Media24Media.com: सांस्कृतिक विरासत

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सुरक्षा और रोजगार की गारंटी के साथ बढ़ा महिला श्रमिकों का सम्मान, छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं से आ रहे बदलाव

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 रायपुर : हर वर्ष 1 मई को हम श्रमिक दिवस मनाते हैं। यह एक ऐसा दिन जो श्रमिकों के अथक परिश्रम, संघर्ष और योगदान को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है, राज्य की आर्थिक प्रगति में महिला श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी जाना जाता है।


कृषि, खनन, वनों से प्राप्त उत्पादों और छोटे उद्योगों पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाएँ खेती-बाड़ी, तेंदूपत्ता संग्रहण और हस्तशिल्प निर्माण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य, घरेलू सेवाएँ और छोटे व्यापारों में उनकी भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। महिला श्रमिकों की भागीदारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, विशेष रूप से असंगठित क्षेत्रों में, फिर भी उनकी मेहनत को अब भी उचित मान्यता और पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। महिला श्रमिकों के सामने कई चुनौतियाँ हैं। जिनमें समान वेतन का अभाव, समान कार्य के बावजूद वेतन असमानता, खनन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में असुरक्षित परिस्थितियाँ, प्रसूति लाभों और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुँच, कम पढ़ाई और तकनीकी प्रशिक्षण के कारण सीमित अवसर, पारंपरिक सोच और घरेलू जिम्मेदारियाँ उनकी स्वतंत्रता को सीमित करती हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिसमें मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण मिशन के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए विशेष सहायता दी जा रही है। नई श्रमिक नीति द्वारा असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत महिला श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया गया है। महिला शक्ति केंद्रों के विस्तार से प्रत्येक जिले में महिला शक्ति केंद्र स्थापित कर महिला श्रमिकों को कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर महिला स्वावलंबन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। सखी वन स्टॉप सेंटर में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए त्वरित सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था। मनरेगा में महिलाओं के भागीदारी बढ़ाने रोजगार दिवसों में महिलाओं के न्यूनतम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से मिनीमाता महतारी जतन योजना है, जो पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति सहायता प्रदान करती है।इस योजना के तहत बच्चे के जन्म के बाद पंजीकृत महिला श्रमिकों को 20 हजार की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके अलावा राज्य सरकार विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम और सहायता योजनाएं भी चलाती है, जो महिला श्रमिकों को सशक्त बनाने में मदद करती हैं।

मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु के बीच की पंजीकृत महिला श्रमिकों को सिलाई मशीन के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण के लिए सहायता प्रदान करती है।छत्तीसगढ़ महिला कोष महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन करता है, जिसमें वित्तीय सहायता प्रशिक्षण और अन्य संसाधन शामिल हैं।घरेलू महिला कामगार कौशल उन्नयन एवं ठेका श्रमिक, हमाल कामगार परिवार सशक्तिकरण योजना,घरेलू महिला श्रमिकों, ठेका श्रमिकों और हमाल श्रमिकों के कौशल विकास और परिवार को सशक्त बनाने के लिए योजना है। सक्षम योजना छत्तीसगढ़ महिला कोष के तहत संचालित एक योजना है जो विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को 1 हजार रूपए प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार महिला श्रमिकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है, प्रशिक्षण के बाद उनके रोजगार का प्रबंध भी कर रही है, ताकि उन्हें आर्थिक मजबूती मिल सके, सरकार माताओं-बहनों तक जनहितैषी योजनाओं के शत प्रतिशत लाभ की पहुंच भी सुनिश्चित कर रही है। जबकि स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय सरकार में प्रदेश के विकास में महिला श्रमिकों के योगदान को सम्मान मिला है।

डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर - सहायक संचालक (जनसंपर्क)

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आध्यात्मिक गुरु रविशंकर से लिया आशीर्वाद

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में आध्यात्मिक गुरु एवं द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक रविशंकर ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए रविशंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

                                    

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकस्वरूप, जशपुर जिले में स्थित विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग - मधेश्वर पहाड़ का छायाचित्र एवं बस्तर आर्ट शैली में निर्मित नंदी की प्रतिकृति भेंट कर रविशंकर का अभिनंदन किया।

रविशंकर ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि इस बार वे अपने साथ 1000 वर्ष पुराने सोमनाथ मंदिर के खंडित शिवलिंग के अवशेष लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक शिवलिंग के अवशेष को सदियों से एक अग्निहोत्री परिवार द्वारा सुरक्षित रखा गया था। अब वे इसे पूरे देश में दर्शनार्थ श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का पावन कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सहित उपस्थित गणमान्य लोगों ने खंडित शिवलिंग के दर्शन किए और आस्था प्रकट की।

पूर्व में केबिनेट में लिए गए निर्णय अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रविशंकर के मध्य छत्तीसगढ़ सरकार एवं व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया (द आर्ट ऑफ लिविंग) के बीच हुए एमओयू को लेकर भी चर्चा हुई। एमओयू का उद्देश्य आजीविका सृजन और ग्रामीण छत्तीसगढ़ के समग्र कल्याण सहित ग्रामीण विकास के विविध  पहलुओं से जुड़ा है, जिसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया।

शंखनाद महासत्संग का न्योता

रविशंकर ने मुख्यमंत्री साय को राजधानी रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित 'शंखनाद महासत्संग' कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण के लिए रविशंकर जी का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव डॉ. बसवराजू एस., पी. दयानंद, राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त रवि मित्तल, मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय सहित परिवार के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।


सुशासन दिवस पर सांसद बृजमोहन ने अटल जी को किया नमन, अटल जी कोई व्यक्ति नहीं, युग पुरुष हैं

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण अटल जी की महान उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि क्षेत्रीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत, और विकास की संभावनाओं को पहचानते हुए छत्तीसगढ़ को एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिले। उनका यह निर्णय राज्य के लोगों के लिए प्रगति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाला साबित हुआ। यह कहना है रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का जो बुधवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेई जी 100 वीं जयंती "सुशासन दिवस" के अवसर पर राजधानी में अटल चौक, अवंती विहार और कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए और अटल जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।



कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में एक प्रदर्शनी का शुभारंभ किया, जिसमें अटल बिहारी बाजपेई के जीवन, योगदान और विचारधारा को प्रदर्शित किया गया।
साथ ही फुंडहर चौक, अटल एक्सप्रेस वे पर अटल परिसर का भूमिपूजन भी किया गया।

अग्रवाल ने अटल जी को याद करते हुए कहा कि, अटल जी कोई व्यक्ति नहीं बल्कि युग पुरुष थे, जिनका जीवन राष्ट्र सेवा, भारतीय राजनीति और समाज को नई दिशा देने के लिए समर्पित था। उनकी दूरदर्शी सोच और नीतियों ने भारत को विकास के पथ पर अग्रसर किया।

अटल जी की नेतृत्व क्षमता, कवित्व, और मानवता ने हर भारतीय को प्रेरित किया। वह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसे विचारक और मार्गदर्शक थे जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनका जीवन और उनकी सोच हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा समेत नगर निगम अधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

ऐतिहासिक नगरी सिरपुर की प्रसिद्धि को मिल रही अंतर्राष्ट्रीय पहचान : अकबर

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रायपुर। पुरातात्विक स्मारकों, समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय विश्व संगीति कार्यक्रम का शुभारम्भ 7 सितम्बर को वन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नागार्जुन फाउंडेशन सिरपुर के अध्यक्ष पूज्य भदन्त आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई एवं कल्चरल सेंटर ऑफ एच. एच. दलाई लामा तिब्बत हाउस के डायरेक्टर गेशे दोरजी दामदुल ने किया।

सी एस आई डी के अध्यक्ष नंदकुमार साय , पुरातत्वविद, नागपुर महाराष्ट्र लेखक डॉ. सत्यजीत चन्द्रिकापुरे, ट्रेव्हल एंड टूरिज्म विभाग महाराष्ट्र डायरेक्टर डॉ. प्रियदर्शी एम. खोब्रागड़े के विशिष्ट आतिथ्य में शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का सिरपुर विकास प्रधिकरण के अध्यक्ष सतीश जग्गी ने स्वागत किया। विश्व संगीति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि सिरपुर एक ऐतिहासिक पुरातात्विक नगरी है। यहां विश्व संगीति कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन से सिरपुर की प्रसिद्धि देश-विदेश तक जाएगी।

उन्होंने कहा कि यहां बौद्ध समाज के अनुयायी उपस्थित है, उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि सिरपुर के विकास के लिए सिरपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है। इससे क्षेत्र के विकास और पर्यटन के मानचित्र में सिरपुर का नाम दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के माध्यम से सिरपुर के विकास को पुनर्जीवित करने का कार्य हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक नगरी सिरपुर सहित क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव पहल की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह वनक्षेत्र है इसलिए ग्राम सभा के प्रस्ताव पर सामुदायिक विकास के लिए एक हेक्टेयर जमीन दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत 17 ग्राम पंचायत के 34 ग्राम शामिल है।

कार्यक्रम में सीएसआईडी के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कहा कि सिरपुर हमारे प्राचीन इतिहास का प्रतिबिंब है। सिरपुर के तट पर ही ऐतिहासिक वैभव और संस्कृति का पूरा संसार है। कई साल पहले से ही दुनिया भर के लोग यहां आते जाते रहे हैं। आज श्रीपुर का वैभव देश-दुनिया में चमक रहा है। कार्यक्रम में सिरपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सतीश जग्गी ने कहा कि यह कार्यक्रम सिरपुर के ऐतिहासिक महत्व को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सिरपुर के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। हम सिरपुर को वर्ल्ड हेरिटेज की ओर मान्यता दिलाने में आगे बढ़ रहे हैं।

इस दौरान संगीति कार्यक्रम में अंचल सहित देश के विभिन्न स्थानो से अतिथि लोग पहुंचे हैं। कार्यक्रम 9 सितंबर तक जारी रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दूसरे दिन 8 सितम्बर को राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के मुख्य आतिथ्य में तथा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में व दीपक बैज सांसद तथा श्यामजी चौहान निज मंदिर खाटूजी राजस्थान के विशिष्ट आतिथ्य में कार्यक्रम आयोजित होगा। कार्यक्रम के तृतीय दिवस समारोह का समापन होगा।

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