Media24Media.com: मुख्य न्यायाधीश

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जस्टिस संजीव खन्ना बने देश के 51वें चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई पद की शपथ

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 CJI Sanjiv Khanna : देश के इतिहास में आज का दिन काफी अहम है। आज देश को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। आज जस्टिस संजीव खन्ना ने देश के 51वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में 51वें सीजेआई के पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। बता दें कि जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की जगह ली है। जस्टिस चंद्रचूड़ रविवार को रिटायर हो गए हैं।


कब तक रहेगा कार्यकाल?
जस्टिस खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 तक रहेगा। जनवरी 2019 से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस संजीव खन्ना कई बड़े केस पर सुनवाई कर चुके हैं। जस्टिस खन्ना ईवीएम की विश्वसनीयता को बनाए रखने, चुनावी बॉन्ड योजना को खत्म करने, अनुच्छेद 370 को हटाने और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे हैं।

कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना?
जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ था। साल 1983 में दिल्ली बार काउंसिल के साथ एक वकील के रूप में उनका रजिस्ट्रेशन हुआ था। साल 2004 में उन्हें दिल्ली के लिए स्थायी वकील के रूप में नियुक्त किया गया था। साल 2005 में वह दिल्ली हाई कोर्ट के एडिशनल जज बन गए थे और 2006 में परमानेंट जज बन गए थे। इसके बाद 18 जनवरी 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में प्रमोट कर दिया गया था। 13 मई 2025 को उनका रिटायरमेंट है।

बता दें कि जस्टिस संजीव खन्ना दिल्ली के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देव राज खन्ना के बेटे हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एच आर खन्ना के भतीजे हैं। वह लंबित मामलों को कम करने और न्याय मुहैया कराने में तेजी लाने पर जोर देते रहे हैं।

 

लोक अदालतों में राजीनामा योग्य प्रकरणों का हो अधिक से अधिक निराकरण : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की अध्यक्षता में आगामी 13 जुलाई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की तैयारियों  के संबंध में आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी तथा न्यायाधीश, छत्तीसगढ उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, सचिव, फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, न्यायाधीश, स्थायी लोक अदालत के चेयरमेन, सीजेएम, लेबर जज बैठक में शामिल हुए। बैठक में मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सभी न्यायाधीशों से आगामी नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक एवं अन्य राजीनामा योग्य प्रकरणों को अधिक से अधिक संख्या में चिन्हांकित कर निराकृत किये जाने के निर्देश दिये। 

उन्होंने न्यायालयों में 5 वर्ष एवं 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित राजीनामा योग्यप्रकरणों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं, विद्युत वितरण कंपनियों, बीएसएनएल, बीमा कंपनियों एवं अन्य के द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले प्री-लिटिगेशन आवेदनों के पक्षकारों की प्री-सिटिंग करा अधिक-से-अधिक प्री-लिटिगेशन मामलों के निराकरण की आवश्यकता बताई ताकि ऐसे मामले न्यायालय में संस्थित होने से पहले ही निराकृत हो जाये। उन्होंने कहा कि पक्षकारों की सहमति से एवं विधि अनुसार अधिक-से-अधिक राजीनामा योग्य मामलों का निराकरण करने के लिए लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी का यथोचित प्रयास अपेक्षित है।

मुख्य न्यायाधिपति ने उच्चतम न्यायालय में 29 जुलाई 2024 से 03 अगस्त 2024 तक विशेष लोक अदालत के आयोजन की महत्वपूर्ण पहल पर उच्चतम न्यायालय द्वारा छत्तीसगढ राज्य से संबंधित चिन्हांकित प्रकरणों में राजीनामा की संभावनाओं पर राज्य के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा की जा रही कार्यवाहियों की समीक्षा की और समस्त प्रधान जिला न्यायाधीशों को निर्देशित किया कि विशेष रूचि लेकर पक्षकारों को नोटिस तामीली करा उनकी प्री-काउसिंलिंग इत्यादि हेतु समुचित कार्यवाही करें और सतत् निगरानी करें।

इस वर्चुअल बैठक में न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने वीडियो कान्फ्रेंस में शामिल जिलों के समस्त न्यायाधीशों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें लोक अदालतों में पूर्ण उत्साह और पूर्ण क्षमता से योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से टीम वर्क के साथ कार्य करने को कहा साथ ही पिछली लोक अदालत में निराकरण हुए प्रकरणों की संख्या को बढ़ाने कहा।

बैठक में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, न्यायाधीश, छत्तीसगढ उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति ने भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में मामलों को चिन्हांकित कर उन्हें विधि अनुसार निराकृत करने पर जोर दिया। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के निर्देशानुसार वर्ष 2024 हेतु निर्धारित कैलेण्डर अनुसार आगामी नेशनल लोक अदालत का आयोजन 13 जुलाई 2024 को किया जा रहा है। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि लोक अदालत उच्च न्यायालय से लेकर तहसील न्यायालयों के साथ साथ राजस्व न्यायालयों में भी आयोजित किये जाते हैं।

चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा ने किया धमतरी जिला न्यायालय का औचक निरीक्षण

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने आज शाम बरसते पानी मे धमतरी के जिला न्यायालय का औचक निरीक्षण किया। उनके द्वारा न्यायालय परिसर के समस्त कक्षों, पार्किंग, गार्डन, अधिवक्ताओं व पक्षकारों हेतु उठने-बैठने की व्यवस्था इत्यादि का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.एल चरयाणी उपस्थित थे।

न्यायालय की अधोसंरचना पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण में गार्डन, न्यायालय की अधोसरंचना, साक्षी कक्ष, किलकारी और दुग्धपान कक्ष का उचित रख-रखाव पाने पर तारीफ की और उचित रख रखाव हेतु निरन्तर प्रयास करने कहा। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं से भी चर्चा की व उनकी समस्याएं सुनी। मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने बताया कि अतिरिक्त अधिवक्ता कक्ष की निर्माण की मांग से सम्बंधित प्रस्ताव उच्च न्यायालय से स्वीकृत होकर आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्य शासन को भेजा जा चुका है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने अधिवक्ताओं से कहा कि पक्षकारों को शीघ्र न्याय प्राप्त हो इस सम्बंध में सभी लोगो का पूरा प्रयास रहना चाहिए। जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के एल चरयाणी से लंबित प्रकरणों की जानकारी ली। पुराने प्रकरणों को भी प्राथमिकता के साथ निराकृत करने हेतु निर्देशित किया। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देशित किया कि पुराने लम्बित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण का प्रयास किया जाए। औचक निरीक्षण में उनके साथ रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा तथा एडिशनल रजिस्ट्रार कम पीपीएस एम.टी. एल एन सुब्रहमन्यम, जिला प्रशासन की ओर से एडीएम जी आर मरकाम, एसएसपी मधुलिका सिंह भी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने सरगुजा जिला न्यायालय का किया निरीक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने जिला सरगुजा प्रवास के दौरान जिला न्यायालय का निरीक्षण किया। उन्होंने जिला कोर्ट के प्रत्येक शाखा जैसे नकल रूम, रिकॉर्ड रूम समस्त सेशन कोर्ट व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण करने के बाद जिला अधिवक्ता संघ के साथ बैठक ली। इस दौरान उन्हें शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि अम्बिकापुर में जिला न्यायालय में लगभग 46 करोड़ रूपए की लागत से कंपोजिट बिल्डिंग निर्माण कार्य किया जाएगा, स्वीकृति हेतु शासन को पत्र भेज दिया गया है।

इस दौरान सिन्हा ने अम्बिकापुर में मां महामाया मंदिर दर्शन करने के बाद केंद्रीय जेल का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने पुरुष बंदीगृह के सभी बैरकों और महिला बंदीगृह का निरीक्षण किया। इसके साथ ही जेल के अस्पताल का भी निरीक्षण किया। मुख्य न्यायाधीश ने जेल में स्थायी रूप से चिकित्सक की नियुक्ति और बंदियों को दिए जा रहे दवाई की जानकारी ली।

चीफ जस्टिस सिन्हा ने जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम, विधिक प्रकोष्ठ का निरीक्षण कर जानकारी ली। इसके साथ ही जेल की कैंटीन, बंदियों की ओर से संचालित बुनाई कक्ष, शिक्षा केन्द्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जेल अधीक्षक से महिला बंदियों के रह रहे बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए व्यवस्था की जानकारी ली और आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही वे बाल संप्रेषण गृह में औचक निरीक्षण पर पहुंचे।

इस दौरान उन्होंने बच्चों से बात कर बाल संप्रेक्षण गृह मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान बाल संप्रेषण गृह की कमरों की स्थिति की जांच की। साथ ही बिल्डिंग मेंटनेंस कराने के दिशा-निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश ने बाल संप्रेषण गृह बालिका एवं नारी निकेतन का निरीक्षण कर वहां मौजूद महिलाओं से बात कर  सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश के साथ रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा तथा एडिशनल रजिस्ट्रार कम पीपीएस एम.बी.एल.एन सुब्रहमन्यम भी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश अपने कुछ माहों के कार्यकाल में ही राज्य के अधिकांश जिला न्यायालयों का भौतिक निरीक्षण करते हुए अधोसंरचना व व्यवस्था में सुधार हेतु अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान किये हैं जिसके परिणामस्वरूप कार्य व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन भी दिखाई देना शुरू हो गया है।


उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने रायगढ़ और सक्ती न्यायालय का किया निरीक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा हाईकोर्ट के मामलों की सुनवाई पश्चात् 22 अगस्त 2023 को औचक निरीक्षण हेतु रायगढ़ पहुंचे। रायगढ़ जाते समय उनके द्वारा सक्ती न्यायालय का भी निरीक्षण किया गया। उल्लेखनीय है कि सक्ती में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व व्यवहार न्यायाधीशों के न्यायालय हैं। निरीक्षण के समय न्यायालयों में प्रकरणों की सुनवाई चल रही थी तथा कर्मचारी कार्य कर रहे थे।

सक्ती न्यायालय में पार्किंग व्यवस्था अत्यन्त खराब पायी गयी। अधिवक्ताओं के बैठने हेतु कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। न्यायालय के बरामदे में फर्नीचर जीर्ण-शीर्ण हालत में व अस्त-व्यस्त रखे हुये थे। बरामदे में बिजली के तार भी खुली हालत में अव्यवस्थित तरीके से दिखाई दे रहे थे। न्यायालय में साफ-सफाई भी नही थी। बरामदे में रखी कियोस्क मशीन बंद थी तथा उसमें धूल लगी हुयी थी। न्यायालय की अधोसंरचना न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। उक्त अव्यवस्था को देखकर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जाहिर की तथा सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं से भी मुलाकात की तथा उनसे उनकी समस्याएं जानी।

इसके उपरांत मुख्य न्यायाधीश द्वारा जिला न्यायालय रायगढ़ का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय न्यायिक अधिकारी न्यायालयों में पीठासीन थे तथा प्रकरणों की सुनवाई चल रही थी। उन्होंने जिला न्यायालय के लगभग समस्त कक्षों का निरीक्षण किया। रिकार्ड रूम में प्रकरणों को उचित व्यवस्थित रूप से रखने हेतु जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रायगढ़ को निर्देशित किया गया। वाटर फिल्टर व उसके आस-पास सफाई हेतु भी निर्देशित किया गया। इसके उपरांत वह अधिवक्ताओं से मिले। अधिवक्ताओं ने फूल-माला से उनका सम्मान किया। अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश से उद्बोधन हेतु आग्रह किया जिस पर उन्होंने उपस्थित अधिवक्ताओं के समक्ष उद्बोधन दिया। तदुपरांत उन्होंने न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक भी ली तथा आवश्यक निर्देश दिये।

रायगढ़ से वापसी के समय बाराद्वार रेस्ट हाउस में सक्ती की कलेक्टर सुश्री नुपूर राशि पन्ना तथा एसपी एम.आर. अहिरे ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। मुख्य न्यायाधीश द्वारा उन्हें सक्ती न्यायालय की अधोसरंचना को न्यायालय की गरिमा के अनुरूप बनाये जाने हेतु निर्देशित किया गया। औचक निरीक्षण में मुख्य न्यायाधीश के साथ रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा तथा एडिशनल रजिस्ट्रार कम पीपीएस एम.वी.एल.एन सुब्रहमन्यम भी उपस्थित रहे।

बच्चे राष्ट्र की संपत्ति है, जो देश के भविष्य को आकार देंगे, उनकी सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है : मुख्य न्यायाधीश

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के किशोर न्याय कमेटी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक एकेडेमी के सहयोग से उच्च न्यायालय के ऑडिटोरियम में आयोजित ‘‘विधि के साथ संघर्षरत बच्चों के अपराध निवारण, पुनर्स्थापनात्मक न्याय, परिवर्तन एवं उनके निरोध के विकल्प’’ विषय पर आयोजित 8वें राज्य स्तरीय कन्सलटेशन के शुभारम्भ समारोह को मुख्य आतिथ्य से सम्बोधित करते हुये मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की संपत्ति है, जो देश के भविष्य को आकार देंगे। समाज के जिम्मेदार सदस्यों के रूप में हमें उनकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए हरसंभव प्रयास करने की आवश्यकता है। 


उन्होंने कहा कि किशोरों को अपराध करने से रोकना समाज में अपराध की रोकथाम का एक अनिवार्य हिस्सा है तथा पुनर्वास प्रक्रिया इतनी ठोस हो सकती है कि उन्हें दोबारा विधि के साथ संघर्ष में आने से रोका जा सके। राज्य की भूमिका उस बच्चे के माता-पिता के रूप में कार्य करना है जिसे पुनर्वास की आवश्यकता है तथा इसकी कार्यवाही बच्चे के सर्वाेत्तम हित में होनी चाहिए।  हमारे बच्चों को स्कूली शिक्षा के प्रारंभ से ही नैतिक एवं मूल्य आधारित शिक्षा देना आवश्यक है। बाल संरक्षण गृहों में भी यह आवश्यक है कि हम अपने बच्चों को समाज का उपयोगी सदस्य और देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न करें।

उन्होने आशा तथा विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आज का परामर्श कार्यक्रम बेहद सफल होगा और बच्चों के लिए एक हिंसा मुक्त समाज की स्थापना तथा प्रचार-प्रसार में काफी सहायता मिलेगी, जहां वे अपने बचपन का आनंद लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। 

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के क्रियान्वयन में हमें अथक प्रयास की आवश्यकता है। हमें बाल अपराधियों की मानसिक स्थिति को समझना चाहिये। बच्चे भगवान के उपहार हैं। उनको सही दिशा देकर समाज में कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति बना सकते हैं।  ईश्वर की असीम कृपा से हम इतने काबिल हैं कि हमें उन बच्चों की प्रगति के लिए अथक प्रयास करना चाहिए।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक एकेडमी के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने कहा कि भारत देश का भविष्य आज के बच्चे ही हैं।  अतः उनके भविष्य के लिए हमें अथक प्रयास करते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए, जो समाज को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

कार्यशाला का स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के किशोर न्याय सेल के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल द्वारा कहा गया कि बच्चे विभिन्न कारणों से विधि का उल्लंघन कर सकते हैं। साक्ष्य दर्शाता है कि इनमें से अधिकांश बच्चे वंचित पृष्ठभूमि से आते हैं तथा ये ऐसे बच्चे भी हैं जिन्हें देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्यकता है। यह, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विधिक ढांचे द्वारा बच्चों को दी जाने वाली विशेष सुरक्षा के साथ, रोकथाम, पुनर्वास तथा पुनर्स्थापनात्मक न्याय प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करने तथा किशोर न्याय अधिनियम के न्याय एवं सुरक्षा प्रावधानों के मध्य संबंध सुनिश्चित करने का आग्रह करता है। पिछले दशक में समाज में तेजी से आए परिवर्तनों को देखते हुए भारत में बच्चों को दोतरफा सुरक्षा की आवश्यकता है। जहां बच्चे के उचित पालन-पोषण के लिए पारिवारिक माहौल प्रदान करके उन्हें शारीरिक रूप से बलवान, मानसिक रूप से सतर्क, शैक्षणिक रूप से प्रतिभाशाली बनाने हेतु उनके समग्र विकास के लिए बुनियादी आवश्यकताएं प्रदान की जानी चाहिए। 

इस अवसर पर किशोर न्याय समिति द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘‘नवचेतन’’ का विमोचन किया गया जिसे उच्च न्यायालय की वेब साईट पर अपलोड किया गया। 

शुभारम्भ सत्र में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के  माननीय न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती रजनी दुबे, माननीय न्यायमूर्ति नरेश कुमार चन्द्रवंशी, माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, माननीय न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, माननीय न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल एवं माननीय न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। 

इसके साथ ही कार्यशाला में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल अरविंद कुमार वर्मा, विधि विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश श्रीवास्तव, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार विजिलेंस सुधीर कुमार, रजिस्ट्रार (न्यायिक) के. विनोद कुजूर, कम्प्यूटर शाखा के रजिस्टार शक्ति सिंह राजपूत, अन्य रजिस्ट्री के न्यायिक अधिकारी तथा राज्य न्यायिक एकेडमी के अतिरिक्त निदेशक हरीश अवस्थी, श्रीमती गरिमा शर्मा एवं एकेडमी के अन्य न्यायिक अधिकारीगण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव आनंद प्रकाश वारियाल, किशोर न्याय सेल के सचिव देवेन्द्र कुमार, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के पूर्व सचिव प्रशांत पराशर उपस्थित रहे।

उक्त कार्यशाला के शुभारम्भ सत्र के पश्चात् दो तकनीकी सत्र में आयोजित किये गये, प्रथम सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुरेणु गोनेला एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के विशेष सचिव पोषण चन्द्राकर की अध्यक्षता में तथा द्वितीय सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, माननीय न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, शिक्षा विभाग की प्रबंध निदेशक श्रीमती इफ्फत आरा, गृह विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू एस. तथा छत्तीसगढ यूनिसेफ प्रमुख जॉब जाकरिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें किशोर न्याय एवं बाल अपराधों से संबंधित विभिन्न विषय एवं समस्याओं एवं उसके निदान पर उपस्थित सर्वसंबंधित विभागों के द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया। 

उक्त कार्यशाला का आभार प्रदर्शन राज्य न्यायिक एकेडेमी की अतिरिक्त निदेशक हरीश अवस्थी के द्वारा एवं मंच संचालन अतिरिक्त निदेशक श्रीमती गरिमा शर्मा द्वारा किया गया। 

उपरोक्त कार्यशाला में विशेष रूप से बाल अधिकार संरक्षण आयोग से सोनल कुमार गुप्ता, कौशल विकास विभाग से श्रीमती ज्योति गुग्गल, पुलिस विभाग से डीआईजी श्रीमती मिलेना कुर्रे एवं पुलिस अधीक्षक  संतोष सिंह उपस्थित थे। 

उपरोक्त कार्यशाला में प्रतिभागी के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश, सामाजिक सदस्य, बाल कल्याण समिति के अध्यक्षगण, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल सुरक्षा अधिकारीगण, विधि अधिकारी, जिलों के काउंसलर, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग, गृह विभाग, पुलिस विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, स्कूल विभाग, कौशल विकास विभाग, यूनिसेफ के प्रतिनिधिगण, बाल सम्प्रेक्षण गृह के विजिटर, विशेष किशोर पुलिस ईकाई के अधिकारीगण, विधि के छात्रागण बढ़ी संख्या में  उपस्थित रहे। 

अवगत हो कि माननीय उच्चतम न्यायालय के बाल कल्याण समिति के द्वारा माह सितम्बर, 2023 में नई दिल्ली में ‘‘विधि के साथ संघर्षरत बच्चों के  अपराध निवारण, पुनर्स्थापनात्मक न्याय, परिवर्तन एवं उनके हिरासत के विकल्प’’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। उक्त परिपेक्ष्य में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के किशोर न्याय सेल के द्वारा उपरोक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य न्यायाधीश ने सेंट्रल जेल का किया औचक निरीक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पहुना गेस्ट हाउस में मिले। मुलाकात के दौरान शासन स्तर पर लंबित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के विभिन्न विषयों पर औपचारिक चर्चा हुई। बैठक के पश्चात मुख्य न्यायाधीश औचक निरीक्षण हेतु केंद्रीय जेल रायपुर पहुंचे। यहां उन्होंने पुरूष बंदीगृह के सभी बैरकों का निरीक्षण किया तथा महिला बंदीगृह का भी निरीक्षण किया।

उन्होंने जेल के अस्पताल का भी निरीक्षण किया। जेल में स्थायी रूप से चिकित्सक की नियुक्ति के बारे में जानकारी ली और इसकी पुष्टि की। चिकित्सक से उन्होंने बंदियों को दी जा रही चिकित्सा सुविधा व दवाईयों की जानकारी ली तथा बंदियों से भी इस संबंध में पूछताछ की। उन्होंने जेल में वीडियो कान्फ्रेसिंग रूम, विधिक प्रकोष्ठ का निरीक्षण कर जानकारी प्राप्त की। जेल में केन्टिन, बंदियों द्वारा संचालित प्रिंटिंग प्रेस, सिलाई-बुनाई कक्ष, शिक्षा केन्द्र इत्यादि का भी निरीक्षण किया। बंदियों से बातचीत करते हुए जानकारी प्राप्त की कि उन्हें जेल मेन्युअल के अनुरूप सुविधाएँ मिल रही है या नहीं। 

बच्चों के साथ रहने वाले महिला बंदियों के बारे में उन्होंने जेल अधीक्षक से महिला बंदियों के बच्चों को मिलने वाली सुविधाएँ जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास हेतु व्यवस्था की जानकारी ली। जेल अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि जेल में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई हेतु शासन से मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित है जिसमें संस्कृत की शिक्षा भी दी जा रही है। मुख्य न्यायाधीश द्वारा स्कूल का भी निरीक्षण किया गया। जेल में शिक्षा, स्वास्थ्य व साफ-सफाई की सुविधा पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। निरीक्षण के समय वहां जेल अदालत चल रही थी। भूपेन्द्र कुमार वासनीकर, मु. न्या. मजिस्ट्रेट, रायपुर द्वारा प्रकरणों में सुनवाई की जा रही थी।

उन्होने जेल अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी बंदी की अपील न्यायालय के समक्ष दो बार प्रस्तुत की गई है तो उस विषय की जानकारी त्वरित रूप से संबंधित न्यायालय को अवगत कराये। साथ ही उनके द्वारा यह भी जानकारी ली गयी कि कितनी बंदियों को विधिक सेवा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में जेल की क्षमता कुल 1586 बंदियों की है जबकि जेल में बंदियों की कुल संख्या 3267 है जिसमें से पुरूष बंदियों की संख्या 3117 तथा महिला बंदियों की संख्या 150 है।

निरीक्षण के समय संभागायुक्त डॉ. संजय कुमार अलंग, आईजी रतनलाल डांगी, डीआईजी जेल सह केन्द्रीय जेल अधीक्षक एस. एस. तिग्गा, एसएसपी प्रशांत अग्रवाल, जेलर एमएन प्रधान मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा, विधि विभाग, रायपुर के प्रमुख सचिव रजनीश श्रीवास्तव एवं एडिशनल रजिस्ट्रार सह पीपीएस एम. वी. एल.एन. सुब्रहमन्यम भी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा मात्र 03 माह के कार्यकाल में ही अनेक न्यायालयों व जेलों का औचक निरीक्षण करते हुए व्यवस्था में सुधार हेतु आवश्यक निर्देश जारी कर चुके हैं जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिलने शुरू हो गये हैं।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति ने बेमेतरा न्यायालय परिसर का किया औचक निरीक्षण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा हाईकोर्ट के मामलों की सुनवाई पश्चात् औचक निरीक्षण हेतु बेमेतरा पहुंचे। उनके द्वारा न्यायालय परिसर के समस्त कक्षों का निरीक्षण किया गया। न्यायालय परिसर में वाहनों की पार्किंग, स्वच्छता, वाशरूम, अधिवक्ताओं व पक्षकारों की बैठक व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया एवं व्यवस्था में आवश्यक सुधार के निर्देश दिये।

निरीक्षण के दौरान न्यायालय का भवन पुराना होने के कारण लायब्रेरी, रिकार्ड रूम अन्य कुछ स्थानों पर सीलन पायी गयी। अधिवक्ता कक्ष में भी पानी का रिसाव होना पाया गया जिस पर उनके द्वारा नाराजगी जाहिर की गयी। निरीक्षण के समय बेमेतरा जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बृजेन्द्र कुमार शास्त्री, कलेक्टर पदुम सिंह एल्मा, पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता एस.डी.एम. कु. सुरूचि सिंह व लोक निर्माण विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे जिन्हें आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिये गये।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए वहां लंबित प्रकरणों की जानकारी ली तथा 05 से 10 वर्ष के पुराने प्रकरण 156 (3) सी.आर.पी.सी के प्रकरण, धारा 138 परकाम्य लिखित अधिनियम (छमहवजपंइसम प्देजतनउमदजे ।बज) के प्रकरणों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित गति से निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं से भी चर्चा की व उनकी समस्याओं को दूर करने हेतु निर्देश दिये। औचक निरीक्षण में उनके साथ रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा तथा एडिशनल रजिस्ट्रार कम पीपीएस एम.वी.एल.एन सुब्रहमन्यम भी उपस्थित थेे।

ज्ञात हो कि मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में आये हुये मात्र 03 माह ही व्यतीत हुये हैं, उक्त तीन माह के कार्यकाल में ही उन्होंने अनेक जिला न्यायालयों व केन्द्रीय जेल, बिलासपुर का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये हैं, जिससे आधारभूत संरचना तथा कार्यदशा में आमूल-चूल परिवर्तन दिखाई देना शुरू हो गया है।

एडिशनल जज दीपक तिवारी बने हाई कोर्ट के स्थायी जज

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रायपुर। माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा द्वारा माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण का मुख्य कार्यक्रम छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कोर्ट हाल क्रमांक-1 में 31 जुलाई 2023 दिन सोमवार को सुबह 10 बजे आयोजित होगा।

गौरतलब है कि माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, एडिशनल जज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर को स्थायी जज में नियुक्ति संबंधी अधिसूचना विधि एवं विधायी कार्य विभाग, नई दिल्ली से जारी कर दी गयी है। माननीय न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी की नियुक्ति 08 अक्टूबर 2021 को एडिशनल जज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में की गयी थी।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा पहुंचे राजधानी रायपुर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नवनियुक्त माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा आज राजधानी रायपुर के विमानतल माना पहुंचे। विमानतल पर बिलासपुर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल, पी. सेम कोसी  सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी अगवानी की।

इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष शर्मा, कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार अग्रवाल, जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीशगण एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा 29 मार्च को राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में शपथ ग्रहण करेंगे।


राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण अति महत्वपूर्ण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, विधिक सेवा प्राधिकरण, यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में किशोर न्याय अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण और बाल संरक्षण से संबंधित विषयों पर राजधानी रायपुर में कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण और उनके सर्वांगीण विकास में सबकी सहभागिता जरूरी है। 

कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष गौतम भादुड़ी ने कहा कि आपको बालकों के कल्याण के लिए कार्य मिला है। यह विशेष कार्य है, जिसे भगवान भी देख रहे हैं। आप के बहुत सारे दोस्त एवं परिचित होंगे जिन्हें यह मौका ही नहीं मिला है। हमें यह पुण्य अवसर मिला है इसे हमें सार्थक करना है। जिस प्रकार हम अपने बच्चों को बेहतर और खुशहाल देखना चाहते हैं, उसी प्रकार पीड़ित और अपचारी बच्चों को भी देखें, इससे मन को संतुष्टि मिलेगी।

न्यायमूर्ति भादुड़ी ने आगे कहा कि बाल संरक्षण लैंगिक उत्पीड़न के लिए एक्ट तो बना है। लेकिन उसका क्रियान्वयन हो रहा है, यह भी देखना जरूरी है। उन्होंने पंचतंत्र की एक कहानी सुनाई कि एक गरीब व्यक्ति को कुछ आटा मिल जाता है और वह सपना देखने लग जाता हैं कि वह उसे बेचकर बकरी खरीद लेगा, फिर बकरी के दूध को बेचकर धीरे-धीरे अमीर हो जाएगा। इसी समय नींद में उसका पांव आटे पर पड़ता है और आटा बिखर जाता है। ऐसा बच्चों को नहीं लगना चाहिए कि यह एक ड्रीम है। उन्होंने एक और कहानी बताया कि एक व्यक्ति को कहीं जाना था। उसने स्वामी विवेकानंद जी से पूछा कि आप मुझे रास्ता बताए। स्वामी जी ने कहा कि रास्ता आपके पैरों के नीचे है जो आपको अपनी मंजिल तक ले जाएगा। 

आप सभी अधिकारियों-कर्मचारियों अथवा इस सेवा से जुड़े लोगों से मेरा अनुरोध है कि आपको अवसर मिला है, आप बच्चों के संरक्षण के लिए बेहतर कार्य कर सकते हैं। न्यायमूर्ति ने बाल संरक्षण एवं लैंगिक अपराध जागरूता एवं नियंत्रण की दिशा में बेहतर कार्य के लिए प्रसन्नता जाहिर की। कार्यशाला को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं किशोर न्याय कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पी.सैम कोशी, न्यायमूर्ति दीपक तिवारी, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, यूनीसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया ने भी संबोधित किया। छत्तीसगढ़. बाल संरक्षण आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने स्वागत भाषण दिया। आभार प्रदर्शन आनंद प्रकाश वॉरियाल, सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राध्किारण, बिलासपुर के द्वारा किया गया।

कार्यशाला में जस्टिस वक्ताओं ने कहा कि एक नाबालिग जिसे यौन शोषण का शिकार बनाया गया है उसे बालिग पीड़ित से ज्यादा सुरक्षा की आवश्यकता है, क्योंकि शारीरिक उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न का सामना करने की क्षमता बालिग व्यक्ति के मुकाबले नाबालिग में कम होती है। कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का संरक्षण अति महत्वपूर्ण हैं। यह मुस्कुराते हुए मासूम प्रार्थी वास्तव में हमारे समाज के हाशिये में पड़े वर्गों में से एक है। यह अक्सर यौन शोषण, पोर्नाेग्राफी, ऐसिड अटैक जैसी जघन्य अपराधों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में हम सभी स्टैक होल्डर जो बडे़-बड़े पदों पर आसीन हैं

उनका नैतिक एवं संवैधानिक कर्तव्य है कि हम इन बच्चों की सुरक्षा एवं सम्मानित जीवन सुनिश्चित करने हेतु अथक प्रयास करें।  इस अवसर पर लघु फिल्म बेहद सख्त कानून हैऔर सावधानी जरूरी हैका प्रदर्शन भी किया गया। कार्यशाला में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यशाला के द्वितीय सत्र में किशोर न्याय बोर्ड, लैंगिक अपराधों तथा बाल संरक्षण से संबंधित लंबित प्रकरणों की संभागवार समीक्षा की गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने बाल संरक्षण के दिशा में किये गये कार्यों की काफी सराहना की अधिकारियों ने विशेष प्राथमिकता व कर्तव्यों के साथ बालकों के भविष्य में कोई कुठाराघात न हो, ऐसे निर्णय लेने पर जोर दिया।

कार्यशाला में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, जिला एवं सत्र न्यायाधीशगण, डिस्ट्रिक्ट जज, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यगण सहित, वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास और यूनिसेफ के प्रतिनिधि तथा किशोर न्यायालय बाल अधिकार संरक्षण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी व इससे जुड़े विद्वतजन उपस्थित थे।

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