Media24Media.com: राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन

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छत्तीसगढ़ के राज्यपाल राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन ने लौटाया विधानसभा से पारित आरक्षण विधेयक

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में आरक्षण संशोधन विधेयक को राजभवन सचिवालय ने सरकार को लौटा दिया है। राज्यपाल बिश्वभूषण हरिचंदन ने आरक्षण संशोधन विधेयक को छत्तीसगढ़ सरकार को लौटाया है, हालांकि विधेयक लौटाने की वज़ह अब तक सामने नहीं आ पाई है। इस मसले पर संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि विधेयक लौटाने के बाद की कार्यवाही पर सरकार आगे बढ़ेगी।

क्या है आरक्षण संशोधन विधेयक

बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक 2022 को विशेष सत्र बुलाकर पास किया गया था। इस आरक्षण संशोधन विधेयक में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था।सदन में एक साथ दो विधेयक छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियो, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022 तथा छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022 सर्वसम्मति से पारित किया गया था। अब राज्यपाल ने नये आरक्षण विधेयक को लौटा दिया है।


 


छत्तीसगढ़ के नए राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन ने राजभवन में ली शपथ

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रायपुर। विश्वभूषण हरिचंदन ने आज राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित गरिमामय समारोह में छत्तीसगढ़ के नौवें राज्यपाल के रूप में अपने पद की शपथ ली। उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायधिपति न्यायमूर्ति अरूप कुमार गोस्वामी ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रथम महिला सुप्रभा हरिचंदन भी उपस्थित रहीं।


राजनीतिक कैरियर वर्ष 1977 में कैबिनेट मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, आवश्यक वस्तुएं, जिनकी आपातकाल के दौरान कमी पाई गयी थी। उन्होनें आवश्यक वस्तुओं को न केवल स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराया बल्कि मूल्य-रेखा को लगातार बनाए रखा। कालाबाजारी करने वालों और जमाखोरों के खिलाफ उनकी कड़ी कार्रवाई जिसने उन्हें ओडिशा में बहुत लोकप्रिय बना दिया।

सिंगल विंडो सिस्टम शुरू करने की पहल की

ओडिशा में उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम शुरू करने की पहल की और उद्योग सुविधा अधिनियम पारित करवाया। उनके गहन प्रयासों के कारण ही राज्य की ‘आरआर’ (पुर्नवास एवं प्रतिस्थापन) नीति, उस समय देश की सर्वश्रेष्ठ आरआर नीति बनी थी। श्री हरिचंदन ने कैबिनेट उप समिति के अध्यक्ष के रूप में इस नीति को अमलीजामा पहनाया, जिससे विस्थापितों के पुनर्वास के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक युद्ध 1817 के पाइक विद्रोह को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने

ब्रिटिश शासन के खिलाफ बख्शी जगबंधु के नेतृत्व में उड़िया लोगों द्वारा स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक युद्ध 1817 के पाइक विद्रोह को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए उन्होंने 1978 वर्ष से निरंतर प्रयासरत रहे। परिणाम स्वरूप माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने राष्ट्रीय स्तर पर इसके द्विशताब्दी समारोह आयोजित करने के निर्देश दिये।

 

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