Media24Media.com: मितानिन

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स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल का निर्देश, लापरवाही करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, मानवीय पहलुओं का रखा जाए ध्यान

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रायपुर। सरगुजा जिले के विकासखण्ड अंबिकापुर अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नवानगर में प्रसूता द्वारा जमीन पर प्रसव किए जाने की घटना संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घटना की जांच के निर्देश दिए थे। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच करवाई गई।

जांच के दौरान बीएमओ, संस्था प्रभारी, बीपीएम, स्टॉफ नर्स, एएनएम एवं स्थानीय मितानिन उपस्थित रहे। जांच के तहत सभी के समक्ष उक्त प्रकरण के बारे में बयान लिया गया, तथा जच्चा-बच्चा प्रसूता महिला एवं नवजात बच्चों को देखा गया। प्रसव को लेकर प्रोटोकॉल का पालन नही करने वाले खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ पी.एन. राजवाड़े को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। रात्रिकालिन स्टॉफ द्वितीय एएनएम श्रीमती मीना चौहान को तत्काल प्रभाव से हटाकर आयुष्मान मंदिर रेवापुर में कार्यादेशित किया गया।

डयूटी में पदस्थ स्टॉफ नर्स बिना पूर्व सूचना के स्टॉफ नर्स कन्या पैंकरा कार्य में अनुपस्थित थी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, निलंबन अवधि में संबंधित का मुख्यालय शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नवापारा किया गया। निलबंन अवधि में संबंधित को जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं की भविष्य में भी ऐसी गंभीर लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और मरीजों के मानवीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

ब्रेकिंग: भूपेश सरकार का मितानिनों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय, प्रतिमाह 2200 रूपए मानदेय बढ़ाया

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करने वाले मितानिनों के हित में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। 


इस संबंध में मंत्रालय से जारी आदेश के तहत मितानिनों को पूर्व में दी जा रही प्रोत्साहन राशि के अतिरिक्त मितानिन कल्याण योजना के अंतर्गत 2200 रूपए की राशि प्रतिमाह एक अप्रैल 2023 से मानदेय में वृद्धि करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस आशय का आदेश आज 10 जुलाई को मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर स्थित लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से जारी कर दिया गया है।



शिशु सुरक्षा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे जागरूकता कार्यक्रम

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रायपुर। नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शिशु सुरक्षा दिवस के अवसर पर कई जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।  शिशु सुरक्षा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी देते हुए महिला एवं बाल विकास की विभाग की पर्यवेक्षक, पंखुड़ी मिश्रा ने बताया: ‘’आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा लगातार गृहभेंट कर शिशुओं को स्वस्थ जीवन देने का  प्रयास किए जा रहे हैं।


         गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम से शिशुओं को मिल रहा स्वस्थ जीवन

इसके अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन के माध्यम से शिशुओं, गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं की देखभाल भी की जा रही है। शिशु संरक्षण दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी केंद्रों में सुपोषण पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच भी की गयी। लोगों को पोषण आहार की सलाह के साथ नियमित टीकाकरण भी किया गया तथा पात्र शिशुओं को विटामिन और आईएफए का सिरप पिलाया गया।

शुरूआती 42 दिन हैं शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.रश्मि अग्रवाल जैन कहती है: नवजात के लिए शुरूआती 42 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं ऐसे समय में नवजात शिशु में खतरों के लक्षण की शीघ्र पहचान कर समय से चिकित्सीय जांच और इलाज कराना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से शिशु को बचाया जा सके । जीवन के प्रथम छह सप्ताह अर्थात 42 दिन शिशु के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, इस दौरान नवजात शिशु की विशेष देखभाल और समुचित निगरानी की जरूरत होती है।

शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम है अहम

शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा संचालित गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल (एचबीएनसी) कार्यक्रम काफी अहम है। इसके तहत मितानिन और कार्यकर्ता बच्चे के जन्म के बाद 42 दिन के भीतर छह/सात बार गृह भ्रमण करती हैं। मितानिन  के पास एचबीएनसी किट होती है जिसमें वजन मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, डिजिटल  घड़ी और कंबल सहित कुछ दवाएं भी होती हैं। जिससे नवजात शिशु के स्वास्थ्य की जांच में आसानी होती है।



एचबीएनसी कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात को अनिवार्य नवजात शिशु देखभाल सुविधायेँ उपलब्ध कराना, समय पूर्व पैदा होने वाले और जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की शीघ्र पहचान कर उनकी देखभाल करना, नवजात शिशु की बीमारी का शीघ्र पता कर समुचित देखभाल एवं रेफ़र करना, परिवार को आदर्श व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित एवं सहयोग करना तथा माँ के अंदर अपने नवजात शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा करने का आत्मविश्वास एवं दक्षता का विकास करना है।

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