Media24Media.com: मौत के घाट

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प्रेम-प्रसंग में बना अड़चन...तो पत्नी ने बेटे संग मिलकर रची खौफनाक साजिश, उतार दिया मौत के घाट

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 गरियाबंद : देवभोग थाना क्षेत्र के ग्राम दबनाई में बीती रात गंगेश्वर सोनवानी को उसके बेटे गिरीश सोनवानी और पत्नी लक्ष्मीबाई ने मौत के घाट उतार दिया. दोनों मां-बेटे ने मिलकर डंडे और पत्थर से पीट-पीट कर गंगेश्वर की हत्या कर दी. जिसका शव लहू लुहान हालात में गांव के शिव मंदिर के पुलिया के नीचे पड़ा मिला. ग्राम कोटवार ने देर रात पुलिस को इसकी सूचना दी.


देवभोग अस्पताल में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों ने गंगेश्वर को मृत घोषित कर दिया. थाना प्रभारी गौतम गावड़े ने बताया कि मृतक के सिर से लगातार खून बह रहा था. ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौत हो गई. मामले में मृतक की पत्नी लक्ष्मीबाई और बेटे गिरीश सोनवानी को हिरासत में ले लिया गया है.

जानकारी के मुताबिक मृतक की पत्नी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है. पति उसके चरित्र पर शंका कर आए दिन विवाद करता था. 4 से 5 बार मारपीट भी हुई. मामला न्यायालय में भी चल रहा है. पति के झगड़े और पिटाई से परेशान पत्नी गांव छोड़कर 5 महीने पहले अपनी बहन के यहां ओडिशा चली गई थी. तनाव कम हुआ तो फिर घर आने की सोची. हाल ही में नुआखाई में पूरा परिवार एक साथ था. दंपति के अलावा उनका बेटा गिरीश और बेटी भी साथ थी. तीन दिन पहले से विवाद फिर शुरू हुआ. शुक्रवार शाम 8 बजे गंगेश्वर ने पत्नी के साथ झगड़ा शुरू किया. मारपीट भी की. लेकिन इस बार मां और बेटे ने मिलकर पति की जम कर पिटाई कर दी और उसे मौत के घाट उतार दिया.


CG NEWS : नक्सलियों ने फिर उतारा एक ग्रामीण मौत के घाट

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रायपुर : बीजापुर जिले में नक्‍सल प्रभावित ओयाम तिमनेनार गांव के एक ग्रामीण को नक्‍सलियों ने मौत के घाट उतार दिया। खबरों के अनुसार नक्‍सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में ग्रामीण की हत्‍या कर दी है। हालांकि इस घटना की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना मिरतुर थाना के ओयाम तिमनेनार गांव का है।


यहां नक्‍सलियों ने घर में सो रहे एक ग्रामीण की हत्‍या कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस मुखबिरी के शक में नक्‍सलियों ने वारदात को अंजाम दिया है। हालांकि इस घटना की अभी तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। खबरों के अनुसार घटना की जानकारी मिलते ही मिरतुर थाना की पुलिस घटनास्‍थल के लिए रवाना हो गई है।


कलयुगी मां ने जवान बेटे को हंसिए से मारकर उतारा मौत के घाट, पुलिस ने किया गिरफ्तार

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धमतरी: कहा जाता है कि पुत्र भले ही कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ये कहावत झूठी साबित हुई। यहां एक मां ने अपने जिगर के टूकड़े को मौत के घाट उतार दिया। बेटे-बहू में आए दिन विवाद के चलते मां ने इस वारदात को अंजाम दिया है।


बता दे कि धमतरी के रूद्री थाना इलाके के बाजार पारा गंगरेल में बीते 15 मई को युवक गणेश पटेल की घर के बिस्तर पर लहूलुहान हालत में लाश मिला था। युवक के हत्या मामले में आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि मृतक के पत्नी और माँ के बीच आये दिन विवाद होता था। वहीं बेटा का मानसिक स्थिति ठीक नहीं था जिसका इलाज भी चल रहा था। जिसका खर्च भी मृतक के माँ को उठाना पड़ रहा था। वहीं सप्ताह भर पूर्व युवक गणेश पटेल ने अपनी माँ से कहा था कि उसके पास घर नहीं पैसा नहीं है। वह पत्नी के साथ वापस पुराना घर में आकर रहना चाहता है। मृतक की माँफुलेश्वरी पटेल अपनी बहू को रखना नहीं चाहती थी। उसी दौरान मृतक की पत्नी कांकेर बरदेभाठा अपने मायके चली गयी।

उसी दौरान बेटे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने से आये दिन होने वाले विवाद एवं उनके इलाज और दवाई पर होने वाले खर्च और बहु के झगड़े से तंग आकर उसकी माँ ने बीते 15 मई को सुबह 3 बजे किचन में रखे हसियाँ से पेट में हमला कर उसकी हत्या कर दी। जिसके बाद आरोपी माँ ने हत्या में उपयोग किये गये सामान को छिपाने का प्रयास किया जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। आरोपी माँ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजी रही है।


कातिल महिला : पत्नी ने टंगिया से वार कर पति को उतारा मौत के घाट

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कांकेर :  जिले के बांदे थाना क्षेत्र अंतर्गत एक पत्नी ने पति की टंगिया से मारकर हत्या कर दी है. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है. हालांकि, घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर पुलिस ने कातिल पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है.


जानकारी के अनुसार, मामला कल देर शाम का है. जहां शराब पीकर पति घर आया और किसी बात को लेकर पत्नी से बहस हो गई. देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ी की पास में रखी टंगिया से पत्नी ने शराबी पति पर हमला कर दिया. जिससे उसकी मौत हो गई.

वहीं घर में बच्चे माता-पिता का झगड़े की जानकारी पड़ोसियों को दी. जिसके पड़ोसियों ने थाने जाकर घटना की जानकारी दी. पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना स्थल पहुंची. आरोपी पत्नी को पुलिस हिरासत में लिया है. मृत शव का मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा दिया है. आगे की कार्रवाई की जा रही है.


छत्तीसगढ़ में हाथी ने फिर मचाया उत्पात! पटक-पटक कर युवती को उतार दिया मौत के घाट

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सरगुजा। सरगुजा संभाग के लुंड्रा वन क्षेत्र में हाथी ने एक युवती की पटक पटक कर जान ले ली। मृतका की बहन ने भाग कर जान बचाई। इस मामले में ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।


जानकारी के अनुसार, वन परिक्षेत्र लुंड्रा के उदारी निवासी उमा भारती पिता बागर उम्र लगभग 22 वर्ष सुबह अपनी बहन के साथ लकड़ी लेने जंगल गई हुई थी। जहां उदारी जंगल में विचरण कर रहे जंगली हाथी से दोनों का सामना हो गया। इस दौरान हाथी ने उमा भारती को सूड़ से पकड़ कर जमीन पर पटक दिया। जिससे घटनास्थल पर ही युवती की मौत हो गई। वहीं उसकी बहन ने भागकर अपनी जान बचाई।


गोरा बच्‍चा पैदा होने पर यहां उसे उतार दिया जाता हैं मौत के घाट

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गर्भावस्‍था के दौरान में मां को फल और मेवा खिलाई जाती है। जिससे घर में पैदा होने वाल बच्‍चे का रंग सफेद हो। वैसे क्‍या आप सोच सकते हैं कि कोई अपने बच्‍चे को सिर्फ इसलिये मार दे कि उसका रंग गोरा है। जी हां इस जगह अगर गोरा बच्‍चा पैदा होगा होगा तो मिलेगी मौत की सजा यह कोई मजाक नहीं सच है।

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हम बात कर रहे हैं जारवा जनजाति के लोगो की जो बच्‍चा गोरा पैदा होने पर मार देते हैं। यह जनजाति अडंमान में है जहां इन लोगों का यही मानना है कि अगर बच्चा थोड़ा गोरा होगा तो वह उस प्रजाति के लोगो से अलग होगा जिससे वह अपने आप को उस समाज से पृथक समझेगा। वहां की यह जनजाति गर्भवती महिलाओं को जानवारों का खुन भी पिलाते है ताकि बच्चे का रंग काला हो। इसी कारण से यहां यह परंपरागत रुप से चल रहा है।

यह भी पढ़ें : –फेसबुक-बीजेपी कनेक्शन पर अमेरिकी अख़बार का बड़ा खुलासा

इस समुदाय के इलाके में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है। ये लोग अंडमान ट्रंक रोड के नज़दीकी रिहायशी इलाकों में रहते हैं। यहां की परंपरा के अनुसार यदि बच्चे की मां विधवा हो जाए या फिर उसका पिता किसी दूसरे समुदाय का हो तो बच्चे को मार दिया जाता है और इसके लिए कोई सजा नहीं है।

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हम बात कर रहे हैं जारवा जनजाति के लोगो की जो बच्‍चा गोरा पैदा होने पर मार देते हैं। यह जनजाति अडंमान में है जहां इन लोगों का यही मानना है कि अगर बच्चा थोड़ा गोरा होगा तो वह उस प्रजाति के लोगो से अलग होगा जिससे वह अपने आप को उस समाज से पृथक समझेगा। वहां की यह जनजाति गर्भवती महिलाओं को जानवारों का खुन भी पिलाते है ताकि बच्चे का रंग काला हो। इसी कारण से यहां यह परंपरागत रुप से चल रहा है।
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