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जब उम्मीद की डोर थमने लगी… मुख्यमंत्री बने संबल: मुख्यमंत्री की मदद बनी शालू के सपनों की सीढ़ी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की बेटी और 12 बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी सॉफ्टबॉल खिलाड़ी शालू डहरिया के चेहरे पर उस वक्त मुस्कान की लहर दौड़ गई, जब स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें वीडियो कॉल कर न सिर्फ शुभकामनाएं दीं, बल्कि उनके सपने को पूरा करने के लिए जरूरी आर्थिक मदद भी प्रदान किया।

शालू डहरिया का चयन 14 से 20 जुलाई, 2025 को चीन के सिआन में होने वाली एशिया यूथ सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हुआ है। छत्तीसगढ़ से इस ओपन टूर्नामेंट के लिए केवल दो महिला खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें शालू डहरिया भी शामिल हैं। लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भागीदारी के लिए आवश्यक 1.70 लाख की फीस उनके लिए एक बड़ी बाधा बन गई थी।

आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाली शालू के पिता प्राइवेट सुरक्षा गार्ड हैं और माँ एक छोटे से ब्यूटी पार्लर का संचालन करती हैं। बावजूद इसके शालू ने आठवीं कक्षा से सॉफ्टबॉल खेलना शुरू किया और अब तक एक गोल्ड मेडल सहित 12 बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने शालू डहरिया को वीडियो कॉल कर कहा "बेटी, तुम आगे बढ़ोहम सब तुम्हारे साथ हैं। छत्तीसगढ़ को तुम पर गर्व है। अच्छा खेलो, मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे साथ हैं। देश और प्रदेश का नाम रोशन करो।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बेटियों को केवल प्रोत्साहित नहीं करती, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उनके सपनों को पंख देने के लिए भी हमेशा तत्पर रहती है।

संवेदनशीलता की मिसाल बनी यह पहल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशानिर्देश पर त्वरित अमल करते हुए जांजगीर चांपा कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने शालू को 1.70 लाख की सहायता राशि का चेक सौंपा और प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं।

शालू की माता श्रीमती अल्का डहरिया ने मुख्यमंत्री साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल और आर्थिक सहायता से मेरी बेटी को अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय की यह पहल बताती है कि सरकार सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं,  ज़रूरत की घड़ी में हाथ पकड़कर साथ निभाने वाली साथी है। बेटियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

 

 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने लहराया राष्ट्रीय स्तर पर परचम

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रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ‘‘स्पेशल जूरी रिकगनिशन अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को यह सम्मान फे़डरेशन ऑफ़ इंडियन चौंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (एफ.आई.सी.सी.आई.) द्वारा अम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में 18 से 19 अक्टूबर 2024 तक आयोजित ‘‘19वीं उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन’’ में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिटेन की उच्चायुक्त सुश्री लिण्डी केमरान के करकमलों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल को प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के कुशल मार्गदशन में विगत दो वर्षाें में धान जनन द्रव्य संरक्षण, जैव विविधता एवं संबंधित उत्पादों पर अनुसंधान हेतु एवं उत्पादों के उपभोग के प्रति आमजनों तक जागरूकता लाने के संबंध में किये गये उल्लेखनीय कार्याें को दृष्टिगत रखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया है। एफ.आई.सी.सी.आई. द्वारा आयोजित 19वीं उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिसमें आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, स्पेन तथा अफ्रिकी देश घाना के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ब्रिटेन की उच्चायुक्त सुश्री लिण्डी केमरान थीं। जो स्वयं भी एक शिक्षाविद हैं तथा समाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्राख्यात हैं।

गौरतलब है कि इस अवार्ड हेतु देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षकिण संस्थाओं द्वारा एफ.आई.सी.सी.आई. के जूरी के समक्ष किये गये कार्याें का प्रदर्शन किया गया था, जिसमें जूरी ने अपना निर्णय देते हुये इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर को शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं उद्यमिता विकास के क्षेत्र में स्पेशल जूरी रिकगनिशन अवार्डप्रदान किया गया। यह अवार्ड मिलने से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई है।

पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को 27 सितम्बर को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

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रायपुर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल होने जा रही है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित द बेस्ट टूरिज्म विलेज कम्पटिशन 2024 के तहत बस्तर जिले के ढूढमारस और चित्रकोट गांवों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। बस्तर के ढूढमारस गांव को एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन तथा चित्रकोट को सामुदायिक आधारित पर्यटन में  उत्कृष्ट कार्य के लिए यह सम्मान मिलेगा। यह सम्मान 27 सितंबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित विश्व पर्यटन दिवस समारोह में प्रदान किया जाएगा।


प्रधानमंत्री मोदी के विजन पर आधारित छत्तीसगढ़ का पर्यटन विकास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि पर्यटन भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण का भी एक प्रभावी साधन है। उनका दृष्टिकोण है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थायी और समावेशी पर्यटन का विकास किया जाए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।

इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ठोस कदम उठाए हैं। राज्य ने अपनी  वन संपदा,जनजातीय परंपराओं, और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए इन क्षेत्रों में पर्यटन का विकास किया है। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को पर्यटन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पर्यटन विकास का विजन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। धार्मिक पर्यटन के तहत, राज्य में पांच शक्तिपीठोंकृसूरजपुर का कुदरगढ़, चंद्रपुर का चंद्रहासिनी मंदिर, रतनपुर का महामाया मंदिर, डोंगरगढ़ का बम्लेश्वरी मंदिर और दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रदेश में इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म में राज्य सरकार का विशेष फ़ोकस है।

राज्य सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ग्रांट बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संरक्षित करते हुए इनके आयोजनों की तैयारी में तेजी आएगी। बस्तर दशहरा का आयोजन इस बार विशेष रूप से भव्य और विशाल होगा। यह पर्व न केवल स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित करेगा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है, जहाँ पर्यटकों को हमारे वन्य जीवन,जनजातीय धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव हो। उनके विजन के अनुसार, राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में वेलनेस टूरिज्म, कृषि पर्यटन, और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, मनोरंजन पार्कों और सांस्कृतिक केंद्रों का विकास भी राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

अमृत काल विजन डॉक्यूमेंट 2024 के  तहत मुख्यमंत्री ने राज्य की पर्यटन आकांक्षाओं को एक रूप देने की बात कही है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक कार्य किया जा रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

चित्रकोट और ढूढमारस की धरोहर

छत्तीसगढ़ के ये दोनों गांव, ढूढमारस और चित्रकोट, राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक संपदा के प्रतीक हैं। चित्रकोट का प्रसिद्ध जलप्रपात, जिसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है, पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय आकर्षण है। वहीं, ढूढमारस गांव अपने एडवेंचर टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ पर्यटक रोमांचक गतिविधियों का अनुभव कर सकते हैं।

इन दोनों गांवों का सम्मानित होना राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक विशेष उपलब्धि है। यह न केवल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य के पर्यावरणीय पर्यटन को भी नया आयाम देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के जनता, अधिकारियों और स्थानीय समुदायों को बधाई दी। उन्होंने कहा, यह पुरस्कार हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय संपदा की विजय है। हमारा लक्ष्य पर्यटन को राज्य की समृद्धि और विकास का प्रमुख साधन बनाना है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संकरा को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता सर्टिफिकेट

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धमतरी। प्राथमिक स्वास्थय केन्द्र सांकरा को राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मंडल ने बताया कि गत दिनों केन्द्रीय मूल्यांकन टीम ने 05 विषयों प्रसव कक्ष, ओपीडी, आईपीडी, लेबोरेटरी और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर मूल्यांकन कर दस्तावेजो का परीक्षण, स्टॉफ एवं मरीजों का इंटरव्यू किया गया। इस दौरान मैदानी कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू लिया गया और सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमो के क्रियान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन किया गया। इसके बाद  पीएचसी सांकरा के एनक्यूएएस सर्टिफाइड होंने की जानकारी दी गई।

खण्ड चिकित्सा अधिकारी नगरी डॉ डी.आर. ठाकुर ने बताया कि इससे पूर्व भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांकरा ने स्थानीय ग्राम पंचायत के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ्य पंचायत का सर्टिफिकेट प्राप्त कर चुके है।  स्वास्थ्य केंद्र के सेवाओ को सुदृढ करने में स्थानीय ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत नगरी का सहयोग रहा है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक धमतरी श्रीमती प्रिया कवंर ने बताया कि इस गुणवत्ता सर्टिफिकेट को प्राप्त करने में राज्य और जिला कार्यालय के उच्च अधिकारियों और सलाहकार व अन्य तकनीकी स्टाफ का विशेष सहयोग रहा है।

छत्तीसगढ़ को एक और राष्ट्रीय पुरस्कार : जलजीवन सर्वेक्षण 2023 में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की ओर से मिला प्रशस्ति पत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सराहा जा रहा है। इसी कड़ी में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। नारायणपुर जिले को आकांक्षी जिले के अंतर्गत जलजीवन सर्वेक्षण 2023 में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र से केंद्रीय जलशक्ति, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सम्मान के लिए नारायणपुर जिलावासियों को तथा इस कार्य में लगे जलजीवन मिशन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है।

गौरतलब है कि बेहद कठिन बसाहटों वाले नारायणपुर जिले के गाँव-गाँव में हर ग्रामीण को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने आंकाक्षी जिले के अंतर्गत नारायणपुर जिले को सम्मानित किया। केंद्र सरकार द्वारा जलजीवन सर्वेक्षण 1 अक्टूबर 2022 से 30 जून 2023 तक कराया गया। इसमें आकांक्षी जिलों अंतर्गत नारायणपुर जिले का कार्य उत्कृष्ट पाया गया। इस जिले के लिए जलजीवन मिशन ने 30 हजार 322 परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने का लक्ष्य रखा था इसमें 18 हजार 72 घरों तक नल कनेक्शन पहुँचाया जा चुका है। 14 गाँव ऐसे हैं जहां शतप्रतिशत परिवारों को कनेक्शन दिया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर पूरे प्रदेश में जलजीवन मिशन के अंतर्गत शुद्ध पेयजल पहुँचाने का काम मिशन मोड पर किया जा रहा है। मिशन संचालक जलजीवन मिशन आलोक कटियार ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सतत् मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन के कार्यों में मानक गुणवत्ता के साथ वांछित प्रगति प्राप्त हुई है, वर्तमान स्थिति में राज्य द्वारा औसतन प्रतिदिन 7000 घरेलू कनेक्शन की उपलब्धि अर्जित की जा रही है तथा 60 प्रतिशत परिवारों को घरेलू कनेक्शन दिया जा चुका है। अब तक राज्य के कुल 422 ग्रामों को हर घर जल प्रमाणीकरण किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि नारायणपुर जिले में दो विकासखंड ओरछा और नारायणपुर है। 

विकासखंड ओरछा का अधिकांश क्षेत्र अबूझमाड़ के अन्तर्गत आता है जो लगभग 4 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ पहाड़ एवं घने जंगलों से घिरा हुआ है। अभी तक इन क्षेत्रों का सर्वे भी नहीं हो पाया है। इस असर्वेक्षित क्षेत्र में 275 से अधिक ग्राम है, जिसके किसानों के हितों को देखते हुये मसाहती सर्वे के कार्य हेतु मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था। मसाहती ग्रामों में सर्वे कार्य चल रहा है। जल जीवन मिशन अन्तर्गत सोलर पम्प आधारित पेयजल योजनाये इस जिले के दूर-दूर में फैले बसाहटों में निवासरत ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य में जलजीवन मिशन अंतर्गत राज्य के कुल 43 हजार 974 शाला (86.78 प्रतिशत), 41 हजार 719 आंगनबाड़ी केंद्र (83.39 प्रतिशत) एवं 5246 स्वास्थ्य केंद्र (97.86 प्रतिशत) में रनिंग वाटर उपलब्ध कराया जा चुका है। राज्य के शतप्रतिशत अर्थात 2470 आश्रम शालाओं में रनिंग वाटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। राज्य के 7 जिलों धमतरी, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, मुंगेली, जांजगीर चांपा एवं सक्ती जिले में 70 प्रतिशत से अधिक घरेलू कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। दंतेवाड़ा जिले में 26 हजार 891 अर्थात 53.01 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदाय किया गया है। दंतेवाड़ा जिले के 19 ग्रामों में शतप्रतिशत परिवारों में नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है तथा 5 गांव में हर-घर जल प्रमाणीकरण कराया जा चुका है।

नारायणपुर जिले में 6 ग्रामों में हर घर जल उत्सव मनाकर प्रमाणीकरण कराया गया है। नारायणपुर जिले में हर घर जल पूर्ण करने के प्रयासों के अंतर्गत विकासखण्ड ओरछा के अंदरूनी ग्राम उदिदगांव, गुलुमकोड़ो, कोकोड़ी, कुंडला, खडकागांव, गुरिया एवं पल्ली आदि गांवों में कार्य पूर्णता पर है। जिले में सोलर आधारित 338 योजनायें पूर्ण की जा चुकी है, सुदूर वनांचल क्षेत्रों में सोलर आधारित पेयजल योजनाओं से निरंतर जलापूर्ति सुनिश्चित किया जा रहा है इस प्रकार नारायणपुर जिले के अंदरूनी एवं विद्युत विहीन ग्रामों में भी पेयजल सुविधा का लाभ मिल रहा है। कटियार ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत नारायणपुर जिले के शत प्रतिशत परिवारों को अतिशीघ्र घरेलू नल कनेक्शन प्रदान कर प्रदेश के प्रथम हर घर जल जिला बनाये जाने हेतु हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

सीएचसी बागबाहरा को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता का प्रमाण-पत्र

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महासमुंद। राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से महासमुंद जिले को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है। जिले के बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक पुरस्कार दिया गया है। इस खास उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं छा गई है। यह प्रमाण पत्र उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिया गया है।
                         

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा ने विभिन्न मानकों में 100 में 85 अंक प्राप्त किए। बता दें कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों एनक्यूएएस) कार्यक्रम की शुरू की गई है। ताकि, बेहतर प्रदर्शन करने वाली सुविधाओं को पहचानने के साथ-साथ समुदाय के सार्वजनिक अस्पतालों की विश्वसनीयता में सुधार हो सकें। एनक्यूएएस वर्तमान में जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और शहरी पीएचसी के लिए उपलब्ध है। मानक मुख्य रूप से प्रदाताओं के लिए पूर्व परिभाषित मानकों के माध्यम से सुधार के लिए अपनी गुणवत्ता का आंकलन करने और प्रमाणन के लिए अपनी सुविधाओं को लाने के लिए हैं। इनमें उपलब्ध सेवाएं इन कड़े मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

मूल्यांकन में आठ सेवा शामिल

राष्ट्रीय गुणवत्ता निर्धारण मानक कार्यक्रम अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा का राष्ट्रीय स्तर का मूल्यांकन 22 एवं 23 मई को किया गया। नौ विभाग बाह्य रोगी विभाग, अंतः रोगी विभाग, प्रसव कक्ष, लेबोरेटरी, बीएसय ओटी, फार्मेसी, रेडियोलॉजी, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रत्येक विभाग को विषय सेवा मरीजों के अधिकार, मरीजों के अधिकार, इनपुट सपोर्ट सर्विसेज, क्लिनिकल सर्विसेस संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन और परिणाम शामिल है।

दूसरी बार मिला प्रमाण-पत्र

सीएमएचओ डॉ. पी कुदेशिया ने बताया कि सीएचसी बागबाहरा के पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोमाखान को भी राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण-पत्र मिल चुका है। कलेक्टर एवं उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं सीएमओ बीएस बढ़ाई, बीपीएम हेमकुमार सोनकर के अलावा बागबाहरा में कार्यरत सभी स्टॉफ के योगदान का परिणाम है। आने वाले वर्षों में जिले से अन्य अस्पतालों को भी यह प्रमाण-पत्र मिल सके, इसके लिए हर समय सुविधाएं विकसित की जा रही है।

कलेक्टर प्रभात मलिक ने भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिली राष्ट्रीय सराहना के लिए स्वास्थ्य विभाग को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि सभी व्यक्ति को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। अस्पतालों में साफ सफाई के साथ गुणवत्तापूर्ण सेवा देना हमारी प्राथमिकता में है।

वनरक्षक के पद पर भर्ती के लिए आवेदन 5 मार्च तक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग के अंतर्गत विभिन्न वनमंडलों में खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत वनरक्षक के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति राष्ट्रीय स्तर के खेलों में प्रावीण्यता प्राप्त उम्मीदवारों से किया जाना है। इच्छुक उम्मीदवारों से 05 मार्च 2023 शाम 05.00 बजे तक आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। 

आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में वनमण्डलाधिकारी एवं नोडल अधिकारी रायपुर वनमंडल, रायपुर के पते पर पंजीकृत डाक (पावती सहित), स्पीड पोस्ट से ही भेजे जा सकते हैं। रिक्त पद पर निर्धारित अर्हता तथा अन्य संबंधित जानकारी वन विभाग की वेबसाइट www.cgforest.com से download  किया जा सकता है।

विशेष लेख : न्याय के चार वर्ष: खनन प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही विकास की नई रोशनी

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रायपुर। खनिज राजस्व से प्रदेश के खनन प्रभावित अंचलों में विकास की नई रोशनी पहुंच रही है। इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, अधोसंरचना के विकास  कार्यों के साथ-साथ  लोगों के जीवन स्तर में बदलाव लाने के कार्य हो रहे हैं। लोगों को पहले छोटी-छोटी समस्याओं के लिए राजधानी की ओर देखना पड़ता था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन क्षेत्रों में डीएमएफ की राशि के व्यय करने की प्रक्रिया को और अधिक लोकतांत्रिक बनाते हुए, इसके लिए गवर्निंग बाडी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रभावित क्षेत्र के लोगों, महिलाओं की भागीदारी तय की है, इससे लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के कार्य आसानी से हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ को प्रकृति के वरदान के रुप में मिली खनिज सम्पदा की भागीदारी राज्य के विकास में लगातार बढ़ती जा रही है। 


नये खनिज भण्डारों की खोज, नये क्षेत्रों में खनन प्रारंभ होने, बेहतर प्रबंधन से राज्य को मिलने वाले खनिज राजस्व में जबरदस्त वृद्धि हुई है। राज्य का लगभग 27 प्रतिशत राजस्व खनिजों के दोहन और खनिज राजस्व से प्राप्त हो रहा है। खनिजों की रायल्टी सें मिलने वाली राशि में से 10 से 30 प्रतिशत राशि डीएमएफ में जमा होती है। इस मद का उपयोग खनिजधारित  और आदिवासी अंचलों में लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि के लिए किया जा रहा है। पिछले 4 वर्षों में राज्य को मिलने वाला खनिज राजस्व 6000 करोड़ रुपए से बढ़कर 12 हजार 305 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। खनिज प्रशासन को सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से पारदर्शी बनाया गया है।


खनिजपट्टों की आनलाइन स्वीकृति, ई-नीलामी जैसे कार्यो के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है।प्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़े हैं, वहीं सामाजिक -आर्थिक विकास की गतिविधयों में तेजी आयी हैै। राज्य के सुपोषण अभियान, नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना, हाट बाजार और स्लम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने, गौठानों के विकास और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन में डीएमएफ फंड के माध्यम से खनिजों की रायल्टी से मिलने वाली अंशदान की राशि की महत्वपूर्ण भूमिका है। डीएमएफ मद का उपयोग खनिज प्रभावित क्षेत्रों के विकास और आजीविका के साधनों के विकास में किया जा रहा है। अपनी खनिज संपदा के बल पर छत्तीसगढ़ देश के विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।


राज्य में पंचायत प्रणाली को मजबूती देने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में रेत की खदानों का संचालन का अधिकार पंचायतों को दिया गया है। इसी प्रकार पंचायतों ओर नगरीय निकायों को पिछले
4 वर्षों में गौण खनिजों से प्राप्त राजस्व में से लगभग 434 करोड़ रूपए की राशि उपलब्ध करायी गई है। खानिज धारित क्षेत्रों के लोगों को जिला खनिज न्यास की गवर्निंग बाडी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रभावित क्षेत्र के लोगों और महिलाओं की भागीदारी तय की गई है। नवीन प्रावधानों के अनुसार खनिज न्यास निधि के माध्यम से संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार को सुनिश्चित करने के साथ शासी निकाय को लोकतांत्रिक बनाया गया है। डीएमएफ मद में प्राप्त राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत राशि प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में व्यय करने का प्रावधान किया गया है।


इस राशि से प्रभावित क्षेत्रों में कृृषि
, लघु वनोपज, वनौषधि प्रसंस्करण, कृृषि की उन्नत तकनीकों के प्रयोग संबंधी कार्य, गौठान विकास से संबंधित कार्य, खनन प्रभावित क्षेत्र के वन अधिकार पट््टाधारकों के जीवन स्तर में सुधार एवं जीविकोपार्जन के उपाय किए जा रहे हैं। नए प्रावधानों के अनुसार ज्वार, बाजरा, मक्का, कोदो कुटकी एवं दलहन-तिलहन के उत्पादन, इन फसलों का रकबा बढ़ाने के उपाय, जैविक कृषि को प्रोत्साहन, फलदार वृृक्षों का रोपण का प्रावधान किया गया है। इस राशि से शिक्षा सेक्टर अंतर्गत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों के परिवार के सदस्यों की शिक्षा तथा सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग क्लासेस, आवासीय प्रशिक्षण की व्यवस्था, आत्मानंद इग्लिश मिडियम स्कूल के संचालन से संबंधित कार्यों का प्रावधान किया गया है। 

प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय के जीवन स्तर में सुधार हेतु सतत जीविकोपार्जन, सार्वजनिक परिवहन, सांस्कृृतिक मूल्यों के संरक्षण, मूलभूत सुविधाएं एवं युवा गतिविधियों को बढ़ावा जैसे संबंधित नए सेक्टर शामिल किए गए हैं। ऑनलाईन स्वीकृृति एवं भुगतान हेतु डीएमएफ पोर्टल का निर्माण एवं संचालन किया जा रहा है। जीआईएस टैंगिंग, मोबाईल एप एवं स्वीकृति, भुगतान संबंधी राइडर युक्त क्लाउड आधारित पोर्टल के नवीन वर्जन का कार्य अंतिम चरण पर है, इन प्रावधानों को करने वाला छत्तीसगढ़ देश का प्रथम राज्य है।

डीएमएफ मद से अक्टूबर 2022 की स्थिति में राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना नरूवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना में 233.89 करोड़, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना में 19.16 करोड़, मुख्यमंत्री सुपोषण योजना में 195.35 करोड़, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में 0ण्63करोड़, मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना में 1.38 करोड़, स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना में 196.80 करोड़, गौठान विकास के लिए 170.14 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है।

डीएमएफ में मुख्य खनिज एवं गौण खनिज के खनिपट्टों, पूर्वेक्षण सह खनिपट्टों से राज्य शासन को प्राप्त रायल्टी की 10 से 30 प्रतिशत राशि जमा हो रही है। राज्य में बढ़ती खनिज क्षेत्र की गतिविधियों से डीएमएफ मद में प्राप्त होने वाली राशि में लगभग दो गुनी वृद्धि हुुई है। पूर्व में डीएमएफ मद में औसत वार्षिक प्राप्ति 1200 करोड़ रुपए थी, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 2199 करोड़ रूपये हो गई है। वर्ष 2022-23 में इस मद में 2400 करोड़ रुपए प्राप्त होने का अनुमान है। न्यास में अब तक 10 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है।


प्रयास के विद्यार्थियों ने देश के सर्वोच्च संस्थानों में प्रवेश पाकर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया: मंत्री डॉ. टेकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस के अवसर पर आज रायपुर के नवीन विश्राम गृह परिसर में आयोजित स्वर्गीय राजीव गांधी स्मृति प्रयास आवासीय विद्यालयों के प्रतिभाशाली 58 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। प्रयास आवासीय विद्यालय के यह प्रतिभावान विद्यार्थी वर्ष 2021-22 की राष्ट्रीय स्तर की जेईई, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं में अध्ययन कर रहे हैं। मंत्री डॉ. टेकाम ने इस अवसर पर आईआईटी, एनआईटी, ट्रीपल आईटी और मेडिकल में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 50-50 हजार रूपए की राशि का चेक प्रदान कर सम्मानित किया। 



अतिथियों द्वारा सम्मान समारोह में वर्ष 2021-22 में प्रयास आवासीय विद्यालय की उपलब्धि पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया। मंत्री डॉ. टेकाम ने इस अवसर पर राज्य की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के अधोसंरचना निर्माण के लिए 72 करोड़ 83 लाख 73 हजार रूपए की लागत वाले 32 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इसमें 67 करोड़ 86 लाख 28 हजार रूपए के 29 विकास कार्यों का भूमिपूजन और 04 करोड़ 97 लाख 45 हजार रूपए के तीन विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। प्रतिभा सम्मान समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। प्रयास आवासीय विद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का अवलोकन अतिथियों द्वारा किया गया। 

 शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस पर प्रयास के प्रतिभाशाली विद्यार्थी सम्मानित

इस अवसर पर आईआईटी धनबाद में अध्ययनरत छात्रा कु. मेरिना स्मृति मिंज और आईआईटी रायपुर में अध्ययनरत छात्र मुरली मनोहर वर्मा ने अपने अनुभव भी साझा किए। मंत्री डॉ. टेकाम ने समारोह में सम्मानित होने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिभावान बच्चों को आज उनके परिश्रम का इनाम मिल रहा है, जो बच्चे आज यहां जगह नहीं बना पाए है उन्हें इनसे सीखने की जरूरत है। चुनौती कोई भी हो प्रयास करने से उसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनजाति क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने देश के सर्वोच्च संस्थानों में प्रवेश पाकर राज्य एवं जनजाति का मान बढ़ाया है। बच्चों की मेहनत, अभिभावकों का सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को सराहने का अवसर है। प्रतिभाओं को सम्मानित करने से उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है



साथ ही आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार के आयोजन से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और प्रतिभा निखर कर सामने आती है। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रयास आवासीय विद्यालय राज्य के संपूर्ण अनुसूचित क्षेत्र सहित गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थित नक्सल प्रभावित जिलोें के आदिवासी उप-योजना क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रारंभ से प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टिकोण से तैयार करता है, जिससे वे विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की प्रतिष्ठापूर्ण संस्थाओं में प्रवेश पाना योग्य बन सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में अब तक प्रयास विद्यालय से 107 आईआईटी, 305 एनआईटी, 916 विद्यार्थी विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों में और 47 विद्यार्थियों ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त का रिकॉर्ड बनाया है। 

वर्ष 2021-22 में प्रयास आवासीय विद्यालयों ने आईआईटी में 10, एनआईटी में 36, ट्रीपल आईटी में 08, मेडिकल कॉलेज में 04 विद्यार्थियों ने और विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं को मिलाकर कुल 451 विद्यार्थियों ने व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त किया है। समारोह को अध्यक्ष अनुसूचित आयोग के.पी. खाण्डे, उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग आर.एन. वर्मा, उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग सुश्री राजकुमारी ने भी संबोधित किया। आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास श्रीमती शम्मी आबिदी प्रयास आवासीय विद्यालय योजना का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

छत्तीसगढ़ को एक और राष्ट्रीय पुरस्कार: ’मोर मयारू गुरूजी’ कार्यक्रम को मिला स्कॉच अवार्ड

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रायपुर। छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा संचालित मोर मयारू गुरूजी कार्यक्रम का चयन बुधवार को स्कॉच अवार्ड (सिल्वर) के लिए किया गया है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को यह अवार्ड नई दिल्ली में प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने पुरस्कार के लिए आयोग को बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि स्कॉच संस्था द्वारा नामांकन से लेकर अंतिम चरण तक लगभग 7 स्तरों पर चरणबद्ध तरीके से मूल्यांकन के बाद यह सम्मान दिया जाता है। मोर मयारू गुरूजी कार्यक्रम के माध्यम से आयोग ने प्रदेश के लगभग 2 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है।



राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को स्कॉच अवार्ड मिलने की घोषणा ऑनलाइन कार्यक्रम में की गई। इसमें देशभर से कई राज्य शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, सदस्यगण श्रीमती पुष्पा पाटले, श्रीमती आशा संतोष यादव, श्रीमती संगीता गजभिये, सोनल कुमार गुप्ता, अगस्टीन बर्नाड और सचिव प्रतीक खरे भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी सदस्यों ने अध्यक्ष श्रीमती नेताम को बधाई दी। इस पर उन्होंने अवार्ड का श्रेय आयोग के सदस्यों के परिश्रम को दिया है।

उल्लेखनीय है कि आयोग के मोर मयारू गुरूजीकार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को बाल अधिकारों की रक्षा के लिए खेल एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से रोचक तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कार्यक्रम को रोचक तरीके से डिजाईन किया गया है। इसकी अवधि मात्र 2 से 3 घण्टे ही रखी गई है, जिससे शिक्षक इसे आसानी से ग्रहण कर सकें। आयोग का यह मानना है कि एक शिक्षक और बच्चे का संबंध 5 वर्ष से 12 वर्ष तक रहता है और इस बीच शिक्षक के व्यक्तित्व का बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए बाल अधिकार सहित शिक्षकों द्वारा बच्चों से वार्तालाप करते समय और पढ़ाते समय किन बातों पर जोर देना है और किन कमियों को सुधारना है, इन सभी विषयों को मोर मयारू गुरूजी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रहा पुरस्कार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नरवा विकास कार्यक्रम के तहत कैम्पा मद अंतर्गत वनांचल स्थित नालों में काफी तादाद मे भू-जल संरक्षण संबंधी कार्याे का तेजी से क्रियान्वयन जारी हैं। राज्य में इसके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को स्कॉच अवार्डके पर्यावरण श्रेणी के लिए स्वर्ण पुरस्कार हेतु चयन किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्कॉच अवार्ड में चयन होने पर विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।




गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में गत चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी नरवा विकासयोजना के तहत वनांचल स्थित 6 हजार 395 नालों के लगभग 23 लाख हेक्टेयर जल ग्रहण क्षेत्रों को उपचारित करते हुए विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत एक करोड़ 61 लाख से अधिक भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। यह राष्ट्रीय अवार्ड देश में जनसामान्य की प्रगति की दिशा में कराए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए नई दिल्ली की स्कॉच संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों तथा संस्थाओं के प्रस्तुतिकरण के आधार पर दिया जाता है।

 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य के वन क्षेत्रों में भू-जल संरक्षण तथा संवर्धन के लिए बड़े तालाब में जल स्त्रोतों, नदी-नालों और तालाबों को पुनर्जीवित करने का कार्य लिया गया है। इनमें वर्ष 2019-20 में 863 नालों का चयन कर लगभग 5 लाख हेक्टेयर भूमि को उपचारित करने के लिए 12 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण  शामिल है। इसी तरह वर्ष 2020-21 में 2 हजार से अधिक नालों का चयन कर 6 लाख हेक्टेयर भूमि के उपचार के लिए 46 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण तथा वर्ष 2021-22 में एक हजार 974 नालों का चयन कर 5 लाख 70 हजार हेक्टेयर भूमि के उपचार के लिए 73 लाख से अधिक भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं।

इसके अलावा वर्ष 2022-23 में एक हजार 503 नालों का चयन कर 6 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि के उपचार के लिए 29 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण जारी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में नरवा विकास योजना के तहत भू-जल संरक्षण संबंधी कार्यों के कुशल क्रियान्वयन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा का भी विशेष योगदान रहा है।

छत्तीसगढ़ में जल्द ही राष्ट्रीय स्तर के सिकलसेल रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही राष्ट्रीय स्तर के सिकलसेल रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के  माध्यम से प्रदेश के अट्ठाईस जिलों में सिकलसेल प्रबंधन केंद्रों का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि सिकलसेल की समस्या का प्रभावी रूप से मुकाबला करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सभी जिला चिकित्सालयों में नवीन सिकल सेल प्रबंधन केंद्र की स्थापना की जा रही है, जहां आधुनिक विधि से सिकलसेल की जांच और उपचार किया जाएगा। 



उन्होंने कहा कि नवीन विधि से जांच बेहद आसान है। इस विधि से मितानिन भी जांच कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से अभियान चलाकर सिकलसेल मरीजों की पहचान की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर डिजिटल कार्ड वितरण योजना का शुभारंभ भी किया। इस बीच, स्वास्थ्य विभाग की राज्य स्तरीय टीम ने दुर्ग जिले का दौरा कर सिकलसेल और एड्स पर नियंत्रण के लिए हो रहे कार्यों का निरीक्षण किया। टीम ने दुर्ग जिला अस्पताल में आज से शुरू हो रहे सिकलसेल प्रबंधन केन्द्र का भी निरीक्षण किया।

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