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छत्तीसगढ़ में अब तक 32.29 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीदी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों से सुगमता पूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में धान 14 नवम्बर सें शुरू हुए धान खरीदी का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। राज्य में 14 नवम्बर से अब तक 32.29 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। राज्य में अब तक 6.80 लाख किसानों ने अपना धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत 6807 करोड़ 82 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगी।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस खरीफ वर्ष के लिए 27.68 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.45 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आज 6 दिसम्बर को 66181 किसानों से 2.95 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की गई है। इसके लिए 76378 टोकन जारी किए गए थे।

राज्य सरकार धान उपार्जन केन्द्रों में शिकायत एवं निवारण के लिये हेल्प लाइन नंबर जारी किए है, जिसका नं. 0771-2425463 है। धान बेचने वाले कोई भी किसान इस हेल्पलाईन नम्बर पर फोन कर अपनी समस्यओं का समाधान कर सकते है।

समिति में आपरेटर के माध्यम से टोकन आवेदन की भी सुविधा

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उपार्जन केन्द्रों में धान विक्रय हेतु किसानों द्वारा टोकन आवेदन समिति माड्यूल एवं टोकन तुहर हाथ एप्प के माध्यम से किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। कुल टोकन आवेदन का 40 प्रतिशत समिति माड्यूल एवं 60 प्रतिशत एप्प के माध्यम से आरक्षित किया गया है। जिन कृषकों को एप्प के माध्यम से टोकन आवेदन करने में कठिनाई हो रही हो, वे समिति में आपरेटर के माध्यम से टोकन आवेदन करा सकते हैं। किसानों द्वारा आवेदन के दौरान आवश्यक प्रविष्टि करने के उपरांत आवेदन की तारीख से लेकर 15 जनवरी 2025 तक रिक्त स्लॉट में धान विक्रय हेतु दिवस का चयन किया जा सकता है। लघु एवं सीमांत कृषकों को 02 टोकन एवं दीर्घ कृषकों 03 टोकन की सुविधा प्रदाय की गई है।

किसान बारदाना के लिए प्रति नग 25 रूपए

भारत सरकार की नवीन बारदाना नीति अनुसार धान का उपार्जन नये एवं पुराने बारदानों में 50 अनुपात 50 में किया जाना है। प्रदेश में अनुमानित धान उपार्जन 160 लाख टन के आधार पर सभी उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त बारदानों की व्यवस्था कर ली गई है। उपार्जन केन्द्रों में पुराने बारदानें के रूप में मिलर बारदाना, पीडीएस बारदाना, समिति द्वारा उपलब्ध कराये गये बारदानों का उपयोग किया जा रहा है। विशेष परिस्थिति में किसान बारदाना का भी उपयोग किया गया है, जिसका 25 रू. नग के मान से किसानों को भुगतान हेतु राशि 11 करोड़ 23 लाख रूपए अपेक्स बैंक को दी जा चुकी है।

धान खरीदी केन्द्रों में 72,194 गठान बारदाना उपलब्ध

समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए कुल 4 लाख गठान नये बारदानों की आवश्यकता है, जिसके विरूद्ध 3.51 लाख नये बारदानें प्रदेश को प्राप्त हो गए है, शेष बारदानें आगामी 15 से 20 दिवसों में प्राप्त हो जायेगें। अभी तक धान उपार्जन में पीडीएस बारदाने 32392 गठान, मिलर बारदानें 23078 गठान, किसान बारदानें 10176 गठान उपयोग किये जा चुके है। उपार्जन केन्द्रों में पीडीएस बारदाने 18985 गठान, मिलर बारदानें 54209 गठान उपयोग हेतु उपलब्ध है। वर्तमान में प्रदेश के किसी भी उपार्जन केन्द्र में बारदानों की कमी नहीं है।

सितम्बर और अक्टूबर के वेतन के भुगतान के लिए नगरीय निकायों को 25.9 करोड़ आबंटित

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रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के 101 नगरीय निकायों में अधिकारियों-कर्मचारियों के सितम्बर और अक्टूबर माह के वेतन के भुगतान के लिए 25 करोड़ 90 लाख रुपए आबंटित किए हैं। इस राशि से नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कार्यरत प्लेसमेंट व नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों को दो महीने के वेतन का भुगतान किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने निकायों को राशि जारी कर दी है।

साव ने सभी नगरीय निकायों में तत्काल वेतन भुगतान के निर्देश भी दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने शहरों में विकास कार्यों को और तेज करने के लिए भी बड़ी राशि जारी की है। उप मुख्यमंत्री एवं विभागीय मंत्री अरुण साव के निर्देश पर राज्य के 129 नगरीय निकायों में अधोसरंचना मद के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों के लिए 144 करोड़ 65 लाख रुपए आबंटित किए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री साव ने प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विकास कार्यों के लिए राशि की कमी नहीं है। नगरीय निकायों को विकास कार्यों और जन सुविधाएं विकसित करने के लिए पर्याप्त राशि दी जा रही है। नगरीय निकाय गुणवत्तापूर्ण कार्य संपादित कराते हुए इन राशियों का सदुपयोग करें। उप मुख्यमंत्री साव नगरीय निकायों के कार्यों की लगातार समीक्षा कर समस्याओं एवं जरूरतों की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने शहरों के सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के लिए कार्ययोजना बनाकर उनके अनुरूप कार्य करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं। वे निकायों का भ्रमण कर विकास कार्यों का औचक निरीक्षण भी कर रहे हैं।

दीवाली से पहले मिलेगा छत्तीसगढ़ के अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं मानसेवियों को दीवाली से पहले वेतन का भुगतान किया जाएगा। इस आशय का आदेश छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग द्वारा आज जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के अनुसार अक्टूबर 2024 के वेतन और मजदूरी के भुगतान 28 अक्टूबर 2024 से करने के निर्देश दिए गए है, ताकि अधिकारियों-कर्मचारियों को दीवाली के त्यौहार से पूर्व वेतन मिल सके और वह अच्छे से त्यौहारे मना सके।

वित्त विभाग द्वारा आदेश के अनुसार व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पारिश्रमिक, मजदूरी, और मानदेय का भुगतान भी 28 अक्टूबर से किया जाएगा। राज्य के निगम, मंडल, प्राधिकरण, विश्वविद्यालय, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और अन्य संस्थानों को भी अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार 28 अक्टूबर से भुगतान के संबंध में विचार करने को कहा गया है।

भुगतान रोकने क़े बाद भी प्रगति नही लाने वाले एजेंसी होंगे ब्लैकलिस्टेड

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बलौदाबाजार। कलेक्टर दीपक सोनी ने जिले में जल जीवन मिशन कार्य क़े लिए अनुबंधित एजेंसियो की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की। उन्होने सभी एजेंसियो क़े प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि कम प्रगति वाले एजेंसी की भुगतान रोकी जाएगी, इसके बाद भी सुधार नही लाने पर एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड की जाएगी। उन्होने कमजोर फिल्ड वर्क क़े कारण हेल्प एंड हेल्प एजेंसी क़े कोऑर्डिनेटर को नोटिस जारी करने क़े निर्देश दिए।

कलेक्टर ने बैठक क़े दौरान एजेंसियों क़े कार्य की जमीनी हकीकत जानने फिल्ड पर काम कर रहे कर्मचारियों से सीधे फोन पर बात कर जानकारी ली और जरुरी निर्देश दिए। उन्होने सभी एजेंसियो से प्रतिदिन किये गए कार्य की रिपोर्ट जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने क़े निर्देश दिए। उन्होने ऐसे एजेंसी जिनक़े पास आवंटित गांव की संख्या अधिक और कर्मचारियों की संख्या कम होने क़े कारण कार्य की प्रगति बहुत धीमा है उनसे गाँव की संख्या कम कर बेहतर प्रगति वाले एजेंसी को देने कहा। कलेक्टर ने कहा कि सभी एजेंसी गुणवत्तापूर्ण काम करें, अब तक जो काम अधूरे है उसे जल्द पूरा करें तथा पाईप बिछाने खोदे गए गड्ढों को ठीक करें।

उन्होंने कहा कि  सभी जल स्रोतों का टेस्टिंग किट से जल की गुणवत्ता जाँच एवं क्लोरीनिकरण करें। जल जीवन मिशन में सबसे पहले गुणवत्तापूर्ण कार्य हो उसके बाद ग्रामवासियों को यूजर चार्ज क़े लिए प्रोत्साहित करें। बरसात क़े मौसम में जलजनित बीमारियों से बचने सभी गांव में बैठक लेकर लोगों को समझाईश दें कि पानी उबालकर ठंडा होने क़े बाद पीने क़े लिए उपयोग में लाएं।

बताया गया कि विकासखंड बलौदाबाजार में एजेंसी उपवन महिला बालविकास को 146 गाँव, पलारी में एजेंसी हेल्प एंड हेल्प को 132 गाँव, भाटापारा में एजेंसी कामगार फाउंडेशन को 108 गाँव, कसडोल में एजेंसी विकास आशा सेवा समिति को 117 एवं प्रतीक्षा को 110 गांव कार्य करने हेतु आवंटित किया गया है।

नगरीय निकायों को बनाया जाएगा ऊर्जा दक्ष, एनर्जी ऑडिट कराकर कमियों-खामियों को किया जाएगा दूर

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राज्य के सभी 184 नगरीय निकायों में बिजली बिल और एनर्जी ऑडिट के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यथासंभव पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा का उपयोग करने को कहा है। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि अधिकांश निकायों में इस मद में राशि के अभाव के कारण समय पर बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया जाता है। इससे नगरीय निकायों और विभाग को हर वर्ष अनावश्यक ही सरचार्ज व एरियर्स की राशि के रूप में बिजली विभाग को अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ता है।

ऊर्जा और बिजली बिल के ऑडिट से इनकी बचत के उपाय करने में सहूलियत होगी। साव ने बिजली बचाने और इसके खर्च में कमी लाने के लिए नगरीय निकायों में पारंपरिक ऊर्जा के बदले ग्रीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने को कहा है। इससे निकायों का खर्च घटने के साथ ही पर्यावरण भी सुधरेगा। उप मुख्यमंत्री ने चरणबद्ध तरीके से एनर्जी ऑडिट का कार्य थर्ड पार्टी प्रोफेशनल एजेंसीज से कराने के निर्देश दिए हैं। शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइटिंग जैसी विभिन्न जन सुविधाओं के संचालन के लिए नगरीय निकायों मे बड़ी संख्या में विद्युत कनेक्शन लिए गए हैं।

विद्युत विभाग द्वारा प्रदेश के सभी 184 नगरीय निकायों में इसके लिए हजारों की संख्या में बिजली के मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों के माध्यम से हर महीने मीटर रीडिंग कर बिजली विभाग द्वारा बिजली का बिल निकायों को प्रेषित किया जाता है। निकायों द्वारा प्रति माह एक बड़ी राशि विद्युत देयकों के रूप में व्यय की जाती है। कई बार सरचार्ज और एरियर्स के रूप में भी बिजली विभाग को अतिरिक्त राशि का भुगतान निकायों और नगरीय प्रशासन विभाग को करना पड़ता है। विभाग द्वारा नगरीय निकायों में बिजली बिल के समायोजन के लिए बिजली विभाग को हर साल लगभग 100 करोड़ रुपए से 200 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की जाती है। वर्तमान में करीब 800 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित होने के कारण सरचार्ज की राशि में लगातार वृद्धि हो रही है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस स्थिति को देखते हुए विभागीय समीक्षा बैठक में नगरीय निकायों के बिजली बिलों के ऑडिट तथा एनर्जी ऑडिट कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इससे प्रत्येक निकाय के बिजली बिल के ऑडिट से वास्तविक विद्युत खपत और अनावश्यक रूप से सरचार्ज हेतु किए जा रहे भुगतान का स्पष्ट आंकलन किया जा सकेगा। ऑडिट के बाद विद्युत की खपत घटाने और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने के लिए नीति भी तैयार की जाएगी। विद्युत खपत घटाने और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने से लंबी अवधि में लगभग 800 करोड़ रुपए से एक हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। साथ ही ग्रीन एनर्जी के उपयोग से निकायों को कार्बन क्रेडिट भी प्राप्त होगा। साव ने कहा कि इस तरह बचाई गई राशि से निकायों में अधोसंरचना विकास के अन्य कार्य तथा नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं शुरू की जा सकेंगी। निकायों में ऊर्जा प्रबंधन में सौर उर्जा को शामिल करने एवं ताप ऊर्जा के उपयोग में कमी से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा भी मिलेगा।

 सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग से नगरीय निकायों को ऊर्जा दक्ष बनाने के निर्देश, पायलेट परियोजना के लिए तैयार की जा रही है कार्ययोजना

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग से नगरीय निकायों को ऊर्जा दक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा निकायों में विद्युत खपत की वास्तविक जानकारी जुटाने हेतु एनर्जी ऑडिट कराने के लिए पायलेट परियोजना की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एनर्जी ऑडिट के माध्यम से नगरीय निकायों में बिजली की वास्तविक खपत और व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, कमियों की पहचान तथा विद्युत देयकों के विश्लेषण के बाद विद्युत दक्ष (Energy Efficient) उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देने, विद्युत खपत में कमी से देयकों में मितव्यता तथा चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा प्रणाली जैसी वैकल्पिक व्यवस्था को अपनाया जाएगा। भारत सरकार द्वारा भी पारंपरिक ऊर्जा के स्थान पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पीएम कुसुम, पीएम सूर्याेदय तथा पीएम सूर्यघर जैसी अभिनव योजनाएं प्रारंभ की गई हैं।


छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक की सबसे बड़ी धान खरीदी

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर अब तक की सबसे बड़ी धान की खरीदी हुई है। एक नवंबर से 04 फरवरी तक चले इस अभियान में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक हुई यह सबसे बड़ी धान खरीदी है। इस वर्ष 130 लाख टन धान खरीदी का अनुमान लगाया गया था। इस साल की धान खरीदी की तुलना करने पर यह पिछली धान खरीदी से 37.39 लाख टन अधिक है। पिछले साल 107.53 लाख टन धान की खरीदी हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की गई। किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से धान की खरीदी की गई है। वर्तमान में किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान किया गया है। जल्द ही अंतर की राशि का भुगतान किसानों को किया जाएगा। धान खरीदी सीजन में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। इसके एवज में किसानों को 30 हजार 68 करोड़ 81 लाख रूपए का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों एवं किसान प्रतिनिधियों की मांग और उनकी परेशानियों को देखते हुए धान खरीदी की अवधि 31 जनवरी से बढ़ाकर 4 फरवरी कर दी थी। ऐसे किसान जो किन्हीं कारणों से 31 जनवरी तक धान नहीं बेच पाए थे, उन किसानों को मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील फैसले का लाभ मिला। धान खरीदी के लिए बढ़ाई गई अवधि में 19 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। 1 फरवरी से लेकर 4 फरवरी के बीच 2.69 लाख टन धान की खरीदी हुई।

राज्य में चालू खरीफ विपणन वर्ष में 130 लाख टन धान का उपार्जन अनुमानित था। धान की रिकॉर्ड खरीदी के चलते अनुमानित उपार्जन का आंकड़ा काफी पीछे छूट गया है। इस साल धान बेचने के लिए राज्य के 26.85 लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। पंजीकृत धान का रकबा 33.51 लाख हेक्टेयर था। धान खरीदी की व्यवस्था के समानांतर कस्टम मिलिंग का काम भी तेजी से जारी है। उपार्जित धान 144.92 लाख टन में से 105.36 लाख टन धान के उठाव का डीओ जारी किया जा चुका है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 98.41 लाख टन धान का उठाव किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ में 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी : किसानों को 29 हजार 318 करोड़ रूपए का भुगतान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 के तहत एक नवंबर 2023 से धान खरीदी का अभियान निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की हित में बड़ा फैसला लेते हुए अब राज्य में 4 फरवरी तक समर्थन मूल्य पर होगी धान खरीदी। शनिवार और रविवार को भी धान खरीदी किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष मोदी की गारंटी के अनुरूप किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा अब तक किसानों से 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा चुकी है। धान उपार्जन के एवज में किसानों को 29 हजार 318 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है।

मार्कफेड के महाप्रबंधक से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में समर्थन मूल्य पर अब तक 24 लाख 51 हजार 28 किसानों से 31 जनवरी 2024 तक 142 लाख 23 हजार 702 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है। अब तक 102 लाख 74 हजार 132 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 93 लाख 44 हजार 627 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ : प्रदेश में अब तक 38.88 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपनण वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर एक नवम्बर 2023 से धान खरीदी जारी है। अब तक राज्य के 8 लाख 55 हजार से अधिक किसानों से 38 लाख 88 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है। किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 2 हजार 739 धान उपार्जन केन्द्र बनाए गए हैं।

धान खरीदी के एवज में किसानों को भुगतान के लिए मार्कफेड द्वारा अपेक्स बैंक को अब तक कुल 9 हजार 463 करोड़ रूपए जारी किया गया है। राज्य शासन के निर्देशानुसार खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की व्यवस्था पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। राज्य में इस साल 130 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है। धान बेचने के लिए 26.86 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीकृत रकबा 33.15 लाख हेक्टेयर है। इस साल धान बेचने के लिए 2.59 लाख नवीन किसानों ने पंजीयन कराया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है। अब तक कुल धान खरीदी 38.88 लाख मीट्रिक टन धान में से 31.46 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 22.90 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आज 19 दिसम्बर को लगभग 62 हजार से  किसानों से 2.57 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। आज की धान खरीदी के लिए 79 हजार से अधिक टोकन जारी किए गए थे। इनमें टोकन तुंहर हाथ एप के तहत 32 हजार से अधिक टोकन ऑनलाइन जारी किए गए थे।

भाजपा का घोषणा पत्र मात्र नहीं, यह है देश के प्रधानमंत्री की गारंटी

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महासमुंद। भाजपा की घोषणा पत्र से जनता और कार्यकर्ताओं में असीमित उत्साह है। किसानों को फोकस करते हुए घोषणा पत्र तैयार किया गया है। हमने 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदने और 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल के दाम से एकमुश्त भुगतान करने की गारंटी दी है। यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी है, इसके बाद किसानों की कर्जमाफी की जरूरत नही पड़ेगी। फिर भी यदि किसानों को राहत नहीं मिलती है तो भाजपा की संवेदनशील सरकार कर्ज माफी पर भी विचार करेगी।

            घोषणा पत्र से जनता और कार्यकर्ताओं में असीमित उत्साह है। 

                     किसानों को फोकस करते हुए घोषणा पत्र

इस तरह किसानों को बढ़े हुए समर्थन मूल्य और एकमुश्त बोनस देने से जितना कर्ज किसान लेते हैं, उससे ज्यादा भुगतान किसानों को होगा। उक्त बातें भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक,  पूर्व विधायक व भाजपा प्रवक्ता डा. विमल चोपड़ा, महासमुंद लोकसभा सांसद चुन्नीलाल साहू , भाजपा जिलाध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी समेत वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कही। उन्होंने कहा कि अभी तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी नही हुआ है। जो भी वायदा कांग्रेस द्वारा किया जा रहा है, वह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रियंका वाड्रा गांधी, राहुल गांधी द्वारा ही किया जा रहा है।

जब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष या प्रदेश अध्यक्ष हस्ताक्षर से वचन पत्र जारी नही होता तब तक उनकी घोषणाओं पर विश्वास नही किया जा सकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ईडी के राडार पर है। ऐसे में बघेल यदि मुख्यमंत्री नही रहते हैं तो कांग्रेस पार्टी मुकर जाएगी कि उसने कोई वायदा नही किया है। प्रधानमंत्री जी ने वादा या घोषणा नहीं की है, बल्कि गारंटी दी है। इसलिए आम जनता और कार्यकर्ताओं में भाजपा के घोषणा पत्र से अपार उत्साह का संचार हुआ है। भाजपा नेताओं का दावा है कि भाजपा के पक्ष में एकतरफा  माहौल बनता दिख रहा है।

हमने बीते वर्षों में हुई भूलचूक पर क्षमा याचना करते हुए इस बार सरकार बनते ही दो साल के बचे हुए पुराना बोनस की धनराशि को 25 दिसंबर को सुशासन दिवस पर किसानों को देने का वायदा भी किया है। विवाहित प्रत्येक महिलाओं को साल में 12 हजार रुपए भाजपा की सरकार बनने पर दिया जाएगा। इसी तरह 18 लाख लोगों को आवास, बीपीएल परिवार की महिलाओं को प्रत्येक सिलेंडर की रिफिलिंग पर 5 सौ रुपये की सब्सिडी, 1 लाख लोगों को नौकरियां, तेंदूपत्ता की कीमत 55 सौ रुपये प्रति मानक बोरा और बोनस 45 सौ रुपये देने के साथ ही साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन कराने की योजना भी शामिल है। भाजपा के बम्पर धमाका से दीपावली के पहले ही जनता में जश्न का माहौल है। वहीं, कांग्रेस  चारों खाने चित्त हो गई है। उन्होंने भाजपा द्वारा घोषित अन्य गांरटी का जिक्र करते हुए कहा कि भूमिहीन खेतीहर श्रमिकों को सलाना 10 हजार रुपए सहायता दी जाएगी, राज्य में हुए पीएसपी घोटाले की जांच कराई जाएगी, आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 लाख तक स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा।

उन्होंने बताया कि घोषित गारंटी के बाद अब प्रत्येक विधानसभा स्तर पर स्थानीय आवश्यकता के अनुसार अलग से घोषणा पत्र प्रत्याशियों द्वारा तैयार किया जा रहा है। सांसद चुन्नीलाल साहू ने इस बीच बताया कि घोषणा पत्र में कोडार, चरौदा डेम को भरने के लिए पैरी नहर लिकिंग योजना को महासमुंद जिले के लिए शामिल किया गया है। प्रेसवार्ता में मनीष जायसवाल ने बताया कि घोषणा पत्र में सभी वर्ग को शामिल करते हुए लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी, प्रदीप चंद्राकर, पूर्व भाजपा अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, ऐतराम साहू, संदीप दीवान आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 06 अक्टूबर को 9.65 करोड़ का करेंगे भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 6 अक्टूबर को अपने निवास कार्यालय रायपुर में गोधन न्याय योजना के ऑनलाईन राशि वितरण कार्यक्रम में योजना के हितग्राहियों के बैंक खातों में 9.65 करोड़ रूपए अंतरित करंेगे। जिसमें गोबर विक्रेताओं को 4.93 करोड़ रूपए, गौठान समितियों को 1.45 करोड़ रूपए, स्व-सहायता समूहों की 1.14 करोड़ रूपए की लाभांश राशि के साथ ही गौठान समिति के सदस्यों को 2.26 करोड़ रूपए की मानदेय राशि शामिल हैं। गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को 579.18 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 6 अक्टूबर कोे 9.65 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 588.83 करोड़ रूपए हो जाएगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गौठानों में 16 सितम्बर से 30 सितम्बर तक क्रय किए गए 2.46 लाख क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को 4.93 करोड़ रूपए का ऑनलाइन भुगतान करेंगे। गौठानों में अब तक 138.26 क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसके एवज में पशुपालन किसानों को 271.60 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। 6 अक्टूबर को 4.93 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद गोबर क्रय के एवज में भुगतान की कुल राशि 276.53 करोड़ रूपए हो जाएगी। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 06 अक्टूबर को भुगतान की जाने वाली 2.46 करोड़ रूपए की राशि के बाद इनको होने वाले कुल भुगतान का आंकड़ा 280.04 करोड़ रूपए हो जाएगा। गौरतलब है कि योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 2 किश्तों में लगभग 30 करोड़ रूपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बोनस का भी भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री गौठान समिति के 42 हजार 808 सदस्यों को सितम्बर माह के मानदेय के रूप में 2.26 करोड़ रूपए की राशि भी जारी करेंगे। 

गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी के मामले में गौठान समिति की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य में निर्मित एवं संचालित 10224 गौठानों में से 6453 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की राशि से गोबर विक्रेताओं से गोबर क्रय कर रहे है। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 83 करोड़ रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय किया है। 6 अक्टूबर को गोबर विक्रेताओं को भुगतान की जाने वाली राशि 4.93 करोड़ रूपए में से 3.25 करोड़ रूपए की राशि स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा 1.68 करोड़ रूपए का भुगतान विभाग द्वारा किया जाएगा।

किसानों और भूमिहीन मजदूरों को मिलेगी इसी माह न्याय योजना की तीसरी किश्त

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के किसानों राजीव गांधी किसान न्याय योजना और भूमिहीन मजदूरों को राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि का भुगतान सितम्बर माह की आखिर तक कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बात आज दुर्ग जिले के भिलाई नगर स्थित जयंती स्टेडियम में आयोजित महिला समृद्धि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने यह फैसला अगले माह अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के परिप्रेक्ष्य में लिया है। गौरतलब है कि उक्त दोनों योजनाओं की तीसरी किश्त का भुगतान अब तक राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर को किया जाता रहा है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के धान सहित अन्य प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ के मान से 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी 4 किश्तों में दी जाती है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के लगभग 24.43 लाख किसानों को दो किश्तों में 3704 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। किसानों को प्रथम किश्त की राशि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर 21 मई 2023 को 1894.93 करोड़ रूपए तथा द्वितीय किश्त की राशि राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर 20 अगस्त 2023 को 1810 करोड़ रूपए प्रदान की गई थी। तीसरी किश्त की राशि लगभग 1890 करोड़ रूपए किसानों के बैंक खातों में इस माह के आखिर तक जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में कृषि विभाग द्वारा इसको लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य दिलाना तथा फसल उत्पादकता एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 21 मई 2020 से राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की गई और इसका लाभ खरीफ वर्ष 2019 के धान उत्पादक किसानों को देने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2020 में इस योजना के तहत किसानों को 5627 करोड़ रूपए, वर्ष 2021 में 5553 करोड़ रूपए, वर्ष 2022 में 7028 करोड़ रूपए तथा वर्ष 2023 की दो किश्तों में अब तक 3704 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। राज्य के किसानों को इस योजना के तहत अब तक 21913 करोड़ रूपए का भुगतान हो चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना के अंतर्गत किसानों को इनपुट सब्सिडी देने के लिए वर्ष 2023-24 के बजट में 6800 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाओं में शामिल राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत राज्य में 5 लाख 63 हजार से अधिक भूमिहीन परिवारों को प्रतिवर्ष 7000 रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक भूमिहीन कृषि मजदूरों को 758 करोड़ रूपए की आर्थिक सहायता इस योजना के तहत दी जा चुकी है। गौरतलब है कि प्रथम चरण में यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों में लागू की गई थी। इस योजना को वित्तीय वर्ष 2023-24 से नगर पंचायत क्षेत्रों में भी विस्तारित किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष की दो किश्तों में भूमिहीन परिवारों के साथ-साथ बैगा, गुनिया, हाट पहरिया, गायता पुजारी, मोहरिया आदि को 281 करोड़ 44 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। तीसरी किश्त के रूप में योजना के हितग्राहियों को लगभग 170 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जाएगा।

सीएम भूपेश बघेल ने न्याय योजनाओं के हितग्राहियों को 2055.60 करोड़ रूपए का किया ऑनलाईन भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती ‘‘सद्भावना दिवस‘‘ के अवसर पर महासमुंद के हाई स्कूल मैदान में न्याय योजनाओं सहित अन्य योजनाओं के हितग्राहियों किसानों, मजदूरों, ग्रामीण व पशुपालकों को 2055.60 करोड़ रूपए की राशि का ऑनलाईन भुगतान किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव अति विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में पंचायत मंत्रा रविन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय विकास विभाग मंत्री डॉ. शिव डहरिया, आदिम जाति जनजाति विकास विभाग मंत्री मोहन मरकाम, राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदवी नेताम ,लोकसभा सांसद दीपक बैज सहित छत्तीसगढ़ शासन संसदीय सचिव, विधायक समेत अनेक जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में ‘‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना‘‘ के हितग्राहियों को योजना की दूसरी किश्त के रूप में 1810 करोड़ रूपए का भुगतान किया। इस राशि को मिलाकर राजीव गांधी किसान न्याय योजना के 24.30 लाख किसानों को अब तक 21 हजार 912 करोड़ रूपए की इनपुट सब्सिडी का भुगतान किया जा चुका है।

राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ के हितग्राहियों को दूसरी किश्त के रूप में 168.63 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया। इस राशि को मिलाकर योजना के 5.6 लाख हितग्राहियों को अब तक 758.03 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

राजीव युवा मितान क्लब एवं गोधन न्याय योजना

कार्यक्रम में बघेल ने ‘राजीव युवा मितान क्लबों’ को 66.21 करोड़ रूपए की राशि का भी अंतरण किया। युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य में गठित किए 13 हजार 242 क्लबों को अब तक 132.48 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इसी कड़ी में ‘गोधन न्याय योजना’ के हितग्राहियों को 9.65 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया। इस राशि को मिलाकर योजना के तहत अब तक महिला स्व-सहायता समूहों, गौठान समितियों और ग्रामीणों को 551.31 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री परब सम्मान निधि योजना

बघेल ने कार्यक्रम में ‘मुख्यमंत्री परब सम्मान निधि योजना’ के तहत गैर अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम पंचायतों को 1.11 करोड़ रूपए की राशि का अंतरण किया। इस राशि को मिलाकर 6,111 ग्राम पंचायतों को स्थानीय उत्सवों को मनाने के लिए 6.11 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों को एक जुलाई को एक वेतन वृद्धि देकर सेवानिवृत्त परिलाभ दिए जाने के निर्देश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग द्वारा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों को 01 जुलाई को एक वेतन वृद्धि देकर सेवानिवृत्त परिलाभ दिए जाने के आदेश जारी किए गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशानुसार इस संबंध में संबंधित प्रकरणों में 90 दिवस की समयावधि में याचिकाकर्ताओं के सेवानिवृत्त परिलाभों में संशोधन एवं एरियर्स राशि भुगतान किए जाने की कार्यवाही करने के निर्देश संबंधित विभाग को जारी किए गए हैं।

वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व, खनिज, मत्स्य विभाग को महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर द्वारा जारी आदेश से संबंधित याचिकाओं में शामिल याचिकाकर्ता, उनके कार्यालय एवं विभाग की सूची प्रेषित करते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्यवाही करने कहा है। सूची में उल्लेखित कर्मचारियों के सेवानिवृत्त परिलाभों को संशोधित कर अंतर की राशि का एरियर्स सहित भुगतान किए जाने की कार्यवाही संबंधित कार्यालय एवं विभाग द्वारा किया जाना है।

वित्त विभाग द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर द्वारा रिटपिटिशन में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा 10 जुलाई 2023 को दिए गए आदेश की प्रति संलग्न कर प्रेषित की गई है, जिसमें याचिकाकर्ताओं को 90 दिवस के समयावधि में एक जुलाई को प्राप्त होने वाले वेतन वृद्धि को जोड़कर सेवानिवृत्ति परिलाभ एरियर्स सहित भुगतान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की योजना से वनोपज संग्राहकों को उनकी मेहनत का मिल रहा सही दाम : मंत्री अकबर

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रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर आज कबीरधाम जिले बोड़ला विकासखण्ड के ग्राम पंडरिया, रेंगाखारकला, बरेंडा, सिवनीखुर्द, नागवाही, रोल और ग्राम पंचायत बम्हनी में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि वनांचलवासियों के जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने अनेक योजनाएं लागू की है, जिससे वन और वनोपज पर आश्रित संग्राहकों को आर्थिक मजबूती मिली है।
                  

प्रदेश के लाखों वनोपज संग्राहक परिवारों को स्थानीय स्तर पर वनोपज से जुड़े रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर वनोपज संग्राहकों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिलाने के लिए लघु वनोपजों के क्रय मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में साढ़े 4 वर्षों में तेंदूपत्ता संग्राहकों को 2518.25 करोड़ रुपए पारिश्रमिक एवं 339.22 करोड़ रुपए प्रोत्साहन पारिश्रमिक का भुगतान किया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए शासन द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण दर को 2500 प्रति मानक बोरा से बढ़ाते हुए 4000 प्रति मानक बोरा कर दिया गया है।

                                 
मंत्री अकबर ने छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा अर्चना कर भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने ग्राम पंडरिया ने सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 5 लाख और रेंगाखारकला में भवन निर्माण के लिए 5 लाख की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने पौधा रोपण कर उपस्थित ग्रामीणों एवं किसानों को पौधा वितरण भी किया। मंत्री अकबर ने कहा कि वनोपज का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों को सीधा और प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। उन्होने कहा कि भूपेश सरकार सात प्रकार के वनोपज को बढ़ाकर 65 प्रकार के वनोपज खरीदी कर रही है।

वर्ष 2018-19 से 22-23 तक 30.35 लाख क्विंटल लघुवनोपज मूल्य 356.44 करोड रूपए की खरीदी कर देश में पहले स्थान प्राप्त किया है। इसी प्रकार सरकार ने महुआ फूल 17 रूपए से बढ़ाकर 33 रूपए किया। इमली प्रति किलो 25 से बढ़ाकर 36 रूपए किए। चिरौजी 93 रूपए से बढ़ाकर 126 रूपए किए। रंगीनी लाख 130 से बढ़ाकर 220 रूपए, कुसुमी लाख 200 से बढ़ाकर 300 रूपए, शहद 195 रूपए से बढ़ाकर 225 रूपए किए। तेन्दूपत्ता 25 सौ रूपए से बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा किए। छत्तीसगढ़ में वनोपज का समर्थन मूल्य बढ़ने से वनसंग्रहण से जुड़े राज्य के लाखों परिवारों को संबल मिला है। भूपेश सरकार के प्रति वनोपज संग्राहक परिवारों को विश्वास और भरोसा बढ़ा है। मंत्री अकबर ने कहा कि ग्राम पंचायतों में जाकर आमजनों से सीधा संवाद करने का उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है या नही इसकी जानकारी लेना है। इस अवसर पर होरी साहू संबंधित ग्राम पंचायत के पंच-सरपंच सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। 

सीएम कल करेंगे गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 12 करोड़ 72 लाख रूपए का भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 जून को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 12 करोड़ 72 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे, जिसमें 1 जून से 15 जून तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय 2.40 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4 करोड़ 79 लाख रूपए, गौठान समितियों को 4.67 करोड़ रूपए और महिला समूहों को 3.26 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं।

गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी में स्वावलंबी गौठानों की भूमिका हर पखवाड़े आगे बढ़ती जा रही है। बीते कई पखवाड़ों से गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में स्वावलंबी गौठानों की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत तक रहने लगी है। आज की स्थिति में 60 फीसद से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की राशि से गोबर एवं गौमूत्र की खरीदी के साथ-साथ गौठान के अन्य व्यय, स्वयं की राशि से कर रहे हैं। एक जून से 15 जून तक गौठानों में कुल 2.40 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है। जिसके एवज में गोबर विक्रेताओं को अंतरित की जाने वाली 4.79 करोड़ रूपए की राशि में से 1.90 करोड़ की राशि कृषि विभाग द्वारा तथा 2.89 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया जाएगा। स्वावलंबी गौठानों द्वारा गोबर खरीदी के एवज में अब तक 61.69 करोड़ रूपए का भुगतान स्वयं की राशि से किया गया है।

गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में हितग्राहियों को 475 करोड़ 95 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 20 जून को 12.72 करोड़ के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 488 करोड़ 67 लाख रूपए हो जाएगा। यह यहां उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 20 जुलाई 2020 से गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। राज्य में 15 जून 2023 तक गौठानों में 121.04 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। गोबर विक्रेताओं से 31 मई तक क्रय किए गए गोबर के एवज में 237 करोड़ 28 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 20 जून को गोबर विक्रेताओं को 4.79 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 242 करोड़ 7 लाख रूपए हो जाएगा। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 223 करोड़ 60 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 20 जून को 7.93 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 231.53 करोड़ रूपए हो जाएगा।

राज्य सरकार खरीदती है किसानों का धान, ऋण लेकर करती है भुगतान

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रायपुर। वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि धान खरीदी राज्य सरकार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी करती है और बैंको से ऋण लेकर भुगतान करती है। केन्द्र सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए कोई अनुदान, सहायता अथवा ऋण नहीं दी जाती। धान खरीदी का एक सिस्टम है, 

राज्य सरकार किसानों से धान खरीदी करती है फिर कस्टम मिलिंग के बाद सेन्ट्रल पूल में चावल जमा किया जाता है। उसके बाद केन्द्र सरकार द्वारा जमा चावल के एवज में निर्धारित दर पर भुगतान किया जाता है। वर्ष 2023-24 में 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है। उन्होंने बताया कि किसानों से अब तक 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जा रही थी, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का निर्णय लिया है।

मंत्री अकबर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बारे में बताया कि धान खरीदी राज्य सरकार की सबसे बड़ी योजना है। धान खरीदी के लिए राज्य सरकार प्रतिवर्ष 20 से 25 हजार करोड़ रूपए का ऋण लेती है। यह ऋण छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के माध्यम से बैंको एवं नाबार्ड इत्यादि से लिया जाता है। धान खरीदी के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को कोई सहायता नहीं दी जाती और न ही कोई अनुदान या ऋण दिया जाता है। बैंकों एवं नाबार्ड से ऋण राज्य सरकार की गारंटी पर दिया जाता है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जहां हमारी सरकार बनने के बाद से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीद के साथ ही प्रतिपूर्ति के रूप में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् अतिरिक्त राशि प्रदान की जाती है। इस तरह किसानों को धान की कीमत 2500 रूपये प्रति क्विंटल मिल रही है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना में दी जाती है 9000 रूपये प्रति एकड़ अनुदान राशि

धान खरीदी के बारे में राज्य सरकार की ओर से जानकारी देते हुए मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार की नीति और फैसलों से छत्तीसगढ़ के किसानों का जीवन खुशहाल हो रहा है। हमने किसानों को 2500 रूपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य देने का जो वादा किया था, उसे निभाकर अपने वायदे के अनुरूप किसानों को राज्य सरकार राशि प्रदान कर रही है। सहकारी समितियों में धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य के अलावा 9000 रूपये प्रति एकड़ की दर से 04 किस्तों में प्रदान किया जा रहा है। किसानों को प्रथम किस्त के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई, उनकी जयंती 20 अगस्त पर द्वितीय किस्त तथा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 01 नवंबर को तृतीय किस्त और वित्तीय वर्ष की समाप्ति की तिथि 31 मार्च को किसानों को किसान न्याय योजना की चतुर्थ किस्त की राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि मिलाकर प्रति क्विटल 2640 रूपए की दर से भुगतान किया गया है।

किसानों को सोसायटियों के जरिए किया जाता है भुगतान

मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने धान उत्पादक किसानों की सुविधा के लिए सेवा सहकारी समितियों की संख्या 1333 से बढ़ाकर 2058 कर दी है। धान बेचने वाले किसानों को धान की राशि का चेक छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। धान बेचने वाले किसानों का पंजीयन छत्तीसगढ़ सरकार के छत्तीसगढ़ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाता है ।

किसान खुशहाल, लगातार बढ़ रही है धान की खरीदी

मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों को दिये जा रहे प्रोत्साहन के फलस्वरूप धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या तथा धान का रकबा लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों द्वारा बेचे जाने वाले धान की मात्रा भी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या 18.96 लाख से बढ़कर 29.97 लाख हो गई है। धान का रकबा 24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 32 लाख हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 92 लाख मीट्रिक टन् वर्ष 2022-23 में 107 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। वर्ष 2023-24 में 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है। मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि किसानों से अब तक 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जा रही थी जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार धान खरीदी के ऋण का करती है भुगतान

मंत्री अकबर ने बताया कि राज्य सरकार जो धान खरीदती है उसका परिवहन कराकर राईस मिलों के माध्यम से कस्टम मिलिंग का कार्य कराती है। कस्टम मिलिंग के बाद जो चावल प्राप्त होता है उसे भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के साथ साथ नागरिक आपूर्ति निगम में जमा कराती है। राज्य सरकार जो चावल एफ. सी. आई. व आपूर्ति निगम में जमा कराती है उसका ही भुगतान केन्द्र सरकार से प्राप्त होता है। धान खरीदने के लिए केन्द्र सरकार से कोई राशि प्राप्त नहीं होती।

इसी तरह राज्य सरकार धान खरीदते समय बैंकों एवं अन्य संस्थाओं से जो ऋण लेती है उसका मूलधन व ब्याज की राशि भी राज्य सरकार द्वारा ही जमा की जाती है। मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने कुल 19,209 करोड रुपये का ऋण धान खरीदी के लिए लिया था, जिसमें एन.सी.डी.सी. से 8500 करोड़, नाबार्ड से 4000 करोड़, इंडियन बैंक से 1599 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक से 1110 करोड़, बैंक आफ इंडिया से 2000 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा से 2000 करोड़ रूपये का लिया गया ऋण शामिल है।

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