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किसी भी कीमत पर न बिगड़े कानून-व्यवस्था : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि प्रदेश में किसी भी कीमत पर कानून और व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। यदि ऐसा होता है तो जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम जनता के बीच पुलिस की सख्त और संवेदनशील छवि दिखनी चाहिए। जनता का विश्वास पुलिस पर रहे, इसके लिए एक मेकैनिज्म बनाने की आवश्यकता है।

जनता का जितना पुलिस पर विश्वास रहेगा उतना ही अच्छा होगा। मुख्यमंत्री साय ने आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गृह एवं जेल विभाग के कार्यो की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ सहित गृह एवं जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानून जो जुलाई में लागू हो रहे हैं इसके लिए समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां कर ली जाए। प्रदेश में नशाखोरी, जुआ और सट्टा पर सख्ती से रोक लगाई जाए। अवैध शराब, जुआ, सट्टा से संबंधित शिकायतें नहीं आनी चाहिए, इसके लिए जिले स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए। जुआ और सट्टा बंद होने चाहिए। चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और कंपनियों से रिकवरी कर निवेशकों को उनकी राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पुलिस प्रशासन की धमक हर क्षेत्र में दिखनी चाहिए। माओवाद का अंतिम रूप से खात्मा करना हमारा लक्ष्य है। माओवादी आंतक के खिलाफ हमारा अभियान लगातार जारी रहेगा। इस अभियान में पुलिस को अच्छी सफलता मिल रही है। इसके लिए पुलिस बधाई के पात्र है। माओवाद के खिलाफ पुलिस को अच्छी सफलता मिल रही है, यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के तहत पुलिस कैम्पों के पांच किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों के विकास के लिए राशि की कमी नही होगी। इस गांवों के विकास के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। इस योजना के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए राशि की कमी नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नवगठित जिलों में जहां अजाक थाने नहीं है, वहां शीघ्र अजाक पुलिस थाने खोले जाएंगे। पुलिस विभाग में रिक्त पदों की भर्ती और पदोन्नति की कार्रवाई शीघ्र की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस की क्षमता विकास के लिए अधिकारियों और जवानों के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। पुलिस को सुदृढ़ और दक्ष बनाने के लिए राज्य सरकार के स्तर से संसाधनों की कोई कमी नही होगी।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि लॉ एन्ड ऑर्डर की स्थिति से निपटने हेतु एसओपी बनाने की आवश्यकता है ताकि लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति निर्मित होने पर तत्काल कार्यवाही की जा सके और इसके लिए पुलिस एवं प्रशासन को प्रशिक्षित भी किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जिलों का दौरा करेंगे और कार्याे की समीक्षा भी करेंगे। पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा ने बैठक में बताया कि प्रदेश में अपराधों में निरंतर कमी आ रही है। प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा हेतु चार महिला थाने एवं महिला विरुद्ध अपराध अनुसंधान की 06 इकाई कार्यरत हैं। 

बैठक में बताया गया कि इसके अतिरिक्त 553 महिला हेल्प डेस्क एवं सभी 33 जिलों में परिवार परामर्श केंद्र स्थापित हैं। अभिव्यक्ति एप के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को आपातकालीन सेवा एवं ऑनलाइन शिकायत की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इस वर्ष के बजट में 5 महिला थानों को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रदेश के चार जिलो रायगढ़, कोरबा, राजनांदगांव एवं कबीरधाम जिले में चार नवीन साइबर पुलिस थाने खोले जाएंगे। मानव तस्करी की रोकथाम हेतु राज्य स्तर पर एन्टी ह्यूमेन ट्रेफिकिंग ब्यूरो की स्थापना की जाएगी।

साइबर अपराधों में कार्रवाई करते हुए 22.12 करोड़ रूपए की राशि ठगों के पास जाने से बचाई गई। प्रदेश में छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी अनेक प्रयास किया जा रहे हैं। गुम बच्चों के मामले में 92 प्रतिशत बच्चों को रेस्क्यू करने में सफलता मिली है। मानव तस्करी के मामलों में लगभग 99 प्रतिशत पीड़ितों का रेस्क्यू किया गया है। गुम बच्चों की तलाश हेतु विशेष अभियान चलाकर गुम बच्चों को बरामद कर उसके अभिभावकों को सौंपने हेतु ऑपरेशन मुस्कान भी चलाया जा रहा है।

 

विशेष लेख : महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ राज्य में महिला सुरक्षा के प्रति बेहत संवेदनशील हैं। महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री बघेल के निर्देशों के अनुसार महिलाओं के संरक्षण के लिए कानून का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और अपराधियों पर कड़ी कार्यवाही की जा रही है। इसके लिए राज्य के प्रत्येक थाने में एक महिला सेल का गठन किया गया है और महिलाओं के संबंधित अपराधों की स्वतंत्र जांच भी की जा रही है।

महिला अपराध से जुड़े लोगों को नहीं मिलेगी शासकीय नौकरी

महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने ये घोषणा भी की है कि महिला अपराध से जुड़े व्यक्ति को शासकीय नौकरी नहीं मिलेगी।

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु किये जा रहे प्रयास

छत्तीसगढ़ में गृह( पुलिस) विभाग द्वारा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विभाग कई योजनाओं का संचालन कर रहा है और जन जागरूकता अभियान भी चला रहा है।

अभिव्यक्ति ऐप

महिलाओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ’’अभिव्यक्ति’’ महिला सुरक्षा ऐप विकसित किया है। इस मोबाइल एप्प का शुभारंभ 01 जनवरी 2022 को किया गया है।

अभिव्यक्तिजन-जागरूकता अभियान

छत्तीसगढ़ की महिलाओं को कानून में प्रदत्त अधिकारों के बारे में जागरूक करने हेतु अभिव्यक्ति जन जागरूकता अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है।

महिला विरुद्ध अपराध अनुसंधान इकाई (IUCAW)

राज्य के 06 जिलों में IUCAW का गठन किया गया है।

महिला थाना

राज्य के 04 जिलों में पृथक से महिला थाना संचालित है।

थाना स्तर पर महिला सेल

राज्य के समस्त 455 पुलिस थानों/चौकी में महिला सेल का गठन किया गया है।

 जिला स्तर पर महिला प्रकोष्ठ

महिलाओं से संबंधित प्रकरणों एवं शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु जिला स्तर पर महिला प्रकोष्ठ का गठन किया गया है।

सीसीटीव्ही कैमरा

सार्वजनिक स्थानों में लगभग 50,000 सीसीटीव्ही कैमरे लगाये गये हैं।

पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना

यौन उत्पीड़न/अन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं/उत्तरजीवियों के लिए क्षतिपूर्ति योजना - 2018 राज्य में लागू है, जिसमें अधिकतम 10 लाख रूपये तक राहत राशि दिये जाने का प्रावधान है।


मेजर थैलेसिमिया से पीड़ित मयंक के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार, बोन मेरो ट्रांसप्लांट में 41 लाख रूपए का आएगा खर्च

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब वो दिन लद गए जब किसी गरीब मरीज को इलाज के लिए पैसे न होने पर जान गंवानी पड़ती थी। प्रदेश की संवेदनशील सरकार की जनमहत्वाकांक्षी योजनाओं ने गरीब से गरीब परिवार में गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के इलाज के लिए आर्थिक सहायता का रास्ता खोला है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर शुरू मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना और डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से सरकार गंभीर एवं जटिल रोगों के उपचार में लगने वाली बड़ी-बड़ी राशि जरूरतमंदों को प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज एक पिता के निवेदन पर मेजर थैलेसिमिया से पीड़ित नौ साल के मासूम के बोन मेरो ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख 80 हजार रूपए देने का आश्वासन दिया है। इसमें से 18 लाख रूपए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से पहले ही जारी की जा चुकी है।

रायपुर के न्यू राजेन्द्र नगर में रहने वाले रवि गोस्वामी का नौ साल का बेटा मयंक दस माह की उम्र से ही मेजर थैलेसिमिया से पीड़ित है। उसे हर 15 दिनों में खून चढ़ाना पड़ता है। बेंगलुरू के एनएच मजूमदार शॉ मेडिकल सेंटर ने उसकी विस्तृत जांच के बाद बीमारी के इलाज के लिए बोन मेरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है जिसमें करीब 41 लाख रूपए का खर्च आएगा। मजदूरी और गैस चूल्हा सुधारने का काम करने वाले रवि गोस्वामी के लिए इतनी बड़ी राशि का इंतजाम सपना ही था।

गोस्वामी आज गुढ़ियारी में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में पहुंचे और मुख्यमंत्री से अपने बेटे के इलाज के लिए आर्थिक सहायता का निवेदन किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से 18 लाख रूपए उसे मिल चुके हैं, पर लाख कोशिशों के बाद भी वह शेष राशि का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने उनके हालात जानकर तत्काल ही शेष राशि की व्यवस्था का भरोसा दिलाया। रवि गोस्वामी ने इस संवेदनशीलता और सहृदयता के लिए अपने परिवार की ओर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।

विशेष लेख : भरोसे का बजट: मुख्यमंत्री बघेल की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के कल्याण के लिए संवेदनशील पहल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2023-24 के बजट में महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के कल्याण के लिए संवेदनशील पहल की गई है। इसके साथ ही उन्होंने निराश्रितों, दिव्यांगों एवं विधवा तथा परित्यक्ता महिलाओं के साथ उभयलिंगी समुदाय का भी विशेष ध्यान रखा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बढ़ाया मानदेय

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मांगों को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने महिलाओं तथा बच्चों के पोषण एवं टीकाकरण हेतु प्रदेश भर में संचालित 46 हजार 660 आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली मासिक मानदेय की राशि 6 हजार 500 रूपए प्रति माह से बढ़ाकर 10 हजार रूपए की है।

इसी तरह  आंगनबाड़ी सहायिकाओं का मानदेय 3 हजार 250 रूपए से बढ़ाकर 5 हजार और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 4 हजार 500 रूपए से बढ़ाकर 7 हजार 500 रूपए प्रति माह करने का प्रावधान बजट में किया है। बजट के इस प्रावधान से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं तथा मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का होली का उल्लास दोगुना हो गया है। प्रदेश भर की आंगनबाड़ी से जुड़ी महिलाओं में हर्ष की लहर है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की राशि बढ़ाकर 50 हजार की गई

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संवेदनशील पहल करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों के विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि को 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने की घोषणा बजट में की है। इसके लिए बजट में 38 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं के रोजगार उपलब्ध कराने शुरू होगी कौशल्या समृद्धि योजना

बजट में महिलाओं के आर्थिक समृद्धि और स्व-रोजगार के लिए नई योजनाओं का प्रावधान भी किया है। महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कौशल्या समृद्धि योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इसके लिए नवीन मद में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

बाल संप्रेक्षण गृह से बाहर जाने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए शुरू होगी मुख्यमंत्री बाल उदय योजना

बजट में बाल संप्रेक्षण गृह से बाहर जाने की आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की घोषणा करने के साथ ही वहां से बाहर जाने वाले युवक-युवतियों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री बाल उदय योजना शुरू करने का प्रावधान किया है। इसके लिए बजट में एक करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा यूनिफाईड डिजिटल एप्लीकेशन योजना शुरू करने के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पोषण, बाल विकास के साथ अधोसंरचना विकास के लिए प्रावधान

बजट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुनर्वास और रोजगार के साथ पोषण, बाल विकास और अधोसंरचना विकास के लिए प्रावधान किया गया है। नगरीय क्षेत्रों में 100 आंगनबाड़ियों के लिए 12 करोड़ रूपए, मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के लिए 160 करोड़ रूपए, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के लिए 8 करोड़ रूपए, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के लिए 844 करोड़ रूपए, एकीकृत बाल संरक्षण योजना के लिए 124 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाकर 500 रूपए प्रति माह की गई

मुख्यमंत्री बघेल ने निराश्रितों, बुजुर्गाे, दिव्यांगों एवं विधवा तथा परित्यक्ता महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए उनको सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत दी जाने वाली मासिक पेंशन की राशि 350 रूपए से बढ़ाकर 500 रूपए प्रति माह की है। इससे इन वर्गों को जीवन-यापन के लिए सहारा मिल सकेगा।

उभयलिंगी व्यक्तियों के लिए नवा पिल्हर योजना होगी शुरू

मुख्यमंत्री ने बजट में उभयलिंगी व्यक्तियों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए नई पहल करते हुए नवा पिल्हर योजना शुरू करने की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उभयलिंगी व्यक्तियों के शिक्षण-प्रशिक्षण तथा रोजगार हेतु प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता की जायेगी। इसके लिए बजट में 25 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

सियान हेल्पलाईन सेंटर की स्थापना की जाएगी

वरिष्ठ नागरिकों, उभयलिंगी व्यक्तियों, विधवा परित्यक्ता महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की समस्याओं के ऑनलाईन समाधान हेतु सियान हेल्पलाईन सेंटर एवं टोल फ्री नंबर की स्थापना के लिए एक करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के संचालन हेतु नवीन सेटअप का प्रावधान भी बजट में किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस ऐतिहासिक बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग हेतु 2 हजार 675 करोड़ रूपए और समाज कल्याण विभाग हेतु 1 हजार 125 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं सहित जरूरतमंद, कमजोर वर्गों के लिए भी मुख्यमंत्री बघेल ने व्यापक प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने इसके माध्यम से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़की परिकल्पना को साकार रूप देने की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है और लोक आकांक्षाओं पर खरा उतरते हुए भरोसे का बजट प्रस्तुत किया है।

सफलता की कहानी अबूझमाड़ में फैलता संचार नेटवर्क

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रायपुर। छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ कहे जाने वाले क्षेत्र नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिलों जहां तक पहुंचपाना बेहद मुश्किल था। वहां के निवासी लम्बे समय से मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं ने इस नामुमकिन को मुमकिन में बदल दिया है। पिछले चार सालों में इस क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की किरण हर घर तक पहुंच रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के वनांचल के विकास के लिए विकास, विश्वास और सुरक्षा की रणनीति अपनाई गई है।

अबूझमाड़ में इस रणनीति के तहत सड़क और संचार नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। शासन द्वारा वनांचल के दुर्गम, पहुंच विहीन, संवेदनशील स्थानों पर जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं और मोबाइल नेटवर्क को अपग्रेड करने का भी काम किया जा रहा है। जिससे कोई भी व्यक्ति इंटरनेट सुविधा से अछूता न रह सके।

दंतेवाड़ा जिले के सीमा से लगे अबूझमाड़ इलाकों में भी अब तेजी से सड़क और संचार नेटवर्क की सुविधा मिल रही है। दन्तेवाड़ा में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से संचार सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का काम तेजी से कराया जा रहा है। दन्तेवाड़ा सीमा से लगे अबूझमाड़ में बसे गांव मालेवाही ऐसा क्षेत्र हैं, जहां वर्षों से मोबाइल नेटवर्क नहीं था। जिससे यहां रहने वाले ग्रामीणजन देश-दुनिया की उपलब्धियों, डिजीटीकरण और ऑनलाइन सुविधाओ से वंचित थे। गांव के लोगों को पहले एंबुलेंस बुलाने या आपातकालीन स्थिति में कई बार पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर सफर करना पड़ता था तब बड़ी मुश्किल से बात हो पाती थी। मोबाइल टावर लगाए जाने से उन्हें आसानी से संचार सुविधा मिल रही है। मालेवाही में मोबाइल टॉवर स्थापित होने से ग्रामीण जनों में उत्साह देखने को मिल रहा है। टॉवर लगने से सूचनाओं के आदान-प्रदान अब सहज हो गया है।

इन्टरनेट की सुविधा मिलने से ग्रामीण जनजीवन में अब तेजी से जागरूकता आ रही है। आने वाले समय में ग्रामीण अंचल में रह रहे हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा दुर्गम और पिछड़े इलाकों में तेजी से सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इन सब कार्यों से राज्य शासन की योजनाओं की पहुंच गरीब तबकों तक पहुंचना आसान हुआ है।

संवेदनशील गांवों में बह रही विकास की बयार : निर्माण एवं विकास कार्यों से ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

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बीजापुर। छत्तीसगढ़ सरकार की विकास, विश्वास और सुरक्षा की नीति के असर अब बस्तर अंचल के संवेदनशील एवं अति संवेदनशील गांवों में भी देखने को मिलने लगा है। वर्षों से विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर इन गांवों में अब विकास की बयार बहने लगी है, जिसके चलते यहां के जन-जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है बीजापुर जिले के संवेदनशील एवं अति संवेदनशील गांवों में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत तेजी से निर्माण व विकास के कार्य कराए जा रहे है, जिसके चलते गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिलने लगा है।



बीजापुर जिले में विगत पौने चार वर्षों में मनरेगा के तहत् 26 हजार 184 कार्य स्वीकृत एवं संचालित कराए गए, जिसके चलते 77 लाख 22 हजार मानव दिवस रोजगार सृजित हुआ है। इससे जिले के एक लाख 19 हजार 306 परिवारों के 02 लाख 54 हजार 378 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हुआ है, जिसमें से 100 दिवस का रोजगार पूर्ण करने वाले परिवारों की संख्या 29 हजार 500 है। बीजापुर जिले के 19 अति संवेदनशील ग्राम पंचायतों में प्रशासन की पहुंच सुनिश्चित हुई। 2017-18 में जहां पहुंचविहीन गांवों की संख्या 40 थी आज उनमें से 19 ग्राम पंचायतों में रोजगारमूलक कार्य कराये जा रहे है।



भैरमगढ़ ब्लॉक के मदपाल, पिटेपाल, बेचापाल, बांगोली, ताकीलोड़, चिंगेर, बैल वहीं बीजापुर ब्लॉक के पदमूर, पुसनार, पालनार, बुरजी, कमकानार, पेदाकोरमा, उसूर ब्लॉक के पुजारीकांकेर, कोरसागुड़ा, चिन्नागेलूर, पेल्लमपल्ली, तर्रेम एवं भोपालपटनम ब्लॉक के संड्रा ग्राम पंचायतों में मनरेगा अंतर्गत रोजगार मूलक कार्य किये जा रहे है। जिले में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के दौरान मनरेगा के तहत् 32908 परिवारों के 78 हजार 479 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। जिले में मनरेगा के साथ अन्य योजनाओं की राशि का अभिसरण कर 15 करोड़ 27 लाख रूपए की लागत के 21 चेक डेम निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गयी है। 



जिसमें 17 चेक डेम पूर्ण किये जा चुके हैं। वहीं 7 करोड़ 43 लाख 32 हजार की लागत से 105 पुलिया निर्माण स्वीकृत किया गया है। जिनमें से 87 पुलिया पूर्ण हो चुके है। 18 निर्माणाधीन है। नवीन पंचायत भवन निर्माण हेतु 05 करोड़ 39 लाख 57 हजार रुपये की लागत से 27 नवीन पंचायत भवन स्वीकृत किया गया था। अब तक 07 पंचायत भवन पूर्ण किया जा चुका है। 16 भवनों का कार्य प्रगति पर है। जिले में 80 करोड़ 54 लाख 67 हजार की लागत से 538 तालाब निर्माण कार्य स्वीकृत किये गए थे। 353 तालाब पूर्ण किया जा चुका है। 185 अप्रारंभ है। 



जिले में मनरेगा के तहत् 23 करोड़ 36 लाख 14 हजार की लागत से 282 आंगनबाड़ी भवन निर्माण स्वीकृत किये गए थे। जिनमें 58 भवन पूर्ण हो चुका है। 150 में कार्य प्रगति पर है। जिसमें 5 पंचायतों के 300 बच्चे लाभान्वित हो रहे है। वहीं सुपोषण अभियान के तहत् एनीमिक महिला एवं कुपोषित बच्चों को लाभान्वित किया जा रहा है। जिले में 04 करोड़ 83 लाख 33 हजार की लागत से 47 उचित मूल्य की दुकान सह गोदाम निर्माण कार्य स्वीकृत किये गये थे। अब तक 18 उचित मूल्य की दूकान पूर्ण हो चुका है। शेष 29 कार्य प्रगति पर है। 18 दुकानों से 4 हजार लोगों को सुगमता पूर्वक राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

जिले में मनरेगा के तहत् 7 करोड़ 11 लाख 22 हजार रूपए की लागत से 140 नहर निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गयी है, जिसमें से 98 नहर निर्माण कार्य पूर्ण होने के फलस्वरूप किसानों को सिंचाई करने में सहूलियत हो रही है। मनरेगा से 53 करोड़ 18 लाख 25 हजार रूपए लागत के 2745 डबरी निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गयी है, जिसमें से 1826 डबरी निर्माण कार्य पूर्ण किये जा चुके है। इन डबरी निर्माण कार्यों के पूर्ण होने के फलस्वरूप सम्बन्धित किसानों को मत्स्यपालन एवं सिंचाई सुविधा मिली है। साग-सब्जी की खेती को बढ़ावा मिला है। जिले में मनरेगा के तहत् 09 करोड़ 49 लाख 70 हजार रूपए लागत के 337 कुआँ निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गयी है। जिसमें 51 कुआँ निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है, जिससे पेयजल एवं सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है।


दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील होकर उनके उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए : राज्यपाल

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जगदलपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा है कि हमें दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील होकर उनके विकास और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। बस्तर प्रवास के दौरान कल राज्यपाल जगदलपुर स्थित महावीर भवन में आयोजित निःशुल्क दिव्यांग सहायता शिविर के समापन कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल और कृत्रिम अंग प्रदान किए। राज्यपाल ने दिव्यांगजनों की सहायता और समस्याओं के निराकरण के लिए ब्लॉक में दिव्यांग सेवा शिविरों का आयोजन करने के निर्देश जिला कलेक्टर को दिए।



इस बीच, राज्यपाल से आज चित्रकोट में कुडुक समाज के जिला अध्यक्ष हरिराम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर इस समुदाय को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की मांग की। अपने बस्तर संभाग के प्रवास के दौरान राज्यपाल आज कोंडागांव पहुंची। इस दौरान राज्यपाल से केशकाल विकासखंड के ग्राम धनोरा के ग्रामीणों ने मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर धर्मांतरण की स्थिति से अवगत कराया।

बदल रहा छत्तीसगढ : अब अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच रहा प्रशासन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में बदलाव की बयार देखने को मिल रही है। एक ओर स्वयं मुख्यमंत्री बघेल भेंट-मुलाकात अभियान के तहत प्रदेश की ग्रामीण अंचलों में पहुंच रहे हैं। वहीं प्रशासन भी अब प्रदेश के संवेदनशील और अंदरूनी इलाकों तक पहुंच रहा है। इसी कड़ी में कोंडागांव जिले के बड़ेराजपुर विकासखण्ड के अंतिम छोर पर बसे संवेदनशील ग्राम बस्तरबुडरा एवं भालूपानी में जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पहुंचे। 



यहां जिला कलेक्टर और एसपी ने ग्रामीणों के साथ वक्त बिताया साथ ही उन्हें उपहार दिये। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’’ का नारा दिया है। इसे छत्तीसगढ़ का ध्येय वाक्य भी बनाया गया है। इस ध्येय को ध्यान में रखते हुए शासन-प्रशासन निरंतर कार्य भी कर रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को कोण्डागांव के बड़ेराजपुर विकासखण्ड के अंतिम छोर पर बसे संवेदनशील ग्राम बस्तरबुडरा एवं भालूपानी में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मावा गिरदा कोंडानार‘ 

कार्यक्रम में शामिल होने कलेक्टर दीपक सोनी एवं पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल पहुंचे। पहली बार जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को अपने बीच पाकर ग्रामीणों की खुशी देखते बन रही थी। जिला कलेक्टर एवं एसपी ने भी ग्रामीणों की भावनाओं को समझते हुए उनके साथ वक्त बिताया साथ ही स्थानीय युवाओं और स्कूली बच्चों को खेलने के लिए व्हॉलीबॉल, क्रिकेट किट का वितरण करते हुए सभी युवाओं को टी-शर्ट बांटे। वहीं स्कूली बच्चों को चॉकलेट एवं नोटबुक भी गिफ्ट में दिए।

इस अवसर पर कलेक्टर सोनी ने ग्रामीणों से मिलकर उनकी समस्याओं के संबंध में जाना एवं ग्रामीणों से गांव में चल रहे विकास कार्यों के संबंध में जानकारी लेते हुए समस्याओं के निदान हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने युवाओं को कहा कि प्रशासन हर कदम में ग्रामीणों के साथ है। उन्होंने गत वित्तीय वर्ष की अपेक्षा मनरेगा द्वारा स्वीकृत कार्यों की संख्या को दोगुना करते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं इसका लाभ प्रत्येक व्यक्ति को दिलाने हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने राजीव मितान क्लब के सदस्यों से भी मुलाकात करते हुए उन्हें ग्राम के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।



पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा कि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन लोगों की सहायता हेतु सदैव तत्पर है। मावा गिरदा कोंडानार (मेरा खुशहाल कोण्डागांव) का उद्देश्य विश्वास, विकास एवं सुरक्षा प्रदान करना है। जिसके तहत उन्होंने बच्चों को पुलिस के पास जाने से होने वाले संकोच को दूर करने के लिए शिक्षकों को स्कूली बच्चों को निकटतम थाने में शैक्षणिक भ्रमण कराने को कहा। उन्होंने यहां के युवाओं को पुलिस सेवा, थल सेना, सीमा सुरक्षा बल एवं सीआरपीएफ से जुड़कर देश की सेवा करने को प्रोत्साहित किया।

मोटर साइकिल से कलेक्टर-एसपी पहुंचे भालूपानी, लगाई चौपाल:

इस दौरान कलेक्टर एवं एसपी भालूपानी मार्ग पर सड़क निर्माण के सर्वेक्षण एवं ग्रामीणों से मिलने मोटरसाइकिल में सवार होकर भालूपानी पहुंचे। जहां उन्होंने खाट पर बैठकर चौपाल का आयोजन किया। चौपाल में आये भालूपानी और टपरापानी के ग्रामीणों ने पहली बार अपने बीच कलेक्टर एवं एसपी को पाकर हर्ष व्यक्त किया साथ ही गांव में बिजली, पानी एवं सड़क की समस्या के संबंध में जानकारी दी। जिस पर कलेक्टर द्वारा जल्द से जल्द वन विभाग के माध्यम से सड़क निर्माण, गांव में पेयजल हेतु दो बोर खोदने एवं जल्द से जल्द आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के निर्देश दिए। विद्युत संबंधी समस्या हेतु कलेक्टर ने तुरंत क्षेत्र के उप अभियंता को बुलाकर विद्युत लाइनों के विस्तार हेतु निर्देश दिए।

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