Media24Media.com: बाघ

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कसडोल शहर के एक किमी के दायरे में आ गया था बाघ, वन विभाग का अमला था सतर्क, ट्रैक्यूलाइज कर किया गया काबू

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रायपुर। कसडोल शहर के बिल्कुल एक किमी के दायरे में पहुंच गये बाघ को वन विभाग ने सफलतापूर्वक काबू पा लिया। यह वाकया कसडोल शहर से लगे ग्राम कोट का है। बाघ एक पैरे के ढेर में छिप गया था। वन विभाग की टीम पहुंची और बेहद कुशलता से बाघ को ट्रैक्यूलाइज किया। टैक्यूलाइज करने के बाद बाघ कुछ देर तक होश में रहा और पास ही के पेट्रोल पंप के पीछे की तरफ आ गया लेकिन उसे तेजी से बेहोशी आई और फिर उसे नियंत्रित कर लिया गया। बाघ के बिल्कुल शहर के पास आने से लोगों के लिए कौतूहल का विषय था कि इसे कैसे नियंत्रित किया जाएगा।

वन विभाग के अमले ने इसकी योजना बनाई और बेहद सफलतापूर्वक यह कार्य संपन्न किया गया। बताया जाता है कि यह बाघ ओडिशा के रास्ते से बारनवापारा पहुंचा होगा। आठ महीने से यह बारनवापारा में सक्रिय था। बाघ की सक्रियता केवल कोर एरिया में रहे इसके लिए वन विभाग ने पर्याप्त प्रयास किये थे। जब बाघ का मूवमेंट कोर एरिया से बाहर होने की खबर मिली तो अमले ने सतर्कता से अपनी कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि अब बाघ को किसी टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा ताकि इसे और भी सुरक्षित परिवेश मिले।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ को रेडियो कालर लगा दिया गया है। इससे बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने में आसानी होगी। इसके रक्त का नमूना भी लिया गया है। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। उल्लेखनीय है कि बाघ के शहर के पास होने की सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग एवं वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी कानन पेण्डारी चिड़ियाघर बिलासपुर डॉ. पी.के. चंदन वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी नंदन वन जू एवं जंगल सफारी नवा रायपुर डॉ. राकेश वर्मा तथा डॉ. रश्मिलता राकेश पशु चिकित्सा अधिकारी कसडोल के टीम ने तत्काल ग्राम कोट पहुंच कर ग्रामीण धीराजी के बाड़ी में रखे पैरा के ढेर में छुपे बाघ को ट्रैक्यूलाईज करने की प्रयास किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख रायपुर व्ही. श्रीनिवास राव प्रधान, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) प्रेम कुमार, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त रायपुर राजु अगसिमनी, मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) एवं क्षेत्र संचालक उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व रायपुर श्रीमति सतोविशा समाजदार, वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार मयंक अग्रवाल, श्री आनंद कुदरया अधीक्षक बारनवापारा भी मौजूद थे।

टाइगर रिजर्व बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में मिलेगा बेहतर परिवेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन विभाग के अधिकारियों को बाघ के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्वके रूप में एक नया टायगर रिजर्व मिल गया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व और असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। इस टाइगर रिजर्व के बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में बेहतर परिवेश मिल पाएगा और इनके बेहतर संवर्धन के अवसर मिलेंगे। छत्तीसगढ़ में अब 4 बाघ रिजर्व हो गए हैं, जिससे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता से इस प्रजाति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले ही टूरिस्टों ने अचानकमार में टाइगर साइट किया था। टाइगर रिजर्व बनने से एक बार छत्तीसगढ़ पुनः बाघों से गुलजार हो जाएगा।


ये कैसा जंगल राज : 25 दिन बाद वन विभाग ने माना महासमुन्द-बलौदाबाजार क्षेत्र में विचरण कर रहा है बाघ !

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मीडिया की खबरों को झुठलाते रहे वन विभाग के जिला अधिकारी

आनंदराम पत्रकारश्री.

महासमुन्द/बलौदाबाजार। वन विभाग में जंगल राज चल रहा है? यह हम नहीं, क्षेत्र के वनवासी कह रहे हैं। सात मार्च को दो शासकीय सेवक (एक शिक्षक और एक पंचायत सचिव) ने सिरपुर रोड (महासमुन्द) किनारे पहली बार बाघ को देखा। उन्होंने सबूत के तौर पर बाघ का वीडियो भी बनाया। जब शोसल मीडिया में वीडियो वायरल हुआ, तो कुम्भकर्णी निद्रा से जागे वन विभाग के अफसर शहरों से सरपट गांव की ओर भागे। साथ ही क्षेत्र में बाघ होने की सूचना को झुठलाने का हर संभव प्रयास किया। वायरल वीडियो को दूसरे क्षेत्र का होना बताया। इस बीच लगातार मवेशियों का शिकार कर अपनी उपस्थिति का अहसास करा रहे बाघ से सिरपुर क्षेत्र में दहशत फैलने लगी। वन्यजीव के तथाकथित शिकारी सक्रिय हो गए। वन विभाग के मैदानी अमला का हाथ पांव फूलने लगा। यदि किसी ने बाघ को मौत के घाट उतार दिया तो आफत आ जाएगी। जैसे-तैसे क्षेत्र के ग्रामीणों को धमका-चमका कर बाघ का फोटो-वीडियो वायरल नहीं करने के लिए अभियान चलाया गया। इसमें वन अधिकारी सफल भी हुए। महासमुन्द वनमण्डल के अधिकारियों ने बाघ के संबंध में कभी कोई जानकारी साझा करने में रुचि नहीं दिखाई। अब 25 दिन बाद बलौदाबाजार वनमण्डल के अधिकारी द्वारा इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी जा रही है। इसे लेकर महासमुन्द वनमण्डल की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है।



पढ़िए:- वन विभाग की ओर से जारी यह प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 07/03/2024 को शिक्षक श्री कांशीराम पटेल एवं सचिव श्री ओमप्रकाश पटेल ग्राम पंचायत बंदोरा कार से जा रहे थे, तब छपोराडीह से सिरपुर मार्ग पर शाम 05:45 बजे ग्राम बांसकूड़ा से सिरपुर मार्ग में एक नग बाघ को रोड़ पार करते हुए देखा गया। शिक्षक पटेल द्वारा मोबाईल से विडियो बनाया गया है। शिक्षक द्वारा उक्त जानकारी वनमण्डलाधिकारी महासमुन्द को दी गई। सूचना प्राप्त होते ही जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के वन अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र की रात्रि गश्त की गई। दूसरे दिन 08/03/2024 को रायकेरा एवं सुकुलबाय के ग्रामीणों द्वारा पुनः बाघ देखने की सूचना दी गई। जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए वनमण्डलाधिकारी महासमुन्द की अध्यक्षता एवं वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार तथा वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मण्डल की टीम गठित कर कार्यवाही की गई। जिससे अमलोर, सुकुलबाय में मवेशियों की मृत्यु होना पाया गया। मवेशियों को मारने के तरीके हिंसक वन्यप्राणी तेन्दूआ जैसे थे। दिनांक 12/03/2024 को जिले के अंतर्गत ट्रेकिंग के दौरान बाघ के पंजे का निशान पगडंडी में प्राप्त हुए। दिनांक 14/03/2024 को बलौदाबाजार वनमण्डल के परिक्षेत्र बल्दाकछार के कर्मचारी द्वारा बाघ को प्रत्यक्ष रूप से देखा गया एवं पुष्टि की गई। तत्पश्चात् विभाग के द्वारा NICA द्वारा जारी SOP/प्रोटोकॉल का पालन कर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

जिला बलौदाबाजार-भाटापारा एवं महसमुन्द जिला में वन विकास निगम के परिक्षेत्र रवान्, बार एवं सिरपुर परिक्षेत्र का आंशिक भाग है। वन विभाग द्वारा विभागीय अमला, डॉग स्क्वायड, NGO संस्था के माध्यम से लगातार ग्रामीणों को जंगल ना जाने हेतु एवं बाघ के विचरण के संबंध में सचेत किया जा रहा है। साथ ही साथ विभागीय अमले के द्वारा लगातार रात्रि गश्ती कर क्षेत्र को नियंत्रण करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से वन विकास निगम क्षेत्र के अंतर्गत वनक्षेत्रों में प्रवेश रोकने के लिये अस्थाई बेरियर का निर्माण किया गया है। परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए बाघ की सुरक्षा हेतु 03 ट्रेकिंग टीम वनमण्डल बलौदाबाजार, वनमण्डल महासमुन्द्र, वन विकास निगम की गठित कर नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी रायपुर के श्री एम. सूरज तथा वसुंधरा सोसाइटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के श्री गौरव निहलानी के सहयोग से लगातार ट्रेकिंग किया जा रहा है, साथ ही जन-जागरुकता हेतु बलौदाबाजार वनमण्डल द्वारा 07 परिक्षेत्रों की अलग-अलग टीम बनाकर दिवसवार रात्रिगश्त करते हुये उपरोक्त ग्रामों में ग्राम प्रमुखों एवं जनप्रतिनिधियों को सूचना देकर ग्रामीणों को अनावश्क वनक्षेत्र में ना जाने की लगातार समझाईस दिया जा रहा है। वनमण्डलाधिकारी (बलौदाबाजार वनमण्डल बलौदाबाजार )

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