Media24Media.com: मौसमी बीमारी

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आई फ्लू आंखों की बीमारी और मौसमी बीमारी के संबंध में संभागीय और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश

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रायपुर। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सभी संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा और जिला शिक्षा अधिकारियों को आई फ्लू आंखों की बीमारी और मौसमी बीमारी के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। जिन स्कूलों के बच्चों में आई फ्लू की समस्या है उनको स्कूल आने से मना करने एवं उन्हें घर में रहने की सलाह देने कहा गया है। साथ ही मौसमी बीमारी से बचाव के उपाय और उन्हें जागरूक करने के लिए सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में जानकारी देने कहा गया है।
                       

लोक शिक्षण संचालनालय से जारी पत्र में कहा गया है कि आई फ्लू आंखों की एक बीमारी है, जिसे आंख आना, आंखों का गुलाबी होना या पिंग आई भी कहते हैं। आई फ्लू बरसात के मौसम में आंखों का इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है। आंखों के होने वाले इंफेक्शन को आई फ्लू या कंजक्टिवाइटिस कहते हैं, इसमें इंफेक्शन होने वाले बच्चों की आंखें लाल हो जाती है। इसके साथ ही आंखों से पानी निकलता रहता है और सूजन आ जाती है। जिस कारण आंखों से साफ नहीं दिखता।

आई फ्लू से बचने के उपाय- थोड़े-थोड़े समय पर अपने हाथों की सफाई करें, आंखों को बार-बार न छूए, अपने आसपास सफाई रखें, अपनी आंखों को समय-समय पर धोए, अगर बाहर जाना ज्यादा जरूरी है तो काला चश्मा पहनकर जाएं, पीड़ित व्यक्ति से आई कांटेक्ट बनाने से बचें, संक्रमित व्यक्ति के बेड, तौलिया या कपड़े का इस्तेमाल न करें तथा समस्या अधिक होने पर अपने नजदीकी अस्पताल जाकर डॉक्टर से ईलाज कराएं।

शासकीय और अशासकीय स्कूलों में यह सभी जानकारी संबंधित अधिकारियों को प्रेषित करने निर्देशित किया गया है। इस संबंध में संचालक, महामारी नियंत्रण ने अपने परिपत्र में कंजक्टिवाइटिस के लक्षणों, उपचार और इससे बचाव के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने परिपत्र में कहा है कि कंजक्टिवाइटिस आंख की आम बीमारी है जिसे हम आँख आना भी कहते हैं। इस बीमारी में रोगी की आँख लाल हो जाती है, कीचड़ आता है, आँसू आते हैं, चुभन होती है तथा कभी-कभी सूजन भी आ जाती है।

कंजक्टिवाइटिस होने पर एंटीबायोटिक ड्रॉप जैसे जेंटामिसिन ¼Gentamicine½, सिप्रोफ्लॉक्सिन ¼Ciprofloxacine½, मॉक्सीफ्लॉक्सिन ¼Moxifloxacin½ आई ड्रॉप आँखों में छह बार एक-एक बूंद तीन दिनों के लिए मरीज को देना चाहिए। तीन दिनों में आराम न आने पर किसी अन्य बीमारी की संभावना हो सकती है। ऐसे में नेत्र विशेषज्ञ के पास दिखाना उचित होता है। अन्यथा गंभीर स्थिति निर्मित हो सकती है। कंजक्टिवाइटिस की जाँच एवं उपचार की सुविधा चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है।

कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है जो सम्पर्क से फैलती है। अतः मरीज को अपनी आँखों को हाथ न लगाने की सलाह देनी चाहिए। रोगी से हाथ मिलाने से बचकर एवं उसकी उपयोग की चीजें अलग कर इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है। संक्रमित आँख को देखने से इस बीमारी के फैलने की धारणा केवल भ्रम है। यह बीमारी केवल सम्पर्क से ही फैलती है।

मौसमी उतार-चढ़ाव से बच्चों में बढ़ी स्वास्थ्य समस्याएं, पालक रहे सतर्क, रोजाना 60-70 बच्चे पहुंच रहे OPD

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वर्तमान में मौसमी उतार-चढ़ाव के चलते बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार संबंधी समस्या बड़ी मात्रा में देखी जा रही है, जिससे विभाग में बाह्य रोगी और भर्ती मरीज बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों की सेहत की देखरेख के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि अभी रोजाना 60-70 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं, जिसमें 40-50 बच्चे सिर्फ सर्दीं, खांसी, बुखार से पीडि़त है वैसे ही भर्ती मरीजों में 50-60 प्रतिशत बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार से ग्रस्त है।


यह सामान्य मौसमी बीमारी है, जो बरसात और उसके बाद के महीनों में मौसम परिवर्तन के साथ होता है। जो कि सामान्य वायरल के लक्षण है। किसी भी बच्चों में कोरोना संबंधी लक्षण नहीं पाए गए हैं। कुछ बच्चों को ऑक्सीजन की भी जरूरत पड़ रही है, जो कि सीवियर निमोनिया के लक्षण में पड़ती है पर उसके बाद स्थिति में सुधार हो रहा है। कुछ एक बच्चों में समस्या ज्यादा है, गंभीरता देखी जा रही है, ये ऐसे बच्चे है जो या तो पहले से अन्य बीमारियों से ग्रस्त है जैसे दिल की बीमारी, खून की कमी होना, कुपोषण या किसी अन्य बीमारियों से ग्रस्त है और अस्पताल पहुंचने में देर कर रहे हैं।

गरम खाना और फलों का करें सेवन

अभी का मौसम वायरल बुखार ठीक होने में समय ले रहा है। इसमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है। किसी भी बच्चे को सर्दी, खांसी का लक्षण हो तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जाकर सलाह लें और आवश्यकता पड़ने पर शिशुरोग विशेषज्ञों की सलाह ले। स्वयं किसी प्रकार का प्रयोगिक और झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में न पड़े। साफ-सफाई रखे और ठंड से बच्चों को बचाकर रखें अभी भी कोविड-19 संबंधी सरकार के नियमों का कड़ाई से पालन करें। बाजार की ठंडी वस्तुएं बच्चों को न देवें घर में बने ताजे भोजन और फलों का सेवन कराए।

हेल्थ टीम ने अस्पतालों का लिया जायजा

रायगढ़ कलेक्टर भीम सिंह के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन.केशरी के मार्गदर्शन में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ.के.डी.पासवान, नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी ईश्वर राव, शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक डॉ.राकेश वर्मा और मलेरिया-डेंगू के सलाहकार शेख निषार की टीम द्वारा रायगढ़ के विभिन्न निजी अस्पतालों का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया। जिसमें विशेष रूप से डेंगू मलेरिया और अन्य मौसमी बुखार के मरीजों की जानकारी ली गई।

कुछ भी लक्षण दिखने पर कराएं जांच

अस्पताल के संचालक और लैब टेक्नीशियन को निर्देशित किया गया कि बुखार के मरीज का विशेष रूप से ध्यान रखकर उसके लक्षण के आधार पर उचित जांच कर उसकी प्रतिवेदन भेजें। निजी अस्पतालों में उपस्थित मरीज और उनके रिश्तेदारों को सलाह दी गई कि वे अपने आसपास अगर कोई बुखार या अन्य मौसमी बीमारियों के मरीज चाहे बच्चा हो या वयस्क निकटतम अस्पताल में जाकर अपना जांच कराएं। साथ ही जल्द रोग मुक्त हो। विलंब करने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है जिसके चलते मरीज के इलाज में कठिनाई होती है और जान जाने का भी खतरा बना रहता है।

मौसमी बीमारी से दूर रहने पीने के पानी का रखें खास ध्यान, सर्दी-खांसी और बुखार होने पर तुरंत कराएं जांच, लापरवाही पड़ सकती है भारी

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मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाए रखना हर समय ही महत्वपूर्ण होता है, पर वर्तमान में जिस तरह से कोविड-19 चल रहा है,चाहे उसकी रफ्तार धीमी हुई हो, लेकिन ऐसे में स्वास्थ्य का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, हवा में नमी, गंदगी का माहौल और बुनियादी निवारक उपायों का पालन न करना जोखिम को और भी बढ़ा देता है। बारिश का मौसम भले ही सुहाना लगता है, लेकिन बीमारियों के संक्रमण के लिए यही मौसम सबसे माकूल होता है और इन दिनों कोविड-19 महामारी के संक्रामक दौर में हो रही बारिश, खंडवर्षा के साथ जरा सी असावधानी भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकती है। 


महासमुंद कलेक्टर डोमन सिंह ने फीवर क्लीनिक में कोविड-19 की जांच और आमजन को जागरूक करने और सावधानी बरतने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए है। उन्होंने जिले की जनता से अपील की वे इस बरसात के मौसम में मौसमी बीमारी (सीजनल फ्लू और बैक्टीरिया ) से दूर रहने के लिए अपने पीने के पानी का खास ध्यान रखें। उन्होंने जिला स्वास्थ्य को इसके लिए सभी तैयारियां करने कहा है । 

सावधानी के लिए पहने फुल स्लीव्स कपड़े

कलेक्टर सिंह ने जिले में हो रही खंडवर्षा और रुकरुक कर बारिश के चलते मौसम में आए परिवर्तन को देखते हुए स्वास्थ्य अमला पूरी तरह मौसमी बीमारी से निपटने के लिए मुस्तैद रहे । जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टाक है। उन्होंने कहा कि मच्छर से बचाव के लिए घरों के आसपास पानी जमा न होने थे। इसके साथ कूलर याखुले में अव्यवस्थित तरीके से रखी सामग्री जिनमें बारिश का पानी जमा हुआ हो। उसे हटा दें ताकि डेंगू मच्छर के लार्वा न हो पाए। जहां तक संभव हो पूरे बदन को ढकने वाले वस्त्र पहने। 

सर्दी-खांसी और बुखार होने पर तुरंत कराएं जांच

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एन.के.मंडपे ने सभी निजी चिकित्सालयों को भी कहा कि उनके यहां आने वाले सर्दी, खांसी, बुखार के मरीजों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर करें। प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कोविड-19 संक्रमण जांच की उपलब्धता है। साथ ही उन्होंने फीवर क्लीनिक सेवाओं में विशेष ध्यान देने और निजी चिकित्सालयों में भी यही सावधानी बरते जाने पर जोर दिया है। ताकि, बारिश के मौसम में कोविड-19 के संक्रमणीय खतरे को समय रहते पहचान कर जल्द इलाज करवाकर नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए विभागीय अधिकारी, डिस्ट्रिक्ट सविर्लेंस ऑफिसर सहित आई.एम.ए. की स्थानीय इकाई सर्दी-बुखार के क्लीनिकों की गतिविधियों की समीक्षा कर नैदानिकी यानी इलाज सेवा प्रदाताओं को सलाह देते रहेंगे।

फ्री में होगा जांच 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मंडपे ने कहा कि कुछ दिनो से रुक-रुक कर हो रही रिमझिम और तेज बारिश के साथ, सर्दी और बुखार सहित अन्य बीमारियों के मामलों में वृद्धि होने की संभावना ज्यादा है। इस दौरान सर्दी और बुखार जैसे अन्य लक्षणों के साथ इस तरह के मामलों को लापरवाही पूर्वक मौसमी फ्लू के रूप में नहीं माना जा सकता। उन्होंने आमजन से कहा है कि वे इस मौसम में अपने और अपने परिवार के सेहत का ध्यान रखें। क्या करना है और क्या नहीं ये स्वास्थ्य एडवाइजारी जारी करते हुए अपील की है कि जिन्हें भी सर्दी, खांसी या बुखार जैसे लक्षण प्रतीत हों, वे जिला चिकित्सालय परिसर से लगे फीवर क्लीनिक में आकर स्वास्थ्य जांच कराएं। यहां जांच, परामर्श और आवश्यक दवा वितरण की सेवा सुविधाएं निशुल्क प्रदाय की जा रही हैं।

फीवर क्लीनिक में कराए स्वास्थ्य जांच 

जरूरत होने पर अनुभवी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की देख-रेख में संक्रमण परख के लिए नमूना जांच की भी सुरक्षित व्यवस्था है। परीक्षण के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट वाली त्वरित जांच में सिर्फ 5 मिनट में यह पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण है या नहीं। साथ ही इस जांच में कोई खास तकलीफ भी नहीं होती। ऐसे में, कोविड-19 की महामारी की रोकथाम के साथ-साथ स्वयं और अपने परिवार को स्वस्थ्य-सुरक्षित रखने के लिए फीवर क्लीनिक में आकर स्वास्थ्य की जांच कराए ।

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