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वन अधिकार अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आदिम जाति विकास विभाग और एनजीओ एटीआरईई के मध्य एम.ओ.यू.

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम-2006 के बेहतर  कियान्वयन हेतु आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग और स्वयं सेवी संस्था अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एण्ड एनवायरोमेंट (एटीआरईई) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ है। विभागीय मंत्री रामविचार नेताम एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की उपस्थिति में एटीआरईई के प्रतिनिधि डॉ. शरतचंद्र लेले एवं विभाग की ओर से सचिव सह आयुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एमओयू का कार्यक्रम मंत्रालय महानदी भवन में सम्पन्न हुआ।

इस मौके पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह समझौता वन अधिकार अधिनियम-2006 के उचित अनुपालन में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर), सीएफआर प्रबंधन एवं वन अधिकार पत्रों के आनॅलाइन डिजिटाइजेशन के संबंध में जमीनी स्तर पर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अब इस समझौते के माध्यम से एफआरए अधिनियम के उचित क्रियान्वयन  में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम केन्द्र एवं राज्य शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है। अतः इसके उचित कियान्वयन में सबका समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक है।

इस समझौते के माध्यम से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) प्रकरणों में त्रुटियों की पहचान और समाधान करने के लिए विभाग को जमीनी स्तर के अनुभव के आधार पर सलाह प्रदाय करेगा। इसके अलावा विभाग द्वारा विकसित किये जाने वाले एफआरए एटलस के लिए एटीआरईई के द्वारा जिला स्तरीय सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) संभावित ग्रामों का मानचित्र एवं डाटा भी प्रदाय किया जाएगा। साथ ही विभाग द्वारा (सीएफआरआर) के अंतर्गत परंपरागत सीमा के संबंध में विकसित किये जा रहे भौगोलिक सूचना प्रणाली (वेबजीआईएस) के पोर्टल के लिए आवश्यकतानुसार तकनीकी सलाह भी प्रदाय करेगा। इसके अलावा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन और गौण वनोपज आधारित आजीविका वृद्धि की सुविधा के लिए नीतियों और कार्यक्रमों में सुधार पर विभाग को सुझाव देगा। साथ ही अन्य राज्यों के क्षेत्रीय अनुभव और उत्तम पहल के आधार पर सीआरएफ प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उपायो के संबंध में भी विभाग को सुझाव प्रदान करेगा।

वन अधिकार पत्र धारकों से धान खरीदी व्यवस्था में शामिल करने राज्य सरकार की विशेष पहल

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रायपुर। राज्य सरकार द्वारा आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में प्रदेश के वन अधिकार पत्र धारक किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के लिए विशेष पहल की जा रही है। वन अधिकार पत्र धारकों को धान खरीदी व्यवस्था में शामिल होने पंजीयन हेतु प्रोत्साहित और जागरूक किया जा रहा है। वन पट्टाधारी किसानों को धान खरीदी व्यवस्था में शामिल करने ज्यादा से ज्यादा संख्या में धान खरीदी पोर्टल में पंजीयन हेतु जोर दिया जा रहा है। इसके लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख को पत्र भी जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए है।

उल्लेखनीय है कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 के लिए अब तक 80 हजार से अधिक वन अधिकार पत्र धारकों का धान खरीदी पोर्टल में पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार द्वारा राजस्व भूमि के साथ-साथ वन भूमियों में रहने वाले वन अधिकार पट्टा धारकों को भी धान बेचने का अधिकार देकर बड़ी सहुलियत दी गई है। शासन की मंशा है कि अधिक से अधिक वन अधिकार पट्टा धारक अपना धान बेंच सके और अन्य कृषि आधारित योजनाओं का लाभ मिले। इसके लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा निर्देश जारी कर वन भूमियों की गिरदावरी का कार्य अक्टूबर माह के दूसरे सप्ताह तक पूर्ण करने को कहा गया है। 

गौरतलब है कि वर्तमान में राजस्व विभाग द्वारा कृषकों की जानकारी ऑनलाईन एकत्रित की जाती है, जो कृषकों की फसल के गिरदावरी से संबंधित है। पत्र में जिला वन मंडलाधिकारियों को कलेक्टर के सहयोग से गिरदावरी की जानकारी एकत्रित करने हेतु बीटगार्डाे को गिरदावरी का प्रशिक्षण दिये जाने की कार्यवाही करने को कहा गया है। ताकि वन अधिकार अधिनियम 2006 अंतर्गत वन पट्टा धारकों का पंजीयन धान खरीदी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिससे वन पट्टाधारकों को सभी शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

वन अधिकार मान्यता के क्रियान्वयन में देश में अव्वल छत्तीसगढ़

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन अधिकार मान्यता अधिनियम का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप प्रभावी और संवेदनशीलता के साथ क्रियान्वयन हो रहा है। इसके परिणाम स्वरूप राज्य में आदिवासी - वनवासियों सहित गरीब तथा कमजोर वर्ग के समस्त लोगों को काफी राहत मिली है, और उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है। आम जन के सरोकार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं वन संरक्षण की दृष्टि से यह वन अधिकार मान्यता पत्र अत्यंत ही महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार मान्यता पत्र के संदर्भ में कुल 5 लाख 17 हजार 096 हितग्राहियों को वन अधिकार पत्र प्रदाय किये गये है। व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र प्रदाय करने में छत्तीसगढ़ राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। इसके अंतर्गत हितग्राहियों के समग्र विकास के लिए भूमि समतलीकरण, जल संसाधनों का विकास तथा क्लस्टर के माध्यम से हितग्राहियों को अधिकाधिक लाभ के उद्देश्य से अनेक योजनाओं के माध्यम से मदद पहुंचाई गई है। इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्हीं. श्रीनिवास राव से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें हितग्राहियों को वन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य की जनहितकारी योजनाओं जैसे निजी भूमि पर बाईबेक गारंटी के साथ मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना, फसल विविधता को प्रोत्साहित करने के लिये धान के बदले अन्य रोपण हेतु प्रोत्साहन राशि का प्रावधान आदि से भी जोड़ा जा रहा है।

इसके तहत भूमि विकास के फलस्वरूप प्रति हितग्राही कृषि उत्पादन बढ़ गया है और अनेक प्रकार के आय-मूलक फसलों (कैश क्रॉप) का उत्पादन भी उन क्षेत्रों में किया जा रहा है। जिसके कारण हितग्राहियों का आजीविका उन्नयन भी सुनिश्चित हुआ है। साथ ही साथ इससे वन सुरक्षा के प्रति जनता का सीधा सरोकार सामने आया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे है। इसी तरह राज्य में सामुदायिक वन अधिकार अंतर्गत कुल 46000 प्रकरणों को मान्यता प्रदान की गई है, जो कि पुनः देश में सर्वाधिक है। 

इसके अंतर्गत वनांचलों में निवासरत जन समुदाय को विभिन्न प्रकार के निस्तार संबंधी अधिकार जैसे गीण वन उत्पाद संबंधी अधिकार मछली व अन्य जल उत्पाद तथा चारागाह अधिकार विशेष पिछड़ी जाति एवं समुदायों, कृषकों को आवास अधिकार, सभी वन ग्रामों पुराने रहवास क्षेत्रों, असर्वेक्षित ग्राम आदि को राजस्व ग्राम में बदलने के अधिकार, आदि शामिल है। इसके अलावा वनांचल क्षेत्र में पाये जाने वाले लघु वनोपज संग्रहण के लिये 67 प्रजातियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है और इस वर्ष छ.ग. राज्य वन अधिकार मान्यता के प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा देश का 73 प्रतिशत लघु वनोपज का संग्रहण करने में सफलता प्राप्त की है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 4306 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मान्यता पत्र प्रदाय किये गये है। वन संसाधन अधिकार के प्रबंधन हेतु मान्यता प्रदान करने में छत्तीसगढ़ राज्य देश का प्रथम राज्य है, जहां व्यापक पैमाने पर वन वासियों के अधिकारों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुये वन अधिकार पत्र प्रदाय किये गये है। इस अधिकार के तहत ग्राम सभा को प्रदत्त मान्यता वाले वन क्षेत्रों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है। उक्त वनों के प्रबंधन हेतु प्रबंध योजना तैयार करने की कार्यवाही प्रगति पर है। जिसके लिये 19 जिलों के लगभग 2000 ग्रामों के हितधारकों को प्रबंध योजना तैयार कर कार्य आयोजना के साथ एकीकृत करते हुये प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

प्रबंध योजना में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मान्यता वाले वन के प्रबंधन हेतु समस्त प्रकार के सर्वेक्षण करते हुये प्रबंधन के सभी आयाम प्रस्तावित है। यहां यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक ईकाई वन भूमि पर अधिक से अधिक लाभ के लिये किस प्रकार का रोपण अथवा संरक्षण संबंधी कार्य प्रस्तावित किया जा सकता है। फाउंडेशन फॉर ईकोलाजिकल सेक्युरिटी नामक स्वयं सेवी संस्था द्वारा राज्य के 19 जिलों के लगभग 700 ग्रामों में प्रसंस्करण एवं आय संसाधन में वृद्धि के लिये संभावनाओं की तलाश और उससे संबधित प्रशिक्षण दिया गया है।

इसी तरह प्रदान संस्था के द्वारा 05 जिलों के 36 गांवों में कृषि के उन्नत तकनीक एवं प्रसंस्करण के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही रिक्त स्थानों पर कार्य आयोजना के प्रावधानों को प्रबंध योजना में एकीकृत करते हुये स्थानीय प्रजातियों के लिये वृहद रोपण हेतु योजना तैयार की जा रही है। राज्य में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार अधिनियम अंतर्गत राज्य के 24 जिलों में लगभग 106 प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है, जिसमें कुल 5492 हितग्राही लाभान्वित हुये है।

वन अधिकार पत्र वितरण, देवगुड़ी विकास और छात्रावास-आश्रम के मरम्मत कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करें : सचिव डी.डी. सिंह

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव डी.डी.सिंह ने कहा है कि प्रदेश में गठित प्रत्येक वन अधिकार समितियों में कम से कम एक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र दिया जाए। विशेष पिछड़ी कमजोर जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को सभी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। वन अधिकार हितग्राहियों को मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों एवं अन्य अनुषंगिक कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। सिंह आज यहां आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में सरगुजा संभाग के सहायक आयुक्तों और परियोजना प्रशासकों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

डी.डी. सिंह ने कहा कि शासन की प्राथमिकता की योजनाएं वन अधिकार मान्यता पत्र, देवगुड़ी विकास, छात्रावास-आश्रम, विभाग द्वारा संचालित एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालय तथा क्रीडा परिसर पर विशेष ध्यान दिया जाए। देवगुड़ी निर्माण, मरम्मत तथा छात्रावास एवं आश्रमों के उन्नयन के कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त के दिन वितरित होने वाले वन अधिकार के पात्र हितग्राहियों का चयन कर सूची तैयार कर ली जाए। छात्रावास-आश्रमों में निर्माण कार्यों को सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही पूर्ण कर लिया जाए। सहायक आयुक्त एवं परियोेजना प्रशासक निर्माण कार्यों के गुणवत्ता की जांच स्थल पर जाकर करें। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दें। छात्रावास-आश्रमों को आदर्श रूप में विकसित करे। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के द्वितीय चरण में चयनित गांव में सर्वे कराकर वहां के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार करें।

आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत जहां विशेष पिछड़ी कमजोर जनजातियों को अधिक वन अधिकार पट्टे दिए गए हैं, उन्हें आदर्श गांव घोषित करें और इन हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलवाए। उन्होंने नगरीय क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन एवं वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत विकसित किए जाने वाले आदर्श ग्राम के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। श्रीमती आबिदी ने कहा कि विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के लिए आवास भी बनाए जाने है, इसके लिए इन वर्गो के मुखिया और हितग्राहियों से चर्चा कर उनके संस्कृति के अनुरूप घर बनाया जाए।

आवास का निर्माण वैध जमीन पर ही किया जाए और वहां बिजली, पानी की मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए मेस संचालन, खेल सामग्री क्रय करने की कार्रवाई नियमानुसार शीघ्र पूर्ण कर ली जाए। जिले के सहायक आयुक्त इसके लिए इन स्कूलों का अकादमी कैलेण्डर तैयार कर उसका पालन सुनिश्चित करवाए। इन स्कूलों के शिक्षकों को विषय-वस्तु के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए। इन स्कूलों के बच्चों का प्रत्येक माह यूनिट टेस्ट लेकर बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों का आकलन करें। विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित क्रीड़ा परिसरों में स्वीकृत लघु निर्माण कार्यो का मौके पर मुआयना कर इन कार्यो को शीघ्र ही पूरा करवाए। क्रीडा परिसरों में बच्चों की समय पर भर्ती हो। इन क्रीडा परिसरों में खेल विधाओं के अनुसार कैम्प लगाकर बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाए।

बैठक में बताया गया कि सरगुजा संभाग में मई 2023 तक व्यक्तिगत 1,20,529 वन अधिकार पत्र 68367.539 हेक्टेयर भूमि पर वितरित किए गए हैं, इसमें सर्वाधिक 29516 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र सूरजपुर जिले में वितरित किए गए हैं। इसी प्रकार सामुदायिक वन अधिकार के 11139 और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के 1329 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। सरगुजा संभाग में विशेष पिछड़ी कमजोर जनजातियों के कुल 800 ग्रामों में व्यक्तिगत वन अधिकार के 9977, सामुदायिक वन अधिकार के 633 और सामुदायिक वन संसाधन के 54 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में प्राप्त आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए मई 2023 तक व्यक्तिगत वन अधिकार के 33 और सामुदायिक वन अधिकार के 4 पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के मेस संचालन, गणवेश आपूर्ति, पाठ्यपुस्तक, बोर्ड परीक्षा परिणाम एवं अतिथि शिक्षकों की भर्ती की समीक्षा की गई। सीबीएसई पैटर्न के आधार पर बच्चों को पढ़ाने वाले अच्छे शिक्षकों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए। प्रयास आवासीय विद्यालयों में प्रवेश एवं परीक्षा परिणाम तथा नवीन प्रयास आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था के संबंध में भी निर्देश दिए गए।

बैठक में अत्याचार निवारण अधिनियम, न्यायालयीन प्रकरणों, भर्ती, पदोन्नति एवं अनुकंपा नियुक्ति की समीक्षा की गई। परियोजना प्रशासकों से आदिग्राम पोर्टल में आवश्यक जानकारी की प्रगति को शीघ्र दर्ज करने के निर्देश दिए। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 एवं केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना अन्तर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह अभिकरण, प्रकोष्ठ के कार्यो में वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 की समीक्षा की गई एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को सभी योजनाओं का लाभ दिलवाएं: मंत्री डॉ. टेकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने वन अधिकार पत्र वितरण के प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके अलावा सामुदायिक वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र एवं वन अधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों को मनरेगा के तहत् स्वीकृत कार्यों एवं अन्य आनुषंगिक कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा है विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को सभी विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।

इनके वन अधिकार पट्टे की भूमि पर मनरेगा के तहत अभिसरण से कार्य कराया जाए। जिला समन्वय समिति बनाकर विभागों को कार्य का लक्ष्य दिया जाए। जिन गांवों में वन अधिकार के अधिक पट्टे दिए गए हैं उन्हें आदर्श गांव घोषित कर इन वर्गो के लिए कार्य कराया जाए। आदर्श गांवों की सूची सभी विभागों को दी जाए तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करवाएं। मंत्री डॉ. टेकाम आज यहां आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के सहायक आयुक्तो एवं परियोजना प्रशासकों को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विभाग के सचिव श्री डी.डी.सिंह और आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी सहित वरिष्ट अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि वर्तमान में मौसम को देखते हुए वन अधिकार पट्टेधारियों की भूमि पर पौधा रोपण करवाएं। यहां सब्जी, फल के पौधो का वितरण भी किया जाए। विभाग के सचिव डी.डी. सिंह ने कहा कि गतवर्ष हर गांव में सामुदायिक भवन अधिकार पत्र वितरण का लक्ष्य दिया गया था, इस कार्य को भी पूरा करें। विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को आयुष्मान कार्ड का वितरण, पेंशन योजना और राशनकार्ड वितरण कर लाभान्वित किया गया। इसके साथ ही इन वर्गो के बच्चों के शिक्षा का विशेष ध्यान दें। आजीविका के लिए लघु वनोपज संग्रहण कार्य से भी जोड़ा जाए। वन अधिकार मान्यता के लिए आवेदकों की संख्या बढ़ाएं।

मंत्री डॉ. टेकाम ने विभागीय योजनाओं के लक्ष्य को पूरा करने, निर्माण कार्यो को स्थल पर निरीक्षण कर अपेक्षित प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के साथ केन्द्रीय योजनाओं के कार्यो को भी समय पर पूरा करें। देवगुड़ी आदिवासियों के आस्था का केन्द्र है। समुदाय का इससे जुड़ाव होना चाहिए। देवगुड़ी निर्माण के सभी स्वीकृत कार्यो को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने कहा कि विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के लिए आवास भी बनाए जाने है, इसके लिए इन वर्गो के मुखिया और हितग्राहियों से चर्चा कर उनके संस्कृति के अनुरूप घर बनाया जाए।

आवास का निर्माण वैध जमीन पर ही किया जाए और वहां बिजली पानी की मूलभुत सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए मेस संचालन, खेल सामग्री क्रय करने की कार्रवाई नियमानुसार शीघ्र पूर्ण कर ली जाए। इन विद्यालयों में कक्षा 10 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिले के सहायक आयुक्त इसके लिए इन स्कूलों का अकादमी कैलेण्डर तैयार कर उसका पालन सुनिश्चित करवाए। इन स्कूलों के शिक्षकों को विषय-वस्तु के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए। इन स्कूलों के बच्चों का प्रत्येक माह यूनिट टेस्ट लेकर बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों का आकलन करें। विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित क्रीडा परिसरों में स्वीकृत लघु निमार्ण कार्यो का मौके पर मुआयना कर इन कार्यो को शीघ्र ही पूरा करवाए। क्रीडा परिसरों में बच्चों की समय पर भर्ती हो। इन क्रीडा परिसरों में खेल विधाओं के अनुसार कैम्प लगाकर बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाए।

बैठक में सहायक आयुक्तों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्यों एवं उन्नयन किये गए छात्रावास-आश्रमों की मौके पर जाकर समीक्षा करें। विभाग अंतर्गत संचालित विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में अनुरक्षण, लघु मद अन्तर्गत किए गए कार्यो की समीक्षा भी की गई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की समीक्षा के अंतर्गत गणवेश आपूर्ति, पाठ्यपुस्तक तथा विद्यालयवार, शिक्षकवार बोर्ड परीक्षा परिणाम एवं अतिथि शिक्षकों की भर्ती की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

 सीबीएसई पैटर्न के आधार पर बच्चों को पढ़ाने वाले अच्छे शिक्षकों की नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा प्रयास आवासीय विद्यालयों में वर्ष 2022-23 में प्रवेश एवं परीक्षा परिणाम तथा नवीन प्रारंभ प्रयास स्कूलों की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना अन्तर्गत चयनित ग्रामों में स्वीकृत कार्यो की प्रगति की समीक्षा भी गई। चयनित ग्रामों में किए गए कार्यों का निरीक्षण करने के निर्देश सहायक आयुक्तों को दिए गए। इसके अलावा अत्याचार निवारण अधिनियम, न्यायालयीन प्रकरणों, भर्ती, पदोन्नति एवं अनुकंपा नियुक्ति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इसी प्रकार परियोजना प्रशासकों से आदिग्राम पोर्टल में आवश्यक जानकारी की प्रगति को शीघ्र दर्ज करने के निर्देश दिए। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 एवं केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना अन्तर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह अभिकरण, प्रकोष्ठ के कार्यो में वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 की समीक्षा गई एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। उल्लेखनीय है कि विभागीय योजनाओं की समीक्षा हेतु तीन चरणों में होने वाली इस बैठक के तृतीय चरण में सरगुजा संभाग की समीक्षा बैठक 15 जून को की जाएगी। 

वन अधिकार पत्र वितरण के प्रकरणों में तेजी लाएं - डी.डी.सिंह

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव डी.डी.सिंह ने वन अधिकार पत्र वितरण के प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कोई भी पात्र हितग्राही शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित ना रहे। इसके अलावा सामुदायिक वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र एवं वन अधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों को मनरेगा के तहत् स्वीकृत कार्यों एवं अन्य आनुषंगिक कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। सिंह आज यहां इंद्रावती भवन में आयोजित विभागीय योजनाओं की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक अंतर्गत बस्तर संभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त एवं परियोजना प्रशासकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नगरीय क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन एवं वन अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत विकसित किये जाने वाले आदर्श ग्रामों की की समीक्षा की।

आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने बैठक को संबोधित करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने और सभी छात्रावास आश्रमों में गोबर पेंट से पुताई संबंधी कार्य शीघ्र करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने सहायक आयुक्तों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्यों एवं उन्नयन किये गए छात्रावास-आश्रमों की मौके पर जाकर समीक्षा करें। विभाग अंतर्गत संचालित विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में  अनुरक्षण, लघु मद अन्तर्गत किए गए कार्यो की समीक्षा भी की गई। 

बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की समीक्षा के अंतर्गत मेस टेण्डर, गणवेश आपूर्ति, पाठ्यपुस्तक तथा विद्यालयवार, शिक्षकवार बोर्ड परीक्षा परिणाम एवं अतिथि शिक्षकों की भर्ती की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। सीबीएसई पैटर्न के आधार पर बच्चों को पढ़ाने वाले अच्छे शिक्षकों की नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा प्रयास आवासीय विद्यालयों में वर्ष 2022-23 में प्रवेश एवं परीक्षा परिणाम तथा नवीन प्रारंभ प्रयास स्कूलों की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना अन्तर्गत चयनित ग्रामों में स्वीकृत कार्यो की प्रगति की समीक्षा भी गई। चयनित ग्रामों में किए गए कार्यों का निरीक्षण करने के निर्देश सहायक आयुक्तों को दिए गए। इसके अलावा अत्याचार निवारण अधिनियम, न्यायालयीन प्रकरणों, देवगुड़ी निर्माण वर्ष 2022-23, भर्ती, पदोन्नति एवं अनुकंपा नियुक्ति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इसी प्रकार परियोजना प्रशासकों से आदिग्राम पोर्टल में प्रविष्टि की समीक्षा, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 एवं केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना अन्तर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह अभिकरण, प्रकोष्ठ के कार्यो में वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 की समीक्षा गई एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। उल्लेखनीय है कि विभागीय योजनाओं की समीक्षा हेतु तीन चरणों में होने वाली इस बैठक के प्रथम चरण मे आज बस्तर संभाग की समीक्षा की गई।  द्वितीय चरण में कल रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर संभाग की समीक्षा एवं तृतीय चरण में सरगुजा संभाग की समीक्षा बैठक 15 जून को की जाएगी। 

महासमुन्द : वन अधिकार पट्टाधारियों को किसान न्याय योजना से जोड़े – कलेक्टर

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महासमुन्द। जिले में नवपदस्थ कलेक्टर प्रभात मलिक ने आज यहाँ कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में समय सीमा की बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासन की सभी योजनाओं को लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले यह सुनिश्चित किया जाए। शासन की जनकल्याणकारी व सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं में सभी विभाग आपस मे समन्वय से कार्य करते हुए परिणाम मूलक कार्य करें। ताकि शासन की मंशानुरूप हितग्राही लाभान्वित हो सके। 

  ब्लाक स्तर पर प्रत्येक सोमवार को जनचौपाल लगाने के निर्देश

कलेक्टर ने सभी वन अधिकार पट्टे धारियों को केसीसी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत सभी श्रेणी के भू-स्वामी और वन पट्टा धारी कृषक पात्र है। ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके तथा वे गरीबी से ऊपर उठ सकें। बैठक में कलेक्टर ने स्वयं अपना परिचय देते हुए अधिकारियों से भी परिचय लिया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ एस आलोक, वनमण्डलाधिकारी पंकज राजपूत, अपर कलेक्टर दुर्गेश वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी, सहित जिला अधिकारी मौजूद थे।। ब्लाक एवं अनुविभाग स्तर के अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े थे। 

कलेक्टर प्रभात मलिक ने जिले में भेंट मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री जी द्वारा की घोषणाओं पर अमल करने के लिए तेजी से प्रयास करने कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री जी द्वारा किये गए प्रत्येक घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। शिशुपाल पर्वत, खल्लारी, चंडी मंदिरों को पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए इस्टीमेट बनाने एवं भूमि आबंटन के लिए सम्बंधित विभाग से प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए ताकि राशि को बजट में स्वीकृति की जा सके। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सीमांकन के प्रकरणों को तत्काल निराकरण करने और 15जून की स्थिति में कोई भी प्रकरण लंबित न रहे यह सुनिश्चित करने कहा ।उन्होंने  शिक्षा एवं अन्य सभी घोषणाओं पर अमल करने के लिए तत्काल प्राक्कलन एवं प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को कक्षा 1 ली से 12 वी तक के सभी विद्यार्थियों का शत प्रतिशत जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए। इस सम्बन्ध में अनुविभागीय अधिकारी को निर्देश दिए।निर्वाचन से सम्बंधित समीक्षा में सभी कर्मचारियों का पीपीईएस एंट्री कर शुक्रवार तक प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए। साथ ही सभी एसडीएम को मतदाता विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत फार्म 6,7,8 को पूर्ण करने कहा।साथ ही मतदान केंद्र में बदलाव से सम्बधित ग्राम पंचायत सरपँच से भी बैठक करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान सभी अनुविभागीय अधिकारी को 15 जून तक लंबित सीमांकन प्रकरण निराकरण करने के निर्देश दिए।साथ ही सोमवार को ब्लाक स्तरीय जनचौपाल लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आंगनबाड़ी केंद्रों में मरम्मत, बिजली व पंखा लगाने के निर्देश दिए। राशनकार्ड अपडेशन अंतर्गत मृत ब्यक्तियों के नाम विलोपन करने के निर्देश दिए।

जिला पंचायत सीईओ एस आलोक ने ज़िले की गौठानों में आजीविका संबंधी की जा रही गतिविधियों एवं गोबर ख़रीदी व वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के साथ ही विक्रय की जानकारी दी। इसके साथ ही रीपा संबंधी जानकारी से कलेक्टर को अवगत कराया। कलेक्टर ने कहा गोठानों में प्रतिदिन 2 क्विंटल से कम गोबर खरीदी हो रही है वहाँ प्रत्येक दिन समीक्षा करें। गोठानों में पानी,पैरा और छांव की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।गोठनों और अमृत सरोवर में कदम्ब के पेड़ का रोपण भी किया जाए। रीपा में ज्यादा से ज्यादा लोगो की सहभागिता बढ़ाने लिए राजीव युवा मितान क्लब,बेरोजगारी भत्ता प्राप्त युवाओं को आय जनित गतिविधियों से जोड़े जाने पर जोर दिया।

वन अधिकार क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है छत्तीसगढ़

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य देश में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य है। विगत चार वर्षों में 54 हजार 518 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए, जिसका कुल रकबा 30 हजार 46 हेक्टेयर है। इसी प्रकार सामुदायिक वन अधिकार के 23 हजार 982 वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं, जिसका कुल रकबा 11 लाख 77 हजार 212 हेक्टेयर है। राज्य शासन द्वारा सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के क्रियान्वयन में भी पहल की गई है। अब तक जिलों में 3 हजार 845 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मान्य किए गए हैं। इसके अंतर्गत 16 लाख 60 हजार 301 हेक्टेयर भूमि के संरक्षण, प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभाओं को प्रदाय किया गया है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार की वन अधिकार पत्रों का वितरण की महत्वकांक्षी योजना है। राज्य शासन द्वारा स्थानीय वन निवासी सामुदायों के विभिन्न वनाअधिकारों को मान्यता दिए जाने की दिशा में प्रतिबद्धतापूर्वक सतत् प्रयास किए जा रहे है, ताकि वन अधिकार अधिनियम 2006 में वर्णित विभिन्न प्रकार के वनाधिकार उन्हें प्राप्त हो सके। अधिनियम के अनुसार वनभूमि पर अनुसूचित जाति और अन्य परंपरागत वन निवासी आवेदक द्वारा कब्जे का दावा करने के लिए 13 दिसंबर 2005 कट ऑफ डेट निर्धारित है। अन्य परंपरागत वन निवासी आवेदक के मामले में कट ऑफ डेट पूर्व से ही तीन पीढ़ियों (75 वर्ष) से संबंधित ग्राम, वन भूमि में निवासरत् होना आवश्यक है।

राज्य शासन की पहल से स्थानीय वन निवासी समुदायों के लिए संबंधित ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार को मान्यता दी जा रही हैं। राज्य के शहरी क्षेत्रों में विभिन्न वन अधिकार पत्रों का वितरण किया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राज्य में विभिन्न कारणों से निरस्त वन अधिकार के दावों पर पुनर्विचार की कार्यवाही की जा रही है। वन अधिकार अधिनियम के तहत वितरित भूमि का रिकार्ड समय-समय पर दुरूस्त करने के कार्यवाही की जा रही है। वन अधिकार प्राप्त लाभार्थी को पोस्ट क्लेम सपोर्ट के रूप में उनकी कृषि को विकसित करने के साथ ही आजीविका के विभिन्न उपायों जैसे- कुकून, टसरक्राप्स, लाख उत्पादन इत्यादि के माध्यम से लाभान्वित करने की दिशा में कार्य हो रहा है।

देश में नगरीय क्षेत्र में वन अधिकारों की मान्यता दिए जाने में छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। अब तक 266 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र, 7 सामुदायिक वन अधिकार पत्र और 4 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र राज्य के नगरीय क्षेत्रों में प्रदाय किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से कमजोर जनजातियों को पर्यावास के अधिकार प्रदाय करने की कार्यवाही धमतरी जिले में शुरू की गई है। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मान्य करने की शुरूआत धमतरी जिले के जबर्रा गांव से की गई। ग्राम सभा जबर्रा को 5352 हेक्टेयर वनभूमि पर सामुदायिक वन संसाधन अधिकार की मान्यता दी गई, जो देश में किसी एक गांव की मान्य किए जाने वाला सर्वाधिक क्षेत्र है।

 इसी प्रकार कांकेर जिले के खैरखेड़ा ग्राम में 1861 हेक्टेयर वन भूमि पर सामुदायिक वन संसाधन अधिकार की मान्यता दी गई है। वन अधिकार कानून के तहत प्रबंधन का बेहतर क्रियान्वयन करते हुए सामुदायिक वन संसाधन के तहत विभिन्न गतिविधियां की जा रही है। जंगल के प्रबंधन के साथ-साथ बांस का शेड एवं मचान बनाकर देशी बकरी पालन, मुर्गी पालन, खरगोश पालन, सुअर पालन, मछलीपालन आदि कार्य किया जा रहा हैं। साथ ही खरीफ फसल जैविक जिमीकंद, हल्दी बीज का उपचार कर तकनीकी विधि इंटरक्रॉपिंग से बुआई की जा रही है और बीज बैंक की स्थापना भी की गई है। 

इसके उपरांत वन संसाधन के संरक्षण, प्रबंधन पर विशेष बल दिया जा रहा है। वन अधिकार प्राप्त हितग्राहियों को आजीविका के लिए मत्स्य एवं जलाशयों के अन्य उत्पाद, चारागाह के उपयोग के लिए वन अधिकार दिए जाने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे है। शासकीय योजनाओं के अभिसरण से व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धाराकों को दावा पश्चात् सहायता यथा भूमि समतलीकरण, मेड़-बंधान, खाद-बीज, सिंचाई उपकरण संबंधी सहायता भी प्रदान की जा रही हैं। साथ ही इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं किसान सम्मान निधि योजना से भी लाभान्वित किया जा रहा हैं।

वन अधिकार के आवेदनों का पुनर्परीक्षण कर 17 तक प्रस्तुत करें : कलेक्टर

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धमतरी। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत वन अधिकार के आवेदनों पर पुनर्परीक्षण कर आगामी 17 अक्टूबर तक जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। उक्ताशय के निर्देश कलेक्टर पी.एस. एल्मा ने आज समिति की बैठक के दौरान दिए। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की याचिका के परिप्रेक्ष्य में मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन अमिताभ जैन के निर्देश का परिपालन करते हुए निरस्त किए गए वन अधिकार के व्यक्तिगत आवेदनों पर निर्णय लेते हुए कहा।



आज सुबह 11.30 बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया कि इस संबंध में बुधवार 12 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव के द्वारा निरस्त किए गए व्यक्तिगत वन अधिकार प्रकरणों के पुनर्विलोकन एवं पुनर्परीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर ने कहा कि इस परिप्रेक्ष्य में निरस्त किए गए आवेदनों का पुनः परीक्षण कर आगामी 17 अक्टूबर तक कारणों का उल्लेख करते हुए सभी अनुविभागीय अधिकारी प्रस्तुत करे। इस दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. रेशमा खान ने बताया कि तीन पीढ़ी के साक्ष्य के अभाव में कुल 1439 आवेदन निरस्त हुए हैं,

जिनमें धमतरी विकासखण्ड के 694, मगरलोड के 607 और नगरी विकासखण्ड के 138 व्यक्तिगत दावे शामिल हैं। कलेक्टर ने वन अधिकार अधिनियम की विभिन्न धाराओं का गम्भीरता से अध्ययन करते हुए सभी निरस्त आवेदनों का पुनरावलोकन करते हुए निर्धारित तिथि तक प्रस्तुत करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। इस अवसर पर एसडीएम नगरी सुश्री गीता रायस्त सहित जनपद पंचायतों के सी.ई.ओ., तहसीलदार और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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