हूं" पढ़ी।
काव्य गोष्ठी को ऊंचाई देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अशोक शर्मा ने अपनी नई कविता प्रस्तुत किया-
"अलग-थलग हूँ मैं,
अनुशासन के इस शासन में,
इतना सा खोकर यदि,
इतना कुछ पाना था,
तो बहुत पहले ही,
'क्वॉरंटीन' हो जाना था।"

कार्यक्रम का संचालन करते हुए काव्यांश के संस्थापक अध्यक्ष भागवत जगत 'भूमिल' ने अपनी चीर परिचित अंदाज में रचना प्रस्तुत किया -"ढोल ताशे बजने लगेंगे।
रण बांकुरे सजने लगेंगे ।।
मातृभूमि के मन:पटल पर,
जन संभाषण आम होगा ।
इंतजार मुझे उस दिन का,
जब मौत से संग्राम होगा।"
काव्य गोष्ठी में अपनी प्रस्तुति देते हुए सुरेन्द्र मानिकपुरी ने कहा-
"इक पाती तेरे नाम लिखा हूँ
अपना तुझे सलाम लिखा हूँ
गौरव गर्व मुझे कितना है
तुम पर ये पैगाम लिखा हूँ।

कार्यक्रम का संचालन भागवत जगत भूमिल ने किया । आभार प्रदर्शन अशोक शर्मा ने किया। इस अवसर पर सूत्र के साहित्यकारों के द्वारा काव्यांश को सूत्र पत्रिका भेंट किया गया। उक्त जानकारी काव्यांश के कोषाध्यक्ष डी बसन्त साव साहिल ने दिया।

डॉ. खूबचंद बघेल ने अपने विचार मूल्यों से छत्तीसगढ़ को नई दिशा दी : भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और साहित्यकार डॉ. खूबचंद बघेल की 19 जुलाई को जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने डॉ. बघेल का छत्तीसगढ़ के लिए योगदान को याद करते हुए कहा कि खूबचंद जी किसान-मजदूर हितैषी और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़कर जीवन के अंतिम समय तक छत्तीसगढ़ की सेवा करते रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ के हितचिंतन में लगा दिया।

खूबचंद जी ने अपने विचार मूल्यों से छत्तीसगढ़ को एक नई दिशा दी। समाज सुधारक, संवेदनशील साहित्यकार और कुशल चिकित्सक के रूप में उन्होंने ख्याति अर्जित की। साहित्य सृजन, लोकमंचीय प्रस्तुति तथा बोल-चाल में वे छत्तीसगढ़ी के पक्षधर थे। वे छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा के रूप में भी जाने जाते हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि अध्ययन के दौरान ही डॉ. साहब राष्ट्रीय विचारधारा से प्रभावित होकर राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करने लगे। महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने गांव-गांव घूमकर सैकड़ों युवाओं को स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित किया और स्वाधीनता संग्राम से उन्हें जोड़ा। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उनके द्वारा लिखे नाटकों ने भी जनमानस पर गहरा प्रभाव डाला।

डॉ. बघेल की स्मृति और सम्मान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि और अनुसंधान कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल राज्य स्तरीय सम्मान दिया जाता है। राज्य के सभी नागरिकों को निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने एक जनवरी 2020 से डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना प्रारम्भ की गई है। प्रदेश के 69 लाख परिवार इस योजना के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. खूबचंद बघेल का व्यक्तित्व और कृतित्व हमें हमेंशा प्रेरित करता रहेगा।

मूल्य एवं सिद्धांतों पर आधारित पत्रकारिता करना सबसे बड़ी चुनौती: भूपेश बघेल

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मुख्यमंत्री शामिल हुए मायाराम सुरजन जन्मशती एवं देशबन्धु पत्र समूह के स्थापना दिवस समारोह में


रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि वर्तमान समय में मीडिया परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आज के समय में सिद्धांतों और मूल्य आधारित पत्रकारिता करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। अपने 65 बरस की यात्रा में देशबन्धु अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा कभी मूल्यों से समझौता नहीं किया। श्री बघेल आज मायाराम सुरजन जन्मशती एवं देशबन्धु के 65 वां स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देशबन्धु पत्र समूह के संस्थापक स्वर्गीय श्री मायाराम सुरजन और स्वर्गीय श्री ललित सुरजन को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आगे कहा कि मायाराम सुरजन जी पत्रकारिता के पुरोधा थे। उनकी पूरे देश में विशिष्ट पहचान थी। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मायाराम सुरजन को पढ़ा है, मगर स्वर्गीय श्री ललित सुरजन जी से मुलाकात हुई, उनका सानिध्य मिला। ललित जी पर मायाराम जी की छाप थी। कार्यक्रम में साहित्यकार श्री प्र्रभात त्रिपाठी एवं पूर्व मुख्य सचिव एवं शिक्षाविद् श्री शरदचंद्र बेहार को मायाराम सुरजन शताब्दी सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार श्री विजय बहादुर सिंह ने की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देशबन्धु की चर्चा होती है, तो हमारे पुराने बचपन के दिन याद आ जाते हैं। उस समय दो या तीन अखबार हुआ करते थे। हम जब गांव में रहते थे, उस समय शाम तक कोई अखबार पहुंच पाता था। शाम को जिसके यहां अखबार पहुंचता था, वहां जाकर अखबार पढ़ा करते थे। तब लोगों में मान्यता थी कि देशबन्धु में यदि कुछ छपा हो तो वह सच होगा। उन्होंने कहा कि जब हमने राजनीति करना शुरू की, तो देशबन्धु में लिखे खबरों, विभिन्न बुद्धिजीवी द्वारा लिखे गए लेखों, सम्पादकीय को पढ़ा करते थे और उनसे सीखते थे। वहीं से सीख कर ज्ञान अर्जन कर मुद्दों को उठाते भी थे।

श्री बघेल ने कहा कि आजादी के समय महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, भगत सिंह, बाल श्री गंगाधर तिलक और श्री गणेश शंकर विद्यार्थी आदि राजनेताओं ने अपनी लेखनी की ताकत से तत्कालिन ब्रिटिश शासन को झकझोर दिया। यहां तक तिलक जी को इसके लिए सजा भी हुई। उसके बाद भी उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा। आजादी की अलख जगाने में समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह कार्य आजादी के बाद भी जारी है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर आमजनों को जागरूक कर देश की प्रगति में सार्थक योगदान दे रहे है।

कार्यक्रम में देशबन्धु रायपुर के सम्पादक श्री राजीव रंजन श्रीवास्तव ने देशबन्धु की 65 साल की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, विधायक श्री अमितेश शुक्ला, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री शैलेष नितिन त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुन्दर दास, श्री पलाश सुरजन तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

स्त्री-2023 सृजन और सरोकार पर दो दिवसीय आयोजन,  मंथन करने पहुंचेंगे साहित्यकार

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स्त्री सरोकारों व साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर साहित्य अकादमी का दो दिवसीय आयोजन राजधानी रायपुर में 19 से

रायपुर । साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद की ओर से दो दिवसीय साहित्यिक कार्यक्रम 'स्त्री-2023 सृजन और सरोकार' का आयोजन 19 फरवरी शनिवार और 20 फरवरी रविवार को शहर के न्यू सर्किट हाउस सिविल लाइंस स्थित कन्वेंशन हॉल में होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में कविता पाठ कहानी पाठ संगीत प्रस्तुति और स्त्री लेखन व स्त्री मुद्दों पर वक्तव्य और चर्चा आयोजित की जा रही है। 

इस संबंध में संयोजक व वरिष्ठ साहित्यकार जया जादवानी ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सृजन के मौजूदा रुझानों की पहचान करना है और स्त्री सरोकारों व साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना है। कार्यक्रम में वक्तव्य और चर्चा के अलावा इन पहलुओं को अभिव्यक्त करने वाली कविताओं और कहानियों का पाठ और संगीत की प्रस्तुति की जाएगी। 

जया जादवानी ने कहा कि महिलाओं पुरुषों की बराबरी का मूल्य हमारे संविधान में एक प्रमुख विशेषता है मगर सामाजिक धरातल पर इसके प्रति जागरूकता फैलाने की विशेष जरूरत रहती है साहित्य मनुष्य की भावनाओं, संवेदना और सपनों की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति माना जाता है हिंदी साहित्य में भी पिछले कुछ दशकों में ना सिर्फ श्रेष्ठ स्त्री लेखकों की उपस्थिति बढ़ी है बल्कि उन्होंने स्त्रियों की सामाजिक स्थितियों के बारे में एक प्रभावशाली विमर्श भी खड़ा किया है। इस आज के माहौल में स्त्री व पुरुष समानता और स्त्री स्वतंत्रता संबंधी विचारों व साहित्य कभी व्यक्तियों से जोड़ना युवा पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे  में  यह  आयोजन  किया  जा रहा है। 

आयोजन में पहले दिन 19 फरवरी रविवार को सुबह 10:30 बजे का सत्र 'स्त्री लेखन नए प्रश्न नई चुनौतियां' विषय पर होगा। जिसमें संयोजक जया जादवानी, देवी प्रसाद मिश्र, गिरिराज किराडू, सुजाता और रश्मि रावत अपनी बात रखेंगे। 

दोपहर 2 बजे 'भाषा का स्त्री पक्ष' विषय पर रोहिणी अग्रवाल, अलका रंजन और प्रियंका दुबे चर्चा करेंगे। वही शाम 4 बजे कहानी पाठ सत्र में जयशंकर, प्रत्यक्षा, आकांक्षा पारे काशिव व दीपिका सिंह अपनी कहानियों का पाठ करेंगे। शाम 5:30 बजे सांस्कृतिक संध्या में के रोहन नायडू के निर्देशन में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कलाकारों की वायलिन पर अनूठी प्रस्तुति होगी। दूसरे और अंतिम दिन 20 फरवरी सोमवार सुबह 10:30 बजे 'साहित्य में स्त्री और स्त्री का साहित्य' विषय पर रोहिणी अग्रवाल, हेमलता महिश्वर, प्रिया वर्मा,पूनम वर्मा और आशीष मिश्र अपनी बात रखेंगे। दोपहर 2 बजे 'साहित्य में स्त्री दृष्टि क्या है..?' इस विषय पर जयशंकर, प्रत्यक्षा,लवली गोस्वामी और प्रियंका दुबे दर्शकों से रूबरू होंगे। शाम 4:00 बजे कविता पाठ सत्र में देवी प्रसाद मिश्र, मृदुला सिंह, गिरिराज किराडू, श्रुति कुशवाहा, पूनम अरोड़ा, सुमेधा अग्रश्री,नेहल शाह, प्रिया वर्मा, रूपम मिश्र और लवली गोस्वामी अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे।

डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद् और छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को याद करते हुए कहा है कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कवि, चिंतक, उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक और मंच संचालक जैसी कई भूमिकाओं में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। डॉ. वर्मा ने जो भी लिखा, वह लोगों की अंतरआत्मा में उतर गया। उनके हिंदी उपन्यास सुबह की तलाशजब छत्तीसगढ़ी में अनुवाद के बाद ‘‘सोनहा बिहान‘‘ के रूप में लोगों के बीच रंगमंच के माध्यम से पहुंचा



तब इसने आम लोगों में सुनहरी सुबह के साकार होने की आशा जगा दी। सही अर्थों में वे छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे। उनका ओजपूर्ण व्यक्तित्व पल भर में लोगों को प्रभावित कर लेता था। अपने विचारों से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को भी गहराई तक प्रभावित किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि डॉ. वर्मा ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाषा-अस्मिता को बनाए रखने और उसे पहचान दिलाने में महती भूमिका निभाई। अरपा-पइरी के धार, महानदी हे अपार......के रूप में उन्होंने अमर रचना दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी का वैभव जीवंत हो उठा है। अब यह गीत डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पहचान और छत्तीसगढ़ का मान बन गया है। 

उनकी कलम से निकला यह गीत राज्य गीत के रूप में आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक छत्तीसगढ़ वासियों की आत्मा का गान बन चुका है। छत्तीसगढ़ की ऐसी वंदना उनका सच्चा सपूत ही कर सकता है। बघेल ने कहा डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा ने ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य का उद्विकास‘‘ विषय पर शोध किया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह अपूर्वा’, हिंदी उपन्यास सुबह की तलाशजैसे कई ग्रंथों की रचना की। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के जनजीवन तथा संस्कृति का सजीव चित्रण मिलता है। उनका लिखा मोला गुरु बनई लेते छत्तीसगढ़ी प्रहसनअत्यंत लोकप्रिय हुआ। बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।

जन संस्कृति मंच का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन : रविभूषण अध्यक्ष और मनोज सिंह महासचिव चुने गए

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रायपुर। फासीवाद के खिलाफ देश की सांस्कृतिक शक्तियों को एकजुट करने के संकल्प के साथ जन संस्कृति मंच का दो दिवसीय 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन 9 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के आखिरी दिन प्रतिनिधियों ने 141 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद और 37 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव किया। प्रसिद्ध हिन्दी आलोचक रविभूषण जन संस्कृति मंच के नए अध्यक्ष चुने गए। पत्रकार और संस्कृतिकर्मी मनोज कुमार सिंह दुबारा महासचिव चुने गए। प्रतिनिधियों द्वारा चुने गए परिषद ने जाने माने कवि लाल्टू, मदन कश्यप, वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति, गुजरात के साहित्यकार भरत मेहता



प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक, चर्चित रंगकर्मी जहूर आलम और रामजी राय को उपाध्यक्ष चुना। जन संस्कृति मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इन पदाधिकारियों के अलावा संजय जोशी, प्रणय कृष्ण, कौशल किशोर, जितेन्द्र कुमार, आशुतोष कुमार, संतोष झा, समता राय, अनिल अंशुमन, दीपक सिन्हा, सुरेन्द्र प्रसाद सुमन, मृत्युंजय, दुर्गा सिंह, रामनरेश राम, डीपी सोनी, सुधीर सुमन, जेवियर कुजूर, बलभद्र, अनुपम सिंह, हिमांशु पंड्या, उमा राग, रामायन राम, कैलाश वनवासी, प्रेमशंकर सिंह, आनंद बहादुर

सियाराम शर्मा, अवधेश त्रिपाठी और दीपक सिंह सर्वसम्मत से चुने गए। कार्यकारिणी में एक जगह रिक्त रखी गयी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी को यह अधिकार दिया गया कि बाद में वह कार्यकारिणी के लिए एक और सदस्य को चुने। सम्मेलन के दूसरे दिन सांगठनिक सत्र में महासचिव की रिपोर्ट, राज्यों व निकायों की रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने चर्चा की और उसे पारित किया। सांस्कृतिक सत्र में प्रसिद्ध कवि देवी प्रसाद मिश्र, लाल्टू, पंकज चतुर्वेदी, जहूर आलम, देव शुक्ल, बलभद्र, आनंद बहादुर

घनश्याम त्रिपाठी, कमलेश्वर साहू, राजेश कमल, अनुपम सिंह,मुकुल सरल, प्रियदर्शन मालवीय, शंभू बादल, वासुकी प्रसाद उन्मत, विनोद सिंह ने कविता पाठ किया। इसी सत्र में बेगूसराय की रंगनायक द लेफट थियेटर ने भीष्म साहनी की कहानी अमृतसर आ गया है पर आधारित नाटक का मंचन किया। नाटक का निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। मंच पर एकल पात्र को विजय कृष्ण ने जीवंत किया। रायपुर के द इंडियन रोलर बैंड की शानदार प्रस्तुति के साथ सम्मेलन को समापन हुआ।

फ़ासीवाद के खिलाफ सांस्कृतिक मार्च से आगाज़ होगा जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन

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रायपुर. लेखक-संस्कृतिकर्मियों के सबसे महत्वपूर्ण संगठन जन संस्कृति मंच का 16 वां राष्ट्रीय सम्मेलन 8--9 अक्टूबर को रायपुर में पंजाब केसरी भवन में आयोजित हो रहा है. दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक प्रतिनिधियों के अलावा जाने माने साहित्यकार, लेखक, संस्कृतिकर्मी भाग लेंगे. यह जानकारी जन संस्कृति मंच छत्तीसगढ के संयोजक सियाराम शर्मा ने एक विज्ञप्ति में दी.उन्होंने बताया कि जन संस्कृति मंच का यह सम्मेलन फ़ासीवाद के खिलाफ प्रतिराध, आजादी और लोकतंत्र की संस्कृति के लिए जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केन्द्रित है. 



सम्मेलन में लेखक-संस्कृतिकर्मी फ़ासीवाद के खिलाफ सांस्कृतिक शक्तियों को एकजुट करने और सांस्कृतिक प्रतिरोध के रूपों पर गहनता से विचार विमर्श कर योजना व रणनीति बनाएंगे. उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को सुबह ठीक आठ बजे सांस्कृतिक मार्च के साथ सम्मेलन प्रारंभ हो जाएगा. देशभर के लेखक, संस्कृतिकर्मियों और कलाकारों का यह मार्च बैरनबाजार स्थित आशीर्वाद भवन से प्रारम्भ होकर आंबेडकर चौक और फिर वहां से शंकर नगर स्थित भगत सिंह चौक तक जाएगा.इसके बाद सभी प्रतिनिधि जोरा स्थित पंजाब केसरी भवन पहुंचेंगे.

सम्मेलन के पहले दिन तीन तीन सत्र होंगे. दोपहर 12 बजे पहला सांगठनिक सत्र होगा. अपरान्ह चार बजे सम्मेलन का उद्घाटन होगा. सम्मेलन में उद्घाटन वक्तव्य प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार देंगे. मुख्य अतिथि के रूप में जाने माने कवि देवी प्रसाद मिश्र का वक्तव्य होगा. विशिष्ट अतिथि के बतौर जुझारू आदिवासी एक्टिविस्ट सोनी सोरी, प्रसिद्ध फिल्मकार मेघनाथ और मैं एक कारसेवक था जैसी चर्चित पुस्तक के लेखक भंवर मेघवंशी और किसान आंदोलन में ट्राली टाइम्स अखबार निकालकर देश-विदेश में चर्चित हुईं युवा एक्टिविस्ट नवकिरन नट्ट सम्मेलन को सम्बोधित करेंगी.

इसी दिन शाम साढ़े छह बजे से सांस्कृतिक सत्र शुरू होगा जिसमें वसु गंधर्व और अजुल्का द्वारा हिंदी कविताओं की सांगीतिक प्रस्तुति दी जाएगी. इस सत्र में शशिकला और उनके साथी छत्तीसगढ़ी प्रतिनिधि गीतों की और निवेदिता शंकर सितार वादन की प्रस्तुति देंगी. पटना के कोरस नाट्य दल द्वारा रजिया सज्जाद जहीर की कहानी और मात्सी शरण के निर्देशन में नमक नाटक का मंचन किया जाएगा. इसी सत्र में झारखंड की सांस्कृतिक मंडली द्वारा नृत्य-गीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा.

इसके अलावा विभिन्न राज्यों से आ रहे जन गायक-नीतिश राय, बाबुनी मजूमदार (पश्चिम बंगाल), अनिल अंशुमन, प्रमोद यादव, सिंहासन यादव, कृष्ण कुमार निर्माही, संतोष झा, राजू रंजन (बिहार) और बृजेश यादव (उत्तर प्रदेश) जनगीत और लोक गीत प्रस्तुत करेंगे. सम्मेलन के दूसरे दिन दोपहर 12 बजे फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध के रूप विषय पर वैचारिक सत्र होगा. इस सत्र में वरिष्ठ कवि लाल्टू, चर्चित उपन्यासकार रणेन्द्र, गुजराती लेखक भरत मेहता, नई पीढ़ी की सशक्त कवि रूपम मिश्र, पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक कार्यकर्ता दीपक मित्रा, तेलंगाना से के लेखक एनआर श्याम

उड़ीसा के राधाकांत सेठी अपनी बात रखेंगे. इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध मार्क्सवादी चिंतक रामजी राय करेंगे. सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिनिधि राष्ट्रीय परिषद, कार्यकारिणी व पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे. शाम को बिहार के बेगुसराय का नाट्य दल रंगनायक द लेफ्ट थियेटर की नाट्य प्रस्तुति अमृतसर आ गया है  के अलावा कविता पाठ और रायपुर के युवा साथियो के इंडियन रोलर बैंड का कार्यक्रम रखा गया है. सम्मेलन में चार प्रकाशकों-नवारूण, समकालीन जनमत, वैभव प्रकाशन, एकलव्य प्रकाशन व सेतु प्रकाशन द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगायी जाएगी. कवि, लेखक एवं जन संस्कृति मंच के संस्थापक सदस्य अजय कुमार की चित्र प्रदर्शनी के संभावना कला मंच गाजीपुर व कोलकाता से आ रहे चर्चित युवा चित्रकार अनुपम राय अपनी कला चित्रों की प्रदर्शनी लगाएंगे.

इस मौके पर कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकों और पत्रिकाओं का विमोचन भी होगा. सम्मेलन में भाग लेने के लिए लेखक-कलाकार छह अक्टूबर से आने लगेंगे. जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र कुमार, रांची से वरिष्ठ लेखक रविभूषण, कथाकार शिवमूर्ति, आलोचक प्रणय कृष्ण, कवि बल्ली सिंह चीमाप्रख्यात रंगकर्मी जहूर आलम, उमा राग, शालिनी बाजपेयी, अनुपम सिंह, प्रीति प्रभा, बलभद्र, राजेश कमल, सुरेंद्र प्रसाद सुमन, दीपक सिन्हा, केके पांडेय मीना राय, समता राय, सोनी तिरिया सहित कई नामचीन लेखक-कवि-कलाकार शामिल हो रहे हैं.

आयोजन स्थल को लेखकों, कवियों, रंगकर्मियों की स्मृति में कलात्मक ढंग से सजाया जाएगा. मुक्तिबोध और प्रख्यात मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी की स्मृति में स्वागत द्वार बनाए जाएंगे. प्रख्यात रंगकर्मी हवीब तनवीर की स्मृति में सम्मेलन स्थल को हबीब तनवीर स्मृति परिसर, प्रसिद्ध कवि मंगलेश डबराल की स्मृति में सभागर का नाम मंगलेश डबराल सभागार, जन संस्कृति मंच के महासचिव रहे बृजबिहारी पांडेय व प्रसिद्ध रामनिहाल गुंजन की स्मृति में सभा मंच का नाम बृजबिहारी पांडेय-रामनिहाल गुंजन स्मृति मंच रखा गया है. पुस्तक प्रदर्शनी को प्रसिद्ध नारीवादी कार्यकर्ता व लेखिका कमला भसीन और चित्र-कला प्रदर्शनी को युवा चित्रकार राकेश दिवाकर की स्मृति में समर्पित किया गया है.

'मुझे कदम-कदम पर चौराहे मिलते हैं’ की शानदार सांगीतिक प्रस्तुति

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रायपुर। मुक्तिबोध की 58वीं पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और ख्यात आलोचक विनोद तिवारी ने कहा कि अस्तित्व रक्षा और स्थिति रक्षा के संघर्ष से तो हर मनुष्य को गुजरना पड़ता है, मगर मुक्तिबोध ने जीवन दृष्टि और जीवन विवेक के निरंतर परिष्कार का जैसा संघर्ष किया वह हम लोगों के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि जीवन में दोहरापन, दुराव-छिपाव और छल-छद्म बढ़ते जाने के हमारे दौर में मुक्तिबोध की ‘अंधेरे में’ जैसी कविताओं की जरूरत बढ़ती जा रही है।


 

विनोद तिवारी ने कहा कि लगातार आत्मनिरीक्षण और आत्मसंघर्ष से गुजरने के कारण ही मुक्तिबोध के लेखन में एक पूरी तैयारी दिखती है। मुक्तिबोध की खासियत थी कि वे किसी बने-बनाए सत्य या पहले से सिद्ध की गई बात से काम नहीं चलाते थे, बल्कि अपने प्रश्नों और खोज के जरिए नया संधान करते थे। मुक्तिबोध की रचनात्मक प्रवृति के केंद्र में आलोचनात्मक विवेक है। 

विनोद तिवारी ने अपने करीब एक घंटे के सुगठित और सुलझे हुए व्याख्यान में कहा कि मुक्तिबोध कबीर, गालिब और निराला की परंपरा के रचनाकार थे, जो अपने मूल्यों और सिद्धांतों के लिए कोई जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने मुक्तिबोध की तुलना शार्पनर से छिलने वाली पेंसिल से करते हुए कहा कि मुक्तिबोध ने लहुलुहान होकर ही अपनी तीक्ष्णता हासिल की थी। 

विनोद तिवारी ने कहा कि मुक्तिबोध ने आत्मनिरीक्षण और आत्मसंघर्ष की पीड़ा से गुजरते हुए अपना जीवन विवेक सृजित किया था। इसीलिए मुक्तिबोध की रचनाएं हमें अपनी तरफ इतना खींचती हैं। मुक्तिबोध किसी समय के साहित्य को समझने के लिए उस समय के सांस्कृतिक इतिहास को जानने की जरूरत रेखांकित करते थे। 

विनोद तिवारी ने कहा कि मुक्तिबोध की रचना एक साहित्यिक की डायरी अपने समय और बाद की भी कई आलोचना पुस्तकों की तुलना में बहुत आगे की रचना है। यह सृजनात्मक यातना से उबरने और सृजन सत्यों से संवाद करने वाली रचना है। 

अपने अध्यक्षीय संबोधन में आलोचक व विचारक जयप्रकाश ने कहा कि मुक्तिबोध को पढ़ना आज पहले की तुलना में आज और ज्यादा जरूरी हो गया है क्योंकि हमारी सभ्यता तेजी से निर्विवेकीकरण का शिकार हो रही है। मुक्तिबोध आज भी हमें राह दिखाते हैं, क्योंकि उनके जीने और रचने में कोई द्वैत नहीं है, उनके जीवन-विवेक और साहित्य-विवेक में कोई फांक नहीं है। 

कार्यक्रम के शुरू में संगीतकार व गायक अजुल्का सक्सेना और वसु गंधर्व द्वारा की गई मुक्तिबोध की कविता ‘मुझे कदम-कदम पर चौराहे मिलते हैं’ की शानदार सांगीतिक प्रस्तुति को श्रोताओं ने खुले मन से सराहा। 

मुक्तिबोध परिवार और साहित्य अकादमी द्वारा मुक्तिबोध की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रायपुर व छत्तीसगढ़ के दूसरे नगरों से आए साहित्यकार व संस्कृतिकर्मी शामिल थे। कार्यक्रम में दिवाकर मुक्तिबोध, गिरीश मुक्तिबोध, संजीव बख्शी, सुशील त्रिवेदी, त्रिलोक महावर, सुभाष मिश्रा, आनंद हर्षुल, नवल शुक्ल, आलोक वर्मा, मोइज कपासी, निर्मल आनंद, अरुण काठोटे, आनंद बहादुर, राजकुमार सोनी, उर्मिला शुक्ल, राहुल कुमार सिंह, सुधीर शर्मा, संजय शाम, प्रकाश उदय, राजेश गनोदवाले सहित कई साहित्यकारों व संस्कृतिकर्मियों ने हिस्सा लिया।

अशोक शर्मा की कविताओं का आकाशवाणी से रेडियो प्रसारण 13 अगस्त को

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महासमुंद। नगर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अशोक शर्मा की कविताओं का रेडियो प्रसारण आकाशवाणी के  रायपुर केन्द से 13 अगस्त सुबह 9 बजे काव्य गोष्ठी कार्यक्रम के अंतर्गत किया जाएगा। अशोक शर्मा के संचालन में सम्पन्न होने वाली इस काव्य गोष्ठी में श्रीमती नीलू मेघ,सुश्री संध्या श्रीवास्तव और अज़हर कुरैशी ने भी भाग लिया है। 



उक्त रेडियो प्रसारण अब प्रसार भारती के एप्प 'न्यूज ऑन एआईर' के माध्यम से स्मार्ट फोन पर भी सुना जा सकता है।

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