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महिलाओं के मान-सम्मान से ही होती है हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान: मुख्यमंत्री बघेल

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आकाशवाणी से प्रसारित रेडियोवार्ता लोकवाणी की 27वीं कड़ी में 'छत्तीसगढ़ सरकार-नारी शक्ति के सरोकार' विषय पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मान सम्मान से ही हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान होती है। इसे हम सभी को गहराई से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी का सम्मान करने वाला समाज ही संस्कारी समाज होता है। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को भरपूर सम्मान दिया जा रहा है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं और बेटियां अब बड़े लक्ष्य लेकर निकल पड़ी है, जिसे आगे बढ़ने से अब कोई रोक नहीं सकता।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को हम एक ऐतिहासिक घटना मानते हैं। हमारे पुरखों के मन में अपने राज्य की एक मुकम्मल तस्वीर थी। सदियों से छत्तीसगढ़ एक लोक प्रदेश रहा है। यहां की परंपरा, पर्व-त्यौहार, संस्कृति के विभिन्न रंगों में, अपने संसाधनों के प्रति आदर भाव में, अपने स्वाभिमान और अस्मिता के स्वभाव में, जो अपनी जननी के प्रति आस्था और श्रद्धा रही है, वही आस्था अपनी धरती के प्रति भी रही है । हमने अपनी विरासत से जो सीखा है, वंदे मातरम के गान से हमने जो सीखा है, उसे अपने प्रदेश में उतारने की प्रबल इच्छा रही है। 

सौभाग्य से हमें यह अवसर मिला और सरकार बनने के बाद हमने जब इसके लिए उपयुक्त गीत की खोज की तो आचार्य डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा का छत्तीसगढ़ी में लिखा यह गीत विचार में आया। 'अरपा पइरी के धार महानदी हे अपार, इन्द्रावती ह पखारय तोर पईंया। महूं पांव परंव तोर भुइंया, जय हो-जय हो छत्तीसगढ़ मइया' इस गीत में हमें छत्तीसगढ़ महतारी की सम्पूर्ण छवि दिखती है। हम इसी मातृभाव के साथ छत्तीसगढ़ की सेवा करना चाहते हैं। इसलिए इस गीत को छत्तीसगढ़ का राज्य गीत बनाया गया है।

पुरखों की वजह से मिला संविधान: CM 

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमारे पुरखों की वजह से हमें ऐसा संविधान मिला है, जिसमें महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया गया है। हमारे संस्कार और प्रयासों का ही नतीजा है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं का प्रतिशत, देश की अन्य विधानसभाओं की तुलना में सबसे अधिक है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। भूमि और संपत्ति पर कानून के अनुसार महिलाओं को समान स्वामित्व और नियंत्रण का अधिकार है।  

'होम गार्ड के 2 हजार 200 नए पदों का सृजन' 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने ऐसे कई नीतिगत इंतजाम किए हैं, जिसमें महिलाओं को अचल संपत्ति पर अधिकार मिले। अचल संपत्ति का पंजीयन महिलाओं के नाम पर कराए जाने पर स्टाम्प शुल्क में 1 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान किया गया है, जिसके कारण एक साल में 50 हजार से अधिक पंजीयन हुए और 37 करोड़ रुपए से अधिक की छूट उन्हें मिली। सरकारी पदों में भर्ती के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा महिलाओं को दी गई है। महिला छात्रावास और आश्रमों में महिला होम गार्ड के 2 हजार 200 नए पदों का सृजन किया गया है। 

'महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन'

प्रदेश के 370 थानों में महिला हेल्प डेस्क संचालित किए जा रहे हैं। महिला हेल्पलाइन 181 का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश के किसी भी कोने से इस टोल फ्री नंबर 181 पर फोन करके कोई भी महिला सहायता प्राप्त कर सकती है। मैं चाहूंगा कि हमारी बहनें इस 181 नंबर को याद रखें और कोई भी तकलीफ होने पर इसकी मदद लें। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि अब हम प्रत्येक जिले में महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ का गठन करने जा रहे हैं ताकि हमारी माताओं, बहनों को पूर्ण सुरक्षा का वातावरण मिले। जिला खनिज न्यास निधि बोर्ड में ग्रामसभा सदस्य के रूप में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 

'बेटियों की संख्या बेटों से डेढ़ गुना ज्यादा'

हर जिले में महिलाओं के लिए अपना महाविद्यालय हो, इसके लिए हमने 9 जिलों में नए महिला महाविद्यालय शुरू किए हैं। हमारे प्रयासों से सरकारी महाविद्यालयों में बेटियों की संख्या बेटों से डेढ़ गुना हो गई है। छत्तीसगढ़ के इन अभूतपूर्व प्रयासों को नीति आयोग ने भी सराहा है और साल 2020-21 की इंडिया-इंडेक्स रिपोर्ट में लैंगिक समानता के लिए छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

'समूहों को 9 हजार 500 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित संस्था छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा स्व-सहायता समूहों को ऋण देने का प्रावधान है। इस संस्था के माध्यम से लगभग 39 हजार समूहों को 9 हजार 500 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण दिए जा चुके हैं। इनमें से 6 हजार 489 महिला स्व-सहायता समूह किसी कारण से लगभग 13 करोड़ रुपए का ऋण नहीं पटा पाने के कारण डिफाल्टर की श्रेणी में आ गए थे और उनके आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो गए थे। 

'ऋण लेने की पात्रता भी दोगुनी'

हमने ऐसे 6 हजार 489 समूहों को संकट से निकालने का फैसला किया और उनका ऋण माफ कर दिया। इसके साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों को 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है। हमने ऐसी व्यवस्था की है, जिससे समूहों को अब पहले की तुलना में दो से चार गुना तक ऋण मिल सके। सक्षम योजना में ब्याज दर 6.5 प्रतिशत थी, जिसे हमने घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया है। वहीं ऋण लेने की पात्रता भी दोगुनी कर दी है। इस तरह महिलाओं को अपने व्यवसाय के लिए अधिक आर्थिक सहायता देने के इंतजाम हमने किए हैं। अन्य योजनाओं में भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं।

'रोजगारमूलक गतिविधियों के लिए मदद'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बेटियां शिक्षा से लेकर स्वावलंबन तक किस तरह से सरकार की योजनाओं से जुड़ना चाहती हैं, यह बिल्कुल निजी तौर पर समझने का विषय है। सभी की आवश्यकताएं अपने परिवार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती हैं। यदि कोई बेटी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार करना चाहे तो बिहान योजना है, जिसमें अभी तक 2 लाख 6 हजार 362 समूहों के माध्यम से 22 लाख 14 हजार 426 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। महिला और बाल विकास विभाग द्वारा भी महिला स्व-सहायता समूहों के गठन के माध्यम से रोजगारमूलक गतिविधियों के लिए मदद की जाती है। 

'निवेश प्रोत्साहन के लिए विशेष रूप से पात्रता'

हमारी नई औद्योगिक नीति 2019-2024 में महिला स्व-सहायता समूहों, कृषि उत्पादक समूहों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए विशेष रूप से पात्रता दी गई है। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि हमने 10 जिलों में 540 उत्पादक समूहों का गठन किया है, जिसमें 18 हजार 598 महिला किसानों को जोड़ा गया है। प्रदेश में तीन सालों में 478 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनमें 1 हजार 167 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ है और इनमें 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसी तरह लघु वनोपजों के प्रसंस्करण के लिए 52 इकाईयों की स्थापना की जा चुकी है। 

'वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 65 कर दिया'

उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 65 कर दिया है। छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड के माध्यम से 121 उत्पादों का प्रसंस्करण और विक्रय हो रहा है। स्व-सहायता समूहों द्वारा भी वनोपजों की प्रोसेसिंग के माध्यम से 200 उत्पादों का विपणन किया जा रहा है। इन सब कार्यों में महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी है। हम लघु वनोपजों के संग्रहण का पारिश्रमिक, समर्थन मूल्य पर खरीदी के अलावा विक्रय का लाभांश भी संग्राहकों और स्व-सहायता समूहों को दे रहे हैं। इस भागीदारी को और आगे बढ़ाने के लिए हम सी-मार्ट की स्थापना हर शहर में कर रहे हैं। प्रदेश में अभी तक 8 हजार 48 गौठान स्थापित किए जा चुके हैं। 

'लगभग 4 हजार बीसी सखियों को जोड़ा गया'

गौठानों के माध्यम से हमने आजीविका के लिए जो प्रयास किए हैं। उसमें 9 हजार 331 महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 66 हजार से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। इन समूहों ने 65 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार बहुत ही अल्प समय में कर लिया है। गोधन न्याय योजना के तहत भी 45 प्रतिशत से अधिक महिलाएं सीधे भागीदार बनी हैं। गांवों में घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए लगभग 4 हजार बीसी सखियों को जोड़ा गया है। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इन बीसी सखियों ने 455 करोड़ रुपए का लेनदेन किया है। 

'रोजगार के दरवाजे महिलाओं के लिए खोले गए'

महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत हमने एक वर्ष में 18 करोड़ 41 लाख मानव दिवस रोजगार देकर शत-प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति की है, जिसमें 50 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य में हमने महिलाओं को बेहतर काम के अवसर भी दिए हैं, जिसमें वे सुपरवाइजरी काम भी कर रही हैं, जिन्हें महिला मेट या इंजीनियर दीदी के नाम से पहचाना जा रहा है। इस तरह नौकरी के अलावा अन्य तरह के रोजगार और स्वरोजगार के दरवाजे महिलाओं के लिए खोले गए हैं।

'171 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में 171 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू कर दिए गए हैं, जो सरकारी स्कूल होने के बावजूद अच्छे से अच्छे निजी स्कूल को टक्कर दे रहे हैं। इस योजना के तहत नए शिक्षा सत्र से हिन्दी माध्यम के विद्यालय भी खोले जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बेटियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट तक निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में बेटियों के लिए 30 प्रतिशत पद आरक्षित है। अनुसूचित क्षेत्र में जिला काडर के लिए योग्यताएं शिथिल की गई हैं। अब तो हमने कनिष्ठ सेवा चयन बोर्ड गठित कर दिया है, जो 14 जिलों में स्थानीय लोगों की भर्ती सुनिश्चित कर रहा है।

'बेटियां प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बेटियों के लिए किसी भी चुनौती का सामना करना कोई बड़ी बात नहीं है।  वे अपनी परिस्थिति के अनुसार पहला कदम बढ़ा सकती है और आगे चलकर मनचाही उपलब्धि भी हासिल कर सकती है। हमारी बस्तर की बेटी देश और दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी को फतह कर सकती है। हमारी बेटियां विभिन्न खेलों में अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में शामिल हुई हैं। हमारी बेटियों ने अपनी टीमों में कप्तानी का अवसर भी पाया है। हमारी बेटियां IAS, IPS जैसी बड़ी परीक्षाओं में पास होकर प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

'500 से 1 हजार रुपए तक मासिक छात्रवृत्ति'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान बहुत हृदय विदारक प्रसंग सामने आ रहे थे। कई परिवारों में माता-पिता के न रहने से बच्चों को लेकर बहुत चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई थी। तब हमने यह निर्णय लिया कि ऐसे बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी हमारी सरकार उठाएगी। इस तरह हमने कोरोना के कारण माता-पिता को खोने वाले बच्चों की निशुल्क शिक्षा के साथ उन्हें निशुल्क कोचिंग और 500 से 1 हजार रुपए तक मासिक छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया। 

'51 हजार 415 आगनबाड़ी केन्द्रों से गर्म भोजन'

'महतारी जतन योजना' के माध्यम से 1 लाख 71 हजार गर्भवती बहनों को गर्म भोजन और रेडी-टू-ईट, टेक होम राशन दिया जा रहा है। कोरोना के समय में भी हमने आंगनबाड़ी केन्द्र के हितग्राहियों को रेडी-टू-ईट फूड दिया। जैसे ही कोरोना का प्रकोप थोड़ा कम हुआ 5 जनवरी 2022 से प्रदेश के 51 हजार 415 आगनबाड़ी केन्द्रों से गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है। 'कौशल्या मातृत्व योजना' हमारे प्रदेश की अभिनव योजना है। पूर्व में प्रथम बेटी के जन्म पर प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था, लेकिन दूसरी बेटी होने पर कोई आर्थिक मदद नहीं की जाती थी। हमने इस कमी को पहचाना और समाधान के लिए 'कौशल्या मातृत्व योजना' बनाई, जिसमें दूसरी बेटी के जन्म पर  भी 5 हजार रुपए की एकमुश्त आर्थिक सहायता का प्रावधान है। 

'बैंक खाते में 20-20 हजार रुपए की राशि का भुगतान'

हाल ही में हमने निर्माण कार्यों में संलग्न पंजीकृत श्रमिक परिवारों के लिए भी एक विशेष योजना शुरू की है। इस 'मुख्यमंत्री नोनी सशक्तीकरण सहायता योजना' के तहत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण योजना में पंजीकृत हितग्राहियों की प्रथम दो पुत्रियों के बैंक खाते में 20-20 हजार रुपए की राशि का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा। इस क्रम में मैं 'दाई-दीदी क्लीनिक योजना' का उल्लेख भी करना चाहूंगा। हमारे परिवार में महिलाएं सबका ख्याल रखती हैं। लेकिन अपने ही स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पातीं। इसलिए हमने चलित वाहनों में पूरे अस्पताल का सेटअप बनाकर, उन्हें बसाहटों और मोहल्लों में भेजने का इंतजाम किया है।

'2018 में राज्य में कुपोषण की दर 40 प्रतिशत था'

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि 'मैंने मुख्यमंत्री का पद संभाला था तो बताया गया कि साल 2018 में राज्य में कुपोषण की दर 40 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बहुत ही भयावह था। कुपोषण का मतलब नई पीढ़ियों की कमजोर बुनियाद। इसलिए हमने 'मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान' की शुरुआत की। अभी NFHS 5 के आंकड़े आए हैं, जो बताते हैं कि अब छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर 31.3 प्रतिशत है। अर्थात लगभग 2 सालों में हमने कुपोषण की दर 9 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की है। इस तरह अब छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत 32.1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। 

मुख्यमंत्री ने इन महिलाओं से किया बात 

अगर हम इसी रफ्तार से काम करें तो आगामी 5 सालों में प्रदेश में कुपोषण की दर को इकाई में ला सकते हैं। मतलब 10 प्रतिशत से कम कर सकते हैं। इस अभियान के कारण 1 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषण से और 1 लाख से अधिक महिलाएं, एनीमिया से बाहर आई हैं और स्वस्थ जीवन जी रही हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने रेडियोवार्ता में सरस्वती ग्राम बेलगहना-बिलासपुर, विद्या मारकण्डे तुता-रायपुर, पुर्णिमा विश्वकर्मा बोड़ला-कबीरधाम, साफिया-सरगुजा, शैलेन्द्री वर्मा-दुर्ग, रिया सिदार- रायगढ़, सुशीला-सुकमा और  रायगढ़ की पर्वतारोही याशी जैन, थाई बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक विजेता टेकेश्वरी साहू, दंतेवाड़ा की डेनेक्स कर्मचारी मनीषा देवांगन से चर्चा की। 

'बेटियां अब बड़े लक्ष्य लेकर निकल पड़ी'

उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि 'नवा छत्तीसगढ़' हमारी बेटियों की सफलता की कहानियों से गढ़ा जाएगा। मैं वचन देता हूं कि हम आप लोगों के लिए नई सुविधाएं और अवसर जुटाने की दिशा में लगातार प्रयास करते रहेंगे। छत्तीसगढ़ की बेटियां अब बड़े लक्ष्य लेकर निकल पड़ी हैं। अब उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।शिक्षा से रोजगार तक, गांवों से शहरों तक, सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक हर जगह हमने बेटियों की तरक्की के रास्ते खोल दिए हैं।

छत्तीसगढ़ में 3 सालों के अंदर 1 हजार 715 नए उद्योग स्थापित, 33 हजार लोगों को मिला रोजगार

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 26वीं कड़ी में 'सुगम उद्योग, व्यापार-उन्नत कारोबार' विषय पर प्रदेशवासियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग, व्यापार और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण है। संभावनाओं से भरपूर छत्तीसगढ़ में देश और दुनिया के निवेशक आकर देखें कि यहां उद्योग मित्र, व्यापार मित्र, कारोबार मित्र, उपभोक्ता मित्र, पर्यटक मित्र, रोजगार मित्र नीतियों से कैसे नवा छत्तीसगढ़ गढ़ा जा रहा है। राज्य में हमने शुरू से ही ऐसे कार्यों को महत्व दिया है, जिससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आए और रोजगार के अवसर बढ़े। 

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ में सेवा क्षेत्र को बहुत प्रोत्साहन मिले। इसके लिए पर्यटन के अलावा अन्य कार्यों को भी चिन्हांकित किया गया है। MSME सेवा श्रेणी उद्यमों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, सेवा केंद्र, BPO, 3-D पिंरटिंग, बीज ग्रेडिंग समेत 16 सेवाओं को सामान्य श्रेणी के उद्योगों की तरह औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन भू-प्रब्याजी में 30 प्रतिशत की कमी की गई है। 

90 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार 

औद्योगिक क्षेत्रों में भू-भाटक में 33 प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर 10 एकड़ तक आवंटित भूमि को लीज होल्ड से फ्री होल्ड किए जाने के लिए नियम तैयार कर अधिसूचना जारी की गई। ऐसे प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ में तीन सालों के अंदर 1 हजार 715 नए उद्योग स्थापित हुए, जिसमें 19 हजार 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हुआ। साथ ही 33 हजार लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा 149 MoU भी किए गए हैं, जिसमें 74 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा और 90 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। 

 3 हजार करोड़ रु से ज्यादा के निवेश के लिए MoU 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने बायो एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए 18 निवेशकों के साथ 3 हजार 300 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश के लिए MoU किया है, जिसमें 2 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति भी केंद्र सरकार से मांगी है। अगर ये अनुमति मिल गई तो धान के बंपर उत्पादन को सही दिशा में उपयोग करते हुए हम बड़े पैमाने पर एथेनॉल बना सकते हैं और इससे बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार का अवसर भी बना सकते हैं। 

देवगुड़ी और घोटुल स्थलों का विकास

औद्योगिक नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, कृषि उत्पादक समूहों, तृतीय लिंग के लोगों के लिए विशेष पैकेज हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ऐसा कोई प्रावधान औद्योगिक नीति में नहीं था। इस दिशा में ध्यान देते हुए OBC वर्ग के लिए 10 प्रतिशत भू-खंड आरक्षित किए जाएंगे। सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए ई-मानक पोर्टल संचालित किया जा रहा है। महिलाओं के पक्ष में पंजीयन कराने पर स्टाम्प शुल्क में छूट दी है, जिससे 50 हजार 280 पंजीयन पर 37 करोड़ रुपए से ज्यादा की छूट दी गई है। आदिवासी अंचलों में देवगुड़ी और घोटुल स्थलों का विकास किया जा रहा है। 

'मुख्यमंत्री श्रमिक संसाधन केंद्र' की स्थापना

छत्तीसगढ़ी खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए गढ़ कलेवा की स्थापना 16 जिलों में कर दी गई है। हमने छत्तीसगढ़ की अपनी फिल्म विकास नीति भी लागू कर दी है। प्रत्येक जिला मुख्यालय और विकासखंड स्तर पर 'मुख्यमंत्री श्रमिक संसाधन केंद्र' की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में 21 हजार करोड़ रुपए की ज्यादा लागत से सड़कों के निर्माण की कार्ययोजना बनाई गई है, जिसमें विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा है। बीते 3 सालों में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की संख्या लगभग दोगुनी कर दी गई है। 

21 लाख 77 हजार किसानों ने बेचा धान 

विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों से स्थानीय युवाओं को जोड़ने के लिए हमने ई-श्रेणी पंजीयन की व्यवस्था की है। ग्रामीण अधोसंरचना के विकास के लिए सुराजी गांव योजना संचालित की जा रही है। नरवा, गरुवा, घुरुवा और बारी के विकास से बहुत बड़े पैमाने पर ग्रामीण कारोबार के अवसर बढ़े हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी का भी नया कीर्तिमान बना है। साल 2017-18 में सिर्फ 15 लाख 77 हजार पंजीकृत किसान थे, जो अब बढ़कर 22 लाख 66 हजार हो गए। इसमें से 21 लाख 77 हजार किसानों ने धान बेचा है। खेती का रकबा 22 लाख से बढ़कर 30 लाख 11 हजार हेक्टेयर हो गया। 

छत्तीसगढ़ में  98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी

धान की खरीदी 56 लाख 88 हजार से बढ़कर लगभग 98 लाख मीट्रिक टन हो गई। इसके अलावा मक्का, गन्ना, तिलहन, दलहन, लघु धान्य फसल, उद्यानिकी फसलों का विकास भी तेजी से हो रहा है। वन संसाधनों की बात करें तो पहले मात्र 7 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाती थी। अब हमने 61 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने की व्यवस्था कर दी है। छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन का गठन कर दिया है, जिससे 5 साल में 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य दिया गया है।

जनसुविधा की दृष्टि से राज्य में 29 नई तहसीलों और 4 नए अनुविभागों का गठन: CM बघेल

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'लोकवाणी'  की 20वीं कड़ी में 'आदिवासी अंचलों की अपेक्षाएं और विकास' विषय पर प्रदेशवासियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति के मुताबिक हरेली साल का पहला त्यौहार है। इस दिन अपने गांव-घर, गौठान को लीप-पोत कर तैयार किया जाता है। गौमाता की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया भावना को ध्यान में रखते हुए हरेली सहित पांच त्यौहारों में सरकारी छुट्टी घोषित की गई है। 


उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश में पहली बार विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपराओं, संस्कृतियों और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेशवासियों को अगस्त महीने में आने वाले त्यौहार हरेली, नागपंचमी, राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस, ओणम, राखी, कमरछठ और कृष्ण जन्माष्टमी की भी बधाई दी।

29 नई तहसीलों और 04 अनुविभागों का गठन

मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के सतीश उपाध्याय, बालोद जिले के युवा विनय कुमार मरकाम और बस्तर अंचल के दरभा के रहने वाले सोमनाथ से हुई बातचीत का उत्तर देते हुए कहा कि हमने ढाई सालों में 29 नई तहसीलें और 4 नए अनुविभाग गठित किए हैं, उनमें से अधिकतर आदिवासी अंचल में ही हैं। कोरिया जिले में पटना के साथ चिरमिरी और केल्हारी तहसीलें भी गठित की गई हैं। इसके अलावा कबीरधाम जिले में रेंगाखार-कला, सरगुजा जिले में दरिमा, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में रामचंद्रपुर, सामरी, सूरजपुर जिले में लटोरी, बिहारपुर, जशपुर जिले में सन्ना और सुकमा जिले में गादीरास प्रमुख हैं। इसी तरह चार नवीन अनुविभागों में दंतेवाड़ा का बड़े बचेली और बस्तर का लोहंडीगुड़ा शामिल है।

पुरातात्विक धरोहर को सहेजने की कोशिश 

सालों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को जिला ही नहीं बनाया गया बल्कि आदिवासी बहुल आबादी वाले इस क्षेत्र को उनका हक भी दिया गया। हमारा यह मानना है कि नई प्रशासनिक इकाईयों के गठन से लोगों को अपनी भूमि, खेती-किसानी से संबंधित काम, बच्चों की पढ़ाई, नौकरी या रोजगार से संबंधित कामों के लिए आसानी होगी। सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा। इसे ही हमने प्रशासनिक संवेदनशीलता का मूलमंत्र बनाया है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरिया जिले के मेरीन फॉसिल्स पार्क - जैव विविधता पार्क का सवाल है, हम सिर्फ कोरिया ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जिले में अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को सहेजने के सार्थक प्रयास कर रहे हैं।

52 वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत चेरपाल की यशोदा पुजारी, सुकमा जिले के पोलमपल्ली निवासी अजय बघेल और कवर्धा जिले के दयाल सिंह बैगा के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन से हमें लगा था कि आदिवासी अंचलों और शेष क्षेत्रों के बीच विकास का अंतर दूर कर लिया जाएगा, लेकिन बीते 15 सालों में यह अंतर और भी ज्यादा बढ़ गया है। इसलिए हमने सबसे पहले विश्वास जीतने की बात की। इसके लिए निरस्त वन अधिकार पट्टों के दावों की समीक्षा, जेल में बंद आदिवासियों के प्रकरणों की समीक्षा कर अपराध मुक्ति, बड़े उद्योग समूह के कब्जे से आदिवासियों की जमीन वापस लौटाने का निर्णय, तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2500 रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा करने का फैसला लिया गया। इससे आदिवासी अंचलों में सरकार और व्यवस्था के प्रति विश्वास का नया दौर शुरू हुआ है। 

आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा

हमने 7 से बढ़ाकर 52 वनोपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की, पुरानी दरों को भी बदला जिसके कारण वनोपज संग्रह से ही 500 करोड़ रुपए से ज्यादा अतिरिक्त सालाना आमदनी का रास्ता बन गया। अनुसूचित क्षेत्रों में कोदो, कुटकी, रागी जैसी फसलों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने के इंतजाम किए गए हैं  और लाख को कृषि का दर्जा दिया गया है। वन अधिकार मान्यता पत्रधारी परिवारों के खेतों में उपजे धान को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की गई है। देवगुड़ी और घोटुल स्थलों का विकास कर आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1637 करोड़ की लागत से सड़कें

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 16 हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हमारे आदिवासी अंचलों को सैकड़ों ऐसी सड़कें मिलेंगी, जिनका इंतजार वे दशकों से कर रहे थे। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए हम 1 हजार 637 करोड़ रुपए की लागत से सड़कें बना रहे हैं। आदिवासी अंचलों में बिजली की सुविधा देने के लिए अति उच्च दाब के चार वृहद उपकेन्द्र का निर्माण पूरा कर लिया गया है। नारायणपुर, जगदलपुर, बीजापुर और सूरजपुर जिले के उदयपुर में ये उपकेंद्र शुरू हो जाने से बिजली आपूर्ति सुचारू हो गई है। इसके अलावा विगत ढाई सालों में आदिवासी अंचलों में सौर ऊर्जा से संचालित 74 हजार सिंचाई पंप, 44 हजार से ज्यादा घरों में रोशनी और लगभग 4 हजार सोलर पेयजल पंपों की स्थापना की गई है, जो अपने आप में कीर्तिमान है।

छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार

कवर्धा जिले के किशन लाल द्वारा वनोपजों के प्रसंस्करण को आगे बढ़ाने को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा में एक बड़े उद्योग की स्थापना के नाम से ली गई आदिवासियों की जमीन वापसी की घोषणा के साथ आदिवासियों को न्याय दिलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 10 गांवों के 1 हजार 707 किसानों को 4 हजार 200 एकड़ जमीन के दस्तावेज प्रदान किए जा चुके हैं। कोंडागांव में मक्का प्रोसेसिंग इकाई का शिलान्यास किया गया है। प्रदेश में 146 विकासखंडों में से 110 विकासखंडों में फूडपार्क स्थापित करने  के लिए भूमि का चिन्हांकन और अनेक स्थानों पर भूमि हस्तांतरण भी किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ में 139 वनधन विकास केंद्र स्थापित हो चुके हैं, जिनमें से 50 केंद्रों में वनोपजों का प्रसंस्करण भी हो रहा है। इस काम में लगभग 18 हजार लोगों को रोजगार मिला है। 

सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार 

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा 'छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड' के नाम से 121 उत्पादों की मार्केटिंग की जा रही है। भारत सरकार की संस्था ट्रायफेड द्वारा 6 अगस्त को छत्तीसगढ़ को लघु वनोपज की खरीदी तथा इससे संबंधित अन्य व्यवस्थाओं के लिए 11 राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।  यह हमारे आदिवासी अंचलों के साथ पूरे प्रदेश के लिए भी गौरव का विषय है। दुर्ग जिले में 78 करोड़ रुपए से अधिक लागत पर एक वृहद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। राज्य में वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए वनांचल उद्योग पैकेज लागू किया गया है। इसके अलावा दंतेवाड़ा में रेडिमेड कपड़ों का 'ब्रांड डेनेक्स' एक सफल प्रयोग साबित हुआ है। नवचेतना बेकरी भी काफी सफल हो रही है। ऐसे कामों से सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।

मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना

'मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना' के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को वे भविष्य में स्थानीय लोगों, आदिवासी और वन आश्रित परिवारों की आय के बहुत बड़े साधन के रूप में देखते हैं। खुद लगाए वृक्षों से इमारती लकड़ी की कटाई और फलों को बेचकर लोगों की आय बड़े पैमाने पर बढ़ेगी।  निजी लोगों को ही नहीं, बल्कि पंचायतों और वन प्रबंधन समितियों को भी पेड़ लगाने और काटने के अधिकार दिए गए हैं।

एनीमिया और कुपोषण में आई कमी

लोकवाणी के माध्यम से आदिवासी क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताएं अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार और स्कूल में शिक्षकों की कमी के प्रश्न पर जवाब देते हुए बघेल ने कहा कि निश्चित तौर पर आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सबसे बड़ी जरूरत है। इस दिशा में प्राथमिकता से काम शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरतों को DMF मद से पूरी करने के लिए आवश्यक नियम बनाए गए हैं। 

उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध

CSR और अन्य मदों की राशि भी इन्हीं प्राथमिकताओं के लिए खर्च करने की रणनीति अपनाई है। इसके कारण बीजापुर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर में अब उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं। सुकमा जिले में भी बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के सुदूर अंचल में ग्रामीणों को सहजता से स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने हमने मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना शुरू की है। इससे अब आदिवासी भाई-बहनों का उपचार हाट-बाजारों में होने लगा है। इसका लाभ 11 लाख से ज्यादा लोगों को मिल चुका है।

एनीमिया की दर में तेजी से कमी 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पांच साल से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार थे और 15 से 49 साल तक की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया मतलब खून की कमी से ग्रस्त थीं। आदिवासी जिलों में हालत और भी खराब थी। इसे देखते हुए हमने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया, जिसमें डीएमएफ और जनभागीदारी के योगदान को बढ़ावा दिया। योजना के माध्यम से बच्चों को दूध, अंडा, स्थानीय प्रचलन के मुताबिक पौष्टिक आहार दिया, जिसके कारण कुपोषण और एनीमिया की दर में तेजी से कमी आ रही है।

UNDP और नीति आयोग ने की सराहना

मुख्यमंत्री ने बताया कि 'मलेरिया मुक्त बस्तर' अभियान शुरू होने से एक साल में बस्तर संभाग में मलेरिया के प्रकरण 45 प्रतिशत और सरगुजा संभाग में 60 प्रतिशत कम हो जाना सुखद है। UNDP और नीति आयोग ने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की तारीफ करते हुए बीजापुर जिले में मलेरिया में 71 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 54 प्रतिशत तक कमी करने की सफलता को बेस्ट प्रेक्टिस के रूप में सराहा है और अन्य आकांक्षी जिलों को भी इस अभियान को अपनाने की सलाह दी है।

प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षकों की नियुक्ति

CM बघेल ने बताया कि शिक्षा के लिए हमने संकटग्रस्त क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस किया। जिसके कारण सुकमा जिले के जगरगुंडा में 13 सालों से बंद स्कूल बीते साल खुल चुका है। कुन्ना में स्कूल भवन का पुनर्निर्माण और दंतेवाड़ा जिले के मासापारा-भांसी में भी 6 सालों से बंद स्कूल अब खुल गया है। कोरोना काल में पढ़ाई तुंहर पारा अभियान के तहत लाखों बच्चों को उनके गांव-घर-मोहल्लों में खुले स्थानों पर भी पढ़ाया गया। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को मातृभाषा में समझाना ज्यादा आसान होता है इसलिए हमने 20 स्थानीय बोली-भाषाओं में पुस्तकें छपवाईं, जिसका लाभ आदिवासी अंचलों में मिला।  बीस साल बाद प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति आदेश दे दिए गए हैं। इससे आदिवासी अंचलों में भी शिक्षकों की कमी स्थायी रूप से दूर हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कोरोना की 'तीसरी लहर' को लेकर सभी से बहुत सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहार मनाते समय फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें, मास्क का उपयोग करें, हाथ को साबुन-पानी से धोते रहे और टीका जरूर लगवाएं। खुद को बचाए रखना ही सबसे जरूरी उपाय है।

2 हजार 260 किलोमीटर सड़कों का निर्माण

मुख्यमंत्री बघेल ने राम-वन-गमन पथ पर बात करते हुए कहा कि यह बहुत गर्व का विषय है कि भगवान राम का अवतार जिस काम के लिए हुआ था, उन प्रसंगों की रचना छत्तीसगढ़ में हुई। वास्तव में भगवान राम छत्तीसगढ़ में कौशल्या के राम और 'वनवासी राम' के रूप में प्रकट होते हैं।  यह अद्भुत संयोग है कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ में प्रवेश, संचरण और प्रस्थान सघन आदिवासी अंचल में ही हुआ। कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका में प्रवेश और सुकमा जिले के अंतिम स्थान कोंटा तक उनकी पदयात्रा। एक बार फिर राम के रास्ते पर चलते हुए अगर हम 2 हजार 260 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करते हैं तो इससे पूरे रास्ते में विकास के दीए जल उठेंगे। आस्था के साथ जुड़ी सड़कें, सुविधाओं के साथ आजीविका के नए-नए साधन भी आएंगे। यह समरसता और सौहार्द्र के साथ वनवासी राम के प्रति आस्था का परिपथ बनेगा, जो नदियों, नालों, झरनों, जलप्रपातों, खूबसूरत जंगलों से गुजरते हुए सैकड़ों पर्यटन स्थलों का उद्धार करेगा।

रेडियो वार्ता लोकवाणी का प्रसारण आज, "उपयोगी निर्माण, जनहितैषी अधोसंरचनाएं, आपकी अपेक्षाएं" विषय पर होगी केंद्रित

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी (Lokvani 15th Telecast today) की 15 वीं कड़ी का प्रसारण आज 14 फरवरी, रविवार को होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार ’उपयोगी निर्माण, जनहितैषी अधोसंरचनाएं, आपकी अपेक्षाएं’ विषय पर प्रदेशवासियों से बातचीत करेंगे। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों, एफ.एम. रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10.30 से 11 बजे तक होगा।


लोकवाणी में इस बार समावेशी विकास, आपकी आस विषय पर होगी बात , फोन करके करा सकते हैं रिकाॅर्डिंग

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रायपुर । छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार "समावेशी विकास, आपकी आस" विषय पर प्रदेशवासियों से बात करेंगे। इस संबंध में कोई भी व्यक्ति आकाशवाणी रायपुर के दूरभाष नंबर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर 25, 26 एवं 27 अगस्त को अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकाॅर्ड करा सकते हैं।

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 10 वीं कड़ी का प्रसारण 13 सितंबर को होगा। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्रों, एफएम रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10.30 से 11 बजे तक होगा I
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