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महासमुन्द : वन अधिकार पट्टाधारियों को किसान न्याय योजना से जोड़े – कलेक्टर

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महासमुन्द। जिले में नवपदस्थ कलेक्टर प्रभात मलिक ने आज यहाँ कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में समय सीमा की बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासन की सभी योजनाओं को लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले यह सुनिश्चित किया जाए। शासन की जनकल्याणकारी व सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं में सभी विभाग आपस मे समन्वय से कार्य करते हुए परिणाम मूलक कार्य करें। ताकि शासन की मंशानुरूप हितग्राही लाभान्वित हो सके। 

  ब्लाक स्तर पर प्रत्येक सोमवार को जनचौपाल लगाने के निर्देश

कलेक्टर ने सभी वन अधिकार पट्टे धारियों को केसीसी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत सभी श्रेणी के भू-स्वामी और वन पट्टा धारी कृषक पात्र है। ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके तथा वे गरीबी से ऊपर उठ सकें। बैठक में कलेक्टर ने स्वयं अपना परिचय देते हुए अधिकारियों से भी परिचय लिया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ एस आलोक, वनमण्डलाधिकारी पंकज राजपूत, अपर कलेक्टर दुर्गेश वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी, सहित जिला अधिकारी मौजूद थे।। ब्लाक एवं अनुविभाग स्तर के अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े थे। 

कलेक्टर प्रभात मलिक ने जिले में भेंट मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री जी द्वारा की घोषणाओं पर अमल करने के लिए तेजी से प्रयास करने कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री जी द्वारा किये गए प्रत्येक घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। शिशुपाल पर्वत, खल्लारी, चंडी मंदिरों को पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए इस्टीमेट बनाने एवं भूमि आबंटन के लिए सम्बंधित विभाग से प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए ताकि राशि को बजट में स्वीकृति की जा सके। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सीमांकन के प्रकरणों को तत्काल निराकरण करने और 15जून की स्थिति में कोई भी प्रकरण लंबित न रहे यह सुनिश्चित करने कहा ।उन्होंने  शिक्षा एवं अन्य सभी घोषणाओं पर अमल करने के लिए तत्काल प्राक्कलन एवं प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को कक्षा 1 ली से 12 वी तक के सभी विद्यार्थियों का शत प्रतिशत जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए। इस सम्बन्ध में अनुविभागीय अधिकारी को निर्देश दिए।निर्वाचन से सम्बंधित समीक्षा में सभी कर्मचारियों का पीपीईएस एंट्री कर शुक्रवार तक प्रमाण पत्र देने के निर्देश दिए। साथ ही सभी एसडीएम को मतदाता विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत फार्म 6,7,8 को पूर्ण करने कहा।साथ ही मतदान केंद्र में बदलाव से सम्बधित ग्राम पंचायत सरपँच से भी बैठक करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान सभी अनुविभागीय अधिकारी को 15 जून तक लंबित सीमांकन प्रकरण निराकरण करने के निर्देश दिए।साथ ही सोमवार को ब्लाक स्तरीय जनचौपाल लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आंगनबाड़ी केंद्रों में मरम्मत, बिजली व पंखा लगाने के निर्देश दिए। राशनकार्ड अपडेशन अंतर्गत मृत ब्यक्तियों के नाम विलोपन करने के निर्देश दिए।

जिला पंचायत सीईओ एस आलोक ने ज़िले की गौठानों में आजीविका संबंधी की जा रही गतिविधियों एवं गोबर ख़रीदी व वर्मी कंपोस्ट उत्पादन के साथ ही विक्रय की जानकारी दी। इसके साथ ही रीपा संबंधी जानकारी से कलेक्टर को अवगत कराया। कलेक्टर ने कहा गोठानों में प्रतिदिन 2 क्विंटल से कम गोबर खरीदी हो रही है वहाँ प्रत्येक दिन समीक्षा करें। गोठानों में पानी,पैरा और छांव की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।गोठनों और अमृत सरोवर में कदम्ब के पेड़ का रोपण भी किया जाए। रीपा में ज्यादा से ज्यादा लोगो की सहभागिता बढ़ाने लिए राजीव युवा मितान क्लब,बेरोजगारी भत्ता प्राप्त युवाओं को आय जनित गतिविधियों से जोड़े जाने पर जोर दिया।

छत्तीसगढ़ : राज्य सरकार का भू-स्वामी और किरायेदार के हित में अहम फैसला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय से अब भू-स्वामी एवं किरायेदार के बीच विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम-2011 का लाभ नगर निगम की तरह नगर पालिका, नगर पालिका परिषद तथा नगर पंचायत को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर की पहल पर जनहित के मद्देनजर राज्य शासन द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय से भू-स्वामी और किरायेदार को अब बड़ी राहत मिलेगी और वे अपने-अपने हक को सुरक्षित रख सकेंगे।



इस आशय की अधिसूचना आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से विगत दिवस 6 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम के तहत नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में प्रत्येक जिले के जो उप जिलाधीश के निम्न श्रेणी का न हो, भाड़ा नियंत्रण के रूप में नियुक्त करता है तथा उनका कार्यक्षेत्र कलेक्टर द्वारा विनिर्दिष्ट रहेगा। यह अधिनियम राज्य शासन की ओर से बनाया गया हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम 2011, जिसमें भू-स्वामी एवं किरायेदार के बीच विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए यह अधिनियम राज्य शासन की ओर से बनाया गया हैं।

जिसमें भू-स्वामी एवं किरायेदार अपने-अपने हक को सुरक्षित रख सके। किन्तु किसी कारण वश यह अधिनियम दो हिस्सों में बट गया था। पहला की यह अधिनियम 2011 में लागू होते ही नगर-निगम में लागू हो गया। लेकिन राज्य की छोटी जगहों जैसे- राज्य के नगर पालिका, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत के लिए राज्य शासन की ओर से कोई अधिसूचना राजपत्र में नहीं होने के कारण वहां के नागरिकों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही वे अपनी जगह और हक के लिए निरंतर परेशान हो रहे थे। इसके मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा इसे अब नगर निगम की तरह नगर पालिका, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत में भी लागू करने की अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है।

 इसके तहत रायपुर जिले अंतर्गत नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा, गोबरा नवापारा, आरंग एवं नगर पंचायत अभनपुर, खरोरा, माना-कैम्प, कुरा, मंदिरहसौद, चंदखुरी एवं समोदा शामिल हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत नगर पंचायत सिमगा, कसडोल, पलारी, भटगांव, लवन, टुडरा, बिलाईगढ़। धमतरी जिले के अंतर्गत नगर पंचायत कुरूद, मगरलोड, नगरी, भखारा, आमदी। गरियाबंद जिले के अंतर्गत नगर पंचायत राजिम, छुरा, फिंगेश्वर। महासमुंद जिले के नगर पालिका परिषद् सरायपाली, बागबाहरा एवं नगर पंचायत पिथौरा, बसना, तुमगांव शामिल है। बीजापुर जिले के नगर पंचायत भैरमगढ़, भोपालपट्नम। दंतेवाड़ा जिले के नगर पंचायत गीदम, बारसूर।

सुकमा जिले के अंतर्गत नगर पंचायत दोरनापाल, कोण्टा। बस्तर जिले के नगर पंचायत बस्तर। कोण्डागांव जिले के अंतर्गत नगर पंचायत फरसगांव, केशकाल। कांकेर जिले के अंतर्गत भानुप्रतापुर, चारामा, पंखाजूर, अंतागढ़, नरहरपुर। इसी प्रकार दुर्ग जिले के नगर पालिका परिषद जामुल, कुम्हारी, अहिवारा। बालोद जिले के नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा एवं नगर पंचायत डौंडी, डौंडी-लोहारा, चिखला कसार, गुरूर, अर्जुन्दा, गुण्डरदेही शामिल हैं। बेमेतरा जिले के नगर पंचायत नवागढ़, साजा, बेरला, मारो, थानखम्हरिया, देवकर, परपोड़ी। कबीरधाम जिले के नगर पंचायत पंडरिया, बोड़ला, पाण्डा तराई, सहसपुर लोहारा, पिपरिया।

राजनांदगांव जिले के नगर पालिका परिषद डोंगरगढ़, खैरागढ़ एवं नगर पंचायत गण्डई, छुईखदान, अंबागढ़-चौकी, डोंगरगांव, छुरिया। बिलासपुर जिले के अंतर्गत नगर पालिका परिषद रतनपुर, तखतपुर एवं नगर पंचायत कोटा, बोदरी, बिल्हा, मल्हार। मुंगेली जिले के नगर पंचायत लोरमी, पथरिया, सरगांव। रायगढ़ जिले के अंतर्गत नगर पालिका परिषद खरसिया, सारंगढ़ एवं नगर पंचायत धरमजयगढ़, घरघोड़ा, लैलूंगा, सरिया, बरमकेला, किरोड़ीमलनगर, पुसौर। जांजगीर के अंतर्गत नगर पालिका परिषद जांजगीर-नेला, चांपा, शक्ति, अकलतरा एवं नगर पंचायत नयाबाराद्वार, बलौदा, खरौद, शिवरीनारायण, अंडमार, जैजैपुर, डभरा, चंन्द्रपुर, सारागांव, नवागढ़, राहौद शामिल हैं।

 इसी प्रकार कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद कटघोरा एवं नगर पंचायत पाली, छुरीकला। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के नगर पंचायत गौरेला-पेण्ड्रा। सरगुजा जिले के नगर पंचायत सीतापुर, लखनपुर। बलरामपुर जिले के नगर पंचायत रामानुजगंज, कुसमी, राजपुर, वाड्रफनगर। सूरजपुर जिले के नगर पंचायत विश्रामपुर, प्रतापपुर, जरही, भठगांव, प्रेमनगर। इसी प्रकार कोरिया जिले के नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़, बैकुण्ठपुर, शिवपुरचरचा एवं नगर पंचायत झगराखण्ड, खोगापानी, नई लेदरी। जशपुर जिले के नगर पंचायत पत्थलगांव, कोतबा, बगीचा, कुनकरी शामिल हैं।

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