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आलेख : सरकार के नीतिगत फैसलों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ के किसानों का मान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के नीतिगत फैसलों एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। राज्य सरकार ने बीते 18 महीने में विभिन्न योजनाओं के तहत् लगभग सवा लाख करोड़ रूपए किसानों के खाते में अंतरित की है। इन कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

साल दर साल बढ़ रहा है किसानों की संख्या, रकबा और उत्पादन

बता दें कि देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री साथ के नेतृत्त्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल की अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीति गत फैसलों से खेती-किसानी की नया सम्बल मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 24.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी कर एक नया रिकार्ड कायम किया है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 32 हजार करोड रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। इसी तरह खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के किसानों से रिकार्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई और धान खरीदी के एवज में किसानों को 34,500 करोड़ रूपए का तत्काल भुगतान किया गया तथा 12 हजार करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त सीधे किसानों के खातों में अंतरित किया गया।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। किसानों को 11 जुलाई की स्थिति में 5124 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित किए गए हैं। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई है। सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है।

कृषि विभाग के बजट में बीते वर्ष की तुलना में वर्ष 2024-25 में 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय है। पिछले वर्ष 149.25 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर राज्य के 25 लाख 48 हजार 798 किसानों से खरीदी की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।



धान नहीं, अब चना की खेती से मिल रहा मुनाफा

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रायपुर। किसान अब परंपरागत धान की खेती के बजाय चना, मूंग और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों की खेती को अपनाने लगे हैं। धमतरी जिले के किसानों ने इस बार गर्मी के मौसम में फसल विविधिकरण की जो नई राह अपनाई है, इसका फायदा उन्हें सीधे तौर पर मिल रहा है। कम लागत, कम पानी में अधिक मुनाफा।

भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण जिला प्रशासन ने किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। गांव-गांव में जल संरक्षण के लिए जल-जगार महोत्सव और फसल चक्र परिवर्तन शिविर आयोजित किए गए। इन प्रयासों का असर यह हुआ कि किसानों ने इस बार धान की जगह चने की खेती की, जो कम पानी में अच्छी पैदावार देती है।

किसानों को उनकी मेहनत का फल भी मिल रहा है। सरकार द्वारा पहली बार चना की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है। 1 मार्च से 31 मई तक 5650 रूपए प्रति क्विंटल की दर से चना खरीदी हो रही है। धमतरी जिले में 8 समितियों के माध्यम से 2144 किसानों ने अब तक 19 हजार 850 क्विंटल चना बेचा है, जिसकी कुल राशि 11 करोड़ 21 लाख 53 हजार रूपए है। भुगतान भी सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है।

अमलडीह के किसान भुनेश्वर साहू बताते हैं कि धान की तुलना में चना की खेती से पानी भी बचा और मुनाफा भी मिला। पैसा भी समय पर मिल गया है। वहीं किसान घुरसिंह साहू ने कहा, मुझे 56 हजार रुपये से ज्यादा की राशि सीधे खाते में मिली है। पहली बार शासन ने चना खरीदी की है, जिससे हम किसानों को बहुत लाभ हुआ है।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि फसल चक्र परिवर्तन से भूजल स्तर को बचाने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल रही है। धान की जगह चना, मूंग, सरसों जैसी फसलें लगाने के लिए किसानों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही इन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी और अन्य सरकारी सहायता भी दी जा रही है। धमतरी में किसानों का यह बदलाव अब एक सफलता की कहानी बन चुकी है। इससे यह साबित होता है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत एक साथ मिल जाएं, तो खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

किसानों को धान विक्रय के लिए टोकन जारी करने की प्रक्रिया का पालन करने कलेक्टरों को निर्देश

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रायपुर। राज्य शासन द्वारा सभी कलेक्टरों को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था के तहत किसानों को टोकन जारी करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी वितरण संघ के प्रबंध संचालक ने सभी कलेक्टरों को प्रेषित पत्र में टोकन आवेदन समिति मॉड्यूल एवं टोकन तुंहर हाथ एप के माध्यम से किए जाने की सुविधा का उल्लेख करते हुए कहा है कि कुल टोकन आवेदन का 40 प्रतिशत समिति मॉड्यूल एवं 60 प्रतिशत एप के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। टोकन आवेदन हेतु रविवार से शुक्रवार तक प्रातः 9.30 बजे सायं 5 बजे तक का समय निर्धारित है।

किसानों द्वारा आवेदन के दौरान आवश्यक प्रविष्टि करने के उपरांत आवेदन दिनांक से 15 जनवरी 2025 तक रिक्त स्लॉट में धान विक्रय हेतु दिवस का चयन किया जा सकता है। समितियों में, धान विक्रय किये जाने हेतु पंजीकृत रकबा एवं खरीदी अवधि को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन खरीदी लिमिट भी निर्धारित है, जिसकी जानकारी खाद्य अधिकारी माड्यूल एवं समिति माड्यूल में उपलब्ध है। प्रतिदिन खरीदी लिमिट अंतर्गत टोकन तुहर हाथ एप के माध्यम से आवेदित टोकन लघु, सीमांत कृषक एवं दीर्घ कृषक के मध्य वही अनुपात निर्धारित है, जो उस समिति में पंजीकृत लघु, सीमांत कृषक एवं दीर्घ कृषक के मध्य है। प्रतिदिन खरीदी लिमिट अंतर्गत समिति माड्यल के माध्यम से आवेदित टोकन में लघु, सीमांत कृषक एवं दीर्घ कृषक के मध्य किसी प्रकार कोई अनुपात निर्धारित नहीं किया गया है।

समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए राज्य में लघु एवं सीमांत कृषकों को 2 टोकन एवं दीर्घ कृषकों 3 टोकन की सुविधा प्रदाय की गई है। लघु सीमांत कृषक अपने दूसरे टोकन में तथा दीर्घ कृषक अपने तीसरे टोकने में उनके द्वारा अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा के अध्याधीन शेष संपूर्ण मात्रा के लिए टोकन ले सकेगा। यदि कृषकों द्वारा अंतिम टोकन में प्रविष्ट की गई धान की मात्रा उपार्जन केन्द्र में निर्धारित खरीदी लिमिट से अधिक होती है, तो उस स्थिति में उक्त उपार्जन केन्द्र में खरीदी लिमिट के 30 प्रतिशत तक का अधिक का उपार्जन किया जा सकेगा।

समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की व्यवस्था पर रखी जा रही है कड़ी निगरानी

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रायपुर।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए किसानों को टोकन जारी करने से लेकर बारदाना की व्यवस्था, धान का उपार्जन एवं भुगतान, केन्द्रों में खरीदे गए धान का उठाव पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। किसानों को धान विक्रय हेतु टोकन आवेदन करने के लिए समिति माड्यूल एवं टोकन तुंहर हाथ एप की सुविधा दी गई है।

टोकन आवेदन करने में दिक्कत होने पर किसान समिति में ऑपरेटर के माध्यम से टोकन आवेदन कर सकते हैं। केन्द्रों में धान उपार्जन के लिए 72,194 गठान बारदाने उपलब्ध है। विशेष परिस्थिति में किसानों के बारदानों का उपयोग और 25 रूपया प्रति नग बारदाना भुगतान के लिए अपेक्स बैंक को 11 करोड़ 23 लाख रूपए भी दे दिए गए हैं। 

किसानों को भुगतान के लिए अब तक 6728 करोड़ रूपए जारी

गौरतलब है कि राज्य में 14 नवंबर से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन किया जा रहा है। 5 दिसम्बर तक 2739 उपार्जन केन्द्रों में कुल 29.22 लाख मेट्रिक टन धान का उपार्जन किया जा चुका है। प्रदेश में कुल पंजीकृत 27.78 लाख कृषकों में से अब तक  6 लाख 15 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य में धान का विक्रय किया है। उपार्जित धान की राशि संबंधित कृषकों के खाते में नियमित रूप से अंतरित की जा रही है। विपणन संघ द्वारा 6727 करोड़ 93 लाख रूपए अपेक्स बैंक को उपार्जित धान के समर्थन मूल्य के रूप में अंतरित की जा चुकी है। किसानों की सुविधा की दृष्टिकोण से उपार्जन केन्द्रों में अपेक्स बैंक द्वारा माइक्रो एटीएम की व्यवस्था भी की गई है।

समिति में आपरेटर के माध्यम से टोकन आवेदन की भी सुविधा

उपार्जन केन्द्रों में धान विक्रय हेतु किसानों द्वारा टोकन आवेदन समिति माड्यूल एवं टोकन तुहर हाथ एप्प के माध्यम से किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। कुल टोकन आवेदन का 40 प्रतिशत समिति माड्यूल एवं 60 प्रतिशत एप्प के माध्यम से आरक्षित किया गया है। जिन कृषकों को एप्प के माध्यम से टोकन आवेदन करने में कठिनाई हो रही हो, वे समिति में आपरेटर के माध्यम से टोकन आवेदन करा सकते हैं। किसानों द्वारा आवेदन के दौरान आवश्यक प्रविष्टि करने के उपरांत आवेदन की तारीख से लेकर 15 जनवरी 2025 तक रिक्त स्लॉट में धान विक्रय हेतु दिवस का चयन किया जा सकता है। लघु एवं सीमांत कृषकों को 02 टोकन एवं दीर्घ कृषकों 03 टोकन की सुविधा प्रदाय की गई है।

किसान बारदाना के लिए प्रति नग 25 रूपए

भारत सरकार की नवीन बारदाना नीति अनुसार धान का उपार्जन नये एवं पुराने बारदानों में 50 अनुपात 50 में किया जाना है। प्रदेश में अनुमानित धान उपार्जन 160 लाख टन के आधार पर सभी उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त बारदानों की व्यवस्था कर ली गई है। उपार्जन केन्द्रों में पुराने बारदानें के रूप में मिलर बारदाना, पीडीएस बारदाना, समिति द्वारा उपलब्ध कराये गये बारदानों का उपयोग किया जा रहा है। विशेष परिस्थिति में किसान बारदाना का भी उपयोग किया गया है, जिसका 25 रू. नग के मान से किसानों को भुगतान हेतु राशि 11 करोड़ 23 लाख रूपए अपेक्स बैंक को दी जा चुकी है।

धान खरीदी केन्द्रों में 72,194 गठान बारदाना उपलब्ध

समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए कुल 4 लाख गठान नये बारदानों की आवश्यकता है, जिसके विरूद्ध 3.51 लाख नये बारदानें प्रदेश को प्राप्त हो गए है, शेष बारदानें आगामी 15 से 20 दिवसों में प्राप्त हो जायेगें। अभी तक धान उपार्जन में पीडीएस बारदाने 32392 गठान, मिलर बारदानें 23078 गठान, किसान बारदानें 10176 गठान उपयोग किये जा चुके है। उपार्जन केन्द्रों में पीडीएस बारदाने 18985 गठान, मिलर बारदानें 54209 गठान उपयोग हेतु उपलब्ध है। वर्तमान में प्रदेश के किसी भी उपार्जन केन्द्र में बारदानों की कमी नहीं है।

कस्टम मिलिंग पंजीयन के लिए 865 आवेदन

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में उपार्जित किए जा रहे धान के उठाव एवं मिलिंग का काम भी समांतर रूप से किया जा रहा है। जिन उपार्जन केन्द्रों में बफर से अधिक धान भण्डारित होने की स्थिति निर्मित हो रही है, वहाँ परिवहन आदेश जारी कर धान का परिवहन निकटतम सग्रहण केन्द्र में किया जा रहा है। अब तक 2.5 लाख टन धान का परिवहन आदेश जारी किया जा चुका है। मिलरों से पंजीयन हेतु 865 आवेदन प्राप्त हुए है। 252 राईस मिलरों द्वारा कस्टम मिलिंग हेतु पंजीयन कराया जा चुका है। मिलरों को 1296 टन का डीओ जारी किया जा चुका है।

अब तक 33,054 क्विंटल धान जब्त

प्रदेश में धान के अवैध परिवहन एवं अफरा-तफरी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश में अवैध धान के 3305 प्रकरण बनाये गये है एवं 33,054 क्विंटल धान जब्त किया गया है। उपार्जन केन्द्रों में रिसाईकलिंग रोके जाने हेतु नोडल अधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। सीमावर्ती जिलों में 273 चेक पोस्ट की स्थापना धान के अवैध परिहन के मामलों पर कार्यवाही की जा रही है।

किसान बोले सरकार खुले दिल से ले रही उनका धान

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बेमेतरा। आज गुरुवार से जिले में खरीफ सीजन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत हो गयी। कलेक्टर सहित जिला नोडल अधिकारियों ने सौंपे गये धान उपार्जन केन्द्रों में पहुंचकर किसानों का फूल मालाओं से स्वागत किया और इलेक्ट्रॉनिक  तोल मशीन (काँटबांटे) की पूजा कर धान खरीदी का शुभारम्भ किया। कलेक्टर रणबीर शर्मा ने खरीदी केंद्र में किसान रामाधर तिवारी का शाल-श्रीफल से स्वागत किया। किसानों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक तोल मशीन पर उनका धान तौल कर शुरुआत की।

जिले की लोलेसरा में कृषक सहकारी समिति में अपनी उपज धान बेचने आये ग्राम चारभाठा के किसान रामाधर तिवारी ने बताया कि वे 108 कट्टा धान बेचने आए है। कलेक्टर के हाथों स्वागत व सम्मान पाकर बहुत खुश और प्रसन्न है। उन्होंने कहा की उनका धान विष्णुदेव सरकार खुले दिल से ले रही है। केंद्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य के ऊपर रुपये प्रति एकड़ धान के अंतर की राशि से खरीदी से अब छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी और सुधार आयेगा। एक और किसान सेवकराम ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि में धान की फसल लगाई थी।जिसका धान समिति द्वारा आसानी से ले लिया गया। बहरहाल आज से शुरू हुई धान खरीदी केंद्रों में इस बार किसानों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय द्वारा धान खरीदी के अपने वायदे को पूरा निभाया इसकी ज्यादा चर्चा है।

वही कृषक हेमन वर्मा ने ग्राम बैजी ने बताया कि अब सरकार की नीतियों से कृषि भी लाभ का व्यवसाय होता जा रहा है। एक और किसान अजय साहू ग्राम गर्रा ने बताया कि अब किसानों की धान खरीदी का कार्य पूर्व से बेहतर तरीके से हो रहा है।खरीदी केंद्र की संख्या बढ़ाने से अब केंद्रों में भीड़भाड़ वाली स्थिति नही है।किसान आसानी से अपनी साल भर की मेहनत की उपज धान बेचकर उसका उचित मूल्य प्राप्त करेगा।

एक कृषक सेवक राम वर्मा ने बताया कि अब सहकारी समिति में धान बेचना अच्छा लग रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान का मूल्य बढ़ाने का अपना वायदा पूरा करते हुए किसानों की सुविधाओं की ओर भी विशेष ध्यान दिया जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। धान बिक्री पर उन्हें समर्थन मूल्य की राशि भी जल्दी मिल जाएगी। इससे उनकी आर्थिक स्थित में सुधार भी पहले से ठीक आ रहा है।

धान खरीदी के लिए 12 नवंबर तक ट्रायल रन एवं सभी तैयारियां पूरी करें

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 14 नवंबर से राज्य में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की चाक-चौबंद व्यवस्था के निर्देश के परिपालन में सभी जिलों में कलेक्टरों के मार्गदर्शन में सहकारिता, मार्कफेड एवं खाद्य विभाग द्वारा सभी तैयारियां तेजी पूरी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा के लिए बारदानों की व्यवस्था, फड़, चबूतरा, पीने का पानी, किसानों के बैठने की छायादार व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों को धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने को भी कहा है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में सहकारिता आयुक्त कुलदीप शर्मा ने आज सहकारिता विभाग के राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों की संयुक्त वर्चुअल बैठक ली। उन्होंने जिला पंजीयक तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को धान खरीदी की अग्रिम तैयारियों के संबंध में कडे निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी तथा बैंक धान खरीदी के संबंध में अपनी जिम्मेदारी को समयानुसार पूरा करें। धान उपार्जन केन्द्रों से बारदानों की व्यवस्था, फड़, चबूतरा, पीने का पानी, किसानों के बैठने की छायादार स्थान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। धान की सुरक्षा हेतु पर्याप्त डनेज एवं तारपोलिन आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। धान बेचने के लिए केन्द्र में आने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

सहकारिता आयुक्त शर्मा ने सभी समितियों में सीसीटीव्ही कैमरे लगाने के लिए उचित जगह का चयन करने को कहा ताकि संपूर्ण परिसर कव्हर हो सके। उन्होंने ट्रायल रन के साथ-साथ सभी अग्रिम तैयारी 12 नवंबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को धान खरीदी नीति अनुसार स्टेक लगाने, सभी समितियों को उचित संख्या में ही टोकन जारी करने के निर्देश दिए। मौसम खराब होने अथवा बारिश होने की स्थिति में किसी तरह की  अव्यवस्था उत्पन्न न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए।

सहकारिता आयुक्त ने बैंक अधिकारियों को बैंकों में उपलब्ध माइक्रो एटीएम समितियों को उपलब्ध कराने को कहा ताकि किसानों को इससे राशि आहरण की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों को सभी समितियों में भ्रमण कर वहां की व्यवस्था का मुआयना करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर से लेकर 31 जनवरी 2025 तक समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन किया जाएगा। इस अवधि में व्यवस्था से जुड़े अधिकारी न तो अनावश्यक रूप से अवकाश पर जाएंगे न ही मुख्यालय से बाहर रहेंगे। बैठक में अपर पंजीयक एस.के. जोशी, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के.एन काण्डे, ओएसडी अविनाश श्रीवास्तव, संयुक्त पंजीयक संदीप गुप्ता सहित, अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक

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रायपुर। खरीफ विपणन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन एक जुलाई से चल रहा है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। पंजीयन के लिए सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सहकारी समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन करा सकते हैं।

खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन 2024-25 में नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड हेतु 1 जुलाई 2024 से किसानों का पंजीयन प्रारंभ किया गया है। सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड शीघ्र पूर्ण करा सकते हैं एवं वारिसान पंजीयन हेतु तहसील कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं, ताकि धान विक्रय करने वाले किसान को कृषक उन्नति योजना का लाभ प्राप्त हो सके।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने की दृष्टि से कृषक पंजीयन की प्रकिया के सरलीकरण हेतु एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है। एकीकृत किसान पोर्टल के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल और रकबे में संशोधन की कार्यवाही 31 अक्टूबर तक सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन की जाएगी।

एकीकृत किसान पोर्टल में धान एवं मक्का उपार्जन योजना को भी सम्मिलित किया गया है। धान एवं मक्का कृषक को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए पंजीकृत माना जाए एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन करा लिया जाए। यह कार्य एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली के लिए किसान द्वारा धान विक्रय के समय धान खरीदी केन्द्र में स्वंय उपस्थित होकर या उनके द्वारा नामांकित नामिनी के द्वारा उपस्थित होकर बायोमेट्रिक आधारित खरीद प्रणाली के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया जा सकता है। इसके लिए किसान पंजीयन हेतु एकीकृत कृषक पंजीयन पोर्टल पर किसान का पंजीयन निर्धारित अवधि के दौरान किसान का एवं उसके एक नामिनी का आधार नंबर लिया जाएगा।

नामिनी के रूप में किसान के परिवार के नामित सदस्य में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद-पुत्रवधू, सगा भाई-बहन एवं अन्य करीबी रिश्तेदार को मान्य किया जाएगा। किसान यदि गत वर्ष पंजीकृत नॉमिनी में परिवर्तन करना चाहता है, तो समिति स्तर पर संशोधन की कार्यवाही की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में नवीन पंजीयन कराने वाले किसान से नॉमिनी की जानकारी एकत्र किया जाएगा।

हिस्सेदार, बटाईदार तथा अधिया रेगहा के तहत फसल उगाने वाले कृषकों के लिए खेत का मालिकाना हक रखने वाले कृषक स्वंय पंजीयन करा सकेगा अथवा संबंधित कृषक का नॉमिनी के तौर पर पंजीयन करा सकेगा। प्रत्येक खरीदी केन्द्रों में बायोमेट्रिक व्यवस्था के सुचारू एवं व्यवस्थित संचालन हेतु एक स्थायी खरीदी केन्द्र प्रभारी नामांकित किया जाएग। खरीदी केंद्र प्रभारी का भी आधार नंबर एकत्रित किया जाएगा।

समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक

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 रायपुर : खरीफ विपणन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन एक जुलाई से चल रहा है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। पंजीयन के लिए सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सहकारी समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन करा सकते हैं।


खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन 2024-25 में नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड हेतु 1 जुलाई 2024 से किसानों का पंजीयन प्रारंभ किया गया है। सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड शीघ्र पूर्ण करा सकते हैं एवं वारिसान पंजीयन हेतु तहसील कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं, ताकि धान विक्रय करने वाले किसान को कृषक उन्नति योजना का लाभ प्राप्त हो सके।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने की दृष्टि से कृषक पंजीयन की प्रकिया के सरलीकरण हेतु एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है। एकीकृत किसान पोर्टल के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल और रकबे में संशोधन की कार्यवाही 31 अक्टूबर तक सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन की जाएगी।
एकीकृत किसान पोर्टल में धान एवं मक्का उपार्जन योजना को भी सम्मिलित किया गया है। धान एवं मक्का कृषक को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए पंजीकृत माना जाए एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन करा लिया जाए। यह कार्य एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली के लिए किसान द्वारा धान विक्रय के समय धान खरीदी केन्द्र में स्वंय उपस्थित होकर या उनके द्वारा नामांकित नामिनी के द्वारा उपस्थित होकर बायोमेट्रिक आधारित खरीद प्रणाली के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया जा सकता है। इसके लिए किसान पंजीयन हेतु एकीकृत कृषक पंजीयन पोर्टल पर किसान का पंजीयन निर्धारित अवधि के दौरान किसान का एवं उसके एक नामिनी का आधार नंबर लिया जाएगा।
नामिनी के रूप में किसान के परिवार के नामित सदस्य में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद-पुत्रवधू, सगा भाई-बहन एवं अन्य करीबी रिश्तेदार को मान्य किया जाएगा। किसान यदि गत वर्ष पंजीकृत नॉमिनी में परिवर्तन करना चाहता है, तो समिति स्तर पर संशोधन की कार्यवाही की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में नवीन पंजीयन कराने वाले किसान से नॉमिनी की जानकारी एकत्र किया जाएगा।

हिस्सेदार, बटाईदार तथा अधिया रेगहा के तहत फसल उगाने वाले कृषकों के लिए खेत का मालिकाना हक रखने वाले कृषक स्वंय पंजीयन करा सकेगा अथवा संबंधित कृषक का नॉमिनी के तौर पर पंजीयन करा सकेगा। प्रत्येक खरीदी केन्द्रों में बायोमेट्रिक व्यवस्था के सुचारू एवं व्यवस्थित संचालन हेतु एक स्थायी खरीदी केन्द्र प्रभारी नामांकित किया जाएग। खरीदी केंद्र प्रभारी का भी आधार नंबर एकत्रित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक की सबसे बड़ी धान खरीदी

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर अब तक की सबसे बड़ी धान की खरीदी हुई है। एक नवंबर से 04 फरवरी तक चले इस अभियान में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक हुई यह सबसे बड़ी धान खरीदी है। इस वर्ष 130 लाख टन धान खरीदी का अनुमान लगाया गया था। इस साल की धान खरीदी की तुलना करने पर यह पिछली धान खरीदी से 37.39 लाख टन अधिक है। पिछले साल 107.53 लाख टन धान की खरीदी हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की गई। किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से धान की खरीदी की गई है। वर्तमान में किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान किया गया है। जल्द ही अंतर की राशि का भुगतान किसानों को किया जाएगा। धान खरीदी सीजन में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। इसके एवज में किसानों को 30 हजार 68 करोड़ 81 लाख रूपए का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों एवं किसान प्रतिनिधियों की मांग और उनकी परेशानियों को देखते हुए धान खरीदी की अवधि 31 जनवरी से बढ़ाकर 4 फरवरी कर दी थी। ऐसे किसान जो किन्हीं कारणों से 31 जनवरी तक धान नहीं बेच पाए थे, उन किसानों को मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील फैसले का लाभ मिला। धान खरीदी के लिए बढ़ाई गई अवधि में 19 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। 1 फरवरी से लेकर 4 फरवरी के बीच 2.69 लाख टन धान की खरीदी हुई।

राज्य में चालू खरीफ विपणन वर्ष में 130 लाख टन धान का उपार्जन अनुमानित था। धान की रिकॉर्ड खरीदी के चलते अनुमानित उपार्जन का आंकड़ा काफी पीछे छूट गया है। इस साल धान बेचने के लिए राज्य के 26.85 लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। पंजीकृत धान का रकबा 33.51 लाख हेक्टेयर था। धान खरीदी की व्यवस्था के समानांतर कस्टम मिलिंग का काम भी तेजी से जारी है। उपार्जित धान 144.92 लाख टन में से 105.36 लाख टन धान के उठाव का डीओ जारी किया जा चुका है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 98.41 लाख टन धान का उठाव किया जा चुका है।

किसानों के हित में लिया बड़ा फैसला 4 फरवरी तक होगी समर्थन मूल्य और लिंकिंग पर धान खरीदी

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रायपुर। राज्य के किसानों के हित में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए समर्थन मूल्य पर नगद और लिंकिंग के आधार पर धान खरीदी अब 4 फरवरी रविवार तक की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य में रिकार्ड धान खरीदी के बावजूद किसानों को धान बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो इसको ध्यान में रखते हुए यह संवेदनशील निर्णय लिया है।


ज्ञातव्य है कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान बेचने से शेष रह गये किसान भी आसानी से अपना धान सोसायटी के धान उपार्जन केन्द्रों में बेच सकें, इसको ध्यान में रखते हुए समर्थन मूल्य पर नगद और लिंकिंग के आधार पर धान खरीदी 4 फरवरी तक किए जाने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में शनिवार 03 फरवरी एवं रविवार 04 फरवरी को भी उपार्जन केन्द्रों में धान की खरीदी सामान्य दिनों की तरह करने को कहा है। 

यहां यह उल्लेखनीय है ऐसा पहली बार होगा कि 03 फरवरी शनिवार और 04 फरवरी रविवार को भी किसान उपार्जन केन्द्रों में अपना धान बेच सकेंगे। राज्य के किसान प्रतिनिधियों एवं किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि किसानों के हित में मुख्यमंत्री साय का यह संवेदनशील निर्णय से किसान उत्साहित हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राज्य में 31 जनवरी तक 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। धान खरीदी के एवज में उन्हें 29 हजार 318 करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है।


छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक 127.37 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 के तहत एक नवंबर 2023 से धान खरीदी का अभियान निरंतर जारी है। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष मोदी की गारंटी के अनुरूप किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा अब तक किसानों से 127.37 लाख मीट्रिक टन धान का समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा चुकी है। धान के एवज में किसानों को 27504 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है।

मार्कफेड के महाप्रबंधक से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में समर्थन मूल्य पर अब तक 22 लाख 94 हजार 718 किसानों से 127 लाख 37 हजार 970 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 27 हजार 504 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है। अब तक 99 लाख 06 हजार 412 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 84 लाख 23 हजार 264 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है।

 

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के संबंध में कलेक्टर ने ली बैठक

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गौरेला पेंड्रा मरवाही। कलेक्टर प्रियंका ऋषि महोबिया ने समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी के संबंध में बैठक ली। कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने धान खरीदी केंद्र के प्रबंधकों, फड़ प्रभारियों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरो को नियमानुसार धान खरीदी करने, फसल पैदावार के अनुसार निर्धारित मात्रा में टोकन जारी करने, टोकन सत्यापन के बाद ही धान खरीदी करने और अवैधानिक रूप से धान परिवहन की सूचना मिलने पर तत्काल सूचित करने के निर्देश दिए। 

उन्होंने सभी समिति प्रबंधक एवं फड़ प्रभारी को उन्हें संलग्न किए गए समितियों-उपार्जन केंद्रों में तत्काल कार्यभार ग्रहण करने और 26 नवंबर रविवार तक भौतिक सत्यापन करने के भी निर्देश दिए। बैठक में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार,  खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, सहायक पंजीयक सहकारी संस्था, नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक भी उपस्थित थे।


 

समर्थन मूल्य पर अब तक 1 लाख 13 हजार 924 क्विंटल धान की खरीदी

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गौरेला पेंड्रा मरवाही। गौरेला पेंड्रा मरवाही, 23 नवंबर 2023/चालू खरीफ विपणन वर्ष में जिले में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर विगत 1 नवंबर से धान खरीदी का कार्य चल रहा है। जिले में अब तक 23 नवंबर की तिथि में 1 लाख 13 हजार 924 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। धान खरीदी की अधिकतम सीमा 20 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित है। जिले में पंजीकृत किसानों से धान खरीदी के लिए 20 धान उपार्जन केंद्र बनाए गए है।

जिला विपणन अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक धान उपार्जन केंद्र धनौली में 14230.40 क्विंटल, लालपुर में 12298.80 क्विंटल, मेढुका में 12087.60 क्विंटल, पेंड्रा में 10608.40 क्विंटल, मरवाही में 7640.40 क्विंटल, नवागांव (पेंड्रा) में 7476.80 क्विंटल, भर्रीडांड में 6765.60 क्विंटल, खोडरी में 6454.40 क्विंटल,  गौरेला में 6072.80 क्विंटल, सिवनी में 5799.20 क्विंटल, लरकेनी में 5218 क्विंटल, देवरीकला में 4875.60 क्विंटल, तरईगांव में 4138.80 क्विंटल, बंसीताल में 2950.40 क्विंटल, परासी में 2465.60 क्विंटल, तेंदुमूंडा 1875.60 क्विंटल, निमधा में 1766.80 क्विंटल, कोडगार में 528 क्विंटल, जोगीसार में 367.20 क्विंटल और धान उपार्जन केंद्र बस्ती में 303.60 क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोदो-कुटकी का समर्थन मूल्य बढ़ाया

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि वितरण कार्यक्रम में मिलेट्स उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा की। उन्होंने कोदो और कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा की। बघेल ने खरीफ 2023 हेतु कोदो का समर्थन मूल्य 3000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने तथा कुटकी का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3350 रुपए प्रति क्विंटल करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार कोदो तथा कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित नहीं करती है। राज्य सरकार द्वारा कई बार केंद्र से कोदो और कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित करने का आग्रह किया गया लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसकी घोषणा नहीं की गई। इसलिए छत्तीसगढ़ के मिलेट्स उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कोदो- कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कोदो का समर्थन मूल्य जो वर्ष 2022-23 में 3000 प्रति क्विंटल था जिसे खरीफ 2023 हेतु बढ़ाकर 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने तथा कुटकी का समर्थन मूल्य जो 3100 रुपए प्रति क्विंटल था उसे बढ़ाकर 3350 प्रति क्विंटल करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल-

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आज शाम कोदो-कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा पर त्वरित अमल करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो एवं कुटकी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना में खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3200 रूपए प्रति क्विंटल और कुटकी का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3350 रूपए प्रति क्विंटल किया गया है। रागी फसल के लिए भारत सरकार द्वारा खरीफ 2023 हेतु घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 3846 रूपए प्रति क्विंटल के अनुसार उपार्जन किया जाएगा। उपार्जन अवधि का निर्धारण वन विभाग द्वारा किया जाएगा। कोदो-कुटकी एवं रागी का उपार्जन छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से किया जाएगा।

गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में राशि का अंतरण-

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 9.65 करोड़ रूपए अंतरित किए। इस राशि में गोबर विक्रेताओं को 4.93 करोड़ रूपए, गौठान समितियों को 1.45 करोड़ रूपए, स्व-सहायता समूहों की 1.14 करोड़ रूपए की लाभांश राशि के साथ ही गौठान समिति के सदस्यों को 2.26 करोड़ रूपए की मानदेय राशि शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को आज वितरित की गई राशि को मिलाकर 588.83 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष धान की खरीदी 1 नवंबर से प्रारंभ होगी राज्य सरकार द्वारा इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इस साल हम लोगों ने 130 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है, उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे। पिछले साल हम लोगों ने 107 लाख 53 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी की थी, इस साल हम धान खरीदी का नया रिकार्ड बनाएंगे। इस साल भी छत्तीसगढ़ के लोग जोरदार दशहरा-दीवाली मनाने वाले हैं। बघेल ने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की किश्तों का भुगतान भी बिलकुल ठीक समय पर किया जा रहा है। अभी हाल ही में 28 सितंबर को योजना की तीसरी किश्त का भुगतान भी कर दिया गया है। न्याय योजनाओं के अंतर्गत अभी तक पौने दो लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि का भुगतान हितग्राहियों को किया जा चुका है।

गौठानों में अब तक 138.26 क्विंटल गोबर की खरीदी-

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में अब तक 138.26 क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसके एवज में पशुपालक किसानों को अब तक 276.53 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 280.04 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 2 किश्तों में लगभग 30 करोड़ रूपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बोनस का भी भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी के मामले में गौठान समिति की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। 6453 गौठान स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 83 करोड़ रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय किया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रविन्द्र चौबे ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, आदिम जाति विकास मंत्री मोहन मरकाम, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री शामिल हुए भारत-24 के ‘विजन न्यू छत्तीसगढ़‘ कार्यक्रम में

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता से जो वायदें किए गए थे, उनसे ज्यादा काम राज्य सरकार ने अपने पांच वर्षों में किया। मुख्यमंत्री ने आज भारत-24 निजी चैनल के ‘विजन न्यू छत्तीसगढ़‘ कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाया, भूमिहीन मजदूर न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, 

लघु वनोपजों और मिलेट्स की समर्थन मूल्य पर खरीदी, उनका प्रसंस्करण और वैल्यूएडिशन, तेन्दूपत्ता का पारिश्रमिक बढ़ाकर 4000 रूपए प्रति मानक बोरा किया। राज्य सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एक लाख 75 हजार करोड़ रूपए की राशि लोगों की जेब में सीधे डाली गई। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री बघेल ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि नक्सल क्षेत्रों में आदिवासियों, व्यापारियों, युवाओं, पत्रकारों, अधिकारियों-कर्मचारियों से बात कर हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और सुरक्षा की रणनीति अपनायी। इससे जनता का समर्थन मिला और नक्सली एक छोटे से क्षेत्र में सिमटकर रह गए हैं। 

नक्सल क्षेत्रों के अंदरूनी गांवों और अबूझमाड़ में सड़कें बनायी गई। पहले इन क्षेत्रों के निवासी मानते थे कि सड़कें पैरा मिलेट्री फोर्स के लिए बनी है, इसलिए सड़के काट दी जाती थी। लेकिन आज सड़कें इन क्षेत्रों के निवासियों की जरूरत बन गई हैं। क्योंकि उनके दोपहिया, चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर इन्हीं सड़कों पर दौड़ते हैं। शासन की योजनाओं से जनता के पास पैसे पहुंचे, इससे इन क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आया है। बीजापुर क्षेत्र में जहां पहले सायकल के शो रूम नहीं होते थे, वहां आज ट्रैक्टर के आठ-आठ शो रूम हैं। अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वे कराकर ग्रामीणों को मसाहती पट्टे दिए गए, जिससे उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया। उनकी उपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर होने लगी है, भूमि का समतलीकरण हो रहा हैं, 

सिंचाई पंप लग रहे है। स्कूल, अस्पताल जैसी सुविधाएं यहां पर विकसित की गई है। पहले इन क्षेत्रों के लोग बात करने से डरते थे। आज ये आंख से आंख मिलाकर बात करते है। आज इन क्षेत्रों में सबसे बड़ी मांग बैंकों और बच्चों की शिक्षा के लिए स्वामी आत्मानंद स्कूलों की हो रही है। मुख्यमंत्री बघेल ने न्यू छत्तीसगढ़ के विजन के संबंध में कहा कि राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से गरीबों, किसानों, मजदूरों सहित समाज के सभी वर्गों के अनेक योजनाएं प्रारंभ की, जिनसे उन्हें बड़ा संबल मिला है। हमने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सहित अधोसंरचना विकास के काम बड़े पैमाने में किए हैं। अभी और भी काम करने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 300 रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ किए हैं, जहां व्यवसायों के लिए लोगों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है।

आने वाले समय छत्तीसगढ़ के विकास में रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क मील का पत्थर साबित होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 750 से अधिक स्वामी आत्मनंद अंगेजी-हिन्दी स्कूलों में 4.50 लाख विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को धान और गन्ना सहित उनकी उपज का सबसे ज्यादा मूल्य मिल रहा है। हमारी योजनाओं से धान सहित विभिन्न उपजों का रकबा ही नहीं उत्पादन भी बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बीपीएल के साथ एपीएल के राशन कार्ड भी बनाये और उन्हें आधार से लिंक किया गया। यदि परिवार बढ़ता है तो तुरंत राशन कार्ड बनाया जा सकता है। राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चल रही है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कानून का राज है। इस अवसर पर भारत-24 के सीईओ डॉ. जगदीश चन्द्रा सहित चैनल के पदाधिकारी और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आयोजकों की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया।     

केन्द्र सरकार ने धान उपार्जन के लिए अनिवार्य किया है बायोमेट्रिक सिस्टम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की विषम भौगोलिक स्थिति के चलते सुदूर एवं दुर्गम अंचलों के किसानों को बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू होने से धान बेचने में होने वाली परेशानी को देखते हुए केन्द्र सरकार से बायोमेट्रिक सिस्टम को इस वर्ष लागू किए जाने का अनुरोध किया है। केन्द्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 से खाद्यान्न उपार्जन में बायोमेट्रिक सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। इस सिस्टम को छत्तीसगढ़ राज्य के वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में सुव्यवस्थित रूप से लागू करने में होने वाली दिक्कत के चलते किसानों को समर्थन मूल्य पर धान और मक्का बेचने में परेशानी होगी।

छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा ने भारत सरकार के खाद्य सचिव को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ प्रदेश में बायोमेट्रिक आधारित खरीफ प्रणाली को लागू करने के कारण किसानों को होने वाली कठिनाईयों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य के बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्र के दूरस्थ एवं पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इस इलाके के कई स्थानों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा की कमी के चलते बायोमेट्रिक आधारित खाद्यान्न उपार्जन प्रणाली को लागू करने में दिक्कत होगी। खाद्य सचिव वर्मा ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में धान खरीदी के पूर्व किसानों का पंजीयन किया जाता है।

पंजीयन में किसान का आधार नंबर भी होता है। किसानों की भूमि के रकबे का सत्यापन भी ‘भुईयां’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है। धान खरीदी के एवज में राशि का ऑनलाईन भुगतान किसानों के बैंक खातों में होता है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और देश में सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने भारत सरकार को खाद्य सचिव से छत्तीसगढ़ राज्य की उक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बायोमेट्रिक खरीदी सिस्टम को अनिवार्य न करने का अनुरोध किया है।

खाद्य सचिव टोपेश्वर वर्मा द्वारा 21 जुलाई 2023 को उक्त संबंध में भेजे गए पत्र के संबंध में केन्द्र सरकार से अब तक न तो सहमति मिली है न ही बायोमेट्रिक आधारित खरीदी सिस्टम में रियायत दिए जाने का भरोसा दिया गया है। धान खरीदी के लिए केन्द्र सरकार द्वारा बायोमेट्रिक सिस्टम की अनिवार्यता का अन्य कोई विकल्प न होने के कारण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में इस प्रणाली को लागू किए जाने की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और इस संबंध में सभी कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।

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