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मंत्रिपरिषद के निर्णय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

1) मंत्रिपरिषद द्वारा भारत सरकार के खान मंत्रालय के नवीन दिशा-निर्देश और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY)-2024 के संशोधित गाईडलाईन्स के अनुसार छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2015 में आवश्यक संशोधन किये जाने का निर्णय लिया गया है।

इससे न्यास के पास उपलब्ध राशि का न्यूनतम 70 प्रतिशत राशि का व्यय उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र जैसे पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं निःशक्तजन के कल्याण के साथ ही कौशल विकास एवं रोजगार, स्वच्छता, आवास, पशुपालन के समग्र विकास पर किया जाएगा।

2) मंत्रिपरिषद द्वारा साधारण रेत के उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण तथा रेत के उत्खनन एवं नियमन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2019 एवं छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत उत्खनन एवं व्यवसाय (अनुसूचित क्षेत्र हेतु) नियम 2023 को निरसित करते हुए नवीन नियम ‘‘छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम-2025‘‘ का अनुमोदन किया गया।

इससे रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिससे आम जनता को उचित दरों पर रेत उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही रेत उत्खनन में पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रस्तावित नियमों में रेत खदान आवंटन की कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के माध्यम से की जाएगी। इससे राजस्व में भी वृद्धि होगी।

3) कृषि भूमि के बाजार मूल्य दरों के निर्धारण के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य कर पंजीयन विभाग से प्राप्त प्रस्ताव का मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया, जिसके तहत ग्रामीण कृषि भूमि के बाजार मूल्य की गणना के लिए 500 वर्गमीटर तक के भू-खण्ड की दर को समाप्त करते हुए सम्पूर्ण रकबा की गणना हेक्टेयर दर से की जाएगी। भारतमाला परियोजना और बिलासपुर के अरपा भैंसाझार में जिस तरह की अनियमितताएँ सामने आई थीं, उनसे बचने के लिए यह व्यवस्था मददगार होगी। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र की परिवर्तित भूमि का मूल्यांकन सिंचित भूमि के ढाई गुना करने के प्रावधान को विलोपित करने के साथ ही शहरी सीमा से लगे ग्रामों की भूमियों और निवेश क्षेत्र की भूमियों के लिए वर्गमीटर में दरों का निर्धारण किया जाएगा।

4) मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (cscs) को नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-3, ग्राम परसदा में क्रिकेट अकादमी की स्थापना के लिए 7.96 एकड़ भूमि आबंटित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

नवा रायपुर में अत्याधुनिक क्रिकेट अकादमी की स्थापना से राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनके कौशल और प्रतिभा को निखारने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेगी।

छत्तीसगढ़ राज्य में क्रिकेट के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य के कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता अर्जित की है। क्रिकेट अकादमी की स्थापना से राज्य के खिलाड़ियों को क्रिकेट के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा वहीं छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी।


छात्रहित में ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर चिकित्सा प्रवेश नियमों में व्यापक सुधार

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्य में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और चिकित्सकों की नई पीढ़ी के लिए सुलभ रास्ता तैयार करने को लेकर सचेत है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए छात्र हित में नए नियम बनाए गए हैं,जो चिकित्सा स्नातक छात्रों के लिए ऐतिहासिक कदम है। 

यह नियम प्रवेश वर्ष 2025 हेतु हैं। इसके अनुसार चिकित्सा स्नातक (एम.बी.बी.एस., बी.डी.एस. एवं बी.पी.टी.) पाठ्यक्रमों में काउंसलिंग के लिए शासन द्वारा नवीन नियम संशोधन किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस वर्ष से काउंसलिंग प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को अधिक सुविधा एवं पारदर्शिता मिलेगी।

प्राथमिकता में संशोधन

निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रबंधन कोटा एवं एनआरआई कोटा में आरक्षित वर्गों (SC, ST, OBC) की रिक्त सीटों के आवंटन में छत्तीसगढ़ मूल निवासी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बॉन्ड सेवा अवधि में छूट

पूर्व निर्धारित 2 वर्षों के स्थान पर अब न्यूनतम 1 वर्ष की बॉन्ड सेवा अवधि अनिवार्य की गई है।

काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्णत ऑनलाइन

समस्त काउंसलिंग प्रक्रिया अब पूर्ण रूप से ऑनलाइन होगी। सीट आवंटन एवं प्रवेश की सम्पूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएगी।

ओबीसी श्रेणी हेतु आय प्रमाण पत्र में सरलता

ओबीसी वर्ग के लिए आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए प्रमाण-पत्र संबंधित मापदंडों को सरल किया गया है।

ईडब्ल्यूएस श्रेणी की रिक्त सीटें अब सामान्य वर्ग को

यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी की सीटें रिक्त रहती हैं तो उन्हें अब अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को आवंटित किया जाएगा।

प्रत्येक चरण में पंजीयन की सुविधा

काउंसलिंग के प्रत्येक राउंड में पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नए नियमों के अनुसार काउंसलिंग की प्रक्रिया दिनांक 30 जुलाई 2025 से प्रारंभ होगी। यह निर्णय राज्य के चिकित्सा विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने तथा प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पंचायती राज संस्थाएं जितनी सशक्त होंगी, लोकतंत्र भी उतना ही मजबूत होगा : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के पंचायत राज प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि संविधान के 73वें संशोधन के अधिनियमन के प्रतीक स्वरूप भारत में 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस मनाया जाता है। इस संशोधन अधिनियम से स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र की स्थापना के लिए पंचायती राज संस्थान को संवैधानिक स्थिति प्रदान की गई और उन्हें देश में ग्रामीण विकास का कार्य सौंपा गया।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ग्राम पंचायतों को संवैधानिक अधिकार और दायित्व देकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार किया है। छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं ने जमीनी स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता और भागीदारी को साबित किया है। संकट के समय में आंगनबाड़ियों व पीडीएस के माध्यम से हितग्राही परिवारों को राशन पहुंचाना हो या मनरेगा के माध्यम से रोजगार मुहैया कराना, इन सभी कामों में सरकार के साथ पंचायतों ने कदम से कदम मिलाकर काम किया है। पंचायती राज संस्थाएं जितनी सशक्त होंगी, लोकतंत्र भी उतना ही मजबूत होगा।

राजस्व मंत्री ने किया राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन

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रायपुर। प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा निवास पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे लिखित राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन किया। लगभग 1100 पृष्ठों के इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद लोक हित में भू-राजस्व संहिता में अनेकों संशोधन किए गए हैं। संशोधनों के प्रवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा शासकीय परिपत्रों के माध्यम से जो दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, उन सभी का समावेश इस ग्रंथ में किया गया है।



राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लोकार्पण अवसर पर विमोचन करते हुए राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि इस ग्रंथ में राजस्व संबंधी सभी संदर्भों का समावेश होने से राजस्व प्रकरणों के संबंध में यह ग्रंथ मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते हुए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा, इसमें संदेह नहीं। राजस्व मंत्री ने उम्मीद जतायी कि इस ग्रंथ से राजस्व न्यायालयों और अधिवक्ताओं को बहुत सहायता मिलेगी। अथक परिश्रम से तैयार किए गए इस ग्रंथ के लिए राजस्व मंत्री ने ग्रंथ के लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे व पुस्तक प्रकाशन में सहयोगकर्ता अधिवक्ता अभिषेक दुबे को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लेखक विजय कुमार दुबे ने बताया कि ग्रंथ में राजस्व संबंधी मामलों के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी किए गए अद्यतन परिपत्रों तक को समाहित किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह ग्रंथ राजस्व संबंधी प्रकरणों के निपटान में एक संदर्भ पुस्तक के रूप में सर्व संबंधित के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। विद्वान अधिवक्ता दुबे ने बताया कि उनके द्वारा लिखित अनेक पुस्तकों में से यह चौथी पुस्तक है, जिसका विमोचन राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है। इससे पूर्व तीन अन्य पुस्तकों का विमोचन विगत वर्षों में राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है।

अनुसूचित जनजाति 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति 13 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर राज्य सरकार आगामी एक और दो दिसंबर को होने वाले विधानसभा के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में रायपुर में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। इस संशोधन विधेयक में अनुसूचित जनजाति के लिए बत्तीस प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए तेरह और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सत्ताईस प्रतिशत आरक्षण के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव किया गया है। 



साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश से संबंधित आरक्षण संशोधन विधेयक के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया गया। वहीं, राज्य मंत्रिमंडल के अन्य फैसले के तहत जिला खनिज न्यास में उपलब्ध राशि के बीस प्रतिशत हिस्से को सामान्य क्षेत्र में और चालीस प्रतिशत भाग को अधिसूचित क्षेत्र में खर्च करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के द्वितीय अनुपूरक अनुमान से संबंधित छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक को भी बैठक में मंजूरी दी गई। इसे विधानसभा के अगले सत्र में पेश किया जाएगा।

राज्य मंत्रिपरिषद ने आज नवीन मछली पालन नीति को भी मंजूरी दी। इसके अनुसार अब मछली पालन के लिए तालाब या जलाशय की नीलामी नहीं होगी, बल्कि इन्हें मछुवारा समूहों को दस वर्ष के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। इसी तरह, कैबिनेट के एक अन्य फैसले के मुताबिक राज्य वनोपज संघ और निजी निवेशकों के बीच हुए समझौते के आधार पर स्थापित वनोपज संबंधी उद्योगों के उत्पाद को चालीस प्रतिशत की छूट के साथ खरीदा जाएगा। छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड के अंतर्गत खरीदे जाने वाले इन उत्पादों को वन विभाग की इकाई ‘‘संजीवनी’’ और अन्य माध्यमों से बेचा जाएगा।

पंजीकृति भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर आर्थिक सहायता का जोड़ा गया नया प्रावधान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार प्राकृतिक आपदा के विरूद्ध प्रभावित व्यक्तियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की राशि में बढ़ोतरी की गई है। केबिनेट की बैठक में अनुमोदित संशोधन प्रस्ताव के अनुसार कृषि भूमि से गाद/मलबा निकालने हेतु वर्तमान में 12,200 रूपए प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। 



नवीन प्रावधान में इसे बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है। भू-स्खलन/नदी से भूमि हानि के लिए वर्तमान प्रावधान 37,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को नवीन प्रावधान में बढ़ाकर 47,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 6,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 8,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 13,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 17,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, बारहमासी फसल हानि पर वर्तमान में 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 22,500 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।

इसी प्रकार रेशम ( ऐरी, मलबरी, टसर) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 4,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, रेशम (मूगा) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 7,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, टिड्डी नियंत्रण हेतु रसायन स्प्रे पर नवीन प्रावधान राज्य के अंश की सीमा तक प्रावधान किया गया है। बड़े दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 30,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 37,500 रूपए, छोटे दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान में 3,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4,000 रूपए, बड़े सूखे पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 25,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 32,000 रूपए

छोटे सूखे पशु की हानि पर वर्तमान में 16,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 20,000 रूपएपोल्ट्री के लिए वर्तमान प्रावधान 5,000 रूपए प्रति परिवार, 50 रूपए प्रति पक्षी को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10,000 रूपए प्रति परिवार, 100 रूपए प्रति पक्षी किया गया है। इसी प्रकार गौशाला में पशु चारा के लिए वर्तमान प्रावधान 70 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 35 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 80 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़ेपशु, 45 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु, पशुगृह क्षति में 1500 रूपए प्रति शेड को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 3000 रूपए प्रति शेड, सामान्य क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 95,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,20,000 रूपए, पहाड़ी क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 1,01,900 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,30,000 रूपए

पक्का मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 5200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6500 रूपए, कच्चा मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 3200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, झोपड़ी क्षति वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 8000 रूपए, कपड़ा क्षति वर्तमान प्रावधान 1800 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, बर्तन क्षति वर्तमान प्रावधान 2000 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, जनहानि पर वर्तमान प्रावधान 4,00,000 रूपए को नवीन प्रावधान में यथावत रखा गया है। इसी प्रकार अंग हानि (40 से 60 प्रतिशत) पर वर्तमान प्रावधान 59,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 74,000 रूपए, अंग हानि (60 प्रतिशत से अधिक) पर 2,00,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2,50,000 रूपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से कम) वर्तमान प्रावधान 4300 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5400 रूपए

अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से ज्यादा) वर्तमान प्रावधान 12700 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 16000 रूपए, हथकरघा बुनकर को क्षति पर वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए प्रति कारीगर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5000 रूपए प्रति कारीगर, मछुवारों के नाव की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 9600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 15000 रूपए, मछुवारों के नाव की आंशिक क्षति पर 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6000 रूपए, मछुवारों के जाल की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, मछुवारों के जाल की आंशिक क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 3000 रूपए, मछली चारे हेतु इनपुट सब्सिडी पर वर्तमान प्रावधान 8200 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10000 रूपए प्रति हेक्टेयर, पंजीकृत भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर नवीन प्रावधान आपदा की अवधि (30 दिन) तक 02 सदस्य को मनरेगा दर पर आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।  

सीएम की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद बैठक में लिए महत्तवपूर्ण निर्णय

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रायपुर। जिला खनिज संस्थान न्यास से संपादित अधोसंरचना के कार्याें पर व्यय हेतु न्यास निधि में प्राप्त राशि से निश्चित प्रतिशत राशि के बंधन से मुक्त किए जाने के संबंध में छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान नियम 2015 में संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया है।



इसके तहत् डीएमएफ के अन्य प्राथमिकता मद में उपलब्ध राशि का 20 प्रतिशत सामान्य क्षेत्र में तथा 40 प्रतिशत अधिसूचित क्षेत्र में व्यय किए जाने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है, इससे अधोसंरचना के कार्य को गति मिलेगी जिससे प्रदेश में सामाजिक एवं आर्थिक विकास तेजी से होगा।

नवीन मछली पालन नीति में संशोधन किए जाने के विभागीय आदेश का मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया। अब मछली पालन के लिए तालाब/जलाशय की नीलामी नहीं होगी। तालाब/जलाशय  10 वर्ष के लीज पर दिए जाएंगे। तालाब/जलाशय के पट्टा आबंटन में सामान्य क्षेत्र में ढीमर, निषाद, केंवट, कहार, कहरा, मल्लाह के मछुआ समूह एवं मत्स्य सहकारी समिति को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह अनुसूचित जनजाति अधिसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग के मछुआ समूह एवं मत्स्य सहकारी समिति को प्राथमिकता दी जाएगी।

संशोधन प्रस्ताव के अनुसार ग्रामीण तालाब के मामले में अधिकतम एक हेक्टेयर के स्थान पर आधा हेक्टेयर तथा सिंचाई जलाशय के मामले में 4 हेक्टेयर के स्थान पर 2 हेक्टेयर प्रति सदस्य/प्रति व्यक्ति के मान से जल क्षेत्र आबंटित किए जाने का प्रावधान किया गया है। मछली पालन के लिए गठित समितियों का आडिट अब सहकारिता एवं मछली पालन विभाग की संयुक्त टीम करेगी।

राज्य शासन छत्तीसगढ़ राज्य वनोपज संघ एवं निजी निवेशकों के मध्य सम्पादित त्रिपक्षीय एमओयू के आधार पर स्थापित वनोपज आधारित उद्योगों द्वारा जो उत्पाद निर्माण किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड के अंतर्गत 40 प्रतिशत की छूट के साथ क्रय करते हुए संजीवनी एवं अन्य माध्यमों से विक्रय हेतु शासन द्वारा निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के फलस्वरूप उन उद्योगों को जो वनोपज आधारित उत्पादों का निर्माण करना चाहते हैं उनको बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हर्बल के अंतर्गत अच्छी क्वालिटी के उत्पादों का विक्रय हो सकेगा।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा, अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण संशोधन विधेयक 2022 के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था में प्रवेश में आरक्षण संशोधन विधेयक के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

द्वितीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2022-23 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक 2022 का अनुमोदन किया गया।

ग्राम सेरीखेड़ी रायपुर पटवारी हल्का नम्बर 77 में स्थित शासकीय भूमि 9.308 हेक्टयर भूमि का आबंटन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन साधारण प्रकृति के प्रकरणों को जनहित में वापस लिए जाने हेतु निर्धारित अवधि 31 दिसंबर 2017 को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2018 करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

मुख्यमंत्री जी के स्वेच्छानुदान राशि  70 करोड़ से बढ़ाकर 110 करोड़ किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

 

राज्योत्सव के साथ ही एक नवम्बर से होगी धान खरीदी

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रायपुर। राज्योत्सव के साथ ही खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में प्रदेश के पंजीकृत किसानों से 01 नवम्बर 2022 से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य प्रारंभ होगा। इस वर्ष लगभग 110 लाख मीट्रिक धान का उपार्जन अनुमानित है, जिसके लिए किसानों के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल/रकबा में संशोधन 01 जुलाई 2022 से प्रारंभ है जो 31 अक्टूबर 2022 तक चलेगा। चालू खरीफ विपणन वर्ष के लिए अब तक 24 लाख 62 हजार किसानों का पंजीन हो चुका हैं। इस वर्ष 60 हजार 878 नवीन किसानों ने पंजीयन कराया है। नवीन पंजीयन तथा संशोधन कार्य 31 अक्टूबर तक चलेगा।



खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के अनुरूप खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 के लिए एक नवम्बर 2022 से धान, खरीदी शुरू हो जाएगी। किसानों से सुगमता पूर्वक धान खरीदी के लिए राज्य शासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां एवं व्यवस्थाएं कर ली गई है। धान खरीदी के साथ निरंतर मानीटरिंग भी किया जाएगा। सचिव वर्मा ने बताया कि 24.05 लाख किसानों का गत खरीफ वर्ष से कैरी फॉरवर्ड तथा 60878 किसानों का नवीन पंजीयन इस तरह 24.62 लाख किसानों का पंजीयन किया गया है।

प्रदेश में इस वर्ष लगभग 30.25 लाख हेक्टे. रकबा का गत खरीफ वर्ष से कैरी फारवर्ड तथा 0.49 लाख हेक्टेयर रकबे का नवीन पंजीयन के साथ 30.44 लाख हेक्टेयर रकबा पंजीयन हुआ है। खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की खरीदी की अधिकतम सीमा पिछले वर्ष के अनुसार 15 क्वि. प्रति एकड़ लिंकिंग सहित निर्धारित की गई है। धान खरीदी हेतु बारदाने की व्यवस्था कर ली गई है। समितियों में बारदाना पहुचाने हेतु निर्देशित किया जा चुका है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मिल पंजीयन का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। 

धान खरीदी केन्द्रों में अवैध धान की आवक रोकने तथा संवेदनशील उपार्जन केन्द्रों की पहचान हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त के संबंध में जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिया गया है। धान खरीदी हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तिथि भी निर्धारित कर दी गयी है। धान खरीदी हेतु सॉफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान कर लिया गया है. जिसका ट्रायल रन आगामी सप्ताह में किया जाना है। प्रदेश में धान खरीदी हेतु प्रारंभिक तैयारियां सुनिश्चित कराने जिला कलेक्टरों एवं जिला विपणन अधिकारियों को शासन एवं विपणन संघ स्तर पर निर्देश भी प्रसारित किए जा चुके हैं। धान खरीदी की मॉनिटरिंग हेतु जिला स्तर पर नोडल अधिकारी भी शासन द्वारा नियुक्त किए जा चुके हैं। इस प्रकार प्रदेश में 01 नवम्बर 2022 से सुचारु रुप से धान खरीदी हेतु राज्य शासन द्वारा आवश्यक तैयारियाँ एवं व्यवस्थाएं कर ली गयी है।

छत्तीसगढ़ में उद्योग-व्यापार को मिली रफ्तार, युवाओं के लिए बढ़ता रोजगार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते पौने चार साल में उद्योग-व्यापार क्षेत्रों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार होने से जहां एक ओर उद्योग-व्यापार को रफ्तार मिली है, वहीं दूसरी ओर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने नई औद्योगिक नीति 2019-24 की घोषणा करते हुए समय-समय पर अनेक आवश्यक संशोधन भी किए हैं। राज्य में बड़े उद्योगों की स्थापना और संचालन को प्रोत्साहित तो किया ही जा रहा है लेकिन कृषि और वन आधारित उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं नई औद्योगिक नीति में वंचित वर्गों के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। 


गौरतलब है कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के मापदंडों में छत्तीसगढ़ देश के प्रथम
6 राज्यों में शामिल है। दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन नियमों का सरलीकरण किया गया है, जिसके अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन भू-प्रब्याजी में 30 फीसदी की कमी की गई, जबकि भू-भाटक में 33 फीसदी की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों एवं औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर 10 एकड़ तक आबंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड किए जाने के लिए नियम तैयार किए गए हैं।


इन वर्गों के लिए विशेष प्रावधान

नयी औद्योगिक नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, कृषि उत्पादक समूहों, तृतीय लिंग के लोगों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया गया है। पूर्व में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए औद्योगिक नीति में किसी तरह का विशेष प्रावधान नहीं था। इस दिशा में ध्यान देते हुए राज्य सरकार ने ओबीसी प्रवर्ग के लिए 10 प्रतिशत भू-खंड आरक्षण का प्रावधान किया है। इन्हें भू-प्रीमियम दर के 10 प्रतिशत दर तथा 1 प्रतिशत भू-भाटक पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

एम.एस.एम.ई. सेक्टर को प्रोत्साहन



छत्तीसगढ़ में बीते वर्षों में एम.एस.एम.ई. सेक्टर को प्रोत्साहन देने विशेष पहल की गई है। इसमें सेवा श्रेणी के उद्यमों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, सेवा केन्द्र, बीपीओ, 3-डी प्रिटिंग, बीज ग्रेडिंग जैसे 16 सेवाओं को सामान्य श्रेणी के उद्योगों की तरह ही औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं मेडिकल उपकरणों और कई अन्य चिकित्सा व स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सामग्री स्थानीय स्तर पर ही बनाए जा सकने की संभावना को देखते हुए इन क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

स्टार्टअप को किया जा रहा है प्रोत्साहित 



 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्टार्टअप को भी प्रोत्साहित करने अनेक सराहनीय पहल की जा रही हैं। इसके अंतर्गत स्टार्टअप पॉलिसी की स्थापना, स्टार्टअप के लिए टैक्स में छूट और अनुदान का प्रावधान, इन्क्यूबेटर्स की स्थापना कर स्टार्टअप के लिए को-वर्किंग स्पेस, मेंटरशिप, फंडिंग और टेक्नोलॉजी सपोर्ट के प्रावधान किए गए हैं। इन्हें सराहते हुए हाल ही में केन्द्रीय उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा स्टेट्स स्टार्टअप ईको सिस्टम के विकास के लिए एस्पायरिंग लीडर के रूप में सम्मानित किया गया है।

लगेंगे बायो एथेनॉल प्लांट

छत्तीसगढ़ में जैविक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ प्रदूषण कम करने, कृषि उत्पादों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल समेत अनेक लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए बायो एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। इस कड़ी में बायो एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए 18 निवेशकों के साथ 3300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू किया गया है। इन बायो एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना से यहां 2 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया होगा। वहीं धान से एथेनॉल की अनुमति मिलने पर इससे बड़े पैमाने पर एथेनॉल बन सकता है। वहीं उत्पादक किसानों को बेहतर दाम भी मिलेगा।

राज्य में 200 फूड पार्क की स्थापना का लक्ष्य

मुख्यमंत्री बघेल का विजन छत्तीसगढ़ में रोजगार के अवसर बढ़ाने और नई संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए योजनाएं बनाने और गतिविधियों के संचालन को लेकर रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 200 फूड पार्कों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। फूड पार्क विकासखंडों में स्थापित किए जाएंगे। अब तक 112 विकासखण्डों में भूमि का चिन्हांकन कर ली गई है। 52 विकासखंडों में भूमि का अधिपत्य उद्योग विभाग को दिया गया है। इधर रायपुर के पंडरी में 350 करोड़ रुपये की लागत से 10 एकड़ में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इधर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण की लघु इकाईयां स्थापित की जा रही हैं, जहां स्थानीय उपलब्धता के आधार पर प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सुविधा दी जा रही है।   

पौने चार साल के भीतर ही 19 हजार करोड़ से अधिक का निवेश

छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की वजह से ही छत्तीसगढ़ में बीते पौने चार वर्षों में 2 हजार 218 नयी औद्योगिक इकाईयां स्थापित हुई हैं, जिसमें 21 हजार 457 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ तथा 40 हजार 324 लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के लिए 177 एमओयू भी किए गए हैं, जिसमें 89 हजार 597 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसमें से 90 से अधिक इकाईयों ने उद्योग स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इन औद्योगिक इकाईयों में 90 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।

एकल खिड़की प्रणाली से ऑनलाइन सेवाएं

छत्तीसगढ़ में उद्योग विभाग द्वारा एकल खिड़की प्रणाली से 56 सेवाएं ऑनलाइन दी जा रही हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत 82 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं। इसमें दुकान के पंजीयन से लेकर कारोबार के लायसेंस प्राप्ति जैसी सेवाएं शामिल हैं। गुमाश्ता एक्ट के अंतर्गत प्रति वर्ष नवीनीकरण की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिले।

वर्जन

हमने छत्तीसगढ़ में उद्योग-व्यापार को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। राज्य में उद्योगों की स्थापना और संचालन के नियमों का सरलीकरण किया गया है। नयी औद्योगिक नीति 2019-24 लागू होने के बाद औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का नया वातावरण निर्मित हुआ है। कृषि और वन आधारित उद्योगों को प्राथमिकता देने के साथ ही निवेश के लिए विशेष पैकेज और रियायतें दी गई हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। 

यह प्रयास नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने में मददगार बनेंगे।दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन नियमों का सरलीकरण किया गया है, जिसके अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन भू-प्रब्याजी में 30 फीसदी की कमी की गई, जबकि भू-भाटक में 33 फीसदी की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों एवं औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर 10 एकड़ तक आबंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड किए जाने के लिए नियम तैयार किए गए हैं।

इन वर्गों के लिए विशेष प्रावधान

नयी औद्योगिक नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, कृषि उत्पादक समूहों, तृतीय लिंग के लोगों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया गया है। पूर्व में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए औद्योगिक नीति में किसी तरह का विशेष प्रावधान नहीं था। इस दिशा में ध्यान देते हुए राज्य सरकार ने ओबीसी प्रवर्ग के लिए 10 प्रतिशत भू-खंड आरक्षण का प्रावधान किया है। इन्हें भू-प्रीमियम दर के 10 प्रतिशत दर तथा 1 प्रतिशत भू-भाटक पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

एम.एस.एम.ई. सेक्टर को प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ में बीते वर्षों में एम.एस.एम.ई. सेक्टर को प्रोत्साहन देने विशेष पहल की गई है। इसमें सेवा श्रेणी के उद्यमों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, सेवा केन्द्र, बीपीओ, 3-डी प्रिटिंग, बीज ग्रेडिंग जैसे 16 सेवाओं को सामान्य श्रेणी के उद्योगों की तरह ही औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं मेडिकल उपकरणों और कई अन्य चिकित्सा व स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सामग्री स्थानीय स्तर पर ही बनाए जा सकने की संभावना को देखते हुए इन क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

स्टार्टअप को किया जा रहा है प्रोत्साहित

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्टार्टअप को भी प्रोत्साहित करने अनेक सराहनीय पहल की जा रही हैं। इसके अंतर्गत स्टार्टअप पॉलिसी की स्थापना, स्टार्टअप के लिए टैक्स में छूट और अनुदान का प्रावधान, इन्क्यूबेटर्स की स्थापना कर स्टार्टअप के लिए को-वर्किंग स्पेस, मेंटरशिप, फंडिंग और टेक्नोलॉजी सपोर्ट के प्रावधान किए गए हैं। इन्हें सराहते हुए हाल ही में केन्द्रीय उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा स्टेट्स स्टार्टअप ईको सिस्टम के विकास के लिए एस्पायरिंग लीडर के रूप में सम्मानित किया गया है।

लगेंगे बायो एथेनॉल प्लांट

 छत्तीसगढ़ में जैविक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ प्रदूषण कम करने, कृषि उत्पादों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल समेत अनेक लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए बायो एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। इस कड़ी में बायो एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए 18 निवेशकों के साथ 3300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू किया गया है। इन बायो एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना से यहां 2 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया होगा। वहीं धान से एथेनॉल की अनुमति मिलने पर इससे बड़े पैमाने पर एथेनॉल बन सकता है। वहीं उत्पादक किसानों को बेहतर दाम भी मिलेगा।

राज्य में 200 फूड पार्क की स्थापना का लक्ष्य

मुख्यमंत्री बघेल का विजन छत्तीसगढ़ में रोजगार के अवसर बढ़ाने और नई संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए योजनाएं बनाने और गतिविधियों के संचालन को लेकर रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 200 फूड पार्कों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। फूड पार्क विकासखंडों में स्थापित किए जाएंगे। अब तक 112 विकासखण्डों में भूमि का चिन्हांकन कर ली गई है। 

52 विकासखंडों में भूमि का अधिपत्य उद्योग विभाग को दिया गया है। इधर रायपुर के पंडरी में 350 करोड़ रुपये की लागत से 10 एकड़ में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इधर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण की लघु इकाईयां स्थापित की जा रही हैं, जहां स्थानीय उपलब्धता के आधार पर प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सुविधा दी जा रही है।   

पौने चार साल के भीतर ही 19 हजार करोड़ से अधिक का निवेश

छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की वजह से ही छत्तीसगढ़ में बीते पौने चार वर्षों में 2 हजार 218 नयी औद्योगिक इकाईयां स्थापित हुई हैं, जिसमें 21 हजार 457 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ तथा 40 हजार 324 लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के लिए 177 एमओयू भी किए गए हैं, जिसमें 89 हजार 597 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसमें से 90 से अधिक इकाईयों ने उद्योग स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इन औद्योगिक इकाईयों में 90 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।

एकल खिड़की प्रणाली से ऑनलाइन सेवाएं

छत्तीसगढ़ में उद्योग विभाग द्वारा एकल खिड़की प्रणाली से 56 सेवाएं ऑनलाइन दी जा रही हैं। ई-डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत 82 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं। इसमें दुकान के पंजीयन से लेकर कारोबार के लायसेंस प्राप्ति जैसी सेवाएं शामिल हैं। गुमाश्ता एक्ट के अंतर्गत प्रति वर्ष नवीनीकरण की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिले।

वर्जन

हमने छत्तीसगढ़ में उद्योग-व्यापार को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। राज्य में उद्योगों की स्थापना और संचालन के नियमों का सरलीकरण किया गया है। नयी औद्योगिक नीति 2019-24 लागू होने के बाद औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का नया वातावरण निर्मित हुआ है। कृषि और वन आधारित उद्योगों को प्राथमिकता देने के साथ ही निवेश के लिए विशेष पैकेज और रियायतें दी गई हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। यह प्रयास नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने में मददगार बनेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना की स्वीकृति में आंशिक संशोधन करते हुए, ऑप्शन-1 के अनुसार क्रियान्वयन की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह देश और प्रदेश दोनोें के हित में होगा। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्रालय के 28 जून 2021 के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा है कि मेेरे द्वारा 23 मार्च 2022 के माध्यम से परीक्षण/सर्वे रिपोर्ट में वर्णित ऑप्शन-1 के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार की सहमति प्रदान करते हुए



संशोधित एलाइमेंट अनुसार परियोजनास्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। किन्तु, इस विषय में भारत सरकार की ओर से सकारात्मक कार्यवाही किए जाने का संदेश/पत्राचार राज्य सरकार को अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। केन्द्रीय रेल मंत्री को मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में आगे लिखा है कि आपके ध्यान में इस तथ्य को भी लाना चाहूंगा कि वर्ष 2015 में दक्षिण-पूर्ण मध्य रेलवे के द्वारा कराए गए सर्वे का एलाइमेंट भी ऑप्शन-1 के ही अनुरूप रहा है। यहां यह लेख करना प्रासंगिक है कि, चूंकि उपरोक्त परियोजना पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) अंतर्गत क्रियान्वित की जानी है

अतएव परियोजना की व्यवहारिकता समग्रता पर आधारित होना अपेक्षित है। यह भी कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट अनुसार एलाइमेंट में उपरोक्त संशोधन उपरांत लागत पर भी परियोजना व्यवहारिक पायी गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से पुनः केन्द्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया है कि कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना की स्वीकृति में आंशिक संशोधन करते हुए, ऑप्शन-1 के अनुसार क्रियान्वयन की स्वीकृति प्रदान की जाए।

आदिम जन जातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 के प्रावधानों का किया गया सरलीकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 की जटिलताओं को दूर करते हुए नया संशोधित अधिनियम 2022 तैयार किया गया है। इस संशोधन के माध्यम से अधिनियम को वर्तमान समय के अधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर इससे अब छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को अपनी जमीन या खेत पर स्थित वृक्षों को काटने और इसके विक्रय की राशि बैंकों से आहरित करने के संबंध में पहले की अपेक्षा अधिक अधिकार और सुविधा मिल गया है।


पुराने अधिनियम के कारण आदिवासियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था
, जिससे उनके समय और पैसों की बर्बादी होती थी। कई बार सूखे वृक्ष के काटने की अनुज्ञा समय पर न मिल पाने के कारण आंधी, तूफान, बारिश से वृक्ष के गिरने पर आदिवासियों के घर भी क्षतिग्रस्त हो जाते थे और उन्हें आर्थिक क्षति भी पहुंचती थी। संशोधित अधिनियम में इन दिक्कतों को दूर किया गया और वृक्ष कटाई से संबंधित नियमों का सरलीकरण किया गया है। 

नये नियमों से आदिवासी समुदाय को काफी राहत मिलेगी। आदिवासी समाज ने अपने हित में किए गए इन प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है। संशोधित अधिनियम 2022 के अनुसार अब आदिवासियों को अपनी जमीन या खेतों में वृक्ष कटाई की अनुज्ञा संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से लेनी होगी जबकि पहले अनुज्ञा देने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास था। इसी प्रकार अब अनुज्ञा देने से पूर्व वन एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण का प्रावधान रखा गया है। 

जबकि पुराने अधिनियम में अनुज्ञा लेने की प्रक्रिया में वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा कई बार स्थल जांच करने का कठिन प्रावधान था। पूर्व अधिनियम के तहत पहले एक वर्ष में मात्र रूपए 50 हजार रूपए मूल्य की लकड़ी काटी जा सकती थी। अब संशोधित अधिनियम में वित्तीय सीमा समाप्त कर दी गई है। पहले के अधिनियम के तहत वृक्षों की कटाई के पश्चात् लकड़ी के कीमत का भुगतान कलेक्टर एवं भूमिस्वामी के संयुक्त बैंक खाता में किया जाता था। अब लकड़ी की कीमत का भुगतान भूमिस्वामी के बैंक खाता में सीधे किया जाएगा।

पुराने अधिनियम के अनुसार संयुक्त खाता से एक माह में मात्र रूपए 5 हजार रूपए की राशि भूमिस्वामी आहरित कर सकता था तथा राशि आहरण हेतु कलेक्टर से हस्ताक्षर प्राप्त करने में अत्यधिक समय लगता था। लेकिन संशोधित अधिनियम के अनुसार अब भूमिस्वामी अपने बैंक खाते का स्वविवेक से उपयोग कर सकता है। पूर्व अधिनियम के तहत कटाई की अनुज्ञा एवं राशि के आहरण के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। अब नये नियमों द्वारा समय-सीमा का प्रावधान रखा गया है।

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