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छत्तीसगढ़ में शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से शिक्षा में नया संतुलन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और प्रभावशाली प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसको ध्यान में रखकर शालाओं और शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन किया जा रहा है। जहां जरूरत ज्यादा है, वहां शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को, जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीक के अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर मिल सके। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी।

कोरबा जिले के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में अब न्यूनतम दो व तीन शिक्षक पदस्थ किए गए हैं। 287 सहायक शिक्षक, 147 माध्यमिक शिक्षक और 75 व्याख्याताओं को काउंसलिंग के माध्यम से ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया है, जहां शिक्षक की जरूरत थी। इससे पोड़ी उपरोड़ा, पाली, करतला, कटघोरा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षकविहीन रहे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। गणित, विज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञों शिक्षक स्कूलों में उपलब्ध होंगे।

रायपुर के धरसीवां विकासखंड में कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के मान से शिक्षक अधिक पदस्थ हैं। नयापारा कन्या स्कूल में 33 छात्राओं पर 7 शिक्षक तथा रविग्राम में 82 विद्यार्थियों पर 8 शिक्षक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से इन शिक्षकों को आवश्यकता वाली शालाओं में पदस्थ किया जाएगा, जिससे शिक्षक और छात्र के अनुपात का संतुलन कायम होने के साथ ही दूरस्थ इलाकों के बच्चों को भी अध्यापन के लिए शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

इसी तरह शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन के चलते राजनांदगांव और दुर्ग जिले के ग्रामीण स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट आई है। राजनांदगांव के घोटिया स्कूल में 103 छात्रों पर मात्र 3 व्याख्याता हैं, वहीं दुर्ग के मुरमुदा, सिलितरा और बिरेझर जैसे स्कूलों में पर्याप्त संख्या में व्याख्याता न होने के कारण इन स्कूलों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है। इसके उलट शहरी स्कूलों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण से अब इस असमानता को दूर किया जा रहा है।

बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा में कुल 1611 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इससे शैक्षणिक संसाधनों का समुचित वितरण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, खेल सामग्री जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, एक ही परिसर में संचालित शालाओं का एकीकरण कर प्रशासनिक खर्च में भी बचत होगी। कमोवेश यह स्थिति कोरिया जिले में मिली, जिसके कारण जिले में 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक व 7 व्याख्याताओं को ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया, जहां शिक्षकों की जरूरत रही है। जिलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है और अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के माध्यम से उनकी पसंद की शालाओं में पदस्थ किया जा रहा है।

सरगुजा जिले में भी युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 283 सहायक शिक्षकों को उन शालाओं में भेजा गया है, जहां शिक्षकों की जरूरत थी। जांजगीर जिले में 18 प्रधान पाठक, 196 शिक्षक और 436 सहायक शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पारदर्शी व वरिष्ठता प्रणाली के आधार पर पूर्ण की गई। चयनित शिक्षकों को तत्काल पदस्थापना आदेश भी दे दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षक युक्तियुक्तकरण की यह नीति न केवल शैक्षणिक असमानताओं को दूर कर रही है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

देश के प्रत्येक विद्यार्थी की बनेगी यूनिक आईडी

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पना के अनुरूप देश के प्रत्येक विद्यार्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी (अपार आईडी) योजना का पूरे देश में लागू किए जाने की पहल शुरू कर दी गई है। यह योजना तीन चरणों में लागू होगी। प्रथम चरण में कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। दूसरे चरण में कक्षा 6वीं से लेकर 8वीं तथा अगले चरण में पहली से लेकर पांचवीं तक विद्यार्थियों की यूनिक आईडी बनाई जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के तहत विद्यार्थियों के समग्र विकास और शैक्षिक प्रगति को ट्रैक करने के साथ ही एक राष्ट्र एक छात्र आर्डडी की परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करना है। अपार आईडी योजना के क्रियान्वयन के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किया गया है।

अपार आईडी को डिजिलॉकर से जोड़ा जाएगा, जिससे छात्रों की शैक्षिक प्रगति, परीक्षा परिणाम, रिपोर्ट कार्ड और अन्य उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध होगा। यह आईडी भविष्य में उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए क्रेडिट स्कोर के रूप में उपयोगी होगी। भारत शासन के शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 3-4 अक्टूबर 2024 को पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन कर अभिभावकों से छात्रों की अपार आईडी बनाने के लिए सहमति ले। सहमति पत्र के आधार पर स्कूल के प्रधानाध्यापक या प्राचार्य यूडाईस प्लस पोर्टल पर जानकारी प्रविष्ट करने से आईडी स्वतः तैयार हो जाएगी।

ऐसे विद्यार्थी जिनके पास आधार कार्ड नहीं हैं, उनके लिए विशेष शिविर आयोजित कर आधार पंजीकरण कराया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी को इस प्रक्रिया का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही जिला मिशन समन्वयक और सहायक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे, जो विकासखंड, संकुल और शाला स्तर पर प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

शिक्षा हमारे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है : मंत्री लखन लाल देवांगन

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रायपुर। वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन आज कोरबा जिले के पाली विकासखंड के ग्राम नोनबिर्रा में शाला प्रवेश उत्सव समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित बच्चों को देश का बेहतर नागरिक बनने और प्रतिदिन स्कूल आकर पढ़ाई करने का आव्हान किया। देवांगन ने कहा कि शासन की मंशा है कि सभी विद्यार्थी शिक्षा अर्जन कर बेहतर नागरिक बनें। शिक्षा हमारे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है, जिसका बंटवारा नहीं किया जा सकता। शिक्षा से ही देश की प्रगति होती है। घर का एक व्यक्ति शिक्षित होने पर परिवार जागरूक और शिक्षित होता है।

मुख्य अतिथि देवांगन ने उपस्थित ग्रामीणों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने तथा बच्चों की पढ़ाई लिखाई में स्वयं रूचि लेते हुए बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी ने सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभ कर दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा के विकास को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करना चाहिए एवं शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने बालक एवं बालिकाओं को शाला में लाने एवं शाला में निरंतर बनाये रखने में सहयोग प्रदान करने की अपील ग्रामीणों से की।

मंत्री देवांगन ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होता है तथा बेहतर नागरिक बन पाता है। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा स्कूल न छोड़े, उनकी नियमित उपस्थिति बनी रहे एवं उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। हम सबको मिलकर प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा दिलाने में अपना अमूल्य योगदान प्रदान करना चाहिए जिससे प्रत्येक बच्चा शिक्षा के माध्यम से समग्र रूप से विकसित होकर उज्जवल भविष्य की मंजिल पा सके। उन्होंने कहा कि जिले के सभी शाला जाने योग्य बच्चे शाला में नामांकित हों तथा अपनी शिक्षा पूर्ण कर सकें इस हेतु जागरूकता एवं निष्ठापूर्वक प्रयास किया जाना जरूरी है।

मंत्री देवांगन ने कोरबा जिले में विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने शुरू की गई कोचिंग की व्यवस्था, स्कूलों में रिक्त शिक्षकों के पदों पर विशेष पिछड़ी जनजाति के पहाड़ी कोरवाओं सहित विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जिले में शिक्षा का बेहतर माहौल बनेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों को बताते हुए श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के शिक्षा के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी और ग्रामीणों से इसका लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर मंत्री देवांगन ने मुख्यमंत्री द्वारा शाला प्रवेशोत्सव के संबंध में दिए गए संदेश का वाचन भी किया। 

कार्यक्रम में उपस्थित विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल, विधायक पाली-तानाखार तुलेश्वर सिंह मरकाम ने कहा कि शासन द्वारा बच्चों को स्कूल पहुंचने में सुविधा व अपनी पढ़ाई भली-भंाति पूरी कर सकें इसके लिए रूचिकर मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क किताबें, गणवेश वितरण, निःशुल्क साइकिल आदि तरीकों से बच्चों की रूचि बढ़ाने व जरूरतमंद पालकों को राहत देने का इंतजाम भी किया जाता है। शाला प्रवेश उत्सव अभियान के जरिये इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दाखिला लेने वाले बच्चों की पढ़ाई बीच में न छुटे तथा एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो। विधायक पटेल ने विद्यार्थियों के लिए परिवार को प्रथम पाठशाला बताते हुए अभिभावकों को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन अपनी प्रतिभा को निखारने का और आगे बढ़ने का समय होता है। उन्होंने सिर्फ नौकरी ही नहीं हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा को महत्व देने की अपील की। प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का अवसर नए सपनों को लेकर आता है। उन्होंने अच्छे नागरिक के निर्माण के लिए शिक्षा को आवश्यक बताया। इसके साथ ही बच्चों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भी बड़ी जिम्मेदारी होने की बात कही। कलेक्टर ने जिले में शिक्षा के विकास को बढ़ावा देने नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग हेतु जिले के विद्यार्थियों को बाहर भेजने, स्कूलों में रिक्त पदों के विरूद्ध शिक्षकों की नियुक्ति करने की जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले समय में स्कूलों में जो भी रिक्त पद हैं उसे भी पूर्ण कर लिया जाएगा।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नोनबिर्रा के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं को तिलक लगाकर व मिष्ठान खिलाकर शाला में प्रवेश दिया गया। नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं को निःशुल्क गणवेश, स्कूल बैग, पाठ्य पुस्तक व अन्य अध्ययन सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर न्योता भोज का आयोजन भी किया गया। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के साथ बैठकर भोजन किया और उन्हें शिक्षा हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिवकला कंवर, सभापति जनप्रतिनिधिगण, प्रेस प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, पालकगण तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

 

 

बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाना गुरूजनों का दायित्व : शिक्षा मंत्री अग्रवाल

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रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पंडित शंकरानन्द झा मेमोरियल स्कूल के 27वें वार्षिकोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर स्कूली बच्चों को सम्बोधित करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में देश सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने का दायित्व हमारे गुरूजनों पर है। यही भावना हमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती है।

स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी एक पौधे के समान होते हैं और शिक्षक उस माली की तरह होता है जिसकी देखभाल से पौधे पनपकर एक फलदार वृक्ष का रूप ले लेते हैं। ऐसे में शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को स्कूल में एक अच्छा वातावरण उपलब्ध कराए, उनसे अच्छा व्यवहार करें और उनकी छुपी प्रतिभा को सामने लाए।

वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने देशभक्ति, लोकनृत्य सहित मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्कूल के निदेशक रविन्द्र झा, प्राचार्या डॉ. बबीता झा, प्रशासनिक प्रमुख ऋषि झा, शैक्षणिक प्रमुख श्रीमती विनिता अग्रवाल तथा शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

 


प्रोजेक्ट वीरगाथा 3.0 : छत्तीसगढ़ के स्कूलों में आजादी के दिवानों और वीर जवानों की गाथाओं पर होंगे कार्यक्रम

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रायपुर।  आजादी के 75 वें वर्ष गांठ के अवसर पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों में देश के आजादी के दिवानों और सेना के वीरता पुरस्कार प्राप्त जवानों की गाथाओं पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वीरगाथा प्रोजेक्ट 3.0 के तहत किए जाने वाले इन आयोजनों में शासकीय और अशासकीय स्कूलों के कक्षा 3 से 12 वीं तक के स्कूली बच्चें विभिन्न कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे।

                               

प्रोजेक्ट वीरगाथा 3.0 में वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले जवानों की जीवन से मिली सीख, वीरता पुरस्कार प्राप्त जवानों का देश के लिए सर्वोच्च बलिदान, मेरे सपनों में रानी लक्ष्मीबाई, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन, आजादी के आंदोलन में आदिवासियों का योगदान आदि विषयों रखें गए है। विद्यार्थी इन विषयों पर आधारित कविता, कहानी, पेटिंग, मल्टीमीडिया प्रस्तुति देंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी स्कूलों को प्रस्तुति के पूर्व स्कूलों को Mygov पोर्टल पर प्रविष्टियां ऑनलाईन जमा होना शुरू हो चुका है। 

                                      
प्रविष्टियों के मामले में छत्तीसगढ़ अभी देश में चौथे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ से 7979 प्रविष्टियों की जा चुकी हैं, इनमें शासकीय स्कूलों से 7638, निजी स्कूलों से 85 और सीबीएसई पाठयक्रम वाले स्कूलों से 256 प्रविष्टियां की जा चुकी हैं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मिशन समन्वयकों को निर्देशित किया है कि सभी स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाए और 15 सितम्बर के भीतर की समय सीमा में पोर्टल में एंट्री हो जाएं। छात्रों की ओर से स्कूल प्रविष्टियां जमा करेंगे फिर इन प्रविष्टियों का मूल्यांकन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा। विजेताओं का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर सुपर 100 विजेता चयनित होंगे। यह चार श्रेणियों (कक्षा 3-5, 6-8, 9-10,11-12) में से 25 विजेता घोषित होंगे। प्रत्येक विजेता को 10 हजार रूपए की पुरस्कार राशि एक पदक और रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाएगा। भारत सरकार रक्षा मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय संयुक्त रूप से इन विजेताओं को पुरस्कृत करेगा। राज्य, संघ राज्य क्षेत्र स्तर के 8 विजेता (प्रत्येक श्रेणी से 2 विजेता) होंगे। सुपर 100 विजेता इसमें शामिल नही होंगे। संबंधित राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश के विजेता वहां के प्रधान सचिव या सचिव शिक्षा द्वारा सम्मानित होंगे। जिला स्तर पर 4 विजेता (प्रत्येक श्रेणी से 1 विजेता) होगा। सुपर 100 व राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश के विजेता इसमें शामिल नहीं होंगे। 

जिला आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, जिला उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा छात्रों को संयुक्त रूप से सम्मानित किया जाएगा। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा द्वारा सभी जिला नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्कूल  Mygov  पर 15 सितम्बर तक चार सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियां अपलोड करें। सभी स्कूलों को इस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से प्रत्येक श्रेणी में शामिल हुए छात्रों की संख्या अपलोड करवाएं। इसके बाद 17 अक्टूबर तक कॉन्सेप्ट नोट के तहत दिए गए शीर्ष के अनुसार जिला नोडल अधिकारियों द्वारा प्रविष्टियों का जिला स्तरीय मूल्यांकन किया जाए।

जिला नोडल अधिकारी द्वारा पोर्टल के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियां राज्य के नोडल अधिकारियों को भेंजी जाएं। 19 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक राज्य नोडल अधिकारी द्वारा जिला नोडल अधिकारियों से प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन किया जाए और पोर्टल के जरिए सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियां शिक्षा मंत्रालय (एमओई) को अग्रेषित की जाएं। 10 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित राष्ट्रीय स्तर समिति द्वारा राष्ट्रीय स्तर प्रविष्टियों का मूल्यांकन किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर समिति द्वारा 15 दिसम्बर तक शिक्षा मंत्रालय को परिणाम प्रेषित किए जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय द्वारा 20 दिसम्बर तक रक्षा मंत्रालय (एमओडी) को परिणाम आगे भेंजे जाएंगे।

राज्यपाल ने स्कूल का भ्रमण कर छात्र जीवन की यादें ताजा की

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रायपुर। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन अपने ओडिशा प्रवास के दौरान मुखु क्षेत्र से संबद्ध एक शैक्षणिक संस्थान खेतबासी अकादमी गए। राज्यपाल इस स्कूल के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। जहां उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा हुई है। यहां उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादंे ताजा की और स्कूल के संस्थापक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
                     

इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें मन लगाकर अच्छे से पढ़ाई करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी कल के भविष्य हैं। यदि उन्हें ठीक से शिक्षा नहीं दी जाये तो वे अपने पूर्वजों, अतीत के गौरव, जाति परंपराओं, सिद्धांतों, मूल्यों, विषमताओं, कुरूतियों आदि के संबंध में नहीं जान सकेंगे।
                    

विद्यालय में विद्यार्थी न केवल पाठ्य पुस्तकों का बल्कि भौतिक, वैदिक, नैतिक, एवं अन्य विषयोें का भी ज्ञान प्राप्त करते हैं।राज्यपाल ने स्थानीय मिट्टी को अपने लिए स्वर्ग बताया और अपने समय के शिक्षको को याद कर उनकी सराहना की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाया हुआ राज्यपाल का पोर्टेट उन्हें भेंट किया। राज्यपाल ने स्कूल परिसर में वृक्षा रोपण भी किया।

छत्तीसगढ़ : विद्यार्थियों के मन से रिजल्ट का भय दूर करने की पहल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा परिणाम घोषित करने के पूर्व 10 मई को सुबह 10.30 बजे से हेल्पलाईन शुरू की जा रही है। हेल्पलाईन टोल फ्री नंबर 18002334363 है। परीक्षा परिणाम के पूर्व विद्यार्थी के मन में भय से होने वाले तनाव का प्रबंधन तथा विषय एवं कैरियर चयन संबंधी मार्गदर्शन के लिए रविवार एवं शासकीय अवकाश को छोड़कर 10 मई से 18 मई तक हेल्पलाईन का संचालन किया जाएगा। 

हेल्पलाईन का संचालन दो पालियों में होगा। पहली पाली सुबह 10.30 बजे से 1.30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2.00 बजे से शाम 5.30 तक संचालित की जाएगी। हेल्पलाईन द्वारा मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, कैरियर काउंसलर, मंडल के अधिकारी, सहायक प्राध्यापक मार्गदर्शन देंगे। हेल्पलाईन मंडल के उपसचिव जे.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं हेल्पलाईन समन्वयक डॉ. प्रदीप कुमार साहू के समन्वय से कार्य करेगा। उल्लेखनीय है कि वार्षिक परीक्षा 2023 की परीक्षा पूर्व एवं परीक्षा के दौरान हेल्पलाईन कार्यक्रम संचालित किया गया। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कक्षा 10 वीं और 12 वीं की मुख्य परीक्षा का परिणाम 10 मई को दोपहर 12.00 बजे घोषित किया जाएगा।


प्रमुख सचिव एवं सचिव स्कूल शिक्षा ने परखी स्कूलों की जमीनी वस्तुस्थिति

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महासमुंद। राज्य में स्कूली शिक्षा में बच्चों के सीखने-सिखाने के स्तर एवं जमीनी वास्तविकताओं को परखने आज स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ल, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक लोक शिक्षण सुनील जैन महासमुंद जिले के साराडीह गाँव के प्राथमिक स्कूल का अवलोकन करने पहुंचे।उन्होंने स्कूल की प्रधानाध्यापिका के साथ सभी कक्षाओं में बच्चों के साथ विस्तार से बातचीत कर उनके स्तर के आकलन करने का प्रयास किया। 145 की दर्ज संख्या वाले स्कूल में लगभग 120 विद्यार्थी ही उपस्थित पाए गए। 



डॉ. आलोक शुक्ला ने अनियमित उपस्थिति वाले बच्चों की सूची बनाकर उन्हें नियमित करने के लिए बच्चों के पालकों और समुदाय के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कक्षा शिक्षण में कक्षा के एक बच्चे को बोर्ड या चार्ट पर लिखे शब्दों या वाक्यों को पढ़कर अन्य बच्चों को दोहराने की बरसों पुरानी परंपरा भी यहाँ दिखाई दी। प्रमुख सचिव ने शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के कौशल और इसे रोचक बनाने पर अधिक जोर दिया। उन्होंने इसके लिए शिक्षक प्रशिक्षण की नियमित व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई। 

स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. भारतीदासन ने कक्षा में एक बच्चे के साथ कितने देर शिक्षक व्यक्तिगत ध्यान दे पाते हैं आदि की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को सिखाने में व्यक्तिगत रूचि लेने का आग्रह किया। संचालक, लोक शिक्षण सुनील जैन ने सभी संकुल समन्वयकों को शीघ्र प्रशिक्षित करते हुए उन्हें बच्चों में मूलभूत भाषाई एवं गणितीय कौशल विकास में फोकस होकर कार्य करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सोमशेखर ने बच्चों को निक्लर एप्प के प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षण कौशल की जानकारी दी।

वरिष्ठ अधिकारियों के इस निरीक्षण दल द्वारा परिसर में संचालित बालवाड़ी, शौचालय एवं किचन शेड आदि का निरीक्षण करते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश भी दिए। उन्होंने मध्यान्ह भोजन को चखकर भी देखा। इस अवसर पर महासमुंद जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

युवा जीवन में अपने लक्ष्य निर्धारित करें और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लें : सुश्री उइके

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रायपुर। युवा अपना लक्ष्य निर्धारित करें और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लें। इसी संकल्प से आप सफल होंगे और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे। उक्त उद्गार राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित युवा उत्सव कार्यक्रम में व्यक्त किए। भारतीय उद्योग परिसंघ के रायपुर वाय.आई. चेप्टर द्वारा युवा उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें देश एवं प्रदेश के प्रमुख उद्यमी/उद्योगपति, विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के युवा विद्यार्थी शामिल हुए। 



इस दौरान राज्यपाल सुश्री उइके ने भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा विभिन्न मानकों के आधार पर चयनित किए गए औद्योगिक ईकाईयों तथा परिसंघ के विशिष्ट सदस्यों को पुरस्कार प्रदान किए।राज्यपाल सुश्री उइके ने उपस्थित युवा विद्यार्थियों से कहा कि आपको अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लेना होगा। तभी आप अपना लक्ष्य प्राप्त कर देश निर्माण में अपनी भूमिका निभा पाएंगे। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि बतौर कुलाधिपति मैंने युवाओं के कैरियर मार्गदर्शन तथा काउंसलिंग के लिए विश्वविद्यालयों को निर्देशित भी किया है, 



ताकि युवा अपनी रूचि के अनुरूप अपना क्षेत्र का चुनाव कर पाएं। राज्यपाल ने आगे कहा कि भारत की विकास यात्रा में भारतीय उद्योग परिसंघ पिछले 125 वर्षों से जुटा हुआ है। एक संस्थान के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है। परिसंघ राष्ट्र के विकास में भारतीय उद्योगों की सक्रियता और योगदान को बढ़ाने और उन्हें जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नीतिगत मुद्दों पर भी उद्योग परिसंघ सरकार के साथ मिलकर काम करता है और इन मुद्दों पर संवाद के माध्यम से आम सहमति बनाने के लिए मंच प्रदान करता है। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत की जो संकल्पना की है, 



उसे पूरा करने में भारत के युवा उद्यमियों की बड़ी भूमिका होगी। इसी आशय से शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया तथा मुद्रा लोन जैसी योजनाएं उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि प्रदेश में परिसंघ की ईकाई वाय.आई. द्वारा राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से अनेकों महत्वपूर्ण विषयों जैसे जलवायु परिवर्तन, अंगदान, सड़क सुरक्षा, प्रोजेक्ट मासूम (बच्चों को सुरक्षित रखना), युवा उद्यमिता शिखर सम्मेलन आदि आयोजित किये जा रहे हैं। वास्तव में ये सभी विषय, वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और इससे समाज में जागरूकता आयेगी।


कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं को अपने अनुभवों से सीख देते हुए कहा कि असफलता से निराश होकर हमें रूकना नहीं चाहिए। हमारा आत्मविश्वास ही हमें जीवन में सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
इस अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा राज्यपाल सुश्री उइके को शाल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय उद्योग परिसंघ के उमेश चितलांगिया, सिद्धार्थ अग्रवाल, आदित्य मुंदड़ा, सतीश पाण्डेय तथा शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति और बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे।

जिला शिक्षा अधिकारियों को आरटीई पोर्टल से बंद निजी विद्यालयों की जानकारी हटाने के निर्देश

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रायपुर. संचालक लोक शिक्षण ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शिक्षा के अधिकार के तहत आईटीआई पोर्टल से बंद निजी विद्यालयों की जानकारी तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। संचालक लोक शिक्षण ने निर्देशित किया गया है कि वर्तमान में यदि ऐसा हुआ कि किसी विद्यार्थी का चयन बंद स्कूल में हो गया है तो, ऐसी स्थिति में नोडल अधिकारी स्वयं उन पालकों से संपर्क स्थापित कर उनका आवेदन स्वीकार करते हुए उन्हें निकट के अन्य विद्यालयों में दाखिला हेतु कार्यवाही करें। 



यदि भविष्य में किसी बंद विद्यालय में विद्यार्थियों का प्रवेश होता है तो या राशि का हस्तांतरण होता है, तो उसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में कहा गया है कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ निजी विद्यालय ऐसे हैं जो बंद हो चुके हैं, वहां भी सीटों का आबंटन हो गया है। कोरोना संक्रमण के कारण कई निजी विद्यालय ऐसे हैं जो बंद हो चुके हैं या बंद होने की स्थिति में हैं।

जिला शिक्षा अधिकारियों की इस संबंध में पूर्व में भी सूचित किया गया था कि, जो विद्यालय बंद हो चुके हैं, उनकी जानकारी लोक शिक्षण संचालनालय को दी जाए। कुछ जिलों के द्वारा बंद स्कूलों की जानकारी दी गई है, परन्तु अभी भी कई जिले ऐसे हैं जिनके द्वारा बंद विद्यालयों की जानकारी आरटीई पोर्टल से न तो हटाई जा रही है और न ही इसकी सूचना कार्यालय को दी जा रही है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि, वे उन स्कूलों का नाम तत्काल पोर्टल से हटाने की कार्यवाही करें या पत्र के माध्यम से कार्यालय लोक शिक्षण संचालनालय को अवगत कराएं।

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