Media24Media.com: भूमिहीन कृषि

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मुख्यमंत्री बघेल भूमिहीन कृषि मजदूरों को 21 मई को देंगेे इस वर्ष की प्रथम किश्त की राशि

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के पुण्यतिथि के अवसर पर दुर्ग जिले के पाटन में आयोजित भरोसा का सम्मेलन में राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र के हितग्राहियों को वित्तीय वर्ष 2023-24 की पहली किश्त की राशि जारी करेंगे। राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों के कुल 5 लाख 63 हजार 576 हितग्राहियों को पहली किश्त के रूप में 112 करोड़ 71 लाख 52 हजार रूपए की राशि जारी की जाएगी।

योजना अंतर्गत प्रत्येक हितग्राही के बैंक खाते में 2 हजार रूपए के मान से पहली किस्त की राशि अंतरित की जाएगी। प्रदेश की ग्रामीण और शहरी आबादी का एक बड़ा वर्ग आजीविका के लिए कृषि आधारित मजदूरी पर निर्भर है। धान की फसल के दौरान कृषि मजदूरों के लिए रोजगार की पर्याप्त उपलब्धता रहती है। किंतु रबी फसल की बुआई का क्षेत्र कम होने के कारण कृषि मजदूरी के अवसर कम हो जाते हैं। गांव और शहरी क्षेत्रों में चरवाहा, बढ़ई, लोहार, नाई, धोबी और पौनी-पसारी से जुड़े परिवारों के लिए अन्य लोगों की अपेक्षा रोजगार की उपलब्धता सीमित होती है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक रूप से संबल देने के उददेश्य से राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की शुरूआत वर्ष 21-2022 में की। योजना के माध्यम से कृषि मजदूरों की ग्रामीण आबादी को लाभ मिल रहा था किंतु कृषि मजदूरों की शहरी आबादी योजना के लाभ से वंचित थी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 25 मार्च 2023 को राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का शुभारंभ किया। राज्य के समस्त ग्राम पंचायत के साथ-साथ अब नगर पंचायत क्षेत्रों और सभी अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत बैगा-गुनिया, मांझी-पुजारी, हाट पहरिया, एवं बाजा मोहरिया को भी योजना में शामिल किया गया है।

32 हजार 328 बैगा, गुनिया को भी भूमिहीन मजदूर न्याय योजना का मिलेगा लाभ-

राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले 32 हजार 328 बैगा, गुनिया, मांझी, पुजारी तथा हाट पहरिया को भी वित्तीय वर्ष 2023-24 की पहली किस्त जारी की जाएगी। नगरीय क्षेत्र के पात्र हितग्राहियों में 53 हजार 265 सामान्य हितग्राही तथा 737 बैगा, गुनिया हितग्राही शामिल है। इस प्रकार नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन कृषि मजदूरों को कुल 54 हजार 02 हितग्राहियों को 10 करोड़ 80 लाख 04 हजार अंतरित किए जाएंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के पात्र हितग्राही में 4 लाख 77 हजार 983 सामान्य हितग्राही और 31 हजार 591 बैगा, गुनिया को शामिल किया गया है। इस प्रकार कुल 5 लाख 9 हजार 574 हितग्राहियों को 101 करोड़ 91 लाख 48 हजार रूपए की राशि अंतरित की जाएगी।

भूमिहीन कृषि मजदूरों को 2 वर्षों में मिले 476 करोड़ 68 लाख 32 हजार रूपए

राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के हितग्राहियों को पिछले 2 वित्तीय वर्षों में 476 करोड़ 68 लाख 32 हजार रूपये की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। जिसमें वर्ष 2021-22 में 3 लाख 55 हजार 402 हितग्राहियों को 140 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2022-23 में 4 लाख 99 हजार 756 हितग्राहियों को कुल 336 करोड़़ 68 लाख 32 हजार रूपये खातों में अंतरित किये गये हैं। योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6 हजार रूपये प्रति हितग्राही प्रति वर्ष दिए जाने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर  वित्तीय वर्ष 2022-23 में 7 हजार रूपये प्रतिवर्ष किया गया है।

महासमुंद : राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना : जिले की तीन नगर पंचायत पिथौरा, तुमगांव और बसना में नवीन आवेदन लेने का कार्य शुरू

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महासमुंद। राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा बजट भाषण के अनुरूप इस योजना का विस्तार ग्राम पंचायतों के क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत एवं नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों) में किया गया है। छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद जिले के नगर पंचायत पिथौरा, तुमगांव और बसना में नवीन आवेदन प्राप्त करने का कार्य 1 अप्रैल 2023 से शुरू हो गया है। इन तीनों नगर पंचायतों की आबादी जनगणना 2011 के अनुसार 26,167 है।

जिसमें नगर पंचायत पिथौरा 8428, नगर पंचायत तुमगांव 7394 और नगर पंचायत बसना की आबादी 10,345 है। नवीन आवेदन लेने का कार्य 15 अप्रैल तक चलेगा। छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण/नगरीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ सत्र में ही कृषि मजदूरी के लिए पर्याप्त अवसर रहता है। रबी सत्र में फसल क्षेत्राच्छादन कम होने के कारण कृषि मजदूरी के लिए अवसर भी कम हो जाता है। कृषि मजदूरी कार्य में संलग्न ग्रामीणों में अधिकतर लघु, सीमांत अथवा भूमिहीन कृषक है। इसमें से भूमिहीन कृषि मजदूर को अन्य की अपेक्षा रोजगार के कम अवसर ग्राम एवं नगर पंचायत स्तर पर उपलब्ध होते है।

राज्य शासन द्वारा ऐसे वर्ग को संबल प्रदाय करने की दृष्टि से राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना प्रारम्भ किया गया है। इसका और विस्तार किया गया है। अब ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत एवं नगरपालिका (अनुसूचित क्षेत्रों के) में ऐसे भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की पहचान करना तथा भूमिहीन मजदूर परिवारों को वार्षिक आधार पर आर्थिक अनुदान प्राप्त होगा। इसके उनकी आय में वृद्धि होगी। यह योजना प्रदेश के ग्राम पंचायत क्षेत्रां में वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू की गई थी। अब चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसका विस्तार कर नगर पंचायत क्षेत्रों में भी लागू किया गया है। ताकि इन क्षेत्र के भूमिहीन मजदूर परिवारों की पहचान कर उनको भी इस योजना का लाभ मिले। यह योजना केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत क्षेत्रों में निवासरत भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु प्रात्र होंगे।

राज्य शासन द्वारा इस योजना के नवीन दिशा निर्देश 31 मार्च 2023 को ही जारी कर दिए गए थे। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिले के उक्त तीनों ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हितग्राहियों से नवीन आवेदन 1 अप्रैल 2023 से प्रारम्भ कर दिया गया है। नवीन आवेदन 15 अप्रैल 2023 तक प्राप्त किए जायेंगे। आवेदन को पोर्टल में 22 अप्रैल तक प्रविष्टि की जाएगी। पंजीकृत आवेदनों का तहसीलदार द्वारा 30 अप्रैल तक निराकरण किया जाएगा। 8 मई 2023 को आवेदनों की स्वीकृति/अस्वीकृति संबंधित ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका क्षेत्रों पर प्रकाशन कर दावा-आपत्ति कर ग्राम सभा/सामान्य सभा में निराकरण किया जाएगा। सामान्य सभा के निर्णयानुसार 14 मई को पोर्टल में अद्यतीकरण किया जाएगा। अंतिम सत्यापित सूची का प्रकाशन 15 मई 2023 को होगा। उक्त सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाने हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार ‘राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना‘ का बढ़ा दायरा

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बजट भाषण में की गई घोषणा के अनुसार राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाका विस्तार ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायतों एवं अनुसूचित क्षेत्र की नगर पालिकाओं में किया गया है। राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रदेश में इस योजना के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हितग्राहियों से नवीन आवेदन प्राप्त कर डाटाएन्ट्री का कार्य करने के लिए समय-सारणी जारी कर दी गई है।

समय-सारणी के अनुसार राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाके नवीन आवेदन प्राप्त करने की तिथि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2023 तक निर्धारित की गई है। पोर्टल में डाटा प्रविष्टि करने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2023 तक, तहसीलदार द्वारा पंजीकृत आवेदनों के निराकरण की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2023 तक, आवेदनों की स्वीकृति/अस्वीकृति पश्चात ग्राम पंचायत/नगर पंचायत/नगर पालिका क्षेत्रों पर प्रकाशन कर दावा आपत्ति का ग्राम सभा/सामान्य सभा में निराकरण की अंतिम तिथि 8 मई 2023 निर्धारित की गई है।

सामान्य सभा के निर्णय अनुसार पोर्टल में अद्यतीकरण की तिथि 14 मई 2023 तथा अंतिम सत्यापित सूची के प्रकाशन की तिथि 15 मई 2023 निर्धारित की गई है।  राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव नीलम नामदेव एक्का ने समस्त कलेक्टर, जिला पंचायत के समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत तथा नगर पालिका को ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में ऑनलाईन प्रविष्टि एवं समय-सीमा में किए जाने वाले कार्यों की कार्ययोजना प्रेषित कर समय-सारणी के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए है।

हितग्राही परिवार की पात्रता-

इस योजना की पात्रता केवल छत्तीसगढ़ के मूलनिवासियों को होगी। ग्राम पंचायत तथा नगर पंचायत क्षेत्रों में निवासरत् भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार जिनके पास कृषि भूमि नहीं है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे। पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि तथा वन अधिकार प्रमाण पत्र से प्राप्त भूमि को कृषि भूमि माना जाएगा। ग्राम पंचायत तथा नगर पंचायत क्षेत्रों के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे, यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है।

अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले व्यक्ति जिन्हें पुजारी, बैगा, गुनिया, मांझी आदि नामों से जाना जाता है, तथा आदिवासियों के देव स्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया, कृषि भूमि धारण करने के बावजूद योजनांतर्गत पात्र होंगें। परंतु इस वर्ग के वे परिवार जो शासन से सामायिक भत्ता, आर्थिक सहायता अन्य योजना में प्राप्त कर रहे हों, पात्र नहीं होंगे।

भूमिहीन कृषि मजदूर-

ऐसा व्यक्ति जो कोई कृषि भूमि धारण नहीं करता और जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है और उसके परिवार का जिसका की वह सदस्य है, कोई सदस्य किसी कृषि भूमि को धारण नहीं करता है। कृषि भूमिहीन परिवारों की सूची में से परिवार के मुखिया के माता या पिता के नाम से यदि कृषि भूमि धारित है अर्थात् उस परिवार को उत्तराधिकार हक में भूमि प्राप्त करने की स्थिति होगी, तब वह परिवार भूमिहीन परिवार की सूची से पृथक् हो जाएगा।

आवासीय प्रयोजन हेतु धारित भूमि, कृषि भूमि नहीं मानी जाएगी। अपंजीकृत परिवारों को योजनांतर्गत अनुदान की पात्रता नहीं होगी। पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने पर उक्त परिवार के द्वारा पात्रता अनुसार नवीन आवेदन योजनांतर्गत प्रस्तुत किया जाना होगा। यदि पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया के द्वारा असत्य जानकारी के आधार पर अनुदान सहायता राशि प्राप्त की गई हो, तब विधिक कार्यवाही करते हुए उक्त राशि उससे भू-राजस्व के बकाया के रूप जाएगी। योजना के हितग्राही के पास 1 अप्रैल 2023 की स्थिति में निर्धारित पात्रता होनी चाहिए।

हितग्राही परिवारों का पंजीयन-

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए हितग्राही परिवार को आवश्यक दस्तावेज यथा- आधार नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति के साथ आवेदन ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सचिव ग्राम पंचायत एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना होगा। अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नगर पालिका में स्थित आदिवासियों के देवस्थल में पूजा करने वाले व्यक्ति जिन्हें पुजारी, बैगा, गुनिया, मांझी आदि नामों से जाना जाता है, तथा आदिवासियों के देव स्थल के हाट पाहार्या एवं बाजा मोहरिया के आवेदन मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका, नगर पंचायत के समक्ष आवेदन करेंगें। आवेदन में मोबाईल नंबर का भी उल्लेख करना होगा। हितग्राही परिवार आवेदन की पावती प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत पात्र चिन्हिंत हितग्राही परिवार के मुखिया को प्रतिवर्ष किस्तों में 7000 रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

विपरीत परिस्थितियों में भी हमने छत्तीसगढ़ वासियों का भरोसा रखा कायम : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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मुंगेली। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुंगेली जिले के सरगांव में आयोजित प्रदेश स्तरीय भरोसे का सम्मेलनसे किसानों, भूमिहीन मजदूरों और पशुपालकों के लिए संचालित न्याय योजनाओं के अंतर्गत कुल 1949 करोड़ 26 लाख रूपए की राशि का हितग्राहियों के खाते में अंतरण किया।

साथ ही मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का शुभारंभ किया तथा बेरोजगारी भत्ता योजना के लिए वेबपोर्टल का लोकार्पण और छत्तीसगढ़ सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2023 का एप्लीकेशन लांच किया। महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क योजना के तहत ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्थानों में नवनिर्मित 278 मल्टीएक्टिविटी सेन्टरों का शुभारंभ  भी मुख्यमंत्री ने किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बघेल द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए 731 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत के 73 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भरोसे का सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षो के विपरीत परिस्थियों में भी हमने छत्तीसगढ़वासियों का भरोसा कायम रखा। इसी भरोसे का यह सम्मेलन है। प्रदेश के किसानों, मजदूरों, नौजवानों के हित में लगातार कार्य  हुए हमने उनका भरोसा और विश्वास राज्य सरकार पर बनाए रखा। राज्य सरकार की योजनाओं सेे प्रदेश के किसान खुशहाल हैं और खेती किसानी में प्रगति हुई है। शासन लगातार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों के जेब में पैसे पहुंच रही है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के किसानों में सम्पन्नता आई है, जिससे प्रदेश के व्यापार-व्यवसाय भी फल-फूल रहे हैं, जिससे प्रदेश में मंदी का प्रभाव नहीं पड़ा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि भेंट-मुलाकात के दौरान लगातार किसानों से चर्चा के दौरान यह बात आई थी कि उनकी धान बेचने की सीमा को बढ़ाया जाए, इसलिए किसानों का सम्मान करते हुए हमने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आज सरगांव से एक उल्लेखनीय कार्य के रूप में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर निर्मित 278 मल्टीएक्टिविटी सेंटर का लोकार्पण किया गया है। गांव में उद्योग खोलने के लिए जरूरी सुविधाएं प्रदान करना और रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ के परंपरागत उद्योगों को प्रोत्साहित करने में रीपा की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत क्षेत्र के भूमिहीन मजदूरों को लाभान्वित करने के लिए शुरू की गई राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना को भी लाभकारी बताया और कहा कि वर्तमान में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना में शहरी क्षेत्र के मजदूरों का लाभ नहीं मिल पा रहा था इसलिए उनके लिए राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना शुरू की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे गोधन न्याय योजना का विस्तार होता जाएगा, हम जैविक राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते जाएंगे। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता के लिए लॉन्च किए गए वेबपोर्टल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे बेरोजगार युवा जिनकी परिवारिक आय 2.50 लाख रूपए से कम हो वे इस वेबपोर्टल के माध्यम 01 अप्रैल से आवेदन कर सकेंगे। 

आवास योजना के लिए 01 अपै्रल से होने वाले सर्वे के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को क्रमबद्ध रूप से आवास मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की है। कोटवारों, मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोईयों एवं स्कूल में कार्यरत स्वच्छताकर्मियों के मानदेय को बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के 9 हजार में से 5 हजार गौठान स्वावलंबी बन चुके हैं। शेष गौठानों को भी स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्ष को 750 रूपए और सदस्यों को 500 रूपए देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमने पत्रकार सुरक्षा कानून विधानसभा में पारित कर पत्रकारों का भरोसा जीता है। स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देते हुए प्रदेश में 04 नए मेडिकल कॉलेज की घोषणा वर्ष 2023-24 की बजट में की है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि  कृषि के क्षेत्र में प्रदेश में बेहतर कार्य हुए हैं, इसे आगे बढ़ाते हुए हमें छत्तीसगढ़ को जैविक राज्य बनाने की दिशा में कार्य करना होगा। भूपेश है तो भरोसा है, ये केवल किसानों का नारा नहीं है बल्कि सामूहिक रूप से छत्तीसगढ़ के पूरी जनता का नारा है। कृषि मंत्री रवींद्र चौबे ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों की मदद करने वाला मुख्यमंत्री है, इसलिये लगातार किसानों के हित में निर्णय लिए जा रहे हैं। 15 क्विंटल से बढ़कर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने की घोषणा भी किसानों के लिए मददगार होगी। मंत्री चौबे ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि आज छत्तीसगढ़ के किसान सबसे खुशहाल किसान हैं।

न्याय योजना के हितग्राहियों को मिली सहायता राशि

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम के दौरान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2021 की चौथी एवं अंतिम किस्त के रूप में 23 लाख 23 हजार 154 किसानों के खाते में 1793 करोड़ रूपए की राशि, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत 4 लाख 99 हजार 756 पात्र हितग्राहियों के खाते में तृतीय किस्त की 3000 रूपए प्रति हितग्राही के मान से कुल 149 करोड़ 92 लाख 68 हजार रूपए की राशि का अंतरण किया। उन्होंने गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रेता, पशुपालकों, महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों के खाते में 6 करोड़ 34 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया। इस राशि में से 8367 गौठानों और गोबर खरीदी केन्द्रों में 1 से 15 मार्च 2023 तक खरीदे गए 01 लाख 67 हजार 932 क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेता, पशुपालकों को 03 करोड़ 68 लाख रूपए, लाभांश राशि के रूप में स्व-सहायता समूहों को 1.08 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों को 1.58 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया गया।

गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में से 2.02 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा 1.66 करोड़ रूपए की राशि विभाग द्वारा दी जा रही है। सम्मेलन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं मुंगेली जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, विधायक धरमलाल कौशिक, पुन्नूलाल मोहले, धरमजीत सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार द्वय प्रदीप शर्मा और विनोद वर्मा, अध्यक्ष जिला पंचायत मुंगेली श्रीमती लेखनी सोनू चन्द्राकर, अध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग थानेश्वर साहू, अध्यक्ष नगर पंचायत सरगांव राजीव तिवारी एवं गणमान्य जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे। साथ ही कार्यक्रम में वन मंत्री मोहम्मद अकबर तथा संसदीय सचिव गुलाब कमरो वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

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