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शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप में मनेन्द्रगढ़ बीईओ निलंबित

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रायपुर। सरगुजा संभाग के आयुक्त ने मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी मनेन्द्रगढ़ सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य शासन के निर्देशानुसार शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के दौरान बरती गई अनियमितताओं के चलते की गई है। जारी आदेश के अनुसार, जायसवाल पर शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में हेरफेर करने, विषयों की गलत जानकारी देने और चक्रिय नियमों का पालन न करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

आदेश में तीन प्रमुख अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है जिस में माध्यमिक शाला लेदरी में वरिष्ठता क्रम में आगे होने के बावजूद श्रीमती गुंजन शर्मा को अतिशेष घोषित किया गया। इसी तरह प्राथमिक शाला चिमटीमार में नियुक्ति तिथि के आधार पर श्रीमती अर्णिमा जायसवाल को अतिशेष माना जाना चाहिए था, किंतु इसके विपरीत श्रीमती संध्या सिंह को अतिशेष सूची में रखा गया। माध्यमिक शाला साल्ही में शिक्षक सूर्यकांत जोशी के विषय की गलत जानकारी दी गई और विषय चक्र का पालन नहीं किया गया।

आयुक्त सरगुजा ने इसे कर्तव्य में लापरवाही और स्वैच्छाचारिता मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलम्बन की कार्रवाई की है। निलंबन की अवधि में जायसवाल का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर नियत किया गया है।

शिक्षकों का संतुलित पदस्थापना से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

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रायपुर। कोरिया जिले में शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने 5 जून को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह प्रक्रिया शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण मरकाम एवं जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि नगरीय और ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों के पदस्थापना में असंतुलन है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि दूरस्थ गांवों में शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण गुणवत्ता और छात्र प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेंगे विषय विशेषज्ञ शिक्षक

कलेक्टर ने बताया कि अब गणित, भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित होगा और विद्यार्थियों को विषयवस्तु की बेहतर समझ मिलेगी। इन शिक्षकों का पुनः समायोजन कर जरूरतमंद विद्यालयों में पदस्थापना की जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है। यह समूचा प्रयास शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। कलेक्टर ने कहा कि यह परिवर्तन जिले के शैक्षिक और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस पहल को सकारात्मक रूप में जनमानस तक पहुंचाएं, ताकि समाज में शिक्षा को लेकर विश्वास और जागरूकता बढ़ सके।

दो प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल

जिले की स्थिति का विवरण देते हुए कलेक्टर ने बताया कि कोरिया जिले में 2 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल हैं। वहीं, 95 प्राथमिक और 75 पूर्व माध्यमिक शिक्षक जिले में अतिशेष हैं। इनका पुनः समायोजन कर शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा में सुधार लाना है।

एक भी स्कूल का समायोजन नहीं

 जिले में 145 में से एक भी स्कूल का समायोजन नहीं किया गया है। राज्य में भी केवल 241 स्कूलों का समायोजन किया गया है, जबकि 10,297 स्कूल यथावत संचालित रहेंगे। युक्तियुक्तकरण के लाभों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकेंगी। साथ ही, बच्चों की ड्रॉपआउट दर में कमी, तीन बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति और पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित होगी।

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से कोरिया जिले की शिक्षा व्यवस्था होगी सुदृढ़, 121 शिक्षकों को नई पदस्थापना

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रायपुर। शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया आज कोरिया जिले में कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी की अध्यक्षता में जिला पंचायत के मंथन कक्ष में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण कुमार मरकाम, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि कोरिया जिले में कुल 121 शिक्षकों, जिनमें 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक, तथा 7 व्याख्याता शामिल हैं, को काउंसलिंग के पश्चात नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि कुछ शहरी स्कूलों में छात्र संख्या की तुलना में अधिक शिक्षक पदस्थ थे, जबकि कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी थी। इस समायोजन प्रक्रिया से अब उन विद्यालयों में भी शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी, जहां पहले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन भी स्थापित होगा। इससे परीक्षा परिणामों में भी सुधार की संभावना है और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की गई है। शिक्षक युक्तियुक्तकरण को शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सुदृढ़ और सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षकों का उचित उपयोग संभव हो रहा है, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है।

 

 

छत्तीसगढ़ में शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से शिक्षा में नया संतुलन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और प्रभावशाली प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसको ध्यान में रखकर शालाओं और शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन किया जा रहा है। जहां जरूरत ज्यादा है, वहां शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को, जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीक के अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर मिल सके। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी।

कोरबा जिले के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में अब न्यूनतम दो व तीन शिक्षक पदस्थ किए गए हैं। 287 सहायक शिक्षक, 147 माध्यमिक शिक्षक और 75 व्याख्याताओं को काउंसलिंग के माध्यम से ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया है, जहां शिक्षक की जरूरत थी। इससे पोड़ी उपरोड़ा, पाली, करतला, कटघोरा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षकविहीन रहे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। गणित, विज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञों शिक्षक स्कूलों में उपलब्ध होंगे।

रायपुर के धरसीवां विकासखंड में कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के मान से शिक्षक अधिक पदस्थ हैं। नयापारा कन्या स्कूल में 33 छात्राओं पर 7 शिक्षक तथा रविग्राम में 82 विद्यार्थियों पर 8 शिक्षक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से इन शिक्षकों को आवश्यकता वाली शालाओं में पदस्थ किया जाएगा, जिससे शिक्षक और छात्र के अनुपात का संतुलन कायम होने के साथ ही दूरस्थ इलाकों के बच्चों को भी अध्यापन के लिए शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

इसी तरह शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन के चलते राजनांदगांव और दुर्ग जिले के ग्रामीण स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट आई है। राजनांदगांव के घोटिया स्कूल में 103 छात्रों पर मात्र 3 व्याख्याता हैं, वहीं दुर्ग के मुरमुदा, सिलितरा और बिरेझर जैसे स्कूलों में पर्याप्त संख्या में व्याख्याता न होने के कारण इन स्कूलों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है। इसके उलट शहरी स्कूलों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण से अब इस असमानता को दूर किया जा रहा है।

बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा में कुल 1611 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इससे शैक्षणिक संसाधनों का समुचित वितरण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, खेल सामग्री जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, एक ही परिसर में संचालित शालाओं का एकीकरण कर प्रशासनिक खर्च में भी बचत होगी। कमोवेश यह स्थिति कोरिया जिले में मिली, जिसके कारण जिले में 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक व 7 व्याख्याताओं को ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया, जहां शिक्षकों की जरूरत रही है। जिलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है और अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के माध्यम से उनकी पसंद की शालाओं में पदस्थ किया जा रहा है।

सरगुजा जिले में भी युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 283 सहायक शिक्षकों को उन शालाओं में भेजा गया है, जहां शिक्षकों की जरूरत थी। जांजगीर जिले में 18 प्रधान पाठक, 196 शिक्षक और 436 सहायक शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पारदर्शी व वरिष्ठता प्रणाली के आधार पर पूर्ण की गई। चयनित शिक्षकों को तत्काल पदस्थापना आदेश भी दे दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षक युक्तियुक्तकरण की यह नीति न केवल शैक्षणिक असमानताओं को दूर कर रही है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

छत्तीसगढ़ में होगी शिक्षकों की भर्ती, प्रथम चरण में 5,000 पदों पर होगी नियुक्ति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहल में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होेने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे।

राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं।

युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शालाओं के युक्तियुक्तकरण के तहत राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके।

शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

 

दुर्ग जिले में शिक्षकों की पोस्टिंग में असंतुलन से प्रभावित हो रहा ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम

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रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने शिक्षा विभाग को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जिले के ग्रामीण अंचलों के शासकीय हाई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की अधिकता के कारण शैक्षिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम औसत से भी कम है। शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए युक्तियुक्तकरण जरूरी है। ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थापना करने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और रिजल्ट में सुधार होगा। 

जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने रिपोर्ट में उल्लेखित किया है कि विकासखंड धमधा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मुरमुदा में स्वीकृत 6 पदों के विरुद्ध मात्र 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि कक्षा दसवीं की छात्र संख्या 63 है। शिक्षक अभाव के कारण यहाँ का वार्षिक परीक्षा परिणाम मात्र 47.62 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार शासकीय हाई स्कूल सिलितरा और शासकीय हाई स्कूल बिरेझर में भी स्थिति अत्यंत दयनीय है। दोनों विद्यालयों में स्वीकृत 6-6 पदों के विरुद्ध एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। क्रमशः 81 एवं 63 छात्रों की दर्ज संख्या वाले इन विद्यालयों में परीक्षा परिणाम क्रमशः 36.59 प्रतिशत एवं 35.00 प्रतिशत ही रहा है।

वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में छात्रों की अपेक्षा शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से कहीं अधिक है। उदाहरणस्वरूप, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केम्प-1 मिलाई में 225 छात्रों के लिए स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध 17 शिक्षक कार्यरत हैं, जो कि दर्ज संख्या के मान से 10 शिक्षक अधिक हैं। इसी प्रकार नेहरू शासकीय प्राथमिक शाला दुर्ग में 113 छात्रों के लिए स्वीकृत 4 पदों की तुलना में 11 शिक्षक पदस्थ हैं, जो कि 7 शिक्षक अतिरिक्त हैं। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की शीघ्र पदस्थापना  की आवश्यकता जताई है, ताकि परीक्षा परिणाम में सुधार लाया जा सके और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुधार की नई पहल: युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को उत्कृष्ट स्वरूप प्रदान करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता से लागू करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे शिक्षा विभाग की वह समीक्षा रिपोर्ट है, जिसमें राज्यभर के सरकारी स्कूलों में संसाधनों के असमान वितरण की गंभीर स्थिति सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 211 शासकीय विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी छात्र दर्ज नहीं है, फिर भी वहां नियमित शिक्षक पदस्थ हैं। इससे न केवल शैक्षणिक संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि आवश्यकता वाले विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

उदाहरण के लिए, सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की प्राथमिक शाला साजाभवना में कोई छात्र नहीं है, जबकि एक सहायक शिक्षक वहां कार्यरत हैं। इसी तरह हर्राटिकरा स्कूल में भी छात्र संख्या शून्य है, लेकिन वहां एक प्रधान पाठक और दो सहायक शिक्षक पदस्थ हैं।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे विद्यालयों की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है, और अब वहां से शिक्षकों को तत्काल उन स्कूलों में नियोजित किया जाएगा जहां उनकी आवश्यकता है।

दूसरी ओर राज्य के अनेक दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षक संकट की स्थिति बनी हुई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुंवारपुर में विषयवार शिक्षक न होने के कारण वर्ष 2024-25 में कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम महज 40.68 प्रतिशत रहा, जो राज्य औसत से बहुत कम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जब कुंवारपुर प्रवास पर थे, तब ग्रामीणों ने उनके समक्ष शिक्षक नियुक्तियों की मांग पुरज़ोर ढंग से रखी। ग्रामीणों ने कहा कि गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे विषयों के लिए वर्षों से शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जहां शिक्षक अनुपयोगी रूप से पदस्थ हैं, वहां से उन्हें शीघ्रता से जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक वहीं तैनात हों जहां छात्र हैं यही सुशासन की प्राथमिक शर्त है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि हम उस व्यवस्था की नींव रख रहे हैं, जहाँ शिक्षक और छात्र दोनों अपनी सही जगह पर हों।  युक्तियुक्तकरण इस परिवर्तन की वह कुंजी है, जो वर्षों की उलझनों को सुलझाएगी और शिक्षा को नई ऊँचाई देगी। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय समय की माँग है। यदि इसे निष्पक्षता और डेटा-आधारित पद्धति से लागू किया जाए, तो छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली देश में एक आदर्श मॉडल बन सकती है।

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने तुरंत युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को सक्रिय किया है, जिसमें पारदर्शिता, मानवीय दृष्टिकोण और स्कूलों की जरूरत को प्राथमिक आधार बनाया गया है। इस कदम से एक ओर शिक्षकविहीन स्कूलों को शिक्षक मिल सकेंगे, वहीं दूसरी ओर छात्रविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना को  रोका जा सकेगा। यह पुनर्संरचना शिक्षा प्रणाली को संतुलित, कुशल और परिणामोन्मुखी बनाएगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का युक्तियुक्तकरण का निर्णय महज़ व्यवस्थागत सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा को सार्थक और समावेशी बनाने की ऐतिहासिक पहल है। यह उस सोच का प्रतिबिंब है जो कहती है शिक्षा वहां शुरू होती है, जहां शिक्षक और छात्र दोनों उपस्थित हों एक उत्तम उद्देश्य के साथ स्वर्णिम भविष्य की ओर अग्रसर होते हुएइस प्रेरणा के साथ कि हर पाठशाला देश की अगली पीढ़ी का निर्माण स्थल है।

सीएम कैंप कार्यालय की पहल पर प्रायमरी स्कूल में तत्काल हुई शिक्षकों की व्यवस्था

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रायपुर। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल पर जशपुर जिले के कांसाबेल ब्लॉक के ग्राम जाममुंडा के प्राथमिक स्कूल में तत्काल दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। ग्राम जाममुंडा के ग्रामीणों ने गुरुवार को सीएम कैंप कार्यालय बगिया में आकर आवेदन दिया था कि गांव के प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के निलंबन के बाद वहां नए शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। जिस कारण से ग्रामीणों ने स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना की मांग रखी थी। 

बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर कैंप कार्यालय द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए प्राथमिक स्कूल में दो शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। समस्या का तुरंत समाधान होने से प्रसन्न ग्रामीणों ने सीएम के प्रति आभार व्यक्त किया है।सीएम कैंप कार्यालय में लोगों की समस्याओं का त्वरित निपटारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट निर्देश है कि हर मामले में तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए और लोगों की समस्याएं हल होनी चाहिए। ऐसे ही एक मामले में ग्रामीणों की मांग पर तत्काल ही शिक्षकों की व्यवस्था हो जाने से ग्रामीण काफी प्रसन्न हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संवरेगा बच्चों का भविष्य : स्कूल शिक्षा सचिव परदेशी

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षकों को नए पाठ्यक्रमों के लिए तैयार करने और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने में एससीईआरटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। परदेशी कल एससीईआरटी कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद अधिकारियों की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

स्कूल शिक्षा सचिव परदेशी ने कहा कि हम सबको टीम वर्क के जरिए कार्य करते हुए नई शिक्षा नीति के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना है। यह पाठ्यक्रम आने वाले कई वर्षों तक बच्चों के भविष्य निर्धारित करेगा। पाठ्यक्रम तैयार करते समय यह ध्यान रखने की जरूरत है कि यह न केवल यह बच्चों का भविष्य तैयार करेगा, बल्कि देश का भविष्य भी बनाएगा। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में भी मदद करेगा।

परदेशी ने कहा कि सभी शिक्षकों का दायित्व है कि हम भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाने के लिए अच्छी से अच्छी शिक्षा दें और इसके लिए बच्चों में अनुशासन और उन्हें संस्कारवान बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज में बड़े से बड़े और छोटे से छोटे व्यक्ति की इच्छा होती है कि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार मिले और आगे चलकर वह परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करें। शिक्षक का दायित्व भावी पीढ़ी का निर्माण करना होता है।

कार्यक्रम को समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजीव कुमार झा एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक जयप्रकाश रथ व समग्र के अतिरिक्त मिशन संचालक के. सी. काबरा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन स्टेट मीडिया सेंटर के नोडल अधिकारी प्रशांत पांडेय ने व आभार प्रदर्शन उप संचालक प्रोफसर पुष्पा किस्पोट्टा ने किया। इस अवसर पर बीएड कॉलेज के शिक्षक, छात्र सहित स्कूल शिक्षा विभाग के विभिन्न निकायों के अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 29 जनवरी को ‘परीक्षा पे चर्चा‘ कार्यक्रम

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा को उत्सव की तरह मनाने एवं विद्यार्थियों में तत्संबधी तनाव दूर करने के लिए सीधा संवाद करेंगे। परीक्षा पे चर्चा-2024‘ का कार्यक्रम 29 जनवरी को प्रातः 11 बजे भारत मण्डपम, प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

सचिव स्कूल शिक्षा ने परीक्षा पे चर्चाकार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर आवश्यक व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों से कहा है कि यह समय है कि जब परीक्षाओं को हम सब एक उत्सव के रूप में मनाये विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ उनके परीक्षा संबंधी तनाव को दूर करने में सहयोग करें तथा उन्हें अपना सर्वोत्तम प्रदान करने हेतु प्रोत्साहित करें।

सचिव स्कूल शिक्षा ने कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा है कि इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण दूरदर्शन राष्ट्रीय चैनल, दूरदर्शन न्यूज, दूरदर्शन भारत, यू-ट्यूब व डलळवअण्पद आदि के माध्यम से उपलब्ध रहेगा। इसके लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, आयुक्त नगर निगम और जिला शिक्षा अधिकारी के मध्य समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार कराया जाए। जिले के केन्द्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों, शासकीय एवं निजी विद्यालयों के साथ-साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में स्मार्ट टीव्ही, डिजीटल क्लासरूम के प्रोजेक्टर स्क्रीन का उपयोग करते हुए कक्षा 6वीं से 12वीं तक के अधिक से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को इस लाईव प्रसारण से लाभान्वित करें।

कलेक्टरों से कहा गया है कि जिन स्थलों में इंटरनेट अथवा टेलीविजन की सुविधा सुगम नहीं वहां ऑलइंडिया रेडियो एवं एफएम चैनल के द्वारा इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण सुनाया जाए। कार्यक्रम के पश्चात् बच्चों एवं शिक्षकों के फोटो डलळवअज च्वतजंस पर अपलोड किया जाए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से तीन स्कूलों में दूर हुई शिक्षकों की कमी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर जिले के तीन स्कूलों में शिक्षकों की कमी से लंबे समय से परेशान बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिले के इन तीन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू बनाएं रखने के लिए शिक्षकों की त्वरित नियुक्ति कर दी गई है। अभिभावकों ने इस संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।

जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के रायकेरा गांव के हाईस्कूल में भूगोल, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की कमी थी। स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने समस्या से बगिया स्थित सीएम निवास को अवगत कराते हुए बताया था कि शिक्षकों के ना होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना था कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं की समय-सारणी घोषित कर दी है। ऐसे में शिक्षकों के ना होने से बच्चों का भविष्य बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। यह जानकारी जब मुख्यमंत्री साय को मिली तो उन्होंने अभिभावकों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जशपुर कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल को रायकेरा स्कूल में शिक्षक की कमी दूर करने के निर्देश दिए। 

कलेक्टर डॉ. मित्तल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस स्कूल में 6 शिक्षकों को संलग्न करते हुए, सत्रांत तक अध्यापन कार्य पूरा कराने का आदेश दिया। इसी तरह फरसाबहार के फोकटपारा प्राथमिक शाला में शिक्षक रोशन लाल रावटे को संलग्न किया गया है। दुलदुला ब्लॉक के करडेगा स्कूल की महिला शिक्षक सुश्री अनुपमा किंडों को जिला ग्रंथालय के प्रभार से मुक्त कर वापस मूल संस्था में पदस्थ किया गया है, ताकि करडेगा स्कूल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले के कांसाबेल ब्लॉक के बगिया स्थित सीएम निवास में जिले भर से लोग समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। यहां इन समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिकता से काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिया हैं। बहरहाल स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने से छात्र और उनके अभिभावक काफी प्रसन्न हैं।

मुख्यमंत्री ने गुरूजनों को शिक्षक दिवस पर दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी शिक्षकों और प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा कि पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाकर हम गौरवान्वित महसूस करते हैं। डॉ. राधाकृष्णन एक दार्शनिक और अध्यापक भी रहे हैं।


देश को शिक्षा की दिशा में आगे ले जाने में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने उच्च नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारा और अपने छात्रों को भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक अच्छा नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा के माध्यम से वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। आशा है कि डॉ. राधाकृष्णन के पदचिन्हों पर चलते हुए सभी शिक्षक देश और समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

’राजीव युवा मितान सम्मेलन’: सांसद राहुल गांधी और मुख्यमंत्री बघेल ने नवनियुक्त 2000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए

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रायपुर। लोकसभा सांसद राहुल गांधी और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज नवा रायपुर के मेला ग्राउंड में आयोजित राजीव युवा मितान सम्मेलनमें प्रदेश में नवनियुक्त 2000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। सम्मेलन के मंच से प्रतीक स्वरूप इनमें से 20 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, स्कूल शिक्षा मंत्री रविन्द्र चौबे सहित मंत्रिमण्डल के सदस्य, संसदीय सचिव, विधायक, निगम मण्डल के अध्यक्ष तथा अनेक जनप्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित थे। गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद प्रदेश में पहली बार शिक्षकों की सीधी भर्ती की गई। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मार्च 2019 में व्याख्याता, शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के 14,580 पदों पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापित पदों के विरुद्ध कुल 10,834 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जा चुका है।

 वर्तमान में मई 2023 में 12,489 व्याख्याता, शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के पदों में सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया। मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा 12 अगस्त, 2023 को इस भर्ती में व्याख्याता पद पर चयनित 232 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है। शिक्षक के विज्ञापित 5772 पदों में से 3449 पदों के लिए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किया जा रहा है। इनमें से 2000 अभ्यर्थियों को आज राजीव युवा मितान सम्मेलन में नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया। सहायक शिक्षक के 6285 पदों के लिये अभ्यर्थियों की ऑनलाईन काउंसिलिंग प्रक्रियाधीन है, शीघ्र ही इन्हें नियुक्ति आदेश जारी किया जायेगा।

आज जिन 20 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए है उनमें राजेश पटेल, सुश्री नेहा भोई और सुश्री प्रमिला, जिला कोरिया, सुश्री वर्षा देवांगन, शशांक साहू, सुश्री आभा रंजन, सुश्री मंजू सिदार, जिला बस्तर, सुश्री सुमन, सुश्री कविता निर्मलकर और सुश्री प्रिया, जिला कोण्डागांव, सोनू जायसवाल, आदित्य वर्मा, जिला सरगुजा, चंद्रकांत गजेन्द्र, दीपक कुमार वर्मा, जिला मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, यश कुुमार साहू, सुश्री गीतिका कुटारे, जिला कांकेर, सुश्री कुंती साहू, जिला दंतेवाड़ा, कामेश, जिला जशपुर, राहुल सिंह और सुश्री रोशनी सिंह, जिला सूरजपुर शामिल हैं।

राजीव युवा मितान सम्मेलन : दो हजार शिक्षकों को मिलेगा नियुक्ति पत्र

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रायपुर। राजीव युवा मितान सम्मेलन में कल 02 सितम्बर को 2000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलेगा। ये शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सीधी भर्ती से नियुक्त किए जा रहे हैं। इस समारोह में लोकसभा सांसद राहुल गांधी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा स्कूल शिक्षा मंत्री रविन्द्र चौबे सहित मंत्रिमंडल के सदस्यगण शामिल होंगे। कार्यक्रम में बस्तर व सरगुजा संभाग में नियुक्त 20 शिक्षकों को अतिथियों द्वारा प्रतीक स्वरूप नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। युवा मितान सम्मेलन नवा रायपुर स्थित मेला स्थल में आयोजित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद पहली बार शिक्षकों की सीधी भर्ती की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मार्च 2019 में व्याख्याता शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के 14580 पदों पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापित पदों के विरुद्ध कल 10834 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है। वर्तमान में बस्तर व सरगुजा संभाग के लिए 12489 व्याख्याता, शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के पदों में सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया। व्याख्याता की नियुक्ति के पश्चात मुख्यमंत्री निवास में 12 अगस्त 2023 को 232 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया था। इसी प्रकार शिक्षकों के विज्ञापित 5772 पदों में से 3449 पदों के लिए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किया जा रहा है। इनमें से 2000 अभ्यर्थियों को कल एक साथ नवा रायपुर स्थित राजीव युवा मितान सम्मेलन में नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

सरगुजा में 5 नए आत्मानंद स्कूल खुले, 39 शिक्षकों को मिली मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना शुरू की है। योजना के अंतर्गत सरगुजा जिले में 11 स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित थे। भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्यमंत्री ने 5 नए स्वामी आत्मानंद स्कूल घोलने की घोषणा की थी।

घोषणा पूरी होने के बाद अब जिले में कुल 16 स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 39 शिक्षकों की भर्ती की गयी है। आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन 39 नव नियुक्त शिक्षकों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान स्वामी आत्मानंद स्कूलों में अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में हमें अध्यापन कार्य के लिए नियुक्ति मिली है जिसे हम पूरी तन्मयता से से पूरा करेंगे।

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भर्ती में अतिथि शिक्षकों को बोनस अंक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भर्ती में अतिथि शिक्षकों कों बोनस अंक दिए जाएगें। लोेक शिक्षण संचालनालय द्वारा इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अतिथि शिक्षकों को प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में निर्देश जारी किए है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन के आदेशानुसार प्रदेश में शिक्षकों के 12 हजार 489 पदों पर भर्ती की जा रही है।

इसमें शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षक को प्रत्येक वर्ष के लिए 2 बोनस अंक तथा अधिकतम 10 अंक संचालक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए जाने पर दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा इस संबंध में अतिथि शिक्षकों को प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने कहा है। यह भी  स्पष्ट किया गया है कि किसी भी शैक्षणिक सत्र में एक वर्ष से कम अवधि के अध्यापन के लिए शून्य अंक देय होगा। एक पूर्ण शैक्षणिक सत्र के अध्यापन के लिए 2 अंक देय होगा।

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों कोे प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा है कि निर्धारित प्रक्रिया अनुुसार प्रमाण पत्र उन्हीं अभ्यर्थियों को जारी किया जाए, जिन्हें छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 24 जून 2019 को जारी पत्र अनुसार अतिथि शिक्षक के रूप में शासकीय शालाओं में अध्ययन हेतु व्यवस्था की गई है। इसके लिए आवेदक को अपनी कार्यावधि की स्वघोषणा पत्र के साथ आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा। आवेदनकर्ता आवेदन पत्र में व्यापम पोर्टल पर बनाई गई अपनी इनरोलमेंट नंबर एवं व्यापम में पंजीकृत अपना मोबाईल नंबर अंकित करेंगे। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी प्राप्त आवेदनों का संबंधित प्राचार्य के प्रमाणीकरण उपरांत, व्यक्तिगत रूप से संतुष्ट होने पर निर्धारित प्रारूप में प्रमाण पत्र, विशेष वाहक के माध्यम से लोक शिक्षण संचालनालय भिजवाएंगे, यहां से हस्ताक्षर होने के बाद प्रमाण पत्र अपने कार्यालय से संबंधित को वितरित किया जाएगा।

युवाओं के हित में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, 12 हजार 489 शिक्षकों की होगी सीधी भर्ती

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रखने के पश्चात प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 हजार 489 शिक्षकों के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे है। इनमें सहायक शिक्षक के 6 हजार 285, शिक्षक के 5772 और व्याख्याता के 432 पद शामिल हैं। 
                       

आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल (व्यापम) की वेबसाईट https://vyapam.cgstate.gov.in/ पर 06 मई 2023 को प्रातः 10 बजे से ऑनलाईन भरे जा सकेंगे। इन पदों की भर्ती के लिए परीक्षा व्यापम द्वारा ली जाएगी। जिसकी तिथि व्यापम द्वारा पृथक से जारी की जाएगी। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बस्तर एवं सरगुजा संभाग में 12 हजार 489 शिक्षकों की पदों की भर्ती के लिए ऑनलाईन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। 

व्याख्याता के रिक्त 432 ई और टी संवर्ग में वाणिज्य विषय के 66, गणित के 147 और भौतिकी विषय के 219 पद शामिल हैं। संचालक लोक शिक्षक संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार विज्ञापित पदों की आवश्यक अर्हताएं, आयु सीमा, निर्देश, परीक्षा योजना, पाठ्यक्रम पदों का आरक्षण संबंधी विस्तृत विवरण और अन्य महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकरी https://vyapam.cgstate.gov.in/ एवं https://eduportal.cg.gov.in/ पर विस्तृत विज्ञापन देखे जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा कार्यक्रम : दो दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

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अभनपुर। मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड में 16 से 23 मार्च की अवधि में तीन चरणों मे अभनपुर विकासखंड के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूलों के एक-एक शिक्षकों को विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में विकास खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद भुषण गुप्ता व विकास खंड स्त्रोत समन्वयक बी.आर. बघेल द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्य व उसकी उपयोगिता पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने विचार रखे। तीनों चरणों के प्रशिक्षण सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती धनेश्वरी साहू के मार्गदर्शन में मास्टर ट्रेनर्स शशिकिरण साहू (व्याख्याता),  चंदन कुमार वर्मा (व्याख्याता) द्वारा संपन्न कराया गया।

एबीईओ धनेश्वरी साहू द्वारा इस कार्यक्रम के प्रमुख लक्ष्य के बारे मे विस्तार से बताया गया कि "घर से शाला एवं शाला से घर तक" विभिन्न आपदाओं पर बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले कुप्रभावों को कम करना एवं नियमित शिक्षण मे आने वाली बाधाओं तथा इससे होने वाले नुकसान मे काफी हद तक कमी लाना है। मास्टर ट्रेनर्स शशिकिरण साहू द्वारा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और उपाय, मधुमक्खी /कुत्ते के काटने के संदर्भ मे उपाय एवं जानकारी, आपदा व विपदा की जानकारी, आपदा के प्रकार सुरक्षित शनिवार गाइडलाइन की विस्तृत जानकारी दी गई।

एबीईओ धनेश्वरी साहू द्वारा बाल अधिकार, बाल विवाह, सुरक्षित स्पर्श- असुरक्षित स्पर्श, बाल यौन दुर्व्यवहार से संरक्षण के उपाय, मानव तस्करी से संबंधित समस्त प्रकार के दुर्व्यवहार की जानकारी तथा बचाव के बारे में विस्तार पूर्वक समाधान सहित बताया गया। सर्प दंश/बिच्छू के काटने पर बचाव के संबंध मे तथा सभी प्रकार के टोल फ्री नंबर तथा उनकी उपयोगिता के बारे में जानकारी शिक्षकों को दी गई।

मास्टर ट्रेनर्स चंदन कुमार वर्मा द्वारा बिजली के घात, जल- जमाव से परेशानी,  बोर के गड्ढे से होने वाली घटनाओं,  चक्रवातों,  तूफान/ आंधी से बचने के उपाय, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं उपाय, आगजनी के खतरे, पेयजल अशुद्धता, लू, फाइलेरिया, डायरिया, स्वच्छता एवं साफ - सफाई, सड़क सुरक्षा आदि के बारे मे बताया गया।

एबीईओ धनेश्वरी साहू एवं शशिकिरण साहू द्वारा दुर्घटनाओं के दौरान पीडितों का रेस्क्यू कैसे करें? इस संबंध में सिंगल मैन रेस्क्यू, डबल मैन रेस्क्यू, ट्रिपल मैन रेस्क्यू, चेस्ट रेस्क्यू, स्ट्रेचर, साइबर अपराध उससे होने वाले परेशानियों तथा उसके बचाव का डेमो प्रदर्शन द्वारा प्रस्तुतिकरण किया गया। गैश सिलेन्डर मे आग लगने पर किस प्रकार बुझाए तथा कैसे बचाव करें ? इसका डेमोस्टेशन करके बताया गया।

प्रशिक्षण में मुख्यतः शाला स्तर पर शाला आपदा प्रबंधन समिति की गठन कर बेसलाइन सर्वे के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों मे हजार्ड हंट (जोखिमों की पहचान करने की प्रक्रिया) तथा उसके समाधान निकालने हेतु योजना बनाने की प्रक्रिया के बारे मे बताया गया।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी धनेश्वरी साहू ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण को अपने-अपने स्कूल में बेहतर क्रियान्वयन करने के लिए संबोधित किया। 2 दिवसीय शाला सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षक बसंत दीवान, जनक साहू, शंकर लाल यादव, प्रदीप साहू, प्रेमलता साहू, पुष्पेंद्र आदि शिक्षक साथियों की सहयोगात्मक भूमिका रही।

माध्यमिक शिक्षा मण्डल हेल्पलाईन: विद्यार्थियों को छोटे-छोटे पैरा में याद कर उसे लिखने का दिया सुझाव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा परीक्षा से पूर्व बच्चों, पालकों की समस्याओं के निराकरण के लिए हेल्पलाईन शुरू की गई है। हेल्पलाईन के टोल-फ्री नम्बर 18002334363 पर रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5.30 बजे तक दो पालियों में निरंतर विद्यार्थियों, पालकों, शिक्षकों द्वारा अपनी समस्याएं बतायी जा रही है, जिसका मण्डल द्वारा त्वरित समाधान किया जा रहा है। हेल्पलाईन टोल-फ्री नम्बर पर आज समस्या समाधान के तहत 125 फोन कॉल आए।

हेल्पलाईन में आज मनोवैज्ञानिक सुश्री अंजू पॉल और सहायक प्राध्यापक श्रीमती रीता चौबे ने मनोवैज्ञानिक के तौर पर संबंधित समस्याओं का निराकरण किया। विद्यार्थियों को छोटे-छोटे पैरा में याद कर, फिर उसे लिख कर याद करने का सुझाव दिया गया। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक से ही परीक्षा की तैयारी करने के लिए कहा गया। परीक्षा के पूर्व स्वस्थ्य रहने के लिए पौष्टिक भोजन, भरपूर नींद और निरंतर पानी पीने की सलाह दी गई।

सीबीएसई विद्यालय की एक छात्रा और उसकी माँ ने हेल्पलाईन में परीक्षा की तैयारी के संबंध में प्रश्न किया ? जिसे हेल्पलाईन के माध्यम से महत्वपूर्ण सलाह प्रदान की गई। साथ ही मण्डल के उप सचिव जे.के. अग्रवाल, सहायक प्राध्यापक श्रीमती प्रीति शुक्ला और राजेन्द्र दुबे ने विद्यार्थियों द्वारा पूछी गई समस्याओं का समाधान किया।

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