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महासमुंद : राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना : जिले की तीन नगर पंचायत पिथौरा, तुमगांव और बसना में नवीन आवेदन लेने का कार्य शुरू

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महासमुंद। राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा बजट भाषण के अनुरूप इस योजना का विस्तार ग्राम पंचायतों के क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत एवं नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों) में किया गया है। छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद जिले के नगर पंचायत पिथौरा, तुमगांव और बसना में नवीन आवेदन प्राप्त करने का कार्य 1 अप्रैल 2023 से शुरू हो गया है। इन तीनों नगर पंचायतों की आबादी जनगणना 2011 के अनुसार 26,167 है।

जिसमें नगर पंचायत पिथौरा 8428, नगर पंचायत तुमगांव 7394 और नगर पंचायत बसना की आबादी 10,345 है। नवीन आवेदन लेने का कार्य 15 अप्रैल तक चलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण/नगरीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ सत्र में ही कृषि मजदूरी के लिए पर्याप्त अवसर रहता है। रबी सत्र में फसल क्षेत्राच्छादन कम होने के कारण कृषि मजदूरी के लिए अवसर भी कम हो जाता है। कृषि मजदूरी कार्य में संलग्न ग्रामीणों में अधिकतर लघु, सीमांत अथवा भूमिहीन कृषक है। इसमें से भूमिहीन कृषि मजदूर को अन्य की अपेक्षा रोजगार के कम अवसर ग्राम एवं नगर पंचायत स्तर पर उपलब्ध होते है।

राज्य शासन द्वारा ऐसे वर्ग को संबल प्रदाय करने की दृष्टि से राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना प्रारम्भ किया गया है। इसका और विस्तार किया गया है। अब ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत एवं नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों के) में ऐसे भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की पहचान करना तथा भूमिहीन मजदूर परिवारों को वार्षिक आधार पर आर्थिक अनुदान प्राप्त होगा। इसके उनकी आय में वृद्धि होगी। यह योजना प्रदेश के ग्राम पंचायत क्षेत्रां में वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू की गई थी। अब चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसका विस्तार कर नगर पंचायत क्षेत्रों में भी लागू किया गया है। ताकि इन क्षेत्र के भूमिहीन मजदूर परिवारों की पहचान कर उनको भी इस योजना का लाभ मिले। यह योजना केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत क्षेत्रों में निवासरत भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु प्रात्र होंगे।

राज्य शासन द्वारा इस योजना के नवीन दिशा निर्देश 31 मार्च 2023 को ही जारी कर दिए गए थे। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिले के उक्त तीनों ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हितग्राहियों से नवीन आवेदन 1 अप्रैल 2023 से प्रारम्भ कर दिया गया है। नवीन आवेदन 15 अप्रैल 2023 तक प्राप्त किए जायेंगे। आवेदन को पोर्टल में 22 अप्रैल तक प्रविष्टि की जाएगी। पंजीकृत आवेदनों का तहसीलदार द्वारा 30 अप्रैल तक निराकरण किया जाएगा। 8 मई 2023 को आवेदनों की स्वीकृति/अस्वीकृति संबंधित ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका क्षेत्रों पर प्रकाशन कर दावा-आपत्ति कर ग्राम सभा/सामान्य सभा में निराकरण किया जाएगा। सामान्य सभा के निर्णयानुसार 14 मई को पोर्टल में अद्यतीकरण किया जाएगा। अंतिम सत्यापित सूची का प्रकाशन 15 मई 2023 को होगा। उक्त सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाने हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार ‘राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना‘ का बढ़ा दायरा

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बजट भाषण में की गई घोषणा के अनुसार राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाका विस्तार ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायतों एवं अनुसूचित क्षेत्र की नगर पालिकाओं में किया गया है। राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रदेश में इस योजना के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हितग्राहियों से नवीन आवेदन प्राप्त कर डाटाएन्ट्री का कार्य करने के लिए समय-सारणी जारी कर दी गई है।

समय-सारणी के अनुसार राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाके नवीन आवेदन प्राप्त करने की तिथि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2023 तक निर्धारित की गई है। पोर्टल में डाटा प्रविष्टि करने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2023 तक, तहसीलदार द्वारा पंजीकृत आवेदनों के निराकरण की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2023 तक, आवेदनों की स्वीकृति/अस्वीकृति पश्चात ग्राम पंचायत/नगर पंचायत/नगर पालिका क्षेत्रों पर प्रकाशन कर दावा आपत्ति का ग्राम सभा/सामान्य सभा में निराकरण की अंतिम तिथि 8 मई 2023 निर्धारित की गई है।

सामान्य सभा के निर्णय अनुसार पोर्टल में अद्यतीकरण की तिथि 14 मई 2023 तथा अंतिम सत्यापित सूची के प्रकाशन की तिथि 15 मई 2023 निर्धारित की गई है।  राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव नीलम नामदेव एक्का ने समस्त कलेक्टर, जिला पंचायत के समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत तथा नगर पालिका को ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में ऑनलाईन प्रविष्टि एवं समय-सीमा में किए जाने वाले कार्यों की कार्ययोजना प्रेषित कर समय-सारणी के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए है।

हितग्राही परिवार की पात्रता-

इस योजना की पात्रता केवल छत्तीसगढ़ के मूलनिवासियों को होगी। ग्राम पंचायत तथा नगर पंचायत क्षेत्रों में निवासरत् भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार जिनके पास कृषि भूमि नहीं है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे। पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि तथा वन अधिकार प्रमाण पत्र से प्राप्त भूमि को कृषि भूमि माना जाएगा। ग्राम पंचायत तथा नगर पंचायत क्षेत्रों के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे, यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है।

अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले व्यक्ति जिन्हें पुजारी, बैगा, गुनिया, मांझी आदि नामों से जाना जाता है, तथा आदिवासियों के देव स्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया, कृषि भूमि धारण करने के बावजूद योजनांतर्गत पात्र होंगें। परंतु इस वर्ग के वे परिवार जो शासन से सामायिक भत्ता, आर्थिक सहायता अन्य योजना में प्राप्त कर रहे हों, पात्र नहीं होंगे।

भूमिहीन कृषि मजदूर-

ऐसा व्यक्ति जो कोई कृषि भूमि धारण नहीं करता और जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है और उसके परिवार का जिसका की वह सदस्य है, कोई सदस्य किसी कृषि भूमि को धारण नहीं करता है। कृषि भूमिहीन परिवारों की सूची में से परिवार के मुखिया के माता या पिता के नाम से यदि कृषि भूमि धारित है अर्थात् उस परिवार को उत्तराधिकार हक में भूमि प्राप्त करने की स्थिति होगी, तब वह परिवार भूमिहीन परिवार की सूची से पृथक् हो जाएगा।

आवासीय प्रयोजन हेतु धारित भूमि, कृषि भूमि नहीं मानी जाएगी। अपंजीकृत परिवारों को योजनांतर्गत अनुदान की पात्रता नहीं होगी। पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने पर उक्त परिवार के द्वारा पात्रता अनुसार नवीन आवेदन योजनांतर्गत प्रस्तुत किया जाना होगा। यदि पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया के द्वारा असत्य जानकारी के आधार पर अनुदान सहायता राशि प्राप्त की गई हो, तब विधिक कार्यवाही करते हुए उक्त राशि उससे भू-राजस्व के बकाया के रूप जाएगी। योजना के हितग्राही के पास 1 अप्रैल 2023 की स्थिति में निर्धारित पात्रता होनी चाहिए।

हितग्राही परिवारों का पंजीयन-

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए हितग्राही परिवार को आवश्यक दस्तावेज यथा- आधार नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति के साथ आवेदन ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सचिव ग्राम पंचायत एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना होगा। अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नगर पालिका में स्थित आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले व्यक्ति जिन्हें पुजारी, बैगा, गुनिया, मांझी आदि नामों से जाना जाता है, तथा आदिवासियों के देव स्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया के आवेदन मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका, नगर पंचायत के समक्ष आवेदन करेंगें। आवेदन में मोबाईल नंबर का भी उल्लेख करना होगा। हितग्राही परिवार आवेदन की पावती प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत पात्र चिन्हिंत हितग्राही परिवार के मुखिया को प्रतिवर्ष किस्तों में 7000 रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

विपरीत परिस्थितियों में भी हमने छत्तीसगढ़ वासियों का भरोसा रखा कायम : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुंगेली जिले के सरगांव में आयोजित प्रदेश स्तरीय भरोसे का सम्मेलनसे किसानों, भूमिहीन मजदूरों और पशुपालकों के लिए संचालित न्याय योजनाओं के अंतर्गत कुल 1949 करोड़ 26 लाख रूपए की राशि का हितग्राहियों के खाते में अंतरण किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का शुभारंभ किया तथा बेरोजगारी भत्ता योजना के लिए वेबपोर्टल का लोकार्पण और छत्तीसगढ़ सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2023 का एप्लीकेशन लांच किया।

महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क योजना के तहत ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्थानों में नवनिर्मित 278 मल्टीएक्टिविटी सेन्टरों का शुभारंभ  भी मुख्यमंत्री ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बघेल द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए 731 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत के 73 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भरोसे का सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षो के विपरीत परिस्थियों में भी हमने छत्तीसगढ़वासियों का भरोसा कायम रखा।

इसी भरोसे का यह सम्मेलन है। प्रदेश के किसानों, मजदूरों, नौजवानों के हित में लगातार कार्य  हुए हमने उनका भरोसा और विश्वास राज्य सरकार पर बनाए रखा। राज्य सरकार की योजनाओं सेे प्रदेश के किसान खुशहाल हैं और खेती किसानी में प्रगति हुई है। शासन लगातार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों के जेब में पैसे पहुंच रही है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के किसानों में सम्पन्नता आई है, जिससे प्रदेश के व्यापार-व्यवसाय भी फल-फूल रहे हैं, जिससे प्रदेश में मंदी का प्रभाव नहीं पड़ा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि भेंट-मुलाकात के दौरान लगातार किसानों से चर्चा के दौरान यह बात आई थी कि उनकी धान बेचने की सीमा को बढ़ाया जाए, इसलिए किसानों का सम्मान करते हुए हमने यह निर्णय लिया है। 

उन्होंने कहा कि आज सरगांव से एक उल्लेखनीय कार्य के रूप में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर निर्मित 278 मल्टीएक्टिविटी सेंटर का लोकार्पण किया गया है। गांव में उद्योग खोलने के लिए जरूरी सुविधाएं प्रदान करना और रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ के परंपरागत उद्योगों को प्रोत्साहित करने में रीपा की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत क्षेत्र के भूमिहीन मजदूरों को लाभान्वित करने के लिए शुरू की गई राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना को भी लाभकारी बताया और कहा कि वर्तमान में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना में शहरी क्षेत्र के मजदूरों का लाभ नहीं मिल पा रहा था इसलिए उनके लिए राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना शुरू की गई।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे गोधन न्याय योजना का विस्तार होता जाएगा, हम जैविक राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते जाएंगे। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता के लिए लॉन्च किए गए वेबपोर्टल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे बेरोजगार युवा जिनकी परिवारिक आय 2.50 लाख रूपए से कम हो वे इस वेबपोर्टल के माध्यम 01 अप्रैल से आवेदन कर सकेंगे। आवास योजना के लिए 01 अपै्रल से होने वाले सर्वे के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को क्रमबद्ध रूप से आवास मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की है। कोटवारों, मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोईयों एवं स्कूल में कार्यरत स्वच्छताकर्मियों के मानदेय को बढ़ाने का निर्णय लिया है। 

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के 9 हजार में से 5 हजार गौठान स्वावलंबी बन चुके हैं। शेष गौठानों को भी स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्ष को 750 रूपए और सदस्यों को 500 रूपए देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमने पत्रकार सुरक्षा कानून विधानसभा में पारित कर पत्रकारों का भरोसा जीता है। स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देते हुए प्रदेश में 04 नए मेडिकल कॉलेज की घोषणा वर्ष 2023-24 की बजट में की है।

 विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि  कृषि के क्षेत्र में प्रदेश में बेहतर कार्य हुए हैं, इसे आगे बढ़ाते हुए हमें छत्तीसगढ़ को जैविक राज्य बनाने की दिशा में कार्य करना होगा। भूपेश है तो भरोसा है, ये केवल किसानों का नारा नहीं है बल्कि सामूहिक रूप से छत्तीसगढ़ के पूरी जनता का नारा है। कृषि मंत्री श्री रवींद्र चौबे ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों की मदद करने वाला मुख्यमंत्री है, इसलिये लगातार किसानों के हित में निर्णय लिए जा रहे हैं। 15 क्विंटल से बढ़कर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने की घोषणा भी किसानों के लिए मददगार होगी। मंत्री चौबे ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि आज छत्तीसगढ़ के किसान सबसे खुशहाल किसान हैं।

न्याय योजना के हितग्राहियों को मिली सहायता राशि

 मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम के दौरान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2021 की चौथी एवं अंतिम किस्त के रूप में 23 लाख 23 हजार 154 किसानों के खाते में 1793 करोड़ रूपए की राशि, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत 4 लाख 99 हजार 756 पात्र हितग्राहियों के खाते में तृतीय किस्त की 3000 रूपए प्रति हितग्राही के मान से कुल 149 करोड़ 92 लाख 68 हजार रूपए की राशि का अंतरण किया। उन्होंने गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रेता, पशुपालकों, महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों के खाते में 6 करोड़ 34 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया। इस राशि में से 8367 गौठानों और गोबर खरीदी केन्द्रों में 1 से 15 मार्च 2023 तक खरीदे गए 01 लाख 67 हजार 932 क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेता, पशुपालकों को 03 करोड़ 68 लाख रूपए, लाभांश राशि के रूप में स्व-सहायता समूहों को 1.08 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों को 1.58 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया गया। 

गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में से 2.02 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा 1.66 करोड़ रूपए की राशि विभाग द्वारा दी जा रही है। सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं मुंगेली जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक धरमलाल कौशिक, पुन्नूलाल मोहले, धरमजीत सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार द्वय प्रदीप शर्मा और विनोद वर्मा, अध्यक्ष जिला पंचायत मुंगेली श्रीमती लेखनी सोनू चन्द्राकर, अध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग थानेश्वर साहू, अध्यक्ष नगर पंचायत सरगांव राजीव तिवारी एवं गणमान्य जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे। साथ ही कार्यक्रम में वन मंत्री मोहम्मद अकबर तथा संसदीय सचिव श्री गुलाब कमरो वर्चुअल रूप से शामिल हुए।                                

छत्तीसगढ़ में इस बार खास होगी दिवाली, योजनाओं की राशि मिलने से बाजार हुए गुलजार

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रायपुर।  नवा छत्तीसगढ़में छत्तीसगढ़ सरकार किसान, मजदूर, भूमिहीन मजदूर, युवाओं, महिलाओं समेत सभी वर्गों के हित में महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का क्रियान्वयन कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेशवासियों के हित में जनहितैषी कार्यों एवं योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभाव देखा जा रहा है। योजनाओं और नीतियों की दूरदर्शिता से आज प्रदेश आर्थिक, समृद्धि और तरक्की के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। 



दिवाली से पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर लोगों की जेबें भर दी हैं। सरकार की तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों, गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रेता ग्रामीणों और पशुपालकों तथा राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत हितग्राहियों के खाते में कुल 1866 करोड़ 39 लाख 32 हजार रूपए का ऑनलाईन अंतरण मुख्यमंत्री बघेल ने किया है।

अरहर, मूंग एवं उड़द की फसलों की बुआई करने वाले किसानों के हित में छत्तीसगढ़ सरकार ने पहली बार अरहर एवं उड़द की फसल 6600 रूपये प्रति क्विंटल और मूंग फसल की फसल 7755 रूपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का निर्णय लिया है, जो इन फसलों की बुआई करने वाले किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध और प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा सरकार ने शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दिवाली के पहले एरियर्स एवं 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने जैसे निर्णय लेकर बड़ा उपहार दिया है मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि आम लोगों की जेब में पैसे भरनाउन्हें आर्थिक समृद्ध करना हमारी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य है

ताकि उनके पास पैसे आएं और अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती से बाजारों की रौनक और बढ़े, जिससे सभी के लिए हर त्यौहार खास बन सके। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सरकार के परिणाममूलक कार्यों का प्रभाव ही है कि छत्तीसगढ़ के लगभग 8 हजार गांवों में बनाए गए गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह आयमूलक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, इनसे न केवल महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुईं हैं बल्कि अब वह अपने कामों में नवोन्मेष से नाम भी कमा रही हैं। महिला समूहों द्वारा इस दीवाली में घरों को रोशन करने गोबर से बनी हुई फ्यूजन रंगोली, दीप के अलावा गोबर के फ्लोटिंग दीया, बंदनवार, मोबाईल स्टैंड, हैंगिंग शो-पीस जैसी कई सजावटी उत्पाद तैयार कर बेचे जा रहे हैं और प्रदेश से बाहर भी भेजे जा रहे हैं।

किसानों का महाबइठका 21 अक्टूबर को महासमुंद में

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ से जुड़े संगठनों की बैठक शनिवार को मंथन हाल रायपुर में सम्पन्न हुआ जिसमें महासमुंद में किसान महाबइठका करने का निर्णय लिया गया है जिसमें प्रदेश भर के किसान जुटेंगे। किसान महाबइठका आयोजक कमेटी के संयोजक तेजराम विद्रोही छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा मेहनतकश मजदूर किसान और आम जनता को चुनावी वायदों में उलझाया गया है उनके द्वारा किये गये वायदे आज तक अधूरे हैं, 



किसानों को राहत मिलने के बजाय उनके सामने फसल उत्पादन करने से लेकर अपनी फसल का वाजिब दाम पाने के लिए लगातार संकट गहराते जा रहें हैं। खाद, बीज, दवाईयों के दामों में बढ़ौतरी ने किसानों का आर्थिक हालत बद से बदतर कर दिया है। ऐसे परिस्थिति में कृषि और किसानों की वर्तमान हालत और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जरुरी क्यों है इस संबंध में व्यापक चर्चा , किसानों की एकजूटता और आगामी रणनीति के लिए छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ (संयुक्त किसान मोर्चा) 

के बैनर तले 21 अक्टूबर 2022 दिन शुक्रवार को दिन के 10 बजे से शाम 5 बजे तक कृषि उपज मंडी महासमुन्द में किसान महाबइठका का आयोजन किया गया है। केन्द्र सरकार से मांगें है- 1. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों का लागत से डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो 2. सभी कृषि उपजों को बारहों माह न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की कानूनी गारंटी दो 3. प्रधानमंत्री किसान सम्मान राशि का लाभ सभी किसानों को अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाये।

4. प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को प्रदान किया जाये तथा सभी बकाया किस्त की राशि तत्काल प्रदान की जाये। 5. यूरिया , डीएपी जैसे सभी प्रकार की खाद की उपलब्धता बढ़ायी जाये कालाबाजारी पर रोक लगायी जाये। राज्य सरकार से मांगें है- 1. सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों का दाना- दाना धान खरीदी किया जाये। 2. भाजपा सरकार की दो साल का धान का बोनस किसानों को प्रदान किया जाये। 3. चिटफंड कंपनियों से किसान, मजदूर एवं आम अभिकर्ता / निवेशकों की राशि वापस दिलाया जाये। 

4. छत्तीसगढ़ में किसान आयोग का गठन किया जाये एवं राजधानी तथा जिला स्तर में किसान भवन का निर्माण किया जाए। 5. राईस मिलरों द्वारा किसानों से खरीदे गए धान की बकाया भुगतान शीघ्र किया जाए। 6. प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत बकाया सभी किस्त हितग्राहियों को शीघ्र प्रदान की जाये ताकि अधूरे आवास का निर्माण पूरा किया जा सके तथा योजना से वंचित गरीब किसान मजदूरों को आवास हेतु स्वीकृति प्रदान किया जाये। 7 . ऋणी एवं अऋणी सभी किसानों को सहकारी समितियों में खाद की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध करायी जाये।

 बैठक में किसान भुगतान समिति पिथौरा के संयोजक अजय कुमार साहू, सदस्य बृज कुमार, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष मदन लाल साहू, कोषाध्यक्ष उत्तम कुमार, सहसचिव ललित कुमार, कृषक बिरादरी के सदस्य पवन सक्सेना, किसान संघर्ष समिति बिलासपुर के संयोजक श्याम मूरत कौशिक, सिक्ख संगठन से पलविंदर सिंह पन्नू, हरिंदर सिंह सन्धु,  पिछड़ा वर्ग संगठन से डॉ ईश्वर दान आसिया,जागो किसान आंदोलन के संयोजक रघुनंदन साहू, सदस्य वेगेंद्र सोनबेर, आरंग किसान संगठन से तामेश्वर साहू  आदि उपस्थित रहे।

‘न्याय सब्बो बर-सब्बो डहर’ के ध्येय को पूरा कर रही छत्तीसगढ़ सरकार

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देश-दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान बीते साढ़े तीन साल के दरम्यान ग्रामीणों और किसानों के साथ न्याय करने वाले राज्य के रूप में कायम हुई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारान्याय सब्बो बर-सब्बो डहरके ध्येय को लेकर योजनाएं लागू की जा रही हैं और उनका क्रियान्वयन भी तेजी से किया जा रहा है। राज्य के ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, गरीबों और महिलाओं के हितों की रक्षा और उन्हें सीधे-सीधे लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने जो फैसले लिए हैं। इसकी वजह से किसान, मजदूर और ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया दौर शुरू हो गया है।


छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते साढ़े तीन साल में अपनी नीतियों से ग्रामीण और किसानों को सिर्फ सम्मान से जीने का अवसर उपलब्ध कराया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति दी है। वास्तव में छत्तीसगढ़ सरकार की यही रणनीति छत्तीसगढ़ के विकास का मॉडल है, जिसकी आज पूरे देश में चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि विभिन्न वर्गों के लिएन्यायकी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य में गरीब ग्रामीण भूमिहीन परिवारों को सीधे आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के नाम से

 राजीव गांधी ग्रामीण कृषि मजदूर न्याय योजनाशुरू की गई। इस योजना का शुभारंभ 3 फरवरी 2022 को सांसद राहुल गांधी ने किया था। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में योजना के शुभारंभ मौके पर आयोजित भव्य समारोह में राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत पात्र 3 लाख 55 हजार भूमिहीन कृषक मजदूरों को डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों राशि अंतरण किया गया था। तब राज्य सरकार ने हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया था, जिसे वित्तीय वर्ष 2022-23 से 7 हजार रुपये कर दिया गया है। हितग्राहियों को वर्ष 2022-23 की प्रथम किश्त के रूप में 71 करोड़ 8 लाख 4 हजार रुपए की राशि जारी भी कर दी गई है।


उल्लेखनीय है कि इस योजना के जरिए समाज के उन परिवारों को सीधी मदद मिल रही है, जिनका जीवन-यापन खेतिहर मजदूर के रूप में होने वाली आय पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत लगभग 3 लाख 55 हजार 402 ऐसे परिवार पंजीकृत हुए हैं, जिनके पास कृषि भूमि नहीं है और वह मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, मांझी, चालकी, गायता, सिरहा, पुजारी, गुनिया और पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र हैं। भूमिहीन परिवारों को लाभान्वित करने की छत्तीसगढ़ सरकार की यह अभिनव योजना है। इस तरह की योजना देश के अन्य राज्यों में कहीं नहीं है।

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