Media24Media.com: मुरिया दरबार

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ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की गरिमा के अनुरूप कार्यक्रमों का हो सफल आयोजन- मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कल शाम यहां अपने निवास कार्यालय 75 दिन तक मनाये जाने वाले देश के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के सफल आयोजन के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक ली। उन्होंने इस दौरान बस्तर दशहरा पर्व की गरिमा के अनुरूप सफलतापूर्वक आयोजन के लिए सर्व संबंधितों को सौंपे गए दायित्व का कुशलतापूर्वक निर्वहन किये जाने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि 75 दिन तक चलने वाला बस्तर दशहरा पर्व हरेली अमावस्या के दिन पाट जात्रा पूजा विधान के साथ 4 अगस्त 2024 से शुरू हो गया है, जो कि 19 अक्टूबर 2024 तक मनाया जाएगा। यह दशहरा पर्व विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है।


मुख्यमंत्री साय को इस दौरान बस्तर दशहरा उत्सव समिति द्वारा इसमें तिथिवार विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी। जिसमें बताया गया कि ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के दौरान 15 अक्टूबर 2024 को मुड़िया दरबार का आयोजन होगा। इसी तरह बस्तर दशहरा को भव्य रूप देने के लिए बस्तर मड़ई, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मीट, एक पेड़ बस्तर के देवी-देवताओं के नाम, बस्तर टूरिस्ट सर्किट, दसरा पसरा, नगरगुड़ी टेंट सिटी, टूरिज्म ट्रेवलर्स आपरेटर मीट, देव सराय, स्वच्छता पखवाड़ा जैसे विविध कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। बस्तर दशहरा पर्व में लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष यात्री बसों के संचालन के सम्बंध में भी चर्चा की गई।

4 अगस्त को पाट जात्रा पूजा विधान से शुरू हुए ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व 2024 के अंतर्गत 2 अक्टूबर को काछनगादी पूजा विधान, रेलामाता पूजा विधान। 5 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा विधान, रथ परिक्रमा पूजा विधान। 12 अक्टूबर को मावली परघाव विधान, 15 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान और मुरिया दरबार, 16 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान, 19 अक्टूबर को मावली माता जी की डोली की विदाई पूजा विधान आयोजित है।

मुरिया दरबार
गौरतलब है कि मुरिया दरबार में विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रमुख, नेता और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर संस्कृति, परंपरा और प्रथाओं को सहेजने और सामुदायिक मांग तथा समस्याओं पर विचार करते हैं। इस वर्ष 15 अक्टूबर 2024 को मुरिया दरबार का आयोजन किया जायेगा।मुरिया दरबार आयोजन के 10 दिन बाद बस्तर संभाग के मांझी, चालकी, मेम्बर, मेम्बरीन, पुजारी, कोटवार, पटेल, मातागुड़ी के मुख्य पुजारियों का सम्मेलन आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा कई अभिनव पहल की जा रही है। द बस्तर मड़ई के अंतर्गत बस्तर की प्राकृतिक सौन्दर्य, एतिहासिक एवं पुरातत्विक स्थलों, एडवेंचर स्थलों, सांस्कृतिक स्थलों से पर्यटकों को अवगत कराने के लिए प्रशासन द्वारा "द बस्तर मड़ई" की अवधारणा तैयार की गयी है।

बस्तर मड़ई के अंतर्गत 21 सितम्बर को सामुहिक नृत्य कार्यक्रम, 21 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक बस्तर हाट-आमचो खाजा, 24 सितम्बर को सिरहासार परिसर मैदान में बस्तर नाचा, 27 सितम्बर को पारंपरिक लोक संगीत, 29 सितम्बर को बस्तर की कहानियां एवं हास्य कवि सम्मेलन, 30 सितम्बर को बस्तरिया नाचा जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 2 अक्टूबर से बस्तर दशहरा 2024 की समाप्ति तक बस्तर के पारंपरिक व्यंजन के स्टॉल लगाए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ की झांकी ‘बस्तर की आदिम जनसंसद : मुरिया दरबार‘ में शामिल लोक-कलाकारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की मुलाकात

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रायपुर। नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड से पूर्व 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न प्रदेशों से झांकी के प्रदर्शन के लिए राजधानी आए लोक-कलाकारों को आमंत्रित कर उनसे मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। इसी दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की झांकी ‘‘बस्तर की आदिम जनसंसद: मुरिया दरबार‘‘ में शामिल लोक-कलाकारों से भी मुलाकात की। इन कलाकारों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी शुभकामनाओं के साथ छत्तीसगढ़ से नई दिल्ली रवाना किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों से आयीं महिला कलाकारों को अच्छे एवं जीवंत प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों से नई दिल्ली पहुंचे एनसीसी और एनएसएस के बच्चों से भी मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सूचना एंव प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, तथा अन्य मंत्रिगण मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार गणतंत्र दिवस की परेड देश की नारी शक्ति को समर्पित है। मैं आज यहां इतनी बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई बेटियों को देख रहा हूं। आप यहां अकेले नहीं आए हैं बल्कि आप सभी अपने साथ अपने राज्यों के रीति रिवाज और अपने समाज की समृद्ध सोच भी लेकर आए हैं। आज आप सब से मिलना भी एक विशेष अवसर बन गया है।

कड़ाके की ठंड में आप सभी ने घने कोहरे के बीच दिन-रात रिहर्सल किया और गजब की परफॉर्मेंस दे रहे हैं। मुझे पक्का विश्वास है कि जब आप यहां से अपने घर जाएंगे तो आपके पास गणतंत्र दिवस के अनुभवों के बारे में बताने के लिए काफी कुछ होगा और यही तो इस देश की विशेषता है। विविधताओं से भरे हमारे देश में सिर्फ एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से ही जीवन में नए अनुभव जुड़ने लग जाते हैं।


प्रधानमंत्री मोदी से मिले छत्तीसगढ़ की झांकी 'मुरिया दरबार' में शामिल लोक-कलाकार

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 रायपुर : नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड से पूर्व 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न प्रदेशों से झांकी के प्रदर्शन के लिए राजधानी आए लोक-कलाकारों को आमंत्रित कर उनसे मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। इसी दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की झांकी ‘‘बस्तर की आदिम जनसंसद: मुरिया दरबार‘‘ में शामिल लोक-कलाकारों से भी मुलाकात की। इन कलाकारों को मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने अपनी शुभकामनाओं के साथ छत्तीसगढ़ से नई दिल्ली रवाना किया था।


प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों से आयीं महिला कलाकारों को अच्छे एवं जीवंत प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्रीमोदी ने राज्यों से नई दिल्ली पहुंचे एनसीसी और एनएसएस के बच्चों से भी मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्रीराजनाथ सिंह, सूचना एंव प्रसारण मंत्रीअनुराग ठाकुर, जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, तथा अन्य मंत्रिगण मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार गणतंत्र दिवस की परेड देश की नारी शक्ति को समर्पित है। मैं आज यहां इतनी बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई बेटियों को देख रहा हूं। आप यहां अकेले नहीं आए हैं बल्कि आप सभी अपने साथ अपने राज्यों के रीति रिवाज और अपने समाज की समृद्ध सोच भी लेकर आए हैं। आज आप सब से मिलना भी एक विशेष अवसर बन गया है। कड़ाके की ठंड में आप सभी ने घने कोहरे के बीच दिन-रात रिहर्सल किया और गजब की परफॉर्मेंस दे रहे हैं। मुझे पक्का विश्वास है कि जब आप यहां से अपने घर जाएंगे तो आपके पास गणतंत्र दिवस के अनुभवों के बारे में बताने के लिए काफी कुछ होगा और यही तो इस देश की विशेषता है। विविधताओं से भरे हमारे देश में सिर्फ एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से ही जीवन में नए अनुभव जुड़ने लग जाते हैं।

छत्तीसगढ़ की झांकी ने नेशनल-मीडिया का दिल जीता, तारीफें बटोरीं

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रायपुर। गणतंत्र-दिवस परेड में शामिल होने से पूर्व आज हुए प्रेस-रिव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ की ओर से प्रदर्शित की जा रही झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद: मुरिया दरबारने राष्ट्रीय मीडिया की जमकर तारीफें बटोरीं। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज में आदिम काल से मौजूद लोकतांत्रिक चेतना का प्रमाण प्रस्तुत करती है। प्रेस रिव्यू का आयोजन नई दिल्ली की राष्ट्रीय रंगशाला में आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने झांकी निर्माण से जुड़ी टीम को अच्छे रिव्यू के लिए बधाई देते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की झांकी का विषय न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह झांकी आदिवासी समाज की गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपराओं से दुनिया को परिचित कराएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ और जनजातीय समाज की अस्मिता और उनकी सांस्कृतिक समृद्धि से दुनिया को परिचित कराने के लिए लगातार काम कर रही है।


प्रेस रिव्यू के दौरान झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने परब नृत्य का प्रदर्शन किया। वहींमांदर की थाप के साथ बांसुरी की मधुर तान ने सबका मनमोह लिया। गणतंत्र-दिवस पर नई-दिल्ली के कर्तव्य-पथ पर प्रदर्शित होने वाली छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जन संसद: मुरिया दरबारमें जगदलपुर के बस्तर-दशहरे की परंपरा में शामिल मुरिया-दरबार और बड़े-डोंगर के लिमऊ-राजा को केंद्रीय विषय बनाया गया है। साथ ही झांकी की साज-सज्जा में बस्तर के बेलमेटल और टेराकोटा शिल्प की खूबसूरती से भी दुनिया को परिचित कराया गया है।

झांकी के प्लेटफार्म पर लिमऊराजा के निकट ही बेलमेटल का बैठा हुआ सुंदर नंदी प्रदर्शित है, जो आदिम समाज के आत्मविश्वास और सांस्कृतिक सौंदर्य के प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। प्लेटफार्म पर चारों दिशाओं में टेराकोटा शिल्प से निर्मित सुसज्जित हाथी सजे हुए हैं, जिन्हें लोक की सत्ता के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। मुरिया दरबार में बस्तर में आदिम काल से लेकर अब तक हुए सांस्कृतिक विकास की झलक भी दिखाई जा रही है। झांकी से सबसे सामने के हिस्से में एक आदिवासी युवती को अपनी बात प्रस्तुत करते हुए दर्शाया जा रहा है, युवती की पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से बस्तर के रहन-सहन, सौंदर्यबोध और सुसंस्कारित पहनावे को प्रदर्शित किया जा रहा है।

लोक कलाकारों ने परब नृत्य की दी प्रस्तुति   

आज प्रेस रिव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ के लोककलाकारों ने नेशनल-मीडिया के सामने परब नृत्य प्रस्तुत किया। परब नृत्य बस्तर की धुरवा जनजाति का लोकप्रिय नृत्य है, जिसमें नर्तक दल कतारबद्ध होकर नृत्य करता है। नृत्य के साथ करतब भी शामिल होता है।

बस्तर जिले के 437 ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक सुविधाओं के लिए ग्रामीण सचिवालय का शुभारंभ

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जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के तहत जगदलपुर में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बस्तर  जिले के चार सौ सैंतीस ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक सुविधाओं के लिए ग्रामीण सचिवालय का शुभारंभ किया। साथ ही टी बी मुक्त बस्तर अभियान के लिए निःक्षय बस्तर का शुभारंभ किया। वहीं, उन्होंने स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए विद्या जतन ऐप लॉंच किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन और बस्तर दशहरा पर्व से जुड़े पारंपरिक सदस्यों को पोशाक के लिए पांच लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की।



इसके साथ ही मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिले के एक सौ आठ गांवों में फ्री वाई फाई सेवा के लिए जिला प्रशासन और बी.एस.एन.एल.के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चौदह विभिन्न समाजों को सामाजिक भवन निर्माण के लिए भूमि का पट्टा प्रदान किया। इस अवसर पर उद्योग और जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद दीपक बैज, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल भी उपस्थित थे। वहीं, अपने बस्तर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने जगदलपुर में एक करोड़ पचपन लाख रुपए की लागत से बने संभागीय सी-मार्ट का शुभारंभ किया। 

इस सी-मार्ट में विभिन्न संस्थाओं, गोठानों, स्व-सहायता समूहों और कृषि उत्पादक संगठनों के माध्यम से राज्य के कृषकों, कामगारों, शिल्पकारों और बुनकरों द्वारा उत्पादित सामग्री की बिक्री की जाएगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने लोहंडीगुड़ा विकासखंड के धुरागांव भी पहुंचे, जहां उन्होंने इमली प्रसंस्करण संयंत्र का शुभारंभ किया। वहीं, मुख्यमंत्री ने आज कांकेर के नथिया नवागांव में मिलेट प्रसंस्करण उद्योग का भी लोकार्पण किया। यहां पर कोदो-कुटकी और रागी के प्रसंस्करण और इनके मूल्य संवर्धन से संबंधित इकाई स्थापित की गई है।

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