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जवानों के बुलंद हौसलों से मिटेगा नक्सलवाद का कलंक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि हमारे जवानों का हौसला दुर्गम पहाड़ों से भी ऊंचा है। नक्सलवाद के विरूद्ध निर्णायक लड़ाई में हमारे जवानों ने अदभुत, साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है। जवानों के बुलंद हौसलों से अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर से नक्सलवाद का नामोनिशान मिट जाएगा।

मुख्यमंत्री साय आज ओरछा ब्लॉक के ग्राम बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचे, जहां पर उन्होंने 21 मई को डीआरजी-बीएसएफ और जिला बल के द्वारा माओवादियों के विरूद्ध नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर की सरहदी पहाड़ियों में चलाए गए नक्सल विरोधी ऑपरेशन में 27 नक्सलियों को मार गिराने वाले जवानों की हौसला-अफजाई की। उन्होंने बासिंग कैम्प में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह माओवाद के विरूद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है जिसमें सुरक्षा बलों ने हार्डकोर माओवादी बसवा राजू सहित 27 नक्सलियों को मार गिराया है। मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी बासिंग पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने जवानों की हौसला अफ़ज़ाई करते हुए तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने जवानों से कहा कि बस्तर में अमन और शांति लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बल के जवानों को 50 मोटर बाइक पर हरी झंडी दिखाकर गस्त करने के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री साय ने जवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने जिस तरह उच्च स्तरीय रणनीति बनाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और कामयाबी हासिल की वह काबिले-तारीफ है। 

फोर्स के इस अदम्य साहस और शौर्य को नमन है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर के माथे से माओवाद का कलंक पूरी तरह से मिट जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश से नक्सल समस्या को समूल समाप्त करने का संकल्प लिया है, वह पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब बस्तर अंचल छत्तीसगढ़ के विकास से पूरी तरह जुड़ जाएगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के अंदरूनी इलाके, जहां कुछ साल पहले तक जाना भी संभव नहीं था, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में अब गति आएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों को शासन की योजनाओं से जोड़ने नियद नेल्लानार, पीएम जनमन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक बदलाव अब बस्तर में दिखने लगा है। माओवाद की समाप्ति के साथ ही बस्तर विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनकी बहादुरी के लिए बधाई दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इस ऑपरेशन और जवानों की बड़ी और ऐतिहासिक सफलता की सराहना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन होने जा रहा है जो विकास और प्रगति की राह पर बस्तर को ले जाएगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को एलईडी सेट और गिफ्ट हैम्पर भेंट किए। इस अवसर पर ऑपरेशन में शामिल जवानों ने की गई तैयारियों और रणनीति की जानकारी मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को दी। इसके पहले, जवानों ने मुठभेड़ के बाद माओवादियों से रिकवर किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया, जिसमें बीजीएल लॉन्चर, 12 बोर बंदूक, .303 बंदूक, 7.62 रायफल, 5.56 एमएम इंसास, एके-47, 9 एमएम कार्बाइन सहित विभिन्न प्रकार के हथियार सम्मिलित थे।

इस मौके पर पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी अमित तुकाराम कामले, कलेक्टर नारायणपुर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगाईं, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

 

BIG NEWS : सांबा में BSF की बड़ी कार्रवाई, 7 आतंकियों को मार गिराया, पाक की साजिश फेल

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 भारत-पाकिस्तान के बीच जारी युद्ध के दौरान पाकिस्तान की एक बड़ी साजिश को हमारे वीर जवानों ने नेस्तनाबूद करते हुए सीमा पर 7 आतंकियों को मार गिराया। बढ़ते तनाव के बीच सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने जम्मू कश्मीर के सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास संदिग्ध आतंकवादियों की घुसपैठ के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया। बीएसएफ के इस एक्शन में सात आतंकियों को ढेर किया गया है। बीएसएफ ने अब इस एक्शन को लेकर एक वीडियो भी जारी किया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि किस तरह से आतंकी पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सीमा पर मुस्तैद हमारी सेना ने उन्हें वहीं ढेर कर दिया।


जानकारी मिली है कि मारे गए सभी आतंकवादी जैश—ए—मोहम्मद संगठन से जुड़े हैं और सभी विदेशी आतंकी हैं। बताया गया कि 8 मई को देर रात 11 बजे के करीब मुस्तैद बीएसएफ जवानों ने जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बड़ी घुसपैठ की हलचल देखी। इसके बाद आतंकियों की इस कोशिश को नाकाम करते हुए उनपर बडा हमला किया गया। अब तक 7 शव बरामद किये गए हैं। बताया जा रहा है कि सांबा में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ की इस कार्रवाई में 7 से ज्यादा कई पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए हैं।

बीएसएफ ने अपने इस एक्शन को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट भी जारी किया है। बीएसएफ की तरफ से इस पोस्ट में लिखा गया है कि हमने ने आठ मई 2025 को रात करीब 23:00 बजे जम्मू कश्मीर के सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दियां आपको बता दें कि घुसपैठ की यह कोशिश ऐसे दिन में हुई है जब भारत ने जम्मू, पठानकोट, उधमपुर और कुछ अन्य स्थानों पर पाकिस्तान द्वारा मिसाइल एवं ड्रोन से किए गए हमलों को विफल कर दिया।

पूर्व अग्निवीरों को केंद्र का एक और तोहफा, अब CISF में 10% कोटा रिजर्व, उम्र सीमा में भी छूट

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नई दिल्ली : गृह मंत्रालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) में पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का एलान किया है। इससे एक सप्ताह पहले बीएसएफ में भी पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने की घोषणा की गई थी। मंत्रालय ने ऊपरी आयु सीमा में छूट की अधिसूचना भी जारी की है।


यह छूट इस बात पर निर्भर करेगी कि अभ्यर्थी अग्निवीरों के पहले बैच का हिस्सा हैं या बाद के बैचों का। पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने के लिए गृह मंत्रालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 के तहत नियमों में संशोधन किया है।

जान लें पहले और दूसरे बैचों के अग्रनीवरों के लिए क्या है अंतर

पहले बैच के पूर्व अग्निवीरों को आयु सीमा में पांच साल और बाद के बैचों के अग्निवीरों को तीन साल की छूट दी जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि पूर्व अग्निवीरों को शारीरिक दक्षता जांच में भी छूट दी जाएगी। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल 14 जून को अग्निपथ योजना की घोषणा की थी।

गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और असम राइफल्स में 10 प्रतिशत रिक्तियां 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए आरक्षित होंगी. मंत्रालय ने कहा था कि इसने यह भी घोषणा की थी कि पूर्व-अग्निवीरों के पहले बैच के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल तक और बाद के बैच के वास्ते तीन साल तक की छूट दी गई. अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए निर्दिष्ट आयु सीमा 18-23 वर्ष है.

अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों में समावेश करने संबंधी गृह मंत्रालय का निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पूर्व-अग्निवीरों को सेवानिवृत्ति की आयु तक रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद मिलेगी. अर्धसैनिक बलों को भी इससे फायदा मिलेगा होगा क्योंकि उन्हें 70,000 से अधिक रिक्तियों को भरने के लिए कर्मियों का एक प्रशिक्षित समूह मिलेगा.

 

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