Media24Media.com: सहारा इंडिया

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सहारा इंडिया के संस्थापक सुब्रत रॉय का 75 साल की उम्र में निधन

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सहारा इंडिया परिवार के संस्थापक और अध्यक्ष सुब्रत रॉय का मंगलवार को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। राजनीतिक नेताओं, व्यापारिक सहयोगियों और खिलाड़ियों ने दुख व्यक्त किया और देश के विकास में उनके योगदान को स्वीकार किया। सहारा इंडिया परिवार के संस्थापक और अध्यक्ष सुब्रत रॉय का लंबी बीमारी से जूझने के बाद 75 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। प्रमुख बिजनेस टाइकून के निधन से विभिन्न क्षेत्रों से शोक और श्रद्धांजलि की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक नेताओं, व्यापारिक सहयोगियों और खिलाड़ियों ने सुब्रत रॉय के निधन पर दुख व्यक्त किया और व्यापार, समाज और परोपकार में उनके प्रभावशाली योगदान पर विचार किया।


उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, उनका निधन राज्य और देश के लिए एक भावनात्मक क्षति है क्योंकि वह एक बेहद सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ एक बड़े दिल वाले बेहद संवेदनशील व्यक्ति भी थे। जिन्होंने अनगिनत लोगों की मदद की और उनका सहारा बने।

अनुभवी अभिनेता अनुपम खेर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “सहारा श्री सुब्रत रॉय जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ! अलग-अलग मौकों पर उनसे कई बार मुलाकात हुई! वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे, दयालु और जीवन से भी बड़े। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!”

10 जून 1948 को बिहार के अररिया में जन्मे सुब्रत रॉय ने सहारा समूह को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समूह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन मेटास्टैटिक घातकता, उच्च रक्तचाप और मधुमेह की जटिलताओं से लंबी लड़ाई के बाद हुआ। रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था।

रॉय ने 1976 में एक चिट-फंड कंपनी, सहारा फाइनेंस का अधिग्रहण करने से पहले गोरखपुर में अपनी उद्यमशीलता यात्रा शुरू की। 1978 तक, उन्होंने इसे भारत के सबसे बड़े समूहों में से एक, सहारा इंडिया परिवार में बदल दिया था। उनके नेतृत्व में, समूह ने वित्त, रियल एस्टेट, मीडिया और आतिथ्य सहित विभिन्न उद्योगों में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया।

रॉय की यात्रा चुनौतियों से रहित नहीं थी। 2014 में, उन्हें वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई। हालाँकि, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया और कानूनी लड़ाई जारी रही।


सहारा इंडिया कंपनी के 1146 निवेशकों को भुगतान हेतु 1 करोड़ 32 लाख रूपए का और चेक जारी

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राजनांदगांव। शासन की मंशानुरूप जिले में चिटफंड कंपनी के निवेशकों को लगातार राशि वापसी की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिटफंड कंपनी के झांसे में आकर अपनी राशि खो देेने वाले सभी निवेशकों को राहत पहुंचाई है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्य करते हुए निवेशकों को राशि वापस प्रदान किया जा रहा है। कलेक्टर डोमन सिंह के मार्गदर्शन में सहारा इंडिया कंपनी अंतर्गत सहारियान इ-मल्टीपरपस सोसायटी लिमिटेड, सहारा क्यूशॉप यूनिक प्रोटक्ट रेंज लिमिटेड तथा सहारा के्रडिट कोआपरेटिस सोसायटी के निवेशकों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन सहारा इंडिया कंपनी द्वारा कराया गया।



पूर्व में कंपनी के कुल 2 हजार 876 निवेशकों को 3 करोड़ 36 लाख रूपए भुगतान तहसीलों के माध्यम से कराया जा चुका है। वर्तमान में लगभग 1 हजार 146 और निवेशकों के आवेदन का सत्यापन कार्य पूर्ण हो चुका है, जिन्हें उनके निवेश राशि का 25 प्रतिशत लगभग 1 करोड़ 32 लाख रूपए भुगतान हेतु संबंधित तहसील को चेक जारी किया गया। उक्त निवेशकों में राजनांदगांव तहसील के 1073 निवेशक, डोंगरगढ़ तहसील के 54 निवेशक एवं छुईखदान तहसील के 19 निवेशक शामिल हैंजिन्हें भुगतान हेतु चेक संबंधित तहसीलदारों को जारी कर निवेशकों की राशि का अंतरण सीधे उनके बैंक खाते में कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया है।

सहारा इंडिया कंपनी द्वारा कलेक्टर राजनांदगांव के खाते में कुल 8 करोड़ रूपए राशि उपलब्ध कराई गई है। नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय ने बताया कि उक्त कंपनियों के 1556 निवेशकों के आवेदन एवं जमा राशि का सत्यापन राजस्व विभाग एवं सहारा इंडिया कंपनी से कराया जा रहा है। सत्यापन उपरान्त शीघ्र ही शेष निवेशकों को भुगतान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न चिटफंड कंपनियों जैसे याल्स्को रियल स्टेट लिमिटेड, शुभ सांई देवकान लिमिटेड,  एव्हीएम रियल स्टेट एण्ड एलाईड लिमिटेड, अनमोल इंडिया लिमिटेड, सहारा इंडिया आदि के लगभग 26 हजार 249 निवेशकों को कुल 18 करोड़ 14 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

6 लाख 25 हजार गंवाया, चिटफंड के षिकंजे में फंसे नागरिकों की जनदर्शन में दस्तक

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दुर्ग। चिटफंड कंपनियों में ठगी का शिकार हुए लोग जनदर्शन में अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में शहर में संचालित संस्कार धानी इंफ्रा हाऊसिंग लिमिटेड कंपनी और सहारा इंडिया का नाम फिर से उछल रहा है। संस्कार धानी हाऊसिंग लिमिटेड से 6 लाख 25 हजार की ठगी  का शिकार हुए आवेदक ने अपने वक्तव्य में बताया कि वो बीएसपी का कर्मचारी था और उसने एम.आई.एस. स्कीम के तहत् 6 लाख रूपए की राशि इस हाऊसिंग लिमिटेड कंपनी में 2015 में लगाई थी। जिसमें उसे 2016 तक तय ब्याज भी मिला।



 इसलिए इस अवधि के दौरान उसने 25 हजार रूपए की राशि और सी.आर.पी. स्कीम के तहत् लगाई थी। लेकिन 2016 के बाद उसे ब्याज की राशि मिलना बंद हो गई और हाऊसिंग लिमिटेड कंपनी कही नदारद हो गई। इसके पश्चात् आवेदक ने न्याय की तलाश में उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। परिणाम उसके पक्ष में आया। जिसमें 01 महीने के अंदर उन्हें उनकी राशि वापस करने का आदेश भी पारित किया गया लेकिन आज भी आवेदक अपने पैसों का इतंजार कर रहा है।

ऐसे ही और ठगी का शिकार आवेदक के पैसों को सहारा इंडिया कंपनी गबन कर बैठा है। जिसमें आवेदक के कथनानुसार सहारा इंडिया कंपनी के सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट रेंज लिमिटेड स्कीम में उसने अपने जीवनभर की जमा पूंजी लाभ पाने की मंशा से और वृद्धा अवस्था में सुखद जीवन जीने के लिए लगाई थी। आज उस आवेदक का स्वास्थ्य खराब है उसे अपने ईलाज के लिए पैसे की जरूरत है। लेकिन आवेदक के हाथ खाली है और आंखे न्याय के लिए राह देख रही है। 

कलेक्टर ने दोनों ही आवेदकों की समस्या सुनी और वस्तु स्थिति अनुसार विधि पूर्वक कार्यवाही करने का उन्हें आश्वासन दिया और संबंधित अधिकारी को आवेदन प्रेषित किया। प्रशासन को नई दिशा देने के लिए और कार्यों के चिन्हांकन के लिए भी जनदर्शन एक बेहतर माध्यम बनता जा रहा है। इसी कड़ी के नगर निगम रिसाली अंतर्गत वार्ड क्रमांक 13 से भी एक आवेदन सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से आया था। इस आवेदन में आवेदक ने जिले के पाटन मार्ग में मरोदा से उतई रोड के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए,

  सड़कों में वाहन सुगम आवागमन के लिए डिवाइडर निर्माण और रात्रि के समय दुर्घटना से बचाव के लिए सड़क में रेडियम लगाने के लिए अपना आवेदन दिया था। उसने अपने सुझाव में सड़क में उचित स्थानों पर लाइटिंग व्यवस्था कराने की मांग भी रखी है। उसने जनकल्याण को दृष्टिगत रखते हुए यह आवेदन दिया था ताकि बेजुबान जानवरों और सड़क दुर्घटना के बढ़ते क्रम में कमी ला जा सके। कलेक्टर ने आवेदन में संज्ञान लेते हुए सड़क निर्माण के इस कार्य में बेहतर से बेहतर काम हो इसके लिए संबंधित अधिकारी को इसे प्रेषित किया।

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