Media24Media.com: सर्पदंश

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समय पर ईलाज नहीं मिलने से सर्पदंश से मासूम की मौत, घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के मैनपुर विकासखंड क्षेत्र से मानवता को तार-तार करने वाली घटना सामने आई है. जहरीले सांप के काटने के बाद एक मासूम समय पर ईलाज नहीं मिलने से असमय काल के गाल में समा गया. इससे भी दुखद यह कि मासूम की लाश को गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण पिता और परिजनों ने बाइक के सहारे रोते बिखलाते घर पहुंचाया.


 तहसील मुख्यालय मैनपुर से करीब 36 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भुतबेड़ा के आश्रित ग्राम तेन्दुछापर के शासकीय प्राथमिक शाला में पढ़ाई करने वाले कक्षा दूसरी के छात्र चन्द्रहास अपने परिजनों के साथ जमीन पर सोया हुआ था. गुरूवार तड़के चार बजे के आसपास चन्द्रहास को जहरीले सांप ने काट दिया. जिसके बाद माता-पिता ने मासूम को गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर कच्ची दलदल पगडंडी से लेकर सड़क तक पहुंचे. यहां से 108 संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले गए. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. जिससे चन्द्रहास की रास्ते में ही मौत हो गई. मैनपुर अस्पताल पहुंचने पर डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

जिसके बाद मृतक का पंचनामा और पोस्टमार्टम कर शव को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुक्तांजली वाहन से उनके घर के लिए रवाना किया गया. लेकिन ग्राम तेन्दुछापर तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण भूतबेड़ा मुख्य सड़क तक शव मुक्तांजलि वाहन से पहुंचाया. यहां से परिजन शव को लेकर बाइक से तेन्दुछापर ग्राम के लिए रवाना हुए. इस तीन किलोमीटर कच्ची सड़क में जगह जगह दलदल और कीचड़ होने के कारण मृतक के पिता को शव को लेकर बार-बार उतारना पड़ा. बाइक को धक्का देना पड़ा. फिर शव को लेकर आगे बढ़े. ऐसे उन्हें तीन से चार बार करना पड़ा. इस दौरान अन्य परिजन बाइक के पीछे दौड रहे थे. 

बता दें कि मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र के राजापड़ाव गौरगांव इलाके के ग्रामीण हमेशा पुल पुलिया और सड़क की मांग को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन करते रहे हैं. लेकिन आज तक उनके कीमती वोंटो से चुने हुए सांसद और विधायक भुतबेड़ा के दौरा में एक बार भी नहीं पहुंचे. आला अफसर भी इस क्षेत्र में बहुत कम पहुंचते हैं. जिसके कारण इस क्षेत्र के लोग मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. यदि ग्राम तेन्दुछापर तीन किलोमीटर पक्की सड़क बनी होती तो बच्चे को समय पर इलाज मिल पाता और आज शायद इस गरीब परिवार का चिराग नहीं बुझता.


सोहम अस्पताल में मिली बालक को नई जिंदगी, सर्पदंश से पीड़ित आठ वर्षीय बालक की प्राणरक्षा

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महासमुन्द। सर्पदंश के उपरांत शरीर तथा मस्तिष्क पर पड़े प्रभाव के कारण कोमा की स्थिति  मे पहुंच रहे एक आठ वर्षीय बालक को सोहम हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सको ने पांच दिनों तक वेंटीलेटर पर रखने के उपरान्त बचा लेने का कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार भारत में पाए जाने वाले सर्वाधिक जहरीले  सांपों मे से एक करैत के काटने से बच्चे का तंत्रिका तंत्र, रक्त प्रवाह, श्वसन क्रिया तथा हार्ट बीट बुरी तरह से प्रभावित हुई थी तथा उसका बच पाना कठिन प्रतीत हो रहा था।



परन्तु सोहम के विशेषज्ञ डॉक्टर ने रोगी को रायपुर रिफर करने के स्थान पर चुनौती को स्वीकार करते हुऐ तत्काल उसे जीवित रक्षाक  प्रणाली (वेंटीलेटर ) पर रख कर उसकी श्वसन क्रिया तथा हृदयगति को व्यवस्थित करके बालक का उपचार प्रारंभ किया एवम पांच दिनों तक निरंतर देखभाल तथा उपचार के उपरांत उसे मौत के मुंह से वापस लाने मे सफल रहे । पीड़ित बालक पूर्ण स्वस्थ है तथा उनके परिजन, जो मुंह से फैन उगलते बेहोशी स्थिति मे पहुंचे बच्चे के बचने के आशा  छोड़ चुके थे, सोहम के डाक्टरों का आभार व्यक्त करते नही थक रहे थे।

जानलेवा हो सकता है सर्प-दंश

सोहम हॉस्पिटल के संचालक डॉ युगल चंद्राकर ने बताया कि जहरीले सांप का काटना समय पर  उपचार न मिले पर जानलेवा हो सकता है। क्योंकि इसका प्रभाव या तो पीड़ित के तंत्रिका तंत्र को निष्क्रिय कर देता है अथवा खून को गाढ़ा कर देता है। जिससे दोनों ही स्थितियों मे रोगी की मौत हो जाती है। अस्तु सर्प दंश की जानकारी मिलते ही पीड़ित को बैगा गुनिया के चक्कर मे पड़ने की स्थान पर अविलंब हॉस्पिटल पहुंचाए, जहां उसे समय रहते उचित उपचार  मिल सके।

सर्पदंश पीड़ितों का सहारा बना सोहम

आधुनिक उपकरणों तथा  विशेषज्ञ डॉक्टरो और  कुशल नर्सिंग टीम के साथ  माड्यूलर अपरेशन थियेटर, आई. सी. यू. क्रिटिकल केयर, यू. एस. जी., ईको, सीटी स्कैन तथा डायलेसिस सुविधा से संपन्न सोहम हॉस्पिटल मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिट जिले मे निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा 100 विस्तर हॉस्पिटल है। जहां समुचित उपचार की व्यवस्था है।

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