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राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से गुणवत्ता सुधार करने रोडमैप मांगा कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श

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रायपुर। राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रमेन डेका ने शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कुलपतियों से दो माह के भीतर रोडमैप मांगा है। उन्होंने आज राजभवन में कुलपतियों के साथ विचार-विमर्श कर छात्रों के हित के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ.एस. भारती दासन विशेष रूप से उपस्थित थे।

राज्यपाल ने कुलपतियों को निर्देशित किया है कि जिस कोर्स में छात्र और शिक्षक नहीं है, उन्हें बंद किया जाएं। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से कहा कि वे मैनेंजमेंट के साथ बैठक कर गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना बनाकर सितम्बर माह में उपलब्ध कराएं। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदंडों एवं नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के लिए पोर्टल बनाया जाएगा जिसमें एडमिशन से लेकर हर गतिविधियों को विश्वविद्यालय अपलोड करेंगे। उन्होंने कहा कि जो विश्वविद्यालय नेक ग्रेडिंग के लिए पात्र हो चुके है वे अनिवार्य रूप से ग्रेडिंग की प्रक्रिया में शामिल हो। डेका ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में विद्यार्थी को भी जागरूक किया जाए। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ में होगी शिक्षकों की भर्ती, प्रथम चरण में 5,000 पदों पर होगी नियुक्ति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होेने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे।

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं।

युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके।

शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

 

शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी: सीएम साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी है। इसके बिना जीवन अधूरा है। यह न केवल रोजगार का माध्यम है, बल्कि समग्र विकास का आधार भी है।वे आज सवेरे मुंगेली जिला मुख्यालय में जिला ग्रंथालय में 29.90 लाख रुपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले तथा पूर्व सांसद लखन साहू भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए आदर्श विद्यार्थी के पाँच गुण काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पाहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अनुशासित, मेहनती और लक्ष्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा दी। एक छात्र द्वारा सोशल मीडिया के प्रभाव पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, डिजिटल युग में अच्छाई को अपनाएं और बुराई से दूर रहें। साय ने अपने छात्र जीवन के संघर्ष साझा करते हुए बताया कि अविभाजित रायगढ़ जिले में शिक्षा के अवसर सीमित थे। नटवर स्कूल ही एकमात्र विकल्प था। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, कभी निराश न होने और परिश्रम को अपना मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।

 मुख्यमंत्री ने प्रयासऔर नालंदा परिसरजैसे शैक्षणिक नवाचारों की सराहना की और कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में आधुनिक ग्रंथालय स्थापित किए जाएं। उन्होंने मुंगेली जिला ग्रंथालय की सराहना करते हुए बताया कि यह ग्रंथालय अब तक सैकड़ों युवाओं की सफलता की नींव बन चुका है। उन्होंने इसे केवल अध्ययन का स्थल न मानकर एक सफलता केंद्र बताया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री को तोप सिंह कुंभकार द्वारा उनके चित्र का हस्तनिर्मित छायाचित्र तथा भगवद् गीता और अन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।

गौरतलब है कि जिला ग्रंथालय में वर्तमान में यहाँ 4780 से अधिक पुस्तकों का संग्रह, 893 पंजीकृत सदस्य, 32 टेबल, 11 सीसीटीवी कैमरे हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

बस्तर जिले को शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नीति आयोग द्वारा 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार

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रायपुर। बस्तर जिले ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षण को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने, नवीन शैक्षणिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन और शिक्षक-छात्र संबंधों को मजबूत करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नीति आयोग ने बस्तर जिले को 3 करोड़ रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बधाई देते हुए कहा कि बस्तर जिले के विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और हमारी सरकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता ने जिले को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यह सम्मान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पुरस्कार आकांक्षी जिलों में बुनियादी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और शिक्षा की समावेशी एवं नवाचारयुक्त नीति को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में संपूर्ण शिक्षा तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने तथा बस्तर में बौद्धिक और शैक्षणिक विकास को नया आयाम देने के लिए राज्य सरकार को और अधिक प्रेरित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि न केवल बस्तर जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

 

 

व्यापम ने व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षाओं की संभावित तिथि जारी की

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रायपुर। छतीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल (व्यापम) ने राज्य के विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों एवं विषयों में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में प्रवेश हेतु आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं की संभावित तिथियां जारी कर दी है। तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, एनसीईआरटी तथा कृषि विभाग के शैक्षणिक सत्र 2024-25 में विभिन्न व्यावसायिक विषयों में प्रवेश के लिए व्यापम मई एवं जून माह में परीक्षाएं आयोजित की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्री. एम.सी.ए. एमसीए 24 तथा एम.एससी. नर्सिंग एमएससीएन 2024 में प्रवेश के लिए परीक्षा की संभावित तिथि 30 मई 2024 रखी गई है। इसी तरह प्री. बीएड, प्री. डीएलडी, के लिए 2 जून 2024, पीईटी एवं पीपीएचटी के लिए परीक्षा की संभावित तिथि 6 जून 2024 होगी। बीएससी नर्सिंग, प्री बीए बीएड/प्री बीएससी बीएड के लिए 13 जून, पीएटी/पीव्हीपीटी प्रवेश परीक्षा की संभावित तिथि 16 जून तथा पीपीटी प्रवेश परीक्षा की संभावित तिथि 23 जून 2024 है।

उक्त प्रवेश परीक्षाओं के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी प्रतिभागियों से किसी भी प्रकार का परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऑनलाईन आवेदन की प्रारंभिक एवं अंतिम तिथि, सुधार की तिथि एवं परीक्षा का समय व्यापम के वेबसाईट पर बाद में घोषित किए जाएंगे। इस संबंध में विस्तृत जानकारी व्यापम की वेबसाइट vyapam.cgstate.gov.in एवं https://vyapamaar.cgstate.gov.in/

राज्यपाल ने स्कूल का भ्रमण कर छात्र जीवन की यादें ताजा की

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रायपुर। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन अपने ओडिशा प्रवास के दौरान मुखु क्षेत्र से संबद्ध एक शैक्षणिक संस्थान खेतबासी अकादमी गए। राज्यपाल इस स्कूल के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। जहां उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा हुई है। यहां उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादंे ताजा की और स्कूल के संस्थापक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
                     

इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें मन लगाकर अच्छे से पढ़ाई करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी कल के भविष्य हैं। यदि उन्हें ठीक से शिक्षा नहीं दी जाये तो वे अपने पूर्वजों, अतीत के गौरव, जाति परंपराओं, सिद्धांतों, मूल्यों, विषमताओं, कुरूतियों आदि के संबंध में नहीं जान सकेंगे।
                    

विद्यालय में विद्यार्थी न केवल पाठ्य पुस्तकों का बल्कि भौतिक, वैदिक, नैतिक, एवं अन्य विषयोें का भी ज्ञान प्राप्त करते हैं।राज्यपाल ने स्थानीय मिट्टी को अपने लिए स्वर्ग बताया और अपने समय के शिक्षको को याद कर उनकी सराहना की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाया हुआ राज्यपाल का पोर्टेट उन्हें भेंट किया। राज्यपाल ने स्कूल परिसर में वृक्षा रोपण भी किया।

महासमुंद : शैक्षणिक संस्थानों में संचालित वाहनों का फिटनेस शिविर 09 जुलाई को

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महासमुंद। शैक्षणिक संस्थानों के अंतर्गत संचालित वाहनों का मय दस्तावेज सहित भौतिक निरीक्षण हेतु जांच शिविर 09 जुलाई को आयोजित किया गया है। यह शिविर राजमहल मैदान सरायपाली में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक किया जाएगा।
                  

जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि उक्त जांच शिविर में महासमुंद जिले के विकासखण्ड पिथौरा, बसना एवं सरायपाली के समस्त शैक्षणिक संस्थानो में संचालित वाहनों का मय दस्तावेज के साथ फिटनेस परीक्षण किया जाएगा। यदि वाहन को जांच शिविर में नहीं भेजा जाता है तो यह माना जाएगा कि वो वाहन शैक्षणिक संस्था में संचालित करने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में वाहनो का उपयोगिता प्रमाण पत्र निरस्ती की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही उपयुक्तता प्रमाण-पत्र रद्द दिनांक से वाहन को साधारण बस मानते हुए कर निर्धारण की कार्यवाही की जाएगी।

627 पदों के लिए 28 जून को रोजगार मेला का आयोजन

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दुर्ग। कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा के निर्देशन में जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र दुर्ग द्वारा जिले में बेरोजगार युवाओं के लिए नियोजकों द्वारा उपलब्ध रिक्त पदों को भरने के लिए रोजगार मेला का आयोजन 28 जून 2023 को लाईवलीहुड कॉलेज  सेक्टर 6 ’’’’ मार्केट भिलाई में किया जाएगा। रोजगार मेला में नियोजक एसबीआई लाईफ इंश्योंरेंस,  वन स्टाफिंग एण्ड सॉल्यूशन, सेफ इंटेलिजेंट सिक्योरिटी सर्विस आर्य नगर कोहका भिलाई, एसबीआई लाईफ इंश्योंरेंस सीपी लिमिटेड भिलाई सुपेला एवं विनायक जॉब के लिए विभिन्न पद रिक्त हैं। 

जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग के उप संचालक आर.के.कुर्रे के अनुसार इच्छुक आवेदक समस्त शैक्षणिक मूल प्रमाण एवं अंकसूची, पहचान पत्र (मतदाता परिचय पत्र, आधार कार्ड, पेन कार्ड, ड्रायविंग लाइसेंस, राशन कार्ड) रोजगार कार्यालय का पंजीयन पत्रक, छ.ग. निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र के साथ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र दुर्ग द्वारा लाईलीहुड कॉलेज  सेक्टर 6 ’’’’ मार्केट भिलाई में 28 जून को समय प्रातः 11 बजे से उपस्थित हो सकते है। पदों, योग्यता, आयु एवं अनुभव से संबंधित जानकारी आवेदक रोजगार मेला स्थल पर प्राप्त कर सकते हैं। सोशल मीडिया  ंिबमइववाण्बवउध्उबबकनतह  पर प्राप्त कर सकते हैं।   

औद्योगक प्रशिक्षण संस्थाओं में गेस्ट लेक्चरर पद हेतु आवेदन आमंत्रित

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बेमेतरा। जिला नोडल बेमेतरा के अंतर्गत संचालित विभिन्न औद्योगक प्रशिक्षण संस्थाओं में स्वीकृत प्रशिक्षण अधिकारी के रिक्त पदों के विरूद्ध विभिन्न व्यवसायों/विषयों के लिये प्रशिक्षण सत्र 2022-23 हेतु मेहमान प्रवक्ता (गेस्ट लेक्चरर) हेतु निर्धारित प्रारूप में आवेदन आमंत्रित किया गया है। 

इच्छुक अभ्यर्थी अपना आवेदन 13 फरवरी 2023 को अपरान्ह 05.00 बजे तक कार्यालय अधीक्षक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था बेमेतरा, कोबिया चौक बेमेतरा, जिला-बेमेतरा, पिन-491335 पते पर पंजीकृत डाक से अथवा स्वयं उपस्थित होकर जमा कर सकते है। पदो की जानकारी शैक्षणिक/तकनीकी योग्यताएं एवं निर्धारित मापदंड नियम एवं शर्तों की जानकारी एवं आवेदन पत्र का प्रारूप बेमेतरा जिले के वेबसाइट http://bemetara.gov.in/ पर एवं इस जिले में संचालित समस्त शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के सूचना पटल पर देखा जा सकता है।

स्नातक पास अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा अवसर

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बीजापुर। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र बीजापुर द्वारा 24 जनवरी 2023 को प्लेसमेंट का अयोजन किया जा रहा है। जिसमें निजी क्षेत्र के संस्थानों के कुल 144 पदों पर भर्ती की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी आवश्यक शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, फोटो सहित 24 जनवरी 2023 को जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र बीजापुर में उपस्थित हो सकते है। 

रिक्त पदों में डेवलपमेंट रिक्यूपमेट पर्सन, डिस्ट्रीक्ट लेवल ट्रेनर, इंटरशिप डेवलपमेंट पर्सन सहित विभिन्न पदों पर निजी संस्थान, नियोजक जनाधार ,कौशल विकास छत्तीसगढ़ अंतर्गत छत्तीसगढ़ एवं जिला बीजापुर कार्य ़क्षेत्र होगा। भर्ती के संबंध मे आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, वेतनमान सहित विस्तृत जानकारी जिले के वेबसाईट www.bijapur.gov.in पर एवं जिला रोजगार कार्यालय बीजापुर के टेलीग्राम  http://me/employment_office_bijapur_cg पर उपलब्ध है।

अत्यधिक ठंड, शीत लहर और कोहरे के कारण शालाओं में अवकाश घोषित, कलेक्टर ने इन जिलों जारी किया आदेश

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कोरिया। सरगुजा. कलेक्टर ने जिले में वर्तमान में पड़ रहे अत्यधिक ठंड, शीत लहर एवं कोहरे के प्रकोप के कारण शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत् छात्र एवं छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए छात्रहित में जिले में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत छात्र,छात्राओं के लिये 07 जनवरी शनिवार तक अवकाश घोषित किया है।


स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के बैकलॉक रिक्त पदों की संविदा भर्ती हेतु आवेदन 11 जनवरी तक आमंत्रित

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मोहला। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले में संचालित सभी स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक बैकलॉग रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों से आवेदन आमंत्रित किया गया है। 

विभिन्न शैक्षणिक बैकलॉग रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी 11 जनवरी 2023 शाम 5 बजे तक कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डॉक एवं कार्यालय में उपस्थित होकर जमा कर सकते है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी से प्राप्त की जा सकती है।

राज्यपाल ने एम्स रायपुर के वार्षिकोत्सव ‘ओराएना 2022‘ का किया शुभारंभ

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रायपुर। एम्स रायपुर ने पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में विशेष उपलब्धि हासिल की है और देश में स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उक्त बातें राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज एम्स रायपुर के वार्षिकोत्सव ‘‘ओराएना 2022‘‘ के शुभारंभ के अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से कहीं। इस दौरान एम्स रायपुर के विद्यार्थियों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से नाटक व नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। राज्यपाल ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने, मनोरोग को नजरअंदाज न करने और इसके रोगियों से संवेदनशील व्यवहार करने का आग्रह किया। इस अवसर पर राज्यपाल और एम्स के चिकित्सकों ने संस्थान के वार्षिक स्मारिका का विमोचन किया।

 


राज्यपाल ने अपने संबोधन में वार्षिक उत्सव के आयोजन के लिए एम्स प्रबंधन और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि ओराएना का अर्थ सूर्याेदयहै और विद्यार्थियों की उपस्थिति से वास्तव में यह परिसर सूर्याेदय की लालिमा, शीतलता, और ऊर्जा का आभास करा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि कि युवाओं की यही ऊर्जा भविष्य के भारत को आकार देगी और विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने का हमारा संकल्प पूरा होगा। राज्यपाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर विस्तार हो रहा है। साथ ही ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के मेडिकल की पढ़ाई करने में भाषाई अवरूद्धता को दूर करने में उनके नेतृत्व में महत्वपूर्ण पहल हुई है। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई से भी लाखों युवाओं के डॉक्टर बनने का सपना साकार होगा।

राज्यपाल ने आगे कहा कि उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलने से छत्तीसगढ़ और आस-पास के क्षेत्रवासियों के लिए एम्स रायपुर किसी वरदान से कम नहीं है। साथ ही संस्थान में प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सक बन रहे हैं, जिससे बेहतर चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो पा रही है। उन्होंने कहा कि एक संस्थान के रूप में यह उपलब्धि भारत में स्वास्थ्य सुविधा के बढ़ते दायरे का सशक्त उदाहरण है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि चिकित्सक के रूप में आपके भावी जीवन में कई ऐसे मौके आएंगे, जब आपके प्रयासों से किसी की जान बचेगी या उनकी शारीरिक परेशानी दूर होगी, तभी वास्तव में आपको आत्मसंतुष्टि मिलेगी और इस पेशे के महत्व को समझ पाएंगे। उन्होंने आमजनों को सस्ता, सुगम और बेहतर इलाज कैसे मिले, इस दिशा में प्रयास करने पर जोर दिया।



राज्यपाल ने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि चिकित्सकीय पेशे का जितना संबंध अध्ययन से है, उतना ही मानवीय संवेदना और सतर्कता के साथ कार्य करने से। उन्होंने चिकित्सकों की कार्यशैली के बारे में बताते हुए उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी। राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वार्षिक उत्सव में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक और शारीरिक गतिविधियों का आयोजन चिकित्सकों और विद्यार्थियों के मनोरंजन और तनाव प्रबंधन में सहायक होगा। विद्यार्थी अपने रूचि के अनुरूप विधा या गतिविधि में शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पायेंगे और इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि वार्षिक उत्सव में मेडिकल के साथ-साथ इंजीनियरिंग, लॉ और गैर तकनीकी क्षेत्रों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं और मुझे विश्वास है कि सभी विद्यार्थी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेल भावना को सर्वाेपरि बनाए रखेंगे।

राज्यपाल ने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत चिंता व्यक्त करते हुए एम्स प्रबंधन से आग्रह किया कि वे इस आशय से आसपास के गांव और स्कूलों में जागरूकता शिविर का आयोजन करें। युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों को नियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि और स्वच्छता के फायदों की जानकारी दें। राज्यपाल ने कोविड-19 के आपदा को स्मरण करते हुए कहा कि इस कठिन समय में डॉक्टरों ने हमारा हौसला बनाये रखा। सेवा की जो शपथ आप सभी ने ली थी उसका अक्षरशः पालन कर कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के अर्थ को पूरे देश को समझाया है। उन्होंने एम्स रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर के समर्पित कार्यशैली की भी प्रशंसा की और आगे स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और बेहतर कार्य करने को कहा। इस दौरान एम्स प्रबंधन ने राज्यपाल सुश्री उइके को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

शैक्षणिक कैलेण्डर पर आधारित होंगी एकलव्य विद्यालय की गतिविधियां

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के एकलव्य विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। इन विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास किए जाएंगे। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग की आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने आज रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के प्राचार्यों एवं छात्रावास अधीक्षकों की संयुक्त बैठक ली। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शैक्षणिक कैलेण्डर के अनुसार अध्यापन कार्य सुनिश्चित किया जाए।



एकलव्य विद्यालय के प्राचार्यों और छात्रावास अधीक्षकों की बैठक को संबोधित करते हुए श्रीमती आबिदी ने कहा कि विद्यालय में अध्ययनरत् बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु प्राचार्यों एवं छात्रावास अधीक्षकों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए यथोचित प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को किताबें और गणवेश समय पर मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। सभी विद्यालयों में पुस्तकालय और कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय की वेबसाइट बनाने और प्रत्येक छह माह में विद्यालय की शैक्षणिक और खेलकूद गतिविधियों पर आधारित पत्रिका का प्रकाशन किया जाए। 

उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नवाचार करने वाले प्राचार्यों अथवा छात्रावास अधीक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के कुल 73 एकलव्य आदर्श विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। श्रीमती आबिदी ने कहा कि विद्यालय में किसी विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं है, ऐसी स्थिति में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। 

बच्चों को किताबें और गणवेश प्राप्त होने में किसी प्रकार की दिक्कत होती है, इसके लिए तत्काल जिले के सहायक आयुक्त एवं मुख्यालय स्तर पर जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों को सीबीएसई की सम्बद्धता प्राप्त हो गई है, ऐसे विद्यालय अपने क्षेत्र में संचालित नवोदय विद्यालय के प्राचार्यों और शिक्षकों का सहयोग लेकर सीबीएसई की शिक्षा पद्धति के अनुसार अध्ययन का प्रजेन्टेशन प्रोग्राम आयोजित करें।

श्रीमती आबिदी ने कहा कि विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को पूरा ध्यान रखने के साथ बच्चों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। इसके अलावा विद्यालय में स्वच्छ किचन शेड, साफ शौचालय, विद्यालय परिसर में साफ-सफाई, बागवानी, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, कैश बुक एवं अन्य स्टॉक पंजियों के उचित संधारण किया जाए। प्रत्येक विद्यालय के डाइनिंग हॉल में बच्चों के भोजन करने हेतु डाइनिंग टेबल की उचित व्यवस्था करने एवं विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण अंतर्गतेे फलदार वृक्ष लगाए जाने के निर्देश भी दिए।

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