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आध्यात्मिक चिंतन : शब्द ऊँचे हों, आवाज नहीं

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छत्तीसगढ़।रायपुर। मनुष्य के जीवन में संवाद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हम अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव शब्दों के माध्यम से ही प्रकट करते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी बात मनवाने के लिए आवाज़ ऊँची कर लेते हैं।

इस संदर्भ में कहा गया है – “हमारे शब्द ऊँचे हों, आवाज़ नहीं।” यह वाक्य न केवल व्यवहारिक बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थ भी समेटे हुए है।

“हमारे शब्द ऊँचे हों, आवाज नहीं — क्योंकि फूल बरसाया जाता है, शोले नहीं।”

यह कथन केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक जीवन-दृष्टि है। आज जब समाज में संवाद की जगह शोर, तर्क की जगह आक्रोश, और भाषा की जगह भाषण लेता जा रहा है, तब यह विचार हमें आत्मचिंतन के लिए आमंत्रित करता है।

शब्द की शक्ति— सृष्टि और संवाद से श्राप तक

आदी सनातन दर्शन में कहा गया है — “वागर्थाविव संपृक्तौ” अर्थात शब्द और उसका अर्थ कभी अलग नहीं होते। वेदों की ऋचाएँ हों या शिव बाबा की मुरली (ईश्वरीय ज्ञान), सभी इस बात पर बल देती हैं कि शब्द न केवल संवाद का माध्यम हैं, बल्कि चेतना के संप्रेषण का सेतु भी है।

शब्द ब्रह्म हैं। उन्हीं से सृजन हुआ, उन्हीं से सृजन बचा है। जब हम शब्दों को संयम से, करुणा से, विनम्रता से प्रयोग करते हैं, तो वे आशीर्वाद बनते हैं। जब हम उन्हें गुस्से, तिरस्कार और क्रोध में बोलते हैं, तो वही शब्द श्राप बन जाते हैं।

 ऊँची आवाज़ नहीं, ऊँचे विचार चाहिए

गर्व, अहंकार और क्रोध में डूबी आवाज़ चाहे जितनी भी ऊँची हो, वह किसी को जीत नहीं सकती। लेकिन प्रेम, करुणा और सत्य से निकले शब्दों की ऊँचाई हर दिल को छू लेती है। सृष्टि पर जितने भी महात्मा हुए हैं, उनका जीवन ही उनका संदेश है। ब्रम्हा बाबा के मुख से साक्षात शिव दर्शन और साक्षात्कार होता है।

गौतम बुद्ध मौन में भी क्रांति कर देते थे। महावीर ने कठोर वाणी नहीं, अनुप्रास और अहिंसा के साथ प्रवचन दिए। संत कबीर ने कितनी अच्छी बात कही है —

"ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय,

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय।"

आज जब बहसें कटुता में बदल जाती हैं, सोशल मीडिया से लेकर संसद तक शब्दों की मर्यादा टूट जाती है, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि वाणी वह दीपक है जिससे आत्मा उजियारी होती है।

 आत्मसंयम और माधुर्य

जब हम अपनी आवाज़ ऊँची करते हैं, तो दूसरे की आवाज़ और भी ऊँची हो जाती है। यह प्रतिस्पर्धा नहीं, संघर्ष बन जाती है। लेकिन जब हम अपने शब्दों को ऊँचा करते हैं, अर्थात उनमें अर्थ, संवेदना, करुणा और विवेक भरते हैं ,तो कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं रहती, केवल संवाद होता है। इस तरह से अभिमान (अहंकार) की ऊँची आवाज़ शोर करती है। स्वमान के ऊँचे शब्द शांति लाते हैं।

वाणी की साधना— एक आत्मिक अभ्यास

जैसे योग में प्राणायाम से मन को नियंत्रित किया जाता है, वैसे ही राजयोग में वाणी-संयम और मेडिटेशन से आत्मा को निर्मल किया जाता है। दुनिया भर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग से विश्व शांति, आनंद और प्रेम का संदेश दे रहे हैं। हम इस तरह आध्यात्मिक अभ्यास कर सकते हैं:

मौन का अभ्यास — हर दिन कुछ क्षण बिना बोले रहना, आत्मनिरीक्षण के लिए। जब वाणी निःशब्द हों, तब मन से मन की बात होनी चाहिए। यही मौन का सार्थक अभ्यास है।

विचारपूर्वक बोलना — “क्या यह सत्य है? क्या यह आवश्यक है? क्या यह शुभ है?” — इन तीन प्रश्नों के आधार पर शब्द चुनना, फिर बोलना।

कठोर शब्दों से बचना — भले ही सच बोलें, पर उसे माधुर्य से बोलें। कहा गया है- 'सत्यम ब्रूयात, प्रियम ब्रूयात' अर्थात सत्य वचन बोलिए, साथ ही सुनने वाले को प्रिय लगे ऐसा बोलिए। कठोर वचन नहीं।

शब्द से सेवा— परिवार और समाज में

परिवार, समाज या राष्ट्र — सब जगह हमारी भाषा का प्रभाव पड़ता है। यदि हम बच्चों से डाँट के बजाय समझदारी से बात करें, यदि हम विवादों में चिल्लाने के बजाय शांति से अपनी बात रखें, तो संवाद अधिक सार्थक बनता है। स्वामी विवेकानंद कहा करते थे — "Talk to yourself once a day, otherwise you may miss meeting an excellent person." मतलब- " दिन में एकबार खुद से बात करें, वरना आप किसी बेहतरीन इंसान से मिलने से चूक सकते हैं। "

देह अभिमान से परे हर पल यह याद रहना चाहिए कि मैं अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूँ। इस तरह से जब यह संवाद आत्मा से हो, तो स्वाभाविक है कि बाहर की भाषा भी अधिक निर्मल, सुसंस्कृत और प्रभावी होगी।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी आवाज़ नहीं, अपने विचार, अपने शब्द, अपने भाव ऊँचे करें। ऊँचे शब्दों का अर्थ है — सत्य से जुड़ी बात, प्रेम से भरी भाषा, विवेक से युक्त दृष्टि और विनम्रता से सज्जित आत्मा।

चिंतन कीजिए-

"शब्द ही शस्त्र हैं, शब्द ही शांति है।

शब्द ही पूजा है, शब्द ही क्रांति है।

शब्द ऊँचे हों, तो आत्मा ऊँचाई को छूती है।

आवाज़ ऊँची हो, तो केवल दूरी ही बढ़ती है।"

आइए, हम सब अपने शब्दों को ऊँचा करें, अपनी वाणी में मधुरता लाएँ और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाई की ओर अग्रसर करें।

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ संवाद किया

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रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ संवाद किया। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, बीएसएफ के महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज यहाँ उपस्थित केंद्रीय सुरक्षा बलों, कोबरा टीम, छत्तीसगढ़ पुलिस बल और डीआरजी के साहस, शौर्य, बलिदान और समर्पण को नमन करता हूँ। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि सुरक्षा बल के जवान अपने शौर्य और परिश्रम से ही नक्सलियों के साथ मुठभेड़ को सफल बनाते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों ने जिस शौर्य, धैर्य और समर्पण के साथ  माओवादियों के बनाये अड्डों को तहस-नहस किया है, उसने विश्व के सभी सुरक्षा बलों को आश्चर्यचकित कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम है कि सेना के जवान जो तय करते हैं, वो हासिल करते हैं। सुरक्षा बलों के इसी भरोसे से मैं देश में 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान करता हूं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद गरीब आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ी विभीषिका रही है, जिससे पिछले 35 साल में लगभग 40 हजार लोगों की मौत हुई है या फिर वो अपाहिज होकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।नक्सलवादी हिंसा ने गरीब आदिवासी तक खाना, बिजली, शिक्षा, घर, शौचालय और पीने का शुद्ध पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं को नहीं पहुंचने दिया और उद्योग को तो भूल ही जाइए। इतने लंबे वर्षों तक इतना बड़ा क्षेत्र गुलामी के कालखंड में जीने को मजबूर रहा। इसका मूल कारण नक्सलवाद है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मुझे आज आनंद है कि आज जिस क्षेत्र से नक्सलवाद खत्म होता है, वहां हमारी सरकार अनाज, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, बिजली, घर, शौचालय और पीने का शुद्ध पानी पहुंचाकर लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि जब बच्चा हाथ में बंदूक की जगह पेंसिल पकड़कर क, ख, ग लिखता है, तो न सिर्फ एक क्षेत्र का बल्कि पूरे देश का भविष्य संवरता है। यह क्षण जल्द ही आने वाला है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में जब 31 मार्च, 2026 को देश नक्सलवाद से मुक्त होगा, वो क्षण आजादी के बाद का सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब नक्सलवाद के खात्मे का इतिहास लिखा जायेगा, उसमे सुरक्षा बलों के जवानों का त्याग, बलिदान और परिश्रम स्वर्णिम अक्षरों से अंकित होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में ‘लियोर ओयना’ - नक्सलियों द्वारा आदिवासियों के भीषण संहार और बस्तर को बचाने के  प्रयासों पर लिखित पुस्तक का लोकार्पण भी किया। नक्सलियों ने जिन मासूम, निहत्थे लोगों को अपनी हिंसा का शिकार बनाया है, उनकी पीड़ा समझने में यह पुस्तक सहायक होनेवाली है। यह पुस्तक ह्यूमन राईट के नाम पर नक्सलियों से संवेदना दिखाने वालों के आँखों के आगे से पर्दा हटाने और उन्हें एक्सपोज करने में भी उपयोगी सिद्ध होगी।

जनता की भागीदारी से ही विकास संभव-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम जरहाटोला, जामगांव, आमगांव, तिलईभाट, और पेड्रीतराई मे ग्रामीणवासियों से जनसंपर्क कर सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों मांग, समस्या और शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके अनेक मांगों को तत्काल पूरा करते हुए 80 लाख रूपए के विकास कार्यों की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने ग्रामवासियों की मांग पर विभिन्न विकास कार्यो की सौगात दी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जनसंपर्क के दौरान ग्रामवासियों की मांग को पूरा करते हुए ग्राम जामगांव में सामुदायिक भवन के लिए 10 लाख रूपए, प्राथमिक शाला में किचन शेड के लिए 3 लाख रूपए, सीसी रोड के लिए 5 लाख रूपए और ज्योति कलश कक्ष निर्माण के लिए 3 लाख रूपए की घोषाणा की। उन्होंने ग्राम जरहाटोला सांस्कृतिक मंच के लिए 5 लाख रूपए, गोठान समतलीकरण 5 लाख रूपए, बीएमडब्लू रोड जरहटोला से खलेवारा खार तक, नरेगा से पुलिया निर्माण कार्य की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने ग्राम आमगांव में जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों की मांग में सामुदायिक भवन के लिए 10 लाख रूपए, सामुदायिक शौचालय के लिए 6 लाख रूपए, गोठान समतलीकरण के लिए 4 लाख रूपए और मंच निर्माण के लिए 3 लाख रूपए देने की घोषणा की। ग्राम तिलईभाट में रिटर्निंग वॉल के लिए 18 लाख रूपए, सीसी रोड के लिए 5 लाख रूपए सांस्कृतिक मंच के लिए 3 लाख रूपए की घोषणा की।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के विकासखंड लोहारा के विभिन्न ग्रामों में जनसंपर्क करते हुए ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं और सुझावों को सुना और उन्हें सरकार की योजनाओं और विकासात्मक पहलुओं के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाना है ताकि हर नागरिक को बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार किए जा रहे है।

इसके अलावा कृषि और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को भी और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा ताकि ग्रामीण युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की भागीदारी से ही विकास संभव है, इसलिए सभी को साथ मिलकर काम करना होगा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साय सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जा रहा है और सभी बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाया जा रहा है।

भेंट मुलाकात की तर्ज पर अब युवाओं के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे सीधे संवाद

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रायपुर। सभी वर्ग के आम नागरिकों से विधानसभावार भेंट-मुलाकात पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब प्रदेश के युवाओं से संभागवार सीधे संवाद करेंगे। इस खास आयोजन के दौरान वे युवाओं से उनके मुद्दों, उपलब्धियों और आकांक्षाओं पर बात करेंगे। वे युवाओं के प्रश्नों के जवाब भी देंगे।
                

छत्तीसगढ़ में राजीव युवा मितान क्लब के गठन से युवा-ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिली है। इन क्लबों के माध्यम से युवा अपने-अपने क्षेत्रों में रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। उनमें काफी उत्साह है। संभागस्तरीय आयोजन के दौरान युवा अपने अनुभव साझा करेंगे, ताकि उनके अनुभव का लाभ अन्य लोग भी उठा सकें। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अपनी बात रखेंगे और युवा भी अपनी बात साझा करेंगे। वे मुख्यमंत्री से प्रश्न भी पूछ सकेंगे। कार्यक्रम में सभी वर्ग के युवाओं का प्रतिनिधित्व होगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साढ़े चार सालों में युवा हित में अनेक निर्णय लिये हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस माफी के साथ ही राज्य में रोजगार मिशन का संचालन किया जा रहा है। साढ़े चार सालों में बड़े पैमाने पर शासकीय भर्तियां की गई हैं। हाल ही में रोक होने के बाद और लगभग 20 हजार शासकीय पदों भर्तियां की जा रही हैं। रोजगार मेलों का आयोजन कर बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक लाख 17 हजार से अधिक युवाओं को बेरोजगारी भत्ते की राशि हर महीने प्रदान की जा रही है। अब तक 80 करोड़ रुपए की राशि युवाओं के खाते में अंतरित की जा चुकी है। इसके अलावा राज्य की खेल अधोसंरचना को भी मजबूत किया गया है।

छग संवाद में बिल के साथ सीडी जमा करने की बाध्यता खत्म, सर्वर में अपलोड करें स्क्रीन शॉट- काबरा

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रायपुर। जनसंपर्क संचालनालय में इम्पैनल वेबसाइट/वेब पोर्टल संचालकों के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा जारी किए जाने वाले मासिक विज्ञापन के बिल के साथ अब सीडी जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। जनसंपर्क आयुक्त दीपांशु काबरा ने इसकी पुष्टि की है।

श्री दीपांशु काबरा, आयुक्त-जनसंपर्क संचालनालय

दरअसल, डिजीटल मीडिया को जारी होने वाले विज्ञापन के बिल के साथ सीडी जमा कराए जाने का नियम बहुत पुराना है। जब तकनीक बहुत ज्यादा विकसित नहीं हुआ था, तब इसकी आवश्यकता थी। अब, स्क्रीन शॉट छग संवाद के सर्वर पर ऑनलाइन सबमिट होता है। इसका प्रिंट आउट भी मीडिया संस्थान/वेबसाइट संचालक बिल के साथ अलग से जमा कराते हैं। ऐसे में सीडी की उपयोगिता नहीं रह गई थी। बावजूद, पुराने नियम के पालन में सीडी अनिवार्य रूप से जमा कराया जा रहा था। इससे हर महीने सैकड़ों सीडी कचरे का ढेर बनने के सिवाय और कोई उपयोगी प्रतीत नहीं हो रहा था। अनावश्यक 'ई-कचरा' का ढेर लगने से पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है।



छत्तीसगढ़ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के उपाध्यक्ष व प्रेस क्लब महासमुंद के पूर्व अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री ने पत्रकार साथियों की परेशानी की ओर जनसंपर्क आयुक्त दीपांशु काबरा का ध्यानाकृष्ट कराया। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए काबरा ने विज्ञापन के बिल के साथ अब सीडी जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी है। साथ ही विज्ञापन प्रसारण का स्क्रीन शॉट 'छत्तीसगढ़ संवाद ' के सर्वर में अपलोड कराए जाने का निर्देश दिया है।


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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपना किया हुआ वादा निभाते हुए चैनसिंह और उनकी पत्नी को कराई हेलीकॉप्टर की सैर...

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को महासमुन्द विधानसभा के ग्राम शेर में भेंट-मुलाकात में लोगों से संवाद कर रहे थे, इस दौरान उनसे स्थानीय ग्रामीण चैन सिंह ने बड़ी रोचक बात की, 



चैन सिंह ने मुख्यमंत्री से कहा जबसे आप मुख्यमंत्री बने हैं, मेरा भाग्य खुल गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री ने चैन सिंह को हेलीकॉप्टर में सपत्नी घुमाने के लिए आमंत्रित किया।

छत्तीसगढ़ में योजनाओं से रुका है पलायन : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। आज बगारपाली भेंट मुलाकात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोगों से संवाद के दौरान कहा कि भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान प्रदेशभर में लोगों ने बताया है कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है। छत्तीसगढ़ में योजनाओं की वजह से पलायन रुका है। मुख्यमंत्री ने बताया की जांजगीर में एक मजदूर साथी ने बताया की गांव में गोठान खुलने से उसे रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नही पड़ी। आज बगारपाली में हेमलता ने बताया की पहले काम के लिए उसे पलायन करना पड़ता था। मगर अब गोठान में काम मिल रहा है।



अभी सरायपाली में भी मुझे एक व्यक्ति ने ऐसा ही संस्मरण सुनाया था। जशपुर में भी पलायन में कमी आने की बात सामने आई थी। इससे यही समझ में आता है कि योजनाओं से लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरी है। ये बहुत अच्छा संकेत है। मुख्यमंत्री ने योजनाओं से आ रहे सामाजिक परिवर्तन की कमेटी द्वारा अध्ययन की घोषणा की।उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है की आज लोगों को काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा। मजदूरों को भी हम 7 हजार रुपए दे रहे हैं। ये भी भूमिहीन श्रमिकों के लिए एक सहारा बना है।

आत्मा से संवाद का उत्सव है अरुणाचल का लोकनृत्य इगु, मृत्यु उपरांत उपवास कर संवाद किया जाता है मृतात्मा से

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रायपुर। अरुणाचल की लोकसंस्कृति में मृत्यु के पश्चात आत्मा से संवाद लोकनृत्य के माध्यम से होता है। सामान्य मौत की स्थिति में परिजनों के मृत्यु के चार-पांच दिन तक उपवास रखा जाता है और इस अवधि में मृतात्मा से संवाद लोकनृत्य के माध्यम से होता है। यह संवाद इदुमिस्थि जनजाति द्वारा किया जाता है।  अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ यह संवाद किया जाता है। उल्लेखनीय है कि अनेक जनजातियों में मृतात्मा के साथ ऐसे संवाद की परंपरा रही है और बहुत समृद्ध परंपरा रही है।



ऐतिहासिक रूप से भी मृत्यु संबंधी अनेक लोकमान्यताएं जनजातीय समुदाय में मिलती हैं। उल्लेखनीय यह भी है कि इगु नृत्य का प्रदर्शन केवल सामान्य मौत में ही होता है। असामयिक रूप से किसी की मृत्यु हुई हो तो यह नृत्य नहीं होता। पारंपरिक अरुणाचल के परिधान के साथ और उनके खास वाद्ययंत्रों के साथ इगु का प्रदर्शन राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हुआ। राजधानी में आयोजित इस महोत्सव में अरूणाचल के इस लोक नृत्य को लोगों ने खूब सराहा।

घोटुल में प्रियजनों को गिफ्ट में देते थे डिज़ाइनर कंघियाँ, खैरागढ़ की छात्रा ने उभारी घोटुल की सुंदर छवि

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रायपुर। उस जमाने में जब सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था तब भी युवाओं में आपस में संवाद की इच्छा तो होती ही थी, एक दूसरे को जानने की इच्छा होती थी और इसके लिए घोटुल जैसे युवा ग्रह होते थे। जहां पर युवा आपस में परिचर्चा करते थे, संवाद करते थे। मैंने चटाई में चित्र के माध्यम से इसे उकेरा है। यह बात इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय में पढ़ रही बस्तर की छात्रा मुस्कान पारख ने बताई। मुस्कान ने कहा कि घोटुल के बारे में जानने के लिए वे बस्तर के गांव में गई। 



जब सोशल मीडिया नहीं था तब घोटुल में होती थी परिचर्चा

वहां कुछ दिन गुजारे यहां का लोकजीवन देखा। घोटुल के बारे में पूछा और तब इस चित्र की संकल्पना मन में आई। बस्तर में दैनिक उपयोग में चटाई का बहुत उपयोग होता है। मैंने चटाई में ही इसे पेंट करने का निर्णय लिया। इसके लिए मैंने मिट्टी बस्तर से ही ली ताकि भित्ति चित्र का अनुभव भी दर्शकों को हो सके। बस्तर में परंपरा है कि अपने प्रियजन को उपहार स्वरूप कंघी दिया करते थे और यह काफी डिज़ाइनर होती थी, कंघी जितनी सुंदर होगी उतना ही अच्छा उपहार माना जाएगा जैसे आज हम गुलाब देते हैं।

 बस्तर की छात्रा मुस्कान ने बस्तर की मिट्टी से ही चटाई में उकेरी घोटुल की कलाकृति

मुस्कान ने बताया कि बस्तर में चाहे शादी ब्याह हो चाहे किसी तरह का ट्रेडीशन हो चटाई  का महत्व बहुत अधिक होता है। मैंने स्थानीय वेश विन्यास देखा और लोगों के बातचीत करने के तरीके को देखा और इस चित्र का निर्माण किया। स्थानीय कला को जीवित रखने और उसे समृद्ध करने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तैयार कराई गई इस आर्ट गैलरी से मुस्कान जैसी अनेक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और छत्तीसगढ़ के लोगों को अपनी समृद्ध संस्कृति को जानने का।

महासमुंद : किसानों के लिए नवागांव में बनेगा कृषक विश्राम गृह

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महासमुंद। क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क और संवाद के क्रम में छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष, केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त अग्नि चंद्राकर महासमुंद विधानसभा अंतर्गत ग्राम नवागांव (पटेवा) पहुंचे, जहां उन्होंने चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। किसानों की मांग पर धान उपार्जन केन्द्र में आने वाले कृषकों की सुविधा के लिए कृषक विश्रामगृह का निर्माण की घोषणा की। ग्राम पहुंचने पर पंचायत प्रतिनिधियों, युवाओं सहित ग्रामवासियों ने चंद्राकर का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया।


बीज निगम अध्यक्ष अग्नि चंद्राकर ने दी सौगात

सरपंच गंगाराम दीवान, उपसरपंच व्यासनारायण ध्रुव, चम्मनलाल ध्रुव, महारथी सिन्हा, मोहन सिन्हा, गंगाराम सिन्हा, मानसिंग निषाद, मंगलू दीवान, राजकुमार निषाद, मनीराम जांगड़े, रामा चंद्राकर, मनोज पटेल आदि ग्रामीणों ने समस्याओं से अवगत कराते हुए स्कूली छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए नवागांव से बोडरा होते हुए पटेवा तक 3 किमी. पक्की सड़क, ग्राम में धान उपार्जन केन्द्र तक सड़क निर्माण, कृषकों की सुविधा के लिए कृषक विश्रामगृह का निर्माण तथा पेयजल व्यवस्था की मांग की।


चबूतरे पर बैठकर ग्रामीणों की सुनीं समस्याएं

वहीं मनरेगा के लंबित भुगतान तथा लो-वोल्टेज की समस्या बताते हुए निराकरण का अनुरोध किया। चंद्राकर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि संबंधित विभागों के माध्यम से उनकी सभी समस्याओं का निराकरण कराएंगे। चंद्राकर ने ग्रामीणों के समक्ष प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की भी चर्चा की। दौरे में चंद्राकर के साथ युवा नेता दिव्येश चंद्राकर, प्रतिनिधि नारायण नामदेव, मदन भारती, पूर्व पार्षद राजू साहू, नरेन्द्र चंद्राकर भी थे।

जनता से संवाद हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए: अनुसुईया उइके

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रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा है कि जनता से संवाद हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सके। रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद के तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह में आज राज्यपाल शामिल हुई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपने परिवेश की स्वच्छता के लिए लोगों को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। राज्यपाल ने कहा कि भारत विकासशील से विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है, ऐसे में हमें सामंजस्य स्थापित करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना होगा।



सम्मेलन में सुश्री उइके ने प्लास्टिक के उपयोग, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों के जरिये विचार-विमर्श करके जानकारियों को साझा किया जा सकता है, इससे नगरीय निकायों में विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। समापन समारोह को रायपुर के सांसद सुनील सोनी ने भी संबोधित किया। वहीं, राज्यपाल ने आज राजभवन में अखिल भारतीय महापौर परिषद में शामिल होने आए महापौरों को सम्मानित भी किया।

इससे पहले, कल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अखिल भारतीय महापौर परिषद के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महापौर नगर निगमों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रयास करें। उन्होंने कहा कि नगर निगमों में महापौर की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के महापौरों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। बघेल ने सभी महापौरों से अनुरोध किया कि वे अपने नगर निगमों में नवाचार के कार्य करें। सम्मेलन में रायपुर के महापौर एजाज ढेबर सहित आगरा के महापौर नवीन जैन, मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता और देश के विभिन्न भागों से आए महापौर उपस्थित थे।

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