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अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अनुसूचित जाति वर्ग के पांच युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में ‘नालंदा परिसर’ के निर्माण की भी बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है।

बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया।

बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, दिलीप लहरिया, शेषराज हरवंश, उतरी गणपत जांगड़े, कविता प्राण लहरे, हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है।

बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं बसव राजू, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव शहला निगार, रोहित यादव, कमलप्रीत सिंह, रीना बाबा साहेब कंगाले, आर. प्रसन्ना, शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


लोकतंत्र को जीवित रखने एवं सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि लोकतंत्र की हत्या के उस काले दिन को हमारी भावी पीढ़ी भी जाने, समझे और उससे सीख ले। आपातकाल के दौर को याद करते हुए भावुक हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कालखंड मेरे जीवन से गहराई से जुड़ा है। यह मेरे लिए मात्र एक घटना नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत पीड़ा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहे। उस समय लोकतंत्र सेनानियों के घरों की स्थिति अत्यंत दयनीय थीकई बार घर में चूल्हा तक नहीं जलता था। ऐसे अनेक परिवारों को मैंने स्वयं देखा है। उन्होंने कहा कि निरंकुश सत्ता ने उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया था, नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे। वास्तव में, वह लोकतंत्र का काला दिन था, जिसका दंश हमारे परिवार ने झेला है और जिसे मैंने स्वयं जिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानी परिवारों के सदस्यों से भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार लोकतंत्र सेनानी परिवारों को सम्मान देने का कार्य कर रही है। इन परिवारों को प्रतिमाह 10 हजार से 25 हजार रुपए तक की सम्मान राशि दी जा रही हैयह उनके संघर्ष और बलिदान को नमन करने का एक विनम्र प्रयास है।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आपातकाल के इतिहास को जानें, पढ़ें और समझें कि किस प्रकार उस कालखंड में संविधान को कुचला गया था। लोकतंत्र को जीवित रखने और सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के संविधान और लोकतंत्र पर आपातकाल एक ऐसा कलंक है, जिसे इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज किया गया है। आपातकाल थोपकर न केवल संविधान को निष्क्रिय कर दिया गया, बल्कि मौलिक अधिकारों को समाप्त कर लोकतंत्र की आत्मा को कुचल दिया गया।

उन्होंने कहा कि उस समय देश को एक खुली जेल में बदल दिया गया था, जिसमें भय और आतंक का वातावरण था। एक लाख से अधिक लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद कर दिया गया, और उन्हें यातनाएं दी गईं। यह केवल राजनीतिक दमन का दौर नहीं था, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना को समाप्त करने का सुनियोजित प्रयास था।

डॉ. सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आपातकाल के विषय में शोध करें, पढ़ें और समझें कि लोकतंत्र की रक्षा हेतु कितने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। भविष्य में लोकतंत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हमें सदैव जागरूक और सजग रहना होगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का सबसे शर्मनाक और काला दिन था। इस दिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को जिस तरह से कुचला गया, उसका कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं मिलता। संविधान में मनमाने ढंग से संशोधन किए गए, जिससे देश की आत्मचेतना और नागरिक अधिकारों का दमन हुआ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित जनजागरूकता रैली में भी भाग लिया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने आपातकाल पर आयोजित विशेष प्रदर्शनी का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान की दमनकारी नीतियों, मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतंत्र के हनन को चित्रों एवं दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है, जिसे विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को लोकतंत्र और संविधान के महत्व को समझाने में सहायक सिद्ध होगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायकगण पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, मोतीलाल साहू, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने, प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर तिवारी, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लोकतंत्र सेनानी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर पटवारी पद से बर्खास्त

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दुर्ग। कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने पटवारी हल्का नंबर 50 तहसील दुर्ग सुश्री इन्द्रा मनोचा को उनके विरूद्ध संस्थित विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा पटवारी पद से बर्खास्त किया है। कलेक्टर ने संविधान के अनुच्छेद 311 (2) के अनुसार सुश्री इन्द्रा मनोचा को सुनवाई तथा लिखित अभिकथन अवसर प्रदान किया था।

सुश्री इन्द्रा मनोचा द्वारा लिखित अभिकथन पर कलेक्टर द्वारा विधिवत् विचार किया गया। विचारोपरांत आरोप की गंभीरता को देखते हुए सुश्री इन्द्रा मनोचा को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 10 (नौ) के तहत् शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

पंचायती राज संस्थाएं जितनी सशक्त होंगी, लोकतंत्र भी उतना ही मजबूत होगा : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के पंचायत राज प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि संविधान के 73वें संशोधन के अधिनियमन के प्रतीक स्वरूप भारत में 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस मनाया जाता है। इस संशोधन अधिनियम से स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र की स्थापना के लिए पंचायती राज संस्थान को संवैधानिक स्थिति प्रदान की गई और उन्हें देश में ग्रामीण विकास का कार्य सौंपा गया।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ग्राम पंचायतों को संवैधानिक अधिकार और दायित्व देकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार किया है। छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं ने जमीनी स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता और भागीदारी को साबित किया है। संकट के समय में आंगनबाड़ियों व पीडीएस के माध्यम से हितग्राही परिवारों को राशन पहुंचाना हो या मनरेगा के माध्यम से रोजगार मुहैया कराना, इन सभी कामों में सरकार के साथ पंचायतों ने कदम से कदम मिलाकर काम किया है। पंचायती राज संस्थाएं जितनी सशक्त होंगी, लोकतंत्र भी उतना ही मजबूत होगा।

बाबा साहेब द्वारा दिया गया संविधान देश के लोगों की सबसे बड़ी ताकत : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि देश के लोगों की सबसे बड़ी ताकत बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिया गया हमारा संविधान हैं। हमारा संविधान हमें अधिकार सम्पन्न बनाता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी रायपुर में संविधान निर्माता, भारतरत्न बाबा साहेब अंबेडकर की 132वीं जयंती के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए इस आशय के विचार प्रकट किए। मुख्यमंत्री ने इसके पहले अंबेडकर चौक स्थित बाबा साहेब अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, वहीं दूसरी तरफ बाबासाहेब अंबेडकर दबे कुचले  समाज को अधिकार दिलाने के लिए संगठित कर संघर्ष कर रहे थे। बाबासाहेब ने समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों को शिक्षित और संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी। बघेल ने कहा कि बाबा साहेब ने यह महसूस किया कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी कमजोरी शिक्षा की है। उन्होंने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि हम पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। वैचारिक दृष्टि से हम बहुत ऊंचे हैं, लेकिन हमारा व्यवहार वैसा नहीं है। हमारे समाज में मनुष्यों के साथ भेद-भाव किया जाता है, समानता का व्यवहार नहीं किया जाता। बाबा साहेब सहित देश के अनेक महापुरूषों ने भारतीय समाज की इस बुराई को महसूस किया और इसके विरूद्ध लड़ाई लड़ी।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने दलितों, शोषितों और पीड़ितों की आवाज बनकर उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बाबा साहेब जैसे महापुरूष सदियों में एक बार पैदा होते है, उन्होंने हमें शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करोका मंत्र दिया। उनके यही विचार हमें संघर्ष करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने भगवान बुद्ध के प्रज्ञा, करूणा और मैत्री के संदेश को आत्मसात किया। आज समाज को इसकी सबसे बड़ी आवश्यकता है। बाबा साहेब द्वारा दिया गया संविधान हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता का अवसर देता है।

संविधान के चलते हमें आरक्षण मिला। बाबा साहेब ने समाज में बदलाव लाने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में लाखों लोगों ने नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने जाति प्रमाण पत्र का सरलीकरण किया है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां यदि माता-पिता के पास जाति प्रमाण पत्र है, तो नवजात शिशु को उसका जाति प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। यदि किसी के पास 50 साल का रिकार्ड नहीं है तो ग्राम सभा अथवा शहरी क्षेत्रों में सामान्य सभा से प्रस्ताव पारित होने पर जाति प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था की गई है। समाज द्वारा नया रायपुर में जमीन की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को जमीन के मूल्य 10 प्रतिशत राशि तथा अन्य वर्गों को 15 प्रतिशत की राशि देने पर जमीन आबंटित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज शासकीय भूमि लेना चाहे तो जमीन चिन्हित कर लें, निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमीन आबंटित की जाएगी। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में गुरू घासीदास संग्रहालय, शहीद वीर नारायण स्मारक और विश्व स्तरीय स्कूल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में तथागत संदेश पत्रिका और भारत का संविधान शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों द्वारा जानकारी दी गई कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री बघेल द्वारा अंबेडकर जयंती के अवसर पर की गई घोषणा के अनुसार कार्यों को स्वीकृति प्राप्त हो गई है। इन कार्यों की स्वीकृति पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सार्वजनिक जयंती समारोह समिति द्वारा मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया गया।

मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष मंगल भवन के लिये 50 लाख रूपये और देवेन्द्रनगर स्थित बौद्ध विहार में ऑडिटोरियम निर्माण के लिए 50 लाख रुपए की राशि देने, अंबेडकर चौक में नगर निगम द्वारा बाबा साहेब की 20 फ़ीट ऊंची नई प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। ये सभी कार्य स्वीकृत हो गए हैं। इस अवसर पर संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, रायपुर नगर पालिका निगम के महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री महेंद्र छाबड़ा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के.पी.खांडे, जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक के अध्यक्ष पंकज शर्मा, नगर निगम रायपुर के पार्षद सुंदर जोगी सहित अनेक पार्षद तथा श्रीमती शकुन डहरिया, रतनलाल डांगी, आयोजन समिति के अध्यक्ष दिलीप वासनिकर सहित समिति के अनेक पदाधिकारी और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हलबी और छत्तीसगढ़ी में संबोधित किया

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रायपुर। मुख्यमंत्री ने कहा ---- हमर भारत के सबले बड़े तिहार, गणतंत्र दिवस के बेरा म हमर सियान मन ल, दाई-दीदी मन ल, भाई-बहिनी- संगवारी अउ नोनी-बाबू मन ल जय जोहार !!

आज हमर संविधान के जय-जयकार करे के दिन हवय। आज जम्मो रहवइया मन, जम्मो मनखे मन के घलोक जय-जयकार करे के दिन हे। काबर के गणतंत्र के बिचार म जम्मो मनखे के अधिकार समाय हवय। इही हमर संविधान के खूबसूरती हे जेखर बर हमर पुरखा मन सहादत दीन अउ अंगरेज मन ल खदेड़ के हमन ल आजादी दिलाइस। ओखर पाछू अइसन संविधान बनाइन जेला खुद हम भारत के लोगमन ह, खुद ल अरपित करे हन। याने के हर मनखे के संविधान हे जेखर सेती मतदाता मन के वोट ले सरकार बनथे। अइसन संविधान अउ लोकतंत्र ल बचाय के जिम्मेवारी अब हमर अउ अवइया पीढ़ी के हवय।

 

गुरु घासीदास बाबा के संदेशों में मिलती है संविधान में लिखे समानता के अधिकार की झलक: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड के ग्राम सुरपा बेल्हरी में सतनाम धर्म के प्रणेता संत गुरु घासीदास बाबा की जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास के समाज में एकता, भाईचारे और समरसता के संदेश का समाज के लोगों को संगठित करने में विशेष योगदान है। इस अवसर पर उन्होंने गुरु घासीदास बाबा का स्मरण करते हुए जीवन की दिशा सकारात्मक रखने की सलाह दी। 


उन्होंने देश के संविधान का उदाहरण दिया जिसमें समानता पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान में लिखे समानता के अधिकार गुरु घासीदास बाबा के संदेशों में भी परिलक्षित होते हैं। उन्होंने पंथी का जिक्र किया, जिसमें लिखे सभी उपदेश छत्तीसगढ़ी में हैं। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि बाबा गुरू घासीदास ने छत्तीसगढ़ में वृहद स्तर पर कार्य किया है और छत्तीसगढ़ के गौरव को भी बढ़ाया है।

इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए बताया कि 31 मार्च तक राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किश्त किसानों को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा शासन विद्या के मंदिर को बेहतर से बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। जीर्णाेद्धार किए गए स्कूलों में गोबर के पेंट से रंग रोगन का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए छत्तीसगढ़ शासन कार्य कर रहा है। हमारे राज्य के किसान, युवा एवं नागरिक समृद्ध हो इसके लिए बेहतर से बेहतर कदम उठाए जा रहे हैं ताकि समावेशी विकास को गति मिल सके। इस अवसर पर जिला पंचायत दुर्ग के उपाध्यक्ष अशोक साहू, ओएसडी आशीष वर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि व ग्रामीण जन उपस्थित थे।

राज्यपाल सुश्री उइके ने राज्य विधानसभा के 15वें सत्र आहूत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये, 

 


01 दिसंबर 2022 को पूर्वान्ह 11:00 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा का 15वां सत्र आहूत करने के विधानसभा से प्राप्त प्रस्ताव पर आज यहां हस्ताक्षर किए हैं। यह सत्र 01 और 02 दिसंबर 2022 को आहूत किया जाएगा।

फिलहाल जारी रहेगा आर्थिक आधार पर आरक्षण

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नई दिल्ली। देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण आगे भी जारी रहेगा। उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विभिन्न व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के साथ ही सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को उचित ठहराया है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए पांच न्यायाधीशों की पीठ में से तीन न्यायाधीशों ने आरक्षण के पक्ष में अपना फैसला दिया। इस तरह बहुमत के आधार पर सुनाए गए फैसले के तहत आर्थिक आधार पर आरक्षण फिलहाल जारी रहेगा।



गौरतलब है कि इस संबंध में एक सौ तीनवें संविधान संशोधन में प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान को जनवरी 2019 में संसद में मंजूरी दी गई थी। हालांकि, इसके तत्काल बाद कुछ संस्थाओं ने इस संशोधन को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण को जारी रखने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी महासचिव बी.एल. संतोष ने अपने ट्वीट संदेश में कहा है कि सामाजिक न्याय की दिशा में यह एक बड़ा निर्णय है।

नवनियुक्त पदाधिकारी समाज की तरक्की के लिए कार्य करें : डॉ. टेकाम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के नव नियुक्त अध्यक्ष के.पी खांडे एवं सदस्य सर्वश्री श्रीराम पप्पु बघेल, संतोष सारथी और रमेश पेगवार ने आज न्यू राजेन्द्र नगर स्थित सांस्कृतिक भवन में बाबा गुरूघासीदास की पूजा-अर्चना कर पदभार ग्रहण किया। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया की उपस्थिति में नव नियुक्त पदाधिकारियों को शपथ दिलाई। मंत्री द्वय ने नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर समाज के प्रतिनिधियों द्वारा भी नवनियुक्त पदाधिकारियों और अतिथियों का स्वागत किया।



आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि संविधान के अधिकार के तहत आयोग में अध्यक्ष और पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आयोग के नवनियुक्त पदाधिकारियों का दायित्व है कि वे समाज की तरक्की के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग की तेजी से तरक्की के लिए पृथक से विभाग बनाने का निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार की स्पष्ट सोच है कि समाज आगे बढ़े और तरक्की करे। डॉ. टेकाम ने कहा कि समाज को तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सबसे बड़ा हथियार शिक्षा है। 

उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में बेहतर शिक्षा के लिए स्वामी आत्मानंद हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन किया जा रहा है। कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों को स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जा रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए जागरूक होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि बाबा गुरूघासीदास के आशीर्वाद से समाज की उन्नति और विकास हो रहा है। बाबा गुरूघासीदास ने समाज में अन्याय, अत्याचार को दूर करने का काम किया। 



उन्होंने कहा कि बाबा साहब अम्बेडकर ने संविधान का निर्माण कर सभी को समानता का अधिकार दिया। संविधान की व्यवस्था से समाज को लाभ मिलेगा। बाबा साहब अम्बेडकर ने दलित, गरीब, महिलाओं, श्रमिकों को अधिकार दिलाने के लिए कार्य किया। इस अवसर पर अनुसूचित जाति आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती पदमा मनहर, उपाध्यक्ष औषधि पादप बोर्ड गुरू खुशवंत गोसाई, अतिरिक्त महाधिवक्ता बिलासपुर श्रीमती मीना शास्त्री, अध्यक्ष चरोदा नगर निगम निर्मल कोसरे, सदस्य श्रम कल्याण असंगठित कर्मकार मंडल आनंद गिलहरे, बाल संरक्षण आयोग की सदस्य श्रीमती पुष्पा पटेल, अध्यक्ष राजश्री सद्भावना समिति श्रीमती सकुन डहरिया सहित डॉ. जे. आर. सोनी, सुंदरलाल जोगी, डी. एस. पात्रे, जी. आर. वाघमारे, एम. डी. माहिलकर एवं अन्य जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।


बच्चों को लैंगिक शोषण से बचाने मददगार बनें-चुप्पी तोड़ें

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रायपुर। बच्चों के अच्छे शरीरिक, मानसिक, भावनात्मक और समाजिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि हर स्तर पर उनके हितों और अधिकारों की रक्षा पर ध्यान दिया जाए। भारतीय संविधान में भी बच्चों के हित और अधिकारों के संरक्षण के लिए कई प्रावधान किये गए हैं। इनमें संविधान का अनुच्छेद 15 का खंड (3) राज्यों को बालकों के लिए विशेष उपबंध करने के लिए सशक्त करता है। जिसके तहत महिलाओं के लिए आरक्षण और बच्चों की मुफ्त शिक्षा जैसे प्रावधान किये जा सकते हैं।



इसके साथ ही बच्चों पर लैंगिक हमले, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने के लिए विशेष अधिनियम लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 लागू किया गया है। जिसे सामान्य रूप से पोक्सो एक्ट के नाम से जाना जाता है। बालकों का लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरूपयोग जघन्य अपराध हैं। इंटनेट के बढ़ते उपयोग के साथ इस प्रकार के अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिस पर प्रभावी मॉनिटरिंग और करवाई करने की आवश्यकता है।

पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों का लैंगिक शोषण करना या उसका प्रयास करना, अश्लील साहित्य हेतु बच्चे का उपयोग करना अथवा इन कृत्यों को करवाना गंभीर अपराध माना गया है। यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बालक तथा बालिकाओं दोनों पर समान रूप से लागू होता है। इस कानून के तहत प्रकरणों के लिए विशेष अदालत नामित किये गए हैं, जिन्हें हम सामान्य भाषा में फास्ट ट्रैक कोर्ट के नाम से जानते हैं। इनमें तेजी से सुनवाई होती है और दोषी को शीघ्र सजा मिलती है। अब इस कानून में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। 

ऐसे मामलों की सुनवाई का विचारण बंद कमरे में किये जाने की भी व्यवस्था की गई है। इस अधिनियम के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग का जिम्मा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को प्रदान किया गया है। इस कानून के तहत ऐसी घटनाओं को छुपाना या सूचना ना देना भी अपराध माना गया है और 6 माह से 1 वर्ष तक की कैद का भी प्रावधान है। यदि यह अपराध बच्चे के संरक्षक द्वारा किया जाता है तो उसे और भी ज्यादा गंभीर माना गया है। इसके लिए उसे आजीवन कारावास या कम से कम 10 वर्ष तक कैद हो सकती है। 

साथ ही जुर्माने की राशि से पीड़ित के पुनर्वास और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए भी उपबंध में प्रावधान किया गया है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में बच्चों के विरूद्ध लैंगिक अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है तथा उसे गंभीर स्तर तक परिभाषित कर दण्ड के प्रावधान किये गये हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत अश्लील साहित्य के प्रयोजनों के लिए बच्चों का उपयोग करना अपराध घोषित करते हुए उसके लिए दण्ड के प्रावधान किये गये हैं। बच्चों के प्रति इस प्रकार के अपराधों को करने के लिए किसी को दुष्प्रेरणा देना याने उकसाना या प्रेरित करना भी दण्डनीय अपराध घोषित किया गया है।

यदि किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध की जानकारी है एवं वह सूचना नहीं देता है तो उसे भी सूचना देने में विफल रहने के लिए दण्ड का प्रावधान किया गया है। अधिनियम के तहत बच्चों की पहचान प्रकट करने वाली किसी भी सूचना को मीडिया द्वारा प्रकट करना भी प्रतिबंधित किया गया है। अधिनियम की धारा 23 के अंतर्गत मीडिया के लिए प्रक्रिया निर्धारित करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी प्रमाणों के बिना किसी बच्चे के संबंध में कोई रिपोर्ट या ऐसी टीका टिप्पणी नहीं कर सकेगा, जिससे बच्चे की प्रतिष्ठा हनन या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन हो।

किसी भी मीडिया से ऐसा कोई भी ब्यौरा प्रकाशित नहीं किया जा सकता, जिससे पीड़ित बच्चे की पहचान जैसे नाम, पता, फोटो, परिवार का विवरण, विद्यालय, पड़ोस या अन्य कोई विशेष सूचना प्रकट हो जाये। इसका तात्पर्य यह है कि पीड़ित बच्चे की पहचान प्रकट नहीं होनी चाहिए। मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्र संबंधी सुविधाओं के प्रकाशक या स्वामी संयुक्त रूप से और पृथक रूप से अपने कर्मचारी के किसी ऐसे कार्य जिसमे उक्त धाराओं का उल्लंघन हो उत्तरदायी माना जायेगा। इसके उल्लंघन की दशा में न्यायालय द्वारा दोषी पाने जाने पर कम से कम 6 माह से 1 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

आवश्यक है कि बालकों की निजता, सम्मान और गोपनीयता का अधिकार भी संरक्षित हो और इसके लिए जरूरी है कि समाज के सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझें। किसी आपत्तिजनक पोस्ट को रीट्वीट करना, साझा करना या फॉरवर्ड करना भी आपको अपराधी बना सकता है। बच्चें का लैंगिक शोषण बहुत गंभीर अपराध है, इसकी रोकथाम में मददगार बनें। याद रखिये कि बच्चों का लैंगिक शोषण चुप्पी के अंधेरे में ही पनपता है इसलिये चुप्पी तोड़ें और ऐसी घटनाओं का पता लगने पर निकटतम पुलिस थाने या 1098 पर सूचना दें।

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